#Article 1: अन्टार्क्टिका (123 words)


अन्टार्क्टिका (US English , UK English  or  or ) विश्वक सात महादेशमे सँ एक छी । ई महादेशमे मानव वस्ती शुन्य अछि । ई पृथ्वीक दक्षिणतम महादेश छी, जहिमे दक्षिणी ध्रुव अन्तर्निहित अछि । ई दक्षिणी गोलार्द्धक अन्टार्क्टिका क्षेत्र आ लगभग पूर्ण तरह सँ अन्टार्क्टिक वृतक दक्षिणमे स्थित अछि । ई चारो दिस सँ दक्षिणी महासागर सँ घेरल अछि । अपन १४० लाख वर्ग किलोमिटर (५४ लाख वर्ग मेल) क्षेत्रफलक संगे ई, एसिया, अफ्रिका, उत्तरी अमेरिका आ दक्षिणी अमेरिकाक बाद, पृथ्वीक पाचम सब सँ पैग महादेश छी, अन्टार्क्टिकाक ९८% भाग औसतन १.६ किलोमिटर मोट बर्फ सँ छोपल अछि ।

औसत रूप सँ अन्टार्क्टिका, विश्वक सबसँ ठन्डा, शुष्क आ तेज हवा भएल महादेश छी आ सभ महादेशक तुलनामे एकर औसत उन्नयन सर्वाधिक अछि ।




#Article 2: अकबर (202 words)


जलाल उद्दीन मोहम्मद अकबर () (१५ अक्टुबर, १५४२-२७ अक्टुबर, १६०५) तैमूरी वंशावलीक मुगल वंशक तेसर शासक छल। अकबरकेँ अकबर-ऐ-आजम (अर्थात अकबर महान), शहंशाह अकबर, महाबली शहंशाहक नामसँ सेहो जानल जाएत अछि। सम्राट अकबर मुगल साम्राज्यक संस्थापक जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर कऽ पौत्र आओर नासिरुद्दीन हुमायूं आ हमीदा बानोक पुत्र छल। बाबर कऽ वंश तैमूर आ मङ्गोल नेता जंगेज खांसँ सम्बन्धित छल अर्थात ओ वंशज तैमूर वंशावलीक खानदान सँ छल आर मातृपक्षक सम्बन्ध जंगेज खाँ सँ छल । अकबर के शासनक अन्त तक १६०५ धरि मुगल साम्राज्य में उत्तरी आर मध्य भारतक अधिकाश भाग सामिल छल आर वो समय के सर्वाधिक शक्तिशाली साम्राज्य में से एक छल । बादशाह सभ में अकबर मात्र एगो एहन बादशाह छल, जे हिन्दू मुस्लिम दुनु वर्ग के बराबर स्नेह आर सम्मान देलक । वो हिन्दू-मुस्लिम सम्प्रदायसभ के विच दुरी कम करै के लेल दीन-ए-इलाही नामक धर्मकऽ स्थापना केने छल । अकबर कऽ दरबार सभ के लेल हर समय खुजल रहेत छल । वोकर दरबार में मुस्लिम सरदारसभ के अपेक्षा हिन्दू सरदार बेसी छल । अहि कारण अकबर हिन्दू आर मुस्लिम दुनु वोकर प्रशंसक बनल छल ।
अकबर मात्र तेरह वर्ष कऽ आयु में अपन पिता नसीरुद्दीन मुहम्मद हुमायुं के मृत्यु उपरांत दिल्ली कऽ राजगद्दी पर बैठल छल ।




#Article 3: अनिलचन्द्र ठाकुर (140 words)


अनिलचन्द्र ठाकुर (१३ सितम्बर १९५४- २ नवम्बर २००७)ई.केँ कटिहार जिलाक समेली गाममे भेलन्हि ।सन् १९८२ मे हिन्दी साहित्यमे स्नातकोत्तर केलाक बाद नवम्बर '९३ सँ नवम्बर '९४ धरि सुबह हस्तलिखित पत्रिकाक सम्पादन-प्रकाशन कएलन्हि आ कोशी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकमे अधिकारी रहथि । हुनकर मैथिली, अङ्गिका, हिन्दी आ अङ्ग्रेजीमे समानरूपेँ लेखन । मृत्युक पूर्व ब्रेन ट्यूमरसँ बीमार चलि रहल छलाह। हुनकर प्रकाशित कृतिसभ: आब मानि जाउ (मैथिली उपन्यास)पहिने भारती-मंडन पत्रिकामे प्रकाशित भेल, फेर मैलोरङ्गद्वारा पुस्तकाकार प्रकाशित भेल । कच (अङ्गिकाक पहिल खण्ड काव्य,१९७५)एक और राम (हिन्दी नाटक, १९८१)एक घर सडक पर (हिन्दी उपन्यास, १९८२); द पपेट्स (अङ्ग्रेजी उपन्यास, १९९०)अनत कहाँ सुख पावै (हिन्दी कहानी सङ्ग्रह, २००७) अछि । आब मानि जाउ (मैथिली उपन्यास)- एहि उपन्यासमे एक एहन युवतीक सङ्घर्ष-गाथा अङ्कित अछि जे अपन लगनसँ जीवन बदलैत अछि। असङ्ख्य गामक ई कथा कुलीनताक अधःपतनक कथा, संस्कारविहीनताक उद्घाटन आ भविष्यक पिढीकेँ बचएबाक चेतौनी छी ।




#Article 4: अमरेश पाठक (165 words)


डॉ अमरेश पाठक 1936-2019

हिनक जन्म सीतामढ़ी जिलाक अन्तर्गत सामरि ग्राममे १९३६ मे भेलन्हि । १९५७ मे पटना विश्वविद्यालयसँ मैथिलीक एम. ए. परीक्षामे प्रथम श्रेणीमे प्रथमस्थान पाओल । १९५७ सँ १९६० धरि रामकृष्ण महाविद्यालय, मधुबनीमे व्याख्याता रूपेँ तकरा बाद पटना विश्वविद्यालयमे व्याख्याता रूपमे कार्य करए लगलाह । पटना विश्वविद्यालयमे मैथिली विभागाध्यक्ष रूपेँ मैथिली उपन्यासक आलोचनात्मक अध्ययन, शोध प्रबन्ध पर हिनका बिहार विश्व-विद्यालय द्वारा डि. लिट्क उपाधि भेटलन्हि । ई शोध प्रबन्ध पुस्तकाकार रूपेँ सेहो प्रकाशित भेल अछि | बिहार राष्ट्रभाषा परिषदक विद्यापति ग्रन्थावलीक सम्पादक मण्डलक सदस्य । हिनक अन्य प्रकाशित रचना अछि ’निबन्ध संकलन’ । एकरा छोड़ि विभित्र पत्न-पत्निकामे हिनक कतेको निबन्ध प्रकाशित छन्हि । मैथिली अकादमी द्वारा प्रकाशित कथा-संग्रहक इहो एक सम्पादक छथि । ई अधिकतर उच्च स्तरीय आलोचनात्मक निबन्ध लिखैत छलाह। २०००- डॉ. अमरेश पाठक, (तमस- भीष्म साहनी, हिन्दी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार भेटल छनि।
प्रो० पाठकक समस्त अध्यापकीय जीवन सक्रिय रहल। अध्ययन, अध्यापन,ओ शोधक अतिरिक्त निम्नलिखित साहित्यिक ओ सांस्कृतिक संस्थासँ सम्बद्ध भए मैथिली भाषा साहित्यक उत्थान हेतु सतत् प्रयासरत रहलाह ।




#Article 5: अरुणाचल प्रदेश (198 words)


अरुणाचल प्रदेश भारतक प्रदेश छी । ई प्रदेशक सीमासभ दक्षिणमे आसाम, दक्षिणपूर्वमे  नागाल्याण्ड, पूर्वमे  बर्मा/म्यानमार, पश्चिममे भुटान आ उत्तरमे चीनक तिब्बतसँ जुड़ल अछि। अरुणाचल प्रदेशक एक भू-भागके चीन अपन दक्षिणी तिब्बतक भाग छी कहि दावा करैत अछि । ईटानगर ई राज्यक राजधानी छी । ई प्रदेशक मुख्य भाषा हिन्दी आ असमिया छी । अङ्ग्रेजी सेहो बिस्तारसँ लोकप्रिय भऽ रहल अछि। 

प्रसिद्ध लेडो बर्मा रोडक एक भाग ई राज्यसँ होइत जाइत अछि, दोसर विश्वयुद्धक समय ई सड़क चीनक लेल एक जीवन रेखाक भूमिका खेलने छल ।

अरुणाचलक बहुत भाग हिमालयसँ ढकल अछि , मुदा लोहित, चेङ्गलङ आ तिरप पतकाई पहाडीसभमे स्थित अछि। काङ्ग्तो, न्येगी काङ्गसाङ, मुख्य गोरीचन चोटी आ पूर्वक गोरीचन शिखर ई क्षेत्रमे हिमालयक सबसँ अग्ला शिखर छी ।  तवाङमे स्थित बुमला घाटी सन् २००६ मे ४४ वर्षक बाद पहिल बेर ब्यापारक लेल खोलल गेल । दुनु तरफक ब्यापारीसभके एक दोसरक क्षेत्रमे प्रवेश करवाक अनुमति देलक। 

हिमालय पर्वतमालाक पूर्वी विस्तार एकरा चीनसँ अलग करैत अछि। ई पर्वतमाला नागाल्याण्ड दिश घुमल अछि  आ भारत तथा बर्माक बीचमे  चांगलांग आ तिरप जिलामे एक प्राकृतिक सीमाक निर्माण करैत अछि आ एक प्राकृतिक बाधाक रूपमे  कार्य करैत अछि। ई पहाड महान हिमालयसँ कम अगला अछि।

अरुणाचल प्रदेशमे  १६ वटा जिलासभ अछि -




#Article 6: आशीष अनचिन्हार (287 words)


 

आशीष अनचिन्हार () मैथिली गजल लेल जानल जाइ छथि। हिनक मूल नाम आशीष कुमार मिश्र () छनि । अनचिन्हारजीक जन्म बिहारक मधुबनी जिलाक भटरा घाट नामक गाममे 04 दिसम्बर 1985 के भेल छनि। आशीषजी वृतिसँ  प्रोफेशनल छथि आ देश-विदेशक विभिन्न बहुराष्ट्रिय कम्पनीमे  केर सफल सञ्चालन कऽ रहल छथि ।

अनचिन्हारजी अपन परिवारक सभसँ छोट छथि। हुनकासँ नमहर दूटा भाय श्री गोविन्द मिश्र (पत्नी-श्रीमती ममता मिश्र), श्री मनोज कुमार मिश्र (पत्नी-श्रीमती हेमा मिश्र) आ बहीनि रिंकी झा (पति-श्री अरूण झा) छथिन। बाबा- स्व. अनिरुद्ध मिश्र (स्व. भुवनेश्वरी देवी)। मामा गाम- जजुआर, नाना- स्व. भाग्यनारायण ठाकुर, जेठ मामा- स्व. वशिष्ठ नारायण ठाकुर, छोट मामा- श्री घनश्याम ठाकुर। अनचिन्हारजीक प्रारंभिक शिक्षा गामक इस्कूलमे भेलनि तकरा बाद मैट्रिक बिस्फीक इस्कूलसँ। एकर बादक शिक्षा कलकत्तासँ पूर्ण भेलनि।

नेनपनेसँ तुकान्त जोड़बाक आदति सन् 2001 मे गजलक रूपमे बदलि गेलनि । प्रारम्भमे अनचिन्हारजी गीत, व्यङ्ग्य, कविता ओ कथा सेहो लिखलाह मुदा सन् 2001 मे ई पूर्ण रूपेण गजल सीखब शुरू केलनि आ सन् 2008मे गजल केन्द्रित ब्लाग अनचिन्हार आखर केर निर्माण केला । एहि ब्लागसँ एखन धरि अनचिन्हारजी कुल 30-32 टा मैथिली गजलकारकेँ प्रशिक्षित कऽ मैथिली गजलकेँ विस्तार देलाह।
हिनक एक गीत रेकार्ड भऽ कऽ सेहो बम-गोला नामक एलबममे आएल अछि। 

संपादित पोथी-

गजेन्द्र ठाकुरक संगे सह-सम्पादित पोथी

एकर अतिरिक्त विभिन्न पत्र-पत्रिकामे विभिन्न विधाक रचना सभ प्रकाशित। हिनक व्यंग्य केर हिंदी अनुवाद सेहो भेल अछि। 

गजलक अतिरिक्त अनचिन्हार जी बहुत रास आलोचना लिखने छथि जे कि अपन एकटा खास शैली आ बेबाकीक कारणे विवादित भेल आ बहुसङ्ख्य मैथिलीक गुटबाज साहित्यकार सभ द्वारा अनचिन्हारजीक जानि बूझि कऽ बहिष्कार सेहो भेल मुदा अनचिन्हारजी पुरस्कार ओ गुटबाजीसँ प्रेरित संस्था सभकेँ दरकिनार करैत बेबाक भऽ अपन खास शैलीक आलोचना लिखैत रहला ।

बर्ख 2014-15  लेल विदेह भाषा सम्मान(समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान)सँ पोथी “अनचिन्हार आखर” (गजल संग्रह) लेल सम्मानित।

 




#Article 7: आशीष चमन (163 words)


आशीष चमन
आशीष चमन

मूल नाम- आशीष कुमार मिश्र

पिता-श्री सच्चिदान्‍द मिश्र अधिवक्‍ता

जन्‍मतिथि-7 जनवरी 1973 टीचर्स क्‍वाटर, जिला गर्ल्‍स हाइ स्‍कूल सहर्षा।

योग्‍यता- बी.ए. (प्रतिष्‍ठा)

राजनैतिक कार्य कलाप- प्रारम्‍भ मे S.F.I के संयुक्‍त सचिव, पुन: अ.भा.वि.प. के कार्यालय एवं बौद्धिक प्रमुख, विहिप के नगर मन्‍त्री, पश्‍चात् राजनीतिसँ मोहभंग।

सामाजिका सांस्‍कृतिक गतिविधि- सांस्‍कृतिक चेतना समिति के संस्‍थापक सचिव आ एहि बैनर सँ प्रायः- दुइ दशक बाद सुपौल मे विद्यापति पर्व समारोहक संचालन, प्रलेस के जिला सचिव, विप्‍लव फांउडेशन के सचिव आ एहि बैनर के तत्‍वावधान मे नागार्जुन जयंती, सगर राति दीप जरय के आयोजन।

वृति:— कौलिक दबाइ व्‍यवसायक सफल संचालन किन्‍तु आपसी कलह के कारण निष्कासन, पुन: जीविका हेतु अनेक जगह छिछियाएब आ पूर्णत: द्ररिद्र बनलाक बाद लघु उद्यम सँ पारिवारिक पोषण ।

लेखन: 1984 सँ सक्रिय आरंभ मे कविता बाद मे हिन्दी कहानी लेखन आ परती पलार संवदिया आदि मे प्रकाशित पुन: मैथिली मे लेखन आ भारती मंडल मिथिला चेतना, घर बाहर, कर्णामृत प्रवासी मैथिल, अंतिका आदि अनेक पत्रिका सभ मे प्रकाशित




#Article 8: इकोलोजी (222 words)


 
  

 पारिस्थितिकीक वैज्ञानिक साम्राज्य विश्वव्यापी प्रक्रियासभ (ऊपर), सँ सागरीय एवं पार्थिव सतही प्रवासिसभ (मध्य) सँ ल अन्तर्विशिष्ट अन्तरसम्बन्ध जना प्रिडेशन आ परागण (नीचा) धरि होइत अछि।

पारिस्थितिकी (अङ्ग्रेजी:इकोलोजी) जीवविज्ञानक एक शाखा छी जाहिमे जीव समुदायसभके ओकर वातावरणक साथ पारस्परिक सम्बन्धसभक अध्ययन करैत अछि। प्रत्येक जन्तु या वनस्पति एक निश्चित वातावरणमे रहैत अछि। पारिस्थितिज्ञ ई तथ्यके पता लगाबैत अछि कि जीव आपसमे आ पर्यावरणक साथ कोन तरह क्रिया करैत अछि आ ओ पृथ्वी पर जीवनक जटिल संरचनाक पता लगाबैत अछि। 

पारिस्थितिकीके इन्भाइरोमेन्टल बायोलोजी सेहो कहल जाइत अछि। ई विषयमे व्यक्ति, जनसङ्ख्या, समुदायसभ आ इकोसिस्टमक अध्ययन होइत अछि। इकोलोजी अर्थात पारिस्थितिकी (जर्मन: Oekologie) शब्दके प्रथम प्रयोग सन् १८६६ मे जर्मन जीववैज्ञानिक अर्नेस्ट ह्याकल अपन पुस्तक जनरेल मोर्पोलोजी देर ओर्गेनिज्मेन मे केनए छल। 

बीसम सदीक आरम्भमे मनुष्य आ ओकर पर्यावरणक बीच सम्बन्धसभपर अध्ययन प्रारमभ भेल आ एक साथ बहुतेक विषयसभमे एहि दिस ध्यान देल गेल। परिणामस्वरूप मानव पारिस्थितिकीक सङ्कलपना आएल। प्राकृतिक वातावरण बेहद जटिल अछि याह कारण शोधकर्ता अधिकांशत: कोनो एक किसिमक प्राणिसभक नस्ल या पौधासभपर शोध करैत अछि। उदाहरणक लेल मानवजाति धरती पर निर्माण करैत अछि आ वनस्पतिपर सेहो असर डालैत अछि। मनुष्य वनस्पतिक किछ भाग सेवन करैत अछि आ किछ भाग बिल्कुल सेहो अनोपयोगी छोडि दैत अछि। ओ पौधासभ लगातार अपन फैलाव करैत रहैत अछि।

वीसम सदीमे ई ज्ञात भेल की मनुष्यसभक गतिविधिसभक प्रभाव पृथ्वी आ प्रकृति पर सर्वदा सकारात्मक नै पड़ रहल अछि। 




#Article 9: इटाली (191 words)


इटाली युरोप महाद्वीपक दक्षिणमे स्थित एक देश छी जेकर मुख्यभूमि एक प्रायद्वीप छी । इटालीक उत्तरमे आल्प्स पर्वतमाला अछि जहिमे फ्रान्स, स्विजरल्याण्ड, अस्ट्रिया तथा स्लोभेनियाक सीमा आएत अछि। सिसली तथा सार्डिनिया, जे भूमध्य सागरक दू सब सँ पैग द्वीप छी, इटालीक अङ्ग छी । भ्याटिकन सिटी तथा सान मारिनो इटालीक अन्तर्गत समाहित दू स्वतन्त्र देश छी ।

इटाली, युनानक बाद युरोपक दोसर प्राचीनतम राष्ट्र छी । रोमक सभ्यता तथा इटालीक इतिहास देशके प्राचीन वैभव तथा विकासक प्रतीक छी । आधुनिक इटाली सन् १८६१ मे राज्यक रूपमे गठित भेल छल । देशक धीमा प्रगति, सामाजिक सङ्गठन तथा राजनितिक उथल-पुथल इटालीक २,५०० वर्षक इतिहास सँ संबद्ध अछि । देशमे पूर्वकालमे राजतन्त्र छल जेकर अन्तिम राजघराना सेवाय छल । जुन, सन् १९४६ सँ देश एक जनतान्त्रिक राज्यमे परिवर्तित भ गेल ।

इटालीक राजधानी रोम प्राचीन कालक एक शक्ति आ प्रभाव सँ सम्पन्न रोमन साम्राज्यक राजधानी रहल अछि । 

ई देशक प्राचिन सभ्यताक इतिहास अछि । रोमन साम्राज्यक उद्गम स्थल अहि देशक राजधानी रोम छी ।

ई देश एक प्रायद्वीप छी । ई एक बूट आकारक देश छी । एकर दक्षिणमे भूमध्यसागरमे ई देशक सिसिली प्रान्त पडैत अछि । ई देशक राजधानी रोम छी ।




#Article 10: उडुपी (119 words)


उडुपी (औपचारिक रूपसँ उडिपी) जकरा तुलु भाषामे ओडिपु ​कऽ नाम सँ जानल जाइत अछि, भारतक कर्नाटक राज्यक एक शहर छी । ई उडुपी जिलाक प्रशासनिक मुख्यालय छी । उडुपी कृष्ण मन्दिर, तुलु अष्टमथाक लेल उल्लेखनीय अछि आ एकर नाम लोकप्रिय उडुपी व्यञ्जन पर अछि । ई भगवान परशुराम क्षेत्रक नाम सँ सेहो जानल जाइत अछि, आ कानाकाणा किन्डीक लेल प्रसिद्ध अछि । तीर्थयात्राक केन्द्र, उडुपीकें राजाता पीठ आ शिवली (शिबालेल) कऽ रूपमे जानल जाइत अछि । एकरा मन्दिर शहर सेहो कहल जाइत अछि । मणिपाल उडुपी शहरक भीतर रहल एक इलाका छी । उडुपी शहर औद्योगिक केन्द्र मेङ्गलोर सँ लगभग ६० किलोमिटर उत्तरमे स्थित अछि आ सड़क अनुसार राज्यक राजधानी बेङ्गलोर सँ लगभग ४२२ किलोमिटर उत्तरमे अवस्थित अछि ।




#Article 11: उदय नारायण सिंह नचिकेता (357 words)


उदय नारायण सिंह नचिकेता 1951-

जन्म-१९५१ ई. कलकत्तामे।पहिल काव्य संग्रह ‘कवयो वदन्ति’। १९७१ ‘अमृतस्य पुत्राः’ (कविता संकलन) आऽ ‘नायकक नाम जीवन’ (नाटक)| १९७४ मे ‘एक छल राजा’/ ’नाटकक लेल’ (नाटक)। १९७६-७७ ‘प्रत्यावर्त्तन’/ ’रामलीला’(नाटक)। १९७८मे जनक आऽ अन्य एकांकी। १९८१ ‘अनुत्तरण’(कविता-संकलन)। १९८८ ‘प्रियंवदा’ (नाटिका)। १९९७-‘रवीन्द्रनाथक बाल-साहित्य’(अनुवाद)। १९९८ ‘अनुकृति’- आधुनिक मैथिली कविताक बंगलामे अनुवाद, संगहि बंगलामे दूटा कविता संकलन। १९९९ ‘अश्रु ओ परिहास’। २००२ ‘खाम खेयाली’। २००६मे ‘मध्यमपुरुष एकवचन’(कविता संग्रह। २००८ ई. मे नाटक नो एण्ट्री: मा प्रविश सम्पूर्ण रूपेँ विदेह ई- पत्रिकामे धारावाहिक रूपेँ ई-प्रकाशित भए एकटा कीर्तिमान बनेलक।२००९ ई.-श्री उदय नारायण सिंह “नचिकेता”केँ नाटक नो एण्ट्री: मा प्रविश लेल कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान।
प्रोफेसर उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’ जन्म-१९५१ ई. कलकत्तामे।

शिक्षा- बी. ए. (सम्मान) भाषाविज्ञान (प्रथम ईशान स्कॉलर) कलकत्ता विश्वविद्यालय, कलकत्ता

एम.ए. भाषाविज्ञान, पी-एचडी. भाषाविज्ञान, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली

रचना संसार- मैथिली साहित्य मध्य छद्म नाम ‘नचितकेता’क नामे, मैथिली आ बंगला साहित्यक कवि आ नाटककारक रूपमे प्रख्यात श्री सिंह एखन धरि चारि कविता संग्रह, एगारह गोट नाटक (मैथिलीमे), छओ साहित्यिक निबंध आ दू टा कविता संग्रह (बांग्लामे), एकर अतिरिक्त एहि दुनू भाषामे आ अंग्रेजीमे कतोक पुस्तकक अनुवाद क’ चुकल छथि। १९६६ मे १५ वर्षक उम्रमे पहिल काव्य संग्रह ‘कवयो वदन्ति’। १९७१ ‘अमृतस्य पुत्राः’ (कविता संकलन) आऽ ‘नायकक नाम जीवन’ (नाटक)| १९७४ मे ‘एक छल राजा’/ ’नाटकक लेल’ (नाटक)। १९७६-७७ ‘प्रत्यावर्त्तन’/ ’रामलीला’(नाटक)। १९७८मे जनक आऽ अन्य एकांकी। १९८१ ‘अनुत्तरण’(कविता-संकलन)। १९८८ ‘प्रियंवदा’ (नाटिका)। १९९७-‘रवीन्द्रनाथक बाल-साहित्य’(अनुवाद)। १९९८ ‘अनुकृति’- आधुनिक मैथिली कविताक बंगलामे अनुवाद, संगहि बंगलामे दूटा कविता संकलन। १९९९ ‘अश्रु ओ परिहास’। २००२ ‘खाम खेयाली’। २००६मे ‘मध्यमपुरुष एकवचन’(कविता संग्रह। २००८ ई. मे नाटक नो एण्ट्री: मा प्रविश सम्पूर्ण रूपेँ विदेह ई- पत्रिकामे धारावाहिक रूपेँ ई-प्रकाशित भए एकटा कीर्तिमान बनेलक। भाषा-विज्ञानक क्षेत्रमे दसटा पोथी आऽ दू सयसँ बेशी शोध-पत्र प्रकाशित। १४ टा पी.एच.डी. आऽ २९ टा एम.फिल. शोध-कर्मक दिशा निर्देश।

आन साहित्यिक गतिविधि- प्रो. सिंह बांगलादेश, कॅरबियन आयलैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नेपाल, पाकिस्तान, रूस, सिंगापुर, स्वीडन, थायलैंड आर अमेरिकामे विविध विषय पर अपन व्याख्यान देने छथि।

इंडो-इटैलियन कल्चरल एक्सचेंज फॉर क्रिएटिव रायटर्सक सदस्य(1999), त्रिनिदाद आर टॉबेगो मे कार्यालयी प्रतिनिधिक सदस्य (2002), आ मॉरीशस (2005), फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेलामे आमंत्रित कवि, जतय ‘इंडिया गेस्ट ऑफ ऑनर’ सँ सम्मानित भेलाह (2006), हालहिमे चीन मे संपन्न एगारह लेखकक सांस्कृतिक प्रतिनिधिक प्रमुखक रूपमे भाग नेने छलाह।




#Article 12: उदयपुर जिला (133 words)


उदयपुर जिला नेपालक पूर्वाञ्चल विकास क्षेत्रक सगरमाथा अञ्चलक मध्य भागमे अवस्थित अछि। ई जिला महाभारत पर्वत श्रृङ्खलासँ चुरे पर्वतमालाधरिक भू-भाग समेटने अछि । एकर कुल क्षेत्रफल २०६३ वर्ग किलोमिटर रहल अछि । क्षेत्रफलक हिसाबसँ ई जिला नेपालक २७अम, पूर्वाञ्चल विकास क्षेत्रक चारिम आ सगरमाथा अञ्चलक दोसर स्थानमे पडएत अछि। देशक सबसँ पैग सिमेन्ट उद्योग उदयपुर सिमेन्ट उद्योग अहि जिलामे अछि ।

पहिले उदय नाम करल राजा ई जिलामे शासन करैक कारण ई जिलाक नाम उदयपुर रहल गएल किम्बदन्ती सुनल जाएत अछि । वि.स. २०२८ सालसँ आगा ई जिलाक सदरमुकाम हालक पञ्चावती गाविसमे रहल उदयपुरगढी नामक ठाममे छल । विसं २०२८, जेठ ९ गतेसँ महेन्द्र राजमार्गक कदमाहासँ २७ कि.मि उत्तर गाईघाट नामक स्थानमे सदरमुकाम रहल अछि ।

निर्वाचन आयोग (नेपाल) द्वारा निर्धारण कएल गेल, जिलागत निर्वाचन क्षेत्र अन्तर्गत  कऽ नक्सा नीचा देल गेल अछि।




#Article 13: उपेन्द्र ठाकुर 'मोहन' (118 words)


उपेन्द्र ठाकुर 'मोहनजन्म १९१३ ई. मे दरभंगा जिलाक चतरिया ग्राममे भेलन्हि । मृत्यु २४-५-१९८० । संस्कृत शिक्षामे साहित्याचार्य ओ बड़ौदा राजक विद्वत्-परीक्षासँ ‘साहित्य-रत्न’क उपाधिसँ विभूषित भेलाह । दैनिक आर्यावर्तमे आदिअहिसँ, पश्चात् १९६० सँ मिथिला मिहिरक उप-सम्पादक एवं सह-सम्पादक रूपेँ कार्य करैत १९७७ मे सेवा निवृत भेलाह ।मोहनजी करीब पचास वर्ष साहित्य साधनामे लागल रहलाह । विजयानन्द, कुंजरंजन, सुदर्शन, पुण्डरीक, शास्त्नी, बामन आदि छद्म नामसँ पत्न-पत्निकामे विविध विषयपर हिनक लेख सभ प्रकाशित भेल अछि ।मोहन जीक ‘बाजि उठल मुरली’मे १०१ गोट कविताक संकलन अछि जाहिमे हिनक सुदीर्घ काव्य-आराधनाक विभित्र विचारधाराक ओ विभित्र अनुभूतिक सामग्री उपलब्ध अछि । एहि पुस्तकपर मोहन’जीकेँ १९७८ मे साहित्य अकादम् पुरस्कार भेटलन्हि। एहिसँ बहुत पूर्व हिनक ’फुलडाली’ नामक कविता संग्रह सेहो प्रकाशित भेल छल ।




#Article 14: ओखलढुङ्गा जिला (142 words)


 
ओखलढुङ्गा जिला नेपालक पूर्वाञ्चल विकास क्षेत्रक सगरमाथा अञ्चलमे पडैवाला पहाडी जिलामे सँ एक छी। पूर्वसँ पश्चिमतर्फ क्रमश चौडा होएत गेल ई जिलाक तीन दिशासँ नदी छुट्टेने अछि। उत्तरमे सोलुखुम्बु जिला, दक्षिणमे उदयपुर आ  सिन्धुली जिलासँ जोडल  ई  जिलाक  पूर्वमे खोटाङ जिलासँ दुधकोशी नदी आ पश्चिममे रामेछाप जिलासँ लिखू नदी छुट्टेने अछि। नेपालक ७५ जिलामे सँ जनसङ्ख्याक हिसाबमे ५९अम स्थान आ क्षेत्रफलक हिसाबसँ ६८अम स्थान ओगट्ने ई जिलाक कूल भू-भागमे सँ सदरमुकाम ओखलढुङ्गा बजार(सिद्धिचरण नगरपालिका)सँ बहुत कम क्षेत्र पूर्वमे आ बहुतरास क्षेत्र पश्चिममे पडैत अछि । युगकवि सिद्धिचरण श्रेष्ठक जन्म भूमि समेत कहिक पहिचानल जाइवाला ई साहित्यिक उर्वर भूमिमे अभिरवंशी गोपालवंशी एवं किराँतवंशी राजासभ राज्य कएल पवैत अछि। वि.सं २०१८ सालक प्रशासनिक विभाजन पूर्व हालक सोलुखुम्बु, ओखलढुङ्गा आ खोटाङ जिलासभ पूर्व ३ नम्बर ओखलढुङ्गामे पडैत छल। 

निर्वाचन आयोग (नेपाल) द्वारा निर्धारण कएल गेल, जिलागत निर्वाचन क्षेत्र अन्तर्गत  कऽ नक्सा नीचा देल गेल अछि।




#Article 15: ओमान (211 words)


ओमान (अरबी: ) अरबी प्रायद्वीपक पूर्व-दक्षिणमे अवस्थित एक देश छी जकरा आधिकारिक रूपमे सल्तनत उमान नाम सँ जानल जाएत अछि । ई साउदी अरबक पूर्व आया दक्षिणक दिशामे अरब सागरक सीमा सँ सटल अछि । संयुक्त अरब इमिरेट्स एकर उत्तरमे स्थित अछि ।

ओमानक कूल जनसङ्ख्या २८ लाख अछि आ एतय बाहर देशसभ सँ आबि रहनिहार आप्रवासीसभक सङ्ख्या बहुत बेसी अछि । लगभग समुचा जनसङ्ख्या मुस्लिम अछि जहिमे इबादीसभक सङ्ख्या सभ सँग बेसी अछि । एकर अमेरिका आ ब्रिटेनक सङ्ग बहुत निकटतम सम्बन्ध अछि ।

सुमेरी सभ्यताक एक लेखक अनुसार एकरा मगन नाम सँ जानल जाएत छल । ओमान नाम एर अरबी जाति पर पड़ल जे यमनक उमान क्षेत्र सँ आएल छल । इशा पूर्व छठम् शताब्दी सँ सातम् शताब्दीक मध्य धरि एतय इरान (फारस) कऽ तीन वंशसभक शासन रहल - हखामनी, पार्थियन आ सासानी । सातम् शताब्दीमे मुहम्मद साहबक जीवनकालमे ओमानमे इस्लामक आगमन भेल छल । सन् २५०८-१६४८ धरि एतय पुर्तगालीसभक उपनिवेश छल जे भास्को दा गामाद्वारा भारतक खोज करि लेलाक बाद समुद्री बाट पर नियन्त्रणक लेल बनाएल गेल छल । पुर्तगाल पर स्पेनक अधिकार भऽ गेलाक बाद पुर्तगालीसभके एहि ठाम सँ बापस जाए पड़ल । एकर बाद ओमानीसभ पूर्वी अफ्रिकी तटीय प्रदेशसभ सँ सेहो पुर्तगालीसभकें भगेने छल ।

ओमानमे ५ प्रदेश (मिन्तका) आ ४ शासकीय प्रखण्ड (मुहाफजाह) अछि - 




#Article 16: कञ्चनपुर जिला (138 words)


कञ्चनपुर जिला ( नेपालक सुदूर-पश्चिमाञ्चलक महाकाली अञ्चलक एकटा तराई जिला छी । एहि जिलाके सिमाना पूरवमे कैलाली, उत्तरमे डडेल्धुरा आर दक्षिण आ पश्चिममे भारतक उत्तराखण्ड परएत अछि ।

पहिने नेपालक बाइसे चौबीसे राज्य रहल समय एहि जिला डोटी राज्यक सीमा क्षेत्रमे पडएत छल । ऐतिहासिक पृष्ठभूमि देखला सँ इस्वी सन् १८१४ सँ १८१६ धरि अंग्रेजसँ भेल युद्ध बाद केल गेल सन्धिसँ महाकालीपार पश्चिमक सम्पूर्ण भू-भाग ब्रिटिश इन्डियामें मिलाएल पाबल जाएत अछि । सन् १८६०क सन्धि बाद मात्र एहि क्षेत्र अर्थात कैलाली कञ्चनपुर बाँके आर बर्दिया नयाँ मुलुकक रूपमे नेपालक अंग भ सकल । 

नेपालक अंग बएन गेला बाद कैलाली आर कञ्चनपुर अलग अलग जिला बनल अछि । कञ्चनपुर जिला स्थापना भेला बाद सर्वप्रथम एकर सदरमुकाम हाल श्रीपुर गाविसक बेलौरी बजारमे रहल आर वोही बेलौरीक कञ्चनपुर नामक गाउँसँ कञ्चनपुर जिलाक नामाकरण भेल कहाई कोनो कोनो इतिहासकार बतेनए अछि ।




#Article 17: कतार (141 words)


कतार (अरबी : قطر)  ; स्थानीय उच्चारण:  अरब प्रायद्वीपक उत्तर पूर्वी तट पर अवस्थित एक छोट प्रायद्वीप छी । एकर दक्षिणमे साउदी अरब अछि, आ बाँकी तीनु दिस फारसक खाड़ी अछि । एक तेल समृद्ध राष्ट्रक रूपमे कतार दुनियाक दोसर (प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद) समृद्ध देश छी । सन् १७८३ मे कुवैतक अल खलीफ वंशद्वारा एहि ठाम शासन केनाए प्रारम्भ केनए छल । तत्पश्चात ई टर्कीक अधीन रहल । प्रथम विश्वयुद्धक बादमे ई ब्रिटेनक संरक्षणमे सेहो रहल छल । सन् १९७१ मे स्वतन्त्रता मिललाक बाद सन् १९७२ मे खलीफा बिन हमद कऽ शासन प्रारम्भ भेल छल । )

मानल जाएत अछि कि कतार नाम आजुक जुबारा नामक शहरक प्राचीन नाम कतारा सँ उत्पन्न भेल अछि, जे प्राचीन समयमे क्षेत्रक महत्वपूर्ण बन्दरगाह आ शहर छल । कतारा शब्द पोटोल्मीद्वारा बनाओल गेल अरब प्रायद्वीपक मानचित्र पर पहिल बेर नजर आएल छल ।




#Article 18: कर्नाटक (101 words)


कर्नाटक (), दक्षिण भारतक एक राज्य छी । ई राज्यक गठन १ नवम्बर, १९५६ कें राज्य पुनर्गठन अधिनियमक अधीन कएल गेल छल। पहिने ई मैसूर राज्य कहलाबैत छल। सन् १९७३ मे पुनर्नामकरण करि एकर नाम कर्नाटक करि देल गेल छल । एकर सीमा पश्चिममे अरब सागर, उत्तर पश्चिममे गोआ, उत्तरमे महाराष्ट्र, पूर्वमे आन्ध्र प्रदेश, दक्षिण-पूर्वमे तमिलनाडु आ दक्षिणमे केरल सँ जुडल अछि । एकर कुल क्षेत्रफल ७४,१२२ वर्ग माइल (१,९१,९७६ वर्गकिमी) अछि, जे भारतक कुल भौगोलिक क्षेत्रक ५.८३% छी । २९ जिलासभक सङ्ग ई राज्य आठम् सभसँ पैग राज्य छी । राज्यक आधिकारिक आ सर्वाधिक बाजल जाएवाला भाषा कन्नड़ छी ।




#Article 19: काठमाडौं (127 words)


काठमाडौ (; नेपाली उच्चारण: )(नेपाल भाषा:येँ देय्‌) नेपालक राजधानी आ सभसँ पैग सहर छी । प्राग ऐतिहासिक इतिहास भेल इ नगरक मध्यकालमें कान्तिपुर कहल जाएत छल । इतिहासक भिन्न भिन्न कालखण्डमें भिन्न भिन्न राजबंशद्वारा शासित ई नगर नेपालक एकिकरण सँ नेपालक राजधनीक रूपमें रहल अछि । काठमाडौं उपत्यका भित्र पडए वाला इ सहरमें राष्ट्रपति भवन तथा राष्ट्रपतिक कार्यालय, प्रधानमन्त्रीक कार्यालय (सिंहदरवार), नेपाल सरकारक केन्द्रीय सचिवालय मन्त्रालयसभ, प्रायः सभ केन्द्रीय कार्यलयसभ, सरकारी तथा निजी टेलीभिजन स्टेसनसभ आ बहुतेक सरकारी तथा निजी रेडियोसभ तथा समाचार संस्थासभ रहल अछि । नेपाली सेनाक केन्द्रीय कार्यालय जङ्गी अड्डा, सशस्त्र प्रहरी-बलक प्रधान कार्यालय तथा नेपाल प्रहरीक केन्द्रीय कार्यालय सेहो एतएक अछि ।

बि.स. २०६८ क जनसंख्या विवरण अनुसार काठमाडौंक जनसंख्या ९,७५,४६३ अछि । जे नेपालक कोनो भी ठामसे सबसँ बेसी जनसंख्या छी ।




#Article 20: कैलाली जिला (236 words)


कैलाली नेपालक सुदूरपश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्रक सेती अञ्चलमे अवस्थित समथर भूभाग तथा पहाड मिश्रित जिला छी । ई जिलाक क्षेत्रफल ३,२३५ वर्ग किलोमिटर आ जनसङ्ख्या (२०६८) ७,७५,७०९ रहल अछि । कैलाली जिलाक सदरमुकाम धनगढी छी। ई जिलामे छ टा नगरपालिका  अछि :लम्की चुहा नगरपालिका, टीकापुर नगरपालिका, अत्तरिया नगरपालिका, घोडाघोडी नगरपालिका,  भजनी-त्रिशक्ती नगरपालिका आ धनगढी उपमहानगरपालिका । टीकापुरमे अवस्थित टीकापुर वृहत उद्यान नेपालक सबसँ पैग मानव निर्मित उद्यान छी तहिने कैलाली जिलामे रहल घोडाघोडी तालके विश्व सम्पदा सूचीक संरक्षित सिमसार क्षेत्रमे राखल गेल अछि ।

कैलाली जिलाक नामाकरण सम्बन्धमे बहुतेक रास मतसभ विद्यमान अछि। ओहीमे सँ प्रमुख मतसभ एहिप्रकार अछि। परापूर्व कालमे कैलाली जिलामे कालाबञ्जारक राज्य छल आ ओसभ सदरमुकाम आजुक कैलाली नाम कएल गाउँमे छल । ओहि ठामके पहिने कालापानी कहल जाइत छल । पहिनेके समयमे जे कियो अपराध करैत छल ओ अपराधीसभके याह ठाममे पठाए सजाय देल जाइत छल । उपरमे कालापानी नामसँ बहैवला नदी नीचा आबि खुटिया खोलाक नामसँ प्रसिद्ध अछि । सम्भवत याह कारणसँ सेहो शब्दक अपभ्रंस होइत होइत एकर नाम कैलाली रहल भऽ सकैक अनुमान कएल जाइत अछि ।

कर्णाली, मोहना, खुटिया, पथरैया, शिवगंगा, गौरी, गंगा, वनरा, गुलरा, गोदावारी, जमरा,आदी

घोडाघोडी ताल, जोखर ताल, तिलेक, कोईलही, लौकाभौका, वेहडावावा

धनगढी ४ उत्तरवेहडी शिवपुरीधाम, शमैजी (गोला देउ) फूलवस्ती, गोदावरीगंगा, ग्वाशी, बेहडाबाबा, लक्ष्मीनारायण मन्दिर, नैनादेवी मन्दिर, पशुपति मन्दिर, वेङ्कटेश्वर मन्दिर, वनदेवी मन्दिर, गोदावरीस्थित शिव मन्दिर

टीकापुर पार्क, घोडाघोडी ताल, लम्किक चिसापानि स्थित कर्णाली पुल, खैराला दरबार, गोदावरी, खानीडाडा, धनगढी स्थित जोखर ताल, धनगढी पार्क आ राजकाँडा




#Article 21: क्रिकेट (226 words)


क्रिकेट एक ब्याट आ बलक सामूहिक खेल छी जकर शुरुआत दक्षिणी इङ्ल्यान्डमे भेल छल । एकर सभ सँ प्राचीन निश्चित सन्दर्भ सन् १५९८ मे भेटैत अछि, अखन ई खेल १०० सँ बेसी देशसभमे खेलल जाएत अछि । एक क्रिकेट प्रतिस्पर्धामे ११ खेलाडीसभक दुई समूह होएत अछि ई खेल घासक मैदानमे खेलल जाएत अछि, जकर केन्द्रमे भूमिक एक समतल  लम्बा पट्टी होएत अछि जकरा पिच कहल जाएत अछि । स्टम्प लकड़ी सँ बनल होएत अछि, जकरा पिचक दुनू दिस गाड़ल जाएत अछि आ ओकर प्रयोग एक लक्ष्यक रूपमे कएल जाएत अछि ।
बलर क्षेत्ररक्षण टिमक एक खेलाड़ी होएत अछि, जे बलिङक लेल एक कड़ा, चमड़ाक मुट्ठी आकारक  बलक एक विकेटक नजदिक सँ दोसर विकेटक दिस करैत अछि, जकरा विपक्षी टिमक एक खेलाड़ी बल्लेबाजद्वारा बचाएल जाएत अछि ।

क्रिकेटक बहुतेक प्रारूप अछि, एकर उच्चतम स्तर टेस्ट क्रिकेट छी, जहिमे वर्तमान प्रमुख राष्ट्रिय टिमसभ भारत, अस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रिका, इङ्ल्यान्ड, श्रीलंका, वेस्ट इन्डिज, न्युजिल्यान्ड, पाकिस्तान, जिम्बाब्वे , बंगलादेश, अफगानिस्तान और आयरल्यान्ड छी । सन् २०१८ अप्रैलमे, आइसिसी घोषणा केलक की ओ १ जनवरी २०१९ सँ ओ अपन सम्पूर्ण १०४ सदस्यसभकें ट्वान्टी२० अन्तर्राष्ट्रिय दर्जा प्रदान करत ।

क्रमानुसार टेस्ट क्रिकेटक बाद एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेटकें गिनल जाएत अछि जकर पिछ्ला उपाधि २०१५ क्रिकेट विश्वकप अस्ट्रेलिया जीतने छल । क्रिकेट विश्वकप प्रतियोगिता २०० सँ बेसी देशसभमे टेलिभिजन पर देखल जाएत अछि आ अनुमानतः २ बिलियन सँ अधिक दर्शक देखवाक अनुमान रहैत अछि ।




#Article 22: खतर काका (1005 words)


मोबाइल आ इन्टरनेट ई दुनियाँ मे जे परिवर्तन आनने हो से दोसर गप्प, मुदा हम दाबी सँ कहि सकैत छी जे हमर घर मे क्रान्ति जरूर आएल अछि. आब अहाँ लोकनिक काकी’क चुल्हा-चिनवार बिल्कूल “ग्लोबल” भ’ गेल अछि. ओ पूरे दुनियाँ’क सम्पर्क मे रहैत छथि आ नहि जानि केहेन केहेन प्रश्न पुछैत रहैत छथि. पहिने तऽ बात केवल केवल प्रश्ने टा तक सीमित छल मुदा आब बात ओहि सँ आगू निकलि गेल. पुरे दुनियाँ के छकाबे वाला अहाँक खट्टर काका आब काकी सँ हारि मानैत छथि. आब हम बुझए लागलहुँ जे भाँग हम खाइत छी आ ओ किएक बोतलाएल रहैत छथि?
आई भोरे भोर चाह पीबाक काल काल मे हमरा पुछए लागलीह, “अहाँ ओसामा बिन लादेन’क बारे मे की जानैत छी?”
हम कहलिअन्हि, “ओसामा के बारे मे कोनो बात आब नुकाएल अछि की?”
हुनकर जवाब छलन्हि, “ओ अरब जगत के दोसर खट्टर काका छलैथ।”
हमरा नहि बुझल छल जे हमर प्रतिद्वन्द्वी अफगानिस्तान के कबायली इलाका मे रहैत अछि. खट्टर काका आ ओसामा बिन लादेन मे समानता ताकब सबहक मजाल नहि. मुदा जखन कल्पना अपन चरम सीमा केँ पार कऽ जैत छैक तऽ ओहि ठाम सँ कल्पना कयनिहार’क बतहपन शुरु होइत छैक. अहाँक काकी’क हऽद जानबाक लेल हम हुनका खोदनाय शुरु केलहुँ.
बूढ़’क अर्थशास्त्र’क पछुलका अँक मे पढ़लहुँ जे दू टा सरदार (मनमोहन सिँह आ अहुलवालिया) मिलि अर्थशास्त्र मे घोर गलती केने जा रहल छथि. बढैत जनसँख्या, अन्ग्रेजी बाजबाक योग्यता आ कम्प्युटर’क सामान्य जानकारी पर भारत केँ सुपर पावर बनेबाक योजना बना रहल अछि. मुदा ई दुनू टा सरदार बिसरि गेल छथि जे एखुनका ६५% यूवा जनसँख्या तीस साल बाद बुढ़ा जायत. तखन नहि तऽ आर्थिक प्रगतिए रहत आ नहि सुपर पावर बनबाक कोनो लालसा. चारु दिस बुढे-बुढ आ बुढ़ सँ जुड़ल अर्थशास्त्र.
हम हुनकर पहिल प्रश्न’क जवाब दैत कहलिअन्हि, “ओसामा बिन लादेन मात्र एकटा आतँकवादी छल आ हुनकर गति ओहने भेलनि जेना कोनो सामान्य आतँकवादी’क होएत छन्हि. आतँक’क एतेक बड़का साम्राज्य कोनो काज नहि एलनि. अमेरिका हुनकर घर मे जा केँ मारि देलकनि आ किनको कानो कान खबरो नहि भेलनि”।

तेँ हुनकर जानकारी केँ हम चुनौती दैत कहलिअन्हि, “इन्टरनेट सँ ताकल जानकारी ओतेक विश्वसनीय नहि होएत छैक. पूरे दुनियाँ के बुझल अछि जे ओसामा की छल।”

हम कहलिअन्हि, “ हँ हमरा बुझल अछि ओ हमरे सन हेहर छथि, वैह जिद्द, वैह arrogance, ओतबी बहस कयनिहार, मुदा एहि सँ किओ खट्टर काका नहि बनि जैत छैक”।

एक सँग एतेक बात हमरा बुझि मे नहि आएल. हम कहलिअनि, “अहाँक एतेक बात हमरा अपच लागि रहल अछि”
ओ तपाक सँ उत्तर देलैथ, “साधारण बात अछि. आई काल्हुक नवयुवक जखन कोनो कम्पनी मे भर्ती होएत छैक तऽ की देखैत छथि. कम्पनीक की पर्फ़ोरमेन्स छै? यदि तीन साल काज काएल जाए तऽ प्रोफ़ाइल मे की बढ़ोतरी हेतैक, दरमाहा कतेक भेटतैक आ पर्क कतेक भेटतैक”
हम चुप छलहुँ आ ओ अपन तरँग मे छलीह, “ओसामा के कोरपेरेट मे भर्ती होबए सँ पहिने अफगानी, पाकिस्तानी आकि पस्तुनी यूवक यैह देखैत छथि जे हुनकर कैरियर कतय नीक रहतैक, अलकायदा मे, तालीबान मे, या जैशे मुहम्मद मे. जे अमुक यूवक केँ नीक दरमाहा आ पर्क दैत छैक ओतैये जाइत छैक.”

हमर चुटकी पर ओ एना प्रतिक्रिया देलथिन जे मानू हमरा हुनकर बात बुझबाक योग्यते नहि अछि.
मुदा जवाब तऽ हुनका देनाइए छलनि, ओ कहय लागलीह, “कम्पनी मे जेना लोक नौकरी चेन्ज करैत छैक, ओसामा के लड़ाका तहिना नौकरी चेन्ज करैत छैक. जे बेसी दरमाहा देत ओतय चलि जायत. दोसर बात कम्पनी’क ब्रैन्ड मूल्य ओहि मे बहुत महत्वपूर्ण स्थान राखैत छैक. अतः यदि कोनो यूवक जैशे-मोहम्मद छोड़ि कम पैसा मे अलकायदा ज्वाइन कऽ लैथ तऽ कोनो अनर्गल नहि. ओना प्रत्येक कम्पनीक भाँति आतँकवादी सँगठन सेहो चाहैत छैक जे हुनकर कम्पनी मे सबसँ बेसी प्रतिभाशाली यूवक होबए जाहि सँ सँगठन दिन दूना आ राति चौगूना बढ़ए”.
आब हुनकर बात किछु तर्कसँगत लागि रहल छल, हम कहलिअन्हि, “से तऽ ठीक छै, मुदा ई बताउ जे प्रत्येक कार्पोरेशन के लक्ष्य होइत छै जे बेसी सँ बेसी पैसा कमाएल जाए. ओसामा के लक्ष्य तऽ एहेन नहि छल.”

हम हुनकर गप्प सँ सँतुष्ट नहि छलहुँ. “पैसा तऽ दोसरो तरीका सँ कमाएल जा सकैत छैक, एहेन रास्ता ओ लोकनि किएक चुनए छै”
हमरा तुरन्ते उत्तर भेट गेल, “आओर नहि तऽ की? अफ़गानिस्तान के आठवाँ पास नवयूवक केँ सोफ़्टवेयर कम्पनी मे नौकरी भेटतैक.”

आब हमरा लागय लागल छल जे काकी’क बात मे किछु दम जरुर छैक. हम कहलिअनि, “जँ अहाँक बात सत्य थीक, तऽ लागले हाथ इहो बता दिअ, जे आब आतँकवादी सँगठन के की हेतैक. ओसामा बिन लादेन तऽ मरि गेलैक.”
हम देखलहुँ जे काकी’क मुँह मे बुरलेल शब्द आबैत आबैत रुकि गेलनि. पत्नीधर्म इन्टरनेट सँ जोगाएल जानकारी पर बेसी भारी पड़ि रहल छलनि. ओ शालीनता सँ उत्तर देलथिन, “ओसामाक मरने किछु नहि होएत. जेना कोनो पैघ कम्पनी’क सी.ई.ओ. “रिटायर हर्ट” भऽ गेलाह. कम्पनी’क परफोर्मेन्स किछु दिन’क लेल डाँवाडोल रहत. फेर सँ वैह. कोनो दोसर लोक एहि पद केँ ग्रहण करताह आ कम्पनी केँ उपर लऽ जेबाक लेल प्रयत्न करताह”.
मोन होएत छल जे इन्टरनेट हमर जवानी मे किएक नहि आएल. अहाँ लोकनिक काकी’क बुद्धि चालीस साल पहिने खुजि जाइते. काकी’क सँ हम हारि मानि गेल छलहुँ आ हुनकर तर्क पर हम स्तब्ध भऽ चुपचाप बैसल छलहुँ. स्त्रीगण अपन पति केँ हारि मानैत नहि देखि सकैत छथि. हमरा सान्त्वना दैत कहलैथ, “ओसामा’क मरला’क बाद एखन आतँकवाद रुपी कार्पोरेट मे मन्दी अछि.”
काकी उपसँहार मे एकटा छोट सन लेक्चर दऽ देलीह, “आतँकवाद एकटा सर्विस इन्डस्ट्री थीक जाहि मे मुख्य उद्देश्य अछि पैसा लऽ केँ दोसरा लेल किछु काज करब थीक. एहि मे आउटसोर्सिँग सेहो होएत छैक. अमेरिका अरब जगत मे कब्जा केवल तेल’क पोलिटिक्स लेल केने छल. आ अरब जगत’क व्यापारी ओसामा सन लोक केँ फण्डिँग कऽ तेल’क सत्ता अपने हाथ मे राखए चाहैत छथि. ई सब पैसाक लेल खीचातानी होइत अछि. आ तथाकथित आतँकवादी एकटा स्किल्ड सोफ्टवेयर वर्कर सँ बढ़ि के किछु नहि”.
जखन हुनकर लेक्चर खत्म भेल तऽ हम जोर सँ श्वाँस छोड़लहुँ. ओसामा मरि चुकल छल. अहाँक काकी एहि स्थिति केँ आतँक’क मन्दी कहि रहल छलीह. आ एतय किछु दिन सँ हम अखबार मे पढ़ि रहल छलहुँ. भारत मे एकटा फेर सँ रीसेशन आबि रहल छल. काकी मँदी पर अपन वक्तव्य दऽ रहल छलीह. डर भेल कहीँ रिसेशन पर जँ हुनकर बहस शुरु भऽ जान्हि तऽ हुनका रोकब कठिन.




#Article 23: खोटाङ जिला (576 words)


खोटाङ नेपालक पूर्वाञ्चल विकास क्षेत्रक सगरमाथा अञ्चलमे अवस्थित एक पहाडी जिला छी।

एकिकरण करि बृहत नेपाल बनावेसँ पूर्व, दुधकोशी सँ अरुण धरिक किराँतीसभक बस्ती भेल माझकिराँत वा खम्वुवान क्षेत्रक नामसँ प्रसिद्ध छल। ई भू-भागक मुख्य प्रशासन चौदण्डीगढीक सेनवंशी राजाद्वारा सञ्चालित छल तहिना पहाडक छोट- छोट गढी आ थुमसभमे किराँती राजासभ राज्य करैत छल। चौदण्डीगढीक सेन राजाक ही शासनकालमे खोटाङ्गमे राईक स्वशासन देनए छल। विभिन्न समयमे किराँती राजा आ सेन राजाक बीच मतभेद आ कलह होमएत छल। एकर फाइदा उठा पृथ्वीनारायण शाह नेपालक एकिकरणक पहिनुक समयमे ई क्षेत्र उपर विजय केनए छल। राणाकालिन समयमे नेपालक ३५ जिलामे विभाजन कएल गेल छल।

ई समयमे हालक खोटाङक बीच भागमे पडैवाला साप्सु खोलाक सिमाना बना पूर्व ३ नम्वर आ पूर्व ४ नम्वर क्षेत्रक ओखलढुङ्गा आ भोजपुर गौडा शासन करैत छल। स्थानीय तहमे मझुवा, आमचोक, खोटाङ्ग, छुलुवार, सावा, दिप्लुङ, चुइचुम्मा, रतन्छा, खाम्तेल, हलेशी आ रावाथुम प्रशासनिक एकाई कायम छल। विशाल क्षेत्र होमएसँ साप्सु दक्षिणमे खोटाङ्ग इलाका अदालत आ ऐशेलुखर्क इलाका अदालत स्थापना करि न्याय प्रशासनक अतिरिक्त जग्गा रजिस्ट्रेशन करैके काम सेहो करैके सुरु भेल।

वि.स. २०१८ साल वैशाख १ गते नेपालक १४ अञ्चल आ ७५ जिलामे विभाजन करैत तत्कालिन खोटाङ्गद्वारा देख्ल जाइवाला आम्चोक आ सिक्तेल थुम भोजपुर देखनाइ आ रावापारिक क्षेत्र सोलुखुम्बु देखनाइ आ बाँकी क्षेत्र खोटाङ्ग देखैत खोटाङ्ग बजारक सदरमुकाम बनाक खोटाङ्ग जिला सेहो एक जिला कायम कएल गेल। ओ बखत ई जिलाक मध्य भागसँ बहैवाला साप्सुखोला सँ उत्तरतर्फ २३ गाउँ पञ्चायत आ दक्षिणतर्फ २२ गाउँ पञ्चायत रहल छल।

तत्कालिन संविधान बमोजिम एक गाम पञ्चायतसँ एक जना जिला सभा सदस्य चुनि पावैक कानूनी प्रावधान होमएसँ जिला सभामे स्वत: साप्सु उत्तरक बहुमत रहल। तत्कालिन पहिल जिला सभाक बैठक ही खोटाङ्गमे रहल सरकारी अड्डा अदालत दिक्तेलमे स्थानान्तरण करै लेल सरकारसँ माग करैत बहुमतसँ निर्णय केलक। खोटाङ्गमे रहल जिला पञ्चायत आ शिक्षा प्रशासन देखैक काम वि.सं. २०२० सालमे दिक्तेलमे सारि विधिवत रूपमे खोटाङ्ग जिलाक सदरमुकाम दिक्तेलमे सारल गेल। २०२२ सालमे तत्कालिन सरकार खोटाङ्ग अदालत दिक्तेलमे आ ऐशेलुखर्क अदालत सोलुसल्लेरीमे सारैके निर्णय केलक तँ तत्पश्चात खोलल गेल कार्यालयसभ क्रमशः दिक्तेलमे ही स्थापना भेल अछि।

 
नेपालक संविधानक तेसर संसोधन २०३२, खोटाङ्गक सिमाना पुनः हेरफेर करि भोजपुर जिलाक वोपुङ, भाज्याङ्गखर्क, काहुले तथा सोलु जिलाक बाकाचोल, पारा, जलेश्वरी, महेश्वरी, धारापानी, डुम्रे, दुवे, माक्पा, बाङ्गदेल, राखा, ऐंशेलुखर्क, बादेल, दिप्सुङ, लगायत पन्ध्र गाउँ पञ्चायत खोटाङ्गमे जोडि क हालक क्षेत्र तथा सिमाना कायम होमएत गेल अछि। अहिना विस्तार भेल क्षेत्र ही हालधरिक खोटाङ्ग जिला रहल अछि।

कोनो समय ई भू-भाग किराँती राजा खोटे द्वारा शासित कोटक रूपमे छल आ उनके नामसँ खोटाङ्गकोट होमएत खोटाङ्ग नाम रहल गेल किम्वदन्ती अछि। दोसर एक जनश्रुती अनुशार हाल खोटाङ बजार रहल स्थान आसपास प्रशस्त खोटे सल्लासभ पावैसँ ई क्षेत्रक खुट्टा कहल जाइ लगल। ई क्षेत्र ओ बखत हालक खुटा कहिक स्थान मात्र नै भ अरु अधिक क्षेत्र समेटने छल। ई क्षेत्रमे ओ बखत हाङ्ग नाम करिक प्रतापी राजा राज्य करैत छल। उनके नामसँ बादमे खुटाका हाङ्ग राजा कहैत खुटाहाङ्ग आ अन्त्यमे खोटाङ्ग शब्दक उत्पति भ ई जिलाक नाम खोटाङ रहल गेल कहिक भनाई सेहो रहल अछि।

ई जिलाक मुख्य पर्यटकिय स्थलसभमे बराहापोखरी, हलेसी महादेव स्थान, ट्याम्केडाँडा, मेरुङ डाँडा आ सेल्मेडाँडा आदी पडैत अछि। एकर साथे हलेसी मलाथुम्की, तुवाचुङ जायजुम, मुढे डाँडा, रूपाकोट डाँडा, मझुवा गढी, ताराखसे डाँडा आ सहदेउ गढी आदि स्थल सेहो पर्यटकीय दृष्टिकोणसँ महत्त्वपूर्ण स्थलक रुपमे रहल अछि।

ई जिलाक प्रमुख ताल/ पोखरिमे बराहपोखरी,छिता पोखरी आ इन्द्रेणी पोखरि मुख्य छी।

ई जिलाक प्रमुख व्यापारिक स्थानसभमे दिक्तेल बजार,हलेसी, अर्खौले बजार, ऐंसेलुखर्क,बाक्सिला माने भञ्याङ्ग,स्यलगौडे,चिसापानी, सिमपानी,रतन्छा बुइपा पञ्चरदोबाटो माला आ खोटाङ बजार पञ्चमी बजार मंगलटार बजार मुख्य छी।

निर्वाचन आयोग (नेपाल) द्वारा निर्धारण कएल गेल, जिलागत निर्वाचन क्षेत्र अन्तर्गत  कऽ नक्सा नीचा देल गेल अछि।




#Article 24: गङ्गा नदी (1065 words)


गङ्गा नदी वा गङ्गे एसियाक पैग नदीसभमे सँ एक तथा भारत आ बङ्गलादेश भऽ प्रवाहित होमएवाला एक पवित्र हिन्दू नदी छी । करीब २५२५ किलोमिटर (१५६९ मेइल) लम्बा ई नदी हिमालयक पश्चिमी भागमे अवस्थित भारतक उत्तराखण्डसँ निकैल दक्षिण पूर्वदिस बहैत भारतक उत्तरी समथर भूभाग होइत बङ्गलादेश प्रवेश करैत अछि आ अन्तिममे बङ्गालक खाडीमे जा समुद्रमे मिलैत अछि । ई नदी भारतक एकटा महत्वपूर्ण नदी तथा विश्वक सम्पूर्ण हिन्दू धर्मावलम्बीसभक आस्थाक एकटा केन्द्र छी । नदीमे बहैवाला पानि लगायत अन्य वस्तुसभक मात्राक आधारमे ई नदी विश्वक तेसर स्थानमे वर्गीकृत अछि ।

गङ्गा नदीद्वारा भारतक उत्तराखण्डमे हिमालयसँ भऽ बङ्गालक खाडीक सुन्दरवन धरिक विशाल भूभागकें सिचाई करैत अछि । ई भारतक प्राकृतिक सम्पदा मात्र नै भऽ, आम जनताक भावनात्मक आस्थाक आधार सेहो छी । २,०७१ किलोमिटरधरि भारत तथा बंगलादेशमे अपन लम्बा यात्रा तय करैत ई सहायक नदीसभक संगे दस लाख वर्ग किलोमिटर क्षेत्रफलक अति विशाल उब्जाउ मैदानक रचना करैत अछि । सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक आ आर्थिक दृष्टिसँ अत्यन्त महत्त्वपूर्ण गङ्गाक ई मैदान अपन बेसीतर जनसङ्ख्याक कारण सेहो चिन्हल जाइत अछि । १०० फिट (३१ मी)क अधिकतम गहिराई भेल ई नदी भारतमे पवित्र मानल जाइत अछि तथा एकर उपासना माता आ देवीक रूपमे कएल जाइत अछि । भारतीय पुराण आ साहित्यमे अपन सौन्दर्य आ महत्वक कारण बारम्बार आदरक साथ गङ्गा नदीकें प्रति विदेशी साहित्यमे सेहो प्रशंसा आ भावुकतापूर्ण वर्णन कएल गेल अछि ।

ई नदीमे माछ तथा सर्पसभक अनेक प्रजाति तँ पाबल जाइते अछि एकर अलावा मिठगर पानिक दुर्लभ डल्फिन सेहो भेटल अछि । ई कृषि, पर्यटन, साहसिक खेलसभ तथा उद्योगसभक विकासमे महत्त्वपूर्ण योगदान दैत अछि तथा अपन तटमे बैसल शहरसभकें जल आपूर्ति सेहो करैत अछि । एकर तटमे विकसित धार्मिक स्थल आ तीर्थ भारतीय सामाजिक व्यवस्थाक विशेष अङ्ग छी । एकर उपर बनल पुल, बाँध, नदी परियोजनासभ भारतक बिजली, पानि आ कृषिसँ सम्बन्धित आवश्यकताकें आपूर्ति करैत अछि । वैज्ञानिकसभ कहैत अछि कि ई नदीक पानिमे ब्याक्टिरिइफेज नामक विषाणु होइत अछि जाहिद्वारा जीवाणुसभ आ अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवसभकें जीवित नै रहैलेल देत अछि । गङ्गाक ई असीमित शुद्धीकरण क्षमता आ सामाजिक श्रद्धा रहला बादो एकर प्रदूषण रोकल नै जा सकल अछि । एकर पानिकें सफा करैलेल विभिन्न प्रयत्न जारी अछि मुदा सफाईकें अनेक परियोजनाक क्रममे नवम्बर, सन् २००८मे भारत सरकारद्वारा एकरा भारतक राष्ट्रिय नदीक रूपमे घोषणा केनए अछि ।

गङ्गा नदीक मुख्य शाखा भागीरथी छी जे कुमायूँमे हिमालयक गोमुख नामक स्थानमे गङ्गोत्री हिमतालसँ प्रवाहित होइत अछि । गङ्गाक ई उद्गम स्थलक उचाई ३१४० मिटर अछि । एहि ठाम गङ्गाकें समर्पित एकटा मन्दिर सेहो अछि । गङ्गोत्री तीर्थ, शहरसँ १९ किलोमिटर उत्तर तरफक ३,८९२ मिटर (१२,७७० फिट)क उचाईमे ई हिमतालक उद्गम अछि । ई हिमताल २५ किलोमिटर लम्बा आ ४ किलोमिटर चौडा आ लगभग ४० मिटर उंच अछि । ई हिमतालसँ भागीरथी एकटा छोट गुफा जका मुखमे अवतरित होइत अछि । एकर जलस्रोत ५००० मिटर उचाईमे अवस्थित एक बेसिन अछि । ई बेसिनकें मूल पश्चिमी ढलानक सन्तोपन्थक शिखरमे अछि । गौमुखक रस्तामे ३,६०० मिटरकें उचाईमे अवस्थित चिरबासा गाउँमे विशाल गोमुख हिमतालक दर्शन होइत अछि  । ई हिमतालमे नन्दा देवी, कामत पर्वत तथा त्रिशुल पर्वतक बरफ पिघैल आबैत अछि । यद्यपि गङ्गाक आकार लेबक लेल अनेक छोट धारासभक योगदान अछि मुदा ६ पैग आ ओकर सहायक ५ छोट धारासभक भौगोलिक आ सांस्कृतिक महत्त्व प्रबल अछि । अलकनन्दाक सहायक नदी धौली, विष्णु गङ्गा तथा मन्दाकिनी छी । धौली गङ्गाक अलकनन्दासँ विष्णु प्रयागमे मिलन होइत अछि । ई १,३७२ मिटरक उचाईमे अवस्थित अछि । याह प्रकार २,८०५ मिटर उंच नन्द प्रयागमे अलकनन्दाक नन्दाकिनी नदीसँ सङ्गम होइत अछि । एकरबाद कर्ण प्रयागमे अलकनन्दाक कर्ण गङ्गा वा पिन्डर नदीसँ सङ्गम होइत अछि । फेर ऋषिकेशसँ १३९ किलोमिटर दुर अवस्थित रुद्र प्रयागमे अलकनन्दा मन्दाकिनी नदीसँ मिलैत अछि। एकरबाद भागीरथी आ अलकनन्दा १,५०० फिटमे अवस्थित देव प्रयागमे मिलैत अछि आ एतयसँ ई सम्मिलित जल-धारा गङ्गा नदीक नामसँ अगाडी प्रवाहित होइत अछि । याह पाँच प्रयागसभक सम्मिलित रूपकें पञ्च प्रयाग कहल जाइत अछि । ई प्रकार २०० किलोमिटरक सकस पहाडी रस्ता तय करि गङ्गा नदी ऋषिकेश होइत पहिल बेर मैदानकें हरिद्वारमे स्पर्श करैत अछि ।

हरिद्वारसँ लगभग ८०० किलोमिटर मैदानी यात्रा करैत गढमुक्तेश्वर, सोरोन, फर्रुखाबाद, कन्नौज, बिठूर, कानपुर होइत गङ्गा इलाहाबाद (प्रयाग) पहुँचैत अछि । एतय एकर सङ्गम यमुना नदीसँ होइत अछि । ई सङ्गम स्थल हिन्दुसभक एक महत्त्वपूर्ण तीर्थ छी । एकरा तीर्थराज प्रयाग सेहो कहल जाइत अछि । एकर बाद हिन्दू धर्मक प्रमुख मोक्षदायिनी नगरी काशी (वाराणसी)मे गङ्गा एक वक्र लैत अछि, जहि ठामसँ ई एतय उत्तरवाहिनी नामद्वारा चिनहल जाइत अछि । एतयसँ गङ्गा मीरजापुर, पटना, भागलपुर होइत पाकुर पहुँचैत अछि । एतय पहुँचैत पहुँचैत गङ्गामे बहुतेक सहायक नदीसभ, जना- सोन, गण्डक, घाघरा, कशी आदि मिल जाइत अछि । भागलपुरमे राजमहलक पहाडसभसँ ई दक्षिणवर्ती होइत अछि । पश्चिम बङ्गालक मुर्शिदाबाद जिलाक गिरिया नामक स्थान नजदिके गङ्गा नदी २ शाखासभमे विभाजित होइत अछि- भागीरथी आ पद्मे । भागीरथी नदी गिरियासँ दक्षिण तरफ बहैत अछि तँ पद्मे नदी दक्षिण-पूर्व तरफ बहैत फरक्का बाँध (१९७४ निर्मित)सँ होइत बंगलादेशमे प्रवेश करैत अछि । एतयसँ गङ्गाक डेल्टा भाग शुरू होइत अछि । मुर्शिदाबाद शहरसँ हुगली शहरधरि गङ्गाक नाम भागीरथी नदी तथा हुगली शहरसँ मुहानेधरि गङ्गाक नाम हुगली नदी अछि । गङ्गाक ई मैदान मूलत: एक भू-अभिनति खदहा छी जाकार निर्माण मुख्य रूपद्वारा हिमालय पर्वतमाला निर्माण प्रक्रियाक तेसर चरणमे लगभग ६-४ करोड वर्ष पहिने भेल विश्वास अछि । याह मैदानसभमे जलस्रोतक औसत गहिराई १,००० सँ २,००० मिटर अछि ।

गङ्गाक ई घाटीमे एकटा एहन सभ्यताक उद्भव आ विकास भेल जकर प्राचीन इतिहास अत्यन्त गौरवमयी आ वैभवशाली अछि ।

File:Ram Jhula Bridge, Rishikesh.jpg|रामझूला पुल ऋषिकेश।
File:Boat Sailing up Padma River Bangladesh.jpg|पद्मा नदी गङ्गाक अन्तिम स्थान ।
File:MeghnaRiver.jpg|गङ्गा अन्तिम स्थितिमे 
File:Haridwar ghat.jpg|हरिद्वार घाट

क.     इंदो किं अंदोलिया अमी ए चक्कीवं गङ्गा सिरे। .................एतने चरित्र ते गंग तीरे।

ख.     कइ रे हिमालइ माहिं गिलउं। कइ तउ झंफघडं गंग-दुवारि।..................बहिन दिवाऊँ राइ की। थारा ब्याह कराबुं गंग नइ पारि।

ग.    प्रागराज सो तीरथ ध्यावौं। जहँ पर गंग मातु लहराय।। / एक ओर देखि जमुना आई। दोनों मिलीं भुजा फैलाय।। / सरस्वती नीचे देखि निकली। तिरबेनी सो तीर्थ कहाय।।

घ.    कज्जल रूप तुअ काली कहिअए, उज्जल रूप तुअ बानी। / रविमंडल परचण्डा कहिअए, गङ्गा कहिअए पानी।।

ङ.    सुकदेव कह्यो सुनौ नरनाह। गङ्गा ज्यौं आई जगमाँह।। / कहौं सो कथा सुनौ चितलाई। सुनै सो भवतरि हरि पुर जाइ।।

च.    देवनदी कहँ जो जन जान किए मनसा कहुँ कोटि उधारे। / देखि चले झगरैं सुरनारि, सुरेस बनाइ विमान सवाँरे।

छ.    पावन अधिक सब तीरथ तैं जाकी धार, जहाँ मरि पापी होत सुरपुर पति है। / देखत नैं जाकौ भलो घाट पहचानियत, एक रूप बानी जाके पानी की रहति है।

ज.    अच्युत चरण तरंगिणी, शिव सिर मालति माल। हरि न बनायो सुरसरी, कीजौ इंदव भाल।।--रहीम

झ.    गङ्गा नदीक सम्बन्धमे नेहरू -जवाहरलाल नेहरू




#Article 25: गजेन्द्र ठाकुर (362 words)


गजेन्द्र ठाकुर (Gajendra Thakur; গজেন্দ্র ঠাকুর; ગજેન્દ્ર ઠાકુર; ଗଜେନ୍ଦ୍ର ଠାକୁର; ਗਜੇਨ੍ਦ੍ਰ ਠਾਕੁਰ; గజేన్ద్ర ఠాకుర; கஜேந்த்ர டாகுர; ಗಜೇನ್ದ್ರ ಠಾಕುರ; ഗജേന്ദ്ര ഠാകുര) भारतक लेखक छथि। ओ मैथिली मे लिखै छथि जे भारतक उत्तरी बिहार आ नेपालक दक्षिण-पूर्वी भागमे बाजल जाइत अछि । ओ मैथिली लेखक, कोष- निर्माता, आ विदेह (मिथिला)क इतिहासक ज्ञाता छथि । ओ मैथिली भाषाक तिरहुता लिपिमे लिखल ११००० तालपत्र-बसहा पत्रपर लिखल अभिलेखक देवनागरीमे लिप्यंतरण केने छथि।
वो पञ्जी सभ मिथिला क्षेत्रक मैथिल ब्राह्मण समुदायक आनुवंशिक लेखक थिक आ ऐमे लगभग १०० अन्तर्जातीय विवाह सेहो लिखित रूपमे वर्णित अछि। अखन धरि पौराणिक बुझल जाएबला व्यक्तित्व सभक लिखित प्रमाण पहिल बेर ऐ मे उपलब्ध भेल अछि।

गजेन्द्र ठाकुर केँ जन्म बिहार केँ भागलपुर में ३० मार्च १९७१ ई. मे भेल । पिता-स्वर्गीय कृपानन्द ठाकुर, माता-श्रीमती लक्ष्मी ठाकुर, मूल-गाम-मेंहथ, भाया-झंझारपुर,जिला-मधुबनी (बिहार)।
शिक्षा: एम.बी.ए. (फाइनेन्स), सी.आइ.सी., सी.एल.डी., कोविद।

विदेह (पत्रिका) प्रधान संपादक सहित अनेको वेबसाइटक संचालक आ पथप्रदर्शक।

विशेष------ हिनक चारिटा मुख्य विशेषता अछि---

प्रकाशित गजल संग्रह----धांगि बाट बनेबाक दाम अगूबार पेने छँ

अन्य लेखन:

प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना भाग-१

सहस्रबाढ़नि (उपन्यास)

सहस्राब्दीक चौपड़पर (पद्य संग्रह)

गल्प-गुच्छ (विहनि आ लघु कथा संग्रह)

संकर्षण (नाटक)

त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन (दूटा गीत प्रबन्ध)

बाल मण्डली/ किशोर जगत (बाल नाटक, कथा, कविता आदि)

उल्कामुख (नाटक)

सहस्रशीर्षा (उपन्यास)

प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना भाग दू (कुरुक्षेत्रम अन्तर्मनक-२)

शब्दशास्त्रम (कथा संग्रह)

जलोदीप (बाल-नाटक संग्रह)

कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक (देवनागरी वर्सन, तिरहुता वर्सन, ब्रेल वर्सन)

सहस्रबाढ़नि_ब्रेल मैथिली (पी.डी.एफ.)

सहस्रबाढ़नि_ब्रेल-मैथिली

मिथिलाक इतिहास- भाग-२ (शीघ्र)

जगदीश प्रसाद मण्डल- एकटा बायोग्राफी (शीघ्र)

The Comet

On_the_dice-board_of_the_millennium

A Survey of Maithili Literature- Vol.II- GAJENDRA THAKUR (soon)

Learn Mithilakshar Script तिरहुता (मिथिलाक्षर) सीखू

Learn_MithilakShara_GajendraThakur.pdf

Learn Braille through Mithilakshar Script ब्रेल सीखू

LearnBraille_through_Mithilakshara.pdf

Learn International Phonetic Script through Mithilakshar Script अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला सीखू
Learn_International_Phonetic_Alphabet_through_Mithilakshara.pdf

सह-लेखन:
गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा
MAITHILI-ENGLISH DICTIONARIES
Maithili_English_Dictionary_Vol.I.pdf

MaithiliEnglishDictionary_Vol.II_GajendraThakur.pdf

ENGLISH-MAITHILI DICTIONARIES
VIDEHA ENGLISH MAITHILI DICTIONARY

EnglishMaithiliDictionary_Vol.I_GajendraThakur.pdf

जीनोम मैपिंग (४५० ए.डी.सँ २००९ ए.डी.)--मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध

जीनोम मैपिंग (४५० ए.डी.सँ २००९ ए.डी.)--मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध (Click this link to download)

पंजी (मूल मिथिलाक्षर ताड़पत्र)

दूषण पंजी

मोदानन्द झा शाखा पंजी

मंडार- मरड़े कश्यप-प्राचीन

प्राचीन पंजी (लेमीनेट कएल)

उतेढ़ पंजी

पनिचोभे बीरपुर

दरभंगा राज आदेश उतेढ आदि

छोटी झा पुस्तक निर्देशिका

पत्र पंजी

मूलग्राम पंजी

मूलग्राम परगना हिसाबे पंजी

मूल पंजी-२

मूल पंजी-३

मूल पंजी-४

मूल पंजी-५

मूल पंजी-६

मूल पंजी-७




#Article 26: गणित (211 words)


गणित (ग्रीक μάθημα máthēma, “ज्ञान, अध्ययन, सिखाई”) एहन विद्यासभक समूह छी जे सङ्ख्यासभ,  मात्रासभ, परिमाणसभ, रूपसभ आ ओइसभक आपसी सम्बन्ध, गुण, स्वभाव इत्यादिक अध्ययन करैत अछि।  गणित एक अमूर्त या निराकार आ निगमनात्मक प्रणाली छी। गणितक बहुतेक शाखासभ अछि : अङ्कगणित, रेखागणित, त्रिकोणमिति, साङ्ख्यिकी, बीजगणित, कलन, इत्यादि। गणितमे अभ्यस्त व्यक्ति या खोज करनिहार वैज्ञानिकके गणितज्ञ कहल जाइत अछि।

बीसम् शताब्दीक प्रख्यात ब्रिटिश गणितज्ञ आ दार्शनिक बर्टेन्ड रसेलक अनुसार - गणितके एक एहन विषयके रूपमे परिभाषित कएल जा सकैत अछि जाहिमे हम जानिए नै सकैत छी की हम की कऽ रहल छी, नै त हमरासभके ई पता होइत अछि की जे हम कऽ रहल छी ओ सत्य अछि या नै। 

गणित किछ अमूर्त धारणासभ तथा नियमसभक सङ्कलन मात्र नै छी, मुदा दैनिकीय जीवनक मूलाधार छी।

पुरातन कालसँ सभ प्रकारक ज्ञान-विज्ञानमे गणितक स्थान सर्वोपरि रहल अछि-

(जाहि प्रकार मयूरमे शिखा आ नागसभमे मणिक स्थान सबसँ उपर अछि, ओहि प्रकार सभ वेदाङ्ग आ शास्त्रसभमे गणितक स्थान सबसँ ऊपर अछि।)

महान गणितज्ञ गाउस कहने छल की गणित सभ विज्ञानसभक रानी छी। गणित, विज्ञान आ प्राविधिकक एक महत्वपूर्ण उपकरण छी। भौतिकी, रसायन विज्ञान, खगोल विज्ञान आदि गणित बिना नै समझल जा सकैत अछि। ऐतिहासिक रूपसँ देखल जाय तँ वास्तवमे गणितक अनेक शाखासभक विकास याह कारण कएल गेल की प्राकृतिक विज्ञानमे एकर आवश्यकता महसुस कएल गेल छल। 




#Article 27: गहूँ (115 words)


गहूँ (Wheat; वैज्ञानिक नाम: Triticum spp.), मध्य पूर्वक क्षेत्रसँ आएल एक घाँस छी जकर खेती दुनिया भरिमे कएल जाइत अछि । विश्व भरिमे, भोजनक लेल रोपल जाएवला धान्य फसलसभमे मकैक बाद गहूँ दोसर सभसँ बेसी उगाएल जाएवला फसल छी, धानक स्थान गहूँक ठीक बाद तेसर स्थान पर अबैत अछि । गहूँक दाना आ दानाकें पीस प्राप्त भेल आटा रोटी, डबलरोटी (ब्रेड), कुकिज, केक, दलिया, पास्ता, रस, सेबई, नुडल्स आदि बनबैक लेल प्रयोग कएल जाइत अछि । गहूँक पेर बियर, दारू, भोड्का आ जैवईंधन बनाएल जाइत अछि । गहूँक एक सीमित मात्रामे पशुसभक चाराक रूपमे प्रयोग कएल जाइत अछि आ एकर भूसाकें पशुसभक चारा या छप्परक लेल निर्माण सामग्रीक रूपमे प्रयोग कएल जाए सकैत अछि ।




#Article 28: गाजा पट्टी (101 words)


गजा पट्टी प्यालेस्टाइनक क्षेत्र छी । एकर क्षेत्र दक्षिण-पश्चिम ६ सँ ११ किलोमिटर चौडाई आ लगभग ५१ किलोमिटर लम्बाई रहल अछि । सन् २०१२ मे एकर अपन पश्चिमी सामुद्रिक किनारा सहित अपन क्षेत्र प्यालेस्टाइनमे मिलेनाए छल । सन् २०१२ क संयुक्त राष्ट्र महासभा प्यालेस्टाइनके गैर सदस्य राष्ट्रक पर्यवेक्षकक रुपमे घोषणा केनए छल ।

एकर नाम एकर प्रमुख सहर गाजा (उच्चारण गाज्जा सेहो होमए अछि) सँ राखल गएल अछि । एकर दोसर प्रमुख सहर एकर दक्षिणमे स्थित राफा अछि जे इजिप्टक सीमासँ जुडल अछि । गाजापट्टीमे लगभग १८ लाख लोग रहैत अछि जहिमे ४ लाख मात्रै गाजा सहरमे बसोबास करैत अछि । 




#Article 29: गोरखपुर (158 words)


गोरखपुर उत्तर प्रदेश राज्यक पूर्वी भागमे नेपालक साथ सीमाक पास स्थित भारतक एक प्रसिद्ध शहर छी। ई गोरखपुर जिलाक प्रशासनिक मुख्यालय सेहो छी। ई एक धार्मिक केन्द्रक रूपमे मशहूर अछि जे बौद्ध, हिन्दू, मुस्लिम, जैन आ सिख सन्तसभक साधनास्थली रहल। मुदा मध्ययुगीन सर्वमान्य सन्त गोरखनाथक बाद हुनकर नाम पर एकर वर्तमान नाम गोरखपुर राखल गेल। एतय के प्रसिद्ध गोरखनाथ मन्दिर अखनो नाथ सम्प्रदायक पीठ छी। ई महान सन्त परमहन्स योगानन्दक जन्म स्थान सेहो छी। ई शहरमे आर बहुतेक ऐतिहासिक स्थलसभ अछि जना, बौद्धसभक घर, इमामबाड़ा, १८अम सदीक दरगाह आ हिन्दू धार्मिक ग्रन्थसभक प्रमुख प्रकाशन संस्थान गीता प्रेस।

२०अम सदीमे, गोरखपुर भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलनक एक केन्द्र बिन्दु छल आ आई ई शहर एक प्रमुख व्यापार केन्द्र बनि चुकल अछि। पूर्वोत्तर रेलवेक मुख्यालय, जे ब्रिटिश कालमे बङ्गाल नागपुर रेलवेक रूपमे जानल जाइत छल, एतय स्थित अछि। आब एकरा एक औद्योगिक क्षेत्रक रूपमे विकसित करैक लेल गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा/GIDA) क स्थापना पुरान शहरसँ १५ किमी दूर कएल गेल अछि।




#Article 30: गोर्खा जिला (213 words)


गोरखा जिला गण्डकी अञ्चलक नेपालके एकटा जिला अछि। गोरखा जिलाके सदरमुकाम गोरखा बजार छी जे पृथ्वीनारायण नगरपालिकामे अवस्थित अछि।
 

राष्ट्रिय जनगणना २०६८ अनुसार गोरखा जिलाक कूल जनसंख्या २,७१,०६१ गोटे मध्ये पुरुष १,२१,०४१ आर महिला १,५०,०२० बसोबास करैत अछि ।

ई बाहेक अहिठाम शक्तिक स्वरूप श्री भवानी कालिका आर शिव स्वरूप श्री गुरु गोरखनाथ बाबा होएक कारण धार्मिक हिसाबसं शिव-शक्ति पीठक रूपम ई ठामक महत्वपूर्ण स्थान अछि ।

ई वि. सं. १७७९ म राष्ट्रनिर्माता श्री ५ वडामहाराजधिराज पृथ्वीनारायण शाहक जन्म भेल छल। गोरखाम जगतमाता भगवती कालिको मन्दिर आर जगतगुरु मानल गुरु गोरखनाथक गुफा सेहो अछि । अहिठाम हजारौं भक्तजनसभ दर्शन करवाक हेतु अपन मनोकामना पूरा हेतु आवैत अछि। संगै प्रत्येक अष्टमीक दिन बलि पूजा चढावल जायेत अछि । दैनिक नित्य पूजाआजा आर भजनकीर्तन सहो अछि। कालिका आर गुरु श्री गोरखनाथक हिन्दुसभक आराध्य वा नेपालक राष्ट्रदेवता मानल जायेत अछि । नेपाली सिक्कामक सहो श्री भवानी आर श्री श्री श्री गोरखनाथ लिखल भेटल अछि । साथै नेपालक राष्ट्रिय निशाना छापम सहो गुरु श्री गोरखनाथक चरण अङ्कीत छल । अहिसं जानकारी होएत कि ई सभ हमसब नेपाली आरध्यदेव छी ।

ई ठामक विशेषत अहिठाम सं देखल जाएवाला चाँदी जहिन घेरल उत्तर भरि हिमाली श्रृङ्खलासभ अछी । संसारक पाँचम अग्ल हिमाल मनासलु अहि भेकम अवस्थित अछि । अतसं धवलागिरी सं गणेश हिमाल तक मनमोहक दृश्य देखि सकेत छि 




#Article 31: गौतम बुद्ध (113 words)


 
गौतम बुद्ध (जन्म ५६३ इशा पूर्व - मृत्यु ४८३ इशा पूर्व) विश्वक प्राचीन धर्ममे सँ एक बौद्ध धर्मक प्रवर्तक छल ।हुनकर जन्म क्षत्रिय कुलक शाक्य नरेश शुद्धोधनक घर भेल छल । सिद्धार्थ विवाहोपरान्त नवजात शिशु राहुल आ पत्नी यशोधराक त्याग संसारक जियन, मरण आ दुखसँ मुक्तिक लेल मार्गक खोजीमे रातिमे राजपाठ छोडि जङ्गल चलि गेल छल । बहुतेक वर्षक कठोर साधनाक पश्चात बोधगया (बिहार)मे  बोधी वृक्षक नीचा ओ ज्ञानक प्राप्ति केलक आ ओ सिद्धार्थसँ बुद्ध बनि गेल छलन्हि ।

गौतम बुद्धक जन्म बैशाख शुक्ल पूर्णिमाक दिन वर्तमान नेपालक सीमाभितर  रूपन्देही जिलाक लुम्बिनीमे भेल छल । सिद्धार्थ गौतमक पिता सुद्धोदन तत्कालीन तिलौराकोट राज्यमे शाक्य वंशक राजा छल । गौतमक माताक नाम मायादेवी छल ।

 




#Article 32: चाणक्य (390 words)


चाणक्य या कौटिल्य (लगभग ईपू ३७०–२८३) एक भारतिय शिक्षक, दार्शनिक आर महान सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के सल्लाहकार छल । हुन्कर नदवन्शके नाश करलखिन आर चन्द्रगुप्त मौर्यके राजा बनेलखिन । हुन्कर  राजनीति आर कूटनीतिके साक्षात् मूर्ति छलाह। हुन्का द्वारा अर्थशास्त्र राजनीति, अर्थनीति, कृषि, समाजनीति आधाके महान ग्रन्थसभक रचना कएल गेल छल । चाण्क्य भारतके एकटा सुदृढ़ आ केन्द्रीकृत शासन प्रदान कएलन्हि, जकर अनुभव भारतवासीके पूर्वमे नहि छलन्हि। चाणक्यक जीवन आ वन्श विषयक सूचना अप्रामाणिक अछि। चाणक्यक आन नाम सभ सेहो अछि। जेना कौटिल्य, विष्णुगुप्त, वात्स्यायन, मालांग, द्रामिल, पाक्षिल, स्वामी आ आंगुल। विष्णुगुप्त नाम कामन्दक केर नीतिसार, विशाखादत्तक मुद्राराक्षस आ दन्डीक दशकुमारचरितमे भेटैत अछि। अर्थशास्त्रक समापनमे सेहो इ चर्चा अछि जे नन्द राजासँ भूमिके उद्धार केनिहार विष्णुगुप्त द्वारा अर्थशास्त्रक रचना भेल। अर्थशास्त्रक सभटा अध्यायक समापनमे एकर रचयिताक रूपमे कौटिल्यक वर्णन अछि। जैन भिक्षु हेमचन्द्र हिन्का चणकक पुत्र कहैत छथि। अर्थशास्त्रमे उल्लिखित अछि जे कौटिल्य कुटाल गोत्रमे उत्पन्न भेलाह। पन्द्रहम अधिकरणमे कौटिल्य अपनाके ब्राह्मण कहैत छथि। कौटिल्य गोत्रक नाम, विष्णुगुप्त व्यक्तिगत नाम आ चाणक्य वन्शगत नाम बुझना जाइत अछि। धर्म आ विधिक क्षेत्रमे कौटिल्यक अर्थशास्त्र आ याज्ञवल्क्य स्मृतिमे बड्ड समानत अछि जे चाणक्यक मिथिलावासी होयबाक प्रमाण अछि। अर्थशास्त्रमे(१.६ विनयाधिकारिके प्रथमाधिकरणे षडोऽध्यायः इन्द्रियजये अरिषड्वर्गत्यागः) कराल जनक केर पतनक सेहो चर्चा अछि । तद्विरुद्धवृत्तिरवश्येन्द्रियश्चातुरन्तोऽपि राजा सद्यो विनश्यति- यथा दाण्डक्यो नाम भोजः कामाद् ब्राह्मण कन्यायमभिमन्यमानः सबन्धराष्ट्रो विननाश करालश्च वैदेहः,... । अर्थशास्त्रमे १५ टा अधिकरण अछि । सभ अधिकरण केर विभाजन प्रकरणमे भेल अछि ।

कौटिल्यक राज्य संब्धी विचार सप्तांग सिद्धांतमे अछि।स्वामी, अमात्य, राष्ट्र, दुर्ग, कोष, दंड आऽ मित्र केर रूपमे राज्यक सातटा अंग अछि। कऊतिल्यक संप्रभुता सिद्धांतमे राज्यक प्राशसनिक विभा वा तीर्थक चर्च अछि- ई १८ ट अछि। १.मंत्री२.पुरोहित३.सेनापति४.युवराज५.दौवारिक६.अंतर्वांशिक७.प्रशास्त्र८.संहर्त्ता९.सन्निधात्रा१०.प्रदेष्टा११.नअयक१२.पौर व्यावहारिक१३.कर्मांतिक१४.मंत्रिपरिषदाध्यक्ष१५,.दंडपाल१६.दुर्गपाल१७.अंतर्पाल१८.आत्विक। विधिक चरिटा श्रोत अछि- धर्म, व्यवहार, चरित्र आऽ राजशासन । कौटिल्यक अतरराज्य सम्बन्ध केर सिद्धान्त मण्डल सिद्धान्त केर नामसँ प्रतिपादित अछि । विजिगीषु राजा- विजय केर इच्छा बला राजा- केर चारू कात अरिप्रकृति राजा आऽ अरिप्रकृति राजाक सीमा पर निम्न प्रकृति राजा रहैत छथि। विजुगीषु राजाक सोझाँ मित्र, अरिमित्र, मित्र-मित्र आऽ अरिमित्र-मित्र रहैत छथि आऽ पाछाँ पार्ष्णिग्राह९फीठक शत्रु), आक्रन्द (पीठक मित्र), पार्ष्णिग्राहासार (फार्ष्णिग्राहक मित्र) आऽ अक्रंदसार (आक्रन्द मित्र) रहैत छथि।

विजिगीषुक षाड्गुण्य सिद्धान्त अछि, सन्धि, विग्रह, यान, आसन, सन्श्रय आऽ द्वैधीभाव। कऊटिल्यक अर्थशास्त्रक प्रथम अधिकरणक पन्द्रहम अध्यायमे दूत आ गुप्तचर व्यवस्थाक वर्णन अछि । भारतीय शिलालेखसँ पता चलैत अछि जे चन्द्रगुप्त मौर्य ३२१ ई.पू. मे आऽ अशोकवर्द्धन २९६ ई.पू. मे राजा बललाह। तदनुसार अर्थशास्त्रक रचना ३२१ ई.पू आऽ २९६ ई.पू. केर बीच भेल सिद्ध होइत अछि।




#Article 33: चितवन जिला (757 words)


चितवन जिला नेपालक प्रदेश नं. ३क पश्चिमी भागमे अवस्थित एक जिला छी। ई जिलाक बहुतरास भू-भाग चितवन उपत्यकामे रहल अछि तँ एकर उत्तरी भागमे महाभारत पर्वत श्रृङ्खला अछि। भरतपुर नेपालक एक पैग बजार आ चितवनक सदरमुकाम छी। भरतपुर नेपालक मध्य पश्चिम क्षेत्रक व्यापारिक नगर छी। एही क्षेत्रमे पैग-पैग व्यापारिक तथा सेवा संस्थासभ अछि। भरतपुर मध्यक्षेत्रमे बसोवास करि नेपाली जनताक लेल उच्च शिक्षा, व्यापार आ यातायातक केन्द्र बिन्दु मानल गेल अछि । नारायणघाट नारायणी नदीक किनारमे बैसल चितवनक दोसर पैग बजार छी। चितवन जिलाक क्षेत्रफल २२३८.३९ वर्ग किलोमिटर रहल अछि। उक्त क्षेत्रफलमे सँ ९०८.७९ वर्ग किलोमिटर चितवन राष्ट्रिय निकुञ्जक क्षेत्रफल बाहेक बाँकी क्षेत्रफल १३२९.६० वर्ग किलोमिटरक गाउँ विकास समिति आ सात नगरपालिका भरतपुर उप महानगरपालिका, रत्ननगर नगरपालिका, खैरहनी नगरपालिका, चित्रवन नगरपालिका, माडी नगरपालिका, आ नारायणी नगरपालिका, कालिका नगरपालिका, राप्ती नगरपालिकामे विभाजन कएल गेल अछि।

चितवनक नामक उत्पत्तिक बारेमे ३ मुख्य कथा रहल अछि। 

चितवन तोरीक लेल एकदम प्रख्यात जिला छी। चितवनक तोरीक तेल नेपालभरि बिक्री होएत अछि। चितवनक तोरी मिलैवाला माटिमे चितवनक एक विशेषता छी। स्लिट प्रकारक माटि चितवनमे रहल अछि। विगतमे नारायणी नदी चितवनक माटि मलिलो बना देने छल से भुगोलविदसभ कहैत अछि। चितवनमे तोरी बाहेक धानक सेहो बढिया खेती होएत अछि। गहुँ, मकै आ बन्दा, मुरै, ब्रोकाउली , काउली, आलु, काँक्रो, फर्सी, गाजर आदिक लेल सेहो चितवन प्रख्यात रहल अछि। 

देशक जम्मा उत्पादनक ७०% मुर्गा उत्पादन चितवनमे होएत अछि। नयाँ समयमे फुल खेती, च्याउ खेती, मह लगायतक बिभिन्न नयाँ चिजक सुरूवात भेल अछि।

चितवनमे बहुत प्रकारक बन्यजन्तु आ रुख बिरुवा पवैत अछि। 
गैंडा, बाघ , भालु,निल गाई,सोस्,गोही, आजिङर, चितुवा, चित्री आ बिभिन्न जातक जनावर चितवनमे पवैत अछि। चितवन राष्ट्रिय निकुञ्जक एक बढिया आ आकर्षक पर्यटकिय गन्तब्य सेहो अछि।

नेपालक मध्य भागमे पडैवाला चितवन उपत्यकाक नारायणी पूर्वी राप्ती उपत्यका सेहो कहल जाइत अछि। पूर्वमे मकवानपुर जिलाक हेटौडा सँ पश्चिममे दाउन्ने पहाड तथा दक्षिणमे माडी उपत्यका बेरावे वाला चुरे श्रृङखला धरि फैलल ई उपत्यका नेपालक केन्द्र भागमे पडैत अछि। दुई मुख्य नदीसभ नरायणी उत्तरसँ पश्चिम तर्फ बहैत अछि तँ राप्ती पूर्वसँ मध्यभाग होएत पश्चिम पुगि नारायणीमे मिलैत अछि। ई दुई प्रमुख नदी बाहेक उपत्यकाक पूर्वमे लोथर आ मनहरी खोलासभ प्रवाहीत भऽ राप्ती नदीमे मिलल अछि। ओहिना मध्य भागमे बुढी राप्ती खगेरी आदी खोलासभ प्रवाहीत होएत राप्ती नदीमे मिलल अछि। ओहिना पश्चिम क्षेत्रमे केरूङगा खोला राप्तीमे मिलल अछि तँ भरतपुर नगर क्षेत्रक जङ्गलसँ निकैल नारायणगढ बजार होएत पुङगी खोला नारायणी नदीमे मिलल अछि। जुगेडी खोला लब्धीखोला लगायतक आओर खोला सेहो नारायणी नदीमे मिलल अछि। ओहिना नारायणी नदी दोसर बागलक क्षेत्रमे बेसी नदी खोला चितवन उपत्यकामे रहल अछि। बढिया जल प्रवाह भेल विनयी खोला,अरूण खोला,गीरवारी खोला साथे छोटका खोला जयश्री,झरे,बहुलाह, ज्यामीरे लगायत सेहो पश्चिमसँ पूर्व बगी नारायणी नदीमे मिलैत अछि। चितवन उपत्यकामे ननद भाउज, बीस हजारी ताल लगायतक छोट-बड बहुतरास ताल तथा पोखरी समेत रहल अछि। एतय बीस हजारी ताल विश्व प्रसिध्द सिमसार क्षेत्र समेत छी। बड्का भू-भाग जङ्गले-जङ्गलसँ झपाएल, चितवन उपत्यका जैविक विविधतामे धनी मानल गेल अछि। चितवन राष्ट्रिय निकुन्जक मुख्य संरक्षित क्षेत्र समेत एही उपत्यकामे रहल चितवन काठमाडौं आ पोखराक बाद नेपालक तेसर पैग पर्यटक गन्तव्य छी।

वर्तमान नेपालमे चितवन उपत्यकाक भू-भाग दुई अञ्चल नारायणी आ लुम्वीनी तथा तीन जिला चितवन,नवलपरासी तथा मकवानपुर नामक प्रशासनिक विभाजनमे पडल अछि। पूर्वक हेटौडासँ शुरू भऽ पश्चिम दाउन्ने पहाडक फेदी दुम्कीवास धरि तथा उत्तरमे माहाभारत आ दक्षिण चुरे धरि कतौ चौडा आ कतौ गल्ली जेहन होएत ई उपत्यका फैलल अछि। नारायणी नदी पश्चिमक भू-भाग लुम्बिनी अञ्चल तथा नवलपरासी जिला तथा नारायणी नदीक पूर्व दिशा चितवन जिला तथा सुदुर पूर्वी क्षेत्रमे मकवानपुर जिलाक रूपमे रहल अछि। अत्यन्त उब्जाव जमीन तथा पर्याप्त जलक्षेत्र रहल चितवन उपत्यकाक मुख्य केन्द्रीय चितवन जिलाक भू-भाग जङ्गल कटान करि २०१४ सालसँ मानव बसोवास क लेल खुल्ला कएल गेल अछि। चितवन उपत्यकामे मुख्य दुई नहर प्रणाली खगेरी आ नारायणी लिफ्ट सिंचाइ योजना वाहेक अन्य छोटका बड्का नहर तथा कुला प्रणालीसभ खेत बारी सिंचित करैक लेल उपयोग कएल जाइत अछि। कृषि उद्यममे उपत्यका अग्रणी मानल गेल।

नेपालक पूर्वपश्चिम जोडेए वाला महेन्द्र राजमार्गक पैग खण्ड (लगभग १४० कि.मी) ई उपत्यकाक हेटौडासँ दुम्कीवास धरि पडैत अछि। हाल चल्तीमे कम सेहो नेपालक पुरानमे उत्तर दक्षिण राजमार्ग त्रिभुवन राजपथ सँ उपत्यकाक पूर्वीक्षेत्र मे हेटौडासँ काठमाडौं धरि गेल अछि। सेहो उपत्यकासँ काठमाडौं आ पोखरा उपत्यका आ देशक जङ्गल क्षेत्र जोडल आ अत्यन्त चल्तीक नारयणगढ मुग्लिङ सडक सेहो रहल अछि। साथमे भरतपुर रामपुर भरतपुर माडी सडकक भरतपुर पटीहानी खण्ड हेटौडा हर्नामाडी टांडी (रत्ननगर) सौराह लगायतक साहायक मार्ग पक्की सेहो रहल अछि । ओहिना भरतपुर हेटौडा आ रत्ननगर नगरपालिका भितरक शहरी सडक सञ्जालक पैग हिस्सा पक्कीसभ सेहो रहल अछि । ओकर बाद कावसती पहाड क्षेत्र सडक भरतपुर शक्तिखोर उपरदांग गढी सहायक सडक मार्ग टाडी विरेन्द्रनगर शक्तिखोर सडक भरतपुर मेघोली सडकक छोटका खण्ड हेटौडा फापरवारी सडक कान्ती राजपथ लगायत पैग कच्ची सडक मार्ग उपत्यक अन्य क्षेत्रसँ जोडल गेल अछि।




#Article 34: जनबादी गणतन्त्र चीन (108 words)


चीनी जनवादी गणराज्य (चीनी: 中华人民共和国) जकरा प्रायः चीन नाम सँ सेहो सम्बोधित कएल जाएत अछि, पूर्वी एसियामे अवस्थित एक देश छी । १.३ अरब निवासि भेल चीन विश्वक सर्वाधिक जनसङ्ख्या भेल देश छी आ ९६,४१,१४४ वर्ग किलोमिटर क्षेत्रफलक सङ्ग रूस आ क्यानाडाक बाद विश्वक तेसर सभ सँ पैग क्षेत्रफल भेल देश छी । एतेक विशाल क्षेत्रफल भेलाक कारण एकर सीमा सँ जुड़ल देशसभक सङ्ख्या सेहो विश्वमे सर्वाधिक (रूसक बराबर) अछि ।  ई देशक उत्तर सँ दक्षिणावर्त्त: रूस, मङ्गोलिया, उत्तर कोरिया, भियतनाम, लाओस, म्यान्मार, भारत, भुटान, नेपाल, तिब्बत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान आ कजाकिस्तान आ उत्तर पूर्वमे जापान आ दक्षिण कोरिया मुख्य भूमि सँ दूरी पर अवस्थित अछि ।




#Article 35: जनक (164 words)


जनक () मिथिलाक ऐतिहासिक राजा छी । जनक वैदिकक राजासबक उल्लेख केल जाएवाला नाम छी । वैदेह राजा ऋगवैदिक कालक नमी सप्याक नामसँ छलाह, यज्ञ करैत सदेह स्वर्ग गेलाह, ऋगवेदमे वर्णन अछि । ओ इन्द्रकसंग देलन्हि असुर नमुचीक विरुद्ध आ ताहिमे इन्द्र हुनका बचओलन्हि । शतपथ ब्राह्मणक विदेघमाथव आ पुराणक निमि दुनू गोटेक पुरोहित गौतम छथि से दुनू एके छथि आ एतएसँ विदेह राज्यक प्रारम्भ। माथवक पुरहित गौतम मित्रविन्द यज्ञक/ बलिक प्रारम्भ कएलन्हि आ पुनः एकर पुनःस्थापना भेल महाजनक-२ क समयमे याज्ञवल्क्य द्वारा । निमि गौतमक आश्रमक लग जयन्त आ मिथि -जिनका मिथिला नामसँ सेहो सोर कएल जाइत छन्हि, मिथिला राज्यक निर्माण कएलन्हि। सीरध्वज जनक सीताक पिता छथि आ एतयसँ मिथिलाक राजाक सुदृढ़ परम्परा देखबामे अबैत अछि। कृति जनक सीरध्वजक बादक १८म पुस्तमे भेल छलाह । कृति हिरण्यनाभक पुत्र छलाह आ जनक बहुलाश्वक पुत्र छलाह । याज्ञवलक्य हिरण्याभक शिष्य छलाह, हुनकासँ योगक शिक्षा लेने छलाह। कराल जनक द्वारा एकटा ब्राह्मण युवतीक शील-अपहरणक प्रयास भेल आ जनक राजवंश समाप्त भए गेल (सन्दर्भ अश्वघोष-बुद्धचरित आ कौटिल्य-अर्थशास्त्र)।




#Article 36: महिला (135 words)


नारी मानवक स्त्रीक कहल जाएत अछि, जे नरक स्त्रीलिङ्ग छी । नारी शब्द मुख्यत: वयस्क स्त्रिसभक लेल प्रयोग कएल जाएत अछि । बहुते सन्दर्भसभमे मुदा ई शब्द सम्पूर्ण स्त्री वर्ग दर्शाबैक लेल सेहो प्रयोग कएल जाएत अछि, जेना: नारी-अधिकार।

ऐतिहासिक तौर पर हिन्दु नारीक भूमिकामे बहुतेक अन्तर आएल अछि । परम्परागत तौर पर मध्य वर्गमे नारीक भूमिका घरेलू कामकाज सँ जुडल छल जेना कि बच्चासभक देखभाल करनाए आ बेसीतर औरतसभ पैसा आर्जन करैलेल नै जाएत छल। गरीब नारीमे, खासकर मेहनती वर्गमे पैसाक कमीक कारण सँ नारीक काम करै पडएत छल, हालांकि औरतसभक देल जाए वाक काम सभदिने मर्दसभ के देल जाएवाला कामसभ सँ प्रतिष्ठा आ पैसासभ दुनोमे छोट होएत छल ।

नेपालक विभिन्न क्षेत्रमे नारीसभक योगदान महत्वपूर्ण रहल अछि । नेपालक नाम विश्वमे चिन्हाबैमे योगदान करनिहार किछ नेपाली महिलासभक सूची निचा देल गेल अछि ।




#Article 37: जयकान्त मिश्र (156 words)


जयकान्त मिश्र, 1922-2009, 3 फरबरी 2009 केँ सात बजे साँझमे निधन।

मैथिली साहित्यक एकटा बड़ पैघ विद्वान डॉ. जयकांत मिश्र 1982 ई. मे इलाहाबाद विश्वविद्यालयक अंग्रेजी आ आधुनिक यूरोपियन भाषा विभागक प्रोफेसर आ हेड पद सँ सेवा निवृत्त भेल छलाह। तकरा बाद ओ चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालयमे भाषा आ समाज विज्ञानक डीन रूपमे कार्य कएलन्हि।

स्व. मिश्र अखिल भारतीय मैथिली साहित्य समिति, इलाहाबादक अध्यक्ष, गंगानाथ रिसर्च इंस्टीट्यूट, इलाहाबादक अवैतनिक सचिव आ सम्पादक, हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयागक प्रबन्ध विभागक संयोजक आ साहित्य अकादमी, नई दिल्लीक मैथिली प्रतिनिधि आ भाषा सम्पादक रहल छलाह।

मैथिली साहित्यक इतिहास, फोक लिटेरेचर ऑफ मिथिला, कीर्तनिया ड्रामा सभक क्रिटिकल एडीशन, लेक्चर्स ऑन थॉमस हार्डी, लेक्चर्स ऑन फोर पोएट्स आ द कॉम्प्लेक्स स्टाइल इन एंगलिश पोएट्री हिनक लिखित किछु ग्रंथ अछि।

हिनकर वृहत मैथिली शब्द कोष मात्र दू खण्ड प्रकाशित भए सकल, जाहिमे देवनागरीक संग मिथिलाक्षर आ फोनेटिक अंग्रेजीमे सेहो मैथिली शब्दक नाम रहए। ई दुनू खण्ड मैथिली शब्दकोष संकलक लोकनिक लेल सर्वदा प्रेरणास्पद रहत।




#Article 38: जीवकांत (142 words)


जीवकांत 1936-

नाम- जीवकान्त झा,पिता-गुणानन्द झा, माता-महेश्वरी देवी, जन्म-२५.०७.१९३६ अभुआढ़, जिला-सुपौल। नौकरी-विज्ञान शिक्षक (उ.वि.खजौली १९५७-८१), हिन्दी शिक्षक (उ.वि.डेओढ़ एवं उ.वि.पोखराम १९८१-९८)।पहिल रचना-इजोड़िया आ टिटही (कविता, जनवरी १९६५ मिथिला मिहिर)।पहिल छपल पोथी- दू कुहेसक बाट (उपन्यास १९६८)।नूतन पोथी-खिखिरक बीअरि (२००७ बाल पद्य कथा), अठन्नी खसलइ वनमे (पद्य-कथा संग्रह) आ पंजरि प्रेम प्रकासिया (जीवन-वृत्तक अंश)।पुरस्कार-साहित्य अकादेमी 1998 तकै अछि चिड़ै, पद्य , किरण सम्मान (१९९८), वैदेही सम्मान (१९८५)।प्रकाशित पोथी-

कविता संग्रह:नाचू हे पृथ्वी (७१), धार नहि होइछ मुक्त (९१), तकैत अछि चिड़ै (९५), खाँड़ो (१९९६), पानिमे जोगने अछि बस्ती (९८), फुनगी नीलाकाशमे (२०००), गाछ झूल-झूल (२००४), छाह सोहाओन (२००६), खिखिरिक बीअरि (२००७)

कथा-संग्रह:एकसरि ठाढ़ि कदम तर रे (७२), सूर्य गलि रहल अछि (७५), वस्तु (८३), करमी झील (९८)

उपन्यास:दू कुहेसक बाट(६८), पनिपत(७७), नहि, कतहु नहि (७६), पीयर गुलाब छल (७१), अगिनबान (८१)

हिन्दी अनुवाद- निशान्त की चिड़िया (तकैत अछि चिड़ै, साहित्य अकादमी, दिल्ली २००३)।




#Article 39: जीवनी (145 words)


जीवनी जीवनक वृतान्तकें कहल जाएत अछि। ई साहित्यकें एक पुरान विधा सेहो छी। प्रसिद्ध इतिहासज्ञ आ जीवनी-लेखक टामस कारलाइल अत्यन्त सोझ आ सङ्क्षिप्त परिभाषामे एकरा एक व्यक्तिक जीवन कहने अछि। एहि तरह कोनो व्यक्तिकें जीवन वृत्तान्तसभकें सचेत आ कलात्मक ढङ्ग सँ लिख देनाए जीवनचरित कहल जाए सकैत अछि। यद्यपि इतिहास किछ हदधरि, किछ लोगसभक रायमे, महापुरुषसभक जीवनवृत्त छी तथापि जीवनचरित ओहि सँ एक अर्थमे भिन्न भऽ जाएत अछि। जीवनचरितमे कोनो एक व्यक्तिकें यथार्थ जीवनक इतिहासक आलेखन होएत अछि, अनेक व्यक्तिसभक जीवनकें नै। मुदा जीवनचरितक लेखक इतिहासकार आ कलाकारक कर्त्तव्यकें किछ समीप नै आबि नै रहि सकैत अछि। जीवनचरितकार एक दिस तँ व्यक्तिकें जीवनक घटनासभक यथार्थता इतिहासकारक रुपमे स्थापित करैत अछि; दोसर दिस ओ साहित्यकारक प्रतिभा आ रागात्मकताक तथ्यनिरूपणमे उपयोग करैत अछि। ओकर ई स्थिति सम्भवत: ओकरा उपन्यासकारक निकट सेहो लाबि दैत अछि।

जीवनचरितक सीमाकें यदि विस्तार कएल जाए तँ ओकर अन्तर्गत आत्मकथा सेहो आबि जाएत।




#Article 40: जोएन रोलिङ (172 words)


जोएन  रोलिङ,  ( रोलिङ; जन्म ३१ जुलाई १९६५), लेखन नाम जे. के. रोलिङ आ रोबर्ट गेलब्रेथ एक ब्रिटिश उपन्यासकार,  समाज सेवी, चलचित्र आ टेलिभिजन निर्माता आ पटकथा लेखक छी जे ह्यारी पोटर काल्पनिक श्रृङ्खलाक लेल लोकप्रिय अछि । ई पुस्तक बहुतेक पुरस्कार जितैक सङ्गे विश्वभरि ५० करोड़ प्रति विक्री भेल छल । ह्यारी पोटर काल्पनिक श्रृङ्खलाक पुस्तक इतिहासमे सर्वाधिक विक्री भेल पुस्तकसभमे सँ एक छी । ह्यारी पोटर चलचित्र श्रृङ्खला निर्माणक लेल रोलिङ कऽ पुस्तक सँ कथा लेल गेल छल, जकर पटकथाकें रोलिङद्वारा स्वयं स्वीकृति देल गेल छल तथा ई चलचित्र श्रृङ्खलाक अन्तिम चलचित्रक निर्माता समेत रोलिङ छी ।

जे. के. रोलिङ मिथक आ कल्पनाक एकटा नयाँ आ अनुठा दुनिया निर्माण केनए अछि, जकर मुख्य पात्र ह्यारी पोटर छी । ई दुनिया जादू आ चमत्कार सँ भरल अछि । ह्यारी पोटर स्वयं एक (अनाथ) जादूगर छी आ ओ तन्त्र-मन्त्र आ जादू-टोना कऽ विद्यालय हाङ्ग्वार्ट्स जाएत अछि । ई कहानी ह्यारी पोटरक एक आतङ्कवादी आ शैतानी जादूगर वोल्डेमर्ट सँ दुश्मनी कऽ बीच चलैत रहैत अछि । ई श्रृङ्खलामे कूल सात उपन्यास अछि :




#Article 41: जोर्डन (110 words)


जोर्डन, आधिकारिक रूपसे हेशमाइट किन्गडम अफ जोर्डन, दक्षिण पश्चिम एशिया में अकाबा खाड़ी के दक्षिण में, सीरियाई मरुस्थल के दक्षिणी भाग में अवस्थित एकटा अरब देश छी। देश के उत्तर में सीरिया, उत्तर-पूर्व में इराक, पश्चिम में पश्चिमी तट आर इजरायल आर पूर्व आर दक्षिण में सउदी अरब स्थित अछि। जोर्डन, इजरायल के साथ मृत सागर आर अकाबा खाड़ी के तट रेखा इजरायल, सउदी अरब आर मिस्र के साथ नियंत्रण करता अछि। जोर्डन के बहुतरासके भाग रेगिस्तान से घेरल गेल अछि, विशेष रूप से अरब मरुस्थल; तबो, उत्तर पश्चिमी क्षेत्र, जोर्डन नदी के साथ, उपजाऊ चापाकार के भाग मानल जाएत अछि। देश के राजधानी अम्मान उत्तर पश्चिम में स्थित अछि। 




#Article 42: झापा जिला (128 words)


झापा जिला नेपालक ७५ जिलामे सँ एकटा जिला छी । ई जिला मेची अञ्चलमे अवस्थित अछि । ई जिलाक क्षेत्रफल १६०६ वर्ग कि.मी. आ जनसङ्ख्या करीव ७ लाख अछि । ई जिलाक पूर्व आ दक्षिणमे भारत, उत्तरमे इलाम, पश्चिममे मोरङ आ सुनसरी जिला पडैत अछि । मानव विकास समग्र सूचकाङ्कमे तेसर स्थानमे रहल ई जिलाक सदरमुकाम चन्द्रगढी छी, जे पूर्वी पश्चिम राजमार्गके बिर्तामोडसँ १३ कि.मी. दक्षिणमे पडैत अछि । नेपालक सबसँ कम अवनति भेल भू-भाग केचना कवल ५८ मिटर आ सबसँ लम्बा पक्की पुल कन्काई (७०२ मिटर) सहो ई जिलाम पडैत अछि । देशक केन्द्रीय राजनीतिमे मुख्य भूमिका खेलैत आबै वला झापा जिला खाद्यान्न उत्पादनक लेल सेहो महत्वपूर्ण जिला छी ।

निर्वाचन आयोग (नेपाल) द्वारा निर्धारण कएल गेल, जिलागत निर्वाचन क्षेत्र अन्तर्गत  कऽ नक्सा नीचा देल गेल अछि।




#Article 43: झारखण्ड (136 words)


झारखण्ड अर्थात 'झार' वा 'झाड़' जे स्थानीय रूपसँ 'वन'के पर्याय छी आ 'खण्ड' अर्थात टुकड़ा सँ मिल बनल अछि । अपन नामक अनुरुप ई मूलतः एक वन प्रदेश छी जे झारखण्ड आन्दोलनक फलस्वरूप (जकरा बादमे किछ लोकसभद्वारा वनाञ्चल आनदोलनक नामसँ जानल जाइत अछि) सृजित भेल । प्रचुर मात्रामे खनिजक उपलबध्ताक कारण एकरा भारतक 'रूर' सेहो कहल जाइत अछि जे जर्मनीमे खनिज-प्रदेशक नामसँ विख्यात अछि ।

७२ वर्ष पहिने आदिवासी महासभा जयपाल सिंह मुण्डाक अगुआईमे अलग 'झारखण्ड' क सपना देखलक । भारतक केन्द्र सरकारद्वारा एकरा सन् २००० १५ नवम्बर (आदिवासी नायक बिरसा मुण्डाक जन्मदिन) क अवसरमे अठ्ठाइसम राज्य बनाए देलक । बिहारक दक्षिणी हिस्साक विभाजित करि झारखण्ड प्रदेशक सृजन कएल गेल छल । औद्योगिक नगरी राँची एकर राजधानी छी । ई प्रदेशक अन्य पैग शहरसभमे धनबाद, बोकारो आ जमशेदपुर शामिल अछि । एकर क्षेत्रफल  रहल अछि ।




#Article 44: डोटी जिला (186 words)


डोटी जिला नेपालक सुदूरपश्चिमाञ्चलविकास क्षेत्रमे अवस्थित एक जिला छी । ज्ञानेश्वर भटृराईक वृहत ज्ञान कोशक अनुसार एतय प्रवाहित होमएवला खोलाक नाम डोटी खोला रहल आ वोही डोटी खोलाक नजदिकी भागके डोटी क्षेत्र कहल गेला आधारमे जिलाक नाम डोटी रहल गेल अछि ।

नेपाल अधिराज्यक सुदुर पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत सेती अञ्चलमे अवस्थित डोटी जिलाक पूर्वमे अछाम आ सुर्खेत, पश्चिममे डडेलधुरा आ बैतडी, उत्तरमे बझाङ आ दक्षिणमे कैलाली आ कञ्चनपुर जिलासभ रहल अछि । २०२५ वर्ग किमिमे फैलल ई जिला ८०°५४' उत्तर सँ २९°५४' उत्तर अक्षांश आ ८०° ३०' पूर्व सँ २१° १४' पूर्वी देशान्तरधरि फैलल अछि । भौगोलिक दृष्टिसँ अत्यधिक विविधता भेल ई जिला उचाईक दृष्टिसँ ३०० मिटर (घाङल गाविसक पिपलकुण्टा) सँ ४,००० मिटरधरि फैलल भेला बादो एकर अधिकांश भू-भाग मुदा ३०० मिटरसँ २००० मिटरक उचाई क्षेत्रमे पडैत अछि । अर्थात उत्तरमे उच्च हिमाली क्षेत्र सँ दक्षिणमे चुरे पर्वत श्रृङ्खलाधरि फैलल ई जिलाक अधिकांश भू-भाग मुदा मध्य पहाडी क्षेत्रमे पडैत अछि । ई जिलामे खप्तड लेक, सकार लेक, महाभारत लेक तथा गोलेदेउ लेक जका उच्च पहाडी स्थानक साथ दिपायल, वानेडुग्रीसैन तथा नारीदाङ्ग जका अर्ध उष्ण हावापानी भेल नदी किनारमे अवस्थित समथल भू-भाग सेहो रहल अछि ।




#Article 45: तंत्रनाथ झा (146 words)


तंत्रनाथ झा 1909-1984

जन्म १९०९ ई मे दरभंगा जिलाक धर्मपुर ग्राममे भेलन्हि मुत्यु ४-५-’८४,चन्द्रधारी मिथिला कॉलेजमे अर्थशास्त्नक प्राध्यापक छलाह । अवकाश ग्रहण क काव्य साधनामे लागल रहलाह । महाकाव्य, मुक्तक, एकांकी सभ विधामे ई सिद्ध हस्त छलाह । हिनक ’कीचक वंध’ महाकाव्य अङरेजीक ‘ब्लैक्ङ भर्स’ (अमित्नाक्षर छन्द) म लिखल अछि । मैथिलीमे ’सौनेट’ एवं ब्लैक्ङ भर्स’क ई प्रथम प्रयोक्ता थिकाह । संस्कृत परम्परामे काव्य रचना करितहुँ पाश्चात्य शैलीक नवीनता हिनका रचनामे भेल । हिनक ’कीचक वध’ ओ ’कृष्ण चरित’ महाकाव्य—‘मङ्गल-पञ्चाशिका’ एवं ‘नमस्या’ मैथिली साहित्यमे अपन विशिष्ट स्थान रखैछ । तकर अतिरिक्त मुक्तक काव्यमे विषय वस्तुक व्यापकता एवं शिल्प शैलिक प्रचुरता अबैत अछि । एक दिश यदि प्राचीन ढंगक ईश्बर वन्दनाक रचना कएलन्हि तँ दोसर दिस ‘सौनेट’ (चतुर्दशपदी) ‘बैलेड’ आदि लिखबामे पूर्ण सफलता प्राप्त कएलन्हि ।‘कृष्ण चरित’ महाकाव्य पर हिनका 1979 ई क साहित्यक अकादमी पुरस्कार भेटलन्हि । 1980 ई. मे हिनका अभिनन्दन ग्रन्थसमर्पित कएल गेलन्हि ।




#Article 46: तनहुँ जिला (117 words)


तनहुँ जिला नेपालक गण्डकी अञ्चलक अवस्थित एकटा पहाडी जिला छी । दमौली बजार ई सदरमुकाम छी । नेपालक पश्चिमान्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत गण्डकी अ‍ञ्चलक दक्षिण पूर्वमा अवस्थित तनहुँ जिला मुलत: महाभारत श्रृङखला आर मध्य पहाडी भु-भागमक विकासोन्मुख जिला छी । ई काठमाडौंसँ १०० कि. मी. पश्चिम आर पोखरासँ १९ कि. मी. पूर्वम अवस्थित अछि । मानचित्रम ई जिला ८३°७५  सँ ८४°३४ पूर्वी देशान्तर, २७°३ सँ २८°०५ उत्तरी अक्षांश तक फैलल अछि । ई जिलाक क्षेत्रफल १५४६ वर्ग कि.मी आ कुल नेपालक भूभागक १.०५% रहल अछि ।

राष्ट्रिय जनगणना २०६८ अनुसार तनहुँ जिलाक कूल जनसंख्या ३,२३,२८८ जन मध्ये पुरुषक संख्या १,४३,४१०  आर महिला १,७९,८७८ रहल अछि । जनघनत्व २०९ प्रति कि.मि अछि तहिना ग्रामिण जनसंख्या १,८७,८८२ रहल अछि। 




#Article 47: ताप्लेजुङ जिला (158 words)


ताप्लेजुङ जिला (  नेपालके पुर्वाञ्चल विकास क्षेत्रमेची अञ्चलके उत्तर मऽ अवस्थित एकटा रमणीय हिमाली जिला छि। ताप्लेजुङ्ग जिलाके सम्पति पाथीभरा देवीके मन्दिर छि। जतऽ हिन्दू आर बौद्ध मार्गीसभ शक्ति प्राप्तिके लागि दर्शन करबाक लेल जाइत अछि। झापा जिलाके बिर्तामोड से २३४.११ किलोमिटरके सडकले इलाम आर पाँचथरके सदरमुकाम सेहो यी जिलाके सदरमुकाम फुङ्लिङ बजारसे जोडल अछि। नेपालके सुदुर उत्तर-पूरवमे अवस्थित तेसर बर्का जिला ताप्लेजुङ करीब ३,६४६ वर्ग किलोमिटर क्षेत्रफलमे फैल्ल अछि ।

यी जिलाके नामाकरण लिम्बु भाषासे भेल अछि से मानल जाइत अछि ।

ताप्लेजुङ् पूर्वी नेपाल मऽ इलाम जिलाके बाध सब सऽ बेसी सुन्दर जिला छि|

यी जिलामे ५० टा गा.वि.स. सभ अछि ।

यी जिलाके ५,००० मिटर से ऊपर टुन्ड्रा हावापानी पाबैत अछि ।

जैबिक विविधताके दृष्टिसे यी जिला धनीकऽ अछि ।

यी जिलाके मुख्य नदीसभमे तमोर आर कावेली छि । और अन्य खोलासभमे मेवाखोला, मैवाखोला, याङ्माखोला, फावाखोला, घुन्साखोला, कालीखोला, हेल्लोक, सिस्नेखोला, सोबुवाखोला, फुंगुवाखोला आदि अछि। हिमनदीसभमे कञ्चनजङ्घा हिमनदी, कुम्भकर्ण हिमनदी, तमोर हिमनदी, यलुङ हिमनदी अछि ।




#Article 48: त्रिपुरा (129 words)


त्रिपुरा उत्तर-पूर्वी सीमा पर स्थित भारतक एक राज्य छी।ई भारतक तेसर सभ सँ छोट राज्य छी जकर क्षेत्रफल १०,४९१ वर्ग किलोमिटर अछि। एकर उत्तर, पश्चिम आ दक्षिणमे बङ्गलादेश स्थित अछि जखन कि एकर पूर्वमे असम आ मिजोरम स्थित अछि।सन् २०११ मे ई राज्यक जनसङ्ख्या लगभग ३६ लाख ७१ हजार छल। अगरतला त्रिपुराक राजधानी छी। बङ्गाली भाषा आ त्रिपुरी भाषा एतय बाजल जाएवाला मुख्य भाषा छी।

त्रिपुराक स्थापना १४म् शताब्दीमे माणिक्य नामक भारतीय-मङ्गोलियन आदिवासी मुखियाद्वारा कएल गेल छल, जे हिन्दू धर्म अपनेनाए छल। सन् १८०८ मे एकरा ब्रिटिश साम्राज्य जीत लेलक आ ई स्व-शासित शाही राज्य बनि गेल।सन् १९५३ मे ई भारतीय गणराज्यमे शामिल भेल छल आ सन् १९७२ मे एकरा राज्यक दर्जा देल गेल। त्रिपुराक आधा सँ बेसी भाग जङ्गलसभ सँ घेराएल अछि, जे प्रकृति-प्रेमी पर्यटकसभकें आकर्षित करैत अछि।




#Article 49: थारु भाषा (106 words)


थारु (, ) या थरुहट () भारोपली भाषा परिवार अन्तर्गतक एक भाषा छी जे नेपालक तराई क्षेत्र आ भारतक उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश आ बिहार राज्यमे रहल थारु लोकसभद्वारा बाजल जाइत अछि ।थारु भाषा नेपालमे बाजल जाइवला एक मुख्य भाषा छी । थारु जातिमे थारु भाषाक प्रकार मानल गेल अन्य बहुतेक भाषासभ अछि जकरा थारु भाषा वा सोनहा, कठरिया, दङ्गौरा वा मुख्य चौधरी भाषा सेहो कहल जाइत अछि । नेपालक पश्चिम भू-भागमे बाजल जाइवला ई भाषा वाहेक पूर्वी थारु समुदायमे चितवनिया थारू भाषा बाजल जाइत अछि जे पश्चिमी थारु भाषासँ फरक होइत अछि । ई अन्य नेपालमे बाजल जाइवला मैथिली, भोजपुरी बङ्गाली भाषासँ मिलैत जुलैत अछि ।




#Article 50: दोलखा जिला (404 words)


दोलखा नेपालक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत जनकपुर अञ्चलक उत्तरदिशामे अवस्थित एक पहाडी जिला छी । ई  जिला  नेपालक मानचित्रमा २७० २८ उत्तरसँ २८० ०० उत्तरी अक्षांश र ८५० ५० पूर्वसँ ८६० ३२ पूर्वी देशान्तरसँ फैलल अछि। कूल २१९१ वर्ग कि.मी. क्षेत्रफल भेल ई जिलाक पूर्वमे सोलुखुम्बु आ रामेछाप जिला, पश्चिममे सिन्धुपाल्चोक जिला, उत्तरमे चीनक स्वशासित क्षेत्र तिब्बत आ दक्षिणमे रामेछाप जिला पडैत अछि। नेपालक राजधानी काठमाडौंसँ १३३ कि. मी. पूर्वमे पडैवाला ई जिलाक सदरमुकाम चरिकोट छी । समुद्र सतहसँ ७६२ मी. (सितली) उचाइसँ ७१३४ (गौरीशंकर) धरिक उचाईमे रहल ई जिलाक गौरीशंकर हिमालक आधार मानि नेपालक प्रमाणिक समय निर्धारण कएल गेल अछि। 

२००७ साल पूर्व आ पश्चात २०१८ सालधरि सेहो पूर्व २ नं. गोश्वराक प्रशासनिक ईकाइक रूपमे रहल दोलखाक २०१८ सालसँ मात्र अलग जिलाक रूपमे अस्तित्वमे आएबतो सेहो २०२४ सालसँ मात्र अदालत, मालपोत, प्रहरी, हुलाक, स्वास्थ्य जेहन जिला स्तरीय कार्यालयसभ स्थापना होमए लगल अछि। ऐतिहासिक स्थल दोलखाक नामसँ नामाकरण कएल गेल ई जिलाक किछ स्थानसभमे किराँत वा लिच्छवीकालसँ ही बस्ती बसल गेल अनुमान अछि। 

प्राचीन समयमे मुगलसभक अत्याचारमे पडि भारतवर्षसँ भागि आएल एक जोगी गौरीशंकर हिमालक काखमे एकटा गुफा भितर कोई नै देखे जका तपस्या करै लगल। हुनकर तपस्यासँ खुस भऽ भगवान शिवजी ओ जोगीक वरदान देलक। शिवजीक वरदान पावि खुस भऽ जोगी एकबेर सभदिशा चक्कर लगाक आवै छी कहिक चलि गेल। ओ जतय घुमैत छल बादमे ओही ठाममे पहुँचैत् छल। एवं रीतसँ दुई लाख बेर चक्कर लगाएतो कतौ नै पुग्ऽ सकल कहिक पहिने स्वयम् जतय तपस्या केनए छल ओही गुफामे आवि बसोवास करै लगल। एना दुई लाख बेर घुमएतो सेहो ओही स्थानमे आवि गेलासँ ओ स्थानक दो+लाखसँ अपभ्रंस होएत दोलखा नाम रहल जनश्रुति पवैत अछि।

वि.सं. सातम् शताब्दीमे भारतक बिहार  लगायत उत्तरी क्षेत्रक तिब्बतसंगक व्यापार दोलखाक रास्तासँ होएत छल । ई मार्ग खुलाक दोलखाक वनगढक रूपमे विकसित कएल गेल। उक्त वनगढमे काठमाडौं उपत्यकासँ ७०० नेवार परिवार बोलाक ओही ठाममे बसावल गेल। कहल जाइत अछि, ओ समय ई वनगढक कुथरे अधिकरणसँ वार्षिक २ लाख प्राप्त होएत छल आ एकर नाम दुईलाखा रहि गलाक बाद दोलाखा होएत दोलखा रहैल पहुँचल कहिक भनाई सेहो अछि। कुथुरे अड्डा संभवत हालक नागदह नजदीकक कुर्थेवेसी वा कुथलीमे रहल छल। कुथुरे अर्थात् लिच्छविकालमे कर उठावेवाला अड्डाक नाम छल।

तिब्बती भाषा अनुसार दो कऽ अर्थ पत्थर आ ल कऽ अर्थ मन्दिर आ खा कऽ अर्थ घर भेलासँ ई जिलामे प्रशस्त मात्रामे पत्थरसँ बनाएल मन्दिर आ घरसभ भेलासँ दोलखा नामाकरण भेल अछि कहिक सेहो कहनाई अछि।

निर्वाचन आयोग (नेपाल) द्वारा निर्धारण कएल गेल, जिलागत निर्वाचन क्षेत्र अन्तर्गत  कऽ नक्सा नीचा देल गेल अछि।




#Article 51: धनकुटा जिला (153 words)


धनकुटा जिला नेपालक पूर्वाञ्चल विकास क्षेत्रक, कोशी अञ्चलमे अवस्थित पहाडी जिला छी । ई जिलाक सदरमुकाम धनकुटा नगरपालिका पूर्वाञ्चल विकास क्षेत्रके क्षेत्रीय सदरमुकाम सेहो छी ।
विक्रम सम्बत २०१९ साल पहिले विभिन्न नामसँ देशक प्रशासनिक एकाईके रूपमे काम करैत आएल धनकुटा वि.सं. २०१९ साल बैशाख १ गते तात्कालिन राजा महेन्द्रके शासनकालमे धनकुटा जिला कहिके नामाकरण कएल गेल । ई जिलाके पूर्वमे तेह्रथुम और पाँचथर जिला, पश्चिममा भोजपुर र उदयपुर, उत्तरमे संखुवासभा जिला र दक्षिणमे मोरङ और सुनसरी जिला रहल अछि । एना चारुदिसके जिलासभसॅ घेरिक होइतो भी धनकुटा जिलाके उपरके जिलासभके सिमाना विभिन्न खोला और नदीसभसॅ छुट्टयाएल गेल छल । वि.सं. २०३२ सालमे तत्कालिन सुनसरी जिलाक आहाले गाविस ई जिलामे समाविष्ट भेलाके बाद ८९१ वर्ग किलोमिटर क्षेत्रफलमे विस्तृत भेल धनकुटा जिला हाल ३५ गाविससभ, एक नगरपालिका, ११ इलाका तथा दुई निर्वाचन क्षेत्रमे विभक्त रहल अछी।

जिलाक नामकरण सम्बन्धमे एकमत नै अछि । धनकुटा जिला नामाकरणके पछाडीके कारणसभके निम्न अनुसार उल्लेख करैत सकैछी । 

 




#Article 52: धनुषा जिला (489 words)


धनुषा नेपालक प्रदेश नं. २मे अवस्थित एक जिला छी । नेपालक मध्यपूर्व क्षेत्रक दक्षिणी भागमे भारतीय सीमासँ नजदीक रहलाक कारण धनुषा जिला पूर्ण रूपमे नेपालक तराई प्रदेशमे अवस्थित अछि । धनुषा जिला नेपालक कूल भू-भागक ०.८०% भाग आ कुल जनसङ्ख्याक २.९% भाग ओकटने अछि । जनसङ्ख्याक क्रममे पाँचम स्थानमे रहल ई जिलामे ९३ जातिजातीक बसोबास अछि । ई जिला धार्मिक क्षेत्रसँ लऽ अपना भितर भौगोलिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक विविधताक कारण देश विदेशमे अपन गौरवशाली इतिहास सँ परिचित केनए अछि । भारतक सीमावर्ती शहर जयनगरधरि सञ्चालित नेपालक एकमात्र रेल सेवा सेहो ई जिलाक महत्व बढेने अछि ।

किम्बदन्ती एवं धर्मग्रन्थसभक अनुसार त्रेता युगमे प्रजासभक अनिकालसँ मुक्ति दिलेबाक लेल जनकवंशक वाइसम राजा शीरध्वज स्वयम् हर जोतै लेल सुरु करैत काल भूमीसँ बालिका जानकी (सीता) उत्पन्न भेल छल । सर्वगुण सम्पन्न जानकीक विवाहक लेल स्वयम्वरक लेल इच्छुक बहुतेक प्रदेशसँ आएल शक्तिसम्पन्न राजकुमारसभमे सँ शिवधनुष तोड़ि चढेवाक लेल सक्षम राजाकें मात्र वरक रूपमे ग्रहण करैवाला राजा शीरध्वजक शर्तमे अयोध्यासँ आएल दशरथ पुत्र रामचन्द्र छोड़ि कियो सफल नै भऽ सकल । मुद्दा रामचन्द्र ओ धनुष तोड़ि चढवैत काल अत्यधिक वजनक कारण ओ धनुष खण्डित भऽ गेल । ओ धनुषक एक टुकड़ा खसल स्थानके धनुषाधाम कहल जाइत अछि, एहि स्थानक नामसँ जिलाक नाम धनुषा कहि नामाकरण कएल गेल जनविश्वास अछि ।

धनुषा जिलाक धार्मिक सांस्कृतिक भौगालिक आर्थिक तथा सामाजिक व्यवस्था मानव सभ्यताक हरेक युग कालसँ प्रभावित भऽ परिष्कृत होएत आएल देखल गेल अछि । भारतमे रहल अयोध्याक राजकुमार रामचन्द्र संग जानकीक विवाह पश्चात ई क्षेत्रक गरिमा अखनो उत्कर्षमे कायम अछि । धनुषा जिलाक हालक स्वरूप कोशी सँ गण्डकी आ गङ्गासँ हिमालयधरि फैलल बृहत मिथिला प्रदेशक युगान्तमे कम होएत गेल छोट स्वरूपे बांकी रहल तथ्य देखल गेल अछि । किम्बदन्ती अनुसार पूर्व वैदिक युगमे मानव विहीन रहल ई क्षेत्रक अन्वेषण माथव विदेध केनए छल । मुखमे अग्नी लऽ ई वनसँ झांपल गेल अनकन्टार प्रदेशमे अवैत काल हुनकर मुखमे रहल अग्नी बाहर आबि सम्पूर्ण वनक विनाश भेलाक पश्चात एतय मानव बसोवास शुरु भेल छल । त्रेतायुगमे राजा जनकक विद्वता आ जानकीक धार्मिक संलग्नताक कारण ई क्षेत्र दूर-दूरधरि प्रख्यात भेल अछि।

सत्रहम शताब्दीक शुरुमे भारतसँ महात्मा सुरदासक आगमन पश्चात ई क्षेत्रक इतिहास प्रस्ट होएत गेल देखल गेल जाइत अछि । किम्बदन्ती अनुसार जानकीक जन्मस्थानक खोजीमे महात्मा सुरदास घुमैत काल एकदिन राति सपनामे जानकी स्वयम् प्रकट भऽ सुरदासक ओ स्थान देखेने छल । ओहि बखत सुरदास ओ स्थानमे खन्ती गाड़ि चिन्ह लगाकऽ जानकीक प्रतिस्थापित कएने छल। राज्यसभक उदय विलय क्रमसंगे ई प्रदेशक शासक भौगोलिक सीमा परिवर्तन होएत गेल। नेपाल एकीकरण होएसँ पहिने ई प्रदेश मकवानपुर राज्यक अधीनमे छल। मकवानपुरक राजा मानिक सेन जानकी मन्दिरक लेल १४०० बिघा जमीन उपलब्ध करौने छल। वि.सं. १८८२ मे अमरसिंह थापा प्यागोडा शैलीमे राममन्दिरक निर्माण केनए छल तँ वि.सं. १९५० मे टिकमगढकी महारानी वृषभानु देवी ९ लाख रूपैयाँ लगाए वर्तमानक भव्य मुगलकालीन शैलीमे जानकी मन्दिर निर्माण करौने छल । धनुषा जिला धार्मिक ऐतिहासिक मिथिला प्रदेशक छोट भू-भाग ओकटने होएतो ई जिला ई प्रदेशक मध्य भागमे अवस्थित अछि।

निर्वाचन आयोग (नेपाल) द्वारा निर्धारण कएल गेल, जिलागत निर्वाचन क्षेत्र अन्तर्गत  कऽ नक्सा नीचा देल गेल अछि।




#Article 53: धौलागिरी अञ्चल (160 words)


धवलागिरी अञ्चल   नेपाल कऽ क्षेत्रिय वर्गीकरण अनुसार पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्रके एकटा अञ्चल छि। यी अञ्चल कऽ ४ जिलासभमे वर्गिकरण करल गेल अछि। यी मऽ पर्वत ,वाग्लुङ ,म्याग्दी आर मुस्ताङ जिलासभ अछि। धवलागिरी हिमाल कऽ नाम सऽ यी अञ्चलके नामाकरण करल गेल अछि धार्मिक आर पर्यटकिय स्थानसभ प्रशस्त भेल पऽ प्रचार-प्रसार कऽ कमीके कारण पर्यटनके निक विकास नै भेल अछि। प्रसिध्द तिर्थस्थल मुक्तिनाथ,बाग्लुङ कालिका भगवति मन्दिर लगायत कऽ प्रशस्त धार्मिक तिर्थस्थलसभ अछि आर पर्यटकिय क्षेत्र मऽ कालिगण्डकि नदिमे राफ्टीङ, मुस्ताङ पद यात्रा,म्याग्दिके गरम पानी क्षेत्र ,ढोरपाटन निकुन्ज लगायत कऽ ठाँम अछि साथे प्रचार-प्रसार कऽ कमीके कारणसे पछारि परल पर्वत जिला कऽ सदरमुकाम कुश्मा बजारके साइड मऽ रहल गुप्तेश्वर गुफा ( २ कि.मि. लमबा ) आर पर्यटकीय तथा धार्मिक रूपसे महत्वपूर्ण मानल जाइ अछि। यी ४ जिला मसे मुस्ताङ सब सऽ विकट जिला छि। मुस्ताङ कऽ हिमाल पारिके जिलाके नामसे ओ चिनल जाइ अछि।

धवलागिरी हिमाल कऽ नाम सऽ यी अञ्चलके नामाकरण करल गेल अछि।

धवलागिरी अञ्चल मै ४ टा जिला अछि।

 




#Article 54: धान (185 words)


धान विश्वके एकटा प्रमुख अन्न बाइल छि । वैज्ञानिक नाम ओरिजा सेटिभासे परिचित ई वनस्पति वैदिक साहित्य एवं पुरातात्विक उत्खननमे धान सबसे पुरान उत्पादित बाइलके रुपमे प्रमाण भेल अछि । हजारौ वर्ष पहिला भारत आर चीनमे एकर खेती होइछि । धानअन्तर्गत विश्वके करिब ९० प्रतिशत क्षेत्र एसियामे परैछि आर विश्वके लगभग ९० प्रतिशत धान एसियामे उत्पादन आर खपत होइछि । संसारभर १५० मिलियनसे बेसी इलाकामे धानके उब्जाउ करल जाछि । चाउर एसियाके एक प्रमुख खाद्य पदार्थ छि । धानके पहिल बीज कत उत्पत्ति भेलछि से अखन तक पता नै लागल अछि ।

सम्भवत: १०,००० वरस पहिल एसियाके गरम भागमे धानके खेतीके शुरु भेल अछि । भारतमे हस्तिनापुर (उत्तर प्रदेश)-मे उत्खनन (१०००-७५० इसापूर्व)-के समयमे धानके सबस से पुरान नमूना जरल या अङ्गारके स्वरूपमे पक्याल छेलै । जंगली धान पहिला बंगलादेश, आसाम, उडिसा आर बगलके इलाकामे उब्जाउ होइके विश्वास करल ग्याल अछि । पश्चिम आर उत्तर अफ्रिका (इजिप्ट), पूरव आर मध्य अफ्रिकाके अधिकांश देशसबमे धान उब्जनी करैई छेलइ । ओकर बाद धानके खेती दक्षिण आर मध्य अमेरिकी मुलुक सब (ल्याटिन अमेरिका), अष्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका आर स्पेन, इटाली आर फ्रान्सजहन दक्षिणी युरोपेली मुलुकरसबमे विस्तार भेल अछि ।




#Article 55: धीरेन्द्र प्रेमर्षि (125 words)


धीरेन्द्र प्रेमर्षि एकटा नेपाली गीतकार, पत्रकार आओर संस्कृतविद् छी जे प्रायः मैथिली भाषा आओर संस्कृति पर काज करैत अछि।दशकौं सँ ओ मैथिली साहित्य, सङ्गीत आओर मीडिया मे हुनकर प्रमुख योगदानसभक लेल हुनका भारतीय रक्षामन्त्री राजनाथ सिंह द्वारा नयाँ दिल्ली, भारत मे अटल मिथिला सम्मान २०१९ सँ सम्मानित कएल गेल ।

वि.सं. २०२४ साल भादव १८ गते सिराहा जिलाक गोविन्दपुर-१, बस्तीपुर गाम मे जन्म लेनिहार प्रेमर्षिक पूर्ण नाम धीरेन्द्र झा छियनि । रेडियो कान्तिपुरसँ प्रशारण होए वाला कार्यक्रम हेल्लो मिथिला कार्यक्रमक प्रस्तुतकर्ता जोड़ी रूपा-धीरेन्द्रक अवाज गामक बच्चा-बच्चा चिन्हैत अछि। “पल्लव” मैथिली साहित्यिक पत्रिका आ “समाज” मैथिली सामाजिक पत्रिकाक सम्पादक एवम् मैथिली भाषाक सरकारी किताब मे हिनकर बहुत महत्त्वपूर्ण योगदान अछि । ओ मैथिली गीति एल्बम चेतना, प्रियतम हमर कमौवा अओर डेग के रचना केनए छथि ।




#Article 56: नरेन्द्र मोदी (203 words)


नरेन्द्र मोदीक पुरा नाम नरेन्द्र दामोदर मोदी अछि। नरेन्द्र मोदी भारतक १४हम प्रधानमन्त्री छी। नरेन्द्र मोदीक जन्म १७ सितम्बर १९५० में  भारतक गुजरात राज्यमें भेल छल। मोदी २००१ सँ २०१४ धरि गुजरातक मुख्यमन्त्री रहल छलाह। सन् २०१४ कें लोकसभा चुनावमे भारतीय जनता पार्टीक बहुमत कें बाद मोदी भारतक प्रधानमन्त्री बनला। ५ सय ४५ सदसीय लोकसभा सिटसभमे भारतीय जनता पार्टी २ सय ८२ मत लावि विजय भेल छल ।

नरेन्द्र मोदीक जन्म तत्कालीन बम्बे राज्यक महेसाना जिला स्थित वाडनगर ग्राममे हीराबेन मोदी आ दामोदरदास मूलचन्द मोदीक एक मध्यम-वर्गीय परिवारमे १७ सितम्बर १९५० कें भेल छल। मोदी पूर्णत: शाकाहारी थिका । भारत पाकिस्तानक बीच द्वितीय युद्धक दौरान अपन तरुणकालमे ओ कथित तौर पर स्वेच्छा सँ रेलवे स्टेशनसभ पर सफर करि रहल सैनिकक सेवा केनए छल। युवावस्थामे ओ छात्र सङ्गठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषदमे सेहो शामिल भेल छल। ओ सङ्ग-सङ्गे भ्रष्टाचार विरोधी नव निर्माण आन्दोलनमे सेहो सहभागी भेल छल। एक पूर्णकालिक आयोजकक रूपमे कार्य करवाक पश्चात् ओ भारतीय जनता पार्टीक सङ्गठनक प्रतिनिधीक लेल मनोनित कएल गेल छल। किशोरावस्थामे अपन भाईकें सङ्ग मोदी एकटा चायकें दोकान चलबैत छल। मोदी अपन विद्यालय शिक्षा वाडनगरमे पूरा केनए छल। ओ आरएसएसक प्रचारक रहितो सन् १९८० मे गुजरात विश्वविद्यालय सँ राजनीति विज्ञानमे स्नातकोत्तर परीक्षा देलक आ एमएससीक डिग्री प्राप्त केनए छल।




#Article 57: नागाल्याण्ड (278 words)


नागाल्याण्ड  भारतक एक उत्तर पूर्वी राज्य छी। एकर राजधानी कोहिमा अछि, आ दीमापुर एहि राज्यक सबसँ पैग नगर छी। नागाल्याण्डक सीमा पश्चिममे असम सँ, उत्तरमे अरुणाचल प्रदेश सँ, पूर्वमे बर्मा सँ आ दक्षिणमे मणिपुर सँ मिलैत अछि। भारतक सन् २०११ कें जनगणनाक अनुसार, एकर क्षेत्रफल १६,५७९ वर्ग किलोमीटर अछि, आ जनसङ्ख्या १९,८०,६०२ अछि, जे एकरा भारतक सबसँ छोट राज्यमे सँ एक अछि।

नागाल्याण्ड राज्यमे कुल १६ जनजातिक लोकसभ बसोवास करैत अछि। प्रत्येक जनजाति अपन विशिष्ट रीति-रिवाज, भाषा आ पोशाककें कारण दोसर सँ भिन्न अछि। मुदा भाषा आ धर्ममे २टा सेतु अछि, जे ई जनजातिसभकें एकआपसमे जोड़ैत अछि। ई राज्यकें आधिकारिक भाषा अङ्ग्रेजी छी। अङ्ग्रेजी भाषामे एहिठाम पढ़ाओल जाएत अछि, आ एहिठाम अधिकांश बासी अङ्ग्रेजी भाषा बोलैत अछि। ई भारतक उ तीन राज्यमे सँ एक छी जाहिठाम ईसाई धर्मक अनुयायी जनसङ्ख्याक अनुसार खुब अछि।

राज्य मे सन् १९५० कें दशकमे विद्रोह आ अन्तर-जातिक सङ्घर्ष देखने अछि। हिन्सा आ असुरक्षा नागाल्याण्डक आर्थिक विकासक सीमित कऽ देनए छल कारण एकर कानून व्यवस्था आ सुरक्षाक लेल अपन दुर्लभ संसाधनक प्रतिबद्ध करबाक छल। मुदा पिछला डेढ़ दशकमे ई राज्यमे हिन्सा बहुत कम भेल अछि जाहिसँ राज्यक वार्षिक आर्थिक विकास दर १०% कऽ आसपास पहुँचल अछि। ई पूर्वोत्तर क्षेत्रमे सबसँ तिब्र गतीसँ विकसित भऽ रहल राज्य बनि गेल अछि।

नागाल्याण्डक स्थापना १ दिसम्बर १९६३ मे भारतक १६हम राज्यक रूपमे भेल छल। असम घाटीक किनारमे बसल किछ क्षेत्रक छोड़िक ई राज्यक अधिकतर भूभाग पहाड़ी क्षेत्रमे अछि। ई राज्यक कुल क्षेत्रफलक मात्र ९% भाग समतल जमीन पर अछि। नागाल्याण्डमे सबसँ उँच शृङ्खला माउन्ट सरामती अछि जकर समुन्द्री सतह सँ उँचाई ३,८४० मीटर अछि। ई पहाड़ी आ एकर शृङ्खला नागाल्याण्ड आ बर्माक बीच प्राकृतिक अवरोधक निर्माण करैत अछि। ई राज्य वनस्पति आ जीवक समृद्ध विविधताक घर छी।




#Article 58: नुवाकोट जिला (330 words)


नुवाकोट जिला नेपालक मानचित्रमे मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्रक बागमती अञ्चल अर्न्तगत राजधानी काठमाडौंंसँ उत्तर-पश्चिम दिशामे अवस्थित एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमिसँ सज्जित जिला छी ।

राष्ट्रनिर्माता राजा पृथ्वीनारायण शाहद्वारा तत्कालिन अवस्थाम नेपाल उपत्यका आ गण्डकी तथा कर्णाली पारीक बाइसे-चौबीसे कहाएवाला छोट-छोट राज्यसभक मिलाक एकीकृत आ समुन्नत नेपाल राज्य खडा करैक उत्कृष्ट अभिलाषा व्यक्त कएल गेल छल। एहि क्रममे उपत्यकाक पश्चिम दिसक मुल दरवार आ तिब्बतसँ व्यापार करैवाला मुख्य नाकासँ अभियान शुरु केलक। ओहि समयम कान्तिपुर अधिनस्थ नुवाकोटक एकटा मजबुत सामरिक किला मानल जाएत छल। जकर फलस्वरूप तेसर बेर व्यापक तयारीक बाद कएल गेल आक्रमणक बादे वि.सं. १८०१ म गोरखालीक विजय भेल छल।

नुवाकोट विजय पश्चात एकरा दोसर राजधानीक रूपम लऽ कान्तिपुर उपत्यकाक हालखबर बुझैएम सरल भेल छल। जकर परिणामस्वरूप वि.सं.१८२५ म इन्द्रजात्राक दिन कान्तिपुर सहर गोरखाली सेनाक अधिनम परल छल। एहि प्रकार क्रमिक रूपम एकीकरण अभियान आगु बढल छल। सङ्गे वि.सं.१८३१ म बडा महाराजक स्वर्गवास भ गेलाक कारण हुनकर उत्तराधिकारी राजाक अतिरिक्त बलभद्र, भीमसेन थापा, अमरसिंह जका वीर योद्घासभ ई अभियानक आर व्यापक बनेलक। यद्यपि भारतम साम्राज्य फैलारहल अङ्ग्रेज शासकसभ एहिसँ सशङ्कित बनल जहिसँ वि.सं.१८३७ म सम्पन्न सुगौली सन्धिक कारण नेपाल पुर्वम मेची आ पश्चिमम राप्ती आ कर्णाली पारिक भू-भागसभ हार परल छल।

नेपालक कोनो भी अञ्चलक सिमाना तथा अन्तर्राष्ट्रिय सिमानाक समेत नै छुववाला आ भौगालिक विभाजन अनुसार पहाडी प्रदेशम अवस्थित ई जिला अर्ध चन्द्राकार रूपम पुर्व-पश्चिमम फैलल अछि। एहि जिलाम उच्च पहाडी क्षेत्रक यठार, हिमालक दक्षिणी ढाल, पहाडी क्षेत्रक बिचम यत्रतत्र पसरल समथर बेंसी आ टारसभ लगाएतक विविध भौगोलिक विशेषतासभ पाएब सकल जाएत अछि। भौगालिक बनावट पहाडी भू-भागक अंश ७१ प्रतिशत, लेकाली भू-भागक अंश १८ प्रतिशत तथा टार, बेंसी आ समथर भू-भागक अंश ११ प्रतिशत रहल अछि। नेपालक मानचित्रम नुवाकोट जिलाक अवस्थिति २७४५' सँ २८२०' उत्तरी अक्षांशधरि आ ८५०' सँ ८५४५' पूर्वी देशान्तरधरि फैलल अछि । समुद्रसतहसँ न्युनतम ४५७' मिटरसँ अधिकतम ५१४४' मिटर उचाईधरि भू-धरातल रहल ई जिलाक क्षेत्रफल ११२१ वर्ग किलोमिटर अछि। जिलाक समग्र भू-धरातलिय हिसाबम मुख्यतः तीन भागम विभाजन करल जा सकैया ।

निर्वाचन आयोग (नेपाल) द्वारा निर्धारण कएल गेल, जिलागत निर्वाचन क्षेत्र अन्तर्गत  कऽ नक्सा नीचा देल गेल अछि।




#Article 59: नेपाल (1135 words)


नेपाल (;  ),  आधिकारिक नाम: सङ्घीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्र नेपाल एक दक्षिण एसियाली भूपरिवेष्ठित हिमाली राष्ट्र छी । एकर भौगोलिक अक्षांश २६ डिग्री २२ मिनेटसँ ३० डिग्री २७ मिनेट उत्तर आ ८० डिग्री ४ मिनेटसँ ८८ डिग्री १२ मिनेट पूर्वी देशान्तरधरि फैलल अछि । एकर कूल क्षेत्रफल १,४७,१८१ वर्ग किलोमिटर अछि । ई क्षेत्रफल पृथ्वीक कूल क्षेत्रफलक ०.०३% आ एसिया महादेशक ०.३% छी । लण्डन स्थित ग्रीनवीच मिनटाइमसँ पूर्वमे रहल गौरीशङ्कर हिमालयक नजदिक भऽ गेल ८६ डिग्री १५ मिनट पूर्वी देशान्तरक आधार मानि नेपालक प्रमाणिक समय ५ घण्टा ४५ मिनेट आगा मानल जाइत अछि । 

नेपालमे ७ प्रदेश आ ७७ जिला आ ७४४ स्थानीय तह रहल अछि जहिमे ४ महानगरपालिका, १३ उपमहानगरपालिका, २४६ नगरपालिका आ ४८१ गाउँपालिका रहल अछि ।नेपालक पूर्वी सीमा मेची नदीसँ पश्चिमी सीमा महाकाली नदीधरिक कूल लम्बाई ८८५ किलोमिटर अछि । उत्तरसँ दक्षिण तरफक चौडाई मुदा एक समान नै अछि । पूर्वी भागसँ पश्चिमी भाग कनिक चौडा अछि । तहिना मध्य भाग कनि खुम्चल अछि । नेपालक अधिकतम चौडाई २४१ किलोमिटर आ न्युनतम चौडाई १४५ किलोमिटर रहल अछि । यसर्थ नेपालक सरदर चौडाई १९३ किलोमिटर रहल अछि । नेपालक उत्तरमे चीनक स्वशासित क्षेत्र तिब्बत अछि तँ दक्षिण, पूर्व आ पश्चिममे भारत अवस्थित अछि । नेपालक ८०% सँ बेसी नागरिक हिन्दू धर्म मानैत अछि जे विश्वमे सभसँ बेसी प्रतिशत हिन्दू धर्मावलम्बी भेल राष्ट्र सेहो छी । हिन्दू धर्म छोडि बौद्ध, मुस्लिम, किरात आदि धर्म माननिहार लोकनि सेहो एतय बसोबास करैत अछि । एकटा छोट सन क्षेत्रक लेल नेपालक भौगोलिक विविधता बहुतेक उल्लेखनीय रहल अछि । एतय तराईक उष्ण फाँटसँ ठण्डा हिमालयक शृङ्खला अवस्थित अछि । संसारक सभसँ पैग १४ हिमश्रृङ्खलामे सँ ८ टा नेपालमे रहल अछि, एहिमे सँ संसारक सर्वोच्च शिखर सगरमाथा एक छी । नेपालक मुख्य शहर आ राजधानी काठमाण्डौ छी । काठमाडौं, ललितपुर आ भक्तपुरके काठमाडौं उपत्यका कहल जाइत अछि । आन मुख्य शहर सभमे भरतपुर, बिराटनगर, भैरहवा, वीरगञ्ज, जनकपुर, पोखरा, नेपालगञ्ज, धनगढी, राजविराज आ महेन्द्रनगर अवैत अछि । नेपाल शब्दक उत्पतिक सम्बन्धमे कोनो ठोस प्रमाण तँ उपलब्ध नै अछि, मुदा एक प्रसिद्ध विश्वास अनुसार मरिची ॠषिक पुत्र 'ने' मुनिद्वारा पालन भेल स्थानक रूपमे एतौका नाम नेपाल रहल गेल अछि। 

निरन्तर रूपमे राजा-रजौटा सभक अधीनमे रहि सम्पन्न इतिहास रहल, अखन नेपाल कहि चिन्हल जाइवला ई खण्ड वि.सं. २०४६ सालक आन्दोलन पश्चात् संवैधानिक राजतन्त्रक नीति अवलम्बन केनए छल । 

हिमाल क्षेत्रमे लोकसभ लगभग ९००० बर्षसँ बैस रहल काठमाडौं उपत्यकाक प्राचिन इतिहाससँ पुष्टी भेल अछि । सम्भवत: भोट-बर्मेली मूलक लोकसभ नेपालमे २,५०० वर्ष आगा बसोबास करैत छल । 

ईशापूर्व १५०० दिस इन्डो-आर्यन जातिक लोकसभ उपत्यका प्रवेश केनए छल । ईशापूर्वक १००० दिस छोट छोट राज्यसभ आ राज्यसङ्गठनसभ बनल । सिद्धार्थ गौतम (ईशापूर्व ५६३–४८३) एहिने एक वंश, शाक्य वंशक राजकुमार छल, जे अपन राजकाज त्याग करि तपस्वी जीवन पसन्द करि [बुद्ध कहि विश्व प्रसिद्ध भेल । 
ईशापूर्वको २५० धरि, ई क्षेत्र उत्तर भारतक मौर्य साम्राज्यक प्रभावमे रहल आ बादमे चारम शताब्दीमे गुप्त साम्राज्यक अधीनस्थ राज्य भऽ गेल । योई क्षेत्रमे ५अम शताब्दीक उत्तरार्द्धमे आबि लिच्छवीसभ राज्य केलक । ८आम शताब्दीक उत्तरार्धमे लिच्छवीवंश अस्त होमए लागल आ सन् ८७९ सँ नेवार युगक उदय भेल, तथापि ओसभक नियन्त्रणमे देशक कतेक विस्तार भेल छल एकर यकिन नै अछि । ११अम शताब्दीक उत्तरार्द्धमे दक्षिण भारतसँ आएल चालुक्य साम्राज्यक प्रभावमे नेपालक दक्षिणी भूभाग आबि गेल । चालुक्यसभक प्रभावमे ओ समय चलिआएल बुद्ध धर्मक बदला एतयक राजासभ हिन्दू धर्मक समर्थन करै लागल आ नेपालमे हिन्दू धर्म तरफक धार्मिक परिवर्तन होमए लागल । 

१३अम शताब्दीक पूर्वार्द्धमा संस्कृत शब्द मल्ल उपनाम भेल नायकसभक उदय होमए लागल । प्रारम्भमे ओसभ सत्ता उदयमान केलक, मुदा ओकरबाद २०० वर्षधरि राजासभ अपन शक्ति एकजुट करवाक काम मात्र केलक । १४अम शताब्दीक उत्तरार्धमे देशक बहुतेक भागसभ एकीकृत राज्यक अधीनमे आएल । मुदा ई एकीकरण छोट समयधरि मात्र टिकल: वि.सं. १४८२ मे यक्ष मल्लक समयमे अपन पुत्रसभक अंशबण्डामे काठमाडौं उपत्यकाक तीन राज्यमे विभाजन करवाक निर्णयबाद ई राज्य तीन भागमे विभाजित भऽ गेल - काठमाडौं, पाटन आ भादगाउँ – जकर बीचमे शताब्दिधरि खिचातानी आ दुश्मनी रहिरहल छल ।

वि.सं. १७६५ मे, गोरखाक राजा पृथ्वीनारायण शाह बहुत कम हतियार आ सहयोग जुटाए नजदिकी राज्यसभ, (खासकरि लम्जुङ्ग, कास्की आ तनहूँ)क तटस्थता अपन पक्षमे उपयोग करैमे सफल भेलाकबाद देश एकीकरणक निम्ति आगा बढल । बहुतेक रक्तरञ्जित युद्ध पश्चात्, ओ ३ वर्षबाद काठमाडौं उपत्यकाके विशाल नेपाल भितर एकीकरण करिक अभियानमे सफलता प्राप्त केलक । तथापि ओ तत्कालीन राजा जयप्रकाश मल्ल राज्य करिरहल काठमाडौं राज्यके जितैक लेल कोनो युद्ध नै करऽ पडल । वास्तवमे, तखन इन्द्रजात्रा पर्वमे काठमाडौं उपत्यकाक सम्पूर्ण जनतासभ जात्रा मनाए रहल छल जब पृथ्वी नारायण शाह अपन सेनासभ सहित खास कोनो मेहनतबिना उपत्यकाके कब्जा करि अपने बैस जात्रा चलाए साँस्कृतिक सम्मानक अवधारणा प्रस्तुत केनए छल । तहिना नेपाल एकीकरणक सिलसिलामे सम्पूर्ण छोट राज्यसभ जितलाकबाद पूर्वमे रहल किरात लिम्बूवान राज्य पहुँचल लिम्बूवान राज्यमे १७ बेरधरि हमला करि वि.स‌ं १८३१ भादो २२ मे लिम्बूवानक केन्द्रीय राजधानी विजयपुरमे लालमोहर सहित तम्रपत्रमे लिखत सन्धि भेल छल । ई नव नेपालक जन्मक आधारशिला तय केनए छल । 

तिब्बतसँ हिमाली मार्गक नियन्त्रणक लेल भेल विवाद आ ओकर पश्चातक युद्धमे चीन तिब्बतक सहायताक लेल अएलाकबाद नेपाल पाछा हटल छल । नेपालक सीमामे रहल नजदिकक छोट-छोट राज्यसभ हडपि लेला कारण आरम्भ भेल ब्रिटिस इस्ट इण्डिया कम्पनीसंगक दुश्मनीक कारण रक्तरञ्जित एङ्गलो-नेपाल युद्ध (१८१४–१६) भेल, जहिमे नेपाल वर्तमानक सीमा रक्षा करैमे सफल भेल मुदा महाकाली नदीक पश्चिमक अपन क्षेत्रसभ परित्याग करऽ पडल । ओ क्षेत्रसभमे वर्तमान भारतक उत्तराखण्ड राज्य आ वर्तमान हिमाञ्चल प्रदेशक बहुतेक पञ्जाबी पहाडी राज्यसभ अवस्थित अछि । अपन स्वाधीनताक लेल नेपालद्वारा इस्ट इण्डिया कम्पनिसँ सुगौली सन्धि करि तराईक किछ भूभाग आ एक तिहाइसँ बेसी भूभाग सहित सिक्किम, दार्जीलिङ परित्याग करऽ पडल । काङ्गडाधरि पहुँचल नेपाली आ सतलजसँ टिस्टाधरिक विशाल नेपाल मेची आ महाकालीमे सीमित भऽ गेल, मुदा तकरबाद वि.सं. १८६० मे प्रथम राणा प्रधानमन्त्री जङ्गबहादुर राणासँ खुसी भऽ अङ्ग्रेजद्वारा नेपालके राप्तीसँ महाकालीधरिक तराई वापस करि देनए छल ।

राज परिवार बीचक गुटबन्दीक कारण युद्धक बाद अस्थायित्व कायम भेल । सन् १८४६ मे शासन करिरहल रानीक सेनानायक जङ्गबहादुर राणाके सत्ताविमुख करवाक षड्यन्त्रक  खुलासा भेलाक कारण कोतपर्व भेल छल । हतियारधारी सेना आ रानीप्रति बफादार भाई-भारदारसभबीच शीतयुद्ध भेलासँ देशक सयन राजखलक, भारदारसभ आ रजौटासभक हत्या भेल छल । जङ्गबहादुर जितलाकबाद राणा खानदान सुरू केलक आ राणा शासन लागू केलक । राजाके नाममात्रमे सीमित कएल गेल आ प्रधानमन्त्री पदके शक्तिशाली आ वंशाणुगत बनाएल गेल । राणासभ पूर्णनिष्ठासँ ब्रिटिससभक पक्षमे छल आ ब्रिटिससभके सन् १८५७ के सिपोई रिबेलियन (प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता सङ्ग्राम), आ पाछा दुनू विश्व युद्धमे सहायता केनए छल । सन् १९२३ मे संयुक्त अधिराज्य आ नेपालबिच आधिकारिक रूपमे मित्रताक सम्झौतामे हस्ताक्षर भेल, जहिमे नेपालक स्वतन्त्रताके संयुक्त अधिराज्य स्विकार केनए छल ।

नेपाली नेपालके राष्ट्रिय भाषा छी । ई सरकारी कामकाजमें सेहो उपयोग होएत अछि । एकर साथ नेपालमे नेवारी,लिम्बू, सुनुवार, राई, मैथिली, भोजपुरी, नेवारी, अवधी, थारू, गुरुङ, सेर्पा, तामाङ, मगर, मारवाडी, डोटेली आदि भाषा सेहो बोल्ल जाएत अछि । भाषाविज्ञानक आधार में देखला पर नेपाली भाषा के उत्पति भारोपेली भाषा परिवार के शतम् शाखा सँ विकसित आर्य-इरानी शाखा के आर्यली संस्कृत सँ विकसित भेल अछि ।

नेपाल १४ अञ्चल, ७५ जिला आर ५ विकास क्षेत्रमे विभाजित करल गेल अछि । नेपालमे रहल ५ विकास क्षेत्र आर १४ अञ्चलसभ निम्नलिखित अछि :-




#Article 60: पंचानन मिश्र (254 words)


पंचानन मिश्र
पिता-आचार्य श्री गंगाधर मिश्र (निबन्‍धकार, कवि धर्मशास्‍त्रज्ञ)। स्‍थायी-‍पता: अच्‍युत परिस ,मोहल्‍ला-लालबाग (चन्‍द्रशेखर आजाद चौक),डाकघर-प्रधान डाकघर दरभंगा,दरभंगा-846004,प्रान्‍त-बिहार।
जन्‍म तिथि-01.04.1952 शैक्षणिक योग्‍यता- बीoएo (आनर्स) अध्‍यवसाय- श्रम अधीक्षक, झारखंड, सरकार पत्राचार पता-द्वारा-राज्‍य श्रम कुल्‍याण केन्‍द्र,डाकघर-झुमरीतिलैया, जिला-कोडरमा-825409 (झारखंड) लेखकीय योगदान:मैथिलीमे मिथिलासँ सम्‍बन्धित पुरातात्विक, इतिहासपरक, सामाजिक, सांस्‍कृतिक, आर्थिक, भौगोलिक, संरचनात्‍मक, एवं सामयिक तथ्‍यात्‍मक आलेख प्रकाशित। मैथिलीक भाषायी आन्‍दोलन विषयक आलेख। साक्षात्‍कार परिचर्चा, रिपोर्ताज, हास्‍य-व्‍यंग्‍य, संस्‍मरण, समीक्षा, लघुकशा साहित्‍य ओ साहित्‍यकार विषयक रचना। अभिनय, प्रतीक संगीता वर्मा, आयुजानन्‍द छद्मनामसँ रचना प्रकाशित। हिन्‍दीमे मैथिली आ ओ मिथिला विषयक आलेख ‘आर्यावर्त’ (हिन्‍दी दैनिक, पटना), ‘पाटलिपुत्र टाइम्‍स’ (हिन्‍दी दैनिक, रांची) ‘बनमनखी टाइम्‍स’ (साप्ताहिक, बनमनखी, पूर्णियाँ)मे प्रकाशित। अभिनव मिश्रक छद्मनामसँ ‘ऋषिसंदेश’ पत्रिकाक सम्‍पादन। कुल प्रकाशित रचनाक संख्या-300 पहिल प्रकाशित रचना-मिथिला मिहिर, पटना (नेना-भुटकाक) चौपाड़ि स्‍तम्भ, 1969)।

पहिल प्रकाशित अग्रलैख-मिथिला मिहिर (शीर्षक: अमेरिकी-जनमत आ बंगला देश, दिनांक 30.1.1972) प्रकाशित पोथी: (1) मैथिल समाज (समाजक विविध पक्षक समीक्षा), 2007 (2) ओ लोकनि (संस्‍मरण), 2007(3) अभिप्राय (निबंध संग्रह), 2008

पोथी जाहिमे रचना संकलित भए प्रकाशित/प्रकाशनाधीन :

बागमती दामोदर टाइम्‍स (हजारीबागसँ मासिक प्रकाशित 10 अंक पछाति दिल्‍लीसँ त्रैमासिक 9 अंक मैथिली प्रकाशन) मिथिला मंडल, झुमरीतिलैयाक वर्ष 1989, 1990, 2001 ई.मे विघापति पर्वपर प्रकाशित (स्मारिका)।

पत्र/पत्रिका जाहिमे रचना प्रकाशित अछि:

कर्णामृत (कोलकाता), मिथिला मिहिर (पटना) कुशलक्षेम (सिंहवाड़, दरभंगा), लोकवेद (रहिका, मधुबनी), माटि–पानि (पटना), भारती (रांची), पूर्वोत्तर मैथिल (गौहाटी), वैदेही (दरभंगा), मिथिला टाइम्‍स (दरभंगा), जानकी (धनबाद), प्रवासक भेट (कोलकाता), मैथिली साहित्‍य परिषद पत्रिका (दरभंगा), आकांक्षा (दरभंगा), भाखा (पटना) पुष्पाञ्जलि (देवघर), समय साल (पटना), आइ-काल्हि (पटना) रचना (दरभंगा), मैथिली दर्शन (कोलकाता), आंकुर (दिल्‍ली), बागमती दामोदर टाइम्‍स, श्री मिथिला (कोलकाता), सीताक बेटी (दरभंगा), हिलकोर (खगडि़या), कचोट (जमशेदपुर), मैथिली समाचार (इलाहाबाद)




#Article 61: पर्सा जिला (196 words)


पर्सा जिला नेपालके एकटा जिला अछि ।

जिलाक महुवन गाममे रहल पारसनाथक मठक नामसँ जिलाक नाम पर्सा नामाकरण कएल गेल अछि कहिक इतिहासकारसभक कथन अछि।

श्री गहवा माईक मन्दिर, , श्री वीरेन्द्र प्रभात घडी (घन्टाघर) ,  श्री गिता मन्दिर, श्री शंकराचार्यद्धार, श्री वीर्ता माईक मन्दिर, श्री अलखिया मठ, श्री महावीर स्थान, बौद्ध चैत्य भिस्वा, घडीअर्वा पोखरी, श्री विन्ध्यवासिनीमाई कऽ मन्दिर, महुवन मठ, पर्सा वन्यजन्तु आरक्ष, श्री विश्व हिन्दू पार्क लछमनवा,श्री दुधेशवरनाथ मन्दिर(भठ मेला)

उरिया (ओरिया) नदी, श्रीसिया नदी, गंगोल नदी, नौरङ्गीया नदी, तिलावे नदी, सिक्टा नदी आदि।

अलौ, अमरपट्टी, औराहा, बगही, वगवन्ना, बागेश्वरी, बहुअरी पिडारी, बहुअरवा भाठा, बसिडलवा, बसन्तपुर, बेलवा, बैरिया बिरता, बैरिया बिरता दा.पू., भवानीपुर, भेडिहारी, भिस्वा, बिजवनिया, विन्दवासनी, बिरन्चीबरवा, बीरगञ्ज उपमहानगरपालिका, बिरवागुठि, विश्रामपुर, चोर्नी, देउरवाना, धोविनी, धोरे, गादी, गम्हरीया, घोडादौडा पिपरा,गोविन्दपुर, हरिहरपुर, हरिहरपुर विर्ता, हरपतगंज, हरपुर, जगरनाथपुर, जैमंगलापुर, जानकिटोला, जीतपुर, झौवा गुठी, कौवा बन कटैया, लाहावरथकरी, लखनपुर, लाल पर्सा, लंगडी, लिपनी विर्ता, मधुवन मथौल, महादेवपट्टी, महुवन, मैनपुर पकाहा, मनीयारी, मसियानी, भिखमपुर, मिर्जापुर, मुडली, नगरदाहा, निचुटा, निर्मलबस्ती, पाचरुखी, परसौनी विर्ता, परसौनी भाठा, पिडारीगुठी, पोखरीया, परशुरामपुर, रामगढवा, रामनगरी, सबैठावा, सभुवा पर्सौनी, समझौता, शंकरसरैया, सेढवा, सिवर्वा (पटवारीटोला), श्रीसिया खलवाटोला, सोनबर्षा, श्रीसिया दा. पु., सुवर्णपुर, सुगौली विर्ता, सुगौली पटेर्वा, सुपौली, सुर्जाहा, ठोरी, तुलसी बर्वा, उदयपुर घर्मी, भौराटार ।




#Article 62: पाँचथर जिला (138 words)


पाँचथर जिला   नेपाल कऽ क्षेत्रिय वर्गीकरण अनुसार पूर्वाञ्चल विकास क्षेत्रके मेची अञ्चलके एकटा पूर्वी पहाडी जिला छि। यी जिला समूद्र सतह सऽ ३८३ मिटर, जिलाके दक्षिण तमोर बगर सऽ ४,५७५ मिटर
फलैचा गा.वि.स. के उपर भाग तक अवस्थित अछि। नेपाल अधिराज्यके पूर्वी सिमानामे रहल मेची अञ्चल यी जिला उत्तर-दक्षिण फैल कऽ 'पल्लो किराँत'के नाम सेओ प्रसिद्ध अछि।

यी जिलामे अवस्थित प्रमुख नदीसभ ईन्द्रावती, कावेली, तमोर, हेवा, ईवा, केवा, फेमे, निवू, नाम्दु आदि अछि।

यी जिलामे अवस्थित प्रमुख धार्मिक स्थलसभ काबेली, तिम्बुपोखरी, महादेव स्थान, जोरपोखरी, आगेजुङ्ग गुम्बा, पाथीभरा देवीस्थान (याङनाम), सिद्ध देवीस्थान, गढी मन्दिर, थाक्ले मन्दिर, किराँतसभके प्रसिद्ध लुब्रेकुटी मन्दिर, महागुरु फाल्गुनन्दके मन्दिर आदि अछि।

यी जिलामे अवस्थित ऐतिहासिक स्थानसभ जोरसाल गढी, आहाल गैह्री, छाला सुकुवा डाँडा, उत्तरे, फौदार पाटी (अमरपुर), च्याखलेपाटी, जोरपाटी (एकतिन), सिम्राहा पाटी (रानीगाउँ), तीनधारे पाटी (फिदिम), जोरसाल पाटी (फिदिम), हेवाखोला पाटी (नागिन) आदि अछि ।




#Article 63: पाकिस्तान (122 words)


पाकिस्तान( or ) एकटा दक्षिण एसियाली देश अछि । ऐतकऽ प्रमुख भाषासभ उर्दू, पञ्जाबी, सिन्धी, बलूची आर पश्तो छी । राजधानी इस्लामाबाद आर अन्य महत्वपूर्ण शहर कराची आर लाहौर छी । पाकिस्तानमे चारि प्रान्त अछि : पञ्जाब, सिन्ध, बेलुचिस्तान आर सूबा-ए-सरहद, ई संग-संग पाक अधिकृत कश्मीर, शुमाली इलाका, कबाइली इलाका, आर इस्लामाबाद सेहो पाकिस्तानमे आबैत अछि । 

उत्तरमे अल्पाईन वनस्पति पबई छि तहिना दक्षिणमे शीतोष्ण। दक्षिणमे सिन्धु नदीमे गोही पाबैत अछि। सिन्धु नदीमे अन्धो डल्फिन सहो पाबैत अछि।

पाकिस्तानकऽ प्रमुख राजनैतिक दलसभ ई प्रकार अछि-

पाकिस्तानमे चाईर प्रान्तसभ अछि:-

ई प्रान्तसभ संग-संग पाकिस्तानमे केन्द्र शासित निम्न लिखित क्षेत्रसभ अछि:

हाकी राष्ट्रिय खेल छी। एहि देश में क्रिकेटकऽ लोकप्रियता बहुत अछि। देशकऽ क्रिकेट टीम एक बेर विश्व कप (सन् १९९२ मे) जितेने अछि।




#Article 64: पूर्वाञ्चल विकास क्षेत्र (142 words)


पूर्वाञ्चल विकास क्षेत्र नेपालके पाँच विकास क्षेत्र मस एकटा विकास क्षेत्र छि। इ नेपालके सबसे नमहर पूर्वमे स्थित क्षेत्र छि । अकर पूर्वमे भारतके सिक्किम तथा पश्चिम बंगालके दार्जीलिङ तथा पश्चिममे नेपालके मध्यमाञ्चल तथा उत्तरमे चीनके तिब्बत तथा दक्षिणमे भारतके बिहार स्थित छि । पूर्वाञ्चलके मुख्यालय धनकुटामे स्थित छि । पूर्वाञ्चलमे ३ अञ्चल तथा १६ जिला छि ।

ई क्षेत्र नेपालक तेसर सभस बड्का  विकास क्षेत्र छि लेकिन जनसंख्याक हिसाबलस नेपालक दोसर सबस बेसी जनसंख्या होएइबाला विकास क्षेत्र छि । ई क्षेत्रक क्षेत्रफल  अछि आर जनसंख्या ५८११५५५५ गोटे अछि । ई क्षेत्रक जनसंख्या घनत्व २०४.२ व्यक्ति/किमा२ अछि ।

यस क्षेत्रक प्रमुख शहरसभ ई छी बिराटनगर, धरान, धनकुटा, इटहरी, राजविराज, बेलबारी,तेलकुडी-कसेनी बिर्तामोड र दमक. अन्य शहरहरु हुन नाम्चे बजार (सगरमाथाको छेउमा बेस क्याम्प नजिक), गाईघाट, लहान, ईलाम, संखुवासभा खादबारी, आर सभ।

पूर्वाञ्चलमे  जम्मा ३ टा अञ्चल आ १६ जिलासभ अछि
पूर्वाञ्चल विकास क्षेत्र




#Article 65: पोखरा लेखनाथ महानगरपालिका (570 words)


पोखरा लेखनाथ महानगरपालिका नेपालक गण्डकी प्रदेश स्थित कास्की जिलामे रहल महानगरपालिका आ प्रादेशिक राजधानी छी। वि.सं. २०५२ माघ १८ गते उपमहानगरपालिका घोषित पोखराकेँ सङ्घीय मामिला तथा स्थानीय विकास मन्त्रालयद्वारा वि.सं. २०७३ फागुन २७ गते महानगरपालिका घाेषणा कएल गेल छल। ई महानगरपालिकाका कूल क्षेत्रफल ४६४.२४ वर्ग किलोमिटर रहल अछि तहिना कूल जनसङ्ख्या ४,१४,१४१ रहल अछि। महानगरपालिकाक केन्द्र साबिक पोखरा उपमहानगरपालिका कार्यालय राखल गेल अछि । पाेखरा लेखनाथ महानगरपालिका, पोखरा उपमहानगरपालिका, लेखनाथ नगरपालिका, मौजा, चापाकोट, भदौरे तमागीक (३,९) वडासभ, कास्कीकोट, माझठानाक (१,४,९) वडासभ कालिकाक (१,५) वडासभ आ पुरन्चौर गाउँ विकास समिति मिलाए कुल ३३ टा वडामे विभाजित अछि। पोखरा लेखनाथ महानगरपालिकाक पूर्वी सिमानामे मादी गाउँपालिका आ रूपा गाउँपालिका, पश्चिममे अन्नपूर्ण गाउँपालिका, पर्वत आ स्याङ्जा जिला तहिना एकर उत्तरी सिमानामे माछापुच्छ्रे गाउँपालिका आ मादी गाउँपालिका तथा दक्षिणमे स्याङ्जा आ तनहुँ जिला रहल अछि।

पोखरा लेखनाथ महानगरपालिका पोखरा उपत्यकामे अवस्थित नेपालक अत्यन्त रमणीय स्थानक रूपमे परिचित अछि। पोखरा शहर नेपाल क पैग शहरसभमे सँ एक छी। तहि कारण पोखराकेँ नेपालक एक महत्वपूर्ण पर्यटकीय स्थलक रूपमे लेल जाइत अछि। एतय रहल महत्पूर्ण स्थानसभमे फेवा ताल, महेन्द्र गुफा, पातले छाँगो, सराङकोट, गुप्तेश्वर महादेव गुफा आदि अछि । पोखरा नेपालक गोर्खा प्रदेशक कास्की जिलामे अवस्थित अछि । ई शहर कास्की जिलाक जिला सदरमुकामक संगे गोर्खा प्रदेशक सदरमुकाम सेहो छी।

पोखरा लेखनाथ महानगरपालिका पोखरा उपत्यकाक उत्तर पूर्वी कोनामे अवस्थित अछि। धौलागिरी हिमालय, अन्नपूर्ण आ मनास्लु श्रृङ्खला, ८००० मिटरसँ उच्च हिमालयसभ सेहो एतयसँ देखल जा सकैत अछि। फेवाताल पोखराक सौन्दर्य आओर बेसी बढेनाए अछि। पोखरा नेपालक सबसँ बेसी वर्षा होमएवाला ठाम छी। एतय पाताले छाँगो, महेन्द्र गुफा आ गुप्तेश्वर गुफा जका पर्यटकीय स्थलसभ अछि। माछापुच्छ्रे हिमालयक मनोरम दृष्य सेहो एतयसँ देखल जा सकैत अछि।

वर्तमान नेपाल एकीकरण होमएसँ पूर्व पोखरा कास्की राज्य अन्तर्गत छल। ऐतिहासिक कास्कीकोट उपत्यकाक उत्तरी छोरमे अवस्थित अछि। पृथ्वी नारायण शाहक मझिला पुत्र नायव बहादुर शाहक समयमे पोखरा उपत्यका वर्तमान नेपालमे मिलाएल गेल अछि।

पोखरा लेखनाथ महानगरपालिकाक जनसङ्ख्या ४,१४,१४१ अछि। ५ दशमलव ४६ प्रतिशत जनसङ्ख्या वृद्धि रहल ई ठामक जनसङ्ख्या वृद्धिदर अधिराज्यमे सर्वाधिक अछि ।  सन् २०११ क तथ्याङ्क अनुसार एतय बाहुन २२ दशमलव ८३ प्रतिशत, गुरुङ २१ दशमलव ६२ प्रतिशत, मगर ८ दशमलव २० प्रतिशत, क्षेत्री १५ दशमलव ३५, दलित ८ दशमलव ७१ प्रतिशत रहल अछि । एतय नेवार, मुसलमान, तामाङ, थकाली आदि जनजाति बसोबास करैत अछि। परम्परागत कामकाज व्यवसाय वाहेक बाहर काज करि आयल लोक आ लाहुरेसभक बसोबास बेसी भेला कारण पोखराके नेपालक महग शहर सेहो कहल जाइत अछि।

पोखरा तथा लेखनाथक मुख्य व्यवसाय पर्यटन छी। पोखरा लेखनाथ महानगरपालिकामे विन्ध्यवासिनी मन्दिर, धर्मशाला, बुद्धविहार, मैत्री चैत्य तथा राधाकृष्ण मन्दिर, भद्रकाली मन्दिर, शोभा भगवती मन्दिर, सिद्धेश्वर महादेव, पुष्करेश्वर शिव मन्दिर, राम मन्दिर, केदारेश्वर मन्दिर, शिवहरि मन्दिर तथा नमोबौद्ध गुम्बा आदि ऐतिहासिक तथा धार्मिक पर्यटकीय स्थलसभ रहल अछि तहिना सेती नदीक गल्छी, चमेरे गुफा, पाताले छाँगो, महेन्द्र गुफा, गुप्तेश्वर गुफा आदि एतय रहल प्राकृतिक पर्यटकीय स्थलसभ छी। एतय रहल रमणीय तालसभ आ सेतीगण्डकी हिमाली छायाँ तथा झरनासभ प्रमुख पर्यटकीय आकर्षण छी । फेवातालक पानिमे माछापुच्छ्रे हिमालयक छाँया तथा बेगनासमे कएल जाइवाला नौका बिहार आकर्षक अछि । संगे अन्नपूर्ण पदमार्ग एहि ठामसँ आरम्भ होइत अछि ।

पोखरा लेखनाथ महानगरपालिका पश्चिम नेपालक प्रमुख शिक्षा तथा स्वास्थ्य केन्द्र सेहो छी। नेपालक प्रख्यात पृथ्वी नारायण क्याम्पस, जनप्रिय क्याम्पस, पोखरा विश्वविद्यालय तथा अन्य क्यापस तथा विद्यालय रहल पोखरामे पोखरा क्षेत्रीय अस्पताल, मणिपाल शिक्षण अस्पताल सहित बहुतेक स्वास्थ्य संस्था रहल अछि।

पोखरा उपत्यका पूर्वमे पृथ्वी राजमार्गक माध्यमसँ मध्य पहाडी क्षेत्र, काठमाडौं उपत्यका मध्य दक्षिणक चितवन जिला तथा पूर्व-पश्चिम राजमार्ग नेपालक तराइसँ जुड़ल अछि तँ सिद्धार्थ राजमार्ग पोखराके पश्चिम तराई आ किछ पहाडी जिलासँ तथा धवलागिरी राजमार्ग पश्चिम-उत्तरी पहाडी आ हिमाली क्षेत्रसँ जोडने अछि।




#Article 66: प्रफुल्ल कुमार सिंह 'मौन' (418 words)


प्रफुल्ल कुमार सिंह 'मौन (1938- ) ग्राम+पोस्ट- हसनपुर, जिला-समस्तीपुर।मैथिलीमे १.नेपालक मैथिली साहित्यक इतिहास(विराटनगर,१९७२ई.), २.ब्रह्मग्राम(रिपोर्ताज दरभंगा १९७२ ई.), ३.’मैथिली’ त्रैमासिकक सम्पादन (विराटनगर,नेपाल १९७०-७३ई.), ४.मैथिलीक नेनागीत (पटना, १९८८ ई.), ५.नेपालक आधुनिक मैथिली साहित्य (पटना, १९९८ ई.), ६. प्रेमचन्द चयनित कथा, भाग- १ आऽ २ (अनुवाद), ७. वाल्मीकिक देशमे (महनार, २००५ ई.)।२००४- डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह “मौन” (प्रेमचन्द की कहानी-प्रेमचन्द, हिन्दी) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार।
.डॉ प्रफुल्ल कुमार सिंह ‘मौन’ (१९३८- )- ग्राम+पोस्ट- हसनपुर, जिला-समस्तीपुर। पिता स्व. वीरेन्द्र नारायण सिँह, माता स्व. रामकली देवी। जन्मतिथि- २० जनवरी १९३८. एम.ए., डिप.एड., विद्या-वारिधि(डि.लिट)। सेवाक्रम: नेपाल आऽ भारतमे प्राध्यापन। १.म.मो.कॉलेज, विराटनगर, नेपाल, १९६३-७३ ई.। २. प्रधानाचार्य, रा.प्र. सिंह कॉलेज, महनार (वैशाली), १९७३-९१ ई.। ३. महाविद्यालय निरीक्षक, बी.आर. अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर, १९९१-९८.

मैथिलीक अतिरिक्त नेपाली अंग्रेजी आऽ हिन्दीक ज्ञाता।

मैथिलीमे १.नेपालक मैथिली साहित्यक इतिहास(विराटनगर,१९७२ई.), २.ब्रह्मग्राम(रिपोर्ताज दरभंगा १९७२ ई.), ३.’मैथिली’ त्रैमासिकक सम्पादन (विराटनगर,नेपाल १९७०-७३ई.), ४.मैथिलीक नेनागीत (पटना, १९८८ ई.), ५.नेपालक आधुनिक मैथिली साहित्य (पटना, १९९८ ई.), ६. प्रेमचन्द चयनित कथा, भाग- १ आऽ २ (अनुवाद), ७. वाल्मीकिक देशमे (महनार, २००५ ई.)।

प्रकाशनाधीन: “विदापत” (लोकधर्मी नाट्य) एवं “मिथिलाक लोकसंस्कृति”।

भूमिका लेखन: १. नेपालक शिलोत्कीर्ण मैथिली गीत (डॉ रामदेव झा), २.धर्मराज युधिष्ठिर (महाकाव्य प्रो. लक्ष्मण शास्त्री), ३.अनंग कुसुमा (महाकाव्य डॉ मणिपद्म), ४.जट-जटिन/ सामा-चकेबा/ अनिल पतंग), ५.जट-जटिन (रामभरोस कापड़ि भ्रमर)।

अकादमिक अवदान: परामर्शी, साहित्य अकादमी, दिल्ली। कार्यकारिणी सदस्य, भारतीय नृत्य कला मन्दिर, पटना। सदस्य, भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर। भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली। कार्यकारिणी सदस्य, जनकपुर ललित कला प्रतिष्ठान, जनकपुरधाम, नेपाल।

सम्मान: मौन जीकेँ साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार, २००४ ई., मिथिला विभूति सम्मान, दरभंगा, रेणु सम्मान, विराटनगर, नेपाल, मैथिली इतिहास सम्मान, वीरगंज, नेपाल, लोक-संस्कृति सम्मान, जनकपुरधाम,नेपाल, सलहेस शिखर सम्मान, सिरहा नेपाल, पूर्वोत्तर मैथिल सम्मान, गौहाटी, सरहपाद शिखर सम्मान, रानी, बेगूसराय आऽ चेतना समिति, पटनाक सम्मान भेटल छन्हि।

राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठीमे सहभागिता- इम्फाल (मणिपुर), गोहाटी (असम), कोलकाता (प. बंगाल), भोपाल (मध्यप्रदेश), आगरा (उ.प्र.), भागलपुर, हजारीबाग, (झारखण्ड), सहरसा, मधुबनी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, वैशाली, पटना, काठमाण्डू (नेपाल), जनकपुर (नेपाल)।

मीडिया: भारत एवं नेपालक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिका सभमे सहस्राधिक रचना प्रकाशित। आकाशवाणी एवं दूरदर्शनसँ प्रायः साठ-सत्तर वार्तादि प्रसारित।

अप्रकाशित कृति सभ: १. मिथिलाक लोकसंस्कृति, २. बिहरैत बनजारा मन (रिपोर्ताज), ३.मैथिलीक गाथा-नायक, ४.कथा-लघु-कथा, ५.शोध-बोध (अनुसन्धान परक आलेख)।

व्यक्तित्व-कृतित्व मूल्यांकन: प्रो. प्रफुल्ल कुमार सिंह मौन: साधना और साहित्य, सम्पादक डॉ.रामप्रवेश सिंह, डॉ. शेखर शंकर (मुजफ्फरपुर, १९९८ई.)।

चर्चित हिन्दी पुस्तक सभ: थारू लोकगीत (१९६८ ई.), सुनसरी (रिपोर्ताज, १९७७), बिहार के बौद्ध संदर्भ (१९९२), हमारे लोक देवी-देवता (१९९९ ई.), बिहार की जैन संस्कृति (२००४ ई.), मेरे रेडियो नाटक (१९९१ ई.), सम्पादित- बुद्ध, विदेह और मिथिला (१९८५), बुद्ध और विहार (१९८४ ई.), बुद्ध और अम्बपाली (१९८७ ई.), राजा सलहेस: साहित्य और संस्कृति (२००२ ई.), मिथिला की लोक संस्कृति (२००६ ई.)।




#Article 67: प्रेमशंकर सिंह (440 words)


प्रेमशंकर सिंह 1942-

ग्राम+पोस्ट- जोगियारा, थाना- जाले, जिला- दरभंगा।मौलिक मैथिली: १.मैथिली नाटक ओ रंगमंच,मैथिली अकादमी, पटना, १९७८ २.मैथिली नाटक परिचय, मैथिली अकादमी, पटना, १९८१ ३.पुरुषार्थ ओ विद्यापति, ऋचा प्रकाशन, भागलपुर, १९८६ ४.मिथिलाक विभूति जीवन झा, मैथिली अकादमी, पटना, १९८७५.नाट्यान्वाचय, शेखर प्रकाशन, पटना २००२ ६.आधुनिक मैथिली साहित्यमे हास्य-व्यंग्य, मैथिली अकादमी, पटना, २००४ ७.प्रपाणिका, कर्णगोष्ठी, कोलकाता २००५, ८.ईक्षण, ऋचा प्रकाशन भागलपुर २००८ ९.युगसंधिक प्रतिमान, ऋचा प्रकाशन, भागलपुर २००८ १०.चेतना समिति ओ नाट्यमंच, चेतना समिति, पटना २००८। २००९ ई.-श्री प्रेमशंकर सिंह, जोगियारा, दरभंगा यात्री-चेतना पुरस्कार।
डॉ. प्रेमशंकर सिंह (१९४२- ) ग्राम+पोस्ट- जोगियारा, थाना- जाले, जिला- दरभंगा। मैथिलीक वरिष्ठ सृजनशील, मननशील आऽ अध्ययनशील प्रतिभाक धनी साहित्य-चिन्तक, दिशा-बोधक, समालोचक, नाटक ओ रंगमंचक निष्णात गवेषक, मैथिली गद्यकेँ नव-स्वरूप देनिहार, कुशल अनुवादक, प्रवीण सम्पादक, मैथिली, हिन्दी, संस्कृत साहित्यक प्रखर विद्वान् तथा बाङला एवं अंग्रेजी साहित्यक अध्ययन-अन्वेषणमे निरत प्रोफेसर डॉ. प्रेमशंकर सिंह ( २० जनवरी १९४२ )क विलक्षण लेखनीसँ एकपर एक अक्षय कृति भेल अछि निःसृत। हिनक बहुमूल्य गवेषणात्मक, मौलिक, अनूदित आऽ सम्पादित कृति रहल अछि अविरल चर्चित-अर्चित। ओऽ अदम्य उत्साह, धैर्य, लगन आऽ संघर्ष कऽ तन्मयताक संग मैथिलीक बहुमूल्य धरोरादिक अन्वेषण कऽ देलनि पुस्तकाकार रूप। हिनक अन्वेषण पूर्ण ग्रन्थ आऽ प्रबन्धकार आलेखादि व्यापक, चिन्तन, मनन, मैथिल संस्कृतिक आऽ परम्पराक थिक धरोहर। हिनक सृजनशीलतासँ अनुप्राणित भऽ चेतना समिति, पटना मिथिला विभूति सम्मान (ताम्र-पत्र) एवं मिथिला-दर्पण, मुम्बई वरिष्ठ लेखक सम्मानसँ कयलक अछि अलंकृत। सम्प्रति चारि दशक धरि भागलपुर विश्वविद्यालयक प्रोफेसर एवं मैथिली विभागाध्यक्षक गरिमापूर्ण पदसँ अवकाशोपरान्त अनवरत मैथिली विभागाध्यक्षक गरिमापूर्ण पदसँ अवकाशोपरान्त अनवरत मैथिली साहित्यक भण्डारकेँ अभिवर्द्धित करबाक दिशामे संलग्न छथि, स्वतन्त्र सारस्वत-साधनामे।

कृति-

लिप्यान्तरण-१. अङ्कीयानाट, मनोज प्रकाशन, भागलपुर, १९६७।

सम्पादन- १. गद्यवल्लरी, महेश प्रकाशन, भागलपुर, १९६६, २. नव एकांकी, महेश प्रकाशन, भागलपुर, १९६७, ३.पत्र-पुष्प, महेश प्रकाशन, भागलपुर, १९७०, ४.पदलतिका, महेश प्रकाशन, भागलपुर, १९८७, ५. अनमिल आखर, कर्णगोष्ठी, कोलकाता, २००० ६.मणिकण, कर्णगोष्ठी, कोलकाता २००३, ७.हुनकासँ भेट भेल छल, कर्णगोष्ठी, कोलकाता २००४, ८. मैथिली लोकगाथाक इतिहास, कर्णगोष्ठी, कोलकाता २००३, ९. भारतीक बिलाड़ि, कर्णगोष्ठी, कोलकाता २००३, १०.चित्रा-विचित्रा, कर्णगोष्ठी, कोलकाता २००३, ११. साहित्यकारक दिन, मिथिला सांस्कृतिक परिषद, कोलकाता, २००७. १२. वुआड़िभक्तितरङ्गिणी, ऋचा प्रकाशन, भागलपुर २००८, १३.मैथिली लोकोक्ति कोश, भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर, २००८, १४.रूपा सोना हीरा, कर्णगोष्ठी, कोलकाता, २००८।

पत्रिका सम्पादन- भूमिजा २००२

मौलिक मैथिली: १.मैथिली नाटक ओ रंगमंच,मैथिली अकादमी, पटना, १९७८ २.मैथिली नाटक परिचय, मैथिली अकादमी, पटना, १९८१ ३.पुरुषार्थ ओ विद्यापति, ऋचा प्रकाशन, भागलपुर, १९८६ ४.मिथिलाक विभूति जीवन झा, मैथिली अकादमी, पटना, १९८७५.नाट्यान्वाचय, शेखर प्रकाशन, पटना २००२ ६.आधुनिक मैथिली साहित्यमे हास्य-व्यंग्य, मैथिली अकादमी, पटना, २००४ ७.प्रपाणिका, कर्णगोष्ठी, कोलकाता २००५, ८.ईक्षण, ऋचा प्रकाशन भागलपुर २००८ ९.युगसंधिक प्रतिमान, ऋचा प्रकाशन, भागलपुर २००८ १०.चेतना समिति ओ नाट्यमंच, चेतना समिति, पटना २००८

मौलिक हिन्दी: १.विद्यापति अनुशीलन और मूल्यांकन, प्रथमखण्ड, बिहार हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, पटना १९७१ २.विद्यापति अनुशीलन और मूल्यांकन, द्वितीय खण्ड, बिहार हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, पटना १९७२, ३.हिन्दी नाटक कोश, नेशनल पब्लिकेशन हाउस, दिल्ली १९७६.




#Article 68: फिलिपिन्स (133 words)


फिलिपिन्स दक्षिण-पूर्व एसियामे अवस्थित एक देश छी । एकर आधिकारिक नाम 'फिलिपिन्स गणतन्त्र' छी आ राजधानी मनिला छी । पश्चिमी प्रशान्त महासागरमे स्थित ७,१०७ द्वीपसभ मिल ई देश बनल अछि । फिलिपिन द्वीप-समूह पूर्वमे फिलिपिन्स महासागर सँ, पश्चिममे दक्षिण चीन सागर सँ आ दक्षिणमे सेलेबस सागर सँ घेरल अछि । ई द्वीप-समूह सँ दक्षिण पश्चिममे लगभग १०० किलोमिटरक दूरी पर बोर्नियो द्वीप आ सीधा उत्तरमे ताइवान अछि । फिलिपिन्स महासागरक पूर्वी भाग पर पलाऊ अछि । 

पूर्वी एसिया में दक्षिण कोरिया आ पूर्वी टिमोरक बाद फिलिपिन्स मात्र एक एहन देश छी, जतय बसोबास करि रहल बेसी लोक बौद्ध धर्मक अनुयायी अछि । १० करोड़ सँ बेसी आबादी भेल ई विश्वक १३म् सभ सँ बेसी जनसङ्ख्या भेल देश छी । ई देश स्पेन (१५२१-१८९८) आ संयुक्त राज्य अमेरिका (१८९८-१९४६) कऽ उपनिवेश रहल छल ।




#Article 69: बच्चा झा (935 words)


सर्वतंत्र स्वतंत्र बच्चा झा 1860-1921

मधुबनी जिलांतर्गत लवाणी(नवानी) गाममे हिनकर जन्म भेलन्हि।हिनक कृति सभ अछि। 1. सुलोचन-माधव चम्पू काव्य, 2.न्यायवार्त्तिक तात्पर्य व्याख्यान, 3.गूढ़ार्थ तत्त्वलोक(श्री मदभागवतगीता व्याख्याभूत मधुसूदनी टीका पर) 4.व्याप्तिपंचक टीका 5.अवच्छदकत्व निरुक्त्ति विवेचन 6.सव्यभिचार टिप्पण 7.सतप्रतिपक्ष टिप्पण 8.व्याप्तनुगन विवेचन 9.सिद्धांत लक्षण विवेक 10.व्युत्पत्तिवाद गूढार्थ तत्वालोक 11.शक्त्तिवाद टिप्पण 12.खण्डन-ख़ण्ड खाद्य टिप्पण 13. अद्वैत सिद्धि चन्द्रिका टिप्पण 14.कुकुकाञ्जलि प्रकाश टिप्पण।
सर्वतंत्र स्वतंत्र श्री धर्मदत्त झा(बच्चा झा) (1860 ई.-1918 ई.)

मिथिला आ’ संस्कृत स्तंभमे एहि अंकमे सर्वतंत्र स्वतंत्र श्री धर्मदत्त झा जिनकर प्रसिद्धि बच्चा झाक नामसँ बेशी छन्हि, केर जीवनी द’ रहल छी।

मधुबनी जिलांतर्गत लवाणी(नवानी) गाममे हिनकर जन्म भेलन्हि। वाराणसीमे श्री विशुद्धानन्द सरस्वती आ’ बालशास्त्रीसँ शिक्षा ग्रहण करबाक बाद गाम आबि गेलाह आ’ शारदा भवन विद्यापीठक स्थापना गामेमे कएलन्हि।गुरुकुल पद्धति सँ एतय संन्यासी आ’ गृहस्थ शिक्षा ग्रहण करैत छलाह। विद्यार्थीगणक खर्चा गुरुजी उठबैत रहलाह। द्वारकाक शंकराचार्य हिनका आमंत्रित कए नव्यन्यायक अध्ययन कएलन्हि। आस्तिक आ’ नास्तिक आ’ नव्यन्यायक विद्वत्तक दृष्टिये हिनका सर्वतंत्र स्वतंत्रक उपाधि देल गेलन्हि। हिनका बच्चामे लोक बच्चा झा कहैत छलन्हि, आ’ ईएह नाम धर्मदत्त झाक अपेक्षा बेशी प्रचलित रहल। हिनक कृति सभ अछि। 1. सुलोचन-माधव चम्पू काव्य, 2.न्यायवार्त्तिक तात्पर्य व्याख्यान, 3.गूढ़ार्थ तत्त्वलोक(श्री मदभागवतगीता व्याख्याभूत मधुसूदनी टीका पर) 4.व्याप्तिपंचक टीका 5.अवच्छदकत्व निरुक्त्ति विवेचन 6.सव्यभिचार टिप्पण 7.सतप्रतिपक्ष टिप्पण 8.व्याप्तनुगन विवेचन 9.सिद्धांत लक्षण विवेक 10.व्युत्पत्तिवाद गूढार्थ तत्वालोक 11.शक्त्तिवाद टिप्पण 12.खण्डन-ख़ण्ड खाद्य टिप्पण 13. अद्वैत सिद्धि चन्द्रिका टिप्पण 14.कुकुकाञ्जलि प्रकाश टिप्पण.

महाराज लक्ष्मीश्वर सिंहक सिंहासनारोहणक बहुत दिन बाद धरि धौत परीक्षा नहि भेल छल। ई परीक्षा दरभंगा राजक संस्थापक श्री महेश ठाकुर द्वारा प्रारम्भ कएल गेल छल आ’ एहिमे मौखिक परीक्षा द्वारा श्रेष्ठ पंडितक चयन कएल जाइत छल। महाराज रमेश्वर सिंह एकर आयोजन करबओलन्हि आ’ श्री गंगानाथ झाकेँ एकर दायित्व देल गेल। श्री गंगानाथ झा परीक्षार्थीक रूपमे सेहो आवेदन कएने छलाह। महाराज परेक्षाक हेतु लिखित पद्धतिक आदेश देने छलाह। प्रश्निक नियुक्त्त भेलाह श्री बच्चा झा आ’ श्री शिव कुमार मिश्र। ई दुनू गोटे क्लिष्ट प्राश्निक आ’ कृपण परीक्षक मानल जाइत छलाह। मुदा ताहि पर श्री गंगानाथ झाकेँ 200 मे 197 अंक भेटलन्हि। महाराज पुरान परम्पराक अनुसार हिनका धोती तँ देलखिन्ह, मुदा नवीन पद्धतिक अनुसार दुशाला नहि देलखिन्ह, कारण संस्कृतक विद्वान् होयतहुँ श्री गंगानाथ झाक झुकाव अंग्रेजी दिशि छल। श्री बच्चा झा प्रकाण्ड पण्डित छलाह। महाराष्ट्र आ’ काशीक पण्डितक प्रसंगमे ओ’ कहैत छलाह जे शब्द खण्डक प्रसंगमे ओ’ सभ किछु नहि जनैत छलाह। ओहि समयमे महामहोपाध्याय दामोदर शास्त्री काशीक एकटा प्रसिद्ध वैयाकरण छलाह। विद्वान लोकनिक सुझाव पर दरभंगा महाराज गुरुधाममे एकटा पंडित सभाक आयोजन कएलन्हि। एहिमे हथुआ महाराज विशिष्ट अतिथि छलाह। काशीक सभ प्रमुख विद्वान एहिमे उपस्थित छलाह। प्रतियोगी छलाह पं.बच्चा झा आ’ म.म. दामोदर शास्त्री भरद्वाज। निर्णायक छलाह पं.कैलाश शिरोमणि भट्टाचार्या आ’ म.म.पं शिव कुमार मिश्र। एकटा सरल समस्यासँ शास्त्रार्थ प्रारम्भ भेल। एकर नैय्यायिक पक्ष लेलन्हि बच्चा झा आ’ व्याकरण पक्ष पंदामोदर शास्त्री।

दामोदर शास्त्री अपन जवाब अत्यंत सरल शब्दमे वैयाकरणिक आधार पर द’ देलन्हि। आब बच्चा झाक बेर आयल। बच्चा झा गहन परिष्कार प्रारम्भ कएलन्हि। विद्वान लोकनिमे विवाद भेलन्हि जे हुनकर प्रश्न प्रासंगिक छन्हि वा नहि। निर्णायक लोकनि एकरा प्रासंगिक मानलन्हि। जौँ-जौँ बच्चा झा आगू बढ़ैत गेलाह हुनकर उत्तर दामोदर शास्त्री आ’ निर्णायक लोकनिक हेतु अबोधगम्य होइत गेलन्हि। मध्य रात्रि तक ई चलल। अन्ततः अनिर्णीत राखि कए सभा विसर्जित भेल।

पं. रत्नपाणि झाक पुत्र केँ बच्चा झाकेँ अपर गङ्गेश उपाध्याय सेहो कहल जाइत अछि। हिनकर प्रारम्भिक अध्ययन गामे पर भेलन्हि। तकरा बाद ओ’ विश्वनाथ झासँ अध्ययनक हेतु ‘ठाढ़ी’ गाम चलि गेलाह। फेर बबुजन झा आ’ ऋद्धि झासँ न्यायदर्शनक विधिवत अध्ययन कएलन्हि। फेर धर्मदत्त झा प्रसिद्ध बच्चा झा काशी गेलाह। ओतय स्वामी विशुद्धानन्द सरस्वतीसँ मीमांसा, वेदान्तक अध्ययन कएलन्हि।

सन् 1886 ई. केर गप छी। एकटा पुष्करिणीक उद्घाटनक उत्सवमे दामोदर शास्त्री जी काशीसँ मिथिलाक राघोपुर ग्राममे निमंत्रित भेल छलाह। ओतय हुनकर शास्त्रार्थ परम्परानुसार बच्चा झाक विद्यागुरु ऋद्धि झासँ भेल छलन्हि। एहिमे ऋद्धि झा परास्त भेल छलाह। गुरुक पराजयक प्रतिशोध लेबाक हेतु सन् 1889 मे बच्चा झा काशी गेलाह। बच्चा झाक उम्र ओहि समयमे 29 वर्ष मात्र छलन्हि। ओ’ प्रायः दामोदर शास्त्रीकेँ लक्ष्य करैत छलाह, जे काशीक वैय्याकरणिक पण्डित लोकनिकेँ शब्द-खण्डक कोनो ज्ञान नहि छन्हि।बच्चा झा समस्त काशीक विद्वान् लोकनिकेँ शास्त्रार्थक हेतु ललकारा देलन्हि। दामोदर शास्त्रीसँ भेल शास्त्रार्थक वर्णन पछिला अंकमे कएल जा’ चुकल अछि। शास्त्रार्थ तीन दिन धरि चलल। ई शास्त्रार्थ सन्ध्यासँ शुरू होइत छल, आ’ मध्य रात्रि धरि चलैत छल।शास्त्रार्थक तेसर दिन दामोदर शास्त्री तर्क कएनाइ बन्न कए देलन्हि, आ’ श्रोताक रूपमे बच्चा झाक तर्क सुनैत रहलाह। पं शिवकुमार शास्त्री आ’ कैलाशचन्द्र शिरोमणि दू टा निर्णायक छलाह। शिरोमणिजीक दृष्टिमे वादी श्री बच्चा झाक पक्ष न्यायशास्त्रक दृष्टिसँ समुचित छल। शिवकुमारजीक सम्मतिमे प्रतिवादी श्री दामोदरशास्त्रीक पक्ष व्याकरणक मंतव्यानुसार औचित्यसम्पन्न छलन्हि।दुनू पण्डितक शास्त्रार्थ कलाक संस्तुति कएल गेल आ’ दुनू गोटेकेँ अपन सिद्धान्तक उत्कृष्ट व्यवस्थापनक लेल विजयी मानल गेल।

बच्चा झा गामेमे रहि कए अध्यापन करैत छलाह। मुदा महाराजाधिराज दरभंगा नरेश श्री रमेश्वरसिंहक अकाट्य आग्रहक कारणसँ मुजफ्फरपुरक धर्म समाज संस्कृत कॉलेजक प्रधानाचार्यक पद स्वीकार कएलन्हि।

मुदा एकर एकहि वर्षमे ओ’ शरीर त्याग कए देलन्हि। बच्चा झाजीकेँ समालोचकगण किछु उदण्ड आ’ अभिमानी मनबाक गलती करैत रहलाह अछि। मुदा एकटा उदाहरण हमरा लगमे एहन अछि, जाहिसँ ई गलत सिद्ध होइत अछि।

ई घटना एहन सन अछि। मुजफ्फरपुर धर्मसमाज संस्कृत विद्यालयमे बच्चा झा प्रधानाचार्य/अध्यक्ष पद पर छलाह, आ’ हुनकर शिष्य पं बालकृष्ण मिश्र ओतय प्रध्यापक छलाह। ओहि समय काशीक पण्डित-पत्रमे गंगाधर शास्त्रीक एकटा श्लोकक विषयमे बच्चा झा कहलन्हि, जे एहि श्लोकमे एकहि पदर्थ वारिधर एक बेर

मृदंग बजबय बला चेतन व्यक्त्तिक रूपमे आ’ दोसर बेर वैह अम्बुद- जवनिकारूपी अचेतन रूपमे वर्णित अछि। एतय पदार्थाशुद्धि अछि।

एहि पर हुनकर शिष्य बालकृष्ण टोकलखिन्ह- गुरुजी! एहिमे कोनो दोष नहि अछि। किएक तँ वारिकेँ धारण करए बला मेघ(वारिधर) केर स्थिति आकाशमे ऊपर होइत अछि, आ’ अम्बु(जल) केँ देबय बला मेघ (अम्बुद) केर स्थिति नीचाँ होइत अछि।अतः दुनूमे स्थानक भिन्नता अछि। वारिधर आ’ वारिद एहि दुनू शब्दसँ दू भिन्न अर्थ ज्ञात होइत अछि। ताहि हेतु एतय पदार्थक अशुद्धि नहि अछि।

ई श्लोक निम्न प्रकारे छल:-

मृदुमृदङ्गनिनादमनोहरे, ध्वनित वारिधरे चपला नटी।




#Article 70: म्यानमार (101 words)


ब्रह्मदेश, बर्मा या म्यानमार दक्षिण एसियाक एक देश छी । एकर आधुनिक बर्मी नाम 'म्यन्मा' ( မြန်မာ = म्रन्मा) छी ।बर्मी भाषामे र क उच्चारण य कएल जाइत अछि अतः सही उच्चारण म्यन्मार छी। एकर पुरान अङ्ग्रेजी नाम बर्मा छल जे एतौका सर्वाधिक बहुल बमा जातिक नाम पर राखल गेल छल । एकर उत्तरमे चीन, पश्चिममे भारत, बंगलादेश तथा हिन्द महासागर तथा दक्षिण तथा पूर्व दिशामे इन्डोनेशिया देश स्थित अछि । ई भारत एवम चीनक बीच एक रोधक राज्यक सेहो काम करैत अछि । एकर राजधानी नेपिडा आ सबसँ बड्का शहर देशक पूर्व राजधानी याङ्गुन छल, जकर पूर्व नाम रङ्गुन छल।




#Article 71: बलियाँ जिला (133 words)


बलिया जिला (, ) भारतक उत्तर प्रदेश राज्यमे एकटा जिला छि। ई जिला उत्तर प्रदेशक सभसँ पूर्वी जिला अछि । जिलाक मुख्यालय बलियाँ सहर छी ।

जिलाक प्राकृतिक सीमा घाघरा आर गंगा नदी बनाओत छी आर ई जिला दुनोंक मध्यमे त्रिभुजक आकार मे स्थित छी। बलियाँ जिलाक पूर्व मे बिहार राज्य छी आर उत्तर में देवरिया जिला, दक्खिन में गाजीपुर जिला आर पच्छिम मे मऊ जिला स्थित अछि ।

भारतक सन् २०११ क जनगणना अनुसार बलियाँ जिलाक कूल जनसङ्ख्या ३२,२३,६४२ छी जे लगभग मॉरिटानिया देसक कूल जनसंख्या क बराबर छी  आर यूऍस देसक आयवा राज्यक बराबर छी। भारतक कूल ६४० सभमे बलिया जिलाक स्थान १८०अम् अछि। जिलाक जनघनत्व  . आर २००१-२०११ दशक मे जनसंख्या वृद्धि दर १६.७३% छल।	बलियाँ जिला में लिंगानुपात ९३३ 	महिला प्रति १००० पुरुष छल, आर साक्षरता दर ७३.८२% छल।




#Article 72: बाबुराम भट्टराई (257 words)


बाबूराम भट्टराई (जन्म १ जून १९५४) एक नेपाली राजनीतिज्ञ आ जनता समाजवादी पार्टी, नेपालक सङ्घिय परिषदक अध्यक्ष छी, ओ अगस्त २०११ सँ मार्च २०१३ धरि नेपालक प्रधानमन्त्री छल। भट्टराई नयाँ शक्ति पार्टीक स्थापना सँ पहिने एकीकृत नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी माओवादी अग्रणी भूमिका निर्वाह केनिहार पार्टीक सदस्य आ नेता छल।

सन् १९९६  मे माओवादीसभ द्वारा नेपाली गृहयुद्धक शुरुआत कएने छल जकर नेपालमे राजनीतिक व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ल। एक दशक धरि चलल गृहयुद्ध जाहिमे १२००० सँ बेसी नेपाली मारल गेल आ नेपालकें राजतन्त्र  अन्त्य करि एक गणतन्त्र देश स्थापित कारबामे ओ प्रमुख भूमिका निभौने छल। भट्टराई २००८ गोर्खासँ माओवादी उमेदवारक रूपमे संविधान सभाक सदस्य चुनल गेल आ चुनाओक बाद बनल क्याबिनेटमे अर्थमन्त्री बनल।

२०११ मे भट्टराई नेपालक ३६अम प्रधानमन्त्री बनल आ मई २०१२ मे पहिल नेपाली संविधान सभा विघटनक बादमे राजनीतिक गतिरोधक रूपमे हुनका द्वारा मुख्य न्यायाधीश खिलराज रेग्मीकें अन्तरिम सरकारक प्रमुखक रूपमे प्रतिस्थापित कएने छल जिनका अभिवारा २१ जुन २०१३ मे चुनाओ सम्पन्न करबाक छल। हुनका द्वारा २६ सितम्बर २०१५ मे अपन पद आ पार्टीक सम्पूर्ण दाइत्वसभसँ त्यागपत्र देलासँ पहिने एकीकृत नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी माओवादीक स्थायी समितिक सदस्य आ एक वरिष्ठ उपाध्यक्ष छल। ओकर बाद २०१९ धरि ओ नयाँ शक्ति पार्टीक समन्वयक छल। वर्तमानमे ओ एक नवगठित पार्टी जनता समाजवादी पार्टी नेपालक सङ्घिय परिषदक अध्यक्ष छी जे पार्टी नयाँ शक्ति पार्टी नेपाल, सङ्घीय समाजवादी फोरम, नेपाल आ राष्ट्रिय जनता पार्टी नेपालक विलयसँ बनल अछि।

नेपालक मध्य पहाडी क्षेत्रमे रहल गोर्खा जिलामे बाबुराम भट्टराईक जन्म भेल हिनकर पिता भोजप्रसाद भट्टराई आ माँता धर्मकुमारी भट्टराईक ओ दोसर सन्तान छी। हुनकर एक दिदी, एक भाइ आ एक बहिन सेहो अछि।




#Article 73: बिराटनगर (548 words)


बिराटनगर नेपालक महानगरपालिका आ दोसर पैग शहर छी । नेपालक संविधान २०७२ अनुसार ई शहर नेपालक प्रदेश नं. १मे रहल कोशी अञ्चल अन्तर्गत मोरङ जिलाक दक्षिण भागमे अवस्थित अछि । ई नेपालक सबसँ पैग औद्योगिक नगर आ उद्योगिक राजधानी सेहो छी । ई नगर तथा आसपासक क्षेत्रमे बहुतेक सङ्ख्यामे कारखाना, उद्योग तथा व्यवसायसभ अछि । बिराटनगर एक पारवहन तथा वाणिज्य केन्द्र सेहो छी । एतयसँ भारत तथा तेसर राष्ट्रसँ व्यापारिक सामानसभ आयात निर्यात होइत अछि । नेपालक जनगणना २०११ अनुसार जनसङ्ख्याक आधारमे विराटनगर, नेपालक चारिम पैग शहर आ जनघनत्वक आधारमे दोसर पैग शहर छी । ई शहर काठमाडौंसँ ३९९ किमी पूर्वमे आ भारतक बिहार राज्यसँ ६ किमी उत्तरमे अवस्थित अछि । बिराटनगरके सन् २०१७ मई २२ कऽ दिन वीरगञ्ज सङ्गे महानगरपालिका घोषित कएल गेल छल । ई शहरके महानगरपालिका घोषित करैत काल टङ्किसिनवारी आ जहदा-३ मिलाएल गेल छल जहिसँ बिराटनगरक जनसङ्ख्या २,१४,६६३ सँ २,४२,५४८ पहुँचल अछि ।

ई शहरमे पौराणिक कालक विराट राजाक दरवार आ राजधानी रहल आ हुनकरे नामसँ विराटनगरक नाम रहल विश्वास कएल जाइत अछि । वि.सं. १९७५ धरि ई ठाम गोग्राहा कऽ नामसँ जानल जाइत छल । विराटनगरक पुरान नाम गोग्राहा छी । वि.स. १९७१ मे वडाहाकिम जित बहादुर खत्री बिराटनगर शहरक परिकल्पना करि मोरङ जिलाक सदरमुकाम रङ्गेलीसँ सरकारी गोश्वारा, माल, अमिन, वनजाँच, चिट्ठी, अडिटर, जेल आ अस्पताल बिराटनगर स्थानान्तरण केनए छल मुदा एकर नामाकरण शिकार खेलैलेल काठमाडौंसँ मोरङ आएल केशर शम्सेर जबरा केनए छल । अपन मोरङ दौडाहाक समयमे भेडियारीमे भेटल विराट राजाक दरवारक भग्नावशेषक दृष्टिगत करि केशर शम्सेर गोग्राहासँ विराटनगर नामाकरण केनए छल । वि.सं.१९७१ मे रङ्गेलीसँ विराटनगरमे जिला सदरमुकाम (तत्कालिन गौडा) आनलाक बाद विराटनगर शहरक स्वरूप परिवर्तित होमए लागल । बडाहाकिम खत्रीके उत्तराधिकारी कर्णेल शिवप्रताप शमशेर थापा विराटनगर निर्माणमे अपन सम्पूर्ण योगदान देनए छल । बिराटनगरमे कृष्णप्रसाद कोइराला, भारतीय मारवाडीसभ बोलाए व्यापारिक वातावरण बनेनाए छल । कृष्णप्रसाद कोइराला, सुब्बा गुञ्जमान, डिट्ठठा कृष्णराज, हनुमानदास, सुब्बा कालिदास, सुबेदार अनन्तराम कऽ विशेष योगदानसँ वि.सं. १९७२ मे सदरमुकाम बिराटनगर आएल छल ।बिराट शब्दक अर्थ पैग आ नगर शब्दक अर्थ शहर होइत अछि । 

नेपालक भूभाग बिराटनगरमे पहिल राणा बिरोधी आन्दोलनक आरम्भ सन् १९४७ मार्च ४ कऽ दिन विराटनगर जुट मिल हड़तालक रुपमे भेल जकर नेतृत्व मिलक कर्मचारी बनि गिरिजाप्रसाद कोइराला तारणी प्रसाद कोइराला, मन मोहन अधिकारी आ युवराज अधिकारी केनए छल ।किछ दिन बाद ई आन्दोलनमे विश्वेश्वरप्रसाद कोइराला जुड़ल आ आन्दोलन वृहत बनाए नेपालसँ राणा शासनक अन्त केलक ।

बिराटनगरसँ काठमाडौं आ नेपालक अन्य शहरसभ हवाई आ सड़क यातायातसँ जुडल अछि । बिराटनगर विमानस्थलसँ पूर्वी नेपालक पहाडी दुर्गम स्थानसभ आ नेपालक मुख्य शहरसभधरि हवाई सम्पर्क अछि । यातायातक मुख्य केन्द्रक रूपमे रहल बिराटनगर शहरक दक्षिणी सिमाना भारतक अररिया जिलाक जोगबनीमे वि.सं. १९६८ सँ रेल सेवा सञ्चालन होमए लागल ।

बिराटनगरक अधिकतम तापक्रम  सन् १९९२ अप्रैल १४ कऽ दिन तापमान कएल गेल छल आ न्यूनतम तापक्रम  सन् १९७० दिसम्बरमे तापमान कएल गेल छल ।

बिराटनगर शहर समुन्द्र सतहसँ ७० मिटर (२२९ फिट) उपर अछि ।

नेपालक वि.सं. २०६८ कऽ जनगणना अनुसार बिराटनगरक जनसङ्ख्या २,४२,५४८ रहल अछि ।जाहिमे पुरुष ५३% आ महिला ४७% अछि । ई शहरमे नेपालक प्राय: सब जातजातिक लोकसभक बसोबास अछि । बि.सं. २०५८ कऽ जनसङ्ख्याक अनुसार बिराटनगरक जनसङ्ख्या करिब २ लाख देखल गेल अछि । नेपालक भौगोलिक रूपसँ बिराटनगर तराईक गर्मी क्षेत्र रहलाक बादो जनघनत्व बहुत बेसी अछि ।

बिराटनगर पूर्वाञ्चलक शैक्षिक केन्द्रक रूपमे देखल जाइत अछि । पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय सहित मेडिकल कलेज आ इन्जीनियरिङ कलेज लगायत बहुतेक शैक्षिक संस्थासभ बिराटनगरमे स्थापित अछि ।




#Article 74: बिल गेट्स (100 words)


विलियम हेनरी बिल गेट्स (जन्म २८ अक्टुबर १९५५) एक अमेरिकी व्यापारी, आविष्कारक आ माइक्रोसफ्ट कम्पनीक संस्थापक अध्यक्ष अछि। बिल गेट्सक मातापिता विलियम गेट्स आ मेरी म्याक्सवेल गेट्स छी । ओ पल एलेनक संग सफ्टवेयर कम्पनी माइक्रोसफ्टक स्थापना केनए छल । ओ अध्यक्षक रूपमे छल । एक परोपकारधर्मी आ प्रभावशाली अमेरिकी व्यवसायी तथा विश्वमे पहिल धनवान व्यक्ति (सन् २०१६ अनुसार) छी । गेट्स अपन करियरक दौरान माइक्रोसफ्टमे सिइओ आ मुख्य सफ्टवेयर वास्तुकार पद पर रहल आ ओ अखन माइक्रोसफ्टक साधारण पुँजीक ९ प्रतिशतसँ बेसीक हिस्सेदारी लऽ सबसँ बेसी व्यक्तिगत शेयरधारक छी । गेट्स किताब लेखक आर सह-लेखक समेत रहल अछि ।

 




#Article 75: बिहार (900 words)


बिहार भारतक एक प्रशासनिक राज्य छी। ई राज्यक राजधानी आ सभ सँ पैग शहर पटना छी। बिहारक उत्तरमे नेपाल, पूर्वमे पश्चिम बङ्गाल, पश्चिममे उत्तर प्रदेश आ दक्षिणमे झारखण्ड स्थित अछि। बिहार नामक प्रादुर्भाव सम्भवत: बौद्ध बिहारसभक बिहार शब्द सँ बनल अछि। ई क्षेत्र गङ्गा नदी आ सहायक नदीसभक उपजाऊ मैदानमे बसल अछि।प्राचीन काल में विशाल साम्राज्यक गढ़ रहल ई प्रदेश, वर्तमान में देशक अर्थव्यवस्थाक [1] सब सँ पिछड़ल योगदाता म स एगो अछि

सन् 1936 और 2000 म ओडिशा और झारखण्ड के अलग भ गेला सँ ई खेती बाड़ी आ अपन मेधाक क दम पर उन्नैत क रहल हाँ। देशक प्रतिष्ठित परीक्षा जेना आई आई टी आ यूपीएससी सन भीरौहगर परीक्षा मे हरेक बेर एतुक्का विद्यार्थी बिहारक मान-सम्मान बढ़बैत रहैत छैथ। हिनकर सभक निष्ठा आ गौरवशाली इतिहास बिहार क एक बेर फेर सँ सुन्दर आ सुशील बनेता।

क्षेत्रफलक दृष्टि सँ 12वाँ राज्य भ गेल हँ।

इतिहास
मुख्य लेख: बिहारक इतिहास
बिहार म प्राचीन म कय गो न राज्य छल जाहि में मिथिला आ बाद में मगध सबसों प्रसिद्ध छल। जेकर राजधानी प्राचीन म राजगीर छल, जेकर ऐतिहासिक नाम राजगृह छी। बिहारक नव राजधानी पटनाक पुरनका नाम पाटलिपुत्र छी। मगध सम्राज्य केर महा प्रतापी राजा जरासंध छलाह।

प्राचीन काल
मुख्य लेख: बिहारक प्राचीन इतिहास
सारण जिलाक गंगा क उत्तर भाग म चिरांद, नवपाषाण युग (लगभग 2500-1345 ईसा पूर्व) सँ एगो पुरातात्विक रिकॉर्ड अछि। बिहारक क्षेत्र जेना-मगध, मिथिला और अंग- धार्मिक ग्रंथ आ प्राचीन भारतक महाकाव्य म वर्णित अछि।

मिथिलाक पहली बेर इंडो-आर्यन लोग सब विदेह साम्राज्यक स्थापना केलाक बाद प्रतिष्ठा प्राप्त भेल।  वैदिक काल (सी। 1100-500 ईसा पूर्व) म, विदेह् दक्षिण एशियाक प्रमुख राजनीतिक आ सांस्कृतिक केंद्र म स एगो बनि गेल छल, कुरु आ पंकलाक संग। विदेह साम्राज्यक राजा एत जनक कहबैत छलाह। मिथिलाक जनकक पुत्री छलिह सीता जिनकर वाल्मीकि द्वारा लिखल गेल हिंदू महाकाव्य, रामायण म भगवान रामक पत्नी कय रूप म वर्णित अछि। बाद में विदेह राज्यक वाजिशि नगर म अपन राजधानी छल जे वज्जि समझौता म शामिल भ गेल, मिथिले म अछि। वज्जिक पास एगो रिपब्लिकन शासन छल जत राजा प्रजाक बहुमत सँ बनाओल गेल छल। जैन धर्म आ बौद्ध धर्म सँ संबंधित ग्रंथ म मिलल जानकारीक अनुस्वार पर, वज्जि क 6 वीं शताब्दी ईसा पूर्व सँ गणराज्य कय रूप म स्थापित कयल गेल छल, गौतम बुद्धक जन्म सँ पहिले 563 ईसा पूर्व म, ई दुनियाक पहिल गणतंत्र छल। जैन धर्मक अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीरक जन्म वैशाली म भेल छल।

आधुनिक-पश्चिम पश्चिम बिहारक क्षेत्र म मगध 1000 सालक लेल भारत म शक्ति, शिक्षा आ संस्कृतिक केंद्र बनल। 684 ईसा पूर्व में स्थापित हरयंक वंश, राजगढ़ (आधुनिक राजगीर) के शहर सँ मगध पर शासन केलाह। अयि वंशक दु गो प्रसिद्ध राजा बिंबिसार आ हुनकर बेटा अजातशत्रु छल, जे अपनहि बापक सिंहासन पर बैसबाक लेल कैद क लेने छलाह। अजातेशत्रु पाटलिपुत्र शहरक स्थापना केलैथ जे बाद म मगधक राजधानी बनि गेल।  हिरुआँ वंशक बाद शिशुनाग वंशक पीछा कयलेन । बाद म नंदवंश बंगाल सँ पंजाब तक पसरल विशाल साम्राज्य पर शासन कयलनि।

भारतक पहिल साम्राज्य, मौर्य साम्राज्य द्वारा नंदवंश क बदैल देल गेल छल। मौर्य साम्राज्य आ बौद्ध धर्मक अहि क्षेत्र म विस्तार भ रहल छल जे आबक आधुनिक बिहार बना देलक। 325 ईसा पूर्व म मगध सँ उत्पन्न मौर्य साम्राज्य क चंद्रगुप्त मौर्य  स्थापित केने छलाह, जिनकर मगध म जन्म भेल छलानि। हिनकर पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) म राजधानी छलानि। मौर्य सम्राट, अशोक, जे पाटलीपुत्र (पटना) म जन्म लेने छलाह, ओ दुनियाक इतिहास म सबसौं पैघ शासक मानल जाय छैथ।

मध्यकाल	
मुख्य लेख: बिहारक मध्यकालीन इतिहास
मगध म बौद्ध धर्म मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजीक आक्रमणक वजह सँ गिरावट म पडि गेल, ओहि समय   नालंदा आ विक्रमशिला केर प्रसिद्ध विश्वविद्यालय क नष्ट क दैल गेल। ई दावा कयल गेल कि 12 वीं शताब्दी म हजारो बौद्ध भिक्षु क हत्या भेल छल। डी.एन. झा सुझाव दैत छैथ, ई घटना सर्वोच्चताक लेल लड़ाई म बौद्ध ब्राह्मणक झगड़ा क परिणाम छल। 1540 म, महान पस्तीसक मुखिया, सासाराम केर शेर शाह सूरीक, सम्राट हुमायूंक मुगल सेना क हराक मुगल स उत्तर भारत ल ललेने छलाह। शेर शाह अपन राजधानी दिल्ली क बनौलएथ आ 11 वीं शताब्दी सँ ल क 20 वीं शताब्दी तक, मिथिला पर विभिन्न स्वदेशीय राजवंश सभ शासन केलाह। अहि में सँ पहिल, कर्नाट, अनवर राजवंश, रघुवंशी आ अंततः राज दरभंगा केर बाद। अयि अवधि कय दौरान मिथिलाक राजधानी दरभंगा म स्थानांतरित कयल गेल छल।

आधुनिक काल
मुख्य लेख: बिहार का आधुनिक इतिहास

भौगोलिक स्थिति
मुख्य लेख: बिहारक भूगोल

उत्तर भारत म 24°20'10 ~ 27°31'15 उत्तरी अक्षांश आ 83°19'50 ~ 88°17'40 पूर्वी देशांतर केर बीच बिहार एगो बहु भाषी राज्य छी। राज्यक कुल क्षेत्रफल 94,163 वर्ग किलोमीटर अछि जाहि म 92,257.51 वर्ग किलोमीटर ग्रामीण क्षेत्र अछि। झारखंड केर अलग भ गेलक बाद बिहारक भूमि मुख्यतः नदि केर मैदान आ कृषियोग्य समतल भूमि अछि। गंगाक पूर्वी मैदान म स्थित अयि राज्यक औसत ऊँचाई १७३ फीट अछि। भौगोलिक तौर पर बिहारक तीन प्राकृतिक विभागो मे बाँटल जा य- उत्तरक पर्वतीय आ तराई भाग, मध्यक विशाल मैदान आ दक्षिणक पहाड़क किनारा।
उत्तरक पर्वतीय प्रदेश सोमेश्वर श्रेणीक हिस्सा अछि। अयि श्रेणीक औसत उचाई 455 मीटर अछि परन्तु एकर सबसौ उँच शिखर 874 मीटरक अछि। सोमेश्वर श्रेणी केर दक्षिण म तराई क्षेत्र अछि।
मध्यवर्ती विशाल मैदान बिहारक 95% भाग अछि। 

गंगा नदी राज्यक लगभग बीचों-बीच बहैत अछि। उत्तर बिहार बागमती, कोशी, बूढी गंडक, गंडक, घाघरा क समतल मैदान अछि। सोन, पुनपुन, फल्गू तथा किऊल नदी बिहार म दक्षिण सँ गंगा में मिलैत अछि।

भाषा और संस्कृति	
हिंदी, मैथिली, भोजपुरी, मगही, उर्दू आ अंगिका एतक प्रमुख भाषा अछि। बिहारक संस्कृति मगध, अंग, मिथिला आ वज्जी संस्कृतिक मिश्रण अछि।




#Article 76: ब्रुनेई (101 words)


ब्रुनेई ( ), आधिकारिक रूपमे ब्रुनेई, एक शान्त राष्ट्र (, जावी: ), दक्षिणपूर्व एसियामे बोर्नियो टापुक उत्तरी तटपर अवस्थित एक देश छी । ब्रुनेई एक राजतन्त्रात्मक (सल्तनत) देश छी । पहिने ब्रुनेई एक समृद्ध मुस्लिम सल्तनत छल जकर प्रभाव सम्पूर्ण बोर्नियो तथा फिलिपिन्सक किछ भागधरि फैलल छल । सन् १८८८ मे ई राष्ट्र ब्रिटिशसभक संरक्षणमे आबि गेल आ सन् १९४१ मे जापानीसभ ई राष्ट्रपर अपन अधिकार कायम करि लेलक । सन् १९४५ मे ब्रिटेन एकरा मुक्त करि पुन: अपन संरक्षणमे लऽ लेलक । सन् १९७१ मे ब्रुनेईकें आन्तरिक स्वशासनक अधिकार भेटल । सन् १९८४ मे एकरा पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त भेल ।




#Article 77: भक्तपुर जिला (239 words)


भक्तपुर (भादगाउँ वा ख्वःप) नेपालक प्रदेश नं. ३मे अवस्थित एक प्राचीन शहर छी जे काठमाडौं उपत्यकाक पूर्वी भागमे अवस्थित अछि । क्षेत्रफलक हिसाबसँ भक्तपुर जिला नेपालक सभसँ छोट जिला छी । मध्यपुर (थिमी) नगरपालिका सेहो एहि जिलामे अवस्थित अछि । भक्तपुर जिला भादगाँउले टोपी आ जुजु धौ नामक स्थानीय दहीक परिकारक लेल प्रसिद्ध अछि । भक्तपुरमे ख्वःप कलेज आ ख्वःप इन्जिनियरिङ्ग कलेजसभ अछि जे भक्तपुर नगरपालिकासँ सञ्चालन करैत अछि ।

ई जिलाक ऐतिहासिक पृष्ठभूमितर्फ देखैसँ भक्तपुरक नामाकरण सम्बन्धमे विभिन्न शिलालेख आ प्रमाणसभक आधारमे विश्लेषण करैसँ लिच्छवीकालीन राजा मानदेवक पालामे देवपाटनमे रहल रत्न संघक अभिलेखमे खोपाङ्ग ग्रामक उल्लेख भेल अछि तँ भक्तपुरक खलाछें टोलमे भेल अभिलेखमे खृपाङ्ग ग्राम उल्लेख भेल अछि। एहिक आधारमे भक्तपुरक ख्वप आ खोप कहिक चलन चलल से अनुमान अछि। जे चलन हालधरि सेहो नेवारी भाषामे यद्यपि अछि। दोसर ऐतिहासिक प्रमाण अनुसार बि.सं. १९९२ धरि भक्तपुर नगरक भद्रगाउँ कहिक नाम प्रचलनमे रहल देखल जाइत अछि। ई भद्रग्राम शव्दक आधारमे भादगाउँ रहल गेल अछि सेहो कहिक अनुमान कएल गेल अछि।

भक्तपुरमे विभिन्न देवदेवीसभक देवालय मन्दिर मठ तिर्थस्थलसभ सेहो देखल जाईत अछि आ मन्दिरमे लिखल गेल नेपाली शैलीक कलात्मक कौशल एवं सांस्कृतिक आ धार्मिक भावनामे ओतप्रोत भेल आ भक्तपुरक वासिन्दा बहुतरासमे धर्मात्मा भेल आ राणा प्रधानमन्त्री जुद्ध शम्शेरसभ साविक नाम भादगाउँक सट्टा भक्तसभक पुर अर्थात शहर भक्तपुरक नामाकरण सेहो देखल जाएत अछि।

भक्तपुर दरबार क्षेत्र, नगरकोट, चाँगुनारायण मन्दिर, सूर्यविनायक मन्दिर, ठिमी, राधे राधे

निर्वाचन आयोग (नेपाल)द्वारा निर्धारण कएल गेल, जिलागत निर्वाचन क्षेत्र अन्तर्गत  कऽ नक्सा नीचा देल गेल अछि। 




#Article 78: भवनाथ झा (332 words)


भवनाथ झा क जन्म 23 सितम्बर, 1968 ई. मे बिहारक वर्तमान मधुबनी जिला में झंझारपुर प्रखण्ड मे हटाढ रुपौली नामक गाम मे पगुलिवार बढियाम मूल मे भेल। हिनक पिता पं. अमरनाथ झा संस्कृत व्याकरण आ साहित्यक पारम्परिक विद्वान् रहथि। हिनक माताक नाम योगेश्वरी देवी छन्हि। पं. झाक जेठ भाय पं. शम्भुनाथ झा सेहो संस्कृत साहित्यक प्रख्यात विद्वान् एवं शिक्षक छथि।

शिक्षा

भवनाथ झा क प्रारम्भिक शिक्षा लक्ष्मीश्वर एकेडमी, सरिसब पाही मे भेल। ओतए सँ 1983 ई में माध्यमिक शिक्षा प्राप्त कए ई जगदीश नन्दन महाविद्यालय, मधुबनी सँ विज्ञान विषय मे अन्तर-स्नातक तथा रामकृष्ण महाविद्यालय, मधुबनी मे इतिहास, अंग्रेजी आ संस्कृत विषय सँ स्नातकक अध्ययन कएल। संस्कृत मे स्नातक प्रतिष्ठाक अध्ययन करबाक लेल ई महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह महाविद्यालय चुनलनि, जतए पं. रामजी ठाकुर, पं. विश्वेश्वर झा आदि प्रख्यात विद्वान् अध्यापक रहथि। संग-संग हिनका अपन पिताक सान्निध्य सेहो अपन गाम मे भेटलनि। एकर बाद ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालयक स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग, दरभंगा मे अपन समयक प्रख्यात समस्कृत विद्वान् पं. त्रिलोकनाथ झा, पं, रामजी ठाकुर, पं. चण्डेश्वर झा, पं, शक्तिधर झा, पं. कालिकादत्त झा, पं. श्रीवर्द्धन ठाकुर आदिक साहचर्य भेटलनि। एतए सँ 1990 क सत्र मे 1992 मे संस्कृत मे स्नातकोत्तर प्रथम श्रेणी मे उत्तीर्ण भए दरभंगा एवं अपन गाम मे रहैत स्वाध्याय कएलनि तथा 1995 ई मे कामेश्वर सिंह दरभंगा विश्वविद्यालय सँ साहित्याचार्य मे प्रथम श्रेणी मे उत्तीर्ण भेलाह।

साहित्य-साधना

मैथिली

संस्कृत

सम्पादन-कार्य

एकर अतिरिक्त ‘धर्मायण’ पत्रिका मे सेहो जानकी-स्तवराज, सोमवारीव्रतकथा आदिक हिन्दी अनुवाद कए प्रकाशित कएल। 

प्राचीन पाण्डुलिपि सँ सम्पादन

ई मिथिलाक्षरक अनेक पाण्डुलिपिक वाचन सेहो कएने छथि। अपन पिता सँ एहि विधाक मौलिक शिक्षा प्राप्त कएल आ एहि क्षेत्र मे हिनका पं. शशिनाथ झा आ पं. गोविन्द झाक मार्गदर्शन भेटलन्हि। संस्कृतक अध्येता रहबाक कारणें कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय आ मिथिला शोध संस्थानक लेल विभिन्न संस्कृतक पाण्डुलिपिक वाचन सेहो कएल। संगहिं हिनक संपादन मे निम्नलिखित संस्कृत ग्रन्थ एखनि धरि प्रकाशित अछिः-

कार्यशाला
फरवरी 2015 ई. मे राष्ट्रीय अनुवाद मिशनक अनुवाद कार्यशाला (मैसूर) तथा जून 2015 ई. मे राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन क कार्यशाला (तिलका माँझी विश्वविद्यालय, भागलपुर) में संसाधन-पुरुषक रूप में भाग लेलनि।




#Article 79: भवप्रीतानन्द ओझा (129 words)


भवप्रीतानन्द ओझा (1886-1970) 

भवप्रीतानन्द ओझा के जन्म  1886 ईस्वी  की अश्विन महीने के नौवें दिन वैद्यनाथ धाम के पास कुंडा गाँव में त्रिपुरानंद ओझा के सबसे बड़े पुत्र के रूप में हुआ था। उन्होंने  कम अत्यंत कम उम्र में अपने पिता को खो दिया था। भवप्रीतानन्द  संस्कृत ,हिंदी,बंगाली,ब्रजबुलि और रामायण, महाभारत, पुराण आदि में पारंगत थे। [ काशीपुरनरेश (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल ) ज्योतिप्रसाद सिं देउ उनकी पृष्ठपोषक थे।  अपुत्रक भवप्रीतानन्द ने पश्चिम बंगाल की बोराम गांव के शिरोमणि हाजरा को दत्तक पुत्र के रूप में  को गोद लिया था, बाद में जिसकी पहल पर  भवप्रीतानन्द की झुमर रसमंजरी  प्रकाशित हुई। 1970 के 15 मार्च भवप्रीतानंद का देहांत हुआ। 1970 को हुआ था। 

भवप्रीतानन्द बाबा बैद्यनाथ मंदिर मंदिर के नौवें सरदार पंडा थे। उनके उत्तराधिकार के मामला न्यायालय तक गया। 




#Article 80: भारत (264 words)


भारत (, अङ्ग्रेजी: इन्डिया, ) (आधिकारिक नाम: गणतन्त्र भारत ) दक्षिण एशियामे अवस्थित भारतीय उपमहाद्वीपक सभसँ पैग देश छी । पूर्ण रूपसँ उत्तरी गोलार्धमे स्थित भारत, भौगोलिक दृष्टिसँ विश्वमे सातम सभसँ पैग आ जनसङ्ख्याक दृष्टिकोणसँ दोसर सभसँ पैग देश छी । भारतक पश्चिममे पाकिस्तान, उत्तर-पूर्वमे चीन, नेपाल आ भुटान, पूर्वमे बंगलादेश आ म्यानमार स्थित अछि । हिन्द महासागरमे एकर दक्षिण पश्चिममे माल्दिभ्स, दक्षिणमे श्रीलंका आ दक्षिण-पूर्वमे इन्डोनेसियासँ भारतक सामुद्रिक सीमा छुबैत अछि । एकर उत्तरक भौतिक सीमा हिमालय पर्वतसँ आ दक्षिणमे हिन्द महासागरसँ छुबैत अछि । पूर्वमे बङ्गालक खाड़ी अछि तथा पश्चिममे अरब सागर अछि ।

प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता, व्यापार मार्गसभ आ वृहत साम्राज्यसभक विकास-स्थान रहल भारतीय उपमहाद्वीप एकर सांस्कृतिक आ आर्थिक सफलताक लम्बा इतिहासक लेल जानल जाइत रहल अछि । चारि प्रमुख सम्प्रदायसभ: हिन्दू, बौद्ध, जैन आ सिख धर्मसभक एहि ठाम उदय भेल, पारसी, यहुदी, इसाई आ मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दीमे एतय पहुचल आ एतय  विविध संस्कृतिकें नव रूप देलक । क्रमिक विजयसभक परिणामस्वरूप ब्रिटिश इस्ट इन्डिया कम्पनी १८हम आ १९अम शताब्दीमे भारतक अधिकतर हिस्सासभकें अपन राज्यमे मिलाए लेलक । सन् १८५७ कऽ विफल विद्रोहक बाद भारतक प्रशासनिक भार ब्रिटिश सरकार अपन उपर लऽ लेलक । ब्रिटिश भारतक रूपमे ब्रिटिश साम्राज्यक प्रमुख अङ्ग भारत, महात्मा गान्धीक नेतृत्वमे एक लम्बा आ मुख्य रूपसँ अहिंसक स्वतन्त्रता सङ्ग्रामक बाद १५ अगस्त १९४७कें आजादी पाबलक । सन् १९५० मे लागू भेल नव संविधानमे एकरा सार्वजनिक वयस्क मताधिकारक आधार पर स्थापित संवैधानिक लोकतान्त्रिक गणतन्त्र घोषित करि देल गेल आ युनाइटेड किङ्गडमक तर्ज पर वेस्टमिनिस्टर शैलीक संसदीय सरकार स्थापित कएल गेल । एक सङ्घीय राष्ट्र, भारतकें २९ राज्य आ ७ सङ्घ शासित प्रदेशसभमे गठित कएल गेल अछि । 




#Article 81: भालचन्द्र झा (386 words)


भालचन्द्र झा

ए.टी.डी., बी.ए., (अर्थशास्त्र), मुम्बईसँ थिएटर कलामे डिप्लोमा। मैथिलीक अतिरिक्त हिन्दी, मराठी, अग्रेजी आ गुजरातीमे निष्णात। १९७४ ई.सँ मराठी आ हिन्दी थिएटरमे निदेशक। महाराष्ट्र राज्य उपाधि १९८६ आ १९९९ मे। आइ.एन.टी. केर लेल नाटक “सीता” क निर्देशन। “वासुदेव संगति” आइ.एन.टी.क लोक कलाक शोध आ प्रदर्शनसँ जुड़ल छथि आ नाट्यशालासँ जुड़ल छथि विकलांग बाल लेल थिएटरसँ। निम्न टी.वी. मीडियामे रचनात्मक निदेशक रूपेँ कार्य।लेखन-बीछल बेरायल मराठी एकांकी(अनुवाद), सिंहावलोकन (मराठी साहित्यक १५० वर्ष), आकाश (जी.टी.वी.क धारावाहिकक ३० एपीसोड), जीवन सन्ध्या( मराठी साप्ताहिक, डी.डी, मुम्बई), धनाजी नाना चौधरी (मराठी), स्वयम्बर (मराठी), फिर नहीं कभी नहीं( हिन्दी), आहट (हिन्दी), यात्रा ( मराठी सीरयल), मयूरपन्ख ( मराठी बाल-धारावाहिक), हेल्थकेअर इन २०० ए.डी.) (डी.डी.)।२००९ मे- भालचन्द्र झा (बीछल बेरायल मराठी एकाँकी- सम्पादक सुधा जोशी आ रत्नाकर मतकरी, मराठी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार।
भालचन्द्र झा, ए.टी.डी., बी.ए., (अर्थशास्त्र), मुम्बईसँ थिएटर कलामे डिप्लोमा। मैथिलीक अतिरिक्त हिन्दी, मराठी, अग्रेजी आऽ गुजरातीमे निष्णात। १९७४ ई.सँ मराठी आऽ हिन्दी थिएटरमे निदेशक। महाराष्ट्र राज्य उपाधि १९८६ आऽ १९९९ मे। थिएटर वर्कशॉप पर अतिथीय भाषण आऽ नामी संस्थानक नाटक प्रतियोगिताक हेतु न्यायाधीश। आइ.एन.टी. केर लेल नाटक “सीता” केर निर्देशन। “वासुदेव संगति” आइ.एन.टी.क लोक कलाक शोध आऽ प्रदर्शनसँ जुड़ल छथि आऽ नाट्यशालासँ जुड़ल छथि विकलांग बाल लेल थिएटरसँ। निम्न टी.वी. मीडियामे रचनात्मक निदेशक रूपेँ कार्य- आभलमया (मराठी दैनिक धारावाहिक ६० एपीसोड), आकाश (हिन्दी, जी.टी.वी.), जीवन संध्या (मराठी), सफलता (रजस्थानी), पोलिसनामा (महाराष्ट्र शासनक लेल), मुन्गी उदाली आकाशी (मराठी), जय गणेश (मराठी), कच्ची-सौन्धी (हिन्दी डी.डी.), यात्रा (मराठी), धनाजी नाना चौधरी (महाराष्ट्र शासनक लेल), श्री पी.के अना पाटिल (मराठी), स्वयम्बर (मराठी), फिर नहीं कभी नहीं( नशा-सुधारपर), आहट (एड्सपर), बैंगन राजा (बच्चाक लेल कठपुतली शो), मेरा देश महान (बच्चाक लेल कठपुतली शो), झूठा पालतू(बच्चाक लेल कठपुतली शो),

टी.वी. नाटक- बन्दी (लेखक- राजीव जोशी), शतकवली (लेखक- स्व. उत्पल दत्त), चित्रकाठी (लेखक- स्व. मनोहर वाकोडे), हृदयची गोस्ता (लेखक- राजीव जोशी), हद्दापार (लेखक- एह.एम.मराठे), वालन (लेखक- अज्ञात)।

लेखन-

बीछल बेरायल मराठी एकांकी, सिंहावलोकन (मराठी साहित्यक १५० वर्ष), आकाश (जी.टी.वी.क धारावाहिकक ३० एपीसोड), जीवन सन्ध्या( मराठी साप्ताहिक, डी.डी, मुम्बई), धनाजी नाना चौधरी (मराठी), स्वयम्बर (मराठी), फिर नहीं कभी नहीं( हिन्दी), आहट (हिन्दी), यात्रा ( मराठी सीरयल), मयूरपन्ख ( मराठी बाल-धारावाहिक), हेल्थकेअर इन २०० ए.डी.) (डी.डी.)।

थिएटर वर्कशॉप- कला विभाग, महाराष्ट्र सरकार, अखिल भारतीय मराठी नाट्य परिषद, दक्षिण-मध्य क्षेत्र कला केन्द्र, नागपुर, स्व. गजानन जहागीरदारक प्राध्यापकत्वमे चन्द्राक फिल्मक लेल अभिनय स्कूल, उस्ताद अमजद अली खानक दू टा संगीत प्रदर्शन।

श्री भालचन्द्र झा एखन फ़्री-लान्स लेखक-निदेशकक रूपमे कार्यरत छथि।




#Article 83: भुटान (113 words)


भुटान दक्षिण एसियामे अवस्थित एउटा छोट देश छी । एकर दक्षिण, पूर्व आ पश्चिममे भारत आ उत्तर दिशामे गणतन्त्र चीनक तिब्बत सँ सीमा जुड़ल अछि । भुटानक दक्षिणमे भारत अछि आ उत्तरमे चीन स्वशासित राज्य तिब्बत। भुटानीसभ अपन देश भुटानकें  स्थानीय नाम द्रुक यू अर्थात ड्रयागनक देश कहैत अछि । ई देश मुख्यतः पहाडी अछि आ मात्र दक्षिणी भागमे किछ समतल भूमि अछि । सांस्कृतिक आ धार्मिक रूपमे भुटान तिब्बत आ नेपालक सांस्कृति सँ जुड़ल अछि । भुटान सन् १६४४ मे वर्तमान राजासभक पुर्खा शाब्द्रुङ ङावाङ नामग्यालके स्थापना केनए छल । भुटानक आधिकारिक भाषा जोङ्खा छी मुदा एतय अन्य बहुत रास भाषासभ सेहो बाजल जाएत अछि । भुटानमे नेपालीभाषीसभक सेहो बाहुल्यता अछि ।




#Article 84: मऊ जिला (132 words)


मऊ जिला भारतक उत्तर प्रदेश राज्यक आजमगढ मण्डल मे एकटा जिला छी । जिलाक मुख्यालय मऊ सहर अछि । ई आजमगढ अउर बलिया जिला से अलग होके बनल अछि।

मऊ जिलाक उत्तर मे गोरखपुर आर देवरिया, पूर्व में बलियाँ, दक्खिन मे गाजीपुर आर पच्छिम ओर आजमगढ जिला स्थित छी ।

भारतक सन् २०११ क जनगणना अनुसार मऊ जिलाक कूल जनसङ्ख्या २२,०५,१७०, जे मे ११,१४,८८८ पुरुष आर १०,९०,२८२ महिला छल। २००१ क जनगणना मे, मऊ जिलाक कूल जनसङ्ख्या १८,५३,९९७ छल, ९,३३,५२३ पुरुष आर ९,२०,४७४ महिला । जिलाक जनसङ्ख्या लगभग लैटविया देसक बराबर आर यूऍस देसक न्यू मैक्सिको राज्यक जनसङ्ख्या क बराबर छल। एकरा अनुसार भारतक कूल ६४० सभमे मऊ जिलाक स्थान २०६अम् अछि। जिला में जनघनत्व   २००१-२०११ में जनसंख्या वृद्धि दर १८.९४%,	लिंगानुपात ९७८ महिला प्रति १००० पुरुष, आर साक्षरता दर ७५.१६% छल।




#Article 85: मकवानपुर जिला (2214 words)


मकवानपुर जिला नेपालक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्रक नारायणी अञ्चलमे अवस्थित एक जिला छी । ई जिलाके मेची -महाकाली अञ्चलके राजधानीसँ सम्बन्ध स्थापित करैवला जिलाक रूपमे जानल जाइत अछि । उत्तरदिस करिब ६६ किलोमिटर लम्बा महाभारत श्रृङ्खला आ दक्षिणदिस करिब ९२ किलोमिटर लम्बा चुरे पर्वत (सिवालिक पहाड)क कोखमे ई जिला अवस्थित अछि। राजधानी प्रवेशक मुख्य मार्गक रूपमे परिचित ई जिला राजधानी काठमाडौं आ ऐतिहासिक जिला ललितपुरसँ सीमाबद्ध भऽ रहल अछि। त्रिभुवन राजपथ आ महेन्द्र राजमार्गक निर्माण भेलाक बाद ई जिला भऽ देशक पूर्व तथा पश्चिम आवागमन अत्यन्त सहज भेल अछि। ई जिलाक सदरमुकाम हेटौंडासँ फाखेल-हुमानेभञ्ज्याङ्ग-फर्पिङ्ग होइत कम समयमे काठमाडौं पहुँचै लेल वैकल्पिक मार्ग सेहो निर्माण भेल अछि। ई जिला देशक तेसर बड्का औद्योगिक जिलामे पडैत अछि। एतय बहुतरास प्राकृतिक मनोरम स्थलसभ रहल अछि। शान्त शीतल वातावरण जे किनको मन जित सकैत अछि। चितवन राष्ट्रिय निकुञ्ज आ पर्सा वन्यजन्तु आरक्ष सहो एहि जिलाक किछ भू-भाग ओगटने अछि। सेन वंशीय राजासभक दरबार मकवानपुरगढी (बडा महाराजाधिराज पृथ्वीनारायण शाहक ससुरारि सेहो), सामारिक दृष्टिसँ महत्वपूर्ण स्थान चिसापानी गढी, पर्यटकीय स्थल शहीद स्मारक, लाली गुराँस आ सुनगाभाक प्राकृतिक सङ्ग्रहालयसभ ई जिलाक सौर्न्दर्य आओर बढेने अछि। ई जिलामे नेपालक एकमात्र मानव निर्मित ताल अछि जकरा इन्द्र सरोवर वा कुलेखानी नामसँ जानल जाइत अछि । ई तालके पानिसँ कुलेखानी प्रथम कुलेखानी द्वितीय आ कुलेखानी तृतीय(हाल निर्माणाधीन) मे विद्युत उत्पादन कएल जाइत अछि । जे नेपाल विद्युत प्राधिकरण कऽ ब्याकअपके रूपमे रहल अछि।

ई जिलाक नामाकरण सेनवंशीय प्रतापी राजा मुकुन्द सेनक नाम अप्रभंश होइत माकन्दपुरसँ अन्तमे मकवानपुर भेल जनश्रुती एतय प्रचलित अछि।

ई जिलाक सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक आ आर्थिक पक्षसभक सम्बन्धमे व्यवस्थित ढङ्गसँ ऐतिहासिक अध्ययन भेल नै देखबैत अछि । किम्वदन्ती आ फाटफुट निकलल लेखसभ अध्ययनक आधारमे महाभारतकालसँ ई जिला विभिन्न प्रसङ्गमे आबैत गेल अछि। वनबासक क्रममे पाँच पाण्डवसभ ई जिलामे आबि आ भीमसेन हेडम्बा राक्षसक बध करि हुनकर नामसँ हेटौंडा नामकरण भेल जनश्रुति प्रचलित अछि। हेडम्बा राक्षसक बहिन भूटनीसंग भीमसेनक विवाह भऽ घटोतकच पुत्र जन्मल आ ओही भूटनीक नामसँ हेटौंडाक प्रसिद्ध मन्दिर भूटनदेवी स्थापना कएल गेल सेहो जनश्रुति अछि।

ई जिलामे आदिवासी जनजातिक रूपमे रहल राई (देवास) जातिसभ दक्षिण पूर्वी बागमती नदी किनारक आसपास तीन-चार सौ वर्ष पहिनेसँ बसोबास करैत आएल छल आ फापरवारी गाविस वार्ड नम्बर १ झुरझुरे ओ सभक राजधानी रहल जनश्रुति अछि। ओहिना बेतिनी गाविसमे तामाङ्ग जातिसभक घिसिङ्ग राजाक दरबार छल कहिक मान्यता आ हाल ई जिलामे ५० प्रतिशतक हाराहारीमे रहल तामाङ्ग जातिसभक बाहुल्य ओकर सबुत भऽ सकैत छी। 

आई सँ २३ सय वर्ष पहिने नेपालक भ्रमणमे आवैत काल चित्लाङ्गमे सम्राट अशोकक पुत्री चारुमती स्थापना केनए चैत्यसँ लऽ लिच्छवी कालीन राजा नरेन्द्रदेवक राजा प्रमाणित करैवाला एक मात्र शिलालेख पृथ्वीनारायण शाहक ससुरारि अर्थात् मकुन्ददेवक दरबार रहल मकवानपुरगढी आ सामरिक हिसाबसँ महत्वपूर्ण भेल काली तोप रहल आ उपत्यकासँ बाहर जाइत काल जाँच करवाक आ राहदानी देवाक प्रचलन तथा राणकालीन भन्सार चौकी चिसापानीगढीसँ ई जिलाक ऐतिहासिक महत्व दर्शावैत अछि।

मकवानपुर जिला पूर्व पश्चिम लम्बा रहल अछि। पूर्व गल्ली होइत पश्चिमदिस बेलुन फुलल जका फुकल आकारमे अछि। 

मकवानपुर जिला नेपालक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत नारायणी अञ्चलमे अवस्थित अछि। ई जिलाक सदरमुकाम हेटौंडा छी। वि.सं. २०४३ सालमे हेटौंडाक सदरमुकाम बनाएल गेल छल । हेटौंडासँ पहिने भीमफेदी ई जिलाक सदरमुकाम छल। मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्रक क्षेत्रीय सदरमुकामक रूपमे एकरा विकास करवाक लक्ष्य राखल गेल अछि आ क्षेत्रीय-स्तरक कार्यालयसभ एतय स्थानान्तरण होमए कऽ क्रम अधिक अछि। प्रशासकीय दृष्टिसँ ई जिलाक ८ गाउँपालिका, १ नगरपालिका आ १ उपमहानगरपालिकामे विभाजन कएल गेल अछि।

वि.सं. २०६८ सालक जनगणना अनुसार ई जिल्लाक कूल जनसङ्ख्या ४,२०,४७७ रहल अछि जहिमे महिलासभक जनसङ्ख्या २,१३,७९३ रहल अछि आ पुरुषक जनसङ्ख्या २,०६,६८४ रहल अछि । वि.सं. २०६४ सालक प्रक्षेपित तथ्याङ्क अनुसार ई जिलाक जनसङ्ख्या ४,३८,१०१ अनुमान कएल गेल अछि। ई जिलाक औसत वार्षिक जनसङ्ख्या वृद्धिदर २.२२ प्रतिशत रहल अछि जे वि.सं. २०४८ सालक जनसङ्ख्या वृद्धिक तुलनामे ०.३४ प्रतिशतसँ घटल अछि। एक परिवारमे सरदर ५.५२ गोटे सदस्यसभ रहल तथ्याङ्क देखाबैत अछि।
हेटौंडा उपमहानगरपालिकाक जनसङ्ख्या ८४,६७९ रहल अछि । नेपालक कूल जनसङ्ख्याक १.७५ जनसाङ्ख्यिक योगदान ई जिलाक रहल अछि।

ई जिला मध्य पहाडी जिला छी। एहि क्षेत्रक ७५% भू-भाग पहाडसँ झाँपल अछि। शिशिर मौसममे बरफ पड़वाला २,५८४ मिटरक उच्च भू-भागमे दामन गाविसक सिमभञ्ज्याङ्ग अछि तँ दक्षिणदिस समुद्री सतहसँ १६६ मिटर धरिक छोट भू-भाग-राईगाउँ गाविसक हात्तीढुङ्गा रहल अछि। मकवानपुर जिला विभिन्न जात जाती तथा सांस्कृतिक विविधताक साथ बरफ पड़वाला पहाडी क्षेत्रसँ समथर मैदानधरि भेल ई जिला जैविक विविधताक दृष्टिसँ सेहो अन्यन्त धनीक अछि। एकरा सुनगाभाक प्राकृतिक सङ्ग्रहालयक रूपमे सेहो जानल जाऽ सकैत अछि। छोट दूरी तथा छोट भूभागमे सेहो पैग वातावरणीय विविधताक श्रृङ्खला रहल भैसेसँ सिमभन्ज्याङ्ग धरि उचाईमे ९० जातिक सुनगाभा (अर्किड) मे सँ ६२ जाति ई जिलामे पाबल जाइत अछि।

जिलाक धरातलीय विविधता संगसंगै अही ठाम हावापानीमे सेहो एकदमे विविधता पओल जाइत अछि। एतय मुख्यत: ३ किसिमक हावापानि पाओल जाइत अछि जाहिमे दक्षिणतर्फ चुरे श्रृङ्खलाक आसपास उष्ण, ओकर बाद क्रमशः उत्तरतर्फ समशीतोष्ण आ शीतोष्ण किसिमक हावापानि पवैत अछि। ई जिलामे वाषिर्क सरदर २५३५ मिलि लिटर वर्षा होएत अछि। ई अङ्क नेपालक चेरापुञ्जी कहिक पह्चानल जाइवाला कास्की जिलाक पोखरा बादके अङ्क छी। जाड महिनाक पुष माघमे न्यूनतम १६.६ डि.से. तापक्रम पवैत अछि ताए गर्मीयामक बैशाख जेठमे अधिकतम ३०.३ डि.से. तापक्रम पवैत अछि।

ई जिलाक जलाधारक रूपमे चारि जलाधार क्षेत्र आ १२५ उप-जलाधार क्षेत्रमे विभाजन कऽ सकैत छी। चारि जलाधार क्षेत्रमे बाग्मती, बकैया, राप्ती आ त्रिशुली छी। ई जिलाक ३.२७ प्रतिशत भू-भाग नदी, खलिहान तथा तालसँ झाँपल  अछि। जिलाक पूर्वी सीमा नदीक रूपमे रहल बाग्मती नदी, पूर्व मध्य भागसँ शुरु भऽ दक्षिणतर्फ बहैवाला बकैया नदी, जिलाक मध्य भागसँ बहैवाला राप्ती, पश्चिमी दिससँ बहैवाला मनहरी आ पश्चिमी सीमा नदी लोथर ई जिलाक प्रमुख नदीसभ छी।

ई जिलाक कूल क्षेत्रफल २,४४,४५७ हेक्टर मे सँ कृषियोग्य जमीन ६१४८९ हे. -२५.१५%), झांडी, घांसे मैदान ४९६८ हे. -२.०३%), खोलानाला तथा बगर १६७१० हे. -६.८३%), वन क्षेत्र १४४५५८ हे.

