#Article 1: भारत (4964 words)


भारत (),  चाहे सरकारी रूप से भारत गणराज्य (रिपब्लिक ऑफ़ इंडिया), दक्खिनी एशिया में एगो देश बा। प्राचीन भारतीय साहित्य में एकरा के जम्बूद्वीप, आर्यावर्त, आ अजनाभदेशो कहल गइल बा। भारत, भूगोलीय क्षेत्रफल के हिसाब से विश्व के सातवाँ सबसे बड़हन अउरी जनसंख्या के हिसाब से चीन की बाद दुसरका सबसे बड़ देश बाटे। 2011 के भारतीय जनगणना के हिसाब से इहाँ के कुल जनसंख्या 1.2 अरब बाटे।

भारत के उत्तर में हिमालय पहाड़, दक्खिन में हिन्द महासागर, पच्छिम में अरब सागर आ पूरुब ओर बंगाल के खाड़ी बाटे।
भारत के जमीनी सीमा जेवन देशन की संघे साझा बा उनहन में पच्छिम में पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, उत्तर-पूरब में चीन, नेपाल, आ भूटान अउरी पूरुब ओर बांग्लादेश आ म्याँमार देश बाड़ें। हिन्द महासागर में एकरी दक्खिन-पश्चिम में मालदीव, दक्खिन में श्री लंका अउर दक्खिन-पूरब में इंडोनेशिया हऽ।

हिमालय से निकले वाली नद्दी कुल के ले आवल निक्षेप से उत्तरी भारत के मैदान बनल बा जेवन बहुत ऊपजाऊ बा।
एही मैदान क पच्छिमी तटीय हिस्सा विश्व के सबसे पुरान सभ्यता सिन्धु घाटी सभ्यता के जनम भइल हऽ आ एही उत्तर भारत के मैदान में विश्व के चार गो प्रमुख धर्म:हिंदू, बौद्ध, जैन अउरी सिख धर्म जनम लिहलन अउर विकसित भइलें।
गंगा नदी भारत के राष्ट्रीय नदी बाटे जेवन इहाँ के संस्कृति में बहुत पबित्र मानल जाले।
 
जहाँ तक भारत के लोगन के सवाल बा जनसंख्या के हिसाब से ई विश्व के सबसे बड़हन लोकतंत्र हऽ। इहवाँ संसदीय प्रणाली के आधार प शासन चलेला आ देश के मुखिया राष्ट्रपति होलें लेकिन परधानमंत्री सभसे शक्तिशाली पद होला।

भारतीय संस्कृति के सभसे मुख्य बिसेसता बा एकर बहुरंगी रूप। भारत में बहुत प्रकार के जाति, प्रजाति आ धर्म के लोग बाटे आ भारत के एक क्षेत्र से दूसरा क्षेत्र में खान-पान, रहन-सहन जइसन चीजन में बहुत अंतर देखे के मिलेला। एकरा बावजूद भारतीय संस्कृति के एगो अलग पहचान बा। अंग्रेज लोग भारत के एही भूगोलिक आ सांस्कृतिक विविधता के देख के ए के एगो उप-महाद्वीप के लोग हालाँकि अब भारतीय एकता आ अखंडता क समर्थक ए शब्द क प्रयोग ना कइल चाहेला लोग।

भारत, एगो भूगोलीय पहिचानक बाटे जवन भारत के संबिधान द्वारा देस के नाँव के रूप में स्वीकार कइल गइल बाटे, कई ठो भारतीय भाषा सब में कुछ हेर-फेर के साथ इस्तेमाल होला। ई नाँव, पुरान भारतवर्ष के आधुनिक रूप हवे जवन 19वीं सदी के बिचला समय में भारत के देशी नाँव के रूप में प्रचलन में महत्व पवलस। बिद्वान लोग के मान्यता बाटे की ई नाँव दूसरका सदी ईसा पूर्व के वैदिक जन भारत लोग के नाँव से उपजल हवे। परंपरागत रूप से ई नाँव कथा में बर्णित राजा भरत के साथ भी जोड़ल जाला। गणराज्य (शब्दशः, जनता के राज्य) संस्कृत/हिंदी में रिपब्लिक खातिर प्रयोग होखे वाला प्राचीन शब्द हवे।

इंडिया () शब्द इंडस () से पड़ल हवे, जवन पुरान फ़ारसी भाषा भाषा के शब्द सिंधी से निकलल हवे। सिंधी शब्द खुदे संस्कृत के सिंधु, जवन इतिहासी रूप से सिंधु नदी खातिर इस्तेमाल होखे, से निकलल। प्राचीन यूनानी लोग भारत के लोग के इंडोई (Ινδοί) कहे जवना के शाब्दिक अरथ होखे सिंधु (के इलाका) के लोग।

हिंदुस्तान तीसरी सदी ईसा पूर्व के, एगो प्राचीन फारसी नाँव हवे, जवन मुगल लोग के समय एह इलाका में चलन में आइल, आ तबसे ब्यापक रूप से इस्तेमाल होला, अक्सरहा एकर अरथ हिंदू लोग के देस के रूप में भी कइल जाला। एकर मतलब परिवर्तनशील रहल बाटे, कबो ख़ाली उत्तरी भारत आ पाकिस्तान खातिर आ कबो पूरा भारत खातिर।

मानव के सभसे पुरान अवशेष दक्खिन एशिया में मिलले के प्रामाणिक तिथि 30,000 साल पहिले के बतावल जाला। लगभग एही काल के मेसोलिथिक रॉक आर्ट के साइट सभ भारत के कई सारा भाग में पावल गइल बाड़ी, जवना में मध्य प्रदेश में मौजूद भीमबेटका के गुफा उल्लेख जोग बाड़ी सऽ। उपमहादीप में, लगभग 7,000 ईसा पूर्व के नियोलिथिक आबादी के पहिला चीन्हा मेहरगढ़ आ कुछ अन्य पच्छिमी पाकिस्तानी इलाका में मिले ला। ईहे क्रमशः बिकास करिके सिंधु घाटी सभ्यता के निर्माण कइलें, जवन दक्खिनी एशिया में पहिला शहरी संस्कृति रहल; ई लगभग 2500-1900 ई॰पू॰ के समय में वर्तमान समय के पाकिस्तान आ पच्छिमी भारत के इलाका में फलल-फुलाइल। मुअनजोदारो (मोहनजोदड़ो), हड़प्पा, धौलावीरा, राखीगढ़ी आ कालीबंगा जइसन शहरन के इर्द-गिर्द केंद्रित, बिबिध प्रकार के रोजगार पर आजीविका खातिर निर्भर, ई सभ्यता शिल्प उत्पादन आ तरह-तरह के बाणिज्य-ब्यापार में काफी आगे रहल।

लेट वैदिक काल में, छठवीं सदी ईसा पूर्व के आसपास, गंगा के मैदान आ उत्तरी पच्छिमी इलाका के छोट-छोट राज्य मिल के 16 गो महाजनपद, जिनहना में कुछ राजतन्त्र वाला रहलें कुछ गणतंत्र नियर, में समाहित हो गइलें। एही काल में नगरीकरण के उपज के बाद गैर-वैदिक धार्मिक आंदोलन के परिणाम के रूप में दू गो नया स्वतंत्र धर्म पैदा भइलें। जैन धर्म एकरे उपदेशक महावीर के समय में महत्व हासिल कइलस। गौतम बुद्ध के उपदेश पर आधारित बौद्ध धर्म के अनुयायी समाज के सगरी वर्ग से आ के जुड़लें, मध्य वर्ग के छोड़ के; बुद्ध के जीवन के घटना के संग्रह से भारत में रेकार्डेड इतिहास के सुरुआत भइल। शहरी संपन्नता के एह युग में त्याग के आदर्श घोषित कइलें, आ दुनों धर्म लंबा समय खातिर एगो संन्यासी परंपरा के अस्थापना कइलें। राजनीतिक रूप से, तीसरी सदी ईसा पूर्व में, मगध राज ज्यादातर छोट राज्यन के अपना में मिला के एगो बिसाल राज के स्थापना कइलस जवना के मौर्य साम्राज्यके नाँव से जानल जाला। ई साम्राज्य ओह समय में सुदूर दक्खिन के कुछ इलाका के छोड़ के बाकी पूरा उपमहादीप पर शासन कइलस; हालाँकि,अब इहो मानल जाए लागल बा कि एकर कोर इलाका के बीच-बीच में कई गो बड़हन स्वशासित (ऑटोनॉमस) इलाका भी रहलें। मौर्य राजा लोग के उनहन लोग के साम्राज्य-स्थापना खातिर लगन आ पब्लिक सुबिधा के मैनेजमेंट खातिर भी ओतने जानल जाला जेतना कि अशोक के जुद्ध के त्याग आ बौद्ध धम्म के परचार-प्रसार खातिर जानल जाला।

तमिल भाषा के संगम साहित्य ई उजागिर करे ला की 200 ईपू से 200 ईसवी के बीच, दक्खिनी प्रायदीप पर चेर, चोल, आ पांड्य लोग के शासन रहल, आ ई राज्य सभ बड़ा पैमाना पर रोमन साम्राज्य, पच्छिम आ दक्खिन पूर्ब एशिया के साथ ब्यापार करें। उत्तरी भारत में, हिंदू धर्म के अंदर परिवार पर पितृसत्तात्मक कंट्रोल मजबूत भइल आ, औरतन के स्थिति पहिले से कमोजर भइल। 4थी-5वीं सदी ले गुप्त साम्राज्य, बृहत् गंगा मैदान के इलाका में प्रशासन आ टैक्स कलेक्शन के एगो ब्याबस्थित सिस्टम दिहलस जवन बाद के राजा लोग खातिर मॉडल के काम कइलस। गुप्त लोग के शासन में, हिंदू धर्म के पुनरुत्थान भइल आ ई भक्ति आ श्रद्धा पर आधारित हो गइल बजाय कर्मकांड पर जोर दिहले के आ ई फिर से महत्व हासिल करे शुरू कइलस। एह नवीनीकरण के चीन्हा मूर्तिकला आ आर्किटेक्चर में प्रगट होला, जवन नगरीय अभिजात वर्ग के संरक्षण पा के बिकसित भइल। क्लासिकल संस्कृत साहित्य में उत्कर्ष भइल, आ भारतीय बिज्ञान, ज्योतिष, आयुर्वेद, आ गणित के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति भइल।

बीसवी सदी के प्रारम्भ में आधुनिक शिक्षा क प्रसार और विश्वपटल पर बदलती राजनीतिक परिस्थितियन के चलते भारत में एक बौद्धिक आन्दोलन क सूत्रपात भयल जे सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर अनेक बदलाव और कई आन्दोलन क नीव रखलस। 1885 में इन्डियन नेशनल कांग्रेस क स्थापना स्वतन्त्रता आन्दोलन के एक गतिमान स्वरूप देहलस।
बीसवीं शताब्दी के शुरुआत में लम्बा समय तक स्वतंत्रता प्राप्ति के लिये बहुत बड़ा अहिंसावादी संघर्ष चलल, जेकर नेतृत्‍व महात्मा गांधी, जिनके आधिकारिक रुप से आधुनिक भारत क 'राष्ट्रपिता' के रूप में संबोधित करल जाला, कईलेन। एकरे साथ-साथ चंद्रशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, सावरकर आदि के नेतृत्‍व में चलल क्रांतिकारी संघर्ष के फलस्वरुप 15 अगस्त, 1947 के भारत ने अंगरेजी शासन से पूर्णतः स्वतंत्रता प्राप्त कईलस। ओकरे बाद 26 जनवरी, 1950 के भारत एक गणराज्य बनल।

भारत के पड़ोसी राष्ट्रन के साथ अनसुलझा सीमा विवाद ह। एही खातिर एके छोटा पैमाना पर युद्ध का भी सामना करे के पड़ल। 1962 में चीन के साथ, अउर 1947, 1965, 1971 अउर 1999 में पाकिस्तान के साथ लड़ाई हो चुकल बा।

भारत गुटनिरपेक्ष आन्दोलन अउर संयुक्त राष्ट्र संघ के संस्थापक सदस्य देशन में से एक बाटे। 1974 में भारत आपन पहिला परमाणु परीक्षण कईले रहल जेकरे बाद 1998 में 5 अउर परीक्षण भयल। 1990 के दशक में भयल आर्थिक सुधारीकरण क बदौलत आज देश सबसे तेज़ी से विकासशील राष्ट्रन क सूची में आ गयल बा।

भारत एगो संघ (फेडरेशन) हवे जे संसदीय ब्यवस्था के तहत भारत के संबिधान आधारित शासित होला। भारतीय संबिधान भारत के सबसे ऊँच कानूनी दस्तावेज हवे। ई देस एगो संबैधानिक रिपब्लिक हवे आ प्रतिनिधिक लोकतंत्री सिस्टम वाला शासन में बहुमत के शासन होला आ अल्पमत के हित के संरक्षण कानून द्वारा सुनिश्चित कइल जाला। भारत में संघवाद द्वारा ई परिभाषित कइल जाला कि राज्य आ केंद्र के बीच कामकाज के बँटवारा कवना बिधी से होखी। दुनो स्तर पर सरकार संबिधान में बतावल कामकाज के बँटवारा के अधीन काम करे लीं। भारत के संबिधान, जे 26 जनवरी 1950 के लागू भइल अपना उद्देशिका में कहे ला कि भारत एगो संप्रभु, सोशलिस्ट, सेकुलर, लोकतंत्रात्मक रिपब्लिक हवे। भारत के सारकार के स्वरुप, परंपरागत रूप से अध-फेडरल (क्वाशी-फेडरल) बताबल जाला जेह में मजबूत केंद्र आ कमजोर राज्य बाने आ 1990के दशक के बाद से राजनीतिक, आर्थिक आ सामाजिक बदलाव के चलते संघीय स्वरुप अउरीओ मजबूत भइल बा।

संघ के शासन में तीन गो शाखा बाड़ी स:

भारत एगो संघ (फेडरेशन) ह जेह में 28 राज्य आ 9 गो संघ राज्यक्षेत्र (यूनियन टेरिटरी) शामिल बाने। सगरी राज्यन में आ जम्मू काश्मीर, पुद्दुचेरी आ दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में चुनल गइल बिधायिका आ सरकार होले जे वेस्टमिन्स्टर मॉडल पर आधारित स्वरुप वाली होलीं। बाकी छह गो संघ राज्यक्षेत्र के शासन सीधे केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक लोग के माध्यम से होला। 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत राज्यन के भाषा के आधार पर सीमांकन भइल। एकरे बाद से 2019 के अक्टूबर में सभसे नया बदलाव में जम्मू अउरी काश्मीर राज्य के बिभाजन कइल गइल आ एकरा के राज्य से बदल के दू गो संघ राज्यक्षेत्र बनावल गइल। हर राज्य प्रशासन खातिर जिला आ तहसील (तालुका) में बाँटल गइल बा आ अंत में सभसे छोट इकाई गाँव बाने।

भारत, भारतीय टेक्टॉनिक प्लेट के ऊपर स्थित बा, आ इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट के हिस्सा हवे। भारत के बर्तमान रूप के रचना करे वाली भूबिज्ञानिक प्रक्रिया सभ के सुरुआत अबसे 75 मिलियन बरिस पहिले भइल जब भातरीय प्लेट, ओह समय के गोंडवाना नाँव के महामहादीप के हिस्सा, अपना जगह से उत्तर-पूरुब ओर घुसुके सुरु कइलस। एकर वजह समुंद्रतल फइलाव रहल जे एकरा दक्खिन-पच्छिम में, आ बाद में, दक्खिन आ दक्खिन पूरुब में सुरू भइल। साथै-साथ, बिसाल आकार के टीथियन समुंद्री क्रस्ट, जे एकरा उत्तर-पूरुब में रहल, यूरेशियन प्लेट के नीचे धँसके सुरू हो गइल। ईहे दुन्नों प्रासेस, जवन पृथ्वी के मैंटल में चले वाली तरंग के परिणाम रहली, हिंद महासागर के निर्माण आ भारतीय महादीपी क्रस्ट के यूरेशिया के नीचे पेस के एह हिस्सा के ऊपर उठा के हिमालय के उठान, दुन्नों चीज के कारन बनली। भारतीय प्लेट के धँसाव जहाँ यूरेशियन प्लेट के नीचे होत रहे आ जवना से हिमालय के उठान होत रहल ओही इलाकाके ठिक दक्खिन में एगो बिसाल दोना के आकार के धँसल हिस्सा के रचना भइल जे नदी सभ के ले आइल गाद-माटी से तेजी से भर गइल बर्तमान समय के सिंधु-गंगा मैदान के रूप लिहलस प्राचीन अरावली परबत द्वारा मैदान से बिलग होखे वाला पच्छिमी हिस्सा थार के रेगिस्तान के रूप में मौजूद बाटे।

मूल आ पुरान भारतीय प्लेट अब प्रायदीपीय भारत के रूप में बाँचल बाटे आ ई भारत के सभसे पुरान आ भूबिज्ञान के हिसाब से सभसे स्थाई हिस्सा हवे। ई उत्तर के ओर अपना बिस्तार में मध्य भारत के सतपुड़ा परबत श्रेणी आ बिंध्याचल परबत श्रेणी ले बिस्तार लिहले बाटे। ई दुनों, लगभग समानांतर श्रेणी, गुजरात राज्य के अरब सागर के तट से ले के झारखंड राज्य में मौजूद छोटानागपुर के पठार ले फइलल बाड़ी। दक्खिन में, बाकी के पठारी हिस्सा, दक्कन पठार अपना पच्छिम सीमा पर पच्छिमी घाट से आ पूरुब में पूरबी घाट नाँव के पहाड़ी कड़ी से बनल सीमा वाला बाटे; पठार भारत के कुछ सभसे पुरान चट्टान वाला बाटे जेवना में से कुछ एक बिलियन बरिस से भी पुरान बाड़ी। एह प्रकार के संरचना वाला भारत बिसुवत रेखा के उत्तर में 8°4' आ 37°6' उत्तर अक्षांस आ 68° 7' से 97° 25' पूरबी देशांतर ले बिस्तार वाला बाटे।

भारत के समुंद्री तट के लंबाई  बाटे; एकर  लंबा हिस्सा प्रायदीपी भारत के हवे आ  लंबा हिस्सा अंडमान निकोबार दीपसमूह आ लक्षदीप के टापू सभ के समुंद्र तट से बनल बाटे। भारतीय नेवी के हाइड्रोग्राफिक चार्ट सभ के मोताबिक भारत के मुख्य जमीन के समुंद्री किनारा, 43 % बलुआ बीच वाला; 11 % चट्टानी किनारा, जवना पर क्लिफ बाड़ी; आ 46 % कीच तट आ दलदली इलाका वाला बाटे।

भारत में बहे वाली प्रमुख हिमालयी नदी सभ में गंगा आ ब्रह्मपुत्र बाड़ी, दुन्नों बंगाल के खाड़ी में पानी छोड़े ली। गंगा के मुख्य सहायिका नदिन में यमुना आ कोसी बाड़ी; जहाँ कोसी बहुत कम ढाल वाला मैदान में बहे ले आ बेर-बेर आपन रस्ता बदले आ भयावन बाढ़ खातिर जानल जाले। प्रायदीपी भारत के मुख्य नदी, जिनहन के ढाल तेज होखे से के कारन ई बाढ़ के परभाव से फिरी बाड़ी, गोदावरी महानदी, कृष्णा आ कावेरी बाड़ी जे बंगाल के खाड़ी में गिरे ली; आ नर्मदा आ ताप्ती अरब सागर में गिरे ली। समुंद्र किनारे के हिस्सा में दलदली जमीन वाला कच्छ के रन पच्छिम में आ सुंदरबन के जलोढ़ मैदान पूरुब में बा; सुंदरबन के कुछ हिस्सा बंगलादेश में पड़े ला। भारत के हिस्सा में दू गो दीपमाला बा: लक्षदीप, जे मूंगा के एटॉल हवे आ पच्छिमी किनारा से कुछ दूर पर बा; आ अंडमान आ निकोबार दीपसमूह, जे अंडमान सागर में ज्वालामुखी कड़ी के ऊपर बा।

भारत के जलवायु हिमालय आ थार के रेगिस्तान से बहुत प्रभावित बा, दुन्नों मिल के भारत खातिर आर्थिक आ सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानसून के संचालन में आपन परभाव छोड़े लें। हिमालय, बिचला एशिया के ठंढा कैटाबेटिक हवा सभ से बचाव करे ला आ इनहन के भारत में प्रवेश करे से रोके ला, भारत, एही अक्षांस वाला बाकी जगहन के तुलना में जाड़ा में गरम रहे ला। थार के रेगिस्तान, मानसून के हवा सभ के खींचे ला आ नमी से भरल ई हवा जून से अक्टूबर के बीच भारत के ज्यादातर हिस्सा में बरखा करे लीं। भारत में मुख्य रूप से चारि गो जलवायु प्रकार मिले ला: उष्णकटिबंधीय नम, उष्णकटिबंधीय सूखल, उप-उष्णकटिबंधीय नम, आ परबती।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइऍमऍफ़) के अनुसार, साल 2015 में भारत के अर्थब्यवस्था US$2.183 ट्रिलियन नौमिनल कीमत वाली रहल; बजार ऍक्सचेंज रेट के हिसाब से ई दुनिया के 7वीं, आ US$8.027 ट्रिलियन कीमत के साथ, परचेजिंग पावर पैरिटी (पीपीपी) के हिसाब से तीसरी सभसे बड़ अर्थब्यवस्था रहल पछिला दू दसक में औसत सालाना जीडीपी बढ़ती 5.8 % के दर से रहल जे 2011-12 में बढ़ के 6.1 % हो गइल आ एह तरे भारत दुनिया के सभसे तेज बढ़ती करे वाला अर्थब्यवस्था बा। हालाँकि, प्रति बेकती जीडीपी के हिसाब से एकर दुनिया में 140वाँ स्थान बा आ पीपीपी पर गिनल प्रति बेकती जीडीपी के हिसाब से ई 129वाँ नंबर पर बा। साल 1991 ले, भारत में सगरी सरकार सभ संरक्षणवादी आर्थिक नीति के लागू कइलीं जे सोशलिस्ट अर्थशास्त्र से प्रभावित रहे। ब्यापक पैमाना पर सरकारी हस्तक्षेप आ रेगुलेशन सभ, बैस्विक अर्थब्यवस्था आ भारतीय अर्थब्यवस्था के बिचा में देवाल नियन खड़ा रहलें। साल 1991 में पैदा भइल एक ठो आर्थिक संकट के बाद भारतीय अर्थब्यवस्था के खोलल गइल; आ एकरे बाद से ई बजार-आधारित अर्थब्यवस्था के ओर बढ़े लागल जेकरा खातिर बिदेसी ब्यापार आ बिदेसी निवेस के आगमन के बढ़ावा दिहल गइल। भारत के हाल के आर्थिक मॉडल पूँजीवादी बाटे। भारत 1 जनवरी 1995 से डब्लूटीओ के मेंबर बा।

, 4,866 लाख कार्यशील लोग के साथ भारतीय श्रमिक दल दुनिया के दुसरा सभसे बड़ बा। सर्विस सेक्टर द्वारा जीडीपी के 55.6 %, उद्योग सेक्टर द्वारा 26.3 % खेती सेक्टर द्वारा 18.1 % हिस्सेदारी कइल जात बा। भारत के  साल 2014 में US$70 बिलियन रहल जे दुनिया में एक नंबर रहल आ ई 250 लाख भारतीय लोग द्वारा कमा के ले आइल गइल रहल जे लोग बिदेस में नोकरी करत बा। खेतीबारी से पैदा होखे वाला प्रमुख चीज में चाउर, गोहूँ, तेलहन, कपास, जूट, चाय, ऊख, आ आलू बा। प्रमुख उद्योग सभ में कपड़ा-उद्योग, टेलीकम्युनिकेशन, केमिकल, फार्मास्यूटिकल, बायोटेक्नोलॉजी, फ़ूड प्रोसेसिंग, स्टील, परिवहन के साधन, सीमेंट, खनन, पेट्रोलियम, मशीनरी, आ सौफ्टवेयर उद्योग बाने। साल 2006 में, भारत के जीडीपी में बिदेसी ब्यापार के हिस्सा बढ़ के 24 % हो गइल जवन कि सन् 1985 में खाली 6 % भर रहल। साल 2008 में, बिस्व ब्यापार में भारत के भागीदारी 1.68 % रहल; साल 2011 में, दुनिया के दसवाँ सभसे बड़ आयातक आ उन्नईसवाँ सभसे बड़ निर्यातक देस रहल। मुख्य निर्यात (बाहर भेजल जाए वाला सामान) में पेट्रोलियम उत्पाद, कपड़ा उद्योग के उत्पाद, गहना, सॉफ्टवेयर, इंजीनियरी के सामान, केमिकल, आ चमड़ा के उत्पाद सामिल रहलें; आयात में कच्चा पेट्रोलियम, मशीनरी, रतन, खाद, आ केमिकल रहल। साल 2001 से 2011 के बिचा में, कुल निर्यात में पेट्रोलियम उत्पाद के हिस्सेदारी 14 % से बढ़ के 42 % हो गइल। साल 2013 में भारत कपड़ा उद्योग के चीज बाहर भेजे के मामिला में, चीन के बाद, दुसरा नंबर के सभसे बड़ निर्यातक देस रहल।

भारतीय संविधान कौनों एक राष्ट्रभाषा के वर्णन ना करेला। भारत में कउनो एक राष्ट्रभाषा न हऽ। संविधान के अनुसार केंद्रीय सरकार में काम हिंदी आ अंग्रेज़ी भाषा में होला, आ राज्यन में हिंदी या फिर आपन-आपन क्षेत्रीय भाषा में काम होला। ईहाँ मुख्यतः बोलल जाये वाली भाषवन के सूची नीचे दिहल बाटे:

भारत के सांस्कृतिक इतिहास 4,500 साल से ढेर लमहर बाटे। वैदिक काल (c. 1700 — 500 BCE) में हिंदू दर्शन, पौराणिक कथा, धर्मदर्शन आ साहित्य के नेंइ रखाइल, आ बहुत सा परंपरा सभ के स्थापना भइल जिनहन के आज भी पालन हो रहल बा, जइसे कि धर्म, कर्म, योग, आ मोक्ष। भारत देस अपना धार्मिक बिबिधता खातिर जानल जाला, जहाँ हिंदू, बौद्ध, सिख, इस्लाम, ईसाइयत, आ जैन प्रमुख धर्म बाने। सबसे प्रमुख, हिंदू धर्म, इतिहासी रूप से कई मत आ संप्रदाय सभ के बिकास से, आ उपनिषद, योग सूत्र, भक्ति आंदोलन, आ बौद्ध दर्शन के परभाव आज के वर्तमान रूप में आइल बा।

भारत के भवन निर्माण कला, जेह में ताजमहल, अन्य दूसर मुग़ल आर्किटेक्चर, आ दक्खिन भारतीय आर्किटेक्चर सामिल बा, प्राचीन स्थानीय परंपरा आ बाहरी शैली सभ के सुघर मेरवन हवे। भारत के देसी भवन निर्माण कला में भी बिबिध रंग देखाई पड़े लें। संस्कृत ग्रंथ वास्तु शास्त्र से ले के तमिल मामुनि मायन तक ले एह बात के खोज करे लें कि कइसे प्रकृति के शक्ति सभ मानव आवास के निर्धारित करे लीं; इनहन में सटीक ज्यामिति आ दिशा आधारित योजना बतावल गइल बा जेकरा अनुसार ब्रह्मांड के ताकत सभ के साथ समरस बइठा के भवन बनावल जा सके लें। शिल्प शास्त्र, कई ठो मिथकीय ग्रंथ सभ के लड़ी हवे जेकरा से प्रभावित हिंदू मंदिर आर्किटेक्चर में पूर्ण के संकल्पना आधारित वर्ग, वास्तु-पुरुष मंडल, के बिधान मिले ला। आगरा के ताजमहल, जे शाह जहाँ के आदेश पर उनके पत्नी मुमताज महल के याद में 1631 से 1648 के बीच में बनावल गइल, भारत में मुस्लिम कला के गहना आ बैस्विक रूप से प्रशंसित मास्टरपीस बिस्व धरोहर के रूप में यूनेस्को के बिस्व धरोहर लिस्ट में शामिल बा। 19वीं सदी में अंगरेजी शासन में बिकसित इंडो-सारसेनिक आर्किटेक्चर मूल रूप से इंडो-मुस्लिम आर्किटेक्चर के आगे बढ़ावे वाला शैली हवे।

भारत में साहित्य के रचना के सुरुआत सभसे पुरान समय में संस्कृत भाषा में भइल जे 1700 ईसा पूर्व से 1200ईसवी के बीच के बा। संस्कृत साहित्य में प्रमुख रचना सभ में रामायण आ महाभारत नियर महाकाव्य, कालिदास के नाटक, जइसे कि अभिज्ञानशाकुन्तलम्, आ अन्य महाकाव्य गिनावल जा सके ला। साहित्य के बिबिध रूप देखे के मिले ला आ कामसूत्र नियर रचना भारते में सभसे पहिले भइल। दक्खिनी भारत में 600 ईसा पूर्व से 300 ईसवी के बीचे के संगम साहित्य के रचना में 2,381 कविता सभ तमिल साहित्य के पूर्ववर्ती मानल जालीं। 14वीं से 18वीं सदी के बीचे में, भारतीय साहित्य में भक्ति आंदोलन के जोर लउके ला आ कबीरदास, तुलसीदास, आ गुरु नानक नियर संत आ कवि लोग एह काल के प्रतिनिधि के रूप में देखल जाला। एह काल के रचना सभ में बिबिध बिचार आ भाव के निरूपण भइल आ ई क्लासिकल (शास्त्रीय) युग के रचना सभ से पर्याप्त रूप से अलग किसिम के बाड़ी सऽ। 19वीं सदी में, भारतीय लेखक लोग के रूचि सामाजिक बराबरी आ मनोबैज्ञानिक बिबरन नियर बिसय में जागल। बीसवीं सदी में बंगाली लेखक रबींद्रनाथ टैगोर के परभाव साहित्य पर देखे के मिले ला जिनका के साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिलल रहल।

भारतीय संगीत कई तरह के परंपरा आ क्षेत्रीय शैली सभ के कारण बहुत बिस्तार लिहले बाटे। शास्त्रीय संगीत के दू ठो प्रमुख शैली: उत्तर भारत में हिंदुस्तानी संगीत, आ दक्खिन भारत में कर्नाटक संगीत के रूप में बा। इलाकाई पापुलर संगीत में फिलिमी आ लोकसंगीत के परंपरा बा; बहुलता लिहले बाउल गीत लोकगीत के एक ठो सुघर उदाहरण बाने। भारत में नाच के भी लोक आ शास्त्रीय शैली बा। कुछ परसिद्ध लोक नाच शैली में पंजाब के भांगड़ा, आसाम के बिहू, ओडिशा, पच्छिम बंगाल आ झारखंड के छऊ, गुजरात के गरबा आ डांडिया, राजस्थान के घूमर, आ महाराष्ट्र के लावनी के नाँव गिनावल जा सके ला। भारत में आठ गो नाच सभ, जिनहना में कई थे में कथा आ मिथक के निरूपण भी होला, के भारत में शास्त्रीय नाच के दर्जा भी 'संगीत नाटक अकादमी' द्वारा दिहल गइल बा। इआ आठ गो नाच बाड़ें: तमिलनाडु के भरतनाट्यम, उत्तर प्रदेश के कथक, केरल के कथकली आ मोहिनीअट्टम, आंध्र प्रदेश के कुचिपुड़ी, मणिपुर के मणिपुरी, आ ओडिशा के ओडिसी नाच आ आसाम के सत्तारिया नाच। भारत में थियेटर यानि नाटक कला के अंदर संगीत, गीत आ सहज भा लिखल डायलाग के मिलल-जुलल परंपरा बिकसित भइल बा। परंपरागत नाटकन के शैली में ज्यादातर हिंदू मिथक आधारित नाटक बाने, हालाँकि मध्यकाल के भी पर्याप्त परभाव इनहन पर देखे के मिले ला। इनहन में कुछ प्रमुख बाने: गुजरात के भवाई, बंगाल के जात्रा, उत्तरी भारत के नौटंकी आ रामलीला, महाराष्ट्र के तमाशा, आंध्रप्रदेश के बुर्रा कथा, तमिलनाडु के तेरुकुट्टू आ कर्नाटक के यक्षगान।

भारत के फिलिम इंडस्ट्री में दुनिया के सभसे ढेर देखल जाए वाला सिनेमा बने ला। भारत में क्षेत्रीय स्तर पर सिनेमा के धनी परंपरा बिकसित भइल बा जेह में असमिया, बंगाली, भोजपुरी, हिंदी कन्नड़, मलयालम, पंजाबी, गुजराती, मराठी, ओडिया, तमिल आ तेलुगु भाषा सभ में सिनेमा का आपन ख़ास पहिचान बन चुकल बाटे। भारत में राष्ट्रीय स्तर पर होखे वाला आय में से 75 % हिस्सा दक्खिन भारतीय सिनेमा के बा।

भारत में टीवी प्रसारण के सुरुआत 1959 में सरकारी स्तर पर भइल आ एकरे बाद दू दसक ले एह में बढ़ती के दर बहुत धीरे रहल। 1990 के दसक में सरकार के चैनल दूरदर्शन के एकाधिकार खतम भइल आ एकरे बाद से सैटेलाईट चैनल सभ में तेजी से बढ़ती देखल गइल आ एकर भारत के समाज के पापुलर संस्कृति के रूप निर्धारित करे में लगातार बढ़त मात्रा में परभाव देखल जा सके ला। आज, भारत में टीवी, समाज में सभसे ढेर घुसल मीडिया बा; एह इंडस्ट्री के अनुमान के मोताबिक  5,540 लाख से ढेर टीवी उपभोक्ता बा लोग आ एह में 4,620 लाख लोग के लगे सैटेलाईट टीवी/केबिल कनेक्शन के सुबिधा बा, आ ई पहुँच अन्य माध्यम सभ, जइसे कि प्रेस (3500 लाख), रेडियो (1560 लाख) या इंटरनेट (370 लाख) से काफी ढेर बाटे।

भारतीय खाना में क्षेत्रीय आ परंपरागत पकवान सभ में बहुत बिबिधता पावल जाला आ अक्सरहा इहाँ कौनों राज्य या क्षेत्र के नाँव के आधार पर ओह इलाका के खाना के पहिचान भी होला (उदाहरण खातिर बिहारी खाना या भोजपुरी खाना)। मुख्य भोजन के हिस्सा के रूप में इहाँ चावल, बजरा, गोहूँ के आटा आ बिबिध प्रकार के दलहन सभ (रहर, मूंग, मसुरी, उर्दी इत्यादि) बाटे।
मसुरी आ मूंग के खड़ा भी पकावल जाला आ दाल के रूप में भी। ज्यादातर दलहन सभ के दाल के रूप में, यानी कि, दर के दू टुकड़ा में हो जाए के बाद पकावल जाला। भारतीय खाना के एक ठो प्रमुख बिसेसता इहाँ के मसाला भी बा। भारतीय मसाला के महत्त्व के अंजाद लगावे खातिर इहे काफी बा कि कुछ बिद्वान लोग यूरोप के साथ भारतीय मसाला के ब्यापार के यूरोप में खोज के जुग के उत्पत्ती के प्रमुख कारण में से एक माने ला।

परंपरागत भारतीय समाज के बहुधा सामाजिक स्तर के हिसाब से परिभाषित कइल जाला जहाँ जाति आधारित ऊँच-नीच बहुत तरह के सामाजिक रोक-टोक लगावे ला आ लोगन के सामाजिक स्थिति के परिभाषित करे ला। सामाजिक बर्ग के रूप में भारत में हजारन गो समूह बाने जे अपना से बाहर नातेदारी ना करे लें, जिनहन के जाति कहल जाला। आजादी में बाद भारत केहू के अछूत माने के गैरकानूनी घोषित क दिहलस आ 1947 के बाद अउरी कई ठो कानून पास कइल गइल ताकि जाति आधारित भेदभाव खतम कइल जा सके। शहरी भारत में अब बड़-बड़ कंपनी में काम करे वाला लोग के बीच ऑफिस में जाति आधारित पहिचान के भावना नइखे रह गइल।

पारिवारिक मूल्य सभ के महत्व भारत में बहुत बाटे आ कई पीढ़ी ले चले वाला संजुक्त परिवार इहाँ आम चीज रहल बा, हालाँकि, अब शहरी इलाका में एकल परिवार के बढ़ती देखल जा रहल बाटे। भारत में अभिन भी ज्यादातर लोग के बियाह परिवार आ नात रिश्तेदारी के बड़ लोग के सहमती से अरेंज कइल जाला। बियाह जीवन भर निभावे के चीज मानल जाला, आ तलाक के दर बहुत कम बा। , बस 1.6 प्रतिशत भारतीय औरत लोग के तलाक होखे हालाँकि अब ई आँकड़ा शिक्षा आ आर्थिक आजादी के चलते बढ़ रहल बाटे। बाल बियाह अभिन भी देहाती इलाका में प्रचलित बा जहाँ लड़की लोग के बियाह कानूनी उमिर 18 साल से पहिलहीं हो जाला। गर्भ में लड़िकिन के हत्या इहाँ के बहुत गंभीर समस्या बा आ एकरे कारण लिंगानुपात में बहुत बिसमता पैदा हो चुकल बा,  के अनुमान के मोताबिक 500 लाख पुरुष फाजिल बाने औरतन के तुलना में। हालाँकि, 2011 के रिपोट कुछ सुधार होत देखावत बाटे। दहेज, गैर-कानूनी होखले के बावजूद काफी मात्रा में प्रचलन में बा आ चोरी-छिपल तरीका से चालू बा। दहेज हत्या के मामिला में भी 2013 के खबर के मोताबिक बढ़ती भइल बा।

भारत में ज्यादातर पब्लिक छुट्टी सभ धार्मिक तिहुआर के होलीं जेह में कुछ प्रमुख बा, दिपावली, होली, गणेश चउथ, पोंगल, दुर्गा पूजा, ईद, बकरीद, क्रिसमस आ बैसाखी। स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस आ गाँधी जयंती नियर कुछ राष्ट्रीय परब भी बाने जे पूरा भारत में मनावल जालें।

लगभग 4000 ईसापूर्व के समय में भारत में कपास आ सूती कपड़ा के चलन सुरू हो गइल रहल। परंपरागत रूप से भारतीय पहिनावा रंग आ स्टाइल के हिसाब से एक इलाका से दुसरा इलाका के बीच काफी अंतर लिहले होला आ ई कई तरह के चीज पर निर्भर होला जइसे कि ओह जगह के जलवायु या फिर लोग के धार्मिक मान्यता। औरतन के सभसे प्रचलित परिधान साड़ी हवे आ मर्दाना लोग के धोती भा लुंगी। एकरे बाद बदलाव के तौर पर सलवार-सूट आ कुरता-पैजामा चलन में आइल। पैंट-बुशर्ट आ जींस टी-शर्ट के चलन भी आ गइल बा। गहना के साथ साथ असली फूल सभ के सिंगार में इस्तेमाल के परंपरा भारत में लगभग 5,000 साल पुरान बाटे; आ रतन सभ के इहाँ ग्रह-दसा के हिसाब से टोटका के तौर पर पहिरल जाला।

भारत में कई ठे पुरान परंपरागत खेल सभ जे एही जा पैदा भइलें, अभिन ले काफी चलन में बाने, उदाहरण खातिर कबड्डी, खो-खो, पहलवानी, आ गुल्ली-डंडा। कई ठे भारतीय मार्शल आर्ट जे एशिया के सुरुआती मार्शल आर्ट में गिनल जा सके लें, जइसे कि कलारियपट्टू, मुष्टियुद्ध, सिलम्बम, आ मार्मा आदि, भारत में जनमल हवें। शतरंज के खेल भारत में चतुरंग के नाँव से जनमल आ नया जमाना में दोबारा इहाँ लोकप्रिय हो गइल बा आ कई गो भारतीय ग्रैंडमास्टर लोग भी हो चुकल बाटे। पचीसी के खेल, बिसाल संगमरमर के चबूतरा पर बादशाह अकबर द्वारा खेलल जाय।

भारतीय डेविस कप में खेलाड़ी लोग के प्रदर्शन आ अन्य जगह पर भी खेल के पापुलर होखे के सुरुआत के कारण 2010 के बाद से देस में टेनिस के महत्व बढ़ल बाटे आ अब एहू में भारतीय लोग रूचि देखावत बा। शूटिंग यानि निशानेबाजी में भारत के महत्वपूर्ण स्थान बा आ ओलंपिक खेलन में, बिस्व शूटिंग चैंपियनशिप में आ कॉमनवेल्थ खेल में भारत कई पदक हासिल कइले बाटे। अन्य कहल जेह में भारतीय खेलाडी लोग के अंतर्राष्ट्रीय लेवल पर सफलता मिलल बाटे, बैडमिंटन (साइना नेहवाल आ पी वी सिंधु दुनिया में टॉप रैंक के बाड़ी), मुक्केबाजी, आ कुश्ती बाड़ें। भारत में फुटबाल के खेल पच्छिम बंगाल, गोवा, तमिलनाडु, केरल आ पूर्वोत्तर के राज्य सभ में पापुलर हवे। फीफा के अंडर-17 वल्ड कप भारत में होखे जा रहल बाटे।

हाकी भारत के राष्ट्रीय खेल हवे आ भारत में एकर प्रबंधन हाकी इंडिया के हाथ में बाटे। भारतीय पुरुष हाकी टीम 1975 में हाकी के बिस्व कप जितल, आ , आठ गो गोल्ड, एक ठो सिल्बर, आ दू गो ब्रोंज मेडल ओलंपिक में जीत चुकल बा, आ ई खेल ओलंपिक में सभसे सफल रहल बाटे।

भारत के योगदान क्रिकेट के मशहूर बनावे में भी रहल बा। एही कारन, भारत में ई खेल सभसे ढेर पापुलर बाटे। भारतीय क्रिकेट टीम 1983 आ 2011 में बिस्व कप आ 2007 के टी20 बिस्वकप जीत चुकल बा 2012 में आइसीसी चैम्पियंस ट्राफी श्रीलंका के साथे साझा कइलस आ 2013 में जीतले रहल। भारत में क्रिकेट के प्रबंधन बीसीसीआई के हाथ में बा; रणजी ट्राफी, दिलीप ट्राफी, देवधर ट्राफी आ इरानी ट्राफी इहाँ के घरेलू प्रतियोगिता हईं सऽ। बीसीसीआइ हर साल टी20 के मुकाबला, आईपीएल के नाँव से भी करवावे ले।

भारत अकेले या फिर दुसरा देस के साथे मिल के कई गो अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता सभ के आयोजन करा चुकल बाटे: 1951 आ 1982 के एशियाई खेल; 1987, 1996 आ 2011 के क्रिकेट बिस्व कप; 2003 के एफ्रो एशियाई खेल; 2006 आईसीसी चैम्पियंस ट्राफी; 2010के हाकी बिस्व कप आ 2010 के कॉमनवेल्थ खेल इहाँ आयोजित हो चुकल बाने। भारत में हर साल आयोजित होखे वाला अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला सभ में चेन्नई ऑपन, मुंबई मैराथन, दिल्ली आधा-मैराथन आ इंडियन मास्टर्स प्रमुख बाने। भारत में पहिला फार्मूला 1 रेस इंडियन ग्रां प्री के सुरुआत 2011 में भइल बाकी ई 2014 के बाद से बंद हो गइल बा।

दक्खिन एशियाई खेलन में भारत के दबदबा रहल बा। एकर एक ठो उदाहरण देखल जा सके ला कि भारतीय बास्केटबाल टीम दक्खिन एशियाई खेल में अब तक ले आयोजित चार में से तीन मुकाबला जीतल बाटे।

राजीव गाँधी खेल रत्न आ अर्जुन पुरस्कार भारत सरकार द्वारा दिहल जाए वाला सभसे बड़हन सम्मान हवे जवन खेलकूद के क्षेत्र में खेलाड़ी लोग के दिहल जालें; जबकि द्रोणाचार्य पुरस्कार खेलकूद के कोचिंग देवे वाला गुरु लोग के दिहल जाला।




#Article 2: पटना (565 words)


पटना ( ) भारत में बिहार प्रान्त क राजधानी ह। पटना क प्राचीन नाँव पाटलिपुत्र रहे।
आधुनिक पटना दुनिया की कुछ अइसन गिनल-चुनल प्रचीन नगरन में से बा जेवन बहुत प्राचीन काल से आज ले आबाद बाड़ें। अपने आप में ए शहर क बहुत इतिहासी महत्व बाटे।

मेगस्थनीज (350 ई॰पू॰-290 ई॰पू॰) अपनी भारत भ्रमण की बाद लिखल पुस्तक इंडिका में ए नगर क उल्लेख पलिबोथ्रा (पाटलिपुत्र) की रूप में कइलें जेवन गंगा अउरी  अरेन्नोवास (सोनभद्र-हिरण्यवाह) की संगम पर बसल रहे। ओ पुस्तक की आकलन की हिसाब से प्राचीन पटना (पलिबोथा) 9 मील (14.5 कि.मी.) लम्बा तथा 1.75 मील (2.8 कि.मी.) चौड़ा रहल होई।

आधुनिक पटना बिहार राज्य क राजधानी ह आ गंगा नदी की दक्षिणी किनारा पर अवस्थित बा। सोलह लाख (16,00,000) से अधिक आवादी वाला ई शहर, लगभग 15 कि.मी. लम्बा आ 7 कि.मी. चौड़ा बाटे।

प्राचीन बौद्ध आ जैन तीर्थस्थल वैशाली, राजगीर या राजगृह, नालन्दा, बोधगया अउरी पावापुरी पटना शहर की आसे-पास बाड़ें। पटना सिक्ख लोगन खातिर पवित्र अस्थान हवे। सिक्ख लोगन क 10वें आ अंतिम गुरु गुरू गोबिंद सिंह क जन्म एहिजा भइल रहे| हर बरिस देश-विदेश से लाखन गो सिक्ख श्रद्धालु पटना में हरमंदिर साहब क दर्शन करे आवेला लोग आ मत्था टेकेला लोग।

एतिहासिक आ प्रशासनिक महत्व की अलावा पटना शिक्षा आ चिकित्सा क भी प्रमुख केंद्र हवे। देवारिन से घिरल नगर क पुराना क्षेत्र, जेवना के पटना सिटी कहल जाला अगो प्रमुख वाणिज्यिक केन्द्र हवे।

पूर्वी भारत में कोलकाता की बाद पटना दूसर सबसे बड़ शहर ह। 2011 में 16 लाख से ज्यादा आबादी की साथ ही भारत क 19वां सबसे बड़ शहर रहे। एईजा पटना हाई कोर्ट आइल बा।

ए शहर क नांव वक्त गुजरले की साथ बदल गईल। ई भारत क प्राचीन शहरन में से एगो ह, पटना की आधुनिक नांव की साथ कईगो किवंदती जुडल बा, जैसे की,

पटना क महत्व शोभा 490 ई॰पू॰ सामने आइल जब अजातशत्रु, जे मगध क राजा रहन, वैशाली की लिच्छवी समुदाय पर युद्ध में फायदा खातिर आपन राजधानी पहाड़ी राजगढ़ (अब राजगीर) से एगो रणनीतिक रूप से फायदा वाला जगह पर ले जईले क तय कईन। गौतम बुद्ध अपनी जीवन की आखिरी बरस में ए जगह पर यात्रा कईलें रहन ऐसन कहल जाला।

मेगास्थिनस एगो ग्रीक इतिहासकार जवन की चन्द्रगुप्त मौर्य की दरबार में राजदूत रहे, ए शहर क एगो प्राचीन विवरण दिहले बा। उ लिखेला की ई शहर गंगा आ सोनभद्र की संगम तट प बसल रहे, आ 14 किमी लम्बा आ 2.82 किमी चौड़ा रहे। मेगास्थिनस ए शहर के भारत की सफलतम समय में धरती क एगो महान शहर बतवले रहे। बाद में इ शहर शुंगा समुदाय की हाथ में गईल जे पाटलिपुत्र प 100 वरस ले राज कईने।

आगे की सालन में, कई शासक ए देश पर राज कईने जवने में गुप्ता और पाला राजा रहें। गुप्ता शासकन से अलग होखले की बाद पटना एगो अनिश्चित समय से गुजरल। बख्तियार खिलजी 12वीं सदी में बिहार प कब्ज़ा क लिहने और एइजा क कई कईगो प्राचीनतम शिक्षा केंद्र के तबाह क दिहने, नतीजतन पटना क राजनितिक और सांस्कृतिक केंद्र होखले क गर्व बिला गईल।

मध्यकाल में पठान सम्राट शेरशाह सूरी क राज इतिहास में यादगार मनाला, ए समय में पटना क ख़ूब विकास भइल।

आजादी आन्दोलन में पटना क लोग बहुत अधिक संख्या में भाग लिहलें। एमें सबसे ज्यादा स्मरणीय चम्पारण और 1942 भारत छोड़ो आन्दोलन रहल। ई शहर कईगो राष्टीय नेता दिहलस, जैसे की स्वामी सहजानंद सरस्वती, पहिला राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्रप्रसाद, लोकनायक जयप्रकाश नारायण इत्यादि।

पटना कॉलेज




#Article 3: भारतीय खाना (270 words)


भारतीय खाना, परंपरागत आ नाया जमाना के, एह बड़हन आकार के देस में अलग-अलग इलाका आ क्षेत्र अनुसार बहुत बिबिधता वाला बा। इहाँ के हावा-पानी, माटी, बनस्पति नियर चीज में ब्यापक बिबिधता आ कई किसिम के सांस्कृतिक परभाव इहाँ के खाना पर लउके लें। धर्म आ सामाजिक मान्यता सभ के भी एहिजा के भोजन पर परभाव देखे के मिले ला। उत्तर भारत के खानपान पर जहाँ मुगल राज में ईरानी आ तुर्की के संस्कृति के परभाव पड़ल ओहीजे नाया समय में जेङने पूरा दुनिया में चाइनीज खाना के बिस्तार भइल बा इहाँ भी ई खाना सभ पापुलर हो रहल बाड़ें। कुल मिला के, भारतीय खानपान में लगातार बदलाव भइल बा आ अभिन भी हो रहल बा।

जहाँ एक ओर एहिजा के भूगोल के परभाव खाना पर लउके ला, बिबिध किसिम के बनस्पति आ मसाला के क्षेत्र एकरा में सभसे आगे बाड़ें, ओहीजे इतिहास में भइल हमला, ब्यापारिक संबंध आ बिदेसी मूल के शासक लोग के शासन के परभाव भी देखे में आवेला। नाया समय में, बैस्वीकरण आ पच्छिमी संस्कृति के परभाव, चीनी खाना आ अउरी बिबिध किसिम के परभाव इहाँ के खानपान पर बा।

आमतौर पर उत्तर भारतीय, पच्छिमी भारतीय, दक्खिन भारतीय आ पूरबी आ पूर्वोत्तर के खाना अलग-अलग किसिम के होला। एह जनरल बँटवारा के बादो, लगभग हर प्रदेश के खाना के कुछ न कुछ आपन ख़ास बिसेस्ता भी बा।

भारतीय खाना भारत से बहरें कई देसन में पापुलर बा। जहाँ-जहाँ इहाँ के लोग परवास कइल, चाहे अंगरेज लोग के समय में भा बाद के समकालीन जुग में, ओहिजा इहाँ के खाना भी चहुँपल। ब्रिटेन, अमेरिका आ सिंगापुर नियर देस सभ में भारतीय खाना खियावे वाला रेस्तरां मिल जइहें।




#Article 4: नेपाल भाषा (396 words)


नेपाल भाषा या नेवारी () नेपाल मे बोलल जाए वाली भाषा बाटे| ई भाषा चिनी-तिब्बती भाषा परिवार अन्तर्गत तिब्बती-बर्मेली समुह मे संयोजित ह।

यह भाषा चीनी-तिब्बती भाषा परिवार के अन्तर्गत तिब्बती-बर्मेली समुह मे संयोजित बा।

नेपाल भाषा कई ठे लिपि सभ में लिखल जाले, हालाँकि, ई सगरी बायें से दहिने लिखल जाए वाली लिपि हई सँ। नीचे इनहन के लिस्ट दिहल जात बा:

नेपाल भाषा काठमाडौं क मौलिक भाषा ह। एकर उत्पत्ति काठमाडौं मे भइल। काठमाडौं मे किरांत शासन के समय मे ए भाषा पर किरांती भाषा क प्रभाव परल। तिब्बत से सदियन ले ब्यापार के कारन ए भाषा में तिब्बती भाषा के परभाव लउके ला। लिच्छवी काल आ मल्ल काल मे संस्कृत भाषा का प्रभाव ए भाषा मे लउके लागल।

तिब्बती-बर्मेली भाषा परिवार क भाषा होखले के बावजूद सालन ले भारोपेली भाषा के साथ रहल संबंध नेपाल भाषा की स्वरूप के, बिसेस रूप से नामपद के, थोडा भारोपेली जइसन बना दिहले बा।

नेपाली मिडिया मे निजि क्षेत्र के संलग्नता से ए भाषा मे बिकास आ सुधार भइल बा।

नेपाल भाषा साहित्य की सुरुवात क कौनों इतिहासी प्रमाण नइखे| एकर बिकास आ बिस्तार लिच्छवी आ मल्ल काल भइले के तथ्य के पुष्टि ओह जमाना के रचित विभिन्न नाटक, गीत, काव्य आ तत्कालीन शिलालेख सब से होला।

नेपाल भाषा के महाकवि सिध्दिदास महाजु हवें।

नीचे नेपाल भाषा क कुछ शब्द आ वाक्य दिहल जात बा; बगल में भोजपुरी समानार्थी भी दिहल गइल बा:

please correct some part regarding its scripts. It is not written in devnagari script. It is after the suppression and bandage to this language for more than 200 years that the new generation do not know its scripts; which resulted in the new generation newa people to write in devnagari script. Please also write that nepal language is the original nepali language. The khas language changed its name to parbate around 16th century, it change its name to gorkhali in around 17th century. After the first world war, the rana prime minister chandra shumsher changed the name of gorkhali language to Nepali, and ranamed the original Nepali to Newari. The present Nepali language doesn't have its originality. Whatever was written above about the influence of Nepali to Nepal language is actually opposite. Even the most common words like door, window in the present Nepali(khas) is taken from Nepal language. I hope whoever knows the Bhojpuri language will correct this page what I have written.




#Article 5: नेपाल (3049 words)


नेपाल संविधान के हिसाब से आधिकारिक रूप से संघिय लोकतांत्रिक गणतंत्र नेपाल कहल जायेला, इ दक्षिण एशिया में एगो भूपरिवेष्ठित या स्थलरुद्ध हिमालयी राष्ट्र ह। नेपाल भूगोलीय रूप से एगो सुन्दर देश ह। नेपाल एगो बहुभाषिक, बहुसांस्कृतिक देश ह। नेपाल में नेपाली भाषा के आलावा हिंदी, भोजपुरी, मगही, थारु, मैथिली, अवधी आदि भाषा भी बोलल जायेला। नेपाल के भूगोलीय अवस्थिती अक्षांश 26 डिग्री 22 मिनट से 30 डिग्री 27 मिनट उत्तर और 80 डिग्री 4 मिनट से 88 डिग्री 12 मिनट पूर्वी देशान्तर तक फैलल बा। इ देश के कुल क्षेत्रफल 1,47,516 वर्ग किमी बा। इ क्षेत्रफल पृथ्वी के कुल क्षेत्रफल के हिसाब से 0.03% अउर एशिया महाद्वीप के हिसाब से 0.3% बा । लन्दन स्थित ग्रीनवीच मिनटाइम से पूर्वतर्फ रहला के कारण गौरीशंकर हिमालय नजदिक होके गईल 86 डिग्री 15 मिनेट पूर्वी देशान्तर के आधार पर नेपाल के प्रमाणिक समय 5 घण्टा 45 मिनट रखल गईल बा।

नेपाल के पूर्वी सीमा से पश्चिमी सीमा तक नेपाल के कुल लंबाई 885 कि.मि बा अउर उत्तर से दक्षिण के चौड़ाई एक बराबर नइखे। नेपाल के पूर्वी हिस्सा के अपेक्षा पश्चिमी हिस्सा अधिक चौड़ा बा वैसे मध्य भाग तनिक सिकुड़ल बा अर्थात एकर अधिकतम चौड़ाई 241 किमी आ न्युनतम चौड़ाई 145 किमी बा। ए प्रकार से नेपाल के औसत चौड़ाई 193 किमी बा। नेपाल के उत्तर में चीन के स्वशासित क्षेत्र तिब्बत पड़ेला आ दक्षिण, पूरब आ पश्चिम तीन तरफ से भारत पड़ेला। नेपाल के 85% से अधिक नागरिक हिन्दू धर्म मानेला लोग। इ प्रतिशत भारत के प्रतिशत से अधिक बा, एही से नेपाल विश्व के सबसे अधिक प्रतिशत हिन्दू धर्म माने वालन के देश ह। एगो छोट देश नेपाल के भूगोलीय विविधता बहुत उल्लेखनीय बा। अहिजा तराई के उष्ण फाँट बा त हिमालय के खूब ठंडा क्षेत्र भी अवस्थित बा। संसार के सबसे ऊँच 14 गो शिखर में से आठ गो ऊँच शिखर नेपाल में पड़ेला, जे में संसार के सबसे ऊँच शिखर एवेरेस्ट (जे के नेपाली भाषा में सगरमाथा कहल जायेला) नेपाल आ चीन के सीमा पर स्थित बा। नेपाल के राजधानी आ सब से बड़ शहर काठमांडू ह। काठमांडू, ललितपुर आ भक्तपुर इ तीन गो शहर कुल काठमांडू घाटी में पड़ेला। नेपाल के अन्य प्रमुख शहरन में बा भरतपुर, बिराटनगर, भैरहवा, वीरगञ्ज, जनकपुर, पोखरा, नेपालगञ्ज आ महेन्द्रनगर।

एगो राजतंत्र के रूप में, इतिहास में इ देश पर शाह राजवंश सब से अधिक समय तक शासन कइले बा - 1768 (जवना घड़ी पृथ्वीनारायण शाह छोट छोट राज्यन के एकीकृत करे के शुरू कइलन) से लेकर के 2008 तक।
नेपाल के कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा एक सदी तक कइल गईल जन युद्ध, लगभग नेपाल के सब बड़हन पार्टी द्वारा कई सप्ताह तक चलल आंदोलन राजा के झुके पर मजबूर कर दिहलस आ 22 नवम्बर 2005 के 12 बिंदु पर सहमति खातिर राजा के तैयार होखे के पड़ल। 28 मई 2008 के नेपाल में प्रथम संबिधान सभा खातिर चुनाव भइल जे में लोग के मत रहल की राजतंत्र के खतम कर के बहुपार्टी प्रणाली के अन्तगर्त संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र के स्थापना होखे।

लगातार नेता कुल के कलह के कारण पहिलका संबिधान सभा के चुनाव के बाद भी संबिधान ना बन पावल आ तारीख खतम हो गईल। 2013 में   फेर दूसरा हाली मतदान भइल आ देर सबेर संबिधान बन गइल। 20 सितम्बर 2015 के नयका संविधान बनला के साथ लागू हो गईल।

नेपाल एगो विकाशसिल देश ह जहाँ बहुत कम आर्थिक आय बा, मानव विकास सूचकांक के 2014 के रिपोर्ट के अनुसार नेपाल के न्यूनतम आय दर नेपाल के 187 गो देश में से नेपाल के 145वां स्थान पर रखत बा। इ देश लगातार गरीबी आ उच्च स्तर के खाना के कमी से लड़ रहल बा। एतना कुछ के बावजूद भी इ देश तनी विकास दर में सुधार लईले बा, अहिजा के सरकार के कहनाम बा की साल 2022 तक देश के कम से कम विकसित राष्ट्र बना लियाई।

हिमालय क्षेत्र में मानव जाती के बसाई कम से कम 9,000 वर्ष पहिले से ही शुरू हो गईल रहल इ बात के पुष्टि काठमाण्डौ घाटी में पावल गईल प्राचीन औजार सभ से भइल बा।
सम्भवत: तिब्बती-बर्मी मूल के लोग नेपाल में लगभग 3,500 वर्ष पहिले ही से आ चुकल रहल लोग।

ईशा पूर्व 2500 में इन्डो-आर्यन समूह के लोग घाटी में प्रवेश कइले रहल लोग। करीब ईशा पूर्व 1000 वर्ष अहिजा छोट छोट राज्य के गठन होखे लागल। सिद्धार्थ गौतम (ईशा पूर्व 563–483) अइसही एगो वंश, शाक्य वंश के राजकुमार रहले, जे आपन राज-काज त्याग के तपस्वी के जीवन अपना लिहलें, पाछे बुद्ध के नाम से प्रसिद्द हो गइलें। 
ईशा पूर्व 250 तक, इ क्षेत्र में उत्तर भारत के मौर्य साम्राज्य के प्रभाव पड़ल आ बाद में चौथा शताब्दी में गुप्त साम्राज्य के अधीन इ क्षेत्र भइल रहल। इ क्षेत्र में 5वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध मे लिच्छवीवंश नेपाल मे शासन कइले। 8वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में लिच्छवी शासन के अंत हो गइल आ 879 से नेवार युग के उदय घाटी क्षेत्र में भइल। 11वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में दक्षिण भारत से आइल चालुक्य साम्राज्य के प्रभाव नेपाल के दक्षिणी भूभाग में पड़ल। चालुक्यन के प्रभाव में बुद्ध धर्म के बदले हिन्दू धर्म के अधिक प्रसार भइल। नेपाल में हिन्दू धर्म के तरफ लोग अधिक आकर्षित भइलें।

तिब्बत के साथे हिमालयी रास्ता के नियन्त्रण खातिर भईल विवाद आ ओकरी बाद भईल लड़ाई में चीन तिब्बत के सहायता खातिर आइल जेसे नेपाल के पाछे हटे के पड़ल। नेपाल के सीमा नजदीक के छोट-छोट राज्य सभ के नेपाल में एकीकरण कइला के चक्कर मे ब्रिटिस इस्ट इण्डिया कम्पनि संगे दुश्मनी शुरू हो गईल नतीजतन अंग्रेज-नेपाल युद्ध (1814–16) भइल, जे में नेपाल के आपन एक तिहाई भू-भाग सुगौली संधि के स्वरूप में अंग्रेजवन के देवे के पड़ गईल। ई संधि से पहिले मेची नदी] से ले के पूरब में तिष्टा नदी के बीच के सारा हिस्सा पर नेपाल के नियंत्रण रहल। पश्चिम में महाकाली नदी से पश्चिम सतलुज नदी के बीच के हिस्सा गुमावे के पड़ल। ई हिस्सा में हाल के उत्तराखंड राज्य, हाल के हिमाचल प्रदेश के हिस्सा के साथ कुछ पंजाबी पहाड़ी हिस्सा रहल। सुगौली संधि में नेपाल के कुछ तराई हिस्सा भी गँवावे के पड़ल रहे लेकिन अंग्रेज लोग दु बार में तराई के हिस्सा फिर से नेपाल के वापस कर दिहल लोग।

राज परिवार के बीच गुटबन्दि के चलते युद्ध के बाद अस्थायित्व कायम हो गईल। सन 1846 में शासन पर विराजमान रानी के सेनानायक जङ्गबहादुर राणा के पदच्युत करे के षडयन्त्र के खुलासा भईल। एहि बीच दरबार हत्याकांड हो गइल। हतियारधारी सेना आ रानी के प्रति वफादार भाइ-भतीजा के बीच मारकाट भइला से देश के सैकड़ों राजपरिवार, कुलीनवर्ग आ रजवाड़ा सभ के शासक लोग के हत्या भइल। जंगबहादुर के जितला पर राणा शासन शुरू भईल।  राजा के नाममात्र में सिमित कर दिहल गईल आ प्रधानमन्त्री पद के शक्तिशाली बनावल गईल। राणा लोग पूरा निष्ठा के साथ ब्रिटिश लोग के पक्ष में रहले। राणा शासक भारत में राज कर रहल ब्रिटिश के हर तरह से मदद करत रहले। राणा शासन 1857 के सिपाही विद्रोह (प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम) के दबावे में अंग्रेजवन के सैन्य मदद कईले आ पाछे दुनो विश्वयुद्ध में अंग्रेज लोग के सैन्य मदद कईले रहले। सन् 1923 में यूनाइटेड किंगडम आ नेपाल के बीच आधिकारिक रूप में मित्रता के समझौता पर हस्ताक्षर भइल, समझौता के स्वरूप यूनाइटेड किंगडम नेपाल के संप्रभु आ स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्वीकार कइलस।

राजा बीरेन्द्र १९९० में नेपाल के इतिहास में दूसरका प्रजातन्त्रिक बहुदलीय संविधान जारी कईले आ अन्तरिम सरकार के संसद खातिर प्रजातान्त्रिक चुनाव करवइले। नेपाली कांग्रेस राष्ट्र के दूसरका प्रजातन्त्रिक चुनाव में बहुमत प्राप्त कइलस आ गिरिजा प्रसाद कोइराला प्रधानमन्त्री बनले।

एक्कइसवीं सदी के आरम्भ से नेपाल में माओवादियन के आन्दोलन तेज होत गईल। मधेशियन के मुद्दो पर आन्दोलन भईल। अन्त में सन् 2008 में राजा ज्ञानेन्द्र प्रजातांत्रिक चुनाव करवइले जे में माओवादियन के बहुमत मिलल आ प्रचण्ड नेपाल के प्रधानमंत्री बनले आ नेपाली कांग्रेस के नेता रामबरन यादव राष्ट्रपति के पद संभलले।

नेपाल मोेट तौर पर समलम्बाकार आकार के,  लमहर आ  चौड़ाई में बा, जेकर क्षेत्रफल बा । तुलनात्मक आकार देखे खातिर देखीं आकार के हिसाब से भूखंड। ई 26° आ 31°N उत्तरी अक्षांश आ 80° आ 89°E पूरबी देशांतर पर स्थित बा।

नेपाल सामान्य तौर पर तीन भौगोलिक क्षेत्र में बँटल बा: हिमालय, पहाड़ आ तराई। पारिस्थितिक पट्टी पूरब से पछिम ले गईल बा आ उत्तर से दखिन की ओर कई गो नदी सभ बहेला जवन देश के कइयों उपखंड में बँटले बा।

दखिन के सपाट निम्नभूमि या तराई जवन भारतीय सीमा से सटल बा इंडो-गंगा सपाट भूमि के हिस्सा ह। तराई एगो निम्नभूमि क्षेत्र ह जेमें कुछ पहाड़ी श्रृंखला भी पड़ेला। ई क्षेत्र में हिमालय से बह के तीन गो मुख्य नदी सभ: कोशी, नारायणी आ कर्णाली आवेला जवन इ क्षेत्र के निर्माण कइले रहल। स्थायी हिमरेखा से भी नीचे के कुछ छोट नदी कुल बाड़ी सन जवन इ में सहायता कइली सन। ई क्षेत्र में उपोष्णकटिबंधीय से लेके उष्णकटिबंधीय तक के जलवायु पावल जाला। सब से बाहरी तलहटी वाला पहाड़ी शिवालिक या चुरिया कहाला। एकर ऊंचाई  तक बा, जहां आके गंगा समतलीय भूमि के सीमा खत्म हो जाला, हालांकि चौड़ा निम्न घाटी बाड़ी सन जवन भीतरी तराई कहाला ई क्षेत्र के उत्तर में पड़ेला।

पहाड़ी क्षेत्र शिवालिक के उत्तरी क्षेत्र से शुरू होखेला जवन महाभारत कहाला। सामान्यतः पहाड़ी क्षेत्र पर हिम या बरफ के मौजूदगी ना दिखेला। एकर ऊंचाई  तक बा। अहिजा  से   तक के जलवायु अल्पाइन होखेला। निम्न हिमालयी श्रृंखला  के दखिन के क्षेत्र पहाड़ क्षेत्र के सीमा ह, जँहवा उपोष्णकटिबंधीय नदी घाटी आ पहाड़ ई श्रृंखला के उत्तर में समानांतर बा। घाटी क्षेत्र में जनसंख्या घनत्व अधिक बा लेकिन  से कम रहेला आ  ऊंचाई पर जनसंख्या बिल्कुले कम रहेला, जहां जाड़ा के दिन में कभी कभार हिम पड़ेला। 

हिमाल या हिमालय उ क्षेत्र ह जँहवा सालों भर हिम या बरफ पड़ेला। ई क्षेत्र नेपाल के सबसे दखिन के हिस्सा ह। हिमालय के ऊंचाई दुनिया में सभन से ऊंचा बा जेमे माउंट एवरेस्ट (नेपाली में सगरमाथा) जेकर ऊंचाई  भी पड़ेला। ई चीन के सीमा नजदीक बा। दुनिया के सबसे ऊँच चोटी अठ-हजरिया में से सात गो सबसे ऊँच चोटी नेपाल में बा, चीन सीमा से सटले। उ सात चोटी के नाम: ल्होत्से, मकालू, चोयु, कंचनजंघा, धौलागिरी, अन्नपूर्णा आ मनास्लु ह।

नेपाल में 5 गो जलवायु क्षेत्र बा, मोटा तौर पर ई ऊंचाई के हिसाब से बा। उष्णकटिबंधीय आ उपोष्णकटिबंधीय  से नीचे रहेला, शीतोष्ण क्षेत्र  पर, ठंडा क्षेत्र  पर, उपआर्कटिक क्षेत्र  पर, आ आर्कटिक क्षेत्र  से ऊपर के क्षेत्र ह।

नेपाल में 5 गो मौसम होखेला: गर्मी, बरसात, पतझड़, शरद आ बसंत. शरद ऋतु में मध्य एशिया से आवे आला ठंडा हवा के हिमालय आवे से रोक देला आ मानसून के उत्तरी हवा आवरण के सीमा बनावेला। जँहवा पहिले घना जंगल रहे उ क्षेत्र में अंधाधुंध पेड़ के कटाई से लगभ हर क्षेत्र में मुख्य परेशानी बनल बा, जे से भूक्षय (माटी में कटाव) आ पारितंत्र (इकोसिस्टम) में गिरावट दर्ज हो रहल बा।

नेपाल पर्वतारोहण खातिर प्रसिद्ध बा, जहां दुनिया के सभन से ऊँच आ कठिन चढ़ाई वाला कुछ पर्वत बाड़ी सन, जे में माउंट एवरेस्ट भी एगो ह। तकनीकी तौर पर, दखिन-पूरबी पर्वत (ढलान वाला साइड) नेपाल ओर बा जवन चढ़े में आसान होखेला, एहि से अधिकांश पर्वतारोही लोग एवरेस्ट आरोहण करे खातिर नेपाल ओर कूच करेले जा।

नेपाल में एलेविशन (समुद्र तल से जमीन के ऊंचाई) में असमानता नाटकीय ढंग से अलग अलग पावल जाला एहि से ओहिजा के बायोम (पेड़-पौधा सभ) में भी विविधता देखल जा सकत बा, उष्णकटिबंधीय सवाना भारतीय सीमा के लगे देखल जा सकत बा त, उपोष्णकटिबंधीय चौड़ा पत्ता आ शंकुधारी जंगल पहाड़ी क्षेत्र पर देखल जा सकत बा, सम शीतोष्ण चौड़ा पत्ता वाला आ शंकुधारी जंगल हिमालय के ढलानी क्षेत्र पर देखल जा सकत बा त, पर्वतीय घास के मैदान आ श्रबलैंड (झाड़ी प्रधान क्षेत्र), चट्टान आ हिम सबसे उच्च एलेविशन पर देखल जा सकत बा।

निम्न एलिवेशन पर तराई-डुआर सवाना आ घास के मैदान इकोरीजन बा। ई इकोरीजन सभ हिमालयी उपोष्णकटिबंधीय चौड़ा पत्ता वाला जंगल के साथ मोज़ेक (mosaic) बनावेला, जवन  पर होखेला जवन भीतरी तराई घाटी में भी दिखेला। हिमालयी उपोष्णकटिबंधीय देवदार के जंगल  पर बा।

ई एलिवेशन से ऊपर नेपाल के जैवभूगोल पूरब आ पछिम में गंडकी नदी द्वारा बँटल बा। पूरब के इकोरीजन में अधिक तेजी बा एहि से ई क्षेत्र अधिक प्रजातियुक्त बा। पछिम के इकोरीजन सुक्खा आ कम प्रजातियुक्त क्षेत्र बा।

 के क्षेत्र पर शीतोष्ण चौड़ा पत्ता वाला जंगल बा: पूरबी आ पछिमी जंगल।  पर पूरबी आ पछिमी उपक्षेत्रीय पर्वत पर शंकुधारी पत्ता वाला जंगल बा आ  तक पर पूरबी आ पछिमी हिमालयी पर्वतीय झाड़ी आ घास के क्षेत्र बा।

नेपाल के राजनीति में पिछला दु दशक में जबरदस्त बदलाव देखल गईल बा। 1990 तक नेपाल एगो राजतंत्र रहल जेकर कार्यकारी अधिकार पर राजा के नियंत्रण रहल। 1990 में राजा के कम्युनिस्ट सभ के आंदोलन के सामना करे के पड़ल। कम्युनिस्ट सभ के आंदोलन एकाधिपत्य राजतंत्र के खिलाफ रहे। 1990 में राजा बड़ी मात्रा में राजनीतिक सुधार करे खातिर राजी हो गईलन आ संसदीय राजतंत्र के स्थापना भईल। ई में राजा राज्य के प्रमुख आ प्रधानमंत्री के सरकार के प्रमुख बनावल गईल।

अप्रिल 2006 के आंदोलन नेपाल के शासन में बदलाव लाईल: एगो अंतरिम संविधान लावल गईल, जेमे राजा के शक्ति के खत्म कर दिहल गईल आ एगो अंतरिम प्रतिनिधि सभा के गठन भईल जेमे माओवादी सदस्यन के प्रवेश मिल गईल, जब नयकी सरकार माओवादी विद्रोहीयन के साथ शांति वार्ता करे में सफल भईल। अप्रिल 2007 में नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) नेपाल के अंतरिम सरकार में शामिल हो गइल।

दिसम्बर 2007 में अंतरिम संसद द्वारा एगो बिल पास भईल जे से  
नेपाल संघीय गणराज्य बन गईल, एकरा बाद नेपाल के प्रमुख अब राष्ट्रपति हो गईले। संविधान सभा खातिर चुनाव 10 अप्रिल 2008 के भईल; माओवादी पार्टी चुनाव के नतीजा आवला के बाद मुख्य पार्टी बन के आइल लेकिन बहुमत प्राप्त ना कर पवलस। नया संसद आपन पहिलका मीटिंग में 2007 के बिल भारी बहुमत से अपनवलस, आ राजा ज्ञानेन्द्र के 15 दिन दियाईल सेंट्रल काठमांडू के महल खाली करे खातिर। 11 जून के उ महल खाली कर दिहलन।

संविधान सभा खातिर 10 अप्रिल 2008 के चुनाव भईल आ 601 सदस्य वाला एकसदनीय संसद के स्थापना भईल। 28 मई 2008 से 27 मई 2012 ले संसद चलल, दु साल के अंदर संविधान बनावे के प्रतिज्ञा के साथ शुरू भईल संसद चार साल में भी संविधान तैयार ना कर पवलस अंततः 27 मई 2012 के पहिलका संविधान सभा भंग कर दिहल गईल।

कृषि 76% कर्मचारियन के रोजगार मुहैया करवले बा, सेवा क्षेत्र 18% आ निर्माण-उत्पादन आ शिल्प आधारित उद्योग 6%. कृषि उत्पादन – ज्यादातर खेती तराई क्षेत्र जवन भारतीय सीमा क्षेत्र से सटल बा में होऽला – चाय, धान, मकई, गेंहू, ऊख (गन्ना), कन्द-मूल, दूध आ जल भैंस के मांस। उद्योग मुख्यतः कृषि उत्पादित क्षेत्र के संचालन में आधारित बा जइसे की जूट, ऊख, तम्बाकू आ अन्न। कृषि-धंधा में व्यस्त लगभग 1 करोड़ कर्मचारियन में चरम कुशल अभाव के कमी बा।

नेपाल के आर्थिक वृद्धि राजनीतिक अनिश्चितता के चलते प्रतिकूल रूप से प्रभावित बा। तबो, वास्तविक जीडीपी वृद्धि 2011-2012 खातिर लगभग 5 प्रतिशत तक बढ़े के अनुमान लगावल गईल रहल। 2010-2011 में इ 3.5 प्रतिशत जीडीपी के वृद्धि में सुधार ह आ संघर्ष विराम के बाद इ दुसरका सब से बड़ वृद्धि दर ह। विकास के स्रोत सभ में कृषि, निर्माण, वित्तीय अउर दूसर सेवा कुल भी शामिल बाड़ी सन। रेमिटेंस (विदेश से भेजल पइसा-रुपया) के चलते 2010/2011 में तेल के आयात से वृद्धि दर में होखे वाला नुक्सान के रोक दिहले बा। जबकि 2010/2011 में रेमिटेंस वृद्धि 11 प्रतिशत (नेपाली रुपया में) धीमा हो गइल, तब से वृद्धि दर  बढ़ के 37 प्रतिशत हो गइल बा। रेमिटेंस लगभग जीडीपी के 25-30 प्रतिशत के बराबर होखे के अनुमान बा। मुद्रास्फीति के तीन साल के निम्नतम 7 प्रतिशत तक घटा दिहल गइल बा। 

नेपाल सात प्रदेश आ सतहत्तर जिला कुल में बँटल बा।

नेपाल सांस्कृतिक बिबिधता स भरल  देश बा। कोई संस्कृति तिब्बत व कोई भारतसँग मिलतजुलत बाटे। यहाँका भेषभूषा, भाषा तथा पकवान जादा समानतापाइल जाला।

नेपाल के राष्ट्रीय चिरई हिमालयी मोनल हवे।

नेपालके सामान्य खाना  दाल, भात, तरकारी, अचार ह। इस प्रकारका खाना एक दाइ बिहान व एक दाइ रातमे कइके दिनके दुई पटक खायाजाला। य खानेके बीचमे चूरा और चायका सेवन भि कैलजाला। समय-समयमे माछा, मासु, अण्डा आदिका सेवन भि करलजाला। हिमाली भेगमे गहुँ, मकै , कोदो, आलु आदिका खाना होवेला वैसे तराईमे गहुँका रोटीका प्रचलन जादा बा। कोदोका मादक पदार्थ तोङ्गबा, छ्याङ, रक्सी आदिका सेवन हिमाली भेगमे जादा होला। नेवार समुदाय अपने विशेष किसिमकके नेवारी परिकार सेवन करेले।

नेपालमे आधुनीक शिक्षाके शुरूवात राणा प्रधानमन्त्री जंग बहादुर राणाके बेलायत यात्राके बाद सन् 1982 मे स्थापीत दरबार हाइस्कुल (हाल रानीपोखरी किनारके भानु मा.बि। )से भइल ह। एकर पहले नेपालमे मात्र कुछ धर्मशास्त्रीय दर्सनमे आधारीत शिक्षा देअलजातरहे । आधुनीक शिक्षाका शुरूवात 1982 मे भैलेपरभि यि आम नेपाली जनताके खातिर सर्वशुलभ नहीरहल । बाकीर देशका बिभिन्न भागमे कुछ बिधालय दरवार हाइस्कुलका शुरूवात साथे खुल्ना शुरूभैल । परन्तु नेपालमे पहिला उच्च शिक्षा केन्द्र  काठमान्डौमे रहल त्रिचन्द्र क्याम्पस ह । राणा प्रधानमन्त्री चन्द्र सम्सेर अपनेसाथ राजा त्रिभुवनका नाम जोडके इस क्याम्पसका नाम रखलेरहले। यि क्याम्पसके स्थापना भैलेपर नेपालमे उच्च शिक्षा आर्जन बहुत सहज होखेलागल रहे परन्तु सन 1959 तक भि देश मे यक्को  विश्वविधालय स्थापना होवे नाइसकल रहे, राजनितीक परिवर्तन भैलेपर राणा शासन मुक्त देश अन्तत 1959मा त्रिभुवन विश्वविधालयको स्थापना कैलस ।वकरपाछे 1984मे  महेन्द्र संस्कृतका साथ अन्य विश्वविधालय भि खुलते चलगैले। हालहीमे मात्र सरकार 4 नया विश्वविधालय भि खोलेको  घोषणा कैले बा। नेपालके शिक्षा का सबसे  मुख्य योजनाकार शिक्षामन्त्रालय ह त्यस बाहेक  शिक्षा विभाग, 5 क्षेत्रीय शिक्षा निर्देसनालय, 75 जिल्ला शिक्षा कार्यालय , परिक्षा नियन्त्रण कार्यालय सानोठिमी, उच्चमाध्यामीक शिक्षा परिषद,पाठ्यक्रम बिकास केन्द्र, बिभिन्न विश्वविधालयका परिक्षा नियन्त्रण कार्यालय शिक्षाके बिकास बिश्तार तथा नियन्त्रणके क्षेत्रमे कार्यरत बाने ।

नेपालका विश्वविधालय

त्रिभुवन विश्वविधालय 

महेन्द्र संस्कृत विश्वविधालय (हाल नेपाल संस्कृत बनाइलगैलबा )

काठमाडौं विश्वविधालय

पुर्वान्चल विश्वविधालय

पोखरा विश्वविधालय

लुम्वीनी विश्वविधालय

नेपाल कृषी तथा वन विश्वविधालय (निकट भविश्यमे स्थापना कैलजायी)

मध्यपस्चिमाञ्चल विश्वविधालय(निकट भविश्यमे स्थापना कैलजायी)

सुदुरपस्चीमाञ्चल विश्वविधालय

डोटी जिल्लाके दिपायल वा कैलालीमे उपकुलपतीका कार्यालय राखके सुदुरपस्चीमाञ्चल बिकासक्षेत्र भर क्याम्पस बिस्तार करलजायी । यि विश्वविधालय भि क्षेत्रीय विश्वविधालयके अवधारणा अनुरूप खोले लागल ह ।

खुल्ला विश्वविधालय

सरकार खुला विश्वविधालयका विश्वभर सफल अवधारणा नेपालमे भि कार्यान्वयन करेके नेपालमे खुल्ला विश्वविधालय खोलेको घोषणा कैलेबा।