चन्द्रागिरी :फाखेल गाविससँ टिष्टुङ्ग गाविसधरि
महाभारत : बेतिनी गाविससँ खैराङ्ग गाविसधरि
चुरे : राईगाउँ गाविससँ मनहरी गाविसधरि

मकवानपुर जिला औद्योगिक जिल्लाक नामक पहिचान होइतो अही ठामक लोगसभक मुख्य पेशा कृषि छी। अही ठामक कूल जनसंख्या मे सँ ८२.७% कृषिमे आ १७.३५ गैर कृषिमे संलग्न अछि। आर्थिक रूपसँ सक्रिय जनसंख्याक ५३.६% कृषिमे आ ४६.९४% जनसंख्या गैर कृषि पेशामे संलग्न अछि।

मकवानपुर जिला बहुजातीय आ बहुभाषिक जात-जातिक एकटा फूलबारी अछि। ई जिला तामाङ्ग जातिक बाहुल्य भेल जिला छी। अही ठाम ४७.३% तामाङ्ग अछि। ७०% सँ बेसी जनजाती सभक बसोबास रहल अछि। तामाङ्ग जातिक बाद दोसर स्थानमे ब्राम्हण(१४.९%), तेसरमे क्षेत्री (१०.६%), चारिममे नेवार (६.८%), पाँचम् मे मगर (५.०१%) आ छठम् मे चेपाङ्ग (३.८%) आ विभिन्न जातिसभक प्रमुख रूपमे रहल अछि। दलित जातिसभक करिब ७% अछि। जातीय विविधताक धनी ई जिलामे अन्य जिलामे ही भेल आ लोपोन्मुख अवस्थामे पहुँचल वनकरिया जातिक सेहो बसोबास अछि।

ई जिलामे विविध धर्म आ सम्प्रदायक लोग्सभ बसोबास करैत अछि। तामाङ जातिक वाहुल्य रहल होएत अछि। हिन्दू धर्म मानेवाला अधिक देखल जाइत अछि कहिक क्रिश्चियन आ इस्लाम धर्म मानेवालासभ न्यून रहल जाईत अछि। ई जिलामे हिन्दूधर्मावलम्वीसभ ४९.३६% अछि आ बौद्ध धर्म मानेवालासभ ४७.६३% अछि। क्रिश्चियन आ इश्लाम धर्मावलम्वीसभ क्रमशः २.०७ र ०.३२ प्रतिशत रहल तथ्याङ्कसँ देखलजाईत अछि।

मकवानपुर जिलाक धार्मिक मठ मन्दिरसभ उल्लेख्य रूपमे रहल अछि। हेटौंडा उपमहानगरपालिका क्षेत्रमे भूटनदेवी, भुवनेश्वर महादेव, पुण्य क्षेत्र रहल अछि तँ मकवानपुरगढी गाविसमे मनकामना मन्दिर आ वंशगोपालक मन्दिर रहल अछि। चुरियामाई गाविसमे चुरियामाईक आ भैंसे गाविसमे त्रिखण्डी महादेवक मन्दिर प्रसिद्ध अछि। अहीना दामन गाविसमे ऋषेश्वर आ इन्द्रायणी माईक मन्दिर अछि आ बज्रबाराही गाविसमे बज्रबाराही, नामटार गाविसमे स्यार्सेकालिका, चित्लाङ्ग गाविसमे शिवालय,हेटौंडा -९, चौधघरेमे  शीर्षक लिंङ्क  रहल कुष्माण्ड सरोबर त्रिवेणीधाम (मुक्तीनाथ पहिनेक १०८ धारा रहल नेपाल क एक प्रसिद्ध धार्मिक एंव पर्यटकिय स्थल) ओहिना चिसापानी गडि मे बटुक भैरव क प्रसिद्ध मन्दिर रहल अछि । एकर अलावा तामाङ बाहुल्य क्षेत्रमे गुम्बा बौद्ध घ्याङ आदि प्रख्यात मठ मन्दिर तहीना देवालयसभ अछि।

समाज आ जनसंख्याक विकासक क्रमसंगे ग्रामीण क्षेत्रहरूमे ग्रामीण जनताक आवश्यकताक वस्तु तथा सेवासँ आ स्थानीय स्तरमे उत्पादन भेल वस्तु तथा सेवासँ खरीद विक्री करैवाला उद्देश्यसँ विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रसभमे बजार केन्द्रसभ स्थापना आ विकास होएत गेल पवैत अछि। एहीना स्थापना आ विकास भेल बजारसभ हेटौंडा, भीमफेदी, मनहरी, लोथर, छतिवन, फापरवारी, चौघडा, पालुङ्ग (ओखरेबजार), अछि। ओहिना भैंसे, दामन (शिखरकोट), हटिया (चिसापानी), बसामाडी (बस्तीपुर), बज्रबाराही (सरस्वती बजार), मार्खु, कुलेखानी, नामटार, हर्नामाडी आदि सेहो क्रमशः बजार उन्मुख गाविससभ अछि।

ई जिलाक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्रक सदरमुकामक रूपमे विकास करैक लेल कार्य संग-संगे क्षेत्रीय अस्पताल निर्माण करैक लेल नीतिगत निर्णय भऽ चुकल अछि। हाल ई जिलामे ५० शैयाक एक जिला अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ४, स्वास्थ्य चौकी १ आ उपस्वास्थ्य चौकी ३१ रहल अछि। आयुर्वेदिक औषधालय दुईटा अछि। ई जिलामे शिशु मृत्युदर प्रति हजार ६४ जना आ बालमृत्युदर ९१ गोटे रहल पवैत अछि। कुल प्रजनन् दर प्रति महिला ५.१ अछि तँ परिवार नियोजनक सेवा लै वाला व्यक्ति ३९% मात्र रहल अछि।

२०४८ सालक तथ्याङ्क अनुसार ई जिलाक साक्षरता प्रतिशत ३८.४% रहल अछि तँ २०५८ सालक जनगणना अनुसार ई दर बढिक ६३.४% पहुँच गेल अछि। महिला साक्षरता प्रतिशत ५३.९% अछि तँ पुरुष साक्षरता ७२.६% रहल अछि। ई जिलाक बेसी साक्षर भेल गाविस हर्नामाडी (६१.२८%) अछि। तँ सबसँ कम साक्षर भेल गाविस भार्ता (१४.७६%) अछि।

कृषि पेशामे ८२.७% जनता संलग्न रहल ई जिलामे २५.१५% भू-भाग कृषि क्षेत्रसँ मात्र छोपल अछि। कृषि भूमिक ३७.२८%मे बर्षसो आ मौसम सिंचाई सुविधा पुगल अछि। भूबनोटक आधारमे ई जिलाक मध्य पहाड आ भित्र मधेशक रूपमे वर्गीकरण करैकलेल सकैत अछि। महाभारत पर्वत श्रृंखलाक उत्तरी भेगमे पर्ने उच्च भू-भागसँ वेशी फा“टधरि चिसो भागमे खासकैर बेमौसमी तरकारी, आलु, हिउंदे फलफूल, सुन्तला जातक फलफूलक लेल उपयुक्त हावापानी छी कहीबाला भित्री पहाड भेगमे अगौटे तरकारी, आलु तथा खाद्यान्न उत्पादनक लेल उपयुक्त कहलजाईतँ अछि। अहीना चुरर्ेपर्वत आ महाभारत पर्वत श्रृंखला बीचक एक चौथाइ समथर भू-भागमे गरम हावापानी भएल कारण अगौटे तरकारी, आलु तथा खाद्यान्न उत्पादनक दृष्टिसँ उपयुक्त मानल जाईत् अछि। ई जिलामे उन्नत जातक गाई, भैंसी आ बाख्रा पालन व्यवसाय क्रमिक रूपसँ बेसी होएत पवैत अछि कहेवला वंगुर, भेडा र कुखुरा पालन कार्य कहेवाला क्रमशः घटल अछि। पशुजन्य उत्पादनमध्ये दुध वाषिर्क १३४१.३ मे.टन, मासु २९५.१ मे. टन र अण्डा ४१०७५९.१ गोटासँ बेसी अछि भने माछा उत्पादनमे खासै बढोत्तरी देखल गेल अछि। पशुजन्य उत्पादन आ जनसंख्याक तुलना मे एक वर्षा एकजनाक भागमे दुध १२३.९७ लिटर, मासु १९.०९ किलो, अण्टा १४.२६ गोटा र माछा ७७.६८ ग्राम सेहो होएतो अछि। जिला कृषि विकास कार्यालयक जिलाक ६ ता सेवा केन्द्र आ ७ ता उपसेवा केन्द्र मार्फ सेवा पहुचलअछि भने जिल्ला पशुसेवा कार्यालयले ६ वटा सेवाकेन्द्र र १० वटा उपसेवा केन्द्र मार्फ सेवा पहुचाबल गेल अछि।

त्रिभुवन राजपथ -चुरे-सोप्याङ खण्ड) ११० कि.मि.
महेन्द्र राजमार्ग -चुरे-लोथर खण्ड) ४७ कि.मि.
जिल्ला सडक अवस्थाक) हेटौंडा-भीमफेदी २३ कि.मि.
ख) हटिया-राईगाउँ ६५ कि.मि.
ग) कुन्छाल-कुलेखानी १८ कि.मि.
घ) भीमफेदी-कुलेखानी-फाखेल-काठमाडौंं ५३ कि.मि.
ङ) चुनिया-नामटार २० कि.मि. -८ कि.मि. मोटर चल्ने)
च) दामन-डांडावास १० कि.मि.
छ) सामरी-आमभञ्ज्याङ्ग ६ कि.मि.
ज) कान्तिराजपथ -हेटौंडा-ठिंगन) ४२ कि.मि. -३० कि.मि. मोटर चलैवाला)
झ) पशुपतिनगर-मकरी भुन्द्रुङ्ग टा“डी-सान्नानीटार १८ कि.मि. -१० कि.मि. मोटर चलैवाला)
ञ) कुलेखानी-सिस्नेरी-छैमले ३० कि.मि.
ट) चुच्चेखोला-फुर्केचौर १३ कि.मि.
ठ) पिप्ले-कुर्ले १२ कि.मि. (६ कि.मि. मोटर चलैवाला
ड) टौखेल-चित्लाङ्ग-चन्द्रागिरी १५ कि.मि.
ढ) घट्टेदोभान-चखेल-देउराली-मातातिर्थ १० कि.मि.(५ कि.मि. मोटर चलैवाला)

पक्की सडक ५६.६२ किमि -राजमार्ग सहित)
ग्राभेल सडक ४८.४५ किमि
कच्ची सडक ७० किमि
गोरेटो सडक २९ किमि
कंक्रिट सडक १२.५५ किमि
सडक पहुँचल नपा/गाविस संख्या - ३४टा
सडक नै पहुँचल गाविस संख्या - १०टा

हेटौंडा - टेकु - ४२ कि.मि. -हाल बन्द)

कुलेखानी प्रथम ६०,००० कि.वा.
कुलेखानी दोसर ३२,००० कि.वा.
कुलेखानी तेसर १५,००० कि.वा. -निर्माणाधिन)
पूर्ण विद्युतीकरण भेल गाविस/नपा संख्या ३४.१० प्रतिशत, १५ गाविस)
आंशिक विद्युतीकरण भेल गाविस संख्या ३४.१० प्रतिशत, १५ गाविस)
विद्युतीकरण होमएल बाँकी गाविस संख्या ३१.८० प्रतिशत, १४ गाविस)

सञ्चारक हिसाबसँ एतय खास परिवर्तन नै देखल जाइत अछि । टेलीफोन सेवा नगरक्षेत्रमे मात्र सिमित होमइक लेल ग्रामिण आ शहरोन्मुख क्षेत्रमे ईन्टरनेट सेवा अछि। आ हाल तार-रहित ईन्टरनेट आ मोबाइल फोन सुविधा जिलाक क्षेत्रमे उपलब्ध अछि आ रेडियो हरेक जेहन स्थानमे सुन्न जाइत अछि आ टेलिभिजन सेहो स्याटेलाइट प्रविधिसँ हरेक स्थानमे सेहो देखल जाइत अछि ।

ई जिलामे उपत्यका बाहरक पहिल व्यावसायिक रेडियो मनकामना एफएम खुलल होएतो, खुललाक छ बर्षक बाद २०६२ सालमे बन्द भेल आ हाल रेडियो सरोबर ९२.५ मेगाहर्ज,पलुंग एफएम, हेटौडा एफएम ,प्रतिध्वनि एफएम,थाहा एफएम,मकवानपुर एफएम,शक्ति एफएम,निकाश एफएम,आकाश गंगा एफएम आदि अछि। 

रेडियो सरोबर ९२.५ मेगाहर्ज मकवानपुरक २४सौं घण्टा प्रशारण होएवाला प्रतिष्ठित एफएम छी। 
गगन मिडिया प्रा.लि कऽ सञ्चालन कलक ई रेडियोक अध्यक्ष चर्चित साहित्यकार आ पत्रकार श्री आनन्दराम पौडेल अछि। 
मकवानपुर जिलाक प्रतिष्ठित महानुभावसभ संचालनमे आनलक आ ई रेडियो सरोबर फरक शैलीमे प्रशारण होइत अछि।

सुरुवातमे रेडियोक स्टेशन म्यानेजर आ प्रधान सम्पादकक जिम्मेवार श्री गिरिजा अधिकारी सम्हालने अछि रेडियोमे अखन चन्द्र घलान स्टेशन को-अर्डिनेरक रुपमे अछि ।
२०७१ साल भाद्र १ गतेसँ परीक्षण प्रशारण आरम्भ भेल ई एफएमक नेपाल सरकारक प्रवक्ता, सूचना आ सञ्चारमन्त्री डा. मिनेन्द्र रिजाल २०७१ फागुन २ गते विधिवत रुपसँ उद्घाटन केने अछि।
मकवानपुरक एकमात्र हास्यब्यङ्यात्मक आ समाचारमूलक एफएमक रुपमे परिचित रेडियो सरोबर, हेटौैंडा-४ मे रहेल नारायणी मल(बिजनेस कम्प्लेक्स)क सबसँ उपर घरमे अवस्थित अछि । मकवानपुरक अधिकांश क्षेत्रसँ आसपासक जिलामे ई रेडियो सुनल जाईत अछि।

ई जिलामे कुराकानी साप्ताहिक ,प्रयास साप्ताहिक आ सुरुमे चर्चित भेल । पहिल हेटौडा सन्देश दैनिक ,नारायणी दैनिक,हेटौडा टुडे ,अभ्याश ,प्रदेश,सझाकुरा,आ सन्देश,शान्ति आब्हान ,समृद्ध समाज  आ दैनिकसभ संचालनमे अछि।
ओहीना उपत्यक बाहरक पहिल सभसँ पैग रंगिन पत्रिका सबथोक साप्ताहिक सेहो एही  जिलासँ संचालनमे अछि।
विगत १० वर्षसँ मकवानपुरक सक्रिय पत्रकार आ नेपाल पत्रकार महासंघ मकवानपुरक उपाध्यक्ष गिरिजा अधिकारीक प्रकाशन-सम्पादनमे साम साप्ताहिक सेहो प्रकाशन होएत अछि।

ई जिलाक पहिल पत्रकार न्हुच्छेमान श्रेष्ठ छि .कृष्णराम परियार,कौशल पाण्डे ,नवराज शर्मा ,प्रताप बिस्टआदि  पुराना पत्रकार छी आ राममणि दाहाल ,महेन्द्र श्रेष्ठ ,गिरिजा अधिकारी,देवराज रिमाल पहिल पुराना पत्रकार अछि ओहिना भानुभक्त आचार्य,रामकुमार एलन,रामशरण पुडाशैनी,देवराज पन्त,राजन दाहाल पहिल पुराना आ सन्तोष न्यौपाने ,सम्झना कार्की ,खेम बोलखे ,उज्ज्वल चौलागाईं,रिपेश ऋद्धि दाहाल ,पुर्णिमा गोले ,सबिन न्यौपाने,,प्रकाश दाहाल ,रुपेश दुलाल,नरेन्द्र सापकोटा,सुनिल खड्का ,प्रेम दाहाल,कृष्ण सरु ,सरिता दाहाल, अशोक सुजन श्रेष्ठ, चन्द्र घलान ,जिबराज बख्रेल, धर्मेन्द्र दाहाल,सुरेश श्रेष्ठ  ,आ पत्रकारसभ सक्रिय अछि।

मोवाईल हेनपा आ २२ गाविस -प्रिपेड ९५००, पोस्टपेड ६५०)
सिडिएमए ३७ गाविस/नपा -प्रिपेड ९८६, पोस्टपेड १०७६)
टेलिफोन सेवा उपलब्ध गाविस/नपा संख्या ४०
टेलिफोन सेवा उपलब्ध नै भेल गाविस संख्या ४ -ठिंगन, बेतिनी, मंथलि, इपा)

जिला हुलाक १टा
इलाका हुलाक ११टा
अतिरिक्त हुलाक ३४टा
काउण्टर हुलाक १टा




#Article 86: मकाउ (105 words)


मकाउ विशेष प्रशासनिक क्षेत्र चीनक एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र छी आ ई चीनक दुटा विशेष प्रशासनिक क्षेत्रमे सँ एक छी, हाङ्गकाङ्ग दोसर क्षेत्र छी । मकाउ पर्ल नदी डेल्टाक पश्चिमी दिस अवस्थित अछि, एकर सीमासभ गुआङ्गडोङ्ग प्रान्त सँ उत्तरमे मिलैत अछि आ दक्षिण आ पूर्वमे दक्षिण चीन सागर अछि ।

मकाओक प्रमुख उद्योगसभमे वस्त्र, इलेक्द्रोनिक्स उपकरण आ खेलौना आ पर्यटन अछि, ई सब मिलाकऽ एकरा विश्वक सभसँ धनीक शहरसभमे सँ एक बनाबैत अछि । एहि ठाम व्यापक श्रेणीक होटल, रिसोर्ट, स्टेडियम, रेस्टुन्रेट आ जुआघर अछि ।

विशेष प्रशासनिक क्षेत्रक रूपमे, मकाउक अपन कानून व्यवस्था, टेलीफोन कोड, पुलिस बल होमएक संग अपन मुद्रा सेहो अछि ।




#Article 87: मगही भाषा (220 words)


मगही या मागधी भाषा भारतक मध्य पूर्वमे या नेपालक धनुषा, महोत्तरी, सर्लाही, सप्तरी, सुनसरी, मोरङ, झापा, रौतहट जिलामे बाजल जाइवाला एक प्रमुख भाषा छी । एकर निकटक समबन्ध भोजपुरी आ मैथिली भाषा सँ अछि आ प्राय: ई भाषासभकें एके साथ बिहारी भाषाक रूपमे रखि देल जाइत अछि । एकरा देवनागरी लिपिमे लिखल जाइत अछि । मगही भाषी प्रयोगकर्ताक सङ्ख्या सन् २००२ मे लगभग १ करोड़ ३० लाख अछि । मुख्य रूप सँ ई भारतक बिहार प्रदेशक गया, पटना, राजगीर, नालन्दा, जहानाबाद, अरवल, नवादा आ औरङ्गाबादक इलाकासभमे बाजल जाइत अछि ।

मगहीकें धार्मिक भाषाक रूपमे सेहो पहिचान अछि । कयन जैन धर्मग्रन्थ मगही भाषामे लिखल गेल अछि । मुख्य रूप सँ वाचिक परम्पराक रूपमे ई आईयो जीवित अछि । मगहीकें पहिल महाकाव्य गौतम महाकवि योगेशद्वारा सन् १९६०-६२ क बीच लिखल गेल छल । दर्जन सँ बेसी पुरस्कारसभ सँ सम्मानित योगेश्वर प्रसाद सिन्हा योगेश आधुनिक मगही भाषाक सभसँ लोकप्रिय कवि मानल जाइत अछि । भारतमे २३ अक्टुबरकें दिन हुनकर जयन्तिमे मगही दिवसक रूपमे मनाएल जाए रहल अछि ।

किछ भारतीय विद्वानसभकें माननाए अछि की मगही संस्कृत भाषा सँ विकसित इन्डो-आर्यन भाषा परिवारक भाषा छी, मुदा महावीर जैन आ गौतम बुद्ध दुनू महापुरुषक उपदेशक भाषा मागधी भाषामे लिखल गेल अछि । बुद्धद्वारा भाषाक प्राचीनताक प्रश्न पर स्पष्ट रूपसँ कहने अछि- सा मागधी मूल भाषा । अतः मगही मागधी सँ विकसित भाषा छी ।




#Article 88: मनाङ जिला (156 words)


मनाङ नेपालक गण्डकी प्रदेशमे अवस्थित हिमालय पारक एक सुन्दर जिला छी । नेपाल सरकारक मापदण्ड अनुसार अति दुर्गम जिला अर्थात क वर्गक जिलाक रूपमे मनाङ रहल अछि ।

मनाङ् शब्द तिब्बती भाषाक म्हनाङ् शब्दसँ अपभ्रंश भऽ राखल गेल अछि । तिब्बती भाषामे म्ह कऽ अर्थ सहायता आ नाङ कऽ अर्थ देनिहार होएत अछि । बिकट भौगोलिक परिवेशमे रहल आ वाह्य सहयोग बिना जनजीवन अत्यन्त कष्टकर रहल अर्थमे बुझल जाएत अछि ।

सन् १७८१ मे रणबहादुर शाहक शासनकालमे नेपाल राज्यक एकिकरण होमए सँ पहिने ई जिला लमजुङ राज्यक एक अङ्गक रूपमे रहल छल । पाछा ई जिला पश्चिम ३ नं. गोश्वारा अन्तर्गत पोखरा स्थित बडाहाकिमक अन्तर्गत राखि प्रशासन सञ्चालन कएल गेल । बि.सं. २०१८ सालमे नेपालकें १४ अञ्चल ७५ जिलामे बिभाजन करैत कालमे एकरा गण्डकी अञ्चल अन्तर्गत एकटा अलग जिलाक रूपमे स्थापित कएल गेल छल ।

राष्ट्रिय जनगणना २०६८ अनुसार मनाङ जिलाक कूल जनसङ्ख्या ६,५३८ अछि जहिमे पुरुष ३,६६१ टा आ महिला २,८७७ टा रहल अछि ।




#Article 89: मानवशास्त्र (136 words)


मानवशास्त्र, मनुष्य विज्ञान वा नृविज्ञान () मानव, ओकर जेनेटिक्स, संस्कृति आओर समाजक वैज्ञानिक आ समाजशास्त्रीय दृष्टिकोणक अध्ययन छी । एकर अन्तर्गत मनुष्यक समाजके अतीत आ वर्तमानके विभिन्न पहलुसभक अध्ययन कएल जाइत अछि । सामाजिक नृविज्ञान आ सांस्कृतिक नृविज्ञान के तहत मानदण्डसभ आ समाजके मूल्य मान्यता अध्ययन कएल जाइत अछि । भाषाई नृविज्ञान मे पढ़ल जाइत अछि कि कोना भाषा, सामाजिक जीवनकें प्रभावित करैत अछि । जैविक या शारीरिक नृविज्ञान मे मनुष्यके जैविक विकासक अध्ययन कएल जाइत अछि ।

नृविज्ञान एक विश्वव्यापी अनुशासन छी , जाहिमे मानविकी, सामाजिक आ प्राकृतिक विज्ञानकें एक दोसरकें सामना करैक लेल मजबूर कएल जाइत अछि । मानव विज्ञान, प्राकृतिक विज्ञानकें समेत मनुष्य उत्पत्ति, मानव शारीरिक लक्षण, मानव शरीरमे बदलाव, मनुष्य प्रजातिसभमे आयल बदलावसभ इत्यादिसँ ज्ञानक रचना करैत अछि ।

सामाजिक-सांस्कृतिक नृविज्ञान, संरचनात्मक आ उत्तर आधुनिक सिद्धान्तसभसँ पूर्ण तरहसँ प्रभावित भेल अछि ।




#Article 90: महात्मा गान्धी (146 words)


मोहनदास करमचन्द गान्धी (महात्मा गान्धी) (२ अक्टुबर १८६९ - ३० जनवरी १९४८) भारत तथा भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलनक एक मुख्य राजनीतिक आ आध्यात्मिक नेता छल। ओ विश्वक महापुरूषसभमेसँ एक छल। बेलायती सरकारक उपनिवेशकेँ रूपमे रहल दक्षिण अफ्रिकाक रङ्गभेद अन्त्य करवाक लेल आ भारतक स्वतन्त्र करवाक लेल गान्धीकेँ बहुत पैग योगदान अछि। अहिंसावादी नेता महात्मा गान्धीक सम्मानमे हुनकर जन्मदिवस २ अक्टुबरकेँ संयुक्त राष्ट्र संघ विश्व अहिंसा दिवसक रूपमे मनबैत अछि। ओ सत्याग्रह (व्यापक सविनय अवज्ञाकेँ माध्यमसँ अत्याचारक प्रतिकार आन्दोलन) कऽ अग्रणी नेता छल, हुनकर ई अवधारणाकेँ 'अहिंसात्मक' आन्दोलन कहल गेल अछि। महात्मा गान्धी भारतक स्वतन्त्रता दिलाए जनताकेँ नागरिक अधिकारसभ तथा स्वतन्त्रता आन्दोलनक लेल सम्पूर्ण विश्वकेँ प्रेरित केनए अछि। हुनका लोकसभ महात्मा गान्धीकऽ नामसँ जनैत अछि।

मोहनदास करमचन्द गान्धीके जन्म २ अक्टोबर १८६९मे पश्चिमी भारतके हाल गुजरातमे रहल पोरबन्दर नामकs एक तटीय सहरमे भेल छेल । ऊनकर पिताके नाम करमचन्द गान्धी और माँ के नाम पुत्लीबाई गान्धी छेल ।




#Article 91: महेन्द्र मलंगिया (411 words)


महेन्द्र मलंगिया 1946-

गाम- मलंगिया, जिला- मधुबनी । मैथिलीक सुपरिचित नाटककार, रंग निर्देशक एवं मैलोरंगक संस्थापक अध्यक्ष । लोक साहित्य पर गंभीर शोध आलेख । मैथिलीमे 13टा नाटक, 19टा एकांकी, 14टा नुक्कड़ आ 10टा रेडियो नाटक प्रकाशित आ आकाशवाणी सँ प्रसारित । सीनियर फेलोशिप (भारत सरकार), इंटरनेशनल थिएटर इंस्टिच्यूट (नेपाल), प्रबोध साहित्य सम्मान आदि सँ सम्मानित । संप्रति ज्योतिरीश्वर लिखित मैथिलीक प्रथम पुस्तक वर्णरत्नाकर पर शोध कार्य । श्री महेन्द्र मलगियाक जन्म २० जनबरी १९४६ मे मधुबनी जिलाक मलंगिया गाममे भेलन्हि। मलंगियाजी मैथिली हिन्दी, अंग्रेजी आ नेपाली भाषाक जानकार आ थियेटर शिक्षण, पटकथा लेखन आ तत्सम्बन्धी शोधक फ्रीलान्स शिक्षक छथि।२००२ ई.- श्री महेन्द्र मलंगिया, मलंगिया;यात्री-चेतना पुरस्कार। प्रबोध सम्मान 2005 सँ सम्मानित।
महेन्द्र मलंगिया

मैथिलीक सुपरिचित नाटककार, रंग निर्देशक एवं मैलोरंगक संस्थापक अध्यक्ष । लोक साहित्य पर गंभीर शोध आलेख । मैथिलीमे 13टा नाटक, 19टा एकांकी, 14टा नुक्कड़ आ 10टा रेडियो नाटक प्रकाशित आ आकाशवाणी सँ प्रसारित । सीनियर फेलोशिप (भारत सरकार), इंटरनेशनल थिएटर इंस्टिच्यूट (नेपाल), प्रबोध साहित्य सम्मान आदि सँ सम्मानित । संप्रति ज्योतिरीश्वर लिखित मैथिलीक प्रथम पुस्तक वर्णरत्नाकर पर शोध कार्य । श्री महेन्द्र मलगियाक जन्म २० जनबरी १९४६ मे मधुबनी जिलाक मलंगिया गाममे भेलन्हि। मलंगियाजी मैथिली हिन्दी, अंग्रेजी आ नेपाली भाषाक जानकार आ थियेटर शिक्षण, पटकथा लेखन आ तत्सम्बन्धी शोधक फ्रीलान्स शिक्षक छथि। सम्मान, उपाधि आ पुरस्कार: २००६(सीनियर फ़ेलो, मानव ससाधन विकास विभाग, भारत सरकार), २००५ ई. मे मैथिली भाषाक सर्वाधिक प्रतिष्ठित प्रबोध सम्मान, उनाप सम्मान, परवाहा (उवा नाट्य परिषद, परवाहा), भानु कला पुरस्कार (कला जानकी संस्थान, जनकपुर), २००४- पाटलिपुत्र पुरस्कार ( प्रांगन थिएटर, पटना), इप्टा पुरस्कार (कटिहार इप्टा, कटिहार), २००३- गोपीनाथ आर्यल पुरस्कार (इन्टरनेशनल थिएटर इन्स्टीट्यूट, नेपाल), यात्री चेतना पुरस्कार (चेतना समिति, पटना), बैद्यनाथ सियादेवी पुरस्कार (बी.एस.डी.पी. काठमाण्डू), २०००- चेतना समिति सम्मान (चेतना समिति, पटना), जिला विकास धनुषा साहित्य पुरस्कार (जिला विकास समिति, जनकपुर), १९९९- विद्यापति सेवा संस्थान सम्मान (विद्यापति सेवा संस्थान सम्मान, दरभंगा), १९९८- रंग रत्न उपाधि (अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली साहित्य परिषद, राँची), १९९७- सर्वोत्तम निर्देशक पुरस्कार (सांस्कृतिक संस्थान, काठमाण्डू), १९९१- भानु कला पुरस्कार, विराटनगर (भानु कला परिषद, बिराटनगर), १९९०- सर्वनाम पुरस्कार (सर्वनाम समिति, काठमाण्डू), १९८५- आरोहण सम्मान, काठमाण्डू, १९८३- वैदेही पुरस्कार (विद्यापति स्मारक समिति, राँची),

शोध कार्य: सलहेस: एकटा ऐतिहासिक अध्ययन, विरहा: मिथिलाक एकटा लोकरूप, सामा चकेबा: लोकनाट्यक एक अवलोकन, सलहेसक काल निर्धारण, विद्यापतिक उगना, शिवक गण, मधुबनी एकटा नगर अछि, हम जनकपुर छी, ई जनकपुर अछि।

हिनकर दू टा पोथी “ओकरा आँगनक बारहमासा” आ “काठक लोक” ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगाक मैथिली पाठ्यक्रममे अछि। हिनकर दू टा पोथी त्रिभुवन विश्वविद्यालय, काठमाण्डू केर एम.ए. पाठ्यक्रममे अछि। हिनकर कैकटा आलेख आ किताब सेकेण्डरी आ हायर सेकेण्डरी पाठ्यक्रममे अछि।




#Article 92: महोत्तरी जिला (144 words)


महोत्तरी नेपालक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्रक जनकपुर अञ्चलमे अवस्थित जिला छी । ई जिला नेपालक कूल भूभागक ०.६८% क्षेत्रफल आ कूल जनसङ्ख्याक लगभग २.३९% भाग ओगटने अछि । जनघनत्वक हिसाब सँ नेपालमे महोत्तरी जिला पाँचम् स्थानमे अछि । हिन्दू आ मुस्लिम धर्माबलम्बीक बाहुल्य रहल ई जिलामे बहुतेक-कम करि ९२ जातजातीक बसोबास रहल अछि। ई जिलामे जीवन निर्वाहक प्रमुख स्रोत कृषि पेशा छी । खेतीयोग्य उर्बर भूमि, विद्युत उपलब्धता, सुगम भौगोलिक अवस्था, वनजङ्गल, नदीनाला तथा खुला भारतीय सिमाना जोका विकासक अवसर तथा सम्भावना भेला बादो स्रोतसाधनक समुचित सदुपयोग नै भेला कारण राष्ट्रिय परिवेशमे तराईके पिछडल क्षेत्रक रूपमे ई जिलाके देखल जाइत अछि ।.

भौगोलिक हिसाब सँ ई जिलाके उत्तरदिस रहल पत्रेदार चुरेभावर क्षेत्र (१४%), दक्षिणमे तराइके समथर मैदान (८४ %) करि कूल २ भागमे बाँड्ल जा सकैत अछि ।

निर्वाचन आयोग (नेपाल) द्वारा निर्धारण कएल गेल, जिलागत निर्वाचन क्षेत्र अन्तर्गत  कऽ नक्सा नीचा देल गेल अछि।




#Article 93: मायानन्द मिश्र (305 words)


मायानन्द मिश्र 1934-

हिनक जन्म १७ अगस्त १९३४ ई. केँ सुपौल जिलाक बनैनियाँ गाममे भेलनि।भाङ्क लोटा, आगि मोम आ’ पाथर आओर चन्द्र-बिन्दु- हिनकर कथा संग्रह सभ छन्हि। बिहाड़ि पात पाथर , मंत्र-पुत्र ,खोता आ’ चिडै आ’ सूर्यास्त हिनकर उपन्यास सभ अछि॥ दिशांतर हिनकर कविता संग्रह अछि। एकर अतिरिक्त सोने की नैय्या माटी के लोग, प्रथमं शैल पुत्री च,मंत्रपुत्र, पुरोहित आ’ स्त्री-धन हिनकर हिन्दीक कृति अछि।१९८८- मायानन्द मिश्र (मंत्रपुत्र, उपन्यास)पर मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित।

प्रबोध सम्मान 2007सँ सम्मानित।
मायानन्द मिश्रक हिनक जन्म १७ अगस्त १९३४ ई. केँ सुपौल जिलाक बनैनियाँ गाममे भेलनि। तत्कालीन बनैनियाँ कोसीक प्रकोपसँ उजड़ि गेल। फलतः हिनक आरम्भिक शिक्षा अपन मामा स्व. रामकृष्ण झा “किसुन” क सान्निध्यमे सुपौलसँ भेलनि। उच्च शिक्षाक हेतु ई दरभंगा चलि गेलाह आऽ ओतएसँ बी.ए. कएल। पश्चात् बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुरसँ हिन्दी एवं मैथिलीमे एम.ए. कएलनि। १९५६ ई. मे आकाशवाणी पटनामे मैथिली कार्यक्रमक लेल नियुक्त भेलाह। एहि अवधिमे मायानन्द बाबू १० गोट रेडियो नाटक लिखलनि जे अत्यन्त प्रशंसनीय रहल। १९६१ ई.मे ओऽ व्याख्याता, मैथिली विभाग, सहरसा कॉलेज सहरसा, पदपर नियुक्त कएल गेलाह, जतए ई विश्वविद्यालय आचार्य एवं मैथिली विभागाध्यक्षक पदकेँ सुशोभित कएल तथा एक सफल शिक्षकक रूपमे अगस्त १९९४ मे एही विभागसँ अवकाश ग्रहण कएलनि।

छात्रजीवनसँ हिनक सुकोमल गेय गीतक रचना-

देखितहि धरणीक बिषम पियास, सजल-सजल भए गेल आकाश
बिजुरी केर कोमल कोरामे डुबइत सुरुज किरण अलसायल।
झिहरि-झिहरि सुनि गगनक गान, धरणि अधर पर मृदु मुसुकान
आकुल कोमल दूबरि दूभिक मनमे नव-नव आशा उमड़ल।

मैथिली काव्य मंचक श्रोताक हृदयकेँ जीति चुकल छल। आचार्य रमानाथ झाक “कविता कुसुम” मे ई कविता स्थान पाबि विश्वविद्यालयक पाठ्यक्रममे अध्ययन-अध्यापनक हेतु स्वीकृत भेल। हिनक उद्घोषण-कला आऽ मंच-संचालन कौशलसँ मैथिलीक कोन मंच नहि लाभान्वित भेल होएत। तेँ हिनका मैथिली मंचक सम्राट कहल जाइत छल। १९६० ई.सँ २००० ई. धरि सफलतम मंच संचालन आऽ अपन चुम्बकीय वाणीसँ मैथिली जनमानसकेँ अपना दिस आकृष्ट कएलनि। भाषा आन्दोलनक सूत्रधारक रूपमे हिनक सहयोगकेँ मिथिला आऽ मैथिली सेहो सभदिन स्मरण राखत।




#Article 94: मार्टिन लुथर किङ, जुनियर (203 words)


डा॰ मार्टिन लुथर किङ, जुनियर (१५ जनवरी १९२९ – ४ अप्रैल १९६८) अमेरिकाक एक पादरी, आन्दोलनकारी आ अफ्रिकी-अमेरिकी नागरिक अधिकारक लेल सङ्घर्षक प्रमुख नेता छी। हिनका अमेरिकाक गान्धी सेहो कहल जाएत अछि। डा॰ किङ संयुक्त राज्य अमेरिकामे निग्रो समुदाय उपर होमएवला भेदभावक विरुद्ध सफल अहिंसात्मक आन्दोलन सञ्चालन केनए छल। सन्‌ १९५५ मे हिनकर जीवनक निर्णायक काल-खण्ड छल। ई वर्ष कोरेटा सँ हिनकर विवाह भेल आ हिनका अमेरिकाक दक्षिणी प्रान्त अल्बामाके मान्टगोमरी शहरमे डेक्सटर एभेन्यु बपटिस्ट चर्चमे वक्तव्य देवाकलेल बोलाओल गेल आ एहि वर्ष माटगोमरीकेँ सार्वजनिक बसमे कारी-गोर कऽ भेदभाव विरुद्ध एकटा महिला रोजा पार्क्स अपन गिरफ्तारी देनए छल । एकर बाद डा॰ किङद्वारा प्रसिद्ध बस आन्दोलनक सुरुआत केनए छल।

पूरे ३८१ दिन चलल ई सत्याग्रही आन्दोलनक बाद अमेरिकी बससभमे कारी-गोर यात्रीसभक लेल अलग-अलग सीट रखवाक प्रावधान खत्म करि देल गेल। बादमे ओ धार्मिक नेतासभक मद्द्ति सँ समान नागरिक कानून आन्दोलन अमेरिकाक उत्तरी भागमे सेहो फैलेलक। हुनका सन्‌ १९६४ मे विश्व शान्तिक लेल सभसँ कम उमरमे नोबेल शान्ति पुरस्कार सँ नवाजल गेल। कयन अमेरिकी विश्वविद्यालय हुनका मानद उपाधि देनए छल। धार्मिक आ सामाजिक संस्थासभ हुनका सम्मान स्वरूप मेडल प्रदान केलक। अमेरिकाक चर्चित पत्रिका टाइम हुनका सन् १९६३ केँ 'म्यान अफ द इअर' चुनलक। ओ 
महात्मा गान्धीद्वारा सुरु कएल गेल अहिंसा आन्दोलनसँ बहुतेक प्रभावित छल।

 




#Article 95: मैथिलके बिकास (821 words)


मिथिला आ मैथिली भाषाक विकास हवाई सर्वेक्षण सं संभव नहि छैक |मैथिली भाषा संवैधानिक अधिकार त पाबि गेल मुदा मिथिलाक सर्वांगिन विकास त’ एखन कोसो दुर अछि |मैथिलीक संवैधानिक अधिकार भेटने काजक इतिश्री नहि भ’ गेलैक |इलेक्ट्रोनिक्स मीडिया ,प्रिंट मीडिया आ अन्य संबाद श्रोत सं मैथिलीक लेल मात्र ढोल पिटल जाइत अछि |कतेक गगन विहारी नेता वोट क्लव पर दिल्ली मे जाकय ओहीठाम दसटा मैथिल क’ पकरि इन्क्लाव –ज़िंदा वाद ,आ ५-१० टा मांगक नारा दय अखवार आ टी०वी० मे अपन वक्तव्य दय मिथिलाक विकासक सहयोगी भ’ जायत छथि |यद्यपि अगर ओ गगन विहारी नेता ओतबो नहि करताह त’ मैथिली क’ नामो लेवा वाला ताकने नहि भेटतइक ,एहि लेल ओ जरुर धन्यबादक पात्र छथि |एखन तक त’ यैह देखलियइ अछि |लेखक –कथाकार अपन काज बाखुबी निमाहि रहल छथि |मैथिली भाषाक खजाना दिन दिन भरि रहल छैक ताहि मे कोनो संदेह नहि |

मिथिलाक विकासक लेल ओकरा जमीनी लीडरसिप चाही |एहन एहन ग्रुप बनय जे ग्रुप मिथिलाक सुदूर देहात मे घुमि लोक सभ क’ जागृत करय , जे ओकर भाषा, मात्र मैथिली छैक |ओ जे बजैत अछि सैह मैथिली छैक | मैथिलीक संग कतेक षड़यंत्र भ’ रहल छैक |कनेक टेढ़ बाजू त’ मैथिली ,बज्जिका ,अंगिका मुंगेरिया आ आर कतेक भाषा मे परिणत भ’ जायत छैक |मुदा से गलत छैक |कोनो भाषा शुद्ध सभठाम नहि बाजल जायत छैक |जे हिंदी इलहाबादक छैक से कतौ दोसर ठामक छैक की ? जतेक प्रान्त ओतेक तरहक हिंदी | बनारस ,पटना ,कोलकोता ,भोपाल ,चंडीगढ़ ,दिल्ली आ दक्षिण भारत कतौक हिंदी मानक नहि मुदा ओ सभ हिंदी छैक | हर भाषा मे वैह बात छैक मुदा मैथिली संग सौतेला जका व्यबहार |एकर मूल कारण जे ग्रासरूट पर हम सभ मैथिल के एखन तक जागृत नहि कयल |

हमरा फिल्ड मे काज करबाक मौक़ा भेटैत रहैत छल |सहरसा ,पुरनिया आ कटिहार जिलाक सुदूर देहात मे जाइत छलौ त’ देखियैक मैथिली छोरि कोनो भाषा केकरो नहि बाजल होयक | पुछला पर उत्तर भेटय जे “हमरा सभक मातृभाषा हिंदी अछि “ |ईहो बात मैथिली मे बजैत छल | एकबेर सहरसा जिलाक एकटा कालेज टीचर सं गप्पक काल कहलनि जे हुनकर मातृभाषा हिंदी छनि |हम पुछलियइन ,जे अहाँक घर सुपौल लग अछि |अहाँक माँ –बाबूजी जाहि भाषा मे अहाँ सं गप्प करैत छथि ओ कोन भाषा छैक? बेचारे चुप भ’ गेलाह | कहक मतलब ओ भाषाक प्रति जागरूक नहि छथि |हम हायरसेकेंड्री मे पढैत रही |हमर एकटा मित्र छलाह श्री राम परीक्षण यादव |बोर्ड क’ परीक्षा जखन ६ मास रहलैक तखन ओ एक दिन हमरा कहलनि ,दोस्त –हमरा त’ सभ सं बेसी डर हिंदी सं होयत अछि |हम कहलियैन जे मैथिली राखि लिअ |ओ कहलनि मैथिली त’ आओर भारी छैक |हम कहलियैन अपन मातृभाषा अछि ,जल्दिये सीख लेब | हुनका हम मददि करय लगलियनि |रिजल्ट बहार भेलैक |स्कुल मे सभ सं बेसी अंक रहनि |आइ हमर ओ मित्र संयुक्त सचिव भ’ रिटायर क’गेलाह आ पूर्ण मैथिल छथि |

१- मिथिला आ मैथिलीक विकासक लेल ग्रासरूट पर मैथिल क’ जागृत केनाइ २-प्राथमिक कक्षा सं मैथिली मे अनिवार्य शिक्षा | ३ –जे बहुत अल्ट्रा माडर्न छथि ओ कम सं कम अपना घर में अपना परिवार सं मैथिली मे गप्प करथि |हम त’ कतेक क’ देखलियइन अछि जे पत्नी सं हिंदी मे बात करैत |ओकर प्रभाव त’ बाल- बच्चाक संस्कार पर परतैक |ओ बच्चा अपन भाषा क’ बिसरि जेतैक |जत’ क’ मैथिली जेहन छैक ओहने क’ व्यवहार करू |ओ परफेक्ट मैथिली छैक |एकटा बात स्मरण आबि रहल अछि |हम बरस ७०-७१ मे मोती लाल रीजिनल इंजिनियरिंग कालेज मे पढैत रही |अखिल भारतीय मैथिली साहित्य समितिक अध्यक्ष स्व० डा० श्री जय कान्त मिश्र छलाह आ हम सचिव रही ||हम सभ मैथिलीक कार्यक्रम समय समय पर करैत रहैत छलौ |विद्यापति पर्व मनेबाक कार्यक्रम बनलैक |स्वागताध्यक्ष केकरा बनायल जाय ?|हम कहलियैन हमरा कालेज मे डॉ०एस ० एन० सिन्हा ,एच ० ओ० डी० छथि ,हुनका बनायल जाय |प्रस्ताव पारित भेल |हम सभ डॉ० सिन्हा लग गेलौ |ओ कहलनि डॉ० राम कुमार वर्मा उदघाटन करताह आ हमरा मैथिली बाजल नहि होयत अछि |डॉ० मिश्र कहलखिन ,सिन्हाजी ,अहाँक घर सीतामढ़ी थीक ,मैथिलीक जन्म स्थली |अहाँ अपना घर मे जे बजैत छि सैह मैथिली थीक ||ओ बात मानि गेलाह मुदा हुनका डर होयत रह्लनि कारण एहि कार्यक्रम मे इलहाबादक तथा बिहारक पैघ हस्ती सभ भाग लइत छलाह |डॉ० सिन्हा ३-४ लाइन शुद्ध मैथिली में लिखाकय घोखि गेलाह |हम सभ जाइ त’ बे- रोकटोक सूना देथि | जखन कार्यक्रम प्रारम्भ भेलैक त’ ओ एक लाइन बाजि चुप भ’ गेलाह |१-२ मिनट चुप रहलाह |हुनका डॉ० मिश्रक बात याद परलनि |आ धारा प्रवाह अपन घर आंगनक मैथिली भाषा मे लगभग आधा घंटा तक बजलाह |पूरा हाँल ताली सं गुंजायमान भ’ गेल |तैं पूर्वी चम्पारण सं महानंदाक तट आ नेपालक तराई सं गंगाक तटक बीच मे जे भाषा बाजल जायत छैक ओ शुद्ध मैथिली छैक | प्राथमिक कक्षा सं अनिवार्य मैथिली भाषा मे पढाई भेला सं सबटा गैप स्वतः समाप्त भ’ जेतैक |मैथिली जागरणक लेल नवतुरिया सभ जिला स्तर पर ग्रुप बनाऊ |मानैत छी समय क’ अभाव अछि मुदा एही मे सं समय निकलय परत | ग्रुप बनैक त’ हमरो नाम द’ सकैत छी |




#Article 96: मैथिली भाषा (3780 words)


मैथिली (; Maithilī) भारोपेली भाषा छी जे मुख्य रूपमे भारतक उत्तरी बिहार आ नेपालक पूर्वी मधेस क्षेत्रसभमे बाजल जाइत अछि जनकपुर धाम में ई प्राचीन भाषा सेह‍ो बाजल जाई छैत समूह भारोपेली भाषा परिवार अन्तर्गत आवैत अछि आ भाषाशास्त्रक हिसाबसँ बङ्गाली, आसामी, उडिया आ नेपालीसँ एकर निकट सम्बन्ध अछि । ई भाषाक अपन तिरहुता लिपि अछि मुदा हाल एकर प्रयोग न्यून देखल जाइत अछि । हाल मैथिली भाषा देवनागरीमा लिखल जाइत अछि । 
मैथिली भाषा भारतक संविधानक आठम अनुसूची आ नेपालक संविधानक अनुसुचीमे सम्मिलित आ साहित्य परिषदद्वारा मान्यता प्राप्त भाषा छी ।

सन् २००२ मे मैथिली भाषाक भारतक संविधानक आठम धारामे समावेश कएल गेल जहिसँ भाषाक शिक्षा, सरकारी निकाय आ अन्य आधिकारिक प्रयोजनमे प्रयोग कऽ सकैत अछि। सन् २०१५ मे मैथिली भाषाके नेपालक संविधान २०७२क भाग १, धारा ५ मे आधिकारिक भाषाक रूपमे राखल गेल अछि ।
भारतक ई एक सभसँ पैघ भाषाक अन्तर्गत आवैत अछि तहिना नेपालक ई दोसर सभसँ बेसी बाजल जाइवाला भाषा छी ।  सन् २००१ धरि ई भाषा लगभग ४ करोड ४७ लाख लोकसभद्वारा बाजल जाइत अछि जहिमे सँ नेपालमे मात्र २८ लाख आ भारतमे ३ करोड ४७ लाख लोक मातृभाषाक रुपमे ई भाषाक प्रयोग करैत अछि ।

नेपालमे मैथिली तराईक जिलासभ धनुषा, सर्लाही, महोत्तरी, सिरहा, सप्तरी, सुनसरी आ मोरङमे बाजल जाइत अछि। ई भाषा विभिन्न जातिसभ आ समूहसभमे कायस्थ, राजपुत, ब्राह्मण, खत्वे, चमार, यादव आ तेली आ अन्य वर्गद्वारा बाजल जाइत अछि । संविधानमे समावेश भेलाक बाद मैथिलीमे प्राथमिक शिक्षाक रूपमे विद्यालयसभमे प्रयोग कएल गेल अछि ।
भारतक साहित्य प्रतिष्ठानद्वारा मैथिलीके साहित्यिक भाषाक स्थान पण्डित जवाहर लाल नेहरूक समयसँ प्राप्त अछि । भारतम मैथिली उत्तरी बिहारक मधुबनी, दरभंगा, सुपौल, पूर्णिया, मधेपुरा, कटिहार, अररिया, किशनगंज आ सहरसा जिलामे व्यापक रूपसँ बाजल जाइत अछि । मधुबनी आ दरभंगाक एकर प्रवेशद्वार मानल जाइत अछि । मातृभाषीसभ भारतक अन्य क्षेत्र जेना नयाँ दिल्ली, मुम्बई, पटना आ कोलकातामे सेहो अछि ।

प्राचीन मैथिलीक विकासक शुरूवात प्राकृत आर अपभ्रंशक विकाससभसँ जुड़ल अछि । मैथिलीक इतिहास १४हम शताब्दीसँ जुड़ल अछि । सन् १५०७ सँ संरक्षण करि राखल वर्ण रत्नाकार नामक मैथिली गद्य पाठ मैथिली भाषासँ सम्बन्धित सभसँ पुरान दस्तावेज मानल जाइत अछि जे मिथिलाक्षर लिपिमे लिखल अछि ।

मैथिली नाम कऽ उत्पति प्राचीन मिथिला राज्यसँ आएल अछि जकर राजा जनक छल्निह । राजा जनकक पुत्री आ राजा रामक पत्नी सीताक मैथिली नामसँ सेहो जानल जाइत अछि । मिथिलासँ समबन्धित विद्वानसभ अपन साहित्यिक काजक लेल संस्कृत भाषा आ आम लोकगीत (अवहट्ट) कऽ लेल मैथिली भाषाक प्रयोग करैत छल ।

पाल वंशक पतनक बाद, बौद्ध धर्मक अनुपस्थितिमे कर्नाट राजक स्थापना भेल आ कर्नाट वंशक हरिसंहदेव (१२२६-१३२४) मैथिलीक संरक्षक भेल । ओहि समयमे मैथिल कवि ज्योतिरिश्वर ठाकुर (१२८०-१३४०) एकटा पूर्ण मैथिली गद्य पाठ वर्णरत्नाकार लिखल्निह, जकरा आधुनिक हिन्द-आर्यन भाषा परिवार अन्तर्गतक सभसँ प्रारम्भिक दस्तावेज मानल जाइत अछि । सन् १३२४ मे, दिल्लीक सुल्तान गयासुद्दीन तुघलक मिथिला राज्यपर आक्रमण करि हरिसिंहदेवके पराजित केलक आ अपन पारिवारिक पुजारी ओइनवार वंशक मैथिल ब्राह्मण कामेश्वर झा कऽ मिथिला राज्य सौंपलक । मुदा ओहि कालखण्डमे कियो मैथिली साहित्य नै निर्माण कऽ सकलक । राजा शिव सिंह आ हुनकर रानी लाखिमा देवीक संरक्षणमे युग कवि विद्यापति (१३६०-१४५०) एक हजारसँ बेसी मैथिली अजर-अमर गीत निर्माण केल्हिन । हुनकाद्वारा निर्माण कएल गीतसभ राधा आ कृष्णक राशलीला, शिव आ पार्वतीक घरेलु जीवन आ संगे मोरङमे रहल आप्रवाशी मजदुर आ ओसभक परिवारपर आधारित छल । एकर संगे ओ विभिन्न सन्धिसभ संस्कृत भाषामे लिख्ने छल । विद्यापतिद्वारा निर्माण कएल गेल प्रेमगीतसभ बहुत कम समयमे सम्भ्रमित सन्त, कवि आ युवासभक दिल जितैमे सफल भेल छल । बङ्गालक वैष्णव सम्प्रदायक सन्त चैतन्य महाप्रभु ई गीतसभक पाछा प्रेमक दिव्य प्रकाश देख एकरा ओहि समुदायक आधारगीत बनेनाए छल । रवीन्द्रनाथ टैगोर उत्सुक भऽ ई गीतसभ अपन पदावली भानुसिंह ठाकुरेरमे अनुकरण केनए छल ।आसाम, बङ्गाल आ उत्कलक धार्मिक साहित्यके अपन रचनासभसँ विद्यापति बहुतेक प्रभावित केनए छल ।

मैथिली या तिरहुतियासँ सम्बन्धि अति प्रारम्भिक सन्दर्भ सन् १७७१ मे प्रकाशित अल्फाबेटम ब्राहमनिकम नामक पुस्तकमे कएल गेल अछि ।सन् १८०१ मे कोलब्रुक्स ऐसे अन द संस्कृत एन्ड प्राकृत ल्याङ्गवेज नामक पुस्तकमे मैथिलीके अलग बोलिक रुपमे वर्णन कएल गेल अछि ।

१७हम शताब्दीके मध्यमे वैष्णव सन्तसभ, विद्यापति आ गोविन्ददासद्वारा बहुतेक मृदुभाषी गीतसभ लिखल गेल । मापति उपाध्याय पारिजातहरण नामक नाटक मैथिली भाषामे लिखने छल । व्यवसायिक समूह मुख्यतया दलितसभ जकरा किर्तनिया सेहो कहल जाइत अछि ई नाटकके गीतक रुपमे जनसमूहमे प्रस्तुत करैलेल आरम्भ केलक । लोचन (१५७५-१६६०) रगतरागिनी लिखलक जहिमे सङ्गीत विज्ञानक महत्वपूर्ण ग्रन्थ, रागसभक वर्णन, ताल आ मिथिलामे प्रचलित गीत सङ्ग्रहित छल ।

१६ शताब्दीसँ १७ शताब्दीक बीचमे मल्ल वंशक शासनकालमे मैथिलीक पहुँच वृहत भेलाक संगे पुरे नेपालमे फैलल छल ।

विद्यापति मैथिली भाषाक आदिकवि आर सर्वाधिक ज्ञात कवि छला । विद्यापति जी मैथिली अतिरिक्त संस्कृत तथा अवहट्ट शेहो रचना केनए अछि ।

ब्राह्मणेत्तर मैथिलीक विश्लेषण आ संश्लेषण एकटा भेग विषय थिक । अहिमे भाषा, साहित्य, संस्कृति, परम्परा, रीतिथिति, पहिरनसहित अनेकन विषय समेटल जा सकैत अछि । ई एकटा अध्ययन, अनुशन्धान आ खोजक विषय सेहो अइछे आ बनबाको चाहि । एहि विषयकें जनबाक आ बुझमाक लेल मैथिलीभाषी क्षेत्रमे रग–रग पसरल ‘ब्राह्मणवाद’ आ ‘मनुवादी’ मानसिकताक जडिकें सेहो खोदबाक या कमेबाक लेल बान्छनिय अछि । जेना खेतमे लागल बालिकें कमेबाक आवश्यकता पडैत छैक, तहिना मैथिली भाषामे करैय पडत । आब मात्र जमिनकँे थामि या तामिकँे, कोरकार ककेँ, चौकी दकेँ बालि छिटलासँ काज नहि चलत । मैथिली भाषाक नाम पर खेतिपाती करैवला सब आजूधरि ‘बौग्ग’ लगाकेँ सोह्रे आना उब्जनी लइत रहल आ मैथिली माय घुसकुनिया कटैत रहली अछि । अनेक ‘वाद’केँ नाम पर जलकुम्भि सब मैथिलीभाषी क्षेत्रमे पसरि गेल अछि । ओ सबकेँ

उखाडि फेक नव सिरासँ आगा बढबाक नितान्त जरुरी भए चुकल अछि । अहि आलेखमे उपर उल्लेखित दूटा विषय पर प्रतिनिधिमूलक तथ्य सब मात्र उल्लेख अछि । ब्राह्मणेत्तर समुदायकँे कोन रुपेण मैथिलीमे अछोपकँे व्यवहार कयल जाइत अछि ? मैथिली मानकक नाम पर ब्राह्मणेत्तरकँे कोनाकँे अलग–थलग पारल गेल अछि आ पारि रहल छैक, तक्कर ई आलेख एकटा उदाहरण मात्र भँ सकैत अछि । ऐतह ई कहि दी जे आलेख कोनो जाति, धर्म, सम्प्रदाय आ वर्गक गरिमा आ प्रतिष्ठाकँे आँच पहुँचय से उद्देश्यसँ किमार्थ नहि लिखल गेल अछि । विशुद्ध मैथिली भाषाक उत्थान आ जर्गेनामे टेवा पहूँचय ताहि लेल अछि, एकरा मैथिली भाषामे जारी शुद्धिकरण अभियानक एकटा अंशकँे रुपमे मानल जाए, विनम्र आग्रह ।

ब्राह्मणेत्तर, भाषा आ साहित्यः 

सामान्य बुझाईमे गइर–ब्राह्मणकेँ ब्राह्मणेत्तर कलह जाइत अछि । मैथिलीभाषी क्षेत्रमे अहि शब्दक प्रयोग बहुत कम भेटैक छैक । मुदा मैथिली भाषा, संस्कृति, साहित्यसहितमे ब्राह्मणवाद हाबी भेलाक कारण किछु समय एम्हर एहि शब्दक प्रचलन घनगर रुपमे फेरसँ शुरु भँ गेल अछि । पहिने साहित्यकेँ ब्राह्मण आ ब्राह्मणेत्तर रुपमे विभाजन कएल गेल बात किछु प्रकाशित सामग्री सबमे भेटैत अछि । कोनो भी भाषामे साहित्यकँे महत्वपूर्ण अंग मानल गेल अछि । साहित्यक रिढ कहल जाइत अछि भाषाकेँ । साहित्य साक्ष्य दू प्रकारकँे होएत अछि–धार्मिक साहित्य आ धर्मनिरपेक्ष (लौकिक) साहित्य । धार्मिक साहित्यकँे अन्तर्गत ब्राह्मण आ ब्राह्मणेत्तर ग्रंथ अबैत अछि । वेद, पुराण, उपनिषद्, रामायण, महाभारत, स्मृति ग्रंथ इत्यादि ब्राह्मण साहित्यकँे अंतर्गत आ जैन तथा बौद्ध रचना सब ब्राह्मणेत्तर साहित्य अन्तर्गत अबैत अछि (सत्य प्रकाश, सन् २०१८) । एहिमे कबिरक बाणी, रवि दाससहितकँे सेहो जोडि सकैत छि । मैथिलीभाषी क्षेत्रमे ब्राह्मण साहित्यक प्रभाव बड बेसी भेटैत छैक । कृर्तिम पात्र खडा ककेँ ‘धार्मिक गुलाम’ बनबैयवला मिथक कथा सब बहुत प्रचलनमे अछि । एहिमे सबसँ बेसी ओझरायल ब्राह्मणेत्तर जाति÷समुदाय भेटैत छैक । ब्राह्मणवादी मिथक सबकँे प्रभावमे एतौहका मूल निवासी वा ब्राह्मणेत्तर संस्कृतिवला लोक सब अपन बृद्धिमान, उदार आ न्यायप्रिय राजकँे प्रतिमानकँे भूल जाइत अछि, बिसरि गेल अछि ।

मैथिलीभाषी क्षेत्रमे ब्राह्मण बाहेककेँ ब्राह्मणेत्तर मानल गेल अछि । तेँ ओ सब जे बजैत–भुकैत छथि, से ब्राह्मणेत्तर भाषा भेल आ ई भाषाक टोन ब्राह्मण सँ अलगे होइत छैक । अखनोधरि मैथिलीमे ओहि टोनकेँ मान्यता कथित ‘मानक जातिक’ महाजन लोकनि नहि देने छथि । मुदा कहैत जरुर छथि जे ‘अहाँ जे बजैत छि, सेहा मैथिली थिक’ । ई नारा व्यवहार आ कार्यान्वयनमे शून्य देखल गेल अछि । ओहुना मैथिली भाषी क्षेत्रमे अतितमे ब्राह्मणवादीद्वारा चार वर्ण (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य आ शुद्र), पचपनियाँ, सोलकन, पिछडावर्गसहितकँे विभाजित कएले गेल छल । आब ब्राह्मणेत्तरकँे रुपमे भँ रहल अछि । एहन परिस्थिति एनाई दूर्भाग्यपूर्ण थिक । एहन अवस्था किएक आएल अछि ? कि मैथिली ब्राह्मणेत्तरकेँ नहि छियैक ? यदि छियैक त ओकरा सबकेँ अहि भाषासँ जोडबाक लेल प्रयत्न किएक नहि भेल आ भए रहल अछि ?...एहने बहुत रास प्रश्न आ जिज्ञासा वर्षौसँ सार्वजनिक भँ रहल अछि । समाधान दिस किनको ध्यान किएक नहि जा रहल छनि ?

ब्राह्मण आ ब्राह्मणेत्तर भाषा÷साहित्य÷ग्रंथ दू फराक विषय थिक । ब्राह्मणेत्तर साहित्य सबमे, खास ककेँ मैथिलीभाषी क्षेत्रमे पसरल जकाँ विभिन्न ‘वाद’ वा जातिगत विभाजनक बात नहि भेटैत छैक । ब्राह्मणेत्तर साहित्य –बौद्ध ग्रन्थ त्रिपिटक, जैन ग्रंथ, जातक कथा सब अछि, एकरा अध्ययन कएलाक बाद एहा निस्कर्ष निकलैत छैक । अई साहित्य अन्तर्गत सर्वाधिक प्राचीन ग्रन्थ त्रिपिटक अछि । ई सर्वाधिक प्राचीन बौद्ध ग्रन्थ सेहो अछि । त्रिपिटक तीन अछि–सुत्त पिटक, विनय पिटक, अभिधम्म पिटक । सुत्त पिटकमे बुद्धकँे धार्मिक विचार आ वचन संग्रहित अछि , एकडा वौद्ध धर्मकँे इनसाइक्लोपीडिया कहल जाएत अछि । विनय पिटकमे बौद्ध संघकँे नियम, अभिधम्म पिटकमे बौद्ध दर्शनकँे विवेचना आ जातकमे बुद्धकेँ पूर्व जन्मकँे काल्पनिक कथा सब भेटैत अछि । मैथिलीभाषी क्षेत्रमे.ब्राह्मणेत्तर साहित्यक चर्च सेहो मुश्किलसँ होयत अछि ।

भाषाकें प्रारम्भिक विकासमें ब्राह्मणेत्तर :

ब्राह्मणेत्तर शब्दक प्रयोग महात्मा गांधी सेहो कएने छथि । ओ कहने छथि, ‘दक्षिण भारत जतेह ब्राह्मणक दृष्टिमे ब्राह्मणेत्तर मात्र अस्पृश्य मानल जाइत अछि, ओतेह त ब्राह्मणवादीद्वारा कएल गेल विभेदक विकृति थप विकृतिपूर्ण देखल गेल अछि । ओकरा सबकँे पक्षमे खडा होमेवला कोनो व्यक्ति नय भेटैत अछि’ (महात्मा गांधी, १९५८) ।  किछु साहित्य प्रकाशन सबमेँ कबिरक वाणीकँे ब्राह्मणेत्तर परम्पराकँे उपादानक निर्देशनकँे रुपमे सेहो प्रस्तुत कयने छैक (मधुमति, सन् १९८६) । मिथिलाभाषी क्षेत्रमे बुद्ध, कबिर, महाविरसहितकें ब्राह्मणेत्तर पर लिखल साहित्य नगण्य छैक, खोजलो पर भेटनाई मुश्किल अछि । सबसँ बेसी विद्यापति पर लिखल गेल अछि । भुसुक राउत जे ब्राह्मणेत्तर जातिकेँ सिद्ध साहित्यकार छलाह, हुनका पर लिखल साहित्य–सिर्जना बड कम भेटैत छैक । जब की विद्वान लोकनिकेँ मत छनि जे मैथिली भाषाकेँ प्रारंभिक विकास ब्राह्मणेत्तर जातिसँ शुरु भेल अछि । बीएन मंडल विश्वविद्यालयके अंग्रेजी विभागक पूर्व संकायाध्यक्ष डा. ललितेश मिश्र एहि बातक रहस्योघाटन करैत कहैत छथि, ‘मैथिली भाषाकें प्रारम्भिक विकास ब्राह्मणेत्तर जातिकँे सिद्ध साहित्यकार भुसुक राउत, डाक आदिकँे जरिए भेल रहैक (जागरण डट कम, २०१७) ।

मैथिली भाषामेँ ब्राह्मणेत्तर जातिकेँ योगदानक चर्चा एकगोटा विद्वान÷समालोचक मोहन भारद्वाज सेहो खुलिएकेँ केने छथि । ओ त मैथिली भाषाक उत्पतिकँे श्रेय ब्राह्मणेत्तरकेँ दैति छथि । ओ लिखैत छथि– ‘स्पष्ट अछि जे मैथिली मिथिलाक भाषा अछि । मिथिलाक मूलनिवासी द्रविड आ जनजातीय लोक सभ छलाह । ओ सभ मुण्डारी परिवारक भाषा (कोल भाषा) बजैत रहथि । कालान्तरमँे ओकर स्वतंत्र नामाकरण भेल । आई ओकरा मैथिली कहल जाइत छैक ।....मुंडा–परिवारक अनेक जनजातिय भाषा सँ ल’ क’ संस्कृत आ हिन्दी धरिक अगणित शब्द मैथिलीक शब्द–भंडारमे अछि । मुदा, मैथिलीक जे व्याकरण–पोथी अछि ताहिमँे अधिकांश एहने अछि जाहिमँे मैथिली समाजक भाषिक विविधताकेँ नकारल गेल अछि । लेखक भाषाकेँ समाजक सामुहिक देन नहि मानैत वर्गीय आ जातिय भावनासँ परिचालित भेलाह अछि । सामन्ती आ जातिय आँखिसँ भाषाकँे देखलनि अछि । वाचित भाषाकँे नकारि देलक अछि, जे मैथिली भाषाकँे जीवन्तता आ जिजीविषाक प्रमाण अछि । मैथिलीक मूल स्वभाव आ शक्ति के अनठा क’ दुतकारि क’ मिथिलाक सम्भ्रान्त वर्ग मानक मैथिलीक परिकल्पना कयने छथि (डाक–दृष्टि, २०१२) ।

मानकिरणकेँ नाम पर विभेद:

ब्राह्मणेत्तर मैथिलीभाषी आमजनकेँ बोली, लय, शैलीकेँ कथित ‘मानक जातिक’ लोक सभ मैथिली मानिते नहि छथि । तेँ मैथिलीक वर्षौसँ दूर्भाग्यपूर्ण नियति भोगि रहल अछि । शुद्ध आ विशुद्ध या अशुद्धकेँ लडाई जाधरि मैथिलीभाषामेँ रहत एकर उन्नयन आ विकास असंभव अछि । छुत, अछुत, अछोप... बला बात मैथिलीभाषी बहुत झेललक/खेपलक अछि । आब ‘हम आ ओ’ बला बात मैथिलीमें दुर्भाग्यपूर्ण अछि । भाषाविद् डा.रामअवतार यादव कहैत छथि– ‘मानक मैथिलीक प्रचलनक आधार भाषावैज्ञानिक नहि भ’ सामाजिक आ भाषावैज्ञानिकेतर अछि । जाति, शिक्षा, पारिवारिक वा सामाजिक पृष्ठभूमि, सामाजिक मनोवृत्ति आदि सन भाषावैज्ञानिकेत्तर कारक तत्वक पृष्ठभूमिमँे एहि मानक मैथिलीक आधारशिला स्थापित भेल अछि ओ खास क’ ब्राह्मण आ (कर्ण) कायस्थ जातिद्वारा अपना–अपना बोलीकेँ उत्तम, स्तरीय ओ विशुद्ध मैथिली बुझि अभिमान करब एहि मानक मैथिलीक विशेषता मानल जाइत अछि । मिथिलाक ब्राह्मण ओ कायस्थ एक प्रकारक कृत्रिम ‘हम–ओ’ भिन्नताक सृजन क’प्रचण्ड रुपेँ एहि कुत्सित भावनासँ ग्रस्त छथि’ (मैथिलीक भाषिक वैविध्य ः औपभाषिक ओ मानक स्वरुप, १९९९) । डा.यादव मैथिलीक मानकक निर्धारण भाषा बैज्ञानिकद्वारा होए, से कहैत छथि । मुदा आब बागमतिमेँ बहुत जल प्रवाहित भए चुकल अछि , पानिबहि गेल अछि, तेँ भाषाक मानक जन–जनकेँ बोली, शैली, लय, तर्जसहितकँे आधार पर होमाक चाहिँ । लोक सब आब एहेन मैथिली भाषाक प्रतिक्षामें छनि, जहिमे ओकरा सबहक अपन बोली समावेश होय, ओ सब सेहो अपनत्व भावनाक साथ पढय आ लिखय सकैय, नेपाली भाषा जँका ओकरा सबहक अपने मातृभाषा दोसर भाषाक रुपमेँ नहि बनौक....।

आम मैथिलीजनकेँ मैथिलीभाषाप्रतिकँे त्रास आ भयकेँ अंग्रेजी विद्वान पोल आर ब्रास सेहो पुष्टि करैत लिखति छथि– ‘मैथिलीभाषी समाजक भाषिक दुगोलाक चलते मैथिली भाषाक विकास अन्य भाषाक तुलनामे मंथर गतिसँ भेल अछि । छात्रलोकनि मैथिली पढवामे एहि लेल हिचकिचाइत छथि जे ओ जाहि वत्र्तनीमे लिखताह ताहिसँ भिन्न वत्र्तनीकेँ मानयवला यदि परीक्षक भ’गेलथिन त’ हुनक अंक कटि जयतनि ’(ल्याङ्गवेज, रीलीजन एण्ड पोलिटिक्स इन नोर्थ इण्डिया, १९७४) । ब्राह्मणेत्तर लोकनिकेँ अहि डर÷त्रासक निर्वारणकर्ताकँे खोजि मैथिलीभाषी क्षेत्रमें दशकौं पहिनेसँ भए रहल अछि । अहि विषय पर कोहि दादा कहबैक लेल निकलूँ ? हाँ, अहिकेँ लेल ‘अश्व शक्ति’ बढेनाय परम आवश्यक सेहो अइछे । ई शक्ति प्राप्तिक लेल मैथिली पत्रकारिताके अस्त्रकेँ रुपमे प्रयोग करबाक सुझाब नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानसँ प्रकाशित आङन पक्रिकामे अछि । पत्रिका अनुसार, विभिन्न भाषाकेँ अपन–अपन महत्व आ पहिचान होइत अछि । मैथिली भाषा ओहिमें सम्भवतः सबसँ उपर आ आगाँ अछि । एकर विरासत आ इतिहास आन कोनो भाषासँ बेसी गरिमामय अछि । परञ्च मैथिली डेगाडेगी मात्र बढिरहल अछि । अहि भाषाक उत्थानक लेल सरोकारवला सभकें ‘अश्व शक्ति’ बढेनाई आवश्यक अछि । अहि शक्तिकेँ प्राप्तिक लेल मैथिली पत्रकारिताकें एकटा अस्त्रक रुपमे प्रयोग कएल जा सकैत अछि (आङ्न,४०ः२०७५) ।

मैथिली भाषामे ब्राह्मणेत्तर मैथिली भाषीकँे महत्वपूर्ण योगदान छलैक,अछि आ रहत । डाकवचन एकर एकगोटा साक्षात प्रमाण थिक । मैथिली साहित्यक प्रारम्भ डाकवचनसँ भेल अछि । ओना, इतिहासकार लोकनि ज्योतिरीश्वरकृत वर्ण रत्नाकरसँ एहिसात्यिक विवेचन–विश्लेषण शुरु करैत छथि, मुदा से उचित नहि । एहिसँ इतिहासकार सभक दृष्टि–सीमा तथा सामथ्र्यहीनता तँ देखार होइते अछि, मैथिली भाषा–साहित्यक कतेक अहित भेल अछि सेहो ध्यान देबाक विषय थिक । असलमे मौखिक साहित्यकेँ साहित्य नहि कहब, ओकर सोध–अनुशन्धान नहि करब जाहि मानसिकताक देन अछि तकर परिणाम मैथिली साहित्यक इतिहाससे नहि, सम्पूर्ण मिथिला–मैथिली भोगि रहल अछि (डाक–दृष्टि) । बहुत रास विद्वान लोकनि डाकवचनकँे लोकसाहित्यकँे उपमा दैति छथि । खास ककें उदारवादी मैथिली साहित्यकार त अहि दिस अपन कलम चलबैइते आबि रहल अछि । डाकवचन लोकसाहित्य, मौखिक साहित्य आ लोककथन अछि((ऐऐ) । डाकवचन एकटा मौखिक साहित्य अछि , एकरा सैकडो वर्ष धरि एकर वाचिकेँ रुप प्रचलित रहल बात दूर्भाग्यपूर्ण अछि । बाह्मणेत्तर साहित्य भेलाक कारण डाकबचनकँे अहि अवस्थासँ गुज्र पडल । ओना आब त लिखित रुप सेहो उपलब्ध भँ रहल अछि । मुदा मौखिक साहित्य के साहित्यक कोटी ने नहि रखनिहार लेखक सभ एकरा साहित्य मानैय लेल तयार एखनो नहि अछि ।

अपभ्रंश शब्द आ गलत प्रचारः 

लोक शब्दक अर्थ अछि, ‘लोक समाजक ओ वर्ग थिक जे आभिजात्य संस्कार, शास्त्रीयता आ पाण्डित्यक चेतना एवं अहंकारसँ मुक्त रहैत एकटा परम्पराक प्रवाहमे जीबैत अछि (हिन्दी साहित्यकोश, १९८५) । लोक भाषा, संस्कृति आ साहित्यकँे प्रतिनिधित्व आ बचाबमे ब्राह्मणेत्तर वर्गक योगदान अतूलनीय अछि । मुदा मैथिली साहित्यमे ब्राह्मणवादीकँे द्वारा ब्राह्मणेत्तरकँे वर्षौंधरि अछोपक श्रेणीमेँ राखल गेल अछि । एकरा प्रष्ट रुपसँ कहल जाए त  मैथिली भाषा, साहित्य आ संस्कृति पर ब्राह्मणवाद हावी अछि । तेँ मैथिली भाषा वषौंसँ पाछा अछि । कण्ठानुकण्ठ विकसित होमयवला काव्य–वाणीसँ भरल–पूरल अछि ब्राह्मणेत्तर मैथिली मुदा एकर लिखित रुप नहि भेलासँ ब्राह्मणवादी साहित्य मैथिलीभाषी क्षेत्रमे लोकगीतकँे रुपमे प्रचार कयल गेल अछि । एकटा उदाहरणकँे रुपमे ग्राम्य लोक–आस्थाक केन्द्र रहल ‘डिहबार बाबा’क महिमा गीत ‘ब्राह्मण बाबू यौ, कनियो कनियो होइयौ न सहाय....’ के लेल जा सकैत अछि । अहि गीतकँे व्याख्या करैत पत्रकार श्यामसुन्दर यादव ‘पथिक’ लिखैत छथि, ‘ गीतमे ब्राह्मण कहि डिहबारकेँ सम्बोधन कएल गेल अछि । आपत–विपत वा समस्या पडलाक अवस्थामे ब्राह्मण अर्थात राजाजी डिहबारकेँ सहारा बनबाक लेल विन्ती कएल जाएत अछि ’ (आङन, २०७५, पृ.९४) । प्रायः मैथिली भाषी क्षेत्रमे ‘बरहम बाबा’कँे रुपमँे सेहो संवोधन होयत आबि रहल ‘डिहबार बाबा’ गावसँ बाहरे भेटैत अछि । एकरा सर्वजातीय लोकप्रिय लोकदेवता मानल जाएत अछि । ब्रह्मासँ ‘बहरम’ आ बादमे ‘ब्राह्मण’ बनि गेल होयत, निराकार ब्रह्मा साकार आ सद्गुण बरहमक रुपमे मिथिलाञ्चलमे पूजित आ सम्मानित अछि (मैथिली संस्कृति, २०५६) । बहरम सँ बराहमन बनाओल गेल आ ओकरा गीतक रुपमे प्रचार कयल गेल बुझमामे किनको कोनो दिक्कत होएत से नहि बुझायत अछि । बरहम बाबा या डिहबार बाबा थानतर गबैवला किछु गीत सब अछि– ‘हाथ चलैत बिहुसैल छतिया ओ बराहमन बाबु, हाथ दुवु कमलक पटल ओ बराहमन बाबु...,’ ‘करिया मेघ चढि वैसल हो बराहमन सुगवा जकाँ मडरावैं......,’ ‘बरहामन बाबुकँे आङना चनन घन गछिया...,’ ‘मुखले जे खयलक हो बरहामन अछतकँे धनमा...,’ ‘तीन रंग घोडवा बरहामन सबुजे रंग वछेखा,’ ‘बराहामन बाबु भेल असबार....,’ ‘बेरी वरजौ मालिक बेरी आ ओही बाटे जयता बरहामन बाबु...’ (ऐऐ) सहितकँे बहुत लोकगीतमेँ उल्लेख कयल गेल निराकार दिहबार (बरहम)कँे लेल प्रयोग भेल शब्द कोनाकेँ अपभ्रंस भए ‘बराहमन(ब्राह्मण)’ बना देल गेल अछि । अहि गीत सभहक अपव्याख्या के पुष्टि तखन होयत अछि जखन बरहम बाबाकँे अध्र्य देबाक समय गाबैवला गीतमेँ लाल जनेउकँे प्रसंग अबैत अछि । ई गीत देखल जाए –

लाल जनेउ मङ्गायब, करिया छागर धुर बाहयब ।

(मैथिली संस्कृति,पृ.१३१)

जनेउ बिन सुखल शरीर......।’

बहिनी मोरा खेहैत रे जनेउ आ,

धनी मोरा रंगतै बरहामन पाटे सुत जनेउआ ।’

(मैथिली संस्कृति,पृ.१३२)

बरहम वा डिहबार बाबा सूर्य आ निरञजनकेँ प्रतीककेँ रुपमे सूर्यक स्वरुप आ संस्कारसँ मण्डित अछि । ओ निराकार अछि । मिथिला क्षेत्रमे कतौह बरहम बाबा त कतौह डिहबार बाबाकेँ रुपमे गामक तमाम लोकक आस्थाकँे केन्द्र अछि । सम्भवत :डिहबार थानमे माटिकँे पिढी मात्र भेटत । हाँ मिथिलाक पारम्परिक लोकमूर्तिकलामँे घोडा पर चढल बरहम बाबाक माटिकँे मुर्ति जरुर भेटैत अछि । जहिमँे कोमल कान्त मुखाकृति, माथ पर पगडी, सेरवानी धोती आ चमडाकँे जुत्ता लगाओल मुर्ति सिल्पी जाति कुम्हार समुदायकँे द्वारा बनाओल जाएत अछि । मिथिलाक विभिन्न मांगलिक कार्यमँे दिहबार स्थान पर चढाओल जाएत अछि (ऐऐ) ।

ब्राह्मणेत्तर समुदायकँे मैथिली संस्कृतिकँे बचाबमे महत्वपूर्ण योगदान सबदिनसँ अछि । मुदा ओ मिथिलामे हमेसा पाछा रहल अछि । धर्मक नाम पर दास बनाओल गेल अछि । आब भाषाक नाम पर दास बनाओल जा रहल अछि । पाणिनि व्याकरणक चर्चा मैथिली भाषाकँे लेल  करैवला सब ब्राह्मणेत्तरकँे भाषिक लय, शैली, बोली, कण्ठोच्चारकँे बाईपास करैत आबि रहल अछि । ई ब्राह्मणेत्तर समुदायकँे मैथिली मातृभाषाकँे दोसर भाषाक रुपमे प्रस्तुत करबाक प्रपंच मात्र अछि । सावधान आ सचेतना जरुरी अछि । ब्राह्मणेत्तर नहि शुद्ध नेपाली लिख सकत आ नहि मैथिली बाज आ लिख सकत त ओकरा सबहक भाषिक अधिकारक एकटा उलंघन नय भेल कि ?

लेखनीमे जातिकँे प्रभाव रहितै छैक, मुद्दा एकर अर्थ ई किन्नौह नहि जे ओकरा अपन स्तुतिगानमँे प्रयोग कएल जाय । शब्दके अपभ्रंस कयल एकटा अउर उदारहण देखियौं : मैथिलीमँे जे डाकवचनक संकलन–संपादन भेल अछि तकर अवस्था व्यक्ति पिच्छे फरक भेटैत छहि । डाकवचनक वनस्पति प्रकरणमे केरा रोपबाक प्रसंग आयल अछि । विद्वान कपिलेश्वर झा आ जीवानन्द ठाकुरक संकलनमँे ओकर प्रारम्भिक दू पाँती एहि प्रकार अछि–

कहए डाक तों सुनह रावन, केरा रोपी अखाढ सावन ।

तीन सय साठि जे केरा रोपए, आबि निचिन्त घरहि भए सुतए ।।(पृ.६७)

शशिनाथ झाक संग्रह मे ई पाठ अछि–

कहय डाक तों सुनह बाभन, केरा रोपी असाढ सावन ।

तीन सय साठि जे केरा रोपए, आबि निचिन्त घरहि भए सुतए ।।(पृ.३८)

ई उपर देल गेल दूटा फरक संग्रहकेँ मोहन भारद्वाजकँे ‘डाक–दृष्टि’ मे सुन्दर व्याख्या कएल गेल अछि । ओ लिखैत छथि–

ध्यान देबाक अछि जे शशिनाथ झाक पाठमे ‘रावन’ बदला ‘बाभन’ शब्द अछि । किएक ? ओ प्रायः मानैत छथि जे रावन राजा रहय, ओकरा केरा रोपबाक लेल कहब उचित नहि । तेँ शशिनाथ झा रावन केँ नहि, बाभन केँ सम्बोधित करैत छथि । मुदा, वास्तविकता से नहि अछि । वामन शिवराम आप्टे संस्कृत–हिन्दी कोश मे रावण शब्दक अर्थ लिखने छथि– क्रन्दन करयवला, चीत्कार करयवला । माने ई जे डाकक पद मे रावनक अर्थ अछि गरीब–गुरबा, दीन–हीन । उक्त पद एहने असहाय लोक केँ संबोधित अछि । एहिठाम रावण शब्दक प्रयोय अत्यन्त सटीक आ सार्थक अछि । तखन शशिनाथ झाक पाठान्तरक प्रसंग की कहल जाय ?(ऐ.ए.े)

डाकवचनक रचना शुरु भेल दशम् शताब्दीमे । मौखिक स्तर पर । कालक्रमे पदक संख्या बढैत गेल । कपिलेश्वर झा(१९२४ ई) डाकबचनक के पहिल संकलक छथि । ई संग्रह लोककण्ठसँ कयल गेल छल, तेँ एहिमे संस्कृतसँ अनूदित वा प्रभावित रचना कम अछि । भाषा तथा लेखन–शैली सेहो लोकमानसक अनुकूल अछि(ऐ.ऐ.) । मुदा प्रचलित समयमे ब्राह्मणेत्तर लोकनिक मौखिक सामग्री सब बड कम भेटत, जे भेटल चिकनाय आ पोलिस कयल भेटत । ओ लोकमानसक आ ग्राम्य बासिन्दाक अनुकूल कम आ बजारमे रहैयवला मैथिली भाषाक दोकानदारीमे लागल लोक सबहक घाटानाफा के गणितमे ओझरायल बेसी भेटत ।

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान, काठमाण्डू सँ प्रकाशित बहुभाषिक अर्धवार्षिक पत्रिका सयपत्रीमें ‘मैथिली भाषा आ साहित्य ःसमस्य आ समाधान’ शीर्षक आलेख मे लिखल अछि, ‘ चौधम् शताब्दीकेँ महान ग्रंथ ज्योतिरीश्वरक ‘वर्णरत्नाकर’ मे अन्य नाच आ लोक बाजा सबकेँ चर्च कएल गेल अछि, परन्च ‘सलहेस नाच’ आ ‘ओरनी’ के चर्च नहि अछि(लोकनायक सलहेस, २०७०) । बहुत राश इतिहासविद्क मत छनि जे सलहेसक काल ओहूँ सँ पहिने शुरु भेल रहेक आ सलहेस नाच ओहेँ समय प्रचलन मेँ आयल होयत । इतिहासविद मणिपद्म पाँचम् वा छठम् शताब्दी मे सलहेसक जन्म भेल बात लिखने छथि । ओना त अहि विषय पर मतैक्यता नहि अछि । तईयो बहुमत विद्वानक मतकँे जौ मानल जाए त ज्योतिरीश्वर सँ बहुत पहिने  सलहेसक जन्म भेल रहल निस्कर्ष पर पहूँचल जा सकैत अछि । मादे, ‘दलित’ होमाक कारण हुनका ओहि समयमेँ अपन साहित्य रचनामे उल्लेख करबामे मनासिब नहि मानल गेल होए ?(सयपत्री, २०७५) ।

पदासिन लोकनिके भूमिका :

मैथिलीमे ब्राह्मणेत्तर लोकनिकँे अपन–अपन भाषा, शैलीमे सिखबाक–बुझबाक, लिखबाक आज्ञा नहि छैक । कथित ‘मानक जाति’ वला सभ ओकरा सबहक भाषाक मान्यता मैथिलीक रुपमे नहि दैत छथि । एकर पैघ उदाहरण सरकारी संचार माध्यम, छापा वा प्रकाशनमे कार्यरत समाचार वाचक, लेखक आ सम्प्रेषक तथा भाषा सम्पादक आ सरकारी पाठ्य पुस्तक लेखनमे ब्राह्मणेत्तर जातिकँे न्यायोचित स्थान नहि गेल तथ्यकँे लेल जा सकैत अछि । दिबिया नेसकँे खोजब तइयो नहि भेटत । हाँ, कतौह भेटियो जेताह त ओ ‘मुर्ति जका ठाड’ भेटत । ओ कोनो दुकानक ‘शोपिस’ मोडेलकँे भूमिकामे मात्र भेटत । पद आ कुर्सीकँे लेल अपन मान, प्रतिष्ठा आ ईज्जतकँे दाउ पर लगेबाक लेल आतूर भेटत । तेँ बहुजन लोकनि मैथिली भाषाप्रति उखरल स्वभावके बडबेसि भेटैत छथि । मिथिलामे बुद्धकँे निस्तेज कयल गेल बात आब पुरान भँ गेल । मुदा कोनो भी भाषाकँे समृद्ध आ सर्वमान्य बनेबाक लेल हुनक ई तथ्यगत बात बिचारणी विन्दू भँ सकैत अछि– ‘बुद्ध ब्राह्मण नहि, ब्राह्मण विचारधाराक विरोधी छलाह । संस्कृत भाषा नहि, धर्माचारमे संस्कृतक माइनजी हुनका अखरैत रहनि । तेँ ओ कोनो एकटा भाषाकेँ नहि, जनपदीय सभ भाषाकेँ समान मानलनि । एक बेर हुनक दू शिष्य हुनकासँ अनुरोध कयलथिन जे अपन धर्मोपदेशक भाषाकेँ वैदिक भाषामे निबद्ध करबाक अनुज्ञा देल जाए । एहि पर बुद्ध कहलथिन–भिक्षुगण, हम अपन वचनकेँ प्रत्येक व्यक्तिक अपन–अपन भाषा, शैलीमे सिखबाक–बुझबाक, लिखबाक आज्ञा दैत छी ’ (सयपत्री :१०६ः२०७५/डाक–दृष्टिः६०–६१ः२०१२ई) । कथित ‘मानक जातिक’ लोक सभ अहि बातकेँ कोना बुझत,  जौ ज्योतिरीश्वर जेहेन पण्डित नहि बुझिलथि । ओ अपन ‘सरोवरवर्णना’ मे लिखने छथि –बौद्धपक्ष अइसन आपात भीषण । तब कहूँ ब्राह्मणेत्तर बुद्ध मैथिली भाषी क्षेत्रमे कोनाकँे टिकत ? संसारभरि बुद्धकँे लाखौं अनुयायी भेटत मुदा मैथिली भाषि क्षेत्रमे बहुत कम, किएक ? ब्राह्मणेत्तरकँे प्रतिनिधित्व करैवला ग्रन्थ÷साहित्यकँे रचइता बुद्ध आ जैन सनक अहिंसाक पुजारी मैथिली भाषि क्षेत्रमे बहिष्कार भेल रहैक, अछि । मैथिली भाषाकँे शुद्धिकरणमँे लागैयबला लोक ‘कोन वृक्ष के पात’ छथि । अनर्गल प्रचार ककँे बदनामी करैत ओकर वहिष्कारक प्रपंच होइछै, होमे करत । ऐहन प्रपंच कएनिहार पाखण्डी आ मक्कार लोकसँ मैथिली के बचेबाक लेल आवश्यक अछि ।   

सन्दर्भ सामग्री :




#Article 97: मोरङ जिला (125 words)


मोरङ जिला ( ) नेपालक पूर्वाञ्चल विकास क्षेत्र, कोशी अञ्चलमे अवस्थित औद्योगिक जिला छी। पूर्वाञ्चलक ऐतिहासिक गौरवक रुपमे स्थापित मोरङ जिला, औद्योगिक एवं जनसंख्याक हिसाब सँ नेपालक दोसर बड्का जिल्लाक रूपमे सेहो परिचित अछि । नेपालक पूर्वी तराइमे परैबाला ई जिला प्राचिनकालमे विराट राजाक राजधानीके रूपमे प्रख्यात छल । बि.सं. २०१८ सालक प्रशासनिक विभाजन सँ पहिने सेहो ई नेपालक ३५ जिलामे एकटा जिला छल । जे हाल आबि मोरङ, सुनसरी तथा झापा जिला सभमे विभाजित भेल अछि । मोरङ जिलाक क्षेत्रफल १,८५५ वर्ग किलोमिटर अछि । विसं २०६८ मे भेल राष्ट्रिय जनगणना अनुसार ई जिल्लाक जनसङ्ख्या ९,६५,३७० अछि । मोरङ जिलाक सदरमुकाम आ प्रमुख औद्योगिक शहर  बिराटनगर छी।

निर्वाचन आयोग (नेपाल) द्वारा निर्धारण कएल गेल, जिलागत निर्वाचन क्षेत्र अन्तर्गत  कऽ नक्सा नीचा देल गेल अछि।




#Article 98: मोल्डोवा (102 words)


मोल्डोभा (अङ्ग्रेजि:Moldova)आधिकारक रूपमे गणतन्त्र मोल्डोभा (रोमानियाई: रिपब्लिका मोल्डोभा) पूर्वी यूरोपमे स्थित एक देश अछि।ई पश्चिममे रोमानिया आ उत्तरमे युक्रेन, पूर्वी आ दक्षिणमे सीमाना अछि।राजधानी सहर चिसिनउ(अङ्ग्रेजि:Chișinău) अछि। मोल्डोभान क्षेत्रके ज्यादा भाग १४ औं शताब्दीसऽ १८१२ तक मोल्डाभियाके प्रधानाधिकारके एक हिस्सा छल, जब ई ओटोम्यान साम्राज्यके रूसी साम्राज्यमे हस्तान्तरण भेल (जइमे मोल्डाभिया एक महत्वपूर्ण राज्य छल) आ बेसेराबिया से चिनह लागल।

File:Pechenegs c.1030.svg|१०३० सी.ईमे पेचनेस के जग्गा आ बसोबास।
File:State of Cuman-Kipchak (13.) en.png|दुनु बेसेराबिया आ ट्रान्सनिस्ट्रिया ११ औं आ १२ औं शताब्दीमे कुमानिया के अंश छल।
File:Bulgaria-Ivan Asen 2.png|जगहसभ जे हाल मोल्डोभा बनैछै बुल्गेरियन साम्राज्य भित्र इवान आसन आइ आइ अन्तर्गत अछि।




#Article 99: योगानन्द झा (180 words)


योगानन्द झा 1923-1986

हिनक जन्म मधुबनी जिलाक कोइलख ग्राममे 1923 ई. मे भेलन्हि । मृत्यु 1986 मे भेलनि । अग्रेजीमे एम. ए. कएलाक पश्चात् ई किछु दिन चन्द्रधरी मिथिला कॉलेजमे प्राध्यापक रहलाह । बिहार प्रशासनिक सेवामे 1981 धरि विभिन्न पदपर कार्य कएल । तत्पश्चात्मैथिली अकादमीक निदेशक ’84 धरि ।योगानन्द झाजी मैथिली साहित्यमे अपन उपन्यास ‘भलमानुस’ एवं ‘पवित्ना’क हेतु ख्यात छथि । हिनक नाटक ‘मुनिक मतिभ्रम’ एवं कथा संग्रह ‘उड़ैत वंशी’ यथेष्ट प्रतिष्ठा प्राप्त कएने अछि । एकर अतिरिक्त ई महात्मा गान्धीक आत्मकथाक अनुवाद एवं ‘आमक जलखरी’ नामक एक कथा संग्रहक सम्पादन सेहो कएने छथि ।
 Shri योगानन्‍द झा

परिचय–पत्रक

नाम                         :    योगानन्‍द झा

पिता का नाम                  :    स्‍व. Nandan झा

माताक नाम                   :    श्रीमती Nitmaya देवी

पारिवारिक सदस्‍य               :    श्रीमती Maya झा–पत्‍नी

                           :    श्री Shardanand झा–पुत्र

                           :    श्री Shyamanand झा–पुत्र

                           :    श्री Sachchidanand झा–पुत्र     श्री Vivekanand झा–पुत्र श्री Binoy Kumar झा–पुत्र

जन्‍म तिथि                    :    11 जनवरी 1955

स्‍थायी पता                   :    House No 103 New Patliputra Colony patna-800013 (बिहार)

                                House No 103 New Patliputra Colony patna-800013 (बिहार)

दूरभाष सं.                   :    0617-2263167

चलवार्त्ता सं.                  :    9334103239

शिक्षा                        :    एम.ए. 

मातृभाषा                      :    मैथिली




#Article 100: रमानन्द झा 'रमण' (403 words)


रमानन्द झा 'रमण' 1949-

जन्म: 02 जनबरी 1949, शिक्षा-एम.ए., पीएच.डी., आजीविका-भारतीय रिजर्व बैंक, पटना (सेवा निवृत्त)। प्रकाशन: 1. नवीन मैथिली कविता,1982, 2. मैथिली नऽव कविता,1993, 3. मैथिली साहित्य ओ राजनीति, 1994, 4. अखियासल, 1995, 5. बेसाहल,2003, 6. भजारल, 2005., 7. निर्यात कैसे शुरू करें? हिन्दी- रिजर्व बैंक, पटनाक प्रकाशन सम्पादित 8. मैथिलीक आरम्भिक कथा, 1978 समीक्षा, 9. श्यामानन्द रचनावली, 1981, 10. जनार्दन झा जनसीदन कृत निर्दयीसासु (1914) आ पुनर्विवाह (1926), 1984, 11. चेतनाथझाकृत श्रीजगन्नाथपुरी यात्रा (1910), 1994, 12. तेजनाथ झाकृत सुरराजविजय नाटक (1919), 1994, 13. रासबिहारीलाल दासकृत सुमति (1918), 1996, 14. जीबछ मिश्रकृत रामेश्वर (1916), 1996, 15. भेटघॉंट (भेटवार्ता), 1998, 16. रूचय तँ सत्य ने तँ फूसि, 1998, 17. पुण्यानन्द झाकृत मिथिला दर्पण (1925), 2003, 18. यदुवर रचनावली (1888-1934) 2003, 19. श्रीवल्लभ झा (1905-1940) कृत विद्यापति विवरण, 2005, 20. मैथिली उपन्यासमे चित्रित समाज, 2003। अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान 2004-05 (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) छओ बिगहा आठ कट्ठा- फकीर मोहन सेनापतिक ओड़िया उपन्यासक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त।
प्रकाशन: मौलिक- समीक्षा 1. नवीन मैथिली कविता,1982, 2. मैथिली नऽव कविता,1993, 3. मैथिली साहित्य ओ राजनीति, 1994, 4. अखियासल, 1995, 5. बेसाहल,2003, 6. भजारल, 2005., 7. निर्यात कैसे शुरू करें? हिन्दी- रिजर्व बैंक, पटनाक प्रकाशन सम्पादित 8. मैथिलीक आरम्भिक कथा, 1978 समीक्षा, 9. श्यामानन्द रचनावली, 1981, 10. जनार्दनझा‘ जनसीदनकृत निर्दयीसासु (1914) आ पुनर्विवाह (1926), 1984, 11. चेतनाथझाकृत श्रीजगन्नाथपुरी यात्रा (1910), 1994, 12. तेजनाथ झाकृत सुरराजविजय नाटक (1919), 1994, 13. रासबिहारीलाल दासकृत सुमति (1918), 1996, 14. जीबछ मिश्रकृत रामेश्वर (1916), 1996, 15. भेटघॉंट (भेटवार्ता), 1998, 16. रूचय तँ सत्य ने तँ फूसि, 1998, 17. पुण्यानन्द झाकृत मिथिला दर्पण (1925), 2003, 18. यदुवर रचनावली (1888-1934) 2003, 19. श्रीवल्लभ झा (1905-1940) कृत विद्यापति विवरण, 2005, 20. मैथिली उपन्यासमे चित्रित समाज, 2003, 21. पण्डित गोविन्द झाः अर्चा ओ चर्चा, 1997 प्रबन्ध सम्पादक, 22. कवीश्वर चेतना, 2008, चेतना समिति, पटना अनुवाद 23. मौलियरक दू नाटक, 1991, साहित्य अकादमी, 24. छओ बिगहा आठ कटठा, 1999, साहित्य अकादमी, 25. मानवाधिकार घोषणा Universal Declaration of Human Rights २००७( यूनेसको), 26. राजू आ’ टाकाक गाछ, 2008 रिजर्व बेंक -वित्तीय शिक्षा योजना के अन्तर्गत पत्रिका सम्पादन-सह-सम्पादन 1. प्रयोजन, 1993 (मासिक), 2. कोषाक्षर (हिन्दी) 1982, 3. घर बाहर, त्रैमासिक, चेतना समिति, पटना कार्यशाला 1. National Workshop on Literary Translation,- Dec 20.1991 to January 12,02,1992, Sahitya Akademi, New Delhi2.Bonds Beyond the Borders (India-Nepal civil society interaction on Cross Border issues) -Consulate General of India, Birgunj, Nepal and B.P. Koirala India-Nepal Foundation-May 27-28, 20062.Preparation of Intensive Course in Maithili- ERLC, Bhubneswar जूरी 6th Inter National Maithili Drama Festival,1992 -Biratnagar, Nepal पुरस्कार- सम्मान




#Article 101: राइट बन्धु (178 words)


राइट बन्धु (), अरविल (अङ्ग्रेजी: Orville, १९ अगस्त, १८७१ ndash; ३० जनवरी १९४८) आ विलबर (अङ्ग्रेजी: Wilbur, १६ अप्रैल, १८६७ ndash; ३० मई, १९१२), दुई अमेरिकी बन्धु छल जकरा हवाई जहाजक आविष्कारक मानल जाइत अछि । ई दुनू लोकनि १७ दिसम्बर १९०३के संसारक सबसँ पहिल सफल मानवीय हवाई उड़ान भरलक् जाहिमे हवासँ भारी विमानके नियन्त्रित रूपसँ निर्धारित समयधरि सञ्चालित कएल गेल । एकर बाद दुई वर्षक समयमे अनेक प्रयोगसभक बाद ई दुनू कियों विश्वक प्रथम उपयोगी दृढ़-पक्षी विमान तैयार केलक । ई प्रायोगिक विमान बनाबै आ उड़ाबै वाला पहिल आविष्कारक तँ नै छल, मुदा ई हवाई जहाजके नियन्त्रित करैक जे विधिसभ खोजलक, ओ बिना आजुक वायुयान सम्भव नै छल ।

ई आविष्कारक लेल आवश्यक यान्त्रिक कौशल हिनका कयन वर्षधरि प्रिन्टिङ प्रेस, बाइसाइकल, मोटर आ अन्य कयन मसिनक साथ काम करैत करैत मिलल । बाइसाइकलक साथ काम करैत करैत ई दुनूके विश्वास भ गेल कि वायुयान जका असन्तुलित वाहनके सेहो अभ्यासक साथ सन्तुलित आ नियन्त्रित कएल जा सकैत अछि । सन् १९००सँ सन् १९०३ धरि ई दुनू ग्लाइडरसभ पर बहुत प्रयोग केलक जाहिसँ हिनकर पायलट कौशल विकसित भेल । 




#Article 102: राजविराज (762 words)


राजविराज () पूर्वी नेपालक प्रदेश नं. २ अन्तर्गत सप्तरी जिलामे अवस्थित एक शहर छी । ई नेपालक एक प्रसिद्ध शहर होमएक सङ्गे सप्तरी जिलाक सदरमोकाम छी । नेपालक पहिल टाउन प्लानिङ करि बसाएल सप्तरी जिलाक सदरमुकाम राजविराज तराई क्षेत्रक सब सँ पहिल आ अधिराज्यक चारिम नगरपालिका छी । वि.सं. १९९४ दिस सप्तकोशी नदी जखन पुरान सदरमोकाम हनुमाननगर कटान केनाए सुरु कऽ देलक तखन सदरमुकाम आन ठाम लऽ जेबाक निर्णय कएल गेल आ आ ओकरे फलस्वरूप तत्कालीन बडाहाकिम प्रकाशशमशेर जबरा उपयुक्त ठाम खोजि शहर बसेबाक जिम्मेवारी ख्यातिप्राप्त इन्जिनीयर डिल्लीजङ्ग थापाके देलक । ओ अपन जमीनदारी मौजा रहल जोलहरी मलेठ गाम नजदिक राजपुर मौजामे सदरमुकाम बनेबाक निर्णय केलक । ओ समयमे सुन्दर शहरक रूपमे प्रसिद्धि पाबल भारतक गुलाबी शहर जयपुरक नक्साक आधारमे टाउन प्लानिङ करि वि.सं. १९९८ मे राजविराज शहर बैसाएल गेल छल ।

वर्तमान राजविराज नगरक नामकरण राजविराजक पूर्वी भागक भलुवाही नदीके किनारमे अवस्थित पुरान इतिहासक प्रख्यात राजदेवी मन्दिरक नामसँ राजविराज नाम रहलगेल बात बहुतेक पुस्तकमे उल्लेख कएल गेल अछि । राजदेवी भगवतीकें सेन राजाक इष्टदेवी मानल जाइत अछि । राजदेवी मन्दिर एतय अवस्थित होमएक कारण एतय सेन राजासभक कचहरी, दरवार, किला रहनाए छी । शहर विकासक लेल आवश्यक आधारसभ भेलाक कारण वि.सं. २०१६ सालमे राजविराजकें नगरपालिका घोषणा कएल गेल । नगरपालिकाक पूर्वमे महादेवा गाउँपालिका आ तिलाठी कोईलाडी गाउँपालिका, पश्चिममे बेल्ही चपेना गाउँपालिका आ रुपनी गाउँपालिका, उत्तरमे रुपनी गाउँपालिका आ कृष्णासवरन गाउँपालिका तथा दक्षिणमे छिन्नमस्ता गाउँपालिका अछि । योजनाबद्ध रूपसँ व्यवस्थित राजविराज नगर व्यवसायिक रूपसँ वि.सं. २०१० सालदिस पूर्वी नेपालको तराई आ पहाडी जिलाक व्यापारिक केन्द्रक रूपमे विकसित भेल । नगरपालिका भितरमे ऐतिहासिक राजदेवी, दुर्गा भगवती, वागेश्वरी भगवती, हनुमान, रामजानकी, राधाकृष्ण, विष्णु, बैष्णवी काली, महादेव जका मठ मन्दिर तथा मुस्लिम समुदाय क जामे मस्जिद आ जैन धर्मावलम्बीसभक मन्दिर अछि ।

नेपालक जयपुरे शहर आ गुलाबी शहरक उपनाम सँ परीचित राजविराज नगरपालिकाक नगर योजना ६० बिघाक प्लटमे तत्कालीन इन्जिनियर डिल्लीजङ्ग थापाद्वारा कएल गेल छल। ओ भारतक गुलाबी सहर कहि जानल जाएवाला जयपुरक नक्साकें आधारमे राजविराजक टाउन प्लानिङ्ग केनए छल । सुरूमे ६० बिघा जमीनमे टाउन प्लानिङ्ग कएल गेल छल मुदा बादमे कर्मचारी आवास बनेवाक आवश्यकता महसुस भेल जकर फलस्वरूप उत्तर दिस २ बिघा आ दक्षिण दिस ८ बिघा जमीन लऽ ७० बिघामे नगर बसाएल गेल छल ।
प्रत्येक चार घरक पछाड़ी छोट गल्ली, मुख्य सड़क आ सहायक सड़क जोड़वला ठाममे चौक तथा अलग अलग स्थानमे हटिया, किराना दोकान, तरकारी बजार आ सरकारी कार्यालय भवनसभ व्यवस्थित रूपमे मिलाएल गेल अछि ।

राजविराजसँ काठमाडौं आ नेपालक अन्य शहरसभसँ सड़क यातायातसँ जुड़ल अछि । राजविराज विमानस्थल अखन निर्माणाधीन अछि आ सुचारू भेलाक बाद एतयसँ पूर्वी नेपालक पहाडी दुर्गम स्थानसभ आ नेपालक मुख्य शहरसभधरि हवाई सम्पर्क रहत । राजविराज शहरक दक्षिणी सिमाना भारतक सुपौल जिलाक कुनौलीसँ जुड़ल अछि ।  

नेपालक जनगणना वि.सं. २०६८ कऽ अनुसार राजविराजक कूल जनसङ्ख्या ६७,२६२ अछि जहिमे पुरुषक सङ्ख्या ३४,६८४ आ महिलाक सङ्ख्या ३२,५७८ अछि । ई शहरक साक्षरता दर ७९.७१% अछि जहिमे पुरुषक साक्षरता दर ८८.४०% आ महिलाक साक्षरता दर ७०.२४% अछि । २०६८ कऽ राष्ट्रिय जनगणना प्रतिवेदन अनुसार राजविराजमे हिन्दू धर्मावलम्बी मुख्य धर्मक रूपमे अछि । मुख्यतया हिन्दू धर्म माननिहारक सङ्ख्या बेसी अछि । हिन्दू धर्मावलम्बीक सङ्ख्या ८७%, मुस्लिम धर्मावलम्बीक सङ्ख्या १०.८९%, जैन धर्मावलम्बीक सङ्ख्या १.२६% अछि तँ शिखक सङ्ख्या ०.६४% रहल अछि । राजविराज शहरमे विभिन्न जातजातिक लोकसभ बसोबास रहल अछि जहिमे कायस्थ, ब्राह्मण, राजपुत, वैश्य, तेली, यादव, बनिया, मारवाड़ी, थारू, लोहार, धानुक आदी अछि ।

राजविराजमे बाजल जाइवला मुख्य भाषा मैथिली छी जे मुख्यतया सम्पूर्ण वर्गक लोकसभद्वारा बाजल जाइत अछि । मैथिली भाषाक बाद सभ सँ बेसी बाजल जाइवला भाषा नेपाली छी । अन्य भाषासभ बहुत कम बाजल जाइत अछि ।

राजविराज नगरपालिकाक जलवायु उष्णकटिबन्धीय अछि । राजविराजक तीन मुख्य मौसम ग्रीष्म, मनसुन आ शरद अछि । नेपालक तराई क्षेत्रमे अवस्थित भेलाक कारण राजविराजक मौसम प्राय गरम होइत अछि । ग्रीष्म ऋतु अप्रैलक सुरुवात संगे सुरू भ अगस्त धरि रहैत अछि आ ई समय ई शहरक तापक्रम २३ °से (७३ °फे) सँ ४४ °से (१११ °फे) धरि पहुँच जाइत अछि । मनसुनक आगमन जुलाईमे होइत अछि आ शरद ऋतुक आगमन अक्टुबरसँ होइत अछि तँ ई मार्च धरि रहैत अछि ।

ठण्डी मौसममे राजविराजक भ्रमण उपयुक्त रहैत अछि । पर्यटकसभ प्राय मध्य सितम्बरसँ अन्तिम मार्चमे एतय आबैलेल पोसन्द करैत अछि । समष्टिगत रूपमे जनवरीसभसँ ठण्डा महिना रहैत अछि तँ जुनसभसँ गरम महिना रहैत अछि ।

राजविराज नेपालक मुख्य शहरसभमे सँ बहुसङ्ख्यक हिन्दू धर्मावलम्बीसँ भरल शहर छी । एतय अवस्थित मन्दिरमे अधिकांश धार्मिक, सामाजिक आ सांस्कृतिक गतिविधि देखल जा सकैत अछि । राजविराज नगरक्षेत्रमे राजदेवी मन्दिर, भगवती मन्दिर, राधाकृष्ण मन्दिर, शिव मन्दिर, हनुमान मन्दिर लगायतक विभिन्न धार्मिक मठ, मन्दिर तथा देवस्थलसभ अछि । विजयादशमी, यमपञ्चक, तीज, होली, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, बुद्ध पूर्णिमा, ल्होसार, छठ, रामनवमी, इद, बकरिद तथा रमजान लगायतक पावनि तिहारसभ भव्य रूपमे मनाएल जाइवाला राजविराज नगरक्षेत्रक अपने प्रकारक विशेषता अछि ।




#Article 103: राजस्थान (130 words)


राजस्थान गणतन्त्र भारतक क्षेत्रफलक आधारमे सभ सँ पैग राज्य छी । एकर पश्चिममे पाकिस्तान, दक्षिण-पश्चिममे गुजरात, दक्षिण-पूर्वमे मध्यप्रदेश, उत्तरमे पञ्जाब (भारत), उत्तर-पूर्वमे उत्तरप्रदेश आ हरियाणा अछि । ई राज्यक क्षेत्रफल ३,४२,२३९ वर्ग किमी (१,३२,१३९ वर्ग माइल) अछि । सन २०११ कें जनगणनाक अनुसार राजस्थानक साक्षरता दर ६६.११% अछि ।

जयपुर राज्यक राजधानी छी । भौगोलिक विशेषतासभमे एकर पश्चिममे थार मरुभूमि आ घग्गर नदीक अन्तिम छोर अछि । विश्वक पुरातन श्रेणीसभमे मुख्य अरावली श्रेणी राजस्थानक एक मात्र पर्वत श्रेणी छी, जे पर्यटनक केन्द्र छी, माउन्ट आबु आ विश्वविख्यात दिलवाड़ा मन्दिर सम्मिलित करैत अछि । पूर्वी राजस्थानमें दुई बाघ अभयारण्य, रणथम्भौर आ सरिस्का अछि आ भरतपुरक समीप केवलादेव राष्ट्रिय निकुञ्ज अछि, जे सुदूर साइबेरिया सँ आबऽ वला सारस आ पैग सङ्ख्यामे स्थानीय प्रजातिक अनेकानेक पक्षीसभक संरक्षित-आवासक रूपमे विकसित कएल गेल अछि ।




#Article 104: राजेन्द्र विमल (230 words)


राजेन्द्र विमल, जनकपुर, नेपाल 1949-

मैथिली, नेपाली आ हिन्दी भाषाक प्राज्ञ विमल शिक्षाक हकमे विद्यावारिधि (पी.एच.डी.)क उपाधि प्राप्त कएने छथि।कम्मो लिखिकऽ यथेष्ट यश अरजनिहार डा. विमलक लेखनीक प्रशंसा मैथिलीक सङ्गसङ्ग नेपाली आ हिन्दी साहित्यमे सेहो होइत रहलनि अछि। त्रिभुवन विश्वविद्यालयअन्तर्गत रा.रा.ब. कैम्पस, जनकपुरधाममे प्राध्यापन कएनिहार डा. विमलक पूर्ण नाम राजेन्द्र लाभ छियनि। हिनक जन्म २६ जुलाई १९४९ ई. कऽ भेल अछि। साहित्यकारक नव पीढ़ीकेँ निरन्तर उत्प्रेरित करबाक कारणे ई डा.धीरेन्द्रक बाद जनकपुर-परिसरक साहित्यिक गुरुक रूपमे स्थापित भऽ गेल छथि।
राजेन्द्र विमल (1949- )।

चामत्कारिक लेखन-प्रतिभाक स्वामी राजेन्द्र विमल नेपालक मैथिली साहित्यक एक स्तम्भ छथि। मैथिली, नेपाली आ हिन्दी भाषाक प्राज्ञ विमल शिक्षाक हकमे विद्यावारिधि (पी.एच.डी.)क उपाधि प्राप्त कएने छथि। सुललित शब्द चयन एवं भाषामे प्राञ्जलता डा. विमलक लेखनक विशेषता रहलनि अछि। अपन सिद्धहस्त लेखनसँ ई कोनहु पाठकक हृदयमे स्थान बना लैत छथि। कथा आ समालोचनाक सङ्गहि मर्मभेदी गीत गजल लिखबामे प्रवीण डा. विमलक निबन्ध, अनुवाद आदि सेहो विलक्षण होइत छनि। कम्मो लिखिकऽ यथेष्ट यश अरजनिहार डा. विमलक लेखनीक प्रशंसा मैथिलीक सङ्गसङ्ग नेपाली आ हिन्दी साहित्यमे सेहो होइत रहलनि अछि। खास कऽ मानवीय संवेदनाक अभिव्यक्तिमे हिनक कलम बेजोड़ देखल जाइत अछि। त्रिभुवन विश्वविद्यालयअन्तर्गत रा.रा.ब. कैम्पस, जनकपुरधाममे प्राध्यापन कएनिहार डा. विमलक पूर्ण नाम राजेन्द्र लाभ छियनि। हिनक जन्म २६ जुलाई १९४९ ई. कऽ भेल अछि। साहित्यकारक नव पीढ़ीकेँ निरन्तर उत्प्रेरित करबाक कारणे ई डा.धीरेन्द्रक बाद जनकपुर-परिसरक साहित्यिक गुरुक रूपमे स्थापित भऽ गेल छथि। जनकपुरधामक देवी चौक स्थित हिनक घर सदति साहित्यक जिज्ञासुसभकअखाड़ाजकाँबनलरहैतअछि।




#Article 105: राम दयाल राकेश (121 words)


डॉ राम दयाल राकेश, सर्लाही, नेपाल 1942-

मैथिली मातृभाषा, हिन्दीक प्राध्यापक आ नेपालीक लेखक ई तीनू भाषा ’राकेश’क व्यक्तित्वमे एना ने मिझराएल छैक जे कोनहुसँ हिनका भिन्न नहि कएल जा सकैत अछि । ई विशेषत: नेपालीमे लिखैत छथि, मुदा लेखनक विषय मूलत: मैथिलीए संस्कृति रहैत छनि । ओना मैथिली, हिन्दी आ अग्ङरेजीमे सेहो ई अनेक रचना कएने छथि ।नेपालक राजकीय-प्रज्ञा-प्रतिष्ठानक सदस्य ’राकेश’ दिल्ली विश्वविद्यालयसँ पीएचडी आ अमेरिकास्थित इण्डियाना यूनिभर्सिटीसँ पोस्ट डाक्टरल रिसर्च कएने छथि । डा. ’राकेश’क जन्म २५ जुलाइ १९४२ ई. कऽ सर्लाही जिलाक सिसौटियामे भेल छनि । नेपाली, मैथिली, हिन्दी आ अग्ङरेजीमे मौलिक, सम्पादित आ अनूदित कऽ करीब दू दर्जन पोथी प्रकाशित , दर्जनभरि देशक भ्रमण सेहो कएने छथि । नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता- श्री राम दयाल राकेश (1999)।




#Article 106: राम भरोस कापड़ि भ्रमर (436 words)


राम भरोस कापड़ि भ्रमर (जनम 1951 धनुषा, नेपाल) मैथिली भाषाक पत्रकार, लेखक एवं विद्वान छै।

जन्म-बघचौरा, जिला धनुषा (नेपाल)।बन्नकोठरी: औनाइत धुँआ (कविता संग्रह), नहि, आब नहि (दीर्घ कविता), तोरा संगे जएबौ रे कुजबा (कथा संग्रह, मैथिली अकादमी पटना, १९८४), मोमक पघलैत अधर (गीत, गजल संग्रह, १९८३), अप्पन अनचिन्हार (कविता संग्रह, १९९० ई.), रानी चन्द्रावती (नाटक), एकटा आओर बसन्त (नाटक), महिषासुर मुर्दाबाद एवं अन्य नाटक (नाटक संग्रह), अन्ततः (कथा-संग्रह), मैथिली संस्कृति बीच रमाउंदा (सांस्कृतिक निबन्ध सभक संग्रह), बिसरल-बिसरल सन (कविता-संग्रह), जनकपुर लोक चित्र (मिथिला पेंटिङ्गस), लोक नाट्य: जट-जटिन (अनुसन्धान)। नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता- श्री राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' (2010)।
श्री रामभरोस कापड़ि “भ्रमर” (१९५१- ) जन्म-बघचौरा, जिला धनुषा (नेपाल)। सम्प्रति-जनकपुरधाम, नेपाल। त्रिभुवन विश्वविद्यालयसँ एम.ए., पी.एच.डी. (मानद)।

हाल: प्रधान सम्पादक: गामघर साप्ताहिक, जनकपुर एक्सप्रेस दैनिक, आंजुर मासिक, आंगन अर्द्धवार्षिक (प्रकाशक नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान, कमलादी)।

मौलिक कृति: बन्नकोठरी: औनाइत धुँआ (कविता संग्रह), नहि, आब नहि (दीर्घ कविता), तोरा संगे जएबौ रे कुजबा (कथा संग्रह, मैथिली अकादमी पटना, १९८४), मोमक पघलैत अधर (गीत, गजल संग्रह, १९८३), अप्पन अनचिन्हार (कविता संग्रह, १९९० ई.), रानी चन्द्रावती (नाटक), एकटा आओर बसन्त (नाटक), महिषासुर मुर्दाबाद एवं अन्य नाटक (नाटक संग्रह), अन्ततः (कथा-संग्रह), मैथिली संस्कृति बीच रमाउंदा (सांस्कृतिक निबन्ध सभक संग्रह), बिसरल-बिसरल सन (कविता-संग्रह), जनकपुर लोक चित्र (मिथिला पेंटिङ्गस), लोक नाट्य: जट-जटिन (अनुसन्धान)।

नेपाली कृति: आजको धनुषा, जनकपुरधाम र यस क्षेत्रका सांस्कृतिक सम्पदाहरु (आलेख-संग्रह), भ्रमरका उत्कृष्ट नाटकहरु (अनुवाद)।

सम्पादन: मैथिली पद्य संग्रह (नेपाल राजकीय प्रज्ञा प्रतिष्ठान), लाबाक धान (कविता संग्रह), माथुरजीक “त्रिशुली” खण्डकाव्य (कवि स्व. मथुरानन्द चौधरी “माथुर”), नेपालमे मैथिली पत्रकारिता, मैथिली लोक नृत्य: भाव, भंगिमा एवं स्वरूप (आलेख संग्रह)। गामघर साप्ताहिकक २६ वर्षसँ सम्पादन-प्रकाशन, “अर्चना” साहित्यिक संग्रहक १५ वर्ष धरि सम्पादन-प्रकाशन। “आँजुर” मैथिली मासिकक सम्पादन प्रकाशन, “अंजुली” नेपाली मासिक/ पाक्षिकक सम्पादन प्रकाशन।

अनुवाद: भयो, अब भयो (“नहि आब नहि”क मनु ब्राजाकीद्वारा कयल नेपाली अनुवाद)

सम्मान: नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान द्वारा पहिल बेर १९९५ ई.मे घोषित ५० हजार टाकाक मायादेवी प्रज्ञा पुरस्कारक पहिल प्राप्तकर्ता। प्रधानमंत्रीद्वारा प्रशस्तिपत्र एवं पुरस्कार प्रदान। विद्यापति सेवा संस्थान दरिभङ्गाद्वारा सम्मानित, मैथिली साहित्य परिषद, वीरगंजद्वारा सम्मानित, “आकृति” जनकपुर द्वारा सम्मानित, दीर्घ पत्रकारिता सेवाक लेल नेपाल पत्रकार महासंघ धनुषाद्वारा सम्मानित, जिल्ला विकास समिति धनुषा द्वारा दीर्घ पत्रकारिता सेवाक लेल पुरस्कृत एवं सम्मानित, नेपाली मैथिली साहित्य परिषद द्वारा २०५९ सालक अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन मुम्वई द्वारा “मिथिला रत्न” द्वारा सम्मानित, शेखर प्रकाशन “पटना” द्वारा “शेखर सम्मान”, मधुरिमा नेपाल (काठमाण्डौ) द्वारा २०६३ सालक मधुरिमा सम्मान प्राप्त। काठमाण्डूमे आयोजित सार्कस्तरीय कवि गोष्ठीमे मैथिली भाषाक प्रतिनिधित्व।

सामाजिक सेवा : अध्यक्ष-तराई जनजाति अध्ययन प्रतिष्ठान, जनकपुर, अध्यक्ष- जनकपुर ललित कला प्रतिष्ठान, जनकपुर, उपाध्यक्ष- मैथिली प्रज्ञा प्रतिष्ठान, जनकपुर, उपकुलपति- मैथिली अकादमी, नेपाल, उपाध्यक्ष- नेपाल मैथिली थाई सांस्कृतिक परिषद, सचिव- दीनानाथ भगवती समाज कल्याण गुठी, जनकपुर, सदस्य- जिल्ला वाल कल्याण समिति, धनुषा, सदस्य- मैथिली विकास कोष, धनुषा, राष्ट्रीय पार्षद- नेपाल पत्रकार महासंघ, धनुषा।




#Article 107: रामभद्र (119 words)


रामभद्र, धनुषा, नेपाल 1935-

साहित्य तथा अन्यान्य क्षेत्रक कतोक सफल व्यक्तिसभ अपन प्रेरणास्रोत आ पथ-प्रदर्शक मानैत छथि । मैथिली साहित्य-क्षेत्रमे हिनक परिचयक मादे एतबाए कहब पर्याप्त होएत जे मैथिलीक मूर्द्धन्य साहित्यकार डा. धीरेन्द्र हिनका मैथिली साहित्यक सर्वश्रेष्ठ कथाकार मानैत छथि ।हिनक कथामे प्रतीकात्मकताक अदभुत प्रयोगहिटा नहि, अपितु एकटा आदर्श कथाक समस्त वैशिष्टसभविद्यमान रहैत अछि । कथाकारक अतिरिक्त ई उत्कृष्ट समालोचक, नाटककार आ कवि सेहो छथि । नेपालमे मैथिलीक पहिल मोनोड्रामा लिखबाक श्रेय सेहो हिनका जाइत छनि ।सामाजिक कुरीतिसभकँ कुशलतासँ चित्रण करबामे, चिन्तनीय बनएबामे आ मन-मस्तिष्कपर अमिट छाप छोड़बामे रामभद्र सिद्धहस्त छथि । धनुषा जिलाक कुर्था गाममे जनमल रामभद्रक पूर्ण नाम रामभद्र कर्ण छनि । अग्ङरेजी विषयक अवकाशप्राप्त शिक्षक रामभद्र व्याकरण, पाठयपुस्तक आ सहायक पुस्तकसभ लिखबाक काजमे निरन्तर सक्रिय छथि।




#Article 108: रामलोचन ठाकुर (109 words)


रामलोचन ठाकुर 1949-

श्री रामलचन ठाकुर, जन्म १८ मार्च १९४९ ई.पलिमोहन, मधुबनीमे। वरिष्ठ कवि, रंगकर्मी, सम्पादक, समीक्षक। भाषाई आन्दोलनमे सक्रिय भागीदारी। प्रकाशित कृति- इतिहासहन्ता, माटिपानिक गीत, देशक नाम छल सोन चिड़ैया, अपूर्वा (कविता संग्रह), बेताल कथा (व्यंग्य), मैथिली लोक कथा (लोककथा), प्रतिध्वनि (अनुदित कविता), जा सकै छी, किन्तु किए जाउ(अनुदित कविता), लाख प्रश्न अनुत्तरित (कविता), जादूगर (अनुवाद), स्मृतिक धोखरल रंग (संस्मरणात्मक निबन्ध), आंखि मुनने: आंखि खोलने (निबन्ध)। अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान 2003-04 (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) जा सकै छी, किन्तु किए जाउ- शक्ति चट्टोपाध्यायक बांग्ला कविता-संग्रहक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त। विदेह सम्पादकक समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्लासँ मैथिली अनुवाद, बांग्ला-उपन्यास - मानिक बंद्योपाध्याय)




#Article 109: रामाश्रय झा 'रामरंग' (476 words)


रामाश्रय झा 'रामरंग' अभिनव भातखण्डे 1928-2009

जन्म ११ अगस्त १९२८ ई. तदनुसारभाद्र कृष्णपक्ष एकादशी तिथिकेँ मधुबनी जिलान्तर्गत खजुरा नामक गाममे भेलन्हि। अभिनव गीतांजलि, हुनकर उच्चकोटिक शास्त्र रचना अछि।मिथिलावासी श्री रामरंग राग तीरभुक्त्ति, राग वैदेही भैरव, आऽ राग विद्यापति कल्याण केर रचना सेहो कएने छथि आऽ मैथिली भाषामे हिनकर खयाल ’रंजयति इति रागः’ केर अनुरूप अछि।

रामाश्रय झा “रामरग” (१९२८-२००९ ) विद्वान, वागयकार, शिक्षक आऽ मंच सम्पादक रहथि।

भारतीय शास्त्रीय संगीतक समर्पित आऽ विलक्षण ओऽ विख्यात संगीतज्ञ पं रामाश्रय झा ’रामरंग’ केर जन्म ११ अगस्त १९२८ ई. तदनुसारभाद्र कृष्णपक्ष एकादशी तिथिकेँ मधुबनी जिलान्तर्गत खजुरा नामक गाममे भेलन्हि। हिनकर पिताक नाम पं सुखदेव झा आऽ काकाक नाम पं मधुसदन झा छन्हि। रामाश्रयजीक संगीत शिक्षा हिनका दुनू गोटेसँ हारमोनियम आऽ गायनक रूपमे मात्र ५ वर्षक आयुमे शुरू भए गेलन्हि। तकरा बाद श्री अवध पाठकजीसँ गायनक शिक्षा भेटलन्हि।

१५ वर्ष धरि बनारसक एकटा प्रसिद्ध नाटक कम्पनीमे रामाश्रय झा जी कम्पोजरक रूपमे कार्य कएलन्हि। पं भोलानाथ भट्ट जी सँ २५ वर्ष धरि ध्रुवपद, धमार, खयाल, ठुमरी, दादरा, टप्पा शैली सभक विधिवत शिक्षा लेलन्हि।

पं भट्ट जीक अतिरिक्त्त रामाश्रय झा जी पं बी.एन. ठकार (प्रयाग), उस्ताद हबीब खाँ (किराना), पं बी.एस. पाठक (प्रयाग) सँ सेहो संगीतक शिक्षा प्राप्त कएलन्हि।

पं झा १९५४ सँ प्रयागमे स्थाई रूपसँ रहि रहल छथि। १९५५ ई.मे हिनकर नियुक्त्ति लूकरगंज संगीत विद्यालयमे संगीत अध्यापक रूपमे भेलन्हि। १९६० ई.मे हिनकर नियुक्त्ति प्रयाग संगीत समितिमे भेलन्हि, जतए १९७० धरि प्रभाकर आऽ संगीत प्रवीण कक्षाक शिक्षक रहलाह। १९७०मे इलाहाबाद विश्वविद्यालयक संगीत विभागाध्यक्ष श्री प्रो. उदयशंकर कोचकजी पं झाक संगीत क्षेत्रक सेवासँ प्रभावित भए विश्वविद्यालयमे हिनकर नियुक्त्ति कएलन्हि। पं झा उत्कृष्ट शिक्षक, गायक आऽ आकाशवाणीक प्रथम श्रेणीक कलाकार छथि। हिनकर अनेक शिष्य-शिष्या आकाशवाणीक प्रथम श्रेणीक कलाकार आऽ उत्तम शिक्षक छथि, जेना-

डॉ. गीता बनर्जी, श्रीमति कमला बोस, श्रीमति शुभा मुद्गल, श्रीकान्त वैश्य,श्री शान्ता राम कशालकर, श्री शान्ता राम कशालकर, श्री कामता खन्ना, श्रीमति सत्या दास, डॉ. रूपाली रानी झा, डॉ इला मालवीय, श्री अनिल कुमार शर्मा, श्री रामशंकर सिंह, श्रीमति संगीता सक्सेना, श्री राजन पर्रिकर, श्रीमति रचना उपाध्याय, श्री नरसिंह भट्त, श्री भूपेन्द्र शुक्ला, श्री जगबन्धु इत्यादि।

पं झा संगीत शास्त्र केर श्रेष्ठ लेखक छथि आऽ हिनकर लिखल अभिनव गीतांजलि केर पांचू भाग प्रकाशित भए चुकल अछि, जाहिमे २००सँ ऊपर रागक व्याख्या अछि आऽ दू हजारक आसपास बंदिश अछि।

मिथिलावासी श्री रामरंग राग तीरभुक्त्ति, राग वैदेही भैरव, आऽ राग विद्यापति कल्याण केर रचना सेहो कएने छथि आऽ मैथिली भाषामे हिनकर खयाल ’रंजयति इति रागः’ केर अनुरूप अछि।

अभिनव गीतांजलि, हुनकर उच्चकोटिक शास्त्र रचना अछि, जे पाँच भागमे अछि। अपन साहित्यिक वाणी, शाब्दिक रूप जे होइत अछि कोनो संगीत रचनाक, आऽ धातु जे अछि स्वरक लयक रचना आऽ एहि सभ गुणसँ युक्त्त छथि “रामरंग”। रामरंगक बंदिश वा रचनामे अहाँकेँ भेटत स्वर, शब्द आऽ मात्राक लयबद्ध बंधन। पुरान ध्रुपद जेकाँ पद्य आऽ स्वरकेँ ओऽ तेनाकेँ बान्हि दैत छथि, जे दुनू एक दोसरमे मिलि जाइत अछि। हुनकर रचना हुनकर उच्चारणसँ मिलि कए मौलिक तात्त्विक स्थायी भरण, सभ बितैत दिन एकटा नव आत्मनिरीक्षण एकटा नव स्थायी।




#Article 110: रामेछाप जिला (111 words)


रामेछाप नेपालक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्र, जनकपुर अञ्चलम अवस्थित एकटा दुर्गम पहाडी जिला छी। राजधानी समेत रहल मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्रक १९ हम जिला मे अवस्थित रामेछाप सेवा सुविधाक हिसावसँ एकटा विकट क्षेत्र छी। राजधानीसँ जुडल काभ्रेपलाञ्चोक जिला, चीनसँ सीमा जोडल दोलखा आर ओखलढुङ्गा जिला आर तराई जुडल सिन्धुली जिलाक बीचक १,५४६ वर्ग किलोमिटरको ई जिला पर्याप्त श्रोत आर साधन भेलाह पश्चात उपेक्षित अवस्थाम अछि। 

राष्ट्रिय जनगणना २०६८ अनुसार रामेछाप जिलाक कूल जनसंख्या २,०२,६४६ जन मध्ये पुरुषक संख्या ९३,२८६  आर महिला १,०९,२६० रहल अछि । जनघनत्व २०९ प्रति कि.मि अछि तहिना ग्रामिण जनसंख्या १,८७,८८२ रहल अछि। 

निर्वाचन आयोग (नेपाल) द्वारा निर्धारण कएल गेल, जिलागत निर्वाचन क्षेत्र अन्तर्गत  कऽ नक्सा नीचा देल गेल अछि।




#Article 111: रुकुम जिला (103 words)


रुकुम नेपालक मध्यपश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्रक राप्ती अञ्चलम अवस्थित रमणीय पहाडी जिला छी। समुन्द्र सतह सँग ६००- ६,००० मिटर उचाइ धरि रहल बेसी, फाँट, पहाड आर हिमाली भाग मिलि बनल रुकुमक पूर्वम म्याग्दी आर , पश्चिममा जाजरकोट जिला, दक्षिणमा सल्यान आर रोल्पा जिला आ उत्तरम डोल्पा जिला अछि। रुकुमकोटस्थित कमल दह, कमलदह बह्राजिको मन्दिर, शिवालय, देउराली गुफा, मैकोट स्थित पुथा हिमाल, सामझाङ हिउँचुली, सिस्ने हिमाल, ढोरपाटन सिकार आरक्ष, पाेखराक तातोपानीको मुल, डिग्रे साइकुमारीको मन्दिर आदि स्थानसभ रूकुमक प्रसिद्ध पर्यटकीय गन्तव्यसभ अछि । '५२ पोखरी ५३ टाकुरी'क जिलाक रूपम परिचित रुकुम स्यार्पु ताल, दुर्लभ वन्यजन्तु नाउर लगायत आउर बहत आकर्षक जडिबुटी तथा रमणीय क्षेत्रसभ अछि। 




#Article 112: रूपेश त्योंथ (328 words)


रूपेश कुमार झा (; जन्म २७ मई १९८९) अपन साहित्यिक नाम रूपेश त्योंथ नामे बेस चिन्हल जाइत अछि । हिनकर जन्म मिथिलाक मधुबनी जिला अन्तर्गत त्योंथागढ़ गाममे भेल छल । वृत्तिसँ आइटी प्रोफेशनल रूपेश वर्तमानमे कोलकातामे बसोबास करैत छथि तथा मैथिली क्रियाकलाप आ लेखनमे विगत एक दशकसँ सक्रिय छथि ।

रूपेश नेनहिसँ मैथिली कविता लेखन दिस प्रवृत्त भेल छल मुदा सन् २००६ मे हुनकाद्वारा लिखित पहिल कविता श्री मिथिलाक प्रकाशनक संगहि ई लोकक नजरिमे एलाह आ तत्पश्चात हिनकर क्रियाकलाप निरन्तर रूपसँ जारी अछि । एकर बाद ओ मैथिली दैनिक मिथिला समादसँ सन् २००८ मई महिनामे जुडलाह आ नवकृष्ण ऐहिक नामे दैनिक व्यङ्ग्य स्तम्भ खुरचनभाइक कछ्मच्छी लिखलनि जे पाठकदीर्घामे लोकप्रिय भेल छल । एहिना सन् २०१० मे ओ मैथिली साप्ताहिक झलक मिथिला कऽ सम्पादन केनए छल । सन् २०१३ मे हिनकर पहिल पोथी मैथिली कविता सङ्ग्रह एक मिसिया विमोचित भेल छल जहिमे रूपेशक आरम्भिक कवितासभ सङ्ग्रहित अछि । सन् २०१५ मे हिनकर लिखल लोकप्रिय व्यङ्ग्य स्तम्भ खुरचनभाइक कछमच्छी पोथी रूपमे सोझा आएल ।

रूपेश इन्टरनेटक माध्यमसँ मैथिली भाषाक प्रचार-प्रसार हेतु सन् २०१२ अगस्तमे मिथिमीडिया नामक वेबसाइट शुरू कयलनि । मिथिमीडिया मैथिली पाठकक मध्य बहुत कम समयमे लोकप्रिय भेल अछि । मिथिमीडिया मैथिली भाषाक डिजिटल समाद स्रोतक रूपमे विकास कएल गेल अछि जकर मूल लक्ष्य मैथिल साहित्य, चलचित्र, कला-संस्कृति, राजनीति, प्रविधि, व्यवसाय आदि विविध विषयक समाचार-विचार प्रसारित करनाए अछि ।

रूपेश लेखन-सम्पादन सहित मैथिलीक कतिपय आयोजनक सहयोगी/संयोजक रहल छथि । सन् २०१४ मे ओ मिथिइवेन्टआयोजन करौने छल तहिना सन् २०१५ के आरम्भमे रूपेश कोलकाताक किछ साहित्यप्रेमीक संगे मैथिली कविताक समर्पित एक अद्भुत साहित्यिक गोष्ठी अकासतर बैसकीशुरू केलनि जे धारावाहिक रूपमे चलि रहल अछि । पहिल वर्षक संयोजक हिनके चुनल गेल छल । हिनकर संयोजनमे कोलकाताक विभिन्न सार्वजनिक स्थल पर ७ गोट साहित्यिक बैसकी सम्पन्न भेल ।एहि बैसकीक देखादेखी बिहारक पटना, कतार, साउदी अरब सहित अनेक ठाम युवा साहित्यिक लोकनि एहन तरहक आयोजन शुरू केलनि । एकर अतिरिक्त रूपेश मिथिला-मैथिली हेतु विभिन्न अभियानी संस्थासभसँ जुड़ि कार्यरत छथि । समय-समय पर बतौर कवि, वक्ता साहित्यिक गोष्ठी, सभामे भाग लैत रहैत छथि ।




#Article 113: रोहित शर्मा (134 words)


रोहित गुरूनाथ शर्मा - రొహిత్ గురునాథ్ శర్మ (जन्म: ३० अप्रिल १९८७) भारतक अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेट खेलाडी छी जे हालमे भारतिय राष्ट्रिय टिमक उप-कप्तान सेहो छी । ओ दामा हातक ब्याट्सम्यान छी आ समयअनुसार कहियो काल दहिना हाथ सँ अफब्रेक बलिङ्ग सेहो करैत अछि । बलरक रुपमे ओ इन्डियन प्रिमीयर लिगमे हयाट-ट्रिक सेहो लेने अछि । ओ इन्डियन प्रिमीयर लिगमे हाल मुम्बई इन्डियनस सँ खेल्ने अछि । ओ एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेटमे एकै इनिङमे सर्वाधिक रनक कीर्तिमान बनाएल अछि । ओ सन् २०१४ नवम्बर १३ क दिन इडेन गार्डेन क्रिकेट ग्राउण्डमे श्रीलङ्काविरुद्ध २६४ रन बनाएल अछि ।

ओ २० वर्षक उमेरमे अपन अन्तर्राष्ट्रिय करियरक सुरुआत केलक । अपन करियरक सुरुवाती समयमे हि ओ बहुत क्रिकेट खेलाडी एवं चयनकर्तासभक दिल जित्न सफल भेल । ओ अपन एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रियक सुरूवात २३ जुन २००७ मे आएरलेण्ड विरुद्ध केने छ्ल ।




#Article 114: लक्ष्मण झा &quot;सागर&quot; (120 words)


लक्ष्मण झा सागर 1953-

लक्ष्मण झा ‘सागर’

२. जन्‍म– ०१.०४.१९५३

३. पिताक नाम– श्री तारकेश्‍वर झा उर्फ श्री मोला झा

४. मायक नाम– स्‍व. गंगादेवी

५. गामक पता– ठढ़बितिया, घोघरडीहा, मधुबनी (बिहार)

६. स्‍थाई पता– ३बी, तिस्‍ता अपार्टमेंट ९४, एवेन्‍यू साउथ रोड संतोषपुर,कोलकाता-६५ (पच्छिम बंगाल)

७. दूरभाष (आवास)– ०३३-२४१६६४१८

८. मोबाइल–०९४३२५–४५३४९

९. आजिविका–रूपा एण्‍ड कंपनीक इस्‍पात संयन्‍त्र इकाईमे वरिष्‍ट क्रय प्रबन्‍धकक पद पर कार्यरत-      -  कोलकातामे।

१०. रुचि-साहित्यिक आ सामाजिक सरोकारसँ जुड़ल रहबाक।

११. अरुचि– मैथिलीक नाम पर अनर्गल आ अनसोंहाँत क्रिया-कलाप।

१२. रचानाधर्मिता- १९६८सँ मैथिलीक विभिन्‍न विघापर मैथिलीक विभिन्‍न पत्रिका सममे रचना      -   प्रकाशित होइत रहल अछि (बीचमे १९८३–१९९६ छोडि़केँ)। चारिटा पोथीक (कविता, कथा,   -   निबन्‍ध विविधा) प्रकाशन योग्‍य सामग्री उपलब्‍ध। छपेबाक जोगार नहि। प्रकाशक लोकनिक -    खोज जारी।




#Article 115: लमजुङ जिला (128 words)


लमजुङ नेपालक पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत अबस्थित गण्डकी अञ्चलकs ६टा जिलासभ मध्ये एक ऐतिहासिक महत्व रहल जिला छी ।

लमजुङ जिल्ला भौगोलिक रूपमा मध्य पहाडी क्षेत्र सँग उत्तरी हिमाली क्षेत्र धरि फैलल अछि । नेपालक  बीच भागम  जैविक विविधताक धनी आर पर्यटकीय दृष्टीसँ महत्वपूर्ण ई जिला १,६९२ वर्ग किलोमिटर क्षेत्रफलमे अवस्थित अछि। गुरुङ जातिक बाहुल्यता रहल ई जिला ऐतिहासिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक महत्वक हिसावसँ प्रमुख स्थानम राखल गेल अछि । नेपालक चिनाहवाला संस्कृति माध्यम लोक दोहोरी गीतक उदगम स्थल ई जिला मानल जाएत अछि । समुद्र सतहसँ ८०० मिटर उचाईम ई जिलाक सदरमुकाम बेसीसहर पृथ्वी राजमार्गम अवस्थित तनहुँ जिलाक डुम्रे बजारसँ ४२ किलोमिटर उत्तरम अवस्थित अछि । राजनैतिक एवं प्रशासनिक दृष्टिकोणसँ ई जिला ५२ गाउँ विकास समिति, ११ इलाका आर २ निर्वाचन क्षेत्रम विभाजन कएल गेल अछि ।




#Article 116: ललितपुर जिला (591 words)


ललितपुर जिला सङ्घीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्र नेपालक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत बागमती अञ्चलमे रहल काठमाडौं उपत्यकाक तीन जिलासभमे सँ ऐतिहासिक तथा पुरातात्विक रूपसँ सम्पन्न जिला छी। नेपालक मानचित्रमे ७५ जिलासभमे सँ ललितपुर जिला अपन गौरवमय प्रतिष्ठाक परिचित करवेने अछि। धार्मिक रूपसँग सेहो प्रसिद्ध कृष्ण मन्दिर, अशोक स्तम्भ, महाबौद्ध, पाटन दरबार क्षेत्र लगायत विभिन्न मठ, मन्दिर, पाटि-पौवा आ स्तम्भसभ सेहो ई जिलामे होमएसँ विश्वमे ई ललितपुर जिला प्रख्यात रहल अछि। ई जिलाक भौगोलिक बनावट, हावापानी, वन-जङ्गलको विविधता, नदी-नाला आ ताल, विभिन्न जनजातिसभक रहन-सहन, भेष-भुषा आदिक विविधता रहल ई जिलाक अपन एकटा ऐतिहासिक महत्त्व सेहो देखल जाऽ सकैत छी।

ई जिलाक ऐतिहासिक पृष्ठभूमिसँ देखैत लिच्छवीकालमे एकरा यूपग्रामद्रङ्ग कहल जाइत छल। लिच्छवीकालक जनता ओ बखत प्रायः एके ठाममे गजमजाके नै बैठ छिरियाक आनन्दसँ बस्ती बसाक रहैक इच्छासँ विभिन्न भेगमे सँग-सँग अनेक विकसित ग्रामसभ बनाक ओकरा जोडिक मूल सडक बीच-बीचमे मान बिहार आदि अनेक प्रसिद्ध विहारसभ बनौने छल। पहिने ई ग्रामसभ आ बिहारसभ संगे मिल गेलक बाद एक शहरक रूप लेलक। पहिनेक ग्रामसभ बादमे टोलक रूपमे परिणत भेल। बड्का-बड्का कमलपोखरीसभ धारा पाटीपौवा उद्योग व्यवसाय आदिसँ रमणीय शहरक रूपमे परिणत भेलाक बाद एकरा ललितपुरक नामाकरण कएल गेल कहिक उल्लेख पावैत अछि।

२०५८ सालक जनगणना अनुसार ई जिलाक जनसंख्या ३,३७,७८५ मे सँ १,६५,३३० (४८.९५%) महिला आ १,७२,४५५ (५१.०५%) पुरुष रहल अछि। विगत १० वर्षक अन्तरालमे जनसंख्या ८०,६९९ गोटे वृद्धि भेल अछि। ई जिलाक वार्षिक जनसंख्या वृद्धिदर २.७३% रहल अछि तँ लैङ्गिक अनुपात १०४.३१ रहल अछि। ई जिलाक जनघनत्व ८५९.८५ वर्ग कि.मी. रहल अछि। एतयके घरधुरी संख्या ६८,९२२ रहल अछि तँ औसत परिवार संख्या ४.९० रहल अछि। एतयके जनसंख्या नेपालक जनसंख्याक १.४६% रहल अछि। साथे एतयके शहरी जनसंख्या १,६२,९९१ अछि तँ ४१टा गा.वि.स. सभक जनसंख्या १,७३,६३६ रहल अछि।

काठमाडौं उपत्यकाक प्रसिद्ध तीन शहरसभमे सँ ललितपुर सभसँ पुरान शहर अछि। ई शहरक प्राचीन कालसँ हालधरि समय अनुसार विभिन्न नामसँ जानल जाइत अछि। जाहिना यल, युपग्राम, ललितपत्तन, ललितपुरी, मानिङ्गल, पाटन आदी। साहित्यिक श्रोत आ जनश्रुतिअनुसार ललितपुर शहर किरांतकालमे ई स्थापना भऽ गेल छल। उक्त जनश्रुति अनुसार ललितपुरक दोसर नाम यल पहिल किराती राजा यलम्वरक नामसँ रहल अछि। जनश्रुति तथा एतयक रीतिरिवाज सेहो ललितपुर शहर आ किराँतसभक प्राचीन सम्वन्ध देखेक सहयोग कएल गेल अछि। क्वालखु स्थित पट्को डोँ (किरात दरवार -), ८०० किराती मरल ठाउँ कहिक चिनहल च्यासल, हालतक सेहो किरातिसभ क वर्षक एकवैर आईव पूजा क लेल त्यागल स्थित सिद्धिलक्ष्मी मन्दिरक परिसरमे रहल देवतासभ, तिखिदेवल स्थित शिवजीक मन्दिर आदिक किराँत आ ललितपुरक प्राचीन सम्वन्ध कहिक कहल सेहो जाईत अछि।

ई शहरक प्राचीनताक बारेमे प्रमाणित रूपमे प्रकाश पार्ने पुरातात्विक श्रोतसभक अभाव अछि। तँ कुछ वंशावलीसभक भारतक मौर्य सम्राट अशोकर् इ.पू. २५० दिसा काठमाडौं उपत्यकाक भ्रमण केन छल आ ओ ललितपुरक चारकुना चार आ विचमे एक समेत करि पाँच स्तूपक स्थापना कएल गेल बात उल्लेख केनए अछि। हालधरि सेहो ललितपुर चारदिशामे चारिटा प्राचीन स्तुपसभ रहल अछि। जे अशोक स्तुपक नामसँ प्रख्यात अछि।

भौगोलिक स्थिति

नेपालक मानचित्रमे ललितपुर जिलाक फैलावट २७ डिग्रि २२ मिनेट सँ २८ डिग्रि ५० मिनेट उत्तरी अक्षांश आ ८५ डिग्रि १४ मिनेट सँ ८५ डिग्रि २६ मिनेट पूर्वी देशान्तरधरि रहल अछि। ई जिला समुद्री सतह सँ ४५७ मिटर उचाई सँ २८३१ मिटरधरि रहल अछि। ई जिला नेपालक करिब ०.२६६% भू-भाग ओगटने अछि। ई जिलाक भु-धरातल मे सँ करिब एक तिहाई भाग उपत्यका भित्र आ दुई तिहाई पहाड तथा दुर्गम क्षेत्रमे पडैत अछि। ई जिलाक दुर्गम स्थानसभमे पैग दुर्लुङ, कालेश्वर, प्युटार, माल्टा, आश्राङ, गिम्दी, चन्दनपुर आदी पडैत अछि।

भौगोलिक सिमाना

ललितपुर जिलाक पूर्वमे काभ्रेपलाञ्चोक, पश्चिममे काठमाडौं, उत्तरमे भक्तपुर आ दक्षिणमे मकवानपुर जिलासभसँ सिमाना जोडल अछि। ई जिलाक क्षेत्रफल ३८५ वर्ग कि. मी. रहल अछि।

ललितपुर जिलाक प्रशासनिक व्यवस्था

ललितपुरमे धरि सभ बौद्ध धर्म मान्नेवाला सभ अछि। यहिना सभ ई हिन्दू धर्म, इस्लाम आ क्रिस्चियन धर्मावलम्बीसभ सेहो ई जिलामे बसोबास केन अछि।




#Article 117: लल्लन प्रसाद ठाकुर (287 words)


 

जन्म ५ फरबरी १९५१ मुंगेर मे श्रीमती सुभद्रा देवी आ श्री हीरानंद ठाकुरक द्वितीय बालक । हिनक ग्राम- समौल,जिला-मधुबनी। सिविल इंजीनियर, टाटा स्टीलमे चाकरी। प्रकाश झाक फ़िल्म कथा माधोपुर की मे मुख्य भुमिका। नाटककार आ मंच अभिनेता। हुनक लिखल किछु प्रसिद्ध मैथिली नाटक छन्हि :बडका साहेब,मिस्टर निलो काका, लोंगिया मिरचाई,बकलेल आदि वा अंत।

श्रीमती सुभद्रा देवी आ श्री हीरानंद ठाकुरक द्वितीय बालक श्री लल्लन प्रसाद ठाकुरक जन्म ५ फरवरि १९५१, नरकनिवारण चतुर्दशी कs मुंगेर में भेल छलैन्ह। हिनक ग्राम- समौल, जिला-मधुबनी, आ कर्म स्थली जमशेदपुर छलैन्ह। स्कूल-वॉट्सन हायर सेकेंडरी स्कूल ,कॉलेज -एम .आई .टी मुजफ्फरपुर।

स्कूली शिक्षा मधुबनिक वॉट्सन स्कूल सs केलाक बाद श्री ठाकुर मुजफ्फरपुर इंजीनियरिंग कॉलेज सs सिविल इंजीनियरिंग केलाह। नेन पनि सs हिनक अभिरुचि कला आ साहित्य कs प्रति रहलैन्ह आ अनेको कार्यक्रम में भाग लैत रहलाह। अपनहीं लिखल नाटकक मंचन ओ अपन स्कूले सs करैत छलाह।

कॉलेज कs पहिल बरख में अपन कॉलेजक सांस्कृतिक कार्यक्रमक भार हिनका देल गेलैंह। कॉलेजक द्वितीय बरख सs लs कs अन्तिम बरख तक अपन कॉलेजक छात्र संघक जेनेरल सेक्रेटरी रहलाह। 

कॉलेजक पढ़ाई पूर्ण भेला पर टाटा स्टील में कार्यरत भेलाह। ऑफिसक व्यस्तताक बावजूद ओ अपन साहित्यिक गतिविधि कs आगू बढ़ाबति रहलाह। अपने लिखल नाटकक मंचन करैत छलाह आ ओहि में हुनक मुख्यभूमिका रहैत छलैन्ह। प्रकाश झा कs फ़िल्म कथा माधोपुर की  आ वीर कुंवर सिंह पर बनल सीरियल विद्रोह में  सेहो श्री ठाकुर मुख्य भूमिका में छलाह। अन्तराष्ट्रीय मैथिली नाटक समारोह में हुनक लिखल आ निर्देशित नाटक कैक बेर पुरस्कृत भ चुकल छैन्ह. श्री ठाकुर केर सब नाटक मिथांचल में अखनो खेलायल जायत छैक।

हुनक लिखल किछु प्रसिद्ध मैथिलि नाटक छैन्ह:
१ - बडका साहेब
२ - मिस्टर निलो काका
३ - लोंगिया मिरचाई
४ - बकलेल
५ - आदि वा अंत
६ - डम डम डिगा डिगा 




#Article 118: लोक (184 words)


लोक (वर्गीकरणक सिद्धान्त अनुसार होमो सेपियन्स) ल्याटिन भाषामे बुद्धिमान प्राणी आ चेतनशील प्राणी मनुख वर्गमे पड़ऽवला एक प्रजाति छी। ई स्तनधारी समूहमे आबऽवला दोपाया प्राणी छी। लोककें उच्च विकसित मस्तिष्क होएत अछि जे आमूर्त तर्क, भाषा, अन्तरावलोकन, आ समस्या समाधानमे सक्षम होएत अछि।

मानव विकासक वैज्ञानिक अध्ययनक सम्बन्ध मुख्य रूपमे होमो वर्गक विकास सँ जुड़ल अछि, मुदा अन्य होमिनिड आ होमोनिन्स प्रजातिक अध्ययन अस्ट्रालोपिथेकस सँ सम्बन्धित अछि। आधुनिक लोक होमो स्पाइन्स वर्गक रूपमे चिनहल जाएत अछि, जकर वर्तमान समयमे एक मात्र उपवर्ग होमो स्पाइन्सक नाम सँ चिनहल जाएत अछि। एकर दोसर परिचित उपवर्ग होमो स्पाइन्स आइडल्टु एखन विलुप्त भऽ चुकल अछि।लगभग ३०,००० बर्ष पहिने विलुप्त भऽ गेल 'होमो नेन्दर्थालेन्सिस' ई उपवर्गक रूपमे लेल गेल छल, मुदा होमो नेन्दर्थालेन्सिसक  आनुवांशिक अध्ययन सँ आधुनिक लोक आ नेन्दर्थालेन्सिसक डिएनए ५०,००० बर्ष पहिले छुटि गेल छल। वर्तमान समयमे कोनो वंशाणुगत अध्ययन सँ आधुनिक लोक कम सँ कम प्राचीन लोकक दुई प्रजातिसभ 'नेन्दर्थालेन्सिस' आ 'डेनिसोभान्स' सँ मिलल जुलल छल से कहल जाएत अछि। एकरा छोड़ि कोनो होमो रोडेसिएन्सिस प्रजातिक नमूनासभक खोज सँ एकर उपप्रजातिकें रूपमे व्याख्या कएल गेल अछि मुदा ई वर्गीकरणक व्यापक रूपमे स्वीकार नै कएल गेल अछि।




#Article 119: विकिपिडिया (150 words)


विकिपिडिया () एकटा बहुभाषिक वेबमे आधारित स्वतन्त्र आ खुला ज्ञानकोश थिक । विकिपिडिया शब्द विकी आ इन्साइक्लोपिडियाकें मिलाय बनाएल गेल अछि । एकर बहुत रास लेखसभ इन्टरनेटमे पहुँच भेल जे केओ परिवर्तन आ सम्पादन करि सकैत अछि । विकिपिडिया शब्द विकी (बहुत रास लोकसभक सहकार्यमे वेवसाइट तयार कएल गेल प्रविधि) आ इन्साइक्लोपिडिया जुड़ि कऽ बनल अछि । विकिपिडियामे स्वयंसेवकसभद्वारा लेख लिखल जाइत अछि ।  विकिपिडियाक मुख्य सर्भर संयुक्त राज्य अमेरिकाक फ्लोरिडा राज्यमे अवस्थित अछि । अन्य सर्भरसभ एम्स्टर्‍ड्याम आ सोलमे अछि । विकिमिडिया फाउन्डेसन नामक एकटा गैर-नाफामुखी संस्थाद्वारा सञ्चालित विकिपिडियाक लगभग सब पृष्ठसभक विकिपिडियामे पहुँच भेल केओ व्यक्ति एकरा परिमार्जन करि सकैत अछि । सन् २००१ मे जिमी वेल्स आ ल्यारी स्याङ्गर एकर शुरुवात केनए छलाह । हाल ई इन्टरनेटमे सभ सँ पैघ आ प्रख्यात सन्दर्भ-सामग्री बनबाक शीर्ष स्थानमे पहुँचि गेल अछि ।
 वर्तमान समयमे विकिपिडिया विश्वमे सभ सँ बेसी ब्राउज कएल जाएवला ५म् इन्टरनेट साइट बनि गेल अछि ।




#Article 120: विद्यापति (575 words)


विद्यापति (१३५२-१४४८) मैथिल कवि कोकिल कऽ नाम सँ सेहो जानल जाएवाला मैथिली साहित्यक आदि कवि आ संस्कृतक लेखक छल। हुनका भारतीय साहित्यक 'शृङ्गार-परम्परा' कऽ सङ्ग-सङ्गे 'भक्ति-परम्परा' कऽ सेहो प्रमुख स्तम्भसभमे सँ एक आ मैथिली भाषाक सर्वोपरि कवि कऽ रूपमे जानल जाएत अछि। हिनकर काव्यसभमे मध्यकालीन मैथिली भाषाक स्वरूप कऽ दर्शन कएल जा सकैत अछि। हिनका वैष्णव, शैव आ शाक्त भक्ति कऽ सेतु कऽ रूपमे सेहो स्वीकार कएल गेल अछि। मिथिलाक लोकसभकेँ 'देसिल बयना सब जन मिट्ठा' कऽ शुत्र दऽ ओ उत्तरी-बिहारमे लोकभाषाक जनचेतनाकेँ जीवित करवाक महान प्रयास केनए छल। विद्यापतिद्वारा रचित कवितासभ मैथिली भाषाक मात्रे साहित्यिक प्रेरणा नई देलक अपितु हिन्दुस्तानी भाषा, बङ्गाली, नेवारी आ कम सम नेपाली भाषाक सेहो साहित्यिक प्रेरणा देनए छल। 

मिथिला क्षेत्रमे एखनो लोकव्यवहारमे प्रयोग कएल जाएवला गीतसभमे सेहो विद्यापति कऽ शृङ्गार आ भक्ति-रसमे रचल रचनासभ जीवित अछि। पदावली आ कीर्तिलता हिनकर अमर रचनासभमे सँ एक छी।

विद्यापतिक जन्म सन् १३५२ मे मिथिला क्षेत्रमे (वर्तमान भारतक बिहार राज्यक मधुबनी जिलाक बिस्फी गाम) भेल छल। हिनकर पिताक नाम गणपति ठाकुर छल। विद्यापति नाम संस्कृत भाषा सँ सम्बन्धित अछि। 'विद्या' कऽ अर्थ ज्ञान आ 'पति' कऽ अर्थ 'स्वामी' होएत अछि जकर सम्मिलित स्वरुप 'ज्ञान सँ सज्जित पुरुष' होएत अछि। 

विद्यापति संस्कृत, अवहट्ठ, आ मैथिली भाषामे कविताक रचना केनए छल। ओ भूपरिक्रमा, पुरुषपरीक्षा, लिखनावली आदि अनेक रचना करि साहित्य जगतकेँ श्रेष्ठता प्रदान केनए छल। कीर्तिलता आ कीर्तिपताका नामक रचना ओ अवहट्ठमे लिखने छल। पदावली हिनकर हिन्दी-रचना छी आ याह हुनकर हिन्दी साहित्यमे प्रसिद्धि कऽ कारण अछि। पदावलीमे कृष्ण-राधा विषयक श्रृङ्गार कऽ पद अछि। एहि आधार पर हिनका हिन्दीमे राधा-कृष्ण-विषयक श्रृङ्गारी काव्य कऽ जन्म दाताक रूपमे जानल जाएत अछि।

हिनकर परवर्तीसभ आइ-काल्हि सौराठ गाममे रहैत छथि। एकर प्रमाण निम्न गपसभसँ लगैत अछि। सन् १३९४-९६ कऽ बीच कएल पदक समर्पण गियासौद्दीन आजमशाह आ नसरत शाहकेँ कएल गेल अछि। देव सिंहक आदेश सँ सन् १४०० लगातिमे ई 'भू-परिक्रमा' लिखलन्हि। सन् १४०२-०४ कऽ बीच 'कीर्तिलता'कऽ रचना कीर्ति सिंहक राज्यकालमे कएलन्हि। सन् १४०९-१४१५ कऽ बीच कीर्तिपताकाक रचना। पूर्वार्ध सन् १४०९ कऽ लगातिमेमे - हरि केलि अर्जुन सिंहक कीर्तिगाथासँ सम्बन्धित अछि आ उत्तरार्ध सन् १४१५ कऽ लगातिमे शिवसिंहक युद्ध आ तिरोधानसँ सम्बद्ध अछि। विद्यापति कऽ आदेशसँ सन् १४१० मे 'काव्य प्रकाश विवेक'कऽ प्रतिलिपि बनाओल गेल। सन् १४१० मे शिवसिंहक राज्यारोहण भेल आ एहि उपलक्ष्यमे विद्यापतिकेँ बिसपीक दानपत्र प्रदान कएल गेल। शिवसिंहक राज्यकाल सन् १४१०-१४ धरि रहल आ एहि अवधिमे गोरक्ष विजय नाटक, पुरुष-परीक्षा आ मैथिली-पदावलीक अधिकांश भागक रचना भेल। सन् १४१६ कऽ लगाति पुरादित्यक आदेशसँ लिखनावलीक निर्माण भेल। सन् १४२८ मे भागवत पुराणक विद्यापति लिखित प्रतिलिपि पूर्ण भेल। सन् १४२७-१४३९ मे पद्म सिंहक महारानी विश्वास देवी कऽ आदेशसँ शैव सर्वस्वसार, शैव सर्वस्वसार प्रमाण भूत सङ्ग्रह आ गङ्गा वाक्यावलीक रचना, सन् १४५३-६० कऽ लगाति राजा नरसिंह दर्पनारायण आ रानी धीरिमतिक समयमे विभागसार, व्याडिभक्ति तरङ्गिणी आ दानवाक्यावलीक रचना भेल। सन् १४५५ कऽ लगाति भैरव सिंहक अनुज्ञासँ 'दुर्गाभक्ति तरङ्गिणी'कऽ रचना भेल आ सन् १४६१ मे श्री रूपधर हिनकासँ छात्र रूपमे अध्ययन कएलन्हि। सन् १४६५ कऽ अगलबगल हिनकर मृत्यु भेल होएतन्हि, जनश्रुति अछि जे ई दीर्घायु भेल छलाह आ सए बरखक आयु प्राप्त कएने छलाह। आधुनिक मैथिली साहित्य लेखन आ विस्तारमे हुनकर बहुत पैघ योगदान रहल अछि। मैथिली भाषा आओर साहित्यमे हिनकर योगदानकेँ नेपाल आओर भारत दुनू देशमे उच्च सम्मान करएत अपन-अपन देशक चिट्ठी टिकटमे हुनकर तस्विर अङ्कित केनए अछि।

हिनकर रचनामे एक बेर जगज्जननी सीताक चरचा एहि रूपमे आएल अछि—

उपर्युक्त पद्य विद्यापतिकृत शैवसर्वस्वसारक प्रारम्भक नवम श्लोक छी। एकर अर्थ अछि- उत्कृष्ट गुणवती, मधुर स्वभाववाली, ब्राह्मण-वंशजा, नीति-कौशलमे विश्वविख्यातओ’ महारानी विश्वासदेवी सम्प्रति संसारमे सुशोभित छथि, जे पृथ्वी-पति पद्मसिंहकेँ तहिना प्रिय छलीह जहिना इन्द्रकेँ शची, शिवकेँ गौरी, कामकेँ रति , रामकेँ सीता ओ’ विष्णुकेँ लक्ष्मी॥9॥

 




#Article 121: विभा रानी (472 words)


विभा रानी (१९५९) मैथिलीके ३ साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता लेखकक ४ गोट किताब कन्यादान (हरिमोहन झा), राजा पोखरे में कितनी मछलियां (प्रभास कुमार चाऊधरी), बिल टेलर की डायरी व पटाक्षेप (लिली रे) हिन्दीमे अनूदित छन्हि । २ गोट लोककथाक पुस्तक मिथिला की लोक कथाएं व गोनू झा के किस्से। मैथिली कथा संग्रह खोहसँ निकसैत।
विभा रानी (१९५९- )लेखक- एक्टर- सामाजिक कार्यकर्ता-बहुआयामी प्रतिभाक धनी विभा रानी राष्ट्रीय स्तरक हिन्दी व मैथिलीक लेखिका, अनुवादक, थिएटर एक्टर, पत्रकार छथि, जिनक दर्ज़न भरि से बेसी किताब प्रकाशित छन्हि आ कएकटा रचना हिन्दी आ र्मैथिलीक कएकटा किताबमे संकलित छन्हि। मैथिली के ३ साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता लेखकक ४ गोट किताब कन्यादान (हरिमोहन झा), राजा पोखरे में कितनी मछलियां (प्रभास कुमार चाऊधरी), बिल टेलर की डायरी व पटाक्षेप (लिली रे) हिन्दीमे अनूदित छन्हि। समकालीन विषय, फ़िल्म, महिला व बाल विषय पर गंभीर लेखन हिनक प्रकृति छन्हि। रेडियोक स्वीकृत आवाज़क संग ई फ़िल्म्स डिविजन लेल डॉक्यूमेंटरी फ़िल्म, टीवी चैनल्स लेल सीरियल्स लिखल व वॉयस ओवरक काज केलन्हि। मिथिलाक 'लोक' पर गहराई स काज करैत २ गोट लोककथाक पुस्तक मिथिला की लोक कथाएं व गोनू झा के किस्से के प्रकाशनक संगहि संग मिथिलाक रीति-रिवाज, लोक गीत, खान-पान आदिक वृहत खज़ाना हिनका लग अछि। हिन्दीमे हिनक २ गोट कथा संग्रह बन्द कमरे का कोरस व चल खुसरो घर आपने तथा मैथिली में एक गोट कथा संग्रह खोह स' निकसइत छन्हि। हिनक लिखल नाटक 'दूसरा आदमी, दूसरी औरत' राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली के अन्तर्राष्ट्रीय नाट्य समारोह भारंगममे प्रस्तुत कएल जा चुकल अछि। नाटक 'पीर पराई'क मंचन, 'विवेचना', जबलपुर द्वारा देश भरमे भ रहल अछि। अन्य नाटक 'ऐ प्रिये तेरे लिए' के मंचन मुंबई व 'लाइफ़ इज नॉट अ ड्रीम' के मंचन फ़िनलैंडमे भेलाक बाद मुंबई, रायपुरमे कएल गेल अछि। 'आओ तनिक प्रेम करें' के 'मोहन राकेश सम्मान' से सम्मानित तथा मंचन श्रीराम सेंटर, नई दिल्लीमे कएल गेल। अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो सेहो 'मोहन राकेश सम्मान' से सम्मानित अछि। दुनु नाटक पुस्तक रूप में प्रकाशित सेहो अछि। मैथिलीमे लिखल नाटक भाग रौ आ मदद करू संतोषी माता अछि। हिनक नव मैथिली नाटक प्रस्तुति छन्हि- बलचन्दा।

विभा 'दुलारीबाई', 'सावधान पुरुरवा', 'पोस्टर', 'कसाईबाड़ा', सनक नाटक के संग-संग फ़िल्म 'धधक' व टेली -फ़िल्म 'चिट्ठी'मे अभिनय केलन्हि अछि। नाटक 'मि. जिन्ना' व 'लाइफ़ इज नॉट अ ड्रीम' (एकपात्रीय नाटक) हिनक टटका प्रस्तुति छन्हि।

'एक बेहतर विश्र्व-- कल के लिए' के परिकल्पनाक संगे विभा 'अवितोको' नामक बहुउद्देश्यीय संस्था संग जुड़ल छथि, जिनक अटूट विश्र्वास 'थिएटर व आर्ट-- सभी के लिए' पर अछि। 'रंग जीवन' के दर्शनक साथ कला, रंगमंच, साहित्य व संस्कृति के माध्यम से समाज के 'विशेष' वर्ग, यथा, जेल- बन्दी, वृद्ध्राश्रम, अनाथालय, 'विशेष' बच्चा सभके बालगृहक संगहि संग समाजक मुख्य धाराल लोकक बीच सार्थक हस्तक्षेप करैत छथि। एतय हिनकर नियमित रूप से थिएटर व आर्ट वर्कशॉप चलति छन्हि। अहि सभक अतिरिक्त कॉर्पोरेट जगत सहित आम जीवनक सभटा लोक आओर लेल कला व रंगमंचक माध्यम से विविध विकासात्मक प्रशिक्षण कार्यक्रम सेहो आयोजित करैत छथि।




#Article 122: विभूति आनन्द (286 words)


विभूति आनन्द 1953-

जन्म: शिवनगर, मधुबनी, बिहार। चर्चित कवि, कथाकार, संपादक । प्रकाशित कृति टूटा उपन्यास टूटा समीक्षा, तीन टा कथ संग्रह, टूटा गीत-गजल संग्रह ओ चारिटा कथा-संग्रह प्रकाशित।२००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा)मैथिली लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार ।
विभूति आनन्द जीक परिचय

         

जन्म       :    4.10.1955

स्थान      :    शिवनगर, मधुबनी

शिक्षा      :    पी.एच.डी., पटना विश्वविद्यालय, पटना

वृत्ति       :    दैनिक मिथिला मिहिरमे कार्यालय                          संवाददाता मैथिली अकादमी, पटनामे                           शोध सहायक,जिला स्कूल, मुंगेरमे +2                                व्याख्याता

सम्प्रति     :    आर. एन कालेज, पण्डौलमे अध्यापन

गतिविधि    :    पूर्वमे विभिन्न राजनीतिक दल, भाषा                              आन्दोलन ओ रंगमंचसँ सम्बन्ध।                             तहिना मैथिलीभाषी छात्र संघ,भंगिमा,                                  जानकी महोत्सव समिति, जखन-तखन                            आदि संस्थाक संस्थापक-सदस्य। 74क                     छात्र आन्दोलनमे जेल यात्रा

सम्मान :    साहित्य अकादेमी पुरस्कार, 2006                                  दिनकर राष्ट्रीय सम्मान-2008

सम्पर्क :    09431857613

       

 विभूति आनन्दक चास–बास

कवितासंग्रह :       डेग, उपक्रम, पुनर्नवा होइत ओ                                      छौंड़ी, नेहाइपर स्वप्न, उठा रहल                                    घोघ तिमिर, झूमि रहल पाथर–मन

कथासंग्रह   :      प्रवेश, खापड़ि महक धान, काठ

उपन्यास    :      गाम सुनगैत, पराजित–अपराजित

नाटक      :      समय–संकेत, तित्तिरदाइ, हाली–हाली                                   बरिसू, फ्रेममे बन्द एकटा उखरल                                  फोटो

समीक्षा :     श्री ललित आ हुनक कथायात्रा,                                       स्मरणक संग, ललित, भाषा–टीका

संपादन :     गीतनाद, विद्यापति पदावली, मैथिली                                    कथा–साहित्य, अहुल, एकटा छला                                         गोनू झा, कथा कहिनी, विद्यापतिक                                 पदावली (सभटा पुस्तक)

संपादन :    लालधूआँ, माटिपानि, भाखा,                                     हालचाल, मैथिली अकादमी                                       पत्रिका, दैनिक मिथिला मिहिर,                                          दृष्टि, कूस, अंग मैथिली, समाद,                                             भंगिमा, हाक, मनीषा, डगर,                                       जनता।      

सम्प्रति :     जखन–तखन (सभटा पत्रिका) एकर                                    अतिरिक्त ‘प्रो. हरिमोहन झा                                          अभिनन्दनग्रंथ’ तथा ‘निखिल                                         भारतीय मैथिली भाषी                                            छल’,‘अरिपन’ ओ ‘प्रो. हरिमोहन                                   झा अभिनन्दन समारोह’ स्मारिकाक                                        संपादन सेहो

 अनुवाद    :    मैथिल शहीद बैकुण्ठ शुक्ल                                         (बंगला),

  मूल      :     विभूति भूषण दास गुप्त तथा जीव                                     विज्ञान (हिन्दी)

  मूल     :     सुबोध बिहारी सहाय

यंत्रस्थ     :     एकटा रहए गप्पू (उपन्यास), ताला,                                         एकटा उड़ल फुर्र! (कथासंग्रह),                                       एकटा साम्यवादीक आत्मकथा                                       (कवितासंग्रह), गामक चिट्ठी                                        (स्तम्भ), हरिमोहन बाबूक रचना–                                      संसार,

स्मरणक संग :    भाग–दू (समीक्षा)




#Article 123: बीरगञ्ज महानगरपालिका (116 words)


वीरगञ्ज उपमहानगरपालिका नेपालक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्र, नारायणी अञ्चलक पर्सा जिलामे अवस्थित एक उप-महानगरपालिका छी । श्री ३ वीर शमशेर जङ्गबहादुर राणाक प्रधानमन्त्रीत्वकालमे वि.सं. १९४२-१९५८ पर्सा जिलाक अलौ नामक स्थानसँ गहवा गाँउमे सदरमुकाम घसकेलाबाद गहवा गाँउके हुनकरे नाममे वीरगञ्ज नामाकरण कएल गएल छल ।

ई नेपालक सबसँ महत्वपूर्ण व्यापारिक तथा पारवहन नाका छी । एतयसँ नेपाल भारत लगायत अन्य मुलुकसभधरि आयात निर्यातक काम होएत अछि । चितवन, काठमाडौं तथा पोखराक लेल सामान पैठारी करैक संगे देशको मुख्य उद्योगिक कोरिडोर सेहो छी । ठाकुरराम क्याम्पसक संगे किछ आर कलेज तथा विद्यालय तथा नारायणी अञ्चल अस्पतालक संगे किछ नर्सिङ होम समेत रहल विरगञ्जमे अञ्चल स्तरीय तथा जिला स्तरीय सरकारी कार्यलयसभ सेहो अछि । वीरगञ्जक एरिया कोड ०५१ छी ।




#Article 124: विराट कोहली (797 words)


विराट कोहली (; जन्म: ५ नवम्बर १९८८) भारतीय राष्ट्रिय क्रिकेट टिमक कप्तान छी । दहिना हातक कलात्मक ब्याट्सम्यान कोहली विश्व क्रिकेटमे उत्कृष्ट ब्याट्सम्यानक दर्जा प्राप्त केनए अछि ।इन्डियन प्रिमियर लिग (आइपिएल) मे रोयल च्यालेन्जर्स बेङ्गलोर दिस सँ खेलनिहार कोहली सन् २०१३ सँ ओ ई टिमक कप्तानक भूमिकामे अछि ।

दिल्लीमे जनमल आ बढल कोहली सन् २००६ मे प्रथम-श्रेणी क्रिकेटमे पदार्पण करै सँ पहिने दिल्ली क्रिकेट टिमक प्रतिनिधित्व करि विविध उमर-समूहक क्रिकेटमे अपन भागिदारी जनाए चुकल छल । मलेसियामे आयोजन भेल २००८ आइसिसी अन्डर-१९ क्रिकेट विश्वकपमे भारत अन्डर-१९ राष्ट्रिय क्रिकेट टिमक कप्तानी करैत अपन समूहकें विजयी बनेनाए छल । विश्वकपक किछ महिना बाद ओ श्रीलंका राष्ट्रिय क्रिकेट टिमक विरुद्ध १९ वर्षक उमरमे एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रिय खेलमे पदार्पण केनए छल । वर्तमान समयमे वनडे क्रिकेटमे सभ सँ बेसी शतक लगेनिहार क्रिकेटरसभक श्रेणीमे विराट कोहली दोसर क्रममे अछि । विराट कोहली अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेटमे सभ सँ तीव्र १५,००० रन बनाबैवला ब्याट्सम्यान छी । ओ क्रिकेटक सम्पूर्ण स्वरूपक कूल ३३३ म्याचमे ई कारनामा करि हाशिम अमलाद्वारा स्थापित कीर्तिमान तोड़लक ।

विराट कोहलीक जन्म दिल्लीमे एक पञ्जाबी परिवारमे ५ नवम्बर १९८८ कें भेल छल । हुनकर पिता प्रेम कोहली एक ओकिल आ माता सरोज कोहली एक गृहिणी छी । हुनकर एक भाए विकास आ एक पैग बहीन भावना अछि । हुनकर परिवारक अनुसार कोहली तीन वर्षक उमरमे क्रिकेट ब्याट हाथमे लऽ अपन पिताक बलिङ करवाक लेल कहैत छल ।

कोहली उत्तम नगरमे पैग भेल  आ अपन विद्यालय शिक्षा विशाल भारती सार्वजनिक विद्यालय सँ पुरा केलक । सन् १९९८ मे पश्चिम दिल्ली क्रिकेट एकेडमीक स्थापना भेलाक बाद ९ वर्षक कोहली ओकर हिस्सा बनि गेल । विराट जका होनहार क्रिकेट खेलाडी गल्ली क्रिकेट खेल अपन समय बर्बाद करि रहल अछि हुनका व्यावसायिक क्लबमे क्रिकेटक कला सिखवाक पड़ोसीसभक सलाह अनुसार कोहलीक पिता हुनका ओ क्रिकेट एकेडमी लऽ गेल छल । राजकुमार शर्माक प्रशिक्षणमे कोहली एकेडमीमे खेल सिखैत छल आ ओहि समय ओ वसुन्धरा इनक्लेभमे सुमीत डोग्रा एकेडमी सँ म्याच सेहो खेलैत छल । प्रशिक्षक शर्मा ओ दिन याद करैत कहैत छथि जे कोहली एक क्षमतावान आ बहुत मिहिनेती खेलाडीक सङ्ग सङ्ग कोनो क्रममे ब्याटिङ करि सकैत अछि । खेलक सङ्ग सङ्ग ओ पढ़ाईमे सेहो अव्वल विद्यार्थी छल ।सन् २०१५ धरि कोहलीक परिवार मीरा बागमे रहैत छल आ बादमे ओसभ गुरुग्राममे बसोबास आरम्भ केलक ।

कोहली पहिल बेर अक्टुबर २००२ मे दिल्ली अन्डर-१५ टिमक लेल २००२-०३ मे पाली उम्रिगर ट्रफीमे खेलने छल । ओ ३४.४० कऽ औसत सँ १७२ रनक सङ्ग ओहि प्रतियोगितामे अपन टिमक लेल अग्रणी रन बनेनिहार खेलाडी छल । ओ २००३-०४ पाली उम्रिगर ट्रफीक लेल अपन टिमक कप्तान बनल आ प्रतियोगिता अवधिमे दुई शतक आ दुई अर्धशतक सहित ७८ कऽ औसत सँ ५ पारीमे ३९० रन बनेलक । सन् २००४ कऽ उत्तरार्धमे, विराटकें २००३-०४ मे विजय मर्चेन्ट ट्रफीक लेल दिल्ली अन्डर-१७ टिममे चयन कएल गेल । ओ चारि म्याचमे ११७.५० कऽ औसत सँ दुई शतक आ २५१* कऽ शीर्ष स्कोरक सङ्ग ४७० रन बनेलक । दिल्ली अन्डर-१७ टिम २००४-०५ कऽ विजय मर्चेन्ट ट्रफी जीतलक जहिमे कोहली दुई शतक सहित ८४.११ कऽ औसत सँ ७ म्याचमे ७५७ रनक सङ्ग प्रतियोगिताक उच्चतम रन-स्कोरर छल । सन् २००६ फरबरीमे, ओ दिल्ली क्रिकेट टिमक लेल सर्भिस क्रिकेट टिमक विरुद्ध सूची ए क्रिकेटक पदार्पण केलक मुदा बल्लेबाजी नै कऽ सकल ।

सन् २००६ जुलाईमे कोहलीकें इङ्ल्यान्ड दौराक लेल भारत अन्डर-१९ राष्ट्रिय क्रिकेट टिममे चयन कएल गेल । ओ तीन म्याचक टेस्ट श्रृङ्खलामे इङ्ल्यान्ड अन्डर-१९ राष्ट्रिय क्रिकेट टिमक विरुद्ध ४९ आ तीन म्याचक एकदिवसीय श्रृङ्खलामे १०५ कऽ औसत सँ रन बनेलक । मेजबान भारत अन्डर-१९ टिम दुनू श्रृङ्खलामे विजयी रहल । दौराक समापनक बाद, भारत अन्डर-१९ टिमक प्रशिक्षक लालचन्द राजपूत कोहली सँ प्रभावित भऽ कहने छल— कोहली गति आ स्पिन दुनूक विरुद्ध तगड़ा कौशल देखेलक । सितम्बरमे, भारत अन्डर-१९ टिम पाकिस्तानक दौरा केलक । ओतय कोहली पाकिस्तान अन्डर-१९ कऽ विरुद्ध टेस्ट श्रृङ्खलामे ५८ आ एकदिवसीय श्रृङ्खलामे ४१.६६ कऽ औसत सँ रन बनेलक ।

कोहली सन् २००६ दिसम्बरमे १८ वर्षक उमरमे तमिलनाडु क्रिकेट टिमक विरुद्ध दिल्लीक लेल अपन प्रथम श्रेणी क्रिकेटक शुरुआत केलक आ अपन पहिल पारीमे १० रन बनेलक । दिसम्बरमे ओ चर्चामे आएल जखन ओ अपन पिताक मौतक एक दिन बाद कर्नाटक क्रिकेट टिमक विरुद्ध अपन टिमसँ खेलैक निर्णय करि ९० रन बनेलक । आउट भेलाक तुरन्त बाद ओ सीधे अन्तिम संस्कारक लेल चलि गेल । दिल्ली टिमक कप्तान मिथुन मनहास कहलक— ई टिमक लेल बहुत पैग प्रतिबद्धताक एक अधिनियम छी आ हुनकर पारी टिमक लेल बहुत महत्वपूर्ण साबित भेल । प्रशिक्षक चेतन चौहान कोहलीद्वारा दर्शाएल गेल रङ्गरूप आ दृढ़ सङ्कल्पक सराहना केलक । हुनकर माताक अनुसार ओहि दिनक बाद विराट परिवर्तित भऽ गेल आ एके रातिमे ओ एक बहुत अधिक परिपक्व व्यक्ति बनि गेल । एकर बाद ओ सभ म्याचकें गम्भीरता सँ लेलक । ओहि सत्रमे ओ ३६.७१ कऽ औसत सँ ६ म्याचमे कूल २५७ रन बनेलक ।

सन् २००७ अप्रैलमे, ओ अपन ट्वान्टी २० क्रिकेटक शुरुआत केलक आ अन्तर-राज्य टि२० च्याम्पियनसिपमे अपन टिमक लेल ३५.८० कऽ औसत सँ १७९ रनकें सङ्ग उच्चतम रन-स्कोररक रूपमे प्रतियोगिता समाप्त केलक ।




#Article 125: वैद्यनाथ मिश्र 'यात्री' (750 words)


'नागार्जुन' वैद्यनाथ मिश्र 'यात्री' 1911-1998

जन्म अपन मामागाम सतलखामे भेलन्हि, जे हुनकर गाम तरौनीक समीपहिमे अछि, जिला-दरभ्गा । मूल नाम: वैद्यनाथ मिश्र । हिन्दीमे नागार्जुन नामे प्रख्यात । प्रकाशित कृति: चित्रा, पत्रहीन नग्न गाछ (मैथिली कविता-संग्रह); पारो, बलचनमा, नवतुरिया (मैथिली उपन्यास); युगधारा, सतरंगे पंखोंवाली, प्यासी पथराई आंखें, खिचड़ी विप्लव देखा हमने, तुमने कहा था, हजार हजार बाहो वाली, पुरानी जूतियो का कोरस, रत्नगर्भा, ऐसे भी हम क्या ! ऐसे भी तुम क्या ! (हिन्दी कविता-संग्रह); रतिनाथ की चाची, बलचनमा, नई पौध, बाबा बटेसरनाथ, वरुण के बेटे, दुखमोचन, कुम्भीपाक, अभिनन्दन, उग्रतारा, इमरतिया (हिन्दी उपन्यास); आसमान में चन्दा तैरे (कहानी संग्रह); भस्मांकुर (हिन्दी खण्ड काव्य); अन्नहीनम् क्रियाहीनम् (निबन्ध-संग्रह); गीत गोविन्द; मेघदूत; विद्यापति के गीत, विद्यापति की कहानियां (अनुवाद) । ’पत्रहीन नग्न गाछ’ लेल १९६८ मे साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त । यायावरी जीवन । मैथिली प्रतिनिधिक रूपमे रूस भ्रमण । नागार्जुन (स्व. श्री वैद्यनाथ मिश्र “यात्री” ), हिन्दी आ मैथिली कवि, १९९४ ई.मे साहित्य अकादेमीक फेलो (भारत देशक सर्वोच्च साहित्यक पुरस्कार)।
स्व. श्री वैद्यनाथ मिश्र “यात्री” केर जन्म १९११ ई. मे अपन मामागाम सतलखामे भेलन्हि, जे हुनकर गाम तरौनीक समीपहिमे अछि। यात्री जी अपन गामक संस्कृत पाठशालामे पढ़ए लगलाह, फेर ओऽ पढ़बाक लेल वाराणसी आऽ कलकत्ता सेहो गेलाह आऽ संस्कृतमे “साहित्य आचार्य” केर उपाधि प्राप्त कएलन्हि। तकर बाद ओऽ कोलम्बो लग कलनिआ स्थान गेलाह पाली आऽ बुद्ध धर्मक अध्ययनक लेल। ओतए ओऽ बुद्धधर्ममे दीक्षित भए गेलाह आऽ हुनकर नाम पड़लन्हि नागार्जुन। यात्रीजी मार्क्सवादसँ प्रभावित छलाह। १९२९ ई. क अन्तिम मासमेमे मैथिली भाषामे पद्य लिखब शुरू कएलन्हि यात्री जी। १९३५ ई.सँ हिन्दीमे सेहो लिखए लगलाह। स्वामी सहजानन्द सरस्वती आऽ राहुल सांकृत्यायनक संग ओऽ किसान आन्दोलनमे संलग्न रहलाह आऽ १९३९ सँ १९४१ धरि एहि क्रममे विभिन्न जेलक यात्रा कएलन्हि। हुनकर बहुत रास रचना जे महात्मा गाँधीक मृत्युक बाद लिखल गेल छल, प्रतिबन्धित कए देल गेल। भारत-चीन युद्धमे कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा चीनकेँ देल समर्थनक बाद यात्रीजीक मतभेद कम्युनिस्ट पार्टीसँ भए गेलन्हि। जे.पी. अन्न्दोलनमे भाग लेबाक कारण आपात्कालमे हिनका जेलमे ठूसि देल गेल। यात्रीजी हिन्दीमे बाल साहित्य सेहो लिखलन्हि। हिन्दी आऽ मैथिलीक अतिरिक्त बांग्ला आऽ संस्कृतमे सेहो हिनकर लेखन आएल। मैथिलीक दोसर साहित्य अकादमी पुरस्कार १९६९ ई. मे यात्रीजीकेँ हुनकर कविता संग्रह “पत्रहीन नग्न गाछ”पर भेटलन्हि। १९९४ ई.मे हिनका साहित्य अकादमीक फेलो नियुक्त कएल गेल। यात्रीजी जखन २० वर्षक छलाह तखन १२ वर्षक कान्यासँ हिनकर विवाह भेल। हिनकर पिता गोकुल मिश्र अपन समाजमे अशिक्षितक गिनतीमे छलाह, मुदा चरित्रहीन छलाह। यात्रीजीक बच्चाक स्मृति छन्हि, जे हुनकर पिता कोना हुनकर अस्वस्थ आऽ ओछाओन धेने मायपर कुरहड़ि लए मारबाक लेल उठल छलाह, जखन ओऽ बेचारी हुनकासँ अपन चरित्रहीनता छोड़बाक गुहारि कए रहल छलीह। यात्रीजी मात्र छ वर्षक छलाह जखन हुनकर माए हुनका छोड़ि प्रयाण कए गेलीह। यात्रीजीकेँ अपन पिताक ओऽ चित्र सेहो रहि-रहि सतबैत रहलन्हि जाहिमे हुनकासँ मातृवत प्रेम करएबाली हुनकर विधवा काकीक, हुनकर पिताक अवैध सन्तानक गर्भपातमे, लगभग मृत्यु भए गेल छलन्हि। के एहन पाठक होएत जे यात्रीजीक हिन्दीमे लिखल “रतिनाथ की चाची” पढ़बाक काल बेर-बेर नहि कानल होएताह। पिता-पुत्रक ई घमासान एहन बढ़ल जे पुत्र अपन बाल-पत्नीकेँ पिता लग छोड़ि वाराणसी प्रयाण कए गेलाह।

कर्मक फल भोगथु बूढ़ बाप

हम टा संतति, से हुनक पाप

ई जानि ह्वैन्हि जनु मनस्ताप

अनको बिसरक थिक हमर नाम

माँ मिथिले, ई अंतिम प्रणाम! (काशी/ नवंबर १९३६) काशीसँ श्रीलंका प्रयाण

१९४१ ई. मे यात्रीजी पत्नी, अपराजिता, लग आबि गेलथि। १९४१ ई. मे यात्रीजी दू टा मैथिली कविता लिखलन्हि- “बूढ़ वर” आऽ विलाप आऽ एकरा पाम्फलेट रूपमे छपबाए ट्रेनक यात्री लोकनिकेँ बेचलन्हि।जीविकाक ताकिमे सौँसे भारत दुनू प्राणी घुमलाह। पत्नीक जोर देलापर बीच-बीचमे तरौनी सेहो घुमि कए आबथि। आऽ फेर अएल १९४९ ई. अपना संग लेने यात्रीजीक पहिल मैथिली कविता-संग्रह “चित्रा”। १९५२ ई. धरि पत्नी संगमे घुमैत रहलथिन्ह, फेर तरौनीमे रहए लगलीह। यात्रीजी बीच- बीचमे आबथि। अपराजितासँ यात्रीजीकेँ छह टा सन्तान भेलन्हि, आऽ सभक सभ भार ओऽ अपना कान्हपर लेने रहलीह। यात्रीजी दमासँ परेशान रहैत छलथि।

हम जखन दरभंगामे पढ़ैत रही तँ यात्रीजी ख्वाजा सरायमे रहैत छलाह। हमरा मोन अछि जे मैथिलीक कोनो कार्यक्रममे यात्रीजी आएल छलाह आऽ कम्युनिस्ट पार्टीबला सभ एजेन्डा छीनि लेने छल। अगिले दिन यात्रीजी अपनाकेँ ओहि धोधा-धोखीमे गेल सभाक कार्यवाहीसँ हटा लेलन्हि। एमर्जेन्सीमे जेल गेलाह तँ आर.एस.एस. केर कार्यकर्ता लोकनिसँ जेलमे भेँट भेलन्हि। आऽ जे.पी.क सम्पूर्ण क्रान्तिक विरुद्ध सेहो जेलसँ बाहर अएलाक बाद लिखलन्हि यात्रीजी। यात्रीजी मैथिलीमे बैद्यनाथ मिश्र यात्री आऽ हिन्दीमे नागार्जुन केर नामसँ रचना लिखलन्हि।

आऽ अन्तमे यात्रीजीक संस्कृत पद्य:-

वासन्ती कनकप्रभा प्रगुणिता

पीतारुर्णेः पल्लवैः

हेमाम्भोजविलासविभ्रमरता

दूरे द्विरेफाः स्ता

यैशसण्डलकेलिकानन कथा

विस्मरिता भूतले

छायाविभ्रमतारतम्यतरलाः

तेऽमी “चिनार” द्रुमाः॥

बसंतक स्वर्णिम आभा द्विगुणित भऽ गेल अछि पीयर-लाल कोपड़सँ। स्वर्णकाल भ्रममे भौरा सभ एकरासँ दूर-दूर रहैत अछि। नन्दनवनक विहार जे पृथ्वीपर बिसारि दैत छथि, छाह झिलमिल घटैत-बढ़ैत जिनक डोलब अछि चंचल आ तरल। ओही चिनारकेँ हम देखने छी अडिग भेल ठाढ़।




#Article 126: शंकर मिश्र (255 words)


शंकर मिश्र

अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥ क वक्ता। पन्द्रहम शताब्दीमे भवनाथ मिश्रक घरमे मधुबनी जिलाक सरिसव ग्राममे शंकर मिश्रक जन्म भेल।शंकर मिश्र महाराज भैरव सिंहक कनिष्ठ पुत्र राजा पुरुषोत्तमदेवक आश्रित छलाह। एकर वर्णन रसार्णव ग्रंथमे भेटैत अछि। शंकर मिश्र कवि, नाटककार, धर्मशास्त्री आ न्याय-वैशेषिकक व्याख्याकार रहथि।शंकर मिश्र ग्रंथावली- १.गौरी दिगम्बर प्रहसन २.कृष्ण विनोद नाटक ३.मनोभवपराभव नाटक४.रसार्णव५.दुर्गा-टीका६.वादिविनोद७.वैशेषिक सूत्र पर उपस्कार८.कुसुमांजलि पर आमोद९.खण्डनखण्ड-खाद्य टीका १०.छन्दोगाह्निकोद्धार ११.श्राद्ध प्रदीप १२.प्रायश्चित प्रदीप।
म.म. शंकर मिश्र

पन्द्रहम शताब्दीमे भवनाथ मिश्रक घरमे मधुबनी जिलाक सरिसव ग्राममे शंकर मिश्रक जन्म भेल। भवनाथ मिश्र बहुत पैघ नैय्यायिक छलाह आऽ कहियो ककरोसँ कोनो वस्तुक याचना नहि कएलन्हि, ताहि लेल सभ हुनका अयाची मिश्र कहए लगलन्हि। शँकर मिश्र पितासँ अध्ययन प्राप्त कएलन्हि आऽ पैघ भाए जीवनाथ मिश्रससँ विद्याक अधिग्रहण कएलन्हि।

जखन शंकर मिश्र पाँच वर्षक छलाह तँ महाराज शिव सिंहक सबारी जाऽ रहल छल। राजा ओहि प्रतिभाशाली बालककेँ देखलन्हि आऽ हुनकासँ परिचय पुछलन्हि। तखन उत्तर भेटलन्हि-

बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती।

अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥

फेर राजाक आग्रह पर ओऽ दोसर श्लोक पढ़लन्हि-

चलितश्चकितच्च्हन्नः प्रयाणे तव भूपते।

सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्त्राक्षः सहस्रपात् ॥

राजा प्रसन्न भए द्रव्य देलखिन्ह जाहिसँ, शंकरक माए पोखरि खुनबेलन्हि, ओऽ पोखरि एखनो सरिसबमे अछि।

शंकर मिश्र महाराज भैरव सिंहक कनिष्ठ पुत्र राजा पुरुषोत्तमदेवक आश्रित छलाह। एकर वर्णन रसार्णव ग्रंथमे भेटैत अछि।

शंकर मिश्र कवि, नाटककार, धर्मशास्त्री आऽ न्याय-वैशेषिक केर व्याक्याकार रहथि।

शंकर मिश्र ग्रंथावली-

१. १.गौरी दिगम्बर प्रहसन

२. २.कृष्ण विनोद नाटक

३. ३.मनोभवपराभव नाटक

४. ४.रसार्णव

५. ५.दुर्गा-टीका

६. ६.वादिविनोद

७. ७.वैशेषिक सूत्र पर उपस्कार

८. ८.कुसुमांजलि पर आमोद

९. ९.खण्डनखण्ड-खाद्य टीका

१०.१०.छन्दोगाह्निकोद्धार

११.श्राद्ध प्रदीप

१२.प्रायश्चित प्रदीप।




#Article 127: शीतल झा (113 words)


शीतल झा, नेपाल
शीतल झा, पिताक नाम–स्व. लक्ष्मी कांत झा, माताक नाम–स्व. दाई रानी झा, जन्म स्थान–सुगामधुकरही–५, ग्राम–नरहिया,धनुषा, नेपाल।, वर्तमान बसोबास–जनक पुर–६, जानकीनगर पगला धर्मशाला, महाराज सागरसँ दक्षिण, जिला धनुषा, नेपाल।, जन्म –२०१२/०१/०१ जूड़शीतल।, शिक्षा–बी.ए., बी.एड., बी.एल.।, राजनीतिक संलग्नता–नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (एमाले)

पद–सलाहकार, के.क. नेकप्पा एमाले।, रूचि आ प्रकाशन–(i) संघीय संरचना आ मिथिला राज्य। मिथिलाक राजनीतिक इतिहास आ मिथिला (नेपालक सन्दर्भमे मात्र), (ii) संस्कृति, राष्ट्र आ मधेशक सम्बन्धमे विभिन्न रचना।, (iii) कविता (प्रकाशित विभिन्न पत्रिकामे), (iv) सुगौली सन्धि आ मिथिला (अप्रशित), “सुगौली सन्धि” मीन राज उपाध्याय नागरिक उड्डयन विभाग बाबरमहल

(१) भारतक भूमिनिर्माण पौराणिक कथा, नक्शा, नेमूनि, निथि, ऐतिहासिक चर्चा (२) तत्कालीन राजाक इतिहास, भूगोल, नक्शा (३) भारतक लिखित इतिहास–(मौर्य, अश्लके, मानव इतिहास)




#Article 128: गणेश (152 words)


गणेश भगवान् हिन्दू धर्मावलम्बीसभक सभसँ पहिले पूजा होएवाला देवताक नाम छी गणेश। हात्तीक शिर तथा लोगक जेहन शरीर भेल पैग पेटवाला भगवान गणेशक विघ्न हर्ता तथा सिद्धि दै वाला सिद्धि विनायक कहिक पूजा कएल जाइत् अछि। ऋद्धि आ सिद्धि ईनकर पत्नी छी। नेपाल तथा भारतमे बहुतरास लोगसभक नाम गणेश राखल गेल अछि। शिवमहापुराणमे गणेशक नामसँ परिचित भगवान गणेशक जांत होम्एवाला,पुजा करिक तिथि ,मिति ,बिधि ,बिधानमे एकरुपता अछि | मुद्दा नेपालक सूदुरपश्चिम डोटी क्षेत्रमे गणेश भगवानक फरक नामसँ सेहो पहचानल जाइत् अछि | 

जाहिना =

गणेश शब्दक उत्पत्ति गण+ईश मिलके भेल अछि जेकर अर्थ होमएत् अछि गण सभक देवता। शिवगणमे प्रमुख गण नन्दी कहलावल जाइत् अछि । नन्दी सहित सभ गणसभक देवता गणेश कहलावल जाइत् अछि।

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#Article 129: सङ्खुवासभा जिला (159 words)


सङ्खुवासभा जिला नेपालके एकटा जिला अछि । सङ्खुवासभा नेपालक पूर्वाञ्चल विकास क्षेत्रक कोशी अञ्चलमे अवस्थित हिमाली भेगक एक दुर्गम जिला छी। ई जिला पूर्वमे ताप्लेजुङ आ तेह्रथुम, पश्चिममे सोलुखुम्बू आ भोजपुर जिला, उत्तरमे चीनक तिब्बत आ दक्षिणमे तेह्रथुम आ धनकुटा जिलाक चौबन्दीमे रहल अछि। ई नेपालक कुल क्षेत्रफलक २.३६%, पूर्वाञ्चल विकास क्षेत्रक १२.१९% आ कोशी अञ्चलक ३५.६८% भू-भाग ओगटने अछि। समुन्द्री सतहसँ ४५७ मिटर (संसारक सभसँ छोटका अरुण उपत्यका) सँ विश्वक पाँचम उंच हिमशिखर मकालु ८४६३ मिटरधरिक उचाईमे रहल ई जिला २७ डिग्री ६' उत्तरसँ २७ डिग्री ५५' उत्तरी अक्षांशधरि आ ८६ डिग्री ५७' पर्वसँ ८७ डिग्री ४०' पूर्वी देशान्तरधरि फैलल अछि। उत्तरतर्फ चौडा भागमे मनोरम हिमाली श्रृंखलासभसँ सजल ई जिलाक दक्षिणतर्फ साँगुरल गेल भागमे बसोबासयुक्त पहाडी भूभाग रहल अछि। ई जिलाक आर्थिक श्रोत कृषिमे निर्भर रहल अछि। आर्थिकरूपसँ सक्रिय जनसंख्या ६०.७३% होएतो ओकर ७७.६२% कृषिमे आ २२.३८% गैरकृषि पेशामे निर्भर अछि।

निर्वाचन आयोग (नेपाल) द्वारा निर्धारण कएल गेल, जिलागत निर्वाचन क्षेत्र अन्तर्गत  कऽ नक्सा नीचा देल गेल अछि।




#Article 130: सचिन तेन्दुलकर (609 words)


सचिन रमेश तेन्दुलकर (; जन्म: २४ अप्रैल १९७३) एक पूर्व भारतीय क्रिकेट खेलाडी आ कप्तान छी । क्रिकेटक इतिहासमे सचिनके विश्वक सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजसभमे गिनल जाइत अछि । भारतक सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्नसँ सम्मानित होमए वाला ओ सर्वप्रथम खेलाडी आ सबसँ कम उमरक व्यक्ति छी । सचिन तेन्दुलकर राजीव गान्धी खेल रत्न पुरस्कारसँ सम्मानित एकमात्र क्रिकेट खेलाडी छी । सन् २००८ मे हुनका पद्म विभूषणसँ सेहो पुरस्कृत कएल गेल छल । 

सन् १९८९ मे अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेटमे पदार्पण कएलाक पश्चात् ओ बल्लेबाजीमे बहुत रास कीर्तिमान स्थापित केनए अछि । ओ टेस्ट आ एकदिवसीय क्रिकेट, दुनू स्वरूपमे सर्वाधिक शतक बनेनिहार खेलाडी छी । ओ टेस्ट क्रिकेटमे सबसँ बेसी रन बनेनिहार बल्लेबाज सेहो छी । ई संगे ओ टेस्ट क्रिकेटमे १५,००० सँ बेसी रन बनेनिहार विश्वक एकमात्र खेलाडी छी । एकदिवसीय म्याचमे सेहो हुनका सबसँ बेसी रन बनेबाक कीर्तिमान प्राप्त अछि । ओ अपन पहिल प्रथम श्रेणी क्रिकेट म्याच मुम्बईक लेल १४ वर्षक उमरमे खेलने छल । ओ अपन अन्तर्राष्ट्रिय खेल जीवनक आरम्भ सन् १९८९ मे पाकिस्तानक विरुद्ध कराचीमे केनए छल । 

सन् २००२ मे अपन करियरक आधा बाटमे विज्डन क्रिकेटर्स अल्मानाक हुनका टेस्ट क्रिकेटक सबसँ महान ब्याट्सम्यानक सूचीमे दोसर स्थानमे राखने छल, हुनकासँ आगा अस्ट्रेलियाक डन ब्र्याडम्यान छल । तहिना एकदिवसीय क्रिकेटमे सेहो हुनका दोसर स्थान प्राप्त भेल छल, हुनकासँ आगा वेस्ट इन्डिजक भिभ रिचर्ड्स रहल छल । भारतद्वारा २०११ क्रिकेट विश्वकप जितैवाला टिममे तेन्दुलकर प्रमुख खेलाडीक रुपमे छल, भारतक प्रतिनिधित्व करैत हुनकाद्वारा खेलल गेल ६ क्रिकेट विश्वकपमे सँ ई पहिल विश्वकप जित छल ।ओ दक्षिण अफ्रिकामे भेल २००३ क्रिकेट विश्वकप प्रतियोगितामे प्लेयर अफ द टुर्नामेन्ट भेल छल । सन् २०१३ मे विज्डन क्रिकेटर्स अल्मानकक १५०अम वार्षिकोत्सवक अवसरमे विश्व क्रिकेट इतिहासमे विश्व टेस्ट एगहारम खेलाडीक सूचीमे अपन स्थान बनेबाने सफल ओ एक मात्र एकमात्र भारतीय क्रिकेट खेलाडी छल ।

तेन्दुलकरद्वारा क्रिकेट खेलमे कएल गेल योगदानक कदर स्वरूप भारत सरकार सन् १९९४ मे अर्जुन पुरस्कार, सन् १९९७ मे भारतक सभसँ पैग खेल सम्मान राजीव गान्धी खेल रत्नक संगे सन् १९९९ आ सन् २००८ मे क्रमसः पद्म श्री आ पद्म विभूषणद्वारा सम्मानित केनए छल । सन् २०१३ नवम्बर १६ मे अपन क्रिकेट जीवनक अन्तिम म्याचक समाप्ति पश्चात किछ देरमे प्रधानमन्त्री कार्यालय (भारत) हुनका भारतक सभसँ पैग नागरिक सम्मान भारत रत्नसँ सम्मानित करवाक निर्णय केनए छल । भारत रत्नसँ सम्मानित होमएवाला ओ अखनधरिक सभसँ कम उमरक लोक आ पहिल खेलाडी छी । 

सन् २०१२ दिसम्बरमे, तेन्दुलकर एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेटसँ सन्यासक घोषणा केनए छल । ओ ट्वान्टी२० क्रिकेटसँ अक्टुबर २०१३ मे सन्यास लेनए छल आ सन् २०१३ नवम्बर १६ मे मुम्बईक वानखेडे स्टेडियममे वेस्ट इन्डिज विरुद्ध अपन जीवनक २००अम तथा अन्तिम टेस्ट म्याच खेल क्रिकेटक सम्पूर्ण स्वरुपसँ सन्यास लेनए छल । तेन्दुलकर ६६४ अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेट म्याच खेल कूल ३४,३५७ रन बनेनाए छल ।

सचिन क्रिकेट जगतक सर्वाधिक प्रायोजित खेलाडी छी आ विश्व भरमे हुनकर अनेक प्रशंसक अछि । हुनकर प्रशंसकगण हुनका प्रेमसँ भिन्न-भिन्न नामसभ सँ बजबैत अछि जहिमे सबसँ प्रचलित लिटिल मास्टर आ मास्टर ब्लास्टर अछि । क्रिकेट वाहेक सचिन अपने नामसँ एकटा रेस्टोरेन्ट सेहो खोलने अछि । वर्तमानमे ओ भारतक राज्य सभाक सदस्य अछि, सन् २०१२ मे ओ राज्य सभाक सदस्यक रूपमे नामित कएल गएल छल ।

 
तेन्दुलकरको जन्म राजापुरक मराठी ब्राह्मण परिवारमे भेल छल । हुनकर पिता रमेश तेन्दुलकर जानल मानल कथाकार छल तँ माता रजनी एक जीवन विमा कम्पनीमे काज करैत छल । सचिनक नाम हुनकर पिता अपन मनपोसन्द सङ्गीतकार सचिन देव बर्मनक नाममे राखने छल । हुनकर भैया अजीत तेन्दुलकर सचिनके क्रिकेट खेलक लेल प्रोत्साहित केनए छल । सचिनक एक भाई नितिन तेन्दुलकर आ एक बहिन सविता तेन्दुलकर अछि ।सन् १९९५ मे सचिन तेन्दुलकरक विवाह अञ्जली तेन्दुलकरसंग भेल छल । सचिनक दुई बेटाबेटी अछि- सारा आ अर्जुन ।

सचिन मुम्बईके शारदाश्रम विद्यामन्दिरसँ अपन शिक्षा पुरा केनए छल । ओतय इ प्रशिक्षक रमाकान्त अचरेकरक अचरजमे अपन क्रिकेट जीवनक प्रारम्भ केनए छल ।




#Article 131: सर्लाही जिला (158 words)


सर्लाही जिला नेपालक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्रक जनकपुर अञ्चलमे अवस्थित अत्यधिक जनघनत्व भएल जिला छी । ई जिलाक पूर्वमे बाँके तथा हर्दी नदी पश्चिममे बागमती नदी सिमाना नदीक रूपमे बहल अछि ।

ई जिलाक नामाकरणक सत्यतथ्य प्रमाण नैरहला बादो प्राचीन इतिहासके खोजी करैत ई जिलाक हेमपुर गाँउ विकास समितिमे सर्लाही देवी मन्दिरक नामसँ जिलाक नाम रहल अनुमान कएल गएल अछि । रातिक समयमे यदि कोनो लोग दीप राखि ओ देवीक मन्दिरमे गेलापर ओ व्यक्तिक मृत्यु होमत कहावत जनविश्वासमे रहला कारण आईओ कोई व्यक्ति दीप लऽ राति ओतय नै जाएत अछि। याह देवीक नामसँ पहिने ई ईलाकाक नाम आ पाछा ई जिलाक नाम भऽ सकैत स्थानीय बासिन्दासभक धारणा रहल अछि । सर्लाही देवीक मन्दिर अगलबगल अखैनो बस्ती नै बैसल अछि।

भैागेालिक हिसाबसँ ई जिलाके उत्तरदिस रहल चुरे पर्वत बीचमे रहल भावर दक्षिणमे रहल तराइक समथर मैदान ओकटि एकरा ३ भागमे बाँटने अछि ।

निर्वाचन आयोग (नेपाल) द्वारा निर्धारण कएल गेल, जिलागत निर्वाचन क्षेत्र अन्तर्गत  कऽ नक्सा नीचा देल गेल अछि।




#Article 132: सल्यान जिला (145 words)


सल्यान  जिला राप्ती अञ्चलक पहाडी जिला छी ।भौगोलिक विकटता आ भौतिक पूर्वाधारक न्यून विकास  कारण  अधिकांस लोगसभकेजीवन कष्टकर रहल अछि  । परम्परागत कृषि पेशामे  आधारीत आर्थिक प्रणालीसुधार उन्मुख रहल अछि  तहिना सामाजिक क्षेत्रमे सेहो विस्तारपरिवर्तनसभ देखल अछि । अत् बाहुन, क्षेत्रि, मगर, कामी, दमाई,नेवार समुदायक बहुल्यता रहल अछि  । राप्ती राजमार्गक मध्यखण्डक निर्माण पछा ई जिलाक चौतर्फी विकासक द्वार खुल्ला भेल अछि । शारदा नदी ई जिलाक प्रमुख जलसम्पदाक रुपमे  रहल अछि । कुपुण्डेदह  धार्मिक स्थलकरुप प्रसिद्व रहल अछि । एकर साथ खैरावाङ भगवती मन्दिर रछत्रेश्वरी मन्दिर प्रमुख धार्मिक स्थलक रुप प्रसिद्व रहल  अछि। एकर अतिरिक्त अन्य पर्यटकिय एवं धार्मिक स्थलसभ अतकाप्रसस्त मात्रामे  रहल  अछि । अदुवा खेती, अमिला जातकाफलफूल खेती तथा बाख्रा पालन व्यवसायका साथ कृषि व्यवसाय ई जिलाक प्रमुख व्यवसायक रुपमे  रहल मिलैत अछि ।प्रसस्त मात्रामे  रहल  प्राकृतिक श्रोत साधनक समुचितउपयोग सहित जिलाक चौतर्फी विकासक लेलसबदिशक प्रतिवद्वताही अतका विकासक मूल आधार छी ।




#Article 133: सागसब्जी (123 words)


सागसब्जी कोनो पौधाक ओ भागकेँ कहल जाएत अछि जकरा आँच पर पकाए खाएल जाएत अछि। बीया आ मीठ फलसभकेँ प्रायः सब्जी नै कहल जाएत अछि। खाएल जाएवला पत्ता, डाट आ जड़ि प्रायः सब्जी कहल जाएत अछि। सांस्कृतिक दृष्टिसँ 'सब्जी' कऽ परिभाषा स्थानीय प्रथाक अनुसार भिन्न भिन्न होएत अछि। उदाहरणक लेल बहुत रास लोक गोबरछत्ता (मसरुम) केँ सब्जी मानैत अछि (मुदा जीववैज्ञानिकक दृष्टि सँ ई 'पौधा' नै छी) जबकि अन्य लोकसभक अनुसार ई सब्जी नै छी आ खानाक एक अन्य श्रेणी छी।

किछ सब्जीसभ कच्चे खाएल जा सकैत अछि जबकि अन्य सब्जीसभकेँ पकेलाक बाद खाएल जाइत अछि। सामान्यत: सब्जीसभ नून या खट्टा दऽ पकाएल जाएत अछि मुदा किछ सब्जीसभ एहनो अछि जकरा चीनीक सङ्ग पकाए ओकर मिठाई अथवा हलवा बनाएल जाएत अछि (जेना गाजर)।




#Article 134: सिक्किम (235 words)


सिक्किम भारतक पूर्वोत्तर भागमे स्थित एक पर्वतीय राज्य छी। अङ्गुठा आकारक ई राज्य पश्चिममे नेपाल, उत्तर तथा पूर्वमे चीनक तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र तथा दक्षिण-पूर्वमे भुटान सँ जुड़ल अछि। भारतक पश्चिम बङ्गाल राज्य एकर दक्षिणमे अछि। अङ्ग्रेजी, भुटिया, गुरुङ, लेप्चा, लिम्बु, मङ्गेर, मुखिया, नेवारी, राई, शेर्पा, तामाङ तथा हिन्दी आधिकारिक भाषासभ अछि मुदा लिखित व्यवहारमे अङ्ग्रेजीकें उपयोग होएत अछि। हिन्दू तथा बज्रयान बौद्ध धर्म सिक्किमक प्रमुख धर्म छी। ई प्रदेशक राजधानी तथा सभ सँ पैग शहर गान्टोक  छी।

सिक्किम नामग्याल राजतन्त्रद्वारा शासित एक स्वतन्त्र राज्य छल मुदा प्रशासनिक समस्यासभक कारण तथा भारत सँ विलय हेवाक लेल सन् १९७५ मे एक जनमत-सङ्ग्रह अनुसार भारतमे विलीन भऽ गेल। ओहि जनमत सङ्ग्रहक पश्चात राजतन्त्रक अन्त तथा भारतीय संविधानक नियम-प्रणालीक ढाँचामे प्रजातन्त्रक उदय भेल।

सिक्किमक जनसङ्ख्या भारतक राज्यसभमे न्यूनतम तथा क्षेत्रफल गोआक पश्चात न्यूनतम अछि। अपन छोटे आकारक बादो सिक्किम भौगोलिक दृष्टि सँ बहुतेक विविधतापूर्ण अछि। कञ्चनजङ्घा पर्वत जे कि दुनियाक तेसर सभ सँ उच्च चोटी छी, ई सिक्किमक उत्तर पश्चिमी भागमे नेपालक सीमा पर अछि आ ई पर्वत चोटी सिक्किमक कयन भागसभ सँ बहुत आसानी सँ देखल जाए सकैत अछि। साफ सुथरा होनाए, प्राकृतिक सुन्दरता आ राजनीतिक स्थिरता आदि विशेषतासभक कारण सिक्किम भारतमे पर्यटनक प्रमुख केन्द्र छी।

'सिक्किम' शब्दक सर्वमान्य स्रोत लिम्बू भाषाक शब्द सु (अर्थात नवीन) तथा ख्यिम (अर्थात महल अथवा घर - जे कि प्रदेशक प्रथम राजा फुन्तसोक नामग्यालद्वारा बनाएल गेल महलक सङ्केतक छी) कें जोड़ि बनाएल गेल अछि। तिब्बती भाषामे सिक्किमकें 'चावलक घाटी' कहल जाएत अछि।




#Article 135: सिन्धुपाल्चोक जिला (107 words)


सिन्धुपाल्चोक जिला नेपालक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्रक एकटा जिला छी। ई जिला बागमती अञ्चलम अवस्थित अछि। सिन्धुपाल्चोक जिलाक सदरमुकाम चौतारा छी। सिन्धुपाल्चोक जिलाम ७९ गाविससभ रहल अछि। ई जिला विकासक हिसाबसं पछाडी पडल पहाडी जिला छी। 

तातोपानी, बाह्रबिसे, चौतारा, खाडीचौर, लामोसाँघु, जलबिरे, मेलम्ची, नवलपुर, चनौटे, तिपेनी, मुडे, बलेफी, सुकुटे, बाहुनेपाटी, सिक्रे, चेहेरे आदि।

इन्द्रावती, भोटेकोशी, सुनकोशी नदीहरूदेखि बलेफी (ब्रम्हायणी), मेलम्ची, सिन्धुखोला, गोहोरेखोला, झ्याँडीखोला, हाँडिखोला, मादेवखोला, तौथलीखोला, वाफलखोला जेहन खोलासभ अहिठामक प्रमुख नदीनालासभ छी।

 
पाँचपोखरी,सिपाखोला, भैरवकुण्ड, गुम्वा ताल, सूर्यकुण्ड, नौलिङ्ग कुण्ड, धुप कुण्ड, गुन्यु ताल आदी यहाँका प्रमुख ताल तथा पोखरीसभ छी।

गौराती भीमेश्वर, सुनकोशी महादेव, पाल्चोक भगवती, तौथली माईस्थान, तातोपानी, पाँचपोखरी, फट्केश्वर महादेव, धुपु प्रमुख तीर्थस्थलसभ छी ।




#Article 136: सिराहा जिला (111 words)


सिराहा जिला नेपालक पूर्वाञ्चल विकास क्षेत्रक सगरमाथा अञ्चलमे पूर्वीभागक दक्षिणी सिमानामे रहल जिला छी । ई जिलाक पूर्वमे सप्तरी जिला (बलान नदी), पश्चिममे धनुषा जिला (कमला नदी), उत्तरमे उदयपुर जिला (चुरे पहाड) तथा दक्षिणमे भारतक बिहार प्रदेश अवस्थित अछि । सिराहा जिला सगरमाथा अञ्चलक सब सँ कम क्षेत्रफल आ बेसी जनघनत्व भेल जिला छी । एतय प्राकृतिक रूपमे उत्तरी भेगमे उच्च, निर्मल जमीन बेसी अछि तहिने दक्षिणी भेगमे होंच आ समथर जमीन बेसी अछि । ई जिलाके १० गाउँपालिका, आ ६ नगरपालिका आ प्रतिनिधि सभाक लेल ४ निर्वाचन क्षेत्रमे विभाजन कएल गेल अछि ।

निर्वाचन आयोग (नेपाल) द्वारा निर्धारण कएल गेल, जिलागत निर्वाचन क्षेत्र अन्तर्गत  कऽ नक्सा नीचा देल गेल अछि।




#Article 137: सुनसरी जिला (258 words)


सुनसरी जिला ( ) नेपालक पूर्वाञ्चलक कोशी अञ्चलमे रहल अत्याधिक जनघनत्व भेल जिला छी । ए जिलाके दक्षिणमे भारत, पूरबमे मोरङ जिला, उत्तरमे धनकुटा जिला आर पश्चिममे सप्तकोशी नदी सप्तरी जिलासँ छुटल अछि। इनरुवा ए जिलाके सदरमुकाम छि । १२५७ बर्ग कि.मि. क्षेत्रफल रहल ए जिलामे करिब ७ लाख लोगके बसोबास अछि। अधिकांश भाग तराईमें रहल सुनसरी जिलाबासीके मुख्य पेशा कृषि छि। धान, गहुँ, दलहन, तेलहन संगे उखु, जूट आर खैनी सेहो यी जिलामे उत्पादन होएत अछि। सुनसरी जिला दक्षिणमे समुद्र सतहसँ १५२ मिटर आर उत्तरमे ९१४ मिटर उचाईमें रहल अछि। यी जिलामे मुख्यतयाः राई, लिम्बू, बाहुन, क्षेत्री, थारू,सतार आदि जनजातिके बसोबास अछि। 

ई जिलाक नामाकरण भरौल गाउँ विकास समिति क्षेत्रक चारकोसे झाडीसँ उत्पत्ति भेल सुनसरी नदीक नाम सँ भेल अछि । ई नदी भरौल, बक्लौरी, सिंगिया, भोक्राहा, नरिसंह, जल्पापुर होएत भारततर्फ बहैत अछि ।

सुनसरी जिला महाभारत पर्वत श्रृङ्खला, चारकोसे जङ्गल आर तराईक उर्वर भागसभ मिलकर  बनल अछि।ई  जिलाक भौगोलिक वनावट उत्तरक पहाडी प्रदेश, मध्यभागक भावर प्रदेश आर दक्षिणक समथर भुमि सहित मुख्य तीन भागम विभाजन करने अछि।

सुनसरी जिलाक प्रमुख नदी तथा ताल तलैयासभम सप्तकोशी, कोकाहा, सुनसरी, बुढी, सेउती, सर्दु, खेतीखोला, टेंग्रा, पकलीखोला, दचकिचा, पटनाली, गडन खोला अवस्थित अछि।

बराहक्षेत्र, दन्तकाली, पिण्डेश्वर, बुढासुब्बा, शिवजट्टा, रामधुनी, विष्णुपादुका चतारा आर सभ।

चिमडी दह, भेडेटार, ठिंगेढुंगा, कोशी टप्पु वन्यजन्तु आरक्ष, एभरेष्ट विज्ञान केन्द्र।

जिलाक प्रमुख व्यापारिक महत्वक स्थानसभमा धरान उपमहानगरपालिका, इटहरी उपमहानगरपालिका, इनरूवा, दुहवी, खनार झुम्का महेन्द्रनगर हरिनगरा आर सभ अछि। प्रमुख रूपम दैनिक तथा साप्ताहिक, हाट बजार लागेत स्थानसभ निम्नानुसार अछि: 

निर्वाचन आयोग (नेपाल) द्वारा निर्धारण कएल गेल, जिलागत निर्वाचन क्षेत्र अन्तर्गत  कऽ नक्सा नीचा देल गेल अछि।




#Article 138: सोलुखुम्बु जिला (135 words)


सोलुखुम्बु जिला ( , शेर्पा:  Wylie: shar khum bu dzong kha), नेपालक पूर्वाञ्चल विकास क्षेत्रक सगरमाथा अञ्चलक उत्तरी भागमे अवस्थित हिमाली जिला छी। विश्व सम्पदा सूचीमे सुचिकृत नेपालक पहिचान (शेर्पा भाषा: ཇོ་མོ་གླང་མ།, Wylie: jo mo glang ma ) सगरमाथा हिमाल एही जिलामे पडैत अछि। 

पूर्वाञ्चलमे सडक सुविधासँ आबद्ध भेल मात्र जिला होमएसँ एतय कऽ मनोरम हिमशिखर आ उच्च पर्वतीय क्षेत्र विश्व मानचित्रमे प्रसिद्ध रहल अछि। ई जिलाक पर्यटकसभक सांग्रिला कहि सेहो चिनहल जाइत अछि। विश्वक साहसी तथा प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक विषयमे रुची राखैवाला सभक लेल ई जिला हरपल आकर्षित करैत रहल पावैत अछि। ई जिला पूर्वाञ्चलक जिलासभमे सभसँ कम जनघनत्व भेल जिलामे पडैत अछि। ई जिलामे ३१ टा गाउँ विकास समितिसभ अछि आ १ टा नगरपालिका सेहो अछि। 

    

निर्वाचन आयोग (नेपाल) द्वारा निर्धारण कएल गेल, जिलागत निर्वाचन क्षेत्र अन्तर्गत  कऽ नक्सा नीचा देल गेल अछि।




#Article 139: सौरभ गांगुली (120 words)


सौरभ चण्डीदास गांगुली (; जन्म ८ जुलाई १९७२) मुख्य रूपसँ दादा भारत क्रिकेट टिमक पूर्व खेलाडी आ कप्तान छी । वर्तमान समयमे, ओ बङ्गाल क्रिकेट एसोसिएसनक अध्यक्ष छी आ विजडन इन्डियासंग सम्पादकीय मण्डलक अध्यक्ष सेहो छी ।ओ भारतक सबसँ सफल कप्तानसभमे सँ एक छी । पश्चिम बङ्गालक एक सामान्य परिवारमे जन्मल सौरभ गांगुली अपन भाई स्नेहशीष गांगुलीक कारण क्रिकेटक संसारमे आएल छल । अपन क्रिकेट करियरक शुरुआत ओ विद्यालय दिससँ राज्य स्तरीय टिममे खेलैत केनए छल । वर्तमान समयधरि उनि एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रिय म्याचमे सर्वाधिक रन बनेनिहार खेलाडीसभक श्रेणीमे ५अम स्थानमे अछि तँ १०,००० रन बनेनिहर ५अम खेलाडी आ सचिन तेन्दुलकर बाद दोसर भारतीय खेलाडी छी । क्रिकेट पत्रिका विजडनक अनुसार ओ अखनधरिक सर्वश्रेष्ठ एकदिवसीय ब्याट्सम्यानक श्रेणीमे छैठम स्थानमे अछि ।




#Article 140: हरसिंहदेव (145 words)


महाराज हरसिंहदेव

मिथिलाक कर्णाट वंशक। ज्योतिरीश्वर ठाकुरक वर्ण-रत्नाकरमे हरसिंहदेव नायक आकि राजा छलाह। 1294 ई. मे जन्म आ 1307 ई. मे राजसिंहासन। घियासुद्दीन तुगलकसँ 1324-25 ई. मे हारिक बाद नेपाल पलायन। मिथिलाक पञ्जी-प्रबन्धक ब्राह्मण, कायस्थ आ क्षत्रिय मध्य आधिकारिक स्थापक, मैथिल ब्राह्मणक हेतु गुणाकर झा, कर्ण कायस्थक लेल शंकरदत्त, आ क्षत्रियक हेतु विजयदत्त एहि हेतु प्रथमतया नियुक्त्त भेलाह। हरसिंहदेवक प्रेरणासँ- आ ई हरसिंहदेव नान्यदेवक वंशज छलाह, जे नान्यदेव कार्णाट वंशक १००९ शाकेमे स्थापना केने रहथि- नन्दैद शुन्यं शशि शाक वर्षे (१०१९ शाके)... मिथिलाक पण्डित लोकनि शाके १२४८ तदनुसार १३२६ ई. मे पञ्जी-प्रबन्धक वर्तमान स्वरूपक प्रारम्भक निर्णय कएलन्हि। पुनः वर्तमान स्‍वरूपमे थोडे बुद्धि विलासी लोकनि मिथिलेश महाराज माधव सिंहसँ १७६० ई. मे आदेश करबाए पञ्जीकारसँ शाखा पुस्तकक प्रणयन करबओलन्हि। ओकर बाद पाँजिमे (कखनो काल वर्णित १६०० शाके माने १६७८ ई. वास्तवमे माधव सिंहक बादमे १८०० ई.क आसपास) श्रोत्रिय नामक एकटा नव ब्राह्मण उपजातिक मिथिलामे उत्पत्ति भेल।




#Article 141: हरिमोहन झा (371 words)


हरिमोहन झा (1908-1984) हिनकर मैथिली कृति १९३३ मे “कन्यादान” (उपन्यास), १९४३ मे द्विरागमन”(उपन्यास), १९४५ मे “प्रणम्य देवता” (कथा-संग्रह), १९४९ मे “रंगशाला”(कथा-संग्रह), १९६० मे “चर्चरी”(कथा-संग्रह) आऽ १९४८ ई. मे “खट्टर ककाक तरंग” (व्यंग्य) अछि। मृत्योपरांत १९८५मे (जीवन यात्रा, आत्मकथा)पर मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित।

जन्म १८ सितम्बर १९०८ ई. ग्राम+पो.- कुमर बाजितपुर , जिला- वैशाली, बिहार, भारत। पिता- स्वर्गीय पं. जनार्दन झा “जनसीदन” मैथिलीक अतिरिक्त हिन्दीक लब्धप्रतिष्ठ द्विवेदीयुगीन कवि-साहित्यकार। शिक्षा- दर्शनशास्त्रमे एम.ए.- १९३२, बिहार-उड़ीसामे सर्वोच्च स्थान लेल स्वर्णपदक प्राप्त। सन् १९३३ सँ बी.एन.कॉलेज पटनामे व्याख्याता, पटना कॉलेजमे १९४८ ई.सँ प्राध्यापक, सन् १९५३ सँ पटना विश्वविद्यालयमे प्रोफेसर तथा विभागाध्यक्ष आऽ सन् १९७० सँ १९७५ धरि यू.जी.सी. रिसर्च प्रोफेसर रहलाह। हिनकर मैथिली कृति १९३३ मे “कन्यादान” (उपन्यास), १९४३ मे “द्विरागमन”(उपन्यास), १९४५ मे “प्रणम्य देवता” (कथा-संग्रह), १९४९ मे “रंगशाला”(कथा-संग्रह), १९६० मे “चर्चरी”(कथा-संग्रह) आऽ १९४८ ई. मे “खट्टर ककाक तरंग” (व्यंग्य) अछि। “एकादशी” (कथा-संग्रह)क दोसर संस्करण १९८७ ए. मे आयल जाहिमे ग्रेजुअट पुतोहुक बदलाने “द्वादश निदान” सम्मिलित कएल गेल जे पहिने “मिथिला मिहिर”मे छपल छल मुदा पहिलुका कोनो संग्रहमे नहि आएल छल।श्री रमानथ झाक अनुरोधपर लिखल गेल “बाबाक संस्कार” सेहो एहि संग्रहमे अछि। आऽ हुनकर “खट्टर काका” हिन्दीमे सेहो १९७१ ई. मे पुस्तकाकार आएल। एकर अतिरिक्त हिनकक स्फुट प्रकाशित-लिखित पद्यक संग्रक “हरिमोहन झा रचनावली खण्ड ४ (कविता)” एहि नामसँ १९९९ ई.मे छपल आऽ हिनकर आत्मचरित “जीवन-यात्रा” १९८४ ई.मे छपल। हरिमोहन बाबूक “जीवन यात्रा” एकमात्र पोथी छल जे मैथिली अकादमी द्वारा प्रकाशित भेल छल आऽ एहि ग्रंथपर हिनका साहित्य अकादमी पुरस्कार १९८५ ई. मे मृत्योपरान्त देल गेलन्हि। साहित्य अकादमीसँ १९९९ ई. मे “बीछल कथा” नामसँ श्री राजमोहन झा आऽ श्री सुभाष चन्द्र यादव द्वारा चयनित हिनकर कथा सभक संग्रह प्रकाशित कएल गेल, एहि संग्रहमे किछु कथा एहनो अछि जे हिनकर एखन धरिक कोनो पुरान संग्रहमे सम्मिलित नहि छल। हिनकर अनेक रचना हिन्दी, गुजराती, मराठी, कन्नड़, तेलुगु आदि भाषामे अनुवादित भेल। हिन्दीमे “न्याय दर्शन”, “वैशेषिक दर्शन”, “तर्कशास्त्र”(निगमन), दत्त-चटर्जीक “भारतीय दर्शनक” अंग्रेजीसँ हिन्दी अनुवादक संग हिनकर सम्पादित “दार्शनिक विवेचनाएँ” आदि ग्रन्थ प्रकाशित अछि। अंग्रेजीमे हिनकर शोध ग्रंथ अछि- “ट्रेन्ड्स ऑफ लिंग्विस्टिक एनेलिसिस इन इंडियन फिलोसोफी”।

प्राचीन युगमे विद्यापति मैथिली काव्यकेँ उत्कर्षक जाहि उच्च शिखरपर आसीन कएलनि, हरिमोहन झा आधुनिक मैथिली गद्यकेँ ताहि स्थानपर पहुँचा देलनि। हास्य व्यंग्यपूर्णशैलीमे सामाजिक-धार्मिक रूढ़ि, अंधविश्वास आऽ पाखण्डपर चोट हिनकर लेखनक अन्यतम वैशिष्ट्य रहलनि। मैथिलीमे आइयो सर्वाधिक कीनल आऽ पढ़ल जायबला पीथी सभ हिनकहि छनि।




#Article 142: हिन्दू धर्म (438 words)


हिन्दू धर्म (संस्कृत: सनातन धर्म) एक धर्म (या, जीवन पद्धति) छी जकर अनुयायी अधिकांशतः भारत ,नेपाल आ मॉरिशसमे बहुमतमे अछि । एहिक विश्वक प्राचीनतम धर्म कहल जाइत अछि । एकरा 'वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म' सेहो कहल जाइत अछि जकर अर्थ होइत अछि कि एकर उत्पत्ति मानवक उत्पत्तिसँ  पहिने भेल छल । विद्वान लोकसभ हिन्दू धर्म कऽ भारतक विभिन्न संस्कृतीसभ एवं परम्परासभक सम्मिश्रण मानैत छथि जकर कोनो संस्थापक नै अछि ।

ई धर्म अपन भितर बहुतो अलग-अलग उपासना पद्धतीसभ, मत, सम्प्रदाय आ दर्शन समेटिने अछि। अनुयायीसभक संख्याक आधार पर ई विश्वक तेसर सभसँ पैग धर्म छी । संख्याक अनुसार एकर अधिकतर उपासक भारतमे अछि आ प्रतिशतक अनुसार नेपालमे अछि । एहिमे बहुतो देवी-देवतासभक पूजा कएल जाइत अछि, मुदा वास्तवमे ई एकेश्वरवादी धर्म छी ।

एकरा सनातन धर्म या वैदिक धर्म सेहो कहल जाइत अछि । इण्डोनेशियामे एहि धर्मक औपचारिक नाम हिन्दु आगम अछि । हिन्दू केवल एकटा धर्म या सम्प्रदाय मात्र नै छी अपितु जीवन जीबऽक एक पद्धति छी ।

सनातन धर्म पृथ्वीक सभसँ प्राचीन धर्मसभमे सँ एक छी; मुदा एकर इतिहासक बारेमे बहुतो विद्वानसभक भिन्न मत अछि । आधुनिक इतिहासकार हड़प्पा, मेहरगढ़ आदि पुरातात्विक अन्वेषणसभक अनुसार एहि धर्मक इतिहास किछ हज़ार वर्ष पुरान मानैत अछि । जहि ठाम भारत (आ आधुनिक पाकिस्तानी क्षेत्र)क सिन्धु घाटी सभ्यतामे हिन्दू धर्मक बहुतो चिह्न मिलैत अछि । एहिमे एक अज्ञात मातृदेवीक मुर्तीसभ, भगवान शिव पशुपति जेहन देवताक मुद्रासभ, शिवलीङ्ग, पीपलक पूजा, इत्यादि मुख्य अछि । इतिहासकारसभक एक दृष्टिकोणक अनुसार ई सभ्यताक अन्त कऽ कालखण्डमे मध्य एशियासँ एक अन्य जातिक आगमन भेल, जे स्वयं कऽ आर्य कहैत छल आ संस्कृत नामक एक हिन्द यूरोपीय भाषा बोलैत छल । एक अन्य दृष्टिकोणक अनुसार सिन्धु घाटी सभ्यताक लोकसभ स्वयं आर्य छल आर हुनकासभक मूलस्थान भारतमे छल ।

आर्यसभक सभ्यता कऽ वैदिक सभ्यता कहैत अछि । पहिनेक दृष्टिकोणक अनुसार लगभग १७०० ईसा पूर्वमे आर्य अफ़्ग़ानिस्तान, कश्मीर, पञ्जाव आ हरियाणामे बसि गेल । तखनसँ ओ लोकसभ (हुनकासभक विद्वान ऋषि) अपन देवतासभक प्रसन्न करऽक लेल वैदिक संस्कृतमे मन्त्र रचैत छलाह । पहिल चारि वेद रचल गेल, जहिमे ऋग्वेद प्रथम छल । ओकर बादमे उपनिषद जका ग्रन्थ आएल । हिन्दू मान्यताक अनुसार वेद, उपनिषद आदि ग्रन्थ अनादि, नित्य अछि, ईश्वरक कृपासँ अलग-अलग मन्त्रद्रष्टा ऋषिसभ द्वारा अलग-अलग ग्रन्थसभक ज्ञान प्राप्त भेल छल जिनकासभक द्वारा पुनः ओकरा लिपिबद्ध कएल गेल । बौद्ध आर धर्मसभक अलग भऽ जेबाक बादमे वैदिक धर्ममे बहुतो परिवर्तन आएल । नव देवता आ नव दर्शनसभ अगाड़ी आएल । एहि अनुसार आधुनिक हिन्दू धर्मक जन्म भेल ।

दोसर दृष्टिकोणक अनुसार हिन्दू धर्मक मूल कदाचित सिन्धु सरस्वती परम्परा (जकर स्रोत मेहरगढ़क ६५०० ईपू संस्कृतिमे मिलैत अछि) सँ पहिनेक भारतीय परम्परामे अछि ।

भारतवर्षक प्राचीन ऋषिसभ द्वारा हिन्दुस्थान नाम देल गेल छल, जकर अपभ्रंश हिन्दुस्तान छी । बृहस्पति आगमक अनुसार:




#Article 143: समय (134 words)


सबहे गोटेक जनैछैक जे समय के गतिके कोनो रोक नै छैक। मुदा कतेक व्यक्ति समयके नहि मानि कऽ मनमानी सेहो करैत छैक। मुदा समयक गतिमे नै रोक छलाह अा कोनौ व्यक्ति ओकरा रोकऽ सकत।

हमसँव यदि समयक संगेसंगे कामकाज करित साच्चे कऽ कोनो दिक्कद नै बुझािइत अा जीवनो रमैतझमैत आगु बढत। मुदा समयक जो आंहा आ हमसंव जै मानव तऽ केकरो दोसरा कऽ नै आंहा आ हमरेसवक जीवन कष्टकरक बनल जाइत छैक।  एहि जमानामे समयक प्रभाव सवगोटेक पर परैइत अछि। मुदा अपनासवके एहि बातपर मात्रे चलइत छी। जे अखुन केहन समय छेैक आ हमरासवकऽ कहिव्य कि अछि। तहिकऽ अनुशरन कऽके सगंहिसंग आगु वढक चाहि।

आंहा आ हमरासभ कऽ समयकऽ मान सम्मान करबाक चाहि,  कैलाकि त समयक नाहि कोनौ लोभलालच, डरभय आ कोनो दोष नै छैक। तहि कारण समयसन वलमान केकरो नै मानल जाइत अछि।




#Article 144: माइबाप (106 words)


हमरा सक्क एहि दुनियामे सबस पहिल माइबापके गुणगाण करयबाक चाहि। किएक की दनियामे जीवैछी जे माइबापक काखो सँ जो माइबापकऽ सेवासंस्कार नै करब त देवपितर आधंकऽ कहियो क्षमा नै करत। मुदा अाजुक जुगमे सब उल्टा भइगेल छेक। हमरासबकऽ ज्ञान नै खुुइजसकल छैक। तहि कारनो हमसब माइबाके मानदज मै करैत छि।

हमसँब यहि आत्मासे पछवैन तँ अो सबसपहिले माइबापकऽ प्रणाम करबक इच्छा जागृत करैत अछि। मुदा हमसब अपना आत्मासँ बढ्का मोनके बना लेने छी। यदि अपनासँब सहि तरहसँ अन्तर आत्मासं मिल्बै त अो मानत कि सस पहिल देग म मायक पेटमे देलौ तखने जमिनपर देलौ आ पहिल दुलार वापक पैलो तखने दोसरोके दुलार सहभागी भइ जाइत छैक।




#Article 145: भारतीय जनता पार्टी (170 words)


भारतीय जनता पार्टी या भाजपा भारतक सबसँ पैग राजनीतिक दलमे सँ एक छी।  एकर वैचारिक आ साङ्गठनिक ढ़ाँचा हिन्दू राष्ट्रवादी राष्ट्रिय स्वयंसेवक सङ्घ सँ जुड़ल रहल अछि।

भारतीय जनता पार्टीक मूल श्यामाप्रसाद मुखर्जी द्वारा सन् १९५१ में निर्मित भारतीय जनसङ्घसँ भेल छल। १९७७ में आपातकालक समाप्ति भेलाक बाद जनता पार्टीक निर्माण हेतु जनसङ्घ आ अन्य दल सभक  सङ्ग विलय भऽ गेल छल। एहि कारण सन् १९७७ में पदस्थ भारतीय राष्ट्रिय काङ्ग्रेसक सन् १९७७ कऽ आम चुनावमे पराजय सम्भव भेल। तीन वर्ष धरि सरकार चलेलाक बाद १९८० मे जनता पार्टी विघटित भऽ गेल आ पूर्व जनसङ्घ पदचिह्नक पुनर्संयोजित करैत भेल भारतीय जनता पार्टीक निर्माण कएल गेल । मुदा शुरुआत कालमें पार्टी असफल रहल आ १९८४ कें आम चुनावमें मात्र दू टा लोकसभा सीट जितवामें सफल भेल। एहिक बाद राम जन्मभूमि आन्दोलन पार्टीक बल प्रदान केनए छल। किछ राज्यमें चुनावमे विजय होएत आ राष्ट्रिय चुनावमे नीक प्रदर्शन करैत सन् १९९६ मे पार्टी भारतीय संसदमे सभसँ पैग दलक रूपमे अग्रसर भेल। एकरा सरकार बनेवाक लेल आमन्त्रित कएल गेल जे १३ दिन धरि चलल।




#Article 146: छिन्नमस्ता भगवती (170 words)


छिन्नमस्ता भगवती मन्दिर सप्तरी जिलाकऽ राजविराज सँ दक्षिण सीमावर्ती क्षेत्र छिन्नमस्ता गाउँपालिका कऽ सखड़ा गाममे अवस्थित अछि । छिन्नमस्ता भगवती मनोकामना पूर्ण केनिहार शक्तिपीठसभमें सँ एक पीठ मानल जाईत अछि आ नेपाल आ भारतक आमजनमानसक बड्का आस्थाके केन्द्र अछि ।

प्राचिन इतिहास आर किवंदन्तीके अनुसार, सन् १०९७में मुसलमान आक्रमण कालमें कर्नाटकके कर्नाटवंशी राजा नान्यदेव भागि पाटली पुत्र होएत मिथिला आएल आ सिम्रौनगढ (बारा)मे अपन राजधानी कायम केनए छल । एहि नान्यदेव वंशके पाँचम पिढीके शक्रसिंह देव राजा भएल । ऊ नाबालक पुत्र हरिसिंह देवके राजगद्दीपे राखि कऽ निर्वासित जीवन बिताबैल सप्तरी ऐला। तखैन जङ्गलस भरल ई स्थानमें जङ्गल सफा करि कालमें भेटल भगवती मूर्तिके ओ अपन कुलदेवीक रूपमें स्थापना करलक आ अपन नामसँ देवीकें नाम शक्रेश्वरी राखने छल । देवीके शीर नैभेलाक कारणसँ किछु समयके बाद छिन्नमस्ता भगवती नाम राखल गेल छल ।
एहि ठाम दशमी (दशहरा) में सर्धालु भक्तजन सभक नेपाल आ भारतक बिहार सँ पैग सङ्ख्यामे माँताकें भक्तसभ दर्शन करबाक लेल आबैत अछि दशहराकें १० दिन धरि एहि ठाम पूजा पाठ केनिहार भक्तसभक खूब भीर रहैत अछि ।




#Article 147: ब्रिसबेन (101 words)


ब्रिसबेन () अस्ट्रेलियाक क्वीन्सल्यान्ड राज्यक राजधानी आ सभसँ बड्का शहर छी । ब्रिसबेन अस्ट्रेलियाक तेसर सबसँ बेसी जनसङ्ख्या भेल शहर छी । ब्रिसबेन महानगरीय क्षेत्रक जनसङ्ख्या लगभग २.२४ करोड अछि ।  ब्रिसबेन नदीक किनार में रहल ई शहर क्वीन्सल्यान्डक दक्षिण-पूर्वमें मारेटान खाडी आर ग्रेट डिवाइडिङ्ग रेन्जक बीचमें रहल कम उचाईं भेल समथल भूभागमा स्थित अछि । अस्ट्रेलियाक मूल निवासी एकरा 'मियान-जिन' कहैत अछि, जेकर अर्थ 'शूलक आकार भेल स्थान' होइत अछि । ई शहरक नामकरण सन् १८२१ सँ सन् १८२५ के बीच न्यू साउथ वेल्सक राज्यपाल सर थोमस ब्रिसबेनक नाममे कएल गेल छल । ब्रिसबेनक निवासीके ब्रिसबेनाइट कहल जाइत अछि ।




#Article 148: जानकी मन्दिर (324 words)


जानकी मन्दिर पवित्र हिन्दू धर्मस्थल छी । जानकी अर्थात सीताक ई मन्दिर हुनकर जन्मस्थल जनकपुरमे अवस्थित अछि । इ मन्दिरके मुगल शैलीमे बनाएल गेल अछि । नेपालक ख्यातीप्राप्त ई मन्दिरके कलाक उत्कृष्ट नमुना मानल गेल अछि । प्राचिन मिथिलाक राजधानी जनकपुरमे अवस्थित जानकी मन्दिर विश्वभरिक हिन्दुक आस्थाक केन्द्र छी । हिन्दु धर्ममे लोकप्रिय रहल रामायणक सीताक जन्मस्थलमे निर्मित ई मन्दिर भव्य आ आकर्षक अछि । भारतक मध्य प्रदेशस्थित टिकमगढक राजकुमारी वृषभानु कुँवरीद्वारा ९ लाख चाँदीक असर्फी खर्च करि निर्माण कराएल गेल मन्दिर रहलाक कारण एकरा नौलखा मन्दिर सेहो कहल जाइत अछि | सन् १८९४ मे शिलान्यास भऽ सन् १९११ मे मन्दिर निर्माण पूर्ण भेल छल । मन्दिर मिथिलाञ्चलबासीक लेल सांस्कृतिक धरोहर सहो छी । मन्दिरक वाषिर्क क्यालेन्डर अनुसार जन्मसँ मृत्युधरि प्रायः सम्पूर्ण क्रियाकलाप मिथिला विधिअनुरूप होइत अछि । राम जन्मक अवसरमे प्रत्येक चैतमे रामनवमी, वैशाखमे जानकी नवमी, अगहनमे रामजानकी विआह महोत्सव, आसिन पूणिर्मामे कोजाग्रत, साओन-भादवमे झुला, फागुनमे परिक्रमासहित मनावोल जेवाक एकर उदाहरण छी । प्रत्येक मासक पूणिर्मामे हजारो श्रद्धालु भक्तजन सहभागी होइत अछि । एहि मन्दिरके नेपाल सरकारद्वारा विश्व सम्पदा क्षेत्रमे सूचिकृत करवाक प्रयास भऽ रहल अछि । धार्मिक आ सास्कृतिक हिसाबसँ सम्पन्न मैथिली सभ्यताक धरोहरक रुपमे रहल अछि जानकीधाम ।

ई मन्दिर सन् १९११ मे टीकमगढक (भारत) राजकुमारी कुमारी वृषभानुद्वारा निर्माण कएल गेल छल । जानकी मन्दिर मुगल शैलीमे बनाओल गेल मन्दिर छी आ इ तथ्यसँ एहि मन्दिरके आओरो महत्वपूर्ण बनाबैत अछि । ई मन्दिरक निर्माण करै बेरमे ओ समयके ९ लाख रूपैया खर्च भेल किम्बदन्ति रहल मानल जाइत अछि, तएं कारण ई मन्दिरके नौलखा मन्दिर सहो कहल जाइत अछि । ई नेपालक क्षेत्रफलक आधारमे सबसँ पैग मन्दिर छी ।मन्दिर निर्माणक सवा सौ वर्ष मात्र भेल अछि मुदा एहि में स्थापित राम-जानकीक प्रतिमा लगभग सात सौ वर्ष पुरान रहल संस्कृतिविद्क कथन अछि । वि.सं. १४१७ मे भारतक राजधानी स्थित लोहागढसँ जनकपुर आएल आदि महन्थ सुरकिशोरदास वैष्णवद्वारा राम-जानकीक प्रतिमा भेटल गेल मानल जाइत अछि । वि.स. १७८४ मे मकवानपुरक राजा मानिक सेन जानकी मन्दिरक नाममे १४ सौ बिघा दान देलक लिखत अखनो अछि ।




#Article 149: मिथिला (785 words)


मिथिला जकरा तिरहुत आ तिरभुक्ति कऽ नामसँ सेहो जानल जाइत अछि, भारतक बिहार आ नेपालक दक्षिणपूर्वी भागमे अवस्थित एक भौगोलिक आ सांस्कृतिक क्षेत्र छी। ई क्षेत्र पूर्वमे महानन्दा नदी, दक्षिणमे गङ्गा नदी, पश्चिममे गण्डकी नदी आ उत्तरमे हिमालयक तलसँ घेरल अछि।

मिथिला क्षेत्रक मुख्य भाषा मैथिली छी आ ई भाषा बाजनिहार लोकसभकेँ मैथिल कहल जाइत अछि। मिथिला नाम सामान्यतया विदेह साम्राज्यकेँ उल्लेख करवाक लेल प्रयोग कएल जाइत अछि आ सङ्गे आधुनिक-कालक क्षेत्रसभ सेहो विदहक प्राचीन सीमासभक भीतर अबैत अछि।१८हम शताब्दीमे, जखन मिथिला क्षेत्रकेँ दड़िभङ्गा राजद्वारा शासित कएल गेल छल, ब्रिटिस राज एकरा एक रियासत राज्यक रूपमे पहचान नै दऽ ई क्षेत्रमे कब्जा कऽ लेनए छल। हिन्दू धार्मिक ग्रन्थसभमे सबसँ पहिने एकर उल्लेख रामायणमे भेटैत अछि। मिथिलाक उल्लेख महाभारत, रामायण, पुराण तथा जैन आ बौद्ध ग्रन्थसभमे सेहो अछि।वर्तमान समयमे मिथिला भारतक बिहार राज्यक पश्चिम चम्पारण, पूर्वी चम्पारण , शिवहर, सीतामढ़ी, वैशाली, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, दड़िभङ्गा, समस्तीपुर, बेगूसराय, मुङ्गेर, खगड़िया, सहरसा,  मधेपुरा, सुपौल, पूर्णिया, अररिया, कटिहार, किशनगञ्ज, बाँका आ भागलपुर जिला छी तँ झारखण्ड राज्यक गोड्डा, देवघर, दुमका, साहिबगंज, जामताड़ा आ पाकुड़ जिला छी तहिना नेपालक नव निर्मित प्रदेश नं. २ अन्तर्गत रहल सप्तरी, सिराहा, धनुषा, महोत्तरी, सर्लाही, रौतहट, बारा आ पर्सा जिला तथा प्रदेश नं. १ अन्तर्गत रहल मोरङ आ सुनसरी जिला मिथिला क्षेत्र भितर अवैत अछि।

मान्यता अछि जे मिथिला नाम पौराणिक राजा 'मिथि' कऽ नामसँ कएल गेल। ओ अपन पिता राजा निमी कऽ शरीरसँ बनायल गेल मानल जाइत अछि। कियए तऽ हुनकर उत्पति अपन पिताक देहसँ मन्थन उपरान्त भेल छल, एहि कारण सँ ओ मिथि कहाएल। पौराणिक परम्परामे राजाक शासकीय क्षेत्रक नाम राजाक नामपर राखल जाइत छल। ताहि लेल मिथि कऽ नामपर ई क्षेत्रक नाम मिथिला पड़ल। मिथिला जनकपुरीक राजधानी छल आ राजा मिथि जनकसँ उत्पन्न भेल छल ताहि कारणसँ स्वयं मिथि आ हुनक बादक शासक सेहो जनक कहाएल। एकर बाद मिथिलाक राजासभकेँ जनक कहल जाए लागल। सीताक पिता सीरध्वज जनक छथि जे वाल्मीकि रामायणक हिसाबसँ जनकपुरीक पचीसम राजा भेल छल। देवी भागवतसँ ज्ञात होइत अछि जे निमिक उन्नैसम पीढ़ीमे राजर्षि जनक सीरध्वज भेल छलाह। हिनक विद्वताक चर्च देवी भागवत, श्रीमद्भगवद्गीता, विष्णु पुराण, वृहद् विष्णुपुराण आ अन्य पौराणिक ग्रन्थमे भेटैत अछि।

ई क्षेत्रकेँ तीरभुक्ति नामसँ सेहो पहिचानल जाइत छल। राधाकृष्ण चौधरीक मिथिलाक इतिहासमे तीरभुक्ति नाम होयबाक निम्नलिखित कारण बताओल गेल अछि।

ई बादमे त्रि आहुति कऽ अर्थ सँ तिरहुत रूपमे लोक प्रचारित भेल।

मिथिलासँ सम्बन्धित सभसँ महत्वपूर्ण स्रोत हिन्दू धार्मिक ग्रन्थ रामायणसँ मिलैत अछि जतय जनकपुरसँ मिथिला क्षेत्रपर शासन केनिहार राजा जनकक पुत्री आ रामक पत्नी सीताकेँ मिथिला क्षेत्रक राजकुमारी कहल गेल अछि। प्राचीन कालमे मिथिलाक अन्य प्रसिद्ध राजासभमे भानुमान्, शतध्युम्न, शुचि:, ऊर्जनम्, सतध्व्य, अञ्जन, अरिष्टनेमी, श्रुतायु, सृञ्जय, सुरमबी, अनेना, भौमरथ, सत्यरथ, उपगु, उपगुप्त, स्वागत, स्वानन्द, सुवर्चा, सुपाशर्व, सुभाष, सुश्रुत, जय, विजय, धृति, सुनय, वीतहव्य, ऋत, बहुलाश्व आ कृति छल। 

पौराणिक मान्यता आ किम्बदन्ती अनुसार जनक वंशक अन्तिम राजा खराब चरित्रक छल। ओ राजाकेँ आम जनतासभ आचार्यसभक नेतृत्वमे सत्ताच्युत केनए छल। ओकर बाद सयन वर्षधरि मिथिला बिना राजाक रहल। राजा नै भेलाक बाद एकटा लोकतान्त्रिक प्रक्रियाक विकास कएल गेल जतय शासक जनताद्वारा निर्वाचित कएल जाइत छल आ निर्णय आम सहमतिसँ कएल जाइत छल। तथ्य अनुसार मिथिला क्षेत्रकेँ विश्वक सभसँ पहिल प्रजातान्त्रिक मूल्य मान्यता माननिहार क्षेत्रक रूपमे देखल जेवाक चाही। ई शासन व्यवस्था कयन शताब्दीधरि कायम रहल जाबे धरि मगध साम्राज्य मिथिला क्षेत्रकेँ क्षति नै कऽ देलक।

ओकरबाद मिथिला क्षेत्रमे विभिन्न कालखण्डमे विभिन्न शासकवर्गद्वारा राज कएल गेल इतिहास अछि जहिमे वज्जि, लिच्छवी, सैषुनाग, नन्द, मौर्य, सुङ्ग, कान्त, गुप्ता, वर्द्धन अछि। मिथिला क्षेत्रपर जनक वंशक बाद ५अम शताब्दी सँ ६हम शताब्दीधरि कियो उल्लेखनीय शासक नै भऽ सकल। एकर बाद जयवर्द्धन राजा सलहेश मिथिलाक राजा भेल। ओ अपन राजधानी महिसौठ- सिराहा (वर्तमान समयमे नेपाल) कायम केलक। बहुतेक बेर ओ मिथिला क्षेत्रकेँ तिब्बती आक्रमणकारीसँ बचाव केनए छल जहिद्वारे हुनका जयवर्द्धनद्वारा शैलेश (हिमालयक राजा) कहल गेल जकरा स्थानीय बोलीमे सलहेश कहल जाई लागल।

मिथिला पहिल बेर भारतीय लोकद्वारा स्थापित कएल गेल, जे विदेह साम्राज्यक स्थापना केनए छल।वैदिक कालक अन्तिम समयमे (ईसा पूर्व ११००-५०००), विदेह साम्राज्य कुरू आ पञ्चाल सङ्गे दक्षिण एसियाक प्रमुख राजनीतिक आ सांस्कृतिक केन्द्रसभमे सँ एक बनि गेल। विदेह साम्राज्यक राजासभ जनक कहलावैत छल।

बादमे विदेह साम्राज्य वज्जिमे शामिल भऽ गेल, जकर राजधानी वैशाली छल, जे एखन मिथिला क्षेत्रमे अछि।

 
११हम शताब्दीसँ २०हम शताब्दीधरि, मिथिला पर विभिन्न स्वदेशीय राजवंशद्वारा शासन कएल गेल। सभसँ पहिने शासन केनिहार कर्नाटवंशी छल जे परमार राजपूत मूलक छल ओकर बाद ओइनवार वंश छल, जे मैथिल ब्राह्मण छल आ अन्तिम शासक दड़िभङ्गा राजक खण्डवालसभ छल जे मैथिल ब्राह्मण छल।ई अवधिक समयमे मिथिलाक राजधानी दड़िभङ्गा स्थानान्तरित कएल गेल छल ।

मिथिला एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रक सङ्ग-सङ्ग नदी आ पहाड़ जका प्राकृतिक सीमासँ घेरल अछि। बृहत् रूपमे मिथिला क्षेत्र समतल भूभाग समेटने अछि सङ्गे ई क्षेत्रमे बहुतेक नदीसभसँ सेहो अन्तरसम्बन्धित अछि जे हिमालयसँ उत्पन्न होइत अछि। प्राकृतिक रूपसँ मिथिला धनीक अछि।

मिथिला क्षेत्रमे सात टा मुख्य नदीसभ अछि जे महानन्दा नदी, गण्डकी नदी, कोशी नदी, बागमती नदी, कमला नदी, बलान नदी आ बुढी गण्डकी नदी छी।




#Article 150: अमिताभ बच्चन (404 words)


अमिताभ बच्चन (जन्म-११ अक्टूबर) बलिवुडके सबसँ लोकप्रिय अभिनेता छी । १९७०क दशकके समयमे अमिताभ बहुतो लोकप्रिय भेलाहके कारण सऽ अमिताभ भारतीय सिनेमाके इतिहास मs सबसं प्रमुख व्यक्तित्व बनि गेल । बच्चन अपन कैरियरमें बहुतो पुरस्कार जीतने अछि, जही मऽ तीन राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार आर बारह फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार सेहो शामिल अछि । हुनकर नाम सर्वाधिक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता फिल्मफेयर अवार्डक रिकार्डमें रहल अछि । 

इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश,में जन्मल अमिताभ बच्चन हिन्दु कायस्थ परिवारसं संबन्ध राखति अछि । हुनकर पिता, डॉ॰ हरिवंश राय बच्चन प्रसिद्ध हिन्दी कबी छलाह, आर हुनकर माँ तेजी बच्चन कराचीके सिख परिवार सं  संबन्ध रखति छलाह ।

इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश,में जन्मल अमिताभ बच्चन हिन्दु कायस्थ परिवारसं संबन्ध राखति अछि । हुनकर पिता, डॉ॰ हरिवंश राय बच्चन प्रसिद्ध हिन्दी कबी छलाह, आर हुनकर माँ तेजी बच्चन कराचीके सिख परिवार सं  संबन्ध रखति छलाह । सुरुमें बच्चनके नाम इंकलाब राखल छल जे कि भारतीय स्वतन्त्रता संग्रामक बखत प्रयोग कएल गेल छल आर iई नाम प्रेरित वाक्यांश इंकलाब जिंदाबाद सॅ लेल छल किन्तु तत्पश्चात उनकर नाम फेर अमिताभ राखल गेल जकर अर्थ अछी, एहन प्रकाश जे कहियो नै बुझत् । यद्यपि उनकर अन्तिम नाम श्रीवास्तव छल फेर उनकर बाबुजी ई उपनामके अपन कृतिसभ में प्रकाशित करने छल बच्चन नामसॅ उद्धृत केने छल। ई उनकर अन्तिमें नाम छल जए से उनकर चलचित्रसभ में एवं सब सार्वजनिक प्रयोजनसभक लेल उपयोग कएल गेल। अब ई नाम उनकर परिवारके समस्त सदस्यसभ के उपनाम बैन गेल छल । 

अमिताभ, हरिवंश राय बच्चनक दुइ पुत्र सभमें सबसॅ बड्का छल। उनकर दोसर पुत्रके नाम अजिताभ छल। उनकर माता के थिएटरमें गहिरगर रुचि छल आर हुनका चलचित्रमें सेहो भुमिका के प्रस्ताव कएल गेल किन्तु वो गृहणि बनेल रुचेलक । अमिताभक क्यारियरके चुनावमें हुनकर माताके सेहो कुछ भाग छल किया कि ओ सभ हर बखत ई बात् पs जोर देने छल कि उ सेंटर स्टेजके अपन क्यारियर बनाबे पडत् । बच्चनके बाबुजी के देहांत २००३ में भेल छल और हुनकर माता के २१ डिसेम्बर २००७ में भेल छल ।  

बच्चन दुइ बेरी एम.ए.के उपाधि प्राप्त करने अछि । मास्टर अफ आर्ट्स (स्नातकोत्तर) इलाहाबाद के ज्ञान प्रबोधिनी र बयज हाई स्कूल (बीएचएस) ओकर बाद नैनीताल के सिंहवुड कलेज में पढने छल जत् कला संकायमें प्रवेश दिलाएल गेल । अमिताभ ओकर बाद अध्ययन करे के लेल दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोडीमल कलेज गेल जत् ओ विज्ञान स्नातक के उपाधि पाएल । अपन आयुके २० औं दशकमें बच्चन अभियनमें अपन क्यारियर प्राप्त करेक लेल कोलकता के एक शिपिंग फर्म बर्ड एण्ड कंपनीमा भाँडाके ब्रोकरको नोकरी छोइड देने छल ।




#Article 151: श्रेया घोषाल (106 words)


श्रेया घोषाल   (जन्म: १२ मार्च १९८४) एक भारतीय पार्श्व गायिका छी । वो भारतीय चलचित्र उद्योग बलिउड आ भारतीय क्षेत्रीय चलचित्रसभमे बहुत रास गीत गाबने अछि । हिन्दी गीत गाबऽ कऽ सङ्गे ओ असमिया, बङ्गाली, कन्नड, मलयालम, मराठी, पञ्जाबी, तमिल आ तेलुगु भाषामे सेहो गीत गाबने अछि । 

श्रेया घोषालक जन्म एकटा बङ्गाली शिक्षित परिवारमे भेल छल । चारि बर्षक उमरमे घोषाल हारमोनियम बजबै लेल अपन माता सँ सिखने छल । घोषालक माता पिता कोटा, राजस्थानमे शास्त्रीय सङ्गीतके विधिवत शिक्षाक लेल एकटा सङ्गीत शिक्षक ओतय पठाैने छल ।

राष्ट्रिय चलचित्र पुरस्कार 

फिल्मफेयर पुरस्कार 

फिल्मफेयर पुरस्कार दक्षिण 

आइफा पुरस्कार 

जी सिने पुरस्कार 

स्टार स्क्रीन पुरस्कार 

अन्य पुरस्कार 




#Article 152: आलिया भट्ट (449 words)


आलिया भट्ट (; जन्म १५ मार्च १९९३) एक ब्रिटिश भारतीय चलचित्र अभिनेत्री आ गायिका छी जे बलिउडमे काज करैत अछि । भट्ट परिवारमे जन्मल, ओ चलचित्र निर्माता महेश भट्ट आ अभिनेत्री सोनी रज्दानक पुत्री छी । सन् १९९९ कऽ थ्रिलर सङ्घर्षमे बाल कलाकारक रूपमे अपन अभिनयक पदार्पण केलाक बाद, भट्ट करण जोहरक प्रेमप्रसङ्गयुक्त नाट्य स्टुडेन्ट अफ द इअर (२०१२) मे अपन पहिल प्रमुख भूमिका केनए छल, जे आलियाक सर्वश्रेष्ठ महिला पदार्पणक लेल फिल्मफेयर पुरस्कारक नामाङ्कन दिलाबऽमे सफल भेल छल ।

भट्ट बलिउडक बहुत रास व्यावसायिक रूप सँ सफल चलचित्रसभमे महिला नेतृत्वक भूमिका केनए अछि, जाहिमे प्रेमप्रसङ्गयुक्त नाट्य टु स्टेट्स, प्रेमप्रसङ्गयुक्त हास्य हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया, नाट्य कपूर एण्ड सन्स, युगल चलचित्र डियर जिन्दगी, आ प्रेमप्रसङ्गयुक्त हास्य बद्रीनाथ की दुल्हनिया शामिल अछि । हुनका सडक नाट्य हाईवे (२०१४), जे हुनका सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्रीक लेल फिल्मफेयर समीक्षक पुरस्कारक उपाधि दिलेनाए छल, आ अपराध नाट्य उडता पञ्जाब (२०१६), जे हुनका  सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्रीके फिल्मफेयर पुरस्कारक उपाधि दिलेनाए छल, मे भावनात्मक रूपसँ गहन चरित्रक चित्रणक लेल समीक्षकद्वारा प्रशंसा कएल गेल ।

चलचित्रसभमे अभिनय छोड़ि, आलिया महिलासभक लेल अपन स्वयंकें कपड़ासभक लाइन लञ्च केनए अछि । ओ अपन अभिनित छ टा चलचित्रसभमे गीत गायन केनए अछि आ मञ्च शो आ साङ्गीतिक कार्यक्रममे भाग लेनए अछि ।

भट्टक जन्म १५ मार्च १९९३ मे, भारतीय चलचित्र निर्देशक महेश भट्ट आ अभिनेत्री सोनी रज्दानक लेल भेल छल । हुनकर पिता गुजराती मूलक छी आ हुनकर माता कश्मीरी आ जर्मन वंशक छी । निदेशक नानाभाई भट्ट हुनकर दादा छी । हुनकर एक बडकी बहिन, शाहीन (जन्म १९८८) आ दु अर्ध-सहोदर, पूजा भट्ट आ राहुल भट्ट छी । अभिनेता इमरान हाशमी आ निर्देशक मोहित सूरी हुनकर फुफेरा भाई छी, जबकि निर्माता मुकेश भट्ट हुनकर चाचा छी । 
भट्ट अपन प्रारम्भिक शिक्षा मुम्बईक जमनाबाई नरसी स्कूलसँ केलक ।

भट्टक पहिल अभिनयक भूमिका सङ्घर्ष (१९९९) मे एक बाल कलाकारक रूपमे छल, जाहिमे अक्षय कुमार आ प्रीति जिन्टा अभिनीत अछि, जहाँ ओ जिन्टाक चरित्रक छोट संस्करणक भूमिका निभाने छल । 
२०१२ मे करण जोहरक स्टुडेन्ट अफ द इअरक साथ सिद्धार्थ मल्होत्रा ​​आ वरुण धवनक साथ हुनकर पहिल प्रमुख भूमिका छल । ओ एक अत्याधुनिक किशोर लडकी, शानया सिङ्घानियाक भूमिका निभाने छल, जे धवनक चरित्रक साथ सम्बन्धमे छी, लेकिन मल्होत्रा​​द्वारा निभाएल चरित्रद्वारा आकर्षित अछि । बलिउड हङ्गामाक तरण आदर्श हुनकर प्रदर्शनक बारेमे लिखने अछि, आलियाक भूमिका कभी खुशी कभी गममे करीना कपूरक याद दिलाने अछि । स्टाइलिश, उत्तम दर्जाक, चाँदीक चम्मचक साथ जन्मेल, ओ कोई छी जे सिर्फ अपन कपडा आ ब्याग नै दिखाने अछि, बल्कि हुनकर धन सेहो दिखाने अछि । बेहद प्रकाशक, आलिया सुपर आश्वस्त पदार्पण केनए अछि । हिन्दुस्तान टाइम्सक अनुपमा चोपडा सेहो कपूरक चरित्रक साथ समानताक उल्लेख केने, लेकिन ओ कहने छल कि हुनकर प्रदर्शन हत्यारा रवैया बिना छल । स्टुडेन्ट अफ द इअर बक्स अफिस पर  कमाई केने छल ।




#Article 153: कङ्गना राणावत (119 words)


कङ्गना राणावत (; जन्म २३ मार्च १९८७) एक भारतीय अभिनेत्री तथा मोडल छी । ओ बलिउड चलचित्र उद्योगक सबसँ चर्चित अभीनेत्रीसभमे सँ एक आ सर्वाधिक पारिश्रमिक लेमएवाला भारतीय महिला अभिनेत्रीमे आबैत अछि । ओ अपन जीवन यात्रा बलिउडमे स्थापित करि चुकल अछि । अखनधरि कङ्गना एक राष्ट्रिय चलचित्र पुरस्कार आ चारिटा फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त करि चुकल अछि ।

रणावकक जन्म भारतक हिमाचल प्रदेशमे भेल अछि । सुरुवाती समयमे ओ अपन मातापिताक आग्रहमे डाक्टर बनैलेल चाहैत छल मुदा अपन करियर निर्माण करिक लेल सोलह बर्षक उमरमे दिल्ली आबि ओ एक मोडल बनल । सन् २००६ मे ओ बलिउड चलचित्र ग्याङ्गस्टरमे मुख्य भूमिकामे ओ चलचित्र जगतमे पदार्पण केनए छल जे हुनका फिल्मफेयर उत्कृष्ट नव महिला कलाकारक लेल पुरस्कार दिलेनाए छल ।




#Article 154: सगरमाथा (476 words)


सगरमाथा संसारकें सबसँ ऊँच पर्वत शिखर छी । एकर उचाई समुन्द्र सतहसँ ८,८४८.८६ मीटर (२९,०३१.६९ फिट) अछि । सन् ८ डिसेम्बर २०२० आगे  ८,८४८  (२९,०२८ फीट) थि ।   इ नेपालकें सोलुखुम्बु जिलाकें खुम्जुङ्ग गा विस में अवस्थित अछि । तिब्बती भाषामें एकरा चोमोलुङ्गमा कहएत अछि । सगरमाथाकें सन १८६५ में ब्रिटिस सर्भेयर कर्णेल सर जोर्ज एभरेष्टकें नाममें  नामाकरण केल गेल छल । बादमें सन् १९५६ (बि.स. २०१२) में इतिहास शिरोमणि बाबुराम आचार्य एकर नाम सगरमाथा राखने छल वो सगरमाथाकें नेपाली नाम झ्यामोलोङ्मो सेहो लिखने छल ।  सगरमाथाकें कतौ कतौ देवढुङ्गा सेहो कहल जाएत अछि ।
सगरमाथा पर्वतमें सर्वप्रथम, सन १९५३ मई २९ तारिखके भोर ११:१५ बजे, नेपालक तेन्जिङ नोर्गे शेर्पा आर न्युजिल्याण्डका सर एडमन्ड हिलारी अपन टांग राखने छल ।

सन् १८०९ में उपरी गंगा अर्थात कुमाउक्षेत्रक खोजीमें निकलल डब्लूएस वेब नेपालमें धौलागिरी पर्वत ८ हजार मिटरसँ पैग रहल रहस्योद्घाटन केने छल अर्थात हिमालयकें ऊँच  पर्वतसभ मे सँ सबसँ पहिल उचाई नापल गेल पर्वत धौलागिरी (८,१७२ मिटर) छी । ए पर्वतकें उचाई नाप लेला के बाद एकरा संसारकें सबसँ ऊँच पर्वत कहल गेल छल । बादमें सन् १८४८ में कञ्चनजङ्घाकें उचाई नापल गेल आर एकर उचाई ८ हजार ५ सय ८६ मिटर रहल परिणाम बाद कञ्चनजङ्घा पर्वतकें संसारकें सबसँ ऊँच पर्वत कहल गेल । वहिक वर्ष आन पर्वत सभक उचाई नापल गेल आर रेकर्ड जम्मा करि सर्वे अफ इन्डियाकें कार्यालयमें पठाओल गेल । ए घटनाकें करिब तीन वर्षबाद सन् १८५२ में जब सगरमाथा संसारकें सबसँ ऊँच पर्वत शिखर छी कहिँ ठहर कल गेल, तखन एकर उचाईं २९ हजार २ फिट मानल गेल । सगरमाथाकें रोमन संकेतचिहृन 'पिक १५' नाम प्रदान केल गेल । सन् १८५२ कें समयमें पहाडसभक उचाइ 'कियोडा लाइट' यन्त्रक प्रयोगसँ मापन करि रहल भारतक सर्वे विभागके एउटा टिमके सदस्यगणमें सँ एक बंगाली नागरिक राधानाथ सिकन्दर हमही सबसँ ऊँच पर्वत शिखर पत्ता लगौने दावी केलक । राधानाथकें सहयोगिकें रूपमें हेनेसी नामक वोकर चेला छल । उक्त विभागक सर्वे कर्मचारीसभ तेजवीर बुढाथोकी आर राधानाथ सिक्दर पत्ता लगेलक उक्त शिखरकें उचाईं ८ हजार ८ सय ४० मिटर छल । राधानाथ प्रतिभाशाली गणितज्ञ छल । सर्वे अफ इन्डियामें कार्यरत रहल वोकर उमर मात्र १९ वर्ष छल । सबसँ ऊँच पर्वत शिखरक उचाईं नापए वाला विधि बेलायतकें इन्जिनियर जर्ज एभरेष्ट विकास केने छल । संसारकें सबसँ ऊँच पर्वत शिखर खोजए वाला काज सुरू भेल पश्चात बिहार (भारत)के समतल मैदानके अध्ययन करि रहल भारतक सर्वेयर जनरल सर एन्ड्रयू वाघ अपन अग्रज जर्ज एभरेष्टकें स्मरणमें पन्ध्रहम ऊँच पर्वत नाम परिवर्तन करि सन् १८६५ (वि.सं. १९२१)में 'माउण्ट एभरेष्ट' नाम राखि देलक । एन्ड्रयू वाघकें वो टिम नेपालक एक हिमशिखर संसारकें सर्वोच्च भागकें रूपमें रहल दाबी सेहो करलक । भारतकें तत्कालीन कम्पनी सरकारद्वारा उक्त नामकरण करैत काल जर्ज ७५ वर्षक छल । जर्ज एभरेष्ट सन् १८२५ सँ सन् १८४३ तक भारतकें सर्वेयर जनरल छल । वि.सं. २०१३ सालमें इतिहासशिरोमणि बाबुराम आचार्य उक्त पर्वतकें नेपाली नामकरण करि 'सगरमाथा' नाम राखने छल । वो इ पर्वतकें नेपाली नाम 'शारदा' नामक पत्रिकामार्फत केने छल ।




#Article 155: कस्तूरबा गान्धी (107 words)


कस्तूरबा गान्धी (१८६९-१९४४ ई.), महात्मा गान्धीक धर्मपत्नी छी जे भारतमे बा  कऽ नामसँ प्रसिद्ध अछि । कस्तूरबा गाँधीक जन्म ११ अप्रैल सन् १८६९ मे महात्मा गान्धी जेना काठियावाड़क पोरबन्दर नगरमे भेल छल । ई प्रकार कस्तूरबा गाँधी आयुमे गान्धी जी सँ ६ मास पैग छल । कस्तूरबा गान्धीक पिता गोकुलदास मकनजी साधारण स्थितिक व्यापारी छला । गोकुलदास मकनजीक कस्तूरबा तेसर सन्तान छी । ओ जमानामे कियो लड़कीके पढ़ेनाए तँ दूर अल्प अवस्थामे विवाह करि दैत छल । सेहा कारणवस कस्तूरबा वाल्यकालमे निरक्षर छल आ सात सालक अवस्थामे ६ सालक मोहनदासक सङ्ग हुनकर सिद्धान्त करि देल गेल । तेरह सालक आयुमे ओ दुनू गोटेक विवाह भेल छल । 




#Article 156: नेपाल रेलवे (241 words)


 
नेपाल रेल निगम लिमिटेड नेपाल सरकारक स्वामित्वमे रहल एक विभाग छी जे नेपालमे रेल सञ्चालन करैत अछि। वर्तमानमे ई कम्पनी दू टा रेलवे लाइन- रक्सौल-सिरसिया आ जयनगर-जनकपुरकें देखरेख आ सञ्चालन करैत अछि। 

नेपाल में रेलवे के  शुरुवात सन 1927 में रक्सौल (भारत) स अमलेखगंज (नेपाल में 46 किमी) के बीच एक 48 किमी  रेललाइन के साथ भेल रहै । इ लाइन के आमान 2’6” (762 मिमी) राखल गेल छलाई । इ लाइन के 1965 में बंद कएल गेल । 2005 में इ लाइन के किछ  हिस्से के आमान परिवर्तन के बाद रक्सौल स सिर्सिया अन्तर्देशीय कंटेनर डिपो, बीरगंज के बीच एक 6 किमी दूरी  बड़ी लाइन (5’6”, 1675 मिमी) के रूप में शुरु कएल गेल और अब अेकर  प्रयोग विशेष रूप स भारतीय रेल द्वारा संचालित माल गाड़ि द्वारा प्रयोग काएल जै छै ।

पूर्व पश्चिम रेलमार्ग कें खण्ड (४०० कि.मि.) निर्माण संचालन ।
भारत सीमा स तराई कें औद्योगिक तथा व्यापारिक शहर/नाका सब रेल प्रणालीम जोड्ल जएत |
पूर्व पश्चिम रेलमार्ग स  तराईक वर्दीवास–विरगंज खण्ड कें जोड्ल जेत  (१३४ कि.मि.) ।
काठमाण्डौ तराई कें  रेल सेवा स  जोडके (१०० कि.मि.)। निर्माण कार्य आगु बढाएल जएत ।
काठमाण्डौ उपत्यकामा मेट्रो  निर्माण कार्य प्रारम्भ  कएल जएत।
काठमाण्डौ –पोखरा–तराई क विद्युतिय रेलमार्ग कें   DPR तयार कएल जएत ।
रेल संजाल कें सम्भाव्य क्षेत्र सभक पहिचान सहित प्रादेशिक प्रशासनिक केन्द्र सबमे पूर्व–पश्चिम एवं तराई , काठमाण्डौ –पोखरा रेल संजाल स जोडक लेल अध्ययन Feasibility एवं DPR कें कार्य आगु बढाएल जएत ।

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#Article 157: सन्नी लियोन (486 words)


करनजीत कौर वोहरा (जन्म १३ मई, १९८१), जकरा ओकर रङ्गमञ्च नाम सन्नी लियोन  () सँ जानल जाएत अछि, एक चलचित्र अभिनेत्री आ कामुक मोडल छी। एखन वर्तमान समयमे ओ भारतीय चलचित्र उद्योगमे सक्रिय अछि। ओ एक पूर्व अश्लील चलचित्र अभिनेत्री छी। सन्नी लग अमेरिका आ क्यानाडा दुनू देशक नागरिकता अछि। ओ रङ्गमञ्चमे कमबेसी मुदा करन मल्होत्रा नामक प्रयोग सेहो केनए अछि। सन्नीकेँ सन् २००३ मे पेन्थहाउस पेट अफ द इअरके रूपमे मनोनित भेल छल आ भिभिड इन्टरटेनमेन्ट सँ काज करवाक लेल अनुबन्धित सेहो भेल। अमेरिकी वयस्क पत्रिका म्याक्सिमद्वारा सन्नीकेँ सन् २०१० मे १२ शीर्ष अश्लील कलाकारसभमे मनोनित केनए छल।

सन्नी स्वतन्त्र मुख्यधारा कार्यक्रम, चलचित्रसभ आ टेलिभिजन श्रृङ्खलामे भूमिका निर्वाह केनए अछि। ओकर पहिल मुख्यधारामे उपस्थिति सन् २००५ मे भेल छल जखन ओ एमटिभी इन्डियाक कार्यक्रम एमटिभी भिडियो म्युजिक अवार्ड्सक लेल रेड कार्पेट रिपोर्टरक रूपमे काज केनए छल। सन् २०११ मे ओ भारतीय रियालिटी टेलिभिजन श्रृङ्खला बिग बोसमे प्रतिभागीक रुपमे भाग लेनए छल। ओ भारतीय रियालिटी कार्यक्रम एमटिभी स्प्लिट्सभिल्लाक प्रस्तोताक रुपमे काज केनए अछि।

सन् २०१२ मे ओ भारतीय चलचित्र अभिनेत्री तथा निर्देशक पूजा भट्टक कामुक थ्रिलर चलचित्र जिस्म २ (२०१२) सँ बलिउड चलचित्र क्षेत्रमे पदार्पण केलक आ अप्पन पूरा ध्यान मुख्य धारा चलचित्रमे अभिनय करवाक उपर केन्द्रित करि देलक जकर बाद ओ हिन्दी चलचित्र ज्याकपट (२०१३), रागिनी एमएमएस २ (२०१४), एक पहेली लीला (२०१५) आ तेरा इन्तजार (२०१७) मे अभिनय केनए छल।

अप्पन अभिनय करियर छोड़ि ओ अमेरिकी क्यान्सर सोसाइटीक लेल पैसा जुटेबाक लेल 'रक एण्ड रोल लस एञ्जल्स हाफ-म्याराराथन' सहितक सामाजिक कार्यक्रमसभमे अप्पन सक्रिय योगदान दऽ रहल अछि। एहि वाहेक ओ 'पिपल फर द एथिकल ट्रिटमेन्ट अफ एनिमल्स' (पेटा)कऽ लेल एकटा बचाएल गेल कुत्ताक सङ्ग, पालतू जानवर पालऽवला मालिकसभकेँ अप्पन बिलाए आ कुत्तासभकेँ बधिया आ न्यून करवाक लेल प्रोत्साहन करऽकऽ उद्देश्य सँ विज्ञापन अभियानमे सेहो काज केनए अछि।

सन् २०११ मे सन्नी सङ्गीतकार ड्यानियल वेबर सँ विवाह केनए छल। एखन वर्तमान समयमे सन्नी आ वेबर मुम्बई, महाराष्ट्रमे रहैत अछि।

सन्नी लियोनक जन्म केरन मल्होत्रा नाम सँ सार्निया, ओन्टारियोमे एक सिक्‍ख पञ्जाबी परिवारमे भेल छल। ओकर पिता तिब्बतमे जन्मल छल आ दिल्लीमे पलल बढ़ल छल। सन्नीकेँ माए (जकर २००८ मे मृत्यु भऽ गेल छल) सिरमौर, हिमाचल प्रदेशक एक छोट सन गाम सँ छली। वाल्यकाल सँ ओ बहुतेक चुस्त छल आ पुरुषसभक सङ्ग हकी खेलैत छली। ओ आइस स्केटिङ केनाए सेहो पोसन्द करैत छली।

ओना तँ ओ सिक्‍ख छली, मुदा सन्नीकेँ माए-बाप ओकर दाखिला एक क्याथोलिक विद्यालयमे कराए देलक कियाकि ओकरा लेल आम विद्यालयमे जेनाए खतरापूर्ण समझल गेल। जखन ओ १२ वर्षक भेल तखन ओकर परिवार फोर्ट ग्रेटिएट, मिसिगन चलि गेल आ ओकर एक साल बाद अप्पन दादा दादीकेँ सपना पूरा करैत ओकर पुरा परिवार एके स्थानमे रहवाक उद्देश्य सँ लेक फरेस्ट, क्यालिफोर्निया जाए बसि गेल। सन्नी सन् १९९९ मे अपन विद्यालय शिक्षा प्राप्त करि उच्च शिक्षा प्राप्ति करवाक लेल कौलेजमे दाखिला लेलक। मात्र ११ वर्षक उमरमे सन्नी अपन जीवनक पहिल चुम्बन, १६ वर्षक उमरमे एक टा बास्केटबल खेलाड़ीसँ यौन आनन्द लऽ अप्पन कौमार्य भङ्ग केनए छल आ १८ वर्षक उमरमे ओ अप्पन द्वयौनिकताक खोज केनए छल।




#Article 158: दक्षिण एसिया (146 words)