नेपालमे बहुत पहिलासे आयुर्वेद, प्राकृतीक चिकित्सा पद्धती उपयोगमा रहलरहे बैध व परंपरागत चिकित्सक  गाँवघर सहरमे श्वास्थ सेवा चलावल रहले, वकैनके औषधीका श्रोत नेपालके हिमाल से तराइ तक मिलेवाला जडीबुटी रहल करते। आधुनीक चिकित्सा पद्धतीका शुरूवात राणा प्रधानमन्त्री जंगवहादुर राणाका बेलायत यात्रा बाद दरवारके भितर शुरूहोगैल तब्बोमे नेपालमे आधुनीक चिकित्सा संस्थाके रूपामे राणा प्रधानमन्त्री वीर सम्सेरके कालमे काठामाण्डौमे सन 1889 मा स्थापित वीर अस्पताल हि पहिला अस्पताल बा वकरबाद चन्द्र समसेर के शासन कालमेमे स्थापीत त्रिचन्द्र सैनीक अस्पताल दुसरा रहे, हाल नेपालका अस्पताल सामन्यतया आयुर्वेद,प्रकृतीक चिकीत्सा तथा आधुनीक चिकीत्सा करके  सरकारी सेवा विधमान बा ।

घुमफिर करे खातिर नेपाल दुनियाके दश गो बढिया देश मे पडेला ।




#Article 6: जन गण मन (203 words)


जन गण मन भारत के राष्ट्रगान हवे। ई मूल रूप से बंगाली भाषा में रबींद्रनाथ टैगोर के रचल गइल गीत के हिंदी अनुबाद हवे।

गीत के हिंदी व्अनुबाद के भारत के संबिधान सभा द्वारा 24 जनवरी 1950 के अंगीकार कइल गइल। औपचारिक रूप से एह गीत के गावल (या धुन बजावल) जाला तब लगभग 52 मिनट के समय लागे ला। एकर छोट रूप, पहिली आ आखिरी लाइन भर के भी कब्बो-कबो गावल या बजावल जाला जेवना में २० सेकेंड के समय लागे ला।
सभसे पहिले, आम जनता के सोझा ई गीत 27 दिसंबर 1919 के कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गावल गइल रहे। टैगोर के गीत भारोत भाग्यो बिधाता के शुरूआती पाँच पद एकर मूल बंगाली वर्जन हवें।

ई गीत बंगाली भाषा के साहित्यिक दर्जा भाषा, साधू भाषा में लिखल गइल रहे। गीत में लगभग सगरी शब्द संज्ञा बाने जे क्रिया के भी काम का सकेलें। गीत के ज्यादातर संज्ञा शब्द भारत के सगरी प्रमुख भाषा सभ में इस्तमाल होखे वाला बाने। एही कारण से मूल गीत के लगभग हर इलाका में समझल जा सके ला आ एकर कई भारतीय भाषा सभ में भाषांतर करे पर भी कौनों ख़ास बदलाव ना होला। नीचे दिहल बंगाली आ देवनागरी पाठ में गीत के बोल बाड़ें:




#Article 7: कहावत (131 words)


कहावत भा लोकोक्ति (Proverbs) आम जबान पर चढ़ल वाक्य होखे लें जिनहन के परंपरा अनुसार खास अरथ होला आ कुछ खास दसा में पूरा भाव के एक वाक्य में ब्यक्त करे खाती इस्तेमाल होलें। साहित्य में इनहन के प्रयोग भाषा में गति आ व्यंग दूनों बढ़ावे में सहायक होला।

भोजपुरी कहावत अइसन कहावत बाड़ी जे भोजपुरी भाषा में बाड़ी आ भोजपुरी क्षेत्र के अलावे अन्य अईसन जगहन पर भी चलन मे बाड़ी जहाँ भोजपुरिया लोग बसल बाटे। भोजपुरी क्षेत्र में भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के बस्ती, फैजाबाद, आजमगढ़ जिला के हिस्सा, महाराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बलियाँ, मऊ, गाजीपुर, बनारस, चंदौली आ मिर्जापुर जिला, सोनभद्र जिला के कुछ हिस्सा; बिहार राज्य के सिवान, बेतिया, चम्पारन, छपरा (सारन), मुजफ्फरपुर जिला; झारखंड के रांची पलामू क्षेत्र; आ नेपाल के तराई क्षेत्र के हिस्सा बाटे।




#Article 8: हिंदू धर्म (154 words)


हिंदू धर्म जीवन शैली, भा धर्म बा जौना के माने वाला लोग प्रमुख रूप से दक्खिन एशिया में बा। हिंदू धर्म के दुनियाँ के सभसे पुरान धर्म मानल जाला, आ कुछ अनुयायी आ बिद्वान लोग एकरा के  सनातन धर्म, हमेशा से मौजूद परंपरा भा शास्वत मार्ग के रूप में माने ला जे मानवता के इतिहास से भी पुराना समय से मौजूद होखे। बिद्वान लोग हिंदू धर्म के फ़्यूजन भा संश्लेषण माने ला जेह में कईयन गो भारतीय परंपरा आ रिवाज सभ के मेलजोल भइल होखे, जिनहन के अलग-अलग मूल रहल आ केहू एगो संस्थापक भा प्रवर्तक ना रहल बा। ई हिंदू संश्लेषण वैदिक काल (1500 ईसापूर्व से 500 ईसा पूर्व) के बाद 500 ईपू आ 300 ईसवी के बीच सुरू भइल।

हिंदू शब्द के पैदाइश सिंधु से मानल जाले। फारस के लोग स के उच्चारण ह के रूप में करें। ऊ लोग सिंधु नदी के पूरुब में रहे वाला लोग के हिंदू कहे लागल।




#Article 9: पाकशास्‍त्र (137 words)


इ विकीपीडीया क भोजपुरी हिस्सा हऽ, एसे एकर सुरुआत भोजपुरी भोजन से कइल ठीक रही। ओइसे भोजपुरी छेत्र खुदहीं बहुत बिभिन्न ह लेकिन कुछ पकवान ऐसन हउअं जौन हर जगह समान रूप से पसन्द कइल जालं। ए छेत्र के सबसे पर्सिद्ध एवं जानल मानल पकवान भइलहुं पर बाटी (लिट्टी) चोखा इहां क प्रमुख भोजन नइखे। गांव देहात क अदमी आजो दुन्नो पहर दाल भात चाहे रोटी तरकारी खाइल पसन्द करेलं। देखल जाए त बाटी चोखा एक तरह से रोजाना क भोजन नाहीं बल्कि सामूहिक भोज जादे ह। चार अदमी मिल गइलं, खेत किनारे चाहे कत्तों गोइंठा उपला लेके बैठ गइलं। कहीं से आटा आ गइल त केहू के खेत से आलू भंटा(बैंगन), प्याज लहसुन मंगा गइल। बस बतकही चालू अउर काम सुरू। एह लेख में आप लोगन के ई कुल पकवान बनावे क ठेठ तरीका बतावल जाई।




#Article 10: बिहार (1256 words)


बिहार भारत के एगो  राज्य ह, जवन कि उत्तरी आ पूरबी भारत में स्थित बा,ई  क्षेत्रफल वाला राज्य भारत के तेरहवाँ सबसे बड़ राज्य ह आ जनसंख्या के हिसाब से भारतीय राज्यन में तिसरा नंबर पर बा। बिहार राज्य के सीमा पश्चिम में उत्तर प्रदेश आ उत्तर में नेपाल से सटल बा जबकि पुरुब ओर पच्छिम बंगाल आ दक्खिन में झारखंड से सटल बाटे। बिहार एगो मैदानी राज्य ह, बिहार के मैदान   में पच्छिम से पुरुब बहे वाली गंगा नदी एकरा के दू हिस्सा में बाँटे ली। सांस्कृतिक रूप से बिहार के चार गो क्षेत्रन में बाँटल जाला, अंगिका, मगध, मिथिला आ भोजपुर।

प्राचीन काल में बिहार के सत्ता, शक्ति, अध्ययन आ संस्कृति के केंद्र मानल जाय। मगध में भारत के पहिला साम्राज्य, मौर्य साम्राज्य, के उदय भइल आ दुनिया के प्रसिद्ध धर्म, बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध के कर्मभूमि भी बिहार रहल। मौर्य आ गुप्त बंस के शासन के दौरान मगध साम्राज्य दक्खिनी एशिया के ज्यादातर हिस्सा के एक ठो केन्द्रीय सत्ता में बान्हे के काम कइलस। बिहार के अन्य क्षेत्र मिथिला प्राचीन काल में विदेह राज के हिस्सा रहल आ ब्राह्मण लोग के ज्ञान खातिर आ अध्ययन केंद्र के रूप में परसिद्ध रहल।

बिहार के महातम ना केवल अभिए बल्कि बहुत पहिले से हवे। प्राचीन भारत में लगभग 475 ई. तक यानि गुप्त वंश तक जेतना भी राजा भइलन उनकर बिहारे एगो राज्य रहल औरी जवन अपना ओर सभेके लुभवलस। एकर प्रमाण उ लोग के राजधानी से लगावल जा सकेला। पुरनका बिहार जेकरा में अंग (पूरबी बिहार), बिदेह (उत्तर बिहार), मगध (दखिन बिहार) अउर  वैशाली/लिच्छवी (उत्तर बिहार) शामिल रहे, उ पुरनका भारत में शक्ति, ज्ञान अउर संस्कृति के केंद्र रहल। मगध से भारत के पहिलका सबसे महान साम्राज्य उभरल, जेकरा के सभे मौर्य साम्राज्य के नाम से जानत बा, उ संसार के वोह साम्राज्यन में रहे, जवन कि धरम का पालन करत रहे। मगध साम्राज्य पूरा दखिनी एशिया को एक राज के अन्दर कइले रहे। एह काम में मौर्य साम्राज्य के अलावे गुप्त राजवंश के भी खूबे योगदान रहे। बिहार जेकर राजधानी पटना ह, ओकरा के पाटलिपुत्र, कुसुमपुर नाम से भी जानल जाला, जवन कि भारतीय सभ्यता के बहुत खास केंद्र रहे के प्रसिद्धि हासिल कइले बा। एही क्रम में शिक्षा के महत्त्वपूर्ण केंद्र नालंदा विश्वविद्यालय के स्थान भी ना केवल भारत में ही अपितु पूरा विश्व में प्रसिद्ध बा।

प्राचीन काल में मगध के साम्राज्य देश के सबसे शक्तिशाली साम्राज्यन में से एगो रहल। अहिजा से मौर्य वंश, गुप्त वंश तथा अन्य कई राजवंशकुल देश के अधिकतर हिस्सवन पर राज कइले। मौर्य वंश के शासक सम्राट अशोक के साम्राज्य पश्चिम में अफ़ग़ानिस्तान तक फैलल रहल। मौर्य वंश के शासन 325 ईस्वी पूर्व से 185 ईस्वी पूर्व तक रहल। छठी आ पांचवी सदी इसापूर्व में अहिजा बौद्ध तथा जैन धर्मवन के उद्भव भइल। अशोक, बौद्ध धर्म के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभइले रहलन आ उ आपन लईका महेन्द्र के बौद्ध धर्म के प्रसार खातिर श्रीलंका भेजले। उ आपन लईका के पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) के एगो घाट से विदा कइले रहलन जवन महेन्द्र के नाम से अब भी महेन्द्रू घाट कहल जाला। बाद में बौद्ध धर्म चीन तथा चीन के रास्ते जापान तक पहुंच गइल।

बिहार के इतिहासी नाम मगध रहल। बिहार के राजधानी पटना के इतिहासी नाम पाटलिपुत्र ह।

बारहवीं सदी में बख्तियार खिलजी बिहार पर आधिपत्य जमा लिहले। उके बाद मगध देश के प्रशासनिक राजधानी ना रहल। जब शेरशाह सूरी, सोलहवीं सदी में दिल्ली के मुगल बाहशाह हुमायूँ के हरा के दिल्ली के सत्ता पर कब्जा कइले तब बिहार के नाम पुनः प्रकाश में आइल पर इ अधिक दिनन तक ना रह पावल। अकबर बिहार पर कब्जा करके बिहार के बंगाल में विलय कर दिहले। इके बाद बिहार के सत्ता के बागडोर बंगाल के नवाबन के हाथन में चल गइल। बिहार के अतीत गौरवशाली रहल बा।

बिहार के जलवायु में बिबिधता देखे के मिले ले। आमतौर पर इहाँ तापमान के दसा उपोष्णकटिबंधी पावल जाला जहाँ खूब गरम गर्मी के सीजन आ ठंडा जाड़ा के सीजन मिले ला। बिहार एगो बिसाल उपजाऊ मैदानी हिस्सा हवे आ इहाँ गंगा मुख्य नदी हवे; गंगा के सहायिका नदी सभ में उत्तर से गंडक, कोसी बागमती इत्यादि नदी आ के मिले लीं आ इनहन के कारण लगभग हर साल बिहार में बाढ़ के स्थिति पैदा हो जाले। उत्तर से आवे वाली नदी सभ में सगरी प्रमुख आ बड़हन नदी नेपाल से निकले लीं आ तराई के मैदान में आवे पर अचानक ढाल में कमी पा के बिसाल इलाका में फइल के बहे लागे लीं। बिहार राज्य के कुल जमीनी रकबा  बा आ इ राज्य 24° 20' 10 N से 27° 31' 15 N अक्षांश आ 83° 19' 50 E से 88° 17' 40 E देशांतर के बीच बिस्तार लिहले बाटे। समुंद्रतल से औसत ऊंचाई लगभग  बाटे।

गंगा नदी बिहार के दू हिस्सा में बाँटे ले आ पच्छिम से पुरुब ओर के दिसा में एह राज्य के बीच से बहे ले। एकरा अन्य सहायिका सभ में सोन, बूढ़ी गंडक, चंदन, ओढ़नी आ फल्गु नदी बाड़ी स। उत्तर में नेपाल देस में बिहार से कुछे दूर पर हिमालय परबत के सभसे दक्खिनी श्रेणी सभ पहाड़ी के रूप में सुरू हो जालीं आ ई पहाड़ भले भौतिक रूप से बिहार के हिस्सा ना होखें, बाकिर इनहन के परभाव बिहार के थलरूप, आबोहवा आ संस्कृति पर जरूर देखल जा सके ला। बिहार के मध्यभाग आ दक्खिनी हिस्सा में भी कुछ छोटहन पहाड़ी पावल जालीं, जइसे कि राजगीर के पहाड़ी; दक्खिन में मौजूद राज्य झारखंड में छोटानागपुर के पठार पड़े ला जे साल 2000 से पहिले बिहारे के हिस्सा रहल।

बिहार में सरकारी तौर पर घोषित जंगल  के क्षेत्रफल पर बा, ई बिहार के कुल रकबा के 7.2% हिस्सा बाटे। हिमालय के निचली पहाड़ी वाला हिस्सा के दक्खिन में सोमेश्वर आ दून पहाड़ी (चंपारण जिला) सभ के इलाका में नम पतझड़ बन के पट्टी पावल जाले। एह क्षेत्र में घास आ झाड़ीनुमा बनस्पति आ सरपत बंसी झाड़ी (मूँज, नरकट, कतरा इत्यादि) सभ भी पावल जाली। एह इलाका में बरखा के मात्रा  के लगभग होला आ साल के बन खाती एकदम सटीक जलवायु होले। सभसे प्रमुख आ महत्व के फेड़ साल, खैर, आ सेमर बाने। सहरसा आ पूर्णिया जिला में भी नम पतझड़ वाली बनस्पति मिले ले। साल (Shorea Robusta), केंदू भा तेंदू (Diospyros melanoxylon), सलाई (Boswellia serrata), साज (Terminalia tomentose), बहेड़ा (Terminalia bellerica), अर्जुन (Terminalia Arjuna), पैसार (Pterocarpus Marsupium), महुआ (Madhuca indica) इत्यादि बिहार के प्रमुख बृक्ष हवें।

वाल्मीकि नेशनल पार्क, पच्छिम चंपारण जिला में, लगभग  रकबा के इलाका में फइलल जंगली इलाका बाटे, ई भारत के 18वां राष्टीय पार्क हवे आ बाघ सभ के घनत्व के मामिला में भारत में चउथा नमर पर बा। एह रिजर्व इलाका में बिबीधता वाले क्षेत्र बाने आ बिबिध प्रकार के जियाजन्तु आ बनस्पति के आवास बा, मुख्य रूप से शेर खाती एह भाग के संरक्षण कइल गइल बा।

बिहार राज्य के अधिकृत सरकारी काम-काज के भाषा हिंदी हवे अउरी दूसरकी सरकारी भाषा उर्दू ह जेकर प्रयोग मुख्य रूप से पढ़े-पढ़ावे, कानूनी काम-काज इत्यादि में ही होला। बिहारी लोगन के आपस के काम-धाम आ बात-चीत के माध्यम बा:

मुख्य रूप से गोपालगंज जिला, सीवान जिला, छपरा जिला, पुरुबी चंपारण जिला, पच्छिम चंपारण जिला, भोजपुर जिला, रोहतास जिला, बक्सर जिला, आरा जिला, भभुआ जिला जिला में बोलल जाला। 

मुख्य रूप से सीतामढ़ी जिला, दरभंगा जिला, मधुबनी जिला, समस्तीपुर जिला, मधेपुरा जिला, सुपौल जिला, शिवहर जिला, इत्यादि जिलन में बोलल जाला।

मुख्य रूप से भागलपुर जिला, बांका जिला, मुंगेर जिला, बेगूसराय जिला, खगड़िया जिला, लक्खीसराय जिला, शेखपुरा जिला, जमुई जिला, कटिहार जिला, सहरसा जिला, पूर्णिया जिला, इत्यादि जिलन में बोलल जाला।

मुख्य रूप से पटना जिला, गया जिला, नालन्दा जिला, नवादा जिला, जहानाबाद जिला, औरंगाबाद जिला, इत्यादि जिलन में बोलल जाला।

बज्जिका भी कुछ जगह पर बोलल जाला।




#Article 11: अमेरिका (1803 words)


यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका, () या बस अमेरिका की नाँव से परसिद्ध, उत्तर अमेरिका महादीप के एगो देस बा। एकर राजधानी वाशिंगटन डी॰सी॰ बा। अमेरिका एक ठो संबैधानिक फेडरल रिपब्लिक हवे जेह में 50 गो राज्य, एक ठो फेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच गो प्रमुख खुदशासित राज्यक्षेत्र आ अन्य कई गो अधिकारक्षेत्र सामिल बाड़ें। पचास गो में से अड़तालीस राज्य एक साथ एकट्ठा बाने जिनहन से मुख्य भूमि बनल बा, कनाडा के दक्खिन आ मैक्सिको के उत्तर में ई अमेरिकी मुख्य भूमि स्थित बाटे। उत्तर अमेरिकी महादीप के उत्तरी पच्छिमी कोना पर अलास्का राज्य बा जेकर पूरबी सीमा कनाडा से बनल बा आ पच्छिम ओर बेरिंग जलजोड़ के ओह पार रूस से सीमा बने ला। प्रशांत महासागर के बीच में दीपसमूह के रूप में हवाई राज्य मौजूद बा।
अन्य राज्य क्षेत्र सभ प्रशांत महासागर आ कैरीबियन सागर में मौजूद बाने। यूऍस के राज्यक्षेत्र कुल नौ ठो टाइम जोन में बिस्तार लिहले बाटे। देस के भूगोल, जलवायु आ जियाजंतु में बहुत ढेर बिबिधता बाटे।

उत्तर अमेरिका में मनुष्य के आबादी कम से कम 15,000 साल पहिले भइल जब एशिया से मंगोलाइड प्रजाति के लोग इहाँ प्रवास क के पहुँचल।

वर्तमान संबिधान के 1788 में अंगीकार कइल गइल। पहिला दस गो संसोधन, जिनहन के बिल ऑफ राइट्स कहल जाला, 1791 में पास भइल आ मूल नागरिक आजादी के गारंटी भइल।

उत्तर अमेरिका में बिस्तार के कार्यक्रम पुरा 19वीं सदी भर जारी रहल आ अमेरिकन इंडियन जनजाति के लोग के बिस्थापन आ नया राज्यक्षेत्र के अधिग्रहण 1848 तक ले चलल जबले की ई पूरा महादीप ले बिस्तार वाला ना हो गइल। उनईसवीं सदी के बाद के आधा हिस्सा में, अमेरिकी सिविल वार एह देस में कानूनी दास प्रथा के खतम कइलस।
एह सदी के अंत ले युनाइटेड स्टेट्स के सीमा प्रशांत महासागर ले चहुँप गइल आ एकर अर्थब्यवस्था, औद्योगिक क्रांति के नतीजा के रूप में तेजी से बढ़ल। स्पेनी-अमेरिकी जुद्ध आ पहिला बिस्व जुद्ध में ई देस बैस्विक मलेटरी ताकत के रूप में सोझा आइल। दुसरका बिस्व जुद्ध के बाद, परमाणु हथियार बनावे वाला पहिला देस, ए हथियार के इस्तेमाल करे वाला एकलौता देस आ युनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल के स्थाई मेंबर के रूप में ई देसदुनिया में सुपरपावर के रूप में स्थापित हो गइल।  1991 में शीत जुद्ध के समापन के बाद जब सोवियत यूनियन के विघटन हो गइल, अमेरिका एकलौता सुपरपावर बचल।

युनाइटेड स्टेट्स एगो बहुत बिकसित देस बा, नॉमिनल जीडीपी के हिसाब से दुनिया के सभसे बड़ आ पीपीपी के हिसाब से दुनिया के दुसरा नंबर के अर्थब्यवस्था बाटे। समाजार्थिक परफार्मेंस के कई ठो माप के हिसाब से ई दुनियाँ में ऊपर के देसन में गिनल जाला। पोस्ट-इंडस्ट्रियल अर्थब्यवस्था होखले के कारण इहाँ सेवा क्षेत्र के बिस्तार आ ज्ञान आधारित अर्थब्यवस्था होखले के बावजूद इहाँ के मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र दुनिया में दुसरा सभसे बड़ बाटे। इहाँ के जनसंख्या, पुरा दुनिया के जनसंख्या के खाली 4.3% बा बाकी ई दुनिया के जीडीपी के चउथाई हिस्सा वाला देस, आ दुनिया भर के मलेटरी खर्चा के एक तिहाई से ढेर खर्चा करे वाला देस बाटे जेकरा कारन ई दुनिया के सभसे आगे के अर्थब्यवस्था आ मलेटरी पावर बाटे। अमेरिका एक ठो परभावशाली सांस्कृतिक आ राजनीतिक ताकत बा आ बिज्ञान आ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी अगुआ ताकत के रूप में बिस्व में स्थापित बा।

अमेरिका में बसे वाला सभसे पहिला लोग साइबेरिया से इहाँ आइल, बेरिंग थल जोड़ से हो के, अबसे कम से कम 15,000 पहिले, हालाँकि कि कुछ सबूत अउरी पहिले आवे के भी मिलल बाने। एह में से कुछेक, उदाहरण खातिर प्री-कोलंबियन मिसिसिपियाई संस्कृति के लोग, ऊँच दर्जा के खेती-किसानी के बिकास भी कइल, शानदार इमारत निर्माण के कला के भी, आ राज्य-स्तर के समाज के भी। जब स्पेनी बिजेता लोग इहाँ के लोग से पहिले-पहिल सम्पर्क में आइल, मूल निवासी लोग के जनसंख्या कई कारन से घटल, मुख्य रूप से छोटकी माता आ मीसल्स के बेमारी से। मूलनिवासी लोग के जनसंख्या में घटती के कौनों महत्वपूर्ण कारण यूरोपीय बिजेता लोग के साथ भइल हिंसा ना रहल, हालाँकि, आपस में आ यूरोपीय लोग के साथ संघर्ष में कई गो छोट समुदायन के नुक्सान भइल आ कई गो यूरोपीय कॉलोनी सभ के भी। हवाई दीपसमूह में, सभसे पहिले आ के बसे वाला लोग, पहिली सदी के आसपास के दौर में पॉलीनेशिया से आइल रहल। यूरोपीय लोग एह दीप पर पहिली बेर, ब्रिटिश खोजी कैप्टन जेम्स कुक के अगुआई में 1778 में आइल।

उपनिवेशीकरण के सुरुआती दौर में बहुत सारा यूरोपीय लोग के खाना के कमी, बेमारी आ मूलनिवासी अमेरिकी लोग के हमला के सामना करे के पड़ल। मूल अमेरिकी लोग अक्सरहा अपने बगल वाला दुसरा मूल नीवासी कबीला के साथ भी लड़ाई लड़े लोग आ एह में यूरोपीय लोग के भी सामिल करे। एह समय यूरोपीय आ मूल लोग आपस में निर्भर भी रहे। बाहर से जा के बसल यूरोपीय लोग खाना आ पालतू जानवरन कीने खातिर मूल लोग के साथ ब्यापार करे आ मूल निवासी लोग के बंदूक आ अन्य यूरोपीय सामान के जरूरत रहे। मूल निवासी लोग यूरोपियन लोग के सिखावल कि कहाँ, कब आ कवने तरीका से मक्का, बीन आ स्क्वाश के खेती कइल जाय। यूरोपीय मिशनरी लोग के बिचार रहे कि मूल निवासी लोग के सभ्य बनावल जाय आ ऊ लोग के यूरोपी तरीका से खेती आ बाकी जीवनशैली अपनावे के कहे।

जब स्पेन के सरकार सन 1492 में कोलंबस के नई दुनिया के खोज करे खातिर समुंद्री जतरा पर भेजलस, बाकियो कई यूरोपी देस एह काम के अनुसरण कइलें। स्पेन के लोग द्वारा पहिली यूरोपी आबादी फ्लोरिडा आ न्यूमैक्सिको में बसावल गइल, जइसे कि सैंट ऑगस्टीन। आ सांता फे। फ्रांसीसी लोग आपन आबादी मिसिसिपी नदी के सहारे बसावल। ब्रिटेन के सफल आबादी बसाव अमेरिका के पूरबी किनारा पर वर्जीनिया कालोनी के साथ 1620 में सुरू भइल। ब्रिटेन द्वारा जेम्सटाउन, पिलग्रिम्स आ प्लेमाउथ कालोनी बसावल गइल। इहाँ बसे वाला लोगन में काफी सारा लोग अइसन भी रहे जे अंग्रेज ईसाई समुदाय से रहल आ धार्मिक आजादी के खोज में अहिजा आ के बसल। एह महादीप के पहिला चुनाव द्वारा बनल बिधायिका सभा वर्जीनिया के हाउस ऑफ बर्जसिज़ रहल जे 1919 में अस्तित्व में आइल। मेफ्लावर नाँव के जहाज पर पिल्ग्रिम्स लोग द्वारा मेफ्लावर कॉम्पैक्ट पर 1920 में दस्खत भइल जे प्लेमाउथ कालोनी के शासन चलावे खातिर पहिला लिखल दस्तावेज बनल। साल 1939 में फंडामेंटल ऑर्डर्स ऑफ कनेक्टिकट स्थापित भइल जे शासन के संरचना आ बिधान के रूप रेखा तय कइल। एही सभ बिकास आगे चल के बाकी के सगरी कालोनी सभ में भइल।

एह कालोनी भा उपनिवेशन में आ के आबाद होखे वाला लोग में ज्यादातर लोग छोट किसान रहल, बाकिर कुछ अन्य उद्योग के बिकास भी अलग-अलग कालोनी सभ में एक्के दशक के भीतर अलग-अलग गति से होखे सुरू हो गइल। नकदी फसल (कैश क्रॉप) सभ में तमाकू, धान (चावल) आ गोहूँ रहल। फर (ऊनी बार) आ मछरी आ लकड़ी के कुंदा के उत्पादन भी सुरू भइल। मैन्यूफैक्चरिंग के क्षेत्र में रम (शराब) आ जहाज के निर्माण सुरू भइल, उपनिवेशी जुग के अंत ले चहुँपत समय अमेरिकी उपनिवेश (कालोनी) सभ में दुनिया के सातवाँ हिस्सा लोहा के उत्पादन होखे लागल रहल। पूरबी किनारा पर धीरे-धीरे सहर बसत गइलेन जे लोकल रूप से आर्थिक कामकाज के सपोर्ट करे आ ब्यापार-बानिज के धुरी बने के मकसद पूरा करे लगलें। अंग्रेज लोग के अलावा स्कॉटिश-आयरिश लोग के आगमन भी बढ़ल आ जब किनारा पर के जमीन महंग होखे सुरू भइल, पच्छिम के ओर बसाव सुरू हो गइल। पच्छिम के ओर बढ़े में आ जाके बसे में ऊ लोग रहे जे कुछ समय खातिर दास के रूप में या बँधुआ मजूरा के रूप में इहाँ यूरोप से आइल आ आपन मजूरी के समय पूरा होखे के बाद आजाद हो गइल रहे। अइसन लोग के इंडेंचर लेबर कहल जाला।

अंग्रेजी निजी स्वामी लोग द्वारा बड़हन पैमाना पर बँधुआ मजदूर (दास भा स्लेव) लोग के आगमन सुरू हो गइल। दक्खिन के तुलना में इहँवा दास (स्लेव) लोग के जिनगी के बचे के उमीद आ जीवन अवधि (लाइफ एक्स्पेक्टेन्सी) बढियाँ रहल काहें कि एह  इलाका में घातक बेमारी सभ के परकोप कम रहे आ खाना-पानी आ इलाज के कुछ बेहतर सुबिधा मौजूद करावल गइल, एकरे चलते दास ब्यापार के बाढ़ आ गइल। उपनिवेशी समाज एह दास प्रथा के मुद्दा पर आपसे में बँटाइल रहे आ कई बेर एकरा पक्ष आ बिपक्ष में कानून पास भइलें। कुल के बावजूद अठारहवीं सदी के आवत-आवत अफ़्रीकी दास सभ इंडेंचर लेबर के रूप में आवे वाला लोग के संख्या के मामिला में पाछे छोड़ दिहलें आ कैश फसल सभ के काम खातिर, कम से कम दक्खिनी हिस्सा सभ में, अफिरकी दास लोग के इस्तमाल के बोलबाला हो गइल।

पूरा यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के कुल जमीनी रकबा  बा, जेह में से मुख्य जमीनी हिस्सा, जेकरा अंगरेजी में कांटाजियस अमेरिका कहल जाला,  एरिया वाला बा। अलास्का, मुख्य जमीन से अलग बा, एकर रकबा  बा आ ई इहाँ के सभसे बड़ राज्य हवे। हवाई, कई गो टापू सभ से मिल के बनल बा, प्रशांत महासागर में  क्षेत्रफल वाला बा। प्यूर्टो रिको, अमेरिकन सामोआ, गुआम, उत्तरी मैरीना दीप, आ वर्जिन दीप में जेतना हिस्सा पर आबादी बा कु कुल   रकबा वाला बा। अगर खाली जमीनी एरिया के तुलना कइल जाव, अमेरिका के पूरा दुनिया में तिसरा अस्थान बा आ रूस आ चीन भर एकरे से बड़हन बाड़ें जबकि एकरा से कुछ छोट कनाडा बाटे।

अमेरिका जमीनी आ पानी के क्षेत्र के एरिया के हिसाब से दुनिया भर में तिसरा चाहे चउथा नंबर पर बा, रूस आ कनाडा के बाद आ चीन देस से कुछ नीचे या ऊपर। Tएह रैंकिंग में बदलाव होखे के कारन बा भारत आ चीन के बीच के सीमा बिबाद आ अमेरिका के साइज के परिभाषित करे के तरीका में बदलाव। उदाहरण खातिर ब्रिटैनिका एन्साइक्लोपीडिया अमेरिका के कुल रकबा  देले काहें से कि ई समुंद्र किनारे के आ टेरिटरियल जलक्षेत्र के ना गिने ला। दि वल्ड फैक्टबुक, जे एह पानी वाला इलाका सभ के सामिल करे ले,  एरिया बतावे ले।

अटलांटिक किनारा के तटीय मैदान आगे जाके पीडमॉन्ट के इलाका के लहरदार पहाड़ी इलाका आ पतझड़ वाला बन से मिले ला। अप्लेशियन परबत श्रेणी पूरब के समुंदरी किनारा वाला इलाका आ महान झील वाला इलाका के बिलग करे ले आ बीचा में पड़े ले। एही के पच्छिम ओ घास के मैदान भी बाड़ें जिनहन के मिडवेस्ट कहल जाला। मिसिसिप्पी आ मिसौरी नदी, दुनियाँ के चउथा सभसे लमहर नदी सिस्टम, मुख्य रूप से देस के बीचोबीच के हिस्सा में उत्तर से दक्खिन के ओर बहे लीं। एकरे पच्छिम में ग्रेट प्लेन्स के उपजाऊँ प्रेयरी इलाका पड़े ला आ दक्खिनपूरब में ई हाइलैंड इलाका से बाधित होला।

अमेरिकी जनगणना ब्यूरो के अनुमान (एस्टीमेट) के अनुसार 1 जुलाई 2017 के एह देस के कुल जनसँख्या  रहल, आ एह में 1 ब्यक्ति के बढ़ती (नेट) हर 13  सेकेंड पर, या लगभग 6,646 लोग रोज के हिसाब से बढ़ रहल बा। अमेरिका के जनसंख्या 20वीं सदी में लगभग चार गुना बढ़ल जब ई 76.2 मिलियन 1900 के जनसंख्या से 281.4 मिलियन 2000 के जनसंख्या भ गइल। चीन आ भारत के बाद ई तिसरा सभसे ढेर जनसंख्या वाला देस बा, आ एकलौता अइसन उद्योगीकरण भइल देस बा जेकर जनसंख्या में अभिन भी भारी बढ़ती के प्रोजेक्शन कइल गइल बा।




#Article 12: लुइसियाना (123 words)


लुइसियाना () यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के एगो राज्य बा। ई राज्य अमेरिका के एकदम दक्खिनी हिस्सा में पड़े ला आ एह देस 50 गो राज्य सभ में 31वाँ सभसे बेसी बिस्तार वाला आ 25वाँ सभसे बेसी जनसंख्या वाला राज्य हवे। लुइसियाना के पच्छिम ओर टेक्सास राज्य, उत्तर ओर आर्कन्सा राज्य, पुरुब ओर मिसिसिपी राज्य आ दक्खिन में मैक्सिको के खाड़ी बा। एकरे आ मिसिसिपी राज्य के बीचा में, एकर पुरबी बाडर बहुत दूरी तक ले मिसिसिपी नदी द्वारा बनावल जाला। ई अमेरिका के एकलौता अइसन राज्य हवे जहाँ राज्य के कई गो पैरिश सभ में बिभाजन बा जे काउंटी के बरोबर दर्जा वाला उपबिभाग हवें। एह राज्य के राजधानी बैटन रोग नाँव के शहर हवे आ सभसे बड़ शहर न्यू ऑर्लियंस हवे।




#Article 13: छठ (1834 words)


छठ पूजा भा छठ परब भोजपुरी, मिथिला, मगध आ मधेस इलाका के प्रमुख परब हवे। ई सुरुज के पूजा के तिहुआर हऽ आ मुख्य रूप से हिंदू औरत लोग मनावे ला। मुख्य तिथी कातिक महीना के अँजोर के छठईं तिथी हवे, एकरे दू दिन पहिले से ले के अगिला दिन ले ई तिहुआर मनावल जाला। कातिक के छठ मुख्य हवे जेकरा के डाला छठ भी कहल जाला। एकरे अलावे, चइत के महीना में भी छठ मनावल जाले जेकरा के चइती छठ कहल जाला।

नाहन, बरत आ अरघा दिहल एह पूजा के मुख्य कार्यक्रम होला। जघह के हिसाब से, पानी के कवनों अस्थान, नद्दी-पोखरा के घाट पर मुख्य पूजा आ अरघा संपन्न होला। बिसेस परसाद के रूप में कई किसिम के फल आ खास तरीका से बनावल पकवान ठेकुआ होला जेकरा के माटी के चूल्हा पर पकावल जाला। नया सूप आ डाली में बिबिध किसिम के फल रख के घाट पर ले जाइल जाला। ओहिजा, ई सब सामग्री माटी के बेदी पर सजावल जाले, दिया अगरबत्ती बारल जाला आ कर्हियाइ भर पानी में ऊखि गाड़ल जाला जेह पर साड़ी चढ़ावल जाले। मेहरारू लोग पानी में खड़ा हो के डूबत सुरुज के पहिला अर्घा आ अगिला दिने फिर दोबारा ओही जे जा के उगत सुरुज के अरघा देला लो।

भारत के बिहार, झारखंड, पूर्वांचल आ नेपाल के मधेस इलाका में, आ जहाँ-जहाँ एह क्षेत्र के लोग पहुँचल बा, धूमधाम से मनावल जाला। बिहार, झारखंड आ पूरबी उतर प्रदेश अउरी नेपाल के मधेस एह परब के मुख्य इलाका हवे। एह क्षेत्र में ई तिहुआर बहुत धूमधाम से मनावल जाला आ नदी किनारे घाट सभ पर एकरे खाती बिसेस तइयारी होले। एह मुख्य इलाका के अलावा, बंगाल, आसाम, दिल्ली, मुंबई, बंगलौर आ बाकी पूरा भारत में जहाँ-जहाँ एक क्षेत्र के लोग निवास करत बा, परंपरागत रूप से ई परब मनावे ला। भारत आ नेपाल के अलावा अउरी कई देसन में एह तिहुआर के मनावल जाला।

छठ भा छठि (संस्कृत: षष्ठी) के शाब्दिक अरथ हवे महीना के छठईं तिथी। ई तिथि हिंदू धर्म में सुरुज भगवान के पूजा खाती बिसेस महत्व के मानल जाले। एही तिथी के ई परब मनावल जाए के कारन एकर नावें छठ परब भा छठ पूजा हो गइल बा। हालाँकि, छठ सुरुज भगवान के पूजा के तिहुआर हवे, छठि शब्द, जवन तिथी खाती इस्तेमाल होला, स्त्रीलिंग होखे के कारन, पूजा के छठ माई के पूजा के रूप में भी कल्पित कइल जाला। कातिक के अँजोर के छठईं तिथी के मनावल जाए वाला एह परब के डाला छठ भी कहल जाला। डाला भा डाल, बाँस के बनावल बड़हन आकार के दउरा के कहल जाला जबकि छोट रूप के डाली भा डलिया कहल जाला। नया डाला, जवना के एह पूजा में बिसेस महत्त्व होला, में पूजा के सामग्री आ फल-नरियर-परसाद इत्यादि चीज घाट पर रख के चढ़ावे के परंपरा के डाला चढ़ावल भी कहल जाला आ एह चढ़ावा के एह तिहुआर में बिसेस अस्थान होखे के तिहुआर के डाला छठ कहल जाला।

चंद्रमा आधारित हिंदू पतरा में छठ तिथी हर महीना के अन्हार-अँजोर दुनों पाख में पड़े ले। एह तिथी के सुरुज देवता के पूजा खाती बिसेस महत्व के मानल जाला। हप्ता के दिन सभ में अतवार के, आ सताइस गो नक्षत्र सभ में अदरा नक्षत्र के सुरुज भगवान के पूजा के बिसेस महत्व हवे, ओही तरीका से तिथी सभ में छठईं तिथी के सुरुज के पूजा खाती निश्चित कइल गइल बा आ हर महीना के छठई तिथि के सूर्य षष्ठी के नाँव से भी जानल जाला। एह हर महिन्ना परे वाला छठ सभ में भी दू गो, चइत आ कातिक महीना के अँजोर पाख के छठ, के खास महत्व दिहल जाला। चइत वाली छठ के चइती छठ कहल जाला जबकि सभसे धूमधाम से आ ब्यापक रूप से मनावल जाए वाला परब कातिक महीना वाला हवे।

छठ के पूजा कब सुरू भइल आ काहें सुरू भइल एकरे बारे में कई गो कथा आ मान्यता चलन में बाड़ी सऽ। कथा सभ बतावल जालीं कि, सुकन्या नाँव के औरत सूर्य के पूजा कइले रहली जेकरे बाद से ई बरत छठ के रूप में मनावल जाए लागल। कृष्ण के बेटा साम्ब के शापित हो के कोढ़ के रोगी हो जाए के बाद सुरुज देवता के पूजा करे के उल्लेख भी मिले ला। महाभारत के हवाला दे के द्रौपदी के छठ ब्रत रहे के बात कहल जाले आ कुछ जगह कर्ण द्वारा एह पूजा के सुरू करे के बात कहल जाला। रामकथा में सीता द्वारा राम के राज्याभिषेक के बाद भइल दीपावली के बाद छठ के सुरुज भगवान के आराधना करे के बात बतावल जाला।

एगो अन्य कथा मिले ले जेह में एह बरत के देवी छठी मइया के पूजा के बिबरन मिले ला। एह कथा में बतावल गइल बा कि प्रियव्रत मनु, पहिला मनु रहलें जे महर्षि कश्यप के सलाह अनुसार पुत्रेष्टि जग्य कइलेन। एह जगि के बाद उनके पुत्र भइल बाकी मुर्दा पैदा भइल। शोक में बूड़ल प्रियव्रत आ मालिनी के सोझा एगो देवी प्रगट भइली आ उनके छुअले से संतान जिंदा भ गइल। उहे देवी, अपना के ब्रम्हा के मानस पुत्री बतवली आ अपना पूजा खाती कहली। इनही के पूजा छठ मइया के पूजा के रूप में सुरू भइल।

छठ मूल रूप से हिंदू लोग के तिहुआर हवे। हालाँकि, कुछ मुसलमान औरत लोग के भी छठ मनावत देखल गइल बा। मुसलमान औरतन द्वारा, कौनों बिसेस कष्ट के स्थिति में, हिंदू औरतन द्वारा सलाह दिहल जाए पर ई बरत करे के बात बतावल गइल बाटे आ एकरा के मुसलमान लो के संस्कृति पर हिंदू संस्कृति के परभाव के रूप में भी देखल जाला। दुसरा तरीका से देखल जाय त ई बिहारी लोग के खास तिहुआर के रूप में देखल जाला आ बिहार के लोग में ई तिहुआर धरम के सीमा से ऊपर उठ चुकल बा आ मुसलमान आ सिख परिवार के लोग भी एह परब के मना रहल बा।

छठ मुख्य रूप से मेहरारू लोगन के बरत हवे, हालाँकि अब मरदाना लोग भी एह ब्रत के मनावे में पाछे नइखे रहि गइल। अरवा चाउर के भात आ लउकी के तरकारी खा के ब्रत के सुरुआत कइल जाला।

अरवा-अरवइन के अगिला दिने, मने कि पंचिमी के, एक दिन दिन भर के बरत भुक्खल जाला। ई एक तरह से मुख्य बरत से पहिले के तइयारी होला आ एही से एकरा के खरना कहल जाला। खर कइल के अरथ होला तपावल भा शुद्ध कइल। एह दिन भर के बरत के बाद साँझ के बेरा रोटी के साथे खीर भा बखीर बनावल जाले जेकरा के खरना के परसाद कहल जाला। इहे परसाद खा के मुख्य बरत सुरू होला।

खरना के बाद के रात, आ छठईं तिथी के पूरा दिन आ रात बरत के रात होले। एही छठ तिथी के साँझ बेर नदी, पोखरा के किनारे घाट पर जाइल जाला। घाट पर जा के पूजा के पहिले घरे परसाद बनावल जाला। छठ के परसाद में ठेकुआ बनावल जाला जे गोहूँ के आटा में मीठा डारि के अ घीव के मोएन दे के दूध में सानल जाला आ सुद्ध घीव में छानल जाला। उत्तरी बिहार में एकरा के खासतौर पर माटी के साफ चूल्हा पर बनावल जाला आ साफ लकड़ी के इस्तेमाल कइल जाला। बाकी परसाद में कम से कम तीन किसिम के फल रहे ला। फल सभ में सिंघाड़ा, गंजी, केला, अनन्नास, गागल नींबू, नरियर, आ मुरई इत्यादि सामिल रहे ला।

घाट पर पहिले से घर के सवाँग लोग सफाई क के माटी के बेदी बनवले रहे ला लोग। घर से दउरा में सगरी परसाद सामग्री सजा के ले जाइल जाला जहाँ दिया-अगरबत्ती बार के परसाद के सूप में सजा के पूजा कइल जाला आ छठ मइया के गीत गावल जाला। एकरे बाद सुरुज के डूबे से पहिले मेहरारू लोग लगभग कर्हियाइ भर से ऊपर पानी में खड़ा हो के सुरुज भगवान के पूजा करे ला। कुछ जगह, जहाँ छठ मइया के साड़ी चढ़ावे के बिधान भी होला, पानी में पाँच गो ऊखि गाड़ल जालीं जिनहन के पतई आपसे में बान्हल रहे ला आ ओही में साड़ी के सजा के ओकरा पाछे से सुरुज के पूजा कइल जाला। पूजा के बाद सुरुज भगवान के अरघा दिहल जाला। अर्घ में पानी में कई तरह के सुगंधित सामग्री मिला के तामा भा पीतर के लोटा में ले के दुनों हाथ से टिकासन से ऊपर उठा के सुरुज के सोझा धार के रूप में गिरावल जाला जेवना से ओह धार से हो के सुरुज के रोशनी चढ़ावे वाला के देह पर परे।

पहिला अर्घा के बाद घाट से सगरी चीज बटोर के घरे आ जाला। कुछ लोग जे संतान खाती मनौती मनले रहे ला एह रात के अँगना में एक तरह के पूजा करे ला जेकरा कोसी भा कोसिया भरल कहल जाला। कोसिया माटी के एगो खास तरह के बर्तन होला जे कोहा के आकार के होला आ एकरा बरि पर दिया बनल रहे लें। एही में चढ़ावा के सामग्री भर के आ दिया सभ के बार के गीति गावल जाला। 

छठ तिथी के अगिला दिने, सत्तिमी के भोरे में लोग घाट पर दोबारा चहुँप जाला आ ओही घाट आ बेदी पर फिर से सारा पूजा के सामग्री सजावल जाले। पानी में खड़ा हो के ब्रती लोग सुरुज उगे के इंतजारी करे ला आ उगत सुरुज के भोर के दुसरा अरघा दियाला। एकरे बाद घरे लवट के परसाद खा के बरत टूटे ला आ पारन कइल जाला।

बिहार छठ के पूजा के मूल अस्थान हवे आ मानल जाला कि हेइजे से ई बरत बाकी इलाकन में चहुँपल। बिहार के औरंगाबाद जिला में देव सूर्य मंदिर बा। मानल जाला कि एही जा से छठ के पूजा सुरू हो के बिहार आ बाद में आसपास के राज्य सभ में फइलल। बतावल जाला कि औरंगाबाद के ई जगह, देवकुंडा, महर्षी च्यवन के आश्रम रहल आ उनके पत्नी हेइजा छठ के बरत करें। इहाँ मौजूद वर्तमान सूर्य मंदिर महाराज भैरवेंद्र देव के जमाना (~1450 ईसवी) के मानल जाला। एकरे लग्गे कुछ दूरी पर सूर्यकुंड भी बा।

मूल रूप से बिहार, पूरबी उत्तर प्रदेश आ तराई के इलाका के ई तिहुआर इहाँ के लोग के साथ-साथ भारत के बाकी इलाका में भी पहुँचल बा आ पूर्वोत्तर भारत, बंगाल आ मध्य प्रदेश में भी मनावल जाला। भारत के राजधानी दिल्ली में छठ खाती सरकारी तौर पर इंतजाम कइल जाए लागल बा आ मुंबई में भी छठ के सार्वजनिक तौर पर आयोजन कइल जा चुकल बा।
दिल्ली मुंबई नियर शहर जहाँ बिहार आ उत्तर प्रदेश के लोग के काफी संख्या बा इहाँ त छठ मनावले जालाम अब ई दक्खिन भारत के बंगलौर आ चेन्नई नियर शहर सभ में भी मनावल जाए लागल बा जहाँ यूपी बिहार के लोग के मौजूदगी बा।

छठ पर्ब के बिहार आ पूर्वांचल के लोग के सांस्कृतिक पहिचान के रूप में देखल जाला। कारण की ई पर्ब इहाँ के लोग द्वारा मनावल जाए वाला एगो यूनिक तिहुआर बाटे आ ई तिहुआर इहँवे के लोग मनावे ला, चाहे अपना मूल इलाका में भा जहाँ दुसरी जगह इहाँ के लोग परवास क रहल बा।

छठ के बिबिध महत्व सभ में इहो एगो महत्व देखल गइल बा कि ई नया पीढ़ी के आपस में जोड़े के माध्यम बन रहल बा।हाल में आइल एगो बीडियो में नया पीढ़ी के लोग द्वारा छठ अपनावे के एगो भावुक बीडियो सोशल मीडिया पर वाइरल भइल बा। एह बीडियो में भोजपुरी-बिहारी इलाका से बाहर दुसरे राज्य में रहत युवा लोग द्वारा छठ अपनावे के प्रेरणा दिहल गइल बा।

 




#Article 14: भोजपुरी (1695 words)


भोजपुरी ( कैथी: 𑂦𑂷𑂔𑂣𑂳𑂩𑂲) भाषाई परिवार के स्तर प एगो इंडो-आर्य भाषा हीयऽ जवन मूल रूप से भारत के बिचिला गंगा के मैदान के कुछ हिस्सन में आ नेपाल के तराई वाला कुछ हिस्सन में बोलल जाला। भारत में ई भाषा मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में, बिहार के पछिमही में, आ झारखंड के ऊतरवारी-पछिमही इलाका सभ में बोलल जाला।

मूल क्षेत्र के अलावा भोजपुरी जाने-बुझे वाला लोगन के बिस्तार बिस्व के सगरी महादीप कुल पर बा। उत्तर परदेश मे सबसे जादा भोजपुरी बनारस,बलिया,जौनपुर आउर गोरखपुर मे बोलल जाला।जेन्ने-जेन्ने यूरोपियन कॉलोनी रहल अंग्रेज लोग उत्तरपरदेश आ बिहार से भारी संख्या में मजदूरी करे खातिर लोग के ले गइल जिनहन लोग के भाषा भोजपुरी रहे। एसियाइ देशन में  मउरीसस  सूरिनाम, गुयाना, त्रिनिदाद आ टोबैगो, फिजी नीयन देश प्रमुख बाड़ें जहाँ भोजपुरी प्रमुख भाषा के रूप में बोलल आ बुझल जाला,  चाहे इहाँ भोजपुरी के मूल में अन्य भाषा सभ के तत्व मिल के नाया भाषा सभ के निर्माण भइल बा।

भारत के जनगणना आंकड़ा 2001 के अनुसार भारत में लगभग 3.3 करोड़ भोजपुरी बोले वाला लोग बा। मय बिस्व में भोजपुरी जाने वाला लोगन के  संख्या लगभग 7 करोड़ से जादे बा। द टाइम्स ऑफ इंडिया के एगो लेखा में कहल गइल बा कि  मय विश्व में भोजपुरी बोले वला 16 करोड़ लोग बाड़ान जे में से 8 करोड़ बिहार आउर 7 करोड़ उत्तर परदेश में रहे लें बाकी १करोड़ लोग बचल बिश्व में रहे लें, उत्तर अमेरिका के भोजपुरी संगठन के भी कहनाम बा कि बिस्व में 18 करोड़ अमदी भोजपुरी बोले लें। ग्रियर्सन इहाँ, शाहाबाद के उत्तरी-पच्छिमी हिस्सा में, एगो कसबा आ परगना बतवले बाडें जेकरा नाम प एह भाषा के नाम पड़ल। बतावल जाला की मध्य काल में राजपूताना के मूल निवासी भोजवंशी परमार राजा लोग, जे उज्जैन हो के आइल रहे, बसावल आ एकर नाम आपन पूर्वज राजा भोज के नाम पर भोजपुर रक्खलस। ई गाँव उनहन लोग के राजधानी बनल आ एही भोजपुर राज्य के भाषा के नाम भोजपुरिया चाहे भोजपुरी भइल। वर्तमान समय में पुरनका भोजपुर आ नवका भोजपुर नाम के दू गो गाँव बक्सर जिला के डुमराँव ब्लॉक में बा। हालाँकि, कृष्णदेव उपधिया आपन पुस्तक में राहुल संकृत्यायन के हवाला दे के लिखले बाड़ें कि पुरनका भोजपुर (जे भोज राजा लोग के राजधानी रहल) अब मौजूद नइखे आ ऊ गंगा जी मे दहि गइल।

बिद्वान लोग भोजपुरी भाषा के पैदाइश मागधी अपभ्रंस से मानें लें। हवलदार त्रिपाठी के कहनाम बा कि भोजपुरी संस्कृते से निकलल हवे। भोलानाथ तिवारी एकर उतपत्ति संस्कृत-प्राकृत से मागधी अपभ्रंस, आ मागधी अपभ्रंस से बिहारी भासा सभ (जे में भोजपुरी भी सामिल कइल जाले) बतवले बाड़ें।

भोजपुरी पर पच्छिमी बोली सभ के प्रभाव भी पाइल  गइल बाटे। बाद के समय में एह में हिंदी-उर्दू के परभाव भी देखे के मिले ला आ फारसी के शब्द भी एतना स्वाभाविक रूप से घुल मिल गइल बाडेन कि ऊ भोजपुरिहा बेकति खातिर बिदेसी ना लागेलें। साथे-साथे अंगरेजी के शब्द भी देसी उच्चारण के साथ अब भोजपुरी में बहुत पावल जालें जेवन एह भाषा के शब्द-ग्राहकता के प्रबल प्रमाण बा।

भूगोलीया वर्गीकरण में उत्तर भारत क लगभग सगरी भाषा कुल इंडो-यूरोपियन परिवार के इंडो-ईरानियन समूह के भाषा ठहरेलीं। ग्रियर्सन महोदय भारतीय भाषा सभ के अंतरंग आ बहिरंग, दू तरह की बिसेसता की आधार, प अलग-अलग श्रेणी में बँटलें जेवना में बहिरंग की आधार पर ऊ भारतीय भाषा सभ के तीन गो प्रमुख शाखा स्वीकार कइलें:

एह में अन्तिम शाखा के अन्तर्गत उड़िया, असमिया, बंगाली अउरी बिहारी भाषा सभ के गणना कइल जाला। बिहारी में मैथिली, मगही अउरी भोजपुरी – ई तीन गो क्षेत्रीय भाषा बाड़ी। क्षेत्रविस्तार अउरी भाषाभाषी लोगन की संख्या की आधार पर भोजपुरी अपनी बहिन मैथिली अउरी मगही से बड़ ठहरेले।

भोजपुरी मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिला कुल अउर बिहार राज्य के पछिमही जिला कुल में बोलल जाला। उत्तर परदेश के वाराणसी, मिर्जापुर, गाजीपुर, बलिया, जौनपुर, गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़, बस्ती, सिद्धार्थ नगर आदि जिला के रहेवाला आ बिहार राज्य के पुरबी चम्पारण, पछिमी चम्पारण, गोपालगंज, पछिमी मुजफ्फरपुर, सिवान, सारण, आरा, बक्सर, कैमूर आ रोहतास जिला के रहनिहार लोग के माईभाषा भोजपुरी हवे। एकरा अलावें कलकत्ता नगर में, बंगाल के चटकल में आ आसाम राज्य के चाय बगान में आ बंबई के अंधेरी-जोगेश्वरी नियन जगह में लाखन के संख्या में भोजपुरी भाषी लोग रहेलें।अतने ना, मारिशस, फिजी, ट्रिनीडाड, केनिया, नैरोबी, ब्रिटिश गायना, दक्खिन अफ्रीका, बर्मा (टांगू जिला) ई सब देश कुल में बड़ संख्या में भोजपुरिया लोग मिलेले।

भारत आ नेपाल के मूल भोजपुरी क्षेत्र के जिलावार बिस्तार:

जेकरा के ग्रियर्सन स्टैंडर्ड भोजपुरी कहलेबाड़े ऊ मुख्य रूप से बिहार राज्य के आरा जिला आ उत्तर प्रदेश के बलिया, गाजीपुर जिला के पूर्वी भाग आघाघरा (सरयू) आ गंडक के दोआब में बोलल जाले। ई लम्बा भूभाग में फैलल बा। एकरा में ढ़ेर स्थानीय विशेषता मिलेला। जहाँ शाहाबाद, बलिया आ गाजीपुर आदि दक्षिणी जिला में ड़ के प्रयोग होला ओहिजे उत्तरी जिला में ट के प्रयोग होला। एह प्रकार उत्तरी आदर्श भोजपुरी में जहाँ बाटे के प्रयोग होला ओहिजे दक्षिणी आदर्श भोजपुरी में बाड़ेके प्रयोग होला। गोरखपुर के भोजपुरी में मोहन घर में बाटें कहल जाला लेकिन  बलिया में मोहन घर में बाड़ें कहल जाला। पूर्वी गोरखपुर के  भाषा को 'गोरखपुरी' कहल जाला लेकिन  पश्चिमी गोरखपुर आ बस्ती जिला के भाषा के सरवरिया कहल जाला। सरवरिया शब्द सरुआर से निकल बा जवन सरयूपार के अपभ्रंश रूप ह। सरवरिया और गोरखपुरी के शब्द - विशेषत: संज्ञा शब्द-के प्रयोग में भिन्नता मिलेला बलिया (उत्तर प्रदेश) और सारन (बिहार) इ दुनो  जिला  में 'आदर्श भोजपुरी' बोलल जाला। लेकिन  कुछ शब्द के उच्चारण में तनी अन्तर बा। सारन के लोग ड का उच्चारण र करेले। जहाँ बलिया निवासी घोड़ागाड़ी आवत बा कहेले, ओहिजे  छपरा या सारन का निवासी घोरागारी आवत बा कहिहें। आदर्श भोजपुरी के एकदम निरखत रूप बलियाँ आ आरा में बोलल जाला।

जौनपुर, आजमगढ़, बनारस, गाजीपुर के पच्छिमी हिस्सा आ मिर्जापुर में बोलल जाले। बनारसी भोजपुरी के एगो नीक उदाहरण बा:

पहिले के समय में उत्तर भारत में उत्तर पश्चिमी इलाका, अवध आ भोजपुरी क्षेत्र में आ नेपाल के मधेस क्षेत्र में आम चलन में कैथी लिखाई के इस्तमाल होखे। एह लिपि में कानूनी दस्तावेज, प्रशासनिक कामकाज के ब्यौरा आ निजी दस्तावेज लिखल जायँ। भोजपुरी लिखे खातिर भी एही के इस्तमाल होखे।

कैथी लिखाई बायें से दाहिने लिखल जाले। ई आबूगीडा नियन लिखाई हवे। एह में व्यंजन में स्वर के चीन्हा मिला के लिखल जालें। स्वर के अक्षर सभ के अलग से भी लिखल जा सके ला। स्वर के चीन्हा व्यंजन अक्षर के ऊपर, नीचे आगे आ पाछे (अलग-अलग स्वर अनुसार) लागे लें। कैथी लिपि के एक ठो खासियत हवे कि एह में उपर के पड़ी पाई ना लागे ला।

बिहार में जमीन के खतियान के रिकार्ड पुरान समय से कैथी लिखाई में बा। आ अभिन ले इनहन के पढ़े खातिर कैथी के जानकार लोग के जरूरत पड़े ला। वर्तमान में एह लिखाई के बस इहे महत्व रहि गइल बाटे आ बतावल जात बा कि एकरा जानकार लोग के कमी से काफी दिक्कत भी हो रहल बाटे। हाल में कैथी लिपि सिखावे खातिर कुछ कोसिस भइल बा।

भोजपुरी साहित्य में अइसन सगरी साहित्य के रखल जाला जवन भोजपुरी भाषा में रचल गइल बाटे। गोरखनाथ, कबीरदास आ दरिया साहेब नियर संत लोगन के बानी से सुरुआत हो के भिखारी ठाकुर आ राहुल बाबा के रचना से होत भोजपुरी साहित्य के बिकास आज कबिता, कहानी, उपन्यास आ ब्लॉग लेखन ले पहुँच गइल बाटे। आधुनिक काल के सुरुआत में पाण्डेय कपिल, रामजी राय, भोलानाथ गहमरी नियर लोगन के रचना से वर्तमान साहित्य के रीढ़ मजबूत भइल बा। 

भोजपुरी भाषा आ साहित्य के इतिहास लिखे वाला लोगन में ग्रियर्सन, राहुल बाबा से ले के उदय नारायण तिवारी, कृष्णदेव उपाध्याय, हवलदार तिवारी आ तैयब हुसैन 'पीड़ित' नियर बिद्वान लोगन के योगदान बा। अर्जुन तिवारी के लिखल एकरा साहित्य के इतिहास भोजपुरी भाषा में मौजूद बा।

भोजपुरी भाषा में बने वाला  फिलिम सभ के भोजपुरी सिनेमा के रूप में जानल जाला। पहिली भोजपुरी फिलिम विश्वनाथ शाहाबादी के गंगा मइया तोहें पियरी चढ़इबों रहे जेवन 1963 में रिलीज भइल रहे। अस्सी के दशक में कई ठे उल्लेख जोग भोजपुरी फिलिम रिलीज भइली जिनहन में बिटिया भइल सयान, चंदवा के ताके चकोर, हमार भौजी, गंगा किनारे मोरा गाँव, आ सम्पूर्ण तीर्थ यात्रा। पुराना समय में भोजपुरी फिलिम बनावे के काम भी बंबई में भोहोखत रहे आ ई बॉलीवुड के एक ठो हिस्सा के रूप में बनावल जायँ। हालाँकि, अब एह फिलिम सभ के निर्माण भोजपुरी इलाका में भी हो रहल बा आ गोरखपुर, बनारस आ पटना नियन छोट शहर भी एह इंडस्ट्री के हिस्सा बन चुकल बाड़ें। 

भोजपुरी फिलिम के मुख्य दर्शक समूह पूरबी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड आ नेपाल के मधेस इलाका में बा लोग जेन्ने के ई भाषा हवे। एकरे अलावा आउर सभ नगर में रहे वाला भोजपुरी भाषी लोग बा। एही चलते भोजपुरी सिनेमा के दर्शक यूरोप आ अमेरिकी देस सभ में भी बा आ सूरीनाम नियरन देस सभ में भी जेन्ने भोजपुरी बोलल जाले।

सन्यक्त राष्ट्र संघ देने से मानवाधिकारन के घोषणा बिस्व के १५४ भाषा में कईल गईल बा, जे मे भोजपुरी आउर सूरीनामी हिन्दुस्तानी बा। सूरीनामी हिन्दुस्तानी भाषा सूरीनाम में बोलल जाला, ई एकदम भोजपुरिए नीयन हऽ खाली एकरा रोमन लिपि में लिखल जाला। संयुक्त राष्ट्र संघ देने से कईल मानवाधिकारन के घोषणा के पहिला अनुच्छेद भोजपुरी, हिन्दी, अंग्रेजी आ सूरीनामी हिन्दुस्तानी में नीचे लिखल बा :-

अनुच्छेद १: सबहि लोकानि आजादे जन्मेला आउर ओखिनियो के बराबर सम्मान आओर अधिकार प्राप्त हवे। ओखिनियो के पास समझ-बूझ आउर अंत:करण के आवाज होखता आओर हुनको के दोसरा के साथ भाईचारे के बेवहार करे के होखला। कइयन बेर एकरा ला धरना-परदरसन कइल जा चुकल बाटे।

भारत के संबिधान में आठवा अनुसूची में बर्तमान में कुल 22 गो भाषा दर्ज बाड़ी। जबकि एह में भोजपुरी नइखे। एह चलते भारत में भोजपुरी भाषा के आधिकारिक तौर पर भाषा ना मानल जाला बलुक एकरा के हिंदी के बोली मानल जाला। भोजपुरी के भाषा ना माने के कारण के रूप में हिंदी के साम्राज्यवाद आ हिंदी भाषी लोग के संख्या बढ़ा-चढ़ा के देखावे के कोशिश मानल जाला, जबकि हिंदी के वकालत करे वाला लोग भोजपुरी के भाषा के दर्जा देवे के माँग के हिंदी के अबर करे खातिर षडयंत्र माने ला अ एकर बिरोध करे ला।

मार्च 2017 में राज्यसभा में एह मुद्दा के जदयू के नेता अनवर अंसारी उठवलें आ ई कहलें की देस भर में प्राथमिक शिक्षा खातिर लइकन के महतारी भाषा के इस्तमाल होखे के चाहीं। हालाँकि, ई पहिला बेर नइखे आ एकरा पहिलहुं भोजपुरी के आठवा अनुसूची में शामिल करे के माँग कइल जा चुकल बाटे।




#Article 15: कार्बन (101 words)


कार्बन (अंगरेजी: कॉर्बन; Carbon, मूल  कोइला से अंगरेजी में आइल शब्द) एगो रासायनिक तत्व हवे जेकर चीन्हा C (रोमन कैपिटल अच्छर सी) हवे आ परमाणु नंबर 6 हवे। ई गैर-धातु हवे आ टेट्रावैलेंट—मने कि कोवेलेंट बंध बनावे खातिर चार इलेक्ट्रान के उपलब्धता वाला हऽ। ई पीरियोडिक टेबल में ग्रुप 14 में रखल जाला। कार्बन के तीन गो आइसोटोप प्राकृतिक रूप से मिले लें, C आ C स्टेबल होलें, जबकि C एगो रेडियोन्यूकलाइड हवे, एकरे क्षय के हाफ-लाइफ लगभग 5,730 साल होला। कार्बन कुछ अइसन तत्व सभ में से एक बा जेकरे बारे में बहुत प्राचीन जमाना से लोगन के मालुम बाटे।




#Article 16: ऑक्सीजन (173 words)


ऑक्सीजन  () चाहे आक्सीजन, एगो रासायनिक तत्व बा जेकरा के अंगरेजी अच्छर ओ (O) से चिन्हित कइल जाला आ एकर परमाणु नंबर 8 हवे। पीरियाडिक टेबल में ई कैल्कजिन समूह में रखल जाला। ई एगो बहुत सक्रिय रासायनिक तत्व हवे जे बहुत सारा तत्व सभ के रासायनिक क्रिया करे में सक्षम होला आ आक्साइड सभ के निर्माण करे ला। खुद ई नान-मेटल यानी की गैर-धातु हवे। एगो अनुमान के अनुसार ई प्रकृति में तिसरा सभसे बेसी मात्रा में पावल जाए वाला तत्व हवे।

पृथ्वी के वायुमंडल में एक दूपरमाणु वाला रूप डाइऑक्सीजन (O2) दुसरा सबसे बेसी मिले वाला गैस हवे जबकि ऊपरी वायुमंडल में एकर सिंगल परमाणु वाला रूप मालीक्यूलर ऑक्सीजन के परत भी पावल जाला। पृथ्वी के क्रस्ट में भी ई तत्व भरपूर पावल जाला।

एकर महत्व जीवधारी सभ खातिर सीधे प्राणवायु के रूप में बा काहें की जिया जंतु सभ साँस लेवे में आक्सीजन ग्रहण करें लें। दुसरा महत्व ई कि ई गैस हाइड्रोजन के साथे जुड़ के पानी के निर्माण करे ला जे जीवन खाती सभसे जरूरी चीज मानल जाला।




#Article 17: वेद (734 words)


बेद चाहे वेद (शब्द के अरथ ज्ञान) प्राचीन भारत के धार्मिक ग्रंथ हवें, वैदिक संस्कृत भाषा में रचल ई ग्रंथ, वर्तमान हिंदू धर्म के आदि ग्रंथ के रूप में मानल जालें। हिंदू लोग वेदन के अपौरुषेय आ नित्य माने ला, मने कि जवना के रचना केहू ब्यक्ति न कइले होखे बलुक ऋषि लोग एह ज्ञान के प्राप्त क के बतवले होखे।

ई ग्रंथ आर्य लोग के ग्रंथ मानल जालें, हालाँकि, आर्य शब्द के इस्तेमाल भाषा आधारित हवे आ कौनों जाति भा नृजाती खातिर या रेस खातिर ना इस्तेमाल होला। पुराना समय में, जब एह वेद सभ के रचना भइल, आर्य लोग के लिखाई के जानकारी ना रहल आ ई ग्रंथ पीढ़ी-दर-पीढ़ी इयाद क के पास भइलें; इनहन के बहुत बाद में जा के लिखल गइल। एही से इनहन के श्रुति कहल जाला।

वेद सभ के संख्या चार गो बा। ऋग्वेद, सामवेद आ यजुर्वेद के वेदत्रयी के रूप में जानल जाला; चउथा वेद, अथर्ववेद के बाद के मानल जाला आ एह में लौकिक चीज, जादू-टोना आ अउरी बिबिध चीज के बर्णन बाटे। वैदिक साहित्य में एह चार गो वेद सभ के अलावा ब्राह्मण ग्रंथ, आरण्यक आ उपनिषद सभ के शामिल कइल जाला। उपवेद सभ के वैदिक साहित्य में ना शामिल कइल जाला बलुक इनहन के वैदिकोत्तर (वेद के बाद के) साहित्य के रूप में मानल जाला।

संस्कृत भाषा के शब्द वेद के अरथ हवे ज्ञान  आ ई विद्- धातु से बनल हवे जेकर अरथ होला जानल (क्रियावाची शब्द के रूप में)। एकरा के प्रोटो-इंडो-यूरोपियन भाषा में पुनर्रचना कइल जाला  के रूप में, आ एकर तत्कालीन अरथ देखल चाहे जानल बतावल जाला।

एह शब्द से संबंधित अन्य शब्द बिद्या, बिद्वान इत्यादि बाड़ें। भोजपुरी में बेद जाने वाला पंडित के बेदुआ कहल जाला।

संस्कृत के वेद () आम नाँव के रूप में ज्ञान खातिर इस्तेमाल भइल बा बाकी कुछ प्रसंग में ई अलग किसिम के अर्थ में भी बा, जइसे कि ऋग्वेद के मंत्र 10.93.11 में एकर अरथ संपति हासिल कइल बा, कुछ अन्य जगहा पर एकर अरथ  घास के बोझा झाड़ू नियर चाहे फिर हवन के आगि खाती भी इस्तेमाल भइल बा।

संबधित स्भ्द वेदना ऋग्वेद में मंत्र 8.19.5 में आइल बा जेकर अनुवाद ग्रिफ़िथ द्वारा कर्मकांडी कथा, सायन के भाष्य में वेद के अध्ययन कइल, मैक्स मुलर द्वारा घास के बोझा आ एच एच विल्सन द्वारा वेद के साथे कइल गइल बा।

ऋग्वेद आर्य लोग के सभसे पुरान ग्रंथ हवे। एह में प्रमुख रूप से, बिबिध देव लोग के स्तुती में सूक्त बाड़े, कुछ सूक्त अन्य तरह के भी बाड़ें। एह में सूक्त सभ के गिनती 1028 (चाहे 1017) बा आ कुल 10580 मंत्र बाड़ें। जग्य करावे वाला पुरोहित, जे एह मंत्र सभ के पढ़ें, होता कहायँ।

एकर तीन गो पाठ मिले लें, साकल्य (1017 सूक्त), बालखिल्य (11 सूक्त जिनहन के आठवाँ मंडल के परिशिष्ट/में प्रक्षिप्त मानल जाला), आ वाष्कल (56 सूक्त, अब मिले लें नाहीं)। 

ऋग्वेद के कुल 10 मंडल में बिभाजित कइल गइल बा। एह में दुसरा से सातवाँ ले सभसे पुरान मानल जालें; पहिला, आठवाँ, नउवाँ आ दसवाँ के बाद के मानल जाला। ऋग्वेद के दू गो ब्राह्मण ग्रंथ मिले लें: ऐतरेय आ कौषीतकी। ई एकर गद्य वाला भाग हवें।

यजुर्वेद मुख्य रूप से जग्य के कर्मकांड से संबंधित हवे। 40 अध्याय के एह वेद में कुल 1990 मंत्र बाड़ें। जग्य के कर्मकांड करावे वाला पुरोहित के अध्वर्यु कहल जाय। एह वेद के दू गो शाखा, शुक्ल यजुर्वेद आ कृष्णयजुर्वेद बाड़ी सऽ।

सामवेद के रचना वेद के मंत्र सभ के गावे खाती भइल हवे। एह में आपन खुद के 75 गो मंत्र बाड़ें आ बाकी ऋग्वेद के हवें। ई जग्य में मंत्र के गावे वाला पुरोहित लोग के खाती कइल संकलन हवे, एह लोग के उद्गातृ कहल जाय।

सामवेद के दू गो उपनिषद हवें: छान्दोग्य आ जैमिनीय। छांदोग्य के सभसे पुरान उपनिषद मानल जाला। एही में पहिली बेर देवकी पुत्र कृष्ण के उल्लेख मिले ला।

अथर्ववेद चउथा वेद हवे। ई वेदत्रयी में ना शामिल हवे। जग्य के समय आवे वाला बाधा सभ क निवारण करे खातिर एकरा के ब्रह्मवेद भी कहल जाला। एह में कुल 731 सूक्त आ 6000 मंत्र बाड़ें जिनहन के 20 अध्याय में बिभाजन बा। एकरे मंत्र के पढ़े वाला के ब्रह्मा कहल जाय। एह वेद में वशीकरण, जादू-टोना इत्यादि के बिबरन मिले ला।

अथर्ववेद के दू गो शाखा बाड़ी, शौनक आ पिप्पलाद। एकलौता ब्राह्मण ग्रंथ गोपथ ब्राह्मण हवे आ एकर कौनों आरण्यक नइखें। एह वेद के तीन गो उपनिषद हवें – मुंडकोपनिषद, मांडूक्योपनिषद आ प्रश्नोपनिषद। मांडूक्योपनिषद सभसे छोट उपनिषद हवे। परसिद्ध वाक्य सत्यमेव जयते मुंडकोपनिषद में आइल हवे।




#Article 18: उत्तर प्रदेश (5824 words)


उत्तर प्रदेश या यूपी भारत क सभसे ढेर जनसंख्या वाला राज्य आ दुनिया में सभसे ढेर जनसंख्या वाला देस-उपबिभाग बाटे। भारतीय उपमहादीप के उत्तरी-बिचला इलाक में पड़े वाला एह राज्य के कुल आबादी लगभग 200 मिलियन (20 करोड़)बाटे। लखनऊ एह राज्य के राजधानी हवे।

ब्रिटिश शासन के दौरान 1 अप्रैल 1937 के यूनाइटेड प्रोविंस के नाँव से ई प्रदेश के रूप में बनावल गइल आ आजादी के बाद 1950 में एकर नाँव बदल के उत्तर प्रदेश रखाइल। 9 नवंबर 2000 के एह राज्य से उत्तरी पहाड़ी इलाका के अलग क के उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) राज्य बनल। वर्तमान में, प्रशासन खातिर ई अठारह गो मंडल आ 75 जिला में बिभाजित कइल गइल बा।

भूगोलीय रूप से ई राज्य गंगा के मैदान के सपाट हिस्सा में स्थित बा आ इहाँ उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु पावल जाले। राज्य के पछिम ओर राजस्थान; उत्तर-पच्छिम में हरियाणा, दिल्ली आ हिमाचल प्रदेश; उत्तर में उत्तराखंड आ नेपाल; पूरुब ओर बिहार आ दक्खिन ओर मध्य प्रदेश बाड़ें; जबकि एकदम दक्खिन-पूरुब के छोर पर एकर कुछ सीमा झारखंड आ छत्तीसगढ़ के साथ भी सटल बा। कुल 243,290 बर्ग किलोमीटर (93,933 बर्गमील) रकबा वाला ई राज्य भारत के 7.33% भाग हवे आ चउथा सबसे बड़ राज्य भी हवे।

अर्थब्यवस्था के आकार के मामिला में ई भारत के तीसरा सभसे बड़ राज्य बा जहाँ जीडीपी ₹9,763 बिलियन (US$150 बिलियन) बाटे। खेती आ सर्विस क्षेत्र प्रमुख आर्थिक कामकाज बाड़ें; सर्विस सेक्टर में परिवहन, पर्यटन, होटल, अचल संपत्ति, इंशोरेंस आ फाइनेंस संबंधी चीज सामिल बाटे। गाजियाबाद, बुलंदशहर, कानपुर, गोरखपुर, इलाहाबाद, भदोही,  रायबरेली, मुरादाबाद, बरेली, अलीगढ़, सोनभद्र, आ बनारस एह राज्य में औद्योगिक रूप से महत्व वाला शहर बाने।

प्राचीन आ मध्य्कालीन दौर में उत्तर प्रदेश ताकतवर राज सभ के भूमि रहल बा। इहाँ प्राकृतिक आ इतिहासी पर्यटन के कई जगह बा जइसे की आगरा, बनारस, कौशांबी, बलियाँ, श्रावस्ती, गोरखपुर, कुशीनगर, लखनऊ, इलाहाबाद इत्यादि। धार्मिक रूप से हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख शाखा वैष्णव मत के दू गो अवतार राम आ कृष्ण एही राज्य में पैदा भइल बतावल जालें आ अजोध्या आ मथुरा प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थ हवें। गंगा के तीरे बसल बनारस आ गंगा आ यमुना नदी के संगम पर मौजूद इलाहाबाद के हिंदू धरम में बहुत महत्व बा। दूर उत्तर-पूरुब कोना पर मौजूद गोरखपुर नाथ सम्प्रदाय के संस्थापक गोरखनाथ के भूमि मानल जाले।

शिकार आ भोजन संग्रह करे वाला आदिम मनुष्य लोग के उपस्थिति एह इलाका में रहल जहाँ आज के उत्तर प्रदेश बा आ अनुमान बा की ई लोग 85,000 से 72,000 साल पहिले इहाँ रहे। इहाँ से पुरापाषाणकाल के चीज भी मिलल बा जे 21,000–31,000 साल पुरान बतावल गइल बा आ मेसोलिथिक/माइक्रोलिथिक जमाना के आदिम लोग के 10550–9550 ईसा पूर्व के बस्ती के अवशेष प्रतापगढ़ जिला से मिलल बा जेह में पालतू मवेशी, बकरी आ भेड़ पाले आ खेती के सुरुआत के प्रमाण कम से कम 6000 ईसा पूर्व तक ले के मिलल बा जे धीरे-धीरे c. 4000 से 1500 ईसापूर्व ले बिकसित भइल; सिंधु घाटी सभ्यता आ हड़प्पा संस्कृति के दौर से होत वैदिक काल आ लोहा के जुग ले आइल।

महाजनपद काल में कोसल राज्य के बिस्तार ओही इलाका में रहे जवन आज के जमाना के उत्तर प्रदेश के सीमा के भीतर आवे ला। हिंदू कथा के मोताबिक अवतारी पुरुष राम अजोध्या के राजा रहलन जे कोसल के राजधानी रहे। कृष्ण, हिंदू कथा के अन्य पात्र, जिनके महाभारत में प्रमुख भूमिका रहल आ जिनके बिष्णु के अवतार मानल जाला, उत्तर प्रदेश के मथुरा में पैदा भइल बतावल जालें। महाभारत के लड़ाई ऊपरी दुआबा आ दिल्ली के आसपास के इलाका में भइल रहल जहाँ कुरु महाजनपद रहल आ पांडव लोग के शासन भइल। इतिहास के हिसाब से कुरु जनपद के काल उहे हवे जे करिया आ लाल माटी के बर्तन वाला जुग हवे, यानि उत्तरी-पच्छिमी भारत में लोहा जुग के सुरुआत, लगभग 1000 ईसा पूर्व के समय।

दक्खिन भारत पर हमला करे वाला ज्यादातर लोग गंगा के मैदान के इलाका से जरूर गुजरल जेकरा आज के उत्तर प्रदेश कहल जाला। एह इलाका पर कंट्रोल कइल सगरी भारतीय साम्राज्य सभ खातिर बहुत महत्व के चीज रहल बा आ अपना स्थायित्व आ बिकास खातिर सगरी बड़हन साम्राज्य सभ एह इलाका के महत्व दिहले बाने, एह में मौर्य (320–200 BC), कुषाण (CE 100–250), गुप्त (350–600), आ गुर्जर-प्रतिहार (650–1036) साम्राज्य के नाँव गिनावल जा सकत बाटे। गुप्त साम्राज्य के तूर देवे वाला हूण आक्रमण के पाछे-पाछे गंगा के मैदान के एह इलाका में कन्नौज के उदय भइल। हर्षवर्धन (590–647) के राज में कन्नौज के राजघराना अपना चरम पर पहुँच गइल। एह समय ई पंजाब से लेके गुजरात ले आ पूरुब में बंगाल से उड़ीसा ले बिस्तार लिहले रहल। एह में मध्य भारत के कुछ अइसन इलाका भी शामिल रहल जे नर्मदा नदी के दक्खिन के इलाका रहल, पूरा गंगा-जमुना मैदान टेम्पलेट एकर भाग रहबे कइल। वर्तमान भारत में कई समुदाय बाने जे अपना के एह कन्नौज के राज से फइलल लोग के बंसज बतावे ला। हर्ष के मउअति के बाद उनके ई साम्राज्य कई राजघराना सभ में टूट गइल, इनहन पर गुर्जर-प्रतिहार लोग आक्रमण कइल आ शासन कइल, एकरा बाद ई लोग के बंगाल के पाल बंस के भी चुनौती दिहल। कन्नौज पर दक्खिनी भारत के राष्ट्रकूट बंस के लोग द्वारा आठवी से दसवीं सदी के बीच भी कई गो आक्रमण भइल।

ब्रिटिश शासन से गम्हिराहे असंतोख के चलते बंगाल रेजीमेंट के सिपाही लोग जे मेरठ में तैनात रहल, बिद्रोह क दिहल। एह घटना में उत्तर प्रदेश के मंगल पांडे के बिद्रोह के सुरुआत करे के श्रेय दिहल जाला। एकरे बाद क्रम से बिद्रोह के बिस्तार होत गइल आ इतिहास में ई 1857 के बिद्रोह भा भारत के पहिली आजादी के लड़ाई के रूप में देखल जाला। कानपुर में नाना साहेब, तात्यां टोपे, आ अजीमुल्ला, लखनऊ में बेगम हजरत महल, झाँसी में रानी लक्ष्मीबाई, बरेली में खान बहादुर खान, फैजाबाद में मौलवी अहमदुल्लाह, कालपी में ताँत्या टोपे, इलाहाबाद में लियाकत अली, मेरठ में कदम सिंह आ मथुरा में देवी सिंह एह बिद्रोह के अगुआई कइल लोग। कुछ दिन बाद जब ब्रिटिश सासन दोबारा आपन सत्ता कायम क लिहलस, 1 नवंबर 1958 के इलाहाबाद में दरबार के आयोजन कइल गइल आ लार्ड कैनिंग महारानी के घोषणापत्र पढ़लें आ एकरे बाद भारत के सत्ता ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथ से सीधे इंग्लैंड के महारानी के हाथ में चल गइल। बिद्रोह के बिफलता के बाद के राजीनीतिक स्थिति में अंग्रेज लोग आपन स्थिति अउरी पोढ़ करे खाती बिद्रोही प्रदेश सभ के बाँट के नया तरीका से राजनीतिक बिभाजन कइल। नार्थ-वेस्ट प्रोविंस के दिल्ली इलाका के पंजाब के संघे बिलय क दिहल गइल, अजमेर आ मारवाड़ के राजपुताना में बिलय कइल गइल, अवध के नया राज्य के रूप में स्थापित कइल गइल आ एकर नाँव 'नार्थ वेस्टर्न प्रोविंस ऑफ आगरा एंड अवध' रखल गइल, जेकरा के 1902 में 'यूनाइटेड प्रोविंस ऑफ आगरा एंड अवध' क दिहल गइल। आमतौर पर एकरा के यूनाइटेड प्रोविंस भा यूपी कहल जाए लागल।

भारत के आजादी के बाद, यूनाइटेड प्रोविंस के नाँव बदल के उत्तर प्रदेश कइल गइल, एकर छोट नाँव यूपी के ओही तरे रखे खातिर, एकरा संबंधी नोटिफिकेशन के संघ के गजट में 24 जनवरी 1950 के छापल गइल। 1992 में अजोध्या में बाबरी महजिद के ध्वस्त करे के घटना के बाद राज्य में आ भारत भर में हिंसा भइल। साल 2000 एकर उत्तरी पहाड़ी भाग के बिलगा के अलग राज्य उत्तराखंड बनावल गइल।

उत्तर प्रदेश के कुल रकबा 2,43,290 बर्ग किलोमीटर बा, आ एह मायने में ई भारत के चउथा सभसे बड़हन राज्य बा। ई भारत के उत्तरी भाग में स्थित बा आ एकर अंतरराष्ट्रीय चौहद्दी नेपाल के साथ बा। एह राज्य के उत्तर में हिमालय परबत शुरू हो जाला, बाकी प्रदेश के ज्यादातर इलाका मैदानी बा आ ई मैदान हिमालय के पहाड़ी इलाका के तुलना में एकदम्मे अलग चीज बाड़ें। मैदानी इलाका के भी कई भाग में बाँटल जाला: ऊपरी गंगा मैदान, गंगा-जमुना दुआबा, घाघरा मैदान, आ तराई के मैदान। प्रदेश के दक्खिनी इलाका में बिंध्य परबत के पठारी हिस्सा बा। ई दक्खिनी हिस्सा में मुख्य रूप से कड़ेर चट्टानी इलाका, पहाड़ी आ पठार आ मैदानी घाटी पावल जालीं। मैदान के उत्तरी हिस्सा में भाबर आ तराई के इलाका पावल जाला, तराई में दलदली जमीन, जंगल आ लमहर हाथी घास पावल जाले। भाबर के इलाका में नदी सभ के पानी काफी हद तक जमीन के नीचे (अंडरग्राउंड) बहे ला आ तराई के समानांतर ई पातर पट्टी के रूप में बा। मुख्य मैदानी इलाका के तीन हिस्सा में बाँटल जाला: पूरबी उत्तर प्रदेश, जेह में 14 गो जिला सामिल बाने, अक्सर सूखा या बाढ़ के स्थिति पैदा हो जाले, बहुत घन आबादी होखे के कारण प्रति बेकती जमीन के रकबा कम बा आ बिपन्नता के इलाका मानल जाला; बिचला उत्तर प्रदेश आ पच्छिमी उत्तर प्रदेश के स्थिति कुछ बेहतर बा आ नहर इत्यादी के बिकास के कारण सिंचनी के सुबिधान बा। उत्तर प्रदेश के कई इलाका सभ में जलजमाव (वाटरलॉगिंग) या फिर ऊसर जमीन के टुकड़ा भी पावल जालें। एकरे अलावा, राज्य के बहुत सारा हिस्सा सूखा वाला इलाका भी बा। राज्य में कुल 32 गो गिनावे लायक छोट-बड़ नदी बाड़ी जिनहन में गंगा, यमुना, सरजू, बेतवा इत्यादि के हिंदू धरम में भी महत्व बाटे।

उत्तर परदेश में गहन खेती होला। मैदानी हिस्सा के निचला इलाका सभ में बहुत उपजाऊँ जमीन बा। कुछ पहाड़ी ढाल सभ पर भी गहन खेती होले हालाँकि ई सिंचनी के सुबिधा पर निर्भर होला। शिवालिक के पहाड़ी ढाल, जे एह प्रदेश के सभसे उत्तरी हिस्सा में बाने, के बाद तुरंते नीचे दक्खिन के ओर भाबर के इलाका हवे जहाँ हिमालयी नदी सभ द्वारा ले आइल बोल्डर आ मोट बालू के बनल जमीन हवे। तराई आ भाबर के एह पातर पट्टी में इतिहासी रूप से घन बन रहल हवें, अभिन ले भी कुछ इलाका में बन मिले लें।

उत्तर प्रदेश में नम उपोष्णकटिबंधी जलवायु होले आ साल में चार गो सीजन होला। दिसंबर से फरवरी के बीच जाड़ा, आ मार्च से मई ले गरमी के सीजन होला। एकरे बाद मानसून के सीजन आवे ला जून से सितंबर ले रहे ला। गर्मी के सीजन बहुत ढेर अतिमान वाला होला जब अधिकतम तापमान 48 °C से ऊपर ले चहुँप जाला। गंगा के मैदान में जलवायु उप-आर्द्र से ले के अर्द्ध-शुष्क के बीच पावल जाले। राज्य के औसत सालाना बरखा 650 मिमी होले जबकि उत्तरी-पूरबी कोने के जिला सभ में ई 1000 मिमी होले, क्रम से पच्छिम के ओर बरखा के मात्रा में कमी आवत जाले। इहाँ ज्यादातर बरखा मानसून के बंगाल के खाड़ी वाली शाखा से होला। जाड़ा के सीजन में भी कुछ बरखा होले जे पच्छिमी डिस्टर्बेंस के कारण होले आ चक्रवाती प्रकार के होले।

राज्य में प्राकृतिक संसाधन पर्याप्त रूप से मौजूद बा। साल 2011 में राज्य में कुल दर्ज कइल गइल बन क्षेत्र  रहे जे राज्य के कुल भूगोली रकबा के 6.88% इलाका पर बिस्तार लिहले रहल। तेजी से बनकटाई आ जानवरन के शिकार के बावजूद अभिन ले राज्य में बनस्पति आ जियाजंतु के मामिला में भरपूर बिबिधता देखे के मिले ला। कई प्रकार के फेड़न के प्रजाति, बिबिध छोट-बड़ मैमल, रेप्टाइल आ कीड़ा-मकोड़ा के प्रजाति ऊपरी समशीतोष्ण जंगली इलाका में पावल जालीं। कई प्रकार के पौधा जंगली रूप से पावल जालें जे जड़ी-बूटी के तौर पर इस्तेमाल होलें आ एह तरह के दवा-बीरो वाला पौधा सभ के ब्यापारिक रूप से भी उपजावल जाला। तराई-दुआर इलाका में चारा के रूप में इस्तेमाल होखे वाली घास भी मिले ले आ कागज उद्योग में इस्तेमाल होखे वाली घास भी। नम-पतझड़ वाला फेड़ सभ गंगा के मैदान में नदी के किनारे वाला इलाका में पावल जालें। ई मैदान बिबिध प्रकार के कीरा-बिच्छी आ अन्य रेंगे वाला जंतु सभ के आवास भी हवे। गंगा आ अन्य नद्दी सभ में बिबिध प्रजाति के मछरी आ खेखड़ा, झींगा, डोंका इत्यादि भी मिले लें। बिंध्य इलाका आ पठारी भाग में बब्बुर आ औरी अइसने सूखा इलाका के फेड़ मिले लें। चिंकारा पुराना समय में बहुत पावल जाय आ नीलगाय अभिन भी बहुत संख्या में मिले लीं।

पूरा मैदानी इलाका में उष्णकटिबंधीय पतझड़ वाली बनस्पति मिले ले आ जमीन ले भरपूर घाम के पहुँच के चलते घास आ झाड़ीदार पौधा भी खूब पावल जालें। खेती बदे, प्राचीन समय में मैदानी इलाका के जंगल सभ के साफ़ कइल गइल आ अब कहीं-कहीं कुछ टुकड़ा बचल बाने जहाँ प्राकृतिक जंगल होखे। दक्खिनी हिस्सा में पठारी भाग में अइसन कुछ इलाका बचल बाने जहाँ कांटेदार पौधा आ सूखा इलाका वाली झाडी के इलाका पथरीला जमीन होखे के कारण साफ़ नइखे कइल गइल। अइसन जंगल कम बरखा वाला क्षेत्र (50–70 सेमी), आ औसत तापमान 25-27 °C आ कम नमी वाला क्षेत्र में बाने।

उत्तर प्रदेश में चिरई सभ के बिबिध प्रजाति मिले लीं। प्रमुख प्रजाति में घरेलू गौरइया, मैना, गंगा मैना, पंडुक, कबूतर, मोर, सुग्गा, कोयल, बुलबुल, चोंचा, मछरेंगा, कठफोड़वे, आ अउरी कई चिरई गिनावल जा सके लीं। राज्य में बखीरा, चंबल, चंद्रप्रभा, हस्तिनापुर, कैमूर आ सुरहा ताल नियर कई गो पक्षी-बिहार स्थापित कइल गइल बाने।

रेप्टाइल, यानी रेंगे वाला जीव में बिस्तुइया, गिरगिट, गोह, कोबरा (गहुअन), करइत, धामिन, घड़ियाल इत्यादि पावल जाला। महसीर, टेंगना आ ट्राउट मछरी पावल जालीं। कई जियाजंतु सभ जे पहिले इहाँ पावल जायँ अब बिलुप्त भी हो चुकल बाने आ कई खतरा में भी बाने। सरकार के कोसिस के बावजूद कई तरह के जानवरन के शिकार से भी खतरा बा।

उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक रूप से कुल 75 गो जिला में बाँटल गइल बा आ ई जिला 18 गो मंडल में ब्यवस्थित बाने। हर जिला के प्रशासन जिलाधिकारी के हाथ में होला जे एगो आईएएस अधिकारी होलें। मंडल यानि कमिशनरी के मुखिया कमिश्नर (मंडलायुक्त) होलें।

हर एक जिला के कई गो तहसील में बाँटल गइल बा। तहसील के प्रशासन के काम डिप्टी कलक्टर (एसडीएम) के जिम्मे होला आ ऊ लोग जिलाधिकारी (डीएम) के रिपोट करे ला। तहसील के नीचे ब्लॉक होलें, हालाँकि ई प्रशासनिक स्तर न हवें बलुक पंचायती राज आ बिकास के कामकाज खातिर बनावल इकाई हऽ। ब्लाक यानि बिकासखंड स्तर पर बीडीओ राज्य के अधिकारी आ ब्लाक प्रमुख जनता के प्रतिनिधि होलें। हर ब्लाक के ग्रामपंचायत में बाँटल गइल बा, एकर मुखिया जनता द्वारा चुनल प्रतिनिधि - ग्राम परधान होलें। एक ठो ग्राम पंचायत में कई गो गाँव सामिल हो सके लें। ब्लाक में शहरी इलाका भी हो सके लें, जइसे छोट जनगणना कस्बा (सेंसस टाउन) जबकि बड़हन नगर सभ में अलग से नगर पंचायत के गठन होला।

उत्तर प्रदेश में सभसे बड़हन प्रशासनिक बिभाग, 18 गो मंडल सभ के लिस्ट नीचे दिहल बा:

नीचे उत्तर प्रदेश के सभसे ढेर जनसंख्या वाला छह गो जिला आ भारत के जिला सभ में इनहन के रैंक दिहल गइल बा:

अन्य राज्य सभ के तुलना में, उत्तर प्रदेश में सभसे ढेर मेट्रो शहर बाने। राज्य के कुल वास्तविक शहरी जनसंख्या  44.4 मिलियन रहल, ई भारत के कुल शहरी जनसंख्या के 11.8% बा आ एह तरीका से अन्य राज्यन के तुलना में उत्तर प्रदेश दूसरा स्थान पर बा। जनगणना 2011 के अनुसार, कुल 15 गो शहरी संकुल अइसन रहलें जिनहन के जनसंख्या 5,00,000 से ढेर रहल। कुल 14 गो नगर निगम रहलें, आ नोएडा अलग से एगो बिधिक संस्था द्वारा प्रशासित कइल जाला।

साल 2011 में, मायावती के मुख्यमंत्री काल में कैबिनेट मंत्री लोग ई निश्चय कइल कि उत्तर प्रदेश के चार गो राज्यन में बाँट दिहल जाय - पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध प्रदेश आ पच्छिम प्रदेश। इनहन में क्रम से अठाईस, सात, तेईस, आ सत्रह गो जिला शामिल कइल जाए वाला रहलें। 2012 के चुनाव में जीत पावे वाली समाजवादी पार्टी के अखिलेश सरकार एह प्रस्ताव के नकार दिहलस।

उत्तर प्रदेश बिसाल जनसंख्या आ तेज जनसंख्या बढ़ती दर वाला राज्य बा। 1991 से 2001 के बीच प्रदेश के जनसंख्या में 26% के बढ़ती भइल। ई भारत के सभसे ढेर जनसंख्या वाला राज्य हवे, जहाँ 1 मार्च 2011 के कुल 199,581,477 निवासी लोग रहल। एह तरीका से भारत देस के कुल जनसंख्या में उत्तर प्रदेश के हिस्सा 16.16% रहल। भले उत्तर प्रदेश भारत के चउथा सभसे बड़हन रकबा वाला राज्य होखे, एतना बिसाल जनसंख्या के कारण इहाँ के जनघनत्व  828 ब्यक्ति प्रति वर्गकिलोमीटर बा आ ई देस के सभसे घन बसल राज्यन में से एक बा।

राज्य में 2011 के आँकड़ा अनुसार साक्षारता दर 67.7% रहल, जे राष्ट्रीय औसत 74% से कमे रहल। पुरुष साक्षारता 79% आ औरतन के साक्षरता दर 59% रहल। एकरे पहिले, 2001 के जनगणना में कुल साक्षरता दर 56.27%, पुरुष साक्षरता 67% आ औरतन के साक्षरता दर 43% दर्ज कइल गइल रहल।

हिंदी इहाँ के प्रमुख भाषा हवे आ आँकड़ा के मोताबिक (91.32%) लोग अपना के हिंदी भाषी बतावल। उर्दू दुसरही भाषा हवे जे राजकाज में इस्तेमाल होले। भोजपुरी अन्य प्रमुख भाषा बा जे पूर्वांचल में बिसाल जनसंख्या द्वारा बोलल जाले हालाँकि, भारत सरकार एकरा के हिंदी के बोली माने ले जवना कारण भोजपुरी आ हिंदी दूनो के वास्तविक बोले वाला लोग के संख्या के अंजाद लगावल कठिन बा।

राज्य कसे शासन प्रातिनिधिक लोकतंत्र के संसदीय सिस्टम से चले ला। उत्तर प्रदेश भारत के सात गो अइसन राज्य सभ में से एक बा जहाँ दू सदन वाली विधायिका बाटे: निचला सदन के बिधान सभा आ ऊपरी सदन के बिधान परिषद कहल जाला। उत्तर प्रदेश बिधान सभा में कुल 404 सीट बा इनहन खातिर जनता सीधे आपन प्रतिनिधि चुने ले जे लोग के बिधायक कहल जाला। बिधान सभा के सदस्य, यानी ई बिधायक लोग पाँच बरिस खातिर चुनल जाला। उत्तर प्रदेश के बिधान परिषद, यानी ऊपरी सदन, 100 सदस्य वाला एगो परमानेंट सदन हवे आ दू तिहाई सदस्य (33 गो) हर दूसरा साल चुनल जाला। चूँकि, भारतीय संसद में उत्तर प्रदेश के सभसे ढेर लेजिस्लेटर (सांसद) लोग जाला, ई राज्य देस के राजनीति मेंभी बहुत महत्व के मानल जाला। भारतीय संसद में 80 गो लोक सभा सदस्य आ 31 गो राज्यसभा सदस्य उत्तरे प्रदेश के होला लोग।

उत्तर प्रदेश में लोकतांत्रिक रूप से शासन के संबैधानिक मुखिया राज्यपाल (गवर्नर) होलें जिनके नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा कइल जाला। राज्यपाल के कार्यकाल पाँच साल होला। बिधान सभा में मेजारिटी के दल भा गठबंधन के नेता के राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री नियुक्त कइल जाला आ इनके सलाह अनुसार बाकी मंत्रिमंडल के भी नियुक्ति राज्यपाले करे लें। प्रतीकात्मक रूप से सरकार के मुखिया राज्यपाल होलें आ रोजमर्रा के सरकारी कामकाज के जिम्मेदारी मुख्यमंत्री आ उनके मंत्रिमंडल के होला।

हर जिला के प्रशासन जिलाधिकारी (डीएम) के हाथे होला जे भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) अधिकारी होलें आ इनके मातहत राज्य सेवा के अधिकारी लोग होला। पुलिस कप्तान (), भारतीय पुलिस सेवा (आइपीएस) अधिकारी होलें आ इनके सहायता में राज्य पुलिस के अधिकारी लोग होला। न्यायपालिका में इहाँ सभसे ऊपर इलाहाबाद हाइकोर्ट बा जेकर एगो बेंच लखनऊ में भी बा। एकरे नीचे हर जिला में जिला न्यायालय आ सत्र न्यायालय बाने आ तहसील स्तर पर भी कुछ मुकदमा के सुनवाई होला। हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीस के नियुक्ती राष्ट्रपति द्वारा, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीस के सलाह पर होले। बाकी जज लोग के नियुक्ति इहाँ के मुख्य न्यायाधीश के सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा होले। निचली अदालत सभ, दू हिस्सा में बिभाजित होलीं: उत्तर प्रदेश सिविल न्यायिक सेवा आ उत्तर प्रदेश उच्च न्यायिक सेवा। जहाँ सिविल जूडीशियल सर्विस में सिविल जज (जूनियर डिवीजन)/चीफ जूडीशियल मजिस्ट्रेट ओही जे, उत्तर प्रदेश के हायर जूडीशियल सेवा में सिविल आ सेशन (सत्र) जज लोग होला।

उत्तर प्रदेश के राजनीति में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी आ भारतीय जनता पार्टी नियर चार गो राजनीतिक दल के मुख्य भूमिका बाटे। उत्तर प्रदेश के राजनीतिग्य लोग भारत के राष्ट्रीय राजनीति में भी प्रमुख भूमिका अदा कइले बा, कुछ लोग काफी ऊँच पद तक ले चहुँपल बा, जइसे कि परधानमंत्री। एह मामिला में उत्तर प्रदेश के अंडर अचीवर भी मानल जाला कि देस के आठ गो परधानमंत्री देवे के बावजूद भी ई राज्य अभिन ले गरीब राज्य बा।

अगर राज्य के नेट घरेलू उत्पाद (NSDP) के हिसाब से देखल जाय, महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश भारत के दुसरा सभसे बड़ अर्थब्यवस्था हवे, जहाँ NSDP  बा, आ एह तरीका से भारत के अर्थब्यवस्था में एकर जोगदान 8.406 % के बा। खेतीबारी एह राज्य के लोग के मुख्य पेशा हवे। इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन के रपट के मोताबिक, साल 2014–15 में देस के कुल खाद्यान उत्पादन में उत्तर प्रदेश के 19% सझियाई रहल। साल 2014–15 में खाद्यान्न उत्पादन 47,773.4 हजार टन रहल। इहाँ गोहूँ मुख्य खाद्यान फसल हवे आ ऊखि प्रमुख आमदनी वाली फसल ह। भारतीय चीनी मिल एसोसिएशन (ISMA) के रपट के मोताबिक, भारत में कुल ऊख के उत्पादन साल 2015 के सितंबर महीना में खतम होखे वाला बित्त बरिस में 28.3 मिलियन टन रहल जेह में से 10.47 मिलियन टन महाराष्ट्र में आ 7.35 मिलियन टन उत्तर प्रदेश से रहल।

राज्य में उद्योग सभ के संकेद्रण कई टुकड़ा में बा। मुख्य उद्योग क्षेत्र में कानपुर आ नोएडा गिनावल जा सके ला। पूर्वांचल में भी कुछ उद्योग लागल बाने। बनारस-मुग़लसराय इलाका में रेलवे से संबंधित उद्योग लागल बाने जइसे मंडुआडीह में डीजल लोकोमोटिव कारखाना बा। इलाहाबाद के उपनगरी इलाका के रूप में नैनी में भी उद्योग क्षेत्र बा, आ जौनपुर में सतहरिया उद्योग क्षेत्र बिकसित कइल जा रहल बा।  उत्तर प्रदेश में मुख्य उद्योग सभ में इंजीनियरी उत्पाद, इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रिक सामान, केबिल, स्टील, चमड़ा से बनल सामान, कपड़ा उद्योग, गहना, ऑटोमोबाइल, रेल डिब्बा इत्यादि बाने। छोटहन साइज के उद्योग सभ के संख्या उत्तर प्रदेश में सगरी राज्यन के तुलना में सभसे ढेर बा; कुल भारत के 23 लाख अइसन छोट इकाई सभ के लगभग 12 हिस्सा इहँवे उत्तरे प्रदेश में बा। With 359 manufacturing clusters, cement is the top sector of SMEs in UP.

उत्तर प्रदेश में शिक्षा के बहुत पुरान परंपरा चल आइल बा भले ई इतिहासी दौर में उच्चबर्ग आ धार्मिक बिद्यालयन ले सीमित रहल होखे। संस्कृत-आधारित शिक्षा इहाँ बैदिक काल से ले के गुप्त काल ले रहल आ एकरे बाद संस्कृति के बिकासक्रम में, पाली, फ़ारसी, आ अरबी बिद्या के चलन आइल। हिंदू-बौद्ध-मुसलमानी बिद्या के सामूहिक रूप तब तक ले इहाँ के बिसेसता रहल जबले ब्रिटिश राज के उदय ना भइल। वर्तमान इस्कूल-से-इन्वर्सिटी वाला सिस्टम बाकी भारत के साथे-साथ इहाँ भी स्थापित भइल आ एह सिस्टम के बिकास में ब्रिटिश राज आ ईसाई मिशनरी सभ के योगदान हवे। राज्य में इस्कूल सभ या त सरकार द्वारा चलावल जालें या फिर प्राइवेट संस्था (ट्रस्ट) द्वारा। ज्यादातर इस्कूल सभ में पढ़ाई के माध्यम के रूप में हिंदी के इस्तेमाल होला; एकरे अलावा इंग्लिश-मीडियम इस्कूल भी बाने आ संस्कृत पाठशाला आ मदरसा भी जहाँ क्रम से अंगरेजी, संस्कृत आ उर्दू माध्यम में पढ़ाई होला। सीबीएससी आ आइसीएससी बोर्ड से जुड़ल इस्कूल सभ में अंगरेजी माध्यम से पढ़ाई होला।

उत्तर प्रदेश में कुल 45 गो विश्वविद्यालय बाने, जेह में 5 गो केंद्रीय विश्वविद्यालय, 28 गो राज्य विश्वविद्यालय, 8 डीम्ड विश्वविद्यालय, 2 गो आइआइटी, 1 ठो आइआइएम (लखनऊ), 1 ठो एनआइटी (इलाहाबाद), आ 2 गो ट्रिपल आइटी, 1 ठो नेशनल लॉ कॉलेज आ कई सारा इंजीनियरिंग कालेज आ पॉलिटेकनिक कॉलेज अउरी आइटीआई बाने। उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय आ उच्च शिक्षा संस्थान सभ में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, आईआईटी कानपुर, आईआईएम लखनऊ, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज (केजीएमसी), बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू), मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमएनआईटी), संजय गाँधी पीजीआई प्रमुख बाने।

घरेलू पर्यटन के हिसाब से देखल जाय त उत्तर प्रदेश में सभसे ढेर पर्यटक लोग आवे ला, ई संख्या 71 मिलियन (7.1 करोड़) बा, जेकर वजह इहाँ के बिबिधता वाला भूगोल, संस्कृति, तिहुआर, स्मारक, प्राचीन पूजा अस्थान आ बौद्ध बिहार इत्यादि के मौजूदगी बा। हर साल अकेले इलाहाबाद में माघ मेलवे में लाखन गो श्रद्धालू लोग नहान करे आवे ला। इहे मेला हर 12वाँ बरिस अउरी बिसाल पैमाना पर आयोजित होला आ कुंभ मेला कहाला, एह समय लगभग एक करोड़ लोग एह गंगा-जमुना के संगम पर एकट्ठा हो जाला आ ई लोगन के दुनिया में सभसे बड़ समागम बन जाला।

इतिहासी रूप से महत्त्व के जगह बनारस खुद भी बा आ एकरे लगे सारनाथ भी बा जहाँ गौतम बुद्ध आपन पहिला उपदेस दिहले रहलें; एकरे उत्तर में गोरखपुर के आगे कुशीनगर भी बौद्ध धरम के लोग खातिर महत्व के अस्थान बा जहाँ बुद्ध के निधन भइल। सारनाथ में मौजूद अशोक के खम्हा आ एकर सिंह मुकुट दुनो राष्ट्रीय महत्त्व के चीज बा। बनारस से लगभग 80 किमी के दूरी पर मौजूद गाजीपुर अपना गंगा घाट खातिर भी मशहूर बा आ हेइजे लार्ड कार्नवालिस के निधन भइल रहल आ उनुके मकबरा मौजूद बा। राज्य में कई गो पक्षी बिहार भी बाने, जइसे एटा में, समसपुर में, आ बलियाँ में सुरहा ताल।

राजधानी लखनऊ में भी कई सारा इतिहासी धरोहर भवन मौजूद बाने। इहाँ अवध काल के ब्रिटिश रेजीडेंसी के भवन अबहिन ले संरक्षित बा आ एकर जीर्णोद्धार भी कइल गइल बा। बड़ा आ छोटा इमामबाड़ा आ अउरी कई गो भवन बाने जिनहन के देखे लोग आवे ला। उत्तर प्रदेश में आगरा आ एकरे नजदीक में तीन गो बिस्व धरोहर अस्थान बाने: ताज महल, आगरा के किला आ फतेहपुर सीकरी।

पर्यटन के बढ़ावा देवे खातिर इहाँ 1972 में पर्यटन डाइरेक्टरेट के स्थापना कइल गइल जेकर मुखिया एगो आइएएस अफसर होलें। एकरे बाद 1974 में उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन निगम के स्थापना कइल गइल जे पर्यटन से जुड़ल बानिज्यिक क्रियाकलाप के देखरेख करे ला।

उत्तर प्रदेश में सरकारी आ निजी क्षेत्र मिला के बड़हन पैमाना पर स्वास्थ्य सुबिधा खातिर इंफ्रास्ट्रक्चर के बिकास भइल बा बाकी सेहत के अलग-अलग पैरामीटर पर अन्य राज्य सभ से तुलना कइल जाय त इहाँ के परफारमेंस बहुत उत्साहजनक नइखे। भले पब्लिक आ प्राइवेट सेक्टर में स्वास्थ्य सुबिधा के लमहर-चाकर इन्फ्रास्ट्रक्चर मौजूद होखे, इहँवा के बिसाल जनसंख्या के कारण ई जरूरत भर के ना बाटे आ अइसन सेवा सभ के डिमांड पूरा ना क पावे ला।

पछिला 15 साल में, उत्तर प्रदेश के जनसंख्या में लगभग 25 प्रतिशत से अधिका के बढ़ती भइल बा। जबकि, सरकारी स्वास्थ्य केंद्र, जवन पब्लिक सेक्टर के सभसे अगिला मोर्चा के स्वास्थ्य सुबिधा बा, इनहन के संख्या में आठ प्रतिशत के गिरावट आइल बा। छोटहन उपकेंद्र सभ, जहाँ जनता के पहिला संपर्क एह सुबिधा सभ से होला, इनहन के संख्या में बस 2 प्रतिशत के बढती भइल बा अगर 2015 के पहिले के 25 साल में भइल बदलाव के देखल जाय, जबकि एही समय में राज्य के जनसँख्या में 51 परसेंट से ढेर के बढ़ती भइल बा। एगो नया पैदा भइल बच्चा के जिए के आशा के तुलना कइल जाय त बिहार के तुलना में ओकर जीवन प्रत्याशा चार बरिस कम, हरियाणा के तुलना में पाँच साल कम, आ हिमाचल प्रदेश के तुलना में सात बरिस कम रहे ला। भारत के स्तर पर, सगरी छुआछूत से फइले वाली भा गैर-छुआछूत वाली बेमारी सभ में उत्तर प्रदेश लगभग सभन में सभसे ढेर केस वाला रहल, एह में टाईफाइड से होखे वाला मउअत के 48 परसेंट (2014); 17 परसेंट कैंसर से होखे वाला मौत आ 18 परसेंट टीबी से होखे वाला मउअत (2015) उत्तर प्रदेश से रहल। महतारी मउअत दर के मामिला में आसाम के बाद उत्तर प्रदेश भारत में दूसरा नमर प बाटे आ इहाँ हर एक लाख जचगी करे वाली औरतन में से 285 के मौत के एभरेज (2013) बाटे, आ सौ में 62 गर्भवती औरतन के जचगी के बाद जवन कमसेकम स्वास्थ्य-सुबिधा मिले के चाहीं ऊ ना उपलब्ध हो पावे ला।

अभिन भी राज्य में 42 प्रतिशत औरत, संख्या में ई 15 लाख से ढेर होखी, घरहीं जचगी करे लीं। अइसन जचगी सभ में से लगभग दू तिहाई हिस्सा (61 प्रतिशत) सुरक्षित ना होला। शिशु मौत दर के आँकड़ा उत्तर प्रदेश में हाई बाटे, नवजात मौत दर (NNMR) से पाँच बरिस के भीतर मरे वाला बच्चा सभ के इंडिकेटर देखल जाय त हर 1000 जनमल बच्चा सभ में से 64 गो मर जालें, एह में से 35 गो महीना के भीतरे मर जालें आ 50 गो साल भर के उमिर पूरा ना का पावे लें। अगर भारत के मानक के हिसाब से देखल जाय, प्रदेश के लगभग एक तिहाई हिस्सा ग्रामीण जनसंख्या मूलभूत स्वास्थ्य सुबिधा से बंचित बाटे। हाल में, गोरखपुर में 60 ढेर बच्चन के अस्पताल में मौत हो गइल, एकर कारण उहाँ ऑक्सीजन के सप्लाई में कमी होखल बतावल गइल।

बहुत सारा वैदिक मंत्र सभ के रचना प्राचीन काल में एह इलाका में भइल जे आज उत्तर प्रदेश के अंदर पड़े ला। महर्षि व्यास, जे परंपरागत रूप से वेद सभ के बिभाजन करे वाला मानल जालें आ पुराणन आ महाभारत के रचइता मानल जालें आ जिनके समर्पित तिहुआर गुरु पूर्णिमा आज भी एह क्षेत्र में मनावल जाला, उत्तर परदेस के कालपी के नजदीक जमुना नदी के एगो दीप पर जनमल बतावल जालें। बाद के समय में, हिंदी साहित्य आ लोक साहित्य में एह प्रदेश के बहुत योगदान रहल बा आ तुलसीदास, सूरदास आ कबीरदास नियर लोग एही राज्य से रहल बा। बनारस पुराना समय से शिक्षा आ साहित्य के केंद्र रहल चल आइल बा। आधुनिक समय (19वीं आ 20वीं-सदी) के हिंदी भाषा के साहित्य में भी बहुत सारा लोग के नाँव गिनावल जा सके ला जइसे कि भारतेंदु हरिश्चंद्र, जयशंकर प्रसाद, मैथिलीशरण गुप्त, मुंशी प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, सुभद्राकुमारी चौहान, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, बाबू गुलाबराय, अज्ञेय, हरिवंश राय बच्चन, हजारी प्रसाद द्विवेदी, शिवप्रसाद सिंह आ काशीनाथ सिंह इत्यादि।

राज्य के कबो-कबो हिंदी हार्टलैंड (मने कि, हिंदी हृदय प्रदेश) भी कहल जाला। हिंदी भाषा राज्य के प्रशासन के ऑफिशियल भाषा 1951 के उत्तर प्रदेश ऑफिशियल भाषा अधिनियम से बनल आ 1989 में एह अधिनियम में सुधार कइल गइल आ उर्दू के अतिरिक्त भाषा के दर्जा दिहल गइल। भाषा बिज्ञान के हिसाब से राज्य के बिस्तार हिंदी पट्टी के पच्छिमी, मध्य आ पूरबी हिंदी तीनो के कुछ इलाका कभर करे ला। मुख्य भाषा आ बोली सभ में अवधी, भोजपुरी, ब्रजभाषा, बुन्देली, कनौजी, बघेली आ कड़ी बोली गिनावल जाली सऽ।

उत्तर प्रदेश से आवे वाला संगीत के क्षेत्र के हस्ती लोग में अनूप जलोटा, गिरिजा देवी, किशन महराज, विकास महराज, नौशाद अली, रविशंकर, शुबहा मुद्गल, सिद्धेश्वरी देवी, तलत महमूद आ उस्ताद बिस्मिल्ला खान के नाँव प्रमुख बा। परसिद्ध गजल गायिका बेगम अख्तर उत्तरे परदेश के रहली। लोक संगीत के भी इहाँ बहुत धनी परंपरा बा आ ब्रज क्षेत्र के रसिया आ होरी कृष्ण भक्ति के संगीत हवे। अन्य लोग संगीत के रूप में फगुआ, कजरी, चैती, सोहर, ठुमरी, बिरहा, आ सोरठी बाटे। लखनऊ में भातखंडे संगीत संस्थान आ इलाहाबाद में प्रयाग संगीत समीति इहाँ के प्रमुख संगीत शिक्षा के संस्थान बाड़ें।

शाश्त्रीय नाच के बिधा कथक के पैदाइश उत्तरे प्रदेश में भइल। तबला आ पखावज के साथ एह नाच के प्रस्तुति उत्तर भारतीय संगीत पर आधारित होले। शास्त्रीय नाच के चार गो घराना प्रमुख बाने: लखनऊ घराना, अज्राड़ा घराना, फर्रूखाबाद घराना आ बनारस घराना। पूर्वांचल के लोक नाच में धोबिअऊ आ कहरऊ नाच के ख़ास अस्थान बा।

दिपावली, होली आ रामनवमी उत्तर प्रदेश के बहुत प्रमुख तिहुआर हवें। इलाहाबाद के कुंभ मेला सभसे बड़हन मेला हवे। बरसाना आ मथुरा में होली के पहिले लट्ठमार होली एक ठो परसिद्ध तिहुआर हवे। बुद्ध पूर्णिमा, जहिया गौतम बुद्ध के जनम, ज्ञान, आ निर्वाण तीनो भइल, बौद्ध लोग आ हिंदू लोग के पावन परब हवे। अन्य तिहुआर सभ में ईद-उल-फ़ित्र, बकरीद, बिजयदसिमी, खिचड़ी, बसंत पंचिमी, सतुआन, जन्माष्टमी, देव दीपावली, गंगा दसहरा, छठ पूजा, महावीर जयंती, मोहर्रम, आ हनुमान जयंती प्रमुख बाने। आगरा के ताज महोत्सव, आधुनिक समय के चीज हवे आ संस्कृति के बिबिध रंगीन रूप देखे के मिले ला। इलाहाबाद में, त्रिवेणी महोत्सव भी मनावल जाला।

रोज-रोज खाइल जाए वाला खाना में, उत्तर भारत के बाकी इलाका नियर, उत्तर प्रदेश में भी थाली में रोटी, दाल, सब्जी आ चावल (भात) प्रमुख भोजन हवे। एकरे संघे, चटनी, रायता, अँचार आ पापड़ नियर चीज चटकार करे खातिर भोजन के सहजोगी आइटम हवें सऽ। खास मोका महाले, रोटी के जगह पूड़ी खाइल जाला। अइसन मोका सभ पर कड़ाही में छान के बनावल पकवान सभ के प्रमुखता हो जाला, इनहन के पक्का खाना कहल जाला। पूड़ी, कचउड़ी, सब्जी, पोलाव, पापड़, रायता आ मीठा आइटम में खीर (तस्मई) भा सेवई खाइल जाला। पेय (पियल जाए वाला) चीज सभ में छाछ (भा माँठा) अभिन भी बहुत सारा लोग पसंद करे ला। भोजन के बाद पान खाए-खियावे के चलन भी हवे।

बहुत सारा समुदाय-बिरादरी सभ के आपन ख़ास पकवान भी होला। जैन, कायस्थ आ मुसलमान लोग के अपना तरीका के भोजन होला। एही तरीका से एह बड़हन राज्य में क्षेत्र के अनुसार भी बिबिधता देखे के मिले ला। अवधी खाना, लखनऊ के परभाव में कबाब, बिरियानी, कीमा आ निहारी नियर पकवान सभ खातिर बहुत परसिद्ध हवे। मिठाई के आइटम में, खुरचन, बरफी, पेड़ा, गुलाबजामुन, पेठा, राबड़ी नियर चीज बहुत चलन में बाड़ी आ हिंदू लोग के भोजन में इनहन के बहुत प्रमुख अस्थान बाटे। लखनऊ के चाट आ बनारस के पान अपना सवाद आ सामग्री खाती पुरा दुनिया में मशहूर हवे।

अवधी खानपान पर मुख्य रूप से लखनऊ क परभाव देखल जाला। नबाब लोग के शासन काल में, मुगलई पकवान के इहाँ चलन बहुत बढ़ल आ एही कारण इहाँ के भोजन भी काश्मीर, मध्य एशिया, पंजाब आ हैदराबादी पकवान सभ से परभावित भइल; आज शहर के अपना नबाबी खाना खातिर जानल जाला।
लखनऊ के बावर्ची आ रकाबदार लोग इहाँ खास 'दम पुख्त' स्टाइल शुरू कइल (जेह में कई तरह के दम शामिल बाने, इनहन के मद्धिम आँच पर देरी ले पकावल जाला) आ अब ई लखनऊ के खास चीन्हा बन चुकल बा। एही स्टाइल के बिस्तार के रूप में, कबाब, कोरमा, बिरियानी, कलिया, कुलचा, जरदा, शीरमाल, रूमाली रोटी, आ वरकी पराठा भी लखनऊ के खास चीज मानल जाला। अवध के खाना खाली भर बिबिधते के मामिला में धनी नइखे, पकवान बनावे में इस्तेमाल होखे वाला सामान में भी बहुत चीज शामिल कइल जाला जेह में इलायची, केसर आ जाफरान नियर खुशबूदार मसाला इत्यादि गिनावल जा सके लें।

पूरबी उत्तर प्रदेश के खाना, जहाँ भोजपुरी संस्कृति बा, कुछ अलगे किसिम के होला। आम उत्तर परदेशी थाली इहाँ ओइसने होले जइसन बाकी उत्तर भारत में, बाकी पूरुब बढ़े पर भात के महत्त्व आ मछरी के महत्व बढ़त जाला। खास परब तिहुआरन पर पूड़ी कचौड़ी के साथ कढ़ी-बरी इत्यादि के महत्व भी बढ़ जाला। भउरी-चोखा (लिट्टी-चोखा), सतुआ आ दही-चिउड़ा एह इलाका में काफी चलन में रहल बा। तराई के इलाका में मछरी के परभाव बढ़त देखल जाला।

उत्तर प्रदेश के लोग के पहिनावा में परंपरागत पहिनावा आ पच्छिमी स्टाइल के पहिनावा, दुनों सामिल बा। परंपरागत रूप से एह इलाका में धोती-कुरता भा पैजामा-कुरता मरदाना लोग के पोशाक हवे आ औरतन के पोशाक साड़ी आ सलवार-कमीज हवे। नया जमाना के लोग अब पैंट-बुशट, जींस-टीशर्ट भी पहिरत बा। टोपी आ पगड़ी पुरुष लोग के पोशाक के हिस्सा हवे। शेरवानी आ चूड़ीदार पैजामा, मर्दाना लोग बिसेस मोका-महाले पहिरे ला जइसे कि शादी बियाह भा तिहुआर के समय पर।

उत्तर प्रदेश से कई गो अंगरेजी, हिंदी आ उर्दू अखबार आ पत्रिका सभ के प्रकाशन होला। अंगरेजी के पायनियर के अस्थापना 1865 में जार्ज एलेन द्वारा इलाहाबाद में कइल गइल। अमर उजाला, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान इत्यादि के भारी सर्कुलेशन बा आ इनहन के लोकल संस्करण कई जगह से छपे ला। इहाँ छपे आ बिकाये वाला प्रमुख अंगरेजी अखबार सभ में दि टेलीग्राफ, दि टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, दि हिंदू, दि स्टेट्समैन, दि इंडियन एक्सप्रेस, आ एशियन एज बाड़ें। अर्थजगत आ फाइनेंस से जुड़ल प्रमुख अखबार दि इकोनॉमिक टाइम्स, दि फाइनेंशियल एक्सप्रेस, बिजनेस लाइन, आ बिजनेस स्टैंडर्ड  के सर्कुलेशन उल्लेख जोग बा। देसी भाषा सभ में भी कई गो अखबार बिकालें जेह में नेपाली, गुजराती, पंजाबी, बंगाली, ओडिया आ उर्दू भाषा के अखबार शामिल बाड़ें, हालाँकि इनहन के पाठक लोग के संख्या गिनल चुनल बा।

दूरदर्शन राज्य द्वारा चलावल जाये वाला टीवी चैनल हवे। एकरे अलावा बिबिध हिंदी, अंगरेजी आ क्षेत्रीय भाषा सभ के चैनल केबिल प्रसारण आ डिश द्वारा उपलब्ध बाने। 24 घंटा समाचार प्रसारण वाला चैनल में एनडीटीवी इंडिया, डीडी न्यूज, जी न्यूज, जन टीवी, आइबीएन-7, आज तक आ एबीपी न्यूज प्रमुख बाने। आल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) राज्य के रेडियो चैनल हवे। एकरे अलावा 32 गो प्राइवेट फ्रीक्वेंसी वाला एफएम चैनल के प्रसारण उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहर सभ में हो रहल बा। सेलफोन नेटवर्क सभ में राज्य के मालिकाना वाला बीएसएनएल बा आ प्राइवेट में वोडाफोन, रिलायंस, एयरटेल, एयरसेल, टेलिनोर, टाटा इंडीकॉम, आइडिया सेलुलर आ टाटा डूकोमो बाने। कुछ चुनल शहर सभ में ब्राडबैंड के सुबिधा उपलब्ध बा जे बीएसएनएल आ कुछ प्राइवेट कंपनी सभ द्वारा उपलब्ध करावल जाले। बीएसएनएल आ अन्य प्रदाता सभ द्वारा डायल-अप सेवा भी उपलब्ध करावल जाले।




#Article 19: गोरखपुर जिला (1419 words)


गोरखपुर  भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी पूरबी हिस्सा मे एगो जिला बा। एकर मुखयालय गोरखपुर शहर हवे आ ई अपनहीं नाँव के मंडल मे आवे ला। जिला के नाँव नाथ संप्रदाय के संत बाबा गोरखनाथ के नाँव पर पड़ल हवे। एह जिला के कुल रकबा  बाटे आ 2011 में जिला के कुल जनसंख्या 4,440,895 रहल।

जिला से हो के बहे वाली प्रमुख नदी राप्ती नदी हवे। रामगढ़ ताल, गोरखनाथ मंदिर, सरदार नगर मिल, गोरखपुर विश्वविद्यालय आ गोरखपुर एयर फोर्स बेस एह जिला के मुख्य पहिचान बाड़ें।

गोरखपुर जिला के नाँव एही नाँव के शहर के अधार पर पड़ल हवे जे एह जिला के मुख्यालय हवे। खुद गोरखपुर शहर के नाँव एगो संत बाबा गोरखनाथ के नाँव पर धराइल हऽ जे नाथ संप्रदाय के सभसे प्रमुख संत रहलें। गोरखपुर शहर में बाबा गोरखनाथ के मंदिर आ मठ बाटे आ ई एह शहर आ जिला के खास पहिचान भी हवे। गोरखनाथ के संस्कृत नाँव गोरक्षनाथ रहे जेकर देसी भाषा में रूप बदल के गोरखनाथ भ गइल। कथा के मोताबिक ई नाथ संप्रदाय के पहिला संस्थापक मछेंदरनाथ (संस्कृत: मत्स्येन्द्रनाथ) के चेला रहलें। एह इलाका में अउरियो कई गो अइसन मठ आ समाधी अस्थापित बाड़ें जे एह नाथ संप्रदाय से जुड़ल हवें।

आधुनिक काल में, सन 1801 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा एह इलाका के अधिकार अवध के नबाब से हासिल कइल गइल आ गोरखपुर जिला के अस्थापना भइल। एह नाया बनल जिला के पहिला कलेक्टर मिस्टर रूल्टेज बनलें। साल 1829 में गोरखपुर शहर के नाया बनल कमिश्नरी, अब इनहन के मंडल कहल जाला, के मुख्यालय बनावल गइल आ एकर नाँव गोरखपुर कमिश्नरी रखाइल। ओह समय एह कमिश्नरी में तत्कालीन गोरखपुर जिला (वर्तमान में ई इलाका कई जिला में बिभाजित भ गइल बा: बस्ती, महाराजगंज, देवरिया आ कुशीनगर जिला पहिले सभ एकही में रहलें), तत्कालीन आजमगढ़ जिला (वर्तमान में आजमगढ़ आ मऊ) आ गाजीपुर जिला (वर्तमान में गाजीपुर आ बलियाँ) सामिल रहलें।

साल 1865 में गोरखपुर जिला के पहिला बिभाजन भइल आ बस्ती नाया जिला बनल। बाकी बचल गोरखपुर जिला से 1946 में देवरिया (वर्तमान देवरिया जिला आ कुशीनगर जिला) आ 1989 में महाराजगंज जिला बनलें। 

गोरखपुर जिला भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के सभसे पूरबी-उत्तरी हिस्सा में पड़े ला आ देवरिया-कुशीनगर के अलगा से जिला बने से पहिले ई एह राज्य पूरबी-उत्तरी कोन के अंतिम सीमा तक बिस्तार वाला जिला रहल। वर्तमान जिला के भूगोलीय लोकेशन, हाल के गूगल नक्शा पर नापल आँकड़ा अनुसार, 26° 13′ 41″ से 27° 06′ 52″ N अक्षांस, आ 83° 04′ 47″ से 83° 40′ 22″ E पूरबी देशांतर के बीच बा। एकर आकृति लगभग चौखुंटा बाटे आ कुल रकबा (एरिया)  बाटे।

जिला के उत्तर में महाराजगंज जिला, पूरुब में कुशीनगर आ देवरिया जिला, दक्खिन में मऊ, आजमगढ़ आ अंबेडकर नगर जिला (पूरुब से पच्छिम क्रम में), आ पच्छिम में संत कबीर नगर जिला आ सिद्धार्थ नगर जिला बाड़ें। जिला के दक्खिनी सीमा घाघरा नदी से बने ले; पूरुब में कुछ दूर तक एकर सीमा राप्ती नदी से बने ले।

पूरा जिला, भूगोलीय रूप से गंगा के मैदान के हिस्सा हवे। ई इलाका हिमालय परबत के दक्खिन के तराई के इलाका में पड़े ला या फिर तराई के दक्खिनी मैदानी हिस्सा में पड़े ला। भूबिज्ञान के हिसाब से ई पुराना जमाना के टीथीज सागर के हिमालय के उत्पत्ती के बाद बचल छाड़न वाला सागर में हिमालय से नद्दी सभ द्वारा ले आइल अवसाद (बालू-माटी-गाद) के गला करे से बनल हवे। एही कारन बहुत गहिराई तक ले इहाँ अल्यूवियम (पानी से बहा के ले आइल अवसाद) मिले ला आ कड़ेर बेडरॉक बहुत नीचे कहीं मौजूद बा।

भूआकृति बिज्ञान के हिसाब से, बड़हन पैमाना पर ई नदी के मैदान वाला इलाका हवे आ सूछ्म स्तर पर देखल जाय तब बाँगर, खादर, नदी के छाड़न, छाड़न झील, प्राकृतिक तटबंधा आ ताल (झील) पावल जालें। जिला के औसत ढाल उत्तर-पच्छिम से दक्खिन-पूरुब के ओर हवे आ राप्ती नदी जिला के सभसे प्रमुख नदी हऽ जेकरे किनारे गोरखपुर शहर भी बसल बा। ई इलाका बहुत उच्चावच (रेलीफ़), मने कि जमीन के सभसे ऊँच आ नीचाई वाला हिस्सा के बीच के अंतर, वाला ना हवे आ ढाल बहुत मद्धिम हवे। एही कारण बरसात के सीजन में इहाँ के ज्यादातर नदी सभ में पानी बढ़े पर नदी के किनारे के दूर तक ले के इलाका पानी में बूड़ जाला नया अल्यूवियम के परत जमा होखे ले।

गोरखपुर जिला में, मौसम के बेध करे वाला अस्थान एह जिला के मुख्यालय गोरखपुर बा जहाँ के आँकड़ा पूरा जिला खातिर प्रतिनिधि के रूप में देखल जा सके ला। एह जिला के जलवायु कोपेन के बर्गीकरण के हिसाब से Cwa प्रकार के हवे। सभसे गरम महीना मई आ सभसे ठंढा महीना जनवरी होला। सुरुआती जून से ले के सितंबर ले बरसात के सीजन होला आ मानसूनी बरखा होखे ले। जाड़ा में कोहरा आ गरमी में लूह से जनजीवन परभावित होला।

साल 2011 के जनगणना अनुसार, गोरखपुर जिला के कुल जनसंख्या 4,440,895 रहल आ ई यूरोपियन देस क्रोएशिया के लगभग बरोबर बा या अमेरिका के केंचुकी राज्य के बरोबर बा। एकरे आधार पर तुलना कइल जाय तब भारत के जिला सभ में ई 40वाँ नंबर पर आवे ला (जनगणना के समय रहल कुल 640 जिला सभ में)। जिला के जनसंख्या घनत्व   बाटे। इहाँ 2001–2011 के दशक में जनसंख्या के बढ़ती के दर 17.81% रहल। गोरखपुर जिला में मानव लिंगानुपात 944 औरत प्रति 1000 मर्दाना रहल, आ साक्षरता दर 70.83% दर्ज कइल गइल।

गोरखपुर जिला के अर्थब्याव्स्था मुख्य रूप से खेती आधारित बा। मैदानी इलाका होखे आ आसपास कौनों खनिज पदार्थ के बहुतायत न होखे के कारण एह इलाका के मुख्य कामकाज खेती बा। उपजाऊँ आ सपाट जमीन, नहर के ब्यवस्था आ ढेर जनसंख्या के कारण अनाज के माँग के चलते एह इलाका में खेती के महत्व ढेर बा।

जिला में जलोढ़ माटी मिले ले जे ज्यादातर बलुई दोमट आ दोमट प्रकार के बा।तराई के ओर के इलाका के माटी के बिकास नम जलवायु आ ऊँच जमीनी पानी के लेवल वाली दशा में भइल हवे आ बनस्पति इतिहासी रूप से लमहर घास वाली रहल हवे। बिचला हिस्सा आ दक्खिनी हिस्सा में बाँगर में कुछ इलाका ऊसर जमीन वाला भी बा। नद्दी के किनारे के जमीन में ढूह प्रकार के माटी भी मिले ला।

जिला के प्रमुख फसल में धान, गोहूँ, अरहर, ज्वार-बजड़ी, आलू इत्यादि बा। तराई के इलाका में गन्ना के खेती बहुत होला जे एह इलाका आ पूरा उत्तर प्रदेश के तराई वाला भाग के खास बिसेसता हवे।धान के खेती दुसरा प्रमुख खेती हवे। एहू में गोरखपुर के उत्तरी इलाका में तराई के खास पहिचान, काला नमक नाँव के चाउर, के खेती भी होला जे एगो महकउवा चाउर हवे आ कई मामिला में परसिद्ध बासमती ले बीस मानल जाला।

जिला के ज्यादातर किसान लोग छोट किसान बा।

गोरखपुर के संस्कृति उत्तर भारतीय संस्कृति आ भोजपुरिया संस्कृति हवे। एहिजा के लोग के रहन सहन परंपरागत रूप से हिंदू मान्यता आ परब-तिहुआर के साथे जुड़ल बा आ साथे-साथ इस्लामी तिहुआर आ रहन-सहन के भारतीय रूप देखे के मिले ला।
प्रमुख हिंदू परब तिहुआर में होली, रामनवमी, जन्माष्टमी, दशहरा, आ दीपावली बाने जबकि मुसलमान लोग ईद, बकरीद आ मोहर्रम मनावे ला। खानपान में भात-दाल आ बिबिध किसिम के तरकारी सब्जी मुख्य भोजन हवे जबकि गोहूँ के रोटी भी उत्तर भारतीय इस्टाइल के बने ला। तराई के इलाका होखे के कारन नद्दी आ ताल के भरपूर मौजूदगी के चलते मछरी के भी बहुतायत होला आ इहो खाना के अंग हवे। शाकाहारी लोग के छोड़ दिहल जाव तब मीट आ मुर्गा के चलन भी बा आ इहाँ के माँसाहारी पकवान पर लखनऊ के परभाव भी देखे के मिले ला।

पहिनावा, पुराना ज़माना में मर्द लोग के धोती कुरता आ मेहरारू लोगन के साड़ी रहल जे अभिन भी चलन में बा। नाया जमाना के लोग कुरता पैजामा सदरी, पैंट बुशट आ जींस टी शर्ट पहिरल पसंद करे ला आ लइकी लोग में सलवार सूट के चलन बा।

गोरखपुर जिला के कई लोग नामी-गिरामी रह चुकल बा। साहित्य के क्षेत्र में फ़िराक़ गोरखपुरी आ विद्यानिवास मिश्र नियर लोग एह जिला में जनमल। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहल, परसिद्ध नेता बीर बहादुर सिंह एही जिला के रहलें। 

एकरे अलावा कई अइसन उल्लेख जोग लोग गोरखपुर से जुड़ाव वाला रहल बा जे एह जिला में ना जनमल बाकी इनहन लोग के कर्मभूमि गोरखपुर रहल भा जिनगी के कौनों महत्व के घटना एह जिला में घटित भइल। परसिद्ध क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल के काकोरी केस में एहिजे फाँसी दिहल गइल। मुंशी प्रेमचंद के कर्मभूमि भी गोरखपुर जिला रहल आ पुणे में जनमल बाबा राघवदास के कर्मस्थल भी इहे जिला रहल।

दिग्विजय नाथ आ आदित्यनाथ, एह जिला में जनमल ना लोग बाकी गोरखनाथ मठ के महंथ रहल आ इनहना लोग के कर्मभूमि गोरखपुर रहल, आदित्यनाथ गोरखपुर से कई बेर सांसद रहल बाड़ें आ वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बाड़ें।




#Article 20: दूरदर्शन (106 words)


दूरदर्शन भारत क सरकारी टीवी चैनल हवे । ई भारत सरकार द्वारा नामित एगो परिषद जेवना का नाँव प्रसार भारती हवे, की अंतर्गत चलावल जाला।

दूरदर्शन की प्रसारण क शुरूआत भारत में दिल्ली से सितंबर, 1959 के भइल। प्रसार-कक्ष आ ट्रांसमीटर की बेसिक सेवा की लिहाज़ से ई विश्व का दूसरा सबसे बड़ प्रसारक हवे। हाले में इहो डिजिटल प्रसारण (Digital Terrestrial Transmitters)) सेवा शुरु कइलस हवे।

दूरदर्शन की राष्‍ट्रीय नेटवर्क में 64 दूरदर्शन केन्‍द्र / निर्माण केन्‍द्र, 24 क्षेत्रीय समाचार एकक, 126 दूरदर्शन रखरखाव केन्द्र, 202 उच्‍च शक्ति ट्रांसमीटर, 828 लो पावर ट्रांसमीटर, 351 अल्‍पशक्ति ट्रांसमीटर, 18 ट्रांसपोंडर, 30 चैनल तथा डीटीएच सेवा शामिल बा।




#Article 21: तोताराम सनाढ्य (142 words)


तोताराम स्नाध्या (1876 - 1947) के बेईमानी से भरती कर के आ बंधुआ मजदूर बना के, 1893 में भारत से फिजी जाइल गइल रहे। ऊ पांच साल बंधुआ मजदूर के काम करते रहने लेकिन अपने अधिकार के खातिर मांग करने में हिचकिचइने ना। बंधुआ मजदूरी से आजाद होखे के बाद ऊ खेती आ पुरोहिताई के काम करे लगने लेकिन ज्यादा समय दूसरे बंधुआ मजदूरन के मदद करे में लगावें। ऊ भारतीय स्वतंत्रता-सेनानी आ ईसाई पादरी लोग से सहायता लिहलें आ भारत से अध्यापक आ वकील लोग के फिजी आवे खातिर नेवतलें जउन लोग फ़िजी के भारतिय लोग के सहायता दे सके। फिजी में एकइस साल ले रहले के बाद ऊ 1914 में भारत लवट गइलें गय आ अपने अनुभव पर एगो पुस्तक, मेरे फिजी द्वीप में इक्कीस वर्ष, लिखलें। एह पुस्तक से भारतिय बंधुआ मजदूर वयवस्था के बन्द करे में सहायता मिलल।




#Article 22: मनोरंजन (596 words)


मनोरंजन बिबिध प्रकार के आनंद देवे वाला क्रियाकलाप में सामिल होखे के कहल जाला। मनोरंजक क्रियाकलाप (एक्टिविटी) में अपना दर्शक या श्रोता सभ के धियान खींचे आ ओह लोग के आनंदित करे के बिसेसता होल। कई प्रकार के साधन बाड़ें जिनहन से लोग के आनंद मिले ला जइसे कि खेलकूद, संगीत, सिनेमा, साहित्य, पर्यटन इत्यादि। मनोरंजन के इतिहास ओतने पुरान बा जेतना मानवता के। मनुष्य आदिम काल से खाली समय या परब-तिहुआर पर बिबिध प्रकार के साधन से आपन मनोरंजन कर रहल बा।

कौनों भी किसिम के मनोरंजन के सभसे महत्व वाला चीज बा मजा आइल। हालाँकि, अइसन कामकाज सभ भी हो सके लें जे मनोरंजन के साथे-साथ जानकारी बढ़ावे वाला, या फिर सेहत खाती लाभदायक हो सके लें। अक्सरहा मनोरंजन वाली चीज सभ के अउरी मकसद भी हो सके ला आ अउरी कई किसिम के परभाव भी हो सके ला।

पढ़ाई आमतौर प जानकारी हासिल करे के तरीका मानल जाला, हालाँकि मनोरंजन खाती पढ़ल काफी समय से एगो स्थापित तरीका बा, खासतौर प जवना समय में परफार्मेंस आधारित मनोरंजन ले सभका पहुँच ना रहे बिबिध प्रकार के साहित्य पढ़ल मनोरंजन के सभसे चलनसार साधन सभ में से एक रहल। अइसन मानल जाला कि लेखन के मूल मकसद जानकारी दिहल भा तरीका सिखावल होखे ला, इहो स्थापित भइल बा के पढ़ल भी आम जिनगी के बिबिध परेशानी सभ से दिमाग हटावे वाला हो सके ला। पुराना समय में जानकारी आ कथा-कहानी मौखिक रूप से सुनल सुनावल जायँ, हालाँकि एक बेर जब कथा-कहानी आ कबिता इत्यादि भरपूर मात्रा में छपल रूप में उपलब्ध भ गइल, मौखिक बिधा कमजोर भ गइल आ पढ़े वाला रूप ढेर मजबूत होखत चल गइल। छापाखाना के आबिस्कार, किताबन के दाम में कमी आ बढ़त साक्षरता इत्यादि से पढ़ के मनोरंजन करे खाती ब्यापक बढ़ती भइल। फोंट के मानक रूप सभ के निर्माण आ पढ़ाई के आसान होखे से भी आनंद खाती पढ़े में ब्यापक बढ़ती देखल गइल। यूरोप में, 16वीं सदी ले, मनोरंजन आ आनंद खाती पढ़ल एगो स्थापित चीज बन गइल।

कॉमिक्स आ कार्टून साहित्य के अइसन बिधा बाड़ें जे चित्र आ पाठ दुनों के एकसाथ मिला के बनल रचना होखे लें आ पढ़े वाला के आनंद दे लें। आज के समय में बहुत सारा कॉमिक्स कल्पनालोक के चीज (फैंटेसी) पर आधारित भी होखे लें आ इनाहन के उत्पादन अइसन कंपनी सभ द्वारा कइल जाला जे मनोरंजन उद्योग के हिस्सा बाड़ीं। 

फिलिम सभ मनोरंजन के एगो प्रमुख रूप में गिनल जालीं, हालाँकि सगरी फिलिम सभ के मकसद मनोरंजने भर ना होला: उदाहरण खाती, डाकुमेंटरी फिलिम सभ के मकसद कौनों चीज के रिकार्ड कइल भा जानकारी बाँटल होखे ला, हालाँकि दुनों मकसद एक साथे मिल के काम करे लें। ई माध्यम सुरुआते से बैस्विक स्तर प बिजनेस के रूप लिहले रहल: ल्यूमायर बंधु (दू लोग) पहिला कैमरामैन रहल जे दुनिया भर में भेजल गइल, ई रिकार्ड करे खाती कि जवन कुछ भी आम जनता के रूचि के चीज हो सके ओकरा के फिलिम के जरिये रिकार्ड कइल जाव। साल 1908 में, पाथी (Pathé) द्वारा न्यूजरील (समाचार वाली फिलिम) लांच कइल गइल आ बाँटल गइल आ पहिला बिस्व जुद्ध के दौर आवत-आवत, फिलिम सभ भारी मात्रा में जनता के मनोरंजन के जरूरत पूरा करे लगलीं। [20वीं] सदी के पहिला दसक के सिनेमा प्रोग्राम सभ में अट्रेंडम रूप से समाचार फिलिम आ काल्पनिक चीजन के मिलजुल रूप मनोरंजन के साधन बनल। अमेरिकन लोग पहिली बेर एक के बाद एक आवे वाली फोटो सभ से गतिमान होखे के भरम पैदा करे के तरीका निकालल, बाकी फ्रांसीसी लोग एह बैज्ञानिक सिद्धांत के बानिज्यिक रूप से आकर्षक दृश्य के रूप में बदले में सफल भइल। एही कारण फिलिम सभ सुरुआते में मनोरंजन इंडस्ट्री के हिस्सा बन गइली।




#Article 23: भूगोल (1479 words)


भूगोल या भुगोल (अंगरेजी: ज्यॉग्रफी) एगो बिज्ञान आ पढ़ाई के बिसय हउवे जवन पृथ्वी के अलग-अलग जगह भा क्षेत्र में पावल जाये वाला भौतिक आ जैविक घटना आ प्रक्रिया से बनल प्राकृतिक पर्यावरण, आ मनुष्य के एह पर्यावरण के साथ संबंध से उपजल मनुष्य के रहन-सहन के तरीका आ मानवीय पर्यावरण के बर्णन, अध्ययन आ व्याख्या करे ला। सबसे पहिले ज्याग्रफिया (γεωγραφία) शब्द के प्रयोग यूनानी बिद्वान इरेटोस्थेनीज (276-194 ई॰पू॰) कइलें।

इतिहासी रूप से भूगोल बिसय के अध्ययन के क्षेत्र सबसे पहिले बिबिध प्रकार के चीजन के धरती पर बितरण के बर्णन से शुरू हो के उनहन के स्पेशियल एनालिसिस ले पहुँचल, मनुष्य-पर्यावरण संबंध के बिबिध रूप के अध्ययन एकर बिसय बनल, क्षेत्र या प्रदेश के अध्ययन के बिसय के रूप में एकर प्रतिष्ठा भइल, पृथ्वी बिज्ञान के बिबिध बिसय पर रिसर्च कइल भी एकर काम रहल आ अब आधुनिक समय में भूगोल एगो अइसन बिसय के रूप में स्थापित बाटे जवन पृथ्वी आ एह पर निवास करे वाला मनुष्य के बीच के संबंध के सगरी पहलू के अध्ययन जगह आ क्षेत्र के संदर्भ में करत बा। आज भूगोल के मतलब खाली ई नइखे कि कवन चीज कहाँ पावल जाला बलुक इहो बा कि पृथ्वी के अलग-अलग हिस्सा में आज जवन रूप देखे के मिलत बा ऊ कइसे बनल आ एह में होखे वाला बदलाव के दिसा का बा।

भूगोल के दू गो बड़हन शाखा में बाँटल जाला, भौतिक भूगोल आ मानव भूगोल, आ वर्तमान समय में एगो आधुनिक शाखा पर्यावरण भूगोल या इंटिग्रेटेड भूगोल बिकसित भइल बा जे एह दुन्नों शाखा के बिचा में सहयोग आ सामंजस्य से बनल बाटे।

भूगोल से उपजल या एकर सहायक बिसय के रूप में रिमोट सेंसिंग, भूसूचना विज्ञान, जी॰आइ॰यस॰ आ कार्टोग्राफी बाड़ें। वर्तमान में भूगोल, इस्कूल से लेके डिग्री कालेज आ इन्वार्सिटी तक में पढावल जाये वाला मशहूर बिषय बा। भूगोल के बिद्वान या भूगोल पढे-पढ़ावे वाला लोग के भूगोलवेत्ता कहल जाला।

भूगोल (भू आ गोल के जोड़ के बनल) शब्द संस्कृत भाषा के हउवे जेकर अर्थ होला गोल आकार के धरती। प्राचीन काल में ज्योतिष विज्ञान में ब्रह्मांड के कल्पना दू गो गोला के रूप में कइल गइल रहे — खगोल आ भूगोल, अउरी ई मानल जाय कि बड़का गोला खगोल के ठीक बीचोबीच में छोटका गोला पृथ्वी स्थित बा।

बाद में यूरोपीय शिक्षा के सिस्टम के भारत में प्रचलन होखले पर एगो ज्ञान के बिसय के रूप में के ज्याग्रफी Geography नाँव के ज्ञान के शाखा भा बिज्ञान के हिंदी में भूगोल कहल जाये लागल। अंगरेजी के ज्याग्राफी शब्द खुदे यूनानी भाषा के दू गो शब्द, ज्या (geo) मतलब पृथ्वी अउरी ग्राफी (graphie) मतलब वर्णन कइल, से मिल के बनल बाटे जवना के शाब्दिक अरथ भइल पृथ्वी के वर्णन। ज्याग्रफी शब्द के सबसे पहिले प्रयोग इरेटोस्थेनीज नामक यूनानी बिद्वान कइलन। एही से आ उनकी एह विषय में महत्व वाला योगदानन के वजह से उनके वैज्ञानिक भूगोल के पिता कहल जाला।

भूगोल के अन्य दुसरा अरथ में होखे वाला इस्तेमाल में बा:

परम्परागत रूप से भूगोलवेत्ता लोग के नक्शानवीस के रूप में देखल जाला जे पृथ्वी के जगह आ जगहन के नाँव आ संख्या के अध्ययन करे लें। हालाँकि, एगो भूगोलवेत्ता के मुख्य काम ई नाही बाटे। भूगोलवेत्ता लोग घटना आ प्रासेस सभ के जगह आ समय के साथ बदलाव के अध्ययन करे ला आ मनुष्य आ ओकरे प्राकृतिक पर्यावरण के बीच होखे वाली क्रिया-प्रतिक्रिया के अध्ययन भी करे ला। स्पेस यानि स्थान या जगह कौनों-न-कौनों तरीका से बहुत सारा चीजन पर आपन परभाव डाले ला आ जलवायु, पेड़-पौधा आ जीव-जंतु से ले के अर्थव्यवस्था आ सेहत जइसन चीज के परभावित करे ला; एही कारण भूगोल, जेकर मुख्य बिसय स्पेस बाटे, एगो इंटरडिसिप्लिनरी बिज्ञान के रूप में बा। भूगोल के ई इंटरडिसिप्लिनरी सुभाव भौतिक आ मानवीय चीजन के बीच के संबंध आ एह से उपजे वाला पैटर्न सभ के अध्ययन के कारण बा।

एगो ज्ञान के बिसय के रूप में भूगोल के दू शाखा में बाँटल जाला:मानव भूगोल आ भौतिक भूगोल। पहिला, मुख्य रूप से आदमी के बनावल पर्यावरण पर धियान देला आ एह बात के खोज में रूचि लेला कि कइसे मनुष्य अपने आसपास के स्पेस के निर्माण करे ला, देखे ला, मैनेज करे ला, आ परभावित करे ला।दूसरी शाखा में अध्ययन के बिसय मुख्य रूप से भौतिक घटना आ जैविक घटना आ प्रासेस से बनल प्राकृतिक पर्यावरण के तत्व सभ के अध्ययन होला आ ई खोज कइल जाला कि कइसे जीव-जंतु, जलवायु, माटी, पानी, आ थलरूप आपस में क्रिया-प्रतिक्रिया कइ के प्राकृतिक पर्यावरण बनावेलें आ एह में स्पेस के कॉ भूमिका होले। एह दुन्नों तरीका या अप्रोच बीच के अंतर के कारण एगो नया तिसरी शाखा उपजल, पर्यावरण भूगोल जवन भौतिक आ मानव भूगोल के कंबाइन कइ के पर्यावरण आ मनुष्य के बीच के क्रिया-प्रतिक्रिया के अध्ययन करे ले।

इतिहासी रूप से बिबरण करे वाला भूगोल के भी दू गो प्रमुख अप्रोच रहल बाड़ें। जब भूगोल में कौनो एगो तत्व चुन के ओकर पूरा पृथ्वी पर अध्ययन कइल जाला, मने कि ऊ तत्व पूरा पृथ्वी पर कहाँ-कहाँ आ केतना मात्रा में पावल जाला एह बात के अध्ययन कइल जाला तब एके क्रमबद्ध भूगोल कहल जाला। एकरी ठीक उल्टा, जब कौनो जगह चाहे क्षेत्र चुन के ओकरी अन्दर पावल जाये वाला सब तत्व क अध्ययन कइल जाला तब ओके क्षेत्रीय भूगोल या प्रादेशिक भूगोल कहल जाला।

भूगोल के दू गो मुख्य शाखा हवे। जब कौनो प्राकृतिक तत्व जैसे ऊंचाई, तापमान, बारिश, बनस्पति इत्यादि के अध्ययन कइल जाला त ओके भौतिक भूगोल कहल जाला आ जब कौनो मानवीय चीज क अध्ययन जैसे कि जनसंख्या, भाषा, धर्म, शहर, कृषि, व्यापार इत्यादि क अध्ययन कइल जाला त ओके मानव भूगोल कहल जाला।

भौतिक भूगोल पृथ्वी पर होखे वाली भौतिक आ प्राकृतिक क्रिया सभ के अस्थान की संदर्भ में अध्ययन करेला। ई पृथवी की जमीनी हिस्सा मने स्थलमंडल, एकरी चारों ओर गैस से बनल वायुमंडल, पृथ्वी पर पावल जाए वाला पानी क बिसाल भण्डार समुद्र, मने जलमंडल, आ पृथिवी पर पावल जाए वाला जीव जंतु से बनल जैवमंडल की रचना आ काम कइले की तरीका क अध्ययन करे ला।

मानव भूगोल भूगोल क एगो अइसन शाखा हवे जेवन मनुष्य की क्रिया कलाप आ ओ सगरी चीजां के अध्ययन करे ले जेवन कौनों अस्थान या क्षेत्र की मानव समाज के बनावे में महत्व वाला होलिन। एही से एह शाखा में मनुष्य, ओकर जनसंख्या, ओकर बस्ती, समाज, संस्कृति इत्यादि सभ चीज का बर्णन आ व्याख्या होले।

भूगोल की एह शाखा में इतिहास में कई तरह क अप्रोच विकसित भइल बा जेवन अलग अलग समय में एकरी बिचारधारा पर हावी रहे:

पर्यावरण भूगोल पर्यावरण के दसा, पर्यावरण के काम करे के तरीका, आ पर्यावरण आ तकनीकी ज्ञान वाला आर्थिक मनुष्य के बीच संबंधन क अध्ययन, जगह (क्षेत्र) आ समय (बदलाव) की संदर्भ में करे वाला बिज्ञान हवे। ई भूगोल क एगो अइसन शाखा हवे जेवन एक तरह का संश्लेषणात्मक विज्ञान हवे आ एके इंटीग्रेटेड भूगोल (समन्वयात्मक भूगोल)की रूप में भी जानल जाला।

भूगोल क ई शाखा एक तरह से भौतिक भूगोल आ मानव भूगोल की अध्ययन क्षेत्र में दूरी कम कइला क काम करे ला| भूगोल हमेशा से मनुष्य आ मनुष्य के पर्यावरण की अध्ययन के अस्थान आ समय की संदर्भ में करत रहल बाटे। हालाँकि, 1950 से 1970 की दौर में भौतिक भूगोल आ मानव भूगोल कि बिचा में दूरी बढ़ल आ एही से भूगोल क पर्यावरण की पढ़ाई से कुछ दूरी बन गइल जेवना कारन ए दौर में पर्यावरण क झंडाबरदार जीव विज्ञानी लोग रहि गइल रहे। बाद में तंत्र विश्लेषण आ इकोलोजिकल उपागम की महत्व के भूगोल में तेजी से बहुत तेजी से मान बढ़ल आ पर्यावरण भूगोल, भौतिक अउरी मानव भूगोल की बिचा में एगो बहुआयामी संश्लेषण की रूप में आगे आइल।

कार्टोग्राफी या मानचित्र विज्ञान या नक्शानवीसी एगो विज्ञान आ कला हवे जेवन नक्शा बनावे की विधि आ तरीका क अध्ययन करेला।

रिमोट सेंसिंग अइसन प्रक्रिया हवे जेह में धरती के सतह से ऊपर कुछ दूरी पर मौजूद कौनों यंत्र से पृथ्वी के कौनों हिस्सा के बारे में जानकारी हासिल कइल जाला। ई यंत्र कैमरा या सेंसर हो सके ला, आ रिमोट सेंसिंग के उत्पाद के रूप में हवाई फोटो या उपग्रह इमेज के इस्तेमाल जीवन के बिबिध क्षेत्र में हो सके ला।

भूगोलीय जानकारी सिस्टम (जीआइएस) अइसन सिस्टम होला जेह में भूगोलीय आँकड़ा के कैप्चर, सहेज के रक्खल, मैनिपुलेशन, एनालिसिस, प्रबंधन, क्वैरी आ प्रेजेंटेशन कइल जा सके ला। एकर अध्ययन करे वाला बिज्ञान जीआइसाइंस कहाला आ जियोइन्फार्मेटिक्स के उपशाखा हवे। जीआइएस के मुख्य कंपोनेंट खासतौर से भूगोलीय भा स्पेशियल आँकड़ा खातिर डिजाइन कइल साफ्टवेयर आ एप्लीकेशन होखे लें।

वेब जीआइएस आ वेब मैपिंग के अक्सरहा पर्यावाची के रूप में इस्तेमाल होला। वास्तव में वेब जीआइएस के मतलब बा वेब ब्राउजर के जरिये जीआइएस के डेटा तक पहुँचल आ एनालिसिस कइल आ अपना जरूरत आ पसऽन अनुसार नक्सा बनावल। वेब आधारित अइसन नक्शा बनावल खाली भर वेब कार्टोग्राफी के काम ना हवे बलुक एह में ई चीज भी सामिल बा कि नकसा में का देखावल जाय आ कइसे देखावल जाय ई कुछ हद तक बीछे के सुबिधा नक्शा पढ़े वाला के भी होला। कहे के मतलब कि वेब आधारित नक्सा कौनों फाइनल प्रोडक्ट ना हवे बलुक एह में उपभोक्ता के सहभागिता भी होला।




#Article 24: इतिहास (367 words)


इतिहास (अंगरेजी: History, हिस्ट्री) बीत चुकल समय के अध्ययन हवे जइसन कि ओकरे बारे में लिखित दस्तावेज सभ में बिबरन मौजूद बा।

इतिहास के मुख्य आधार युगविशेष आ घटनास्थल के उ अवशेष हवे जा जवन कौनौ ना कौनो रूप में प्राप्त होखेला। जीवन के बहुमुखी व्यापकता के कारण स्वल्प सामग्री के सहारे विगत युग अथवा समाज के चित्रनिर्माण करल दु:साध्य बा। सामग्री जेतने अधिक हो जायेला ओही अनुपात से बीतल युग तथा समाज के रूपरेखा प्रस्तुत करल साध्य हो जायेला। पर्याप्त साधनन के होते हुए भी ई नईखे कहल जा सकत बा कि कल्पनामिश्रित चित्र निश्चित रूप से शुद्ध या सत्य ही होखी। एहिसे उपयुक्त कमी के ध्यान रखके कुछ विद्वान् कहेलन जा कि इतिहास के संपूर्णता असाध्य जईसन बा, फिर भी यदि हमनी के अनुभव आ ज्ञान प्रचुर होई त, इतिहासी सामग्री के जाँच-पड़ताल से हमानी के कला तर्कप्रतिष्ठत होखे आ कल्पना संयत आ विकसित होखे त अतीत के हमनी के चित्र अधिक मानवीय आ प्रामाणिक हो सकत बा। सारांश ई बा कि इतिहास के रचना में पर्याप्त सामग्री, वैज्ञानिक ढंग से उ का जाँच, उ से प्राप्त ज्ञान के महत्व बुझे के विवेक के साथ ही साथ ऐतिहासक कल्पना के शक्ति तथा सजीव चित्रण के क्षमता के आवश्यकता बा। याद रखे के चाहिं कि इतिहास ना त साधारण परिभाषा के अनुसार विज्ञान ह आ ना केवल काल्पनिक दर्शन या साहित्यिक रचना ह। इ सबके यथोचित संमिश्रण से इतिहास के स्वरूप रचल जायेला।

इतिहास न्यूनाधिक ओही प्रकार के सत्य ह जईसन विज्ञान आ दर्शनन के होखेला। जवन प्रकार विज्ञान अ दर्शनन में हेरफेर होखेला ओही प्रकार इतिहास के चित्रण में भी होखत रहेला। मनुष्य के बढ़ते हुए ज्ञान आ साधनन के सहायता से इतिहास के चित्रन के संस्कार, ओकर पुरावृत्ति आ संस्कृति होत रहेला। प्रत्येक युग आपन आपन प्रश्न उठावेला आ इतिहास से ओकर समाधान खोजत रहेला। एहिसे प्रत्येक युग, समाज अथवा व्यक्ति इतिहास के दर्शन आपन प्रश्नन के दृष्टिबिंदुवन से करत रहेला। यह ई सब होते हुए भी साधनन के वैज्ञानिक अन्वेषण तथा निरीक्षण, कालक्रम के विचार, परिस्थिति के आवश्यकतन तथा घटनवन के प्रवाह के बारीकी से छानबीन आ उ से परिणाम निकाले में सर्तकता आ संयम के अनिवार्यता अत्यंत आवश्यक बा। उ के बिना इतिहासी कल्पना आ कपोलकल्पना में कोई भेद ना रह जाई।




#Article 25: बिशाल नेपाल (159 words)


नेपाली हरू नेपाललाई बिशाल नेपाल भन्ने गर्दछन यो शब्द बिभिन्न राष्ट्रीय गितहरूमा बढी परेको पाईन्छ । भौगोलीक रूपमा सानो भइकन पनी सानो भुभाग भित्र भएको साँस्कृतीक विविधता लाई नेपालको भुभाग भित्र पाईने प्रकृतीक विविधता लाई पनि बिशाल नेपाल शव्दले प्रतिविम्वीत गर्दछ नेपालको 147181 स्कवाएर कि मी भित्रको क्षेत्र मा पाईने जिवजन्तु, चराचुरूङगी, विविध जिव मानीसहरूका रहन सहन कुनै ठुलै भुभाग मा बस्ने मानीसको भन्दा कम विविधता छैन ।

साथै विसाल नेपाल शव्दले अंग्रेज संग नेपाल ले लडेको युद्ध जसलाइ एङ्गलो-नेपाल युद्ध (1814–16)पनी भनिन्छ हुनुभन्दा अगाडी नेपालको भुभाग भित्र पर्ने पस्चिमको हालको उत्तराखण्ड राज्य, हिमाञ्चल प्रदेश राज्यका साथै साना, साना पञ्जाबी पहाडी राज्यजहरू का सतलजनदी र त्यसको पारी सम्मका भुभाग, पुर्वमा सिक्किम ,दार्जिलिङ, गुमाउनु टिष्टा नदी सम्मका भुभाग जस्को क्षेत्रफल 3,34250 थियो लाई पनी मिठो एतिहसीक स्मरणका साथ बिसाल नेपाल भनेर संझन चाहान्छन । जुन भुभाग नेपाल अंग्रज युद्धको समाप्ती भएको घोषणा गर्ने सुगौली सन्धी संगै नेपाल ले ब्रिटिस इस्ट इण्डिया कम्पनि सरकार लाइ स्वामीत्व छोडी दिनु परेको थियो ।




#Article 26: पृथ्वी नारायण शाह (363 words)


पृथ्वी नारायण शाह नेपाल के एगो छोट पहाड़ी राज्य गोरखा के राजा नरभुपाल शाह तथा रानी कौसल्यावती के लैका रहलन। बि.सं. 1779 मेँ इनकर जनम भइल रहल। बि.सं. 1799 मेँ बीस बरस के उमर मेँ पृथ्वीनारयण शाह गोरखा के राजा बनल रहलन। ई आधुनिक नेपाल के जनमदाता हउवन ईहे के छोट-छोट राज्यन मेँ विभाजीत नेपाल के एकिकृत करे के शुरुवात कईनी, नेपाल प्राचिन काले से एकिकृत होकर के विभाजित हो जात रहल। अईसे त पृथ्वी नरायण शाहो से पहिले उपत्यका के राजा यक्ष मल्ल, पाल्पा के राजा मणीमकुन्द सेन आ जुम्ला के राजा जितारी मल्ल के बेरा भी एकीकरण भइल रहल बाकी एकीकृत नेपाल के ऊपर उल्लेखित राजा लोग ढेर दिन तक बचा के ना रख सकलन जा आ चाहे अपन भाई बेटवन मेँ आपन जिवनकाले मेँ बाँट के चल गईलन जा। लेकिन पृथ्वी नारायण शाह जब एकीकरण शुरू कईलन त नेपाल के फेर विभाजन हो ना देहलन आ जोगा के रखे खातिर सभन के सिखा गईलन ।