एसिया महादेशक दक्षिणी भू-भागकेँ दक्षिण एसिया कहल जाएत अछि वा हिमालय आओर हिमालय अगलबगलक क्षेत्रकेँ सेहो दक्षिण एसिया कहल जाएत अछि। दोसर शब्दमे कहबै तँ भारतीय प्लेटमे रहल भू-भाग वा हिमालय आओर हिन्दुकुश सँ दक्षिणक भू-भाग जकरा भारतीय उपमहाद्वीप सेहो कहल जाएत अछि जे दक्षिण एसिया छी। दक्षिण एसियाक दक्षिणकेँ भूभाग समुन्द्रसँ घेरल अछि आ पश्चिम, उत्तर तथा पूर्वमे क्रमशः पश्चिम एसिया, मध्य एसिया, पुर्व एसिया अछि आ दक्षिण-पुर्वमे दक्षिण पुर्व एसिया अवस्थित अछि।
कोन कोन देश दक्षिण एसियामें परैत अछि वा नै परैत अछि मतमें भिन्न-भिन्न श्रोतके भिन्न-भिन्न विचार रहल देखल गेल अछि । उदाहरणके लेल संयुक्त राष्ट्र संघक भौगोलिक क्षेत्र वर्गिकरणमें, नेपाल, भारत, भुटान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बंगलादेश, माल्दिभ्स तथा श्रीलंका दक्षिण एसियाके देश छी उल्लेख केल गेल अछि । दक्षिण एसिया विश्वमें एक पाँच भाग सँ बेसी जनसंख्याके घर छी, जे विश्वमे बेसी जनसख्या भेल आर उच्च जनसंख्या घनत्व भेल भौगोलिक क्षेत्र छी ।




#Article 159: जिमी वेल्स (281 words)


 
जिमी वेल्स (; जन्म ७ अगस्त १९६६)) एक अमेरिकी इन्टरनेट प्रबन्धक तथा एक स्वतन्त्र विश्वकोश विकिपिडिया तथा विकिया कम्पनीकेँ सह-संस्थापक छी।
जिमी वेल्सक जन्म संयुक्त राज्य अमेरिकाक अलाबामा राज्यमे भेल छल। ओ अप्पन विद्यालय शिक्षा रानडोल्फ विद्यालयसँ पुरा केनए छल। बादमे, ओ वित्त विषयमे स्नातक आ स्नातोकोत्तरक शिक्षा औबर्न विश्वविद्यालय आ अलाबामा विश्वविद्यालयसँ प्राप्त केलक। सन् १९९६ मे बोमिस नामसँ दुटा साझेदारक भागीदारीसँ एक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराबऽवला संस्था स्थापित केलक जे न्यूपेडिया नामक मुक्त ज्ञानकोश प्रदायी संस्थान आ ओकर अनुवर्ती प्रतिष्ठान विकिपिडियाकेँ प्रारम्भिक आर्थिक सहयोग प्रदान केनए छल।

एखन ओ विकिमिडिया फाउन्डेसनक न्यासी बोर्डमे काज करैत अछि। ई फाउन्डेसन एक धर्मार्थ सङ्गठन अछि जे बिना कोनो लाभ विकिपिडिया चलबैत अछि। 

जिम्मी वेल्सक जन्म ७ अगस्त १९६६ मे हन्ट्सभिल्ली, अलाबामामे भेल अछि । जिमीक पिता जिम्मी किराना भण्डार दोकानमे म्यानेजर छल आर माता डोरिस आ दादी एर्मा एकटा छोट सन निजी विद्यालयमे बाल सिकाई गृह सञ्चालन करैत छल जहि विद्यालयमे जिमी वेल्स आ हुनकर भैयाभाई तथा दिदिबहिन प्रारम्भिक शिक्षा हासिल केनए छल । वहि विद्यालयमे कक्षा ८ धरि अध्ययन करलाक बाद वेल्स हन्ट्सभिल्लीमे अवस्थित एक प्रारम्भिक विश्वविद्यालय: र्यान्डोल्फ विद्यालयमे भर्ना भेल आ सोलह वर्षक उमेरमे स्नातक करलक ।

जिम्मी वेल्स दुई बेर विवाह तथा छोडपत्र कऽ लेने अछि । ओ २० वर्षक उमरमे अलाबामामे एकटा किराना स्टोरमा सहायकक रूपमे कार्यरत पामसँ विवाह केनए छल । ओ अपन दोसर पत्नी क्रिस्टिन रोहनके एक मित्रक माध्यमसँ सिकागोमे भेट केनए छल, जखन ओ मित्सुबित्सीक लेल इस्पात व्यापारीके रूपमा कार्यरत छल । ई दुनू फ्लोरिडाके मुनरो राज्यमे मार्च १९९७ मे विवाह केनए छल । क्रिस्टिनसँ छोडपत्र करै सँ पहिने क्रिस्टिन एकटा बेटीके जन्म देने छल। वेल्स १९९८ मे सान डिएगोमे बसाई करवाक लेल आएल छल । ओ सन् २००७ धरि एहि ठाम बसोबास केलक ।




#Article 160: विकिमिडिया फाउन्डेसन (114 words)


विकिमिडिया फाउन्डेसन एक अमेरिकी गैर लाभकारी धर्मार्थ संगठन छी । एकर कार्यालय सान फ्रान्सिस्को, क्यालिफोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिकामें अछि जे बहुतो विकीके संचालन करैत अछि । इ संगठन विकिपिडियाके कारण जानल जाएत अछि जे विश्वमें दश सबसँ बेसी खोजल जाए वाला वेबसाइट छी । वोए वाहेक इ संगठन अनलाइन सहयोगात्मक परियोजनासभ विकिस्नरी, विकिसोर्स, विकिमिडिया कमन्स, विकिसमाचार, विकिभर्सिटी, विकिडाटा, विकिभोएज, विकिमिडिया इनक्यूबेटर आर के संचालित करैत अछि । विकिमिडिया फाउन्डेसनक उपस्थितिके आधिकारिक घोषणा विकिपिडियाके सह संस्थापक जिमी वेल्स २० जून, २००३ में केने छल । 

, फाउन्डेसनमें २५० कर्मचारी कार्यरत अछि । फाउन्डेसन के वार्षिक राजश्व लगभग अमेरिकी $५० मिलियन रहल अछि ।लाइला त्रेतिकोभ फाउन्डेसनके कार्यकारी प्रमूख छी जखन प्यात्रिसियो लोरेन्ते न्यासीके प्रमूख छी ।




#Article 161: श्रद्धा कपूर (388 words)


श्रद्धा कपूर (जन्म ३ मार्च १९८९) एक भारतीय चलचित्र अभिनेत्री छी। ओ अनुभवी अभिनेता शक्ति कपूरक सुपुत्री छी। सन् २०१० मे पहिले बेर अमिताभ बच्चनक 'तीन पत्ती' नामक चलचित्रसँ ओ चलचित्र क्षेत्रमे प्रवेश केलक आ 'आशिकी २' नामक चलचित्रक सफलता बाद ओ चलचित्र प्रशसंक आ चलचित्र समालोचक सभक नजरिमे आएल छल।

अभिनेता शक्ति कपूर कऽ सुपुत्री, ओ सन् २०१० कऽ थ्रिलर चलचित्र 'तीन पत्ती'मे एक छोट भूमिकासँ अभिनय जीवन शुरू केनए छल। ओकर बाद ओ 'लभ का द इन्ड' (२०११) चलचित्रमे मुख्य भूमिकामे नजरि आएल। सन् २०१३ मे 'आशिकी २ (२०१३ चलचित्र)' मे गायिकाक भूमिकामे हुनकर अभिनयक चौतर्फी प्रशंसा कएल गेल आ ई चलचित्रमे अप्पन दमदार अभिनयक लेल कपूरकें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्रीके फिल्मफेयर पुरस्कारक लेल नामांकन प्राप्त भेल छल।

दोसर वर्ष, ओ ओपेलिया बिशाल भारद्वाजक आलोचनात्मक प्रशंसित नाटक हैदर (२०१४) मे आधारित अनुकूलन विलियम शेक्सपियरक त्रासदी ह्यामलेट। कपूर आपनाकेँ रोमान्टिक थ्रिलर  एक भिलन  (२०१४), नृत्य नाटक  एबीसीडी २  (२०१५) आ एक्शन ड्रामा बागी (२०१६)। खराब प्राप्त फिल्मसभक शृङ्खला, हुनकर सर्वाधिक कमाई केनिहार रिलीजसभ हरर कमेडी स्त्री (२०१८), एक्शन थ्रिलर साहो (२०१९), आ कमेडी नाटक छिछोरे (२०१९) केँ साथमे आएल।

कपूर अपनाकेँ भारतक सबसँ लोकप्रिय हस्तकसभक रूपमे स्थापित केलक। २०१३ मे, एफएचएमके भारतीय संस्करण द्वारा कएल गेल सर्वेक्षण अनुसार हुनका विश्वके सबसँ सेक्सी अभिनेत्रीसभक सूचीमे पाँचम स्थानमे राख्ल गेल।२०१४ मे, हिनका छठम स्थानमे राखल गेल आ अगला वर्ष हिनका म्याकफीक सबसँ बेसी खोजल गेल सेलिब्रिटी पोलमे दोसर स्थानमे छल। उ २०१९ के शुरुआत सुभाथके त्रिभाषी एक्शन फिल्म साहोमे प्रभासके बिरूद्ध अग्रणी महिला खेल्ने छल। बजेट केने , ई उत्पादन कैल सबसेज्यादा महँग भारतीय फिल्म अछि।   उदिता झुनझुनवाला पुदीना (अखबार))क टकसाल एकरा होस्टल जीवनक लेल एक सजीव श्रद्धान्जलीक रूपमे लेबल केनए अछि आ थपल छै कि एक रेखाचित्र भूमिकाक बादो, कपूर एक चल्ती आ मनपरल प्रदर्शन केलक। के विश्वव्यापी कूल कमाईके साथ, फिल्म उनकर सबसेज्यादा सफल मध्ये एकके रूपमे देखा परल।

हिनकर जन्म ३ मार्च १९८९ मे भेल छल। श्रद्धाक पालन-पोषण मुम्बईक न्रजातीय परिवार मे भेल अछि। ओ अभिनेता शक्ति कपूरक पुत्री छी। हिनकर पिता पञ्जाबी आ माता मराठी अछि। ओ अपन माताक जकाँ  अपनाकेँ एगो मराठी मानैत अछि। हिनकर पिता, शक्ति कपुर आ माता शिवांगी कोल्हपुरे कपूर दुनु हिन्दी चलचित्रक अभिनेता छी। ओ अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरी आ निर्देशक तेजस्विनी कोल्हापुरेक भतीजी छी, आ आशा भोसले आ लता मंगेशकरक भव्य भतीजी छी। हिनकासँ पैग भाई सीधान्त कपूर एगो डिस्को जकी आ अभिनेता छी।
श्रद्धाक पढ़ाई अमेरिकन स्कुल आफ बम्बेमे भेल अछि। 




#Article 162: कैलाश पर्वत (202 words)


कैलाश पर्वत (, ) तिब्बत में स्थित कैलाश हिमश्रृङ्खलाके एगो पर्वत छी । एकर पश्चिम तथा दक्षिण में मानसरोवर तथा राक्षस ताल अछि । एतय एसियाके किछु सभसँ पैग नदीके श्रोतलग अवस्थित अछि - जे में ब्रह्मपुत्र नदी, सिन्धु नदी आ सतलुज नदी रहल अछि । ऐ पर्वतके चार धर्ममें पवित्र मानल गेल अछि जे छी हिन्दू धर्म, जैन धर्म, बोन धर्म आ बौद्ध धर्म ।

ऐ पर्वत कैलाश के संस्कृत में () कहल जाएत अछि । इ शब्द केलाससँ आयल अछि, जेकर माने स्फटिक होएत अछि ।

ए तीर्थके गणपर्वत आर रजतगिरि ओ कहल जाएत अछि । कैलाश ६,६३८ मिटर (२१,७७८ फिट) ऊँच शिखर आर वो सँ सटल मानसरोवरक इ तीर्थ छी आर ऐ प्रदेशके मानसखण्ड कहल जाएत अछि । कदाचित प्राचीन साहित्य में उल्लिखित मेरु एतएक अछि । पौराणिक अनुश्रुतिसभ के अनुसार शिव आर ब्रह्मा आदि देवगण, मरीच आदि ऋषि एवं रावण, भस्मासुर आदि एतय तप केने छल । पाण्डव के दिग्विजय प्रयास के समय अर्जुन ऐ प्रदेश पर विजय प्राप्त केने छल । युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में ऐ प्रदेश के राजा उत्तम घोडा, सोना, रत्न आर याकके पुच्छरके बनल कारी आर उज्जर चामर भेंट केने छला । ऐ प्रदेशके यात्रा व्यास, भीम, कृष्ण, दत्तात्रेय आदि केने छल । 




#Article 163: मानसरोवर (167 words)


मानसरोवर झील  तिब्बतमें स्थित एक सफा पानिके झील छी । इ पवित्र झील लहासा सँ  दुर अछि । एकर उत्तर में कैलाश पर्वत तथा पश्चिम में राक्षस ताल अछि ।

इ झील लगभग ३२० वर्ग किलोमाटर के क्षेत्र में फैलल अछि । एकर उत्तर में कैलाश पर्वत तथा पश्चिम में राक्षस ताल अछि । इ समुद्र सतहसँ लगभग ४,५५६ मिटरके ऊंचाई में स्थित अछि । एकर परिमिति लगभग ८८ किलोमिटर अछि आर औसत गहराई ९० मिटर रहल अछि ।

हिन्दू धर्म में एकरा पवित्र मानल गेल अछि । एकर दर्शन के लेल लाखौ लोग प्रतिवर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा में भाग लैत अछि । हिन्दू विचारधारा के अनुसार इ झील सर्वप्रथम भगवान ब्रह्मा के मन में उत्पन्न भेल छल । संस्कृत शब्द मानसरोवर, मानस तथा सरोवर के मिल के बनल अछि जेकर शाब्दिक अर्थ होएत अछि - मन के सरोवर।
एतएक देवी सती के शरीरके दाहिना हाथ गिरल छल । एहि लेल एतएक एक पाषाण शिलाके वोकर रूप मानि पूजा केल जाएत अछि । एतएक शक्तिपीठ अछि ।




#Article 164: राक्षस ताल (166 words)


राक्षस ताल तिब्बत में स्थित एक झील छी जे मानसरोवर आर कैलाश पर्वत के समिपमें स्थित अछि । सतलुज नदी राक्षसतल के उत्तरी छोर सँ शुरु होएत अछि । पवित्र मानसरोवर आर कैलाश के एतेक लग भेला के बादो राक्षसताल हिन्दुसभ आर बौद्ध-धर्मिसभद्वारा पवित्र आ पूजनीय नै मानल जाएत अछि । एकरा तिब्बती भाषा में लग्नगर त्सो (ལག་ངར་མཚོ།) कहल जाएत अछि । प्रशासनिक रूपसँ इ तिब्बत के न्गारी विभाग में भारतके सीमाके लग स्थित अछि ।

राक्षस ताल लगभग २२५ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, ८४ किलोमीटर परिधि तथा १५० फिट गहिराई में फैलल अछि । ऐ झील के तट राक्षससभ के राजा रावण एते आराध्य देव शिव के आराधना केने छल । एहि लेल एकरा राक्षस ताल वा रावण ताल कहल जाएत अछि । एक छोट नदी गंगा-चू दुनू झीलसभके जोडएत अछि ।

राक्षस ताल द इ आस्था अछि कि एहि ताल रावण सँ सम्बन्धित अछि, जाहि कारणवश एकरा रावणताल कहल जाएत अछि । जतेक मानसरोवरके पानि मीठ होएत अछि, वोते राक्षसताल के नूनगर होएत अछि ।




#Article 165: हनुमाननगर (215 words)


हनुमाननगर सप्तरी जिल्लाकऽ एक गाविस छी । 

सप्तरी जिल्लाकऽ सब सँ बेसी पुराण सहर हनुमाननगर छी । एक्कर नामाकंन एहिठामकऽ हनुमान जि के मूर्ति रहलाहके कारणे हनुमाननगर भेल से सहजे अनुमान होइत अछि । ई सगरमाथा अञ्चलके सदरमुकाम आ सप्तरीके सदरमुकाम सेहो छल । भारत कऽ स्वतन्त्रता सेनानी के सेहो एहिठाम केद केने छल । तकर उपरान्त एहिठाम क जनता केद तोडा क भागै मे हिन्कर साथ देलक । हनुमाननगरके कछेरमे कोशी नदी बहैत अछि । तकर बाद कोशी नदी मे बाढिके प्रभाव अजगुते बढ लाग्ल ।तत्कालीन शासक वर्गद्धारा सदरमुकाम घुसका'वाक निर्णय केल गेल ।फलस्वरुप सदरमुकाम राजविराज छलि गेल ।अखन राजविराज से १२ कि मि पूर्व मे पडैत अछि ।
आ महेन्द्र राजमार्ग सँ ६ कि मि दक्षिण अछि ।हनुमान जि के मूर्तिके कारणे इ गाम चर्चित अछि ।अखन कत एह मूर्ति बरण क्यो पुर्णरुपेण नहि केने अछि ।
विश्वके अति कमे ठाममे इ मूर्ति पावल जाइत अछि ।

बि सँ २०६८ अनुसार एहि ठामकऽ कूल जनसंख्या ६,२७५ रहल अछि । जहिमें पुरुष ३,१८५ आर महिला ३,०९० अछि ।
एहि ठाम यादब, अमात, ब्राहमण, मडण्ल, हलुवाई, खतबे, डोम, पण्डित, मुखिया, कोरि, बनियाँ, सोनार , आदी मधेशी समुदाय बसोबास करैत अछि ।
हिन्दु ,मुस्लीम, जैन धर्म अछि ।

सन्दर्भ पोथी

१.सप्तरीको राजनितिक तथा केहि धार्मिक स्थल ईतिहास(प्रा. हरिकान्तलाल दास)

२.नगरपालिका राजबिराज

३.वैराग देखि बचाव सम्म(डा.सिके राउत)




#Article 166: श्री देवी (426 words)


श्रीदेवी कपूर (जन्म १३ अक्टुबर १९६३ - २४ फरवरी २०१८) श्री अम्मा याङ्गर अय्यपण, एक भारतीय अभिनेत्री आ चलचित्र निर्माता छल, जे तमिल, तेलुगु, हिन्दी, मलयालम, आ कन्नड चलचित्रसभमे अभिनय केनए छल। हिन्दी सिनेमाक पहिल महिला सुपर स्टारक रूपमे मानल जाइत अछि, हुनका पाँचटा फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्तकर्ता छल । सन् १९८० आ १९९० कऽ दशकमे श्रीदेवी सभसँ अधिक भुक्तान लेनिहार अभिनेतासभमे सँ अग्र स्थान प्राप्त केनए छल आ ई युगक सभसँ लोकप्रिय भारतीय अभिनेत्री मानल जाइत अछि ।

श्रीदेवी चारि सालक उमरमे एम. ए. थिरुमुगमक १९६९ कs भक्ति चलचित्र थुनीवनमे बाल कलाकारक रूपमे अपन करियर शुरू केलक, आ तमिल, तेलगु, मलयालम आ कन्नड़ चलचित्रसभमे बाल कलाकारक रूपमे काज केनाए जारी राखने छल । ओ जुलीमे एक बाल कलाकारक रूपमे अपन बलिउडमे अभिनयक शुरुवात केलक आ तमिल चलचित्र मोन्द्री मुदिच्छू (१९७६) के संग १३ वरिषक उमरमे अपन पहिल वयस्क भूमिका निर्वाह केनए छल । श्रीदेवी १६ भेटिनील (१९७७), सिगमू रोजक्कल (१९७८), वरुमेयिन निर्राम शिवप्पा (१९८०), मेन्दम कोकीला (१९८१), प्रेमभास्शेम (१९८१), मून्द्राममे प्रमुख भूमिकासभक साथ तमिल आ तेलुगु सिनेमाक अग्रणी अभिनेत्रीक रूपमे स्वयम् के स्थापित केलक । पिराई (१९८२), आखरी पोरटम (१९८८), जगदेका वीरडू अतिकोका सुन्दरी (१९९०) आ क्षन कसनम (१९९१)।

हिन्दी सिनेमामे श्रीदेवीद्वारा पहिल अभिनीत भूमिका १९७९ के नाटक चलचित्र सोल्वा सावन के साथ आएल आ १९८३ के प्रोडक्शन हिम्मतावाला के साथ बहुतरास ध्यान आकर्षित केलक। ओ मवाली (१९८३), तोहफा (१९८४), नयाँ कदम (१९८४), मक्काद (१९८४), मास्टरजी (१९८५), नजराना (१९८७), श्री भारत (१९८७) सहित अनेकौं सफल व्यावसायिक चलचित्रसभमे शामिल भेल। , वक्ता की आवाज (१९८८) आ चान्दनी (१९८९)। ओ १९९३ मे सद्मा (१९८३), नगीना (१९८६), चालबाज (१९८९), लम्हे (१९९१), खुदा गवाह (१९९२), गुमराह (१९९३), लाडला (१९९४) आ जुदाई (१९९७) जेहन चलचित्रसभक प्रशंसा केलक। टेलिभिजन सिटकम मालिनी अय्यर (२००४-२००५) मे नामाङ्कित नायक के भूमिका के बाद, श्रीदेवी २०१२ मे सफल कमेडी-ड्रामा ईङ्गलिश विङ्ग्लिश के साथ अभिनयमे फेरसँ आएल। ओ २०१७ के थ्रिलर माँ मे अपन ३००हम चलचित्र के भूमिकामे अभिनय केनए छल। ओ दुनु ही चलचित्रसभमे हुनकर प्रदर्शन के लेल आलोचकसभक प्रशंसा केनए छल।

२०१३ मे, भारत सरकार मनोरञ्जन उद्योगमे हुनकर योगदान के लेल देश के चौथा उच्चतम नागरिक सम्मान पद्म श्री सँ श्रीदेवी के सम्मानित केनए छल। तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश आ केरल राज्य सरकारद्वारा हुनका सम्मानित पुरस्कार सेहो प्रदान कएल गेल। भारतीय सिनेमाक शताब्दीक अवसर पर २०१३ मे आयोजित सिएनएन-आइबिएन राष्ट्रिय सर्वेक्षणमे श्रीदेवीक '१०० सालमे भारतक सभसँ पैग अभिनेत्री' मत देल गेल छल। ओ चलचित्र निर्माता बोनी कपूरसँ विवाह केनए छल, जकर साथ हुनका दुईटा सन्तान छल। फरवरी २०१८ मे श्रीदेवीक पानिमे डुबएसँ मृत्यु भऽ गेल। दुबई पुलिसद्वारा जारी फोरेन्सिक रिपोर्टक अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त डूबैत काल श्रीदेवीक निधन तथा मदिराक निशान हुनकर शरीर आ हुनकर कलेजामे पाएल गेल।




#Article 167: सामन्था अक्किनेनी (488 words)


सामन्था अक्किनेनी () (जन्म:२८ अप्रैल १९८७) एक भारतीय अभिनेत्री तथा मोडल छी। अक्किनेनीकेँ तेलुगु आ तमिल चलचित्र उद्योगमे स्थापित करियर अछि आ ओ एखन धरि ४ टा फिल्मफेयर अवार्ड जीत चुकल अछि। 

सामन्थाक जन्म तमिलनाडु राज्यक चेन्नईमे तेलुगु आ मलयाली परिवारमे भेल छल। ओ व्यवस्थापन विषयमे स्नातक करि छोट मोट मोडलिङ क्षेत्रमे सक्रिय भेल छल। हुनका जल्दिए चलचित्रमे काज करवाक मौका मिलल आ ओ अपन चलचित्र करियरक सुरुवात गौतम मेननक समीक्षकद्वारा प्रशंसित तेलुगु प्रेममिलन पर आधारित चलचित्र ये माया चेसाव (२०१०) सँ केनए छल। ई चलचित्रक लेल हुनका फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री-दक्षिण पुरस्कार आ नन्दी अवार्ड प्राप्त भेल छल।  निथाने एन पुनवसन्तम (२०१२) आ इगा (२०१२) नामक चलचित्रमे दमदार अभिनयक लेल सामन्था एके वर्ष फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ तमिल अभिनेत्री आ फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ तेलुगु अभिनेत्रीक पुरस्कार जीतऽमे सफल भेल छल। दुनू पुरस्कार एके वर्ष जीतै वाली ओ इतिहासक दोसर अभिनेत्री बनल। सामन्थासँ पहिने ई कारनामा रेवती केनए छल। सन् २०१२ मे मिलल अपार सफलताक बाद सामन्था अभिनेता केन्द्रित चलचित्रमे मुख्य महिला कलाकारक रूपमे प्रस्तुत भेल। तेलुगु चलचित्र डोकुडु (२०११), पारवारिक नाट्य चलचित्र सितम्मा वकिट्लो सीरीमल्ले चेट्टु (२०१२), आ तमिल चलचित्र कठ्ठी (२०१४) थेरी (२०१६) आ २४ बक्स अफिसमे बढ़िया साबित भेल छल।

सन् १९८७ मे जन्म भेल सामन्थाक माता मलयाली आ पिता तेलुगु छी । सामन्था अपन वाल्यकाल भारतीय राज्य तमिलनाडुक चेन्नईमे बितौने छल। दुई भाए आ १ बहीनक परिवारमे ओ सभ सँ छोट सन्तान छी। सामन्था सँ पैग जोनाथन आ डेभिड नामक दुई भाए अछि। ओ तमिल भाषा बाजऽमे प्रवीण अछि। मिश्रित क्षेत्रीय परिवार सँ जुड़ल भेला बादो सामन्था अपना आपकेँ तमिल मानैत अछि कियाकी ओ घरमे तमिल आ अङ्ग्रेजी बाजैत पैग भेल । सामन्था अपन प्रारम्भिक शिक्षा होली एन्जेल्स एङ्लो इन्डियन उच्च माध्यमिक विद्यालय सँ केलक आ वाणिज्य सङ्कायमे स्टेला मेरिस कलेज, चेन्नई सँ स्नातकधरिक शिक्षा प्राप्त केलक। स्नातोकोतर शिक्षाक अन्त्य दिस ओ मोडलिङ क्षेत्रमे प्रवेश केलक आ नायडु चलचित्र घर सङ्गे काज करऽलेल आरम्भ केलक जखन सामन्थाकेँ रवि वर्मन अङ्कित केनए छल।

सन् २०१२ मे सामन्था बहुत समयधरि रोग सँ ग्रस्त रहल, जहिकारण ओ पैग चलचित्रसभ सँ बाहर भेल आ २ महिनाक लेल अभिनय सँ छुट्टी लेलक। रोग प्रतिरोधात्मक क्षमतामे कमी आ एन्टिबायोटिक्सद्वारा शरीरमे कमजोरी सँ ओ प्रभावित भेल छल। सन् २०१५ मे ओ अभिनेता नागा चैतन्य सँ भेटघाट आरम्भ केलक आ सन् २०१७ जनवरीमे ई दुनू जोड़ी हैदराबादमे एक समारोहक बीच बन्धनमे बधि गेल। गोवामे रहल समुद्री तटमे ई दुनू जोड़ी ६ अक्टुबरक दिन विवाह करि लेलक। परम्परागत हिन्दू/तेलुगु रीतिरिवाजमे ई दुनू ६ अक्टुबरक दिन विवाह केलक आ ८ अक्टुबरक दिन एकटा क्रिश्चियन चर्चमे विवाह समारोह सम्पन्न भेल।

सामन्था सक्रिय रूप सँ परोपकारी गतिविधिसभमे शामिल होएत अछि। सन् २०१२ मे पञ्जीकृत कएल गेल हुनकर परोपकारी संस्था प्रत्युषा सपोर्टमे ओ विज्ञापन, उत्पादन विमोचन आ उद्घाटन कार्यक्रम सँ होमएवला कमाई दान करैत अछि। सन् २०१२ मे अपन बीमारीक दौरान १५ दिन ग्रस्त भेलाक बाद एहन रोग सँ पीडित लोकसभक लेल एकटा गैर-सरकारी सङ्गठन शुरू केलक। सन् २०१३ अगस्तमे ओ अपन फाउन्डेसनके चर्चित बनेबाक लेल एक अनुदान जमा करवाक लेल अपन व्यक्तिगत वस्तु आ कयन यादगार वस्तुकेँ निलामी केनए छल।




#Article 168: चलचित्र (192 words)


चलचित्र, सिनेमा वा फिल्म एक प्रकारक सञ्चार माध्यम छी जहि में चलैवाला चित्र आर आवाजक प्रयोग करि कथाके प्रस्तुत केल जाएत अछि । संसारभरिक लोगसभ मनोरञ्जनक लेल चलचित्र देखैत अछि । प्राय चलचित्रसभ एना बनाएल जाएत अछि कि बड्का पर्दा भेल सिनेमाघर वा चलचित्र भवनमें देखाएल जा सकै ।

१९औं शताब्दीसँ ग्रीक चलचित्रक निर्माणक लेल बहुत रास अनुसन्धान भेला बादो चलचित्रक शुरुवात सन् १९९५में फ्रान्ससँ भेल । जेकर निर्माण अगस्ट लुमिएर आर लुई लुमिएर नाम करल दुई फ्रान्सेली भैयाँ केलक । सन् १८२४में पिट् मार्क रोगट फोटोसभ के जल्दी-जल्दी घुमेला सँ वास्तवमें चलभ्रम द सकैत अछि कहि धारणा देलाक बाद चलचित्रक बारेमें सोच आ काम सुरू भेल । सन् १८९५में एहि सिद्धान्तमें आधारित रहि लुमियर भैयाँ एकटा कारखानाक तस्वीरसभ खिच 'मूभिङ इमेज'क रूपमें प्रस्तुत केलक । शुरूमें एहि चलचित्रमें ध्वनि नै हैत छल । and its sexist treatment of women.name=thewrap.com१९२७में बनल द ज्याज सिङ्गर ध्वनिसहितक पहिलो चलचित्र बनल । एहिसँ पहिले सन् १९१३में भारतमें दादा साहेब फाल्के राजा हरिश्चन्द्र नामक ध्वनिरहित चलचित्र बना एसियामें चलचित्र सम्बन्धी उत्सुकता बढा चुकने छल ।

नेपाली भाषामें विसं २००६में मात्र चलचित्र बनल, नेपाली भाषी चलचित्रक परिचय कराबै के श्रेय तत्कालिन प्रधानमन्त्री देव शमसेरके जाएत अछि ।




#Article 169: सुनिता विलियम्स (298 words)


सुनिता विलियम्स () के जन्म १९५ सेप्टेम्बर, १९६५ अमेरिकाके ओहायो राज्यमे भेल छेल। वो अमेरिकी अन्तरिक्ष एजेन्सी नासाक माध्यमसँ अन्तरिक्षमें जाए वाला भारतीय मूलक दोसर महिला छी । वो भारतक गुजरात राज्यक अहमदाबादसं सम्बन्ध अछ । वो एक महिला अन्तरिक्ष यात्रीके रूपमें १९५ दिनधरि अन्तरिक्षमें बैसे वाला विश्व किर्तिमान स्थापित केनेए अछि । वोकर पिताजी अमेरिकामें डाक्टर पेशामें अछि ।

सुनीता लिन पांड्या विलियम्स क जन्म १९ सितम्बर १९६५ म अमेरिकाक ओहियो राज्य म यूक्लिड नगर (स्थित क्लीवलैंड) म भेल छल। मैसाचुसेट्स स हाई स्कूल पास केलाक  बाद १९८७] म वो संयुक्त राष्ट्र क नौसैनिक अकादमी स फिजिकल साइन्स म बीएस (स्नातक उपाधि) क परीक्षा उत्तीर्ण केलक । तत्पश्चात १९९५ म वो फ़्लोरिडा इंस्टिट्यूट ऑफ़ टैक्नोलॉजी स इंजीनियरिंग मैनेजमेंट म एम.एस. क उपाधि हासिल केलक। उन्कर  पिता डॉ॰ दीपक एन. पांड्या एकटा तंत्रिका विज्ञानी (एम.डी) छि, जिनका संबंध भारत क गुजरात राज्य सं अछि। उनकर माता बॉनी जालोकर पांड्या स्लोवेनिया क छि। उनका एक बड़ा भाई जय थॉमस पांड्या और एक बड़ी बहन डायना एन, पांड्या अछि। जब वो एक वर्ष से भी कम उमेर छल तखनपिता१९५८ म अहमदाबाद सं अमेरिका क बोस्टन म बसोबास कएल। हालाँकि बच्चा अपन दादा-दादी,बहुत चाचा-चाची आर चचेरे भाई-बहन क छो़ड़ क ज्यादा खुश नै छल  ,मुदापरिवार  पिता दीपक क हुंकर चिकित्सा पेशा स प्रोत्साहित भेल।

जून १९९८ म उनका अमेरिका क अंतरिक्ष एजेंसी नासा म चयन भेल आर प्रशिक्षण शुरू केलक। सुनीता भारतीय मूल क दोसर महिला छि जे  अमरीका क अंतरिक्ष मिशन पर गेल अछी । सुनीता विलियम्स  सितंबर / अक्टूबर २००७ म भारतक दौरा सेहो केनेए छल। जून,१९९८ स नासा स जुड़ल सुनीता अखन तक कुल ३० अलग-अलग अंतरिक्ष यानों म २७७० बेर उड़ान केनेए अछि। साथ ही सुनीता सोसाइटी ऑफ एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलेट्स, सोसाइटी ऑफ फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर्स आर अमेरिकी हैलिकॉप्टर एसोसिएशन जैसी संस्था सं सहो जुडल अछि ।




#Article 170: सेलिना जेटली (162 words)


सेलिना जेटली() (जन्म: २४ नवम्बर, १९८१) एक भारतीय अभिनेत्री, मोडल आ मिस इन्डिया विजेता छी। सेलिना सन् २००१ मे फेमिना मिस इन्डिया कऽ उपाधि जितने छल।

जेटलीक जन्म काबुल, अफगानिस्तानमे भेल छल। हुनकर पिता भारतीय पञ्जाबी आ माता अफगानी छी। हिनकर पिता भिके जेटली भारतीय सेनाक एक सेवानिवृत्त कर्नल छी आ माता मीता एक अफगान हिन्दू भारतीय सेनामे एक नर्स आ सङ्गे पूर्व अफगान सुन्दरी छल। सेलिनाक एक भाई अछि जे भारतीय सेनामे सेवारत अछि।

सेलिना लखनऊ सहित कयन भारतीय नगरसभमे अपन वाल्यकाल व्यतित केनए छल जतय ओ नगरकें मोन्टेसरी विद्यालयमे अध्ययन केनए छल। ओ बहरामपुर, ओडिसामे सेहो अध्ययन केनए छल जखन हिनकर पिताकें सेनाद्वारा एतय तैनात कएल गेल छल। भारतमे अपन सभ सँ अधिक समय कोलकातामे बितेनाए छल। ओ धर्म सँ एक हिन्दू छी। छोटमे ओ भारतीय सेनामे भर्ति होमए लेल चाहैत छल, या तँ एक चिकित्सक या एक पायलटक रूपमे अपना आपकें देखऽ लेल चाहैत छल। ओ इन्दिरा गान्धी राष्ट्रिय मुक्त विश्वविद्यालय सँ वाणिज्य सङ्कायमे स्नातकक शिक्षा प्राप्त केनए अछि।




#Article 171: अनुष्का शर्मा (114 words)


अनुष्का शर्मा () भारतीय चलचित्र क्षेत्रके एक प्रसिद्ध अभिनेत्री तथा मोडल छि। ओ मोडलिङसँ अपन करियरक सुरूवात केनए छल । ओ अपन अभिनयक आदित्य चोपडाद्वारा निर्देशित हिन्दी चलचित्र रब ने बना दी जोडी सँ केनए छल । 

शर्माक जन्म मई १, १९८८ मे उत्तर प्रदेशमे भएल छल । अनुष्काक पिता अजय कुमार शर्मा एक आर्मी अफसर छल आर माँ आशिमा शर्मा एक गृहणी छल । अनुष्काक एक भाई अछि, कारनेश । अनुष्का अपन प्रारम्भिक शिक्षा आर्मी विद्यालयसँ केल्हिन आ स्नातक तह माउन्ट कारमेल कलेजसँ करने छल ।

अनुष्का अपन अभिनय जीवनक सुरुवात निर्देशक आदित्य चोपरा निर्देशित २०१० क हिन्दी चलचित्र रब ने बना दी जोडी सँ तानी सहानी नामक पात्रक भूमिकासँ केनए छल ।




#Article 172: कृति सेनन (293 words)


कृति सेनन (जन्म २७ जुलाई १९९०) एक भारतीय मोडल तथा अभिनेत्री छी । ओ मोडलिङसँ अपन करियरक सुरूवात केनए छल । ओ अपन अभिनयक पदार्पण सुकुमारद्वारा निर्देशित तेलुगु चलचित्र १:नेनोककाडीन सँ केनए छल । कृतिक पहिल बलिउड चलचित्र सब्बिर खान निर्देशित हिरोपन्ती छल जे कृतिक फिल्मफेयर उत्कृष्ट महिला पदार्पणकक उपाधि दिलाएने छल ।

सेननक जन्म २७ जुलाई १९९० मे नयाँ दिल्लीमे भएल छल । कृतिक पिता राहुल सेनन एक चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट छल आर माँ गीता सेनन दिल्ली विश्वविद्यालयक सहायक प्रोफेसर छल ।  कृतिक एक बहिन अछि, नुपुर । सेनन अपन प्रारम्भिक शिक्षा दिल्ली पब्लिक स्कुलसँ केल्हिन आ स्नातक तह जेपी प्राविधिक संस्थानसँ करने छल ।

सेनन अपन अभिनय जीवनक सुरुवात निर्देशक सुकुमारद्वारा निर्देशित २०१४ क मनोवैज्ञानिक थ्रिलर तेलुगु चलचित्र १:नेनोककाडीन सँ समीरा नामक पात्रक भूमिकासँ केनए छल । ई चलचित्रक विश्लेषकसभद्वारा मिश्रित प्रतिक्रिया प्राप्त केनए छल ।द टाइम्स अफ इन्डिया क विश्लेषक सेननक अभिनय भूमिका आ सुन्दरताक बढिया आकलन केनए छल । तहिने सिफी.कम सेननक सुन्दरताक सराहना केनए छल आ साथे भूमिकाक बढिया बतेनै छल ।

पाछा वोहि वर्ष, सेनन हिन्दी चलचित्रमे सब्बिर खानक आक्रामक रोमान्टिक चलचित्र हिरोपन्तीसँ पदार्पण कएलक । चलचित्र बहुतेक विश्लेषकसभद्वारा मिश्रित प्रतिक्रिया पावने छल आ बक्सअफिसइन्डिया एकरा भारतीय बक्स अफिसमे व्यावसायिक सफल कहलक ।बलिउड हङ्गामाक तरण आदर्श सेननक सुन्दरता आ चलचित्रमे अभिनयक बढिया कहने छल ।द टाइम्स अफ इन्डियाक सृजना दास,  कृतिक अभिनयक औषत बतेलक । ई चलचित्रमे उत्कृष्ट अभिनयक लेल कृति फिल्मफेयर उत्कृष्ट नयाँ महिला कलाकारक लेल पुरस्कार जित्ने छल । 

कृतिक दोसर तेलुगु चलचित्र सुधिर वर्माद्वारा निर्देशित २०१४ क दोहचे छल ।

अभिनय वाहेक कृति भिन्न भिन्न ब्रान्ड आ उत्पादनक लेल राजदूत भ चुकल अछि जेना टाइटन घडी- रागा कलेक्सन, पारासुट, अमेरिकन स्वान  आर कोला प्रायोजन करैत अछि । 

कृतिक सबसँ नव प्रदर्शित चलचित्र रोहित शेट्टीक दिलवाले छी जहिमे ओ वरुण धवनक विपरित अभिनय केनए अछि ।




#Article 173: तृषा (अभिनेत्री) (127 words)


तृषा कृष्णन (जन्म ४ मई १९८३), अपन सुरुवाती नाम तृषा, एक भारतीय चलचित्र अभिनेत्री आ मोडल छी जे मुख्य रुप सँ दक्षिण भारतीय सिनेमामे काज करैत अछि। ओ दक्षिण भारतीय चलचित्र उद्योगमे अपना आपकें मुख्य अभिनेत्रीकें रुपमे स्थापित करि लेनए अछि। विभिन्न सौन्दर्य प्रतियोगितासभ जेना मिस मद्रास प्रतियोगिता (१९९९) जितलाक बाद हिनका पहिचान कएल गेल आ चलचित्र क्षेत्रमे प्रवेश करवाक द्वार खोजल गेल छल।

सन् १९९९ मे प्रदर्शित तमिल चलचित्र जोड़ी सँ सहायक भूमिकामे अभिनय केलाक बाद, तृषा सन् २००२ मे चलचित्र मौनम पेसियाडेमे मुख्य भूमिका निर्वाह केनए छल। बादमे ओ व्यापारिक रुप सँ सफल चलचित्रसभमे काज करि चर्चा बटोरनाए आरम्भ केलक जहिमे तमिल सिनेमा सामी (२००३) आ घिल्ली (२००४) आ तेलुगु सिनेमा वर्शम (२००४),जकर लेल हिनका अपन पहिल फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री दक्षिण पुरस्कार प्राप्त भेल छल। 




#Article 174: प्रियङ्का चोपड़ा (122 words)


प्रियङ्का चोपड़ा (जन्म: १८ जुलाई, १९८२) भारतीय चलचित्र क्षेत्रक एक बहुप्रसिद्ध अभिनेत्री छी।

प्रियङ्का चोपड़ाक जन्म १८ जुलाई १९८२ कऽ भेल छल । ओ एक भारतीय चलचित्र अभिनेत्री, गायक आ सन् २००० कऽ मिस वर्ल्ड प्रतियोगिताक विजेता छी। हुनकर सफल करियरक माध्यम सँ, चोपड़ा बलिउड चलचित्र उद्योगक सभ सँ बेसी पैसा लेनिहार अभिनेत्रीसभमे सँ एक छी आ भारतमे सभ सँ लोकप्रिय व्यक्तिसभमे सँ एक बनि गेल अछि। हुनका एक सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्रीक राष्ट्रिय चलचित्र पुरस्कार आ चारि विधासभमे फिल्मफेयर पुरस्कारक सहित बहुतो पुरस्कार आ नामाङ्कन प्राप्त केनए अछि।

प्रियङ्काक जन्म जमशेदपुरमे भेल छल। मुदा ओ बरेलीक अपन असल घर समझति अछि। हुनकर माता-पिता भारतीय सेनामे चिकित्सक छल। सन् २००० मे एक किशोरीक रूपमे ओ अमेरिकामे अपन चाचीक सङ्ग किछ वर्ष धरि रहल छल। 




#Article 175: गायन (220 words)


गायन एक एहन क्रिया छी जहि में स्वरक सहायतासँ संगीतमय ध्वनि उत्पन्न केल जाएत अछि आर जे सामान्य बोलचालक गुणवत्ताके राग आर ताल दुनुके प्रयोगसँ बढाबएत अछि । जे व्यक्ति गाबैत अछि वो गायक, गायिका आ गवैया कहाबैत अछि । गायक गीत गाबैत अछि जे एकल भऽ सकैत अछि यानी बिना कोनो आर साज या संगीतक सँग वा फेर संगीतज्ञसभ आ एक साजसँ ल पुरा आर्केस्ट्रा वा बड्का ब्याण्डक सँग गाबल जा सकएत अछि । गायन प्राय अन्य सङ्गीतकारसभक समूहमें केल जाएत अछि, जेना भिन्न प्रकारक स्वर भेल बहुतेक गायक, गायिकासभके सँग या भिन्न प्रकारक साज बजाबै वाला कलाकारसभके सँग, जेना कोनो रक समूह या बैरोक सङ्गठनके सँग गाबल जा सकएत अछि । प्रत्येक वो व्यक्ति जे बोएल सकएत अछि वो गाएब सकएत अछि, कियाकि गायन बोलीके एक परिष्कृत रूप छी ।

गायन अनौपचारिक भऽ सकएत अछि आर संतोष वा खुशीके लेल केल जा सकएत अछि, जेना नहाबैत समय वा कैराओकेमें वा इ बहुत औपचारिक भऽ सकएत अछि जेना कोनो धार्मिक अनुष्ठानके समय वा मञ्चपर वा रिकार्डिङ्गके स्टुडियोमें पेशेवर गायनक समय । पैग दर्जाके पेशेवर वा नौसीखिया गायनके लेल सामान्यतः निर्देशन आर नियमित अभ्यास आवश्यकता होएत अछि। पेशेवर गायक सामान्यतः कोनो एक प्रकारक सङ्गीतमें अपन पेशाक निर्माण करएत अछि जेना शास्त्रीय या रक आर आदर्श रूपसँ वो अपने पूरा करियरक समय कोनो स्वर-अध्यापक या स्वर-प्रशिक्षकक सहायतासँ स्वर-प्रशिक्षण लैत अछि ।




#Article 176: इलाम नगरपालिका (128 words)


इलाम नगरपालिका () नेपालक मेची अञ्चलक इलाम जिलामे अवस्थित एक नगरपालिका छी । नेपालक पूर्वाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गतक मेची अञ्चलमे रहल इलाम जिलाक निर्वाचन क्षेत्र नं. ३ कऽ पहाडी भेगमे स्थापित इलाम नगरपालिका बि.सं. १८७५ मे सदरमुकाम तथा गौडा होइत बि.सं. २०१५ मे नगरपालिका, बि.सं. २०१९ नगर पञ्चायत आ बि.सं. २०४७ मे पुनः नगरपालिका कऽ रुपमे कायम भेल अछि । इलाम नगरपालिकाक वार्ड बिभाजन १ सँ ९ धरि अछि । इलाम नगरपालिका एकटा पर्यटकीय नगरक रूपमे विकसित कएल गेल अछि आ भविष्यमे प्रदेश नं. १क सङ्घीय राज्यक राजधानीक रूपमा प्रस्तावित नगर छी । ई क्षेत्रमे पर्यटकीय पूर्वाधारक लेल विमानस्थल, जैविक विविधता युक्त विभिन्न पर्यटकीय स्थल, सभागृह आ शैक्षिक संस्थासभक व्यवस्थापन कार्य तीब्रतर गतिमे भऽ रहल अछि । 

नेपालक सन् २०११ के जनगणना अनुसार इलाम नगरपालिकाक जनसंख्या १९,४२७ अछि।




#Article 177: गढीमाई (162 words)


गढीमाई मन्दिर नेपालक नारायणी अञ्चल, बारा जिलामे अवस्थित तराई क्षेत्रक प्रसिद्ध शक्तिपीठ अछि । बारा जिलाक सदरमुकाम कलैया नगरपालिकासँ लगभग आठ किलोमिटर पुरब बरियारपुरस्थित गढीमाईक मेला हरेक पाँच-पाँच वर्षमे मार्ग शुक्ल सप्तमीसँ आरम्भ होएत अछि । नेपालक विभिन्न क्षेत्रसँ लाखौँ दर्शनार्थीसभ भिड लागएवाला एहि पीठमे हजारौँ भारतीय दर्शनार्थीसभ सेहो आबएत अछि ।

बरियारपुरक खुल्ला मैदानमे राखल त्रिशूलसँ लोगक शूल रूपी तीन ताप आध्यात्मिक, आदिर्देविक आर आदिभौक्तिक नाश होएत कहल जनविश्वास अछि । त्रिशूल स्थापना भेल दक्षिणदिस हाल देवीक मूर्तिसहित मन्दिर सेहो देखल जा सकएत अछि। मन्दिरसँ पूर्व-दक्षिणदिस पीपलगाछसंगे ब्रहृमाक स्थान सेहो देखै लायक अछि। पूर्वदिस रहल ब्रहृमास्थलसँ मार्ग शुक्ल सप्तमीक दिन सरसफाई लिपपोत करि गढीमाईक स्वागत करएत पाँचदिनधरि पूजा करलाक बाद आनके लेल दर्शन खुला केल जाएत अछि । गढीमाईक पूजारी थारूजातिक अछि । गढीमाईक पूजाआजा करएत काल कङ्कालीमाई, जाखिनमाई, भक्तिमाईक पूजा केल जाएत अछि । अखन गढीमाईक बहिनसभ- कटबासीमाई, ककालीमाई, मनकामना, संसारी, साम्ये, राजदेवी, गढवाडा, जोरलाही, वनशक्ति आदिक सेहो पूजा केल जाएत अछि । 

गढीमाईक अखन पूजारी मगल चौधरि छी ।




#Article 178: भोजपुर नगरपालिका (117 words)


भोजपुर नगरपालिका () नेपालक कोशी अञ्चलक भोजपुर जिलाक एक नगरपालिका छी। भोजपुर नगरपालिका भोजपुर जिलामे अवस्थित नगरपालिका छी । ई नगरपालिका २०६८ साउन १ सँ लागू भऽ बनाइएल अछि। एकरा  नगरपालिका घोषणा करैत खन भोजपुर, बोखिम, टक्सार आ भैसीपंखा गाउँ विकास समितिसभ समावेश कएल गेल अछि। आर्थिक वर्ष २०६८/६९क बजेटमार्फत् मुलुकमे ४१ नयाँ नगरपालिका थपैत खन भोजपुर सेहो  नगरपालिका बनल अछि। 
महानगरपालिका, उपमहानगरपालिका आ नगरपालिका करि अखन मुलुकमे कूल ९९ भेल अछि आ गाविसक संख्या ३ हजार ९ सय १२ सँ घटि ३ हजार ७ सय ५२ भेल अछि।

नेपालक सन् १९९१ के जनगणना अनुसार भोजपुर नगरपालिकाक जनसंख्या ५,८२३ अछि।

निर्वाचन आयोग (नेपाल) द्वारा निर्धारण कएल गेल, जिलागत निर्वाचन क्षेत्र अन्तर्गत  कऽ नक्सा नीचा देल गेल अछि।




#Article 179: जनकपुर उपमहानगरपालिका (443 words)


जनकपुर उपमहानगरपालिका जनकपुर अञ्चलक धनुषा जिलामे अवस्थित अछि।
 जनकपुर उपमहानगरपालिक रूपमे २०७१ साल अगहन १६ गते नगरपालिकासँ उपमहानगरपालिका लेल आवश्यक प्रक्रिया पूरा भेला बाद उपमहानगरपालिका घोषणा भेल। जनकपुरकें उपमहानगरपालिका घोषित करैत काल एहिमे कुर्था, बसबिट्टी, बिन्धी, महुवा प्रको, लोहना, बेंगाशिवपुर, बसहिया, देवपुरा रूपैठा, लक्ष्मीपुरबगेवा, गोपालपुर तथा कनकपट्टी गाविसक समावेस करि एकरा उपमहानगरपालिका घोषणा कएल गेल। ई धनुषा जिलाक सदरमोकाम सेहो छी। एतय नेपालक प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थस्थल जानकी मन्दिर अछि। जनकपुर नगरक मैथिली संस्कृतिक केन्द्र मानल जाइत अछि। जनकपुर वा जनकपुरधाम दक्षिण पूर्व नेपालक जनकपुर अञ्चल अन्तर्गत धनुषा जिलामे अवस्थित अछि। ई सहर नेपालक तराईमे अवस्थित अछि आ एकरा साँस्कृतिक, व्यापारिक तथा राजनैतिक दृष्टिकोणसँ महत्वपूर्ण मानल जाइत अछि।

ई धनुषा जिलाक प्रशासकीय केन्द्र सेहो छी। ई सहरक अनुमानित जनसङ्ख्या १,५३,६१४ अछि।  ई नेपालक राजधानी काठमाडौँसँ १२३ किलोमिटर दक्षिण पूर्वमे अछि

साधु, पण्डित आ राज पुरोहितसभक दस्तावेजसँ पता चलैत अछि की जनकपुरधाम १८हम शताब्दीक शुरुआतमे स्थापित भेल छल । सन् १८०५ मे जनकपुरधाम तीर्थ स्थलक रूपमे रहल विवरण पता चलल छल । पहिने रहल प्राचीन शहरक उपस्थितिक पुरातात्विक प्रमाण नै भेटल अछि । हिन्दू महाकाव्य रामायणक अनुसार, विदेहक राजा जनकक राजमहल आ राजधानी जनकपुरमे अवस्थित छल । कहल जाइत अछि की राजा जनककें हल जोतैत काल एक लड़की भेटल, जकर पुत्री स्विकारि ओकर नाम सीता राखि पालन पोषण कएल गेल । जब ओ पैग भेल, ओ कहल्नि जे हिन्दू भगवान शिवक धनुष जे हजारो वर्षसँ जनकपुरक अगलबगल राखल छल उठबैमे सक्षम होइत ओहि व्यक्तिसँ ओ विवाह करत । कयन शाही राजकुमार ओ धनुष उठबैक कोशिश केलक, मुदा अयोध्याक राजकुमार राम मात्र ओ धनुष उठाए सकल । एक पुरान गीतक अनुसार, ओ धनुष जनकपुरक उत्तर-पूर्वमे भेटल छल ।

सन् १९५० कऽ दशकधरि जनकपुरमे किसान, कारीगर, पुजारी आ देवानसभ ग्रामीण इलाकामे समूह बनाए बसोबास करैत छल, जे मठ आ मन्दिरक लेल काम करैत छल आ भूमि नियन्त्रित करैत छल । भारतमे आजादीक बाद, जनकपुर एक वाणिज्यिक केन्द्रक रूपमे विस्तार भेल आ सन् १९६० कऽ दशकमे धनुषा जिलाक सदरमोकाम बनि गेल ।

हिन्दू धर्ममे राम आ सीताक मुख्य प्रभाव भेलाक कारण, जनकपुर दुनिया भरिमे हिन्दुसभक लेल एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल छी ।

पहिल सहस्राब्दी पाठ कऽ अनुसार शतपथ ब्राह्मण, मैथिल राजा माथव विदेघा अपन पुजारी गोतम राहुगानाक नेतृत्वमे सदानिरा (गण्डकी नदी) कऽ पार करि लेलक आ राजधानी कऽ रूपमे जनकपुरक संग विदेह राज्यक स्थापना केलक । गौतमा राहुगना ऋग्वेदक कयन भजन रचित केनए छल तहि लेल ई घटनासभ पक्का वैदिक सभ्यताक समय भेल होइत ।

बौद्ध धर्मक संस्थापक गौतम बुद्ध आ जैन धर्मक २४हम आ अन्तिम तीर्थङ्कर, वर्धामान महावीर, जनकपुरमे रहैत छल । ई क्षेत्र पहिल सहस्राब्दी कऽ समय मिथिला इतिहासक लेल महत्वपूर्ण केन्द्र छल ।

ठण्डी मौसममे जनकपुरक तापक्रम १०-१८ डिग्री सेन्टिग्रेड होइत अछि तँ गर्मी मौसममे ३०-४२.३ डिग्री सेन्टिग्रेड तापक्रम होइत अछि ।

www.janakpurmun.gov.np जनकपुर उपमहानगरपालिका




#Article 180: विद्या देवी भण्डारी (180 words)


 
विद्या देवी भण्डारी () नेपालक दोसर तथा देशक लोकतान्त्रिक इतिहासमे पहिल महिला राष्ट्रपति छी ।वो भूतपूर्व नेपाली राजनीतिज्ञ तथा नेकपा एमालेक नेता रह चुकल अछि ।
विद्याक ५४९ मेसँ ३२७ भोट प्राप्त कैर कुल बहादुर गुरुङ के हराबैत राष्ट्रपति चुनल गेल । वो नेपाल रक्षा मन्त्रालयमे पूर्व रक्षा मन्त्री भऽ चुकल अछि।

विद्या भण्डारीक जन्म १९ जुन १९६१ के नेपालक भोजपुरमे राम बहादुर पाण्डे आर मिथिला पाण्डेक घर भेल छल । वो कम उम्रमे छात्र राजनीतिमे शामिल भऽ गेल छल । वो अपन समयक एक करिश्माई आर प्रभावशाली नेताक रूपमे विख्यात कम्युनिस्ट नेता मदन भण्डारीक पत्नी छी । मुदा सन् १९९३ मे एक सडक दुर्घटनामे पतिके असामयिक निधनक बाद विद्या सुर्खिमे आएल छल ।

विद्या १९९४ आर १९९९ मे क्रमश: तत्कालीन प्रधानमन्त्री कृष्ण प्रसाद भट्टाराई आर दमनाथ ढुङ्गाना के संसदीय चुनावमे हरेलाक बाद दो बार चुनल गेल । मुदा, २००८ में संविधान सभा चुनावक दौरान हुनका हारक सामना करए पडल । वो माधव कुमार नेपालक नेतृत्वमे रक्षा मन्त्री पदके लेल चुनल गेल छल । सन् २०१३ मे दोसर संविधान सभाक चुनावमे सामानुपातिक चुनाव प्रणाली के तहत वो चुनल गेल ।




#Article 181: गुगल (112 words)


गुगल संयुक्त्त राज्य अमेरिकाक एक बहुराष्ट्रीय सार्वजनिक कम्पनी छी, जे इन्टरनेट सर्च, क्लाउड कम्प्युटिङ आर विज्ञापनक क्षेत्रमा अत्याधिक लगानी केने अछि । इन्टरनेटमे आधारित बहुसङ्ख्यक सेवा तथा उत्पादनसभक आयोजना तथा विकास करि अपन विज्ञापन प्रोग्राम एडवर्ड्सक माध्यमसभ गुगल नाँफा कमाबैत अछि । एहि कम्पनी स्ट्यानफोर्ड विश्वविद्यालयसँ विद्यावारिधी कएल दुई छात्रसभ लेरी पेज आर सर्गेई ब्रिनद्वारा मेन्लो पार्क, क्यालिफोर्निया स्थित सितम्बर ४, १९९८ मे स्थापना केने छल । हाल एहि दुनोके गुगल गाइजक नामसँ सम्बोधन कएल जाएत अछि । एकर पहिल सार्वजनिक कार्य, सेवा १९ अगस्त २००४ मे प्रारम्भ भेल छल । वोहि दिन ल्यारी पेज, सर्गेई ब्रिन आर एरिक स्मिटले गुगलमे अग्ला बिस वर्ष (२०२४) धरि एकैसंग काम करबाक सम्झौता केने छल । 




#Article 182: सानिया मिर्जा (109 words)


सानिया मिर्जा (उर्दू: ثانیہ مرزا, तेलुगु: సాన్యా మీర్జా, जन्म: १५ नवम्बर १९८६, मुम्बई,महाराष्ट्र) भारतक एक टेनिस खेलाडी छी । सन् २००३ सँ २०१३ धरि वो लगातार एक दशकतक महिला टेनिस संघक एकल तथा युगलमे शिर्ष भारतीय खेलाडीक रुपमे अपन स्थान बनाबएमे सफल भेल आर बादमे एकल विधामे वो अपन खेल त्याग करला पश्चात शिर्ष स्थानमे अंकिता रैना आएल । १८ बर्षक उमेरमे विश्वस्तरमे चर्चित भेल एहि खेलाडीक भारत सरकार सन् २००६ मे पद्मश्री पुरस्कारसँ सम्मान केने छल । एहि सम्मान पाबए वाला वो सबसँ कम उमरक खेलाडी छी । मिर्जाक २००६ मे अमेरिकामे विश्व टेनिस खेलक दिग्गज हस्तीसभक बिच मस्ट इम्प्रेसिभ न्यु कमर अवार्ड प्रदान केल गेल छल । 




#Article 183: मस्को (171 words)


मस्को ( or ; ) रसियाक  राजधानी आ यूरोपक सबसँ पैग शहर छी, मस्कोक शहरी क्षेत्र दुनियाक सबसँ पैग शहरी क्षेत्रसभमे गिनल जाएत अछि । मस्को रसियाक राजनैतिक, आर्थिक, धार्मिक, वित्तीय आ शैक्षणिक गतिविधिसभक केन्द्र मानल जाएत अछि । ई मोस्कवा नदीक तट पर बसल अछि । ऐतिहासिक रूपसँ ई पुरान सोभियत सङ्घ आ प्राचीन रसियाली साम्राज्यक राजधानी सेहो रहल अछि । मस्कोक दुनियाक अरबपतिसभक शहर सेहो कहल जाएत अछि जतएक दुनियाक सबसँ बेसी अरबपति बैसल अछि । सन् २००७ मे मस्कोक लगातार दोसर बेर दुनियाक सबसँ महङ्गा सहर सेहो घोषित केल गेल छल । 

मस्को शहरक नाम मोस्कवा नदी पर राखल गेल अछि । सन् १२३७-३८ क आक्रमणक बाद, मङ्गोलसभ पुरा सहर जलाए डेलक आर लोगसभक माएर देलक । मस्को पुन विकास केलक आर सन् १३२७ मे ब्लादिमिर-सुज्दाल रियासतक राजधानी बनाएल गेल । भोल्गा नदीक शुरूवात पर स्थित भेलाक कारण एहि सहर अनुकूल छल आर एहि कारण धीरे धीरे सहर पैग होमए लागल । मस्को एक शान्त आर सम्पन्न रियासत बनि गेल आर समुच्चा रसियाक लोग एतए आबि बैसै लागल।




#Article 184: उदित नारायण झा (128 words)


उदित नारायण झा एक प्रसिद्ध नेपाली पार्श्व गायक छी । वो नेपाली, मैथिली, नेपाल भाषा,  उर्दू, हिन्दी, तमिल, तेलगु, मलयालम, कन्नड, उडिया, आसामी आर सिन्धी भाषासभक चलचित्रमे पार्श्व गायकक रूपमे गीत गाबने अछि । नारायण करीब ३० भाषासभमे १५,००० सँ बेसी गीत गाबने अछि जहिमे २६० चलचित्रसभ मात्र हिन्दीमे अछि ।  वो वर्ष २००१ मे प्रबल गोर्खा दक्षिण बहु नेपालक तत्कालिन राजा श्री ५ बिरेन्द्र बिर बिक्रम शाह देवसँ प्राप्त केने रहा संगे वर्ष २००९ मे भारतक उच्च सम्मान पदक पद्म श्री पुरस्कारसँ सम्मानित भेलेन्हि ।

उदित नारायण झा क जन्म नेपालक सप्तरी जील्लाक भारदह गा.वि.स मे भेल छल ।   हुनकर पिताक नाम हरे कृष्ण झा आ माताक नाम भुवनेश्वरी देवी झा अछि । उदित नारायण आ हुनकर परिवारक मात्री भाषा मैथिली अछि । मधेशी सेहो छी ।




#Article 185: चितवन राष्ट्रिय निकुञ्ज (583 words)


चितवन राष्ट्रिय निकुञ्ज (; पहिने शाही चितवन राष्ट्रिय निकुञ्ज) (चि.रा.नि.) नेपालक सबसँ पहिल तथा सबसँ पुरान राष्ट्रिय निकुञ्ज छी । एकर स्थापना सन् १९७३ मे कएल गेल छल । एहि निकुञ्जकें सन् १९८४ मे विश्व सम्पदा क्षेत्रमे सूचीबद्ध कएल गेल । एकर क्षेत्रफल  अछि । एकर अवस्थिति उचाई निचुलका नदी उपत्यकामे  सँ चुरे पहाड क्षेत्रमे  धरि रहल अछि । चितवन राष्ट्रिय निकुञ्ज नेपालक मध्य तराईमे अवस्थित अछि जे जैविक विविधताक दृष्टिसँ धनिक अछि । एहि निकुञ्जक मुख्य कार्यालय कसरामे अछि । सब प्रकारक प्रशासनिक काजसभ कसरासँ होइत अछि ।

सन् १९५१ धरि चितवन उपत्यकाक तत्कालीन शासकसभ एक आपसमे शिकार खेलैत छल जकर कारण ई खुबे प्रचलित छल । जे बादमे जाए चितवन राष्ट्रिय निकुञ्जक रूप लेलक । चितवन राष्ट्रिय निकुञ्जक मुख्यद्वार नजदिकक शहर भरतपुरसँ १० किलोमिटरक दुरीमे रहल अछि । ई निकुञ्ज भ्रमण करवाक लेल सडकमार्ग होइत भरतपुर भऽ टाँडीसँ भितर होइत जा सकैत अछि तँ भरतपुर विमानस्थलमे दैनिक उड़ान उपलब्ध अछि ।

१९हम शताब्दीधरि जङ्गलक हृदयक रूपमे रहल चितवन राष्ट्रिय निकुञ्जमे जाड़क समयमे नेपालक शासक वर्गसभक मोनपोसन्द शिकार स्थान रहल छल । सन् १९५० धरि नेपालक दक्षिणी क्षेत्रसँ काठमाडौंधरि यात्रा बहुतेक कठिन छल जहि कारण जङ्गलक बाट प्रयोग कएनिहार बटोहीसभ एतय महिनौ शिविर लगाए बाघ, भालु, गैंडा, चितवासभक शिकार करैत छल ।
सन् १९५० मे, चितवनक वन आ घाँसक मैदान मे विस्तार भेल जाहिमे लगभग ८०० टा गैंडाक वासस्थानक रूपमे एकर परिणत कएल गेल । जखन मध्य-पहाडी क्षेत्रसँ गरीब किसान कृषि योग्य भूमिक खोजमे चितवन उपत्यका आएल तखन वनजङ्गल विनास करि ओसभ एतय बस्ती बनौलक आ वन्यजन्तुक चोरी शिकारी व्यापक भेल । सन् १९५७ मे, देशक पहिल संरक्षण व्यवस्था कानूनद्वारा गैंडा आ एकर वासस्थान संरक्षण कारबामे जोड़ देनए छल । सन् १९५९ मे, एडवर्ड प्रिचर्ड जीद्वारा एकटा सर्वेक्षण कएल गेल जहिमे ओ ई क्षेत्रमे रहल उत्तर राप्ती नदी आ दक्षिणमे वन्यजीव बचेबाक दश वर्षक लेल परीक्षण अवधिक लेल सिफारिस केलक । चितवनमे भेल सर्वेक्षणक बाद सन् १९६३ मे ओ जीवजन्तुसभक संरक्षण समाज आ प्रकृति संरक्षणक लेल अन्तर्राष्ट्रिय सङ्घ दुनूकें दक्षिण क्षेत्रकें विस्तार करवाक लेल सिफारिस केलक ।

सन् १९६० कऽ अन्तधरि, ७०% जङ्गलसभकें डिडिटिक प्रयोगसँ खाली बनाए हजारो हजार लोकसभ बसोबास आरम्भ केलक जकर असर निकुञ्जभितर रहि रहल गैंडाक सङ्ख्यामे प्रत्यक्ष रूपसँ देखल गेल आ गैंडाक कूल सङ्ख्या ९५ पहुँचि गेल । गैंडाक सङ्ख्यामे आएल नाटकीय ह्रास आ बृहत चोरी शिकारीक देखैत सरकारद्वारा एक गैंडा पुनरीक्षक समूहक स्थापना कएल गेल जहिमे १३० सशस्त्र जवानसभ आ सुरक्षा केन्द्र सञ्जाल रहल छल जकरा चितवनक सम्पूर्ण स्थानमे गस्ती करै लेल लगाएल गेल छल । गैंडाक शिकार रोकथाम करवाक निमित्त सन् १९७० मे चितवन राष्ट्रिय निकुञ्जके अनङ्कित कएल गेल आ सन् १९७३ मे एकर सुरूवाती रूपमे क क्षेत्र सामिल कएल गेल ।

सन् १९७७ मे, निकुञ्जकें एकर वर्तमान क्षेत्र मे फैलाए कायम कएल गेल । सन् १९९७ मे नारायणी-राप्ती नदी प्रणालीक उत्तर आ पश्चिम तथा निकुञ्जक दक्षिण-पूर्वी सीमाविचमे आ साथे अन्तर्राष्ट्रिय सिमाना भारतबीच एकटा क मध्यवर्ती क्षेत्र जोड़ल गेल छल ।

चितवनमे वर्ष भरि उष्ण प्रदेशीय मनसुन जलवायुसंगे उच्च वर्षा होमए वला ठाम छी । ई क्षेत्र केन्द्रीय हिमाली जलवायुमे अवस्थित भेलाक कारण ई क्षेत्रमे मनसुन मध्य जुन सँ सुरु होइत अछि आ सितम्बरक अन्तमे जाए वर्षामे कमी आबैत अछि । याह १४-१५ सप्ताहक अवधिमे एतय वार्षिक २५०० मिमीसँ बेसी वर्षा होइत अछि । 

ई निकुञ्जमे विशेष करि एक सिङ्घा गैंडा आ बाघक लेल प्रख्यात अछि । ई निकुञ्जमे ४३ प्रजातिक स्तनधारी प्राणी, ४५० प्रजातिक पंक्षी आ ४५ प्रजातिक जलथलचर पाबल जाइत अछि । एतय रहल प्रमुख स्तनधारी प्राणीसभमे मृग, चित्तल, बानर तथा लङ्गुर बानर आदि छी ।

ई निकुञ्जक एक सिङ्घा गैंडाकें द जेफ कोर्विन एक्सपेरिएन्सक दोस्रो संस्करणक ११हम भागमे प्रसारित कएल गेल छल ।




#Article 186: सलमान खान (328 words)


सलमान खान  भारतीय चलचित्र क्षेत्रक बहुप्रसिद्ध अभिनेता छी ।अब्दुल रशीद सलीम सलमान खान एक भारतीय फिल्म अभिनेता, निर्माता, सामयिक गायक आर टेलिभिजन व्यक्तित्व अछि। तीस साल लम्बा चलचित्र क्यारियरमे, खान बहुत पुरस्कार प्राप्त केने छेल, जेमेसे एक फिल्म निर्माताके रूपमा दुई राष्ट्रिय फिल्म पुरस्कार, आर दुई फिल्म फेयर पुरस्कार अभिनयके लागि छेल। उनक एशिया आर भारतीय प्रवासी संसारमे उल्लेखनीय अनुगमन अछि, आर मिडियामे संसार आर भारतीय सिनेमाके सबसे व्यावसायिक रूपमे सफल कलाकारसभके रूपमा उल्लेख करल अछि | फोर्ब्स 2018 के सूचीमे सलमान खान विश्वको शीर्ष-भुक्तान १०० सेलिब्रिटी मनोरन्जनकर्तासभके सूचीमे ३७.७ मिलियन डलर कमाईके ८२ नुम्बर पे छेल | सलमान खान २०१० से रियलिटी शो बिग बॉसके होस्टके नामक सेहो जानल जाइट अछि |

पटकथा लेखक सलीम खानके जेस्ठ बेटा, सलमान खान बिवी हो तो आइसी मे सहयोगी भूमिकासे आपन अभिनय जीवन शुरू करने छेल, साथे मैने प्यार कीया मे मुख्य भूमिका खेल्न छेल । १९९० दशकमे खान बलिउड जारी राइख रोमान्टिक नाटक हम आपके हैं कौन सहित बहुत निर्माणमे भूमिका खेल्न छेल । १९९४ मे एक्शन थ्रिलर करण अर्जुन, १९९९ मे हास्य बीवी नम्बर १, आर पारिवारिक नाटक हम साथ-साथ हैं सेहो खेल्न छेल । २००० दशकमे भेल गिरावटके बाद, खान २००९ मे वान्टेड , दबंग (२०१०), रेडी (२०११), एक था टाइगर (२०१२), किक (२०१४), सुल्तान (२०१६) आर टाइगर जिंदा है (२०१७) जेहेन सफल एक्शन फिल्महसभमे मुख्य भूमिका खेल्के स्टारडम हासिल करने छेल । फोर्ब्स २०१५ मे उनके संसारक शीर्ष-भुक्तान १०० सेलिब्रिटी मनोरन्जनकर्तासभके सूचीमे समावेश करने छेल; खान आर अमिताभ बच्चन दुनो सूचीमे ३३.५ मिलियन डलर कमायीके साथ ७१ नुम्बरपे छेल |

आपन अभिनय जीवनके अतिरिक्त, खान एक टेलिभिजन प्रस्तुतकर्ता छि आर उनक परोपकारी संस्था बीइंग ह्युमन फाउन्डेशन मार्फत मानवीय कारणसभके बढावा सेहो दइत अछि।  खानक अफ पर्दा जीवन विवाद आर कानुनी समस्यासभसे मार्ड छि । २०१५ मे उनके एउटा लापरवाह ड्राइभि केसके लागि अपराधी हत्याके अभियोगमे दोषी ठहराइल छेलै आर २०१८ मे उनक ब्ल्याकबच शिकार केसमा दोषी ठहराइल छेलै आर पाच सालके जेल सजाय सुनाने छेलै | अपिलके सुनुवाइ भया रहल बखत उ जमानतमे बाहर अछि ।




#Article 187: सगरमाथा राष्ट्रिय निकुञ्ज (114 words)


सगरमाथा राष्ट्रिय निकुञ्ज पूर्वी नेपालक सोलुखुम्बु जिलाक उत्तरी भागम अछि जे सगरमाथा, ल्होत्से, नुप्त्से, चो यु, आमादब्लम हिमालसभ तथा ई अगलबगल क क्षेत्रक ओगटने अछि । एकर क्षेत्रफल ११४८ वर्ग कि.मि. अछि । ई सन् १९७६ म स्थापना कएल गेल अछि। ई निकुञ्ज क्षेत्रक सन् ११७९ सँ विश्व सम्पदा सूचीम सूचिकृत कएल गेल अछि ।ई निकुञ्ज १८०० मि. सँ ४०४८ मि. तक क उचाईम रहल गेल अछि । एत कस्तुरी मृग पक्षी  पावल जाएत अछि। ई क्षेत्रभितर बसोबास करैत लोगसभक सङ्ख्या करिब ३,००० अछि । जै म मुख्य रूपसँ शेर्पा जातीक लोगसभक बसोवास रहल अछि । एतक मुख्य बसोबास क्षेत्रसभ नाम्चे बजार, खुम्जुङ, थामे, थेङ्बोचे, स्याङ्बोचे आदि छि।

ई राष्ट्रिय निकुञ्जक किछ चित्रसभ :-




#Article 188: बर्दिया राष्ट्रिय निकुञ्ज (142 words)


बर्दिया राष्ट्रिय निकुञ्ज नेपालक मध्य तथा सुदूर पच्छिममे अवस्थित अछि । बर्दिया राष्ट्रिय निकुञ्ज करिब ९६८ वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफलमे पसरल अछि । बर्दिया राष्ट्रिय निकुञ्जक प्रमुख कार्यालय ठाकुरद्वारामे अछि, जे पुर्व-पश्चिम राजमार्गक अम्रेनीसँ दक्षिण दिस रास्ता छुट्ल अछि । ई निकुञ्ज नेपालक पश्चिममे कर्णाली नदीक पूर्व दिसक तराइ प्रदेशम अवस्थित अछि । सन् १९६८म शाही शिकार आरक्षक रूपमे स्थापना कएल पशचात सन् १९६७मे करिब ३६८ वर्ग किलोमिटर क्षेत्रफलक उक्त आरक्षणक शाही कर्णाली वन्यजन्तु आरक्षक रूपम घोषणा कएल गेल । बादमे सन् १९८२मे एकरा शाही बर्दिया वन्यजन्तु आरक्ष नामाकरण कएल गेल आर सन् १९८४म पुनः बबई नदी आसपासक क्षेत्रक समटल गेल । सन् १९८८म आएबक बर्दिया राष्ट्रिय निकुञ्जक रूपमे ई क्षेत्रक घोषणा कएल गेल छल । पूर्णरूपमे तराइ क्षेत्रम रहल ई राष्ट्रिय निकुञ्ज स्थापनाक प्रमुख उद्देस्य बाघ तथा एकर शिकारक संरक्षण भेलाक बादो  गेंड़ा, गोहि, सोंसि जेहन आओर लोपोन्मुख जानवरसभ  संरक्षित अछि ।




#Article 189: मकालु-बरूण राष्ट्रिय निकुञ्ज (172 words)


मकालु-बरुण राष्ट्रिय निकुञ्जक स्थापना बि. सं. २०४९ (सन १९९२)मे भेल अछि, जेकर नामाकरण मकालु हिमालक नामसँ कएल गेल अछि । एकर प्रशासनिक तथा ब्यबस्थापनक कार्य नेपाल सरकार, राष्ट्रिय निकुञ्ज तथा वन्यजन्तु संरक्षण विभागसँ होएत अछि तथा सहयोगिक रूपमे द माउन्टेन इन्स्टिच्युटस (संरक्षित क्षेत्र तथा समुदाय विकासक समाहित कराक ल जएवाला नविन संरक्षण नमुना) सेहो कार्य करैत आएल अछि ।

अरुण नदीक अगलबगलक उष्ण जंगलसँ हिमालयक उच्च भाग तक पसरल मकालु-बरुण राष्ट्रिय निकुञ्ज बिश्वक सबसँ उचाई स्थानमे रहल संरक्षीत क्षेत्र छी, जे समुन्द्री सतहसँ ८,००० मिटरक उचाईमे अवस्थित अछि। मकालु-बरुण राष्ट्रिय निकुञ्ज २३,३० वर्ग किलोमिटर क्षेत्रफलमे पसरल अछि । एहि निकुञ्ज भितर मकालु हिमाल (८,४६३ मिटर) बिश्वक पन्ध्रौ उचाई हिमाल, चाम्लाङ्ग हिमाल ( ७,३१९ मिटर) नेपालक चौंथो उचाई हिमाल, बरुन्त्से हिमाल ( ७,१२९ मिटर), मिरा पिक (६,६५४ मिटर) लगायतक हिमालसभ रहल अछि ।

वन्सपतिक अधिक बिभिदताक कारण परिचित एहि मकालु-बरुण राष्ट्रिय निकुञ्जमे २५ प्रजातिक लाली गुराँससभ, ४७ प्रजातिक  तथा ५६ अन्य दुर्लभ प्रजातिक वनस्पतिसभ पावल जाएत अछि । साथे एहि निकुञ्जमे हिम चितुवा, कस्तुरी मृग लगायतक दुर्लभ वन्यजन्तुसभ सेहो पावल जाएत अछि ।




#Article 190: शिवपुरी नागार्जुन राष्ट्रिय निकुञ्ज (638 words)


शिवपुरी नागार्जुन राष्ट्रिय निकुञ्जक स्थापना बि.सं. २०५८ (सन् २००२) सालमे कएल गेल अछि । एहि निकुञ्ज नेपालक मध्य पहाडी क्षेत्र काठमाडौंक उत्तरी किनारमे परैत अछि । एकर क्षेत्रफल १५९ वर्ग कि.मि अछि  (शिवपुरी १४४ व.कि.मी, नागार्जुन १५ व.कि.मी) । ई निकुञ्ज काठमाडौं, नुवाकोट आर सिन्धुपाल्चोकक भुभाग ओगटने अछि । नेपालक मध्यपहाडी क्षेत्रमे अवस्थित पारिस्थितिकीय प्रणालीक प्रतिनिधित्व करएवाला एकमात्र राष्ट्रिय निकुञ्ज छी । काठमाडौंक रत्नपार्कसँ निकुञ्ज मुख्यालय बुढानीलकण्ठ पानिमुहान धरिक  दुरी १२ कि.मि. अछि ।

ई क्षेत्रक संरक्षणक इतिहासक देखलाक बाद सन १९७६ मे जलाधार संरक्षण क्षेत्रक रुपमे शिवपुरी जलाधार संरक्षण वोर्डद्वारा संरक्षण सुरु सन् १९७८ मे शिवपुरी संरक्षित जलाधार क्षेत्र कायम भेल पावल जाएत अछि ।  अहिना सन १९८४ मे शिवपुरी जलाधार तथा वन्यजन्तु आरक्ष घोषणा भेल छल । एहि नामानुसार ई क्षेत्रक आवस्यक संरक्षण तथा व्यवस्थापनक कार्यसभ होएत जाएत ई क्षेत्रक महत्वक आ मूल्याङ्कन करि सन २००२ मे नेपाल सरकारद्वारा शिवपुरी राष्ट्रिय निकुञ्जक रुपमे राजपत्रमे सूचना प्रकाशित भेल छल । नागार्जुन वनक्षेत्र तत्कालिन राजा विरेन्द्रक निजि वनक रुपमे रहल आर राजा विरेन्द्रक वंशनास भेलाक परिवेशमे देशक राजनैतिक परिवर्तन संगे उ वनक्षेत्रक राष्ट्रियकरण करावक हेतु राजनैतिक निर्णयानुसार सन २००९ मे १५ व.कि.मि. क्षेत्रफल ओगटल नागार्जुन वन क्षेत्रक समेत शिवपुरी राष्ट्रिय निकुञजमे गाभि शिवपुरी नागार्जुन राष्ट्रिय निकुञ्ज नामाकरण कएल गेल छल ।

बहुत पहिलेसँ काठमाण्डौ उपत्यकामे ई निकुञ्जक बडका महत्व रहल आएल अछि । काठमाण्डौ उपत्यकामे दैनिक खपत हुए वाला हजार लिटर पियए वाला पानिक मूल स्रोत भेलाक कारणसँ ई निकुञ्जक महत्व इतिहास कालसँ रहल आएल अछि । वि.सं. २०५८ मे काठमाण्डौ, नुवाकोट आ सिन्धुपाल्चोक जिलाक १४४ व.कि.मी भुभाग ओगटल शिवपुरी राष्ट्रिय निकुञ्जक रुपमे ई निकुञ्जक स्थापना कएल गेल छल । तै पश्चात ई निकुञ्जक पुनः वि.सं. २०६५ मे नागार्जुन वन संरक्षण क्षेत्रक काठमाण्डौ आ धादिङमे परएवाला १५ व.कि.मी भूभाग समेट कुल १५९ व.कि.मी मे पसारल गेल छल ।

ई निकुञ्ज समुन्द्र सतहसँ १३५०–२७३२ मिटरक उचाईमे अवस्थित अछि ।  भौगोलिक रुपमे शिवपुरी क्षेत्र २७°४५' सँ २७° ५२' उत्तरी अक्षांस तथा ८५° १६' सँ ८५° ४५'  पूर्वी देशान्तर आर नागार्जुन क्षेत्र २७° ४३' सँ २७°४६' उत्तरी अक्षांस तथा ८५°१३' सँ ८५° १८'  पूर्वी देशान्तर तक पसरल रहल नेपालक मध्य पहाडक प्रतिनिधित्व करवाला ई एक मात्र निकुञ्ज अछि ।

ई निकुञ्जक शिवपुरी क्षेत्र अंर्तगत काठमाण्डौ जिलाक ९५ व. कि. मि. भुभाग, नुवाकोट जिलाक ३६ व. कि. मि. भुभाग आर सिन्धुपाल्चोक जिलाक १३ व. कि. मि. भुभाग समेत कुल १४४ व. कि. मि. भुभाग ओगटने अछि ।
तहिना ई निकुञ्जक नागार्जुन क्षेत्र अंर्तगत काठमाण्डौ जिलाक ७.७ व. कि. मि. भुभाग आर धादिङ जिलाक ७.३ व. कि. मि. भुभाग समेत कुल १५ व. कि. मि. भुभाग ओगटने अछि । अहिना दुनु क्षेत्र समेत ई निकुञ्जक कुल १५९ व. कि. मि भुभाग ओगटने अछि ।

 

पावल जाएत अछि जहिमध्मे ५० प्रजातिक रैथाने वनस्पति पावल जाएत अछी । अहिना करि ई वनक्षेत्रमे १२९ प्रजातिक ढुसी (च्याउ) सेहो पावल जाएत अछी ।

ई निकुञ्जमे २२ टासँ बेसी जाएतक स्तनधारी जानवरसभक वसोबास रहल आएल अछि । जहिमध्य संरक्षित ध्वाँसे चितुवा, चरीबाघ, आसामी बाँदर, सालक जेहन वन्यजन्तु एत पावल जाएत अछि ।
ई निकुञ्जमे करिब ३११ प्रजातिक चिरई चुनमुन तथा पंक्षी पावल जाएत अछि । जहिमध्य १७७ प्रजातिक बसाई सराई करैवाला पंक्षी एत पावल जाएत अछि ।
अहिना करि ई निकुञ्जमे करिब १०२ प्रजाति तितली\पतङ्गसभ सेहो पावल जाएत अछि ।

ई शिवपुरी नागार्जुन राष्ट्रिय निकुञ्जमे विभिन्न प्रकारक धार्मिक आकर्षण आ महत्वक क्षेत्रसभ अछि । बागद्वार, कागेश्वरी, मणिचूड, तारकेश्वर, सुन्दरीमाई, विष्णुपादुका, नागीगुम्बा, पचलीभैरव शान्तिगुफा, 
नागदेवता, जामाचो गुम्वा गणेश मन्दिर आदि एतके प्रसिद्ध धार्मिक सम्पदामे परैत अछि ।

ई शिवपुरी नागार्जुन राष्ट्रिय निकुञ्ज हिन्दु आ बौद्ध धर्मालम्बीसभक सांस्कृतिक संगमस्थल सेहो रहल आएल अछि ।

अधिकार प्राप्त अधिकारीसँ लिखित अनुमति नैल कोनो आदमी राष्ट्रिय निकुञ्ज भितर देहायक काम करि नै पाएब सकैत अछि ।

ई शिवपुरी नागार्जुन राष्ट्रिय निकुञ्ज क्षेत्र भितर गैर कानुनी तरिकासँ वन्यजन्तु मारि, घायल बनाब, खरिद–बिक्री करए वा अन्य संरक्षित वन्यजन्तुक ओसारपोसार आ, खरिद–बिक्री करल पाबल गेलापर निजक रु. ५०,००० (पचास हजार) सँ रु. १००,०००(एक लाख) तकक जरिवाना वा पाँचसँ पन्ध्र वर्षधरि कैद वा दुनो सजाय होएत ।




#Article 191: स्वामी विवेकानन्द (121 words)


 
स्वामी विवेकानन्द (जन्म १२ जनवरी १८६३, जन्मनाम: नरेन्द्रनाथ दत्त ) ओ हिन्दू दर्शनक प्रखर विद्वान् छल । वेदान्त दर्शनक प्रसिद्ध अध्यात्मिक गुरु स्वामीक वास्तविक नाम नरेन्द्रनाथ दत्त छल । ओ अमेरिकामे रहल शिकागोमे आयोजित सन् १८९३ मे भएल विश्व धर्मा सभामे सनातन हिन्दू धर्मक तर्फसँ प्रतिनिधित्व केनए छल । ओ सनातन धर्मक आध्यात्मिकताद्वारा परिपूर्ण वेदान्त दर्शनके पश्चिमी देशमे अपन वक्तृत्वकलाक बलमे पहुँचेने छल । ओ भक्तिक मूर्तिस्वरुप रामकृष्ण परमहंसक सुयोग्य शिष्य छल । ओ अपन गुरुक नामसँ रामकृष्ण मिसन नामक संस्थाक स्थापना केनए छल । जेकर उद्देश्य गरीब अनाथ दीनहीनक निशुल्क उपचार करनाए छल । जे आईओ देश तथा विदेशमे अपन काम करिरहल अछि । ओ अमेरिकामे भएल भाषणक  पहिलो सम्बोधन वाक्यसँ (अमेरिकी भाई तथा बहिनसभ) सभक मन जित्ने छल ।




#Article 192: रामदेव (394 words)


स्वामी रामदेव ()  (जन्म: रामकृष्णा यादव हरियाणा १९६५ मे ) एक विश्व प्रसिद्ध भारतीय योग गुरू छी । रामदेव ठाम-ठाम स्वयं जाक योग-शिविरसभक आयोजन करएत अछि, जहिमे प्राय: सभ सम्प्रदायक लोगसभ आवैत अछि । रामदेव अखनधरि देश-विदेशक करोडो लोगसभके प्रत्यक्ष आ अप्रत्यक्ष रूपसँ योग सिखा चुकल अछि । भारतसँ भ्रष्टाचार मिटावक लेल अभियान प्रारम्भ केलक ।

भारतमे हरियाणा राज्यक महेन्द्रगढ जनपद स्थित अली सैयदपुर नामक गाँममे ११ जनवरी १९७१ के गुलाबो देवी एवं रामनिवास यादव कs घर जन्म लेनिहार रामदेवक वास्तविक नाम रामकृष्ण छल । समीपवर्ती गाँम शहजादपुरक सरकारी स्कूलसँ आठम कक्षा धरि पढाई पुरा करलाक बाद रामकृष्ण खानपुर गाँमके एक गुरुकुलमे आचार्य प्रद्युम्न व योगाचार्य बल्देव जीसँ संस्कृत आ योगक शिक्षा लेलक । योग गुरू बाबा रामदेव युवा अवस्थामे सन्यास लेवाक सङकल्प केलक आ रामकृष्ण, बाबा रामदेवक नयाँ रूपमे लोकप्रिय भs गेल ।

बाबा रामदेव मई  १९९५ मे दिव्य योग मन्दिर ट्रस्टक  स्थापना केलक । २००३ सँ आस्था टीवी पर  सभदीन  भिन्सर  बाबा रामदेवक योग कs कार्यक्रम देखेनाइ   शुरू केलक  जकर  पश्चात  बहुत रास्  समर्थक हुनकासँ जुडल । योगकs जन-जन तक पहुँचाबsमे बाबा रामदेव  महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह केलक, भारत आर विदेशमे हुनकर  योग शिविरमs   आम लोग सहित बहुतो  बडका-बडका हस्तिसभ भाग ल चुकल अछि ।    बाबा रामदेवसँ योग सिखए बलामे सँ अभिनेता अमिताभ बच्चन आ अभिनेत्री शिल्पा शेट्टीक नाम उल्लेखनीय अछि ।   

योग आर आयुर्वेदक बढ़ाबकs लेल बाबा रामदेव पतन्जली योगपीठक स्थापना केलक । ब्रिटेन, अमेरिका, नेपाल, कनाडा आ मारीशसमे सहो पतन्जली योगपीठक दुटा शाखासब अछि पतन्जली योगपीठ-एकटा आर पतन्जली योगपीठ-।

स्वामी रामदेव सन् २००६ मs महर्षि दयानन्द ग्राम हरिद्वारम पतन्जली योगपीठ ट्रस्टके अतिरिक्त अत्याधुनिक औषधि निर्माण इकाई पतन्जली आयुर्वेद लिमिटेड नामसँ दुटा सेवा प्रकल्प स्थापित केलक । इसभ सेवा-प्रकल्पक माध्यमसँ स्वामी रामदेव योग, प्राणायाम, अध्यात्म आदिकs साथ-साथ वैदिक शिक्षा आ आयुर्वेदक सहो प्रचार-प्रसार कs रहल अछि ।
हुनकर प्रवचन विभिन्न टी० वी० चैनलसभ आस्था टीवी, आस्था इण्टरनेशनल, जी-नेटवर्क, सहारा-वन तथा इण्डिया टी०वी० पर प्रसारित होएत अछि । भारतम भ्रष्टाचार आ इटली एवं स्विट्ज़रलैण्डके बैंकम जमा रहल लगभग ४०० लाख करोड़ रुपैयाकs काला धन कs स्वदेश वापस लाबक माँग करति बाबा समुचे भारतकs एक लाख किलोमीटर कs यात्रा केलक ।
भ्रष्टाचारक खिलाफ बाबा रामदेव जी अनवरत लड़ाई जारी अछि आर राष्ट्र निर्माणमे सहो ओ प्रमुख भूमिका निर्वाह करि रहल अछि ।
एकर अलावा स्वामी रामदेव न स्वच्छ भारत अभियानमे सहो भाग लेलक । एतबे नै बाबा रामदेव अई अभियान के तहत हरिद्वार आ तीर्थ नगरी ऋषिकेश कs गोद लेबकs घोषणा सेहो  केनेछल ।




#Article 193: पर्सा वन्यजन्तु आरक्ष (158 words)


पर्सा वन्यजन्तु आरक्ष () नारायणी अञ्चलक चितवन राष्ट्रिय निकुञ्जसँ जोड़ल वन्यजन्तु आरक्ष क्षेत्र छी, जे चितवन जिलाक पुबारी भागमे, मकवानपुर जिलाक दछिनबारी भागमे, आ पर्सा आओर बारा जिलाक उतरबारी भागसभमे पसरल अछि । एहि आरक्षक क्षेत्रफल ४९९ बर्ग कि.मी. अछि । बि.सं.१९८४मे जंगली हाथीक बासस्थान संरक्षण करबाक उद्देश्यसँ एहि आरक्ष केर स्थापना कएल गेल छल । ई ७५० मीटर सँ ९५० मीटर धरिक चुरे पहाड़ क्षेत्र अगुटने अछि । एकर हावापानि (जलवायु) उष्ण प्रदेशीय श्रेणीक अछि।

एतए चुरे पहाड़क उपरुका भागमे सखुआ आओर निचलुका भागमे खैर, सिसो, साल आदिक जंगलसभ अछि । चुरे पहाड़क दच्छिन दिस टोलमे घासक मैदान अछि । एत हाथी, बाघ, चितुवा, भालु, गौर, निलगाए, चित्तल, मृग, लंगूर, बानर, हुड़ार, बन बिलाड़ि आदि जंगली जनावरसभ भेटैत अछि । ओकर साथे एत करीब ३०० प्रजातिक चिरइसभ भेटैत अछि । ताहिमे मयुर, धनेश, मएना आदि आबैत अछि । बहुत रास रेंगि कऽ चलएबाला / घुसकएबाला जानवरसभ जेना गहुमन, करैत, अजगर / अजेगर आदि सहो भेटैत अछि ।




#Article 194: कोशी टप्पु वन्यजन्तु आरक्ष (771 words)


कोशी टप्पु वन्यजन्तु आरक्ष () कोशी नदीक तटमे रहल संरक्षित क्षेत्र छी । कोशी टप्पुक स्थापना वि.स. २०३२ (सन् १९७६) सालमे भेल अछि । कोशी टप्पु वन्यजन्तु आरक्ष १७५ वर्ग किलोमिटर क्षेत्रफलमे पसरल अछि । ई आरक्ष सुनसरी, सप्तरी आ उदयपुर करि तीनटा जिलामे पसरल अछि । सन् १९८७ मे रामसार सूचीमे सूचीकृत भेल नेपालक पहिल बडका रामसार क्षेत्रक रूपमे परिचित ई आरक्षमे विभिन्न ४८९ प्रजातीक चिरइसभ, २१९ दुर्लभ अर्ना आ ११/१२ टा दुर्लभ डल्फिन एतय संरक्षित करि राखल गेल अछि ।
 

नेपाल सरकारक जनसहभागितामे संरक्षण कार्य अगाडि बढाबक लक्ष्यसँ मध्यवर्ती क्षेत्रक घोषणा करि, ई मध्यवर्ती क्षेत्र व्यवस्थापन समितिक गठन २०६१ भादो ३१ मे कएल गेल अछि । मध्यवर्ती क्षेत्रक क्षेत्रफल १७३ वर्ग किलोमिटर रहल ३ जिलाक (सुनसरी, सप्तरी, उदयपुर) १६ टा गाउँ विकास समितिसभ समेटने अछि । मध्यवर्ती क्षेत्र व्यवस्थापन समितिमे ९ टा समिति सदस्य, १ टा समिति अध्यक्ष तथा १ सदस्य सचिव संरक्षण अधिकृत सहित १३ सदस्यीय व्यवस्थापन समिति रहल अछि । मध्यवर्ती क्षेत्र व्यवस्थापन समिति विशेष करि आरक्ष अगलबगल रहल प्राकृतिक श्रोतक संरक्षण आ सदुपयोग, स्थानीय सामुदायिक विकास सहित आरक्ष संरक्षणमे सहयोग आ सल्लाहकारक भूमिका निर्वाह करैत अछि ।

एतय प्रत्येक वर्ष विश्व सिमसार दिवस तथा राष्ट्रिय चिरई महोत्सव मनाएल जाइत अछि । कोशी टप्पु वन्य जन्तु आरक्षण दक्षिण पूर्वी तराईक सुनसरी जिलामे सप्तकोशीक तटमे अवस्थित अछि । ई आरक्ष वि.सं. २०३२ साल (सन् १९७६) मे लोपोन्मुख अवस्थामे रहल अर्ना (जङ्गली भैँस)सभक संरक्षित बासस्थानक रूपमे स्थापना भेल छल । कुल क्षेत्रफल १७५ वर्ग किलोमिटर भेल ई आरक्षण नेपालक सबसँ छोट आरक्षण छी । एकर दक्षिणी सीमामे सप्तकोशी नदीक बाँध रहल अछि । बढिया आ पैग सिमसार क्षेत्र भेल कारण ई आरक्षमे साइवेरियासँ चिरईसभ आवत जावत करैत अछि, एतबी मात्र नै भऽ ई आरक्ष दुर्लभ गिद्धक लेल सेहो प्रसिद्ध मानल जाइत अछि ।

ई कोशी टप्पु वन्यजन्तु आरक्षमे तीन अलग मौसम अनुभव कएल जा सकैत अछि । गर्मीक मौसम (फागुनसँ जेठधरि)मे तीव्रता न्यूनतम वर्षा संगे तीव्र गर्मी होइत अछि । ई समय एतय तापक्रम ४० डिग्री सेन्टीग्रेट पहुँच जाइत अछि । मनसुन जेठक अन्त्य तथा आषाढक शुरूमे शुरू होइत अछि आ भादोधरि लगातार भारी वर्षा होइत अछि । सबसँ भारी वर्षा साउन दिस होइत अछि मुदा ओई समय मौसममे उच्च आर्द्रता आ तापक्रमक अनुभव सेहो होइत अछि । शिषिर ऋतुमे साफ आकाश आ सयमी तापक्रम भेलाक बाद एतय एकदम ठण्डा मौसम रहैत अछि ।

कोशी टप्पु वन्य जन्तु आरक्षण मुख्यत: घाँसक मैदानसँ भरल अछि । एतय खयर, साल तथा सिसौ लगायत वनस्पतिसभ पाबल जाइत अछि । मुख्यत: लोपोन्मुख अवस्थामे रहल अर्ना (जङ्गली भैँस)सभ पाबल जाइवला ई आरक्षमे अन्य २० प्रकारक छोट पैग जानावरसभ जेना: हरिण, रतुवा, नीलगाई, बाँदर, अजिङ्गर आदि जानवरसभ रहैत अछि ।

विश्वमे दुर्लभ मानल गेल चिरई चुनमुनसभ सहित ४४१ प्रजातिक चिरई चुनमुनसभ पाबल जाइवला ई आरक्षणमे हाँस प्रजातिक २० टा, जलचिरई प्रजातिक ११४ टा लगायतक पंक्षीसभ पाबल जाइत अछि । जहिमे सँ लोसार, पैग धनेश, स्वाम्प प्याराडाइज, फिसिङ इगल, टफटेड सोभलरडक ब्रेस्टेट, ब्रान्डेट रेल किङ फिसर आदि संसारमे दुर्लभ चिरईसभ अन्तर्गत आबैत अछि ।

बिराटनगरसँ करिब ५० किमी उत्तर-पश्चिम आ धरानसँ करिब ४० किमी पश्चिम दक्षिणमे अवस्थित कोशीक कोशीटप्पु सिमसार भूमि आ दलदल क्षेत्रक लेल विश्वमे प्रसिद्ध अछि । सिसौ, खयर आ सिमलक गाछ आ अनेकन छोट गाछवृक्षसँ भरल ई टप्पु सिमसार भूमि आ दलदल क्षेत्र वाहेक चिरईसभक वासस्थानक लेल प्रसिद्ध अछि । एतय ४२० प्रजातिका स्थायी चिरई अछि, हरेक वर्ष साइबेरियासँ हिमाल नाघि अस्थायी चिरईसभ सेहो किछ महिनाक लेल डेरा खोजैत एतय आबि जाइत अछि । समुच्चा नेपालमे अर्ना एतय पाबल जाइत अछि । यहिलेल कोशीटप्पुके अर्नाक राजधानी आ चिरईसभक स्वर्ग कहल जाइत अछि ।

कोशी नदीक किछ भाग समेत समेट १७५ वर्ग किलोमिटर क्षेत्रफलमे फैलल ई आरक्ष क्षेत्रमे अर्ना आ दुर्लभ चिरईको अवलोकन करवाक लेल बिदेशी पर्यटकसभ आबैत अछि । विश्वमे कतौ आनठाम नै पाबल जाइवला स्वाम प्यास्ट्रिज नामक चिरई एतय पाबल जाइत अछि । कात्तिकसँ फागुन महिनाधरि रूस, श्रीलङ्का, भारत, तिब्बत आदि देशसभसँ हुल बनाए चिरईसभक बथान एतय आबैत अछि । किछ समय एतय बास बैसलाबाद चिरईसभ पाकिस्तान, अफगानिस्तान होइत अफ्रिका, युरोप दिस चलि जाइत अछि । कोशी नदीक धुमिल पानिमे क्रेन प्रजातिक लम्बा गर्दन भेल चिरईसभक संगे कुर्रा, सारस, हाँससभक हुल देख सकैत छी । डल्फिन आ घड़ियाल गोहि सेहो कोशी टप्पुक मुख्य आकर्षण छी।

कात्तिकसँ फागुन महिनाधरि अर्ना आ चिरईसभक संसार घुमघाम आ दृश्यावलोकनक लेल बेसी उपयुक्त मानल जाइत अछि । ई अवधिमे चिरईसभक भीडसँ कोशीटप्पुक रौनक बढि जाइत अछि ।

बिराटनगरसँ करिब ५० किमी उत्तर-पश्चिम आ धरानसँ करिब ४० किलोमिटर पश्चिम दक्षिणमे अवस्थित कोशीटप्पुधरि पहुँचक लेल यातायातक साधन उपलब्ध अछि । पूर्व-पश्चिम राजमार्गक लौकही नजदिक कटान क्षेत्रसँ ५ किलोमिटर पश्चिममे कोशी टप्पु वन्यजन्तु आरक्ष अवस्थित अछि ।

वन्य-जीवनक संरक्षण अतिरिक्त ई संरक्षित क्षेत्रमे सप्तकोशी नदीक किछ महत्वपूर्ण भाग सेहो संरक्षित रहनाए आवश्यक भेल एक अध्ययन बतौने अछि । सन् १९८७ मे ई ठामके रामसर क्षेत्र घोषित कएल गेल छल ।




#Article 195: रजनीकान्त (319 words)


शिवाजीराव गायकवाड (; ) अपन रङ्गमञ्च नाम रजनीकान्त कऽ रूपमे स्थापित  एक भारतीय चलचित्रक अभिनेता आ राजनीतिज्ञ छी जे विशेष रूप सँ तमिल सिनेमामे काज करैत अछि । ओ एक बस कन्डक्टरक रूपमे बेङ्गलोर महानगर यातायात सेवामे काज  करैत नाटकमे अभिनय केनाए आरम्भ केनए छल । सन् १९७३ मे, ओ अभिनयमे डिप्लोमा करवाक लेल मद्रास चलचित्र संस्थानमे सामिल भऽ गेल । अभिनेताक रूपमे ओ अपन चलचित्र जीवनक आरम्भ राष्ट्रिय चलचित्र पुरस्कार विजेता चलचित्र अपूर्व रागङ्गल (१९७५) सँ केनए छल जकर निर्देशक कैलाशम बालाचन्दर छल जकरा स्वयं रजनीकान्त अपन गुरु मानैत अछि ।भारतीय चलचित्र शिवाजी (२००७) मे अपन भूमिकाक लेल ओ ₹ २६ करोड़ (सन् २०१७ मे ५६ करोड़ या $ ७.८ मिलियनक बराबर) भुगतान लेनए छल जे ओ समयमे अभिनेता ज्याकी च्यानक बाद एसियामे सभ सँ बेसी भुगतान लेनिहार अभिनेता छल । प्रारम्भिक चरणमे प्रतिनायकक भूमिका कएलाक बाद ओ तमिल चलचित्रमे अस्थिरे अस्थिर एक स्थापित अभिनेताक रूपमे उदाएल । अपन जीवनक किछ वर्षमे ओ तमिल सिनेमाक महान सितारा बनि गेल आ तखन सँ ओ भारतक लोकप्रिय संस्कृतिमे एक प्रतिमान बनि चुकल अछि । रजनीकान्तक विशेष शैली तथा संवाद बोलवाक विशेष अन्दाज हिनकर जनप्रियता तथा आकर्षणक प्रमुख कारण छी । अन्य भारतीय क्षेत्रीय चलचित्र उद्योगमे अभिनय करवाक सङ्गे ओ संयुक्त राज्य अमेरिकाक हलिउड चलचित्र 'ब्लडस्टोन' (१९८८) मे सेहो अभिनय केनए छल । सन् २०१८ धरि रजनीकान्त ६ तमिलनाडु राज्य चलचित्र पुरस्कार - ४ सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार आ सर्वश्रेष्ठ अभिनेताक लेल २ विशेष पुरस्कार आ एकटा फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ तमिल अभिनेता पुरस्कार जितने अछि । अभिनय वाहेक ओ एक चलचित्र निर्माता आ पटकथा लेखकक रूपमे सेहो काज केनए अछि । अपन चलचित्र करियर वाहेक ओ एक परोपकारी, आध्यात्मिकता आ द्रविड़ राजनीतिमे प्रभावशील नेताक रूपमे सेहो काज करैत अछि ।

भारत सरकार हिनका सन् २००० मे पद्म भूषण आ कला क्षेत्रमे हिनकर योगदानक लेल सन् २०१६ मे पद्म विभूषण सँ सम्मानित केनए छल । भारतक ४५अम अन्तर्राष्ट्रिय चलचित्र महोत्सव (२०१४) मे, हिनका 'भारतीय चलचित्र व्यक्तित्वक लेल शताब्दी पुरस्कार' सँ सम्मानित केनए छल ।




#Article 196: संयुक्त राष्ट्र सङ्घ (100 words)


संयुक्त राष्ट्र सङ्घ एक अन्तराष्ट्रिय संस्था छी । एकर स्थापना २४ अक्टुबर १९४५ मे भएल अछि । ई सङ्घमे वर्तमानमे १९३ सदस्य राष्ट्रसभ अछि, जहिमे संसारक लगभग सभ देशसभ परैत अछि । एकर सदस्य राष्ट्रसभके अन्तर्राष्ट्रिय कानून, अन्तर्राष्ट्रिय सुरक्षा, आर्थिक विकास आ सामाजिक निष्पक्षतामे आपसी सहयोग मिलए कहि उद्देश्यसाथ संयुक्त राष्ट्र सङ्घक स्थापना भएल अछि । मूलत: अन्तर्राष्ट्रिय सङ्घर्षमे हस्तक्षेप करए लेल सहज होए कहि दोसर विश्वयु्द्धक विजयी राष्ट्रसभ मिल एकर स्थापना केलक । 

संयुक्त राष्ट्रसंगक औपचारिक कामकाजमे अङ्ग्रेजी, चिनियाँ, फ्रान्सेली, रुसी, स्पेनी आर अरबी भाषाक प्रयोग होएत अछि। 

संयुक्त राष्ट्रमे ६ मुख्य अङ्गसभ अछि । जे निम्न अछि - 




#Article 197: ढोरपाटन शिकार आरक्ष (236 words)


ढोरपाटन शिकार आरक्ष नेपालक एक मात्र शिकार आरक्ष छी । ई आरक्ष पश्चिम नेपालमे धौलागिरी हिमश्रृंखला भितर रुकुम, म्याग्दि आर बाग्लुङ करि तीन जिलामे पसरल अछि, जेकर क्षेत्रफल १,३२५ वर्ग किलोमिटर रहल अछि । ढोरपाटन शिकार आरक्ष बि.सं. २०४० (सन १९८३)मे स्थापित भेल आर एकर बि.सं. २०४४ (सन १९८७)मे मात्र सरकारी मान्यता प्राप्त करलक । एकर उत्तरी सिमामे पुथा, चुरेन आर गुर्जा हिमालसभ रहल अछि । ई आरक्ष समुन्द्री सतहसँ २,८५० मिटर(९,३५० फिट) सँ ५,५०० मिटर(१८,००० फिट) उचाईमे अवस्थित अछि । 

ढोरपाटन शिकार आरक्ष क्षेत्रमे आश्विन महिनाक शुरुवात तक वर्षात मौसम रहैत अछि । एत हिउँद मौसममे दिनक तापक्रम न्युन रहि तथा जोडसँ हावा चलैत रहैत अछि । उपरक भागमे भोरक समयमे बादल तथा कुहेससँ झापल रहैत अछि लेकिन बादमे हावा बहि बादलसभ हइट गेलाक बाद मौसम सफा भ जाएत अछि । माघ तथा फाल्गुण महिना दिस एही क्षेत्रक निचला भाग तक हिउँ परैत अछि  लेकिन ई जल्दी पघैल जाएत अछि ।

ढोरपाटन शिकार आरक्षमे गोब्रे सल्ला, सल्ला, भोजपत्र, लाली गुराँस, ठिँग्रे सल्ला, सिंदूर, धुपी तथा देबदारु लगायतक वनस्पतिसभ पावल जाएत अछि । अधिक मात्रामे जैविक सम्पदाक खानी मानल ढोरपाटन क्षेत्रमे १ सय ८५ किसिमक दुर्लभ वनस्पति उच्च पहाडी सिमसार क्षेत्रमे ३२ जाइतक स्तनधारी वन्यजन्तु, १ सय ३० प्रजातीक चिरइ चुनमुनच ८ सय ५२ नाउर, २ सय झारल, हिउँ चितुवा, चित्तल, थारल, घोरल, भालु, बँदेल, लंगुर लगायतक जंगली जानवर आर पंक्षीसभ रहल अछि । 

 नेपाल सरकार वन तथा भु-संरक्षण मन्त्रालय, राष्ट्रिय निकुञ्ज तथा वन्यजन्तु संरक्षण विभाग




#Article 198: अन्नपूर्ण संरक्षण क्षेत्र (194 words)


अन्नपूर्ण संरक्षण क्षेत्र पश्चिम नेपालक गण्डकी तथा धौलागिरी अञ्चलक उत्तरी क्षेत्रसभमे परवाला नेपालक सबसँ बडका संरक्षण क्षेत्र छी । एकर क्षेत्रफल ७,६२९ बर्ग कि.मी. अछि । एहि अन्तरगत ८,००० मि. सँ लम्बा हिमालसभ, संसारक सबसँ गहिर काली गण्डकी नदीक खोंच, नेपालक सबसँ बेसी तथा कम पानि परैत ठामसभ अछि । ई नेपालक सबसँ महत्वपूर्ण पर्यटकीय गन्तब्य स्थल सेहो छी ।

नेपाल प्रकृति संरक्षण कोष अर्न्तर्गत स्थापना भेल ई संरक्षण क्षेत्र आयोजनाक कास्की, लमजुङ्ग, मनाङ, मुस्ताङ आर म्याग्दी करि ५ जिलाक ५६ टा गा.वि.ससभमे काम करैत आइब रहल अछि । २०४३ साल मंसीर सँ परीक्षण रूपमे कास्की जिलाक घान्द्रुकसँ काम कर शुरु करि २०४९ साल श्रावणमे नेपाल सरकार संरक्षण क्षेत्रक चार किल्ला तोइक उ क्षेत्रक ब्यवस्थापन करके जिम्मा तत्काल श्री ५ महेन्द्र प्रकृति संरक्षण क्षेत्र आयोजनाक देल गेल छल । हाल एहि आयोजनाक आंशिक आर पुरै गा.वि.स. करि कास्की जिलाक उत्तरी क्षेत्रक १७ टा गा.वि.स.सभमे काम करैत आईब रहल अछि । उ गा.वि.ससभक नामावली एहि प्रकार अछि - 

आर आशिक क्षेत्रमे 

ई आयोजना अन्तर्गत कस्तुरी प्रजनन केन्द्रक सेहो स्थापना भेल अछि । 

पता : प्रधान कर्यालय, हरियोखर्क, पोखरा, कास्की
पो.ब.नं. : १८३, पोखरा ।
टेलिफोन नम्बर : २११०२, २८२०२
फ्याक्स : २८२०३
इमेल : acap@mos.com.np




#Article 199: धम्पुस (285 words)


धम्पुस नेपालक पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्रक गण्डकी अञ्चल, कास्की जिलामे अवस्थित गाँउ विकास समिति छी। ई ठाममे ६२० टा घर अछि । 
एत पहुचक लेल  पर्यटकसभ गाडिमे नै जाक पैदल जाएत अछि । ई ठाम अझ फिल्म सुटिङ्क लेल बहुत प्रसिद्ध अछि । एहि गाविसमे रहल ऐतिहासिक तथा धार्मिक पर्यटकीय स्थलसभ धम्पुसकोट, भुमे मन्दिर, नेवोताल वराह, सिद्घवराह मन्दिर आदि रहल अछि तथा पाराग्लाईडिङक लागि थाक डाँडा, तप्राङ मैदान आदि प्राकृतिक पर्यटकीय स्थलसभ छी।

नेपालक सन् २००१क जनगणना अनुसार धम्पुसक जनसङ्ख्या २९५० अछि। एहि मध्य पुरुष ४७%, आ महिला ५३% अछि।

अधिकांश पर्यटक माछापुच्छ्रे देखए लेल पोखरा जाएत अछि। मुदा, माछापुच्छ्रेक असली दृश्यावलोकन करएक अछि तँ धम्पुससँ बढिया ठाम और कोनो नै अछि । माछाक पुच्छर आकारक उपर भेलाक कारण एकर नाम माछापुच्छ्रे भेल अछि । धम्पुस पहुँचनाए हल्लुक अछि, पोखरासँ मात्र २५ किलोमिटर पश्चिम। पोखराक बाग्लुङ बसपार्कसँ बाग्लुङ जाएवाला बस जाएत अछि । एतसँ सार्वजनिक बस पकैर वा ट्याक्सी लक आधा घण्टामे फेदी पहुच सकै छी । एतसँ शुरु होएत अछि, जङ्गलसँ घेरल रास्तामे पदयात्रा। जल्दी चलवालाक एक घण्टा, अस्थिरसँ चलवालाक दुई घण्टा, तेकर बाद आइब जाइया- गन्तव्य धम्पुस ! धम्पुससँ देखाई वाला हिमालमात्रे नाई, पोखरासँ फेदीतक गाडीमे यात्रा करैत काल देखाई वाला फाँट, खोलासभ सेहो कम मनमोहक नैअछि। फेदीमे भेल होटलसभमे सजाक राखल सुखैइ देखलाक बाद  खायल बिना नै रहि सकै छी । डाँडा पहुचनासाथ शुरु होएत धम्पुसक होटल, सफावस्ती आर स्वागत करि बैसल रहल धम्पुसबासीक व्यवहार पर्यटकक एना लुभावैत अछि कि एक रातक लेल जाएवालाक सेहो अपन  बसाइँ बेसी दिन कर मन लागैत अछि। 

१७५० मिटरमे रहल धम्पुसमे कोदो, धान, आलु, सागक बढिया उबजाऊ होएत अछि । रासायनिक मल बिनाक तरकारी, सुखैइ, लोकल मुर्गा खाएत हिमालक सौन्दर्य नजदिकसँ देखानाइ कम आनन्ददायी नै होएतअछि । एतक मौसम सेहो गज्जबक अछि,न बहुत जाड न गर्मी ।




#Article 200: कैलाश सत्यार्थी (190 words)


कैलाश सत्यार्थी (जन्म: ११ जनवरी १९५४) एक भारतीय बाल अधिकार कार्यकर्ता आ बाल-श्रमक विरुद्ध पक्षधर छी। ओ सन् १९८० मे बचपन बचाओ आन्दोलनक स्थापना केनए छल जकर बादसँ ओ विश्व भरिक १४४ देशक ८३,००० सँ अधिक बच्चासभ क अधिकार रक्षाक लेल कार्य कऽ चुकल अछि। सत्यार्थीक मानवीय काजक कारणसँ सन् १९९९ मे अन्तर्राष्ट्रिय श्रम सङ्घद्वारा बाल श्रमक निकृष्टतम श्रेणीसभ पर सन्धीसँ १८२क अङ्गीकृत कएल गेल, जे आब दुनियाभरिक सरकार क लेल एहि क्षेत्रमे एक प्रमुख मार्गनिर्देशक छी।

कैलाश सत्यार्थीक कार्यक लेल हुनका विभिन्न राष्ट्रिय आ अन्तर्राष्ट्रिय सम्मान आओर पुरस्कारद्वारा सम्मानित कएल गेल अछि। सन् २०१४ मे हुनका आ पाकिस्तानक नारी शिक्षा कार्यकर्ता मलाला युसुफजईक सम्मिलित रूपसँ नोबेल शान्ति पुरस्कार प्रदान कएल गेल छल।

भारतक मध्य प्रदेशक विदिशामे जन्म भेल कैलाश सत्यार्थी 'बचपन बचाओ आन्दोलन' चलबैत अछि। ओ पेशासँ विद्युत इन्जिनियर छी मुदा ओ २६ वर्षक उमरसँ करियर छोड़ि बच्चासभक लेल काम करऽ लेल शुरू कऽ देनए छल। एहि समय ओ 'ग्लोबल मार्च अगेन्स्ट चाइल्ड लेबर' (बाल श्रमक विरुद्ध वैश्विक अभियान)क अध्यक्ष सेहो छी।

वर्तमान समयमे सत्यार्थी नयाँ दिल्लीमे रहैत अछि। कैलाश सत्यार्थीक परिवारमे हुनकर पत्नी सुमेधा, पुत्र, पुत्रवधू तथा पुत्री अछि। सामाजिक कार्य अतिरिक्त ओ एक बढिया पाकशास्त्री सेहो छी।




#Article 201: मलाला युसुफजई (856 words)


मलाला युसुफजई (पश्तो: ملاله یوسفزۍ जन्म: १२ जुलाई १९९७) बच्चासभक अधिकार सुनिश्चित करवाक लेल प्रयत्नशील कार्यकर्ताक रुपमे जानल जाएत अछि । ओ पाकिस्तानक खैबर-पख्तुनख्वा प्रान्तक स्वात जिलामे स्थित मिङ्गोरा शहरक एक छात्रा छी । १३ सालक उमरमे ओ तहरिक-ए-तालिबान शासनक अत्याचारक बारेमे बिबिसी उर्दू सेवाक लेल एक ब्लग लिखलक जे बादमे जाए बहुतेक चर्चित भेल आ हुनका स्वातक लोकमे प्रतिष्ठित बनाए देलक । अक्टुबर २०१२ मे, मात्र १४ वर्षक आयुमे अपन उदारवादी प्रयासक कारण ओ आतङ्कवादीक हमलाक शिकार बनि गेल, जहि सँ ओ पूर्ण रुप सँ घाइल भऽ गेल आ अन्तर्राष्ट्रिय मिडियाक चर्चामे आबि गेल । डायरी लिखैक शौकीन मलाला अपन डायरीमे लिखने छल, 'आइ स्कूलक अन्तिम दिन छल एहिद्वारे हमसभ मैदान पर कुछ बेसी देर खेलक फैसला करलौ । हमर माननाइ अछि कि एक दिन स्कूल खुलत लेकिन जाइत समय हम स्कूलक इमारत क एना देखलौ कि जेना हम एत फेर कहियो नइ आएब ।' 

मलाला ब्लग आर मिडियामे तालिबानक ज्यादतिक बारेमे जबसँ लिखलेल शुरू केएलक तबसँ मलालाक बहुत बेर धमकिया मिलल। मलाला तालिबानक कट्टर फरमानसँ जुडल दर्दनाक दास्तानक महज ११ सालक उम्रमे अपन कलमक जरियासँ लोगक सामने आनैक काम करने छल । मलाला उ पिडित लडकिसभमे अछि जे तालिबानक फरमानक कारण लम्बा समय तक स्कूल जाएसँ वन्चित रहल । तीन साल पहिले स्वात घाटीमे तालिबान लडकिसभक स्कूल जाए पर पाबंदी लगा देने छल । लडकिसभक टीवी कार्यक्रम देखलेल सेहो मनाही छल ।‍ स्वात घाटीमे तालिबानिक कब्‍जा छल आर स्‍कूलसँ लक बहुत चीजपर पाबंदी छल । मलाला सेहो एकर शिकार भेल । लेकिन अपन डायरीक माध्‍यमसँ मलाला क्षेत्रक लोगसभक नै खाली जागरुक करलक बल्कि तालिबानक खिलाफ खडा सेहो करलक । तालिबान वर्ष २००७मे स्‍वातक अपन कब्‍जामे ल लेने छल । आर लगातार कब्‍जामे राखने छल । तालिबानि लडकिसभक स्‍कूल बन्द क देने छल । कारमे म्‍यूजिकसँ लक सडक पर खेलै तक पर पाबंदी लगा देल गेल छल । उ दौरक अपन अनुभवक आधार पर मलाला बीबीसी उर्दू सेवाक लेल जनवरी, २००९मे एक डायरी लिखने छल । एहिमे उ जिक्र करने छल कि टीवी देखपर रोक क चलते ओ अपन पसन्दीदा भारतीय सीरियल राजा की आएगी बारात नै देख पावैत छल।

जब स्‍वातमे तालिबानक आतंक कम भेल त मलालाक पहिचान दुनियाक सामने आएल आर ओकरा बहादुरीक लेल अवार्डसँ नवाजल गेल । एहिक साथ ओ इन्टरनेशनल चिल्‍ड्रन पीस अवार्ड (२०११)क  लेल सेहो नामित भेल । (२०११मे ओ नइ जीत सकल, मुदा बादमे २०१३मे मलालाक ई अवार्ड सेहो मिलल)।

पाकिस्तानक ‘न्यू नेशनल पीस प्राइज’ हासिल कर वाली १४ वर्षीय मलाला यूसुफजई तालिबानक फरमानक बावजूदओ लडकिसभक शिक्षित करक अभियान चला रहल अछि । तालिबान आतंकी एहि बातसँ तमशाक ओकरा अपन हिट लिस्‍टमे ल चुकल छल । संगठनक प्रवक्ताक अनुसार,‘ई महिला पश्चिमी देशक हितक लेल काम क रहल अछि । ओ स्वात इलाकामे धर्मनिरपेक्ष सरकारक समर्थन करने छल । एहि कारणसँ ओ हमार हिट लिस्टमे अछि । अक्टोबर २०१२मे, स्‍कूलसँ आबैत समय ओकारा पर आतंकिसभ हमला करलक जेहिमे ओ बुरी तरह घायल भ गेल । एहि हमलाक जिम्‍मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी)लेलक। बादमे इलाजक लेल ओकरा ब्रिटेन ल जाएल गेल जत डॉक्टरक अथक प्रयासक बाद मलालाक बचा लेल गेल । 

अत्यन्त प्रतिकूल परिस्थितिमे शान्तिक बढावा देबक लेल ओकरा साहसी आर उत्कृष्ट सेवाक लेल, ओकरा पहिल बेर १९ दिसम्बर २०११क पाकिस्तानी सरकारद्वारा पाकिस्तानक पहिल युवाक लेल राष्ट्रिय शान्ति पुरस्कार मलाला युसुफजईक मिलल छल। मिडियाक आगु बादमे बोलैत, ओ शिक्षा पर केन्द्रित एक राजनितिक दल बनाबैक इरादा राखलक। सरकारी गर्ल्स सेकेन्डरी स्कूल, मिशन रोड,क तुरन्त ओकर सम्मानमे मलाला युसुफजई सरकारी गर्ल्स सेकेन्डरी स्कूल नाम देल गेल ।

अन्तरराष्ट्रिय बच्चासभक वकालत करवाला समूह किड्स राइट्स फाउंडेशन युसुफजईक अन्तर्राष्ट्रिय बाल शान्ति पुरस्कारक लेल प्रत्याशिमे शामिल करलक, ओ पहिल पाकिस्तानी लडकी छल जेकरा एहि पुरस्कारक लेल नामांकित कएल गेल । दक्षिण अफ्रीकाक नोबेल पुरस्कार विजेता डेसमंड टूटू एम्स्टर्डम, हॉलैन्डमे एक समारोहक दौरान २०११क ई नामांकनक घोषणा करलक, लेकिन युसुफजई एहि पुरस्कार नइ जीत सकल आर एहि पुरस्कार दक्षिण अफ्रीक़ाक १७ वर्षीय लडकी जीत लेलक ई पुरस्कार बच्चासभक अधिकारक लेल काम करवाला संस्था हरेक साल एकटा लडकीक दैत अछि ।

मलाला युसुफजईक यूरोसंसदद्वारा वैचारिक स्वतन्त्रताक लेल साखारफ पुरस्कार प्रदान कएल गेल अछि । बच्चाक शिक्षाक अधिकारक लेल संघर्षमे महती भूमिका निभाबक लेल  ओकरा ई पुरस्कार देल गेल अछि ।

मलाला युसुफजईक इक्वेलिटी एंड नान डिस्क्रिमीनेशनक अन्तरराष्ट्रिय पुरस्कार दिय जाइक घोषणा भेल अछि । मेक्सिकोमे भेदभाव निरोधक राष्ट्रिय परिषदक दिससँ जारी बयानमे ई जानकारी देल गेल अछि । बयानमे कहल गेल अछि कि मलालाक ई पुरस्कार मानवाधिकारक रक्षाक लेल ओकर प्रयास विशेषतया जाति, उम्र, लिंग मे भेदभाव करल बिना शिक्षाक अधिकारक लेल संघर्षक देखैत देल जा रहल अछि ।

संयुक्त राष्ट्र मलाला युसुफजईक २०१३क मानवधिकार सम्मान (ह्यूमन राइट अवॉर्ड) देबक घोषणा करलक । ई सम्मान मानवधिकारक क्षेत्रमे बेहतरीन उपलब्धिक लेल हरेक पाच सालमे देल जाएत अछि । एहिसँ पहिले ई सम्मान पावैवालामे नेल्सन मण्डेला, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जिम्मी कार्टर आ एमनेस्टी इन्टरनेसनल आदि शामिल अछि । मलालाक अतिरिक्त पाच अन्यक सेहो इ अवॉर्ड सँ सम्मानित केएल गेल अछि।

बच्चा आर युवाक दमनक खिलाफ आर सबक शिक्षाक अधिकारक लेल संघर्ष करवाला भारतीय समाजसेवी कैलाश सत्यार्थीक साथ संयुक्त रूपसँ ओकरा शान्तिक नोबेल पुरस्कार प्रदान कएल गेल छल । १० दिसम्बर २०१४क नर्वेमे आयोजित एक कार्यक्रममे ई पुरस्कार प्रदान कएल गेल । पुरस्कार प्रदान करैत मातर सभागृहमे उपस्थित सब खडा भक तालि बजेलक । १७ वर्षक आयुमे नोबेल पुरस्कार प्राप्त करवाली मलाला दुनियाक सबसँ कम उम्र वाली नोबेल विजेती बैन गेल। 




#Article 202: नोबेल पुरस्कार (302 words)


नोबेल पुरस्कारक स्थापना सन् १९०० मे स्विडेनक वैज्ञानिक तथा विस्फोटक पदार्थ डाइनेमाइटक आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेलक नाममे भल अछि । नोबेल फाउण्डेशनद्वारा स्वीडेनक वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेलक स्मरणमे सन् १९०१ मे आरम्भ करल गेल ई पुरस्कार भौतिक, रसायन, साहित्य, शान्ति, क्रिया विज्ञान तथा चिकित्सा आ अर्थशास्त्र क्षेत्रमे प्रदान करल जाइवाला विश्वक सर्वोच्च पुरस्कार छी । ई पुरस्कारक रूपमे प्रमाण-पत्रक साथमे १२,००,००० (बारह लाख अमेरिकी डलर) प्रदान करल जाइत अछि । अल्फ्रेड नोबेल कूल ३५५ आविष्कारसभ करलक जहिमे सन् १८६७ मे कएल गेल डायनामाइटक आविष्कार सेहो अछि । नोबेलक डायनामाइट तथा एहि प्रकारक विज्ञानक विध्वंसक शक्तिसभक बारेमे पूरा ज्ञान छल । सन् १८९६ क दिसम्बर १० मे देहान्त भेलाक बाद हुनकर कोनो उत्तराधिकारी नै छल । ओ अपन शेषक बाद सम्पति ककरो देब नै चाहै छल । सन् १८९५ मे ओ एक इच्छापत्र तयार करैलेल लगौलक जाहिमे अपन सम्पत्तिसँ अक्षयकोष स्थापना करल जाए जाहि सँ कोषसँ प्राप्त आम्दानीसँ विज्ञानदिस भौतिकशास्त्र, रसायनशास्त्र आर क्रिया विज्ञान तथा चिकित्साशास्त्रमे महत्वपूर्ण खोज आ आविष्कार करल, साहित्यक क्षेत्रमे पैग योगदान देनिहार आ विश्वशान्ति कायम करि विशेष योगदान पहुचाएल व्यक्ति आ संस्थाक नगद राशिसहितक पुरस्कार प्रदान करक व्यवस्था मिलाएल गेल । अल्फ्रेडक इच्छा अनुसार ई सम्पत्तिके ब्याजसँ प्रत्येक बर्ष मानव जातिक कल्याणक निम्ति कार्य करेवला लोकसभक सम्मानित कएल जाइत । ई सम्पत्ति स्वीडिस बैंकमे राखल अछि आ प्राप्त ब्याजसँ नोबेल फाउन्डेसनद्वारा प्रत्येक वर्ष शान्ति, साहित्य, भौतिक, रसायन, चिकित्सा विज्ञान आ अर्थशास्त्रमे सर्वोत्कृष्ट योगदान देनिहार व्यक्तित्वके पुरस्कृत कएल जाइत अछि । नोबेल फाउन्डेसनक स्थापना २९ जुन १९०० मे भेल अछि आर १९०१ सँ नोबेल पुरस्कार प्रदान कएल जाइत अछि । अर्थशास्त्रक क्षेत्रमे नोबेल पुरस्कारक शुरुवात सन् १९६८ सँ कएल गेल । पहिल नोबेल शान्ति पुरस्कार सन् १९०१ मे रेडक्रसका संस्थापक ज्यां हेनरी ड्युना आर फ्रेञ्च पीस सोसाइटीक संस्थापक अध्यक्ष फ्रेडरिक पैसीक संयुक्त रूपमे प्रदान कएल गेल छल । 

शान्तिदिसक पुरस्कार ओस्लो, नर्वेसँ आ अन्य पुरस्कारसभ स्टोकहोम, स्वीडेनसँ प्रदान कएल जाइत अछि । 




#Article 203: एडभार्ड मोजर (139 words)


एडभार्ड मोजर (जन्म २७ अप्रिल १९६२) नर्वेक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक आर ट्रनह्याम, नर्वे स्थित नार्वेजियन यूनिवर्सिटी अफ साइन्स एन्ड टेक्नोलोजी (एनटीएनयू) मे रहल कभ्ली इन्स्टिच्युट फर सिस्टम्स न्यूरोसाइन्स एन्ड सेन्टर फर द बायोलोजी अफ मेमोरीमे संस्थान निर्देशक छी ।

मोजर तथा हुनकर पत्नी मे ब्रिट मोजर पीएचडी कारलाक एक वर्ष बाद सन् १९९६ मे एनटीएनयूमे मनोविज्ञान तथा न्यूरोविज्ञानक सह-प्राध्यापक (एसोशिएट प्रोफेसर) पदमे नियुक्त भेल छल । मोजर अपन पत्नी साथे मिलक बहुत पुरस्कार प्राप्त करने अछि जेहि मध्ये लोइसा ग्रास होविट्ज प्राइज आर कार्ल अवार्ड सेहो सामिल अछि । सन् २०१४ मई मस्तिस्कक स्थान पता लगाबवाला प्रणाली मेबारे अध्यन कारलाक पशचात हुनका हुनकर पत्नी तथा जोहन ओ केफे साथे चिकित्साक क्षेत्रमे नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने अछि ।

मोजरक जन्म एल्संडमे भेल छल । सन् १९५० मे हुनकर माता-पिता जर्मनीसँ नर्वे गेल छल । हुनकर पिता पाइप आर्गन निर्माता छल ।




#Article 204: मे ब्रिट मोजर (116 words)


मे ब्रिट मोजर (जन्म ४ जनवरी १९६३) नर्वेक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक आर ट्रनह्याम, नर्वे स्थित नार्वेजियन यूनिवर्सिटी अफ साइन्स एन्ड टेक्नोलोजी (एनटीएनयू) मे रहल कभ्ली इन्स्टिच्युट फर सिस्टम्स न्यूरोसाइन्स एन्ड सेन्टर फर द बायोलोजी अफ मेमोरीमे संस्थापक निर्देशक छी ।

मोजर तथा हुनकर पति एडभार्ड मोजर पीएचडी कारलाक एक वर्ष बाद सन् १९९६ मे एनटीएनयूमे मनोविज्ञान तथा न्यूरोविज्ञानक सह-प्राध्यापक (एसोशिएट प्रोफेसर) पदमे नियुक्त भेल छल । मोजर अपन पति साथे मिलक बहुत पुरस्कार प्राप्त करने छल जेहि मध्ये लोइसा ग्रास होविट्ज प्राइज आर कार्ल अवार्ड सेहो सामिल अछि । सन् २०१४ मे मस्तिस्क स्थान पता लगाबवाला प्रणाली बारेमे अध्यन कारला पश्चात हुनका हुनकर पति तथा जोहन ओ केफे साथे चिकित्साक क्षेत्रमे नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने अछि ।




#Article 205: मधुबनी चित्रकला (511 words)


मधुबनी चित्रकला या मिथिला पेंटिंग   मिथिलाञ्चल क्षेत्र जेना बिहारक दरभंगा, मधुबनी एवम नेपालक कुछ क्षेत्रक प्रमुख चित्रकलाछी । प्रारम्भमे रङ्गोलीक रुपमे रहैक बाद ई कला धिरे-धिरे आधुनिक रूपमे कपडा, दिवार एवम कागज पर उतैर गेल । मिथिला महिलासभद्वारा शुरू कएल गेल घरेलु चित्रकलाक पुरुषसभ सेहो अपना लेने अछि ।

मानल जाइत अछि ई चित्र राजा जनक राम-सीताक विवाहक दौरान महिला कलाकारसभसँ बनबेने छल । पहिले त खाली पैग जातिक महिलासभ (जेना ब्राह्मण)क ई कलाक बनाबैक अनुमति छल  लेकिन समयक साथ ई सिमासभ सेहो खत्म भ गेल । आई मिथिलाञ्चलक बहुत गामसभक महिलासभ इ कलामे दक्ष अछि । अपन असलि रूपमे त ई पेन्टिङ गामसभक माइटसँ लेपल गेल बस्तीसभमे देख भेटैत छल , लेकिन एहिकइ आब कपडा आ पेपर पर खुब बनाएल जाइत अछि । समयक साथ साथ चित्रकारक एहि विधामे पासवान जातिक समुदायक लोगसभद्वारा राजा शैलेशक जिवन वृतान्तक चित्रण सेहो कर जाए लागल । एहि समुदायक लोग राजा सैलेशक अपन देवताक रूपमे पुजा सेहो कर लागल ।

एहि चित्रमे खासकक कुल देवताक सेहो चित्रण होएत अछि । हिन्दु देव-देवताक तस्विर, प्राकृतिक नजारा जेना-सूर्य आ चन्द्रमा, धार्मिक गाछ-वृक्ष जेना-तुलसी आर विवाहक दृश्य देखला भेटत । मधुबनी पेन्टिङ दुई किसिमक होएत- भितर चित्र आर अरिपन या अल्पना ।

चटख रङ्गक इस्तमाल खुब कएल जाइत अछि । जेना गाढा लाल रङ्ग, हरियर,बुल्लु आर करिया । कुछ हल्का रङ्गसँ सेहो चित्रमे निखार आनल जाइत अछि, जेना-पियर, गुलाबि आ नेबो रङ्ग । ई जाएनक परेशान हेबै कि ई रङ्गक घरेलु समानसँ बनाएल जाइत अछि, जेना-हरदि, केलाक पता, लाल रङ्गक लेल पिपलक छाल प्रयोग कएल जाइत अछि । आर दुध। भितरक चित्रक अलावा अल्पनाक सेहो बिहारमे बहुत चलन अछि । एहिक बैठक या दरबाजावक बाहर बनाएल जाइत अछि । पहिले एकरा एहिद्वारे बनाएल जाइत छल ताकि खेतमे बालीक उब्जाउ बढियासँ होए मुदा आइकाइल एकरा घरक शुभ काममे बनाएल जाइत अछि । चित्र बनाबक लेल सलाईक काठी आ बासक कलमक प्रयोगमे आनल जाइत अछि । रङ्गक पकर बनाबक लेल बबुलक वृक्षक लस्साक मिलाएल जाइत अछि ।

समयक साथ मधुबनी चित्रक बनाबक पाछुक मतलब सेहो बदल गेल अछि, मुदा ई कला अपनामे एते चिज समटने अछि कि ई आइयो कलाक कद्रदानक पहिल पसन्दमेसँ अछि ।

चित्रणसँ  पूर्व हातसँ निर्माण कागजक तैयार करक लेल कागज पर गाईक गोबरक झोर बनाक तथा एहिमे बबुलक लस्सा देल जाइत अछि । सुती कपडासँ गोबरक झोरक कागज पर लगाएल जाइत अछि आ रौदमे सुखाबक लेल राएख देल जाइत अछि ।

मधुबनी चित्रकला देवाल, केन्वास एवम हातसँ निर्माण कागज पर वर्तमान समयमे चित्रकारसभद्वारा बनाएल जाइत अछि ।

मधुबनी भितर चित्र मे माइट (चिकनी) आ गाईक गोबरक मिश्रणमे बबुलक लस्सा मिलाक देवाल पर निपल जाइत अछि । गाईक गोबरमे एक खास तरहक रसायन पदार्थ होएक कारण देवाल पर विशेष चमक आइब जाइत अछि । एकरा घरक तिन खास जगह पर बनाबक  परम्परा अछि, जेना- पुजास्थान, कोहबर कक्ष (विवाहितक कक्षमे) आर विवाह या कोनो खास उत्सव पर घरक बाहरि देवाल पर। मधुबनी पेन्टिङमे जेहि देवी-देवताक चित्रण कएल जाइत अछि, उ अछि- मा दुर्गा, काली, सीता-राम, राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती, गौरी-गणेश आर विष्णुक दस अवतार इत्यादि। इ तस्विरक अलावा बहुत प्राकृतिक आर रम्य नजाराक सेहो पेन्टिङ बनाएल जाइत अछि। पशु-पक्षी, वृक्ष, फुल-पात आदिक स्वस्तिकक निशानिक साथ सजाएल-सवारल जाइत अछि ।




#Article 206: माचू पिचू (102 words)


माचू पिचू () १५अम सताब्दीमे कोलम्बियन पूर्व युगक इन्का साम्राज्यक एक महत्वपूर्ण स्थान छल । माचू पिचूक शाब्दिक अर्थ पुरान पहाड होएत अछि । ई स्थान समुद्र सतहसँ करिब २४३० मीटर (७९७० फीट) उचाईमे अवस्थित अछि । माचू पिचू पेरूक उरुबाम्बा उपत्यका उपर सँ करिब ८० किलोमीटर (५० मील) उत्तरपश्चिममे रहल एक पर्वत श्रृङ्खलामे अवस्थित अछि आ एहि स्थान होएत उरुबाम्बा नदी बहैत अछि । बेसीतर पुरातत्वविदसभ माचू पिचू इन्का सम्राट पचाकुटी (१४३८-१४७२)क लेल निर्माण कएल गेलवाला बातमे सहमत अछि । अधिकतर लोगसभ एकरा इन्का साम्राज्यक हराएल सहरक रूपमे सेहो परिचित कराबैत अछि, सम्भवत ई स्थान इन्का साम्राज्यक विश्वप्रसिद्ध प्रतीक छी ।




#Article 207: योग (191 words)


योग भारत आ नेपालमे एकटा आध्यात्मिक प्रकियाक योग कहल जाएत अछि । जहिमे शरीर, मन आ आत्मा कऽ एक साथ लाबऽ मे योगक महत्वपूर्ण भूमिका होएत अछि । ई शब्द, प्रक्रिया आ धारणा बौद्ध धर्म, जैन धर्म आ हिन्दु धर्ममे ध्यान प्रक्रिया सँ सम्बन्धित अछि । योग शब्द भारत, नेपाल सँ बौद्ध धर्मक सङ्ग चीन, जापान, तिब्बत, दक्षिण पूर्व एसिया आ  श्रीलंका लगायत विश्वभरि फैलल अछि आ एखन समुचा सभ्य जगतमे सेहो लोक योग सँ परिचित अछि ।

एतेक प्रसिद्धि कऽ बाद पहिल बेर ११ दिसम्बर २०१४ कें दिन  संयुक्त राष्ट्र सङ्घ महासभाद्वारा प्रत्येक बर्ष २१ जुनकें विश्व योग दिवसक रूपमे सम्पूर्ण विश्व भरि मनेबाक लेल मान्यता देल गेल अछि । आब जा योगक विश्वव्यापी परिभाषा सुनिश्चित भऽ गेल अछि । हिन्दू धर्मक श्रीमद्भगवद्गीता प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जाएत अछि । जहिमे योग शब्दक बहुतो बेर प्रयोग कएल गेल अछि, कहियो असगड़े आ कहियो सविशेषण जेना बुद्धियोग, संन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे भक्तियोग आ हठयोग नाम सँ सेहो योग प्रचलित छल । महात्मा गान्धीक अनासक्ति योगक व्यवहार सँ प्राप्त भेल छल । पतञ्जली योगदर्शनमे क्रियायोग शब्द देखल जाएत अछि । पशुपती योग आ माहेश्वर योग जका शब्दक सेहो चर्चा मिलैत अछि ।




#Article 208: मदर टेरेसा (569 words)


मदर टेरेसा (२६ अगस्त १९१० - ५ सितम्बर १९९७)कऽ जन्म अग्नेसे गोङ्क्से बोजसियु नामसँ एक अल्बेनियाली परिवारमे उस्कुब, ओटोमन साम्राज्य (वर्तमान सोप्जे, म्यासेडोनिया)मे भेल छल। हिनका रोमन क्याथोलिक चर्चद्वारा कलकत्ताक सन्त टेरेसा कऽ उपाधिसँ नवाजने छल। मदर टेरसा रोमन क्याथोलिक नन छल, जे सन् १९४८ मे स्वेच्छा सँ भारतीय नागरिकता लऽ लेनए छल। सन् १९५० मे कोलकातामे मिसनरिज अफ च्यारिटी नामक एक ट्रस्टकेँ स्थापना केनए छल। ४५ वर्षधरि गरीब, बीमार, अनाथ आओर असहाय लोकसभक मद्दति केनए छल आ सङ्गे अप्पन ट्रस्ट मिसनरिज अफ च्यारिटीकेँ प्रसारक मार्ग प्रसस्त केनए छल।

सन् १९७० धरि ओ गरीब आ असहायसभक लेल अप्पन मानवीय कार्यसभक लेल प्रसिद्द भेल छल। माल्कोम मुगेरिजक बहुतेक वृत्तचित्र आ पुस्तक जेना 'समथिङ ब्युटिफुल फर गड' मे टेरेसाक उल्लेख कएल गेल छल। हिनका सन् १९७९ मे नोबेल शान्ति पुरस्कार आ सन् १९८० मे भारतक सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान कएल गेल छल। मदर टेरेसाक जीवनकालमे मिसनरिज अफ च्यारिटीक काज निरन्तर विस्तृत होएत रहल आ हुनकर मृत्यु सँ पहिने धरि ई १२३ देशमे ६१० मिशन नियन्त्रित करि रहल छल। मदर टेरसाक मृत्यु पश्चात हिनका पोप जन पल द्वितीय धन्य घोषित केनए छल आ हिनका कोलकाताक धन्य कऽ उपाधि प्रदान केनए छल।

टेरेसाक हृदयघातक कारण ५ सितम्बर १९९७ कऽ दिन मृत्यु भेल छल।

सन् १९८१ मे आगवेश अपन नाम बदलि टेरेसा राखलक आ ओ आजीवन सेवाक सङ्कल्प अपनेलक। ओ स्वयं लिखलक - ओ १० सितम्बर १९४० कऽ दिन छल जब हम अपन वार्षिक अवकाश पर दार्जिलिङ्ग जा रहल छलौ। ओ समय हमर अन्तरात्मासँ आवाज उठल छल कि हमरा सब कीछ त्याग करि देना चाही आ अप्पन जीवन इश्वर आ दरिद्र लोकसभक सेवा करि कङ्गाल तनकेँ समर्पित करि देना चाही।

मदर टेरेसा दलितसभ एवं पीडितसभक सेवामे कोनो प्रकारक पक्षपाती नै छल । ओ सद्भाव बढाबैक लेल संसारक दौरा केनए छल । हुनकर मान्यता छल कि प्यारक भूख रोटीक भूखसँ बहुत पैग अछि । हुनकर मिसनसँ प्रेरणा ल संसारक विभिन्न भागसभसँ स्वयंसेवक भारत आएल आ तन, मन, धनसँ गरीबसभक सेवामे लागि गेल । मदर टेरेसाक कहना छल कि सेवाक कार्य एक कठिन कार्य अछि आ एकर लेल पूर्ण समर्थनक आवश्यकता अछि । वोहि लोग ई कार्यक सम्पन्न क सकएत अछि जे प्यार एवं सान्त्वनाक वर्षा क सकै- भूखलके खुवाबै, बेघरसभके शरण दै, दम तोडएवाला बेबससभके प्यारसँ ममता करै, अपाहिजसभक हर समय ह्रदयसँ लगाबैक लेल तैयार रहि सकै । 

मदर टेरेसाक हुनकर सेवासभक लेल विविध पुरस्कार एवं सम्मानसभसँ विभूषित कएल गेल छल । सन् १९३१ मे टेरेसाक पोप जन तैसमक शान्ति पुरस्कार आ धर्मक प्रगतिक लेल टेम्पेलटन फाउन्डेशन पुरस्कार प्रदान कएल गेल । अमेरिकाक क्याथोलिक विश्वविद्यालय हुनका डोक्टोरेटक उपाधिसँ विभूषित कएलक । भारत सरकारद्वारा सन् १९६२ मे हुनका पद्म श्रीक उपाधि मिलल । मदर टेरेसाक लेल पुरस्कार आ सम्मानक दौर भारतमे नै रुकल आ सन् १९८० मे भारतक सबसँ पैग नागरिक सम्मान भारत रत्न मिलल । 
सन् १९८८ मे ब्रिटेनद्वारा आईर अफ द ब्रिटिश इम्पायरक उपाधि प्रदान कएल गेल । बनारस हिन्दु विश्वविद्यालय हुनका डी-लिटक उपाधिसँ विभूषित कएलक । १९ दिसम्बर १९७९ क मदर टेरेसाक मानव-कल्याण काजसभक हेतु नोबेल पुरस्कार प्रदान कएल गेल । वह तेसर भारतीय नागरिक छि जे संसारमे ई सबसँ पैग पुरस्कारसँ सम्मानित कएल गेल छल । 

टेरेसाक जीवनी भारतक एगो सरकारी कर्मचारी नविन चावला लिखनै अछि जे सन् १९९२ मे प्रकाशित भएल छल ।

बहुतरास व्यक्तिसभ, सरकारसभ आ संस्थासभद्वारा हुनकर प्रशंसा कएल जाति रहल अछि, यद्यपि ओ आलोचनाक सेहो सामना केनए अछि । अहिमे बहुतेक व्यक्तिसभ, जेना क्रिस्टोफर हिचेन्स, माइकल परेन्टी, अरूप चटर्जी (विश्व हिन्दू परिषद)द्वारा कएल गेल आलोचना सामिल अछि, जे हुनकर काम (धर्मान्तरण)क विशेष तरिकाक विरुद्ध छल ।




#Article 209: पूर्णिया (144 words)


पूर्णिया भारतक बिहार प्रान्तक एक जिला एवं जिला मुख्यालय छी। एतसँ नेपाल तथा पूर्वोत्तर भारत जाएक रास्ता ऐछ। एन एच ३१ जे कि इस्ट-वेस्ट कोरीडरक हिस्सा छी उत्तर भारतक आसाम, सिक्कीम, मेघालय, अरुणाचल, त्रिपुरा, नागालैंड, मणीपुर, मिजोरम तथा भुटानस जोडति अछि । पूर्णिया पुर्वी बिहारक सबसँ पैग नगर अछि । ई नगर स्वास्थ्य सेवा, मोटर पार्ट, अनाज आ किराना मंडीके कारण पूरे पूर्वी भारतम विख्यात अछि। मुगल कालसँ ही पूर्णिया प्रशासनिक दृष्टीकोणसँ महत्वपूर्ण स्थान रहल अछि, अंग्रजी हुकूमतके दौरमे एतसँ आस-पासक इलाकासभ पर नियंत्रण कएल जाएत छल । वर्तमानमें पूर्णिया प्रमंडलीय मुख्यालय छी जेकर अन्तर्गत पूर्णिया, कटीहार, अररिया आ किशनगंज जिला आबैत अछि ।

पूर्णिया, सौरा नदीक पूर्वी किनार पर स्थित नगर अछि । एतसँ कारागृह तथा कार्यालयसभक इमारतसभ बढिया हालत मे अछि । कम्बल, चटाइसभ आ सरसोंक तेल पेरौन आदि के काम होएत अछि तथा एतक उत्पादित वस्तुसभ एतहि खपि जाएत अछि ।




#Article 210: हनुमान (149 words)


हनुमान (; हनुमान);(SA: हनुमान्, आञ्जनेय आ मारुती ओ) परमेश्वरक भक्ति (हिन्दू धर्ममे भगवानक भक्ति) कs सबसँ लोकप्रिय अवधारणा आ भारतीय महाकाव्यक रामायणमे सबस महत्वपूर्ण व्यक्तिसभमे प्रधान अछि। किछ विचारक अनुसार भगवान शिवजी कs ११अम रुद्रावतार, सबसँ बलवान आ बुद्धिमान मानल जाएत अछि ।  जे हुनकर सबसँ प्रसिद्ध उपलब्धि छथि, जेहन रामायणमे वर्णित छै, बानरक सेनाक अग्रणी रूपमे राक्षस राजा रावण सँ युद्ध । परन्तु बहुतो विद्वान सभक अनुसार हनुमान जी कs जाति वानर बताओल गेल अछि। जकर जीवित उदाहरण अछि विराट नगर (राजस्थान)मे स्थापित पञ्चखण्डपीठ पावन धाम स्थित बजरंग मन्दिर । गोभक्त महात्मा रामचन्द्र वीर कs समूचा हिन्दुस्तानमे विश्व कs सबसँ अलग मन्दिर स्थापित केलक  जहिमे हनुमान जी कs बिना बानर वाला मुहक मूर्ति स्थापित छै । महात्मा रामचन्द्र वीर कहने छथि जे हनुमान कs जी जाति वानर बतओलैन, ओ कहने छथि कि सीता माता कs खोज केनीहार आ वेद पाठक ज्ञाता हनुमानजी बन्दर कोना भs सकैत अछि |




#Article 211: अन्तर्राष्ट्रिय महिला दिवस (168 words)


अन्तरराष्ट्रिय नारी दिवस () महिला जागरूकता सम्बन्धी दिवस छी । ई ८ मार्चमे विश्वभरि मनाओल जाएत अछि । राजनितिक रुपसँ सुरु होएतो हाल महिला अधिकार, महिला सशक्तिकरण आर समानता आदि प्रश्नसभ अन्तर्राष्ट्रिय महिला दिवसक बिषयसभ अछि । ई सर्वप्रथम् १९०९ फेब्रुअरी २८ मे मनाओल गेल छल । १९१० मे महिलासभक मत खसावक अधिकार सुनिश्चित करवाक उद्देश्यक साथ एकरा अन्तर्राष्ट्रिय दर्जा प्रदान कएल गेल छल  । सन् २०१३ मे पुगि गेलक बादमे बिश्वभरि १०३अम अन्तर्राष्ट्रिय नारी दिवस मनौने अछि । ई मार्च महिना धरि मनाओल जाएत अछि ।

संयुक्त राज्य अमेरिकाक सोसलिस्ट पार्टी २८ फरबरी १९०९ मे पहिल बेर महिला दिवसक आयोजना केनए छल । सोसलिस्ट पार्टी सन १९०८ क अन्तर्राष्ट्रिय महिला कपडा कामदारसभक आन्दोलनके स्मरणमे २८ फेब्रुअरि १९०९ क दिन महिला दिवस मनौने छल । एकर बाद ई फेब्रुअरिक अन्तिम रवि दिन मनावक लेल सुरु भेल । १९१० मे सोशलिस्ट इन्टरनेशनलक कोपेनहेगनके सम्मेलनमे एकरा अन्तर्राष्ट्रिय दर्जा प्राप्त भेल । ओ बखत एकर प्रमुख ध्येय महिलासभक मतअधिकार देबाक छल, ओही बखत महिलासभक मत खसावक अधिकतर देशसभमे नै छल ।




#Article 212: नीरजा भनोट (119 words)


नीरजा भनोट (७ सितम्बर १९६३- ५ सितम्बर १९८६) मुम्बईमा प्यान एम एयरलाइन्सक विमान परिचारिका छल । ५ सितम्बर १९८६ मे मुम्बईसँ न्युयोर्क जाएत प्यान एम विमान ७३क अपहृत विमानमे यात्रीसभक सहायता आर सुरक्षा करैत ओ आतंकवादीसभक बन्दुकक गोलीक शिकार भेल छल । ओकर बहादुरीक लेल मरनोपरान्त हुनका भारत सरकार शान्ति कालक अपन सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्रसँ सम्मानित करने छल आर साथे पाकिस्तान सरकार आर अमेरिकी सरकारले सहो हुनका ई वीरताक लेल सम्मानित करने छल ।

वर्ष २०१० मे हुनका उपर एक चलचित्रक निर्माण करके घोषणा भेल जेहिमे हुनकर भूमिका सोनम कपूर निर्वाह करैत अछि । नीरजा भनोट चलचित्रक सुरुवात सन् २०१५ मे भेल अछि आर ई चलचित्रक सन् २०१६ क १९ फरबरीमे प्रदर्शन कएल जा रहल अछि ।




#Article 213: मधुबाला (296 words)


मधुबाला (असल नाम  मुमताज जहाँ देहलवी) (जन्म: १४ फेब्रुवरी १९३३, दिल्ली - मृत्यु: २३ फरवरी १९६९ , मुम्बई ) एक भारतीय चलचित्र अभिनेत्री छी जे की क्लासिक सिनेमामे दिखाई देनए छल। भारतीय हिन्दी चलचित्रक एक अभिनेत्री छल। उनकर अभिनयमे आदर्शवादी भारतीय महिला देखल गेल छल। 

मधुबाला कऽ जन्म १४ फरवरी १९३३ मे दिल्ली कऽ एक पश्तून मुस्लिम परिवारमे भेल छल। मधुबाला अपन माता-पिता कऽ ५अम सन्तान छल। उनकर माता-पिता कऽ कुल ११ सन्तान छल। मधुबाला कऽ बाल्यकाल कऽ नाम मुमताज बेगम जहाँ देहलवी छल। एक भविष्यवक्ता उनकर माता-पितासँ उनकर बारेमे एना कहने छल कि मुमताज अत्यधिक ख्याति तथा सम्पत्ति आर्जन करत मुद्दा उनकर जीवन दुखःमय होइत। 

बलिउडमे उनकर प्रवेश बेबी मुमताज़ कऽ नामसँ भेल छल। उनकर पहिल चलचित्र बसन्त (१९४२) छी। देविका रानी बसन्तमे उनकर अभिनयसँ बहुत प्रभावित भेल छल, तथा उनकर नाम मुमताजसँ बदलि  मधुबाला राइख देलक।

उनका मुख्य भूमिका खेलवाक पहिल मौका केदार शर्मा अपन चलचित्र नील कमल (१९४७) मे देनए छल। ई चलचित्रमे ओ राज कपूर कऽ साथ अभिनय केनए छल। ई चलचित्रमे उनकर अभिनयक बाद उनका सिनेमा क सौन्दर्य देवी (Venus Of The Screen) कहल जाइ लगल। एकर २ सालक बाद बम्बे टकीज क चलचित्र महल मे ओ अभिनय केलक। महल चलचित्रक गीत आयेगा आनेवाला दर्शकसभ बहुत पसन्द केलक। ई चलचित्रक गीत पार्श्व गायिका लता मङ्गेश्वर, ई चलचित्रक सफलता तथा मधुबालाक करियरमे, बहुत सहायक सिद्ध भेल।

मधुबाला कऽ विवाह कऽ लेल तीन अलग-अलग व्यक्तिसँ प्रस्ताव मिलल छल। मुद्दा मधुबाला किशोर कुमार कऽ चुनवाक निर्णय केलक। किशोर कुमार एक तलाक भेल व्यक्ति छल। १९६० मे किशोर कुमार विवाह केलक। मुद्दा किशोर कुमार के माता-पिता कऽ मधुबाला स्वीकार नै छल। उनकर विचार छल कि मधुबाला के उनकर बबेटा कऽ पहिल विवाह टूटवाक कऽ कारण छी। किशोर कुमार माता-पिता कऽ खुश करवाक लेल हिन्दू रीति-रिवाज से पुनः शादी केलक, मुद्दा ओ उनका मना नै सकल।




#Article 214: मलाइका अरोड़ा (108 words)


मलाइका अरोड़ा भारतीय चलचित्र क्षेत्रक अभिनेत्री तथा मोडल छी। ओ अपन नृत्यक लेल बहुत लोकप्रिय अछि। 'छैया छैया' (१९९८) आओर 'मुन्नी बदनाम हुई' (२०१०) जका गीतसभमे नृत्य करि ओ चर्चामे आएल छल। 

मलाइका अरोड़ाक जन्म महाराष्ट्रक चेम्बुर, मुम्बईमे भेल छल। जखन ओ मात्र ११ वर्षक छल तखन हुनकर मातापिताक सम्बन्ध विच्छेद भऽ गेल आओर ओ अपन परिवारसङ्ग चेम्बुर स्थनान्तरण करि गेल। हुनकर माता जोयस पोलिकर्प एक मलयाली छल आ पिता, अनिल अरोड़ा एक पञ्जाबी छल।  ओ अपन माध्यमिक शिक्षा स्वामी विवेकानन्द विद्यालय, चेम्बुरसँ केनए छल। ओ अपन कौलेज शिक्षा जय हिन्द कौलेज, चर्चगेटसँ पुरा केनए छल। ओ अपन मोडलिङ करियर सुरु करऽसँ पहिne बोर्ला समुदायमे गुजरबसर करैत छल।




#Article 215: नगमा (149 words)


नन्दिता मोरारजी या नम्रता सदाना, जुन नगमा क रूपमे प्रसिद्ध अछि,   (जन्म २५ डिसम्बर १९७४), बलिवुड, टलिवुड आर कलीवुडक एक भारतीय अभिनेत्री छी । सन् १९९० क दशकमे अपन चरममे, द हिन्दु पत्रिकाक उद्धरणानुसार, तमिल चलचित्र उपर हुनकर प्रभुत्व छल । हुनकर जन्म क्रिसमस दिवसमे , एक मुसलमान माता आर हिन्दु पिताक घरमे भेल छल । ओ बॉलीवुड मे अपन अभिनय करिअर शुरूवात करलक आर किछ चलचित्रमे अभिनय करलक, मुदा ओ दक्षिणमे बसाईसराई करलक, जत हुनका मुम्बई आबसँ पहिले तक, अपार सफलता भेटल । ओना त कहियो काल चलचित्रसभ नामावलिमे हुनका नगमा क रूपमे सूचीबद्ध कएल गेल छल, मुदा हुनका एक पुरान अभिनेत्री नै भुझए, कियाकी ओ एहि मन्च नामक अपनेने छल - ई गलती इंटरनेट मूवी डेटाबेस वेबसाइटमे हुनकर सूचीमे कएल गेल छल । नगमा हिन्दी, तेलुगू, तमिल, कन्नड, मलयालम, बंगाली, भोजपुरी, पंजाबी और अब मराठी जेना भारतीय भाषासभमे विस्तृत रूपसँ काम करके लेल उल्लेखनीय रहल अछि  । 




#Article 216: जेसिका बेल (110 words)


जेसिका क्लैयर टिम्बरलेक (; जन्म ३ मार्च १९८२) व्यावसायिक रुपमे जेसिका बेलक रुपमे जानल जाएत अछि । एक अमेरिकी अभिनेत्री, मोडल तथा गायिका छी । बेल अपन करियरक सुरुवात गायिकाक रुपमे केनए छल जाबे धरि वो पारिवारिक नाट्य सिरिज हेभनमे अभिनय नै केनए छल । टेलिभिजन इतिहासमे आई धरि सभसँ बेसी समय धरि चलैवाला टेलिभिजन सिरिज छल ।

जेसिका बेलक जन्म एली, मिनेसोटामे भेल छल । जेसिकाक माता किम्बरले एक गृहिणी आर वैद्य छी । जेसिकाका पिता जोनाथन बेल जनरल इलेक्ट्रोनिक्समे कार्य करैत छल आ अमेरिकी व्यापारी छल । वो जर्मन, फ्रान्सेली आ अङ्ग्रेजी वंशक छी  आर ओकर एक छोट भाई, जस्टिन छी जे सन् १९८५ मे जन्म लेलक ।




#Article 217: पलक मुच्छाल (137 words)


पलक मुच्छाल (जन्म : ३० मार्च १९९२), एकटा भारतीय पार्श्व गायिका छी । पलक आ हुनकर छोटका भाई पलाश मुच्छाल भारत तथा विदेशसभमे सार्वजनिक मञ्चमे गीत गाएब के ह्रदय रोगसँ पीडीत छोट-छोट बालबालिकासभक उपचारक लेल चन्दा जमा करैत अछि । ओ, मई २०१३ धरि अढाई करोड रुपैयाक चन्दा जमा करि ५७२ गोटे बच्चासभक जान बचाबै के हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करने अछि । पलक के, ई समाज सेवामे योगदानक लेल हुनकर नाम गिनिज बुक्स अफ वर्ल्ड रेकर्ड तथा लिम्का बुक अफ वर्ल्ड रेकर्ड मे दर्ता कएल गेल अछि । भारत सरकार आ विभिन्न सामाजिक संस्थासभ हुनका विभिन्न पुरस्कारसभसँ सम्मानित सेहो केनए अछि । सन् २०११ मे पलक हिन्दी चलचित्रसभमे पार्श्व गायिका के रुपमे गायन शुरू केलक । हुनकर प्रशंसा खास करि के एक था टायगर आ आशिकी २ चलचित्रसभमे गौने गीतसभक लेल कएल जाइत अछि ।

टिप्पणीसभ
 




#Article 218: मिसेल ओबामा (120 words)


मिसेल ओबामा (जन्म १९६४ जनवरी १७) अमेरिकाक ४४अम तथा वर्तमान राष्ट्रपति बाराक ओबामाक पत्नी तथा पहिल एफ्रो-अमेरिकी प्रथम महिला अछी । जनवरी १७, १९६४ मे जन्म भेल मिसेल ओबामा  एक अमेरिकी कानूनविद आर लेखक छी । ओ संयुक्त राज्य अमेरिकाक वर्तमान राष्ट्रपति बाराक ओबामासँ विवाह केनए अछि ।

मिशेल क परवरिश दक्षिणी शिकागो म भेल छल । उनकर  पिता वटर पन्टमे कर्मचारी छल आर उन्कर पत्नी एक स्कूलमे सचिव छल । ओ प्रिन्सटन विश्वविद्यालय आर हार्वर्ड लॉ स्कूलस ग्रेजुएशन करने छेल्ही।
पहलि डेट म  बराक और मिशेल स्पाइक ली क  फिल्म डू द राइट थिंग देखेल गेल छेल । वोकर  बाद उसब  अक्टूबर १९९२ म विवाह  करने छेल । उन्कर दुई पुत्री ,मालिया आर  साशा क जन्म देने छेल्ही ।




#Article 219: चलू मैथिल (146 words)


घुइर चलू घुइर चलू मैथिल 
अपन मिथिला देश 
बाट जोहै छथि माए मिथिला, 
आँचर मे लऽ स्नेहक सनेश। 
उजइर पुजइर गेल छै ओकर 
सभटा खेत पथार 
गाम घर सभ भक्क पड़ल छै 
डिबिया बाती नै जरै छै 
देख ई दशा 
माए मिथिला के फाटै छै कुहेश ।...
जाहि धरा पर बहैत अछि 
सात सात धार 
आई ओहि धरा के छाती अछि सुखाएल 
खाए लेल काइन रहल अछि नेन्ना भुटका 
माइर रहल छथि माए मिथिला चित्कार । 
देखू देखू हे मिथिलावाशी केहन आएल काल
देब भूमि तपोभूमि 
आई बनल आतंकक अड्डा 
जतऽ कहियो पशु पंछियोँ वाचैत छल शास्त्र 
आई ओहि धरा सँ सुना रहल अछि बम बारुदक राग ।
हे मैथिल! 
दोसरक नगरी रौशन केलौँ 
छोइड़ अपन देश 
आबो जँ नै आएब मिथिला 
तऽ भऽ जाएत मिथिला डीह  
कुहैर कुहैर क कहैथ माए मिथिला ई..
चलू चलू यौ मैथिल अपन मिथिला देश 
फेर सँ बनेबै ओहने मिथिला 




#Article 220: रेणु खाटोर (127 words)


रेणु खाटोर (; जन्म: २९ जुन, १९५५) अमेरिका मे डल्लासक फेडरल रिजर्व बैंकक निदेशक बोर्डक प्रमुख छी । ओ एहिसँ पहिले अमेरिकाक ह्यूस्टन विश्वविद्यालयक प्रमुख तथा विश्वविद्यालय आफ ह्यूस्टन सिस्टम्सक कुलपति सहो भ गेल अछि , एहिअन्तर्गत ओ ह्यूस्टनक अधिन चार विश्वविद्यालयसभक प्रशासनिक प्रमुखक कार्यभार सम्हारने छल । ई विश्वविद्यालयमे ५६ हजार सँ बेसी अध्ययन करैत अछि । ओ कोनो प्रतिष्ठित अमेरिकी विश्वविद्यालयमे एते बरका पद पाबवाला पहिल भारतीय महिला छी  ।एहिसँ पहिले हुनका २००३ मे साउथ फ्लोरिडा विश्वविद्यालयक प्रोवोस्ट आर सीनियर वाइस प्रेसीडेन्ट नियुक्त कएल गेल छल । ओ उत्तर प्रदेश क फरुखाबाद सँ १९७४ मे १८ वर्षक अवस्थामे अमेरिका आएल छल । ओ यूएच सिस्टमक पहिल महिला चान्सलर भेल आर पहिल एहन भारतीय प्रवासी छी जे अमेरिकाक एहि समग्र शोध विश्वविद्यालयक नेतृत्व करने अछि ।




#Article 221: सुकृति काण्डपाल (102 words)


सुकृति काण्डपाल एक भारतीय अभिनेत्री छी जे मुख्यतया भारतक टेली सिरियलहरूमे अभिनय कतैत अछि  । ओ भारतक प्रतिनिधि कहिक मिस इन्डिया विश्वव्यापी भारत भक सन् २०११ मे दुबईमे भेल मिस इन्डिया विश्वव्यापी प्रतियोगितामे भाग लेने छल ।एहि प्रतियोगितामे काण्डपाल उत्कृष्ट १० मे अपन स्थान बनेने छल । ओकरा भारतक विभिन्न सिरियलसभमे करल अभिनयक लक चिनहल जाएत अछि । ओ अग्ले जनम मोहे बिटिया ही किजो, दिल मिल गए, प्यार की यह एक कहानी,  आर कैशा यह इशक है.. अजब सा रिस्क है जेहन सिरियलसभमे अभिनय लेल चिनहल जाएत अछि ।

काण्डपालल सेन्ट मेरी कन्भेन्ट उच्च विद्यालयसँ अपन शिक्षा पूर्ण करने अछि ।




#Article 222: द्रष्टी धामी (191 words)


द्रष्टी धामी एक अभिनेत्री, मोडल तथा नर्तकी छी । ओ अपन भूमिका गीत – हुई सबसे परायी, मधुबाला–एक इश्कका जूनून आर एक था रजा एक थी रानी जेहन टेलिभिजन कार्यक्रमक लेल पहचानल जाएय । 

धामी मनोरञ्जन उद्योगमे आबेसँ पहिने सैंया दिलमे आना रे म्यूजिक भिडियोमे नजर आएल छल । ओ अपन करियर मोडलिङमे प्रिन्टसँ आर टेलिभिजन विज्ञापनसँ केने छल । उनकर पहिल भूमिका स्टार वन मे दिल मिल गए मे छल, जाहिमे ओ डाक्टर मुस्कान के भूमिकामे अभिनय केने छल । ताही के बाद ओ मुख्य महिला क रुपमे स्टार वन के शो  गीत – हुई सबसे परायी में दिखाई देने छल ।
 
धामी “ना बोले तुम ना मैंने कुछ कहा” मे सेहो ओ अपन नृत्यक माध्यमसँ संक्षिप्त प्रदर्शन केने अछी ।  ओ कोरियोग्राफर सलमान युस्सिफ खान क साथ “झलक दिखला जा” क ६ठम सत्रके विजेता सेहो भ गेल अछी ।  

ओकर बाद ओ कलर्स टि.भी. क धारावाहिक मधुबाला-एक इश्क एक जूनून मे विवियन दसना क विपरीत मुख्य भमिका खेल्ने छल ।  जी टि.भी. क एक था राजा एक थी रानी मे, ओ गायत्री देवीक भूमिका खेल्ने छल ।

२१ फरवरी २०१५ मे, धामी व्यवसायी नीरज खेमकासँ विवाह केने छल । 




#Article 223: अब्दुल कलाम (836 words)


अबुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम या डाक्टर एपिजे अब्दुल कलाम (; ; १५ अक्टुबर १९३१ – २७ जुलाई २०१५) जे मिसाइल म्यान आ जनताक राष्ट्रपति कऽ नामसँ जानल जाएत छल, भारतीय गणतन्त्रक एगारहम निर्वाचित राष्ट्रपति छलाह । ओ भारतक पूर्व राष्ट्रपति, जानल मानल वैज्ञानिक आ अभियन्ताक (इन्जिनियर) रूपमे विख्यात छल ।
ओ मुख्य रूप सँ एकटा वैज्ञानिक आ विज्ञानक व्यवस्थापकक रूपम चारि दशक धरि रक्षा अनुसन्धान एवम् विकास सङ्गठन (डिआरडिओ) आ भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान सङ्गठनक (इसरो) नेतृत्व केनए छल आ भारतक नागरिक अन्तरिक्ष कार्यक्रम आ सैन्य मिसाइलक विकासक प्रयासमे सेहो सामिल रहल छल । ओ ब्यालेस्टिक मिसाइल आ प्रक्षेपण यान प्राविधिकक विकासक कार्यकें लेल भारतमे मिसाइल म्यानक रूपमे जानल जाएत अछि ।

कलाम सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी आ विपक्षी भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस दुनुक समर्थनक सङ्गे सन् २००२ मे भारतक राष्ट्रपति चुनल गेल छल । पाँच वर्षक सेवा अवधि बाद, ओ शिक्षा, लेखन आ सार्वजनिक सेवाकें अपन नागरिक जीवनमे पुनः आएल । कलाम भारत रत्न, भारतक सर्वोच्च नागरिक सम्मान सहित बहुतो प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त सेहो केनए छल ।

सन् १९३१ अक्टुबर १५ कऽ दिन धनुषकोड़ी गाम (रामेश्वरम, तमिलनाडु)मे एक मध्यमवर्ग मुस्लिम परिवारमे हिनकर जन्म भेल छल ।,आ हिनकर पिता जैनुलाब्दीन नै तँ बहुतेक पढ़ल-लिखल छल, नै तँ बेसी पैसा वला छल । हिनकर पिता मलाहसभके नाह भाडा पऽ दैत छल । अब्दुल कलाम संयुक्त परिवारमे रहैत छल । परिवारक सदस्यसभक सङ्ख्याक अनुमान यएह बातसँ लगाएल जा सकैत अछि कि हिनकर स्वयं पाँच भाए आ पाँच बहीन आ घरमे तीन परिवारसभ रहैत छल । अब्दुल कलामक जीवन पर हुनकर पिताक बड्ड प्रभाव रहल । ओ पढ़ल-लिखल नै भेलाक बादो कलामक लगन आ हुनकर देल संस्कार अब्दुल कलामके बहुत काज आएल । इसरो लॉन्च व्हीकल प्रोग्रामकs उपर चढ़ाबक श्रेय सेहो हिन्का प्रदान कएल जाइत अछि। डाक्टर कलाम स्वदेशी लक्ष्य भेदी नियन्त्रित प्रक्षेपास्त्र (गाइडेड मिसाइल्स)क डिजाइन केलखिन। इ अग्नि एवं पृथ्वी जका प्रक्षेपास्त्रसभक स्वदेशी तकनीकसँ बनाएल गेल छल। डाक्टर कलाम जुलाई १९९२सँ दिसम्बर १९९९ धरि रक्षा मन्त्रीके विज्ञान सलाहकार तथा सुरक्षा शोध आर विकास विभागक सचिव छेलखिन। ओ रणनीतिक प्रक्षेपास्त्र प्रणालीक उपयोग आग्नेयास्त्रसभक रूपमे केलखिन। अही प्रकार पोखरणमे दोसर बेर परमाणु परीक्षण सेहो परमाणु ऊर्जाके साथ मिलाकs केएने छल। अही प्रकार भारत दवार परमाणु हथियारक निर्माणकs क्षमता प्राप्त करsमे सफलता अर्जित केलक। डाक्टर कलाम भारतके विकासस्तरकs २०२० धरि विज्ञानक क्षेत्रमे अत्याधुनिक करsके लेल एक विशिष्ट सोच प्रदान केएने अछि। 

डाक्टर अब्दुल कलाम भारतक एगारहम राष्ट्रपति निर्वाचित भेल छेलखिन। हिन्का भारतीय जनता पार्टी समर्थित एन॰डी॰ए॰ घटक दलसभ दवारा अपन उम्मीदवार बनाओल गेल छल जकरा वामदलक अलावा समस्त दलसभ दवारा समर्थन कएल गेल छल। १८ जुलाई २००२ कs डाक्टर कलाम के नवम प्रतिशत बहुमत द्वारा भारतक राष्ट्रपति चुनल गेल छल आर हिन्का २५ जुलाई २००२ कs संसद भवनक अशोक कक्षमे राष्ट्रपति पदक शपथ दिएल गेलै। 

राष्ट्रपती कार्यालय छोड़लाक बाद, कलाम भारतीय प्रबन्धन संस्थान शिलोंग, भारतीय प्रबन्धन संस्थान अहमदाबाद, भारतीय प्रबन्धन संस्थान इन्दोर आ भारतीय विज्ञान संस्थान,बैंगलोरके मानद फैलो, आ एक विजिटिङग प्रोफेसर बनि गेलखिन। आर लगभग ६:३० बजे गम्भिर हालतमे हुन्का बेथानी अस्पतालमे आईसीयूमे लS जाए पड़लै आर करीब दू घन्टाक बाद हुन्कर मृत्युक पुष्टि कs देल गेल।

मृत्युके तुरन्त बाद कलामके शरीरकS भारतीय वायु सेनाके हेलीकॉप्टरसँ शिलोंगसँ गुवाहाटी लाएल गेल। जहि ठाम
दोसर दिन  २८  जुलाईक पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलामक पार्थि‍व शरीर मंगलदिन दुपहर वायुसेनाके विमान सी-130जे हरक्यूलिससँ दिल्ली लाएल गेल। लगभग १२:१५ पर विमान पालम हवाईअड्डा पर उतरल। सुरक्षा बल दवारा पूरे राजकीय  सम्मानके साथ कलामक पार्थिव शरीरकs विमानसँ उतारि।ओही ठाम प्रधानमन्त्री नरेद्र मोदी, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, दिल्लीके मुख्यमन्त्री अरविन्द केजरीवाल उ तीनु सेनासभक  प्रमुख दवारा अगवानी करि आर कलामके पार्थिव शरीर पर पुष्पहार अर्पित केलक।
एकर बाध तिरङ्गामे लिपटल डॉ. कलामके पार्थि‍व शरीर कs पूरे सम्मानके साथ, एक गन कैरिजमे राखि हुन्कर आवास १० राजाजी मार्ग पर लsगेल छल। 

२९ जुलाईक भोर वायुसेना विमान सी-130जे सँ भारतीय ध्वजमे लपेटल कलामक शरीरक पालम एयर बेस परसँ मदुरै होइत फेर हुन्कर गृह स्थान रामेश्वरममे  अन्तिम दर्शनक बाध 

डाक्टर कलाम साहित्यिक रूपसँ सेहो अपन विचारसभकs चारि पुस्तकसभमे समाहित कएने अछि, जे इ प्रकार अछि: 'इन्डिया २०२० अ विज़न फ़ॉर द न्यू मिलेनियम', 'माई जर्नी' तथा 'इग्नाटिड माइंड्स- अनलीशिंग द पॉवर विदिन इन्डिया'। 

कलाम साहबक प्रमुख पुस्तकसभ अही प्रकार अछि:

अन्य लेखक द्ववारा डाक्टर कलामक जीवनी या जीवनके विविध पहलुसभ पर पुस्तकसभ लिखल गेल अछि जाहिमे किछ प्रमुख निम्नवत अछि:

डाक्टर कलामक ७९अम जन्म दिनक अवसरमे संयुक्त राष्ट्र सङ्घद्वारा विश्व विद्यार्थी दिवस क रूपमे मनाओल गेल छल । एकर बाधो ओ लगभग चालीस विश्वविद्यालयसभ द्वारा मानद डाक्टरेटक उपाधिसभ प्रदान कएल गेल छल भारत सरकार द्ववारा हुनका सन् १९८१ मे पद्म भूषण आ सन् १९९० मे पद्म विभूषणद्वारा सम्मानित कएल गेल छल । हुनका इसरो आ डिआरडिओ नामक दुई वैज्ञानिक संस्थामे अपन कार्यकालमे वैज्ञानिक उपलब्धिसभक लेल तथा भारत सरकारक वैज्ञानिक सलाहकारक रूपमे कार्य हेतु प्रदान कएल गेल छल ।

सन् १९९७ मे कलाम साहबके भारतक सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान कएल गेल छल जे हुनका वैज्ञानिक अनुसन्धान आ भारतमे प्राविधिकसभक विकासमे अभूतपूर्व योगदान हेतु देल गेल छल ।

वर्ष २००५ मे स्विजरल्याण्डक सरकार डाक्टर कलामके स्विजरल्याण्ड आगमनक उपलक्ष्यमे २६ मई के विज्ञान दिवस घोषित केनए छल । कलाम नेशनल स्पेस सोसाइटी वर्ष सन् २०१३ मे अन्तरिक्ष विज्ञान सम्बन्धित परियोजनासभक कुशल सञ्चालन आ प्रबन्धनक लेल वन ब्राउन अवार्ड सँ पुरस्कृत भेल छलाह ।




#Article 224: पोप फ्रान्सिस (262 words)


फ्रान्सिस जन्म नाम: जर्ज मारियो बर्गोग्लियो (जन्म: १७ डिसेम्बर १९३६)मा भ्याटिकन सिटीमे रहल क्याथोलिक चर्चक २६६अम पोपक रूपमे १३ मार्च २०१३मे निर्वाचित व्यक्ति छी । उक्त पदमे निर्वाचित भेलाक बाद हाल ओ चर्चक प्रमुख तथा विश्वक सबसँ छोट राष्ट्र भ्याटिकन सिटीक शासक समेत भेल अछी ।

अर्जेन्टिनाक राजधानी सहर ब्युनर्स आयर्समे जन्मल जर्ज मारियोक सन् १९६९मे पुजारीक रूपमे नियुक्त कएल गेल छल । ओ सन् १९७३ सँ १९७९ तक अर्जेन्टिनाक सोसाइटी अफ जिसस नामक संस्थाक नेतृत्व केने छल । ओकर बाद सन् १९९८मे ब्युनर्स आयर्सकोआर्कबिसप होएत ओ सन् २००१मे पोपक चुनावमे मतदान कएल कार्डिनलक रूपमे चुनल गेल । सन् २०१३ फेब्रुअरी २८मे उनकर अग्रज पोप बेनेडिक्ट १६अम राजीनामा देलाक बाद पोप छनौट करवाक लेल भ्याटिकन सिटीमे आयोजित एक गोप्य भेला ओकरा पोपक रूपमे चुनलक । पोप चुनलाक बाद जर्ज मारियो प्राचिन सन्त फ्रान्सिस अफ असिसीक सम्मानमे अपन नाम फ्रान्सिस प्रथमक रूपमे परिवर्तन करलक । सोसाइटी अफ जिसससँ पोप भेल प्रथम व्यक्ति पोप फ्रान्सिस, अमेरिकी मुल तथा दक्षिणी गोलार्द्धसँ पहिल पोप छी ।

जर्ज मारियो बर्गोग्लियोक जन्म ब्युनर्स आयर्सक फ्लोरेसमे भेल छल ।  ओ इटालियन आप्रवासी मारियो जोसे बर्गोग्लियो आर उनकर पत्नी रेगिना मारिया सिभोरीक पाँच सन्तान मे एक छल । इटालीक पिडमन्ट क्षेत्रक पोर्टाकोमरोमे जन्मल मारियो जोसे एक रेलवे कामदार छल ।  उनकर पत्नी रेगिना मारिया एक गृहणी छल । रेगिनाक जन्म ब्युनर्स आयर्समे बसोबास करैत आएल एक उत्तरी इटालियन आप्रवासी परिवारमे भेल छल । जर्ज मारियोक दिदी मारिया एलेनाक अनुसार ओ सभके पिता इटालीमे भेल तानाशाही शासन ओकरा देश छोडए क लेल बाध्य बनाएल छल कहिक बेर-बेर कहल गेल छल । एलेना पोपक एकमात्र जीवित एके कोखक अपन लोग छी ।




#Article 225: नेपालक संविधान २०७२ (804 words)


नेपालक  सम्विधान नेपालक  विद्यमन सम्विधान छी। ई जनताक प्रतिनिधिद्वारा पारित कएल पहिल आ नेपालक सातम सम्विधान छी । इ सम्विधान नेपालक सम्विधानसभाद्वारा बनाएल अछि । सम्विधान सभाक दोसर निर्वाचनसँ निर्वाचित सम्विधान सभाद्वारा २०७२ साल भादो ३० गते ई सम्विधान २ तिहाई बेसी मतसँ पारित कएल गेल अछि । संगे नेपालक इतिहासमे जनता समक्ष जा मस्यौदा तयार कएल इ पहिल आ विश्वक सबसँ पिछ्ला सम्विधान छी ।
तराई भागक किछ जिलासभमे एकरविरूद्द आवाज उठल मुदा ई सम्विधान नब्बे प्रतिसतसँ बेसी बहुमतमे राष्ट्रपतिद्वारा घोषणा कएल गेल छल ।    

(१)संबिधान मूल कानून
(२)सर्वभौमसत्ता
(३)राष्ट्र
(४)नेपाल राज्य
(५)राष्ट्रीय हित
(६)राष्ट्र भाषा
(७)सरकारी कामकाजकएल भाषा
(८)राष्ट्रीय झण्डा
(९)राष्ट्रीय गान इत्यादि 

(१०).नागरिकतासँ बञ्चित नै करवाक
(११).नेपाली नागरिक ठहर्ने
(१२).वंशीय आधार तथा लैङ्गिक पहिचान सहितकएल नागरिकता
(१३).नागरिकता प्राप्ति, पुनः प्राप्ति र समप्ति
(१४).गैर आवासिय नागरिकता प्राप्त गर्न सकिने
(१५).नेपाली नागरिकता सम्बन्धी अन्य व्यवस्था

(१६)सम्मानपूर्वक बाँच्न पाउने हक 
(१७)स्वतन्त्राकएल हक
(१८)समनताकएल हक
(१९)सञ्चारकएल हक
(२०)न्याय सम्बन्धी हक
(२१)अपराध पीडितकएल हक
(२२)यातना विरूद्धकएल हक
(२३)निवारक नजरबन्द विरूद्धकएल हक
(२४)छुवाछुत र भेदभाव विरूद्धकएल हक
(२५)सम्पत्तिकएल हक
(२६)धार्मिक स्वतन्त्राकएल हक
(२७)सूचनाकएल हक
(२८)गोपनीयताकएल हक
(२९)शोषण विरूद्धकएल हक
(३०)स्वच्छ वातावरणकएल हक
(३१)शिक्षा सम्बन्धी हक
(३२)भाषा र संस्कृतिकएल हक
(३३)रोजगारकएल हक
(३४)श्रमकएल हक
(३५)स्वस्थ्य सम्बन्धी हक
(३६)खाद्य सम्बन्धी हक
(३७)आवासकएल हक
(३८)महिलाकएल हक
(३९)बालबालिकाकएल हक
(४०)दलितकएल हक
(४१)ज्येष्ठ नागरिककएल हक
(४२)सामजिक न्यायकएल हक
(४३)सामजिक सुरक्षाकएल हक
(४४)उपभोक्ताकएल हक
(४५)देश निकाला विरोद्धकएल हक
(४६)संबैधानिक उपचारकएल हक
(४७)मौलिक हककएल कार्यन्यायन
(४८)नागरिकका कर्तब्य

(४९)मर्ग निर्देशनका रूपम रहने
(५०)निर्देशक सिद्धान्त 
(५१)राज्यका नीतिहरू
(५२)राज्यकएल दायित्व
(५३)प्रतिवेदन पेश गर्ने
(५४)अनुगमन सम्बन्धी व्यवस्था
(५५)अदालतम प्रश्न उठाउन नसकिने

(५६)राज्यकएल संरचना
(५७)राज्य शक्तिकएल बाँडफाँड
(५८)अविशिष्ट अधिकार
(५९)आर्थिक अधिकारकएल प्रइग
(६०)राजश्व स्रोतकएल बाँडफाँड

(६१)राष्ट्रपति
(६२)राष्ट्रपतिकएल निर्वाचन
(६३)राष्ट्रपतिकएल पदावधि
(६४)राष्ट्रपतिकएल इग्यता
(६५)राष्ट्रपतिकएल पद रिक्त हुने अवस्था
(६६)राष्ट्रपतिकएल काम, कर्तव्य र अधिकार
(६७)उपराष्ट्रपति
(६८)उपराष्ट्रपतिकएल पद रिक्त हुने अवस्था
(६९)उपराष्ट्रपति सम्बन्धी अन्य व्यवस्था
(७०)राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपति फरक फरक लिङ्ग वा समुदायकएल हुने
(७१)राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिकएल सपथ
(७२)राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिकएल पारिश्रमिक तथा सुबिधा
(७३)राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपतिकएल कार्यालय

(७४) शासकीय स्वरूप
(७५)कार्यकरणी अधिकार 
(७६)मन्त्रीपरिषद गठन 
(७७)प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रीपरिषद रिक्त हुने अवस्था 
(७८)संघीय संसदकएल सदस्य नभाकएल व्यक्ति मन्त्री हुने 
(७९)प्रधानमन्त्री र मन्त्रीकएल पारि श्रमिक तथा अन्य सुविधा 
(८०)शपथ 
(८१)राष्ट्रपतिलाई जानकारी दिन 
(८२)नेपाल सस्कारकएल कार्य सञ्चालन

(८३)संघीय व्यवस्थापिका 
(८४)प्रतिनिधि सभाकएल गठन 
(८५)प्रतिनिधि सभाकएल कार्यकाल 
(८६)राष्ट्रीय सभा कएल गठन र सदस्यसभकएल पदावधि 
(८७)सदस्यकएल लागि इग्यता 
(८८)शपथ 
(८९)स्थानकएल रिक्तता 
(९०)सदस्यताकएल लागि अइग्यता सम्बन्धी निर्णय 
(९१)प्रतिनिधि सभाकएल सभामुख र उपसभामुख 
(९२)राष्ट्रीय सभाकएल अध्यक्ष र उपाघ्यक्ष 
(९३)अधिवेशन आहवन र अन्त्य 
(९४)गण पूरक संख्या 
(९५)राष्ट्रपतिबाट सम्बोधन 
(९६)उपप्रधानमन्त्री, प्रधानमन्त्री, राज्य मंत्री र सहायक मन्त्रीले दुबै बैठकम भाग लिन पाउने 
(९७)समितिकएल गठन 
(९८)सदस्यकएल स्थान रिक्त रहेकएल अवस्थाम सदनकएल कार्य सञ्चालन 
(९९)मतदान 
(१००)बिस्वासकएल मत र अबिस्वाशकएल प्रस्ताब सम्बन्धी व्यवस्था 
(१०१)महाअभिइग 
(१०२)अनधिकार उपस्थित भएम वा मतदान गरेम सजाय 
(१०३)बिशेषाधिकार 
(१०४)कार्य सञ्चालन बिधि 
(१०५)बहसम बन्देज 
(१०६)संघीय संसधकएल महासचिब र सचिब 
(१०७)संघीय संसदकएल सचिबालय 
(१०८)पारिश्रमिक 

(१०९) संघीय संसदकएल व्यवस्थापिकीय अधिकार 
(११०) बिधेयक प्रस्तुत गर्ने बिधि 
(१११) बिधेयक पारित गर्ने बिधि 
(११२) बिधेयक फिरता लिने 
(११३) बिधेयकम प्रमणीकरण 
(११४) अध्यादेश

(११५) कर लगाउन वा ऋण लीन नपाउने
(११६) संघीय संचित कएलष 
(११७) संघीय संचित कएलष वा संघीय सरकारी कएलषबाट व्यय 
(११८) संघीय संचित कएलषमथि व्ययभार 
(११९) राजस्व र व्ययकएल अनुमन 
(१२०) बिनिइजन ऐन 
(१२१) पूरक अनुमन 
(१२२) पेस्कि खर्च 
(१२३) उधारो खर्च 
(१२४) संघीय आकस्मिक कएलष 
(१२५) आर्थिक कार्य बिधि सम्बन्धी ऐन 

न्याय सम्बन्धी अधिकार अदालत बाट प्रइग हुने
अदालतसभ 
सर्वोच्च अदालत 
नेपालक  प्रधान न्यायाधीस तथा सर्वोच्च अदालत्को नियुक्त र इग्यता 
प्रधान न्यायाधीश तथा न्यायाधीश कएल सेवाका सर्त र सुविधा 
प्रधान न्यायाधीश वा सर्वोच्च अदालत कएल न्यायाधीश कएल पद रिक्त हुने 
प्रधान न्यायाधीश तथा सर्वोच्च अदालत कएल न्यायाधीश लाइनम अन्य कुनै काम म लगाउन नहुने 
सर्वोच्च अदालत कएल अधिकार क्षेत्र 
मुद्दा सार्न सक्ने 
बहस,पैरवी गर्न नपाउने 
प्रधान न्यायाधीश कएल जिम्मेवारी 
संबैधानिक इजलास कएल गठन 
बार्षिक प्रतिबेदन 
उच्च अदालत 
उच्च अदालत का मुख्य न्यायाधीश तथा न्यायाधीश कएल नियुक्त्ति र इग्यता 
मुख्य न्यायाधीश तथा न्यायाधीश कएल सेवाका सर्त तथा सुबिधा 
मुख्य न्यायाधीश  वा न्यायाधीश कएल पद रिक्त हुने 
मुख्य न्यायाधीश तथा न्यायाधीस लाई अन्य कुनै कामम लगाउन नहुने र सरुवा सम्बन्धी व्यवस्था 
उच्च अदालत कएल अधिकार क्षेत्र 
मुद्दा सार्न सक्ने 
बहस र पैरवी गर्न पाउने 
न्यायाधीश कएल जिम्मेवारी 
जिल्ला अदालत 
जिल्ला अदालत कएल न्यायाधीश कएल नियुक्ती, इग्यता तथा पारिश्रमिक र सेवाका अन्य सर्त 

महान्यायाधिवक्ता 
महान्यायाधिवक्ता कएल काम कर्तव्य र अधिकार 
बार्षिक प्रतिवेदन 
मुख्य न्यायाधिवक्ता 
सेवाका सर्त र सुबिधा सम्बन्धी व्यवस्था 

प्रादेशिक कार्यकाराणी अधिकार 
प्रदेश सम्बन्धी व्यवस्था 
प्रदेश प्रमुखकएल इग्यता 
प्रदेश प्रमुख्को पद रिक्त हुने अवस्था 
प्रदेश प्रमुखकएल काम,कर्तब्य र अधिकार 
प्रदेश प्रमुख्को शपथ 
प्रदेश मन्त्रीपरिषदकएल गठन 
मुख्य मन्त्री तथा मन्त्रीकएल पद रिक्त हुने अवस्था 
प्रदेश सभाकएल सदस्य नभएकएल व्यक्ति मन्त्री हुन सक्ने 
मुख्यमन्त्री आ मन्त्रीक पारिश्रमिक आ अन्य सुबिधा 
शपथ 
प्रदेश प्रमुख लाई जानकारी दिने 
प्रदेश सरकार कएल कार्य सञ्चालन 

प्रदेश व्यवस्थापिका
प्रदेश सभा कएल गठन 
प्रदेश सभाकएल कार्यकाल 
प्रदेश सभाकएल सदस्य का लागि इग्यता 
प्रदेश सभाका सदस्य कएल शपथ 
प्रदेश सभाका सदस्य कएल स्थान रिक्त हुने 
प्रदेश सभाकएल सदयका अइग्यता सम्बन्धी निर्णय 
प्रदेश सभाकएल सभामुख र उपसभामुख 
प्रदेश सभाकएल अधिबेशन आव्हान र अन्त्य 
प्रदेश प्रमुखबाट सम्बोधन 
प्रदेश सभाकएल गुण पुरक संख्या 
प्रदेश सभाकएल मतदान 
प्रदेश सभाकएल बिषेशाधिकार 

 

 

 

 

 

 




#Article 226: २०१६ आइसिसी वर्ल्ड ट्वान्टी-ट्वान्टी (126 words)


२०१६ आइसिसी वर्ल्ड ट्वान्टी-ट्वान्टी प्रतियोगिता आइसिसी वर्ल्ड ट्वान्टी-ट्वान्टीक छठम संस्करण छी । ई आइसिसी टुर्नामेन्ट भारतमे आयोजना होमत ।

सन् २०१५ जनवरी २८ मे बैसल अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेट परिषदक बोर्ड बैसार सन् २०१६ क टि२० क्रिकेट विश्वकप आयोजना करैक अधिकार भारतके प्रदान कल्हिक । ई प्रतियोगिताक पिछला संस्करणक विजेता श्रीलंका छी । सन् २०१५ अक्टुबरमे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्डक अध्यक्ष शाहरयार खान कहलनि यदि भारत विरुद्धक शृङ्खला नैभेल तहन पाकिस्तान प्रतियोगितामे भाग नैलेवाक बात बतौने छल ।

 सुपर १०क लेल छनौट

 सुपर १०
को लागि छनौट

 नकआउट चरणमे पहुँच  सफल ।

 नकआउट चरणमा पुग्न सफल ।

यदि पाकिस्तान समूह बी मे दोसर होमत तहन ओ सेमिफाइनल खेल मार्च ३० मे दिल्लीमे खेलत । सेमिफाइनल खेलसभ मुम्बईमे होनाए तय भेलाबादो  सुरक्षाक कारण दिल्लीमे घस्काएल बात आइसिसी जनेने अछि ।




#Article 227: संरक्षण स्थिति (147 words)


कोनो प्रजातिक संरक्षण स्थिति ओहि सम्भावनाक द्योतक छी कि ओ प्रजाति वर्तमानमे वा निकट भविष्यमे विलोपनसँ बचल रहै । कोनो प्रजातिक संरक्षण स्थितिक आकलनक लेल बहुतेक कारकसभक ध्यानमे राखल जाएत अछि: नै मात्र की ओ प्रजातिक शेष सदस्यसभक सङ्ख्या, अपितु ओकर जनसङ्ख्यामे एक खास अवधिक दौरान समग्र वृद्धि वा कमी, प्रजनन सफलताक दर, ज्ञात जोखिम आदि।

सङ्कटग्रस्त प्रजातिसभक आइयुसिएन लाल सूची, एक सबसँ बेहतर विश्वव्यापी संरक्षण स्थिति सम्बन्धी सूची आर क्रमाङ्क प्रणाली छी । ई प्रणालीमे सङ्कटग्रस्त प्रजातियसभके तीन श्रेणीमे बांटल गेल अछि: गम्भीर रूपसँ विलुप्तप्राय (CR), विलुप्तप्राय (EN) आ असुरक्षित (VU)। एकरसंगे सन् १५०० सँ अखनधरि विलुप्त भ गेल आ जङ्गलमे विलुप्त भ गेल जीवसभ सूचीबद्ध अछि । कम जोखिम भेल जीवसभ सेहो श्रेणीमे विभाजित अछि ।
विलुप्तप्राय जीवसभ आ वनस्पतिक अन्तर्राष्ट्रिय व्यापारक अन्तर्राष्ट्रिय समझौता ई बातक सुनिश्चित करैत अछि कि जङ्गली जानवरसभ आ गाछक नमूनासभक व्यापार ई जीवसभ आ वनस्पतिसभक अस्तित्वक खतरामे नै धकेल दै। 




#Article 228: होली (558 words)


होली (;  Holī) हिन्दू संस्कृतिमे हरेक वर्षक फागुन शुक्ल पूर्णिमा अर्थात होली पूर्णिमाक दिन मनाएल जाइत अछि । ई पावनि नेपाल], भारत तथा अन्य राष्ट्रसभमे बैसैवला हिन्दूसभक  एकटा महत्वपूर्ण पावनि छी । ई पावनि वसन्त ऋतुक फागुन मासमे मनाएल जाइत अछि । होलीमे नेपाली समुदायमे फागु पूर्णिमा आ मिथिलामे फगुवाक नामसँ सेहो जानल जाइत अछि । होली रङ्गक पावनि छी । होलीक दिन सम्पूर्ण हिन्दूधर्मावलम्बी एक दोसरके विभिन्न प्रकार सँ रङ्ग आ अबीर लगबैत अछि ।  मिठाई आ पकवान ग्रहण करबैत अछि । 
होली पावनि घरपरिवार-साथीभाई आपसमे रङ्ग लगाए उल्लासपूर्वक फागुन पूणिर्माक अवसरमे पहाड़सँ, तराई आर गाम आ शहरधरि बच्चा, युवा, युवती तथा प्रौढसभक हूल तथा जत्थासभ हातमे रङ्ग आ रङ्गीन घोल पदार्थ लऽ गीत गावैत, बजावैत, मनोरञ्जन होहल्ला करैत आपसी रिसराग छोड़िक उत्साह आ उमङ्गक साथ मनबैत अछि । 

होलीक बारेम पौराणिक भनाइ अनुसार प्राचीन समयमा अथवा सत्य युगमे नास्तिक हिरण्यकश्यपु नामक एक गोटे राक्षसक जन्म भेल छल । हिरण्यकश्यपुक भगवान विष्णु नृसिंह अवतारम प्रकट भक संघहार केलक । हिरण्यकश्यपुक सुपुत्र भक्त प्रह्लाद छल । भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णुक निक भक्त छल । अपन पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णुक भजन करैत हिरण्यकश्यपुक रास नै भेल । अहिल ओ राजा प्रह्लादक मारक लेल योजनासभ बनावैत छल । एक योजना अनुसार हिरण्यकश्यपु पुत्रके अग्निकुण्डमे फेक माइर अपन बहिन होलिका(जे अग्निसँ नै डहत वरदान भेटल छल)क जिम्मा देलक । हिरण्यकश्यपुक आदेशानुसार होलिका प्रह्लादक काखम लक अग्निम वैठ आगनि धर्मक साथ देलक होलिका डहैक नष्ट भेल प्रह्लादक किछ नै भेल  । होलिका दहनक खुसियाली मनाओल आपसमा रङ्ग आ अविरक होली पावनि मनावैक परम्परा चलल धार्मिक मान्यता रहि गेल अछि । तहिना दोसर एक प्रसङ्ग अनुसार द्वापर युगम श्रीकृष्णक मार् उद्देश्य सँ दूध पिलावै गेल कंशक शेना पुतना नामक राक्षसनीक उल्टा कृष्ण मारिदेलक तहिद्वरा शवके ब्रजवासीहसभ अहि दिन जलाक आपसमा रङ्ग आर अबिर छरी खुसियाली मनाओलक वोहिक सम्झनामा अद्यावधिक चीरदाहक होली खेल्ल परम्परा चलल भनाइ अछि । होली हिन्दूसभक अत्यन्त प्राचीन पावनि छी । इतिहासकारसभ मानैत अछि कि ई पावनिक प्रचलन आर्यसभ सेहो छल । ई पावनिक वर्णन अनेक पुरातन धार्मिक पुस्तकसभमे भेटल जाइत अछि । नारद पुराण आ भविष्य पुराण जेहन प्राचीन हस्तलिपीसभमे ग्रन्थसभमे सेहो ई पावनिक उल्लेख  कएल गेल अछि। भारतम विंध्यक्षेत्रको राम गढमर स्थानम स्थित ईसा सँ ३०० वर्ष पुरान एकटा अभिलेखम सेहो एकर उल्लेख कएल गेल अछि। संस्कृत साहित्यम वसन्त ऋतु आर वसन्तोत्सव अनेक कविसभक प्रिय विषय छल ।

फागु पुर्णिमा आ होली ई चाड नेपालम हर्शोल्लाशका साथ मनाओल जाइत अछि। होलीक एक दिन अगाडी साझ नेपालक बसन्तपुर दरबार अगाडि  'होलिका दहन'क ई चाडक सुरुवात होइत अछि। हिरण्यकश्यपुक बहिन होलिकाक बिष्णुके भक्त हिरण्यकश्यपुके सुपुत्र (प्रह्लाद) के मारि अग्नी नजिक जा होलिका पने जलिक नस्ट भेलाहक कारण असत्य माथि सत्यक जित भेल दिनक रुपमा ई पर्ब मनावैत अछि। हिन्दू धर्म मानेवालासभ बाहुल्यता भेल नेपालम होलीक रौनक पूर्व मेची सँ पश्चिम महाकाली धरि भब्य होइत अछि । नेपालम पहाडी क्षेत्रम फागु पुर्णिमाक दिन होली मनावैत् अछि तहिना वोकर बिहान मात्र तराइमा मनाओल जाइत अछि।नेपालक बिशेष शहरसभ काठमाडौं, पोखरा, धरान, चितवन, बिराटनगर, धनगढी लगायत ठामसभमे होलीक रौनक बहत फरक होईत अछि । बिशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमसभ ओही रङसभक बर्षासँ शहरक होली रमावैत अछि । नेपालक गाउसभमे सेहो होली भब्यताका साथ मनावैत अछि । होलीमे पानी फेकनाई, अबिर लगायत रङ लगेवाक चलन अछि। होली बिभिन्न प्रकारक बिक्रिती बिसंगती सेहो भेटल गेल अछि। होलीम आजुक युवासभ अण्डा फोड्न् , गाडीक मोबिल लगा ,  युवासभ मदिरा सेवन जेहन काम होइत अछि जेहन होइत अछि। नेपालक मुख्य शहरसभम होलीक लेल बिभिन्न ठामसभमे कडा सुरक्षा जांच होइत अछि। 




#Article 229: वसन्त (342 words)


वसन्त नेपाल आ उत्तर भारत तथा समीपवर्ती देशक छ टा ऋतुसभमे सँ एक ऋतु छी, जे फरबरी, मार्च आ अप्रैलक मध्य ई क्षेत्रमे अपन सौन्दर्य देखबैत अछि । माघ महिनाक शुक्ल पञ्चमी सँ वसन्त ऋतुक आरम्भ होइत अछि । फागुन आ चैत्र मास वसन्त ऋतु मानल जाइत अछि । फागुन वर्षक अन्तिम मास छी आ चैत पहिल । एहि प्रकार हिन्दू पञ्चाङ्गमे वर्षक अन्त आ प्रारम्भ वसन्तमे होइत अछि । ई ऋतु अएला सँ सर्दी कम होइत अछि । मौसम सुहावना होइत अछि । बृक्षमे नव पात अवैत अछि । आम टिक्लासँ लदि जाइत अछि आ खेत सरसों कऽ फूलसँ भरि जाइत अछि अतः राग रङ्ग आ उत्सव मनेवाक लेल ई ऋतु सर्वश्रेष्ठ मानल गेल अछि आ एकरा ऋतुराज कहल जाइत अछि ।

ई ऋतुमे वातावरणीय तापमान प्रायः सुखद रहैत अछि । भारत आ नेपालमे ई ऋतु फरबरीसँ मार्चधरि होइत अछि । अन्य देशसभमे ई अलग समय पर होइत अछि । ई ऋतुकें विशेषतासभ मौसम गरम होनाए, फूल फुलनाए, गाछ वृक्ष हरियर होनाए आ बर्फ पिघलनाए । नेपाल आ भारतक एक मुख्य पर्व छी होली जे वसन्त ऋतुमे मनाएल जाइत अछि । ई एक सन्तुलित मौसम छी । ई मौसममे चारो दिस हरियाली होइत अछि । बृक्षमे नव पात अवैत अछि । ई ऋतुमे बहुत लोक उद्यान आ तालाब आदिमे घुमैलेल जाइत अछि ।

पौराणिक कथासभ अनुसार वसन्तकें कामदेवक पुत्र कहल जाइत अछि । कवि देव वसन्त ऋतुकें वर्णन करैत कहने अछि की रूप व सौन्दर्यक देवता कामदेवक घर पुत्रोत्पत्तिक समाचार पाबिते प्रकृति झुमि जाइत अछि । वृक्षसभ ओकर लेल नव पल्लवकें पालना विछबैत अछि, फूल वस्त्र पहिरावैत अछि पवन झुलवैत अछि आ कोइली गीत सुनाए बहलावैत अछि । भगवान कृष्ण गीतामे कहलक ऋतुसभमे हम वसन्त छी । 

वसन्त ऋतुमे वसन्त पञ्चमी, शिवरात्रि तथा होली नामक पर्व मनाएल जाएत अछि । नेपाली आ भारतीय सङ्गीत साहित्य आ कलामे एकर महत्वपूर्ण स्थान अछि । सङ्गीतमे एक विशेष राग वसन्तक नाम पर बनल अछि जकरा  राग बसन्त कहल जाइत अछि । वसन्त राग पर चित्र बनल अछि।

नेपाल आ उत्तर भारतमे ६ ऋतु होइत अछि - वसन्त, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, शिशिर आ हेमन्त ।




#Article 230: ऋतु (248 words)


ऋतु एक वर्ष स छोट कालखंड छी  जहिमे  मौसम क दशाएं एक खास प्रकारस होइत अछि। इ  कालखण्ड एक वर्ष क भाग म विभाजित करैत अछि जाहि दौरान पृथ्वी क सूर्य क परिक्रमा क परिणामस्वरूप दिन क अवधि, तापमान, वर्षा, आर्द्रता इत्यादि मौसमी दशाएँ एक चक्रीय रूप म बदलैत अछि। मौसम क दशाओं म वर्ष क दौरान इ  चक्रीय बदलाव क प्रभाव पारितंत्र पर पडैत अछि आर इ  प्रकार पारितंत्रीय ऋतुसभ  निर्मित होइत अछि यथा नेपाल आर  पश्चिम बंगाल म जुलाई स सितम्बर तक वर्षा ऋतु होइत , यानि  नेपाल आर पश्चिम बंगाल म जुलाई स अक्टूबर तक, वर्ष क अन्य कालखंडो क अपेक्षा अधिक वर्षा होइत अछि। इ  प्रकार यदि कहल जायकी  तमिलनाडु म मार्च स जुलाई तक गृष्म ऋतु होइत अछि, एकर  अर्थ छी  कि तमिलनाडु म मार्च स जुलाई तक क महीना म  साल क अन्य समय क अपेक्षा गर्म होइत अछी ।

नेपाल आर भारत म परंपरागत रूप स मुख्यतः छः ऋतुएं परिभाषित कएल जाएत अछि। -

ऋतु परिवर्तनक  कारण पृथ्वी द्वारा सूर्य क चारों ओर परिक्रमण आर पृथ्वी क अक्षीय झुकाव अछि।
पृथ्वी क डी
घूर्णन अक्ष  परिक्रमा पथ स बनल  समतल पर लगभग 66.5 अंश का कोण बनैत अछि जेकर  कारण उत्तरी आ  दक्षिणी गोलार्धों म स कोनो एक गोलार्द्ध सूर्य क ओर झुकैत अछि। इ झुकाव सूर्य क चारो ओर परिक्रमा क कारण वर्ष क अलग-अलग समय अलग-अलग होइत अछि जहिमे  दिन-रात क अवधि म घट-बढ़ क एक वार्षिक चक्र निर्मित होइत अछि। यी  ऋतु परिवर्तन क मूल कारण होइत अछि।




#Article 231: श्रीमद्भगवद्गीता (1165 words)


श्रीमद्भगवद्‌गीता हिन्दु क पवित्रतम ग्रन्थसभमेसँ एक छी । महाभारतक अनुसार कुरुक्षेत्र युद्धमे श्री कृष्ण  गीताक सन्देश अर्जुनक सुनाबऽ छलाह। ई महाभारतक भीष्मपर्वक अन्तर्गत आ  एक उपनिषद् छी । अहिमे  एकश्वरवाद, कर्म योग, ज्ञानयोग, भक्ति योगक बहुत सुन्दर ढङ्गसँ होएत अछि । अहिमे  देहसँ अतीत आत्माक निरूपण वर्णन कएल गेल अछि ।

श्रीमद्भगवद्‌गीताक पृष्ठभूमि महाभारतक युद्ध छी ।जे प्रकार एक सामान्य मनुष्य अपन जीवनक समस्यामे उलझि किंकर्तव्यविमूढ़  जाएत अछि  आ ओकर पश्चात जीवनक समराङ्गणसँ पलायन करिक मन बना लैत छै  ओही  प्रकार अर्जुन जे महाभारतक महानायक छी  अपन समक्ष आबऽ बला समस्याकसँ भयभीत भऽ जीवन आ क्षत्रिय धर्मसँ निराश होएत अछि , अर्जुनक जेका ही अपना सभ कहियो-कहियो अनिश्चयक स्थितिमे या तऽ हताश भऽ जाएत अछि  आर फेर अपन समस्यास  उद्विग्न करि कर्तव्य विमुख भऽ जाएत अछि। भारत वर्षक ऋषिसभ गहन विचारक पश्चात जे  ज्ञानक आत्मसात कि आर ओ हुनका द्वारा वेदक नाम देल गेल छलाह । एहा वेदसभक अन्तिम भाग उपनिषद कहल जाइत अछि । मानव जीवनक विशेषता मानव कऽ प्राप्त बौद्धिक शक्ति छी  आ उपनिषदसभमे निहित ज्ञान मानवक बौद्धिकताक उच्चतम अवस्था त छी , अपितु बुद्धिक सीमासभक समुचे मनुष्य की अनुभव करि सकैत अछि  ओकर एक झलक सेहो दिखल दैत अछि ।

संस्कृत साहित्य क पम्परा म वो ग्रन्थों को भाष्य (शाब्दिक अर्थ - व्याख्या क योग्य), कहते अछिजो दूसरे ग्रन्थों क अर्थ क वृहद व्याख्या आर टीका प्रस्तुत करते अछि। भारतीय दार्शनिक परंपरा मकिसी भी नयाँ दर्शन को आर किसी दर्शन क नयाँ स्वरूप को जड़ जमाने क लेल  तीन ग्रन्थों प अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करना पड़ता छेलाह (अर्थात् भाष्य लिखकर) जहिमे भगवद्गीता भी एक छी  (अन्य दुनु अछि- उपनिषद् तछेलाह ब्रह्मसूत्र)।

भगवद्गीता प लिखे गये प्रमुख भाष्य निम्नानुसार अछि-

श्रीमद्भगवद्गीता बदलति सामाजिक परिदृश्यसभमे अपन महत्ता को बनाए हुए छी  और इसी कारण तकनीक विकास ने इसक उपलब्धता को बढ़ाआर छी , तछेलाह अधिक बोधगम्य बनाने का प्रआरस किआर छी । दूरदर्शन प प्रसारित धारावाहिक महाभारत मभगवद्गीता विशेष आकर्षण रही, वहीं धारावाहिक श्रीकृष्ण (धारावाहिक) मभगवद्गीता प अत्यधिक विशद शोध करक उसे कई कड़ियों क एक शृंखला क रूप मदिखाआर गआर। इसक एक विशेष बात यह रही कि गीता से संबंधित सामान्य मनुष्य क संदेएत को अर्जुन क प्रश्नों क माध्यम से उत्तरित करने का प्रआरस किआर गआर। इसक अलावा नीतीश भारद्वाज कृत धारावाहिक गीता-रहस्य (धारावाहिक) त पूर्णतआर गीता क ही विभिन्न आआरमों प केंद्रित रहा।
इंटरनेट प भी आज अनेकानेक वेबसाइटें इस विषय प बहुमाध्यमों क द्वारा विशद जानकारी देती अछि।

श्रीमद्भगवद्गीता वर्तमान मधर्म से ज्यादा जीवन क प्रति अपने दार्शनिक दृष्टिकोण को लेकर भारत मही नहीं विदेशों मभी लोगों का ध्यान अपनी और आकर्षित कर रही छी । निष्काम कर्म का गीता का संदेश प्रबंधन गुरुओं को भी लुभा रहा छी । विश्व क सभी धर्मों क सबसे प्रसिद्ध पुस्तक मशामिल छी । गीता प्रेस गोरखपुर जैसी धार्मिक साहित्य क पुस्तक को काफी कम मूल्य प उपलब्ध कराने वाले प्रकाशन ने भी कई आकार मअर्थ और भाष्य क साथ श्रीमद्भगवद्गीता क प्रकाशन द्वारा इसे आम जनता तक पहुंचाने मकाफी योगदान दिआर छी ।

गीता का उपदेश अत्यन्त पुरातन योग छी । श्री भगवान् कहते अछिइसे मैंने सबसे पहले सूर्य से कहा छेलाह। सूर्य ज्ञान का प्रतीक छी  अतः श्री भगवान् क वचनों का तात्पर्य छी  कि पृथ्वी उत्पत्ति से पहले भी अनेक स्वरूप अनुसंधान करने वाले भक्तों को यह ज्ञान दे चुका हूँ। यह ईश्वरीय वाणी छी  जिसमसम्पूर्ण जीवन का सार छी  एवं आधार छी । मैं कौन हूँ? यह देह क्या छी ? इस देह क साथ क्या मरा आदि और अन्त छी ? देह त्याग क पश्चात् क्या मरा अस्तित्व रहेगा? यह अस्तित्व कहाँ और किस रूप मगा? मरे संसार मआने का क्या कारण छी ? मरे देह त्यागने क बाद क्या गा, कहाँ जाना गा? किसी भी जिज्ञासु क हृदय मयह बातें निरन्तर घूमती रहती अछि। हम सदा इन बातों क बारे मसोचते अछिऔर अपने को, अपने स्वरूप को नहीं जान पाते। गीता शास्त्र मइन सभी क प्रश्नों क उत्तर सहज ढंग से श्री भगवान् ने धर्म संवाद क माध्यम से दिये अछि। इस देह को जिसम36 तत्व जीवात्मा क उपस्थिति क कारण जुड़कर कार्य करते अछि, क्षेत्र कहा छी  और जीवात्मा इस क्षेत्र मनिवास करता छी , वही इस देह का स्वामी छी  पन्तु एक तीसरा पुरुष भी छी , जब वह प्रकट ता छी ; अधिदैव अर्थात् 36 तत्वों वाले इस देह (क्षेत्र) को और जीवात्मा (क्षेत्रज्ञ) का नाश कर डालता छी । यही उत्तम पुरुष ही पम स्थिति और पम सत् छी । यही नहीं, देह मस्थित और देह त्यागकर जाएत हुए जीवात्मा क गति का यछेलाहर्थ वैज्ञानिक एंव तर्कसंगत वर्णन गीता शास्त्र महुआ छी । जीवात्मा नित्य छी  और आत्मा (उत्तम पुरुष) को जीव भाव क प्राप्ति हुई छी । शरीर क मर जाने प जीवात्मा अपने कर्मानुसार विभिन्न योनियों मविचरण करता छी । 
गीता का प्रारम्भ धर्म शब्द से ता छी  तछेलाह गीता क अठारहवें अध्याय क अन्त मइसे धर्म संवाद कहा छी । धर्म का अर्थ छी  धारण करने वाला अथवा जिसे धारण किआर गआर छी । धारण करने वाला जो छी  उसे आत्मा कहा गआर छी  और जिसे धारण किआर छी  वह प्रकृति छी । आत्मा इस संसार का बीज अर्थात पिता छी  और प्रकृति गर्भधारण करने वाली योनि अर्थात माता छी । 

धर्म शब्द का प्रयोग गीता मआत्म स्वभाव एवं जीव स्वभाव क लेल जगह जगह प्रयुक्त हुआ छी । इसी परिपेक्ष मधर्म एवं अधर्म को समझना आवश्यक छी । आत्मा का स्वभाव धर्म छी  अथवा कहा जाय धर्म ही आत्मा छी । आत्मा का स्वभाव छी  पूर्ण शुद्ध ज्ञान, ज्ञान ही आनन्द और शान्ति का अक्षय धाम छी । इसक विपरीत अज्ञान, अशांति, क्लेश और अधर्म का द्योतक छी । 

आत्मा अक्षय ज्ञान का स्रोत छी । ज्ञान शक्ति क विभिन्न मात्रा से क्रिआर शक्ति का उदय ता छी , प्रकति का जन्म ता छी । प्रकृति क गुण सत्त्व, रज, तम का जन्म ता छी । सत्त्व-रज क अधिकता धर्म को जन्म देती छी , तम-रज क अधिकता ने प आसुरी वृत्तियाँ प्रबल ती और धर्म क स्थापना अर्थात गुणों क स्वभाव को स्थापित करने क लेल, सतगुण क वृद्धि क लेल, अविनाशी ब्राह्मी स्थिति को प्राप्त आत्मा अपने संकल्प से देह धारण कर अवतार गृहण करती छी । 

सम्पूर्ण गीता शास्त्र का निचोड़ छी  बुद्धि को हमशा सूक्ष्म करते हुए महाबुद्धि आत्मा मलगाये रक्खो तछेलाह संसार क कर्म अपने स्वभाव क अनुसार सरल रूप से करते र। स्वभावगत कर्म करना सरल छी  और दूसरे क स्वभावगत कर्म को अपनाकर चलना कठिन छी  क्योंकि प्रत्येक जीव भिन्न भिन्न प्रकृति को लेकर जन्मा छी , जीव जिस प्रकृति को लेकर संसार मआआर छी  उसमसरलता से उसका निर्वाह  जाता छी । श्री भगवान ने सम्पूर्ण गीता शास्त्र मबार-बार आत्मरत, आत्म स्थित ने क लेल कहा छी । स्वाभाविक कर्म करते हुए बुद्धि का अनासक्त ना सरल छी  अतः इसे ही निश्चआरत्मक मार्ग माना छी । यद्यपि अलग-अलग देखा जाय त ज्ञान योग, बुद्धि योग, कर्म योग, भक्ति योग आदि का गीता मउपदेश दिआर छी  पन्तु सूक्ष्म दृष्टि से विचार किआर जाय त सभी योग बुद्धि से श्री भगवान को अर्पण करते हुए किये जा सकते अछिइससे अनासक्त योग निष्काम कर्म योग स्वतः सिद्ध  जाता छी । (सन्दर्भ - बसंतेश्वरी भगवदगीता से)




#Article 232: भारत रत्न (105 words)


भारत रत्न भारतक सर्वोच्च नागरिक सम्मान छी। ई सम्मान राष्ट्रिय सेवाक लेल प्रदान कएल जाएत अछि । ई सेवासभ छी कला, साहित्य, विज्ञान आ सार्वजनिक सेवा । ई सम्मानक स्थापना २ जनवरी, १९५४ मे भारतक तत्कालीन राष्ट्रपति श्री राजेन्द्र प्रसादद्वारा कएल गेल छल । अन्य अलङ्करणक समान ई सम्मान सेहो नामक संग पदवीक रूपमे नै लेल जाएत अछि ।
 प्रारम्भमे ई सम्मान मरणोपरान्त देवाक प्रावधान नै छल, ई प्रावधान सन् १९५५मे जोडल गेल । अहि पश्चात अखन धरिक सम्मानमे १० व्यक्तिसभक मरणोपरान्त भारत रत्न प्रदान प्रदान कएल गेल अछि । 

अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कारसभमे पद्म विभूषण, पद्म भूषण आ पद्मश्रीक नाम लेल जा सकएत अछि ।




#Article 233: हनुमान चालीसा (542 words)


हनुमान चालीसा तुलसीदास कs एकटा काव्यात्मक कृति अछि जहिमे प्रभु रामक महान भक्त हनुमान कs गुण एवं कार्य कs चालीस चौपाइ में वर्णन अछि । यी अत्यन्त लघु रचना छी जहिमें पवनपुत्र श्री हनुमान जी कs सुन्दर स्तुति कएल  गेल अछि । अहिमे बजरंग बली‍ कs भावपूर्ण वंदना आ , श्रीरामक व्यक्तित्व सरल शब्द मे बर्णन कएल गेल अछि । 

ओना तs समूचा भारत आ हिन्दू समाज  मs यी लोकप्रिय छै किन्तु विशेष रूप सं उत्तर भारत मे बहुत प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय अछि । लगभग सभी हिन्दु सभक यी कंठस्थ होएत अछि । कहल जाएत अछि कि हनुमान चालीसा पाठ सं  भय दूर होएत अछि , क्लेष मिटैत अछि । एकर गंभीर भाव पर विचार करलासं मन में श्रेष्ठ ज्ञानक साथ भक्तिभाव जागृत होएत अछि ।

श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥

राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥२॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुंडल कुँचित केसा॥४॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे
काँधे मूँज जनेऊ साजे॥५॥

शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जगवंदन॥६॥

विद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर॥७॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मन बसिया॥८॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा
बिकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे
रामचंद्र के काज सँवारे॥१०॥

लाय संजीवन लखन जियाए
श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥११॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥१२॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावै
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कवि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥१५॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६॥

तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना
लंकेश्वर भये सब जग जाना॥१७॥

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू
लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥१८॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं
जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥१९॥

दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥

राम दुआरे तुम रखवारे
होत ना आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥

सब सुख लहैं तुम्हारी सरना
तुम रक्षक काहु को डरना॥२२॥

आपन तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हाँक तै कापै॥२३॥

भूत पिशाच निकट नहिं आवै
महावीर जब नाम सुनावै॥२४॥

नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥

संकट तै हनुमान छुडावै
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥२६॥

सब पर राम तपस्वी राजा
तिन के काज सकल तुम साजा॥२७॥

और मनोरथ जो कोई लावै
सोई अमित जीवन फल पावै॥२८॥

चारों जुग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥

साधु संत के तुम रखवारे
असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता॥३१॥

राम रसायन तुम्हरे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥

तुम्हरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥

अंतकाल रघुवरपुर जाई
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥३४॥

और देवता चित्त ना धरई
हनुमत सेई सर्व सुख करई॥३५॥

संकट कटै मिटै सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥

जै जै जै हनुमान गोसाई
कृपा करहु गुरु देव की नाई॥३७॥

जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहिं बंदि महा सुख होई॥३८॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥३९॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥४०॥

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥




#Article 234: ग्रेगोरियन क्यालेन्डर (148 words)


ग्रेगोरियन क्यालेन्डर इस्वी सम्बतमे आधारित क्यालेन्डर छी । ई संसारमे लगभग हरेक ठाममे उपयोग कएल जाएवाला क्यालेन्डर छी। ई जुलियन क्यालेन्डरक रूपान्तरण छी। 

ग्रेगोरियन क्यालेन्डरक मूल एकाइ दिन होएत अछि। ३६५ दिनसभक एक वर्ष होएत अछि, मुदा प्रत्येक चारिम वर्ष ३६६ दिनक होएत अछि जेकरा अधिक वर्ष (लिप इअर) कहल जाएत अछि । सूर्यमे आधारित पञ्चाङ्ग हर १४६,०९७ दिनबाद दोहोरैत अछि । एकरा ४०० वर्षसभमे बाटल अछि, आ ई २०८७१ सप्ताह (७ दिन)क बराबर होमएत अछि । अहि ४०० वर्षसभमे ३०३ वर्ष साधारण वर्ष होमएत अछि, जहिमे ३६५ दिनसभ होमएत अछि । आ ९७ लिप वर्ष होमएत अछि, जहिमे ३६६ दिन होमएत अछि । अहि प्रकार प्रत्येक वर्षमे ३६५ दिन, ५ घण्टा, ४९ मिनेट आ १२ सेकेन्ड होमएत अछि ।
एकरा पोप ग्रेगोरी लागू केनए छल जहिसँ एकर नाम ग्रेगोरियन क्यालेन्डर रहल । एकरासँ पहिने जुलियन क्यालेन्डर प्रचलनमे छल, मुदा ओहिमे त्रुटीसभ भेला कारण हटाएल गएल छल ।




#Article 235: अटल बिहारी वाजपेयी (463 words)


अटल बिहारी वाजपेयी (जन्म २५ दिसम्बर, १९२४) भारतक पूर्व प्रधानमन्त्री छल । ओ भारतीय जन सङ्घक स्थापना केनीहार एक प्रमुख व्यक्ति छल  आ सन् १९६८सँ सन् १९७३ धरि ओ एकर अध्यक्ष सहो रहल छल । ओ भारतीय राजनीतिमे एक सक्रिय नेता छल । ओ अपन जीवन कालमे  राष्ट्रधर्म, पाँचजन्य आ वीर अर्जुन आदि राष्ट्रिय भावनासँ ओत-प्रोत पत्र-पत्रिकासभक सम्पादन केनए छल । एहि अतिरिक्त ओ एक ओजस्वी आ पटुवक्ता (ओरेटर) आ प्रसिद्ध हिन्दी कवि सेहो छल । 

उत्तर प्रदेशकऽ आगरा जनपदक प्राचीन स्थान बटेश्र्वरमे  २५ दिसम्बर, १९२४ कऽ दिन ब्रह्ममुहूर्त्तमे  हिनकर जन्म भेल छल । पिता पं. कृष्ण बिहारी मिश्र ग्वालियरमा अध्यापन कार्य करैत छल । महात्मा रामचन्द्र वीरद्वारा रचित अमर कृति विजय पताका पढ अटल जीकऽ जीवनक दिशा परिवर्तन भेल । अटलजक बी.ए.कऽ शिक्षा ग्वालियरक विक्टोरिया कलेज (वर्तमानमे  लक्ष्मीबाई कलेज)मे  भेल । छात्र जीवनसँ ओ राष्ट्रिय स्वयंसेवक सङ्घक स्वयंसेवक बनल  आ  राष्टीय स्तरक वाद-विवाद प्रतियोगितासभ भाग लिए लगल । कानपुरक डी.ए.वी. कलेजसँ राजनीति शास्त्रमे  प्रथम श्रेणीमे  एम.ए. कऽ परीक्षा उत्तीर्ण केलक। फेर एल.एल.बी. को पढाई शुरू केलक मुदा  बीचमे  छोड सङ्घ कार्यमे  लागल । डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी आ पं. दीनदयाल उपाध्यायक निर्देशनमे  राजनीतिक पाठ पढलक। सम्पादकक रूपमे  पाञ्चजन्य, राष्ट्रधर्म, दैनिक स्वदेश आ वीर अर्जुनक कार्यभार सम्हालक।

ओ भारतीय जन सङ्घक स्थापना करैसभमे  एक गोटे छल आ १९६८ सँ १९७३ धरि  अध्यक्ष सेहो रहल। १९५५ मे  पहिल बेर लोक सभा चुनाव लडलक, सफलता नै भेल मुदा, १९५७ मे  बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश)सँ जनसङ्घक प्रत्याशीक रूपमे  विजयी भऽ लोक सभामे  पुगल । १९५७ सँ १९७७ धरि ( जनता पार्टीक स्थापना धरि) जनसङ्घक संसदीय दलक नेता रहल।
१९६८ देखि १९७३ सम्मउनी भारतीय जनसङ्घका राष्टीय अध्यक्ष पदमा आसीन रहे। मोरारजी देसाईको सरकारमा उनी १९७७ देखि १९७९ सम्म विदेश मन्त्री रहे र विदेशमा भारतको छवि राम्रो बनाए।

श्री अटल बिहारी वाजपेयी राजनीतिज्ञ होएके साथ-साथ एक कवि सेहो छल । मेरी इक्यावन कविताएं वाजपेयीक प्रसिद्ध काव्यसंग्रह छी। अटल बिहारी वाजपेयीक काव्य रचनाशीलता एवं रसास्वाद पितासँ प्राप्त भेल छल । हिनकर पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर रियासतमे  ओहि समयक मानिएल  कवि छल । ओ ब्रजभाषा आ खडी बोलीमे  काव्य रचना करैत छल । पारिवारिक वातावरण साहित्यिक एवं काव्यमय होएके  कारण ओ सफल कवि बनल छथि। हिनकर सर्व प्रथम कविता ताजमहल छल । कवि हृदय कहियो भी  कवितासँ वंचित नै भऽ सकत। राजनीतिक साथ-साथ समष्टि एवं राष्ट्रप्रति हिनकर वैयक्तिक संवेदनशीलता प्रकट होएत। हिनकर सङ्घर्षमय जीवन, परिवर्तनशील परिस्थितिसभ, राष्ट्रव्यापी आन्दोलन, जेलवास सब परिस्थितिक प्रभाव एवं अनुभूतिसँ काव्यमे  अभिव्यक्ति पावल गेल अछि ।

हिनकर प्रकाशित रचनासभ छथि :

ओ ११ जून २०१८ मे किडनी मे संक्रमण आ कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्या कऽ कारणसँ अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) मे भर्ती छल , जत् १६ अगस्त २०१८ कऽ शाम ०५:०५ बजे हिनकर मृत्यु भऽ गेल । पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी  १६ अगस्त २०१८ को शाम ०५:०५ बजे अंतिम सांस लेल्क। पिछला ३६ घण्टातक हिनकर तबीयत बहुत खराब भऽ गेल छल ।




#Article 236: भारत सरकार (163 words)


भारत सरकार, जे आधिकारिक रूप सँ सङ्घीय सरकार आ सामान्यतया केन्द्रीय सरकार कऽ नाम सँ जानल जाएत अछि, २९ राज्यसभ तथा सात केन्द्रशासित प्रदेशसभक सङ्घीय एकाई जे संयुक्त रुप सँ भारतीय गणराज्य कहलावैत अछि ओकर नियन्त्रक प्राधिकारी छी। भारतीय संविधानद्वारा स्थापित भारत सरकार नयाँ दिल्ली, दिल्ली सँ काज करैत अछि।

भारतक नागरिकसभ सँ सम्बन्धित बुनियादी दीवानी आ फौजदारी कानून जेना नागरिक प्रक्रिया संहिता, भारतीय दण्ड संहिता, अपराध प्रक्रिया संहिता, आदि मुख्यतः संसदद्वारा बनाएल जाएत अछि। सङ्घ आ हरेक राज्य सरकार तीन अङ्गसभ कार्यपालिका, विधायिका आ न्यायपालिकाक अन्तर्गत काम करैत अछि। सङ्घीय आ राज्य सरकारसभ पर लागू कानूनी प्रणाली मुख्यतः अङ्ग्रेजी साझा आ वैधानिक कानून पर आधारित अछि। भारत किछ अपवादसभक साथ अन्तर्राष्ट्रिय न्यायालयक न्याय अधिकारिताक स्वीकार करएत अछि। स्थानीय स्तर पर पञ्चायती राज प्रणालीद्वारा शासनक विकेन्द्रीकरण कएल गेल अछि।
 
भारतक संविधान भारतक एक सार्वभौमिक, समाजवादी गणराज्यक उपाधि देत अछि। भारत एक लोकतान्त्रिक गणराज्य अछि, जेकर द्विसदनात्मक संसद वेस्टमिन्स्टर शैलीक संसदीय प्रणालीद्वारा सञ्चालित अछि। एहि शासनमे तीन मुख्य अङ्ग अछि: न्यायपालिका, कार्यपालिका आ व्यवस्थापिका




#Article 237: रोमन क्याथोलिक चर्च (113 words)


क्याथोलिक चर्च, जेकरा रोमन क्याथोलिक चर्चक रूपमे सेहो जानल जाएत अछि, दुनियाक सबसँ पैग ईसाई चर्च (गिरजाघर) छी, दावाक अनुसार एकर सौ करोडसँ अधिक सदस्य अछि । ओसभक नेता पोप होइए जे धर्माध्यक्षसभक समुदायक प्रधान अछि । ई पश्चिमी आ पूर्वी क्याथोलिक गिरजाघरसभक  एक समागम छी, ई अपन लक्ष्यक यीशु मसीहक सुसमाचार फैलेनाए, संस्कार करवेनाए तथा दयालुताक प्रयोगके रूपमे परिभाषित करैत अछि । 

गिरजाघर दुनियाक सबसँ पुरान संस्थानसभमे सँ एक छी आ ई पश्चिमी सभ्यताक इतिहासमे एक प्रमुख भूमिका निभेनए अछि । ई मानल जाएत अछि कि एकरा यीशु मसीहकद्वारा स्थापित कएल गएल छल, कि एकर धर्माध्यक्ष धर्मदूतसभक उत्तराधिकारी छी आ कि सेन्ट पिटरक उत्तराधिकारीक रूपमे पोपक एक सार्वभौमिक प्रधानता प्राप्त अछि ।




#Article 238: नोबेल शान्ति पुरस्कार (165 words)


नोबेल शान्ति पुरस्कार (नर्वेजियन तथा स्वीडिश: ) वार्षिक रुपमे विश्वमे शान्ति क्षेत्रमे उल्लेखनीय योगदान करैवाला व्यक्तिसभके नर्वेजियन नोबेल समिति प्रदान करैत अछि । ई ५ नोबेल पुरस्कार रसायन विज्ञान, भौतिक शास्त्र, साहित्य, शान्ति आ क्रिया विज्ञान तथा चिकित्सा मेसँ एक छी जेकरा सन् १८९५ मे उद्योगपति, आविष्कारक, आ शस्त्रसभक निर्माता अल्फ्रेड नोबेल स्थापना केनए छल ।ई ओहन व्यक्तिसभके प्रदान कएल जाएत अछि जे सीमामे खटल सेनाके हटाबै या घटाबएक लेल आ शान्ति काङ्ग्रेसक आयोजन आ प्रबर्द्धनक लेल, राष्ट्रक बीच बिरादरी बढाबैक लेल सबसँ वा सबसँ बढिया काम करनिहार व्यक्तिसभके (किछ अपवादसंग) वार्षिक रुपसँ सम्मानित कएल जाएत अछि । ई पुरस्कार नर्वेजियन नोबेल समितिद्वारा प्रशासित आ संसदद्वारा निर्वाचित पाँच सदस्य होमएत अछि जे शान्तिक लेल नोर्वेक संसदक प्रस्तावमे सम्मानित करल जाएत अछि । ई पुरस्कार प्रत्येक वर्ष दिसम्बर १० मे नोबेलक मृत्युको वार्षिकोत्सवमे एक वार्षिक समारोहमे ओस्लो सिटी हलमे प्रस्तुत कएल जाएत अछि । ई पुरस्कार पहिने ओस्लोक कानुन संकाय (१९४७-१९८९), नार्वे नोबेल संस्थानक विश्वविद्यालयक एट्रियम (१९०५-४६), आ संसद (१९०१-०४) मे सम्मानित कएल गेल छल । 




#Article 239: महिना (118 words)


महिना पुरा बर्षक १२अम भागक एक भाग छी। सामान्यतया अंग्रजी महिनामे  २८ सं ३१ दिनक होएत अछि नेपालीमे महिना २९ सं ३२ दिनक होएत अछि। पुरा बर्ष भरिमे  १२टा महिनासभ होएत अछि।

विक्रम सम्वत  अनुसार बैशाख महिनाक पहिल महिना मानैत आर चैत्र महिनाके अन्तिम महिना मानैत अछि । नेपाली साथ हिन्दू धर्मावलम्बीक वसोवास रहेवाला क्षेत्रम विक्रम संवतका महिनासभ  प्रचलनमे मानल जाएत अछि। हिन्दू प्रचलन होएवाला विक्रम सम्वत अनुसार १२ महिनाक नामसभ यइ प्रकार अछि ।

क्रिश्चियन धर्मका धर्म प्रवर्तक इशु जन्मके आधारम इस्वी संवत अथवा सन् प्रचलनमा लावल गेल छल । इ. सं.मे अङ्ग्रेजी महिनासभक नाम प्रचलनमे अछि।  अङ्ग्रेजी महिनामे जनवरी वर्षक पहिल महिना छी आर डिसेम्बर अन्तिम महिना छी । अङ्ग्रेजी महिनाकके नामसभ यी प्रकार अछि ।




#Article 240: चेन्नई अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थल (100 words)


चेन्नई अन्तर्राष्ट्रिय हवाई अड्डा  (), जे मद्रास इन्टरनेशनल एयरपोर्ट क नाम सँ सेहो विख्यात अछि, चेन्नई (मद्रास), भारत क दक्षिणमे, तिरूसुलम  मे स्थित अछि। ई देशक सबसँ बडका अन्तर्राष्ट्रिय प्रवेश द्वारमे सँ एक अछि आर भारतमे तेसर सबसँ व्यस्त हवाई अड्डा छी (दिल्ली आर मुम्बईक बाद) आर एक ऐहन अन्तर्राष्ट्रिय केन्द्र, जे २००७ सँ लगभग १ करोड यात्रिसभक संचालन क रहल अछि आर २५ सँ अधिक विभिन्न एयरलाइनक सेवा प्रदान करैत अछि । देशमे मुम्बईक बाद ई दोसर सबसँ बडका नौभार केन्द्र छी। ई मिनमबक्कम आर तिरूसुलमक लग स्थित अछी, जत यात्री प्रवेश तिरूसूलममे आर माल प्रवेश मिनमबक्कममे होएत अछि।




#Article 241: इन्दिरा गान्धी अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थल (134 words)


इन्दिरा गान्धी अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थल  भारतक राजधानी एवम राष्ट्रिय राजधानी क्षेत्र दिल्लीक प्रधान अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थल छी। ई नयाँ दिल्ली नगर केन्द्र सँ लगभग १६ कि.मी.(10 मील) दक्षिण-पश्चिम दिशामे स्थित अछि । भारतक पूर्व प्रधान मन्त्री इन्दिरा गान्धीक नाम पर बनल ई  भारतक व्यस्त विमानस्थल छी । हवाई अड्डाक नवीनतम टर्मिनल-३ क चालू होएक बादसँ ४ करोड ६० लाख यात्री क्षमता तथा वर्ष २०३० तक अनुमानित यात्री क्षमता १० करोडक साथ ई भारतक साथे-साथे पूरे दक्षिण एशियाक सबसँ बडका आर सबसँ महत्वपूर्ण व्यापार सम्बन्धी विमान केन्द्र बन गेल अछि । भारतक वाणिज्य राजधानी मुम्बईक छत्रपति शिवाजी अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थलक साथे एकर आकडा मिलाक देखु त ई दुनु दक्षिण एशियाक आधासँ अधिक विमान यातायातक वहन करैत अछि । ई विमानस्थलक संचालक दिल्ली अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थल लिमिटेड (डायल) एकरा विश्वक अगला अन्तर्राष्ट्रिय ट्रान्जिट हब बनाबक प्रयास क रहल अछि ।




#Article 242: चन्द्रपुर नगरपालिका (129 words)


मध्य नेपालक रौतहट जिलामे रहल चन्द्रपुर नगरपालिका द्रुततर गतिमे बैढरहल नगर छी । चन्द्रनिगाहपुर बजार रहल ठाम क केन्द्र बनाएल गेल अछि ।ई नगरपालिका २०६८ साउन १ सँ लागू होए लेल बनाएल गेल मुदा कार्यन्वयनमे हाल जेठ ४,२०७१ सँ आएल अछि । एकरा नगरपालिका घोषणा करैत बेरमे चन्द्रनिगाहपुर,जुडिबेला,पौराही,सन्तपूर मटिऔन आर डुमरीया मटिऔन गाउँ विकास समितिसभ समावेश कएल गेल अछि । आर्थिक वर्ष २०६८/६९क बजेटमार्फत् मुलुकमे ४१ नयाँ नगरपालिका थपैत कटारी सहो नगरपालिका बनल अछि । महानगरपालिका, उपमहानगरपालिका आर नगरपालिका करि आब मुलुमे कूल १३० भेल अछि तथा गाविसक संख्या ३ हजार ९ सय १५ सँ घैटक ३ हजार ६ सय ३३ भेल अछि ।

चन्द्रनिगाहपुर,जुडिबेला,पौराही,सन्तपूर मटिऔन आर डुमरीया मटिऔन गाविससभ मिलाक चन्द्रपुर नगरपालिका बनाएल गेल अछि । तहिदुवारे बि.स.२०६८ क जनगणना अनुसार ई ठामसभक जनसंख्याक जोएड ७२,०५९ रहल ।




#Article 243: मनोरमा (102 words)


मनोरमा हिन्दी चलचित्रक एक लोकप्रिय अभिनेत्री छल । ओ बहुत चलचित्रसभमे खलनायिका आर हास्य चरित्रक साकार करने छ्ल । हुनकर किछ प्रशिद्ध चलचित्रसभमे सीता और गीता, एक फूल दो माली, दो कलिया, कारवा आदि छल । हुनकर अन्तिम चलचित्र दीपा मेहताक 'वाटर' छल, जेहिमे ओ विधवा आश्रमक मुखियाक भूमिका निभेने छल  । लाहौर (आब पाकिस्तानमे) सँ अपन फिल्मी करियर सुरू करने मनोरमा राजा नक्सरसँ निकाह करने छल । दुनुक बीच विभाजन बाद भारत आएब गेल छल, जत राजा निर्माता बैन गेल । शुक्रदिन १५ फेब्रुअरी, २००८ मे बम्बईमे संक्षिप्त बिमारीक एक निजी अस्पतालमे हुनकर निधन भेल । ओ ८१ वर्षक छल ।




#Article 244: प्रिया तेन्दुलकर (156 words)


भारतक पहिल टिभी स्टार प्रिया तेन्दुलकर अनेक चलचित्र आर टिभी धारावाहिसभमे भूमिका निभेलक मुदा सम्भवतः ओ सम्पूर्ण जीवन अपन सबसँ पहिल टिभी अवतार रजनी क नाम सँ ओ प्रशिद्ध भेल । सन् १९८५मे निर्मित आर बासू चटर्जीद्वारा निर्देशित ई धारावाहिकमे ओ भ्रष्टाचार आर सामाजिक कुरीतिक खिलाफ बुलन्द आवाज उठावबाला एक साधारण गृहणीक किरदार निभेने छल । ओ लेखिका सहो छल ।

प्रिया प्रसिद्ध नाटककार विजय तेन्दुलकर क सुपुत्री छल । हुनकर जन्म १९ अक्टोबर, १९५४ मे भेल छल, हुनकर दु बहिन आर एक भाई छल । प्रियाक विवाह अभिनेता तथा  लेखक करण राजदान सँ १९८८ मे भेल । मुदा ई बिवाह सात साल धैर मात्र चलल आर ओकर बाद हुन्कर सम्बन्ध विच्छेद भेल । करण आर प्रियालर  रजनी आर किस्से मिया बीवी के धारावाहिकमे श्रीमान श्रीमतीक वास्तविक जीवनक किरदार सहो निर्वाह करने छल । १९७४ मे श्याम बेनेगल क चलचित्र अंकुर मे निभाएल भूमिकाक कारण प्रियाक अभिनेता अनंत नाग सँ सहो सम्बन्ध जोडल गेल छल ।




#Article 245: दिपिका कुमारी (198 words)


दिपिका कुमारी (१३ जुन १९९४) एक रिकर्व भारतीय महिला धनुषवान छी । निचल्का स्तरसँ धनुषवान खेलमे शुरुआतक ओ आई अन्तराष्ट्रिय स्तरक शीर्ष खेलाडीमे सँ एक छी ।

दिपिकीक जन्म १३ जुन १९९४ मे झारखण्ड राज्यक राजधानी राँची कोरातु नामक स्थानमे भेल अछि । हुनकर पिता एक किसानक साथसाथे रिक्सा चालक सहो छी । बाल्यकाले सँ दिपिका अपन लक्ष्यमे केन्द्रित रहल अछि । दिपिकाक माता कहैत अछि बाल्यकालमे दिपिका एकदिन हमरा साथे जाएत समय रास्तामे आमक गाछ देखलक । दिपिका कहलक की ओ आम तोडब । हम हुनका कहलौ की आम बहुत उपर अछि, ओ तोडनै सकत, त ओ कहलक, नै हम आई ई  आमक तोएडक रहब । ओ जमीनसँ पत्थर उठाक निशाना लगेलक । पत्थर सिधे आममे लागल आम निचा गिरल । दीपिकाक उ निशाना देख हम हैरान भेलउ । ठिक ओहिना जिन्दगीमे सहो दिपिका जे लक्ष्य बनाबैत अछि, ओकारा हासिल कक देखाबैत अछि । ओ ओहिना करबो करलक । जे गाउमे आईयो बिजली-पानीक सप्लाई तक नै होएत अछि,ओत धनुषवानक दिशा पकडनाई कोनो धनुर्धरक निष्ठा भ सकैत अछि । अत्यन्त निर्धन परिवारसँ  सम्बन्ध राखवाला दिपिका अखन हालमे  झारखंड सरकार रांची शहरमे निशुल्क आवासीय भुखन्ड दैक घोषणा करने अछि  । वर्तमानमे दिपिका टाटा स्टील कम्पनीक खेल विभागक प्रबन्धक छी।




#Article 246: लोकसेवा आयोग (268 words)


लोकसेवा आयोग वि.सं. २००७ सालमे नेपालमे प्रजातन्त्रक स्थापना साथे निजामती कर्मचारीक नियुक्ति अलगे आर स्वतन्त्र निकायसँ करैक उद्देश्यसँ वि.सं. २००८ साल असार १ (तदनुसार १५ जुन १९५१ इस्वी) गते लोक सेवा आयोगक स्थापना भेल अछि । ई आयोग निजामती सेवाक पदमे उपयुक्त उम्मेदवार छनौट करैवाला कार्य करैत अछि । 

नेपाल अधिराज्यक संविधान, २०४७ सेहो लोक सेवा आयोगक एक स्वतन्त्र संवैधानिक निकायक रूपमे स्वीकार करने अछि । वही संविधानक धारा १०१ आयोगक एक अध्यक्ष आर आवश्यकता अनुसार अन्य सदस्यसभ रहै तेहन लोक सेवा आयोगक गठन होएवाला व्यवस्था कएल गेल अछि । आयोगक अध्यक्ष आर सदस्यसभ ६ वर्षक लेल नियुक्ति करैक व्यवस्था संविधानमे व्यवस्था कएल गेल अछि । आयागेक अध्यक्ष तथा सदस्यसभक सर्वोच्च अदालतक न्यायाधीश सरह समान आधारमा आर समान तरिकासँ अपन पदसँ हटाब सकत ।

नेपाल सरकारक वैधानिक कानून, २००४ मे सरकारी नोकरीक लेल उम्मेदवारसभक दरखास्त आएल योग्यता या ल्याकत जाँचबुझ करि सरकारमे सिफारिस कर दरखास्त परिषद्क व्यवस्था भेल देखलाक बाद वि.सं. २००८ सालमे भेल प्रजातान्त्रिक व्यवस्थाक सुरूवात बाद लोक सेवा आयोगक कमी महसुस भएल । एहि क्रममे नेपालक अन्तरिम शासन विधान, २००७क धारा ३७मे व्यवस्था भेल अनुसार वि.सं. २००८ असार १ गते नेपाल पब्लिक सर्भिस कमिसनक नामसँ विधिवत रूपमे लोक सेवा आयोगक स्थापना भेल अछि । 

नेपालक अन्तरीम संविधान, २०६३ अनुसार लोकसेवा आयोगक काम, कर्तव्य आर अधिकार एहि प्रकार अछि :

नेपालक अन्तरिम संविधान २०६३ क धारा १२५ अनुसार ई निकायमे एक आदमी अध्यक्ष तथा चाहल अनुसार सदस्य राखवाला ब्यबस्था कएल गेल अछि । हाल ई संगठनमे पदासिन रहल सदस्यसभ एहि प्रकार अछि :-

लोक सेवा आयोग 
केन्द्रीय कार्यालय 
अनामनगर, काठमाडौं, 
पोष्ट बक्स नं. : ८९७९ 
फोन : ४७७१४८८, ४७७१४८१, ४७७१४९४, ४७७१५२८ 
फ्याक्स : ४७७१४९० 
ईमेल : info@psc.gov.np 




#Article 247: ताजमहल (161 words)


ताज महल (, निकसँ ; अरबिक ताज राखैवाला स्थान) भारतक आगरा सहरमे स्थित एक समाधिस्थल छी । एकर निर्माण मुगल सम्राट शाहजहाँ, अपन घरवाली मुमताज महलक यादमे करेनाए छल । ताज महल मुगल वास्तुकलाक उत्कृष्ट नमूना छी । एकर वास्तुकला शैली फारसी, टर्की, भारतीय तथा इस्लामिक वास्तुकलाक घटकसभक अनौठा मिश्रण छी । सन् १९८३ मे, ताजमहल युनेस्को विश्व सम्पदा क्षेत्र बनल । एकर संगे, इकरा विश्व सम्पदाक सर्वत्र प्रशंसा पाबएवाला, अत्युत्तम मानवीय कृतिसभ मे सँ एक बताएल गएल अछि । ताजमहलके भारतक इस्लामी कलाक रत्न सेहो घोषित कएल गएल अछि । साधारणतया देखाबएवाला सङ्गमर्मरक चदरासभक पैग-पैग तहसँ छारएलेल बनाएल भवनसभ जोका नै बनाए एकरा श्वेत गुम्बद तथा टाइल आकारमे सङ्गमर्मरसँ छारल गएल अछि । केन्द्रमे बनाएल समाधिस्थल अपन वास्तु श्रेष्ठतामे सौन्दर्यक संयोजनक परिचय देवैत अछि । ताजमहल भवन समूहक संरचनाक खास बात ई अछि, कि ई पूर्णतया समतिताकार अछि । एकर निर्माण सन् १६४८ क लगभगममे पुरा भएल छल । उस्ताद अहमद लाहौरीके प्रायः एकर प्रधान शिल्पकार मानल जाएत अछि ।




#Article 248: देवनागरी (112 words)


देवनागरी ( ; ;  भारत आ नेपालक विभिन्न भाषासभ लिखवाक लेल प्रयोग होमएवाला लिपि छी । ई दाहिनासँ बामादिस लिखल जाएवला लिपि छी ।एकर पहिचान एक क्षैतिज रेखासँ कएल जाएत अछि जकरा 'शिरोरेखा' कहल जाएत अछि। संस्कृत, पालि, हिन्दी, मराठी, कोंकणी, सिन्धी, कश्मीरी,  हरियाणवी डोगरी, खस, नेपाल भाषा (तथा अन्य नेपाली भाषा), तामाङ भाषा, गढ़वाली, बोडो, अंगिका, मगही, भोजपुरी, नागपुरी,  मैथिली, सन्थाली, राजस्थानी आदि भाषासभ आ स्थानीय बोलीसभ सेहो देवनागरीमे लिखल जाएत अछि। एकर अतिरिक्त किछ स्थितिसभमे गुजराती, पञ्जाबी, बिष्णुपुरिया मणिपुरी, रोमानी आ उर्दू भाषासभ सेहो देवनागरी लिपिमे लिखल जाएत अछि। देवनागरी विश्वमे सर्वाधिक प्रयुक्त लिपिसभमे सँ एक अछि। ई दक्षिण एसियाक १७० सँ बेसी भाषासभ लिखवाक लेल प्रयुक्त भऽ रहल अछि। 




#Article 249: चीनक विशाल दिवार (130 words)


चीनक विशाल दिवार माटि आ पत्थरसँ बनल एकटा किलानुमा दिवार छी जेकरा चीनक भिन्न भिन्न शासकसभद्वारा उत्तरी शत्रुसभसँ रक्षाक लेल ईसा पूर्व पाँचम शताब्दीसँ सोलहम शताब्दीधरि बनौलक । कतेकौ दिवारसभक सामूहिक रूपसँ ई महान दिवारक पुनर्निर्माण कएल गएल अछि । ५अम शताब्दी ईसा पूर्वसँ १६अम शताब्दीक मध्यमे बनाएल रूपमे सन्दर्भित करैत अछि । एकर विशालताक अनुमान एहि बातसँ लगाबाल जा सकैत अछि कि ई मानव निर्मित आकृतिक अन्तरिक्षसँ सेहो देखल जा सकैत अछि ।

ई बिशाल दिवार ६,४०० किलोमिटर (१०,००० ली, चीनी लम्बाई मापन एकाई) क्षेत्रमे फैलल अछि । एकर विस्तार पूर्वमा शानहाइगुआनसँ पश्चिममे लोप नुर धरि अछि, आ एकर कुल लम्बाई लगभग ६७०० कि.मी. (४१६० माइल) रहल अछि । ओनातँ पुरातत्व सर्वेक्षण विभागक हाल धरिक सर्वेक्षण अनुसार समग्र महान दिवार, अपन सब शाखासभ सहित ८८५१.८ किलोमिटरधरि फैलल अछि ।




#Article 250: विश्व सम्पदा क्षेत्र (335 words)


संयुक्त राष्ट्र सङ्घीय अङ्ग युनेस्कोद्वारा बहुमूल्य सम्पदाक रूपमे सूचीकृत विश्वक स्मारक आ स्थानसभके युनेस्को विश्व सम्पदा क्षेत्र कहल जाएत अछि। युनेस्को कोनो भी राष्ट्रक विशेष सांस्कृतिक महत्व राखऽवाला (जेना वन, पहाड़, ताल, द्वीप, मरुभूमि, स्मारक, भवन, वा शहर कोनो खास परिस्थितिमे एहन सम्पदासभकें ई समितिद्वारा आर्थिक सहयोग सेहो प्रदान कएल जाएत अछि।, सन् २०१९ जुलाई ३१ धरिमे १६७ राष्ट्रक १,१२१ क्षेत्रके विश्व सम्पदाक रूपमे सूचीकृत कएल गेल अछि जहिमे ८६९ सांस्कृतिक, २१३ प्राकृतिक आ ३९ मिश्रित सम्पदा रहल अछि।

प्रत्येक सम्पदा क्षेत्र ओ देशक विशेष सम्पति होएत अछि, जे देशमे ओ स्थल रहैत अछि मुदा अन्तर्राष्ट्रिय समुदायक हितमे सेहो एहि बेश होएत अछि कि आबऽवाला सन्ततिकें तथा मनावताक हितक लेल सेहो एहन विशेष सम्पदाक संरक्षण कएल जाए। तथापि समुचा विश्व समुदायकें एकर संरक्षणक जिम्मेवारी रहैत अछि।

सन् १९५९ मे इजिप्ट सरकार अस्वान बाँध बनेबाक निश्चय कएलक । अहिसँ प्राचीन सभ्यता समेटल नाइल नदी नजदिकक उपत्यका नुबियामे रहल अनेकौ बहुमुल्य खजानासभके बाँधक पानिसँ बहनाई निश्चित छल । ओ समय युनेस्को इजिप्ट आ सुडान सरकारके आग्रह करवाक संगे एकर रक्षा करैक निमित्त विश्वव्यापी रक्षा उपाय अभियान चलेलक । ई अभियानक कारण ई निश्चित कएल गेल कि ओतेक रहल हजारौं पुरातात्विक सम्पदासभ आ सबसँ एतिहासिक आ चर्चित अबु सिम्बल आ फिलेके कोनो उँच स्थानमे पुनर्स्थापित कएल जाए । ई अभियानक अन्त्य सन् १९८० मे भएल जेकरा पूर्ण रुपसँ सफल मानल गेल । विशेष रूपसँ अभियानमे सहयोग करैवाला राष्ट्रके इजिप्ट अपन चाएरटा मन्दिरसभ उपहार स्वरूप प्रदान कएलक जहिमे: डेनडुर मन्दिरके न्यू योर्क सहरक महानगरीय कला सङ्ग्रहालयमे, डेबोद मन्दिरके म्याड्रिडक पार्क डेल ओएस्तोमे, तफेह मन्दिरके नेदरल्याण्डक रिज्क्स सङ्ग्रहालयमे आ इलिसिया मन्दिरके तुरिनको म्युजियो इगीजियोमे घसकाएल गेल छल । 

ई परियोजनाक लागत लगभग $८० मिलियन छल जहिमेसँ $४० मिलियन ५० राष्ट्रसभसँ जम्मा कएल गेल छल । ई अभियानके व्यापक रूपमे पूर्ण सफलता मानल गेल आ याह अभियानसँ प्रेरित भ अनेकौं अभियान चलाएल गेल (जेना भेनिस आ ओकर लगुनक संरक्षण इटालीमे, मोहन जोदडो पाकिस्तानमे आ इन्डोनेसियामे बोरोबुदुर मन्दिर प्राङ्गन) । अहि पश्चात युनेस्को अन्तर्राष्ट्रिय स्मारक तथा स्थल परिषदसँ पहल करि एकटा सम्मेलन कएलक जे मानवताक सार्वजनिक साँस्कृतिक धरोहरसभके संरक्षण करैत रहत ।




#Article 251: क्राइस्ट द रिडिमर (132 words)


क्राइस्ट द रिडिमर  ब्राजिलक राजधानी सहर रियो दी जेनेरियोमे अवस्थित क्राइस्टक मुर्ति छी जेकरा संसारक दोसर सबसँ पैग आर्ट डेको स्ट्याच्यु मानल जाएत अछि ।   ई प्रतिमा ३० मिटर (९८ फिट) उँच तथा ई प्रतिमाक हातक लम्बाई २८ मिटर (९२ फिट) रहल अछि । एकर तौल ६३५ टन अछि आ ई प्रतिमा ७०० मिटर (२३०० फिट)क उचाईमे तिजुका फोरेस्ट राष्ट्रिय निकुञ्जमे कोर्कोवाडो सिखरक चोटीमे अवस्थित अछि जतेकसँ सहर पूर्ण देखबैत अछि । ई विश्वमे अपन किसिमक सबसँ उँच मूर्तिसभ मेसँ एक छी (बोलिभियाक कोचाबम्बामे स्थित क्राइस्टो डी ला कोनकोर्डियाक प्रतिमा अहिसँ उँच छी ) । ईसाई धर्मक एकटा प्रतीकक रूपमे ई प्रतिमा रियो आ ब्राजिलक एकटा नमूना बनल अछि ।  ई प्रतिमा मजबुत कङ्क्रिट तथा सोपस्टोनसँ बनाएल गेल अछि, एकर निर्माण सन् १९२२ सँ सन् १९३१ क मध्यमे कएल गएल छल । 




#Article 252: ब्राजिल (104 words)


ब्राजिल दक्षिण अमेरिकाक सबसँ पैग आ बेसी जनसङ्ख्या भएल राष्ट्र छी।  क्षेत्रफल अनुसार ब्राजिल विश्वक पाँचम पैग देश छी आ जनसङ्ख्या अनुसार ब्राजिल विश्वक पाँचम पैग तथा चारिम पैग लोकतान्त्रिक मुलुक छी ।  संसारक सर्वाधिक पोर्चुगेली भाषा बोलएवाला जनसङ्ख्या ई देशमे अछि । ई देशक पूर्वमे आन्ध्र महासागर (ब्राजिलक तटीय क्षेत्र ७९४१ किमि लम्बा अछि) उत्तरमे भेनेजुएला, सुरिनाम, गायना आ फ्रेञ्च गायना पडैत अछि; उत्तरपश्चिममे कोलम्बिया; पश्चिममे बोलिभिया आ पेरु; दक्षिणपश्चिममे अर्जेन्टिना आ पाराग्वे आ दक्षिणमे उरुग्वे रहल अछि । आन्ध्र महासागरमे बहुतेक आर्किपेगालोसभ ब्राजिलक भूभागमे पडैत अछि जेना फर्‍न्यान्डो दे नोरोन्हा, रोकास अटोल, सेन्ट पिटर एन्ड पल रक्स आ ट्रिन्डेड आ मार्टिम भाज।




#Article 253: मनिषा कोइराला (111 words)


मनिषा कोइराला (जन्म १६ अगस्त १९७०) एक नेपाली अभिनेत्री छी जे हिन्दी चलचित्रमे अपन काजक लेल जानल जाएत अछि । कोइराला एक सफल अभिनेत्री वाहेक एक सामजिक कार्यकर्ता सेहो छी । कोइराला प्रारम्भमे हिन्दी चलचित्र उद्योगमे काम केलक आ बादमे विभिन्न भाषाक चलचित्र जेना नेपाली, तमिल, तेलुगु आ मलायलम भाषाक चलचित्रमे काज केलक । मनिषा भारतनाट्यम आ मणिपुरी नृत्यमे महाराथ हासिल केनए अछि । राजनीतिज्ञ प्रकाश कोइराला आ सुष्मा कोइरालाक पुत्री छी मनिषा जे नेपालक स्थायी राजनीतिकमे बहुत पैग योगदान देनए अछि । मनिषा नेपाली चलचित्र फेरी भेटौला (१९८९) सँ चलचित्र जीवनक आरम्भ केलक । एक वर्षबाद ओ बलिउड चलचित्रमे अपन हाथ अजमैलक आ सौदागर (१९९१) सँ करियरल सुरुवात केलक ।




#Article 254: अञ्जु पन्त (110 words)


अञ्जु पन्त नेपाली गायिका छी । नेपाली गायन क्षेत्रमे विविध चर्चित गीतसभ गाबने अछि जहिमे न बिर्सें तिमीलाई..., म तिमी बिना मरीहाल्छु, भुन भुन बोल्यो भमरा रहल अछि । वो अखन धरि १८ टा नेपाली चलचित्रक लेल गीत गायन कऽ चुकल अछि आ सौ टा सँ बेसी साङ्गीतिक एल्बममे अपन आवाजक जादु देखाए चुकल अछि । पाँचथरक आठराईमे माता मनु योञ्जन आ काठमाडौं नजदिक फर्पिङक विष्णु पन्तक बेटी अञ्जु पन्त सबसँ बेसी गीत गाबने अछि, सभसँ बेसी पुरस्कार पाबनिहार आ गीतसँ सबसँ बेसी आम्दानी देनए अछि । हुनकर सर्वप्रिय गीत न बिर्से तिमीलाई मोबाइलमे २८ हजार बेर डाउनलोड भऽ चुकल अछि जे मोबाइलसँ डाउनलोड कएल गेल सर्वाधिक गीत छी ।




#Article 255: बैश्य (101 words)


हन्दू सभक जाति व्यवस्था के अंतर्गत वैश्य वर्णाश्रम क तेसर मुख्य जाति अछि । यी वर्ग में मुख्य रूप स भारतीय आ नेपाली समाजक किसान, पशुपालक आर व्यापारी समुदाय शामिल अछि । 

अर्थक दृष्टि स यी शब्द कs उत्पत्ति संस्कृत स भेल अछि  जकर मूल अर्थ बसना होएत अछि । मनु कs मनुस्मृति के अनुसार वैश्यों कs उत्पत्ति ब्रम्हा जी  के उदर यानि पेट स भेल छल । 

ब्रम्हा जी स जन्मल ब्राह्मन भेल , बिष्णु  स जन्मल बैश्य आर शंकर जी स जन्मल क्षत्रिय, तैदुवारे आईयो ब्राह्मन अपन मात्ता सरसवती, बैश्य लकश्मी, क्षत्रिय मा दुर्गे कs पुजा करएत अछि ।




#Article 256: जलथल (104 words)


जलथल नेपालक मेची अञ्चलक झापा जिल्लाक एक गाँउ विकास समिति छि। ई ठामा २४९२ टा घर अछी। अहिज  अवस्थित चार कोसे झाडी स यत क सौदर्य बढेन अछि । जलथल गा वि स क कार्यालय बडाबारी म अवस्थित अछ । अहिज स  सम्ब्न्धित सम्पूर्ण कार्य क सकेत अछी  । जलथल रेड क्रस , स्वास्थ्य चौकि, महेन्द्र माद्यामिक बिद्यालय साथ आर महतोपूर्ण भवन सभ सहो बडाबारी म आवस्थित अछि । 

ई ठामक अक्षांश आर देशान्तर छि । समुद्र सतह स ई ठाम ८५ मिटर (२७८ फुट) उपर परेत् अछी। 

नेपालको सन् २००१क जनगणना अनुसार जल्थलको जनसंख्या १३,१३२ छ।  मध्ये  पुरुष ४९%, आर महिला ५१% छन्।




#Article 257: २०१६ इन्डियन प्रिमियर लिग (104 words)


इन्डियन प्रीमियर लिग अन्तर्गत २०१६ म सञ्चालित  प्रतियोगिता म ८ टिम सहभागि भेल छेलाह । जे प्रत्येक वर्ष भारतम सञ्चालन होएत अछि । ई प्रतियोगितामा चेन्नई सुपर किङ्स आर राजस्थान रोयल्स प्रतिबन्धित अछि ।

इन्डियन प्रिमियर लिगको २०१६ क सिजन जे कि आईपीएल ९ या विवो आईपीएल २०१६ क नाम स सेहो जानल जाएत अछि । इन्डियन प्रिमियर लिग जेकर सञ्चालक बीसीसीआई छी । एकर शुरुआत २००७ म भेल छेलाह ।ई आईपीएल क ९ वमा  सिजन छी । ई आईपीएल ०८ अप्रैल २०१६ म प्रारम्भ तथा २९ मई २०१६ मा फाइनल मिति तय भेल अछि।

मुम्बई क पानी संकट कारण भेन्यूमा हेरफेर भेल छेलाह।




#Article 258: चण्डीगढ (185 words)


चण्डीगढ, (पञ्जाबी: ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ) भारतक एकटा केन्द्र शासित प्रदेश छी, जे दुई राज्य, पञ्जाब आ हरियाणाक राजधानी सेहो छी । एकर नामक अर्थ छी चण्डीक किला । ई हिन्दू देवी दुर्गाक एकटा रूप चण्डिका आ चण्डीक एकटा प्रसिद्ध मन्दिरक कारण राखल गएल अछि । ई मन्दिर अखनो अहि सहरमे अवस्थित अछि । ई शहरके सिटी अफ ब्युटिफुल सेहो कहल जाएत अछि । चण्डीगढ राजधानी क्षेत्रमे मोहाली, पञ्चकुला आ जिरकपुर आबैत अछि, जेकर सन् २००१ क जनगणना अनुसार जनसङ्ख्या ११,६५,१११ (१ करोड १६ लाख) रहल अछि । भारतक लोकसभामे प्रतिनिधित्व करैक लेल एकटा सिट आरक्षित कएल गेल अछि । वर्तमान सोलहम लोकसभामे भारतीय जनता पार्टीक श्रीमति किरण खेर यतयसँ सांसद चुनल गएल अछि ।

ब्रिटिश भारतक विभाजन पश्चात सन् १९४७ मे पञ्जाब राज्यके भारत आ पाकिस्तान करि दुई भागमे बाँटल गएल छल । अहि संगे राज्यक पुरान राजधानी लाहोर पाकिस्तानक भागमे घसकाएल गएल छल । आब भारतीय पञ्जाबके एकटा नयाँ राजधानीक आवश्यकता देखाएल । पूर्व स्थित सहरसभके राजधानीमे रुपान्तरित करैमे बहुतेक कठिनाई भएल छल जेकर फलस्वरूप एकटा नयाँ योजनाबद्ध राजधानी सहरक निर्णय कएल गेल तथा सन् १९५२ मे ई सहरके निर्माण करैक निर्णय कएल गेल । ।




#Article 259: नेपालक संरक्षित क्षेत्रसभ (109 words)


नेपालक संरक्षित क्षेत्रसभ मुख्यतः जङ्गली जमिन ओकटने अछि जे नेपालक विविध उचाईमे अछि । ई क्षेत्रसभमे तराई आ हिमालयक भाग अछि । 
नेपालक क्षेत्रफल  अछि । दक्षिण-पूर्वी तराईक न्युनतम उचाई सँ सगरमाथा उच्चतम उचाई  धरि विविधता अछि ।

वनस्पति वैज्ञानिकसभ नै फुलाएवला पौधासभक १,१२० प्रजाति आ फूल फुलाएवला पौधासभक ५,१६० प्रजाति दर्ज केनए अछि । नेपाल एसिया महादेशमे फूल आ पौधाक विविधताक मामलामे १०अम स्थानपर अछि । तहिना भूवैज्ञानिकसभ नेपालमे १८१ स्तनपायी प्रजाति, ८४४ प्रजातिक पक्षी, १०० साँपक प्रजाति, ४३ उभयचर प्रजातिसभ, १८५ मीठ पानिक माछक प्रजाति आ ६३५ तरहक तितलीक प्रजाति दर्ज केनए अछि ।

निम्नलिखित रामसार क्षेत्रसभ सन् १९८८ सँ सन् २००८ धरि सूचिकृत कएल गएल अछि:




#Article 260: ज्योतिर्लिङ्ग (101 words)


हिन्दू धर्ममे पुराणसभक अनुसार शिवजी जतेक-जतेक स्वयं प्रकट भेल उक्त बाह्र स्थानमे अवस्थित शिवलिङ्गके ज्योतिर्लिङ्गक रूपमे पूजा कएल जाएत अछि । नेपाली बृहत् शब्दकोशमे ज्योतिर्लिङ्गके सत्ययुगमे इजोत करै छल से विश्वास कएल गएल शिवजीक बाह्र लिङ्ग कहि लिखल छल ।

हिन्दू मान्यता अनुसार जे कोई मानव प्रतिदिन भोर तथा साँझक समयमे ई बाह्र ज्योतिर्लिङ्गसभक नाम लेवत, ओकर सात जन्मक पाप ई लिङ्गसभक स्मरण मात्रसँ सेहो मेटाएत ।

१२ ज्योतिर्लिङ्गक नाम शिव पुराण अनुसार (शतरुद्र संहिता,अध्याय ४२/२-४)। 

मेष सोमनाथ, वृष श्रीशैल, मिथुन महाकाल, कर्क अमलेश्वर, सिंह वैद्यनाथ, कन्या भीमशंकर, तुला रामेश, वृश्चिक नागेश, धनु विश्वेशं, मकर त्र्यम्बकं, कुम्भ केदार तथा मीन घृष्णेशं 




#Article 261: अनिता यादव (189 words)


अनिता यादव नेपालक प्रथम राष्ट्रपति डा. रामबरण यादवक छोटकी सुपुत्री छि।अनिता यादव महिला अधिकार, बाल अधिकार, महिला सशक्तिकरण, महिला-पुरुष बिच विद्यमान असमानता, व्यक्तिक स्वतन्त्रता आर मौलिक अधिकार, समानता आर सामाजिक आर विभेदम न्यूनिकरण, महिलाक जीवनस्तर वृद्धि जेहन सामाजिक कार्य म स्मलग्न अछी । अनिता यादव स्थानीय गैरसरकारी संस्था , सरकार, अन्तर्राष्ट्रिय गैरसरकारी संस्था संग मिलके विद्यमान सरोकारवाला बीच अपन कार्यक्रम करेत अछी । अनिता यादव क कार्यक्रम सँ विशेष करि अति विपन्न, समाजस वञ्चित आर विभिन्न क्षेत्रम पछाडी परल महिलाक क्षमता अभिवृद्धिक संगै विभिन्न विषय अभिमुकरण कक अपन  आवाज अरु सामुन्ने निर्धक्क राखने अछी ।

अनिता यादव जन्म सपही गाउँ विकास समिति, वडा नं ९ भेल छल  । सपही गाउँ विकास समिति धनुषा जिला नेपालम अछि । हुनकर जन्मस्थल जानकी मन्दिरक नजदिक अछि । अनिता यादवशिक्षा भोला सिंह मिथिला इङ्ग्लिस विद्यालय जनकपुरसँ सुरू भेल छल । भोला सिंह मिथिला इङ्ग्लिस विद्यालयसँ वो एसएलसी उत्तीर्ण करने छेल्हिन । ओकर बाद ओ काठमाडौं जाक पद्मकन्या क्याम्पससँ मध्यवर्ती पाठ्यक्रम पुरा करैत लन्डनस लन्डन महानगरीय विश्वविद्यालयसँ समाज शास्त्रमे स्नातोकोत्तर समापन करने छल ।

अनिता यादव  नोभेम्बर २७ २०१४ म सार्क राज्य क राज्य प्रमुख आर सार्क राज्य पहिल महिलासभ क लागि स्वागत करैत

  
  
  
 
 




#Article 262: ग्रेट ब्यारियर रिफ (113 words)


ग्रेट ब्यारियर रिफ, क्विन्सल्यान्ड (अस्ट्रेलिया)क उत्तरी-पूर्वी तटक समान्तर बनल, विश्वक सबसँ पैग मुँगाक चट्टान छी ।  ई दीवारक लम्बाई लगभग १,२०० माइल तथा चौडाई १० माइल सँ ९० माइल धरि अछि । ई बहुतेक स्थानसभ पर खण्डित अछि तथा एकर अधिकांश भाग जलमग्न अछि, मुदा कतौ कतौ जलक बाहर सेहो स्पष्ट दृष्यावलोकन होएत अछि । महीद्वीपीय तट सँ एकर दूरी १० सँ १५० माइल धरि अछि । महाद्वीपीय तट तथा अवशेषी शैल भित्तिक बीचक क्षेत्र (८०,००० वर्ग माइल) पर्यटकसभक लेल अत्यन्त आकर्षक स्थल छी । जलवायु परिवर्तनक खराब असरसँ ग्रेट ब्यारियर रिफक बचैक सम्भावना बहुत कम छी अ ऐहन आशङ्का अछि कि सन् २०५० धरि रिफ पूर्ण रुप सँ नष्ट भ जाएत ।




#Article 263: ग्यारेथ बेल (121 words)


ग्यारेथ फ्र्याङ्क बेल (जन्म १६ जुलाई १९८९) वेल्सक फुटबल खेलाडी छी । ओ हाल व्यावसायिक रुपमे रियल म्याड्रिड सँ विङ्गरक रूपमे खेलैत अछि । ग्यारेथ व्यावसायिक फुटबलक सुरुवात सन् २००७ मे साउथह्याम्पटन सँ केनए छल । जल्दीए ओ इङ्गलिस प्रिमियर लिगमे फ्री-किक विशेसज्ञक रुपमे चर्चित भएल छल । सन् २०११ तथा २०१३ मे एपिएफ प्लेयर अफ द इअर आ यङ प्लेयर अफ द इअर घोषित भएल छल । इङगल्याण्डक प्रोफेसनल फुटबलर एशोसिएसन २३ वर्षीय बेलके प्लेयर अफ द इयर आ यङ प्लेयर अफ द इअर सँ सम्मान केनए छल । सन् २०१३ मे दुई महिनाक लम्बा कसरत पश्चात अन्ततः स्पेनी क्लव रियल म्याड्रिड ग्यारेथ बेलके इङ्गलिस क्लव टोटनह्याम हट्स्परसँ कीर्तिमानी रकम ९९ सय मिलियन युरो बुझा क्लबमे आबद्ध केनए छल ।




#Article 264: कराची (128 words)


कराची पाकिस्तानक सब सँ पैग सहर छी आ सिन्ध प्रान्तक राजधानी सेहो छी । ई सहर अरब सागरक तटमे रहल अछि तथा पाकिस्तानक सब सँ पैग बन्दरगाह सेहो छी । एकर उपनगरसभ मिलाएल जाए तँ ई विश्वक तेसर सब सँ पैग सहर छी । ई सहर ३५२७ वर्ग किलोमीटरमे फैलल अछि आ करीब २.११ करोड लोगक बसोबास क्षेत्र छी । एतौका निवासी एहि सहरक चमकक कारण एकरा प्रकाशक सहर तथा कैद-ए-आजम जिन्नाक निवास स्थान भेला कारण ई सहरके सहर-ए-कैद सेहो कहल जाएत अछि । जिन्‍नाहक जन्‍मस्‍थलक लेल प्रसिद्ध कराची पाकिस्‍तानक सिन्ध प्रान्तक राजधानी छी । कराचीके पाकिस्‍तानक सांस्‍कृतिक, आर्थिक आ शैक्षिक राजधानी मानल जाएत अछि । ई सहर पाकिस्‍तान आबैवाला सभ पर्यटकसभमे लोकप्रिय रहल अछि । पर्यटकसभ ई सहरमे समुद्र तट ,सङ्ग्रहालय तथा मस्जिद देख रमवैत अछि ।