पृथ्वी नारायण शाह आधुनीक नेपाल के नीँव गाड़ के गईलन आ छोट छोट क्षेत्र जैसे (भिरकोट, कास्की, लम्जुंग गोरखा) मेँ राज करत शाहवंश के पुरे नेपाल के राजवंश मेँ बदल देहलन। बि.सं. 1831 मेँ पृथ्वी नारायण शाह 52 वर्ष के उमर मेँ देहान्त कर गइलन तबो नेपाल एकिकरण अभियान उनकर पतोह रानी राजेन्द्र लक्ष्मी, लैका राजकुमार बाहदुर शाह सब मिलकर के आगे बढवलन। नेपाल एकिकरण अभियान के पुर्णविराम उनकर परनाती राजा गिर्वाण युद्ध विक्रम शाह के समय मेँ भइल नेपाल अंग्रेज युद्ध जेकरा के एंगलो-नेपाल युद्ध (1814–16) के बाद भइल।

उक्त युद्ध मेँ नेपाल आपन सार्वर्भौमिकता त बचा लेहलख बाकी बिशाल नेपाल के क्षेत्र जेमे पश्चिम क्षेत्र मेँ हाल के भारत के उतराखंड राज्य, हिमाचल राज्य तथा पंजाब के छोट छोट पहाड़ी क्षेत्र आ सतलज नदी पार के पहाडी राज्य तक रहे त पूरब मेँ दार्जिलिङ, से लेके टिष्टा नदी तक तराई आ पहाडी भू भाग ब्रिटिस इस्ट इंडिया कंपनी सरकार के सुगौली के संधि के तहत देवे के पडल। सिक्किम के उपर नेपाल के अधिकारो खतम हो गइल। बाकी अंग्रेज लोग नेपाल के 1822 मेँ मेची से राप्ती तक तराई तथा प्रथम राणा प्रधानमन्त्री जंगबहादुर के काम से खुश होके राप्ती से महाकाली के बिच के तराई भू भाग 1860 मेँ वापस लौटा देहलस।




#Article 27: नेपाली भाषा (223 words)


नेपाली भाषा आर्य-भारोपेली समुह के भाषा ह जौन नेपाल लगायत भारत, भुटान आ बर्मा क कुछेक भाग म बोलल जायेला | ई भाषा नेपाल आ सिक्किम (भारत) के आधिकारीक (सरकारी काम काज) के भाषा ह | नेपाल के करीव आधा जनसंख्या आपन मातृभाषा के रूप मे ई भाषा बोलल जायेला ।

नेपाली भाषा बिभिन्न समयमा बिभिन्न नामले चिनिन्थ्यो । खस कुरा, पर्वते भाषा तथा गोर्खाली भाषा आदि । यी मध्ये खस कुरा सबैभन्दा पुरानो नाम हो । खस जातीहरूले बोल्ने भाषा भएको हुनाले यसलाई खस भाषा भनिएको हो । यो भाषा पश्चिम नेपालको कर्णाली क्षेत्रमा विकशित भएर पूर्व तर्फ फैलदै गएको हो । खस कुरा पश्चिम नेपालको अर्को भाषा खाम कुरा, जुन नेपालका मगर जातीहरूले बोल्ने गर्दछन्, संगै विकशित हुँदै अगाडी बढ्यो ।

नेपाली साहित्य लाई नेपाली उखान-टुक्का तथा गाउँ खाने कथा आदिले एकदमै रोचक र धनी बनाएको छ।

न॑पाली भासामा वचन दुइ प्रकारका भनिया॑.स्वरमा वचन निम्न तरिकाल॑ ल्याऊ.
 एक वचन       बहुवचन
  अ              आ
  इ               ई
  उ               ऊ
  ए               ए॑
  आ॑             ओ॑

                      स्वर वर्णक 

                           |
             लघु            |              दीर्घ 
___________________________|____________________________________
                           |
   स्वर               वर्णक   |        स्वर           वर्णक 
                           |
__________________________|______________________________________
                           |
   अ                ़      |       आ             ा    __________________________|______________________________________
                           | 
   इ                ि      |       ई              ी                            
                           |
   उ                ु      |       ऊ              ू

                           |
   ऋ               ृ      |        ॠ             ॠ
 __________________________________________________________________
                           |
   ए                े      |        ऐ              ै

   ओ               ो      |        औ              ौ

                      खण्डेतर वर्ण

                           |
 अं      ं       ँ          |          अः                ः




#Article 28: काठमांडो (708 words)


काठमांडो हिमालयी देस नेपाल के राजधानी आ इहाँ के सभसे बड़ सहर हवे। ई हिमालय क्षेत्र में भी सभसे बड़हन सहर हवे आ इहाँ के कुल जनसंख्या लगभग 20 लाख बा आ अगर काठमांडो घाटी में मौजूद अन्य उपनगर सभ के शामिल कइल जाय तब जनसंख्या 60 लाख बाटे; एह में  ललितपुर, कीर्तिपुर, मध्यपुर थीमी आ भक्तपुर नियर कस्बा सामिल कइल जालें।

शहर बिचला नेपाल के कटोरीनुमा काठमांडो घाटी में समुंद्र तल से  के ऊँचाई पर बसल बा। घाटी के इतिहासी रूप से नेपाल सदर के नाँव से जानल जाला। ई नेवार लोग के मूल अस्थान हवे। काठमांडो, नेपाली राजघराना के राजधानी रहल हवे आ कई गो पबित्र धार्मिक अस्थान एह घाटी में बाड़ें। इहाँ दक्खिन एशियाई देसन के संगठन सार्क के मुख्यालय भी 1985 से अस्थापित बा। वर्तमान में ई शहर, साल 2008 में अस्थापित नेपाली गणराज्य के राजधानी भी बा आ ई नेपाल के प्रशासनिक बिभाजन अनुसार बागमती अंचल आ प्रदेश संख्या 3 के अंतगर्त आवे ला।

पुराना समय से काठमांडो नेपाल के इतिहास, कला, संस्कृति आ अर्थब्यवस्था के केंद्र रहल बा। इहाँ के जनसंख्या भी कई किसिम के जातीयता वाली बा आ धार्मिक आधार पर देखल जाय तऽ हिंदू आ बौद्ध लोग के बहुलता बाटे। धार्मिक आ सांस्कृतिक तिहुआर सभ इहाँ के आम जनजीवन के अभिन्न अंग बाड़ें। शहर के आर्थिक आधार के रूप में पर्यटन के बिसेस महत्व बा। धार्मिक तीर्थ यात्रा के अलावा पहाड़ घूमे आ अन्य एडवेंचर करे खाती भी लोग इहाँ आवे ला आ इहाँ सात गो कसीनों भी बाने। 2015 में आइल भूडोल में शहर के काफी नोकसान भइल रहे। नेपाली आ नेपाल भाषा इहाँ आम चलन में बा आ अंगरेजी आ हिंदी भी लोग बुझे ला।

काठमांडो शहर, काठमांडो घाटी के उत्तरी पच्छिमी हिस्सा में, बागमती नदी के उत्तर में स्थित बा आ लगभग  क्षेत्रफल पर एकर बिस्तार बाटे। समुंद्र तल से औसत ऊँचाई  बाटे। शहर के इर्द-गिर्द कई गो अन्य नगरपालिका सभ भी बाड़ी: बागमती नदी के दक्खिन में पाटन (ललितपुर) बा जेकरे साथे रिंग रोड जुड़े ला, दक्खिन पच्छिम में कीर्तिपुर बा आ पूरुब में मध्यपुर थिमि बाटे। उत्तर में ई शहर कई गाँव बिकास समीति सभ ले बिस्तार लिहले बा। हालाँकि, शहर के नगरीय संकुल (एग्लोमरेशन) अउरी बिस्तार वाला बा आ एह में भक्तपुर नियर नगरपालिका आ लगभग पूरे काठमांडो घाटी आ जाले।

काठमांडो घाटी में कुल छोट-बड़ आठ्गो नदी गुजरे लीं, इनहन में घाटी के मुख्य नदी, बाघमती आ एकर सहायिका नदी सभ शामिल बाड़ी, बिष्णुमती, ढोबी खोला, मनोहरा खोला, हनुमंते खोला आ टुकुचा खोला एह सहायिका सभ में प्रमुख बाड़ी सऽ। जवना पहाड़ सभ से ई नदी निकसे लीं उनहन के ऊँचाई लगभग  के बीच बा, आ एह में कई को काठी (दर्रा) सभ बाने जिनहन से हिमालय के अन्य घाटी सभ से एह घाटी के जुड़ाव आ रस्ता बा। बहुत पुराना जमाना के एगो नहर नागार्जुन पहाड़ी से निकल के बलाजू होखत काठमांडो चहुँपे, हालाँकि अब ई नहर बिलुप्त हो चुकल बाटे।

काठमांडो घाटी के बनस्पति क्षेत्र मानसूनी पतझड़ वाला बन के श्रेणी में आवे ला (ऊँचाई ) जे नेपाल के पाँच गो बनस्पति क्षेत्र सभ में एक हवे। ओक, एल्म, बीच आ मैपल इत्यादि पे फेड़ सभ के बहुतायत बा आ ऊँच ढाल सभ पर कोणधारी बन भी मिले लें।

काठमांडो आ आसपास के नगरीय इलाका सभ कई गो आवासीय क्षेत्र सभ में बिभाजित बाने, लोकल लोग आम बेहवार में एही मोहल्ला सभ के नाँव के इस्तेमाल ढेर करे ला। हालाँकि, प्रशासन के हिसाब से काठमांडो के बिभाजन 35 गो वार्ड सभ में कइल गइल बा। इनहन के नाँव नंबरिंग के आधार पर हवे, मने की वार्ड नं. 1 से ले के वार्ड नं. 35 तक।

काठमांडो नगरीय समूह (एग्लोमेरेशन) कौनों प्रशासनिक इकाई ना घोषित हवे। काठमांडो घाटी के शहरी इलाका सभ तीन गो जिला सभ में बिभाजित बाने जे लगभग पूरा तौर पर एह घाटी के भितरे मौजूद बाने सिवाय दक्खिनी हिस्सा के छोड़ के जे एह घाटी के बहरे ले फइलल बाटे। एह जिला सभ के जनसंख्या घनत्व पूरा नेपाल में सभसे ढेर बा, मने की ई नेपाल के सभसे ढेर घन बसल जिला सभ में टॉप पर बाने। एह तीन जिला सभ में 3 कई गाँव बिकास समीति, 20 गो नगरपालिका आ 2 दू गो मेट्रो (महानगरपालिका): काठमांडो आ लातितपुर) सामिल बाने। नीचे एह जिला सभ के आँकड़ा दिहल गइल बा जे काठमांडो नगरीय संकुल के हिस्सा मानल जालें:




#Article 29: महेन्द्र संस्कृत विश्वविधालय (176 words)


महेन्द्र संस्कृत विश्वविधालय (हाल नेपाल संस्कृत बनाइलगैल) नेपालका दुसरा पुरान विश्वविधालय ह व यि विश्वविधालय काठमान्डौ उपत्यका बाहीर स्थापित पहिला विश्वविधालय भि बा । दाङ जील्लाके त्रिभुवननगर के लगवा स्थापित यस विश्वविधालय 1986मे स्थापना भइल ह । संस्कृत शिक्षाका उच्च तह आयुर्बेद, तथा आधुनीक शिक्षामे समेत पढाइ भइलरहल इस विश्वविधालयका काठमान्डौ कार्यालय बसन्तपुर मा बा ।

धनुषाजिल्लाके जनकपुर क्याम्पसमे मुस्लिम समुदायके कुछ विद्यार्थील संस्कृतकी पढाइ सुरु कैल महेन्द्र संस्कृत विश्वविद्यालय परीक्षा नियन्त्रण कार्यालय जानकारी देलेबा । इस विश्वविद्यालयअर्न्तर्गतके 12 क्याम्पसमे संस्कृततर्फ करिब 3 हजार 5 सय विद्यार्थी बाटे। वकरमे दलित जनजाति करिब 20 प्रतिशत बाटे । अध्ययनार्थीमे छात्राकी प्रतिशत करिब 40 ब । सोलुखुम्बु जिल्लामे संस्कृत पढैयामे करिब 25 प्रतिशत दलित बाटे । बिजौरी, त्रिभुवननगरदाङमे 20 विद्यार्थी थारू तथा दलित बाटे । केन्द्रीय विद्यापीठ बेलझुन्डी, त्रिभुवननगरमे मोहन थारू व एक कुमालजातके युवा संस्कृतमे आचार्य कैलेवाने ।

विशेष सुविधा

संस्कृत पढेवाले ब्रँह्मण-क्षत्री समुदायका छात्रको प्रतिमहिना 4 सय 50 रुपैया“ दियाजाला। उक्त समुदायका छात्रा मासिक 5 सय पावेले। दलित व जनजातिका छात्रछात्राको मासिक 1 हजार छात्रवृत्ति दियलगैलबा । बाहिरी जिल्लाका का विधार्थीका खातिर छात्रावासका समेत सुविधा दियलजाला ।




#Article 30: त्रिभुवननगर (105 words)


राप्ती अन्चलका प्रमुख वाणीज्य तथा शिक्षा श्वास्थका केन्द्र त्रिभुवननगर दाङ उपत्यका के दांग जिल्ला मे पडल । लमही से फेडर रोडसे जोडीएइल त्रिभुवन नगर राप्तीका पाहडी क्षेत्रको प्रमुख पैठारीकर्ता ह महेन्द्र संस्कृत विस्वबिधालय, महेन्द्र बहुमुखी क्यम्पस (त्रि.वि.) लगायतका क्याम्पस रहलबाने याहां दुसर  प्राइभेट तथा सामुदायीक क्याम्पस तथा बिधालय रहलबाने, महेन्द्र अस्पताल , आंखाउपचार केन्द्र यिहा बाडे वकरसाथ साथ कुछु प्राइभेट श्वास्थ संस्था यिहा बाडे।

रोल्पाके लिवाङ रूकुम लगायतका जिल्ला संग त्रिभुवन नगर कच्ची सडकसे जुडलबा वैसेही तुल्सीपुर तक पक्की बाकीर उहासे कच्ची सडक सल्यान होले सुर्खेत वीरेन्द्रनगर तक जोडाइलबा। त्रिभुवननगर शहरमे करिव 55 हजार मनैयन के गृहस्थी बा । त्रिभुवननगरका टेलीफोन कोड नं. 082 बा।




#Article 31: वीरेन्द्रनगर (275 words)


नेपालके सन् 2001के जनगणना अनुसार वीरेन्द्रनगर न.पा.का जनसंख्या 49,381 बा।[1]  मध्य पुरुष 51%, व महिला 49% बाटे।

वीरेन्द्रनगर नेपालके सुर्खेत उपत्यकाका सुर्खेत जील्लामे पडला यि सहर मध्यपस्चीमाञ्चल बिकास क्षेत्रके सदरमुकाम तथा सुर्खेत जील्लाक भि सदरमुकाम ह यि नगरका नामाकरण स्वर्गीय राजा वीरेन्द्र के नामसंग संबन्धीत बा, राजा वीरेन्द्रद्धारा हि सुर्खेत उपत्यकामे मलेरीयाके उन्मुलन भैलेपर वीरेन्द्रनगर सहरकी परिकल्पना कैल रहले। हाल वीरेन्द्रनगर पस्चीम नेपालके प्रमुख वाणिज्य केन्द्र तथा शिक्षा श्वास्थक भैलबा ।

वीरेन्द्रनगर नगरपालीकामा हाल करीब पचासहजार के हारहारी मा मनैयन बसोबास करेले साथ साथै नेपालमे फैलल गृहयुद्द वीरेन्द्रनगरका अाप्रवासीयोका  सहर बनादेलेबा नजदीकका पाहाडी जिल्लासे मावोवादी युध्दपिडीतकुल बसांइसरके यांहा बैठलबाने। यि नगरपालीका मा 12 ठि वार्ड बाने। याँहाका टेलीफोन कोड083 ह । वीरेन्द्रनगर से देशका प्रमुख स्थान सँग जोडनेका कार्य रत्न राजमार्ग कोहलपुर मे महेन्द्र राजमार्ग सँग जोडले पुरा कैलेबा, जसमार्फत वीरेन्द्रनगर बुटवल, भरतपुर, हेटौडा, काठमाण्डौ, धरान, विराटगर लगायतके सहर  सँग जोडे पहुचलबा । वैसाही हालहीमे निर्मीत कर्णाली राजमार्ग दैलेख जिल्लाका साथ कर्णाली अञ्चलका कालीकोट, जुम्ला लगायतका जिल्ला सँग  वीरेन्द्रनगरके जोडलेबा। वैसेही दांग उपत्यका से सल्यान होइले सुर्खेत ढुकल कच्ची सडक तुल्सीपुर तथा त्रिभुवननगर संग जोडलबा,  दुसर  नवनिर्मीत जाजरकोट सडक जाजरकोटका सदरमुकाम तथा रूकुमके चोरजाहारी संग जोडलेबा, वीरेन्द्रनगरमे आधुनीक संचारका साधन, इमेल, इन्टनेट, पोष्टपेड तथा प्रिपेड मोवाइल, लोकल फोन एस टि डी तथा आइ एस टि डी लगायत सबै सुबिधा उपलब्ध बाटे।

वीरेन्द्रनगरमे  मध्यपस्चीमान्चल क्षेत्रीय अस्पताल, एक जील्ला अस्पताल व एक नेत्र उपचारकेन्द्र सरकारी नियन्त्रणमा संचालीत बाने बाकिर कुछ प्राइभेट श्वास्थ संस्था भि याहां रहलबाने, बहुत माध्यामीक तथा प्राथमीक विधालय रहल बिरेन्द्रनगरमे सुर्खेत बहुमुखी क्याम्पस, वीरेन्द्रनगर बहुमुखी क्याम्पस तथा सामुदायीक चिकीत्सा क्याम्पस मुख्य शैक्षीक हने । अभैन सरकारल वीरेन्द्रनगरमे मध्यपस्चिमाञ्चल विश्वविधालय निर्माणका खातिर कार्यदल गठन कैलेबा । वीरेन्द्रनगरके मुख्य कारोबार ब्यापार, नोकरी तथा कृषी रहलबा ।




#Article 32: बिराटनगर (153 words)


बिराटनगर नेपाल के प्रदेश संख्या 1 में एगो महानगरपालिका ह। आ प्रदेश संख्या 1 के अंतरिम राजधानी भी ह। 2011 के जनगणना के हिसाब से ई शहर नेपाल के पांचवा सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर ह। जनसंख्या घनत्व में ई काठमांडू के बाद दुसरका नंबर पर बा। बिराटनगर नेपाल के औद्योगिक राजधानी भी ह जेकर क्षेत्रफल 40.108 मील² (103.88 किमी²) बा। एकर भौगोलिक अवस्थिति 26°28'60उत्तर 87°16'60पूरब देशांतर पर बा। ई शहर प्रदेश संख्या 1 के दक्खिनी क्षेत्र (तराई) में मोरंग जिला में पड़ेला। ई नेपाल के राष्ट्रीय राजधानी से 399 किमी पर पूरब के तराई में पड़ेला आ भारतीय अंतराष्ट्रीय सिमा से 6 किमी उत्तर में पड़ेला। 22 मई 2017 के ई शहर के महानगर के दर्जा मिलल ह। ई शहर के महानगर के श्रेणी में लावे खातिर ई में टंकीसिनुवारी आ जहदा-3 के जोड़ल गईल ह, जे से एकर जनसंख्या बढ़ के 240,000 हो गइल ह। ई से पहिले शहर के जनसंख्या 214,000 रहल ह।




#Article 33: अरविंद गौड़ (244 words)


अरविंद गौड़ (Arvind Gaur), भारतीय रंगमंचा निदेशक, सामाजिक एउर राजनीतिक प्रासंगिक रंगमंच मा अपुनो काम के लिए जाने जाते बा । अरविंद गौड़ को नाटक समकालीन बा । व्यापक सामाजिक राजनीतिक मुद्दों - सांप्रदायिकता , जातिवाद , सामंतवाद, घरेलू हिंसा, राज्य केउ अपराध, सत्ता की राजनीति, हिंसा, अन्याय, सामाजिक- भेदभाव एउर नस्लवाद उन्को रंगमंच के प्रमुख विषय बा । गौड़ एको अभिनेता प्रशिक्षक ( ट्रेनर ), सामाजिक कार्यकर्ता एउर एका अच्छे कथा -वाचक (स्टोरी टेलर ) बा ।

अरविन्द गौड़ ना भारत एउर विदेश का प्रमुख नाट्य महोत्सवो मा भाग लिया बा । ऊन्होन नाटक कार्यशालाओं का विभिन्ना कॉलेजों, संस्थानों,स्कूलआ ,विश्वविद्यालयों मा आयोजनओ किए बा. व्हो बच्चों के लिया भी नाटक(थिएटर)कार्यशालाओं का आयोजना करतेअ बा । अरविन्द नो विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक मुद्आ पर नुक्कड़ नाटकॉ का साथ- साथ दो दशकों मा 60 सेअ अधिक मंच नाटको का निर्देशन कियाओ बा। 

पद्मश्री हबीब तनवीर का नया थिएटर का प्रमुख नाटको का लिया अरविन्द ना प्रकाश व्यवस्था भी डिजाइन की बा । आजकले अरविन्द गौड़ अस्मिता थियेटर ग्रुप के निदेशक का रूप मा कार्यरत बा । कुच्ह प्रमुख सिनेमा अभिनेताओं - कंगना राणावत ( फिल्म-गैंगस्टर, मेट्रो, फैशन), दीपक डोबरियाल (ओमकारा ,शोर्य ), शिल्पा शुक्ला (चक दे इंडिया), पीयूष मिश्र (दिल से ), लुशिन दुबे, बबल्रस सबरवाल, ऐशवरया निधि ( सिडनी ),तिलोत्त्त्त्मा शोम ( मानसून वेडिंग), राशि बनि ( दुविधा फिल्म ), रुथ शेअर्द् (ब्रिटिश अभिनेत्री),मनु ऋषि चड्ढा (मिथ्या फिल्म),सीमा आज़मी(चक दे इंडिया), सुसान बरार (फिल्म-समर 2007),चन्दन आनंद,जैमिनि कुमार,शक्ति आनंद आदि ना उसका साथए काम किया बा।




#Article 34: आरा (841 words)


आरा (कैथी: 𑂄𑂩𑂰) भारत के बिहार राज्य के एगो प्रमुख नगर हऽ। ई भोजपुर जिला के मुख्यालय हऽ। बिहार के राजधानी पटना से एकर दूरी खाली 55 किलोमीटर बा। देश के दोसर ईलाकन से ई सड़क आउर रेलमार्ग से जुड़ल बा । ई सहर बनारस से 136 मील पूरूब-उत्तर-पूरूब ,पटना से 37 मील पश्चिम, गंगा नदी से 14 मील दक्खिन आउर सोन नदी से आठ मील पश्चिम में बसल बा। ई पूर्वी रेलवे के प्रधान साखा आउर आरा-सासाराम रेलवे लाइन के जंकशन हऽ। डिहरी से निकले वाली सोन के पूरबी नहर के प्रमुख 'आरा नहर' शाखा भी इहां से होकर जाले। आरा के 1865 में नगरपालीका बनावल गइल रहे।

गंगा और सोन के उपजाऊ घाटी में होखला के चलते ई अनाज के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र आउर वितरणकेंद्र हऽ । ई पटना, सासाराम आउर बनारस से रेल आउर सड़क मार्ग से जुड़ल बाटे। गंगा अऊर सोन नदी में बाढ़ अईला के चलते सहर कबो-कबो छतिग्रस्त हो जाला।

मसाढ़ मे मिलल एगो जैन सिलालेख मे एकर नांव अरामनगर लिखल बा एहिसे एइसन मानल जाला जे आरा नांव एहिसे पड़ल।

काथा सभ मे अईसन कहल गईल बा जे आरा संस्कृत के सबद अरण्य से बनल बाटे, जेकर माने बन होला। अईसन कहल जाला जे पुरान घड़ी मे आरा मे बहुते सघन बन रहऽसन। कहाला जे, राम जी के गुरु, विश्वामित्र के मड़ई हेनिए केनियो रहे। राम जी ताड़का के अरे लगे मरले रहन।

आरा दिया रामायण मे लिखल बा, कहाला जे, राम जी के गुरु, विश्वामित्र के मड़ई हेनिए केनियो रहे। राम जी ताड़का के अरे लगे मरले रहन।

पुरान भारत मे ई मगध मे आवत रहे।, 684 बिसी मे एहिजा हर्यक कुल के राज चलत रहे। मौय कुलो एहिजा राज कइले रहे आ मसाढ़ लगे असोक के थम मिलल बाटे। 200 ईश्व मे एहिजा ग गुप्ता कुल रहे, बिकरमादित के कथा कईसे बैताल पचिसी आ सिंहासन बत्तिसी एहिजा आजो सुनावल जाला। फेर एहिजा पाल आ चेरो सभ के राज रहल।

आरा सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण रहल बा ।आरा में ढेर अईसन संस्थान बाड़ीसन ,जवन सांस्कृतिक नाटक के प्रस्तुति में, लोगिन के मनोरंजन करे में इउर शिक्षा के साथे साथे सामाजिक कुप्रथा के भी ख़तम करे में बहुत बड़ भूमिका निभावत बाड़ीसन । युवानीति, दृष्टिकोण, कमायनी, भूमिका, अभिनव, रंगभूमि जईसन संस्था आरा में नाटक के आयोजन करत रहेलिसन । आरा रंमंच के विकाश में  डॉ श्याम मोहन अस्थाना, सिरिल मैथ्यू, नवेन्दु, श्रीकांत, सुनील सरीन, अजय शेखर प्रकाश, श्रीधर लोगिन के बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रहल बा । मेहरारुन में छंदा सेन का नाम प्रमुख बाटे जे बहुत समय से रंगमंच के साथे जुडल रहल बाड़ी I

आरा व्यापारिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण रहल बा I एहिजा के मुख्य व्यवसाय खेती से जुडल बा I आरा के गोला आउर बाजार समिति खेती से जुडल खरीद-बिक्री के जगह के रूप में जानल जाला।

इहां वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय अऊर बहुत महाविद्यालय बाड़ीसन । प्रोफेसर मिथिलेश्वर, उर्मिला कौल, मधुकर सिंह, अनंत कुमार सिंह, नीरज सिंह, निलय उपाध्याय, जवाहर पाण्डेय जईसन लोग समाकालिन साहित्य के  दिशा दे रहल बा लोग । भोजपुर कंठ, आरण्य ज्योति जईसन पाक्षिक अखबार बहुत लम्बा समय से इहाँ प्रकाशित होत बाड़ीसन । एगो अइसन समय भी रहे जब आरा से टटका नाम के  एगो भोजपुरी अखबार प्रकाशित होत रहे । बीच में शाहाबाद भूमि और समकालीन भोजपत्र नाम के पत्रिकन के प्रकाशन शुरू भइल रहे जे अब बंद बा । मित्र और जनपथ नाम के साहित्यिक पत्रिका इहाँ से प्रकाशित हो रहल बाड़ीसन । जनवादी लेखक संघ,प्रगतिशील लेखक संघ और अखिल भारतीय साहित्य परिषद के शाखा भी आरा शहर में आपन मौजूदगी दर्ज करवले बाड़ीसन । आजकाल भोजपुरी भाषा के कईअक गो लेखक अऊर संगठन आरा में सक्रिय बाड़ें । आरा में बहते पुरान अऊर इतिहासिक ईमारत बाड़ीसन । महाराजा कॉलेज परिसर में आरा हाउस, रमना मैदान के भीरी चर्च, बड़की  मस्जिद, नागरी प्रचारिणी सभागार सह पुस्तकालय, बाल हिंदी पुस्तकालय, जैन सिंद्धांत भवन आदि प्रमुख बाड़ीसन I शहर में जैन लोग के भी ढेर मंदिर बाटे । इहाँ जैन बाला विश्राम नाम के लईकिन खातिर एगो ढ़ेर पुरान स्कूल बा। हरप्रसाद दास जैन कॉलेज, महाराजा कॉलेज, सहजानंद ब्रह्मर्षि कॉलेज, जगजीवन कॉलेज, महंत महादेवानंद महिला कॉलेज अंगीभूत कॉलेज हयिसन। नामी स्कूलन में डी.ए.वी ,जीन पौल्स ,सम्भावना अवासिय उच्च विद्यालय आउर डी.के.कारमेल के नाम शामिल बा I एकरा अलावा शहर में ढेर बड़-छोट स्कूल-कालेज बाड़ीसन । इहाँ वीर कुंवर सिंह विश्वविधालय  के स्थापना सन 1992 में भइल । जगजीवन राम, राम सुभग सिंह, अंबिका शरण सिंह, सचिदानन्द सिन्हा, रामानंद तिवारी जईसन नेता आरा के माटी के लाल हवें।

आरा के दर्शनीय जगह में आरण्य देवी, मढ़िया के राम मन्दिर शामिल बा। शहर में बुढ़वा महादेव, पतालेश्वर मंदिर, रमना मैदान के  महावीर मंदिर, सिद्धनाथ मंदिर आदि शामिल बा । शहर में बड़की मठिया नाम से मशहुर एगो धार्मिक जगह बा । शहर के बीचोबीच बसल बड़की  मठिया रामानंद सम्प्रदाय के प्रमुख केन्द्र हऽ। बनारस के तर्ज प मानस मंदिर के भी निर्माण चल रहल बा । आरा शहर से दूर बखोरापूर के काली माई के मंदिर भी बहुत मशहुर भइल जात बा जहाँ हर साल बड़-बड़ कलाकारन के जमावड़ा लागेला। आरा शहर से 9 किलोमिटर दूर सकड्डी के दुर्गा माई के मंदिर भी बहूत मशहुर है।




#Article 35: केरल (128 words)


केरल दक्खिन भारत में मालाबार किनारा पर एगो राज्य बा आ एकर राजधानी तिरुअनंतपुरम (त्रिवेंद्रम) शहर बा। एह राज्य के गठन 1 नवंबर 1956 के भइल जब भारत के राज्य पुनर्गठन आयोग अधिनियम द्वारा मलयालम भाषा बोले वाला लोग के इलाका के एगो अलगा से राज्य के दर्जा दिहल गइल। लगभग  रकबा के बिस्तार वाला ई राज्य उत्तर आ उत्तर-पूरुब में कर्नाटक, दक्खिन पूरुब में तमिलनाडु आ पछिम ओर लक्षदीप सागर से घेराइल बा। लक्षदीप सागर मूल रूप से अरब सागर के हिस्सा हवे आ एह किनारा के मालाबार किनारा कहल जाला। केरला के कुल जनसंख्या, 2011 के जनगणना के मोताबिक 33,387,677 बा आ एह राज्य के प्रशासन के हिसाब से 14 गो जिला में बाँटल गइल बा। मलयालम इहाँ के सभसे चलनसार भाषा आ ऑफिशियल भाषा हवे।




#Article 36: इलाहाबाद (2527 words)


इलाहाबाद (ऑफिशियल नाँव: प्रयागराज) भारत देस के उत्तर प्रदेश राज्य में गंगा, यमुना अउरी पौराणिक सरस्वती की संगम पर बसल एगो दसलाखी शहर बा आ ई प्रयागराज जिला क मुख्यालय हउए। एकर प्राचीन नाँव प्रयाग  हवे आ ई हिंदू धर्म क एगो बहुत महत्वपूर्ण तीरथ अस्थान हऽ। हर बारिस इहाँ माघ की महीना में माघ मेला लागेला आ हर बारहवाँ बारिस कुंभ मेला, आ हर कुंभ की छह साल बाद अर्धकुंभ मेला लागेला। कुंभ मेला विश्व क सबसे बड़हन मेला हवे।

इलाहाबाद में इलाहाबाद विश्वविद्यालय एगो विश्वप्रसिद्द इन्वरसिटी बा जेवन ए शहर के शिक्षा की क्षेत्र में बहुते ऊँच अस्थान दिहले बा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के 'पूरुब क आक्सफोर्ड' कहल जाला। एकरी आलावा इहँवा इलाहाबाद हाइकोर्ट बा जेवन उत्तर प्रदेश के हाइकोर्ट हवे। ए॰ जी॰ आफिस आ मिलिट्री पेंशन के आफिस भी इहाँ बा जेवना से ए शहर क महत्व बढ़ जाला।

अंग्रेजन की समय में सन 1902 से 1920 ले ई शहर संयुक्त प्रांत क राजधानी रहल आ 1958 ई॰ में भारत क राजधानी रहल। इलाहाबाद भारत की स्वतंत्रता संग्राम में ए शहर क बहुत महत्व क अस्थान रहे आ काँग्रेस क चौथा अधिवेशन इहँवा भइल रहे। भारत क पहिला परधानमंत्री पं॰ जवाहिरलाल नेहरू के जनम इहँवे भइल रहे। उहाँ के घर आनंद भवन अब एगो संग्रहालय की रूप में बा।

अकबर क बनवावल इलाहाबाद किला, खुसरो बाग, कंपनी बाग, मिंटो पार्क, थोर्नहिल माएन मेमोरियल, भारती भवन पुस्तकालय, हिंदी साहित्य सम्मलेन, हिन्दुस्तानी एकेडमी, प्रयाग संगीत समिति इत्यादि ए शहर क प्रमुख आकर्षण आ महत्व के अस्थान बा।

इलाहाबाद शहर क प्राचीन नाँव प्रयाग हवे। पौराणिक आख्यान की हिसाब से ब्रह्मा जी इहाँ बहुत विशिष्ट प्रकार क यज्ञ कइलें जेवना कारण एकर नाँव प्रयाग पड़ल। ए दूनो की अलावा एगो मत इहो बा कि ए शहर के नाँव बनाफर योद्धा अल्लाहा की नाँव पर पड़ल ।

प्रयाग क अस्तित्व वैदिक काल से बा आ वैदिक साहित्य में एकर वर्णन ब्रह्मा जी की यग्य की भूमि की रूप में भइल बा आ एही क समर्थन मत्स्यपुराण आ लिंगपुराण में भी मिलेला। इहवाँ पुरातात्विक खोदाई में पालिशदार उत्तरी काला मृदभाण्ड मिलल बा जेवन 600 ई॰पू॰ से 700 ई॰पू॰ के बतावल जाला। पुराणन में वर्णन मिलेला कि राजा ययाति जेवन प्रयाग से जा के सप्तसैन्धव प्रदेश पर विजय प्राप्त कइलें उनहीं के पाँच पुत्रन (यदु, द्रुह्य, पुरु, अनु, आ तुवर्शु) की नाँव पर ऋग्वेद की मुख्य जन क नाँव पड़ल।। 319 ई॰पू॰में चंद्रगुप्त मौर्य कौशाम्बी पर अधिकार क लिह्लें आ प्रयाग भी उनकी अधिकार में आ गइल। 273 ई॰ में सम्राट अशोक की शासन काल में इहँवा एगो कीर्ति स्तंभ लगवावल गइल जेवन आज भी अशोक स्तंभ की नाँव से इलाहाबाद में अकबर की किला में सुरक्षित बा। ए पर उत्कीर्ण लेख के प्रयाग प्रशस्ति की नाँव से जानल जाला। प्रयाग प्रशस्ति में समुद्रगुप्त द्वारा 326 ई. में अश्वमेध यग्य कइला क वर्णन लिखल बा आ ए शिला लेख के रचयिता हरिषेण के मानल जाला। समुद्रगुप्त के खोदवावल कुआँ इलाहाबाद की बगल में झूँसी की लगे बा जेवना के समुद्रकूप कहल जाला।

एकरी बाद 525 ई॰ में प्रयाग आ एकरी आसपास की इलाका पर कन्नौज की राजा यशोवर्मन क अधिकार हो गइल। सम्राट हर्षवर्द्धन की बारे में कहल जाला कि उहाँके हर कुंभ मेला में आपन सबकुछ दान क दीं। चीनी यात्री ह्वेन सांग के आगमन हर्षवर्धन की समय में भइल रहे आ ऊ प्रयाग के यात्रा कइलें आ अपनी बर्णन में लिखलें कि गंगा आ यमुना नदी जहाँ मिलेलीं उहाँ एगो बड़ा मंदिर आ विशाल पेड़ बा। उ इहो लिखलें कि ए पेड़ (अक्षयवट) से बहुत लोग कूदि के जान दे देला काहें की ई मान्यता बा कि ए परम पबित्र जगह पर मरला से स्वर्ग मिल जाई। हर्षवर्द्धन की बाद क लगभग 200 बारिस क इतिहास नामालूम बा। लगभग 810 ई. की बाद कन्नौज क शासन प्रतिहार राजपूत लोगन की द्वारा भइल आ 1090 ई॰ की आसपास कड़ा के इलाका चंद्रदेव गहड़वाल की कब्ज़ा में आ गइल। ए समय प्रयाग के शासन कड़ा से चले आ लगभग सारा जानकारी कड़ा की पुरालेख से प्राप्त होला।

मुहम्मद गोरी 1194 ई॰ में एक कि बाद एक दिल्ली आ कन्नौज पर अधिकार करत बनारस ले हमला कइलस आ प्रयाग की इलाका पर भी ओकर प्रभुत्व हो गइल। ओह समय से लेके अकबर की समय तक प्रयाग क प्रशासनिक महाव बहुत काम हो गइल रहे आ ई कड़ा से शासित इलाका में आवे। 1567 ई॰ में कड़ा के गवर्नर अली कुली खान की बागी हो गइला पर अकबर इहवाँ आ के ओ के हरा दिहलें आ पहिली बार प्रयाग के यात्रा कइलें अउरी ए अस्थान की सैनिक महत्व के महसूस कइलें। 1574 ई॰ अपनी दूसरी यात्रा की दौरान अकबर इहँवा इलाहाबाद शहर के अस्थापना कइलें आ किला के नीव रखलें।

औरंगजेब की शासन काल में फ्रांसीसी यात्री टेवर्नियर बनारस जात समय एक दिन खातिर (6 दिसंबर, 1665 ई॰) इलाहाबाद में रुकल रहलें आ ए शहर क वर्णन एगो बड़ा आ ख़ूबसूरत शहर की रूप में कइलें। सन 1739 ई॰ में मराठा सरदार राघोजी भोंसले इलाहाबाद पर आक्रमण करि के शहर में लूटपाट कइलस। सन 1759 ई॰ में इलाहाबाद शुजाउद्दौला की कब्ज़ा में आ गइल आ अंततः सन 1764 ई॰ की बक्सर की लड़ाई कि बाद इलाहाबाद के दीवानी अधिकार अंग्रेजन के मिल गइल आ सन 1801 ई॰ की बाद ई अंग्रेजन की राज्य में शामिल हो गइल।

अंग्रेज इलाहाबाद पर अपनी अधिकार की बाद इहाँ एगो गैरीसन के अस्थापना कइले आ इलाहाबाद के प्रमुख सैनिक केन्द्र की रूप में महत्व दिहलें। अकबर की समय में इलाहाबाद सूबा में 12 गो सरकार आ 177 परगना क इलाका आवे जेवन ब्रिटिश काल में कम हो के 5 आ 23 बचल। सन 1825 में फतेहपुर ज़िला इलाहाबद से अलग कइल गइल आ सन 1842 ई॰ से 1862 ई॰ की बीच में कई बार मिर्जापुर आ इलाहाबाद की बीछ में जिला क सीमा में बदलाव भइल।

सन 1829 ई॰ में इलाहाबाद में कमिश्नरी के अस्थापना भइल आ मिस्टर राबर्ट बार्लो इलाहाबाद के पहिला कमिश्नर नियुक्त भइलें, इलाहाबाद के पहिला कलेक्टर मिस्टर ए. अहमुट्टी रहलें जिनकी नाँव पर मोहल्ला मुट्ठीगंज बसल। 1834 ई॰ में इहँवा गवर्नर के आसन आइल आ 1858 ई में ई संयुक्त प्रान्त क राजधानी बन गईल। इहंवे लार्ड कैनिंग महारानी क घोषणापत्र पढ़ी के सुनावलें आ भारत के शासन ईस्ट इण्डिया कंपनी कि हाथ से महारानी की हाथ में चलि गइल। थोड़ा समय खातिर इलाहाबाद एह समय पूरा ब्रिटिश भारत क राजधानी रहल।

एक तरह से देखल जाय त शहर क वर्तमान स्वरूप अंग्रेजन की समय में बनल। मुट्ठीगंज कीडगंज कोतवाली लूकरगंज, जार्जटाउन, एलनगंज, म्योराबाद जइसन मोहल्ला एही समय बसल। वर्तमान चौक मोहल्ला अंग्रेजन की समय से पाहिले तक एगो गड़ही की रूप में रहे जेवना की आसपास कुछ सागसब्जी आ अनाज के दूकान लगे। लार्ड कैनिंग की नाँव पर सिविल स्टेशन क विकास भइल आ ओ समय ए के कैनिंग टाउन कहल जाय जेवना के वर्तमान नाँव सिविल लाइन्स बा। वर्तमान महात्मा गाँधी मार्ग के ओ समय नाँव कैनिंग रोड रहे।

सन 1866 ई. में इलाहाबाद में हाइकोर्ट के अस्थापना भइल आ ठीक बाद में एक साल खातिर आगरा भेज दिहल गइल लेकिन फिर 1868 ई. में वापस इलाहाबाद आ गइल आ तब से इहंवे बा। सन 1887 ई. में म्योर सेन्ट्रल कालेज के इलाहाबाद विश्वविद्यालय की रूप में मान्यता दिहल गइल आ ई भारत क चौथा सभसे पुरान विश्विद्यालय बनल।

प्रथम स्वतंत्रता संघर्ष में इलाहाबाद के महत्वपूर्ण योगदान रहे। इहँवा ग़दर के नेतृत्व मौलवी लियाक़त अली कइलें। इहाँ 6 जून 1957 के बगावत शुरू भइल आ जल्दिये बागी सिपाही आ जनता रेलवे आ टेलीग्राफ पर कब्ज़ा क लिहलें। दारागंज में नाव की पुल पर बागी लोगन क कब्ज़ा हो गइल। मौलवी साहब, जेवन स्कूल के अध्यापक रहलें खुसरू बाग़ से आपन कमान सम्भाले शुरू कइलें। लगभग एक हफ्ता बाद 12 जून के  कर्नल नील के पलटन बनारस से इहँवा पहुँचल आ दारागंज क पुल पर आपन कब्जा वापस लिहलस। एकरी बाद शहर में लड़ाई भइल आ तब मौलवी साहब अपनी लोगन की साथ शहर छोड़ के बाहर से लड़ाई करे लगलन। अंग्रेज सेना शहर पर वापस कब्ज़ा कइला की बाद लोगन पर बहुत अत्याचार कइलस। समदाबाद आ रसूलपुर नाँव क दू गो गाँव त पूरा क पूरा जरा दिहल गइलन। एही गाँवन की ज़मीन पर अल्फ्रेड पार्क के निर्माण भइल जेवना के आजकाल आज़ाद पार्क कहल जाला।

भारत की स्वतंत्रता संग्राम में इलाहाबाद क योगदान हमेशा महत्वपूर्ण मानल जाला। इहाँ काँग्रेस क चौथा अधिवेशन लार्ड वेडरबर्न की अध्यक्षता में सन 1888 ई॰ में भइल। एकरी आलावा आठवाँ आ पचीसवाँ अधिवेशन क्रम से 1892 ई॰ आ 1910 ई॰ में भइल। सन 1920 ई॰ में आल-इण्डिया-खिलाफत कांफ्रेंस इलाहाबाद में आयोजित भइल।

आज़ादी की लड़ाई में इलाहाबाद के नेता लोगन क लिस्ट भी बहुत लंबा बा। ए में से प्रमुख लोग रहे पं॰ अयोध्या नाथ, सुरेन्द्र नाथ सेन, पं॰ मदन मोहन मालवीय, मोतीलाल नेहरू, पुरुषोत्तम दास टंडन, सी॰ वाई॰ चिंतामणि, हृदय नाथ कुंजरू, तेजबहादुर सप्रू, जवाहरलाल नेहरू इत्यादि। सुन्दरलाल आ मनाज़िर अली सोख्ता क्रांतिकारी दल क सदस्य रहे लोग। महान क्रन्तिकारी चंद्रशेखर आजाद इहँवे अल्फ्रेड पार्क में शहीद भइलें आ उनकी नाँव पर अब ए पार्क के चंद्रशेखर आजाद पार्क कहल जाला।

भूगोलीय रूप से इलाहाबाद मध्य गंगा मैदान क हिस्सा बा आ पूरब-पच्छिम बिस्तार की हिसाब से ए मैदान की ठीक बिचा में पड़ेला। गंगा आ यमुना नदियन की बिचा में बसल ए शहर क लोकेशन सैनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो जाला आ व्यापर की दृष्टीकोण से भी। निर्देशांक की हिसाब से इलाहाबाद क लोकेशन 25.45 डिग्री उत्तर अक्षांश आ 81.85 डिग्री पूरबी देशांतर पर बा आ ए शहर में नगर निगम की अन्दर में क कुल क्षेत्रफल 94 वर्ग किलोमीटर बा। इतिहासी जी.टी.रोड जेवन अब स्वर्णिम चतुर्भुज योजना की तहत बिकसित भइल बा ए शहर के दिल्ली आ कलकत्ता से जोड़ेला। इलाहाबाद अपनी आसपास कि अन्य शहरन से भी सड़क आ रेल मार्ग से जुडल बा।

इलाहाबाद शहर के समुद्र तल से औसत ऊंचाई 90 मीटर मानल जाला। हालाँकि कुछ इलाका 105 मीटर से अधिक ऊँच बा आ नदी की ओर ई ऊंचाई कम हो के 80 मीटर से नीचे चल जाला। बाढ़ के लेवल 81 मीटर मानल गइल बा। इलाहाबाद शहर में सबसे ढेर ऊँच इलाका इलाहाबाद इन्वार्सिटी की लगे बा। दारागंज आ कटरा भी ऊंचाई पर बसल बा। परेड ग्राउंड के इलाका नीचे बा आ अल्लापुर, सलोरी, छोटा बघाड़ा, टैगोर टाउन, एलनगंज के कुछ न कुछ इलाका बाढ़ कि लेवल 81 मीटर से नीचे पड़ेला।

इलाहाबाद नम उपोष्ण जलवायु की प्रकार में आवेला। कोपेन की बर्गीकरण की हिसाब से Cwg प्रकार के जलवायु पावल जाला जे में जाड़ा, गर्मी, वसंत आ बरसात चार गो ऋतु होलीं। बरखा की ऋतु से ठीक पाहिले भीषण गर्मी आ शुष्क हवा ए जलवायु प्रकार के बिसेसता बा। औसत सालाना तापमान 26.1 °C होला आ सबसे गरम महीना मई-जून होला जेवना समय तापमान 40 °C के पार क जाला आ 18 जून की बाद मानसून के बारिश शुरू होले। पूरा मई में आ जून की पहिला पाख में गरम हवा लूहि बहेले आ मानसून से पहिले आन्ही-अंधड़ की साथ झंझावाती बरखा होला। जनवरी क महीन सबसे ठंढा होला जेवना में शीतलहरी चलला पर कौनो-कौनो दिन न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे चल जाला। लूहि आ शीतलहरी छोड़ि के बाकी समय मौसम सुहावन रहेला। अब तक ले सबसे अधिक तापमान 48 °C आ सबसे कम -2 °C रेकार्ड कइल गइल बा ।

औसत सालाना बरखा 1027 मिलीमीटर बतावल जाला आ साल में औसतन 50 दिन बरखा वाला होला जहिया कम से कम 2.5 मिलीमीटर या अधिका बरखा होला। हालाँकि ई औसत पिछला कुछ साल में कम भइल बा। बरखा ऋतु के आरम्भ 18 जून से होला आ अक्टूबर ले चलेला। मानसून की अइला से पाहिले अप्रैल मई में झंझावाती बरखा होला जेवन तेज आन्ही की साथ दुपहरिया बाद नाहीं त राति में आवेला। सबसे ढेर बरखा जुलाई अगस्त में (सावन-भादों) में होले। जाड़ा के बरखा भूमध्य सागर की ओर से उठे वाला चक्रवात पच्छिमी विक्षोभ से होले आ रबी की फसल खातिर बहुत फ़ायदा करेले। सबसे सूखा महीना अप्रैल क होला जे में 5 मिमी से कम बरखा होले।

बदरी वाला मौसम बरसात में होला आ जाड़ा में पच्छिमी विक्षोभ की सामय होला। जाड़ा में कुहासा पड़ेला आ कौनो कौनो दिन घाम ना होला। तेज हवा खाली लूहि की समय चलेला। पुरुआ हवा चलला पर वातावरण में नमी के मात्रा बढ़ि जाला।

दस लाखी नगर होखला की बावजूद अबहिन इलाहाबाद में पेड़-पौधा के संख्या बढियाँ बा लेकिन जेवना तेजी से पुरान मज़बूत पेड़ गिरत जात बाडेन ऊ चिंता क बिषय बा। नीबि, इमिली आम, बरगद, पीपल आ पाकड़ के बहुत पुराण पुराण पेड़ इलाहाबाद शहर में बा। नया वृक्षारोपण में अधिकतर पेड़ शिरिष, सप्तपर्णी, गुलमोहर आ अमलताश के लागल बा। सहजन के बहुत पेड़ शहर में बा। सेना की अधिकार में काफ़ी इलाका अइसन बा जेवना में पेड़ संरक्षित बाड़ें। परेड ग्राउंड की ओर पीपल आ पकड़ के पेड़ भी लगावल गइल बा ई सुखद बाति बा।

सन 2011 की जनगणना की अनुसार इलाहाबाद शहर के कुल जनसंख्या 12,16,719 बा। जनसंख्या घनत्व 1,087 लोग प्रति वर्ग किलोमीटर बा जेवन 2001 में 901 रहे। इलाहाबाद में साक्षरता दर 86.50% बा जेवन राष्ट्रिय औसत 74% से अधिक बा। पुरुष जनसंख्या में साक्षरता दर 90.21% बा जबकि महिला साक्षरता दर 82.17% बा। इलाहाबाद में लगभग 78% हिंदू, 20% मुसलमान, आ 1.8% जैन लोग बा।

इलाहाबाद शहर एगो प्राचीन शहर होखला की वजह से ई अपनी आसपास की इलाका खातिर बाजार केन्द्र की रूप में सुविधा उपलब्ध करावेला। उद्योग की दृष्टि से इलाहाबाद के उपनगर नैनी आ थोड़ी दूर पर फूलपुर में आधुनिक उद्योग के अस्थापना भइल बा। नैनी में भारत पम्प एंड कम्प्रेसर्स, अरेवा, आई टी आई, रेमंड, वैद्यनाथ, त्रिवेणी शीट ग्लास लिमिटेड, जीप इंडस्ट्रीज, इफको आदि के औद्योगिक इकाई बा। फूलपुर में इफको खाद बनावे वाली फैक्टरी हवे।

माघ मकरगत रवि जब होई। तीरथपतिहिं आव सब कोई।।
देव दनुज किन्नर नर श्रेनी। सादर मज्जहिं सकल त्रिबेनीं।।
तुलसीदास, राम चरितमानस, बालकाण्ड, 43।।

इलाहाबाद क शिक्षा की क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण अस्थान बा। ए के उत्तरी भारत क शैक्षणिक राजधानी भी कहल जा सकेला।इलाहाबाद विश्वविद्यालय भारत क चौथा सबसे पुरान विश्वविद्यालय हवे। म्योर सेन्ट्रल कालेज के अस्थापना 1872 ई॰ में भइल रहे जेवना के 1887 ई॰ में इलाहाबाद विश्वविद्यालय बना दिहल गइल। बिच में इ राज्य सरकार की शासन में चलि गइल रहे लेकिन अब सन 2003 ई से फिर एकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय क दर्जा बहाल हो गइल बा। एकरी आलावा इहँवा तीन गो मानद विश्वविद्यालय आ एगो मुक्त विश्व विद्यालय बा। मोतीलाल नेहरू राष्ट्रिय प्रौद्योगिकी संस्थान () एगो मानद विश्वविद्यालय आ राष्ट्रीय महत्व के संस्थान बा। सैम हिग्स्बाटम कृषि, प्रौधोगिकी एवं बिज्ञान संस्थान (कृषि विश्विद्यालय, नैनी) पूरा दक्षिणी एशिया के सबसे पुरान आधुनिक विश्वविद्यालय मानल जाला।

राष्ट्रिय स्तर पर ख्याति प्राप्त शिक्षा संस्थान की सूची में अउरी गो कई नाँव बा – ट्रिपल आई टी IIIT-A, मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, हरीशचन्द्र शोध संस्थान, गोविन्द वल्लभ पन्त सामाजिक विज्ञान संस्थान, आई ई आर टी, यूइंग क्रिश्चियन कालेज इत्यादी।

साहित्य की क्षेत्र में इलाहाबाद क योगदान अदभुत रहल बा। इहँवा हिंदी उर्दू आ अंगरेजी के पत्र-पत्रिका के प्रकाशन आ किताबन की प्रकाशन क एगो बहुत पुराना इतिहास बा। हिंदी की साहित्यकारन में महादेवी वर्मा , सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, सुमित्रानंदन पन्त, हरिवंशराय बच्चन, धर्मवीर भारती, मार्कंडेय, अमरकांत, रवीन्द्र कालिया जइसन मूर्धन्य साहित्यकार लोगन क कर्मभूमि रहल बा। उर्दू शायरी के महाकवि फ़िराक़ गोरखपुरी के इहँवे रहि के आपन योगदान दिहलीं। अकबर इलाहाबादी, राज़ इलाहाबादी, तेग़ इलाहाबादी, नूह नारवी, आदिल रशीद, एजाज़ हुसैन, अकील रिज़वी, इब्ने-शफी इत्यादि लोग उर्दू के प्रमुख साहित्यकार इलाहाबाद से रहल। अंग्रेज़ी साहित्यकार रुड्यार्ड किपलिंग इहवाँ पायोनियर अखबार के सह संपादक की रूप में रहलें।




#Article 37: राहुल सांकृत्यायन (126 words)


राहुल सांकृत्यायन, जिनके महापंडित क उपाधि दिहल जाले, हिंदी के एगो प्रमुख साहित्यकार अउर प्रतिष्ठित बहुभाषाविद् रहने। उ हिंदी यात्रासहित्य क पितामह कहल जालें। बौद्ध धर्म पर उनकर शोध हिंदी साहित्य में युगान्तरकारी मानल जाला, जेकरे खातिन उ तिब्बत से श्रीलंका तक भ्रमण करले रहने। एकरे अलावा उ मध्य-एशिया तथा कॉकेशस भ्रमण पे यात्रा वृतांत लिखने जेके साहित्यिक दृष्टि से बहुते महत्वपूर्ण मानल जाला।

राहुल जी की तिब्बत यात्रा की वर्णन के महत्व आ ओकर जिनगी की हर पहलू पर बिस्तार से परभावित हो के कुछ लोग 1933-52 की समय के यात्रा साहित्य में राहुल युग ले कहि दिहल।

राहुल सांकृत्यायन के जनम आजमगढ़ जिला के पंदहा गाँव में भइल रहल जवन उनुके ननिअउरा रहल।

राहुल जी क सभसे महत्व वाला साहित्य हवे उनकर यात्रा साहित्य:




#Article 38: शिक्षा (185 words)


शिक्षा (अंगरेजी:एजुकेशन) अइसन क्रिया ह जेह में कौनों तरह के ज्ञान, कौशल, नैतिक मूल्य, बिस्वास, आ आदत सिखावे के ब्यवस्था कइल जाला। शिक्षा के माध्यम के रूप में इस्कूली पढ़ाई भर नइखे सामिल, बलुक खीसा-कहनी से ले के चर्चा-परिचर्चा आ बीडियो देखावल भी सामिल हो सके ला। शिक्षा अक्सरहा केहू पढ़ावे सिखावे वाला ब्यक्ति के द्वारा दिहल जाले, जेकरा के शिक्षक कहल जाला; हालाँकि, कुछ लोग बिना केहू शिक्षक के भी सीख सकत बा। शिक्षा औपचारिक आ अनौपचारिक रूप से हो सके ले। मतलब कि ब्यवस्थित तरीका से शिक्षा देवे के मकसद से भी ई काम कइल जा सके आ आ ब्यक्ति अपना अनुभव से भा देख-देख के भी अपने बिचार आ ज्ञान में बदलाव ले आ के शिक्षा हासिल क सके ला।

ब्यवस्थित शिक्षा के चार भाग में बाँटल जाला, नर्सरी/किंडरगार्डेन (इस्कूल से पहिले), प्राइमरी इस्कूल में, माध्यमिक इस्कूल में, कॉलेज या यूनिवर्सिटी में या अप्रेंटिस के रूप में।

शिक्षा के अधिकार, के अरथ हवे एक ठो ख़ास उमिर के लड़िकन के शिक्षा हासिल करे के कानूनी अधिकार। बहुत सारा देसन में कुछ उमिर तक के लड़िका-बच्चा सभ खातिर शिक्षा अनिवार्य कइल गइल बाटे।




#Article 39: जञनी (1349 words)


जञनी, जुआनी चाहे जोनी( (वैजाइना); संस्कृत: योनि) मय  जीव सभ के देह मे मांसपेशी से बनल नली के आकार के अंग होला आ ई मादा जननांग के हिस्सा होला। मनुष्य भी एगो मैमल, माने कि स्तनधारी जीव हवे आ मनुष्यन में ई अंग औरत के दुनों जाँघ के महे खुले वाला वल्वा से ले के शरीर के अंदर मौजूद कोख के मुहाना (सर्विक्स) ले के बीच के हिस्सा होला। देह के एह अंग के मुख्य काम सेक्स, जचगी आ महिनवारी के बहाव बाहर निकालल हवे।

जञनी के बनावट आ शरीर में एकर अस्थान अलग-अलग प्रजाति के जानवर सभ में अलग-अलग होला आ आकारो अंतर होखेला। आमतौर पर मादा मैमल सभ में वल्वा मे दुगो बाहरी छेद होला जेह में से एक ठो मैदान करे ला होखेला आ दुसरका सेक्स आ जचगी खातिर। ई नर मैमल सभ से अलग होला, नर मैमल में पेशाब करे आ प्रजनन दुनो काम खातिर एक्के गो छेद होखेला जेमे से पेशाब आ वीर्य (बीज) दुनों बाहर निकसेला। योनि-द्वार नजदीके के मूत्र-द्वार से बहुत बड़हन होला आ मानव जाति के दुनो छेद के लेबिया द्वारा सुरक्षा प्रदान करल रहेला। उभयचर जंतु जइसे की चिरई कुल,  अंडजस्तनी (अंडा देवे वाली जीव सभ) में एक्केगो छेद होखेला, मल-नली, जठरांत्र-नली, मूत्र-नली, प्रजनन-नली सभन खातिर एकहिगो द्वार होखेला।

संभोग घड़ी, जञनी के अंदरूनी सतह प चिकनाहट वाला पदार्थ भा रस सरवत्त्ते लागे ला जवना से एह में आसानी से घुसाव संभव हो सके, अइसन मनुष्य सभ मे आ अन्य मैमल सभ में भी होला। एह रस के नमी के चलते जञनी में चिकनाहट बढ़ जाला आ रगड़ में कमी आवेला जवना से संभोग आसान हो जाला। जञनी के अंदरूनी सतह के बनावट भी लहरदार होले जवना से शीशन प पर्याप्त रगड़ पैदा होले आ बीर्य के निकले तक के प्रक्रिया पूरा होला, जेकरे बाद गरभ धारण हो सकेला। जञनी मे संभोग बजी आनंद आ प्रेम के लगाव मे बढ़त के अलावा अउरी किसिम के परभाव भी हो सकेला, जइसे हेट्रोसेक्सुअल भा लेस्बियन सेक्स के कारण सेक्स संबंधी इन्फेक्शन आ बेमारी (एसआईटी) के एक बेकत से दोसर बेकत मे संचार हो सकेला। एह तरह के इन्फेक्शन आ बेमारी सभ से बचाव खाती बिबिध तरह के सेफ तरीका के पालन कइल जा सके ला। एकरे अलावा जञनी से संबंधित कई तरह के रोग बाड़ें जिनहन से मनुष्य के जञनी परभावित हो सके ले।

जञनी शब्द, सामाजिक रूप से पूरा मानव इतिहास में बहुत संबेदनशील रहल बा आ नकारात्मक दृष्टिकोण, भाषा में आ सांस्कृतिक सोच में एकरा के गंदा रूप में प्रस्तुतीकरण, आ तरह-तरह के टैबू (नकारात्मक मान्यता) सभ, औरत के कामुकता के चीन्हा, आध्यात्मिक रहस्यवाद आ जीवनशक्ति आ प्रजनन से जुड़ल बाटे। सामाजिक सोच में जञनी, गंदा आ अश्लील चीज से ले के पूजनीय चीज (चीन्हा भा प्रतीक के रूप में) ले बिबिध रूप में देखल गइल बा। 

आम भाषा में जञनी शब्द औरत के जननांग के बाहरी हिस्सा (अंगरेजी में वल्वा भा संस्कृत में भग) खाती भी इस्तमाल होला आ भीतरी नलीनुमा हिस्सा खाती भी। हालाँकि, मेडिकल शब्दावली आ तकनीकी रूप से खाली अंदरूनी नलीदार हिस्सा के जञनी (वैजाइना) कहल जाला। एह बिभेद के जानकारी सेक्स संबंधी ज्ञान आ कई तरह के बेमारी रोके में सहायक हो सकेला। प्राचीन भारतीय ग्रंथ सभ में जञनी के आकृती के आधार प कई प्रकार भी गिनावल गइल बा। कामसूत्र में एकर प्रकार आ बिभेद के बिस्तार से बर्णन बा; चरकसंहिता में कई किसिम के जञनी संबंधी रोग के बिबरन दिहल गइल बा।

मनुष्य सभ में बुर मांसपेसी से बनल एगो लचकदार नली होले जे बाहरी हिस्सा #वल्वा से ले के सर्विक्स तक ले जाले। एकर रंग गुलाबी होला आ, बाहरी माथ गुप्तांग त्रिभुज में खुले ला आ अंदरूनी माथ गर्भाशय से जुड़े ला, गर्भाशय आ जञनी के नली के जोड़ के सर्विक्स कहल जाला। सर्विक्स से जञनी के नली के जुड़ाव के अंगरेजी में फोर्निक्स कहल जाला, फोर्निक्स बाहरी नली नियर होला जेह में सर्विक्स अंदरूनी नली के रूप में समाइल होला। जञनी के बाहरी माथ, गुप्तांग त्रिभुज में खुले ला, गाँड़ आ जञनी के छेद के बीच के सतह के अंगरेजी में पेरीनम कहल जाला, एह पेरीनम के ठीक ऊपर जञनी के नली के छेद होला आ जञनी के छेद के ठीक ऊपर पेशाब करे वाला छेद, यानी मुतरी या पेशाब मार्ग होला जेकरा अंगरेजी में यूरेथ्रल ओपनिंग कहल जाला। बाहर से अंदर के ओर जञनी के नली ऊपर के ओर आ पाछे के ओर बढ़ल होले, ई नली पेशाब मार्ग (यूरेथ्रा) आ मलाशय (रेक्टम) के बीच से हो के गुजरे ले, एकरे अंतिम माथ पर जेकरा के फोर्निक्स कहल जाला लगभग 90 डिग्री के कोण पर एह में सर्विक्स आ के घुसल होला। 

हालाँकि, भोजपुरी में जञनी नली वाला हिस्सा के भी कहल जाला आ बाहरी हिस्सा के भी, तकनीकी रूप से आ मेडिकल साइंस में इनहन में अंतर कइल जाला। तकनीकी रूप से दुनों जाँघ के बीच के सगरी गुप्तांग सभ के गुप्तांग त्रिभुज के रूप में परिभाषित कइल जाला। औरतन में एह त्रिभुज के संरचना में सभसे ऊपर क्लाइटोरल हुड होला आ सभसे नीचे मलदुआर जेवना से मल निकास होला।

एह गुप्तांग त्रिभुज के ऊपरी हिस्सा के वल्वा कहल जाला, या आम भाषा में जेकरा के जञनी कहल जाला। एह हिस्सा में दू गो छेद होलें, ऊपरी पेशाब मार्ग, निचला जञनी के नली के बाहरें खुले वाला छेद; एह दुनों छेद के अगल-बगल सुरक्षा खाती लेबिया माइनर आ लेबिया मेजर रुपी संरचना होला, मने कि दोहरा ओठ नियर फुल्लल अंग। बाहरी मोट ओठ नियर संरचना के लेबिया मेजोरा कहल जाला आ एकरे अंदर छिपल बाकी सभ अंग वाला हिस्सा के आम भाषा में जञनी आ तकनीकी भाषा में वल्वा कहल जाला।

मय इतिहास में, जञनी के बारे में कई किसिम के धारणा आ सोच मिले ला, एकरा के कई तरह से बोध में लिहल गइल मिले ला, एह परसेप्शन सभ में कई चीज सामिल बा। उदाहरण खातिर ई कामुक इच्छा के केंद्र मानल जाय, जनम एही रास्ता से होखे के कारण ई जीवन के प्रतीक आ चीन्हा मानल जाय, शिशन से कमतर आँकल जाय, देखे चाहे महक में बेकार बूझल जाय या फिर अश्लीलता से जोड़ल जाय। एह बिचार आ धारणा सभ खाती बहुत हद तक नर आ मादा के बीचा के अंतर सभ, जेह में काम संबंधी अंतर खास रूप से सामिल बाने, जिम्मेदार मानल जालें आ इहो सामिल कइल जाला कि ई अंतर सभ के कवना तरीका से ब्याख्या कइल जा रहल बा। एगो इवोल्यूशनरी साइकोलाजिस्ट डेविड बस्स के कहल बा कि चूँकि शिशन के आकार क्लाइटोरिस के साइज से काफी बड़हन होला आ शिशन एक तरह से ढेर लउके वाला अंग हवे जबकि जञनी देख्लाई ना पड़े ला (तुलना में), मरदाना लोग शिशन से पेसाब करे ला, लइका छोटपने से आपन शिशन छुए के सीख लेलें जबकि लइकी सभ के आपन जञनी छुए के गलत बतावल सिखावल जाला, एह कारन उनहन के दिमाग मे ई आ जाला कि ई एकरा के छुए से कौनों नोकसान होखी। इहे कारन बा कि बहुत सारी औरत सभ अपना जञनी के बारे में बहुत जानकारी ना रखेलीं। वैज्ञानिक लोग इहो मान्यता रखे ला जे एही कारन लइका सभ लइकिन के तुलना मे हाली हस्त मैथुन चाहे मास्टरबेशन  के सीख जालें आ ई काम लइकी सभ के तुलना में बेसी करे लें।

जञनी अइसन संरचना हवे जे ओह जानवर सभ में पावल जाले जे सभ में मादा अंदरूनी तरीका से गरभ धारण करे ले, जबकि कुछ वर्टीब्रेट सभ में ई काम शरीर के बहरें होला जैसे कि मेंघुचा सभ में, आ इनहन में जञनी ना पावल जाला। जञनी के आकृति अलग-अलग जानवर सभ में अलग-अलग होला। खेड़ी वाला आ मार्सूपी जानवर सभ में गर्भाशय से ले के मादा के शरीर के बाहरें ले जञनी होला। मादा मार्सूपियल सभ में दू गो जञनी होले आ साइड बाई साइड दू गो गर्भाशय से जुड़े लीं बाकी ई शरीर के बहरें खुले लीं एकही ओठदार मुहाना के रूप में, तिसरही जञनी परमानेंट भा कुछ समय खाती हो सके ले जे ट्रांजीटरी कनाल कहाला आ बच्चा एह रास्ता से बहरें आवे ला (उदाहरण के रूप में कंगारू सभ में ई तीनों जञनी होलीं)। चित्तीदार हाइना (लकडबग्घा) में मादा बाहरी रूप से जञनी के छेद वाली ना होखे लीं बलुक पेसाब, मैथुन आ बच्चा जनमावे के काम, तीनों क्लाइटोरिस के जरिये होखे ला। The vagina of the female coyote contracts during copulation, forming a copulatory tie.




#Article 40: सिवान जिला (1181 words)


सिवान जिला भारत के राज्य बिहार के कइयन जिला में से एक ह। सिवान शहर सिवान जिला के शासकिय मुख्यालय ह। 1972 से सिवान जिला सारण प्रमंडल के हिस्सा बा। सिवान जिला विशेष रूप से स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद खातिर जानल जाला जे एही जिला की गाँव जीरादेई से ताल्लुक रखत रहनी ह। इ जिला अलीगंज सावन के नाम से भी जानल जायेला जौन अली बख्श के नाम के बाद पड़ल।

सिवान जिला राज्य में उत्तरी-पश्चिम क्षेत्र में स्थित बा, इ पहिले मूलतः सारण जिला के उप-मण्डल रहल, जौन प्राचीन काल में कोसल राजतंत्र के हिस्सा रहल। सिवान पूर्ण रूप से तब जिला बन के सामने आइल जब इ के 1976 में सारण जिला से काट के अलग करल गइल।

सिवान नाम शिव मान से पड़ल जे अहिजा के राजा रहन, जिनके शासन अहिजा रहल बाबर के अईला से पहिले। महाराजगंज, जौन इ जिला के प्रखण्ड ह शायद ओहिजा के महाराजा के चलते पड़ल। हाल में भइल एगो खुदाई में अहिजा के एगो गाँव भेरबनिया में एगो पेड़ के निचे मिलल भगवान विष्णु के मूर्ति से इ साबित होत बा कि अहिजा भगवान विष्णु के माने वाला लोग बहुत अधिक संख्या में रहलें। गोरखा के राजा आपन राज्य के विस्तार सिवान जिला तक कइले रहलन कुछ साल तक, 1790 ई0 में अंग्रेजन के इ क्षेत्र में अईला से पहिले। इ नेपाल के सीमा के करीब होखला के चलते भी इ सिमान चाहे सिवान कहल जात रहल। बाद में इ क्षेत्र पर यादव आ राजपूत के अधिपत्य रहल। 

सिवान 8 वीं शताब्दी में बनारस राज के हिस्सा रहल। मुस्लिम अहिजा 13 वीं शताब्दी में अईले। सिकंदर लोदी 15 वीं शताब्दी में आपन अधिन कइले। बाबर जब यात्रा से लौटत रहलें तब सिसवां के भिरी घाघरा नदी पार कइले। 17 वीं शताब्दी के अंत में डच अहिजा अंग्रेज के पीछा करत करत आइल रहलें जा। 1765 के बक्सर के लड़ाई के बाद इ क्षेत्र बंगाल के एगो हिस्सा बन के रह गइल। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में सिवान एगो अहम भूमिका निभइले रहे। इ दिग्गज आ बरियार भोज-पूरीयन खातिर भी प्रसिद्ध बा, जे हमेशा आपन मार्शल भावना आ शारीरक सहन शक्ति खातिर उल्लेखिल कइल जात रहले जा आ जहाँ से सेना आ पुलिस कर्मी लोग बड़ी मात्रा में ट्रेनिंग लेके भर्ती होत रहलें जा। जे में से अच्छा संख्या में लोग बागी भइले आ बाबु कुंवर सिंह के सेवा में समर्पित हो गइले। श्री ब्रज किशोर प्रसाद जे सिवान के रहलन 1920 में  गैर सहकारी आन्दोलन के प्रतिक्रिया में बिहार में पर्दा विरोधी संग्राम चालू कइले रहलन।

मैरवा ब्लॉक के एक गावँ, जौन मैरवा धाम से 2 किमी दक्षिण में स्थित बा। इहाँ सिवान के प्रथम साईं मंदिर बा जौन भगवान शिव आ माता दुर्गा के सटले बा। अहिजा हर साल अगस्त में वार्षिकोत्सव मनावल जायेला।

दरौली ब्लॉक में एगो गाँव बा, जहाँ एगो किला के अवशेष बचल बा, कहल जयेला की इ का संबंध महाभारत के प्रसिद्ध पात्र आचार्य द्रोणाचार्य से बा जे कौरव आ पांडव दुनो के गुरु रहनी। दोन के स्तूप तनिक कम प्रसिद्ध बा लेकिन बुद्ध धर्मावलम्बियन खातिर महत्वपूर्ण तीर्थ बा। बुद्ध धर्मावलम्बी ह्यून त्सांग एक पुस्तक में उल्लेख करते हुए लिखले बानी की जब उहाँ के भारत यात्रा पर आइल रहनी त दोन में भी पधारले रहनी।  वर्तमान में दोन में एगो छोट हरियाली युक्त पहाड़ बा, जेकरा ऊपर एगो हिन्दू मंदिर बा, जहाँ देवी तारा के एगो सुन्दर मूर्ति स्थापित बा, जिनके हिन्दू देवी के रूप में पूजा कइल जयेला। इ मूर्ति के 9 वीं शताब्दी में ढालल गइल रहल।

जौन अब इ ब्लॉक के मुख्यालय ह, बस्नौली गंगर के नाम से भी जानल जयेला। इ जिला के सबसे बड़ बाजार के रूप में बा। इहे उ जगह ह जहाँ से स्वतंत्रता सेनानी श्री फुलेना प्रसाद भारतीय स्वतंत्रता खातिर लड़ले रहनी, एही भूमि पर उहाँ के आपन रणनीति तैयार कर के अंग्रेजन के साथ लड़ल रहनी।

सिसवां ब्लॉक में एगो गाँव बा जौन महेन्द्रनाथ या मेंहदार नाम से जानल जयेला। अहिजा भगवान शिव आ विश्वकर्मा जी के मंदिर स्थित बा जहाँ बड़ी संख्या में भक्तजन लोग शिवरात्रि आ विश्वकर्मा दिवस के दिन दर्शन खातिर जायेला। इ आपन मंदिर खातिर प्रसिद्ध बा जहाँ 52 बीघा में एगो पोखर बा। कहल जायेला की नेपाल के राजा महेंद्र के कोढ़ फूटल रहे आ उ आपन एगो यात्रा के दौरान अहिजा से गुजरत रहलन। यात्रा के दौरान उ अहिजा एगो छोट गड्ढा में थोडा सा कीचड़युक्त पानी छुवले आ उनकर कोढ़ खत्म हो गइल जे से खुश होके उ अहिजा शिव के मंदिर बनवइले आ उ छोट गड्ढा के बहुत बड़ पोखर में परिवर्तन करवइले। एही से इ जगह के महेन्द्रनाथ कहाय लागल। गाँव के लोग इ के मेहदार कहे लागल।

महाराजगंज ब्लॉक में एगो गाँव बा, जहाँ एगो खुब बड़हन पेड़ बा, ओ पेड़ के नीचे भैया-बहिनी मंदिर स्थित बा। कहल जायेला की इ भाई आ बहिन 14 वीं शताब्दी में मुग़ल सिपाही से लड़ गइल रहे लोग आ लड़ाई करत करत दुनो भाई बहिन के अहिजा मृत्यु हो गइल रहल। 

गुठनी ब्लॉक में एगो जगह बा, ओहिजा भगवान शिव (हंसनाथ बाबा) के एगो प्रसिद्ध मंदिर बा, सिवान मुख्यालय से 40 किमी दुरी पर बा इ मंदिर जौन उत्तर प्रदेश के देवरिया जिला के सीमा पर पड़ेला।

सिवान जिला के क्षेत्रफल 2219 km2 बा, तुलनात्मक रूप में देखल जाव त  रूस के विलजेक लैंड के बराबर बा।

सिवान जिला उत्तरी गंगा के मैदान में स्थित एक समतल भू-भाग ह। जिला के विस्तार 25053' से 260 23' उत्तरी अक्षांस तथा 840 1' से 840 47' पूर्वी देशांतर के बीच बा। नदियन द्वारा जमा करल गइल माटी की गहराई 5000 फीट तक बा। मैदानी भाग का ढाल उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर बा। निचला मैदान में जलजमाव के कई गो क्षेत्र बा जौन चौर कहल जायेला। अहिजा से कई गो छोट नदी या 'सोता' भी निकलेला। मुख्य नदी घाघरा बा जेके किनारे दरारा निर्मित बा। इ खास भूगोलीय बनावट में बालू के मोट परत पर मृत्रिका आ सिल्ट की पतली परत पावल जायेला। सिवान की माटी खादर (नयी जलोढ) एवं बांगर (पुरानी जलोढ) के बीच की ह। खादर माटी के अहिजा दोमट तथा बांगर के बलसुंदरी कहल जायेला। बलसुंदरी माटी में कंकर की मात्रा पावल जायेला। कई जगहन पर गंधकयुक्त माटी मिलेला जहाँ से कभी साल्टपीटर निकालल जात रहल। अंगरेजी शासन में अहिजा इ के उद्योग होखल करत रहल लेकिन अब इ गायब हो चुकल बा। 

सिवान में उत्तर प्रदेश आ पश्चिम बंगाल के बीच की जलवायु पावल जायेला। मार्च से मई के बीच अहिजा चलेवालि पछुआ पवनन के चलते मौसम शुष्क रहेला लेकिन कई बार शाम में चलेवाली पुरवाई हवा आर्द्रता ले आवेला जे से उत्तर प्रदेश से चले वाली धूलभरल आँधी के विराम लग जायेला। गर्मियन में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जायेला आ लू के चलना इ दिनन साधारण बात बा। जाड़ के मौसम सुहावना होखेला किंतु कई बार शीत लहर का प्रकोप भी रहेला। जुलाई-अगस्त में होखे वाला मॉनसूनी वर्षा के अलावे पश्चिमी अवदाब से जाड़ा में भी बारिस होखल सामान्य बात बा। औसत वार्षिक वर्षा 120 सेंटीमीटर होखेला।

सिवान जिला 2 अनुमंडल अउर 19 प्रखंड में बँटल बा। एगो प्रखंड में बहुतेरे गाँव या एगो नगरपालिका हो सकत बा। 19 ओ प्रखंड में मिला के 1528 गांव आ 3 गो नगरपालिका बाड़ी सन।




#Article 41: जानकारी (150 words)


जानकारी भा सूचना (अंगरेजी: इनफार्मेशन) कौनों चीज या घटना के बारे में कौनों तथ्य हवे जवन केहू द्वारा बतावल जाय, या कौनों अध्ययन, परीक्षण भा  से प्राप्त कइल जाय। दुसरे शब्द में, तथ्य के रूप में जवना के जानल जाय, अइसन ज्ञान के जानकारी कहल जाला। जानकारी हमेशा कौनों प्रश्न के सटीक उत्तर के रूप में होला, आ तथ्यात्मक होला।

एही कारण, जानकारी के संबंध आँकड़ा आ ज्ञान दुनों से बा; आँकड़ा कौनों चीज के लच्छन सभ के बारे में एकट्ठा कइल जानकारी भा सूचना सभ के भंडार हवे; ज्ञान, वास्तविकता के समझ हवे जेह में जानकारी मददगार होले।

सूचना शब्द के इस्तमाल अंगरेजी के इनफार्मेशन आ नोटिस दुनों खातिर होला। एही से अंगरेजी शब्द इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के अनुवाद सूचना टेक्नोलॉजी भी कइल जाला। इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी आधुनिक समय के बिधा बा जे कंप्यूटर द्वारा आँकड़ा, यानि कि जानकारी के ढेर, के ब्यवस्थित करे आ बिस्लेषण करे के कामे आवे ले।




#Article 42: होली (895 words)


होली बसंत ऋतु में मनावल जाये वाला एगो महत्वपूर्ण भारतीय तिहुआर ह। इ पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फागुन मास के पुर्नवासी के मनावल जाला ।

फागुन में मनावे जाए वाला होली क त्योहार होलिका की दहन की साथ एक रात पहिलहीं से शुरू हो जाला ओइजा लोग एकट्ठा होला, होलिका दहन की आगे कईगो आपन रीति-रिवाज निभावेला आ प्रार्थना करेला। ओकरी अगिला सबेरे रंगवाली होली मनावल जाला, इ एगो रंग महोत्सव की तरह होला जवने में हर केहू शामिल हो सकेला। ए महोत्सव में शामिल होखे वाला लोग एकदूसरे प रंग डाल के, गुलाल लगाके होली मनावेला। लोगन क दल ड्रम बजावेला, जगहे-जगहे नाचेला गावेला। लोग रंग खेले एकदूसरे की घरे जाला, खूब हँसी मजाक, गप्पा लागेला, ओकरी अलावा खईले पियले क कार्यक्रम होला, कुछ लोग भाँग वगैरह  क सेवन करेला। इ सब कुल ख़तम होखले की बाद सांझी क, अदमी अच्छा से कपड़ा पहिन के अपनी दोस्त रिश्तेदारन से मिले जाला।।

इ त्योहार अच्छाई क बुराई पर जीत क संदेशा देला ओकरी अलावा, वसंत ऋतु क आगमन, शीत ऋतु क अंत क संकेत की साथ कई अदमी खातिर इ त्योहार सबसे मेल मिलाप, हँसले बोलले क बहाना, कड़वाहट भुला के माफ़ी दिहले क आ आपन टूटल रिश्ता जोड़ले क मौका होला।

होली मनवले की पीछे एगो किवंदती बा। “होली” शब्द “होलिका” में से आइल बा, होलिका पंजाब क्षेत्र की मुलतान में असुरन की राजा हिरण्यकश्यप क बोहिन रहे। किवंदती की अनुसार राजा हिरण्यकश्यप
  के एगो वरदान मिलल रहे जवने की वजह से उ लगभग अविनाशी हो गइल रहे और एसे उ आगे चलके अहंकारी हो गइल और खुदके भगवान माने लागल, और फेर सबके आदेश जारी क दिहलस की सभे खाली ओहि क पूजा करे।

लेकिन ओकर आपन लईका प्रह्लाद ओकरी ए बात से सहमत नाहीं रह न। उ पहिलहीं से भगवान विष्णु के मानें और हिरण्यकश्यप की आदेश की बादो भगवान विष्णुए क पूजा कइल जारी रख न। ए वजह से हिरण्यकश्यप प्रह्लाद के कई बेर क्रूर सजा दिहलस लेकिन एको बेर प्रह्लाद के न कौनों नुकसान पहुँचल और न ही उनकी सोच पर कौनों फर्क पड़ल। आखिर में होलिका प्रह्लाद के बहला - फुसला के चिता में साथ ले के बैठल। होलिका एगो चोगा पहिनले रहे जवन ओकर आग से रक्षा करे, लेकिन चिता में जैसे आग लागल उ चोगा होलिका की देहीं से उड़  के प्रह्लाद के ढक लिहलस जेसे प्रह्लाद त आगी से बच गईन लेकिन होलिका जर गइल। एसे बौखलाइल हिरण्यकश्यप अपनी गदा से एगो खंभा पर प्रहार कइलस, खंभा फूटल और ओमें से भगवान विष्णु नरसिंह अवतार लेके प्रकट भई न और हिरण्यकश्यप क खात्मा कई न।

ए तरह से इ होलिकादहन बुराई पर अच्छाई क संकेत देला। होलिकादहन की अगिला दिनें जब राखी ठंडा हो जाला तब कई अदमी इ राखी ओही समय से परम्परागत तौर से अपनी माथा प लगावेला। लेकिन इ परम्परा में समय बितले की साथ राखी की साथ रंग जुड़ गइल।

रंग क त्योहार कहल जाये वाला इ पर्व पारंपरिक रूप से दू दिन मनावल जाला। इ प्रमुखता से भारत अउरी नेपाल में मनावल जाला ! इ त्यौहार कई अउरी देश जौना में अल्पसंख्यक हिन्दू लोग रहेलन , उहवो धूम धाम क साथ मनावल जाला! पहिले दिन होलिका जलावल जाला, जवना के होलिका दहन भी कहल जाला। दुसरा दिन , जवना के धुरड्डी, धुलेंडी, धुरखेल या धूलिवंदन कहल जाला, लोग एक दुसरा पे रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि फेकेलन, ढोल बजा के होली के गीत गावल जाला, अउरी घरे-घरे जाके लोगन के रंग लगावल जाला।

अइसन मानल जाला कि होली क दिन लोग पुरान कटुता के भुलाके गले मिलेलन अउरी फिर से सँगी बन जालन। एक दूसरा के रंगे अउरी गावै बजावै क दौर दुपहरिया तक चलेला। एकरा बाद नहा के सुस्तइला क बाद नया कपड़ा पहिन के सांझ के लोग एगो दुसरा क घरे मीले जालन, गले मीलेलन अउरी मिठाइ खालन ।

राग-रंग क इ लोकप्रिय पर्व वसंत क सन्देश वाहको भी ह। राग मने संगीत अउरी रंग त एकर प्रमुख अंग हइये ह, लेकिन एकरा  के उत्कर्ष तक पहुँचावे वाली प्रकृति भी इ समय रंग बिरंगा यौवन क संगे आपन चरम अवस्था पे होले। फागुन महीना में मनावल जाये क कारन एके फाल्गुनी भी कहल जाला ।

होली क त्योहार बसंत पंचमी से ही शुरू हो जाला। ओही दिने पाहिले बार गुलाल उड़ावल जाला। एही दिन से फाग और धमार क गाना शुरू हो जाला। खेत में  सरसो खिल उठेले। बाग- बगइचा में फूल क आकर्षक छटा छा जाला । पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य सब उल्लास से परिपूर्ण हो जाते हैं। खेतों में गेहूँ की बालियाँ इठलाने लगती हैं। किसानों का ह्रदय ख़ुशी से नाच उठता है। बच्चे-बूढ़े सभी व्यक्ति सब कुछ संकोच और रूढ़ियाँ भूलकर ढोलक-झाँझ-मंजीरों की धुन के साथ नृत्य-संगीत व रंगों में डूब जाते हैं। चारों तरफ़ रंगों की फुहार फूट पड़ती है। होली के दिन आम्र मंजरी तथा चंदन को मिलाकर खाने का बड़ा माहात्म्य ह।

होली हिन्दू लोगन की आलावा कई और भारतीय और दक्षिण एशिया की लोगन की खातिर एगो महत्वपूर्ण त्योहार ह। नेपाल के नेवार इलाका के बौद्ध लोग भी ई तिहुआर मनावे ला। इ के खतम भइला पर फागुन के पूर्णिमा की दिनें मनावल जाला, जवन की आमतौर प अंगरेजी कैलेण्डर के हिसाब से मार्च महिना में और कई बेर फरवरी की आखिर में पड़ेला।

इ त्योहार मनवले क कई गो वजह बा; खासतौर से, इ वसंत ऋतु की शुरुआत में मनावल जाला। 17वीं सदी की साहित्य में होली के खेती क और उपजाऊ जमीन की महोत्सव की तौर प चिन्हित कइल गइल बा।




#Article 43: ज्ञानकोश (181 words)


ज्ञानकोश भा एन्साइक्लोपीडिया संदर्भ देवे/खोजे में इस्तमाल होखे वाला रचना हवे जेह में तथ्यात्मक जानकारी के एकट्ठा क के लेख के रूप में प्रस्तुत कइल गइल होला। ई दुनिया के हर तरह के ज्ञान से संबंधित बिसय सभ पर भी हो सके ला आ कौनों खास अध्ययन बिसय के ऊपर भी, जइसे भूगोल के ज्ञानकोश में खाली भूगोल से संबंधित बिसय पर तथ्यात्मक लेख मौजूद होखीहें। ई किताब भा कई खंड में किताबन के संकलन के रूप में हो सके ला - जइसे ब्रिटैनिका एन्साइक्लोपीडिया के छपल संस्करण, सीडी में आवे वाला हो सकेला - जइसे एन्कार्टा, या फिर इंटरनेट आधारित ऑनलाइन संस्करण हो सकेला - जइसे कि विकिपीडिया।

संछेप में, ज्ञानकोश मानवीय ज्ञान से सगरी शाखा पर या कौनों एक ठो शाखा से जानकारी के सारगर्भित संकलन से बनल एक ठो संदर्भ रचना होला।
आमतौर पर एह में लेख (या एंट्री) सभ अच्छर क्रम से सजावल गइल होलें।

हर टॉपिक डिक्शनरी के परिभाषा से पर्याप्त बड़ होला, काहें कि डिक्शनरी (शब्दकोश) में शब्दन के भाषाई अरथ आ इस्तमाल समझावल गइल होला, जबकि ज्ञानकोश के एंट्री तथ्यात्मक जानकारी देवे खातिर होला।




#Article 44: राजेंद्र प्रसाद (100 words)


राजेन्द्र प्रसाद (; 3 दिसंबर, 1884 - 28 फरवरी, 1963) भारत के प्रथम राष्ट्रपति रहलन। राजेन्द्र प्रसाद भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से रहलन अउर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में एक प्रमुख भूमिका निभइलन। भारतीय संविधान के निर्माणॉ में उ अपना प्रमुख योगदान दिहलन जेकरे कारण 26 जनवरी 1950 के भारत के एगो गणतंत्र के रुप में स्थापना भइल। राष्ट्रपति होला के अलावा रउआ स्वाधीन भारत में केन्द्रीय मंत्री के रुप में भी थोर समय खातिर काम कइलें। पूरा देश में खूब लोकप्रिय होईला के कारण रउआ के राजेन्द्र बाबू भा देशरत्न कहके पुकारल जाला।  




#Article 45: रामायण (118 words)


रामायण कवि वाल्मीकि द्वारा लिखल गईल संस्कृत के एगो अनुपम महाकाव्य ह। एकर 24,000 श्लोक हिन्दू स्मृति के उ अंग ह जेकरे माध्यम से रघुवंश के राजा राम के गाथा कहल गइल बा। एके आदिकाव्य भी कहल जाला।

कुछ भारतीय विद्वान कहेले कि इ 600 ईपू से पहले लिखल गईल रहल। ओकरा पीछे कारन इ बा कि महाभारत जे एकरे बाद आइल, बौद्ध धर्म के बारे में मौन ह जबकि एमें जैन, शैव, पाशुपत आदि अन्य परम्पराओं के वर्णन बा। अतः रामायण गौतम बुद्ध के काल के पहिले के होखे के चाहि। भाषा शैली से भी इ पाणिनि के समय से पहिले का होखे के चाहि। रामायण के सात अध्याय हैं जेके काण्ड के नाम से जानल जाला।




#Article 46: लखनऊ (263 words)


लखनऊ  (उर्दू: لکھنؤ ) भारत के सर्वाधिक आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश के राजधानी बा। लखनऊ शहर अपनी खास नज़ाकत अउर तहजीब वाली बहुसांस्कृतिक खूबी, दशहरी आम के आ चिकन के काम के खातिर जानल जाला। ए शहर में, लखनऊ जिला और लखनऊ मंडल क प्रशासनिक मुख्यालय भी बा। लखनऊ शहर आपन खास नज़ाकत और तहजीब वाली बहुसांस्कृतिक खूबी, दशहरी आम के बाग़ तथा चिकन की कढ़ाई की काम खातिर जानल जाला। 2011 मे एकर जनसंख्या 28,15,601, तथा साक्षरता दर 84.72% रहे। भारत सरकार की 2001 की जनगणना, सामाजिक आर्थिक सूचकांक और बुनियादी सुविधा सूचकांक संबंधी आंकड़न की अनुसार, लखनऊ जिला अल्पसंख्यकन की घनी आबादी वाला जिला ह। कानपुर की बाद इ शहर उत्तर-प्रदेश का सबसे बड़ शहरी क्षेत्र ह। शहर की बीच से गोमती नदी बहेले, जवन की लखनऊ की संस्कृति क हिस्सा ह।

लखनऊ ओ क्ष्रेत्र मे स्थित बा जेके ऐतिहासिक रूप से अवध क्षेत्र की नांव से जानल जाला। लखनऊ हमेशा से एगो बहुसांस्कृतिक शहर रहल बा। एइजा की शिया नवाबन द्वारा शिष्टाचार, खूबसूरत उद्यान, कविता, संगीत और बढ़िया व्यंजन के हमेशा संरक्षण दिहल गईल। लखनऊ के  नवाबन की शहर की रूप में भी जानल जाला। एके पूर्व क स्वर्ण नगर (गोल्डन सिटी) और शिराज-ए-हिंद की रूप में भी जानल जाला। आज क लखनऊ एगो जीवंत शहर ह जेमे आर्थिक विकास लउकेला और इ भारत की तेजी से बढे वाला गैर-महानगरन की शीर्ष पंद्रह में से एगो ह। इ हिंदी और उर्दू साहित्य की केंद्रन में से एगो ह। एइजा अधिकांश लोग हिन्दी बोले ला लो। एइजा की हिन्दी में लखनवी अंदाज़ बा, जवन की विश्वप्रसिद्ध बा। एकरी अलावा एइजा उर्दू और अंग्रेज़ी भी बोलल जाला।

ऐतिहासिक रूप से, अवध क राजधानी दिल्ली सल्तनत द्वारा नियंत्रित होखे, जवन की ओ समय मुगल शासन की अधीन रहे। एके बाद में अवध की नवाबन के स्थानांतरित क दिहल गईल।




#Article 47: लालू प्रसाद यादव (311 words)


लालु प्रसाद यादव(जनम 11 जून 1948) एगो भारतीय राजनीतिक नेता बाड़ें। यादव, भारत के बिहार राज्य से हवें आ राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष बाड़ें आ बिहार राज्य के मुख्यमंत्री आ पंद्रहवीं लोकसभा में सांसद आ भारत के रेलमंत्री रह चुकल बाने। 

लालू प्रसाद यादव पटना विश्वविद्यालय के छात्र राजनीति से आपन राजनीतिक कैरियर के सुरुआत कइलें आ 1977 में जनता पार्टी के कैंडिडेट के रूप में 29 बरिस के उमिर में, तबतक के सभसे कम उमिर वाला लोक सभा सांसद चुनल गइलें। साल 1990 में यादव बिहार के मुख्यमंत्री बनलें आ 1997 में चारा घोटाला में भ्रष्टाचार के आरोप में उनके इस्थीपा देवे के परल। 1997 से 2005 ले इनके मेहरारू राबड़ी देवी बिहार के मुख्यमंत्री रहली, लालू के आलोचक लोग एकरा के लालू के अप्रत्यक्ष सरकार के रूप में देखे ला। बिहार में लालू के शासन के कानून बिहीन राज आ जंगल राज के नाँव दिहल जाला। लमहर समय के बाद साल 2015 में लालू यादव के दल नीतीश कुमार के साथे बिहार बिधान सभा में पावर में आइल बाकी साल 2017 के जुलाई में लालू यादव, राबड़ी देवी आ तत्काल में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (लालू यादव के बेटा) के खिलाफ एन्फोर्समेंट डाइरेक्टरेट आ सीबीआई के द्वारा कई गो मामिला दर्ज करे के बाद नीतीश कुमार इनके पार्टी के पाछे हटा के, भाजपा के साथ मिल के सरकार बना लिहलें।

भीड़ खींचे वाला, चल्हाँक आ मनोरंजक नेता के रूप में पहिचान वाला यादव पर प्रदेश में जाति आधारित राजनीति के बढ़ावा देवे वाला भी मानल जाला, आ इनके खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामिला दर्ज बाने 3 अक्टूबर 2013 के इनके पाँच साल के सजा आ ₹25 लाख के जुर्माना सीबीआई अदालत द्वारा चारा घोटाला मामिला में कइल गइल, आ दुबारा एही मामिला में 23 दिसंबर 2017 के साढ़े तीन साल के सजा सुनावल गइल, आ चारा घोटाला के तीन गो मामिला अभिन भी इनका पर अदालत में लंबित बाने।




#Article 48: बराक ओबामा (156 words)


बराक ओबामा इहाँ अमेरिका के प्रथम अश्वेत राष्ट्रपति हईं। उन्होंने 20 जनवरी, 2009 को राष्ट्रपति पद की शपथ ली। ओबामा इलिनॉय प्रांत से कनिष्ठ सेनेटर तथा 2008 में अमरीका के राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रैटिक पार्टी के उम्मीदवार हईं।

ओबामा हार्वर्ड लॉ स्कूल से 1991 में स्नातक बनें, जहाँ वे हार्वर्ड लॉ रिव्यू के पहले अफ्रीकी अमरीकी अध्यक्ष भी रहे। 1997 से 2004 इलिनॉय सेनेट में तीन सेवाकाल पूर्ण करने के पूर्व ओबामा ने सामुदायिक आयोजक के रूप में कार्य किया ह और नागरिक अधिकार अधिवक्ता के रूप में प्रेक्टिस की ह। 1992 से 2004 तक उन्होंने शिकागो विधि विश्वविद्यालय में संवैधानिक कानून का अध्यापन भी किया। सन् 2000 में अमेरिकी हाउस आफ रिप्रेसेंटेटिव में सीट हासिल करने में असफल होने के बाद जनवरी 2003 में उन्होंने अमरीकी सेनेट का रुख किया और मार्च 2004 में प्राथमिक विजय हासिल की। नवंबर 2003 में सेनेट के लिये चुने गये। ई हिलेरी क्लिंटन के हरा के राष्ट्रपति बनलें।




#Article 49: गोपालगंज जिला (1277 words)


गोपालगंज जिला भारत के बिहार राज्य के 39 गो जिला सभ में से एगो जिला बा। ई जिला सारण प्रमंडल के अन्तर्गत आवेला, जेकर जिला मुख्यालय गोपालगंज शहर में स्थित बा। एह जिला में पर्यटन दर्शनीय स्थल 
के रूप् में थावे दुर्गा मंदिर, घोडा घाट दुर्गा मंदिर,सिंहासनी दुर्गा मंदिर,बंगलामुखी दुर्गा मंदिर,शिव मंदिर,रामबृक्ष धाम,हनुमान मंदिर मशहुर बा । एह जिला में मुख्यरूप से भोजपुरी आ गौण रूप से हिंदी बोलल जाला।

समृद्ध इतिहासी पृष्ठभूमि औरी शानदार संस्कृति वाला एगो खूबसुरत जिला के रूप में विख्यात बा- गोपालगंज। आपन बहादुरी औरी लोगन के आजादी से प्यार करे वाला मल्ल वंश के नांव भी एह गोपालगंज से जुड़ल बा। प्रागैतिहासिक काल में, गोपालगंज नेपाल देश के हिस्सा रहे। खाली इहे ना नेपाल राजतंत्र  सरयू नदी के किनारे तक ले रहे, जवन आज सीवान जिला कहलाला। सीवान के मतलबे होला- सीमा। 1875 ई. तक गोपालगंज एगो छोट इलाका रहे, जवन ओही साल में पुरनका सारण (एकरा अन्तर्गत वर्तमान में गोपालगंज, सीवान औरी छपरा जिला आवेला) जिला के एगो अनु्मंडल बनल। 02 अक्टुबर, 1973 के सारण से अलग होखे एगो स्वतंत्र जिला बनल।
 
पुरनका सारण जिला के इतिहास ही गोपालगंज के इतिहास भी ह। संयुक्त सारण जिला आर्य सभ्यता के आवेवाला मुख्य रास्ता में से एगो ह।

वैदिक साहित्य में संरक्षित एगो परंपरा के अनुसार, विदेह लोग सरस्वती नदी के पूरब की ओर चलल शुरु कइले औरी चलत-चलत गंडक नदी के किनारे आ गईल लोग। ओहिजा पहुंचला पर आग के देवता अग्नि ओह लोगन से कहले कि एह जलधारा के पूरब में रउआ सभे बस जाईं औरी एह जगह के स्वर्गमय बना दीं। अग्नि देवता के बात मान के विदेह लोग नदी के दूसरा तरफ यानि कि पूरबी किनारे पर जाके एगो शक्तिशाली राज्य के स्थापना कइल लोग#160;; एहु बात के संभावना भी व्यक्त कइल जाला कि अधिकांश लोग तो गंडक पार कर लिहल लोग लेकिन ओहिमें से कुछ लोग पुरनका सारण (जवन रास्ता में ही पड़त रहे) में ही रुक गईले।

गोपालगंज जिला भूगोलीय रूप से 26° 12 से 26° 39 उत्तरी अक्षांश औरी 83° 54 से 84° 55 पूरबी देशांतर में स्थित बा। एह जिला के कुल क्षेत्रफल 2033 वर्गकिलोमीटर औरी कुल जनसंख्या इक्कीस लाख उनचास हजार तीन सौ तैंतालिस [2,149,343 (2001 के जनगणना के अनुसार)] 

उत्तर: पूरबी (मोतिहारी) और पश्चिमी चंपारण (बेतिया) जिला 
दक्खिन: सिवान औरी छपरा जिला 
पूरब: पूरबी चंपारण और मुजफ्फरपुर जिला 
पश्चिम: उत्तर प्रदेश 
 

गोपालगंज, मीरगंज, बरौली, कटेया, विजयीपुर, कुचायकोट, विनोद खरेंया, सासामुसा, थावे, माँझागढ़, महम्मदपुर, दिघवा-दुबौली, ऊँचकागाँव, फुलवरिया, हथुआ, भोरे, बड़कागाँव।

गोपालगंज के जलवायु विविधतापूर्ण हवे। गर्मी के मौसम में ई जिला बहुते गर्म आ शुष्क हो जाला। खूब जोर से लू चले लागेला औरी तापमान कबो-कबो 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाला। मानसून के समय में लगभग 500 मिमी तक बारिश होवेला, जवना के चलते जाड़ा के मौसम में तापमान ठीक-ठाक रहेला (हालांकि, ग्लोबल वार्मिंग के चलते गर्मी और जाड़ा वर्तमान समय में जादा ही पड़ रहल बा)। एह जिला में औसत वर्षा लगभग 290 मिमी होला, औरी तापमान 10 से 45 डिग्री सेल्सियस के  बीच रहेला।

जनसंख्या घनत्व: 1057
पुरूष: 1,072,151 (49.89%) 
औरत: 1,077,192 (50.12)
शहरी जनसंख्या: 130,536 (6.07%)
गँवई जनसंख्या: 2,018,807 (93.93%) 
अनुसूचित जाति के प्रतिशत: 12.43%
अनुसूचित जनजाति के प्रतिशत: 0.29% 
लिंग अनुपात: 1005

गोपालगंज में मुख्य रूप से ऊँख (गन्ना), दलहन, धान, गेहूँ और विभिन्न प्रकार के तरकारी (सब्जी) के उत्पादन होला। बागवानी भी होखेला किंतु बहुत ही सीमित रूप से। इहाँ मुख्य रूप से ऊँख के उत्पादन होखला के कारण कई गो चीनी मिल बाड़ी सन, जेहिमे गोपालगंज शहरिया में स्थित विष्णु सुगर मिल सबसे प्रमुख बा। एकरा अलावे कई गो कोल्ड स्टोरेज भी बाड़ी सन।

कुछ साल पहिले तक त गुणात्मक शिक्षा के क्षेत्र में गोपालगंज के कवनो ज्यादा नाम ना रहे। लोग आपना बचवा सभे के आगे पढ़ावे के खातिर दिल्ली, इलाहाबाद, पटना इत्यादि जगहन पर भेज देत रहे लोग। हालांकि अभियो स्थिति में कवनो ज्यादा सुधार नईखे, लेकिन पहिले से स्थिति बेहतर बा। वर्तमान में एहिजा स्थित विद्यालय/महाविद्यालय में से अधिकांश सरकार द्वारा चलावल जाला। कुछ स्कूल निजी ट्रस्ट और व्यक्ति द्वारा भी संचालित बाटे। लगभग सारा स्कूल या त केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) या बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से जुड़ल बाड़ल सन। कहे खातिर त अधिकांश निजी विद्यालय अंगरेजी माध्यम से शिक्षा देवे के दावा करेलन सन, लेकिन वास्तविकता एहिसे कोसो दूर बा। सरकारी विद्यालय में से अधिकांश के माध्यम हिंदी बा। दसवीं तक के पढ़ाई के बाद अधिकांश लईका-लईकी इंटरमीडिएट के पढ़ाई करे खातिर कला, विज्ञान में से ही कवनो एगो मुख्य रूप से चुनेला। वाणिज्य के पढ़ाई के एहिजा बहुत सही माहौल औरी सुविधा उपलब्ध नईखे। गोपालगंज मुख्य रूप से माध्यमिक स्तर तक के शिक्षा खातिर सही बा। एह स्तर तक के स्कूलन में भी.एम.उच्च विद्यालय, डी.ए.वी उच्च विद्यालय, केन्द्रीय विद्यालय (वर्तमान में ई गोपालगंज शहर के भी.एम.उच्च विद्यालय के प्रांगण में स्थित बा), सैनिक स्कूल, गोपालगंज (ई हथुआ में स्थित बा), जवाहर नवोदय विद्यालय औरी डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल (थावे में स्थित) प्रमुख बाड़ी सन। एह जिला में लगभग 290 प्राथमिक विद्यालय, 100 माध्यमिक विद्यालय, 08 उच्चचर माध्यमिक विद्यालय, 05 महाविद्यालय, 01 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और 01 पॉलिटेक्नीक महाविद्यालय बाटे। स्नातक-स्तरीय शिक्षा के बादा आगे पढ़ाई करेके खातिर लईकन के बाहर जाएके पड़ेला।

एह जिला के मुख्य पर्व पूरा बिहार के तरह छठ पर्व ह। कातिक के महीना में होखेवाला छठ के धूमधाम औरी मान्यता त एहिसे पता चल जाला कि बिहार जाए वाली कवनो गाड़ी में तीन महीना पहिलहि सीट आरक्षित हो जाला। औरी जे टिकट ना करा पवले होला उ केहु तरह से भी जाए के मन बना ले ला। बाहर काम करे वाला मनई भले साल में कबो घर ना जा पावे लेकिन छठ में जरुरे घर जाए के कोशिश करेला। एकरा अलावे दीवाली, गोधन-पूजा, होली, रक्षा-बंधन, राम-नवमी, दुर्गा-पूजा (अक्टूबर-नवंबर) इत्यादि सगरे पर्व बहुते धूम-धाम से मनावल जाला। रक्षा-बंधन दिन गोपालगंज शहरिया में महावीर अखाड़ा के जुलूस त देखले बनेला।

गोपालगंज जिला मुख्यालय से मात्र छः किलोमीटर के दूरी पर सिवान जाएवाला राजमार्ग पर थावे नाम के जगहा बा । ओहिजा माई थावेवाली के बहुते पुरान मंदिर बा। माई थावेवाली के सिंहासिनी भवानी, थावे भवानी भा रहषु भवानी ओ कहल जाला। चईत के महीना में एहिजा बहुते बड़हन मेला लागेला। मंदिरे के बगल में एगो बहुत ही बड़हन पेड़ बा, जवना के अबले वनस्पतीय वर्गीकरण नईखे हो पावल।

देशो-विदेश में रहेवाला लोग जब साल-दूसाल पर अपना घरे आवेला तब ऊ थावेवाली माई के दर्शन करे जरुर आवेला।. बाकिर अफ़सोस एह बात के बा कि एतना महातम के बावजूद एह स्थान के सही तरीका से विकास नईखे भइल। आम जनता आ प्रशासन के मिलजुल के एह स्थान के समुचित विकास के कोशिश करे के चाहीं जेहसे कि माई के स्थान विश्व का मानचित्र पर एगो महत्बपूर्ण दर्शनीय जगह बन जावे।

गोपालगंज से 40 किलोमीटर दक्खिन-पूरब तथा छपरा से मशरख जाए वाली रेल लाईन पर 56 किलोमीटर उत्तर में दिघवा-दुबौली एगो जगह बा, जहांपिरामिड के आकार के दुठो टीला बा। अईसन मानल जाला कि एकर निर्माण एहिजा शासन कर रहल चेर राजा लोग बनवले रहे। 

गोपालगंज से 24 किलोमीटर उत्तर-पछिम में झरही नदी के किनारे हथुआ महाराजा के बनवावल किला अब खंडहर हो गईल बा। ई गाँव पहिले हथुआ नरेश के गतिविधियन के केंद्र रहे। किला के चारु ओरी बनल खड्डा अब भर चुकल बा। किला के सामने बनल टीला हथुआ राजा के मेहरारु द्वारा सती होखे के गवाह बा।

गोपालगंज से 26 किमी पछिम में भोरे-कटेया रोड पर स्थित एह गांव के महिमा भगवान गणेश के प्राचीन मंदिर के चलते बा। जहां हर बरिस माघ के चौथ से एक महीना तक बड़हन मेला लागेला। आसपास ही ना बल्कि दूरदराज के इलाकन में भी एह मंदिर के महात्तम एतना बा कि पूरा माघ भर लोग एहिजा आवेला। लकड़ी के सामान खातिर भी इहां लागे वाला मेला के बहुते प्रसिद्धी बा।

गोपालगंज से 21 किलोमीटर पछिम में इ एगो छोटहन गाँव बा, जहाँ दुर्गा माई के एगो बड़ा निमन मंदिर बनल बाटे।




#Article 50: पाकिस्तान (445 words)


पाकिस्तान चाहे पाकिस्तान इस्लामी गणतंत्र दक्खिन एशिया में एगो देस बा। 14 अगस्त 1947 के बँटवारा के बाद पाकिस्तान के जन्म भइल। ई से पहिले पाकिस्तान भारत के हिस्सा रहल। पाकिस्तान एगो मुस्लिम प्रधान देश ह। पाकिस्तान के राजधानी इस्लामाबाद ह आ अहिजा के अधिकारिक भाषा उर्दू ह।

पाकिस्तान भारत के उत्तर-दक्षिण कोन पर स्थित बा। पाकिस्तान से भारत के सटल राज्य बाने: जम्मु कश्मीर, पंजाब, राजस्थान आ गुजरात। पाकिस्तान के दक्षिण में अरब सागर आ उत्तर में अफगानिस्तान स्थित बा। कुछ मामला में पाकिस्तान के विवादित क्षेत्र (जे पर भारत अधिकार जनावेला) से चीन भी सटल बा।

जम्मू कश्मीर से धारा 370 व 35-ए के हटते ही लोगों ने लाहौर और करांची को भी नहीं छोड़ा, सोशल मीडिया पर छाए ये मजेदार कमेंट्स

पाकिस्तान के बिकाससील देस मानल जाला आ ई, ब्रिक देस सभ के साथे, अगिला इगारह गो देस सभ में आ जाई अइसन संभावना बा जे इगारह देस सभसे 21वीं सदी में सभसे धनी देस होखिहें, मने कि बड़ अर्थव्यवस्था होखिहें।
हाले के सालन में, लगभग एक दशक के सामाजिक उठा-पटक के बाद, , कई किसिम के मैक्रोइकोनामिक डिसबैलेंस के बाद, कुछ सेक्टर में बढ़ियां पर्पार्मेंस रहल बा जइसे कि रेलवे परिवहन आ बिजली के उत्पादन एह में गिनावल जा सके लें। अर्थब्यवस्था के सेमी-इंडस्ट्रियलाइज कटेगरी में गिनल जाला, जबकि कई गो इंडस्ट्रियल केंद्र सभ सिंधु नदी के सहारे अस्थापित बाड़ें। कराची के आ पंजाब के शहरी केंद्र सभ में बिबिध किसिम के इंडस्ट्री के बिकास भइल बाटे जबकि बलूचिस्तान नियर कम बिकसित इलाका सभ में उद्योग सभ के बिकास बहुते कम भइल बा। इकोनामिक काम्प्लेक्सिटी इंडेक्स के मोताबिक, पाकिस्तान 67वाँ-सभसे बड़ अर्थब्यवस्था बा एक्सपोर्ट इकोनामी के रूप में, जबकि काम्प्लेक्स इकोनामी के हिसाब से एकर अस्थान 106वाँ बाटे। बित्तीय साल 2015–16 में, पाकिस्तान के एक्सपोर्ट US$20.81 बिलियन रहल आ आयात US$44.76 बिलियन दर्ज कइल गइल, मने कि कुल ब्यापार बैलेंस नकारात्मक रहल US$23.96 बिलियन के बरोबर।

पाकिस्तान में सिविल सोसाइटी बहुत हद तक कई स्तर में बँटल बा आ लोकल सांस्कृतिक तहजीब आ परंपरागत इस्लामी रिवाज द्वारा निजी आ सामाजिक-राजनीतिक जिनगी निर्धारित होला। परिवार के मूलभूत इकाई संजुक्त परिवार होलें, हालाँकि बदलत सामाजिक-आर्थिक कारण से अब एकल परिवार के ओर बढ़ती के रुझान देखल जा रहल बाटे। लोगन के परंपरागत पहिनावा सलवार-कमीज रहे आ ट्राउजर, जींस, शर्ट आ टीशर्ट मरदाना लोग में पापुलर बा। हाल के दशक में, मिडिल क्लास में बढती भइल बा आ एह बर्ग के लोगन के संख्या ३५ मिलियन के करीब हो गइल बा जबकि ऊपरी आ ऊपरी-मिडिल क्लास के संख्या लगभग १७ मिलियन बा, पावर अब देहाती जमींदार लोग से हट के शहरी उच्चबर्ग के लोग में आ रहल बा। पाकिस्तानी तिहुआर सभ में ईद-उल-फ़ित्र, ईद-उल-अजहा, रमजान, क्रिसमस, ईस्टर, होली, दिपावली इत्यादि धार्मिक तिहुआर प्रमुख बाने।




#Article 51: इंटरनेट (1584 words)


इंटरनेट (अंगरेजी: Internet) आपस में जुड़ल कंप्यूटर नेटवर्क सभ के बैस्विक सिस्टम हवे जे इंटरनेट प्रोटोकाल सूट (टीसीपी/आइपी) के इस्तमाल से दुनिया भर के कंप्यूटर डिवाइस सभ के आपस में जोड़े ला। ई एक तरह से नेटवर्क सभ के नेटवर्क हवे जेह में लोकल से ले के बैस्विक बिस्तार क्षेत्र वाला प्राइवेट, पब्लिक, एकेडेमिक, ब्यावसायिक आ सरकारी नेटवर्क सभ आपस में इलेक्ट्रानिक, वायरलेस आ ऑप्टिकल टेक्नालॉजी के माध्यम से जुड़ल बाड़ें। इंटरनेट पर बिबिध प्रकार के जानकारी संसाधन मौजूद बाड़ें आ बिबिध तरह के सेवा सभ उपलब्ध करावल जालीं जिनहन में वल्ड वाइड वेब के आपस-में-जुड़ल हाइपरटेक्स्ट डाकुमेंट आ एप्लीकेशन, ई-मेल, टेलीफोनी, आ फाइल शेयर करे नियर चीज प्रमुख बाड़ी स।

इंटरनेट के सुरुआत पैकेट स्विचिंग की शुरुआत से भइल जौन 1960 की दशक में शुरू भइल रहे। इनहन  में सभसे महत्व वाला अर्पानेट (ARPANET) के सुरुआत रहल जेवन एगो रिसर्च की दौरान बनावल नेटवर्क रहे।

अर्पानेट या एआरपीए नेट एगो प्रोजेक्ट की रूप में अमेरिका के कुछ विश्वविद्यालयन के नेटवर्क से जोड़े के काम कइलस आ ई प्रोटोकॉल बनावे के सुरुआत कइलस जेवना से कंप्यूटर नेटवर्कन के नेटवर्क बनावल जा सके। अर्पानेट के पहुँच बढ़ल 1981 में जब नेशनल साइंस फाउन्डेशन आपन कंप्यूटर साइंस नेटवर्क बनवलस। एकरी बाद 1982 में इंटरनेट प्रोटोकॉल सूट के मानक रूप बनावल गइल।

इंटरनेट कई तरह के सर्विस या सेवा उपलब्ध करावे ला। इनहन में से मुख्य तीन गो नीचे दिहल जात बाड़ी स:

आम आदमी इंटरनेट आ वेब के एकही समझेला बाकी इन्हन में अंतर बाटे। वेब एगो सभसे ढेर इस्तेमाल में आवे वाली इंटरनेट सेवा हवे। वेबसाइट देखे खातिर अलग-अलग वेब ब्राउजर बनल बाटें जइसे की माइक्रोसॉफ्ट के इंटरनेट एक्सप्लोरर, गूगल के क्रोम, एपल के सफारी, ऑपेरा, मोजिला फ़ायरफ़ॉक्स नियर ढेर सारा ब्राउजर बाने। इन्हन की मदद से देखे वाला आदमी पन्ना-दर-पन्ना जानकारी देख सकत बाटे जेवन एक दुसरा से हाइपरटेक्स्ट प्रोटोकॉल द्वारा जुड़ल होखे लें।

वर्ल्ड वाइड वेब ब्राउजर सॉफ्टवेयर, जइसे कि माइक्रोसॉफ्ट के इंटरनेट एक्स्प्लोरर/एज, मोजिला फायरफॉक्स, ऑपेरा, एप्पल के सफारी, आ गूगल के क्रोम इत्यादि प्रयोगकर्ता लोग के ई सुबिधा देवे लें कि ऊ लोग एक वेब पन्ना से दुसरे वेब पन्ना पर हाइपरलिंक के माध्यम से आवाजाही क सके। ई हाइपरलिंक वेब पन्ना डाकुमेंट के हिस्सा होखे लें आ एक पन्ना से दुसरे ले जाए के कड़ी केरूप में उपलब्ध होखे लें। अइसन डाकुमेंट सभ में डेटा के अउरी दूसर कौनों तरह के कंबिनेशन भी हो सके ला जइसे कि साउंड, पाठ (टेक्स्ट), बीडियो, मल्टीमीडिया आ अउरी कौनों प्रकार के इंटरेक्टिव सामग्री जवन तब रन करे ले जब प्रयोगकर्ता एह कड़ी सभ के क्लिक करे लें या पन्ना के साथ इंटरेक्शन क रहल होखे लें। क्लायंट-साइड के सॉफ्टवेयर में एनीमेशन, गेम ऑफिस एप आ बैज्ञानिक डेमो इत्यादि शामिल हो सके लें। कीवर्ड द्वारा संचालित होखे वाला इंटरनेट रिसर्च भी कइल जा सके ला जेकरा बदे कई गो इंटरनेट सर्च इंजन बाड़ें जइसे कि याहू!, बिंग, गूगल, आ डक-डक-गो। एह तरीका से प्रयोगकर्ता लोग के लगे अपार ऑनलाइन जानकारी तक ले तुरंता (इंस्टैंट) चहुँप संभव होखे ला। छपल किताब, ज्ञानकोश भा मीडिया के तुलना में वर्ल्ड वाइड वेब के इस्तेमाल जानकारी के बिकेंद्रीकरण (डीसेंट्रलाइजेशन) में बहुते गजब के काम कइले बा।

संचार या कम्यूनिकेशन एगो दुसरा प्रमुख सेवा बाटे जेवन इंटरनेट से मिलेला। ईमेल एगो संचार सेवा हवे।

इंटरनेट की मदद से ढेर सारा डेटा ट्रांसफर किया जा सकता है।

इंटरनेट के इस्तमाल में गजब के बढ़ती देखल गइल बा। साल 2000 से 2009 के बीच दुनियां में इंटरनेट प्रयोग करे वाला लोग के संख्या 394 मिलियन से बढ़ के 1.858 बिलियन हो गइल। साल 2010 में दुनिया के कुल जनसंख्या के 22 फीसदी लोग के लगे इंटरनेट तक पहुँच हो चुकल रहे आ एह समय ले 1 बिलियन गूगल सर्च रोज होखे लागल, 300 मिलियन प्रयोगकर्ता लोग ब्लॉग पढ़े लागल, आ 2 बिलियन बीडियो रोज यूट्यूब पर देखल जाए लागल। साल 2014 में दुनिया में इंटरनेट इस्तेमाल करे वाला लोग के संख्या 3 बिलियन या 43.6 प्रतिशत पहुँच गइल, लेकिन एह प्रयोगकर्ता लोग के दू-तिहाई हिस्सा धनी देसन से रहल, जहाँ 78.0 प्रतिशत यूरोपीय लोग आ उत्तर आ दक्खिन अमेरिका के 57.4 लोग इंटरनेट प्रयोगकर्ता बन गइल रहल लोग।

इंटरनेट के संसाधन सभ, जइसे कि एकरा से संबंधित हार्डवेयर आ सॉफ्टवेयर वाल अंग सभ, कई तरह के अपराधी या दुरभावग्रस्त कोसिस के निसाना बने लें। अइसन कोसिस के मकसद होला कि अबैध तरीका से इंटरनेट के संसाधन सभ पर कंट्रोल क लिहल जाव, फ्राड, धोखाधड़ी, ब्लैकमेल नियर घटना के अंजाम दिहल जाव या निजी जानकारी के गलत तरीका से हासिल कइल जा सके। अइसन चीज से बचाव करे के उपाय इंटरनेट सुरक्षा भा इंटरनेट सिक्योरिटी हवे।

साइबर अपराध के सभसे चलनसार तरीका मैलवेयर के इस्तेमाल हवे। मैलवेयर एक तरह के दुरभाव वाला भा खतरनाक रूप से नोकसान पहुँचावे वाला सॉफ्टवेयर होला। एह में कंप्यूटर वायरस, कंप्यूटर वर्म, रैनसमवेयर, बॉटनेट आ स्पाईवेयर सभ के सामिल कइल जाला। एह में से कुछ अइसन प्रोग्राम होलें जे अपना के खुद से कापी क के एक कंप्यूटर से दूसरा में फइले लें आ फाइल अ डेटा के नोकसान चहुँपावे लें। कुछ कंप्यूटर के लॉक क देलें आ बदला में फिरौती के माँग करे लें, कुछ अइसन होलें जे प्रयोगकर्ता के कामकाज के जासूसी करे लें।

कंप्यूटर सर्विलांस के ज्यादातर हिस्सा इंटरनेट पर डेटा आ ट्रैफिक के मॉनिटरिंग के रूप में होला। अमेरिका में कानूनी रूप से ई प्राबिधान बा कि सगरी फोन काल आ ब्रॉडबैंड ट्रैफिक (ईमेल, वेब ट्रैफिक, इंटरनेट मैसेजिंग इत्यादि) रियल-टाइम मॉनीटर कइल जा सके ला, ई काम फेडरल एजेंसी सभ के दायरा में आवे ला। कंप्यूटर नेटवर्क पर डेटा के ट्रैफिक के मॉनिटरिंग के पैकेट कैप्चर कहल जाला। आसान रूप में समझावल जाय त कंप्यूटर सभ आपस में संबाद करे खाती मैसेज सभ के कई छोट-छोट टुकड़ा में बाँट के साझा करे लें जिनहन के पैकेट कहल जाला आ ईहे पैकेट नेटवर्क के जरिये एक जगह से दूसरा जगह ट्रांसफर होलें आ अपना लक्ष्य के जगह पर पहुँच के दुबारा एकट्ठा (असेंबल) हो के संदेस के रूप ले लेलें। पैकेट मॉनिटरिंग में इनहने के पकड़ल जाला जब ई नेटवर्क में जात्रा क रहल होलें। पैकेट कैप्चर अप्लायंस सभ द्वारा इनहन के पकड़ के अन्य प्रोग्राम सभ के मदद से इनहन के सामग्री के जाँच कइल जाला। पैकेट कैप्चर एक तरह से जानकारी के एकट्ठा करे के औजार होला न कि एकर बिस्लेषण करे वाला।

पैकेट कैप्चर से एकट्ठा कइल भारी मात्रा में डेटा के अन्य सॉफ्टवेयर द्वारा बिस्लेषण कइल जाला, इनहन में कुछ खास शब्द भा वाक्य सभ के फिल्टर कइल जाला, कुछ खास संदेह वाली वेबसाइट इत्यादि के पहुँच के बिस्लेषण कइल जाला।

As the Internet is a heterogeneous network, the physical characteristics, including for example the data transfer rates of connections, vary widely. It exhibits emergent phenomena that depend on its large-scale organization.

The volume of Internet traffic is difficult to measure, because no single point of measurement exists in the multi-tiered, non-hierarchical topology. Traffic data may be estimated from the aggregate volume through the peering points of the Tier 1 network providers, but traffic that stays local in large provider networks may not be accounted for.

An Internet blackout or outage can be caused by local signalling interruptions. Disruptions of submarine communications cables may cause blackouts or slowdowns to large areas, such as in the 2008 submarine cable disruption.  Less-developed countries are more vulnerable due to a small number of high-capacity links.  Land cables are also vulnerable, as in 2011 when a woman digging for scrap metal severed most connectivity for the nation of Armenia. Internet blackouts affecting almost entire countries can be achieved by governments as a form of Internet censorship, as in the blockage of the Internet in Egypt, whereby approximately 93% of networks were without access in 2011 in an attempt to stop mobilization for anti-government protests.

इंटरनेट चलावे में केतना बिजली खर्चा होले एकर अनुमान सभ बहुत बिबाद के बिसय रहल बाड़ें। एगो पियर-रिव्यू जर्नल में छपल रिसर्च-पेपर में 2014 में पछिला एक दशक में छपल लगभग 20,000 के आसपास सामग्री के आधार पर बिजली के खर्चा के आँकड़ा में भारी अंतर देखल गइल आ ई 0.0064 किलोवाट घंटा प्रति गीगाबाइट ट्रांसफर (kWh/GB) से ले के 136 kWh/GB तक के बीचा में अलग-अलग दर्ज कइल गइल। रिसर्च करे वाला लोग एह गड़बड़झाला खातिर मुख्य रूप से संदर्भ के साल के कारन मानल (जइसे कि, एनर्जी एफिशेंसी के कवना तरीका से गिनती में लिहल गइल बा, समय के साथ एह में होखे वाला सुधार के कइसे गिनल गइल बा) आ अंतिम माथ पर स्थित पर्सनल कंप्यूटर आ सर्वर सभ के गिनती एह बिस्लेशन में सामिल बा की ना।

साल 2011 में एकेडमिक रिसर्चर लोग ई अनुमान लगावल कि इंटरनेट चलावे में खर्चा होखे वाली कुल एनर्जी 170 से 307 GW के बीचा में बाटे जे पूरा मानव जाति द्वारा इस्तेमाल होखे वाली कुल एनर्जी के दू प्रतिशत से कम बाटे। एह इस्टीमेट में जरूरी चीजन के निर्माण, संचालन आ समय-समय पर लगभग 7500 लाख लैपटाप आ एक अरब स्मार्टफोन अउरी 1000 लाक सर्वर सभ के रिप्लेस करे में खर्चा एनर्जी, राउटर आ सेलफोन टावर, ऑप्टिकल स्विच में, वाईफाई ट्रांसमीटर में आ क्लाउड स्टोरेज में होखे वाला सगरी एनर्जी खर्चा के सामिल कइल गइल रहल। एगो बिना पियर-रिव्यू वाले प्रकाशन में 2018 में छपल दि शिफ्ट प्रोजेक्ट (कार्पोरेट स्पांसर्ड फ्रांसीसी थिंक टैंक) में बैस्विक डेटा ट्रांसफर आ जरूरी इंफ़्रास्ट्रक्चर के दुनिया के कुल बैस्विक CO2 एमिशन के लगभग 4% हिस्सेदारी के जानकारी दिहल गइल। एह अध्ययन में इहो बतावल गइल की एह तरीका के डेटा ट्रांसफर में सभसे बेसी लगभग 60% हिस्सेदारी बीडियो स्ट्रीमिंग के रहल जे लगभग 300 मिलियन टन सालाना CO2 एमिशन खाती जिम्मेदार बा, आ तर्क दिहल गइल कि नया डिजिटल सोबर बेहवार में बीडियो फाइल के साइज आ ट्रांसफर पर रेगुलेशन के जरूरत बाटे।




#Article 52: ताइवान (246 words)


ताइवान चाहे चीन गणराज्य (रिपब्लिक ऑफ चाइना) पूर्ब एशिया में एगो राज्य बा जेकरे पच्छिम आ उत्तर में चीन (पीआरसी), उत्तर पूरुब में जापान आ दक्खिन में फिलिपींस पड़ोसी देस बाने। ई यूनाइटेड नेशंस के सदस्य देस ना हवे आ अइसन सभसे ढेर जनसंख्या वाला राज्य हवे जे यूनाइटेड नेशंस में शामिल ना बा।

एह राजनीतिक इकाई में ताइवान दीप, पेंगबु, किंमेन, मात्सु आ अवरू छोट-छोट द्वीप शामिल बाड़न जौन चीन के मुख्य भूमी से दूर के पूर्वी तट पर स्थित बाने। ताइवान दीप के पहिले फारमूसा कहल जाय, 17वीं-सदी से पहिले लोकल मूल निवासी लोग दुआरा आबाद रहे। जब एह दीप पर डच आ स्पेनी लोग पहुँचल, सतरहवीं सदी के बाद इहाँ हान लोग के आवे में भारी बढ़ती भइल। एकरा बाद ई दीप किंग बंस के सासन में आइल जे चीन के अंतिम राजशाही रहल। एह बंस के शासक लोग जापान से भइल एगो जुद्ध में एह दीप के जापान के दे दिहलें। एकरा बाद चीन के मुख्य जमीन पर रिपब्लिक ऑफ चाइना (आरओसी) के स्थापना भइल; मने राजशाही खतम क के लोग के सासन वाली सरकार बनल। बाद में आरओसी एह दीप के जापान के कब्ज़ा से छोड़ा लिहलस लेकिन मुख्य जमीन पर चीन के क्रांति भइल आ सत्ता पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना, यानी के चीन (पीआरसी) के हाथ में चल गइल आ एह दीप पर चीनी रिपब्लिक के सासन बचल। ई 1971 ले यूनाइटेड नेशंस के सदस्य रहे आ एकरे बाद ई बाहर हो गइल आ चीन (पीआरसी) सामिल क लिहल गइल।




#Article 53: हिमालय (2731 words)


हिमालय बिस्व क सबसे ऊँच परबत हवे जवन भारत के मैदान आ तिब्बत के पठार के बिचा में स्थित बा। ई एगो बिसाल परबत तंत्र हवे जहाँ संसार का सबसे ढेर ऊँचाई वाला अधिकांश पहाड़ी चोटी मौजूद बाड़ी। ए हिमालयी परबत तंत्र में करीब 110 गो चोटी 7,300 मीटर (24,000 फीट) से अधिका ऊँचाई वाली बाड़ी सऽ जिनहन में बिस्व क सभसे ऊँच परबत चोटी माउंट एवरेस्टो सामिल बा।

भूबिज्ञान की हिसाब से देखल जाय त हिमालय परबत सभसे नया परबतन में गिनल जाला। एकरे उत्पत्ती क इतिहास देखल जाय त अन्य पर्वतन के तुलना में ई बहुते नया बा आ अभिन भी विकसिते हो रहल बा।

हिमालय पहाड़ के बिस्तार कुल छह गो देस - पाकिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान चीन आ म्यांमार में बाटे। हिमालय से निकले वाली नद्दिन क ए इलाका खातिर महत्व बा। सिन्धु, सतलज, गंगा, सरजू, गंडक, कोसी, ब्रह्मपुत्र आ यांग्त्सी नदी हिमालय से निकले वाली कुछ मेन-मेन नदी बाड़ीं कुल। हिमालय परबत श्रेणी में 15 हजार से अधिका ग्लेशियर बाड़न सऽ जिनहन क बिस्तार करीब-करीब 12,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर बाटे।

हिमालय क पच्छिम से पूरुब के ओर बिस्तार सिंधु नदी की घाटी से ब्रह्मपुत्र नदी के मोड़ ले लगभग अढ़ाई हज़ार किलोमीटर (2,500 कि॰मी॰) आ उत्तर-दक्खिन के चौड़ाई करीब 160 से 400 कि॰ मी॰ बाटे। हालाँकि, एकर पूरबी आ पच्छिमी सीमा कौनो बहुत स्पष्ट रूप से परिभाषित नइखे। सिडनी बुर्राड नाँव क बिद्वान सिंधु नदी की मोड़ के एकर पच्छिमी सीमा मनलें।

सबसे पच्छिम ओर क ऊँच परबत चोटी नंगा परबत बा आ पूरुब ओर क चोटी नामचा बरवा बा। एकर देशांतरी बिस्तार कुल 22 डिग्री की आसपास बाटे आ ई अपना पूरा बेंड़ी-बेंड़ा बिस्तार में पूरुब से पच्छिम ओर के एगो तलवार के आकार में बा।

हिमालय की पहाड़ी इलाका क कुल क्षेत्रफल लगभग पाँच लाख वर्ग किलोमीटर (5,00,000 कि॰मी॰2) बाटे। एकर औसत ऊँचाई समुंद्र-सतह से 600 मीटर हवे। राजनैतिक रूप से देखल जाय त हिमालय पहाड़ छह गो देसन में कुछ न कुछ बिस्तार लिहले बा। ई देश बाड़न - पाकिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान चीन आ म्यांमार।

गंगा की मैदानी हिस्सा से अगर उत्तर की ओर बढ़ल जाय त क्रम से हिमालय क तीन गो परबत श्रेणी पड़ी।

ई सभसे दक्खिन ओर स्थित बा आ सबसे नया बनल श्रेणी हवे। एके उप-हिमालय, बाहरी हिमालय आ शिवालिक कहल जाला। जम्मू में ए के जम्मू पहाड़ी कहल जाला, पंजाब में एकर बिस्तार पोटवार बेसिन से शुरू होला आ ई कुमायूँ आ नेपाल में होत कोसी नदी ले जाला। नैपाल में बुटवल क पहाड़ी एही का हिस्सा हवे। आसाम-अरुणाचल में डफला, मिरी, अभोर आ मिशमी क पहाड़ी एही क बिस्तार हई कुल। एकरी उत्तर में मध्य हिमालय से एके अलग करे वाला भ्रंश मेन फ्रन्टल फॉल्ट कहल जाला। एकर निर्माण मायोसीन काल से निचला प्लीस्टोसीन की बीच भइल रहे।

शिवालिक की उत्तर में मध्य हिमालय या लघु-हिमालय श्रेणी बा। एके जम्मू काश्मीर में पीरपंजाल, कुमायूँ में नाग टिब्बा आ नैपाल में महाभारत श्रेणी कहल जाला। धौलाधार, हालाँकि एकरी दक्खिन ओर बा लेकिन एही क हिस्सा मानल जाला। एके महान हिमालय से अलग करे वाला भ्रंश के मेन बाउण्ड्री फॉल्ट कहल जाला।

सभसे ऊँच आ बिना कौनों निचाई के लगातार फइलल श्रेणी हवे।

बिबरण के सुबिधा खातिर सिडनी बुर्राड एकरा के चार गो क्षेत्रीय हिस्सा में बटले रहलें:
आसाम हिमालय (ब्रह्मपुत्र से तीस्ता नदी तक), नेपाल हिमालय (तीस्ता से काली नदी तक), कुमाऊँ हिमालय (काली से सतलज तक) आ पंजाब हिमालय (सतलज से सिंधु नदी तक)।

महान हिमालय के उत्तर में भी चीन के तिब्बती इलाका में एकरे समानांतर एक ठो अउरी श्रेणी बाटे जेकरा के ट्रांसहिमालय कहल जाला।

महान हिमालय के चापाकार श्रेणी के बीचोबीच 8000 मीटर ऊँचाई वाली चोटी धौलागिरि आ अन्नपूर्णा नेपाल देस में मौजूद बाड़ी, इनहन के काली गंडकी के बिसाल गॉर्ज अलगा करे ला। ई गॉर्ज हिमालय के पच्छिमी आ पूरबी दू हिस्सा में बाँटे ला परबत के रूप में भी आ इकोलॉजी के हिसाब से भी। काली गंडकी के सुरुआती बिंदु के लगे 'कोरा ला' नाँव के दर्रा बाटे जे महान हिमालय के श्रेणी पर माउंट एवरेस्ट आ K2 के बीच सभसे निचला बिंदु हवे। अन्नपूर्णा के पुरुब ओर 8000 मीटर ऊँचाई वाली मनास्लु आ तिब्बत सीमा के लगे शिशापंगमा बाड़ी। इनहन के दक्खिन में काठमांडू स्थित बा जे नेपाल के राजधानी हवे आ हिमालय पर बसल सभसे बड़ शहर भी हऽ।  काठमांडू के पूरुब में भोटे/सुन कोसी नदी बा जे तिब्बत में से निकले ले आ नेपाल आ चीन के बीचा में रस्ता एही के सहारे हो के जाला (अरानिको हाइवे आ चीनी नेशनल हाइवे 318)। अउरी पूरुब बढ़े पर महालंगुर हिमाल बा जे में दुनिया के छह गो सभसे ऊँच परबत चोटी मौजूद बाड़ी - चो ओयु, एवरेस्ट, ल्होत्से आ मकालू इनहन में सभसे ऊँच बाड़ी। 
खुम्बु प्रदेश के क्षेत्र, जवन पैदल यात्रा (ट्रेकिंग) खातिर मशहूर हवे, इहँवे बा आ माउंट एवरेस्ट के ओर दक्क्षिण-पच्छिम से बढ़े पर पड़े ला। अरुण नदी एह पहाड़ के उत्तरी ढाल पर बहे ले, एकरे बाद ई दक्खिन के ओर मुद जाले आ मकालू के पूरुब से हो के बहे लागे ले।

नेपाल में दूर पूरुब में जा के हिमालय परबत कंचनजंघा के रूप में उभार ले ला आ भारत नेपाल सीमा पर ई हिस्सा हिमालय के सभसे पूरबी आठ हजारी चोटी वाला हवे। कंचनजंघा के पूरबी साइड भारत के सिक्किम राज्य में पड़े ला जे पहिले अपने-आप में एगो राजघराना रहल। कंचनजंघा भारत के सभसे ऊँच चोटी हवे (K2 काश्मीर में भारत-पाक के बीच बिबादित बा)। सिक्किम में भारत से तिब्बत के राजधानी ल्हासा जाए के रस्ता बा जे नाथु ला से हो के गुजरे ला। सिक्किम के पूरुब ओर बौद्ध देस भूटान बा। भूटान के सभसे ऊँच पहाड़ गान्खर पुएन्सुम हवे। इहो दावेदारी बा कि ई परबत दुनिया के अइसन परबत सभ में सबसे ऊँच बाटे जिनहन पर अबतक ले न चढ़ल जा सकल बा। एह इलाका में हिमालय बहुत कटल-फटल बा आ एकरे पहाड़ी ढालन पर घन जंगल बाने। हिमालय एकरे बाद कुछ उत्तर-पुरुब के ओर मुड़ के अरुणाचल प्रदेश से हो के नामचा बरवा ले चहुँपे ला जे सभसे पूरबी ऊँच चोटी हवे। ई चोटी राजनीतिक रूप से तिब्बत में बा। नामचा बरवा पूरा तरीका से यारलुंग-सांपू मोड़ के भीतर पड़े ला आ सान्पू नदी के पूरुब ओर मौजूद चोटी ग्याला पेरी के भी कंचित-कलां हिमालये के हिस्सा मानल जाला।

हिमालय के परबत श्रेणी सभ धरती के सभसे नया पहाड़ सभ से बनल हवे। ई पहाड़ कुल अवसादी आ रूपांतरित चट्टानन के मुड़ के ऊपर उठे के कारन बनल हवें। प्लेट टेक्टानिक्स के आधुनिक थियरी के अनुसार ब्याख्या कइल जाय तब हिमालय के निर्माण महादीपन के टकराव से भइल हवे, जब भारतीय प्लेट दक्खिन ओर से आ के यूरेशियाई प्लेट से लड़ल आ इनहन के बीच में टेथीज सागर के मलबा बिचा में दबा के मोड़दार रूप में उपर के ओर उठ गइल।

हिमालय के ठीक नीचे, भूगर्भ में, भारतीय प्लेट आ यूरेशियाई प्लेट के बीच टकराव वाली बाउंडरी पावल जाले जहाँ भारतीय प्लेट अबो धीरे-धीरे यूरेशियाई प्लेट के नीचे धँसकत जात बा आ हिमालय के ऊपर उठे के काम धीरे-धीरे आजु ले चल रहल बाटे। एही प्लेट टकराव से बर्मा के अराकान योमा आ भारतीय दीपमाला अंडमान निकोबार के भी उत्पत्ती भइल हवे।

अपर क्रीटैशियस काल में, अबसे लगभग 70 मिलियन बरिस पहिले, उत्तर की ओर बढ़ रहल भारतीय-आस्ट्रेलियाई प्लेट दू हिस्सा में टूट के भारतीय प्लेट आ आस्ट्रेलियाई प्लेट के रूप ले लिहलस) आ ई 15 सेंटीमीटर प्रति साल के हिसाब से उत्तर की ओर बढ़ल जारी रखलस। लगभग 50 मिलियन साल पहिले ई भारतीय-आस्ट्रेलियाई प्लेट आगे बढ़ के टीथीस सागर के लगभग पूरा बंद क दिहलस। टीथीस सागर में जमा मलबा यूरेशियाई प्लेट आ भारतीय-आस्ट्रेलियाई प्लेट के बिचा में चपा गइल। ओह समय टीथीस के दुनों किनारा पर सक्रिय ज्वालामुखी सभ के निर्माण भी भइल। चूँकि दुन्नों प्लेट हलुक पदार्थ से बनल महादीपी प्लेट रहलीं, इनहन के बिचा में थ्रस्ट फॉल्ट के घटना घटल आ मोड़दार परबतन के उत्पत्ती भइल जबकि अगर इनहन में से एक ठो भारी प्लेट रहल रहित तब ऊ साफ तौर पर ट्रेंच सभ के सहारे धँस के मैंटल में घुस गइल रहित।

ई उदाहरण बहुत दिहल जाला कि माउंट एवरेस्ट नियर परबत चोटी समुंदरी चूना-पाथर के चट्टान से भइल हवे, ई एह बात के परमान हवे कि एह चट्टानन के जमाव समुंद्र में भइल रहे आ इहँवा पहिले समुंद्र रहल।

हिमालय के बिसाल आकार, अतना ढेर ऊँचाई आ जटिल थलरचना (टोपोग्राफी) नियर कई सारा चीज मिल के इहाँ जलवायु के बहुत बिबिधता वाला बना देलें, जहाँ दक्खिन ओर के निचली पहाड़ी सभ पर नम उपोष्ण कटिबंधी जलवायु पावल जाला ओही जे तिब्बती साइड ओर एकदम ठंडा आ सूखा वाली जलवायु मिले ले।

अगर सुदूर पच्छिम के हिस्सा के छोड़ दिहल जाय त बाकी पूरा हिमालय के दक्खिनी ढाल वाला इलाका सभ में सभसे प्रमुख चीज मानसून हवे। दक्खिन-पच्छिमी मानसून के जून में आगमन हो जाला आ सितंबर तक ले रहे ला, एह दौरान एह पहाड़ी ढाल पर खूब बरखा होले आ कबो-कबो भारी बारिश के कारण यातायात ठप हो जाला आ जमीन धँसके के घटना भी होले। एह दौरान पूरा इलाका में पर्यटन आ ट्रेकिंग के काम बंदे रहे ला जबले कि अक्टूबर के महीना न आ जाय।

अगर कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के हिसाब से देखल जाय तब एह पहाड़ के दक्खिनी ढाल वाला निचला इलाका सभ के, पूरुब से बीच नेपाल तक, नम उपोष्णकटिबंधी जलवायु (Cwa) में रखल जाला आ ऊपरी हिस्सा सभ के उपोष्ण कटिबंधी हाइलैंड जलवायु (Cwb) बर्ग में रखल जाला। पच्छिम के ओर जाये पर, मानसून के परभाव क्रम से कम होखत चल जाला आ काश्मीर के घाटी के पच्छिम ओर एकर कौनों महत्व ना रह जाला। पच्छिमी हिमालय में जाड़ा के सीजन में होखे वाला बर्षण (जेह में बरफ आ बरखा दुनों सामिल होला) के महत्व हवे। पच्छिमी हिमालय में बरखा के मात्रा भी कम होले आ बरखा के समय (सीजन) भी अलग होला। उदाहरण खाती काश्मीर घाटी में, जे भौतिक रूप से शिमला आ काठमांडू के नियर घाटी हवे, इनहना के तुलना में लगभग आधे बर्षण होला आ एहू के अधिकतम मात्रा मार्च-अप्रैल में होले।

हिमालय के उत्तरी भाग में बरखा बहुत कम होले आ बनस्पति के भी कमी पावल जाले। ई इलाका सभ एक तरह से सूखा वाला इलाका हवें आ ठंडा रेगिस्तान हवें। एशिया के ठंडा रेगिस्तान, तकला मकान आ गोबी इत्यादि के निर्माण में भी हिमालय के भूमिका गिनावल जाला।

हिमालय क सबसे बड़ महत्व दक्षिणी एशिया की क्षेत्रन खातिर बा जहाँ की जलवायु खातिर ई पहाड़ बहुत महत्वपूर्ण नियंत्रक कारक क काम करे ला। हिमालय क विशाल पर्वत शृंखला कुल साइबेरियाई ठंढा वायुराशियन के रोक के भारतीय उपमहाद्वीप के जाड़ा में बहुत ढेर ठण्ढा होखला से रक्षा करेलीं।
इहे पहाड़ मानसूनी हवा की रस्ता में रुकावट पैदा कइ के ए क्षेत्र में पर्वतीय वर्षा करावे ला जेवना पर ए इलाका क पर्यावरण आ अर्थव्यवस्था निर्भर बा।
हिमालय क उपस्थितिये अइसन कारण हवे जेवना की वजह से भारतीय उपमहाद्वीप की ओहू इलाकन में भी उष्ण कटिबंधी आ उपोष्ण कटिबंधी जलवायु पावल जाला जेवन इलाका कर्क रेखा की उत्तर ओर परे लन , नाहीं त ए इलाकन में त अक्षांशीय स्थिति की हिसाब से समशीतोष्ण कटिबंधी जलवायु मिले के चाही।

उत्तरी भारत क मैदान जेवना के सिन्धु-गंगा-ब्रह्मपुत्र क मैदान भी कहल जाला, एही हिमालय से नद्दी कुल की द्वारा ले आइल गइल जलोढ़ माटी के जमा भइला से बनल हवे। हिमालय क सालो भर बरफ से तोपाइल रहे वाला चोटी आ इहँवा पावल जाए वाला हिमनद सदावाहिनी नदियन क स्रोत हवें जिनहन से भारत, पाकिस्तान, नेपाल, आ बांग्लादेश के महत्वपूर्ण जल संसाधन उपलब्ध होला।

वन संसाधन की रूप में शीतोष्ण कटिबंधीय मुलायम लकड़ी वाली बनस्पति आ शंक्वाकार जंगल इहवाँ पावल जाला जवना क काफ़ी आर्थिक महत्व हवे। जंगल से अउरी कई तरह क चीज मिलेले जइसे किजड़ी-बूटी वाला पेड़-पौधा। फल की खेती खातिर भी ई क्षेत्र मशहूर बा आ सेब, आडू, खुबानी आ तरह तरह क फल आ सूखा मेवा इहाँ पैदा होला। जानवरन की चरागाह खातिर हिमालय का महत्व हवे  काहें से की एकरी घातिन में नर्म घास वाला इलाका मिलेला जिनहन के पश्चिमी हिमालय में मर्ग आ कुमायूँ क्षेत्र में बुग्याल अउरी पयाल कहल जाला।

बहुत तरह क खनिज पदार्थ, जइसे की चूना पत्थर, डोलोमाईट, स्लेट, सेन्हा नमक इत्यादि इहाँ पावल जाला। पर्यटन उद्योग आ बहुत गो पर्यटक केन्द्र खातिर आ पनबिजली उत्पादन खातिर भी हिमालय पहाड़ महत्वपूर्ण बाटे।

हिमालय के एक भाग से दुसरा भाग के बीच जिया-जंतु आ बनस्पति में काफी बिबिधता पावल जाले। ई अंतर ऊंचाई, तापमान, बरखा, आ माटी में अंतर के कारण मिले ला। हिमालय के दक्खिनी भाग के मैदान से सटल इलाका उष्णकटिबंधीय जलवायु वाला हवें आ उत्तर के ओर जइसे-जइसे ऊँचाई बढ़े ला तापमान कम होखत जाला आ अंत में बरफ से तोपाइल चोटी मिले लीं। एही तरे पूरुब से पच्छिम ओर बरखा के मात्रा में कमी होले। ई दूनों चीज स्थानीय माटी आ ढाल के अनुसार पूरा हिमालय के बहुत ब्यापक जीवबिबिधता बना देलीं।  बहुत ढेर ऊँचाई (आ एकरे चलते कम हवादबाव) आ बहुत नीचा तापमान वाला इलाका सभ में कई तरह के चरमपसंदी जिया-जंतु भी आपन निवास बनवले बाने।
जबकि बनस्पति में जैवविविधता खातिर फुलवन के घाटी आ पूरबी नेपाल, भूटान आ अरुणाचल में बिस्तार लिहले पूरबी हिमालय क्षेत्र अपने आप में अजगुत चीज बा। पूरबी हिमालय क्षेत्र के जीवबिबिधता के हॉटस्पॉट घोषित कइल गइल बा आ आज इहाँ कइयन गो प्रजाति खतरा में बाड़ी।

हिमालय के ऊँच पहाड़ी इलाका में मुख्य शिकारी जानवर हिम तेंदुआ हवे। ई पहाड़ी बकरी सभ के आ हिमालयी नीलकी भेड़ सभ के शिकार प्रमुख रूप से करे ला। हिमालयी कस्तूरी मिरगा बहुत ऊँचाई पर पावल जाये वाला एगो दूसर जीव हवे। एकरे ढोंढ़ी में पावल जाये वाली कस्तूरी बहुत कीमती होले आ एकरा चलते एकर अतना शिकार भइल कि अब ई खतम होखे के कगार पर बाने। 

हिमालय क्षेत्र के अन्य मूलनिवासी या लगभग मूल निवासी शाकाहारी जिया-जंतु में हिमालयी तहर, ताकिन, भड़ल, घोरल, थारल इत्यादि जानवर प्रमुख बाने। हिमालई भूअरा भालू आज भयानक रूप से खतरा में बा आ पूरा हिमालय क्षेत्र में अब कहीं-कहीं पावल जाला, अइसने हाल एशियाई करियवा भालू के भी बा। पहाड़ी इलाका के बाँस के पत्ता खा के रहे वाला लाल पांडा आज खतरा में बा। अन्य प्रजाति में पूरबी हिमालय में सीमित गोल्डेन लंगूर आ पच्छिमी हिमालय के काश्मीरी सलेटी लंगूर दुनों बहुत कम बचल बाने।

ऊँचाई आ बरखा के बदलत मात्रा के साथ बनस्पति के बिस्तार आ प्रकार में भी अंतर साफ़ देखाई पड़े ला। हाल में नोट कइल गइल बा कि गढ़वाल हिमालय इलाका (उत्तराखंड) में अब ओक के जंगल पर पाइन के प्रजाति सभ आपन कब्जा करत जात बाड़ी। बुराँस, सेव, काफल आ अइसने कई फेड़ सभ में अपना सीजन से पहिलहीं फूल आ फर आवे के बात भी नोट कइल गइल बा। हिमालय क्षेत्र में सभसे अधिका ऊँचाई पर पावल जाये वाला फेड़ हवे तिब्बती जूनिपर जे  के ऊँचाई तक ले, दक्खिनी तिब्बत के इलाका में पावल जालाल

हिमालय परबत क भूराजनीतिक महत्व हर ओ देस खातिर बा जेह में कुछ न कुछ दूरी तक एह परबत के बिस्तार बाटे। हिमालय के भूराजनीती महत्व चार तरह से बा: सीमा बिबाद के चलते, नदी सभ के पानी पर कंट्रोल आ बँटवारा खातिर, ग्लेशियर सभ पर नियंत्रण खातिर, आ दर्रा आ दर्रा से हो के गुजरे वाला ब्यापारिक रस्ता सभ पर नियंत्रण खातिर।

मुख्य रूप से ई परबत श्रेणी भारत आ चीन के बिच में एगो सीमांत अबरोध (फ्रंटियर बैरियर) के रूप में काम करे ले। एकरे अलावा एह इलाका में भारत-चीन के सीमा पर कई जगह बिबाद बा आ जम्मू काश्मीर के हिस्सा भारत आ पाकिस्तान के बिचा में 1947 के बादे से बिबाद के बिसय रहल बा जे इलाका के रणनीति आ भूराजनीति के हिसाब से महत्वपूर्ण बना दिहले बा।

हिमालय कई गो सदाबाहिनी नद्दी सभ के उद्गम हवे आ एह नदी सभ के पानी बिबिध कारण से भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेस आ चीन तीनों खातिर जरूरत के चीज बा आ एक दूसरा के हित के टकराव नदी सभ के पानी खातिर भी होला। कुल मिला के दक्खिन एशिया के भूराजनीति में हिमालय से निकले वाली नदी सभ के पानी एगो केंद्रीय बिसय बाटे। हिमालय के ग्लेशियर सभ के भी भूराजनीति के हिसाब से महत्व बा, उदाहरण खातिर सियाचिन इलाका एक तरह से दुनिया के सभसे ऊँच लड़ाई के मैदान ह जहाँ पछिला कुछ समय से लगातार तनाव के स्थिति रहल बा।

हिमालई दर्रा सभ, जिनहन से रस्ता हो के एह देसन के आपस में जुड़े के मोका देला, बिबिध बिबाद के बिसय रहल बाने आ इनहन पर कंट्रोल इलाका के भूराजनीति खातिर बहुत महत्व के चीज हवे। उदाहरण खातिर कराकोरम दर्रा पर वर्तमान में चीन के कंट्रोल बा जेवना कारण पाकिस्तान के चीन के जिनजियांग से जुड़े में सुबिधा होले जबकि दिफू दर्रा पर भारत के नियंत्रण होखे के कारण चीन के आसाम आ पूर्वोत्तर भारत के बजार से जुड़े में दिक्कत होखे ला।




#Article 54: सिवान (290 words)


सिवान भारत की बिहार प्रांत में एगो शहर बा जेवन एही नाँव की जिला क मुख्यालयो हवे।

सिवान (पुरान नाम अलिगंज) अक्षांश पर स्थित बा। सिवान के औसत ऊँचाई 77 मीटर (252 फिट) बा।

शब्द सिवान के मतलब भोजपुरी में सिमा होला। हाल के समय में इ बिहार, भारत के सिमा पर स्थित नईखे बल्कि कउनो समय में अहिजा भारत के सिमा रहल।
डॉ0 राजेन्‍द्र प्रसाद (दिसम्बर 3, 1884– फरवरी 28, 1963) भारत के प्रथम राष्ट्रपति रहलन। उनका जन्म सिवान के जिरादेई में भइल रहल।

राजेन्द्र प्रसाद भारतीय स्वतंत्रता के कार्यकर्ता रहनी आ कांग्रेस पार्टी के नेता रहनी। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में इहाके एक प्रमुख भूमिका निभइले रहनी। उहाँ के संविधान सभा के प्रमुख के रुप में भी भूमिक निभइले रहनी जिनके अध्यक्षता में 1948 से लेके 1950 के बीच गणतंत्र संविधान के मसौदा तैयार भइल। उँहाके स्वतंत्र भारत में प्रथम भारत के कैबिनेट में भी थोड़ा समय खातिर कैबिनेट मंत्री के रुप में आपन सेवा देले रहनी।

देशरत्न डॉ0 राजेन्‍द्र प्रसाद स्वतंत्रता आंदोलन में नेतृत्व करे खातिर जेतना हो सकत रहे ओतना दिन पटना में रहनीं। 6 फरवरी 1921 के बिहार विद्यापीठ के स्थापना भइल तब से उँहाके अहिजा खातिर काम कईनी, अहिजा रहनी।

ध्यान देबे लाएक बात की बहुत हाल ले सिवान में कैथी लिपि में भोजपुरी लिखल जात रहल ह। पर सरकारी प्रोपगेंडा आ हिन्दी के प्रचार प्रसार के फेरा में कैथी (𑂍𑂶𑂟𑂲) लिपि आ भोजपुरी भाषा, ई दुनू के बलि दे दिहल गइल।

डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद- स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति, डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद जी के घर जिरादेई गाँव में अवस्थित बा, जौन कि अहिजा से 8 किमी पश्चिम में स्थित बा। उँहा के स्वंत्रता आंदोलन के एगो कार्यकर्ता रहनी आ कांग्रेस पार्टी के नेता भी रहनी, भारतीय स्वतंत्रता खातिर इहाँके एगो अहम भूमिका निईले रहनी।




#Article 55: पच्छिम चंपारण जिला (124 words)


पश्चिम चम्पारण जिला बिहार के 38 गो जिला में से एगो ह। ई तिरहुत प्रमंडल के एगो जिला ह।
इ बिहार के उतरी भाग मेँ बा।बेतिया,बगहा,नरकटियागंज,हरिनगर,भैरोगंज आदि इ जिलवा के मेन शहर ह।इ जिला के सटले नेपाल देश बा।
इ जिला के इतिहास त बङी बढिया बा|
पुरनका चंपारण जिला से काट  के 1972 में पश्चिम चंपारण के नया जिला बनावल गइल . बेतिया के एह जिला के मुख्यालय बनावल गइल .कहल जाला  की बेतिया के नाम बेंत पर पड़ल बा जौन कि एह इलाका में पहिले आम तौर  पर पावल जाय .चंपारण ,चम्पक अरण्य के बिगड़ल रूप ह ,काहे  कि प्राचीन काल में एह इलाका में बहुत सारा चंपा के गाछ रहे आ साधू महात्मा लोग ओ जंगलन में तपस्या करे लोग .