#Article 265: बालकृष्ण सम (165 words)


बालकृष्ण सम (वास्तविक नाम: बालकृष्ण शमशेर जङ्बहादुर राणा; १९५९ साल माघ २४ – २०३८ साल साउन ६) नेपाली साहित्यका नाटककार आर चित्रकार छेलाह । वि.सं. २००७ सालक क्रान्ति पश्चात सब नेपाली बराबर देखावैल
'शमशेर जङ्बहादुर राणा' परिवर्तन कक 'सम' राखेन छेलाह।

बालकृष्ण समको जन्म वि.सं. १९५९ साल माघ_२४ गते काठमाडौंक ज्ञानेश्वर मे भेल छेलाह।

औपचारिक रूपमा वो आई.एस्सी. टक मात्र अध्ययन करने छेलाह् अपन अध्ययन वो पूर्वीय एवं पाश्चात्य कला, साहित्य, धर्म, दर्शन, विज्ञान, इतिहास आदिक गम्भीर विवेचना  सामर्थ्य प्राप्त करने छेलाह।

बहुमुखी प्रतिभाका धनी बालकृष्ण सम कविता, नाटक, कथा, प्रवन्ध, निवन्ध, जीवनी आदि बिभिन्न क्षेत्रम कलमक धनि व्यक्ति छेलाह |

लघुनाटक (एकाङ्की) देखि प्रेमपिण्ड जस्तो महानाटक दिएर नेपाली साहित्यलाई समृद्ध पार्ने सम बहुमुखी र नेपालीले गर्व गर्न लायक प्रतिभाशाली साहित्यकार हुन्। आधुनिक नेपाली नाटकका प्रारम्भकर्ताका रूपमा पनि उनको उत्तिकै ख्याति छ। नेपालका विश्वकोष मानिने समको साहित्यिक योगदानलाई कदर गरेर उनलाई रोयल नेपाल एकेडेमीका (हाल नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान) सदस्य र पछि उपकुलपतिसमेत बनाइयो।

 मृत्यु वि.सं. २०३८ साल साउन ६ गते, पशुपति आर्यघाट, काठमाडौँ भएको थियो।




#Article 266: लियोनेल मेस्सी (405 words)


लियोनेल एन्ड्रेस मेस्सी ( जन्म २४ जुन, १९८७) अर्जेन्टिनाक फुटबल खेलाडी छी, जे हाल ला लिगा टिम बार्सिलोना आ अर्जेन्टिनाक लेल खेलैत अछि । मेस्सी अपन पुस्ताक सर्वश्रेष्ठ फुटबल खेलाडीसभ मे सँ एक मानल जाएत अछि । मेस्सी २१ वर्षक उमरमे बेलोन डी' ओर आ फिफा सर्वश्रेष्ठ वर्ष खेलाडीक उपाधि प्राप्त करलक । हुनकर खेल शैली आ क्षमताक कारण सँ हुनका फुटबलक बादशाह कहि चिनहै वाला म्याराडोना सँ तुलना होमए लागल, जेकरा ओ स्वयं अपन उत्तराधिकारी घोषित केलक ।

मेस्सी कम उमर सँ फुटबल खेलैलेल सुरु केलक आ शिघ्र बार्सिलोना हुनकर क्षमता पहिचान केलक । ओ सन् २००० मे रोसारियोमे अवस्थित नेवेल्स ओल्ड ब्वाइज युवा टिम छोडि अपन परिवारसंग युरोप आएल, कियाकि बार्सिलोना हुनकर विकास हार्मोनक कमीके लेल औषधउपचार करि देवाक प्रस्ताव राखने छल । सन् २००४-०५ सिजनमे पहिल बेर मैदानमे घुसैवाला ओ सब सँ
कम उमरमे लिग खेल खेलैवाला फुटबलरक ला लिगा कीर्तिमान तोडलक आ संगे सब सँ कम उमरमे लिग गोल स्कोर करनिहार खेलाडी बनल । मेस्सीक प्रथम आगमनमे ओ बार्सिलोनाके ला लिगा जिताबैमे सफल भेल आ सन् २००६ मे पुन: ओहि लिग आ युइयफए युरोपेली च्याम्पियनसिप जिताए जल्दीए प्रमुख सम्मान प्राप्त केलक । सन् २००६-०७ हुनकर सफलताक सिजन छल: एल क्लासिकोमे एक ह्याट्रिक आ २६ लिग म्याचमे १४ गोल करैत, ओ नियमित रूप सँ खेल जितैवाला पहिल समूहमे ठाम बनेलक । सम्भवतः २००८-०९ क सिजन हुनकार सब सँ सफल सिजन छल, जहिमे मेस्सी ३८ गोल करैत लगातार तेसर विजय अभियानक अभिन्न अङ्ग बनल ।

मेस्सी, २००५ फिफा विश्व युवा च्याम्पियनसिपमे अन्तिम खेलमे २ गोल सहित कूल ६ गोल करि शीर्ष स्कोरर बनल । ओकर लगले, ओ अर्जेन्टिनाक अन्तर्राष्ट्रिय टिमक एक सदस्यक रूपमे स्थापित भेल । सन् २००६ मे, ओ अर्जेन्टिना सँ फिफा विश्वकपमे खेलैवाला सब सँ कम उमरक खेलाडी बनल आ अग्ला वर्ष ओ कोपा अमेरिका प्रतियोगितामे उप-विजेताक पदक जितैलेल सफल भेल । सन् २००८ मे, ओ अर्जेन्टिना ओलम्पिक फुटबल टिम सँ बेइजिङमे भेल ओलम्पिक खेलमे अपन पहिल अन्तर्राष्ट्रिय सम्मान, ओलम्पिक स्वर्ण पदक जितलक । 

मेस्सीक जन्म २४ जुन, १९८७ मे रोसारियो, अर्जेन्टिनामे जर्ज मेस्सी (एक कारखाना मजदूर) आ सीलिया (उर्फ कुक्कीटिनी) (एक अंशकालिक सफाईकर्ता) दम्पतिक घरमे भएल छल । मेस्सीक पूर्वजक उद्गम इटालियन सहर एङ्कोना सँ भेल, जते सँ सन् १८८३ मे हुनकर पूर्वज, एञ्जलो मेस्सी अर्जेन्टिनामे प्रवेश केनए छल । हुनकर रडरिगो तथा मेसियस नाम केनिहार दुई भैया आ संगे मारिया सोल नाम करनिहार एक बहिन सेहो छल । मेस्सी पाँच बर्षक उमर सँ अपन पिता जर्ज मेस्सी प्रशिक्षक रहल एक स्थानीय क्लब ग्रैन्डोलीक लेल फुटबल खेलैलेल आरम्भ केलक ।




#Article 267: अर्जेन्टिना (130 words)


अर्जेन्टिना दक्षिण अमेरिकामे स्थित एक देश छी । क्षेत्रफल आ जनसङ्ख्याक दृष्टि सँ दक्षिणी अमेरिकाक ब्राजिल देशके बाद द्वितीय विशालतम देश छी (क्षेत्रफल: २७,७६,६५६ वर्ग कि.मी.)। एकर उत्तरमे ब्राजिल पश्चिममे चिली तथा उत्तरपश्चिममे पराग्वे अछि । देश २२° द.अ. तथा ५५° द.अ. क मध्य ३७,७०० कि॰मी॰ क लम्बाईमे उत्तर दक्षिण फैलल अछि । एकर आकृति एक अधोमुखी त्रिभुजक समान अछि जे लगभग २,६०० कि॰मी॰ चौडा आधार सँ दक्षिणक दिस संकरा होएत चलि गेल अछि । उत्तरमे ई बोलिभिया आ पराग्वे, उत्तर-पूर्वमे उरुग्वे तथा ब्राजिल आ पश्चिममे चिली देश सँ घेरल अछि। 

अर्जेन्टिनाक नाम अर्जेन्टम सँ पडल जेकर अर्थ चाँदी होएत अछि । चांदीक लेल प्रयुक्त ल्याटिन तथा स्पेनी पर्यायवाची शब्दसभ सँ, जे क्रमश: 'अर्जेन्टम' आ 'प्लाटा' छी, अर्जेन्टिना आ 'रायो डी ला प्लाटा' (देशक महान एस्चुअरी)क नामकरण भेल अछि ।




#Article 268: एफसी बार्सिलोना (142 words)


एफसी बार्सिलोना () बार्सिलोना वा बार्साक नाम सँ चिनहल जाएवाला ई क्लब स्पेनक एक व्यावसायिक क्लब छी, जे बार्सिलोना सहरमे अवस्थित अछि । एकर पुरा नाम एफसी बार्सिलोना अर्थात फुटबल क्लब बार्सिलोना छी ।

सन् १८९९ मे जोअन ग्यामपरक नेतृत्वमे स्विस, अङ्ग्रेजी आ स्पेनी फुटबल खेलाडीक एक समूह मिलाए Més que un club (मैथिलीमे: एकटा क्लब सँ बेसी) नामक उक्तिक संग फुटबल क्लब बार्सिलोनाक रूपमे ई क्लबक स्थापना कएल गेल छल । ई क्लब क्याटलनबाद आ क्याटलन संस्कृतिक एक प्रतीक बनल । एकर आधिकारिक गान Cant del Barça जउमे पिकास आ जोसफ मारिया इस्पिनासद्वारा लिखल गेल छल । राजस्वक मामलामे ई क्लब विश्वक दोसरा धनिक फुटबल क्लब छी, एकर वार्षिक बजेट ५६०.८ मिलियन युरो अछि । ई क्लबके रियल म्याड्रिड क्लब सँ लम्बा समय सँ प्रतिद्वन्द्विता चलि आएल अछि आ ई दुई बिचक खेलके एल क्लासिकोक नाम सँ जानल जाएत अछि ।




#Article 269: चाँगुनारायण मन्दिर (117 words)


चाँगुनारायण मन्दिरक निर्माण लिच्छविकालिन राजा हरिदत्त बर्माले ईसापूर्व ३२३मा बनौने छल । नेपालक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल मध्ये एक आर प्राचिन पुरातात्विक शिलास्तभ समेत रहल चाँगुनारायण मन्दिर भक्तपुर जिलाक चाँगुनारायण गा.वि.स.मा अवस्थित अछि। भक्तपुर नगरबाट ६ कि.मी. उत्तरमा रहल चाँगुनारायण मन्दिर ऐतिहासिक, कलात्मक र धार्मिक दृष्टिकोण सँ मात्र नैभक प्रमुख पर्यटकीय क्षेत्रक रूपम सहो महत्वपूर्ण अछि । काठमाडौं उपत्यकाम रहल सात विश्व सम्पदा सूची मध्ये चाँगुनारायण सहो एक छी  । उपत्यकाम रहल प्राचिन मन्दिरम सब्स पुरान मानल ई मन्दिरक सन् १९६९म युनेस्कोक विश्व सम्पदा सूचीम सूचिकृत केनेए छल  । तेलकोट भन्ज्याङ्ग-तेलकोट डाँडा-चाँगु आवेवाला रुट उपत्यकाक सब्स बेसी निक  ट्रेकिङ्ग रुट मानल जायेत अछि । साथ ई  क्षेत्र नगरकोटक ट्रेकिङ करेल  तथा काठमाडौं उपत्यकाक दृष्यावलोकका लेल सहो  प्रसिद्ध एकछि।




#Article 270: फिफा बेलोन डी' ओर (146 words)


फिफा बेलोन डी' ओर (,गोल्डेन बल) अन्तर्राष्ट्रिय फुटबल सङ्गठन् फिफाद्वारा प्रत्येक बर्ष उत्कृष्ट फुटबल खेलाडीसभके प्रदान करैवाला पुरस्कार छी । गोल्डेन बल नाम सँ सेहो जानएवाला ई पुरस्कार बितल बर्षमे उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन करनिहार फुटबल खेलाडीके प्रदान कयल जाएत अछि । ई पुरस्कार अन्तर्राष्ट्रिय फुटबल टिमके प्रशिक्षकसभ तथा कप्तानके संगे विश्वक पत्रकारसभक मतक आधारमे तय कयल जाएत अछि । 

ई पुरस्कारक सुरुवात सन् २०१० मे फ्रान्स फुटबल तथा फिफा बर्षक सर्वोत्कृष्ट खेलाडीके मिलाए बनाएल गेल छल । सन् २०१० मे भएल पहिल फिफा बेलोन डी' ओरक उपाधि अर्जेन्टिनाक स्टार खेलाडी लियोनेल मेस्सी जितने छल ।

सन् २०१४ मे सम्मानक रुपमे ब्राजिलक महान फुटबल खेलाडी पेलेके फिफा बेलोन डी' ओर सम्मान प्रदान कयल गेल छल । पेले ब्राजिलके ३ बेर फुटबल विश्वकप जितेला बादो हुनका फिफाद्वारा कोनो सम्मान प्राप्त नै भेल छल कियाकी हुनकर समयमे फिफा बेलोन डी' ओर युरोपेली खेलाडीके मात्र प्रदान कयल जाएल छल ।




#Article 271: फिफा (168 words)


फिफा (फ्रान्सेली: Fédération Internationale de Football Association) अन्तर्राष्ट्रिय फुटबल सम्मेलन महासङ्घक संक्षिप्त रूप छी, जे एकटा अन्तराष्ट्रिय सङ्घ छी जे अन्तर्राष्ट्रिय फुटबल खेलउपर नियन्त्रण राखैत अछि । (एकरा फुटबल सङ्घ सेहो कहल जायत अछि)। एकर मुख्यालय ज्युरिख, स्वीट्जरल्याण्डमे अछि, आ हाल एकर अध्यक्ष जियानी इन्फान्टिनो छी । फिफा अन्तर्राष्ट्रिय फुटबलक पैग पैग प्रतियोगिताक आयोजन करैत अछि, आ ओहिमे सँ प्रख्यात रहल एकटा प्रतियोगिता छी फिफा विश्वकप, जे सन् १९३० मे सुरुवात भएल छल । फिफाक स्थापना मई २१,१९०४ मे पेरिसमे भएल छल आ अहिमे २०८ अन्तर्राष्ट्रिय सङ्गठनसभ एकर सदस्य छी । ई सङ्घक अधिकारिक भाषासभ अङ्ग्रेजी, फ्रान्सेली, जर्मन आ स्पेनी रहल अछि । 

विश्व जुडान संगे २०अम शताब्दीक शुरुमा खेलसभ उपर दृष्टि राखैक लेल निकायक जरुरी देखल गेल । फिफाक स्थापना २१ मई १९०४ मे पेरिसमे भएल छल । ई सङ्घके स्थापना करैवाला सदस्यसभ बेल्जियम, डेनमार्क, फ्रान्स, नेदरल्याण्ड, स्पेन, स्वीडेन आ स्वीट्जरल्याण्ड छल आ वोहि दिन जर्मन सङ्गठन् टेलीग्राम पठाए अपन सदस्यता समबन्धमे अपन इच्छा प्रकट केनए छल । एहि सङ्गठनक सर्वप्रथम अध्यक्ष रबर्ट ग्युरिन बनल छल ।




#Article 272: दुर्गा सप्तशतीक सिद्ध-मन्त्र (234 words)


दुर्गा सप्तशतीक सिद्ध-मन्त्र क अर्थ होयेत अछि कि जे मन्त्र माँ दुर्गा कs लेल प्रयुक्त कएल जाएत अछि अर्थात माँ दुर्गा कs नमन करति हुनकर चरणमे अपनाक समर्पित करति  हुनकर सिद्ध मन्त्रक जाप करला पर माँ दुर्गा प्रशन्न होएत अपन भक्त कs इच्छित फल प्राप्ति कs अवसर देती अछि  । 

दुर्गा सप्तशतीक सिद्ध-मन्त्र क मन्त्र विभिन्न प्रकारक होएत अछि , जे कि हर एक इच्छा पर निर्भर और अही मन्त्र कs कम स कम ११, २१, ५१ अथवा १०८ बेर जाप करला पर   व्यक्ति कs मनोकामना पुर्ण होएत अछि ।

दुर्गा सप्तशतीक सिद्ध-मन्त्र के मन्त्र किछ अहि  प्रकार अछि :

शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे ।

सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमो स्तु ते ॥

सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्तिमन्विते ।

भये भ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमो स्तु ते ॥

हिनस्ति दैत्येजंसि स्वनेनापूर्य या जगत् ।

सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्यो नः सुतानिव ॥

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभिष्टान् ।

त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति ॥

देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥

एवं देव्या वरं लब्ध्वा सुरथः क्षत्रियर्षभः

जयन्ती मड्गला काली भद्रकाली कपालिनी ।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमो स्तु ते ॥

सृष्टि स्तिथि विनाशानां शक्तिभूते सनातनि ।

गुणाश्रेय गुणमये नारायणि नमो स्तु ते ॥

ॐ कात्यायनि महामाये महायेगिन्यधीश्वरि ।

नन्दगोपसुते देवि पतिं मे कुरु ते नमः ॥ 

पत्नीं मनोरामां देहि मनोववृत्तानुसारिणीम् ।

तारिणीं दुर्गसंसार-सागरस्य कुलोभ्दवाम् ॥

ई सिद्ध मन्त्र निम्नलिखित पुस्तकसभ सं लेल गेल अछि:




#Article 273: युरोपेली सङ्घ (111 words)


युरोपेली सङ्घ युरोप महादेशमे रहल २८ टा राष्ट्रसभक एकटा राजनैतिक तथा आर्थिक सङ्घ छी । जहिमे आपसी प्रशासकिय साझेदारी होमएत अछि, जे सङ्घक सब राष्ट्रमे लागु होएत अछि । एकर उदय सन् १९५७ मे रोमक सन्धिद्वारा युरोपेली आर्थिक परिषदक माध्यम सँ ६ युरोपेली देशसभक आर्थिक समर्थनद्वारा भएल छल । तहि समय सँ अखन धरि अहि सङ्घमे राष्ट्सभक सङ्ख्या बढि रहल अछि । सङ्घ अखनधरि अपन नीति तथा नियमसभने परिवर्तन करैत सुधार जारी राखने अछि जेकर फल:स्वरूप ई सङ्घ दृढ बनैत गेल अछि । 

दोसर विश्वयुद्ध पश्चात युरोपक राष्ट्रसभ एकताक दिस लागल । जहि अनुरुप इटाली, बेल्जियम, फ्रान्स, लक्जेम्बर्ग, नेदरल्यान्ड आ पश्चिम जर्मनी मिल युरोपेली कोइला तथा स्टिल समुदायक स्थापना केलक ।




#Article 274: अरविन्द केजरीवाल (176 words)


अरविन्द केजरीवाल (जन्म: १६ अगस्त १९६८) एक भारतीय राजनीतिज्ञ, आम आदमी पार्टीक राष्ट्रीय संयोजक आ दिल्लीक मुख्यमन्त्री छी । ओ अपन पहिल कार्यकालक समय २८ दिसम्बर २०१३ सँ १४ फरवरी २०१४ धरि एहि पद पर रहल छल । ४९ दिनक अल्पमत सरकार चलाबक बादमे ओ त्यागपत्र देलक आ हिनका द्वारा कहल गेल छल जे अल्पमतमे रहवाक कारण हम अपन चुनावी प्रतिज्ञाक अनुसार जनलोकपाल बिल विधानसभामे पारित नै करवा सकलौं । १ वर्ष धरि रहल राष्ट्रपति शासनक बाद फरवरी दिल्ली विधानसभा चुनाव, २०१५मे हिनकर पार्टी भारी बहुमत सँ विजय भऽ १४ फरवरी २०१५ कऽ ओ पुनः दोसर बेर दिल्लीक मुख्यमन्त्री पद पर पदासिन भेल ।

एहिसँ पहिने ओ एक सामाजिक कार्यकर्ता छल आ सरकारी कामकाजमे अधिक पारदर्शिता लाबक लेल  सङ्घर्ष केनए छल । भारतमे सूचना अधिकार अर्थात सूचना कानून (सूका) कऽ आन्दोलनकें जमीनक स्तरमे सक्रिय बनाए सरकारकें जनताक प्रति जवाबदेह बनेवाक आ सभसँ गरीब नागरिकसभक खातिर भ्रष्टाचारसँ लड़ि सशक्त बनेवाल लेल हिनका वर्ष २००६ में रमन म्याग्सेसे पुरस्कार सँ सम्मानित कएल गेल छल । ओ आम आदमी पार्टीक नाम सँ एक नयाँ  राजनीतिक दलक स्थापना कएलक ।




#Article 275: अमावस्या (107 words)


अमावस्याक अर्थ संस्कृतमें अनहार चन्द्र चरण होइत अछि । अमावस्या शब्द लगभग सम्पूर्ण नेपाली आ भारतीय भाषासभमे सामान्य अछि कियाकी ओ भाषासभ अधिकांश संस्कृतसँ व्युत्पन्न भेल अछि । प्राचीन बेबिलोन, ग्रीक आ भारतीय क्यालेन्डर ३० चन्द्र चरणसभक प्रयोग करैत आएल अछि, जकरा भारतमे तिथि कहल जाइत अछि । अनहार चन्द्र तिथि तखन होइत अछि जखन चन्द्रमा, सूर्य आ चन्द्रमाक बीचकें दूरी संयोजन (युति-वियुति) १२ डिग्री भीतर होइत अछि । नव चन्द्रमा तिथि (प्रतिपदा या प्रतिमा कहल जाइत अछि) युति-वियुतिक बाद १२ कोणीय डिग्रीमे अवस्थित रहैत अछि । अमावस्याकें प्रायः नव चन्द्रमाक रूपमे अनुवादित कएल जाइत अछि कियाकी चन्द्रमाकें अङ्ग्रेजीमे संयोजनसँ पहिने कोनो मानक शब्द नै अछि ।




#Article 276: कुबेर (159 words)


कुबेर एक हिन्दू पौराणिक पात्र छि जे धनक स्वामी (धनेश) मानल जाएत अछि । कुबेर यक्षों कs राजा सेहो छि । वो  उत्तर दिशा कs दिक्पाल छि  आर लोकपाल (संसारक रक्षक) सेहो छि ।

रामायण मs कुबेर भगवान शंकर कs  प्रसन्न करsके  लेल  कुबेर हिमालय पर्वत पर तप केनेए  छल । तपक अंतराल मs शिव तथा पार्वती कs देखने छल  । कुबेर जी  अत्यंत सात्त्विक भाव सं  पार्वती कs  आगा  बाया  नेत्रसs देखलथि  । पार्वती कs दिव्य तेज सं वो  नेत्र भस्म भs पियर भs गएल छल । कुबेर जी जगह सs उठि कs दोसर स्थान पs  चल गएल । एहन घोर तप या त शिव जी केने छल या  फिर कुबेर कएलक , अन्य कोनो  देवता ओकरा  पूर्ण रूप सं  संपन्न नइ  करि पाओल छल । कुबेर सं  प्रसन्न भsकs शिव जी  कह्ल्खिन-'तूं  हमरा अपन  तपस्या सं  जीत लेल्ही । तोहर  एकटा नेत्र पार्वती कs तेज सं  नष्ट भs गएलौ, अत: आब सं तूं  एकाक्षीपिंगल कहेभी । [1]




#Article 277: मिथिला स्टुडेन्ट युनियन नेपाल (272 words)


मिथिला स्टुडेन्ट युनियन नेपाल
 मिस्यु नेपाल
एक मैथिली अभियानी संस्था छी।जकर स्थापना
२०७२ भादोँ ५ गते (२०१५ अगस्ट
२१)भेल  ।एकर केन्द्रिय कार्यलय
लहान मे छै।
इ संस्था कोनो सरकारी वा नाफामुलक
सस्था नहि थिक ।[एहि मे विद्यार्थी
लोकनि अपन पाय जमा कऽ बिभिन्न योजना
व कार्यक्रम तय करय छथि] ।एहिमे
नवतुरिया १२ सँ २५ बर्ष युवा लोकनि
छथि।जैँ मे दृष्टि विहिन सँ लक दलित
आदिवासी,पहाडी -मधेशी व्यत्ति आवद्ध
अछि । युनियनमे मात्र विद्यार्थी केर
हस्तीसभ मिथिला निमार्णमे समुचित
प्रयास सदेशं मुलक कार्य सं आरम्भ कएने छल
।'एक डेग मिथिला विकाशकऽ लेल' 
इ नारा द कऽ कतेको डेग आगु बढि रहल अछि
। 
हाल सिरहा जिलाक केन्द्र बिन्दु बनबैत
स्कुले स्कुल विद्यार्थीके मैथिली भाषा प्रति
अभिरुची जगेनाइ ,मैथिली सास्कृतिक
कार्यक्रम आयोजन,साहित्यिक गोष्ठी
लगाय अन्य अन्य काज सभ होइत एल अछि । Msu
एतिहासिक स्थल पर खोजके,डोकोमेन्टरी
लेनाइ तयारी पर सेहो लाग्ल अछि ।आपत बिपतमे राहत दैत सेहाे एल अछि।

कार्यसमिति
२०७३ भादव २५ गते साधारण सभा उपरान्त कार्यसमिति परिबर्तन भेल अछि।अध्यक्ष-हृदय नारायण यादब, उपाध्यक्ष-तेजु मैथिल ,सचिव- गजेन्द्र गजुर, सह- सचिव -संगिता साह, कोषाध्यक्ष - गायत्री सिंहकेन्द्रीय सदस्यसुख सागर साह ,जावेद अली ,शिब शंकर गुप्ता ,अमरेश महताे ,ज्याेती बि क अछि।निवर्तमान अध्यक्ष- दिनेश रसियाउपाध्यक्ष-सृजना गजमेर महासचिव-गायत्रीसिहँ सचिव -सरोज चौधरी सुचनाधिकारी-गजेन्द्र गजुर युनियन प्रेस-नरेश बरबरिया,महेश सिहँ सदस्यसभ- तेजु मैथिल,रितेश मैथिल,नारायण मधुशाला,हृदय सुमन,अमरेशमहतो,गौरी ठाकुर,विद्यानन्द बेदर्दी,सागर साह ,जाबेद अली , ज्योती बि क ,जेपी अकेला ,कृष्णा बेदर्दी ,पूजा सिहं लगाय२५ ब्यत्तीनिवर्तमान अध्यक्ष- दिनेश रसिया
उपाध्यक्ष-सृजना गजमेर महासचिव-गायत्री
सिहँ सचिव -सरोज चौधरी सुचनाधिकारी-
गजेन्द्र गजुर युनियन प्रेस-नरेश बरबरिया
,महेश सिहँ सदस्यसभ- तेजु मैथिल,रितेश मैथिल,
नारायण मधुशाला,हृदय सुमन,अमरेश
महतो,गौरी ठाकुर,विद्यानन्द बेदर्दी,
सागर साह ,जाबेद अली , ज्योती बि क ,जे
पी अकेला ,कृष्णा बेदर्दी ,पूजा सिहं लगाय
२५ ब्यत्ती




#Article 278: गीता (2897 words)


श्रीमद्भगवद्‌गीता हिन्दू धर्म|हिन्दुसभक] पवित्रतम ग्रन्थों मs सs एक छि । महाभारतक अनुसार कुरुक्षेत्र युद्ध मs श्री कृष्ण  गीता कs सन्देश अर्जुन कs सुनाउने छल । यी  महाभारतक भीष्मपर्व कs  अन्तर्गत देल गएल  एक उपनिषद् छि । इसमें एकेश्वरवाद, कर्म योग, ज्ञानयोग, भक्ति योग कs बहुत सुन्दर ढंग सं चर्चा भेल अछि । अहिमs देह सं  अतीत आत्मा कs निरूपण कएल गेल अछि । सभसs पहिल गीता संस्कृत मs लिखल गएल छल । जे अहि प्रकार अछि ।

श्रीमदभगवद्गीताख्यं शास्त्रं वैदिकवाङ्मये सम्पूर्णवेदस्थानीयमिति शास्त्रविदां मतम् । वेदवत् त्रिकाण्डात्मकत्वात्, समस्तवेदार्थसारसंग्रहभूतत्वात्, सर्वशास्त्रमयत्वात्, सर्वसाधारणलोकोपकारकत्वाच्च । प्रसिद्धिश्चैतादृश्येव –

वासुदेव-पार्थयोः संवादरूपायाः गीताया अवसाने अर्जुन उवाच— नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा त्वत्प्रसादान्मयाच्युत । स्थितोऽस्मि गतसन्देहः करिष्ये वचनं तव । अनेन मोहनाशः जातः यत् तदेव प्रश्नप्रतिवचनेन प्राप्तं सर्वशास्त्रार्थज्ञानफलमेतदिति निश्चितं दर्शितं भवति । यतो ज्ञानान्मोहनाश आत्मस्मृतिलाभश्चेति । तथा च श्रुतावनात्मविच्छोचामीत्युपन्यस्यात्मज्ञानेन सर्वग्रन्थिविप्रमोक्ष उक्तः भिद्यते हृदयद्रन्थिस्तत्र को मोहः कः शोकः एकत्वमनुपश्यतः इति च मन्त्रवर्णः । एतस्याः गीतायाः शास्त्रत्वे भगवतः स्ववचनमेव प्रमाणम्-

अत्र शंकरभगवत्पादाः – इत्येतद् गुह्यतमं गोप्यतममत्यन्तरहस्यमित्येतत् । किं तच्छास्त्रम् ।
तच्छास्त्रम् । यद्यपि गीताख्यं समस्तं शास्त्रमुच्यते तथाप्यमेवाध्याय इह शास्त्रमित्युच्यते स्तुत्यर्थं प्रकरणात् । सर्वो हि गीताशास्रार्थोयऽस्मिन्नाध्याये समासेनोक्तो न केवलं सर्वश्च वेदार्थ इह परिसमाप्तो यस्तं वेद स वेदवित् वेदैश्च सर्वैरहमेव वेद्यः इति चोक्तम् । इदमुक्तं मया हेऽनघापाप । एतच्छास्रं यथादर्शितार्थं बुदध्वा बुद्धिमान् स्यात् भवेन्नान्यथा । कृतकृत्यश्च भारत कृतं कृत्यं कर्तव्यं येन स कृतकृत्यो विशिष्टजन्मप्रसूतेन ब्राह्मणेन यत्कर्तव्यं तत्सर्वं भगवत्तत्वविदिते कृतं भवेदित्यर्थः । न चान्यथा कर्त्तव्यं परिसमाप्यते कस्यचिदित्यभिप्रायः । सर्वं कर्माखिलं पार्थ ज्ञाने परिसमाप्यते । इति चोक्तम् ।
	

इति च मानवं वचनम् । यत् एतत्प्रमार्थतत्त्वं मत्तः श्रुतवानसि ततः कृतार्थस्त्वं भारतेति”। भाष्यस्योपोद्धाते तदिदं गीतशास्त्रं समस्तवेदार्थ-सारस्ंग्रहभूतं दुर्विज्ञेयार्थं तदर्थाविष्करणायानेकै विवृतपदार्थवाक्यार्थ-न्यायमत्यन्तविरुद्धानेकार्थत्वेन लौकिकैर्गृह्यमाणमुपलभ्याहं विवेकतोऽर्थ निर्धारणार्थं संक्षेपतो विवरणं करिष्यामि । आचार्याः अस्याः शास्त्रत्वे न विप्रतिपद्यन्ते । आचार्यान्तराणामत्र सम्मतिरेव-

तच्चोक्तं-

पुराणं भागवतं चेति सम्भिन्नः शास्त्रपुङ्गवः- इति नारायणाष्टाक्षरकल्पे ॥

ब्रह्माद्यैः प्रार्थितो विष्णुर्भारतं स चकार ह ।
यस्मिन् दशर्थाः सर्वत्र न ज्ञेयाः सर्व जंतुभिः ॥६॥

परोक्षार्थं तु सर्वत्र वेदादप्युत्तमं च यत् –इति स्कान्दे । तत्र च वासुदेवार्जुन संवादरुपां सर्वभारतार्थसंग्रहां भारतपारिजातमधुभूतां गीतामुपनिवबंध ।
तच्चोक्तं-  ॥ भारतं सर्वशास्रेषु भारते गीतिका वरा ॥
विष्णो सहस्त्रनामापि ज्ञेयं पाठयं च् तद्वयम् “ इति महाकौर्म्ये ”॥ 

मलनिर्मोचनं पुंसां जलस्नानं दिने दिने ।
सकृदीताम्भसि स्नानं संसारमलनाशनम् ॥
अकृत्यमपि कुर्वाणो भुञ्जानोऽपि यथा तथा ।
कदाचिन्नारकं दुःखं गीताध्यायी न पश्यति ।
वेदोदघिप्रमथितं वासुदेव समुदधृतम् ।
सन्तः पिवन्ति सततं गीतामृतरसायनम् ॥

एकं शास्रं देवकीपुत्रगीतमेकोदेवो देवकीपुत्र एव । 
एको मन्त्रो तस्य नामानि यानि कर्माप्येकं तस्य देवस्य सेवा ॥

गीतैव तत्त्वहितायोर्यथावच्छासनात् शास्त्रम । उपनिषत्समाधिना सिद्धव्यवहारनिरुढेः स्रीलिङ्गनिर्देशः । एतेन शास्त्रान्तरादस्य शास्त्रस्याधिक्यं व्यञ्जितम् । स्वयं च महाभारते महर्षिणोक्तम् –“अत्रोपनिषदं पुण्यं कृष्णद्वैपायनोऽब्रवीत्” (म० भा०, आ० प०, १४. २७९) इति उक्तं चाभियुक्तैः –“ यस्मिन् प्रसादसुमुखे कवयोऽपि ये ते शास्राण्यशासुरिहतन्महिमाश्रयाणि । कृष्णेन तेन यदिह स्वयमेवगीतं शास्त्रस्य तस्य सदृशं किमिवास्ति शास्त्रम् ।

यद्यपि गीताशास्रे शास्त्रपदं श्रुत्यर्थे प्रयुक्तम् –तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ तथापि शास्त्रत्वन्त्वस्याः स्मृतित्वेऽपि न विरुध्यते । प्राय आचार्या स्मृतिनाम्ना गीताश्लोकानुद्धरन्तो दृश्यन्ते वेदार्थसंग्राहकत्त्वान्नास्या श्रुतित्वम । वेदा एव श्रुति पदाभिलाप्या इति गीतायाः स्मृतित्वं शास्त्रत्वं च भगवदुक्तत्वादागमशास्त्रवत् । वर्णाश्रमधर्मप्रतिपादकत्वाच्च मन्वादिवत् । गीताशास्त्रेऽपि वेदवत् प्रवृत्तिनिवृत्तिलक्षणं धर्मद्वयमपि प्रतिपादितम् । तत्रापि भक्ति-ज्ञान-कर्मयोगानामेकत्र समन्वयेनाखिललोककलयाणपरत्व सुलभत्वञ्चाधिगम्यते ।

अनुबन्धचतुष्टयवत् शास्त्रमेतदिति विज्ञापितं भवति, सर्वेषामधिकारित्वबोधनात् । शास्त्रस्यास्य सम्बन्धाभिधेयप्रयोजनानि-मोक्ष इति निः श्रेयसप्रयोजनवत् । किं च पुरुषार्थान्तराणामविरोधेन परमप्रयोदनस्यैव मुख्य्त्वात् । स च मोक्षः परमार्थ स्वरुपबोधात् गीताशास्त्रप्रतिपादितात् । परमार्थः परमात्मा, तत्परमात्मस्वरुपावबोधस्यास्य च शास्त्रस्य साध्यसाधनलक्षणः सम्बन्धः इति अधिकारि-प्रयोजनसम्बन्धाभिधेयविशिष्टं गीताशास्त्रम । अत्र शंकरभवगत्पादाः –
इमं द्विप्रकारं धर्म निः श्रेयसम्प्रयोजनं परमार्थतत्त्वञच वासुदेवाख्यं परब्रह्मभिधेयं विशेषतः अभिव्यञ्जयत् विशिष्टप्रयोजनसंबन्धाभिधेयवत् गीताशास्त्रम् । यतः तदर्थविज्ञानेन समस्तपुरुषार्थसिद्धिः ।
एवं सकलपुरुषार्थसिद्धये सर्वेषां श्रेयोऽर्थिनां गीताशास्त्रस्य पठनं श्रवणं पाठनं तात्पर्यबोधं विनाऽपि कल्पते इति गीतोक्तं प्रमाणम् । ननु ज्ञानकाण्डात्मिका उपनिषदः यासां सारसंग्रहभूता गीता-

इति कथं समस्तवेदार्थसाससंग्रहात्मिकेति । किञ्च वेद्मनां   
त्रिगुणात्मकत्वात् त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्योभवार्जुन इति चेन्न, काण्डत्रयात्मिकायाः गीतायाः भगवदुक्तत्वादभक्तियोगे कर्मज्ञानयोः समन्वितत्वाच्च । :यावानर्थ उदपाने सर्वतः सम्प्लुतोदके ।

इति सार्थक्यं द्विविधधर्मोपदेशस्येति सर्वशास्त्रो पजीव्यत्वेन गीताया सर्वातिशायि महात्म्यम् । उपनिषदस्तावद्रहस्यविद्यात्वेन प्रसिद्धाः गीताशास्त्रं तु गुह्यतममिति तत्रैवावधृतत्वात् । अतः कृतकृत्यता चरितार्थता समग्रस्य जीवनस्य तदा यदा हि गीताशास्त्रमनुसृत्य यथोक्त कर्मयोगमाश्रित्य ज्ञानयोगेन सह भगवद्भक्तियोगेन जीवनस्य परमपुरुषार्थः साधितो भवेत् ।

 
पूर्वोक्तदिशा विचार्यमाणे श्रीमदभगवद्गीतायाः शास्त्रत्वं महत्त्वञ्चोपनिषदभ्योऽप्यधिकतरं विद्यते इति वक्तुं शक्यते । गुह्यात्गुह्यतरं ततोऽपि गुह्यतमं शास्त्रमिति प्रमाणितं भवति समेषामाचार्याणां वचनैः । यथा गूढार्थदीपिकायामेव-
अतिगम्भीरस्य गीताशास्त्रस्याशेषतः पर्यालोचनक्लेशनिर्वृत्तये कृपया स्वयमेव तस्य सारं संक्षिप्य कथयति –  सर्वगुह्यतममिति  । पूर्वं हि गुह्यात् – कर्मयोगाद् गुह्यतरं ज्ञानमाख्यातम्, अधुना तु कर्मयोगात्त-फलभूतज्ञानाच्च सर्वस्मादतिशयेन गुह्यं रहस्यं गुह्यतमं परमम् सर्वतः प्रकृष्टं मे मम वचः – वाक्यं भूय-तत्र तत्रोक्तमपि त्वदनुग्रहार्थ पुनर्वक्ष्यमाणं श्रृणु । अपि च स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः 

	
अत्र मधुसूदनाचार्यः-

यः पूर्वौक्तैः कर्मभिः शुद्धान्तः करणः, सोऽवश्यं भगवदेकशरणो, भगवदेकशरणतापर्यन्तत्वादन्तः करणशुद्धेः । एतादृशश्चेद ब्राह्मणः संन्यासप्रतिबन्धरहितः सर्वकर्माणि संन्यस्यतु नाम, संसारविमोक्षस्तु तस्य भगवदेकशरणस्य भगवत्प्रसादादेव । एतादृशश्चेत्क्षत्रियादिः, संन्यासाधिकारी, स करोतु नाम कर्माणि, किंतु मदव्यपाश्रयः अहं भगवान् वासुदेव एव व्यपाश्रयः शरणं यस्य, स मदेकशरणो मय्यर्पितसर्वात्मभावः संन्यासान् धिकारात् सर्वकर्माणिसर्वाणि कर्माणि वर्णाश्रमधर्मरुपाणि लौकिकानि, प्रतिषिद्धानि वा सदा कुर्वाणो मत्प्रसादातपरमेश्वरस्यानुग्रहादवाप्नोति हिरण्यगर्भवन्मद्विज्ञानोत्पत्या शाश्वतं नित्यं पदं वैष्णवमव्ययम्-परिणामि । एतादृशो भगवदेकशरणः करोत्येव न प्रतिषिद्धानि कर्माणि, यदि कुर्यात् तथाऽपिमत्प्रसादात्प्रत्यवायानुत्पत्या मद्विज्ञानेन मोक्षभागभवतीति भगवदेकशरणतास्तुत्यर्थं‘सर्वकर्माणि सर्वदा कुर्वाणोऽपी’ त्यनूद्यते ।

यस्मान्मदेकशरणतामात्रं मोक्षसाधनम्, न कर्मानुष्ठानम्, कर्मसंन्यासो वा । तस्मात् क्षत्रियस्त्वम्- चेतसा विवेकबुद्धया सर्वकर्माणि-दृष्टादृष्टार्थानि मयीश्वरे संन्यस्य-“यत्करोषियदश्नासी” त्युक्तन्यायेन समर्प्यमत्परः अहं भगवान् वासुदेव एव परः प्रियतमो यस्य समत्परः सन् बिद्धियोगम्-पूर्वोक्तसमत्वबुद्धिलक्षणं योगं बन्धहेतोरपि कर्मणो मोक्ष-हेतुत्वं सम्पादाकमुपाश्रित्य- अनन्यशरणतया स्वीकृत्य मच्चित्तः मयि भगवति वासुदेव एव चित्तं यस्य,न राजनि, कामिन्यादौ वा, सः मच्चित्तः सततं भव ।
	
तदेवं प्रमाणितं वेदितव्यं यदभगवद्गीता कर्मैव पूजा इत्युपदिशति । सर्वेषां मानवानां स्वभानानुकूलं कर्म एव भगवदाराधनरुपेण ग्राह्यमिति हि सिद्धान्तः । जीवननिर्वाहायावश्यकं कर्म सहजं स्वभावनियतं च – नहि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्  । कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः ।

ततः कर्मजन्यशुद्धयभावे बहिर्मुखः – इति यस्मातक्षणमपि कालं जातु कदाचित्कश्चिदप्यजितेन्द्रियोऽकर्मकृत्सन्न तिष्ठति, अपितु लौकिकवैदिक कर्मानुष्ठानव्यग्र एव तिष्ठति । तस्माद् शुद्धचित्तस्य संन्यासो न सम्भवतीत्यर्थः कस्मात् पुनरविद्वान्कर्माण्यकुर्वाणो न तिष्ठति । हि यस्मात् सर्वः प्राणी चित्तशुद्धिरहितोऽवशोऽस्वतन्त्रएव सन् प्रकृतितो जातैरभिव्यक्तै कार्याकारेण सत्त्वरजस्तमोभिःस्वभावप्रभवैर्वा रागद्वेषादिभिर्गुणैः कर्म लैकिकं वैदिकं वा कार्यते । अतः कर्माण्यकुर्वाणो न कश्चिदपि तिष्ठतीत्यर्थः । यतः स्वभाविका गुणाश्चालकाः अतः परवशतया सर्वदा कर्माणि कुर्वतोऽशुद्धबुद्धेः सर्वकर्मसंन्यासो न संभवतीति न संन्यासनिबन्धना ज्ञाननिष्ठा संभवतीत्यर्थः ॥ यथाकथंचिदौत्सुक्यमात्रेण कृतसंन्यासस्त्वशुद्धचित्तस्तत्फलभाङ् न भवति । यतः- यो हि विमूढात्मा रागद्वेषादि दूषितान्तः करण औत्सुक्यमात्रेण कर्मेन्द्रयाणि वाक्पाण्यादीनि संयम्य निगृह्य, बहिरिन्द्रियैः कर्माण्यकुर्वन्निति यावत् । मनसा रागादि प्रेरितेन्द्रियार्थाञ्छब्दादीन नत्वात्मतत्त्वं स्मरन्नास्ते कृतसंन्यासोऽहमित्याभिमानेन कर्मशून्यस्तिष्ठति स मिथ्याचारः सत्त्वशुद्धयभावेन फलायोग्यत्वात्पापाचार उच्चते त्वं पदार्थविवेकाय संन्यासः सर्वकर्मणाम् । श्रुत्येह विहितो यस्मात्तत्यागी पतितो भवेत् । इत्यादि धर्म शास्त्रेणा । अत उपपन्नं न च संन्यसनादेवांशुद्धान्तः करणः सिद्धिं समधिगच्छतीति । औत्सुक्यमात्रेण सर्वकर्माण्यसंन्यस्य चित्तशुद्धये निष्कामकर्माण्येव यथाशास्त्रंकुर्यात् । यस्मात् तु शब्दोऽशुद्धान्तः करण संन्यासिव्यतिरेकार्थः । इन्द्रियाणि ज्ञानेन्द्रियाणि श्रोत्रादीनि मनसा सह नियम्य पापहेतु शब्दादिविषयासक्तेर्निवर्त्य, मनसा विवेकयुक्तेन नियम्येति वा, कर्मेन्द्रियैर्वाक्पाण्यादिभि कर्मयोगं शुद्धिहेतुतया विहितं कर्मारभते करोत्यसक्तः फलाभिलाषशून्यः सन यो विवेकी स इतरस्मानमिथ्याचाराद्विशिष्यते । परिश्रमसाम्येऽपि फलातिशयभाक्त्वेन श्रेष्ठो भवति । हे अर्जुन, आश्चर्यमिदं पश्य यदेकं कर्मेन्द्रियाणि निगृयज्ञानेन्द्रियाणि व्यापारयन् परमपुरुषार्थ् भगभवतीति यस्मादेवं तस्मान्मनसा ज्ञानेन्द्रियाणि निगृह्य कर्मेन्द्रियै-त्वं प्रागननुतिष्ठत शुद्धिहेतुकर्मा नियतं विध्युददेशे फलसम्बन्धशुन्यतया नियतनिमित्तेन कर्म श्रौतं स्मार्तं च नित्यमिति प्रसिद्धं कुरु कुर्विति मध्यमपुरुषप्रयोगेणैव त्वमिति लब्धे त्वमिति पदमर्थान्तरे संक्रमितम् । कस्मादशुद्धान्तः करणेन कर्मैव कर्त्तव्यम् हि यस्मात् अकर्मणोऽकरणात्कर्मैअ ज्यायः प्रशस्यतरम् । न केवलं कर्माभावे तवानतः करणशुद्धिरेव नद्धयेत किन्तु अकर्मणो युद्धादिकर्मर्हितस्य ते तव शरीरयात्रा शरीरस्थितिरपि न प्रकर्षेण क्षात्रवृत्तिकृतत्व लक्षणेन सिध्येत् । तथा च प्रागुक्तम् । अपि चेत्यन्तः करण शुद्धि समुच्चयार्थः “ कर्मणा बध्यते जन्तुः” इति स्मृतेः । सर्वं कर्मबान्धात्मकत्वान्मुमुक्षुणा न कर्तव्यमिति मत्वा तस्योत्तरमाह-यज्ञः परमेश्वरः यज्ञो वै विष्णुः” इति श्रुतेः । तदाराधनार्थं यत्कर्म क्रियते तद्यज्ञार्थं तस्मात्कर्मणोऽन्यत्र कर्मणि प्रवृत्तोऽयं लोकःअ कर्माधिकारी कर्मबन्धनः कर्मणाबध्यते नत्वीश्वराराधनार्थेन । अतस्तदर्थं यज्ञार्थं कर्म हे कौन्तेय, त्वं कर्मण्यधिकृतो मुक्तसंगः सन्समाचर सम्यक् श्रद्धादिपुरः सरमाचर ॥

मानवसमाजस्य श्रेयस्कामेन भगवता वासुदेवेन सनातन वैदिकधर्मद्वयमुपदिशता नानाप्रपञ्चपूर्णे जीवने सार्वजनीनाः समस्याः शास्त्रीयरीत्या समाहिताः । न केवलमर्जुनायापितु सर्वेभ्यः, नकेवलं युद्धविषयेऽपि तु सम्पूर्णजीवनस्य येऽपि कार्याकार्ये तदव्यवस्थार्थं शास्त्रमेव प्रमाणीकृतम् । सरलया भाषया, नादमधुरया, रसात्मिकया पदावल्या, सत्तर्कप्रतिष्ठितया, प्रतिपत्तिबन्ध्यादि दोष रहितया, छ्न्दोमय्या पदसंहत्या सहजौजस्विन्या शैल्या भ्रान्तिशून्यया रुचिपूर्णया भारत्या शिष्टसंस्कृत भाषया सुबोधिन्या सकलार्थबोधनसमर्थया स्वाभाविक्या छन्दोनिबद्धप्रणाल्या कठिनतरं विषयजातं गम्भीरदार्शनिकैविवादास्पदं सतप्रतिपाद्यविषयमपि सुबोधगम्यं सुलभं करोति विराजते चास्याः गीतायाः सर्वविध माहात्म्यं प्रासंगिकता चाद्यत्वेऽपि यथापूर्वम् ।

भगवदगीता सर्वैरेव स्वकीयगुणविशेषैः सम्यकतया प्रतिष्ठिता  वैदिकपरम्परायाः सम्प्रदायकृत्सु प्रमुखाचार्येषु भाष्यकारेषु टिकाकारेषु तत्तच्छास्त्रकारेषु च । सा हि वेदान्तप्रस्थानत्रयीनध्ये परिगणिता व्याख्यातृभीश्च व्याख्याता स्वस्वसम्प्रदायसिद्धान्तानुसारेण । तथापि न कृतोपसंहाराऽस्याअर्थगभीरा प्रभूतप्रभावा वाग्धारा । न केवलं भारतेऽपि तु विश्वस्मिन् जगतीतले भाषान्तरेष्वपि विद्वद्वर्यैव्याख्याताऽनूदिता प्रचारिता प्रसारिताऽधिताऽध्यापिता च । नाविदितं कस्यापि प्रबुद्धजनस्यैतस्याः सर्वोत्त्कृष्टं महत्त्वमुपयोगित्वं च । प्राचीनैराचार्यैराधुनिकैश्च विद्वदभिः समानभेव सम्मानिताऽभिनन्दिता परः शतैः प्राचीनैः साम्प्रदायिकैराचार्यैर्यथा स्वपक्षेनीता, व्याख्याता, सादरं परिशीलिता, तथैवं ततोऽप्यधिकतरमद्यतनी मानवता भगवद्गीतोपदेशसापेक्षेति प्रवृत्तिः प्रसृताऽवलोक्यते । अतः विदुषाम्-संख्येयत्वात्, अल्पज्ञत्वाच्चास्माभिरत्र केषाञ्चिदेवाचार्यप्रवराणां नामोल्लेखः संक्षिप्तश्च परिचयोऽत्र दिग्दर्शनत्वेन क्रियते ।

सर्वप्रथमं श्रीशंकरभगवत्पादाचार्यप्रणीतं भाष्यं ज्येष्ठं पुरोजन्मतया गुणैश्च इति प्रसिद्धम् । एतदभाष्यावलोकनेन विज्ञायते यत् भाष्यान्तरं वृत्त्यन्तरञ्चासीत् पुरा । शांकरभाष्यं तु आनन्दगिरिव्याख्यायुतम् । ततस्तु शांकरसम्प्रदायस्याद्वैतमतानुगामिभिः बहुभिराचार्यैः टीकोपटीकाः विरचिताः । तत्रैव मधुसूदनसरस्वतीयतिवरोऽपि प्रवेशनार्हतीति ।

अद्वैतमतेनैता व्याख्याः सर्वा एव् भगवद्गीताया आनुगुण्यं तथा नैव वहन्ति यथाऽन्ये वैष्णवसम्प्रदायाचार्या इति विदुषां विनिर्णयः । मधुसूदनाचार्यास्तु अद्वैतानुसारि व्याख्यानं कुर्वाणाऽपि भगवतधर्मानुसारिणीं व्याख्यां प्रस्तुवन्ति । अद्वैतव्याख्याखण्डनपरा व्याख्याः प्रमुख वैष्णवाचार्यादरीदृश्यन्ते । तत्र प्रमुखाः रामानुजाचार्याः, विशिष्टाद्वैतवेदान्तसम्प्रदाअयप्रतिष्ठापकाः स्वसिद्धान्तानुसारं भागवतधर्ममेव गीतोक्तं याथातथ्येन व्याख्याव्याजेन स्थापयाम्बभूवुः । ततः ताप्तर्यचन्द्रिका श्रीवेङ्कटनाथप्रणीताऽपि वैष्णवधर्मोदबोधिनी ।
	
द्वैतवेदान्तनुसारिणी व्याख्या मध्वाचार्यैः आनन्दतीर्थापराभिधैरर्थगभीरा दुरवगम्या च । तस्या दुरुहार्थावद्योतिनि “ प्रमेयदीपिका” जयतिर्थविरचिता विराजते ।
वेङ्कटनाथकृता व्याख्या “ ब्रह्मानन्दगिर्याख्यान नामिका माध्व मतं रामानुजमतं मधुसूदनमतञ्च निराकर्तुमुत्सहते ।
बल्लभसम्प्रदानुसारिव्याख्या तु तत्त्वदीपिका” बल्लभलाल्लोल्लासिता, “ अमृततरङिगणी” पुरुषोत्तमजीप्रणीतेति टीकाद्वयं विराजते ।
सम्पूर्णमहाभारतटीकाकर्तुः नीलकण्ठस्य भावदीपाख्यटीकाऽपि महदुपकारिणी । सापि अद्वैतमतानुसारिणीति ।
यामुनमुनिप्रणीतो गीतार्थसंग्रहः सर्वथा भागवतमतं निर्वहति ।
पैशाचभाष्यमपि केनापि शापवशात् गीताश्रवणापराधकुपितस्य भगवतः अवाप्तपिशाच भावेन हनूमताऽन्येनार्वाचीनेन हनूमन्नाम्ना वा विदुषा कृतम् ।

एतदतिरिक्ता अपि सामञ्जस्येन दर्शनशास्त्रीयविषयप्रतिपादनपराः व्याख्या उपलभ्यन्ते । तथाहि श्रीधरीयसुबोधिनी” प्रायोऽद्वैतमतं प्रतिपादयति। यत्र कुत्रापि शंकरमताद्भिद्यते च । अपरा टीका “ भाष्योत्कर्षदीपिका खलु सर्वतोभावेन शांकरभाष्यार्थमेवाविष्करोति, स्वतन्त्रव्याख्यां च प्रस्तौति निराकरोति च सामान्यतः नीलकण्ठीयव्याख्यां, श्रीधरीव्याख्यां अभिनवगुप्तव्याख्यां च, विशेषतस्तु मधुसूदनसरस्वतीस्वमिकृतां गूढार्थदीपिकां निरस्य “ भाष्यविरुद्धमेतदि” ति स्वस्वानादरं प्रकटयति । श्रीमदभिनवगुप्तपादाचार्याणामन्या लधुकायाऽपि निर्भिन्नार्थिका शैवमतोपस्थापिका चेति प्रतीयते ।

एतदुक्तं भवति समस्तटीकानां सम्यगेवेक्षणेनेति यत् सर्वा अपि यास्सन्तीति टिकात्वेन भाष्यत्वेन प्रसिद्धास्ता सर्वा अपि नैकैकशः स्वातन्त्रयेण सम्भूय वा भागवादाशयं गीतावचननिगूढं प्रकाशयितुं पर्याप्ता इति । यतो हि पराचीनानां नवीनानां व्याख्यानानामावश्यकता मनुभवन्त आचार्या आधुनिका विद्वांसोऽपि स्वमतोपन्यासे स्वतन्त्राः सन्तोऽपि गीतोक्तिमनुरुन्धन्तोऽपि स्वपक्षस्थापने प्राचुर्येण प्रमाणमुपनस्यान्तोऽपि वैदिक परम्परा पद्धतिं न जहति । महच्चित्रमिदं यत्सर्वेषां मतोद्वलकानि वचनानि समुपलभ्यन्ते । स्वस्वमतोपस्थाने परमतप्रत्याख्यानं वा समाना प्रवृत्तिः सर्वेषाम् । वस्तुगत्या भगवदाशय प्रकाशनपरा निष्पक्ष वेदोदित सिद्धान्त प्रतिपादनपरा व्याख्यातारः विरला एव । भगवद्गीताया उपदेशबलेन भगवान् वासुदेवः रहस्यजातं सुबोधभाषया समन्वयपद्धत्या प्रकाशितवन्तः यतः सम्प्रदायानां पृथक् पृथकपरम्पराः राशीकृत्यैकत्र सम्प्रदाये वैदिकसम्प्रदाये शाश्वतात्मवादे सामञ्जस्येन संकलय्य न केवलमेकनिष्ठता मानीता भगवताऽपितु सर्वोपादेयतां सर्वजीवनोपयोगयोग्यतां प्रयोगार्हतां च प्रापिताः । तत्र प्राचीनाः प्रस्थानभेदाः वेद- सांख्ययोगपाञ्चरात्रपाशुपतप्रभृतयः वैदिकापरम्परायामेकीभवन्ति  पूर्णतां प्राप्नुवन्ति एतां समन्वययात्मिकां दृष्टिं भगवतोऽनालोच्यानाश्रित्य को नाम व्याख्याता भगवदाशयं प्रकाशयितुं प्रभवेत् । सर्वथा भागवतमतमात्रप्रतिपादनपरायण एव तथा कर्तुं क्षमा याननुगृहणाति भगवान ।

	

एतामनन्तरोदित दृष्टिमवलम्ब्यालोच्यमाने सर्वा अपि शास्त्रीयाः टीकाः प्रामाण्यं भजन्त एव, किन्तु न पूर्णतया सामस्त्येन् वा । दार्शनिकविषये भवतु नाम भेदो मतमतान्तरं विलसतु नाम, तथापिधर्मसम्मतजीवनं यापयितुं, पुरुषार्थसिद्धयं दर्शनानामुपयोगं कर्तुम, आत्मोन्नतये परमपुरुषार्थावाप्तये, विश्वासं द्रढयितुं, परमार्थसत्तायामसंभावनाविपरीतभावनामपाकर्तुं भगवदाराधनामात्मोपासनां सफलां कर्तुं दार्शनिकमतभेदाः कथमपि साहाय्यं नाचरन्ति । कर्मनिष्ठा-ज्ञाननिष्ठा-भक्तिनिष्ठाः गीतोक्तदिशैव तत्र साधनत्वेनसमर्थाः भवन्ति । एवं विधो भगवतो वासुदेवस्य विष्कृष्टोऽभिप्रायो भवितुमर्हति ।
	
आधुनिकास्तु केचित् कर्मनिष्ठाप्रधानां व्याख्यां कुर्वन्ति, केचित्तु ज्ञाननिष्ठाप्रधानां, केचिच्च पुनः भक्तिनिष्ठाप्रधानामेव । तिलककृत गीतारहस्यं” सुप्रसिद्धं महदुपकारि च । गांधीविरचिता टीकापि सामाजिकं महत्त्वमावहति । मतमेतदन्येऽप्याधुनिकाः आधुनिकदृष्टया पुष्णन्ति । सन्ति च विद्वांसो बहवोऽरविन्द्रप्रभृतयो येऽखण्डयोगप्रतिपादकाः सन्ति वैदिकात्मब्रह्मैक्यप्रतिपादनपरायणा अपि गीतोक्तिमाश्रित्य यथेष्टं दर्शनान्तरं प्रख्यापयन्ति । स्वतन्त्रदर्शनप्रतिपादनपरत्वात्तेषां तु न काऽप्यनुपपत्तिः ।
	
पूर्वापरसकलटीकासु प्रयुक्तां पद्धतिं तदनुरोधेनार्थाविष्करणाय स्वस्वम्प्रदायविशेषानुरोधेन च सिद्धान्तजातं पर्यालोच्यास्माकं मतेनेदं वक्तुं पार्यते यत् यतिवरो मधुसूदनसरस्वतीमहाभागो प्रशास्यतरो व्याख्याता । यतो हि भगावदगीतायाः या समन्वयात्मिकादृष्टिः स तामेवावलम्बते संगृहणाति च सर्वान् स्वोत्प्रेक्षाबलेन व्याख्याति स्वातन्त्रयेण । अतोऽधिकांशतः श्रद्धेयो व्याख्यातेति निष्पक्षपाततो वक्तुमुचितम्  ।

यः उपनिषदां आत्मविचारः साङ्ख्यानां ज्ञनविचारः तथा सृष्टिक्रमः, उपासनाविवरणम् भगवद्विचाराः एतत् सर्वमपि बोधयति स एव भगवद्गीता । येभ्यः वेदाध्ययनाधिकारः नास्ति तेभ्यः अपि वेदान्तस्य तथा धर्मस्य सारं पाठयति एषा भगवद्गीता । व्यासरचितं  महाभारतमेव गीतायाः स्रोतः । भगवद्गीतयाः प्रस्थानत्रये द्वितीयं स्थानं दत्तं वर्तते । परमज्ञानं, परिशुद्धभक्तिः, निष्कामकर्मणः एतेषां त्रयाणामपि मोक्षसाधकत्वं वर्तते इति भगवद्गीता अभिपैति । गीतायाः उपरि अचार्यत्रयाणां भाष्यं वर्तते । आधुनिकाः अपि बालगङ्गाधरतिलकः, मदनमोहनमालवीयः,महात्मा गान्धिः, अरविन्द घोष इत्यादयः गीतायाः माहात्म्यं मुक्तकण्ठेन श्लाघितवन्तः । गीतायाः उपरि एतेषां व्याख्यानं अपि उपलभ्यते । एतस्याः काव्यशैली, आध्यात्मिकाकर्षणात् जगति सर्वेपि प्रभाविताः अभूवन् इति कारणादेव सर्वासु भाषासु अद्य अनूदिता वर्तते । त्रयाः आचार्याः तेषां सिद्धान्तानुसारं गीतायाः भाष्यं रचितवन्तः।

श्रीमद्भगवद्गीतायां भगवता श्रीकृष्णेन अर्जुनाय ये उपदेशाः प्रदत्ताः, तेषां दिशा सुस्पष्टाऽस्ति । तत्र आचारमीमांसा विशेषेण प्रतिपादिता लक्ष्यते । श्रीमद्भगवद्गीता योगशास्त्रमप्यस्ति । अत्र योगशब्दः आचारव्यवहारयोरर्थे प्रयुक्तोऽस्ति । प्रत्येकम् अध्यायस्य पुष्पिकायां “ ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे” इत्युल्लेखेन विज्ञायते यद्गीतायाः मुख्यं प्रतिपाद्यं ब्रह्मविद्यायां प्रतिष्ठितस्य व्यवहारस्य प्रतिपादनमस्ति ।

अध्यात्मविवेचनमपि श्रीमद्भगवद्गीतायां सरलं स्प्ष्टञ्चास्ति । अध्यात्मक्षेत्रस्य सर्वेषां सिद्धान्तानां समन्वयं कृत्वा एकस्य निश्चितस्य सिद्धान्तस्य स्थापनायाः कार्यं कठिनं भवति, अतो भगवता शङ्करपादेन कथितम् –“ तदिदं गीताशास्त्रं समस्तवेदार्थसारसंग्रहभूतं दुर्विज्ञेयम्”। श्रीमद्भगवद्गीतायां यानि दार्शनिकतत्त्वानि विवेचितानि, तान्येवं प्रकारेणोल्लेखनीयानि सन्ति ।

श्रीमद्भगवद्गीतायां ब्रह्मणः सगुण- निर्गुण-स्वरुपयोरभिन्नतायाः प्रतिपादनं कृतम् । गीताया अधोलिखितश्लोक एतदर्थम् उदाहर्त्तुं शक्यते –

गीतोक्तम्तानुसारेण ब्रह्मैव इन्द्रियवृत्तिभिः लैकिकविषयाणाम् उपलब्धौ समर्थं भवति । अन्तरिन्द्रियाणां बहिरिन्द्रियाणां च व्यापारैः प्रतिभासितम् अपि दृश्यते । अथ च तत् स्वयं सर्वेन्द्रियेभ्यो विहीनं, सर्वविधदेहादिसम्बन्धेभ्यो रहितञ्च वर्तते । तत् अखिलं जगत् आदधाति तत्र निर्गुणमस्ति तथापि गुणानां भोक्ताऽस्ति । सत्त्वादिगुणानां परिणामभूतानां शब्दस्पर्शरुपादिविषयाणाम् उपभोक्ताऽपि भवति । तत् सत् अस्ति असच्चाप्यस्ति । उभयोः परेऽस्ति । तद् भूतानां बहिरन्तश्च विद्यते । तच्चरम् अचरं दूरस्थम् अन्तिकस्थं चास्ति ।
	ब्रह्मणः सन्दर्भे उक्तप्रतिपादने विरोधो नास्ति, यतोहि देश –काल- निमित्तादिभिः उपाधिभिः रहितं तत् सर्वेषां विरोधानाम् अन्तोऽस्ति । इदमेव विचारशास्त्रस्य गूढसिद्धान्तोऽस्ति । ब्रह्मैव जगतः उत्पत्तिर्लयश्चास्ति । तदेव सर्वेषु प्राणिशरीरेषु तिष्ठति । गीतायां ब्रह्मणि तयोर्भावयोः सत्ता प्रतिपादिताऽस्ति अर्थात् ब्रह्मणो द्वौ भावौ स्तः- अपरभावः परभावश्च । अंशमात्रेण ब्रह्म योगमायया युक्तं भवति । तेनैवांशेन च तद् जगति अभिव्यक्तं भवति । ब्रह्म केवलं जगन्मात्रं नास्ति । तत्तुजगद् अतिक्रम्यापि वर्तते । तथापि जगतः प्रत्येकस्मिन् पदार्थे प्राणिनि च तस्यांश एव भासते ।

श्रीमद्भगवद्गीतायाम् ईश्वरस्य प्रकृतिद्वयं वर्णितम् अस्ति । गीतोक्तानुसारेणा जडा प्रकृतिः चेतनः पुरुषश्चेति तत्त्वद्वयं सांख्यशास्त्रे अभिमतम्स्ति किन्तु तयोरतिरिक्तं परमतत्त्वमेव सर्वव्यापकम् अव्यक्तम् अमृतं चास्ति, येन चराचरमिदं जगत् उत्पद्यते । प्रकृतिपुरुषौ तु तस्यैव परमतत्त्वस्य व्यापकस्य ब्रह्मणो वा विभूतिमात्रस्वरुपौ भवतः । परमतत्त्वस्यैव आयत्ता प्रकृतिर्द्विधा वर्तते-अपरा प्रकृतिः, परा प्रकृतिश्चेति । अपरा प्रकृतिरेव क्षेत्रनाम्ना अथवा क्षरपुरुषसंज्ञया व्यवह्रियते । एवमेव परा प्रकृतिरपि क्षेत्रज्ञनाम्ना अथवा अक्षरपुरुष- संज्ञया विज्ञायते ।

परा प्रकृतिः जीवरुपा विद्यते, किन्तु अपरा प्रकृतिः जीवेतर-पदार्थरुपा वर्तते । सर्वेषां भौतिकपदार्थानां ग्रहणं क्षरपुरुषरुपेण कृतम् । अपरा –प्रकृतेरष्टौ भेदा गीतायां प्रतिपादिताः पृथ्वी, जलं, तेजः, वायुः आकाशः, मनः बुद्धिः अहङ्कारश्च । क्षेत्रस्य चतुर्विंशतिभेदानां प्रतिपादनमपि गीतायां विहितम् तद्यथा –पञ्चमहाभूतानि, अहङ्कारः, बुद्धिः, अव्यक्तप्रकृतिः, पञ्चज्ञानेन्द्रियाणि, पञ्चकर्मेन्द्रियाणि, मनः पञ्च तन्मात्राश्चेति । एषां चतुर्विंशतितत्त्वानामन्तर्भाव एव अपराख्यायां प्रकृतौ भवति । इच्छा –द्वेष- सुख-दुःखसंघात चेतना –धृति –प्रभृतयस्तु क्षेत्रविकारा विद्यन्ते ।

जीवः चैतन्यात्मकोऽस्ति, अतः परमेश्वरस्य पराप्रकृतिरुपाः उत्कृष्टा विभूतिश्च वर्तते । जीव एव क्षेत्रज्ञोऽस्ति कृतकर्मणां फलभोगाय भोगायतनमिदं शरीरं क्षेत्रं भवति । क्षेत्रस्य ज्ञाता क्षेत्रज्ञ आत्माऽस्ति । क्षेत्रज्ञस्य आत्मनो वर्णनं गीतायां विस्तरेण विहितम् । आत्मा षड्विकारेभ्यो रहितोऽस्ति । स न कदापि उत्पद्यते, न म्रियते स सत्तात्मकोऽनुभूयते । तस्य कदाप्यभावो न भवति ।

जीवशरीरस्थोऽपि आत्मा अजन्मा, नित्यः, शाश्वतः, पुरातनश्च वर्तते । पुरातनोऽपि स नूतन एवास्ति । विनाशशीले प्राणिशरीरे विद्यमानस्यापि तस्य विनाशो न भवति । आत्मा स्वयं जीवशरीरस्य वरणं करोति, अस्योल्लेखः गीतायां निम्नप्रकारेण कृतम् –

आत्मा स्वयं अविकारी अस्ति किन्तु जीवशरीरं विकाररुपं विद्यते । यदा जीवः प्रारब्धकर्मणां फलभोगं कृत्वा निवर्तते तदा अन्यशरीरस्य प्राप्त्यर्थं आत्मानं प्रेरयति । फलतः आत्मा पूर्वशरीरं परित्यज्य अपरं जीवशरीरं गृह्णाति । एवञ्चेदम् आत्मा सर्वव्यापी, स्थिरः अचलः, सनातनश्चास्ति ।
 
जीव आत्मना सम्पृक्तो भवति, अतः यथा एक एव आत्मा सर्वेषु शरीररेषु विद्यते तथैव जीवोऽपि एक एव सर्वेषु शरीरेषु विद्यमानोऽस्ति । जीवस्य नानात्वं गीतायां सम्मतं नास्ति । तत्र लिखितम्स्ति –यथा एक एव सूर्यः सम्पूर्णं जगत् प्रकाशयति तथैव क्षेत्रज्ञः एकोऽपि सर्वाणि क्षेत्राणि भासयति । जीवः ईस्वरस्य सनातनः अंशो विद्यते । उक्तं च गीतायाम् –ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः” ।

जगतः उत्पत्तिः स्थितिः लयश्चेति त्रयो विकारा ईशरादेव जायन्ते । ईश्वरः सर्वेषां प्राणिनां सनातनम् अविनाशि च बीजमस्ति । यथा बीजाद् वृक्षः उद्भवति, अन्ते च वृक्षो बीजे एव लीनो भवति, तथा इदं जगत् भगवतः उत्पद्यते, अन्ते च भगवत्येव विलीयते । जगतः अवान्तर-आविर्भावस्य कालः ब्रह्मणो दिनमुच्यते, अवान्तर-तिरोभावस्य कालश्च ब्रह्मणो रात्रिः कथ्यते ।
गीतोक्तम्तानुसारेण प्रकृतेरध्यक्षः ईश्वरोऽस्ति । ईश्वरस्य अध्यक्षतायां प्रकृतिः जगत् उत्पादयति । उक्तं च –

सर्वेषां चराचराणां प्राणिनां पदार्थानाञ्च उत्पत्तिस्थानं महद ब्रह्मास्ति । स एव जगद्बीजस्य विधाताऽस्ति । प्रकृतिः विश्वस्य मातृस्थानीया वर्तते, ईश्वरः पितृस्थानीयोऽस्ति । एवञ्चेत् प्रकृतेः स्थानं ईश्वरात् न्यूनमस्ति । जगदुत्पत्तिसन्दर्भे गीता सत्कार्यवादस्य समर्थनं करोति –
	नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः

एवं श्रीमद्भगवद्गीतायाः  विवेचनानुसारं इदं जगत् मायिकं काल्पनिकं वा नास्ति, अपितु सर्वथा सत्यं वास्तविकञ्च वर्तते ।				

अध: भगवद्गीतायाः अध्यायसूची प्रदत्ता वर्तते ।

भगवद्गीतायां नैके साङ्ख्यविचारा: सन्ति। साङ्ख्यदर्शनस्य मुख्यग्रन्थ: साङ्ख्यकारिका। तेन सह भगवद्गीताया: तुलना कृता चेदिमानि साम्यस्थलानि लभ्यन्ते।
भगवद्गीता साङ्ख्यकारिका च 

गीताविस्तारो भागवतम्’इति उक्ति: प्रसिद्धा।अनया दृष्ट्या उभौ ग्रन्थौ यदा अवलोकितौ, तदा कतिचन साम्यस्थलानि दृष्टानि।तानि दृष्ट्वा उपरितना उक्ति: यथार्था अस्ति इति निश्चय: भवति।एतानि तानि साम्यस्थलानि-

एतद् एव तथ्यं भागवते एवं प्रतिपादितम् -           मृत्युर्जन्मवतां वीर, देहेन सह जायते। अद्य वाब्दशतान्ते वा मृत्युर्वै प्राणिनां ध्रुव:॥भाग

परं ब्रह्म परं धाम पवित्रं परमं भवान् । पुरुषं शाश्वतं दिव्यमादिदेवमजं विभुम्।।10.12,13

भागवते तु कृष्णजन्मन: पूर्वम् एव ब्रह्मदेव: सर्वान् देवान् भविष्यद्वृत्तं ज्ञापयति -   वसुदेवगृहे साक्षाद् भगवान्पुरुष: पर:। जनिष्यते . . .॥ भाग10.1.23
कृष्णजन्मन: समनन्तरं वसुदेव: कृष्णम् उद्दिश्य वदति -  
विदितोऽसि भवान्साक्षात्पुरुष: प्रकृते: पर:। भाग10.1.23

 
एतद् दिव्यं जन्म कथं भवति इति वर्णनं भागवते प्राप्यते - देवक्यां देवरूपिण्यां विष्णु: सर्वगुहाशय:। आविरासीद्यथा प्राच्यां दिशीन्दुरिव पुष्कल:।तद्द्भुतं बालकमम्बुजेक्षणम् . . .। भाग 10.3. 8,9,10

गीतायां भगवान् अर्जुनाय उपदिशति -सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुच:।। भ.गी.18.66

अत्र सर्वधर्माणां त्याग: विहित:। सर्वधर्मेषु कस्य कस्य अन्तर्भाव: भवति इति भागवतं पठित्वा ज्ञायते।तत्र कृष्ण: उद्धवाय उपदिशति  
तस्मात्त्वमुद्धवोत्सृज्य चोदनां प्रतिचोदनाम्। प्रवृत्तं च निवृत्तं च श्रोतव्यं श्रुतमेव च। मामेकमेव शरणमात्मानं सर्वदेहिनाम् ।यदि सर्वात्मभावेन मया स्या: ह्यकुतोभय:। भाग 11.12.15

गीतायां विश्वरूपदर्शनानन्तरं भगवान् वदति -
नाहं वेदैर्न तपसा न दानेन न चेज्यया ।शक्य एवंविधो द्रष्टुं दृष्टवानसि मां च यथा। भक्त्या त्वनन्यया शक्य अहमेवंविधोऽर्जुन।ज्ञातुं द्रष्टुं च तत्वेन प्रवेष्टुं च परन्तप॥ भ.गी.11.53,54

अत्र सर्वेषु साधनेषु भक्ते: प्राधान्यम् उक्तम्। किं बहुना वेदादिकानि अन्यानि साधनानि मम प्राप्त्यर्थम् असमर्थानि, भक्ति: एका समर्था इति भगवत: आशय:।तथापि एतस्माद् वचनात् पूर्वं साधनानां तारतम्यविषये अर्जुनस्य प्रश्न: नास्ति। 
भागवते उद्धवमुखेन एष: प्रश्न: साक्षाद् वाचित:।‘हे कृष्ण, ब्रह्मवादिन: नाना साधनानि वदन्ति। तत्र विकल्प: अस्ति अथवा मुख्यगौणभाव: अस्ति?’ (भाग. 11.14.1) अनन्तरम् एतद् एव उत्तरं भववता दत्तम्-

न साधयति मां योगो न साङ्ख्यं धर्म उद्धव।न स्वाध्यायस्तपस्त्यागो यथा भक्तिर्ममोर्जिता॥ भक्त्याहमेकया ग्राह्य: श्रद्धयात्मा प्रिय:सताम्।भक्ति:पुनाति मन्निष्ठा श्वपाकानपि सम्भवात्।भाग11.14.21,22

अत्र मन्मना भव इति साधनम् उपदिष्टम्। तस्य फलं मामेवैष्यसि इति कथितम्।भागवते एतस्य साक्षात् निदर्शनं दृश्यते।यदा कृष्ण: न दृष्ट: तदा गोप्य: ह्ताशा: जाता:।ता: स्वगृहं प्रति निवृत्ता:। तदानीं तासां स्थिति: भागवते वर्णिता-

तन्मनस्कास्तदालापास्तद्विचेष्टास्तदात्मिका:।तद्गुणानेव च गायन्त्यो नात्मागाराणि सस्मरु:।भाग 10.30.44

स्वगृहं विस्मृतवत्य: गोप्य: पुन: यमुनापुलिनम् आगता:!मन्मना भव तथा मामेवैष्यसि इति एतयो: फल-साधनसम्बन्ध: व्यासेन गोपीवृत्तेन साक्षात् दर्शित:।गीतोक्तसिद्धान्तस्य एतावद् मनोहरम् उदाहरणम् अन्यत्र न स्यात् !

गीतायां भगवान् अर्जुनाय प्रतिशृणोति - कौंतेय प्रतिजानीहि न मे भक्त: प्रणश्यति।भ.गी.9.16
भागवते एषा प्रतिज्ञा एवम् - तस्मान्मच्छरणं गोष्ठं मन्नाथं मत्परिग्रहम्।गोपाये स्वात्मयोगेन इति मे व्रत आहित:। भाग ?

गीतायां श्रीकृष्ण: व्याहरति - पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति तदहं ।भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मन:।।भ.गी.9.16

तत्र भागवते श्रीकृष्ण: एतद् एव वचनं दरिद्राय सुदाम्ने श्रावयति -पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति ।तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मन:।। भाग10.81.4

गीतायां देह्स्य कृते अयं शब्दप्रयोग: कृत:-सर्वकर्माणि मनसा संन्यस्यास्ते सुखं वशी।नवद्वारे पुरे देही नैव कुर्वन्न कारयन्। भ.गी.5. 13

एतस्य नवद्वार-पुरस्य विवरण तु गीतायां न लभ्यते। तद् विवरणं भागवते लभ्यते -नवद्वारं पुरम् ।अक्षिणी नासिके कर्णौ मुखं शिश्नगुदाविति। भाग4. 29. 8

एतेषां नवानां द्वाराणां दिग्विभाग: अपि तत्र एव दत्त:- अक्षिणी नासिके आस्यमिति पञ्च पुर: कृता:।दक्षिणा दक्षिण: कर्ण उत्तरा चोत्तर: स्मृत:।पश्चिमे इत्यधोद्वारौ गुदं शिश्नमिहोच्यते। भाग4. 29. 9




#Article 279: शक्तीपीठ (295 words)


हिन्दू धर्मक अनुसार जही ठाम  सती देवी कs शरीरक अंग गिरल, वही वही ठाम  शक्ति पीठ बनावोल  गेल । यी  अत्यंय पावन तीर्थ कहाबाति अछि । यी  तीर्थ समूचा  भारतीय उपमहाद्वीप पs फैलल अछि ।

पुराणोंक अनुसारसतीक शव कs विभिन्न अंगसभ सं  बावन शक्तिपीठ सभ कs निर्माण भेल छल ।एकर पाछा यी  अंतर्पंथा अछि  कि दक्ष प्रजापतिक कनखल (हरिद्वार) मs 'बृहस्पति सर्व' नामक यज्ञ रचाउल्खिन । वही  यज्ञ मs  ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र आर  अन्य देवी-देवतासभ कs आमंत्रित कएल गेल छल , लेकिन जान-बूझ कs अपन जमाता भगवान शंकर कs नई बुलावोल गेल । शंकरजी कs  पत्नी आर दक्षक पुत्री सती पिता द्वारा नई  बुलाइल जाइ पs आर शंकरजी कs रोकला पs भी यज्ञ मs भाग लेलक । 

पुराण ग्रंथों, तंत्र साहित्य एवं तंत्र चूड़ामणि मs जे बावन शक्तिपीठ सभक वर्णन मिलति छै , वो  निम्नांकित अछि । निम्नलिखित सूचीसभ 'तंत्र चूड़ामणि' मs वर्णित इक्यावन शक्ति पीठक छि । बावनवाँ शक्तिपीठ अन्य ग्रंथक आधार पs छै । अहि  बावन शक्तिपीठ सभक अतिरिक्त अनेकानेक मंदिर देश-विदेश मs विद्यमान अछि । हिमाचल-प्रदेश मs नयना देवी कs पीठ (पंचकूला) विख्यात अछि । गुफा मs प्रतिमा स्थित अछि । कहल जाएत अछि  कि यिहो  शक्तिपीठ छि  आर सती कs एक नयन यही ठाम गिरल छल । अहि  प्रकार उत्तराखंडक पर्यटन स्थल मसूरी कs लगक सुरपुंडा देवी कs मंदिर (धनौल्टी में) अछि । एहो शक्तिपीठ छी । कहल जाति अछि कि अहू पs सती कs सिर धड़ सs अलग भs गिरल छल । माता सती कs अंग भूमि पs गिरला कs कारण भगवान श्री विष्णु द्वारा सुदर्शन चक्र सं  सती माता कs समस्तांग विछेदित करने छल ।

शक्तिपीठ सभक संख्या इक्यावन कहल गएल अछि । यी भारतीय उपमहाद्वीप मs विस्तृत अछि । अहि ठाम समूचा शक्तिपीठ सभक सूची देल गएल अछि ।

कुछ आर शक्ति पीठ मंदिर कहल जाति अछि :-




#Article 280: भानुभक्त आचार्य (100 words)


भानुभक्त आचार्य (वि.सं. १८७१ असार २९ – वि.सं. १९२५ आसिन ६) नेपाली साहित्यक प्राथमिक कालक प्रतिनिधि कवि छी । ओ वाल्मीकि रामायणक अनुवादकक रुपमे प्रख्यात अछि । मोतिराम भट्ट हुनका पहिल बेर नेपाली भाषाक आदिकविक उपाधि देनए छल ।। ओ प्रश्नोत्तर (वि.सं. १९१० ), भक्तमाला (वि.सं. १९१०), वधूशिक्षा (वि सं १९१९)  लगायतका कृतिसभ लिखने छल । हुनकर पाण्डुलिपिके सङ्ग्रह करि मोतिराम भट्ट पुस्तकारमे प्रकाशित करलाकबाद ओ नेपाली साहित्यमे चिन्हल गेल छल ।

भानुभक्तक जन्म धनञ्जय आचार्य आ धर्मावतीदेवीक पुत्रक रूपमे तनहूँक रम्घामे विक्रम सम्वत १८७१ असार २९ गते भेल छल । दादा श्रीकृष्ण आचार्य सँ शिक्षा ग्रहण केनए छल ।




#Article 281: विक्रम सम्बत (110 words)


विक्रम सम्बत हिन्दू पञ्चाङ्गमे आधारित नेपाल तथा भारतक राष्ट्रिय पत्रा छी । ई प्राचिन हिन्दु परम्परा आ वैदिक समयाङ्कनमे आधारित शौर्य पत्रा छी । ई ग्रेगोरियन पत्रा (अङ्ग्रेजी पत्रा) सँ ५६ वर्ष ८ महिना १५ दिन अगाडी अछि । ई पत्रामे वर्षक सुरूवात बैशाखक पहिल दिन सँ होएत अछि । नयाँ वर्षक सुरूवात सामान्यतया ग्रेगोरियन पत्राके अप्रिल महिनाक १३ वा १४ तारिकमे पडैत अछि । विक्रम सम्बत सूर्य सँ सम्बन्धित भेला कारण विक्रम सम्बतमे ग्रह नक्षत्रक नाम सेहो महिनासभ सँ सम्बन्धित अछि । विक्रम सम्बत प्राकृतिक रूपमे सञ्चालित होएत आएल अछि । विक्रम सम्बतक बारेमे अनेकौं विवाद सेहो प्रस्तुत भ रहल अछि । विक्रम सम्बत नेपालक आदि सम्बत छी ।




#Article 282: संयुक्त अधिराज्य (190 words)


बृहत ब्रिटेन आ उत्तरी आयरल्यान्डक युनाइटेड किङ्गडम  (सामान्यतः युनाइटेड किङ्गडम, युके, UK, या ब्रिटेनक रूपमे जानल जाएत अछि)।
एक विकसित देश छी जे महाद्वीपीय युरोपक पश्चिमोत्तर तट पर स्थित अछि । ई एक द्वीपीय देश छी । ई ब्रिटिश द्वीप समूहमे फैलल अछि जहिमे ग्रेट ब्रिटेन, आयरल्यान्डक पूर्वोत्तर भाग आ कतेकौ छोट द्वीप शामिल अछि । उत्तरी आयरल्यान्ड, युकेक एकमात्र एहन हिस्सा छी जतेक एक स्थल सीमा अन्य राष्ट्र सँ छुबैत अछि आ एतेक आयरल्यान्ड युकेक पडोसी देश छी ई एक संसदीय प्रणालीद्वारा सञ्चालित अछि जेकर राजधानी लण्डन छी जतेक सरकार बैठैत अछि, मुदा अहिमे तीन न्यागत राष्ट्रीय प्रशासन अछि, बेलफास्ट, कार्डिफ आ एडिनबर्ग, क्रमशः उत्तरी आयरल्यान्ड, वेल्स आ स्कटल्यान्डक राजधानी । जर्सी आ ग्वेर्नसे द्वीप समूह, जेकरा सामूहिक रूप सँ च्यानल द्वीप कहल जाएत अछि आ म्यान द्वीप (आयल फ म्यान), युकेक राजत्व निर्भरता अछि आ युकेक हिस्सा नै छी । एहि वाहेक, युकेक चौदह समुद्रपार निर्भर क्षेत्र अछि, ब्रिटिश साम्राज्य, जे १९२२ मे अपने चरम पर छल, दुनियाक तकरीबन एक चौथाई क्षेत्रफलक घेरैत छल आ इतिहासक सब सँ पैग साम्रज्य छल । एकर पूर्व उपनिवेशसभक भाषा, संस्कृति आ कानूनी प्रणालीमे ब्रिटिश प्रभाव अखनो देखल जा सकैत अछि ।




#Article 283: इङ्ल्यान्ड (127 words)


इङ्ल्यान्ड (अङ्ग्रेजी: England), ग्रेट ब्रिटेन नामक टापूक दक्षिणी भागमे स्थित एक देश छी । एकर क्षेत्रफल ५०,३३१ वर्ग माइल अछि । ई युनाइडेट किङ्गडमक सब सँ पैग निर्वाचक देश छी । इङ्ल्यान्डक वाहेक स्कटल्यान्ड, वेल्स आ उत्तर आयरल्यान्ड सेहो युनाइडेट किङ्गडममे शामिल अछि । ई युरोपक उत्तर पश्चिममे अवस्थित अछि जे मुख्य भूमि सँ इङ्लिस च्यानलद्वारा पृथकीकृत द्वीपक अङ्ग छी । एकर राजभाषा अङ्ग्रेजी छी आ ई विश्वक सब सँ सम्पन्न तथा शक्तिशाली देशसभमे सँ एक छी ।

इङ्ल्यान्डक इतिहासमे सब सँ स्वर्णिम काल ओकर औपनिवेशिक युग छी । अठारहम सदी सँ ल बिसम सदीक मध्य धरि ब्रिटिश साम्राज्य विश्वक सब सँ पैग आ शक्तिशाली साम्राज्य होमएत छल आ ई कतेकौ महाद्वीपसभमे फैलल छल आ कहल जाएत छल कि ब्रिटिश साम्राज्यमे सूर्य कहियो अस्त नै होएत छल। 




#Article 284: फोर्ब्स (102 words)


फोर्ब्स इन्कोर्पोरेसन एकटा निजी स्वामित्व भेल प्रकाशन तथा मिडिया कम्पनी छी । जकर प्रमुख प्रकाशन द्वि-साप्ताहिक पत्रिका फोर्ब्स छी जकर खपत सन् २०१४ अनुसार १० लाख सँ बेसी भऽ रहल अछि । ई पत्रिका मुलत: अर्थ, उद्योग, निवेश, आ मार्केटिङ विषयसभमे मूल लेख प्रकासन करैत अछि ।

कम्पनीक अन्य प्रकासनसभमे फोर्ब्स एसिया, फोर्ब्स लाइफ आ फोर्ब्स विमिन पत्रिकासभ अछि । ई वाहेक फोर्ब्सक चीन, क्रोएसिया, भारत, इन्डोनेशिया, इजरायल, कोरिया, पोल्याण्ड, रोमानिया, रूस आ टर्कीमे १० स्थानीय भाषाक अनुमतिधारी संस्करण रहल अछि  । फोर्ब्स, फोर्ब्स एसिया आ कम्पनीकें दश अन्तर्राष्ट्रिय लाईसेन्सधारी संस्करण एक साथ ६० लाख सँ बेसी पाठकसभ समक्ष पहुचैत अछि ।




#Article 285: निखिल उप्रेती (105 words)


निखिल उप्रेति नेपालका एक चर्चित एक्सन् अभिनेता छी। उनकर जन्म सन् १९८० अगस्ट् १० तारिखम सर्लाही जिलाम भेल छल । हुनका  नेपालक एक चर्चित नायकक रूपम चिनाहैत अछि। 
उनक पहिल आर सफल चलचित्र पिजडा छी। वो नेपाली चलचित्र उधोगक  उत्क्रिस्ट् एक्सन् अभिनेता एबम् स्टन्ट कर्ता क रूपमा परिचित अछि  आर नेपालि चलचित्र जगत्म् एक्सन् चलचित्र सभप्रति दर्शक् रुचिक प्रेरणाक श्रोत छी।
वो अखंतक  ११० टा बेसी चलचित्रसभम अभीनय कर चुकल अछि आर अनेक पुरस्कारसभ सहो प्राप्त करने अछि।

चलचित्र हामी तीन भाइ का लागि निखिल उप्रेतिले राष्ट्रिय चलचित्र पुरस्कार २०६२मा सर्बोत्क्रिस्ट अभिनेताको पुरस्कार जितेका थिए। यसका साथै उनले राष्ट्रिय नागरिक स्वर्ण सम्मान प्राप्त गरेका छन।




#Article 286: पशुपतिनाथ मन्दिर (151 words)


पशुपतिनाथ मन्दिर काठमाडौं जिलाअवस्थित ऐतिहासिक धार्मिक, पर्यटकीय  महत्वपूर्ण स्थल छी। ई मन्दिर काठमाडौं जिलाक का म पा वार्ड  नम्बर ८ म बागमती नदीक किनारम रहल अछि । ई मन्दिर २४० हेक्टर जग्गामा फैलल अछि । पशुपतिनाथक मन्दिर सांस्कृतिक सम्पदा अन्तर्गत युनेस्को विश्व सम्पदा क्षेत्र म नामकन अछि। सन् १९७९म युनेस्को पशुपतिनाथ मन्दिरक  विश्व सम्पदा क्षेत्रम सूचीकृत करने छेलाह । काठमाडौं उपत्यका प्राचीनतम धार्मिकस्थल प्रमाणित होएक आर अति प्राचीन पूजास्थल, मठ  मन्दिर आर मूर्तिसभ तथा प्राचीन अभिलेखसभक  अवस्थित होएक  पशुपतिनाथको मन्दिर क्षेत्र खुला संग्रहालय जेहल लगैत अछि  । शैव, शाक्त, वैष्णव, बौद्ध, जैन सौर, गाणपत, नाथ सिख आदि प्रमुख सम्प्रदायका भक्तजनसभक लागि पशुपति क्षेत्र सदैव समान आस्था एवं श्रद्धाको केन्द्र रहल अछि । पशुपति क्षेत्रम  विभिन्न सम्प्रदायका विभिन्न स्मारक एवं पुजास्थल अखाडा सहो  रहल अछि ।  पशुपतिनाथक मन्दिर एक जीवन्त सम्पदाक रुपमा रहल अछि । जन्म सं मृत्यु तक संस्कार सम्पन्न होएवाला ई  पावन स्थलम वागमती नदी आर  महिमा बढेंन् अछि ।
 




#Article 287: तिरहुता (194 words)


तिरहुता () वा मिथिलाक्षर () मैथिली भाषाक लिपि छी । तिरहुता लिपिक इतिहास बहुत बृहत रहल अछि । ई लिपि प्रतिक उदासिनता तथा न्यून प्रयोगक कारण मैथिली भाषी तिरहुता लिपिक बदला देवनागरी लिपिमे लिखैलेल अभ्यस्त भऽ गेल अछि । मुदा हाल कोनो कोनो पारम्परिक ब्राह्मण (पण्डित) 'पाता' (विवाह आदि सँ सम्बन्धित पत्र) पठाबैक लेल ई लिपिक प्रयोग करैत अछि । ई लिपि बङ्गला लिपि सँ मिलैतजुलैत अछि मुदा ई कनिक भिन्न अछि । ई पढबामे बङ्गला लिपि सँ बहुत कठिन अछि ।

ई लिपिक सब सँ प्राचिन अभिलेख नेपालक जानकी मन्दिरमे भेटल अछि । प्राचिन समयमे ई ठाममे संस्कृत भाषाक समेत विकासक लेल महत्वपूर्ण योगदान रहल इतिहासविद्धसभ बतबैत अछि । ई लिपिक कम्प्युटरमे प्रयोग करैलेल फन्टक विकास सन् २००३ मे भेल छल । तहिना ई लिपिक प्राचिन नमुना भारतक दरभङ्गा जिलाक कुशेश्वरस्थान नजदिक एकटा शिवमन्दिरमे सेहो भेटल अछि जहिमे पूर्वी मगधी प्राकृतमे लिखल अछि कि मन्दिर 'कात्तिका सुदी' (अर्थात कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा) शके १२५ (अर्थात २०३ ई सन्) मे निर्माण कएल गेल छल ।

तिरहुता लिपि अङ्कसभक लेल अपन लिपिक प्रयोग करैत अछि । 

तिरहुता लिपि सन् २०१४ जुनमे युनिकोडक ७.० भर्सनमे जारी कएल गेल छल । तिरहुताक युनिकोड ब्लक U+11480ndash;U+114DF रहल अछि । 




#Article 288: बाबाधाम (326 words)


वैद्यनाथ मन्दिर, देवघर (अङ्ग्रेजी:Baidyanath Temple) द्वादश ज्योतिर्लिङ्ग म एक ज्योतिर्लिङ्ग क पुराणकालीन मन्दिर छी  जे भारतवर्षक राज्य झारखण्डमे अतिप्रसिद्ध देवघर नामक स्‍थान पर अवस्थित अछि ।पवित्र तीर्थ स्थल कारण लोग  वैद्यनाथ धाम सहो कहैत अछि । जहि ठाम पर ई  मन्दिर स्थित अछि ओ स्थानके देवघर अर्थात देवतासभक घर कहैत अछि । बैद्यनाथ ज्योतिर्लिङ्ग स्थित होमएके कारण ई स्‍थानक देवघर नाम मिलल अछि। ई ज्योतिर्लिङ्ग एक सिद्धपीठ अछि । कहल जाएत अछि कि ई ठाम पर आबै वालाक सम्पूर्ण मनोकामना पूर्ण होएत अछि । आहि कारणस ई लिङ्गक कामना लिङ्ग सहो कहल जाएत अछि ।

ई लिङ्गक स्थापना कालके इतिहास ई अछि कि एक बार राक्षसराज रावण हिमालय पर जा शिवजी के प्रसन्नताक लेल घोर तपस्या कएलक आ अपन सिर काटि-काटि शिवलिङ्ग पर चढाबैलेल शुरू करि देलक । एक-एक करि नौ सिर चढाबैक बाद दसम् सिर सेहो काट लेल छल कि शिवजी प्रसन्न भ प्रकट भ गेल । ओ हुनकर दसु सिर ज्यों-के-त्यों करि देलक आ रावण सँ वरदान माँगै लेल कहलक । रावण लंकामे जा ओ लिङ्गके स्थापित करैक लेल ओकरा ल जाए के आज्ञा माँग कएलक । शिवजी अनुमति त द देलखिन, मुदा ई चेतावनीक संग देलक कि यदि मार्गमे एकरा पृथ्वी पर राखि देभी त ओ ओतय अचल भ जाएत । अन्ततोगत्वा वाहि भेल । रावण शिवलिङ्ग ल चल लागल मुदा मार्गमे एक चिताभूमि एला पर ओकरा लघुशङ्का निवृत्ति क आवश्यकता भेल । रावण ओ लिङ्ग के एक अहीरक थमा लघुशङ्का-निवृत्ति करै लेल चलि गेल । एमहर ओ अहीर सँ लिङ्ग बहुत अधिक भारी अनुभव करि भूमि पर राखि देलक । फेर की छल, घुमला पर रावण पूरी शक्ति लगाए लिङ्ग नै उखाडि सकल आ निराश भ मूर्ति पर अपन अँगूठा गाडि लंका के लेल प्रस्थान कएलक । एमहर ब्रह्मा, विष्णु आदि देवतासभ आबि ओ शिवलिङ्गक पूजा कएलक । शिवजीक दर्शन होएते सभ देवी देवतासभ शिवलिङ्ग के वाहि स्थान पर प्रतिस्थापना करि देलक आ शिव-स्तुति करति वापस स्वर्ग चलि गेल । जनश्रुति व लोक-मान्यताक अनुसार ई वैद्यनाथ-ज्योतिर्लिङ्ग मनोवाञ्छित फल देव वाला छी ।




#Article 289: पिताजी (119 words)


पिता एकटा बच्चाके जन्म देनिहार अथवा यौन सम्पर्क वा शुक्रदान करि स्त्रिक गर्भमे बच्चाक विकासक लेल शुक्राणु प्रदान करनिहार पुरुष छी । कोनो भी बच्चाक लिङ्ग निर्धारण सेहो ओकर पिताक शुक्राणुमे भर पडैत अछि । पिता अपन शुक्राणुकद्वारा बच्चक लिङ्ग तय करैत अछि, जहिमे या त एक्स (X) गुणसूत्र (क्रोमोजोम) होएत अछि (स्त्रीलिङ्ग वाला) या वाई (Y) गुणसूत्र (पुलिङ्ग वाला)।

वर्तमान मैथिल शब्द पुरातन संस्कृत शब्द 'पितृ' सँ आएल अछि जेकर सजातीय शब्द हैं: लातीनी pāter (पातर), युनानी πατήρ, मूल-जर्मेनिक fadēr (फादर) (पूर्वी फ्रिसियायी foar (फोवार), डच vader (फादर), जर्मन Vater (फातर))। 

रिवायती तौर पर पिताके बच्चासभ प्रति सुरक्षा, सहायता आ जिम्मेदारी वाला रवैया होएत अछि । पिता मात्र जैविक नै बल्कि पालनहार पिता सेहो भ सकैत अछि ।




#Article 290: भारतक जिलासभक सूची (113 words)


एक जिला (zilā) भारतक राज्य आ सङ्घीय राज्य क्षेत्रसभक एक प्रशासनिक भाग छी । जिलाकुल फेर उप-भागवनमे या सिधा तालुकवनमे बँटल होएत अछि । भारतक जनगणना २०११मे २४० सँ बढि अखन  भारतमे कूल ६८६ जिला अछि ।

पुदुचेरी राज्यक माहे भारतक क्षेत्रफलक आधारमे सब सँ छोट (९ किमी२) जिला छी आ गुजरात राज्यक कच्छ जिला सब सँ पैग (४५,६५२ किमी२) जिला छी । 

The names of the 686 districts are mostly unique. There are some exceptions:

The following tables list the population details of various states. The columns include the hierarchical administrative subdivision codes, the district name, district headquarters, 2011 census population, area in square kilometres, and the population density per square kilometre.




#Article 291: क्याथलिन बेट्स (124 words)


क्याथलिन डोयले क्याथी बेट्स (जन्म: जुन २८, १९४८) एक अमेरिकी अभिनेत्री आ निर्देशक छी । ओ किछ छोट भूमिका सँ चलचित्र आ टेलिभिजनक दुनियामे आएल छल । ओ सन् १९९० मे मिसेरी नामक चलचित्र अभिनयक कारण उत्कृष्ट अभिनेत्रीक एकेडेमी अवार्ड पाबैमे सफल भएल छल । ओ अहि वाहेक फ्रिड ग्रिन टोमटोज (१९९१), डोलोरेस कलाईबोर्न (१९९५) आ टाइटानिक (१९९७) मे अभिनय केनए अछि ।

बेट्सक जन्म मेमफिस, टेनिसीमे भेल अछि । ओ अपन परिवारक सब सँ छोट सदस्य छल । हुनकर माता आ पिता इन्जिनियर छल । हुनकर परिवार मे सँ एक दादा अमेरिकी राष्ट्रपति एन्ड्रयु ज्याकसनक डाक्टरक रुपमे काज केनए छल । ओ स्नातकक शिक्षा दक्षिणी मेथोडिस्ट विश्वविद्यालय सँ सन् १९६९ मे केनए छल । ओ सन् १९७० मे अभिनय करैलेल न्युयोर्क आएल ।




#Article 292: निकोल शेर्जिङ्गर (100 words)


निकोल प्रेस्कोविया एलिकोलानी वलिएंटे शेर्जिङ्गर (, जन्म २९ जुलाई १९७८) एक अमरीकी गायिका, गीतकार, नर्तिका, रेकर्ड निर्माता, मोडल आर अभिनेत्री छी । उनकर जन्म होनोलूलू, हवाई, अमेरिकामे भेल छल । उनकर लुईव्हिल केन्टकीमे लालन पालन भेल अछि । ओ बहुत रा सँ गायन प्रतियोगितामे सहभागी भ गाबने अछि, डे अफ द न्यु यिअर नामक रक ब्याण्डमे सहभागिता लेब सँ पहिले ओ २०१५मे टीन चोइज पुरस्कारक लेल मनोनीत भेल छल । ओ २०१३मे द एसियन् पुरस्कार प्राप्त करलक । ओ २०१२मे मेन इन ब्ल्याक ३मे सेहो अभिनय करलक ।

उनकर जन्म होनोलूलू, हवाई, अमेरिकामे एक केथोलिक धर्मि परिवारमे भेल छल । 




#Article 293: सार्वभौम सम्पन्न राष्ट्रसभक सूची (202 words)


ई सार्वभौम सम्पन्न राष्ट्रसभक सुची सार्वभौम सम्पन्न राष्ट्रसभक विश्व मानचित्रमे स्थिति तथा ओसभक अवस्थाक बारेमे जानकारी प्रदान करैत अछि ।
नीचा देल २०६ राष्ट्रसभक सुची दुईभागमने विभाजित अछि :-

यस किसिमको सूचीलाई निर्धारण गर्दा केही कठिनाई तथा बिबादास्पद प्रक्रिया हुन सक्छ किन भने राष्ट्रको दर्जाको लागि कुनै मापदण्ड निर्धारण नगरिएको हुँदा समुदायमा रहेको सम्पूर्ण सदस्य राष्ट्र बाध्य छ । यस सूचीको सामाग्रीलाई निर्धारण गर्ने मापदण्ड माथि विशेष जानकारीको लागि तल दिइएको समावेशीको लागी मापदण्ड हेर्नुहोला । सार्वभौम सम्पन्न राष्ट्रको सुची वास्तविक स्थितिलाई दर्साउछ जसको पहिचान भइसकेको छ । 

राज्यको प्रमुख प्रथागत  राज्यको दर्जाको  हो । एउटा राज्यलाई परिभाषित गर्न अन्तर्राष्ट्रिय कानुनको एक राज्यको रुपमा देहायका निम्न योग्यताको जरुरी हुन्छ : (क) स्थायी जनसंख्या; (ख) परिभाषित इलाका; (ग) सरकार; र (घ) अन्य राज्यमा प्रवेश गर्न सक्ने सम्बन्ध क्षमता राज्यको दर्जाको  मापदण्ड रुपमा समावेश गर्न सकिन्छ जुन डिग्रीमा समावेश रहेको छ त्यसमाथि ठुलो बहस चल्दै आएको छ । उदाहरणको रुपमा  हामी मा पाउन सक्छौ कि राज्यको दर्जाको कथात्मक सिद्धान्त हो र राज्यको दर्जाको लागि बिशुद्ध उद्देश्य हो ।

वा

याद राख्नुहोला केही अवस्थामा त्यहाँ पहिलो कुराको व्याख्यामा रायको बिचलन छ र एउटा एकाइ यसमै सन्तुष्ट छ कि यसमा बिबाद छ ।

माथिका आधारहरूको आधारमा, यो सूची निम्नलिखित २०६ राष्ट्रहरूलाई समावेश गरेर बनाइएको छ, जसमा 




#Article 294: इलाहाबाद (180 words)


 इलाहाबाद (आधिकारिक रूपमे प्रयागराज) उत्तर भारतक उत्तर प्रदेशक पूर्वी भागमे स्थित एक नगर तथा इलाहाबाद जिलाक प्रशासनिक मुख्यालय छी। एकर प्राचीन नाम प्रयाग छी। एकरा 'तीर्थराज' (तीर्थस्थलसभक राजा) सेहो कहल जाएत अछि। हिन्दू मान्यता अनुसार, एतय ब्रह्माद्वारा सृष्टि कार्य पूर्ण भेलाक बाद पहिल यज्ञ कएल गेल छल। हिन्दुसभक सभसँ पैग सम्मेलन महाकुम्भक चार स्थलसभमेसँ एक छी, बाँकी तीन हरिद्वार, उज्जैन तथा नासिक छी। हिन्दू धर्मग्रन्थसभमे वर्णित प्रयाग स्थल पवित्रतम नदी गङ्गा आ यमुनाक सङ्गममे स्थित अछि। एतय सरस्वती नदी गुप्त रूपसँ सङ्गममे आबि मिल जाएत अछि, अतः ई स्थानकेँ त्रिवेणी सङ्गम कहल जाएत अछि जतय प्रत्येक बारह वर्षमे कुम्भ मेला लगैत अछि।

इलाहाबादमे राज्य सरकारक महत्वपूर्ण कार्यालयसभ अछि, जेना इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रधान महालेखाधिकारी (एजी अफिस), उत्तर प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग, राज्य प्रहरी मुख्यालय, उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्डक क्षेत्रीय कार्यालय आ उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषदक कार्यालय अछि।

शहरक वर्तमान नाम अकबरद्वारा सन् १५८३ मे इलाहाबाद राखल गेल छल। इलाहाबादक अर्थ अरबी शब्द 'इलाह' (अकबरद्वारा चलाएल नव धर्म दीन-ए-इलाहीक सन्दर्भसँ, अल्लाहक लेल) आ फारसीसँ 'आबाद' (अर्थात बैसाएल)– यानि 'ईश्वरद्वारा बैसाएल', या 'ईश्वरक शहर' होएत अछि।




#Article 295: अवन्तीबाई (132 words)


रानी अवन्तीबाई सन् १८५७ क प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राममे महत्वपूर्ण भूमिका निभाबै वाली वीरांङ्गना छल । क्रान्तिमे रामगढक रानी अवन्तीबाई रेवाञ्चलमे मुक्ति आन्दोलनक सूत्रधार छल । सन् १८५७ मे मुक्ति आन्दोलनमे ओ राज्यक अहम भूमिका छल, जहि सँ इतिहास जगत अनभिज्ञ अछि । सन् १८१७ सँ सन् १८५१ धरि रामगढ राज्यक शासक लक्ष्मण सिंह छल । हुनकर निधनक पश्चात  राजकुमार विक्रमादित्य सिंह सन् १८५७ मे  राज गद्दी प्राप्त केलक । हुनकर विवाह बाल्यावस्थामे मनकेहणीक जमीन्दार राव जुझार सिंहक कन्या अवन्तीबाई सँ भेल छल । विक्रमादित्य सिंह बाल्यकाल सँ वीतरागी प्रवृत्तिक छल आ पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठानसभमे लागल रहता । अत: राज्य सञ्चालनक काम सेहो हुनकर पत्नी रानी अवन्तीबाई करैत छल । हुनकर दुई पुत्र भेल-अमान सिंह आ शेर सिंह । अङ्ग्रेजसभ ता धरि भारतक अनेक भाग उपर अपन कब्जा केनए छल ।




#Article 296: बछेन्द्री पाल (101 words)


बछेन्द्री पाल (जन्म: २४ मई १९५४) माउन्ट एभरेस्ट आरोहन करै वाली प्रथम भारतीय महिला छी । ओ एभरेस्टक उचाईके छुबै वाली दुनियाक ५अम महिला पर्वतारोही छी । वर्तमानमे ओ इस्पात कम्पनी टाटा स्टीलमे कार्यरत अछि, जतेक ओ छन्नी करल लोगसभके रोमाञ्चक अभियानसभक प्रशिक्षण देबैत अछि । 

बछेन्द्री पालक जन्म उत्तराखण्ड राज्यक उत्तरकाशी जिलाक एक गाउँ नकुरीमे सन् १९५४ मे भेल छल । खेतिहर परिवारमे जन्म लेनिहार बछेन्द्री बि.एड. धरिक पढाई पुरा केनए अछि । मेधावी र प्रतिभाशाली भेला बादो हुनका बहुतेक निक रोजगार नै भेट सकल । के मिलल ओ अस्थायी, जुनियर स्तरक छल आ कमाई सेहो बहुते कम छल ।




#Article 297: नीतू चन्द्रा (102 words)


नीतू चन्द्रा() एक भारतीय मोडल आ अभिनेत्री छी । उनकर जन्म पटना, बिहार, भारतमे भेल छल । उनकर मातृभाषा भोजपुरी छी । ओ इन्द्रपस्त कलेजसँ स्नातक करलक । ओ अपन सफल अभिनय आर मोडलिङक श्रेय अपन माताक दैत अछि पूर्वी चम्पारण जिलाक छी । ओ तेक्वान्दोमे ब्ल्याक बेल्ट छी आर भारतक दिससँ अन्तर्राष्ट्रिय तेक्वान्दो प्रतियोगितामे जे हंग कंगमे भेल छल जेहिमे सेहो ओ समावेश भेल छल । उनका भाइ नितिन चन्द्रा एक चलचित्र निर्देशक छी जे देशवा नामक चलचित्रक निर्देशन करने छल । ओ तलेजु , तामिल , कन्नड आर हिन्दी चलचित्रमे अभिनय करने अछि । पावर उनकर सफल चलचित्र छी ।




#Article 298: इलाहाबाद जिला (135 words)


इलाहाबाद जिला भारतक राज्य उत्तर प्रदेशक एकटा प्रमुख आर सभसँ पैग जिला छी। इलाहाबाद सहर एहि जिलाक मुख्यालय आर उत्तर भारतक प्रमुख सहर छी । सन् २०११ क तथ्याङ्क अनुसार इलाहाबाद जिला ८ तहसील आर २० ब्लकमे बिभाजित अछि। इलाहाबाद मण्डलमे तीन जिलासभ छी - इलाहाबाद, फतेहपुर आर कौशाम्बी । कौशाम्बी पहिलक समयमे इलाहाबादक पच्छिमी हिस्सा छल ।

इलाहाबाद जिला तीन प्राकृतिक भागमे बिभाजित अछि - गंगा नदीक उत्तर मे गङ्गापार, यमुना नदीक दक्षिणमे यमुनापार आर दुनोक बीचमे दोआबा क्षेत्र । इलाहाबाद सहरमे गंगा आर यमुनाक विश्व प्रसिद्ध सङ्गम अछि । इलाहाबाद एकटा प्रमुख शिक्षा केन्द्र छी आ इलाहाबाद विश्वविद्यालय आर मोतीलाल नेहरू इन्जिनियरिङ कलेज एहि ठामक प्रमुख शिक्षा संस्थान छी ।

भारतक सन् २०११ क जनगणना अनुसार इलाहाबाद जिलाक कूल जनसङ्ख्या ५९,५९,७९८ छी । इलाहाबाद उत्तर प्रदेशक सभसँ बेसी जनसंख्या वाला जिला अछि ।




#Article 299: बैजनाथ धाम देबघर (290 words)


बैजनाथ मन्दिर मे स्थापित लिङ्ग भगवान शिवक बारह ज्योतिर्लिङ्गमे सँ एकटा छी । पुराणसभमे सेहो एकर वर्णन मिलति अछि । मानल जाति छै कि रावण चाहएत छल कि हुनकर राजधानी पर शिवक आशीर्वाद हरदम बनल रहए । तहिखातिर ओ कैलाश पर्वत पर जाए भगवान शिवक अराधना कएलक आ ओकर तपस्या सँ प्रसन्न भs शिवजी रावणके अपन ज्योतिर्लिङ्ग देनए छल । लेकिन एकर साथ एकटा शर्त सेहो राखलक कि रावण अपन यात्रा बीचमे रोकि नै सकति आर अहि लिङ्गके कोनो भी जगह नीचा नै राखि सकति छी । यदि लिङ्ग लंका सँ पहिल कोनो भी जगह नीचा राखला पर ओ सदा कs लेएल उहए जगह स्थापित भs जाति से बतौलक ।

देवगण अपन शत्रु कs मिलल यी वरदान सँ घबरा गएल आर एक योजना कs तहत इंद्र ब्राह्मण बनिकs आएल । इंद्र ऐहन बहाना बनौलक कि रावण यी लिङ्ग हुनका सौंप देलक । ब्राह्मणरूपी इंद्र यी लिङ्ग देवघर मे राखि देलक । रावणक लाख कोशिश कs बाध भी लिङ्ग नइ हिलल । रावण अपन गलती कs सुधारsक लएल सभदीन अही ठाम आबै छल आर गंगाजल सँ शिवजी कs अभिषेक करति छल ।

लेकिन ऐतिहासिक रूप सँ यी मन्दिरक स्थापना १५९६ कs मानल जाति छै  जब बैजू नामक व्यक्ति हराएल लिङ्ग कs ख़ोजने छल । तब अहि मन्दिरक नाम बैजनाथ पड़ल । बहुतो लोग एकरा कामना लिङ्ग सेहो मानति अछि । आर राबनक द्वारा स्थापना भेलाक कारण सँ एकर नाम राबनेश्वर माहादेव सेहो कहति अछि ।  
दर्शनक समय: बिहान ४ बजे-दूपहर ३.३0 बजs, साझ ६ बजs-राति ९ बजे तक । लेकिन विशेष धार्मिक अवसरसभ पs समय कs बढाओल जाति अछि ।

अही ठाम श्रावन मास मे बडका मेला लागति अछि सुलतानगंज सँ गंगा जल भरि शिवक भक्तसभ कांबर लकs पैदल देबघरक यात्रा करि बाबा बैजनाथ क गंगा जल अर्पित करति अछि ।




#Article 300: जेरुसेलम (113 words)


जेरुसेलम इजरायल देशक राजधानी छी, जे किछ देशसभद्वारा विवादित मानल गेल अछि । ई यहूदी धर्म, ईसाई धर्म आ इस्लाम धर्म, तिनु धर्मक पवित्र भूमि छी । एतिहासिक पृष्ठभूमि अनुसार जेरुसेलम प्राचिन यहूदी राज्यक केन्द्र आ राजधानी रहल छल । ई शहर भूमध्य सागर आ मृत सागर बीच जुडियन पर्वतक एकटा पठारमे स्थित विश्वक सभ सँ जेठ तथा पुरान नगरमे सँ एक छी । एकर लम्बा इतिहास देखला पर जेरुसेलमके कम्तीमे दुई बेर नाश कएल गेल, २३ बेर घेरल गेल, ५२ बेर आक्रमण, आ ४४ बेर कब्जा आ पुनः कब्जा कएल गेल छल । ई शहरक सभ सँ पुरान भाग ४अम सहस्राब्दीमे बसोबास भेल इतिहासमे रहल अछि ।

सरकार

संस्कृति

शिक्षा

नक्सा

धर्म




#Article 301: रणजंग पाँडे (142 words)


रणजंग पाँडे विसं १८९४ श्रावणमे मुख्तियार भिमसेन थापाके पदच्युत कएल गेला बाद मुलुकक केन्द्रीय राजनीतिमे पकड बनाबैमे सफल भेल छल । मुलुकक मुख्तियारी रंगनाथ पौडेलद्वारा जिम्मेवारी बहन करला बादो हुनकर अधिकार क्षेत्र मुलुकी बन्दोवस्त आ परराष्ट्र विभागमे मात्र सिमित छल । रणजंग पाँडे ओहि बखत जङ्गी विभागक जिम्मेवारी पाबनए छल । ओकर बाद तत्कालीन राजा राजेन्द्रक निर्देशन अनुसार हुनकर जफत कएल गेल पारिवारिक जमीन घुमाएल गेल आ हुनकर भैया रणदल पाँडेके काजी बनाए पाल्पा पठाएल गेल छल । विसं १९९५ भादोमे रंगनाथ पौडेलक राजीना देलाबाद चौतारिया पुष्कर शाहके मुख्तियारी देल गेल आ ओहि वर्षक पुस महिनामे रणजंग पाँडे मुख्य मन्त्री बनाएल गेल । तत्कालिन जेठकी रानी साम्राज्यलक्ष्मीक दवाबक कारण विसं १८९७ साल माघ (सन् १८४० फरबरी १४)मे राजा राजेन्द्रविक्रम शाह हुनका मुख्तियार नियुक्त केनए छल । विसं १८९८ साल कात्तिक (सन् १८४० नवम्बर १)मे हुनका से पद सँ हटाएल गेल छल ।




#Article 302: माथवरसिंह थापा (129 words)


माथवर सिंह थापा, मातवर सिंह थापा सन् १८४३ दिसम्बर २५ सँ १८४५ मई १७ धरि नेपालक प्रधानमन्त्री छल । ई भिमसेन थापाक भतिजा तथा जङ्गबहादुर राणाक मामा छल । हिनका सन् १८४५ मई १७क दिन हुनकर अपने भाञ्जा जङ्गबहादुर राणा गोली मारि हत्या केनए छल । ओ भिमसेन थापाक भतिजा छल आ भिमसेन थापाके जिवन दन्ड दैत काल ओ भागि भारत पहुँचल छल । बादमे ओ नेपाल बोलाएल गेल आ राजेन्द्र विक्रम शाहक दोसर रानी महारानी राज्यलक्ष्मीद्वारा नेपालक प्रधानमन्त्री बनाएल गेल । मुदा ओ श्री ५ सुरेन्द्रक गद्दि च्युतक राज्यलक्ष्मीके अपने पुत्रके गद्दी दहि लेल नैमानैक कारण रानी सन् १८४५ मई १७ मे दरबार बोलाए जङ्गबहादुर राणाद्वारा हुनकर हत्या करवेनै छल ।

माथवरसिंहक जन्मके सम्बन्धमे बहुत किछ स्पष्ट नै अछि । हुनकर जन्म गोरखा जिलाक बोर्लाङमे भेल छल ।




#Article 303: इरोम चानू शर्मिला (231 words)


इरोम चानू शर्मिला(जन्म:१४ मार्च १९७२) मणिपुर'क मानवाधिकार कार्यकर्ता छथि, जे पूर्वोत्तर राज्य सबमे लागू सशस्त्र बल विशेष शक्ति अधिनियम, १९५८ के हटेवाक लेल एक दशकसँ सेहो बेसी समयसँ(४ नवम्बर २०००
) सँ भूख हड़ताल पर छथि। पूर्वोत्तर राज्य सबहक विभिन्न हिस्सा सबमे लागू अहि कानूनक तहत सुरक्षा बल सबके किन्को देखते गोली मारि' अथवा बिना वारन्टके गिरफ्तार करऽके अधिकार भेटल  अछि। शर्मिला कऽ खिलाफ इम्फालके जस्ट पीस फाउन्डेशन नामक गैर सरकारी सङ्गठनसँ जुड़ि कऽ भूख हड़ताल रहलथि। सरकार शर्मिलाके आत्महत्याक प्रयासमे गिरफ्तार कररि लेने छल। कियकी इ गिरफ्तारी एक सालसँ बेसी नै भऽ सकैत अछि ताए सब साल हुनका रिहा करैत दुबारा गिरफ्तार कएल जाइत छल।

इरोम अपन भूख हड़ताल तखन कएने छलीह जखन २ नवम्बरके दिन मणिपुरक राजधानी इम्फालके मालोममे असम राइफल्सक जवानक हाथे १०टा बेगुनाह लोक मारल गेल छल। ओ ४ नवम्बर २००० के अपन अनशन शुरू कऽ देने छलीह, अहि उम्मीदक संग कि १९५८सँ अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, असम, नागाल्यान्ड, मिजोरम आओर त्रिपुरामे आर १९९०सँ जम्मू-कश्मीरमे लागू आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (एएफएसपीए)क हटेवामे ओ महात्मा गान्धीके नक्शाकदम पर चलिके कामयाब हेतीह।

२०१३ मे हुनका उपर आत्महत्याक कोशिश करके मुकद्दमा चलेवाक लेल अदालतमे आरोप तय कएल गेल।  २० अगस्त २०१४ के सेशन कोर्टके आदेशसँ हुनका रिहा कऽ देल गेल।

जस्ट पीस फाउन्डेशन ट्रस्ट (जेपीएफ)के द्वारा शर्मिलाके आम आदमी पार्टीके नेता प्रशान्त भूषण  मणिपुरक लोकसभा सीटसँ आम आदमी पार्टी (आप)के टिकट पर २०१४ के लोकसभा चुनाव लड़िके प्रस्ताव देलथि मुदा ओ एकरा अस्वीकार काए देलथिन्ह।




#Article 304: त्रिभुवन अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थल (101 words)


त्रिभुवन अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थल नेपालक राजधानी काठमाडौंमे रहल विमानस्थल छी । ई नेपालक प्रमुख आ हाल धरि चालु एक मात्र अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थल छी ।

त्रिभुवन अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थल गौचरण विमानस्थलक नाम सँ बिसं २००६ सँ नागरिक उड्डयन सेवा शुरु केनए छल । बिसं २०१२ मे तत्कालिन राजा महेन्द्र ई विमानस्थलके आधिकारिक रूपमे उद्घाटन करि अपन पिता राजा त्रिभुवनक नाम सँ नामाकरण करि त्रिभुवन विमानस्थल राखनाए छल ।

ई विमानस्थल काठमाडौं महानगरपालिकाक पूर्वी क्षेत्रक चक्रपथ सँ बाहर मनहरा नदीक पश्चिममे अवस्थित अछि। ई विमानस्थलक दक्षिण दिस कोटेश्वर, उत्तरमे गौरीघाट आ पश्चिममे चक्रपथ पडैत अछि ।

त्रिभुवन विमानस्थल सँ उडान करवाला विमानसेवासभ ई सभ अछि।




#Article 305: जङ्गबहादुर राणा (214 words)


जंगबहादुर राणा नेपालक प्रधानमन्त्री तथा प्रथम श्री ३ महाराज छल । कोतपर्वक नरसंहार पश्चात शक्तिशाली भेल जङ्गबहादुर राणा भण्डारखाल पर्व पश्चात राजसंस्था सँ बेसी शक्तिशाली भेल । हिनकर राजकालमे नेपालद्वारा अङ्ग्रेज सँ लडाईंमे हारल भूभागमे सँ ई अङ्ग्रेजके खुसी बनाए राप्ती सँ महाकाली धरिक तराई वर्तमानक बाँके जिला, बर्दिया जिला, कैलाली जिला तथा कञ्चनपुर जिला पुन: नेपालमे मिलेनाए छल ।

बालनरसिंह कुँवरक पुत्रक रूपमे जंगबहादुरक जन्म वि.सं. १८७४ मे भेल छल । सुरूवाती दिनमे लफङ्गा, जुवाडी जंगबहादुर अपन भितरके अदम्य साहस, वीरता आ चातुर्यक कारण नेपालक इतिहासमे एक सफल खलनायकक रूपमे परिचित भेल । नेपालमे राणा शासनक स्थापना करि १०४ वर्षक पारिवरिक शासनशैलीक सुत्रपात याह छी । बेलायतीसभक कट्टर भक्त जंगबहादुर पन कट्टर विरोधीसभके एकएक करि मारि एकतन्त्री शासन चलेलक । ओ बेलायत आ फ्रान्स सँ घुमलाबाद नेपाली कला, संस्कृति, जनजीवन आ कानूनमे समेत पश्चिमी प्रभाव परल छल । 

वि.स. १९०३ सँ २००७ साल धरि नेपालमे राणासभ शासन करलक । तत्कालिन राजपरिवार भितरक झगडाक फाइदा उठाबैत पश्चिम नेपालक लडाकु जङ्ग बहादुर कुँवर पहिल राणा प्रधानमन्त्री बनल । वि.स. १९०३ असोज ३ मे काठमाडौं दरबार क्षेत्रमे भेल कुख्यात कोत पर्वमे सयौं भारदार, रइस आ सैनिकक हत्या करैक हुनकर षडयन्त्र सफल भेल । ओकरबाद ओ अपनाआपके प्रधानमन्त्री बनाए राणा पद धारण करलक । राणा परिवारमे प्रधानमन्त्रीक पद वंशपरम्परागत भेल त शाह राजासभ झपना मात्र रहल ।




#Article 306: अन्तर्राष्ट्रिय हवाई यातायात सङ्गठन विमानस्थल कोड (124 words)


अन्तर्राष्ट्रिय हवाई यातायात सङ्गठन विमानस्थल कोडके आइएटिए स्थान पहिचानकर्ता, आइएटिए स्टेसन कोड वा मात्र स्थान पहिचानकर्ताक नाम सँ जानल जाएत अछि । ई एकटा तीन अक्षरक कोड छी जेकर प्रयोग विश्वक सब नियुक्त विमानस्थलसभक लेल कएल जाएत अछि । ई कोड अन्तर्राष्ट्रिय हवाई यातायात सङ्घ (आइएटिए)द्वारा निर्धारित कएल गेल रहैत अछि । ई चिन्हसभक उपयुक्त उदाहरण विमानस्थलक प्रवेश जाँच डेस्कमे देखल जा सकैत अछि, जते सामानमे लगाएल ब्यागेज ट्यागमे ई चिह्न स्पष्ट रूप सँ अङ्कित रहैत अछि ।

ई कोड आइएटिएक प्रस्ताव-७६३ द्वारा निर्धारित कएल जाएत अछि । एकर प्रबन्धन मोन्ट्रियल स्थित आइएटिए मुख्यालय करैत अछि । ई सङ्केतसभके वर्षमे दुई बेर आइएटिए एयरलाइन कोड निर्देशिका (कोडिङ्ग डायरेक्ट्री)मे प्रकाशित कएल जाएत अछि । आइएटिए ई कोड रेलवे स्टेशनसभक लेल सेहो जारी करैत अछि ।




#Article 307: रुद्राष्टकम् (219 words)


श्री रुद्राष्टकम् (संस्कृत:) स्तोत्र महाज्ञानी लंकेश रावण या दशाननद्वारा भगवान् शिवक स्तुति हेतु रचित एवम प्रथम गायित अछि । एकर उल्लेख श्री रामचरितमानसक उत्तर काण्डमे आबति छै ।

शिवके समर्पित ई स्तोत्र तुलसीदासक रामचरितमानस सँ लेल गएल अछि ।

॥ अथ रुद्राष्टकम् ॥

नमामीशमीशान निर्वाणरूपम् । 
विभुम् व्यापकम् ब्रह्मवेदस्वरूपम् । 
निजम् निर्गुणम् निर्विकल्पम् निरीहम् ।  
चिदाकाशमाकाशवासम् भजेऽहम् ॥१॥ 

निराकारमोङ्कारमूलम् तुरीयम् ।  
गिराज्ञानगोतीतमीशम् गिरीशम् । 
करालम् महाकालकालम् कृपालम् ।  
गुणागारसंसारपारम् नतोऽहम् ॥२॥ 

तुषाराद्रिसङ्काशगौरम् गभीरम् ।  
मनोभूतकोटि प्रभाश्रीशरीरम् । 
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारुगङ्गा ।  
लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥३॥ 

चलत्कुण्डलम् भ्रूसुनेत्रम् विशालम् ।  
प्रसन्नाननम् नीलकण्ठम् दयालम् । 
मृगाधीश चर्माम्बरम् मुण्डमालम् ।  
प्रियम् शङ्करम् सर्वनाथम् भजामि ॥४॥ 

प्रचण्डम् प्रकृष्टम् प्रगल्भम् परेशम् ।  
अखण्डम् अजम् भानुकोटिप्रकाशम् । 
त्रयः शूलनिर्मूलनम् शूलपाणिम् ।  
भजेऽहम् भवानीपतिम् भावगम्यम् ॥५॥ 

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी ।  
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारि । 
चिदानन्द सन्दोह मोहापहारि ।  
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारि ॥६॥ 

न यावद् उमानाथपादारविन्दम् ।  
भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् । 
न तावत्सुखम् शान्ति सन्तापनाशम् ।  
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ॥७॥ 

न जानामि योगम् जपम् नैव पूजाम् । 
नतोऽहम् सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम् ।
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानम् । 
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ॥८॥

रुद्राष्टकमिदम् प्रोक्तम् विप्रेण हरतोषये।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषाम् शम्भुः प्रसीदति॥

॥ इति श्री रुद्राष्टकम् सम्पूर्णम् ॥

भगवान रुद्रक यी अष्टक शंकर जी कs स्तुतिक लेल छै । जे मनुष्य एकरा प्रेमस्वरूप पढ़ति छै , श्रीशंकर जी अहि सं प्रसन्न होति अछि ।




#Article 308: मन्दिर (161 words)


हिन्दुसभ आ जैनोसभक उपासनास्थलके मन्दिर कहल जाएत अछि । ई अराधना आ पूजा-अर्चनाक लेल निश्चित कएल गेल जगह या देवस्थान छी। मतलब जे जगह कोनो आराध्य देवके प्रति ध्यान या चिन्तन कएल जाए या वतेक मूर्ति इत्यादि राखि पूजा-अर्चना कएल जाए ओकरा मन्दिर कहैत अछि । मन्दिरक शाब्दिक अर्थ 'घर' छी । वस्तुतः सही शब्द 'देवमन्दिर', 'शिवमन्दिर', 'कालीमन्दिर' आदि छी ।

आ मठ ओ स्थान छी जतेक कोनो सम्प्रदाय, धर्म या परम्परा विशेषमे आस्था रखैवाला शिष्य आचार्य या धर्मगुरु अपन सम्प्रदायक संरक्षण आ संवर्द्धनक उद्देश्य सँ धर्म ग्रन्थसभ पर विचार विमर्श करैत अछि या हुनकर व्याख्या करैत अछि जहि सँ ओहि सम्प्रदायके मानै वालाक हित होए आ ओसभके पता चलि सकै कि हुनकर धर्ममे की अछि । उदाहरणक लेल बौद्ध विहारसभक तुलना हिन्दू मठ या इसाई मोनेस्ट्रिज सँ कएल जा सकैत अछि । मुदा 'मठ' शब्दक प्रयोग शंकराचार्यक काल यानी सातम् या आठम् शताब्दी सँ शुरु भेल मानल जाएत अछि ।

तमिल भाषामे मन्दिरके कोईल या कोविल (கோவில்) कहैत अछि ।




#Article 309: राजदेवी मन्दिर (107 words)


राजदेवी मन्दिर सप्तरी जिलाक सदरमुकाम राजविराजक राजदेवी टोलमे अवस्थित अछि । प्राचीन इतिहासक धनी ई मन्दिरक नाम सँ राजविराज नगरक नाम राखल गेल अछि । राजदेवी मन्दिर भितर रहल भगवतीके सेन वंशक इष्टदेवी मानल जाएत अछि । राजदेवी मन्दिर यतय रहैक प्रमुख कारण यतय सेन राजासभक कचहरी, किला आ दरवार रहनाए अछि । ई मन्दिरमे रहल भगवतीके मनोकामना पूरा करैवाली देवी मानल गेला कारण नेपाल आ भारतक आमजनमानसक पैग आस्था रहल अछि । ई मन्दिरमे हिन्दुसभक महान पर्व दशमीमे बड्का भीड लागैत अछि आ यतय छागरक बली देल जाएत अछि । 

प्राचीन इतिहास आ किम्वदन्तीक अनुसार राजदेवी मन्दिरक उत्पति सेन वंशक समयमा भेल देखल जाएत अछि ।




#Article 310: लखनऊ जिला (120 words)


लखनऊ जिला भारतमे उत्तरप्रदेश राज्यमें एकटा जिला छी । लखनऊ सहर एहि जिलाक मुख्यालय आर उत्तर भारतक  प्रमुख सहर छी आर ई जिला लखनऊ मण्डलक हिस्सा अछि । लखनऊ उत्तर प्रदेशक राजधानी छी । लखनऊ सहरक स्थापना १७७५मे भेल जब अवधक नवाब अपन राजधानी फैजाबाद से एहिजा ले गेल ।

तबसे ई सहर उत्तर प्रदेशक आर उत्तर भारतक एकटा प्रमुख सहर अछि ।

भारतक सन् २०११ क जनगणना अनुसार लखनऊ जिलाक कूल जनसङ्ख्या ३५,८८,४५५ 3, अछि लगभग ज्योर्जिया देसक कूल जनसङ्ख्या आर ई अमेरिकाक लुइसियाना राज्यक जनसङ्ख्याक बराबर अछि। भारतक ६४० सभमे ई ३१अम् जिला अछि। जिलाक जनघनत्व  छी  आर संवृद्धि दर, २००१-२०११क दशक मे २५.७९% छल। लखनऊ जिला मे मानव लिङ्गानुपात ९०६ छल, आर ७९.३३ % जनसङ्ख्या साक्षर छल।




#Article 311: आगरा मण्डल (110 words)


आगरा मण्डल () भारतक राज्य उत्तर प्रदेशक एकटा मण्डल अछि । आगरा मण्डल उत्तर प्रदेशमे पच्छिमी भागमे अवस्थित अछि आर एहि मण्डलक मुख्यालय आगरा सहर अछि । आगरा मण्डल उत्तर प्रदेशक सीमावर्ती मण्डल अछि आर एहि कर पच्छिमी सीमा राजस्थान आर दक्षिणी सीमा मध्य प्रदेश राज्यक साथ अछि । एहि मण्डलमे कूल चार जिला सभ छी - आगरा जिला, फिरोजाबाद जिला, मैनपुरी जिला आर मथुरा जिला। 

अंग्रेज लोग १८०३ में मराठा लोग सभक हरा देल आर आगरा मण्डलक स्थापना ब्रिटिश कालमें सन् १८३४ मे भेल। सन् १९८९ मे फिरोजाबाद जिला आगरा जिलासे अलग भेल आर बाकी जिला सभ बाद मे। आगरा मण्डल राजनीति दृष्टि से एकटा महत्वपूर्ण जिला अछि ।




#Article 312: फिरोजाबाद जिला (106 words)


फिरोजाबाद जिला (; ; ) भारतमे उत्तरप्रदेश राज्यमें एकटा जिला छी । फिरोजाबाद सहर एहि जिलाक मुख्यालय अछि । ई जिला उत्तर प्रदेशक आगरा मण्डलक भाग अछि।

फिरोजाबाद सहर क पुराना नाम चंदावर छल। वर्तमान नाम अकबरक समय मे मंसबदार फिरोज शाहक नाम अनुसार १५६६ ईसवी मे रखल गेल।

भारतक सन् २०११ क जनगणना अनुसार लखनऊ जिलाक कूल जनसङ्ख्या २४,९६,७६१ छल लगभग कुवैत देसक कूल जनसङ्ख्या आर ई अमेरिकाक नेवादा राज्यक जनसङ्ख्याक बराबर अछि। भारतक ६४० सभमे ई १७३अम् जिला अछि। जिलाक जनघनत्व  छी  आर संवृद्धि दर, २००१-२०११क दशक मे २१.६२ % छल। लखनऊ जिला मे मानव लिङ्गानुपात ८६७ छल, आर ७४.६ % जनसङ्ख्या साक्षर छल।




#Article 313: कपिल शर्मा (229 words)


कपिल शर्मा एक भारतीय हास्य अभिनेता छी । फरवरी २०१३ मे, कपिल शर्मा फोर्ब्स इंडिया पत्रिका म शीर्ष १०० हस्ति क बीच म चुनल गेल छल आर वो सूची म ९६ अम स्थान पर छेलाह ।
	 

कपिल शर्माक जन्म अमृतसर , पंजाब, भारत म  भेल छल । हुनकर पिता पुलिस डिपार्टमेंट म हेड कांस्टेबल छेलाह आर माँ जनक रानी एक गृहणी छि।  कपिल एक स्थानीय (लोकल) पीसीओ स काम करैल शुरू करने छेलाह। वो अपन पढाई हिन्दू कॉलेज ,अमृतसर स केनेए अछि।

कपिल  एमएच वन म    हसदे हसांदे रहो कॉमेडी शो में काम करने छेलाह बाद म   द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज म अपन पहला ब्रेक मिलल। ई वो नौ रियलिटी टीवी शो में स एक छि जिनक वो जीत चुकल अछी ।२२०७ म शो क विजेता बनल जहिमे वो १० लाखक  पुरस्कार राशि जीतने छल । वोकर  बाद वो  सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न पर कॉमेडी सर्कस में भाग लेलेक । कपिल ऐकर सब छः सीजन जीत चुकल अछि।
ये डांस रियलिटी शो झलक दिख लाजा सीजन 6 होस्ट कर चुकल अछी । आर वो कॉमेडी शो छोटे मियां सहो होस्ट केनेए अछि।शर्मा ने उस्तादों के उस्ताद नामक शो में  सहो हिस्सा लेने अछि।

सीएनएन-आईबीएन इंडियन ऑफ़ द इयर अवार्ड्स म शर्माक एंटरटेनर ऑफ़ द इयर अवार्ड 2013 स अमोल पालेकर द्वारा सम्मानित केनेए छेलाह।

 लोक सभा चुनाव 2014 म वो दिल्ली चुनाव आयोगक द्वारा दिल्लीक ब्रांड अम्बेसेडर बनान अछि। 




#Article 314: पश्चिमी घाट (126 words)


पश्चिमी घाट भारतक पश्चिमी तटमे स्थित पर्वत श्रृङ्खलाके पश्चिमी घाट कहल जाइत अछि । एकरा सह्याद्रि सेहो कहल जाइत अछि । दक्‍कनी पठारक पश्चिमी किनारक संग-संग ई पर्वतीय शृङ्खला उत्‍तर सँ दक्षिणक तरफ १६०० किलोमिटर लम्‍बा अछि । विश्‍वमे जैविकीय विवधताक लेल ई बहुत महत्‍वपूर्ण अछि आ ई दृष्टि सँ विश्‍वमे एकर ८अम स्थान अछि । ई गुजरात आ महाराष्ट्रक सीमा सँ शुरू होइत अछि आ महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु तथा केरल सँ होइत ई कन्याकुमारीमे समाप्‍त भ जाइत अछि । वर्ष सन् २०१२ मे युनेस्को पश्चिमी घाट क्षेत्रके ३९ स्‍थानसभके विश्व धरोहर स्‍थल घोषित केनए अछि । ३९ विश्व सम्पदा क्षेत्रक स्थानसभमे राष्ट्रिय निकुञ्ज, वन्यजन्तु आरक्ष आ संरक्षित जङ्गल अछि - जाहिमे केरलमे २०, कर्नाटकमे १०, तमिलनाडुमे ५ आ महाराष्ट्रमे ४ टा स्थान अछि ।




#Article 315: साँचीक स्तुप (109 words)


साँची भारतक मध्य प्रदेश राज्यक रायसेन जिलामे बेतवा नदीक तट अवस्थित एक छोट गाउँ छी । ई भोपाल सँ ४६ किमी पूर्वोत्तरमे, तथा बेसनगर आ विदिशा सँ १० किमी के दूरी पर मध्य-प्रदेशक मध्य भागमे स्थित अछि । एतेक बहुतेक बौद्ध स्मारक अछि, जे तेसर शताब्दी ईशा पूर्व सँ बारहम् शताब्दीक बीचक कालक छी । साँची रायसेन जिलाक एक नगर पञ्चायत छी । साँचीक महान मुख्य स्तूप, मूलतः सम्राट अशोक महान तेसर शताब्दी, ईशा पूर्वमे बनवेनाए छल । एकर केन्द्रमे एक अर्धगोलाकार ईंट निर्मित ढाँचा छल, जहिमे भगवान बुद्धके कुछ अवशेष रखल गेल छल । एकर शिखर पर स्मारकक देल गेल ऊंच सम्मानक प्रतीक रूपी एक छत्र छल ।.




#Article 316: भिमबेटका चट्टान आश्रय (159 words)


भिमबेटका चट्टान आश्रय (भिमबैठका) भारतक मध्य प्रदेश राज्यक रायसेन जिलामे स्थित एक पुरापाषाणिक आवासीय पुरास्थल छी । ई आदि-मानवद्वारा बनाएल गेल चट्टान चित्रसभ आ शैलाश्रयक लेल प्रसिद्ध अछि । ई चित्रसभके पुरापाषाण काल सँ मध्यपाषाण कालक समयक मानल जाएत अछि । 

अन्य पुरावशेषसभमे प्राचीन किलाक दीवार, लघुस्तूप, पाषाण निर्मित भवन, शुङ्ग-गुप्त कालीन अभिलेख, शङ्ख अभिलेख आ परमार कालीन मन्दिरक अवशेष सेहो एतेक मिलल अछि । भिमबेटका क्षेत्रके भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भोपाल मण्डल अगस्त १९९०मे राष्ट्रिय महत्त्वक स्थल घोषित केनए छल । एकर बाद जुलाई २००३मे युनेस्को एकर विश्व सम्पदा क्षेत्र घोषित केनए छल । 

ई भारतमे मानव जीवनक प्राचीनतम चिह्न छी । एहन मानल जाएत अछि कि ई स्थान महाभारतक चरित्र भीम सँ सम्बन्धित अछि आ अहि सँ एकर नाम भिमबैठका पडल । ई गुफासभ मध्य भारतक पठारक दक्षिणी किनार पर स्थित विन्ध्याचलक पहाडीसभक निचला छोर पर अछि ।एकर दक्षिणमे सतपुडाक पहाडीसभ आरम्भ भ जाएत अछि । एकर खोज वर्ष १९५७-१९५८मे डाक्टर विष्णु श्रीधर वाकणकरद्वारा कएल गेल छल । 




#Article 317: महाबोधी मन्दिर (152 words)


महाबोधी मन्दिर या महाबोधी विहार, बोध गया स्थित प्रसिद्ध बौद्ध मन्दिर छी । युनेस्को एकरा विश्व सम्पदा क्षेत्र घोषित केनए अछि । मानल जाएत अछि कि ई मन्दिर ओहि स्थान पर खडा अछि जतेक भगवान बुद्ध ज्ञान प्राप्त केनए छल ।

ई मन्दिर मुख्‍य मन्दिरक नाम सँ सेहो जानल जाएत अछि । ई मन्दिरक बनावट सम्राट अशोकद्वारा स्‍थापित स्तुपक समान अछि । ई मन्दिरमे बुद्धक एक बहुत बड्का मूर्ति स्‍थापित अछि । ई मूर्ति पदमासनक मुद्रामे अछि । एतेक ई अनुश्रुति प्रचिलत अछि कि ई मूर्ति ओहि जगह स्‍थापित अछि जतेक बुद्धक ज्ञान निर्वाण (ज्ञान) प्राप्‍त भेल छल । मन्दिरक चारो बागल पत्‍थरक नक्‍काशीदार रेलिङ बनाएल अछि । ई रेलिङ बोधगयामे प्राप्‍त सब सँ पुरान अवशेष छी । ई मन्दिर परिसरक दक्षिण-पूर्व दिशामे प्रा‍कृतिक दृश्‍यसभ सँ समृद्ध एक उद्यान अछि जतेक बौद्ध भिक्षु ध्‍यान साधना करैत अछि । आम लोग ई उद्यानमे मन्दिर प्रशासनक अनुमति ल मात्र प्रवेश करि सकैत अछि । 




#Article 318: चम्पानेर पावागढ पुरातत्विक निकुञ्ज (121 words)


चम्पानेर पावागढ पुरातत्विक निकुञ्ज एक युनेस्को विश्व सम्पदा क्षेत्र छी, जे कि भारतक गुजरात राज्यक पाँचमहल जिलामे स्थित अछि ।ई स्थान एतिहासिक सहर चम्पानेरमे अवस्थित अछि जे सहर सुल्तान महमुद बेगदा निर्माण केनए छल । एहि क्षेत्रके सन् २००४मे युनेस्को अपन विश्व सम्पदा क्षेत्रक सूचीमे सम्मिलित केनए छल । एतेक वृहत स्तर पर उत्खनित पुरातात्विक, ऐतिहासिक एवं जीवित सांस्कृतिक धरोहर सम्पत्तिक बहुतायत अछि, जे कि एक प्रभावशाली भूखण्डमे सिमटल अछि । 

एहिमे प्रागैतिहासिक चैकोलिथिक स्थल, एक प्राचीन हिन्दू राज्यक राजधानीक एक महल व किला आ सोलहम शताब्दीक गुजरात प्रदेशक राजधानीक अवशेष अछि । एतेक अन्य पदक सहित, किला, प्रासाद, धार्मिक इमारतसभ, आवासीय अहातसभ, कृषि चिह्न व जल आपूर्ति निर्माण कार्यक आठम शताब्दी सँ ल चौदहम शताब्दी धरिक अनेक स्थल अछि । 




#Article 319: एलोरा गुफासभ (125 words)


एलोरा या एल्लोरा (मूल नाम वेरुल) एक पुरातात्विक स्थल छी, जे भारतमे औरङ्गाबाद, महाराष्ट्र सँ ३० कि.मि. (१८.६ माइल) क दूरी पर स्थित अछि । एकरा राष्ट्रकूट वंशक शासकसभद्वारा बनाओल गेल छल । अपन स्मारक गुफासभक लेल प्रसिद्ध, एलोरा युनेस्कोद्वारा घोषित एक विश्व धरोहर स्थल छी ।

एलोरा भारतीय पाषाण शिल्प स्थापत्य कलाक सार छी, यतय ३४ गुफासभ अछि जे असलमे एक ऊर्ध्वाधर डा चरणाद्रि पर्वतक एक नमूना छी । एहिमे हिन्दू, बौद्ध आ जैन गुफा मन्दिर बनल अछि । ई पाँचम आ दसम शताब्दीमे बनल छल । यतय १२ बौद्ध गुफासभ (१-१२), १७ हिन्दू गुफासभ (१३-२९) आ ५ जैन गुफासभ (३०-३४) अछि । ई सभ अगल-बगल बनल अछि आ अपन निर्माण कालक धार्मिक सौहार्द दर्शावैत अछि ।
ई यूनेस्कोक विश्व विरासतमे शामिल अछि ।




#Article 320: रणथम्भोर किला (249 words)


रणथम्भोर किला दिल्ली-मुम्बई रेल मार्गक सवाई माधोपुर रेल्वे स्टेशन सँ १३ किमी दूर रन आ थम्भ नामक पहाडीसभके बीच समुद्रतल सँ ४८१ मीटर उचाई पर १२ किमीक परिधि मे बनल अछि । किलाक तीनो ओर पहाडसभमे प्राकृतिक खाई बनल अछि जे ई किलाक सुरक्षाके मजबूत बनाए अजेय बनाबैत अछि ।

किला सँ सम्बन्धित प्रमुख ऐतिहासिक स्थानसभमे नौलखा दरवाजा, हाथीपोल, गणेशपोल, सुरजपोल आ त्रिपोलिया प्रमुख प्रवेश द्वार अछि । त्रिपोलिया अन्धेरी दरवाजा सेहो कहलावैत अछि । एकर बगल सँ एक सुरङ्ग महल तक गेल अछि । किला तक पहुँचैक लेल बहुतेक उतार-चढाव, संकरा व फिसलन भेल रास्ता तय करैक संग नौलखा, हाथीपोल, गणेशपोल आ त्रिपोलिया द्वार पार करै पडैत अछि  । ई किलामे हम्मीर महल, सुपारी महल, हम्मीर कचहरी, बादल महल, जबरा-भंवरा, ३२ खम्बासभक छतरी, रनिहाड ताल, महादेवक छतरी, गणेश मन्दिर, चामुण्डा मन्दिर, ब्रह्मा मन्दिर, शिव मन्दिर, जैन मन्दिर, पीर सहरुद्दीनक दरगाह, सामन्तोक हवेलीसभ तत्कालीन स्थापत्य कलाक अनुठा प्रतीक छी । राणा साङ्गाक रानी कर्मवतीद्वारा शुरू कएल गेल अधूरी छतरी सेहो दर्शनीय अछि । किलाक मुख्य आकर्षण हम्मीर महल अछि जे देशक सब सँ प्राचीन राजप्रसादसभमे सँ एक छी स्थापत्यक नाम पर ई किला सेहो भग्न-समृधिक भग्न-स्थली छी ।

कम्बोडियाक राजधानी नोमपेन्ह सहरमे युनेस्कोक विरासत सम्बन्धी विश्वव्यापी समितिक ३६अम बैठकमे दिनाङ्क २१ जुन २०१३ शुक्रवारके भारतक पहाडी किला रणथम्भोर किलाक चयन कएल गेल, ई किलाक घटनाक्रम विश्वमे सिधा प्रसारणक रुपमे देखल आ सराहल गेल । रणथम्भोर किलाक छोडि राजस्थानमे जन्तर मन्तर वेधशाला, आमेर किला, गागरोन किला, कुम्भलगढ किला, जैसलमेर किला आ चितौडगढ किला सेहो विश्व धरोहर स्थलमे शामिल अछि ।




#Article 321: चित्तौडगढ किला (205 words)


चित्तौडगढ किला (अङ्ग्रेजी: Chittorgarh Fort) भारतक सब सँ बड्का किला छी । ई विश्व सम्पदा क्षेत्र सेहो छी । ई किला चित्तौडक नाम सँ प्रसिद्ध अछि आ मेवारक राजधानी छल आ वर्तमान समयमे चित्तौडगढमे अवस्थित अछि ।

ई किला अपन इतिहासमे बहुतेक उतार-चढाव देखने अछि । ई इतिहासक सब सँ खूनी युद्धसभक गवाह छी । ई तीन महान आख्यान आ पराक्रमक किछ सर्वाधिक वीरोचित कार्य देखने अछि जे अखनो स्थानीय गायकसभद्वारा गाओल जाएत अछि । ई किला तीन बेर १५ आ १६अम शताब्दीक बीच युद्धक गवाह बन्ल अछि; सन् १३०३ मे अल्लाउद्दीन खिलजी राणा रतन सिंहक युद्धमे परास्त केनए छल, सन् १५३५ मे गुजरातक सुल्तान बहादुर साह बिक्रमजीत सिंहक युद्धमे परास्त केनए छल आ सन् १५६७ मे अकबर महाराणा उदय सिंह द्वितीयक परास्त केनए छल जे बादमे एतय सँ भागि उदयपुरक स्थापना केनए छल । सभ बेर सैनिक आ सर्वसाधारण वीरता सँ किलाक रक्षाक लेल प्रतिबद्ध छल मुदा सभ बेर परास्त भेल छल । परास्तक बादो तीनो बेर १३,००० सँ बेसी राजपुत महिला आ बच्चासभ जे चित्तौडगढ युद्धमे अपन जान भजेने छल अपन जौहर देखेनए छल । पहिल बेर राणा रतन सिंहक पत्नी रानी पद्मिनी जे सन् १३०३ क युद्धमे मारल गेल छल आ बादमे रानी कर्णावती सन् १५३७ क युद्धमे मारल गेल छल ।




#Article 322: कुम्भलगढ किला (166 words)


कुम्भलगढ किला राजस्थान मात्र नै भारतक सभ किलामे विशिष्ठ स्थान राखैत अछि । उदयपुर सँ ७० किमी दूर समुद्र सतह सँ १,०८७ मीटर उँच आ ३० किमी व्यासमे फैलल ई किला मेवाडक यशश्वी महाराणा कुम्भाक सूझबूझ व प्रतिभाक अनुपम स्मारक छी । ई किलाक निर्माण सम्राट अशोकक द्वितीय पुत्र सम्प्रतिक बनाएल किलाक अवशेषसभ पर सन् १४४३ सँ शुरू भ १५ वर्षके बाद सन् १४५८ मे पूरा भेल छल । किलाक निर्माण कार्य पूर्ण भेला पर महाराणा कुम्भा सिक्का डलबेनाए छल जहि पर किला आ ओकर नाम अङ्कित छल । वास्तुशास्त्रक नियमानुसार बनल ई किलामे प्रवेश द्वार, प्राचीर, जलाशय, बाहर जाएक लेल सङ्कटकालीन द्वार, महल, मन्दिर, आवासीय इमारतसभ, यज्ञ वेदी, स्तम्भ, शीर्षसभ आदि बनल अछि ।

ई किला राजस्थानक राजसमन्द जिलामे स्थित अछि । ई दुर्गक निर्माण महाराणा कुम्भा करेनाए छल । ई किलाके 'अजेयगढ' कहल जाएत अछि कियाकी ई किलापर विजय प्राप्त करनाए दुष्कर कार्य छल । एकर चारो दिस एक बड्का दीवार बनल अछि जे चीनक दीवारक बाद दोसर सब सँ बड्का दीवार छी ।




#Article 323: जैसलमेर किला (117 words)


जैसलमेर किला विश्वक सभ सँ पैग किलामे सँ एक छी । ई भारतक राजस्थान राज्यक जैसलमेरमे अवस्थित अछि । ई विश्व सम्पदा क्षेत्र छी । एकर निर्माण राजपुत शासक रावल जैसल करेनाए छल जहि सँ एकर नाम आएल । ई किला थार मरुभूमिक रेतीला अन्तरके त्रिकुट पहाडपर खडा अछि, आ बहुतेक युद्धक गवाही रहल अछि । ई किला सोनार किला वा गोल्डेन फोर्टक नाम सँ सेहो जानल जाएत अछि । ई किला सहरक बिचोबीच निर्मित अछि आ स्थानीयमे ई किलाक बहुतेक महत्व अछि ।

ई किला स्थापत्य कलाक दृष्टि सँ उच्चकोटिक विशुद्ध स्थानीय किला रचना छी । ई किला २५० फिट तिकोनाकार पहाडीपर स्थित अछि । ई पहाडीक लम्बाई १५० फिट आ चौडाई ७५० फिट अछि ।




#Article 324: हरिमन्दिर साहिब (926 words)


श्री हरिमन्दिर साहिब (पञ्जाबी भाषा: ਹਰਿਮੰਦਰ ਸਾਹਿਬ; हरिमन्दर साहिब, हरमन्दिर साहिब), जकरा दरबार साहिब या स्वर्ण मन्दिर सेहो कहल जाएत अछि सिख धर्मावलम्बिसभक पावनतम धार्मिक स्थल या सबसँ प्रमुख गुरुद्वारा छी । ई भारतक राज्य पञ्जाबक अमृतसर सहरमे स्थित अछि आर एतय के सबसँ बडका आकर्षण छी । पुरा अमृतसर सहर स्वर्ण मन्दिरक चारो दिस बसल अछि । स्वर्ण मन्दिरमे प्रतिदिन हजारो श्रद्धालु आर पर्यटक आबैत अछि । अमृतसरक नाम वास्तवमे ओ सरोवरक नाम पर रखाल गेल अछि जेकर निर्माण गुरु राम दास स्वयम अपन हाथ सँ केने छल । ई गुरुद्वारा एहि सरोवरक बिचोबिच स्थित अछि । एहि गुरुद्वारेक बाहरी हिस्सा सोनाक बनल अछि, एहि लेल एकरा स्वर्ण मन्दिर आ गोल्डन टेम्पलक नाम सँ सेहो जानल जाएत अछि । श्री हरिमन्दिर साहिबक दरबार साहिब क नाम सँ सेहो ख्याति हासिल अछि । ओना त ई सिखक गुरुद्वारा छी, मुदा एकर नाममे मन्दिर शब्दक जोडनाए ई स्पष्ट करैत अछि की भारतमे सब धर्मक एक समान मानल जाएत अछि । एतबे नै, श्री हरमन्दिर साहिबक नीव सेहो एक मुसलमान राखने छल । इतिहासक मुताबिक सिखक पाचम गुरु अर्जुन देव लाहौरक एक सूफी सन्त साईं मियां मीर जी सँ दिसम्बर, १५८८ मे गुरुद्वारक नीव रखबेने छल । सिखसभक लेल स्वर्ण मन्दिर बहुत महत्वपूर्ण अछि । सिखक अलावा सेहो बहुत रास सँ श्रद्धालु एत आबैत अछि, जेकरा स्वर्ण मन्दिरआर सिख धर्ममे अटूट आस्था अछि ।

लगभग ४०० साल पुरान एहि गुरुद्वारक नक्शा स्वयम् गुरु अर्जुन देव जी तैयार केनए छल । ई गुरुद्वारा शिल्प सौन्दर्यक अदभुत मिसाल छी। एकर नक्काशी आर बाहरक सुन्दरता बहुत निक अछि । गुरुद्वारक चारो दिस केबार अछि, जे चारो दिशाक (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण) मे खुलैत अछि । ओहि समयमे समाज चारि जातिमे विभाजित छल आर बहुतरास सँ जातिक लोगक अनेक मन्दिर आदिमे जाएक अनुमति नई छल, मुदा एहि गुरुद्वारक ई चारो केबार ओ चारो जातिक एतय आबक लेल आमन्त्रित करैत छल । एहि ठाम सभ धर्मक अनुयायीक स्वागत कएल जाइत अछि ।

श्री हरिमन्दिर साहिब परिसरमे दुईटा बड्का आर बहुतरा सँ छोट-छोट तीर्थस्थल अछि । ई सभ तीर्थस्थल जलाशयक चारु दिस पसरल अछि । एहि जलाशयक अमृतसर, अमृत सरोवर आर अमृत झीलक नाम सँ जानल जाएत अछि । पूरा स्वर्ण मन्दिर उजर संगमरमर सँ बनल अछि आर एकर देवाल पर सोनाक पता सँ नकार कएल गेल अछि । हरिमन्दिर साहिबमे पूरे दिन गुरबाणी (गुरुवाणी) क स्वर सुनाएत रहैत अछि । सिख गुरुक ईश्वर तुल्य मानैत अछि । स्वर्ण मन्दिरमे प्रवेश करसँ पहिले ओ मन्दिरक आगु माथा झुकाबैत अछि, फेर पैर धोएक बाद सिढीसँ मुख्य मन्दिर धैर जाएत अछि। सिढीक साथे-साथे स्वर्ण मन्दिर सँ जुडल बहुतरा सँ घटनासभ आर एकर पूरा ईतिहास लिखल अछि । स्वर्ण मन्दिर एक बहुत निक इमारत अछि । एहि इजोतक सुन्दर व्यवस्था कएल गेल अछि । मन्दिर परिसरमे पत्थरक एक स्मारक सेहो अछि जे, बहादुर सिख सैनिकसभक श्रद्धाजंलि देबक लेल लगाएल गेल अछि ।

श्री हरिमन्दिर साहि‍बक चाइर द्वार अछि । एहिने सँ एक द्वार गुरु राम दास सरायक छी । इ सरायमे अनेक विश्राम-स्थल अछि । विश्राम-स्थलसभक साथे-साथे एत चौबीस घण्टा लङ्गर चलैत अछि, जेहिमे कोई प्रसाद ग्रहण क सकैत अछि । श्री हरिमन्दिर साहिबमे अनेक तीर्थस्थान अछि । एहिमे सँ बेरी वृक्षक सेहो एक तीर्थस्थल मानल जाएत अछि । एकरा बेर बाबा बुड्ढाक नाम सँ जानल जाएत अछि । कहल जाएत अछि कि जब स्वर्ण मन्दिर बनाबल जाएत रहल छल तब बाबा बुड्ढा जी एहि गाछक निचा बैसल छल आर मन्दिरक निर्माण कार्य पर नजर राखैत छल ।

स्वर्ण मन्दिर सरोवरक बिचमे मानव निर्मित द्वीप पर बनल अछि । समुचा मन्दिर पर सोनाक परत चढाएल गेल अछि । एहि मन्दिरक एक पुलद्वारा किनारा सँ जुडल अछि । तालमे श्रद्धालु स्नान करैत अछि । ई ताल माछ सँ भरल अछि । मन्दिर सँ १०० मिटरक दूरी पर स्वर्ण जडित, अकाल तख्त अछि । एहिमे एक भूमिगत तल अछि आर पाँच अन्य तल अछि । यतय एक सङ्ग्रहालय आर सभागार अछि । एहि ठाम सरबत खालसाक बैठकसभ होइत अछि । सिख पन्थ सँ जुडल सम्पूर्ण समस्याक समाधान एहि सभागारमे कएल जाइत अछि ।

गुरुद्वाराक बाहर दहिना दिस अकाल तख्त अछि । अकाल तख्तक निर्माण सन् १६०६ मे कएल गेल छल । एतय दरबार साहिब स्थित अछि । एहि समयमे एतय बहुतरास अहम फैसला लेल जाइत छल । सङ्गमर्मर सँ बनल ई इमारत देख योग्य अछि । एकर बगलमे शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबन्धक समि‍ति‍क कार्यालय अछि, जत सिखसभ सँ जुडल बहुतरास महत्वपूर्ण निर्णय लेल जाइत छल ।

गुरुक लङ्गरमे गुरुद्वार आब वाला श्रद्धालुसभक लेल खाए-पिएक पूर्ण व्यवस्था होइत अछि । ई लङ्गर श्रद्धालुसभक लेल २४ घण्टा खुलल रहैत अछि । खाए-पिएक व्यवस्था गुरुद्वारमे  आमए वाला चढाबा आर दोसर कोषसभ सँ होइत अछि । लङ्गरमे खाए-पिएक व्यवस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबन्धक समि‍ति‍क दिस सँ नियुक्त सेवादार करैत अछि । ओ यतय आब वाला लोगसभ (सङ्गत) क सेवामे सभ दिस सँ योगदान दैत अछि । अनुमान अछि कि लगभग ४० हजार लोग सब दिन एतय लङ्गरक प्रसाद ग्रहण करैत अछि । खाली भोजन मात्र नै, एतय श्री गुरु रामदास सरायमे गुरुद्वारमे आमए वाला लोगसभक लेल विश्रामक सेहो व्यवस्था अछि । ई सरायक निर्माण सन १७८४ मे कएल गेल छल । एतय २२८ विश्राम गृह आर १८ बड्का कक्ष अछि । एहि ठाम राति बितेबाक लेल गद्दा आ चादर मिल जाईत अछि । एक व्यक्तिक तीन दिन तक रुकैक पूर्ण व्यवस्था अछि ।

स्वर्ण मन्दिरक कतेकौ बेर नष्ट कएल जा चुकल अछि । मुदा भक्ति आ आस्थाक कारण सिखसभ एकरा पुन बनेलक। जतेक बेर ई नष्ट कएल गेल अछि आ जतेक बेर ई बनाएल गेल अछि ओकर हरेक घटना मन्दिरमे दर्शाएल गेल अछि । अफगान हमलावरसभ एकरा १९ अम शताब्दीमे पूर्ण तरह सँ नष्ट करि देनए छल । तब महाराजा रणजीत सिंह एकरा पुन निर्माण केनए छल आ एकरा सोनाक परत सँ सजेनाए छल ।




#Article 325: घोड़ा (720 words)


घोड़ा या अश्व (Equus ferus caballus) मनुष्य से जुड़ा हुआ संसार का सबसे प्राचीन पालतू स्तनपोषी प्राणी है, जिसने अज्ञात काल से मनुष्य की किसी ने किसी रूप में सेवा की है। घोड़ा ईक्यूडी (Equidae) कुटुंब का सदस्य है। इस कुटुंब में घोड़े के अतिरिक्त वर्तमान युग का गधा, जेबरा, भोट-खर, टट्टू, घोड़-खर एवं खच्चर भी है। आदिनूतन युग (Eosin period) के ईयोहिप्पस (Eohippus) नामक घोड़े के प्रथम पूर्वज से लेकर आज तक के सारे पूर्वज और सदस्य इसी कुटुंब में सम्मिलित हैं। 

इसका वैज्ञानिक नाम ईक्वस (Equus) लैटिन शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ घोड़ा है, परंतु इस कुटुंब के दूसरे सदस्य ईक्वस जाति की ही दूसरों छ: उपजातियों में विभाजित है। अत: केवल ईक्वस शब्द से घोड़े को अभिहित करना उचित नहीं है। आज के घोड़े का सही नाम ईक्वस कैबेलस (Equus caballus) है। इसके पालतू और जंगली संबंधी इसी नाम से जाने जातें है। जंगली संबंधियों से भी यौन संबंध स्थापति करने पर बाँझ संतान नहीं उत्पन्न होती। कहा जाता है, आज के युग के सारे जंगली घोड़े उन्ही पालतू घोड़ो के पूर्वज हैं जो अपने सभ्य जीवन के बाद जंगल को चले गए और आज जंगली माने जाते है। यद्यपि कुछ लोग मध्य एशिया के पश्चिमी मंगोलिया और पूर्वी तुर्किस्तान में मिलनेवाले ईक्वस प्रज़्वेलस्की (Equus przwalski) नामक घोड़े को वास्तविक जंगली घोड़ा मानते है, तथापि वस्तुत: यह इसी पालतू घोड़े के पूर्वजो में से है। दक्षिण अफ्रिका के जंगलों में आज भी घोड़े बृहत झुंडो में पाए जाते है। एक झुंड में एक नर ओर कई मादाएँ रहती है। सबसे अधिक 1000 तक घोड़े एक साथ जंगल में पाए गए है। परंतु ये सब घोड़े ईक्वस कैबेलस के ही जंगली पूर्वज है और एक घोड़े को नेता मानकर उसकी आज्ञा में अपना सामाजिक जीवन व्यतीत करतेे है। एक गुट के घोड़े दूसरे गुट के जीवन और शांति को भंग नहीं करते है। संकटकाल में नर चारों तरफ से मादाओ को घेर खड़े हो जाते है और आक्रमणकारी का सामना करते हैं। एशिया में काफी संख्या में इनके ठिगने कद के जंगली संबंधी 50 से लेकर कई सौ तक के झुंडों में मिलते है। मनुष्य अपनी आवश्यकता के अनुसार उन्हे पालतू बनाता रहता है।

घोड़े को पालतू बनाने का वास्तविक इतिहास अज्ञात है। कुछ लोगों का मत है कि 7000 वर्ष दक्षिणी रूस के पास आर्यो ने प्रथम बार घोड़े को पाला। बहुत से विज्ञानवेत्ताओं और लेखकों ने इसके आर्य इतिहास को बिल्कुल गुप्त रखा और इसके पालतू होने का स्थान दक्षिणी पूर्वी एशिया में कहा, परंतु वास्तविकता यह है कि अनंत काल पूर्व हमारे आर्य पूर्वजों ने ही घोड़े को पालतू बनाया, जो फिर एशिया से यूरोप, मिस्र और शनै:शनै: अमरीका आदि देशों में फैला। संसार के इतिहास में घोड़े पर लिखी गई प्रथम पुस्तक शालिहोत्र है, जिसे शालिहोत्र ऋषि ने महाभारत काल से भी बहुत समय पूर्व लिखा था। कहा जाता है कि शालिहोत्र द्वारा अश्वचिकित्सा पर लिखित प्रथम पुस्तक होने के कारण प्राचीन भारत में पशुचिकित्सा विज्ञान (Vetrerinary Science) को शालिहोत्रशास्त्र नाम दिया गया। महाभारत युद्ध के समय राजा नल और पांडवो में नकुल अश्वविद्या के प्रकांड पंडित थे और उन्होने भी शालिहोत्र शास्त्र पर पुस्तकें लिखी थी। शालिहोत्र का वर्णन आज संसार की अश्वचिकित्सा विज्ञान पर लिखी गई पुस्तकों में दिया जाता है। भारत में अनिश्चित काल से देशी अश्वचिकित्सक 'शालिहोत्री' कहा जाता है।

अश्व पुरातन काल से ही इतना तीव्रगामी और शक्तिशाली नहीं था जितना वह आज है। नियंत्रित सुप्रजनन द्वारा अनेक अच्छे घोड़े संभव हो सके हैं। अश्वप्रजनन (ब्रीडिंग) आनुवंशिकता के सिद्धांत पर आधारित है। देश-विदेश के अश्वों में अपनी अपनी विशेषताएँ होती हैं। इन्हीं गुणविशेषों को ध्यान में रखते हुए घोड़े तथा घोड़ी का जोड़ा बनाया जाता है और इस प्रकार इनके बच्चों में माता और पिता दोनों के विशेष गुणों में से कुछ गुण आ जाते हैं। यदि बच्चा दौड़ने में तेज निकला और उसके गुण उसके बच्चों में भी आने लगे तो उसकी संतान से एक नवीन नस्ल आरंभ हो जाती है। इंग्लैंड में अश्वप्रजनन की ओर प्रथम बार विशेष ध्यान हेनरी अष्टम ने दिया। अश्वों की नस्ल सुधारने के लिए उसने राजनिय बनाए। इनके अंतर्गत ऐसे घोड़ों को, जो दो वर्ष से ऊपर की आयु पर भी ऊँचाई में 60 इंच से कम रहते थे, संतानोत्पत्ति से वंचित रखा जाता था। पीछे दूर दूर देशों से उच्च जाति के अश्व इंग्लैंड में लाए गए और प्रजनन की रीतियों से और भी अच्छे घोड़े उत्पन्न किए गए।




#Article 326: मानस राष्ट्रिय निकुञ्ज (102 words)


मानस राष्ट्रिय निकुञ्ज वा मानस वन्यजन्तु विहार (Pron:ˈmʌnəs) (, ) एक राष्ट्रिय निकुञ्ज छी जे युनेस्को विश्व सम्पदा क्षेत्रक प्राकृतिक मापदण्ड अन्तर्गत सुचिकृत अछि ।  ई निकुञ्ज भारतक पूर्वी भाग असम राज्यमे अवस्थित अछि । 
एकरा सन् १९८५ मे विश्व धरोहर स्थलक दर्जा देल गेल छल मुदा अस्सीक दशकक अन्त आ नब्बेक दशकक शुरूमे बोडो विद्रोही गतिविधिसभक कारण ई निकुञ्जके सन् १९९२ मे विश्व धरोहर स्थल सूची सँ हटा लेल गेल छल । जुन २०११ सँ ई पुनः युनेस्कोक विश्व धरोहरमे शामिल करि लेल गेल अछि ।ई निकुञ्ज एक सिङ्गे गैंडा (भारतीय गैंडा) आ बारहसिङ्घाक लेल विशेष रूप सँ प्रसिद्ध अछि ।




#Article 327: सुन्दरवन राष्ट्रिय निकुञ्ज (124 words)


सुन्दरवन राष्ट्रिय निकुञ्ज () भारतक पश्चिम बङ्गाल राज्यक दक्षिणी भागमे गङ्गा नदीक सुन्दरवन डेल्टा क्षेत्रमे स्थित एक राष्ट्रिय निकुञ्ज, बाघ संरक्षित क्षेत्र आ बायोस्फेयर संरक्षण क्षेत्र छी । ई क्षेत्र म्यानग्रोभक घणा जङ्गलसभ सँ घेरल अछि आ रोयल बङ्गाल टाइगरक सब सँ बड्का संरक्षित क्षेत्र छी । हालक अध्ययनसभ सँ पता चलल अछि कि ई राष्ट्रिय निकुञ्जमे बाघसभक सङ्ख्या १०३ अछि । एतय पक्षिसभ, सरीसृपसभ तथा रीढविहीन जीवसभ (इन्भर्टिब्रेट्स)क बहुतेक प्रजातिसभ सेहो पाबल जाइत अछि । एकर संगे एतेक नुनगर पानिक मगरमच्छ सेहो मिलैत अछि । वर्तमान सुन्दरवन राष्ट्रिय निकुञ्ज सन् १९७३ मे मूल सुन्दरवन बाघ संरक्षण क्षेत्रक कोर क्षेत्र तथा सन् १९७७ मे वन्य जीव अभयारण्य घोषित भेल छल । सन् १९८४ मई ४ क एकरा राष्ट्रिय निकुञ्ज घोषित कएल गेल छल ।




#Article 328: जन्तु विज्ञान (127 words)


जन्तु विज्ञान या जन्तु शास्त्र ( / ) जीव विज्ञानक ओ शाखा छी जाहिमे जन्तु जगत केर सम्बन्धमे वैज्ञानिक अध्ययन कएल जाइत अछि । जीव विज्ञान केर एहि शाखाक अन्तर्गत कोनहु जिबैत () वा विलुप्त () जन्तुक शरीर रचना, शरीर क्रिया, भ्रुणविज्ञान, क्रमिक उद्विकाश, अभिज्ञान (पहिचान), जैव वर्गीकरण आ पारिस्थितिक तन्त्रमे ओहि जन्तुक योगदान आदिक अध्ययन कएल जाइत अछि ।

प्राणीक परिभाषा बहुतेक प्रकार सँ कएल गेल अछि । किछ लोग प्राणी एहन जीव के कहैत अछि जे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटिन आ वसाक सृजन तँ नै करैत अछि, मुदा जीवनयापनक लेल एहि पर निर्भर करैत अछि । ई पदार्थसभ के प्राणी बाह्य स्रोत सँ प्राप्त करैत अछि । एकर सृजन करैवाला पादप जातिक जीव होइत अछि, जे अकार्बनिक स्रोत सँ प्राप्त पदार्थसभ सँ एकर सृजन करैत अछि । 




#Article 329: हम्पी (150 words)


हम्पी ( Hampe) एकटा गाउँ छी जे भारतक कर्नाटक राज्यक उत्तरमे अवस्थित अछि । हम्पी मध्यकालीन हिन्दू राज्य विजयनगर साम्राज्यक राजधानी छल । तुङ्भद्रा नदीक तट लग स्थित ई नगर आब हम्पी (पम्पा सँ नामाकरण) नाम सँ जानल जाइत अछि आ आब एतेक मात्र जिर्ण अवशेष बाँकी रहल अछि । ई अखनो महत्वपूर्ण आस्थाक केन्द्र अछि जाहिमे सँ सब सँ महत्वपूर्ण विरूपाक्ष मन्दिर छी संगे एहि प्राचीन सहरमे बहुतेक भिन्न भिन्न धरोहरसभ रहल अछि । एकरा देखला पर एहन लागैत अछि कि कोनो समयमे एतेक एकटा समृद्धशाली सभ्यता निवास करैत छल । भारतक कर्नाटक राज्यमे स्थित ई नगरक जिर्ण धरोहरसभके युनेस्कोद्वारा सन् २००६ मे विश्व सम्पदा क्षेत्रमे सामिल कएल गेल छल । प्रत्येक वर्ष यतय हजारोक सङ्ख्यामे पर्यटक तथा तिर्थ यात्री आबैत अछि । सन् २०१४ क एक तथ्याङ्क अनुसार कर्नाटक राज्यक एतिहासिक स्थानसभमे हम्पी, इन्टरनेट खोज साइट गुगलमे सब सँ बेसी खोज कएल गेल स्थानमे जगह बनेनाए छल । 




#Article 330: महाबलिपुरममे रहल स्मारकसभक समूह (142 words)


महाबलिपुरममे रहल स्मारकसभक समूह एक धरोहर परिसर छी जे भारतक तमिलनाडु राज्यक कान्चीपुरम जिलाक बङ्गालक खाडीके कोरोमण्डल तटमे स्थित अछि । ई चेन्नईक बगलमे स्थित अछि । ई मन्दिर दक्षिण भारतक सब सँ प्राचीन मन्दिरमे मानल जाइत अछि जे आठम शताब्दी सँ अछि । ई मन्दिर द्रविड वास्तुकलाक उत्कृष्ट नमूना छी । लगभग ४० विहारक संगे एहिमे विश्वक सब सँ बड्का चट्टानक कलाकृति अछि । महाबलिपुरमके सन् १९८४ मे युनेस्कोक विश्व सम्पदा क्षेत्रमे स्थान भेटल छल । यतय पल्लव वंशीय कालमे रहल सम्पदासभ निम्न अछि: पञ्च रथमे धर्मराज रथ, अर्जुन रथ, भीम रथ, द्रौपदी रथ, नकुल सहदेव रथ, आ गणेश रथ सामिल अछि । विवध महाबलिपुरमक गुफा मन्दिरसभमे वराह गुफा मन्दिर, कृष्ण गुफा मन्दिर, महिषासुरमर्दिनी मण्डप, पञ्चपाण्डव गुफा मन्दिर अछि । संरचनात्मक मन्दिरसभमे शोर मन्दिर आ ओलककन्नेश्वर मन्दिर आ गङ्गाक अवतरण, विश्वक सब सँ बड्का खुला आकासमे रहल चट्टानक कलाकृति छी ।




#Article 331: सिख धर्म (190 words)


सिख धर्म (सिखमत आ सिखी सेहो कहल जाइत अछि; पञ्जाबी: ਸਿੱਖੀ) एक एकेश्वरवादी धर्म छी । ई धर्मक अनुयायी के सिख कहल जाइत अछि । सिखसभक धार्मिक ग्रन्थ श्री आदि ग्रन्थ या ज्ञान गुरु ग्रन्थ साहिब छी । आमतौर पर सिखसभक १० सतगुरु मानल जाइत अछि, मुदा सिखसभक धार्मिक ग्रन्थमे ६ गुरुसभ सहित ३० भगतसभक बानी अछि, जेकर सामान सिख्यासभक सिख मार्ग पर चलैक लेल महत्त्वपूर्ण मानल जाइत अछि । सिखसभक धार्मिक स्थानक गुरुद्वारा कहैत अछि ।

सन् १४६९ मे पञ्जाबमे जन्मल नानक देव गुरमतकें खोजलक आ गुरमतक सिख्यासभक देश देशान्तरमे स्वयं जाए जाए करि फैलेने छल । सिख हुनका अपन पहिल गुरु मानैत अछि । गुरमतक परचार बाँकी ९ गुरुसभ केलक । १०अम गुरु गोबिन्द सिंह जी ई परचार खालसाक सोपलक आ ज्ञान गुरु ग्रन्थ साहिबक सिख्यासभ पर अम्ल करैक लेल उपदेश देलक । सन्त कबीर, धना, साधना, रामानन्द, परमानन्द, नामदेव  इत्यादि, जेकर सभक बानी आदि ग्रन्थमे दर्ज अछि, ओ भगतसभक सेहो  सिख सत्गुरुसभक सामान मानैत अछि आ ओकर सिख्यासभ पर अमल करैक कोशिश करैत अछि । सिख एक ईश्वर मानैत अछि, जेकरा ओ एक-ओम्कार कहैत अछि । ओकर मान अछि कि ईश्वर अकाल आ निरंकार होइत अछि ।




#Article 332: निलगिरी हिमालय रेलवे (118 words)


निलगिरी हिमालय रेलवे (अङ्ग्रेजी: Nilgiri Mountain Railway; तमिल: நீலகிரி மலை ரயில்) सन् १९०८ मे ब्रिटिशद्वारा भारतक तमिलनाडुमे निर्माण केनए छल । प्रारम्भमे ई रेलवेक मद्रास रेलवे सञ्चालित केनए छल । सन् २००५ जुलाईमे युनेस्को निलगिरी हिमालय रेलवेके दार्जिलिङ हिमालय रेलवे संगे विश्व धरोहर स्थलक एक विस्तारक रूपमे मान्यता देनए छल आ तखन सँ एकरासभके संयुक्त रूप सँ भारतक पर्वतीय रेलक नाम सँ जानल जाइत अछि । एकरा ई मान्यता मिलैक बाद एकर आधुनिकीकरणक योजना परित्याग करि देल गेल । पिछला वर्ष सँ कुन्नुर आ उदगमण्डलमक बीचक खण्ड पर भापक इन्जनक स्थान पर डिजल इन्जनक प्रयोग कएल जा रहल अछि । स्थानीय लोगसभ आ पर्यटकसभ ई खण्डपर एक बेर फेर सँ भाप इन्जनद्वारा रेलगाडी चलाबैक मांग केनए अछि ।




#Article 333: वर्णमाला (261 words)


कोनो एक भाषा या अनेक भाषासभके लिखैक लेल प्रयुक्त मानक प्रतीकसभक क्रमबद्ध समूहके वर्णमाला (=वर्णसभक माला या समूह) कहैत अछि। उदाहरणक लेल देवनागरीक वर्णमालामे अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ऋ, लृ, लृ्, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अः,  क , ख , ग , घ , ङ । च , छ , ज , झ , ञ । ट , ठ , ड , ढ , ण । त , थ , द , ध , न । प , फ , ब , भ , म । य , र , ल , व । श , ष , स आ हके 'देवनागरी वर्णमाला' कहैत अछि आ a, b, c, d ... z के रोमन वर्णमाला (रोमन अल्फाबेट) कहैत अछि । 

वर्णमाला एहि मान्यता पर आधारित अछि कि वर्ण, भाषामे आबैवाला मूल ध्वनिसभ (स्वनिम या फोनिम)क प्रतिनिधित्व करैत अछि । ई ध्वनिसभ या त ओ अक्षरसभक वर्तमान उच्चारण पर आधारित होइत अछि या फेर ऐतिहासिक उच्चारण पर । मुदा वर्णमालाक मात्र लिखैक अन्य तरिकासभ सेहो जेना शब्द-चिह्न (लोगोग्राफी), सिलैबरी आदि । शब्द-चिह्ननमे प्रत्येक लिपि चिह्न पुरा-क-पुरा शब्द, रूपिम (morpheme) या सिमान्टिक इकाईक निरूपित करैत अछि । याह रुपेन सिलैबरीमे प्रत्येक लिपि चिह्न कोनो अक्षर (syllable (वर्ण नै))क निरूपित करैत अछि ।

प्रत्येक वर्णमालामे दुई प्रकारक वर्ण होइत अछि स्वर वर्ण तथा व्यञ्जन वर्ण। व्यञ्जनक संग स्वर लगाबैक भिन्न तरिकासभक आधार पर वर्णमालासभके तीन वर्गमे बांटल जाइत अछि:

'वर्णमाला' के अङ्ग्रेजीमे 'ऐल्फाबेट' (alphabet) कहैत अछि । अरबी, फारसी, कुर्दी आ मध्य पूर्वक अन्य भाषासभमे एकरा 'अलिफ-बेई' या मात्र 'अलिफ-बे' कहैत अछि (जे अरबी-फारसी लिपिक पहिल दुई अक्षरसभक नाम छी)।




#Article 334: अन्तर्राष्ट्रिय ध्वन्यात्मक लिपि (139 words)


अन्तर्राष्ट्रिय ध्वन्यात्मक लिपि (अ॰ध॰व॰, अङ्ग्रेजी: International Phonetic Alphabet, इन्टरनेसनल फनेटिक एल्फाबेट) एक एहन लिपि छी जाहिने विश्वक सब भाषासभक ध्वनिसभ लिखल जा सकैत अछि । एकर हर अक्षर आ हरेक ध्वनिक एक-सँ-एकके सम्बन्ध होइत अछि । आरम्भमे एकर अधिकतर अक्षर रोमन लिपि सँ लेल गेल छल, मुदा जेना-जेना एहिमे विश्वक बहुतेक भाषासभक ध्वनिसभ जोडल जाए लागल तँ बहुत सँ युनानी लिपि सँ प्रेरित अक्षर लेल गेल आ बहुतेक बिलकुले नव अक्षरसभक निर्माण कएल गेल । एहिमे सन् २०१० धरि १६० सँ अधिक ध्वनिसभक लेल चिह्न दर्ज कएल जा चुकल अछि, मुदा कोनो भी एक भाषाके दर्शाबैक लेल ई वर्णमालाक एक भागक मात्र जरुरत होइत अछि ।

ई प्रणालीके ध्वन्यात्मक प्रतिलेखन (ट्रान्सक्रिप्सन)मे सूक्ष्म प्रतिलेखन [ ] क चिन्हसभक बीचमे आ स्थूल प्रतिलेखन / / क चिन्हसभक भितर लिखल जाइत अछि । एकर नियामक अन्तर्राष्ट्रिय ध्वन्यात्मक सङ्घ छी । उदाहरणक लेल:




#Article 335: लिपि (113 words)


लिपि या लेखन प्रणालीक अर्थ होइत अछि कोनो भी भाषाक लिखावट या लिखैक ढङ्ग। लिपि आ भाषा दुई अलग अलग चीज होइत अछि । भाषा ओ चीज होइत अछि जे बोलल जाइत अछि, लिखाईके तँ कोनो भी लिपिमे लिख सकैत छी । कोनो एक भाषाक ओकर सामान्य लिपि सँ दोसर लिपिमे लिखनाए, ओहि तरहक वास्तविक अनुवाद नै भेल होए, ओकरा लिप्यन्तरण कहल जाइत अछि ।

यद्यपि संसार भरिमे प्रयोग भ रहल भाषासभक सङ्ख्या अखनो हजार सँ बेसी अछि, तथापि अखन ई भाषासभ लिखैक लेल मात्र लगभग दुई दर्जन लिपिसभक मात्र प्रयोग भ रहल अछि । आर गहराईमे पहुचला पर पता चलैत अछि कि संसारमे मात्र तीन प्रकारक मूल लिपिसभ (या लिपि परिवार) अछि- 




#Article 336: भुत जोलोकिया (135 words)


भुत जोलोकिया (, आइपिए: [ˈbʱʊt.zɔˌlɔkiˌja]), घोस्ट पिपर, घोस्ट चिली, यु-मोरोक, रेड नागा, नागा जोलोकिया आ विह जोलोकियाक नाम सँ सेहो जानल जाइत अछि । ई बंगलादेशक नागा मोरिच सँ बहुतेक नजदिकक सम्बन्ध राखैत अछि आ ई एकदलीय हाइब्रिड मर्चाई छी जे भारतक राज्य अरुणाचल प्रदेश, असम, नागाल्यान्ड आ मणिपुरमे कृषि खेति कएल जाइत अछि । ई कयाप्सिकम चिनी आ क्याप्सिकम फ्रुटिसिनक प्रजाति छी ।

सन् २००७ मे, गिनिज वर्ल्ड रेकर्ड एकरा विश्वके सभ सँ करु लाल मिर्चाईक रुपमे प्रमाणित केनए छल । ई लाल मिर्चाई कोभिल्ले ताप एकाईमे १ मिलियन एसएचयु ताप मापन देखेने छल । मुदा, ई मर्चाईके सन् २०११ मे इनफिनिटी चिली बादमे नागा भाइपर पिपर, सन् २०१२ मे ट्रिनिडाड मोरुगा स्कोर्पियन आ अखुनका सभ सँ करु मर्चाई क्यारोलिना रिपर छी जे सन् २०१३ अगस्त ७ के कीर्तिमान अपन नाममे केनए छल ।




#Article 337: मर्चाई (101 words)


मर्चाई क्याप्सिकम वंशक एकदलीय फल छी, तथा ई सोलेनेसी कुलक एक सदस्य छी । एकर स्वाद करु होइत अछि । मर्चाईके करु तत्वके क्याप्सिसिन आ ओ वनस्पतिके क्याप्सिकम कहल जाइत अछि । ग्रीक भाषाक डसैवाला वस्तु बुझाबैवाला शब्द सँ ई नाम बनल अछि । मर्चाईके पोर्चुगाली आ स्पेनी अन्वेषकसभ एसिया महाद्वीप आनैक मान्यता रहल अछि । मर्चाई विभिन्न जातिक होइत अछि । युरोप, अमेरिका दिस सेयान पेपर कहल जाएवाला सामान्य लम्बा मर्चाई मसालेदार एसियाली पकवानक अभिन्न अङ्ग छी ।मर्चाईक जन्म स्थान दक्षिण अमेरिका छी जतय सँ ई पुरा विश्वमे फैलल । मर्चाईक प्रयोग एक औषधिक रूपमे सेहो भऽ रहल अछि ।




#Article 338: फतेहपुर सिकरी (125 words)


फतेहपुर सिकरी () एक सहर छी, जे आगरा जिलाक एक नगरपालिका छी । ई भारतक उत्तर प्रदेश राज्यमे अवस्थित अछि । ई एतिहासिक सहर मुगल साम्राज्यक समयमे अकबर सम्राटक राज्यमे सन् १५७१ सँ सन् १५८५ धरि रहल छल । बादमे सम्भवत पानिक कमीक कारण ई सहरके खालि कराएल गेल छल । फतेहपुर सिकरी हिन्दु आ मुसलमान वास्‍तुशिल्‍पक मिश्रणक सब सँ बढिया उदाहरण छी । फतेहपुर सिकरी मस्जिदक बारेमे कहल जाइत अछि कि ई मक्‍काक मस्जिदक नक्कल छी । आर एकर वास्तुकला हिन्दु आ पारसी वास्‍तुशिल्‍पमे आधार मानि निर्माण कएल गेल अछि । मस्जिदक प्रवेशद्वार ५४ मिटर उँच फाटक रहल अछि । जेकर निर्माण सन् १५७० मे भेल छल । मस्जिदक उत्तरमे शेख सलीम चिश्‍तीक दरगाह अछि जतेक नि:सन्तान महिलासभ सन्तान माँगै लेल आबैत अछि ।




#Article 339: खजुराहोमे रहल स्मारकसभक समूह (113 words)


खजुराहोमे रहल स्मारकसभक समूह हिन्दु आ जैन मन्दिरक एक समूह छी जे भारतक मध्य प्रदेशमे अवस्थित अछि । ई झाँसी सहर सँ  दक्षिणपूर्वमे अछि । ई भारतक युनेस्को विश्व सम्पदा क्षेत्र छी । ई मन्दिरसभ नगाडा शैलीक वास्तुकला आ कामुक मूर्तिक लेल प्रसिद्ध अछि ।

बेसी खाजुराहो मन्दिरसभ सन् ९५० सँ सन् १०५० क बीच चन्देला वंश निर्माण केनए छल । एतिहासिक तथ्याङ्कअनुसार १२अम शताब्दीमे खाजुराहो मन्दिर क्षेत्रमे ८५ मन्दिर छल, जे २० वर्ग किलोमिटरमे फैलल छल । ओहिमे सँ,अखन ६ वर्ग किलोमिटरक क्षेत्रमे २० मन्दिर बचि गेल अछि । विविध बचल मन्दिरसभमे सँ कन्दारिया महादेव मन्दिर जटिल विवरण, प्रतीकसभ आ प्राचीन भारतीय कलाक अर्थवत्ताक संग मूर्तिसभक प्रचुरताक संग सजाएल गेल अछि ।




#Article 340: टाइगर श्रोफ (135 words)


जय हेमन्त टाइगर श्रोफ (जन्म २ मार्च १९९०) एक भारतीय चलचित्र अभिनेता आ मार्शल कलाकार छी, जे हिन्दी चलचित्रसभमे काज करैत अछि । ओ अपन अभिनयक पदार्पण  शब्बिर खानद्वारा निर्देशित बलिउड चलचित्र हिरोपन्ती सँ केनए छल । श्राफके पहिल सिनेमा हिरोपन्ती सफल भेल छल आ वोकरा अहि सिनेमा के लेल सर्वश्रेष्ठ नव पुरुष अभिनेताके लेल फिल्मफेयर पुरस्कारसँ सम्मानित केल गेल छल ।

श्रोफक जन्म २ मार्च १९९० मे भारतक मुम्बईमे भेल छल । टाइगरके पिता जैकी श्राफ स्वयं फिल्म् अभिनेता आ माता आयेशा दत्त फिल्म अभिनेत्रि छल । टाइगरक एक बहिन अछि, कृष्णा श्राफ। टाइगर अपन प्रारम्भिक शिक्षा अमेरिकन स्कूल अफ बम्बईसँ केल्हि आ स्नातक तह एमिटी यूनिवर्सिटीनसँ करने छल ।

श्रोफ अपन अभिनय जीवनक सुरुवात निर्देशक सब्बिर खानद्वारा निर्देशित २०१४ क मनोवैज्ञानिक थ्रिलर हिन्दी चलचित्र हिरोपन्ती सँ बब्लू नामक पात्रक भूमिकासँ केनए छल ।




#Article 341: महेश बाबु (136 words)


महेश बाबू एक भारतीय तेलुगु चलचित्र अभिनेता छी । बाबुक जन्म ९ अगस्त १९७५ चेन्नई, तमिलनाडुमे भेल छल । महेश बाबु अपन चलचित्र करियरक शुरूआत बाल्यकालमे करि देनए छल । हुनकाद्वारा अभिनित सन् २००३ क ब्लकबस्टर चलचित्र ओकाडु ओई समयक सबसँ पैग तेलुगु चलचित्रसभमे सँ एक छल ओ चलचित्रमे महेश एक एक युवा कबड्डी खेलाड़ीक भूमिका निभेनए छल । तेलुगु भाषाक चलचित्र वाहेक ई चलचित्र विभिन्न भारतीय भाषासभमे पुनर्निर्माण कएल गेल छल । महेश बाबुक सन् २००५ क चलचित्र अथाडु तेलुगु सिनेमामे उच्च कमाईक संग अन्तर्राष्ट्रिय मान्यता प्राप्त केनए छल ।

महेश बाबू प्रोडक्शन हाउसक मालिक छी । दिग्गज तेलुगु अभिनेता कृष्णाक छोट बेटा महेश वाल्यकालमे तेलुगु चलचित्र निदा (१९७९) मे एक बाल कलाकारक रूपमे अपन चलचित्र करियरक शुरुआत केनए छल आ छ वर्षक उमरमे एक बाल कलाकारक रूपमे आठ अन्य चलचित्रसभमे अभिनय केनए छल ।




#Article 342: रकुल प्रीत सिंह (190 words)


रकुल प्रीत सिंह (जन्म १० अक्टुबर १९९०) एक भारतीय चलचित्र अभिनेत्री आ मोडल छी । ओ विशेष करि तेलुगु सिनेमामे अभिनय करैत अछि । ओ तमिल सिनेमा, हिन्दी सिनेमा आ कन्नड सिनेमामे सेहो अभिनय केनए अछि ।

वर्तमान समयमे ओ तेलङ्गाना सरकारद्वारा चलाएल जा रहल बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियानक राजदूत छी । 

कलेजमे अध्ययनक समयमे ओ एक मोडलकें रूपमे अपन करियरक आरम्भ केनए छल । अध्ययनकें समय ओ सन् २००९ मे प्रदर्शित भेल कन्नड़ चलचित्र गिली (२००९) मे अभिनय करि अपन चलचित्र करियरक पदार्पण केनए छल । सन् २०११ मे ओ फेमिना मिस इन्डिया प्रतियोगितामा सहभागी भेल जहिमे ओ शीर्ष ५ स्थान प्राप्त केनए छल आ सङ्गे पिपल्स चोइस, मिस इन्डिया टाइम्स, पेन्टालुन फेमिना मिस फ्रेस फेस, फेमिना मिस ट्यालेन्ट, फेमिना मिस ब्युटिफुल स्माइल आ फेमिना मिस ब्युटिफुल आई सहित पाँच टा पुरस्कार जितने छल ।

किछ समय बाद ओ एक पूर्णकालिक अभिनेत्री बनवाक विकल्प चुनलक आ ओहि वर्ष तेलुगु चलचित्र केरतम सँ तेलुगु सिनेमामे पदार्पण केलक तँ ओकर एक वर्षक बाद तमिल चलचित्र तदैयारा थाक्का सँ तमिल सिनेमामे पदार्पण केनए छल । सन् २०१४ मे बलिउड चलचित्र यारियाँ सँ ओ बलिउड चलचित्र क्षेत्रमे अपन कदम राखने छल ।




#Article 343: मधुबनी, भारत (1791 words)


मधुबनी बिहार राज्यमे अवस्थित एगो शहर छी । ई मधुबनी जिलाक मुख्यालय छी ।

मधुबनीक मुख्य भाषा मैथिली अछि जे सुनऽ मे मधुर आ सरस अछि। पहिलुका समयमे एतयके जङ्गलमे मौध (शहद) बेसी भेटैत छल ताहि लेल जगह का नाम मधु + वनी सँ मधुबनी भऽ गेल। किछ लोकक मानब छै मधुबनी शब्द मधुर + वाणी सँ विकसित भेल अछि।

मधुबनी जिलाक प्राचीनतम ज्ञात निवासीमे किरात, भार, थारु एहेन जनजाती शामिल अछि । वैदिक स्रोतक अनुसार आर्यक विदेह शाखा आगिके संरक्षणमे सरस्वती तट सँ पूबमे सदानीरा (गण्डक)क आओर कूच केलथि आओर एहि क्षेत्रमे विदेह राज्यक स्थापना केलथि । विदेहक राजा मिथिके नाम पर ई प्रदेश मिथिला कहाओल । रामायणकालमे मिथिलाक राजा सिरध्वज जनकक पुत्री सीताक जन्म मधुबनीक सीमा पर स्थित सीतामढीमे भेल छल । विदेहक राजधानी जनकपुर, जे आधुनिक नेपाल मे पड़एत अछि, मधुबनीके उत्तर-पश्चिमी सीमाके लग अछि । बेनीपट्टीके लग स्थित फुलहरके बारेमे एहेन मान्यता अछि की एतय फुलक बाग छल जतय सँ सीता फुल लए कए गिरिजा देवी मन्दिरमे पूजा करैत छलीह । पण्डौलके बारेमे एहो प्रसिद्धि अछि की एतय पाण्डवसभ अपन अज्ञातवाशक किछु दिन बितेने छलाह । विदेह राज्यक अन्त भेला पर ई प्रदेश वैशाली गणराज्यक अङ्ग बनल । एकर बाद ई मगधक मौर्य, शुङ्ग, कण्व आ गुप्त शासक सभक अधीन रहल । १३हम शताब्दीमे पश्चिम बङ्गालक मुसलमान शासक हाजी शम्सुद्दीन इलियासक समय मिथिला आ तिरहुत क्षेत्रक बँटवारा भऽ गेल । उत्तरी भाग जाहिके अन्तर्गत मधुबनी, दड़िभङ्गा आ समस्तीपुरक उत्तरी हिस्सा आएल छल, ओईनवार राजा कामेश्वर सिंहक महान शासन व्यवस्थामे रहल । ओईनवार राजासभ मधुबनीके लगमे रहल सुगौनाके अपन पहिल राजधानी बनेलथि । १६हम शताब्दीमे ओ सब दड़िभङ्गाक अपन राजधानी बनेलथि । ओईनवार राजा सभक कला, संस्कृति आया साहित्यके बढ़ावा दिअ लेल जानल जाएत अछि । 
१८४६ इस्वीमे ब्रिटिश सरकार मधुबनीकें तिरहुतक अधीन अनुमण्डल बनेलक । सन् १८७५ मे दड़िभङ्गाके स्वतन्त्र जिला बनला पर ई एकर अनुमण्डल बनल । स्वतन्त्रता सङ्ग्राममे महात्मा गान्धीक खादी आन्दोलनमे मधुबनी अपन विशेष पहिचान कायम केलक आओर सन् १९४२ मे भारत छोड़ो आन्दोलनमे जिलाक सेनानी सभ जीजान सँ हिस्सा लेलक । स्वतन्त्रताक पश्चात सन् १९७२ मे मधुबनीकें स्वतन्त्र जिला बना देल गेल ।

मधुबनी शहरक उत्तरमे नेपाल, दक्षिणमे दड़िभङ्गा, पुरबमे सुपौल तथा पश्चिममे सीतामढी जिला अछि । ई शहरक कुल क्षेत्रफल ३५०१ वर्ग किलोमिटर  अछि । नदिसभ सँ भरल ई स्थान बरसातक दिनसभमे प्रति वर्ष लोकसभक लेल तबाहीक कारण बनैत अछि । सन् २००७ मे आएल भीषण बाढ़िमे ३३१ पञ्चायत (११० पूर्ण रूप सँ तथा २२१ आंशिक रुप सँ) तथा ८३६ गामसभक ३,७२,५९९ परिवार पूर्ण रूप सँ प्रभावित भेल छल । समूचा जिला एक समतल आ उपजाऊ क्षेत्र छी । औसत वार्षिक १,२७३ मिमी वर्षा अधिकांश मनसुन सँ प्राप्त होइत अछि । 

मधुबनीमे कमला, करेह, बलान, भूतही बलान, गेहुंआ, सुपेन, त्रिशुला, जीवछ, कोशी आ अधवारा समूह। अधिकांश नदियाँ बरसात के दिनों में उग्र रुप धारण कर लेती है। कोशी नदी जिले की पूर्वी सीमा तथा अधवारा या छोटी बागमती पश्चिमी सीमा बनाती है।

यह जिला ५ अनुमंडल, २१ प्रखंडों, ३९९ पंचायतों तथा ११११ गाँवों में बँटा है। विधि व्यवस्था संचालन के लिए १८ थाने एवं २ जेल है। पूर्ण एवं आंशिक रुप से मधुबनी जिला २ संसदीय क्षेत्र एवं ११ विधान सभा क्षेत्र में विभाजित है।

मधुबनी मूलतः एक कृषि प्रधान जिला है। यहाँ की मुख्य फसलें धान, गेहूं, मक्का, मखाना आदि है। भारत में मखाना के कुल उत्पादन का ८०% मधुबनी में होता है। आधारभूत संरचना का अभाव एवं निम्न शहरीकरण (मात्र 3.65%) उद्योगों के विकाश में बाधा है। अभी मधुबनी पेंटिंग की 76 पंजीकृत इकाईयाँ, फर्नीचर उद्योग की 13 पंजीकृत इकाईयाँ, 3 स्टील उद्योग, 03 प्रिंटिंग प्रेस, 03 चूरा मिल, 01 चावल मिल तथा 3000 के आसपास लघु उद्योग इकाईयाँ जिले में कार्यरत है। पशुपालन एवं डेयरी को आधार बनाकर इनपर आधारित उद्योग लगाया जा सकता है लेकिन अभी तक मात्र ३० दुग्ध समीतियाँ ही कार्यरत है। मछली, मखाना, आम, लीची तथा गन्ना जैसे कृषि उत्पाद के अलावे मधुबनी से पीतल की बरतन एवं हैंडलूम कपड़े का राज्य में तथा बाहर निर्यात किया जाता है।

शिक्षा के प्रसार के मामले में मधुबनी एक पिछड़ा जिला है। साक्षरता मात्र 41.97% है जिसमें स्त्रियों की साक्षरता दर महज 26.54% है। आधारभूत संरचना के अभाव को शिक्षा क्षेत्र में पिछड़ेपन का मुख्य कारण माना जाता है। जिले में शिक्षण संस्थानों की कुल संख्या इस प्रकार है:

स्थिति में सुधार हेतु बिहार शिक्षा परियोजना के अधीन अभी 98 प्राथमिक विद्यालय खोले गए हैं तथा 83 प्राथमिक विद्यालयों को मध्य विद्यालय में उत्क्रमित किया जा रहा है। मधुबनी जिले के तमाम कॉलेज ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा से संवद्ध हैं जबकि आबादी को देखते हुए जिले में एक विश्वविद्यालय की सख्त आवश्यकता है। इसके अलावा यहां मेडिकल कॉलेज और अन्य इंजीनियरिंग कॉलेज भी नहीं है। मधुबनी के लोग पढ़ाई लिखाई में काफी जहीन माने जाते हैं और उन्होंने राज्य और देश के अंदर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। कम साक्षरता के बावजूद यहां के लोग बड़ी संख्या में आईएएस, आईपीएस और अन्य सेवाओं में चुनकर जाते रहे हैं। लेकिन पढ़ वहीं पाते हैं जो आर्थिक रुप से संपन्न हैं और जुनूनी है साथ ही जिनका जागरुक समाजिक परिवेश है। मधुबनी में वैसे तो एक नवोदय विद्यालय है लेकिन उसकी गुणवत्ता प्रभावित हुई है। मधुबनी को कम से कम ५ डिग्री कॉलेज, एक मेडिकल कॉलेज और पांच इंजिनयरींग कॉलेजों की सख्त आवश्यकता है। यहां के बच्चे जमीन बेचकर कर्नाटक, महाराष्ट्र और अन्य सूबों में डिग्री पाने जाते हैं जिसकी गुणवत्ता भी संदिग्ध होती है साथ ही राज्य का राजस्व भी दूसरे राज्य में चला जाता है। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि इस जिले से इतने कद्दावर नेताओं के संसद और विधानसभा पहुंचने के बाद भी जनता को ठगने का सिलसिला जारी है और शिक्षा अभी तक राजनीतिक एजेंडे पर नहीं आ पाई है। शायद देश के अन्य हिस्सों का भी कमोवेश यहीं हाल है।

मधुबनी मिथिला संस्कृति का अंग एवं केंद्र विंदु रहा है। राजा जनक और सीता का वास स्थल होने से हिंदुओं के लिए यह क्षेत्र अति पवित्र एवं महत्वपूर्ण है। मिथिला पेंटिंग के अलावे मैथिली और संस्कृत के विद्वानों ने इसे दुनिया भर में खास पहचान दी है। प्रसिद्ध लोककलाओं में सुजनी (कपडे की कई तहों पर रंगीन धागों से डिजाईन बनाना), सिक्की-मौनी (खर एवं घास से बनाई गई कलात्मक डिजाईन वाली उपयोगी वस्तु) तथा लकड़ी पर नक्काशी का काम शामिल है। सामा चकेवा एवं झिझिया मधुबनी का लोक नृत्य है। मैथिली, हिंदी तथा उर्दू यहाँ की मुख्‍य भाषा है। यह जिला महाकवि कालीदास, मैथिली कवि विद्यापति तथा वाचस्पति जैसे विद्वानों की जन्मभूमि रही है। 

पर्व त्योहारों या विशेष उत्सव पर यहाँ घर में पूजागृह एवं भित्ति चित्र का प्रचलन पुराना है। १७वीं शताब्दी के आस-पास आधुनिक मधुबनी कला शैली का विकास माना जाता है। मधुबनी शैली मुख्‍य रुप से जितवारपुर (ब्राह्मण बहुल) और रतनी (कायस्‍थ बहुल) गाँव में सर्वप्रथम एक व्‍यवसाय के रूप में विकसित हुआ था। यहाँ विकसित हुए पेंटिंग को इस जगह के नाम पर ही मधुबनी शैली का पेंटिग कहा जाता है। इस पेंटिग में पौधों की पत्तियों, फलों तथा फूलों से रंग निकालकर कपड़े या कागज के कैनवस पर भरा जाता है। मधुबनी पेंटिंग शैली की मुख्‍य खासियत इसके निर्माण में महिला कलाकारों की मुख्‍य भूमिका है। इन लोक कलाकारों के द्वारा तैयार किया हुआ कोहबर, शिव-पार्वती विवाह, राम-जानकी स्वयंवर, कृष्ण लीला जैसे विषयों पर बनायी गयी पेंटिंग में मिथिला संस्‍कृति की पहचान छिपी है। पर्यटकों के लिए यहाँ की कला और संस्‍कृति खासकर पेंटिंग कौतुहल का मुख्‍य विषय रहता है। 
मैथिली कला का व्‍यावसायिक दोहन सही मायने में १९६२ में शुरू हुआ जब एक कलाकार ने इन गाँवों का दौरा किया। इस कलाकार ने यहां की महिला कलाकारों को अपनी पेंटिंग कागज पर उतारने के लिए प्रेरित किया। यह प्रयोग व्‍यावसायिक रूप से काफी कारगर साबित हुई। आज मधुबनी कला शैली में अनेकों उत्‍पाद बनाए जा रहे हैं जिनका बाजार फैलता ही जा रहा है। वर्तमान में इन पेंटिग्‍स का उपयोग बैग और परिधानों पर किया जा रहा है। इस कला की मांग न केवल भारत के घरेलू बाजार में बढ़ रही है वरन विदेशों में भी इसकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। अन्य उत्पादों में कार्ड, परिधान, बैग, दरी आदि शामिल है।

मधुबनी चित्रकला के लिए प्रख्यात है। 2003 ई॰ में लन्दन में आयोजित कला प्रदर्शनी में मधुबनी पेंटिंग्स को बहुत प्रशंसा मिली थी।

मधुबनी बिहार के सभी मुख्य शहरों से राजमार्गों द्वारा जुड़ा हुआ है। यहाँ से वर्तमान में तीन राष्ट्रीय राजमार्ग तथा दो राजकीय राजमार्ग गुजरती हैं। मुजफ्फरपुर से फारबिसगंज होते हुए पूर्णिया जानेवाला राष्ट्रीय राजमार्ग ५७ मधुबनी जिला होते हुए जाती है। यह सड़क स्वर्णिम चतुर्भुज योजना का अगल चरण है जिसे ईस्ट-वेस्ट कॉरीडोर कहा जाता है। इसकी योजना वाजपेयी सरकार के वक्त बनी थी। इस सड़क के बन जाने से मधुबनी, दरभंगा बल्कि पूरे मिथिला क्षेत्र की ही तकदीर बदल जाएगी। इस सड़क के तहत कोसी पर बनने वाले पुल की लंबाई (संभवत:इसके साथ रेल पुल भी बनाई जाएगी) करीब २२ किलोमीटर होने की संभावना है जिसमें कोसी के पाट के अलावा उसके पूरव और पश्चिम में निचली जमीन के ऊपर कई-कई किलोमीटर तक वो पुल फैली हुई होगी। यह सड़क चार लेन की बन रही है और इसके बनने से मधुबनी का संपर्क सहरसा, सुपौल, पूर्णिया और मिथिला के पूर्वी इलाके से एक बार फिर जुड़ जाएगा जो सन १९३४ के भूंकंप से पहले कायम था। पूरा इलाका समाजिक और आर्थिक रुप से एक इकाई में बदल जाएगा। इस पुल के महज बनने मात्र से इस इलाके की राजनीतिक चेतना किस मोड़ लेगी इसका अंदाज लगाना मुश्किल है। कुछ लोगों की राय में इस पुल के बनने से एक अखिल मिथिला राज्य की मांग जोड़ पकड़ सकती है जिसका आन्दोलन अभी खंडित अवस्था में है। 

मधुबनी से गुजरने वाली दूसरी सड़क ५५ किलोमीटर लंबी राष्ट्रीय राजमार्ग १०५ है जो दरभंगा को मधुबनी के जयनगर से जोड़ता है। राजधानी पटना से सड़क मार्ग के माध्‍यम से अच्‍छी तरह से जुड़ा हुआ है। 

मधुबनी भारतीय रेल के पूर्व मध्य रेलवे क्षेत्र के समस्तीपुर मंडल में पड़ता है। दिल्ली-गुवाहाटी रूट पर स्थित समस्तीपुर जंक्शन से बड़ी गेज की एक लाईन मधुबनी होते हुए नेपाल सीमा पर झंझारपुर को जाती है। मधुबनी से गुजरने वाली एक अन्य रेल लाईन सकरी से घोघरडिहा होते हुए फॉरबिसगंज को जोड़ती है। १९९६ के बाद रेल अमान परिवर्तन होने से दरभंगा होते हुए दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, अमृतसर, गुवाहाटी तथा अन्य महत्वपूर्ण शहरों के लिए यहाँ से सीधी ट्रेनें उपलब्ध है। इसके अलावा एक रेललाईन दरभंगा से सकरी और झंझारपुर होते हुए लौकहा तक नेपाल की सीमा को जोड़ती है। जिले में सकरी और झंझारपुर दो रेल के जंक्शन हैं। लौकरा रेलवे लाईन के निर्माण में कांग्रेस के वरिष्ट नेता ललित नारायण मिश्र का अहम योगदान है जिनका कार्यक्षेत्र मधुबनी ही था। वे झंझारपुर से सांसद हुआ करते थे।

यहाँ से सबसे नजदीकी नागरिक हवाई अड्डा 146 कि॰मी॰ दूर राजधानी पटना में स्थित है। लोकनायक जयप्रकाश हवाई क्षेत्र पटना (IATA कोड- PAT) से अंतर्देशीय तथा सीमित अन्तर्राष्ट्रीय उड़ाने उपलब्ध है। इंडियन, किंगफिशर, जेट एयर, स्पाइस जेट तथा इंडिगो की उडानें दिल्ली, कोलकाता और राँची के लिए उपलब्ध हैं।




#Article 344: उग्रतारा मन्दिर (107 words)


उग्रतारा मन्दिर  सुदूर पश्चिमक पैग शक्तिपिठ मानल जाइत अछि । ई मन्दिर डडेलधुरा सँ चारि किलोमिटर पश्चिम दिस रहल अछि । ई मन्दिरके नेपालक सूदूर पश्चिमक नौ
भगवतीसभक मन्दिरसभमे एक मन्दिर छी । उग्रतारा मन्दिरक उत्पति सम्बन्धमे प्रमाणिक आधारमे कुनो शिलालेख नभेटल अछि ।

डडेल्धुरा जिलाक अमरगढी नगरपालिकामे अवस्थित ई प्रसिद्ध मन्दिर, बागबजार सँ करिब ५ कि.मि. दुर डडेलधुरा, बैतडी राजमार्गक पश्चिम दिसक उंच विशाल तथा रमणीय फाटमे रहल अछि । एतेक कतौ सँ आएब मन्दिरमे प्रवेश करैलेल मार्ग नै भ प्रकृत प्रदत फाँटमे अवस्थित उग्रतारा देवीक दर्शन करैलेल भक्तजनसभ चढाई करि जा परैत अछि । उग्रतारा मन्दिरक उत्पति सम्बन्धमे प्रमाणिक आधारमे कुनो शिलालेख नभेटल अछि ।




#Article 345: वेङ्कटरामन रामकृष्णन (141 words)


वेङ्कटरामन वेङ्की रामकृष्णन () (जन्म: १९५२, तमिलनाडु) एक जीव वैज्ञानिक छी । हिनका सन् २००९मे रसायन विज्ञानक नोबेल पुरस्कार सँ सम्मानित कएल गेल छल । हिनका ई पुरस्कार कोशिकाक भितर प्रोटिनक निर्माण करैवाला राइबोसोमक कार्यप्रणाली व संरचनाक उत्कृष्ट अध्ययनक लेल प्रदान कएल गेल छल । हिनकर ई उपलब्धि सँ कारगर प्रतिजैविकसभक विकसित करैमे सहायता मिलत । इजरायली महिला वैज्ञानिक अदा योनोथ आ अमेरिकाक थमस स्टिजक सेहो संयुक्त रूप सँ ई सम्मानक लेल चुनल गेल छल । 

तीनु वैज्ञानिकसभ त्रि-आयामी चित्रक मद्दत सँ दुनियाक समझेलक कि कोन तरह सँ राइबोसोम अलग-अलग रसायनसभके संग प्रतिक्रिया करैत अछि, एकर लेल ओ एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफीक सहारा लेने छल जे राइबोसोम्जक हजारो गुना पैग चित्र आगा लाबैत अछि । वर्तमानमे श्री वेङ्कटरामन रामकृष्णन ब्रिटेनक प्रतिष्ठित क्याम्ब्रिज विश्वविद्यालय सँ जुडल अछि आ विश्वविद्यालयक एमआरसी लेबोरेट्रिज अफ मोलिक्युलर बायोलोजीक स्ट्रकचरल स्टडिज विभाग (संरचनात्मक अध्ययन) विभागक प्रमुख वैज्ञानिक छी ।




#Article 346: हरगोविन्द खुराना (106 words)


हरगोविन्द खुराना (जन्म: ९ जनवरी १९२२ मृत्यु ९ नवम्बर २०११) एक भारतीय- अमेरिकी जीव वैज्ञानिक छल जे सन् १९६८ क नोबेल पुरस्कार सँ सम्मानित भेल छल । हुनका नाभिकीय अम्ल सहस्रसभ एकल न्युक्लिऔटिडसभ सँ बनैत अछि । जैव कोशिकसभक आनुवंशिकीय गुण याह जटिल बहु न्युक्लिऔटिडसभक संरचना पर निर्भर रहैत अछि । डाक्टर खुराना एघारह न्युक्लिऔटिडसभक योग करैमे सफल भऽ गेल छल तथा आब ओ ज्ञात शृङ्खलाबद्ध न्युक्लिऔटिडवाला न्युक्लिक अम्लक प्रयोगशालामे संश्लेषण करैमे सफल भेला । ई सफलता सँ ऐमिनो अम्लसभक संरचना तथा आनुवंशिकीय गुणसभक सम्बन्ध समझैमे सम्भव भेला कारण सँ डाक्टर खुराना अन्य दू अमेरिकी वैज्ञानिकसभक संग सन् १९६८क नोबेल पुरस्कार प्रदान कएल गेल छल ।




#Article 347: अलाबामा (198 words)


अलबामा संयुक्त राज्य अमेरिकाके एक राज्य छी । ई संयुक्त राज्य अमेरिकाक दक्षिण क्षेत्रमे  अवस्थित एक राज्य छी। ई राज्यक सीमा उत्तरमे  टेनेसी, दक्षिण पूर्वमे  फ्लोरिडा, दक्षिणमे  मेक्सिकोक खाडी, पूर्वमे  जर्जिया आ पश्चिममे  मिसिसिपीसंंग जोडिएल अछि। अलबामा आकारक आधारमे  संयुक्त राज्य अमेरिकाक ३०अम पैग तथा जनसंख्याक आधारमे  २३ अम पैग(सन् २००६मे  लगभग ४६ लाख जनसंख्या) राज्य छी।

अमेरिकी गृह युद्ध सँ दोसर विश्वयुद्ध धरि, अलबामा आरो दक्षिणी राज्यसभ सरह आर्थिक चुनौतिसभक सामना केलक। द्वितीय विश्व युद्ध पश्चात अलबामा राज्यक अर्थव्यवस्थामे  महत्वपूर्ण सुधार भेल  आ ई राज्य उत्पादन, खनिज निष्कर्षण, कृषि क्षेत्रमे  बहुत फड्को मारल । शिक्षा आ प्रविधिक रूपमे , आ एकाधिक सैन्य प्रतिष्ठानक विस्तार, मुख्य रूपसँ अमेरिकी सेना आ अमेरिकी वायुसेनासँ ई प्रसिद्ध भेल । राज्य एयरोस्पेस, शिक्षा, स्वास्थ्य रेख देख निवेश केने अछि, आ बैंकिंग, आ विभिन्न ऑटोमोबाइल विनिर्माण, खनिज निष्कर्षण, इस्पात उत्पादन आ निर्माण सहित भारी उद्योगक  कार्य होएत अछि।

अलबामाके  येल्लो हम्मर राज्य कहै  चिनैत अछि। जे  राज्य चरक नाम सेहो छी। अलबामा देगचाक हार्टक रूपमे  जानैत अछि। राज्य वृक्ष बडी पट्टी पाइन छी आ राज्य फूल कमीलया छी। अलबामाक राजधानी मोंटगोमरी छी, आ जनसंख्याक हिसाबसँ सबसँ पैग सहर बर्मिंघम छी। कुलभूमि क्षेत्रसँ सबसँ पैग सहर हुन्त्विल्ली छी। सबसँ पुरानो सहर मोबाइल छी ।




#Article 348: टोरी लेन (302 words)


टोरी लेन एक अमेरिकी फेटिश मोडेल, कामोत्तेजक नर्तकी, अश्लील चलचित्र अभिनेत्री तथा निर्देशक छी। सन् २००७ एडल्टकनमे हुनका शीर्ष बीस अश्लील अभिनेत्रीसभमे समावेश कएल गेल छल आओर ओ दुई बेर एभीएन अवार्ड सेहो जितने छल। हुनका सन् २०१७ मे एभीएन हल अफ फेममे सेहो समावेश कएल गेल छल।

लेन कऽ जन्म सेङ्केटिडी, न्यूयोर्कमे भेल छल आओर ओ पोलिश आ इटालेली वंशक छी। ओ फोर्ट लडरडेल बीचतिर द एल्बो रूम नामक एकटा क्लबमे बारटेन्डरक रूपमे काम केनए छल। ओ एकटा सेक्स शप आ स्थानीय फ्लोरिडा स्ट्रिप क्लबमे स्ट्रिपरक रूपमे सेहो काम केनए अछि। पीटर नर्थद्वारा फ्लोरिडामे स्काउट करि लेलाक पश्चात लेन सन् २००४ मे पोर्नोग्राफिक चलचित्र उद्योगमे शुरुवात केनए छलआओर फेरसँ ओ क्यालिफोर्नियाक लेल उडान भरने छल अनि तत्कालीन नयाँ एजेन्सी एलए डायरेक्ट मोडेलक साथ हस्ताक्षर सेहो केनए छल। ला डायरेक्ट मोडेल्सक साथ साइन करि लेलाक पश्चात, अश्लील चलचित्रमे लेन कऽ पहिल दृश्य सन् २००४ मे बेन इङ्ग्लिश आओर मार्कोक साथ छल। ओ ६०० सँ अधिक चलचित्रसभमे नजर आएल छल। मई २००७ मे, लेन अभिनय आ निर्देशन दुनुटा कऽ लेल सिन सिटीक साथ दुई वर्षक अनुबन्ध केनए छल। सन् २००६ मे, लेन प्लेबोय टिभी रियालिटी शो जेनाक अमेरिकन सेक्स स्टारक दोसर सीजनमे एक गोटे फाइनलिस्ट छल, मुद्दा ओ फाइनल राउन्डमे पुरस्कार हारि गेल छल।हुनका सन् २०१७ मे एभीएन हल अफ फेममे समावेश कएल गेल छल।

लेन जेनिफर केचमक एक व्यक्तिगत साथी छी आओर ओ सन् २०१२ कऽ संस्करण आइएम जेनी मे फिचर भेल छल। केचम कहलैन जे लेन अपन बहिन, विस्तारित परिवार आ स्वयम् कऽ लेल प्रदान करि उद्योगमे कएल गेल धनक प्रयोग आ ओकरा व्यापारमे किछ जिम्मेवार केटीसभमे सँ एक कऽ रूपमे वर्णित केनए अछि।फरवरी २०१५ मे, फ्लाइट क्रू कऽ सदस्यसभ आ अन्य यात्रीसभ उपर कथित रूपसँ हमला करवाक लेल लेन के डेल्टा एयरलाइन्सक उडानसँ गिरफ्तार कएल गेल छल। बादमे जाके ओ घटनासँ चोट पहुँचल्, ओ फ्लाइट अटेन्डेन्टउपर मुद्दा दर्ता केनए छल। 

  
 
 




#Article 349: जाम मिनार (192 words)


जाम मिनार (फारसी: ) या मीनार-ए-जाम (अङ्ग्रेजी: Minaret of Jam) पश्चिमी अफगानिस्तानक एक विश्व सम्पदा क्षेत्र छी । ई अफगानिस्तानक गोर प्रान्तक सहरक जिलामे हरी नदी (हरीरूद) क किनार खडा एक प्रसिद्ध ईंटा सँ बनल मिनार छी । ई ६५ मीटर उँच मीनार दिल्लीक कुतुब मिनारक बाद दुनियाक दोसर सब सँ उँच मिनार छी, हालांकि कुतुब मिनार वास्तवमे अहि मिनार सँ प्रेरित भ बनाएल गेल छल । मिनार-ए-जाम जाम नदी आ हरी नदीक सङ्गमक बगल मे अछि आ चारो दिस सँ २,४०० मिटर उँच पहुँचैवाला पहाडसभ सँ घेरल अछि । सन् ११९० क दशकमे बनल ई मिनार पर ईंट, गच पलस्तर (स्टक्को) आ टाइलसभ लागल अछि जाहिपर कुरानक आयत आ आकर्षक लकीर व आकृतिसभ बनाएल गेल अछि ।NATO Channel, Discover Afghanistan - The Minaret of Jam, August 2013, सन् २०१४ मे बिबिसी अपन एक प्रतिवेदनमे ई मिनारक स्थलगत निरीक्षणक बाद कहलक की ई खतरापूर्ण स्थितिमे पहुँच गेल अछि ।Afghan historic minaret of Jam 'in danger of collapse', 28 August 2014, By Mohammad Qazizada and Daud Qarizadah, 

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#Article 350: मोहन जोदडो (113 words)


मोहन जोदडो (, ) एकटा पुरातात्विक क्षेत्र छी जे पाकिस्तानक सिन्ध प्रान्तमा रहल अछि ।  एकरा दुनियाक सब सँ पुरान नियोजित आ उत्कृष्ट सहर मानल जाइत अछि । ई सिन्धु घाटी सभ्यताक सब सँ परिपक्व सहर छी । ई नगर अवशेष सिन्धु नदीक किनार सक्खर जिलामे स्थित अछि । मोहन जोदडो शब्दक सही उच्चारण छी 'मुअन जो दडो' । एकर खोज राखालदास बनर्जीद्वारा सन् १९२२ मे कएल गेल छल । भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षणक महानिर्देशक जन मार्शलक निर्देश पर खुदाईके कार्य शुरु भेल छल । यतय खुदाई के समय बहुत मात्रामे ईमारतसभ, धातुसभक मूर्तिसभ आ मुहरसभ आदि मिलल छल । पिछुलका १०० वर्षमे अखन धरि ई सहरक एक-तिहाई भागक मात्र खुदाई भेल अछि ।




#Article 351: फिफा विश्वकप (329 words)


फिफा विश्वकप फुटबल प्रतियोगिता प्रारम्भक कथा अन्तर्राष्ट्रिय फुटबल महासङ्घ फिफासँ जुड़ल अछि तहिने फिफाक कथा विभिन्न देशमे स्थापना भेल राष्ट्रिय फुटबल सङ्घसभक विकाससँ जुड़ल अछि । सन् १८६६ मे विश्वक पहिल राष्ट्रिय फुटबल सङ्घक रूपमे इङ्गल्यान्ड फुटबल एसोसिएसन (एफए) गठन भऽ गेल छल । किछ वर्षबाद अन्य देशसभमे सेहो धमाधम राष्ट्रिय फुटबल सङ्घसभक स्थापना होमए लागल । अहिना फुटबल खेल आ ओकर राष्ट्रिय सङ्घसभक विस्तार भऽ गेलाक बाद एकटा अन्तर्राष्ट्रिय फुटबल सङ्घक आवश्यकता सर्वत्र महसुस होमए लागल । अहि जरुरतक निकास खोजवाक क्रममे फ्रान्स, बेल्जियम, नेदरल्यान्ड्स, डेनमार्क, स्पेन, स्वीडेन आ स्विजरल्यान्ड समेत सात देशक प्रतिनिधि फ्रान्सक राजधानी पेरिसमे जम्मा भेल  । अहि सभाद्वारा २९ मई १९०४ मे फुटबलक सर्वोच्च संस्था अन्तर्राष्ट्रिय फुटबल महासङ्घ -फेडरेसन इन्टरनेशनल डे फुटबल एसोसिएसन, फिफाक औपचारकि गठन केलक । इङ्गल्यान्ड दुई वर्षबाद फिफा सदस्य बनल  । एकरबाद आर बहुतेक देशसभ सेहो एकर सदस्य होमएक क्रम चलल, जे अखनो जारी अछि । अखन दुई सय सँ बेसी देश फिफा सदस्य अछि । नेपाल सन् १९७० मे फिफाक पूर्ण सदस्य बनल छल ।

विश्वकप फुटबल प्रतियोगिताक आरम्भक श्रेय आधुनिक ओलम्पिक खेलकुद प्रतियोगिताक सफल सुरूवातके जाइत अछि । सन् १९०० मे भेल दोसर ओलम्पिक खेलकुदमे फुटबल पहिल बेर समावेश कएल गेल छल । ओलम्पिक फुटबलक सफलतासँ उत्साहित भऽ फिफा पदाधिकारीसभ अन्तर्राष्ट्रिय फुटबल प्रतियोगिता ओलम्पिकक घेराभितर सीमित नै राखैक निष्कर्ष निकाललक । वार्ता आरम्भ भेलाक बाद अन्ततः २६ मई १९२८ मे बैसल फिफा एम्स्टर्डम कङ्ग्रेसद्वारा युगान्तकारी निर्णय कएल गेल, जाहिमे हरेक चारि-चारि वर्षक अन्तरालमे फिफा सदस्य देशसभ बीच विश्वकप प्रतियोगिता आयोजना आरम्भ केनाए आ पहिल विश्वकप सन् १९३० मे करेबाक निचोड़ निकालल गेल । ताहि स्वरूप ओकर एक वर्षक बाद, सन् १९२९ कऽ बार्सिलोना फिफा कङ्ग्रेस ई ऐतिहासिक जिम्मेवारी पूरा करवाक दायित्व उरूग्वेके प्रदान केलक । फलस्वरूप, राजधानी मोन्टेभिडियोमे एक लाख दर्शक क्षमताक नवनिर्मित रङ्गशाला स्टेडियम डेल सेन्टेनारियोमे १३ जुलाई १९३० मे फ्रान्स आ मेक्सिकोबीच पहिल विश्व कपक पहिल म्याच विधिवत् उद्घाटन खेलक रूपमे सम्पन्न भेल छल । 

पहिल विश्वकप आयोजना होमएत काल फिफा सदस्य देश सङ्ख्या कूल ४१ छल । विश्वकप फुटबलसभ सँ बेसी देखल जाइवाला खेलकुद छी ।




#Article 352: जवाहरलाल नेहरू (117 words)


जवाहरलाल नेहरू (नवम्बर १४, १८८९ - मई २७, १९६४)क जन्म उत्तर प्रदेशक इलाहाबाद सहरमे भेल छल । ओ स्वतन्त्र भारतक प्रथम प्रधानमन्त्री छल। 

जवाहर लाल नेहरूक जन्म इलाहाबादमे एक धनाढ्य वकील मोतीलाल नेहरूक घरमे भेल छल । हुनकर माताक नाम स्वरूप रानी नेहरू छल । ओ मोतीलाल नेहरूक असगर पुत्र छल । हिनका छोडि मोती लाल नेहरूक तीन बेटी सेहो छल । नेहरू कश्मीरी वंशक सारस्वत ब्राह्मण छल । 

जवाहरलाल नेहरू विश्वक किछ बढिया विद्यालयसभ आ विश्वविद्यालयमे शिक्षा प्राप्त केनए छल । ओ अपन विद्यालय शिक्षा हैरो आ क्याम्पसक शिक्षा ट्रिनिटी कलेज, लण्डन सँ पूरा केनए छल । एकर बाद ओ अपन कानूनक डिग्री क्याम्ब्रिज विश्वविद्यालय सँ पूरा केलक । बेलायतमे ओ सात साल व्यतीत केलक ।




#Article 353: लालबहादुर शास्त्री (292 words)


 लालबहादुर शास्त्री (जन्म: २ अक्टुबर १९०४ मुगलसराय - मृत्यु: ११ जनवरी १९६६ तासकन्द), भारतक दोसर प्रधानमन्त्री छल । ओ ९ जुन १९६४ सँ ११ जनवरी १९६६ धरि लगभग अठारह महिना भारतक प्रधानमन्त्री रहल । ई प्रमुख पद पर हुनकर कार्यकाल अद्वितीय रहल ।

भारतक स्वतन्त्रताक पश्चात शास्त्रीजी उत्तर प्रदेशक संसदीय सचिवक रूपमे नियुक्त कएल गेल छल । गोविन्द बल्लभ पन्तक मन्त्रिमण्डलमे हुनका पुलिस आ परिवहन मन्त्रालय सौंपल गेल छल । परिवहन मन्त्रीक कार्यकालमे ओ प्रथम बेर महिला संवाहकसभ (कन्डक्टर्स)क नियुक्ति केनए छल । पुलिस मन्त्री होमएक बाद ओ भीड नियन्त्रणमे राखैक लेल लाठीक स्थान पानिक बौछारक प्रयोग प्रारम्भ करौलक । सन् १९५१ मे, जवाहरलाल नेहरूक नेतृत्वमे ओ अखिल भारत काङ्ग्रेस कमेटीक महासचिव नियुक्त कएल गेल । ओ सन् १९५२, १९५७ व १९६२ क चुनावसभमे काङ्ग्रेस पार्टीक भारी बहुमत सँ जिताबैक लेल बहुत परिश्रम केनए छल ।

जवाहरलाल नेहरूके कार्यकालक दौरान सन् २७ मई, १९६४ को देहावसान भेलाक बाद साफ सुथरी छविक कारण शास्त्रीजीके सन् १९६४ मे देशक प्रधानमन्त्री बनाएल गेल । ओ ९ जुन १९६४ क दिन भारतक प्रधानमन्त्रीक पद भार ग्रहण केनए छल । 

हुनकर शासनकालमे सन् १९६५ क भारत पाक युद्ध शुरू भेल छल । अहि सँ तीन वर्ष पूर्व चीनक युद्ध भारत हारि चुकल छल । शास्त्रीजी अप्रत्याशित रूप सँ भेल ई युद्धमे नेहरूक मुकाबलामे राष्ट्रके उत्तम नेतृत्व प्रदान केलक आ पाकिस्तानके करारी शिकस्त देबएमे सफल रहल । 

तासकन्दमे पाकिस्तानक राष्ट्रपति अयुब खानक संग युद्ध समाप्त करेवाक समझौता पर हस्ताक्षर करैक बाद ११ जनवरी १९६६ क रातिमे हुनकर रहस्यमय परिस्थितिमे मृत्यु भऽ गेल ।

हुनकर सादगी, देशभक्ति आ ईमानदारीक लेल मरणोपरान्त भारत रत्न सँ सम्मानित कएल गेल ।

लालबहादुर शास्त्रीक जन्म सन् १९०४ मे मुगलसराय (उत्तर प्रदेश) मे मुन्शी शारदा प्रसाद श्रीवास्तवक घर भेल छल । हुनकर पिता प्राथमिक विद्यालयमे शिक्षक छल अत: सब हुनका मुन्शीजी कहैत छल । 




#Article 354: मोरारजी देसाई (111 words)


मोरारजी देसाई (२९ फ्रवरी १८९६ – १० अप्रैल १९९५) (गुजराती: મોરારજી રણછોડજી દેસાઈ) भारतक स्वाधीनता सेनानी आ चारिम प्रधानमन्त्री (सन् १९७७ सँ १९७९) छल । ओ प्रथम प्रधानमन्त्री छल जे भारतीय राष्ट्रिय काङ्ग्रेसक नै भए अन्य दल सँ छल । ओ एकमात्र व्यक्ति छी जे भारतक सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न आ पाकिस्तानक सर्वोच्च सम्मान निशान-ए-पाकिस्तान सँ सम्मानित कएल गेल अछि । 

ओ ८१ वर्षक आयुमे प्रधानमन्त्री बनल छल । एकर पूर्व कतेकौ बेर ओ प्रधानमन्त्री बनिक कोशिश केलक मुदा असफल रहल । मोरारजी देसाई मार्च १९७७ मे देशक प्रधानमन्त्री बनल मुदा प्रधानमन्त्रीक रूपमे हिनकर कार्यकाल पूर्ण नै भ सकल। चौधरी चरण सिंह सँ मतभेदक कारण हुनका प्रधानमन्त्री पद छोड पडल ।




#Article 355: मयूर (110 words)


मयूर () ग्यालिफर्म्स वर्गक पक्षी छी । एकर मूल वासस्थान दक्षिणी आ दक्षिणपूर्वी एसिया छी । ई पक्षी अन्य चिरईचुरुङ्गी जोका खुला वनमे बसोबास करैत अछि । अङ्ग्रजीमे मर्द मयूरके  आ मादाके  कहल जाइत अछि । पुरुष मयूरक सुन्दर आ बुलु, हरियर तथा सुनौला लगायतक रङ्ग-बिरङ्गी पाइख सँ बनल डेन आ पूच्छर होइत अछि, जेकरा मयूरद्वारा विशेष रूप सँ वसन्त तथा वर्षाक मौसममे (जाहि समयमे ई सभ प्रजनन प्रक्रिया शुरु होइत अछि) औरत मयूरके उत्सुक करैक लेल नाचैत अछि ।

मयूरक मुख्यत: भारतीय बुलु मयूर आ हरियर मयूर करि दू प्रजाति रहल अछि । भारतीय बुलु मयूर दक्षिण एसियामे पाबल जाइत अछि, जे भारत आ श्रीलंकाक राष्ट्रिय पक्षी  छी । 




#Article 356: रोहतास किला (117 words)


रोहतास किला ( Qila Rohtas) पाकिस्तानक पञ्जाब प्रान्तक झेलम सहरमे स्थित एक ऐतिहासिक ग्यारिसन किला छी । ई किला सोलाहम शताब्दीमे अफगान राजा शेर शाह सुरी] बनौलक जाहि सँ उत्तरी पञ्जाब क्षेत्रक विद्रोही जनजातिसभक वशमे करि सकी । ई किला ४ किमी परिधिमे अछि । 

ई किला निर्माण करैमे आठ वर्षक समय लागल छल, मुगल सम्राट हुमायुँ एकरा सन् १५५५ मे कब्जा केनए छल ।नदिर शाह, पर्सियाक शासकवर्ग, अफगान शासक अहमद शाह अब्दाली आ मराठा सेना सेहो विभिन्न समयमे ई किलाके कब्जामे लेने छल । रोहतास किला शिख शासक रञ्‍जित सिंहक प्रशासनिक काजक लेल सेहो सन् १८२५ मे प्रयोगमे आएल छल ।

ई रोहतास किलामे निम्न १२ टा फाटकसभ अछि । ओ फाटकसभक नाम एहि प्रकार अछि:-




#Article 357: तक्षशिला (135 words)


तक्षशिला (, ) प्राचीन भारतमे गान्धार राज्यक राजधानी तथा वर्तमानमे पाकिस्तानक पञ्जाब राज्यक रावलपिण्डी जिलामे अवस्थित एक पुरातात्विक स्थान छी । ई स्थान बौद्ध तथा हिन्दु दुनू धर्मक केन्द्रविन्दु छल । सन् १९८० मे युनेस्को ई क्षेत्रके विश्व सम्पदा क्षेत्र घोषित केनए छल । ई पाकिस्तानक सभ सँ बेसी पर्यटक आबैवाला स्थान छी ।

तक्षशिलाक नाम रामक भाई भरतक दू बेटासभ मे सँ एकक नाम सँ रहल कथन उल्लेख अछि । भरतक दू बेटा छल तक्ष आ पुष्कर । तक्ष सिन्धु नदीक एकदिस तक्षशिला वा तक्षखण्डक
स्थापना केलक । पुष्करद्वारा नदीक दोसरदिस पुष्करावती राजधानी बनाए राज्य केलक । ई विवरण रामायणमे मिलल अछि । तक्षशिला गान्धारक राजधानीक रुपमे रहल बात महाभारतमे सेहो उल्लेख  अछि । सर्प यज्ञ कएल स्थान सेहो एतय मानल जाइत अछि । तहिलेल परीक्षितके राज्यारोहण कएल स्थान सेहो एहि होवाक चाही ।  




#Article 358: मिला कुनिज (217 words)


मिला कुनिज (अङ्ग्रेजी: Milena Markovna Mila Kunis) (;जन्म: अगस्ट १४, १९८३) अमेरिकी अभिनेत्री छी। सन् १९९१ मे सात वर्षक उमेरम परिवारसँ वओ सोभियत युनियनसँ लस एन्जलस चैल गेल। विद्यालय समाप्तक वओ अभिनय कक्षासभ्मे भर्ना भेल आर बहत जल्दी एजेन्टसभद्वारा बोलाव लगल । विभिन्न टेलिचलचित्र आर विज्ञापनसभक भुमिका केनए छल आर १५ वर्ष नपुग्दै 'द्‌याट सेभेन्टीज शो' म अभिनयक ओ चर्चामे आव सफल भेल छल । सेप्टेम्बर १९९९ मे ओ 'फ्यामिली गाय' (एक एनिमेटेड टेलिभिजन चलचित्र) 'मेग ग्रिफिन'क रुपम स्वर भूमिकामे प्रस्तुत भेल ।
सन् २००८ मे ओ फिल्मी पर्दाक चलचित्र 'फरगेटिङ सारा मारसल'म 'रेचल जेनसन'क भूमिका रह्यो  पश्चात् ओ बहत अन्य भुमिकासभ निभने अछि । अन्य चलचित्रसभ्मे 'म्याक्स प्यान'मे 'मोना स्याक्स', 'बुक्स अफ एली'मा 'सोलेरा', 'फ्रेन्डस विथ बेनिफिट्स'म 'जेमी', 'टेड'म 'लोरि' आर 'ओज, द ग्रेट एन्ड पओरफुलमा'म 'विइकेड विच अफ वेस्ट (थियोडोरा)'क रुपमे हुन्कर भूमिका रहल।

'ब्लायक स्वान'मे 'लिल्ली'क भुमिका हुन्कर विश्वमे प्रशंसाक पात्र जहिमे ६७अम भेनिश अन्तरराष्ट्रिय चलचित्र महोत्सवम 'बेस्ट योङ एयाक्टर/एयाक्टरेस' जितैम सफल भेलखिन । तहिना 'गोलडेन ग्लोब अवार्ड फर बेस्ट सपोर्टिङ एयाक्टरेस' आर 'इस्क्रिन एयाक्टरस गिल्ड अवार्ड फर आउट स्ट्यान्डिङ पर्फरमेनस फर फेमल एयाक्टर'मे सेहो छनौटम  परल छेल्हिन ।

कुनिजक जन्म 'चेर्नीब्त्सी', सोभियत संघ (हाल:युक्रेन)मे भेल छल ।
हुन्कर माता आमा एलभिरा, फिजिक्स शिक्षिका छी आर बाबू मार्क कुनिज मेकानिकल इन्जिनियर छी, जे एकटा ट्याक्सी चालक अछि ।
कुनिजकी दाजुको नाम माइकल हो ।




#Article 359: राजीव गान्धी (155 words)


राजीव गान्धी (; २० अगस्त १९४४ – २१ मई १९९१), इन्दिरा गान्धीक पुत्र आ जवाहरलाल नेहरूक दौहित्र (नाती) आ भारतक सातम् प्रधानमन्त्री छल ।

सन् १९८४मे इन्दिरा गान्धीक हत्याक बाद हुनकर पुत्र राजीव गान्धी भारी बहुमतक सँ भारतक प्रधानमन्त्री बनल छल । एकर बाद सन् १९८९ क आम चुनावमे काङ्ग्रेसक पराजय भेल आ पार्टी दुई साल धरि विपक्षमे रहल छल । सन् १९९१ कऽ आम चुनावमे प्रचारक समय तमिलनाडुक श्रीपेरम्बदुरमे एक भयङ्कर बम विस्फोटमे राजीव गान्धीक मृत्यु भऽ गेल ।

राजीवक विवाह एन्टोनिया माईनो सँ भेल जे ओ समय इटालीक नागरिक छल । विवाहोपरान्त हुनकर पत्नी अपन नाम बदलि सोनिया गान्धी करि लेलक । कहल जाइत अछि कि राजीव गान्धीसँ हुनकर परिचय तब भेल जखन राजीव क्याम्ब्रिजमे पढ़क लेल गेल छल । हुनकर विवाह सन् १९६८ मे भेल जकर बाद ओ भारतमे रहऽ लागल । राजीव आ सोनियाक दुई बच्चा अछि, पुत्र राहुलक जन्म सन् १९७० आ पुत्री प्रियङ्काक जन्म सन् १९७१मे भेल छल ।




#Article 360: इन्द्र कुमार गुजराल (106 words)


इन्द्र कुमार गुजराल (अङ्ग्रेजी: I. K. Gujral जन्म: ४ दिसम्बर १९१९, झेलम - मृत्यु: ३० नवम्बर २०१२, गुडगाँव) भारतीय गणराज्यक १२अम प्रधानमन्त्री छल । ओ भारतीय स्वतन्त्रता सङ्ग्राममे सक्रिय रूप सँ हिस्सा लेनए छल आ सन् १९४२ क भारत छोडो आन्दोलनक दौरान ओ जेल सेहो गेल छल । अप्रैल १९९७ मे भारतक प्रधानमन्त्री बनि सँ पहिने ओ केन्द्रीय मन्त्रिमण्डलमे विभिन्न पदसभ पर काम केनए छल । ओ सञ्जचार मन्त्री, संसदीय कार्य मन्त्री, सूचना प्रसारण मन्त्री, विदेश मन्त्री आ आवास मन्त्री जोक महत्वपूर्ण पदसभ पर रहल छल । राजनीतिमे आबै सँ पहिने ओ किछ समय धरि बिबिसीक हिन्दी सेवामे एक पत्रकारक रूपमे सेहो काम केनए छल ।




#Article 361: फिल्मफेयर उत्कृष्ट नव महिला कलाकारक लेल पुरस्कार (103 words)


फिल्मफेयर उत्कृष्ट नव महिला कलाकारक लेल पुरस्कार फिल्मफेयरद्वारा वार्षिक रूपमे प्रदान कएल जाइत अछि । हिन्दी चलचित्रमे नव महिला कलाकारद्वारा उत्कृष्ट अभिनयके ई पुरस्कारद्वारा सम्मानित कएल जाइत अछि ।

सन् १९८९ मे ई पुरस्कारक नाम फिल्मफेयर लक्स न्यु फेस अफ द इअर पुरस्कार कहि राखल गेल । तबुके सन् १९९५ मे उत्कृष्ट नव महिला कलाकारक रूपमे विशेष पुरस्कार देल गेल । सन् १९९९ मे ई पुरस्कार प्रीति जिन्टाके देला बाद एकर नाम परिवर्तन करि फिल्मफेयर उत्कृष्ट नव महिला कलाकारक लेल पुरस्कार राखल गेल । पहिल बेर से शीर्षक जित्नेहार महिला कलाकार नन्दिता दास भेल । अन्तिम बेर ई शिर्षक भूमि पेडनेकर जितिलखिन ।




#Article 362: फिल्मफेयर पुरस्कार (124 words)


फिल्मफेयर पुरस्कार भारतक व्यावसायिक हिन्दी भाषा चलचित्र उद्योग अन्तर्गत कलात्मक आ प्राविधिक क्षेत्रमे उत्कृष्टताके सम्मान करिक उद्देश्य सँ टाइम्स ग्रुपद्वारा प्रत्येक वर्ष एकर आयोजन कएल जाइत अछि । फिल्मफेयर पुरस्कार समारोह भारतीय चलचित्र इतिहासक सब सँ पुरान आ प्रमुख पुरस्कार मे सँ एक छी । एकर शुरुआत सब सँ पहिने सन् १९५४ मे भेल छल जब राष्ट्रिय चलचित्र पुरस्कारक सेहो स्थापना भेल छल ।   पुरस्कार जनताक मत आ निर्णायक समितिक सदस्यसभक मतक आधारमे प्रत्येक वर्ष तय कएल जाइत अछि ।

एकर प्रारम्भ फिल्मफेयर पत्रिकामे लोकप्रिय अभिनेता आ अभिनेत्रीसभ उपर कराएल गेल पाठकसभक मतदानद्वारा सन् १९५३ मे भेल छल । ओ समय लगभग २०,००० पाठकसभ एहिमे भाग लेने छल । २१ मार्च १९५४ मे भेल पहिल पुरस्कार समारोहमे मात्र पाँच लाख पुरस्कार राखल गेल छल। 




#Article 363: ड्यारेन क्रिस (102 words)


ड्यारेन एभरेट् क्रिस् (जन्म: ५ फेब्रुवरि, १९८७) एक अमेरिकी अभिनेता, गायक, गीतकार र संगीतकार छि। वो  शिकागो अवस्थित स्टारकिड प्रोडक्शन्स् नामक एक मिडिया आर संगीत थिएटर निर्माण कम्पनीको सह-संस्थापक आर सह-सञ्चालक सहो छि। वो विशेष  फक्सक टिभि श्रृंखला ग्लीम ब्लेन एंडरसन, एक उच्च विद्यालयको समलैंगिक छात्र,क भुमिका निर्भाह करवाक लेल चिन्हल जायेत अछि।

क्रिसले पहिल बेर स्टारकिडक सांगीतिक नाटक, अ भेरि पट्टर म्युजिकल आर वोकर वाद  अ भेरि पट्टर सिक्वलम ह्यारी पट्टरक प्रमुख भूमिका कक  सबक ध्यान खिचन्र छल। जनवरी २०१२ म वो अपन ब्रडवे शुरुवात, हाउ टु सक्सिड इन बिजनेस विथाउट रियल्ली ट्राइन्ग नाटकमा जे. पिएरपोन्ट फिन्चको भूमिका सं केनेए छल।




#Article 364: नेपालक मन्त्रिमण्डलसभ (1355 words)


नेपालम राणा शासनक अन्त्य पश्चात् पहिल मन्त्रिपरिषद्क गठन भेल अछी । तैपश्चात गठन भेल मन्त्रिपरिषद्क विवरण ई प्रकार अछी।
 मन्त्रिपरिषद : वि.सं. २००७-२०१० 

पुनर्गठन २००८ जेठ 

सहायकमन्त्री

कीर्तिनिधि बिष्ट 

गेहेन्द्र बहादुर राजभण्डारी प्रथम मन्त्री

नगेन्द्रप्रसाद रिजाल

डा तुल्सी गिरी

 

 

 

लोकेन्द्रबहादुर चन्द

नगेन्द्रप्रसाद रिजाल

मनमोहन अधिकारी -प्रधानमन्त्री राजदरवार र सामान्य प्रशासन

माधव कुमार नेपाल- उपप्रधानमन्त्री रक्षा र परराष्ट्र

सिपी मैनाली- स्थानीय विकास तथा आपूर्ति

केपी ओली - गृह

भरत मोहन अधिकारी- अर्थ

राधाकृष्ण मैनाली- कृषि तथा भूमिसुधार

मोदनाथ प्रश्रित- शिक्षाऽ संस्कृति तथा समाजकल्याण

प्रदीप नेपाल-सूचना तथा सञ्चार

पद्मरत्न तुलाधर- श्रम तथा स्वास्थ्य

राज्यमन्त्री

अशोक कुमार राई- निर्माण तथा भौतिक योजना यातायात

सलिम मियाँ अन्सारी- वन तथा वातावरण

प्रेमसिंह धामी- भौतिक योजना तथा आवास

सुभासचन्द्र नेम्बाङ- कानून न्याय तथा संसदीय व्यवस्था

भीम रावल - नागरिक उड्यान तथा पर्यटन

हरि पाण्डे- उद्योग तथा जलस्रोत

गिरिजा प्रसाद कोइराला
गिरिजा प्रसाद कोइराला

सूर्यबहादुर थापा

गिरिजा प्रसाद कोइराला- प्रधानमन्त्री रक्षा

मन्त्री

राज्यमन्त्री

नेपालको अन्तरिम संविधान, २०६३को धारा ३८ बमोजिम सम्माननीय प्रधानमन्त्री श्री माधवकुमार नेपालद्वारा गठित मन्त्रिपरिषद्को कार्यविभाजन
मन्त्रिपरिषद् गठन विधि र कार्य विभाजन

मन्त्रीहरू

राज्यमन्त्रीहरू

सहायक मन्त्री

पुनर्गठन मिति: २०६६/२/२१, २०६६/३/३, २०६६/३/१०, २०६६/३/१९, ०६६/४/१४ , २०६६/५/१७ र २०६६/५/२६

पुनर्गठन (२०६७ फागुन)

पुनर्गठन (२०६८/१/२१)

१ श्री झलनाथ खनाल - प्रधानमन्त्री

माननीय उपप्रधानमन्त्री - 

२ श्री भरतमोहन अधिकारी - अर्थ; वाणिज्य तथा आपूर्ति

३ श्री कृष्णबहादुर महरा - गृह

४ श्री उपेन्द्र यादव - परराष्ट्र

माननीय मन्त्रीहरू - 

५ श्री विष्णुप्रसाद पौडेल - रक्षा

६ श्री टोपबहादुर रायमाझी - भौतिक योजना तथा निर्माण

७ श्री अग्निप्रसाद सापकोटा - सूचना तथा सञ्चार

८ श्री शक्तिवहादुर बस्नेत - स्वास्थ्य तथा जनसंख्या

९ श्री खड्गबहादुर विश्वकर्मा - पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन

१० श्रीमती उर्मिला अर्याल - स्थानीय विकास

११ श्री गङ्गालाल तूलाधर - शिक्षा; विज्ञान तथा प्रविधि

१२ श्री रघुवीर महासेठ - सिँचाई

१३ श्री गोकर्ण विष्ट - ऊर्जा

१४ श्री भानुभक्त जोशी - वन तथा भू-संरक्षण

१५ श्री घनश्याम भुसाल - कार्यभार पछि तोकिने

१६ श्री युवराज कार्की - सामान्य प्रशासन

१७ श्री विश्वनाथ शाह - शान्ति तथा पुनर्निर्माण

१८ श्री जयपुरी घर्ती - महिला, बालबालिका तथा समाजकल्याण

१९ श्री रामचरण चौधरी - भूमीसुधार तथा व्यवस्था

२० श्री महेन्द्र पासवान - उद्योग

२१ श्री प्रभु साह - कानून तथा न्याय

२२ श्री हितवहादुर तामाङ - युवा तथा खेलकुद

२३ श्री हरिनारायण यादव - कृषि तथा सहकारी

२४ श्री मोहम्मद इस्तियाक राईन - श्रम तथा यातायात

२५ श्री सुनीलकुमार मानन्धर - वातावरण

२६ श्री खगेन्द्रप्रसाद प्रसाई - सङ्घीय मामिला, संविधान सभा, संसदीय व्यवस्था तथा संस्कृति

माननीय राज्यमन्त्रीहरू 

२७ श्री शत्रुघन महतो - स्थानीय विकास

२८ श्री दलवहादुर सुनार - सिँचाई

२९ श्री रामजी शर्मा - ऊर्जा

३० श्री डम्वर साम्वाहाम्फे - सामान्य प्रशासन

३१ श्रीमती भगवती चौधरी - वन तथा भू-संरक्षण

३२ श्री हकिकुल्लाह खाँ - भूमीसुधार तथा व्यवस्था

३३ श्री देवी खड्का - भौतिक योजना तथा निर्माण

३४ श्री धर्मशिला चापागाई - स्वास्थ्य तथा जनसंख्या

३५ श्री ध्रुव आङदाम्बे लिम्वु - पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन

३६ श्री नन्दनकुमार दत्त - कृषि तथा सहकारी

१ डा. बाबुराम भट्टराई - प्रधानमन्त्री

उपप्रधानमन्त्रीहरू

२ श्री विजयकुमार गच्छदार - गृह र रक्षा

३ श्री नारायणकाजी श्रेष्ठ - परराष्ट्र

मन्त्रीहरू

४ श्री जयप्रकाश प्रसाद गुप्ता - सूचना तथा सञ्चार

५ श्री हृदयेश त्रिपाठी - भौतिक योजना तथा निर्माण

६ श्री पोष्टबहादुर बोगटी - ऊर्जा

७ श्री टोपबहादुर रायमाझी - स्थानीय विकास

८ श्री राजेन्द्र महतो - स्वास्थ्य तथा जनसङ्ख्या

९ श्री बर्षमान पुन - अर्थ

१० श्री दीनानाथ शर्मा - शिक्षा

११ श्री महेन्द्रप्रसाद यादव - सिंचाई

१२ श्री लोकेन्द्र विष्ट मगर - पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन

१३ श्री गोपाल किराँती - सङ्घीय मामिला, संविधानसभा, संसदीय व्यवस्था तथा संस्कृति

१४ श्री लेखराज भट्ट - वाणिज्य तथा आपूर्ति

१५ श्री भीमप्रसाद गौतम - भूमिसुधार तथा व्य.

१६ श्री रामकुमार यादव - सामान्य प्रशासन

१७ श्री अनिलकुमार झा - उद्योग

१८ श्री वृजेशकुमार गुप्ता - कानून तथा न्याय

१९ श्री हेमराज तातेड - वातावरण

२० श्री नन्दन कुमार दत्त - कृषि तथा सहकारी

२१ श्री कमला रोका - युवा तथा खेलकुद

२२ श्री राजलाल यादव - कार्यभार पछि तोकिने

२३ श्री मुहम्मद वकील मुसलमान - वन तथा भू-संरक्षण

२४ श्री दानबहादुर कुर्मी चौधरी - महिला, बालबालिका तथा समाजकल्याण

२५ श्री सरिता गिरी - श्रम तथा यातायात व्यवस्था

२६ श्री कल्पना धमला - विज्ञान तथा प्रविधि

२७ श्री सत्य पहाडी - शान्ति तथा पुनर्निर्माण

राज्यमन्त्रीहरू

२८ श्री खोभारी राय - उद्योग

२९ श्री रामबच्चन अहिर(यादव) - रक्षा

३० श्री सरोजकुमार यादव - स्वास्थ्य तथा जनसङ्ख्या

३१ श्री दिलीप महर्जन - पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन

३२ श्री विष्णुप्रसाद चौधरी - वाणिज्य तथा आपूर्ति

३३ श्री सूर्यमान दोङ - ऊर्जा

३४ श्री लीला भण्डारी - शिक्षा

३५ श्री गोपी आछामी - युवा तथा खेलकुद

३६ श्री घनश्याम यादव - स्थानीय विकास

३७ श्री ज्वाला साह - भूमिसुधार तथा व्य.