#Article 56: अरवल जिला (241 words)


अरवल(कायथी: 𑂃𑂩𑂫𑂪) जिला बिहार राज के एगो जिला हे। ई मगध प्रमंडल के अंतर्गत आवाs हे।कुछ साल पहिले तक़ इ जहानाबाद जिला के भाग हल।इ जिला के सोन नद (सोन पुल्लिंग हे) के वरदान प्राप्त हे।जिला के मुख्य व्यवसाय कृषि हे।यहाँ बहुत ही उर्वर आउ सोन से सिंचित माटी हे।छोटे बडे नहर से सिंचाई के उतम व्यवस्था हे।केयाल के अहरा बिहार राज्य के सबसे बडा अहरा हे।लारी में माता सती माई के मंदिर लंगटा बाबा मंदिर ,पोखवाँ के वागेश्वरी माई, मधुश्रमा मे च्यवन ऋषि आश्रम, देकुड मे बाबा दुधेश्वरनाथ इ जिला के प्रमुख पवित्र स्थल हे।जमीन्दारी उन्मूलन के पहिले इ अरवल जिला के क्षेत्र केयाल राज पण्डुई राज आउ पहाडपुर जमींदारी के भाग हल।इ जिला के पुराना इतिहास बहुत गौरवशाली हे, केयालगढ के नेतृत्व मे यहाँ के लोग औरंगजेब जइसन बर्बर मुगल शासक से सोन के खुला मैदान मे महीनो टक्कर लेलन हल।इ लडाइ बाबा दुधेश्वरनाथ मंदिर के सुरक्षा के ले के शुरू होएल हल, जेकरा औरंगजेब तोड़े के ठान लेलक हल।देकुड मे बाबा दुधेश्वर नाथ के प्राचीन मंदिर हे जेकर अग्रहार के रूप मे गुप्तकाल मे राजा नरसिह वर्मन सूर्यशरमन् नाम के वत्सगोत्री ब्राह्मण के केयालगढ के साथ १२२ गाँव देलन हल।मंदिर के देख-रेख और पाण्डित्य के जिम्मेवारी  केयाल के वत्सगोत्री अग्रहार ब्राह्मण के हल।रणपण्डित मयुर भट्ट के भी जन्म स्थान एही जिला के केयाल ही हे जे १२वी सदी मे बेतिया राज के नीव रखलन हल।एही जिला महाकवि बाणभट्ट के रूप मे भारत के एगो महान विद्वान देलक हे।




#Article 57: आंध्र प्रदेश (269 words)


आंध्र प्रदेश भारत के 28 राज्य सब में से एगो राज्य बा। भारत के दक्खिन-पूरबी हिस्सा में मौजूद एह राज्य के रकबा लगभग  बाटे आ एह तरीका से ई भारत के आठवाँ सभसे बड़हन राज्य बा। साल 2011 में भइल जनगणना के हिसाब से इहाँ के कुल आबादी 49,386,799 बा आ जनसंख्या अनुसार ई भारत के 10वाँ राज्य बाटे। एह राज्य के सभसे ढेर जनसंख्या वाला शहर विशाखपट्नम बा।

तारीख 2 जून 2014 के आंध्र प्रदेश के उत्तर-पच्छिमी हिस्सा एकरा से बिलग क दिहल गइल आ ओकरा के तेलंगाना नाँव से नाया राज्य बनावल गइल; लंबा समय से राजधानी रहल हैदराबाद शहर भूगोलीय रूप से तेलंगाना के भीतर आवे के कारन ओही में रह गइल हालाँकि, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन एक्ट, 2014 के अनुसार ई बेवस्था कइल गइल कि कम से कम दस साल खाती आंध्र प्रदेश के कार्यकारी राजधानी हैदराबादे रही। नई, वास्तविक राजधानी जे नदी के तीरे बिकसित कइल जा रहल बा अमरावती के नाँव से बा आ आंध्र प्रदेश राजधानी बिकास क्षेत्र (APCRDA) के अधीन बाटे

आंध्र प्रदेश समुंद्र के किनारे मौजूद राज्य हवे आ एकर तटरेखा  के लगभग लंबाई वाली बा – गुजरात के बाद भारत में एह मामिला में एकर दुसरा नमर बाटे – आ करीबन 15,000 किमी2 जलक्षेत्र एकरे राज्यक्षेत्र के हिस्सा हवे। आंध्र प्रदेश के सीमा तेलंगाना से उत्तर-पच्छिम में, छत्तीसगढ़ आ ओडिशा से उत्तर-पूरुब में, पच्छिम में कर्नाटक से आ दक्खिन में तमिल नाडु से सटे ला आ एकरे पूरुब ओर बंगाल के खाड़ी बाटे। केंद्र शासित प्रदेश पुद्दुचेरी के एगो हिस्सा यनम एह राज्य के अंदर एन्क्लेव के रूप में बा आ काकीनाड़ा क्षेत्र में गोदावरी डेल्टा के इलाका में बा।




#Article 58: अरुणाचल प्रदेश (160 words)


अरुणाचल प्रदेश भारत की पूर्वोत्तर इलाका में एगो राज्य ह। ए कर राजधानी ईटानगर में स्थित बा। पूर्वोत्तर के सबसे उत्तरी हिस्सा में स्थित ए राज्य में हिमालय पर्वत आ ए पर पैदा जंगल ए राज्य के बहुत सुन्दर बनावेलें। ए प्रान्त क कुल क्षेत्रफल 83,743 किमी² बा।

भारत क सबसे पूरबी बिंदु एही राज्य में स्थित बा आ भारत देस में सबसे पहिले सुरुज भगवान एहिजा उगे लें एहीसे एकर नाँव अरुणाचल धराइल बा।

अरुणाचल प्रदेश में विविध प्रकार क आदिवासी लोग बसल बा आ इहाँ जनसंख्या बाकी जगह की तुलना में कम बा। 
अरुणाचल प्रदेश क जनसंख्या 2011 की जनगणना की मोताबिक 13,82,611 बा आ जनघनत्व 17 व्यक्ति प्रति किमी² बाटे।
एही से इहवाँ प्राकृतिक पर्यावरण क सुरक्षा अभिन ले भइल बा।

भूगोलीय दृष्टि से ई पुरबी हिमालय क हिस्सा हवे।

इहँवा बहुत प्रकार क आदिवासी लोग रहेला। बौद्ध धर्म क बिस्तार भी मिलेला। तवांग क बौद्ध मठ प्रसिद्ध बाटे।

अरुणाचल प्रदेश में 16 ठे जिला बाटे -




#Article 59: शिव (153 words)


शिव एगो प्रमुख हिंदू देवता हवें। हिंदू धर्म में शिव के बिष्णु आ ब्रह्मा के साथे त्रिमूर्ति के रूप में पूजल जाला जबकि शैव मत में इनके सभसे बड़हन देवता आ साक्षात ईश्वर के रूप मानल जाला। त्रिदेव के रूप में इनके बिनास भा संहार के देवता भी मानल जाला जबकि ब्रम्हा के रचना आ बिष्णु के पालन के देवता मानल जाला।

वैदिक साहित्य में इनके रूप रूद्र नाँव के देवता में देखल जाला हालाँकि, कुछ बिद्वान लोग शिव के पूजा वैदिक युग से पहिले से होखत माने ला। शैव मत के परभाव काश्मीर आ दक्खिन भारत में खासतौर से देखे के मिले ला। एकरे अलावा जहाँ-जहाँ शक्ति के उपासना के जोर बा ओह इलाका सभ में भी शिव के पूजा महत्व के चीज हवे। 

भगवान गणेश आ कार्तिकेय जी के पिता जी आ माता पार्वती के पति बतावल जालें। पुराण सभ के जुग के, शिव से जुड़ल प्रमुख ग्रन्थ शिव पुराण हवे।




#Article 60: जम्मू-काश्मीर (212 words)


जम्मू काश्मीर चाहे जम्मू अउरी काश्मीर भारत के 9 गो संघ राज्यक्षेत्र (केंद्रशासित प्रदेश) में से एगो संघ राज्यक्षेत्र बाटे। एकर राजधानी श्रीनगर आ जम्मू में स्थित बा। ई संघ राज्य क्षेत्र एगो बड़हन भूगोलीय इलाका काश्मीर के हिस्सा हवे आ 31 अक्टूबर 2019 के संघ राज्यक्षेत्र के रूप में अस्तित्व में आइल। एकरा पहिले ई भारत के जम्मू काश्मीर राज्य के हिस्सा रहल जेकरा के दू हिस्सा में बाँटल गइल, दुसरका हिस्सा लद्दाख के भी संघ राज्यक्षेत्र के दर्जा मिलल।

वर्तमान में एह में जम्मू मंडल आ काश्मीर मंडल के रूप में 2 गो मंडल आ इनहन के अंदर कुल 20 गो जिला बाड़ें। ई एगो अइसन संघ राज्यक्षेत्र बनावल गइल बा जेकर आपन बिधानसभा होखी।

पुराणन की कथा की हिसाब से कश्यप ऋषि की नाँव पर काश्मीर नाँव पड़ल। इहो कहल जाला की इहँवा केसर क खेती होला जेवना से काश्मीर (बिंदी) लगावल जाला एही से एकर नाँव काश्मीर पड़ल।

सम्राट अशोक इहँवा बौद्ध धर्म क परचार करववलें।
प्राचीन समय में इहाँ कर्कोट, उत्पल आ लोहार वंश क राजा लोग शासन कइलें।

मुसलमानन क आगमन इहँवा 13 वीं आ 14 वीं सदी में भइल।

महाराजा हरिसिंह 26 अक्टूबर 1947 के भारत में कश्मीर कि विलय पत्र पर दसखत कइलें।

भारत की सबसे उत्तरी हिस्सा में हिमालय पहाड़ क इलाका हउवे।




#Article 61: झारखंड (1338 words)


झारखंड भारत के 28 राज्यन में से एगो राज्य ह आ एकर राजधानी राँची में बा। ई इलाका पहिले बिहार राज्य के हिस्सा रहल आ 15 नवंबर 2000 में एकरा के अलग राज्य के दर्जा दिहल गइल। पठारी आ पहाड़ी इलाका आ बन-संपदा से भरपूर ई क्षेत्र खास तौर से अपना खनिज संसाधन सभ खाती जानल जाला आ एही कारन इहाँ कई गो खनिज आधारित उद्योग भी बाड़ें; एकरा बावजूद बिकास के मामिला में ई राज्य पिछड़ल बाटे।

झारखंड राज्य के कुल रकबा 79,714 वर्ग किलोमीटर बाटे आ ई भारत के पूरबी हिस्सा में पड़े वाला राज्य हवे। एकरे उत्तर में बिहार, पूरुब ओर पच्छिम बंगाल, दक्खिन में उड़ीसा राज्य आ पच्छिम ओर छत्तीसगढ़ आ कुछ सीमा उत्तर प्रदेश के साथे लागे ला। भारत के भौतिक बिभाजन अनुसार ई इलाका पूरबी पठार के हवे जेह में कैमूर श्रेणी से ले के छोटा नागपुर के पठार के इलाका आवे ला। उत्तर के हिस्सा के नदी सभ गंगा थाला के नदी बाड़ीं स आ दक्खिन से उत्तर के ओर बहे लीं जबकि दक्खिनी हिस्सा के अपवाह पूरुब ओर के बा। जलवायु मानसूनी हवे, साल में चार महीना बरखा के होला जे जून से सितंबर ले होला। माटी बहुत उपजाऊँ ना हवे बाकी बनस्पति के मामिला में धनी राज्य हवे।

झारखंड के कुल जनसंख्या, साल 2011 के जनगणना अनुसार, 32,988,134 रहल। इहाँ के काफी सारा लोग आदिवासी समुदाय से हवे आ उद्योग के चलते बाहरी जगह के लोग भी इहाँ के शहर सभ में भारी संख्या में मिले लें। राजधानी राँची, धनबाद आ जमशेदपुर एह राज्य के प्रमुख शहर हवें।

झारखंड के इतिहास पत्थर जुग से सुरू होला। एह काल में इहाँ के लोग नुकीला पाथर आ हाथ से चलावे वाली पाथर के कुल्हाड़ी के इस्तेमाल करे जिनहन के सबूत दामोदर घाटी से मिलल बा आ हजारीबाग के बाँदा इलाका अउरी पूरबी सिंहभूमि के बारधा, बारबिल, हिरजिहाती इत्यादि जगह सभ से मिलल बाटे। पत्थर जुग के सभसे अंतिम हिस्सा जेकरा के नवपत्थर काल (नियोलिथिक) कहल जाला, छिन्नी, आरी, चाकू इत्यादि खाती जानल जाला। धियान देवे वाली बात ई बा कि भारत में कुल 12 किसिम के कुल्हाड़ी पावल गइल बा, आ एह में से बारहो किसिम के कुल्हाड़ी झारखंड के छोटानागपुर पठार से मिले लीं।

पाथर जुग के बाद तामा आ काँसा के जुग के संक्रमण काल आइल। एह जमाना के चीज भी झारखंड में मिले ला। मानल जाला कि असुर, बिरजिया आ बिरहोर जनजाति के लोग के पूर्वज तामा गला के ओह से हथियार औजार बनावे के कला जानत रहल। काँसा के एगो प्याला लोहरदग्गा से मिलल बा।

ऋग्वैदिक काल में जवन बड़हन इलाका कीकट प्रदेश कहाय ऊ अथर्ववेद के काल तक कई हिस्सा में बँट गइल आ मगध, पौंड्र, अंग इत्यादि एकर हिस्सा बन गइलेन। वर्तमान झारखंड के इलाका मुख्य रूप से पौंड्र आ अंग (पच्छिमी) वाला इलाका रहल।

झारखंड में ब्रिटिश परभाव के सुरुआत 1765 के बाद भइल, इलाहाबाद के संधि के बाद मुगल बादशाह शाह आलम द्वारा बिहार, बंगाल आ उड़ीसा के दीवानी ईस्ट इंडिया कंपनी के सउँप दिहल गइल। एकरे चलते ओह समय के छोट-छोट राज्य सभ जे एह इलाका में रहलें, कंपनी के परभाव में आ गइलें। कंपनी के योजना बंगाल से बनारस ले छोटा नागपुर हो के नया ब्यापारिक रास्ता सुरू कइल चाहत रहल आ एह इलाका में ढालभूम, पोरहाट आ कोल्हान नियर राज्य रहलें। कंपनी के प्रवेश एह इलाका में सिंहभूम से सुरू भइल, 1766 में कंपनी तय कइलस कि अगर सिंहभूम के राजा लोग कंपनी के अधीन हो जायँ आ टैक्स देवें तब उनहन लोग के खिलाफ सैनिक कार्रवाई ना कइल जाई। सिंहभूम के राजा लोग माने से इनकार क दिहल आ 1767 में फर्ग्युसन के अगुआई में ब्रिटिश सेना एह इलाका पर हमला कइलस।

बिहार (जेह में ओह समय इहो इलाका आवे) के बिद्रोही जमींदार सभ खाती छोटा नागपुर पठार के इलाका शरण के जगह के रूप में, जब इनहन लोग से टैक्स वसूली करे के होखे लोग भाग के जंगल में छिप जाय। एकरे अलावा तत्कालीन बिहार के पच्छिमी सीमा के मराठा राजा लोग से भी खतरा रहल। एह सभ से निपटे खाती कंपनी पलामू के किला पर आपन अधिकार कइलस आ एह इलाका में कंपनी के शासन के मजबूती मिलल।

सभके बावजूद, एह इलाका के भूगोल आ जनजाति लोग के आबादी के संस्कृति पूरा तरीका से कब्बो कंपनी शासन के अधीनता ना स्वीकार कइलेन आ जमींदारन आ कंपनी के खिलाफ कई गो बिद्रोह आ आंदोलन भइलें। एह बिद्रोह सभ में चुआर बिद्रोह, तिलका माँझी आंदोलन, पहड़िया बिद्रोह, मुंडा बिद्रोह प्रमुख रहलें। तिलका माँझी के 1785 में भागलपुर में फाँसी दिहल गइल। 

झारखंड राज्य भारत के पूरबी हिस्सा में पड़े ला। एकरे उत्तर में बिहार, पुरुब ओर पच्छिम बंगाल, दक्खिन में ओडिशा आ पच्छिम ओर छत्तीसगढ़ अउरी [उत्तर प्रदेश राज्य बाड़ें। राज्य के कुल रकबा 79.7 लाख हेक्टेयर बा।

झारखंड के जादेतर हिस्सा छोटा नागपुर के पठार वाला हिस्सा हवे। ई पठार खुद दक्खिनी भारत के पठार (दक्कन पठार) के हिस्सा हवे आ एगो महादीपी पठार हवे जे पुराना समय में गोंडवानालैंड (दक्खिनी महादीप) के हिस्सा रहे। पच्छिमी हिस्सा में राजमहल के पहाड़ी वाला हिस्सा में दक्कन लावा के हिस्सा भी मिले ला। ऊबड़-खाबड़ पठारी हिस्सा कई गो नदी सभ के उदगम के इलाका हवे आ सोन, दामोदर, उत्तर कोइल, दक्खिन कोइल, शंख आ ब्राह्मणी नियर कई गो नदी सभ के ऊपरी बेसिन एही पठार पर पड़े ला। पठारी इलाका होखे के कारण झारखंड के जादेतर हिस्सा अभिन ले जंगल वाला बा। हाथी आ शेर एह इलाका में पावल जालें।

झारखंड में लाल, लैटराइट आ राजमहल वाला हिस्सा में काली माटी प्रमुख रूप से मिले लीं। पठारी इलाका होखे के कारण आ बहुत उपजाऊ माटी ना होखे के कारण खेती के ओतना बिकास नइखे भइल जेतना की उत्तर ओर मैदानी हिस्सा में भइल बा।

झारखंड के जलवायु नम उपोष्णकटिबंधी (Humid subtropical) से ले के पूरबी-दक्खिनी हिस्सा में उष्णकटिबंधी नम-सूखा (सवाना) जलवायु हवे। भारतीय मानसून के परभाव के चलते इहाँ चार गो सीजन होखे लें गर्मी, बरसात, शरद आ जाड़ा के रितु। गर्मी अप्रैल के महीना से जून ले पड़े ले आ सभसे गरम महीना मई के होला जब अधिकतम तापमान 38 °C(100 °F) आ न्यूनतम 25 °C (77 °F) के आसपास रहे ला। बीच जून से ले के अक्टूबर ले मानसून के परभाव के चलते बरसात के सीजन होला। बरखा साल भर में लगभग 40 इंच (1,000 मिमी) पच्छिमी आ बिचला हिस्सा में होखे ले जबकि दक्खिनी-पूरबी हिस्सा में 60 इंच (1,500 मिमी) ले होखे ले। साल भर के एह बरखा के लगभग आधा हिस्सा जुलाई आ अगस्त में बरिसे ला। नवंबर से फरवरी ले जाड़ा के मौसम होला आ राँची के तापमान एह दौरान 10 °C (50 °F) से 24 °C (75 °F) रहे ला। बसंत के सीजन फरवरी से अप्रैल ले होला।

जब झारखंड राज्य बनल तब एह में बिहार से अलगा भइल 18 जिला रहलें। कुछ जिला सभ के सीमा में बदलाव कइल गइल आ नाया 6 गो जिला बनावल गइलें। एह नया जिला सभ के नाँव बा लातेहार, सरायकेला खरसाँवा, जामताड़ा, साहेबगंज, खूँटी आ रामगढ़। वर्तमान समय में झारखंड में कुल 5 गो प्रमंडल (डिवीजन) आ 24 गो जिला बाड़ें। झारखंड के जिला सभ के बारे में एगो रोचक बात ई बा कि एकरे दू गो जिला लोहरदग्गा आ खूँटी के अलावा बाकी सगरी जिला अगल-बगल के राज्य सभ के साथ सीमा बनावे लें।

ऊपर दिहल गइल प्रशासनिक बिभाजन में, प्रमंडल के जिम्मेदार अधिकारी के आयुक्त (कमिश्नर) कहल जाला जे लोग अपना जिला सभ के अधीकारी सभ के बीचा में कोओर्डिनेशन के काम करे ला, हालाँकि, रोज-रोज के कामकाज में इनहन लोग के कौनों हस्तक्षेप ना रहे ला। जिला स्तर पर उपआयुक्त लोग होला, इहे उपआयुक्त लोग जब रेवेन्यू के काम करे ला तब कलेक्टर कहाला आ कानून-बेवस्था के काम देखे ला तब जिला मजिस्ट्रेट कहाला। आम जनता सीधे एह लोग के डीएम के रूप में जाने ले।

जिला के नीचे के प्रशासनिक खंड अनुमंडल होलें। झारखंड में वर्तमान (2018) में कुल 37 गो अनुमंडल बाड़ें। अनुमंडल के अलावा पुलिस के कामकाज खाती सर्किल आ बिकास के काम खाती प्रखंड (ब्लॉक) में बिभाजन कइल गइल बा। स्थानीय स्वशासन के इकाई ग्राम पंचायत होखे लीं। आमतौर पर लगभग 5000 जनसंख्या पर एगो ग्राम पंचायत के गठन कइल गइल बा।

झारखंड के सभसे बड़ शहर

सरकार

सामान्य जानकारी




#Article 62: महाराष्ट्र (268 words)


महाराष्ट्र भारत के 28 राज्य में से एगो ह। ई के राजधानी मुंबई में स्थित बा। महाराष्ट्र भारत क एगो राज्य ह जवन की भारत की दक्षिण मध्य में स्थित बा। एकर गिनती भारत की सबसे धनी राज्यन में होला। एकर राजधानी मुंबई  ह जेके भारत क सबसे बड़ शहर और देश क आर्थिक राजधानी की रूप में भी जानल जाला। और एइजा क पुणे शहर के भी भारत की बड़ा महानगरन में गिनल जाला।

महाराष्ट्र क जनसंख्या सन 2011 में 11,23,72,972 रहे, विश्व में सिर्फ़ ग्यारह ऐसन देश बान स जेकर जनसंख्या महाराष्ट्र से ज़्यादा बा। ए राज्य क निर्माण 1 मई 1960 के मराठी भाषी लोगन की माँग पर कइल गइल रहे। एइजा मराठी ज्यादा बोलल जाला। पुणे, औरंगाबाद, कोल्हापूर, नाशिक और नागपुर महाराष्ट्र क अन्य मुख्य शहर हंव स।

प्राचीन और मध्यकालीन महाराष्ट्र में सतावना वंश, राष्ट्रकूट वंश, पश्चिमी चालुक्य, मुगल और मराठा साम्राज्य भी शामिल रह न स। 1,18,809 वर्ग मील (3,07,710 किमी) में फैलल, इ राज्य अरब सागर और कर्नाटक, तेलंगाना, गोवा, गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और दादरा और नगर हवेली से पश्चिम की तरफ बा। राज्य क प्रमुख नदी गोदावरी और कृष्णा हई स। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात की बीच सीमा की निकट नर्मदा और ताप्ती नदी प्रवाहित होली स। महाराष्ट्र भारत में दूसरा सबसे शहरीकृत राज्य ह। राज्य में पंढरपुर, देहु और आलंदी, शेगांव सहित कईगो लोकप्रिय हिंदू तीर्थस्थल बान स। भारत और अन्य हिस्सन से तीर्थयात्री लोगन के आकर्षित करे वाला अन्य स्थान में नांदेड़ में हजूर साहिब गुरुद्वारा, शिर्डी में साई बाबा मंदिर और नागपुर में दीक्षाभूमि शामिल बा।

महाराष्ट्र सबसे धनी और भारत की सबसे विकसित राज्यन में से एगो ह, जवन देश की औद्योगिक उत्पादन क 25% और एकर जीडीपी (2010-11) में 23.2% योगदान देला।




#Article 63: सिक्किम (3346 words)


सिक्किम भारत के 28 राज्यन में से एगो राज्य ह। हेकर राजधानी गांतोक बा। सिक्किम के जनसंख्या भारत के राज्य मे से सभसे कमती बा। सिक्किम नामग्याल राजतन्त्र द्वारा बनल एगो स्वतन्त्र राज्य रहल, बाकीर प्रशासनिक समस्या सभ के मारे आ भारत से विलय के जनमत के चलते 1975 में एगो जनमत-संग्रह करावल गइल। ओहि के बाद राजतन्त्र के अंत भइल औरि भारतीय संविधान के नियम-प्रणाली के दांचा में ई राज्य प्रजातन्त्र भ गइल।

अंगूठे के आकार जैसन ई राज्य के पच्छिम में नेपाल देस परेला, उत्तर आ पूरुब में चीन देस के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र आ ई दक्खिन-पूर्व में भूटान से जुरल बा। भारत के पश्चिम बंगाल राज्य हेकरे दक्खिन में बा। सिक्किम मे अंगरेजी, नेपाली, लेप्चा, भूटिया, लिंबू औरि हिंदी जैसन भाषा के पर्योग होला परन्तु लिखे खातिर अंगरेजी औरि नेपालि ही उपयोग जादा होला। हिंदू धर्म आ बज्रयान बौद्ध धर्म सिक्किम के प्रमुख धर्म बा। लेकिन यहा औरि जाति के लोग भि रहेला जैसे कि मुस्लिम, हिन्दु, लेपचा, राइ, गुरुन्ग आदि।

कहल जाला कि बौद्ध संत गुरु रिम्पोचे 9 वीं सदी के सिक्किम के बौद्ध धर्म और राजशाही के पूर्वाभास युग शुरू करले. ओहि के अनुसार नामग्याल राजवंश 1642 में स्थापित करल गइल। अगले 150 वर्ष से ई राज्य नेपाली आक्रमणकारियों के खातिर लगातार छापा मारल गइल और प्रादेशिक नुकसान भैइल।

अपने छोटे आकार के बावजूद भि सिक्किम भूगोलीय दृष्टि से काफ़ी विभिन्न बा। कंचनजंगा जो कि दुनिया के तीसरा सबसे ऊंचा चोटी बा, सिक्किम के उत्तरी पश्चिमी भाग में नेपाल की सीमा पर परेला और ई पर्वत चोटी के प्रदेश के कई भागो से आसानी से ही देखाइ देला। सिक्किम के विशेषता जेमे एकर साफ सुथरा प्राकृतिक सुंदरता एवं राजनीतिक स्थिरता शामिल बा।

सिक्किम शब्द के लिम्बू भाषा के शब्द के अनुसार(नवीन) तथा ख्यिम(अर्थात महल अथवा घर - जो कि प्रदेश के पहिल्का राजा फुन्त्सोक नामग्याल के द्वारा बनाईल गयिल महल के संकेतक बा। तिब्बती भाषा में सिक्किम के दॅञ्जॉङ्ग, अर्थात चावल की घाटी कहल जाला।

बौद्ध भिक्षु गुरु रिन्पोचे (पद्मसंभव) के 8 वीं सदी में सिक्किम दौरा ईहा से सम्बन्धित सबसे पुरान विवरण हवे। अभिलेखित बावे कि उहाके बौद्ध धर्म के प्रचार कैनिह, सिक्किम के आशिवाद देहनिह। औरि कुछ सदियों के बाद आवे वाला राज्य के भविष्यवाणी कअरले रहलन। मान्यता के अनुसार 14 वीं सदी में ख्ये बुम्सा, पूर्वी तिब्बत में खाम के मिन्यक महल के एगो राजकुमार के एक रात दैवीय दृष्टि के अनुसार दक्षिण की ओर जाय के आदेश मिलल। उनकर ए ही वंशजन् सिक्किम में राजतन्त्र के स्थापना कर्लस। 1642 इस्वी में ख्ये के पाँचवें वंशज फुन्त्सोंग नामग्याल के तीन बौद्ध भिक्षु, जउन उत्तर, पूर्व तथा दक्षिण से आइल रहला । द्वारा युक्सोम में सिक्किम के प्रथम चोग्याल(राजा) घोषित कइल्य गइल्। इ प्रकार सिक्किम में राजतन्त्र के शुरूआत भइल।
फुन्त्सोंग नामग्याल के पुत्र, तेन्सुंग नामग्याल उनकरा बाद 1670 में कार्य-भार संभालन। तेन्सुंग राजधानी के युक्सोम से रबदेन्त्से स्थानान्तरित कर दिहलन। सन 1700 में भूटान में चोग्याल के अर्बहन, जिसे राज-गद्दी से वंचित कर दिया गया था, द्वारा सिक्किम पर आक्रमण हुआ। तिब्बतियों की सहयता से चोग्याल को राज-गद्दी पुनः सौंप दी गयी। 1717 तथा 1733 के बीच सिक्किम के नेपाल औरि भूटान के अनेक आक्रमणों के सामना करेके पड़ल जेकारा कारण रबदेन्त्से के अन्तत:पतन हो गइल।

वर्ष 2002 मे चीन के एगो बड़ शर्मिंदगी के सामना तब करेके पड़ल जब सत्रहवें कर्मापा उर्ग्यें त्रिन्ले दोरजी, जेकरा के चीनी सरकार एक लामा घोषित कर चुकल रहल, एक नाटकीय अंदाज में तिब्बत से भाग के सिक्किम के रुम्तेक मोनास्ट्री मे जा पहुंचल। चीनी अधिकारी ई धर्म संकट मे जा फँसलन कि ई बात का विरोध भारत सरकार से कैसे करल जाव। भारत से विरोध कइला के अर्थ ई निकलित कि चीनी सरकार  प्रत्यक्ष रूप से सिक्किम के भारत के अभिन्न अंग के रूप मे स्वीकार ले ले बा।
चीनी सरकार के अभी तक सिक्किम पर औपचारिक स्थिति ई रहलक  कि सिक्किम एगो स्वतंत्र राज्य हवे जउना पर भारत  अधिक्रमण कर ले ले बा। [3][8] चीन अंततः सिक्किम के 2003 में भारत के एक राज्य के रूप में स्वीकार कैलश जउना से भारत-चीन संबंधों में आइल कड़वाहट कुछ कम भैइल। बदले में भारत तिब्बत के चीन के अभिन्न अंग स्वीकार कइलश। भारत और चीन के बीच भैइल एगो महत्वपूर्ण समझौते के तहत चीन एगो औपचारिक मानचित्र जारी कइलश जउना मे सिक्किम के स्पष्ट रूप मे भारत की सीमा रेखा के भीतर दिखावल गइल। ई समझौता पर चीन के प्रधान मंत्री वेन जियाबाओ औरि भारत के प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह हस्ताक्षर कइलन। 6 जुलाई, 2006 मे हिमालय के नाथुला दर्रे के सीमावर्ती व्यापार के खातिर खोल दियल गइल जउना ई संकेत मिलत बा की इस क्षेत्र के लेके दूनु देशन के बीच सौहार्द के भाव पैदा भैइल बा। [9]

अंगूठे के जैसन आकार के सिक्किम पूरा पर्वतीय क्षेत्र बाटे । विभिन्न स्थानों के ऊँचाई समुद्री तल से 280 मीटर (920 फीट) से 8,585 मीटर (28,000 फीट) तक बाटे । कंचनजंगा यहाँ के सबसे ऊंचा चोटी ह । यहा के अधिकतर हिस्सा खेती।कृषि के खातिर अन्युपयुक्त हाटे । एकर बावजूद कुछ ढलान के कारन खेतों में बदल दियल गइल बा और पहाड़ी तरीके से खेती करल जाला । बर्फ

हिमालय के ऊँची पर्वत श्रंखलाओं ने सिक्किम के उत्तरी, पूर्वी औरि पश्चिमी दिशा मे अर्धचन्द्राकार।अर्धचन्द्र में घेर के रखल बा । राज्य के अधिक जनसंख्या वाला क्षेत्र अधिकतर राज्य के दक्षिणी भाग मे, हिमा एकलय के कम ऊँचाई वाल श्रंखलाओं मे स्थित बा । राज्य मे अट्‌ठाइस पर्वत चोटि, इक्कीस हिमानी, दो सौके कारण सिक्किम के मिट्टी भूरी मृत्तिका, तथा मुख्यतः उथला औरि कमज़ोर हटे ।यहाँ के मिटटी खुरदरी तथा लौह जारेय से थोड़ अम्लीय ह् । एमे खनिजी औरि कार्बनिक पोषक के अभाव हटे । अइसन मिट्टी सदाबहार औरि पर्णपाती वनों के योग्य हटे ।
सिक्किम के भूमि के अधिकतर भाग मे केम्ब्रिया-पूर्व(Precambrian) चट्टान से बनल हटे जेकर आयु पहाड़ से बहुत कमति ह्टे । पत्थर फ़िलीतियों।फ़िलीत(phyllite) औरि स्कीस्त से बनल ह्टे।येहि के कारन से and therefore the slopes are highly susceptible to weathering and prone to erosion. This, combined with the intense rain, causes extensive soil 

येहा के मौसम बहुत अछा ह्।भारत के और जगह से बहुत अछा येहा जादा करके ठड रहेला।सिक्किम के अधिकांश आवासित क्षेत्र में, मौसम समशीतोष्ण (टैंपरेट)मे रहेला औरि तापमान कम 28 °सै (82 °फै) से ऊपर यां 0 °सै (32 °फै) से नीचे जाला. सिक्किम में पांच ऋतुएं आवेला: सर्दी, गर्मी, बसंत,पतझड़, औरि वर्षा, जो जून औरि सितंबर के बीच मे आवेला। अधिकतर सिक्किम में औसत तापमान लगभग 18 °सै (64 °फै)रहेला. सिक्किम भारत के उ कुछ राज्यों में से एगो ह जेमे यथाक्रम वर्षा होवेला। हिम रेखा लगभग 6000 मीटर (19600 फीट)बा।
मानसून के महीन में प्रदेश में भारी वर्षा होवेला जेमे काफी संख्या में भूस्खलन होवेला। प्रदेश में लगातार बारिश होवे के कीर्तिमान 11 दिन के ह। प्रदेश के उत्तरी क्षेत्र में शीत ऋतु में तापमान -40 °C से भी कम होऐला। शीत ऋतु एवं वर्षा ऋतु में कोहरा भी जन जीवन के प्रभावित करेला जेमे परिवहन काफी कठिन होजाला।

सिक्किम में चार जनपद ह। प्रत्येक जनपद (जिला)के केन्द्र अथवा राज्य सरकार द्वारा नियुक्त जिलाधिकारी देखेला। चीन की सीमा से लगल होवे के कारण अधिकतर क्षेत्र में भारतीय सेना के बाहुल्य दिखाई देला। कई क्षेत्रों में प्रवेश निषेध ह औरि लोग के घूमे के खातिर परमिट लेवे के परेला। सिक्किम में कुल आठ कस्बे एवं नौ उप-विभाग ह।
यह चार जिले पूर्व सिक्किम, पश्चिम सिक्किम, उत्तरी सिक्किम एवं दक्षिणी सिक्किम हटे जेकर राजधानि क्रमश: गंगटोक, गेज़िंग, मंगन एवं नामची ह। यह चार जिला पुन: विभिन्न उप-विभागों में बाँटल गइल हटे। पकयोंग पूर्वी जिला के, सोरेंग पश्चिमी जिला के, चुंगथांग उत्तरी जिला के औरि रावोंगला दक्षिणी जिला के उपविभाग ह।

सिक्किम हिमालय के निचले हिस्से में पारिस्थितिक गर्मस्थान में भारत के तीन पारिस्थितिक क्षेत्र में से एगो बसल ह। यहाँ के जंगल में विभिन्न प्रकार के जीव जंतु एवं वनस्पतियाँ मिलेला। अलग अलग ऊँचाई होवे के कारन से यहाँ ट्रोपिकल, टेम्पेरेट, एल्पाइन औरि टुन्ड्रा तरह के पौधा भी मिलेला। ऐइसन छोट इलाका में एइसन भिन्नता कम ही जगह पर मिलल जाला।
The flora of Sikkim includes the rhododendron, the state tree, with a huge range of species occurring from subtropical to alpine regions. Orchids, figs, laurel, bananas, sal trees and bamboo in the lower altitudes of Sikkim, which enjoy a sub-tropical type climate. In the temperate elevations above 1,500 metres, oaks, chestnuts, maples, birchs, alders, and magnolias grow in large numbers. The alpine type vegetation includes juniper, pine, firs, cypresses and rhododendrons, and is typically found between an altitude of 3,500 metres to 5,000 m. Sikkim boasts around 5,000 flowering plants, 515 rare orchids, 60 primulas species, 36 rhododendrons species, 11 oaks varieties, 23 bamboos varieties, 16 conifer species, 362 types of ferns and ferns allies, 8 tree ferns, and over 424 medicinal plants. The orchid Dendrobium nobile is the official flower of Sikkim.

The Himalayan Black Bear
The fauna includes the snow leopard, the musk deer, the Bhoral, the Himalayan Tahr, the red panda, the Himalayan marmot, the serow, the goral, the barking deer, the common langur, the Himalayan Black Bear, the clouded leopard, the Marbled Cat, the leopard cat, the wild dog, the Tibetan wolf, the hog badger, the binturong, the jungle cat and the civet cat. Among the animals more commonly found in the alpine zone are yaks, mainly reared for their milk, meat, and as a beast of burden.
सिक्किम के पक्षी जगत में प्रमुख हते - Impeyan pheasant, the crimson horned pheasant, the snow partridge, the snow cock, the lammergeyer and griffon vultures, as well as golden eagles, quail, plovers, woodcock, sandpipers, pigeons, Old World flycatchers, babblers and robins. यहां पक्षि के कुल 550 प्रजाति अभिलिखित किअल गैल बा, जेमे से कुछ के विलुप्तप्रायः घोषित किअल गैल बा।

यह सांख्यिके एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी सिक्किम के सकल घरेलू उत्पाद के प्रवाह के एगो झलक ह(करोड़ रुपय में)

 साल     सकल घरेलू उत्पाद

 1980       52

 1985       122

 1990       234

 1995       520
 
 2000       971

 2003       2378.6

सिक्किम एगो कृषि प्रधान।कृषि राज्य ह्ते औरि यहाँ सीढ़ीदार खेत में पारम्परिक पद्धति से कृषि करल जाला । यहाँ के किसान इलाईची, अदरक, संतरा, सेब, चाय और पीनशिफ आदि के खेती करेले ।चावल राज्य के दक्षिण इलाके में सीढ़ीदार खेत में उगावेले। पुरा भारत में इलाईची के सबसे अधिक उपज सिक्किम में होला । पहाड़ी क्षेत्र होवे के कारण औरि परिवहन के आधारभूत सुविधाओं के अभाव से यहाँ कोई बड़ा उद्योग न ह । मद्यनिर्माणशाला, चर्म-उद्योग तथा घड़ी-उद्योग सिक्किम के मुख्य उद्योग ह । यह राज्य के दक्षिणी भाग में स्थित ह- मुख्य रूप से मेल्ली औरि जोरेथांग नगरों के । राज्य में विकास दर 8.3% ह्टे, जो दिल्ली के पश्चात राष्ट्र भर में सर्वाधिक ह।

इलायची सिक्किम के मुख्य नकदी फसल ह।
हाल के कुछ वर्ष में सिक्किम के सरकार ने प्रदेश में पर्यटन के बढ़ावा देवे प्रारम्भ करले ह । सिक्किम में पर्यटन के बहुत संभावना ह औरि येहि के लाभ उठाके सिक्किम के  अप्रत्याशित वृद्धि होएल ह। आधारभूत संरचना में सुधार के चलते, यह उपेक्षा करल जा रहल बा। ऑनलाइन सट्टेबाजी राज्य में एगो नए उद्योग के रूप में उभर कर आ गइल बा । प्लेविन जुआ, जेकरा के विशेष रूप से तैयार किएल गइल अंतकों पर परयोग करल जाला,राष्ट्र भर में बहुत वाणिज्यिक पराप्त भइल बा ।राज्य में प्रमुख रूप से ताम्बा, डोलोमाइट, चूना पत्थर, ग्रेफ़ाइट, अभ्रक, लोहा और कोयला आदि खनिजों का खनन करल जाला।
जुलाई 6, 2006 के नाथूला दर्रा, जो सिक्किम के ल्हासा, तिब्बत से जोड़ला,इ के खुले से यह आशा जताव तरन कि एसे सिक्किम के अर्थव्यवस्था के बढ़ावा मिलि, भले वे धीरे-धीरे ही देखे के मिलि ।यह दर्रा, जो 1962 में 1962 भारत-चीन युद्ध।भारत-चीन युद्ध के पश्चात बंद कर दिहल गइल , प्राचीन रेशम मार्ग के एगो हिस्सा रहल औरि ऊन, छाल औरि मसालों।मसाला के व्यापार में सहायक करत रहल ।

सिक्किम में कठिन भूक्षेत्र होऐ के कारण इहा कौनो हवाई अड्डा अथवा रेल स्टेशन न हवे ।नजिक हवाईअड्डा बागदोगरा हवाईअड्डा, सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल में बा। इ हवाईअड्डा गंगटोक से 124 कि0मी0 दूर मे बा । गंगटोक से बागदोगरा तक सिक्किम से हेलीकॉप्टर सर्विस द्वारा एगो हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध बा। जेकर उड़ान 30 मिनट लम्बआ बा, दिन में केवल एक बार चलेला औरि केवल 4 लोगो के ले जा सकेला ।गंगटोक हैलीपैड राज्य मे एकमात्र असैनिक हैलीपैड बा । निकटतम रेल स्टेशन नई जलपाईगुड़ी में बा जोन सिलीगुड़ी से 16 किलोमीटर।कि0मी0 कि दूरी मे बा ।
राष्ट्रीय राजमार्ग 31A सिलीगुड़ी के गंगटोक से जोरेला । ई एगो सर्व-ऋतु मार्ग बाटे तथा सिक्किम के रंग्पो मे प्रवेश करे खातिर। पश्चात तीस्ता नदी के समानान्तर चलेला। बहुत सार्वजनिक अथवा निजी वाहन हवाई-अड्डे, रेल-स्टेशन तथा औरि सिलिगुड़ी के गंगटोक से जोरला । मेल्ली से आवे वाला एगो राजमार्ग शाखा पश्चिमी सिक्किम से जोरेला । सिक्किम के दक्षिणी और पश्चिमी शहर सिक्किम के उत्तरी पश्चिमी बंगाल के पर्वतीय शहर कलिम्पोंग औरि दार्जीलिंग से जोरेला । राज्य के भीतर चौपहिया वाहन लोकप्रिय हवे कहेकि ई राज्य के चट्टानी चढ़ाइयों के आसानी से पार करे में सक्षम होएला। छोटी बस राज्य के छोटे शहरों के राज्य औरि जिला मुख्यालयों से जोरेला। अभि एगो नया ऐरोपलेन के हवाई-अड्डा खुले वाला बा जो कि पाकयोन्ग मे बा।

मानवजाती रूप से सिक्किम के अधिकतर रहेवाला निवासी नेपाली हवे, जो प्रदेश में उन्नीसवीं सदी में प्रवेश करले रहल । भूटिया सिक्किम के मूल निवासि में से एगो ह, जौन तिब्बत के खाम जिला से चौदवीं सदी में आइल रहल , औरि लेप्‍चा, जो स्थानीय मान्यतानुसार सुदूर पूर्व से आइले रहल मानल जाला । प्रदेश के उत्तरी तथा पूर्वी इलाकका में तिब्बती बहुत जादा मात्रा में रहेला । अन्य राज्यों से आके सिक्किम में रहे वाल में प्रमुख मारवाड़ी लोग बारन ।मारवाड़ी, जौन दक्षिण सिक्किम तथा गंगटोक में दुकान चलावेला आइल बारन ;बिहारी जो अधिकतर श्रमिक ह; तथा बंगाली लोग।
हिन्दू धर्म राज्य के प्रमुख धर्म हवे जेकर अनुयायी राज्य में 60.9% में ह । बौद्ध धर्म के अनुयायी 28.1% पर एगो बहुत बड़ अल्पसंख्या में ह । सिक्किम में ईसाइ के 6.7% आबादी हवे जेमे मूल रूप से अधिकतर  लेपचा हवे जौन सब उन्नीसवीं सदी के उत्तरकाल में संयुक्त राजशाही रहल । अंग्रेज़ीधर्मोपदेशक के प्रचार के बाद ईसाई जात अपना लेलन । राज्य में कभी साम्प्रदायिक तनाव न रहल।  मुसलमान के 1.4% प्रतिशत आबादी के खातिर गंगटोक के व्यापारिक क्षेत्र में औरि मंगन में मस्जिद बनल हटे।
नेपाली सिक्किम के प्रमुख भाषा ह । सिक्किम में प्रायः अंग्रेज़ी औरि हिंदी भी बोलल औरि समझल जाला। यहाँ के अन्य भाषा मे भूटिया, जोङ्खा, ग्रोमा, गुरुंग, लेप्चा, लिम्बु, मगर, माझी, मझवार, नेपालभाषा, दनुवार, शेर्पा, सुनवार आदि भाषा आवेला जैसे, तामाङ, थुलुंग, तिब्बती, औरि याक्खा शामिल ह्वे।

सिक्किम के नागरिक भारत के सभी मुख्य हिन्दू त्योहार जैसे दीपावली औरि दशहरा,मनावे ले । बौद्ध धर्म के ल्होसार, लूसोंग, सागा दावा, ल्हाबाब ड्युचेन, ड्रुपका टेशी औरि भूमचू वे त्योहार ह्वे जो अपन-अपन समय मे मनावल जाला । लोसर - तिब्बती नव वर्ष लोसर, जौन मध्य दिसंबर में आवेला , ओकर दौरान अधिकतर सरकारी कार्यालय एवं पर्यटक केन्द्र हफ़्ता दिन के खातिर बंद रहेला । गैर-मौसमी पर्यटकों के आकर्षित करे के खातिर हाल में हि बड़ा दिन के गंगटोक में प्रसारित कियल जा रहल बा ।

हिंदी संगीत भी येहा के लोग में अपन जगह बना लेले बा । विशुद्ध नेपाली रॉक संगीत, तथा पाश्चात्य संगीत मे नेपाली काव्य भी काफ़ी पर्सिध हवे । फुटबॉल एवं क्रिकेट यहाँ के सबसे लोकप्रिय खेल ह। नूडल मे आधारित व्यंजन जैसे थुक्पा, चाउमीन, थान्तुक?, फाख्तु?, ग्याथुक? औरि वॉनटन? सर्वसामान्य हवे । मःम, भाप से पकेला औरि सब्जि से भरके पकौडि़याँ, सूप के साथ परोसल जाला ई भैंसि के माँस अथवा सूअर के माँस से भि बनावल जाला । सुअर के माँस लोकप्रिय लघु आहार ह । पहाड़ी लोग के आहार में भैंस, सूअर, इत्यादि के माँस के मात्रा बहुत अधिक होवेला । मदिरा पर राज्य उत्पाद शुल्क कम होवे के कारण राज्य में बीयर?, विस्की?, रम? औरि ब्रांडी इत्यादि के सेवन करल जाला ।
सिक्किम में लगभग सभी आवास देहाती ह जौन मुख्यत: करा बाँस के ढाँचा पर लचीले बाँस के आवरण डाल के नानाये? जाला । आवास में ऊष्मा के संरक्षण करेके के खातिरी ऐकर उपर गाय के गोबर के लेप भी करल जाला। राज्य के अधिक ऊँचाई वाला क्षेत्र में अधिकतर लकड़ी के घर बनावल जाला।

भारत के औरि राज्यों के समान, केन्द्रिय सरकार द्वारा निर्वाचित राज्यपाल राज्य शासन के प्रमुख ह । ओकर निर्वाचन मुख्यतः औपचारिक ही होला, तथा ओकर मुख्य काम मुख्यमंत्री के शपथ-ग्रहण के अध्यक्षता मे ही होला । मुख्यमंत्री, जेकर पास वास्तविक प्रशासनिक अधिकार होला, अधिकतर राज्य चुनाव में बहुमत जीते वाला दल अथवा गठबंधन के प्रमुख होवेला । राज्यपाल मुख्यमंत्री के परामर्श पर मंत्रीमण्डल नियुक्त करेला। अधिकतर अन्य राज्य के समान सिक्किम में भी एगोसभायी (एगोसदनी unicameral) सदन वाला विधान सभा ह । सिक्किम के भारत के द्विसदनी विधानसभा के दुनो सदनों, राज्य सभा तथा लोक सभा में एक-एक स्थान प्राप्त हवे । राज्य में कुल 32 विधानसभा सीट ह जेमे से एगो बौद्ध संघ के खातिर आरक्षित ह् । सिक्किम उच्च न्यायालय देश के सबसे छोटा उच्च न्यायालय ह।

सिक्किम के सड़क बहुधा भूस्खलन तथा पास के धार द्वारा बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो जाला, लेकिन फिर भी सिक्किम के सड़क अन्य राज्य के सड़क के तुलना में बहुत अच्हा हवे । सीमा सड़क संगठन(BRO), भारतीय सेना के एगो अंग इ सड़क के रखावालि करेला । दक्षिणी सिक्किम तथा रा0रा0-31अ के सड़क अच्छी स्थिति में हवे काहे कि यहाँ भूस्खलन के घटना कम हवे । राज्य सरकार 1857.35 कि0मी0 के वह राजमार्ग जौन सी0स0सं0 के अन्तर्गत न आवेला,के रखवालि करेला ।
सिक्किम में अनेक जल विद्युत बिजली स्टेशन (केन्द्र) ह जौन नियमित बिजली उपलब्ध करेला , परन्तु संचालन शक्ति अस्थिर ह तथा स्थायीकारों(stabilisers) के आवश्यकता पड़त रहेला । सिक्किम में प्रतिव्यक्ति बिजली प्रयोग 182 kWh ह । 73.2% घर में स्वच्छ जल सुविधा उपलब्ध हवे, तथा अनेक धाराओं के परिणाम स्वरूप राज्य में कभी भी अकाल या पानी के कमी के परिस्थितियाँ उत्पन्न न होयल ह । टिस्टा नदी पर बहुत जलविद्युत केन्द्र निर्माणशील ह तथा उनका पर्यावरण पर प्रभाव एगो चिन्ता के विषय हवे।

दक्षिण नगर क्षेत्र में अंगरेजी, नेपाली औरि हिंदी के दैनिक पत्र हवे । नेपाली समाचार-पत्र स्थानीय रूप से ही छपेला परन्तु हिंदी तथा अंगरेजी के पत्र सिलिगुड़ी में छप के आवेला। सिक्किम में नेपाली भाषा में प्रकाशित समाचार पत्र के मांग विगत दिन में बढ़ते जा रहल बा। समय दैनिक, हाम्रो प्रजाशक्ति, हिमाली बेला औरि साङ्गीला टाइमस् इत्यादि नेपाली समाचार पत्र गंगटोक से प्रकाशित होवेला जेमे हाम्रो प्रजाशक्ति राज्य के सबसे बड़ औरि लोकप्रिय समाचार पत्र हवे । अंगरेजी समाचार पत्र में सिक्किम नाओ औरि सिक्किम एक्सप्रेस हिमालयन मिरर स्थानीय रूप से छपेला,तथा द स्टेट्समैन तथा द टेलेग्राफ़ सिलिगुड़ी में छपल जाला जबकि द हिन्दू तथा द टाइम्स ऑफ़ इन्डिया कलकत्ता में छपे के एगो दिन पश्चात् गंगटोक, जोरेथांग, मेल्ली तथा ग्याल्शिंग पहुँच जाला। सिक्किम हेराल्ड सरकार के आधिकारिक साप्ताहिक प्रकाशन ह । हाल-खबर सिक्किम के एकमात्र अंतर्राष्ट्रिय समाचार के मानकीकृत प्रवेशद्वार हवे । सिक्किम सें 2007-में नेपाली साहित्य के ऑनलाइन पत्रिका टिस्टारंगीत शुरु हो गैइल ह जेकर संचालन साहित्य सिर्जना सहकारी समिति लिमिटेड] करेला।
अन्तर्जाल सुविधा जिला मुख्यालय में उपलब्ध ह परन्तु ब्रॉडबैंड सम्पर्क उपलब्ध न हवे तथा ग्रामीण क्षेत्र में अभी अन्तर्जाल सुविधा उपलब्ध न ह । थाली विद्युत-ग्राहक(Dish antennae) द्वारा अधिकतर घर में उपग्रह दूरदर्शन सरणि(satellite television channels) उपलब्ध हटे । भारत में प्रसारित सरणिय के अतिरिक्त नेपाली भाषा के सरणि भी प्रसारित किरल जाला। सिक्किम केबल, डिश टी0 वी0, दूरदर्शन तथा नयुमा (Nayuma) मुख्य सेवा प्रदान करेला । स्थानीय कोष्ठात्मक दूरभाष सेवा प्रदाताओं(cellular phone service provider) के अच्छी सुविधा उपलब्ध हते जेमे भा0सं0नि0लि0 के सुविधा राज्य-विस्तृत ह परन्तु रिलायन्स इन्फ़ोकॉम तथा एयरटेल केवल नगरीय क्षेत्र में हते । राष्ट्रिय अखिल भारतीय आकाशवाणी राज्य के एकमात्र आकाशवाणी केन्द्र हवे।

साक्षरता प्रतिशत दर 69.68% ह, जो कि पुरुष में 76.73% तथा महिला में 61.46% ह। सरकारी विद्यालयों के संख्या 1545 ह तथा 18 निजी विद्यालय भी हवे जो कि मुख्यतः नगर में ह। उच्च शिक्षा के खातिर सिक्किम में लगभग 12 महाविद्यालय तथा अन्य विद्यालय ह। सिक्किम मणिपाल विश्वविद्यालय आभियान्त्रिकी, चिकित्सा तथा प्रबन्ध के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्रदान करेला। वह अनेक विषय में दूरस्थ शिक्षा भी प्रदान करेला। राज्य-संचालित दुगो बहुशिल्पकेंद्र, उच्च तकनीकी प्रशिक्षण केन्द्र (Advanced Technical Training Centre) तथा संगणक एवं संचार तकनीक केन्द्र (Centre for Computers and Communication Technology) आदि आभियान्त्रिकी के शाखा में सनद पाठ्यक्रम चलावेले । ATTC (Advanced Technical Training Centre) बारदांग, सिंगताम तथा CCCT Computers and Communication Technology) चिसोपानि,नाम्ची में हवे। अधिकतर विद्यार्थी उच्च शिक्षा के खातिर सिलीगुड़ी अथवा कोलकाता जाले। बौद्ध धार्मिक शिक्षा के लिए रुमटेक गोम्पा द्वारा संचालित नालन्दा नवविहार एगो अच्छा केंद्र हवे।




#Article 64: उत्तराखंड (166 words)


उत्तराखंड भारत की 28 गो राज्यन में से एगो राज्य बाटे। एकर राजधानी देहरादून में स्थित बा। उत्तराखंड पहिले उत्तर प्रदेश क हिस्सा रहे बाकी 9 नवंबर, 2000 के एके उत्तरांचल की नाँव से एगो अलग राज्य क दर्जा दे दिहल गइल आ इ भारत क 27वाँ राज्य बनल। फिन बाद में एकर नाँव बदल के उत्तराखंड कइ दिहल गइल।

क्षेत्रफल की हिसाब से ई भातर क 19वाँ राज्य हवे आ एकर क्षेत्रफल लगभग 53,483 वर्ग किमी बाटे, जेवना में 46,035 वर्ग किमी एरिया पहाड़ी बा आ ख़ाली 7,448 वर्ग किमी क्षेत्र मैदानी बाटे। ई एगो लगभग आयत की आकार वाला राज्य बाटे जेवना क सीमा चीन आ चीन की तिब्बत क्षेत्र से, नेपाल से, आ भारतीय राज्यन में हिमाचल प्रदेश आ उत्तर प्रदेश से मिले ला।

उत्तरखंड में एह समय 13 गो जिला बाने आ इन्हन के दू गो मंडल में बाँटल जाला। जिला कुल क लिस्ट नीचे दिहल जात बा:

कुमाऊँ मण्डल में छह गो जिला बाटें::

गढ़वाल मण्डल में सात गो जिला बा::




#Article 65: नेपाल के प्रशासनिक बिभाजन (357 words)


संघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्र नेपाल एगो छोट देश ह जवन दक्षिण एशिया में भारत आ चीन के बीच में स्थित बा। ई देश पुरी तरह से स्थलरुद्ध बा कहे के मतलब ह इ देश के भू-भाग समुन्दर के ना छुयेला।

२० सितम्बर २०१५ के जारी भइल नया संविधान के हिसाब से नेपाल अब ७ गो प्रदेश में बंट गइल बा।

नयका प्रशासनिक विभाजन (२० सितम्बर २०१५ के जारी संविधान) के हिसाब से नेपाल के ७ गो प्रदेश आ ७४४ पालिका (नगरपालिका आ गांवपालिका) में बांटल गइल बा। ३ गो जिला सभ के तोड़ के नया ३ गो अउर जिला बन गईल बा। कुल मिला के अब ७८ गो जिला हो गइल बा।

प्रदेश सभ के नामकरण उ प्रदेश के विधान परिषद द्वारा होखे के प्रावधान बा। फिलहाल प्रदेश सभ के ओकर संख्या के आधार से जानल जाऽला।

प्रदेश सभ के नाम ई तरह बा:

नेपाल में पहिले से ७५ गो जिला रहल जवन विकास क्षेत्र आ अंचल में बँटल रहल। जिला के जिम्मेदारी जिला विकास समिति के पास रहल।

अब कुछ जिला सभ के तोड़ के ७८ गो जिला बना दिहल गइल बा आ जिला विकास समिति के नाम जिला समन्वय समिति हो गइल बा। कुछ अधिकार में भी बदलाव भइल बा।

नेपाल में अब कुल ७४४ पालिका बाड़े जे में महानगरपालिका, उपमहानगरपालिका, नगरपालिका आ गांवपालिका आवेला।

नेपाल प्राकृतिक रुप से तीन भाग में विभाजित बा।

प्रशासनिक रुप से नेपाल के 5 विकास क्षेत्र, 14 अंचल आ 75 जिला में विभाजित करल गईल बा। चार पाँचगो जिला मिला के एगो अंचल आ दु-तीन गो अंचल मिला के एगो विकास क्षेत्र बनल बा।

नेपाल में 75 गो जिला बा।

नेपाल में वर्तमान समय में प्रशासनिक बिभाजन के एगो इकाई नगरपालिका बा आ नगरसभा के निर्वाचनके अन्तिम नतिजा प्राप्त होला के 15 दिनभितर 20 सदस्यीय नगर कार्यपालिका के गठन होबेला।
   

महिला सदस्य: 5 जन (जौन नगरसभाके सदस्य सभ अपन मे से निर्वाचित क के 5 गो महिला सदस्य)

दलित वा अल्पसंख्यक सदस्य 3 जन (नगर सभाके सदस्य सभ दलित वा अल्पसंख्यक समुदाय मे से वा नगर सभा के बाहर के व्यक्ति के चुने परेला इ 3 जन सदस्य नगर सभाके सदस्य होव सकेला मुदा इ लोकनि के मताधिकार ना होला)




#Article 66: पहाड़ (264 words)


पहाड़ चाहे परबत, (हिंदी: पर्वत) जमीन के रुप चाहे थलरूप ह जौन बड़ आकार के होला आ अपने आस-पास के इलाका से बहुत ऊँच होला साथे साथ एकर साइड बहुत तेज ढाल वाला होला आ बहुधा एकर सभसे ऊँच जगह नोकदार चोटी के रूप में होखे ला। पहाड़ी के तुलना में एकर ऊँचाई आ ढाल दुनों ढेर होखे ला।

पहाड़ सभ के निर्माण पृथ्वी के अंदरूनी हलचल, टैक्टॉनिक हलचल के कारन या ज्वालामुखी क्रिया के कारन होला। ई ताकत सभ लोकल रूप से जमीन के ऊँच क के पहाड़ के निर्माण क देलीं। पहाड़ सभ के ऊंचाई में कमी बहुत धीरे-धीरे चट्टान के टूटन आ पानी हवा आ ग्लेशियर द्वारा खरोहल जाए के कारन होला। कुछ पहाड़ अकेल ऊँच आकृति आ चोटी वाला होखे लें जबकि ज्यादातर परबत सभ बिसाल परबत श्रेणी के रूप में होखे लें।

ऊँचाई के कारण परबत के ऊपरी हिस्सा में तापमान कम होखत जाला, काहें कि ऊपर जाए पर हवा के घनापन कम होखत जाला। एही कारण परबत सभ पर ऊपरी हिस्सा में अलगा किसिम के इकोसिस्टम आ पर्यावरण बन जाला। जादे ऊँचाई वाला परबत सभ पर चोटी बरफ से तोपाइल भी हो सके ला।

हिमालय विश्व में सबसे बड़ पहाड़ हवे आ एका सबसे ऊँच चोटी हवे माउंट एवरेस्ट समुंद्र तल से  के ऊँचाई पर बा। विश्व क सबसे लम्बा पहाड़ एंडीज हवे जेवन दक्षिण अमेरिका में बाटे। जहाँ तक हमनी के सौर मंडल के कौनों भी ग्रह पर अबतक ले मालुम सभसे ऊँच परबत के बात बा, हमनी के सौर मंडल के सदस्य मंगल ग्रह पर ओलिंपस मॉन्स नाँव के परबत सभसे ऊँच परबत  ऊँचाई वाला बाटे।




#Article 67: भूत (120 words)


कहावत के अनुसार कौनो मृत ब्यक्ति के आत्मा भूत हो जाला। भूत होखे के अभी तक कौनो साक्षय प्रमाण उपलब्ध नईखे फिर भी दुनिया में अईसन लोग ढ़ेर बा जे कहेला कि भूत होखेला आ ऊ देखले बा। वैज्ञानिक भूत के बारे में अभी तक कुछू पता नईखे कईले। 
देखो भूत होता है, इसका निर्माण तब होता है जब एक आदमी अपनी आयू से पूर्व मर जाता है, या उसकी आकास्मिक मृत्यू हो जाय| आयु पूर्ण होने तक वो पिसाच योनी में भटकते रहते है| इस योनी में भटकने वाली आत्माए समयावधी पूर्ण हuोने तक यही हमारे बीच रहती है| इसमे कुछ तो समय समाप्ती का इंन्तजार करते है, और कुछ इसी समय में लोगो को परेशान करते रहते है|




#Article 68: गोलघर (128 words)


गोलघर, बिहार प्रांत के राजधानी पटना में गाँधी मैदान के पश्चिम में स्थित बा। 1770 में आइल भयंकर सूखा के दौरान ब्रिटिश कैप्टन जान गार्स्टिन  अनाज़ के (ब्रिटिश फौजवन खातिर) भंडारण खातिर इस गोल ढाँचा के निर्माण करवले रहल। ई में एक साथ 1,40,000 टन अनाज़ रखल जा सकत बा। इ के निर्माण कार्य ब्रिटिश राज में 20 जुलाई 1786 के संपन्न भइल रहल।

ई के आधार 125 मीटर, आ ऊँचाई 29 मीटर बा. ई में कौनो आधार स्तम्भ नईखे आ ई का देवाल  आधार में 3.6 मीटर मोट बा। 145 सीढियन के सहारे रउआ इ के उपर वाला भाग पर जा सकत बानी जहाँ से शहर के एगो बड़ हिस्सा देखल जा सकत बा आ गंगा के मनोहारी दृश्यन के भी अहिजा से निहारल जा सकत बा।




#Article 69: बाजुरा जिला (555 words)


बाजुरा जिला नेपाल क सूदुर पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्र क सेती अञ्चल मा अवस्थित एक हिमाली जिला बा।  इ जिला के सीमाना 
बझाङ जिल्ला, हुम्ला जिल्ला, मुगु जिल्ला, कालीकोट जिल्ला अउर अछाम जिल्ला से जोडेल बा।  इ जिला के क्षेत्रफल 2188 वर्ग कि.मि. ह।  इ जिल्ला प्रशासनिक हिसाब से 27 गाविस, 9 इलाका, 1 निर्वाचन क्षेत्र मे विभक्त रहल बा। 

जिला के नाम कैसन बाजुरा रहल गए इ बारे मा कौनो लिखित प्रमाण नभइल। पुराना कहावतें अनुसार पहले इ जिला के आपन स्वतन्त्र अस्तित्व नरइल बा। उ समय मा इ क्षेत्र सिजां के अन्तर्गत रहल बा। केन्द्रीय शासन जुम्ला से संचालन होकर भी शासक का प्रतिनिधि हाल के बाजुरा जिला मे सहायक दरबार बनाइल के रहल बा। उ सहायक दरबार को कोट बोलल बा। तत्कालीन सिजां दरबार के राजा के आदेश अनुसार इ बाजुरा दरबार से वाज चिडिया के नाम पकड कर  पर्दथ्यो । वाजलाई पासोमा हालेर समातिन्थ्यो । भालेबाजंलाई शाही वाज र पोथि वाजलाई झुर्रा वाज भनिन्थ्यो । एक पटक राजाको आफ्नो दरबारमा वाज पठाई दिने आदेश अनुसार पासो थाप्दा उक्त पासोमा शाही वाज न परि झुर्रा वाज पर्न गएछ । शाहीवाज पासोमा पार्न नसकि झुर्रावाज मात्र परेको खबर सहित झुर्रावाज राजाको दरबारमा पठाएछन । राजाले शाहिवाजको चाहना गरेको तर झुर्रावाज प्राप्त भएकोले यस ठाउंको नाम त्यहि पोथीवाजको नाम भुर्रावाज लाई उल्टोबाट बाझुर्राकोट राखेछन । त्यहि बाझुर्राकोट पछि अपभ्रंश हुदै बाजुरीकोट भयो र त्यसै बाजुरीकोटको नामबाट बाजुरा रहेको किंवदन्ति पाईन्छ । अर्को भनाई अनुसार यो ठांउमा बाजुगार्ड भन्ने नदिको नामबाट बाजुरा जिल्ला नाम रहन गएको हो भन्ने भनाई पनि पाईन्छ । 

इ जिल्ला 28 डि 18“उत्तरी से 29डि 5” उत्तरी अक्षांश अउर 80डि 9 “ पुर्व से 81डि 5” पूर्व देशान्तर मे अवस्थित बा।  इ जिला के सिमाना मे पूर्व मे मुगु अउर कालिकोट, पश्चिम मे बझाङ, उत्तर मे हुम्ला, दक्षिण मे अछाम अउर कालिकोट जिल्ला रहल बा।  इ जिला के क्षेत्रफल 2188 वर्ग किलोमिटर या 218800 हेक्टर रहल बा।  भूगोलीय रुप से इ जिला हिमाली क्षेत्र में 13.5%, उच्च पहाडि क्षेत्र –84.7% मध्य पहाडि क्षेत्र 1.7% रहल बा। इ जिला समुद्री सतह से न्युनतम 726 मी.(ईकडि गार्ड) से अधिकतम 7036 मि.(हंशिरेलेख)उचाई तक रहल बा।  इ जिला के प्रमुख नदि में कर्णाली नदि, बुढिगंगा, मालागाड, बार्जुगाड, कोदिगाड, दानसाग,
कवाडि, ईकडिगार्ड आदि रहल बा अउर प्रमुख ताल में खप्तड ताल, छेडेदह, बुढिनन्दा देवी के पवित्र स्थल मे अवस्थित 7 ताल आदि बा। धरातलीय स्वरुप के आधार मे इ जिला के मौसम निर्भर रहल बा। इ जिल्ला मे अर्ध उष्ण, समशितोष्ण, शितोष्ण अउर  ठण्डा शितोष्ण करके चार प्रकार के हावापानी रहेल बा।  इ जिल्लाको औसत तापक्रम गृष्म ऋतुमा 18 डि – 32डि र हिउदमा 0 डि — 5 डि तथा औषत बर्षा अधिकतम 80 ईन्च देखि न्युनतम 25 ईन्चसम्म हुन्छ।  यो जिल्लाको  धार्मिक तथा पर्यटकीय क्षेत्रमा बुढिनन्दा देवी, मालिका, नाटेश्वरी, खप्तड, छेडेदह आदि तथा व्यपारिक महत्वका क्षेत्रमा मार्तडी बजार, कोल्टी बजार, शेरा बजार, ढाव बजार, कुल्देवमाण्डौ बजार आदि रहेका छन्।

वि सं 2058को जनगणना अनुसार यो जिल्लाको जनसंख्या 1,08,781 थियो जसमा महिला 54,947 र पुरुष 53,834 थियो। यो जिल्लाको जनसंख्या नेपालको जनसंख्याको 0.47 प्रतिशत छ।   यी मध्ये 5 वर्ष मुनिको जनसंख्या 15,233 75 बर्ष र सो भन्दा माथिका 1,108 थियो। यो जिल्लामा घर परिवार संख्या 20,378 थियो भने औसत परिवार सदस्या संख्या  5.34 थियो। यो जिल्लाको जनघनत्व 50 र जनसंख्या बृद्धिदर 1.67 थियो।  यो जिल्लाको लैङ्गिक अनुपात 97.97 छ।

यो जिल्लाका गाविसहरुको सामान्य जानकारी निम्न लिखित सूचीमा दिइएको छ। विस्तृत जानकारी गाविसको पृष्ठमा हेर्नुहोस्।  

नेपालको क्षेत्रिय बर्गिकरण




#Article 70: दारोगा प्रसाद राय डिग्री आ इंटर महाविद्यालय, सिवान (116 words)


दारोगा प्रसाद राय महाविद्यालय के स्थापना 1980 ई॰ में अवध बिहारी चौधरी के द्वारा भइल रहल। ई के जय प्रकाश विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता प्राप्त बा। ई महाविद्यालय में जय प्रकाश विश्वविद्यालय के अन्तर्गत आवे वाला सब महाविद्यालय से ज्यादा विषय के पढ़ाई होला। ई वित्त रहित महाविद्यालय ह। बिहार में जेतना भी वित्त रहित महाविद्यालय बा ऊ सब में ई का भवन नम्बर एक स्थान पर बा। वित्त रहित रहे के चलते ई महाविद्यालय के सब शिक्षक लोगन के स्थिती काफी दयनिय बा। ई महाविद्यालय के प्राचार्य श्री सुभाष चन्द्र यादव भोजपुरी आ हिंदी के मशहुर कवि बानी।

ई महाविद्यालय बिहार के सिवान जिला मुख्यालय के पश्चिम में श्रीनगर में गंडक कालोनी के ठिक सटल बा।




#Article 71: शतरंज (1309 words)


शतरंज चाहे चेस (Chess) एक किसिम के बोर्ड गेम ह जे में एक साथ दुगो खेलाड़ी लोग खेल खेलेला। ई एक प्रकार के वर्गाकार बोर्ड, जे आमतौर पर लकड़ी के बनल होला, पर खेलल जाला, जेमें छोट-छोट 64गो खाना (8x8) बनल रहेला। दुनो खेलाड़ी सोलह-सोलह गो गोटी के साथ खेल शुरु करेलन। जे में गोटी रहेला: आठगो सिपाही, दुगो घोड़ा, दुगो ऊँट, दुगो हाथी, आ एगो राजा आ एगो मंत्री।

खेल के लक्ष्य होला कि कौनो एगो खेलाड़ी कौनो दुसरा प्रतिद्वन्दी खेलाड़ी के राजा के चेकमेट (मात) करे के कोशिश करे। चेकमेट एक प्रकार के धमकी ह ('चेक' चाहे 'शह') जौन प्रतिद्वन्दी खेलाड़ी के राजा के करल जाला जब प्रतिद्वन्दी खेलाड़ी के राजा मुकाबला कर सके के स्थिती में ना होखे। जब राजा फँस जाई त खेल खत्म हो जाई।

खेल दुगो प्रतिद्वन्दी खेलाड़ी के बीच शुरु होला जेमें खेलाड़ी एक एक कर के आपन गोटी शतरंज के बोर्ड पर अलग अलग वर्ग में आगे बढ़ावेला। एगो खेलाड़ी ('उज्जर') के पास उज्जर या हल्का रंग के गोटी होला; दुसरका खेलाड़ी ('करिया') के पास करिया या गाढ़ा रंग के गोटी होला। खेल में हर गोटी के आगे बढ़ावे के आ दुसरा गोटी के पिटे के नियम कानून होला।

चेस एगो विश्व विख्यात खेल ह जौन कई बार प्रतियोगिता के तौर पर होखेला जे के शतरंज प्रतियोगिता कहल जाला। बहुते देश में लोग ई खेल के मजा लेवेला आ ई रुस देश के एगो महत्वपूर्ण राष्ट्रिय शौक ह 

चेस के नियम सभ के प्रकाशन फिडे (FIDE - Fédération Internationale des Échecs) करे ला। ई एह नियम सभ के हैंडबुक छापे ला। अन्य देस में कुछ मामूली अंतर वाला नियाम भी हो सके लें बाकी अंतर्राष्ट्रीय नियम इनहने के मानल जाला जे फिडे द्वारा छापल जालें। सभसे हाल में इनहन के 2018 में अपडेट कइल गइल।

परंपरा अनुसार शतरंज के गोटी सभ, जिनहन के मोहरा कहल जाला, करिया आ सफेद सेट में बँटल होखे लें। हर सेट में 16 मोहरा होखे लें: एगो राजा, एक ठो वजीर, दू गो हाथी, दू गो ऊँट, दू गो घोड़ा, आ आठ गो प्यादा। इनहन के सुरुआती सजावट चित्र में आ डाइग्राम में देखावल गइल बा। जे खेलाड़ी जवना रंग के गोटी से खेले ला ओकरा के सफेद आ काला खेलाड़ी कहल जाला। 

शतरंज जवना बोर्ड पर खेलल जाला ओह में कुल 64 खाना होखे लें। बेंड़ी-बेंड़ा आठ गो के रैंक कहल जाला आ इनहन के नंबरिंग 1 से 8 तक होखे ले (नीचे, मने की सफेद वाला की ओर से) आ खड़ा-खाड़ी आठ गो के फ़ाइल कहल जाला जिनहन के बाएँ से दाहिने (सफेद के हिसाबन) a से h ले नाँव दिहल जाला। ई 64 खाना अगल-बगल हल्का (सफेद) आ डार्क (करिया) रंग के होखे लें। बोर्ड के एह तरीका से रखल जाला कि खेलाड़ी के दहिने ओर सबसे निचला खाना सफेद रंग के पड़े। दुनों वजीर अपना-अपना रंग के खाना में रखल जालें, राजा वजीर के बगल में, एकरे बाद इनहन के दुनों ओर ऊँट, फिर दुनों ओर घोड़ा आ सभसे किनारे दुनों ओर हाथी रखालें। इनहन के साम्हने आठ गो प्यादा (सैनिक) रखल जालें। खेल के शुरुआत सफेद खेलाड़ी करे ला।

सगरी मोहरा सभ के अलग-अलग किसिम के चाल होला। डाइग्राम में एकरा के देखावल गइल बा, मोहरा ओह जगह पर चल सके ला जहाँ जहाँ बिंदी लगा के देखावल गइल बाटे अगर बीचा में कौनों दूसर गोटी ना होखे; हालाँकि, घोड़ा कूद के चले ला आ बीचा में कौनों दूसर मोहरा होखे तबो घोड़ा बिंदी वाली जगह पर चल सके ला।

File:ChessCastlingMovie en.svg|thumb|upright=0.95|किलेबंदी के उदाहरण ()
खेल में एक बेर, राजा एगो इस्पेशल चाल चल सके ला जेकरा के किलेबंदी भा कैसलिंग के नाँव से जानल जाला। एह चाल में राजा अपना रैंक में, अपने ठीक बगल वाला खाना के फलांग के अगिला खाना में चल जाला आ जवना खाना के ऊ फलांगे ला ओह खाना में ओह साइड वाला हाथी आ के रखा जाला। 

कैसलिंग नीचे दिहल गइल शर्त के मोताबिक होला:

कई बेर ई मान लिहल जाला की राजा पर पहिले चेक ना पड़ल होखे के चाहीं। हालाँकि अइसन ना बा चेक पड़ल होखे आ राजा के चलले बिना कौनों दूसर तरीका से चेक बचा लिहल गइल होखे तब्बो कैसलिंग कइल जा सके ला।

जब प्यादा आपन दू घर वाली चाल चले आ बिरोधी प्यादा ओकरे पहुँचे वाली जगह के ठीक बगल में मौजूद होखे, बिरोधी प्यादा दू घर चले वाला प्यादा के मार सके ला आ ओह खाना में जा के रखा जाला जहाँ ऊ तब रखाइत जब प्यादा आपन दू घर के चाल चले के बजाय एक घर चलल रहित तब पहुँचत। एह नियम के मकसद ई हवे कि प्यादा दू घर चल के बिरोधी के प्यादा के वार से आपन बचाव न करे। ई चाल फ्रांसीसी खोज हवे एही से एकर नाँव फ्रेंच भाषा में अँपासाँ (en passant) हवे जेकर मतलब हवे गुजरत समय (in passing)। ई चाल के शर्त हवे की प्यादा के दू घर चले के बाद ठीक अगिली चाल में ई चाल चलल जा सके ला, अगर कौनों दूसर चाल चल दिहल गइल तब फिर ओह दू घर चले वाला प्यादा के एह तरीका से ना मारल जा सके ला। उदाहरण खाती डाइग्राम देखल जा सके ला, एनीमेशन में देखावल बा की करिया प्यादा दू घर चल रहल बा g7 से g5 आ सफेद प्यादा जे f5 खाना में बा ओकरा के अँपासाँ के चाल से मार के g6 पर पहुँच जा रहल बा (बाकी ई सफेद के ठीक अगिली चाल होखे)।

जब प्यादा आठवाँ रैंक पर पहुँच जाला, मने कि अब ओकरा के चले के अउरी जगह ना रह जाला काहें की ऊ सीधा चले ला, ओकर परमोशन हो जाला आ ओकरे जगह पर खेलाड़ी के चुनाव अनुसार वजीर, हाथी, ऊँट भा घोड़ा में से कवनों एगो गोटी रखा जाले। एकरा के गोटी जिंदा कइल भी कहल जाला। चूँकि, खेलाड़ी के पसंद एह दसा में वजीर (अंगरेजी में रानी) के जिंदा करावे के ज्यादा होखे ले, एकरा के क्वीनींग भी कहल जाला। एह में इहो कौनों प्रतिबन्ध ना होला कि पहिले से बोर्ड पर कवन कवन गोटी बा (मतलब कि दू या दू से बेसी वजीर भी हो सके लें)।

जब राजा पर बिरोधी खेलाड़ी के एक ठो भा दू ठो गोटी के वार पड़ रहल होखे, एकरा के शह भा चेक कहल जाला। चेक पड़े के दसा में खाली उहे चाल उचित मानल जाला जेकरे चलते राजा पर से चेक हट जाय आ राजा बच जाय। चेक से बचाव के तीन गो तरीका हो सके ला: चेक जवना गोटी से पड़ रहल होखे ओकरा के मार दिहल जाय; बीचा में आपन कौनों दूसर गोटी खड़ा क दिहल जाय (ई घोड़ा से पड़े वाला चेक में ना काम करे ला), या फिर राजा के अइसन खाना में चलल जाय जहाँ चेक न पड़ रहल होखे। चेक के दसा में कैसलिंग ना कइल जा सके ला।

खेल के मकसद बिरोधी खेलाड़ी के मात दिहल (चेकमेट) होला, मने की अइसन दसा जबकी चेक से बचाव के कवनों गुंजाइश बिरोधी के लगे न बचे। अइसन चाल कबो बैध ना मानल जाले जवना के चले से आपन खुदे के राजा पर चेक पड़े लागे।

आमतौर पर चेक देवे के बाद लोग चेक (या शह) बोल के बतावे ला, हालाँकि नियम के मोताबिक अइसन कइल कवनों जरूरी ना होला। टूर्नामेंट में आमतौर पर ई काम ना कइल जाला।

शतरंज के खेल में नीचे दिहल तरीका सभ से जीत हो सके ला:

शतरंज के खेल बिना हार-जीत के ड्रा हो सके ला:

ढ़ेरे इतिहासकार लोगन बानी जे के कहनाम बा कि शतरंज सबसे पहिले उत्तर भारत में छठईं ईस्वी में गुप्त साम्राज्य के वक्त खेलल जात रहल। पहिले के शतरंज के ई खेल के चतुरंगा नांव से जानल जात रहल, जौन मलेटरी शब्द के संस्कृत ह। गुप्तकाल के शतरंज के गोटी ऊ काल के मिलेट्री में बँटल रहल जौन पैदल सेना रहे, जे में रहल घुड़सवार फौज, हाथी, आ रथ। धीर-धीरे ई गोटी सब हो गइल सिपाही, घोड़ा, हाथी, आ ऊँट। अंगरेजी में चेस (chess) आ चेक (check) दुनो शब्द फारसी शब्द शाह से आइल जेकर मतलब होला राजा।




#Article 72: आम (1082 words)


आम एक ठो कोइली वाला फल हवे। एकर बड़हन आकार के ऊँच फेड़ होला। आम के फेड़ के बनस्पति बिज्ञान के बर्गीकरण में मैंगीफेरा जाति में रखल जाला। ई गरम इलाका सभ में पैदा होखे हवे आ एकरे फल खातिर बगइचा लगा के खेती होला। आम के कइयन गो प्रजाति सभ प्रकृति में जंगली तरीका से भी पावल जालीं।

बनस्पति बिज्ञान के बर्गीकरण के हिसाब से एह जाति के सगरी पौधा एनाकार्डियासिया परिवार के सदस्य हवें, जेवना में काजू नियर अन्य कई गो फेड़ भी शामिल बाने। आम दक्खिनी एशिया, मने की भारत आ आसपास के देस सभ, के मूल पैदावार हवे जहाँ से भारतीय आम (मैंगीफेरा इंडिका) बाकी जगह पहुँचल आ आज के समय में गरम प्रदेसन में एही फल के खेती सभसे ढेर हो रहल बाटे।

आम भारत, पाकिस्तान आ फिलिपींस के राष्ट्रीय फल हवे आ बांग्लादेश के राष्ट्रीय फेड़ हवे।

आम के फेड़  तक ले ऊँच हो सके ला, आ एकरे ऊपरी फइलाव के गोलाई  व्यास बाला हो सके ला। ई फेड़ बहुत लंबा समय ले जियत रहे ला, कुछ अइसन नमूना भी देखे में आइल बाने जे 300 साल के होखले के बावजूद फरत मिलल बाने।
गहिरा माटी में, मूसर वाली जरि लगभग  भीतर ले चल जले आ एकरे चारों ओर बड़हन बिस्तार में अउरी सोरि सभ फइले लीं; इनहन के अलावा कई ठो अइसन सोरि भी होलीं जे जमीन में कई फीट अंदर ले जालीं आ फेड़ के खड़ा रहे में लंगर नियर मदद करे लीं। पतई सभ सदाबहार होलीं, एक के बाद एक कंछी में साधारण तरीका से जुड़ल होलीं आ इनहन के लंबाई लगभग  आ, चौड़ाई  होले; एकदम नौनिहाल पतई सभ नारंगी-गुलाबी, तेजी से कुछ बड़ भइले पर बैंगनी या चमकदार गहिरा लाल आ फिर रूढ़ भइले पर गहिरा हरियर रंग के हो जालीं। फूल लगभग  लमहर झोंप में लागे लें; हर एक सफेद रंग के आ फूल पाँच गो पंखुरी वाला होला जिनहन के लंबाई  होला; हल्का मादक महक वाला ई फूल दूर से फुलाइल होखे के सूचना देलें। आम के लगभग 400 किसिम सभ के पता बा जिनहन में ज्यादातर गरमी के सीजन में फरे लें, जबकि कुछ में साल में दू बेर फर लागे ला। फर के पाके में तीन से छह महिन्ना के समय लागे ला।

पाकल फर के रूपरंग आ साइज भी अलग-अलग होला। आम के बिबिध किसिम सभ में पीयर, संतरहवा, लाल, भा हरियर रंग के हो सके लीं आ अंदर एक ठो लमछर आ चापट कोइली होला जेकरा चारों गूदा लपटाइल रहे ला आ कोइली रेशा निकल के गूदा में समाइल रहे लें जेकरा कारन ई जल्दी कोइली से अलगा ना होला। पाकल, बिना छीलल आम ईगो खास तरह के मीठ महक देला। कोइली में अंदर  मोटाई के सिंगल बीया होले जे लगभग  लमहर होले। बीया के अंदर ओधी के भ्रूण होला। आम के बीया हठबीया () होले आ ई वातावरण के जमा देवे वाला तापमान या फिर बहुत सूखा ना बर्दास्त क सके लें।

भोजपुरी, मैथिलि, हिंदी आ कई अन्य भाषा सभ में एह फल के नाँव आम, संस्कृत के आम्रः शब्द से निकलल हवे।

जबकि अंगरेजी शब्द मैंगो (mango) (बहुवचन में मैंगोस (mangoes भा mangos) मूल रूप से मलयालम भाषा के मान्ना भा मांगा से पुर्तगाली भाषा से हो के पहुँचल, लगभग 1498 में जब केरल से यूरोप खातिर मसाला के ब्यापार होखे।Origin of mango: Portuguese manga, probably from Malayalam māṅga. First Known Use: 1582 एह शब्द के कौनों यूरोपीय भाषा के लिखित सामग्री में पहिला रिकार्ड इटली के लेखक लुडोविसो दि वर्देमा के 1510 के लिखल चीज में मांगा (manga) के रूप में मिले ला; फ्रांसीसी भाषा आ परंपरागत-बाद के लैटिन भाषा में एही जा से अनुवाद हो के पहुँचल; अंगरेजी में -ओ कईसे जुड़ गइल ई बात साफ नइखे।

दक्खिन एशिया में आम के खेती भा बागबानी हजारन साल से हो रहल बा आ ई ईसा पूर्व पाँचवीं-चउथी सदी में दक्खिन पुरुब एशिया में पहुँचल, आ दसवीं सदी ईसवी में अफिरका महादीप में पूरबी हिस्सा में एकर खेती सुरू गइल। 14वीं-सदी के मोरक्को देस के यात्री इब्ने-बतूता एकरा के मोगादिशू में पावल जाए के बिबरण दिहले बाने। बाद में एकर बागबानी ब्राजील, बरमूडा, वेस्ट इंडीज आ मैक्सिको में होखे लागल जहाँ कहीं उचित जलवायु मिलल।

वर्तमान में आम के बागबानी सगरी बर्फ रहित इलाका में, उष्णकटिबंधीय आ उपोष्ण कटिबंधीय इलाका में होखे लागल बाटे; हालाँकि आज भी दुनिया के कुल आम पैदावार के आधा हिस्सा अकेले भारते में पैदा होला, दुसरा नंबर पर चीन बाटे। आम के खेती स्पेन के अंडालूसिया में भी होला काहें से कि इहाँ के समुंद्र किनारे के उपोष्णकटिबंधी जलवायु यूरोप के मुख्य भूमि के एकलौता अइसन हिस्सा सभ में बा जहाँ उष्णकटिबंधी पौधा सभ के उपज हो सके ले। स्पेन के कब्जा वाला, कनारी दीपसमूह दुसरा उल्लेखनीय इलाका बा जहाँ आम के पैदावार होले। बाकी अन्य आम उपजावे वाला जगह सभ में उत्तरी अमेरिका के फ्लोरिडा आ कैलीफोर्निया ने कोचेला घाटी, दक्खिन अमेरिका आ मध्य-अमेरिका में, कैरीबियन देस सभ में, हवाई में, दक्खिनी, पच्छिमी आ मध्य अफिरका में, ऑस्ट्रेलिया, चीन, दक्खिन कोरिया, पकिस्तान, बांग्लादेश आ दक्खिन पुरुब एशिया बानें।

भारत आम के सभसे बड़ उत्पादन करे वाला होखे के बावजूद, आम के बिस्व ब्यापार में खाली भर 1% हिस्सेदारी करे ला काहें से कि इहाँ खुदे एकर जयादातर खपत हो जाला।

आम के ब्यापार होखे वाली ज्यादातर किसिम सभ मूल रूप से क्यूबा के आम के किसिम गोमेरा-1 के जरि पर कलम लगा के उपजावल जालीं काहें की ई समुंद्र किनारे के भूमध्यसागरीय इलाका के आबोहवा के अनुकूल पड़े ला। आम के 1,000+ किसिम सभ में से ज्यादातर के कलमी आम के रूप में उपजावल जा सके ला। आम के कुछ छोटहन लंबाई वाली किसिम के सजावटी पौधा के रूप में भी इस्तमाल होला।

आम के फसल कई तरह के रोग आ बेमारी से भी प्रभावित होले।

In 2017, global production of mangoes (report includes mangosteens and guavas) was 50.6 million tonnes, led by India with 39% (19.5 million tonnes) of the world total (see table). China and Thailand were the next largest producers (table).

At the wholesale level, the price of mangoes varies according to the size, the variety, and other factors.  The FOB Price reported by the United States Department of Agriculture for all mangoes imported into the US ranged from approximately US$4.60 (average low price) to $5.74 (average high price) per box (4 kg/box) during 2018.

एही तरह से, अगर पुराना आँकड़ा देखल जाय तब साल 2013 के आँकड़ा अनुसार, आम, अमरुत आ मैंगोस्टीन के सामूहिक रूप से कुल उत्पादन 430लाख टन भइल, एह में 42% हिस्सा भारत देस में पैदा भइल (18 मिलियन टन)। चीन आ थाईलैंड क्रम से दुसरा आ तिसरा नमर पर रहलें।




#Article 73: गाजर (109 words)


गाजर एगो सब्जी के नाम ह। इ लाल, करिया, नारंगी, कईयन रंगन में मिलेला। इ पौधवन के मूल (जड़) होला।

गाजर के एक गिलास रस एक समय के पूर्ण भोजन ह। इका सेवन से रक्त में वृद्धि होखेला। मधुमेह आदि के छोड़के गाजर प्रायः हरेक रोग में सेवन करल जा सकत बा। गाजर के रस में विटामिन ‘ए’,'बी’, ‘सी’, ‘डी’,'ई’, ‘जी’ , आ ‘के’ मिलेला। इ पीलिया के प्राकृतिक औषधि ह। इका सेवन ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर ) आ पेट के कैंसर में भी लाभदायक बा। इका सेवन से कोष आ धमनियन के संजीवन मिलेला। गाजर में बिटा-केरोटिन नामक औषधीय तत्व होखेला, जौन कैंसर पर नियंत्रण करे में उपयोगी बा। 




#Article 74: फीफा (176 words)


फिफा (फ्रांसीसी: Fédération Internationale de Football Association) जे के भोजपुरी में कहल जाई: अंतराष्ट्रिय फुटबॉल सम्मेलन के महासंघ
Fédération Internationale de Football Association के संक्षिप्त रुप ह FIFA (फिफा), जौन एगो अन्तराष्ट्रिय संगठन ह जौन अंतराष्ट्रिय फुटबॉल खेल के नियंत्रक ह, (फुटबॉल संघ भी कहाला)। इ संगठन के मुख्य कार्यालय ज्युरिख, स्वीट्जरलैंड में स्थित बा आ इका हाल के सबसे उच्चाधिकारी सेप ब्लाटर बानी। फिफा विश्व के सबसे बड़ फुटबॉल प्रतियोगिता के आयोजन करेला, आ इ सब में सबसे प्रसिद्ध प्रतियोगिता ह  फिफा विश्वकप, जौन 1930 में शुरु भइल रहल। फिफा के स्थापना 21 मई 1904 में पेरिस में भइल रहल आ अभी इमें 208 गो राष्ट्रिय संघ सदस्य बाड़न। इ संघ के कार्यालयी भाषा अंगरेजी, फ्रंसीसी, जर्मन आ स्पेनिश बा।

फिफा के सबसे शक्तिशाली अंग ह फिफा कांग्रेस, जौन एगो सभा ह जौन प्रतिनिधी लोगन के द्वारा बनल बा जें में प्रत्येक संघ के सदस्य बाड़न। कांग्रेस एक साल में एक बार एगो बैठक करावेला, आ 1998 से एगो अन्य बैठक हर साल करा रहल बा। फिफा के नियम में फेर बदल खाली कांग्रेस false.