३८ श्री सुषमा शर्मा - सङ्घीय मामिला, संविसंसदीय व्यवस्था तथा संस्कृति

३९ श्री हरिराज लिम्बु - अर्थ

४० श्री सुनिताकुमारी महतो - सामान्य प्रशासन

४१ श्री भीमराज चौधरी राजबंशी - गृह

४२ श्री लक्ष्मण महतो - वन तथा भू–संरक्षण

४३ श्री दुर्गादेवी महतो (धानुक) - वातावरण

४४ श्रीमती काशी देवी झा - कानून तथा न्याय

४५ श्री ईश्वर दयाल मिश्र - भौतिक योजना तथा निर्माण

४६ श्री अरविन्द साह - महिला, बालबालिका तथा समाज कल्याण

४७ श्री रमणीराम - सिँचाई

४८ श्री सुरीताकुमारी साह - सूचना तथा सञ्चार

४९ श्री ओमप्रकाश यादव - कृषि तथा सहकारी

(मूल लेख अन्तरिम चुनावी मन्त्रीपरिषद् २०६९)

१ सम्माननीय खिलराज रेग्मी, मन्त्रिपरिषद् अध्यक्ष, रक्षा; सहकारी तथा गरीबी निवारण

मन्त्रीहरू

२ श्री माधवप्रसाद घिमिरे - गृह र परराष्ट्र

३ श्री हरिप्रसाद न्यौपाने - कानून, न्याय, संविधानसभा तथा संसदीय मामिला र श्रम तथा रोजगार

४ श्री ऋद्धिबाबा प्रधान - महिला, वालवालिका तथा समाजकल्याण र भूमिसुधार तथा व्यवस्था 

५ श्री विद्याधर मल्लिक - सङ्घीय मामिला तथा स्थानीय विकास र स्वास्थ्य तथा जनसंख्या 

६ श्री माधवप्रसाद पौडेल - सामान्य प्रशासन; सूचना तथा सञ्चार र शिक्षा 

७ श्री शंकरप्रसाद कोइराला - अर्थ; उद्योग र वाणिज्य तथा आपूर्ति 

८ श्री छविराज पन्त - भौतिक पुर्वाधार तथा यातायात र सहरी विकास 

९ श्री टेकबहादुर थापा (घर्ती) - कृषि विकास र वन तथा भू-संरक्षण 

१० श्री रामकुमार श्रेष्ठ - युवा तथा खेलकुद; शान्ति तथा पुननिर्माण र संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन 

११ श्री उमाकान्त झा - उर्जा; विज्ञान, प्रविधि तथा वातावरण र सिंचाइ 

महिला, बालबालिका तथा समाजकल्याण, रक्षा, वाणिज्य तथा आपूर्ति, विज्ञान,प्रविधि तथा वातावरण, शान्ति तथा पुननिर्माण, सहकारी तथा गरिबी निवारण, श्रम तथा रोजगार

	

नेपालको संविधानको धारा २९८ को उपधारा (४), (५) र (६) बमोजिम सम्माननीय प्रधानमन्त्री के.पी. शर्मा ओलीको नेतृत्वमा मिति २०७२/६/२५मा गठित मन्त्रिपरिषद‌्मा देहाय अनुसार नियुक्ति, हेरफेर र कार्य विभाजन भएको छ । २०७२ पौष ९।
सम्माननीय प्रधानमन्त्री
१.श्री के.पी.शर्मा ओली - सहरी विकास
माननीय उपप्रधानमन्त्री
२.श्री विजयकुमार गच्छदार - भौतिक पूर्वाधार तथा यातायात
३.श्री कमल थापा - परराष्ट्र र सङ्घीय मामिला तथा स्थानीय विकास
४. श्री भीमवहादुर रावल - रक्षा
५.श्री चन्द्रप्रकाश मैनाली - महिला, बालबालिका तथा समाजकल्याण
६.श्री चित्रबहादुर के.सी. - सहकारी तथा गरिबी निवारण
७.श्री टोपबहादुर रायमाझी - ऊर्जा
माननीय मन्त्री
८.श्री विष्णुप्रसाद पौडेल - अर्थ
९.श्री प्रेमबहादुर सिंह - खानेपानी तथा सरसफाई
१०.श्री दीपक बोहरा - श्रम तथा रोजगार र वाणिज्य
११.श्री गिरिराजमणि पोखरेल - शिक्षा
१२.श्री अग्निप्रसाद सापकोटा - वन तथा भू-संरक्षण
१३.श्री शक्तिबहादुर बस्नेत - गृह
१४.श्री एकनाथ ढकाल - शान्ति तथा पुननिर्माण
१५.श्री सत्यनारायण मण्डल - युवा तथा खेलकुद
१६.श्री अग्नि प्रसाद खरेल - कानुन, न्याय, तथा संसदीय मामिला
१७.श्री सोमप्रसाद पाण्डेय - उद्योग
१८.श्री हरिबोल प्रसाद गजुरेल - कृषि विकास
१९.श्री रामकुमार सुब्बा - भूमिसुधार तथा व्यवस्था
२०.श्री रामजनम चौधरी - स्वास्थ्य
२१.श्री शेरधन राई - सूचना तथा सञ्चार
२२.श्री शान्ता मानवी - पशुपंक्षी विकास
२३.श्री रेखा शर्मा - सामान्य प्रशासन
२४.श्री गणेशमान पुन - आपूर्ति
२५.श्री उमेश कुमार यादव - सिँचाइ
२६.श्री आनन्दप्रसाद पोखरेल - संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन
२७.श्री विश्वेन्द्र पासवान - जनसङ्ख्या तथा वातावरण
२८.श्री शिवलाल थापा - विज्ञान तथा प्रविधि
माननीय राज्यमन्त्री
२९.श्री मेघराज नेपाली (निषाद) - उद्योग
३०.श्री मो. मुस्ताक आलम - स्वास्थ्य
३१.श्री विक्रमबहादुर थापा - भूमिसुधार तथा व्यवस्था
३२.श्री कुन्तीकुमारी शाही - सङ्‌घीय मामिला तथा स्थानीय विकास
३३.श्री दिनेशचन्द्र यादव - खानेपानी तथा सरसफाई
३४.श्री दामोदर भण्डारी - अर्थ
३५.श्री बलबहादुर महत - संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन
३६.श्री नरदेवी पुन मगर - पशु विकास
३७.श्री मञ्जुकुमारी चौधरी - सहरी विकास
३८.श्री दिपनारायण साह - शान्ति तथा पुननिर्माण
माननीय सहायकमन्त्री
३९.श्री दिनेश श्रेष्ठ - भूमिसुधार तथा व्यवस्था
४०.श्री विराज विष्ट - सङ्‌घीय मामिला तथा स्थानीय विकास
मन्त्रिपरिषद् गठनः २०७२/६/२५, ७/१, ७/१९, ७/२३ , ९/ ९
श्रोत : प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालय




#Article 365: एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रिय (145 words)


एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रिय (सङ्क्षिप्त रुप: ओडिआई) क्रिकेटक एकटा स्वरूप छी । जे दुई क्रिकेट टिमक बिचमे प्रत्येक टिम ५० ओभरक खेल खेलैत अछि । क्रिकेट विश्वकप एहि ढाँचामे खेलल जाइत अछि । एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रिय म्याचके लिमिटेड ओभर इन्टरनेसनल क्रिकेट सेहो कहल जाइत अछि कियाकी दुनु टिमक बीच सिमित ओभरक क्रिकेट म्याच खेलल जाइत अछि ।

अन्तर्राष्ट्रिय एकदिवसीय खेलक विकास २०अम शताब्दीक अन्तमे भेल छल । पहिल एकदिवसीय म्याच मेलबोर्न क्रिकेट ग्राउन्डमे ५ जनवरी १९७१ क दिन अस्ट्रेलिया आ इङ्ल्यान्डक बीच खेलल गेल छल । ई दुनु टिम बीच चालू तेसर टेस्ट म्याचक पहिलो तीन दिन वर्षा सँ प्रभावित भेला बाद खेल अम्पायर तथा रेफ्री म्याचके समाप्त करैक निर्णय केलक आ ओहि म्याचक स्थानमे ६ बल प्रति ओभरक प्रत्येक टिमक लेल ४० ओभरक एकदिवसीय म्याच करैक निर्णय केलक । एहि प्रकार एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रिय म्याचक जन्म भेल । अस्ट्रेलिया ई म्याच ५ विकेट सँ जित इतिहास बनेलक ।




#Article 366: ट्वान्टी२० अन्तर्राष्ट्रिय (249 words)


ट्वान्टी२० अन्तर्राष्ट्रिय (टि२०आई उच्चारण टिट्वान्टीआई) क्रिकेटक एकटा रूप छी जे दुई राष्ट्रिय क्रिकेट टिम बीच खेलल जाइवाला २० ओभरक एक प्रतियोगिता छी । ई खेल ट्वान्टी२० क्रिकेटक नियम अन्तर्गत खेलल जाइत अछि । पहिल ट्वान्टी२० अन्तर्राष्ट्रिय खेल १७ फरबरी २००५ मे अस्ट्रेलिया तथा न्युजिल्यान्ड बीच इडेन पार्क अकल्यान्डमे खेलल गेल छल जाहिमे अस्ट्रेलिया ४४ रन सँ विजयी भेल छल । अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेट परिषदद्वारा जारी पहिल आधिकारिक क्रमाङ्कमे इङ्गल्याण्ड शीर्ष स्थानमे रहल छल ।

टेस्ट क्रिकेट खेलैवाला १० राष्ट्र (जे आइसिसीक पूर्ण सदस्य सेहो छी)के स्थायी टि२०आई दर्जा प्राप्त अछि । निचा उल्लेखित टिमसभक पहिल टि२०आई सुरु भेल मिति कोष्ठकमे दर्साएल गेल अछि:

सन् २००५ सँ आइसिसीद्वारा ओडिआई तथा टि२०आई दर्जा ६ अन्य टिमसभ (क रुपमे रहल)के देत आएल अछि । कोनो भी टिम ओ अस्थायी दर्जा ४ वर्षक लेल प्राप्त करैलेल आइसिसी क्रिकेट लिग चौवर्षीय प्रदर्शनक आधारमे प्राप्त करि सकैत अछि – वा, आइसिसी विश्वकप छनौट प्रतियोगिताक अन्तिम ६ टिम बनि प्राप्त करि सकैत अछि । आइसिसी विश्वकप छनौट प्रतियोगिता विश्व क्रिकेट लिगक अन्तिम प्रतियोगिता छी । सन् २०१४ जुन २८ मे आइसिसी नेपाल तथा नेदरल्यान्डके टि२०आई दर्जा प्रदान केनए छल, दुनु टिम जुन २०१४ आइसिसी वर्ल्ड ट्वान्टी-ट्वान्टीमे छनौट तथा सहभागी भेल छल ।निम्नलिखित ८ टिमसभ वर्तमानमे ई दर्जा प्राप्त केनए अछि (कोष्ठकमे देल तिथि टिमसभक अस्थायी ओडिआई तथा टि२०आई दर्जा प्राप्त केलाबाद खेलल पहिल टि२०आई म्याच दर्साएल अछि):

जल्दीए, चारि अन्य एसोसिएट राष्ट्र विश्व क्रिकेट लिगमे बढिया प्रदर्शन केलाबाद अस्थायी एकदिवसीय आ टि२०आई दर्जा देल गेल छल जे बादमे विश्वकप छनौटमे स्तरीय प्रदर्शन नैकरलाबाद हटाएल गेल अछि :




#Article 367: ट्वान्टी२० (108 words)


ट्वान्टी२० सामान्यतया टिट्वान्टी कहल जाइत अछि । ई क्रिकेटक ओ स्वरूप छी जाहिमे दुई टिमसभक बीचमे कम सँ कम २० ओभर क प्रतिस्पर्धा होए । ई खेलक सुरुवात संयुक्त अधिराज्यमे इङ्ल्यान्ड तथा वेल्स क्रिकेट बोर्डद्वारा सन् २००३ ,मे व्यावसायिक टिमसभ बीच खेल आरम्भ कराएल गेल अछि । ई खेल बहुतेक कम समयमे अपन स्वरूपक कारण चर्चा पाबैमे सफल भेल अछि । ई खेलक समयावधि छोट भेला कारण सम्पूर्ण वर्गक क्रिकेट प्रेमी बीच ई खेल लोकप्रिय अछि । ई खेलक एक इनिङ्ग ७०-९० मिनेटमे समाप्त होइत अछि आ १०-२० मिनेटक अन्तराल बाद दोसर इनिङ्गक खेल आरम्भ होइत अछि जाहि कारण ई खेल ३ घण्टा भितर समाप्त होइत अछि ।




#Article 368: प्रणब मुखर्जी (283 words)


प्रणव कुमार मुखर्जी (, जन्म: ११ दिसम्बर १९३५, पश्चिम बङ्गाल) एक राजनीतिज्ञ आ भारतक १३हम राष्ट्रपतिक रूपमे सेवा देनए अछि । ओ भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेसके वरिष्ठ नेता छथि। नेहरू-गान्धी परिवारसँ हुनकर लऽगक सम्बन्ध रहल छन्हि। भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेसके नेतृत्व वाला संयुक्त प्रगतिशील गठबन्धन हुनका अपन उम्मीदवार घोषित केलक। सोझ मुकाबलामे ओ अपन प्रतिपक्षी प्रत्याशी पिए सङ्गमा के हरेला। ओ २५ जुलाई २०१२ के भारतके तेरहम राष्ट्रपतिके रूपमे पद आओर गोपनीयताक शपथ लेलनि।

प्रणव मुखर्जीक जन्म पश्चिम बंगालके वीरभूम जिलेमें किरनाहर शहरके निकट स्थित मिराती गाँवके एक ब्राह्मण परिवारमें कामदा किंकर मुखर्जी आओर राजलक्ष्मी मुखर्जीके एतय भेल छल।

हुनकर पिताजी1920 सँ कांग्रेस पार्टीमें सक्रिय हुअके संग पश्चिम बंगाल विधान परिषदमें 1952 से 64 तक सदस्य आओर वीरभूम (पश्चिम बंगाल) जिला कांग्रेस कमेटीके अध्यक्ष रहि चुकल छलाह। हुनकर पिता एगो सम्मानित स्वतन्त्रता सेनानी छलाह, जे ब्रिटिश शासनक खिलाफतके परिणामस्वरूप 10 वर्षो सँ बेसी जेलक सजा सेहो काटने छलाह। 

प्रणव मुखर्जी सूरी (वीरभूम)के सूरी विद्यासागर कॉलेजमें शिक्षा प्राप्त केने छलाह, जे ओही समय कलकत्ता विश्वविद्यालय सँ सम्बन्धित छल।

कलकत्ता विश्वविद्यालय सँ ओ इतिहास आओर राजनीति विज्ञानमें स्नातकोत्तरके संग-संग कानूनक डिग्री हासिल केने छथि। ओ एगो वकील आओर कॉलेज प्राध्यापक सेहो रहि चुकल छथि। हुनका मानद डी.लिट उपाधि सेहो भेटल छनि। ओ पहिले एगो कॉलेज प्राध्यापकके रूपमें आओर बादमें एगो पत्रकारक रूपमें अपन कैरियर शुरू केलथि। ओ बाँग्ला प्रकाशन संस्थान देशेर डाक (मातृभूमि की पुकार) में सेहो काज केने छथि। प्रणव मुखर्जी बंगीय साहित्य परिषदके ट्रस्टी एवं अखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलनके अध्यक्ष सेहो रहल छथि।

बंगाल (भारत)में वीरभूम जिलाक मिराती (किर्नाहार) गाँवमें 11 दिसम्बर 1935 के कामदा किंकर मुखर्जी आओर राजलक्ष्मी मुखर्जीके घर जन्मे प्रणवक विवाह बाइस वर्षक आयुमें 13 जुलाई 1957 के शुभ्रा मुखर्जीके संग भेल छलैह। हुनकर दुगो बेटा आओर एगो बेटी - टोटल तीनगो बच्चा छनि। पढ़नाइ, बागवानी केनाइ आओर संगीत सुननाइ- तिने टा हुनकर व्यक्तिगत शौक छनि।




#Article 369: पाकिस्तान राष्ट्रिय क्रिकेट टिम (106 words)


पाकिस्तान राष्ट्रिय क्रिकेट टिम (उर्दू: پاکستان کرکٹ ٹیم) पाकिस्तानक राष्ट्रिय क्रिकेट टिम छी । पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पिसिबी) द्वारा नियन्त्रित ई टिम अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेट परिषदक पूर्ण सदस्य राष्ट्र छी । पाकिस्तान क्रिकेट टिम टेस्ट, एकदिवसीय तथा टि-ट्वान्टी अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेट म्याचमे भाग लैत आएल अछि । पाकिस्तान वर्तमान धरि ८५१ वनडे म्याच खेलने अछि जाहिमे ४५१ जित (५४.६२%), ३७४ हार, ८ टाई सहित १७ बेनतिजाक परिणाम निकालने अछि । पाकिस्तान सन् १९९२ एकदिवसीय विश्वकप विजेता राष्ट्र छी तहिने सन् १९९९ को विश्वकपक उप-विजेता समेत रहल अछि । पाकिस्तान दक्षिण पूर्व एसियाक अन्य देश सँ समायोजन करि सन् १९८७ तथा १९९६ के विश्वकप समेत आयोजना केनए अछि ।




#Article 370: इङ्ल्यान्ड राष्ट्रिय क्रिकेट टिम (133 words)


इङ्ल्यान्ड क्रिकेट टिम अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेटमे इङ्ल्यान्ड आ वेल्सक (सन् १९९२ पूर्व स्कटल्याण्ड) प्रतिनिधित्व करनिहार एकटा टिम छी । सन् १९९७ जनवरी १ बाद ई टिमके इङ्ल्यान्ड आ वेल्स क्रिकेट बोर्डद्वारा सञ्चालित अछि तहिने एहि सँ पूर्व एकरा सन् १९०३ सँ १९९६ क अन्त धरि मेरिलबोन क्रिकेट क्लबद्वारा शासित कएल गेल छल । सन् १८७७ के १५-१९ मार्चमे आयोजित इङ्ल्यान्ड तथा अस्ट्रेलिया राष्ट्रिय क्रिकेट टिम बीच भेल म्याचके पहिल आधिकारिक टेस्टके रुपमे मानल जाइत अछि । सन् १९०९ जुन १५ मे ई दुनू राष्ट्र संग दक्षिण अफ्रिका क्रिकेट बोर्ड मिल इम्पिरियल क्रिकेट कन्फ्रेन्स (अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेट परिषदक अवधारणा) गठन केनए छल । इङ्ल्यान्ड आ अस्ट्रेलिया बीच सन् १९७१ जनवरी ५ मे पहिल एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रिय म्याच खेलल गेल छल । इङ्ल्यान्ड अपन पहिल अन्तर्राष्ट्रिय टि-ट्वान्टी म्याच अस्ट्रेलिया विरुद्ध सन् २००५ जुन १३ मे खेलेने छल । 




#Article 371: नेल्सन मन्डेला (338 words)


नेल्सन रोलीह्लला मण्डेला  (ख़ोसा: Nelson Rolihlahla Mandela; १८ जुलाई १९१८ – ५ दिसम्बर २०१३) दक्षिण अफ्रीकाक प्रथम अश्वेत  भूतपूर्व राष्ट्रपति छेला। राष्ट्रपति बनवाक सं पूर्व वो दक्षिण अफ्रीका म सदियों स चल रहल  रंगभेदक विरोध करे वाला अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस आर इ सशस्त्र गुट उमखोंतो व सिजवेक अध्यक्ष छल। रंगभेद विरोधी संघर्षक कारण वो २७  वर्ष रॉबेन द्वीपक कारागार म बिताव जत् वो कोयला खनिक काम करने छेलाह। १९९० म श्वेत सरकार स भेल एक समझौतक बाद वो नया दक्षिण अफ्रीकाक निर्माण केनेए छेलाह । वो दक्षिण अफ्रीका एवं समूचे विश्वम रंगभेदक विरोध करेकक प्रतीक बनि गेल । संयुक्त राष्ट्रसंघ हुनकर जन्म दिनक नेल्सन मण्डेला अन्तर्राष्ट्रीय दिवसक रूपम मनावाईक निर्णय केलक। 

मण्डेलाक जन्म १८ जुलाई १९१८ म  म्वेज़ो, ईस्टर्न केप, दक्षिण अफ़्रीका संघ म गेडला हेनरी म्फ़ाकेनिस्वा आर उनकर तेसर पत्नी नेक्यूफी नोसकेनीक भेल छल। वो अपन माँ नोसकेनीक प्रथम आर पिताक सभी संतानों म १३ भाइ म तेसर छल। मण्डेलाक पिता हेनरी म्वेजो कस्बेक जनजातीय सरदार छल। स्थानीय भाषा म सरदारक बेटाक मण्डेला कहेत छल, जहिम हुनका अपना उपनाम मिलल । उनकर पिता इनका 'रोलिह्लाला' प्रथम नाम देने छल जेकर अर्थ उपद्रवी होइत अछि। उनकर माता मेथोडिस्ट छल । मण्डेला अपन प्रारम्भिक शिक्षा क्लार्कबेरी मिशनरी स्कूल सं पुरा करने छल। वोकरबादक स्कूली शिक्षा मेथोडिस्ट मिशनरी स्कूल से प्राप्त करने छल । मण्डेला  जब १२ वर्षक छल तखन उनकर पिताक मृत्यु भगेल ।

१९४१ म मण्डेला  जोहन्सबर्ग चल गेल जत उन्कर मुलाकात वॉल्टर सिसुलू आर वॉल्टर एल्बरटाइन सं भेल। वो दुनु राजनीतिक रूप स मण्डेलाक बहुत प्रभावित केलक । जीवनयापनक लेल वो एक कानूनी फ़र्म म क्लर्क बनि गेल  परन्तु धीर-धीरे उनकर सक्रियता राजनीतिम बढ़ल गेल । रंगक आधार पर होनए वाला भेदभावक दूर करवाक लेल वो राजनीतिम कदम रखलक। १९४४ म वो अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेसम शामिल भ गेलाह जहिमे रंगभेदक विरूद्ध आन्दोलन चलएत् छल । वोही वर्ष वो अपन मित्र आर सहयोगिक साथ मिलक अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस यूथ लीगक स्थापना कएल गेल । १९४७ म वो लीगक सचिव चुनल गेल। १९६१ म मण्डेला आर उनर कुछ मित्रक विरुद्ध देशद्रोहक मुकदमा चलल परन्तु जहिमे वो निर्दोष मानल गेल। 




#Article 372: सन्तोला (रङ्ग) (680 words)


सन्तोला  रङ्ग लाल आ पियर  समिश्रण भए बनैवाला रङ्ग छी । सन्तोला रङ्ग होमएक कारण एकर नाम सन्तोला रहल अछि ।

 Seashell (web color) (Hex: #FFF5EE) (RGB: 255, 245, 238) 
 Old Lace (web color) (Hex: #FDF5E6) (RGB: 253, 245, 230)
 Antique White (web color) (Hex: #FAEBD7) (RGB: 250, 235, 215)
 Blanched Almond (web color) (Hex: #FFEBCD) (RGB: 255, 235, 205) 
 Banana Mania (Crayola) (Hex: #FBE7B2) (RGB: 251, 231, 128)
 Moccasin (web color) (Hex: #FFE4B5) (RGB: 255, 228, 182)
 Bisque (web color) (Hex: #FFE4C4) (RGB: 255, 228, 196) 
 Navajo White (web color) (Hex: #FFDEAD) (RGB: 255, 222, 173)
 Peach Puff (web color) (Hex: #FFDAB9) (RGB: 255, 218, 185)
 Peach (Hex: #FFE5B4) (RGB: 255, 229, 180)
 Deep Peach (Crayola Peach) (Hex: #FFCBA4) (RGB: 255, 203, 164)
 Peach-Orange (Hex: #FFCC99) (RGB: 255, 204, 153)
 Bright Apricot (Crayola Apricot) (Hex: #FDD5B1) (RGB: 253, 213, 177)
 Apricot (Hex: #FBCEB1) (RGB: 251, 206, 177)
 Melon (Crayola) (Hex: #FEBAAD) (RGB: 254, 186, 173)
 Macaroni and Cheese (Crayola) (Hex: #FFB79B) (RGB: 255, 185, 123)
 Sandy Brown (web color) (Hex: #F4A460) (RGB: 244, 164, 96) 
 Light Salmon (web color) (Hex: #FFA07A) (RGB: 255, 160, 122)
 Dark Salmon (web color) (Hex: #E9967A) (RGB: 233, 150, 122) 	
 Medium Salmon (Hex: #FF8C69) (RGB: 255, 140, 105)
 Coral (web color) (Hex: #FF7F50) (RGB: 255, 127, 80)
 Salmon (web color) (Hex: #FA8072) (RGB: 250, 128, 114)
 Coral Pink (Hex: #F88379) (RGB: 248, 131, 121)
 Light Coral (web color) (Hex: #F08080) (RGB: 240, 128, 128)
 Bittersweet (Crayola) (Hex: #FE6F5E) (RGB: 254, 111, 94) 
 Terra Cotta (Hex: #E2725B) (RGB: 226, 114, 91) 
 Tea Rose (orange) (Hex: #F88379) (RGB: 248, 131, 121)
 Vivid Tangerine (Crayola) (Tangerine Sherbert) (Hex: #FF9966) (RGB: 255, 153, 102)
 Atomic Tangerine (Crayola) (Hex: #FF9966) (RGB: 255, 153, 102)
 Orange Peel (Hex: #FFA000) (RGB: 255, 160, 0)
 Orange (web color) (Hex: #FFA500) (RGB: 255, 165, 0)
 Deep Saffron (Hex: #FF9933) (RGB: 255, 153, 51)	 
 Dark Orange (web color) (Hex: #FF8C00) (RGB: 205, 127, 50) 	 	 
 Tangerine (Hex: #F28500) (RGB: 243, 132, 0)
 ORANGE (Color Wheel Orange) (Hex: #FF7F00) (RGB: 255, 127, 0)
 Automotive Amber (SAE/ECE Amber) (Hex: #FF7E00) (RGB: 255, 126, 0) 
 Pumpkin (Hex: #FF7518) (RGB: 152, 118, 54)
 Rich Orange (Crayola Orange) (Hex: #FF681F) (RGB: 255, 104, 31)
 Safety Orange (Blaze Orange) (Hex: #FF6600) (RGB: 255, 102, 0)
 Cadmium Orange (Xona.com Color List) (Hex: #FF6103) (RGB: 255, 97, 3)
 Persimmon (Hex: #EC5800) (RGB: 236, 88, 0)
 Tangelo (Hex: #F94D00) (RGB: 249, 77, 0)
 Vermilion (Hex: #F34234) (RGB: 227, 66, 52)
 Red-Orange (Crayola) (Hex: #FF3F34) (RGB: 255, 63, 52)
 Orange-Red (web color) (Hex: #FF4500) (RGB: 255, 69, 0)
 International Orange (Hex: #FF4F00) (RGB: 255, 79, 0)
 Ultra Orange (Crayola) (Outrageous Orange) (Hex: #FF6037) (RGB: 255, 96, 55)
 Tomato (web color) (Hex: #FF6347) (RGB: 255, 99, 71)
 Deep Carrot Orange (Hex: #E9692C) (RGB: 255, 150, 0)
 Carrot Orange (Hex: #ED9121) (RGB: 237, 145, 33)
 Neon Carrot (Crayola) (Hex: #FF9933) (RGB: 255, 153, 51)
 Gamboge (Hex: #EF9B0F) (RGB: 228, 155, 18) 	 
 Ochre (Hex: #CC7722) (RGB: 204, 119, 34)	 
 Bronze (Hex: #CD7F32) (RGB: 205, 127, 50) 	 	 
 Copper (Hex: #B87333) (RGB: 184, 115, 51)
 Pale Brown (Hex: #987654) (RGB: 152, 118, 54)
 Antique Brass (Crayola) (Hex: #C88A65) (RGB: 200, 138, 101) 
 Peru (web color) (Hex: #CD5700) (RGB: 205, 133, 63)
 Chocolate (web color) (Hex: #D2691E) (RGB: 210, 105, 30)
 Tenne (Tawny) (Hex: #CD5700) (RGB: 205, 87, 0)	 Burnt Orange (Hex: #CC5500) (RGB: 204, 85, 0)
 Mahogany (Hex: #C04000) (RGB: 192, 64, 0) 	
 Dark Terra Cotta (Hex: #CC4E3C) (RGB: 204, 78, 92) 
 Dark Coral (Hex: #CD5B45) (RGB: 205, 91, 69)
 Medium Brown (Crayola Brown) (Hex: #AF593E) (RGB: 175, 89, 67) 
 Sienna (web color) (Hex: #A05220) (RGB: 160, 82, 45) 	 	 
 Brown (Hex: #964B00) (RGB: 150, 75, 0) 
 Saddle Brown (web color) (Hex: #8B4513) (RGB: 139, 69, 13) 
 Rust (Hex: #64417) (RGB: 183, 65, 14)	 
 Russet (Hex: #804618) (RGB: 128, 70, 27) 
 Cognac (Xona.com Color List) (Hex: #9F381D) (RGB: 159, 56, 29)  	 
 Burnt Umber (Hex: #8A3324) (RGB: 138, 51, 36)
 Pullman Brown (UPS Brown) (Hex: #644117) (RGB: 100, 65, 23)
 Dark Brown (Hex: #654321) (RGB: 101, 67, 33)
 Medium Taupe (Hex: #674C47) (RG 76, 21) 	 
 Taupe (Hex: #483C32) (RGB: 72, 60, 50) 	




#Article 373: नेपाल राष्ट्रिय क्रिकेट टिम (114 words)


नेपाली राष्ट्रिय क्रिकेट टिम नेपालक प्रतिनिधित्व करि अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेट प्रतियोगितामे भाग लेनिहार क्रिकेट खेलाडीसभक समूह छी । नेपाली राष्ट्रिय क्रिकेट टिम सन् १९९६ सँ आइसिसी एसोसिएट सदस्य राष्ट्रक समूहमा रहैत आएल अछि ।

नेपाली राष्ट्रिय क्रिकेट टिम सन् १९९६ सँ प्रत्येक एसिसी ट्रफी टुर्नामेन्ट,एसिसी टि-ट्वान्टी कप,२००१ आईसीसी ट्रफीमे भाग लैत आएल अछि तथा दुइटा आइसीसी इन्टर कन्टिनेन्टल कपमे भाग लेनए अछि ।

सन् १९२० दिस नेपालमे राज केनिहार राणा वंश सँ भेल छल । सन् १९२० दिस जब बेलायत सँ राणासभ पढाइ पुरा करि नेपाल आएल तब ओसभ एहि खेल प्रति आकर्षित भ एहि खेलक सुरुवात केनए छल । सन् १९४६ मे नेपालमे क्रिकेटके विकासक लेल क्रिकेट असोसिएसन अफ नेपालक स्थापना भेल छल ।




#Article 374: दड़िभङ्गा (1413 words)


दड़िभङ्गा बिहार राज्यक एक शहर आ नगर निगम छी । ई दड़िभङ्गा जिला आ दड़िभङ्गा क्षेत्रक मुख्यालय छी । दड़िभङ्गा बिहारक पाँचम पैग शहर आ सभसँ तेजीसँ बढि रहल नगर छी । दड़िभङ्गा बिहारक दोसर सभसँ पैग चिकित्सा क्षेत्र छी । ऐतिहासिक रूपसँ ई शहर दड़िभङ्गा राजक दरबारस्थल छल ।

दड़िभङ्गा शब्द संस्कृत भाषाक शब्द द्वार-बङ्ग अथवा फारसी भाषाक दर-ए-बङ्ग मतलब बङ्गालक दरवाजाके मैथिली भाषामे कतेको वर्ष सँ चलवाक स्थानीयकरण प्रमाण अछि । एहनो कहल जाइत अछि कि मुगल कालमे दरभङ्गी खान शहरक स्थापना केने छल । मुदा किछु लोक अहिं बातक खण्डन करैत अछि आओर मानैत अछि की दरभङ्गी खान मुगल कालमे विकसित दड़िभङ्गा शहरके कोनो व्यपारी रहल होइत ।

वैदिक स्रोतक अनुसार आर्य सबहक विदेह शाखाद्वारा आगिक संरक्षणमे सरस्वती तटसँ पूबमे सदानीरा (गण्डक) दिस कूच केलक आओर विदेह राज्यक स्थापना केनए छल। विदेहक राजा मिथीकेँ नाम पर ई प्रदेश मिथिला कहाएल। रामायणकालमे मिथिलाक राजा जनक कहाएत छल, सिरध्वज जनकऽक पुत्री सीता छलीह। औसत सालाना ११४२ मिमी वर्षाक अधिकांश मनसुनसँ भेटैत अछि । दरभङ्गा जिलाक आमतौर पर निम्न चारि गो क्षेत्रमे बाँटल गेल अछि:

सन् २०११ के भारतीय जनगणनाके अनुसार अहि जिलाक कुल जनसङ्ख्या ३२,८५,४९३ अछि जाहिमे शहरी क्षेत्र तथा देहाती क्षेत्रक जनसङ्ख्या क्रमश: २,६६,८३४ आ ३०,१८,६३९ अछि । 

दरभङ्गा जिलाके अन्तर्गत ३ अनुमण्डल, १८ प्रखण्ड, ३२९ पञ्चायत, १,२६९ गाम आ २३ थाना अछि ।

दड़िभङ्गा जिलाक चूनासँ युक्त दोमट माटि रबी आओर खरीफ फसल लेल उपयुक्त अछि । भदई आओर अगहनी धान, गहुंम, मकई, रागी, तिलहन (बूट, मसूरी, खेसारी, मूंग), आलू कुसिआर आदि मुख्य फसल अछि । जिलाक कुल क्षेत्रफलक १,९८,४१५ हेक्टेयर कृषियोग्य अछि । १९,६१७ हेक्टेयर क्षेत्र ऊँच जमीन, 37,६६० हेक्टेयर मध्यम आओर ३८,०१७ हेक्टेयर निचाऽक भूमि अछि । ओना दड़िभङ्गा जिलामे जङ्गल नहि अछि तैयो लोगक अपन गाछी वृछी बेस छै । गामसँ सटल रैयतक जमीन पर सिसो, खैर, खजूर, आम, लीची, लताम, कटहर, पीपर, ईमली आदि पर्याप्त मात्रामे देखा जाइत । आम आओर मखानाक उत्पादनक लेल दड़िभङ्गा प्रसिद्ध अछि आओर विशेष स्थान सेहो राखैत अछि । जिलाक लगभग सब हिस्सामे पोखैर आओर चौर क्षेत्रमे पोषक तत्वसभसँ भरपूर मखान एतयके महत्वपूर्ण उत्पाद अछि ।  पुरातन आ आधुनिक शिक्षाक नीक केन्द्र हुअके बावजूद दड़िभङ्गा एकटा निम्न साक्षरतावला जिला अछि । ललितनारायण मिथिला विश्वविद्यालयके छोडि एतय कामेश्वरसिंह संस्कृत विश्वविद्यालय स्थापित अछि जकर अन्तर्गत राज्यके सबटा संस्कृत महाविद्यालय आबैत अछि । शहरमे प्राविधिक आ चिकित्सा महाविद्यालयके अतिरिक्त मिथिला शोध संस्थान जेहेन विशिष्ट शिक्षाक केन्द्र सेहो अछि । दड़िभङ्गा जिलाक अन्तर्गत आबयबाला शिक्षण संस्थान अहिं प्रकारसँ अछि:

दरभङ्गा कलेज अफ इन्जिनियरिङ, महिला प्राविधिक महाविद्यालय, राजकीय पोलिटेक्निक दरभङ्गा, उद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान

दरभङ्गा चिकित्सा महाविद्यालय आ अस्पताल, नर्सिङ ट्रेनिङ्ग विद्यालय-१, दन्त चिकित्सा महाविद्यालय-४ (निजी), एमआरएम आयुर्वेदिक महाविद्यालय

एकर अतिरिक्त जिलामे १ केन्द्रीय विद्यालय, १ जवाहर नवोदय विद्यालय तथा ४ चरवाहा विद्यालय सेहो अछि S।

दरभङ्गा प्रदेश मिथिला संस्कृतिक अङ्ग आ केन्द्र विन्दु रहल अछि । रामायण कालसँ राजा जनकक शासन प्रदेश रहल अछि । मध्यकालमे अहि क्षेत्र पर मुसलमान शासक सबहक कब्जा भेलाके बादो ई हिन्दू क्षत्रपक अधीन रहल आओर अपन खास पहिचान बनाऽ कऽ राखऽ मे सक्षम रहल । पहिले सँ मुस्लिम बहुल दरभङ्गा शहरमे १९अम सदीक आरम्भमे ब्राह्मण राजाद्वारा अपन राजधानी स्थानान्तरित केलाक बाद एतय हिन्दू बसऽ लागल आओर शहरमे नीक संस्कृतिक जन्म भेल । ओना दरभङ्गा हिन्दू बहुल अछि मुदा मुसलमानक कुल जनसङ्ख्याक ३६% अछि । मिथिला चित्रकला, ध्रुपद गायनक गया शैली आओर संस्कृतक विद्वान अहिं क्षेत्रके दुनिया भरिमे पहिचान देलक । प्रसिद्ध लोककला सबमे सुजनी, खरक घर अओर काठ पर नक्काशीक काज सम्मिलित अछि । सामा चकेवा आ झिझिया दड़िभङ्गाक लोक नृत्य अछि । एतयके लोकके खान-पान आ विद्या प्रेम पर मैथिलीमे प्रचलित एकटा कहावत दड़िभङ्गाक संस्कृतिके नीक सँ बतबैत अछि:

दड़िभङ्गा महाराजक संस्कृति धरोहरसभमे सँ एकटा एहि ठामक गया शैली रहल अछि। जकरा दड़िभङ्गा घराना सेहो कहल जाएत अछि। दड़िभङ्गा घरानाकें आरम्भ दरबारी सङ्गीतकें रूपमे जन्म भेल छल। जकर श्रेय राधाकृष्ण आ कर्तारामकें देल जाएत अछि। दूनो गोटे दड़िभङ्गा नवाबक दरबारमे छल। ई दूनो सङ्गीतकार ३५ वर्ष धरि भूपत खानक शिष्य रहल छल। सन् १७९० मे राग मल्हार गाबि वर्षा करेबाक अदभुत काज केनए छल। एहि सँ प्रसन्न भऽ दड़िभङ्गा महाराज मालिककें उपाधि प्रदान केनए छल। मालिक बन्धुसभ सन् १९४७ धरि राज घरानाकें  सेवा प्रदान केनए छल।  घरानाकें अन्तिम दरबारी गायक रामचतुर मालिकक देहान्त सन् १९९१ मे भेल। ओकरा बाद पण्डित विदुर मालिक घरानाकें बागडोर अपन अन्तिम समय धरि ओरीया कय रखलक। एहि शैलीमे खयाल, तराना, गजल, भजन आ दड़िभङ्गाक प्रसिद्ध कवि विद्यापतिक ठुमरी गीत अखनो धरि गायल जाएत अछि। दड़िभङ्गा महाराजा अपन यश कऽ प्रतीक मात्र दड़िभङ्गे टाऽ धरि नई अपितु भारतक अनेकानेक स्थान पर स्थापित केनए छल। एहिमे कोलकाता, राँची आ इलाहाबादकें दड़िभङ्गा हाउस प्रमुख अछि। आईकाल्हि दड़िभङ्गा महाराजकें टोलमे ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय कऽ मुख्यालय अछि। एहिमे कोनो दुविधा नई कि दड़िभङ्गाक राजघरानाकें धरोहर आई ई शहरक एकटा बहुतनिक भेंट छी।

अपन गौरवशाली अतीत आ अद्वितीय सांस्कृतिक परम्पराक बादो दुर्भाग्यसँ मिथिला संस्कृतिक केन्द्र रहल ई क्षेत्र आई राजनैतिक उपेक्षाक शिकार भऽ कऽ रहि गेल अछि आओर एखन कहिओ कहिओ अपन बाढ़िक भयावहताक कारण अखबारक मुख्य पन्नामे देखल जाए सकैत अछि।

दड़िभङ्गाक महाराजा सबहक कला, साहित्य आ संस्कृतिके संरक्षकमे गिनल जाइत अछि। स्वर्गीय महेश ठाकुरद्वारा स्थापित दरभङ्गा राज किला-परिसर आब एगो आधुनिक स्थल आ शिक्षाक केन्द्र बनि गेल अछि । भव्य आ योजनाबद्ध तरीकासँ अभिकल्पित महल, मन्दिर आ पुरानका प्रतीकके अखनो देखल जा सकैत अछि । अलग-अलग महाराजाद्वारा बनायल गेल महल सबमे नरगौना महल, आनन्दबाग महल आ बेला महल प्रमुख अछि । राज पुस्तकालय भवन ललितनारायण मिथिला विश्वविद्यालयद्वारा आ आन दोसर भवन संस्कृत विश्वविद्यालयद्वारा उपयोगमे आनल जा रहल अछि ।
 

रन्ती-ड्योढी (मधुबनी)क स्वर्गीय चन्द्रधारी सिंहद्वारा दान कएल गेल कलात्मक आ अमूल्य दुर्लभ सामग्रिके शहरके मानसरोवर झीलक कातमे ७ दिसम्बर १९५७ के स्थापित एकटा सङ्ग्रहालयमे राखल गेल अछि । अहिं सङ्ग्रहालयके सन १९७४ मे दू मञ्जिला भवनमे स्थानान्तरित करि देल गेल जतय सङ्ग्रहित वस्तुसभजे ११ कक्षामे राखल गेल । सितम्बर १९७७ मे दरभङ्गाक तत्कालिन जिलाधिकारीद्वारा महाराजा लक्ष्मिश्वर सिंह सङ्ग्रहालयके स्थापना कएल गेल । दरभङ्गा महाराजक वंशज श्री शुभेश्वर सिंहद्वारा दान कएल गेल दुर्लभ कलाकृतिसभ आ राजसँ सम्बन्धित वस्तुसभ एतय सङ्ग्रहित अछि । दरभङ्गा राजक अमूल्य आ दुर्लभ वस्तुसभ तथा सोना, चाँदी आ हाथी दाँतक बनल हथियारसभ आदिके आठ कक्षामे सजाए क राखल गेल अछि । सोमवार छोडि सप्ताहमे प्रत्येक दिन खुजैवला दुनू सङ्ग्रहालयसभमे प्रवेश नि:शुल्क अछि ।

दरभङ्गा स्टेशनसँ १ किलोमिटरक दूरी पर मिथिला विश्वविद्यालयक परिसरमे दरभङ्गा राजद्वारा सन् १९३३ मे बनावोल गेल काली मन्दिर बहुत सुन्दर अछि । स्थानीय लोगसभमे ई मन्दिरप्रति बहुत पैग प्रतिष्ठा अछि आ लोकसभमे एहन विश्वास अछि कि एतय पूजा करैसँ मनोवाञ्छित फल मिलैत अछि ।

दरभङ्गा रेलवे स्टेशनसँ १ किलोमिटर उत्तर स्थित सन् १८९१ मे बनाएल क्याथोलिक चर्च इसाई पादरिसभक प्रशिक्षणक लेल बनाएल गेल छल । चर्चक बाहर ईसा मसीहक एक 
प्रतिमा बनाएल गेल अछि ।

दरगाह शरीफ हजरात मखदूम भीका शाह सैलानी रहमतुल्लाह अलैह बिहारक दरभङ्गा शहरक रेलवे स्टेशनसँ आधा किलोमिटरक दूरी पर दिघी तालाबक पश्चिम किनार पर मोहल्ला मिश्रटोला (भटियारी सराय) मे स्टेशन रोड पर हजरात मखदूम भीका शाह सैलानी रहमतुल्लाह अलैहक मजार अछि । सड़कसँ उचाई पर अवस्थित आलिशान दरगाह शरीफमे हजरात मखदूम भीका भीका शाह सैलानी रहमतुल्लाह अलैहक लगभग ४०० वर्षसँ पुरान मजार अछि । दरगाह परिसरेमे हजरत मौलाना फिदा अब्दुल करीम समरकन्दी रहमतुल्लाह अलैहक सेहो मजार अछि जे बादमे आएल छल । 

हजरात मखदूम भीका शाह सैलानी रहमतुल्लाह अलैहक सालाना उर्स ईद उल ज़ुहा (बकरीद)क १३ सँ १७ तारिखधरि होइत अछि । जाहिमे बिहारक अलावा अन्य राज्यसभसँ आओर पडोसी देश नेपालक सेहो जायरीन आबैत अछि । हजरात मखदूम भीका शाह सैलानी रहमतुल्लाह अलैहक मानैवला हिन्दू, मुस्लिम, सिख आ ईसाई सभ धर्मक लोक अछि । 

दरभङ्गा रेलवे स्टेशनसँ २ किलोमिटरक दूरी पर दरभङ्गा टावरक नजदिक बनल मस्जिद शहरक मुसलमानसभक लेल सबसँ पैग इबादत स्थल छी । एकर नजदिके सूफी सन्त मकदूम बाबाक मजार अछि जे हिन्दू आ मुसलमानसभद्वारा समान रुपसँ आदरित अछि । स्टेशनसँ १ किलोमीटर दूर गङ्गासागर तालाबक किनार बनल भिखा सलामी मजारक लग रमजान महिनाक १२-१६ अम दिन मेला लागैत अछि ।

दरभङ्गा बिहारक सम्पूर्ण मुख्य शहरसभसँ राजमार्गसभद्वारा जुड़ल अछि। जिलामे सड़कसभक कुल लम्बाई २,२४५ किलोमिटर अछि। एतयसँ वर्तमानमे दुई राष्ट्रिय राजमार्ग तथा तीन राजकीय राजमार्ग गुजरति अछि। मुजफ्फरपुरसँ झञ्झारपुर जाएवाला राष्ट्रिय राजमार्ग ५७ दरभङ्गा होइत जाइत अछि। ५५ किलोमिटर लम्बा राष्ट्रिय राजमार्ग १०५ दरभङ्गाके जयनगरसँ जोड़ति अछि। जिलामे राष्ट्रिय राजमार्ग ५७ आ १०५ कऽ कुल लम्बाई ५७ किलोमिटर तथा राजकीय राजमार्ग सङ्ख्या ५० तथा ५६ कऽ कुल लम्बाई ८९ किलोमिटर अछि।

दरभङ्गा भारतीय रेलक एक महत्वपूर्ण जङ्क्सन छी जे पूर्व मध्य रेलवे क्षेत्रक समस्तीपुर मण्डलमे अवस्थित अछि। दिल्ली-गुवाहाटी रूट पर अवस्थित समस्तीपुर जङ्क्सनसँ पैग गेजक एक लाईन दरभङ्गा होइत नेपाल सीमापर जयनगर आ दोसर लाइन झञ्झारपुर धरि जाइत अछि। दरभङ्गासँ एक अन्य रेल लाइन सीतामढी होइत नरकटियागञ्जकेँ जोड़ति अछि। सकड़ीसँ हसनपुर जोड़ैवला रेल लाइन निर्माणाधीन अछि। सन् १९९६ धरि दरभङ्गा मीटर गेजसँ जुड़ल छल मुदा अमान परिवर्तनक बाद एतयसँ दिल्ली, मुम्बई, पुणे, कोलकाता, अमृतसर, गुवाहाटी तथा अन्य महत्वपूर्ण शहरसभक लेल सीधा ट्रेनसभ उपलब्ध अछि।




#Article 375: मन्दाकिनी (अभिनेत्री) (198 words)


मन्दाकिनी (जन्म ३० जुलाई १९६९) एक भूतपूर्व भारतीय अभिनेत्री छी ।

मन्दाकिनीक जन्म जुलाई ३०, १९६९मे एक अंग्रेज-भारतीय परिवारमे यासमीन जोसफक नाम सँ भेल छल । हिनकर पिता जोसफ एकटा ब्रिटिश आर माता मुस्लिम छी । मन्दाकिनी एकटा भूतपूर्व बलिउड अभिनेत्री छी  जे १९८५ में प्रकाशित राम तेरी गंगा मैली फ़िल्ममें अपन श्रेष्ठ भूमिका कऽ लएल जानल जाति अछि ।

बलिउडमे मन्दाकिनीक जीवन-यात्रा अत्यन्त छोट रहल । राज कपूर द्वारा निर्मित राम तेरी गंगा मैली मन्दाकिनीक पहलि फ़िल्म छल । अही  फ़िल्ममे मन्दाकिनी कऽ कीछ विवादस्पद दृश्य फ़िल्मायल गएल छल जकरा सेंसर बोर्ड कऽ आपत्तिजनक लागल छल । प्रथम दृश्यमे मन्दाकिनी सफ़ेद पारदर्शी साड़ी पहनि एक झरनाके नीचा नहाति कालक फिल्माया गएल छल  जहिमे मन्दाकिनीक स्तन लगभग साफ़ दिखा गएल छल आर दोसर दृश्यमे मन्दाकिनी कऽ एक बच्चाक स्तनपान कराबति फिल्मायल गएल छल जहिमे मन्दाकिनीके सम्पूर्ण स्तन खुला एवम् साफ़ दिखाएल गएल छल तथापि फ़िल्म सफल रहल आर मन्दाकिनी कऽ अही फ़िल्मक श्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार सं सेहो सम्मानित कएल गएल छल ।
राम तेरी गंगा मैली कऽ सफलताके पश्चात मन्दाकिनी डांस डांस १९८७ आर प्यार करके देखो १९८७ जंका अधिक व्यावसायिक फिल्मसभमे सेहो अभिनय कएलक परन्तु राम तेरी गंगा मैलीके आकर्षण कऽ आगा सफल नइ भऽ सकल ।




#Article 376: विश्वकप क्रिकेट (133 words)


आइसिसी क्रिकेट विश्वकप पुरुषसभक एकदिवसीयके मुख्य अन्तर्राष्ट्रिय प्रतियोगिता छी । ई खेलक आधिकारिक निकाय अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेट परिषद (आइसिसी) द्वारा ई प्रतियोगिता प्रत्येक चार बर्षमे आयोजित कएल जाइत अछि । ई प्रतियोगिता संसारमे सब सँ बढी दर्शकद्वारा देखल जाइवाला खेल प्रतिस्पर्धा मे सँ एक छी । ई फिफा विश्वकप आ ओलम्पिक खेल सँ पाछा अछि ।

पहिल बेर विश्व कप १९७५ इङ्ल्यान्डमे आयोजित भेल छल । पहिल तीन विश्व कप इइङ्ल्यान्ड आयोजना केनए छल । मुदा १९८७ बाद प्रत्येक चार वर्षमे अन्य देशसभने आयोजना कएल जाइत अछि । वर्तमानमे २०१५मे आयोजना भेल ई टुर्नामेन्ट अस्ट्रेलिया आ न्युजिल्यान्डमे भेल छल जेकर उपाधी अस्ट्रेलिया जितने छल ।

विश्व कप क्रिकेटक आयोजन सर्वप्रथम १९७५ मे इङ्ल्यान्डमे भेल छल । पहिल विश्वकपमे भाग लेनिहर राष्ट्र छ अस्ट्रेलिया, इङ्ल्यान्ड, भारत, न्युजिल्यान्ड, पाकिस्तान, श्रीलंका, वेस्ट इन्डिज आ पूर्व अफ्रिका ।




#Article 377: १९७५ क्रिकेट विश्वकप (347 words)


क्रिकेट विश्वकप १९७५ (आधिकारिक रुपमे प्रुडेन्सियल कप) क्रिकेट विश्वकप प्रतियोगिताक पहिल क्रिकेट विश्वकप छल । ई प्रतियोगिता ७ जुन सँ २१ जुन धरि इङ्ल्यान्डमे आयोजन भेल छल । ई टुर्नामेन्ट प्रुडेन्सियल एसुरेन्स कम्पनीद्वारा प्रायोजित छल । ई टुर्नामेन्टमे ८ टा टिम भाग लेने छल । जाहिमे ६ टा टेस्ट मान्यताप्राप्त राष्ट्र तथा २ टा गैह्र टेस्ट मान्यताप्राप्त राष्ट्र छल । 

ई प्रतियोगितामे एक म्याच ६० ओभरक खेलाएल गेल छल आ खेलाडी उज्जर पोसाकमे तथा लाल क्रिकेट बल सँ खेलैक नियम छल । म्याच दिनमे भेला कारण खेल शीघ्र सुरु कएल जाइत छल ।

टुर्नामेन्टमे टिमसभके २ समूहमे विभाजन कएल गेल छल जाहिमे प्रत्येक टिम दोसर टिम सँ खेल खेलकि छल । दुई उत्कृष्ट टिम सेमीफाइनलक लेल प्रत्येक समूह सँ अगाडी जाकि नियम छल । सेमीफाइनलक विजेता फाइनल खेलक लेल सक्षम होवाक नियम छल ।

पहिल विश्वकप इङ्ल्यान्डक ७ स्थानमे खेलाएल गेल छल । प्रतियोगितामे कूल १५ खेल भेल छल जाहिमे २ सेमीफाइनल तथा १ फाइनल रहल छल । 

ई प्रतियोगिताक आयोजक इङ्ल्यान्ड छल । आइसिसी अपन पहिल आयोजन इङ्ल्यान्डके करैक निर्णय केनए छल कियाकी इङ्ल्यान्ड सँ ओ समयमे पर्याप्त संसाधन छल जे एकटा सफल आयोजन क सकैत छल । आइसिसीक अनुसार दिन-रातिक म्याच करैलेल असक्षम भेला कारण इङ्ल्यान्डमे जुनक महिनामे दिन लम्बा भेला कारण एहि प्रतियोगिताक आयोजन इङ्ल्यान्डके देल गेल छल । म्याच दिनमे समाप्त होमएक सम्भावना बेसी छल ।

८ राष्ट्र ई टुर्नामेन्टक लेल सहभागी भेल छल । श्रीलंका तथा पूर्वी अफ्रिका मात्र एहन टिम छल जे टेस्ट खेलैक मान्यता नै पौने छल ।

१९७५ क्रिकेट विश्वकपक पहिल सेमीफाइनल खेल इङ्ल्यान्ड तथा अस्ट्रेलिया बीच खेलल गेल छल तहिने दोसर सेमीफाइनल खेल न्युजिल्यान्ड तथा वेस्ट इन्डिज बीच खेलल गेल छल । पहिल सेमीफाइनल खेलमे अस्ट्रेलिया इङ्ल्यान्डके ४ विकेट सँ आ दोसर सेमिफाइनल खेलमे वेस्ट इन्डिज न्युजिल्यान्डके ५ विकेट सँ हराबैत फाइनलक यात्रा तय केनए छल ।

फाइनलमे वेस्ट इन्डिज अस्ट्रेलियाके १७ रन सँ हरेनाए छल । वेस्ट इन्डिजक तर्फ सँ कप्तान क्ल्याइब लोयडक तुफानी १०२ रन (८५ बल) बनेनाए छल । अस्ट्रेलियाक अग्रपंक्तिक खेलाडीसभ रन आउट भेला कारण अस्ट्रेलिया बढिया मौका हुसेनाए छल । सन् १९७५ क क्रिकेट विश्वकपमे म्यान अफ द सिरिजक व्यवस्था नै छल ।




#Article 378: ओउ्म् (403 words)


ओ३म् (ॐ) आ ओंकारक नामान्तर प्रणव छी । ई ईश्वरक वाचक अछि । ईश्वरक साथ ओंकारक वाच्य-वाचक-भाव सम्बन्ध नित्य छैक, साङ्केतिक नै । सङ्केत नित्य आ स्वाभाविक सम्बन्ध कऽ प्रकट करैत अछि । सृष्टिके आदिमे सर्वप्रथम ओंकाररूपी प्रणवक स्फुरण होइत छैक । तदनन्तर सात करोड़ मन्त्रसभक आविर्भाव होइत अछि । अही मन्त्रसभक वाच्य आत्माके देवता रूपमे प्रसिद्ध अछि । ई देवता मायाके ऊपर विद्यमान रहिक मायिक सृष्टिके नियन्त्रण करैत छैक । एहिमेसँ आधा शुद्ध मायाजगत्मे कार्य करैत छैक आ शेष आधा अशुद्ध आ मलिन मायिक जगत्मे । ई एकटा शब्दक ब्रह्माण्डक सार मानल जाइत अछि, १६ श्लोकसभमे सेहो हिनकर महिमा वर्णित अछि ।

ब्रह्मप्राप्तिके लेल निर्दिष्ट विभिन्न साधनसभमें प्रणवोपासना मुख्य छैक। मुण्डकोपनिषद्मे लिखल अछि:

गुरु नानक जी कs शब्द एक ओंकार सतनाम बहुत प्रचलित एवम शत्प्रतिशत सत्य छी । एक ओंकारटा सत्य नाम अछि । राम, कृष्ण सब फलदायी नाम ओंकार पर निहित अछि  एवम ओंकारके कारणने एकर महत्व छै । बाँकी नामसभक तs हमसभ बनौने छी परंतु ओंकार मात्र छैक जेकी स्वयंभू छी आ हर शब्द अहीसं बनल अछि । सभ ध्वनिमें ओउ्म शब्द होइत अछि ।

ओउ्म तीन शब्द 'अ' 'उ' 'म' सं मिलकर बनल अछि जेकी त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु आर  महेश तथा त्रिलोक भूर्भुव: स्व: भूलोक भुव: लोक तथा स्वर्ग लोकक प्रतीक छी ।

पद्माशनमें बइठ कs एकर जप करलासं मनक शांती एवम एकाग्रताक प्राप्ति होति छैक, वैज्ञानिकों तथा ज्योतिषिसभक कहना छै कि ओउ्म आ एकाक्षरी मंत्र एकर पाठ करलासं दाँत, नाक, जीभ सभक उपयोग होइत अछि जहिमे हार्मोनल स्राव कम होति छै आ ग्रंथि स्रावक कम करके अही शब्द बहुतो बीमारीसभसं रक्षा आर शरीरके सात चक्र (कुंडलिनी) कs जागृत करैत छैक ।

तैत्तरीयोपनषद शिक्षावल्ली अष्टमोऽनुवाकःमें ॐ कs विषयमें कहल गेल अछि 

ओमति ब्रह्म। ओमितीद ँूसर्वम्।

ओमत्येदनुकृतिर्हस्म वा अप्यो श्रावयेत्याश्रावयन्ति।

ओमति सामानि गायन्ति।

ओ ँूशोमिति शस्त्राणि श ँूसन्ति।

ओमित्यध्वर्युः प्रतिगरं प्रतिगृणाति। ओमिति ब्रह्मा प्रसौति।

ओमित्यग्निहोत्रमनुजानति।

अमिति ब्राह्मणः प्रवक्ष्यन्नाह ब्रह्मोपाप्नवानीति।

ब्रह्मैवोपाप्नोति।।

अर्थातः- ॐ ही ब्रह्म छी । ॐ ही  प्रत्यक्ष जगत् छी। ॐ ही एकर (जगतक) अनुकृति छी । हे आचार्य! ॐ के विषयमें आर  सुनाओल जाई आचार्य सुनाबैत अछि । ॐ सं प्रारम्भ करिके साम गायक सामगान कहैत छथि । ॐ-ॐ कहैत् ही शस्त्र रूप मs मन्त्र पढ़ल जाइत अछि । ॐ सं अध्वर्यु प्रतिगर मन्त्रसभक उच्चारण करैत अछि । ॐ कहीक अग्निहोत्र प्रारम्भ करल  जाइत अछि । अध्ययनके समय ब्राह्मण ॐ कहीकs ब्रह्म कs प्राप्त करsक बात करैत अछि । ॐक द्वारा ही ओ ब्रह्म कs प्राप्त करैत अछि ।

गुरु नानक ॐ कs महत्वक प्रतिपादित करैत लिखलथि  —




#Article 379: टेलर स्विफ्ट (205 words)


टेलर एलिसन स्विफ्ट (जन्म १३ दिसम्बर १९८९) एक अमेरिकी कन्ट्री-पप गायिका, गीत रचनाकार, सङ्गीतकार तथा अभिनेत्री छी। ओ अपन व्यक्तिगत जीवनक बारेमे गीत लिखनिहार गायिकाक रुपमे प्रचलित अछि।

स्विफ्टक जन्म आ वाल्यकाल पेन्सिलभेनियामे व्यतीत भेल छल आ गायिका बनवाक सपना देखैत ओ १४ वर्षक उमरमे पेन्सिलभेनिया सँ न्यासभिल गेल छल। स्विफ्ट बहुत छोट उमरमे बिग मेसिन सँ अनुबन्धन पत्रमे हस्ताक्षर करि सभ सँ छोट उमरमे रेकर्ड लेबलमे हस्ताक्षर केनिहार पहिल गायिका बनल छल। हुनकर अपन पहिल साङ्गीतिक एल्बमक रुपमे सन् २००६ मे टेलर स्विफ्ट नामक एल्बम सार्वजनिक केनए छल जे बिलबोर्ड २००कें शीर्ष ५ मे आएल छल तँ सन् बीसम दशकक सभ सँ लम्बा समय धरि चार्टमे अडिग रहऽ वाला एल्बम बनैमे सफल भेल छल। उक्त एल्बमक तेसर गीत अावर सङ बिलबोर्ड हट कन्ट्री तालिकामे शीर्ष स्थान अाएल छल तँ ई गीत करैत काल स्विफ्ट ककरो सहायता बीना गीत लिखनिहार आ प्रस्तुत करऽ लेल सक्षम सभ सँ युवा गायिकाक रुपमे चर्चित भऽ  गेल। स्विफ्ट अपन दोसर एल्बमक रुपमे फियरलेस एल्बम सार्वजनिक केल्ह्नि जकर दुई गीत लभ स्टोरी आ यु बिलङ विथ मी नामक गीतसभ  बहुत बेसी चर्चित भेल तँ ओ गीतसभक कारण फियरलेस एल्बम सन् २००९ कें सभ सँ बेसी बिक्री होमए लेल सफल बनल। फियरलेस एल्बम चारिम ग्रामी अवार्ड जितऽमे सेहो सफल भेल छल।




#Article 380: हैरिसन फोर्ड (122 words)


हैरिसन फोर्ड (१३ जुलाई १९४२ म जन्मल) एक अमेरिकी फिल्म अभिनेता आर निर्माता छि। फोर्ड मूल स्टार वार्स रचना त्रय म हैन सोलोक रूपम अपन प्रदर्शनक लएल आर इंडियाना जोन्स फिल्म श्रृंखलाक शीर्षक संप्रतीकक रूपम सर्वाधिक जानल जाएत अछि।. ओ ब्लेड रनर में रिक डेकार्डक रूप में, विटनेस में जॉन बुकक रूपमें, पेट्रियट गेम्स आर क्लियर एंड प्रेजेन्ट डेंजर  जैक रयानक अपन भूमिकाक लएल सेहो जानल जाएत अछि। हुनकर  चार दशक के कैरियर म प्रिज़्युम्ड इनोसेंट, द फ्युजिटिव, एयर फोर्स वन आर व्हाट लाइज़ बिनीथ सहित हॉलीवुडक  अन्य बहुत सफल (ब्लॉकबस्टर्स) फिल्में शामिल अछि ।  एक समय बॉक्स-ऑफिसक पांच शीर्ष सफल फिल्म म से चारि म हुनकर भूमिका शामिल छल ।  उनकी पांच फिल्मक राष्ट्रीय फिल्म रजिस्ट्री म शामिल कएल गेल अछि.




#Article 381: १९७९ क्रिकेट विश्वकप (432 words)


क्रिकेट विश्वकप १९७९ (आधिकारिक रुपमे प्रुडेन्सियल कप) क्रिकेट विश्वकप प्रतियोगिताक दोसर क्रिकेट विश्वकप छल । ई प्रतियोगिता ९ जुन सँ २३ जुन धरि इङ्ल्यान्डमे आयोजन भेल छल । ई टुर्नामेन्ट प्रुडेन्सियल एसुरेन्स कम्पनीद्वारा प्रायोजित छल । ई टुर्नामेन्टमे ८ टा टिम भाग लेने छल । जाहिमे ६ टा टेस्ट मान्यताप्राप्त राष्ट्र तथा २ टा गैह्र टेस्ट मान्यताप्राप्त राष्ट्र छल । 

ई प्रतियोगितामे एक म्याच ६० ओभरक खेलाएल गेल छल आ खेलाडी उज्जर पोसाकमे तथा लाल क्रिकेट बल सँ खेलैक नियम छल । म्याच दिनमे भेला कारण खेल शीघ्र सुरु कएल जाइत छल ।

टुर्नामेन्टमे टिमसभके २ समूहमे विभाजन कएल गेल छल जाहिमे प्रत्येक टिम दोसर टिम सँ खेल खेलकि छल । दुई उत्कृष्ट टिम सेमीफाइनलक लेल प्रत्येक समूह सँ अगाडी जाकि नियम छल । सेमीफाइनलक विजेता फाइनल खेलक लेल सक्षम होवाक नियम छल ।

पहिल विश्वकप इङ्ल्यान्डक ७ स्थानमे खेलाएल गेल छल । प्रतियोगितामे कूल १५ खेल भेल छल जाहिमे २ सेमीफाइनल तथा १ फाइनल रहल छल । 

ई प्रतियोगिताक आयोजक इङ्ल्यान्ड छल । आइसिसी अपन पहिल आयोजन इङ्ल्यान्डके करैक निर्णय केनए छल कियाकी इङ्ल्यान्ड सँ ओ समयमे पर्याप्त संसाधन छल जे एकटा सफल आयोजन क सकैत छल । आइसिसीक अनुसार दिन-रातिक म्याच करैलेल असक्षम भेला कारण इङ्ल्यान्डमे जुनक महिनामे दिन लम्बा भेला कारण एहि प्रतियोगिताक आयोजन इङ्ल्यान्डके देल गेल छल । म्याच दिनमे समाप्त होमएक सम्भावना बेसी छल ।

८ राष्ट्र ई टुर्नामेन्टक लेल सहभागी भेल छल । श्रीलंका तथा क्यानाडा मात्र एहन टिम छल जे टेस्ट खेलैक मान्यता नै पौने छल ।

१९७९ क्रिकेट विश्वकपक पहिलो सेमीफाइनल खेल वेस्ट इन्डिज तथा पाकिस्तान बीच खेलल गेल छल ताहिना दोसर सेमीफाइनल खेल इङ्ल्यान्ड तथा न्युजिल्यान्ड बीच खेलल गेल छल । पहिल सेमीफाइनल खेलमे वेस्ट इन्डिज पाकिस्तानके ४३ रन सँ आ दोसर सेमीफाइनलमे इङ्ल्यान्ड न्युजिल्यान्डके ९ रन सँ हराए फाइनलक यात्रा तय केनए छल ।

फाइनलमे वेस्ट इन्डिजद्वारा इङ्ल्यान्ड ९२ रन सँ पराजित भेल छल । इङ्ल्यान्ड पहिने टस जित बलिङ करैक निर्णय केनए छल । वेस्ट इन्डिजक पहिल ४ विकेट ९९ रनमे आउट भेल छल मुदा भिभियन रिचर्डसक तुफानी १३८ रन (१५७ बल) आ कोल्लिस किङ्गक ८६ रन (६६ बल) क मदति सँ वेस्ट इन्डिज सम्मानजनक २३८/५ (६० ओभर) बनेनाए छल । 

इङ्ल्यान्ड जवाफमे बढिया सुरुवात केलक ओकर प्रारम्भिक ब्याट्सम्यान माइक ब्रीयरली ६४ रन (१३० बल) तथा ज्योफ बोयकट ५७ रन (१०५ बल) धिमा सुरुवात देलक । ओसभ पहिल विकेटक लेल १२९ रन बनेलक मुदा ओकर लेल ३८ ओभर लगेनाए छल । ओभरक कमीक कारण इङ्ल्यान्डक अन्य ब्याट्सम्यान दवाबमे अपन विकेट नै बचाए सकल आ अन्तत: १९४ रनमे अल आउट भेल । ई म्याचमे उत्कृष्ट प्रदर्शन केनिहार वेस्ट इन्डिजक धुवांधार ब्याट्सम्यान भिभियन रिचर्डसके म्यान अफ द म्याच सँ समनित कएल गेल ।




#Article 382: १९८३ क्रिकेट विश्वकप (325 words)


क्रिकेट विश्वकप १९८३ (आधिकारिक रुपमे प्रुडेन्सियल कप) क्रिकेट विश्वकप प्रतियोगिताक तेसर क्रिकेट विश्वकप छल । ई प्रतियोगिता ९ जुन सँ २३ जुन धरि इङ्ल्यान्डमे आयोजन भेल छल जकरा भारत जितने छल । ई टुर्नामेन्ट प्रुडेन्सियल एसुरेन्स कम्पनीद्वारा प्रायोजित छल । ई टुर्नामेन्टमे ८ टा टिम भाग लेने छल । ई क्रिकेट विश्वकप सुरु सँ नाटकीय रहल छल । भारत तथा जिम्बाब्वे जका टिम विश्वकप सुरु होमए सँ पहिने आन टिमक मुकाबलामे स्तरीय क्रिकेट नै खेलैक छल मुदा ओसभ वेस्ट इन्डिज तथा अस्ट्रेलिया जका कड़गड़ टिमसभके हराए सनसनी फैलोनए छल । 

ई प्रतियोगितामे एक म्याच ६० ओभरक खेलाएल गेल छल आ खेलाडी उज्जर पोसाकमे तथा लाल क्रिकेट बल सँ खेलैक नियम छल । म्याच दिनमे भेला कारण खेल शीघ्र सुरु कएल जाइत छल । ई प्रतियोगितामे सेहो म्यान अफ द सिरिजक व्यवस्था नै कएल गेल छल ।

टुर्नामेन्टमे टिमसभके २ समूहमे विभाजन कएल गेल छल जाहिमे प्रत्येक टिम दोसर टिम सँ खेल खेलकि छल । दुई उत्कृष्ट टिम सेमीफाइनलक लेल प्रत्येक समूह सँ अगाडी जाकि नियम छल । सेमीफाइनलक विजेता फाइनल खेलक लेल सक्षम होवाक नियम छल ।

ई पहिल विश्वकप छल जे इङ्ल्यान्डक १४ टा अलग-अलग स्थानमे खेलाएल गेल छल । प्रतियोगितामे कूल २७ खेल भेल छल जाहिमे २ सेमीफाइनल तथा १ फाइनल रहल छल । 

ई प्रतियोगिताक आयोजक इङ्ल्यान्ड छल । आइसिसी अपन पहिल आयोजन इङ्ल्यान्डके करैक निर्णय केनए छल कियाकी इङ्ल्यान्ड सँ ओ समयमे पर्याप्त संसाधन छल जे एकटा सफल आयोजन क सकैत छल । 
८ राष्ट्र एहि टुर्नामेन्टक लेल सहभागी भेल छल । जहिमे ७ टा टिम पूर्ण आइसिसी मान्यता प्राप्त छल । (श्रीलंका आइसिसीक सन्निकट पूर्ण सदस्य बनाएल गेल छल तहिना जिम्बाब्वे १९८२ क आइसिसी ट्रफी जिते से मान्यता प्राप्त केनए छल ।)

१९८३ क्रिकेट विश्वकपक पहिल सेमीफाइनल खेल इङ्ल्यान्ड तथा भारत बीच खेलल गेल छल तहिना दोसर सेमीफाइनल खेल पाकिस्तान तथा वेस्ट इन्डिज बीच खेलल गेल छल । पहिल सेमीफाइनल खेलमे भारत इङ्ल्यान्डके ६ विकेटसँ आ दोसर सेमीफाइनलमे वेस्ट इन्डिज पाकिस्तानके ८ विकेटसँ हराए फाइनलक यात्रा तय केनए छल ।




#Article 383: १९८७ क्रिकेट विश्वकप (251 words)


१९८७ क्रिकेट विश्वकप (आधिकारिक रुपमे रिलायन्स विश्वकप) क्रिकेट विश्वकप प्रतियोगिताक चारिम क्रिकेट विश्वकप छल । ई प्रतियोगिता ८ अक्टुबर सँ ८ नवम्बर धरि भारत तथा पाकिस्तानमे आयोजन भेल छल । ई टुर्नामेन्ट रिलायन्स कम्पनीद्वारा प्रायोजित छल । प्रतियोगितामे कूल ८ टिम सहभागी छल । म्याच ६० ओभरक बदला ५० ओभरक खेलाएल गेल छल (वर्तमान नियम अनुसार) । ई प्रतियोगितामे सेहो म्यान अफ द सिरिजक व्यवस्था नै कएल गेल छल । ई प्रतियोगिताक रोमाञ्चक फाइनल खेलमे अस्ट्रेलिया इङ्गल्याण्डके ७ रन सँ हराबैत उपाधि जितने छल । आयोजक राष्ट्र भारत तथा पाकिस्तान दुनू प्रतियोगिताक सेमी फाइनलधरि पहुँचल छल तहिने २ बेरक उपाधि विजेता वेस्ट इन्डिज समूह चरण सँ बाहर भेल छल ।

टुर्नामेन्टमे टिमसभके २ समूहमे विभाजन कएल गेल छल जाहिमे प्रत्येक टिम दोसर टिम सँ खेल खेलकि छल । दुई उत्कृष्ट टिम सेमीफाइनलक लेल प्रत्येक समूह सँ अगाडी जाकि नियम छल । सेमीफाइनलक विजेता फाइनल खेलक लेल सक्षम होवाक नियम छल ।

आइसिसीद्वारा सातटा सहभागी राष्ट्रके टेस्ट क्रिकेटमान्यता प्रदान कएलाक कारण ओसभ प्रतियोगिताक लेल स्वत: छनौट भेल छल तहिने १ टा टिमक लेल १९८६ क आइसिसी ट्रफी विजेताके प्रदान कएल गेल छल । जकर उपाधि जित जिम्बाब्वे एहि विश्वकपक लेल छनौट भेल छल । ओ आइसिसी ट्रफी १९८६ क फाइनलमे नेदरल्याण्डके नाटकीय रुपमे हरेनाए छल ।

१९८७ क्रिकेट विश्वकपक पहिलो सेमीफाइनल खेल अस्ट्रेलिया तथा पाकिस्तान बीच आ दोसर सेमीफाइनल खेल इङ्गल्याण्ड तथा भारत बीच खेलल गेल छल । पहिल सेमीफाइनल खेलमे अस्ट्रेलिया पाकिस्तानके १८ रन सँ हरेनाए छल तहिने दोसर सेमीफाइनलमे इङ्गल्याण्ड भारतके ३५ रनसँ हराबैत फाइनलक यात्रा तय केनए छल ।




#Article 384: राँची (109 words)


राँची () भारत का एक महानगर छी आर ई झारखण्ड प्रदेशक राजधानी छी। पहिल जब ई बिहार राज्यक हिस्सा छल तखन गर्मीमे अपन अपेक्षाकत ठण्डा मौसमक कारण प्रदेशक राजधानी होइत छल । झारखण्ड आन्दोलनक समय राँची एकर केन्द्र होइत छल। 
राँची एक प्रमुख औद्योगिक केन्द्र सहो छी। जतेक मुख्य रूपसँ एचइसी (हेभी इन्जिनियरिङ्ग कोर्पोरेसन), स्टील अथारटी अफ इन्डिया, मेकन इत्यादिक कारखाना अछी। राँची साथ साथ जमशेदपुर आ बोकारो ई प्रान्तक दुई अन्य प्रमुख औद्योगिक केन्द्र छी।

गहरूडा हिल एण्ड रक गार्डन: राँचीमे पर्यटक गोण्डा हिल आर रक गार्डनक भ्रमणमे जाए सकैत छी।

गहरूडा हिलमे पिकनिक मनेनाएक वाहेक पर्यटक राँचीमे माछाघर आर मूटा गोहि प्रजनन केन्द्र देखैलेल जाए सकैत छी।




#Article 385: विजयादशमी (611 words)


विजयादशमी वा बडा दशैं (अन्य नाम: दशहरा, विजया दशमी, नवरात्र, आयुध-पूजा आ प्रणय) नेपाल, भारत आ अन्य देशसभमे रहल हिन्दूसभक प्रमुख पावनि अछि । ई नेपालक राष्ट्रिय पावनि समेत रहल अछि । विजयादशमी (नवरात्र) हिन्दू धर्मवलम्बीसभ आश्विन शुक्ल प्रतिपदासँ नवमीधरि (नवरात्रभर) शक्तिक आराधना करि दशम दिन भोर दशमीक दिन टीका-प्रसाद ग्रहण आ विशेष रुपमे पुर्णिमा धरि (प्रसाद ग्रहणक लेल) मनाओल जाइत अछि । आश्विन शुक्ल प्रतिपदा (घटस्थापना)मे जमरा राखि नवमीधरि नवरात्र विधिपूर्वक प्रतिदिन भिन्न भिन्न देवीसभक पूजा होइत अछि | प्रतिपदासँ क्रमशः शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कुष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायिनी, कालरात्री, महागौरी आ सिद्धिदात्री करि अन्तिममे नवदुर्गाक पूजा करैत सप्तशती (चण्डी) पाठ करि नवदुर्गा आ त्रीशक्ति महाकाली, महालक्ष्मी आ महासरस्वतीक विशेष पूजाआजा आ आराधाना कएल जाइत अछि ।

विजयादशमीक दिन भगवतीद्वारा दानवी शक्ति उपर आ रामद्वारा रावन उपर विजय हासिल कएल उपलक्ष्य आ खुसीयालीमे नवदुर्गा भवानीक प्रसादस्वरुप लाल टिका आ जमरा लगेबाक चलन अछि । आसिन (आश्विन) महिनाक शुक्ल पक्षक दशमी तिथिक दिन ई पावनिक प्रमुख दिन छी । बताएल जाइत अछि कि भगवान् राम एहि दिन रावणक वध केनए छल । एकरा असत्य उपर सत्यके विजयक रूपमे लेल जाइत अछि । एहिकारण, ई दशमीके विजयादशमी कहल गेल अछि । आसपासक लोकके सेहो सहज होए ताहि हेतु ई कार्य पूर्णिमाधरि चलति अछि । अपन नाता कुटुम्ब पैग वुजुर्ग आ मान्यजनसँ टिका तथा जमरा लगाए आ आशीर्वाद प्राप्त करनाए, नव नव लत्ता कपडासभ लगानाए, अपन क्षमताअनुसार बढिया खाना खेनाए-खुवेनाए, घर आँगन, बाटघाट, गाम बस्ती सफासुग्गर राखनाए जका काम ई पावनिमे विशेष उत्साहक सङ्ग कएल जाइत अछि । 

विजयादशमी वर्षक तीन अत्यन्त शुभ तिथिसभमे पडैत अछि:  चैत महिनाक शुक्ल पक्षमे तथा कात्तिक महिनाक शुक्ल पक्षक प्रतिपदा तिथिमे । ई दिनसभने हिन्दूसभ नव कार्य आरम्भ करैत अछि, शस्त्रक पूजा करैत अछि । प्राचीन कालमे राजासभ एहि दिन विजयक प्रार्थना करि रण-यात्राक लेल प्रस्थान करैत छल । ई दिन ठाम-ठाममे मेलासभ लागति छल । अखनो नेपालक पूर्वी भाग आ भारतमे रामलीलाक आयोजन कएल जाइत अछि । रावणक विशाल पुतला बनाए जलाएल जाइत अछि । हर्ष एवं उल्लास तथा विजयक पर्व विजयादशमीक छी । हिन्दू संस्कृति वीरताक पूजक तथा शौर्यक उपासक छी । व्यक्ति आ समाजक खुनमे वीरता प्रकट होए ताहि ध्येयसँ विजयादशमीक उत्सव आरम्भ भेल छल । विजयादशमी पर्व दश प्रकारक पापसभ- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहङ्कार, आलस्य, हिंसा आ चोरी त्याग करकि प्रेरणा दति अछि । 

भारत तथा नेपाल कृषि प्रधान देश छी । जब कृषक अपन खेतमे सोनगर फसल रोपि अन्न रूपी सम्पत्ति घरमे लाबैत अछि तब ओकर खुसी तथा उमङ्गक सीमा नै होइत अछि। एहि खुसीक अवसरमे भगवानक कृपा मानि कृतज्ञता प्रकट करिकलेल पूजा करति अछि । दक्षिण एसियाक बहुतेक देशमे विशेष करि भारत, नेपाल, भुटान, बंगलादेश, पाकिस्तान आ बर्मा (म्यानमार)मे ई पावनि विभिन्न प्रकारसँ मनाएल जाइत अछि ।

विजयादशमी नेपालीसभक सबसँ विशेष पावनि मानल जाइत अछि । नेपाली हिन्दू पतरा अनुसार आश्विन शुक्ल प्रतिपदासँ दशमीधरि १० दिन पूजापाठ, व्रत आ उत्सवक सङ्ग ई पावनि मनावैत अछि । विशेष तथा हर्षोल्लास पावनि भेला कारण ई पावनिके विजयादशमी वा विजय दशमीक नामसँ सेहो चिनहल जाइत अछि। हिन्दू चन्द्र मासिक पञ्चाङ्ग गणनाक तिथि अनुसार भेला कारण नेपाली पावनिसभ निश्चित तिथि आ तारिखमे नै होइतअछि तहिना अङ्ग्रेजी वा ग्रेगरियन क्यालेण्डर अनुसार विजयादशमी सितम्बर महिनाक अन्त्यसँ अक्टुबर महिनाक मध्यमे पडैत अछि । विजयादशमी आश्विन शुक्ल प्रतिपदाक दिनसँ आरम्भ होइत अछि आ एकर पहिल दिनके घटस्थापना कहल जाइत अछि । विजयादशमी प्रतिपदा घटस्थापनासँ पूर्णिमा(कोजाग्रत) धरि १५ दिनक होइत अछि । एकर सुरुवाती ९ दिनके नवरात्रि आ दशम दिनके दशमी वा विजयादशमी कहल जाइत अछि | ई तिथिमे माता दुर्गाद्वारा महिषासुर नामक दैत्यके तथा भगवान् श्री रामचन्द्रद्वारा रावणके वध करि मानवजातिक कल्याण कएल किम्वदन्ती अछि । प्रतिपदा (घटस्थापना), सप्तमी (फूलपाती), महाअष्टमी, (कालरात्री), महानवमी, विजयादशमी आ पूर्णिमा (कोजाग्रत) विजयादशमीक प्रमुख तिथिसभ छी।

आश्विनस्य सिते पक्षे दशम्यां तारकोदये।

मम क्षेमारोग्यादिसिद्ध्‌यर्थं यात्रायां विजयसिद्ध्‌यर्थं

यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थों धनुर्धरः।

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#Article 386: आसिन (100 words)


आसिन (, , ) हिन्दू क्यालेन्डरक १२ महिनासभमे सँ एक महिना छी । ई महिनाके भोजपुरी, अवधि आ थारु भाषामे कुवार महिना कहल जाइत अछि । चन्द्रमासक अनुसार ई महिना भाद्र पूर्णिमाक काल्हिसँ सुरु भेल मानल जाइत अछि ताहिना सौर्यमास अनुसार आसिनक महिना कन्या सक्रान्तिक दिन सुरु होमएत अछि । मुदा शाक्य पञ्चाङ्गक अनुसार आसिन महिना कन्या सक्रान्तिक ५ दिन बाद सुरु होइत अछि। नेपालमे सौर्यमासके प्रयोगमे आनल गेल अछि। आसिनक महिना शरदऋतुक पहिल महिना छी । अङ्ग्रेजी महिनाक आधा सितम्बर महिना आ आधा अक्टुबर महिना आश्विन महिनामे पडैत अछि। 

आसिन महिनामे विवध पावनिसभ मनाएल जाइत अछि। जे निम्नलिखित अछि:




#Article 387: कमल मन्दिर (163 words)


कमल मन्दिर  भारतक राजधानी दिल्ली,नेहरू प्लेसक नजदिक स्थित एक बहाई उपासना स्थल अछि। ई अपने आप मे एक अनूठा मन्दिर छी। अहि ठाम नै कियो मूर्ति अछि आर नै कोनो प्रकारक कोनो धार्मिक कर्म-काण्ड कएल जाइत अछि, अतके विपरीत अहि ठाम पर विभिन्न धर्मसभसँ समबन्धित विभिन्न पवित्र लेख पढल आर अध्ययन कएल जाइत अछि।   

मन्दिरक स्थापना वास्तुकार फ़रीबर्ज़ सहबा तैयार केने छल। ई मन्दिर निर्माण के बाद एहन जगहक जरूरत महसूस भेल,जही ठाम सभी जिज्ञासुयोंके प्रशनक सहजता स उत्तर देल जा सकि । तब सूचना केन्द्र के गठनक बारे म निर्णय लेले गेल। सूचना केन्द्र के निर्माण म करीब पाँच सालक समय लगल। ई मार्च २००३ में जिज्ञासुओं के लेल खोलल गेल। सूचना केन्द्रमे मुख्य सभाघर अछि, जहिमे करीब ४०० लोग एक साथ बैठ सकैत छि। इसके अतिरिक्त दो छोटे सभाघर सहो अछि, जहिमे करीब ७० सीट अछि।भारतीय उपमहाद्वीप म भारतक कमल मन्दिर के अलावा छह मन्दिर एसिया-पश्चिमी समोआ, सिडनी-आस्ट्रेलिया, कंपाला-यूगांडा, पनामा सिटी-पनामा, फ्रैंकफर्ट-जर्मनी आर विलमाँट- संयुक्त राज्य अमेरिका में सेहो अवस्थित अछि। 




#Article 388: तिथि (239 words)


हिन्दू काल गणनाक अनुसार मासमे ३० तिथि होइत अछि, जे दुई पक्षमे बटल होइत अछि। चन्द्र मास एक अमावस्याक अन्त सँ शुरु भऽ दोसर अमावस्याक अन्त धरि रहति अछि। अमावस्याक दिन सूर्य आ चन्द्रमाक भौगांश बराबर होति अछि। एहि दुनू ग्रहसभक भोंगाशमे अन्तरक बढनाए ही तिथिक जन्म देत अछि। तिथिक गणना निम्न प्रकार सँ कएल जाइत अछि। 

तिथि = चन्द्रमाक भोगांश - सूर्यक भोगांश / (Divide) 12. 

वैदिक लोग वेदाङ्ग ज्योतिषक आधार पर तिथिक अखण्ड मानति अछि । क्षीण चन्द्रकला जब पैग होमए लगति अछि तब अहोरात्रात्मक तिथि मानति अछि। जे दिन चन्द्रकला क्षीण होइत ओहि दिन अमावास्या मानल जाइत अछि । ओकर दोसर दिन शुक्लप्रतिपदा होति अछि । एक सूर्योदयसँ अपर सूर्योदयधरिक समय जकरा वेदासभमे अहोरात्र कहल गेल अछि ओकरा एक तिथि मानल जाइत अछि । प्रतिपदातिथिक १, एहि क्रमसँ २,३, ४,५,६,७,८,९,१०,११,१२, १३, १४ आ १५ सँ पूर्णिमा जानल जाइत अछि । एहि तरह पूर्णिमाक दोसर दिन कृष्णपक्षक प्रारम्भ होइत अछि आ ओकरा कृष्णप्रतिपदा (१) मानल जाइत अछि एहि क्रमसँ २,३,४,५,६,७,८,९,१०,११,१२, १३,१४ एहि दिन चन्द्रकला क्षीण होए तँ कृष्णचतुर्दशी तुटल मानि ओहि दिन अमावास्या मानि दर्शश्राद्ध कएल जाइत अछि आ १५अम दिन चन्द्रकला क्षीण होए तँ बिना तिथि तुटल पक्ष समाप्त होइत अछि। नेपालमे वेदाङ्ग ज्योतिषक आधार पर वैदिक तिथिपत्रम् (वैदिक पञ्चाङ्ग) व्यवहारमे आनल गेल अछि। सूर्य सिद्धान्तक आधारक पञ्चाङ्गसभक तिथिसभ दिनमे कोनो भी समय आरम्भ भऽ सकैत अछि आ एकर अवधि उन्नासि सँ छब्बीस घण्टाधरि भऽ सकैत अछि।

ई १-१५ धरि तिथिसभके निम्न नाम कहल जाइत अछि:-




#Article 389: समस्तीपुर (126 words)


समस्तीपुर  भारत गणराज्य के बिहार प्रान्त में दरभंगा प्रमंडल स्थित एक शहर एवं जिला छी। समस्तीपुर के उत्तर में दरभंगा, दक्षिण में गंगा नदी आर पटना जिला, पश्चिम में मुजफ्फरपुर आ वैशाली, तथा पूर्व में बेगूसराय एवं खगड़िया जिला अछि। एत शिक्षा के माध्यम हिन्दी, उर्दू आ अंग्रेजी अछि लेकिन  बोल-चाल में बज्जिका आर मैथिली जाएत अछि। मिथिला क्षेत्र के परिधि स्थित इ जिला उपजाऊ कृषि प्रदेश छी। समस्तीपुर पूर्व मध्य रेलवे के मंडल सहो अछि। समस्तीपुर के मिथिला के प्रवेशद्वार कहल जाएत अछि।

समस्तीपुरक परंपरागत नाम सरैसा अछि। एकर वर्तमान नाम मध्य कालमें बंगाल एवं मिथिलाक शासक हाजी शम्सुद्दीन इलियास ((१३४५-१३५८ ईस्वी)के नाम पर पड़ल अछि। किछ किछु लोकक मानैत छै कि एकर पहिलुका नाम सोमवती छल जे बदलिक' सोम वस्तीपुर फेर समवस्तीपुर आओर समस्तीपुर भ' गेल।




#Article 390: १९९२ क्रिकेट विश्वकप (158 words)


क्रिकेट विश्वकप १९९२ (आधिकारिक रुपमे बेन्सन्स एण्ड हेजेज क्रिकेट विश्वकप) क्रिकेट विश्वकप प्रतियोगिताक पाँचम क्रिकेट विश्वकप छल । ई प्रतियोगिता २२ फरबरी सँ २५ मार्चधरि अस्ट्रेलिया तथा न्युजिल्यान्डमे भेल छल। ई टुर्नामेन्ट बेन्सन्स एण्ड हेजेज कम्पनीद्वारा प्रायोजित रहल छल। ई टुर्नामेन्टमे ९ टा टिम सहभागिता जनेनाए छल। 

सन् १९९२ क्रिकेट विश्वकप अस्ट्रेलिया तथा न्यूजिल्यान्डमे आयोजित कएल गेल छल। ई विश्वकपमे पहिल बेर रङ्गीन जर्सी, उज्जर क्रिकेट बल तथा कारी साइट स्क्रीनक प्रयोग कएल गेल छल जे बादमे जा अत्यन्त लोकप्रिय भेल छल। ई पहिल क्रिकेट विश्वकप छल जे दक्षिणी ध्रुवमे आयोजना कएल गेल छल। ई पहिल विश्वकप छल जहिमे दक्षिण अफ्रिका राष्ट्रिय क्रिकेट टिमके समावेश कएल गेल छल।

१९९२ क्रिकेट विश्वकपमे ७ टा टेस्ट खेलनिहार टिमक सहभागिता छल तथा पहिल बेर दक्षिण अफ्रिका सेहो टेस्ट खेलल हैसियतक कारण ई विश्वकपमे सहभागी होमए लेल छनौट भेल छल तथा जिम्बाब्वे १९९० आइसिसी ट्रफी जित विश्वकप खेलैलेल छनौट भेल छल । टिम जे ई विश्वकपमे सहभागिता जनेनाए छल ओ निम्न अछि: 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

 

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

 
 

 
 

 




#Article 391: पारस खड्का (192 words)


पारस खड्का(जन्म:७ कार्तिक २०४४ तदनुसार  २४ अक्टोबर १९८७) नेपाली क्रिकेट खेलाडी छी ।  ओं दाहिना हाते ब्याट्सम्यान तथा दाहिना हाते मध्यम बलर छी ।  पारस सन् २००४ सं नेपाली राष्ट्रिय क्रिकेट टिमक नियमित सदस्य छी । 

पारस खड्का  पहिल अन्तर्राष्ट्रिय खेल अण्डर-१५ एसिया कप यूएई म सन् २००२ डिसम्बरम खेल्ने छल।

पारस खड्का नेपाल खेलकुद पत्रकार मञ्च प्रत्येक वर्ष प्रदान करsवाला वर्ष खेलाडी उपाधि दुई बेर जितने अछि । ओ वि.सं.२०६६ आर २०६९ क वर्ष खेलाडी उपाधि जितेल छल  । नेपाली राष्ट्रिय क्रिकेट टिमक कप्तान पारसक नेतृत्वम नेपाल वि.स. २०६९ म दुई अन्तर्राष्ट्रिय प्रतियोगिता जितने छल तहिना एकटाक फाइनलम सहो पहुँचने छेलाह । पारस कप्तान रहेल टिम मलेसियाम सम्पन्न आइसिसी वर्ल्ड क्रिकेट लिग डिभिजन-४ आर वाहि लगत्तै दुबईम एसिसी एलिट ट्रफी २०१३ क उपाधि जित्ने छल । तहिना चैतम नेपालमे सम्पन्न एसिसी टि-ट्वान्टी कप २०१३क फाइनल खेलने छल । एसिसीक दुनु प्रतियोगिताम पारस 'म्यान अफ द सिरिज' बनल । उनकर नेतृत्वम सशस्त्र प्रहरी बल (एपिएफ) घरेलु प्रतियोगितामा सहो सफलता चुमने छल । ओंन्यू जील्याण्डम भेल २०१४ क्रिकेट विश्वकप छनौट खेल्वाक लएल सहो पहुँचल छेलाह । न्युजिल्याण्डमा दुखद नतिजा निकालला  पारसका कप्तानिम नेपाल बंगलादेशम सम्पन्न टि टवान्टि वर्ल्डकपम सुखद नतिजा निकालन छल ।




#Article 392: श्री शैल्य शिखर मालिकार्जुन मन्दिर (146 words)


शैल्य शिखर मालिकार्जुन मन्दिर  नेपालक दार्चुला जिलाम अवस्थित मन्दिर छी । ई मन्दिर नेपाल सरकार २०६५ सालम  देशक सातम धाम घोषणा केनेए अछी। राष्ट्रक सातम धाम तथा जिलाक प्रमुख धार्मीक पर्यटकीयस्थलक रुपम चिनिहल जायेत अछि ई मालिकार्जुन मन्दिरम विशेषक प्रत्येक वर्ष कार्तिक आर अगह्न महिनाम जात्रा आर भदौ महिनाक गौरा पर्व लाग्ल जायेत अछि। ई मालिकार्जुन मन्दिर सं  ५००० मिटरक उचाईम श्री शैल्य शिखरधाम अछि ।ई शैल्य शिखरधामम विशेष कक् असार शुक्ल चर्तुदशी आर कार्तिक शुक्ल त्रियोदसिक दिन जात्रा लागैत अछि। श्री शैल्य शिखर धामक दर्शन महिलाक हकमा विबाहित आर पुरुषक हकमा ब्रतबन्ध करल ब्यक्ति मात्रै जा सकैत अछी  मालिकार्जुन गाविसमा लटिनाथ, कैलपाल आर बालिचन देवताक मन्दिर सहो अछि। लटिनाथ मालिकार्जुनका सुपुत्र छी तहिना कैलपाल लटिनाथ देवताक भाई अर्थात हुनकर मामाक सुपुत्र छी ।

हिन्दु शास्त्र परम्पराअनुसार वैद्धिक मन्त्र आर विधिक साथ पुजापाठ होएवाला ई ठामम समस्त नरनारी मानवजगत शुदता वर्तेर शिखर स्वामीको दर्शन करैत अछी।




#Article 393: पाथीभरा देवी (ताप्लेजुङ) (132 words)


पाथीभरा ताप्लेजुङ जिलामा रहेल एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल छी । पाथीभरा मन्दिर हिन्दू एवं बौद्धसभक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल छी । ई ताप्लेजुङ जिलाक १२ हजार फिट उचाइम रहल  अछि। विश्‍वास आस्था एवं पवित्रताकी देवी पाथीभराक ई पवित्र स्थल ताप्लेजुङ जिलाक सदरमुकाम फुङ्गलिङसं १९.४ कि.मी. पूर्वोत्तरतर्फ ३७९४ मी.क उचाईमा अवस्थित अछि ।  ई फुङ्लिङ बजारस १ दिन पैदल चैलक जासकैत छी । ई मन्दिरम वर्ष भरि भक्तजनसभक भिड लगल रहेत । अन्न भरल पाथी जोंगा सुन्दर, मनमोहक आकृति  पाथीभरा पहाडको शिखरक (टुप्पोमा) देवीको उत्पतिस्थल रहल ई देवीको नाम पाथीभरा देवी  श्रद्धा एवं भक्तिपूर्वक पुकारल जाएत् अछि । ताप्लेजुङ्गक रैथाने लिम्बू समुदायसभक पाथीभरा मुक्‍तुवुङ चिनहल जायेत अछि । लिम्बूभाषाक मुक्‍तुक अर्थ शक्ति वा बल, वुङक अर्थ बोट कहेक चिन्हल जायेत अछी । अर्थात लिम्बूजातिसभ पाथीभरा शक्ति वा बलक श्रोत गाछक रूपम प्रकट केनेए अछि ।




#Article 394: अनुराधा कोइराला (203 words)


अनुराधा कोइराला नेपालक समाजसेवी, माइती नेपालक संस्थापक अध्यक्ष आ वर्तमान प्रदेश नं. ३क प्रदेश प्रमुख छी । ओ अपन गैरसरकारी संस्था माइती नेपालक मद्दतिसँ किनबेच भेल स्त्रीसभक उद्वार करैत अछि । भारतीय कोठीसभमे बेचल गेल आ बदत्तर जीवन वितेवाक लेल वाध्य नेपाली स्त्रीसभक उद्वार तथा पुनर्स्थापनामे हिकर संस्था क्रियाशील अछि। ओ सन् २०१० मे सिएनएन हिरोक उपाधिसँ सेहो सम्मानित भेल छल ।

अनुराधाक जन्म १४ अप्रैल १९४९ मे ओखलढुङ्गा जिलाक रुम्जाटारमे गुरुङ परिवारमे भेल छल। हुनकर पिता कर्णेल प्रताप शिंह गुरुङ आ माता लक्ष्मी गुरुङ अछि ।

अनुराधा, १० कक्षा धरि भारतक कालिम्पोङमे अध्ययन आ भारतक कोलकातासँ स्नातक उतिर्ण केनए छल। चारि भाई आ दुई दिदी बहीनमे सँ ओ सैझली छल । १९ वर्षक किशोर 
उमेरमे काठमाडौंक दिनेशप्रसाद कोइरालासँ वैवाहिक बन्धनमे बन्हल अनुराधाक एक मात्र पुत्र मनीष कोइराला सेहो 'प्रयास नेपाल' नामक गैरसरकारी संस्था चलबैत अछि। 

कोइराला संयुक्त राज्य अमेरिकाक क्यालिफोर्नियाक लस एन्जलसमे सिएनएन हिरो उपाधि जितने छल । ओ डेमी मुर आ एस्टन कचरद्वारा मञ्चमे संयुक्तरुप सँ बजाएल गेल छल ।

कोइरालाकें माइती नेपालक अपन कार्यक्रम जारी राखऽ कऽ लेल अमेरिकी डलर १,००,००० संगे २५,०० कदर स्वरुप सिएनएनद्वारा प्रदान कएल गेल छल ।

ओ सन् २०१४ मे मदर टेरेसा पुरस्कार आसन् २०१७ अप्रैलमे भारतक चारिम सर्वोच्च नागरिक सम्मान पुरस्कार पद्मश्री प्राप्त केलक।




#Article 395: मारिया क्युरी (149 words)


मारिया क्युरी (वाल्यकालक नाम: मारिया सालोमिया स्कोलोडोवस्का),  (; ; (१८६७ नोभेम्बर ७ - १९३४ जुलाई ४) एकटा विख्यात भौतिकविद तथा रसायनशास्त्री छल । ओ रेडियम तत्व पत्ता लगेने छल । विज्ञानक दुटा शाखामे (भौतिक शास्त्रमे नोबेल पुरस्कार तथा रसायन शास्त्रमे नोबेल पुरस्कार)मे नोबेल पुरस्कार सँ सम्मानित भेल पहिल वैज्ञानिक छी । वैज्ञानिक माता मेरीक दुनु पुत्रीसभ सेहो नोबल पुरस्कार प्राप्त केने छल। जेठकी पुत्री आइरीनक १९३५मे रसायन विज्ञानमे नोबेल पुरस्कार प्राप्त भेल छल तथा छोटकी पुत्री ईवक १९६५मे शान्तिक लेल नोबेल पुरस्कार जितने छल ।
म्याडम क्युरी आधुनिक विज्ञान जगतके महत्वपूर्ण योगदान दिक गौरवमय स्थान राखमे सफल साधिका छी । एकेटा वंशमे पहिल आर दोसर पुस्ताक पाँच गोटे सदस्य नोबेल पुरस्कार लेबमे सफल भेल  विश्वक लेल उदाहरण भेल अछि । आपन जीवनकालमे म्याडम क्युरी दुबेर नोबेल पुरस्कारसँ विभूषित भेल तथा इन्कर पति पियरे क्युरी,पुत्री इरेने क्युरी एवम् जमाई फ्रैकरिक जुलियट सेहो नोबेल पुरस्कारसँ विभूषित हुवमे अवसर प्राप्त hindustan times




#Article 396: भिभ रिचर्ड्स (296 words)


सर इसाक भिभियन एलेक्जेन्डर रिचर्ड्स, केजिएन, ओबिई (जन्म - ७ मार्च १९५२ सेन्ट जोन, एन्टिगुआ) वेस्ट इन्डिजक पूर्व क्रिकेटर छी। क्रिकेट जगतमे एकर दोसर नाम भिभियन या, भिभ आ किङ्ग भिभक रूपमे अधिक लोकप्रिय नाम सँ जानल जाइत अछि, रिचर्ड्सके १०० सदस्यसभक विशेषज्ञ प्यानल बीसम शताब्दीक पाँच महान खेलाडीसभक सूचीमे शामिल केनए अछि, ई सूचीमे भिभियन रिचर्ड्सक छोडि सर डोनाल्ड ब्रेडम्यान, सर गैरीफील्ड सोबर्स, सर जैक हब्स आ महान लेग स्पिनर शेन वार्नक नाम सेहो शामिल छल। फरवरी २००२ मे क्रिकेटक बाइबल कहल जाइवला क्रिकेट पत्रिका विजडनद्वारा भिभियन रिचर्ड्सक एक पारीके एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेटक सर्वश्रेष्ठ इनिङ्ग घोषित कएल गेल। ओहि वर्ष दिसम्बरमे विजडन हुनका वनडे क्रिकेटक सर्वकालीन आ टेस्ट क्रिकेटक तीन महान बल्लेबाजसभमेसँ एक घोषित केलक, सवा सौ सालक क्रिकेट इतिहासमे मात्र दुई बल्लेबाज सर डन ब्रेडम्यान आ भारतक सचिन तेन्दुलकरक स्थान हुनकासँ उपर आकल गेल अछि।

रिचर्ड्स दाहिना हाथक एक आक्रामक बल्लेबाज छल, जे गेन्द पर बहुतेक शक्तिसँ प्रहार करैत छल, एकर वाहेक ओ स्लिपक बढिया क्षेत्ररक्षक आ उपयोगी अफ स्पिनर छल। क्रिकेट इतिहासमे हुनका एक एहन बल्लेबाजक रुपमे जानल जाइत अछि, जे कोनो भी तरहक आक्रामणक धज्जी उड़ाबैमे महारत रखैत छल, पूर्व क्रिकेटर, हुंकार समकालीन, क्रिकेट पत्रकार आ ई खेलक प्रशंसक सब रिचर्डसके असाधारण प्रतिभा भेल क्रिकेटर बतौने अछि, रिचर्डसक आक्रमकताक अन्दाज एहिसँ लगाएल जा सकैत अछि कि अपन सत्रह सालक लम्बा क्रिकेट करियरक दौरान ओ कहियो ब्याटिङ्ग करैतकाल हेल्मेटक प्रयोग नै केलक।

रिचर्ड्सक विवाह मरियमसँ भेल, जाहिसँ हुनका दुई सन्तान भेल, एक मातारा रिचर्ड्स जे अखन टोरन्टो, क्यानाडामे अछि आ दूसर माली रिचर्ड्स, जे प्रथम श्रेणी क्रिकेटर सेहो छी। भारतीय अभिनेत्री नीना गुप्ताक साथ सेहो हुनकार सम्बन्ध रहल अछि, जाहिसँ हुनका एक बेटी मसाबा गुप्ता अछि। (जन्म: 1989).

सन् १९९९ मे क्रिकेटमे अमूल्य योगदानकै देखैत हुनका एन्टिगुआक राष्ट्रिय नायक घोषित कएल गेल आ हुनका अर्डर अफ द नेशनल हिरोक उपाधिसँ सम्मानित कएल गेल।




#Article 397: नीना गुप्ता (130 words)


नीना गुप्ता (जन्म: ४ जुलाई १९५९) हिन्दी चलचित्रक एक अभिनेत्री, टेलिभिजन कलाकार आ चलचित्र निर्देशक तथा निर्मात्री छी। हुनका वर्ष १९९० मे चलचित्र वो छोकरी' क लेल उत्कृष्ट सहायक अभिनेत्रीक राष्ट्रिय चलचित्र पुरस्कार मिलल छल। ओ अस्सीक दशकमे प्रसिद्द क्रिकेटर भिभ रिचर्ड्सक साथ अपन प्रेम समबन्धक कारण काफ़ीफी चर्चामे रहल; आ सन् १९८९ मे ओ भिभसँ बिना विवाह केनए बेटी मसाबाक जन्म देलक।

नीना गुप्ताक जन्म नयाँ दिल्लीमे भेल आ ओ सनावर लौरेन्स स्कूलमे शिक्षा ग्रहण करलक। हुनकर पिताक नाम आरएन गुप्ता छल। वेस्ट इन्डिजक प्रसिद्द क्रिकेट खेलाडी भिभियन रिचर्ड्ससँ हुनका एक बेटी मसाबा गुप्ता अछि जे एक प्रसिद्द फ्यासन डिजाइनर छी। नीना सन् २००८ मे पेशासँ चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट विवेक मेहरासँ विवाह केलक।

नीनाक सन् १९९० मे चलचित्र वो छोकरी' क लेल उत्कृष्ट सहायक अभिनेत्रीक राष्ट्रिय चलचित्रक पुरस्कार मिलल छल।




#Article 398: कञ्चनरुप नगरपालिका (129 words)


कञ्चनरूप नेपालक प्रदेश नं. २ अन्तर्गत  सप्तरी जिलामे रहल एक नगरपालिका छी ।नेपाल सरकारद्वारा वि. सं. २०७१ वैशाख २५ गते ७२ टा नव नगरपालिका थप करैत काल कञ्चनरूपकें सेहो नगरपालिका घोषित केनए छल । कञ्चनरूपकें नगरपालिका घोषित करैतकाल सप्तरीक बरमझीया, बदगामा, ठेलिया, जगतपुर, कञ्चनपुर, पिप्रापूर्व, रुपनगर, धरमपुर आ घोघनपुर गाउँ विकास समितिकें समेटल गेल छल ।

नेपालमे वि.सं. २०७३ मे ७५३ स्थानीय तह लागू करैतकाल कञ्चनरूप नगरपालिकाकें यथावतै राखि ई नगरपालिकामे वैरवा आ बकधुवा (७-९) गाउँ विकास समितिसभकें समेटने छल । ई नगरपालिकाकें १२ वडामे विभाजन कएल गेल अछि । ई नगरपालिकाक कूल जनसङ्ख्या ३५,८९८ रहल अछि । एकर क्षेत्रफल १४३.३३ वर्गकिलोमिटर रहल अछि । ई नगरपालिकाक केन्द्र साविकक कञ्चनरूप नगरपालिकाक कार्यालयमे राखल गेल अछि ।

नेपालक सन् २०११ क जनगणना अनुसार कञ्चनरूप नगरपालिकाक जनसङ्ख्या ३५,८९८ रहल अछि । 




#Article 399: शम्भुनाथ नगरपालिका (117 words)


शम्भुनाथ नेपालक प्रदेश नं. २ अन्तर्गत  सप्तरी जिलामे रहल एक नगरपालिका छी ।नेपाल सरकारद्वारा वि. सं. २०७१ वैशाख २५ गते ७२ टा नव नगरपालिका थप करैत काल शम्भुनाथकें सेहो नगरपालिका घोषित केनए छल । शम्भुनाथकें नगरपालिका घोषित करैतकाल सप्तरीक खोक्सरप्रवाहा, मोहनपुर, शम्भुनाथ, भंगाहा, बसबलपुर आ रामपुर जमुवा गाउँ विकास समितिकें समेटल गेल छल ।

नेपालमे वि.सं. २०७३ मे ७५३ स्थानीय तह लागू करैतकाल शम्भुनाथ नगरपालिकाकें यथावतै राखने अछि । ई नगरपालिकाकें ११ वडामे विभाजन कएल गेल अछि । ई नगरपालिकाक कूल जनसङ्ख्या ३३,०१२ रहल अछि । एकर क्षेत्रफल ९९.९९ वर्गकिलोमिटर रहल अछि । ई नगरपालिकाक केन्द्र साविकक शम्भुनाथ नगरपालिकाक कार्यालयमे राखल गेल अछि ।

नेपालक सन् २०११ कऽ जनगणना अनुसार शम्भुनाथ नगरपालिकाक जनसङ्ख्या ३३,०१२ रहल अछि । 




#Article 400: दड़िभङ्गा जिला (138 words)


दड़िभङ्गा जिला (, ) पूर्वी भारतक बिहार राज्यक ३८ जिलामे एक जिला छी। ई जिलाक मुख्यालय दड़िभङ्गा शहर छी। दड़िभङ्गा जिला दड़िभङ्गा प्रमण्डलक एक जिला छी। ई जिलाके उत्तरमे मधुबनी जिला, दक्षिणमे समस्तीपुर जिला, पूर्वमे सहर्षा जिला आ पश्चिममे सीतामढ़ी जिला आ मुजफ्फरपुर जिला अछि। ई जिला २,२७९ किमी२ के क्षेत्रफलमे फैलल अछि। दड़िभङ्गा शब्द फारसी भाषाक दर-ए-बङ्ग सँ आएल मानल जाइत अछि। सन् १८७५ मे तिरहुतसँ अलग करि दड़िभङ्गाक जिला बनाएल गेल छल। मिथिला क्षेत्रक ई जिला अपन प्राचीन संस्कृति, संस्कृत आ बौद्धिक परम्पराक लेल विख्यात रहल अछि। मिथिला संस्कृतिक केन्द्र रहल ई जिला आम, मखान तथा माछक लेल सेहो प्रसिद्ध अछि।

सन् १९७६ मे दड़िभङ्गा क्षेत्रके: मधुबनी जिला आ समस्तीपुर जिलामे बाँटल गेल छल।

सन् २०११ क जनगणना अनुसार ई जिलाक कुल जनसङ्ख्या ३९,२१,९७१ अछि जे लाइबेरिया नामक राष्ट्र आ अमेरिकी राज्य ओरेगनक जनसङ्ख्यासँ बेसी अछि।




#Article 401: वैशाली जिला (363 words)


वैशाली जिला भारतक बिहार राज्यक ३८ जिलामे एक जिला छी। एकर नाम मिथिलाक प्राचीन शहर वैशालीक नामपर रहल अछि जे बात महाभारत आ बौद्ध तथा जैन धर्ममे उल्लेख अछि। ई जिला तिरहुत प्रमण्डल अन्तर्गत आबैत अछि।

वैशाली जिलाक इतिहास बहुत पुरान अछि
विश्वक प्रथम गणतंत्र एत स्थापना भेल छलाह,भगवान बुद्ध 3 बेर एत आयल छलाह,हुनक अस्थि केर घैला अखनो एत स्थित अछि, वैशाली जिलाके बहुत रास उपलब्धि प्राप्त अछि , जैन धर्मक संस्थापक भगवान महावीर केर जन्म कुण्डल्पुर में भेल छल , वज्ज़ी मह महाजनपद केर राजधानी वैशाली में छल जकर राज नेपालक हिमालय से ल के गंगा नदी धरि पसरल रहै राजा विशाल केर नाम पर येहि जिलाक नाम वैशाली पड़ल ,वैशाली जिलाक उल्लेख महाभारत आ रामायण दुनो ठाम भेटल अछि ,श्री भगवत पुराण केर अनुसार एक बेर गज आ ग्रास (घरियाल) में युद्ध होएत रहै ग्रास गज के गण्डकी नदी मे खिचैत छल आ गज ग्रास के भुमि पर जखन गज घायल भेल तखनि वेइह भगवान श्री हरि केर कमल पुष्प स आराधना कयलनि तखन भगवान प्रकट भेला आ मगर के अप्पन सुदर्शन स मुक्ति  देलखिन यही घटना हाजीपुर(हरिपुर) केर कौनहारा घाट पर भेल छल, एक नेपाली सेनाधिकारी मातबर सिंह थापा द्वारा १८ वीं सदी में पैगोडा शैली में निर्मित शिवमंदिर कोनहारा घाट केर पूर्वी कात में अछि,येह अद्वितीय मंदिर नेपाली वास्तुकला केर अद्भुत उदाहरण अछि। काठ पर बनल परणय दृश्य केर अधिकांश भाग आब नष्टप्राय भ गेल या चोरी भ गेल अछि प्रेमियों केर अलावे शिव भक्त केर मध्य मंदिर केर खूब प्रतिष्ठा अछि,एत मिथिलाक लोक देवता बाबा भुइया के जन्म भेल छल बसौली गाम में पनापुर लंगामे हिनकर पूजा सम्पूर्ण मिथिला में होएत छैक।

एत के भाषा मैथिली अछि !
मैथिली के पश्चिमी रूप एत बाजल जाइत छैक, जेकरा वज्जिका बोली सेहो कहल जाएत अछि।

वैशाली जिला मे समा चेकावा, जट जटिन, झिझिया, झरणी नृत्य होएत छैक! 
पबनी तिहार में छठ, दिवाली, होरी/फगुआ,सिकरात/तिलसंक्रांति,सप्त डोरा , अनंत पूजा, चौरचन, जीतिया, शवानी घड़ी, लकपाचे, विशहरा, ब्रह्म बाबा केर पूजा, डीहबार पूजा, सलहेश पूजा , भुइया पूजा, कारीख पूजा, गणिनाथ पूजा, फेकू अनंदू, कर्मा धर्मा, भरदूतिया,बहुत आर पावनी होएत छैक
गीत विवाह केर , आऽ सभ मौसम केर अलग अलग गीत सब संस्कार के अलग गीत जेना मुरन, उपनायन, घृतधारी, कोहबर, समदौन




#Article 402: श्रीभगवतीस्तोत्रम् (137 words)


श्रीभगवतीस्तोत्रम शक्ति रूपेण देवी भगवती दुर्गा की स्तुति में कहा गया स्तोत्र है। इसके अनेक उवाच हैं, जो कि निम्नलिखित हैं। यह एक धार्मिक पाठ है जिसकी रचना व्यास मुनि ने की थी। ऐसा माना जाता है कि जो पवित्र भाव से नियमपूर्वक इस व्यासकृत स्तोत्र का पाठ करता है अथवा शुद्ध भाव से घर पर ही पाठ करता है, उसके ऊपर भगवती सदा ही प्रसन्न रहती हैं। 

जय भगवति देवि नमो वरदे, जय पापविनाशिनि बहुफलदे।
जय शुम्भनिशुम्भकपालधरे, प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे॥१॥

जय चन्द्रदिवाकरनेत्रधरे, जय पावकभूषितवक्त्रवरे।
जय भैरवदेहनिलीनपरे, जय अन्धकदैत्यविशोषकरे॥२॥

जय महिषविमर्दिनि शूलकरे, जय लोकसमस्तकपापहरे।
जय देवि पितामहविष्णुनते, जय भास्करशक्रशिरोऽवनते॥३॥

जय षण्मुखसायुधईशनुते, जय सागरगामिनि शम्भुनुते।
जय दुःखदरिद्रविनाशकरे, जय पुत्रकलत्रविवृद्धिकरे॥४॥

जय देवि समस्तशरीरधरे, जय नाकविदर्शिनि दुःखहरे।
जय व्याधिविनाशिनि मोक्ष करे, जय वाच्छितदायिनि सिद्धिवरे॥५॥

एतद्व्यासकृतं स्तोत्रं य: पठेन्नियतः शुचिः।
गृहे वा शुद्धभावेन प्रीता भगवती सदा॥६॥

इति व्यासकृतं श्रीभगवतीस्तोत्रं सम्पूर्णम्




#Article 403: भौतिक शास्त्रमे नोबेल पुरस्कार (188 words)


भौतिक शास्त्रमे नोबेल पुरस्कार () वार्षिक रुपमे भौतिक शास्त्रमे उल्लेखनीय योगदान करनिहार वैज्ञानिकसभके शाही विज्ञान स्वीडीश एकेडमीद्वारा प्रदान कएल जाइत अछि । ई ५ नोबेल पुरस्कार भौतिक शास्त्र, रसायन विज्ञान, साहित्य, शान्ति आ क्रिया विज्ञान तथा चिकित्सामे सँ एक छी जकरा सन् १८९५ मे अल्फ्रेड नोबेलक इच्छा अनुसार स्थापना कएल गेल छल । ई पुरस्कार नोबेल फाउण्डेशनद्वारा प्रशासित आ एकेडमीद्वारा निर्वाचित पाँच सदस्य होइत अछि जे भौतिकशास्त्रक लेल नोबेल समितिके प्रस्तावमे शाही विज्ञान स्वीडीश एकेडमीद्वारा सम्मानित कएल जाइत अछि । ई पुरस्कार प्रत्येक वर्ष दिसम्बर १० मे नोबेलक मृत्युक वार्षिकोत्सवमे एक वार्षिक समारोहमे स्टकहोममे प्रस्तुत कएल जाइत अछि । भौतिक शास्त्रक नोबेल पुरस्कारके बहुतेक महत्वक संग वैज्ञानिकसभ देखैत अछि । भौतिक शास्त्रक पहिल नोबेल पुरस्कार जर्मनीक विल्हम कोनराड रोन्टगेनके असाधारण सेवाक मान्यतामे हुनकाद्वारा उल्लेखनीय खोज किरण (वा एक्स-रे)क लेल सम्मानित कएल गेल छल ।

भौतिक शास्त्रमे नोबेल पुरस्कार विजेताके स्वर्ण पदक, एकटा वृत्तान्त देमएवाला डिप्लोमा आ मुद्रा सहितक राशि पाबैत अछि । सम्मानित मुद्राक राशि नोबेल फाउण्डेशनक वार्षिक आय उपर निर्भर करैत अछि । यदि एकेटा पुरस्कार एक सँ बेसी विजेतासभके सम्मानित करल जाइवाला अवस्थामे पैसाके ओहि अनुसार विभाजन करि पुरस्कार पाबैवाला सबके समानरूपमे देल जाइत अछि ।




#Article 404: रसायन शास्त्रमे नोबेल पुरस्कार (187 words)


रसायन शास्त्रमे नोबेल पुरस्कार () वार्षिक रुपमे रसायन शास्त्रमे उल्लेखनीय योगदान करनिहार वैज्ञानिकसभके शाही विज्ञान स्वीडीश एकेडमीद्वारा प्रदान कएल जाइत अछि । ई ५ नोबेल पुरस्कार रसायन शास्त्र, रसायन विज्ञान, साहित्य, शान्ति आ क्रिया विज्ञान तथा चिकित्सामे सँ एक छी जकरा सन् १८९५ मे अल्फ्रेड नोबेलक इच्छा अनुसार स्थापना कएल गेल छल । ई पुरस्कार नोबेल फाउण्डेशनद्वारा प्रशासित आ एकेडमीद्वारा निर्वाचित पाँच सदस्य होइत अछि जे रसायनशास्त्रक लेल नोबेल समितिके प्रस्तावमे शाही विज्ञान स्वीडीश एकेडमीद्वारा सम्मानित कएल जाइत अछि । ई पुरस्कार प्रत्येक वर्ष दिसम्बर १० मे नोबेलक मृत्युक वार्षिकोत्सवमे एक वार्षिक समारोहमे स्टकहोममे प्रस्तुत कएल जाइत अछि । रसायन शास्त्रक नोबेल पुरस्कारके बहुतेक महत्वक संग वैज्ञानिकसभ देखैत अछि । रसायन शास्त्रक पहिल नोबेल पुरस्कार नेदरल्याण्डक ज्याकब्स हेन्रिक्सके हुनकर खोज रासायनिक गतिशीलता आ समाधानमे आसमाटिक दवाब नियमसभक लेल सम्मानित कएल गेल छल ।

रसायन शास्त्रमे नोबेल पुरस्कार विजेताके स्वर्ण पदक, एकटा वृत्तान्त देमएवाला डिप्लोमा आ मुद्रा सहितक राशि पाबैत अछि । सम्मानित मुद्राक राशि नोबेल फाउण्डेशनक वार्षिक आय उपर निर्भर करैत अछि । यदि एकेटा पुरस्कार एक सँ बेसी विजेतासभके सम्मानित करल जाइवाला अवस्थामे पैसाके ओहि अनुसार विभाजन करि पुरस्कार पाबैवाला सबके समानरूपमे देल जाइत अछि ।




#Article 405: लहान नगरपालिका (154 words)


लहान नगरपालिका नेपालक सगरमाथा अञ्चलक सिराहा जिला के एक नगरपालिका छी। महेन्द्र राजमार्गमा अवस्थित सिरहा जिलाक लहान नगरपालिका सुन्दर, शान्त आर हराभरा अछि। यी राजधानी, काठमाडौंक लगभग ३५० किलोमिटर (99.3 माइल) पूरव अवस्थित छी। यी समुद्र स्तर से 111 मिटर उचाइम छी। 

वि.सं. २०३२ म सरकार द्वारा लहान बजार, लहान गोठ आर सिग्याही मटियर्वा गाविस मिलाक नगरपञ्चायत स्थापना कएल गेल छल । नगरपालिकाक २०३३ सँ २०५४ साल धरि पाँच बेर निर्वाचन भेल । पाँच पटक निर्वाचनमा लगातार तीन बेर लगन लाल चौधरी नगर प्रमुखम विजयी भेल छल। वि.सं. २०३३क निर्वाचन पहिल प्रधानपञ्चक रूपम रामलोचन महतो आर उप-प्रधानपञ्चमा विश्वनाथ चौधरी विजयी भेल छल। तहिना २०४९ सालक निर्वाचनम नगर प्रमुखम लगनलाल चौधरी आर उप-प्रमुखमा प्रकाश बहादुर के.सी. विजयी भेल छल। वि.सं. २०५४ क निर्वाचनम प्रमुखमा मुनी साह आर उप-प्रमुखम राजेन्द्र महतो विजयी भेल छ्हल । ओकर तोकल समयम निर्वाचन नै भेलाक कारन् श्री ५क सरकारद्वारा नगरप्रमुखम प्रकाश बहादुर के.सी. आर उप-प्रमुखम सागरलाल चौधरीक मनोनित कएल गेल।




#Article 406: गोलबजार नगरपालिका (113 words)


गोलबजार नगरपालिका नेपालक पूर्वाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत सगरमाथा अञ्चलक सिराहा जिलाम अवस्थित एक नगरपालिका छी। स्थानीय विकास मन्त्रालय थप ६१ टा नयाँ नगरपालिका थपैत सिराहा जिलाम असनपुर, अशोकापुर बल्कवा, बेतौना, लालपुर, चन्द्रलालपुर, मुक्सर, चन्द्रोदयपुर आर जमदह गाउँ विकास समितिसभक समेटेक गोलबजार नगरपालिका घोषणा कएल गेल अछि। गोलबजार नगरपालिकाक केन्द्र गोलबजार रहल अछि। सिरहाक एक व्यापारिक आर व्यावसायिक केन्द्रक रुपमा परिचित गोलबजार पुर्व पश्चिम राजमार्ग अन्तर्गत परैत् अछि। गोलबजार नगरपालिकाम १३ टा वडासभ रहल अछि। नगरपालिकाक घोषणा आर क्षेत्रविस्तारसँग मुलुक १ महानगरपालिका, ११ उपमहानगरपालिका, १ सय ७९ नगरपालिका आर ३ हजार २ सय ७८ गाविस कायम भएका कएल गेल अछि। नयाँ नगरपालिका थपैत नेपालक सहरी जनसंख्याक प्रतिशत ३६ दशमलव ८ पहुँचल मन्त्रालयले जनाओने अछि।




#Article 407: धनगढीमाई नगरपालिका (106 words)


धनगढीमाई नगरपालिका नेपालक सगरमाथा अञ्चलक सिराहा जिलाम अवस्थित अछि। स्थानीय विकास मन्त्रालय २०७२ आस्विन १ गते थप २६ वटा नयाँ नगरपालिका थप्दा सिराहा जिल्लामा भवानीपुर, हनुमाननगर प्रध, फुल्कहाकट्टी, अयोध्यानगर, धनगढी आर विस्नुपुरकट्टी ई ६ टा गाउँ विकास समितिसभक समेटक धनगढीमाई नगरपालिका घोषणा कएल गेल अछि। धनगढीमाई नगरपालिकाको केन्द्र धनगढी बजारम रहल अछि। नगरपालिकाक घोषणा आर क्षेत्रविस्तारसँग मुलुकमा १ महानगरपालिका, १२ उपमहानगरपालिका र २ सय १७ नगरपालिका कायम भेल अछि।

भवानीपुर, हनुमाननगर प्रध, फुल्कहाकट्टी, अयोध्यानगर, धनगढी आर विस्नुपुरकट्टी ई ६ टा गाउँ विकास समितिसभक मिलाक धनगढीमाई नगरपालिका बनाओल गेल । राष्ट्रिय जनगणना २०६८क जनगणना अनुसार ई ६टा ठामसभक जनसंख्याक जोडिग धनगढीमाई नगरपालिकाक जनसङ्ख्या ४७,४४९ रहल अछि ।




#Article 408: क्यान्डी (122 words)


क्यान्डी ( Maha Nuvara, उच्चारण ;  kaṇṭi, उच्चारण  श्रीलंकाक मध्य भागमे अवस्थित शहर छी। ई शहर कोलम्बोसँ १ सय १५ किलोमिटर दुर तथा समुद्री सतहसँ ४ सय ६५ मिटर उचाईमे अछि। ई श्रीलंकाक पुरान केन्द्रीय राजधानी छी। एकर वास्तविक नाम महा नुवारा अर्थात् महाननगर छी। चौदहम शताब्दीमे स्थापना भेल ई शहरक पुरान महलसभमे औपनिवेशिक झलक देखल जा सकैत अछि। ई शहरक डाल्दा मालिगावा (टेम्पल अफ द टुथ)के सन् १९८८ मे विश्व सम्पदा सूचीमे सेहो सूचीकृत अछि। एतय गौतम बुद्धक एकटा दाँत राखल गेल विश्वास कएल जाइत अछि। प्रत्येक वर्ष जुलाई-अगस्तमे एतय आयोजन होमएवला क्यान्डी पेराहेरा कार्यक्रममे उक्त दाँत लोकसभक दर्शनक लेल निकालल जाइत अछि। कार्यक्रमक क्रममे बजाबैवला बाजा, नृत्य एवं हात्तीसभक लस्कर विश्वभरि परिचित अछि । ई शहरमे देखलायक बहुतेक स्थान अछि।




#Article 409: उज्जैन जिला (122 words)


उज्जैन जिला भारतक मध्य प्रदेश राज्यक एक जिला छी आ ई जिलाक मुख्यालय उज्जैन शहर छी।

उज्जैन नगर क्षिप्रा नदीक किनारमे  अवस्थित एक धार्मिक आ रमणीय पवित्र भूमि छी, जे अपन गौरवशाली इतिहास कुम्भ मेला, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिङ्ग आओर अनेक प्रकारक मन्दिरसभक कारण प्रसिद्ध अछि। उज्जैनमे अनेक प्रकारक प्राकृतिक आ धर्मिक दर्शनीय स्थलसभ अछि। जाहिमे १. महाकालेश्वर २. हरसिध्दी ३. काल भेरव् ४. सन्दीपनी आश्रम् ५. भर्तहरी गुफा ६. चिन्तामन गणेश् ७. जन्तर-मन्तर ८. शनि मन्दिर ९. सिध्द-वट १०. मङ्गलनाथ ११. कालियादेह महल १२. गोपाल मन्दिर आदि प्रसिद्ध अछि। उज्जैन जिलाक तहसील तरानाक ग्राम कनासिया फौजी गामक नामसँ प्रसिध्द अछी । ई  गामक ८०० जवान भारतीय सेनामे सेवारत अछि। ई गाममे बहुतो शिक्षकसभ आ बहुतो राष्ट्रिय आ अन्तराष्ट्रिय कबड्डी खिलाड़ीसभ सेहो रहैत अछि।




#Article 410: रामानन्द सागर (269 words)


रामानन्द सागर (२९ डिसेम्बर १९१७ - १२ डिसेम्बर २००५) (जन्म चन्द्रमौली चोपडा) एक गोटे भारतीय चलचित्र निर्देशक छल। ओ रामायण टेलिभिजन श्रृङ्खला बनावे कऽ लेल सभसँ प्रसिद्ध रहल छल, ओही नाम के प्राचीन भारतीय महाकाव्यसभक ७८-भाग टिभी रूपान्तरण, जाहिमे अरुण गोविल भगवान राम आओर दीपिका चिखलिया सीताक रूपमे अभिनय केनए छल।ई टिभी धारावाहिक के तखन पुरा देशभरि व्यापक रूपसँ देखल गेल छल आओर रुचाओल गेल सेहो छल । भारत सरकार हुनका सन् २००० मे पद्मश्रीक नागरिक सम्मानसँ सम्मानित केनए छल।

रामानन्द सागरक जन्म लाहोर के आसपास रहल क्षेत्र असाल गुरुमे भेल छल। हुनकर दादाजी के सेहो दादाजी, लाला शंकर दास चोपडा, लाहोरसँ कश्मीर आएल छल। रामानन्दके हुनकर नाना धर्मपुत्र बनौने छल, जेकरा कि कोनो पुत्र नै छल, ओ समय हुनकर नाम चन्द्रमौली चोपडा सँ बदलि रामानन्द सागर करि देल गेल छल।सागरक जैविक माताके मृत्यु पश्चात, हुनकर पिता पुनर्विवाह करिके आओर हुनका आगा मे हुनकर अगाडी के बच्चा छल, जाहिमे विधु विनोद चोपडा समावेश छल, जे कि ई हिसाबसँ सागरक सौतेला भाई छल। सागर दिन के समयमे एक गोटे पियन, ट्रक क्लीनर, साबुन विक्रेता, सुनचाँदीक कालीगढ आदि के रूपमे काम करैत् छल आओर रातिमे अपन डिग्री के अध्ययन सेहो करै छल। ओ सन् १९४२ मे पञ्जाब विश्वविद्यालयसँ संस्कृत आओर फारसीमे स्वर्ण पदक विजेता सेहो भेल छल। ओ दैनिक पत्रिका डेलीप के सम्पादक सेहो छल। ओ रामानन्द चोपडा, रामानन्द बेदी आओर रामानन्द कश्मीरी जेहन नामसभसँ अनेकौं लघु कथासभ, उपन्यास, कवितासभ, नाटक आदि लिखने छल। सन् १९४२ मे जखन ओ क्षयरोगसँ ग्रसित भऽ गेल, ओ समयमे अपन लडाई वा संघर्षक बारे मे एकटा व्यक्तिपरक कलम, टी.बी. रोगीसभक डायरी लिखने छल। कोलम के लाहोर मे अदब-ए-मशरिक पत्रिका के श्रृङ्खलामे प्रकाशित कएल गेल छल।




#Article 411: चापाकोट नगरपालिका (223 words)


पश्चिमी नेपालक स्याङ्जा जिलामे रहल चापाकोट नगरपालिका द्रुततर गतिमे बढि रहल नगरपालिका छी। स्थानीय विकास मन्त्रालयद्वारा २०७१ बैशाख २५ गते देशमे विभिन्न २ सय ८३ गाविसके मिलाए ७२ टा नव नगरपालिका घोषणा केनए छल जाहिमे स्याङ्जाके साविक चापाकोट, कुवाकोट आ रत्नपुर गाउँ विकास समितिसभ समावेस करि चापाकोट नगरपालिका घोषणा केनए अछि। चापाकोट गाविसको वडा नम्बर ६, सुन्तलीटार रहेको ठाउँलाई  नगरपालिकाको केन्द्र बनाइएको छ ।

जिलाको दक्षिण पुर्बी क्षेत्रमा पर्ने चापाकोट नेपालको अति नै रमणीय, सुन्दर, शान्त ठाउँहरु मध्यको एक हो । चारै तर्फबाट डाँडाले घेरिएको चापाकोटलाई नेपालको एक नमुना उपत्यकाको रुपमा लिन सकिन्छ । विशेष गरि दक्षिण भागमा बगने कालीगण्डकी नदी जसलाई सालिकराम ढुङ्गाको खानीको रुपमा चिनिन्छ, त्यसले अझ चापाकोटको सुन्दरतालाई बयान गर्दछ ।   

ब्राह्मण, क्षेत्री, नेवार, सुनार, ठकुरी, सार्की, कुमाल, विश्वकर्मा, यहाँका प्रमुख बासिन्दा भए पनि बाहुल्यतामा भने केहि भिन्नता पाईन्छ । प्राय गरि चापाकोट गाविसको उत्तरी भाग जुन केवारे भञ्ज्याङ संग सिमाना जोडिएको छ त्यो क्षेत्रमा सार्की तथा ठकुरी जातिको बाहुल्यता छ भने पुर्बी भाग जुन सेखाम गाविस संग सिमाना जोडिएको छ त्यो क्षेत्रमा प्राय नेवार तथा विश्वकर्मा लगायतका जातिहरुको बाहुल्यता भेटल जायेत अछि ।

चापाकोट,कुवाकोट आर रत्नपुर गाविससभ जोडिक चापाकोट नगरपालिका बनावल गेल अछि । बि.स.२०६८ क जनगणना अनुसार ई ठामसभ जनसंख्याक जोडिक १२,७४२ रहल अछि  ।

चापाकोट नगरपालिकाक आयोजना तथा जिला शिक्षा कार्यालय स्याङ्जाको सहयोग आर चापाकोट सामुदायिक अध्ययन केन्द्रक व्यवस्थापनम चापाकोट नगरपालिका पूर्ण साक्षर घोषणा केनेए अछि ।




#Article 412: पर्ल एस बुक (105 words)


पर्ल एस बुक (जुन २६, १८९२ – मार्च ६, १९७३; अपन चिनी नाम साई झेन्झु; सँ जानल जाइत अछि) एक अमेरिकी लेखिका आ उपन्यासकार छल । धार्मिक मण्डलीका पुत्री भेला कारण बुक अपन जीवनके बहुतेक समय चिनमे बितेनाए छल । हुनकर लिखित पुस्तक गुड अर्थ नामक विश्व प्रसिद्ध उपन्यास सन् १९३१/१९३२ मे अमेरिकामे सबसँ बेसी बिकैवला पुस्तकक सूचीमे स्थान पाबने छल । ओ सन् १९३२ मे पुलित्जर पुरस्कार प्राप्त केनए छल ताहिने चिनक कृषकके अन्तर्वस्तु बनाए लिखल गेल हुनकर वास्तविक एवं यथार्थपरक विवरणक लेल सन् १९३८ मे हुनका साहित्यमे नाेबेल पुरस्कार प्राप्त केनए छल । साहित्यमे नाेबेल पुरस्कार पाबनिहार ओ प्रथम अमेरिकी महिला छी ।




#Article 413: त्रियुगा नगरपालिका (123 words)


गाईघाट आ त्रियुगा नगर पूर्वाञ्चल विकास क्षेत्रक सगरमाथा अञ्चलक  उदयपुर जिलाक सदरमुकाम छि। गाईघाट त्रियुगा नगरपालिकाक उदयपुर जिला केन्द्रिय शहर सेहो छि, समग्र नगरपालिकाक  गाईघाट आ त्रियुगा नगरक नामसँ जानल जाएत अछि। ई नगरपालिकाम १७ टा वडा अछि आ एकर क्षेत्रफलक आधारमा नेपालक सबसँ पैग नगरपालिका सेहो छी । २०६८ सालक जनगणना अनुसार अहि ठामक जनसँख्या  रहल अछि।
पूर्वी नेपालक उदयपुर उपत्यकाक उदयपुर जिलाम रहल त्रियुगा नगर द्रुततर गतिम विकास भऽरहल नगर छि । ई भित्री मधेशमा अवस्थित अछि । उदयपुर जिलाक सदरमुकाम रहल त्रियुगाम सब जिला स्तरीय कार्यलयसभ साथ क्याम्पस विद्यालय तथा अस्पतालसभ समेत रहल अछि।

नेपालक जनसंख्या २०६८ क अनुसार  गाउँ विकास समितिक जनसंख्या ७१,४०५ अछि ताहिमे पुरुषक जनसँख्या ३२,९१० आर महिलाके जनसँख्या ३७,०९० अछि तहिना घरधुरीके संख्या १५,९२६ अछि ।




#Article 414: इनरूवा नगरपालिका (144 words)


 नेपालक प्रदेश नं. १ कऽ सुनसरी जिलाक एक नगरपालिका छी । इनरूवा नगरपालिका सुनसरी जिलाक सदरमुकाम छी | ई नगरपालिका सुनसरी नदीक किनारमे, पूर्वी पश्चिम लोकमार्गके दक्षिणमे अवस्थित अछि | इनरुवा नगरपालिका सुनसरी जिलाके ४ टा नगरपालिकामे सँ एक नगरपालिका आ सुनसरी जिलाके सदरमुकाम सेहो छी | 

ई नगरपालिकाकें पवित्र तीर्थस्थल श्रीरामधुनीक प्रवेशद्वारक रूपमे लेल जाइत अछि । भगवान श्रीराम श्रीरामधुनी क्षेत्र अबैत काल रथक पहिया डोब भऽ सुरसरी नदी श्रीरामक चरण विन्दक स्पर्श कऽ लेलन्हि पौराणिक कथा रहल अछि । एहि सुरसरी नदी कालान्तरमे आबि कनकवर्णक जल अधिक मात्रामे रहल कारण सुनसरी कहाए लागल लोकोक्ति रहल अछि । एतय सीतारामचन्द्र भगवानक प्यागोडा शैलीक बहुप्रसिद्ध जानकी मन्दिर सेहो रहल अछि ।

इनरुवा नगरपालिका के मुख्य चोक सभ

सखुवागाछी 

बलाहा 

शान्ति चोक  

महेन्द्र चोक 

बबिया 

मधेशा 

बस चोक 

पुल्चोक  

अर्ता 

गणेश पुर 

इनरुवा नगरपालिमे मुख्य करके नेपालि, मैथिली , थारु , झाङड भासासभ बोलिअछि । 




#Article 415: नोबेल साहित्य पुरस्कार (146 words)


नोबेल साहित्य पुरस्कार () वार्षिक रुपमे साहित्यमे उल्लेखनीय योगदान करनिहार साहित्यकारसभके स्वीडीश एकेडमीद्वारा प्रदान कएल जाइत अछि । ई ५ नोबेल पुरस्कार साहित्य, रसायन विज्ञान, शान्ति आ क्रिया विज्ञान तथा चिकित्सामे सँ एक छी जकरा सन् १८९५ मे अल्फ्रेड नोबेलक इच्छा अनुसार स्थापना कएल गेल छल । ई पुरस्कार नोबेल फाउण्डेशनद्वारा प्रशासित आ एकेडमीद्वारा निर्वाचित पाँच सदस्य होइत अछि जे भौतिकशास्त्रक लेल नोबेल समितिके प्रस्तावमे शाही विज्ञान स्वीडीश एकेडमीद्वारा सम्मानित कएल जाइत अछि । ई पुरस्कार प्रत्येक वर्ष दिसम्बर १० मे नोबेलक मृत्युक वार्षिकोत्सवमे एक वार्षिक समारोहमे स्टकहोममे प्रस्तुत कएल जाइत अछि । 

नोबेल साहित्य पुरस्कार विजेताके स्वर्ण पदक, एकटा वृत्तान्त देमएवाला डिप्लोमा आ मुद्रा सहितक राशि पाबैत अछि । सम्मानित मुद्राक राशि नोबेल फाउण्डेशनक वार्षिक आय उपर निर्भर करैत अछि । यदि एकेटा पुरस्कार एक सँ बेसी विजेतासभके सम्मानित करल जाइवाला अवस्थामे पैसाके ओहि अनुसार विभाजन करि पुरस्कार पाबैवाला सबके समानरूपमे देल जाइत अछि ।




#Article 416: क्रिया विज्ञान तथा चिकित्सामे नोबेल पुरस्कार (221 words)


क्रिया विज्ञान तथा चिकित्सामे नोबेल पुरस्कार () वार्षिक रुपमे क्रिया विज्ञान तथा चिकित्सामे उल्लेखनीय योगदान करनिहार वैज्ञानिकसभके नोबेल समितिक कारोलिन्स्का संस्थानद्वारा प्रदान कएल जाइत अछि । ई ५ नोबेल पुरस्कार भौतिक शास्त्र, रसायन विज्ञान, साहित्य, शान्ति आ क्रिया विज्ञान तथा चिकित्सामे सँ एक छी जकरा सन् १८९५ मे अल्फ्रेड नोबेलक इच्छा अनुसार स्थापना कएल गेल छल । ई पुरस्कार नोबेल फाउण्डेशनद्वारा प्रशासित आ एकेडमीद्वारा निर्वाचित पाँच सदस्य होइत अछि जे क्रिया विज्ञान तथा चिकित्साक लेल नोबेल समितिके प्रस्तावमे कारोलिन्स्का संस्थानद्वाराद्वारा सम्मानित कएल जाइत अछि । ई पुरस्कार प्रत्येक वर्ष दिसम्बर १० मे नोबेलक मृत्युक वार्षिकोत्सवमे एक वार्षिक समारोहमे स्टकहोममे प्रस्तुत कएल जाइत अछि । क्रिया विज्ञान तथा चिकित्साक पहिल नोबेल पुरस्कार सन् १९०१ मा जर्मन जीवशास्त्री एमिल अडोल्फ वन बेहरिङ्गके सीरम चिकित्सामे काम आ डिप्थेरिया विरुद्ध खोप विकासक लेल सम्मानित कएल गेल छल । ई विधामे नोबेल पुरस्कार पाबनिहार पहिल महिला गर्टी कोरी छी जे मधुमेहक उपचार सहित औषधीक बहुतेक पक्षसभक महत्त्वपूर्ण ग्लुकोजक चयापचयमे हुनकर भूमिकाक लेल सन् १९४७ मे पुरस्कृत कएल गेल छल ।

क्रिया विज्ञान तथा चिकित्सामे नोबेल पुरस्कार विजेताके स्वर्ण पदक, एकटा वृत्तान्त देमएवाला डिप्लोमा आ मुद्रा सहितक राशि पाबैत अछि । सम्मानित मुद्राक राशि नोबेल फाउण्डेशनक वार्षिक आय उपर निर्भर करैत अछि । यदि एकेटा पुरस्कार एक सँ बेसी विजेतासभके सम्मानित करल जाइवाला अवस्थामे पैसाके ओहि अनुसार विभाजन करि पुरस्कार पाबैवाला सबके समानरूपमे देल जाइत अछि ।




#Article 417: कमलामाई नगरपालिका (350 words)


 

कमलामाई नगरपालिका नेपालक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्रक जनकपुर अञ्चल, सिन्धुली जिलामे अवस्थित अछि। कमला उपत्यकाक सिन्धुली माढीमे अवस्थित कमलामाई सिन्धुली जिलाक सदरमुकाम छी। ई नगरपालिकाक स्थापना विसं २०५३ सालमे भेल अछि। पहिने सिद्धेश्वर आ भिमान दुई गाविस समेट ई नगरपालिका बनाएल गेल छल। एकर पूर्वमे रानिचुरी, रानिबास, भिमस्थान आ बेलघारी गाविस पडैत अछि तहिना पश्चिममे डाँडिगुराँसे आ भद्रकाली गाविससभ अछि। उत्तरमे रतनचुरा आ भद्रकाली गाविससभ पडैत अछि तहिना दक्षिणमे सर्लाही, महोत्तरी आ धनुषा जिला (चुरे पहाड) अवस्थित अछि। 
कमलामाई नगरपालिकाक पूर्व - पश्चिम लम्बाई ३३ कि.मी. अछि। एकर चौडाई सभ ठामपर एक रङ्गक नै अछि। एकर सरदर चौडाई ७ कि.मी. रहल अछि। वर्दिवास - सिन्धुली सडक एकरा काटि के गेल अछि। माईस्थानमे अवस्थित कमलामाई मन्दिर ई स्थानक लेल सुप्रसिद्ध अछि। ओतयसँ उत्पन्न कमला नदी ई क्षेत्रमे मात्र नै भऽ देशभरिमे प्रसिद्ध अछि। कमलामाई मन्दिरक नामसँ ई नगरपालिकाक नामाकरण कएल गेल अछि।

नगरपालिकाक कूल जनसङ्ख्या ३२,८३८ रहल अछि। ओहिमे सँ  १६,४५० महिला आ १६,३८८ पुरुष अछि । कूल जनसङ्ख्यामे सँ ४४% साक्षर अछि आ ५६% निरक्षर अछि। निरक्षर जनसङ्ख्यामे सँ ४२% पुरुष आ ५८% महिला रहल अछि। नगरपालिकाक औषत वार्षिक जनसङ्ख्या वृद्धि दर २% रहल अछि।

नगरपालिकाक कूल क्षेत्रफल २०,५१२ हेक्टर मे सँ १११९६ हेक्टर वनजङ्गल, ५,४३२ हेक्टर खेतियोग्य भूमि, २,५६१ हेक्टर नदी नाला आ १,३२३ हेक्टर वस्ती तथा बजार क्षेत्रसँ घेरल अछि। नगरपालिकाक मुख्य वस्तीसभमे ज्यामिरे, डुम डाँडा, वेसारे, राजपानी, शिखर, खैरेनी, सिमले, लामिडाँडा, कुडुले, बोगटी, गैयाँटार, रातमाटा, राम्माढी, दोभानटार, माझगाउँ, पाखाटोल, कुलो खोला गाउँ, सरकारी टोल, राजमहल, चिलाउने टोल, तरुल वन, मजुरे गाउँ, ताप्के गाउँ, भिमान, ढुङ्ग्रेवास, ढकाल गाउँ आदि छी। भिमान बजार, सिन्धुली बजार (१ नं. बजार, २ नं. बजार), धुरा बजार आ ढुङ्ग्रेवास बजार नगरपालिकाक प्रमुख बजारसभ छी। सिन्धुली तथा भिमान बजारमे साप्ताहिक हाटबजार सेहो लागैत अछि। शिद्धबाबा, कालीमाई तथा कमलामाई एतौका मुख्य मन्दिरसभ छी। रानीचुरी डाँडो नगरपालिकाक ऐतिहासिक स्थल छी। 
कमलामाइ नगर कमला उपत्यकामे बैसल अछि। किछ उपरी डाँडामे एतिहासिक सिन्धुलीगढी दरवार अछि। नगरक मुख्य बजार सिन्धुली माढीमे अवस्थित अछि। जतय पृथ्वी नारायण शाहक गोर्खाली सेना, अङ्ग्रेजी कप्तान किनलोकक अङ्ग्रेजी सेनाके नेपाल एकीकरणक समयमे परास्त केनए छल। बादमे राणाकालमे दरवार बनलाबाद ई क्षेत्रके प्रसाशनिक केन्द्र बनाएल गेल छल। सिन्धुलीमाढी शहरमे लगभग ४० हजार लोक बसोबास करैत अछि। 




#Article 418: सिड्नी ओपेरा हाउस (119 words)


सिड्नी ओपेरा हाउस सिड्नी, न्यू साउथ वेल्स, अस्ट्रेलियामे स्थित प्रदर्शन कलासभक एकटा वहु-स्थलीय केन्द्र छी। एकर परिकल्पना डेनमार्कक वास्तुकार जोन उत्जन केनए छल संगे ओ एकर अधिकांश निर्माण सेहो करेनाए छल।

याेजना निर्माण सन् १९४० का दशकमे आरम्भ भेला बादो सन् १९५४ धरि निर्माण आगा नै बढल छल। एकर डिजाइनक लेल सन् १९५५ सितम्बर १३ मे अन्तर्राष्ट्रिय स्तरमे डिजाइन प्रतिस्पर्धा कराएल गेल छल जाहिमे ३२ मुलुकक २३३ प्रतिस्पर्धी सहभागी भेल छल। सन् १९५७ मे जाेन उत्जनके विजयी घाेषणा कएल गेल छल। सन् १९५९ मार्चसँ एकर निर्माण सुरू भए तीन चरणमे एकर निर्माण सन् १९७३ मे सम्पन्न भेल छल। 
पहिलाे चरणः १९५९ सँ १९६३ धरि ।
दाेस्रो चरणः १९६३ सँ १९६७ धरि ।
तेस्राे चरणः १९६७ सँ १९७३ धरि ।




#Article 419: मध्य रेलवे (भारत) (165 words)


मध्य रेल, भारतीय रेलक १६ सबसँ बड़का अञ्चलसभमे सँ एकटा अञ्चल छी आ अहिक मुख्यालय मुंबईमे छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (पहिने भिक्टोरिया टर्मिनस)मे स्थित अछि । अहिके अन्तर्गत भारतक पहिल यात्री रेल लाइन सेहो आबैत छै, जहिमे १६ अप्रैल १८५३ क मुम्बईसँ ठाणेके बीच चलाओल गेल छल । 

मध्य रेलके अंतर्गत महाराष्ट्रक अधिकांश, कर्नाटकके  उत्तर-पूर्वी क्षेत्र आ मध्य प्रदेशक दक्षिणी हिस्सा आबैत अछि। अही रेल अंचल कs गठन ५ नवम्बर १९५१ कs बहुतो सरकारी स्वामित्व वला रेलसभ कs मिलाकs कएल गेल  छल, जाहीमें ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे, पूर्व रियासत ग्वालियरक सिंधिया स्टेट रेलवे, निजाम स्टेट रेलवे आ धौलपुर रेल शामिल छल।
  
पहिले उत्तरी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आर दक्षिणी उत्तर प्रदेशक इलाका सेहो मध्य रेल अंचलक अंतर्गत आबैत छल जकर कारण अही क्षेत्र, रेलपथक लंबाई आ कर्मचारिसभ कs संख्याके हिसाबसं भारतक सबसं बड़का रेल अंचल बनि गेल छल। अप्रैल २००३ में अही क्षेत्रसभ मिलाकs एकटा नया रेल अंचल पश्चिम मध्य रेल कऽ गठन कएल गेल ।

एकरे अंतर्गत आबऽबला मंडल छी:
मुंबई, भुसावल, पुणे, शोलापुर आर नागपुर 




#Article 420: अम्बाला (180 words)


अम्बाला() शहर भारत के हरियाणा राज्य के एकटा मुख्य एवं ऐतिहासिक शहर अछि। इ भारत के राजधानी दिल्ली से दुसै किलो मीटर उत्तर के आर शेरशाह सूरी मार्ग (राष्ट्रीय राजमार्ग नम्बर १) पे स्थित अछि। अम्बाला छावनी (cantt) एक प्रमुख रेलवे जंकशन अछि। अम्बाला जिला हरियाणा एंव पंजाब (भारत) राज्य के सीमा पे स्थित अछि। अम्बाला छावनी देश के प्रमुख सैन्य आगार छी। भौगोलिक स्थिति के कारण पर्यट्न के क्षेत्र में सहो अम्बाला के मह्त्वपूर्ण योगदान अछि।
अम्बाला नाम के उत्पत्ति शायद महाभारत के अम्बालिका के नाम से भ सकैय। आइ के जमाना में अम्बाला अपन विज्ञान सामग्री उत्पादन आ मिक्सी उद्योग के लेल प्रसिद्ध छि। अम्‍बाला के विज्ञान नगरी पुकारा जितल अछि कियाकी ऐत वैज्ञानिक उपकरण उद्योग केंद्रित अछि। भारत के वैज्ञानिक उपकरणसभक लगभग चालीस प्रतिशत उत्‍पादन अम्‍बाला में है छि। एक अन्‍य मत एहो छि कि ऐत आम के बाग बगीचे बहुत छेल, जइस एकर नाम अम्‍बा वाला अर्थात अम्‍बाला रखाल गेल।

अम्बाला के स्थापना १४ वीं शताब्दी में अम्बा नामक राजपूत केन छेल। ऐत आम के पैदावार अधिक है छेल इ कारण एकरा अम्बवाला कहल जति अछि।




#Article 421: छठि (486 words)


छठि पर्व नेपाल आ भारतक उत्तर क्षेत्रमे हिन्दूसभद्वारा मनाओल जाइवला एक महत्वपूर्ण पावनि छी। ई पर्वमे षष्ठी भगवती, भगवान सूर्य देव आ छठि मैयाँ (पौराणिक वेदक देवी; उषा - सूर्य देवक पत्नी)क पूजा अर्चना करि पुत्र, पति आ परिवारक कल्याणक कामना कएल जाइत अछि। पृथ्वीमे पर्याप्त प्रकाश देला कारण आ कामना पूर्ण भेलापर सूर्यके धन्यवाद देब क लेल मुख्यत: ई पर्वक सुरुवात भेल मानल जाइत अछि।नेपालक विशेष रुपसँ तराई (मधेश) क्षेत्रमे श्रद्धा एवं भक्तिपूर्वक ई पर्व मनाएल जाइत अछि। ई पर्वक अवसरमे पञ्चमीक दिनसँ व्रत बैसनिहार महिला तथा पुरुष निष्ठापूर्वक पवित्र जलाशयमे स्नान करि साँझमे दूध, चामल आ सख्खरक खीर पकाए प्रसादक रूपमे अपनो खाइत अछि आ व्रत नैबैसनिहार परिवारक सदस्यसभके सेहो खुवाबैक चलन अछि। परम्परानुसार छठिक दिन साँझ अस्ताबैत सूर्यके जलाशयमे ठार भऽ पूजासहित अर्घ दऽ देलाबाद रातभरि नदी तथा तलाउ किनारमे बसि भजनकीर्तन करैत काल्हि सप्तमीक दिन भोर उगैत सूर्यके पुनः अर्घ दऽ पूजा विसर्जन कएल जाइत अछि। ई पर्वमे मुस्लिम समुदायक लोकसभ सेहो सहभागी होइत अछि आ ई पर्व विधिवत्त रूपमे मनाबैत अछि । पवित्र मनसँ छठि पर्व मनेलासँ पारिवारिक कल्याण, सन्तानसुख तथा मनोकामना पूरा होमएक विश्वास कएल जाइत अछि।

सृष्टिक सुरूवातसँ सूर्यक उपासना कएल आबैत देखल गेल अछि। अग्नि पुराणमे सेहो षष्ठी व्रतक प्रसँग उल्लेख अछि। चौदह वर्षक वनवास आ एक वर्षक अज्ञातवास बैसल समय कुन्ती, द्रौपदी सहित पाण्डवद्वारा ई व्रत कएल वर्णन महाभारतमे उल्लेख अछि । त्रेता युगमे राजा दशरथक रानी कौशल्या सेहो ई व्रत केनए छल, से बताओल गेल अछि। कातिक महिनामे मनाएल जाइवला छठिके पैग छठि कहल जाइत अछि। चैत महिनाक षष्ठी तिथिमे सेहो कतेक ठाममे ई पर्व मनाएल जाइत अछि।

सूर्य उपासनासँ सम्बन्धित छठि पर्व प्रत्येक वर्ष कात्तिकशुक्ल पञ्चमी आ षष्ठीक दिन मनाएल जाइत अछि। व्रत बैसनिहार स्नान करि उपवास बैस आत्मशुद्धि करैत अछि, जकरा खर्ना कहल जाइत अछि। षष्ठीक दिन नदी आ पोखरिक घाटमे व्रतालुसभ स्नान करि साँझक समयमे जलाशयमे ठार भऽ सूर्यके फलफूल, ठेकुवा आ कसार अर्घ दैत अछि। व्रतालु भक्तजनसभ राति प्राय नदी किनारमे बास बैसैत अछि तँ कोई कोई घर चलि जाइत अछि। मुदा शुद्धाशुद्धिक बहुतेक विचार पहुँचाबैक कारण कोनो चीज अशुद्ध नैहोए ताहिलेल सभ कियो सजग रहैत अछि। शुद्ध भावनासँ ई व्रत करलासँ तुरुन्त फल सेहो मिलैत अछि से धर्मावलम्बीसभक विश्वास अछि। ताहिकारण मनसँ मात्र शुद्ध नै भऽ सबचीज साफसुथरा होवाक कारण व्रतालुसभ मात्र नै बल्कि सम्पूर्ण परिवारक सदस्यसभ एकरा कडाइक साथ पालना करैत अछि।

षष्ठीक भोर ब्रहृममुहूर्तमे लोकसभ पूजासामग्री लऽ नदी किनारमे जा स्नान करि उगैत सूर्यके पुन: अर्ध्य देलाकबाद छठि पर्व समाप्त होइत अछि आ प्रसाद बाँटल जाइत अछि।

छठिक पहिल दिन-कार्तिक शुक्ल चतुदर्शी

कार्तिक शुक्ल चर्तुदशीक दिन सँ छठि आरम्भ होइत अछि। विजयादशमी आ दीपावली बाद छठि नितान्त सूर्यक उपासना करि मनाएल जाइत अछि। छठिक शुरुवात मानल जाइवला ई दिनके व्रतालुसाभ नहाए खाए (नहाए खाए) कहैत अछि। भोर सबेरमे उठि हात टाङ्गक नह काटि आ पवित्र पानिसँ नुहाए-धुवाए करि सफा कपडा लगाए पूजा करि शुद्ध भोजन करैत अछि। कहल जाइत अछि ई दिनमे व्रतालुसभ ई प्रण करैत अछि की आब सँ हम कोनो गलत काम नै करि भगवानक राहमे चलब।




#Article 422: मारुति सुजुकी (197 words)


मारुति सुजुकी इन्डिया लिमिटेड सामान्यत: मारुति आ एकर पूर्व मारुति उद्योग लिमिटेडक नामसँ जानल जाइत छल । ई सङ्गठन भारतमे मोटर निर्माता छी ।
ई जापानी मोटरगाडी एवं मोटरसाइकिल निर्माता सुजुकीक एकटा सहायक कम्पनी छी।नवम्बर २०१२ धरि, भारतीय यात्री कार बजारमे ई कम्पनीक  हिस्सेदारी ३७% छल । मारुति सुजुकी प्रवेश स्तरसँ कारसभक पुरा शृंखलासभक  निर्माता एवं विक्रेता रही चुकल अछि। प्रवेश स्तर अल्टोसँ ह्याचब्याक रिट्ज, ए स्टार, स्विफ्ट, वैगन आर, जेन आ सेडान वर्गमे डिजायर, किजाषी तथा 'सी' वर्गमे इको, ओम्नी एवं अन्य आवश्यकतासभवला कार जका सुजुकी अरटीगा आर स्पोर्टस यूटिलिटी वाहन ग्रान्ड विटाराके लेल मारुति सुजुकी देश भरिमे प्रसिद्ध अछि।कम्पनी कs मुख्यालय नेलसन मंडेला रोड, नयाँ दिल्लीमे स्थित अछि।फरवरी २०१२के अन्त धरि कम्पनी अपन एक करोड़ कार बेचि चुकल अछि।

१) ग्रान्ड विटारा (२००७ शुरू) 
२) किजशि (२०११ शुरू)

१) जिप्सी ई (१९८५-२०००) 
२) जेन (१९९३-२००६) जेन एस्टिलोद्वारा बदलल गेल।
३) एस्टीम (१९९४-२००८) स्विफ्ट डिजायरसँ बदलल गेल।
४) बैलेनो (१९९९-२००७) एसएक्स 4 सेडानद्वारा बदलल गेल। 
५) बैलेनो Altura (१९९९९-२००३) 
६) वर्सा (२००१-२०१०) ईकोद्वारा बदला गया।
७) ग्रान्ड विटारा XL७ (२००३-२००७) कम्प्याक्ट / विटाराद्वारा बदलल गेल।
८) मारुति ८०० (१९८३-२०१२) आल्टो ८०० सँ बदलल गेल।
९) अल्टो (२०००-२०१२) आल्टो ८०० सँ बदलल गेल।
१०) जेन एस्टिलो (२००६-२०१३)




#Article 423: चेन्नईकऽ भूगोल (300 words)


चेन्नई भारतके दक्षिण पूर्वी तट पर तमिलनाडु प्रदेशक उत्तरी पूर्वी तटीय क्षेत्रमे स्थित छै। अही तटीय क्षेत्र कऽ पूर्वी तटीय मैदानी क्षेत्र सेहो कहल जाइत अछि। यी क्षेत्रक समुद्र तलसं औसत ऊचाई ६.७ मीटर छैआर सबसं ऊच स्थान ६० मीटर कs ऊचाई पर छै। मरीना बीचके नामसं प्रसिद्ध चेन्नईके समुद्र तट कs विस्तार १२ किलोमीटर धरि अछि। शहरक मध्यमे बहऽ वला कूवम नदी आर दक्षिणसं बहऽ वला अड्यार नदी आजुक तारीखमे बहुते ज्यादा प्रदूषित भऽ चुकल अछि। अड्यार नदी कूवमसं कम प्रदूषित छै आर एकर तट पऽ अनेक पशु-पक्षिसभक बसेरा अछि। यी दुनु नदिसभक बकिङघम नहरके द्वारा जोडल गेल छै। यी नहर अपन ४ किलोमीटर कs दूरी सागर तटके सामानान्तर तय करैत अछि। शहरके पश्चिमी भागमे बहुतो झीलसभ अछि, जहिमेसं रेड हिल्स, शोलावरम आर चेम्बरामबक्क्मसं पेय जलक आपूर्ति होएत छै। चेन्नईऽक भूमिगत जल सेहो प्रदूषित होइत जा रहल छै।

चेन्नईमे वार्षिक तापमान लगभग एक समान होइत छै। अहीकऽ कारण चेन्नई कऽ सागर तट पs एवं थर्मल इक्वेटर पs स्थित  होइत अछि। वर्ष भरि मौसम आम तौर पs गर्म एवं उमस भरल रहैत अछि। मई एवं जूनक पहिल सप्ताह वर्षक सबसं गर्म समय होइत छै। अही समय जब तापमान ३८-४२ डिग्री सेल्सियसके आस-पास पहुँच जाइत छै, ताए स्थानीय लोग एकरा अग्नि नक्षत्रम आ कथिरि वेय्यी कहैत छै। वर्षक सबसं ठण्डा महीना जनवरी कs होइत छै, जब न्यूनतम तापमान १८-२० डिग्री सेल्सियस तक पँहुच जाइत अछि। अखन धरि अही ठामक सबसं न्यूनतम तापमान १५.८ डिग्री सेल्सियस आर उच्चतम तापमान ४५ डिग्री सेल्सियस दर्ज कएल गेल अछि।
चेन्नईमे वर्षमे औसतन १,३०० मिलीमीटर वर्षा होइत छै। मुख्यतः वर्षा सितम्बरसं डीसम्बरके मध्य होइत छै। देशके अन्य जगहसभसं विपरीत चेन्नईमे वर्षा मनसूनके घुरला कs समय उत्तर-पूर्वी हवाके कारन होइत छै। बङगालक खाड़ीमे आबऽ वला चक्रवात बहुतो बेर चेन्नई सहो पहुँच जाइत अछि। सन २००५ मे आजुक तककs सबसं ज्यादा वर्षा २,५७० मिलीमीटर दर्ज कएल गेल छल।




#Article 424: भरतनाट्यम् (112 words)


भरतनाट्यम् () भारतीय शास्त्रीय नृत्यक एक प्रमुख विधा छी जे ई भरत मुनिक नाट्य शास्त्र (जे ४०० ईशा पूर्वक अछि) पर आधारित अछि। भरतनाट्यम सबसँ प्राचीन नृत्य मानल जाइत अछि| ई नृत्य शैली तमिलनाडु आ नजदिकी क्षेत्रक हिन्दू मन्दिरसँ उत्पति भेल मानल जाइत अछि। परम्परागत रुपमे भरतनाट्यम् खास करि महिलासभद्वारा एकल रुपम प्रस्तुत करल जाइवला नृत्य छी।ई नृत्यमे हिन्दू भगवान शिवक विशेष रुपसँ धार्मिक रङ्गरूप आ छविक प्रस्तुत कएल जाइत अछि।

ई नृत्यके तमिलनाडुमे देवदासिसभद्वारा विकसित आ प्रसारित कएल गेल छल| शुरू शुरूमे ई नृत्य देवदासिसभक द्वारा विकसित होमएक कारण उचित सम्मान नै मिलल छल| मुदा बीसम् सदीक शुरूमे इन्जिनियर कृष्ण अय्यर आर रुकीमणि देवीक प्रयाससँ ई नृत्यके पुन: स्थापित कएल गेल|




#Article 425: शास्‍त्रीय नृत्‍य (134 words)


भारतीय शास्त्रीय नृत्य, वा शास्त्रीय नृत्य, धार्मिक हिन्दू परम्पराक नृत्य शैली छी जकर सिद्धान्त आ व्यवहार संस्कृत पाठ नाट्य शास्त्रसँ आएल मानल जाइत अछि ।

भारतमे मान्यता प्राप्त शास्त्रीय नृत्यक सङ्ख्या ८ वा बेसी अछि, जे स्रोत आ विद्वानक आधारपर निहित अछि । भारतक सङ्गीत नाटक एकेडमी – भरतनाट्यम्, कथक, कुचिपुड़ी, ओड़िसी, कथकली, सत्त्रिया, मणिपुरी आ मोहिनीअट्टमक शास्त्रीय नृत्यक रुपमे मान्यता प्रदान केनए अछि । विद्वानसभमे ड्रीड विलियम्स छऊ, यक्षगण आ भागवत मेलाक सेहो सूचीमे जोड़ने अछि । जबकि भारतक सांस्कृतिक मन्त्रालय छऊ नृत्यक सेहो शास्त्रीय नृत्यक रूपमे मान्यता प्रदान केनए अछि । प्रत्‍येक विधा विशिष्‍ट समय व वातावरणक प्रभावक कारण आकार लेने अछि । राष्‍ट्र शास्‍त्रीय नृत्‍यक बहुतेक विधासभके प्रस्तुत करैत अछि, जाहिमेसँ प्रत्‍येकक सम्बन्ध देशक विभिन्‍न भागसभसँ अछि । प्रत्‍येक विधा कोनो विशिष्‍ट क्षेत्र अथवा व्‍यक्तिसभक समूहक लोकाचारक प्रतिनिधित्‍व करैत अछि ।




#Article 426: धनतेरस (221 words)


 
कार्तिक कृष्ण पक्षक त्रयोदशी तिथिकेँ दिन भगवान धनवन्तरीक जन्म भेल छल ताहि लेल एहि तिथि धनतेरस या धनत्रयोदशी नामसँ जानल जाएत अछि। भारत सरकार धनतेरसकेँ राष्ट्रिय आयुर्वेद दिवसक रूपमे मनेबाक निर्णय केनए अछि।

धन्वन्तरी जब प्रकट भेल छलाह ओही समयमे हुनकर हाथमे अमृतसँ भरल कलश छल। भगवान धन्वन्तरी जाए कलश लऽ प्रकट भेल छल तहि दुवारे ई अवसर पऽ बर्तन किनवाक परम्परा अछि। बहुतो ठाम लोकमान्यताकेँ अनुसार एहो कहल जाएत अछि कि एहि दिन धन (वस्तु) खरीदलासँ ओहिमे तेरह गुणा वृद्धि होएत अछि। एहि अवसर पऽ लोक धनियाक बीया खरीद कऽ सेहो घरमे रखैत अछि। दीपावलीकेँ पश्चात ई बीज/बीया कऽ लोकसभ अपन-अपन खेतमे रोपैत अछि। 

धनतेरसक दिन चाँदी खरीदै कऽ सेहो प्रथा अछि। यदि सम्भव नै भेला पऽ लोकसभ कोनो बर्तन खरिद करैत अछि। एकर ई कारण मानल जाएत छै की ई चन्द्रमाक प्रतीक होएत अछि जे शीतलता प्रदान करैत छै आ मोनमे सन्तोष रूपी धनक वास होएत छै। सन्तोष सभसँ बड़का धन कहल गेल अछि। जकरा लऽ सन्तोष अछि ओ स्वस्थ अछि सुखी अछि आओर ओहि सभसँ धनवान होएत अछि। भगवान धन्वन्तरी जे चिकित्साक देवता सेहो छी हुनकासँ स्वास्थ्य आ सेहतक कामनाक लेल सन्तोष रूपी धनसँ बड़का कोनो धन नई छै। लोकसभ एहि दिन दीपावली कऽ राति लक्ष्मी गणेशक पूजा हेतु मूर्ति सेहो खरिददारी करैत अछि। धनतेरसक साझ घरकेँ बाहर मुख्य द्वार पऽ आओर अङ्गनामे दीप जलाबऽक प्रथा सहो अछि।




#Article 427: राजेसुल्तानपुर (250 words)


राजेसुल्तानपुर उत्तर प्रदेशक अम्बेडकर नगर जिलासभमे स्थित एकटा प्रमुख कस्बा एव नगर पचायत छी। राजेसुल्तानपुर सन १८७६ सं रियासत बनल आ अहीसं बस्ती आर हसवरक रियासतसभ सेहो जन्मल।

राजेसुल्तानपुर फैजाबाद-बलिया आ  राष्ट्रीय राजमार्ग २३३ मार्ग पs सरयू नदीके मैदानमे बसल अछि। नगरक पाछासं 'छोटी सरयू' नामक नदी बहैत अछि जे आजमगढ़ आ अम्बेडकर नगर कऽ विभाजित करेत अछि।
  
  मुख्य सड़कसभ:

राजेसुल्तानपुरसं लगक शहरसभक दूरी:

राजेसुल्तानपुरक व्यवसाय मुख्यतः खेती आ ग्रामीण आवश्यकतासभ पs आधारित अछि। राजेसुल्तानपुरक चारु तरफ हरा भरा लहराइत गाँव छी आ हुनकरसभ आवश्यकतासभक पुर्ति राजेसुल्तानपुरसं होइत अछि। उर्वरक, कीटनाशक, खेती कs मशीनसभ एवं रोजमराक सम्रागी मिलि जाइत अछि। राजेसुल्तानपुर पूरा पूर्वांचल एवं अवधमे अपन तम्बाकूके लेल प्रसिद्ध अछि।

अवध मे गोण्डाके बाद सबसं अधिक तम्बाकू कs उत्पादन राजेसुल्तानपुरमे होइत अछि। राजेसुल्तानपुरक तम्बाकू विश्व प्रसिद्ध अछि जही कारण गुटखा, पान मसालामे राजेसुल्तानपुरी तम्बाकू लिखल जाइत अछि।

अहि ठाम पर एकटा कोतवाली पुलिश थाना छै आ  एकटा माहिला पुलिस स्टेशन अछि आर राजेसुल्तानपुर कोतवालीके अन्तगर्त बहुतो चौकिसभ एव थानासभ सेहो अछि -

((राजेसुल्तानपुर कोतवालीके अन्तगर्त))

अहि ठाम पs एकटा बस स्टेशन छै अकबरपुर डिपो, फैजाबाद डिपो, आजमगढ डिपो, अम्बेडकरनगर डिपो, सुलतानपुर डिपो क बस चलैत अछि 

राजेसुल्तानपुरक जनसख्या 2001 मे 19,678छल जे 2011मे लगभग 27,970के आस पास पहुच गेल

राजेसुल्तानपुरमे हिन्दूक सख्या ९८ % अछि मुस्लिमक सख्या नाममात्र १ % तथा ईसाई, जैन, बौद्ध धर्मक सख्या १ % अछि

राजेसुल्तानपुर शहरमे बैकिंग सुविधासभक विकाश नइ भेल अछि कारण छै कि राजेसुल्तानपुरमे अखन धरि बैकिंगक कमी अछि

राजेसुल्तानपुरमे बहुतो सरकारी आ गैर सरकारी कौलेज अछि ।

राजेसुल्तानपुरके निम्नलिखित प्रसिद्ध स्थल छी:




#Article 428: टोक्यो (351 words)


टोक्यो (जापानी: 東京, उच्चारणः तोउक्योउ)  जापानक राजधानी तथा सबसँ पैग शहर छी । ई जापानक होन्शू द्वीपमे अवस्थित अछि आ एकर जनसङ्ख्या लगभग ८६ लाख अछि, जबकि टोक्यो क्षेत्रमे १.२८ करोड आ उपनगरीय क्षेत्र मिलाए एतयक अनुमानित ३.७ करोड लोक बसोबास करैत अछि जे ई देशक सबसँ बेसी जनसङ्ख्या भेल महानगरीय क्षेत्र अछि । टोक्यो लगभग ८० किमीक क्षेत्रमा फैलल अछि आ ई क्षेत्रफलक दृष्टिसँ सेहो विश्वक सबसँ पैग नगरीय क्षेत्र छी ।

टोक्यो विश्वक सबसँ विकसित शहरसभमे सँ एक छी । ई जापानक राजनीतिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक गतिविधिक प्रमुख केन्द्र होमएक संगे विश्वक एक प्रमुख आर्थिक केन्द्र सेहो छी । ई विश्वक सबसँ पैग महाशहरीय अर्थव्यवस्था सेहो छी जकर कुल गृहस्थ उत्पाद, क्रय शक्तिक आधारमे सन् २००५ मे १,१९१ अरब डलर छल । न्यूयोर्क तथा लण्डनक साथ मिल ई विश्व अर्थव्यस्थाक सञ्चालक छी आ एकरा अल्फा+ नगरक दर्जा प्राप्त अछि । विभिन्न संस्थाद्वारा कएल सर्वेक्षणमे टोक्योके विश्वक लगातार सबसँ महग महाशहरक गौरव प्राप्त अछि ।

टोक्योके मूल रूपमे ईडोक नामसँ जानल जाइत छल, जकर जापानी अर्थ मुहाना छी । सन् १८६८ मे एकरा जापानक राजधानी बनाएल गेल आ एकर नाम परिवर्तन करि टोक्यो (तोउक्योउ: तोउ (पूर्व) + क्योउ (राजधानी)) बनाएल गेल ।

अक्टुबर २००७ धरि, आधिकारिक अन्तरजनगणनीय अनुमानक आधारमे टोक्योमे १.२७९ करोड लोक निवास करैत अछि, जाहिमेसँ ८६.५३ लाख टोक्योक २३ वार्डमे निवास करैत अछि । दुपहरक समय, जनसङ्ख्यामे लगभग २५ लाखक वृद्धि होइत अछि कियाकि कर्मिक तथा विद्यार्थी आसपासक क्षेत्रसँ टोक्योमे आबैत अछि । ई स्थिति तीन केन्द्रीय वार्ड चियोदा, चूओ तथा मिनातोमा सँ अधिक स्पष्ट होइत, जकर सन् २००५क राष्ट्रिय जनगणनाक अनुसार सामूहिक जनसङ्ख्या रात्रीक समय ३,२६,०० होइत छल, मुदा दुपहरक समय २४ लाखधरि पहुँचि जाइत छल ।

समूचे प्रिफेक्चरमे सन् २००७ मे १,२७,९०,००० (२३ वार्डमे ८६,५३,०००) निवासी छल, जाहिमे दुपहरक समय ३० लाखक वृद्धि होइत छल । टोक्योक अखनिधरिक सर्वाधिक जनसङ्ख्या सन् १९६५ क जनगणनामे छल, जखन २३ वार्डसभक कुल आधिकारिक जनसङ्ख्या ८८,९३,०९४ छल आ सन् १९९५क जनगणनामे ई सङ्ख्या ८० लाखसँ कम भेल । 

सन् २००५ धरि, टोक्योमे बैसनिहार विदेशीसभमे सर्वाधिक जनसङ्ख्या चीनीसभ (१,२३,६६१) क अछि, ओकरबाद कोरियाली (१,०६,६९७), फिलिपीनो (३१,०७७), अमेरिकी (१८,८४८), ब्रिटिश (७,६९६), ब्राजिलियाली (५,३००) आ फ्रान्सेली (३,०००)क अछि।

टोक्योक पर्यटन स्थलसभ निम्नलिखित अछि:




#Article 429: आजमगढ़ जिला (126 words)


आजमगढ़  भारतीय राज्य उत्तर प्रदेशक आजमगढ़ सम्भागके तीनटा जिलामेसं एकटा जिला छी। एकर जिला मुख्यालय आजमगढ़ अछि। तमसाके पावन तट पs स्थित यी जनपद आज़मगढ़ अनेक ऋषिसभक पावन पुण्य भूमि छी। आज़मगढ़ जनपद उत्तर प्रदेशके पूर्वी भागमे स्थित अछि, जे गंगा आर घाघराके मध्य बसल अछि।
यी जनपद आदि कालसं मनीषिसभ, ऋषिसभ, चिन्तसभ, विद्वानसभ आर स्वतंत्रता सेनानिसभक जन्म स्थली रहल अछि। यी जनपदक नवाब आज़मशाह बसौने छल, अही कारण एकर नाम आज़मगढ़ पड़ल। १५ नवम्बर १९९४क चौदहम मण्डलके रूपमे आजमगढ़ मण्डल क सृजन केल गेल। आजमगढ़ जिलामे सात तहसिसभ अछि। जे लालगंज, सदर, सगङी, मेंहनगर, बुढ़नपुर, निजामबााद आ फूलपुर छै। सबसं बड़का तहसील निजामबााद छी।
 
एस. टी. डी (STD) कोड - 05462

  
समुद्र तलसं उचाई -

अक्षांश - उत्तर

देशांतर - पूर्व

औसत वर्षा - मि.मी.




#Article 430: लखनऊ (374 words)


लखनऊ ( ) भारतक उत्तर प्रदेशक राजधानी छी। ई शहर, लखनऊ जिला तथा लखनऊ प्रमण्डलक प्रशासनिक मुख्यालय सेहो छी। लखनऊ शहर अपन खास नजाकत तहजीबवला बहुसांस्कृतिक खूबीक लेल प्रसिद्ध अछि। सन् २००६ मे ई शहरक जनसङ्ख्या २,५४१,१०१ तथा साक्षरता दर ६८.६३% छल। कानपुर शहरक बाद ई शहर उत्तर-प्रदेशक सबसँ पैग शहर छी। शहरक बीचसँ गोमती नदी बहैत अछि, जे लखनऊक सांस्कृतिक हिस्सा छी 

लखनऊ ओ क्षेत्रमे स्थित अछि जे ऐतिहासिक रूपसँ अवध क्षेत्रक नामसँ जानल जाइत अछि । लखनऊ एतिहासिक रुपसँ एक बहुसांस्कृतिक शहर रहल अछि । एतय शिया नवाबद्वारा शिष्टाचार, सुन्दर उद्यान, कविता, सङ्गीत तथा बढिया व्यञ्जनके सबदिने संरक्षण देनए छल । लखनऊके नवाबक शहर कऽ रूपमे सेहो जानल जाइत अछि। एकरा पूर्वक स्वर्ण शहर (गोल्डेन सिटी) तथा शिराज-ए-हिन्द क रूपमे जानल जाइत अछि। आजुक लखनऊ एक जीवन्त शहर छी जे एखन एक आर्थिक विकासक बाटदिस अछि आ ई भारतक तेज गतिशील गैर-महानगरक शीर्ष पन्द्रह शहरसभमेसँ एक छी। ई हिन्दी आ उर्दू साहित्यक केन्द्रमे सँ एक छी । 

लखनऊ प्राचीन कोसल राज्यक हिस्सा छल। ई भगवान रामक विरासत छल जकरा ओ हुनकर भाई लक्ष्मणकेँ समर्पित करि देनए छल। अत: एकरा लक्ष्मणावती, लक्ष्मणपुर या लखनपुरक नामसँ सेहो जानल गेल, जे बादमे परिवर्तन भऽ लखनऊ भेल। ई शहरसँ अयोध्या मात्र ८० माइलक दूरीमे स्थित अछि। एक अन्य कथा अनुसार ई शहरक नाम, 'लखन अहीर' जे 'लखन किला'क मुख्य कलाकार छल, कऽ नाममे राखल गेल छल। लखनऊक वर्तमान स्वरूपक स्थापना नवाब आसफुद्दौलाद्वारा सन् १७७५ मे कएल गेल छल। अवधक शासकसभ लखनऊके अपन राजधानी बनाए एकरा समृद्ध बनेने छल। मुदा ओकरबादक नवाब विलासी आ निकम्मा सिद्ध भेल। ई नवाबसभक काहिल स्वभावक परिणामस्वरूप लर्ड डलहौजीक फौजसभ बिना युद्ध अवधक अधिग्रहण करि ब्रिटिश साम्राज्यमे मिलेनाए छल। सन् १८५० मे अवधक अन्तिम नवाब वाजिद अली शाह ब्रिटिश अधीनता स्वीकार केनए छल। लखनऊक नवाबसभक शासन एहि प्रकार समाप्त भेल।

सन् १९०२ मे नर्थ वेस्ट प्रोभिन्सक नाम बदलि युनाइटेड प्रोभिन्स अफ आगरा एन्ड अवध कएल गेल। साधारण बोलचालक भाषामे एकरा युनाइटेड प्रोभिन्स या युपी कहल जाइत अछि। सन् १९२० मे प्रदेशक राजधानीके इलाहाबादसँ बदलि लखनऊ बनाएल गेल। प्रदेशक उच्च न्यायालय इलाहाबादमे रहल आ लखनऊमे उच्च न्यायालयक एक खण्डपीठ स्थापित कएल गेल। स्वतन्त्रताबाद १२ जनवरी सन् १९५० मे ई क्षेत्रक नाम बदलि उत्तर प्रदेश राखल गेल आ लखनऊ एकर राजधानी भऽ गेल।

१७७५-१७९७
File:Saadut_Aly_Khan.jpg|सआदत खान१७९८-१८१४
File:Washah1.jpg|वाजिद अली शाह
File:United_Provinces_1903.gif|संयुक्त अवध आगरा प्रान्त मानचित्र




#Article 431: नवी मुम्बई (143 words)


नवी मुम्बई (आइपिए:Navī Mumba'ī) भारतीय राज्य महाराष्ट्रक मुम्बईक पश्चिमी किनारपर एक पुर्ण रुपसँ नियोजित शहर छी, एकरा मुम्बईक जुड़वा शहरक रुपमे
सन् १९७२ सँ विकसित कएल जा रहल अछि । ई संसारक सबसँ पैग नियोजित शहर बनि चुकल अछि । नवी मुम्बई लगभग १६३ वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफलमे फैलल अछि आ नवी मुम्बई महानगरपालिका निगमक कार्यक्षेत्रमे आबैत अछि । नवी मुम्बई भारतक मुख्य भूमीमे ठाणे क्रीकक पूर्वमे अवस्थित अछि । शहरक सीमा ठाणेक नजदीक ऐरोली सँ शुरु भऽ दक्षिणमे उरण धरि जाइत अछि ।
वाशी क्रीक तथा मुलुण्ड बाँध नवी मुम्बईके मुम्बईसँ जोड़ति अछि । वाशी नामक स्थान शहरक मुख्य व्यवसायिक क्षेत्र मानल जाइत अछि । जबकि नेरुल नामक स्थान शहरक रानी कहलावैक गर्व हासिल अछि । एतय आगरी समाजक बहुत राश गाम अछि |

खारघर आ पनवेलक आसपास नवी मुम्बई अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थलक निर्माण होमएक कारण ई क्षेत्रसभके सेहो महत्व बढि गेल अछि ।




#Article 432: मुझफ्फरनगर जिला (230 words)


मुजफ़्फर नगर भारतके राज्य उत्तर प्रदेशक एकटा शहर छी। यी मुजफ़्फरनगर जिलाक मुख्यालय सेहो छी।

यी समुद्र तलसं २३७-२४५ मीटर ऊपर, दिल्ली सं लगभग ११६ किमी दूर, उत्तर प्रदेशके उत्तरमे उत्तरी अक्षांश २९º ११' ३० सं २९º ४५' १५ धरि आर पूर्वी रेखांश ७७º ३' ४५ सं ७८º ७' तक स्थित छै। यी राष्ट्रीय राजमार्ग ५८ पs सहारनपुर मण्डलक अन्तर्गत गंगा आर यमुनाके दोआबमे, दक्षिणमे मेरठ आर उत्तरमे सहारनपुर जिलाके बीच स्थित अछि। पश्चिममे शामली मुजफ़्फर नगरक हरियाणाके पानीपत आ करनाल सं आर पूर्वमे गंगा नदी उत्तर प्रदेशक बिजनोर जिलासं अलग करैत अछि। मुजफ़्फर नगरक क्षेत्रफल ४००८ वर्ग किलोमीटर (१९,६३,६६२ एकड़) अछि। मुजफ़्फर नगरमे पहिल जनसंख्या १८४७ मे भेल आ तखन मुजफ़्फर नगरक जनसंख्या ५३७,५९४ छल। २००१ कs जनसंख्याके अनुसार मुज़फ़फर नगर जिलाक आबादी ३५,४३,३६० (१८,९३,८३० पुरूष आर १६,४९,५३० महिला, २६,३९,४८० ग्रामीण आर 9,०३,८८० शहरी, १७,८०,३८० साक्षर, ४,७८,३२० अनुसूचित जाति आर लगभग ९० अनुसूचित जनजाति) अछि आ औसत ३१,६०० व्यक्ति प्रतिवर्ग किलोमीटरमे रहैत अछि। मुजफ़्फर नगर जिलामे २ लोकसभा, ९ विधान सभा, ५ तहसिल, १४ खण्ड (ब्लोक), ५ नगर पालिकासभ, २० टाऊन एरिया, १०२७ गामसभ (२००३-०४ मे केवल ८८६ गामसभमे बिजली छल), २८ पुलिस स्टेशन, १५ रेलवे स्टेशन (उत्तरी रेलवे, १८६९ मे रेलमार्ग आरम्भ भेल छल)। २००१ मे ५५७ औघोगिक कम्पनिसभ आर ३०,७९२ स्माल स्केल कम्पनिसभ छल।

मुजफ्फरनगर सं प्रकाशित दैनिक अमरीश समाचार बुलेटिन सांध्यकालीन समयक लोकप्रिय समाचार पत्र छी।

मुज़फ़्फ़र नगरसं जुड़ल किछ खास बातसभ -

श्रेणी:उत्तर प्रदेशक शहरसभ]




#Article 433: ईटानगर (335 words)


ईटानगर (;) भारतक राज्य अरुणाचल प्रदेशक राजधानी शहर छी । ई हिमालयक तराईमे अवस्थित अछि । समुद्र सतहसँ एकर औसत उचाई ७५० मिटर अछि । ई प्रादेशिक राजधानी भेला कारणसँ सडक व्यवस्था निक अछि । गुवाहाटी आ ईटानगरक नाहरलागुनक मध्यमे हेलिकप्टर सेवाक विकल्प सेहो रहल अछि । हेलिकप्टर वाहेक पर्यटक बससभद्वारा सेहो गुवाहटीसँ ईटानगरधरि पहुँचल जा सकैत अछि ।

ईटानगरक खोज मायापुर संगे भेल छल । मायापुर ११अम शताब्दीमे जित्रि वंशक राजधानी छल । ई किलाक निर्माण १४-१५अम शताब्दीमे कएल गेल छल । याह किलाक नाममे ई शहरक नाम ईटानगर राखल गेल छल । पर्यटक ई किलामे बहुतेक सुन्दर दृश्य देख सकैत अछि । हाल आबि ई किलाके राजभवनक नामसँ सेहो जानल जाइत अछि आ ई एतय कऽ राज्यपालक सरकारी निवास छी । 

ईटानगर मे अवस्थित अछि । यसको औसत उचाई ७५०  मिटर रहल अछि ।

ईटानगरमे पर्यटकसभ ईटा किला सेहो देख सकैत अछि । ई किलाक निर्माण १४-१५अम शताब्दीमे कएल गेल छल । याह किलाक नाममे ई शहरक नाम ईटानगर राखल गेल छल । पर्यटक ई किलामे बहुतेक सुन्दर दृश्य देख सकैत अछि । किलाक भ्रमण करि पर्यटकसभ एतय पौराणिक गङ्गा ताल सेहो देख सकैत अछि ।

ई ईटानगरसँ ६ किलोमिटरक दूरीमे स्थित अछि । ई ताल नजदिके एक मनमोहक जङ्गल सेहो अछि । पर्यटकसभ ई जङ्गलमे सुन्दर गाछ-वृक्ष, वन्य जन्तु आ फूलक बगैंचा देख सकैत अछि । एतय आबैवला पर्यटकसभ ई स्थान आबि मात्र जाइत अछि । 

एतय एकटा सुन्दर बौद्ध मन्दिर रहल अछि । बौद्ध गुरू दलाई लामा सेहो एकर यात्रा करि चुकल अछि । ई मन्दिरक छत पियर अछि आ ई मन्दिरक निर्माण तिब्बती शैलीमे कएल गेल अछि । ई मन्दिरक उपरका मञ्जिलासँ पुरे ईटानगरक सुन्दर दृश्यसभ देखल जा सकैत अछि । ई मन्दिरमे एक सङ्ग्राहलयक निर्माण सेहो कएल गेल अछि । एकर नाम जवाहर लाल नेसभ सङ्ग्राहलय छी । ई सङ्ग्रहालयमे पर्यटकसभ पुरे अरूणाचल प्रदेशक झलक देख सकैत अछि ।

ई स्थलसभ वाहेक एतय काठसँ बनल सुन्दर वस्तुसभ, वाद्ययन्त्र, हस्त कपडा, हस्तनिर्मित वस्तुसभ तथा कलाकृतिसभ देखल जा सकैत अछि । एतय रहल सङ्ग्राहलयमे पुस्ताकलयक सेहो निर्माण कएल गेल अछि ।




#Article 434: आर्मेनिया (114 words)


आर्मीनिया (आर्मेनिया) यूरोपक काकेशस क्षेत्रम स्थित एकटा देश छी। एकर राजधानी येरेवन छी। १९९० पूर्व ई सोवियत संघक एक अंग छल जे एक राज्यक रूपम छल। सोवियत संघमा एक जनक्रान्ति एवं राज्यसभक स्वतन्त्रता संघर्ष आर्मीनियास २३ अगस्ट १९९०म स्वतंत्रता प्रदान केनेए छल, परन्तु एकर स्थापनाक घोषणा २१ सितंबर १९९१म भेल छल एवं एकरा अन्तरराष्ट्रिय मान्यता २५ दिसंबरमा भेटल। एकर सीमासभ] तुर्की, जर्जिया, अजरबैजान र ईरानसित लागेकाछन्। यहाँ ९७.९ प्रतिशत भन्दा अधिक आर्मीनियाई जातीय समुदायका अतिरिक्त १.३% यजिदी, ०.५% रूसी आर अन्य अल्पसंख्यक निवास करेत अछी। आर्मेनिया प्राचीन ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर भेल देश छी। आर्मेनियाका राजा चौथो शताब्दीमा नै ईसाई धर्म ग्रहण केनेए छल। यहि प्रकार आर्मेनिया राज्य ईसाई धर्म ग्रहण गर्ने प्रथम राज्य छी।




#Article 435: उर्जित पटेल (160 words)


	
	
उर्जित पटेल (जन्म- २८ अक्टुबर १९६३) भारतीय रिजर्व बैंकक वर्तमान गभर्नर छी। 

उप गभर्नरक रूपमे ई मौद्रिक नीति सम्बन्धी विशेषज्ञ समितिक अध्यक्षता केनए छल । भारतक प्रतिनिधित्व करि उर्जित ब्रिक्स देशसभक साथ अन्तर-सरकारी समझौता आ अन्तर-केन्द्रीय बैंक करार (आइसिबिए) मे मुख्य भूमिका निर्वाह केनए छल । आकस्मिक आरक्षित निधि व्यवस्था (सिआरए) क स्थापना भेल जे ई देशसभक केन्द्रीय बैंकसभक बीच स्वाइप लाइन ढाँचा छी ।

ओ सन् १९९८ सँ सन् २००१ धरि वित्त मन्त्रालय (आर्थिक कार्य विभाग), भारत सरकारमे परामर्शदाता छल । ओ सार्वजनिक आ निजी क्षेत्रसभमे सेहो कार्य केनए अछि । पटेल लन्डन स्कुल अफ इकोनोमिक्स सँ स्नातक केनए अछि, अक्सफोर्ड विश्वविद्यालयसँ एमफिलक अध्ययन केनए अछि आ येल विश्वविद्यालय सँ विद्यावारिधि केनए अछि ।

७ जनवरी २०१३ क दिन उर्जित पटेल भारतीय रिजर्व बैंकक डिप्टी गभर्नर पद पर नियुक्त भेल छल । ओ आइडिएफसी लिमिटेडमे मुख्य नीति अधिकारीक रूपमे कार्य सेहो केनए छल । हुनकर लग वित्त, ऊर्जा आ बुनियादी ढाँचाक क्षेत्रमे १७ सँ अधिक वर्षक अनुभव अछि । 




#Article 436: रघुराम राजन (251 words)


रघुराम राजन (पूरा नाम: रघुराम गोविन्द राजन, तमिल: ரகுராம் கோவிந்த ராஜன் आ शिकागो विश्वविद्यालयक बुथ स्कुल अफ बिजनेसमे एरिक जे ग्लिचर फाइनान्सक गणमान्य सर्विस प्रोफेसर छल ।  सन् २००३ सँ सन् २००६ धरि ओ अन्तर्राष्ट्रिय मुद्रा कोषक प्रमुख अर्थशास्त्री आ अनुसन्धान निर्देशक आ भारतमे वित्तीय सुधार कऽ लेल योजना आयोगद्वारा नियुक्त समितिक नेतृत्व सेहो केलक ।

राजन मेसाचुसेट्स इन्स्टिच्युट अफ टेक्नोलोजीक अर्थशास्त्र विभाग आ स्लोन स्कुल अफ म्यानेजमेन्ट; नर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालयक क्यालौग स्कुल अफ म्यानेजमेन्ट आ स्टकहोम स्कुल अफ इकोनोमिक्समे अतिथि प्रोफेसर सेहो रहल छल । ओ भारतीय वित्त मन्त्रालय, विश्व बैंक, फेडरल रिजर्व बोर्ड आ स्वीडिश संसदीय आयोगक सल्लाहकारक रूपमे सेहो काम केनए अछि । सन् २०११ मे ओ अमेरिकी फाइनान्स ऐसोसिएसनक अध्यक्ष छल तथा वर्तमान समयमे अमेरिकन एकेडेमी अफ आर्ट्स एन्ड साइन्सेजक सदस्य छी । 

रघुराम राजनक जन्म भारतक भोपाल शहरमे ३ फरबरी १९६३ के भेल छल । सन् १९८५ मे ओ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली सँ इलेक्ट्रिकल इन्जीनियरिङमे स्नातक डिग्री हासिल केलक । इन्डियन इन्स्टिच्युट अफ म्यानेजमेन्ट, अहमदाबाद सँ ओ सन् १९८७ मे एमबिए केनए छल । मेसाचुसेट्स इन्स्टिच्युट अफ टेक्नोलोजी सँ ओ सन् १९९१ मे अर्थशास्त्र विषयमे पिएचडी केलक ।

स्नातक स्तर धरि पढ़ाईक बाद राजन शिकागो विश्वविद्यालयक ग्रेजुएट स्कुल अफ बिजनेसमे शामिल भऽ गेल । सितम्बर २००३ सँ जनवरी २००७ धरि ओ अन्तर्राष्ट्रिय मुद्रा कोषमे आर्थिक सल्लाहकार आ अनुसन्धान निर्देशक (मुख्य अर्थशास्त्री) रहल । जनवरी २००३ मे अमेरिकन फाइनान्स एसोसिएशनद्वारा देल जाइवला फिशर ब्ल्याक पुरस्कारक प्रथम प्राप्तकर्ता छल । ई सम्मान ४० सँ कम उमर क अर्थशास्त्रीसभके वित्तीय सिद्धान्त आ अभ्यासमे योगदानक लेल प्रदान कएल जाइत अछि। 




#Article 437: दिपायल सिलगढी नगरपालिका (110 words)


दिपायल सिलगढी नगरपालिका नेपालक सुदूर-पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्र, सेती अञ्चलक डोटी जिलाम अवस्थित एकटा नगरपालिका छि । ई नगर सुदुर पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्रको क्षेत्रीय सदरमुकाम सेहो छि । दिपालयल सिलगढी सेती नदीक किनारम अवस्थित अछि । सिलगढीम बहत क्षेत्रीय तथा जिला स्तरीय सरकारी कार्यालयसभ रहल अछि । दिपायल सिलगढी वि.सं. २०३९ म नगरपालिका घोषणा भेल छल । एकर पहिल नगरप्रमुख शिवशङ्कर भट्ट छेलाह आ पिछ्ला नगरप्रमुख पूर्णराज जोशी छल । सिलगढीम बहत क्षेत्रीय तथा जिला स्तरीय सरकारी कार्यलयसभ रहल अछि, नगरक जनसंख्या २३,४१६ अछि । सिलगढीक टेलीफोन कोड नं.०९४ छी ।

नेपालक बि.स.२०६८ क जनगणना अनुसार दिपायल सिलगढी नगरपालिकाक जनसंख्या २३,४१६ अछि। तहि मध्य पुरुष ५१%, आर महिला ४९% अछि ।




#Article 438: हेटौंडा उपमहानगरपालिका (228 words)


हेटौंडा उपमहानगरपालिका मकवानपुर जिलाक सदरमुकाम छी ।
 ई नगर भौगोलिक रूपमे भित्री मधेस कहल जाइवला चितवन उपत्यका (नारायणी पूर्वी राप्ती उपत्यका कहि चिनहैवला)क पूर्वी किनार चुरे पहाड श्रृङखला सँ जुडल अछि । ई मध्य नेपालक प्रमुख वाणिज्य तथा यातायात केन्द्र छी । ई महेन्द्र राजमार्ग तथा त्रिभुवन राजपथक मिलन विन्दुमे अवस्थित अछि । हिन्दू, बौद्ध, मुसलमान, क्रिश्चियन धर्मावलम्बी अछि । नेपालक मन्त्री परिषद अन्तर्गतक सामाजिक समिति ६१ टा नव नगरपालिका आ ७ टा नगरपालिकाके उपमहानगरपालिका बनाबैक निर्णय करलाकबाद हेटौंडाके सेहो नगरपालिकासँ उपमहानगरपालिकामे विस्तार कएल गेल अछि । हेटौंडाके उपमहानगरपालिका घोषित करलाकबाद एहिमे वसामाडि गाविसके समावेश कएल गेल छल ।

महाभारतमे आधारित किम्वदन्ती अनुसार पाँच पाण्डव वनबासक क्रममे ई स्थानमे पहुँचल आ हेडम्बा राक्षस सँ युद्ध भेलापर भीमसेनद्वारा हेडम्बाके तत्कालै मारल गेलापर हेडम्बासँ अपभ्रंस भऽ हेटौंडा भेल अछि । हेडम्बाक बहिनी भूटनदेवीक नामसँ स्थापित भूटनदेवी मन्दिर ई उपनगरपालिकाक वडा नं. १० मे अवस्थित अछि, जहाँ दैनिक पूजाआजा करवाक संग एहिसँ सम्बन्धित पर्व सेहो मानाओल जाइत अछि । 

नेपाल सरकार वि.सं. २०२६ वैशाखमे हेटौंडाके तत्कालिन नगरपञ्चायतक रूपमे घोषणा केनए छल । तत्कालिन हेटौंडा नगरपञ्चायतक प्रथम प्रधानपञ्च वासुदेव रिजाल आ दोसर ओमनाथ पराजुली छी । देशमे बहुदलीय प्रजातन्त्रको स्थापनाबाद हेटौंडा नगरपालिकाक प्रमुखमे डोरमणि पौडेल, उपप्रमुख हरिबहादुर महत सहित दुई अवधिक लेल निर्वाचित भेल छलाह ।

हेटौंडा नगरपालिकामे शहीद स्मारक, मकवानपुरगढी, पशुपति मन्दिर, ऐतिहासिक भूटनदेवी मन्दिर, मनकामना मन्दिर, गोक्षेक्व मन्दिर, कुसमान्ड सरोवर, गुम्बा आ पुण्यक्षेत्रक संगे पुष्पलाल पार्क विशेषताक रूपमे अछि ।




#Article 439: महेन्द्र राजमार्ग (196 words)


महेन्द्र राजमार्ग () पूर्व पश्चिम राजमार्ग () के नाम सँ सेहो जानल जाइत अछि । ई राजमार्ग नेपालक तराईक भौगोलिक क्षेत्रके काटैत नेपालक पूर्वमे रहल मेचीनगर सँ पश्चिममे रहल भीमदत्त धरि जाइत अछि । ई देशक पूर्ण चौडा भू-भाग समेटैत अछि । ई नेपालक सभसँ लम्बा राजमार्ग छी जे भारतीय इन्जिनियर आ विभिन्न कामदारसभद्वारा निर्माण कएल गेल अछि । ई राजमार्ग एगार सय किलोमिटर सँ बेसी नमहर अछि । 

चितवन उपत्यकाक नवलपरासी जिला खण्डमे रहल गैडाकोटमे राजा महेन्द्रद्वारा ई राजमार्गक वि.स. २०२२ सालमे उद्घाटन कएल गेल छल। 

हाल पूर्व सँ पश्चिममे रहल नेपालीके एकशुत्रमे बानहैक लेल ई राजमार्गक अतुलनीय योगदान रहल अछि । ई राजमार्गक विकास संगे देशमे व्यापार वाणिज्यमे अतुलनीय विकास भेल अछि आ राजमार्गक पूर्वसँ पश्चिमधरि विभिन्न द्रुत गतिके विभिन्न वाणिज्य केन्द्रसभक विकास सम्भव भेल अछि । तीव्र गतीमे विकास भऽ रहल प्रमुख नेपाली शहरसभ मेचीनगर, दमक, इटहरी, हेटौंडा, भरतपुर, बुटवल,महेन्द्रनगर, बिर्तामोड, लहान, वर्दिवास, चन्द्रनिगाहपुर, निजगढ,पथलैया, रत्ननगर, कावासोती, बर्दघाट, लमही, कोहलपुर, अतरिया लगायतक विकास याह राजमार्गमे भेल गतिविधीसँ बसाबैमे सम्भव भेल अछि । याह राजमार्गके आधार बनाए बिर्तामोड, इटहरी, लहान, बर्दिबास, हेटौंडा, भरतपुर, बुटवल, गोरूसिङगे, भालुवाङ, लमही, कोहलपुर तथा अतरियासँ प्रमुख उत्तर दक्षिण मार्गसभ गेल अछि ।

महेन्द्र राजमार्गक मुख्य नाकासभ निम्न अछि :  




#Article 440: बालियाडाङ्गी उपजिला (182 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक ठाकुरगाँओ जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ५ उपजिला अछि, आ मुख्यालय ठाकुरगाँओ सदर उपजिला अछि । ई बंगलादेशक राजधानी ढाका सँ उत्तर दिशामे अवस्थित अछि । एतय मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे बैसैत अछि । 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी(हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । राजशाही विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

बालियाडाङ्गी उपजिला बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक ठाकुरगाँओ जिलामे स्थित अछि ।




#Article 441: बिरामपुर उपजिला (171 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल १३ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । एतय मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे बैसैत अछि । 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलामे स्थित अछि ।




#Article 442: ठाकुरगाँओ सदर उपजिला (180 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक ठाकुरगाँओ जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ५ उपजिला अछि, आ मुख्यालय ठाकुरगाँओ सदर उपजिला अछि । ई बंगलादेशक राजधानी ढाका सँ उत्तर दिशामे अवस्थित अछि । एतय मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे बैसैत अछि । 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी(हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । राजशाही विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक ठाकुरगाँओ जिलामे स्थित अछि ।




#Article 443: पीरगञ्ज उपजिला (180 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक ठाकुरगाँओ जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ५ उपजिला अछि, आ मुख्यालय ठाकुरगाँओ सदर उपजिला अछि । ई बंगलादेशक राजधानी ढाका सँ उत्तर दिशामे अवस्थित अछि । एतय मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे बैसैत अछि । 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी(हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । राजशाही विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक ठाकुरगाँओ जिलामे स्थित अछि ।




#Article 444: बीरगञ्ज उपजिला (171 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल १३ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । एतय मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे बैसैत अछि । 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलामे स्थित अछि ।




#Article 445: बोचागञ्ज उपजिला (171 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल १३ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । एतय मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे बैसैत अछि । 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलामे स्थित अछि ।




#Article 446: फुलबाड़ी उपजिला (दिनाजपुर) (171 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल १३ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । एतय मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे बैसैत अछि । 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलामे स्थित अछि ।




#Article 447: चिरिरबन्दर उपजिला (171 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल १३ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । एतय मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे बैसैत अछि । 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलामे स्थित अछि ।




#Article 448: घोड़ाघाट उपजिला (171 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल १३ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । एतय मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे बैसैत अछि । 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलामे स्थित अछि ।




#Article 449: हाकिमपुर उपजिला (171 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल १३ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । एतय मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे बैसैत अछि । 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलामे स्थित अछि ।




#Article 450: नबाबगञ्ज उपजिला (171 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल १३ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । एतय मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे बैसैत अछि । 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलामे स्थित अछि ।




#Article 451: पार्बतीपुर उपजिला (171 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल १३ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । एतय मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे बैसैत अछि । 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलामे स्थित अछि ।




#Article 452: बिरल उपजिला (171 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल १३ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । एतय मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे बैसैत अछि । 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक दिनाजपुर जिलामे स्थित अछि ।




#Article 453: गान्धीनगर (332 words)


गान्धीनगर  भारतक गुजरात राज्यक राजधानी छी । ई भारतक दोसर एहन शहर छी जे पूर्ण तरिकासँ आयोजणा करि बसाएल गेल अछि । एकरा 'हरित नगर' (ग्रीन सीटी) सेहो कहल जाइत अछि । सचिवालय आ राज्यक मन्त्रीसभक निवास सेहो एतय अछि । आजुक समयमे ई शहरके भारतक आर्थिक राजधानी सेहो कहल जाइत अछि ।

महात्मा गान्धीक यादमे ई शहरक नाम 'गान्धीनगर' राखल गेल अछि । एतयक अधिकांश लोक सरकारी आ निजी काम करि अपन जिवन चलाबैत अछि । गान्धीनगर अहमदाबाद शहरसँ ३५ किलोमिटर पूर्वोत्तरमा साबरमती नदीक दहिना तटमे स्थित अछि । चण्डीगढके डिजाइन कएनिहार फ्रेञ्च वास्तुकार ली कोरबुसियनद्वारा ई शहरके डिजाइन भेल अछि ।

अहमदाबादसँ  ई मुम्बई-दिल्ली राष्ट्रिय राजमार्ग सङ्ख्या-८ द्वारा जुडल अछि । सन् १९६६ मे गुजरातक भूतपूर्व राजधानी अहमदाबादसँ गान्धीनगर स्थानान्तरित भेल छल । ई एक नियोजित शहर छी, जुन १९७० मे अहमदाबादसँ शासकीय कार्यालयसभ एतय आबि गेला बाद ई स्थान सक्रिय भेल । शहरमे सडकक ग्रीड प्रणाली अछि तथा ई क्षेत्रमे विभाजित अछि, जे बुनियादी सुविधासभसँ युक्त अछि ।

अहमदाबादक सरदार बल्लभ भाई पटेल अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थल गान्धीनगरक नजदिकी विमानस्थल छी जे जिला मुख्यालयसँ लगभग ३२ किलोमिटर दूर अछि ।

अहमदाबाद जङ्क्सन गान्धीनगरक नजदिकी रेलवे स्टेशन छी । ई रेलवे स्टेशन देशक अनेक भागसँ अनेक रेलगाडीसभक माध्यमसँ जुडल अछि ।

अहमदाबाद आ गुजरातक प्रमुख शहरसभसँ नियमित बससभ गान्धीनगरक लेल परिचालन अछि । संग-संगे नजदिकी राज्यसभद्वारा सेहो गान्धीनगर सडक मार्गद्वारा जुडल अछि ।

गान्धीनगर अहमदाबाद शहरसँ ३५ किलोमिटर पूर्वोत्तरमे साबरमती नदीक दहिना तटमे स्थित अछि । साबरमती नदीक पश्चिमी तटमे स्थित गुजरातक राजधानी गान्धीनगरक नाम राष्ट्रपिता महात्मा गान्धीक नाममे राखल गेल अछि । कूल ६४९ वर्ग किलोमिटरमे फैलल गान्धीनगरके चण्डीगढ बादक भारतक दोसर नियोजित शहर मानल जाइत अछि ।

भारतक जनगणना सन् २०११ अनुसार गान्धीनगरक जनसङ्ख्या २,०६,१६७ अछि ।

अदलज, राधेजा, दभोदा आदि एतयक प्रमुख दर्शनीय स्थल छी । ३० क्षेत्रसभमे बटल ई शहरक सम्पूर्ण क्षेत्रमे खरीददारी आ सामुदायिक केन्द्र, प्राथमिक विद्यालय आ स्वास्थ्य केन्द्रक व्यवस्था अछि । स्वामीनारायण सम्प्रदायद्वारा सञ्चालित अक्षरधाम मन्दिर एतयक मुख्य आकर्षण छी । जिलाक रूपल गाँउमे मनाओल जाइवला पल्ली पर्व बहुतेक सङ्ख्यामे पर्यटकसभके आकर्षित करैत अछि ।




#Article 454: गाइबान्धा सदर उपजिला (171 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक गाइबान्धा जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ७ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । एतय मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे बैसैत अछि । 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक गाइबान्धा जिलामे स्थित अछि ।




#Article 455: साघाटा उपजिला (171 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक गाइबान्धा जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ७ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । एतय मुख्यतः एक ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे बैसैत अछि । 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक गाइबान्धा जिलामे स्थित अछि ।




#Article 456: उलिपुर उपजिला (182 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक कुड़िग्राम जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ९ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक कुड़िग्राम जिलामे स्थित अछि ।




#Article 457: कुड़िग्राम सदर उपजिला (182 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक कुड़िग्राम जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ९ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक कुड़िग्राम जिलामे स्थित अछि ।




#Article 458: चर राजीबपुर उपजिला (182 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक कुड़िग्राम जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ९ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक कुड़िग्राम जिलामे स्थित अछि ।




#Article 459: चिलमारी उपजिला (182 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक कुड़िग्राम जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ९ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक कुड़िग्राम जिलामे स्थित अछि ।




#Article 460: नागेश्वरी उपजिला (182 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक कुड़िग्राम जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ९ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक कुड़िग्राम जिलामे स्थित अछि ।




#Article 461: फुलबाड़ी उपजिला (कुड़िग्राम) (182 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक कुड़िग्राम जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ९ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक कुड़िग्राम जिलामे स्थित अछि ।




#Article 462: भुरुङ्गामारी उपजिला (182 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक कुड़िग्राम जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ९ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक कुड़िग्राम जिलामे स्थित अछि ।




#Article 463: राजारहाट उपजिला (182 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक कुड़िग्राम जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ९ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक कुड़िग्राम जिलामे स्थित अछि ।




#Article 464: रौमारी उपजिला (182 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक कुड़िग्राम जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ९ उपजिला अछि, आ मुख्यालय दिनाजपुर सदर उपजिला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक कुड़िग्राम जिलामे स्थित अछि ।




#Article 465: पाटग्राम उपजिला (183 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक लालमनिरहाट जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ५ उपजिला अछि, आ मुख्यालय लालमनिरहाट सदर उपजिला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक लालमनिरहाट सदर उपजिलामे स्थित अछि ।




#Article 466: आदितमारी उपजिला (183 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक लालमनिरहाट जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ५ उपजिला अछि, आ मुख्यालय लालमनिरहाट सदर उपजिला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक लालमनिरहाट सदर उपजिलामे स्थित अछि ।




#Article 467: कालीगञ्ज उपजिला (183 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक लालमनिरहाट जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ५ उपजिला अछि, आ मुख्यालय लालमनिरहाट सदर उपजिला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक लालमनिरहाट सदर उपजिलामे स्थित अछि ।




#Article 468: हातिबान्धा उपजिला (183 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक लालमनिरहाट जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ५ उपजिला अछि, आ मुख्यालय लालमनिरहाट सदर उपजिला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक लालमनिरहाट सदर उपजिलामे स्थित अछि ।




#Article 469: निलफामारी सदर उपजिला (183 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक निलफामारी जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ६ उपजिला अछि, आ मुख्यालय निलफामारी सदर उपजिला,  अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक निलफामारी सदर उपजिला,मे स्थित अछि ।




#Article 470: जलढाका उपजिला (183 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक निलफामारी जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ६ उपजिला अछि, आ मुख्यालय निलफामारी सदर उपजिला,  अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक निलफामारी सदर उपजिला,मे स्थित अछि ।




#Article 471: किशोरगञ्ज उपजिला (183 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक निलफामारी जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ६ उपजिला अछि, आ मुख्यालय निलफामारी सदर उपजिला,  अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक निलफामारी सदर उपजिला,मे स्थित अछि ।




#Article 472: सैयदपुर उपजिला (183 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक निलफामारी जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ६ उपजिला अछि, आ मुख्यालय निलफामारी सदर उपजिला,  अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक निलफामारी सदर उपजिला,मे स्थित अछि ।




#Article 473: देबीगञ्ज उपजिला (183 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक पञ्चगड जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल १३ उपजिला अछि, आ मुख्यालय पञ्चगड़ सदर उपज़िला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक निलफामारी सदर उपजिला,मे स्थित अछि ।




#Article 474: अशोक स्तम्भ (408 words)


अशोक स्तम्भ भारतीय उपमहाद्वीप भरिमे निर्मित स्तम्भसभक एक श्रृङ्खला छी जे ईसा पूर्व तेसर शताब्दीमे मौर्य सम्राट अशोकद्वारा बनाएल गेल छल । मूल रूपसँ, ओहि समयमे बहुतेक स्तम्भ बनाएल गेल छल मुदा मुसलमान आक्रमणकारीके लक्षित रहला कारण वर्तमानमे मात्र उन्नाइस शिलालेख मात्र बचल अछि आ ओहिमे अशोकक सिंह राजधानी भेल ६ गो स्तम्भ मात्र बचल अछि । बहुतेक स्तम्भसभ तुटल अवास्थामे संरक्षित कएल गेल अछि । अशोक स्तम्भ औसतन  उँच अछि, आ तौलमे ५० टनक रहल अछि । कखेनै कखेनौ ई स्तम्भ स्थापित करिक लेल सौ माइलसँ बेसी घसिट कऽ लऽ जाइल जाइत छल ।

सम्राट अशोकक धार्मिक प्रचारसँ भारतमे कलाके बहुतेक प्रोत्साहन मिलल । अपन धर्मलेखसभक अङ्कनक लेल ओ ब्राह्मी आ खरोष्ठी दुई लिपिसभक उपयोग केनए छल आ सम्पूर्ण देशमे व्यापक रूपसँ लेखनकलाक प्रचार भेल । धार्मिक स्थापना आ मूर्तिकलाक अभूतपर्वू विकास अशोकक समयमे भेल । परम्पराक अनुसार अशोक ओहि तीन वर्षक अन्तर्गत ८४,००० स्तूपसभक निर्माण करौलक । एहिमे सँ ऋषिपत्तन (सारनाथ) मे ओकरद्वारा निर्मित धर्मराजिका स्तूपक भग्नावशेष अखनो द्रष्टव्य अछि ।

एहि प्रकार ओ अगणित चैत्यसभ आ विहारसभक निर्माण करौलक । अशोक देशक विभन्न भागसभमे प्रमुख राजपथसभ आ मार्गसभ पर धर्मस्तम्भ स्थापित केलक । अपन मूर्तिकलाक कारण ई स्तम्भ सबसँ अधिक प्रसिद्ध अछि । स्तम्भ निर्माणक कला पुष्ट नियोजन, सूक्ष्म अनुपात, सन्तुलित कल्पना, निश्चित उद्देश्यक सफलता, सौन्दर्यशास्त्रीय उच्चता तथा धार्मिक प्रतीकत्वक लेल अशोकक समय अपन चरम सीमा पर पहुँचि चुकल छल । ई स्तम्भसभक उपयोग स्थापत्यात्मक मात्र नै भऽ स्मारकात्मक सेहो छल ।

सारनाथक स्तम्भ धर्मचक्र प्रवर्तनक घटनाके स्मारक छल आ धर्मसङ्घक अक्षुण्णता बनाए राखैक लेल एकर स्थापना भेल छल । ई चुनारक बलुआ पत्थरक लगभग ४५ फिट लम्बा प्रस्तरखण्डक बनल छल । धरतीमे गड़ल आधारक छोडि एकर दण्ड गोलाकार अछि, जे शीर्ष भाग आ क्रमश: पातर होइत जाइत अछि । दण्डक उपर एकर कण्ठ आ कण्ठक उपर शीर्ष अछि । कण्ठक निचा प्रलम्बित दलोन्वाला उलटा कमल अछि । गोलाकार कण्ठ चक्रसँ चारि भागमे विभक्त अछि । ओहिमे क्रमश: हाथी, घोड़ा, बैल तथा सिंहक सजीव प्रतिकृतिसभ उभरल अछि । कण्ठक उपर शीर्षमे चारि टा सिंहमूर्तिसभ अछि जे पृष्ठत: एक दोसरसँ जुड़ल अछि । ई चारू के बीचमे एकटा छोट दण्ड छल जे धर्मचक्रक धारण करैत छल । अपन मूर्तन आ चमकक दृष्टि ई स्तम्भ अद्भुत अछि । ई समय स्तम्भक निचला भाग अपन मूल स्थानमे अछि । शेष सङ्ग्रहालयमे राखल गेल अछि । धर्मचक्रक मात्र किछ टुकड़ा उपलब्ध भेल अछि । चक्ररहित सिंह शीर्ष आई भारत गणतन्त्रक राज्य चिह्न छी । चक्र वैदिक ऋतसँ विकसित धर्मक कल्पनाक प्रतीक अछि, जे सम्पूर्ण आकाशमे गतिशील रहैत अछि । 




#Article 475: तेतुलिय़ा उपजिला (183 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक पञ्चगड जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल १३ उपजिला अछि, आ मुख्यालय पञ्चगड़ सदर उपज़िला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक निलफामारी सदर उपजिला,मे स्थित अछि ।




#Article 476: पञ्चगड़ सदर उपजिला (183 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक पञ्चगड जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल १३ उपजिला अछि, आ मुख्यालय पञ्चगड़ सदर उपज़िला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक निलफामारी सदर उपजिला,मे स्थित अछि ।




#Article 477: बोदा उपजिला (183 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक पञ्चगड जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल १३ उपजिला अछि, आ मुख्यालय पञ्चगड़ सदर उपज़िला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक निलफामारी सदर उपजिला,मे स्थित अछि ।




#Article 478: आटोय़ारी उपजिला (183 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक पञ्चगड जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल १३ उपजिला अछि, आ मुख्यालय पञ्चगड़ सदर उपज़िला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक निलफामारी सदर उपजिला,मे स्थित अछि ।




#Article 479: रङ्पुर सदर उपजिला (168 words)


रङ्पुर सदर () बाङ्लादेशक एक उपजिला छी, जे बाङ्लादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन)। ई रङ्पुर विभागक रङ्पुर जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ८ उपजिला अछि, आ मुख्यालय रङ्पुर सदर उपजिला अछि। ई बाङ्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि।

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक रङ्गपुर सदर उपजिला,मे स्थित अछि ।




#Article 480: बदरगञ्ज उपजिला (183 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक रङ्गपुर जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ८ उपजिला अछि, आ मुख्यालय रङ्गपुर सदर उपजिला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक रङ्गपुर सदर उपजिला,मे स्थित अछि ।




#Article 481: गङ्गाछड़ा उपजिला (183 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक रङ्गपुर जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ८ उपजिला अछि, आ मुख्यालय रङ्गपुर सदर उपजिला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक रङ्गपुर सदर उपजिला,मे स्थित अछि ।




#Article 482: काउनिय़ा उपजिला (183 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक रङ्गपुर जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ८ उपजिला अछि, आ मुख्यालय रङ्गपुर सदर उपजिला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक रङ्गपुर सदर उपजिला,मे स्थित अछि ।




#Article 483: मिठापुकुर उपजिला (183 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक रङ्गपुर जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ८ उपजिला अछि, आ मुख्यालय रङ्गपुर सदर उपजिला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक रङ्गपुर सदर उपजिला,मे स्थित अछि ।




#Article 484: पीरगाछा उपजिला (183 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक रङ्गपुर जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ८ उपजिला अछि, आ मुख्यालय रङ्गपुर सदर उपजिला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक रङ्गपुर सदर उपजिला,मे स्थित अछि ।




#Article 485: तारागञ्ज उपजिला (183 words)


, बंगलादेशक एक उपजिला छी, जे बंगलादेशमे तृतीय स्तरक प्रशासनिक अञ्चल होइत अछि (जिलाक अधीन) । ई रङ्गपुर विभागक रङ्गपुर जिलाक एक उपजिला छी, जाहिमे, जिला सदर समेत, कुल ८ उपजिला अछि, आ मुख्यालय रङ्गपुर सदर उपजिला अछि । ई बांग्लादेशक राजधानी ढाका सं उत्तर दिशा मे अवस्थित अछि । ई मुख्यतः एकटा ग्रामीण क्षेत्र छी, आर अधिकांश आबादी ग्रामीन इलाक में रहैत अछि। 

एतयक आधिकारिक स्तरक भाषासभ बङ्गला भाषा आ अङ्ग्रेजी अछि । तथा बंगलादेशक कोनो भी अन्य क्षेत्र जका अछि, एहि ठामक प्रमुख मौखिक भाषा आ मातृभाषा बङ्गला अछि । बङ्गाली छोडि अङ्ग्रेजी भाषा सेहो बहुतो लोकसभद्वारा जानल आ समझल जाइत अछि, जबकि सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक निकटता तथा भाषासभक समानताक कारण, बहुतो लोक सीमित मात्रामे हिन्दुस्तानी (हिन्दी/उर्दू) सेहो समझैमे सक्षम अछि । एतय बहुसंख्यक धर्म, इस्लाम अछि, जबकि प्रमुख अल्पसङ्ख्यक धर्म, हिन्दू धर्म अछि । रङ्गपुर विभागमे, जनसाङ्ख्यिकीक रूप सँ, इस्लामक अनुयाई, आबादीक औसतन करीब ८८% अछि, जबकि शेष जनसङ्ख्या प्रमुखतः हिन्दू धर्मक अनुयाई अछि । ई मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र अछि, आ अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकासभमे रहैत अछि ।

 बंगलादेशक उत्तरी सीमान्तसभमे स्थित, रङ्गपुर विभागक रङ्गपुर सदर उपजिला,मे स्थित अछि ।




#Article 486: चारमीनार (281 words)


चारमीनार, सन् १९५१ मे निर्मित एक मस्जिद आ धरोहर छी जे भारतक नव राज्य तेलङ्गानाक हैदराबाद शहरमे अवस्थित अछि । ई स्थान हैदराबादक विश्वव्यापी मुख्य कलाकृति छी जे समुचा भारतक अमूल्य धरोहरक सूचीमे सूचीकृत अछि ।  चारमीनार मुसी नदीक किनारमे अवस्थित अछि । एकर पश्चिममे लाड बजार आ दक्षिणपश्चिममे पूर्ण ग्रेनाइटसँ निर्मित मक्का मस्जिद अवस्थित अछि । भारतक पुरातात्विक विभागद्वारा जारी कएल गेल भारतक पुरातात्विक आ अमूल्य धरोहरसभक सूचीमे चार मीनार सूचीवद्ध अछि ।
चारमीनार शब्द उर्दू भाषाक दुई संयुक्त शब्द चार आ मीनार सँ आएल अछि जकर अङ्ग्रेजी रूप चार टावर्स होइत अछि ।इतिहासकार मसुद हुसैन खानक अनुसार चारमीनारक निर्माण समाप्ति सन् १५९२ मे भेल जतय अखुनका हैदराबाद शहर अछि जकर स्थापना सन् १५९१ मे भेल छल ।

कुतुब शाही राजवंशक पाँचम् शासक सुल्तान मुहम्मद कुली कुतुब शाह चारमीनारक निर्माण सन् १५९१ मे करौने छल । गोलकुण्डासँ हैदराबाद राजधानी स्थानान्तरित करि ओ शीघ्र चारमीनारक विशाल संरचना बनौलक । चारमीनारक कारण आई ई हैदराबाद शहर विश्वव्यापी केन्द्रक रूपमे स्थापित अछि ।

एतिहासिक व्यापारिक मार्गक बिचोबीच चारमीनारक निर्माण कएल गेल छल जे गोलकोण्डा बजार आ बन्दरगाह शहर मछलीपट्टनमक जोडैत अछि । भारतक पौराणिक शहर हैदराबादक मध्यमे चारमीनारक निर्माण भेल अछि ।

 शहरक योजनावद्ध तरिकासँ बसाबैक लेल अतिरिक्त वास्तुविद्सभ सेहो पर्सियासँ बजाएल गेल छल । चारमीनारक संरचना स्वयम् मस्जिद आ मदरसाक रूपमे काज करैत छल । ई इस्लामिक वास्तुशैलीमे निर्माण कएल गेल अछि । अपन सोनगर दिनमे, चारमीनार बाजारमे १४,००० क आसपास दोकान छ्हल । चारमीनारक नजदिक रहल प्रसिद्ध लाड बजार आ पाथेर गट्टी बाजार, आभूषण, स्थानीय समान विशेष रूपसँ निक चूडी आ मोतीक लेल पर्यटक आ स्थानीयसभक लेल जानल जाइत अछि ।

सन् २००७ मे, पाकिस्तानक हैदराबाद प्रान्तमे रहनिहार मुसलमानसभ कराचीमे बहादुराबाद पड़ोसक मुख्य चौकपर चारमीनारक अर्ध प्रतिकृति निर्माण केनए अछि ।




#Article 487: कोच्चि (383 words)


कोच्चि (), जकरा कोचीन सेहो कहल जाइत छल, लक्षद्वीप सागरक दक्षिण-पश्चिम तटरेखामे स्थित एक बड़का बन्दरगाह शहर छी, जे भारतीय राज्य केरलक एर्नाकुलम जिलाक एक भाग छी । कोच्चिके बहुतेक समयसँ प्रायः एर्नाकुलम सेहो कहल जाइत छल, जकर अर्थ नगरक मुख्यभूमि भाग होइत अछि । कोच्चि नगर निगमक अधीनस्थ (जनसङ्ख्या ६,०१,५७४) ई राज्यक दोसर सर्वाधिक जनसङ्ख्या भेल शहर छी । ई कोच्चि महानगरीय क्षेत्रक विस्तार सहित (जनसङ्ख्या २१ लाख) केरल राज्यक सबसँ पैग शहरी आबादी क्षेत्र छी । कोच्चि नगर ग्रेटर कोच्चि क्षेत्रक एगो भाग छी, आ एकरा भारत सरकारद्वारा द्वितीय दर्जाक शहर वर्गीकृत कएल गेल अछि । नगरक रेख-देख तथा अनुरक्षण दायित्त्व सन् १९६७ मे स्थापित भेल कोच्चि नगर निगम करैत अछि । एहि वाहेक पुरा क्षेत्रक पूर्ण विकासक भार ग्रेटर कोचीन विकास प्राधिकरण (GCDA) आ गोश्री आइल्यान्ड विकास प्राधिकरण (GIDA) क अछि ।

कोच्चि १४अम शताब्दीसँ भारतक पश्चिमी तटरेखाक मसालाक व्यापार केन्द्र रहल अछि आ एकरा अरब सागरक रानी क नामसँ जानल जाइत अछि । सन् १५०३ मे एतय पोर्चुगेलीसभक आधिपत्य भेल आ ई उपनिवेश भारतक प्रथम युरोपेली कोलनी बनल आ सन् १५३० मे गोवाक चुनाव भेलाबाद धरि ई पोर्चुगेली एतौका प्रधान शक्ति केन्द्र रहल । कालान्तरमे कोच्चि राज्यक रजवाड़ामे परिवर्तित भेलाक संगे ई डच आ ब्रिटिशक नियन्त्रणमे आएल । आई केरलमे कुल घरेलु तथा अन्तर्राष्ट्रिय पर्यटकसभक आगमन सङ्ख्यामे प्रथम स्थान बनेनाए अछि ।  नीलसन कम्पनीक आउटलुक ट्रयाभलर पत्रिकद्वारा कएल एक सर्वेक्षण अनुसार कोच्चि वर्तमानमे भारतक सर्वश्रेष्ठ पर्यटक आकर्षणसभमे सँ छठम् स्थानमे रहल अछि ।

ई महल मूल रूपसँ पोर्चुगेली लोकसभद्वारा बनाएल गेल अछि आ कोचीनक राजा वीर केरला वर्माके उपहार स्वरूप ई प्रदान कएल गेल छल । बादमे डचसभ एहि उपर अपन अधिकार जमेलक । ओसभ सन् १६६३ मे किलाक मरम्मत करौलक आ किलाके नव रूप देलक । ई किलामे कोचीनक बहुतेक रास राजासभक राज्याभिषेक भेल अछि । ई किलामे रामायण आ महाभारत जका महाकाव्यसभसँ सम्बन्धित पेन्टिङ्ग्‍स बनाएल गेल अछि ।

ई महलके देखैक लेल बहुतेक सङ्ख्यामे पर्यटक एतय आबैत अछि । डच लोकसभद्वारा बनाएल ई महल बोलघट्टी द्वीपमे स्थित अछि। ई महलके आब एक आलिसान होटलमे रुपान्तरित कएल गेल अछि । बोलघट्टीमे एक गोल्फ कोर्स सेहो अछि । एतय लोकसभ पिकनिक मानबैक लेल आबैत अछि ।

१९अम शताब्दीमे कोच्चिक राजाद्वारा ई महल बनाएल गेल छल । आब एकरा केरला पुरातत्व विभागक सङ्ग्रहालयमे परिवर्तित कएल गेल अछि । सङ्ग्रहालयमे चित्रकारी, नक्काशी आ राजकीय वंशसँ सम्बन्धित वस्तुसभ राखल गेल अछि । 

 




#Article 488: अजरबैजान (230 words)


अजरबैजान (), ककेससक पूर्वी भागमे अवस्थित एक गणतन्त्र देश छी । ई पूर्वी युरोप आ एसिया महादेशक मध्यमे अवस्थित अछि । भौगोलिक रूप सँ ई एसियाके भाग अछि । एकर सीमान्त देश छी: अर्मेनिया, जर्जिया, रूस, ईरान, टर्की आ एकर तटीय भाग आन्ध्र सागर सँ जुड़ल अछि । ई सन् १९९१ धरि भूतपूर्व सोभियत संघक भाग छल।

अजरबैजान एकटा धर्मनिरपेक्ष देश छी आ वर्ष २००१ सँ युरोपेली सङ्घक सदस्य छी । एकर अधिकांश जनसङ्ख्या इस्लाम धर्मक अनुयायी अछि आ ई देश इस्लामी सम्मेलन सङ्घक सदस्य राष्ट्र सेहो छी । ई देश धीरे-धीरे औपचारिक मुदा सत्तावादी लोकतन्त्रक दिशामे आगा बढि रहल अछि ।

अजरबैजान नामके उद्गम लऽ बहुतो प्रकारक अवधारणासभ अछि । सभ सँ प्रचलित प्रमेय ई अछि कि ई नाम 'अट्रोपटन' शब्द सँ आएल अछि । अट्रोपट फारसी अकामिनाइड राजवंशक समयमे एक क्षत्रप छल, जकरा सिकन्दर महान आक्रमण करि परास्त केलक आ अट्रोपटनक स्वाधीनता मिलल । ओहि समय ई क्षेत्र मिदिया अट्रोपाटिया आ अट्रोपाटीनक नाम सँ जानल जाएत छल ।

अजरबैजानमे प्रारम्भिक मानव बस्तिसभके चिह्न पाषाण युगक बादक भेटैत अछि । ५५० इशापूर्वमे एक्युमेनिडा राजवंश ई क्षेत्र पर विजय प्राप्त केनए छल, जहिमे पारसी धर्मक उदय भेल छल आ बादमे याह क्षेत्र सिकन्दर महानके साम्राज्यक भाग बनल आर बादमे ओकर उत्तराधिकारी, सेलियुसिडा साम्राज्यक । एल्बानियाली ककेसन लोकसभ चारिम शताबदी इशापूर्वमे ई क्षेत्रमे एक स्वतन्त्र राजशाहीक स्थापना केलक, मुदा ९५-६७ इशापूर्वमे टिगरानीस २ महान ई क्षेत्र पर अधिकार करि लेनए छल। 




#Article 489: सीरिया (358 words)


सीरिया (  or ), आधिकारिक रूप सँ सीरियाई अरब गणतन्त्र (अरबी:  ), दक्षिण-पश्चिम एसियाक एक राष्ट्र छी। ई राष्ट्रक पश्चिममे लेबनान आ भूमध्यसागर, दक्षिण-पश्चिममे इजरायल, दक्षिणमे जोर्डन, पूरबमे इराक तथा उत्तरमे टर्की अछि। इजरायल आ इराकक बीच स्थित होमएकें कारण ई मध्य-पूर्वक एक महत्वपूर्ण देश छी। एकर राजधानी दमास्कस अछि जे उमय्यद खिलाफत आ मामलुक साम्राज्यक राजधानी रहि चुकल अछि। 

सन् १९४६ अप्रैलमे फ्रान्स सँ स्वाधीनता प्राप्त केलाक बाद एहि ठामके शासनमे बाथ पार्टीक प्रभुत्व रहल अछि। सन् १९६३ सँ एहि ठाम आपातकाल लागू अछि जकर कारण सन् १९७०कें बाद सँ एहि ठामक शासक असद परिवारक लोक होएत आबि रहल अछि।

सीरिया नाम प्राचीन ग्रीकसं आएल अछि। प्राचीन कालमे यवन अही क्षेत्र कs सीरीयोइ कहैत छल।

सीरियाक कार्यपालिकाके अंग अछि - राष्ट्रपति, दू उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री मंत्रीपरिषद। अही ठामक विधायिकामे एकमात्र सदन होइत अछि।

सीरिया का संविधान १९७३म अपनाएल गेल छल जाहिमे बाथ पार्टीक नेतृत्व कs अधिकार मिलल अछि।

सन् १९६३सं देशमे आपातकाल लागू अछि।

 
एल्बाके शहरक स्थापना सन् ३००० ईसापूर्वमे भेल छल। इस सभ्यता के अवशेष सन् 1975 में उत्तरी सीरिया में मिले थे। सुमेर तथा अक्कद से इसका व्यापारिक सम्पर्क था। फ़राओ के उपहारों के यहाँ मिलने से यह भी स्पश्ट होता है कि मिस्र से भी इनके सम्बन्ध थे। सीमेटिक भाषाओं का सबसे पुराना अभिलेख भी यहीं मिला है। यद्यपि आधुनिक संधानों से पता चलता है कि यह पूर्वी सेमेचिक भाषा थी और अक्कदी भाषा के अधिक करीब थी। एल्बा के साम्राज्य को ईसापूर्व 2260 में अक्कद के सारगोन ने तथा उसके बाद ईसपूर्व 1900 में हिट्टियों ने फ़तह किया।

 
अरब फिलीप - सीरियाई नोट का विवरण

ईसाइयलके इतिहासमे सीरिया बहुत महत्वपूर्ण अछि।{}

दमिश्क - अलेप्पो - लताकिया - होम्स - हमा

अल-हसाख - दीर अज़-ज़ोर - अर-रक्का - इदलिब - डारा - अस-सुवयदा - तरतूस.

अल कमीशली - नवा - अर-रास्तान - मयसफ़ - सफ़िता - जाब्लेह - अथ-थवारा - दुमा - बनियास - अन-नब्क- कुसैर - मालौला - ज़बादानी - बुसरा अल शाम - जरामाना - अत-ताल - सलामिये- सैदान्या - अल-बाब - जिस्र अल-शुग़ुर

सीरिया की ९० प्रतिशत आबादी मुस्लिम अछि आर १० प्रतिशत ईसाई। सुन्नी मुस्लिम कुल जनसंख्याके ७४ प्रतिशत अछि जबकि शिया क़रीब १३ प्रतिशत। 

दमिश्कमे किछ यहूदी सेहो रहैत अछि।

 
 




#Article 490: विशाखपट्नम (353 words)


विशाखपट्नम (उपनाम भाइज्याग) भारतक राज्य आन्ध्र प्रदेशक सबसँ पैग आ सबसँ बेसी जनसङ्ख्या भेल शहर छी । ई बङ्गालक खाडीक तटमे अवस्थित अछि । ई विशाखपट्नम जिलाक मुख्यालय शहर आ आन्ध्र प्रदेशक आर्थिक राजधानी छी । सन् २०११ क भारतक जनगणना अनुसार, ई शहरक जनसङ्ख्या २०,३५,९२२ रहल अछि जे एकरा भारतक सबसँ बेसी जनसङ्ख्या भेल १४अम क्रमक शहर बनेनाए अछि । विशाखपट्नम महानगरीय क्षेत्र भारतक महानगरीय क्षेत्रसभक आधारमे ९अम क्रममे रहल अछि जकर  जनसङ्ख्या ५३,४०,००० रहल अछि ।

ई एक प्राकृतिक तथा सुरक्षित समुद्री बन्दरगाह छी  । कृषि तथा खनिज सम्पत्तिमे समृद्ध आन्ध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश आ उडिसा राज्य एहि बन्दरगाहक पृष्ठ प्रदेश कहल जाइत अछि । ई एक उल्लेखनीय मत्स्य-शिकार केन्द्र सेहो छी । विशाखपट्नम आन्ध्र प्रदेशक उत्तरी सरकारी तटमे गोदावरी नदीक मुखक उत्तरमे अवस्थित अछि । विशाखपट्नमके भाइज्यागक नामसँ सेहो चिनहल जाइत अछि । विशाखपट्नम भारतक चारिम पैग बन्दरगाह छी । ई भारतीय नौसेनाक पूर्वी कमाण्डक केन्द्र छी ।

विशाखपट्नमक बन्दरगाहक महत्व भारत भरि लोकप्रिय रहल अछि कियाकी ई कोरोमण्डल तटमे अवस्थित एकमात्र संरक्षित बन्दरगाह छी । एहिमे हालमे कएल सुधारसभ आब एतय १०.२ मिटर उँच पनडुब्बीसभके आश्रय देबमे सक्षम अछि । ई शहर एक महत्त्वपूर्ण पोत निर्माण केन्द्र सेहो छी । भारतमे बनल पहिल स्टीमरके विशाखपट्नमक बन्दरगाहमे सन् १९४८ मे उद्घाटन कएल गेल छल । विशाखपट्नम क्षेत्रक अर्थव्यवस्थाक आधार कृषि छी ।

बङ्गालक खाडीक उत्तरी ध्रुवमे अवस्थित उपनगर वाल्टेयरमे आन्ध्र विश्वविद्यालय रहल अछि । एतयक शैक्षिक संस्थानसभमे आन्ध्र मेडिकल कलेज, कलेज अफ नर्सिङ्ग, कलेज अफ इन्जिनियरिङ, गान्धी इन्स्टट्युट अफ टेक्नोलोजी एण्ड म्यानेजमेन्ट आ बहुतेक महाविद्यालय अछि ।

विशाखपट्नममे पनिया जहाज बनाबैवला कारख़ाना रहल अछि । ई एकटा प्राकृतिक तथा सुरक्षित समुद्री बन्दरगाह छी । कृषि तथा खनिज सम्पत्तिमे समृद्ध आन्ध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश आ उडिसा राज्य एहि बन्दरगाहक पृष्ठ प्रदेश कहल जाइत अछि । ई एक उल्लेखनीय मत्स्य-शिकार केन्द्र सेहो छी ।

विशाखपट्नम प्राचीन बौद्ध विरासत, भूवैज्ञानिक चमत्कार, प्रसिद्ध मन्दिरसभक एक उदार मिश्रणमे संस्कृति, कला आ शिल्प आदिक लेल प्रसिद्ध अछि । ई शहर समयानुसार परिवर्तनशील अछि आ परिमार्जित होइत आएल अछि, एतय धरि की ई शहर अपन समृद्ध इतिहासक संरक्षण प्रति सजग अछि । एकर सुन्दर पूर्वी घाट बङ्गालक खाडीक बुलु पानि उपर एक गजब स्पर्श दैत अछि ।




#Article 491: ग्वालियर (329 words)


ग्वालियर () भारतक राज्य मध्य प्रदेशक ऐतिहासिक आ प्रमुख शहर छी । भौगोलिक दृष्टिसँ ग्वालियर मध्य प्रदेश राज्यक उत्तरमे अवस्थित अछि । ई शहर भारतक राजधानी शहर नयाँ दिल्लीक  दक्षिणमे रहल अछि । ई शहर आ एकर किला उत्तर भारतक प्राचीन शहरसभक केन्द्र रहल अछि। ई शहर गुर्जर प्रतिहार, तोमर तथा कछवाहा राजवंशक राजधानी रहल छल । ई शहरमे ओसभद्वारा बनाएल प्राचीन चिन्ह स्मारकसभ, किलासभ आ महलसभ आइयो देखल जा सकैत अछि । सङ्ग्रह करि राखल भव्य स्मृति चिन्ह ई शहरके पर्यटनक दृष्टिसँ आर महत्वपूर्ण बनाबैत अछि । ग्वालियर शहर एकर नामक पछाडी सेहो एकटा इतिहास नुकाएल अछि; आठम् शताब्दीमे एतयक एक राजा सूरजसेन छल, जे एक अज्ञात बिमारीसँ ग्रस्त भेला आ मृत्युशैयामे पहुँच गेला, ओहि समय ग्वालिपा नामक सन्त हुनका निक बनाए जीवनदान देनए छल । ओहि समय हुनकर सम्मानमे ई शहरक जग बसाएल गेल आ ई शहरक नाम ग्वालियर राखल गेल ।

एकरबाद एतय आबैवला शताब्दीमे ई शहर बड़का-बड़का राजवंशसभक राजस्थल बनल । हरेक शताब्दीमे ई शहरक इतिहासमे नव आयाम जोडल चलि गेल । महान योद्धासभ, राजासभ, कविसभ, सङ्गीतकारसभ तथा सन्तसभ ई राजधानी शहरके देशव्यापी रूपमे चिन्हाबैमे अपन-अपन योगदान देलक । आई ग्वालियर भारतक एक आधुनिक शहर छी आ एकटा प्रसिद्ध उद्योगिक केन्द्र छी ।

भारतक प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीक भारतमे १०० स्मार्ट सिटी बनाबैक निर्णय अन्तर्गत ई शहरके सेहो चुनल गेल अछि । 

सन् २०११ क भारतक जनगणना अनुसार ग्वालियरक कूल जनसङ्ख्या २०,३०,५४३ अछि, जाहिमे पुरुष १०,९०,६४७ आ महिला ९,३९,८९६ अछि । एतयक साक्षरता ५७.४७% (पुरुष ७०.८१%, महिला ४१.७२%) रहल अछि ।

बलुवा पत्थरसँ बनल ई किला शहरक हरेक दिशासँ देखल जा सकैत अछि आ ई शहरक प्रमुख स्मारक छी । एकटा उँच पठारमे बनल ई किलाधरि पहुँचक लेल एकटा उँच पतला मार्गसँ भ जाइ पडैत अछि । ई मार्गक अगलबगल पैग चट्टानसभ उपर जैन तीर्थक विशाल मूर्तिसभ बहुतेक सुन्दर ढङ्गसँ बनाएल गेल अछि । ई किला भितर मध्यकालीन स्थापनाक अद्भुत नमूनासभ रहल अछि । पन्द्र्हम शताब्दीमे निर्मित गुजरी महल ओही मे सँ एक छी जे राजा मानसिंह आ गुजरी रानी मृगनयनीक गहन प्रेमक प्रतीक छी ।




#Article 492: सूरत (283 words)


सूरत गुजरात प्रान्तक एक प्रमुख शहर छी । यी शहर सूरत जिलाक प्रशासनिक मुख्यालय सेहो छी । तापी नदी सूरत शहरके मध्य सं भऽकs जाईत अछि। सूरत मुख्यत: कपड़ा उद्योग आर डाइमन्ड कटिंग  पोलिशिंगके लेल प्रसिद्ध अछि, अही कारन सं यी शहरक सिल्क सिटी आ डाइमन्ड सिटीके नामसं सेहो जानल जाइत अछि| 

एहन समझल जाइत छै कि आधुनिक सूरत शहरक स्थापना पंद्रहम सताब्दीके अंतिम वर्षसभमे भेल छल| कहल जाईत छै कि १५१६ मे एकटा हिन्दू ब्राह्मण गोपी एकरा बसउने छलाह । १२हम सं १५हम शताब्दी धरि यी शहर मुस्लिम शासकसभ, पुर्तग़ालिसभ, मुग़लसभ आर मराठसभके आक्रमणक शिकार भेल छल। १५१४ मे पुर्तग़ाली यात्री दुआरते बारबोसा सूरतक वर्णन एक महत्त्वपूर्ण बंदरगाहके रूपमे केलक। १८हम शताब्दीमे धीरे-धीरे सूरतक पतन होबs लागल छल। ओही समय अंग्रेज़ आर डच, दुनु सूरत पर नियंत्रणक दावा केलक, लेकिन १८०० मे अंग्रेजसभक अही पर अधिकार भs गेल।

सूरत भारतके पश्चिममे स्थित अछि आर एकर निर्देशांक २१.१७º उ. एवं ७२.८३º पु. अछि|

यह सड़क, रेल आर हवाई मार्गसं जुड़ल अछि।

आसपासक इलाकामे खेती होईत अछि। कपास, बाजरा, दलहन आर चावल अही ठामक मुख्य पैदावार छी। वस्त्रोद्योग सूरत शहरमे ही केंद्रित छै। 1990 मे उइख, अंगूर आर केरा जका नकदी फसलसभक खेती कs शुरुआत केल गेल।

पुर्तग़ालियसभ द्वारा (१५१२ एवं १५३०) सूरत कs जला देलक बाद यी एकटा बड़का विक्रय केंद्र बनल, जहिसं कपड़ा आर सोना कs निर्यात होईत छल। वस्त्रोद्योग आर जहाज निर्माण अही ठामके मुख्य उद्योग छल। अंग्रेजसभ १६१२ मे पहिल बेर अपन व्यापारिक चौकी यहीं पर स्थापित कएने छल। सूरतके हीरा पर पॉलिशके उद्योग प्रवासी मजदूरसभकs अपनी आर आकर्षित केलक। वर्तमानमे सूरत शहर देशमे वस्त्र निर्माणमे प्रथम स्थान पर अछि। 

१९अम शताब्दीके मध्यमे सूरत एकटा गतिहीन नगर छल, जकर आबादी ८०००० छल

जिलासं औसत वार्षिक वर्षा १०७१ मिमी होइत अछि।




#Article 493: मेरठ (347 words)


मेरठ  भारतक उत्तर प्रदेश राज्यक एक शहर छी । एतय नगर निगम कार्यरत अछि । ई प्राचीन नगर भारतक राजधानी दिल्लीसँ ७२ किमी. (४४ माइल) उत्तर पूर्वमे स्थित अछि । मेरठ, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसिआर) कऽ एक भाग छी । एतय भारतीय सेनाक एक छावनी सेहो अछि । ई उत्तर प्रदेशक सबसँ तीव्र गतिमे विकसित आ शिक्षित होमएवला जिलासभमे सँ एक छी । 

मेरठक भौगोलिक स्थिति  अछि | एहि ठामक औसत उचाई २१९ मीटर (७१८ फीट) अछि ।

निकटवर्ती शहर :

मेरठ एक महत्वपूर्ण मास मिडिया केन्द्र बनि रहल अछि । देशक विभिन्न क्षेत्रसभसँ पत्रकार तथा अन्य मिडियाकर्मी एतय कार्यरत अछि । वर्तमानमे, बहुतेक समाचार च्यानलसभ अपराधमे केन्द्रित कार्यक्रम देखाबैलेल आरम्भ केनए अछि । कियाकी मिडिया केन्द्र मेरठमे स्थित अछि, तब शहरके राष्ट्रिय स्तरमे बढिया प्रचार मिल रहल अछि । किछ वर्ष पहिने सँ नगरमे कानून व्यवस्थाक स्थितिमे बहुतेक सुधार आएल अछि । एहिमे मिडियाक बहुत पैग हात अछि । 

मेरठ वेब मिडियाक सेहो मुख्य केन्द्र बनैत जा रहल अछि । मेरठमे एक्सएन भ्यु न्युज आ अन्य बहुत रास मिडिया च्यानलसभ अछि ।

नगरमे कुल चार विश्वविद्यालय अछि, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि आ प्राविधिक विश्वविद्यालय, शोभित विश्वविद्यालय आ स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय । ई वाहेक नगरमे बहुतेक अन्य महाविद्यालय आ विद्यालय अछि ।

एहि ठामक ऐतिहासिक नौचन्दी मेला हिन्दू – मुस्लिम एकताक प्रतीक छी । हजरत बाला मियाँक दरगाह आ नवचण्डी देवी (नौचन्दी देवी) क मन्दिर एक दोसरसँ निकटमे स्थित अछि । मेलाक समय मन्दिरक घण्टीसभ अजानक आवाज एक साम्प्रदायिक आध्यात्मक प्रतिध्वनि दैत अछि । ई मेला चैत्र मासक नवरात्रि पर्वसँ एक हप्ता पहिलेसँ लागैत अछि । होलीक लगभग एक सप्ताह बाद आ एक माहिनाधरि ई मेला चलैत अछि ।

पन्तनगर विमानस्थल आ इन्दिरा गान्धी अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थल मेरठक निकटतम विमानस्थल छी । पन्तनगरक विमानस्थल मेरठसँ ६२ किमी. क दूरीमे स्थित अछि ।

मेरठ जङ्क्सन देशक प्रमुख शहरसभसँ अनेक ट्रेनसभक माध्यमसँ जुडल अछि । दिल्ली, जम्मू, अम्बाला, सहारनपुर आदि स्थानसभ मेरठसँ जल्दीए पहुँचल जा सकैत अछि ।

मेरठ उत्तर प्रदेश आ आसपासक राज्यसभक अनेक शहरसभसँ सडक मार्गद्वारा जुडल अछि । राज्य परिवहन निगमक बससभ अनेक शहरसभसँ मेरठक लेल नियमित रूपसँ चलैत अछि ।




#Article 494: फरीदाबाद (396 words)


फरीदाबाद भारतक उत्तरी राज्य हरियाणा प्रदेशक प्रमुख शहर छी । ई फरीदाबाद जिला अन्तर्गत पडैत अछि । एकरा सन् १६०७ मे शेख फरीद, जहांगीरक खजाञ्चीद्वारा बनाएल गेल छल । हुनकर उदेश्य एहि ठामसँ जाइवला राजमार्गक रक्षा करनाए छल । ई क्षेत्र राजधानी दिल्लीसँ २५ किलोमिटर दक्षिणमे अवस्थित अछि । 

१५ अगस्त १९७९ मे ई हरियाणाक १२अम जिला बनल छल । आई फरीदाबाद अपन उद्योगसभक लेल प्रसिद्ध अछि । एकर स्थापना सन् १६०७ मे सूफी सन्त शेख फरीद केनए छल । ओ एतय किला आ मस्जिदक निर्माण सेहो केनए छल । किछ समयबाद एतयक जनसङ्ख्या उन्नति भेल आ एकर उद्योगिकरण होमए लागल । आब एतय अनेक उद्योगिक एकाइसभक स्थापना भ चुकल अछि । हरियाणाक आयक ६० प्रतिशत हिस्सा फरीदाबादसँ आबैत अछि।

ई दिल्लीसँ मात्र १० किमी क दूरीमे स्थित अछि । भारत सरकार एकरा राष्ट्रिय राजधानी क्षेत्र घोषित केनए अछि । भारतक राष्ट्रिय राजमार्ग २ सँ पर्यटक सहजे फरीदाबादधरि पहुँचि सकैत अछि । सडक मार्ग वाहेक रेल मार्गसँ सेहो सहजे फरीदाबादधरि पहुँचल जा सकैत अछि । दिल्ली-मथुरा रेल लाइन अन्तर्गत फरीदाबादमे रेलवे स्टेशन सेहो बनाएल गेल अछि । पर्यटकसभ फरीदाबादमे विभिन्न क्षेत्रसभ घुमि सकैत अछि ।

फरीदाबादक बडखल ताल बहुतेक सुन्दर अछि । ई मानव निर्मित ताल छी । एकरसंग अरावली पर्वत श्रृङ्खला अछि । तालमे पर्यटक वाटर स्पोर्टसक आनन्द ल सकैत अछि । एतयसँ किछ दूरीमे बडखल गाम अछि । एहि गामक नाम पर्शियन भाषासँ लेल गेल अछि । बडखलक अर्थ बिना कोनो रोकावट होइत अछि । तालमे पानिक आपूर्ति वर्षाक पानि आ एक छोट जलधारासँ होइत अछि । पर्यटकसभक बासक लेल तालक निकट बासासभ बनाएल गेल अछि । ई बासासभमे बिना कुनो परेशानीक रुकल जा सकैत अछि ।

स्थानीय लोकसभक अनुसार बाबा फरीदक नाममे फरीदाबादक नाम राखल गेल छल । एतय बाबा फरीदक मजार सेहो बनाएल गेल छल । एकर प्रति स्थानीय लोकसभमे पैग श्रद्धा अछि । मजामे पूजा करिक लेल प्रतिदिन अनेक श्रद्धालु आबैत अछि ।

दक्षिणी दिल्लीसँ ८ किमीक दूरीमे स्थित ई परिसर बहुतेक सुन्दर अछि । स्थानीय निवासीसभ आ दिल्लीवलासभकलेल ई स्थान बेहतरीन पर्यटन स्थल छी । फरबरी महिनामे एतय एक मेलाक आयोजन सेहो कएल जाइत अछि । मेलामे पर्यटक भारतीय शिल्प कलाक शानदार कलाकृतिसभ देख आ किन सकैत अछि । एकर संग बडखल ताल आ मोर ताल सहो एतय अछि । 

बल्लबगढ फरीदाबादक सबसँ पैग शहर छी । एतय सन् १८५७ मे शहीद राजा नाहर सिंहक महल छल । बल्लबगढक प्रमुख कालोनीसभ निम्न अछि : 

बल्लबगढक प्रमुख स्थान निम्न अछि : 




#Article 495: रोहतक (335 words)


रोहतक () भारतक राज्य हरियाणाक रोहतक जिलाक मुख्यालय आ एक शहर छी । ई राष्ट्रिय राजधानी दिल्लीसँ  उत्तर पश्चिममे आ दिल्ली सिमानासँ मात्र ४०-४५ किमीमे अछि । रोहतक राज्य राजधानी चण्डीगढसँ  दक्षिणमे एनएच १०पर अछि । रोहतक राष्ट्रिय राजधानी क्षेत्र अन्तर्गत आबैत अछि, जे भौतिक भवन निर्माण विकासक लेल एनसिआर योजना बोर्डसँ राहत व्याज पाबैत अछि आ रोहतक जिलाके सोझ फाइदा पहुँचाबैत अछि ।

सन् २०११ मे भेल भारतक जनगणना अनुसार रोहतक हरियाणा राज्यक छअम सभसँ बेसी जनसङ्ख्या भेल शहर छी । रोहतकक जनसङ्ख्या ३,७४,२९२ अछि आ एकर साक्षरता दर ८४.०८ प्रतिशत अछि ।

कहल जाइत अछि कि पहिने रोहतासगढ़ (रोहतासक किला) कहल जाइवला रोहतकक स्थापना एक पम्वार राजपूत राजा रोहतासद्वारा कएल गेल छल । एतय सन् ११४० मे निर्मित दीनी मस्जिद छी । नजदिकी खोकरा कोटक खुदाईसँ बौद्ध मूर्तिसभक अवशेष मिलल अछि ।

दक्षिण पञ्जाबक ई अति प्राचीन नगर छी । एकर उल्लेख महाभारत सभापर्वमे प्रसङ्ग नकुलक पश्चिम दिशाक दिग्विजयक अछि जे निम्न प्रकार अछि:-

ई प्रदेशक एतय बहुत उपजाउ बताओल गेल अछि तथा ओहिमे मत्तमयूरक निवास बताओल गेल अछि, जकार इष्टदेव स्वामी कार्तिकेय छल । याह प्रसङ्गमे एकर पश्चात शेरीषक (वर्तमान सिरसा) क उल्लेख अछि । उद्योग पर्वमे सेहो रोहितकक कुरुदेशक सन्निकट बताओल गेल अछि- दुर्योधनक सहायतार्थ जे सेनासभ आएल छल, ओ रोहतकक नजदिक रुकल छल-

रोहतक लग ओहि समय वन प्रदेश रहल होइत, जकरा एतय रोहिताकारण्य कहल गेल अछि । 

रोहतक नगर स्थिति : २८°५४' उत्तर अक्षांश तथा ७६°३८' पूर्वी देशान्तरमे अवस्थित अछि । ई रोहतक जिलाक नगर छी, ई नगर सन् १८२४ मे एक ब्रिटिश जिलाक मुख्यालय बनल छल । दक्षिणवर्ती सैकत पहाड़िसभसँ नगरक मध्यमे स्थित श्वेत मस्जिद आ पूर्वमे स्थित भव्य दुर्ग अत्यन्त मनोरम लागैत अछि । दिल्लीसँ ४४ माइल उत्तर पश्चिम स्थित रोहतक, उत्तरी रेलवेक एक स्टेशन अछि ।

रोहतक अनाज आ कपासक प्रमुख बाजार अछि । एतय उद्योगिक गतिविधिसभमे खाद्य उत्पाद, कपासक ओटाई, चीनी आ बिजलीक करघा पर बुनाईक काम उल्लेखनीय अछि ।

रोहतकमे महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय अछि, जाहिमे सम्बद्ध अनेक महाविद्यालयसभमे जिबी आयुर्वेदिक कलेज, आइसी कलेज, वैश कलेज अफ इन्जिनियरिङ्ग आ गोड ब्राह्मण डिग्री कलेज छी ।




#Article 496: गौतम अदानी (427 words)


गौतम अदानी (जन्म २४ जुन १९६२) एक भारतीय व्यवसायी छी जे अदानी समूहक संस्थापक आ कार्यकारी प्रमुख छी । अमेरिकी पत्रिका फोर्ब्स अनुसार सन् २०१५ मे गौतमके कूल सम्पति ७ बिलियन अमेरिकी डलर अछि । ओ सन् १९८८ मे अदानी समूहक स्थापना केनए छल आ आई वर्तमान समयमे अदानी समूह कोयला व्यापार, कोयला खनन, तेल आ ग्यास खोज, बन्दरगाहसभ, मल्टी मोडल लजिस्टिक, बिजली उत्पादन आ पारेषण आ ग्यास वितरणमे फैलल कारोबारक सम्भालैवला विश्व स्तरक एकीकृत बुनियादी ढाँचा छी । ३३ वर्षक व्यापार अनुभवक साथ साथ, गौतम अदाणी प्रथम पीढ़ीक उद्यमी छी जे अपेक्षाकृत कम समयमे $८ अरबक व्यवसायिक कारोबारी साम्राज्य आदानी समूहक नेतृत्व करैवला एक मामूली पृष्ठभूमिक व्यक्ति छी ।

गौतमके व्यापार-परिवहन आ परिवहन सम्बन्धी बुनियादी ढाँचाक विकासक लेल विश्व भरिमे १०० सबसँ प्रभावशाली व्यवसायीसभमे गिनल जाइत अछि । ओ सन् २००६ मे आधुनिक मुन्द्रा बन्दरगाहक स्थापना केनए छल जकरा सन् २००६ मे लोयड्स सभसँ बढिया बन्दरगाहक सूचीमे स्थान देनए छल । आजुक वर्तमान समयमे मुन्द्रा बन्दरगाह भारतक सभसँ पैग व्यवसायिक बन्दरगाह छी जे सन् २०१३-१४ क आर्थिक वर्षमे १०० मिलियन म्याट्रिक टनक कारोबार केनए छल ।

गौतम अदानीक जन्म गुजराती बनिया परिवारमे सन् १९६२ जुन २४ मे भारतक गुजरात राज्यक अहमदाबादक रतनपोलमे भेल छल । गौतमक पिताक नाम शान्तिलाल आ माताक नाम शान्ता अदानी छी आ हुनका ७ भाईबहिन अछि । हुनकर मातापिता गुजरातक पूर्वी भाग थराद शहरसँ बसाइसराई केनए छल । गौतमक विवाह प्रिती अदानीसँ भेल अछि जे पेशासँ दन्त चिकित्सक आ अदानी फाउन्डेसनक प्रबन्धक सञ्चालक छी । ई दुनूके दुई टा बेटा अछि । गौतम अपन प्रारम्भिक शिक्षा अहमदाबादक शेठ चिमनलाल नागीनदास विद्यालयसँ केनए अछि । बादमे, ओ गुजरात विश्वविद्यालयसँ वाणिज्य सङ्कायमे स्नातकक दुई वर्षधरि पढ़ाई केलक ।

अपन पिताद्वारा अहमदाबादमे स्थापित टेक्सटाइलक व्यवसायमे समर्पित नै भ गौतम १८ वर्षक उमरमे किछ १०० रुपैया ल भारतक आर्थिक राजधानी मुम्बई पहुँचल छल । ओ अपन करियरक आरम्भ हिरा विक्रेताक रूपमे केनए छल । ओ २ वर्ष धरि महिन्द्रा ब्रदर्स नामक फर्ममे काज केनए छल । बादमे ओ खुद अपन हीरा दलालीक काज मुम्बईमे स्थापित केनए छल । हुनकर कथन अनुसार ओ एक वर्षमे लगभग १० लाख रुपैया आर्जित केनए छल, सन् १९८० मे ई रकम बहुत बेसी छल ।

गौतमक बड़का भाई महासुख अदानी, अपन प्लास्टिक कारखानाक चलाबैक लेल गौतमक मुम्बईसँ अहमदाबाद बजेलक । जल्दीए गौतम अदानी पोलीभिनाइल क्लोराइड, प्लास्टिक निर्माणक लेल प्रमुख सामग्रीक आयात करि कमोडिटी व्यवसाय आरम्भ केलक ।

अदानी, उच्च जोखिम ल व्यवसाय करि सफल भेला कारण हुनका गौतमभाई नाम राखल गेल । पूर्व आइआइएम-ए निर्देशक बाकुल ढोलकिया, जे अदानी समूहक शैक्षिक आ सिएसआर सुरुवातकर्ता छल ओ कहलक, उच्च जोखिम वहन करि सफल होमएवला बहुतेक कम व्यवसायीसभमे सँ एक अदानी छी ।




#Article 497: जातीय संसद भवन (208 words)


जातीय संसद भवन वा राष्ट्रिय संसद भवन, ( जातियो सोंसद भोवोन) बंगलादेशक संसदक नाम छी । ई भवन राजधानी ढाकाक शेर-ए-बाङ्ग्ला नगरमे अवस्थित अछि । एकर डिजाइन लुइस कान केनए अछि आ ई भवन २०० एकड़मे फैलल अछि आ संसारक सबसँ बड़का विधायक भवनसभमे सँ एक छी ।

ई भवन सन् २००३ मे निर्माण भेल माई आर्किटेक्ट नामक चलचित्रमे स्थायी रूपसँ दर्शाएल गेल छल । ई चलचित्रमे वास्तुकार लुइस कानके पारिवारिक स्थिति आ करियरक बारेमे देखाएल गेल छल । लुइस आइ कान क लेखक रोबर्ट म्याककार्टर, बंगलादेशक जातीय संसद भवनके २०अम शताब्दीके मुख्य भवनमे सँ एक कहने छल ।

बंगलादेशी संसद स्थायी रूपसँ जातीय संसद भवनमे बैठैत अछि । ई भवन, विधायकसभक दुनियामे एक शानदार संसदीय निर्माणक नमूना छी । ई भवन २१५ एकड़क भूमिमे राजधानी ढाकाक शेर-ए-बाङ्ग्ला क्षेत्रमे अवस्थित अछि । एकर परिसरमे, मुख्य भवन अतिरिक्त, खुलल हरियर रिक्त स्थान, जल निकास आ सांसदसभक भव्य कार्यालय सेहो अवस्थित अछि । ई भवनक निर्माण सन् १९६१ मे शुरू भेल छल । अनेक उतार चढ़ावक बाद अत्यन्तः ८ जनवरी १९७२ के ई भवनके उद्घाटन कएल गेल छल । ई शानदार भवनक रचना प्रसिद्ध अमेरिकी वास्तुकार लुइस आई कान तैयार केनए छल । संसद भवन क्षेत्रक मुख्य भवन, दक्षिण प्लाजा आ राष्ट्रपति प्लाजा, करि तीन भागमे बांटल गेल अछि ।




#Article 498: मङ्गलयान (392 words)


मङ्गलयान, (औपचारिक नाम- मङ्गल कक्षित्र मिशन, ; मार्स अर्बिटर मिशन), भारतक प्रथम मङ्गल अभियान छी । ई भारतक प्रथम ग्रहसभक बीचक मिशन छी । वस्तुत: ई भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान सङ्गठनक एक महत्वाकांक्षी अन्तरिक्ष परियोजना छी । ई परियोजनाक अन्तर्गत ५ नवम्बर २०१३ के २ बजिके 38 मिनट पर मङ्गल ग्रहक परिक्रमा करैक हेतु छोड़ल गेल एक उपग्रह आन्ध्र प्रदेशक श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अन्तरिक्ष केन्द्र सँ ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पिएसएलभी) सी-२५ द्वारा सफलतापूर्वक छोड़ल गेल । 

एकर संगे भारत सेहो आब ओहि देशसभमे शामिल भ गेल अछि जे मङ्गल ग्रहपर अपन यान भेज्ने अछि । ओना आई धरि मङ्गल जाइक लेल शुरू कएल गेल दुई तिहाई अभियान असफल भेल अछि मुदा २४ सितम्बर २०१४ के मङ्गल पर पहुँचैक साथे भारत विश्वमे अपन प्रथम प्रयासमे सफल होमएवला पहिल देश तथा सोभियत रूस, नासा आ युरोपेली अन्तरिक्ष एजेन्सीक बाद दुनियाक चारिम देश बनि गेल अछि । एकर अतिरिक्त ई मङ्गल पर भेजल गेल सबसँ सस्ता मिशन सेहो छी । भारत एसियाक देशसभमे सँ ऐहन करैवला प्रथम देश बनि गेल । कियाकि एहिसँ पहिने चीन आ जापान अपन मङ्गल अभियानमे असफल रहल छल। 

वस्तुतः ई एक प्राविधिक प्रदर्शन परियोजना छल जकर लक्ष्य अन्तरग्रहीय अन्तरिक्ष मिशनसभक लेल आवश्यक डिजाइन, नियोजन, प्रबन्धन तथा क्रियान्वयनक विकास करनाए अछि । अर्बिटर अपन पाँच उपकरणसभक संग मङ्गल ग्रहक परिक्रमा करैत रहत तथा वैज्ञानिक उद्देश्यक प्राप्त करैक लेल तथ्याङ्क तथा चित्र पृथ्वी पर भेजत । अन्तरिक्ष यान पर वर्तमानमे इसरो टेलिम्याट्री, ट्रयाकिङ आ कमाण्ड नेटवर्क, बेङ्गलोरक अन्तरिक्षयान नियन्त्रण केन्द्रसँ भारतीय डिप स्पेस नेटवर्क एन्टिनाक सहायतासँ नजर रखल जा रहल अछि ।

प्रतिष्ठित टाइम पत्रिका मङ्गलयानके सन् २०१४ के सर्वश्रेष्ठ आविष्कारसभमे शामिल केनए छल ।

२३ नवम्बर २००८ के, मङ्गल ग्रहक लेल एक मानव रहित मिशनक पहिल सार्वजनिक अभिस्वीकृतिक घोषणा इसरोक अध्यक्ष माधवन नायरद्वारा कएल गेल छल ।  मङ्गलयान मिशनक अवधारणा सन् २००८ मे चन्द्र उपग्रह चन्द्रयान-१क प्रक्षेपण बाद अन्तरिक्ष विज्ञान आ भारतीय प्राविधिक संस्थानद्वारा सन् २०१० मे एक व्यवहार्यता अध्ययनक साथ शुरू भेल । भारत सरकार परियोजनाके ३ अगस्त २०१२ मे मञ्जुरी देनए छल ।  एकर बाद भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान सङ्गठन १२५ करोड़ टाका (१९$ मिलियन) क अर्बिटरक लेल आवश्यक अध्ययन पूरा केलक । परियोजनाक कुल लागत ४५४ करोड़ टाका (६७$ मिलियन) भेल ।  

अन्तरिक्ष एजेन्सी २८ अक्टुबर २०१३ प्रक्षेपणक योजना बनौलक । मुदा प्रशान्त महासागरमे खराब मौसमक कारण इसरो अंतरिक्ष यान ट्रयाकिङ्ग जहाजसभके पहुँचैमे देरी भेल । जाहिसँ अभियानके ५ नवम्बर २०१३ धरि स्थगित करि देल गेल छल ।




#Article 499: कोटा, राजस्थान (350 words)


कोटा  () भारतक राजस्थानक एक प्रमुख उद्योगिक आ शैक्षणिक शहर छी । ई चम्बल नदीक तटमे अवस्थित अछि । कोटा शहर राजधानी जयपुरसँ सडक आ रेलमार्गसँ लगभग २४० किलोमीटरक दूरीमे अवस्थित अछि । ई नगर जयपुर-जबलपुर राष्ट्रिय राजमार्ग १२ मे अवस्थित अछि । दक्षिण राजस्थानमे चम्बल नदीक पूर्वी किनारमे अवस्थित, कोटा ओ शहरसभमे गिनल जाइत अछि जतेक उद्योगीकरण पैग मात्रामे कएल जाइत अछि । कोटा अनेक किला, महल, सङ्ग्रहालय, मन्दिर आ बगैचाक लेल लोकप्रिय अछि । ई शहर नवीनता आ प्राचीनताक गजब मिश्रण अछि, जतेक एक तरफ शहरक स्मारक प्राचीनताको बोध कराबैत अछि तँ चम्बल नदीमे बनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लान्ट आ न्युक्लियर पावर प्लान्ट आधुनिकताक एहसास कराबैत अछि ।

कोटा चम्बल नदीक पूर्वी तटमे अवस्थित अछि । ई राजस्थान]क दक्षिणी भागमे अछि । एकर भौगोलिक निर्देशाङ्क  अछि । एकर क्षेत्रफल १२,१३६ किमी२ (राजस्थान राज्यक ३.६३ % भूभाग) अछि । एकर औसत उचाई २७१ मिटर (८८९ फिट) अछि ।

कोटाक विशेष सूती तथा कोटा डोरीया साडी, कोटा स्टोन, कचोरीक लेल प्रसिद्ध अछि । कोटाके शिक्षा नगरीक नामसँ सेहो जानल जाइत अछि ।

प्रारम्भमे कोटा बुन्दी राज्यक एक भाग छल । मुगल शासक जहाँगीर जब बुन्दीक शासकसभके पराजित केलक तब कोटा सन् १६२४ मे एक स्वतन्त्र राज्यक रूपमे स्थापित भेल । राव माधो सिंह एतयक प्रथम स्वतन्त्र शासकक रूपमे गद्दीमे बैसल । सन् १८१८ मे कोटा ब्रिटिश साम्राज्यक अधीन भऽ गेल ।

चम्बल नदीक पूर्वी तटमे १७अम शताब्दीमे बनल ई किला कोटाक मुख्य आकर्षण छी । ई किलाक परिसर राजस्थानक सबसँ विशाल किला परिसरसभमे सँ एक छी । १७अम शताब्दीमे बनल हात्ति पोल किलामे प्रवेशक सुन्दर प्रवेशद्वार अछि ।

ई सङ्ग्रहालय पुरान महलमे अवस्थित अछि आ एकरा राजस्थानक सबसँ सुन्दर सङ्ग्रहालयसभमे गिनल जाइत अछि । कोटा राज्यक प्रथम शासक राव माधो सिंहक नाममे सङ्ग्रहालयक नाम राखल गेल अछि । सङ्ग्रहालयमे कोटाक सुन्दर दावालचित्र, मूर्ति, तस्वीर, हतियार आ शाही वंश सम्बन्धित अनेक वस्तुसभ देखल जा सकैत अछि ।

ई एक सुन्दर पिकनिक स्थल छी आ एतय मगरमच्छ ताल देखल जा सकैत अछि । ई बगैंचा चम्बल नदी आ अमर निवासक नजदिक अवस्थित अछि ।

देवताजीक हवेली राजस्थानक सबसँ सुन्दर भवनसभमे एक छी । कोटाक ई हवेली अद्भुत दवालचित्र आ चित्रकारीक लेल प्रसिद्ध अछि ।




#Article 500: बेङ्गलोर (393 words)


बेङ्गलोर , आधिकारिक रूपमे बेङ्गलुरू ()क नामसँ जानल जाइत अछि । ई कर्नाटक राज्यक राजधानी शहर छी । बेङ्गलोर शहरक जनसङ्ख्या ८४ लाख आ ई महानगरीय क्षेत्रक जनसङ्ख्या ८९ लाख अछि, आ ई गणतन्त्र भारतक तेसर सबसँ बड़का शहर आ पाँचम् सबसँ पैग महानगरीय क्षेत्र छी । दक्षिण भारतमे डेक्कनक पठारीय क्षेत्रमे ९०० मिटरक औसत उचाईपर अवस्थित ई नगर अपन साल भरि  सुहाना मौसमक लेल जानल जाइत अछि । भारतक मुख्य शहरसभमे एकर उचाई सबसँ बेसी अछि ।

सन् १५३७ मे विजयनगर साम्राज्यक सामन्त केम्पेगौडा प्रथमद्वारा ई क्षेत्रमे पहिल किलाक निर्माण करेनाए छल । एकरा आई बेङ्गलोर शहरक नींव मानल जाइत अछि । समयक साथ ई क्षेत्र मराठासभ, अङ्ग्रेजसभ आ अन्तिममे मैसूरक राज्यक हिस्सा बनल । अङ्ग्रेजक प्रभावमे मैसूर राज्यक राजधानी मैसूर शहरसँ बेङ्गलोरमे स्थानान्तरित भऽ गेल, आ ब्रिटेश रेसिडेन्ट बेङ्गलोरसँ शासन चलाबैक आरम्भ करि देलक । बादमे मैसूरक शाही वाडेयार परिवार सेहो बेङ्गलोरसँ शासन चलाबैत रहल । सन् १९४७ मे भारतक आजादीक बाद मैसूर राज्यक भारत सङ्घमे विलय भऽ गेल, आ बेङ्गलोर सन् १९५६ मे नवगठित कर्नाटक राज्यक राजधानी बनि गेल । सन् १९४९ मे बेङ्गलोर छावनी आ बेङ्गलोर नगर, जकर विकास अलग अलग एकाईसभक तर्ज पर भेल छल, कऽ विलय करि नगरपालिकाक पुनर्गठन कएल गेल ।

वर्ष २००६ मे बेङ्गलोरक स्थानीय निकाय बृहत् बेङ्गलोर महानगरपालिका (बिबिएमपी) एक सङ्कल्पक माध्यमसँ शहरक नाम अङ्ग्रेजी भाषाक वर्तनीके Bangalore सँ Bengaluru मे परिवर्तित करिक निवेदन राज्य सरकारक भेजलक । राज्य आ केन्द्रीय सरकारक स्वीकृति मिल्लाबाद ई परिवर्तन १ नवम्बर २०१४ सँ प्रभावी भऽ गेल ।

बेङ्गलोर भारतक सूचना प्राविधिक निर्यातसभक अग्रणी स्रोत रहल अछि, आ याह कारणसँ एकरा भारतक सिलिकन भ्याली कहल जाइत अछि । भारतक प्रमुख प्राविधिक सङ्गठन इसरो, इन्फोसिस आ विप्रोक मुख्यालय याह शहरमे अछि । एक जनसाङ्खिकीय विविध नगर, बेङ्गलोर भारतक दोसर सबसँ तीव्र गतिमे विकसित भऽ रहल मुख्य महानगर छी । एतय बहुतरास शैक्षिक आ अनुसन्धान संस्थान स्थित अछि, जेना भारतीय विज्ञान संस्थान, भारतीय प्रबन्ध संस्थान बेङ्गलोर, राष्ट्रिय डिजाइन संस्थान, नैशनल ल स्कुल अफ इन्डिया युनिभर्सिटी आ नेसनल इन्स्टिट्यूट अफ मेन्टल हेल्थ एन्ड न्युरोसाइन्स । बहुतरास सरकारी वायुप्राविधिक आ रक्षा सङ्गठन सेहो एतय स्थापित अछि, जेना भारत इलेक्ट्रनिक्स, हिन्दुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड आ नेसनल एयरोस्पेस लेबोरेटरिज । बेङ्गलोर कन्नड फिल्म उद्योगक केन्द्र छी । एक तीव्रतासँ विकास भऽ रहल महानगरक तौर पर बेङ्गलोरक आगा बढऽ कऽ लेल प्रदूषण, यातायात आ अन्य सामाजिक-आर्थिक चुनौतिसभ अछि । $८३ अरबक घरेलू उत्पादक साथ, सकल घरेलू उत्पादक नजरियासँ बेङ्गलोर भारतक चारिम सबसँ पैग नगर छी ।




#Article 501: दीपा कर्मकार (330 words)


दीपा कर्मकार (बङ्गाली: দিপা কর্মকার , अङ्ग्रेजी: Dipa Karmakar) (जन्म:९ अगस्त १९९३) एक कलात्मक जिम्नास्ट छी जे  २०१६ ग्रीष्मकालीन ओलम्पिकमे भारतक प्रतिनिधित्व केनए छल। ओलम्पिकमे भाग लऽ प्रतिस्पर्धा करनिहार ओ पहिल भारतीय महिला जिम्नास्ट छी, आ पिछला ५२ वर्षमे एहन केनिहार प्रथम भारतीय पुरुष अथवा महिला जिम्नास्ट छी।

सन् २०१६ कऽ रियो ओलम्पिक खेलमे ओ १५.०६६ अङ्कक सङ्ग चारिम स्थान प्राप्त केनए छल। ओ ग्लासगोमे सम्पन्न २०१४ राष्ट्रमण्डल खेलमे कास्य पदक जित सभक ध्यान अपनदिस खिच्ने छल। राष्ट्रमण्डल खेलक इतिहासमे ई सफलता प्राप्त केनिहार ओ पहिल भारतीय महिला छी।

कर्मकार पूर्वोत्तर भारतक त्रिपुरा राज्यक अगरतला शहरक छी। ओ ६ वर्षक कम उमर सँ जिम्नास्टिक्स आरम्भ केनए छल आ ओहि समय सँ एखनधरि अपन प्रशिक्षक विश्वेश्वर नन्दीक निर्देशनमे अभ्यास कऽ रहल छथि। जिम्नास्टिक्स कक्षामे प्रवेश लेबऽ कऽ समयमे दीपा फ्ल्याट फिटक समस्या सँ ग्रस्त छलथि। प्रशिक्षक नन्दीक अनुसार फ्ल्याट फिटक कारण सँ दीपाक उछालमे समस्या आबि रहल छल। एकरा दुरुस्त बनेबामे दीपा आ हुनकर प्रशिक्षकक लेल चुनौतीपूर्ण कार्य रहल। सन् २००७ मे जलपाईगुडीमे ओ जुनियर नेसनल्स जित लेलक। सन् २००७ सँ दीपा राज्य, राष्ट्रिय आ अन्तर्राष्ट्रिय प्रतियोगितासभमे समग्रमे ७७ पदक जित चुकल अछि जाहिमे सँ ६७ स्वर्ण पदक रहल अछि।

दीपा २०१६ ग्रीष्मकालीन ओलम्पिकमे भारतक प्रतिनिधित्व केलक। ओलम्पिकमे भाग लऽ प्रतिस्पर्धा करनिहार ओ पहिल भारतीय महिला जिम्नास्ट छी, आ पिछ्ला ५२ वर्षमे एहन केनिहार प्रथम भारतीय, पुरुष अथवा महिला, जिम्नास्ट छी।

ई ओलम्पिकमे ओ फाइनलधरि यात्रा तय करैमे सफल भेल। फाइनलमे ओ बहुतकम अङ्कक अन्तर (०.१५०) सँ कास्य पदक प्राप्त करैमे असफल भेल आ चारिम स्थानमे अपन मन बुझेनए छल। ओ अति कठिन मानल जाएवला प्रोदुनोभा बोल्टक सफल प्रदर्शन केनए छल जे आइधरि विश्वमे ५ महिला जिम्नास्ट मात्र सफलतापूर्वक केनए अछि। ओना तँ ओ कोनो पदक नै जित सकलक मुदा तहियो ई उपलब्धिक कारण हुनका भारतमे चर्चित बनेलक। भारतक महानतम् क्रिकेट खेलाडी सचिन तेन्दुलकर कहलक - जित्नाए आ हारनाए खेलक एकटा भाग छी । अहाँक ई उपलब्धि सँ हमसभ देशवासीकें गौरवान्वित बनेनाए अछि। बेइजिङ ओलम्पिकमे स्वर्ण पदक जित चुकल भारतीय निशानेबाज अभिनव बिन्द्रा कहलक - दीपा कर्मकार अहाँ हमर हिरो छी।




#Article 502: अगरतला (521 words)


अगरतला  ( ) भारतक त्रिपुरा राज्यक राजधानी आ सभसँ पैग शहर छी । ई उत्तर-पूर्व भारतक गुवाहाटी शहरक बाद सभसँ पैग नगर क्षेत्र आ सभसँ बेसी जनसङ्ख्या भेल नगर छी । ई शहर त्रिपुराक सरकारी सिट छी । अगरतला भारतके सभसँ तेजीसँ आगा बढि रहल शहर छी ।

अगरतला दुई शब्द अगर जकर अर्थ एक प्रकारक मूल्यवान सुगन्धित गाछ होइत अछि आ + उपसर्ग तला, एक गोदाम घर सँ बनल अछि । अगरतला नगर परिषद ई शहरके शासित करैत अछि । अगरतला हरोआ नदीके किनारमे अवस्थित अछि आ एतयसँ बंगलादेशक सिमाना मात्र २ किमी दुर अछि । अगरतला भारतक मुम्बई आ चेन्नईक बाद तेसर अन्तर्राष्ट्रिय इन्टरनेट गेटवे छी ।

एतय मुख्यत: बङ्गाली भाषा बोलल जाइत अछि । अगरतलाक ह्याण्डलुम बुनाई एतयक मुख्य उद्योग छी । अगरतलाक आधासँ बेसी भाग जङ्गलसँ घेरल अछि, जे प्रकृति-प्रेमी पर्यटकसभके आकर्षित करैत अछि । अगरतला नगर परिषदक सम्पूर्ण क्षेत्रफल ७६.५०४ वर्ग किमी आ सन् २०१३ मे पुनार्निर्मित अगरतला नगर परिषदक जनसङ्ख्या ४,३८,४०८ रहल अछि । सन् २०११ के भारतक जनगणना अनुसार अगरतलाक साक्षरता दर ९३.८८ अछि जे भारतक साक्षरता दरसँ बेसी अछि । सन् २०१५ के नगर जनगणना अनुसार अगरतलाक जनसङ्ख्या ५,२२.६१३ अछि ।

त्रिपुरा राज्यक स्थापना १४अम शताब्दीमे माणिक्य नामक भारतीय-मङ्गोलियन आदिवासी मुखियाद्वारा भेल छल, जे हिन्दू धर्म अपनेनाए छल । सन् १८०८ मे एकरा ब्रिटिश साम्राज्य जित लेलक आ ई एक स्व-शासित शाही राज्य बनि गेल ।त्रिपुराक राजधानी अगरतलाक स्थापना सन् १८५० मे महाराज राधा कृष्ण किशोर माणिक्य बहादुरद्वारा कएल गेल छल । सन् १९५६ मे ई गणतन्त्र भारतमे शामिल भऽ गेल आ सन् १९७२ मे एकरा राज्यक दर्जा प्राप्त भेल ।

पर्यटनक दृष्टिसँ ई एक एहन शहर छी, एतय मनोरञ्जनक तमाम साधन अछि, साहसिक कर्तबक लेल बहुतेक विकल्पसभ ई शहरमे उपलब्ध अछि आ सांस्कृतिक रूपसँ सेहो ई शहर बेहद समृद्ध अछि । एहि वाहेक एतय पावोल जाइवला अलग-अलग प्रकारक जीव-जन्तु आ गाछवृक्ष अगरतला पर्यटनक आओरो रोचक बनाए देनए अछि । अगरतला ओ समय प्रकाशमे आएल जब माणिक्य वंश एकर अपन राजधानी बनेलक । १९अम शताब्दीमे कुकीक लगातार हमललासँ परेशान भऽ महाराज कृष्ण माणिक्य उत्तरी त्रिपुराक उदयपुर स्थित रङ्गामाटीसँ अपन राजधानीके अगरतला स्थानान्तरित करि देलक । राजधानी परिवर्तन करैक एक अओरो कारण ई छल कि महाराज अपन साम्राज्य आ पड़ोसमे स्थित ब्रिटिश बंगलादेशक साथ सम्पर्क बनाबै लेल चाहैत छल । आई अगरतला जे रूपमे स्थापित अछि, दरअसल एकर परिकल्पना सन् १९४० मे महाराज बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर केनए छल । ओ ओहि समय सड़क, बजारक भवन आ नगरनिगमक योजना बनेनाए छल । हुनकर याह योगदानके देखैत आई अगरतलाके बीर बिक्रम सिंह माणिक्य बहादुरक शहर सेहो कहल जाइत अछि । शाही राजधानी आ बंग्लादेशसँ नजदीकी होमएक कारण अतीतमे बहुतेक पैग नामचीन हस्तिसभ अगरतलाक भ्रमण केनए अछि । रविन्द्रनाथ टैगोर बहुतेक बेर अगरतला आएल छल । 

अगरतलामे रहल किछ पर्यटन स्थलसभ निम्न अछि:

सन् १९०१ मे निर्मित उज्जयन्ता दरबार, अगरतलाक मुख्य स्मारक छी जे मुगल-युरोपेली मिश्रित शैलीमे निर्मित अछि । ८०० एकड़मे फैलल ई विशाल परिसर आब राज्यक विधान सभाक रूपमे प्रयुक्त होइत अछि । ई परिसरमे बगैंचा आ मानव-निर्मित ताल अछि । आमतौर पर एकरा जनताक लेल नै खोलल जाइत अछि मुदा यदि अहाँ साँझ ३ सँ ४ बजेके बीच मुख्यद्वार पर जाए तँ अहँ एतयसँ प्रवेशक लेल प्रवेश-पास प्राप्त करि सकैत छी ।




#Article 503: कलैया नगरपालिका (336 words)


कलैया नगरपालिका नेपालक बारा जिलाम अवस्थित एकटा नगरपालिका छी । २०३९ सालम स्थापित काठमाडौँ सँ ३०६ कि.मी. एसियाक सब सँ बेसी बली प्रदान होएवाला ठाम श्री गढीमाई मन्दिर सं १० कि.मी. पश्चिम आर वीरगंजबाट पूर्व १२ कि.मी.क दुरीम अवस्थित बारा जिलाक सदरमुकाम रहल एक मात्र नगरपालिका छी। स्थापनाकालम ई न.पा.मा तत्कालिन कलैया, बरेवा, भवानीपुर, बैरिया, बघवन, रामपुर गाविस समेटन छल। ११ वडामा विभाजित ई न.पा.मा २०४७ सालम भतौडा, ब्रम्हपुरी, विशम्भरपुर गाविस थप कक १४ वडामा विस्तार एकर क्षेत्रफल बढाने छल। ३२२३.५ हे. क्षेत्रफल भेल ई न.पा. हाल कृषि उत्पादनक दृष्टि सँ उर्वर भूमिक रूपम चिनिहल एसियाक सब सं बेसी बली चढेवाला श्री गढीमाई मन्दिर नजीक भेलाक कारण सँ ई न.पा. पर्यटकीय क्षेत्रक रूपम सेहो विकसित होएक क्रमम अछि ।

 (वार्षिक जनसंख्या वृद्धि दर ३.५%)
 साक्षरता : ५५.६%
 प्राथमिक स्तर : २२ %
 एस.एल.सी. : १० %
 ईन्टरमेडिएट आर उपर : ९%
 अन्य : १४.६ %
 घरधुरी संख्या : ५७३३

 उचाई : समुद्र सतहबाट १५२ मी. देखि ९१५ मी. सम्म
 माटो : बलुटो र मलिलो

 श्रावण देखि आश्विन : गर्मी र वर्षा
 कार्तिक देखि माघ : जाडो,शीत्
 फागुनदेखि अषाढ : गर्मी, हावा— हुरी र बतास

 संसदिय निर्वाचन क्षेत्र :३

 विकास क्षेत्र : मध्यमाञ्चल

 प्रदेश : तराई

 अञ्चल : नारायणी

 नगरपालिका : कलैया

 वडा संख्या १४ (शहरी क्षेत्रमा ५, ग्रामीण क्षेत्रमा ९)

 क्षेत्रफल : ३२२३.५ हेक्टर

 बसोबास क्षेत्र : १०७० हेक्टर

 कृषि क्षेत्र : १५१० हेक्टर

 बजार/अन्य क्षेत्र : ६४३.५० हेक्टर

 अस्पताल (२७ सैंया) : १
 हेल्थ पोष्ट संख्या : ३
 आयुर्वेद औषधालय : १
 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र : १

 शाखा संख्या — ११
 कर्मचारीको कुल संख्या — ९७
 कार्यकारी अधिकृत — १
 स्थायी — ५५
 करार — २२
 दैनिक ज्यालादारी — १९

 पूर्व : गाविस बघवन, सिसवा महेशपुर

 पश्चिम : गाविस सिसहनिया, भतौडा

 उत्तर : गाविस दोहरी, उत्तर झिट्कैया

 दक्षिण : गाविस धर्मनगर, बलिरामपुर

सिद्धेश्वर मन्दिर, राजदेवी मन्दिर, नुतनदेवी मन्दिर, मुक्तेश्वर मन्दिर, राधाकृष्ण मन्दिर, महावीर मन्दिर, बुद्ध मन्दिर, चिमनीमाई मन्दिर, बेलपाती मन्दिर, मस्जिद, बौद्धिमाई मन्दिर, हनुमान मन्दिर,
रामराजा दरबार, सिद्धेश्वर मा.वि., रामजानकी मन्दिर, बरेवा हरियाली पार्क, रामपुरको पोखरी, लङ्गडा पोखरी, बावन बिगाहा फुलबारी, गढीमाई मन्दिर (७ कि.मी.पूर्व)




#Article 504: गढिमाई नगरपालिका (276 words)


मध्य नेपालक बारा जिलाम रहल गढिमाई नगरपालिका द्रुततर गतिमा बिकाश होए वाला नगर अछि । जितपुर बजार रहल ठाँम क केन्द्र बनेन छल । ई नगरपालिका २०६८ साउन १ सं लागू भेल छल लेकिन  कार्यन्वयनमा हाल जेष्ठ ४,२०७१ सुरु भेल छल । ई नगरपालिका घोषणा गर्दा पिपरा सिमरा,जितपुर,छातापिपरा,फत्तेपुर आर डुमरवाना गाउँ विकास समितिसभ समावेश कएल गेल छल । आर्थिक वर्ष २०६८/६९क बजेटमार्फत् मुलुकमा ४१ नयाँ नगरपालिकाम गढिमाई सेहो नगरपालिका बनल छल। महानगरपालिका, उपमहानगरपालिका आर नगरपालिका कक आब मुलुकमा कूल १३० नगर पालिका अछि तहिना  गाविसक संख्या ३ हजार ९ सय १५ सा कम भक ३ हजार ६ सय ३३ अछि ।

पिपरा सिमरा,जितपुर,छातापिपरा,फत्तेपुर र डुमरवाना गाविसहरूलाई मिलाक गढिमाई नगरपालिका बनावल गेल छल । तहिना बि.स.२०६८ क जनगणना अनुसार ई ठामसभ जनसंख्या जोडिक ८३,३६७ रहल अछि  ।

 अक्षांश: २६.५१ देखि २७.२ उत्तरसम्म
 देशान्तर: ८४.५१ देखि ८५.१६ पूर्वसम्म
 सिमा: पूर्व रौतहट जिल्ला, पश्चिम पर्सा, उत्तर मकवानपुर जिल्ला, दक्षिण: भारतको विहार राज्यको पूर्वी चम्पारण जिला
 सब स अग्लोस्थान: समुद्र सतहबाट ९१५ मिटर
 सब स होचोस्थान : समुद्र सतहबाट १५२ मिटर
 क्षेत्रफल: १,१९० वर्ग किलोमिटर (१२९५६३ हेक्टर)
 हावापानी: उष्ण

ई नगरपालिक उत्तर पूर्वी भागम  जमानामा गढी गौडा (बारा गढीमाई) आर गोश्वाराको रूपम रहेकल बारागढी  स्थानक नामस बरा जिलाक नाम बारा राखल गेल छ

बाराक प्रसिद्ध गढीमाईक मन्दिर अहिठाम अवस्थित अछि,जे बारा कलैया स करिब ७ किलोमिटर पूर्व दिशामा अछि।

 प्रमुख नदी: अणुवा(अरुवा), लालवकैया, पसाहा, जमुनी, तीयर, दुधौरा, बंगरी, थल्ही।
 साना खोलासभ:- काट खोला, टेन्ग्रहर, सिर्सींया, भुटिया नाला, कोरिया नाला, सिलपैत नाला, बिजौरी खोला, सिंगहा नाला, भेडाहा नाला, भुतहिखोला।
 प्रमुख तालसभ:- हलखोरिया दह, झरोखर पोखरी, शिव सरोवर, ईटाहि पोखरी,कवहीपोखरी, सन्तगजपोखरी देवापुर पोखरी।

सिमरौनगढ,कचोर्वा, पिप्राढी, वरियारपुर, कलैया,  बेलहिया, प्रस्टोका, गंजभवानीपुर, फेटा, प्रसौनी, परवानीपुर, जीतपुर, सिमरा, डुमरवाना, अमलेखगंज, निजगढ, कोल्भी, कवहीगोठ, रतनपुरी आदि।