#Article 75: गुलाब (236 words)


गुलाब एगो काँटेदार झांगी वाला पौधा हऽ जेमे खुब सुंदर खुश्बुदार फुल फुलाला आ ई फूलवो गुलाब कहाला। बैज्ञानिक हिसाब से ई रोज़ा (Rosa) जाति के सगरी पौधा आ फूल सभ हवें जे रोज़ेसी परिवार में आवे लें। गुलाब के सुंदरता आ सुगंध दुनों खातिर खास महत्व हवे आ एही से ई सजावटी पौधा, गुलदस्ता बनावे, इतर बनावे इत्यादि में इस्तेमाल होला।

गुलाब के लगभग तीन सौ से बेसी प्रजाति बाड़ी सऽ आ हजारन गो ले किसिम सभ बाड़ी सऽ। एकर पौधा झांग नियर हो सके ला, लता नियर हो सके ला आ झाड़ी नियर हो सके ला। एकरे डांठ के बनावट लकड़ी नियर होला आ एह पर काँटा होखे लें। हालाँकि ई काँटा सभ असल में एकरे ऊपरी छाल के बिस्तार होखे लें असल काँटा ना होखे लें। फूल सभ के बनावट आ साइज में बिबिधता देखे के मिले ला। रंग में ई सफ़ेद, गुलाबी, पीयर आ लाल रंग के बिबिध प्रकार के होखे लें। गुलाब के जादेतर प्रजाति सभ एशिया महादीप के मूल पौधा हईं जबकि कुछ प्रजाति यूरोप, उत्तर अमेरिका का उत्तर-पच्छिमी अफिरका के मूल पौधा हईं। एकर बिबिध प्रजाति आ किसिम सभ के आपस में मेल आसानी से हो जाला जेवना कारन एकर बहुत सारा किसिम सजावटी पौधा, इतर इत्यादि खाती बिकसित कइल गइल बाटे। पौधा के ऊँचाई गमला में लागल कुछ इंच के पौधा से ले के लता वाला किसिम सभ में पाँच-सात मीटर के ऊँचाई तक ले हो सके ला।




#Article 76: शहर (427 words)


शहर बड़हन आकार के मानव आबादी वाला जगह होला। शहरन में कई प्रकार के सुविधा उपलब्ध रहेला, आवागामन-यातायात के साधन के साथ साथ बजार, सिनेमा हॉल, अस्पताल, कॉलेज, बैंक आदी सब कुछ के सुविधा उपलब्ध रहेला। इहे कारण बा कि गाँव के अपेक्षा शहर में बेसी लोग रहेला। बेसी लोगन के रहे खातिर ऊँच-ऊँच भवन, घुमे फिरे खातिर पार्क नियर चीज सभ रहेला।

इतिहासी रूप से, दुनियाँ के बहुत कम्मे आबादी शहर में निवास करत रहल बा, हालाँकि, पछिला दू सदी में शाहीकरण अतना तेजी से भइल बा कि अब बिस्व के लगभग आधा से बेसी जनसंख्या शहरन में निवास करत बा। एह घटना के बिबिध परभाव सभ में बैस्विक सस्टेनबिलिटी पर दबाव भी एगो प्रमुख चिंता के बिसय बाटे। आज्काल्ह के शहर सभ में आमतौर पर में शहर भा कोर एरिया, मेट्रो एरिया आ आसपास के कम्यूटर जोन होला। आसपास के लोग रोजगार से ले के बिबिध मकसद से शहरन के ओर खिंचाव महसूस क्र रहल बा आ शहर में बस रहल बा। बैस्वीकरण के एह जुग में आ कम्युनिकेशन के साधन देख के इहो देखल जा रहल बा कि शहर सभ आपस में बहुत ऊँच डिग्री तक कनेक्टिविटी वाला हो चुकल बाड़ें। 

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बंगलौर (बंगलुरु) आ हैदराबाद नियर कुछ शहर भारत देस के प्रमुख शहर सभ में गिनल जालें।

शहर के आमतौर पर अइसे परिभाषित कइल जाला कि जवन आबादी वाला इलाका गाँव चाहे कसबा (टाउन) से बड़ होखे, मने की बेसी जनसंख्या वाला होखे, शहर (सिटी) कहाला। हालाँकि, कस्बा आ शहर के बीचा में, मने कि टाउन आ सिटी के बीच, कौनों बिसेस परिभाषा वाला अंतर ना बा आ इनहन के इस्तेमाल अदल-बदल के भी होखे ला। इंटरनेशनल रूप से पूरा दुनियाँ में कौनों निश्चित पैमाना भी ना बा कि केतना जनसंख्या वाली बस्ती शहर कहाई। उदाहरण देखल जाय तब घाना में 5,000 आबादी, अर्जेंटीना में 2,000 के आ न्यूजीलैंड में 1,000 के जनसंख्या के कम से कम होखल जरूरी बा जबकि स्वीडन नियर देस में 200 लोग के आबादी भी अगर एगो छोट जगह पर लगे-लगे रह के एक बस्ती के रूप में बसल होखे शहर कहा सके ला।

भारत में जनगणना बिभाग, जनगणना के रपट में, देहाती आ शहरी इलाका के रूप में बिभाजन करे ला जहाँ शहरी इलाका कहाए खाती या टेम्पलेट ओह बस्ती में नगर निगम, नगरपालिका, कैंट इत्यादि होखे; 5,000 से बेसी आबादी, 75 परसेंट से बेसी जनसंख्या गैर-खेती के काम में, आ 400 प्रति किमी से बेसी जनघनत्व होखे; एकरे अलावा नगर पालिका इत्यादि बिधिक एरिया के आसपास के सटल इलाका जे भले गाँव के रूप में दर्ज होखे बाकी शहरी सुबिधा सभ मौजूद होखे।




#Article 77: नीतीश कुमार (219 words)


या

नीतिश कुमार भारत देस के बिहार राज्य के मुख्यमंत्री (दावेदार) बाने। खबर बा कि 27 जुलाई के सबेरे 10 बजे इनके बिहार के 22वाँ मुख्यमंत्री के रूप में सपथ दियावल गइल। एकरा पहिले नीतीश कुमार साल 2005 से 2014 ले आ दूसरी बेर 2015 से 2017 ले बिहार के मुख्यमंत्री रहलें आ 26 जुलाई 2017 के अपना पद से इस्थीपा दे दिहले रहलें।

नीतीश कुमार जनता दल (यूनाइटेड) के नेता हवें। राजनीति में नीतीश के पृष्ठभूमि समाजवादी नेता के रूप में बा। अपना पहिले के मुख्यमंत्री काल में इनके समाजवादी नीति के तहत 100,000 इस्कूल मास्टरन के भर्ती, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डाक्टरन के उपस्थिति आ काम कइल सुनिश्चित कइल, गाँवन के बिद्युतीकरण, सड़क निर्माण, जनाना निरक्षरता के कम कइल, अपराध कम कइल आ औसत बिहारी ब्यक्ति के आमदनी में बढ़ती ले आइल कुछ मुख्य उपलब्धी गिनावल जाला। इनका मुख्यमंत्री काल में बिहार के क्यूमुलेटिव जीडीपी बढ़ती अन्य राज्यन के तुलना में सभसे ढेर रहल बा।

नीतीश कुमार के जनम बिहार के नालंदा जिला के हरनउत (कलियाँबीघा) में कबिराज रामलखन सिंह आ परमेश्वरी देवी के घरे भइल। इनके बाबूजी स्वतंत्रता सेनानी रहलें
नीतीश कुमार 1972 में बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरी में डिग्री लिहलें पढ़ाई के बाद ऊ बिहार राज्य बिद्युत निगम में आधा-अधूरा मन से नौकरी ज्वाइन कइलेन आ बाद में राजनीति में उतर गइलें।




#Article 78: जंगल (130 words)


जंगल एगो बड़हन जमीन क टुकड़ा होला जेमें विभिन्न प्रकार क हरिअर पेड़-पौधा आ बनस्पति प्राकृतिक रूप से बहुत घन अवस्था में पावल जाला। जंगल चाहे वन क परिभाषा अलग अलग देस में अलग अलग भी होला आ केतना पेड़ रहला पर जंगल कहल जाई ई बहुत अलग अलग भी हो सकेला। आमतौर पर जंगल बहुत घन बन के कहल जाला, हालाँकि ई बिभाजन पच्छिमी देस कि लोगन के हवे जे उष्णकटिबंधीय बन के जंगल कहे लागल, हमनी की भाषा में बन आ जंगल एकही के कहल जाला। जंगल में नदी, तालाब, झील, पोखरा भी हो सकत बा आ साथे-साथ विभिन्न प्रकार के जानवर भी हो सकत बा।

भारत में वन विभाग की अधिकार में आवे वाला जमीन के बन चाहे कहल जाला भले ओ में एक्को पेड़ न होखे।




#Article 79: संस्कृत (239 words)


संस्कृत भारतीय उपमहादीप के एगो प्राचीन भाषा हऽ। ई भाषा बिज्ञान के हिसाब से इंडो-यूरोपीय परिवार के भाषा हवे आ एकरे इंडो-आर्यन शाखा में आवे ले। अभिन भी एह भाषा के बोले-समझे वाला लोग मौजूद बा आ एह भाषा में लिखल प्राचीन साहित्य से ले के समकालीन साहित्य तक ले के बिसाल धरोहर मौजूद बा। प्राचीन भारतीय ग्रंथ सभ के रचना एही भाषा में भइल हवे आ बिबिध बिसय सब पर बृहद मात्रा में जानकारी एह भाषा में लिखल प्राप्त होखे ले।

बिकास के क्रम के हिसाब से हे भाषा के दू गो रूप बतावल जाला: वैदिक संस्कृत, जेह में वेद सभ के रचना भइल हवे; आ लौकिक संस्कृत जेह में बाद के साहित्य आ अउरी बिबिध बिसय के ग्रंथ लिखल गइल हवें। संस्कृत भाषा के ई नाँव बिसेस संस्कार, यानी ब्याकरण इत्यादि के हिसाब से खास शुद्ध कइल भाषा, होखे के कारण मिलल हवे आ अपना इतिहास में ई अभिजात वर्ग आ पढ़ल लिखल लोग के भाषा रहल बा। एकरे साथे-साथ आम जनता के भाषा प्राकृत रहल जेकरा में कुछ साहित्य भी मिले ला आ संस्कृत साहित्य में भी एह भाषा के मिलजुल मिले ला।

बाद के कई इंडो-आर्यन भाषा सभ, जइसे कि भोजपुरी, नेपाली, हिंदी, मराठी, बांग्ला इत्यादि के बिकास संस्कृत से होखल बतावल जाला, हालाँकि, एह बात के बिपरीत कई बिद्वान लोग माने ला कि एह भाषा सभ के बिकास संस्कृत के समांतर बोलल जाए वाली प्राकृत सभ से भइल आ संस्कृत के परभाव भर पड़ल।




#Article 80: हिंदी भाषा (284 words)


हिंदी भाषा (शाब्दिक अरथ:हिंद के भाषा) मुख्य रूप से भारत के हिंदी प्रदेश में, आ अन्य भाषा के रूप में पूरा भारत आ भारत से बाहर रहे वाला भारतीय लोग द्वारा बोलल जाए वाली एक ठो भाषा हवे। भाषा बिज्ञान के अनुसार ई इंडो-आर्य समूह के भाषा हवे। खड़ी बोली के मानकीकरण से हिंदी आ उर्दू दुनों भाषा सभ के उत्पत्ति मानल जाले, हिंदी भाषा जहाँ संस्कृत से आपन ज्यादातर शब्द लिहले बा ओहिजे उर्दू में ज्यादातर शब्द फ़ारसी आ अरबी मूल के मिलेला। हिंदी-उर्दू के मिलल-जुलल रूप, जवन काफी संख्या में आम जन के आ सिनेमा जगत भाषा बाटे ओकरा के हिंदुस्तानी भी कहल जाला।

मानक हिंदी, हिंदी के अइसन रूप हवे जेह में संस्कृत के परभाव ज्यादा बा आ जवन तकनीकी शब्दावली, सरकारी कामकाज आ साहित्य के भाषा बाटे। ई भारत के राजभाषा (राष्ट्रभाषा नाहीं इत्यादि के अनौपचारिक वर्गीकरण भी मिले ला।

हिंदी भाषा के देवनागरी लिपि मे लिखल जाला, हालाँकि अंगरेजी के बढ़त परभाव के कारण कुछ लोग एकरा के रोमन लिपि में भी लिखे ला, खासतौर पर इंटरनेट आ चैटिंग इत्यादि में। हिंदी आ इंग्लिश के मिला-जुला रूप के हिंग्लिश के नाँव भी दिहल गइल बा।

भारत में 258 मिलियन लोग पहिली भाषा के रूप में आ 120 मिलियन लोग दूसरी भाषा के रूप में हिंदी बोले वाला बतावल जाला। लोग के मातृभाषा हिंदी हवे (हालाँकि एह आंकड़ा में भोजपुरी नियर भाषा बोले वाला लोग सब के भी सामिल कइल गइल बा) आ एकरे बाद लगभग 12 करोड़ लोग के दूसरी भाषा हवे।

हिंदी के साहित्य में आमतौर पर मध्य क्षेत्र के बोली सब में भइल 11वीं सदी के आसपास तक ले के रचना सभ से ले के आधुनिक काल तक के हिंदी में भइल रचना सभ के गिनल जाला। 




#Article 81: शुक्रवार (230 words)


शुक भा शुक्रवार सप्ताह के सात दिन में से एगो दिन हवे जे बियफे के बाद आ शनीचर से पहिले पड़े ला। जवना देस सभ में सोमार के हप्ता के पहिला दिन मानल जाला, ई पाँचवाँ दिन हवे; जहाँ अतवार के पहिला दिन मानल जाला उहाँ ई छठवाँ दिन हवे।

भोजपुरी नाँव शुक या सुक, संस्कृत में शुक्रवार के छोट रूप हवे। भारतीय आ नेपाली हिसाब से एह दिन के शुक्र ग्रह के आधार पर नाँव रखल गइल हवे।

अंगरेजी में एकरा के फ्राइडे (Friday) कहल जाला। ई शब्द पुरान अंगरेजी भाषा के Frīġedæġ से निकलल हवे जेकर अरथ होला Frigg के दिन। अंगरेजी में Frigg के अरथ देवी वीनस से लिहल जाला; इनही वीनस के नाँव पर अंगरेजी में शुक्र ग्रह के भी नाँव रखल गइल हवे।

हिंदू धरम में ई देवी के पूजा के दिन मानल गइल हवे आ दुर्गा आ लक्ष्मी के पूजा एह दिन के कइल जाला।

इस्लाम में शुक के जुमा या जुम्मा के रूप में मनावल जाला आ एह दिन के नमाज के ख़ास महत्व हवे। इस्लाम माने वाला देसन में ई छुट्टी के दिन होला, जइसे ईसाई धरम वाला देसन में या अंगरेजी राज के अधीन रहल देसन में अतवार के छुट्टी मनावल जाला ओही तरे।

ईसाई धर्म में ईस्टर के तिहवार से पहिले वाला शुक के ईसा मसीह के सूली पर चढ़ावे के इयाद में गुड फ्राइडे के रूप में मनावल जाला।




#Article 82: एम्सटर्डम (133 words)


एम्सटर्डम नीदरलैंड के राजधानी आ सबसे बड़ शहर ह। एह शहर के राजधानी वाला इस्टेटस नीदरलैंड के संबिधान द्वारा अस्थापित हवे, हालाँकि, ई सरकार के सीट ना हवे आ लगभग सगरी सरकारी कामकाज दि हेग नाँव से शहर से होला। एम्सटर्डम सहर में सदर शहर के कुल जनसंख्या 8,51,373 बा, शहरी इलाका के कुल जनसंख्या 13,51,587 बा आ पूरा मेट्रो एरिया के शामिल कइल जाय तब कुल जनसंख्या 24,10,960 बाटे। ई शहर नीदरलैंड के पच्छिमी हिस्सा में मौजूद प्रांत उत्तर हालैंड में पड़े ला हालाँकि, ई एह प्रांत के राजधानी ना हवे बलुक प्रांत के राजधानी हार्लेम शहर हवे।

एह शहर के नाँव के उतपत्ती एम्स्टेलरेडैम (Amstelredamme) से भइल हवे, इतिहासी रूप से एम्स्टेल नाँव के नदी पर बनल बाँध के किनारे बस्ती के बसाव के सुरुआत के कारण ई नाँव पड़ल हवे।




#Article 83: जिमी वेल्स (101 words)


जिमी डोनल (जिम्बो) वेल्स एक ठो अमेरिकी इंटरनेट उद्यमी आ  के सह संस्थापक आ प्रमोटर हवें।

वेल्स हुन्त्विली, अलबामा में पैदा भइलें आ एगो छोट निजी स्कूल में पढ़ाई भइल, फिर एक विश्वविद्यालय में उसने स्नातक आ फाइनेंस बिसय में मास्टर डिग्री लिहलें। वेल्स बाद में वित्त फर्म में नौकरी करने लगलें, आ कई बरिस ले शिकागो के एगो वायदा आ विकल्प फर्म के शोध निदेशक के रूप में काम कइलें। 1996 में, ऊ आ अउरी दू साथी लोग मिल के एगो वेब पोर्टल के अस्थापना कइल लोग आ जिम्बो, विकिपीडिया आ नुपेडिया के बनावे खातिर सुरुआती रकम के ब्यबस्था कइलें।




#Article 84: राम (180 words)


राम, श्रीराम चाहे रामचंद्र एगो भारतीय देवता हवें जिनके हिंदू लोग विष्णु के सातवाँ अवतार माने ला; वाल्मीकि के महाकाव्य आ हिंदू धर्मग्रंथ रामायण आ तुलसीदास के काव्य रामचरितमानस में इनके कथा प्रमुख रूप से बर्णित बा आ अउरी कई गो रामकथा सभ के ई मुख्य पात्र बाड़ें। वैष्णव शाखा इनके विष्णु के अवतार माने ला आ रामभक्ति शाखा में इनका के सभसे ऊँच देवता भा साक्षात ईश्वर (भगवान) के रूप मानल जाला।

कथा अनुसार राम कोसल प्रदेश के राजा दशरथ, जिनके राजधानी अजोध्या रहल, के चार गो में से जेठ बेटा रहलें आ रानी कौशल्या के गरभ से पैदा भइल रहलें जबकि बाकी भाई लोग लक्ष्मण, भरत आ शत्रुघन रहल। राम के बियाह जनक के बेटी सीता से भइल। एकरे बाद के घटनाक्रम में राम के बनवास, सीता के रावण द्वारा हरण, सीता के खोज आ रावण से जुद्ध के बाद लंका पर बिजय पा के वापस अजोध्या लवटे; सीता के अग्निपरीक्षा आ त्याग इत्यादि रामकथा के मुख्य घटना हईं। कथा में राम के धर्म आ सामाजिक ज़िम्मेदारी निभावे वाला आदर्श ब्यक्ति के रूप में चित्रित कइल गइल बा। 




#Article 85: दिन (257 words)


दिन, समय के नाप के इकाई के रूप में, लगभग ओह समय के बराबर होला जेतना देरी में पृथ्वी अपना धुरी पर एक चक्कर लगावे ले आ एकरे परिणाम के रूप में एक बेर सुरुज उगे से ले के डूबे आ रात भर के बाद अगिल दिने उगे से ठीक पहिले के बेर तक ले के समय लागे ला। दुसरे अरथ में, आम बोलचाल के भाषा में दिन के मतलब सुरुज उगे से ले के अस्त होखे तक ले के समय के कहल जाला, ई सीजन अनुसार घटत-बढ़त रहे ला।

ढेर तकनीकी रूप से, सुरुज के सापेक्ष पृथिवी के चक्कर के कुल 24 घंटा में बाँटल जाला आ इहे एक दिन के समय होला। तकनीकी रूप से एकर गणना बीच रात से ले के अगिला बीच रात ले के समय के रूप में होला; बीच रात मने कि रात के बारह बजे, जेकरा के तकनीकी रूप से 00.00 AM के रूप में परिभाषित कइल जाला। एह किसिम के परिभाषा अनुसार जवन समय होला ओकरा के सौर दिवस (सोलर डे) कहल जाला।

अउरी सूछम रूप से बिबेचना कइल जाय तब साइडेरियल दिन के गणना कइल जाला जे ज्योतिष आ खगोल शास्त्र में इस्तमाल होले। एक साइडेरियल दिन ठीक ओह समय के बराबर होला जेतना देर में पृथिवी अपना धुरी पर एक चक्कर लगावे ले। काहें से कि पृथ्वी साथे-साथ सुरुज के चक्कर भी लगावे ले, एकदम सटीक नाप तब हो पावे ला अगर बहुत दूर मौजूद तारा सभ (नक्षत्र) के सापेक्ष पृथ्वी के चक्कर के नापल जाय; एही से हिंदी में एकरा के नाक्षत्र दिवस भी कहल जाला।




#Article 86: पृथ्वी (3567 words)


पृथ्वी सौर मंडल में सूर्य के ओर से बुध अउरी शुक्र की बाद तिसरका ग्रह हवे। पृथ्वी से मिलत जुलत संरचना वाला ग्रहन के पार्थिव ग्रह कहल जाला जिनहन में पृथ्वी सबसे बड़हन बाटे आ बाकी अउरी तीन गो बुध, शुक्र आ मंगल बाड़ें। पृथ्वी अंतरिक्ष में से नीला रंग के लउकेले एही से एकरा के नीला ग्रह भी कहल जाला। वैज्ञानिक प्रमाण की हिसाब से पृथ्वी के उत्पत्ति अब से करीब साढ़े चारि अरब बरिस पहिले भइल रहल।

पृथ्वी के सबसे बड़ बिसेसता बा इहाँ जीवित जीव जंतु आ पेड़ पौधा के मिलल। अबहिन ले पूरा ब्रह्माण्ड में अउरी कौनो अइसन पिण्ड नइखे मिलल जेवना पर जीवन मिलला के सबूत होखे। खाली मनुष्ये ना बालुक अउरी हजारन लाखन परकार के जीवित परानी पृथ्वी पर निवास करेलन। एकरी खातिर कई गो कारण जिम्मेवार बा जइसे कि पृथ्वी के सूर्य से दूरी एकदम सही बा ए से ई न ढेर गरम रहेले न ढेर ठंढा हो जाले, पृथ्वी के वायुमंडल में गैसन के मात्रा एकदम सही अनुपात में बा, ओजोन परत आ पृथ्वी के चुंबकीय मण्डल सूर्य की हानिकारक किरण से जीवित परानिन के रक्षा करे लें।

पृथ्वी के जीवन धारण कइला कि क्षमता की कारण आ मनुष्य कि एकरी ऊपर निर्भर रहला की कारण एकरा के भारतीय संस्कृति में धरती माई कहल जाला काहें कि सगरी जीव जंतु आ पेड़ पौधा एही पृथ्वी के संतान हवे लोग । संसार की प्राचीनतम ग्रन्थ वेद में पृथ्वी कि आराधना में एगो पूरा सूक्त बा जेवना के पृथिवी सूक्त कहल जाला। पुरानन में पृथ्वी के शेषनाग की फन पर स्थित बतावल गइल बा।

पृथ्वी के अध्ययन करे वाला विज्ञानन के पृथ्वी विज्ञान कहल जाला। इन्हन में सबसे पुरान विज्ञान के भूगोल कहल जाला जेवन पृथ्वी के अलग-अलग अस्थान के रूप आ उहाँ पावल जाए वाला पर्यावरण आ लोगन के अध्ययन आ वर्णन करे वाला विषय हवे। पृथ्वी की अन्दर की जानकारी के खोज करे वाला बिज्ञान भूगर्भशास्त्र कहल जाला। भूगोल में पृथ्वी की ज़मीन वाला हिस्सा के स्थलमंडल, पानी वाला हिस्सा के जलमंडल, पृथ्वी की चारो ओर की गैस से बनल हिस्सा के वायुमंडल आ ए बाकी तीनों में व्याप्त ओ हिस्सा के जे में जीव पावल जालें, जैवमंडल कहल जाला।

पृथ्वी पर पावल जाए वाला पर्यावरण मनुष्य आ बाकी सभ जीव जंतु खातिर बहुत महत्व के चीज बा काहें से कि एकरी अन्दर गड़बड़ी से एकर संतुलन बिगड़ जाई टा सारा जीव जंतु के अस्तित्व समाप्त हो जाई। एही से पृथ्वी की पर्यावरण के सुरक्षा खातिर बहुत व्यापक चर्चा होत बा काहें से कि मनुष्य की क्रियाकलाप से पृथ्वी की प्राकृतिक पर्यावरण के खतरा पैदा हो गइल बा। 

हर साल अप्रैल महीना की 22 तारिख के पृथ्वी दिवस आ 5 जून के पर्यावरण दिवस मनावल जाला।

पृथ्वी (या पृथिवी) के अरथ होला बिसाल आकार वाली आ एकरा के अउरी कई गो नाँव से भी जानल जाला, जइसे कि धरती, भूमि, भू, भूँइ इत्यादि। पृथिवी शब्द से जुड़ल पुराणन के कहानी भी बा। विष्णु पुराण के मोताबिक राजा पृथु के नाँव पर पृथ्वी नाँव पड़ल हवे। कहानी के अनुसार अंग देस के राजा वेन सुभाव से दुष्ट रहलें आ जज्ञ पूजा के रोक दिहलें जेकरे कारण तपस्वी ऋषि लोग उनके पीट के मुआ घालल आ उनके बाँह के मीसल जेकरा से पृथु नाँव के राजा पैदा भइलें। प्रजा के पृथ्वी से अन्न आ शाक इत्यादि मिलल बंद हो गइल रहे जेकरे कारण पृथु तीर-धेनुही ले के पृथ्वी के पीछा कइलें जे गाय के रूप ध के भागल आ अंत में एह शर्त पर तइयार भइल कि ओकरा के एगो बाछा दे दिहल जाय। तब पृथु, स्वयंभू मनु के बाछा बना के पृथ्वी रुपी गाय के दुहलें आ ओकरे बाद पृथ्वी से फिर से अन्न इत्यादि के उपज सुरू भइल।

पृथ्वी के अन्य नाँव भी बाने। धरा, धरती इत्यादि के अरथ सभके धारण करे वाली होला। वसुंधरा के अरथ वसु सभ के धारण करे वाली। रसा के अरथ जेह में सभ रस मौजूद होखे भा जेह से रस के उत्पत्ती होखे। रत्नगर्भा मने जेह से रतन उत्पन्न होखत होखें।

अंगरेजी में पृथ्वी के अर्थ  (Earth) कहल जाला। लातीनी भाषा में टेरा  (Terra) आ यूनानी भाषा में ज्या भा जी (γῆ)। टेरा से टेरेस्ट्रियल इत्यादि शब्द बने लें जबकि ज्याग्रफी (भूगोल), जियोलोजी (भूबिज्ञान) इत्यादि शब्द यूनानी मूल शब्द से बनल हवें।

वैदिक साहित्य में ऋग्वेद आ अथर्ववेद में पृथ्वी के देवी रूप में बर्णन कइल गइल बा। अथर्ववेद में पृथ्वीसूक्त में पृथ्वी देवी के बिस्तार से स्तुति गावल गइल बा।

सौर मंडल में मौजूद सभसे पुरान पदार्थ के समय  (Gya) निर्धारित कइल गइल बा।  तक ले सुरुआती (प्राइमार्डियल) पृथ्वी के निर्माण हो गइल रहे। सौर मंडल के ग्रह आ इत्यादि सभ के निर्माण आ इवोल्यूशन सुरुज के साथे-साथ भइल। सिद्धांत रूप में, एगो सौर नेबुला से मॉलिक्यूलर बदरी के रूप में निकल के पदार्थ चापट डिस्क के नियर रूप लिहलस जे घुमरी करे लागल आ एही डिस्क से ग्रह सभ आ सुरुज के उत्पत्ती भइल। नेबुला में गैस, बरफ के कण, आ ब्रह्मांडी धूर रहल (जेह में प्राइमार्डियल यानि सुरुआती न्यूक्लियस भा केंद्रबिंदु भी रहलें)। नेबुलर सिद्धांत के अनुसार, ग्रहाणु (प्लैनेटेसिमल) सभ के उत्पत्ती नेबुला के पदार्थ सभ के एकट्ठा होखे (एक्रियेशन) से भइल आ सुरुआती पृथ्वी के बने में 10– (Ma) के समय लागल।

चंद्रमा के उत्पत्ती, जवन 4.53 बिलियन साल पहिले भइल, अभिन ले रिसर्च के बिसय बा। कामचलाऊँ हाइपोथीसिस के मोताबिक, चंद्रमा के उत्पत्ती पृथ्वी से निकलल पदार्थ के एकट्ठा होखे से भइल जब मंगल के आकार के एगो आकाशी पिंड थीया  (Theia) पृथ्वी के टकरा गइल। एह सिनैरियो में, थीया के द्रब्यमान पृथ्वी के द्रब्यमान के 10% के आसपास रहल, भयानक टक्कर भइल, आ एकर कुछ द्रब्यमान पृथ्वी के साथ बिलय भी हो गइल। लगभग 4.1 आ  तक ले, कई सारा एस्टेरोइड टक्कर भइल जेकरा के अब बाद के हैबी बमबारी कहल जाला आ ई काफी ब्यापक रूप से चंद्रमा के सतह आ वातावरण के बदल दिहलस, एही तर्ज पर, अइसने परभाव धरती पर भी भइल।

धरती के वायुमंडल आ समुंद्र सभ के रचना ज्वालामुखी क्रिया आ अन्य तरीका से बाहर निकले वाली गैस सभ के द्वारा भइल जेह में जलभाप भी शामिल रहल। जलभाप के कंडेन्सेशन (ठंढा हो के पानी बनले) के काम में एस्टेरोइड सभ से, प्रोटोप्लैनेट (आदिग्रह), आ पुच्छल तारा सभ से मिलल पानी आ बरफ के भी योगदान रहल। एह सिद्धांत के मोताबिक, वायुमंडल में मौजूद ग्रीनहाउस गैस सभ के कारण समुंद्र के पानी जमे ना पावल जबकि सुरुज अभी अपने वर्तमान दीप्ति के  70% भर प्रकाश देत रहे।  तक ले, पृथ्वी के चुंबकी क्षेत्र स्थापित हो चुकल रहल, ईहो एह काम में मदद कइलस आ सौर हवा से उड़ के वायुमंडल के बिनास होखे से बचावे में मदद कइलस।

क्रस्ट, यानी पृथ्वी के ऊपरी ठोस परत, के निर्माण पघिलल बाहरी परत के ठंढा होखे से बनल। दू गो मॉडल बाने जे धरती के जमीनी हिस्सा के वर्तमान रूप के धीरे-धीरे निर्माण या फिर, बहुत संभावित बा कि, अचानक तेजी से भइल बिकास के ब्याख्या करे लें जवन कि पृथ्वी के सुरुआती इतिहास में भइल रहल होखी आ एकरे बाद लमहर समय खातिर पृथ्वी के जमीनी महादीपी हिस्सा स्थाई रूप पा गइल। महादीप सभ के उत्पत्ती प्लेट टेक्टॉनिक्स के द्वारा भइल जेकरा के चलावे वाली ताकत पृथ्वी के ठंढा हो रहल अंदरूनी हिस्सा से आवे ले। भूबैज्ञानिक समय पैमाना पर देखल जाव त पछिला कई सौ करोड़ साल में सुपरमहादीप सभ टूट के बिलग होखे आ दुबारा एकट्ठा होखे के प्रक्रिया से गुजरल बाने। लगभग  (मिलियन (करोड़) साल पहिले), सभसे पुरान मालुम सुपरमहादीप रोडीनिया टूटे सुरू भइल। बाद में एकर हिस्सा 600– के आसपास दोबारा जुड़ के पैनोटिया नाँव के सुपर महादीप बनवलें। एही तरीका से अंत में पैंजिया सुपरमहादीप बनल आ  के लगभग इहो टूट गइल जेकर टुकड़ा वर्तमान समय के महादीप हवें सऽ।

बर्फानी जुग के वर्तमान पैटर्न  में सुरू भइल आ प्लीस्टोसीन काल, , में अउरी पोढ़ भइल। ऊँच-अक्षांस वाला इलाका सभ में एकरे बाद से कई बेर बर्फानी जुग के ग्लेशियर निर्माण आ फिर इनहन के पघिलाव के घटना भइल बा आ लगभग हर 40,000– में चक्र के रूप में अइसन भइल बा।  अंतिम महादीपी ग्लेशीयेशन करीबन 10,000 साल पहिले भइल रहे।

अबसे लगभग चार बिलियन बरिस पहिले, केमिकल रियेक्शन के चलते पहिला अइसन अणु (मोलिक्यूल) सभ के उत्पत्ती भइल जे खुद अपने नियर अणु पैदा करे में सक्षम रहलें। एकरे लगभग आधा बिलियन साल बाद, पृथ्वी के सभसे पहिला अइसन जिंदा के जीव के पैदाइश भइल जे बाद के सगरी जिंदा परानी सभ के पूर्बज मानल जा सके ला। प्रकास संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस) के बिकास भइल आ सुरुज के रोशनी से मिले वाली उर्जा के सीधा तरीका से सजीव जीवधारी अपना भोजन बनावे में करे सुरू क दिहलें। एह से पैदा भइल ऑक्सीजन (O2) वायुमंडल में जमा भइल आ सुरुज के अल्ट्रावायलेट किरन से रिएक्शन क के पृथिवी के चारों ओर ऊपरी वायुमंडल में ओजोन (O3) के एगो परत बना दिहलस जे एक तरह से सगरी सजीव सभ के सुरक्षा करे वाली परत हवे। एकरे बाद छोटहन कोशिका सभ के बड़हन कोशिका सभ में समहित होखे के बाद काम्प्लेक्स कोशिका सभ के निर्माण भइल, जिनहन के यूकार्योट कहल जाला। वास्तविक कई कोशिका वाला जीवधारी सभ के द्वारा बनल कालोनी के सभ के स्पेशलाइजेशन बढ़त गइल। नोकसानदेह अल्ट्रावायलेट किरन के सोख लिहल जाए के बाद पृथिवी पर जीवन के बिस्तार होखे में मदद मिलल। अबतक ले, सभसे पुरान जीवधारी सभ के परमान के रूप में, पच्छिमी आस्ट्रेलिया के बलुआ पाथर में से लगभग 3.48 बिलियन बरिस पुरान सूक्ष्मजीवी (माइक्रोबायल) फोसिल मिलल बाड़ें, जीवीय पैदाइश वाला 3.7 बिलियन बरिस पुरान ग्रेफाईट पच्छिमी ग्रीनलैंड के मेटासेडीमेंटरी चट्टान सभ में मिलल बाटे, आ पच्छिमी आस्ट्रेलिया के 4.1 बिलियन बरिस पुरान चट्टान में से जीवी तत्व मिलल बाड़ें।

नियोप्रोटेरोजोइक (Neoproterozoic) काल में,  पहिले, पृथ्वी के ज्यादातर हिस्सा बरफ से तोपाइल रहल होखी। अइसन हाइपोथीसिस के स्नोबाल अर्थ (बरफीला गोला रुपी पृथ्वी) के नाँव से जानल जाला आ ई खासतौर पर अध्ययन आ रिसर्च के रूचि के बिसय बाटे काहें की ठीक एही के बाद ऊ घटना भइल जेकरा के कैम्ब्रियाई बिस्फोट कहल जाला, जेह में अचानक तेजी से, पृथ्वी पर बहुकोशिकी-जीव सभ के रचना अउरी ढेर काम्प्लेक्स यानि जटिल बन गइल। कैंब्रियाई बिस्फोट के बाद,  के आसपास, पाँच बेर भारी पैमाना पर जीव सभ के बिलुप्त होखे के घटना भी भइल। अइसन सभसे हाल के बिलुप्ती घटना  में भइल, जेकर कारन एगो उल्का टक्कर के मानल जाला आ एही के बाद पृथ्वी से डाइनासोर सभ के बिनास भइल आ अउरी ढेर सारा रेप्टाइल सभ के जिनगी बड़हन पैमाना पर परभावित भइल। पछिला  में, मैमल सभ के जाति-प्राजाति में बहुत बिबीधता आइल, कुछ करोड़ बरिस पहिले, अफिरकी बनमानुस नियर जीव सभ सीधा खड़ा हो के चले सीखलें। एकरे बाद औजार के इस्तेमाल करे सुरू कइलेन आ आपस में संबाद के बिकास भइल, दिमाग के बिस्तार भइल आ एही क्रम में आधुनिक मनुष्य सभ के उत्पत्ती भइल। खेती के खोज आ उदोगीकरण के बाद मनुष्य खुद पृथ्वी के वातावरण आ जिया-जंतु के बहुत हद तक परभावित कइलस।

लमहर समय के बात कइल जाव त पृथ्वी के भाबिस्य सुरुज के भाबिस्य पर निर्भर बा। अगिला  में सुरुज के दीप्ती (ल्यूमिनासिटी) लगभग 10% बढ़ी आ अगिला  में ई 40% तक ले बढ़ जाई। धरती के साथ के तापमान बढ़ी आ ई पृथ्वी पर कार्बनडाईआक्साइड के मात्रा के में अइसन बदलाव होखी जेकरा कारण पौधा सभ के फोटोसिंथेसिस खातिर मिले वाला कार्बनडाईआक्साइड के मात्रा में खतरनाक तरीका ले गिरावट आई। पेड़-पौधा के बिनास से ऑक्सीजन के कमी होखी आ जियाजंतु सभ के भी बिनास हो जाई। एकरे एक बिलियन साल बाद, धरती के सारा पानी गायब हो चुकल होखी आ दुनिया के औसत बैस्विक तापमान  तक ले () चहुँप चुकल होखी। एह नजरिया से देखल जाव त पृथ्वी अउरी  साल तक ले निवास जोग रही, आ संभवतः  तक ले अगर वायुमंडल से नाइट्रोजन निकाल दिहल जाय। अगर सुरुज के दसा न भी बदले आ स्थाई तौर पर अइसने रहे तबो अनुमान बा कि आधुनिक समुंद्र सभ के 27% पानी एक बिलियन साल में सरवत के जमीन के भीतर मैंटल में चहुँप जाई, एकर कारण समुंद्रमध्य के रिज सभ से भाप वेंटिंग के घटाव होखी।

सुरुज  में बिकसित हो के रेड जायंट बन जाई। मॉडल सभ के प्रागअनुमान बा की सुरुज के आकार में फइलाव होखी। ई फइल के  के हो जाई, ई आकार एकरे वर्तमान आकार के 250 गुना होखी। एह घटना के कारन पृथ्वी के भागि अनिश्चिते बा। एगो रेड जायंट के रूप में, सुरुज के द्रब्यमान में 30% के कमी होखी आ पृथ्वी के परिकरमा कक्षा 1.7 AU होखी जब सुरुज अपने बिस्तार के चरम पर होखी। अगर सगरी ना, त अधिकतर जिंदा चीज सभ के त बिनास होई जाई काहें की सुरुज के दीप्ती बहुत बढ़ जाई (अपना चरम पर ई वर्तमान के 5,000 गुना होखी)। 2008 के एगो सिमुलेशन मॉडल ई बतावल की पृथ्वी के परिकरमा के कक्षा अंत में ज्वारीय परभाव के चलते घट जाई आ अंत में ई सुरुज के वायुमंडल में प्रवेश क के भाफ बन जाई।

धरती के घनत्व पूरा सौरमंडल मे बाकी सगरी पिण्डन में सबसे ज्यादा बा। बाकी चट्टानी ग्रहन के संरचना कुछ अंतर की साथ पृथ्विये की नियर हउवे। चन्द्रमा के केन्द्रक छोट हवे, बुध का केन्द्रक उसके कुल आकार की तुलना मे बहुत विशाल हवे, मंगल और चंद्रमा का मैंटल कुछ मोटा हवे, चन्द्रमा और बुध मे रासायनिक रूप से भिन्न भूपटल ना पावल जाला, सिर्फ पृथ्वी के अंत: और बाह्य मैंटल परत अलग है। ध्यान दिहल जाय कि ग्रहन (पृथ्वी भी) के आंतरिक संरचना की बारे मे हमनी के ज्ञान सैद्धांतिक हवे।

पृथ्वी के आतंरिक संरचना परतदार बाटे मने कि कई परत में बा। ए परतन के मोटाई का सीमांकन रासायनिक विशेषता या फर यांत्रिक विशेषता की आधार पर कइल जाला।

पृथ्वी के सबसे ऊपरी परत क्रस्ट एगो ठोस परत हवे, मध्यवर्ती मैंटल बहुत ढेर गाढ़ परत हवे, आ बाहरी क्रोड तरल अउरी आतंरिक क्रोड ठोस अवस्था में हवे।

पृथ्वी की आतंरिक संरचना की बारे में जानकारी के स्रोत को दू तरह के बाड़ें । प्रत्यक्ष स्रोत, जइसे ज्वालामुखी से निकलल  पदार्थन के अध्ययन, समुद्र्तलीय छेदन से मिलल आंकड़ा के अध्ययन इत्यादि, जेवन कम गहराई ले का जानकारी उपलब्ध करा पावे लें। दूसरी ओर अप्रत्यक्ष स्रोत की रूप में भूकम्पीय तरंगन के अध्ययन अउर अधिक गहराई की विशेषता की बारे में जानकारी देला।

यांत्रिक लक्षणों की आधार पर पृथ्वी के  स्थलमण्डल, दुर्बलता मण्डल, मध्यवर्ती मैंटल, बाह्य क्रोड और आतंरिक क्रोड में बाँटल जाला। रासायनिक संरचना की आधार पर भूपर्पटी, ऊपरी मैंटल, निचला मैंटल, बाह्य क्रोड और आतंरिक क्रोड में बाँटल जाला।

पृथ्वी की अंतरतम के ई परतदार संरचना भूकंपीय तरंगों की संचलन आ उनहन की परावर्तन आ प्रत्यावर्तन पर आधारित ह जिनहन के अध्ययन भूकंपलेखी की आँकड़न से कइल जाला। भूकंप से पैदा भइल प्राथमिक अउरी द्वितीयक तरंगन के पृथ्वी की अंदर स्नेल की नियम के अनुसार प्रत्यावर्तित हो के  वक्राकार पथ पर गति होले। जब दू गो परतन की बीच में घनत्व अथवा रासायनिक संरचना के अचानक परिवर्तन होला तब तरंगन के कुछ ऊर्जा उहाँ से परावर्तित हो जाले। परतन की बीच की अइसन जगहन के असातत्य (Discontinuity) कहल जाला।

अन्य चट्टानी ग्रहन की ऊपरी परत से अगर तुलना कइल जाय त पृथ्वी के क्रस्ट (अउरी मेंटल के ऊपरी कुछ हिस्सा) कई ठोस हिस्सन में बाँटल बा जिनहन के प्लेट कहल जाला। ई प्लेट एस्थेनोस्फीयर की ऊपर तैरत रहेलीं आ एही गतिविधि के प्लेट टेक्टानिक कहल जाला।

(वर्तमान में) आठ प्रमुख प्लेट:

पृथ्वी का भूपटल के उमिर बहुत काम हवे। खगोलिय पैमाना पर देखल जाय त ई बहुते छोटे अंतराल 500,000,000 वर्ष मे बनल हौउवे। क्षरण अउरी टेक्टानीक गतिविधी पृथ्वी की भूपटल को नष्ट करत रहेले औउरी दूसरी ओर नया भूपटल के निर्माण भी होत रहेला। पृथ्वी के सबसे शुरुवाती इतिहास के प्रमाण नष्ट हो चुकल बाडन। पृथ्वी के आयु करीब-करीब  4.5 अरब साल से लेके  4.6 अरब साल होखला के अनुमान वैज्ञानिक लोग लगावेला । लेकिन पृथ्वी पर सबसे पुरान चट्ठान 4 अरब वर्ष पुरान हउवे , 3 अरब वर्ष से पुरान चट्टान बहुत दुर्लभ रूप से मिलेली। जिवित प्राणियन के जीवाश्म के  आयु 3.9 अरब बारिस से कम्मे मिलेला। जब पृथिवी पर जीवन के शुरुआत भइल ओह समय के कौनो प्रमाण अब उपलब्ध नइखे।

पृथ्वी की सतह का 70% हिस्सा पानी से ढंकल बा। पृथ्वी अकेला एइसन ग्रह हउवे जेवना पर पानी द्रव अवस्था मे सतह पर उपलब्ध हउवे । हमनी के ई जानले जात बा कि जीवन खातिर द्रव जल बहुत आवश्यक हउवे । समुद्र के गर्मी सोखला के क्षमता पृथ्वी की तापमान के स्थायी रखे मे बहुत महत्वपूर्ण हउवे । द्रव जल पृथ्वी की सतह के क्षरण (अपरदन) आ मौसम की खातिर बहुत  महत्वपूर्ण हवे।(मंगल पर भूतकाल मे शायद एइसन गतिविधी भइल होखे ई हो सकेला।)

पृथ्वी के वायुमंडल मे 77% नाइट्रोजन, 21% आक्सीजन, अउरी कुछ मात्रा मे आर्गन, कार्बन डाई  आक्साईड अउरी भाप पावल जाला। ई अनुमान लगावल जाला कि पृथ्वी की निर्माण की समय कार्बन डाय आक्साईड के मात्रा ज्यादा रहल होई जेवन चटटानन में कार्बोनेट की रूप मे जम गइल, कुछ मात्रा मे सागर द्वारा अवशोषित कर लिहल गइल, बाकी बचल कुछ मात्रा जीवित प्रानी द्वारा प्रयोग मे आ गइल होई। प्लेट टेक्टानिक अउरी जैविक गतिविधी कार्बन डाय आक्साईड के थोड़-बहुत मात्रा के उत्सर्जन आ अवशोषण करत रहेलन। कार्बनडाय आक्साईड पृथ्वी के सतह की तापमान के  ग्रीन हाउस प्रभाव द्वारा नियंत्रण करे ले । ग्रीन हाउस प्रभाव द्वारा पृथ्वी सतह का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस की आस पास बनल रहेला नाहीं त पृथ्वी के तापमान  -21 डीग्री सेल्सीयस से 14 डीग्री सेल्सीयस रहत;  इसके ना रहने पर समुद्र जम जाते और जीवन असंभव हो जाता। जल बाष्प भी एगो आवश्यक ग्रीन हाउस गैस हउवे।

रासायनिक दृष्टि से मुक्त आक्सीजन भी आवश्यक हवे। सामान्य परिस्थिती मे आक्सीजन विभिन्न तत्वन से क्रिया करि के विभिन्न यौगिक बनावे ले। पृथ्वी की वातावरण में आक्सीजन के निर्माण अउरी नियंत्रण विभिन्न जैविक प्रक्रिया से होला। असल में जीवन के बिना मुक्त आक्सीजन संभव नइखे।

पृथ्वी के आपन चुंबकीय क्षेत्र भी हउवे जेवन कि बाह्य केन्द्रक के विद्युत प्रवाह से निर्मित होला। सौर वायु ,पृथ्वी के चुंबकिय क्षेत्र और उपरी वातावरण में आयनमंडल से मिल के औरोरा बनाते है। इन सभी कारको मे आयी अनियमितताओ से पृथ्वी के चुंबकिय ध्रुव गतिमान रहते है, कभी कभी विपरित भी हो जाते है।
पृथ्वी का चुंबकिय क्षेत्र और सौर वायू मीलकर वान एलन विकिरण पट्टी बनावेले, जो की प्लाज्मा से बनल हुयी छल्ला की आकार के जोड़ी हउवे जेवन पृथ्वी के चारो ओर वलयाकार मे पावल जाला। बाहरी पट्टी 19000 किमी से 41000 किमी तक हवे जबकि अंदरूनी पट्टी 13000 किमी से 7600 किमी तक हवे।

चन्द्रमा पृथ्वी के एकलौता उपग्रह हवे । चन्द्रमा पृथ्वी से करीब डेढ़ लाख किलोमीटर की दूरी पर स्थित हउवे आ ई पृथ्वी के चक्कर 27.3 दिन में लगावेला। बाकी ग्रह उपग्रहन की तरह चन्द्रमा भी सूर्य की अँजोर से प्रकाशित रहेला । पृथ्वी की चारो ओर चक्कर लगावत घरी पृथ्वी, चन्द्रमा आ सूर्य के आपस के संबंध दिशा की अनुसार बदलत रहेला जेवना से हमनी के चंद्रमा घटत-बढ़त रूप में लउकेला। एही घटना के चन्द्रमा के अवस्था कहल जाला । भारत में चन्द्रमा की अवस्था की हिसाब से तिथि अउरी महीना के गणना होला ।

चंद्रमा  जेतना देर में पृथ्वी के एक चक्कर लगावेला (27.3 दिन) ओतने देरी में अपनी धुरी पर एक चक्कर घूमेला । एही वजह से हमनी के पृथ्वी से हमेशा चन्द्रमा के एक्के हिस्सा लउकेला ।

चन्द्रमा अपनी आकर्षण से ज्वार-भाटा ले आवेला । साथै-साथ चंद्रमा की आकर्षण की कारण पृथ्वी की घूर्णन अउरी परिक्रमा गति के हर सदी मे 2 मिली सेकन्ड कम कर देला । ताजा रिसर्च की अनुसार 90 करोड़ वर्ष पहिले एक वर्ष मे 18 घंटा के 481 दिन होखे।

पृथ्वी के मानक खगोलशास्त्रीय चीन्हा चार हिस्सा में बाँटल एगो बृत्त, , हवे जे दुनिया के चारो कोना सभ के ओर इशारा करे ला।

अलग-अलग जगह के मानवी संस्कृति सभ में धरती के बारे में किसिम-किसिम के बिचार मौजूद बाने। कई जगह, धरती के देवी के रूप में मानल गइल बा। कई संस्कृति सभ में पृथ्वी के महतारी देवी (mother goddess) आ कहीं उपजशक्ति के देवी (fertility deity) के रूप में देखल जाला, आ 20वीं सदी में जनमल गाया हाइपोथीसिस, एकरा के एक ठो सिंगल सजीव जीवधारी के रूप में देखे ले जे अपना के खुद नियमित करे ला आ निवास जोग वातावरण के स्थाई बनवले रहे ला। सृष्टि के कई तरह के मत में पृथ्वी के कौनो देवता भा दैवी शक्ति द्वारा बनावल मानल गइल बा।

बैज्ञानिक खोज के रिजल्ट के कारण कई संस्कृति सभ में धरती के बारे में नजरिया में भी बदलाव देखल गइल बा। पच्छिमी जगत में ई मान्यता कि पृथ्वी चापट बा, छठवीं सदी ईसा पूर्व में पाइथागोरस के खोज द्वारा बदल गइल आ एकरा के गोलाकार स्वीकार कइल गइल। पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में बा इहो मान्यता रहे, ई सोरहवीं सदी में कोपरनिकस आ गैलीलियो के खोज से बदल गइल आ सौरमंडल के केंद्र में सुरुज के होखे के बात स्वीकार क लिहल गइल। चर्च के बिद्वान जेम्स अशर के परभाव में पूरा पच्छिमी जगत इहे बूझत रहे कि पृथ्वी के उत्पत्ति कुछ हजार साल पहिले भइल रहे, ई त उनईसवीं सदी में जाके भूबिज्ञान के खोज सभ से पता लागल की पृथ्वी के उमिर कई करोड़न साल के बा। लार्ड केल्विन नियर बिद्वान, 1864 में, थर्मोडाईनॅमिक्स के सिद्धांत के आधार पर पृथ्वी के उमिर 20 करोड़ से 400 करोड़ बरिस के बीच होखे के बात कहलें, जेह पर ओह समय बहुत बिबाद मचल; ई त उनईसवीं आ बीसवीं सदी के बात बा कि रेडियोएक्टिविटी के खोज के बाद उमिर निर्धारित करे के बिस्वासजोग तरीका मिलल आ पृथ्वी के उमिर कई बिलियन (अरब) बरिस बा ई बात साबित भइल। पृथ्वी के बारे में आदमी के नजरिया 20वीं सदी में एक बेर फिर बदलल जब पहिली बेर एकरा के अंतरिक्ष में से देखल गइल, खासतौर से जब अपोलो मिशन के दौरान लिहल गइल फोटो सभ प्रकाशित भइल।

 | title=Climate Change and International Politics
 | first1=Narottam | last1=Gaan
 | publisher=Gyan Publishing House
 | year=2008 | isbn=8178356414 | page=40
 | url=



#Article 87: मार्च (418 words)


मार्च ग्रेगरियन कैलेंडर आ जूलियन कैलेंडर दुनों में तिसरा महीना हऽ। ई महीना 31 दिन के होला आ साल के अइसन दुसरा महीना हवे। एकरा पहिले फरवरी आ एकरे बाद अप्रैल के महीना पड़े लें। उत्तरी गोलार्ध में मार्च के महीना से बसंत के सुरुआत होला जबकि खगोलीय तरीका से 20 या 21 मार्च के बसंत बिसुव (दिन-रात बराबर) पड़े ला आ खगोलीय बसंत के सुरुआत होला। दक्खिनी गोलार्ध में ई पतझड़ के सुरुआत होला।

भारतीय हिसाब से मार्च के महीना में फागुन-चइत के महीना ओभरलैप करे लें आ शिवराति आ होली नियर तिहुआर अक्सरह मार्च के महीना में पड़े लें काहें से कि इनहन के हिंदू पतरा अनुसार पड़े वाला तिथी के आधार पर मनावल जाला।

पुराना जमाना में, रोमन कैलेंडर आ अउरी यूरोपीय कैलेंडर सभ में मार्च के महीना साल पहिला महीना होखे जब एकरे साथे बसंत के सुरुआत होखे। एकर नाँव ओही जमाना के मरीचस भा मारिटस के बदल चुकल रूप हवे आ एकर ई नाँव यूनानी कथा के देवता मार्स के नाँव पर रखल गइल हवे। मार्स के जुद्ध के देवता मानल जाला आ खेती किसानी आ रक्षा करे वाला देवता के रूप में भी। उत्तरी गोलार्ध आ खासकर यूरोप में जाड़ा के बाद खेती किसानी आ जुद्ध के सुरुआत के इहे सीजन रहे।

फिनलैंड के भाषा में मार्च के मालिस्कू (maaliskuu) कहल जाला, एह के उत्पत्ती मालिनेन कू (maallinen kuu) से भइल बतावल जाला जेकर मतलब होला, मार्च में, धरती भा जमीन जाड़ा में बरफ से तोपाइल रहे के बाद वापस लउके सुरू हो जाला (हालाँकि, ई उत्पत्ती शब्दशास्त्र आधारित अनुमान बा आ कौनों अन्य परमान नइखे)। यूक्रेनियाई भाषा में एकर नाँव  березень/बेरेजेन हवे, जेकर मतलब बर्च के फेड़ होला, एही तरे चेक भाषा में भी ब्रजेन (březen) कहल जाला। सैक्सन भाषा में एकरा के लेंटमोनाट (Lentmonat) कहल जाला जे, मार्च बिसुव के आधार पर आ दिन के लंबाई बढ़े के आधार पर रखल गइल हवे (लेंट के अंगरेजी के लेंथ भा लंबाई से समानता धियान दिहल जाय)। एगो अउरी नाँव Rhed-monat भा Hreth-monath (देवी Rhedam/Hreth के नाँव पर) हवे, आ एंगल्स लोग एह महीना के Hyld-monath कहे ला।

स्लोवेनियाई भाषा में पारंपरिक नाँव sušec हवे, जेकर मतलब ई होला कि जमीन अब अतना सूख चुकल बा कि खेती खाती ओकरा के जोतल जा सके ला। अन्य नाँव brezen आ breznik भी इस्तेमाल होलें, बर्च के महीना के अरथ में। तुर्की भाषा में मार्ट (Mart) मार्स देवता के नाँव पर दिहल गइल हवे।

कई गो तिहुआर बाड़ें जे अंगरेजी कैलेंडर के हिसाब से ना मनावल जालें बाकी अक्सरहा मार्च में पड़ सके लें:




#Article 88: ङ (176 words)


ङ देवनागरी वर्णमाला के पाँचवा व्यंजन वर्ण ह आ क-वर्ग के पाँचवा (क-वर्ग= क, ख, ग, घ, ङ) अक्षर ह।

भोजपुरी भाषा में ङ अक्षर के ध्वनी बहुत प्रचलित ह। हिंदी के परभाव में शब्दन के लिखे के तरीका बदल गइल बा आ एह आवाज के अक्सर एह अक्षर के इस्तेमाल द्वारा अब लिखल छोड़ दिहल गइल बा। संस्कृत में कई शब्दन के एह अक्षर के सहायता से लिखल जाला आ एकर प्रयोग शुद्ध मानल जाला। ङ से कौनो शब्द के शुरुआत ना होखेला।

हिंदी में (खासतौर से पछाहीं हिंदी में) एह अक्षर के उच्चारण लगभग गायब हो चुकल बा आ एकरे जगह अं के मात्रा के बाद ग अक्षर के उच्चारण नियर बोलल जाए लागल बा। उदाहरण खातिर संस्कृत के गङ्गा अब हिंदी में गंगा के रूप में लिखल जाला। भोजपुरी में देखा-देखी गंगा लिखल जाला बाकिर अभिन भी बिहारी भाषा सभ (भोजपुरी, मैथिली, मगही) में ठेठ उच्चारण गङा भा गङ्ङा नियर होला।

निचे के उदाहरण में देखीं ङ के इस्तेमाल कहाँ होला:

रङ = रंग
रङ्ग = रंग
बङ्गाल = बंगाल
अङरेज = अंग्रेज




#Article 89: पानी (329 words)


पानी (अंगरेजी: Water रासायनिक सूत्र: H2O) बिना रंग, बिना गंध आ बिना स्वाद के अईसन एगो पदार्थ जौन आमतौर पर पृथ्वी पर नदी, झील, ताल, तालाब, आ समुद्र में तरल रूप में मिलेला, बरखा की रूप में आसमान से बरिसे ला आ बर्फ़ की रूप में ठोस अवस्था में पावल जाला, एगो बहुत महत्व वाला पदार्थ हवे। पानी अगर ना रहित त पृथ्वी पर जिन्दगी के शुरुआत न भइल रहित। ज्यादातर जीव सब की कोशिका में कोशिका द्रव्य की रूप में पावल जाला आ जीवन खातिर बहुत जरूरी मानल जाला।

पानी की एगो अणु में ऑक्सीजन के एगो आ हाइड्रोजन के दू गो परमाणु होला।
पृथ्वी के लगभग 71% सतह पानी से तोपाइल बाटे। पृथ्वी पर कुल पानी के 96.5% पानी समुद्र की रूप में बाटे, 1.7% जमीनी पानी 1.7% ग्लेशियर आ बर्फीली टोपी की रूप में, आ ख़ाली 0.001% पानी हवा में भाप, बादर आ बरखा के रूप लेवे वाला बाटे। खाली 2.5% पानी साफ पानी बाटे, एहू के 98% बरफ आ पातालीय जल की रूप में बाटे। 0.3% से भी कम साफ पानी के मात्रा नदी, झील आ आकाश में बाटे आ बहुत मामूली मात्रा (0.003%) में सजीव जीवधारी सब में स्थित बाटे।

आदमी खातिर पानी के बहुत उपयोग बाटे। रोज की जीवन में पिये वाला पानी से ले के खेत में सिंचनी करे खातिर, उद्योग सब में इस्तेमाल खातिर, पानी में जहाज चला के यातायात आ आवागमन खातिर, अइसन बहुत सारा सीधा उपयोग वाली चीज बा सब जेवन मनुष्य की जीवन खातिर जरूरी भ लाभदायक बाटे।

पानी का जीवन खातिर महत्व एही बात से बूझल जा सकत बाटे की बैज्ञानिक लोग कौनों दुसरा ग्रह या आसमानी चीज पर जिनगी के होखला के खोज करे खातिर सभसे पहिले ईहे खोजे के कोसिस करे ला की उहाँ पानी मिलत बाटे की नाहीं।

एही सब इस्तेमाल की चलते पानी एगो महत्व वाला संसाधन हवे। एकर रखरखाव आ मैनेजमेंट कई कारण से बहुत जरूरी बाटे काहें से कि आजकाल प्रदूषण आ कमी की चलते एकर महत्व बहुत बढ़ गइल बाटे।

 




#Article 90: सेव (125 words)


सेव भा सेब ((; Malus domestica) एगो फलदार फेड़ हवे जेह पर गोल-गोल गुद्देदार फर फरे ला। एकरे फल के भी सेब भा सेव कहल जाला। ई समशीतोष्ण इलाका के फल हवे आ भारत में आमतौर प पहाड़ी इलाका में एकर बाग होला। काश्मीर आ हिमाचल प्रदेश में एकर बागान बाड़ें।
वैश्विक दृष्टि से एकर मुख्य स्थान मध्य एशिया रहल। बाद में ई यूरोप में भी उगावल जाए लागल। हजारों वर्षों से ई एशिया तथा यूरोप में उगावल जा रहल बा। एकर विशेष धार्मिक महत्व बा। पूजा पाठ में एकर खास महत्व बा। स्वास्थ्य के दृष्टि से भी ई एगो बहुत फायदेमंद फल बाटे। एगो प्राचीन कहावत बा कि प्रतिदिन एगो सेव खाए वाला आदमी के डॉक्टर वैद्य के लगे जाए के जरूरत ना पड़ी।




#Article 91: वर्कशॉप (106 words)


वर्कशॉप (, हिंदी:कर्मशाला) एगो अइसन जगह ह जहवा कवनो वस्तु के आधारभूत रुप मे परिर्वतन कइल जाला, कहला के मतलब इ बा की एगो अइसन जगह जहवां कवनो वस्तु के निर्माण होत होखे या ओकरी आकार के इंजीनियरी तरीके से बदलल जात होखे, कर्मशाला अर्थात वर्कशाप कहाला ।

आमतौर पर ई कौनों कमरा भा बिल्डिंग होला जहाँ सामान के मरम्मत या निर्माण करे वाला औजार आ काम करे के जगह मौजूद होला। 

पुराना समय में, जब औद्योगिक क्रांति ना भइल रहे, इंजीनियरी आ अइसन अउरी सामान सभ फैक्ट्री में ना बलुक वर्कशौप में बने।

वर्कशाप बनावे खातिर सबसे महत्वपूर्ण चीज होला उपयुक्त जगह के चुनाव कइल।




#Article 92: साहित्य (445 words)


साहित्य (अंगरेजी: लिटरेचर) सामान्य अरथ में, लिखल गइल रूप में कौनों रचना के कहल जा सके ला। हालाँकि, कुछ सकेत अरथ में कलात्मक ढंग से लिखल गइल रचना सभ के साहित्य के दर्जा दिहल जाला; पुराना समय में खाली कबितई वाली रचने सभ के साहित्य मानल जाय आ गद्य रचना बाद में एह में शामिल भइल। दुसरे ओर, ब्यापक अरथ में, सगरी अइसन लिपिबद्ध, मने कि लिखाई भा लिपि के इस्तेमाल से सहेजल, चाहे ऊ हाथ से लिखल होखे चाहे छापा में छपल होखे, भा डिजिटल रूप में मौजूद होखे, कला आ ज्ञान के बात के निरूपण करे वाली सगरी सामग्री साहित्य कहल जा सके ले। ऑक्सफोर्ड ऑनलाइन हिंदी डिक्शेनरी के अनुसार, साहित्य के अरथ: लिपिबद्ध ज्ञान भा बिचार हो सके ला, गद्य भा पद्य में लिखल कलात्मक रचना, या फिर ग्रंथ सभ के सामूहिक रूप से साहित्य कहल जा सके ला।

साहित्य के बर्गीकरण भी कई आधार पर कइल जा सके ला, जइसे कि भाषा, देस, बिधा, भा बिसयबस्तु के आधार पर अलगा-अलगा किसिम के साहित्य परिभाषित कइल जाला।

भोजपुरी भाषा में साहित्य शब्द संस्कृत से आइल हवे जहाँ एकर उत्पत्ती सहित+यत् प्रत्यय से बतावल जाला आ अरथ कइल जाला कि जहाँ शब्द आ अरथ के सहभाव (एक्के साथ मौजूद होखे के स्थिती) होखे। हालाँकि, ऊपर बतावल ब्युत्पत्ती में कत्तों शब्द आ अरथ के समभाव वाली बात अपने आप ना आ जाले, ई मानल जाला कि पुरनका आचार्य लोग काब्य, मने कि कबिताई के परिभाषा एही रूप में कइल कि जहाँ शब्द आ अरथ के समभाव होखे (सहितौ), हालाँकि बाद में एह पूरा बात खाती ई एकही शब्द इस्तमाल होखे लागल; साथे-साथ काब्य शब्द के अरथ एकरे बाद सिकुड़ गइल।

अंगरेजी शब्द लिटरेचर के उत्पत्ती लैटिन भाषा के शब्द लिटेरा (litera/littera) से बतावल जाला। मने कि इहाँ भाषा के लिखल रूप के ढेर साफ बात कइल गइल बा, काहें कि एही लिटेरा मूल शब्द से जेकर अरथ अच्छर या अच्छर संबधित होला, से लेटर (अक्षर), लेटर चिट्ठी पतरी इत्यादि के उत्पत्ती होखे ला।

साहित्य के परिभाषा समय के साथ बदलत रहल बाटे: ई एक किसिम से संस्कृति सापेक्ष परिभाषा होला। पच्छिमी यूरोप में, 18वीं सदी से पहिले, साहित्य के मतलब रहे सगरी किताब आ लिखित सामग्री। रोमांटिक जुग में अउरी सकेत माने के उदै भइल आ साहित्य के मतलब बूझल जाए लागल कि कल्पनाशीलता वाला लेखन के काम। समकालीन बादबिबाद कि साहित्य में कवना कवना चीज के सामिल कयल जाय, पुरनका लच्छन सभ के ओर लवट रहल बा आ बेसी इन्क्लूसिव (मने ढेर कुछ समेटले) चिन्हित कइल जा रहल बा; जइसे कि उदाहरन के रूप में, सांस्कृतिक अध्ययन, एकरे पापुलर आ अलपसंख्यक बिधा सभ, सगरो के सामिल करे ला आ पच्छिमी पंथ (धार्मिक) परंपरा के ग्रंथ सभ के भी एही के हिस्सा माने ला।




#Article 93: सोनपुर मेला (850 words)


सोनपुर मेला(कैथी:𑂮𑂷𑂢𑂣𑂳𑂩 𑂧𑂵𑂪𑂰) भारतीय राज्य बिहार के सारन जिला में सोनपुर नाँव के जगह पर लागे वाला मेला हवे। मुख्य रूप से ई मेला मवेशी सभ के मेला हवे जहाँ पालतू जानवरन के बिक्री-खरीद होखे ला। मेला हिंदू कैलेंडर के हिसाब से कातिक महीना के पुर्नवासी से सुरू होला जेकरा के गंगा नहान भी कहल जाला।

सोनपुर शहर, हिंदू धरम में पबित्र मानल जाए वाली नदी गंगा आ नेपाल से बह के आवे वाली गंडक नदी के संगम पर बसल हवे। हेइजा श्री हरिहरनाथ के मंदिर बा, इलाका के हरिहर क्षेत्र कहल जाला, आ एहिजे ई मेला लागे ला। मंदिर आ जगह के पबित्र माने के वजह पुराणन में बर्णित गजेंद्र मोक्ष के कथा हवे, जेकरे अनुसार अपना भक्त हाथी के मगरमच्छ द्वारा पकड़ लिहल जाए पर विष्णु आ के ओकरा के बचवले रहलें।

कुछ समाचारन में एकरा के एशिया के सभसे बड़हन पशु मेला बतावल जाला। एह मेला के देखे खाती भारते ना बलुक बिदेस के लोग भी आवे ला। 

राज्य सरकार एकरे खाती कई किसिम के बेवस्था भी करे ले। सरकारी पुलिस के अलावा, मेला में चोरी-चकारी से निपटे खाती आ भुलाइल लोगन के खोज करे खाती इहाँ सामुदायिक पुलिस (स्वयंसेवक लोग के ब्यवस्था) भी कई साल से चल रहल बा।

हिंदू धार्मिक कथा आ पुराणन के अनुसार गंगा-गंडक के संगम वाला इलाका के हरिहर क्षेत्र कहल जाला। सोनपुर में हरिहरनाथ के मंदिर भी स्थापित बाटे। पौराणिक कथा सभ में गजेंद्र मोक्ष के कथा मिले ला। कथा के मोताबिक, ग्राह (मगरमच्छ) द्वारा गज (हाथी) के पकड़े के आ बिष्णु द्वारा अवतार ले के ग्राह से मुक्ति दियवले रहलें। मानल जाला की एह घटना के क्षेत्र इहे क्षेत्र हवे। जहाँ भगवान विष्णु अपना भक्त हाथी के प्राण के रक्षा मगरमच्छ से कइले रहीं, तबे से उहाँ के भगवान श्रीहरि आ हरिहरनाथ कहल जाला। 

कुछ बिद्वान लोग, वैष्णव लोग आ शैव लोग के आपसी बिबाद के दूर करे खाती हरी (बिष्णु) आ हर (शिव) के सम्मिलित रूप वाला देवता भगवान के हरिहर के कल्पना आ अस्थापना के भी इहाँ के प्रमुख देवता के उत्पत्ती के आधार माने ला। कुछ अन्य बिबरन में शालिग्रामी (इ गंडक के अन्य नाँव हवे) आ गंगा के संगम के कारण भी एह क्षेत्र के हरिहर क्षेत्र मानल जाए के बात मिले ला। एह क्षेत्र के सात गो पुण्य क्षेत्र सभ में भी शामिल कइल जाला।

जानवर के मेला भइला के बावजूद इ खाली जानवर मेला ना ह। इ भोजपुरिया समाज के मेला भी ह जहाँ रउआ भोजपुरी सभ्यता आ संस्कृति के जाने पहचाने के मौका मिले ला। भोजपुरिया पकवान से लेके भोजपुरिया कला तक के दर्शन इहाँ हो जाला। एही मेला में अपना ज़माना के मशहूर नौटंकी अदाकारा गुलाब बाई के जलवा रहे जेकरा के ओह समय के लोग अब्बो इयाद करे ला। हालत ई कि अब्बो एह मेला में गुलाब बाई के नाँव से कई गो इस्टेज लागे लें।

सोनपुर मेला खाली मवेशी बेचे-खरीदे के जगह ना हवे। अतना लोग के भारी भीड़ एकट्ठा होला कि ई एगो सामाजिक-सांस्कृतिक सम्मेलन बन जाला। एह मेला के दौरान होखे वाला पब्लिक के भीड़ के चलते इहाँ कुछ इतिहासी सम्मलेन भी भइल बाने। एह में से दू गो प्रमुख बाने।

सन 1908 में एही सोनपुर के मेला में बिहार प्रांतीय कांग्रेस के गठन भइल रहल। एह पहिली बैठक के अध्यक्षता सरफ़राज हुसैन खान कइलेन। कांग्रेस पार्टी के लोग बाद में भी एहिजा आ अइसने मेला सभ में जा के नया सपोर्टर जुटावे के कोसिस करे। 

एगो अन्य दुसरी प्रमुख चीज कि हेइजे स्वामी सहजानंद सरस्वती 1920 में किसान सभा के भी गठन कइले रहलें आ एह सभा के अध्यक्ष बनलें। कुछ अन्य बिबरन में, एहिजे 1888 में अखिल भारतीय गौरक्षा समीति के स्थापना होखे के बात भी बतावल जाला। 

राहुल सांकृत्यायन के हवाला से एह मेला के उत्पत्ती शुंग बंस के शासन काल से भइल बतावल जाले। जबकि बिहार सरकार के पर्यटन बिभाग के हवाला से एह मेला के प्राचीन होखे के बारे में बतावल गइल बा कि चंद्रगुप्त मौर्य भी इहाँ से हाथी खरीदें। कुछ जगह बिबरन मिले ला कि पहिले ई मेला पटना के उत्तर में मौजूद हाजीपुर में लागे आ औरंगजेब के जमाना में एह जगह लागे शुरू भइल। पहिले खाली भर पूजा हेइजा होखे।

बाबा हरिहरनाथ के मंदिर के इतिहास के बारे में कथा बतावल जाला कि ई राम द्वारा जनक के इहाँ जात समय बनवावल गइल रहे। बाद में एकर मरम्मत के काम राजा मान सिंह द्वारा करावल गइल आ अपना अंतिम रूप में, वर्तमान मंदिर के निर्माण राजा राम नारायण द्वारा मुग़ल काल के अंतिम समय में करावल गइल।

सोनपुर शहर बिहार के सारन जिला के सभसे पूरबी माथ पर बा। ई गंगा आ गंडक के संगम पर बसल हवे। बिहार के राजधानी पटना से एकर दूरी बस लगभग 30 किलोमीटर बा आ ई पटना से उत्तर ओर, तनिका पछिमाहुत दिसा में पड़े ला, गंगा नदी के उत्तरी किनारा पर सोनपुर-हाजीपुर आ दक्खिनी किनारे पर पटना बा।

रेल से भी सोनपुर तीशन पहुँचल जा सकत बा। हाजीपुर के पच्छिम ओर ई रेलवे इस्टेशन मौजूद बा आ एकरे आगे अउरी पच्छिम जा के लाइन दू दिसा में चल जाले, छपरा खाती आ दक्खिन मुंह के मुड़ के दीघा-सोनपुर पुल (लोकनायक जयप्रकाश सेतु) पार क के पटना के पच्छिमी हिस्सा में घुसे ले।




#Article 94: सुरजीत सिंह (165 words)


सुरजीत सिंह ने एक भारतीय वंश जो फिजी में शतरंज के विकास में बहुमूल्य योगदान दिया है की फ़ीजी. वह एक स्थानीय पहले पैदा हुए फिजी में शतरंज खिलाड़ियों में से एक था।
वह फिर से दक्षिण प्रशांत विश्वविद्यालय शतरंज क्लब के शुरू कर दिया। वह फिजी शतरंज संघ के संस्थापक सदस्य थे. वह रैंकों के माध्यम से गुलाब के लिए 1988 में राष्ट्रपति किया जाना है. वह सामना करने वाली चेहरा कक्षाओं के माध्यम से शतरंज क्लब और शिक्षण शतरंज की स्थापना और प्रिंट मीडिया के माध्यम से उपयोग शतरंज को बढ़ावा दिया। वह एक 1980 के दशक में फिजी में अग्रणी शतरंज खिलाड़ियों में से एक था. वह 1986 और 1988 में कप्तान और खिलाड़ी 1 बोर्ड के रूप में शतरंज ओलंपियाड में फिजी का प्रतिनिधित्व किया। 1983 में वह रेटिंग फिजी शतरंज संघ द्वारा प्रयोग किया जाता प्रणाली कम्प्यूटरीकृत।

उन्होंने यह भी एक व्यापार संघी था, फिजी अध्यापक संघ के भीतर आयोजित कार्यकारी पदों होने 1979 से 1983 के. इस प्रकार है:




#Article 95: फिजी हिंदी (122 words)


फिजी हिंदी भाषा, फिजी में भारतीय मूल के लोगन द्वारा बोलल जाले । एकरा फ़िजियन हिन्दी चाहे फ़िजियन हिन्दुस्तानी[1] भी कहल जाला। इ फिजी की आधिकारिक भाषा मे से एक बिया। ई जादेतर भारतीय मूल के फिजी लोगन द्वारा बोलल जाले। फिजी हिन्दी देवनागरी लिपि आउर रोमन लिपि दुनो में लिखल जाले।भाषा अवधी आउर भोजपुरी, हिंदी के पूरबि बोलियन प आधारित बा, लेकिन अउरौ भारतीय भाषा, खासकर उर्दू आउर अंगरेजी भाषा के शब्द   फ़ीजी हिन्दी के शब्दन  शामिल बा। 

पिछला 25 वर्षन में फिजी में राजनीतिक तनाव के चलते, कई भारतीयों  फिजी विदेशी व्यवस्थित करने के लिए छोड़ दिया है, उनके साथ उनकी भाषा ले रही बा। तालिका के नीचे दुनिया भर में फिजी हिंदी बोलने वालों के वितरण को दर्शाता बा।




#Article 96: गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (494 words)


गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय या खाली आई. पी. दिल्ली में एगो सार्वजनिक वृतिक विश्वविद्यालय ह. एकर निर्माण 1998 में करल गईल रहे जे की अब 120 से भी ज्यादा कालेजों के सम्बद्ध करेले जे की राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तक फईलल बाड़े. विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर में 15 शिक्षालय और कश्मीरी गेट परिसर में एगो संघटक कालेज - इंदिरा गाँधी प्रौद्योगिकी संसथान बाटे.

गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के देश के शिक्षा के क्षेत्र के प्रवर्तकों में गिनल जाला. ई पहिली और एकमात्र, भारतीय और एशीआई विश्वविद्यालय ह जेकरा प्लाटिनम टेकनोलौजी अवार्ड फॉर क्वालिटी एंड एक्सीलेंस जीनीवा स्वीज़रलैंड में शिक्षा के क्षेत्र में मिलल बा. ई पुरस्कार अदरवेज मैनेजमेंट एंड कनसलटिंग द्वारा दिहल गईल बा.

विश्वविद्यालय के, राष्ट्रमंडल विश्वविद्यालय संघ, भारतीय विश्वविद्यालय संघ, भारतीय चिकित्सा परिषद्, दूरशिक्षा परिषद् के सदस्यता प्राप्त बा.

गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वदियालय 28 मार्च 1998 के संस्थापित करल गईल रहे अउर प्रोफेस्सर के. के. अग्रवाल एकर पहिला कुलपति बनावल गईलें. विश्वविद्यालय के नाम प्राचीन और पौराणिक शहर इन्द्रप्रस्थ के ऊपर रखल गईल. बाद में 2001 में एकर औपचारिक नाम सिक्ख लोगन के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह के ऊपर रखल गईल. यद्यपि विश्वविद्यालय एगो धर्म निर्पेक्ष्य संस्था ह अउर एकर कउनों धार्मिक सम्बद्धता नइखे.

सन 1997 में दिल्ली में चार गो विश्वविद्यालय रहूवे - दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय और इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय. दिल्ली विश्वविद्यालय एक मात्र सम्बद्ध करे वाली विश्वविद्यालय रहूवे अउर ओ समय, ई एकहू नया कालेज या फिर राजकीय कालेज के सम्बद्ध करला के स्तिथि में न रहूवे. अतः दिल्ली विश्वविद्यालय अउर बाकि के विश्वविद्यालयों पर आवश्यकता से अधिक छात्रों के पड़ रहल बोझ के कम करला के खातिर गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के निर्माण करल गईल. लेकिन ई अब बहुते अच्छा विकल्प बन चुकल बा.

विश्वविद्यालय में 85 फ़ीसदी सीट दिल्ली के विद्यार्थी खातिर आरक्षित करल गईल. ए आरक्षण से विद्यार्थियों के काफी रहत मिलल काहे की अब उनका लोग के दाखिला खातिर अउर कउनों राज्य में जयिला के जरुरत न रहूवे. ओ समय 5000 अलग अलग क्षेत्रो में बनावल गईल रहे, जे की अब 50000 से अधिक के आँकड़ा पार कर गईल बा.

विश्वविद्यालय के दू गो परिसर बा - एक कश्मीरी गेट अउर दोसर द्वारका में . कश्मीरी गेट एकर पहिला परिसर ह जेमे एकर संस्थापना करल गईल अउर द्वारका एकर नया परिसर ह. वर्तमान में ई द्वारका परिसर से कार्यशील ह. सगरी विभाग कश्मीरी गेट से विस्थापन कर चुकल ह खाली इंदिरा गाँधी प्रौद्योगिकी संसथान के छोड़ के. द्वारका परिसर में विश्वविद्यला के लगभग सभी विभाग कार्यशील ह जे की 3000 से भी अधिक स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के वृतिक शिखा प्रदान कर रहल बाड़े.

भविष्य में कश्मीरी गेट परिसर में इंदिरा गाँधी प्रौद्योगिकी संसथान और अम्बेडकर विश्वविद्यालय कार्यशील होई. अन्तराष्ट्रीय स्तर के अनुसन्धान और आविष्कार सुविधा से लैस, के लक्ष्य के साथ, विश्वविद्यालय पूर्वी दिल्ली में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संसथान के निर्माण करी. ई सूरजमल विहार में 15 एकड़ के जमीन पर बनी और एकरा के विश्वविद्यालय के पूर्वी परिसर कहल जाई.