#Article 505: निजगढ नगरपालिका (373 words)


निजगढ बारा जिलाम अवस्थित एकटा नगरपालिका छी । साबिक निजगढ गाबिसक बजार रहल ठाँमक क केन्द्र बनेन अछि । ई नगरपालिका घोषणा करैत निजगढ,भरतगंज सिङगोल आर रतनपुरी गाउँ विकास समितिसभ समावेश कएल गेल अछि । नेपालम आब महानगरपालिका, उपमहानगरपालिका आर नगरपालिका आर अब मुलुकम कूल १३० भेल अछि वोहिना गाविसक संख्या ३ हजार ९ सय १५ सँ घैटक ३ हजार ६ सय ३३ भेल अछि । बारा जिलाक महेन्द्र राजमार्गम अवस्थित निजगढ बजार सेहो क्षेत्रक प्रमुख बजार छी ।

विश्वक मानचित्रमा २६°२३°.उत्तर सँ ३०°२७° उत्तरी आऋश तक आर ८०°४’ पुर्व सँ ८८°१२’ पुर्वि देशान्तर तक रहल नेपालक राजनैतिक विभाजन अनुसार पाँच बिकास क्षेत्र, चौध अञ्चल आर पचहत्तर जिला तथा महानगरपालिका, उपमहानगरपालिका आर नगरपालिका  जम्मा १३० आर ३,६३३ गा.बि.स.सभम विभाजित भेल  अनुसार मध्यमाञ्चल विकाश क्षेत्रक नारायणी अञ्चलक बारा जिलाक उत्तरी सिमामा अवस्थित एकटा आदर्श गाँउ विकास समिति छि निजगढ । बारा जिला उत्तरीभागमा स्थित पुर्व पश्चिम करिब ४ कि.मि फैलावट भेल निजगढक पुर्वम भरतगंज सिङगोल, पश्चिममा रतनपुरी, दक्षिणमा सपही आर उत्तरमा मकवानपुर जिलाक धियाल गाविससभ अवस्थित अछि । निजगढक पश्चिममा बकैया खोला आर पुर्वम भमरा खोला अवस्थित अछि ।

निजगढमा कहिले देखि बस्ती बसेको हो भन्ने बारेमा कुनै ठोस ऐतिहासिक तथ्य फेला परेको छैन केवल किँवदन्तीको आधारमा निजगढ ३०० वर्ष भन्दा पुरानो बस्तिको भन्ने जानकारी आउँछ । निजगढको ऐतिहासिक नालिबेलिको खोजी कुनै गतिलोसँग भएको छैन तैपनि निजगढ बारे जानकारी तयार पार्नु भन्दा पहिले अनुसन्धानहरको आधारमा निजगढका आदिवासी कछडियाहरू मुसलमानहरूको आक्रमाणहरूबाट जोगिन ३०० बर्षभन्दा अघि नै यहाँ जङ्गलको बिचमा आएर बसोबास गर्न थालेको जानकारीमा आउँछ । निजगढको नामाकरण सम्बन्धमा पनि स्पष्ठ प्रमाण फेला पर्न सकेको छैन तर पनि निजगढ कुनै न कुनै ऐतिहासिक यद्धका गढहरूसँग सम्बन्धित रहेको कुरा भन्ने अडकल गर्न सकिन्छ । तयस्तै बि.स २०२४/२५ साल तिर महेन्द्र राजमार्ग बनेपछी र त्यसपछी हेटौडाबाट सट्टा भर्ना पाएर आएका मानिसहरूको बसोबास भऐपछी निजगढ झन फराकीलो भयो ।

जनसङ्ख्याक दृष्टीले बारा जिला निजगढ सबस बेसी जनसङख्या भेल नगरपालिका मध्ये एक छी । २०६८ क जनगणनाक आधारम निजगढक जनसंख्या जम्मा ३५,३३५ रहल अछि । निजगढम बसोबास  जातिसभम मुलत : वाहुन क्षेत्रिसभक प्राधाम्यता भेला तहिना तामाङ्गहरूको बसोबास सेहो कम नै अछि । यि बाहेक कछडिया,नेवार,कामी,दमाई मगर,माझी,दनुवार तथा अन्य जातियसभक बसोबास सेहो निजगढम अछि ।

निजगढ,भरतगंज सिङगोल आर रतनपुरी गाविससभ मिलाक निजगढ नगरपालिका बनावाल गेल छल । तहिना बि.स.२०६८ क जनगणना अनुसार ई ठामसभक जनसंख्याक जोडिक ३५,३३५ रहेल अछि  ।




#Article 506: सिम्रौनगढ नगरपालिका (150 words)


सिम्रौनगढ नगरपालिका नेपालक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत नारायणी अञ्चलम अवस्थित बारा जिलाम अवस्थित एकटा नगरपालिका छी ।स्थानीय विकास मन्त्रालयल थप ६१ टा नयाँ नगरपालिका थप करैतकाल बाराम गोलागञ्ज, अमृतगञ्ज, हरिहरपुर आर उचिडिह गाउँ विकास समितिसभ समेटक सिम्रौनगढ नगरपालिका घोषणा केनेए छल। सिम्रौनगढ नगरपालिकाको केन्द्रभने साविकको सिम्रौनगढ बजार रहको छ। नगरपालिकाको घोषणा र क्षेत्रविस्तारसँगै मुलुकमा १ महानगरपालिका, ११ उपमहानगरपालिका, १ सय ७९ नगरपालिका र ३ हजार २ सय ७८ गाविस कायम भएका छन्। नयाँ नगरपालिका थपिएपछि नेपालको सहरी जनसंख्याको प्रतिशत ३६ दशमलव ८ पुगेको मन्त्रालयले जनाएको छ।

सिम्रौनगढ नगरपालिका गोलागञ्ज, अमृतगञ्ज, हरिहरपुर आर उचिडिह गाविससभ मिलक बनल अछि। तहिना राष्ट्रिय जनगणना २०६८ अनुसार गोलागञ्ज, अमृतगञ्ज, हरिहरपुर र उचिडिह गाविसहरूको जनसंख्यालाई जोड्दा सिम्रौनगढ नगरपालिकाको कूल जनसङ्ख्या २४,६१५ हुन्छ।

ऐतिहासिक स्थल तथा व्यापारिक दृष्टिकोणले प्रख्यात सिम्रौनगढमा अखनतक एकटा बैंक नै अछि । सिम्रौनगढ नगरपालिका घोषणा भेल सिम्रौनगढवासी बहुत खुश अछि तहिना नगरपालिकाक पूर्वाधार तयार बनवाक क्रमम  सरकार देखावेवाला उदासीनताप्रति आम जनता आक्रोशित अछि।




#Article 507: महागढीमाई नगरपालिका (147 words)


महागढीमाई नगरपालिका नेपालक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत नारायणी अञ्चलम अवस्थित बारा जिलाम अवस्थित एकटा नगरपालिका छी।

स्थानीय विकास मन्त्रालय थप ६१ टा नयाँ नगरपालिका बढेवाक बाराम बरियारपुर, दहियार, बगुआइन, पत्थरहटटी, तेलकुवा आर गंजभवानीपुर गाविससभ समेटक महागढीमाई नगरपालिका घोषणा केनेइ।  महागढीमाई नगरपालिकाको केन्द्रभने बरियारपुर गाविसको कार्यालय रहको छ। नगरपालिकाको घोषणा र क्षेत्रविस्तारसँगै मुलुकमा १ महानगरपालिका, ११ उपमहानगरपालिका, १ सय ७९ नगरपालिका र ३ हजार २ सय ७८ गाविस कायम भएका छन्। नयाँ नगरपालिका थपिएपछि नेपालको सहरी जनसंख्याको प्रतिशत ३६ दशमलव ८ पुगेको मन्त्रालयले जनाएको छ।

महागढीमाई नगरपालिका बरियारपुर, दहियार, बगुआइन, पत्थरहटटी, तेलकुवा आर गंजभवानीपुर  गाविससभ मिलक बनल अछि। तहैना राष्ट्रिय जनगणना २०६८ अनुसार ६ ठामक जनसंख्या जोडिक महागढीमाई नगरपालिकाक जनसङ्ख्या जोडिक ३९,९७० हेताई।

ऐतिहासिक स्थल तथा व्यापारिक दृष्टिकोणस प्रख्यात महागढीमाई गढ़िमाई मन्दिरके कारण बहत प्रचलित अछि । महागढीमाई नगरपालिका घोषणा भेल सिम्रौनगढवासी बहुत खुश अछि तहिना नगरपालिकाक पूर्वाधार तयार बनवाक क्रमम  सरकार देखावेवाला उदासीनताप्रति आम जनता आक्रोशित अछि।




#Article 508: कोल्हवी नगरपालिका (116 words)


कोल्हवी नगरपालिका नेपालक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत नारायणी अञ्चलम अवस्थित बारा जिलाम अवस्थित एकटा नगरपालिका छी।

स्थानीय विकास मन्त्रालयले थप ६१ टा नयाँ नगरपालिका बढेवाक क्रममा बाराम सपही, कोल्हवी, ककडी आर प्रसौना गाविससभक समेटक कोल्हवी नगरपालिका घोषणा केनए छल। कोल्हवी नगरपालिकाको केन्द्रभने साविकको कोल्हवी गाविसको कार्यालय नै रहको छ। नगरपालिकाको घोषणा आर क्षेत्रविस्तारसँगै मुलुकम १ महानगरपालिका, ११ उपमहानगरपालिका, १ सय ७९ नगरपालिका आर ३ हजार २ सय ७८ गाविस कायम भेल अछि। नयाँ नगरपालिका जोडिक  नेपाल सहरी जनसंख्या प्रतिशत ३६ दशमलव ८ पहुचल मन्त्रालयल जनाउने अछि।

कोल्हवी नगरपालिका सपही, कोल्हवी, ककडी आर प्रसौना गाविससभ मिलक बनल अछि। तहिना राष्ट्रिय जनगणना २०६८ अनुसार सपही, कोल्हवी, ककडी आर प्रसौना गाविससभक जनसंख्यालाई जोड्मे कोल्हवी नगरपालिकाको कूल जनसङ्ख्या २३,७६५ अछि।




#Article 509: गौशाला नगरपालिका (137 words)


गौशाला नगरपालिका नेपालक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत जनकपुर अञ्चलमs रहल महोत्तरी जिल्लाम अवस्थित एकटा नगरपालिका छी । गौशाला बजार रहल ठामसभक नगरपालिकाक केन्द्र बनाएल गेल अछि । यी नगरपालिका २०६८ साउन १ सँ लागू भेल लेकिन कार्यन्वयनम हाल २०७१ जेष्ठ ४ सँ आएल अछि । अहि नगरपालिका घोषणा करैत गौशाला, निगौली आर रामनगर गाउँ विकास समितिसभ समावेश केएने अछि । आर्थिक वर्ष २०६८/६९क बजेटमार्फत् मुलुकमे ४१ नयाँ नगरपालिका थपैत गौशाला सेहो नगरपालिका बनल अछि । महानगरपालिका, उपमहानगरपालिका आ नगरपालिका करैत आब मुलुकमs कूल १३० भेल अछि आर गाविससभक संख्या ३ हजार ९ सय १५ सँ घटिक ३ हजार ६ सय ३३ भेल छैक ।

गौशाला, निगौली आर रामनगर गाविससभ मिलाक गौशाला नगरपालिका बनौने अछि । तही दुवारे बि.स.२०६८क जनगणना अनुसार यी ठामसभक जनसंख्याक जोडि गौशाला नगरपालिकाक जनसङ्ख्या ३२,१११ रहल अछि । गौशाला नगरपालिकामा ५,७१८ घरधुरि छै ।




#Article 510: वड़ोदरा (368 words)


वड़ोदरा (: /ʋə'ɽod̪əɾa/),  (पूर्व नाम : बडौदा ) गुजरात राज्यक तेसर सबसँ बेसी जनसङ्ख्या भेल शहर छी । ई एक शहर छी जतेक महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय अपन सुन्दर वास्तुकलाक लेल जानल जाइत अछि । वड़ोदरा गुजरातक एक महत्त्वपूर्ण नगर छी । वड़ोदरा शहर, वड़ोदरा जिलाक प्रशासनिक मुख्यालय, पूर्वी-मध्य गुजरात राज्य, पश्चिम भारत, अहमदाबादक दक्षिण-पूर्वमे विश्वामित्र नदीक तटमे अवस्थित अछि । वड़ोदराके बडौदा सेहो कहल जाइत अछि । एकर सबसँ पुरानो उल्लेख सन् ८१२ क अधिकारदान या राजपत्रमे अछि, जाहिमे एकरा वादपद्रक बताएल गेल अछि । ई क्षेत्रके जैनिसभक कब्जासँ मुक्त करेनिहार दोर राजपूत राजा चन्दनक नाममे शायद एकरा चन्दनवटीक नामसँ सेहो जानल जाइत छल । समय-समयमे ई शहरक नव नामकरण होइत गेल, जेना वारावती, वातपत्रक, बडैदा आ सन् १९७१ मे वड़ोदरा नाम राखल गेल ।

इतिहासमे ई शहरक पहिल उल्लेख सन् ८१२ मे ई क्षेत्रमे आबि बैसल व्यापारीसभक समयसँ भेटल अछि । सन् १२९७ मे ई प्रान्त हिन्दू शासनक अधिन हिन्दूसभक वर्चस्वमे छल । ईसाई यूगक प्रारम्भमे ई क्षेत्र गुप्तवंशक साम्राज्यक अधीन छल । भयङ्कर युद्धबाद, ई क्षेत्रमे चालुक्य वंशक सत्ता कायम भेल आ एकर आधिन भऽ गेल । अन्तमे, ई राज्यमे सोलङ्की राजपूतसभ कब्जा केलक । ई समयधरि मुस्लिम शासन भारत वर्षमे फैलल छल आ देखते देखते वड़ोदराक सत्ताक बागडोर दिल्लीक सुल्तानसभक हात चलि गेल । वड़ोदरामे दिल्लीक सुल्तानसभ एक लम्बा समयधरि शासन केलक, जाबे धरि ओ सभ मुगल सम्राटसभद्वारा परास्त नहि भऽ गेल । मुगलसभक सबसँ पैग समस्या मराठा शाषक छल जे कनिक कनिक करि मुदा अन्ततः ई क्षेत्रमे अपन राज्य स्थापित केलक आ ई मराठा वंश गाइकवाडक राजधानी बनल । सर सयाजी राव गाइकवाड (१८७५-१९३९) III, एहि वंशक सबसँ सक्षम आ लोकप्रिय शासक छल आ ओ ई क्षेत्रमे बहुतेक सरकारी आ नौकरशाही सुधार करैमे सफल भेल । ब्रिटिश राजक समयमे भारतक बहुतेक क्षेत्रमे ब्रिटिशसभक प्रभाव छल मुदा बडोदरा भारतक स्वतन्त्रताधरि एक शाही राज्य बनल रहल । बहुतेक अन्य रियासतसभ जका, बडोदरा राज्य सेहो सन् १९४७ मे गणतन्त्र भारतमे शामिल भऽ गेल ।

ई शहरमे उत्पादित होमएवला विभिन्न प्रकारक वस्तुसभमे सूती वस्त्र तथा हथकरघा वस्त्र, रसायन, दियासलाई, मसिनसभ आ फर्नीचर शामिल अछि ।

वड़ोदरा एक रेल आ मेर्ग जङ्क्सन छी तथा एतय एक विमेनस्थल सेहो अछि ।

सन् २००१ क भारतक जनगणना अनुसार वड़ोदरा शहरक जनसङ्ख्या १३,०६,०३५ अछि आ बडोदरा जिलाक कुल जनसङ्या ३६,३९,७७५ अछि ।




#Article 511: भरदुतिया (165 words)


भाई-बहिनक स्नेह, प्रेम ,सुभाशीष आ मधुरता सँ भरल ई महान पावनि थिक भरदुतिया । भाई-बहिनक प्रेमकऽ प्रतीक भरदुतिया (भ्रातृ द्वितीया) कऽ पावनि दीवाली कऽ दू दिनक बाद, कार्तिक मासक शुक्ल पक्ष केर द्वितीया तिथिकेँ मनाओल जाईत अछि । एहि पावनिमे बहिन भाईकेँ निमन्त्रण दऽ केँ अप्पन घर बजावैत छथि । अरिपन बना कऽ पिड़ही पर भाईकेँ बैसायल जाईत अछि । ललाठ पर पिठार आ सिन्दुरक ठोप कऽ, पान सुपारी भाईकेँ हाथमे दऽकेँ बहिन एही पन्तीक उचारण करैत छथि “गङ्गा नोतए छैथ यमुनाके, हम नोतए छी भाईकेँ! जहिना जहिना गङ्गा-यमुनाकेँ धार बहए, तहिना हमर भाए सभहक औरदा बढ़य” आ हुनक दीर्घायु जीवनक कामना यमराज सँ करैत छथि, फेर भाईकेँ मुंह मिठ कएल जाईत अछि । भाई अप्पन साम‌र्थ्यक अनुसार बहिनकेँ उपहार प्रदान करैत छैथ । कहल जाएत अछि जे यमराजक बहिन कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया केँ हुनका निमन्त्रण देनए छलीह । ताहि सँ यमराज प्रसन्न भेल छलाह । तहिआ सँ ई प्रथा चलि रहल अछि । मिथिलामे ई पावनि घरे-घर उल्लासक सङ्ग मनाओल जाईत अछि ।




#Article 512: कामाख्या मन्दिर (162 words)


कामाख्या मन्दिर (); वा कामरूप-कामाख्या एक हिन्दू मन्दिर छी जे कामाख्या माताके समर्पित अछि । ई ५१ शक्ति पीठमे सँ सभसँ पुरान शक्ति पीठ छी । ई मन्दिर भारतक असाम राज्यक गुवाहाटी शहरक निलाचल पर्वतपर अवस्थित अछि । ई परिसरमे मुख्य मन्दिर सहित काली, तारा, सोदाशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धुमावती, बगलामुखी, मातङ्गी आ कमला करि १० महाविद्याक मन्दिरसभ अछि । ई मन्दिरसभ संगहि शिव आऔर विष्णुक संग-संग गणेश, हनुमान आदि देवता लोकनिक मन्दिर सेहो एतय अवस्थित अछि।

कामाख्या मंदिरक महत्ता एतेक महत्वपूर्ण अहिलेल जे प्राचीनकाल सँ वर्तमान धरि तंत्र सिद्धि हेतु ई प्रमुख साधना स्थल केर रूप मे विख्यात रहल अछि। संगहि आद्याशक्ति भैरवी कामाख्या सर्वदा कौमारी रुप में विद्यमान छथि एतय। अत: कामाख्याधाम विश्वक सर्वोच्च कौमारी तीर्थ सेहो मानल जाएत अछि। सब जातिक कुमारी वंदनीय छथि। एहिठाम कुमारि पूजन और अनुष्ठानक बड्ड बेसी महत्व अछि। तैं एहिठाम वास्तविक जीवन में सेहो बिना कुनो जातिगत भावना केँ स्त्री शक्ति वंदनीय थिकिह एवं आसाम में स्त्रीक प्रधानता बड्ड बेसी अछि सेहो सर्वविदिते अछि।




#Article 513: अहमदाबाद (430 words)


अहमदाबाद वा अमदाभाद (; गुजराती उच्चारण: ) भारतक गुजरात प्रदेशक सबसँ पैग शहर आ पुरान राजधानी छी । ई अहमदाबाद जिलाक मुख्यालय आ गुजरात उच्च न्यायालयक सदन छी । समस्त भारतक पैग नगरसभमे छठम आ सातम सभसँ पैग महानगरीय क्षेत्र छी । ६३ लाखको जनसङ्ख्या भेल ई शहर, साबरमती नदीक किनारमे अवस्थित अछि । पहिने गुजरातक राजधानी याह रहल छल बादमे राजधानी गान्धीनगरमे स्थानान्तरण कएल गेल । अहमदाबादके कर्णावती क नामसँ सेहो जानल जाइत अछि । ई शहरक आधारशिला सन् १४११ मे बैसाएल गेल छल । ई शहरक नाम सुलतान अहमद शाहक नाममे राखल गेल अछि ।

अहमदाबादक नाम सुल्तान अहमद शाहक नाममे राखल गेल अछि । सुल्तान अहमद शाहद्वारा ई शहरक स्थापना सन् १४११ मे केनए छल । ई शहरके भारतक म्यानचेस्टर सेहो कहल जाइत अछि । वर्तमान समयमे, अहमदाबाके भारतक गुजरात प्रान्तक आर्थिक राजधानी होमएक संगे एकटा प्रमुख उद्योगिक शहरक रूपमे चिनहल जाइत अछि ।

ऐतिहासिक रूपमे, भारतीय स्वतन्त्रता सङ्घर्षक समयमे अहमदाबाद प्रमुख आधार शिविर रहल छल । याह शहरमे महात्मा गान्धी साबरमती आश्रमक स्थापना केनए छल आ  भारतीय स्‍वतन्त्रता सङ्घर्षमे जुड़ल बहुतेक आन्‍दोलनक शुरुवात सेहो याह ठामसँ भेल छल । अहमदाबाद बुनाईक लेल सेहो बहुतेक प्रसिद्ध अछि । एकर साथ ई शहर व्यापार आ वाणिज्य केन्द्रक रूपमे विकसित भ रहल अछि । अङ्ग्रेजी शासनक अवधिमे, ई ठामके फौजी मुख्यालयक रूपमे प्रयोग कएल जाइत छल । 

पश्चिम भारतमे अवस्थित ई शहर, समुद्र सतहसँ १७४ फिटक उचाईमे अवस्थित अछि । शहरमे दुईटा ताल अछि- कङ्करिया आ वस्त्रापुर ताल । साबरमती नदी गर्मीक मौसममे सुखैक कारण, नदीक ठाममे साफ माटि रहैत अछि । वर्षाक महिना वाहेक पुरे साल गर्मीक माहौल रहैत अछि । गर्मी मौसममे सबसँ उच्च तापमान ४७ डिग्री आ जाड़क समयमे कममे ५ डिग्री तापमान पहुँचैत अछि । 

अहमदाबाद नगरपालिका निगम ई शहरके देख रेखक काम करैत अछि आ किछ भाग औडाद्वारा प्रशासित अछि । 

एतय सरदार वल्लभभाई पटेल विमानस्थल अछि । ई प्रमुख भारतीय शहरसभक साथ साथे विदेशसभक शहरसभके जोडैत अछि जेना कोलम्बो, मसकट, लण्डन आ न्यू योर्क शहर । 

अहमदाबाद स्टेशन देशके लगभग सब प्रमुख स्‍टेशसभसँ सीधा जुडल अछि ।

अहमदाबादक दूरी मुम्‍बईसँ लगभग ५४५ किलोमिटर तथा राष्ट्रिय राजधानी दिल्‍लीसँ ८७३ किलोमिटर अछि । एतय मुम्‍बईसँ बसद्वारा सेहो जाएल जा सकैत अछि ।

अहमदाबादमे भ्रमण कर लायक बहुतेक स्थलसभ अछि । एहिमे किछ आधुनिक अछि आ किछ पौराणिक सेहो अछि । 

ई तालक निर्माण कुतुब-उद्-दीनद्वारा सन् १४५१ मे कराएल गेल छल । वर्तमान समयमे अहमदाबादक निवासीसभक बीच ई ठाम सबसँ बेसी प्रसिद्ध अछि । ई तालक चारोदिस  बगैचा लगाएल गेल अछि । तालक मध्य भागमे बहुतेक सुन्दर सुन्दर द्वीप महल अछि । जतय मुगल कालक समय नूरजहां आ जहांगीर प्रायजसो घुमफिर करै लेल आबैत छल ।




#Article 514: जयपुर (221 words)


जयपुर  जकरा गुलाबी नगरक नामसं सहो जानल जाइट अछि, भारतमे राजस्थान राज्यकs राजधानी छी। आमेरक तौर पर यी जयपुर नामसं प्रसिद्ध प्राचीन रजवाड़े कs सहो राजधानी रहल छै। यी शहरकs स्थापना १७२८मे आमेरकेर महाराजा जयसिंह द्वितीय क्एने छल। जयपुर अपन समृद्ध भवन निर्माण-परम्परा, सरस-संस्कृति आ ऐतिहासिक महत्वके लेल प्रसिद्ध अछि। जयपुर शहरक पहचान अही ठामके महलसभ आ पुरान घरसभमे लागल गुलाबी धौलपुरी पत्थरसभसं होइत अछि जेकी अही ठामके स्थापत्यक खूबी छी। १८७६में तत्कालीन महाराज सवाई रामसिंह इंग्लैंडक महारानी एलिज़ाबेथ प्रिंस ऑफ वेल्स युवराज अल्बर्टके स्वागतमे समुचा शहर कs गुलाबी रंगसं आच्छादित करवा देने छल। ताहीसं शहरक नाम गुलाबी नगरी पड़ल अछि।

सत्रहवीं शताब्दीमे जब मुगल अपन ताकत खतम होइत देखलक, तs समूचा भारतमे अराजकता सिर उठाब लागल, अही समयमे राजपूतानाक आमेर रियासत, एकटा बडका ताकतके रूपमें उभरल.जाहिर अछि कि महाराजा सवाई जयसिंह कs तब बहुत पैग दायरामे फैलल अपन रियासत संभालकs आ सुचारु राजकाज संचालनके लेल आमेर छोट लागs लागल आर अही तरहसं यी नव राजधानीके रूपमे जयपुरक कल्पना कएल गेल छल | अही शहर कs नींव पहिल बेर कोन जगह राखल गेल, एकर बारेमे मतभेद अछि, किंतु किछ इतिहासकारसभके अनुसार तालकटोराके निकट स्थित शिकार की होदीसं अही शहरके निर्माणक शुरुआत भेल। किछ एकरा ब्रह्मपुरी आ किछ आमेरक लगमे एकटा स्थान 'यज्ञयूप' स्थलसं मानैत अछि| पर यी निर्विवाद छै संबसं पहिल चन्द्रमहल बनल आर बाधमे बाज़ार आ साथमे तीन चौपड़ |




#Article 515: नागपुर (125 words)


नागपुर (अंग्रेज़ी: Nagpur, मराठी: नागपूर) महाराष्ट्र राज्यकs एक प्रमुख शहर छी। नागपुर भारतके मध्यमे स्थित छै। महाराष्ट्र कs यी उपराजधानीकs जनसंख्या २४ लाख (१९९८ जनगणना के अनुसार) अछि। नागपुर भारतकs १३हम आ विश्वक ११४हम सबसं बड़का शहर छी। नागपुरक लगभग आधा आबादी मराठी भाषा बोलैत अछि। यी नगर संतरा,सम्तोलाके लेल बहुत मशहूर अछि। अही कारण एकरा लोगसभ संतरा,सम्तोलाक नगरी सहो कहैत अछि।

हालेमे अही शहर कs भारत देशके सबसं स्वच्छ आ सुन्दर शहरक इनाम मिलल अछि। नागपुर भारत देशक दोसर नंबर कs ग्रीनेस्ट (हरित शहर) शहर मानल जाइत अछि। बिकास इन्फ्रास्ट्रकचरक कारनसं नागपुरक गिनती जल्दी महानगरसभमे कएल जाएत।

नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) आर विश्व हिंदू परिषद जकाँ राष्ट्रवादी संघटनसभक एक प्रमुख केन्द्र छी। 

नागपुर का स्थान २१°०६' उत्तर अक्षांश, ७९° ०३' पूर्व रेखांश है।




#Article 516: तिरुचिरापल्ली (321 words)


तिरुचिरापल्ली (tiruchirāppaḷḷi) () तिरुची वा त्रिचीक नामसँ प्रसिद्ध, भारतक दक्षिणी राज्य तमिलनाडुक शहर आ तिरुचिरापल्ली जिलाक मुख्यालय छी । ई तमिलनाडु राज्यक चारिम पैग नगर निगम आ चारिम बेसी जनसङ्ख्या भेल नगर छी । ई चेन्नईसँ  दक्षिणमे आ कन्याकुमारीसँ  उत्तरमे अवस्थित अछि । ई तमिलनाडु राज्यक मध्यमे अवस्थित रहल अछि । ई शहर कावेरी नदीक तटमे बैसाएल गेल अछि । ई स्थान विशेष रूपसँ विभिन्न मन्दिरसभ जना श्री रङ्गानाथस्वामी मन्दिर, श्री जम्बुकेश्‍वरा मन्दिर आ वरैयुर आदिक लेल प्रसिद्ध अछि । शहरक मध्य भाग अर्थात  पश्चिमसँ कावेरी नदी बहैत अछि । सन् २०११ क भारतक जनगणना अनुसार ई शहरक जनसङ्ख्या ९,१६,८५७ रहल अछि ।

वर्तमान समयमे तिरूचिरापल्लीक एक महत्‍वपूर्ण भाग वरैयुर छी, इशापूर्व ३००० मे ई चोल साम्राज्‍यक राजधानी छल । तिरूचिरापल्लीमे किछ समय मुगल शासकसभ सेहो राज्य केलक । एकर पश्चात् एतय विजयनगरक शासकसभ कब्जा केलक ।

ई मन्दिर कावेरी नदीक मध्य स्थित श्री रङ्गम द्वीपमे अवस्थित अछि । ई मन्दिरक निर्मेण चेर, पाण्डेय, चोल, होयसल आ विजयनगरक शासकसभद्वारा कराएल गेल अछि । ई मन्दिरक निर्माण १३अम आ १८अम शताब्दीमे कराएल गेल छल ।

ई मन्दिर श्री रङ्गानाथस्वामी मन्दिरक पूर्वमे २.५ किलोमिटरक दूरीमे अवस्थित अछि । ई मन्दिरक वास्तुकला बहुतेक सुन्दर अछि । ई मन्दिरक मध्य प्राङ्गण भव्य आ विशाल अछि । ई मन्दिर सन् १६०० मे निर्माण कएल गेल अछि । 

ई भगवान शिवक मन्दिर छी । ई मन्दिर श्रीरङ्गमक पूर्व सँ ६ किलोमिटरक दूरीमे अछि । 

ई स्थान ऐतिहासिक दृष्टिसँ बहुतेक महत्वपूर्ण अछि । ई चोल वंशक राजधानी छल । त्रिची हाथसँ बनल सिगार आ साडीसभक लेल प्रसिद्ध अछि । वरैयुरक हातसँ बनल सिगार पुरै विश्‍वमे प्रसिद्ध अछि ।

ई मन्दिर कावेरी नदीक किनारमे अवस्थित अछि । ई स्थान समुद्र सतहसँ २७२ फिटक उचाईमे अवस्थित अछि । ई मन्दिरमे ४३७ सिढीसभ रहल अछि । ई मन्दिर भगवान विनायक (पौराणिक कथाक अनुसार आधा पुरूष, आधा पक्षी गरूड, जे भगवान विष्णुक वाहन छी, एकर सङ्केत प्रसिद्ध महाकाव्यमे सेहो उल्लेखित अछि)के समर्पित अछि । ई मन्दिरक मार्गमे अन्य मन्दिरसभ स्थापित अछि ।




#Article 517: पुणे (248 words)


पुणे भारतके महाराष्ट्र राज्यकs एक महत्त्वपूर्ण शहर छी। यी शहर महाराष्ट्रके पश्चिम भाग, मुला आ मूठा इ दुनु नदिसभके किनार बसल अछि आर पुणे जिलाक प्रशासकीय मुख्यालय छी। पुणे भारतक छठम सबसं बड़का शहर आ महाराष्ट्र कs दोसर सबसं बड़का शहर छी। सार्वजनिक सुखसुविधा आ विकासके हिसाबसं पुणे महाराष्ट्रमे मुम्बईके बाद अग्रसर छै। अनेक नामांकित शिक्षणसंस्थासभ होइके कारण इ शहरक 'पूरब कs ऑक्सफोर्ड' सहो कहल जाइत अछि। पुणेमें अनेक प्रौद्योगिकी आर ऑटोमोबाईल उपक्रम अछि, अही कारन पुणे भारतक ”डेट्राइट” जकाँ लागैत अछि। काफी प्राचीन ज्ञात इतिहाससं पुणे शहर महाराष्ट्र कs 'सांस्कृतिक राजधानी' मानल जाइत छै। मराठी भाषा इ शहरक मुख्य भाषा छी।

पुणे यह नाम 'पुण्यनगरी' नामसं आएल समझल जाइत छै । इ शहर ई.स. ८ के शतकमे 'पुन्नक' (या 'पुण्यक') नामसं जानल जाइत छल, एहन सन्दर्भ मिलैत अछि। ई.स. ११के शतकमे 'कसबे पुणे' आ 'पुनवडी' नामसं जानल जाई लागल। मराठा साम्राज्यके काल खण्डमे शहरकs नाम 'पुणे'के रूपमे उपयोगमे लाबलक । ब्रिटिशसभ एकरा 'पूना' कहि कs संबोधित करsक सुरुआत केलक। आब इ पुणे, अही आधिकारिक नामसं जानल जाइत अछि।

आठहम शताब्दीमे पुणे कs पुन्नक नामसं जानल जाइत छल। शहरक सबसं पुरना वर्णनइ.स. ७५८क छै, जब उ कालके राष्ट्रकूट राजमे एकर उल्लेख मिलैत अछि । मध्ययुग कालक एक प्रमाण जंगली महाराज मार्ग पर पाओल जाइ वला पातालेश्वर गुफा अछि, जे आठ्हम सदी कs मानल जाइत अछि।

पुणे कs स्थान 18°31'22.45 उत्तर अक्षांश, 73° 52' 32.69 पूर्व रेखांश अछि।

पुणेमे महत्वपूर्ण कम्पनीसभके मुख्यालय -

इ शहर पुणेके भगिनी शहर छी -

अही ठाम बहुतो पर्यटक आकर्षण अछि। जहीमेसं किछ अछि:-

 




#Article 518: नेपालगञ्ज उपमहानगरपालिका (304 words)


नेपालगन्ज उप महानगरपालिका मध्य-पश्चिमाञ्चल विकासक्षेत्रक भेरी अञ्चलक बाँके जिला पर्ने नेपालक एक प्रमुख शहर छी।
 भारतक रुपैडिया सिमाना नजिक अवस्थित ई सहर दुई देश बिचक ब्यापार सम्बन्धक कारणसँ सेहो महत्वपूर्ण अछि।

ई सहर पूर्व-पश्चिम राजमार्गक कोहलपुर चोकसँ १६ किलोमिटर दक्षिणम अवस्थित अछि। सहरक बिच भागमा वीरेन्द्र चोक अछि। तहिना धम्बोजी, त्रिभूवन-चोक, बी.पी. चोक अहिठामक ब्यापारिक केन्द्र छी। नेपालक पश्चिमी भेगक लेल ई सहर यातायात आर आर्थिक कारोबारक हिसाबसँ महत्वपूर्ण केन्द्र छी। अहिठाम नेपाल राष्ट्र बैङ्क लगायत आउर बाणिज्य आर विकास बैङ्कहरूका शाखा अछि। ई सहर समुद्री सतह सँ १५० मिटर उपर अवस्थित अछि। ई सहर नेपालक सबसँ बेसी गर्मी होएवाला सहरसभ मध्येको एकटा छी। गर्मी मौसमम अहिठामक वायुक तापक्रम ४२ डिग्रि सेल्सियस तक पहुंच जायेत अछि । मध्यपश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्रक प्रमुख व्यापारिक केन्द्र छी।

ई सहर संस्कृतिक आर धार्मिक दृस्टिकोणले निक्क तरिकासँ विभिधतापूर्ण अछि । अहिठामक बासिन्दासभ हिन्दू, मुसलमान, बौद्ध लगायत आर बहत धर्मम आस्था रखैत अछि। तहिना,अहिथामक बासिन्दासभ विभिन्न सम्प्रदाय, जात-जाती आर मूलक अछि। ई सहर नेपालक शान्तिपूर्ण बहूसांस्कृतिक सहर हो आर अहिठामक लोगसभ एक आपसमा निक सौहार्दपूर्ण वातावरणमा रहैत अछि। 

मुदा ६३ सालमा मधेसी आर पहाडियासभ बिच दङ्गा भड्किँ एक गोटेक मृत्यु आर दर्जनौ धाईते भेल छल ।ई घटना पहिल पटक नेपालगन्जक बिभिन्न जात-जाती बिच शान्ति कायम अछि से धारणाक गलत बनावालक।

सहरक मध्यभाग नजीक रहेल बागेश्वरी मन्दिर निक्कै प्रशिद्ध हिन्दू स्मारक छी। ई मन्दिर प्राङ्गण नजीक रहेल पोखरिक बिचम जुङ्गे महादेवको मुर्ती रहल अछि। ई मुर्तीम महादेवक मोछ अछि,जे आश्चर्य के बात छी । पर्यटकीयस्थल महेन्द्रपार्क तथा छोट चिडियाखाना आर रानी तलाउक आकर्षण भेल नेपालगन्ज नगरपालिकाम १० हजार ५ सय ९२ घरधुरी संख्या अछि।

विक्रम सम्बत् २०१७ म स्थापित नेपालगन्ज नगरपालिकाम अखनतक १० नगर पिताक कार्यभार सम्हालने अछि। नगरप्रमुखक रूपमा प्रतिनिधित्व करेईमा क्रमशः मूलचन्द्र आजाद (स्वर्गीय), कृष्णजङ्ग शाह (स्वर्गीय), गीता राणा, नेमबहादुर शाक्य (स्वर्गीय), पूर्णमान आजाद, महावीरप्रसाद गुप्ता (स्वर्गीय), सफिक अहमद सिद्धिकी (स्वर्गीय), विजयकुमार गुप्ता, धवलशम्शेर राणा आर रमेश अर्याल छी।




#Article 519: औरङ्गाबाद, महाराष्ट्र (491 words)


औरङ्गाबाद भारतक महाराष्ट्र राज्यक एक महानगर छी । अजन्ता गुफा आ एलोरा गुफा विश्व सम्पदा क्षेत्रमे सूचीवद्ध भेला कारणसँ ई एक महत्वपूर्ण पर्यटक केन्द्र छी । औरङ्गाबाद शहर एक प्रमुख उद्योगिक शहर तथा शिक्षाक केन्द्र छी । ई एक जिला तथा क्षेत्रीय मुख्यालय सेहो छी । औरङ्गाबाद विश्‍वमे बौद्ध गुफा अजन्‍ता आ एलोरा गुफाक कारण प्रसिद्ध अछि । ई गुफासभक निर्माण २०० ईसा पूर्व सँ ६५० ईसा पूर्वमे भेल छल । 

मध्‍यकलमे औरङ्गाबाद भारतमे अपन महत्‍वपूर्ण स्‍थान राखैत अछि । औरङ्गजेब अपन जीवनको उत्तरार्द्ध एतय व्‍य‍तीत केनए छल आ औरङ्गजेबक मृत्‍यु सेहो याह स्थानमे भेल छल । औरङ्गजेबक पत्‍नी रबिया दुरानीक मकबरा एतय अवस्थित अछि । ई मकबराक निर्माण ताजमहलक प्रेरणासँ लेल गेल अछि । ताहिकारण एकरा पश्चिमक ताजमहल सहो कहल जाइत अछि ।

ई सुन्दर इमारतके स्‍थानीय लोक ताजमहलक जुड़वा रुप मानैत अछि। मुदा बाहरक लोकसभ एकरा ताजमहलक गलत नक्कल मानैत अछि । एकरा औरङ्गजेबक बेटा आजमशाह अपन माता रबिया दुर्रानीक यादमे बनेनाए छल । ई इमारत अखनो पूर्णत: सुरक्षित अवस्‍थामे अछि । याह शहरमे दोसर भवन अछि जकरा सुनहरी महल कहल जाइत अछि ।

ई पनचक्‍कीक निर्माण राजा मलिक अम्बरद्वारा कराएल गेल अछि । ई पनचक्‍कीमे पानि ६ किलोमिटरक दूरीसँ माटिक पाइपसँ आबैत छल । एकर च्याम्बरमे लोहाक पङ्खा घुमैत छल जाहिसँ ऊर्जा उत्‍पन्‍न होइत छल । ई ऊर्जाक उपयोग आटाक मिलके चलानमे कएल जाइत छल । ई मिलमे तीर्थयात्रीसभक लेल अनाज पिसल जाइत छल । याह स्‍थानमे कुम नदीक बामा तटमे बाबा शाह मुसाफिरक मजार अछि । औरङ्गजेब बाबा शाहको बहुत आदर करैत छल । ई मकबरा लाल रङ्गक साधारण पत्‍थरसँ बनाएल गेल छल । ई मकबरा सन्तक सादगीक प्रतीक छी ।

औरङ्गाबाद शहरमे बहुतेक दरवाजासभ कऽ अवशेष अखनो बाँकी अछि । ई ध्‍वंस अवशेषसभमे दिल्‍ली, जालान, पैठान तथा मक्‍क रा॓शन दरवाजा शामिल अछि । ई वाहेक बहुते भवनसभक अवशेष सहो अछि । नकोन्डा दरबार, किला अर्क तथा दामरी महल आदिक अवशेष एतय अछि । 

पुरानो शहरमे फैलल ई मस्जिद आ दरगाह लगातार उपयोगमे आबैक करण बढिया अवस्‍थ‍ामे अछि । ई भवनसभमे जामा मस्जिद प्रमुख अछि जे निजाम आ मुगल दुनूक शासन कालमे अपन महत्‍व राखैत छल । जामा मस्जिद वाहेक शाह गञ्ज मस्जिद, चौकीक मस्जिद (ई मस्जिदक निर्माण औरङ्गजेबक काकाद्वारा कराएल गेल छल) आदि इमारतसभ सहो देख योग्‍य अछि । शहरक उत्तरमे पीर इस्‍लामक दरगाह अछि । ई दरगाहमे औरङ्गजेबक शिक्षकक समाधि अछि ।

ई सुन्दर बाग औरङ्गाबादसँ २४ किलोमिटर दूर अवस्थित अछि । ई बागमे बनल बेगमक समाधि बनल अछि । बानी बेगम औरङ्गजेबक पत्‍नी छल । ई मकबरमे भव्‍य गुम्बद अछि । ई मकबरा डेक्‍कन प्रभावित मुगल वास्‍तुशैलीक सुन्दर नमूना छी ।

ई गुफासभ शहरसँ किछ किलोमिटर दूर उत्तरमे अवस्थित अछि । ई गुफासभमे बौद्ध धर्म सम्बन्धित चित्रकरी कएल गेल अछि । एतय कुल दस गुफासभ अछि जे कि पूर्व आ पश्‍िचमी भागमे बटल अछि । ई गुफासभमे चौथी गुफा सबसँ पुरान छी । ई गुफाक बनावट हिनयान सम्‍प्रदायसँ सम्बन्धित वास्‍तुशैलीमे कएल गेल अछि । ई गुफासभमे जातिक कथासभ सम्बन्धित चित्रकरी कएल गेल अछि । गुफामे बुद्धके एक जैन तीर्थङ्करक रुपमे दर्शाएल गेल अछि ।




#Article 520: जोधपुर (367 words)


जोधपुर ( ) भारतक राजस्थान राज्यक दोसर सभसँ पैग शहर छी । ई राज्यक दोसर सभसँ पैग महानगरीय क्षेत्र आ समुच्चा भारतमे ३५ अम सभसँ पेग शहर छी । ई ऐतिहासिक रजवाड़ा मारवाड़क याह नामसँ राजधानी सेहो होमैत छल । जोधपुर थार मरुभूमिक बीच अपन अनगिन्ती शानदार महलसभ, दुर्गसभ आ मन्दिरसभ भेल प्रसिद्ध पर्यटन स्थल छी ।  

वर्ष पर्यन्त चमकैत सूर्य मौसमक कारण एकरा सूर्य नगरी सेहो कहल जाइत अछि । एतय स्थित मेहरानगढ़ दुर्गके घेरैवला हजारो बुलु मकानसभक कारण एकरा नीली नगरी क नाम सँ सेहो जानल जाइत अछि । एतय अवस्थित पुरान शहरक अधिकांश भाग याह दुर्गक घेरामे बैसल अछि, जकर प्रहरी दीवारमे बहुतरास द्वार बनल अछि, ओनातँ पिछ्ला किछ दशकसभमे याह दीवारक बाहर सेहो नगरक वृहत प्रसार भेल अछि । जोधपुरक भौगोलिक स्थिति राजस्थानक भौगोलिक केन्द्रक निकट अछि, जकर कारण ई नगर पर्यटकसभक लेल राज्य भरिमे भ्रमणक लेल उपयुक्त आधार केन्द्रक कार्य करैत अछि ।

वर्ष २०१४ मे विश्वके अति विशेष आवास स्थानसभमे (मोस्ट एक्स्ट्रा अर्डिनरी प्लेसेज अफ द वर्ल्ड) क सूचीमे प्रथम स्थान पर आएल छल ।  एक तमिल चलचित्र, आई, जे कि आई धरिक भारतीय सिनेमाक सबसँ महंग चलचित्र छी ओकर छायांकन एतय भेल अछि ।

सूर्य नगरी क नामसँ प्रसिद्ध जोधपुर शहर क पहचान एहि ठाममे रहल महलसभ आ पुरान घरसभमे लागल छितरक पत्थरसभ सँ होइत अछि, पन्द्रहम शताब्दीक विशालकाय मेहरानगढ़ दुर्ग, पत्थरिली चट्टान पहाड़ीपर, मैदानसँ १२५ मिटर उचाई पर विद्यमान अछि । आठ द्वारसभ आ अनगिनत बुजसँ युक्त ई शहर दस किलोमिटर लम्बा उंच दीवारसँ घेरल अछि ।

सोलहम शताब्दीक मुख्य व्यापार केन्द्र, किलासभक शहर जोधपुर, आब राजस्थानक दोसर विशालतम शहर छी । पुरा शहरमे वैभवशाली महल, किला आ मन्दिर, एक तरफ जतय ऐतिहासिक गौरवक जीवन्त करैत अछि ओतय दोसर दिस उत्कृष्ट हस्तकलासभ, लोक नृत्य, सङ्गीत आ प्रफुल्ल लोक शहरके आओरो रङ्गीन बनाबैत अछि ।

राजस्थानमे जोधपुर शिक्षाक क्षेत्रमे बहुत आगा अछि । दुर दुरसँ विद्यार्थी एतय पठन-पाठन करैलेल आबैत अछि । जोधपुरके चार्टर्ड एकाउन्टेन्टक खान कहल जाइत अछि । सम्पूर्ण भारतमे सबसँ बेसी सिए एतयसँ निकलैत अछि । शिक्षाक लेल एतय विभिन्न विकल्प मौजूद अछि । एतय विश्व प्रसिद्ध आइआइटी, नेशनल ल युनिवर्सिटी, एम्स, काजरी, आफरी आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय अवस्थित अछि । एकर अलावा जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय तथा राजस्थान विश्वविद्यालय सेहो अछि तथा एतय वालिकासभक लेल कलेजसभ सहो अछि । 




#Article 521: भोपाल (272 words)


भोपाल भारत देशमे मध्य प्रदेश राज्य]क राजधानी छी आर भोपाल ज़िला कs प्रशासनिक मुख्यालय सेहो छी। भोपालक झीलसभ कs नगरी सेहो कहल जाइत अछि कियाकी अही ठाम बहुतो छोट-बड ताल अछि। ई शहर अचानक सुर्ख़िमे तब आएल जब १९८४मे अमरीकी कम्पनी यूनियन कार्बाइडसं मिथाइल आइसोसाइनेट गैसके रिसावसं लगभग बीस हजार लोग मारल गेल छल। भोपाल गैस कांड कs कुप्रभाव आई तक वायु प्रदूषण, भूमि प्रदूषण, जल प्रदूषणके अलावा जैविक विकलांगता एवं अन्य रूपसभमे आई तक सेहो जारी छै। अही वजहसं भोपाल शहर बहुतो आंदोलनसभक केन्द्र छी।

भोपाल प्राचीन नाम भूपाल छी भूपाल, भू-पाल भू = भूमि, पाल=दूध। एक दोसर मत ई अछि कि ई शहर कs नाम एकटा अन्य राजा भूपाल आ (भोजपाल)के नाम पर पड़ल।

भोपाल भारतके मध्य भागमे स्थित अछि आ एकर निर्देशांक २३.२७º उ. एवं ७७.४º पू. छै। ई विंध्य पर्वत श्रृंखलाके पूर्वमे छैक। भोपाल एक पहाड़ी इलाका पर स्थित अछि किंतु एकर तापमान अधिकतर गर्म रहैत अछि। एकर भू-भाग ऊँच-नीच अछि एवं एकर दायरामे बहुतो छोट पहाड़ अछि।

अही ठामक छोट तलाब, बडका तलाब, भीम बैठका, अभ्यारण्य तथा भारत भवन देखs योग्य अछि| भोपालके नजदीक स्थित सांचीक स्तूप सेहो पर्यटकसभके आकर्षणक केन्द्र छी। भोपालसं लगभग २८ किलोमीटर दूर स्थित भोजपुर मन्दिर एक एतिहासिक दर्शनिय स्थल छी।

सांची, इंदौर,उज्जैन, खजुराहो, पंचमढी, जबलपुर आदि शहरसभसं आसानीसं सडक मार्ग होइत भोपाल पहुंचल जा सकैत अछि। मध्‍यप्रदेश आर पडोसी राज्‍यसभके अनेक शहरसभसं भोपालके लेल नियमित बससभ चलैत अछि।

भोपाल शहरक कुल जनसंख्या (२०११ की जनगणनाके अनुसार) कुल १७,९५,६४८ छै। भोपाल जिला कs कुल जनसंख्या २३,६८,१४५ अछि। जहिमे करीब ५६% हिन्दू, ४०% मुस्लिम छै। पुरुषसभक संख्या १२,३९,३७८ तथा महिलासभक संख्या ११,२८,७६७ छै। कुल साक्षरता ८२.२६% (पुरुष: ८७.४४%, महिला: ७६.५७%)।

लोक सभा

विधान सभा




#Article 522: बबई नगरपालिका (105 words)


बबई नगरपालिका नेपालक मध्य-पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत भेरी अञ्चलम अवस्थित बर्दिया जिलाम अवस्थित एकटा नगरपालिका छी। स्थानीय विकास मन्त्रालय २०७२ आसिन १ गते थप २६ वटा नयाँ नगरपालिका बढ़वैत कालबर्दियाम नेउलापुर आर बगनाह ई २ गाउँ विकास समितिसभ समेटेक बबई नगरपालिका घोषणा केनेए। बबई नगरपालिकाको केन्द्र साबिकक नेउलापुर गाउँ विकास समितिक सैनाबर बजारम रहल अछि। नगरपालिकाक घोषणा आर क्षेत्रविस्तारसँ मुलुकम १ महानगरपालिका, १२ उपमहानगरपालिका आर २ सय १७ नगरपालिका कायम भेल अछि।

बर्दिया जिलाम नेउलापुर आर बगनाह ई २ गाउँ विकास समितिसभक मिलाक बबई नगरपालिक बनावल गेल छल। तहिना राष्ट्रिय जनगणना २०६८क जनगणना अनुसार ई २ ठामसभक जनसंख्याक जोडिक बबई नगरपालिकाक जनसङ्ख्या २७,८३८ रहेल अछि।




#Article 523: रायपुर (333 words)


रायपुर ( ) भारतीय राज्य छत्तिसगढमे अवस्थित रायपुर जिलाक एक शहर छी । ई शहर राजधानी होमएक संगे रायपुर जिलाक प्रशासनिक मुख्यालय छी । ई छत्तिसगढक सभसँ पैग शहर सेहो छी । सन् २००० नवम्बर १ मे छत्तिसगढ राज्य स्थापना होमएसँ पहिने ई मध्य प्रदेशक भाग छल ।

पुरान भवन आ किलाक अवशेषमे आधारित किछ इतिहासविद्क मान्यतानुसार ई शहर ९आम शताब्दीसँ अस्तित्वमे अछि । मुदा प्राय लोकक माननाए अछि कि ई शहर १४आम शताब्दीमे बैसाएल गेल छल ।

सन् २०११ क भारतक जनगणनाक अनुसार रायपुरक जनसङ्ख्या १०,१०,०८७ अछि । एतयक लिङ्गानुपात ९४६ महिलासभ प्रति १००० पुरुषक अछि । रायपुरक साक्षरता दर ८६.९०% अछि, पुरुषसभक साक्षरता दर २९.३९% आ महिलासभक साक्षरता दर ८१.१०% अछि ।

रायपुर खारुन नदीक तटमे बैसल छत्तिसगढक सबसँ पैग शहर छी । रायपुर एक पैग मैदान (छत्तिसगढक मैदान) क मध्यमे अवस्थित अछि जे धान का कटोरा क नामसँ सेहो जानल जाइत अछि । रायपुरक पूर्वमे महानदी नदी बहैत अछि। उत्तर-पश्चिमममे मैकालक पहाडी अछि । उत्तरी तरफ छोटा नागपुरक पठार आ दक्षिणमे बस्तरक पठार अछि । 
रायपुर मुम्बई-हावडा रेल लाइनमे अवस्थित अछि आ ई सम्पूर्ण महत्वपूर्ण शहरसभसँ जुडल अछि । राष्ट्रिय राजमार्ग ६ एहो शहर भऽ गुजरैत अछि आ अन्तिममे ४३ शहरसभ भऽ विशाखापट्नमधरि जाइत अछि । रायपुर मुम्बई, दिल्ली आ अन्य शहरसभसँ हवाई मा‍र्गद्वारा जुडल अछि । रायपुरक हवाई अड्डा माना मे अछि । 

तापक्रम:
गर्मीमे ४५ सँ २९ सेल्सियस
जाडमे २७ सँ १० सेल्सियस
वर्षा लगभग १२० मिमी (जुलाईसँ सितम्बर)

सन् २००० मे स्थापना भेल छत्तिसगढ राज्यक राजधानी रायपुरक प्रशासनिक केन्द्र नव रायपुर मे स्थानान्तरण करैलेल प्रस्ताव कएल गेल अछि । ई एक विश्व स्तरीय परियोजना छी जाहिमे वर्तमान रायपुरसँ २५ किमी दूर एक नव शहरक सृजन होइत । एकर लेल एक पैग क्षेत्रक भूमिक अर्जन कएल जा रहल अछि । नव रायपुरक लेल समग्रमे ८०,००० हेक्टेयर भूमि अर्जित कएल जाइत । नव रायपुरमे २२५ किमी पक्की सडक अछि । नव रायपुरक परसदा क्षेत्रमे अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेट स्टेडियम बनाएल केल गेल अछि ।

रायपुर सम्पूर्ण छत्तिसगढ आ उडिसाक लेल थोकक मन्डी छी ई वाहेक एतय एक उद्योगिक शहर अछि ।




#Article 524: मदुरै (214 words)


मदुरै या मदुरई ( एवं ), दक्षिण भारतके तमिल नाडु राज्यके मदुरई जिले कs मुख्यालय नगर छी। ई भारतीय प्रायद्वीपके प्राचीनतम बसल शहरसभमेसं एक छी। अही शहर कs अपन प्राचीन मंदिरसभके लेल जानल जाईत अछि। अही ठामक मीनाक्षी मंदिर विश्वके प्रसिद्ध मंदिरसभमे सं एक छी ।

भारतक २००१ कs जनगणनुसार, मदुरई शहर कs नगरपालिका सीमाके भीतर जनसंख्या ९२८,८६९ छै, एवं शहरी क्षेत्र कs जनसंख्या १,१९४,६६५ अछि। अहिमेसं ५१% पुरुष एवं ४९% स्त्रीसभ अछि। मदुरई कs औसत साक्षरता दर ७९% छै, जे राष्ट्रीय दर ५९.५% सं कहीं ऊंच अछि। पुरुष दर ८४% एवं स्त्री दर ७४% छै। शहरक १०% जनसंख्या ६ वर्षसं नीचा कs अछि। शहरमे प्रत्येक १००० पुरुषसभ पर ९६८ स्त्रीसभ कs संख्या छै।

पहिले एकर नाम मधुरा या मधुरापुरी छल। कतिपय शिलालेखसभ तथा ताम्रपत्रसभसं विदित होईत अछि कि ११अम शदी धरि अही ठाम, बीचमे किछ समयक छोइड पांड्य राजवंशक शासन छल। संगम-कालके कवि नक्कीरर ही सुंदरेश्वररके किछ अंश रचल छल- जे आई सेहो मंदिरके पारंपरिक उत्सवसभ पर आयोजित नाट्य होईत अछि।

मदुरई आर निकटवर्ती क्षेत्रसभमे मुख्यतः तमिल भाषा ही बोलल जाइत अछि। मदुरई तमिल कs बोली कोंगू तमिल, नेल्लई तमिल, रामनाड तमिल एवं चेन्नई तमिलसं भिन्न अछि। तमिलके संग अन्य बोलल जाई वला भाषासभ छी हिन्दी, अंग्रेज़ी, उर्दु, सौराष्ट्र, मलयालम एवं कन्नड़, हालांकि उ सब भाषासभमे अही ठाम तमिल शब्द समा गेल अछि।




#Article 525: जमशेदपुर (408 words)


जमशेदपुर (, ) भारतक झारखण्ड राज्यक एकटा शहर छी । ई भारतक सबसँ बेसी जनसङ्ख्या होमएवला शहरसभमे सँ ३६अम क्रममे आ झारखण्डमे पहिल स्थानमे रहल अछि । जमशेदपुरके टाटानगर सेहो कहल जाइत अछि । ई झारखण्ड राज्यक दक्षिणी भागमे अवस्थित पूर्वी सिंहभूम जिलाक भाग छी । जमशेदपुरक स्थापना पारसी व्यवसायी जमशेदजी नौशरवानजी टाटाद्वारा भेल अछि । सन् १९०७ मे टाटाके आइरन एण्ड स्टिल कम्पनी (टिस्को) क स्थापना भेलाबाद ई शहरक जग बैसाएल गेल अछि । एहिसँ पूर्व एतय साक्ची नामक एकटा आदिवासी गाम होमएत छल । एतौका माटि कारी भेला कारण एतय पहिल रेलवे-स्टेशन कालीमाटीक नामसँ बनाएल गेल जकरा बादमे परिवर्तन करि टाटानगर कएल गेल । खनिज पदार्थसभक प्रचुर मात्रामे उपलब्धता आ खडकई तथा सुवर्णरेखा नदीक सहजरूपसँ उपलब्ध पानि, तथा कोलकातासंगक नजदिकीक कारण आजुक ई आधुनिक शहरके बैसाएल जा सकल अछि ।

जमशेदपुर आई भारतक सबसँ प्रगतिशील उद्योगिक नगरसभमेसँ एक छी । टाटा परिवारक बहुतेक कम्पनीसभक उत्पादन एकाई जना टिस्को, टाटा मोटर्स, टिस्कन, टिन्पलेट, टिमकन, ट्यूब डिभिजन, इत्यादि एतय कार्यरत अछि ।

जमशेदपुर सड़क आ रेल-मार्गद्वारा पूरे भारतसँ जुड़ल अछि । हावड़ा मुम्बई रेल मार्गपर अवस्थित होमएके कारण टाटानगर दक्षिणपूर्व रेलवेक अत्यन्त व्यस्त स्टेशनसभमे सँ गिनल जाइत अछि । राष्ट्रिय राजमार्ग ३३ याह शहरसँ होइत गुजरति अछि । नगरक उत्तर पूर्वी हिस्सामे एक सोनारी विमानस्थल अछि जे वायु विमान सेवासभसँ जोड़ने अछि । शहरक ज्यादातर सड़कसभक रखरखाव टाटा परिवारद्वारा होमएक कारण सँ एतयक सड़क झारखण्डमे अन्य शहरसभक अपेक्षा बहुत बढिया अछि ।

जमशेदपुर एयर डेकनद्वारा कोलकाताक विमानस्थलद्वारा जुड़ल अछि । एकर अलावा एक आओर निजी एयरलाइन्स हप्तामे दुई दिन एतयसँ दिल्लीक लेल उड़ान भरति अछि । ई विमानस्थलक बेसी उपयोग करपोरेट जहाजसभक आगमन-प्रस्थानक लेल कएल जाइत अछि । एकर अलावा एतय उड़ान प्रशिक्षणक लेल स्थापित जमशेदपुर को-आपरेटिभ फ्लाईगुङ्ग क्लब तथा टाटानगर एभियेसनद्वारा एकर प्रयोग कएल जाइत अछि । कोलकाताक अतिरिक्त एतयसँ निकटतम हवाई अड्डा राँचीक बिरसा मुण्डा विमानस्थल अछि जे एतयसँ लगभग १२० किलोमिटरक दूरी पर अछि ।

टाटानगर (जमशेदपुर) दक्षिणपूर्व रेलवेक सबसँ प्रमुख रेलवे स्टेशनसभमे सँ एक छी अओर ई सीधे-सीधे भारतक प्रमुख शहरसभ जना कोलकाता, मुम्बई, दिल्ली, चेन्नई, पटना, रायपुर, भुवनेश्वर इत्यादिसँ जुड़ल अछि । रेलवे स्टेशनके टाटानगरक नामसँ जानल जाइत अछि ।

जमशेदपुर सड़क मार्गद्वारा भारतक सभ पैग शहरसभसँ जुड़ल अछि । शहरसँ राष्ट्रिय राजमार्ग ३३ (बहरागोड़ा सँ बरही) गुजरति अछि जे राष्ट्रिय राजमार्ग सङ्ख्या २ सँ जुड़ति अछि जे सँ कोलकाता आ दिल्ली जुड़ल अछि । राँची (१३१ किलोमिटर), पटना, गया, कोलकाता (२५० किलोमिटर) सहित कयन बिहार, बङ्गाल आ उडिसाक अन्य प्रमुख शहरसभसँ जमशेदपुरक लेल सीधा बस सेवा उपलब्ध (सरकारी आ निजी) अछि ।




#Article 526: तिरुवनन्तपुरम (196 words)


तिरुवनन्तपुरम (मलयालम - തിരുവനന്തപുരം) या त्रिवेन्द्रम केरल प्रान्तक राजधानी छी। ई नगर तिरुवनन्तपुरम जिला कs मुख्यालय सेहो छी। केरलक राजनीतिके अलावा शैक्षणिक व्यवस्था कs केन्द्र सेहो इहे छी। कइयो शैक्षणिक संस्थानसभमे विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र, राजीव गांधी जैव प्रौद्योगिकी केन्द्र किछ प्रसिद्ध नामसभमे सं छी। भारतक मुख्य भूमिके सुदूर दक्षिणी पश्चिमी तट पर बसल इ नगर कs महात्मा गांधी द्वारा भारत कs सदाबहार नगरक संज्ञा देल गेल छल।

तिरुवनन्तपुरम कs संधिविच्छेद अछि: तिरुवनन्तपुरम = तिरु+ अनन्त+ पुरम्

तिरु एक दक्षिण भारतीय आदरसूचक आद्याक्षर छी (जेना कि - तिरुचिरापल्ली,तिरुपति,तिरुवल्लुवर) जकर हिन्दी समानान्तर छी श्री (जका - श्रीमान, श्रीकाकुलम्, श्रीनगर, श्रीविष्णु इत्यादि)। अनन्त भगवान अनन्तके लेल अछि तथा संस्कृत शब्द पुरम् कs अर्थ अछि घर, वासस्थान।

हिन्दीमे अहिक वर्तनिसभमे सेहो लिखल जाइत अछि - तिरुवनन्तपुरम या तिरुवनन्तपुरम् या तिरुअनन्तपुरम। 

केरलक राजधानी तिरुवनंतपुरम कs त्रिवेंद्रमके नामसं सेहो पुकारल जाईत अछि। देवतासभ कs नगरीके नामसं मशहूर ई शहर कs महात्मा गांधी द्वारा सदाबहार शहर कs संज्ञा देल गेल छल। यी शहर कs नाम शेषनाग अनंतके नाम पर पड़ल जिनकर ऊपर पद्मनाभस्वामी (भगवान विष्णु) विश्राम करैत अछि। तिरुवनंतपुरम, एक प्राचीन नगर छी जकर इतिहास १००० ईसा पूर्व सं शुरु होइत अछि।

तिरुवनंतपुरम भारतके केरल राज्यके दक्षिण-पश्चिमी तट पर  पर स्थित अछि।

   




#Article 527: राजकोट (214 words)


राजकोट ()  भारतके गुजरात प्रान्तक एक शहर छी। राजकोट नगर गुजरात राज्य, भारतमे स्थित अछि। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधीकs क्रीड़ास्थली राजकोट, पहिले सौराष्ट्र कs राजधानी रहल छल। महात्मा गाँधीके पिता करमचंद गाँधी सौराष्ट्रक दीवान छ्लाह। अहीसं गाँधी जी अपना बचपन संवारि तथा अपन जिन्दगीके प्रारम्भिक दिन राजकोटक गलिसभमे ही व्यतीत कएने छल। गाँधी जी अही ठामसं हिन्दुस्तानिसभ आ अंग्रेजसभक रहन-सहनके अंतर कs क़रीबसं देखने छथि। मोहनदास करमचंद गाँधी उच्च स्कूल तत्कालीन अलफ्रंट हाई स्कूलमे अपनी शिक्षा ग्रहण केएने छल। गाँधीजी कs इस नगरीमे पर्यटकसभके लेल काबा गाँधीना देलो (गाँधी जी कs निवास स्थान) जहिमे आजुक बाल मन्दिर स्कूल चलि रहल अछि, राजकुमारी उद्यान, जबूली उद्यान, वारसन संग्रहालय, रामकृष्ण आश्रम, लालपरी झील, अजी डेम, रंजीत विलास पैलेस, सरकारी दुग्ध डेरी आदि दर्शनीय स्थल अछि। राजकोटमे मनायल जाइ वला अंतर्राष्ट्रीय पतंग मेला बड़का संख्यामे लोगसभ कs आकर्षित करैत अछि।

प्राचीन सभ्यता आर आज़ादी कs लड़ाईसं राजकोटक बहुत नजदीकी संबंध रहल अछि। राजकोटसं भारतके राजनीतिक आर सांस्कृतिक इतिहासक बहुतो यादसभ जुड़ल अछि। सन १६१२ ई. मे राजकोट शहर कs स्थापना जडेजा वंशके ठाकुर साहब विभाजी जडेजा कएने छल। महात्मा गाँधी अपन अहिंसा एवं सत्याग्रह कs प्रयोग सबसं पहिल अही ठामसं कएने छालह।

राजकोट कs सोनी बाजार गुजरातमे स्थित सोना कs सबसं बड़का बाज़ार छी। महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा जँका किछ प्रमुख कम्पनी सहो अही ठामसं ब्यापार शुरु कएने छल।




#Article 528: जबलपुर (131 words)


जबलपुर भारतके मध्यप्रदेश राज्य कs एक शहर छी। अही ठाम पर  मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय तथा राज्य विज्ञान संस्थान अछि। एकरा मध्यप्रदेशक संस्कारधानी सहो कहल जाइत अछि। थलसेना कs छावनीके अलावा अही ठाम भारतीय आयुध निर्माणिसभके कारखाना तथा पश्चिम-मध्य रेलवे कs मुख्यालय सहो अछि।

पुराणसभ आर किंवदंतिसभके अनुसार इ शहर कs नाम पहिने जबालिपुरम् छल, कियकी एकर सम्बंध महर्षि जाबालिसं जोड़ल जाइत अछि। जिनकरि बारेमे कहल जाइट अछि कि ओ अही ठाम निवास करैत छ्लाह।

विंध्य पर्वत श्रृंखलामे स्थित इ नगर पवित्र नर्मदा नदीके तट पर स्थित है। जबलपुर भारतके प्रमुख शहरसभ दिल्ली तथा मुंबईसं हवाई मार्गसं जुड़ल अछि ।

२००१ कs जनगणनाके अनुसार जबलपुर नगर निगम क्षेत्र कs जनसंख्या ९,५१,४६९ छल, जबलपुर छावनी क्षेत्र कs जनसंख्या ६६,४८२ आर जबलपुर जीलाक कुल जनसंख्या २१,६७,४६९ अछि।

इ शहरमे पांच विश्वविद्यालय अछि -




#Article 529: पृथ्वीनारायण शाह (130 words)


श्री ५ बडामहाराजाधिराज पृथ्वीनारायण शाह (१७२३–१७७५; ) गोरखा राज्यक अन्तिम राजा आ नेपाल अधिराज्यक पहिल शाहवंशीय राजा छल। छोट छोट राज्य रजौटामे रहल बाइसे तथा चौबिस राज्यसभक एकत्रित करि देशक एकीकरण केनिहार हिनका आधुनिक नेपालक राष्ट्रनिर्माताक रूपमे जानल जाएत अछि ।हिनकर यादमे प्रति वर्ष पुष २७ गते नेपालमे राष्ट्रिय एकता दिवस मनाएल जाएत अछि। 

पृथ्वीनारायण शाहद्वारा सुरू कएल गेल नेपाल एकीकरण अभियान बढ़ैत बढ़ैत नेपाल राज्यक सीमा पूर्वमे टिस्टा नदी, दक्षिणमे मगध आ पश्चिममे सतलज नदी धरि विस्तार भेल। पाछा नेपाल अङ्ग्रेज युद्धक बाद सुगौली सन्धि धरि ई भू-भागसभ नेपालक अधिनस्थ रहल छल। नेपालक इतिहासक शीर्षस्थ पुरूष पृथ्वीनारायण शाहक वि.सं. १८३१ मकर सङ्क्रान्तिक दिन ५२ वर्षक उमरमे नुवाकोट जिलाक देवीघाटमे देहावसान भेल छल। एकार बाद नेपाल एकीकरण अभियान हिनकर पुतहू रानी राजेन्द्र लक्ष्मी आ पुत्र बहादुर शाहद्वारा आगा बढाएल गेल।




#Article 530: नासिक (283 words)


नासिक या नाशिक भारतक महाराष्ट्र राज्यमे अवस्थित एक शहर छी। नासिक महाराष्ट्रक उत्तर पश्चिममे, मुम्बई सँ १५० किमी आ पुणे सँ २०५ किमीक दुरीमे अवस्थित अछि। ई शहर मुख्य रूपसँ हिन्दू तीर्थयात्रिसभक प्रमुख केन्द्र छी। नासिक पवित्र गोदावरी नदीक सतह पर स्थित अछि। समुद्रक मानक अनुसार एकर ऊँचाई ५६५ मीटर अछि। गोदावरी नदीक किनार पर बहुत सुन्दर-सुन्दर सन घाट अवस्थित अछि। ई शहरक सभसँ प्रमुख भाग पञ्चवटी छी। एही ठाम बहुतो मन्दिर सेहो अछि। नासिकमे पावनिसभक समयमे बहुत बेसी सङ्ख्यामे भीड़ देखल जाएत अछि।
 

नाशिक शक्तिशाली सातवाहन वंशक राजासभक राजधानी छल। मुगल कालक समयमे नासिक शहरक गुलशनबादकें नामसँ सेहो जानल जाएत छल। एकर अतिरिक्त नाशिक शहर भारतीय स्वतन्त्रता सङ्घर्षमे सेहो अपन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभौने अछि। डॉ॰ भीमराव अम्बेडकर द्वारा १९३२मे नाशिककें कालाराम मन्दिरमे अस्पृश्योंकसभ प्रवेश करिकें आन्दोलन चलौने छल।

नाशिक आस्थाक शहर छी। एही ठाम पर बहुतो रास सुन्दर मन्दिर आ घाट देखबाक लेल मिलैत अछि। एतय विभिन्न पावनिसभ बहुत उत्साहक सङ्ग मनाओल जाएत अछि। 

नाशिकमे होमए बला कुम्भ मेला, जे एहि ठाम सिंहस्थकें नामसँ प्रख्यात अछि, शहरक आकर्षण कऽ सभसँ पैग केन्द्र छी। भारतीय पञ्चाङ् अनुसार सूर्य जखन कुम्भ राशीमे होएत अछी ओहि समय इलाहाबादमे कुम्भ मेला लगैत अछि आ जखन सिंह राशीमे होएत अछि, तखन नाशिकमे सिंहस्थ कुम्भ मेला होएत अछि। 

पञ्चवटी नाशिकके उत्तरी भागमे अवस्थित अछि। एक मान्यताक अनुसार भगवान राम, सीता आ लक्ष्मणक सङ्ग किछ समयकें लेल पञ्चवटीमे रहल छल ताही कारण सेहो पञ्चवटी प्रसिद्ध अछि। वर्तमान समयमे पञ्चवटीमे  जाहि स्थानसँ सीताक अपहरण कएल गेल छल ओ स्थान पाँचटा बड़हड़क गाछक लगमे अछि।

शिरड़ी एकटा छोट गाम छी जे कोपरगाव तालुकामे अवस्थित अछि। शिरड़ी भारतक प्रमुख धार्मिक स्थानसभमे सँ एक छी।

सोमेश्वर मन्दिर नाशिकमे स्थित सभसँ पुरान मन्दिरसभमे सँ एक छी। ई मन्दिरमे महादेव सोमेश्‍वरक प्रतिमा स्थापित अछि।




#Article 531: श्रीनगर (152 words)


श्रीनगर भारतके जम्मू आ कश्मीर प्रान्त कs राजधानी छी। कश्मीर घाटीके मध्यमे बसल इ नगर भारतके प्रमुख पर्यटन स्थलसभमे सं एक छी। श्रीनगर एक दिस जेतs डल झीलके लेल प्रसिद्ध अछि ओही दोसर दिस विभिन्न मंदिरसभक लेल विशेष रूपसं प्रसिद्ध अछि।

१७०० मीटर ऊंचाई पर बसल श्रीनगर विशेष रूपसं झीलसभ आर हाऊसबोटक लेल जानल जाइत अछि। एकर अलावा श्रीनगर परम्परागत कश्मीरी हस्तशिल्प आर सूखल मेवाके लेल सहो विश्व प्रसिद्ध अछि। श्रीनगरक इतिहास बहुत पुरान अछि। मानल जाइत छै कि इ जगहक स्थापना प्रवरसेन द्वितीय द्वारा २००० वर्ष पूर्व कएल गेल छल। 

श्रीनगरक सबसं बडका आकर्षण अही ठामक डल झील छी। भोरेसं शाझ धरि रौनक नजर आबैत अछि। सैलानी घंटों एकर किनारमे धुमैत रहैत छै आ शिकारमे बैठ नौका विहारक लुत्फउठाबति अछि। दिनके हर प्रहरमे इ झीलक खूबसूरती कs कोई अलग रंग दिखाई दैत अछि।

जम्मू- २९३ किलोमीटर
लेह- ४३४ किलोमीटर
कारगिल- २०४ किलोमीटर
गुलमर्ग- ५२ किलोमीटर
दिल्ली- ८७६ किलोमीटर
चंडीगढ़- ६३० किलोमीटर




#Article 532: घोराही उपमहानगरपालिका (353 words)


घोराही नगरपालिका राप्ती अञ्चलक प्रमुख वाणिज्य तथा शिक्षा स्वास्थ्यक केन्द्र छी । ई दाङ उपत्यकाक दाङ जिलाम अवस्थित अछि । लमहीसँ फेडर रोड जोडल त्रिभुवननगर राप्तीक पहाडी क्षेत्रक प्रमुख पैठारीकर्ता छी । महेन्द्र संस्कृत विश्वविद्यालय, महेन्द्र बहुमुखी क्याम्पस (त्रि.वि.) लगायतका क्याम्पसहरू रहल अहिठाम आउर सेहो निजि तथा सामुदायीक क्याम्पस तथा विद्यालय रहल अछि तहिंना महेन्द्र अस्पताल, आंखा उपचार केन्द्रका साथै किछ प्राइभेट स्वास्थ्य संस्थासभ सेहो अछि  ।

रोल्पाक लिवाङ रूकुम लगायतक जिला सँ त्रिभुवननगर कच्ची सडक जोडल अछि तहिना तुल्सीपुर तक पक्की आर वोहिज़ा अगाडी कच्ची सडक सल्यान होयेत सुर्खेत वीरेन्द्रनगर तक जोडल अछि। त्रिभुवननगर सहरम ६५ हजार जनतासभ बसोबास करैत अछि । त्रिभुवननगरक टेलीफोन कोड नं. ०८२ छी ।

प्रशिद्ध तिर्थस्थल स्वर्गद्धारी जाए वाला श्रद्धालुसभक यातायात तथा बासस्थानक मुख्यकेन्द्र सेहो त्रिभुवननगर अछि। त्रिभुवनगर भित्रैक गोरक्ष रत्ननाथ मन्दिर, त्रि.न.न.पा.४ चौघेरा, अम्विकेश्वरी भगवती मन्दिर, त्रि.न.न.पा., बाह्रकुने दह, त्रि.न.न.पा.७, गणेश मन्दिर, त्रि.न.न.पा. १० आर सिरडी साइ मन्दिर त्रि.न.न.पा. ११ अछि । तहिना नगरक मुटुम रहल त्रिभुवन पार्क तथा अम्बीकेस्वरी पार्क प्रकृतीक सुन्दरताअन्तर्गत अवस्थित अछि।

त्रिभुवननगर नगरपालिका दाङ जिलामे  अछि। त्रिभुवन नगरपालिका दाङ जिलाक सदरमुकाम घोराही बजार भित्र रहल  राप्ती अञ्चलका रूकुम, रोल्पा, सल्यान आर प्युठान जिलक् प्रमुख व्यापारिक केन्द्रको रूपमा सेहो मानल जायेत अछि। तहिना नगरपालिकाभित्र बराहक्षेत्र, अम्बिकेश्वरी भगवती आर गोरक्षनाथ, गणेश, सिराडीसाह मन्दिर आर सत्यसाइ केन्द्र जेहन मठमन्दिर अछि । उक्त नगरपालिकाक मुख्य विशेषता एसियाक सबैसँ बड्का उपत्यका दाङ उपत्यका भित्र रहल अछि। नगरपालिकाक पूर्वमा लक्ष्मीपुर, पश्चिममा नारायणपुर/हापुर आर उत्तरमा स्युजा/सैघा गाउँ विकास समिति अछि। नगरपालिकाक कुल जनसंख्या ४३ हजार १ सय २६ छी। कुल जनसंख्यामध्ये महिलाको जनसंख्या २१ हजार ५ सय ५० आर पुरूषक २१ हजार ५ सय ७६ अछि तहिना नगरपालिका भित्र जम्मा घरधुरी संख्या ८ हजार ९ सय ४५ अछि । नगरपालिकाक कुल क्षेत्रफल ७४ दशमलव ४५ वर्ग किमि अछि । नगरपालिकाभित्र ब्राहृमण, क्षेत्री, थारू, नेवार, मगर, विश्वकर्मा, परियार आर मधेसीमूलका जात/जाति बसोबास करैत अछि । नेपाली झ्याउरे थारू संस्कृतिमा आधारित बडका नाच, कौडा नृत्य, टप्पा नाच, लाखे नाच, देउँसी भैलो आर धार्मिक कार्यमा गाइने भजन कीर्तन नगरपालिकाका प्रमुख कला संस्कृति मानल जायेत अछि । अहिठाम हिन्दू धर्म मान् वाला २७ हजार ९ सय ७९, बौद्ध धर्म मान् ३ सय ३५, मुस्लिम धर्म मान्ने ३७ आर क्रिश्चियन धर्म मान्ने २१ अछि।




#Article 533: मलप्पुरम (215 words)


पूर्वमे नीलगिरी कs पहाड़िसभ, पश्चिममे अरब सागर आर दक्षिणमे पालक्काड एवं तृश्शूर जिले सं घिरल मलप्पुरम (मलयालम:മലപ്പുറം, मलप्पुऱम्) कोषिक्कोड सं ५० किमी. दक्षिण पूर्वमे स्थित अछि। इ मलप्पुरम जिला कs मुख्यालय छी। मलप्पुरम कs १९६९ मे कालीकट आ पलक्कड सं अलग करिके बनाएल गेल छल। चेलियार, काडलकुंडी आर भरतपुजा नामक तीन महान नदिसभ अही ठाम सं बहति अछि। इन्डो-यूरोपियन शैलीमे बनल अनेक ऐतिहासिक इमारसभ अखन धरि सहो देखाल जा सकैत अछि।

देवी दुर्गा को समर्पित यह मन्दिर एक पहाड़ी कs चोटी पर बनाओल गेल अछि आर एक बहुत ही अनोखा किवदंती इ मन्दिर कs उत्पत्तिसं जुड़ल अछि। मानल जाइत अछि कि चेरूमा जातिक एक महिला गाछ कs ड़ारि काटि रहल छलि। जखन ही ओ पहाड़ी कs चट्टानसं चाकू पर धार लगाबs शुरू केलक तs चट्टानसं रक्त (खुन्) निकलs लगल। इ खबर नगरमे आगिक तरहसं फैलि गेल आ शीघ्र अही स्थान पर इ मन्दिर बनाओल गेल छल।

इ मस्जिद कालाथुर रोड़ पर स्थित अंगदीपुरमसं १ मीलक दूरी पर अछि। इ मस्जिद मोप्पिला परिवार द्वारा बनाएल गेल छल । अही ठामके स्थानीय शासक वल्लानुवद द्वारा १० मोप्पिला परिवारसभ कs अही जगह बैसकs निमंत्रण देल गेल छल । मोप्पिला परिवारसभ द्वारा सर्वप्रथम अही ठाम इ मस्जिदक निर्माण कराओल गेल। 

 12. S. Rajendu  - History of Valluvanad (Malayalam) - from pre-historic times to A.D. 1792 - Perintalmanna - 2012




#Article 534: तुलसीपुर उपमहानगरपालिका (353 words)


तुलसीपुर नगरपालिका राप्ती अञ्चलक प्रमुख वाणिज्य तथा शिक्षा स्वास्थ्यक केन्द्र छी । ई दाङ उपत्यकाक दाङ जिलाम अवस्थित अछि । लमहीसँ फेडर रोड जोडल त्रिभुवननगर राप्तीक पहाडी क्षेत्रक प्रमुख पैठारीकर्ता छी । महेन्द्र संस्कृत विश्वविद्यालय, महेन्द्र बहुमुखी क्याम्पस (त्रि.वि.) लगायतका क्याम्पसहरू रहल अहिठाम आउर सेहो निजि तथा सामुदायीक क्याम्पस तथा विद्यालय रहल अछि तहिंना महेन्द्र अस्पताल, आंखा उपचार केन्द्रका साथै किछ प्राइभेट स्वास्थ्य संस्थासभ सेहो अछि  ।

रोल्पाक लिवाङ रूकुम लगायतक जिला सँ त्रिभुवननगर कच्ची सडक जोडल अछि तहिना तुल्सीपुर तक पक्की आर वोहिज़ा अगाडी कच्ची सडक सल्यान होयेत सुर्खेत वीरेन्द्रनगर तक जोडल अछि। त्रिभुवननगर सहरम ६५ हजार जनतासभ बसोबास करैत अछि । त्रिभुवननगरक टेलीफोन कोड नं. ०८२ छी ।

प्रशिद्ध तिर्थस्थल स्वर्गद्धारी जाए वाला श्रद्धालुसभक यातायात तथा बासस्थानक मुख्यकेन्द्र सेहो त्रिभुवननगर अछि। त्रिभुवनगर भित्रैक गोरक्ष रत्ननाथ मन्दिर, त्रि.न.न.पा.४ चौघेरा, अम्विकेश्वरी भगवती मन्दिर, त्रि.न.न.पा., बाह्रकुने दह, त्रि.न.न.पा.७, गणेश मन्दिर, त्रि.न.न.पा. १० आर सिरडी साइ मन्दिर त्रि.न.न.पा. ११ अछि । तहिना नगरक मुटुम रहल त्रिभुवन पार्क तथा अम्बीकेस्वरी पार्क प्रकृतीक सुन्दरताअन्तर्गत अवस्थित अछि।

त्रिभुवननगर नगरपालिका दाङ जिलामे  अछि। त्रिभुवन नगरपालिका दाङ जिलाक सदरमुकाम घोराही बजार भित्र रहल  राप्ती अञ्चलका रूकुम, रोल्पा, सल्यान आर प्युठान जिलक् प्रमुख व्यापारिक केन्द्रको रूपमा सेहो मानल जायेत अछि। तहिना नगरपालिकाभित्र बराहक्षेत्र, अम्बिकेश्वरी भगवती आर गोरक्षनाथ, गणेश, सिराडीसाह मन्दिर आर सत्यसाइ केन्द्र जेहन मठमन्दिर अछि । उक्त नगरपालिकाक मुख्य विशेषता एसियाक सबैसँ बड्का उपत्यका दाङ उपत्यका भित्र रहल अछि। नगरपालिकाक पूर्वमा लक्ष्मीपुर, पश्चिममा नारायणपुर/हापुर आर उत्तरमा स्युजा/सैघा गाउँ विकास समिति अछि। नगरपालिकाक कुल जनसंख्या ४३ हजार १ सय २६ छी। कुल जनसंख्यामध्ये महिलाको जनसंख्या २१ हजार ५ सय ५० आर पुरूषक २१ हजार ५ सय ७६ अछि तहिना नगरपालिका भित्र जम्मा घरधुरी संख्या ८ हजार ९ सय ४५ अछि । नगरपालिकाक कुल क्षेत्रफल ७४ दशमलव ४५ वर्ग किमि अछि । नगरपालिकाभित्र ब्राहृमण, क्षेत्री, थारू, नेवार, मगर, विश्वकर्मा, परियार आर मधेसीमूलका जात/जाति बसोबास करैत अछि । नेपाली झ्याउरे थारू संस्कृतिमा आधारित बडका नाच, कौडा नृत्य, टप्पा नाच, लाखे नाच, देउँसी भैलो आर धार्मिक कार्यमा गाइने भजन कीर्तन नगरपालिकाका प्रमुख कला संस्कृति मानल जायेत अछि । अहिठाम हिन्दू धर्म मान् वाला २७ हजार ९ सय ७९, बौद्ध धर्म मान् ३ सय ३५, मुस्लिम धर्म मान्ने ३७ आर क्रिश्चियन धर्म मान्ने २१ अछि।




#Article 535: त्रिपुर नगरपालिका (117 words)


त्रिपुर नगरपालिका नेपालक मध्य-पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत राप्ती अञ्चलम अवस्थित दाङ जिलाम अवस्थित एक नगरपालिका छी । स्थानीय विकास मन्त्रालय थप ६१ वटा नयाँ नगरपालिका थप्दा दाङ जिल्लामा नारायणपुर, हापुर आर ढिकपुर ई ३ गाउँ विकास समितिसभक समेटक त्रिपुर नगरपालिका घोषणा भेल छल। त्रिपुर नगरपालिकाको केन्द्र नारायणपुर बजारमा रहल अछि। नगरपालिकाको घोषणा आर क्षेत्रविस्तारसँगै मुलुकम १ महानगरपालिका, ११ उपमहानगरपालिका, १ सय ७९ नगरपालिका आर ३ हजार २ सय ७८ गाविस कायम भेल छल । नयाँ नगरपालिका थपिएपछि नेपालको सहरी जनसंख्याको प्रतिशत ३६ दशमलव ८ पुगल मन्त्रालय जनावुने अछि।

त्रिपुर नगरपालिका साविकका नारायणपुर, हापुर आर ढिकपुर गाविससभ मिलक बनल अछि । ततहिना राष्ट्रिय जनगणना २०६८ अनुसार ई ३ गाविससभक जनसंख्याक जोड्क त्रिपुर नगरपालिकाक कूल जनसङ्ख्या ४१,१८३ होएत अछि।




#Article 536: लमही नगरपालिका (111 words)


लमही नगरपालिका नेपालक मध्य-पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत राप्ती अञ्चलमे दाङ जिलाम अवस्थित एक नगरपालिका छी। स्थानीय विकास मन्त्रालय थपेत ६१ टा नयाँ नगरपालिका थप दाङ जिलामे  चौलाही आर सोनपुर ई २ गाउँ विकास समितिसभक समेटक लमही नगरपालिका घोषणा केनेए छल। लमही नगरपालिकाको केन्द्रभने लमही बजारम रहल अछि। नगरपालिकाक घोषणा आर क्षेत्रविस्तारसँगै मुलुकम १ महानगरपालिका, ११ उपमहानगरपालिका, १ सय ७९ नगरपालिका आर ३ हजार २ सय ७८ गाविस कायम भेल छल। नयाँ नगरपालिका थपके बाद नेपालक सहरी जनसंख्याको प्रतिशत ३६ दशमलव ८ पुगल अछि ।

लमही नगरपालिका साविकका चौलाही आर सोनपुर गाविससभ मिलक बनल अछि। तहिना राष्ट्रिय जनगणना २०६८ अनुसार ई २ गाविससभक जनसंख्याक जोडी लमही नगरपालिकाक कूल जनसङ्ख्या ३४,२८५ होएत अछि।




#Article 537: कोयम्बटोर (285 words)


कोयम्बटोर, कोयम्बतुर, कोयम्बटुर वा कोवाई क नामसँ प्रसिद्ध, तमिलनाडु राज्यक एक शहर छी । कर्नाटक आ तमिलनाडु राज्यक सिमानामे अवस्थित ई शहर मुख्य रूपसँ एकटा उद्योगिक नगरी छी । ई शहर सम्पूर्ण भारतसँ रेलवे, राजमार्ग आ वायु मार्गसँ व्यवस्थित तरिकासँ जुडल अछि अछि ।

कोयम्बटोर एकटा महत्वपूर्ण उद्योगिक शहर छी । दक्षिण भारतक म्यानचेस्टरक नामसँ प्रसिद्ध कोयम्बटोर एक प्रमुख कपडा उत्पादनक केन्द्र छी । नीलगिरी हिमालक तराईमे अवस्थित ई शहर पुरे वर्ष अनुकुलित मौसमक महसुस कराबैत अछि । दक्षिणसँ नीलगिरीक यात्रा करैलेल आएल पर्यटकसभ कोयम्बटोर शहरके आधार शिविर जका प्रयोग करैत अछि । कपडा उत्पादन कारखानासभ वाहेक एतय कयन पर्यटकीय स्थलसभ अछि जतय भ्रमण करैलेल आएल पर्यटकसभ घुमि सकैत अछि । एतय रहल जैविक उद्यान, कृषि विश्‍वविद्यालय सङ्ग्रहालय आ भिओसी पार्क विशेष रूपसँ पर्यटकसभके आकर्षित करैत अछि । कोयम्बटोरमे बहुतेक हिन्दू मन्दिरसभ अछि जाहिकारण ई शहरक हिन्दू धर्मावलम्बी महत्वके थप करैत अछि । भारतक प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीक भारतमे १०० स्मार्ट सिटी बनाबैक निर्णय अन्तर्गत ई शहरके सेहो चुनल गेल अछि ।

कोयम्बटोरक नाम उत्पतिमे विभिन्न सिद्दान्तसभ विद्यमान अछि । ओहिमेसँ एक सिद्दान्त अनुसार कोयम्बटोर नाम कोवनपुथुर ('कोवानक नव शहर' सँ पृथक भऽ आएल अछि), कोवान वा कोयानक मुखिया कोयम्बटोर सँ विकसित भेल अछि।

भारतक जनगणना सन् २०११ अनुसार कोयम्बटोर शहरक जनसङ्ख्या १६,०१,४३८ रहल अछि । एतयक लिङ्ग अनुपात अनुसार १,००० पुरुषमे कूल ९९७ महिला आबैत अछि । ई चेन्नई बाद तमिलनाडु राज्यक सबसँ पैग शहर छी ।

भिओसी पार्क कोयम्बटोरक प्रमुख आकर्षण छी । 

तमिलनाडु कृषि विश्‍वविद्यालय कोयम्बटोरक रोचक पर्यटक स्थलसभ मे सँ एक छी । रेलवे स्टेशनसँ पाँच किलोमिटरक दूरीमा अवस्थित ई विश्‍वविद्यालय एसियाक उत्कृष्ट कृषि विश्‍वविद्यालयसभमेसँ एक छी ।

पेरुर कोयम्बटोरसँ ६ किलोमिटरक दूरीमे अवस्थित एकटा छोट शहर छी । एकर मुख्य आकर्षण पेरुर मन्दिर छी जतय सात कोङ्गु शिवालयममेसँ एक अछि ।




#Article 538: आगरा (319 words)


आगरा (;  Āgrā) भारतक उत्तरी राज्य उत्तर प्रदेशक यमुना नदीक किनारमे अवस्थित एक शहर छी । 

आगरा एक ऐतिहासिक नगर छी, जकर प्रमाण एकर चारो तरफ रहल धरोहरसभसँ लगाएल जा सकैत अछि । ओना तँ आगराक इतिहास मुख्य रूपसँ मुगल कालसँ जानल जाइत अछि मुदा एकर सम्बन्ध महर्षि अङ्गिरासँ अछि जे १००० वर्ष ईसा पूर्व भेल छल । इतिहासमे पहिल जिक्र आगराक महाभारतक समयसँ भेल छल, जब एकरा अग्रवाण वा अग्रवनक नामसँ सम्बोधित करल जाइत छल । कहल जाइत अछि कि पहिने ई नगर आर्यग्रहक नामसँ सेहो जानल जाइत छल । तौलमी पहिल ज्ञात व्यक्ति छल जकर एकरा आगरा नामसँ सम्बोधित केलक ।

आगरा शहरके सिकन्दर लोदी सन् १५०६ मे बसेनाए छल । आगरा मुगल साम्राजयक चहेती स्थान छल । आगरा सन् १५२६सँ सन् १६५८धरि मुगल साम्राज्यक राजधानी रहल । आई सेहो आगरा मुगलकालीन इमारतसभ जेना - ताज महल, लाल किला, फतेहपुर सिकरी आदिक कारणसँ एक विख्यात पर्यटन स्थल छी । ई तीनो इमारतसभ युनेस्को विश्व सम्पदा क्षेत्रक सूचीमे सामिल अछि । बाबर (मुगल साम्राज्यक जनक) एतय चौकोर (आयताकार आ वर्गाकार) बगैंचासभक निर्माण करेलक ।

ताजमहलक निर्माण मुगल सम्राट शाहजहाँ, अपन घरवाली मुमताज महलक यादमे करेनाए छल । ताज महल मुगल वास्तुकलाक उत्कृष्ट नमूना छी । एकर वास्तुकला शैली फारसी, टर्की, भारतीय तथा इस्लामिक वास्तुकलाक घटकसभक अनौठा मिश्रण छी । सन् १९८३ मे, ताजमहल युनेस्को विश्व सम्पदा क्षेत्र बनल । एकर संगे, इकरा विश्व सम्पदाक सर्वत्र प्रशंसा पाबएवाला, अत्युत्तम मानवीय कृतिसभ मे सँ एक बताएल गएल अछि । ताजमहलके भारतक इस्लामी कलाक रत्न सेहो घोषित कएल गएल अछि । साधारणतया देखाबएवाला सङ्गमर्मरक चदरासभक पैग-पैग तहसँ छारएलेल बनाएल भवनसभ जोका नै बनाए एकरा श्वेत गुम्बद तथा टाइल आकारमे सङ्गमर्मरसँ छारल गएल अछि । केन्द्रमे बनाएल समाधिस्थल अपन वास्तु श्रेष्ठतामे सौन्दर्यक संयोजनक परिचय देवैत अछि । ताजमहल भवन समूहक संरचनाक खास बात ई अछि, कि ई पूर्णतया समतिताकार अछि । एकर निर्माण सन् १६४८ क लगभगममे पुरा भएल छल । उस्ताद अहमद लाहौरीके प्रायः एकर प्रधान शिल्पकार मानल जाएत अछि ।




#Article 539: बुटवल उपमहानगरपालिका (416 words)


बुटवल उपमहानगरपालिका नेपालक लुम्बिनी अञ्चलक रूपन्देही जिलाक एकटा उपमहानगरपालिका छी ।
 ई शहर तिनाउ अथवा तिलोत्तमा नदिक किनारमा अवस्थित अछि । बुटवल उपमहानगरपालिका रूपमे विक्रम सम्वत २०७१ साल अगहन १६ गते नगरपालिकासँ उपमहानगरपालिका लेल आवश्यक प्रक्रिया पूरा भेलाह उपमहानगरपालिका घोषणा भेल अछि । बुटवलक उपमहानगरपालिका घोषित करवक अहिमे सेमलाल तथा मोतिपुर गाविसके समावेश करि एकरा उपमहानगरपालिका घोषणा कएल गेल अछि । बुटवलक २२ किमि दक्षिणमे भैरहवा शहर अछि । ई नगर पश्चिम नेपालक प्रवेशद्वारक रूपम रहल अछि । ई नगर महेन्द्र राजमार्ग तथा सिद्दार्थ राजमार्गद्वारा नेपालक पूर्व पश्चिम तथा उत्तर दक्षिण जुड़ल अछि । यातायतक सुविधा तथा भौगोलिक अवस्थितिक कारण बुटवल पश्चिम नेपालक एक प्रमुख वाणिज्य केन्द्रको रूपम विकास भऽ रहल अछि । 

ई पहाड़ आ तराई दुनू क्षेत्रमे रहल अछि । एक लाखक हाराहरी जनसङ्ख्या रहल बुटवल द्रुतगतीमे विस्तारित भऽ रहल अछि यातायातक केन्द्र रहल बुटवलमे किछ अञ्चल स्तरीय कार्यलयक साथै इलाका स्तरीय कार्यलय रहल अछि। बुटवल बहुमुखी, वाणिज्य क्यम्पस, तिलोतमा क्याम्पस लगायतक के आओरो क्याम्पस तथा विद्यालय रहल बुटवलम लुम्बिनी अञ्चल अस्पतालक साथै सिदार्थ वाल अस्पताल लगायत अन्य सामुदायिक तथा निजी स्वास्थ संस्था समेत अछि । प्रसिद्ध सिद्धबाबा मन्दिर, जीतगढी किला, फुलवारी आदी अछि ई शहर तिनाउनदीक किनारमा अवस्थित अछि । बुटवलक टेलिफोन कोड नं. ०७१ अछि। 

ई नगरक नामाकरण सम्बन्धमे बिभिन्न जनश्रुतिसभ सुन्नल जाइत अछि । बिभिन्न ठामसभसँ लोकसभ मिलजुलि एतय आबि बैसल भेला कारण बटौली कहलक आ एकर अपभ्रम्स होइत होइत एकरा बुटवल कहल जाइ लागल । ई शहरके पहिने खस्यौलि नामसँ सेहो चिनहल जाइत छल । वि.सं. २०१६ मे बुटवल-खस्यौली नगरपालिका स्थापना भेलाह पश्चात हालधरि १५ व्यक्ति एकरा नेतृत्व प्रदान केनए अछि । वि.सं. २०१७ मे बहुदलीय व्यवस्था विघटन भेलाह पश्चात ई ठामक नाम बदलि बुटवल-खस्यौली नगरपञ्चायत राखल गेल । एहिलेल बोलीचालीमे एकरा बुटवल नगरपञ्चायत सेहो कहल जाइत अछि । बहुदलीय व्यवस्था पुनःस्थापना भेलापश्चात् एकरनाम नाम बुटवल नगरपालिका राखल गेल । बुटवल नगरपालिकाक पहिल नेतृत्व करैवला पहिल व्यक्तित्व मुन्नीलाल शाक्य (२०१६-२०१७ साल), दोसर ओमशङ्कर श्रेष्ठ (२०१९-२०२३ साल), तेसर परीक्षितप्रसाद लाकौल (२०२४-२०२६ साल), चारिम सरस्वतीप्रसाद शेरचन (२०२६-२०२८ साल आ पुनः २०३३ सँ २०३६ साल) छलाह । तहिना हरिबहादुर सिंह वि.सं. २०२८ मे प्रधानपञ्चमे चुनल गेल छल । ओ चारि-बेरधरि नगरपालिकाक प्रधानपञ्च भेलाह । ताहिना बुटवल नगरपालिकाक प्रधानपञ्चमे पत्रकार सूर्यलाल वि.सं. २०३० मे, बृजमान श्रेष्ठ, २०३६ सँ २०३९ सालधरि सू्र्यप्रसाद प्रधान (२०४९-२०५३) आ भोज प्रसाद श्रेष्ठ (२०५४-२०५९) तथा पुनाराम पोखरेल २०६० मे नगरप्रमुख भेल अछि ।

नेपालक बि.स. २०६८ कऽ जनगणना अनुसार बुटवलक जनसङ्ख्या १,२०,९८२ अछि । एहिमे सँ पुरुष ५०%, आ महिला ५०% अछि । ई नगरमे कुल २९,६८७ परिवार रहल अछि । ई नगरके १५ वडामे बिभाजन कएल गेल अछि ।




#Article 540: लुम्बिनी सांस्कृतिक नगरपालिका (107 words)


लुम्बिनी सांस्कृतिक नगरपालिका लुम्बिनी अञ्चल रूपन्देही जिलाम अवस्थित एक नगरपालिका छी । ई नगरपालिका विद्यमान ७ टा गाविस मिलाक २०७१ जेठम लागू भेल अछि। ई नगरपालिकाम जोडल गाविससभम लुम्बिनी आदर्श, भगवानपुर, तेनुहुजा, एकला, खुदावागर, मधुवनी आर मसिना छी। यस बाट महानगरपालिका, उपमहानगरपालिका र नगरपालिका गरी अब मुलुकमा कूल १३० भएका छन् भने गाविसको संख्या ३ हजार ९ सय १५ बाट घटेर ३ हजार ६ सय ३३ भएका छन् ।

नेपालक बि.स. २०६८ क जनगणना अनुसार लुम्बिनी सांस्कृतिक नगरपालिकाक जनसंख्या १,२०,९८२ अछि । यस मध्य पुरुष ५०%, र महिला ५०% छन् । यस नगरमा जम्मा २९,६८७ परिवार रहेका छन् । यस नगरलाई १५ वडामा बिभाजन गरिएको छ ।




#Article 541: कन्नूर (187 words)


कन्नूर केरलके उत्तरी सिरमे स्थित एक छोटका लेकिन बेहद खूबसूरत,सुन्दर तटवर्ती नगर छी। शहरी भागदौड़सं परेशान भs चुकल पर्यटकसभ कs कन्नूर काफी रास आबैत अछि। प्राकृतिक सुन्दरतासं परिपूर्ण इ नगरके पश्चिमी तट पर फैलल रेतक लक्षद्वीप सागर चूमैत अछि आ तटके दोसर तरफ ऊंच-ऊंच ताड़के गाछ वातावरण कs आर मनोरम बनाबैत अछि। सांस्कृतिक विरासत आर कला सं सम्पन्न इ नगरसं अनेक किस्से जुड़ल अछि। मानल जाइत अछि कि राजा सोलोमनक जहाज मन्दिर बनेबाक हेतु लकड़ी एकत्रित करि अही ठाम आएल छल। अही ठामक थय्यम नृत्य परम्परा विश्व प्रसिद्ध अछि। 

कन्नूर किलाके रूपमे विख्यात इ किला कs निर्माण १५०५ ई. मे प्रथम पुर्तगाली वायसराय डॉन फ्रांसिसको डी अलमीडा द्वारा बनाएल गेल छल । पुर्तगालिसभके बाध इ किला पर डचसभकs नियन्त्रण भs गेल छल, ओकर बाध अंग्रेजसभ द्वारा इ पर अधिकार करि देने छल । मालाबारमे अंग्रेजसभक इ प्रमुख सैन्य ठिकाना छल। 

इ सुन्दर प्राचीन मस्जिदक निर्माण ११२४ ई. मे मुस्लिम उपदेशक मलिक इबन दीनार द्वारा करबाइल गेल छल। मानल जाइत अछि कि मस्जिदके सफेद रंगके ब्लॉक कs एकर संस्थापक द्वारा मक्कासं लाबल गेल छल।

File:Kalarivathukkal temple.JPG|Kalarivathukkal
File:The Banyan tree at Akkare Kottiyoor.jpg|Kottiyoor
File:Chalil Temple (4329640601).jpg|Chalil
File:Temple Procession, Chalad.jpg|thumbnail|Chalad




#Article 542: गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश (293 words)


गाजियाबाद () भारतक उत्तरी क्षेत्रमे अवस्थित उत्तर प्रदेशक एक शहर छी । ई कहियो कताल उत्तर प्रदेशक प्रवेशद्वार कहल जाइत अछि कियाकी ई राष्ट्रिय राजधानी दिल्लीसँ बहुतेक नजदिक आ दिल्लीक मुख्य मार्गमे पडैत अछि । ई दिल्लीक राष्ट्रिय राजधानी क्षेत्रक एक भाग छी । ई एक पैग आ नियोजित शहर छी, जे सडक आ भारतीय रेलवेसँ निक जका अन्तरसम्बन्धित अछि आ गाजियाबाद जिलाक मुख्यालय छी । पश्चिम उत्तर प्रदेशक ई प्राथमिक वाणिज्यिक, उद्योगिक आ शिक्षाक केन्द्र होमएक संगे उत्तर भारतक मुख्य रेलवे जङ्क्सन छी । हालमे कएल गेल महानगरीय सर्वेक्षणमे ई शहर भारतमे मात्र नै भऽ पुरे विश्वमे ई सभसँ तेजी सँ बढि रहल शहर छी । ई शहर उपरी गङ्गाक तराईमे अवस्थित अछी जे मुख्य रूपसँ दुई भागमे विभाजित भेल अछि ।

गाजियाबाद शहरक खोज सन् १७४० मे वजिर गाजी-उद्-दीन केलक आ ओ अपने नामसँ ई शहरक नाम गाजीउद्दीननगर राखने छल । मुगल शासनक समयमे गाजियाबाद आ गजियाबादमे रहल हिन्डोन नदीक आसपड़ोसक क्षेत्र मुगल शाही परिवारक पिकनिक मनावैक क्षेत्र छल ।

ब्रिटिश राजक समयमे प्राय मेरुत जन सुनुवाई गाजियाबाद जिलाक तीन क्षेत्र गाजियाबाद, मेरुत आ बुलन्दशहरमे होइत छल ।

गाजियाबाद सन् १८५७ मे भारतीय स्वतन्त्रता सङ्ग्राममे सामिल भेल छल । स्वन्तन्त्रा सङ्ग्रामक दौरमे एहि क्षेत्रमे ब्रिटिश आ भारतीय स्वतन्त्रता सेनानी बीच हिन्डोन नदीक तटपर भिषण युद्ध भेल छल ।

सन् २०११ के भारतक जनगणना अनुसार गाजियाबादक जनसङ्ख्या ४६,८१,४५२ अछि जाहिमे २४,79,७१० पुरुष आ २२,०१,७४२ महिला अछि । गाजियाबादक साक्षरता दर ९३.८१% अछि । गाजियाबाद बी श्रेणीक जिला अन्तर्गत बी१ उपश्रेनीमे आबैत अछि । एतौका सामजिक आर्थिक अवस्था राष्ट्रिय तुलनामे बहुत कम अछि । ई उत्तर प्रदेशक शहर कानपुरक बाद दोसर सभसँ पैग उद्योगिक क्षेत्र छी ।
ब्राह्मण, जट आ त्यागी समुदायके संसदीय मत खसाबैके सङ्ख्या क्रमश: १.२ लाख, ६० हजार आ ७० हजार अछि । गुज्जर समुदायके लगभग ८०,००० मत अछि ।




#Article 543: हिण्डन नदी (339 words)


हिण्डन नदी, उत्तरी भारतमे यमुना नदीक एक सहायक नदी छी । एकर पुरातन नाम हरनदी या हरनन्दी सेहो छल । एकर उद्गम सहारनपुर जिलामे निचला हिमालय क्षेत्रक ऊपरी शिवालिक पर्वतमालामे स्थित अछि । ई पूर्णत: वर्षा-आश्रित नदी छी आ एकर बेसिन क्षेत्र ७,०८३ वर्ग किमी अछि। ई गंगा आ यमुना नदिसभक बीच लगभग ४०० किमीक लम्बाईमे मुजफ्फरनगर जिला, मेरठ जिला, बागपत जिला, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा सँ निकलैत दिल्ली सँ किछ दूरी पर यमुनामे मिल जाइत अछि । कहियो महानगरक पहचान मानल जाइवाली हिण्डन नदीक अस्तित्व खतरामे अछि । एकर पानि पिय लायक त कहियो नै रहल, आब ई नदीमे प्रदूषण एते बढि चुकल अछि कि जलीय प्राणियसभक अस्तित्व सेहो खतरामे पहुँच गेल अछि । ऐनामे हिण्डन नदी आब केवल शोध करै तक सीमित रहि गेल अछि । ई नदीमे अक्सिजनक मात्रा लगातार घटैत जा रहल अछि । वर्षा ऋतुमे सेहो ई लगभग जलविहीन रहैत अछि । नदीमे लगातार औद्योगिक अपशिष्ट आ पूजन सामग्री आदि डालल गेला कारण ओहिमे घुलित अक्सिजनक मात्रा दुई सँ तीन मिलिग्राम प्रति लीटर रहि गेल अछि । शोधकर्ता डाक्टर प्रसूम त्यागीक अनुसार प्रायः अक्सिजनक स्तर ६० लाख मिलिग्राम प्रति लीटर या ओई सँ बेसी होवाक चाही । याह कारण अछि कि नदीमे मोहन नगर आ छगारसीक पास जलीय जीवनक नाम पर केवल काइरोनास लार्वा बचल अछि, जे भारी जल प्रदूषणक संकेत छी । ई सूक्ष्म जीवक श्रेणीमे आबैत अछि ।

हिण्डन नदीमे मोहन नगर औद्योगिक क्षेत्रसँ डिस्टलरीक अपशिष्ट, वेस्ट डिस्चार्ज, धार्मिक पूजन सामग्री आ मलमूत्र मिलैत अछि । एकर बाद छगारसी ग्राममे पशुसभक नहेनाए आ खनन आदि होइत अछि, जकार कारण प्रदूषणमे बढोत्तरी होइत अछि । लगभग दस साल पहिने धरि नदीमे अनेक कशेरुकी प्राणी, माछ आ बेंग आदि मिलैत छल, जे कि वर्तमानमे मात्र सूक्ष्मजीव, काइरोनमस लार्वा, नेपिडी, ब्लास्टोनेटिडी, फाइसीडी, प्लैनेरोबिडी परिवारक सदस्य मात्र बचल अछि ।

दून घाटी सँ निकलैवला काली नदी, १५० किमीक यात्रामे सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ आ गाजियाबाद होइत हिण्डन नदीमे एकर यमुनामे मिलन सँ पूर्व मिलैत अछि । काली नदी सेहो उच्च प्रदूषण ल क चलैत अछि आ पश्चिमी उत्तर प्रदेशक बहुत सन प्रदूषित जल यमुनाके पहुंचैत अछि ।




#Article 544: अलकनन्दा नदी (255 words)


अलकनन्दा नदी गङ्गाक सहयोगी नदी छी । ई गङ्गाक चार नामसभमे सँ एक छी । चार धामसभमे गङ्गाक बहुतेक रूप आ नाम अछि । गङ्गोत्रीमे गङ्गाक भागीरथीक नामसँ जानल जाइत अछि, केदारनाथमे मन्दाकिनी आ बद्रीनाथमे अलकनन्दा । ई उत्तराखण्डमे शतपथ आ भगीरथ खड़क नामक हिमनदीसँ निकलैत अछि । ई स्थान गङ्गोत्री कहलावैत अछि । अलकनन्दा नदी घाटीमे लगभग २२९ किमी धरि प्रवाहित होइत अछि । देव प्रयाग या विष्णु प्रयागमे अलकनन्दा आ भागीरथीक सङ्गम होइत अछि आ एकर बाद अलकनन्दा नाम समाप्त भए केवल गङ्गा नाम रहि जाइत अछि । अलकनन्दा चमोली टहेरी आ पौड़ी जिला भ जाइत अछि ।. गङ्गाक पानिमे एकर योगदान भागीरथीसँ अधिक अछि । हिन्दू धर्मावलम्बीसभक प्रसिद्ध तीर्थस्थल बद्रीनाथ अलखनन्दाक तट पर बैसल अछि । राफ्टिंग इत्यादि साहसिक नाव खेलसभक लेल ई नदी बहुत लोकप्रिय अछि । तिब्बतक सीमा लग केशवप्रयाग स्थान पर ई आधुनिक सरस्वती नदीसँ मिलैत अछि । केशवप्रयाग बद्रीनाथसँ कुछ उचाई पर अवस्थित अछि ।

अलकनन्दा नदी कतौ बहुत गहिर, तँ कतौ उथल अछि, नदीक औसत गहराई ५ फिट (१.३ मीटर) आ अधिकतम गहराई १४ फिट (४.४ मीटर) अछि । 

अलकनन्दाक पाँच सहायक नदिसभ अछि जे गढ़वाल क्षेत्रमे ५ अलग अलग स्थानसभपर अलकनन्दा सँ मिल पञ्च प्रयाग बनाबैत अछि । अलकनन्दा नदीक पहिल सहायक नदीसभमे विष्णुप्रयाग अछि जे धौली गङ्गामे अलकनन्दासँ मिलैत अछि । दोसर सहायक नदी नन्दप्रयाग छी जे नन्दाकिनी मे अलकनन्दासँ मिलैत अछि । तेसर सहायक नदीसभमे कर्णप्रयाग छी जे पिण्डारीमे अलकनन्दासँ मिलैत अछि । आ अन्तिम चारिम सहायक नदीसभमे रूद्र प्रयाग अछि जे मन्दाकिनीमे अलकनन्दासँ मिलैत अछि । देवप्रयाग जे भागीरथीमे अलकनन्दासँ मिलैत अछि ।




#Article 545: देवप्रयाग (342 words)


देवप्रयाग भारतक उत्तराखण्ड राज्यमे अवस्थित एक नगर आ प्रसिद्ध तीर्थस्थान छी । ई अलकनन्दा नदी तथा भागीरथी नदीक सङ्गम पर स्थित अछि । याह सङ्गम स्थलक बाद ई नदीके पहिल बेर गङ्गा नदीक नाम सँ जानल जाइत अछि । एतय श्री रघुनाथ जी के मन्दिर अछि, जतय हिन्दू तीर्थयात्री भारतक कोना कोना सँ दर्शन करै लेल आबैत अछि । देवप्रयाग अलकनन्दा आ भागीरथी नदिसभकके सङ्गम पर बैसल अछि । एतय सँ दुनू नदिसभके सम्मिलित धारा गङ्गा कहलाबैत अछि । ई टेहरीसँ १८ माइल दक्षिण-दक्षिण-पूर्व दिशामे स्थित अछि । प्राचीन हिन्दू मन्दिरक कारण ई तीर्थस्थानक विशेष महत्व अछि । सङ्गम पर होमएक कारण तीर्थराज प्रयागक स्वरूप एकर नामकरण भेल अछि । 

देवप्रयाग समुद्र सतहसँ १५०० फिटक उचाई पर अवस्थित अछि आ निकटवर्ती शहर ऋषिकेशसँ सड़क मार्गद्वारा ७० किमीक दूरी पर अछि । ई स्थान उत्तराखण्ड राज्यक पञ्च प्रयागमे सँ एक मानल जाइत अछि । एकर अलावा एकर बारेमे कहल जाइत अछि कि जब राजा भागीरथ गङ्गाक पृथ्वी पर आनैक लेल समर्थन बनौलक तहन ३३ करोड़ देवी-देवता सेहो गङ्गाक साथ स्वर्गसँ पृथ्वीलोक आएल छल । तब ओसभ अपन आवास देवप्रयागमे बनेनाए छल जे गङ्गाक जन्म भूमि छी । भागीरथी आ अलकनन्दाक सङ्गमक बाद याह ठामसँ पवित्र नदी गङ्गाक उद्भव होइत अछि । याह ठाम पहिल बेर ई नदी गङ्गाक नामसँ जानल जाइत अछि ।

गढ़वाल क्षेत्रमे मान्यतानुसार भागिरथी नदीक सौस तथा अलकनन्दा नदी को बौह कहल जाइत अछि । ई स्थानक मुख्य आकर्षणमे सङ्गमक अलावा एक शिव मन्दिर तथा रघुनाथ मन्दिर छी जाहिमे रघुनाथ मन्दिर द्रविड शैलीमे निर्मित अछि । देवप्रयाग प्राकृतिक सम्पदासँ परिपूर्ण अछि । ई ठामक सौन्दर्य अद्वितीय अछि । निकटवर्ती डण्डा नागराज मन्दिर आ चन्द्रवदनी मन्दिर सेहो दर्शनीय अछि । देवप्रयागक सुदर्शन क्षेत्र सेहो कहल जाइत अछि । ई ठाम पर कव्वा नै देखल गेल अछि, जे की एक आश्चर्यक बात छी ।

मान्यतानुसार एतय देवशर्मा नामक एक तपस्वी कठोर तपस्या केनए छल, जकार नाम पर ई स्थानक नाम देवप्रयाग पड़ल । प्रयाग कोनो भी सङ्गमक कहल जाइत अछि । ई स्व.आचार्य श्री पं.चक्रधर जोशी नामक ज्योतिष्विद आ खगोलशास्त्रीक गृहस्थान छल, जे सन् १९४६ मे नक्षत्र प्रयोगशालाक स्थापना केनए छल ।




#Article 546: इब्राहिम इस्माइल चुंदरीगर (111 words)


इब्राहिम इस्माइल चनदरीगर, एक पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ एवं पाकिस्तान क पूर्व प्रधानमंत्री छल । हुनक जन्म 1897 मे अहमदाबाद भेल छल । हुनक शिक्षामुंबई विश्वविद्यालय स कानूनक  डिग्री ल भेल। ओ  1924 में अहमदाबाद नगर निगम क सदस्य भेल आ  1937 मे बम्बई विधानसभा के सदस्य चुनल गेल छल । विभाजनक बाद पाकिस्तान क केंद्रीय मंत्रिमंडल मे अगस्त 1947 स मई 1948 आ  अगस्त 1955 धरि अगस्त 1956 मंत्री रहल ।

इब्राहिम इस्माइल चनदरीगर फरवरी 1950 स नवंबर 1951 धरि, उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत(ख़ैबर पख़्तूनख़्वा) आ  नवंबर 1951 स मई 1953 धरि पंजाब, पाकिस्तान के राज्यपाल रहल ।

इब्राहिम इस्माइल चनदरीगर 17 अक्टूबर 1957 स 16 दिसंबर 1957 धरि पाकिस्तानक प्रधानमंत्री रहल ।




#Article 547: कोल्लम (106 words)


कोल्लम(मलयालम: കൊല്ലം, कॊल्लम्)केरलमे अरब सागरक तट पर अष्टमुदी झीलके निकट बसल एक बंदरगाह नगर छी। व्यवसायिक दृष्टिसं महत्वपूर्ण इ नगर कs प्राचीन कालसं विशेष महत्व रहल अछि। इब्न बतूता द्वारा १४हम शताब्दीमे एकरा भारतके पांच बड़का बंदरगाहसभमे शुमार कएने छल । मानल जाइत अछि कि इ शहर कs स्‍थापना नवम शताब्दी मे सीरियाके व्यापारी सपीर ईसो द्वारा कएल गेल छल । कोल्लम कs अही ठामक प्राकृतिक खूबसूरती आर विविधतासभक लेल जानल जाइत अछि। समुद्र, झील, मैदान, पहाड़, नदिसभ, बैकवाटर, जंगल, आदि विविधतासभ एकरा अन्य स्थानसभसं पृथक करेत अछि।

कोल्लम कs सीमासभसं पत्तनमत्तिट्टा जिला आर आलप्पुषा़ जिला उत्तरी दिस, तथा तिरुअनन्तपुरम जिला दक्षिणी दिस सं लागैत अछि।




#Article 548: जेली फिस (207 words)


जेली फिस या जेली या समुद्री जेली या मेड्युसोजोआ, या गिजगिजिया नाइडेरिया सङ्घक मुक्त-तैराक सदस्य छी । जेली फिसक कयन अलग रूप अछि जे स्काइफोजोआ (२०० सँ अधिक प्रजातिसभ), स्टारोजोआ (लगभग ५० प्रजातिसभ), क्युबोजोआ (लगभग २० प्रजातिसभ) आ हाइड्रोजोआ (लगभग १०००-१५०० प्रजातिसभ जाहिमे जेली फिस आ कायन अनेक शामिल अछि) सहित विभिन्न नाइडेरियाई वर्गसभक प्रतिनिधित्व करैत अछि । ई समूहसभमे जेली फिसके, क्रमशः, स्काइफोमेड्युसे, स्टारोमेड्युसे, क्युबोमेड्युसे आ हाइड्रोमेड्युसे सेहो कहल जाइत अछि । सम्पूर्ण जेली फिस उपसङ्घ मेड्युसोजोआ मे सन्निहित अछि । मेड्युसा जेली फिस क लेल एक आओर शब्द छी आ याह लेल जीवन-चक्रक वयस्क चरणक लेल विशेष रूपसँ प्रयुक्त होइत अछि ।

जेली फिस हर समुद्रमे, सतहसँ समुद्रक गहराई धरि पावल जाइवला माछ छी । किछ हाइड्रोजोआई जेली फिस, या हाइड्रोमेड्युसे ताजा पानिमे सेहो पाएल जाइत अछि; मीठ पानिक प्रजातिसभ व्यासमे एक इञ्च (२५ मिमी), बेरङ्ग होइत अछि आ डङ्क नै मारैत अछि । आरेलिया जेना कयन सुविख्यात जेली फिस, स्काइफोमेड्युसे छी । ई पैग, अक्सर रङ्गीन जेली फिस छी, जे विश्व भरिमे सामान्यतः तटीय क्षेत्रसभमे पाएल जाइत अछि ।

अपन व्यापक अर्थमे, शब्द जेली फिस आम तौर पर सङ्घ टिनोफोराक सदस्यसभक निर्दिष्ट करैत अछि । शेर अयाल जेली फिस सर्वाधिक विख्यात जेली फिस छी आ विवादास्पद तौर पर दुनियाक सबसँ लम्बा जानवर छी ।




#Article 549: शंकरपोखरी (105 words)


 नेपालक पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्रक धवलागिरी अञ्चल, पर्वत जिलामे अवस्थित गाँउ विकास समिति छी ।  पर्वत जिलाक शंकरपोखरी गाविस क्षेत्रफलक हिसाबस जिलाक सब्स बड्का गाविस छि । ई  गाविसक सब्स बेसी शिक्षितसभक गाविस कहैत छि । एकर उत्तरमे मल्याङ्दी खोला आर दक्षिणमे लमाहे खोला छि । दक्षिणी भेग पानिक अभावमाग्रस्त छि । ई गाविसमे दलित आर क्षेत्री बाहुनक बाहुल्यता छि । जनजातिक बसोबास ई गाविसमे नैछि । अन्य स्थानस एल कनी-मनी लोगसभ व्यापार केन छि । एत एकटा बहुमुखी क्याम्पस छि । एकटा गाविमे तीनटा माध्यमिक विद्यालय हुबाई बाला गाविस पर्वतमे शंकरपोखरी सही छि । 
पर्याप्त जंगल हैक कारणस प्राकृतिक स्रोतमे धनि मानल जाएत अछि ।

 




#Article 550: नेटफ्लिक्स (100 words)


नेटफ्लिक्स एकटा अमेरिकी कम्पनी छी, जे उपयोग अनुसारक इन्टरनेटक माध्यम सँ लोकके मिडिया उपलब्ध कराबैत अछि । ई अस्ट्रेलिया, न्यू ज़ीलैंड, दक्षिण अमेरिका, जापान, उत्तर अमेरिका, आ यूरोपक किछ भाग जेना डेनमार्क, फ्रान्स, जर्मनी, नेदरल्याण्ड, नर्वे, स्वीडेन, फिनल्याण्ड, स्विट्जरल्याण्ड, अस्ट्रिया, बेल्जियम, लक्जेम्बर्ग, आयरल्याण्ड, स्कटल्याण्ड आ इङ्ल्यान्डमे उपलब्ध अछि । ई अमेरिकामे डिभिडीके माध्यमसँ पठाओल जाइत अछि । एकर निर्माण सन् १९९७ मे क्यालिफोर्नियामे कएल गेल छल । ई सदस्यता सेवा सन् १९९९ मे शुरू केलक । सन् २००९ मे ई कुल १,००,००० शीर्षकमे डिभिडी प्रदान करि लागल ।

ई कम्पनी पहिलेसँ सेहो प्योर सफ्टवेयर नामक कम्पनीमे कार्य करि चुकल अछि।




#Article 551: टाटा मोटर्स (114 words)


टाटा मोटर्स भारतमे व्यावसायिक वाहन बनाबs बला सबसं बड़का कम्पनी छी। एकर पुरना नाम टेल्को (टाटा इन्जिनियरिंग एन्ड लोकोमोटिव कम्पनी लिमिटेड) छल। इ टाटा समूह कs प्रमुख कम्पनीसभमे सं एक छी। इसकी येक्र इकाइसभ भारतमे जमशेदपुर (झारखण्ड), पुणे (महाराष्ट्र) आर लखनऊ (उत्तर प्रदेश) सहित अन्य बहुतो देशमे सहो अछि। जेना कि नामसं स्पष्ट छै टाटा घराना द्वा्रा इ कारखाना कs शुरुआत अभियांत्रिकी आर रेल इन्जनके लेल भेल छल । किन्तु आब इ कम्पनी मुख्य रूपसं भारी एवं हल्का वाहनसभक निर्माण करैत अछि। इ ब्रिटेनके प्रसिद्ध ब्रान्डो जगुआर आर ल्यान्ड रोवर कs खरीद लेने अछि।

टाटा मोटर्स द्वारा वर्ष २००८ धरि ६०००० वनकैट एयरकार लगभग €2,500 कs लागत पर बनाबै कs लक्ष्य निर्धारित कएने अछि।




#Article 552: मनकामना मन्दिर (130 words)


मनकामना/मनोकामना भगवति गोरखाक मनकामना पनि महत्वपूर्ण देवीस्थान शक्तिपीठ छी। मनक इच्छा पूरा करवाला भगवती मानल अर्थम मनकामना नाम रहल अछि । राम शाहक रानी स्वयं मनकामना भगवतीक अवतार छेल्ह्नी जनविश्वास अछि।
दशैम पूजा के लेल बढिया  भीड रहैत अछि। ई प्रत्येक अष्टमीक दिन बलि प्रदान होयेत अछि। मनकामनाक दर्शनक मनोकांक्षा पूरा होयेत धार्मिक विश्वास अछि।

मनकामना मन्दिर, गोर्खा जिलाक सदरमुकामसँ दक्षिणपुर्वी भागमा अवस्थीत अछि । ई मन्दिर गोर्खाक सदरमुकामक पोखरीथोक बजारसँ १२ किलोमिटर दक्षिण, तनहूक आबुखैरेनी देखि ५ किलोमिटर पूर्व आर चितवनक मुग्लिनसँ २६ किलोमिटर उत्तरम अवस्थित अछि । समुद्री सतहसँ १३०३ मिटरक उचाईम अवस्थित ई मन्दिरक परिसरसँ दक्षिणदिश महाभारत लेक आर छिम्केश्वरी डाँडाक साथै उत्तरी भागमा अन्नपुर्ण हिमाल आर मनास्लु हिमालक चुचुरासभ देख्ल जा सकैत छी। मन्दिर प्रांगणसँ दुनु समयम सुर्यादय सुर्यास्तक मनमोहक दृष्य देख्ल जा सकैत अछि ।




#Article 553: दिक्तेल नगरपालिका (150 words)


दिक्तेल नगरपालिका पूर्वी नेपालक सगरमाथा अञ्चलम रहल खोटाङ जिलाम अवस्थित अछि । दिक्तेल बजार रहल ठाँमक केन्द्र बनावल अछि ।  ई नगरपालिका २०७१ जेष्ठ ४ सँ लागू भकऽ बनावल गेल अछि । एकरा नगरपालिका घोषणा करैतकालम दिक्तेल,बाम्राङ्ग, लफ्याङ, खाल्ले गाउँ विकास समितिसभ समावेश केनए छल । आर्थिक वर्ष २०६८/६९ क बजेटमार्फत् मुलुकम ४१ नयाँ नगरपालिका बढ़वैतकाल रंगेली सेहो नगरपालिका बनल छल लेकिन ई हाल कार्यान्वयनम आवल गेल अछि । महानगरपालिका, उपमहानगरपालिका आर नगरपालिकाक आब मुलुकम कूल १३५ भेल अछि तहिना गाविसक संख्या ३ हजार ९ सय १५ सँ घैटक ३ हजार ६ सय ३३ भेल अछि । दिक्तेल खोटाङ जिलाक सदरमुकाम तथा सबसँ पैग व्यापारिक केन्द्र सेहो छी ।

दिक्तेल,बाम्राङ्ग, लफ्याङ, खाल्ले गाविससभ जोडीक दिक्तेल नगरपालिका बनावल गेल अछि । तहिना बि.स.२०६८ क जनगणना अनुसार यी ठामसभक जनसंख्याक जोडि १७,७९३ रहल छल  ।

ई ठाम अक्षांश आर देशान्तर छी ।समुन्द्र सतहभन्दा यो ठाउँ १५३१ मिटर (५०२२ फिट) माथि पर्दछ । 




#Article 554: जयललिता (537 words)


जयललिता जयराम (तमिल भाषा: ஜெ. ஜெயலலிதா, कन्नड भाषा: ಜೆ. ಜಯಲಲಿತಾ, मलयालम भाषा: ജെ. ജയലളിത, २४ फ़रवरी १९४८ – ५ दिसम्बर २०१६) भारतीय राजनीतिज्ञ तथा तमिलनाडुक मुख्यमन्त्री छल। ओ दक्षिण भारतीय राजनैतिक दल अल इन्डिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्ना द्रमुक) कs महासचिव छल। अहीसं पूर्व ओ १९९१ सं १९९६, २००१ मे, २००२ सं २००६ धरि आर २०११ सं २०१४ धरि तमिलनाडु कs मुख्यमन्त्री रहल। राजनीतिमे आबsसं पहिल ओ अभिनेत्री छल आर ओ  तमिलके अलावा तेलुगू, कन्नड आ एक हिन्दी तथा एक अँग्रेजी फिल्ममे सेहो काम कएने अछि। जब ओ स्कूलमे पढ़ति रहल समय तखन हुनका द्वारा 'एपिसल' नामक अंग्रेजी फिल्ममे काम केलक। ओ १५ वर्षक आयुमे कन्नड फिल्मसभमे मुख्‍य अभिनेत्री कs भूमिका करs लागल छल। एकर बाद ओ तमिल फिल्मसभमे काम करs ल्लागल। ओ दक्षिण भारतक पहिल ऐहन अभिनेत्री छल जे स्कर्ट पहिनकs फिल्मसभमे भूमिका निभौने छल। १९६५ सं १९७२ कs दौरमे अधिकतर फिल्मसभमे एमजी रामचंद्रनके साथ काम केलक।  फिल्मी करियरके बाद ओ एम॰जी॰ रामचंद्रनके साथ १९८२ मे राजनीतिक करियरक शुरुआत केलक। ओ १९८४ सं १९८९ के समयमे तमिलनाडु सं राज्यसभाके लेल राज्य कs प्रतिनिधित्व सेहो कएने छल। वर्ष १९८७ मे रामचन्द्रन कs निधनके बाध ओ खुद अपनाकs रामचन्द्रनकs विरासत कs उत्तराधिकारी घोषित करि देने छल। ओ २४ जून १९९१ सं १२ मई १९९६ धरि राज्यक पहिल निर्वाचित मुख्‍यमन्त्री आ राज्य कs सबसं कम उम्र कs मुख्यमन्त्री रहल। अप्रिल २०११ मे जब ११ दलसभके गठबन्धन द्वारा १४हम राज्य विधानसभामे बहुमत हासिल केलक तs ओ तेसर बेर मुख्यमन्त्री बनल। ओ १६ मई २०११ कs मुख्‍यमन्त्री पदक शपथ लेलक आर तखनसं ओ राज्य कs मुख्यमन्त्री छल। राजनीतिमे हुनकर समर्थक हुनका अम्मा (मां) आ कहियो कहियो पुरातची तलाईवी ('क्रांतिकारी नेता') कहिकs बुलाबैत छल।

जयललिता कs जन्म २४ फ़रवरी १९४८ कs एक अय्यर परिवार मे, मैसूर राज्य (जे कि अब कर्नाटक कs हिस्सा अछि) के मांडया जिलाके पांडवपुरा तालुक के मेलुरकोट गाममे भेल छल। हनकर दादा तत्कालीन मैसूर राज्य मे एक सर्जन छल। महज २ सालकs उम्र मे ही हुन्कर पिता जयराम, हुनका माए संध्याके साथ अकेले छोडि कs चल गेल छल। पिता कs मृत्युके पश्चात हुनकर माए हुन्का लsकs बंगलौर चल आएल, जतह हुन्कर माता-पिता रहैत छल। बाध मे हुन्कर माए तमिल सिनेमामे काम करकs शुरू करि देलक आर अपन फिल्मी नाम 'संध्या' राखि लेलक।

तमिल सिनेमामे ओ जानल मानल निर्देशक श्रीधर कs फिल्म 'वेन्नीरादई' सं अपन करियर शुरू कएने छल आ लगभग ३०० फिल्मसभमे काम केलक। ओ तमिलके अलावा तेलुगु, कन्नड़, अँग्रेजी आर हिन्दी फिल्मसभमे सहो काम कएने अछि। ओ धर्मेन्द्र सहित बहुतो अभिनेतासभके साथ काम केलक, किन्तु हुन्कर ज्यादातर फिल्मसभ शिवाजी गणेशन आर एमजी रामचन्द्रनके साथ ही आएल।

अम्मा जयललिता १९८२ मे ऑल इन्डिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्ना द्रमुक) कs सदस्यता ग्रहण करैत एम॰जी॰ रामचन्द्रनके साथ अपन राजनीतिक जीवन कs शुरुआत केलक। १९८३ मे हुनका पार्टी कs प्रोपेगेनडा सचिव नियुक्त कs देल गेल। बाध मे अंग्रेजी मे हुन्कर वाक क्षमता कs देखैत पार्टी प्रमुख रामचन्द्रन हुनका  राज्यसभा मे पठेलक आर राज्य विधानसभाके उपचुनावमे जिता कs हुन्का विधानसभा सदस्य बनेलक। ओही समयसं ओ राजनीतिक बड्का नेत्री बनल छल ।

जयललिता कs पहलि बेर मद्रास विश्वविद्यालय सं १९९१ मे डॉक्टरेट कs मानद उपाधि मिलल आर ओकर बाध हुनका बहुतो बेर मानद डॉक्टरेट सं सम्मानित कएल जाs चुकल अछी। वर्ष १९९७ मे हुनकर जीवन पर बनल एक तमिल फिल्म इरूवर आएल छल जहिमे जयललिता कs भूमिका ऐश्वर्या राय निभौने छल।




#Article 555: राबड़ी देवी (134 words)


राबड़ी देवी (जन्म: १९५६ गोपालगञ्ज) स्वतन्त्र भारतक बिहार राज्यक पहिल महिला मुख्यमन्त्री छी।राष्ट्रिय जनता दलक अध्यक्ष लालू प्रसाद यादवक पत्नी राबड़ी देवी २५ जुलाई १९९७ कें दिन बिहारक मुख्यमन्त्री ओहि समय बनल जब बहुचर्चित चारा घोटाला मामलामे हुनकर पतिकें जेल जाए पड़ल । ओ तीन कार्यकालमे मुख्यमन्त्री पद सम्भाललक । मुख्यमन्त्रीकें रूपमे हुनकर पहिल कार्यकाल मात्र २ वर्षक रहल जे सन् १९९७ जुलाई ७ सँ सन् १९९९ नवम्बर २ धरि चल सकल । दोसर आ तेसर कार्यकालमे ओ मुख्यमन्त्रीकें रूपमे अपन पाँच सालक कार्यकाल पूरा केनए छल । हुनकर दोसर आ तेसर कार्यकाल क अवधि क्रमशः सन् १९९९ मार्च ९ सँ सन् २००० फरबरी ३ धरि आ सन् २००० मार्च ११ सँ सन् २००५ मार्च ६ धरि रहल । सन् २००५ मे भेल विधानसभा चुनावमे राबड़ी देवी वैशालीकें राघोपुर क्षेत्रसँ निर्वाचित भेल छल ।




#Article 556: मनोहर लाल खट्टर (192 words)


मनोहर लाल खट्टर (जन्म: 5 मई 1954) भारतक हरियाणा राज्यक मुख्यमंत्री निर्वाचित भेल अछी। 26 अक्टूबर 2014 क वो हरियाणाक 10हम मुख्यमंत्रीक रूपम शपथ ग्रहण करने अछी ।  मनोहर लाल खट्टर हरियाणाक पहिल एहन मुख्यमंत्री छी जो गैर जाट समुदाय सं आइल अछी,  18 वर्ष बाद वओ इस पद पर विराजमान होए वाला पहिल गैर जाट नेता छी। वओ भारतीय जनता पार्टीक सदस्य छी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघक प्रचारक रहल चुकल छी। हरियाणा विधानसभा में वओ करनालक प्रतिनिधित्व करैत् अछी। 2014 के हरियाणा विधान सभा चुनावम भारतीय जनता पार्टीक विजयक पश्चात् विधायक दल द्वारा वओ नेता चुनल गेल तथा मुख्यमंत्री पद हेतु नामित केल गल।

मनोहर लाल खट्टरक जन्म 5 मई, 1954 में रोहतकक निदाना गांममें भेल छल। साधारणस किसान परिवार मे वाले खट्टर पंजाबी समुदाय सं ताल्लुक रखत अछी। खट्टरक परिवार 1947क भारत विभाजन क बाद पाकिस्तान सं आकार रोहतक जिलाक निदाना गाँम में बसल अछी। खट्टर स्कूलक सभ गतिविधियोंम काफी आगु छल। खट्टर डॉक्टर बनल चाहात अछी, पढ़ाईक इसी शौकक चलते खट्टर अपन परिवारम 10 पास करे वाला पहिल सदस्य बनल। मनोहर लाल खट्टर दसवीं पास  के बाद दिल्ली में सदर बाज़ारम दुकानदारी कएलक। साथ ओं दिल्ली विश्वविद्यालयस ग्रेजुएशन कएल। 




#Article 557: अलवर जिला (134 words)


अलवर  भारतीय राज्य राजस्थानक एक जिला छी । ई जिलाक मुख्यालय अलवर छी । ई राष्ट्रिय राजधानी क्षेत्रक हिस्सा सहो छी । राजस्थानक राजधानी जयपुरसँ करीब १७० किलोमिटरक दूरी पर अछि । अलवर अरावलीक पहाडक मध्य स्थान मे बैसल अछि ।

अलवरक नजदिक घूमैक अनेकौं जगहसभ अछि। सिलिसेढ, सरिस्का वन्य जीव उद्यान आ भरतपुर पक्षी उद्यान। अलवरक किला आ संग्रहालय सेहो देखैक योग्य अछि। अलवरक कोर्टक इमारत एक बहुत ही खूबसूरत पुरान महलमे बनल गेल अछि। अलवरसँ १७० कि॰मी॰ क दूरी पर जयपुर आ १५० कि॰मी॰ पर मथुरा, गोवर्धन आ वृन्दावन स्थित अछि।

क्षेत्रफल - वर्ग कि.मी.

जनसंख्या - २९,९०,८६४ (२००१ जनगणना)

साक्षरता - ६२.४८

एस. टी. डी (STD) कोड - ०१४४ जिलाधिकारी - (सितम्बर २००६ मे)

समुद्र तटसँ उचाई - 

अक्षांश - २७.५७ उत्तर

देशांतर - ७६.६ पूर्व

औसत वर्षा - 315 मि.मी.




#Article 558: बीकानेर जिला (168 words)


 बीकानेर भारतीय राज्य राजस्थानक एक जिला छी।

जिला कs मुख्यालय बीकानेर अछि।

क्षेत्रफल - २७,२४४ वर्ग कि.मी.

जनसंख्या - २३६७७४५ (२०११ जनगणना)

साक्षरता - ६५.९२%

एस. टी. डी (STD) कोड - ०१५१

जिलाधिकारी - (सितम्बर २००६ मे)

समुद्र तल से उचाई -

अक्षांश - 28.01 उत्तर

देशांतर - 73. 19 पूर्व

औसत वर्षा - २४३ मि.मी.

बीकानेर जिलाके दर्शनिय स्थल 
१। देशनोकs करनी माता कs मन्दिर 
इ मन्दिर बीकानेरके बसsसं पहिल बनल अछि 
इ मन्दिर चुहो के मन्दिरक नाम सं प्रसिद्ध अछि 

बीकानेर रेगिस्तानक जिलामे एक छी जे उत्तर-पूर्व राजस्थानमे अछि। अहिकs उत्तरी दिस श्रीगंगानगर, पश्चिमी दिस जैसलमेर आ पाकिस्तान, चुरु पूर्वी दिस श्री डुंगरगढ आ नागोर आर जोधपुर दक्षिण-पूर्व मे स्थित अछि।

जिला कs अधिकतम तापमान ४८ सेल्सियस आर न्यूनतम तापमान शून्य सं सहो एक डिग्र्री कम अछि।

बीकानेरके वर्तमान ग्रिड उप-कार्यस्थलसभ कs क्षमता ६२.० एम०वी०ए० अछि।

ज़मीन कs स्तरसं नीचा पानी अरावलीके ऊपर, विंध्य सं बनs वला क्षेत्रसभमे ६० मीटर कs गहराई पर मिलैत अछि।

विभिन्न प्रकारक मिट्टी जेना कि फ़ायर क्ले, गेरू आर खरिया माटि।




#Article 559: जोधपुर जिला (101 words)


जोधपुर जिला भारतके राजस्थान राज्यकs एक ज़िला छी। एकर मुख्यालय जोधपुर नगरमे अछि जे कि राजस्थान कs दोसर सबसं बड़का नगर छी। 

जोधपुर शहर पश्चिमी राजस्थान कs सबसं बड़का शहर छी, एकर स्थापना राव जोधा द्वारा सन १४५९ मे कएल गेल छल।

२६॰-२७॰३७'उत्तरी अंक्षाश
७२॰५५'-७३॰५२'पूर्वी देशान्तर

प्रशासन कs दृष्टि सं जोधपुर जिला कs निम्न तहसीलसभ मे बाँटल गेल अछि:

जोधपुर कs इतिहास १४५९ मे राव जोधा कएल गेल छल ओ राठौड़ कुलके राजपूत छालह हुनकर पिता रणदेव कs हत्या मेवाड़ मे भs गेल छल अही खातिर हुनका छोड़s पड़ल शुरूमे मन्डोर जोधा कs राजधानी छल बाध मे जोधपुर उनका केन्द्र बनल।




#Article 560: कोटा जिला (137 words)


 कोटा भारतीय राज्य राजस्थान कs एक जिला छी।

जिला कs मुख्यालय कोटा अछि।

क्षेत्रफल - १२,४३६ (12,436) वर्ग कि॰मी॰

जनसंख्या - १,५६८,५२५ (1,568,525) (2001 जनगणना)

साक्षरता - पुरुष - ७८%, महिला - ६३%

एस॰टी॰डी॰ कोड - ०७४४

जिलाधिकारी - (जुलाई 200८ मे) अभय कुमार

समुद्र तल से उचाई - २७१(271) m (889 ft)

अक्षांश - उत्तर

देशांतर - पूर्व

औसत वर्षा - मि॰मी॰

कोटा शहर भारतके राजस्थान प्रदेशमे आबैत अछि। इ चम्बल नदीके किनारमे बसल अछि। अही ठाम बहुतो प्रकारक कारखाना अछि, जहिमे रसायन तथा प्रोध्योगिकी सम्बन्धित कारखाना प्रमुख अछि। अही ठाम बहुतो प्रमुख शहरसभ सं रेल आर सडक सं जुडल अछि। ≥

कोटा शहर चम्बल नदीके किनारमे बसल अछि। इ राजस्थानके दक्षिन प्रान्त मे अछि। 

कोटा आर्थिक रूप सं मुख्यत: शिक्षा क्षेत्र पर निर्भर अछि। अही ठाम बहुतो प्रकार कs परिक्षासभ के लेल पढाओल जाइत अछि।




#Article 561: अखिलेश यादव (224 words)


 
अखिलेश यादव (जन्म: १ जुलाई १९७३) वर्तमान मे उत्तर प्रदेशक मुख्यमन्त्री छी। अहीसं पूर्व ओ लगातार तीन बेर सांसद सहो रहि चुकल अछि। समाजवादी पार्टीके राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव कs पुत्र अखिलेश द्वारा २०१२ कs उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव मे अपन पार्टी कs नेतृत्व केलक। हुनकर पार्टी कs राज्यमे स्पष्ट बहुमत मिलला के बाध, १५ मार्च २०१२ कs ओ उत्तर प्रदेशके मुख्य मन्त्री पदक शपथ ग्रहण कलक।पर आब पारिवारिक विवाद सं चर्चामे अछि।  I  WOULD Lik

अखिलेश यादवक जन्म १ जुलाई १९७३ कs इटावा जिलाक सैफई गाम मे समाजवादी पार्टीके नेता मुलायम सिंह यादव कs पहिल पत्नी मालती देवीके घर भेल छल। हिन्कर माए कs देहान्त बचपन मे ही भs गेल छल। अखिलेश विवाहित अछि आ तीन बच्चासभकक पिता अछि। डिम्पल यादव हुन्कर पत्नी छी, जे कि कन्नौज सं निर्विरोध साँसद चुनल गेल अछि।

अखिलेश राजस्थान मिलिट्री स्कूल धौलपुर सं शिक्षा प्राप्त केलक ओ अभियान्त्रिकी मे स्नातक कs उपाधि मैसूरके एस॰ जे॰ कउलेज ऑफ इंजीनियरिंग सं लेलक, बाधमे विदेश चल गेल आर सिडनी विश्वविद्यालय सं पर्यावरण अभियान्त्रिकीमे स्नातकोत्तर केलक

अखिलेश द्वारा मई २००९ के लोकसभा उप-चुनाव मे फिरोजाबाद सीट सं अपन निकटतम प्रतिद्वंद्वी बहुजन समाज पार्टीके प्रत्याशी एस०पी०एस० बघेल कs ६७,३०१ मतसं हराकs सफलता प्राप्त केएने छल।

मार्च २०१२ के विधान सभा चुनाव मे २२४ सीट जीतकs मात्र ३८ वर्ष कs आयु मे ही ओ उत्तर प्रदेश के ३३अम मुख्यमन्त्री बनि गेल। 




#Article 562: महबुबा मुफ्ती (102 words)


महबूबा मुफ़्ती (जन्म:२२ मई १९५९, बिजबिहारा) एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा जम्मू आ कश्मीर कऽ तेरहम आ एक महिलाक रूपमे राज्य कऽ प्रथम मुख्यमन्त्री छी। महबूबा मुफ्तीसँ पूर्व वर्ष १९८० मे सैयदा अनवरा तैमूर कोनो भरतीय राज्य (असम)कऽ पहिल मुस्लिम मुख्यमन्त्री बनल छल। ई प्रकार ओ देशकऽ कोनो राज्य कऽ दोसर मुस्लिम मुख्यमन्त्री छी। ओ अनन्तनागसँ लोकसभा सांसद अछि। साथे जम्मू आ कश्मीर पिपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी कऽ राजनेत्री आ अध्यक्षा तथा जम्मू आ कश्मीरके पूर्व मुख्यमन्त्री मुफ़्ती मोहम्मद सईदकऽ पुत्री छी। पिता कऽ बीमारीक कारण मृत्युक बाद ओ जम्मू आ कश्मीर कऽ मुख्यमन्त्री बनल अछि।महबूबा मुफ़्ती जम्मू आ कश्मीरक पहिल महिला राजनेत्री है।




#Article 563: सत्यमेव जयते (171 words)


सत्यमेव जयते (= सत्यं एव जयते) भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य है। एकर अर्थ छी : सत्य ही जीतैत अछि / सत्यक जीत अछि। ई भारतक राष्ट्रीय प्रतीक क नीचला देवनागरी लिपि में अंकित छी। ई प्रतीक उत्तर भारतीय राज्य उत्तर प्रदेशम वाराणसीक निकट सारनाथ में 250 ई.पू. मे सम्राट अशोक द्वारा बनवाये गए सिंह स्तम्भक शिखर सँ लेल गेल अछि , लेकिन वहिमे ई आदर्श वाक्य नै अछि। 'सत्यमेव जयते' मूलतः मुण्डक-उपनिषदक सर्वज्ञात मंत्र 3.1.6 है। पूर्ण मंत्र एवंम प्रकार अछि:

सत्यमेव जयते नानृतम
सत्येन पंथा विततो देवयानः।
येनाक्रमंत्यृषयो ह्याप्तकामो
यत्र तत् सत्यस्य परमम् निधानम्।।

अर्थात अंततः सत्यकी ही जय होती है न कि असत्य की। यही वह मार्ग है जिससे होकर आप्तकाम (जिनकी कामनाएं पूर्ण हो चुकी हों) मानव जीवन के चरम लक्ष्य को प्राप्त करते हैं।.

'सत्यमेव जयते' क राष्ट्रपटल पर लावक आर  प्रचार कर में मदन मोहन मालवीय (विशेषतः कांग्रेसक सभापतिक रूपमें उन्कर द्वितीय कार्यकाल (१९१८) में)क महत्वपूर्ण भूमिका अछि। 

चेक गणराज्य आर एकर पूर्ववर्ती चेकोस्लोवाकियाक आदर्श वाक्य प्रावदा वितेजी (सत्य जीत छी)क सेहो समान अर्थ छी।




#Article 564: वसुन्धरा राजे सिन्धिया (154 words)


वसुन्धरा राजे सिन्धिया भारतकs राज्य राजस्थान कs पूर्व मुख्यमन्त्री छी। ओ राजस्थान कs पहिल महिला मुख्यमन्त्री छी।

वसुन्धरा राजे कs जन्म ८ मार्च १९५३ कs मुम्बई मे भेल छल। ओ ग्वालियर राजघराना कs पुत्री छी। हुन्कर पिता कs नाम जीवाजीराव सिन्धिया आ माँ कs नाम विजयाराज सिन्धिया छी। ओ मध्य प्रदेशके कांग्रेस नेता माधव राव सिन्धिया कs बहिन छी। हुन्कर विवाह धौलपुरके एक जाट राजघराना मे भेल छल।

राजे कs १९८४ मे भाजपा कs राष्ट्रीय कार्यकारिणीमे शामिल कएल गेल छल। एकर बाध १९८५-८७ के बीच राजे भाजपा युवा मोर्चा राजस्थानक उपाध्यक्ष रहल छल। १९८७ मे वसुंधरा राजे राजस्थान प्रदेश भाजपा कs उपाध्यक्ष बनल। हुन्कर कार्यक्षमता, विनम्रता आ पार्टीके प्रति वफादारीके कारन १९९८-१९९९ मे अटलबिहारी वाजपेयी मन्त्रीमन्डल मे राजे कs विदेश राज्यमन्त्री बनाओल गेल। वसुंधरा राजे को अक्टूबर १९९९ मे फेर केन्द्रीय मन्त्रीमन्डल मे राज्यमन्त्रीकs तौर पर स्वतंत्र प्रभार सौंपल गेल। भैरोंसिंह शेखावतके उपराष्ट्रपति बननेके बाध हुन्का राजस्थान मे भाजपा राज्य इकाई कs अध्यक्ष बनल।




#Article 565: एयर इन्डिया एक्सप्रेस (101 words)


एयर इन्डिया एक्सप्रेस भारतमे सार्वजनिक क्षेत्रक पहिल बजट एयरलाइन्स छी । ई एयर इन्डियाक एक आनुषांगिक एकाई छी । अप्रैल २००५ मे शुरु भेल ई विमान सेवा फिलहाल दिल्ली, मुम्बई, त्रिवेन्द्रम आओर कोच्चीसँ खाड़ी क्षेत्रक दुबई, मस्कट, अबु धाबी सहित किछ अन्य शहरसभक लेल उडान भरैत अछि । भविष्यमे एकर विस्तार दक्षिण पूर्वी एसियाक शहरसभ जना कुआलालामपुर, हङकङ, बैङ्कक, सिङ्गापुर इत्यादि शहरसभधरि करैक योजना अछि । 

एयर इन्डिया एक्सप्रेस, एयर इन्डियाक कम कीमत भेल सहायक एयरलाइन छी जकर मुख्य कार्यालय भारतक केरल राज्यमे अछि । ई मुख्य रूपसँ मध्य पूर्व तथा दक्षिण पूर्व एसिया महाद्वीपमे अपन सेवा प्रदान करैत अछि ।




#Article 566: कोशी नदी (146 words)


कोशी नदी नेपालक सबसँ पैग नदी छी । कोशी नदी चीनक ह्वाङ्हो नदी बाद तीव्र गतिमे प्रवाहित होमएवला विश्वक दोसर पैग नदी छी । एकर सहायक नदीसभमे अरूण, तमोर, सुनकोशी, भोटेकोशी, लिखु, तामाकोशी, इन्द्रावती पडैत अछि ।

सातटा मुख्य सहायक नदी मिल बनल भेला कारण एकरा सप्तकोशी सेहो कहल जाइत अछि । हिमालयसँ उत्पत्ति भेल ई सहायक नदीसभ महाभारत पर्वत श्रेणीक निचुल्का भागमे सम्मिश्रित भ सप्तकोशीक रूपमे सुनसरी जिलाक चतरा गल्छीसँ तराईक समथर क्षेत्रमे प्रवेश करैत अछि । नेपालक लौकही आ हनुमाननगर गाविसक बीचमे बनल कोशी बाँध पार करि ई नदी भारत प्रवेश करैत अछि आ भारतक बिहार राज्यक कर्सेला घाटमा गङ्गा नदीमे मिलैत अछि । वर्षायाममे बाढि एला पर ई नदी आसपासक क्षेत्र डुबान भ जाइत अछि ताहिकारण एकरा बिहारक दुःख सेहो कहल जाइत अछि ।

कोशी नदीक लम्बाई  अछि आ ई नदी लगभग तिब्बत, नेपाल आ भारत मिलाए  क क्षेत्र सिंचित करैत अछि ।




#Article 567: पारिजात (साहित्यकार) (256 words)


पारिजात (वि.सं. १९९४- वि.सं. २०५०) प्रसिद्ध नेपाली साहित्यकार छी। पारिजात बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न शिखर नारी छल । पारिजातकs कवितामे विसग्ङतिवादी, अस्तित्ववादी चिन्तन पाओल जाइत अछि ।

पारिजातकs जन्म दार्जीलिंगक लिंगीय चाय कमानमs बि.सं. १९९४ बैशाख महिनामे भेल छल|हुनकरि पिताकs नाम के.एन. वाईबा जे चिकित्सक छल | माता अमृत मोक्तानकs गर्भसं हुन्कर जन्म भेल छल| हुन्कर जन्मकs नाम विष्णुकुमारी वाईबा छल| हुन्का अमर बनाबsक नाम पारिजात छी जे नाम ओ अपनेसं राख्ने छल| परम्भिक पढाई दर्गॆलिङ्ग्मे हासिल करि २०११ सालमे काठमाडु भित्रल पारिजात पदमकन्या विद्याश्रमबाट एस.एल.सी. आ पदमकन्या कौलेजसं बी.ए. तक पढाई हासिल केल्थि|
वि.सं. २०१३ मे 'धरती ' पत्रिकामs कविता प्रकाशन करि ओ अपन साहित्ययात्रा सुरु कएने छल|

वि.सं. २०२३ सालमे तत्कालीन राजनीतिक व्यवस्थाविरुद्ध किछ सङ्गीतकार आ लेखक कविसभ अपन प्रकारकs विद्रोहक स्वर उचालि एकटा समूहकs निर्माण केलक। उ समूहकs नाम छल 'राल्फा'। इ समूहकs केन्द्रविन्दुके रूपमs पारिजात रहल। 

गीत सङ्गीतमs हुन्का बहुत लगाव छल। वेदना सांस्कृतिक समूहसँग आर बाधो इसाससँग बेर-बेर करि भारतकs विभिन्न प्रान्तसभ लगायत स्वदेश आर विदेशमे ओ भ्रमण केल्थि। ओ इन्द्रेणी सांस्कृतिक समाजकs इसास मानार्थ अध्यक्ष छल।

ओ मदन पुरस्कार गङ्की पुरस्कार आर पाण्डुलिपि पुरस्कार पाओल। हुन्का 'जनमत' आ 'नेपाल तामाङ घेदुङ सङ्घ'द्वारा अभिनन्दित करने छल। पारिजात द्वारा लिखित पुस्तक 'शिरिषको फूल'कs अङ्ग्रेजी अनुवाद Blue Mimosa कs अमेरिकाके मेरिल्याण्ड युनिभर्सिटीकs पाठ्यक्रममे सहो राखल गेल। हुन्का मनपरs बला रङ्ग हरा, मनपर्s ऋतु वर्षा- फूल गुराँश- खानाः छोइला, मम, सुख्खा रोटी, काभ्रो, चिण्डो, टमाटर आ कोइराल छल।

पारिजातकs प्रकाशित कृतिसभ - 

हुन्करs निधन लम्बा समय धरि पुरान व्यथा (बिमारी)सं २०५० साल वैशाख ५ गते भोर ४ बजे वीर अस्पतालकs विशेष उपचार कक्षमे भेल छल।




#Article 568: शुभाघाट गंगामाला नगरपालिका (118 words)


शुभाघाट गंगामाला नगरपालिका नेपालक मध्य-पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत भेरी अञ्चलम  सुर्खेत उपत्यकाक सुर्खेत जिलाम अवस्थित एक नगरपालिका छी।  स्थानीय विकास मन्त्रालय २०७२ आस्विन १ गते थप २६ वटा नयाँ नगरपालिका थपित सुर्खेतम मेहलकुना, गुमी, दहचौर आर घुमखहरे ई
४ गाउँ विकास समितिसभक समेटक शुभाघाट गंगामाला नगरपालिका घोषणा कएल गेल अछि। शुभाघाट गंगामाला नगरपालिकाको केन्द्र साबिकक दहचौर गाउँ विकास समितिक शुभाघाट देउतिबज्यै मन्दिरक आसपासमाम रहल अछि। नगरपालिकाक घोषणा आर क्षेत्रविस्तारसँग मुलुकम १ महानगरपालिका, १२ उपमहानगरपालिका आर २ सय १७ नगरपालिका कायम भेल अछि ।

मेहलकुना, गुमी, दहचौर आर घुमखहरे अहि ४ गाउँ विकास समितिसभक मिलाक शुभाघाट गंगामाला नगरपालिका बनावाल गेल अछि। त्यसैले राष्ट्रिय जनगणना २०६८क जनगणना अनुसार ई ४ ठाम जनसंख्याक जोडिक शुभाघाट गंगामाला नगरपालिकाक जनसङ्ख्या २४,३३९ रहल अछि।




#Article 569: रामपुर (105 words)


रामपुर (उर्दू: ) भारतक उत्तर प्रदेश राज्यक रामपुर जिलामे स्थित एकटा शहर एवम नगर महापालिका छी। ई मुरादाबाद एवम बरेलीक बीचम अछि | रामपुर नगर उपर्युक्त जिलाक प्रशासनिक केंद्र छी तथा कोसीक बायाँ किनार पर स्थित अछि। रामपुर नगर में उत्तरी रेलवेक स्टेशन सेहो छी। रामपुरक चाकू उद्योग प्रसिद्ध अछि। चीनी, वस्त्र तथा चीनी मिट्टीक बरतनक उद्योग सेहो नगरम  अछि । रामपुर नगर में अरबी भाषाक एक महाविद्यालय अछि। रामपुर क़िला, रामपुर रज़ा पुस्तकालय आर कोठी ख़ास बाग़ रामपुरक प्रमुख पर्यटन स्थल सेहो अछि। रामपुर जगहक कुल क्षेत्रफल 2367 वर्ग किलोमीटर अछि। रामपुरक स्थापना नवाब फैजुल्लाह खानन अछि। ओ 1774-1794 धरि अहिठाम शासन केनेए छल।




#Article 570: त्रिशूली नदी (112 words)


त्रिशूली नदी नेपालक एक मुख्य नदी तथा सप्तगण्डकी नदी प्रणालीक एक मुख्य सहायक नदी छी । ई नदी रसुवाक गोसाईकुण्ड स्थित त्रिशूलधारासँ उत्पत्ति भेल नदी छी । भगवान शिव कालकूट बिष शेवन करि तपस्या करैलेल पहुँचला बाद अप्पन त्रिशूल भोकि पानि निकाललक कहि ई ठाम त्रिशूलधारा नामसँ प्रसिद्ध अछि । त्रिशूली नदीके त्रिशूली गङ्गा सहो कहल जाइत अछि । त्रिशूली नेपालक मध्य भागसँ बहैवला नदी छी । ई नारायणी वा गण्डकी नदी जलाधार क्षेत्रक एक प्रमुख नदी छी ।

त्रिशूली नदीक नामाकरण हिन्दू देवता शिवक कथासँ जुडल अछि । कथाअनुसार कालकूट विषसँ कराहरहल घेंचके शितल बनेबाक पानिक लेल प्रहार कएल त्रिशूल लागि बनल तीन मूलसभसँ एकर नाम त्रिशुली नाम रहल गेल ।




#Article 571: २०१६ अन्डर-१९ एसिया कप (115 words)


तेसर सन्स्करण यु-१९ एसिया कप क्रिकेट आगामी दिसम्बरमे होनाइ निश्चित भेल अछि। दिसम्बर ८ सं २२ धरि श्रीलंकामे युवा क्रिकेट प्रतियोगिता होबs जाsरहल अछि। प्रतियोगितामे नेपालसहित कुल ८ राष्ट्रक सहभागिता रहत, जहिमे आयोजक श्रीलंका सहित टेष्ट खेलsबला ४ टीम समेत रहत। अही बेर श्रीलंकाक राजधानी कोलम्बोकs बाहर ३ स्टेडियममे खेल हाएत। हामवानटोटस्थित महेन्द्रा राजापाक्ष इन्टरनेसनल क्रिकेट स्टेडियम,गाल्ले इन्टरनेसनल क्रिकेट स्टेडियम आर मातारास्थित मातारा उयानवाटे स्टेडियममे खेल होएत।  सन् २०१२ सं एसिया कपक रुपमे खेलाबs लागल प्रतियोगिक इ तेसर सन्स्करण छी। मलेसियामे भेल पहिल सन्स्करणमे भारत आर पाकिस्तान संयुक्त रुपमs च्याम्पियन बनल छल ताहिना सन् २०१४ मे भेल दोसर सन्स्करणमे पाकिस्तानकs हराबैत भारत च्याम्पियन बनल छल।  एसिया कप एसियन स्तरक सबसं पैग यु १९ प्रतियोगिता छी। 




#Article 572: टिहरी जिला (324 words)


टिहरी गढ़वाल भारतके उत्तराखण्ड राज्यक एक जिला छी। पर्वतसभक बीच स्थित इ स्थान बहुत सौन्दर्य युक्त अछि। प्रति वर्ष बड़ संख्यामे पर्यटक अही ठाम पर घूमsके लेल आबैत अछि। इ स्थान धार्मिक स्थलके रूपमे सहो बहुत प्रसिद्ध अछि। अही ठाम चम्बा, बुदा केदार मन्दिर, कैम्पटी फल, देवप्रयाग आदि स्थानसभमे घूम सकैत छी। 

टिहरी आर गढ़वाल दु अलग नामसभक मिलाकs इ जिलाक नाम राखल गेल अछि। 

 केदारखंडक गढ़वाल हिमालय त साक्षात देवात्मा छी, जही ठामसं प्रसिध्द तीर्थस्थल बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्रीके अलावा एकटा आर परमपावन धाम छी बूढ़ा केदारनाथ धाम जेकर पुराणमे अत्यधिक मह्त्व बताओल गेल अछि। इ चारु पवित्र धामसभके मध्य वृद्धकेदारेश्वर धामक यात्रा आवश्यक मानल गेल अछि, फलत: प्राचीन समयसं तीर्थाटन पर निकलल यात्री श्री बूढ़ा केदारनाथके दर्शन अवश्य करैत रहल अछि। श्रीबूढ़ा केदारनाथके दर्शन सं अभीष्ट फलक प्राप्ति होइत अछि। 

केदारखंड हिमालय ऋषि मुनिसभक तप स्थली रहल अछि। ऋषि मुनिसभ द्वारा इ पवित्र पर विश्व जन कल्याणके निमित धर्म ग्रन्थसभक रचना कएल गेल अछि। 

यह काफी प्रसिद्ध जगह है। मसूरी स्थित केम्पटी फॉल टिहरी से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह जगह हिल स्टेशन के रूप में अधिक जानी जाती है जो यमनोत्री मार्ग पर स्थित है। यहां स्थित वाटर फॉल (जल प्रपात) खूबसूरत घाटी पर स्थित है। हर साल यहां हजारों की संख्या में देशी एवं विदेशी पर्यटक यहां आते हैं। 

इ जगह समुद्र तल सं ३०४० मीटरक ऊंचाई पर मसुरी सं ७० किमी दूर यमनोत्री मार्ग सं होइत नैनबागक किछ दूर स्थित अछि।

नरेन्द्र नगर मुनि-की-रीति सं १४ किलोमीटरक दूरी पर स्थित अछि। इ जगह समुद्र तल सं १,१२९ मीटरक ऊंचाई पर स्थित अछि।

चम्बा मंसूरी सं ६० किलोमीटर आर नरेन्द्र नगर सं ४८ किलोमीटरक दूरी पर स्थित अछि। इ स्थान समुद्र तल सं १६७६ मीटरक ऊंचाई पर स्थित अछि। 

इ जगह समुद्र तल सं २९०३ मीटरक ऊंचाई पर स्थित अछि। इ मन्दिर नाग राजक अछि। इ मन्दिर पर्वतके सबसं ऊपरी भागमे स्थित अछि। 

धनौलटी एक गांव छी। जे कि चम्बा सं २५ किलोमीटरक दूरी पर स्थित अछि। 




#Article 573: ओनसरी घर्तिमगर (119 words)


ओनसरी घर्ती नेपालक राजनीतिज्ञ तथा रुपान्तरित व्यवस्थापिका संसदक सभामुख छी। ओ नेपालक पहिल महिला सभामुख छी। 
एकिकृत नेकपा माओवादीको तर्फ सँ महिला जनजातिक प्रतिनिधित्व कर ओनसरी घर्तिमगरक भूमिगत नाम 'उषा' छी।

माओवादी जनयुद्धक क्रममे पूर्वी नेपाल आ राजधानी वरपरक काभ्रे, रामेछापमे बितौने घर्ती मगर जनमुक्ति सेनामे किछ समय काम केनए छल । जनयुद्धक सुरुवातक दिन होलेरी चौकी आक्रमणमे सहभागी दुई महिलामे ओ सेहो एक छल । ओ सँगे भेल दोसर महिला तारा घर्ती मगर सेहो संविधानसभा सदस्य भेल ।

रोल्पाक जंकोट -१ माडीचौरमे निम्न मध्यम वर्गीय मगर परिवारमे जन्म भेल घर्ती मगर औपचारिक रूपमे माध्यमिक तह धरिक अध्ययन पुरा केनए अछि । गीतसँगीत प्रति सेहो रुचि रखैवाली घर्ती मगरक संस्मरण तथा लेखसभ विभिन्न पत्रिकामे प्रकाशित होएत रहैत अछि ।




#Article 574: त्रिभुवन विश्वविद्यालय (175 words)


त्रिभुवन विश्वविद्यालय वा टियु (अङ्ग्रेजी : Tribhuvhan University वा TU) नेपालक पुरान, पैग विश्वविद्यालय तथा उच्च शिक्षाक लेल नेपालक पहिल राष्ट्रिय शैक्षिक संस्था सेहो छी । ई विश्वविद्यालयक केन्द्रीय कार्यालय कीर्तिपुर काठमाडौंमे अछि । 

ई विश्वविद्यालय ३०४२–५–२ रोपनी क्षेत्रफलमे फैलल अछि । त्रिभुवन विश्वविद्यालय अन्तर्गत पाँचटा प्राविधिक शैक्षिक संस्था आ चारिटा साधारण सङ्काय सञ्चालित अछि । ई पचासटा प्राविधिक शीर्षकमे प्रमाण–पत्र तहके शिक्षा द रहल अछि ताहिना १०७९ शीर्षकमे स्नातक तथा १ हजार शीर्षकमे स्नातकोत्तर शीर्षकमे शिक्षा प्रदान करि रहल अछि । एकर साथ ई विद्यावारिधिक लेल समेत विभिन्न शिर्षकमे प्राविधिक तथा सङ्कायस्तरीय शिक्षा द रहल अछि । त्रिभुवन विश्वविद्यालय अन्तर्गत ९३१ टा निजी क्याम्पससभ सम्बन्धन लेनए अछि ।

सन् २०१३–१४ धरि एहिमे ६,०४,४३७  विद्यार्थीसभ विभिन्न शैक्षिक तहमे अध्ययनरत अछि  । त्रिभुवन विश्वविद्यालयमे ७,९६६ अध्यापन सङ्काय अछि । त्रिभुवन विश्वविद्यालयमे १५,१९६ कर्मचारी कार्यरत अछि । कृषि तथा पशु विज्ञान, वन विज्ञान, इञ्जिनियरिङ, विज्ञान तथा प्रविधि, चिकित्साशास्त्र, समाजविज्ञान, भूगर्भशास्त्र मानवशास्त्र, व्यवस्थापन, शिक्षाशास्त्र, कानून तथा मानविकिमे ई विश्वविद्यालय शिक्षा प्रदान करि रहल अछि । ३८ केन्द्रीय विभाग समेत करि ई विश्वविद्यालयक ६० आङ्गिक क्याम्पस रहल अछि । 




#Article 575: लालबन्दी (106 words)


लालबन्दी नगरपालिका नेपालक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत जनकपुर अञ्चलक सर्लाही जिलाम अवस्थित एकटा नगरपालिका छी । लालबन्दी बजार रहल ठामक नगरपालिकाक केन्द्र बनावल गेल अछि । ई नगरपालिका २०६८ साउन १ सँ लागू कक  बनावाल गेल मुद कार्यन्वयनम हाल २०७१ जेष्ठ ४ सँ आइल गेल अछि । ई नगरपालिका घोषणाम लालबन्दी, जब्दी आर पत्थरकोट गाउँ विकास समितिसभ समावेश कएल गेल अछि । आर्थिक वर्ष २०६८/६९को बजेटमार्फत् मुलुकम ४१ नयाँ नगरपालिका बनावैत लालबन्दी सेहो नगरपालिका बनावल गेल अछि । महानगरपालिका, उपमहानगरपालिका आर नगरपालिका जोडिक मुलुकम कूल १३० भेल अछि तहिना  गाविसक संख्या ३ हजार ९ सय १५ बाट घटिक ३ हजार ६ सय ३३ भेल अछि ।




#Article 576: बरहथवा नगरपालिका (107 words)


बरहथवा नगरपालिका नेपालक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत जनकपुर अञ्चलक सर्लाही जिलाम अवस्थित एक नगरपालिका छि। स्थानीय विकास मन्त्रालय २०७२ आस्विन १ गते थप २६ टा नयाँ नगरपालिका सर्लाहीम बरहथवा, मुर्तिया, हजरीया आर लौकट ई ४ गाउँ विकास समितिसभक समेटक बरहथवा नगरपालिका घोषणा कएल गेल अछि। बरहथवा नगरपालिकाक केन्द्र साबिकक बरहथवा गाउँ विकास समितिक बरहथवा बजारम रहल अछि। नगरपालिकाक घोषणा आर क्षेत्रविस्तारसँग मुलुकम १ महानगरपालिका, १२ उपमहानगरपालिका आर २ सय १७ नगरपालिका कायम भेल अछि।

बरहथवा, मुर्तिया, हजरीया आर लौकट ई ४ गाउँ विकास समितिसभक मिलाक बरहथवा नगरपालिका बनावल गेल अछि। तहिना राष्ट्रिय जनगणना २०६८क जनगणना अनुसार ई ४ ठामसभक जनसंख्या जोडिक बरहथवा नगरपालिकाक जनसङ्ख्या ५०,४२४ रहल अछि।




#Article 577: चाँगुनारायण नगरपालिका (117 words)


चाँगुनारायण नगरपालिका नेपालक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत बागमती अञ्चलक भक्तपुर जिलाम अवस्थित एकटा नगरपालिका छि। स्थानीय विकास मन्त्रालय थप ६१ टा नयाँ नगरपालिका थप्बेरम भक्तपुर जिलाम चाँगुनारायण, झौखेल, दुवाकोट आर छालिङ ई ४ गाउँ विकास समितिसभक समेटक चाँगुनारायण नगरपालिका घोषणा कएल गेल अछि। चाँगुनारायण नगरपालिकाको केन्द्र चाँगुनारायण गाविसक नारायणटारम रहल छ। नगरपालिकाको घोषणा र क्षेत्रविस्तारसँगै मुलुकमा १ महानगरपालिका, ११ उपमहानगरपालिका, १ सय ७९ नगरपालिका र ३ हजार २ सय ७८ गाविस कायम भेल अछि। नयाँ नगरपालिका थपके बाद नेपालक सहरी जनसंख्याक प्रतिशत ३६ दशमलव ८ पुगल मन्त्रालय जनावने अछि।

चाँगुनारायण नगरपालिका साविकका चाँगुनारायण, झौखेल, दुवाकोट आर छालिङ गाविससभ मिलक बनल अछि। नेपालक राष्ट्रिय जनगणना २०६८ अनुसार ई ४ गाविससभक जनसंख्याम जोडिक चाँगुनारायण नगरपालिकाक कूल जनसङ्ख्या ३२,५२२ अछि।




#Article 578: काँक्री (136 words)


काँक्री नेपालक मध्यपश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्रक राप्ती अञ्चल, रुकुम जिलामे अवस्थित एक गाउँ विकास समिति छी। सदरमुकाम खलंगासँ १८ कोष पूर्वमे रहल काँक्री गाविस सेहो एक छी। पहाडी भूगोलमे रहल काँक्री गाविस अपने ऐतिहासिक भौगोलिक धार्मिक राजनैतिक आर सामाजिक महत्व एवं विशेषता लेने अछी । ई गाविसक पूर्वमे वाग्लुङ जिला पश्चिममे रुकुमक मोरावाङ गाविस उत्तरमे कोल आर तकसेरा गाविस आर दक्षिणमे रोल्पा जिला परैत अछी। काँक्री गाविस राजनैतिक विभाजन अनुसार निर्वाचन क्षेत्र नम्बर १ आर इलाका नम्बर ५ मे अवस्थित मनोरम पहाडी गाविस छी। भौगोलीक अवस्थित अनुसार ई गाविस २८ डिग्री २९ मिनेट १५ सेकेण्ड सँ २८ डिग्री ३७ मिनेट ३९ सेकेण्ड उत्तरी अक्षांश आर ८२ डिग्री ४१ मिनेट सँ ८२ डिग्री ५५ मिनेट पूर्व देशान्तरक भितर परैत अछी। नापी शाखा रुकुमक रेकर्ड अनुसार ई गाविसक क्षेत्रफल ६ हजार ७ सय २८ दशमलब ०५५ हेक्टर रहल अछी।




#Article 579: बिजयश्वरी (141 words)


बिजयश्वरी नेपालक मध्यपश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्रक राप्ती अञ्चल, रुकुम जिलामे अवस्थित एक गाउँ विकास समिति छी। विजयश्वरी गाविस मध्यपश्चिमान्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत राप्ती आचलक रुकुम जिलामे पडैवाला ४३ गाविसमे एक छी। अन्य गाविससँ राज्य संयन्त्रक बढएत उपस्थितिसँ नमूना गाविसक उपमा पावल विजयश्वरी गाविस जिला सदरमुकाम मुसिकोटसँ १६ कोस सुदुरपश्चिममे रहल अछी। सल्यान जाजरकोट डोल्पा आ रुकुमक प्रमुख व्यापारीक केन्द्र चौरजहारी बजार रहल ई गाविस राजनैतिक विभाजन अनुसार निर्वाचन क्षेत्र नं २ आ इलाका नं ८ मे पडैत अछि। समुन्द्र सतहसँ ६६७ मिटर उचाई भेल भेरी नदीसँ १५१२ मिटर उचाईमे रहल मालिका लेकधरिक भू-भाग रहल ई गाविसक पूर्वमे कोटजहारी आ खोलागाउँ गाविस पश्चिममे जाजरकोटक जगतीपूर गाविस उत्तरमे जाजरकोट जिलाके ही खलंगा गाविस आ दक्षिणमे सल्यान जिल्लाक कालागाउँ गाविस रहल अछि।

बाइसे चौबीसे राज्यकालमे ई ठाम्मे राज्य संचालन कएल गेल छल । समग्र रूपमे देखल जाइपर विजयश्वरी गाविस जिलाक नमूना गाविस छी भन्न सकिन्छ। 




#Article 580: एआर रहमान (114 words)


अल्लाह रक्खा रहमान हिन्दी चलचित्रक एक प्रसिद्ध सङ्गीतकार छी । हिनकर जन्म ६ जनवरी १९६७के चेन्नई, तमिलनाडु, भारतमे भेल अछि । जन्मक समय हुनकर नाम एएस दिलीप कुमार छल जकरा बादमे बदलि के ओ एआर रहमान बनल । सुरसभक बादशाह रहमान हिन्दी वाहेक अन्य कयन भाषासभक चलचित्रमे सेहो सङ्गीत देनए अछि । टाइम्स पत्रिका हुनका मोजार्ट अफ मद्रास उपाधि देनए अछि । रहमान गोल्डन ग्लोब अवार्डसँ सम्मानित होमएवला पहिल भारतीय छी । एआर रहमान एहन पहिल भारतीय छी जकरा ब्रिटिश भारतीय चलचित्र स्लमडग मिलेनियरमे हुनकर सङ्गीतक लेल तीन ओस्कर नामाङ्कन हासिल भेल छल । याह चलचित्रक गीत 'जय हो' के लेल सर्वश्रेष्ठ साउन्डट्रयाक कम्पाइलेसन आ सर्वश्रेष्ठ चलचित्री गीतक श्रेणीमे दुई ग्र्यामी पुरस्कार मिलल ।




#Article 581: लक्ष्मीकान्त-प्यारेलाल (114 words)


लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल एक लोकप्रिय भारतीय संगीतकारक जोड़ी छी, लक्ष्मीकान्त शान्ताराम कुदलकर (१९३७-१९९८) आ प्यारेलाल रामप्रसाद शर्मा (जन्म १९४०) सं मिलकs बनल छल । ओसभ १९६३ सँ १९९८ धरि ६३५ हिन्दि फिल्मसभके लेल सङ्गीत रचना केलक आर अही समय के लगभग सभ उल्लेखनीय फिल्म निर्मातासभक लेल काम केलक जहिमे सम्मिलित छल राज कपूर, देव आनन्द, बी.आर. चोपड़ा, शक्ति सामन्त, मनमोहन देसाई, यश चोपड़ा, सुभाष घई आर मनोज कुमार।

लक्ष्मीकांत शान्ताराम कुदलकरक जनम ३ नोभेम्बर १९३७ कs लक्ष्मी पूजनके दिन भेल छल, 

प्यारेलाल रामप्रसाद शर्मा (जन्म सितंबर ३, १९४०) प्रसिद्ध बिगुल वादक पन्डित रामप्रसाद शर्मा (जे बाबाजीके नाम सँ लोकप्रिय छ्लाह)के पुत्र छल, 

लक्ष्मीकान्त-प्यारेलाल हिन्दी फिल्मसभके एक प्रसिद्ध सङ्गीतकार हिन्का द्वारा निम्नतालिकामे फिल्मसभमे सङ्गीत देल गेल अछि। 




#Article 582: नेपाल राष्ट्र बैंक (162 words)


नेपालक आर्थिक क्षेत्रक व्यवस्थापन करवाक उद्देश्य सहित केन्द्रिय बैंकक रूपमे नेपाल राष्ट्र बैंक ऐन १९५५ अन्तर्गत नेपाल राष्ट्र बैंकक स्थापना २०१३ साल वैशाख १४ गते (सन् १९५६ अप्रिल २६) मे भेल छल । नेपाल राष्ट्र बैंक आर वितिय संस्थासभक मौद्रिक विनिमायक आर प्रक्षेपण क रुपमे रहल अछी । तत्कालिन ऐनक ठाममे नयाँ नेपाल राष्ट्र बैंक ऐन २०५८ परिचालन करी  ओहीमे बैंकक स्वायत्तता, स्वतन्त्रता आर सुनिश्चिता कएल गेल। नेपाल राष्ट्र बैंक विदेशी  विनियम दर आर देशमे रहल विदेशी मुद्रा भण्डार क संरक्षण , विदेशी मुद्रा नीति  नियन्त्रण करैत अछी।

एकर उद्देश्यसभ--

नेपाल राष्ट्र बैंकमे एक गोटे गभर्नर आर दुईगोटे डेपुटी गभर्नरहोएत अछी। हालतकके गभर्नरसभक नाम निचा देल अछी -

१. हिमालयशमशेर ज.ब.रा.

२. लक्ष्मीनाथ गौतम

३. प्रद्युम्नलाल राजभण्डारी

४. डा. भेषबहादुर थापा

५. डा. यादवप्रसाद पन्त

६. कुलशेखर शर्मा

७. कल्याणविक्रम अधिकारी

८. गणेशबहादुर थापा

९. हरिशंकर त्रिपाठी

१०. सत्येन्द्रप्यारा श्रेष्ठ

११. डा. तिलक रावल

१२. दिपेन्द्र पुरुष ढकाल

१३. डा. तिलक रावल

१४. विजयनाथ भट्टराई

१५. युवराज खतिवडा

 हाल : डा.चिरञ्जिवी नेपाल




#Article 583: व्यास (ऋषि) (135 words)


महर्षी वेदव्यासक भगवान विष्णुक २४ अवतारसभमे एक अवतार मानल जाएत अछि । हुनकर नाम कृष्ण द्धैपायन छी । श्री मद्देवीभागवतक अनुसार महर्षि वेदव्यास प्रत्येक द्वापर युगमे अवतरित होएत अछि । एतय सँ पहिने २८ टा व्याससभ अवतरित भेल पुष्टी कएल गेल अछि ।

व्यास ऋषिक जन्मके प्रसङ्गमे दमौली सँ ८ कि.मि. पूर्व छाब्दी बाराहक मन्दिरसँ करिब ५० मिटर पश्चिम दिशाक कुण्डमे व्यासक माता सत्यवतीक जन्म भेल छल । मत्स्यक रूपसँ जन्म होए सँ ओ कुण्डक नाम मच्छे कुण्ड रहल आएल कथन अछि । सत्यवती ६-७ बर्षक छोट बालिका होएत काल घुमैत फिरैत दमौलीमे मलाहसभक नाव चलैत ठाममे पहुँचल आ ओ मलाहसभके एतेक छोट ममता रुपी बालिकाक देख घरमे जाए किछ दिन पालन पोषण केलक । ओ समय पराशर ऋषिक आश्रम सेहो दमौलीक नजदीक छल । घुमैत फिरैत  एकदिन पराशर ऋषि आर सत्यवातीक भेट भेल ।




#Article 584: बलुचिस्तान (पाकिस्तान) (102 words)


बलुचिस्तान (उर्दू: بلوچستان) पाकिस्तानक पश्चिमी प्रान्त छी । बलुचिस्तान नामक क्षेत्र पैग अछी आर ई ईरान (सिस्तान व बलुचिस्तान प्रान्त) तथा अफगानिस्तानक सटल होमएवाला क्षेत्रमे छुटि गेल । एहि ठामके राजधानी क्वेटा छी । एहि ठामके लोकनिसभक प्रमुख भाषा बलुच वा बलुची क नाम सँ जानल जाईत अछी। १९४४ मे बलुचिस्तानक स्वतन्त्रताक विचार जनरल मनीक विचारमे आएल छल परन्तु सन् १९४७ मे ब्रिटिश इशारा पर एकरा पाकिस्तानमे शामिल करि लेल गेल । सन् १९७० के दशकमे एक बलूच राष्ट्रवादक उदय भेल जाहिमे बलुचिस्तानक पाकिस्तान सँ स्वतंत्र करवाक मांग उठल ।

ई प्रदेश पाकिस्तान क सबसँ कम आबाद इलाकासभ मे से एक छी।




#Article 585: पञ्जाब (पाकिस्तान) (146 words)


पञ्जाब () पाकिस्तानक एक सूबा वा प्रान्त छी । ई प्रान्तमे ३६ जिला अछि । पञ्जाब आबादीक हिसाबसँ पाकिस्तानक सबसँ पैग सूबा छी । पञ्जाबमे रहैवाला लोक पञ्जाबी कहलावैत  अछि । पञ्जाबक जनूबक तरफ सिन्ध, मगरिबक तरफ खाइबर पख्तुनख्वा आ बलुचिस्तान,‎‎‎ शुमालक तरफ  आजाद कश्मीर आ इस्लामाबाद आ मशरिकक तरफ भारतीय राज्य पञ्जाब, भारत आ राजस्थानसँ मिलैत अछि । पञ्जाबमे बाजल जाइवाला भाषा पञ्जाबी छी । पञ्जाबीक बाहेक एहि ठाम उर्दु आर सराइकी सेहो बाजल जाइत अछि । पञ्जाबक दारुल हकूमत (राजधानी) लाहौर छी । पञ्जाब फारसी जुबानक दुइटा लफज - 'पञ्ज' बमानी 'पाँच' (५) आर 'आब' बमानी 'पानी' सँ मिल बनल अछि । ई पाँच समुद्रके नाम छी:

पञ्जाबक दुइटा हिस्सा अछि: एक मशरकी हिस्सा जे कि भारतमे अछि आर एक मगरिबी हिस्सा जे पाकिस्तानमे अछि । पञ्जाब पाकिस्तानक सबसँ पैग सूबा छी जबकि पाकिस्तानक ४८% लोक पञ्जाबी जुबान समझैत आर बोलैत सेहो अछि ।




#Article 586: सङ्घ-शासित जनजातीय क्षेत्र (161 words)


संघीय शासित कबायली इलाका (फाटा) पाकिस्तान क एक सूबा आ क्षेत्र छी। 

पाकिस्तान क क़बायली इलाका जात चारो सओ-बूं सँ अलिहदा हैसीयत रखैत अछी आर ई वफ़ाक़ क ज़ेर इंतिज़ाम छी। क़बायली इलाका जात २७ हज़ार २२० मरब्बा किलोमीटर क इलाका पर फैलल अछी जे सूबा सरहद सँ मुनसलिक अछी। 

मग़रिब मे क़बायली इलाका जात क सरहद अफ़ग़ानिस्तान सँ मिलैत अछी जत डीवरुणड लाइन ओकरा अफ़ग़ानिस्तान सँ अलग करैत अछी। क़बायली इलाका जात क मशरिक़ मे पंजाब आर सूबा सरहद आर जनूब मे सूबा ब्लोचिस्तान अछी। 

२०००ए के मुताबिक क़बायली इलाका जात क कुल आबादी ३३ लाख ४१ हज़ार ७० अछी जे पाकिस्तान क कुल आबादी क तक़रीबअन् २ फ़ीसद बनईत अछी। 

क़बायली इलाका ई ७ एजैंसीसभ/अज़ला पर मुशतमिल अछी: 

एकर अलावा पिशावर, टॉनिक, बनूं, कोहएट आर डेरा इस्माईल ख़ान सँ मलहक़ा क़बायली इलाका सेहो मौजूद अछी। 

क़बायली इलाका जात क अहम शहरसभ मे मीर एन शाह, बइजूड़, वानअ आर दर्राह बाज़ार शामिल अछी। 

पाकिस्तान क इंतिज़ामी अका अयां

गलगत बलतसतान




#Article 587: आजाद कश्मीर (100 words)


पाक-अधिकृत कश्मीर जम्मू आ कश्मीर राज्यक ओ हिस्सा छी जे एखन पाकिस्तानक नियन्त्रणमे अछि । पाकिस्तान एकरा प्रशासनिक रूपसँ दुई हिस्सामे विभाजित केनए अछि, जकरा पाकिस्तानी सरकारी भाषा मे आजाद जम्मू-ओ-कश्मीर आ गिलगित-बल्तिस्तान कहल जाइत अछि । ध्यान दिअ कि ई लेख मात्र एकर पहिल भागक बारेमे अछि । कखनो-कखन पाकिस्तानमे आजाद जम्मू-ओ-कश्मीरके मात्र आजाद कश्मीर (उर्दू: ) सेहो कहल जाइय।

गिलगित-बल्तिस्तान रहित आजाद कश्मीरक इलाक १३,३०० वर्ग किलोमिटर (५,१३५ वर्ग माइल) पर फैलल अछि आ एकर आबादी अन्दाजी ४० लाख अछि । आजाद कश्मीरक राजधानी मुजफ्फराबाद अछि आ एहिमे ८ जिला, १९ तहसील आ १८२ सङ्घीय काउन्सि अछि । 




#Article 588: समरकन्द (105 words)


समरकन्द (सोगदियन भाषा अनुसार: पत्थर किला वा चट्टान शहर; ; ), आधुनिक उज्बेकिस्तानक एक शहर छी । ई केन्द्रीय एसियाक सभसँ पुरान शहरसभमे सँ एक छी । ई शहरमे लोकक चहलपहल पुरापाषाण कालसँ भेल प्रमाण भेटल अछि मुदा ई शहरक स्थापनाक विषयमे बहुतेक कहावत अछि । वैज्ञानिक अनवेषणक आधारमे इशापूर्व ७ सँ इशापूर्व ८ धरि एकर स्थापना भेल सङ्केत देनए अछि । एकर स्थानक आधारमे चिन आ मेडिटेरियनक मध्यमे सिल्क सडक एतयसँ गेल भेला कारण, समरकन्द एक समयमे केन्द्रीय एसियाक प्रमुख आ महान शहर छल ।

ई क्षेत्रके युनेस्कोद्वारा सन् २००१ मे समरकन्द – संस्कृतिक चौबाटो कहि युनेस्को विश्व सम्पदा क्षेत्रमे सूचिकृत केनए अछि ।




#Article 589: बट्टग्राम जिला (228 words)


बट्टग्राम (उर्दू: , पश्तो: , अंग्रेज़ी: Battagram), जकरा बट्टाग्राम सेहो उच्चारित कएल जाएत अछी, पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत क एक ज़िला छी। ई कोहिस्तान जिला के दक्षिण मे, मनसेहरा जिला के उत्तर मे आर शांगला जिला के पूर्व मे स्थित अछी। एकर सीमासभ तोर ग़र​ नामक जिला (जकरा 'काला ढाका' के नाम से सेहो जानल जाएत अछी) से सेहो अछी जे २८ जनवरी २०११ तक क़बाईली क्षेत्र भेल करैत छल।

'बट्टग्राम' संस्कृत के 'भट्ट ग्राम' क एक रूप अछी आरई जिला के नाम के मतलब 'ब्राह्मण (भट्ट) गाँव' अछी। ई जिला मे बहुत से अन्य गाँव-क़सबों के नाम हिन्दू जातियों आरसंस्कृत शब्दों पर पड़े अछीं, मसलन चोहान ('चौहान' से उत्पत्ति), जेसोले बाज़ार (Jesole Bazar), अजमेरा, छप्पर​ग्राम (, Chappargram) आरबानियाँ (, Banian, 'बनिया' से उत्पन्न)।

बट्टग्राम जिला मे सन् १९९८ मे ३,०७,२७८ लोक आबादी छल। एकर क्षेत्रफल क़रीब १,३०१ वर्ग किमी अछी। १९९३ तक ई मानसेहरा जिला क हिस्सा छल, परन्तु जुलाई १९९३ मे ई एक अलग जिला क दर्जा द देल गेल। एकर राजधानी सेहो बट्टग्राम नाम का शहर ही अछी। ई पूरे क्षेत्र मे पश्तो आरहिन्दको (पंजाबी की एक उपभाषा) बोलल जाएत अछी। बट्टग्राम जिला की दुइटा तहसील अछी - अल्लाई तहसील (Allai) आरबट्टग्राम तहसील। अक्टूबर २००५ के ज़बरदस्त ज़लज़ले का ई क्षेत्र पर भारी असर पड़ा था लेकिन राहत कार्यों से हालात मे बहुत सुधार हो पाया अछी। ई क्षेत्र मे कुछ डिग्री कॉलेज सेहो अछीं।




#Article 590: चित्राल जिला (165 words)


चित्राल (उर्दू: , अंग्रेज़ी: Chitral) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत के सबसँ उत्तरी भाग मे स्थित एक जिला छी। ई ओ प्रान्त क सबसँ पैग जिला छी। एकर क्षेत्रफल १४,८५० वर्ग किमी अछी आर १९९८ क जनगणना मे एकर आबादी ३,१८,६८९ छल। ७,७०८ मीटर ऊँचा तिरिच मीर, जे दुनिया के सबसँ ऊंचा पहाडसभ मे से एक छी, ई जिला मे स्थित अछी। चित्राल जिला क राजधानी चित्राल शहर छी।

चित्राल जिला पाकिस्तान आर ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्त दुनु क सबसँ उत्तर क जिला छी। एकर पश्चिम आर उत्तर मे अफ़ग़ानिस्तान अछी। उत्तर मे अफ़ग़ानिस्तान क वाख़ान गलियारा आवैत अछी जे कुनो स्थानसभ पर बस १६ किमी चौड़ा अछी जेकर पार ताजिकिस्तान स्थित अछी। चित्राल ज़िले के पूर्व मे गिलगित-बलतिस्तान (पाक-अधिकृत कश्मीर का हिस्सा) अछी आर दक्षिण मे ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा के ही ऊपरी दीर आर स्वात जिलासभ स्थित अछी। चित्राल जिला के कुछ भाग मे पामीर पर्वत आवैत अछी एही कारण ई जिला बहुत ही पहाड़ी क्षेत्र अछी।

चित्राल जिला पाकिस्तान आर गिलगित-बलतिस्तान से बस दुई सड़क से जुडल अछी।




#Article 591: हरिपुर जिला (104 words)


हरिपुर (उर्दू: , पश्तो: , अंग्रेज़ी: Mansehra) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्त क एक जिला छी। एकर पश्चिम मे स्वाबी जिला, पश्चिमोत्तर मे बुनेर जिला, उत्तर मे मानसेहरा जिला, पूर्वोत्तर मे ऐब्टाबाद जिला आर दक्षिण मे पंजाब प्रान्त पडैत अछी। हरिपुर जिला ऐतिहासिक हज़ारा क्षेत्र क हिस्सा छी, जे ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा मे होमए के बावजूद एक पंजाबी प्रभावित क्षेत्र मानल जाएत अछी।

'हरिपुर' क नाम सिख साम्राज्य के सम्राट रणजीत सिंह के मशहूर सिपहसालार हरी सिंह नलवा पर पडल अछी। ई पूरे क्षेत्र पर ओ अफ़ग़ान नियंत्रण ख़त्म करि क सिख साम्राज्य के अधीन करि लेने छल। १८२२ मे ओ हरिपुर शहर क स्थापना केनेए छल।




#Article 592: गिनी रोमेटी (118 words)


भर्जिनिया मारी गिनी रोमेटी (जन्म २९, १९५७) एकटा अमेरिकी व्यापार कार्याकरी छी । ओ वर्तमानमे आइबिएमक सिइओ छी । तथा पहिल महिला छी जे ई कम्पनीक कार्यभार सम्भाल्ने अछि ।सन् २०१२ जनवरीमे अध्यक्ष तथा सिइओ बनैसँ पूर्व ओ आइबिएम कम्पनीक वरिष्ठ उपाध्यक्ष तथा बिक्री, मार्केटिङ आ रणनीतिसमूहक कार्याकारीक रुपमे कार्यरत छल । ओ फर्च्युन पत्रिकाद्वारा जारी ५० शक्तिशाली व्यावसायिक महिलासभक सूचीमे लगातार ८ बर्षधरि #१ स्थानमे रहल छल्नि । तथा सन् २०१४ मे फोर्ब्स पत्रिका हुनका विश्वक शक्तिशाली १०० महिलाक सूचीमे १०अम स्थानमे राख्ने छल । हुनका टाइम्स पत्रिका सेहो सन् २०१२ क अपन टाइम १०० क सूचीमे समावेश केनए छल । तथा ब्लुमबर्ग पत्रिका सेहो हुनका उत्कृष्ट ५० व्यावसयिक हस्तीक रुपमे अपन सूचीमे समावेश केनए छल ।




#Article 593: करक जिला (163 words)


करक (उर्दू: , पश्तो: , अंग्रेज़ी: Karak) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत क एक जिला छी। ई कोहाट जिला के दक्षिण मे, बन्नू आर लक्की मरवत ज़िलों के उत्तर मे स्थित अछी। पेशावर से कराची जाई वाला सिन्धु राजमार्ग के रस्ता मे आवै वाला ई जिला ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा क राजधानी पेशावर से १२३ किलोमीटर के दूरी पर अछी। कहल जाइय कि करक पाकिस्तान क इकलौता जिला छी जाहिमे केवल एक ही पश्तून क़बीला के लोक रहैत अछी आर ई ख़टक कबीला छी।

करक जिला मे सन् १९९८ मे ४,३०,७९६ लोकसभ के आबादी छल। एकर क्षेत्रफल क़रीब ३,३७२ वर्ग किमी अछी। १९४० से लके १९८२ तक ई कोहाट जिला क हिस्सा छल, परन्तु १ जुलाई १९८२ क एकरा एक अलग जिला क दर्जा द देल गेल। एकर राजधानी टेरी नामक शहर छी आर कोनो ज़माने मे टेरी नवाब क ई पूरे जिला पर राज होमए छल। एते के लोग ख़टक क़बीला के बरक उपक़बीला के पठान अछी आर ई पूरे क्षेत्र मे पश्तो बोलल जाईत अछी।




#Article 594: कोहाट जिला (177 words)


कोहाट (उर्दू: , पश्तो: , अंग्रेज़ी: Kohat) पाकिस्तान क ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत क एक जिला छी। ई करक जिला के उत्तर मे आर फ़ाटा नाम के क़बीला इलाका के दक्षिण मे स्थित अछी। एहीमे बहुत से पश्तून क़बीला के लोक रहैत अछी, जेना कि अफ़रीदी, ख़टक, बन्गश आर ओरकज़ई। ई पूरे क्षेत्र मे पश्तो बोलल जाएत अछी। कोहाट दुइतहसीलों मे बटल अछी - कोहाट तहसील आर लाची तहसील।

कोहाट जिला मे सन् १९९८ मे ५,६२,६४४ लोक के आबादी छल। एकर क्षेत्रफल क़रीब २,५४५ वर्ग किमी अछि। एतए पर १४वीं शताब्दी मे अफ़रीदी, ख़टक आर बन्गश क़बीला के पठान लोक आवि बईस गेल आर अपन राज चलावे लगल। १९वीं सदी मे पंजाब से फैल रहल सिख साम्राज्य कोहाट पर क़ब्ज़ा करि लेलक आर अपनी हुकूमत चलवे लगल। १८३६ मे सिख साम्राज्य के पतन के साथ-साथ टेरी नामक शहर के नवाब एते अपन राज आरम्भ करलक। २८ मार्च १८४९ को पंजाब के साथ-साथ कोहाट सेहो भारत मे ब्रिटिश राज क हिस्सा बईन गेल। अंग्रेज़सभ एते राज त चलेलक परन्तु स्थानीय लोक हर बखत ओकर विरुद्ध समय-समय पर उपद्रव करैत रहल।




#Article 595: कोहिस्तान जिला (पाकिस्तान) (206 words)


कोहिस्तान (उर्दू आर पश्तो: , अंग्रेज़ी: Kohistan) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत के पूर्वोत्तरी भाग मे स्थित एक पूर्व जिला छल। ई जिलासभ क राजधानी दासू () नामक बस्ती छी। वर्ष २०१४ मे एकरा द्विभाजित करि, ऊपरी कोहिस्तान जिला आर निचला कोहिस्तान जिला बनावल गेल।

'कोह' फ़ारसी भाषा क एक शब्द छि जेकर मतलब 'पर्वत' होएत अछी। अन्य हिन्द-ईरानी भाषासभ मे एही शब्द पश्तो मे 'ग़र', प्राचीन अवस्ताई भाषा मे 'गैरी' आर संस्कृत मे 'गिरि' के रूप मे सजातीय शब्द के तौर पर मिलैत अछि। कोहिस्तान जिला मे बहुत पहाड़ अछि, जाई से ई शब्द आएल अछी। 

कोहिस्तान जिला मे सन् १९९८ मे ४,७२,५७० लोकसभ क आबादी छल। एकर क्षेत्रफल क़रीब ७,४९२ वर्ग किमी अछी। एतए ज़्यादातर कोहिस्तानी भाषा आर अन्य दार्दी भाषासभ के साथ पश्तो बोलै वाला सेहो रहैत अछी। अधिकतर लोक धर्म सँ सुन्नी मुस्लिम अछी हालांकि एक अल्पसंख्यक शिया मुस्लिम समुदाय सेहो एतए मिलैत अछी। कोहिस्तान आर्थिक रूप सँ एक पिछडल आर अविकसित इलाक़ा समझल जाएत अछी। २००६ मे ई जिला क साक्षरता दर बस २०% छल ।अधिकतर लोक कृषि आ मवेशी पालन सँ जीवन बसर करैत अछी आर गरीबी व्यापक अछी। जिला क जमीन पहाडडी आ शुष्क होएसँ खेती मे कठिनाई होएत अछी। पनीर, मक्खन, ऊन आर काठ एते के मुख्य उत्पादन छि। 




#Article 596: लक्की मरवत जिला (184 words)


लक्की मरवत (उर्दू और पश्तो: , अंग्रेज़ी: Lakki Marwat) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत के दक्षिणी भाग मे स्थित एक जिला छी। ई कहियो बन्नू जिला क हिस्सा छल, परन्तु १ जुलाई १९९२ क एकरा एक अलग जिला क दर्जा देल गेल।

'लक्की मरवत' क नाम कोना पडल एही पर दुइटा कहानिसभ बता सकैत छी। एक कथा ई य कि बहुत पहिले एतए मरवत कबीला आर वज़ीर कबीला के बीच युद्ध भेल छल । एकर बाद मरवत कबीला वालासभ लगभग एक लाख लोकसभ क फौज तैयार करलक, जाहिसे ई स्थान क नाम 'लक्खी मरवत' पडल जे बिगारीक 'लक्की मरवत' बनि गेल। दोसर कथा ई य कि प्राचीन काल मे एकर मुख्य शहर क स्थापना एक लक्की राम वा लुक्को राम नामक हिन्दू व्यापारी केनेए छल।

लक्की मरवत जिला मे सन् १९९८ मे ४,९०,०२५ लोक के आबादी छल। एकर क्षेत्रफल क़रीब ३,१६४ वर्ग किमी अछी। एतए ज्यादातर पश्तो बोलल जाएत अछी हालाकि कुछ लोक हिन्दको नाम के एक पंजाबी उपभाषा सेहो बोलैत अछी। ई जिला मे मरवत कबीला के पश्तून लोकसभ क बहुतायत अछी। एतए के अधिकतर गाम आर कस्बसभ नाम 'ख़ेल' से अंत होएत अछी।




#Article 597: मानसेहरा जिला (127 words)


मानसेहरा (उर्दू: , पश्तो: , अंङग्रेजी: Mansehra) पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत क एक जिला छी। एकर उत्तर मे शांगला, बट्टग्राम, कोहिस्तान जिला, दक्षिण मे ऐब्टाबाद​ आर हरिपुर जिला, पश्चिम मे बुनेर जिला आर पूर्व मे जम्मू और कश्मीर पडैत अछी। ई एक रमणीय पहाडी इलाका छी आर ई जिला क काग़ान वादी पर्यटन के लेल लोकप्रीय अछी। चीन आर पाकिस्तान के दरम्यान चलै वाला काराकोरम राजमार्ग सेहो ई जिला से होएत जाइय।

'मानसेहरा' क नाम मुग़ल सम्राट अकबर के मशहूर सिपहसलार राजा मान सिंह पर रखल गेल छल।

मानसेहरा से पश्चिम मे अफ़ग़ानिस्तान आनाए-जानाए आसान अछी एकर लेल ओ देश मे गृहयुद्ध होएसँ बहुत अफ़ग़ान शरणार्थी एतए आवि बईस गेल। ई जिला एक नदी-झरनासभ, झीलसभ आर पर्वतसभ सँ भरपूर क्षेत्र अछी आर सैलानिसभ मे बहुत लोकप्रीय अछी।




#Article 598: टाङ्क जिला (113 words)


टाङ्क (उर्दू: ,टाङ्क; पश्तो: , टाङ्क; सराइकी: , टङ्क; अंग्रेजी: Tank) पाकिस्तानके खाइबार पख्तुनख्वा प्रान्तक एक जिला छी । ई पहिले डेरा इस्माइल खान जिलाक हिस्सा छल ।

टाङ्क जिलामे ८५% लोग पश्तो बोलै वाला पश्तून लोक अछि आर बाकी सराइकी बोलैत अछि (जे पञ्जाबी भाषा आर सिन्धी भाषा सँ प्रभावित एक हिन्द-आर्य भाषा छि)। ई जिला मे सन् १९९८ मे २,३८,२१६ लोक के आबादी छल। एकर क्षेत्रफल करीब १,६७९ वर्ग किमी अछि। एतेए गर्मी मे बहुत गर्मी पडैत अछि आर तापमान ४८° सेन्टीग्रेड तक पहुँच जाएत अछि, तबो तक जाडमे ई से पश्चिम के इलाकासभमे जबरदस्त जाड़ पडैत अछि जाई से ओतके बहुत लोक अक्सर अपन जाडा ई जिला मे बितावाई य।




#Article 599: सम्भोग (144 words)


सम्भोग वा यौन सम्पर्क मतलब यौन आनन्द वा प्रजननक लेल पुरूषक लिङ्ग स्त्रीक योनीमे प्रवेश करा घर्षण करी वीर्यपात होमए वाला क्रिया कहिक बुझल जाएय ।  

जीव विज्ञानमे मैथुन आनुवंशिक लक्षणसभक संयोजन आर मिश्रणक एक प्रक्रिया छी, जे कि जीवक भाले या पोथी (जीवक लिंग या योनि) होएसे निर्धारित करैत अछी । मैथुनमे विशेष कोशिकासभ (ग्यामेट)क मिलन सँ नयाँ जीवक निर्माण होएत अछी, ओइमे माता-पिता दुवके लक्षण होएत अछी। गैमीट रूप तथा आकारमे बराबर भ सकैय ।पुरुष गैमीट (शुक्राणुं) छोट होएत अछी त पोथी गैमीट (अंडाणु) पैग होएत अछी।
जीवक लिंग एहिमे निर्भर करै य कि ओ कोन गैमीट उत्पन्न करैत अछी - भाले गैमीट उत्पादन करैवाला पुरुष तथा पोथी गैमीट उत्पादन करैवाला के पोथी कहैत अछी।

विपरीत लिङ्गी व्यक्तिसभ बीच एना होएत अछी।

समलिङ्गी व्यक्तिसभ बीच एना होएत अछी।

समलिङ्गी (महिला) व्यक्तिसभ बीच एना होएत अछी।

समलिङ्गी (पुरुष) व्यक्तिसभ बीच एना होएत अछी।




#Article 600: गरुडा नगरपालिका (129 words)


गरुडा नगरपालिका नेपालक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत नारायणी अञ्चलक प रौतहट जिलाम अवस्थित एक नगरपालिका छी। स्थानीय विकास मन्त्रालय थप ६१ टा नयाँ नगरपालिका  रौतहट जिलाम गरुडा बैरीया, महम्मदपुर, पोठीयाही, गेडही गुठी, मलाही , बसविट्टी जिगडीया आर जयनगर ७ गाउँ विकास समितिसभक समेटक गरुडा नगरपालिका घोषणा भेल अछि। गरुडा नगरपालिकाक केन्द्र साविक गरुडा बैरीया बजार रहल छेलाह। नगरपालिकाक घोषणा आर क्षेत्रविस्तारसँग मुलुकम १ महानगरपालिका, ११ उपमहानगरपालिका, १ सय ७९ नगरपालिका आर ३ हजार २ सय ७८ गाविस कायम भेल अछि। नयाँ नगरपालिका थपिक नेपालक सहरी जनसंख्याक प्रतिशत ३६ दशमलव ८ पुगल मन्त्रालय जनाउने अछि ।

गरुडा नगरपालिका गरुडा बैरीया, महम्मदपुर, पोठीयाही, गेडही गुठी, मलाही , बसविट्टी जिगडीया आर जयनगर गाविससभ मिलक बनल अछि। तहिना राष्ट्रिय जनगणना २०६८ अनुसार ई ७ गाविससभ जनसंख्याक जोडिक गरुडा नगरपालिकाक कूल जनसङ्ख्या ३९,६३७ अछि।




#Article 601: ३ इडियट्स (137 words)


थ्री इडीयट्स (हिन्दी अर्थ : तीन बेवक़ूफ़) २००९ क एक हिंदी चलचित्र छी। ई फ़िल्म क कहानी अंग्रेजी उपन्यासकार चेतन भगत क प्रसिद्ध अंग्रेजी उपन्यास फ़ाइव प्वांइट समवन पर आधारित अछी। फ़िल्म के मुख्य कलाकार आमिर ख़ान, करीना कपूर, बोमन इरानी, माधवन, ओमी वैद्य और शर्मन जोशी छी। 

फिल्म थ्री इडियट्स मात्र ४ दिन मे १०० करोड़ रूपैया क कमाई करि बक्स अफिस पर एक नया कीर्तिमान रचने छल। ई फिल्म क विश्व स्तर पर २१२६ सिनेमाघरसभ मे प्रदर्शित कएल गेल छल जाहिमे ३२६ सिनेमाघर विदेश क छल। ३ इडियट्स भारतीय शिक्षण व्यवस्था पर एक सामाजिक टिप्पणी अछी। 

ई फिल्म सभ बलिउड फिल्मसभ मे उच्चतम कमाई केलक। ई चलचित्र क कथानक अब पुस्तकके रूप मे उपलब्ध अछी। २०० करोड़ के क्लब मे शामिल होए वाला ई पहिल फिल्म अछी। फिल्म २०२ करोड़ रूपैया क व्यापार केने छल।




#Article 602: कलात जिला (125 words)


कलात (उर्दू आ बलोच: قلات, अंग्रेज़ी: Kalat) पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रान्त क एक जिला छी। ई पारम्परिक रूप सँ कलात ख़ानत क केन्द्र छल। जिला क राजधानी कलात शहर छी।

सन् १९९५ क जनगणना के अनुसार जिला क ८९% लोक ब्राहुई भाषा आर ५% लोक बलोच भाषा बोलैत अछी। एतए ज़िक्री समुदाय सेहो अल्पसंख्या मे मौजूद अछी। अधिकतर लोक कृषि आर मवेशी पालन सँ जीविका कमावै य।

जिला क मौसम शुष्क आर अर्ध-रेगिस्तानी छी। गरमि मे बहुत गर्मी आर शीतऋतु मे बहुत जाड़ा होएत अछी। अधिकतर वर्षा सर्दि मे गिरैत अछी। इलाक़ा पहाड़ी अछी आर कई वादियाँ अछी। अधिकतर पहाड़ शुष्क अछी परन्तु हरबोई पर्वत पर पुरान हपुषा (ज्युनिपर) वृक्ष फैलल अछी। मोरो नदी क्षेत्र क मुख्य नदी अछी।

जिला ३ तहसील मे विभाजित अछी:




#Article 603: किला अब्दुल्लाह जिला (165 words)


क़िला अब्दुल्लाह (उर्दू: , अंग्रेज़ी: Killa Abdullah) पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत के उत्तर-पश्चिमी भागमे स्थित एक जिला छी। एकर क्षेत्रफल ३,२९३ किमी२ अछी आर सन् २००५मे एकर आबादी ४ लाख सँ अधिक अनुमानित कएल गेल छल। एते रहै वाला अधिकतर लोक पश्तून अछी आर पश्तो एतए सबसँ अधिक बोलल जाएवाला भाषा छी। जून १९९३ तक ई पिशीन जिला (, Pishin) क हिस्सा छल परन्तु फेर एकरा एक अलग जिला क दर्जा देल गेल।

ई जिला शेला बाग़ पहाड़ के चरणमे स्थित अछी। एकर दुइटा विभाग अछी: गुलिस्तान आर चमन। ई पानी क क़िल्लत सँ शुष्क क्षेत्रमे उगै वाला पौधे अधिक मिलैत अछी। चमन क क्षेत्र पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप क लोक-संस्कृतिमे अपन ख़ुबानी, आलू बुख़ारों आर गिलास (चेरी) जेना फल के लेल मशहूर अछी। भारत के विभाजन से पहिले हींग, घी, क़ालीन, मवेशी आर बहुतरास फल सेहो अफ़्ग़ानिस्तान भारत चमन के माध्यम से लावल जाएत छल।

पिशीन क्षेत्र के साथ ई इलाक़ा सेहो सन् १८३९मे प्रथम ब्रिटिश-अफ़्ग़ान युद्ध के बाद हिंदुस्तान क भाग बनि गेल।




#Article 604: लसबेला जिला (254 words)


लसबेला या लस बेला (उर्दू आ बलोच: , अंग्रेज़ी: Lasbela) पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रान्त क एक तटवर्ती जिला छी। एकरा सिन्धी लहजे मे लस बेलो कहैत अछी। यह ३० जून १९५४ क ओ समय क कलात विभाग के भितर एक अलग जिला क रूप मे गठित कएल गेल छल। ई जिला मे ९ तहसील आर २१ संघीय काउंसिल​ पडैत अछी।

लसबेला मे बलोच लोगों आर सिन्धी लोकसभ क एक मिश्रण रहैत अछी। एतए पर सिंधिसभ क जामोट (, Jamote) समुदाय भारी संख्या मे अछी। जामोट एक राजपूत समुदाय छी जे स्वयं क सम्माँ राजवंश क वंशज समझईत अछी। लगभग सभ लोक मुस्लिम अछी हालांकि एक छोट हिन्दू समुदाय सेहो मौजूद अछी। एतए के सिन्धी एक 'लासी' नामक सिन्धी उपभाषा बोलैत अछी जे मानक सिन्धी भाषा से कने अलग अछी।

मध्य पूर्व आर भारतीय उपमहाद्वीप के बीच यदि मकरान क तटीय रास्ता अपनावल जाएत त लसबेला ओहीपर पडैत अछी। सिकंदर महान जब पश्चिमोत्तर भारत पर क़ब्ज़ा करलाक बाद बैबिलोन लौट रहल छल त लसबेला सँ गुजरल छल। ७११ ईसवी मे उमय्यद ख़िलाफ़त क सिपहसालार मुहम्मद बिन क़ासिम सेहो सिंध पर हमला करि के लेल लसबेला से निकलल छल। भारत क आज़ादी आर विभाजन सँ पहिले लस बेला ब्रिटिश राज के प्रशासन मे एक अलग रियासत होएत छल, जेकर शासक जामोट समुदाय क छल आर 'जाम' क उपाधि रखैत छल। स्वतंत्रता के बाद १९५४-१९५५ मे एकर पाकिस्तान मे विलय करि देल गेल। आई सेहो लसबेला सँ किछे किलोमीटर दूर लगभग सय क़ब्रसभ क एक समाधिक्षेत्र अछी जत लसबेला के पुराने शाही परिवारसभ के सदस्य दफ़्न अछी।




#Article 605: दादरा आ नगर हवेली (157 words)


दादरा आ नगर हवेली (, , ) भारतक एक केन्द्रशासित प्रदेश छी। ई दक्षिण भारतमे महाराष्ट्र आ गुजरातक बीच स्थित अछि, ओना त दादरा, जे की ई प्रदेशक एक तालुका छी, किछ किलोमिटरक दूरीमे गुजरातमे स्थित एक  छी। ई प्रदेशक राजधानी सिलवासा छी। ई क्षेत्र दमन सँ १० सँ ३० किलोमिटर दूर अछि। 

ई प्रदेश पर सन् १७७९ धरि मराठासभक आ बादमे सन् १९५४ धरि पोर्चुगिज साम्राज्यक शासन छल। ई सङ्घकें भारतमे सन् १९६१ अगस्त ११ मे सामिल कएल गेल। २ अगस्त को मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है।

दादरा आ नगर हवेली प्रमुख रूप सँ ग्रामीण क्षेत्र छी जतय ६२% सँ अधिक आदिवासी बसोबास करैत अछि। ई सङ्घ राज्य क्षेत्रक ४० प्रतिसत भाग आरक्षित वन जङ्गल सँ घेरल अछि जहिमे अनेक प्रकारक वनस्पति आ पशुक निवासस्थान छी। समुद्री तट सँ समीपताक कारण, गर्मीमे एहि ठामक तापमान बहुत उपर नई जाएत अछि । एहि ठामक मुख्य नदी दमनगङ्गा छी जे अरब सागरमे जाए मिलैत अछि।




#Article 606: पीके (चलचित्र) (174 words)


पीके () एक भारतीय बलिउड चलचित्र छी । जेकर निर्देशन राजकुमार हिरानी केने अछी । ई फिल्मक निर्माता राजकुमार हिरानी संगै विधु विनोद चोपडा आर सिद्धार्थ रोय कपूर रहल अछी । ई चलचित्र सन् २०१४ डिसेम्बर १९ मे प्रदर्शित भेल छल । ई चलचित्रमे मुख्य कलाकार आमिर खान, अनुष्का शर्मा, सञ्जय दत्त, बोमन इरानी आर सुशान्त सिंह राजपुत रहल अछी । ई चलचित्र हाल तक ५७२ करोड भारतीय रुपैयाक कारोबार केने अछी । ई चलचित्र सबसँ सफल चलचित्र बनल अछी ।

ऐही फिल्म में दोसर ग्रह से आयल आदमी के वर्णन कयल गेल अछि । जिनकर नाम पिके रहित अछि ।ओ अपन अंतिरिक्ष यान सं राजस्थान में उतरेत  अछि ओही काल मे एगो चोर ओकर रिमोट चुरा के भाग जाय अछि आं अपन रिमोट खोज करैत काल मे पृथ्वी के अंधविश्वास के बारे मे बुजैत अछि  ।एंहि काल मे ओकरा जग्गु से भेट होयत अछि ।जे पिके के रिमोट खोजै मे मदद करैत अछि ।आ पिके तपवशी के झुठा साबित क के अपन रिमोट हासिल क के वापिस अपन गोला पर जाय अछि ।




#Article 607: आम (166 words)


आम 'म्याङ्गिफेरा' वर्ग सँ सम्बन्धित तथा उष्ण हावापानी भेल स्थानमे उब्जऽवला एक प्रकारक मीठ तथा खट्टा फल छी । एकर गाछ अत्यन्त उपयोगी, दीर्घजीवी, सघन तथा विशाल होएत अछि । फलक राजा कहि चिन्हल जाएवला आम नेपालमे पूर्व सँ पश्चिम तथा दक्षिणक तराई सँ पहाड़ (३,००० फिटक उचाईधरि) धरि पाओल जाएत अछि । अनुकूल जलवायु भेलापर एकर गाछ करिब ५०-६० फिटधरि उँच भऽ सकैत अछि । वैज्ञानिक वर्गीकरण वनस्पति जगतक ऐनाकार्डियेसी वर्ग सँ सम्बन्धित आमक कीछ गाछसभ बहुतेक उँच होएत अछि । 

आमक गाछ एक फूल फुलाएवला जातिक, पैग स्थलीय वनस्पति छी । एकर फलमे दुई दलीय बिया होएत अछि । एकर फूल छोट-छोट आ समूहमे होएत अछि । आमक पत्ता सरल, लम्बा तथा शीर्षमे चोख होएत अछि । एकर जडि लम्बा आ बलगर होएत अछि । एकर फल एक बीज भेल सरस आ गुदीयुक्त होएत अछि । आमक फल विश्वप्रसिद्ध, स्वादिष्ट आ अत्यन्तै पौष्टिक फल छी एहिकारण एकरा फलसभक राजा सहो कहल जाइत अछि । एकर स्वाद कच्चामे खट्टा आ पाकलाकबाद मिठगर होएत अछि । 




#Article 608: रेसुङगा नगरपालिका (135 words)


रेसुङगा नगरपालिका नेपालक पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत लुम्बिनी अञ्चलक गुल्मी जिलाम अवस्थित एक नगरपालिका छी । तम्घास बजार रहल ठाँमक नगरपालिकाक केन्द्र बनावल गेल अछि । ई नगरपालिका २०६८ साउन १ सँ लागू भेल बनावल लेकिन कार्यन्वयनमा हाल २०७१ जेष्ठ ४ सँ भेल । रेसुङगा नगरपालिका घोषणा  तम्घास, सिमीचौर, अर्खले आर दुबिचौर गाउँ विकास समितिसभ समावेश कएल गेल अछि । आर्थिक वर्ष २०६८/६९क बजेटमार्फत् मुलुकम ४१ नयाँ नगरपालिका थपिंदा रेसुङगा  नगरपालिका बनल अछि । महानगरपालिका, उपमहानगरपालिका आर नगरपालिका  आब मुलुकम कूल १३० भेल तहिना गाविसक संख्या ३ हजार ९ सय १५ बाट घटि ३ हजार ६ सय ३३ भेल अछि ।

तम्घास, सिमीचौर, अर्खले आर दुबिचौर गाविससभक मिलाक रेसुङगा नगरपालिका बनावल गेल अछि । तहिना बि.स.२०६८ क जनगणना अनुसार ई ठामसभक जनसंख्याक जोडिक रेसुङगा नगरपालिकाक जनसङ्ख्या २८,७३६ अछि । रेसुङगा नगरपालिकाम ७,४९८ घरधुरि अछि ।




#Article 609: राजेन्द्र प्रसाद (149 words)


डा. राजेन्द्र प्रसाद (३ दिसम्बर १८८४ - २८ फरवरी १९६३) भारतक प्रथम राष्ट्रपति छल।ओ भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन के प्रमुख नेतासभमे सँ छल, जे भारतीय राष्ट्रिय काङ्ग्रेस के अध्यक्ष के रूपमे प्रमुख भूमिका निर्वाह केनए छल। ओ भारतीय संविधान के निर्माणमे सेहो अपन योगदान देनए छल जेकर परिणति २६ जनवरी १९५० के भारतक एक गणतन्त्र के रूपमे भेल छल। राष्ट्रपति होए के अतिरिक्त ओ स्वाधीन भारतमे केन्द्रीय मन्त्री के रूपमे सेहो किछ समय के लेल कार्य केनए छल। पूरा देशमे अत्यन्त लोकप्रिय होमए के कारण हुनका राजेन्द्र बाबू  वा देशरत्न कहि सेहो बजाएल जाइत छल।

डा. राजेन्द्र प्रसाद के पूर्वज मूलरूपसँ कुवागाँव, अमोढा (उत्तर प्रदेश) के निवासी छल। ओ एक कायस्थ परिवारसँ छल। किछ कायस्थ परिवार ई स्थान के छोडि के बलिया जाके बैस गेल छल। किछ परिवार के बलिया सेहो नै भावल एही कारण ओ ओहीय सँ बिहार के जिल्ला सारन के एक ग्राम जीरादेई मे जाके बैस गेल। 




#Article 610: सर्वपल्ली राधाकृष्णन (195 words)


डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (; ५ सितम्बर १८८८ – १७ अप्रैल १९७५) भारतक प्रथम उप-राष्ट्रपति (१९५२ - १९६२) आ दोसर राष्ट्रपति रहल । ओ भारतीय संस्कृतिक संवाहक, प्रख्यात शिक्षाविद, महान दार्शनिक आ एक आस्थावान हिन्दू विचारक छल । हुनकर याह गुणक कारण सन् १९५४ मे भारत सरकार हुनका सर्वोच्च सम्मान भारत रत्नसँ अलङ्कृत केनए छल । हुनकर जन्मदिन (५ सितम्बर) भारतमे शिक्षक दिवसक रूपमे मनाएल जाइत अछि ।

सर्वपल्ली राधाकृष्णनक जन्म दक्षिण भारतक तिरुत्तनि स्थानमे भेल छल जे चेन्नईसँ ६४ किमी उत्तर-पूर्वमे अछि। ओ भारतीय संस्कृतिसँ ओतप्रोत एक प्रख्यात शिक्षाविद, महान दार्शनिक, उत्कृष्ट वक्ता आर एक आस्थावान हिन्दू विचारक छल। ओ स्वतन्त्र भारत के दोसर राष्ट्रपति छल। एहीसँ पूर्व ओ उपराष्ट्रपति सेहो रहल। राजनीति मे आवै से पूर्व ओ अपन जीवन के महत्वपूर्ण ४० वर्ष शिक्षक के रूप मे व्यतीत केने छल। उनका मे एक आदर्श शिक्षक के सारा गुण मौजूद छल। ओ अपन जन्म दिन अपन व्यक्तिगत नाम से नै अपितु सम्पूर्ण शिक्षक बिरादरी क सम्मानित कएल जाएके उद्देश्य से शिक्षक दिवस के रूप मे मनावे की इच्छा व्यक्त केने छल जेकर परिणामस्वरूप आई सेहो सारा देश मे उनकर जन्म दिन (५ सितम्बर) क प्रति वर्ष शिक्षक दिवस के नाम से ही मनावल जाएत अछी।




#Article 611: जीरा (106 words)


जीरा ( अङ्ग्रेजी: क्युमिन ; वानस्पतिक नाम:क्युमिनम सायमिनम) क एक पुष्पीय पौधा छी । ई पूर्वी भूमध्य सागर सँ ल भारत आ नेपाल धरिक क्षेत्रकें देशज छी । एकर प्रत्येक फलमे अवस्थित एक बीज वला बीजसभकें सुखाए बहुतरास खानपान व्यञ्जनसभमे साबुत या पिसल मसालाक रूपमे प्रयोग कएल जाइत अछि । ई देखैमे सौंफ जका होइत अछि । संस्कृतमे एकरा जीरक कहल जाइत अछि, जकर अर्थ छी, अन्नक जीर्ण होबामे (पाचनमे) सहायता करै वला ।

अङ्ग्रेजीमे क्युमिन शब्दक उत्पत्ति पुरातन अङ्ग्रेजीक शब्द सायम्यान या ल्याटिन भाषाक शब्द क्युमिनम, सँ भेल अछि । ई शब्द मूलतः युनानी भाषाके κύμινον (kuminon), जकरा पाकिस्तानमे सौंफ (سونف) कहल जाइत अछि ।




#Article 612: मुलेठी (107 words)


मुलेठी या मुलहठी या यष्टिमधु एक झाड़ीनुमा पौधा होइत अछि । एकर वैज्ञानिक नाम ग्लिसीर्रहिजा ग्लाब्र (Glycyrrhiza Glabra) कहैत अछि । एकरा संस्कृत भाषा मे मधुयष्‍टी, बङ्गला भाषामे जष्टिमधु, मलयालममे इरत्तिमधुरम, तथा तमिलमे अतिमधुरम कहैत अछि । एहिमे गुलाबी आ जामुनी रङ्गक फूल होइत अछि । एकर फल लम्‍बा चपटे तथा कांट होइत अछि । एकर पत्तिसभसँ युक्‍त होइत अछि । मूल जड़सँ छोट-छोट जड़ निकलैत अछि । एकर खेती नेपाल आ भारतमे कएल जाइत अछि ।

मुलहठी एक प्रसिद्ध आ सर्वसुलभ जड़ी छी । काण्ड आ मूल मधुर भेला कारण मुलहठीकें यष्टिमधु कहल जाइत अछि । मधुक क्लीतक, जेठीमध तथा लिकोरिस एकर अन्य नाम छी । 




#Article 613: तुलसी (102 words)


 
तुलसी - (असिमम स्याक्टम) एक दुई दलीय तथा शाकाहारी, औषधीय पौधा छी । ई झाड़ीकें रूपमे उगैत अछि आ १ सँ ३ फिट उंच होइत अछि । एकर पत्तिसभ बैंगनी रङ्गक हल्का रुइयासँ ढकल होइत अछि । पत्तिसभ १ सँ २ इन्च लम्बा सुगन्धित आ अण्डाकार या आयताकार होइत अछि । ई संसारक सभ भूभागमे उपलब्ध अछि । ई वनस्पति हिन्दूसभक लेल अत्यन्तै पुजनीय आ उपयोगी वनस्पति छी | ल्यामिएसी परिवारमे वर्गीकरण कएल गेल तुलसी विश्वक बहुतेक भागमे नियमित सेवन कएल जाइत अछि | भारतीय उपमहाद्विपमे एकर वहु उपयोग कएल जाइत अछि ताहिना पूर्वी एसियाक पकवानक लेल तुलसी अमिन्न मसाला छी | 




#Article 614: जाकिर हुसैन (राजनीतिज्ञ) (300 words)


डाक्टर जाकिर हुसैन (८ फरवरी, १८९७ - ३ मई, १९६९) भारतक तेसर राष्ट्रपति छल जकर कार्यकाल १३ मई १९६७ सँ ३ मई १९६८ तक छल । डा. जाकिर हुसैनक जन्म ८ फरवरी, १८४८ ई. मे  हैदराबाद, आन्ध्र प्रदेशके धनाढ्य पठान परिवारमे भेल छल । कुछ समय बाद इनकार पिता उत्तर प्रदेशमे रहैलेल आएल छल। केवल २३ वर्ष क अवस्था मे ओ 'जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालयक स्थापना दलके सदस्य बनल । जाकिर हुसैन भारत के तेसर राष्ट्रपति तथा प्रमुख शिक्षाविद छल। ओ अर्थशास्त्रमे पिएचडीक डिग्रीके लेल जर्मनीक बर्लिन विश्वविद्यालय गएल आर वापस आबि कऋ जामियाके उप कुलपतिक पद पर सेहो आसीन भेल। सन् १९२० मे ओजामिया मिलिया इस्लामिया की स्थापना मे योग दिया तथा एकर उपकुलपति बनल। इनकर नेतृत्व मे जामिया मिलिया इस्लामिया क राष्ट्रवादी कार्यसभ तथा स्वाधीनता संग्राम क ओर झुकाव रहल। स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात ओ अलीगढ़ विश्वविद्यालय के उपकुलपति बनल तथा उनकर अध्यक्षता मे विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग सेहो गठित कएल गेल।एकर अलावा ओ भारतीय प्रेस आयोग, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूनेस्को, अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा सेवा तथा केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से सेहो जुड़ल रहल। १९६२ ई. मे ओ भारत के उपराष्ट्रपति बनल। ओ वर्ष १९६३ मे भारत रत्न से सम्मानित कएल गेल । १९६९ मे असमय देहावसान के कारण ओ अपन राष्ट्रपति कार्यकाल पूरा नै करी सकल छल । डॉ. जाकिर हुसैन भारत मे आधुनिक  शिक्षा के सबसे पैग समर्थकसभ मे से एक छल आर ओ अपन नेतृत्व मे  जामिया मिलिया इस्लामिया के नाम से एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय के रूप मे नयाँ दिल्ली मे मौजूद के स्थापित केलक, जते से हजारो छात्र प्रत्येक वर्ष अनेक विषयों मे शिक्षा ग्रहण करैत अछी ।  डॉ. जाकिर हुसैन  बिहार के राज्यपाल के रूप मे सेहो सेवा केने छल  आर एकर  बाद ओ अपन राजनीतिक कैरियर समाप्त होए सँ  पहिले ओ देश के उपराष्ट्रपति रहल तथा बाद मे ओ भारत के तेसर राष्ट्रपति सेहो बनल।




#Article 615: वराहगिरी वेङ्कट गिरी (102 words)


वराहगिरी वेङ्कट गिरी या बिबी गिरी (१० अगस्त १८९४ - २३ जुन १९८०) भारतक चारिम राष्ट्रपति छल।हुनकर जन्म ब्रह्मपुर, उडिसामे भेल छल ।

वराहगिरीक जन्म भारतक उडिसा राज्यक एक तेलुगु ब्राह्मण परिवारमे भेल छल । सन् १९१३ मे ओ युनिभर्सिटी कौलेज डबलिनक लेल कानूनक अध्ययन करवाक लेल चलि गेल । आयरल्यान्डसँ सन् १९१६ मे एक प्रकारक आयरिश दल आन्दोलनसँ जुड़ललाक बाद हुनका कौलेजसँ निष्कासित करि देल गेल। 

ओ १९७५ मे भारतक सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्राप्त केलक । ओ एक विपुल लेखक आ एक बढिया वक्ता छल । ओ पर भारतीय उद्योग मे औद्योगिक सम्बन्ध आ श्रम समस्यासभक किताबसभ लिखने छल।




#Article 616: नीलम संजीव रेड्डी (122 words)


नीलम संजीव रेड्डी (२७ अक्टूबर १९२० - ९ नवंबर २००५) भारत के छठा राष्ट्रपति छल। उनकर कार्यकाल २५ जुलाई १९७७ से २५ जुलाई १९८२ तक रहल। आंध्र प्रदेश के कृषक परिवार मे जन्मल नीलम संजीव रेड्डी क छवि कवि, अनुभवी राजनेता एवं कुशल प्रशासक के रूप मे छल। इनकर सार्वजनिक जीवन उत्कृष्ट छल। सन १९७७ के आम चुनाव मे जखन इंदिरा गांधी क पराजय भेल, ओ समय नव-गठित राजनीतिक दल जनता पार्टी इनका राष्ट्रपति क प्रत्याशी बनेलक। ओ भारत के पहिल गैर काँग्रेसी राष्ट्रपति छल। ओ अक्टूबर १९५६ मे आंध्र प्रदेश के पहिल मुख्यमंत्री बनल आर दोसर बेरी फेर १९६२ से १९६४ तक यही पद संभाललक। ओ १९५९ से १९६२ तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप मे सेहो कार्य केलक।




#Article 617: रामस्वामी वेंकटरमण (140 words)


रामस्वामी वेंकटरमण,  (रामास्वामी वेंकटरमन, रामास्वामी वेंकटरामण या रामास्वामी वेंकटरमण)(४ दिसंबर १९१०-२७ जनवरी २००९) भारत के ८अम राष्ट्रपति छल। ओ १९८७ से १९९२ तक ई पद पर रहल। राष्ट्रपति बने के पहिले ओ ४ वर्ष तक भारत के उपराष्ट्रपति रहल। मंगलवार क २७ जनवरी क लंबा बीमारी के बाद उनकर निधन भ गेल । ओ ९८ वर्ष के छल। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति आर प्रधानमंत्री समेत देश भर के अनेक राजनेतासभ उनकर निधन पर शोक व्यक्त केलक। ओ २:३० बजे दिल्ली मे सेना के रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल मे अंतिम साँस लेलक। उनका मूत्राशय मे संक्रमण (यूरोसेप्सिस) क शिकायत के बाद विगत १२ जनवरी क अस्पताल मे भर्ती करावाल गेल छल। ओ साँस सम्बन्धी बीमारी से सेहो पीड़ित छल। उनकर कार्यकाल १९८७ से १९९२ तक रहल। राष्ट्रपति पद पर आसीन होए से पूर्व वेंकटरमन करीब चार साल तक देश के उपराष्ट्रपति सेहो रहल।




#Article 618: अमाल मलिक (105 words)


अमाल मलिक क जन्म एक संगीत परिवार के रहै वाला हिंदी फ़िल्म उद्योग मे एक संगीतकार छी।  सरदार मलिक के पोता, दबू मलिक क बेटा आर संगीतकार अनु मलिक के भतीजा छी।  अमाल ८ साल क उमर मे संगीत सीखनाई शुरू करी देने छल। ओ अपन फ़िल्मी कैरियर क शुरुआत सलमान ख़ान क जय हो के साथ २०१४ मे शुरू केलक फेर मलिक २०१५ क कते बलिउड फिल्मसभ जेना की रॉय, एक पहेली लीला, ऑल इज़ वैल, कैलेंडर गर्ल्स, हीरो, हेट स्टोरी 3  के लेल संगीत देलक।  

मलिक ई गीत एकल रूप मे रचित कैल जाहिमे कम्पनी टी-सीरीज़ रहल । तथा निर्माता भूषण कुमार रहल।




#Article 619: ठाडिया ,राजस्थान (135 words)


ठाडिया एक छोट गाम छी जे राजस्थानक जोधपुर जिलाक बालेसर तहसील तथा देचू कस्बामे अवस्थित अछि । ई गाम पोस्ट अफिससँ युक्त अछि तथा एकर पिनकोड ३४२३१४ छी । गाममे कयन सरकारी तथा कयन निजी विद्यालय सहो अछि । एतय आन छोट छोट गामसभ सहो अछि। ] एतय अनेक जातिसभ निवास करैत अछि जाहिमे - सुथार, राजपूत, बिश्नोई, भील, जोगी, मेहतर, बनिया, मेघवाल आदि शामिल अछि । गमक जनसङ्ख्या भारतक २०११ क जनगणना अनुसार लगभग १०४९ अछि। 
ठाडिया गाममे लोक ज्यादातर खेतीक काज पर निर्भर करैत अछि याह कारण एतय भूमिक बढिया होनाए स्वाभाविक अछि । गर्मि मौसममे एतय कडा गर्मी होइत अछि । साथे आँधी लू के सिलसिला तँ चैलते रहैत अछि ।
गाममे अधिकतर लोक तँ अपन - अपन ट्यूबवेलक सहारासँ खेतीक काममे व्यस्त रहैत अछि जबकि खदानमे सेहो लोकसभ काम करैत अछि




#Article 620: खीरा (110 words)


खीरा (Cucumber; वैज्ञानिक नाम: Cucumis sativus) जायदक एक मुख्य फसल छी। सलादक रूपमे सम्पूर्ण विश्वमे खीराक विशेष महत्त्व अछि। खीराक सलाद अतिरिक्त उपवासक समय फलाहारक रूपमे प्रयोग कएल जाइत अछि। एकर प्रयोग करि विभिन्न प्रकारक मिठाइसभ सेहो तैआर कएल जाइत अछि। पेटक गड़बडी तथा कब्जमे सेहो खीराकेँ औषधिक रूपमे प्रयोग कएल जाइत अछि। खीरामे अधिक मात्रामे फाइबर रहैत अछि। पीलिया, प्यास, ज्वर, शरीरक जलन, गर्मी दोष, चर्म रोगमे लाभदायक अछि। खीराक रस पथरीमे लाभदायक अछि। पेशाबमे जलन, रुकावट आ मधुमेहमे सेहो लाभदायक अछि। ठेगुनक दर्द दूर करवाक लेल भोजनमे खीराक सेवन अधिक मात्रामे केना चाही|

जापानीज लग, ग्रीन पोइनसेट, खीरी पूना, फैजाबादी तथा कल्याणपुर मध्यम इत्यादि खीराक उन्नत जाति छी।




#Article 621: कपुर (174 words)


कपुर (संस्कृत : कर्पूर) उड़नशील वानस्पतिक द्रव्य छी। ई उज्जर रंगक मोमक जेहन एक पदार्थ छी। एहिमे एक तेज गन्ध होइत अछि । कपुरक संस्कृतमे कर्पूर, फारसीमे काफुर आ अंग्रेजीमे क्याम्फर कहल जाइत अछि ।

कपूर उत्तम वातहर, दीपक और पूतिहर होता है। त्वचा और फुफ्फुस के द्वारा उत्सर्जित होने के कारण यह स्वेदजनक और कफघ्न होता है। न्यूनाधिक मात्रा में इसकी क्रिया भिन्न-भिन्न होती है। साधारण औषधीय मात्रा में इससे प्रारंभ में सर्वाधिक उत्तेजन, विशेषत: हृदय, श्वसन तथा मस्तिष्क, में होता है। पीछे उसके अवसादन, वेदनास्थापन और संकोच-विकास-प्रतिबंधक गुण देखने में आते हैं। अधिक मात्रा में यह दाहजनक और मादक विष हो जाता है।

कपूर तीन विभिन्न वर्गों की वनस्पति से प्राप्त होता है। इसीलिए यह तीन प्रकार का होता है : 

(१) चीनी अथवा जापानी कपूर, 

(२) भीमसेनी अथवा बरास कपूर, 

(३) हिन्दुस्तानी अथवा पत्रीकपूर।

उपर्युक्त तीनों प्रकार के कपूर के अतिरिक्त आजकल संश्लिष्ट (synthesized) कपूर भी तैयार किया जाता है।

भारतमे कम्पोजिटी (Compositae) कुल की कुकरौंधा प्रजातिसभ (Blumea species)सँ प्राप्त कएल जाइत अछि, जे पर्णप्रधान शाक जातिक वनस्पतिसभ होइत अछि ।




#Article 622: नारियल (100 words)


नारियल (Cocos Nucifera, कोकोस न्युकिफेरा) एक बहुवर्षी आ एकबीजपत्री गाछ छी। एकर गाछ लम्बा तथा शाखा रहित होएत अछी। मुख्य गाछके ऊपरी सिरे पर लम्बा पत्तिसभक मुकुट होएत अछी। ई वृक्ष समुद्रक किनार या नमकीन जगह पर पावल जाएत अछी। एकर फल हिन्दुसभके धार्मिक अनुष्ठानसभमे प्रयुक्त होएत अछी। बांग्लामे एकरा नारिकेल कहल जाएत अछी। नारियलके वृक्ष भारतमे प्रमुख रूपसँ केरल, पश्चिम बङ्गाल आ उडिसामे खूब उगैत अछी। महाराष्ट्रमे मुम्बई तथा तटीय क्षेत्रसभ आ गोवामे सेहो एकर उपज होएत अछी। नारियल एक बेहद उपयोगी फल छी। नारियल देरसँ पचाईवाला, मूत्राशय शोधक, ग्राही, पुष्टिकारक, बलवर्धक, रक्तविकार नाशक, दाहशामक तथा वात-पित्त नाशक छी।




#Article 623: लह्सुन (110 words)


लहसुन (Garlic) प्याज कुलक (एलिएसी) एक प्रजाति छी। एकर वैज्ञानिक नाम एलियम सैटिवुम एल छी। एकर करीबी रिश्तेदारसभमे प्याज, ई शलोट आर हरीयर प्याज शामिल अछि। लहसुन पुरातन काल सँ दुनू, पाक आ औषधीय प्रयोजनक लेल प्रयोग कएल जा रहल अछि। एकर एक खास गन्ध होएत अछि, तथा स्वाद करु होएत अछि जे पकावे से काफी हद तक बदल करि मृदुल भ जाएत अछी। लहसुन क एक गाँठ (बल्ब), जक्रा आगा कतेक मांसल पुथी (लौंग या फाँक) मे विभाजित कएल जा सकैत अछी एकर गाछ क सबसँ अधिक प्रयोग कएल जाए वाला भाग अछी। पुथी क बीया, उपभोग (कच्चे या पकाया) आर औषधीय प्रयोजन क लेल उपयोग कएल जाएत अछी। 




#Article 624: लड्डु (103 words)


लड्डु एक प्रकारक मिठाई छी जकरा विभिन्न तरहसँ बनाएल जाएत अछि। ई बेसन, मोतीचूर, गोंद इत्यादि कतेक अलग-अलग चीजसभ सँ तैयार कएल जाएत अछि। भारतके अलावा ई पाकिस्तान मे सेहो बनाएल आर पसन्द कएल जाएत अछि। लड्डू सैंकडो प्रकार के होएत अछि आर बनावल जा सकेट अछि। हर जगह क लडडुसभ क अलग-अलग विशेषता होएत अछि। प्राचीन काल मे लड्डू  कोनो भी उत्सव मे भोजन के आयोजन मे विशेष प्रकार क महत्व रखैत छल। अनेक मंदिर मे भगवान के प्रसाद के रूप मे लड्डू मिलैत अछि। सभ मंदिर के लडडु क अलग विशेषता होएत अछि।

तिरुपतिके लड्डू अपन अलग पहचान रखैत अछि ।




#Article 625: आलेक्सान्द्रा कोलोन्ताइ (110 words)


आलेक्सान्द्रा मिखाइलोभ्ना कोलोन्ताइ (Алекса́ндра Миха́йловна Коллонта́й) (१८७२-१९५२) - ओ १८९० क दशकसँ सामाजिक-जनवादी छेल्हीन् । अन्तर्राष्ट्रिय समाजवादी महिला आन्दोलनम सक्रिय भेल छेलहिन १९१४ पहिने मेन्शेभिकक सदस्य छेल्हिन। १९१७म कोलोन्ताइ पार्टीक केन्द्रीय कमिटीमा निर्वाचित भेल।

रुसको अक्टोबर क्रान्तिपछिक सोभियत सरकारम कोलोन्ताइक सामाजिक कल्याणक कमिसार (मन्त्री) बनल। सोभियत इतिहासमा ओ पहिल महिला मन्त्री छी। बुखारिनसँ 'लेफ्त कम्युनिष्ट' फ्याक्शनमा रहल आर जर्मनीसँ भेल ब्रेस्त-लितोभ्स्क शान्ति सम्झौताक विरोध केलक । अहि स पहिन तीनथरी विचार देखा परल छल । लेनिन अहिमे तत्काल हास्ताक्षर करवाक पक्षम छल, जर्मनीम क्रान्ति होएक आसम त्रोत्स्की सम्झौता घसकेवाक पक्षम छल आर वर्कर्स अपोजिसन्का नेता जर्मनीविरुद्ध क्रान्तिकारी युद्धक पक्षमा छल।

, कोलोन्ताइलाई मेक्सिको आर स्क्यान्डिनेभियाली मुलुकम कूटनैतिक पदमा पठावल गेल।




#Article 626: पंकज कपूर (130 words)


पंकज कपूर भारतक जानल मानल नाटककार आर टीवी आ फिल्म अभिनेता छी। ओ अनेको टीवी धारावाहिकसभ आ फिल्मसभमे अभिनय करि चुकल अछि। 

दूरदर्शन पर ८० के दशकमे प्रसारित जासूसी धारावाहिक करमचन्द मे निभाइल शीर्षक भूमिका शायद हुन्कर सबसँ मशहूर भूमिकासभमे सँ एक छी। हुन्कर अन्य सराहनीय फिल्मसभमे एक डॉक्टर की मौत (१९९१) आर विशाल भारद्वाज निर्देशित मक़बूल (२००३) शामिल अछि। आस्कर अवार्ड विजेता रिचर्ड अटेनबरो निर्देशित आ १९८२ मे निर्मित फिल्म गाँधी मे पंकज द्वारा प्यारेलालक संक्षिप्त भूमिका अदा कएल गेल छल पर फिल्मक हिन्दी संस्करणमे गाँधी कs किरदार निभा रहल बेन किंग्सले कs डबिंग करsक हुन्का अवसर मिलल छल।

पंकज बॉलीवुडके प्रसिद्ध युवा अभिनेता शाहिद कपूरक पिता छी जे अभिनेत्री व नृत्यांगना नीलिमा अज़ीम सँ हुन्कर पहिल विवाहक सन्तान छी। पंकज दोसर विवाह अभिनेत्री सुप्रिया पाठक सँ कएने अछि।




#Article 627: पंकज उधास (120 words)


पंकज उधास (जन्म १७ मई १९५१) भारतके एक गज़ल गायक छी। भारतीय सङ्गीत उद्योगमे हुन्का तलत अजीज आ जगजीत सिंह जकाँ अन्य सङ्गीतकारके साथ इ शैली कs लोकप्रिय सङ्गीतक दायरामे लाबsक श्रेय देल जाइत अछि। उधास कs फिल्म नाम (१९८६ फिल्म)मे गायकी सँ प्रसिद्धि मिलल, जहिमे हुन्कर एक गीत चिठ्ठी आई है काफी लोकप्रिय भेल छल।  एक कुशल गज़ल गायकके रूपमे समुचा दुनियामे अपन कला कs प्रदर्शन करैत अछि। २००६ मे पंकज उधास कs पद्मश्री सँ सम्मानित सहो कएल गेल छल।

पंकज उधासक जन्म गुजरात मे राजकोटके पास जैतपुरके एक बीयर बनाबs वला परिवारमे भेल छल। ओ तीन भाइसभमे सबसँ छोट छी।

पंकज उधासके बड़का भाई मनहर रङ्मन्चके एक अभिनेता छल, जकरे कारन सँ पंकज सङ्गीतक सम्पर्क मे आएल. 

शब्द-




#Article 628: कुछ रंग प्यार के ऐसे भी (112 words)


कुछ रंग प्यार के ऐसे भी भारतीय हिन्दी धारावाहिक छी, जेकर प्रसारण सोनी पर २९ फरवरी २०१६ से शुरू भेल। ई धारावाहिक के निर्माता यश पटनायक आर ममता यश पटनायक अछी।

देव एक बहुत पैग व्यापारी छी, जे अपन माँ ईश्वरी आर तीन बहन के साथ रहैत अछी। देव आठ वर्ष क उम्र मे ही अपन पिता क देहवासन भ चुकल अछी। उनकर माँ ईश्वरी अपन बच्चा क पालैक हेतु बहुत से त्याग करैत अछी । देव अपन माँ के खुशी के लेल कुछ भी करैक क तत्पर रहैत अछी। ओ एही के चलते अपन प्रेमिका सोनक्षी से सेहो दूरी बना लैत अछी, क्या कि उनकर माँ ओकरा पसन्द नै करैत अछी।




#Article 629: धोलावीरा (127 words)


गुजरात मे कच्छ प्रदेश के उतरीय विभाग खडीर मे धोलावीरा गाम के पास पांच हजार साल पहिले विश्व क ई प्राचीन महानगर छल। ओ जमाना मे लगभग ५०,००० लोग एतए रहैत छल। ४,००० साल पहिले ई महानगर के पतन क शुरुआत भेल। सन १४५० मे फेर एतए मानव बसाहट शुरु भेल। पुरातत्त्व विभाग क ई एक अति महत्त्व क स्थान २३.५२ उत्तर अक्षांश आर ७०.१३ पूर्व देशांतर पर स्थित अछी। एतए उत्तर से मनसर आर दक्षिण से मनहर छोट नदी से पानी जमा होएत छल। हड़प्पा संस्कृति के ई नगर क जानकारी १९६० मे भेल आर १९९० तक एकर खुनाई चलैत रहल। हड़प्पा, मोहन जोदडो, गनेरीवाला, राखीगढ, धोलावीरा तथा लोथल ई छः पुरान महानगर पुरातन संस्कृति के नगर छी। जाहिमे धोलावीरा आर लोथल भारत मे स्थित अछी। 




#Article 630: नालन्दा (115 words)


ई प्राचीन भारत मे उच्च शिक्षा क सर्वाधिक महत्वपूर्ण आ विख्यात केन्द्र छल । महायान बौद्ध धर्मक ई शिक्षा-केन्द्रमे हीनयान बौद्ध-धर्म लगायत अन्य धर्मसभक तथा अनेक देशसभक छात्र पढ़ैत छल । वर्तमान बिहार राज्यमे पटना सँ ८८.५ किलोमीटर दक्षिण-पूर्व आ राजगीर सँ ११.५ किलोमीटर उत्तरमे एक गामक लग अलेक्जेन्डर कनिङ्घम द्वारा खोजल गेल ई महान बौद्ध विश्वविद्यालयकें भग्नावशेष एकर प्राचीन वैभवक बहुत किछ स्मरण कराबैत अछि । अनेक पुराभिलेखसभ आ सातम शताब्दीमे भारत भ्रमणक लेल आएल चीनी यात्री ह्वेनसाङ्ग तथा इत्सिङ्गक यात्रा विवरण सँ ई विश्वविद्यालयकें बारेमे विस्तृत जानकारी प्राप्त होएत अछी । एहि ठाम १०,००० छात्रसभ कऽ अध्यन करवाकलेल २,००० शिक्षक छल ।

प्रसिद्ध 'बौद्ध सारिपुत्र' क जन्म एहि ठाम पर भेल छल ।




#Article 631: इन्द्रधनुष (111 words)


आकाश मे संध्या समय पूर्व दिशा मे तथा प्रात:काल पश्चिम दिशा मे, वर्षा के पश्चात् लाल, नारंगी, पीला, हरा, आसमानी, नीला, तथा बैंगनी वर्णक एक विशालकाय वृत्ताकार वक्र कख्नु-कख्नु दिखाई देएत अछी। ई इंद्रधनुष कहलावै अछी। वर्षा अथवा बादल मे पानी क सूक्ष्म बूँदसभ अथवा कण पर पडै वाला सूर्य किरणसभ क विक्षेपण (डिस्पर्शन) ही इंद्रधनुष के सुंदर रंगसभ क कारण छी। सूर्य क किरणसभ वर्षा क बूँदसभ से अपवर्तित तथा परावर्तित होए के कारण इन्द्रधनुष बनैत अछी। इंद्रधनुष सदा दर्शक क पीठ के पाछा सूर्य होए पर ही दिखाई पडैत अछी। पानी के फुहारे पर दर्शक के पाछा से सूर्य किरणसभ के पडै पर सेहो इंद्रधनुष देखल जा सकैत अछी।




#Article 632: कुल्चा (107 words)


 
कुल्चा (; पञ्जाबी ਕੁਲਚਾ) एक उत्तर भारतीय रोटीक किस्म छी । भारतक साथ-साथ ई पाकिस्तानमे सेहो लोकप्रिय अछि । प्रायः एकरा छोलेक संग खायल जाइत अछि । ई मैदाक खमीर उठाए आवामे बनायल जाइत अछि । 

कुल्चा मुख्यतः एक पञ्जाबी व्यञ्जन छी, जे पञ्जाबसँ उद्गम भेल अछि । अमृतसरक खास कुल्चा अमृतसरी कुल्चा कहलावैत अछि । मैदाक दहीक साथ मलि करि खमीर उठायल जाइत अछि । एकर बाद ओहिमे उबालल मसालेदार आलू आ कटी प्याज आदि भरि भरवां कुल्चे बनायल जाइत अछि । एकरा सुनहरा रङ्ग होमए धरि आवा या तन्दुरमे पकायल जाइत अछि । एकर बाद एकर उपर मक्खन लगाए छोलेक साथ परोसल जाइत अछि । 




#Article 633: पराठा (136 words)


पराठा (उर्दू: پراٹھا, तमिल: பராட்டா) भारतीय रोटीक विशिष्ट रूप छी। ई उत्तर भारतमे जतेक लोकप्रिय अछि, लगभग ओहि अनुरुप दक्षिण भारतमे सेहो अछि, मुदा मूल अन्तर ई अछि, कि जतय उत्तरमे आटाक पराठा बनैत अछि, तँ दक्षिणमे मैदाक बनैत अछि। प्रतिदिन उत्तरी भारतीय उपमहाद्वीपीय नास्तामे सबसँ लोकप्रिय पकवान यदि किछ अछि तँ ओ पराठा छी। पराठा शब्द उपरि+आवर्त शब्दसँ बनल अछि। उपरि यानी उपर कऽ भाग आ आवर्त यानी चारो दिस घुमेनाए।

पराठा लगभग रोटी जका बनाएल जाइत अछि। रोटी जेना तावा पर सेकलाक बाद सीधा आंच पर फुलाएल जाइत अछि तँ पराठाकेँ मात्र तावा पर सेकल जाइत अछि। रोटी बनि गेलाक बाद ओकरा उपरसँ शुद्ध घी लगाएल जा सकैत अछि मुदा पराठाकेँ तावा पर सेकते खन घी या तेल लगाए सेकल जाइत अछि। दक्षिण भारतक केरलक पराठा प्रसिद्ध अछि। एतय एकरा प्रोट्टा कहल जाइत अछि। 




#Article 634: उत्तपम (118 words)


 एक केरलक खाना छी। उत्तपम या ऊथ्थाप्पम या उथप्पा (तमिल: ஊத்தாபம்) दक्षिण भारतसँ एक डोसा-जेहन पकवान छी जे सामग्रीसभक खाना पकावेवाला बैटरकेद्वारा बनाएल जाइत अछि। डोसासँ भिन्न, जे कुरकुरा आ क्रेप जेहन अछि,उत्तपम एक मोटा पैनकेक अछि जे टपिङक साथ बैटरमे पकावल जाइत अछि।

उत्तपम चपाती एक १ भाग उडदक दाल आ ३ भाग चामलक अनुपातसँ मिलके बनल अछि, चामलक संयोजन खौलल प्रकारक होवाक चाही आ बासमतीक रुपमे अर्थात् ओ प्रकारक होवाक चाही। दाल आ चामलक सम्मिश्रण पूर्ण घुलल आ उफनल गेल होवाक चाही।

 उत्तपम बनावेक लेल ५ मिनट समय लगैत अछि। उत्तपमक एक छोटका हिस्सा पानीक साथ मिलावल जाइत अछि आ उफानसँ बल्लेबाजक रूपमे फैलावल जाइत अछि। ई तँ एक कडाही पर समान रूपसँ फैलावल गेल अछि।

 




#Article 635: गितार (104 words)


गितार (अंग्रेज़ी: Guitar) एक लोकप्रिय वाद्य यन्त्र जाहिमे तार (जे कि आमतौर पर छ टा होएत अछी) के बजावे सँ ध्वनि उत्पन्न होएत अछी। इलेक्ट्रिक गितार मे विद्युत प्रवर्धन (इलेक्ट्रिकल एम्पलीफिकेशन) क मदत सँ ध्वनि उत्पन्न होएत अछी।

गितार क दुइ व्यापक श्रेणिसभ मे बांटल जा सकैत अछी-

बाकी सभ तार वाला साज़सभ क तरह ही गितार क बजावे के लेल सेहो गितार पिक (अंग्रेज़ी:Guitar Pick or Plectrum) क प्रयोग कएल जाएत अछी जेकरा [फ़ारसी] मे मिज़राब कहल जाएत अछी।

गितार विश्व के सबसे लोकप्रिय वाद्ययंत्र मे से एक छी जेकर प्रयोग पाश्चात्य संगीत से लके हर तरह के संगीत मे कएल जाएत अछी।




#Article 636: वीरेन्द्र वीर विक्रम शाह (130 words)


वीरेन्द्र वीर विक्रम शाह देव(वि.सं. १५ पौष २००१ - १९ ज्येष्ठ २०५८) नेपालक दशम शाहवंशीय राजा आ दक्षिण एसियाली राजनेता छल । राजा महेन्द्रक ज्येष्ठ पुत्र, जे १९७२ सँ २००१ धरि नेपाली शाही हत्याकाण्डमे अपन मृत्युधरि राज्य करैमे सफल रहल छल । 

तीन जना सन्तान युवराज दिपेन्द्र शाह, अधिराजकुमारी श्रुती शाह तथा अधिराजकुमार निराजन शाहक रूपमे जन्मल छल । वीरेन्द्रक दुई भाइ छल धिरेन्द्र शाह आर ज्ञानेन्द्र शाह। धिरेन्द्रक राजदरबार हत्याकाण्डमे मृत्यु भेल छल । राजा बीरेन्द्रके समयमे २०३७ सालमे जनमत संग्रह आर जनआन्दोलन २०४६ सँ नेपालमे प्रजातन्त्रक पुनर्वहाली भेल छल । पहिल बेरी बि.सं. २०३६ सालमे पञ्चायत वा बहुदल के रोजने कहिक जनताक व्यवस्था रोजैल जनमत संग्रहक घोषणा कएल गेल छल। नेपालक शान्ति क्षेत्र बनावे के प्रस्ताव विश्व सामु राखी शान्तिवादी राजाक छवी बनावे के बाद उनकर मृत्यु भेल।

 




#Article 637: विद्यालय (111 words)


विद्यालय ओ स्थल होयत अछि जतए शिक्षा प्रदान आ ग्रहण कएल जाएत अछि। विद्यालय अनेको तरहक होयत अछि। पहिल ओ विद्यालय जाहि मे शिक्षा आरम्भ कैल जायत अछि ओ प्राथमिक विद्यालय होयत अछि। जाहि में कक्षा नर्सरी सँ पांच तक पढाओल जायत अछि। दोसर मध्य विद्यालय होयत अछि। जाहि में कक्षा एकसँ कक्षा आठ तक पढाओल जायत अछि। तेसर- जाहि में कक्षा दश तक पढ़ाओल जायत अछी ओहि विद्यालय के उच्च विद्यालय कहल जायत अछि। चारिम- जाहि में स्नातक धरि पढाओल जायत अछि ताहि विद्यालय के माहा विद्यालय कहल जायत अछि। आ पाँचम विश्वविद्यालय होयत अछि। जाहि में अनेकों विषय अनेको भाषा मे पढाओल जायत अछि। जेना-गणित,विज्ञान,ईतिहास,भूगोल आंग्ल भाषा(अंग्रेजी), जापानी,फ्रेंच इत्यादि




#Article 638: खड्गप्रसाद ओली (214 words)


 

खड्गप्रसाद शर्मा ओली (जन्म: विसं २००८ साल फागुन ११, प्रख्यात नाम: केपी ओली) नेपालक राजनीतिज्ञ तथा वर्तमानमे (४१ अम) प्रधानमन्त्री छी । राष्ट्रपती विद्या देवी भण्डारी द्वारा संविधानक धारा ७६ कऽ उपधारा २ बमोजिम २०७४ फागुन ३ गते ओली प्रधानमन्त्री नियुक्त भेल ।।   आ एहिसँ पहिने ओली २०७२ मे पहिलबेर नेपालक ३८अम प्रधानमन्त्री सेहो रहि चुकल अछि ओ नेकपा (एमाले)क वर्तमान अध्यक्ष छी। 

खड्गप्रसाद ओलीक जन्म बाबु मोहनप्रसाद ओली आर मधु ओलीक पुत्रक रूपमे वि सं २००८ साल फागुन ११ गते शनिबार तेह्रथुम जिलाक इवा गाममे भेल छल । वि.सं. २०२२ सालमे कम्युनिष्ट राजनीतिमे संलग्न ओली २०२६ सालमे नेपाल कम्युनिष्ट पार्टीक सदस्यता लेनए छल। २०२८ सालक झापा आन्दोलनक प्रमुखसभमे एक छल, ओही वर्ष ओ जेलमे पडल छल ।। ओली तत्कालिन नेकपा (माले) कऽ संस्थापकमे एक छी। पञ्चायती व्यवस्था विरुद्धक संंघर्षक क्रममे ओली २०२८सँ २०४४धरि १४ वर्ष जेल जीवनयापन केने छल ।

ओली २०४८, २०५१ आ २०५६ कऽ आम-निर्वाचनमे झापा जिल्ला क्षेत्र नं ६सँ प्रतिनिधि सभामे निर्वाचित भेल छल। पहिल संविधान सभा निर्वाचन २०६४मे ओ झापाक क्षेत्र नं ७सँ पराजित भेल। वि.सं. २०४९ सालमे नेकपा (एमाले)क स्थायी कमिटी सदस्य भेल ओ, २०७१ असारमे पार्टीक अध्यक्षमे निर्वाचित भेल अछि । दोसर संविधानसभा निर्वाचन २०७०मे ओ झापा क्षेत्र नं ७सँ नेकपा एमालेक तरफसँ निर्वाचित भेल अछि। हाल ओ नेकपा (एमाले)क संसदीय दल कऽ नेता सेहो छी ।




#Article 639: गगन थापा (232 words)


 (नेपाली: गगन थापा) नेपालक राजनीतिज्ञ तथा नेपाली काँग्रेसक नेता आर नेपालक स्वास्थ्यमन्त्री छी।

थापाक जन्म २०३३ सालमे काठमाडौंक प्रसूति गृहमे भेल अछि। उनकर मातापिता महेन्द्र कुमार थापा आ रामेश्वरी थापा छी। उनकर दादा सोलुखुम्बु जिल्लाक खाल्पा गाम्क धनी मुखिया भीमराज थापा छी। ओ कश्यप गोत्री गोदार थापा अछि।

गगनक बाल्यकालक किछ समय सिन्धुपाल्चोक जिल्लामे बितल। उनकर पिता महेन्द्र नेपाल विद्युत प्राधिकरणमे इन्जिनियर छल। गगनक एक भैया आ दुई भाइ अछि। भैया पवन छी तँ भाईसभ सुमन आ जीवन। गगन सिर्द्धार्थ वनस्थली हाइस्कूलमे पढलक। ओहि ठाम पढैतधरि उनकर इच्छा डाक्टर-इन्जिनियर बनेके ही छल। २०४६ सालक जनआन्दोलनमे गगन सक्रिय भेल। तखन ओ कक्षा ९ मे पढैत छल। परन्तु, राजनीतिमे लागेके सोचाइ नै छल। 

दोसर सविधानसभामे कृषि तथा जलस्रोत समितिक सभापतिक प्रभावशाली भूमिका निर्वाह केने थापा नेपाली काग्रेसक युवा नेता गगन थापा एक सभासदक रुपमे सदा चर्चाक शिखरमे रहल । 
समाजशास्त्रमे स्नातकोत्तर अध्ययन केने थापा २०५९ सालसँ २०६१ सालधरि नेविसंघक महामन्त्री भ काम केने छल। नेपाली काँग्रेसक महाधिवेशन प्रतिनिधि थापा राजाक सक्रिय शासनक खन काङ्ग्रेस पार्टी गतन्त्रक आवाज प्रखर रूपमे उठावे वाला युवाक रूपमे परिचित अछि। दर्जनौ बेर हिरासतमे पडल थापा चलचित्र देखनाई, अध्ययन आ घुमफिर अपन रुचि भेल बतौने अछि।

संविधानसभामे नेपाली काङ्ग्रेस नामक पुस्तकक लेखक थापा नेपाली काग्रेसक नेता अर्जुननरसिंह केसीक बेटी डा.अञ्जना के.सी सँग २०६५ वैशाखमे विवाह केलक। संविधानसभामे दलसभक बीचमे सहमति बनावेमे अपन प्रमुख प्रयास रहल थापा बतौने अछि।

 
उनकर पत्नी नेपाली काँग्रेसक नेता अर्जुननरसिंह केसीक बेटी डा. अञ्जना केसी छी।




#Article 640: कुत्ता (107 words)


कुत्ता या श्वान भेड़िया कुल क एक प्रजाति छी। ई मनुष्य क पालतू पशुसभ मे से एक महत्त्वपूर्ण प्राणी छी। एकरा द्वारा तंत्रिका तंत्र क प्रभावित करै वाला एक भयंकर बीमारी रेबीज होएत अछी। एकर माता क कुतिया आर बच्चा क पिल्ला कहैत अछी। 

कुत्ता 11-16,000 साल पहिले पश्चिमी यूरोप मे भेड़िया क पालतू बनावे से शुरू भेल छल। ई समय जब मानव शिकारी छल ओकर दौरान क अछी। भ सकैत अछी की आधा-कुत्ता प्रारंभिक मानव द्वारा शिकार के बाद छोडी देल गेल ई शव क लाभ लेईत छल, साथ ही शिकार क पकडै मे सहायता प्रदान करैत छल आर बड शिकारिसभ से रक्षा प्रदान करैत छल।




#Article 641: कछुवा (111 words)


कछुवा जल आर स्थल दुनु ठाममे रहै सकै वाला एकटा उभयचर जीव छी।
प्रकृतिक सर्वाधिक पुरान जीवधारी कछुवा सरिसृपवर्गमे सर्वाधिक बुद्धिमान प्राणी सेहो मानल जाएत अछी। बितल २० करोड वर्षमे जलवायु परिवर्तन क वाबजुद एखन तक भी अपना आपके सुरक्षित रखैत आएल अछी|

उभयचर प्राणीमे पडै वाला कछुवा बहुत लम्बा समय तक जीवित रहै वाला प्राणी छी। सम्भवतः प्रकृतिमे लोगसँ दोब्बर आयु अर्थात् डेढ सय वर्षतक जीवित रहै सकै वाला प्राणी कछुवाबाहेक आर दोसर नै अछी आर करिब २० करोड वर्षसँ प्रकृतिक अनगिन्ती आरोह अवरोहक झेलैत अपना आपके सुरक्षित राखैमे सफल प्राणीमे सेहो कछुवा पडैत अछी। विष्णुक दस अवतारमे कछुवा सेहो मानल जाएत अछी, जेकर क्रम मत्स्यके बाद आवैत अछी । 




#Article 642: राहुल गान्धी (159 words)


राहुल गान्धी (जन्म:१९ जून १९७०) एक भारतीय नेता आ भारत संसदक सदस्य छी और भारतीय संसदक निचला सदन लोकसभामे उत्तर प्रदेशमे अवस्थित अमेठी चुनाव क्षेत्रक प्रतिनिधित्व करैत अछि । 
राहुल गान्धी १६ दिसम्बर २०१७ सँ भारतीय राष्ट्रिय काङ्ग्रेसक अध्यक्ष सेहो छी । राहुल भारतक प्रसिद्ध गान्धी-नेहरू परिवारसँ अछि । राहुल कऽ २००९ मे भेल आम चुनावमे काङ्ग्रेसक मिलल पैग राजनैतिक जीतक श्रेय देल गेल छल । हुनकर राजनैतिक रणनीतीसभमे जमीनक स्तरसँ सक्रियता पर बल देनाए, ग्रामीण जनताक संग गहण सम्बन्ध स्थापित केनाए आ काङ्ग्रेस पार्टीमे आन्तरिक लोकतन्त्र कऽ शसक्त्त करबाक कोशिश केनाए प्रमुख अछि ।एखन राहुल अपन समुचा ध्यान अपन पार्टीक जड़िसँ मजबूत बनानबऽमे केन्द्रित करि रहल अछि ।

राहुल गान्धीक जन्म १९ जून १९७० कऽ नयाँ दिल्लीमे भारतक पूर्व प्रधानमन्त्री राजीव गान्धी आ निवर्तमान काङग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गान्धीक घर भेल छल । ओ अपन माता-पिताक दुटा सन्तानसभमे पैग छी आ प्रियङ्का गान्धी वाड्राक पैग भाई छी । राहुल गान्धीक दादी इन्दिरा गान्धी भारतक पूर्व प्रधानमन्त्री छल ।




#Article 643: करमचन्द गान्धी (116 words)


करमचन्द उत्तमचन्द गाँधी (१८२२-१८८५) भारत क राष्ट्रपिता महात्मा गांधी क पिता छल। वे पोरबन्दर रियासत मे प्रधानमंत्री, राजस्थानिक कोर्ट के सभासद, राजकोट मे दीवान आर किछ समय तक बीकानेर के दीवान के उच्च पद पर प्रतिष्ठित छल। ओ कबा गाँधी के नाम से सेहो जानल जाएत छल।

महात्मा गाँधी क माता पुतलीबाई, करमचंद गाँधी चौथी पत्नी छल। इनकर पिता क नाम उत्तमचन्द गाँधी आर माँ क नाम लक्ष्मी गाँधी छल।

ओ दिन कोनो रियासत क दीवानगिरी चैन क नौकरी नै छल। पोरबन्दर पश्चिमी भारत क तीन सौ रियासत मे से एक छल, जाहि पर ओ राजा सभ शासन केलक जे मात्र राजकुल मे जन्म लै के कारण आर अंग्रेजों क सहायता सँ सिंहासन पर विराजमान भेल। 




#Article 644: मार्शल आर्ट (127 words)


मार्सल  आर्ट (अंग्रेजीमाः Martial Art) वा मार्सल  कला, लडाई अभ्यास क प्रणाली आर आत्म-सुरक्षा क  लेल प्रशिक्षण करै जाए वाला परम्परा छी ।  मार्सल  आर्ट क एक लक्ष्य रहल अछी : अपन या दुसर क कोनो प्रकारक शारीरिक खतरा से रक्षा करब ।  मार्सल  आर्ट के विज्ञान र कला क मिलन मनाल जाइत छी। मार्सल  आर्टसे  हिन्दू धर्म, बुद्ध धर्म आर विभिन्न सामिदायिक आस्था संग जोडल अछि।  इ कलाहरूक प्रतिस्पर्धात्मक अभ्यास गरिनुका साथै लड़ाईका खेलसभमे पय्रोग कैल जाइत छी, नीचा कहियो कहियो इ नृत्य क रूपमे सोह प्रशतूत कल गइल
अछि   ।

' मार्सल  आर्ट्' शब्दक अर्थ मार्श(मंगलग्रह - रोम लोग युद्ध क देवता) क कलासभ छी आर इ  लडाईक कलासग सम्बन्धित १५ सताब्दिक युरोपेली शब्द छी  । मार्सल  आर्टक कलाकारके मार्सल  कलाकार(अंग्रेजीमाः Martial Artist)कहल जाइत छी।




#Article 645: बहादुर शाह जफर (126 words)


बहादुर शाह ज़फ़र (१७७५-१८६२) भारत मे मुग़ल साम्राज्य के आखिरी शहंशाह छल आर उर्दू भाषा के मानल जाए वाला शायर छल। 

लगता नहीं है जी मेरा उजड़े दयार में,
किस की बनी है आलम-ए-नापायदार में।

बुलबुल को बागबां से न सैयाद से गिला,
किस्मत में कैद लिखी थी फसल-ए-बहार में।

कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें,
इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दाग़दार में।

एक शाख गुल पे बैठ के बुलबुल है शादमान,
कांटे बिछा दिए हैं दिल-ए-लाल-ए-ज़ार में।

उम्र-ए-दराज़ माँग के लाये थे चार दिन,
दो आरज़ू में कट गये, दो इन्तेज़ार में।

दिन ज़िन्दगी खत्म हुए शाम हो गई,
फैला के पांव सोएंगे कुंज-ए-मज़ार में।

कितना है बदनसीब 'ज़फर' दफ्न के लिए,
दो गज़ ज़मीन भी न मिली कू-ए-यार में॥

 
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम




#Article 646: सेकेण्ड (101 words)


 (अन्तर्राष्ट्रीय इकाई प्रणाली चिन्ह: s), संकेताक्षर मे sec., समय क अंतर्राष्ट्रीय मानक इकाई छी। अंतर्राष्ट्रीय मानक मे समय क अन्य इकाइसभ  क ही व्युत्पन्न अछी। ई इकाइसभ दस के गुनांक मे होएत अछी। एक मिलिसेकेंड  क एक हजारिम भाग होएत अछी आर 'एक नैनोसेकेण्ड' सेकेण्ड क एक अरबम भाग होएत अछी। 

अन्तर्राष्ट्रीय इकाई प्रणाली के अन्तर्गत, सैकण्ड क वर्तमान परिभाषा छी: 
 ई परिभाषा सीज़ियम परमाणु क विराम अवस्था मे शून्य कैल्विन पर बनाएल गेल अछी। विराम या आधार अवस्था शून्य चुम्बकीय क्षेत्र मे परिभाषित अछी। 
सेकण्ड क अन्तर्राष्ट्रीय मानक चिन्ह छी s (देखी मानक ISO 31-1).

१ अन्तर्राष्ट्रीय सैकण्ड बराबर अछी:




#Article 647: कन्फुसियस (145 words)


कन्फुसियस(इ.पू.५५१-४७९) चीनक महान विचारक तथा दार्शनिक छल।

जाहि समयमे नेपालमे भगवान गौतम बुद्ध धर्मक बारेमे नयाँ विचार खोईज करैत छल ओहि समयमे चीनमे सेहो एक धार्मिक सुधारकक जन्म भेल जेकर नाम कन्फुसियस छल। ओ समय चीनमे चाऊ वंशक शासन चलिरहल छल। चाऊ शासकसभ कमजोर होवाक कारण ओ समय चीनमे विभिन्न राज्यसभ बढल छल जे आपसमे लडाई झगडा करैत छल। सदा दिनक लडाई झगडासँ चिनियाँ जनता बडका कष्ट झमेला झेले पडल छल। ओही समयमे चीनवासीक नैतिकताक पाठ पढावैल महात्मा कन्फुसियसक जन्म भेल। 
इनकर जन्म जिसस क्राइस्टक जन्मक करीब ५० वर्ष पहिले चीनक सानतुङ्ग प्रदेशमे भेल छल।इनकर वाल्यकालक नाम कुङ फू च्चू छल। उनका ज्ञानक आकांक्षा असीम छल। परन्तु वाल्यकालमे ही पिताक मृत्यु होवाक कारण ज्ञान आर्जन करैमे इनका एकदमे कठीन परल छल।१७ वरिष क उमेरमे ओ एकटा सरकारी नोकरी पावने छल परन्तु अपनामे भेल ज्ञान तथा दर्शनक कारण ओ ई नोकरीमे बहुतरास समय रमावे नै सकल।




#Article 648: हेलेन केलर (130 words)


हेलेन एडम्स केलर (२७ जून १८८० - १ जून १९६८) एक अमेरिकी लेखक, राजनीतिक कार्यकर्ता आर आचार्य छल। ओ कला स्नातक क उपाधि अर्जित करै वाला पहिल बधिर आर दृष्टिहीन छल। ऐनी सुलेवन के प्रशिक्षण मे ६ वर्ष क अवस्था से शुरु भेल ४९ वर्ष के साथ मे हेलेन सक्रियता आर सफलता क ऊंचाइ तक पहुँचल। ऐनी आर हेलेन क चमत्कार लगने वाले कहानी अनेक फिल्मकारसभ क आकर्षित केलक। हिन्दी मे २००५ मे संजय लीला भंसाली एही कथानक क आधार बना कने परिवर्तन करैत ब्लैक फिल्म बनेलक। बेहतरीन लेखिका केलर अपन रचनासभ मे युद्ध विरोधी के रूप मे नजर आवैत अछी। समाजवादी दल के एक सदस्य के रूप मे ओ अमेरिकी आर दुनिया भर के श्रमिकसभ आर महिलासभ के मताधिकार, श्रम अधिकारसभ, समाजवाद आर कट्टरपंथी शक्ति के खिलाफ अभियान चलेलक।




#Article 649: स्टिफन हकिङ (1393 words)


स्टिफन विलियम हकिङ, (सीएच, सीबीई, एफआरएस आ एफएसएए), (८ जनवरी १९४२ - १४ मार्च २०१८) क्याम्ब्रिज विश्वविद्यालयमे सैद्धान्तिक ब्रह्माण्ड विज्ञान केन्द्रमे शोध के एक अङ्ग्रेज मूल के सैद्धान्तिक भौतिक विज्ञानी, ब्रह्माण्डविद्, लेखक आ निर्देशक छल। हुनकर वैज्ञानिक कार्यसभमे सामान्य सापेक्षताक रूपरेखामे गुरुत्वाकर्षण विलक्षण प्रमेयसभ पर रोजर पेनरोसक साथ मिलि केऽ आ सैद्धान्तिक भविष्यवाणी कएल गेल जे ब्ल्याक होल विकिरण उत्सर्जित करैत अछि, जेकरा प्रायः हकिङ विकिरण कहल जाइत अछि। सापेक्षता आ क्वान्टम यान्त्रिकी के सामान्य सिद्धान्त के एक संघ द्वारा समझाएल गेल, ब्रह्माण्ड विज्ञान के सिद्धान्तक स्थापित करै वाल पहिल व्यक्ति हकिङ छल। ओ क्वान्टम यान्त्रिकी के अनेकौं-विश्वक व्याख्या के एकटा जोरदार समर्थक छल।

हकिङ, रोयल्टी सोसाइटी (एफआरएस) कऽ एकटा साथी छल, जे पोन्टिकल एकेडेमी अफ साइन्सेज कऽ आजीवन सदस्य छल आ संयुक्त राज्य अमेरिकामे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारक राष्ट्रपति पदक प्राप्त करि चुकल छल। २००२ मे, १०० महानतम ब्रिटेनक बीबीसी के सर्वेक्षणमे हकिङ कऽ २५हम स्थान देल गेल छल। ओ १९७९ सँ २००९ धरि केऽ बीचमे क्याम्ब्रिज विश्वविद्यालयमे गणितक लुकासियन प्रोफेसर छल आ ओ लोकप्रिय विज्ञान के साथ-साथ व्यवसायिक सफलता हासिल केनए छल जाहिमे ओ अपन सिद्धान्त आ ब्रह्माण्ड विज्ञानक उपर सामान्य रूपसँ चर्चा केनए छल। हुनकर पुस्तक ए ब्रिफ हिस्ट्री अफ टाइम ब्रिटिश सडेज टाइम्स कऽ बेस्ट-विक्रेता सूची २३७ सप्ताहसभक रेकर्डिङ कऽ लेल पेश कएल गेल।

हकिङ मोटर न्यूरोन रोग (जेकरा एमियोथ्रोफिक लेटरल श्लेक्सिओस एएलएस वा लो जेरिग्स रोग सेहो कहल जाइत अछि) के एकटा दुर्लभ प्रारम्भिक सुस्त गतिसँ प्रगतिशील रूपसँ विकसित केनए छल जे धीरे-धीरे हुनका दशकसभ धरिमे लकवा मारि देलक। अपन हानि के बाद सेहो, ओ एकटा भाषण-जनरेटिङ डिभाइसक माध्यमसँ शुरूमे संवाद करवाकमे सक्षम छल, शुरूमे एक हातसँ आयोजित स्विचक उपयोगक माध्यमसँ, आ अन्ततः एक गाल के मांसपेशीक उपयोग करि के भाषण देनए छल। १४ मार्च २०१८ मे ७६ वर्षक उमर मे हुनकर निधन भऽ गेल।

हकिङ कऽ जन्म जनवरी १९४२मे अक्सफोर्डसँ फ्रयाङ्क (१९०५-१९८६) आ ईसोबेल ईलीन हकिङ (नी वोकर; १९१५-२०१३) मे भेल छल। हकिङ कऽ माताक जन्म ग्लासगो, स्कटल्याण्डकऽ डाक्टरसभक एकटा परिवारमे भेल छल। योर्कशायर के हुनकर धनीमनी दादा-दादी खेतक भूमि खरीदवाक कऽ लेल स्वयम् कऽ विस्तार केलक आ २०हम शताब्दीक
आरम्भमे महान कृषि अवसादमे दिवालिया भऽ गेल। अपन पैतृक महान दादी अपन घरमे एकटा स्कूल खोलि कऽ वित्तीय बर्बाद होएसँ परिवार के बचौलक्। अपन परिवारक वित्तीय बाधासभक बावजूद, दुनु गोटे अभिभावकसभ अक्सफोर्ड विश्वविद्यालयमे भाग लेलक, जतय फ्रयाङ्क मेडिकल कऽ पढाई केलक आ आइसोबेल दर्शन, राजनीति आ अर्थशास्त्र पढाई केलक। आइसोबेल एकटा चिकित्सा अनुसन्धान संस्थान के लेल, एकटा सचिव के रूपमे काम केलक, आ फ्रयाङ्क एकटा चिकित्सा शोधकर्ता छल हकिङ कऽ दुईटा छोटकी बहिन, फिलिप आ मरियम आ एकटा दत्तक भाई एडवर्ड फ्रयाङ्क डेभिड (१९५५-२००३) छल।

१९५० मे, जखन हकिङ कऽ पिता नेशनल इन्स्टिच्युट फोर मेडिकल रिसर्चमे परजीवी विज्ञान कऽ विभाजन कऽ प्रमुख बनल, तँ परिवार सेन्ट एल्बन्स, हर्टफोर्डशायर चलि गेल, सेन्ट एल्बन्समे, परिवारक बेहद बुद्धिमान आ किछ विलक्षण मानल जाइत छल;भोजन प्रायः प्रत्येक व्यक्ति के साथ चुपचाप एकटा किताब पढैत छल।ओ एकटा बडका, बरबाद आ खराब रखरखाव वाला घरमे एक मितव्ययी अस्तित्व रखैत छल आ एकटा परिवर्तित लण्डन ट्याक्सीक्याबमे यात्रा करैत छल।अफ्रीकामे काम करै वाला हकिङ कऽ पिता के लगातार अभाव के दौरान, बाकी के परिवार मालोर्कामे अपन माताक साथी बेरिल आ हुनकर पति, कवि रोबर्ट ग्रेव्स कऽ यात्रामे चारि महिना बितौलक्।

हकिङ उच्च विद्यालय, लण्डन के बायरन हाउस स्कूलमे अपन पढाई शुरू केलक।बादमे ओ स्कूलमे पढनाए सीखनाए मे विफल रहै के लेल अपन प्रगतिशील तरीकासभ के दोषी ठहरौलक्। सेन्ट एल्बन्समे, आठ साल के हकिङ किछ महिना धरि लडकिसभक लेल सेन्ट एल्बन्स हाई स्कूलमे भाग लेलक। ओ समय, छोटका लडकासभक घरसभमे सँ एकटामे शामिल भऽ सकैत छल।

हकिङ दुईटा स्वतन्त्र (अर्थात् शुल्क-भुगतान) स्कूल, पहिल रेडलेट स्कूलआ सितम्बर १९५२ सँ सेन्ट एल्बन्स स्कूलमे ११ सँ एक वर्षक शुरुवाती उत्तीर्ण होमए के बाद भाग लेलक, परिवार शिक्षा पर उच्च मूल्य रखने अछि, हकिङ कऽ पिता अपन पुत्र के बढीयाँ तरिकासँ मनौलक् जे हम, वेस्टमिन्स्टर स्कूलमे शामिल करवाक चाहै छी, मुद्दा १३ वर्षीय हकिङ छात्रवृत्ति परीक्षाक दिन बीमार छल।हुनकर परिवार के स्कलरशिप के वित्तीय सहायता के बिना स्कूलक फीस नै मिल सकैत छल, एहि लेल हकिङ सेन्ट एल्बन्समे बनल रहल। एकटा साकारात्मक परिणाम ई छलजे हकिङ ओ दोस्तसभक करीबी समूह के साथ बनि रहल जेकर साथ ओ बोर्ड गेम्स, आतिशबाजी, मोडेल हवाईजहाज आ नौकासभक निर्माण केलक, आ ईसाई धर्म आ अतिसंवेदनशील धारणा के बारेमे बहुतरास समयसँ चर्चा केलक। १९५८ सँ, गणितक शिक्षक डिक्रन ताहता कऽ सहायतासँ, ओ घडी कऽ हिस्सासभ, एकटा पुरान टेलिफोन स्विचबोर्ड आ अन्य पुनर्नवीनीकरण घटकसभसँ कम्प्युटर बनौलक्।

हकिङ युनिभर्सिटी कलेज, अक्सफोर्डमे १९५९ मे १७ वर्षक उमरमे अपन शिक्षा शुरू केलक।पहिनुक १८ महिनामे, ओ ऊब आ अकेला छल- हुनका एकेडेमीक काम हास्यास्पद आसान मिलल।हुनकर भौतिकी के शिक्षक, रोबर्ट बर्मन बादमे कहलक्, ओकरा लेल ई बुझनाए जरूरी छल जे किछ कएल जाऽ सकैत अछि, आ ई देखवाक लेल जे ई कोना अन्य लोगसभ केनए छल, ओकरा बिना करि सकैत छल।बर्मन के अनुसार, अपन दोसर आ तेसर वर्षक दौरान एकटा परिवर्तन भेल, हकिङ लडकासभमे सँ एकटा होए के लेल एकटा प्रयास केलक।ओ एक लोकप्रिय, जीवन्त आ विनोदी कलेज के सदस्य के रूपमे विकसित केलक, जे कि शास्त्रीय सङ्गीत आ विज्ञान कथामे रुचि रखैत अछि। परिवर्तनक एकटा हिस्सा कलेज बोट क्लब, युनिभर्सिटी कलेज बोट क्लबमे शामिल होए के अपन फैसला के कारण भेल, जतय ओ एकटा रोइङ्ग क्रू कऽ दौरा केलक। समय पर रोइङ्ग कोच कहलक् जे हकिङ एकटा साहसी छवि के खेती केलक, जे खतरनाक पाठ्यक्रमसभ पर अपन चालक दल के सञ्चालन के कारण क्षतिग्रस्त नौकासभक नेतृत्व केलक।

हकिङ अनुमान लगौलक् जे ओ अक्सफोर्डमे अपन तीन वर्षक दौरान १,००० घण्टा कऽ अध्ययन केलक। ई अप्रतिष्ठित अध्ययन कऽ आदतसभ अपन फाइनलमे एक चुनौती बनल, आ ओ तथ्यसभक ज्ञान के आवश्यकता के बाहेक केवल सैद्धान्तिक भौतिकी के प्रश्नसभक जवाफ देए के फैसला केलक। क्याम्ब्रिज विश्वविद्यालयमे ब्रह्माण्ड विज्ञानमे एक प्रथम श्रेणी कऽ सम्मान के डिग्री अपन नियोजित स्नातक अध्ययन के लेल स्वीकृति कऽ शर्त छल।उत्सुकतासँ, ओ परीक्षासभसँ पहिनुक रात खराब नै सुतलक्, आ अन्तिम परिणाम प्रथम- आ द्वितीय श्रेणी के सम्मान के बीच कऽ सीमा पर छल, जाहिसँ एक निर्विवाद (मौखिक परीक्षा) आवश्यक होए। हकिङ कऽ चिन्तित छल जे हुनका आलसी आ मुश्किल छात्र के रूपमे देख गेल छल।एहि लेल, जखन मौखिक रुपसँ हुनकर योजनासभक वर्णन करवाक लेल कहलक्, ओ कहलक्, यदि अहाँ हमरा सभसँ पहिने पुरस्कार दैत अछि, तँ हम क्याम्ब्रिज जाएब। यदि हमरा दोसर मिलल तँ हम अक्सफोर्डमे रहत, एहि लेल हमरा उम्मीद अछि जे अहाँ हमरा सभसँ पहिने दऽ दियौ।ओ उच्च सम्बन्धमे हुनकर विश्वासक तुलनामे आयोजित कएल गेल छल; जेना कि बर्मन टिप्पणी केलक, परीक्षकसभ ई समझै मे काफी बुद्धिमान छलजे ओ स्वयम् के तुलनामे बहुत अधिक क्लियररसँ बात करि रहल छल प्रकृति विज्ञानमे प्रथम श्रेणी कऽ बीए (अनर्स) डिग्री प्राप्त करलक् आ एकटा मित्र के साथ ईरान कऽ यात्रा पूर्ण करवाक बाद, ओ अक्टूबर १९६२ मे क्याम्ब्रिज के ट्रिनिटी हलमे स्नातक काम शुरू केलक।

एकटा डक्टरेट छात्र के रूपमे हकिङ कऽ पहिल वर्ष मुश्किल छल। हुनका शुरूमे निराश कएल गेल छल जे हुनका योर्कशायर खगोलशास्त्री फ्रेड होल के छोडि एकटा सुपरभाइजर के रूपमे, आधुनिक ब्रह्माण्ड विज्ञान के संस्थापकसभमे सँ एकटा डेनिस विलियम क्यासामा के सौंपल गेल छल आ हुनका सामान्य सापेक्षता आ ब्रह्माण्ड विज्ञानमे काम के लेल अपर्याप्त गणितमे हुनका प्रशिक्षण पावलक्। मोटर न्युरोन रोग कऽ निदान करवाक बाद, हकिङ अवसादमे गिर गेल- मुद्दा हुनकर डाक्टरसभ सलाह देलक जे ओ अपन पढाई जारी रखि सकैत अछि, ओ महसूस केलक जे छोट-मोट बात छी।डाक्टर कऽ भविष्यवाणी कऽ तुलनामे हुनकर रोग अधिक धीरे-धीरे प्रगति केनए छल मुद्दा हकिङ कऽ असमर्थित रूपसँ घूमै मे कठिनाई होइत छल, आ हुनकर भाषण लगभग अपुष्ट छल, प्रारम्भिक निदान ई छल जे ओ केवल दुईटा साल धरि जीवन-निर्वाह के लेल निराधार साबित भेल। क्यासामा के प्रोत्साहन के साथ, ओ अपन काम पर फिर्ता भेल। जून १९६४ मे व्याख्यान के दौरान हकिङ, फ्रेड होल आ हुनकर छात्र जयन्त नारलीकर के काम कऽ चुनौती देलक, जखन प्रतिभा आ चमक के लेल प्रतिष्ठा विकसित करनाए शुरू करि देलक।

जखन हकिङ अपन स्नातक अध्ययन शुरू केलक, तँ भौतिकी समुदायमे ब्रह्माण्ड के निर्माण कऽ प्रचलित सिद्धान्तसभक बारेमे बहुत बहस भेल:बिग ब्याङ आ स्थिर राज्य सिद्धान्त ब्ल्याक होल्स के केन्द्रमे स्पेसटाइम विलक्षणता के रोजर पेनरोस के प्रमेयसँ प्रेरित भऽ, हकिङ पुरा ब्रह्माण्ड कऽ ओही सोच कऽ लागू केलक; आ, १९६५ के दौरान, ओ ई विषय पर अपन थेसिस लिखलक्।हकिङ कऽ थेसिस के १९६६ मे मञ्जूरी दऽ देल गेल। एहिमें अन्य साकारात्मक घटनासभ सेहो छल:हकिङ कऽ क्याम्ब्रिज कऽ गोनविले आ क्यायूस कलेजमे रिसर्च फेलोशिप मिलल; ओ गणित आ सैद्धान्तिक भौतिकीमे अपन पी.एचडी. कऽ डिग्री प्राप्त केलक, मार्च १९६६ मे सामान्य सापेक्षता आ ब्रह्माण्ड विज्ञानमे विशेषज्ञता; आ हुनकर निबन्ध अपूर्वदृष्टि आ अन्तरिक्ष-समय कऽ ज्यामिति एक वर्ष के लेल पेनोरोज द्वारा एकटा के साथ शीर्ष सम्मान के साथ ओ वर्षक प्रतिष्ठित एडम्स पुरस्कार जीत लेनए छल।




#Article 650: कोल्डप्ले (112 words)


 कोल्डप्ले  एक बहुचर्चित ब्रिटिश रक ब्याण्ड छी। ई ब्याण्डक सदस्य क्रिस मार्टिन, जोन्नी बकल्याण्ड, गाइ बेर्रीमन , विल च्याम्पियन अछी। कोल्डप्ले आठ टा  ब्रिट अवार्ड आर छब्बीस टा ग्राम्मी अवार्ड नोमिनेसनमे पईड चुकल अछी। कोल्डप्ले सातटा ग्राम्मी अवार्ड आ आठटा  ब्रिट अवार्ड जितने अछी। ओ सभ नाम पेक्टोरल्जके अन्तर्गत गठित ब्याण्डके नाम, बेरीम्यान बास वादकके रूपमे समूहमे शामिल भेलाक बाद स्टारफिश नाम बदैल देने अछि।

वर्ष २०००मे रिलीज भेल एकल गीत यल्लो क रिलीजक साथ बैन्ड दुनियाभरमे ख्याति हासिल केलक। बैन्डक आठ ब्रिट पुरस्कार सहित अनेक विभिन्न संगीत पुरस्कारसभसँ सम्मानित कएल गेल अछि। दिसम्बर २००९मे, रोलिङ स्टोन पत्रिकाद्वारा कएल गेल एक मतदानमे पाठकसभ कोल्डप्लेक २०००क दशकके चौथा सभसँ बढिया कलाकारक रूपमे चुनलक।




#Article 651: दक्षिण एशियाली सहयोग सङ्गठन (127 words)


दक्षिण एसियाली सहयोग सङ्गठन या छोट नाम सार्क सन १९८०मे दक्षिण एसिया क्षेत्रमे विकसित भेल क्षेत्रीय एकताक भावनाक बङ्गलादेशक राष्ट्रपति जियाउर रहमान विशेष पहल केने छल । एहीसँ पहिले नेपालक राजा वीरेन्द्र वीरबिक्रम शाह सन १९७७ ताका कोलोम्बो योजना परामर्शदातृ सम्मेलनमे नेपालक नदी-नालासभक ई क्षेत्रक मुलुकसभक हितक लेल प्रयोग करैके आह्वान केने छल । 

सार्क सचिवालय नेपालक काठमाडौँमे रहल अछि । एकर उद्घाटन नेपालक तत्कालीन राजा वीरेन्द्र शाहसँ सन् १९८७ जनवरी १६मे भेल अछि ।

 राष्ट्रपति अशरफ गनी
File:Sheikh Hasina in London 2011.jpg| बङ्गलादेश प्रधानमन्त्री शेख हसीना
File:Tshering Tobgay.jpg| भूटान प्रधानमन्त्री शेरिङ्ग तोबगे
File:PM Modi Portrait(cropped).jpg| भारतप्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी

File:Prachanda 2009.jpg| नेपाल प्रधानमन्त्री पुष्प कमल दाहाल
File:Nawaz Sharif January 2015.jpg| पाकिस्तान प्रधानमन्त्री नवाज शरीफ
File:Maithripala Sirisena (cropped).jpg| श्रीलंका राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना

वर्तमान सदस्य (अङ्ग्रेजी वर्णक्रमसँ)

प्रेक्षक देश




#Article 652: विश्व व्यापी वेब (140 words)


विश्व व्यापी वेब(जेकरा सामान्यत: वेब कहल जाएत अछी) आपस मे परस्पर जुडल हाइपरटेक्स्ट दस्तावेजसभक इन्टरनेट द्वारा प्राप्त करै के प्रणाली छी। एक वेब ब्राउजर क सहायता से हम अहाँ ओ वेब पन्ना क देख सकैत छिये जेकरा टेक्स्ट, छवि (), भिडियो, एवम अन्य मल्टीमीडिया होएत अछी तथा हाइपरलिंक क सहायता से उ पन्ना के बीच मे आवागमन करि सकैत अछी। विश्व व्यापी वेब क टिम बर्नर्स ली द्वारा १९८९ मे यूरोपीय नाभिकीय अनुसंधान संगठन जे की जेनेवा, स्वीट्ज़रलैंड मे अछी, मे काम करैत खन बनाएल गेल छल आर १९९२ मे जारी कएल गेल छल। ओकर बाद से बरनर्स-ली वेब के स्तरसभ के विकास (जेना की मार्कअप भाषासभ जाहिमे की वेब पन्ना लिखल जाएत अछी) मे एक सक्रीय भूमिका अदा केने अछी आर हाल के वर्ष मे ओ सीमेंटिक (अर्थ) वेब () विकसित करि के अपन स्वप्न क वकालत केने अछी।




#Article 653: ईद (106 words)


ईद उल-फित्र या ईद उल-फितर (अरबी: عيد الفطر) मुस्लमान रमजान उल-मुबारकक महिनाक बाद एक मजहबी खुशी कऽ पावनि मनावैत अछि जकरा ईद उल-फित्र कहल जाइत अछि । ई यक्म शवाल अल-मुकर्रम्म कऽ मनावल जाइत अछि । ईद उल-फित्र इस्लामी क्यालेन्डरक दसम महिना शव्वालक पहिल दिन मनावल जाइत अछि । इसलामी क्यालेन्डरक सम्पूर्ण महिनासभ कऽ जका एहो नव चन्द्रक देखलाक बाद शुरू होइत अछि । मुसलमानसभक पावनि ईद मूल रूपसँ भाईचारा कऽ बढ़ावा दै वला पावनि छी । ई पावनि कऽ सभ आपसमे मिल मनावैत अछि आ खुदासँ सुख-शान्ति आ बरक्कतक लेल दुआ माङ्गैत अछि । पूरे विश्वमे ईद कऽ खुशी पूरे हर्षोल्लाससँ मनाएल जाइत अछि ।




#Article 654: दुमका (127 words)


दुमका भारतक झारखण्ड प्रान्तक एक जिला छी। दुमका मे दस प्रखण्ड छै जे निम्नलिखित अछि : दुमका, गोपीकान्दर, जामा, जरमुण्डी, काठीकुण्ड, मसलिया, रामगढ़, रानीश्वर, शिकारीपाड़ा आर सरैयाहाट।

पाषाणकाल- खननक प्राप्त औजारसभ सँ पता चलल अछि कि अही ठामके मूल निवासी मोन-ख्मेर आर मुण्डा छल।

प्राचीन इतिहास- इ जिलासभमे प्राचीन निवास पहाड़ी लोकसभ रहएत छल । ग्रीक यात्री मेगास्थानीज द्वारा एहो माली नाम सँ सम्बोधित केलक। 

१७४२-१७५१- इ समय मराठा शासक राघोजी भोसले आर पेशवा बालाजी राव अही ठाम आबैत रहल छल.

१७४५: सन्थाल परगनाके जङग्ल आर राजमहलक पहाड़िसभसँ राघोजी भोसलेकs दुमकामे प्रवेश भेल छल.

१७६९: बंगालके बीरभूम जिलाके अन्तर्गत दुमका घाटवाली पुलिस थाना रहि चुकल अछि।

१७७५: दुमकाकs भागलपुर सम्भागके अन्तर्गत शामिल कएल गेल।

१८६५: दुमकाकs सवतन्त्र जिला बनाओल गेल।

१८७२: दुमकाकs सन्थाल परगनाक मुख्यालय बनाओल गेल।




#Article 655: तरिना पटेल (102 words)


तरिना पटेल एक दक्षिण अफ्रिकी अभिनेत्री, मोडल आ चलचित्र निर्माता छी । तरिनाक जन्म दक्षिण अफ्रिकाक केप टाउनमे भेल आ पढाई लेखाई डरबन शहरमे भेल । पटेल विभिन्न व्यवसायिक पत्रिकाक आवरण पृष्ठमे नजर आएल जाहिमे एल्ले, डोजियर जर्नल, एफएचएम, कस्मोपोलिटन आ ग्ल्यामर छल । पटेल दक्षिण अफ्रिकाक मुख्य महिला मोडलसभमे सँ एक छी । सन् २००७ मे ओ बलिउड चलचित्र क्षेत्रमे प्रवेश केलक ।

पटेलक जन्म दक्षिणी अफ्रिकाक केप टाउनमे भेल छल । हुनकर पिताक नाम रमण पटेल आ माताक नाम विणा पटेल अछि । रमण पटेल पेशासँ डाक्टर छी तँ हुनकर माता शिक्षिका छी । ओ हिन्दू धर्म मानैत अछि ।




#Article 656: उपेन्द्र महतो (132 words)


उपेन्द्र महतो (, जन्म; १९६०) नेपाली उद्योगपति छी जे मुख्यतया रसिया आर नेपालम बसोबास करैत अछि । रसियाम ओ रसिया-नेपाल उद्योग व्यवसाय सङ्घक अध्यक्ष छी । ओ गैर आवासीय नेपाली संघक संस्थापक अध्यक्ष छी । ओ सन् २००३ सँ सन् २००९ तक अहि सङ्घक अध्यक्ष भक कार्यभार समहाल्न छल । सन् १९९० सँ व्यवसायमा कदम राखन उपेन्द्रक रसियाम इलेक्ट्रोनिक्स, तेल, भवन निर्माण, बैंक तथा मेसिनसभक कारोवार रहल अछि । रसियाम इलेक्ट्रोनिक्स कारोवारीक रूपमा व्यवसाय आरम्भ केलक महतोक रसियाक राजधानी मस्कोसँ ४०० किलोमिटर दक्षिणमा रहल भोरोनेझमा टेलिभिजन उद्योग अछि जतस प्रत्येक वर्ष १० लाख टेलिभिजन निर्माण होएत अछि । ई वाहेक उनकर गोर्भुस्काम एकटा मेगा इलेक्ट्रोनिक्स बजार रहल अछि जहि ठामसँ प्रत्येक दिन ८०,००० ग्राहक भ्रमण करैत अछि । उनकर मस्कोक महत्वपूर्ण आवाशीय भागम ५० मिलियनक लागत भेल २६ तल्ला भवन अछि ।




#Article 657: टिस्का चोपडा (118 words)


टिस्का चोपडा (अंग्रेजी :Tisca Chopra) (जन्म टिस्का जरीन अरोडा; १ नवम्बर १९७३) एक भारतीय चलचित्र तथा रङ्गमञ्च अभिनेत्री छी । हुनकर पहिल हिन्दी चलचित्र प्लेटफर्म छल जे सन् १९९३ मे प्रदर्शित भेल छल ई चलचित्रमे टिस्का अजय देवगनक संग अभिनय केनए छल । सन् २००४ मे ओ प्रकाश झाक चलचित्र लोकनायकमे प्रभावती देवीक रोल निभेनए छल । सन् २००७ मे ओ आमिर खानक संग तारे जमीन पर चलचित्रमे अभिनय केनए छल ।  सन् २०११ मे टिस्का मधुर भण्डारकरक चलचित्र दिल तो बच्चा हे जीमे अभिनय केनए छल । सन् २०१६ मे टिस्का चोपडाक दुईटा लगातार चलचित्रमे काम करिक मौका मिलल । पहिल घायल वन्स अगेन तथा १९ फरबरी २०१६ मे प्रदर्शित भेल लभशुदा चलचित्रमे सेहो मौका मिलल ।




#Article 658: पनीर (192 words)


पनीर () एक दुग्ध-उत्पाद छी। ई चीज कऽ एक प्रकार छी जे भारतीय उपमहाद्वीपमे खूब उपयोग कएल जाइत अछि । एहि तरिका छेना सेहो एक विशेष प्रकारक भारतीय चीज छी जे पनीरसँ मिलैत-जुलैत अछि आ रसभरी बनेबामे प्रयुक्त होइत अछि । भारतमे पनीरक प्रयोग सीमित मात्रामे होइत अछि । कश्मीर आदि जहिना ठण्डा स्थानसभमे अपेक्षाकृत अधिक पनीर खायल जाइत अछि । 

स्वास्थ्यवधर्क खाद्यपदार्थक रूपमे पनीर वा पनीर बड्ड महत्वपूर्ण आ ठण्डा देशसभमे बहुप्रचलित खाद्य छी। जहिना रोगीसभ, बच्चासभ आ बूढपूरानसभक लेल जकरा मान्सयुक्त भोजन पचेवामे कठिनाई होइत अछि, ओ सभक लेल पनीर श्रेष्ठ खाद्य पदार्थ मानल जाइत अछि, कियाकी एहिमे प्रोटीन, मान्समे जत्तेक यथेष्ट मात्रामे होइत अछि आ अधिक पाचक दशामे रहैत अछि । साथ-साथै क्यालोरी (calories)क मात्रा मान्सके बराबर होइत अछि । ठण्डा प्रदेशसभमे, जतय पनीरक बीना कोनो कठिनाई एकदम लम्बा समयधरि बढिया हालतमे राईख सकैत छी, पनीरक प्रयोग बहुतरास होएत अछी। अफगानिस्तान, मध्य-एसिया, यूरोप, अमेरिका, अस्ट्रेलिया आदि देशसभमे पनीरक खपत अधिक मात्रामे होएत अछी। प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थसभ पनीरक स्थान मासु सँ पहिल आवैत अछी। गरम स्थानसभमे पनीर क लम्बा समय तक सुरक्षित रूपसँ रखै ल सम्भव नै होएत अछी, ओही कारण गरम प्रदेशसभमे पनीरक प्रयोग सीमित मात्रामे ही होएत अछी।




#Article 659: आड़ू (112 words)


आड़ू या सतालू (अङ्ग्रेजी नाम : पीच (Peach); वास्पतिक नाम : प्रूनस पर्सिका; प्रजाति : प्रूनस; जाति : पर्सिका; कुल : रोजेसी) क उत्पत्तिस्थान चीन छी । किछ वैज्ञानिकोंक मत ई अछि कि ई ईरानमे उत्पन्न भेल । ई पर्णपाती वृक्ष छी । भारत आ नेपालक पर्वतीय तथा उपपर्वतीय भागसभमे एकर सफल खेती होइत अछि । ताजा फल खाएल जाइत अछि तथा फलसँ फलपाक (ज्याम), जेली आ चटनी बनैत अछि । फलमे चीनीक मात्रा पर्याप्त होइत अछि । जतौका जलवायु नै अधिक ठण्डी, नै अधिक गरम होइ, १५ डिग्री सँ १०० डिग्री धरिक तापक्रम भेल पर्यावरणमे, एकर खेती सफल भ चुकल अछि । एकर लेल सबसँ उत्तम माइट बलुवा दोमट अछि ।




#Article 660: एलके झा (123 words)


लक्ष्मी कांत झा (२२ नवम्बर १९१३-१६ जनवरी १९८८) (जन्म: दरभंगा,बिहार ) जेकरा  एल के झा के नाम से जानल जाएत छल, १ जुलाई १९६७ से लके ३ मई १९७० तक भारतीय रिज़र्व बैंक के आठम गवर्नर छल। भारतीय सिविल सेवा के १९३७ बैच के सदस्य झा आपूर्ति विभाग क उप सचिव क पद हासिल केलक। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर  के रूप मे उनकर नियुक्ति पहिले ओ प्रधानमंत्री के सचिव के रूप मे सेवा केलक। 

उनकर कार्यकाल मे महात्मा गांधी क जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य मे २ अक्टूबर १९६९ के  २, ५, १० आर १०० के मूल्यवर्ग के भारतीय नोट, जारी कएल गेल छल। ई नोटसभ पर उनकर हस्ताक्षर अछी, एकर बाद के नोटसभ क श्रृंखला पर बी एन आदरकार के हस्ताक्षर अछी।




#Article 661: बिएन आदरकार (107 words)


बी एन आदरकार ४ मई १९७० मे  से १५ जून १९७० तक भारतीय रिज़र्व बैंक के ९अम गवर्नर छल। उनकर कार्यकाल केवल ४२ दिन क रहल, जे की अमिताभ घोष (२० दिन) के बाद दोसर सबसे छोट छल। उनकर कार्यकाल एतए छोट ई कारण छल किया कि ओ एस जगन्नाथन के पदभार सम्हारे से पहिले केवल अंतरिम रूप से ई पद क भर रहल छल। अपन पूर्ववर्तिसभ के विपरीत, जे की भारतीय सिविल सेवा से छल, आदरकार  एक अर्थशास्त्री छल आर भारत सरकार के आर्थिक सलाहकार के कार्यालय मे काम केलक। एहीसँ पहिले ओ वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय मे विभिन्न महत्वपूर्ण पदसभ क कार्यभार सम्हारि चुकल छल।




#Article 662: पोखरा विमानस्थल (115 words)


पोखरा विमानस्थल नेपालक राजधानी काठमाडौंसँ २०० किलोमिटर दुर पोखरा उपत्यकाक पोखरा शहरमे अवस्थित अछि । ई विमानस्थल सन् १९५८ सँ शुरू भेल छल । हाल पश्चिम नेपालक प्रमुख ई विमानस्थलक बगलमे रहल दोसर जमीनमे सरकारद्वारा क्षेत्रीय स्तरक अन्तराष्ट्रिय विमानस्थल बनाबैक चर्चा भए रहल अछि । विमानस्थल निर्माणक लेल सरकार जमीन समेत किन चुकल अछि आ अन्य भौतिक सुविधा निर्माणक लेल हालक विमानस्थलके सामान आ अन्य सामग्री सुविधा जुटाबैक प्रयासक सोच राखल गेल अछि । हाल ई विमानस्थलसँ दैनिक २१ टा उडान होइत अछि । नेपालक राजधानी बाहरक ई अत्यान्तै व्यस्त विमानस्थल छी ।

ई विमानस्थलक नाम नेपालक पोखरा शहरक नामसँ राखल गेल अछि । 

ई विमानस्थलसँ होमएवला प्रमुख हवाई सेवा निचा उल्लेखित शहरधरि विस्तारित अछि-




#Article 663: दारांग जिला (127 words)


दरङ् (Darrang) भारतक असम राज्यमे उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रक प्रसिद्ध जिला छी, जेकर मुख्यालय मङ्गलदोईमे अछि। इ जिलाके उत्तरमे भूटान आ दफला पहाड़िसभ आर दक्षिणमे ब्रह्मपुत्र नदी अछि, जेकर अही ठामक व्यापार होइत अछि। नदी द्वारा निर्मित क्षेत्र होबsके कारण धान, राई, सरसो, गन्ना आर जूट अही ठाम अत्यधिक मात्रामे उत्पन्न होइत अछि। इ क्षेत्रमे चायके बागानसभक भरमार अछि। इ जिलामे चाय उत्पादनक कारखाना, रेशमके कीड़ा पालsक उद्योग तथा रेलवेक वर्कशॉप अछि। अही ठाम सँ तिब्बतक राजधानी लाशा कs जाइके लेल सुगम आर कम दूरी कs मार्ग अछि, जेकर अन्तिम छोर उड़लगुड़ीमे अछि। १,००० ईo के लगभग पाल राजासभक राजधानी तेजपुरमे छल, ताहि खातिर अही ठामके मन्दिरसभ तथा खन्डरसभमे शिल्पकला आर स्थापत्यकलाके दर्शीय नमूना छी।

इ जिलाक क्षेत्रफल - ३,४८१ वर्ग कि॰मी॰ आ जनसंख्या - १५,०३,९४३ (२००१ जनगणना) अछि।




#Article 664: बर्फी! (362 words)


बर्फी! २०१२ मे प्रदर्शित रोमान्टिक हास्य-नाटक हिन्दी चलचित्र छि जेकर लेखक, निर्देशक आ सह-निर्माता अनुराग बासु अछि। १९७० के दशक मे घटित चलचित्र कऽ कहानी दार्जिलिङ्ग के एक बौक आ बैहर व्यक्ति मर्फी बर्फी जनसन कऽ जीवन आ ओकर दुई महिला श्रुति आ मंदबुद्धि के साथ सम्बन्धसभसँ कऽ दर्शावैत अछि। चलचित्रमे मुख्य भूमिकामे रणबीर कपूर, प्रियङ्का चोपडा आ इलियाना डी'क्रूज अछि तथा सहायक अभिनय करए वाला सौरभ शुक्ला, आशीष विद्यार्थी आ रूपा गाङ्गुली अछि।

लगभग ₹३० करोड (US$४.३८ मिलियन) कऽ बजेटमे निर्मित, बर्फी! विश्व स्तर पर १४ सितम्बर २०१२ मे व्यापक समीक्षकसभक प्रशंसा के साथ प्रदर्शित भेल। समीक्षकसभ अभिनय, निर्देशन, पटकथा, छायाङ्कन, सङ्गीत आ शारीरिक रूपसँ विकलाङ्ग व्यक्तिसभक साकारात्मक चित्रण कऽ प्रशंसा कएल गेल। चलचित्र कचलचित्र  बक्स-अफिस पर बडका सफलता प्राप्त भेल, परिणामस्वरूप ई भारत आओर विदेशसभमे सेहो २०१२ कऽ उच्चतम अर्जक बलिउड चलचित्रसभमे कऽ श्रेणीमे शामिल भेल तथा तीन सप्ताह पश्चात बक्स अफिस इन्डिया द्वारा एकरा सूपर हिट (उत्तम सफलता) घोषित करि देल गेल। दुनियाभरमे चलचित्र रु.. १७५ करोड (US$ २५.५५ मिलियन)  अर्जित केलक।

चलचित्रके ८५अम एकेडेमी पुरस्कारसभक सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा चलचित्र श्रेणी के नामाङ्कन के लेल भारतीय आधिकारिक प्रविष्टि के रूप मे चयन कएल गेल। बर्फी, भारत भरि के विभिन्न पुरस्कार समारोहसभमे अनेकौँ पुरस्कार आ नामाङ्कन अर्जित केलक। ५८अम फिल्मफेयर पुरस्कारसभ मे ई चलचित्र १३ नामाङ्कन प्राप्त केलक आ ई सर्वश्रेष्ठ चलचित्र, कपूर कऽ सर्वश्रेष्ठ अभिनेता तथा प्रीतम के मिलल सर्वश्रेष्ठ सङ्गीत निर्देशक पुरस्कार सहित सात (अन्य कोनो सेहो चलचित्र से अधिक) पुरस्कार जीतवाकमे सफल रहल।

मर्फी वा बर्फी जनसन (रणबीर कपूर) एक आशावादी, युतिसम्पन्न आ मनोहर युवक अछि जे दार्जिलिङ्ग मे एक नेपाली दम्पति के मूक-बधिर बालक के रूप मे जन्म लेनए  अछि। ओकर माँ कऽ बचपन मे ही देहान्त भऽ जाइत अछि आ ओकर पिता, जे मोटर चालक अछि, अकेले ही ओकर पालन-पोषण करैत अछि। बर्फ़ी बचपन से ही अपन हँसिठट्टा कऽ लेल जानल जाइत अछि जे बिजली कऽ खम्भा काटनाए, मासूम लोगसभक साथ ठिठोली केनाए जेहन कार्य करैत अछि, जेकर वजह सँ स्थानीय पुलिस अधिकारी सुधांशु दत्ता (सौरभ शुक्ला) ओकर पीछा करैत रहैत अछि। बर्फी श्रुति घोष (इलियाना डी'क्रूज़) सँ मिलैत अछि जे अखन-अखन दार्जिलिङ्ग पहुँचल अछि। श्रुति कऽ रणजीत सेनगुप्ता (जीशु सेनगुप्ता) कऽ साथ सगाई भऽ चुकल अछि तथा ओकर तीन महीनामे विवाह होए वाला अछि।




#Article 665: भुवन चन्द (127 words)


भुवन चन्द नेपालक चलचित्रक नायिका छी। ओ नेपाली चलचित्रक पहिल नायिका छी।

२००६ साल असार १ गते काठमाडौंक धोबीचौरमे जन्मल चन्द १५ वर्षके उमरमे नेपाली चलचित्र पहिल नायिका बनल छल। चलचित्र आमामे नायिकाक भूमिका निम्हावैत समय उनकर उमर मात्र १५ वर्ष छल।

०२२ साल असोज ५ गते चलचित्र आमामे सार्वजनिक प्रदर्शन करल गेल छल काठमाडौंक न्युरोडमे रहल रञ्जना हलमे।

नेपाली चलचित्रक पहिल नायिका भुवन चन्द सुरुमे त गायिका छी। अपन पिता उस्ताद स्वर्गीय भैरवबहादुर थापाक बेटी भुवन चन्द २०१८-२०१९ सालमे गीत गाव लगल छल। अपन पिता गायक होएके कारण बेटी सेहो गायन क्षेत्रमे ही जाए पडत कही परिवारक मान्यताविरुद्ध जा ओ समयमे अवस्थामे सेहो साहसिक कार्य करैत ओ अभिनय दिशन लगल। ओना त बालकृष्ण समक नाटकसँ २०१० सालसँ ओ बाल कलाकारक रूपमे रंगमञ्चमे देखल गेल छल ।




#Article 666: गढवा (133 words)


गढवा भारतमे झारखण्ड प्रान्तक एक जिला छी। गढवा जिलाक निर्माण पलामूके आठ प्रखण्डसभकs मिलाकs १ अप्रिल १९९१ कs कएल गेल जे पलामूके दक्षिण पश्चिम हिस्सा मे स्थित छल। गढवा
के उत्तरमे सोन नदी बहैत अछि जे अही छत्तीसगढसं अलग करैत अछि, पूर्वमे पलामू छै आर पश्चिममे छत्तीसगढक सरगुजा जिला आर उत्तर प्रदेशक सोनभद्र जिला अछि। गढवाके प्रखण्डसभमे गढवा सहित- मेरेल, रनका, भण्डरिया, मझियांव, नगर-ऊँटारी, भवनाथपुर एवं धुरकी शामिल छल। बाधमे इ प्रखण्डसभमे सँ छटा आर नव प्रखण्ड सृजित कएल गेल जहीमे दन्दै, चिनिया, रमना, रमकन्दा एवं कन्दी शामिल छल। 

गढवा रेल एवं सडक द्वारा भारतक बाकी हिस्सासँ सुगम सम्पर्कमे अछि। झारखण्डमे रांचीआ अन्य स्थानसभसँ गढवाके लेल सीधा बस सेवा उपलब्ध अछि। एकर अलावा रेलगाडी सँ अही ठाम पहुंचsके लेल सबसँ नजदीककs स्टेशन मिर्जापुर अछि। इ जिला अखन धरि वायु मार्गसँ जुडल नै अछि। 




#Article 667: लियोनार्ड ओइलर (107 words)


लियोनार्ड ओइलर (Leonhard Euler; १५ अप्रैल १७०७, बाजेल - १८ सितंबर १७८३) एक स्विस गणितज्ञ छल। ई जोहैन बेर्नूली के शिष्य छल।

गणित के संकेतसभ क सेहो ओइलर क देन अपूर्व अछी। ओ संकेतसभ मे अनेक संशोधन करि त्रिकोणमितीय सूत्रसभ क क्रमबद्ध केलक। १७३४ ई. मे ओइलर x के कोनो फलन के लेल f (x), १७२८ ई. मे लघुगणकसभक के प्राकृत आधार के लेल e, १७५० ई. मे अर्ध-परिमिति के लेल s, 1755 ई. मे योग के लिए Σ आर काल्पनिक ईकाई के लेल i संकेतसभ क प्रचलन केलक।

१७६६ ई. मे ओ अंधा भ गेल, परन्तु मृत्यु पर्यन्त (१८ सितंबर १७८३ ई.) शोधकार्य मे संलग्न रहल।




#Article 668: उसताद अलाउद्दीन खान (231 words)


उस्ताद अलाउद्दीन खाँ (१८६२-६ सितम्बर १९७२) एक बहुप्रसिद्ध सरोद वादक छल साथ ही अन्य वाद्य यंत्रसभ क बजावे मे सेहो पारंगत छल। ओ एक अतुलनीय संगीतकार आर बीसम शताब्दी के सबसँ महान संगीत शिक्षकसभ मे से एक मानल जाएत अछी। 
सन् १९३५ मे पंडित उदय शंकर  के बैले समूह के साथ खाँ साहब ने यूरोप क दौरा केलक आर एकर बाद काफी लम्बा समय तक उत्तराखंड के अल्मोड़ा मे स्थित  'उदय शंकर इण्डिया कल्चर सेंटर' से सेहो जुडल रहल। अपन जीनन काल मे ओ कई रागसभ क रचना केलक आर विश्व संगीत जगत मे विख्यात मैहर घराने क नींव रखलक। उनकर सबसँ खास रेकर्डिंग्स मे से अल इण्डिया रेडियोके साथ १९५०-६० के दशक मे  कएल गेल उनकर रेकर्डिंग सबसँ अधिक प्रसिद्ध अछी।

अलाउद्दीन खाँ साहब मशहूर सरोद वादक अली अकबर खाँ आर अन्नपूर्णा देवी के पिता छी, साथ ही राजा हुसैन खाँ के चाचा सेहो। एतने नै बाबा अलाउद्दीन खाँ पंडित रवि शंकर, निखिल बनर्जी, पन्नालाल घोष, वसंत राय, बहादुर राय आदि सफल संगीतकारसभ के गुरु सेहो रहल। ओ स्वयं गोपाल चंद्र बनर्जी, लोलो आर मुन्ने खाँ जेहन संगीत के महारथिसभ से संगीत क दीक्षा लेलक। 

 उसताद अलाउद्दीन खान  क कला के क्षेत्र मे सन १९५८ मे पद्म भूषण से सम्मानित कएल गेल छल। एहीसँ पहिले उनका साल  १९५४ मे संगीत नाट्य  अकादमी अपन सबसँ बड सम्मान 'संगीत नाट्य अकादमी फैलोशिप ' से नवाजने छल। ओ उत्तर प्रदेश राज्य से अछी।

 




#Article 669: काला बाजार (110 words)


काला बाजार या भूमिगत बाजार या भूमिगत अर्थव्यवस्था ओ बाजार छी जतए सारा वाणिज्य, कराधान (taxation), नियम आर व्यापार सम्न्बन्धी नियंत्रण आदि क चिंता करि बिना कएल जाएत अछी। 

एकरा छाया अर्थतंत्र, काला अर्थव्यवस्था आर समानान्तर अर्थव्यवस्था सेहो कहैत अछी।

आधुनिक समाज मे भूमिगत बाजार के अन्तर्गत बहुत से क्रियाकलाप आवैत अछी। काला बाजार ओ देशसभ मे कम अछी जतए क अर्थव्यवस्था खुला अछी। परन्तु जे देशसभ मे भ्रष्टाचार, नियंत्रण आर कडा नियम अछी ओत अधिक मात्रा मे कालानाजारी होएत अछी।

किछ लोग क तर्क अछी कि काला बाजार ही सर्वाधिक मुक्त बाजार छी। दोसर अन्य कोनो प्रकार से नियंत्रित बाजार विविध प्रकार के अनुचित हस्तक्षेपसभ से परेशान रहैत अछी।




#Article 670: बादशाह (गायक) (103 words)


बादशाह एक भारतीय रेप्पर गायक कलाकार छी ' इनकर जन्मनाम आदित्य प्रतीक सिंह सिसोदिया छी ' ओ अपन कैरियर क शुरूआत यो यो हनी सिंह के साथ २००६ मे केने छल ' ओ कतेक फिल्मसभ मे गीत गावने अछी ,  ओ मुख्यत हिन्दी, अंग्रेजी, पंजाबी आर हरयाणवी भाषासभ मे गीत गावने अछी। उनकर गावल गीत कतेक बलिउड फिल्मसभ मे सेहो शामिल अछी जेना कि २०१४ क फिल्म हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया आर खूबसूरत।

बादशाह क जन्म दिल्ली मे बेल छल। बादशाह के पिता हरयाणवी अछी आर माता पंजाबी अछी। ओ अपन स्कूली शिक्षा दिल्ली के बाल भारती पब्लिक स्कूल से ग्रहण केने अछी।




#Article 671: शक्ति मोहन (162 words)


शक्ति मोहन (अंग्रेजी : Shakti Mohan) भारत से एक समकालीन नर्तकी छी। ओ जी टीवी के नृत्य रियलिटी शो डांस इंडिया डांस (सीजन २) क विजेता रहल छल। शक्ति जी टीवी से ५० लाख क नगद पुरस्कार आर एक सुजुकी वैगनार जीतने छल। । शक्ति तीस मार खान फिल्म के शीर्षक गीत के वीडियो पर संक्षिप्त उपस्थित अछि । ओ दैनिक ओपेरा चैनल वी पर दिल दोस्ती डांस पर क्रिया निभावैत अछि आर दुनिया भर के विभिन्न शो मे प्रदर्शन करैत अछि।

ओ बृजमोहन आर कुसुम क बेटी छी, ओकर तीन बहिन अछि : नीती, मुक्ति आर कीर्ति। ओ दिल्ली से अछि, परन्तु ओ मुम्बई मे २००६ के बाद से रहैत अछि। ओ बिरला बालिका विद्यापीठ, एक बोर्डिंग स्कूल मे अध्ययन केने अछि। आर सेंट जेवियर्स कलेज, मुम्बई से राजनीति विज्ञान मे एमए केने अछि आर डांस इंडिया डांस पर ओकर उपस्थिति से पहिले एक आईएएस अधिकारी बनेल चाहैत छल। ओ टेरेंस लुइस नृत्य फाउंडेशन ट्रस्ट से नृत्य मे डिप्लोमा केने छल।




#Article 672: फेडरेशन टावर (103 words)


फेडरेशन टावर () एकटा गगनचुम्बी इमारत वाला कम्प्लेक्स छी जे मस्को-शहर, मस्को, रूस मे निर्माण कएल गेल अछि।  परियोजना सर्गेई शोबान आ पीटर स्वेजरद्वारा नियोजित कएल गेल छल। टावरसभक निर्माण २००३ मे शुरू भेल। तथापि, निर्माण बन्द करि देलक ई अगस्त २०११ मे फेरसँ शुरू कएल गेल आ एखन मध्य २०१६ मे पूरा होमए कऽ उम्मीद अछि।

निर्माण कार्य कम्पनी एईओन कर्पोरेसनद्वारा कार्यान्वयन कएल गेल अछि।

कम्प्लेक्समे एक मंच पर बनाएल गेल दुई टावरसभक होइत अछि। टावर इस्ट एक ९५ मञ्जिला संरचना अछि। टावर पश्चिम एक ६५ मञ्जिला संरचना अछि।

सितम्बर २००७ मे टावर फ्रांसीसी एलेन रबर्टद्वारा एकल रुपमे चढल गेल छल । 




#Article 673: व्हिस्की (178 words)


व्हिस्की किण्वित अनाज मैश से आसवित एक प्रकार क मादक पेय छी। एकर विभिन्न प्रकारसभ के लेल विभिन्न अनाजसभ क प्रयोग कएल जाएत अछी, जाहिमे शामिल अछी जौ, राई, माल्ट राई, गेहूं आर मक्का (मकई) अधिकांश व्हिस्की क सामान्यतः लकडी के पीपे मे पुरान कएल जाएत अछी, जे ओक क बनल होएत अछी, जेकर अपवाद अछी किछ मकई शराब

व्हिस्की दुनिया भर मे अनेक प्रतिस्पर्धी मूल आर अनेक वर्गों तथा प्रकारसभ के साथ विनियमित मद्यसार अछी। विभिन्न वर्ग आर प्रकार क एकीकृत विशेषतासभ छी अनाज क किण्वन आर जल मिलावे से पहले, मकई के लेल अधिकतम ८०% अल्कोहल तक आर अन्य अनाजसभ के लेल ९०% अल्कोहल तक मद्यसार क आसवन प्रक्रिया, ताकि मद्य बनावे के लेल प्रयुक्त अनाज क किछ स्वाद बना राईख सकि आर ओकरा अनाज मध्यम मद्यसार या वोदका के रूप मे वर्गीकृत करै से रोकल जा सकेपुरान बनावे क प्रक्रिया के लेल प्रयुक्त पीपे के प्रकार से ही व्हिस्की अपन लगभग ६०% स्वाद प्राप्त करैत अछी। एही लेल आगा क वर्गीकरण प्रयुक्त लकडी आर लकडी क झुलसावे या सेके के मात्रा पर निर्भर करैत अछी। 




#Article 674: पार्क गेयुन हेई (102 words)


पार्क गेयुन हेई (कोरियाली भाषा: 박근혜) (जन्म २ फरबरी १९५२) दक्षिण कोरियाक राजनीतिज्ञ छी जे सन् २०१३ सँ सन् २०१७ धरि दक्षिण कोरियाक ११अम राष्ट्रपति पद सम्हाल्ने छल । ओ दक्षिण कोरियाक पहिल निर्वाचित महिला राष्ट्रपति छल जे १८अम राष्ट्रपति पदमे पदासिन भेल छल । ई बाहेक ओ उत्तरपूर्वी एसियाक पहिल महिला छी जे कोनो राष्ट्रक प्रमुखक रुपमे राष्ट्रपति भेल अछि । राष्ट्रपति पद बाहेक ओ सन् २००४ सँ २००६ आर सन् २०११ सँ सन् २०१२ मे ग्रयाण्ड राष्ट्रिय पार्टी (जीएनपी)क अध्यक्ष समेत रहल छल । सन् २०१२ फरबरीमे आवी ग्रयाण्ड राष्ट्रिय पार्टी (जीएनपी) अपन नाम परिवर्तन करि सेइनुरी पार्टी राखलक ।




#Article 675: सेन्टा क्लज (149 words)


सांता क्लोज क सेंट निकोलस, फादर क्रिसमस (क्रिसमस के जनक), क्रिस क्रिंगल, या मात्र सांता  के नाम से जानल जाएत अछी। पौराणिक आर ऐतिहासिक दृष्टि से ओ लोक कथासभ मे प्रचलित एक व्यक्ति छी। कतेक पश्चिमी संस्कृतिसभ मे एहन मानल जाएत अछी के सांता क्रिसमस क पूर्व संध्या, यानि २४ दिसम्बर क शाम या देर राईत के समय के दौरान बढिया बच्चा के घर मे आवि के ओकरा उपहार देईत अछी। 
सांता क आधुनिक आकृति क व्युत्पत्ति सिंटरक्लास क डच आकृति से भेल, जेकरा संभवतया उपहार दै वाला सेंट निकोलस से सम्बंधित मानल जाएत अछी। सेंट निकोलस एक एहन ऐतिहासिक आकृति छी, जे हेगिओग्राफिकल कहानिसभ मे मिलैत अछी। 
एही सँ लगभग मिलैत जुलैत एक कहानी बीजान्टिन आर यूनानी लोककथासभ मे प्रचलित अछी, बेसिल अफ केसारिया (Basil of Caesarea). 
१ जनवरी क ग्रीस मे बेसिल क फीस्ट दिवस मनाएल जाएत अछी, ई दिन उपहारसभ क आदान प्रदान कएल जाएत अछी।




#Article 676: जमशेदजी टाटा (125 words)


जमशेदजी टाटा (३ मार्च १८३९ - १९ मई १९०४)) भारत के महान उद्योगपति तथा विश्वप्रसिद्ध औद्योगिक घराना टाटा समूह के संस्थापक छल।

उनकर जन्म सन १८३९ मे गुजरात के एक छोट से कस्बा नवसेरी मे भेल छल उनकर पिता जी क नाम नुसीरवानजी छल ओ उनकर माता जी क नाम जीवनबाई टाटा छल। पारसी पादरिसभ के अपन खानदान मे नुसीरवानजी पहिल व्यवसायी छल। भाग्य उनका बंबई ल आएल जते ओ व्यवसाय (धंधा) मे कदम रखलक। जमशेदजी १४ साल क नाजुक उम्र मे ही उनकर साथ दै लगल। जमशेदजी एल्फिंस्टन कलेज (Elphinstone College) मे प्रवेश लेलक आर अपन पढाई के दौरान ही ओ हीरा बाई दबू सँ विवाह करि लेने छल। ओ १८५८ मे स्नातक भेल आर अपन पिता के व्यवसाय से पूर्ण रुपसँ जुईड गेल।




#Article 677: पद्म भूषण (107 words)


पद्म भूषण सम्मान भारत सरकारद्वारा प्रदान कएल जाएवाला तेसर सर्वोच्च नागरिक सम्मान छी । भारत सरकारद्वारा प्रदान कएल जाएवाला अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कारसभ भारत रत्न, पद्म विभूषणक बाद पद्म भूषण अबैत अछि । ई सम्मानक स्थापना भारत सरकारद्वारा सन् १९५४ जनवरी २ कें दिन कएल गेल छल । ई सम्मान देशक लेल विशिष्ट सेवा देनिहार व्यक्तिसभकें प्रदान कएल जाएत अछि । ई सम्मान डाक्टर आ वैज्ञानिक सहित सरकारी कर्मचारीसभद्वारा प्रदान कएल जाएवला सेवा सहित कोनो भी क्षेत्रक सेवा शामिल अछि मुदा सार्वजनिक क्षेत्रक उपक्रमसभमे काज केनिहार लोककें ई सम्मानक लेल सामिल नै कएल गेल अछि ।

२६-जनवरी-२००९, धरि १०३७ व्यक्तिसभक ई अलंकरण प्रदान कएल जा चुकल अछि ।




#Article 678: चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (111 words)


चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (तमिल: சக்ரவர்தி ராஜகோபாலாச்சாரி) (१० दिसम्बर १८७८ - २५ दिसम्बर १९७२), राजाजी नाम से सेहो जानल जाएत अछी। ओ वकील, लेखक, राजनीतिज्ञ आर दार्शनिक छल। ओ स्वतन्त्र भारत के द्वितीय गवर्नर जनरल आर प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल छल। १० अप्रैल १९५२ से १३ अप्रैल १९५४ तक ओ मद्रास प्रांत के मुख्यमंत्री रहल। ओ दक्षिण भारत के कांग्रेस के प्रमुख नेता छल, किन्तु बाद मे ओ कांग्रेस के प्रखर विरोधी बनी गेल तथा स्वतंत्र पार्टी क स्थापना केलक। ओ गांधीजी के समधी छल। (राजाजी क पुत्री लक्ष्मी क विवाह गांधीजी के सबसँ छोट पुत्र देवदास गांधी से भेल छल।) ओ दक्षिण भारत मे हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लेल बहुत कार्य केलक।




#Article 679: कोहिमा (106 words)


कोहिमा भारतक नागाल्याण्ड प्रान्तक राजधानी छी । ई नागाल्याण्डक राजधानी आर बहुत सुन्दर शहर छी । कोहिमामे अधिकतर आदिवासी रहैत अछी । ई आदिवासिसभक संस्कृति बहुत रङ्गी-बिरङ्गी अछी जे पर्यटकसभक बहुत बढिया लगैत अछी । 
ओ सभके अपन संस्कृतिक झलक देखावे ल बड मन पडैत अछी । ओ सभके संस्कृति बाहेक पर्यटक एतय बहुत बेहतरीन आर ऐतिहासिक पर्यटक स्थलसभक भ्रमण सेहो करै सकैत अछी। एतय राज्य संग्राहलय, एम्पोरियम, नागा हेरिटेज कम्पलैक्स, कोहिमा गाउँ, दजुकोउ घाटी, जप्फु चोटी, त्सेमिन्यु, खोनोमा गाउँ, दज्युलेकी आर त्योफेमा टूरिस्ट गाम प्रमुख अछी । एतय सब पर्यटकसभक बहुत बढिया लगैत अछी किया की एतय के सुन्दरतासँ ओ सभ मनत्रमुग्ध होएत अछी ।




#Article 680: दिसपुर (140 words)


दिसपुर  () भारतक राज्य आसामक राजधानी छी । गुवाहाटी सहरक स्थानीय सहर रहल दिसपुर सन् १९७३ मे आसामक राजधानी बनल अछी । मेघालय राज्यक स्थापना भेला के बाद ई सहर शिलोङ बाद राजधानी बनल अछी ।

दिसपुर आसाम सरकारक क्षेत्र छी । दिसपुरक दक्षिणमे पौराणिक वशिष्ठ आश्रम आर शंकरदेव कलाक्षेत्र स्थित अछी । शंकरदेव कलाक्षेत्र सन् १९९० मे अस्तित्वमे आएल छल किया की ई क्षेत्रमे एकटा कला केन्द्रक कमी पिछला कते क वर्षसँ महसुस होएत रहल । आसाम सचिवालय भवन, आसाम संसद भवन आर राज्य आपातकालीन केन्द्र दिसपुरमे ही अवस्थित रहल अछी । आसाम मार्ग आर जिएस मार्ग दिसपुर भ के जाएत अछी । राजधानीक रूपमे जानल जाए वाला दिसपुर, गुवाहाटी चिया विमोचन केन्द्रक लेल प्रसिद्ध अछी । विभिन्न प्रकारक चायसभ एतय विमोचन करल जाएत अछी । ई केन्द्रमे सिटिसी चायके विश्वमे सबसँ पैग प्रजाति विमोचन करल जाएत अछी ।




#Article 681: देहरादून (100 words)


देहरादून, देहरादून जिलाक सदरमोकाम छी जे भारतक राजधानी दिल्ली सँ २३० किलोमीटर दूर दून उपत्यकामे अवस्थित अछि । ९ नवम्बर, २००० कऽ दिन उत्तर प्रदेश राज्य विभाजित करि जब उत्तराखण्ड राज्यक गठन कएल गेल छल, ओ समय एकरा उत्तराखण्ड (तत्कालिन उत्तरांचल)क अन्तरिम राजधानी बनाएल गेल छल । देहरादून शहर, शिक्षा, संस्कृति आर सौंदर्यक लेल प्रसिद्ध अछी । एकर विस्तृत पौराणिक इतिहास अछी।

देहरादूनक इतिहास बहुत सय वर्ष पुरान अछि । देहरादूनसँ ५६ किलोमीटर दूर काल्सीक नजदीक स्थित शिलालेखसँ एतय तेसर शताब्दी ईसा पूर्वमे सम्राट अशोक कऽ अधिकार भेल जानकारी पावैत अछि । देहरादून पहिलेसँ ही आक्रमणकारीसभक आकर्षित केने अछि ।




#Article 682: सिलवास (140 words)


सिलवास वा सिलवासा ; भारतक केन्द्र शासित प्रदेश दादरा आ नगर हवेलीक राजधानी सहर छी । ई सहर अरब सागरक नजदीक अवस्थित अछि । अङ्ग्रेजी प्रभावक कारण सिलवासक उच्चारण प्राय: सिलवासा करल जाइत अछि आ मुख्यतया लोगसभ आब एकरा सिल्वासा वा सिलवासा कहिक सेहो बोलवैत अछि । गुजरती जनसङ्ख्याक प्रभावके कारण एकरा सेलवास (गुजराती: સેલ્વાસ) सेहो कहल जाइत अछि । पोर्चुगेली शासनक समयमे लिसबन (पेको डी एक्रोस, ओइरास) नजदिक रहल शहरक नाममे सिलवासके भिला डी पेको डी'एक्रोस के नामसँ समेत जानल जाइ छल ।

ई नगरमे १०,००० सँ बेसी के सङ्ख्यामे उद्योग व्यवसाय स्थापित अछि, जे एतय के स्थानीय सरकारक बढिया मात्रामे राजस्व तिरैत अछि । भारतक प्रस्तावित १०० स्मार्ट सिटी बनावे के लक्ष्य अनुरुप ई शहरक नाम सेहो रहल अछि । हिन्दी आ गुजराती शहरक प्रमुख भाषा छी, उद्योग व्यवसाय बढत क्रममे भेल होइसँ अङ्ग्रेजीक प्रयोग बढल अछि । 




#Article 683: मोक्षगुण्डम विश्वेश्वरय्या (116 words)


भारतरत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या (१५ सितम्बर १८६० - १४ अप्रैल १९६२) (तेलुगु मे: శ్రీ మోక్షగుండం విశ్వేశ్వరయ్య; अंग्रेजी मे : Visvesvaraya, Visweswaraiah, Vishweshwariah;) भारत के महान अभियन्ता एवं राजनयिक छल। उनका सन १९५५ मे भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से विभूषित कएल गेल छल। भारत मे उनकर जन्मदिन अभियन्ता दिवस के रूप मे मनाएल जाइता अछि।

विश्वेश्वरैया क जन्म मैसूर (कर्नाटक) के कोलार जिला के चिक्काबल्लापुर तालुक मे १५ सितम्बर १८६० क एक तेलुगु परिवार मे भेल छल। उनकर पिता क नाम श्रीनिवास शास्त्री तथा माता क नाम वेंकाचम्मा छल। पिता संस्कृत के विद्वान छल। विश्वेश्वरैया प्रारम्भिक शिक्षा जन्मस्थान से ही पूरा केलक। आगा क पढाई के लेल ओ बेंगलुरु के सेन्ट्रल कलेज मे प्रवेश लेलक। 




#Article 684: गोविन्द वल्लभ पन्त (196 words)


पण्डित गोविन्द बल्लभ पन्त या जिबी पन्त (जन्म १० सितम्बर १८८७ - ७ मार्च १९६१) प्रसिद्ध स्वतन्त्रता सेनानी आ वरिष्ठ भारतीय राजनेता छल। ओ उत्तर प्रदेश राज्य के प्रथम मुख्य मन्त्री आ भारत के चौथा गृहमंत्री छल। सन १९५५ मे उनका भारतरत्न से सम्मानित कएल गेल। गृहमंत्री के रूप मे उनकर मुख्य योगदान भारत क भाषा के अनुसार राज्य मे विभक्त करनाइ तथा हिन्दी क भारत क राजभाषा के रूप मे प्रतिष्ठित करनाइ छल।

इनकर जन्म १० सितम्बर १८८७ क अल्मोडा जिला के श्यामली पर्वतीय क्षेत्र स्थित गाम खूंट मे महाराष्ट्रीय मूल के एक कऱ्हाडे ब्राह्मण कुटुम्ब मे भेल। इनकर माँ क नाम गोविन्दी बाई आ पिता क नाम मनोरथ पन्त छल। बचपन मे ही पिता क मृत्यु भ जाइ के कारण उनकर परवरिश उनकर दादा बद्री दत्त जोशी केलक। १९०५ मे ओ अल्मोडा छोड देलक आ इलाहाबाद चलि गेल। म्योर सेन्ट्रल कलेज मे ओ गणित, साहित्य आ राजनीति विषयसभ के बढिया विद्यार्थिसभ मे सबसँ तेज छल। अध्ययन के साथ-साथ ओ कांग्रेस के स्वयंसेवक क कार्य सेहो करैत छल। १९०७ मे बी०ए० आ १९०९ मे कानून क डिग्री सर्वोच्च अंक के साथ हासिल केलक। एकर उपलक्ष्य मे उनका कलेज क तरफ से लैम्सडेन अवार्ड देल गेल।




#Article 685: धोण्डो केशव कर्वे (207 words)


महर्षि डा. धोण्डो केशव कर्वे (अप्रैल १८, १८५८ - नवम्बर ९, १९६२) प्रसिद्ध समाज सुधारक छल। ओ महिला शिक्षा आ विधवा विवाह मे महत्त्वपूर्ण योगदान केलक। ओ अपन जीवन महिला उत्थान क समर्पित करि देलक। उनका द्वारा मुम्बई मे स्थापित एसएनडिटी महिला विश्वविघालय भारतक प्रथम महिला विश्वविघालय छी। ओ वर्ष १८९१ से वर्ष १९१४ तक पुणेके फरगुस्सन कलेजमे गणित के अध्यापक छल। हुनका वर्ष १९५८ मे भारत रत्नसँ सम्मनित कएल गेल। 

हुनकर जन्म महाराष्ट्रके मुरुड नामक कस्बे (शेरावाली, जिला रत्नागिरी), मे एक गरीब परिवारमे भेल छल। पिता क नाम केशवपंत आ माता क लक्ष्मीबाई। आरम्भिक शिक्षा मुरुड मे भेल। पश्चात् सतारा मे दुई अढाई वर्ष अध्ययन करि के मुंबई के राबर्ट मनी स्कूल मे दाखिल भेल। १८८४ ई. मे ओ मुंबई विश्वविद्यालय से गणित विषय लके बी.ए. क परीक्षा उत्तीर्ण केलक। बी.ए. करै के बाद ओ एलफिंस्टन स्कूल मे अध्यापक भ गेल। कर्वे क विवाह १५ वर्ष क आयु मे ही भ गेल छल आ बी.ए. पास करै धरि उनकर पुत्र क अवस्था अढाई वर्ष भ चुकल छल। अत: खर्च चलावे के लेल स्कूल क नौकरी के साथ-साथ लडकिसभ के दुई हाईस्कूल मे ओ अंशकालिक काम सेहो करैत छल। गोपालकृष्णन गोखले के निमंत्रण पर १८९१ ई. मे ओ पूना के प्रख्यात फर्ग्युसन कलेज में प्राध्यापक बनि गेल।




#Article 686: दिलजीत दोसांझ (159 words)


दिलजीत सिंह दोसांझ (जन्म ६ जनवरी १९८४), 
दिलजीत दोसांझ पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार एवं प्रशिद्ध गायक छी। उनका मुख्यत: उनकर मंच नाम 'दिलजीत' से ही जानल जाइत अछि। ब्लोकबस्टर पंजाबी फिल्म 'जट एंड जूलिएट' के भाग १ आ २, 'पंजाब १९८४', 'जिने मेरा दिल लुटेया', 'डिस्को सिंह' जेहन सुपरहिट फिल्मसभ मे उनका द्वारा निभाएल गेल भुमिकासभ दर्शक क दिल जीत लेलक। ओ कतेक संगीत एल्बम एवं फिल्मसभ मे गीत गावलक, विशेषत: उनकर 'बैक टू बेसिक' एल्बम क बहुत लोकप्रियता हासिल भेल। ओ रितेश देशमुख आ जेनेलिया क हिन्दी फिल्म 'तेरे नाल लव हो गया' मे पीपा पीपा ई गीत गावलक, साथ ही ओ 'मेरे डैड की मारूती' आ 'यमला पगला दिवाना २' ई हिन्दी फिल्मसभ मे सेहो गीत गावलक।
निर्देशक अभिषेक चौबे क आगामी बहुचर्चित हिन्दी फिल्म 'उडता पंजाब' मे प्रमुख भुमिका द्वारा दिलजीत बलिउड मे कदम रखै जा रहल अछि। ई फिल्म मे दिलजीत के साथ करिना कपुर, शाहिद कपूर आ आलिया भट्ट अभिनय करैत नजर आएत।




#Article 687: रफ्तार (र्‍यापर) (209 words)


दिलिन नायर ,(दिल्ली, भारत मे १६ नवम्बर क जन्म) एक भारतीय रैपर/ गायक छी। प्रायः ई अपन मंच नाम रफ्तार या RAA से जानल जाइत अछी। ई पूर्व मे यो यो हनी सिंह द्वारा गठित शहरी संगीत समूह माफिया मुंडेर के एक सदस्य छल। ई समूह से अलग भ गेल, आ पंजाबी बैंड आरडीबी से तीन रेकर्ड्स क लेल हस्ताक्षर करै क बाद ई चर्चा मे आएल। ओ बलिउड के लेल सेहो संगीत क उत्पादन शुरू करि देने छल।

रफ्तार बलिउडमे एक डान्सरके रूपमे अपन करियर शुरू केलक। ओ भारतीय बलिउड फिल्मक लेल पृष्ठभूमि नृत्य (ब्याक ग्राउन्ड डान्स) सेहो केलक। ओ माणिक नामक एक साथीक साथ मैक्सके तहत भारतीय डान्स शो डान्स इन्डिया डान्समे भाग लेलक, जेकर ओ काफी प्रसिद्ध भेल। ओ दिल्लीमे बिग डान्स क्लबमे एक नृत्य शिक्षक के रूपमे सेहो काम केलक। शोसँ बाहर होमए के बाद, एकटा रैपर के रूपमे अपन करियर शुरू केलक। ओ संगीत समूह माफिया मुंडेर के सदस्यक रूपमे, संगीत निर्माता यो यो हनी सिंहक साथ काम शुरू केलक। रफ्तारक समूह छोडेके बाद पन्जाबी संगीत बैन्ड आरडीबी रफ्तारक अपन लेबल युक्त, तीन रेकर्ड्सके लेल साइन केलक। आरडीबीके सदस्यसभक बीच विभाजन के बाद, आरडीबीके लेल एक गायक के रूपमे सेवा दै वाला (अब मान्ज म्यूसिकके रूपमे जानल जाइत अछि) मंजीत रालके साथ जुडी गेल।




#Article 688: इस्लाम (127 words)


इस्लाम धर्म (الإسلام) अनुयायी संख्याक आधारम ईसाई धर्म पश्चात् विश्वक दोसर धर्म छी। इस्लाम शब्द अरबी भाषाक शब्द छी। जेकर मूल शब्द सल्लमा छी आर एकर दुटा परिभाषा अछि। इस्लाम (अरबी: الإسلام) एक एकेश्वरवादी धर्म छी, जे एकर अनुयायीसभक अनुसार, अल्लाहक अन्तिम रसूल आ नबी, मुहम्मदद्वारा मनुष्यसभ धरि पहुँचावाल गेल अन्तिम ईश्वरीय पुस्तक क़ुरआनक शिक्षा पर आधारित अछि। कुरआन अरबी भाषामे रचल गेल आ एही भाषामे विश्वक कुल जनसङख्याक २५% हिस्सा, लगभग १.६१ सँ १.८ अरब लोगसभद्वारा पढल जाइत अछि; एहिमे सँ (स्रोतसभक अनुसार) लगभग २० सँ ३० करोड लोगसभक ई मातृभाषा छी। मुहम्मदक मुँहसँ कथित भऽ लिखल जाइ वाला पुस्तक आ पुस्तकक पालन करैके निर्देश प्रदान करै वाला शरीयत ही दुई एहन संसाधन छी जे इस्लामक जानकारी स्रोत करार देल जाइत अछि।

(१) शान्ति 

(२) आत्मसमर्पण।




#Article 689: ईशा शरवानी (105 words)


ईशा शरवानी (जन्म: १९८४ सितम्बर २९) हिन्दी चलचित्रक एक अभिनेत्री आ भारतीय समकालीन नर्तकी सेहो छी ।

ईशाक जन्म गुजरात, भारतमे २९ सितम्बर १९८४ मे भेल छल । ओ अहमदाबादमे बैसैत छल । तिरुवनन्तपुरममे बैसैसँ पूर्व ओ दिल्ली, उडीसा, वृन्दावन आ बेङ्गलोर जका विभिन्न स्थानसभमे बोसाबस केनए छल । ईशाक माता पिताद्वारा तिरुवनन्तपुरम, केरलमे एकेडमी फर आर्ट रिसर्च, ट्रेनिङ्ग आ इनोभेशन (कला अनुसन्धान एकेडमी, प्रशिक्षण आ अभिनय) नामक एक कला विद्यालय स्थापित केलक, जतय ओसभ १३-१४ वर्षक लेल बैसल छल । १३ वर्षक उमरसँ, अपन नृत्य विद्यालयमे ओ अपन माता दक्षा सेठसंग नृत्यमे औपचारिक शिक्षण शुरू केलक आ कलारिप्पयाट्टु, कथक आ छऊ नृत्य सिखलक ।




#Article 690: कथक (153 words)


कथक () भारतीय शास्त्रीय नृत्यक प्रमुख १० नृत्य शैलीमे सँ एक छी । ई भारतीय राज्य राजस्थान आ उत्तर भारतक एक नृत्य शैली छी । ई बहुत प्राचीन शैली छी कियाकि महाभारतमे सेहो कथकक वर्णन अछि । मध्य कालमे एकर सम्बन्ध कृष्ण कथा आ नृत्यसँ छल । मुसलमानसभक कालमे ई दरबारमे सेहो कएल जा लागल । वर्तमान समयमे बिरजू महाराज एकर पैग व्याख्याता रहल अछि । हिन्दी चलचित्रमे अधिकांश नृत्य याह शैली पर आधारित होइत अछि ।

भारतक आठ शास्त्रीय नृत्यसभमे सँ सबसँ पुराना कथक नृत्य जकर उत्पत्ति उत्तर भारतमे भेल । कथक एक संस्कृत शब्द छी जकर अर्थ कहानीसँ व्युत्पन्न करनाए होइत अछि । ई नृत्य कथा पियानी बोलैक एक साधन छी । ई नृत्यक तीन प्रमुख घराना अछि । कछवाक राजपुतसभके राजसभामे जयपुर घरानाके, अवधक नवाबके राजसभामे लखनऊ घरानाके आ वाराणसीक सभामे वाराणसी घरानाके जन्म भेल छल । अपन विशिष्ट रचनासभक लेल प्रसिद्ध एक कम प्रसिद्ध रायगढ़ घराना सेहो अछि ।




#Article 691: महाभारत (178 words)


महाभारत हिन्दुसभक एक प्रमुख काव्य ग्रन्थ छी, जे स्मृति वर्गमे आबैत अछि । कहियो कहियो मात्र भारत कहल जाइवाला ई काव्यग्रन्थ भारतक अनुपम धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक आ दार्शनिक ग्रन्थ छी । विश्वक सबसँ लम्बा ई साहित्यिक ग्रन्थ आ महाकाव्य, हिन्दू धर्मक मुख्यतम ग्रन्थसभमे सँ एक छी । ई ग्रन्थके हिन्दू धर्ममे पञ्चम वेद मानल जाइत अछि । यद्यपि एकरा साहित्यक सबसँ अनुपम कृतिसभमे सँ एक मानल जाइत अछि, मुदा आइयो ई ग्रन्थ प्रत्येक हिन्दू धर्मावलम्बीक लेल एक अनुकरणीय स्रोत छी । ई कृति प्राचीन भारतक इतिहासक एक गाथा छी । एहिमे हिन्दू धर्मक पवित्रतम ग्रन्थ भगवद्गीता सन्निहित अछि । सम्पूर्ण महाभारतमे लगभग १,१०,००० श्लोक अछि, जे युनानी काव्यसभ इलियड आ ओडिसीसँ परिमाणमे दस गुणा अधिक अछि ।

हिन्दू मान्यतासभ, पौराणिक सन्दर्भसभ आ स्वयं महाभारतक अनुसार ई काव्यक रचनाकार वेदव्यास जी के मानल जाइत अछि । ई काव्यक रचयिता वेदव्यास जी अपन ई अनुपम काव्यमे वेदसभ, वेदाङ्गसभ आ उपनिषदसभके गुह्यतम रहस्यसभक निरुपण केनए अछि । एकर अतिरिक्त ई काव्यमे न्याय, शिक्षा, चिकित्सा, ज्योतिष, युद्धनीति, योगशास्त्र, अर्थशास्त्र, वास्तुशास्त्र, शिल्पशास्त्र, कामशास्त्र, खगोलविद्या तथा धर्मशास्त्रक सेहो विस्तारसँ वर्णन कएल गेल अछि ।




#Article 692: भीष्म (128 words)


भीष्म अथवा भीष्म पितामह महाभारतक एक पात्र छी । भीष्म पितामह गङ्गा तथा शान्तनुक पुत्र छल । ई महाभारतक सबसँ महत्वपूर्ण पात्रसभमे सँ एक छल । भगवान परशुरामक शिष्य देवव्रत अपन समयके बहुतेक विद्वान आ शक्तिशाली पुरुष छल । महाभारतक प्रसङ्गक अनुसार हर तरहक शष्त्र विद्याके ज्ञानी देवव्रतके कोनो भी किसिमक युद्धमे हराए पेनाए असम्भव छल । ओ सम्भवत: हुनकर गुरु परशुराम मात्र हराए सकैत छल मुदा ई दुनुके बीच भेल युद्ध पूर्ण नै भ सकल आ दुई अति शक्तिशाली योद्धासभके युद्धसँ होमए वाल नुकसानके देखैत एकरा भगवान शिवद्वारा रोकल गेल । 

हिनका अपन ओ भीष्म प्रतिज्ञाक लेल सर्वाधिक जानल जाइत अछि जकर कारणसँ ई राजा बनि सकैत छल मुदा ओ आजीवन हस्तिनापुरक सिंहासनके संरक्षकक भूमिका निर्वाह केलक । ओ आजीवन विवाह नै केलक आ ब्रह्मचारी रहल ।




#Article 693: सत्यवती (133 words)


सत्यवती महाभारतक एक महत्वपूर्ण पात्र छी । ओकर विवाह हस्तिनापुर नरेश शान्तनुसँ भेल छल । ओकर मूल नाम मत्स्यगन्धा छल । ओ ब्रह्माके शापसँ मत्स्यभावक प्राप्त भेल अद्रिका नामक अप्सराके गर्भसँ उपरिचर वसुद्वारा उत्पन्न एक कन्या छल । एकर नाम बादमे सत्यवती भेल । 

माछक पेट फाडि मल्लाहसभ एक बालक आ एक कन्याके निकाललक आ राजाके सूचना देलक । बालकके तँ राजा पुत्र रूपमे स्वीकार करि लेलक मुदा बालिकाके शरीरसँ मत्स्यक गन्ध आबैक कारण राजा ओकरा मल्लाहके दऽ देलक । पिताक सेवाक लेल ओ यमुना नदीमे नाव चलाबैत छल । पराशर ओकरापर मुग्ध भऽ ओकर मत्स्यभाव नष्ट कऽ देलक तथा शरीरसँ उत्तम गन्ध निकालैक वरदान देलक अत: ओ गन्धवती नामसँ सेहो प्रसिद्ध भेल । ओकर नाम योजनगन्धा सेहो छल । ओ विवाहसँ व्यासक जन्म भेल । बादमे राजा शान्तनुसँ हुनकर विवाह केलक ।




#Article 694: विचित्रवीर्य (110 words)


विचित्रवीर्य (, vicitravīrya) सत्यवती आ शान्तनुक चित्राङ्गद आ विचित्रवीर्य नामक दुई पुत्र भेल । शान्तनुक स्वर्गवास चित्राङ्गद आ विचित्रवीर्यके बाल्यकालमे भ गेल छल याह कारण ई दुनुके पालन पोषण भीष्मद्वारा कएल गेल छल । भीष्म चित्राङ्गदके पैग भेला बाद हस्तिनापुरक राजगद्दी पर बैसाएल गेल मुदा किछ समयबाद ओ गन्धर्वसभसँ युद्ध करैत समय चित्राङ्गद मारल गेल । एकर बाद भीष्म हुनकर अनुज विचित्रवीर्यके राज्य सौंपि देलक । आब भीष्मके विचित्रवीर्यक विवाहक चिन्ता भेल। अम्बिका आ अम्बालिकाक विवाह विचित्रवीर्यक संग ओ कराए देलक । विचित्रवीर्य अपन दुनु रानिसभक साथ भोग विलासमे रत भ गेल मुदा दुनु रानीसभसँ हुनका कोनो सन्तान नै भेल आ ओ क्षय रोगसँ पीड़ित भ ओकर मृत्यु भेल ।




#Article 695: अम्बिका (महाभारत) (186 words)


अम्बिका महाभारतमे काशीराजक पुत्री बताएल गेल छल । अम्बिकाक दुईटा बहिन छल, पैग बहिन अम्बा तथा छोट बहिन अम्बालिका । अम्बा, अम्बिका आ अम्बालिकाक स्वयंवर होमए वाला छल । हुनकर स्वयम्वरमे जाए अकेले भीष्म ओतय आएल समस्त राजासभके परास्त करि देलक आ तीनु कन्याके हरण करि हस्तिनापुर ल गेल जतय ओ तीनु बहिनके सत्यवतीक सामने प्रस्तुत केलक ताकि हुनकर विवाह हस्तिनापुरक राजा आ सत्यवतीक पुत्र विचित्रवीर्यके संग सम्पन्न भ जाए । अम्बिका आ अम्बालिका विचित्रवीर्यक पत्नि बनल । मुदा विचित्रवीर्यक अकाल मृत्यु भेला कारण ओ दुनु निःसन्तान रहि गेल । भीष्म पहिनेसँ ब्रह्मचर्य व्रतक शपथ लेनए छल आ आब दुनु पुत्र, चित्राङ्गद तथा विचित्रवीर्यक अकाल मृत्युके कारण कुरुवंशक वंश खतरामे छल । एहि अवस्थामे सत्यवती अपन सबसँ पैग पुत्र वेद व्यासके याद केलक आ नियोगक विधिसँ अम्बिका आ अम्बालिकाके गर्भाधान करेलक ।

जब वेद व्यास अम्बिकाके सामने प्रस्तुत भेल तँ ओ लज्जाके कारण अपन नेत्र बन्द करि लेलक । याह कारणसँ हुनकर पुत्र धृतराष्ट्र आन्हर पैदा भेल । जब दोबारा सत्यवती वेद व्यासके अम्बिकाके लग भेजलक तँ अम्बिका अपन दासी हुनका सम्मुख करि देलक जाहि कारणसँ विदुरक जन्म भेल जे धृतराष्ट्र आ पाण्डुक भाई कहायल ।




#Article 696: अनुराग कश्यप (171 words)


अनुराग सिंह कश्यप (जन्म १० सितम्बर १९७२) एक भारतीय फिल्म निर्देशक, निर्माता आ पटकथा लेखक छी। उनकर जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपूर जिला मे भेल आ ओ विभिन्न शहरसभ मे पलल आ बडका भेल। ओ अपन तालीम देह्ररादून आ ग्वालियर मे केलक आ उन्कर किछ फिल्मसभ मे ई शहरसभ क छाप देखैल मिलैत अछि, विशेष रूप से ग्यांङ्गस् अफ वास्सेय्पुर जतय ओ ऊ घर क प्रयोग केलक जतय ओ पलल-बढल। फिल्म् देखै क शौक उनका बचपन से ही छल, परन्तु ओ स्कूली शिक्षा के दौरान छूटि गेल। ई शौक फेरसँ कलेज मे उजाग्रित भेल। एतय एक थिएटर टोली से संगठित भ जब ओ एक अंतराष्ट्रिय फिल्म पर्व मे उपस्थित भेल तँ उनका मे फिल्म बनावे क चेतना जागल। एतय सँ उनकर कैरियर क शुरुआत भेल।

फिल्म बनावे क लालसा अनुराग कश्यप क जून १९९३ मे जेब मे ५०००-६००० रुपैया के साथ मुम्बई खींच ले आएल। मुम्बई शहर मे प्रथम ८-९ महिना उनका लेल अत्यधिक कष्ट्दायक रहल, जेकर दौरान उनका सडक पर सुतय पडल आ काम क खोज मे भटके सेहो पडल।




#Article 697: केके (189 words)


कृष्णकुमार कुन्नथ (मलयालम: കൃഷ്ണകുമാര് കുന്നത്ത്, जन्म: २३ अगस्त १९७०), केके के रूप मे सेहो जानल जाइत अछि| ओ एक भारतीय पार्श्व गायक छी| ओ हिन्दी, तेलुगु, मलयालम, कन्नड आ तमिल फिल्मसभ मे एक प्रमुख गायक छी|
उनकर जन्म त्रिश्शूर, केरल मे सीएस नायर आ कनाकवाल्ली, एक मलयाली जोडा, ल भेल| कृष्णकुमार कुन्नाथ नयाँ दिल्ली मे पलल बढल| उनकर बलिउड ब्रेक से पहिले ओ ३,५०० विज्ञापन गीत गावने छल| ओ दिल्ली के माउन्ट सेन्ट मैरी स्कूल के एक पूर्व छात्र अछि| ओ १९९९ क्रिकेट विश्व कप के दौरान भारतीय क्रिकेट टीम के समर्थन के लेल जोश अफ इण्डिया गीत गावलक| एकर बाद, ओ पल नामक एलबम निकाललक जेकर सर्वश्रेष्ठ सोलो एल्बम के लेल स्टार स्क्रीन पुरस्कार मिलल| ई एल्बम के दुई गीत 'पल' आ 'यारों' काफी लोकप्रिय छल|

बचपन मे केके एक डक्टर बनेल चाहैत छल| ओ अपन पहिल प्रदर्शन केलक जब ओ दुई कक्षा मे छल| अपन बहुमुखी आवाज के लेल जल्द ही दिल्ली मे विभिन्न विज्ञापन एजेंसिसभ द्वारा उनकर उपयोग कएल गेल| ओ अपन दोस्तसभ के साथ एक रक बैंड क सेहो गठन केलक| सु-प्रशिद्ध गायक किशोर कुमार आ संगीत निर्देशक आर.डी. बर्मन केके क बहुत प्रभावित केलक|




#Article 698: सईद कादरी (104 words)


सईद कादरी एक प्रसिद्ध कवि आ बलिउड संगीतकार छी। उनकर जन्म जोधपुर, राजस्थान मे भेल। ओ फिल्म मर्डर (२००४) के लेल सर्वश्रेष्ठ संगीतकार क ६अम आईफा अवार्ड्स जीतने छल। सईद कादरी बलिउडमे एक नव कवि छी, जे अपन सुन्दर गीतक माध्यमसँ युवासभक उर्दू शायरीसँ फेरसँ परिचित होमए कऽ शुरू करि देलक। एक कविके रुपमे उनकर गीतके बोल लिखैक लेल जोधपुरसँ संचालन भेल, सईद पारम्परिक रूपसँ मुम्बई मे नै रहैत अछि। सईद कादरी ८०के दशकमे काम के लेल जोधपुरसँ पहिले बोम्बे आएल छल। ओ महेश भट्टसँ मिलल जे कि उनका बहुत पसन्द करैत अछि परन्तु भट्ट स्वतन्त्ररुपसँ उनका एखनधरि कोनो फिल्म अफर नै करि सकल। 




#Article 699: राघव सच्चर (147 words)


राघव सच्चर (जन्म जुलाई २४, १९८०, भारत मे) एक भारतीय गायक छी, इनकर पिता आर.के. सच्चर आ माता उषा सच्चर छी। ओ तीन बच्चा मे सबसँ छोट अछि। ओ चाईर साल क उम्र से ही अपन पहिल वाद्ययंत्र, हारमोनिका, बजाना प्रारंभ करि देने छल। तखन से हर साल उनकर माता-पिता उनका एक वाद्ययंत्र ही उपहार मे दैल प्रारम्भ करि देलक संगीत प्रेमिसभ के परिवार मे जन्मल राघव क संगीत मे बहुत कम उम्र से ही दिलचस्पी छल। उनका १९९४ मे दिल्ली मे आयोजित पेप्सी कोरनुकोपिया प्रतियोगिता मे सर्वश्रेष्ठ ड्रम वादक क पुरस्कार मिलल, एकर अलावा उनका बिट्स पिलानी (BITS Pilani) मे सर्वश्रेष्ठ की-बोर्ड वादक क पुरस्कार सेहो मिलल ओ अपन मित्रसभ के साथ मिलके एक बैंड कैनजोना (Canzona) क गठन केलक आ ओकर पश्चात् वर्ष २००० मे ओ मोनाश कंजर्वेटरी अफ म्यूजिक (Monash Conservatory of Music) से संगीत क शिक्षा लै के लेल मेल्बर्न, अस्ट्रेलिया चलि गेल।




#Article 700: विशाल दादलानी (117 words)


विशाल दादलानी एक भारतीय गायक ,म्यूजिक रेकर्ड निर्माता , रचनाकार छी । एखन धरि विशाल दादलानी लगभग ३०० सँ ४०० गीत गावि चुकल अछि । इनकर जन्म मुम्बई मे सन २८ जून १९७३ मे भेल छल । इनका बचपन से ही संगीत सँ विशेष लगाव छल ई कारण इनकर माता-पिता सेहो बहुत प्रेम करैत छल ।विशाल क जन्म एक सिन्धी परिवारमे भेल छल जे मुम्बई महाराष्ट्रमे रहैत छल। ओ एक स्वयं सीखल संगीतकार अछि आ ई रक, इलेक्ट्रोनिक तथा हिप-हप शैलीमे गायन करैत अछि । ओ अपन शिक्षा हिल ग्रेंज हाई स्कूल से शुरू केने छल He is often seen tweeting about his college and paying respect to his teachers on social media. Retrieved 19 August 2015 




#Article 701: नेपाल बैंक लिमिटेड (209 words)


नेपाल बैंक लिमिटेड () नेपाल राष्ट्र बैंकसँ 'क' वर्गक इजाजत पत्र प्राप्त वाणिज्य बैंक छी । ई बैंकक स्थापना १९९४ भेल छल । नेपाल बैंक लिमिटेड नेपालमे स्थापना भेल पहिल बैंक छी । ई नेपाल सरकार तथा निजी लगानिकर्तासभक संयुक्त लगानीमे स्थापना भेल अछि ।

नेपाल बैंकक उद्घाटन राजा त्रिभुवनसँ वि.सं.१९९४ कार्तिक ३० गतेक दिन भेल छल । एहीसँ नेपालमे संस्थागत रूपमे बैंकिङ्ग सेवाक शुरुवात भेल छल । ई बैंक स्थापना होएसँ पहिले तक सम्पूर्ण मौद्रिक कारोवारसभ निजी डिलर तथा व्यापारिक केन्द्रसभसँ होएत छल। १२ जना कर्मचारी आ एकमात्र कार्यालयसँ सुरू भेल छल । उक्त अवसरमे बोलैत तत्कालिन प्रधानमन्त्री राणा प्रधानमन्त्री जुद्धशमशेर राजा त्रिभुवनक आज्ञासँ सम्पूर्ण देशक इच्छा अनुरूप करै लगल ई कार्य हमार लेल एकदम पैग अवसर छी कहने छल । आई तक नेपालमे कोनो बैंक खोल नै सकल छल । तर्सथ, उक्त आवश्यकता पूरा करि नेपाल बैंक लिमिटेड नाममे ई बैंक स्थापना होए लागल तथा श्री ५ सँ उद्घाटन होए लागल ई क्षण एकदमे आनन्द तथा खुशीक क्षण छी । ई बैंकक उद्देश्य धनिक गरीब सभक सेवा प्रदान केनाई साथे राष्ट्र निर्माणमे योगदान पुगावे के रहल छल। उक्त उद्देश्य हासिल करैमे सभसँ र्समर्थन तथा शुभकामनाक आवश्यकता पडेमे हम ओ प्रकारक सहयोग प्राप्त होएमे विश्वस्त छी । बैंक सञ्चालनक शुरुवातमे केवल १० जना शेयरधनीसभ मात्र रहल छल । 




#Article 702: ईन्जिनियरिङ अध्ययन संस्थान (199 words)


त्रिभुवन विश्वविद्यालय  अन्तर्गतक पाँच अध्ययन संस्थानसभ मध्ये इन्जिनियरिङ अध्ययन संस्थान एक छी । एकर स्थापना नयाँ शिक्षा योजना सँगै वि.सं. २०२९ सालमे भेल छल । स्थापना कालमे इ राष्ट्रिय आवश्यकता अनुरूपक मध्यम तथा उच्च तहक इन्जिनियरिङ जनशक्ति अर्थात् ओभरसियर आर इन्जिनियरसभ उत्पादन करsवला, विभिन्न तहक जनशक्तिकs तालिम दs आर देशक इन्जिनियरिङ क्षेत्रक प्राविधिक क्षमता अभिवृद्धि करवाक उद्देश्य राखि अनुसन्धान तथा परामर्श सेवा उपलब्ध मूलभूत उद्देश्यसभ रहल छल । इ उद्देश्यसभ प्राप्तिक लेल हाल इन्जिनियरिङ अध्ययन संस्थान अन्तर्गत चारि आंगिक क्याम्पससभ सञ्चालित अछि । इ क्याम्पससभ, केन्द्रीय क्याम्पस, पुल्चोक (ललितपुर), थापाथली क्याम्पस (काठमाडौं), पूर्वाञ्चल क्याम्पस (धरान) आर पश्चिमाञ्चल क्याम्पस (पोखरा) छी । उच्च शिक्षामा नीजि तथा समुदायक भूमिकासभ सेहो परिचालन कए सरकारक लक्ष्य अनुरुप इन्जिनियरिङ शिक्षा प्रदान करवाक लेल त्रि.वि.सँ सम्बन्धन प्राप्तक अन्य १०टा कलेजसभ सेहो इ.अ.संस्थान अन्तर्गत सञ्चालनमे रहल अछि । ईन्जिनियरिङ विधाक विभिन्न क्षेत्रसभम उच्च स्तरीय दक्ष जनशक्ति उत्पादनक साथै सोध तथा अनुसन्धानक क्षेत्रसभमे समेत नेतृत्वदायि भूमिका निर्बाहक आजुक चुनौतिपूर्ण आवश्यकताक इ अपन गहन जिम्मेवारीक सम्हान्लने अछि ।

त्रिभुवन विश्वविद्यालयसँ सम्बन्धन–प्राप्त कलेजसभम भर्नाक लेल समेत इन्जिनियरिङ अध्ययन संस्थान द्ववारा सञ्चालित प्रवेश–परीक्षा उत्तीर्ण करवाक अनिवार्य अछि । साथे सम्बन्धन–प्राप्त कलेजसभक कुल भर्ना संख्याक १० % स्थानमे भर्ना लक्ष्य नैवढाsक इ.अ.सं.क नियमित सरहक शुल्क लकs भर्नाक प्रावधान रहल अछि ।




#Article 703: राष्ट्रिय वाणिज्य बैंक लिमिटेड (118 words)


राष्ट्रिय वाणिज्य बैंक, पूर्ण सरकारी स्वामित्वमा स्थापित नेपालक दोसर पुरान आ सबसँ बड्का वाणिज्य बैंक छी। एकर स्थापना रा.वा.बैंक ऐन, २०२१ अर्न्तर्गत वि.सं.२०२२ साल माघ १० गते तदअनुसार जनवरी २३, १९६६ म भेल छल। ई बैंक अपन औद्योगिक व्यापारिक कृषि तथा मुद्रा स्थानान्तर, पूंजी बजार, उपभोक्ता कर्जा लगायत अन्य क्षेत्रसभम ग्राहकसभक विविध बैंकिङ्ग सेवा दति अछि। राष्ट्रिय वाणिज्य बैंकसँग देशभर २६०० कर्मचारी सहित देशभरम १६०टा शाखाक विस्तृत कार्यजाल रहल अछि। यस बैंक सँग १७ लाख सन्तुष्ट ग्राहक रहेको छ जुन नेपालको कुनै पनि बैंकको लागि बढी रहेको छ । बैंकले देशको अर्थतन्त्रको लागि उपयोगी कदम चाल्दै आएको छ ।

राष्ट्रिय वाणिज्य बैंक
केन्द्रिय कार्यालय
सिंहदरवार प्लाजा, काठमाण्डौ
फोन : (९७७-१) ४२५-२५९५
फ्याक्स : (९७७-१) ४२५-२९३१
ईमेल : rbb.info@rbb.com.np




#Article 704: युवराज खतिवडा (169 words)


डा. युवराज खतिवडा (जन्म: २०१९ ) हाल नेपाल राष्ट्र बैंकक गभर्नर छी । वि.सं. जेठ  २०६६मे सदस्यक रूपमे  क्षेत्रीय नेपालमे नियुक्ती भेल छल । ओ कोलम्बो मे यूएनडीपी रीजनल सेन्टरमे तीन वर्ष (असार २०६३)तक वरिष्ठ अर्थशास्त्रीक रूपमे सेवा आ  डा.युवराज खतिवडा वि.सं.२०५९ सँ २०६२ तक नेपाल सरकारक राष्ट्रिय योजना आयोगमे उप-सभापति भेल छल । एहीसँ पहिले ओ नेपाल राष्ट्र बैंकक आर्थिक अनुसन्धान विभागक प्रमुख (२०५५-२०५८), २०३८मे त्रिभुवन विश्वविद्धालयमे एक स्नातकोत्तर शिक्षक आ २०४७ सँ २०४८ तक त्रिभुवन विश्वविद्यालय आ काठमाडौं विश्वविद्यालयमे एक अतिथि संकाय सदस्यक रूपमे कार्य केने छल । 

डा.युवराज खतिवडा २०३८ आ २०४१ मे त्रिभुवन विश्वविद्यालयसँ क्रमशः अर्थशास्त्र आ लोक प्रशासनमे मास्टर डिग्री प्राप्त केने छल । वि.सं. २०४८मे दिल्ली स्कूल अफ इकोनोमिक्ससँ मौद्रिक अर्थशास्त्रमे पीएचडी केने छल । ओ बहुतरास राष्ट्रिय तथा अन्तर्राष्ट्रिय प्रशिक्षण, विकास आ नियोजन संबंधित मुद्दामे तथा कार्यक्रमसभक सेमिनारमे भाग लेने अछि आ एक संसाधन व्यक्तिक रूपमे ई तरिकाक प्रशिक्षण कार्यक्रमसभ आ सेमिनारसभमे भाग लेने अछि । डा.युवराज खतिवडा वि.सं.२०५०मे महेन्द्र विद्या भूषण तथा वि.सं.२०५७ सुप्रबल गोर्खा दक्षिण बाहुसँ सम्मानित भेल छल ।




#Article 705: फोबिया (162 words)


दुर्भीति या फोबिया (Phobia) एक प्रकार क मनोविकार छी जाहिमे व्यक्ति क विशेष वस्तुसभ, परिस्थितिसभ आ क्रियासभ सँ डर लागे लगैत अछि। मतलब ओकर उपस्थिति मे घबराहट होएत अछि जबकि ओ चीज उ समय खतरनाक नै होएत अछि। ई एक प्रकार क चिन्ता क बीमारी छी। एहन बीमारी मे पीडीत व्यक्ति क हल्का अनमनेपन सँ लके डर के भयावाह दौरा तक पडी सकैत अछि। 

दुर्भीति क स्थिति मे व्यक्ति क ध्यान किछ एक लक्षण पर केन्द्रित भ सकैत अछि, जेना-धड्कन क जोर-जोर सँ धडकनाई या बेहोशी लागनाई। ई लक्षण सँ जुडल किछ डर होएत अछि जेना-मरि जाए क भय, अपन उपर नियंत्रण गुमा देनाई या पागल भ जेनाइ क डर। 

ई विकार सँ रोगी अधिकतर लोग अपन विकार पर पर्दा डालैत रहैत अछि। ओकरा लगैत अछि कि एकर चर्चा करै सँ उनकर जग हंसाई होएत। ओ उ हालात से बचै पुरजोर कोशिश करैत अछि जाहिसँ ओकरा फोबिया क दौरा पडैत अछि। परन्तु ओ पलायन क रवैया जीवन मे जहर घोइल दैत अछि।




#Article 706: पुरूषोत्तम दास टंडन (208 words)


पुरूषोत्तम दास टंडन (१ अगस्त १८८२ - १ जुलाई, १९६२) भारत के स्वतन्त्रता सेनानी छल। हिन्दी क भारत क राष्ट्रभाषा के पद पर प्रतिष्ठित करबावे मे उनकर महत्त्वपूर्ण योगदान छल। उनकर जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद मे भेल छल। ओ भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के अग्रणी पंक्ति के नेता तँ छल आ साथे समर्पित राजनयिक, हिन्दी के अनन्य सेवक, कर्मठ पत्रकार, तेजस्वी वक्ता आ समाज सुधारक सेहो छल। हिन्दी क भारत क राजभाषा क स्थान दीयावे के लेल ओ महत्वपूर्ण योगदान केलक। १९५० मे ओ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बनल। उनका भारत के राजनैतिक आ सामाजिक जीवन मे नयाँ चेतना, नयाँ लहर, नयाँ क्रान्ति पैदा करै वाला कर्मयोगी कहल गेल अछि। ओ जन सामान्य मे राजर्षि (संधि विच्छेदः राजा+ऋषि= राजर्षि अर्थात एहन प्रशासक जे ऋषि के समान सत्कार्य मे लगल हुए।) के नाम सँ प्रसिद्ध भेल। किछ विचारकसभ के अनुसार स्वतंत्रता प्राप्त करनाई उनकर पहिल साध्य छल। ओ हिन्दी क देश क आजादी के पहिले आजादी प्राप्त करै क साधन मानैत रहल आ आजादी मिले के बाद आजादी क बनाय रखै क। टण्डन जी क राजनीति मे प्रवेश हिन्दी प्रेम के कारण ही भेल। १७ फरवरी १९५१ क मुजफ्फरनगर 'सुहृद संघ` के १७अम वार्षिकोत्सव के अवसर पर ओ अपन भाषण मे ई बात क स्वीकार सेहो केने छल। 




#Article 707: पाण्डुरङ्ग वामन काणे (213 words)


पाण्डुरङ्ग वामन काणे (७ मई १८८०, दापोली, रत्नागिरि - १९७२) संस्कृतक एक विद्वान्‌ आ प्राच्यविद्याविशारद छल। हुनका सन् १९६३ मे भारत रत्नसँ सम्मानित कएल गेल छल।

काणे अपन विद्यार्थी जीवन के दौरान संस्कृतमे नैपुण्य एवं विशेषताक लेल सात स्वर्णपदक प्राप्त केलक आ संस्कृत मे एम.एस. क परीक्षा उत्तीर्ण केलक। पश्चात्‌ बम्बई विश्वविद्यालय सँ एल.एल.एम. क उपाधि प्राप्त केलक। एही विश्वविद्यालय आगा जाके उनका साहित्य मे सम्मानित डाक्टर (डी. लिट्.) क उपाधि देलक। भारत सरकार क तरफसँ उनका महामहोपाध्याय क उपाधिसँ विभूषित कएल गेल। उत्तररामचरित (1913 ई.), कादम्बरी (2 भाग, 1911 तथा 1918), हर्षचरित (2 भाग, 1918 तथा 1921), हिन्दुसभक रीतिरिवाज तथा आधुनिक विधि (3 भाग, 1944), संस्कृत काव्यशास्त्र क इतिहास (1951) तथा धर्मशास्त्र क इतिहास (4 भाग, 1930-1953 ई.) इत्यादि उनकर अंग्रेजी मे लिखित कृतिसभ छी।

डा॰ काणे अपन लम्बा जीवनकाल मे समय-समय मे उच्च न्यायालय, बम्बई मे अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय, दिल्ली मे वरिष्ठ अधिवक्ता, एलफिन्स्टन कलेज, बम्बई मे संस्कृत विभाग के प्राचार्य, बम्बई विश्वविद्यालय के उपकुलपति, रोयल एशियाटिक सोसाइटी (बम्बई शाखा) के फेलो तथा उपाध्यक्ष, लंदन स्कूल अफ ओरयिंटल एंड अफ्रिकन स्टडीज के फेलो, रार्ष्टीय शोध प्राध्यापक तथा सन्‌ 1953 सँ 1949 तक राज्यसभा के मनोनीत सदस्य रहल। पेरिस, इस्तंबूल तथा कैंब्रिज मे आयोजित प्राच्यविज्ञ सम्मेलनसभ मे ओ भारत क प्रतिनिधित्व केलक। भण्डारकर ओरएन्टल रिसर्च इन्स्टिट्यूट, पुनासँ सेहोओ बहुत समयधरि संबद्ध रहल।




#Article 708: विनोबा भावे (172 words)


आचार्य विनोबा भावे (११ सितम्बर १८९५ - १५ नवम्बर १९८२) भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा प्रसिद्ध गांधीवादी नेता छल। उनकर मूल नाम विनायक नरहरी भावे छल। उनका भारत क राष्ट्रीय आध्यापक आ महात्मा गांधी क आध्यातमिक उत्तराधीकारी समझल जाइत अछि। ओ अपन जीवन के आखरी वर्ष पुनार, महाराष्ट्र के आश्रम मे गुजारलक। ओ भूदान आन्दोलन चलेलक। इंदिरा गांधी द्वारा घोषित आपातकाल क 'अनुशासन पर्व' कहै के कारण ओ विवाद मे सेहो छल।

विनोबा भावे क मूल नाम विनायक नरहरि भावे छल। महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र मे एक गाम अछि, गागोदा, एततय के चितपावन ब्राह्मण छल, नरहरि भावे। गणित के प्रेमी आ वैज्ञानिक सूझबूझ वाला। रसायन विज्ञान मे उनकर रुचि छल। ओ दिन रंग क बाहर सँ आयात करे पडै छल। नरहरि भावे रात-दिन रंग क खोज मे लगल रहैत छल। बस एक धुन छल उनकर कि भारत के ई मामला मे आत्मनिर्भर बनाएल जा सकि। उनक पत्नी रुक्मिणी बाई विदुषी महिला छल। उदार-चित्त, आठो याम भक्ति-भाव मे डूबल रहैत छल। एकर असर उनकर दैनिक कार्य पर सेहो पडैत छल। 




#Article 709: खान अब्दुल गफ्फार खान (168 words)


ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान (१८९०- २० जनवरी १९८८) सीमाप्रांत आ बलूचिस्तान के एक महान राजनेता छल जे भारत के स्वतंत्रता संग्राम मे भाग लेलक आ अपन कार्य आ निष्ठा के कारण सरहदी गांधी (सीमान्त गांधी), बच्चा खाँ तथा बादशाह खान के नाम से बोलवल जाए लगल। ओ भारतीय उपमहाद्वीप मे अंग्रेज शासन के विरुद्ध अहिंसा के प्रयोग के लेल जानल जाइत अछि। एक समय उनकर लक्ष्य संयुक्त, स्वतन्त्र आ धर्मनिरपेक्ष भारत छल। एकर लेल ओ १९२० मे खुदाई खिदमतगार नाम के संगठन क स्थापना केलक। ई संगठन सुर्ख पोश के नाम से सेहो जानल जाइत अछि।

खान अब्दुल गफ्फार खान क जन्म पेशावर, पाकिस्तान मे भेल छल। उनकर परदादा आबेदुल्ला खान सत्यवादी होए के साथ ही साथ लडाकू स्वभाव के छल। पठानी कबीलिसभ के लेल आ भारतीय आजादी के लेल ओ बड-बड लडाइसभ लडने छल। आजादी क लडाई के लेल ओ प्राणदंड देल गेल छल। ओ जेना बलशाली छल ओहेन समझदार आ चतुर सेहो छल। एही प्रकार बादशाह खाँ के दादा सैफुल्ला खान सेहो लडाकू स्वभाव के छल।




#Article 710: प्रकाश सिंह बादल (150 words)


प्रकाश सिंह बादल भारत के पंजाब प्रान्त के मुख्यमन्त्री छी एवं शिरोमणी अकाली दल (बादल) के प्रमुख छी।

पनञ्जाबक भूतपूर्व मुख्यमन्त्री प्रकाश सिंह बादलक जन्म ८ दिसम्बर १९२७ कें पञ्जाबक छोट गाम अबुल खुरानाक जाट सिख परिवारमे भेल छल । ई पञ्जाबक पहिल मुख्यमन्त्री छी जे चारिम बेर ई पद पर विराजित भ गेल अछि । प्रकाश सिंह बादलक पत्नी सुरिन्दर कौरक देहान्त भ गेल अछि। हिनकर एक बेटा आ एक बेटी अछि। प्रकाश सिंह बादलक बेटा सुखबीर सिंह बादल पञ्जाबक फाजिल्का निर्वाचन क्षेत्रसँ विधायक छी तथा पञ्जाबक उप-मुख्यमन्त्री रहि चुकल अछि । प्रकाश सिंह बादलक बेटीक विवाह पञ्जाबक पूर्व मुख्यमन्त्री प्रताप सिंह कैरोंक बेटासँ सम्पन्न भेल अछि ।

प्रकाश सिंह बादल कतेक दशक सँ राजनीति क एक महत्वपूर्ण हिस्सा अछि। उनका पंजाब क राजनीति के बेहद सम्माननीय वरिष्ठ व्यक्ति क दर्जा देल गेल अछि। प्रकाश सिंह बादल एक कुशल राजनीतिज्ञ आ अपन धर्म के प्रति पूर्ण रुपसँ समर्पित अछि।




#Article 711: बाल गंगाधर तिलक (287 words)


बाल गंगाधर तिलक (या लोकमान्य तिलक, ; २३ जुलाई १८५६ - १ अगस्त १९२०), जन्म सँ केशव गंगाधर तिलक, एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक, वकील आ एक स्वतन्त्रता सेनानी छल। ओ भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के पहिल लोकप्रिय नेता भेल; ब्रिटिश औपनिवेशिक प्राधिकारी उनका भारतीय अशान्ति के पिता कहैत छल। उनका, लोकमान्य क आदरणीय शीर्षक सेहो प्राप्त भेल, जेकर अर्थ अछि लोग द्वारा स्वीकृत (उनकर नायक के रूप मे)। इनका हिन्दू राष्ट्रवाद क पिता सेहो कहल जाइत अछि।

तिलक ब्रिटिश राज के दौरान स्वराज के सबसँ पहिल आ मजबूत अधिवक्तासभ मे सँ एक छल, तथा भारतीय अन्तःकरण मे एक प्रबल आमूल परिवर्तनवादी छल। उनकर मराठी भाषा मे गेल गेल नारा स्वराज्य हा माझा जन्मसिद्ध हक्क आहे आणि तो मी मिळवणारच (स्वराज हमर जन्मसिद्ध अधिकार छी आ हम एकरा लाईये के रहब) बहुत प्रसिद्ध भेल। ओ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कतेक नेतासभ सँ एक करीबी सन्धि बनेलक, जाहिमे बिपिन चन्द्र पाल, लाला लाजपत राय, अरविन्द घोष, वी० ओ० चिदम्बरम पिल्लै आ मुहम्मद अली जिन्नाह शामिल छल।

बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई, सन् 1856 ई. को भारत के रत्नागिरि नामक स्थान पर हुआ था। इनका पूरा नाम 'लोकमान्य श्री बाल गंगाधर तिलक' था। तिलक का जन्म एक सुसंस्कृत, मध्यमवर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम 'श्री गंगाधर रामचंद्र तिलक' था। श्री गंगाधर रामचंद्र तिलक पहले रत्नागिरि में सहायक अध्यापक थे और फिर पूना तथा उसके बाद 'ठाणे' में सहायक उपशैक्षिक निरीक्षक हो गए थे। वे अपने समय के अत्यंत लोकप्रिय शिक्षक थे। उन्होंने 'त्रिकोणमिति' और 'व्याकरण' पर पुस्तकें लिखीं जो प्रकाशित हुईं। तथापि, वह अपने पुत्र की शिक्षा-दीक्षा पूरी करने के लिए अधिक समय तक जीवित नहीं रहे। लोकमान्य तिलक के पिता 'श्री गंगाधर रामचंद्र तिलक' का सन् 1872 ई. में निधन हो गया।




#Article 712: राजा हरिश्चन्द्र (240 words)


 

राजा हरिश्चंद्र अयोध्या के प्रसिद्ध सूर्यवंशी राजा छल जे सत्यव्रत के पुत्र छल। ओ अपन सत्यनिष्ठा के लेल अद्वितीय अछि आ एकर लेल इनका अनेक कष्ट सहै पडल। ओ बहुत दिन तक पुत्रहीन रहल परन्तु अन्त मे अपन कुलगुरु वशिष्ठक उपदेश सँ ओ वरुणदेवक उपासना केलक तँ एही शर्त पर पुत्रक जन्म भेल कि ओकरा हरिश्चंद्र यज्ञ मे बलि द दै। पुत्र क नाम रोहिताश्व रखल गेल आ जब राजा वरुण के कतेक बेर आवि पर सेहो अपन प्रतिज्ञा पूरा नै केलक तँ ओ हरिश्चंद्र क जलोदर रोग होए क शाप द देलक।

रोग सँ छुटकारा पावि आ वरुणदेव क फेर प्रसन्न करैके लेल राजा वशिष्ठ जी के नजदिक पहुँचल। एतय इंद्र रोहिताश्व क वन मे भगा देलक। राजा वशिष्ठ जी क सम्मति सँ अजीगर्त नामक एक दरिद्र ब्राह्मण के बालक क खरीद करि यज्ञ क तैयारी केलक। परन्तु बलि दै के समय शमिता कहलक कि हम पशु क बलि दैत छी, मनुष्यक नै। जब शमिता चलि गेल तँ विश्वामित्र आविक शुन:शेप क एक मंत्र बतेलक आ ओकरा जपई के लेल कहलक। ई मंत्र क जप करै सँ वरुणदेव स्वयं प्रकट भेल आ कहलक - हरिश्चंद्र , अहाँ के यज्ञ पूरा भ गेल। ई ब्राह्मणकुमार क छोडी दियौ। अहाँ के हम जलोदर से सेहो मुक्त करैत छी।

यज्ञ क समाप्ति सुनि के रोहिताश्व सेहो वन सँ घुमि के आएल आ शुन:शेप विश्वामित्र क पुत्र बनि गेल। विश्वामित्र के कोप सँ हरिश्चंद्र तथा उनक रानी शैव्या क अनेक कष्ट उठावे पडल। 




#Article 713: लक्ष्मी बैंक लिमिटेड (123 words)


लक्ष्मी बैंक नेपाल राष्ट्र बैंकसँ “क” वर्गक इजाजत प्राप्त बैंक छी, र इ. सं. २००६ म बैंक तथा बित्तीय संस्था संबन्धी एैन अन्तर्गत पुनः दर्ता भेल छल। स्थापना इ. सं. २००२,अप्रिल नेपालक सोलअम बैंकक रूपम भेल बैंक अछि। बैंकक शेयर नेपाल स्टक एक्स्चेन्जमा किनबेच होएत अछि। 

बैंकक हाल १.६१ अर्बक चुक्ता पूँजी रहल अछि तहिना सन् २००९ म बैंक पहिल बेर २० प्रतिशत बोनस शेयर लाभांश स्वरूप बाँडने छ्लाह।

पूर्वी नेपाली भेगम बैंकक बहत निक पहुँच रहल अछि ( अनि  को पहुँच)। बैंकको  क संजाल सेहो ८त सँ बेसी मुलुकम सेवा प्रदान करैत अछि।

बैंकका मुख्य मातहतका संस्थाहरू यस प्रकार छन्:

लक्ष्मी बैंक लिमिटेड 
नेपाल राष्ट्र बैंक 
and “लक्ष्मी बैंक – एक्स्प्रेस मनि ट्रान्सफर” (eMT) 
बैंक तथा बित्तीय संस्था एैन  
प्राइम लाईफ इन्स्योरेन्स 




#Article 714: ऋतुपर्ण (अयोध्या के सूर्यवंशी राजा) (136 words)


 अयोध्या के एक सूर्यवंशी राजा छी। ऋतुपर्ण अयोध्याक एक पुराकालीन राजा छल। इनकर पिताक नाम सर्वकाम छल। ई अक्षविद्यामे अत्यन्त निपुण छल। जुवामे राज्य हारि जाएके उपन्रात अपन अज्ञातवासकालमे नल 'बाहुक' नामसँ एकर नजदिक सारथिक रूपमे रहल छल। ओ नलके अपन अक्षविद्या देलक तथा नल सेहो अपन अश्वविद्या इनका देलक। 

नलवियुक्ती दमयंतीक जखन अपन चर पर्णादद्वारा पता चलल की नल ऋतुपर्ण के सारथि के रूपमे रहि रहल अछि तँ ओ ऋतुपर्णक संदेशा भेजलक, नलक किछ भी पता न लगैके कारण हम अपन दोसर स्वयमवर काइल सूर्योदयक समय करि रहल छी, अत: अहाँ समय रहिते कुंडनिपुर पधारव। नल अपन अश्वविद्याक बलसँ ऋतुपर्णक ठीक समय पर कुन्डनिपुर पहुँचा देने तथा ओतय नल आ दमयम्तीक मिलन भेल।

बौधायन श्रौत्रसूत्र (२०,१२)क अनुसार ऋतुपर्ण भंगाश्विनक पुत्र तथा शफालक राजा छल। वायु, ब्रह्म तथा हरिवंश इत्यादि पुराणसभमे ऋतुपर्णक अयुतायुपुत्र बताएल गेल अछि।




#Article 715: इक्ष्वाकु (अयोध्या के सूर्यवंशी राजा) (180 words)


 अयोध्या के एक सूर्यवंशी राजा छी।
इक्ष्वाकु, प्राचीन भारत के इक्ष्वाकु वंशक प्रथम राजा छल। 'इक्ष्वाकु' शब्द 'इक्षु'सँ व्युत्पन्न अछि, जेकर अर्थ ईख होइत अछि।

पौराणिक परम्पराक अनुसार इक्ष्वाकु,  विवस्वान् (सूर्य)क पुत्र वैवस्वत मनुक पुत्र छल। पौराणिक कथा इक्ष्वाकुक अमैथुनी सृष्टिद्वारा मनुक क्षिक्नीसँ उत्पन्न बतावैत अछि। ओ सूर्यवंशी राजासभ मे पहिल मानल जाइत अछि। उनकर राजधानी  कोसल (अयोध्या) छल। उनकर १०० पुत्र बतावल जाइत अछि जाहिमे ज्येष्ठ विकुक्षि छल। इक्ष्वाकु के एक दोसर पुत्र निमि मिथिला राजकुल स्थापित केलक। साधारणत: बहुवचनांतक इक्ष्वाकुसभक तात्पर्य इक्ष्वाकुसँ उत्पन्न सूर्यवंशी राजासभसँ होइत अछि, परन्तु प्राचीन साहित्यमे ओइसँ एक इक्ष्वाकु जातिक सेहो बोध होइत अछि। इक्ष्वाकुक नाम, केवल एक बेर, ऋग्वेदमे सेहो प्रयुक्त भेल अछी जेकरा मेक्समूलर राजाक नै, बल्कि जातिवाचक संज्ञा मानल अछि। इक्ष्वाकुसभक जाति जनपदमे उत्तरी भागीरथीक घाटीमे संभवत: कहियो बैसल छल। किछ विद्वानसभक मतसँ उत्तर पश्चिम के जनपदसभसँ सेहो उनकर सम्बन्ध छल। सूर्यवंशक शुद्ध अशुद्ध सभ प्रकारक वंशावलीसभ देशक अनेक राजकुलसभमे प्रचलित अछि। उनकामे वैयक्तिक राजासभक नाम अथवा स्थानमे चाहे जते भेद हो, उनकर आदि राजा इक्ष्वाकु ही अछि। एहीसँ किछ अजब नै, जे ओ सुदूर पूर्वकालमे कोई ऐतिहासिक व्यक्ति रहल हो।




#Article 716: राजा रवि वर्मा (213 words)


राजा रवि वर्मा (१८४८ - १९०६) भारत के विख्यात चित्रकार छल। ओ भारतीय साहित्य आ संस्कृति के पात्रक चित्रण केलक। उनकर चित्र क सबसँ बडका विशेषता हिन्दू महाकाव्यसभ आ धर्मग्रन्थसभ पर बनाएल गेल चित्र अछि। हिन्दू मिथकसभ क बहुत ही प्रभावशाली प्रयोग उनकर चित्र मे दिखैत अछि। वडोदरा (गुजरात) स्थित लक्ष्मीविलास पैलेस के संग्रहालय मे उनकर चित्र क बहुत बडका संग्रह अछि।

राजा रवि वर्मा क जन्म २९ अप्रैल १८४८ क केरल के एक छोट सँ शहर किलिमानूर मे भेल। पाँच वर्ष क छोट आयु मे ही ओ अपन घर क दीवारसभ क दैनिक जीवन क घटनासभसँ चित्रित करनाई प्रारम्भ करि देने छल। उनकर चाचा कलाकार राजा राजा वर्मा उनकर प्रतिभा क पहचानलक आ कला क प्रारम्भिक शिक्षा देलक। चौदह वर्ष क आयु मे ओ उनका तिरुवनंतपुरम लके चलि गेल जतय राजमहल मे उनकर तैल चित्रण क शिक्षा भेल। बाद मे चित्रकला के विभिन्न आयाम मे दक्षता के लेल ओ मैसूर, बड़ौदा आ देश के अन्य भागसभ क यात्रा केलक। राजा रवि वर्मा क सफलता क श्रेय उनकर सुव्यवस्थित कला शिक्षा क जाइत अछि। ओ पहिले पारम्परिक तंजौर कला मे महारत प्राप्त केलक आ फेर यूरोपीय कला क अध्ययन केलक। 

डाक्टर आनंद कुमारस्वामी उनकर चित्र क मूल्यांकन करि कलाजगत मे उनका सुप्रतिष्ठित केलक। ५७ वर्ष क उमर मे १९०५ मे उनकर देहान्त भेल।




#Article 717: विपिन चन्द्र पाल (199 words)


बिपिन चंद्र पाल (बांग्ला:বিপিন চন্দ্র পাল) (७ नवंबर, १८५८ - २० मई १९३२) एक भारतीय क्रांतिकारी छल। भारत के स्वतंत्रता आंदोलनक बुनियाद तैयार करै मे प्रमुख भूमिका निभावे वाला लाल-बाल-पाल क तिकडी मे सँ एक विपिनचंद्र पाल राष्ट्रवादी नेता होए के साथ-साथ शिक्षक, पत्रकार, लेखक आ बेहतरीन वक्ता सेहो छल आ उनका भारत मे क्रांतिकारी विचारक जनक सेहो मानल जाइत अछि।

लाला लाजपत राय, बालगंगाधर तिलक एवं विपिनचन्द्र पाल (लाल-बाल-पाल) क ई तिकडी १९०५ मे बंगाल विभाजनक विरोधमे अङ्ग्रेजी शासनक विरुद्ध आंदोलन केलक जेकरा पैग मात्रा पर जनताक समर्थन मिलल। 'गरम' विचार के लेल प्रशिद्ध ई नेतासभ अपन बात तत्कालीन विदेशी शासक तक पहुँचावे के लेल कतेक एहन तरीकासभ पैदा केलक जे एकदम नव छल। ई तरीका मे ब्रिटेन मे तैयार उत्पादक बहिष्कार, मैनचेस्टर क मिल मे बनल कपडा सँ परहेज, औद्योगिक तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठान मे हडताल आदि शामिल अछि।

ओ महसूस केलक कि विदेशी उत्पादक कारणसँ देशक अर्थव्यवस्था खस्ताहाल भ रहल अछि आ एतय के लोग क काम सेहो छिन रहल अछी। ओ अपन आंदोलन मे ई विचारक सेहो आगा रखलक। राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान 'गरम धडे' के अभ्युदयक महत्वपूर्ण मानल जाइत अछि किया कि एहीसँ आंदोलनक एक नयाँ दिशा मिलल आ एहीसँ लोग के बीच जागरुकता बढल।




#Article 718: सुषमा सेठ (126 words)


सुषमा सेठ भारतीय सिनेमा, टीवी आ रंगमन्चक जानल मानल अभिनेत्री छी। अपन अभिनय सफरक शुरुवात ओ ७० के दशकमे केलक। ओ सबसँ अधिक हिन्दी चलचित्र मे नायकके माँ के किरदार निभाने अछि। प्रेम रोग, राम तेरी गंगा मैली, चाँदनी, दीवाना, कभी खुशी कभी गम आ कल न न हो जेहन चर्चित चलचित्र मे ओ काम केने अछि। 

सुषमा कतेक टीवी धारावाहिक मे सेहो काम केलक जेना कि हम लोग आ देख भाई देख। ८० के पूर्वार्ध मे दूरदर्शन पर प्रसारित पहिल सोप ओपेरा हम लोग मे उनकर द्वारा निभाएल दादी क किरदार बेहद लोकप्रिय रहल। दादीक गला के कैंसरसँ पीडीत दिखाएल गेल छल, ओ मृत्युक कगार पर छल पर ई सुषमाक लोकप्रियता ही छल जेकर कारण ई किरदारक उम्रक दर्शक के माँग पर बढावे पडल ।




#Article 719: फुटबल (186 words)


एसोसिएशन फुटबल जकरा प्राय: फुटबल (अङ्ग्रेजी: फुट: लात वा पद, बल) वा सकर कहल जाइत अछि, ई संसारक लोकप्रिय खेलसभमे सँ एक छी । ई एकटा सामूहिक खेल छी आ एकरा ११/११ खेलाडीसभक दुई सममूह बीच खेलल जाइत अछि । फुटबलकें सामान्यत: एकटा आयताकार घाँस वा कृत्रिम घाँस भेल मैदानमे खेलल जाइत अछि जकरा अन्तिममे एकटा गोलपोस्ट होइत अछि । खेलाडीसभद्वारा विरोधी समूहको गोलपोस्टमे अपन चालाकीद्वारा फुटबलके गोल करनाए ई खेलक उद्देश्य छी । खेलमे गोलरक्षक मात्र एकटा एहन खेलाडी होइत अछि जे फुटबल रोकैक लेल अथवा बचाबैक लेल अपन हात प्रयोग करैक अनुमति होइत अछि । समूहक बाँकी खेलाडी प्रायजका फुटबलकें प्रहार (किक)क लेल अपन टाङ्गक प्रयोग करैत अछि । तथा कहियो काल हावामे बल रोकैक लेल अपन छाती या कपारक प्रयोग करैत अछि । जुन समूह खेलक अन्त वा समय समाप्तिधरि बेसी गोल करैमे सफल होइत अछि अन्त्यमे ओ टिम विजय घोषित होइत अछि  । खेलक अन्त अर्थात समय समाप्तिधरि यदि स्कोर बराबर भेलापर ओ खेलकें बराबर वा ड्र घोषित कएल जा सकैत अछि वा खेलकें अतिरिक्त समयमे ल जाए पेनाल्टी शुट आउट द्वारा जितहारक निर्णय करनाए प्रतियोगिताक स्वरुप उपर निर्भर होइत अछि ।




#Article 720: क्रिस्टियानो रोनाल्डो (835 words)


क्रिस्टियानो रोनाल्डो डस सान्तोस (जन्म: ५ फेब्रुअरी १९८५, चर्चित नाम: क्रिस्टियानो रोनाल्डो) पोर्चुगल राष्ट्रिय फुटबल टिम तथा रियल म्याड्रिडक अग्रपङ्क्तिक फुटबल खेलाडी छी । ओ  पोर्चुगल राष्ट्रिय फुटबल टिमक कप्तान सेहो छी । ओ बाइस वर्ष कऽ उमरमे फिफा बेलन डि'ओर आ फिफा विश्व बर्ष खेलाडी उपाधिक लेल मनोनित भेल छल । ओ सन् २००८ मे अपन जीवनक पहिल फिफा बेलन डि'ओर आ फिफा विश्व वर्ष खेलाडीक उपाधि जित्न सफल भेल छला । ओ विश्व फुटबलक सबसँ महान् खेलाडीमे सँ एक छी ।

रोनाल्डो म्यानचेस्टरसँ रियल म्याड्रिडमे स्थानान्तरण होइत समय संसारक सबसँ महग खेलाडी बनल छल यद्यपी हुनकर ई किर्तिमान हुनकरे समकक्षी ग्यारेथ बेलद्वारा सन् २०१३ मे तोडल गेल छल । रोनाल्डोद्वारा अपन युवा करियर एन्डोरिन्हासँ प्रारम्भ केनए छल जतय ओ दुई बर्ष बितेनाए छल । सन् १९९७ मे ओ स्पोर्टिङ सिपिके चुनैसँ पहिने ओ नेकियोनल क्लब कऽ लेल सेहो खेलैत छल । सन् २००३ मे ओ अपन उत्कृष्ट खेल शैलीक कारण म्यानचेस्टर युनाइटेडक प्रशिक्षक सर एलेक्स फर्गुसन कऽ ध्यान आकर्षण केनए छल, जे हुनका €१५ मिलियनमे अपन क्लबमे आबद्द करौलक । सन् २००८, सन् २०१३ तथा सन् २०१४ मे फिफा/ बलोन डी'ओर अवार्ड जितैमे सफल रोनाल्डो सन् २००८, सन् २०११ आ सन् २०१४ कें युरोपियन गोल्डेन बुट विजेता सेहो छी ।

रोनाल्डोक जन्म पोर्चुगलक फञ्चल, म्याडेइराक एक बस्ती सान्तो आन्तोनियोमा ५ फरबरी १९८५  दिन माता मारिया डोलोरेस डस सान्तोस अभेइरो आ पिता होजे डिनिस अभेइरोका छोट सन्तानक रूपमे भेल छल  । क्रिस्टियानो रोनाल्डोक एक भाई ह्युगो आ दुई दिदी एल्मा आ लिलाना कातिया अछि । क्रिस्टियानो रोनाल्डोक नामक दोश्रो भाग रोनाल्डो पोर्चुगलमे  अपेक्षाकृत दुर्लभ अछि । हिनकर मातापिता  ई नाम ओहिसमयक अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रेगनक नाममे  राखने छल  कियाकी रोनाल्ड रेगन हिनकर पिताक मन परल  अभिनेता छल  ।

रोनाल्डो १६ वर्षक होएत कल  हिनकर ड्रिबलिङ  क्षमतासँ प्रभावित भऽ स्पोर्टिङ सिपीक प्रशिक्षकसँ हुनका युवा टिमसँ मुख्य टिममे  बढुवा केलक।  ओ एकै सिजनमे  क्लबक १६ वर्ष निचाक उमेर समूह, १७ वर्ष निचाक उमेर समूह, १८ वर्ष निचाक उमेर समूह, बी टिम आ मुख्य टिमसँ खेलैवाल पहिल खेलाडी बनल । सन २००२ अक्टूबर ७ मे  ओ पोर्चुगलक प्रिमियर लिगक पहिल खेलमे  दुई गोल केलक जे  खेलमे  उनकर टिम ३-०  विजयी भेल । 
स्पोर्टिङ आ म्यानचेस्टर युनाइटेडबिच सन् २००३ अगस्टमे  लिस्बनमे  भेल  खेलमे  युनाइटेड ३-१ ले पराजित होएत युनाइटेडक खेलाडीसभ आ प्रशिक्षक सर एलेक्स फर्गुसन रोनाल्डोक खेल कौशलसँ अत्याधिक प्रभावित भेल । एहि खेलसँ रोनाल्डोके  युनाइटेडमे  स्थानान्तरण करैल मुख्य भूमिक खेलक।  फर्गुसन ओहिसमय रोनाल्डोके  अपन जीवनमे भेटेल सर्वोत्कृष्ट युवा खेलाडीमध्ये एक बनल छल । रोनाल्डो स्पोर्टिङसँ बाहिरिएल  एक दशक पछा सन् २०१३ अप्रिलमे  क्लबसँ हुनका क्लबक १००,०००अम सदस्य बना सम्मान केने अछि।

सन २००३-०४  सिजन अगाडि म्यानचेस्टर युनाइटेडमे  अनुबन्धित भेल  रोनाल्डो क्लबमे  खेलैल पोर्चुगलक पहिल खेलाडी बनल । £१२.२४ मिलियनमे  भित्र्याएल  ओ उक्त समयमे  बेलायतक फुटबल इतिहासमे  सर्वाधिक महङ्गा किशोर खेलाडी भेल छल। ओ २८ नम्बरक जर्सीक माग केने छल  कियाकी  ई नम्बर स्पोर्टिङमे  लावने  छल  मुदा ओ ७ नम्बरक जर्सी पावलक जे  नम्बर क्लबक प्रभावशाली खेलाडीसभ जहिना जर्ज बेस्ट, इरिक क्यान्टोना, डेभिड बेक्ह्याम आदि लावैत छल । यसले उनलाई थप उत्साहित बनायो, हुनका  ३ वर्षभितर विश्वक सर्वश्रेष्ठ खेलाडी मध्ये एक बनैल  लक्ष्य राखलक। रोनाल्डोक खेल जीवनके  उचाईमे  पुचावैल  म्यानचेस्टर युनाइटेडक प्रशिक्षक सर एलेक्स फर्गुसनक महत्वपुर्ण भूमिका रहयो। रोनाल्डो कहैने अछि,  फुटबल खेलमे  फर्गुसन हमर  पिता छी, हमर जीवनक एक बहुत  महत्वपुर्ण आ प्रभावशाली व्यक्ति छथि। 

सन २००३ अगस्त १६ मे oरोनाल्डो युनाइटेडक लेल  पहिल खेल खेलक। बोल्टोन वान्डरर्स विरुद्ध युनाइटेड ४-० ले विजयी भेल  प्रिमियर लिगक खेलक ६०अम मिनेटमे  रोनाल्डो मैदान प्रवेश करैत सब दर्शक  स्वागत केने छल । उक्त खेलमे  रोनाल्डोक प्रदर्शनके  पूर्व म्यानचेस्टर युनाइटेड खेलाडी जर्ज बेस्ट सबसँ आकर्षक पहिल खेल बनल छल ।  युनाइटेडक लेल  रोनाल्डो पहिल गोल ओही नवम्बर १ मे  फ्री किक मार्फत केलक, उक्त खेलमे  पोर्टस्माउथ ३-०  पराजित भेल । उक्त सिजन लिगमे  रोनाल्डो थप तीन गोल केलक। उक्त सिजन लिगक अन्तिम दिन एस्टन भिल्लाविरुद्ध हुनका एक गोल करैके  साथै पहिल बेर लाल कार्ड सेहो पावलक। एफए कपमे  मिलवाल एफसी विरुद्ध ३-० क जितमे  पहिल गोल केने  रोनाल्डो युनाइटेडमे  पहिल उपाधि जितैत अपन पहिल सिजन बिताएलक।

सन् २००४-०५  सिजनमे  उत्कृष्ट खेल  अपन विकासक्रम जारी राखलक।   विङ्गसँ खेल अत्याधिक गोल नै करै सेहो ओ सन् २००५-०६ क सिजनमे  तीन खेलमे  दुई/दुई गोल केलक।   सन् २००५ अक्टोबर २९ मे  ओ प्रिमियर लिगमे  युनाइटेडक १००० अम गोल केलक मुदा  उक्त खेलमे  युनाइटेड पराजित भेल । ओही सिजनक मध्यदिश ओ क्लबसँगक अनुबन्ध दुई वर्ष थप सन् २०१० तक पुर्‍याएलक। सन् २००५-०६ कऽ लिग कप फाइनलमे गोल करैत ओ युनाइटेडक लेल  दोसर उपाधि जितलक।

सन् २००६-०७ कऽ सिजनमे  युइएफएर च्याम्पियन्स लिगक उत्कृष्ट आठक खेलमे  रोमा क्लब विरुद्ध युनाइटेड ७-१ कऽ जित निकाल्दा रोनाल्डो दुई गोल करैत च्याम्पियन्स लिगमे  गोलक खाता खोलक।  सन् २००७ मे ५ को म्यानचेस्टर डर्बीमे  एक गोल करैत ओ युनाइटेडक लेल  गोल सङ्ख्या ५० पुर्‍याएलक। ओही सिजन युनाइटेड चार वर्ष पछा फेर लिगक उपाधि जितक। उत्कृष्ट प्रदर्शनक कारण रोनाल्डो पिएफए (Professional Footballers' Association: व्यवसायिक फुटबल खेलाडी सङ्गठन) वर्ष खेलाडी, पिएफए फ्यान वर्ष खेलाडी, पिएफए युवा वर्ष खेलाडी तथा एफडब्लुए (Football Writers' Association: फुटबल पत्रकार सङ्गठन) वर्ष खेलाडीक उपाधि जितलक। ई चार उपाधि एकैसाथ जितैल ओ पहिल खेलाडी बनल। क्लबसँ उनकर तलब बढा £१२०,००० प्रतिहप्ता पुर्‍यालक  ओ पाँच वर्षक लेल  अनुबन्ध बढाउन सहमति जनालक।




#Article 721: मकबुल फिदा हुसैन (134 words)


 
मकबुल फिदा हुसैन (जन्म सितम्बर १७, १९१५, पन्ढरपुर), (मृत्यु जून ०९, २०११, लन्डन),एम एफ हुसैनक नामसँ जानल जाए वला भारतीय चित्रकार छल।

एक कलाकारक तौर पर हुन्का सबसँ पहिल १९४०के दशकमे ख्याति मिलल। १९५२मे हुन्कर पहिल एकल प्रदर्शनी ज्युरिकमे भेल छल। एकर बाद हुन्कर कलाकृतिसभकक अनेक प्रदर्शनिसभ यूरोप आर अमेरिकामे सेहो भेल।

१९६६मे भारत सरकार द्वारा हुन्का पद्मश्रीसँ सम्मानित कएल गेल। जेकर एक सालक बाद ओ अपन पहिल फिल्म बनेलक: थ्रू द आइज आफ अ पेन्टर (चित्रकार की दृष्टि से)। इ फिल्म बर्लिन उत्सव]मे देखाएल गेल आर हुन्का 'गोल्डेन बियर'सँ पुरस्कृत कएल गेल।

हुसैन बहुत छोट छल जखन हुन्कर माएकs देहान्त भs गेल। जकर बाद हुन्कर पिता इन्दौर चल गेल ओही ठाम हुसैनकs प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त भेल छल।

भारतीय देवी-देवतासभ पर बनाएल, हिनकर विवादित पेन्टीङ्ग कs लकs भारतक बहुतो जगहमे प्रदर्शन सेहो भेल छल। 




#Article 722: मङ्गोलिया (162 words)


मङ्गोलिया चीनक उत्तर आ रुसक दक्षिणमे अवस्थित एक भूपरिवेष्ठित राष्ट्र छी। एकर राजधानी उलानबटोर छी।
Deer stones in Mongolia

एकर जनसंख्या २८ लाख अछि । 

मङ्गोल साम्राज्य सन् १२०६मे चंगेज खाँ स्थापना केने छल । मङ्गोलियामे चीन दुई सय वर्ष शासन केलक तँ पूर्वसोभियत संघ एकरा ७० वर्ष नियन्त्रणमे लेलक । ई सन् १९११मे चीनसँ स्वतन्त्रताक घोषणा करलाक बाद पूर्ण स्वतन्त्रता तँ सन् १९२१मे मात्र पावने अछि । परन्तु, ई विश्व समुदायसँ अलग मुलुकक रूपमे सन् १९४५मे मात्र मान्यता पावने छल । परन्तु, सन् १९२४ सँ मङ्गोलिया पुनः सोभियत संघक नियन्त्रण -प्रभावमे गेल । सन् १९८९मे सोभियत संघ विघटन भेलाक बाद सन् १९९०मे मङ्गोलियामे सेहो लोकतान्त्रिक आन्दोलन भेल । सन् १९९२मे नयाँ लोकतान्त्रिक संविधान बनलाक बाद मङ्गोलिया संसदीय व्यवस्था आ उदार अर्थतन्त्रक युगमे प्रवेश केलक ।

मङ्गोलियाक दक्षिण, पूर्व आ पश्चिममे चीन आ उत्तरमा रुस अछि । मङ्गोलिया क्षेत्रफलक दृष्टिसँ काजकस्तान के बाद दोसर पैग भूपरिवेष्ठित मुलुक छी। मङ्गोलियाक राजधानी उलानबटोर विश्वमे सबसँ अधिक ठण्डा होए वाला राजधानी मानल जाइत अछि । 




#Article 723: सम्राट अशोक (191 words)


अशोक (राज्यकाल ईसापूर्व २७३-२३२) प्राचीन भारतमे मौर्य राजवंशक चक्रवर्ती राजा छल । उनकर मौर्य राज्य उत्तरमे हिन्दुकुशक की श्रेणीसँ लके दक्षिणमे गोदावरी नदीक दक्षिण तथा मैसूरतक तथा पूर्वमे बंगालसँ पश्चिममे अफगानिस्तान तक पुगल छल। ई ओही समयतक के सबसँ पैग भारतीय साम्राज्य छल। सम्राट अशोक अपन विशाल साम्राज्यक बढिया आ कुशल प्रशासन तथा बौद्ध धर्मक प्रचारक लेल जानल जाइत अछि।

जीवनक उत्तरार्धमा अशोक भगवान गौतम बुद्धक भक्त भेल आ ओही स्मृतिमे ओ एकटा स्तम्भ खडा करि देलक जे आई तक नेपालमे उनकर जन्मस्थल - लुम्बिनी मे मायादेवी मन्दिरक बगलमे अशोक स्तम्भक रुपमे देख सकैत छी। ओ बौद्ध धर्मक प्रचार भारत लगायत श्रीलंका, अफगानिस्थान, पश्चिम एसिया, इजिप्ट तथा ग्रीकमे सेहो करेलक।

अशोक मौर्य सम्राट बिन्दुसार तथा रानी धर्माक पुत्र छल। कहल जाइत अछि कि धर्मा एकटा ब्राह्मणक बेटी छल । एक दिन ओ स्वप्न देखलक कि उनकर बेटा एकटा पैग सम्राट बनत । ओकर बाद उनका राजा बिन्दुसार अपन रानी बनेलक। जब कि धर्मा कोनो क्षत्रिय कुलसँ नै छल तसर्थ उनका राजकुलमे कोनो विशेष स्थान प्राप्त नै छल। अशोकक बहुत भाई-भैया (सौतेली)-बहीन छल। बाल्यकालमे ओ सभमे कडा प्रतिस्पर्धा होइत छल। अशोकक बारेमा कहल जाइत अछि कि ओ बाल्यकालसँ सैन्य गतिविधिसभमे प्रवीण छल।




#Article 724: चेकोस्लोभाकिया (110 words)


चेकोस्लोभाकिया  () मध्य युरोपमे अवस्थित एक देश होइत छल जे अक्टुबर १९१८ सँ १९९२ तक अस्तित्वमे रहल । द्वितीय विश्वयुद्धक दौरान सन् १९३९ सँ सन् १९४५ क एक अन्तरालमे एकरा जबरदस्ती जर्मनीमे विलय करि देल गेल याह लेल वास्तविकतामे ई देश ओ जमानामे अस्तित्वमे नै छल, हालांकि औपचारिक रूपसँ मित्रपक्ष शक्तिसभ तखनो एकरा मान्यता दैत रहल । सन् १९४५ मे सोभियत संघ एकर एक पूर्वी हिस्साकें चेकोस्लोभाकियासँ अलग करि अपन क्षेत्रक भाग बनाए लेलक । शीत युद्ध कालमे चेकोस्लोभाकिया पर साम्यवाद (कम्युनिस्ट) शासन रहल आ ई देश सोभियत संघके नेतृत्वमे गठित वारसा सन्धिके मित्रपक्षमे शामिल छल । सोभियत संघक अलगावक बाद सन् १९९० मे एतौ साम्यवाद खत्म भऽ गेल । 




#Article 725: बङ्गालक खाडी (192 words)


 बङ्गालक खाडी विश्वक सबसँ बड खाडी छी  आ हिन्द महासागरक पूर्वोत्तर भाग छी। ई मोट रूपमे त्रिभुजाकार खाडी छी जे पश्चिमी दिशासँ अधिकांशतः भारत एवम शेष श्रीलंका, उत्तरसँ बङ्गलादेश एवम पूर्वी दिशासँ  बर्मा (म्यानमार) तथा अन्डमान एवम निकोबार द्वीपसमूहसँ घेरल अछि। बङ्गालक खाडीक क्षेत्रफल २,१७२,००० कि.मी. अछि। प्राचीन हिन्दू ग्रन्थक अनुसार एकरा महोदधि  कहल जाइत छल।

बङ्गालक खाडी २१७२०००  कि.मी. के क्षेत्रफलमे विस्तृत अछि, जाहिमे सबसँ बड नदी गङगा तथा ओकर सहायक पद्मा एवम हुगली, ब्रह्मपुत्र एवम ओकर सहायक नदी जमुना एवम मेघनाक अलावा अन्य नदिसभ जेना इरावती, गोदावरी, महानदी, कृष्णा, कावेरी आदि नदिसभ सागरसँ संगम करैत अछि। एहीमे स्थित मुख्य बन्दरगाहमे चेन्नई, चटगाँव, कोलकाता, मोङ्गला, पारादीप, तूतीकोरिन, विशाखापट्टनम एवम यानगोन अछि। 

अंतरराष्ट्रीय जल सर्वेक्षण संगठन बङ्गालक खाडीक परिधि ई प्रकार बतौने अछि::

प्राचीन हिन्दू ग्रन्थों एवम मान्यता अनुसार बङ्गाल कऽ खाड़ी नामक जलराशि के महोदधि नामसँ जानल जाइत छल । एकरा अलावा अन्य मध्यकालीन मानचित्रों मे एहिके साइनस गैन्जेटिकस आ गैन्जेटिकस साइनस, अर्थात गंगा कऽ खाड़ी नामसँ सेहो  दिखाने  अछी।
१०अम शताब्दी मे चोल राजवंश कऽ नेतृत्त्व मे निर्मित ग्रन्थों मे एहिक चोल सरोवर नाम सेहो देने अछी। कालान्तर मे एही बङ्गाल क्षेत्र कऽ नाम पर बङ्गाल कऽ खाड़ी नाम मिलल।




#Article 726: वासुदेव बलवन्त फडके (163 words)


वासुदेव बलवन्त फडके (४ नवम्बर १८४५ – १७ फरवरी १८८३) भारतके स्वतंत्रता सङ्ग्रामक क्रान्तिकारी छल जिनका आदि क्रान्तिकारी कहल जाइत अछि। ओ ब्रिटिश कालमे किसानसभक दयनीय दशाक देख करि विचलित भ गेल छल। उनकर दृढ विश्वास छल कि 'स्वराज' ही ई रोगक दवाई अछि। 

जिनकर केवल नाम लै सँ युवकसभमे राष्ट्रभक्ति जागृत भा जाइत छल, एहन छल वासुदेव बलवन्त फडके। ओ भारतीय स्वतंत्रता सङ्ग्रामक आद्य क्रान्तिकारी छल। ओ स्वतंत्रता प्राप्तिक लेल सशस्त्र मार्गक अनुसरण केलक। अङ्ग्रेजक विरुद्ध विद्रोह करैके लेल लोगसभक जागृत करैके कार्य वासुदेव बलवन्त फडके केने छल। महाराष्ट्रक कोळी, भील तथा धाङ्गड जातिसभक एकत्र करि ओ 'रामोशी' नामक क्रान्तिकारी संगठन खडा केलक। अपन ई मुक्ति सङ्ग्रामक लेल धन एकत्र करैके लेल ओ धनीक अङ्ग्रेज साहुकारसभक लूटने छल। 

फडकेक तखन विशेष प्रसिद्धि मिलल जब ओ पुणे नगरक किछ दिन के लेल अपन नियन्त्रणमे ल लेने छल। २० जुलाई १८७९मे ओ बीजापुरमे पकडमे आवि गेल। अभियोग चला करि उनका काला पानीक दण्ड देल गेल। अत्याचारसँ दुर्बल भ एडनके कारागृहमे उनकर देहान्त भ गेल।




#Article 727: वी.पी. कोइराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान (244 words)


वी.पी. कोइराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान () स्वशासित, आत्मनिर्भर स्वास्थ्य विश्वविद्यालय छी । ई पूर्वी नेपालक सुनसरी जिलाक धरान नगरपालिकामे सन् १९९३ मे स्थापना भेल अछि ।

वी.पी. कोइराला स्वास्थय विज्ञान प्रतिष्ठान १९९३ मे स्थापना भ सन् १९९८ स्वास्थ्य विश्वविद्यालयक रुपमे परिणत भेल अछि । मुलुकक लेल आवश्यक जनशक्तिक उत्पादन करैत स्वास्थ्य क्षेत्रमे आत्मनिर्भर होएके उद्देश्य प्राप्त करैके क्रममे शुरु कएल गेल एम.बी.बी.एस. शिक्षण कार्यक्रम हालतकमे आविधरि एम.एम.बी.बी.एस. लगायत बी.डीं.एस., बी.एस्सी. नर्सिंंग, प्रमाणपत्रतह नर्सिंग, व्याचलर अफ नर्सिंग, बी.एम.एल.टी, बी.एस्सी.एम.आई.टी.आ विभिन्न विषयसभमे पोष्टग्राजुएट जेना एम.डी.एम.एस., एम.डी.एस., एम.एस्सी. नर्सिंग, एम.पी.एच, डीएम/एमसीएच, फेलोसिप इन इमर्जेन्सी मेडिसिन, एम.डी.एच. कार्यक्रमहरुमा पठनपाठन शुरु भ चुकल अछि ।  

वी.पी. कोईराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान बीजारोपणक ऐतिहासिक क्षण सम्बत २०४७ साल फागुन ३ गते (फेबु्रवरी १५, १९९१) छी । ओही दिन बिराटनगरमे आयोजित एक सार्वजनिक सभामे ई संस्था खडा करैके लेल नेपाल भ्रमणमे रहल तत्कालिन भारतीय प्रधानमन्त्री श्री चन्द्रशेखर भारतीय सहयोग प्राप्त होएके वचन देलाक बाद स्व. प्रधानमन्त्री गिरीजा प्रसाद कोइरालाक भारत भ्रमणक अवसरमे भारत नेपाल उच्चस्तरीय कार्य दल नेपालमे भूतपूर्व प्रधानमन्त्री स्व. विश्वेश्वरप्रसाद कोइरालाक नाममे एक मेडिकल कलेज स्थापना करैके सहमति जनेलक । प्रतिष्ठानक स्वशासित संस्थाक रुपमे संचालन करैके लेल संसद २०४९ माघ ५ गते (१८ जनवरी १९९३)े वी.पी. कोइराला स्वास्थ्य बिज्ञान प्रतिष्ठान ऐन पारित केलक आ नेपाल-भारतक प्रधानमन्त्रीसभद्धारा १० मार्च १९९४ क दिन प्रतिष्ठानक ३५० शैयाक एक अस्पताल आ ५० गोटेक स्थान द के मेडिकल कलेज बनावेके सहमतिपत्रमे हस्ताक्षर भेल । तत्कालिन प्रधानमन्त्री गिरिजा प्रसाद कोइराला १९ अक्टोबर १९९४ मे ३५० शैया अस्पतालक निर्माणक शिलान्यासक साथे एम.बी.बी.एस कक्षा संचालनक शुभारम्भ केलक ।




#Article 728: मदन मोहन मालवीय (163 words)


महामना मदन मोहन मालवीय  (२५ दिसम्बर १८६१ - १९४६) काशी हिन्दू विश्‍वविद्यालयक प्रणेता छलाह सँगे ओ युगक आदर्श पुरुष सेहो छलाह । ओ  भारतक पहिल आ एहन अन्तिम व्यक्ति छल जिनका महामनाक सम्मानजनक उपाधिसँ विभूषित कएल गेल छल । पत्रकारिता, आन्दोलक, समाज सुधारक, मातृभाषा तथा भारतमाताक सेवामे अपन जीवन समर्पण केनिहार ओ महान व्यक्तित्व जे  विश्वविद्यालयक स्थापना केनए छल जाहिमे हिनकर परिकल्पनामे एहन विद्यार्थीसभ शिक्षित होए जे देशक सेवाक लेल तयार करि देशक शिर गौरवसँ उच्च भऽ सकए । मालवीयजी सत्य, ब्रह्मचर्य, व्यायाम, देशभक्ति आ आत्मत्यागमा अद्वितीय छ्लाह । ई सम्पूर्ण आचरणमे ओ मात्र उपदेशक नै भऽ स्वयं ओ सभक लेल पालन कर्ताकें रुपमे सेहो रहल छल । ओ अपन व्यवहारमे सदैव मृदुभाषी रहल आ कर्म हि हुनकर जीवन छल । अनेको संस्थासभक संस्थापक तथा सफल सञ्चालक रुपमे सेहो अपन नियम कानून व्यवस्थाक सुचारू रखैत ओ कहियो  रिस आ द्वेस आ कड़ा स्वरमे किनको मन नै दुखेलक । भारत सरकार द्वारा २४ दिसम्बर २०१४ मे हुनका भारत रत्नसँ सम्मानित कएल गेल छल ।




#Article 729: मोतीलाल नेहरू (196 words)


मोतीलाल नेहरू (जन्म: ६ मई १८६१ – मृत्यु: ६ फरवरी १९३१) इलाहाबाद के एक प्रशिद्ध वकील छल। ओ भारतक प्रथम प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरूक पिता छल। ओ भारतक स्वतन्त्रता सङ्ग्रामक आरम्भिक कार्यकर्तासभमे सँ छल।

१९२८ सँ १९२९ तक पूरा दुई वर्षतक ओ कांग्रेसक राष्ट्रीय अध्यक्ष रहल।

मोतीलाल नेहरूक जन्म आगरामे भेल छल। उनकर पिताक नाम गंगाधर छल। ओ पश्चिमी ढँगक शिक्षा पावे वाला प्रथम पिढीक गिनल-चुनल भारतीसभमे सँ छल। ओ इलाहाबाद के म्योर सेन्ट्रल कलेजमे शिक्षित भेल किन्तु बी०ए०क अन्तिम परीक्षा नै द पावल। बादमे ओ कैम्ब्रिज से बार ऐट ल क उपाधि लेलक आ अङ्ग्रेजी न्यायालमे वकीलक रूपमे कार्य प्रारम्भ केलक।

मोतीलाल नेहरू क पत्नी क नाम स्वरूप रानी छल। जवाहरलाल नेहरू उनकर एकमात्र पुत्र छल। उनकर दुई कन्या सेहो छल। उनकर बड बेटीक नाम विजयलक्ष्मी छल, जे आगा जाके विजयलक्ष्मी पण्डितक नामसँ प्रशिद्ध भेल। उनकर छोटकी बेटीक नाम कृष्णा छल। जे बादमे कृष्णा हठीसिंह कहलेलक।

परन्तु आगा जाके ओ अपन वकालत छोडी भारतके स्वतन्त्रता सङ्ग्राममे कार्य केने छल। १९२३ मे ओ देशबन्धु चित्तरन्जन दास क साथ काँग्रेस पार्टीसँ अलग भ अपन स्वराज पार्टीक स्थापना केलक। १९२८मे कोलकातामे भेल काँग्रेस अधिवेशनक ओ अध्यक्ष चुनल गेल। १९२८ मे काँग्रेसद्वारा स्थापित भारतीय संविधान आयोगक सेहो ओ अध्यक्ष बनल।




#Article 730: लाला लाजपत राय (223 words)


लाला लाजपत राय ( पञ्जाबी: ਲਾਲਾ ਲਾਜਪਤ ਰਾਏ, जन्म: २८ जनवरी १८६५ - मृत्यु: १७ नवम्बर १९२८) भारत के एक प्रमुख स्वतन्त्रता सेनानी छल। इनका पञ्जाब केसरी सेहो कहल जाइत अछि। ओ पञ्जाब नैशनल बैंक आ लक्ष्मी बीमा कम्पनीक स्थापना सेहो केने छल। ओ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसमे गरम दलक तीन प्रमुख नेतासभ लाल-बाल-पालमे सँ एक छल। सन् १९२८मे ओ साइमन कमीशनक विरुद्ध एक प्रदर्शनमे हिस्सा लेलक, जेकर दौरान भेल लाठी-चार्जमे ओ खराब तरहसँ घायल भ गेल आ अन्तत: १७ नवम्बर सन् १९२८मे इनकर महान आत्मा पार्थिव देह त्याग द देलक।

लाला लाजपत रायक जन्म पञ्जाबक मोगा जिलामे एक हिन्दु कलाल परिवारमे भेल छल। ओ किछ समय हरियाणाक रोहतक आ हिसार शहरमे वकालत केलक। ओ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसक गरम दलक प्रमुख नेता छल। बाल गंगाधर तिलक आ विपिन चन्द्र पालक साथ ई त्रिमूर्तिक लाल-बाल-पालक नामसँ जानल जाइत छल। एही तीन नेतासभ सबसँ पहिले भारतमे पूर्ण स्वतन्त्रताक माँग केने छल बादमे समूचा देश इनकर साथ भ गेल। ओ स्वामी दयानन्द सरस्वतीक साथ मिलके आर्य समाजक पञ्जाबमे लोकप्रिय बनेलक। लाला हंसराजक साथ दयानन्द एङ्गलो वैदिक विद्यालयक प्रसार केलक भाग जेकरा आइ काइल डीएवी स्कूल्स आ कलेजक नामसँ जानल जाइत अछि। लालाजी अनेक स्थानसभमे अकालमे शिविर लगाके लोगक सेवा सेहो केने छल। ३० अक्टूबर १९२८मे ओ लाहौरमे साइमन कमीशन के विरुद्ध आयोजित एक विशाल प्रदर्शनमे हिस्सा लेलक, जेकर दौरान भेल लाठी-चार्जमे ओ खराब तरहसँ घायल भ गेल। 




#Article 731: गोपाल कृष्ण गोखले (190 words)


गोपाल कृष्ण गोखले (९ मई १८६६ - फरवरी १९, १९१६) भारत एक स्वतन्त्रता सेनानी, समाजसेवी, विचारक एवम सुधारक छल। महादेव गोविन्द रानाडेक शिष्य गोपाल कृष्ण गोखलेक वित्तीय मामलाक अद्वितीय समझ आ ओही पर अधिकारपूर्वक बहस करैके क्षमतासँ उनका भारतक 'ग्लेडस्टोन' कहल जाइत अछि। ओ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसमे सबसँ प्रसिद्ध नरमपन्थी छल। चरित्र निर्माणक आवश्यकतासँ पूर्णत: सहमत भ ओ १९०५ मे सर्वेन्ट्स अफ इण्डिया सोसायटीक स्थापना केलक ताकि नौजवानक सार्वजनिक जीवन के लेल प्रशिक्षित कएल जा सकी। उनकर माननाइ छल कि वैज्ञानिक आ तकनीकी शिक्षा भारतक महत्वपूर्ण आवश्यकता छी। स्व-सरकार व्यक्तिक औसत चारित्रिक दृढता आ व्यक्तिक क्षमता पर निर्भर करैत अछि। महात्मा गान्धी उनका अपन राजनीतिक गुरु मानैत छल।

गोपालकृष्ण गोखलेक जन्म रत्‍‌नागिरी कोटलुक ग्राममे एक सामान्य परिवारमे कृष्णराव के घर ९ मई १८६६ मे भेल। पिताक असामयिक निधन गोपालकृष्णक बचपन सँ ही सहिष्णु आ कर्मठ बना देने छल। देशक पराधीनता गोपालकृष्णक कचोटती रहैत छल। राष्ट्रभक्तिक अजस्त्र धाराक प्रवाह उनकर अन्तर्मनमे सदैव बहैत रहैत छल। एही कारण ओ सच्चा लगन, निष्ठा आ कर्तव्यपरायणताक त्रिधारा के वशीभूत भ कार्य करैत आ देशक पराधीनतासँ मुक्ति के प्रयत्नमे लगल रहैत छल। न्यू इङ्गलिश स्कूल पुणेमे अध्यापन करैत गोखलेजी बालगंगाधर तिलकक सम्पर्क मे आएल छल।




#Article 732: बाघ (100 words)


बाघ () फेलिडी () परिवारक प्यान्थरा () वर्ग अन्तर्गत परनिहार  समूहक सबसँ पैघ आ शक्तिशाली जङ्गली जानवर छी । कुन समय पश्चिममे टर्की, उत्तरमे साइबेरियासँ दक्षिणमे बालीधरिक भूभागमे शिर्ष शिकारीक रूपमे राज कएनिहार ई जानवर अखन पूर्वी आ दक्षिणी एसियाक १३ देशसभमे मात्र सिमित भ गेल अछि । करिब ३.३ मिटर (११ फिट) लम्बा शरीर, ३०० किलोग्राम (६६० पाउन्ड) तौल आ ४ इन्चधरि लम्बा तीखा कुकुरदाँत होमएवला एक जानवर एक भयानक हिंस्रक मान्शाहारी जानवर छी । विशाल काया आ शक्तिक अलावा बाघसभ उज्जर वा गाढा सन्तोला रङ्गक रुइयासँ ढकल शरीरमे होमएवला कारी पाटासभक कारण सेहो देखै लायकक होइत अछि ।




#Article 733: रीमा लागू (120 words)


रीमा लागू (२१ जुन १९५८ – १८ मई २०१७) एक भारतीय चलचित्र अभिनेत्री छल । हिनका हिन्दी आ मराठी सिनेमामे सहायक आ माए कऽ भूमिकामे अभिनय करवाक कारण जानल जाएत अछि ।
ई लगभग चार दशक सँ मराठी मञ्च पर कार्य करि रहल छल । ओ मराठी धारावाहिक तुजा मजा जामेना मे मुख्य किरदार निर्वाह केनए छल, एहि बाहेक हिन्दी धारावाहिक श्रीमान श्रीमती आ तू तू मैं मैंमे सेहो महत्वपूर्ण भूमिकामे अभिनय केनए छल । हिनका बहुत बलिउड चलचित्रसभमे माए कऽ किरदारमे अभिनय केलाक कारण चर्चा आ प्रशंशा भेटल छल, हुनकाद्वारा अभिनीत चलचित्रसभमे मैंने प्यार किया, आशिकी, साजन, हम आपके हैं कौन, रंगीला, वास्तव, कुछ कुछ होता है, कल हो ना हो आ हम साथ साथ हैं आदि छी ।




#Article 734: बङ्गाल बाघ (113 words)


बङ्गाली बाघ वैज्ञानिक नाम प्यान्थरा टाइग्रिसकें नामसँ चिन्हल जाइवाला ई बाघसभ मूलतः भारत, नेपाल आ बंगलादेशक जङ्गली जानवर छी । बाघसभ विभिन्न प्रकारक वासस्थानमे बैस सकैत अछि । घांसक मैदानसँ उष्ण तथा समशितोष्ण सदाबहार जङ्गलसभ आ झाडीसभमे मात्र नै भ मरुभूमी आसपासक पतझर वनसभ, सुख्खा झाडीसभमे आ ओशीला दलदलसभमे समेत बाघ अपन वासस्थान बनाए रहैत अछि । जङ्गलमे खुल्लारूपमे विचरण करनिहार नर बाघसभ साधारणतया २०५ सँ २२७ किलोग्रामधरि तौल भेल होइत अछि तहिना महिला बाघसभ औषत रूपमे करिब १४१ किलोग्राम तौलक होइत अछि । यद्यपी नेपाल तथा उत्तर भारतमे पाबल जाइवाला बङ्गाल बाघसभ दक्षिण भारतमे पाबल जाइवाला बाघसभसँ किछ पैग शरीरक होइत अछि जकर नरक तौल लगभग २३५ किलोग्राम धरि होइत अछि ।




#Article 735: सुषमा स्वराज (144 words)


सुषमा स्वराज (जन्म : १४ फरबरी १९५२) एक भारतीय महिला राजनीतिज्ञ आ भारतक विदेश मन्त्री छी। ओ वर्ष २००९ मे भारतक भारतीय जनता पार्टीद्वारा संसदमे विपक्षक नेता चुनल गेल छल, एहि नाता ओ भारतक पन्द्रहम लोकसभामे प्रतिपक्षकऽ नेता रहल अछि। अहिक पूर्व सेहो ओ केन्द्रीय मन्त्रिमण्डलमे रहि चुकल अछि तथा दिल्लीक मुख्यमन्त्री सेहो रहल अछि। ओ सन् २००९ के लोकसभा चुनावक लेल भाजपाके १९ सदस्यीय चुनाव-प्रचार-समितिक अध्यक्ष सेहो रहि चुकल अछि। 
वर्ष २०१४ मे ओ विदिशा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र सँ लोकसभा कऽ सांसद निर्वाचित भेल अछि आ हुन्का भारतक पहली महिला विदेश मन्त्री होबsक सौभाग्य प्राप्त भेल अछि।

वर्तमानमे ओ मध्य प्रदेशक विदिशा सीटसँ लोकसभाकऽ सदस्या चुनल गेल। ओ विदेशी मामलासभमे संसदीय स्थायी समिति कऽ अध्यक्षा सेहो अछि। १९७५मे हुन्कर विवाह स्वराज कौशलके साथमे भेल छल। कौशल जी छह साल धरि राज्यसभामे सांसद रहि एकर वाहेक ओ मिजोरम प्रदेशके राज्यपाल सेहो रहल अछि। 




#Article 736: अमेरिकी कारी भालु (102 words)


अमेरिकी कारी भालु उत्तर अमेरिकामे पाबल जाइवाला भालुक मध्यम आकारक प्रजाति छी । ई स्तनधारी जीव छी जे समुच्चा उत्तर अमेरिकी महादेशक सबसँ छोट मुदा बहुतेक स्थानमे फैलल प्रजाति छी । सामान्यत अमेरिकी कारी भालु सर्वाहारी होइत अछि । ई अन्य सामान्य भालुसभ जका सङ्केतक लेल दाँत वा नहसँ गाछमे खोखरि खोखरि चिन्ह बनाबैत अछि ।

ई एक खतरनाक जङ्गली शिकारी जानवर छी जे घात करि अपन शिकार बनाबैत अछि । एकर शारीरिक आकार मध्यम भेला बादो एकर शारीरिक फुर्ती शिकार हल्लुक बनबैत अछि । अमेरिकाक विभिन्न क्षेत्रमे एकर वासस्थल भेला कारण सेहो एकरा अमेरिकी कारी भालुक नाम देल गेल अछि । 




#Article 737: ऋषिपञ्चमी (102 words)


ऋषिपञ्चमी हिन्दु संस्कार अनुसार महिलासभक लेल तीज तथा हरितालिकाक जते महत्व भेल पर्व मानल जाइत अछि । पौराणिक कथनअनुसार नारीसभ रजस्वला भेला पर जानि वा अन्जानमे कएल गेल जतेक भी पापसभ भ जाइत अछि, ओहीसँ मुक्ति पावैके लेल ई व्रत बैसल जाइत अछि । 

श्रीमद्भागवत, गरुड पुराण लगायत अन्य पुराणसभमे लिखल अनुसार देवराज इन्द्रक ब्रह्महत्यासँ भेल पापक मुक्त करैके लेल चाईर भाग लगा एक भाग नारीसभक मासिक रक्तमे प्रवेश कराके ओहीके कारण ओ सभ चौथा दिनतक अशुद्ध रहैत अछि। एही रजस्वलासँ ही नारीसभमे सन्तानोत्पादन करैके शक्ति उत्पन्न भेल मानल जाइत अछि। सम्पूर्ण मानवीय चक्रक सुरूआत ही नारीक मासिक रजस्वलासँ सुरू होइत अछि।




#Article 738: तीज (114 words)


तीज हिन्दू नारीसभ मनावे वाला एकटा महत्त्वपूर्ण चाड छी। ई चाड भाद्र शुक्ल द्वीतियासँ पञ्चमीतक ४ दिन मनावल जाइत अछि। तीजमे भगवान शिवक आराधना करवाक साथ-साथे नाचगान मनोरञ्जन समेत करल जाइत अछि। नेपाली हिन्दू महिलासभद्वारा स्वतन्त्र आ आनन्दमय रूपमे मनावल जाइ वाला तीज अन्य धर्म आ जातजातिक नेपाली महिलासभ सेहो हर्षोल्लासक साथ मनावे लगल अछि ।
ई पर्व मुख्य रूपसँ नेपालभर मनावल जाइत अछि तँ भारतक कोनो-कोनो प्रान्तमे मनावल जाइत अछि। कहल जाइत अछि की आद्य-शक्ति भगवानशिवक अर्धाङ्गीनी हिमालय पुत्री पार्वती भगवान शिवक स्वास्थ्य तथा शरीरमे कोनो वाधा उत्पन्न नै होए कहिक पहिल वत्र रखने छल ओही दिन ई हरितालिका तिजक दिन छल ओही दिनसँ आई तक हिन्दु नारीसभ ई पर्व मनावैत आएल अछि। 




#Article 739: डल्फिन (120 words)


डल्फिन () ग्रीक शब्द  (डेल्फस) आ ल्याटिन नाम डेलफिनस सँ एकर विकास भेल अछि ।समुद्री स्तनधारी जीव छी । ई जीवक ह्वेलसँ निकट सम्बन्ध अछि । डल्फिनक १७ वंश आ ४० प्रजातिसभ अछि । एकरसभक आकार १.२ मिटर (४ फिट) आ ४०० किलोग्राम (माउई डल्फिन) सँ लऽ ९.५ मिटर (३० फिट) १० टन (ओर्का आ किलर व्हेल) धरि भऽ सकैत अछि । ई विश्वक सब ठामसभ पाबल जाइत अछि । खासकरि महाद्वीपीय तख्ताक समुन्द्री क्षेत्रमे ई जीव पाबल जाइत अछि । ई मान्सहारी होइत अछि आ छोट छोट माछसभ आ समुद्री जीव एकर मुख्य आहार छी । डल्फिनक उत्पत्ति लगभग १ करोड वर्ष पहिने मियोसिन कालक समयमे भेल छल ।

डल्फिन पृथ्वीमे रहल किछ बहुतेक बुद्धिमान जीवसभमेसँ एक छी । 




#Article 740: कालिदास (138 words)


कालिदास (कालीक दास ) संस्कृत भाषाक सबसँ महान् कवि आ नाटककार छल । कालिदासक शाब्दिक अर्थ कालीक सेवक कहैक बुझल जाईत अछि । कालिदास शिवक सेहो भक्त छल। हुन्कर पौराणिक कथासभ आ दर्शनक आधार मानि रचनासभ लिखने
छल । कलिदास अपन अलंकार युक्त सुन्दर, सरल आ मधुर भाषाक लेल विशेष रूपसँ जानल जाईत अछि । हुन्कर ऋतु वर्णन अद्वितीय मानल जाईत अछि । हुन्कर उपमाहसभ अनुपम अछि । संगीत उन्कर साहित्यक प्रमुख अङ्ग छी आ रसक सृजन करऽम हुन्कर कोनो उपमा नै अछि। ओ अपन शृंगार रस प्रधान साहित्यम सेहो साहित्यिक सौन्दर्यक साथ साथ आदर्शवादी परम्परा आ नैतिक मूल्यसभक समुचित ध्यान राखन अछि । हुन्कर नाम अमर अछि आ हुन्कर स्थान वाल्मीकि आ व्यासक परम्पराम अछि । हुनका द्वावारा लिखल कविता तथा नाटकसभ कहिया लिखल गेल यकिन नहियो भेलाप् पाँचम शताब्दीम लिखल गेल अनुमान केल गेल अछि ।




#Article 741: भागीरथी नदी (103 words)


भागीरथी (बङ्गाली भाषा - ভাগীরথী) भारतक एक नदी छी । ई उत्तराखण्डसँ प्रवाहित होइत अछि आ देवप्रयागमे अलकनन्दासँ मिल गङ्गा नदीक निर्माण करैत अछि । भागीरथी गोमुख स्थानसँ २५ किलोमिटर लम्बा गङ्गोत्री हिमनदीसँ निकलैत अछि । भागीरथी आ अलकनन्दा देव प्रयाग सङ्गम करैत अछि जकर पश्चात ओ गङ्गाक रुपमे पहचानल जाइत अछि ।

भागीरथी गोमुख स्थानसँ २५ किलोमिटर लम्बा गङ्गोत्री हिमनदीसँ निकलैत अछि । ई स्थान उत्तराखण्ड राज्यमे उत्तरकाशी जिलामे अछि । ई समुद्र सतहसँ ६१८ मिटरक उचाईपर, ऋषिकेशसँ ७० किलोमिटर दूरी पर अवस्थित अछि ।

भारतमे टिहरी बाँध, टेहरी विकास परियोजनाक एक प्राथमिक बाँध छी, जे उत्तराखण्ड राज्यक टिहरीमे अवस्थित अछि ।




#Article 742: शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय (115 words)


शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय (१५ सितम्बर, १८७६ - १६ जनवरी, १९३८) बाङ्गलाके सुप्रसिद्ध उपन्यासकार छल। उनकर जन्म हुगली जिलाक देवानन्दपुरमे भेल। ओ अपन माता-पिताक नौ सन्तानमेसँ एक छल। अठारह सालक अवस्थामे ओ प्रवेश पास केलक। एही दिनमे ओ बासा (घर) नामसँ एक उपन्यास लिखने छल, परन्तु ई रचना प्रकाशित नै भेल। रवीन्द्रनाथ ठाकुर आ बम्किमचन्द्र चट्टोपाध्यायक ओही पर गहिरा प्रभाव पडल। शरतचन्द्र ललित कलाके छात्र छल लेकिन आर्थिक तंगी के चलते ओ ई विषयक पढाई नै करि सकल। रोजगारक तलाशमे शरतचन्द्र बर्मा गेल आ लोक निर्माण विभागमे क्लर्क के रूपमे काम केलक। किछ समय बर्मा रहिके कलकत्ता लौटेके बाद ओ गम्भीरताक साथ लेखन शुरू करि देलक। बर्मासँ लौटेके बाद ओ अपन प्रसिद्ध उपन्यास श्रीकान्त लिखैके शुरू केलक।




#Article 743: घनश्यामदास बिड़ला (196 words)


श्री घनश्याम दास बिडला (जन्म-१८९४, पिलानी, राजस्थान, भारत, मृत्यु- १९८३, मुम्बई) भारत के अग्रणी औद्योगिक समूह बी.के.के.एम. बिडला समूहके संस्थापक छल, जेकर परिसंपत्तिसभ १९५ अरब रुपैयासँ अधिक अछि। ई समूहक मुख्य व्यवसाय कपडा, बिस्कुट, फिलामेन्ट यार्न, सीमेन्ट, रासायनिक पदार्थ, बिजली, उर्वरक, दूरसन्चार, वित्तीय सेवा आ एल्युमिनियम क्षेत्रमे अछि, जबकि अग्रणी कम्पनीसभ 'ग्रासिम इन्डस्ट्रीज' आ 'सेन्चुरी टेक्सटाइल' छी। ओ स्वाधीनता सेनानी सेहो छल तथा बिडला परिवारक एक प्रभावशाली सदस्य छल। ओ गान्धीजीक मित्र, सलाहकार, प्रशंसक एवम सहयोगी छल। भारत सरकार सन् १९५७मे उनका पद्म विभूषणक उपाधिसँ सम्मानित केलक। घनश्याम दास बिडलाक निधन जून, १९८३ ई.स. मे भेल छल।

एक स्थानीय गुरुसँ अंकगणित तथा हिन्दीक आरम्भिक शिक्षा प्राप्त करैके बाद अपन पिता बी.डी. बिडलाक प्रेरणा आ सहयोगसँ घनश्याम दास बिडला कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता)मे व्यापार जगतमे प्रवेश केलक। १९१२मे किशोरावस्थामे ही घनश्याम दास बिडला अपन ससुर एम.सोमानीक मदतसँ दलालीक व्यवसाय शुरू करि देलक। १९१८मे घनश्याम दास बिडला ‘बिडला ब्रदर्स’क स्थापना केलक। किछ ही समय बाद घनश्याम दास बिडला दिल्लीक एक पुरान कपडा मिल खरीद लेलक, उद्योगपतिक रूपमे ओ घनश्याम दास बिडलाक पहिल अनुभव छल। १९१९मे घनश्याम दास बिडला जूट उद्योगमे सेहो कदम रखलक। १९२१मे ग्वालियरमे कपडा मिलक स्थापना केलक आ १९२३ सँ १९२४मे ओ केसोराम कटन मिल्स खरीद लेलक। 




#Article 744: भीमराव आम्बेडकर (165 words)


डा. भीमराव रामजी आम्बेडकर ( १४ अप्रिल , १८९१ -- ६ दिसम्बर , १९५६ ) एक भारतीय विधिवेत्ता तथा सुधारवादी छी। ओ एक राजनीतिक नेता, सुधारवादी बौद्ध गुरु तथा भारतीय संविधानक निर्माता सेहो छल। हुनका बाबासाहेब आम्बेडकर नामसँ सेहो चिन्हल जाइत अछि। 'बाबासाहेब'क अर्थ मराठी भाषामे पिता होइत अछि। हुनकर जन्म एक गरीब अस्पृश्य (अछूत) परिवारमे भेल छल। बाबासाहेब आम्बेडकर अपन सम्पूर्ण जीवन हिन्दू धर्मक हिन्दू वर्ण व्यवस्था, आ भारतीय समाजमे व्याप्त जातीय व्यवस्थाक विरुद्धक सङ्घर्षमे बितौलक। हिन्दू धर्ममे मानव समाजक चारि वर्णसभमे वर्गीकृत कएल गेल अछि। आम्बेडकरकें बौद्ध महाशक्तिसभक दलित आन्दोलन प्रारम्भ करवाक श्रेय सेहो जाइत अछि। बाबासाहेब आम्बेडकरकें भारत रत्नसँ सेहो सम्मानित कएल गेल अछि, जे भारतक सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार छी।
 
ओ तखन अछूतसभ मानल गेल दलितमेसँ पहिल व्यक्ति छल जे बहुतरास सामाजिक आ वित्तीय बाधासभ पार करि, भारतमे कलेजक शिक्षा प्राप्त केलक। आम्बेडकर कानूनक उपाधि प्राप्त करवाक सङ्गे विधि, अर्थशास्त्र आ राजनीतिक विज्ञानमे अपन अध्ययन आ अनुसन्धानक कारण कोलम्बिया विश्वविद्यालय आ लण्डन स्कूल अफ इकनमिक्ससँ बहुतरास डक्टरेट डिग्रीसभ सेहो अर्जित केनए छल।




#Article 745: विनायक दामोदर सावरकर (102 words)


 
विनायक दामोदर सावरकर (जन्म: २८ मई १८८३ - मृत्यु: २६ फ़रवरी १९६६) भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के अग्रिम पंक्तिके सेनानी आ प्रखर राष्ट्रवादी नेता छल। उनका प्रायः वीर सावरकरक नामसँ सम्बोधित कएल जाइत अछि। हिन्दू राष्ट्रक राजनीतिक विचारधारा (हिन्दुत्व)क विकसित करैके बहुत बड श्रेय सावरकरक जाइत अछि। ओ न केवल स्वाधीनता-सङ्ग्रामक एक तेजस्वी सेनानी छल अपितु महान क्रान्तिकारी, चिन्तक, सिद्धहस्त लेखक, कवि, ओजस्वी वक्ता तथा दूरदर्शी राजनेता सेहो छल। ओ एक एहन इतिहासकार सेहो अछि जे हिन्दू राष्ट्रक विजयक इतिहासक प्रामाणिक ढँगसँ लिपिबद्ध केने अछि। ओ १८५७क प्रथम स्वातंत्र्य समर क सनसनीखेज आ खोजपूर्ण इतिहास लिखके ब्रिटिश शासनक हिला करि राखि देने छल।




#Article 746: विनोद चौधरी (239 words)


विनोद चौधरी नेपालक एक परिचित उद्योगपति छी। ओ चौधरी ग्रूप अफ इन्डस्ट्रीजक मालिक छी। ओ विश्वक धनिक समुहमे नेपालक एक मानल जाइत अछि।

९० सालक महाभूकम्प गेल २ वर्षके बाद सन् १९३५मे चौधरी परिवार न्युरोड हालक विशाल बजार सँ पहिले वार्षिक २०० रूपैयाँ भाडामे लके पसल खोलने छल। ओ पसलक सामान बिक्री करै तत्कालीन राणा प्रधानमन्त्री जुद्ध शमशेरक दरबारमे आवत जावत करै चौधरी परिवारक रोकतोक नै छल। बाद मे ब्रान्डक सामान बिक्री करैके न्युरोडमे अरुण इम्पोरियम खोललक। एतय कतिपय आयातित सामान सेहो दरबार जाईत अछि।

चर्चित अन्तर्राष्ट्रिय ब्रान्डक कपडा आ अन्य समाग्री लावि दरबार आ सम्पन्नक बिक्री करिते-करिते चौधरी परिवार स्टील, घागो कारखाना जेहन उद्योगमे प्रवेश केने छल। पिछला समयमे चौधरीक कपडा पसलक ग्राहक तत्कालीन राजारानी आ दरबारक सदस्य होईत छल। पञ्चालयतकालमे दरबारसँगके ई सम्पर्क उद्योग खोलैके सेन्स लैल उपयोगी बनल।

परन्तु, परम्परागत नै नयाँ देखैके विनोदक स्वभाव वाइवाइमे मात्र समिति नै भेल। नयाँ-नयाँ व्यवसायमे ओ हात लगाईते चलि गेल। कतेक मे सफल भेल कतेक मे असफल। रेडियो टेलिभिजन बिक्रीसँ सन्तुष्ट नै भ पार्टपुर्जा लावि उत्पादन सुरु केलक। दुई वर्ष पहिले नैपालमे सिजी ब्रान्डक टिलिभिजन बिक्री करैके सुरु केलक। बासुदेव चलचित्र बनाक मनोरञ्जन उद्योगमे प्रवेश केलक। ठेक्का पट्टा, निकासी व्यापारमे सेहो चौधरी परिवार संलग्न छल। काठमाडौं त्रिशुली सडक, सोल्टी होटलक किछ भाग चौधरी समूह बनेने अछि। देश आर्थिक उदारीकण नीति लेलाक बाद बैंक, होटल, फाइनान्स कम्पनी, हाउजिङ, जलविद्युत, स्वास्थ्य, उत्पादनलगायत उद्योगमे सिजी हात लगेलक। तत्कालीन समयमे ई सभ नयाँ क्षेत्र छल। सञ्चार, बियर, चुरोटलगायत उद्योगमे सेहो सिजी लगानी केलक।




#Article 747: चौधरी ग्रूप अफ इन्डस्ट्रीज (218 words)


चौधरी ग्रूप अफ इन्डस्ट्रीज नेपालक प्रमुख उद्योग समूहमे एक छी। ई समूहक बीजारोपण सन् १८७० भूमल चौधरी कपडा व्यापारसँ केने छल। समूह ४० सँ बेसी कम्पनीमे साढे १७ अर्ब रूपैयाँसँ बेसी लगानी केने अछि। कम्पनी खाद्य तथा पेय, विद्युत् तथा घरेलु प्रयोगक विद्युतीय उपकरण, बियर, चुरोट, वित्तीय संस्था, पूर्वाधार, होटल, आवास विकास, अटोमोबाइल, अस्पताल, स्कूललगायतक क्षेत्रमे लगानी केने अछी।

वाइवाइ चाउचाउक दक्षिण एसियामे समेत एकाधिकार लै सँ चौधरी समूहक बहुराष्ट्रिय उद्यमी बनेलक। नेपालमे वाइवाइ लोकप्रिय भेल। एकर बाद चौधरी समूह नेपालमे उत्पादन भेल चाउचाउ लके भारतीय बजार प्रवेश केलक। किछ वर्ष पहिले भारतक विभिन्न स्थानमे उद्योग समेत खोललक। भुटान, मध्यपूर्वलगायत देशमे वाइवाइ बजार लेने अछि।

सीजी भितरे झन्डै ४० कम्पनी अछि। विदेशमे आक्रमक रूपमे लगानी विस्तार केलाके बाद सिजीमे एखन आधुनिक व्यवस्थापन आ संस्थागत सुशासनक अभाव देखल जाइत अछि। वाइवाइ वार्षिक कारोवार कते करैत अछि, सिजी टेलिभिजन नाफा अछि या नोक्सानमे। ई एखन धरि सीजी सार्वजनिक केने नै अछि। सीजी विभिन्न क्षेत्रमे २५ करोड अमेरिकी डलर लगानी केने मात्र सार्वजनिक केने अछि। भारतमे रिलायन्स या टाटा ग्रूप जेना आम सर्वसाधारण नेपालीक अपन कम्पनी आ अर्थतन्त्रसँ जोडैके क्षेत्रमे सेहो सीजी लगल अछि। सीजीक किछ कम्पनीक सेयर सर्वसाधारणक विक्री कएल गेल अछि । परन्तु, ई स्टक एक्सेन्जमे कारोवार होए वाला कम्पनीमे सीजी समुहके लगानी होएसँ कोनो प्रभाव पडल नै अछि। सेयर बजार कम्पनी आ लगानीकर्ताक छवि नाप्ने व्यारोमिटर सेहो छी।




#Article 748: अधिकार (110 words)


अधिकार, कोनो वस्तुकें प्राप्त करै या कोनो कार्यकें सम्पादित करैक लेल उपलब्ध करायल गेल कोनो व्यक्तिक कानूनसम्मत या सम्विदासम्मत सुविधा, दावा या विशेषाधिकार छी । कानूनद्वारा प्रदत्त सुविधासभ अधिकारसभक रक्षा करैत अछि । दुनुक अस्तित्व एक-दोसरकें बिना समभव नै अछि । जतय कानून अधिकारसभक मान्यता देत अछि ओतय एकरा लागू करनाए या एकर अवहेलनापर नियन्त्रण स्थापित करैक व्यवस्था सेहो करैत अछि ।

राजनीतिक आ संवैधानिक दृष्टिसँ अधिकार मानव इतिहाससँ समान शाश्वत अछि । प्राचीन कालमे परिवार आ सम्पत्तिपर मातृसत्ताक समाजमे माताक तथा पितृसत्ताक समाजमे पिताक अधिकार होइत छल । राजतन्त्रके विकासक साथ राजा दैवी अधिकारकें सिद्धान्तसभक सहायतासँ प्रजासँ प्रजाक समस्त अधिकारसभसँ निरस्त करि राष्ट्र विशेषमे सम्प्रभु बनि जाए लागल ।




#Article 749: मूल अधिकार (116 words)


मूल अधिकार या मौलिक अधिकार ओ अधिकार छी जे लोगसभके जीवनक लेल अति-आवश्यक या मौलिक समझल जाइत अछि ओ अधिकारकें मूल अधिकार () कहल जाइत अछि । प्रत्येक देशके लिखित अथवा अलिखित संविधानमे नागरिकके मूल अधिकारक मान्यता देल गेल अछि । ई मूल अधिकार नागरिकक निश्चात्मक रूपमे प्राप्त अछि तथा राज्यक सार्वभौम सत्ता पर अङ्कुश लगाबैक कारण नागरिकक दृष्टिसँ एहन अधिकार विषर्ययात्मक कहल जाइत अछि । मूल अधिकारक एक दृष्टान्त अछि राज्य नागरिकसभक बीच परस्पर विभेद नै करत । प्रत्येक देशक संविधानमे एकर मान्यता अछि ।

मूल अधिकारसभकें सर्वप्रथम विकास ब्रिटेनमे भेल जब सन् १२१५ मे सम्राट जोनकें ब्रिटिश जनता प्राचीन स्वतन्त्रतासभकें मान्यता प्रदान करैक हेतु म्याग्ना कार्टापर हस्ताक्षर करै पर बाध्य करि देनए छल ।




#Article 750: सुभाष चन्द्र (115 words)


सुभाष चन्द्र (जन्म सुभाष चन्द्र गोयल ३० नवम्बर १९५०) एक भारतीय प्याकेजिङ्गमे चासो आ मिडिया लटरी आ सिनेमाक साथ मिडिया मुगल छी ।   सुभाष चन्द्र भारत के एक उद्यमी, मीडिया स्वामी तथा अभिप्रेरक वक्ता (प्रेरक स्पीकर) छी। ओ भारतक सभसँ विशाल टि.भी. चैनल समूह जी मीडिया तथा एस्सेल समूहक अध्यक्ष छी जे भारतीय उपग्रह टेलिभिजन प्रसारणमे क्रान्तिक सूत्रपात केलैन्। उनकरद्वारा १९९२मे स्थापित जी टि.भी. भारतमे पहिल केबल टि.भी. छल । आई सोनी एवम स्टार-प्लस आदि के साथ टक्कर करि रहल अछि। एम्मी पुरस्कारसँ नवाजल जा चुकल चन्द्रक आत्मकथाक विमोचन प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी दिल्लीमे २० जनवरी २०१६मे भेल एक कार्यक्रममे केने छल। ११ जून २०१६ मे ओ हरियाणासँ राज्यसभा सदस्य चुनल गेल।

एस्सेल समूह  (Essel Group)




#Article 751: पेशवा (104 words)


मराठा साम्राज्य के प्रधानमन्त्रीसभक पेशवा (मराठी: पेशवे) कहैत छल। ई राजाक सलाहकार परिषद अष्टप्रधानक सभसँ प्रमुख होइत छल। राजाक बाद इनकर स्थान आवैत छल। शिवाजीक अष्टप्रधान मन्त्रीमण्डलमे प्रधानमन्त्री अथवा वजीरक पर्यायवाची पद छल। 'पेशवा' फारसी शब्द छी जेकर अर्थ 'अग्रणी' छी। पेशवाक पद वंशानुगत नै छल। आरम्भमे, संभवत: पेशवा मर्यादामे अन्य सदस्यसभक बराबर ही मानल जाइत छल। छत्रपति राजारामक समयमे पन्त-प्रतिनिधिक नवनिर्मित पद, राजाक प्रतिनिधि होए के नाता पेशवासँ ज्येष्ठ ठहराएल गेल छल। पेशवाई सत्ताक वास्तविक संस्थापनक, तथा पेशवा पदक वंशपरम्परागत रूप दै कऽ श्रेय ऐतिहासिक क्रमसँ सातम पेशवा, बालाजी विश्वनाथक जाइत अछि। मुदा, ई परिवर्तन छत्रपति शाहूक सहयोग आ सहमतिद्वारा ही सम्पन्न भेल।




#Article 752: टिस्टा नदी (114 words)


टिस्टा नदी भारतक पश्चिम बङ्गाल राज्यक दार्जिलिङ जिल्लामे पडैत छल। टिस्टा नदी नेपाल अङ्ग्रेज युद्ध होएसँ आगा धरि नेपालक पूर्वी सिमानामे छल। ई नदीसँ मेची नदी धरिके सम्पूर्ण पहाडी तथा तराई भूभाग नेपाल सरकार सुगौली सन्धि माफर्त ब्रिटिस इस्ट इण्डिया कम्पनी सरकारक स्वामित्व हस्तान्तरण करै पडल।

कहल जाइत अछि कि टिस्टा नदी भारतीय प्रान्त सिक्किमक जीवनरेखा छी, सिक्किम प्रान्तक जते लम्बाई अछि लगभग पुरे लम्बाईसँ भके बहै वाला ई नदी वरदान्त हिमालयक समसितोष्ण आ नदीक घाटीसँ उष्णकटिबन्ध तापमानक काटि ल जाइत अछि। चमकिला हरियर (emerald) रंगक ई नदी बंगलादेशक ब्रह्मपुत्र नदीमे मिलैसँ पहिले धरि ई नदी सिक्किम आ पश्चिम बङ्गालक सिमानाक रूपमे रहैत अछि। ई नदीक सम्पूर्ण लम्बाई ३१५ किमी (१९६ माइल) रहल अछि।




#Article 753: जेफ बेजोस (187 words)


जेफरी प्रेस्टन बेजोस (; जन्म जोर्गेनसेन; १२ जनवरी १९६४) एक अमेरिकी प्राविधिक उद्यमी, लगानीकर्ता आ दार्शनिक छी जे एमाजोन.कमक संस्थापक, अध्यक्ष आ मुख्य कार्यकारी अधिकारी कऽ रूपमे जानल जाएत अछि । एमाजोन.कम संसारक सभ सँ पैग अनलाइन खरिददारी खुद्रा विक्रेता कम्पनी छी । 

बेजोसक जन्म एल्बुकर्की, न्यू मेक्सिकोमे भेल छल आ ओ ह्युस्टन, टेक्सासमे पैग भेल छल । सन् १९८६ मे बेजोस प्रिन्सटन विश्वविद्यालय सँ अभियान्त्रिकी स्नातक आ  कम्प्युटर विज्ञानमे स्नातकक उपाधि प्राप्त केलक । सन् १९८६ सँ सन् १९९४ धरि ओ वाल स्ट्रिटक विभिन्न क्षेत्रसभमे काज केलक । सन् १९९४ कें अन्तमे ओ न्यू योर्क शहर सँ सियाटल धरिक सड़क यात्राक समय एमाजोनक स्थापना केलक । कम्पनी अपन काजक सुरवात अनलाइन पुस्तक स्टोरक रूपमे केलक आ अस्थिर अस्थिर भिडियो आ अडियो स्ट्रिमिङ सहित विभिन्न प्रकारक उत्पादसभ आ सेवासभमे विस्तार केलक । वर्तमान समयमे एमाजोन दुनियाक सभ सँ पैग इन्टरनेट अनलाइन विक्री कम्पनी होमएक सङ्गे अपन एमाजोन वेब सेवाक माध्यम सँ ई दुनियाक सभ सँ पैग क्लाउड संरचना प्रदाता छी ।

१९९९ मे उनका टाइम पत्रिका वर्षके व्यक्ति नामक सम्मानसँ नवाजलक।  २००८ मे, यू.एस.न्यूज आ वर्ल्ड रिपोर्ट उनका अमेरिकाक सर्वश्रेष्ठ नेतासभमे सँ एक के रूपमे चयनित केलक।




#Article 754: सादिक खान (109 words)


सादिक अमन ख़ान  (जन्म: ८ अक्टुबर १९७०) ब्रिटेनक मुख्य विपक्षी लेबर पार्टीक नेता आर लण्डन के मेयर छी। ओ लण्डनक पहिल मुस्लिम मेयर छी नहीं बल्कि यूरोपियन यूनियनक कोनो भी राजधानीके पहिल मुस्लिम मेयर छी। ओ अपन करीबी प्रतिद्ववान्धि कंजर्वेटिव उम्मीदवार जैक गोल्डस्मिथक हराकऽ। ओ अपन करियरक शुरुआत मानव अधिकार वकील सँ केनेए छल। ओकर बाध सो सांसद बनल। २००५ सँ ओ लगातार टूटिंग सते लेबर पार्टीक सांसद छी । २००९-१० म वओ गॉर्डन ब्राउन गोवेर्न्मेंटम ओ परिवहन सेहो रहल अछि। ओ बेलायतक ऐहन पहिल मुस्लिम मन्त्री छी, जे कैबिनेट बैठकम शामिल भेल अछि। हूनकर पिता बेलायतक राजधानी लण्डनम एक बस ड्राइवर छी। ओ पाकिस्तानी मूलके ब्रिटिश नागरिक छी।




#Article 755: शिवानी वर्मा (105 words)


शिवानी वर्मा (पुणे, १९७२) बढियासँ ब्रह्मा कुमारी शिवानी के रूपमे जानल जाइवाला एक भारतीय आध्यात्मिक शिक्षक, प्रेरणादायक वक्ता , ब्रह्माकुमारीजक शिक्षक आ लगभग १९९५सँ प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालयक एक सदस्य छी। 

हिन्दी

१. राजयोग मेडिटेशन

२. सेल्फ म्यानेजमेन्ट

३. ह्यापिनेस इन्डेक्स

४. इमोशनल इन्टेलिजेन्स

५. लाइफ स्किल्स

६. गिवीङ अप एडिक्शन 

७. रिलेसनशिप्स

८. इन्नर ब्युटी

९. प्रैक्टिकल स्पिरिचुयालिटी

१०. बीइङ ब्लिस

११. बीइङ लभ

१२. बीइङ ब्लिस

१३. बीइङ शक्ति

१४. बीइङ डिभाइन

१५. गड्स रेवेलेसन्स

१६. डिप्रेशन

१७. लिविङ भ्यालुज

१८. फोरगिवनेस

१९. विजडम अफ दादी जानकी

२०. डीजास्टर म्यानेजमेन्ट

अङ्ग्रेजी

१. सोल कनेक्शन

२. गोईङ बीयोन्ड

३. ह्यापिनेस अनलिमिटेड

४. हिलर विदीन




#Article 756: आइएसबिएन (140 words)


कोनो भी पुस्तकक पछाडि कऽ आवरण पृष्ठमे बार कोड जे छोट बक्सामे राखल रहैय १० वा १३ टा अङ्क ओहि आइएसबिएन छी । संसारमे लोकसभक नाम भिन्न-भिन्न होइत अछि तहिना दुनियामे किनको टेलिफोन नम्बर किनको सँ नै मिलैत अछि, ओहिना किताबक पाछा आइएसबिएन नम्बर सेहो भिन्न-भिन्न होइत अछि। विकशित देशसभमे अहि नम्बरक आधारमे इन्टरनेटसँ पुस्तक सम्बन्धी जानकारी प्राप्त होइत अछि। 

संसारम पहिल बेर नम्बर राखवाला चलन सन् १९६६ मे बेलायतसँ सुरु भेल छल । ओहि ठामक बडका पुस्तक प्रकाशक मध्येम गनल आर आर बुकरक प्रमुख विलियम हेनरी स्मिथ देश भित्रके प्रकाशकसभक एकटा सम्मेलन आयोजना कऽ पुस्तक पछा फरक-फरक नम्बर राख्वाला चलन सुरुवात केनेए छल । सन १९७२ सँ जर्मनीक राजधानी बर्लिनमे रहल राष्ट्रिय पुस्तकालयलके आइएसबिएनक मुख्य कार्यालय बनावल गेल। संसारक विभिन्न देशक पुस्तकालयसभम आइएसबिएन वितरणक लेल अधिकार दै लागल । युनेस्को लगायतक अन्तर्राष्ट्रियस्तरक शैक्षिक संस्थासभ आइएसबिएनक सल्लाहकार समितिम सदस्य अछि। 




#Article 757: यार्सा गुम्बा (389 words)


यार्सा गुम्बा एक बहुमुल्य जडिबुटि छी। लामा भाषाम यार्साक अर्थ आधाजीव आ गुम्बाक अर्थ आधा गाछ वा बुटी (हर्बस्भ) होएत अछि। विश्वम अखन धरि Cordyceps वर्गक  ढुसीसभ (sac fungus)क ६८०सँ बेसी प्रजातीसभ भेटल अछि। ई मध्य सबैसँ परिचित ढुसी यार्चागुम्बाके अंग्रेजीम  कहैत अछि । एकर बैज्ञानिक नाम Cordyceps Sinensis छी । ल्याटीन शब्दसभ cord club, ceps head आर चिनीयाँ अर्थम sinensis सँग एकर वैज्ञानिक नाम  राखल गेल अछि। यार्सागुम्बा नेपाल आर तिब्बतक हिमाली भागम भेटवाला एक प्रकारक बहुमुल्य जडीबुटी छी । ई समुन्द्र सतहसँ ३,००० मीटर सँ ६,००० मीटरक उचाईम भेटल जाएत अछि । एकरा तिब्बती भाषाम यार्साकुन्भु तथा यार्सागुन्बु कहैत अछि । जहिमे 'यार'क अर्थ बर्षा,'सा'क अर्थ घाँस आर 'कुन्भु'क अर्थ हिउँ किरा अर्थात बर्षाम घाँस आर हिउँदम किरा सेहो बुझल जायेत अछि । यार्सागुम्बा एक प्रकारक झुसिलकिराक माथसँ ढुसीसे बनैत अछि । हिमाली भेगम हिउँद खतम भेलाक बाध बैशाख सँ हिउँ पगलेत अछि आ बिरुवासभम फूल शुरु होएत अछि , ओही समयम पुतलीसभ फुल दैत अछि  । सोहि पुतलिक लार्भा अवस्थाम रहल झुसिलकिरा जमीन नीचा जाएत अछि आर उक्त झुसिलकिराक माथम ढुसी होएत अछि । एकर जमीन माथिक ढुसी च्याउ खैर रंगक आर जमीनम भेल भाग पियर रंगक होएत अछि । जमीनमे भेल  भाग ४ मि. मि. मोट आर ४ से. मि. जेहन लम्बा तथा उपरका भाग महिन ५-६ से. मि. जेहन लम्बा होएत अछि ।

 
विश्वमा १००, चीनमा २१, भारतमा ७ आर नेपालमा २ प्रजातिक यार्सा गुम्बा पावल जाएत अछि । एकरा यौन शक्ति बर्धक आर सर्वगुण सम्पन्न टनिकको रूपम लेल जाएत अछि । पुरुष नपुंसकता आर अजीर्ण अपचमा स्थानीय मुर्गाक मासुम आर मृगौलाक रोगम सुँगरक मासुम एकरा मिलाक खाइत अछि । खोकी, दम, क्षयरोग, अनिद्रामे एकरा चिनिया औषधी विधि अनुसार सेवन करल जायेत अछि । बीर्यम शुक्राणुक संख्या बढावैल आर शुक्राणुक स्वस्थ्य राख्नम अण्ड आर डिम्बाशयक खराबी कमलपित्त जन्डिसम ई उपयोगी देखल गेल अछि । स्नायु सम्बन्धी रोग अनिद्रा मांशपेसीक दुखाई श्वासप्रश्वास सम्बन्धी रोगम कोलेष्ट्रोल घटावम रोग प्रतिरोधक क्षमता बढावल ई उपयोगी होएत अछि । हाल यार्सागुम्बाक चामल, चिया आदिम मिसावट बजारम बिक्री वितरण करैत अछि ।
 
नेपालक हिमाली भेगम भेटऽ वाला यार्सा गुम्वा प्रकृतिक अनुपम उपहार छी । यार्सागुम्वा सन् २००१ धरि व्यपारिक प्रयोजनम नै छल आर मुल्य सेहो नै छल। अखन् एकर मुल्य प्रति किलो दुई लाख तक तोकल गेल अछि । अत्यन्त महङ्ग मुल्यम बिक्री होववाला यार्सा गुम्बा नेपालम येल्लो लिभिङ गोल्ड (अंग्रेजी:Yellow Living Gold) क रुपमा समेत पहिचान दै लागल अछि।




#Article 758: कमलमणि दीक्षित (183 words)


बागमती अञ्चल अन्तर्गत काठमाडाैं गैरीधारामे जन्म लेनए कमलमणि अाचार्य दीक्षितका विधिपूर्वक राखल गेल नाम मुकुन्दराज छी । साहित्यिक क्षेत्रमे ओ कमल दीक्षित नामसँ बेसी परिचित अछि। नेपाली भाषाक निबन्ध लेखक तथा मदन पुरस्कार पुस्तकालयक संस्थापक दीक्षित बनारस हिन्दू विश्वविद्यालयसँ स्नातकाेपाधि प्राप्त केनए अछि । उनकर प्रकाशित पुस्तकसभ निम्न अछि  :

दीक्षितक उपर्युक्त बाहेक आर दुर्इ दर्जनसँ अधिक कृतिसभ प्रकाशित भेल अछि ।

दीक्षितक जन्म काठमाडौँक गैरीधारामे भेल छल, आ उनकर मातापिताक नाम केदार मणि दीक्षित आ बिद्या देवी दीक्षित छी। 
दीक्षित दरबार हाई स्कूल काठमाडौँ मे  अध्ययन केनए अछि। ओ १९४९ मे बनारस हिन्दु विश्वविद्यालयसँ कलामे स्नातक केने अछी। 

उनकर १९४९ मे अंजू पौडेलसँ विवाह भेल छल। उनकर २टा बेटा आ १टा बेटी अछी : कुन्डा दीक्षित  कनक मणि दीक्षित उनकर लेखनक लेल सेहो जानल जाइत अछी नेपाल आ बेटी रुपा जोशी कऽ पत्रकार स्थापित अछी।

दीक्षित बी एन्ड बी अस्पताल, ललितपुर मे बृहस्पतिबार, दिसम्बर २९, २०१६ मे  सुबहमे मृत्यु भेल छल। ओ किछ दिनसँ सांसके समस्या सेहो पीडीत छल।
उनकर पार्थिव शरीर बृहस्पतिबार सुबहमे पशुपति अर्याघाटमे इलेक्ट्रोनिक शमशान तैयार करि दाउरा सुरूवाल आ ढाका टोपी कऽ साथ पार्थिव शरीर अग्निप्रवाह केनए छल।




#Article 759: तुल्सी गिरी (114 words)


तुल्सी गिरी राजा जखन शासन सत्ता हातमे लेने छल तखन बेर-बेर प्रधानमन्त्री बनावल गेल व्यक्ति छी। २०१७ सालमे राजा जन निर्वाचित संसद आ सरकारक भङ्ग करि पञ्चायती व्यवस्था आवि गेलाक फर्स्ट मिनिस्टर होमएत मन्त्रीपरिषदक उपाध्यक्ष बनावल गेल छल। बादमे ओ प्रधानमन्त्री सेहो बनावल गेल। एहीसँ पहिले ओ नेपाली कांग्रेसक एकमना सरकारमे परराष्ट्र मन्त्री छल। राजा ज्ञानेन्द्र २०६१ माघ १९ मे देशक शासन सत्ता हातमे लके प्रत्यक्ष शासन शुरु करवाक बाद ओ पुनः मन्त्रीपरिषदक उपाध्यक्ष बनावल गेल छल।

ओ नेपालमे पञ्चायत व्यवस्थाक जन्मदाता मानल जाइत अछि| आ सभसँ कम उमरमे प्रधानमन्त्री होमए वाला व्यक्ति सेहो छी| ओ बहुतरास समयसँ विदेशमे बसोबास करैत आवैत छल, नेपालमे माघ १९ गतेक राजनैतिक घटनाक बाद नेपाल आएल अछि|

टिप्पणी




#Article 760: एरिका फर्नान्डिज (141 words)


एरिका जे फर्नान्डिज एक भारतीय चलचित्रक अभिनेत्री जे कन्नड,हिन्दी तमिल आ तेलुगु भाषासभक चलचित्रमे नजर आवैत अछि। ओ चलचित्र करियरसँ पूर्व, सौन्दर्य प्रतियोगिता मिस इण्डिया २०१२ मे भाग लेलक, जे शीर्ष दसमे जाके समाप्त भ गेल। ओ वर्तमानमे डा. सोनाक्षी बोस,  कुछ रङ्ग प्यार के ऐसे भी कऽ समीक्षकसभद्वारा प्रशंसित मुख्य भूमिकामे चित्रित अछि जे पहिले २९ फरवरी २०१६ मे प्रसारित भेल।

एरिका फर्नान्डिजक जन्म मुम्बई मे एक मंगलोरियन कोंकणी-बाजैवाला परिवार मे भेल छल आ अपन मातापिता राल्फ फर्नान्डिज;एक मोडल आ एन्टेरियर डिजाइनर आ लविना जे मंगलौर, कर्नाटकसँ अछि, कऽ साथ मुम्बई आएल छल। 

एरिका एस. जे. सूर्याक इसाई कऽ मुख्य भूमिकाक लेल ओडिशन देनए छल मुदा अन्त: उद्यमक लेल नै चुनल गेल छल। ओ बादमे द्विभाषी विरट्टू / डेगा मे प्रमुख भूमिका निभावे कऽ ले चुनल गेल छल एकर अलावा नवागंतुक सुजीव, निर्देशक कुमार कऽ बेटा कऽ साथ केनए अछि।




#Article 761: अम्बर गुरुङ (421 words)


अम्बर गुरुङ (जन्म विसं १९९४-२०७३) नेपाली सांगीतिक फाँट कऽ प्रसिद्ध व्यक्तित्व छी। उनकर सयौं नेपाली गीतमे संगीत भरएल अछी। उनकर खास कऽ नेपालक राष्ट्रिय गान सयौं थूंगा फूलका संगीतकार रूपमे परिचित अछि।

अम्बर गुरुङक जन्म वि.सं १९९४ फागुन १४ गते, पिता उजीरसिंह गुरुङ आ माता रेणुका गुरुङक सुपुत्रक रूपमे भारतक दार्जिलिङक लालढिकीमे भेल छल।उनकर पिता आ दादाजी देवराज गुरुङ सेहो सेनामे भर्ती छल। अम्बर गुरुङक पुर्खा कऽ घर गोर्खा जिलाक रिसिङ मे अछि । गुरुङ तीन बेटा : किशोर, राजु तथा शरदमणि आ एक बेटी अलकाक पिता छी। २०५२ सालमे नेपाल राजकीय प्रज्ञा प्रतिष्ठानक संगीत निर्देशकसमेत रहल गुरुङ काठमाडौंक महाराजगञ्ज चक्रपथ नजदीक बसोबास केनए छल।

गायन तथा संगीत सुरुवात वि.सं. २०१६ माघ कलकत्तासँ दुई गीत 'म अम्बर हुँ' आ 'सम्हालेर राख' सँ गीति लेखन प्रारम्भ केनए अछि। 
संगीतकार गुरुङ कोलकातामे पहिल बेर सन् १९६१ मे अगमसिंह गिरीद्वारा रचित गीत रेकर्ड केनए छल- 'नौ लाख तारा उदाए'। एक हप्तामे ही पाँच सय प्रति बिक्री भेल ई गीत भारत विरोधी कहैत अल इन्डिया रेडियोमे प्रतिबन्धित भेल छल। बादमे एही गीत नेपाली लोगसभक बड मन पडल।

राजा महेन्द्र एही गीतक मन पडलासँ अम्बरक उनकर जन्मोत्सवक उपलक्ष्यमे नेपाल बोलावैत छल। ओ वि.सं. २०२५ सालमे नेपाल आएल। वि.सं. २०२६ सालमे (दोसर बेर) नेपाल आएल समय सेहो राजा महेन्द्र फेरसँ एकेडेमीमे बैसक प्रस्ताव दोहरेलाक बाद गुरुङ नेपाल आवि बैसल छल।

वि.सं. २०२६ मे संगीत विशेषज्ञक रूपमे नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानमे प्रवेश भेल। संगीत प्रमुख, संगीतसंयोजक आ संगीत निर्देशक भऽ वि.सं. २०५४मे अवकाश पावलक। ओ लक्ष्मीप्रसाद देवकोटाक गीतिनाटक कुन्जिनी, मुनामदनमे सँगीतांकन केनए अछि। ओ सत्यमोहन जोशीक चाईरटा नाटक लगायत माधवप्रसाद घिमिरेक मालती मंगलेमे समेत संगीत देने अछि। ओ चलचित्र मनको बाँध, जीवनरेखामे पृष्ठसंगीत आ पार्श्व संगीत देने अछि। ओहिना आदिकवि भानुभक्त वृतचित्र वृतचित्रमे पार्श्वसंगीत,स्वर देने अछि।

नेपालक वर्तमान राष्ट्रगान सयौं थुंगा फूलका हामी मे अम्बर गुरुङ संगीत देने छल।

१ जनवरी २०१४ हङकङमे हिमालयन टोन्स म्युजिक एकेडेमीद्वारा आयोजित अम्बर गुरुङ रात्री मे आयोजक कऽ तरफसँ संगीतकार गुरुङक अभिनन्दन करैत महासंगीतकार कऽ घोषणा कएल गेल। विगत पाँच दशक पहिने सङ्गीत-साधनामे निरन्तर लगनशील भऽ सांगीतिक माध्यमद्वारा नेपाली कला आ संस्कृतिक उत्थानक साथे नेपाली भाषा साहित्यक श्रीवृद्धि करवाक लेल सशक्त योगदान करै वापत वि.स. २०५४ सालक जगदम्बाश्री पुरस्कार पावने छल। ओ २०२८ सालमे गोरखा दक्षिणबाहु चौथा, सन् १९९४ मे गिरी पुरस्कार गुठी दार्जिलिङसँ रु. १ लाख नगद प्रमाणपत्र, वि.स. २०३८ सालमे इन्द्रराज्यलक्ष्मी पुरस्कार, २०४७ सालमे छिन्नलता गीत पुरस्कार पावने छल। 

जुन ७, २०१६ कऽ भोरमे, गुरुङ ७९ वरिषमे उपचारक क्रम मे ग्रान्डे अस्पतालमे मृत्यु भेल छल। गुरुङ पहिने अपन गाँसनलीमे ट्यूमर कऽ लेल उपचारार्थ छल। गुरुङक पिछला दिनमे आईसीयूमे भर्ती करावल गेल छल आ बादमे जीवन रक्षक प्रणाली पर रखल गेल छल।




#Article 762: दुर्जोय दत्ता (505 words)


दुर्जोय दत्ता एक भारतीय उपन्यासकार छी। उनकर जन्म ७ फरवरी,१९८७ मे भेल। ओ टिभी आ चलचित्रसभक लेल सेहो लिखैत अछि। ओ दिल्ली कलेज अफ इन्जिनियरिङसँ स्नातक आ फेर विपणनमे पीजीडीबीएम डिग्री प्राप्त करवाक लेल म्यानेजमेन्ट डेभलपमेन्ट इन्स्टीच्युट आ फ्रैङ्कफर्ट स्कूल अफ फाईनेन्स आ म्यानेजमेन्ट गेल।ओ ग्रेपवाइन इण्डिया पब्लिशर्सक स्थापना केलक।  ओ ९ उपन्यास लिखने अछि। २००९ मे द टाइम्स अफ इण्डिया अखबार उनका एक युवा उपलब्धिसभक रूपमे मान्यता देलक। २०११ मे उनका व्हीस्लिङ वुड्स इन्टरनेशनलमे मीडिया आ संचारक क्षेत्रमे एक युवा उपलब्धिसभक रूपमे चुनल गेल छल। २०१२ मे, ओ शिक्षक उपलब्धि पुरस्कारमे शामिल होमए वाला प्राप्तकर्तासभमे सँ एक छल। ओ भारतभरमे विभिन्न कलेजसभमे टेडएक्स सम्मेलनसभमे भाषण देनए अछि। ओ कथा लेखनमे सर्वोच्च भारतीय लेखकसभमे सँ एक छी।

दुर्जोय दत्ताक जन्म दिल्लीमे भेल। ओ ओही ठाम पर पलल-बढल। ओ अपन स्कूली शिक्षा बाल भारती पब्लिक स्कूल, पित्मपुरामे केलक।फेर ओ दिल्ली कलेज अफ इन्जिनियरिङमे स्नातक प्राप्त केलक। ओ अपन पोस्ट ग्रयाजुऐशन म्यानेजमेन्ट डेभलपमेन्ट इन्स्टिच्युट, गुडगाँव आ फ्रैङ्कफर्ट स्कूल अफ फाइनान्स आ म्यानेजमेन्टसँ प्राप्त केलक आ उनकर मुख्य विषय विपणन आ फाइनान्स छल। जखन ओ अपन कलेजक अन्तिम सालमे छल तखन ओ लिखनाए शुरु केनए छल।

दुर्जोय दत्ताक पहिल उपन्यास अफ कर्स आई लव यु! २००८ मे लिखने छल, जखन ओ केवल २१ वर्षक छल। ई उपन्यास उनकर दिल्ली कलेज अफ इन्जिनियरिङ कऽ अनुभव पर आधारित छल। उनकर दोसर किताब नाउ द्याट यु आर रिच! जे अगस्त २००९ मे आएल छल, पहिल रचनाक दोसर भाग छी।ई किताब उनकर सह-लेखक मानवी आहूजाक एक निवेश बैंक क अनुभव पर आधारित छल।उनकर तेसर किताब शी ब्रोक उप, आई डिंट!२०१० मे छपाएल छल, जे सभ क बहुत पसन्द आएल।२०१० मे उनकर चौथा रचना ओह येस, आई एम सिङ्गल! लिखल गेल छल जखन ओ चार महिना यूरोपमे छल।ई किताब दुर्जोयक सहयोगसँ, नीति रस्तोगी लिखलक, जे दुर्जोयक जीवन के घटनासभ पर आधारित छल।२०११ मे, म्यानेजमेन्ट डेभलपमेन्ट इन्स्टिच्युट, गुडगाँवसँ पास करै के बाद ओ सचिन गर्ग क साथ ग्रैपवाइन इण्डिया पब्लिशर्सक स्थापना केलक, किया की ओ नयाँ लेखकसभक मौका दै ल चाहैत छल।उनकर पाँचम किताब यु वेयर माई क्रश सितम्बर २०११ मे ग्रैपवाइन इण्डिया पब्लिशर्ससँ प्रकाशित भेल।ई हिन्दुस्तान टाइम्स बेस्टसेलर पर नम्बर ३ पर छल आ तीन लगातार हफ्ता क लेल ओतय रहल।इफ इट्स नोट फोरेभर उनकर छठम रचना छल, जे फरवरी २०१२ मे छपाएल छल।ई रचना सितम्बर २०११ दिल्ली हाई कोर्टमे बिस्फोटसँ प्रेरित छल।ई रचना किछु मित्रसभ क सडक यात्रा क बारेमे अछि जे, ओ विस्फोट स्थल पर एक जलल डायरी प्राप्त करै के बाद करैत अछि।ई हिन्दुस्तान टाइम्स पर नम्बर ६ पर छल।ओही वर्ष टिल द लास्ट ब्रेथ लिखल गेल छल, जे दुई युवासभ क बारेमे अछि जे किछु महिना क मेहमान छल।ई हिन्दुस्तान टाइम्स बेस्टसेलर पर नम्बर ३ पर छल।फरवरी २०१३ मे समवन लाईक यु किताब, ओ नीकिता सिंह क साथ लिखने छल, पेङ्गुइन इण्डियाद्वारा जारी केलक।ई हिन्दुस्तान टाइम्स बेस्टसेलर पर नम्बर ५ पर छल।दुर्जोय दत्ता क नौ-अम पुस्तक होल्ड माई हेन्ड ५ अगस्त २०१३ मे जारी कएल गेल छल।ई कहानी एक विद्वान आईटी ग्रेजुएट, दीप आ आहाना नामक एक दृष्टिहीन लडकी क प्यार क बारेमे आधारित छल।दुर्जोय दत्ता क किताबसभक सह-लेखक छल- मानवी आहूजा, नीति रस्तोगी, ओरवाना घाई आ नीकिता सिंह।




#Article 763: सुब्रत रॉय (255 words)


सुब्रत राय सहारा (जन्म १० जून १९४८) भारतक एक व्यवसायी तथा सहारा इण्डिया परिवारके संस्थापक, प्रबन्ध निदेशक एवं अध्यक्ष छी। हुन्का 'सहाराश्री'के नाम सँ सेहो जानल जाइत अछि। इण्डिया टुडे द्वारा हुन्कर नाम भारतक दश सर्वाधिक शक्तिसम्पन्न लोगसभमे शामिल केने छल। ओ सन् १९७८ मे सहारा इण्डिया परिवारकs स्थापना केलक। सन् २००४ मे टाइम पत्रिका द्वारा सहारा समूहकs भारतीय रेलक बाद दोसर सबसँ बड़का नियोक्ता बतौने छल। ओ पुणे वॉरियर्स इन्डिया, ग्रॉसवेनर हाउस, एमबी वैली लेक सिटी, प्लाजा होटल, ड्रीम डाउनटाउन होटलके मालिक छी।  

रायकs जन्म १० जून १९४८ कs बिहारक अररिया जिलामे पिता सुधीर चन्द्र राय आर माँ छबि रायके घर भेल छल। ओ कोलकाताके होली चाइल्ड स्कूलमे प्राम्भिक शिक्षा पूरा करलाके बाद राजकीय तकनीकी संस्थान गोरखपुरसँ मैकेनिकल इन्जिनियरिङमे डिप्लोमा केलक। ओ १९७८ मे गोरखपुरसँ अपन व्यवसाय प्रारम्भ केलक। संप्रति हुन्कर निवास लखनऊ मे अछि।

रॉय द्वारा १९७८ मे गोरखपुरमे सहारा इन्डिया परिवारक स्थापना कएल गेल, जकर ओ प्रबन्ध कार्यकर्ता (प्रबन्ध निदेशक) आर चेयरम्यान छी।इ भारतक एक बहु-व्यापारिक कम्पनि छी, जकर कार्य वित्तीय सेवासभ, गृहनिर्माण वित्त (हाउसिङ फाइनेन्स), म्युचुअल फन्डसभ, जीवन बीमा, नगर-विकास, रीयल-इस्टेट, अखबार एवं टेलीविजन, फिल्म-निर्माण, खेल, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, पर्यटन, उपभोक्ता सामग्री सहित अनेको क्षेत्रसभमे फैलल अछि। किछ दिन पहिले धरि ओ आई पी एल कs फ्रेंचाईजी पुणे वॉरियर्स इन्डिया, लन्डनके ग्रॉसवेनर हाउस,मुम्बईके लोनावालामे स्थित एमबी वैली सिटी तथा न्यूयार्कके प्लाजा होटल, ड्रीम डाउनटाउन होटलक मालिक सेहो छी।

रॉय द्वारा सन्चालित सहारा समूहके लग ३० जून-२०१० धरि १,०९,२२४ करोड़ रूपैयाकs परिसम्पतिसभ अछि।

रॉय द्वारा अपन व्यवसायकs प्रगति हेतु सामूहिक भौतिकवाद कs दर्शन देलक,जिकर अभिप्राय अछि सामूहिक प्रगति आर उन्नति, समूहिक देखरेखमे।




#Article 764: रतन टाटा (211 words)


रतन नवल टाटा (२८ दिसम्बर १९३७)क जन्म भारतक आर्टिक राजधानी मुम्बईमे भेल छल । रतन टाटा टाटा समूहक वर्तमान अध्यक्ष, जे भारतक सबसँ बड़का व्यापारिक समूह छी, जकर स्थापना जमशेदजी टाटाद्वारा कएल गेल छल आ हुनकर परिवारक पीढिसभद्वारा एकर विस्तार कएल आर एकरा दृढ़ बनावल गेल अछि ।

रतन टाटा एक शर्मीला स्वभावक व्यक्ति छी, समाजक झूठ चमक दमकमे विश्वास नै करैत अछि, बर्षोसँ मुम्बईके कोलाबा जिलामे एक किताबसभ एवं कुतासभसँ भरल बेचलर फ्लैटमे रहि रहल अछि।
रतन टाटा अपन नया उत्तराधिकारी चुनि लेने अछि। सायरस मिस्त्री रतन टाटाक स्थान लेता लेकिन पूरा हुन्कर जगह लेबsसँ पहिल ओ एक साल धरि हुन्का साथे काम करत। डीसम्बर २०१२मे ओ पूरा निक जका समूहक जिम्मेदारी सम्भाल लेट।

भारतक ५०अम गणतन्त्र दिवस समारोह पर २६ जनवरी २०००, रतन टाटा कs तेसर नागरिक अलंकरण पद्म भूषण सँ सम्मानित कएल गेल। हुन्का २६ जनवरी २००८ भारतके दोसर सर्वोच्च नागरिक अलंकरण पद्म विभूषणसँ सम्मानित कएल गेल छल। ओ नैसकॉम ग्लोबल लीडरशिप () पुरस्कार -२००८ प्राप्त करऽ वलामेसँ एक छलाह। इ पुरस्कार हुन्का १४ फ़रवरी २००८ कs मुम्बईमे एक समारोहमे देल गेल। रतन टाटा २००७ मे टाटा परिवारक दिससँ परोपकारक कारनैगी पदक प्राप्त केने छल।

 रतन टाटा  कऽ सन २०००मे भारत सरकारद्वारा उद्योग आ व्यापार क्षेत्रमे पद्म भूषणसँ सम्मानित कएल गेल छल । ओ महाराष्ट्र राज्यसँ अछि ।




#Article 765: भूपी शेरचन (155 words)


भूपि शेरचन (वि.स. १९९२-२०४६) नेपाली आधुनिक कवि छी। सन् १९६९ मे ओ घुम्ने मेच माथि‍ अन्धो मान्छे कृतिक लेल साझा पुरस्कार सँ सम्मानित भेल छल।

भूपी शेरचनक (वास्तविक नाम: भुपेन्द्रमान शेरचन) जन्म वि.सं. १९९२ साल पुस (१४ मे १९३७) महिनामे मुस्ताङ जिलाक थाक टुकुचेमे भेल अछि। भूपी ६ वर्षक होमएत काल उनकर माताक मृत्यु भेल छल। मातृ वात्सल्यविहीन भूपी अत्यन्त संवेदनशील छल।

अध्ययनक लेल ओ बनारस गेल। ओ बि.ए. धरि अध्ययन केनए छल|

ओ दुई विवाह केनए अछि। दोसर सहयात्री कान्तिसँग ओ २०२५ सालमे अन्तर्जातीय विवाह केनए छल।

 ‘भूपी’ शेरचन
(व्यङ्ग्यात्मक सेल्फ पोट्रेट):

भूपी शेरचनक प्रकाशित कृतिसभ:- 
 
१. परिवर्तन  (नाटक, २०१० साल)
२. नयाँ झ्याउरे (कविता,२०१० साल)
३. निर्झर (कविता, २०१५ साल)
४. घुम्ने मेचमाथि अन्धो मान्छे (कविता, २०२५ साल)

साझा पुरस्कार पावैवाला पहिल कृति सेहो 'घुम्ने मेचमाथि अन्धो मान्छे'  ही छी, जाहिमे ४२टा कवितासभ सरल, सरस भाषाशैली आ अनुप्रासयुक्त एवम् लयात्मक भावाभिव्यक्तिसँ शृङ्गारल अछि।

भूपीक निधन २०४६ साल जेठ १ गते, काठमाडौँमे भेल ।




#Article 766: यादव खरेल (278 words)


यादव खरेल चलचित्र निर्देशक एवम् साहित्यकार छी। गीत, मुक्तक, नियात्रा, कविता आदि विधामे विशेष सामर्थ्य प्रस्तुत क चुकल खरेल चलचित्रक निर्देशक, निर्माता तथा लेखकक रूपमे अत्यन्त चर्चित अछि।

यादव खरेलक जन्म वि.सं. १९९९ साल फागुन् १२ गते मङ्लबार तदनुसार कृष्णपक्ष तृतीया तिथिक दिन  बागमती अञ्चलक  काभ्रेपलाञ्चोक अन्तर्गत पडैवाला खरेलथोक कहिक ठाममे पिता गोपीकृष्ण खरेल तथा माता सरस्वती खरेलक तृतीय सन्तानक रूपमे भेल अछि। इनकर चठीहारक नाम पद्मनाथ खरेल छी। विद्यालय आदिक प्रमाणपत्रसभमे सेहो एही नाम रहल मुदा कोनो दिन नाट्य सम्राट बालकृष्ण सम प्रसङ्गवश हँसीमज्जाकमे जिस्कावै क बाद ओ अपन नाम बदलि यादव रखने छल। यादव खरेलक एक दिदी अम्बिकादेवी, एक दाजु श्यामकृष्ण खरेल, दुई भाईसभ रामकृष्ण खरेल आ अच्युतकृष्ण खरेल तथा दुई बहिनसभ गीता आ सीता अछि। यादव खरेल अखन काठमाडौंक कुमारीगालमे बसोबास करैत अछि। बाल्यावस्थामे ओ कहियो काठमाडौं कहियो खरेलथोक आ कहियो तराईमे बसोबास करैत छल। ओ अर्थशास्त्रमे एम. ए., बि. एल. तथा बेलायतक लण्डन फिल्म स्कूलसँ डिप्लोमा केनए अछि। ओ रेडियो नेपालमे काम केनए छल। पढाइक सिलसिलामे बेलायत पहुँचल खरेल सन् १९६९मे खुलल बीबीसी नेपाली सेवामे सेहो किछु समय काम केलक।

विभिन्न पत्र-पत्रिका, रेडियोमे कथा, निबन्ध, कविता, गीत आ अन्वेषणात्मक लेखसभ प्रकाशित अछि। उनकर प्रकाशित कृतिसभ

१) अनि एउटा लहर ब्यूँझन्छ (कविता)
२) यादव खरेलका मुक्तकहरू (मुक्तक, वि. सं. २०३०)
३) समुन्द्रपारी (नियात्रा)
४) खलबल (हाँस्यव्यङ्ग्य कृति)
५) यस्तो पनि हुँदा रहेछ	
६) यस्तै रहेछ यहाँको चलन

खरेलद्वारा निर्देशित चलचित्रसभ निम्न अछि: 

१) आदिकवि भानुभक्त
२) प्रेमपिण्ड
३) श्री स्वस्थानी
४) चेलीबेटी
४) लोभीपापी

ओ जे सम्मान पावने छल ओ निम्न अछि: 

१) रत्नश्री स्वर्ण पदक
२) वासु शशी स्मृति सम्मान

ओ अमेरिका, बेलायत, फ्रान्स, जर्मनी, स्पेन, बेल्जियम, लक्जेम्बर्ग, स्विजरल्याण्ड, जापान, मेक्सिको, केन्या, चीन, दक्षिण कोरिया, इन्डोनेशिया, फिलिपिन्स, सिंगापुर, मलेशिया आदि देशक भ्रमण केनए अछि।




#Article 767: चुडामणि गौतम (275 words)


चुडामणि गौतम (वि.सं. २०००-वर्तमान) अङ्ग्रेजी व्याकरणक अनेकौं पुस्तक लिखने अछि। ओ साहित्यकार छी। ग्रामर जेहन आ बहुतरास सहयोगी करि उनकर ५० पुस्तक प्रकाशित अछि। बजारमे अधिक प्रचलित एहन २० पुस्तक अछि।

चुडामणिक जन्म वि.स. २,००० साल असोज १ मे तेह्रथुमक कोयाखोलामे भेल अछि। गौतमक एक भाई आ चाईर दीदि-बहिन अछि। उनकर भाई रामचन्द्र गौतम गोरखापत्र दैनिकसँग आवद्ध छल। रामचन्द्रक किछु वर्ष पहिले निधन भ गेल। उनकर पिता यमनाथ आ माता भीमरूपा अछि। उनका बाल्यकालमे 'गोपाल'  कहिक बोलावल जाइत छल। भागवतमे 'गोपाल-चुडामणि'  एके ठाम उल्लेख होमएसँ उनका 'गोपाल' कहल गेल अछि।

ओ  ६/७ वर्षक होमएत काल अक्षर पहिचाने लगल छल। सरस्वती पूजाक दिन काइला गुरु उनका अक्षर लिखैल सिखेने छल। ओ बखत अक्षर लिखैल काठक पाटी होमएत छल। ओहीमे धुल छिडकि के कैटकीसँ लिखल जाइत छल। ओ सिखैके काम गुरुके घरमे होमएत छल। पढैक ठाम एकटा दलान छल। कक्षा ४ मे पहुँचलाक बाद मात्र ए, बि, सि, डि... सिखलक। चण्डी, रुद्रि, गीता, वेद बाल्यकालसँ ही पढैत छल। कक्षा ६ पढैक लेल आठराईक त्रिभुवन हाइस्कुल गेल। ओ दश वर्षक होमएत काल पिता स्वर्गवास भ गेल। दिदी कृष्णकुमारीक विवाह भ गेल छल। छोटकी बहिन अठार महिनाक मात्र छल। अकेले माता परिवारक भरणपोषण केलक।

अपन बाल्यकाल अभाव आ दुःखमे बितलासँ ओ सस्तमे ग्रामर पुस्तक बजारमे लाविलक। विद्यालय नियमित गएलासँ सेहो कलेज सभ प्राइभेट पढलक। ओ बी.ए. आ बी.एल. केनए अछि। कलेज पढैके लेल बिराटनगरक महेन्द्र मोरङ कलेज भर्ना भेल सेहो नियमित नै भ सकल। २०३५ सालमे आवि मात्र 'आभाष' नामक कवितासंग्रह छापने छल। नयाँ शिक्षा लागू भेलाक बाद नेपाली व्याकरण आ अङ्ग्रेजी ग्रामरक अलग पुस्तक नै छल। नेपाली व्याकरण आ अङ्ग्रेजी ग्रामर बहुत आवश्यक भेल कहैत ओ २०३५/३६ मे ग्रामर लिखने अछि। ओ हाल काठमाडौंक डिल्लीबजारमे बसोबास करैत अछि।




#Article 768: बीर अस्पताल (184 words)


बीर अस्पताल नेपालक सभसँ पुरान तथा व्यस्त अस्पतालमे सँ एक छी। ई अस्पताल वि.सं. १९४६ साउन (सन् १८८९ जुलाई) मे बीर शम्शेरद्वारा स्थापित कएल गेल छल ओही लेल एकरा बीर अस्पताल कहल गेल अछी। ई काठमाडौँ शहरक केन्द्रमे खुलामञ्च आगा अवस्थित अछि। ई अस्पताल सन् २००३ पश्चात एक सरकारी एजेन्सी चिकित्सा विज्ञान राष्ट्रिय प्रतिष्ठान मार्फत सञ्चालित अछि। 

अस्पताल देशभरक सभ तह आ तप्का व्यक्तिसभक लेल उच्च गुणस्तरक चिकित्सा तथा शल्य चिकित्सा उपचार प्रदान करैत अछि। ग्रामिण भेगक बहुतरास बिमारसभ ई अस्पतालमे निशुल्क चिकित्सा सेवा लै कऽ लेल दूर-दूरसँ आवैत अछि। हाल अस्पतालमे ५३५ शैयाक क्षमता रहल अछि। देशक प्रसिद्ध डाक्टरसभमे सँ किछु एही अस्पतालमे कार्यरत अछि।

विशेषकरि विपन्न एवम् असहाय वर्गक लेल लक्षित करि वि.सं. १९४६ साउनमे १५टा अन्तरङ्ग शैयासहित स्थापना भेल अछि। ई अस्पतालक स्थापना बीर शम्शेरक समयमे होमएसँ एकरा बीर अस्पताल कहल गेल अछि। ई अस्पताल बहुतरास समय सँ बिमारीसभक चिकित्सा सहयोग प्रदान कऽ रहल अछि।

अस्पतालक प्रकोप व्यवस्थापन योजना काठमाडौंक नेशनल स्टेडियममे मचल भगदड़ घटनाक बाद १९८८ मे पहिल बेर प्रयोग कएल गेल छल।

नेपालमे नेफ्रोलोजी सेवाक सुरुवात बीर अस्पतालमे सुरु भेल अछि। हरेक वर्ष ४०कऽ हाराहारीमे मृगौला बायोप्सी होमएत अछि।




#Article 769: तिलगंगा आँखा केन्द्र (502 words)


तिलगंगा आँखा अस्पताल नेपालक प्रमुख आँखा अस्पतालमे सँ एक छी। स्थपनाकालसँ ही सुलभ तथा सरल सुविधा प्रदान कऽ रहल ई अस्पताल स्वयम् कऽ एक उत्कृष्ट अस्पतालक रुपमे स्थापित करैमे सफल भेल अछि।

नेपाल अन्धोपन नियन्त्रण कार्यक्रम (स्थापना सन्  १९९२) अन्तर्गत (Tilganga Institue of Opthalmology|Tilganga Eye Hospital) एक गैरसरकारी संस्थाक रूपमे सन्  १९९४ मे काठमान्डौंक तिलगङ्गामे स्थापना भेल अछि। ई अस्पताल नेपालक सर्वोत्कृष्ट अस्पतालमे पडैत अछि।ई अस्पतालक संचालक आ योजनाकार नेत्र विशिषज्ञ  डा.  सन्दुक रुइत छी।।
ई अस्पतालक अन्तराष्ट्रिय पार्टनरक रुपमे आबद्ध संस्थासभ निम्न अछि-

बिमारीसभक सरल उपचार आ अस्पताल व्यवस्थापनक लेल विभिन्न विभागमे विभाजन करि सुविधा देल जाइत अछि।

ई अस्पतालक मुख्य सुविधा निम्न रहल अछि –

तिलगंगा आँखा अस्पतालद्वारा सन् १९९४ सँ ही आँखा प्रत्यारोपण केनाइ सुरु कएल गेल अछि। तिलगंगा वर्षमे एक सय २० सँ एक सय ५० गोटेक मात्र पुतली प्रत्यारोपण करैमे एखनधरि ६ हजारसँ बेसीक हराएल दृष्टि घुमावमे सफल भेल अछि। प्रत्यारोपणक लेल करिब २५ हजार खर्च होएसँ भी केन्द्र निःशुल्क सेवा दैत अछि।

साधारण उपचार वा अस्पतालमे भर्ना नै करैवाला बिमारीक निम्त्ति बहिरंग विभाग रहल अछि। ई सेवा अन्तर्गत आँईख सम्बन्धितसभ किसिमक सेवा देल जाइत अछि। ई अस्पतालमे आकास्मिक सेवा २४ घण्टा देल जाइत अछि।  शनिदिन बाहेक बाँकी दिनसभमे भोर ८-३:३० धरि खुला रहैत अछि।

चस्मा नै लगाक वा आँखिक पावर बेसी भ चस्मा लगावै पडैक बाध्यतासँ मुक्त होवाक लेल ई क प्रयोग कएल जा सकैत अछि। विदेशमे सिमित रुपमे रहल ई महग सर्जरी नेपालमे पहिल बेर ई सर्जरी तिलगंगा आँखा अस्पताल बहुत कम मुल्यमे करैत अछि। आँखिक पुतलीभित्र 'रेटिना' छेकैवाला पत्र हटाक दृष्टि सन्तुलित रखैक लेल लेजर पद्दतिक प्रयोग कएल जाइत अछि। लेजर सर्जरीक स्माइल प्रविधि सेहो कहल जाइत अछि। भारतमे करिब अढाइ लाख भारू आ अन्य देशमे सेहो २ सँ ८ लाख रुपैयाँ पडैवाला ई लेजर सर्जरी तिलगंगा करिब ४५ हजारमे ई सेवा दैत आएल अछि। एतेक सुलभ मूल्यमे एहन शल्यक्रिया करैवाला नेपाल पहिल देश मानल जाइत अछि। एकर अतिरिक्त विपन्नवर्गक निशुल्क सेवा दैत आएल अछि। 
संसारमे लेजर शल्यक्रिया करैवाला जम्मा ६ गोटे विज्ञ अछि, जाहिमे नेपालक डा. किशोर प्रधान रहल अछि। नेपालमे हालधरि माइनस १४ आ प्लस ६ धरि पावर भेल सभाक ई प्रविधि अपनाक शल्यक्रिया कएल जा सकैत अछि आ नेपालमे शल्यक्रिया करैसँ पहिले बेलायतमे डा.ड्यान लगायत विशेषज्ञसभ कम्प्युटरसँ बिमारीक रिपोर्ट देखि सुझाव दै कऽ व्यवस्था अछि। 

ई अस्पतालद्वारा संचालन कएल गेल शैक्षिक कार्यक्रम अन्तर्गत एतय मुख्य करि दुई बिषयमे पढावल जाइत अछि।

क लके पढावल जाईवाला ई विषयक अवधि ३ बर्षक होमैत अछि। तिलगंगा आँखा अस्पताल  आ क संयुक्त संचालित ई कार्यक्रमक  मान्यता देनए अछि। ई शैक्षिक कार्यक्रम अन्तर्गत ई विषयक प्रथम वर्षक पढाई धुलिखेल कलेज , दोसर वर्ष तिलगंगा आँखा अस्पताल आ अन्तिम वर्ष विद्यार्थीसभाक आर आखाँ अस्पतालमे तालिमक लेल पठावल जाइत अछि। ई विषय पूर्ण रुपमे समाप्त भेलाक बाद विद्यार्थीसभ नेपाल हेल्थ काउन्शिलमे अपन नाम ग्रेड द्वितीय स्वास्थकर्ताक रुपमे दर्ता करावैमे मान्य होमैत अछि। 

ई कार्यक्रमक अवधि सेहो ३ वर्षक रहैत अछि। ई शैक्षिक कार्यक्रमक मुख्य उद्धेश्य योग्य  उत्पादन करि नेपालक विभिन्न आँखा अस्पताल/केन्द्रमे सेवा प्रदान करेनाइ अछि। ई  विषयक मान्यता द्वारा मान्यता देल गेल अछि।

ठेगान: गौशाला , काठमान्डौं 
ई-मेल: tec@tilganga.com.np 
फोन नम्बर:   ९७७-१- ४४९३७७५, ४४९३६८४ 
फ्याक्स नम्बर: ९७७-१-४४७४९३७




#Article 770: म्याकिन्टोश (117 words)


म्याकिन्टोश ( ); () वा म्याक () व्यक्तिगत कम्प्यूटरसभ (पीसी:पर्सनल कम्प्युटर) कऽ एक श्रेणीक नाम छी जाहीमे एप्पल इन्कार्पोरेशन नामक कम्पनीद्वारा अनेकौं प्रकारक पीसी कऽ डिजाइन, विकास आ विपणन केनए छल। म्याकिन्टोश २४ जनवरी सन् १९८४ कऽ सभसँ पहिल बजारमे लौने छल । म्याकिन्टोश ही व्यापारिक रूपसँ सफल पहिल पीसी छी जाहीमे 'कमाण्ड लाइन इन्टरफेस' कऽ बदलामे माउस (माउस) आ ग्राफिकल युजर इन्टरफेस उपलब्ध करावल गेल छल।

उनैस सय अस्सी कऽ उत्तरार्धमे कम्पनी बजार बनौलक मुद्दा नब्बे कऽ दशक एहीमे क्रमश: कमी वा गेल किया की पीसी-बजारक मनोवृत्ति आईबीएम सँग-सँग (कम्प्याटिबल) पीसी कऽ तरफ चलि पडल जे एमएस-डस वा माइक्रोसफ्ट विन्डोज पर चलैत छल। बादमे सन् १९९८ मे आईम्याक () लावि एप्पल अपन बजार फेर बढेने छल।




#Article 771: गुरूप्रसाद मैनाली (324 words)


गुरूप्रसाद मैनाली (जन्म:वि.सं. १९५७, भादो शुक्ल चतुर्दशी, मृत्यु:वि.सं. २०२८ साल जेठ ५) नेपाली भाषाक एक कथाकार छी।

उनकर पुर्खौली घर काभ्रेपलाञ्चोक जिलाक कानपुरमे अछी। उनकर पिता जागीर करैत छल। जागीरक सिलसिलामे उनकर पिता धनकुटा गएल छल । ओही समयमे गुरूप्रसाद मैनालीक जन्म धनकुटामे भऽ गेल। उनकर जन्म वि.सं. १९५७ साल भाद्र शुक्ल चतुर्दशीक दिनमे भेल छल। उनकर पिताक नाम काशीनाथ आ माताक नाम काशीरूपादेवी छी।

गुरूप्रसाद ढेर-रास नै पढि सकल। बाबुक जागीर सरुवा होमएत बाबुक सँग-सँगे जाइ पडैक होमएसँ उनकर बसाइ एके ठाममा नै भ सकल। ओहीलेल पहिले घरमे
ओ अक्षर पहचानलक, ओकर बाद 'लघुकौमुदी', 'अमरकोश', 'रुद्री', 'दुर्गासप्तशती' आदि पढलक। तहिना स्रेस्ता पाठशालामे पढलक। ओ बखत नेपालमे बहुत-रास विद्यालय नै छल।

मैनाली श्रेस्ता पाठशालाक पढाइ समाप्त भेलाक बाद जागीर मिलल। न्यायसेवामे उनकर जागीर छल। नौसिन्दा पदसँ मासिक रु. ११।- तलब पावैत ओ जागीर सुरु कलाक। बादमे ओ विचारी, डिठ्ठा आ तहबिलदार भेल। ओकर बाद फेर बढुवा भ ओ न्यायाधीश समेत भेल। सामान्य घरक आ कम मात्र पढल व्यक्ति न्यायाधीश होमएके बात नै छल। राणासभाक शासन भेल समयमे न्यायाधीश भेलासँ राणासभाक भित्री बात सेहो ओ बुझ्ने छल। न्यायाधीश भेल समयमे गुरूप्रसाद मैनाली बहुत-रास घरायसी मुद्दा देखै पडल। ओहन मुद्दासभ देखैत-देखैत ओ नेपालक गाउँघरमे कि-केहन स्थिति रहल अछि कहिक बुझलक। ओ गाम-गाममे घुम्ने सेहो छल।
ओ गामघरमे गरीबसभ देखलक, लोगसभ किया गरीब भेल अछि कहिक सेहो बुझलक। श्रीमान्पत्नीक सम्बन्ध, पडोसी-पडोसीक सम्बन्ध आदि बहुत बात ओ देखलक। अनेकौं घटना तँ अत्यन्त मार्मिक छल। ओहन मार्मिक घटना बुझि ओही घटनासभसँ उनका कथा लिखैक प्रेरणा मिलल। गुरूप्रसाद मैनालीक ओ घटनाक विषयमे कथा लिखैल पावैत कतेक बढिया होइएत कहि लागै लगल। ओकर बाद बहुत सोचविचार करि ओ कथा लिखैल सुरु केलक। ओ गामघरमे होमएवाला शब्द आ गामघरमे घटैत घटनासभ राखि कथासभ लिखलक। ओ नेपाल आ भारतक बहुत-रास ठाम घुमने छल। ओही लेल गामघरमे भेल छोट-छोट घटना सेहोसभ ओ थाहा पावने छल। छोट-छोट घटनासँ सेहो उनकर मनमे लिखैक विचार आवैत छल। ओही लेल ओ ओहन घटनाक कथामे उतारलक। भारतमे जाके काम करैवाला नेपालीसभाक दुःख-दर्दक घटनाक विषयमे सेहो ओ कथा लिखने अछि।

   




#Article 772: तिला सङ्कराति (175 words)


तिला सङ्कराति नेपालक एक प्रमुख पावनि छी। ई माघ महिनाक पहिल दिन मनाएल जाइत अछि । ई दिन नेपालमे सार्वजनिक विदा होइत अछि । नेपालमे माघ महिनाक पहिल दिन मकर सङ्क्रान्ति पहाडक जिलासभमे माघे सङ्क्रान्ति, मधेस आ थारु समुदायमे माघी आ मैथिली सहितक भारत बर्षक हिन्दू तिला सङ्कराति नामसँ मनबैत अछि । एहि प्रातेसँ नदी पोखरि सहितक जलाशयमे लोकसभक भिड नजरि होइत अछि । श्रद्धालु ठण्डीके परवाह कएने बिना स्नान कए भगवानक पूजा करैत अछि आ स्नान पूजा पछाडी तिल, मुरही, चुराक लड्डु (तिलवा, लाई आ चुरला बनाऽ कऽ ग्रहण करैत अछि । एहि दिन दिनक भोजनमे लोक खिचडी आ तरुवा, पापड आदि लैत छथि । खम्हाउर खेबाक बिशेष प्रथमिकता सेहो रहैत अछि । 

ज्योतिष शास्त्र अनुसार सौर मासक हिसाबसँ माकर  संकराइतसँ सुर्य धनु राशीसँ मकर राशीमे प्रवेश करैत दक्षिणायनसँ उतरायण होइत अछि तए एकरा मकर संकराइत कहल जाइछ । सुर्यक उदयबिन्दु दक्षिन दशासँ उतर दिशादिस जायब प्रारम्भ होइछ आ उतरायणक प्रारम्भेसँ एहि अवधिमे तुलनात्मक रुपमे दिन लम्बा होयब आ तापक्रममे शनै:शनै वृद्धि होयब सुरुह होइछ । तए खगोलीय रुपमे एकर अलगे महत्व अछि । 




#Article 773: डेमी मुर (166 words)


डेमी मुर कऽ पूरा नाम डेमी गिनेस कुचर छी। टेलिभिजन शृंखला जेनरल हस्पिटलसँ अभिनय यात्रा प्रारम्भ केनिहार डेमी, सेन्ट एल्मोज फायर (१८८५)सँ हलिउडमे स्थापित नायिकाक रूपमे प्रख्यात भेल छल। सन् १९९० मे चलचित्र घोष्ट कऽ लेल १ करोड डलर पारिश्रमिक लेनए सभसँ महग नायिका कऽ रूपमे ओ स्थापित भेल। १ करोड डलर पारिश्रमिक लैत ओ लगातार अ फ्यु गुड मेन (१९९२) , इन्डिसेन्ट प्रपोजल (१९९३) आ डिस्किलोजर (१९९४) जेहन चलचित्रमे अभिनय केनए अछि।

न्यू मेक्सिको कऽ रसवेलममे जन्म भेल मुर, कऽ बाल्यकाल दुःखद छल। दुई महिना कऽ छल ओ जखन हुनकर पिता हुनकर माता कऽ छोडि बेपत्ता भऽ गेल छल। हुनकर माता ड्यानी गिन्स नामक पुरुषसँ दोसर विवाह केलक मुदा ड्यानी ओही एक वर्षमे आत्महत्या कऽ लेलक। कम उमर कऽ मुरक मनमे त्रासयुक्त जीवन कऽ बोध केलक। ओ अपन बाल्यकालमे करिब ४०टा डेरा परिवर्तन करवा कऽ अनुभव प्रस्तुत केनए अछि। माता आ सौतेला पिता दुनु गोटेमे मदिरा कऽ लत कऽ कारण दुनु गोटेमे बेर-बेर मारिपिट होइत छल। एहि पीडामे ड्यानी आत्महत्या केनए होवाक मुरक अनुभव अछि। 




#Article 774: जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा (141 words)


जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा या जे आर डी टाटा (२९ जुलाई, १९०४ - २९ नवम्बर, १९९३) भारतक वायुयान उद्योग आर अन्य उद्योगसभके अग्रणी छल। ओ रतनजी दादाभाई टाटा आर हुनकर फ्रान्सिसी पत्नी सुजेन्न ब्रियरक पांच सन्तानसभमेसँ दोसर छल। ओ दशको धरि टाटा ग्रुपके निर्देशक रहल आर इस्पात, इन्जिनियरिंग, होटल, वायुयान आर अन्य उद्योगसभक भारतमे विकास केलक। सन् १९३२मे हुनकाद्वारा टाटा एयरलाइन्स शुरू कएल गेल। भारतके लिए महान इन्जिनियरिंग कम्पनी खोलि ओ सपनाके साथ ओ सन् १९४५मे टेल्कोक शूरूवात केलक जे मूलतः इन्जिनियरिंग आर लोकोमोटिभक लेल छल। हुनका वर्ष १९५७मे पद्म विभूषण आ सन् १९९२मे भारत रत्नसँ सेहो सम्मनित कएल गेल छल। 

जेआरडी टाटा वायुयान उद्योग आर अन्य उद्योगसभके अग्रणी छल । १०  फरवरी १९२९ क टाटा द्वारा भारतमे जारी कएल गेल पहिल  पायलट लाइसेन्स प्राप्त केलक।  

२९ नवम्बर १९९३ कs गुर्दामे संक्रमणके कारण जिनेवामे ८९ वर्षक आयुमे हुन्कर निधन भs गेल। 




#Article 775: किरणकुमार राई (साहित्यकार) (106 words)


किरणकुमार राई भारतमे बसोबास कएनिहार नेपाली साहित्यकार छी ।

राईक जन्म सन् १९६७ सितम्बर १३मे पिता सिंहबीर राई आ माता मङ्गली राईक पुत्रके रूपमे दार्जीलिङक भा-तकभर चियाबारीमे भेल अछि ।

राईक मौलिक कृतिसभ ई छी- 
१. आत्मसम्मोहन र घाइते शब्दहरू (कवितासँग्रह, सन् १९९५) 
२. शब्दसित साइनो गाँस्दै (भारतीय नेपाली कविसभक परिचयात्मक लेख सँगालो) 
राईके अनुवाद करै नेपालीमे  प्रकाशित ग्रन्थसभ छी-
१. अर्धवृत्त जीवनयात्रा (सन् १९९७) 
२. अभ्यन्तर दक्षिण कामरूपको (सन् २०००) 
३. अयन दाशरथिको (सन् २००४) 
४. अनुराधाको मुलुक (सन् २००४) 

राई पवाल छल ई  पुरस्कारसभ-
१. स्रष्टा पुरस्कार (सन् १९९३, स्रष्टामा प्रकाशित उत्कृष्ट कविताका लागि) 
२. साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कार (सन् १९९३, अर्धवृत्त जीवनयात्राका लागि)




#Article 776: माधवप्रसाद घिमिरे (साहित्यकार) (375 words)


माधवप्रसाद घिमिरे (जन्म: वि.सं.१९७६ असोज ७ गते) स्वच्छन्दतावादी भावधारा आ परिष्कारवादी शैली भेल कुशल नेपाली साहित्यकार कवि आ गीतकार अछी । उनकर बाल्यावस्थासँ निरन्तर रुपमे नेपाली साहित्यक कविता, खण्डकाव्य, गितिनाटक, कथा, अनुवाद लेख -प्रबन्ध जहिने अनेकौं विधा-उपविधासभमे निरन्तर कलम चलैत अायल बहुमुखी प्रतिभा छी । प्रकृतिका अनेकन बिबिध पक्ष सभके अपन जिवन्त रचना सभामे समावेश करैत जिवनके प्रकृतिसापेक्ष ढङगसँ व्याख्या कैर उनकर लेखाईसभ दिर्घसाधना भरल अछी । ओ १९९२ सालमे गोरखापत्रमे अपन कविता छपावैला छल । उनकर नवमञ्जरी (१९९४), घामपानी (२०१०), नयाँ नेपाल (२०१३), किन्नर-किन्नरी (२०३३) जहिने कवितासङ्ग्रह सङ्कलित अछी । हुनका 'राष्टकवि' सँ सेहो सम्मानित कएने अछी ।

माधवप्रसाद घिमिरेक जन्म वि.सं.१९७६ असोज ७ गते लमजुङ जिलाक पुस्तुन गाउँमे भेल  । जन्मिएके तीन वर्षवाद उनर मात बित
गेल । ६ वर्षक  उमेरसँ अक्षर चिनलक उनकर ८–९ वर्षक उनेरमे  गाउँके फुलेबाबासँग पञ्चांग अध्ययन कैलक । ११ वर्षके उमेरमे घर छौइड दुराडाँडा(लमजुङ) गाउँक संस्कृत पाठशाला हाईत काठमांडूके रानीपोखरीमे रहल संस्कृत प्रधान पाठशाला आ तीनधारा संस्कृत पाठशालाधरि आबैत ओ प्रथम उत्तीर्ण कैलक । तहिना अध्ययनके लेल ओ बनारस पुचल।घिमिरे भारतमे बनारसक क्विन्स विश्वविद्यालयसँ सर्वदर्शनमे शास्त्री केने छल।

१४ वर्षक उमेरमे ज्ञानपुषप शीर्षकमे वि.सं.१९९२ मे गोरखापत्रमे पहिल रचना छपाआ काव्य सिर्जनामे प्रवेश केलक । घिमिरे २००५ सालमे गोरखापत्रमै सह-सम्पादकक जागिरे सेहो छल । बनारससँ शास्त्री प्रथम खण्ड उत्तीर्ण कैलावाद वि.सं. १९९८ सालमे भाषानुवाद परिषदसँ मासिक २५ रुपैयाँ तलबमे लेखक पदमे आ २००१ सालमे गोरखापत्र दैनिकमे मासिक ४० रुपैयाँ तलबमे सहायक सम्पादक रहै काज कैलक। ओकरवाद २०१० सालमे लक्ष्मीप्रसाद देवकोटाक अध्यक्षतामे गठन भेल काव्य प्रतिष्ठानमे चार वर्षधरि सदस्य छल। 

वि.सं. २००८ सालमे लमजुङ फर्किएर माध्यमिक विद्यालयक प्रधानाध्यापक भऽ शिक्षा क्षेत्रमे प्रत्यक्ष रूपमे संलग्न भेल छल । 

चर्चित राष्ट्रिय गीत 'गाउँछ गीत नेपाली' क रचनाकार घिमिरे क अन्य चर्चित गीत सभमे 'फूलक थुङ्गा बगेर गयो' (तारादेवी) तथा 'आजै र राति के देखे सपना' (नारायण गोपाल) अछी। ओ वि.सं. २०१४ सालमे नेपाल राजकीय प्रज्ञाप्रतिष्ठानक सदस्य भेलावाद आजीवन सदस्य, उपकुलपति, कुलपति भऽ  प्रज्ञाप्रतिष्ठानमे लाबा समयधरि सक्रिय रहल ।

वि.सं. २००४ सालमे उनकर जीवनसंगिनी गौरीक मृत्यु भेल ।

उनकर काविक यात्राक पहिल कृति नव मञ्जरी वि.सं. १९९४ सालमे प्रकाशित भेलावाद यात्रा निरन्तर अछी। गौरी राष्ट्रकवि माधव घिमिरेद्वारा लिखल शोककाव्य अछी । साझा प्रकाशन विसं २०१५ सालमे प्रकाशित भेल ई काव्यमे १२ उपशिर्षकमे लिखल कवितासभ संग्रहित अछी ।

राष्ट्रकवि माधव प्रसाद घिमीरे वि. सं. २०६७ सालमे पद्यश्री साधना सम्मान पुरस्कार प्रदान करैने छल ।




#Article 777: सिद्धिचरण श्रेष्ठ (747 words)


सिद्धिचरण श्रेष्ठ (वि.सं.१९६८ जेठ ९ – २०४९ जेठ २२) नेपालक नेपाल आ नेपाली भाषी कवि छल । हुनका नेपाल सरकार सेहो युगकविक पदवीसँ सम्मानित कएल छथि ।

पूर्वी नेपालक सगरमाथा अञ्चल अन्तर्गत ओखलढुंगा जिलाक तत्कालीन मालअड्डाका हाकिम (खरिदार) तथा सुमति उपन्यासका लेखक बुबा विष्णुचरण श्रेष्ठ आ माता नीरकुमारीक एक मात्र बेटाक रूपमे ओखलढुंगा बजारमे विसं १९६९ जेठ ९ गते सिद्धिचरण जन्मल ।

सिद्धिचरण जन्मल ओखलढुंगा जिलामे ओहिसमय स्कुलक नामनिशान नै छल। ब्राह्मण बालकसभ मात्र गुरुक घरमे जा रुद्री, चण्डी आ  वेद पढैत छल । सिद्धिचरणक पिता दिनभर अड्डा आ डेरा आवैतकाल सेहो  रातक ११/१२ बजेधरि चालु कचहरीमे व्यस्त रहल छथि तहिना माता सेहो पूजापाठमै प्रायः दिन बितावैत छथि। एहि स्थितिमे बालक सिद्धिचरणल ओखलढुंगामे सात वर्ष उमेरधरिमे केवल बाह्रखरीक मात्र अध्ययन करै पावलक । पछा वि.स.१९७६ सालमे मातापिता ओखलढुंगासँ अपन घर काठमांडू आएलवाद सिद्धिचरण सेहो सगसग काठमांडू आएल । मुदा, काठमांडूमे  ओबखत स्कुलक नाममे दरबार स्कुलबाहेक  आरो कोनो नै छल आ दरबार स्कुलमे सोर्सफोर्ससँ मात्र पढे पावत आ खर्च सेहो निकै लागेके कारण  जेकोई अहिमे भर्ना नै होइ सकत। जेहोस्, अहिमे भर्ना भऽ पढए लगल  सिद्धिचरणल १९८४ साल (१५ वर्षक उमेरमे)पाचम कक्षामे पुगतै सन्ध्या शीर्षक कविता लेखने छल  ।

सन्ध्या कविता उनकर २०२१ सालमे प्रकाशित कवितासंग्रह कोपिलामे संग्रहित अछि। ई कविता  हुनका अखन  -०६८ साल धरिक उपलब्ध पहिल कविता छी। एहि प्रकार पाच कक्षामे पढतैखाल कविता लिखला करण सिद्धिचरण स्कुल औपचारिक शिक्षा पूरा नै करै सकल। हिसाबमे कमजोर भेला करण कक्षा आठमे  गेलावाद  ओ स्कुल छोइड; कक्षा आठधरिक मात्र स्कुलक औपचारिक शिक्षा हासिल कैलक ।

सिद्धिचरणके अंश सर्वस्वसहित १८ वर्षक कठोर काराबासक सजाय देलक । १८ वर्षक जेल सजाय भेलावादो पछा श्री ३ जुद्धक महषिर् बनल अभिलाषा सेहो पाँच वर्षपछा अर्थात् २००२ सालमे ओ रिहा भेल। कवि सिद्धिचरण अहिना जेलसँ रिहा हैस पहिल कुछ महिना अगाडि उनकर पिता विष्णुचरण श्रेष्ठक देहावसान भेल छल मुदा सिद्धिचरणके अपन  पिताक दाहसंस्कारसमेत  नै करै देलक ।

उनकर मृत्यु वि.स.२०४९ जेठ २२ गते भेल छल ।

 सिद्धिचरण श्रेष्ठक कविता ओखलढुंगाक छी। ओ १९९२ सालमे (२३ वर्षक उमेर)मे ओखलढुंगा रचेने छल। इ कविता नेपाली साहित्यक एकटा प्रकृतिपरक कविता छी। ई ओखलढुंगालगायत १९९२ सालधरिमे सिद्धिचरणक निर्झर, साँझमा हिमालयको दृश्य', 'प्रातकालीन किरण', 'जूनकीरी', 'सपनाझैँ देखेँ तिनलाई', 'वर्षा आयो', 'वसन्तजहिने कविता शारदामे प्रकाशित भेल छल। खास कैर १९९२ सालधरिक सिद्धिचरणक कविता आ लक्ष्मीप्रसाद देवकोटाका सेहो शारदामे प्रकाशित  कविता (मुनामदन खण्डकाव्यसमेत)तर्फ आकषिर्त हाईत प्रसिद्ध समीक्षक सूर्यविक्रम ज्ञवाली नेपाली साहित्याकाशका दुई नयाँ तारा शीर्षक समीक्षा प्रकाशित कऽ आ ओहिमे ओ लक्ष्मीप्रसाद आ सिद्धिचरणल नेपाली कविताक क्षेत्रमे लेखनाथ पौड्यालके समयके परम्परागरगत -परिष्कारवादी कविताधारसँ अलग नवीन -स्वच्छन्दतावादी कविता परम्पराके चर्चा करैते ई दुइ कवि लक्ष्मीप्रसाद आ सिद्धिचरणके 'नेपाली साहित्याकाशका दुई नयाँ तारा'क रूपमे उपस्थापित भेलावाद  लक्ष्मीप्रसाद आ सिद्धिचरणक ख्याति फैलेल लगल छल।

केवल कक्षा आठधरिक मात्र स्कुलक औपचारिक शिक्षा हासिल कैर सिद्धिचरण १९९० सालमे बीए, बीएल पइढ़ लक्ष्मीप्रसाद देवकोटासग पूर्वोक्त प्रकार एकसाथ 'नेपाली साहित्याकाशका नयाँ तारा'क उपाधि पावल,  सूर्यविक्रम ज्ञवालीजहिना  दिग्गज समालोचकसँ―चानचुने बात नै छी । तहिना  अर्थात् १९९२-९३ सालधरिमे सिद्धिचरणल औपचारिक नै भेला वादो अनौपचारिक शिक्षा अर्थात् स्व-अध्ययनसँ, अपना के काते उपर तक उठा सकेछी  तथ्य प्रमाणित होइत अछि, साथै  सिर्जनासँ हुनका लक्ष्मीप्रसाद देवकोटाजहिना दैवी वर प्राप्त, गडगिफ्टेड, जन्मजात कवि छ्थिन्न सेहो प्रमाणित होइत अछि। यथार्थमे खासकैर इ दुइ कवि -लक्ष्मीप्रसाद आ सिद्धिचरण सर्वप्रथम नेपाली साहित्यमे लेखनाथ, सम प्रवृतिक परिष्कारवादी काव्यधारा विपरीत स्वच्छन्दतावादी काव्यधाराक नया युगक प्रवर्तन-प्रतिष्ठापन केने छल। एहिप्रकार नया युगमे प्रवर्तक-प्रतिष्ठापक होइत लक्ष्मीप्रसाद आ सिद्धिचरण; इ कविद्वय ओही बखत, अर्थात् १९९२-९३ सालक सेरोफेरोम वस्तुतः 'युगकवि' बनल छाथि। पछा २००२ सालपछा लक्ष्मीप्रसाद देवकोटा महाकविक रूपमे प्रख्यात भेल नेपाली साहित्य जगतमे 'युगकवि' उपाधि सिद्धिचरण श्रेष्ठमे सीमित आ रुढ भऽ गेल । युगकवि सिद्धिचरण १९९५ सालसँ एकतन्त्रीय जहानिया राणाशासनक विरुद्ध स्पष्टतः विद्रोही एवं क्रान्तिकारी कविक रूपमे लक्ष्मीप्रसाद देवकोटासे अग्रणी देखापरल। ई तथ्य तलक प्रसंगसभसँ स्पष्ट होइत अछि ।

१९९५ सालमे फत्तेबहादुर सिंहक सम्पादनमे प्रकाशित नेपाली विहार नामक कवितासंग्रहमे सिद्धिचरणक तीनटा नेवारी कविता राष्ट्रिय गान', 'वर्षा' र 'गंगुखुसी छापलक, जहिमे वर्षा शीर्षक कवितामे क्रान्तिबिना थन दैमखु स्वच्छ शान्ति अर्थात् 'क्रान्तिबिना यहाँ हुँदैन स्वच्छ शान्ति'  पंक्ति परल छल । ई पंक्तिमे मुखरति कवि सिद्धिचरणक क्रान्तिचेत १९९६-९७ सालधरिमे उत्तरोत्तर प्रखर पावैत गेल  कविका परचिय (१९९५), चम्क युवक (१९९५)जहिन  कविता आ विश्वव्यथा (१९९६-९७)जहिना शोककवितासँ स्पष्ट होइत अछि । अपन  चारवर्षके बेटा विश्वचरण श्रेष्ठक मृत्युशोकमे लेखिल तथा शारदाक १९९६ भदौक अंकमे कुछा  अंश प्रकाशित भेल ई विश्वव्यथाक कुछ पंक्ति ई छी :

ओही बखत स्वेच्छाचारी क्रूर जहानिया राणाशासनक समयमे कवि सिद्धिचरणक अहिने खुलेआम विद्रोह अपनावैत खालक अभिव्यक्तिसँ तत्कालीन निरंकुश शासनसँ मात्र नै, अपितु सृष्टिकर्ता स्वयं परमेश्वरसग सेहो विद्रोह कैर अति आतुर रहल खुलासा भेल।

वास्तवमे कवि सिद्धिचरण अपन उपर्युल्लिखित कवितासभमे ओहिबखत जनमानसमे भित्रर गुसै गेल आ आरो कोई मुखरति तुलना नै सकल एकतन्त्रीय क्रूर जहानिया राणाशासनविरोधी युगीन विद्रोह आ क्रान्तिक आवाजके नै वाणी दिन अग्रसर रहल।




#Article 778: धर्मभक्त माथेमा (194 words)


धर्मभक्त माथेमाकs जन्म पिता सुब्बा आदिभक्त माथेमा आ माता चन्द्रकुमारी देवीक कोखसँ वि.सं. १९६६ आशिन ९ गते काठमाडौक ओमबहाल नवहिलमे भेल छल। पिता आदिभक्त राणासभक लेल भारतसँ समान लाबैत छल। ओही कारणसँ धर्मभक्त दार्जीलिङमे शिक्षा आर्जन करलथि। किछ समय कलकत्तामे सेहो पढलथि। शरीर दुब्ला भेलाक कारन व्यायाम करs लागल छल। बङ्गालक शारीरिक व्यायामशालासँ ओ बङ्गाल च्याम्पीयन भs नाम कमाउलथि। बङ्गाल अङ्ग्रेजक पालासँ राजनैतिक चेतना भेल ठाम छल। ओहीठामसँ हुन्का राजनैतिक ज्ञान मिलल छल। हुन्कर सम्पर्क बङ्गाली नेता चित्तरन्जन दाससँ भेल। किछ समयक बाद हुन्कर बाबुजीक राणा प्रधानमन्त्री जुद्ध शमशेर निर्वासित करि देलक। वि.सं. १९९०मे धर्मभक्त माथेमाक उत्तरादेवीसँ वैवाहिक सम्बन्ध कायम भेल आर ओ भारतक स्कटिस चर्च कलेजसँ आई.ए.उत्तीर्ण करने छल। वि.सं. १९९० सालमे दशरथ चन्दसँ धर्मभक्तक भेट भेल। बादमे चन्द सेहो प्रजापरिषद्क सँस्थापक सदस्य भेल। ओ घोडेजात्रामे टुँडीखेलमs शारीरिक तन्दुरुस्ती आ व्यायामक प्रदर्शनी करला पर राजा त्रिभुवन बहुत प्रभावित भेल छ्लाह। ओ स्व.राजा त्रिभुवनक सेहो व्यायाम शिक्षक छल। आर हुन्का द्वारा १९९३ सालमे अपन फुपूक घरमे नेपाल प्रजापरिषद्क स्थापना करने छल। प्रजापरिषद् आ राजा त्रिभुवनक बीचमे हुन्के द्वारा सम्पर्क भेल। लैनचौरमs राजा आ प्रजापरिषद्बीच भेल सम्पर्क राणासभ बुझि गेल। धर्मभक्तक पक्राउ करल गेल। वि.सं. १९९७ माघ १२ गते हुन्का सिफलमे फाँसी देल गेल छल।




#Article 779: शुक्रराज शास्त्री (162 words)


शुक्रराज शास्त्री (जन्मनामःशुक्रराज जोशी) नेपालक शहीद आ नेपालभाषाकऽ प्रमुख साहित्यकार छल। ओ आर्य समाजक एक सक्रिय सदस्य छलाह । हुन्का राणासभ द्वारा नेपाल सम्बत १०६१मे टेकुकऽ गाछमे लटकाकऽ मारने छल।

हुन्कर जन्म नेपाल सम्बत १०१३ गुन्लाथ्व गुंपुन्हि(वि.सं. १९५०)मे माधवराज जोशी आ रत्नमाया जोशीक बेटाक रूपमे काठमाडौक खिउँलँ, थाय्‌मदुमे भेल छल। नेवार समुदाय अन्तर्गतक क्षत्रीय (छथरी) जाति भितर पर्निहार जोशी कूलमे जन्म भेलाक कारण ओ बाबु जका संस्कृत पढने छल। हुन्कर पिता आर्य समाजक नेता छल। हुन्कर विवाह मेनका देवी माथेमा (धर्मभक्त माथेमाक बहनि)सँ भेल छल। ओ बादमे उच्च श्रेणी संस्कृत भाषामे शास्त्री उत्तीर्ण करलासँ हुन्का 'शास्त्री' कहल गेल। शास्त्री द्वारा भारतक इलाहाबाद स्थित दयानन्द आर्य समाजी विद्यालयक प्रधानाध्यापक भऽ काम गरिक सँगे सामाजिक सुधारक क्षेत्रमे भारतक मदनमोहन मालवीयसँ काम करने छल। पञ्जाब विश्वविद्यालयसँ अङ्ग्रेजी विषयमे स्नातक करलाक बाद ओ नेपालमे एलखनि।

नेपाल भाषा, नेपाली, हिन्दी, संस्कृत आर अङ्ग्रेजी भाषाक ज्ञाता स्व. शास्त्रीका ६टा सँ बेसी पुस्तकसभ प्रकाशित अछि। ब्रह्मसूत्र शाङ्कर भाष्य,स्वर्गको दरबार, नेपाल भाषा व्याकरण, संस्कृत प्रदीपलगायत हुन्कर बहुत पुस्तक प्रकाशित अछि।




#Article 780: नेपालक पहिल संविधान सभा (726 words)


नेपालक पहिल संबिधान सभा एक सदनीय अंग छल जे वि.स २०६५ जेठ १५ सँ वि.स. २०६९ जेठ १५ धरि कार्य  कैलक। अहि संबिधान सभाक सदस्यसभक निम्ति निर्वाचन वि. सं २०६४ साल चैत्र २८ गते सम्पन्न भेल छल। संबिधान सभाके नेपालक नयाँ संबिधान लेख्ने जिम्मेवारी दियोने छल। अहि सभा व्यवस्थापिका संसदक रुपमे समेत काम कारब अधिकार प्राप्त भेल । ई संबिधान सभामे पहिल भेल, निर्वाचित भेल सिट अर्थात् प्रत्यक्ष तर्फ २४० जना सदस्यसभ, समानुपातिक सिटक तर्फसँ ३३५ सदस्यसभ आ बाँकी २६ जना सदस्यसभ मन्त्रिपरिषद्क सिफारिसमे निर्वाचित भेल छल।

तत्कालिन नेकपा – माओवादी सबसँ पैग पार्टीक रुपमे निर्वाचित भेल। पहिल संबिधान सभाक पहिल वैठकी नेपालके राजतन्त्रसँ गणतन्त्र राज्यक रुपमे परिभाषित कैलक।

पहिल संबिधान सभाल तोकल समयमे संबिधान दिन असफल भेलावाद अहिक म्याद पुन: चार वर्षक लेल बढाउने छल। चार वर्ष पश्चात वि.स. २०६९ जेठ १५ गते संविधानक मस्यौदा तयार करै असफल भेला कारण पहिल संविधानसभा भंग भेल। दोश्रो संबिधान सभाक सदस्यसभक निर्वाचन वि.स. २०७० मंसिर ४  गते सम्पन्न भेल।

अन्तत: २०७२ असोज ३ गते अहि संविधान सभासँ नेपालक संविधान २०७२ जारी भेल ।

समानुपातिक तर्फसे आधाकारिक आ अन्तिम नतिजा वि.स. २०६५ वैशाख २५ गते निकालने छल। वैशाख ३० गते भेल निर्णय अनुरुप संबिधानसभाक पहिल वैठक जेठ १५ गते बसैल जेक लेल  जेठ १४ गते नै सभासदसभ  शपथ ग्रहण केने छल।

२०६५ साल जेठ १५ गते बसैल पहिल बैठकी नेपाल संघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्र मुलुक भेल घोषणा  कैलक  । अहिसँ नेपालमे २३८ बर्ष पुराना राजतन्त्रक अन्त्य भऽ गणतन्त्रक स्थापना भेल छल। कुल ५६४ जना सदस्यक मतदानमे ५६०  ई निर्णयक पक्षमे मत खसालक  तहिना राप्रपा – नेपालक ४ सदस्यसे विपक्षमे अपन मत खसालक। २०६५ जेठ १५ गते बसैल संविधानसभाक पहिल बैठकमे मुलुक गणतन्त्र भेल घोषणा कैलक ओहिके १५ दिनपछा राजा ज्ञानेन्द्र नारायणहिटी राजदरबारसँ विदा भेल।

सत्ता साझेदारक विषयमे छलफल कैर जेठ १९ गते  तत्कालिन नेकपा माओवादी, नेपाली कांग्रेस आ नेकपा – एमाले सहित १३ राजनीतिक दलक नेतासभक शान्ति तथा पुनर्स्थापना मन्त्रालयमे भेट वार्ता करलावादो कोनो  निचोड नै निलल ।  नेकपा माओवादी राष्ट्रपति आ प्रधानमन्त्री दुनुके दावी कैर रहल छल तहिना नेपाली कांग्रेस आ नेकपा – एमाले ई प्रस्तावके अस्विकार केने छल । ओसभ ई विषयके संबिधान सभाक एक सामान्य मतदानमार्फत टुंगो लवैएल पक्षमे एकमत छल । 

जेठ १९ मे गोरखामे एक रयालीके सम्बोधन करैत नेकपा – माओवादीक अध्यक्ष प्रचण्ड गिरिजाप्रसाद कोइरालाके दुइ-तीन दिनमे राजीनामा दिन अल्टिमेटम मात्रै नै देलक अना करलासँ सडक संघर्ष चर्काउने चेतावनी समेत देने छल । 

जेठ १९ मे पुर्व राजा ज्ञानेन्द्र अपन बसोबासक निम्ति प्रबन्ध मिलादी सरकारके अनुरोध क अनुरुप जेठ २२ गते नेपाल सरकार नागार्जुन दरबार प्रदान करैल निर्णय केलेक। जेठ १९ मे प्रचण्ड कोइरालाके  भेट जेठ २३ धरि सरकारसँ पछा नै हैट सडक आन्दोलन करब धम्की देलक । जेठ २२ मे तीन दल – नेकपा – माओवादी, नेपाली कांग्रेस आ नेकपा एमाले – वैठक बसेल मुदा सहमति  जुटल नै सकल । 

जेठ २३ गते नेकपा – माओवादीक केन्द्रिय समितिक वैठक राष्ट्रपतिक लेल अपन दलके अडान नै रखै मुदा राष्ट्रपतिक लेल नागरिक समाजसँ सदस्य राइख्न सकल विकल्प प्रस्तुत कैलक। माओवादी संसदसँ हवैवाला  प्रधानमन्त्रीय पद्धतिप्रति पार्टीक विरोध रहल धारणा सार्वजनिक कैलक। 

जेठ २३ मे संबिधानसभाक दोर्श्रो वैठक बसैल मुदा दलसभबीच असमझदारी रहलकारण ओ कोनो ठोस निर्णय नै देलक। 

जेठ २९ गते पुर्वराजा ज्ञानेन्द्र नारायणहिटी दरबारमे पत्रकार सम्मेलन कैर अपन गणतन्त्रके स्वकार कैर आ एकरा पूर्ण सहयोग करब वाचा देलक। ओ नेपालमे रहव इच्छा कैर आ नेपालबाहर कोनो प्रकारक सम्पति नरहल खुलासा कऽ अपन सम्पति राख्न पावत आशा व्यक्त कैलक।  ज्ञानेन्द्र ओहि दिन नारायणहिटी दरबार छाइड नागार्जुन दरबार गेल। 

जेठ ३० गते सरकारमे सम्मेलित नेकपा - माओवादीक मन्त्रीसभ राजीनामा दऽ । स्थानीय विकास मन्त्री देव गुरुङ राजीनामा सङ्क्रमणकालक अन्त्य आ नया सरकारक चल्दी गठनके निम्ति राजीनामा दऽ प्रष्टोक्ति देलक । मुदा मन्त्रीसभक राजीनामा प्रधानमन्त्री कोइरालाके नै देलासे ई  प्रभावकारी नै भेल ।

असार ५ गते तीन ठुला दल संबिधान संशोधन कऽ दुइ तिहाईसँ नेभेल संबिधान सभाक सामान्य मतदान प्रक्रिया मार्फत प्रधानमन्त्रीक चयन कैर सहमतिमे पुगल। ओहि दिन पार्टीसभाके माओवादी लडाकुसभ्के नेपाली सेनामे समायोजन करब निर्णय समेत लेलक। मुदा सत्ता साझेदारीमे  कोनो किसिमक सहमति नै भेल। 

असार ७ गतेको सात दलीय मोर्चाक वार्तामे नेकपा – माओवादी तर्फक मन्त्रीसभके सामुहिक राजीनामा दऽ। असार १० गते पुन: सात दलीय मोर्चाक वैठकसे संबिधानमे संसोधन कैर राष्ट्रपति निर्वाचन बहुमतक आधारमे होएब सहमति केलक ।

ओहि दिन मन्त्रीपरिषद नियुक्त कैर २६ जना संबिधान सभा सदस्यक निम्ति सिट-बाडफाडमे सहमति जुटल। नेकपा – माओवादीले ९ सिट, नेपाली काँग्रेस आ नेकपा – एमाले  ५ सिट, मधेशी जनाधिकार फोरम २ सिट, सद्भावना पार्टी, नेपाल किसान एंव मजदुर पार्टी, जनमोर्चा नेपाल आ नेकपा – मालेले १ सिटमे  समझदारी जुटल।




#Article 781: गोपाल प्रसाद रिमाल (183 words)


गोपालप्रसाद रिमाल (१९७५-२०३०) नेपाली साहित्यमे प्रगतिवादी साहित्यकारक रूपमे चिनावैत अछि । काठमाडौंक लगनटोलमे जन्मल गोपालप्रसाद रिमाल निकै प्रतिभावान् व्यक्तिक रूपमे परिचित अछि । हुनकर आमाको सपना कृतिक लेल हुनका २०२० सालक मदन पुरस्कार प्रदान केने छथि । हुनकर वि.सं.२०३० मे त्रिभुवन पुरस्कारसँ सेहो सम्मानित भेल । छन्दमे लेख्ने परम्पराके  तोइड गद्यमे कविता  लिखलासे   उनकर क्रान्तिकारी कविक रूपमे सेहो परिचित अछी । कम लिख ढेर जस कमावै बालामे हुनका  एक छी ।

रिमालक जन्म वि.सं. १९७४ जेठ १८ गते लगनटोल, काठमाडौंमे भेल छल। उनकर पिताक नाम उमाकान्त रिमाल छी।

ओ  प्रमाणपत्र तहधरिक अध्ययन केने छल ।

रिमालक  प्रकाशित रचना वि.सं. १९९२मे शारदामे प्रति शीर्षकक कविताके मानैत अछि ।

उनकर निधन वि.सं. २०३० कार्तिक ८ गते काठमाडौंमा भेल छल ।

१) मसान (नाटक, वि.सं. २००३) 
२) यो प्रेम (नाटक,लेखन २००२, प्रकाशन वि.सं. २०१५) 
३) आमाको सपना (कविता सङ्ग्रह २०२०)
उनकर मसान समकालिन साहित्यमे चर्चित नाटक छी। आमाको सपना कवितासंग्रह लगायतक उनक विभिन्न कृतिसभ प्रकाशित अछी। चर्चित नेपाली गीत  रातो रगत र चन्द्र सूर्य जंगी निशान हाम्रो    हिनका लिखने अछि।

१) वि.सं. २०१९क मदन पुरस्कार आमाको सपना का लेल प्राप्त
२) वि.सं. २०३०मे 'त्रिभुवन पुरस्कार' प्राप्त




#Article 782: जगदीश घिमिरे (352 words)


जगदीश घिमिरे (विसं २००२- २०७०)  नेपाली लेखक तथा साहित्यकार छल। क्यान्सर सिकिस्त भऽ मृत्युशैयासँ लिखलक अपन आत्मवृर्तान्त अन्तर्मनक यात्रासँ ढेर ख्याति कमावल घिमिरे लाम्बा समयसँ सामाजिक कार्यमेसमेत संलग्न छल।

जगदीश घिमिरेक जन्म वि.सं. २००२, चैत्र २८ गते, रामेछाप जिलाक मन्थली  गाममे भेल अछी । ओ प्रारम्भिक शिक्षा नेपाल आ उच्व शिक्षा भारत आ बेलायतसँ प्रात्त  केने अछि। छोटेसँ उनकर अभिरुचि साहित्य आ पत्रकारितामे छल। तहिना उनकर समाजशास्त्रमे एम्. ए. आ जनसंख्यामे पोष्ट ग्य्राजुएट डिप्लोमे केने अछि । राष्ट्रिय तथा अन्तराष्ट्रिय गैरसरकारी संस्थासभमे उनकर लाम्बा संलग्नता रहल अछि  जसमार्फत उनकर रामेछाप जिलाक सामुदायिक बिकासमे बहुत सहयोग केने अछि। साहित्यिक आ सामाजिक कार्यमे संलग्न भऽ क्रममे उनकर नेपाल, भारत, पाकिस्तान, श्रीलङ्का, केन्या, बेलायत, सिङ्गापुर, फ्रान्स, युगोस्लाभिया, थाइलेण्डजहिना ढेर देश भ्रमण केने अछि। रामेछापमे बिकासनिर्माण आ सामाजिक उत्थानक कार्य करैत घिमिरे ढेर बाधा-विरोधसभक सामना करै परल। मुद उनकर निरन्तर रूपमे समाज रूपान्तरणक काममे लगल रहल।

जगदीश घिमिरेमे निहित संवेदनशीलता उनकर एक मार्मिक सिहित्यसर्जक मात्र नै बनल एक सहृदयी विकासअभियन्ता सेहो बनल। सामाजिक कार्यमे घिमिरेके पत्नी दुर्गा सेहो तहिना साथ देलक। एबीसी नेपालमे कार्यरत दुर्गा घिमिरे ओ प्रथम महिला मध्येक अछी जे बेचेल नेपाली चेलीबेटीके मुम्बइसँ उद्धार कैर लावल साहसिक काममे अग्रणी भुमिका खेलक। २०४६ सालमे घिमिरे दम्पत्तील तामाकोशी सेवा समिति स्थापना कैर रामेछाप जिलाक गरीब जनताक आर्थिक जिवनस्तर सुधारैत सक्रिय भेल। ईक्रममे क्रियाशील जगदीश आ दुर्गा घिमिरेउपर  राजनीतिक-सामाजिक विरोधीसभक प्रहार भऽ त स्वभाविक अछी। मुद घिमिरे दम्पत्तीउपर दोश्रो आक्रमण सेहो भेल  जब जगदीशके  'माइलोमा'  रत्तक्यान्सर भेल। ओकर उपचारक क्रममे भोगे परल दुःख-कष्टक मार्मिक वर्णन घिमिरेक पुस्तक 'अन्तर्मनक यात्रा'मे छि । मुदा जगदीश रोगके सेहो  पछालक। ई भयावह रोगक आक्रमणपछा सेहो   उनकर वैराग्य आ विगलितमनस्कता नै देखलक । क्यान्सर भेलावाद घिमिरे साहित्यिक सिर्जना आ सामाजिक बिकास अभियानमामे यथावत सक्रिय रहल।
घिमिरेक ६८ वर्षक उमेरमे २०७० कार्तिक १४ गते काठमाडौंक ओम अस्पतालमे  निधन भेल।घिमिरेक अन्त्येष्टी काठमाडौंकपशुपति आर्यघाटमे भेल। घिमिरेक श्रीमती दुर्गा घिमिरे बेटा हिमाल घिमिरे आ बेटी जुन घिमिरे छी।

उपन्यास, कथा, नाटक आदिक पुस्तक लेखैत आएल घिमिरेक प्रकाशित कृतिसभ 

प्रकाशोन्मुख कृतिसभ

सम्पादित, अनूदित आ फुटकर कृति

उनकर कृति अन्तर्मनको यात्रा वि.सं. २०६४ सालक मदन पुरस्कार पावल अछि। घिमिरे मैनाली कथा पुरस्कार सेहो पावल छल। तहिना उनकर अन्तर्मनको यात्राक लेल उत्तम शान्ति पुरस्कार सेहो  पावल अछि ।




#Article 783: नवराज सुब्बा (492 words)


डा. नवराज सुब्बा (अङ्ग्रेजी: ) कवि, गीतकार तथा निबन्धकार छथि। मानवता, राष्ट्रियता तथा सीमान्तकृत समुदायक आवाज बोकने उनकर रचना सरल, सरस आ सबल ढंगसे नेपाली साहित्य आ संगीत जगतमे मुखरित अछि । हुनका गायक सेहो अछि।हुनका एक दक्ष जनस्वास्थ्यकर्मी तथा शोधकर्ता सेहो अछि । उनकर नेपालक विभिन्न जिलामे जनस्वास्थ्य व्यवस्थापनमे तीन दशक से बहुत काम केलक । हुनकामे बहुमुखी प्रतिभा अछि । हुनकर जन्म सन् १९६१ अक्टोबर १ मे ताप्लेजुङ जिलाक हाङपाङ गाममे भेल छथि ।

उनकर  त्रिभुवन विश्वविद्यालयसँ जनस्वास्थ्य आ नेपालीमे स्नातकोत्तर तथा स्वास्थ्य मनोविज्ञानमे विद्यावारिधि केलक । उनकर लेखन ७० क दशकमे सुरु केलावादो सेहो  समाजशास्त्र समेतक अध्ययन करै मात्र सन् २००० पछ उनकर पुस्तकाकार कृतिसभ प्रकाशमे  लवने याएल  उनकर कहब   रहल अछी ।

उनकर नेपालक जनस्वास्थ्य आ स्वास्थ्य मनोविज्ञान क्षेत्रक विभिन्न शिर्षकसभमे अध्ययन कऽ लेख तथा शोधपत्रसभ अन्तराष्ट्रिय जर्नलसभमे प्रकाशित केने छल । 

 

बेलायत स्थित अनलाईन नेपाली साहित्य मञ्च सन् २००७ मे पहिल अनलाईन वेभक्याम विश्व कविता प्रतियोगिता आयोजना केने छल । प्रतियोगितामे २७ देशक १०३ जना प्रतियोगी सहभागी छल । विराटनगर नेपालसँ अनलाईन वेभक्याममे  सहभागी कवि नवराज सुब्बा प्रतियोगितामा प्रथम भेल । हुनका सुब्बाक चर्चा चलाल्क । उनकर कवितासभ अंग्रेजी आ वंगला भाषामे सेहो अनुवाद केलक अछि । कवि वैरागी काइँला नवराज सुब्बाकाके  सरल मुदा गहिर लोग छी कहैत अछि आ लेखनक भाषा सेहो  सरल छी कहैत कविता सरल आ गहन रुपमे लेखलक काम कठिन कार्य छी जे सुब्बा केने अछि कहैत अछी । भाषाशास्त्री बालकृष्ण पोखरेल नवराजक कवितामे नकारात्मक ब्यापार नै पावत आ उनकर सफलताक एकटा चचुरो चुमेल अछी कहैत अछि । समालोचक डा. गोविन्दराज भट्टराई नवराज सुब्बाके माता, देशप्रेम आ सीमान्तकृत समुदायक विषयमे लिखलक एक शक्तिशाली कविक रुपमे लेने अछी । तहिना   समालोचक लीला लुइँटेल नवराजक कवितामे नारीके सम्मान केने अछि उच्च स्थान देने अछि  कहैत अछि । समालोचक डा. कृष्णप्रसाद दाहाल नवराजक कवितामे उच्च, उदात्त आ स्वाभीमानी जीवनमूल्यक प्रतिबिम्बन भेल अछि कहैत अछि । समालोचक दधिराज सुबेदी सुब्बाके कईलके परिवेशमे  जन्मल  भऽ सिद्धिचरण श्रेष्ठ, हरिभक्त कटुवाल आ भूपी शेरचन पछ के  पङ्तिमे  उनकर नाम दरिने छल कहैत अछि । आख्यानकार परशु प्रधान कहैत अछि– नवराज सुब्बा दक्ष आ बढीया कवि मात्र नै बढीया निबन्धकार सेहो अछी  । उनकर बढीया प्रशासक मात्र नै बढीया मानवतावादी  सेहो अछी ।बढीया गीतकार मात्र नै बढीया गायक सेहो अछी। उनकर भित्रर सर्वतोमुखी प्रतिभा अछी । हुनका बखमे चिनके  कदर करना चाही
 । हाल नवराज सुब्बाक कृतीत्व तथा ब्यक्तित्वक बारेमे विभिन्न शोधार्थीसभके त्रिभुवन विद्यालयमे अध्ययन कैर रहल अछि । 

बरिष्ठ गीतकार रत्न समशेर थापा नवराज सुब्बाक गीतसभ राष्ट्रियभावना ओतप्रोत अछि जे  सब देशभक्त नेपालीकें सुनै परत्त बतावैत अछि  । दोसर बरिष्ठ गीतकार किरण खरेल कहित अछि सुब्बाक गीतमे वाह साहित्यिक गहिराई अछि जे  गीतकें गम्भीर बनावैत अछि । दोसर बरिष्ठ गीतकार कालीप्रसाद रिजाल सुब्बाक गीत नेपाली गीतसंगीत क्षेत्रक अमूल्य निधिक रुपमे रहल अछि  । 

हामी नेपाली 
नेपाली नेपाली हामी नेपाली
मधेशी होस वा जनजाति हामी नेपाली
हिमाल, पहाड, तराई माटोका रङ्ग एउटै छ
शर्मा या शेर्पा थारू या राई रगतको रङ्ग एउटै छ
नेपाली नेपाली हामी नेपाली...
(देशको माया देशभक्ति गीति एल्बम 2009)

जनस्वास्थ्य क्षेत्रमे उनकर पुस्तकसभ प्रकाशित अछि ।
कृतिसभ 




#Article 784: धरणीधर कोइराला (269 words)


धरणीधर कोईराला(वि.सं. १९४९ - वि.सं. २०३६) नेपाली भाषासेवी तथा शिक्षाविद् धरणीधर एक कुशल कवि सेहो अछि ।

धरणीधरक जन्म तात्कालिन पूर्व २ नम्बर, दुम्जामे वि.सं. १९४९ साल माघ २४ गते भेल अछि । माता पूण्यमातादेवी तथा पिता आवन्तिनाथ कोईरालाका पुत्र धरणीधरक बाल्यकाल हजुरबुबा पूर्णानन्दक काखमे बितल । बनारससँ आई ए क अध्ययन पुरा कैर  कवि धरणीधर नेपालमे जागिर नमिलपछा अपन समकालिन मित्र पारसमाणि प्रधानक सहयोगमे वि.सं.१९७६ मे दार्जिलिङक एक सरकारी विद्यालयमे नेपाली शिक्षकक रूपमे प्रवेश करलक । शिक्षकक रुपमे रहेल समय कलकत्ता विश्वविद्यालयसँ स्नातक तथा ढाका विश्वविद्यालयसँ बि टि परिक्षा उत्तिर्ण करल धरणीधर संस्कृत भाषाक प्रकाण्ड विद्वान छल । पछ ओहि विद्यालयमे प्रधानाध्यापकक कार्यभार पावल धरणीधर सन् १९४९मे सेवानिब्रित्त भेल । तहिना स्वतन्त्र भारतक पहिल विधानसभा निर्वाचनमे काङ्ग्रेसक तर्फसँ प्रत्यासी बनल धरणीधर पराजित भेला वाद सन् १९४९ डिसेम्बर सँ दार्जिलिङ जिला सामाजिक शिक्षा अधिकारी भऽ सन् १९५४ डिसेम्बर धरि कार्यरत रहल । तहिना वि.सं. २०१२ सालमे नेपाल फर्किएल धरणीधर फर्पिङक त्रिभुवन आवासीय माध्यमिक विद्यालयमे प्रधानाध्यापकक रुपमे कार्यरत रहल । अपन सम्पूर्ण जीवन नै नेपाली भाषा तथा शिक्षाक सेवामे समर्पित कैर धरणीधरक वि.सं. २०३६ सालमे पशुपति क्षेत्रमे  निधन भेल ।

धरणीधरद्वारा लिखित नैवेद्य नामक प्रसिद्ध कविताकृति बाहेक स्पन्दन, नेपाली मन्जरी, लोकक राज जहिना कविताकृतिसभ सेहो  प्रकाशित अछि।  धरणीधर विभिन्न लेख रचना , जीवन तथा वक्तव्यसभ नेपाली वाङमयके देने अछि। शैक्षिक तथा सामाजिक चेतना, उच्च सस्कार, देशभक्ति एवम् मानविय धारणा जगावल खालक प्रेरणा धरणीधरक कृतिसभमे मिलैत अछि ।

वि.सं. २०२२ सालमे धरणीधरके नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानसे त्रिभुवन प्रज्ञा पुरस्कार सँ सम्मानित करला साथ आजिवन प्राज्ञक रुपमे सम्मान देलक । वि.सं. २०३१ सालमे नेपाली साहित्य सम्मेलन रथ शोभायात्रा गराई सम्मान देलक । वि.सं. २०३१ सालमे त्रिभुवन विश्वविद्यालय साहित्य महाविद्यावारिधिसँ सम्मानित केने अछि ।




#Article 785: मोतिराम भट्ट (518 words)


मोतिराम भट्ट (१९२३ भदौ २५ - १९५३) नेपाली साहित्यक प्रथम गजलकार, जीवनीकार, समलोचक तथा माध्यमिक कालक प्रवर्तक छल। कमै  बाइच नेपाली साहित्यमे अत्यन्तै ढेर योगदान पुर्यावल ओ नेपाली साहित्यक प्रेरक व्यक्तित्व, कुशल नायक आ होनहार प्रतिभा मानैत अछि। १९४० सँ १९७६ सालधरिक नेपाली साहित्यमे श्रृङ्गारिक धाराक सुरुवातकर्ता मोतिराम भट्ट छल।

मोतिराम भट्ट नेपाली साहित्यामे भानुभक्त आचार्य पछा आवैंल सशक्त व्यक्तित्व छी। उनकर नेपाली भाषा साहित्यमे समालोचनाक सुरु कैर; भट्ट नै संवत् १९४८मे कवि भानुभक्त आचार्यक जीवनचरित्रके प्रकाशमे लबल्क। कवि भानुभक्त आचार्यक जीवन चरित्रमे मोतिराम भट्ट प्रभाववादी ढङ्सँ व्याख्यात्मक रूपमे भानुभक्तबारे प्रशंसा करल गेल  मानैत अछि। अपन खोजल  कविके प्रतिभा सम्पन्न तथा सहज कवि छल माने  प्रमाणित कैर  उनकर  ओही  जीवनचरित्रमे  भानुभक्त रचल कहैत  जताततै फुटकर सिलोकसभ देखल गेल कहैत अछि।

मोतिराम भट्टक जन्म १९२३ साल कुशेऔसीका दिन भदौ २५ गते,शनिदिन काठमाडौँक भोसिक टोलमे भेल छल। मोतिराम भट्टक वंश कुमाउगढसँ आएल अछि । मोतिराम भट्ट पण्डित दयाराम भट्ट आ रिपुमर्दिनीदेवी भट्टक माझला सुपुत्रक रूपमे जन्मेल छल। भट्ट दम्पतिक प्रथम पुत्रचाहि जन्मनासाथ दिवङ्त भेल छल। मोतिराम भट्टकें दीर्धजीवी राख्न उनकर मातापिता हिनका नाकक दाहिना पोरा छेदने छल । 
मोतिराम भट्ट ५ वर्षक उमेर अक्षरारम्भ केने छल। ६ वर्ष भेला वाद ई काशी गेल छल । ओहीबखत हिकर पिता पं. दयाराम भट्ट  माता रिपुमर्दिनीदेवी विशेष कामसे काशी रहित छल। ओकरवाद मोतिराम भट्टक शिक्षाक प्रारम्भिक जग काशीमे नै रहैल लगल। ओत ई फारसी स्कूलमा भर्ना भऽ आ ओतहि रहितरहै  हिनका फारसी आ उर्दू पढे लाग्ल। काशीमे हिनकर भेट भारतेन्दु हरिश्चन्द्रसग भेल, भारतेन्दु मोतिराम जना प्रख्यात छल। भारतेन्दुसग गहकिलो सङगत करै उनकर नेपाली साहित्यक सेवा केलक आ ई पढाइमे सेहो  समर्पित छल।  मोतिराम पछा फारसी, उर्दूक अतिरिक्त संस्कृत, हिन्दी, अङ्ग्रेजी भाषामे सेहो दक्ष भऽ लगल। बनारसमे हिनका हरिश्चन्द्र स्कूलमे अङ्ग्रेजी भाषासाहित्यक अध्ययन केने छल।  आठ वर्षक उमेरमे बनारसमे नै हिनका  व्रतबन्ध केलक।

बनारस रहितकाल हिनका गजल गावैंल आ सितारवादन सिकलक। बनारसक प्रसिद्ध सितारवादक पन्नालालसँ हिनका सितार बजवैल आ गीत गावैंल सिकने छल। करिब आठ वर्ष बनारस बसेर ई १९३७ सालमे पुनः काठमाडौँ आएल। ओहि साल हिनका १५ वर्षक उमेरमे विवाह केलक । विवाहपछा ई कुछ दिन काठमाडौमे रहल। ओहिबखतसे  उनकर नेपाली भाषामे लिखल गेल मीठामीठा गीत, कविता, भजन आ गजल सुनैल वञ्चित छल। बनारसमे रहित काल  हिनका चार सय शायरीसभ लिखने छल मुदा ओही बखत उनकर नेपाली गीत, कविता आ गजल नै छल। ओहि बखत उनकर नरनारीक युगलरदोहरीरजुहारी गीत सुनैल पावल। वास्तवमा ओहि बखत सुनल रसिया गीतकें ई मोहित सेहो भेल । तहिना  उनकर मीठा गीतसभके हृदयमे रोप्न छागेल, मस्तिष्कमे खेलावैं लगल  आ स्वरद्वारा प्रस्तुत करै लगल।

दरबार हाई स्कूलमे अध्ययन करैत खाल  मोतिराम भट्ट नामी भेल छल। ई पढाइमे सेहो तेजिला छल। हुनकर दरबार हाई स्कूलक दशम कक्षामे अध्ययन करै बखत  अर्थात् १९४८ सालमे बेलायतसँ नेपाल-भ्रमणमे आएल लर्ड राबर्ट प्रधानमन्त्री चन्द्रशमशेरसग दरबार हाइस्कूलक निरीक्षणमे गेल छल। ओही बखत स्कूलक प्रथम विद्यार्थी मोतिराम भट्ट कह चन्द्रशमशेर परिचय करलसाथ ई पाहुनाके खडाभेल मोतिरामके अपन हातसँ मेच दऽ बैसल कहलक।

१९५० सालमे  ई कलकत्तामे एए.आईए परीक्षामे सम्मिलित भेल। ओइ परीक्षामे ओ अनुत्तीर्ण भेल। तहिना कुछ खिन्न भावना रैख ओ  १९५२ सालमे पुनः कलकत्ता गेल। ओहीबखत ओ  निथला परल। कुछ समयपछ ओ अशक्त शरीर लऽ काठमाडौ आएल। सात महिना ओछयानमा थला परल कुशे औसीमे एकतीस वर्ष के दिन ओ १९५३ सालमे काठमाडौ पशुपति आर्यघाटमा स्वर्गीय भेल।




#Article 786: वसन्त पञ्चमी (156 words)


वसन्त पञ्चमी हिन्दूसभक पर्व छी । ई दिन विद्याक देवी सरस्वतीक पूजा कएल जाइत अछि । ई पूजा पूर्वी भारत आ नेपालमे हर्ष उल्लासक साथ मनाएल जाइत अछि । ई दिन महिलासभ पियर वस्त्र धारण करैत अछि । ई पर्व वेदाङ्गज्योतिषकालमे वसन्त ऋतु मधु (आर्तव चैत्रमास) मासमे मनाएल जाइत छल । बादमे मात्र वार्हस्पत्यसंत्सरक निरयण माघ शुक्ल पञ्चमीमे मनवैलेल सुरु कएल गेल । जकरा एखनो वसन्त पञ्चमी कहल जाइत अछि । 

प्राचीन भारत आ नेपालमे पूरे सालके जे छ मौसमसभमे बाँटल जाइत छल ओहिमे  वसन्त लोकसभक सभसँ मोन पोसन्द मौसम छल । जखन फूलसभ पर बहार आएल जाइत अछि, खेतमे सैरसो कऽ सोना चमके लगैत, जौ आ गहूँम कऽ बाली फले लगैत अछि , आमसभक गाछ पर मझर आवि जाइत आ हर दिशामे  रङ्ग-बिरंगी पुतलीसभ मँडरावे लगैत अछि। वसन्त ऋतुक स्वागत करैक लेल  माघ महिनाक पाँचम दिन एक बडका समारोह मनावल जाइत छल जाहीमे विष्णु आ कामदेवक पूजा होइत, इ वसन्त पञ्चमीक पावनि  कहलावैत छल ।




#Article 787: पीतल (262 words)


पीतल (brass) एक प्रमुख मिश्रातु छी। इ तांबा एवं जस्ता धातुसभके मिश्रणसँ बनाओल जाइत अछि। संस्कृतमे 'पीत' कऽ अर्थ 'पीला' होइत अछि। इ एकर रङ्ग (पीलापन लेल सफेद)क द्योतक छी।

पीतल मिश्र धातु छी, जे ताँबा आर जस्ताके संयोगसँ बनैत अछि। ताँबामे जस्ता देला पर ताँबा कऽ सामर्थ्य, चौमड़पन आर कठोरता बढैत अछि। इ वृद्धि ३६ प्रतिशत जस्ता धरि नियमित रूपसँ होइत अछि, लेकिन बादमे केवल सामर्थ्यमे वृद्धि अधिक स्पष्ट देखल जाइत अछि। पीतलमे २ सँ लऽक ३६ प्रतिशत धरि जस्ता रहैत अछि।
ताँबा जस्ताके साथ दु निश्चित यौगिक Cu2 Zn3) आर Cu Zn बनाबैत अछि आर दु किस्मके ठोस विलयन बनैत अछि, जहीसँ ऐल्फा-विलयन आर बीटा-विलयन कहल जाइत अछि।

पीतल प्रधानतया दु किस्मके होइत अछि। एकमे ताँबा ६४ प्रतिशतसँ अधिक रहैत अछि। इ समावयव ऐल्फाविलयन होइत छै। दोसरमे ताँबा ५५.६४ प्रतिशत रहैत अछि। अहीमे ऐल्फा-आर बीटा-दुनु विलयन रहैत अछि साधारणतया पहिले किस्मक पीतलमे ७० प्रतिशत ताँबा आर ३० प्रतिशत जस्ता आर दोसर किस्मके पीतलमे ६० प्रतिशत ताँबा आर ४० प्रतिशत जस्ता रहैत अछि।

ताँबा कऽ अपेक्षा पीतल अधिक मजबूत होइत अछि। पीतलक रङ्ग सहो अधिक आकर्षक होइत अछि। किछ पीतल सफेद लेल पीला रङ्गके आर किछ लाली लेल पीला रङ्गके होइत अछि। अन्य धातुसभके रहलासँ रङ्ग आर चीमड़पन बहुत किछ बदल जाइत अछि। पीतल तन्य होइत अछि आर आसानीसँ पीटल आर खरादल जा सकैत अछि। पीतल पर कलई सहो बढिया चढ़ैत अछि । 

पीतलक व्यवहार थाली, कटोरा, गिलास, लोटा, गागर, हण्डी, देवतासभक मूर्तिसभ, ओकर सिंहासन, घन्टी, अनेक प्रकारके वाद्ययन्त्र, ताला, पानिक नलसभ, मकानसभमे लागैवला समान आर गरीबसभके लेल गहना बनाबमे होइत अछि। लोहासँ पीतलक चीजसभ अधिक टिकाऊ आर आकर्षक होइत अछि।




#Article 788: डल ताल (117 words)


डल ताल जम्मू आर कश्मीरक गृष्म कालिन सदरमुकाम श्रीनगरमऽ अवस्थित एकटा ताल छी । एकर क्षेत्रफल लगभग १८ वर्ग किलोमिटर रहल अछि। १८ किलोमीटर क्षेत्रमे फैलल  ई झील तीन दिशासभसँ पहाडसभसे घेरल अछि। जम्मू-कश्मीरक दोसर सबसँ पैग ताल छी । एहिमे सोतोंसँ  जल आवैत अछि सँगे  कश्मीर उपत्यकाक अनेक ताल आवि अहिमे मिलैत अछि। एकर चार प्रमुख जलाशय छी गगरीबल, लोकुट डल, बोड डल तथा नागिन। लोकुट डलके मध्यमे रूपलंक द्वीप स्थित अछि तथा बोड डल जलधाराके मध्यमे सोनालंक द्वीप स्थित अछि। भारतक सबसँ सुन्दर तालमे एकर नाम लेल जाति अछि । नजदिकमे स्थित मुगल वाटिकासँ डल झीलक सौन्दर्य अप्रतिम नजर आवैत अछि। पर्यटकसभ जम्मू-कश्मीर आवि आ डल ताल देखैल नै जाएँ ओहन भऽ नै सकैत अछि।




#Article 789: लोहा (133 words)


 
लोहा या लोह (Iron) आवर्त सारणीके आठम समूहक पहिल तत्व छी। धरतीके गर्भमे आ बाहर मिलाकऽ इ सर्वाधिक प्राप्य तत्व छी (भारके अनुसार)। धरतीके गर्भमे इ चारिम सबसँ अधिक पाओल जाइ वला तत्व छी। एकर चारि स्थायी समस्थानिक मिलैत अछि, जकर द्रव्यमान संख्या ५४, ५६, ५७ आर ५८ अछि। लोहके चारि रेडियोऐक्टिव समस्थानिक (द्रव्यमान संख्या ५२, ५३, ५५ आर ५९) सहो ज्ञात अछि, जे कृत्रिम रीतिसँ बनाएल गेल अछि।

Ornamental grating

 The acidophile bacteria Acidithiobacillus ferrooxidans, Leptospirillum ferrooxidans, Sulfolobus spp., Acidianus brierleyi and Sulfobacillus thermosulfidooxidans can oxidize ferrous iron enzymically. A sample of the fungus Aspergillus niger was found growing from gold mining solution, and was found to contain cyano metal complexes such as gold, silver, copper iron and zinc. The fungus also plays a role in the solubilization of heavy metal sulfides.--




#Article 790: महाशिवरात्री (245 words)


महाशिवरात्रि या शिवरात्री हिन्दुसभक प्रमुख पावनि छी । इ भगवान शिवक प्रमुख पावनि सेहो छी । शिवजीक उत्पत्ति भेलाक रातिक नामसँ नामकरण भेल इ उत्सव कालरात्रि मोहरात्रि सुखरात्रि आ शिवरात्रि नामक चारि प्रमुख रात्रिमध्ये एक पवित्र पावनिक रूपमे पुराणसभमे वर्णित अछि । फागुन कृष्ण चतुर्दशीक दिन मनाओल जाइवला अहि पर्वके सम्पूर्ण दीनदुःखी आ कष्टपूर्ण अवस्थामे रहल प्राणीसभक हृदयमे धर्मक उदय कराबैत आशुतोष भगवान् शिवक अति प्यारा दिनक रूपमे सेहो मानल जाइत अछि । व्रतोत्सवभमध्ये सर्वोत्तम कहल जाइवला महाशिवरात्रिक दिन आजुक दिन भक्तजनसभके शुद्ध भऽ शिव मन्दिरमे पूजा-अराधना कैर व्रत रहै आ भगवान् शिवक प्रिय चिज दूध धतुर आ बेलपत्र चढाबैत अछि । अहि पर्वक दिन उपवास कऽ   ऊँ नमः शिवाय मन्त्र जप करलासँ  सर्वसिद्धि लाभ भऽ यमलोक नै जाऽ परैत धार्मिक विश्वास रहल अछि । ब्रह्मा रूद्ररूपी शिवजीके उत्पन्न भेल दिन, शिव पार्वतीक विवाहक दिन शिवरात्री पर्व कृष्ण चतुर्दशीमे मनावैत अछि । निर्जल व्रत, रात्रि जागरण, चार प्रहरक पूजा, शिवलिङ्गमे दुग्धाभिषेक आ शिव महिमा कीर्तन शिवरात्रीक पूजा अर्चनाक मुख्य अङ्ग मानैत । शिवरात्री पर्वके पर्वक राजा कहल जाइत अछि आ शिवरात्रीक पालना भोग आ मोक्ष दुनुक प्रप्ति होइत अछि  । शिवरात्रीमे बड्ड छोट मन्दिरसभमे धुमधामसग श्रद्धा भावना व्यक्त करब परम्परा रहल अछि । शिवरात्री पूजामे व्रतकालमे भगवान शिवक ध्यान, पूजन आ जप करैत अछि, जागरणकालमे भक्तक सम्पूर्ण सत्ता जागरणसँ शिवमय बनैत अछि। पूजन वा शिवार्चनमे इशानमूर्तिकें दूधसँ स्नान कराबैत अछि । अघोरमूर्तिके दहीसँ स्नान करबैत अछि, वामदेवमूर्तिकें घीइसँ स्नान कराबैत अछि, सद्योजात लिंगोद्भवमूर्तिके महसँ स्नान कराबैत अछि । शिवरात्रीके ऋषि बोधोत्सवक रूपमे मनावैत अछि ।




#Article 791: भारतीय खाना (126 words)


भारतीय भोजन या भारतीय खाना  अपन भीतर भारतक सम्पूर्ण क्षेत्र, राज्यक अनेक भोजनसभक नाम छी । जना भारतमे सब किछ अनेक आ विविध अछि, भारतीय भोजन सेहो ओहि रुपेंण विविध अछि । पूरब पश्चिम, उत्तर आ दक्षिण भारतक आहार एक दोसरसँ बहुत भिन्न अछि । भारतीय भोजन उपर अनेक तत्वसभक प्रभाव पडल अछि, जना उत्तर भारतमे मुगलय प्रभाव अछि । हर क्षेत्रक खाना दोसर क्षेत्रसँ बहुत अलग होइत अछि, ई भरतीय भोजनके अपन एक निराला आ अद्भुत रूप दैत अछि ।

भारतक सम्पूर्ण क्षेत्रक खानाके अपन एक विशिष्टता अछि आ याह कारणसँ आई संसारक सभ पैग देशसभमे भारतीय भोजनालय उपलब्ध रहैत अछि जे कि अत्यन्त लोकप्रिय अछि । विदेशसभमे प्रायः सप्ताहान्त अथवा अवकाश मिलला पर भोजनक लेल लोक भारतीय भोजनालयसभमे जाए लेल पसन्द करैत अछि ।




#Article 792: प्रेम दिवस (688 words)


भ्यालेन्टाइन्स डे, साइन्ट भ्यालेन्टाइन्स डे वा साइन्ट भ्यालेन्टाइन्स कऽ पर्व कहल जाइत अछि, एक वार्षिक बिदा छी जे १४ फेव्रुअरीमे मनावल जाइत अछि। ई पर्व पादरी साइन्ट भ्यालेन्टाइनक बलिदानसँ सम्बन्धित अछि । तत्कालीन रोमन सम्राट् क्लाउडियस द्वितीय युवा प्रेम आ विवाहमे लगल सैनिक सेवा प्रभावित होएत कहिक एकरा प्रतिबन्ध लगौने छल मुद्दा भ्यालेन्टान सम्राट्क निर्णयक धर्मविरुद्ध कहैत छल । उनकर बुझाइ छल- अनुशासनक दायराभितर होएवाला प्रेम आ आकर्षणमे ईश्वर सेहो खुसी होएत अछि । ओही लेल ओ राजाक आज्ञा अवज्ञा करैत प्रेम आ विवाहक लेल प्रेरित मात्र नै केलक युवायुवतीक जोडीसभ तयार करि सार्वजनिक स्थलमे सामूहिक विवाह कार्यक्रम सम्पन्न केलक आ निषेधाज्ञा तोडिके आरोपमे उनका ई.पू. २७० फेब्रुअरी १४ मे मृत्युदण्ड देल गेल छल । प्रेमक लेल प्राण उत्सर्ग करिके ओ पादरीक सम्झनामे भ्यालेन्टाइन डे मनावल सुरु भेल अछि । विश्वभरि ई दिनक उत्सवक रूपमे मनावल जाइत अछि ।

भारतमे १९९२ कऽ आसपास भ्यालेन्टाइन्स डे कऽ प्रचलन प्रारम्भ भेल । विश्व बजारक प्रतिस्पर्द्धा, आर्थिक उदारीकरण आ पाश्चात्य प्रभाव कऽ कारण भारतीय समाजक युवावर्ग सेहो एकरा आत्मसात करि लेलक । आ सार्वजनिक स्थानसभ पर प्रेम-प्रदर्शन कऽ पारस्परिक प्रतिस्पर्द्धा शुरू भऽ गेल।

भारतमे जतय वीरसभ कऽ बलिदान-दिवस मनावाल जाइत छल ओतय भ्यालेन्टाइन्स डे मनावाल जाए लगल।

भ्यालेन्टाइन्स डे, रोम कऽ एक पुजारी कऽ नाम पर मनावल जाइत अछि, जे २६९ ईस्वी संवतमे शहीद भऽ गेल छल आ जेकरा १४ फरवरी २६९ मे फ्लेमिनियामे दफनावल गेल छल। उनकर अवशेष रोम कऽ साइन्ट फ्रेक्स्ड चर्च आ डबलिन (आयरलैण्ड) कऽ स्ट्रीट कामिलैट चर्चमे रखल गेल अछि।

एक अन्य विशप टर्नी कऽ सेहो प्रेम कऽ भ्यालेन्टाइन बताएल जाइत अछि जे १९७ ईस्वी संवतमे सम्राट ओरोलियन कऽ उत्पीडनसँ शहीद भऽ गेल छल। कहल जाइत अछि की उनकर शव सेहो फ्लेमिनियामे गडल अछि, मुद्दा रोम कऽ भ्यालेन्टाइन कऽ समाधिसँ अलग स्थान पर ओकरा दफनावल गेल छल।

क्याथोलिक विश्वकोश सेहो एक तेसर साइन्ट भ्यालेन्टाइन कऽ नाम बतावैत अछि जेकर नाम कऽ उल्लेख एखनो हालमे प्रकाशित शहीदनामामे १४ फरवरीमे भेल अछि। ओ अफ्रीकामे अपन एक साथी कऽ साथ शहीद भ गेल छल। मुद्दा एकरा अधिक आ किछ ओकर बारेमे ज्ञात नै अछि।

रोमन क्याथोलिक क्यालेन्डरसँ १४ फरवरीके लिस्टमे १९६९ मे संशोधन करिके सन्त कऽ नाम निकालि देल गेल। एही लेल ई बतावाल गेल अछि की ओकर नाम कऽ छोडि आ किछो नै ज्ञात अछि। एकरा छोडि कऽ की ओ फ्लेमिनियामे १४ फरवरीमे दफनावल गेल छल। केवल किछ परम्परावादी क्याथोलिक ईसाई ओ जगह पर साइन्ट कऽ अवशेष होए कऽ दावा करि रहल छल।

भारत मे, प्राचीन परम्परा कऽ दृष्टिसँ कामदेव कऽ काम कऽ देवता मानल गेल अछि। खजुराहो कऽ मूर्तिसभमे काम-क्रिया कऽ भित्ति चित्र सेहो दर्शायल गेल अछि। कामसूत्र नाम कऽ ग्रन्थ सेहो संस्कृतमे उपलब्ध अछि जेकरा आचार्य वात्स्यायन लिखने छल। एहीमे काम-कला कऽ अद्भुत वर्णन मिलैत अछि। मध्य युग कऽ आसपास कामदेव कऽ पूजा समाप्त भ गेल। रामचरितमानस मे रति कऽ पति कामदेव कऽ शिवद्वारा भस्म कएल जाए कऽ प्रसङग सेहो मिलैत अछि। १९९० के दशक धरि स्वतन्त्र भारतमे काम कऽ पूजा कऽ कोनो महत्व नै देल जाइत छल। 

१९९२ कऽ आसपास जखन रङगीन टीभी च्यानलसभक प्रचार आ प्रसार भेल आ विशेष रूपसँ एमटीभी जेहन पूर्णत: व्यवसायिक टीवी च्यानल बजारमे आएल तखनसँ भ्यालेन्टाइन डे कार्ड्स कऽ प्रचलन प्रारम्भ भेल। विश्व बजार कऽ प्रतिस्पर्द्धा आ आर्थिक उदारीकरण ई अग्निमे घी कऽ काम केलक। एही प्रकार जे परम्परा कऽ भारतीय समाज मध्य युग कऽ बाद त्याग चुकल छल ओकरा युवावर्ग पाश्चात्य प्रभाव कऽ कारण आत्मसात करि लेलक। सार्वजनिक स्थानसभ पर प्रेम-प्रदर्शन कऽ एक प्रतिस्पर्द्धा जेहन प्रारम्भ भऽ गेल।

आसाराम बापू भ्यालेन्टाइन डे कऽ मातृ-पितृ-पूजन-दिवस कऽ रूपमे मनावे जाए कऽ लेल युवकसभ कऽ प्रोत्साहित केलक जाहीसँ प्रभावित भऽ छत्तीसगढ जेहन राज्य कऽ पब्लिक स्कूलसभमे ई दिन सार्वजनिक अवकाश धरि कऽ घोषणा करि देल गेल। शिव सेना आ संघ परिवार कऽ अनेकौं सङ्गठनसभ  एकरा भारतीय संस्कृति पर पश्चिमी अपसंस्कृति कऽ कुप्रभाव बतावैत अनेकौं महानगरसभमे एकर विरोधके वातावरण सेहो बनौलक। 

ई सभके बावजूद भारतमे एकर लोकप्रियता कऽ पाछा आ कि-की कारण भऽ सकैत अछि, ई भारतीय बुद्धिजीविसभ कऽ चिन्ता कऽ विषय बनि गेल अछि।

भारतीय बुद्धिजीवी भ्यालेन्टाइन डे कऽ लोकप्रियता कऽ लेल पाश्चात्य साम्राज्यवादी शक्तिसभक जिम्मेदार ठहरावैत अछि। उनकर माननाए अछि की एकर पाछा ओ शक्तिसभ कऽ मन्शा ई अछि की कोना ओ भ्यालेन्टाइन डे कऽ माध्यमसँ बजारमे अपन माल खपा सकत। मुद्दा आ अनेकौं माध्यम एकर हवा दै मे जुटि गेल अछि।




#Article 793: बूढानीलकण्ठ मन्दिर (205 words)


बूढानीलकण्ठ नेपालक काठमाडौं जिलाम अवस्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल छी। ई काठमाडौं उपत्यका उत्तर तर्फ शिवपुरी डाडाक काखम अवस्थित अछि। एहि देवस्थलक लगक स्थानसभक सेहो बूढानीलकण्ठ कहैत अछि।

प्राचीन समयमा समुद्र मन्थन कालम बहुमूल्य रत्नहरू आर अमृत समेत उपलब्ध भकऽ भयङ्कर कालकुट विष सेहो अगाडि निकलल आवल देवता आर असुरसभ बीच कोलाहल भेल । भगवान् शिव कोलाहलक साम्य करवाक उक्त विष पान केनए छल । उक्त विष पिव उपयुक्त नै भेलाहक अपन गर्दनम अड्काक राखन् छल। विषक प्रभावसँ शिवक गर्दन नील रङ्गक भगेलाह कारण वहि द्ववार उनका नीलकण्ठ कहल जाईत अछि । बूढ शब्द आदरार्थी वाचक भेलाहसँ पुजनीय अर्थम विभूषित करवाक हेतु नीलकण्ठक अगाडि बूढा शब्द राखल गेल अछि हिन्दू धर्मावलम्बीसभक मान्यता अछि। ई प्रस्तर मूर्ति भगवान विष्णुक छी विश्वास करल जाईत अछि तहिना मूर्ति, चतुर्भुज भगवान नारायणक प्रतित होइत अछि । भगवानका चारहातमध्ये तीन हातमा शङ्ख, चक्र आर गदा रहल अछि तहिना चारिम हातम कमलक फूल भेलाहक फरक विभूति खरानी डल्ला जेहन देखल जाईत अछि । भगवान् नीलकण्ठक प्रस्तुत शेषशायी पोखरी परिसरम अन्य देवीदेवताका मूर्तिसभ एवं शिवलिङ्गसभक साथै सत्तल, पाटीसभक साथ यज्ञशाला, होम कुण्डसभ सेहो अछि । भगवानक दर्शन पूजन करला सँ धन धान्यादि परिपूर्ण होवक साथै स्त्री पुत्रसँ सुख सन्तोष भ अन्तम नारायण गति प्राप्त होएत् अछि तेहन नेपाल महात्म्य, हिमवत्खण्डमा उल्लेख कएल गेल अछी। 




#Article 794: वैरागी काइँला (227 words)


तिलविक्रम लिम्बू (प्रख्यात नाम: वैरागी काँहिला, जन्म: १९९६ साउन २५) नेपाली साहित्यक मूर्धन्य  साहित्यकार छी  । उनकर २०६६ सँ २०७० धरि नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक कूलपति छल।

वैरागी काइँलाक जन्म पाँचथर जिलाक पौवा गाउमे वि.सं १९९६ साउन २५ गतेक दिन भेल छल। ओ स्नातक तहधरिक औपचारिक शिक्षा हासिल करने छल। वैरागी काइँला आयामेली आन्दोलन (२०२०) मार्फत साहित्य क्षेत्रमे नयाँ युगको सुरुवात करब साहित्यकारक रूपमे चिनल छल। एहिक  अतिरिक्त वैरागी काइँला ‘मन्थन साहित्य संस्था’ ‘शताब्दी काठमाडौं’ जहिना संस्थाक सल्लाहकार रहल छल माने  वि.सं २०४७मे तत्कालिन राजकीय प्रज्ञा प्रतिष्ठान (हाल नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान)क सदस्य भेल छल। वैरागी काइँला हाल नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक कुलपतिक रूपमे  कार्यरत अछी। कमे  कविता लिख बेसी चर्चित, अर्थित आ गर्वित प्राज्ञमे दरिल 'बैरागी काँइलाक वास्तविक नाम तिल बिक्रम नेम्बाङ छी। दुरुह आ विलक्षण बिम्वसभमे भाषाक चामत्कारिक विलाश करै कवि काइँला २०६२-६३क जनआन्दोलन क सक्रिय सहभागी अछी। वि.सं २०६६ सँ २०७० धरि ओ प्रज्ञा-प्रतिष्ठान क कुलपति क हैसियतके साहित्यक विकासमे लागेल अछि।
काँइला हालसालै ‘रत्नशोभा-शुभलक्ष्मी मुन्धुम पुरस्कार’ प्राप्त केने छल। किरात लिम्बु जातिमे  रहल धर्मशास्त्र मुन्धुमबारे पाचदशकसँ निरन्तर खोज, अनुसन्धान, लिपिबद्ध कऽ दर्जनसँ बेसी कृति प्रकाशितक स्रष्टा काइँलाके पहिल पटक ई पुरस्कार देने छल।

वैरागी काइँला लिम्बू भाषा, साहित्य आ इतिहासमे सेहो  महत्वपुर्ण योगदान देने छल। वैरागी काइँलाद्वारा लिखित, सम्पादित किराँत लिम्बू भाषा, मुन्धुम् संस्कृति, इतिहास सम्बन्धि प्रकाशित कविता संग्रहसभ  तथा कृतिसभ :

ओ ‘साझा पुरस्कार (२०३१), ‘सिद्धिचरण काव्य पुरस्कार’ (२०५३) जहिना सम्मानजनक पुरस्कार प्राप्त केने अछि।




#Article 795: दीया खान (245 words)


दीया खान पञ्जाबी/पख्तुन वंशक एक नर्विज्न  फिल्म  निर्देशक आ मानवाधिकार कार्यकर्ता छी।  

सन् २०१३ में दिया खाँन की निर्देशक और निर्माता के रूप में पहली फिल्म बाणाज़- ए लव स्टोरी (सन् २०१२) ने सर्वश्रेष्ठ दस्तावेज़ी फिल्म होवल पर पीबॉडी अवार्डौर और एमी अवार्ड जितल अछी। दिया क दुसर फिल्म जिहाद- ए स्टोरी ऑफ़ अदर्स कोब्रिटेन का बाफ्टा, ग्रियर्सन और मोंटी करलो टैलीविज़न फेस्टिवल सर्वश्रेष्ठ दस्तावेज़ी फिल्म होवल पर नियमित केल गेल। वह फ्यूज मीडिया कंपनी की अध्यक्ष होने के अलावा सिस्टरहुड नामित पत्रिका की मुख्य संपादक भी हैं।

२०१६ में दिया को युनेस्को की कलात्मक स्वतंत्रता और रचनात्मकता वर्ग के लिये सदभावना राजदूत नियुक्त किआ गया। वह इस श्रेणी के लिए नामांकित होने वाले पहली व्यक्ति हे।

दियाक जन्म ७ अगस्त १९७७ मे नर्वेक राजधानी ओस्लोमे भेल अछि । दिया नर्वेजियन अभिनेता आदिल खान कऽ पैग बहिन छी।

दिया एक कलात्मक परिवारसँ सम्बन्ध रखैत अछि। दिया के बचपनसँ  उनकर पिता नॉर्वे मे सांस्कृतिक गतिविधि कऽ एक सर्जक केने अछी । ओकर भारतीय शास्त्रीय संगीत क नॉर्वे मे लोकप्रिय बनावाक लेल बहुत अधिक काम केने अछि। संगीत आ कला मे अपन पिता क गतिविधि कारण दिया  बचपनसँ ही संगीत सीखैल शुरू केने छल। दिया  बहुत मेहनत कैर आ जल्दी ही संगीत क्षेत्रमे उनकर नाम चिहने लगल दिया  साढ़े सात साल कऽ उमेर मे नार्वेजियन टीवी पे रघुपति राघव राजा राम भजन गाबै कर अपन कैरियर कऽ शुरुआत केलक। दिया पटियाला घराने के उस्ताद बड़े फ़तेह अली ख़ान आ सारंगी वादक उस्ताद सुल्तान खान क शिष्य छी।




#Article 796: नेली फर्टाडो (254 words)


नेली किम फर्टाडो (, जन्म २ दिसम्बर १९७८) एक कनेडियाई गायिका-गीतकार, रिकर्ड निर्माता आ अभिनेत्री छी । फर्टाडो विक्टोरिया, ब्रिटिश कोलम्बिया, क्यानाडामे पलल बढल अछि।

फर्टाडोक प्रसिद्धी अपन पहिल अल्बम वोआ, नेली! ओ उनकर एकल गीत आई एम लाइक अ बर्ड सँ मिलल अछि जे उनका २००१ क वर्ष के एकल गीत क जूनो पुरस्कार आ २००२ क सर्वश्रेष्ठ महिला पॉप वोकल पर्फोर्मंस क ग्रैमी पुरस्कार जितेलक। अहिमे दुई आ अंतर्राष्ट्रीय एकल गीत छल: टर्न ऑफ़ द लाइट आ शीट ऑन द रेडियो (रिमेम्बर द डेज़)। अपन बेटी नेविस क जन्म के बाद उनकर अपन दोसरा स्टूडियो अल्बम फ़ोकलोर रिलीज केलक। ई व्यापारिक दृष्टी से अमेरिका मे कम सफल रहल। अहिमे तीन अनतर्राष्ट्रीय एकल गीत छल: पावरलेस (से वाट यु वांट), ट्राई आ फोर्का।

२००६  गर्मि मे उनकर आपन तेसर स्टूडियो अल्बम लूज़ रिलीज केलक। ई अखनतक  उनकर विश्वभर मे सबसे सफल अल्बम छी। अहिमे प्रथम क्रमाक के हीट गीत प्रोमिशियस, मैनइटर, से ईट राईट आ ऑल द गुड थिंग्स (कम टू एन एंड) शामिल अछि। तिन वर्ष के विराम के बाद सितम्बर २००९ मे उनकर अपन स्पैनिश अल्बम मी प्लान अपन पहिल स्पैनिश गीत मानोस अल ऐरे क सग रिलीज़ केलक। अहिमे मियास आ बाजो ओतरा लुज़ बाकी गीत छल। मी प्लान क लेल नेली क सर्वश्रेष्ठ महिला पॉप वोकल अल्बम के लेटिन ग्रैमी पुरस्कारसँ सेहो  सम्मानित केने छल। २६ अक्टूबर क एक रीमिक्स अल्बम मी प्लान रिमिक्सेस रिलीज केलक । एक महिना बाद १२ नवम्बर २०१०  फ़र्टाडो  अपन पहिल सर्वश्रेष्ठ हीट गीतों क अल्बम द बेस्ट ऑफ़ नेली फ़र्टाडो रिलीज केने छल।




#Article 797: कुल बहादुर गुरुङ (122 words)


कुलबहादुर गुरुङ (प्रचलित नाम केबी गुरुङ) नेपाली राजनीतिज्ञ तथा प्रजातन्त्र सेनानी छी। अखन ओ नेपाली कांग्रेसक केन्द्रीय समिति सदस्य छी। एहीसँ  पहिले ओ कांग्रेसक महामन्त्री छल । गुरुङ २००७ सालसँ  राजनीतिमे  संलग्न रहैत आएल अछि।
पहिल संविधानसभा निर्वाचन २०६४ मे ओ इलाम क्षेत्र नं. ३ सँ नेपाली कांग्रेसक तर्फसँ सभासद्‍मे प्रत्यक्ष निर्वाचित भेल छल। संविधानसभामे अध्यक्षक विधिवत् निर्वाचन होएसँ पहिले ज्येष्ठत सदस्यक रूपमे संविधान सभाक अध्यक्षता केनए  छल। उनकर अध्यक्षतामे बैसल संविधान सभाक पहिल निर्वाचन नेपालमे  राजतन्त्रक विधिवत अन्त्य करैत गणतन्त्र घोषणा केनए छल। 

दोसर संविधानसभामे गुरुङ समानुपातिक तर्फसँ सभासद् निर्वाचित भेल अछि।

गुरुङ वि.सं. १९९२ मंसीर ८ गते बाबु पहलबहादुर गुरुङ आ माता पूर्णकुमारी गुरुङक पुत्रक रूपमे इलाममे जन्मल छल। ओ २००५ सालसँ राणा शासन विरूद्धक संघर्षमे  सहभागी भेल  छल ।




#Article 798: ज्योती मगर (199 words)


ज्योती मगर एक नेपाल लोक गायिका,  मोडेल आ नर्तकी छी । हुन्कर जन्म रोल्पा जिलाकऽ नुवागाउँ गाविसमे भेल छल । ओ विसं २०६३ सँ सांगीतिक क्षेत्रमे प्रवेश केनए छल ।

ज्योती मगरक जन्म रोल्पा जिलाक नुवागाउँ गाविसमे भेल छल, बादमे ओ बाल्यकालमे हुन्कर परिवारक साथ दाङमे बसाई सरल । उनकर परिवारमे मातापिता लगायत एकटा भाई एकटा बहिन अछी । ओ दाङसँ एसएलसी पास केलक आ प्रविणता प्रमाणपत्र तह सुरु केलक मुद्दा पढाई बिचमे ही छोडि ओ सांगीतिक क्षेत्रदिशा लागल ।

प्रारम्भमे डान्सरक रूपमे करियरक सुरुवात केनए ज्योती काठमाडौं आएल आ बादमे किछ वर्ष रंगमञ्च तथा रेडियो नाटकसभमे अभिनय केलक । विसं २०६३ मे ओ पहिल गिती एल्बम रेकर्ड केलक मुद्दा उक्त एल्बम मञ्चन नै भेल । हुन्कर दोसर आ तेसर गिती एल्बम माया सँग आ उही मुलाको सिन्की उही मुलाको चाना बजारमे आएल आ ओकर बाद ओ चर्चामे आएल । ओ एखनोधरि चर्चामे आविके कारण हुन्कर 'ढाडे बिबिरालो'नामक गीत रहल अछि जाहिमे ओ एकदमे अश्लिलता नजर आवैवाला अभिनय केनए अछि । ओहीसँ पहिले सेहो उनकर बहुतरास अश्लिलतासँ भरिपूर्ण म्यूजिक भिडियोसभ बजारमे आविरहल अछि आ खुबे चर्चा सेहो पाविरहल अछि मुद्दा सकारात्मक चर्चासँ नै कमाव सकल अछि मुद्दा सेहो ओसभक हि सफलता मानैत आगा बढि रहल पाओल जाइत अछि ।




#Article 799: २०१८ फिफा विश्वकप (206 words)


२०१८ फिफा विश्वकप (फिफा विश्वकपक २१अम संस्करण) एक अन्तर्राष्ट्रिय पुरुष फुटबल प्रतियोगिता छी । ई फुटबल विश्वकप प्रतियोगिता सन् २०१८ जुन १४ सँ सन् २०१८ जुलाई १५ कऽ बीच रसियामे सञ्चालन भऽ रहल अछि जकर फाइनल खेल सन् २०१८ जुलाई १५ मे खेलल जाएत । रसिया पहिल बेर विश्वकप फुटबलक आयोजना करि रहल अछि जकर आयोजनाक लेल अधिकार सन् २०१० दिसम्बर २ मे प्राप्त केनए छल ।

ई इतिहासक सभ सँ खर्चिला विश्वकप प्रतियोगिता होमए कऽ अनुमान कएल गेल अछि, ब्राजिलमे आयोजना भेल २०१४ फिफा विश्वकपके पाछा करैत ई विश्वकप प्रतियोगिता आयोजनाक लेल ११.८- १४ बिलियन अमेरिकी डलरक बजेट राखल गेल अछि ।
ई विश्वकप फुटबलक लेल कूल ३२ राष्ट्रक टिमसभ मुख्य प्रतियोगितामे सहभागी अछ जहिमे सँ ३१ चुनि कऽ आएल अछि तँ १ आयोजक राष्ट्र छी । जर्मनीमे आयोजना भेल २००६ विश्वकप बाद युरोपमे आयोजना भऽ रहल ई पहिल विश्वकप छी । समग्रमे युरोपमे आयोजना भेल ई ११अम विश्वकप प्रतियोगिता छी । रसियाक ११ शहरक १२ स्थानसभमे कूल ६४ टा म्याच खेलल जाएत । सन् २०१८ जुलाई १५ कऽ दिन मस्कोक लुझनिकी स्टेडियममे फाइनल खेल खेलल जाएत ।

सन् २०१८ कऽ फिफा विश्वकप रसियाक ११ शहरक १२ टा स्टेडियममे खेलल जाएत ।

ई फिफा विश्वकपक पुरस्कार राशिक घोषणा अक्टुबर २०१७ मे कएल गेल छल ।




#Article 800: कृष्णबहादुर महरा (119 words)


कृष्णबहादुर महरा 'अमरसिंह' एकीकृत नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (माओवादी)क महासचिव छी । ओ  पूर्व उपप्रधान एवं गृहमन्त्री सेहो छी  । महरा सरकार-माओवादी वार्ताकालमे  तीन बेर  संलग्न छल । बेर बेर  पार्टी प्रवक्ता, दुई बेर  सरकार–माओवादी वार्ता टोलीक संयोजक तथा एक बेर  सदस्य बनल  महरा पूर्व उप्रधान तथा गृहमन्त्री अछि  । 
ओ  बेर-बेर  सूचना तथा सञ्चारमन्त्री बनल  छल  । सञ्चामन्त्री होमएत काल  ओ  पहिले  सारल गेल  ‘हातहातमे  मोबाइल सेट, घरघरमे  इन्टरनेट’ कऽ महत्वाकांक्षी नारा छोट समयमे  स्थापित भेल  । ई सँगे  ओ सूचनाक हकसम्बन्धी ऐन, श्रमजीवी पत्रकार ऐन जारी करैल सेहो महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह केलक । ई सँगे विभिन्न जिलामे पत्रकार महासङ्घक भवन निर्माणक लेल सरकारी जग्गा उपलब्ध करावैसँ पत्रकार विमा स्थापनाक लेल समेत ओ महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह केनए अछि ।




#Article 801: भैरव अर्याल (191 words)


भैरव अर्याल (१९९३-२०३३) प्रसिद्ध हास्यव्यङ्ग्यकार अछि । उनकर हास्यव्यङ्ग्यक निबन्ध बहुत चर्चित अछी।

उनकर जन्म वि.सं. १९९३ आश्विन ५ गते ललितपुरक कोपुण्डोलमे भेल अछि। उनकर माताक नाम खेमकुमारी अर्याल आ पिताक नाम होमनाथ अर्याल छी।

नेपालीमे एम.ए. , साहित्यरत्न आ संस्कृतमे मध्यमा करि कऽ अर्याल पत्रकारिता केलक । ओ दैनिक पत्रिका ‘हालखबर’ सँ पत्रकारिता सुरु केलक । उनका ‘हालखबर’ दैनिक कऽ सम्पादक दाताराम शर्मा प्रोत्साहित करलाऽ कऽ बाद २०१४ सालमे ओही ठाममे पत्रकार नियुक्त भेल छल। पाछा गोरखापत्रक सम्पादन समूहमे रहल छल । ‘मधुपर्क’ के स्तरीय बनावैलऽ बहुत कार्य केलक । ‘रचना’ पत्रिका प्रकाशनमे सेहो उनकर भूमिका महत्त्वपूर्ण रहल अछि।

ओ नेपालक विभिन्न स्थान, भारत, जर्मनी, बङ्गलादेशक भ्रमण केलक ।

मृत्यु-वि. सं. २०३३, आश्विन, गोकर्ण काठमाणडू

ओ  सर्वप्रथम वि. सं. २००९ सालमे 'नयाँ जीवन’ शीर्षक कविता रचि लेखनयात्रा सुरु केनए अछि । उनकर पहिल रचनाक रूपमे वि.सं. २०१३ मे 'नव निर्माण' शीर्षक कऽ कविता प्रकाशित भेल छल । ओ हाँस्यव्यङ्ग्य, काव्य आदिसभमे अपन कलम चलेलक।

१) साझा कथा - कथा संग्रह- २०२५ -

२) छ्याकन - कविता संग्रह -

३) रत्नश्री - सम्पादन

४) गोरखापत्र -स. सम्पादक

५) विभिन्न पत्र-पत्रिकासभमे कविता, लेख समालोचना, हास्य व्यंग्यात्मक रचनासभ प्रकाशित

उनकर किछ चर्चित निबन्धसभ




#Article 802: रमेश क्षितिज (232 words)


रमेश क्षितिज (अङ्ग्रेजी: ) नेपाली साहित्यक समकालीन धारा (२०४० पछा) कऽ सशक्त साहित्यकार अछि। कविता विधात तरफ मात्र नै रहि कथा आ गीतलेखन तरफ सेहो ओहिने सक्रिय आ उत्कृष्टता प्रदान करऽमे सफल क्षितिज कविकऽ रूपमे चिन्हल जाइत अछि। समसामयिक नेपाली कविताक टडकार सुइन स्वरसभक पङ्क्तिमे ओ  सबसँ अगाडि आबैक सामर्थ्य राखैत छथि।

सन् १९६९मे  सल्यान जिलामे जन्मल जीवनक बाल्यकालिन समय दाङक हेकुली गाविसक मिरौलीमे बिताएक क्षितिज कक्षा ४मे पढ़ैत पहिल बेर कविता आ कक्षा ६मे पढ़ैत काल नाटक लीखने छल । सिद्धजनता मावि, श्रीगाउँसँ प्रवेशिकाधरीक शिक्षा ल्या उच्चशिक्षा अध्ययन नेपाल ल क्याम्पस, काठमाणडूसँ शुरु कऽ त्रिभुवन विश्वविद्यालयसँ स्नातकोत्तर (एल.एल.एम) पुरा केलक।

वि.सं. २०५६ सालसँ सरकारी सेवामे प्रवेश करैक क्षितिज विशेषतः कविता, गीत तथा कथा विधामे कलम चलाने छल। स्थानिय विकास अधिकारीक रूपमे दूरदराजक गाउसभमे विकास निर्माणक काममे सन्लग्न भऽ, जनयुद्ध क्षतविक्षत भौतिक संरचनासभक पुनर्निर्माण कार्य करऽ क्रममे अनेकौ व्यक्तिसभक संसर्गमे पहुचल भेटल लडाकु होई या कोनो प्राकृतिक छटामे, या विदेश भ्रमणक बेरमे भेटल विदेशी लोकनिसभ, ओहि बखत उत्पन्न मानवीय भावना, सम्वेदनाके कवि अपन कवितासभमे व्यक्त केने अछि :

बटुवा हे मान्छे भन्नु यो संसारमा
जुनजस्तै चम्की हिड अन्धकारमा
बग्छ आँशु एकान्तमा बगी जान देऊ
खुशी तर बोकी हिड अनुहारमा

१.	अर्को साँझ पर्खेर साँझमा, पहिल मुद्रण २०५७, दोस्रो मुद्रण २०६९
२.	घर फर्किरहेको मानिस ,पहिल मुद्रण भाद्र २०६९, दोस्रो मुद्रण पौष २०६९, तेस्रो मुद्रण २०७०

१.	आफै आफ्नो साथी भए, वि.सं. २०६३

१.	क्षितिज, वि.सं. २०६८

१.	उस्तै छु म (कथा संग्रह)




#Article 803: नवजोत सिंह सिद्धू (733 words)


नवजोत सिंह सिद्धू (अंग्रेजी: Navjot Singh Sidhu, पञ्जाबी: ਨਵਜੋਤ ਸਿੰਘ ਸਿੱਧੂ, जन्म: २० अक्टूबर १९६३, पटियाला) भारतके पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी (बल्लेबाज) एवं अमृतसर लोक सभा सीटसँ भारतीय जनता पार्टीके पूर्व सान्सद छी। खेलसँ सन्यास लेबऽ के बाद पहिल ओ दूरदर्शन पऽ क्रिकेटक लेल कमेन्ट्री आरम्भ केलक ओकर बाद राजनीतिमे सक्रिय रूपसँ भाग लेबऽ लागल। राजनीतिके अलावा ओ टेलीविजनके छोट पर्दा पर टी.वी. कलाकारक रूपमे सेहो अपन पहिचान बनौने अछि। टी.वी. सीरियल बिग बोसके कारण सेहो ओ चर्चित रहल।

नवजोत सिंह सिद्धू कऽ जन्म भारतमे पञ्जाब प्रान्तक पटियाला जिलामे भेल। १९८३सँ १९९९ धरि ओ क्रिकेटके माँजल खेलाड़ी रहल; क्रिकेटसँ सन्यास लेबऽके पश्चात हुन्का भारतीय जनता पार्टी द्वारा लोकसभाकऽ टिकट देलक। ओ राजनीतिमे खुलिकऽ हाथ अज्मेलक आर भाजपाके टिकट पर २००४मे अमृतसरक लोकसभा सीटसँ सान्सद चुनल गेल। हुन्का पर एक व्यक्ति कऽ गैर इरादतन हत्याके आरोप लगाकऽ मुकदमा चलाएल गेल आर अदालत द्वारा हुन्का तीन सालक सजाय सुनेलक। जकर बाद ओ लोकसभाक सदस्यतासँ तत्काल त्यागपत्र दकऽ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की। उच्चतम न्यायालय द्वारा निचली अदालत की सजा पर रोक लगाने के पश्चात उन्होंने दुबारा उसी सीट से चुनाव लड़ा और सीधे मुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी व पञ्जाबक वित्त मन्त्री सुरिन्दर सिङगला कऽ ७७६२६ भोटक भारी अन्तरसँ हरेलक। सिद्धू पञ्जाबी सिक्ख भेलाक बादो पूर्णतया शाकाहारी अछि। सन्योगसँ हुन्कर पत्नीक नाम सेहो नवजोत छी। पत्नी नवजोत कौर पेशासँ चिकित्सक छी आर पटियालामे जहि ठाम सिद्धूके स्थायी निवास अछि, ओहि ठाम रहैत अछि।

नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा १९८३सँ लकऽ १९९९ धरि पूरा सत्रह साल क्रिकेट खेला। टेस्ट क्रिकेटमे ओ पहिल म्याच वेस्ट इन्डीजक टीमके विरुद्ध १९८३ साल अहमदाबादमे खेललक जाहिमे ओ बस १९ रन बनाऽ पाओल। एकर बाद ओ १९८७के विश्व कप क्रिकेटक भारतीय टीममे शामिल कएल गेल। ओ कुल पाँचमे सँ चारि म्याच खेललक आ प्रत्येक म्याचमे अर्धशतक ठोकलक। पाकिस्तानके खिलाफ शारजाहमे खेलैत १९८९मे ओ पहिल शतक लगौने छल। ग्वालियरक मैदान पऽ १९९३ मे ओ इङग्लैण्डके विरुद्ध नॉट आउट रहैत १३४ रन बनौलक जे की हुन्कर एकदिवसीय अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबला म्याचमे सर्वश्रेष्ठ स्कोर छल। १९९९मे क्रिकेटसँ सन्यास लेबऽके बाद मीडियाके देल गेल एक इन्टरव्यूमे सिद्धू कहने छल कि एक क्रिकेट समीक्षकक टिप्पणीसँ आहत भऽक ओ क्रिकेटके अलविदा कहि रहल अछि अन्यथा हुन्कर खेल एतेक खराब नै छल। १९८७के विश्व कपमे हुन्कर शानदार भागीदारीकऽ एतेक जल्दी भुला देल जाइत एकर ओ स्वप्नमे सेहो कल्पना नै केने छल।

सिद्धू द्वारा तीन बेर १९९३, १९९४ आ १९९७के समय प्रति वर्ष ५००-५००सँ अधिक टेस्ट रन बनौने अछि। प्रथम श्रेणी म्याचमे मात्र १०४ गेन्द खेलिकऽ बनाओल गेल २८६ रन हुन्कर जीवनक सर्वश्रेष्ठ स्कोर छी। १९९४मे वेस्ट इन्डीज दौराके समय ओ एकदिवसीय म्याचमे ८८४ रन बनौलक आर पाँच शतक ठोकऽ वला पहिल भारतीय होबऽक गौरव सेहो प्राप्त केलक। सिद्धूके जीवनक बेहतरीन क्षण तब आएल जब १९९६-९७मे वेस्ट इन्डीजके खिलाफ टेस्ट क्रिकेटमे ११ घण्टा लम्बा पारी खेलने छल ओ २०१ रन बनेलक। १९९३-९४मे श्रीलङकाके खिलाफ आठ छक्काक मददसँ १२४ रनक धुआँधार पारी आर १९९७-९८ मे आस्ट्रेलियाके टीमक विरुद्ध चारि-चारि अर्द्धशतक हुन्कर यादगार कारनामा छी जे ओ क्रिकेटके मैदानमे खेलैत करि देखेलक।

सिद्धू भारतीय जनता पार्टीके टिकट पर अमृतसर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रसँग २००४क लोकसभा चुनाव जीतलक। राजनीतिमे आबऽसँ बहुत समय पूर्व १९८८मे सिद्धू कऽ कोनो गुरनामसिंहक इरादतन हत्याके सिलसिलामे सह-आरोपी बनाओल गेल छल। हुन्का पटियाला पुलिस द्वारा गिरफ्तार करि जेल भेज देल गेल छल। हुन्का पर आरोप इ छल कि ओ गुरनामसिंहक हत्यामे मुख्य आरोपी भूपिन्दर सिंह सन्धूक सहायता केने अछि जबकि सिद्धू द्वारा इ आरोपसभ कऽ गलत बताओल गेल छल। सिद्धू द्वारा कोर्टमे इ दलील देल गेल कि ओ इ मामलामे पूरा तरह निर्दोष अछि आर शिकायतकर्तासभ द्वारा हुन्का झूठमे फँसाएल गेल अछि। सिद्धूक इ दलील पर मृतक गुरनामसिंहके भतीजा जसविन्दर सिंह द्वारा कहल गेल कि ओ घटनाक प्रत्यक्षदर्शी छी आ सुप्रीम कोर्ट धरिमे एकरा सिद्ध करि देत।

जब ओ सान्सद बनि गेल तऽ हुन्का खिलाफ पुरान केसक फाइल खोलि देल गेल। दिसम्बर २००६मे अदालतके अन्दर हुन्कापऽ मुकदमा चलाओल गेल। उपलब्ध गवाहिसभके आधार पर नवजोत सिंह सिद्धूकऽ चलति सड़क पर भेल झगड़ामे एक व्यक्तिक घातक चोट पहुँचाकऽ ओकर गैर इरादतन हत्याके लेल तीन साल कैदक सजाय सुनायल गेल। सजायक आदेश होइते ओ लोकसभाक सदस्यतासँ जनवरी २००७मे त्यागपत्र दकऽ उच्चतम न्यायालयमे याचिका ठोकि देलक।उच्चतम न्यायालय द्वारा निचली अदालत द्वारा देल गेल सजाय पर रोक लगाबैत फरवरी २००७मे सिद्धूके अमृतसर लोकसभा सीटसँ दोबारा चुनाव लड़ऽक इजाजत दऽ देलक।

जब भारतीय क्रिकेट टीम २००१मे श्रीलङ्काके दौरा पर गेल तखन सिद्धू द्वारा बतौर कमेण्ट्रेटर निम्बूज स्पोर्टजके लेल काम केलक। बादमे हुन्का ई.पी.एन.एस. स्टार स्पोर्ट्स द्वारा अपन च्यानल पर अनुबन्धित करि लेलक आर ओ वन लाइनर कॉमेडी करऽ लागल। हुन्का इ कार्यसँ अपार लोकप्रियता सेहो हासिल भेल।




#Article 804: दिव्याङ्का त्रिपाठी (318 words)


दिव्याङ्का त्रिपाठी दहिया (जन्म १४ डिसेम्बर १९८४), एक भारतीय अभिनेत्री छी जे कि हिन्दी टेलिभिजनमे कार्य करैत अछि। ओ भारतीय टिभी च्यानल जी टिभीसँ प्रशारण होएवाला बनू मैं तेरी दुल्हन मे मुख्य दोहोरो भूमिका निर्वाह करैत अछि तँ दोसर टिभी च्यानल स्टार प्लससँ प्रशारण होएवाला ये है मोहब्बतें मे डा.इशिता भल्लाक भूमिकाक लेल प्रख्यात अछि। सन् २०१७ मे, ओ नृत्य रियालिटी शो नच बलिए समेत जीतने छल।

दिव्याङ्का त्रिपाठीक जन्म १४ डिसेम्बर १९८४ मे भारतके मध्य प्रदेशके भोपालमे भेल छल। ओ भोपालके नूतन कलेजसँ पढाई पूरा केनए अछि। ओ उत्तरकाशीमे नेहरू इन्स्टिच्युट अफ माउन्टेनियरिङ् सँ पर्वतारोहणक कोर्स पूरा केनए अछि।

त्रिपाठी अपन करियरक सुरुवात अल इण्डिया रेडियो, भोपालमे एक गोटे एङ्करक रूपमे शुरू केनए छल। ओ सन् २००३ मे प्यान्टिन जी टीन क्वीन मे भाग लेनए छल आओर मिस ब्यूटिफुल स्किनक शीर्षक जीतने छल। सन् २००४ मे, त्रिपाठी भारतक सर्वश्रेष्ठ सिनेस्टारक योजनामे भाग लेनए छल आओर भोपाल क्षेत्रसँ शीर्ष ८ मे पडए मे सफल रहल्। ओ फेरसँ इन्दौर जोनसँ चुनाव लडिन्, जतय हुनका उपविजेता घोषित कएल गेल छल। ई प्रतियोगिताक चरण २ के लेल ओ अपन योग्यता सुनिश्चित केनए छल जतय ओ अन्ततः जितवा मे असफल रहल्। हुनका मिस भोपाल के ताज पहिराओल् गेल छल। त्रिपाठी दूरदर्शनमे टेलिफिल्म्समे अभिनयक शुरुआत केनए छल।

सन् २०१७ मे, त्रिपाठी स्वतन्त्रता दिवस (१५ अगस्ट) पर चण्डीगढमे एक गोटे १२ वर्षीय बालिकाक बलात्कार के निन्दा करैत किछ भावुक ट्वीट्स पोस्ट केनए छल, जाहिमे सँ किछमे ओ प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के सम्बोधित केनए छल, जाहिमे बलात्कारी के विरुद्ध कडा कारबाही करवाक आग्रह केनए छल।

त्रिपाठी, बनू मैं तेरी दुल्हन के सह-अभिनेताक रूपमे अभिनय केनए शरद मल्होत्रा सँ डेट केनए छल। ओ सन् २०१५ धरि, एकटा सम्बन्धमे छल। १६ जनवरी २०१६ मे, ओ अपन ये है मोहब्बतें के सह-अभिनेता विवेक दहियासँ रोक्का केनए छल। दुनु गोटे ८ जुलाई २०१६ मे भोपालमे विवाह केनए छल। नच बलिए के सेटमा, त्रिपाठी खुलासा केनए छल जे हुनकर प्रेम कहानी हुनका द्वारा लेल गेल दुईटा निर्णयद्वारा बनाओल गेल छल।




#Article 805: नयनराज पाण्डे (163 words)


नयनराज पाण्डे (अङ्ग्रेजी: )(जन्म सन् १९६६, ९ जुन विक्रम सम्बत: २०२३, २७ जेठ) चर्चित नेपाली साहित्यकार अछि । ओ नेपाली कथाकार, चलचित्रक पटकथा लेखक तथा समकालीन परिस्थितिके चित्रात्मक शैलीमे प्रस्तुत करैवाला प्रसिद्ध उपन्यासकार अछि । उलार, लू, घामकिरी आ सल्लीपिर उपन्यास उनकर चर्चित उपन्यासमे परैत अछि मुदा निदाएँ जगदम्बा, खोरभित्रक जोकर आ चकलेट नामक कथासंग्रह सेहो चर्चित अछि ।

पिता स्व.डिल्लीराज पाण्डे काठमाण्डौक सूचना विभागमे कार्यरत रहैत काल नयनराज पाण्डे माता भगवतीदेवी पाण्डेक कोखसँ काठमाण्डुक प्युखा टोलमे जन्म भेल तहियो  कुछ समयपछा पिता नेपालगञ्जक एकटा माध्यमिक विद्यालयमे हेडमास्टरमे नियुक्त भेलावाद मातापितासग ओ  नेपालगञ्ज गेल आ ओतहि  उनकर बाल्यकाल बित्न  बित गेल । विद्यालय स्तरसँ प्रमाणपत्र तहधरिक अध्ययन सेहो उनकर नेपालगन्जमे सम्पन्न भेल छल । पछा कानुनमे स्नातक तहक अध्ययन करब क्रममे ओ २०४४ सालमे काठमाण्डौ आएल आ तहिना काठमाण्डौ मे रहै साहित्य साधना करे लगल । तराई मधेशमे रहल ओतकके जनजीवन, समाज आ संस्कृतिके नजिकसँ देखैत आ अनुभूत कैर पावेकेले हुनका रचनासभमे तराईमधेशक सुखदुख, समस्या, सरोकार आ पीडा मुख्यरुपमे प्रस्तुत कएल अछि  ।




#Article 806: दिनेश अधिकारी (385 words)


दिनेश अधिकारी (अङ्ग्रेजी: ) जन्म सन् १९५९, ७ दिसम्बर विक्रम सम्बत: २०१६ साल मंसिर २२ गते नेपाली कवि तथा गीतकार छी । नेपाली कविता एवम् गीति क्षेत्रक श्रष्टा दिनेश अधिकारी उनकर कृति अतिरिक्त अभिलेख कविता विधामे मदन पुरस्कार प्राप्त कएल पिछला  (वि.सं. २०५६) व्यक्तित्व अछि ।

अधिकारीक जन्म बाबु नन्दनहरि अधिकारी आ माता शारदादेवीक सुपुत्रक रूपमे वि.सं. २०१६ साल मंसिर २२ गते सोमदिनक  बानेश्वर, काठमाडौंमे भेल। उनकर खास नाम दिनेशहरि अधिकारी छी। बानेश्वर, काठमाडौंमे जन्मल कवि/गीतकार दिनेश अधिकारीक बाल्यकाल पढाईक प्रकृयासगसग कहियो काठमाडौं तऽ कहियो सर्लाहीक हरिऔंनमे बितल देखल जाइत अछी । ओ तीन वर्षक हइतकाल अर्थात २०२० सालमे सपरिवार सर्लाहीक हरिऔंनमा बसाई सरै कारण बाल्यकाल समयक बसाइ अवधि काठमाडौंको तुलनामे सर्लाहीक हरिऔंनमे बहुत भेल ।

उनकर औपचारिक शिक्षाक सुरुवात काठमाडौंक धुम्बाराही मन्दिरपरिसरमे रहल हालक धुम्रबराह माध्यमिक विद्यालयसँ भेलअछी । कक्षा १ आ २ ओही विद्यालयमे अध्ययन कऽ कक्षा ३ आ ४ ओ हरिऔन, सर्लाहीस्थित हालक महादेव जनता माध्यमिक विद्यालयसँ पुरा केने अछी  माने कक्षा ६ आ ७ हरिऔन, सुखेपोखरीस्थित चतुर्भुजेश्वर जनता माध्यमिक विद्यालयसँ उत्तीर्ण केने अछि । कक्षा ८ काठमाडौंक नक्सालमे अवस्थित नन्दीरात्रि माध्यमिक विद्यालयसँ अध्ययन पूरा करै ९ आ १० कऽ लेल ओ फेर सर्लाही, हरिऔनकै चतुर्भुजेश्वर माध्यमिक विद्यालयमे जा ओही विद्यालयसँ प्रवेशिका उत्तीर्ण केने  ओ २०३४ सालमे नेपाल ल क्याम्पस, काठमाडौंमे भर्ना भऽ २०३५ सालमे प्रवीणता प्रमाणपत्र तह २०३९ सालमे कानुन विषयमा स्नातक केने अछी। २०४५ सालमे मानविकीतर्फ राजनीतिशास्त्र विषयमा स्नातकोत्तर (एम.ए.) पास केने छल । 

साहित्यिक लेखनक अतिरिक्त कवि/गीतकार दिनेश अधिकारी सरकारी निजामती सेवामे सेहो आबद्ध भऽ २०३८ साल भदौ २८ गतेसँ ना.सु. पदसँ सरकारी सेवामे स्थायी रुपमे प्रवेश अछि मुदा २०४१ सालमे अधिकृत स्तरमे न्याय सेवामे प्रवेश कऽ बेरबेरमे बढुवा पाऽ अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोगक सहसचिव आ महान्यायाधिवक्ताक कार्यालयमे सहन्यायाधिवक्ताक पदमे कार्यरत रहल आएल अधिकारी नेपाल प्रशासन सेवामे अपन सेवा परिवर्तन कैर स्वास्थ्य मन्त्रालयमे सहसचिवक पदमे समेत कार्यरत रहल छल । २०६६ सालसँ सचिव पदमे बढुवा भऽ नेपाल सरकारक विभिन्न मन्त्रालयमे महत्वपूर्ण जिम्मेवारी वहन करैत वि.सं. २०७१ साउनमे सेवा निवृत भेल अछि ।

उनकर जीवनयात्राक २५ वर्ष हैइत अर्थात २०४१ साल माघ २५ गते ओ वैवाहिक जीवनमे प्रवेश केने अछि । चाबहिल, काठमाडौं निवासी सरदार स्व. विष्णुमणि आचार्य तथा विजया आचार्यक बेटी उषा आचार्यसग उनकर विवाह भेल । ई दम्पत्तीक पहिल बेटी लिपि अधिकारीक वि.सं. २०४३ मे आ दोसर बेटा शव्द अधिकारीक २०४६ मे जन्म भेल । हाल ओ अही चार गोटे परिवारक साथ बत्तीसपुतली, काठमाडौं महानगरपालिकामे बासस्थान अछि ।




#Article 807: ओलिम्पिया,ग्रीस (138 words)


ओलिम्पिया नगर (Olympia) प्राचीन कालमे ओलिपिक खेलसभ कऽ स्थल छल । ई  यूनान देशकऽ पश्चिमी मोरियामे रूफिया नदी के उत्तरी किनारा पर आधुनिक पिरगोस नगरसँ ११ मील पूर्व स्थित अछि ।

यूनान कऽ इतिहासमे ई नगर कऽ धार्मिक आ राजनीतिक महत्व रहल अछि । हीरा कऽ मन्दिर प्राचीनतम विद्यमान भवन अछि जेकर निर्माण, अपन मौलिक रूपमे, सम्भवत: ईसासँ १,००० वर्ष पूर्व भेल छल । एतय खेलसभ कऽ उत्पत्ति कऽ सम्बन्धमे विभिन्न धारणासभ अछि । एक मत कऽ अनुसार पहील दौड प्यालौप्स आ आयनोमौस कऽ बीच भेल छल , मुद्दा द्वितीय मतानुसार एतय सर्वप्रथम हेराकिल्सद्वारा खेलकूदसभ कऽ उत्सव मनावल गेल छल । ११अम शताब्दी कऽ यूनानी लेखक सेडीनस कऽ अनुसार ओलिम्पिक उत्सव ३९३ ईसा धरि मनावल गेल ।

ओलिम्पिया अथवा ओलिम्बिया कऽ वर्तमान गाम क्लादियस नदी कऽ दोसर किनारा पर स्थित अछि । एतय एक संग्रहालय सेहो अछि । 




#Article 808: सोना (166 words)


सोना एक धातु छी जेकर ल्याटिनमे चिन्ह Au रहल अछि एकरा अउरम (Aurum) वा छोटकरीमे Au सेहो लिखल जाइत अछि । ई एक (रासायनिक तत्व छी । एकर परमाणु संख्या ७९ छी ।

सोना कऽ विश्वव्यापी मान्यता कऽ कारण, ई बहुमुल्य धातु छी आ एकरा सुख कऽ गहना आ दुःख कऽ खजाना सेहो कहिक कहल अपनसभके समाजमे प्रचलित अछि जेकर कारण सोना कऽ महत्व कऽ टेवा दऽ सकै छी ।
सोना आ चाँदी बजार पत्रिका कऽ सम्पादक प्रकाश समीर कऽ अनुसार नेपाली मौलिक गहनासभमे सोना कऽ अत्याधिक प्रयोग होएसँ सेहो नेपालमे सोना कऽ महत्वमे वृद्धि भेल बतावैत अछि । विकसित मुलुकसभमे आधुनिक मेसिनसभद्धारा कम तौलमे सोना कऽ गहना तयार कएल जाइसँ सेहो नेपालमे ओ नै रहल आ एखनो सेहो नेपाली मौलिक गहनासभ बेसी मात्रामे चलैसँ सोना कऽ खपत नेपालमे अत्याधिक होएत अछि, समीर कऽ कहनाई अछि । 
बहुतरास समयधरि सोना आ चाँदी कऽ क्षेत्रमे क्रियाशिल पत्रकार प्रकाश समीर नेपालमे सोना कऽ कारोबारमे निश्चित मापदण्ड नै बनलाक कारण एकर कारोबारमे समस्या देखल गेल सेहो बतावैत अछि ।




#Article 809: अभि सुवेदी (105 words)


अभि सुवेदी (  जन्म - वि.स. २००२ अषार १७, तदनुसार सन् १९४५ जुन ३०) नेपाली आ अङ्ग्रेजी भाषामे समानान्तर कलम चलौने नेपाली समालोचक, भाषाविद्, नाटककार, अनुवादक आ कवी अछि । हुन्कर स्रष्टा व्यक्तित्व नाटककार, कवि आ निबन्धकारमे विभक्त छैक माने द्रष्टा व्यक्तित्व समालोचक आ साहित्यिक चिन्तकक रूपमे प्रसिद्ध अछि। करिब तीन दर्जन कृतिक कृतिकार सुवेदीक साहित्यिक छवी हुन्कर बाह्य छविजहिना सर्वथा भिन्न, उच्च आ गम्भीर अछि । 

सुवेदी त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपालसँ एम्. ए.(अङ्ग्रेजी), तथा बेलायतसँ भाषाशास्त्रमे एम. एस्सी. एवम्, विद्यावारिधीक उपाधी हासिल केने अछि ।

अभि सुवेदी करिव चालीस वर्ष त्रिभुवन विश्वविध्यालयमे प्राध्यापनक  हाल सेवा निवृत्त भेल अछि । ओ हाल स्वतन्त्ररूपमे सिर्जनारत अछि ।




#Article 810: भावना घिमिरे (108 words)


भावना घिमिरे क्रिकेट एसोसिएसन अफ नेपाल कऽ पहिल सिइअो छी । 

नेपाल कऽ मूल निवासी , भावना व्यवसाय प्रशासनमे स्नातकोत्तर करै कऽ लेल २००६ मे वेल्स विश्वविद्यालय गेल छल । घिमिरे लण्डन मे पञ्जाब नेशनल बैंक कऽ साथ काम केलक आ बादमे ओ वेल्थ म्यानेजमेन्ट कम्पनी बहराइन मे जतय ओ इङ्लीस प्रिमियर लिग, स्पेनिस-ला-लिग के फर्मुला वान सँ सम्बन्धित कार्यमे संलग्न भेल छल ।

अक्टुबर २०१४ मे, ओ क्रिकेट एसोसिएसन अफ नेपाल के सिइअो कऽ रुपमे अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट प्रशासन कऽ भूमिका पावैमे सफल भेल छल ।

घिमिरे, नेपाल क्रिकेट के इतिहासमे पहिल बेर २२ राष्ट्रीय क्रिकेटरसभके एक केन्द्रीय अनुबन्धमे पुरस्कृत करै कऽ लेल सफल भेल अछि ।

टिप्पणीसभ




#Article 811: प्रदीप रिमाल (146 words)


प्रदीप रिमाल (वि.सं.१९९२ – वि.सं. २०७१) चलचित्र निर्देशक, संस्कृतिविद्, आ मदन पुरस्कार विजेता छल।

प्रदीपक जन्म वि.सं. १९९२ साल फागुन महिनामे लुभु, ललितपुरमे भेल छल। उनकर  बाबु दुर्गाप्रसाद रिमाल आ आमा डिल्लीकुमारी अछि।

४० क दशकक चर्चित चलचित्र के घर के डेरा निर्देशक रिमाल ०२५ सालमे बनल चलचित्र हिजो आज भोली मे अभिनय समेत केने छल ।

माईतीघरमे सहायक निर्देशक भेलावाद उनकर निर्देशन यात्रा सुरु भेल छल । वि.सं. २०२९ सालसँ शाही नेपाली चलचित्र संस्थानक निर्देशक भेल रिमाल मनको बाँध, कुमारी, सिन्दुर, माया आ नेपाल भाषाक शिलु निर्देशन केने छल ।

चलचित्रमे आबैसेपहिले   लोकगीत संकलन करैत चलैत रिमाल दर्जनौ गीतमे स्वर समेत देने अछि । ओ कर्णाली लोक संस्कृति नामक ग्रन्थक लेल दर्शन विज्ञानतर्फक मदन पुरस्कार २०२८ संयुक्तरूपमे प्राप्त केने अछि।

उनकर साथ बिहारीकृष्ण श्रेष्ठ, स्थिरजंगबहादुर सिंह‎ आ डा. चूडामणि बन्धु‎के उक्त पुरस्कार प्रदान केने छल।

उनकर निधन वि.सं. २०७१ साल माघमे अमेरिकाक भर्जिनियामे भेल । 




#Article 812: चूडामणि रेग्मी (125 words)


चूडामणि रेग्मी चर्चित नाम चूडामणि बन्धु (जन्म वि.सं. १९९५) नेपाली भाषाकऽ समालोचक तथा निवन्धकार अछि। रेग्मी विगत ४ दशकसँ नेपाली भाषा साहित्य अध्यापन कार्यमे संलग्न अछि।

चूडामणि वि.सं. १९९५ जेठ महिनामे बाबु डिल्लीराम रेग्मी आ माता हरिप्रिया देवीक सुपुत्रक रूपमे बन्धु रहबास, चिर्तुङधारा, पाल्पामे  जन्मल अछि । नेपालीमे एम्.ए. आ भाषाविज्ञानमे विद्यावारिधि कएल रेग्मी प्राध्यापन पेशा अँगालेक छल।

रेग्मीक मौलिक कृतिसभ

उनकर सम्पादित, अनूदित आ फुटकर कृतिसभ

ओ कर्णाली लोक संस्कृति भाग ४ नामक ग्रन्थक लेल दर्शन विज्ञानतर्फक मदन पुरस्कार २०२८ संयुक्तरूपमे प्राप्त केने अछि। उनकर साथ बिहारीकृष्ण श्रेष्ठ, स्थिरजंगबहादुर सिंह‎ आ प्रदीप रिमाल के उक्त पुरस्कार प्रदान केने छल।

ओ देवकोटाक लेल वि.सं. २०३६क साझा पुरस्कार, वि.सं. २०३७मे गुणराज स्मारक व्याख्यान पुरस्कार, सन् १९७४मा गो.द.बा. चौथो, सन् १९८४मे महेन्द्र विद्याभुषण आदि पावल छल ।




#Article 813: मातृभाषा (113 words)


सुपरस्क्रिप्ट पाठमानवके जन्म पश्चात् सबसँ पहिल बोलल आ सिख भाषाक ओकर मातृभाषा कहल जाइत अछि । मातृभाषा कोनो  व्यक्तिक सामाजिक एवं भाषा सम्बन्धी आर रिति रिवाजक पहिचान छी। मातृभाषाक व्यक्तिक पहिल भाषा सेहो कहल जाइत अछि ।

मातृभाषा दिबस २१ फरबरीम मनाओल जाइत अछि ई पहिल यूनेस्क द्वारा १७ नोभेम्बर १९९९ घोषणा कएल गेल छल। 

सन् २००० सँ अन्तर्राष्ट्रिय मातृभाषा शान्ति आर बहुभाषावाद प्रचार प्रसार भरहल अछि। सन् १९५२ क दिन पारस्परिक ढाकाक जगन्नाथ विश्वविद्यालय  मेडिकल कलेजसँ विद्यार्थीसभ  पूर्व पाकिस्तानक दुटा राष्ट्रिय भाषासभक रूपम बङ्गाली भाषाक पहिचानक लेल प्रदर्शन कएल गेल छल वहिसँ सेना अश्रुग्याँस आर गोलि चलाओने छल साथै प्रहरी उल्लङ्घनकारीक गिरफ्तार कएन छल वाहि घटनाम प्रदर्शनकरीसभ सेहो मारल गेल छल ।




#Article 814: मायादेवी मन्दिर, लुम्बिनी (332 words)


मायादेवी मन्दिर एक प्राचीन बौद्ध मन्दिर छी, जे युनेस्को कऽ विश्व सम्पदा सूचीमे सुचिकृत अछि । ई पवित्र धार्मिक मन्दिर नेपालक लुम्बिनीमे अवस्थित अछि । ई लुम्बिनीक एक मुख्य मन्दिर छी आ परम्परागत रुपसँ गौतम बुद्धक जन्मस्थान मानल जाइत अछि । मन्दिर परिसर भितर एक पवित्र पूल (जे पुष्करणीक रूपमे सेहो जानल जाइत अछि) आ एक पवित्र उद्यान अखनो आसन्न अवस्थामे अछि । ई सम्पूर्ण क्षेत्रमे रहल पुरातात्विक अवशेषसभसँ लगभग इसा पूर्व तेसर शताब्दीमे बनाएल जानल जाइत अछि । महान अशोकद्वारा निर्मित ईट्टाक भवनसभसँ ई क्षेत्रक दिनाङ्कित कएल गेल अछि । इसा पूर्व छठम् शताब्दीक काष्ठ तीर्थस्थल २०१३ मे पत्ता चलल छल ।

नेपाल, लुम्बिनीक बहुतरास समयसँ भगवान बुद्धक जन्मस्थानक रूपमे पहचान विकसित करै कऽ लेल, विश्वमे एक शान्ति शहरक रुपमे बनावै कऽ योजना लेनए अछि । शान्तिक लेल एक विश्वव्यापी स्थान आ बौद्ध शिक्षाक लेल एक केन्द्रक रूपमे नेपालक दक्षिणी क्षेत्रमे बारी करै कऽ लेल एक अन्तिम दूरदर्शी योजना अनावरण कएल गेल छल । कोरियाली अन्तर्राष्ट्रिय विकास एजेन्सीद्वारा प्रस्ताव कएल ई योजनामे लगभग $८०० मिलियनक निवेश कएल जाइत । अनेकन लोकसभक तर्क अछि की लुम्बिनी बौद्धसभक मक्का कऽ रूपमे परिवर्तित करै कऽ लेल विभिन्न प्रयाससभक बादो ई क्षेत्रके आधुनिक आ परम्परागत बनेबामे एखन अरबौं डलर आवश्यक अछि ।उत्खनन डरहम विश्वविद्यालय, बेलायतक रोबिन कनिङ्गम आ पशुपति क्षेत्र विकास कोष, नेपालक कोष प्रसाद आचार्यक अध्यक्षतामे कएल गेल छल । कनिङ्गमक अनुसार, तीर्थस्थल दुनियामे सभसँ पहिनुक बौद्ध मन्दिर छी ।

वर्तमान मन्दिरक नीचा ईट्टाक मन्दिरसभक एक श्रृङ्खलाक अन्तर्गत पारम्परिक रूपसँ गौतम बुद्धक जन्मस्थान मानल गेल क्षेत्र पर खोज कएल गेल छल ।अनुसन्धानमे एहो पत्ता चलल की वृक्षक जडिसभक नीचा खनिजसभक टुकडाक उपस्थिति अछि जे बौद्ध परम्पराक वृक्षसभक साथ मन्दिरसभमे सहयोगीसभक साथ सङ्गत अछि । सिद्धार्थ गौतमक बारेमे कहल जाइत अछि की ओ एक साल वृक्षक नीचा जन्म लेनए छल, मुद्दा हुनकर माता रानी मायादेवी स्वयम्, हुनका जन्म दऽ  एक वृक्षक ठाडि पकडि हुनका समर्थित केनए छल ।

जुलिया शा, युनिभर्सिटी कलेज लण्डनमे दक्षिण एशियाली पुरातत्वमे एक व्याख्याता, चेतावनी देलक की तीर्थस्थल पूर्व-बौद्ध वृक्षक पूजाक प्रतिनिधित्व करि सकैत अछि, आ आगा अनुसन्धानक आवश्यकता अछि ।




#Article 815: कृष्ण जन्माष्टमी (208 words)


कृष्ण जन्माष्टमीके सातम आठम, गोकुलष्टमी, अष्टमी रोहिनी, श्रीकृष्ण जयन्ती, श्री जयन्ती वा साधारण भाषामे जन्माष्टमी सेहो कहल जाइत अछि । भगवान विष्णुक आठम् अवतारक रूपमे श्री कृष्णक जन्मदिनक अवसरमे हिन्दूसभद्वारा मनाएल जाइवाला ई एक वार्षिक पर्व छी । कृष्ण जन्माष्टमीमे हिन्दूसभ भगवान श्री कृष्णक पूजा-आराधना करैत श्रद्धा-भक्तिपूर्वक मनावैत अछि । ज्ञानयोग, कर्मयोग आ  भक्तियोगक प्रणेता भगवान श्रीकृष्णक जन्म द्वापरयुगमे हिन्दू पञ्चाङ्ग अनुसार भाद्रकृष्ण अष्टमीक मध्यरातमे होएसँ आईके दिनमे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आ रातिके मोहरात्री कहल जाइत अछि। जन्माष्टमीक दिन हिन्दु बसोवास रहल क्षेत्रक कृष्ण मन्दिरसभमे भगवान् श्रीकृष्णक पूजा-आराधना, प्रवचन, भजन-कीर्तन करिके साथे विशेषकरि  महिलासभ व्रत बसि रातिभर जाग्राम रहैवाला चलन अछि । अन्याय, अत्याचार आ  राक्षसी प्रवृत्तिसँ मानवमात्रक संरक्षण करैक लेल भगवान् विष्णुक आठम् अवतारक रूपमे जन्मल श्रीकृष्ण आजीवन सत्यक पक्षमे रहैत  सत्कर्मक लेल मानव समुदायक  प्रेरित केनए छल । कुरुक्षेत्रमे  कौरवसभसँ लडाईमे संलग्न पाण्डवसभमेसँ अर्जुनक उपदेश दै के क्रममे स्वयं उनकर  मुखारविन्दसँ व्यक्त श्रीमद्‍भागवत गीता हिन्दूसभक  पवित्र ग्रन्थ मानल जाइत् अछि । बाल्यकालसँ ही अपन  विचित्र लीला देखेने श्रीकृष्ण पुतना, कंस, जरासन्ध, शिशुपाल जेहन दानवी प्रवृत्तिक संहार केनए छल । जन्माष्टमीमे  पाटनक मंगलबजारस्थित प्रसिद्ध कृष्ण मन्दिरमे  बड्का मेला लगैत अछि। एही  उपलक्ष्यमे  काठमाडौंलगायत मुलुकक विभिन्न नगरक विभिन्न धार्मिक संघ/संस्थासभद्वारा श्रीकृष्णक झाँकीसहित शोभायात्रा निकालेके  चलन अछि । भारतमे समेत विभिन्न समुदायक हिन्दू धर्मावलम्बीसभ  कृष्णाष्टमी हर्षोल्लासक साथ मनावैत अछि ।




#Article 816: बहिन (100 words)


बहिन एकटा स्त्री सहोदर छी | यदि कोनो व्यक्ति कोनो स्त्रीक अपन बहिन कहि करि सम्बोधित करैत अछि तँ ओ महिलाके एवम् ओ व्यक्तिक माता वा पिता या दुनु गोटे एके होइत अछि ।

बहीन शब्द पुरान नर्स साइस्टिर जे स्वयममे आद्य-युरोपीय*स्वेसटरसँ उत्पति भेल अछि, जाहीमेसँ दुनुक अर्थ एके छी, अर्थात बहिन । किछ अध्ययनसभसँ पत्ता चलल अछि की बहिनसभ उनकर पुरुष समकक्षसभ, भाईसभसँ कऽ तुलनामे सहोदरक बीचमे अधिक ईर्ष्या कऽ सङकेत लक्षण प्रदर्शित करैत अछि। किछ संस्कृतिसभमे, बहिनसभक पुरुष भाई, बदमाशसभ वा प्रलोभकद्वारा यौन अग्रिमसभसँ लकऽ अनेकौ मुद्दासभसँ विशेष रूपसँ बड़का भाईसभद्वारा सुरक्षाक तहत एक भूमिका निर्वाह करैत अछि।




#Article 817: पार्वती (106 words)


पार्वती हिन्दु धर्मालम्बीक देवी छी । उनका  शक्ती, गौरी तथा हिन्दु धर्मक पैग देवता महादेवक पत्नी, होएसँ महादेवी सेहो कहल जाइत् अछि । लक्ष्मी, सरस्वती आ पार्वती लगायत त्रिदेवी मानल जाइत् अछि ।

पर्वत अर्थात् संस्कृतमे  हिमाल छी । उनका हिमालय (पर्वत)क बेटी  होएसँ पार्वती नाम देखाओल गेल अछि । राजा पर्वत हिमालयक मानविकिकरण भेल बुझल जाइत अछि,  पार्वती हिमालक ओ कहिक अर्थ जनावैत अछि ।

संस्कृत साहित्यमे पार्वतीक ठाममे अनेक उपनामसभ देखल जाइत् अछि । शैलजा, अद्रीजा, नागजा, शैलापुत्री, हेमावती, गिरिजा, गिरिजापुत्री बहुतो नामसभ अछि । लिलिता सहश्रणाममे हजार नामसभ उल्लेख कएल गेल अछि । उमा आ उपमा पार्वतीक दुई चर्चित उपनामसभ सेहो छी ।




#Article 818: कार्तिकेय (110 words)


कार्तिकेय वा मुरुगन (तमिल भाषा: முருகன்), एक लोकप्रिय हिन्दू देवता छी आ हिनकर अधिकतर भक्त तमिल हिन्दू अछि । हिनकर पूजा मुख्यत: भारतक दक्षिणी राज्यसभ आ विशेष करि तमिलनाडुमे कएल जाइत अछि एकर अतिरिक्त विश्वमे जतय कतौ भी तमिल निवासी/प्रवासी रहैत अछि जाहिना कि श्रीलंका, मलेसिया, सिङ्गापुर आदिमे सेहो ई पुजल जाइत अछि। हिनकर छ: सभसँ प्रसिद्ध मन्दिर तमिलनाडुमे स्थित अछि। तमिल ई तमीज कादुवुल वा तमिलसभक देवता कहिक सम्बोधित करैत अछि, ई भारतक तमिलनाडु राज्यक रक्षक देव सेहो छी। 

कार्तिकेय जी शिव पार्वतीक पुत्र छी तथा सदैव बालक रूप ही रहैत अछि। मुद्दा उनकर ई बालक स्वरूपक सेहो एकटा रहस्य अछि। 

संस्कृत ग्रन्थ अमरकोषक अनुसार कार्तिकेयक निम्न नाम अछि:




#Article 819: वेद (118 words)


वेद विश्वक सभ  धर्म ग्रन्थसभक पिता छी । वेद सँ ही साभार करि  अन्य धर्मशास्त्रक पुस्तकसभ  निर्माण कएल गेल अछि  ।
वेद हिन्दूसभक  सभसँ पैग ग्रन्थ छी ।
वेद शब्द संस्कृत भाषाक विद् धातु सँ बनल अछि  जेकर  अर्थ अछि : जान्नाइ, ज्ञान इत्यादि । वेद हिन्दू धर्मक प्राचीन पवित्र ग्रन्थसभक नाम छी । वेदसभक  श्रुति सेहो कहल जाइत् अछि, किया की पहिले मुद्रणक व्यवस्था नै भेलासँ एकर एक दोसर सँ सुनिके सम्झना राखल गेल एही प्रकार वेद प्राचीन भारतक वैदिक कालक वाचिक/श्रुति = श्रवण परम्पराक अनुपम कृति छी जे पीढी दर पीढी चार-पाँच हजार वर्ष सँ चलि आएल रहल अछि। वेद ही हिन्दू धर्मक सर्वोच्च आ सर्वोपरि धर्मग्रन्थ छी ।

चार वेदक चार उपवेद मानल जाइत् अछि: 




#Article 820: ऋग्वेद (219 words)


ऋग्वेद  सनातन धर्म वा हिन्दू धर्मक स्रोत छी। एहीमे  १०२८ सूक्त अछि , जाहिमे  देवतासभक स्तुति कएल गेल अछि । एहीमे देवतासभक यज्ञमे  आह्वान करै के लेल  मन्त्र अछि , एही  सर्वप्रथम वेद छी । ऋग्वेदक  संसारक सभ इतिहासकार हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवारक सभसँ पहिल रचना मानैत अछि। ई संसारक सर्वप्रथम ग्रन्थसभ मे सँ एक छी। ऋक् संहितामे १० मण्डल, बालखिल्य सहित १०२८ सूक्त अछि। वेद मंत्रसभक समूहक सूक्त कहल जाइत् अछि, जाहिमे  एकदैवत्व तथा एकार्थक ही  प्रतिपादन रहैत अछि। कात्यायन प्रभति ऋषिसभक अनुक्रमणीक अनुसार ऋचासभक संख्या १०,५८०, शब्दसभक संख्या १५३५२६ तथा शौनक कृत अनुक्रमणीक अनुसार ४,३२,००० अक्षर अछि। ऋग्वेदक जिन २१ शाखासभक वर्णन मिलैत अछि, उनमासँ चरणव्युह ग्रन्थक अनुसार पाँच ही प्रमुख अछि- १. शाकल, २. वाष्कल, ३. आश्वलायन, ४. शांखायन आ माण्डूकायन। ऋग्वेदमे ऋचासभक बाहुल्य होएसँ एकरा ज्ञानक वेद कहल जाइत् अछि। ऋग्वेदमे  ही  मृत्युनिवारक त्र्यम्बक-मंत्र वा मृत्युञ्जय मन्त्र (७/५९/१२) वर्णित अछि , ऋग्विधानक अनुसार एही  मंत्रक जपक साथ विधिवत व्रत तथा हवन करै के लेल  दीर्घ आयु प्राप्त होएत्  अछि, मृत्यु दुर करि सभ प्रकारक सुख प्राप्त होएत अछि। विश्वविख्यात गाईत्री मन्त्र (ऋ० ३/६२/१०) सेहो एहीमे वर्णित अछि। ऋग्वेदमे अनेक प्रकारक लोकोपयोगी-सूक्त, तत्त्वज्ञान-सूक्त, संस्कार-सुक्त उदाहरणतः रोग निवारक-सूक्त (ऋ०१०/१३७/१-७),श्री सूक्त वा लक्ष्मी सुक्त (ऋग्वेदक परिशिष्ट सूक्तक खिलसूक्तमे), तत्त्वज्ञानक नाशताव्दीय-सूक्त (ऋ० १०/१२९/१-७) तथा हिरण्यगर्भ-सूक्त (ऋ०१०/१२१/१-१०) आ विवाह आदिक सूक्त (ऋ० १०/८५/१-४७) वर्णित अछि, जाहीमे ज्ञान विज्ञानक चरमोत्कर्ष देखाई दैत अछि।




#Article 821: सामवेद (349 words)


सामवेदक अधिकांश ऋचासभ ऋग्‍वेदसँ ही  लेल गेल अछि । ई  वेद गीत-संगीत प्रधान छी । प्राचीन आर्यसभद्वारा साम-गान कएल जाइत छल । सामवेद चार वेदसभमे आकारक दृष्टिसँ सभसँ छोट अछि  आ  एकर  १८७५ मन्त्रसभमे  सँ ६९क  छोडिसभ ऋगवेदक अछि। केवल १७ मन्त्र अथर्ववेद आ  यजुर्वेदक मिलैत अछि । एकर बाद भी एकर प्रतिष्ठा सर्वाधिक अछि। एकर  प्रतिष्ठा अधिक होए के एक कारण गीतामे  कृष्णद्वारा 'वेदानां सामवेदोऽस्मि' सेहो कहल गेल अछि।

सामवेद यद्यपि छोट अछि  मुद्दा  एक प्रकारसँ ई  सभ  वेदसभक सार रूप अछि आ सभ वेदसभक चुनल गेल अंश एहीमे सामेल कएल गेल अछि। सामवेद संहितामे जे १८७५ मन्त्र अछि, ओहीमे सँ १५०४ मन्त्र ऋग्वेदक ही अछि। सामवेद संहिताक दुई भाग अछि, आर्चिक आ गान। पुराणसभमे जे विवरण मिलैत अछि ओहीसँ सामवेदक एक सहस्त्र शाखासभक होएके जानकारी मिलैत अछि। वर्तमानमे प्रपंच ह्रदय, दिव्यावदान, चरणव्युह तथा जैमिनि गृहसूत्रक देखैमे १३ शाखासभक पत्ता लगैत अछि। ई तेह्रमे सँ तीन आर्चासभक  शाखासभ मिलैत अछि- (१) कौमुथीय, (२) राणायनीय आ  (३) जैमिनीय। सामवेदक महत्व एहीसँ पत्ता लगैत अछि की गीतामे कहल गेल अछि की -वेदानां सामवेदोऽस्मि। (गीता-अ० १०, श्लोक २२)। महाभारतमे गीताक अतिरिक्त अनुशासन पर्वमे सेहो सामवेदक महत्ताक दर्शाएल गेल अछि- सामवेदश्च वेदानां यजुषां शतरुद्रीयम्। (म०भा०,अ० १४ श्लोक ३२३)। सामवेदमे  एहन  मन्त्र मिलैत अछि जाहीसँ ई प्रमाणित होएत अछि  कि वैदिक ऋषिसभक  ओहन वैज्ञानिक सत्यसभक ज्ञान छल जेकर जानकारी आधुनिक वैज्ञानिकसभक सहस्त्राब्दिसभके बाद प्राप्त भ सकल । उदाहरणतः- इन्द्र पृथ्वीक घुमाँवैत रोक्ने अछि। (सामवेद,ऐन्द्र काण्ड,मंत्र १२१), चन्द्रक मण्डलमे सूर्यक किरण विलीन करै के लेल ओकरा  प्रकाशित करैत अछि । (सामवेद, ऐन्द्र काण्ड, मंत्र १४७)। साम मन्त्र क्रमांक २७क भाषार्थ अछि - ई  अग्नि द्यूलोकसँ  पृथ्वीधरि  संव्याप्त जीवसभ  धरि के पालन करैत अछि। ई जलक रूप एवं गति दिनमे समर्थ अछि। अग्नि पुराणक अनुसार सामवेदक विभिन्न मन्त्रसभक विधिवत जप आदिसँ रोग व्याधिसभसँ मुक्त भ जाईके लेल एवं बचा जाई सकै के लेल, तथा कामनासभक सिद्धि होए के लेल कएल जाइत अछि। सामवेद ज्ञानयोग, गर्मयोग आ भक्तियोगक त्रिवेणी छी। ऋषिसभक विशिष्ट मन्त्रसभक  संकलन करि  गाईनक पद्धति विकसित केलक  आधुनिक विद्वान् सेहो एही तथ्यक  स्वीकार करै लगल अछि  कि समस्त स्वर, ताल, लय, छन्द, गति, मन्त्र, स्वर-चिकित्सा, राग नृत्य मुद्रा, भाव आदि सामवेदसँ ही निकलल अछि।




#Article 822: यजुर्वेद (406 words)


 यद्यपि वैदिक सनातन वर्णाश्रमधर्मीसभ  अनादि अपौरुषेय  (मन्त्र+ब्राह्मणात्मक) वाक्कृतिर्वेद कहिक मानित अछि  | ई आधारमे - मन्त्रश्च   ब्राह्मणश्चैव द्वावेतौ वेदसंज्ञकौ कण्ठं भित्वा विनिर्यातौ ह्यादित्यस्य दयावतः||
यजुर्वेद चार वेदसभ मध्येक हिन्दू धर्मक एकटा महत्त्वपूर्ण श्रुति धर्मग्रन्थ छी । जाहीमे  मे  यज्ञ-प्रक्रियाक निम्ति गद्य आ पद्य मन्त्रसभ  अछी । यजुर्वेद यजुस + वेद आ हिन्दू धर्मक चार  पवित्रतम प्रमुख ग्रन्थसभमे सँ  एकटा छी । मन्त्रभाग आ  ब्राह्मणभाग करि  दुई भागमे ओकारा देखेल जैत अछि |ई सब  त आदि कालमे वेद सभ छल  | पहिले  चार भागमे  केलक | वेदव्यासक अनुसार (गरुडमहापुराणक पहिल खण्ड) एकैवासीत् यजुर्वेदः चतुर्धा व्यभजत् पुनः|| सृष्टिकालमे  (वैदिक कालमे ) यजुर्वेद नाम के   वेद छल | 
बादमे चातुर्होत्रविधि द्वारा यज्ञ सिद्धि 
करै मे ऋग्यजुसामाथर्वक रुपमे चार भाग लगाएल गेल |यज्ञमे वाचन कएल जाइवाला गद्यात्मक मन्त्रसभक  ‘यजुस’ कहल जाइत् अछि। यजुस नाममे  ई  आधारित आ  वेदक क नाम यजुस+वेद दुई शव्दसभक सन्धिसँ (यजुर्वेद) बनल अछि। अतः यजुर्वेदक पद्यात्मक मन्त्रसभ  ॠग्वेद आ  अथर्ववेदमे यथावत् कएल गेल अछि। एहीमे  स्वतन्त्र पद्यात्मक मन्त्र बहुतरास कम अछि। ई वेदमे अधिकांशतः यज्ञ आ हवनक नियम तथा विधान अछि, अतः ई ग्रन्थ कर्मकाण्ड प्रधान अछि। जतय ॠग्वेदक रचना सप्त-सिन्धु क्षेत्रमे भेल छल तँ यजुर्वेदक रचना कुरुक्षेत्रक प्रदेशमे भेल अछि। वैदिक सनातन वर्णाश्रमधर्मीसभ वेदसभक रचना ही नै मानैत अछि | ओ सभ वेदसभक अनादि अपौरुषेय दिव्यवाणी मानैत अछि जे साक्षात् विराटपुरुषसँ प्रकट भेल अछि | सृष्टिक आदिमे परमात्मासँ ब्रह्माजी प्राप्त केलक आ बादमे ब्रह्मासँ अनुशासित मन्त्रद्रष्टा ऋषिसभक सेहो साक्षात्कार करैल पहुँचल | पाश्चात्य दृष्टि भेल आधुनिक विद्वानसभक मतानुसार एकर रचनाकाल १४०० सँ १००० ई.पू. मानल जाइत् अछि। यजुर्वेदक संहितासभ लगभग अन्तमे रचल गेल संहितासभ छी, जे ईसा पूर्व द्वितीय सहस्राब्दि सँ प्रथम सहस्राब्दीक आरम्भिक शताब्दीसभमे लिखल गेल अछि । ई ग्रन्थद्वारा आर्यसभक सामाजिक तथा धार्मिक जीवनसँ पूर्ण रूपमे असर पडल देखल गेल अछि । ओ बखत कऽ वर्ण-व्यवस्था तथा वर्णाश्रमक झाँकी सेहो एहिमे अछि। यजुर्वेद संहितामे  वैदिक कालक धर्मक कर्मकाण्ड आयोजनक साथे यज्ञ करै के निम्ति मन्त्रसभक संग्रह अछि। यजुर्वेदक दुई शाखासभ छल :
दक्षिण भारतमे  प्रचलित कृष्ण यजुर्वेद आ उत्तर भारतमे  प्रचलित शुक्ल यजुर्वेद शाखा । एहीमे कर्मकाण्डक बहुतरास यज्ञसभक विवरण अछि-अग्निहोत्र,अश्वमेध,
वाजपेय,सोमयज्ञ, राजसूय,अग्निचयन,
औद्ध्वदेहिक-:
 अग्निहोत्र करै के शुक्लयजुर्वेदी यजमानक मृत्यु होएत काल अन्त्येष्टिकर्ममे लाशक पूर्वशिर करै के ,ऋग्वेदी यजमानक उत्तरशिर ,सामवेदी यजमानक दक्षिणशिर करै के वैदिक ग्रन्थ श्रौतसूत्र गृह्यसूत्रसभक व्यवस्था अछि |
ऋग्वेदक आ यजुर्वेदक  लगभग ६६३ मन्त्रसभ यथावत् एके रुपक देखल गेल अछि। यजुर्वेद वेदक एकटा एहन भाग छी, जे विभाजनपूर्व आ आई सेहो जन-जीवनमे अपन स्थान उच्च रूपमे बनाक बैसल अछि ।  संस्कारसभ एवं यज्ञीय कर्मकाण्डसभक अधिकांश मन्त्र यजुर्वेदक ही अछि।




#Article 823: रमन म्याग्सेसे पुरस्कार (144 words)


रमन म्याग्सेसे पुरस्कार (Ramon Magsaysay Award) एसिया कऽ व्यक्तिसभ एवम संस्थासभक ओसभक  अपन क्षेत्रमे विशेष रूपसँ उल्लेखनीय कार्य करै वापत प्रदान काएल जाइत अछि। एकरा प्राय: एसियाक नोबेल पुरस्कार सेहो कहल जाइत अछि। ई रमन म्याग्सेसे पुरस्कार फाउन्डेशनद्वारा फिलिपिन्स कऽ भूतपूर्व राष्ट्रपति रमन म्याग्सेसेकऽ सम्झनामे देइत अछि ।

ई पुरस्कार न्यूयोर्क स्थित रकफेलर ब्रदर्स फण्ड क गुठियारसभ द्वारा सन् १९५७ मे स्थापित कएल गेल अछि। फिलिपिन्स सरकारक सहमतिसँ ओतकके भूतपूर्व राष्ट्रपति रमन म्याग्सेसेक स्मृतिमे ई पुरस्कार शुरुवात कएल गेल जेसँ  हिनकर साधारण जनताके  साहसपूर्वक सेवा, लोकतांत्रिक समाजमे व्यावहारिक आदर्शवादिता एव निर्मल सरकारी चरित्र जहिना  सम्झनाके ताजा राखैब सकब ।

ई वर्षक रोमन म्यागसेसे पुरस्कार नेपालक गैरनाफामूलक 'शक्ति समूह' के महिला हकहित कऽ कार्य मे , अफगानिस्तानकी पूर्व महिला, शिक्षा, तथा संस्कृति मन्त्री एवम चिकित्सक ५७ वर्षीया हाबिबा सारोबिर तथा म्यानमारक समाजसेबी ६४ वर्षीय लाहपेइ सेन्ग रोके  द्वन्द्व रूपान्तरणमे महत्त्वपूर्ण भूमिका खेलेबापत उक्त पुरस्कार देलक।




#Article 824: नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान (132 words)


नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान भाषा, साहित्य, संस्कृति तथा दर्शनक संरक्षण, सम्वर्द्धन आ विकासक लेल स्थापित संस्था छी । एकरा पहिने नेपाल राजकीय प्रज्ञा प्रतिष्ठान कहल जाइत छल।
हाल ई प्रतिष्ठानक कुलपति श्री गङ्गा प्रसाद उप्रेती छी।

प्रतिष्ठानक स्थापना वि.सं. २०१४ साल आसाढमे भेल छल। एकर नाम नेपाल साहित्य कला प्रतिष्ठान (एकेडेमी) छल । प्रतिष्ठानक स्थापना वि.सं. २०१३ सालमे महाकवि लक्ष्मीप्रसाद देवकोटाक परिकल्पना बमोजिम श्री ५ महेन्द्र वीर विक्रम शाहदेवद्वारा कएल गेल छल । वि.सं. २०१४ साल फागुनमेमा नेपाल एकेडेमी बनल । बादमे वि.सं. २०२४ सालमे नेपाल राजकीय प्रज्ञा प्रतिष्ठान बनल  । 
नेपाल प्रजातान्त्रिक सङ्घीय गणतन्त्र भेलाक बाद एकर नाम नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान राखल गेल । 

नेपालक सब भाषा, साहित्य, संस्कृति तथा दर्शनक संरक्षण, सम्वर्द्धन आर विकासक लेल काठमाडौं आ आवश्यकता अनुसार नेपालक विभिन्न स्थानसभमे शाखा खोलि एकर स्थापना कएल गेल प्रतिष्ठान छी ।।




#Article 825: निर्वाचन आयोग (नेपाल) (207 words)


निर्वाचन आयोग नेपालम बालिग मताधिकारक आधारम संसद, गाउँ, नगर तथा जिलाक स्थानीय निकायसभक स्वतन्त्र निर्वाचन सम्पन्न कराव उद्देश्यसँ स्थापना भेल संबैधानिक अंग छी।

नेपाल सरकार वैधानिक कानून, २००४ र्सवप्रथम गाउँ पञ्चायत, आर जिला पञ्चायतसभम निर्वाचित जनप्रतिनिधिसभ रहेके व्यवस्था केनेए छल। अन्तरिम शासन विधान,२००७ निर्वाचन आयोगक व्यवस्था भेल आर आयोगक पहिलो प्रमुख निर्वाचन आयुक्त पदमा श्री सुवर्ण सम्शेर ज.ब.रा नियुक्त भेल। नेपाल अधिराज्यक संविधान, २०१५ अर्न्तर्गत नेपालम प्रतिनिधि सभाक लेल फाल्गुण ७, २०१५ म पहिल संसदीय आम निर्वाचन सम्पन्न भेल। नेपालक संविधान, २०१९ अर्न्तर्गत गाउँ तथा नगर तहक प्रतिनिधिक लेल प्रत्यक्ष निर्वाचन सम्पन्न भेल। ईसभ निकायक प्रतिनिधिसभ मध्येसं उपर तह जिला, अञ्चल आर राष्ट्रिय पञ्चायत (राष्ट्रिय विधायिका)क निर्वाचन सम्पन्न भेल छल।

नेपाल अधिराज्यक संविधान,२०४७ एकर प्रस्तावनाम आधारभूत मानव अधिकार सुरक्षितक बालिग मताधिकार, संसदीय शासन प्रणाली, संवैधानिक राजतन्त्र आर बहुदलीय प्रजातन्त्रक सुदृढीकरण उल्लेख कएल गेल अछि । वाहि संविधानक भाग १५ म धारा १०३ सँ १०८ धरि निर्वाचन आयोगक गठन प्रक्रिया, काम, कर्तव्य आर अधिकार, निर्वाचन क्षेत्र निर्धारण आयोग,निर्वाचन विशेष अदालतक व्यवस्था उल्लेख कएल गेल अछि।

नेपाल अधिराज्यक संविधान, २०४७ क प्रस्तावनाम उल्लेख भेल अनुसार बालिग मताधिकारक आधारम संसद तथा गाउँ, नगर र जिलाक स्थानीय निकायसभक निर्वाचन स्वच्छ आर स्वतन्त्र रूपमा सम्पन्न कार्य ।

निर्वाचन आयोग
कान्तिपथ, काठमाडौंं, नेपाल 
फोन: (९७७ १) ४२२८६६३
फ्याक्स: (९७७ १) ४२२९२२७
ईमेल: info@election.gov.np




#Article 826: किम जोङ उन (178 words)


किम जोङ उन (कोरियाई उच्चारण : [kimdzʌŋɯn]; जन्म ८ जनवरी १९८३) उत्तर कोरियाक सर्वोच्च नेता छी । ओ किम जोङ इल (१९४१–२०११) कऽ पुत्र आ किम सुङ (१९१२–१९९४) कऽ पोता छी । किम अपना आपकें २८ दिसम्बर २०११ कऽ दिन तानाशाह घोषित करि देलक आ ओकर आधिकारिक घोषणा सेहो करि देलक ।

किमक प्रारम्भिक जीवनसँ जुड़लसभ जानकारी मात्र उत्तर कोरियाक तानाशाहद्वारा या फेर ओ लोकसभकद्वारा मात्र मिलैत अछि, जे हुनका विदेशसभमे देखने अछि। जेना कि स्विट्जरल्याण्डक विद्यालयमे किमक द्वारा पढ़िक घटना। उत्तर कोरियाक विभाग वला किमक जन्मक तारीख ८ जनवरी १९८२ अछि, बताबैत छैथि। जबकि दक्षिण कोरियाक आधिकारिक विभाग एकर आर बादमे अछिसे कहल जाइत अछि। डेनिस रॉडमन द्वारा कहल गेल अछि कि हुन्कर जन्म ८ जनवरी १९८३ कऽ भेल छल । आ ओ किमसँ सितम्बर २०१३ के मिलल छल। इ अपन तीन भाइसभमेसँ दोसर छी।

जापानी समाचार-पत्रमे सबसँ पहिल प्रकाशित भेल एक सूचनाक अनुसार किम स्विट्जरल्याण्डक ही एक विद्यालयमे पढ़ाई केएने छल। ओही विद्यालयमे चोल-पक या पक-चोल नामसँ १९९३सँ लकऽ १९९८ धरि छल। जे एक शर्मीला लड़का आ बास्केटबल प्रेमीक रूपमे ओहि ठाम पढ़ाई करि रहल छल।




#Article 827: लोसार (406 words)


लोसार (Tib:, Wylie: Lo gsar), अन्य नाम: लोसर, ल्योसार या ल्होसार, विशेषत: तिब्बती, नेपालको शेर्पा, गुरुङ आ तामाङ जातीके नयाँ वर्षक रुपमे मनावल नेपालक एक मुख्य पर्व छी । लोसार बौद्ध धर्म अनुयायी तामाङ्ग, शेर्पा, गुरुङ, थकाली आदि जाती महत्वपूर्ण पर्वक रूपमे मनावैत अछि। ई पर्व नेपालक विभिन्न जातजाती, धर्मालम्वी खासकरै मंगोल मूलक कुछ प्रजातिसभ धुमधामक साथ मनावैत अछि। यद्यपि पहिलेके  समयमे नेपालमे बसोबास कएल सब जाती ई पर्व मनावल लगल अछि। लोसार पर्वक लेल  नेपालमे सार्वजनिक विदा देइत अछि।

लोसार दुइ शब्द मिल बनल अछि। जेकर अर्थ तिब्बती आ तिब्बती संग सम्बन्धित शेर्पा, भुटानी, योल्मो, डोल्पाली इत्यादि भाषाहरूमा लो अर्थात वर्ष या साल होइत अछि माने सारक अर्थ नया होइत अछि। तहिना लोसारको अर्थ 'नया वर्ष या नयाँ साल कहैत ।  लोसार मनावैत समुदाय बौद्ध ज्योतिष शास्त्रमे उल्लेख भ अनुसार 'लो' अर्थात वर्षके १.ज्यिवा, २.लअङ्, ३.ताग, ४.योस, ५.ड्रुग्, ६.ड्रुल्, ७.त, ८.लुग, ९.ट्रेल्, १०.ज्य, ११.ख्यी, १२.फग क बाह्रटा जीवजन्तुक नाम दऽ गनैत आ उक्त बाह्र वर्षसमाप्त भेला पछा फेर उही नाम दोहोर्याएर वर्ष अछि। जा लागल पुरानो बर्षक विदाई करै के लेल  लोसार आवैसे पहिले २/३ दिन पहिलसँ लामासभ आमन्त्रणकऽ भव्य पूजा करैत अछि।
 

नेपालमे लोसार मनावल प्रचलन चिनिया“ सभ्यतासँ तिब्बत होइत भित्रि करवाक अनुमान कएल गेल अछि।

अपन देशमे मुख्यतः तीन प्रकारक लोसार मनावल जाइत अछि : 

मुख्य लेख: तमु लोसार
तमु (तोला) लोसार मुलतः गुरुङ जाति मनावैत अछि । ई पुस महिना १५ या १६ गते परैत अछि। लोसारक दिनसँ पहिल साँझसँ नै एकरा मनावल सुरू करैत अछि। साँझ पूजापाठ, भोजभत्तेर, नाचगान कऽ आधा रातमे 'वर्ष आएल' कहैत नया वर्षक स्वागत करैत अछि। लोसारक दिन बिहानसँ नै ढोग-भेट, आशीष आदानप्रदान करैत नाता कुटुम्बके बोलाएर भोज खुवाएर बडो धुमधामका साथ मनावैत अछि।

मुख्य लेख: सोनाम लोसार
सोनाम लोसार कहई ह्योल्मो आ तामाङ्ग जाति मनावैत अछि । ई माघे संक्रान्तिक लगल परैत अछि। घर-आँगन लिपपोत कऽ, नहाइधोवाई शुद्ध भऽ  पूजा करैत ई पर्व मनावल जाइत अछि । सकई वाला लामा पुरोहितसँग, नै सकैवाला घरक मुलीसँ पूजापाठ करैत  अछि। गहुँ आटा आकाशतर्फ उडाक देवताक विजय आ भुतप्रेतको पराजय होस् कहैत कामना करैत अछि। मान्यजनसँ आशीर्वाद लेइत बाबरी रोटी, फूलौरा, कन्दमूल आदि खाँइत रमावैत अछि ।

मूल लेख: ग्याल्पो ल्होसार

ग्याल्पो ल्होसार शेर्पा समुदायल मनावैत अछि । प्रायःजसो ई पर्व फागुन महिनामे परैत अछि। ई पर्वमे नौ थोक अन्नक खोले बनाक एक दोसर के बोलाक खुवावैत अछि। ल्होसारक दिन नया कपडा लगावैत, पानी धारामे जा नागक पूजा कैर। ओ पानी ल्याक घरक देवताके चढावैत अछि। खा , एक दोसरक घरमे जा  नाचगान करैत  तरिकासँ ल्होसार मनावैत अछि ।




#Article 828: बौद्ध धर्म (267 words)


बौद्ध धर्म एक अनिश्वरवादी धर्म छी। ऐतिहासिक रुपमे ई धर्म शाक्यमुनि बुद्ध (गौतम बुद्ध) आ हुनकर अनुयायीसभक शिक्षामे आधारित धर्म छी। बौद्ध धर्मक परम्परामे तँ गौतम बुद्धक वर्तमान कल्पक चौथा सम्यक सम्बुद्धक रूपमे मानल जाइत अछि। ओ छठम्  सँ पाँचम् शताब्दी इसा पूर्व धरि जीवित छल । ओ स्वर्गवास भेलाक दोसर पाँच शताब्दीसभमे बौद्ध धर्म सारा भारतीय उपमहाद्वीपमे फैलल, आ दोसर दुई हजार वर्षसभमे मध्य, पूर्वी आ दक्षिण-पूर्वी जम्बू महाद्वीपमे सेहो फैलल । आई, बौद्ध धर्ममे तीन मुख्य संघ अछि: थेरवाद, महायान आ वज्रयान। बौद्ध धर्मक पैंतीस करोडसँ अधिक लोगसभ मनैत अछि आ ई दुनियाक चौथा सभसँ पैग धर्मक रूपमे रहल अछि।

बुद्ध अर्थात् बोधिप्राप्त वा अन्तिम सत्यक साक्षात्कार केनए महामानव बुझल जाइत अछि। जे व्यक्ति अपन प्रयाससँ विना गुरु बुद्धत्व प्राप्त करैत अछि आ दोसर प्राणीसभक दु:खनिरोधक मार्गदर्शन करैत अछि हुनका सम्यक सम्बुद्ध कहल जाइत अछि । कहल जाइत अछि की गौतम बुद्धक पहिने अनेक सम्यक सम्बुद्धसभ उत्पन्न भऽ गेल अछि आ भविष्यमे सेहो अनेकौं सम्यक सम्बुद्धसभ उत्पन्न भऽ दु:खनिरोधक सनातन शिक्षा देत । बौद्ध धर्मक अन्तिम लक्ष्य छी, दुःखसँ सदाक लेल मुक्ति । बुद्ध दु:खमुक्तिसँ सरोकार नै रखैत दार्शनिक प्रश्नसभक महत्व नै दैत छल । ओ कहैत छल , भिक्षुसभ हम केवल एकटा बात मात्र सिकाएब: दु:ख आ दु:खनिरोधक उपाय । शीलक जगमे रहि ध्यानद्वारा समाधि पुष्ट करैत पज्ञा उत्पन्न् करावे सकैमे ही दु:खमुक्तिक अवस्था निर्वाणक साक्षात्कार कएल जा सकैत अछि से हुनकर मूल शिक्षा छी ।

बुद्धक वास्तविक नाम सिद्धार्थ छल । हुनकर जन्म कपिलवस्तु (शाक्य महाजनपदक राजधानी) कऽ लग लुम्बिनी (वर्तमानमे दक्षिण मध्य नेपाल)मे भेल छल । याह स्थान पर, तेसर शताब्दी ईसा पूर्वमे सम्राट अशोकद्वारा बुद्धक स्मृतिमे एक स्तम्भ बनेने छल । 




#Article 829: कुशीनगर (158 words)


कुशीनगर उत्तर प्रदेशक उत्तरी-पूर्वी सीमान्त इलाकामे स्थित एक कस्बा एवं ऐतिहासिक स्थल छी। ई बौद्ध तीर्थ छी आ एतय गौतम बुद्धक महापरिनिर्वाण भेल छल। कुशीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग २८ पर गोरखपुरसँ कोनो ५० किमी पुर्वमे स्थित अछि। महात्मा बुद्धक निर्वाण एतय भेल छल। एतय अनेक सुन्दर बौद्ध मन्दिरसभ अछि। एही कारणसँ ई एक अन्तर्राष्ट्रिय पर्यटन स्थल सेहो अछि जतय मुख्यत: विश्वभरि कऽ बौद्ध तीर्थयात्री भ्रमणक लेल आवैत अछि। कुशीनगर कस्बाक आ पुर्व दिशा बढला पर लगभग २० किमी पश्चात बिहार राज्य आरम्भ भऽ जाइत अछि। 

एतय बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बुद्ध इण्टरमडिएट कालेज तथा अनेकौं छोट-छोट विद्यालय सेहो अछि। स्वयम् मे ई एक छोट कस्बा अछि जेकर पुर्वमे एक किमीक दूरी पर कसयाम नामक बड्का कस्बा अछि। कुशीनगरक आस-पासक क्षेत्र मुख्यत: कृषि-प्रधान अछि। जन-सामन्यक भाषा भोजपुरी अछि। एतय गेहूँ, धान, केतारी आदि मुख्य फसलसभ फलैत होइत अछि। 

बुद्ध पूर्णिमाक अवसर पर कुशीनगरमे एक महिनाक मेला लगैत अछि। यद्यपि ई तीर्थ महात्मा बुद्धसँ सम्बन्धित अछि, मुद्दा आस-पासक क्षेत्र हिन्दू बाहुल्यता अछि। 




#Article 830: पशुपति क्षेत्र विकास कोष (102 words)


पशुपति क्षेत्र विकास कोष श्री पशुपतिनाथ मन्दिर क्षेत्रक बृहत्तर विकासक लेल कार्यरत संस्था छी। 
पशुपति क्षेत्रक एकर प्रतिष्ठा एवं गरिमा अनुरुप सुव्यवस्थित आ विकसित करै कऽ उद्देश्यसँ वि.सं. २०४३ सालमे एक अविच्छिन्न उत्तराधिकारवाला स्वायत्त संस्थाक रुपमे ई कोषक स्थापना भेल अछी। हाल ई पशुपति क्षेत्र विकास कोष ऐन २०४४ अन्तर्गत सञ्चालित अछि।

ई कोष, पशुपतिनाथमे दैनिक पुजापाठक अतिरिक्त विशेष पूजा आ महाशिवरात्री, बालाचतुर्दशी, तीज लगायतक पर्वसभमे होएवाला पूजासभ व्यवस्थित करैत अछि।

पशुपति क्षेत्र भितर वृद्धाश्रम, घाट व्यवस्थापन तथा कृयापुत्री सेवा भवन लगायतक सेवासभ रहल अछि।

लक्ष्मी प्रसाद प्रसाईँ कोषक भुतवुर्व सदस्य सचिव छी। 

हाल डा.गोविन्द टण्णन कोषक सदस्य सचिवक रूपमे कार्यरत अछि।,




#Article 831: बौद्ध वास्तुकला (104 words)


बौद्ध धार्मिक वास्तुकला ३ शताब्दी इसा पूर्वमे भारतीय उपमहाद्वीपमे विकसित भेल छल।

तीन प्रकार संरचनासभकक पहिनुक बौद्ध धर्मक धार्मिक वास्तुकलाक साथ जुडल रहल अछि: मठसभ (विहार), स्थानसभक अवशेष (स्तूप), आ धार्मिक स्थलसभ वा प्रार्थना हल (चैत्याज सेहो चैत्य गृह कहल जाइत अछि), जे बादमे किछ स्थानसभमे मन्दिरसभ कहल जाइ लगल ।

विहार शुरूमे बरसातक मौसमक दौरान भिक्षुसभक भटकद्वारा प्रयोगक लेल अस्थायी घरसभमे छल, मुद्दा बादमे बढि रहल अछि आ द्रुत गतिसँ औपचारिक रूपसँ बौद्ध मठसभसँ समायोजित करै कऽ लेल विकसित कएल गेल। एक मौजूदा उदाहरणक नालन्दा (बिहार) मे अछि। किला वास्तुकलाक एक विशिष्ट प्रकार हिमालयक पूर्व आ वर्तमान बौद्ध राज्यसभमे पावल गेल जोङ्स छी।




#Article 832: विएना (166 words)


विएना (जर्मनमे वीन) अस्ट्रियाक राजधानी एवं ओकर नवम प्रान्तसभमेसँ एक छी। विएना अस्ट्रियाक सबसँ प्रमुख नगर छी जकर जनसङ्ख्या १.७ मिलियन अछि।यदि एकर महानगरीय क्षेत्र मिला देल जाए तऽ जनसङ्ख्या २.३ मिलियन भऽ जाइत अछि। ई अस्ट्रियाक सबसँ बड़का शहर एवं अही ठामक सांस्कृतिक, आर्थिक एवं राजनैतिक गतिविधिसभक केन्द्र छी। ई युरोपेली सङ्घमे स्थित दशम सबसँ बड़का (जनसङ्ख्याक अनुसार) शहर सेहो छी ।आर रहन सहनक स्तर कऽ देखैत तेसर सबसँ बढ़िया शहर छी। विएनामे वैश्विक महत्वक संस्थासभ स्थित अछि जहिमे संयुक्त राष्ट्र सङ्घ, ओपेकक संस्थासभ सबसँ महत्वपूर्ण अछि। डेन्यूबक किनारमे स्थित विएना इन्टरनेशनल सेन्टर विश्वक बहुतो प्रमुख संस्थासभक कार्यलयसभक एकीकृत स्थान सेहो छी। विएना शहर अस्ट्रियाक बिल्कुल पूर्वमे स्थित अछि एवं चेक गणतन्त्र, स्लोभाकिया एवं हङ्गेरीसँ एकर सीमासभ मिलैत अछि। सन २००१मे विएनाक सिटी सेन्टर कऽ युनेस्कोद्वारा विश्व सम्पदा क्षेत्रक रूपमे मान्यता देल गेल छल। आ दुनियाक १२७ शहरसभक एक अध्यनमे अही ठामक रहन सहनक स्तर अनुसार दुनियामे भ्यानकुभरक साथ साथ पहिल स्थान देल गेल।

आधिकारिक जालस्थल

विएनाक सांस्कृतिक जीवन

विएनाक तस्वीरसभ आर वीडियो

विएनाक इतिहास




#Article 833: रवीन्द्र मिश्र (176 words)


रविन्द्र मिश्र बिबिसी नेपाली सेवा लण्डनक निर्देशक छलाह । ओ एक पत्रकार तथा स्तम्भकार सेहो छी । ओ विभिन्न नेपाली पत्रिकासभमे अपन कलम चलौने अछि जहिमे मुख्यत: नेपाल साप्ताहिक, विभिन्न कालखण्डम छद्दनाम, समसामयिक स्तम्भ संगे भूमध्य रेखा नामक पुस्तक सेहो प्रकाशित करौने छल । ई पुस्तकसँ प्राप्त रोयाल्टी रकम मिश्र चितवन स्थित राउटेसभक सहयोग करवाक हेतु पुस्तक बिमोचन समारोहमे घोषणा केनए छल।

रबिन्द्र मिश्र त्रिभुवन विश्वविद्यालयसँ अङग्रेजीमे स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त केनए अछि । तहिना पञ्जाब विश्वविद्यालय, पाकिस्तानसँ पत्रकारितामे तथा लन्डन विश्वविद्यालय, बेलायतसँ अन्तर्राष्ट्रिय राजनीतिमे स्नातकोत्तर केनए अछि।

रवीन्द्र मिश्र पेशासँ एक पत्रकार छल । ओ बिबिसी नेपाली सेवाक प्रमुख छल आ ओ बिबिसीक महत्वपूर्ण अङ्ग्रेजी विभागसभ, द वर्ल्ड टुडे, न्युज आवर आ समाचार महाशाखामे काज केनए छल । ओ बिबिसी टेलिभिजनक लेल समाचार सम्प्रेषण आ विश्लेषणसभ करैत छल । मिश्र पाकिस्तानमे द न्युज इन्टरनेसनल दैनिकक समाचार शाखामा सेहो काम केनेए अछि । सन् २०१७ फरबरी २८ मे ओ बिबिसी नेपाली सेवासँ राजिनामा देलक । नेपालक राजनीतिमे कदम रखवाक लेल ओ पत्रकारिता सँ राजिनामा देलक ।

मिश्र कल्याणकारी संस्था हेल्प नेपाल नेटवर्क, नेपालक संस्थापक अध्यक्ष छी ।




#Article 834: पासाङ ल्हामु शेर्पा (157 words)


पासाङ ल्हामु शेर्पा वा पासाङ ल्हमो शरपा (, सर्वोच्च शिखर सगरमाथा आरोहण कएनिहार प्रथम नेपाली महिला छी । ओ सन् १९९३ अप्रैल २२ मे सगरमाथाक सफल आरोहण केनए छल । एहिसँ पहिने हुनकर तीन बेर सगरमाथा आरोहण करिक प्रयास असफल भेल छल । ओ सगरमाथाक दक्षिणी मोहडासँ आरोहण केनए छल । सगरमाथाक शिखरसँ पति सोनाम छिरिङसंग घुमैतकाल हुनकर मृत्यु भेल छल ।

सगरमाथाक सफल आरोहण करिसँ पहिने ओ मोन्ट ब्लाङ्क, चोयु हिमालय तथा अन्य हिमालयसभक सफल आरोहण केनए छल । 

पासाङके जन्म सोलुखुम्बु जिलाक चौरीखर्क, लुक्ला सुर्के-४ मे सन् १९६१ दिसम्बर १० मे भेल छल । पिता फूर्वा कितार शेर्पासंग १४ वर्षक छोट उमरसँ ओ हिलडुल करैलेल आरम्भ क देनए छल । अपन घरक एकमात्र बेटी पासाङ सन् १९७९ मे पूर्णरूपसँ ट्रेकिङ पेशामे लागल छल । सन् १९९० आ ओकरबाद लगातार दुई वर्ष सगरमाथा आरोहण करिक हुनकर योजना असफल भेल छल । 

पासाङ ल्हामुक सहासक सम्मान करैत नेपाल सरकार हुनका नेपालक राष्ट्रिय विभूति घोषित केनए अछि । 




#Article 835: सावित्रीबाई फुले (191 words)


सावित्रीबाई गोविंदराव फुले (३ जनवरी १८३१ – १० मार्च १८९७) भारतक एक शिक्षिका, समाज सुधारिका एवं मराठी कवयित्री छि। हिन्कर अपन पति ज्योतिराव गोविंदराव फुले के संग मिलके महिला अधिकार आ शिक्षाक लेल बहुत काज सभ केन अछि। सावित्रीबाई भारतक प्रथम कन्या विद्यालयक प्रथम महिला शिक्षिका छि। हिन्का आधुनिक मराठी काव्यक अग्रदूत मानल जैत छि। १८५२ मे अछूत बालिका सभहक लेल विद्यालयक स्थापना केन छेला ।

सावित्रीबाई फुले के जन्म ३ जनवरी १८३१ मे भेल छेल। हिन्कर बाबुक नाम खन्दोजी नेवसे आर म्याक नाम लक्ष्मी छेल। सावित्रीबाई फुलेक विवाह १८४० मे ज्योतिबा फुले स भेल छेल।

सावित्रीबाई फुले भारतक पहल बालिका विद्यालय क पहल प्राध्यापक आर पहल किसान स्कूलक संस्थापक छि। महात्मा ज्योतिबा के महाराष्ट्र आर भारत मे सामाजिक सुधार आंदोलन मे एकटा सबस महत्त्वपूर्ण व्यक्ति के रूप मे मनल जैत छि। हिन्का महिला सभहक आर दलित जनजाति क शिक्षित करै के प्रयास के लेल जानल जैत छि । ज्योतिराव, जे बाद मे ज्योतिबा के नाम से जानल गए सावित्रीबाई के संरक्षक, गुरु आर समर्थक छि। सावित्रीबाई अपन जीवन क एकटा लक्ष्य के रुपमे लेन छेल जेकर उद्देश्य विधवा विवाह करबेनै, छुआछूत मिटेनै, महिला सभक मुक्ति आर दलित महिलासभक शिक्षित बनेनै।




#Article 836: कर्णम मल्लेश्वरी (174 words)


कर्णम मल्लेश्वरी (जन्म: १ जुन १९७५) भारतक महिला भारोत्तोलक छी । ओ ओलम्पिक खेलमे भारतक तरफसँ कांस्य पदक जितै वाली प्रथम महिला खेलाडी छी । 

कर्णम मल्लेश्वरीक जन्म १ जुन, १९७५ के श्रीकाकुलम, आन्ध्र प्रदेशमे भेल छल । ओ अपन करियरक शुरुआत जुनियर वेटलिफ्टिङ च्याम्पियनसिपसँ केनए छल, जतय ओ  प्रथम स्थान प्राप्त केनए छल । सन् १९९२ मे आयोजना भेल एसियाली च्याम्पियनसिपमे मल्लेश्वरी ३ रजत पदक जितने छल । ओ विश्व वेटलिफ्टिङ च्याम्पियनसिप सेहो ३ कांस्य पदक जितने छल, मुदा हुनकर सभसँ पैग कामयाबी सन् २००० मे सिडनीमे आयोजना भेल ओलम्पिक खेलमे मिलल छल, जतय ओ कांस्य पदक जित ओलम्पिक खेलमे पदक जितै वाली पहिल भारतीय महिला बनल छल ।

मल्लेश्वरी सन् १९९७ मे विवाह केलक आ खेल जीवनसँ अल्प विराम हेतु यमुनानगर, हरियाणा चलि आयल । सन् १९९८ मे बैङ्कक एसियाली खेलसँ खेल जीवनमे पुन: वापसी कएलाक बाद ओ रजत पदक हासिल केलक । सन् १९९९ के एथेन्स विश्व भारोत्तोलन च्याम्पियनसिपमे ओ पदक नै जित सकलक, मुदा सन् २००० के लेल भारतक ओलिम्पिक टिममे विवादक बादो ओ कांस्य पदक जितैमे सक्षम भेल । 




#Article 837: कृष्णा पूनिया (101 words)


कृष्णा पूनिया (अंग्रेजी :Krishna Poonia) (जन्म ०५ मई १९७७) एक भारतीय डिस्कस थ्रोअर छी । ओ ११ अक्टुबर २०१० मे दिल्लीमे आयोजित किएल गेल राष्ट्रमण्डल खेलक फाइनल म्याचमे क्लीन स्वीप करि ६१.५१ मीटरमे स्वर्ण पदक जितने छल । एकर पश्चात सन् २०११ मे भारत सरकार अपन नागरिक सम्मानमे हिनका पद्मश्री पुरस्कारसँ सम्मानित केनए छल । 

कृष्णा पूनिया एक जाट परिवारसँ अग्रोहा हिसार हरियाणाक छी ।  ओ सन् २००० मे राजस्थानक चुरू जिलाक गागर्वास गामक रहनिहार वीरेन्द्र सिंह पूनियासँ विवाह केनए छल । हिनकर पति जयपुरमे भारतीय रेलवेमे कार्यरत अछि । कृष्णा अपन पढ़ाई साइकोलोजीमे कनोडिया गर्ल्स कलेज जयपुरसँ केनए अछि ।




#Article 838: नीता अम्बानी (862 words)


नीता अम्बानी (जन्म: नवम्बर १, १९६३) रिलायन्स फाउन्डेसनक संस्थापक आ अध्यक्ष तथा रिलायन्स इन्डस्ट्रिजक गैर- कार्यकारी निर्देशक छी । ओ भारतक सभ सँ धनीक व्यक्ति मुकेश अम्बानीक पत्नी आ रिलायन्स इन्डस्ट्रिजक संस्थापक धीरूभाई अम्बानीक पुतहू छी । नीता अम्बानी धीरूभाई अम्बानी अन्तर्राष्ट्रिय विद्यालयक संस्थापक आ अध्यक्ष सेहो छी ।

४० बिलियन अमेरिकी डलर बराबरक पारिवारिक सम्पति भेल अम्बानी भारतक सभ सँ धनीक महिला छी । ओ इन्डियन प्रिमियर लिगक क्रिकेट टिम मुम्बई इन्डियन्सक सह-मलकानि छी । अम्बानी बहुतो सम्मानसभ सँ सम्मानित भेल अछि जहिमे सन् २०१६ कें फोर्ब्सद्वारा जारी कएल गेल सूची अनुसार एसियाक सभ सँ प्रभावशाली व्यवसायी महिला नेतृ आ इन्डिया टुडेक पचास उच्च आ शक्तिशाली भारतीय महिलाक सूचीमे हिनकर नाम सूचीकृत कएल गेल छल । ओ भारतक पहिल महिला छी जे अन्तर्राष्ट्रिय ओलम्पिक समितिक सदस्यक रूपमे निर्वाचित भेल अछि ।

अम्बानीकें परोपकार, शिक्षा आ कला क्षेत्रमे उल्लेखनीय काजक लेल न्यू योर्क महानगरीय सङ्ग्रहालयद्वारा सम्मानित कएल गेल छल ।

नीता अम्बानी (दलाल) कऽ जन्म १ नवम्बर १९६४ मे मुम्बईक एक मध्यम-वर्गीय गुजराती परिवारमे भेल छल । नीताक पिता बिरलाक एक कम्पनीमे उच्चाधिकारी छल । नीताक भारतीय शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम्मे बाल्यकाले सँ बड्ड रूचि छल आ ओ ई नृत्यक अध्ययन आ प्रस्तुतीकरण सेहो केलक । नीता अपन उच्च शिक्षा मुम्बईक प्रसिद्ध नरसी मोन्जी कलेज अफ कमर्स आ इकोनामिक्स सँ पुरा केनए छल ।

नीता अम्बानी सन् २००३ जुनमे धीरूभाई अम्बानी अन्तर्राष्ट्रिय विद्यालयक स्थापना करि एकर अध्यक्ष बनल । ई विद्यालय मुम्बईक लोकप्रिय विद्यालयसभमे सँ एक छी । समुचा भारतमे ई ३७ नामी विद्यालयसभमे शामिल अछि जे देशमे प्रतिष्ठित अन्तर्राष्ट्रिय बेक्केलोरेट कार्यक्रम उपलब्ध करवैत अछि । एकर बाद नीता धीरूभाई फाउन्डेसनक स्थापना करि एकर अध्यक्ष बनल । ओ रिलायन्स इन्डस्ट्रिज आ संयुक्त राष्ट्र सङ्घीय एड्स न्यूनीकरण कार्यक्रमक सेहो हिस्सा छी । नीता अम्बानी रिलायन्स इन्डस्ट्रिजक सामाजिक आ समाजसेवा सँ जुड़ल काजसभ देखैत अछि ।ओ मुम्बई इन्डियन्स टिमक मलकानि सेहो छी । सन् २०१४ मे नीताके रिलायन्स इन्डस्ट्रिजक कार्यसमितिमे निर्वाचित कएल गेल ।

सन् १९९७ मे, रिलायन्स मेगा रिफाइनरीकें कर्मचारीसभक लेल कम्पनी शहरी परियोजना निर्माणमे नीता अम्बानी शामिल छल । ई परियोजनामे पूर्ण योजनाबद्ध तरिका सँ वृक्षारोपण आ पर्यावरण अनुकूल कोलोनी स्थापित करवाक लेल प्रस्ताव कएल गेल छल जहिमे १७,००० सँ अधिक कर्मचारी बास करि सकैत छल । आई, जामनगर परिसरमे लगभग १,००,००० सँ अधिक आमक गाछी अछि जतय विविध पक्षीसभ अपन बनाए लेने अछि ।

नीता अम्बानी रिलायन्स फाउन्डेसन चलबैत अछि । फाउन्डेसन एक भारतीय परोपकारी पहल छी जकरा सन् २०१० मे नीता अम्बानी स्थापित केनए छल । ई रिलायन्स इन्डस्ट्रिज लिमिटेड सँ सम्बद्ध अछि आ भारतक सभ सँ पैग निजी फाउन्डेसन छी ।ई फाउन्डेसन विशेष रूप सँ शिक्षा, खेल, स्वास्थ्य, ग्रामीण परिवर्तन, शहरी नवीनीकरण, आपदा प्रतिक्रिया, महिला सशक्तिकरण, कला प्रचार आ भारतक समृद्ध सांस्कृतिक विरासतक संरक्षणक क्षेत्रसभमे पहल करैत अछि । गुजरात, चेन्नई आ कश्मीरमे आएल बाढ़ि, केदारनाथ त्रासदी, मराठवाड़ा सूखा इत्यादि सहित भारतक विभिन्न भागमे आएल प्राकृतिक आपदाक समयमे आपदा प्रबन्धन, राहत आ बचाव अभियान आ पुनर्वास प्रयासमे रिलायन्स फाउन्डेसन सभ सँ आगा रहल अछि ।

अम्बानी इन्डियन प्रिमियर लिगक टिम मुम्बई इन्डियन्सक सह-मलकानि छी । अम्बानीक टिम सन् २०११ आ २०१३ मे च्याम्पियन्स लिग टि२० आ  सन् २०१३, २०१५ आ २०१७ मे इन्डियन प्रिमियर लिगक उपाधि जितने अछि ।

अम्बानी मुम्बई इन्डियन्सद्वारा समाजकें किछ वापस दै कऽ लेल 'एजुकेसन फर अल' (इएफए) नामक पहलकें नेतृत्व केनए अछि । इएफए नामक ई पहल ७०,००० सँ अधिक वञ्चित बच्चासभ धरि पहुँचाएल गेल अछि आ विभिन्न मिडिया आ डिजिटल प्लेटफर्मक उपयोग करि शिक्षाक लेल आवश्यक जागरूकता सृजना कएल गेल अछि ।

नीता धिरूभाई अम्बानी अन्तर्राष्ट्रिय विद्यालयक संस्थापक आ अध्यक्ष छी । ई विद्यालयकें विविध प्रकाशनसभ निरन्तर भारतक श्रेष्ठ विद्यालयके क्रममे रखैत आएल अछि । ई विद्यालयकें लगातार चारि वर्ष सँ भारतक उत्कृष्ट विद्यालयक रूपमे एजुकेसन वर्ल्ड प्रथम स्थानमे दर्ज केनए अछि । पछिला ५ वर्षमे मुम्बईकें उत्कृष्ट विद्यालय क्रमाङ्कमे एकरा एनडिटिभी आ हिन्दुस्तान टाइम्स चारि बेर प्रथम स्थान देनए अछि ।

सन् २०१६ जुन ३ कें, स्विस निर्णायकमण्डलद्वारा अन्तर्राष्ट्रिय ओलम्पिक समिति (आइओसी) मे सदस्यताक लेल मनोनीत आठ उम्मेदवारसभमे सँ नीता सेहो एक उम्मेदवार छल । ई नव सदस्यसभक निर्वाचन अगस्त २०१६ कें पहिल सप्ताहमे १२९अम आइओसी शत्रक समयमे आयोजित कएल गेल छल । सन् २०१६ अगस्त ४ कें दिन अम्बानी आइओसीक सदस्यक रूपमे निर्वाचित पहिल भारतीय महिला छी ।

नीताक जन्म रविन्द्रभाई दलाल आ पूर्णिमा दलालक सुपुत्रीक रूपमे भेल छल । नीताक बाहिन ममता दलाल एक विद्यालय शिक्षिका छी । मुम्बईक एक मध्यमवर्गीय परिवारमे नीताक पालनपोषण भेल छल । ओ एक निपुण भरतनाट्यम् नर्तकी छी ।

विद्यालय शिक्षिकाक रूपमे ओ मुकेश अम्बानी सँ भेट केनए छल । सन् १९८५ मे ओ प्रमुख भारतीय व्यापारी धीरूभाई अम्बानीक पुत्र मुकेश अम्बानी सँ विवाह केनए छल । विवाहक किछ साल धरि ओ विद्यालय शिक्षिकाक रूपमे काज केनए छल ।

ई दुनू कियो कऽ २ पुत्र आ १ पुत्री अछि । आकाश आ इशा अम्बानी जेठ अछि तँ अनन्त अम्बानी सभ सँ छोट अछि । आकाश अम्बानी जे ब्राउन विश्वविद्यालय सँ अर्थशास्त्रमे स्नातक केनए अछि वर्तमानमे रिलायन्स जियो इन्फोकमक मुख्य योजनानिर्माणकर्ता छी । इशा अम्बानी, येल विश्वविद्यालय सँ मनोविज्ञानमे स्नातक केनए अछि आ वर्तमान समयमे रिलायन्स जियो इन्फोकम आ रिलायन्स रिटेलक निर्देशक छी ।

जमीनी खेल पर हिनकर पहल कऽ लेल, अम्बानीके भारतक राष्ट्रपति सँ 'राष्ट्रिय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार २०१७' प्राप्त भेल । हिनका ई पुरस्कार रिलायन्स फाउन्डेसनक अध्यक्षक रूपमे प्राप्त भेल ।

टाइम्स अफ इन्डियाद्वारा हिनका भारतीय खेलक सर्वश्रेष्ठ कर्पोरेट समर्थन कऽ लेल पुरस्कृत कएल गेल।  




#Article 839: सबरिना हो (102 words)


सबरिना हो चि येङ () (चिनियाँ: 何超盈) एक मकाउक उद्यमी छथि । सबरिना हो पोली अक्सन मकाउ लिमिटेडके निर्देशिका आ प्रमुख कार्यकारी अधिकृत छथि । साथे सबरिना चिउ येङ संस्कृति लिमिटेडके स्थापनाकर्ता आ प्रमुख कार्यकारी अधिकृत सेहो छथि । ई वाहेक सबरिना रिजेन्सी होटल मकाउके सञ्चालिका आ मालिक छथि । 

सबरिनाके जन्म २४ सेप्टेम्बर १९९० मे हङकङमे भेल छेल । सबरिना गेमिङ टाइकुन स्ट्यान्ले होके बर्का बेटी छी । उनकर परिवार चार्ल्स माउरिस बेसम्यानक युहुदी डच वंशक छथि । सबरिनाके कलाप्रतिके चाहनाक कारणसँ सबरिना हङकङ विश्वविद्यालयसँ कला क्षेत्रमे स्नातक कर्ने छथि । सबरिना सन् २०१३ मे स्नातक तहसे उतिर्ण कर्ने अछि ।




#Article 840: पुष्पा बस्नेत (186 words)


पुष्पा बस्नेत नेपालमे कार्यरत समाजसेवी तथा प्रारम्भिक बाल विकास केन्द्र आ पुतली घर नामक गैह्रनाफामूलक गैह्रसरकारी संस्थाक संस्थापक/अध्यक्ष छी । ओ आ हुनकर संस्थाद्वारा विभिन्न कारणसँ कैदमे रहल अभिभावकक बेटाबेटीक अधिकारक सुरक्षा करै लेल काम करैत अछि । सिएनएन हिरो अवार्ड २०१२ कऽ लेल हुनकर नाम मनोनयनमे अएलाबाद विभिन्न राष्ट्रिय तथा अन्तर्राष्ट्रिय सञ्चार संस्थासब हुनकर कामक प्रचार प्रसार केनए छल । जेलमे रहल मातापिताक सन्तानक अधिकारक लेल कार्यरत पुष्पा बस्नेत सन् २०१२ कऽ लेल सिएनएन हिरो घोषित भेल छल । सन् २०१२ दिसम्बर ३ मे सिएनएन विश्वभरिसँ कएल गेल इन्टरनेट मतदानक परिणाम अनुसार हुनका सिएनएन हिरो घोषणा केनए छल । सन् २०१६ मे ओ सिएनएन सुपर हिरो घोषित भेल्निह । अमेरिकी टेलिभिजन सिएनएनद्वारा सिएनएन हिरो अवार्डक १० वर्ष भेलाक अवसरमे पूर्व सिएनएन हिरोमेसँ सुपर हिरो अवार्ड प्रदान केनए छल । ओहिक लेल नेपालक पुष्पा बस्नेतसहित अन्य पाँच लोक पूर्व सिएनएन हिरो मनोनयनमे अटायल छल । ओहि कार्यक्रमे अपन पकोपकारी कार्यके निरन्तरता देवाक विजेता पुष्पा वस्नेत ५० हजार अमेरिकी डलर प्राप्त केनए छल ।

अभिभावकसंग कारागार जीवन बिताबैमे बाध्य बालबालिकाके ओहि ठामसँ छोडाए आश्रय दऽ उदाहरणीय काम केनिहार पुष्पा बस्नेत सिएनएन सुपर हिरोक मनोनयनमे अटायल छल ।




#Article 841: एसिड फेकनाए (206 words)


अम्ल फेकनाए वा अम्ल आक्रमण कोनो लोकके मारनाए, कुरूप बनेनाए वा अङ्गभङ्ग करैक उद्देश्यसँ ओकर शरीरमे एसिड (अम्ल) फेक करल जाइवला एक प्रकारक हिंसा वा अपराध छी । अम्ल फेकैत काल विशेषत लोकक मुखारमे फेकैक घटना बेसी भेटैत अछि । ई घटनासँ महिलासभ बेसी पीडित भेल बात महिला अधिकारकर्मीसभ बताबैत अछि । अम्ल आक्रमणसँ पीडितक छालक तन्तु समाप्त भऽ सकैत अछि तहिना हड्डीमे समेत भित्री प्रभाव होइत अछि । अम्ल फेकैवला निर्मम अपराध कएनिहार लोकसभ सल्फ्युरिक वा नाइट्रिक अम्लक सहारा लैत अछि । सल्फ्युरिक अम्लके तँ आओरो रसायनसभक राजा कहल जाइत अछि । हाइड्रोक्लोरिक अम्ल कम असरदार भेलाक कारण अपराधीसभ नाइट्रिक अथवा सल्फ्युरिक अम्लके बेसी प्राथमिकता देल पावल गेल अछि । अम्लक आक्रमणसँ होमएवला दीर्घकालिन समस्यामे अन्धापन, शरीर आ छालमे कहियो नै मेटाबैवला दाग जका शारीरिक समस्या देखल जाइत अछि तँ समाजमे सेहो पीडितसभके घृणाक नजरसँ देखल जाइत अछि । अखन अम्लक आक्रमण विश्वक प्राय अधिकतर ठामक समस्या छी । सन् १९९० सँ बाद बङ्गलादेशमे महिला विरूद्ध ई अपराध सभसँ बेसी भऽ रहल विभिन्न सर्वेक्षणसभ देखेनए अछि । सन् १९९९ आ सन् २०१३ के बीचमे ३,५१२ बङ्गलादेशी नागरिकसभ ई अपराधक चपेटमे आएल सर्वेक्षण बतौने अछि । यद्यपी युरोप सहित अम्ल आक्रमणक घटना विश्वभरि भऽ रहल अछि मुदा एकर प्रभाव दक्षिण एसियामे विशेष रुपमे कायम अछि ।




#Article 842: वैवाहिक बलात्कार (126 words)


वैवाहिक बलात्कार वैवाहिक जीवनबाद महिलाउपर होमएवला घरेलु तथा यौन हिंसा छी । संसारभरि ई अमान्य घोषित अछि, महिलाउपर होमएवला अत्याचारसँ सम्बन्धित वैवाहिक बलात्कार बीसम् शताब्दीक मध्यदिस प्रकाशमे आएल छल । अखनो कयन देशसभमे ओना ई घरेलु अपराध सम्बन्धित नियमसभ नै बनि सकल अछि । 

महिलाके यौन चाह नैहोनाए, हरबखत महिलाके पुरुषक यौन अभिलासा पूरा करैक साधन आ यौन मामलामे पत्नीके पतिक आज्ञा मानैवला बात विश्वभरि प्रचलनमे रहल अछि । ई धारणाके पश्चिमा राष्ट्रसभमे सन् १९६० आ ७० क दशकमे नारीक शारीरिक अधिकार नारीमे होनाए चाही कहि चेतना अभिवृद्धि कएल गेल । पूर्वी युरोप आ स्क्यानडिनिभियन देशसभमे सन् १९७० सँ पहिने वैवाहिक बलात्कारक सम्बन्धमे कानून बनि गेल छल । अर्धविकसित आ विकासोन्मुख राष्ट्रके एहि दिस सन् १९९० आ सन् २००० दिस ध्यान गेल प्रकाशमे आएल छल ।




#Article 843: निना दोब्रेव (105 words)


निना दोब्रेव (जन्म: निना कोन्स्टेनटिनोवा दोब्रेवा, ; जनवरी ९, १९८९) बल्गेरियाली-क्यानेडेली अभिनेत्री आ मोडल छी । ओ दग्रासि: नेक्स्ट जनरेशन क छठम् सँ नवम् सत्रमे मिया जोन्स, एकल किशोर माता, क भूमिका निभेनाए छल । ओ वर्तमान समयमे सिडब्लु टेलिभिजन नेटवर्कक अलौकिक-किशोर ड्रामा टिभी श्रृङ्खला द भेम्पायर्स डायरिज मे एलीना गिल्बर्ट आ क्याथरिन पियर्सक किरदारक भूमिका केनए छल ।

निना दोब्रेवक जन्म सोफिया, बुल्गेरियामे भेल छल । जब ओ दुई वर्षक छल तखन ओ क्यानाडा गेल छल, तथा हिनकर पालन-पोषन टोरन्टो, ओन्टेरियोमे भेल छल । ओ धाराप्रवाह फ्रेञ्च, अङ्ग्रेजी आ बुल्गारियन भाषासभ बाजैत अछि । हिनकर माता एक कलाकार आ पिता कम्प्युटर वैज्ञानिक छी ।




#Article 844: जन्नत जुबेर रहमानी (106 words)


जन्नत जुबैर रहमानी टेलिभिजनमे अभिनय कएनिहार एक बाल कलाकार छी । हुनकर जन्म सन् २ooo मे भारतमे भेल छल । ओ किछ टेलिभिजन कार्यक्रममे सेहो काज केनए अछि । ओ टेली चलचित्र फुलवामर सानु फुल्वाक अभिनयसँ अपन अभिनयक सुरुवात केनए छल जे कलर्स टिभी च्यानलमे प्रसारण होइत आएल अछि । फुलवा, काशी - अब ना रहे तेरा कागज कोरा, हार जीत, मट्टी की बन्नु, एक थी नायका, भारत का वीर पुत्र – महाराणा प्रताप नामक टेली चलचित्रमे ओ अभिनय केनए अछि । हुनकर भाई आर्यन अग्रवाल या अयान जुबेर रहमानी सेहो एक बाल कलाकार छी । ओ लभका द इन्ड नामक चलचित्रमे सेहो अभिनय केनए अछि।




#Article 845: वेश्या विरुद्धक हिंसा (117 words)


वेश्या विरुद्धक हिंसा वेश्या वृत्तिके घृणित दृष्टीकोणसँ देखनिहार आ वेश्याके शाररिक यातना देनाए सम्भोगक लेल एलटा सामान्य खेलौना जका व्यवहार करनाए आ हत्या मारि पिट करनाए जका कार्यके वेश्या उपर भेल हिंसा कहल जाइत अछि । वेश्या वृत्तिके समाजमे घृणित दृष्टिसँ देखनाए मुख्य कारण सेहो वेश्या उपर हिंसा होमए के दोसर कारण छी । वेश्या शब्दमे सेहो हिंसा भएल सुनल जाइत अछि एकटा घटना अनुसार विवाह होमए लागल अवस्थामे एक पुरुष कोनो रिस आवेगमे आबि महिलाके वेश्या शब्दक गाली मात्र करलाक कारण ओ दुनूक सम्बन्ध सदाक लेल समाप्त भेल छल । वेश्या अर्थात यौनकर्मी अर्थात महिलाद्वारा कएल जाइवला एक प्रकारक पेशा छी । ई पेशा प्राय कठिन अवस्थामे कएल जाइवला बात ई क्षेत्रक महिलासभ बताबैत अछि ।




#Article 846: नारीवाद (148 words)


नारीवाद राजनैतिक आन्दोलनक एक सामाजिक सिद्धान्त छी जे नारीसभक अनुभवसभसँ जनित अछि । मुदा मूल रूपसँ ई सामाजिक सम्बन्धसँ अनुप्रेरित अछि मुदा कयन नारीवादी विद्वानक मुख्य मुद्दा लैङ्गिक असमानता आ महिलाक अधिकार इत्यादि पर बेसी जोड़ दैत अछि । 

नारीवादी सिद्धान्तसभक उद्देश्य लैङ्गिक असमानताक प्रकृति आ कारणसभके समझनाए तथा एकर फलस्वरूप जन्म होमएवला लैङ्गिक भेदभावक राजनीति आ शक्ति सन्तुलनक सिद्धान्तसभ पर एकर असरक व्याख्या केनाए छी । नारी विमर्श सम्बन्धी राजनैतिक प्रचारसभक जोड़ प्रजनन सम्बन्धी अधिकार, घरेलु हिंसा, मातृत्व अवकाश, समान वेतन सम्बन्धी अधिकार, महिला यौनाङ्ग कर्तन, भेदभाव आ यौन हिंसा पर केन्द्रित अछि ।

आधुनिक नारीवादी विमर्शक मुख्य आलोचना सबदिने सँ याह रहल अछि कि एकर सिद्धान्त आ दर्शन मुख्य रूपसँ पश्चिमी मूल्य आ दर्शन पर आधारित रहल अछि । मुदा जमीनी स्तर पर नारीवादी विमर्श हरेक देश आ भौगोलिक सीमासभने अपन स्तरपर सक्रिय रहैत अछि आ हरेक क्षेत्रक नारीवादी विमर्शक अपनी खास समस्यासभ होइत अछि । 




#Article 847: वेश्यावृत्ति (289 words)


आर्थिक लाभक लेल अन्य पुरुषसँ यौन सम्बन्ध राखनाए या कोनो भी प्रकारक यौन सेवा प्रदान केनाए वेश्यावृत्ति या देहव्यापार कहलाबैत अछि । एहि प्रकार वेश्यावृत्ति केनिहार महिलाके वेश्या या यौनकर्मी कहल जाइत अछि, तँ सेवा लेनिहारके विविध नामसँ जानल जाइत अछि । वेश्यावृत्ति यौन व्यापारक एकटा अंश छी । वेश्यावृत्ति सम्बन्धि कानुन सेहो राष्ट्र अनुसार अलग अलग होइत अछि । कतौ कतौ वेश्यावृत्तिके विश्वक सबसँ पुरान पेशाक रुपमे लेल पावल जाइत अछि ।संस्कृत कोशमे ई वृत्ति धारण केनिहार महिलासभक लेल विभिन्न संज्ञा देल गेल अछि । वेश्या, रूपाजीवा, पण्यस्त्री, गणिका, वारवधू, लोकाङ्गना, नर्तकी आदिक गुण आ व्यवसायपरक अमिघा छी - 'वेशं (बाजार) आजोवो यस्या: सा वेश्या' (जकर आजीविकामे बाजार हेतु होए, 'गणयति इति गणिका' (रुपया गिनैवाली), 'रूपं आजीवो यस्या: सा रूपाजीवा' (सौन्दर्य मात्र जकर आजीविकाक कारण होए); पण्यस्त्री - 'पण्यै: क्रोता स्त्री' (जकरा रुपया दऽ आत्मतुष्टिक लेल क्रय करि लेल गेल होए)।

वेश्यावृत्ति लगभग सभ सभ्य देशसभमे आदिकालसँ विद्यमान रहल आयल अछि । एकरा सदैव सामाजिक यथार्थक रूपमे स्वीकार कएल गेल अछि आ विधि आ परम्पराद्वारा एकर नियन्त्रण होइत रहल अछि । सामन्तवादी समाजमे ई अभिजातवर्गक कलात्मक अभिरुचि आ पार्थिव गौरवप्रदर्शनक माध्यम छल । आधुनिक यान्त्रिक समाजमे ई लोकसभक विवशता, मानसिक विक्षेप, भोगैषणा आ निरन्तर बढैत आन्तरिक कुन्ठाक क्षणिक उपचारक साधन छी । वस्तुत: ई विघटनशील समाजक सहज अङ्गक रूपमे विद्यमान रह अछि । सामाजिक स्थितिमे आरोह अवरोह आबैत रहल अछि, मुदा एकर अस्तित्व अक्षुण्ण, अप्रभावित रहल अछि । पश्चिमी भागक प्राचीन देशसभमे वेश्यावृत्ति धार्मिक अनुष्ठानसभक साथ सम्बन्ध रहल अछि । 

आधुनिक युगमे नारीसभके वेश्यावृत्ति दिस प्रेरित केनिहार प्रमुख कारण निम्नलिखित अछि-

अनेक महिलासभ अपन आ आश्रितसभक भुखक ज्वाला शान्त करैक लेल विवश भऽ ई वृत्तिके अपनाबैत अछि । जीविकोपार्जनक अन्य साधनसभक अभाव तथा अन्य कार्यसभक अत्यन्त श्रमसाध्य आ अल्वैतनिक होमएक कारण वेश्यावृत्ति दिस महिला आकर्षित होइत अछि ।




#Article 848: कमला बेनीवाल (138 words)


कमला बेनीवाल (जन्‍म: १२ जनवरी १९२७) मिजोरमक वर्तमान राज्‍यपाल छी । ओ त्रिपुरा आ गुजरातक पूर्व राज्‍यपाल भ काज केनए अछि आ भारतीय राष्ट्रिय काङ्ग्रेसक सबसँ वरिष्‍ठ राजनेतामे सँ एक छी । ओ बहुत लम्बा समयधरि राजस्‍थान काङ्ग्रेस राज्‍य सरकारमे बहुतेक महत्‍वपूर्ण मन्त्री पदमे रहि काज केनए छल ।

बेनीवालक जन्‍म १२ जनवरी १९२७ के राजस्‍थानक झुंझुनू जिलाक गोरिर गाम्मे जाट परिवारमे भेल छल । कमलाक प्रारम्भिक शिक्षा झुंझुनू जिलामे भेल छल । एकर बाद ओ अर्थशास्‍त्र, राजनीति शास्‍त्र तथा इतिहासमे स्‍नातकक शिक्षा प्राप्‍त केलक आ अन्तत: इतिहासमे एमएक पढ़ाई पूर्ण केनए छल । कमला एक तैराक, घुड़सवार, कला प्रेमी आ प्राकृतिक प्रेमी छल । कमला अपन बचपनमे राजनीतिक कला सिखने छल । ११ वर्षक उमरमे ओ भारत छोड़ो आन्दोलनमे भाग लेनए छल । एकर लेल हुनका भारतक पूर्व प्रधानमन्त्री इन्दिरा गांधी 'ताम्रपत्र' सम्‍मानसँ सम्‍मानित केनए छल ।




#Article 849: बर्दिश चग्गर (113 words)


बर्दिश चग्गर (जन्म: ६ अप्रिल, १९८०), एक भारतीय मूलक कनाडाई राजनीतिज्ञ छी तथा वर्तमानमे केनेडा सरकारमे लघु उद्योग एवम् पर्यटन मन्त्री छी । १९ अगस्त, २०१६ क ओ केनेडाक ‘हाउस अफ कामन्स’मे नया सरकारक सदनक नेता नामित भेल । ओ ई पद पर पहुच वाली पहिल महिला छी जे कि अल्पसङ्ख्यक सिख समुदायक सदस्य छी । चग्गर सदनक नेता डोमिनिक लेब्लाङ्कक स्थान लेने अछि । ओ १९ भारतीयमे सँ एक छी जे गतवर्ष केनेडामे चुनाव जितने छल । वाटरलू क्षेत्रमे जन्मल आ बढल चग्गर युनिभर्सिटी अफ वाटरलू सँ शिक्षा हासिल करलक, जत ओ यङ्ग लिबरल्सक अध्यक्ष सेहो रहल छल । ओ २०१३ मे टड्रोक चुनाव अभियानमे स्वयंसेवकक रूपमे सेहो काम करने छल । 




#Article 850: जयन्ति पटनायक (108 words)


जयन्ति पटनायक (जन्म 1932) एक भारतीय सांसद आ राष्ट्रिय महिला आयोग सँ जुरल सामाजिक कार्यकर्ता छी। 

ओ राष्ट्रिय महिला आयोग क पहली अध्यक्ष रहि चुकल अछि । उनकर कार्यकाल ३ फरवरी १९९२ सँ ३० जनवरी १९९५ तक छल । 

उनकर जन्म उडिसा क गंजम जिलाक अस्कामे १९३२ मे भेल छल । उनकर पिता निरन्जन पटनायक छल । उनकर प्रारम्भिक शिक्षा हरिहर हाई स्कूल, अस्कामे भेल छल । तत्पश्चात ओ उत्कल विश्वविद्यालय कटक सँ स्नातकोत्तर कलाक पढाई पुरा करलक ।

उनकर विवाह वर्ष १९५३ मे जानकी बल्लभ पटनायक सँ भेल, जे १९८० सँ १९८९ धरि उडिसा क मुख्यमन्त्री छल, जेहि सँ उनका एक पुत्र आ दु पुत्री अछि । 




#Article 851: डिम्पल यादव (209 words)


डिम्पल यादव समाजवादी पार्टीक प्रदेश अध्यक्ष, विधान मण्डल दलक नेता आ उत्तर प्रदेशक मुख्यमन्त्री अखिलेश यादवक धर्मपत्नी छी जे कि कन्नौजसँ निर्विरोध सान्सद चुनल गेल अछि। हुनकर तीनटा बच्चा अछि-अदिति, टीना आर अर्जुन।

राजनीतिमे आबैसँ पूर्व डिम्पल अपन परिवारक सदस्यसभक सहित आयसँ अधिक सम्पत्ति अर्जितक मामलामे शामिल छल।राजनीतिक क्षेत्रमे पहिल चुनाव ओ हारि गेल लेकिन ओ हिम्मत नै हारलक। अन्तत: हुन्कर पति अखिलेश यादव अपन द्वारा जितल गेल कन्नौज लोक सभा सीट हुनका लेल खाली करि देलक। डिम्पल अही सीटक लेल अपन नामाङ्कन पत्र दाखिल करि देलक।

चुनाबमे काङ्ग्रेस, भाजपा आर बहुजन समाज पार्टी द्वारा हुन्कर खिलाप अपन प्रत्याशी नै उतारलक जबकि दुटा अन्य, दशरथ सिंह शंकवार (संयुक्त समाजवादी दल) आर संजू कटियार (स्वतन्त्र उम्मीदवार) द्वारा अपन नामांकन वापस लऽ लेलक। जकर परिणाम इ भेल कि २०१२ कऽ लोक सभा उप-चुनाव ओ निर्विरोध जीतिक उत्तर प्रदेशमे एक कीर्तिमान स्थपित केलक।

डिम्पलसँ पूर्व पुरुषोत्तम दास टन्डन द्वारा उत्तर प्रदेशक इलाहाबाद पश्चिमी लोकसभा सीट सन् १९५२ मे एक पुरुष प्रत्याशीक रूपमे निर्विरोध जीतल छल।

राजनीतिमे अपन पतिक साथ्के लेल ओ मुख्य मन्त्री अखिलेश यादवक ट्वीटर आ फेसबुक अकाउण्ट स्वयं देखैत अछि।

सेलेब्रिटी सान्सद बनल डिम्पल डिम्पल यादव उत्तर प्रदेशमे सेलेब्रिटी सान्सदके रूपमे सहो जानल जाइत अछि। हरेक बड़का बिजनेस घराना आर संस्थान अपन कार्यक्रमसभमे श्रीमती यादवक आमन्त्रित करऽक होड़मे रहैत अछि।




#Article 852: रूपा गांगुली (280 words)


रूपा गांगुली () (जन्म २५ नोवम्बर १९६६) एक भारतीय अभिनेत्री छी जे हिन्दी आर बंगाली भाषाक फिल्म उद्योगक साथ टेलिभिजनमसेहो काम केनए अछि। टेलिभिजन श्रृंखला महाभारत (१९८८)म द्रौपदीक भूमिका काम केलाएक बाद ओ लोकप्रिय बनल आर ओ निम्नलिखित चलचित्रम अपन किरदारक लेल सबसँ बेसी जानल जाएत अछि, गौतम घोषक चलचित्र पोद्मा नदीर माझी (१९९३), अपर्णा सेनक चलचित्र युगान्त (१९९५) आर रितुपर्णो घोषक चलचित्र अन्तरमहल (२००६) फिल्मसममे देखा पडल अछि.

गांगुलीक जन्म भारत,मे पश्चिम बंगालक कोलकाता,  निकट कल्याणी मे भेल हुन्कर लालन पालन एक संयुक्त परिवारमे भेल।

गांगुली अनिल कपूर अभिनीत फिल्म साहेब (1985) सँ बतौर एक बाल अभिनेत्री शुरुआत केलक। हुन्कर दोसर भूमिका मलयालम फिल्म इथिले इनियम वारु (1986) में ममूटीक साथ बतौर मुख्य अभिनेत्री छल। हालाकि बी. आर. चोपड़ाक पौराणिक टीवी श्रृंखला महाभारत (1988) मे एक मुख्य अभिनेत्रीके रूपमे,द्रौपदी क अत्‍यधिक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभान अछि बादमे, ओ तुरंत प्रसिद्ध भ गेल आ ओकर परिणामस्वरूप ओ मृणाल सेनक एक दिन अचानक (1989) में अभिनयक मौका भेटल। 

हुन्कर अन्य उल्लेखनीय फिल्मसभमे शामिल अछि गौतम घोषक पुरस्कृत-फिल्म, पद्मा नोदीर माझी (1993),अपर्णा सेनक युगांत (1995), गौतम घोष क आबार अरण्ये (2003), रितुपर्णो घोषक ओंतोरमोहोल (2006), ई फिल्मसभमे अभिनय करके आलावा ओ हिन्दी आ बंगलाक कई टेलीविजन श्रृंखलासभमे सेहो काम केलक, जहिमे सुकन्या (1998) आदि, शामिल अछि। 

किछ हिन्दी फिल्मक बाद, ओ कोलकाता  स्थानांतरित भ गेल १९९९०क दशकम बहत बंगाली फिल्मसभमे अभिनय कऽ  बाद, २००७ म वओ मुंबई आधारित स्थानांतरण केलक, अंजन दत्ता द्वारा निर्देशित अंग्रेजी फिल्म बो बैरक्स फॉरएवर (2004) मे काम केलक साथ ओ बंगाली फिल्मसभमे अभिनय जारी राखि करम अपना अपना (2007) सं हिन्दी टीवी श्रृंखला में काम शुरू केलक, जहिमे ओ लव स्टोरी (सब टीवी श्रृंखला) (2007)  हालिया धारावाहिक अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो में सेहो काम केन्ए अछि




#Article 853: नेलि साचस (105 words)


नेलि साचस (१० दिसम्बर १८९१ – १२ मई १९७०) एक यहूदी जर्मन जन्म, स्वीडीश कवि आ नाटककार छल । द्वितीय विश्व युद्धक यूरोपमे नाजिसभक उदयसँ उत्पन्न होएवाला हुनकर अनुभव हुनका हुनकर मित्र यहूदीसभक दुःख आ उत्साहक लेल एक तीक्ष्ण प्रवक्ताक रूपमे परिवर्तित करि देलक । हुनकर सभसँ प्रसिद्ध नाटक एली छी: एईन् मिस्टेरिन्सपिएल वोम लेडन इजरायल्सक बारेमे एक रहस्यमयी नाटक (१९५०); अन्य कार्यसभ कवितासभ जेइकेन ईम स्याण्ड (१९६२), वरजाउबेरिङ (1970), आ इन डेन वोनुहगेन डेस टोडेस (१९४७) कविताक सङ्ग्रह, फ्लक अण्ड वरम्यान्डलुङ (१९५९), फाहर्ट इन्स स्टाउब्लोज (१९६१), आ स्युक नाच लेबेन्डेन (१९७१) शामिल अछि । ओ १९६६ मे साहित्यक नोबेल पुरस्कारसँ सम्मानित कएल गेल ।




#Article 854: वाङ्गारी माथाई (191 words)


वाङ्गारी माथाई ( ) (१ अप्रैल १९४० – २५ सितम्बर २०११) एक अन्तर्राष्ट्रिय जानल मानल केन्याक वातावरणीय विज्ञ राजनैतिक समाजसेवी आ नोबेल पुरस्कार विजेता छल । हुनकर प्रारम्भिक शिक्षा संयुक्त राज्य अमेरिकाक माउन्ट सेन्ट कोलास्टिका आ पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय आ केन्याक नैरोबी विश्वविद्यालयमे भेल छल । अफ्रिकामे मामा मिति (वृक्षक माता) नामसँ माथाई चर्चित छल जकर जन्म सन् १९४० मे केन्याक नायरीमे भेल छल । ओ ग्रीन बेल्ट आन्दोलनक संस्थापक आ महिला अधिकारक लेल लड़निहार प्रसिद्ध केन्याली राजनितिज्ञ आ समाजसेवी छल । ओ साल सन् २००४ मे नोबेल पुरस्कार प्रदान कएल गेल छल । ओ नोबेल पुरस्कार प्राप्त केनिहार पहिल अफ्रिकी महिला छल |

ओ अमेरिका आ केन्यामे उच्चशिक्षा अर्जित केनए छल । सन् १९७० क दशकमे माथाई ग्रीन बेल्ट आन्दोलन नामक गैर सरकारी सङ्गठनक आरम्भ करि पौधरोपण, पर्यावरण संरक्षण आ महिलासभक अधिकारक लेल ध्यान देनए छल । सन् २००४ मे सतत विकास, लोकतन्त्र आ शान्तिक लेल अपन योगदानल कारण ओ नोबेल शान्ति पुरस्कार प्राप्त केनिहार पहिल अफ्रिकी महिला आ पहिल पर्यावरणविद् बनल । वर्ष २००५ मे हिनका भारत सरकार जवाहर लाल नेहरू पुरस्कारसँ सम्मानित केनए छल ।

ओ सन् २००२ मे केन्याक सांसद बनल आ केन्याक सरकारमे मन्त्री सेहो रहल ।




#Article 855: काइली मिनोग (153 words)


काइली एन मिनोग, (जन्म - २८ मई १९६८) एक अस्ट्रेलियाली पप गायिका, गीतकार तथा अभिनेत्री छी । अस्ट्रेलियाली टेलिभिजनपर एक बाल कलाकारक रूपमे अपन करियर शुरू करैक बाद तथा सन् १९८७ मे एक रिकर्डिङ कलाकारक रूपमे अपन करियर शुरू करैसँ पहिने, हुनका टेलिभिजन सिरियल नेबर्स मे अपन भूमिकासँ ख्याति मिलल छल । हुनकर पहिल एकल लोकोमोशन, अस्ट्रेलियाली एकल चार्ट पर पूरे सात हप्ताधरि शीर्षपर बनल रहल आ ओ एलबम ओहि दशकक सबसँ बेसी बिकै वला एकल बनि गेल । ई सफलताक बाद हुनका स्टक, एटकेन आ वाटरम्यान आदि गीतकारसभ तथा निर्मातासभक साथ अनुबन्ध दिलेनाए छल । हुनकर पहिल एल्बम, काइली (१९८८) आ ओकर एकल आई शुड बी सो लकी दुनू संयुक्त अधिराज्यमे क्रमाङ्क एक पर पहुंचि गेल आ अगला दुई वर्षसँ भी बेसी अवधिधरि हुनकर सभ पहिल १३ एकल ब्रिटिश शीर्ष दस धरि पहुंचल । हुनकर पहिल चलचित्र द डेलिनक्वेन्ट्स (१९८९) नकारात्मक समीक्षाक बादो अस्ट्रेलिया तथा ब्रिटेनमे बक्स अफिस पर सफल रहल ।




#Article 856: रानी चेन्नम्मा (129 words)


रानी चेनम्मा (कन्नड: ಕಿತ್ತೂರು ರಾಣಿ ಚೆನ್ನಮ್ಮ) (१७७८ - १८२९) भारत क कर्नाटक के कित्तूर राज्यक रानी छल । सन् १८२४ मे (सन् १८५७ क भारतक स्वतन्त्रताक प्रथम सङ्ग्राम सँ ३३ वर्ष पूर्व) ओ हडप नीति (डाक्ट्रिन अफ लेप्स) क विरुद्ध अंग्रेजसभ सशस्त्र संघर्ष केने छल । सङ्घर्षमे ओ वीरगतिक प्राप्त भेल। भारतमे उनका भारतक स्वतन्त्रताके लेल सङ्घर्ष करवाली सबसँ पहिल शासकमे उनकर नाम लेल जाएत अछि । 

रानी चेनम्माके साहस एवम् उनकर वीरताके कारण देशक विभिन्न हिस्सासभ खासक कर्नाटकमे उनका विशेष सम्मान प्रदान अछि आ उनकर नाम आदरक साथ लेल जाएत अछि । झांसीक रानी लक्ष्मीबाईके सङ्घर्षके पहिले रानी चेनम्मा युद्धमे अंग्रेजसभके पराजित क देने छल । मुदा उनका युद्धमें कामयाबी नै मिलल आ उनका कैद करि लेल गेल छल । अंग्रेजके कैदमे रानी चेनम्माक निधन भ गेल ।




#Article 857: वैष्णो देवी (139 words)


वैष्णो देवी, जेकरा माता रानी, त्रिकुटा आ वैष्णवीक नामसँ सेहो जानल जाइत अछि, हिन्दू माता देवी महालक्ष्मीक एक रूप छी। शब्द माँ आ माता प्राय:  माँ कऽ लेल भारतमे उपयोग कएल जाइत अछि, आ एही प्रकार वैष्णो देवीक सम्बन्धमे प्राय: एकर उपयोग कएल जाइत अछि। वैष्णो देवी मन्दिर (हिन्दी: वैष्णोदेवी मन्दिर) हिन्दू देवीक समर्पित एक हिन्दू मन्दिर छी, जे जम्मू आ कश्मीर राज्यक भीतर त्रिकुटा पहाडसभमे आ कटरामे स्थित अछि। मन्दिर वा भवन कटरासँ १३.५ कि.मी. दूर अछि आ परिवहनक विभिन्न साधनसभक कटरासँ भवानीमे उपलब्ध अछि, जाहिमे टोनी, इलेक्ट्रिक वाहन आ दुई वा चार व्यक्तिसभद्वारा सञ्चालित प्यालीकेशन्स शामिल अछि।

हेलीकप्टर सेवासभ सेहो सञ्जीचहटधरि उपलब्ध अछि, जे कटरासँग ९.५ कि.मी. दूर अछि। भैरव मन्दिर भवानीसँ १.५ कि.मी. दूर अछि।

बैंक अफ इन्डिया- कल्याण (आरबीआई), सिक्काक पाछाक दिशामे माँ वैष्णो देवीक छविक साथ ५ रुपैयाँ आ १० रुपैयाँक सिक्का जारी केलक।




#Article 858: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, २०१७ (120 words)


उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, २०१७ उत्तर प्रदेश विधानसभाक १७अम चुनाव छी जे ११ फरबरी सँ ८ मार्च २०१७ धरि आयोजित भेल । सन् २०१२ मे भेल विधानसभा निर्वाचनमे समाजवादी पार्टी बहुमात प्राप्त केनए छल आ अखिलेश यादवक नेतृत्वमे सरकार गठन केनए छल ।

सन् २०१६ जनवरीमे भारत निर्वाचन आयोग उत्तर प्रदेशक ४०३ संसदीय क्षेत्रक चुनाव तिथि सार्वजनिक केनए छल । सन् २०१६ जुलाईमे निर्वाचन आयोग निर्णय लेलक जे सन् २०१७ क विधान सभा निर्वाचानक लेल निर्वाचन केन्द्रक सङ्ख्यामे बढोतरी कएल जाए । १,५०० सँ बेसी पञ्जीकृत मतदाता रहल स्थानमे आ ६ संसदीय निर्वाचन क्षेत्र मुझ्झपरनगर, बुधना, पुरकाजी, खटोली, चार्थवाल आ मिदानपुरमे नव निर्वाचन केन्द्रक स्थापना होमएक प्रस्ताव पारित भेल जहिसँ कूल मतदान केन्द्रक सङ्ख्या १,७६९ सँ १,८१९ पहुँचि गेल ।




#Article 859: बर्लिन (223 words)


बर्लिन(,; ) जर्मनीक राजधानी शहर तथा जर्मनीक १६ राज्यसभमे सँ एकटा राज्य छी। बर्लिन जर्मनीक सबसँ पैग शहर छी ।
ई बर्लिन-ब्र्यान्डनबर्ग मेट्रोपोलिटन क्षेत्रक मध्यमे, जर्मनीक उत्तर-पूर्वी भागमे अवस्थित अछि । ई शहरक जनसङ्ख्या ३४ लाख अछि । ई युरोपेली सङ्घक दोसर सबसँ पैग शहर छी । बर्लिन युरोपक राजनीति, संस्कृति आ विज्ञानक महत्त्वपूर्ण केन्द्र छी । युरोपक यातायातक लेल ई एक धुरीक समान अछि । एहि शहरमे बहुतेक महत्त्वपूर्ण विश्वविद्यालय, सङ्ग्रहालय आ शोध केन्द्र अछि । ई शहर बहुत तेजी सँ विकास करि रहल अछि आ एतय होमएवला समारोह, उत्सव, अग्रणी कला, वास्तुशिल्प आ रात्रि-जीवन बहुत प्रसिद्ध अछि । बर्लिन १३हम शताब्दीमे स्थापित भेल आ ई क्षेत्र बहुत राज्यसभ आ साम्राज्यसभक राजधानी रहल- प्रुशिया राज्य (सन् १७०१ सँ), जर्मन साम्राज्य (सन् १८७१-१९१८), वेइमार गणतन्त्र (सन् १९१९-१९३२) आ तेसर राइख (सन् १९३३-१९४५) । द्वितीय विश्वयुद्धक बाद ई शहरक विभाजन भ‌‍ऽ गेल । पूर्वी बर्लिन जर्मन लोकतान्त्रिक गणराज्य (पूर्वी जर्मनी) कऽ राजधानी बनल आ बर्लिन दीवार सँ घेरल पश्चिमी बर्लिन पश्चिमी जर्मनीक हिस्सामे आएल । सन् १९८९ मे बर्लिन दीवार टुटलाक बाद बर्लिन शहर फेर एक भऽ गेल आ जर्मनी एकीकरणक बाद पुरा जर्मनीक राजधानी बनल ।

५२° ३२' उत्तरी अक्षांश तथा १३° २४' पूर्वी देशान्तरमे बर्लिन शहर अवस्थित अछि । ई उत्तर-पूर्वी जर्मनीमे बाल्टिक सागरक तटसँ ११० माइल भीतर दिस एल्ब आ ओडर नदीसभक बीच स्प्री नदीक दुनू किनार पर बसल अछि ।




#Article 860: शेर्पा जाति (603 words)


शेर्पा जाति (शेर्पा भाषा: , वयली: shar pa'i mi rigs) नेपालक उच्च हिमाली क्षेत्रक जातिगत समूह छी। शेर्पा भाषाम शरपा अथवा शरवाक मतलब पूर्वी निवासी होएत अछि जे शब्द सम्भोट लिपिमे लिखल शेर्पा इतिहाससभक (शेर्पा भाषा: , वयली: shar pa) भेलाहक पश्चाता देवनागरी आर अंग्रेजी लिपिमे शेर्पा कहिक लिखल गेल अछि । शेर्पासभ पूर्वी तिब्बत सर्वप्रथम सन् १४८० मे अपन ठाम छोडि १५३० मे नेपालक पूर्वी क्षेत्र सोलुखुम्बु जिलाम बसाईँसराई भs आएल छल  शेर्पासभक इतिहास आर संस्कृति नामक पुस्तकमे उल्लिखित अछि । बहुत शेर्पासभ नेपालक पूर्वी भागम बसोबास करैत अछि,  रोल्वालिङ्ग उपत्यक तथा हेलम्बु धरि सेहोमे बसोबास करैत अछि । पङ्पोछे  नेपालक शेर्पासभक सबसँ पुरान गाउँ छी। शेर्पा भाषा भोट-बर्मेली भाषा परिवारक दक्षिणी डारि मानल जाइत अछि। तहिना ई भाषा तिब्बती भाषासं बहुत मिलैत अछि आ कोनो-कोनो भाषा तिब्बतसं सेहो  मिलैत अछि। वोकरबाद सोलु आ खुम्बुसँ नेपालक विभिन्न भू-भागमा वसोवास करैत आएल तथ्यसभ प्रमाणित रहल अछि। विशेषक हिमाली क्षेत्रके अपन बसोवास स्थलक रूपमे  हिमाली भू-भागमा बसोवासक शेर्पा जातिसभक विशेषता चिन आर तिब्बतसँ जोडल भू-भागम वसोवास भेल शेर्पा जातिक अन्य जातिक लोगसभसँ तिब्बती या भोटबासी (भोटे) कहैक प्रचलन सेहो रहल अछि।

शेर्पा भाषा आ व्याकरणक आधारमे बात करैत “शर” कहैक पूर्व दिशा आ ”प“ स्वामित्वक बोध शब्द होइत अछि shar pa, शरप कहैक पूर्व दिशामे बसोबास कएनिहर पूर्वेली या पूर्वी निबासी कहैक शाब्दिक अर्थ होएत अछि। एही अर्थम व्याकरणक दृष्टिकोणसँ कोनो त्रुटी नै भेल आर मौखिक बोलि चालीमे सेहो सरल आ सहज तथा उपयुक्त भेलाहप् शेर्पासँ सम्बन्धित सम्भोट लिपिमे लेखेक लेखसभम सब एकमतमे शरप लिख्ल भेटल सेहो अंग्रेजी आ देवनागरी लिपिमे शरपके शेर्पा कहि व्यापकरूपम अशुद्ध लिखल देख्ल गेल अछि।

शेर्पा समाजक इतिहासकार खनपो सङग्यस् तन्जीन (१९२४-१९९०) लेख्नु भेल ब्रहमदण्ड नामक शेर्पा इतिहास आ वंशावली तथा Snowlight of Everest मे उल्लेख कएल गेल अछि  शेर्पा जातिक मूलथर आ उपथर निम्न प्रकारक अछि।    

अपन भावना आ विचारके सहज रुपसँ छोटनिक व्यक्तक भाषाक प्रयोग करैत अछि। तहि दवरा लोग आ भाषाक बीचमे अभिन्न सम्बन्ध रहल गेल अछि। भाषा लोगसभक विचार व्यत्तक महत्वपूर्ण संचार प्रणाली अथवा साधन छी। कोनो समुदाय वा वर्ग विशेषका पहिचानक भाषाक महत्वपूर्ण भूमिका अछि। भाषा आ संस्कृति विना जातित्वक पहिचान नै भऽ सकैत अछि। शेर्पा समुदायमे एक दोसर बीच अपन विचार व्यक्तक अपन अलग भाषा रहल गेल अछि, जेकरा  शेर्पा भाषा कहैत छी।
ताही खातिर शेर्पासभक सेहो अपन अलग भाषाक विकास भेल अछि। ई भाषाक शुद्ध उच्चारण करबाक लिपि मतलब सम्भोट लिपि छी।  

नेपालक लुम्बिनीमे जन्म भेल सिद्धार्थ गौतमक बुद्धात्त्व प्राप्त पश्चात् भारतक ठामसभ्मे उपदेश द भारतम बौद्ध धर्मक विकास भेल छल। तत् पश्चात् कालान्तरमा अहि धर्मक विकास आर लोकप्रियतासँ चीन, तिब्बत, जापान आर मंगोलिया लगायत एशियाक बहत मुलुकसभ्मे व्यापक स्थान भेटल। ओहि क्रमम हिमाली क्षेत्र तिब्बतमा सर्वप्रथम धर्मराज स्रोङ्चन गम्पो (जन्मकाल ५५७ ई.) क राज्यकालमा बौद्ध धर्मको प्रवेश भेल छल विशेषतः (७६३ ई.मा) नालन्दासँ शान्तरक्षितक तिब्बत आगमन पश्चात् ई आउर व्यापक रूप सँ भेल। ओ तिब्बतम बौद्धधर्मक प्रचारार्थ स्वयं राजाके  आमन्त्रण केनेए छल।

  लामा बुद्ध छन्चन 
  लामा सङ्व दोर्जे 
  लामा रोल्पयी दोर्जे 
  लामा ख्येन्पा दोर्जे 
  क्यरोग तन्जीन ड्रग्पा / रोल्प दोर्जे 
  पल थिम्मि जङ्पो / फ़ट् छेन 
  जम्याङ छोस्क्यी रिग्जीन 
  थाङ्ला टुल्कु ङग्वाङ दोर्जे 
  थाङ्ला ङग्वाङ छेरीङ दोन्ड्रुब
  थाङमद् रिन्पोछे ङग्वाङ शद्ड्रुब तान्पयी ग्याल्छन 
  लफुगदो लामा कुन्जङ येशे 
  लामा गुलो / ङग्वाङ नोर्बु जङ्पो 
  ङग्वाङ तन्जीन जङ्पो 
  क्यरोग लामा ओर्ग्यन तन्जीन
  क्यरोग लामा तन्जीन
  छरवोग लामा कुशाब मङ्थोस्
  लामा ङग्वाङ 
  काछेन अङ ञिमा
  रिग्जीन कुन्जङ ठ्रीन्लास ग्याछो 
  तोग्दन ङग्वाङ छुल्ठ्रीम्स
  गेलोङ ङग्वाङ छोग्ड्रुब
  अनि रब्ज्युङमा 
  अनि ङग्वाङ पद्म

  लामा ड्रुब्प / सोद्नम छोस्दर
  लामा सङग्यास तन्पा   
  ङग्वाङ योनतन
  ङग्वाङ छोस्फेल ग्याछो 
  लामा तन्जीन रङड्रोल 
  लामा सङग्यास तन्जीन
  खनपो ज्यङछुव छुलठ्रिमस्  
  खनपो ङग्वाङ वोदसेर

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#Article 861: मानस्वी ममगई (128 words)


मानस्वी ममगई (जन्म १० अक्टुबर १९८९) एक भारतीय अभिनेत्री आ सुपरमोडल छी जे फेमिना मिस इन्डिया २०१०, मिस टुरिज्म इन्टरनेसनल २००८ आ एलाइट मोडल लुक इन्डिया २००६ के उपाधि विजेता छी । ओ विश्व सुन्दरी २०१० प्रतियोगितामे भारतक तरफसँ सन् २०१० मे प्रतिनिधित्व केनए अछि । ओ सन् २०१४ मे बलिउड चलचित्र उद्योगमे पदार्पण केनए छल ओ प्रभु देवाद्वारा अभिनित चलचित्र एक्सन ज्याकसनमे अजय देवगन संगे अभिनय केनए छल ।

मानस्वीक जन्म भारतक राजधानी नयाँ दिल्लीमे भेल अछि मुदा हुनकर वंशज उत्तराखण्डसँ अछि । ओ अपन विद्यालय शिक्षा चण्डीगढसँ केनए अछि । ओ विद्यालयमे नृत्य आ स्केटिङमे अव्वल श्रेणीके छात्रा छल ।

भारतक एलाइट मोडल म्यानेजमेन्टद्वारा मानस्वीके कलामे रुची लेल गेल । जकर फलस्वरूप ओ बादमे सन् २००६ के एलाइट मोडल लुक इन्डियाक उपाधि जितैमे सफल भेल ।




#Article 862: नेपाल वायुसेवा निगम (145 words)


नेपाल वायुसेवा निगम () नेपालक राष्ट्रिय ध्वजावाहक विमान सेवा कम्पनी छी। जुलाई 1958 मे शाही नेपाल बायुसेवा निगम (RNAC) रूपमा स्थापना भेल छल एकर गणतन्त्र स्थापना होएतै नेपाल वायुसेवा निगम  नामाकरण कएल गेल। अन्तराष्ट्रिय क्षेत्रम ५ देशका ७ गन्तब्य स्थानमा उडान क ई नेपालक एकमात्र अन्तर्राष्ट्रिय वायुसेवा कम्पनी छी। पूर्ण सरकारी स्वामित्व रहल एकर मुख्य आधार त्रिभुवन अन्तर्राष्ट्रिय हवाई अड्डा, काठमाडौं छी । प्रधान कार्यालय काठमाडौंक नयाँ सडकम रहल नेवानीका पहिलो विमान एक डगलस डीसी-३ डकाेटा छल जहि मार्फत नेवानि आन्तरिक तथा भारतक किछ गन्तव्यसभम सेवा प्रदान करैत अछि । सन् 1972 मे ई विमान अपन पहिलो जेट विमान, Boeing 727s प्रयोगम आएल छल ।

सन् २०१५ मा बाेइंग ७५७ किनल २८ वर्ष बाद निगम फ्रान्सेली जहाज निर्माता कम्पनी एयरबससँग २ टा ए ३२० जहाज खरिद गरेकाे केन्ए छल ।  नयाँ एयरबस अाएपछि निगमल दिल्ली, बेंगलुरू लगायत अन्य नयाँ गन्तव्यसभमे सेवा सुरू केनए छल । 




#Article 863: रितु बेरी (188 words)


   
रितु बेरी () () नयाँ दिल्ली अवस्थित अन्तर्राष्ट्रिय फ्यासन डिजाइनर छी । ओ पहिल एसियाली डिजाइनर छी जे फ्रेञ्च फ्यासन ब्रान्ड शेरेरक अगुआई केलक । १६ मार्च, २०१६ के खादी आ ग्रामोद्योग आयोग भारत आ विश्वमे खादी उद्योगक बढ़ावा देवक लेल प्रसिद्ध फ्यासन डिजाइनर रितु बेरीक अपन सलाहकार नियुक्त केलक । आयोग हुनका १ वर्षक अवधिक लेल सलाहकारक रूपमे नियुक्त केनए अछि । अपन कार्यकालक दौरान ओ खादी उत्पादसभक बढ़ावा देवक लेल तरीका बताएत ।

रितु बेरी नयाँ दिल्लीक निफ्टसँ फ्यासन कलाक अध्ययन प्राप्त केनए छल । ओ प्रोमोस्टाइलक पत्रिका एक्युसटिल, जे दुनियाभरमे फ्यासन रूझानक अगुआई करैत अछि, मे प्रदर्शित होमए वाली भारतक एकमात्र फ्यासन डिजाइनर छी । ओ व्यक्तिगत फ्यासनक किताबक लेखिका छी, जकर नाम १०१ वेज टु लुक गुड छी। ओ निफ्टमे गभर्नर बोर्ड पर सेहो काज करैत अछि आ सवेरा एसोसिएशनक एक मानद संरक्षक सेहो छी, जे कि एक लोकप्रिय च्यारिटी छी जहिमे भारतीय महिलासभक जीवनमे सुधार आनै लेल कठिन अछि शामिल अछि । 

रितु बेरी सन् २००४ मे अपन लम्बा-समयक मित्र आ दिल्लीक उद्योगपति बबी चड्ढासँ विवाह केनए छल आ सन् २००७ मे ओ दुनूके एक बेटीक जन्म भेल जकर नाम जिया छी ।




#Article 864: डग हमरसल्ड (151 words)


डग हजल्मार अग्ने कार्ल हम्मरस्क्जोल्ड (; २९ जुलाई १९०५ – १८ सेप्टेम्बर १९६१) एक स्वीडिश अधिकारी, राष्ट्रीय आर्थिक सलाहकार, कूटनीतिज्ञ, लेखक, नोबेल पुरस्कार विजेता उम्मीदवारीके एक लम्बा शृंखलाके बाद जब कोई प्रतिनिधि नै चुनल गेल तब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषदकेद्वारा डग हम्मरस्क्जोल्डके विकल्पके रूपमे चुनल गेल, लेकिन ओ द्वारा १९५७ मे निर्विरोध चुनल गेल । सोवियत संघ उनकर नेतृत्वमे कान्गो समस्याके दौरान गुस्सामे ऐल छल आर सुझाव देने छल कि ई पद पर त्रिकोणीय उम्मीदवारके गठन कएल गेल । एकर विरोध पश्चिमी देशसभद्वारा कएल गेल आर सोवियत संघ उनकर सुझाव मज्बुरीमे लेने छल । हम्मरस्क्जोल्डके मृत्यु उत्तरी रहोडेशियामे हवाई दुर्घटनामे भेल छल तखन ओ कान्गोके लेल एक शान्ति मिशन पर छल ।

डग हम्मरस्क्जोल्डके जन्म स्वीडनके जोन्कोपिन्गमे भेल छल । उनकर बचपनके अधिकांश समय अपसलामे बीतल । सन् १९१४ से १९१७ तक स्वीडनके प्रधानमन्त्री रहल हजल्मार हम्मरस्क्जोल्डके ओ पुत्र छल । उनकर पूर्वज १७औ शताब्दीमे स्वीडन पर राज केने छल ।




#Article 865: योगी आदित्यनाथ (774 words)


योगी आदित्यनाथ (जन्म नाम: अजय सिंह बिष्ट, जन्म ५ जुन १९७२) गोरखपुरक प्रसिद्ध गोरखनाथ मन्दिरक महन्त तथा राजनेता छी जे १९ मार्च २०१७क उत्तर प्रदेशक मुख्यमन्त्री बनल। ओ सन् १९९८ सँ लगातार भारतीय जनता पार्टीक टिकट पर गोरखपुर लोकसभा क्षेत्रक प्रतिनिधित्व करि रहल अछि आ २०१४ लोकसभा चुनावमे अही ठामसँ सांसद चुनल गेल छलाह । आदित्यनाथ गोरखनाथ मन्दिरक पूर्व महन्त अवैद्यनाथक उत्तराधिकारी छी । ओ हिन्दू युवा वाहिनीक संस्थापक सेहो छी, जे हिन्दू युवासभक सामाजिक, सांस्कृतिक आ राष्ट्रवादी समूह छी । हिनकर छवी एक कट्टर हिन्दू नेताक अछि ।

५ जून १९७२ कऽ उत्तराखण्ड (तखनक उत्तर प्रदेश; उत्तर प्रदेशक विभाजन देखी)क पौड़ी गढ़वाल जिला स्थित यमकेश्वर तहसीलक पञ्चुड़ गामक गढ़वाली राजपूत परिवारमे योगी आदित्यनाथक जन्म भेल । हिनकर पिताक नाम आनन्द सिंह बिष्ट छी जे फरेस्ट रेञ्जर छलाह ।

योगी आदित्यनाथ १९७७ मे टिहरीक गजाक स्थानीय स्कूलमे पढ़ाई शुरू केल्खिन आ सन् १९८७ मे टिहरीक गजा स्कुलसँ दसम कऽ परीक्षा पास करि सन् १९८९ मे ऋषिकेशक श्री भरत मन्दिर इन्टर कौलेजसँ इन्टरमिडिएटक परीक्षा पास भेल आ सन् १९९० मे ग्रेजुएशनक पढ़ाई करैत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषदसँ जुड़ल । सन् १९९२ मे श्रीनगरक हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालयसँ गणितमे बिएससी कऽ परीक्षा पास भऽ सन् १९९३ मे गणितमे एम.एस.सी. कऽ पढ़ाईक समय गुरु गोरखनाथ पर शोध करैत योगी गोरखपुर आएल छल । अही ठाम गोरखनाथ पीठक महन्त अवैद्यनाथक दृष्टि हिनका पर पड़ल छल। सन् १९९४ मे पूर्ण सन्यासी बनि गेल, जकर बाद हिनकर नाम अजय सिंह बिष्टसँ योगी आदित्यनाथ भऽ गेल।

योगी आदित्यनाथ १२ सितम्बर २०१४ कऽ गोरखनाथ मन्दिरक पूर्व महन्त अवैद्यनाथक निधनक बाद ओ अही ठामक महन्त बनल। २ दिन बाद हुनका नाथ पन्थक पारम्परिक अनुष्ठानक मुताबिक मन्दिरक पीठाधीश्वर बनाओल गेल।

सबसँ पहिल सन् १९९८ मे योगी आदित्यनाथ गोरखपुरसँ भाजपा उमेदबार भऽ चुनाव लड़ल आर जीत गेल। तखन हिनकर उमर केवल २६ वर्ष छल। ओ बारहम लोक सभा (१९९८-९९)क सभसँ युवा सांसद छलाह। सन् १९९९ मे गोरखपुरसँ पुनः सांसद चुनल गेल। 

अप्रैल २००२ मे हिनका द्वारा हिन्दू युवा वाहिनी बनाओल गेल । सन् २००४ मे तेसर बेर लोकसभाक चुनाव जितलखिन। सन् २००९ मे २ लाखसँ बेसी भोटसँ जीतिकऽ लोकसभा पहुँचल। सन् २०१४ मे पांचम बेर एक बेर पुनः दुई लाखसँ बेसी भोटसँ जीत कऽ सांसद चुनल गेल । सन् २०१४ कऽ लोकसभा चुनावमे भाजपाक बहुमत मिलल, एकर बाद उत्तर प्रदेशमे १२ विधानसभा सीटसभ पर उपचुनाव भेल। अही चुनावमे योगी आदित्यनाथसँ बहुत प्रचार कराओल गेल, लेकिन परिणाम निराशाजनक रहल। सन् २०१७ मे विधानसभा चुनावमे भाजपाक राष्ट्रिय अध्यक्षद्वारा योगी आदित्यनाथसँ समुचा राज्यमे प्रचार कराओल गेल आ हिनका एक हेलिकप्टर सेहो देल गेल। 

१९ मार्च २०१७ मे उत्तर प्रदेशक बिजेपी विधायक दलक बैठकमे योगी आदित्यनाथ कऽ विधायक दलक नेता चुनिक मुख्यमन्त्री पद सौंपल गेल।

आदित्यनाथक भारतीय जनता पार्टीक साथमे रिश्ता एक दशकसँ पुरान अछि। ओ पूर्वी उत्तर प्रदेशमे बढ़िया प्रभाव राखैत छथि।
अहीसँ पहिले हुनकर पूर्वाधिकारी तथा गोरखनाथ मठक पूर्व महन्त, महन्त अवैद्यनाथ सेहो भारतीय जनता पार्टीसँ १९९१ तथा १९९६ कऽ लोकसभा चुनाव जीत चुकल अछि।

योगी आदित्यनाथ सबसँ पहिल बेर सन् १९९८ मे गोरखपुरसँ चुनाव भाजपा उमेदवार भऽ लड़ल आर तखन ओ बहुत कम अन्तरसँ जीत दर्ज केलक। लेकिन ओकर बाद हरेक चुनावमे हुनकर जीतक अन्तर बढ़ैत गेल आ ओ १९९९, २००४, २००९ आर २०१४ मे सांसद चुनल गेल। हिनकाद्वारा अप्रैल २००२ मे हिन्दू युवा वाहिनी बनाओल गेल।

७ सितम्बर २००८ कऽ योगी आदित्यनाथ पर आजमगढ़मे जानलेवा हिंसक हमला भेल छल। अही हमलामे ओ बाल-बाल बचल। ई हमला एतेक बड़का छल की एकसयसँ अधिक वाहनसभक हमलावरसभद्वारा घेरि लेल गेल आ लोकसभक लहुलहान करि देलक। आदित्यनाथ गोरखपुर दङ्गाक समय तखन गिरफ्तार कएल गेल जब मुस्लिमसभ्क पावनि मोहर्रमक समय फायरिङ्गमे एक हिन्दू युवाक जान चलि गेल । जिलाधिकारीद्वारा बताओल गेल कि ओ पुरा घायल अछि। तखन अधिकारीसभद्वारा योगीक ओहि जगह जाइसँ रोकि देल गेल परन्तु आदित्यनाथ ओही जगह पर जाएक लेल अड़ि गेल छल। तखन हुनकाद्वारा शहरमे लागल कर्फ्यूक हटाबक माङ्ग केलक। दोसर दिन ओ शहरक मध्य श्रद्धाञ्जलि सभाक आयोजन करकऽ घोषणा केलक लेकिन जिलाधिकारी द्वारा एकर अनुमति देबऽसँ मनाह करि देल गेल। आदित्यनाथद्वारा सेहो एकर चिन्ता नै केलक आर हजारो समर्थसभक साथ अपन गिरफ्तारी देलक। आदित्यनाथक सिआरपिसी कऽ धारा १५१ए, १४६, १४७, २७९, ५०६ कऽ तहत जेल भेज देल गेल। हुनका पर कार्यवाहीक असर भेल कि मुम्बई-गोरखपुर गोदान एक्सप्रेसक किछ डिब्बा जला देल गेल, जकर आरोप हुनकर सङ्गठन हिन्दू युवा वाहिनी पर लागल।

ई दङ्गा पूर्वी उत्तर प्रदेशक छटा जिलसभ आर तीन मण्डलसभमे सेहो फैलि गेल।हुनकर गिरफ्तारीक दोसर दिन जिलाधिकारी हरि ओम आ पुलिस प्रमुख राजा श्रीवास्तवक तबादला भऽ गेल। कथित रूपसँ आदित्यनाथक ही दबावक कारण मुलायम सिंह यादवक उत्तर प्रदेश सरकार कऽ ई कार्यवाही करऽ पड़ल छल।

योगी धर्मांतरणक विरुद्ध आ घर वापसीक लेल बहुत चर्चामे रहल। सन् २००५ मे योगी आदित्यनाथद्वारा करिब १८०० ईसाइसभ कऽ शुद्धीकरण करि हिन्दू धर्ममे शामिल कएल गेल छल। ईसाइसभक अही शुद्धीकरणक काम उत्तर प्रदेशक एटा जिलामे कएल गेल छल ।




#Article 866: बान कि-मुन (134 words)


बान कि-मुन (जन्म : १३ जुन १९४४) संयुक्त राष्ट्र सङ्घक आठम महासचिव छल । महासचिव बनऽसँ पहिने ओ दक्षिण कोरियाक विदेश मामलाक मन्त्रालयमे एक करियर राजनयिक छलाह । ओ जनवरी २००४ सँ नवम्बर २००६ धरि कोरिया गणतन्त्रक विदेश मन्त्री रहल । १३ अक्टुबर २००६ के ओ संयुक्त राष्ट्र महासभाद्वारा आठम महासचिव चुनल गेल ।

बान कि-मुनक जन्म सन् १९४४ मे कोरियामे जापानी शासनक अन्तक समय; उत्तरी चुङ्गचेओङ्ग प्रान्तक एकटा छोट किसानी गाम युम्सेओङ्गमे भेल छल । एकर बाद हुनकर परिवार नजदिकक शहर चुङ्जुमे अवाशित भेल । बानके पिता एक गोदामक व्यापारी छल मुदा बादमे गोदामक व्यापार बन्द भेलाबाद हुनकर परिवारक स्तर न्यून भ गेल । वान ६ बर्षक भेला बाद हुनकर परिवार कोरियाली युद्धक अवधिभरि पिछडल पहाडी क्षेत्रमे बैसैलेल गेल । युद्ध समाप्त भेलाक बाद हुनकर परिवार पुन: चुङ्जुमे आबि बसोबास आरम्भ केलक ।




#Article 867: जोन सिना (128 words)


जोन फेलिक्स एन्थोनी सिना (जन्म अप्रिल २३, १९७७) एक अमेरिकी रेस्लर, हिप-हप गायक आ कलाकार अछि। ओ  अखन सँ सम्बन्धित अछि। जोन सिना क बाहिरी पहिचान अछि। ओ  हाल डब्लु डब्लु इ इस्माय्कडउन ब्यान्डमे कार्यरत अछि। ओ १६ बेर डब्लुडब्लुई विश्व विजेता रह चुकल  अछि| 

रेस्लिङ बाहेक जोन सिना  (२००२),  (२००९), and  (२०१०) जहिना फिल्ममे अभिनय केने छल।. ओ  , , , , , , आ  जहिना टेलिभिजन कार्यक्रममे सेहो   देखल जाइत छल।

सिना अपन रेस्लिङक जीवनयात्रा सन् १९९९सँ सग सुरु केलक। जोन सिना सग २००१मे  करार सही कैर २००२मे  प्रथम प्रवेश केलक।   धरि जोन सिना २३टा प्रतिस्पर्धा जितने अछि, रेकर्डक अनुसार हुनका   ,   आ ४  बेर  जित्ने छथि। हुनका कऽ क विजेता, २ बेर  विजेता (, ), आ तीन बेर वर्षक सुपरस्टार  (२००९, २०१०, २०१२)कऽ विजेता छथि।




#Article 868: १४हम दलाई लामा (156 words)


चौदहम दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो (६ जुलाई, १९३५ - वर्तमान) तिब्बतक राष्ट्राध्यक्ष आ आध्यात्मिक गुरू छी। हुनकर जन्म ६ जुलाई १९३५ कऽ उत्तर-पूर्वी तिब्बतक ताकस्तेर क्षेत्रमे रहनिहार येओमान परिवारमे भेल छल। दु वर्षक अवस्थामे बालक ल्हामो धोण्डुपक पहिचान १३हम दलाई लामा थुबटेन ग्यात्सोक अवतारक रूपमे कएल गेल। दलाई लामा एक मङ्गाोलियन् पदवी छी जेकर मतलब होइत अछि ज्ञानक महासागर आर दलाई लामाक वंशज करूणा, अवलोकेतेश्वरक बुद्धक गुणसभक साक्षात रूप मानल जाइत अछि। बोधिसत्व एहन ज्ञानी लोग होइत अछि जिनका द्वारा अपन निर्वाण कऽ टालि देल गेल होइ आ मानवताक रक्षाक लेल पुनर्जन्म लेबऽक निर्णय लेने होइ । हुनका सम्मानसँ परमपावन कहल जाइत अछि।

परमपावन द्वारा अपन मठवासीय शिक्षा छह वर्षक अवस्थामे प्रारम्भ कएल गेल। २३ वर्षक अवस्थामे वर्ष १९५९ कऽ वार्षिक मोनलम ;प्रार्थनाद्ध उत्सवक समय ओ जोखाङ्ग मन्दिर, ल्हासामे अपन फाइनल परीक्षा देल्खिन। ओ अही परीक्षा अनर्सक साथ पास भेल आ हुनका सर्वोच्च गेशे डिग्री ल्हारम्पा ; बौध दर्शनमे पी. एच. डी. प्रदान कएल गेल ।




#Article 869: राम राजा प्रसाद सिंह (139 words)


राम राजा प्रसाद सिंह(बि स १९९१ - २०६९) नेपालक पहिल गणतन्त्रवादी नेता छलाह। बि.स. १९९१मे जिमिन्दारक परिवारमे जन्मल सिंह २०४२ सालमे सिँहदरबारमे बम विस्फोट करौने छल। ओकर बाद हुनका पर नेपाल सरकार तखनक (श्री ५ सरकार) द्वारा मुद्दा चलाओल गेल आ गिरफ्तार करऽक लेल कहल गेल । राजा महेन्द्रक समयसँ ही गणतान्त्रिक आन्दोलनमे लागल हिनका पर सर्वस्व हरणसहित मृत्युदण्डक सजाय सुनाएल गेल छल । लेकिन तखन ओ भूमिगत भऽ गेल छल ।जब नेपालमे गणतन्त्रक स्थापना भेल तखन ओ नेपाल आएल छल। ओकर बाद राम राजा प्रसाद सिंह नेपालक पहिल रास्ट्रपति चुनावमे एकीकृत नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (माओवादी)क उम्मेदवार छलाह।

सिंह भारतक बिहार राज्यअन्तर्गत दरभङ्गा स्थित अपन मामाघर रहि पढ़ने छल।भारत छोड़ो आन्दोलनकारी आ ओकर हतियार सप्तरी स्थित घरमे नेपाल प्रहरि द्वारा भेटलाक कारण हिनका ९ वर्षक छोट उमेरमे भाइ लक्ष्मणप्रसाद सिंह आ बाबु जयमङ्गल सिंह सँगे जेल भेजि देल गेल।




#Article 870: साक्षी तन्वर (108 words)


साक्षी तन्वर (जन्म १२  जनवरी १९७३) भारतीय टेलिभिजन आ बलिउडकऽ प्रसिद्ध अभिनेत्री छथि । एक टेलिभिजन प्रोग्राममे  एङ्करक रूपमे  १९९० मे शुरु केलक । हुनका मुख्य रूपसँ बालाजी टेलिफिल्मसद्वारा निर्मित टेलिचलचित्र कहानी घर घर की पार्वती अग्रवाल आ बडे अच्छे लगते हैमे   प्रिया कपूरक भूमिका निर्वाह केने छथि । हुनका एही अतिरिक्त विभिन्न टेलिचलचित्रसभ एवम हिन्दी चलचित्रसभमे सेहो अभिनय केने छथि ।  हुनकर २३ दिसम्बर २०१६ मे आएल चलचित्र दङ्गलमे अमिर खान कऽ पत्नीक रुपमे भूमिका निवार्ह केने छथि  ।  
हुनकर प्रथम टिभी धारावाहिक दस्तूर छल। ओ विभिन्न टेलिभिजन धारावाहिकसभमे कार्य केने छथि । हुनकर मुख्य भूमिका कहानी घर घर की नामक धारावाहिकसँ    हुनका बहुत सफलता मिलल ।




#Article 871: इलिनर अस्ट्रम (118 words)


इलिनर अस्ट्रम (७ अगस्त, १९३३- १२ जुन, २०१२) एक अमेरिकी महिला अर्थशास्त्री छल । ओ ओलिभर विलियमसनक संग संयुक्त रूपमे सन् २००९ क अर्थशास्त्र विधामे नोबेल स्मृति पुरस्कार प्राप्त केनए छल । अर्थशास्त्रमे नोबेल पुरस्कार प्राप्त कएनिहार ओ प्रथम महिला छी ।

इलिनर अस्ट्रमक जन्म संयुक्त राज्य अमेरिकाक लस एन्जलस, क्यालिफोर्नियामे भेल छल । हुनकर पिता हपकिन्स, एक सङ्गीतकार छल तँ माता एड्रियन, एक सेट डिजाइनर छल । हुनकर जन्म भेला किछ दिन बाद हुनकर पिता हुनकर मातासँ अलग भेल छल जहि कारण ओ अधिकांश समय अपन मातासाथ रहि बितेने छल । अस्ट्रम सन् १९५१ मे बेवर्ली हिल्स उच्च विद्यालयसँ स्नातक केनए छल आ सन् १९५४ मे युसिएलएसँ बिए (अनर्स) राजनीतिक विज्ञानमे तीन बर्षक स्नातक केनए छल ।




#Article 872: सुसान किलरेन (149 words)


सुसान किलरेन एक अमेरिकी इन्जिनियर, पूर्व संयुक्त राज्य नौसेना अधिकारी आ पूर्व नासाक अन्तरिक्ष यात्री छी । हुनकर जन्म २४ अक्टुबर १९६१ अगस्ता, जर्जियामे भेल छल । हुनकर पिता डक्टर जोसफ एक प्रमुख जिला शल्य चिकित्सक छल, जे जर्जियाक अगस्तामे युसुफ एम.स्टिल जिला केन्द्रक स्थापना आ निर्देशन केनए छल ।

सन् १९७९ मे वालनट हिल विद्यालय, नेटिक, मेसाचुसेट्स, सँ अपन विद्यालय शिक्षा प्राप्त केलक । ओ सन् १९८२ मे विमान इन्जिनरियङमे स्नातकक डिग्रीक संग एम्ब्री-रिडडल एरोनटिकल विश्वविद्यालयसँ स्नातकक उपाधि प्राप्त केलक आ सन् १९८५ मे जर्जिया संस्थानक प्राविधिक विषय राखि एयरोस्पेस इन्जिनरियङमे ओ मास्टर अफ साइन्सक डिग्री प्राप्त केलक । ग्रेजुएसन स्तरक पढ़ाई केलाक बाद ओ जर्जियामे मेरिटेटामे लकहिड कर्पोरेसनक लेल पवन सुरङ्ग परियोजना अधिकारीक रूपमे काज केलक आ अपन स्नातकक डिग्री अर्जित केलक ।
सन् १९८५ मे हुनका संयुक्त राज्य नौसेनामे नियुक्त कएल गेल छल आ सन् १९८७ मे नौसेना एभिएटर कहि हुनकर नाम नामित कएल गेल । 




#Article 873: लिउ याङ (अन्तरिक्ष यात्री) (136 words)


लिउ याङ (; जन्म अक्टुबर ६, १९७८) एक चीनी पायलट आ अन्तरिक्ष यात्री छी जे अन्तरिक्ष अभियान शेनझोउ ९ मे एक चालक दलक सदस्यक रूपमे काज करैत अछि । १६ जुन २०१२ के, लिउ अन्तरिक्षमे जाए वाली पहिल चीनी महिला बनल । 

लिउ याङक जन्म ६ अक्टुबर १९७८ के झेङ्गझोउ, हेनान, चीनमे लिन्हु, आन्याङ मूलक एक परिवारमे भेल छल । ओ चाङ्गचुनक पिपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स एभिएसन कलेजसँ ग्रेजुएसन पुरा केलक । लिउ सन् १९९७ मे पिपल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्समे शामिल भ गेल आ एक पायलटक रूपमे एक उड़ान एकाईक उप प्रमुख बनि गेल । ओ एक १६८० घण्टाक उड़ान अनुभव रखनिहार महिला पायलट छी । अन्तरिक्ष यात्री प्रशिक्षणक दुई वर्षक बाद, लिउ अपन महिला सहकर्मी, वाङ यापिङक संग, अन्तरिक्ष यात्रीक लेल उम्मेदवारक रूपमे चुनल जाएसँ पहिने परीक्षण उड़ानमे उत्कृष्टता प्राप्त केनए छल ।




#Article 874: भ्यालेन्तिना तेरेस्कोभा (219 words)


भ्यालेन्तिना तेरेस्कोभा (; जन्म ६ मार्च १९३७, अन्तरिक्षमे गेल पहिल महिला छथि । ओ तत्कालिन सोभियत सङ्घक भोस्तोक-६क पाइलटक रूपमे १९६३ जुन १६ मे अन्तरिक्ष यात्रा केनए छल ।ओ अन्तरिक्षमे गेल पहिल नागरिक सेहो छथि । हुनका ४०० टा प्रत्याशीमे सँ चुनि अन्तरिक्षमे जाइलेल मौका देल गेल छल । अन्तरिक्षयात्री होमए सँ पूर्व ओ कपडा कारखानामे काम करैत छल आ एकटा शौखिन प्यारासुटर छल । सन् २०१३ मे ओ मङ्गल ग्रहमे जाइलेल प्रस्ताव राखलखिन । हुनका २०१४ शीतकालिन ओलोम्पिकक उद्घाटन समारोहमे ओलोम्पिक ध्वजबाहक बनाएल गेल छल ।

तेरेस्कोभाको जन्म सोभिएत संघक म्याज्लेनिकोभो गाँउमे भेल छल ।उनकर मातापिता बेलारससँ बसाई सारै ओत आएल छल ।हुनकर पिता ट्रयाक्टर चालक छल आ माता कपडा कारखानामे  काम करैत छलिन ।१९४५ हुनका  विद्यालय जाइल सुरु करलिन मुदा १९५३ मे विद्यालय छोइड अन्य क्षेत्रक अध्ययन करै लगलिन  ।हुनकर प्यारसुटिङमे छोटेसँ  रुचि छल ।हुनका स्थानिय एरोक्ल्बमे प्यारासुटिङ सिक २१ मे १९५९ कऽ  दिन पहिल बेर  प्यारासुट लऽ उडल ।हुनका ओही बेरसँ  स्थानिय कपडा कारखानामे  काम करैत छथिन । हुनकर  प्यारासुटिङ् कलासँ हुनका अन्तरिक्ष यात्रामे  सफलता देलक।१९६१ मे  ओ युवा कम्युनिस्ट लिग (कम्सोमोल) कऽ सचिव भेल आ पछा जा सोभिएत कम्युनिस्ट पार्टिक सदस्य भेल ।

भ्यालेन्तिना तेरेस्कोभाले अपन उडान पछा रसियाक झुकोभ्स्की वायु सेना एकाडेमीमे भर्ना भेल । हुनका ओतसँ विशिष्ट श्रेणीमे उत्तिर्ण भऽ कस्मोनट इन्जीनियर भेल ।सन १९७७ मे हुनका  इन्जीनियरक डक्ट्रेट उपाधि प्राप्त केलिन ।




#Article 875: नेपाल टेलिकम (134 words)


नेपाल टेलिकम सरकारी स्वामित्त्वमे रहल दूरसञ्चार सेवा प्रदायक कम्पनी छी। एकर स्थापना वि.स. २०३२ सालमा नेपाल दूरसञ्चार संस्थानके रूपम भेल छल आ वि.स. २०६० माघ २२ गते ई नेपाल दूरसञ्चार कम्पनीक रूपम दर्ता भेल अछि । वि.स. २०६१ बैशाखसँ एकरा नेपाल टेलिकम कहल जाइत अछि। ई देशभरमे पिएसटिएन, सिडिएमए, लगायतक आधारभूत टेलिफोन आ जिएसएम/सिडिएमए मोबाइल सेवा प्रदान केनए अछि । टेलिकम इन्टरनेट सेवामे डायल-अप आइएसडिएन लिज्ड एडिएसएल इन्टरनेट आ स्काई डेटा मार्फत वायरलेस इन्टरनेट प्रदान करैत अछि। बैङ्क तथा विभिन्न निकायसभक तथ्याङ्क आदान प्रदानक लिज्ड सर्किटक सेवा समेत टेलिकम द रहल अछि।
वि.स. २०६४ फागुनमे सर्वसाधारणक लेल सेहो शेयर बिक्री खुला करि ई कम्पनीक जारी पूँजी १५ अर्ब तथा चालू पूँजी २२ अर्ब रूपैयाँ रहल अछि। ई कम्पनीमे हाल करिव ७ हजार ५ सय कर्मचारी कार्यरत अछि जहिमे सँ करीब २ हजार इन्जिनियरसभ अछि।




#Article 876: वाणेश्वर महादेव मन्दिर (112 words)


वाणेश्वर महादेव मन्दिर पौराणिक मन्दिर छीजे भारतक उत्तर प्रदेश राज्यक कानपुर देहात जिलामे अवस्थिति अछि । 

कानपुर देहात जिला अन्तर्गत रूरा नगरसँ उत्तर-पश्चिम दिशामे ७ किलोमिटर दूरी पर रूरा-रसूलाबाद मार्गपे वाणेश्वर महादेव मन्दिर स्थित अछि । ई देवालय रोडकेद्वारा कहिझरी होइते कानपुरसँ जुडल अछि । कहिझरीसँ ई मन्दिरके दुरी ८ किलोमिटर अछि ।

पौराणिक वाणेश्वर महादेव मन्दिर लोगसभक आस्थाक केन्द्र छी । इतिहास लेखक प्रो. लक्ष्मीकान्त त्रिपाठीके अनुसार सिठऊपुरवा (श्रोणितपुर) दैत्यराज वाणासुरक राजधानी छी । दैत्यराज बलिक पुत्र वाणासुर मन्दिरमे विशाल शिवलिङ्गक स्थापना कएल गेल छल । श्रीकृष्ण वाणासुर युद्धक बाद स्थल ध्वस्त होगेल छल । मन्दिरक पास शिव तालाब, टीला, ऊषा बुर्ज, विष्णु आ रेवन्तक मुर्तिसभ पौराणिकताक प्रमाणित करैत अछि ।




#Article 877: कपालेश्वर महादेव मन्दिर (111 words)


कपालेश्वर मन्दिर वा कपालेश्वर महादेव मन्दिरक नामसँ जानल जाईत् अछि । ई शिव मन्दिर प्रकृतिक सुरम्य गोदिमे उत्तर प्रदेशक नगर डेरापुर, कानपुर देहातके दक्षिण दिशामे सेन्गुर नदीके उत्तर-पूर्वी दिशामे स्थित जङ्गलके १०० फिट ऊँचा टीला पर बनाल अछि । श्री कपालेश्वर मन्दिर पण्डित कनोजी लाल मिश्र आ असिस्टेन्ट कमिश्नरके स्वप्नद्वारा ई मन्दिरक निर्माण कएल गेल अछि । अपन  मृत्यु तिथि ज्ञात भेलाके कारण ओ मन्दिरक निर्माण शीघ्रसँ शीघ्र कारण ई मन्दिरक मठ छोटका हो गेल । मन्दिरक रख रखाव सरवराकर करुणेश नारायण मिश्रकेद्वारा कएल गेल अछि । 

ई मन्दिर उत्तर प्रदेशक नगर डेरापुर, कानपुर देहातके दक्षिण दिशामे सेन्गुर नदीके उत्तर-पूर्वी दिशामे स्थित जङ्गलके १०० फिट ऊँचा टीला पर बनाल अछि ।




#Article 878: विद्यापति सेतु (कोलकाता) (499 words)


कल्लोलिनी कलकत्ता. ई महानगर देशक सांस्कृतिक राजधानीक दर्ज़ा पओने अछि. एहि ठाम केर धरती अनेको संस्कृतिक अनुपम संगम कें अपन वक्ष पर बिहुंसति रखने अछि. मिथिला, मैथिली ओ मैथिलक कलकत्ता कनेक्शन त' अओरो पुरातन ओ अभिन्न अछि. बांग्ला ओ मिथिला केर संस्कृति एक्कहि गाछक दू डारि अछि. पहिनहि सं बांग्ला केर राजधानी कलकत्ता मे मैथिल मानुष अपन संस्कृतिक मूल तकैत आबि रहल छथि. कहल जाइत छैक जे महानगर ओ उपनगरीय क्षेत्र मे लगभग दस लाख मैथिल डेरा जमओने छथि आ अपन शिक्षा, रोजगार आदि मे लागल छथि. एहि ठामक लगभग अढ़ाइ दर्जन मैथिल संस्था, एकटा मैथिली दैनिक, आध दर्जन मैथिली सामयिक पत्रिका, अनेको स्मारिका, वार्षिक अनुष्ठान, साहित्यिक गोष्ठी आदि एहि बातक पुष्टि करैत अछि जे कलकत्ता मैथिल हेतु दोसर मिथिला अछि. ओना एहि महानगर कें मैथिलक तीर्थस्थली कहल जाइत अछि जे एकदम सटीक अछि.

एकदिस एहिठाम दड़िभंगा महाराजक अनेको निशानी मैथिलक इतिहास पर एखनो ओहिना टॉर्च बाडैत अछि त' दोसर दिस मैथिल संस्थादि द्वारा बनाओल स्मारक मिथिला-बांग्ला संबंधक मूक गवाही देइत अछि. कलकत्ता मे मैथिलक एहने चेन्हासी अछि 'विद्यापति सेतु', जे सियालदह टीसन पर जयबाक मार्ग अछि. 

सियालदह रेलवे टीसन केर खचाखच भीड़ आ यातायात केर समस्याक समाधान हेतु एहि फ्लाइओवर केर निर्माण कयल गेल अछि. ई फ्लाइओवर अपना नीचां विशाल बजार कें सेहो पोषित कयने अछि. संगहि सियालदह टीसन पर अबिते लोक एहि सेतुक दर्शन करैत अछि. विद्यापतिक नाओ भेटने ई फ्लाइओवर मैथिल- बंगाली जनास्था केर केंद्र सेहो बनि गेल अछि. ई सेतु बंग प्रान्तक राजधानी कोलकाता ओ मिथिला केर कथित राजधानी दरिभंगा (द्वार-बंगा:बंग केर द्वार) केर मध्य चिर संपर्कक गवाही देइत अछि.

सियालदह फ्लाइओवर केर उद्घाटन १७ दिसंबर, १९८९ कें कलकत्ता नगर निगमक तत्कालीन मेयर कमल कुमार बसु कयलनि. एकर नामकरण मे कलकत्ता केर प्रबुद्ध मैथिल लोकनिक भूमिका अत्यंत सराहनीय अछि. ई साकांक्ष मैथिल लोकनिक सत्प्रयास थिक. एहि सेतु पर विद्यापतिक प्रतिमा विद्यापति स्मारक मंच द्वारा स्थापित कयल गेल अछि. जकर अनावरण १२ नवम्बर, २००० कें कोलकाता नगर निगम केर तत्कालीन मेयर सुब्रत मुखोपाध्याय कयलनि.  

विद्यापति अवसान दिवस पर प्रत्येक वर्ष कोलकाता केर अनेको संस्था सभ मिलि विशाल जुलूस निकालैत अछि जे विद्यापति विद्या मंदिर सं शुरू भ' विद्यापति सेतु धरि जा विशाल सभा मे परिवर्तित भ' जाइत अछि. जुलूस कोलकाता केर मुख्य मार्ग सं निकलैत अछि जाहि मे विद्यापति संगीत आ झाकी एकरा अओर बेसी उत्कृष्ट बना देइत अछि. कोलकाता मे मैथिल उपस्थितिक अनुपम क्षण रहैत अछि ओ. ई पूरा कार्यक्रम विद्यापति स्मारक मंच केर अगुआइ मे होइत अछि. कार्यक्रम मे आमंत्रित मैथिल-बंगाली प्रबुद्ध लोकनि विद्यापति आ मिथिला-मैथिली पर अपन विचार रखैत छथि. एम्हर आबि क' संपर्क (साहित्यिक गोष्ठी) केर मासिक बैसार आ काव्य गोष्ठी (ओहि मासक) सेहो विद्यापतिक सोझा मे होइत अछि. एहि कार्यक्रमक हलचल स्थानीय मीडिया मे सेहो पसरल रहैत अछि.

विद्यापतिक प्रतिमा हेतु सेतु पर पर्याप्त स्थान देल गेल अछि. मुदा प्रतिमा कें छोडि ओतय किछुओ एहन नहि अछि जे ओहि स्थान कें रमणीय बना सकत. कार्यक्रमक पश्चात ओतय साल भरि विद्यापतिक प्रतिमा आबय-जाय वला लोक कें टुकुर-टुकुर तकैत अछि. मुदा लोकक नज़रि ओहि प्रतिमा पर शाइते जाइत होयत. ओहि स्थल केर सौन्दर्यीकरण कें ल' प्रशासन संगहि मैथिल सेहो उदासीन बुझना जाइत अछि. 




#Article 879: अकासतर बैसकी (586 words)


मिथिलासं ल' परदेस धरि मैथिली भाषा-साहित्यसं जुड़ल अनेको गोष्ठी आयोजित होइत रहैत अछि. एहन गोष्ठी कोनो ने कोनो संस्थाक छाहरिमे होइत रहल अछि. एकर अतिरिक्त सरकारी-गैरसरकारी साहित्यिक अनुष्ठान शीतताप नियंत्रित सभा कक्षमे होइए. मने मैथिलीमे बहुत बेसी साहित्यिक कार्यक्रम होइत रहल अछि. 

एहि सभ कार्यक्रममे आम लोकक भागीदारी नै जकां रहैत छै संगहि साहित्यिक लोकनिक उपस्थिति सेहो ओतेक नीक नै रहैछ. एहन अवस्थामे भाषा-साहित्यसं जुड़ल कार्यक्रम आम लोकक पहुंचसं बाहर भ' गेल अछि. परिणाम भेल जे ने साहित्यप्रेमी रहल आ ने आम लोकक मध्यसं रचनाकारे बहराइछ. नब लोक जे साहित्य लेखन दिस रुखि करितो छथि, प्लेटफ़ॉर्म आ प्रोत्साहनक अभावमे उभरि नै पबै छथि.  साहित्य एकटा सर्किल मध्य संकुचित भेल गेल अछि. एकर बड्ड भयाओन परिणामसं मैथिली भाषा गुजरि रहल अछि. 

एही सभ बातकें धियानमे रखैत कलकत्ताक किछु भाषाप्रेमी लोकनि 'अकासतर' साहित्यिक गोष्ठी करबाक नियारसं अनौपचारिक गोष्ठी शुरू केलनि, जे 'अकासतर बैसकी' नामे जानल जाइए. गोष्ठीमे पुरान आ स्थापित रचनाकारक स्थान पर नवतुरिया वा नब आगंतुक कविकें प्राथमिकता देल जाइत अछि. सभसं विशेष बात जे एहिमे कवि आ कविता प्रेमी संग बैसि क' कविताक आनंद लेइत छथि. एकर आयोजन फुजल अकासतर कोनो पार्क, मैदान, स्कूल-कॉलेज वा कोनो संस्थानक कैम्पस आदि स्थान पर होइए. धियान राखल जाइए जे आयोजनमे कोनो तरहक लम्फ-लम्फा नै हो.  

ई गोष्ठी मैथिली कविताकें समर्पित अछि. एहिमे पद्य विधाक साहित्य पढ़ल-सुनल जाइए. ओहिपर विचार, विमर्श ओ समीक्षा प्रस्तुत कएल जाइए. काव्य विधाक रचना कम समयमे पढ़ल जा सकैए आ एक गोष्ठी (जे डेढ़-दू घंटाक होइए)मे बहुते गोटे अपन रचना राखि सकैत छथि. मैथिली भाषासं आमजनकें जोड़बाक लेल ई गोष्ठी शुरू कएल गेल अछि. कविते एहन विधा अछि जे नवतुरियासं ल' वरिष्ठ लोकनि धरिकें अपना दिस आकर्षित क' सकैछ. एकर वाचन, गायन, प्रस्तुतीकरण अलग-अलग ढंगसं कत्तहु कएल जा सकैछ. 

साहित्यिक गोष्ठी जाहिमे सभ विधा पढ़ल-सुनल जाए, पहिनेसं होइत रहल अछि. कलकत्तामे लगभग अढाइ दशकसं ओ जमशेदपुरमे एक दशकसं ‘संपर्क’ नामे एहन गोष्ठी आयोजित होइत रहल अछि. कथा गोष्ठी ‘सगर राति दीप जरय’ बेस लोकप्रिय भेल अछि त’ अनेक साहित्यिक गोष्ठी अस्तित्वमे अछि जे समय-समयपर विभिन्न ठाम विभिन्न संस्था सभ द्वारा आयोजित होइए. मुदा कविताकें समर्पित गोष्ठीक नितांत खगता देखल जा रहल छल. एही सभ कारणें ‘अकासतर बैसकी’ कविता केन्द्रित राखल गेल.

एकर संचालन पूरा रूप सं संयोजकक जिम्मे रहैत छनि जे एक साल लेल मनोनीत रहै छथि. गोष्ठीक पहिल साल 2015क संयोजक रूपेश त्योंथ भेल छथि जे साल 2016 लेल संयोजकक दायित्व चन्दन कुमार झाकें सौंपलनि. संयोजकक मनोनयन आपसी सहमति आ विचार-विमर्शसं कएल जाइछ. बैसकीपर नजरि रखबाक लेल 5 सदस्यीय एडवाइजरी बोर्ड अछि जे एकर स्वरूप, उद्देश्य केर समीक्षा करैत अछि आ संयोजकक क्रियाकलाप आ प्रयासपर दृष्टि रखैत अछि. एडवाइजरी बोर्डमे राजीव रंजन मिश्र, भास्करानंद झा भास्कर, मनोज शाण्डिल्य, चन्दन कुमार झा ओ रूपेश त्योंथ छथि. एक बेर संयोजकसं सहमति ल' बैसकी देश-विदेशमे कतहु आयोजित कएल जा सकैत अछि. संयोजकक अनुपस्थितिमे आयोजित बैसकीक वैधता पर संयोजक आ एडवाइजरी बोर्ड मिलि क' निर्णय करैत छथि. बैसकीक उतरोत्तर विकास ओ प्रसार सहित आयोजनक स्वरूप पर बैसकीमे उपस्थित लोकनि सभसं समय-समयपर सलाह-मशविरा कएल जाइत अछि.

बैसकीक सभसं बड़का कएदा कविते अछि. कविते पढ़ब, कविते सुनब, कविते जियब, कविते भोगब. कविता पर सभ किछु भ' सकैए. भाखा मैथिलीएटा होएत, तखन आन-आन भाखाक उत्तम कविताक मैथिली अनुवाद पढ़ल-सुनल जा सकैत अछि. गोष्ठीमे उपस्थित लोकनि आन रचनाकारक रचना सेहो पढि सकैत छथि. कविता प्रकाशित-अप्रकाशित वा नव-पुरान सभ तरहक रहि सकैत अछि. ओहिपर चर्च-विमर्श भ’ सकैत अछि. रचनापर त्वरित टिप्पणीक विधान नै अछि. रचना पढ़ब-सुनब आ तकर आनंद लेब, नव रचनाकारकें प्रोत्साहित करब मुख्य ध्येय राखल गेल अछि. कोनो वैध बैसकीमे 5 गोटेक उपस्थिति अनिवार्य अछि. सालमे कम सं कम 5टा गोष्ठी होएब आवश्यक अछि. बेसीसं बेसी 12टा बैसकी भ' सकैत अछि. 




#Article 880: वेब पत्रकारिता ओ मैथिली (1621 words)


सूचना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकीक आजुक युगमे दिनानुदिन बढैत संचार साधनक प्रभावे वेब पत्रकारिता बहुविषयक समाचार एवं सूचना प्राप्तिक सबसं महत्वपूर्ण माध्यम, साधन एवं स्रोत बनि गेल अछि. पारम्परिक प्रिन्ट मीडियाक स्थान शनै-शनै इलेक्ट्रानिक मीडिया ल’ लेने अछि. आन समस्त भाषामे इंटरनेट आधारित पत्र-पत्रिकाक संख्या निरंतर बढैत जा रहल अछि. कहबाक आवश्यकता नहि जे सूचना प्रौद्योगिकीक क्षॆत्र मॆं नित नव प्रगतिसं प्रभावित वर्तमान परिदृश्यमॆ वेब-मीडिया अथवा ऑनलाइन मीडियाक लोकप्रियता अपन चरम पर अछि. प्रिन्ट मीडियासं फ़राक कम्प्यूटर एवं इन्टरनेट केर समुचित समन्वयनसं संचालित हॊमयबला वेब पत्रकारिताकें इनटरनेट पत्रकारिता, ऑनलाइन पत्रकारिता, सायबर पत्रकारिता आदि सेहो कहल जायत छैक. वेब पत्रकारिताक लेल समस्त लेखन क्षमताक संगॆ कम्प्यूटर आ इन्टरनेट  केर प्रचालनक प्रारंभिक ज्ञान आ संबंधित सॉफ़्टवेयर केर संचालनमे प्रवीणता ओ दक्षता सेहो आवश्यक छैक. दैनिक, साप्ताहिक, मासिक, त्रैमासिक आदि वेबकारिताक किछु सामान्य वर्गीकरण अछि.

भारतमे वेब पत्रकारिताक प्रारंभ इन्टरनेट केर शुभ आगमनसं मानल जाइछ. भारतवासीकें इन्टरनेटक सुविधा 1990क मध्यसं भेटय लागल छ्ल. चेन्नई सं अंग्रेजीमॆ प्रकाशित “द हिन्दू” भारतक पहिल अखबार मानल जायत छैक जकर इन्टरनेट संस्करण 1995मे आयल. ’’नई दुनिया’’ अखबार द्वारा ’’वेब दुनिया’’क नामसं हिन्दी भाषामे पहिल इन्टरनेट पोर्टलक आगमनसं अपन देशमें हिन्दी समाचारक वेबकरण भेल. 1998 धरि अबैत अबैत हिन्दी, अंग्रेजी, मराठी, मलयालम, तमिल, गुजराती आदि भाषामे करीब 48टा समाचार पत्र ऑनलाइन भ' गेल. वर्तमान परिदृश्यमॆं हम देखि सकैत छी जे वेब पत्रकारिता आब शिक्षाक अहम क्षेत्र बनि गेल अछि जाहिमे युवा पीढीक लॆल कैरियरक बहुत बेसी संभावना अछि। नवतुरिया सबहक पसीन कैरियर केर रुपमें एकर अलगे महत्व अछि. इन्टरनेटक अयलासं वॆब पत्रकारिताक विकासमें ब्लॉगिंग सुविधाक महत्वपूर्ण भूमिका रहल अछि. हिन्दी भाषाक प्रथम ब्लॉग छल “ नौ दॊ ग्यारह” जॆकि आलॊक कुमार द्वारा अप्रैल 2003 मॆं शुरु कएल गॆल छल.

मैथिलीमे पत्रकारिताक अपन गौरवशाली इतिहास अछि. मैथिली पत्रकारिताक संदर्भ आन आन भाषामॆ पत्रकारिताक इतिहासक विवॆचन मॆं बड्ड सम्मानित ढंगसं देल जायत अछि. पंडित चन्द्रनाथ मिश्र अमरक मैथिली पत्रकारिताक इतिहास” आ डॉ यॊगानन्द झाक “ मैथिली पत्रकारिता कॆ सौ वर्ष“ उल्लॆखनीय संदर्भ स्रॊत अछि. मैथिलीमॆ पत्रकारिताक आरंभ जयपुरसं प्रकाशित मासिक पत्रिका 'मैथिल हित साधन' (1905)सं भेल छल. तकर बाद 1906मे मिथिलामोद वाराणसीसं, 1908मे मिथिला मिहिर, दरभंगासं बहरायल. डॉ जयकान्त मिश्रक अनुसार “ मैथिली पत्रकारिताक दोसर चरण 1914क विश्व युद्धक बाद प्रारंभ भेल. एहि चरणक अन्तर्गत मैथिल प्रभा (1920), मथुरा आ आगरासं, मैथिल प्रभाकर(1929) अलीगढसं, श्रीमैथिली (1925) आ मिथिला मित्र (1931) सुल्तानगंज सं प्रकाशित भेल.

मैथिली पत्रकारिताक तेसर चरण  1935सं शुरु भेल. एहि चरणमे प्रवासी मैथिललोकनिक पत्रिका मैथिल-बंधु (1935)सं बहरायल. तकरा बाद मैथिललोकनिक सम्पोषकत्वमे दुगोट आओर पत्रिका बहरायल- मैथिल युवक ( 1938) आ आगरासं जीवन प्रभा (1940). मैथिली पत्रकारिताक तेसर चरण मिथिला मोदक पुनर्प्रकाशन (1936), भारती (1937) आओर विभूति (1937)क लेल विशॆष रुपे महत्वपूर्ण छल. अंग्रॆजी एवं मैथिलीक प्रख्यात भाषाविद विद्वान उदयनारायण सिंह नचिकॆताक मन्तव्य छन्हि-

भारतक लगभग समस्त भाषामॆ अखबार, पत्रिकाक साथ साथ ऒकर ऑनलाइन वर्सन/ संस्करण बहरायत अछि मुदा मैथिलीमे वेब पत्रकारिता एखनो शैशव-अवस्थामे अछि. मैथिलीमे दैनिक पत्रक संग संग वेब पत्रिका वर्तमान स्थिति अति दयनीय एवं चिन्तनीय अछि. अखबारी रिपोर्टक अनुसार विश्वमॆ लगभग तीन करोड़ मैथिली भाषी छथि. स्वभावित रुपे एकर पाठक वर्गक संख्या अधिक होयत. मुदा स्थिति दुखद! विपुल साहित्य भंडारसं हम सब गौरवान्वित होयत छी. प्रतिभाशाली युवा मैथिल हरॆक सेक्टरमे अपन प्रतिभाक लॊहा मनबा रहल छथि. तकर बादो, सूचना प्रौद्योगिकीक एहि युगमे मैथिलीमॆ अखबारी  प्रकाशनक समस्या यथावत बनल अछि. पत्र पत्रिकाक निरंतरताक खगता खटकि रहल अछि. किछु हद तक एहि खगताक पूर्ति कोलकातासं प्रकाशित मिथिला समाद (2008) करैत रहल. तकर बाद दरभंगासं प्रकाशित मिथिला आवाज (2012) किछु आवाज देलक. सगरो मिथिला हर्षित भेल छल जहन दरभंगासं मैथिलीक पहिल रंगीन अखबार मिथिला आवाज छपय लागल. एकर ऑनलाइन संस्करण केर लॊकप्रियता आह्लादकारी छल. मुदा जेहन हमर सबहक इतिहास रहल अछि, आपसी वैमनष्यता, अहंकार, चेतना अवरोध, असहयोगक  भावना आदि एकरो ल' डूबल. मिथिला आवाज बन्न भ' गॆल. आ बन्न भ गॆल एकर ऑनलाइन संस्करण. मिथिला आवाजक स्थायी स्थगन मैथिली पत्रकारिताक इतिहासमे बड़का क्षति रहत.

एहिमे कोनो भांगट नहिं जे मैथिलीमे साहित्यिक पत्र पत्रिकाक भरमार रहल अछि आ  समय समय पर मैथिली ओ मिथिलाकें बढावा दैत रहल अछि. मुदा ऑनलाइन पत्रकारिताक क्षेत्रमे आन भाषाक अपेक्षा हम सब बहुत पछुआ गेल छी. वेब पत्रकारिताक स्थिति ओ उपस्थिति नगण्य अछि. हां किछु युवा मिथिलाकर्मी सोझा आयल अछि जेकि अपन तकनीकी ज्ञानक प्रयोगसं किछु ने किछु कय रहल छथि. कॊलकाता, मुम्बई, दिल्ली, दरभंगा आदिक मैथिल युव जन  वॆब पत्रकारिताकॆ उत्थानमॆ लागल छथि. एहि भागीरथी प्रयासमे हुनकर ब्लॉगिंग ज्ञान बड्ड काज आबि रहल अछि. मिथिला मैथिलीसं संबंधित समस्त राजनीतिक, सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक, आर्थिक मुद्दाकॆं इन्टरनॆट पर ब्लॉगिंग केर माध्यमॆ  सोझा लाबि रहल छथि. एतबेटा नहि, किछु मिथिला-मैथिली प्रॆमी  मैथिलीमे न्यूज पॊर्टल सॆहॊ चला रहल छथि. एहन न्यूज पॊर्टलमे ई-समाद, मिथिमीडिया, प्राईम न्यूज, हकार डॉट कॉम, मिथिला मिरर आऒर नव मिथिला किछु उल्लॆखनीय नाम अछि.

कहबाक आवश्यकता नहि जे मैथिली ई-पत्रिकाक आरंभक श्रॆय गजॆन्द्र ठाकुर द्वारा संचालित विदॆहकें देल जायत अछि. विदेह मैथिलीक प्रथम पाक्षिक ई-पत्रिका अछि जाहिमे समकालीन मैथिली साहित्यक विभिन्न गतिविधिकें ऑनलाइन राखल जा रहल अछि. मैथिली पत्रकारिता मे एखन धरि विदेहक काज ऐतिहासिक, प्रशंसनीय, स्तुत्य आ प्रेरक अछि.  दॊसर दिस, इन्टरनॆट पर पहिल बॆर मैथिलीकॆं दॊसर रुपमे आनयकॆ श्रॆय कारपॊरॆट रिसर्चर प्रबुद्ध मैथिल कुमार पद्मनाभ जीक छन्हि. पद्मनाभ आईआइआईटी, खरगपुरसं 2004मॆ मैथिलीक पहिल ब्लॉग(?) “कतेक रास बात” (Vidyapati.org) शुरु कॆनॆ रहथि. एहि समयमे हितॆन्द्र गुप्ता द्वारा संचालित “हैलॊ मिथिला”, गजॆन्द्र ठाकुर द्वारा संचालित “भालसरिक गाछ” (5 जुलाई 2004) आ धीरॆन्द्र प्रॆमर्षि (नॆपाल) द्वारा संचालित “पल्लव मिथिला” नामक  ब्लॉग आयल छल. मुदा सबसं पहिनॆ कॆ? कॆर मुद्दा एखनॊ विवादित अछि. खैर, मैथिलीकॆं नॆटक दुनियामॆं लॆनिहारक सूचीमॆ कुमार पद्मनाभ, गजॆन्द्र ठाकुर, हितॆन्द्र गुप्ता, राजीव रंजन लाल, धीरॆन्द्र प्रॆमर्षि, कुन्दन कुमार मल्लिक, मिथिला समाचारक शैलॆश झा, जनकपुर न्यूजक जीतॆन्द्र झा आदि अग्रणी रहल छथि.

मैथिलीमॆ वॆब आधारित पत्रकारितामॆ ईसमाद कॆर अमूल्य यॊगदान अछि. न्यूज पोर्टल के रुपमॆ ई-समाद मैथिलीक प्रथम ई-अखबार अछि जॆकि राष्ट्रीय आ अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मिथिलाक समाद उपलब्ध करा रहल अछि. एहि न्यूज पोर्टल कें सम्यक रुपेन संचालित करबामें कुमुद सिंह, प्रीतिलता मलिक, ममता शंकर, सुषमा, जया झा आ छवि जी महत्वपूर्ण भूमिकाक निर्वहन क’ रहल छथि. ई-समादक तहमे गेलाक बाद ई महत्वपूर्ण बात विदित भेल जे “छह टा मैथिल महिलाक प्रयास सं निकलि रहल समाद ई-पेपरक संबंधमे आन आन पत्र पत्रिका मे बहुत रास प्रशंसा छपल अछि. एकटा व्लॉगक रूप मे शुरू भेल ई प्रयास आइ एकटा संपूर्ण वेब साइटक रूप मे  हमरा सबहक  समक्ष अछि. समादक सफलता मिथिलाक स्त्रीक ओ गौरवशाली परंपराक सबूत अछि, जाहि ठाम वैदेही, भारती आओर गार्गी सन महान विभूति जन्म लेने छथि. वर्तमान काल मे सेहो मिथिलाक स्त्रीगण देश-विदेश मे अपन ज्ञान सं सब कए प्रभावित क' रहल छथि.“

मिथिला-मैथिलीक प्रति कॊलकाताक यॊगदानक एकटा गौरवशाली परम्परा रहल अछि. स्वतंत्रता पूर्वसं वर्तमान धरि उल्लॆखनीय उपलब्धिक पैघ सूची अछि. वर्तमानमें, साहित्यिक ओ सांस्कृतिक गतिविधिक अतिरिक्त, कॊलकाताक प्रवासी युवा मैथिल आब वॆब पत्रकारिताक क्षॆत्रमॆ अपन प्रतिभा मनबा रहल छथि. एहि संबंधमॆं कॊलकाता अबाध रूपसं चलि रहल मैथिली न्यूज पोर्टल अछि - मिथिमीडिया, नवमिथिला, मैथिली जगत जकर नाम सम्मानपूर्वक लॆल जायत अछि. एकर अतिरिक्त, मैथिली सिनेमा ओ रंगमंच संबंधी समादक लेल मैथिली सिनॆमा डॉट कॉम केर अलगे नाम भ' रहल अछि.

मैथिली वॆब आधारित पत्रकारिताक क्षॆत्रमॆ कोलकातासं संचालित मिथिमीडियाक योगदान अभूतपूर्व अछि. मिथिमीडिया 15 अगस्त 2012कें अस्तित्व में आयल छल. बहुत कम समयमे बेसी लोकप्रियता हासिल करबामे मिथिमीडियाकें सफ़लता भेटैत चलि गेल. “मैथिली पाठकक पहिल पसिन” मिथिमीडिया व्यापक ऑनलाइन कवरेज, संपूर्ण त्वरित अपडेट, सेलिब्रेटी लोकनिक साक्षात्कार, मैथिली सिनेमाक टटका हलचल आ साहित्यिक कन्टेंट आदिक लॆल सर्वाधिक चर्चित पोर्टल अछि आ “अपन कार्यपद्धति आ समर्पित निष्पक्ष पत्रिकारिता तथा स्तरीय विविध सामग्री हेतु चिन्हल जाइत अछि”। आईटी क्षेत्रमे कार्य केनिहार रुपेश त्योंथ एक संगे कवि, व्यंग्यकार, आलेखक, प्रखर पत्रकार तथा जुझारु मैथिली सॆनानी छथि. मैथिली वॆब पत्रकारिताक विकासमे “मिथिमीडिया” केर संस्थापक-संपादक क रुपमे हुनक योगदानकॆं जतॆक प्रशंसा कएल जाय, ऒ कम्मॆ अछि.  हुनक रचनात्मक यात्र एक दशक पूर्वहिसं प्रारंभ भेल छल जहन ओ झलक मिथिला, वरिष्ठ मैथिली पत्रकार तारा कान्त झाक सम्पादनमें प्रकाशित होयबला मैथिली अखबार मिथिला समाद मे नियमित कॉलम लिखैत छलाह. रूपेशजीक नियमित लेखन कार्यक प्रतिफ़ल थिक मिथिमीडिया.

मिथिला प्राइम  एकटा आओर न्यूज पॊर्टल अछि जॆ एखन ब्लॉगक रुपमॆ कार्य क’ रहल अछि. 4 जुलाई 2012कें स्थापित ई पोर्टल सॆहॊ नीक काज कय रहल अछि.

मैथिलीमॆ वॆब पत्रकारिताक खगताक पूर्ति लॆल पत्रकार भवेशनंदन झा हकार डॉट कॉम शुरु कॆनॆ रहथि मुदा दुर्भाग्यवश आब ई सक्रिय नहि अछि.

मैथिली वॆब पत्रकारिताक क्षॆत्रमे मिथिला मिरर’क आगमन एकटा पैघ उपलब्धि अछि. एकर संस्थापक छथि ललित एन झा जिनकर शैक्षणिक पृष्ठभूमि कलकत्तॆ रहल अछि. देशक राजधानी दिल्लीसं संचालित मिथिला मिरर’क मुख्य उदे्श्य - मिथिलाक विभिन्न समस्याकें आम जनमानसक बीच राखब अछि. मिथिलाक एकटा प्रहरीकें रूपमे ई न्यूज पोर्टल  मिथिलाक मुद्दाकें सामाजिक ओ राजनीतिक स्तर पर बुलंद क' रहल अछि. मुट्ठी भरि संसाधन रहितो नित नव करबाक कोशिशमे लागल मिथिला मिरर मिथिला-मैथिलक बीच अपन खास पहिचान बना लेने अछि. एतबेटा नहि, मिथिला मिरर पत्रकारिताक क्षेत्र में रुचि रखनिहार व्यक्तिकें  एकटा मंच सेहो द' रहल अछि.

न्यूज़ पोर्टल नव मिथिला 21 अक्टूबर 2014 धनतेरसक दिन शुरू भेल. नव मिथिला वेब न्यूज़क निर्माण एकमात्र मैथिली भाषाक प्रचार-प्रसार ओ भाषाक संरक्षण हेतु कयल गेल अछि. आन मैथिली वेब पेज सॅ फराक किछु नव सोच-नव उमंगक संग मैथिल लोकनिकक बीच आयल ई न्यूज पॊर्टल  सुदूर गामक खबरि अपन भाषा मे एकठाम आनि रहल अछि.  मिथिला-मैथिली के इतिहास -धरोहर कें  जीवंत एवं प्रसार हेतु” प्रकाश झा केर सफ़ल सम्पादनमॆ  कटिबद्ध ऒ प्रतिबद्ध नव मिथिला अपन डेग बढा रहल अछि.

मैथिलीमे वॆब पत्रकारिताक प्रारंभ, प्रारंभिक मैथिल ब्लॉगरक सुन्दर प्रयास, ई-समाद, मिथिमीडिया, मिथिला मिरर, मिथिला प्राइम, नव मिथिला आदि मैथिली न्यूज पॊर्टलक गतिविधि, एकर उद्देश्य ऒ उपलब्धिक विवेचनाक उपरान्त ई बात स्पष्ट अछि जे इन्टरनेट पर मिथिलामॆ वेब आधारित पत्रकारिताक उज्जवल भविष्यक किछु किरण फ़ूटि रहल अछि. मैथिली पत्रकारिता इन्टरनॆटक दुनियाक प्रकाशमय धरातल पर घुरछियाइत अपन अन्हार कोनकीमॆ ठाड़ विमर्शित किछु न्यूज पॊर्टलक गवाक्षसं अपन उज्जवल भविष्यक बाट जॊहि रहल अछि आ बड्ड कातरताक संग वर्तमान मैथिली पत्रकारिता, प्रिन्ट आ इन्टरनॆटी, ई अपेक्षा क’ रहल अछि कि आब किछु उद्यमी व्यवसायी मैथिलक नियमित रुपसं प्रकाशित होबयबला मैथिली समाद पत्रक प्रकाशन करैत ऒकर ऑनलाइन संस्करण द’ मैथिली वॆब पत्रकारिताक वर्तमान स्थिति सुधारैत आ मिथिला-मैथिलीक भविष्य उज्ज्वल करताह.

मिथिला हिन्दी न्यूज 

मिथिलांचल क 20 अप्रैल 2017  दिन शुरू भेल
रोहित कुमार सोनू मुख्य संपादक रहल अछि। 




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