#Article 97: हनुमान (853 words)


हनुमान, हिंदू धर्म में एगो देवता हवें जिनकर रूप बानर के ह। हनुमान के अनन्य रामभक्त के रूप में मानल जाला आ भारतीय उपमहादीप आ दक्खिन-पुरुब एशिया में मिले वाला रामायण के बिबिध रूप आ पाठ सभ में हनुमान एगो प्रमुख चरित्र हवें। हनुमान के चिरंजीवी मानल जाला आ एह रूप में इनके बिबरन अउरी कई ग्रंथ सभ, जइसे कि महाभारत, कई गो पुराण सभ में आ जैन ग्रंथ सभ, बौद्ध, आ सिख धर्म के ग्रंथ सभ में मिले ला। कई ग्रंथ सभ में हनुमान के शिव के अवतार भा अंश भी मानल गइल बा। हनुमान के अंजना आ केशरी के बेटा मानल जाला, आ कुछ कथा सभ के मोताबिक पवन देव के भी, काहें कि इनके जनम में पवनदेव के भी योगदान रहे।

हिंदू धरम में हनुमान के देवता भा पूज्य चरित्र के रूप में परतिष्ठा कब भइल ई बिबाद के बिसय बा। एहू बारे में बिबाद बा कि इनके पहिले का स्वरुप रहल आ वर्तमान देवता के रूप से केतना अलग रहल। बैकल्पिक थियरी सभ के अनुसार इनके बहुत प्राचीन साबित कइल जाला, ग़ैर-आर्य देवता के रूप में कल्पित कइल जाला जेकरा के बाद में वैदिक आर्य लोग संस्कृताइज क लिहल, या फिर साहित्य में इनके धार्मिक प्रतीकवाद के उपज आ यक्ष रुपी देवता लोग के फ्यूजन से गढ़ल देवता के रूप में भी कल्पित कइल जाला।

हालाँकि, हिंदू धर्म के परसिद्ध कृति रामायण महाकाव्य आ एकरे बाद के बिबिध रामकथा सभ में हनुमान एगो प्रमुख चरित्र के रूप में मौजूद बाने, इनके पूजा करे के बिबरन प्राचीन आ मध्यकालीन ग्रंथ सभ में आ पुरातात्विक खोदाई से मिलल सबूत सभ में कम मिले के बात कहल जाला। अमेरिकी भारतबिद, फिलिप लुटगेंडार्फ, जे हनुमान पर अध्ययन करे खाती मशहूर बाने, माने लें कि हनुमान के धार्मिक आ पूज्य देवता के रूप में महत्व रामायण के रचना के लगभग 1,000 साल बाद दूसरी सहस्राब्दी ईसवी में भइल जब इस्लाम के भारत में आगमन भइल। भक्ति आन्दोलन के संत, जइसे कि समर्थ रामदास इत्यादि लोग द्वारा हनुमान के राष्ट्रवाद आ अत्याचार के खिलाफ बिद्रोह के चीन्हा के रूप में स्थापित कइल गइल। आज के ज़माना में इनके मुर्ती, चित्र आ मंदिर बहुत आम बाने। हनुमान के ताकत, हीरोइक कामकर्ता आ सबल क्षमता के साथ कृपालु, आ राम के प्रति भावनात्मक भक्ति के चीन्हा के रूप में शक्ति आ भक्ति के आदर्श मिलजुल रूप वाला देवता के रूप में परतिष्ठा भइल। बाद के साहित्य में हनुमान के मल्लजुद्ध, आ कलाबाजी के देवता के रूप में भी आ ग्यानी-ध्यानी बिद्वान के रूप में भी स्थापना भइल। इनके निरूपण आत्म-नियंत्रण, बिस्वास आ आस्था, नियत कारज में सेवा के भावना के छिपल निरूपण भइल जेकर बाहरी रूप भले बानर के बा।

हिंदू धर्म में एगो बहुत चलनसार देवता होखे के साथे-साथ हनुमान जैन आ बौद्ध धर्म में भी मौजूद बाने। इहे ना, बलुक भारत से बहरें के कई देसन में हनुमान के बिबिध रूप में परतिष्ठा बा, जइसे कि म्यांमार, थाइलैंड, कंबोडिया, मलेशिया आ बाली अउरी इंडोनेशिया में हनुमान के पूजल जाला भा इनके मुर्ती के निरूपण मिले ला। बाहरी देसन में हनुमान के चित्रण कुछ अलग तरीका से भी मिले ला जे हिंदू धर्म के हनुमान से भिन्न बा। उदाहरण खाती कुछ संस्कृति में हनुमान के बिसाल छाती वाला शक्तिशाली देव के रूप में जरूर कल्पित कइल जाला बाकिर उनके ब्रह्मचारी रूप में ना बलुक बियाह करे आ लइका-फइका वाला रूप में मानल गइल बा जइसे भारतो के कुछ इलाकाई हिस्सा में मानल जाला।  कुछ बिद्वान लोग के अइसन मत भी बा कि परसिद्ध चीनी काब्यात्मक उपन्यास शीयूजी (पच्छिम के यात्रा), जे चीनी यात्री ह्वेन सांग (602–664 ईसवी) के भारत यात्रा के बिबरण से परभावित हो के लिखल गइल रहे, एह में कौतुक आ साहस भरल बानर के चरित्तर वाला हीरो, हनुमान के कथा से प्रेरणा ले के रचल गइल हवे।

एह नाँव के पाछे एगो ब्याख्या ई दिहल जाला कि हनुमान जी बचपन में सुरुज भगवान के सुघर फल बूझ के लपक लिहलें आ मुँह में भर लिहलें जवना से चारों ओर अन्हियारी फइल गइल आ हनुमान के मुँह से सुरुज के बहरें निकासे खाती इंद्र अपना बज्र से प्रहार कइलेन जवना से हनुमान जी के दाढ़ी (संस्कृत में हनु) कुछ टेढ़ भ गइल। एही के बाद टेढ़ हनु वाला, इनके हनुमान कहल जाए लागल।

एगो दूसर ब्याख्या ई कइल जाला कि संस्कृत में हन् के अरथ होला नास होखल, आ मान के अरथ होला गरब भा अभिमान; एह आधार पर हनुमान के अरथ बतावल जाला कि जेकर भक्ति में आपन मान नष्ट हो गइल होखे। अइसन इनके द्वारा राम आ सीता के भक्ति में अनन्य समर्पण आ भक्ति के कारण बतावल जाला। एह तरीका से हनुमान के ताकत, शक्ति आ बीरता के साथे साथ भावुक आ दयालु अउरी भक्त देवता के रूप में कल्पित कइल जाला आ भक्ति आ शक्ति दुन्नों के चीन्हा के रूप में देखल जाला।

एगो तिसरहा मत जैन धरम में मिले ला। एह कथा के मोताबिक हनुमान अपना बचपन के दिन एगो अइसन दीप पर बितवलें जेकर नाँव हनुरुह रहे; एही दीप के नाँव पर इनकरो नाँव हनुमान धरा गइल।

हनुमान शब्द के भाषाई बिबिधता के रूप में हनुमत, अनुमान (तमिल में), हनुमंत (कन्नड़), हनुमंथुदु (तेलुगु) इत्यादि मिले लें। हनुमान के अलावा इनके अन्य कई नाँव नीचे दिहल जा रहल बाने:




#Article 98: कृष्ण (1050 words)


कृष्ण हिंदू धर्म के एगो प्रमुख देवता हवें। इनका के बिष्णु के अवतार के रूप में भी पूजल जाला आ अपना में खुदे इनहीं के सबसे बड़हन ईश्वर के रूप में भी पूजल जाला। कृष्ण के हिंदू धर्म में करुणा, दया आ प्रेम के देवता के रूप में पूजल जाला, आ ई भारतीय देवी-देवता सभ में एगो प्रमुख देवता हवें। कृष्ण के जनमदिन के लगभग पूरा भारत में कृष्ण जन्माष्टिमी के रूप में मनावल जाला आ ई हिंदू कैलेंडर के हिसाब से भादो महीना के अन्हार में अष्टिमी तिथी के पड़े ला आ अंगरेजी कलेंडर के हिसाब से ई तिहुआर अगस्त भा सितंबर में पड़े ला।

कृष्ण के अउरी कई नाँव से जानल जाला, जइसे की गोविंद, मुकुंद, मधुसूदन, वासुदेव, आ माखनचोर। कृष्ण के जिनगी के कथा आ खीसा सब के कृष्ण लीला कहल जाला। कृष्ण कई गो पुराणिक कथा सभ, जइसे कि महाभारत, भागवत पुराण आ भगवत गीता में प्रमुख चरित्र बाड़ें आ इनके जिकिर कई किसिम के दार्शनिक, धार्मिक आ कथा ग्रंथ सभ में आइल बा। एह कथा आ ग्रंथ सभ में कृष्ण के कई बिबिध रूप में प्रस्तुत कइल गइल बा: उदाहरण खाती, ईश्वर के अवतार, लीलापुरुष, आदर्श प्रेमी, पबित्र हीरो, आ साक्षात ईश्वर इत्यादि। इनके बिबिध रूपलेखन (आइकनोग्राफी) में इनके जिनगी के बिबिध रंग प्रगट होला आ जीवन के अलग-अलग हिस्सा, बचपन में माखन चोरा के खाए वाला चंचल बालक, मुरली बजावे वाला लइका, युवा रूप में राधा आ गोपी लोग के साथे रास रचावे वाला प्रेमी, युद्ध में निपुण योद्धा आ अर्जुन के सारथी, योगी आ उपदेशक इत्यादि रूप प्रमुख बाड़ें।

कृष्ण शब्द संस्कृत के हवे आ एकर मतलब करिया, काला, या गहिरा नीला होला। कथा के अनुसार बतावल जाला कि जमुना के कालिय दह में कालिया नाग के बध करत समय ओकरे बिस से इनके रंग करिया भा नीला हो गइल रहे। (कृष धातु के अर्थ खींचल, जवना से आकर्षण बने ला) भी बतावल जाला। कृष्ण के बिष्णु के अवतार मानल जाला आ बिष्णु के एक हजार नाँव (बिष्णुसहस्रनाम) में कृष्ण शब्द बिष्णु के 57वाँ नाँव के रूप में गिनावल गइल हवे।

अन्य नाँव सभ में मोहन यानी सभके मोह लेवे वाला, मुरलीधर मने कि मुरली (बँसुरी) धारण करे वाला, गोविंद भा गोपाल मने कि मुख्य गौ पालक इत्यादि नाँव प्रमुख हवें। उड़ीसा में आ कुछ अन्य पूरबी भारत के जगह सभ में इनके जगन्नाथ के रूप में पूजल जाला आ बिस्व के स्वामी के अरथ में एह नाँव के इस्तेमाल होला। कई अन्य नाँव अइसन दइत आ राक्षस सभ के नाँव पर भी पड़ल हवें जिनहन के इनके द्वारा बध भइल बतावल जाला, जइसे: मुरारि, मधुसूदन इत्यादि। वसुदेव आ जशोदा आ देवकी के बेटा के रूप में इनके वासुदेव, जशोदानंदन आ देवकीनंदन भी कहल जाला। सुदर्शन चक्र धारण करे वाला रूप में इनके चक्रधारी भी कहल जाला।

आगे कृष्ण के जिनगी आ जुड़ल कथा सभ के बिबरन दिहल गइल बा, ई सभ महाभारत, हरिबंस, भागवत आ बिष्णु पुराण नियर साहित्य आ कथा में मौजूद बिबरन पर आधारित बा। कृष्ण के जीवन के घटना सभ भारत में भइल बतावल जालीं आ एह कथा सभ में बर्णित जगह क्षेत्र सभ के इलाका  आज के समय के उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली आ गुजरात में पड़े ला। कृष्ण के जिनगी के बिबरन के कृष्णचरित कहल जाला।

कृष्ण चरित सभ में, कृष्ण के देवकी आ उनके पति वसुदेव के लइका के रूप में जनमल बतावल जाला जेलोग चंद्रबंसी कुल के रहल। देवकी के भाई कंस नाँव के अत्याचारी राजा रहलें। देवकी के बियाह के समय, पुराण सभ में बर्णित कथा अनुसार, आकासबाणी भइल या कुछ भाबिस्य बतावे वाला लोग अइसन बतावल कि देवकी के एगो लइका कंस के बध करिहें। कंस एही कारण देवकी के हर संतान के मुआ डारे के ब्यवस्था कइलें आ वसुदेव आ देवकी के जेलखाना में डाल दिहलें। कृष्ण के पैदा होखे प, वासुदेव चुपचाप चोरी से नया पैदा भइल लइका के जमुना पार ले जा के नंद-जशोदा के संतान से बदल देलें। जब कंस नया पैदा भइल शिशु के मुआवे खाती आवे लें ऊ लइकी जे शक्ति के अवतार होखे लीं, आकास में उड़ जालीं आ कंस के चेतावनी देलीं कि तोहार संहार करे वाला तोहरे राज में पैदा भ चुकल बा। पुराणन के अनुसार, कृष्ण नंद बाबा आ उनके मेहरारू जशोदा के घरे पालल पोसल जालें, ई जगह आधुनिक जमाना के मथुरा के लगे बतावल जाला। एह कथा सभ के अनुसार कृष्ण के दू गो अउरी भाई-बहिन कंस की हाथे मुआवल जाए से बच जालें - बलिराम आ सुभद्रा। कृष्ण के जनम के तिथि आजुओ ले कृष्ण जन्माष्टिमी के रूप में मनावल जाले।

The legends of Krishna's childhood and youth describe him as a cow herder, a mischievous boy whose pranks earns him the nickname a Makhan Chor (butter thief), and a protector who steals the hearts of the people in both Gokul and Vrindavana. The texts state, for example, that Krishna lifts the Govardhana hill to protect the inhabitants of Vrindavana from devastating rains and floods.

Other legends describe him as an enchanter and playful lover of the gopis (milkmaids) of Vrindavana, especially Radha. These metaphor-filled love stories are known as the Rasa lila and were romanticised in the poetry of Jayadeva, author of the Gita Govinda. They are also central to the development of the Krishna bhakti traditions worshiping Radha Krishna.

Krishna's childhood illustrates the Hindu concept of lila, playing for fun and enjoyment and not for sport or gain. His interaction with the gopis at the rasa dance or Rasa-lila is an example. Krishna plays his flute and the gopis come immediately, from whatever they were doing, to the banks of the Yamuna River, and join him in singing and dancing. Even those who could not physically be there join him through meditation. He is the spiritual essence and the love-eternal in existence, the gopis metaphorically represent the prakṛti matter and the impermanent body.

This lila is a constant theme in the legends of Krishna's childhood and youth. Even when he is battling with a serpent to protect others, he is described in Hindu texts as if he were playing a game. This quality of playfulness in Krishna is celebrated during festivals as Rasa-lila and Janmashtami, where Hindus in some regions such as महाराष्ट्र playfully mimic his legends, such as by making human gymnastic pyramids to break open handis (clay pots) hung high in the air to steal butter or buttermilk, spilling it all over the group.




#Article 99: बिस्मिल्ला ख़ाँ (212 words)


बिस्मिल्लाह खां या उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ान (21 मार्च, 1916 - 21 अगस्त, 2006) विश्व प्रख्यात शहनाई वादक रहलें। आपके जन्म डुमराँव के भिरुंग राउत के गली, बिहार मे 21 मार्च 1916 में भइल रहे। आपके पिताजी के नाम पैगम्बर खान और माँ के नाम मिट्ठन रहे। आप अपना माता पिता के दो संतानों में दूसरा स्थान पर रही आपके नाम कमरुद्दीन आपके बड़े भाई शमसुद्दीन के नाम के तर्ज पर पडल। आपके दादा रसूल बक्श खान जब आपके पहिला बार देखलन त आपके देख कर उनका मुख से बिस्मिल्लाह निकलल और यही आगे चल कर आपके नाम भी पडल।

भोजपुरी - आपन बोली आपन समाजआपके पूर्वज डुमराव के तत्कालीन महाराज महाराजा केशव प्रसाद सिंह के दरबार में नगाड़ा वादक रहनी जा। आप 6 साल के उम्र में काशी चल अयीनी और आप के शुरूआती शिक्षा आपके चाचा  अली  बक्श 'विलायतु' जे ओह समय में प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर से जुडल रहलन के शागिर्दगी में भइल। आप एक शिया मुस्लमान होते हुए भी सरस्वती के परम भक्त रहनी और आप हमेशा हिन्दू समाज से जुडल कार्यक्रम के हिस्सा बनल रहनी।

खान साहब के  सन 2001 मे भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मनित कइल गईल रहे। आप  21 अगस्त 2006 के हृदय गति के रुके से परम अलोक में विलीन हो गईनी




#Article 100: वाशिंगटन पोस्ट (104 words)


वाशिंगटन पोस्ट अमेरिका के एगो प्रमुख दैनिक अखबार हवे। ई वाशिंगटन, डी.सी. से छपे ला आ एह मेट्रो एरिया बे बिकाए वाला सभसे बड़ अखबार हवे। अखबार मुख्य रूप से अमेरिकी राजनीति आ फेडरल सरकार पर फोकस खबर आ बिस्लेषण छापे ला। ब्राडशीट कागज वाला संस्करण कोलंबिया डिस्ट्रिक्ट, मैरीलैंड आ वर्जीनिया राज्यन खातिर छपे लें।

अखबार के अबतक ले कुल 47 गो पुलित्जर पुरस्कार मिल चुकल बाड़ें। एक साल में सभसे ढेर छह गो पुलित्जर एकरा के साल 2008 में मिलल आ एह मामिला में ई खाली भर न्यू यार्क टाइम्स से पाछे बा जेवना के साल 2002 में सात गो पुलित्जर मिलल रहलें।




#Article 101: भरत शर्मा (128 words)


भरत शर्मा व्यास (जनम: 1 अगस्त 1957) भोजपुरी-भाषा के एगो जानल-मानल गायक हउवन। इनका के भोजपुरी निर्गुन बिधा के गीत से खास पहिचान मिलल हालाँकि, व्यास अउरी बिबिध किसिम के गाना भी खूब गवले बाने। व्यास भोजपुरी भाषा में लगभग साढ़े चार हजार गीत गा चुकल बाने आ एह भाषा के लोक गौरव आ भोजपुरी गायकी के शिखर पुरुष कहाने। इनका के 23 गो राष्ट्रीय आ अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुकल बा। हाले में (नवंबर 2018) में एगो संगीत समारोह में इनका के पद्मश्री से सम्मानित करे के मांग भी उठल रहे।

टैक्स संबंधी मामिला में इन पर एक बेर टैक्स चोरी के भी आरोप लागल रहे। भरत शर्मा राजनीति से भी जुड़ल बाने आ मई 2018 में इनका के दिल्ली भाजपा के संस्कृति प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष बनावल गइल।




#Article 102: शारदा सिन्हा (435 words)


शारदा सिन्हा (जनम 1 अक्टूबर 1952) एगो भारतीय लोक गायिका बाड़ी। बिहार में जनमल सिन्हा, मैथिली, भोजपुरी आ मगही में गावल अपने लोकगीतन खातिर जानल जालीं। एकरे अलावा हिंदी फिलिम सभ में भी उनके कई गो गाना हिट रहल बाने। संगीत के सेवा खातिर भारत सरकार उनके पद्मश्री सम्मान दिहले बा।

शारदा सिन्हा के जनम भारतीय राज्य बिहार के मिथला क्षेत्र के सुपौल जिला के हुलास गाँव में 1 अक्टूबर 1952 के एगो मध्यमवर्गी परिवार में भइल। इनके बाबूजी सुखदेव ठाकुर बिहार सरकार के शिक्षा बिभाग में एगो अधिकारी रहलें। इनके बाबूजी बचपने में संगीत के ओर झुकाव के चीन्ह लिहलें आ घरहीं आके सिखावे वाला एगो शिक्षक इनके गायकी आ नाच के शिक्षा देवे सुरू कइलेन।

आगे, शारदा सिन्हा आपन एकेडेमिक पढ़ाई पटना विश्वविद्यालय से पूरा कइली। सिन्हा कला वर्ग में स्नातक (ग्रेजुएट) हई।

बियाह के बाद उनके गायकी के ससुरार में कुछ बिरोध भी भइल बाकी पति के पूरा सहजोग मिलल। वर्तमान में सिन्हा समस्तीपुर में रहे ली आ उहाँ एगो कालेज में संगीत के शिक्षा भी देली।

शारदा सिन्हा 80 के दशक में मैथिली, भोजपुरी आ मगही भाषा सभ में परंपरागत गीत गावे खातिर परसिद्ध होखे सुरू भइली। लोकगीतन के अलावा उनके श्रद्धांजलि नाँव के एल्बम (कैसेट) बहुत लोकप्रिय भइल जेह में ऊ मैथिल कवि विद्यापति के गीतन के आवाज दिहली। ई दौर कैसेट के दौर रहे आ सिन्हा के गावल पिरितिया काहे ना लगवले, पटना से बैदा बोलाइ दऽ, नजरा गइलीं गुइंया, पनिया के जहाज से पलटनिया बनि अइहऽ पिया, आ बतावऽ चाँद केकरा से कहाँ मिले जालऽ नियर भोजपुरी गीत उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल आ बिहार में बहुत पसंद कइल गइने। टी-सीरीज पर आइल एलबम (कैसेट) केकरा से कहाँ मिले जाल में सिन्हा प्रसिद्ध भोजपुरी कवि आ नाटककार भिखारी ठाकुर के मार्मिक गीत रोई-रोइ पतिया लिखवले रजमतिया गवली। टेप वाला कैसेट के ओह दौर में सिन्हा के परसिद्धी के अनुमान एही से लगावल जा सके ला कि ऊ एगो रेकार्डिंग के मेहनताना लगभग पचास हजार पावें। भोजपुरी फिलिम सभ खातिर सुरुआती माहौल एही कैसेट के जमाना में लोकगीतन के क्रांति से बनल आ एह में सिन्हा के नाँव सभसे आगे लिहल जाला।

हिंदी फिलिम में शारदा सिन्हा के गावल कई गो गीत हिट बाने आ आज भी पसंद कइल जालें। मैंने प्यार किया फिलिम के गीत कहे तोसे सजना से सिन्हा हिंदी जगत के लोग के अपना आवाज से मोह लिहली। एकरे बाद हम आपके हैं कौन में भी उनके गावल एगो गीत रहल। 1989 में सिन्हा हिंदी फिलिम माई में एक्टिंग भी कइली। हाल में, अनुराग कश्यप के फिलिम गैंग्स ऑफ वासेपुर में सिन्हा के गावल पारंपरिक बियाह गीत तार बिजली से पतले हमारे पिया बहुत पसंद कइल गइल।




#Article 103: विद्यापति (1099 words)


विद्यापति (1352–1448), चाहे बिद्यापति, एगो भारतीय कवी रहलें जे मैथिली, अवहट्ट आ संस्कृत में आपन रचना कइलें, प्रमुख रूप से इनके मैथिली के रचना खाती जानल-मानल जाला आ मैथिली भाषा के आदि कवी आ मैथिल कोकिल के उपाधी दिहल जाला। कबिता के अलावा संस्कृत में गद्य लेखन के काम भी कइलेन। भक्ति आ शृंगार इनके रचना सभ के मुख्य बिसय रहल आ कबिता के रूप गीत आ पद रहल। शिव-पारबती आ राधा-कृष्ण दुनों इनके भक्ति वाली रचना के बिसय बनल लोग। 

इनके साहित्यिक परभाव बाद के हिंदुस्तानी भाषा, मैथिली भाषा आ बंगाली भाषा के साहित्य पर सीधा-सीधा, आ अप्रत्यक्ष रूप से नेपाली, ओडिया आ असमिया भाषा के साहित्य पर पड़ल। विद्यापति के समय अइसन रहे जेह समय साहित्य आ संपर्क के भाषा अवहट्ट रहल आ वर्तमान मैथिली, बंगाली इत्यादि देसी भाषा सभ के बिकास सुरू भइल रहल, एही से इनके रचना सभ के परभाव, जे देसी बोली के साहित्य के भाषा बना के रचल गइली सऽ, एह सगरी पूरबी भाषा सभ पर परल। एही कारन बिद्यापति के भारतीय साहित्य में लगभग उहे दर्जा दिहल जाला जे इटली में दांते के भा इंग्लैंड में चॉसर के दिहल जाला।

इनके मैथिलि रचना सभ प आधारित बिदापती नाच बाद के समय में बिहार-नेपाल के मिथिला क्षेत्र के खास बिधा के रूप में अस्थापित भइल। विद्यापति के मैथिली गीत सभ आज भी लोकगीत के रूप में सुनल-गावल जालें आ इनके रचना साहित्य में उच्च-कक्षा सभ में पढ़ावल जालीं।

विद्यापति के जनम भा निधन के बारे में लिखित रूप से कुछ ना मिले ला, एही कारन इनके समय अनुमान के बिसय हवे आ कई किसिम के अनुमान कई आधार प लगावल जाला। उपलब्ध साक्ष्य के हवाला से, रामधारी सिंह दिनकर इनके जनम 1350 ईसवी के आसपास भइल होखी अइसन लिखे लें। 

डाकटर सुभद्र झा के मत के अनुसार, विद्यापति के काल 1352 ईसवी से 1448 ईसवी हवे। इहे तारीख अंगरेजी के प्रसिद्ध ज्ञानकोश ब्रिटैनिका एनसाइक्लोपीडिया प भी मिले ला।

सभसे बिशद बिबरन प्रस्तुत कइले बाने शिवप्रसाद सिंह, जे विद्यापति प किताब लिखलें। इनके द्वारा सोझा रखल गइल बिबिध मत के तुलना अनुसार, विद्यापति के रचना कीर्तिलता में बिबरन मिले ला कि राजा गणेश्वर के निधन लक्ष्मण संवत 252 में भइल आ ई अनुमान मानल जाला कि एह समय विद्यापति के उमिर दस बारह बरिस के रहल, यानी कि इनके जनम लगभग 242 लक्ष्मण संवत में भइल होखी। समस्या ई बा कि लक्ष्मण संवत कब सुरू भइल एहू में बिबाद बा। कुछ अनुमान के मोताबिक एह परमान के आधार प विद्यापति के जनम के तिथी 1360 ईसवी के आसपास मान लिहल गइल, काहें कि लक्ष्मण संवत के सुरुआत पर अलग-अलग मत के अनुसार 1106 से 1119 ईसवी मानल जाला आ एह तरीका से गणेश्वर के निधन के तिथी 1358 से 1371 ईसवी के बिचा में ठहरे ले। हालाँकि, शिवप्रसाद सिंह कीर्तिलता के आधार पर विद्यापति के समय के निर्धारण के ठीक ना बुझे लें आ कई लोगन के मत के परिच्छा करे के बाद आपन मत देलें कि इनके जनम 1373 ईसवी के आसपास भइल होखे ई संभव बा।

एही तरह से इनके निधन के तिथी के बारे में भी अनुमाने लगावल जाला। लखनसेन नाँव के कवी के कविता के हवाला से अनुमान लगावे पर शिवप्रसाद सिंह बतावे लें कि एह आधार पर विद्यापति के निधन 1424 ईसवी के आसपास ठहरे ला; हालाँकि ऊ खुदे एह बारे में लिखे लें कि ई विद्यापति के अंतिम समय मानल ठीक ना बुझाला। कुछ जगह ई बिबरन मिले ला कि विद्यापति लक्ष्मण संवत 299 (1418 ईसवी, अगर लक्ष्मण संवत के सुरुआत 1119 ईसवी मानल जाय) में लिखनावली ग्रंथ पूरा कइलेन आ 309 में भागवत के एगो प्रति लिख के पूरा कइलें, यानी एह आधार प ऊ 1428 ईसवी तक जियत रहलें। एही कारण सिंह, लखनसेन के आधार पर 1424 वाल मत ठीक ना माने लें, बस एकरा के एगो मत के रूप में लोगन के सोझा रखे लें।  अन्य कथा के हवाला दे के लिखे लें कि राजा शिवसिंह के निधन के बत्तीस बरिस बाद विद्यापति एगो सपना देखलें आ उनके आपन मउअत नगीचे बुझाए लागल, यानी शिवसिंह के निधन भइल 1415 में आ एह में 32 जोड़ल जाय तब विद्यापति के निधन 1447 ईसवी के कुछ समय बाद भइल होखी।

अउरी दूसर मत सभ में डॉ. बिमानबिहारी मजुमदार विद्यापति के जनम 1380 ईसवी आ निधन 1460 के बाद कबो भइल माने लें; नगेन्द्रनाथ गुप्त 1440 के इनके निधन तिथी माने लें आ उमेश मिश्र इनके निधन के तिथी 1466 के बाद ले माने लें। हालाँकि, मजुमदार अपना बिचार में 1460 के बाद बिद्यापति के होखे के बात के खंडन करे लें। मजुमदार के मोताबिक विद्यापति के जिनगी के महत्व वाला घटना सभ के क्रम बा: 1380 के आसपास इनके जनम, 1395-96 ईसवी के आसपास पद लिख के गियासुद्दीन आ नसरत शाह के समर्पित कइल, 1397 में सुलतान जौनपुर द्वारा तिरहुत जीतल गइल जेकरे पहिले ई दुनों पद लिखल गइल रहलें; 1400 के आसपास भूपरिक्रमा के रचना, 1402-04 के बीच इब्राहिम शाह द्वारा तिरहुत के सिंघासन पर कीर्तिसिंह के स्थापित कइल आ ओही समय के आसपास कीर्तिलता के रचना; 1410 से 1414 के बीच शिवसिंह के राज्यकाल में दू सौ पद सभ के रचना; 1440 से 1460 के बीच विभागसागर, दान-वाक्यावली, आ दुर्गाभक्ति तरंगिणी के रचना।

हिंदी साहित्य के परंपरा में, विद्यापति के समय आदिकाल में परे ला। आदिकाल के दूसर नाँव वीरगाथा काल भी हवे, हालाँकि, विद्यापति के काब्य के बीरगाथा से कवनो तालमेल ना बा, साथे-साथ ई एह काल के समाप्ति के बाद ले रहलें अइसन भी बिचार कइल जाला, यानी लोग इनके आदिकाल में रखे पर संतोख ना करे ला। आदिकाल के बाद के समय के भक्तिकाल मानल जाला, जबकि रामचंद्र शुक्ल इनका के भक्ति वाला कवी ना माने लें। शुक्ल जी के अइसन बिचार के कारन विद्यापति के शृंगार प्रधान रचना बा। जबकि हजारी प्रसाद द्विवेदी शुकुल जी के बिचार के निवारण करे लें आ विद्यापति के भक्ती वाली रचना सभ के पूरबी भाषा सभ के साहित्य पर बाद में परल परभाव के ओर धियान दिवावे लें। कुल मिला के विद्यापति, अपना काब्य के बिसेस्ता के आधार पर ना त आदिकाल के कवी के रूप में साबित होखे लें ना भक्ति काल के बिसेस्ता उनुका रचना में निर्बिबाद रूप से खोजल जा सके ला। दिनकर के कहनाम बा की, ...विद्यापति कवनो बर्ग में ना समा सके लें। उनुके सत्कार खाती अइसन सिंघासन चाही जवना प खाली उहे बइठ सके लें। ऊ खाली कबी रहलें आ कबिता में सौंदर्य आ आनंद के छाड़ के ऊ अउरी कवनो बात के जगहा ना दें।

पदावली बिद्यापति के सभसे परसिद्ध रचना हवे। एह में गावल जा सके वाला सुघर पद बाड़ें। इनहन के बिसय शिव के भक्ती, राधा-कृष्ण के प्रेम, आम प्रेम आ सुंदरता के बखान बाटे।

अउरी बिबिध बिसय पर बिद्यापति कलम चलवलें जेह में मुख्य-मुख्य बाड़ें:




#Article 104: फारेस्ट्री (276 words)


फारेस्ट्री (अंगरेजी: फ़ॉरेस्ट्री; Forestry) बन आ जंगल संबंधी बिज्ञान, कला आ मैनेजमेंट हवे। एह बिधा के तहत बन के लगावे, रखरखाव करे, इस्तमाल करे, उनहन के संरक्षण करे, रिपेयर करे के काम कइल जाला आ एकर मकसद बिबिध जरूरत के पूरा कइल, निर्धारित लक्ष्य हासिल कइल, आ पर्यावरण आ मनुष्य के लाभ खाती निश्चित मूल्य (वैलू) सभ के सहेजल होला। फारेस्ट्री के परेक्टिस प्लांटेशन (पौध भा फेड़ लगावे) के रूप में भी होला आ प्राकृतिक रूप से पावल जाए वाला बन आ जंगल सभ के रखरखाव में भी होला। The science of forestry has elements that belong to the biological, physical, social, political and managerial sciences.

मॉडर्न जमाना के फारेस्ट्री के सोझा कई किसिम के चीज बा जे धियान में रखे के होला। एह चीज सभ में शामिल बा कि कइसे लकड़ी (इमारती) हासिल कइल जाय भा जलावन के लकड़ी उपराजल जाय, बन्य जीव सभ के आवास कइसे सहेज के रखल जाय, जल संसाधन सभ के कइसे संरक्षण कइल जाय, मनोरंजन आ आनंद खाती कइसे बन सभ के बिकास कइल जाय, प्राकृतिक लैंडस्केप के आ जंगल से जुड़ल समुदाय सब के कइसे बचाव कइल जाय, जीवबिबिधता के कवना तरीका से अधिकाधिक बढ़ावल जाय, वाटरशेड मैनेजमेंट केंङने कइल जाय, जमीन आ माटी के कटाव पर कइसे रोक लगावल जाय आ बन आ जंगल सभ के कार्बनडाईआक्साइड के सोखे वाला सिंक के रूप में कइसे मैनेज कइल जाय।

फारेस्ट्री के प्रैक्टिस करे वाला लोग के फारेस्टर कहल जाला। एगो अउरी टर्म के इस्तेमाल होला सिल्वीकल्चर जे तनिका छोट आ सकेत अरथ में इस्तेमाल होला काहें कि ई खाली खड़ा फेड़ सभ से संबंधित होला। हालाँकि, कभीकभार ई शब्द आ फारेस्ट्री दुनों पर्यावाची के रूप में इस्तेमाल कइल जालें।




#Article 105: राजनीति (142 words)


राजनीति (, पॉलिटिक्स) निर्णय लेवे के प्रक्रिया हवे जेह में कौनों समूह में रहे वाला लोग अइसन निर्णय ले चहुँपे ला जेकरा के सभ सदस्यन पर लागू कइल जा सके।

एह में कौनों समुदाय, आमतौर पर राज्य, के शासन करे के पोजीशन में पहुँचे आ एह पोजीशन के इस्तेमाल करे के भी शामिल कइल जाला। जवन एकेडमिक बिसय एह सभ चीज के अध्ययन करे ला ओकरा के राजनीति बिज्ञान (पोलिटिकल साइंस) कहल जाला।

आधुनिक जमाना के नेशन स्टेट सभ में राजनीतिक पार्टी सभ के गठन बा जे अलग लग किसिम के आइडिया के प्रतिनिधि के रूप में काम करे लीं, चुनाव में हिस्सा लेलीं आ जीते वाली पार्टी शासन करे ले।

एकरे अलावा राजनीति शब्द के नकारात्मक अरथ भी लिहल जाला आ राजनीति कइल कई बेर एह अरथ में इस्तेमाल होला कि छल से कौनों काम चाहे परिणाम हासिल क लिहल जाय। 




#Article 106: हरिवंश राय बच्चन (300 words)


हरिवंश राय बच्चन (27 नवंबर 1907 – 18 जनवरी 2003) हिंदी के प्रसिद्ध कवि आ लेखक रहलें।

इलाहाबाद के कायस्थ परिवार में बच्चन जी के जनम भइल।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्यापन। बाद में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ रहे। अनन्तर राज्य सभा के मनोनीत सदस्य। बच्चन जी हिंदी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवियों में अग्रणी हें।

निधन : 18 जनवरी 2003 को मुम्बई में।

हरिवंश राय बच्चन के संपूर्ण साहित्य की सूचीकविता संग्रह
तेरा हार (1932)
मधुशाला (1935)
मधुबाला (1936)
मधुकलश (1937)
निशा निमंत्रण (1938)
एकांत संगीत (1939)
आकुल अंतर (1943)
सतरंगिनी (1945)
हलाहल (1946)
बंगाल का काव्य (1946)
खादी के फूल (1948)
सूत की माला (1948)
मिलन यामिनी (1950)
प्रणय पत्रिका (1955)
धार के इधर उधर (1957)
आरती और अंगारे (1958)
बुद्ध और नाचघर (1958)
त्रिभंगिमा (1961)
चार खेमे चौंसठ खूंटे (1962)
दो चट्टानें (1965)
बहुत दिन बीते (1967)
कटती प्रतिमाओं की आवाज़ (1968)
उभरते प्रतिमानों के रूप (1969)
जाल समेटा (1973)
विविध
बचपन के साथ क्षण भर (1934)
खय्याम की मधुशाला (1938)
सोपान (1953)
मैकबेथ (1957)
जनगीता (1958)
ओथेलो(1959)
उमर खय्याम की रुबाइयाँ (1959)
कवियों के सौम्य संत: पंत (1960)
आज के लोकप्रिय हिंदी कवि: सुमित्रानंदन पंत (1960)
आधुनिक कवि:7 (1961)
नेहरू: राजनैतिक जीवनचित्र (1961)
नये पुराने झरोखे (1962)
अभिनव सोपान (1964)
चौसठ रूसी कविताएँ (1964)
डब्लू बी यीट्स एंड औकल्टिज़्म (1968)
मरकट द्वीप का स्वर (1968)
नागर गीत) (1966)
बचपन के लोकप्रिय गीत (1967)
हैमलेट (1969)
भाषा अपनी भाव पराये (1970)
पंत के सौ पत्र (1970)
प्रवास की डायरी (1971)
किंग लियर (1972)
टूटी छूटी कड़ियां (1973)
मेरी कविताई की आधी सदी (1981)
सोहं हंस (1981)
आठवें दशक की प्रतिनिधी श्रेष्ठ कवितायें (1982)
मेरी श्रेष्ठ कविताएँ (1984)
आत्मकथा / रचनावली
क्या भूलूं क्या याद करूं (1969)
नीड़ का निर्माण फिर(1970)
बसेरे से दूर (1977)
दशद्वार से सोपान तक (1965)
बच्चन रचनावली के नौ खण्ड (1983)




#Article 107: राष्ट्रीय गीत (354 words)


राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रगान, चाहे एंथम कौनों देश की इतिहास आ परमपरा की गौरव के बखान करे वाला आ ओ देश की जनता द्वारा आदर कइल जाए वाल गीत होला। ई राष्ट्र गान से अलग होला काहें की एकरी गावे का अवसर आ तरीका के सरकारी रूप से मान्य निश्चित रूप न होला। जेवना देस में अलग से राष्ट्रीय गीत न होला उहाँ राष्ट्रगाने के राष्ट्रीय गीतो कहि दिहल जाला।

भारत का राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् हवे आ राष्ट्रगान जन गण मन हवे।

राष्ट्र गान सभ के महत्व यूरोप में 19सदी में बढ़ल, बाकी कुछ के उत्पत्ती बहुते पहिले भ गइल रहे। सभसे पुरान स्वीकार कइल जाए वाला राष्ट्रगान नीदरलैंड के Wilhelmus हवे जे डच बिद्रोह के समय 1568 से 1572 बीच कबो लिखल गइल आ एकर वर्तमान धुन सन 1626 में बनावल गइल। ई बहुत पापुलर मार्च-गान (सेना के मार्च के समय गावल जाए वाला) रहल बाकी ऑफिशियल रूप से एकरा के एंथम 1932 में घोषित कइल गइल।

जापान के राष्ट्रीय गान Kimigayo के गीतरचना सभसे पुरान हवे, ई हेइयान काल 794–1185 के एगो कबिता से लिहल गइल हवे। हालाँकि एकर संगीत 1880 में बनावल गइल

भारत के राष्ट्र गान जन गण मन बंगाली भाषा में लिखल गइल हवे आ रबींद्रनाथ टैगोर के एगो गीत के हिस्सा हव।

फिलिपीन्स के एंथम Lupang Hinirang के संगीत 1898 में बिना कौनों बोल (कबिता) के रचल गइल (incidental music) जब फिलीपींस स्पेन से अपना आजादी के घोषणा कइलस। कबिता Filipinas अगिला साल लिखल गइल जे एह एंथम के गीत बनल; वर्तमान तागालाग भाषा वाला वर्शन 1962 में के हवे। 

स्पेन के राष्ट्रगान, Marcha Real (शाही मार्च), 1761 में लिखल गइल, राष्ट्रगान के रूप में अंगीकार कइल जाए वाला सभसे पहिला रहल, 1770 में। डेनमार्क अपने दू गो एंथम सभ में से पुरनका वाला, Kong Christian stod ved højen mast, के 1780 में अंगीकार कइलस; आ La Marseillaise, फ्रांस के नेशनल एंथम, 1792 में लिखल गइल आ 1795 में अंगीकार कइल गइल।

वेल्श के क्षेत्रीय एंथम Hen Wlad Fy Nhadau पहिला अइसन एंथम रहल जेकरा के कौनों इंटरनेशनल खेलकूद आयोजन में बजावल गइल। ई राष्ट्रगान पहिली बेर न्यूजीलैंड के खिलाफ रग्बी के एगो खेल के दौरान गावल गइल। 




#Article 108: जमुना (143 words)


जमुना नदी () उत्तरी भारत के एक ठो प्रमुख नदी हवे जे उत्तराखंड राज्य में यमुनोत्री से निकले ले आ प्रयाग में गंगा नदी में  मिल जाले। ई उत्तरी भारत के इलाका में, गंगा नदी के सभसे बड़हन सहायिका नदी हवे। उत्तराखंड में मध्य हिमालय के बंदरपुंछ चोटी के पच्छिमी हिस्सा में मौजूद यमुनोत्री ग्लेशियर से करीबन 6,387 मीटर के ऊंचाई पर एह नदी के उदगम होला आ ई नदी कुल  के दूरी तय करे ले जबकि एकरे थाला के बिस्तार कुल  एरिया में बा जे गंगा नदी के कुल थाला के लगभग 40.2% हिस्सा बाटे। जमुना नदी, इलाहाबाद में गंगा नदी से मिले ले आ एह अस्थान के त्रिवेणी संगम के नाँव से जानल जाला, हिंदू धर्म में पबित्र तीर्थ के रूप में एह जगह के मान्यता हवे आ हर साल इहाँ माघ मेला आ हर बारहवाँ बरिस कुंभ मेला लागे ला।




#Article 109: बीदसर (144 words)


बीदसर  राजस्थान में सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ तहसील क एक ठो गाँव बा। ई गाँव लक्ष्मणगढ़ से 21 किलोमीटर पूरुब में आ नवलगढ़ से 6 किलोमीटर के दूरी पर पड़े ला। बीदसर सटल गाँव में बिड़ोदी, बीदासर, मिर्जवास, दुंदलोद, आ नवलगढ़ बाड़ें। 2011 की जनगणना के अनुसार बीदसर के कुल जनसंख्या 2546 रहल।

बीदसर बीदासर पंचायत के अंतर्गत आता है| नेता का शीर्षक सरपंच होता है| इस गाँव में 16 वार्ड हैं|

लगभग 1500 लोग, जे कुल आबादी के लगभग 80% बा, खेती में लागल बा| गाँव खेती पर निर्भर हवे| मानसून के बरखा आज भी खेती के आधार बा| सिंचनी खातिर इनार के उपयोग भी होला|

बीदसर एक ठो दू लेन वाली पक्की सड़क से लक्ष्मणगढ़ आ नवलगढ़ से जुड़ल बाटे| नवलगढ़ रेलवे स्टेशन (8 किमी) इहँवा से सभसे नजदीकी रेलवे स्टेशन बा जे जयपुर, दिल्ली आ अन्य कई शहरन से जुड़ल बाटे|




#Article 110: अखिलेश यादव (159 words)


अखिलेश यादव (जनम 1 जुलाई 1973) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री बाड़ें आ ऊ 15 मार्च 2012 के 38 बरिस के उमिर में एह पद पर पहुँचे वाला अब तक ले के सभसे कम उमिर के ब्यक्ति बाड़ें।

अखिलेश यादव के जनम 1 जुलाई 1973 के सैफई गाँव में मुलायम सिंह यादव आ उनुके के पहिली मेहरारू मालती यादव के बेटा के रूप में भइल। उनुके माता जी के जल्दिये देहांत हो गइल। आखिलेश के सुरुआती पढ़ाई धौलपुर मलेटरी इस्कूल में भइल। एकरा बाद ऊ मैसूर इन्वर्सिटी से सिविल इंजीनियरी पास कइलें। आगे के पढ़ाई करे खातिर ऊ ऑस्ट्रेलिया चल गइलेन आ उहाँ पर सिडनी विश्वविद्यालय से पर्यावरण इंजीनियरी में मास्टर डिग्री लिहलें।

अखिलेश के पत्नी डिंपल यादव हई जिनसे सन 1999 में बियाह भइल आ आखिलेश आ डिंपल वर्तमान में दू गो बेटी आ एक ठो बेटा के माई-बाप बा लोग।

अखिलेश के पहिला राजनीतिक सफलता कन्नौज से सांसद के रूप में चुनल गइल रहल।




#Article 111: राहुल गांधी (105 words)


राहुल गांधी (जनम 19 जून 1970) एगो भारतीय राजनीतिक नेता बाने। गाँधी, सोनिया गांधी आ राजीव गांधी के लइका हवें आ वर्तमान में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बाड़ें। एकरे पहिले ई भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उपाध्यक्ष रहलें जबकि वर्तमान में, भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष आ बिद्यार्थी संगठन एनएसयूआइ के अध्यक्ष पद पर भी बाने। 
सोलहवीं लोकसभा में गांधी अमेठी लोकसभा सीट से सांसद बाने। एकरे अलावा गांधी बाहरी मामिला पर संसदीय स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य भी बाने।

राजीव गांधी फाउंडेशन आ राजीव गांधी धर्मादा ट्रस्ट के ट्रस्टी भी बाने। एकरे पहिले गांधी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के जनरल सेक्रेटरी भी रह चुकल बाने।




#Article 112: रामभद्राचार्य (292 words)


जगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य चित्रकूट, भारत में रहल एक हिन्दू धार्मिक नेता बा।

जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य के जनम सरयूपारीण ब्राह्मण कुल के वशिष्ठ गोत्र मे होइल रहे। 14 जनवरी 1950, माघ महिना के कृष्णपक्ष एकादशी के मकर संकरान्ति के शुभ अवसर पे अनुराधा नक्षत्र मे, प्रातः काल के 10.34 मे महाराजश्री शरीर धारण कैयले। जौनपुर के अंतर्गत शाण्डिखुर्द नामक स्थान में ब्राह्मण दम्पति पंडित राजदेव मिश्र और शची मैया के इनकर माता-पिता बनले के सौभाग्य प्राप्त भइल। आचार्यजी के पूज्य बाबा पंडित सूर्यबली मिश्रजी के बहिन गिरधरलाल के प्रेमी भक्त रहली त एही कारण उनकर नाम भी गिरिधर नाम रखल गईल।

मार्च 1950 मे गिरिधर के नेत्र ज्योति चलि गईल।जब उनकाके ट्रकोम के बिमारी भइल त गाँवमें कौनों इलाज नाही रहल। ट्रकोम के गाठ हटावे खातिर गाँवके एक महिला उनके आँखि में एक गर्म दवा डारी दिहलि जेकरा कारण आँखिनसे रक्तस्राव होखे लागल। परिवारिक जन गिरिधर के आयुर्वेदिक, होमेओपथिक, एलोपैथिक दवा हेतु सीतापुर, लखनउ औरि मुम्बई लै गैले, पर कौनों लाभ नाही भइल। एहि कारण गिरिधर कबों ब्रैल के माध्यम से नाही पढ़ले बल्कि श्रवण से सुनकर सीखले औरि बोलिकें लिपिकारन से आपन रचना लिखवले।

बालक गिरिधरके पिता मुम्बई में कार्यरत रहलै, त एहि कारण उनकर प्रारम्भिक अध्ययन घर पर पितामह की देख-रेख में भइल। दोपहर में उनकर पितामह उनके रामायण,  महाभारत, विश्रामसागर, सुखसागर, प्रेमसागर, ब्रजविलास आदि काव्य के पद सुनाय देत रहलै।तीन बरिस के आयुमें गिरिधर अवधी में आपन प्रथम रचना कईके आपन पितामहकें सुनवले। एहि कवितामें मैया जसोदा से एकठो गोपी लड़े खातिर उलाहना देत बाटी - 

मेरे गिरिधारी जी से काहे लरी ॥
तुम तरुणी मेरो गिरिधर बालक काहे भुजा पकरी ॥
सुसुकि सुसुकि मेरो गिरिधर रोवत तू मुसुकात खरी ॥
तू अहिरिन अतिसय झगराऊ बरबस आय खरी ॥
गिरिधर कर गहि कहत जसोदा आँचर ओट करी ॥




#Article 113: रिनाक (250 words)


रिनाक (अंग्रेजी:Rhenock) सिक्किम के पूर्वी जिला में परेला। इ सिक्किम के छोटा-सा क्षेत्र बा। जहाँ बजार,और गाँव स्थल बा । सिक्किम के राजधानी गान्तोक बा जौन लगभग 63 किलोमिटर दूर जलेपला पास जायेवाला मार्ग मे अवस्थित बा इ स्थल समुद्री सतह से 1040 मिटर उचाई पर बा। लेप्चा बोली के दुगो शव्द रे - नोक से बनल ( बाद में रिनाक) जएकर अर्थ होअला काला पहाड। रिनाक बजार से उपर मे अवस्थित आरिटार मे राज्य के पहिल्का पुलिस चौकी के स्थापना भइल। ओहि के कारन इ स्थल राज्य के खातिर इतिहासी बा।

आज तक रिनाक के लिखित इतिहास जानकारी में न होखे के कारन बुजुर्गोंन के मुह से सुनल तथ्यों आउर सीमित स्रोत से मिल्ल जानकारी के अनुसार- तेह्रौं शताव्दी तक इहा के स्थल घोर जंगल से ढकल रहल। लेप्चा जाति प्रथम वासिन्दा कह्ल्य्लन। ओक्रा बाद भुटिया औरि नेपाली समुदाय के लोग ई स्थल पर आइल।

रिनाक में सिक्किम के औरि जगह जैसन सब जाति के लोग रहेलन, जौन मे लेप्चा, भुटिया, नेपाली (गोर्खा), मारवाडी और बिहारी सामिल बारन।

रिनाक के शैक्षिक इतिहास राज्य के ओरि जगहन से लम्बा बा। एही स्थल पर राज्यके सर्वप्रथम विद्यालय के स्थापना सन 1880 में मिशनरियन द्वारा भइल। बाद में ई विद्यालय के सिक्किम सरकार अधिग्रहण करके किंगस्टोन में स्थानान्तरित करदेह्ल्स ओरि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के दर्जा दिह्ल्स। हाल में ई विद्यालय के रिनाक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के नाम से जानल् जाला। सिक्किम के सर्वप्रथम संस्कृत विद्यालय रिनाक के मन्दिर में स्थापित कइल गइल। सिक्किम भारत में विलय भइला के बाद निम्न विद्यालय भइल-




#Article 114: बिजनेस (172 words)


बिजनेस, धंधा, कारोबार या उद्द्य्म () एक तरह के आर्थिक काम हवे। ई कानूनी रूप से मान्य संस्था हवे जो उपभोक्ता के कौनो उत्पाद या सेवा देवे के लक्ष्य से निर्मित करल जाला। बिजनेस के कम्पनी, इंटरप्राइज या फर्म भी कहल जाला। पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में कारोबार के प्रमुख स्थान ह जौन अधिकांशत: निजी हाथ में रहेला औरि लाभ कमाय के ध्येय से काम करल जाला तथा साथ-साथ स्वयं बिजनेस के भी वृद्धि करेला । लेकिन संस्था तथा सरकार द्वारा चलायल जाऐ वाला संस्था प्राय: लाभ के बजाय अन्य उद्देश्य के पूर्ति के लागि बनायल जायेला।

शेयर के सिधा अर्थ होवेला हिस्सा शेयर बजार के भाषा मे कहे तो कम्पनि मे हिस्सा।

उदाहरन -    
ऐगो कम्पनि कुल 20 लाख के शेयर जारि करेला। ओ मे से कौनो भि कम्पनि के प्रस्ताव के अनुसार जेतना चाहे अंश खरिद सकेला।ओक्रा वजह से उ कम्पनि मे खरिदे वाला के ओतना ही के मलिकाना हो जाला। ओकर बाद जब चाहे तब जेक्रा के चाहे बेच सकेला, शेयर बजार मे कौनो भि 100 से जादा शेयर खरिद सकेला।




#Article 115: सत्यार्थ प्रकाश (103 words)


सत्यार्थ प्रकाश की रचना आर्य समाज के संस्थापक महार्षि दयानंद सरस्वती ने की। यद्यपि उनकी मातृभाषा गुजराती थी और संस्कृत का इतना ज्ञान था कि संस्कृत में धाराप्रवाह बोल लेते थे, तथापि इस ग्रन्थ को उन्होने हिंदी में रचा। कहते हैं कि जब स्वामी जी 1972 में कलकत्ता में केशवचन्द्र सेन से मिले तो उन्होने स्वामी जी को यह सलाह दे डाली कि आप संस्कृत छोडकर हिंदी बोलना आरम्भ कर दें तो भारत का असीम कल्याण हो। तभी से स्वामी जी के व्याख्यानों की भाषा हिंदी हो गयी और शायद इसी कारण स्वामी जी ने सत्यार्थ प्रकाश की भाषा भी हिंदी ही रखी।




#Article 116: खलील जिब्रान (104 words)


संसार के श्रेष्ठ चिंतक महाकवि के रूप में विश्व के हर कोने में ख्याति प्राप्त करने वाले, देश-विदेश भ्रमण करने वाले खलील जिब्रान अरबी, अंगरेजी फारसी के ज्ञाता, दार्शनिक और चित्रकार भी बा। उन्हें अपने चिंतन के कारण समकालीन पादरियों और अधिकारी वर्ग का कोपभाजन होने से जाति से बहिष्कृत करके देश निकाला तक दे दिया गया बा। खलील जिब्रान 6 जनवरी 1883 को लेबनान के 'बथरी' नगर में एक संपन्ना परिवार में जनम ह। 12 वर्ष की आयु में ही माता-पिता के साथ बेल्जियम, फ्रांस, अमेरिका आदि देशों में भ्रमण करते बा 1912 मेंअमेरिका के न्यूयॉर्क में स्थायी रूप से रहने लगे बा।




#Article 117: पंजाबी भाषा (248 words)


पंजाबी  एगो  हिंद-आर्यन  भाषा ह और इतिहासी पंजाब क्षेत्र (अब भारत और  पाकिस्तान के बीच विभाजित) की निवासियन तथा प्रवासी लोगन द्वारा बोलल जाला। एके बोले वालन मे सिख, मुसलमान और हिंदू सब शामिल बान स। पाकिस्तान क 1998 की जनगणना और 2001 की भारत की जनगणना के अनुसार, भारत और पाकिस्तान मे ए भाषा के कुल वक्ता लोगन क संख्या लगभग 9 करोड़ बा।  ए अनुसार इ भारत क 11वां सबसे व्यापक भाषा ह और भारतीय उपमहाद्वीप में तीसरा सबसे ज्यादा बोलल जाए वाला मातृभाषा ह। कम से कम पिछला 300 वर्ष से लिखित पंजाबी भाषा क मानक रूप, माझी बोली पर आधारित बा, जवन इतिहासी माझा क्षेत्र  क भाषा ह। इ भाषा क संयुक्त अरब अमीरात, संयुक्त राज्य अमेरिका, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया में भी एगो महत्वपूर्ण उपस्थिति बा। पंजाबी भाषा शाहमुखी और गुरुमुखी लिपि में लिखल बा, इ एक से अधिक लिपि में लिखल बहुत कम भाषा में से एगो बन गईल बा।

भारत में, पंजाबी भारत की 22 अनुसूचित भाषा में से एक ह। इ भारत की पंजाब राज्य क पहिला आधिकारिक भाषा ह। पंजाबी के उर्दू, हरियाणवी के साथ दिल्ली में दूसरी आधिकारिक दर्जा प्राप्त बा।
पाकिस्तान में कौनो क्षेत्रीय जातीय भाषा के राष्ट्रीय स्तर पर आधिकारिक भाषा क दर्जा नइखे मिलल, और ए तरह से एइजा पंजाबी राष्ट्रीय स्तर पर आधिकारिक भाषा नाहीं ह, भले ही इ उर्दू की बाद पाकिस्तान में सबसे अधिक बोलल जाए वाली भाषा ह। तबो इ भाषा पंजाब, पाकिस्तान क आधिकारिक भाषा ह, जवन की इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र क सबसे अधिक आबादी वाला प्रांत ह।




#Article 118: महात्मा गाँधी (908 words)


मोहनदास करमचंद गाँधी (; 2 अक्टूबर 1869 — 30 जनवरी 1948) जिनके महात्मा गाँधी की नाँव से आ गान्ही महात्मा, गान्ही बाबा आ बापू के नाँव से जानल जाला, भारत के आज़ादी की लड़ाई क एगो प्रमुख राजनैतिक आ आध्यात्मिक नेता रहलन। ऊ सत्याग्रह आ व्यापक सविनय अवज्ञा की सहारे अत्याचार के खिलाफत क शुरुआत करे वाला नेता रहलें। सत्य आ अहिंसा की आधार पर लड़ाई लड़िके भारत के आजादी दियावे में उनके योगदान खातिर उनके पूरा दुनिया में जानल जाला।

संस्कृत के महात्मा एगो आदर-सम्मान प्रगट करे वाला शब्द ह जेवना क प्रयोग इनका खातिर रवीन्द्रनाथ टेगौर कइलें। 2 अक्टूबर के उनकी जनम दिन के गाँधी जयंती के रूप में मनावल जाला आ दुनियाभर में एहिदिन अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस भी मनावल जाला।

गाँधी टोपी आ चरखा उनकी बिचारधारा क निशान बन चुकल बा।

गांधीजी एगो बड़ी नीक लेखक रहन। हरिजन के जोरे जोरे कै गो अखबारन के अनुवाद उ गुजराती मे कइले रहन।

मोहनदास करमचंद गाँधी के जनम 2 अक्टूबर 1869 के एगो गुजराती हिंदू मोध बनिया परिवार में पोरबंदर (जेकरा के सुदामापुरी के नाँव से भी जानल जाला) में भइल जे काठियावाड़ प्रायदीप क एगो समुंद्र के किनारे बसल कस्बा हवे आ ओह जमाना में भारत राज के काठियावाड़ एजेंसी के अंदर पोरबंदर स्टेट के नाँव से रहल। इनके बाबूजी, करमचंद उत्तमचंद गांधी (1822-1885) पोरबंदर राज के दीवान (मुख्यमंत्री) रहलें। 2 अक्टूबर 1869 के इनहीं के घरे इनके मेहरारू पुतलीबाई आपन सभसे छोट बेटा, मोहनदास, के जनम दिहली। मोहनदास से बड़ एगो बहिन रालिताबेन (1862-1960) रहली आ सभसे बड़ संतान लक्ष्मीदास (c. 1860-1914) रहलें। मोहनदास बचपने में बहुत चंचल रहलें। इनके बहिन इनका बचपन के बारे में बतावेली कि इनके सभसे प्रिय खेल कुक्कुरन के कान मिमोरल रहे। भारतीय क्लासिक कथा सभ, खासतौर से सरवन के आ हरिसचंद राजा के कहानी के इनके बचपन पर बहुत परभाव परल। गाँधी अपना आत्मकथा में ई बात खुदे स्वीकार कइले बाने।

गाँधी के महतारी एगो धार्मिक औरत रहली आ परनामी वैष्णव हिंदू परिवार से रहली। उनके परभाव गांधी पर बहुत परल। 1874 में गांधी के पिताजी पोरबंदर छोड़ के राजकोट आ गइलें आ इहाँ के राजा के इहाँ दीवान बन गइलें। एकरे बाद पूरा परिवारो राजकोट आ गइल। 9 बरिस के उमिर में गाँधी के लोकल इस्कूल में एडमीशन भइल। इहाँ ऊ सुरुआती गणित, इतिहास, गुजराती भाषा आ भूगोल पढ़लें। इगारह बरिस के उमिर में उनके एडमीशन राजकोट के हाई इस्कूल में भइल। ऊ औसत दर्जा के बिद्यार्थी रहलें, कुछ इनामो जितलें, बाकी लजाधुर आ चुप्पा किसिम के रहलें आ खेलकूद में कौनों रूचि ना रहल; इनके साथी बस किताब आ इस्कूल में मिले वाला काम भर रहल।

मई 1883 में 13-साल के उमिर वाला मोहनदास के बियाह 14-साल के कस्तूरबाई माखनजी कपाड़िया (इनके पहिला नाँव के छोट क के कस्तूरबा बोलावल जाला आ अउरी लगाव के साथ बा) के साथे भइल। एक्के साथ इनके अउरी भाई भतीजा लोग के भी बियाह सामूहिक कार्यक्रम में भइल रहे। एह चक्कर में इनके पढ़ाई के एक साल नोकसान भइल बाकी बाद में तेजी से पढ़ के आपन पढ़ाई कभर कइलेन। एकरे दू बरिस के बाद 1885 में गांधी के पीताजी के सरगबास भ गइल। गांधी ओह समय सोरह बरिस आ कस्तूरबा सतरह बरिस क रहली जब एह लोग के पहिला संतान पैदा भइल बाकी कुछे दिन जिए पवलस। एह दुनों मउअति से गांधी के मन बहुते ब्यथित भइल। बाद में चल के गाँधी के चार गो संतान भइल: सगरी बेटा लोग रहे, हरिलाल, 1888 एन जन्मलें; मणिलाल, 1892 में जनमलें; रामदास, 1897 में जन्मलें; आ देवदास के जनम 1900 में भइल।

नवंबर 1887 में 18-बरिस क गांधी अहमदाबाद के हाई इस्कूल से ग्रेजुएट भइलेन आ 1988 में भावनगर राज के समालदास कालेज में ऊँच शिक्षा खाती दाखिला लिहलें बाकी फिर छोड़ के वापिस पोरबंदर अपना घरे लवट गइलेन।

गांधी कौनों बहुत धनी परिवार से ना रहलें आ कालेज के पढ़ाई छोड़ चुकल रहलें। एही समय परिवार के परिचित आ पुजारी मावजी दवे जोशीजी इनका के सलाह दिहलें की लंदन जा के वकालत पढ़ें। जुलाई 1888 में कस्तूरबा आपन पहिला जियत बेटा के जनम दिहली आ गांधी के माई एह बारे में बहुत आश्वस्त ना रहली कि गांधी आपन परिवार के एह समय छोड़ के बिदेस जाँसु। गांधी अपना माई आ मेहरारू के सोझा किरिया खइलेन की ऊ बिदेस में जा के भी मांस ना खइहें, शराब आ औरतन से लम्मा रहिहें। गांधी के भाई लक्ष्मीदास, जे खुदे वकील बन गइल रहलें इनका के बढ़ावा दिहलें कि लंदन जा के पढ़े के चाहीं।

अठारह बरिस के उमिर में गांधी राजकोट से बंबई (अब मुंबई) आ गइलेन आ इहाँ मोधी बनिया लोग के साथे रहलें जबले की इंग्लैंड जाए वाला जहाज के जात्रा के इंतजाम ना भ गइल। 4 सितंबर 1888 के गांधी बंबई से लंदन खाती जहाज से चल दिहलें, इनके भाई इनका के चाहुंपावे आइल रहलें।

लंदन में गांधी वकालत आ बिधिशास्त्र (ज्यूरिसप्रूडेंस) के पढ़ाई कइलेन। लजाधुर होखे के बावजूद एगो पब्लिक ग्रुप से जुड़लें आ भाषण देवे के सीख्लें। शाकाहारी खाना के खोज में इनके परिचय एगो शाकाहरी रेस्टोरेंट से भइल जहाँ से हेनरी साल्ट के लेखन के बारे में जानकारी मिलल आ ई उनके लेखन से परभावित हो के शाकाहारी सोसाइटी में सामिल हो गइलेन। बाद में एह सोसाइटी के एक्सीक्यूटिव कमिटी में भी चुनल गइलें। यही जे इनके परिचय थियोसोफिकल सोसाइटी से भइल जे 1875 में वैश्विक (युनिवर्सल) भाईचारा खाती अस्थापित भइल रहल।बौद्ध आ हिंदू साहित्य के अध्ययन भी ई सोसाइटी करे। एहीजे गांधी गीता के पाठ करे से जुड़लें।

गांधी एकरे खातिर तइयार भ गइलेन कि ई ब्रिटिश उपनिवेश नटाल में कम से कम एक साल खातिर होखी।




#Article 119: मौर्य साम्राज्य (2242 words)


मौर्य साम्राज्य प्राचीन काल के लोहा जुग में, लगभग 322 ईसा पूर्व से 187 ईसा पूर्व के दौर में, भारतीय उपमहादीप में एक ठो बिसाल राज रहल। एकर संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य रहलें आ अशोक के समय में ई अपना चरम बिस्तार पर पहुँचल। अपना चरम काल में ई एह भूगोलीय क्षेत्र में अब तक ले भइल सभसे ढेर बिस्तार वाला राज्य हवे।

भारतीय मैदानी इलाका के वर्तमान बिहार राज्य में, ओह जमाना में मगध राजघराना के स्थापना से सुरू भइल ई साम्राज्य के राजधानी पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) रहल। 

पूरबी भारत में, चउथी सदी ईसा पूर्व में नंद बंस के शासन रहल। कहानी कहल जाला कि राजा घनानंद भरल सभा में विष्णुगुप्त चाणक्य के अपमान क दिहलें जेकरा से नराज हो के चाणक्य परतिज्ञा क लिहलें की नंद बंस के बिनास क दिहें। एही चाणक्य के मदद से चंद्रगुप्त द्वारा मौर्य राज के स्थापना तक्षशिला में भइल जे बाद में बिसाल साम्राज्य के रूप में स्थापित भइल।

एह समय से ठीक पहिले, बिजेता सिकंदर के सेना ब्यास नदी के पूरुब बढ़े से मना क दिहले रहल आ सिकंदर बेबीलोन लवट गइल रहलें। सिकंदर के मौत के बाद उनके राज के अधीन पच्छिमी भारत के हिस्सा पर यूनानी लोग कंट्रोल पोढ़ ना रहि गइल सिकंदर के मौत के पाँचे बरिस के बाद पुरु (पोरस) के भुला दिहल गइल। एकरा बाद चंद्रगुप्त मेसीडोनियाई लोग के हरा के आपन राज पंजाव में स्थापित कइलेन, चाणक्य के मदद से मजबूत सेना बनवलें आ एकरे बाद मगध पर आक्रमण क के उहाँ के सम्राट बनलें। हालाँकि, चंद्रगुप्त के शक्ति के उदय के बारे में बहुत बिबाद बाटे आ इतिहासकार लोग बहुत सारा बात पर एकमत ना बा लोग।

चाणक्य बिद्वान आ कुशल नीति निर्माता रहलें, कूटनीति के ज्ञाता रहलें, रणनीति बनावे आ गुप्तचर ब्यवस्था करे में उनके महारथ रहल। ऊ चंद्रगुप्त के मंत्री के रूप में मगध के शत्रु लोग से मेल करे आ सहजोगी जुटावे के काम कइलें, मगध में आपन गुप्तचर भेजलें।

सभसे पहिले चाणक्य अपना एगो शिष्य आ तत्काल में पोरस के प्रतिनिधि राजा के रूप में कैकेय पर राज करे वाला मलायकेतु के साथे मिलवलें। विशाखदत्त के मुद्राराक्षसम् में आ जैन ग्रंथ परिशिष्टपर्व सभ में चंद्रगुप्त के पर्वतिक राजा के साथ अलायंस बनावे के बिबरन मिले ला, जिनके पोरस के रूप में इतिहासकार लोग चिन्हित करे ला। एह हिमालयी एलायंस में यवन (यूनानी), कंबोज, शक (सीथीयाई), किरात (नेपाली), पारसीक (ईरानी), आ बाह्लीक (बैक्ट्रियाई) लोग सामिल हो के एक साथ मगध पर हमला कइल आ राजधानी पाटलिपुत्र, जेकरा के कुसुमपुर भी कहल जाय, बिजय स्थापित कइल।

 
मेसिडोनियाई लोग के खिलाफ चंद्रगुप्त तब आक्रमण कइलें जब सेल्यूकस I (निकेटर) द्वारा भारत के उत्तरपच्छिमी भाग सभ के, जिनहन के सिकंदर के समय में जीतल गइल रहे, दोबारा जीते के कोसिस कइल गइल लगभग 305 ईसा पूर्व में। एह लड़ाई के बारे में यूनानी इतिहासकार लोग कुछ नइखे लिखले मानल जाला कि एह लड़ाई में सेल्यूकस के भागे के पड़ल, बाद में चंद्रगुप्त आ सेल्यूकस के बीच समझौता भइल जेह में एक ठो औपचारिक जुद्ध-संधि लिखल गइल। एकरे अनुसार, यूनानी लोग आपन राजकुमारी के बियाह चंद्रगुप्त से कइल। चंद्रगुप्त द्वारा कंबोज, गांधार, कंधाहार, आ बलूचिस्तान के इलाका पर काबिज हो गइलेन आ बदला में सेल्यूकस के 500 हाथी मिललें जे उनके पच्छिमी सीमा पर जारी हेलेनिस्टिक जुद्ध सभ के बहुत मददगार साबित भइलेन। दुनों राज के बीच में राजदूत के रूप में भी संपर्क बढ़ल आ मेगस्थनीज नियर इतिहासकार लोग के मौर्य दरबार में स्थान मिलल।

मौर्य साम्राज्य के पहिला शासक, चंद्रगुप्त मौर्य आ उनके पत्नी दुर्धरा के बेटा बिंदुसार (298 - 272 ईसा पूर्व) , उनके बाद राजा बनलें। ओह समय बिंदुसार के उमिर मात्र 22 बरिस रहल। बिंदुसार के बारे में ओतना इतिहासी जानकारी ना मौजूद बा जेतना उनके पिता चंद्रगुप्त भा उनके बेटा अशोक के बारे में मिले ला, तबो कुछ जानकारी इनहूँ के राजकाज के बारे में जरूर मौजूद बा।

यूनानी इतिहासकार लोग इनके अमित्रचेत्स के नाँव से बोलवले बा, जेकर संस्कृत रूप अमित्रघात होखे के अनुमान लगावल जाला।
मध्यकालीन तिब्बती इतिहासकार लामा तारानाथ के लिखित बौद्ध धर्म के इतिहास में ई बिबरन मिले ला कि बिंदुसार ओह समय के सोरह गो राजा लोग के दमन कइलेन आ साम्राज्य के बिस्तार पच्छिमी समुंद्र से ले के पूरबी समुंद्र ले कइलें। कुछ लोग एकरा के दक्कन बिजय माने ला, काहें कि उनहन लोग के अनुसार पूरबी समुंद्र (बंगाल के कुछ इलाका छोड़ के) से ले के पच्छिमी समुंद्र (सौराष्ट्र के अलावा) पहिलहीं, चंद्रगुप्त के काल में, मौर्य साम्राज्य के हिस्सा बन चुकल रहल। कुछ इतिहासकार लोग एकरा के नया बिजय ना माने ला बलुक बिद्रोह के दमन भर माने ला। अशोक के शिलालेख-13 के हवाले से ई बतावल जाला कि मैसूर ले के इलाका अशोक के पैतृक राज के रूप में मिलल रहल। एही कारन ई बितर्क कइल जाला कि दक्षिण के बिजय या टेम्पलेट चंद्रगुप्त के काल में भइल या बिंदुसार के समय में।

दिव्यावदान नाँव के ग्रंथ से तक्षशिला में बिद्रोह के बिबरन मिले ला जेकरा के रोके खातिर बिंदुसार अशोक के भेजलें। अशोक के पहुँचे पर पता चलल कि उहाँ के लोग ना त राजकुमार के बिरुद्ध बा न राजा बिंदुसार के बाकिर दुष्ट आमात्य (मंत्री) लोग उनहन लो के अपमान करे ला।

बिंदुसार पच्छिम के यूनानी शासक लोग से दोस्ती के संबंध रखलें। स्ट्रेबो के हवाला से ई बतावल जाला कि ग्रीक शासक एंटियोकस, जे सेल्यूकस के उत्तराधिकारी रहलें, बिंदुसार के दरबार में डायमेकस नाँव के दूत भेजलें। प्लिनी के हवाला से बतावल जाला कि फिलाडेल्फस द्वारा एगो दूत डायोनीसस के भेजल गइल रहे।

पुराण सभ के मोताबिक बिंदुसार 24 साल राज कइलें, जबकि महावंश के अनुसार 27 साल, इतिहासकार राधाकुमुद मुखर्जी के हवाला दे के बिंदुसार के निधन के तिथि 272 ईसा पूर्व बतावल जाला। बिंदुसार के बाद इनके बेटा अशोक उत्तराधिकारी बनलें जे बिंदुसार के जीवन में उज्जयिनी के शासन ब्यवस्था के देखरेख करें।

नौजवान राजकुमार के रूप में अशोक ( BCE) जबरदस्त आ बेहतरीन कमांडर रहलें आ उज्जैन आ तक्षशिला में भइल बिद्रोह के सफलता के साथ दमन कइलें। राजा के रूप अशोक महत्वाकांक्षी आ उग्र सुभाव वाला रहलें जे साम्राज्य के ताकत के पच्छिमी भारत आ दक्खिनी भारत में दोहरा के पोढ़ कइलें हालाँकि, ई इलाका उनके राज्य के हिस्सा चंद्रगुप्त भा बिंदुसार के जमाना से रहबे कइल। ई त कलिंग (262–261 BCE) के बिजय अभियान आ एकरे दौरान भइल लड़ाई रहल जे उनके जिनगी में सभसे जबरदस्त मोड़ साबित भइल। भले अशोक के सेना कलिंग के हरा के अपना राज्य में सामिल करे में सफल भइल, एह भयानक लड़ाई में लगभग 1,00,000 सैनिक आ नागरिक मारल गइलें जेह में 10,000 खुद अशोके के आदमी रहलें। सैकड़ों हजार लोग एह जुद्ध के कारन बरबादी के शिकार भइल। जब अशोक ई बरबादी आ कष्ट खुद देखलें तब उनके पछितावा होखे लागल। एही पछितावा में ऊ शांति के खोज में बौद्ध धर्म अपना लिहलें, हालाँकि कलिंग उनके राज्य के हिस्सा बन गइल। एकरे बाद ऊ लड़ाई आ हिंसा के रास्ता छोड़ दिहलें आ नैतिक आ धार्मिक बिचार के बढ़ावा देवे में लाग गइलेन। राज्य में पशु बध बंद करवा दिहलें, सभका के कानून के नजर में बराबर घोषित कइलें आ अपना आदेशलेखन में धर्म आ नीति के बात लिखवा के धर्म के परचार कइलें, अन्य देसन में धर्म प्रचारक लोग के भेजलें।

पत्थर पर खोदवावल अशोक के आदेसलेख पूरा भारतीय उपमहादीप में मिलल बाने। सुदूर उत्तर-पच्छिम में अफगानिस्तान से ले के दक्खिन में आंध्र प्रदेश के नेल्लोर तक ले ई आदेसलेख मिलल बाने। एह आदेसलेख सभ में अशोक के नीति आ आदर्श के बिबरन मिले ला। एह में से ज्यादातर लेख ब्राह्मी लिपि में बाने जबकि एक ठो लेख ग्रीक (यूनानी भा यवन) भाषा में आ यूनानी आ अरमाई लिखाई में लिखल बा। एह आदेसलेखवन में यवन, गांधार लोग के बारे में लिखल बा आ ओह लोग के राज्य के पच्छिमी सीमा पर मौजूद खेतीबारी करे वाला लोग के रूप में बतावल गइल बा। ग्रीक (यवन) राज्य के सीमा भूमध्यसागरीय इलाका तक ले बतावल गइल बा आ इनहन में अम्तियोक (दूसरा एंटियोकस), तुलामय (टालेमी), अम्तिकिनी (एंटीगोनोस), मक (मग) आ अलिकसुंद्र (एपिरस के दूसरा अलेक्जेंडर) इत्यादि के बिबरन बाटे। एह आदेस लेख सभ में राज्य के सटीक सीमा 600 योजन के दूरी पर बतावल गइल बा (लगभग 4,000 मील दूर)।

अशोक के बाद अउरी 50 साल ले एह बंस के राज चलल। अशोक के उत्तराधिकारी लोग के रूप में कुणाल, जलौक, दशरथ आ संप्रति के नाँव मिले ला। पुराणन में वर्णन अनुसार शालिशुक आ बृहद्रथ अंतिम मौर्य राजा रहल लोग। शालिशुक के कमजोर शासन के समय में पाटलिपुत्र पर यवन लोग के हमला भइल आ बृहद्रथ के उनके ब्राह्मण सेनापति पुष्यमित्र शुंग द्वारा 185 ईसा पूर्व में एगो सैनिक परेड के दौरान हत्या क दिहल गइल। एकरे बाद मौर्य साम्राज्य के अंत हो गइल आ शुंग बंस के शासन स्थापित हो गइल। 

बौद्ध ग्रंथ, उदाहरण खातिर अशोकवंदना में बिबरन बा कि बृहद्रथ के हत्या के बाद ब्राह्मण शुंग लोग के राज में बौद्ध धरम के लोगन के प्रताड़ना भइल आ, आ हिंदू धर्म के दोबारा उठान सुरू भइल। जान मार्शल के अनुसार,  पुष्यमित्र एह धार्मिक प्रताड़ना के सभसे बरियार समर्थक आ कलाकार रहलें जबकि बाद के शुंगबंसी राज लोग बौद्ध धरम के ओर कुछ सपोर्ट भी करे वाला रहल। अन्य इतिहासकार, जइसे कि एटिनी लामोटी आ रोमिला थापर, के मत बा कि अइसन बरियार प्रताड़ना आ हमला के पुरातात्विक सबूत कहीं से नइखे मिलल आ बौद्ध ग्रंथन में लिखल ई बात बढ़ा-चढ़ा के कहल गइल हवे। राधाकुमुद मुखर्जी ई माने लें कि पुष्यमित्र कट्टर ब्राह्मण आ बौद्ध धर्म के पक्का दुश्मन रहलें आ बौद्ध विहारन पर बहुत प्रहार कइलेन, बाकी इहो लिखे लें कि विदिशा के लगे भरहुत में उनके दान से बौद्ध स्तूप के निर्माण भी भइल।

मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद खैबर दर्रा से सुरक्षा हट गइल आ ई रस्ता बाहरी हमलावर लोग खातिर फिर से खुल गइल। एह तरह से यवन (ग्रीक) लोग के आक्रमण शुंग शासनकाल में सुरू हो गइल रहे। एकर मूल जगह बक्त्र (बैक्ट्रिया) रहल जेकरा के दूसरा दायोदोतस (डायोडोटस II) सीरिया के साम्राज्य से आजाद करा लिहलें आ उनके उत्तराधिकारी लोग राज के बिस्तार के आगे बढ़ावल। दिमेत्रियस द्वारा लगभग 180 ईपू में अफगानिस्तान आ उत्तर-पच्छिम भारत के इलाका जीत लिहल गइल आ सिंधुपार के इलाका में हिंद-ग्रीक राज के स्थापना हो गइल। एह लोग में सभसे परसिद्ध राजा मिलिंद (मिनांडर) रहलें जे सागल (सियालकोट) के आपन नई राजधानी बनवलें। पाली भाषा में मौजूद बौद्ध ग्रन्थ मिलिंद-पन्हों के बिबरन अनुसार नागसेन के परभाव से मिनांडर बौद्ध हो गइलें। उनके भारतीयकरण अतना हो गइल कि अपना कई गो अनुयायी लोग के नाँव यूनानी से बदल के भारतीय क दिहले रहलें। इनका काल में बौद्ध धर्म के परतिष्ठा बढ़ल। इनहन लोग के राज्य के वास्तविक बिस्तार कहाँ तक ले रहल एह बारे में कई अर्ह के मत बा। सबूत एह बात के मिले ला कि ई हिंद-यूनानी लोग ईसवी सदी के सुरुआत ले शासन कइल। शुंग, सातवाहन आ कलिंग राज के खिलाफ एह लोग के केतना सफलता मिलल ई बिबाद के बिसय बा। ई बात जरूर साफ बा कि लगभग 70 ईसापूर्व के बाद से शुंग राज के ऊपर यूरेशियाई स्टेपी के इलाका के सीथियाई लोग (जिनके एगो शाखा इंडो-सीथियन या फ़ारसी आ संस्कृत में सक भा शक कहल गइल बा) के हमला भइल आ हिंद-यूनानी राज के पतन हो गइल आ मथुरा आ उज्जयिनी तक के इलाका पर शक लोग के राज हो गइल आ 175-160 ईसापूर्व तक शक राज रहल जबले कि कुषाण लोग के आगमन ना हो गइल।

मौर्य साम्राज्य के प्रशासन में सभके केंद्र में सम्राट रहल। इलाकाई बिस्तार के हिसाब से देखल जाय त पूरा साम्राज्य के चार गो प्रांत नियर इकाई में बाँटल गइल रहल। इनहन के राजधानी तोसली (पूरुब में), उज्जैन (पच्छिम में), सुवर्णगिरि (दक्खिन में) आ तक्षशिला (उत्तर-पच्छिम में) रहल। एह प्रांतीय इकाई सभ के प्रशासन के जिम्मेदारी राजा के प्रतिनिधि के रूप में कुमार लोग करे।

बिसय बिभाजन के हिसाब से देखल जाय त मौर्य साम्राज्य एगो उच्चस्तर के केंद्रीय राजतंत्र रहल। प्रशासन के कामकाज के बिसय अनुसार अठारह हिस्सा में बाँटल गइल रहे। एह बिभाग सभ में कुछ प्रमुख के मुखिया रहलें समाहर्ता (टैक्स वसूली), सन्निधाता (खजाना), सेनापति, युवराज, मंत्री, प्रदेष्टा, दौवारिक इत्यादि। एकरे अलावा अधिकारी लोग के भी अलग अलग बिभाजन रहल आ हर बिभाग के मुखिया अधिकारी के अध्यक्ष कहल जाय। अइसन कुल बाईस गो अध्यक्ष लोग या फिर सताइस  होखे जेह में कुछ प्रमुख रहलें: सीताध्यक्ष (खेती), पण्याध्यक्ष (बानिज), संस्थाध्यक्ष (ब्यापार के मार्ग), वित्ताध्यक्ष (चरागाह) आ लक्षणाध्यक्ष (छपाई) इत्यादि। पण्याध्यक्ष (पौतव) के काम नापजोख के बटखरा सभ के जाँच कइल भी रहे जवना से प्रशासन के जटिलता आ सूक्ष्मता के अंजाद लगावल जा सके ला।

सेना बहुत बिसाल रहल आ मेगास्थनीज के हवाला से 6,00,000 पैदल (इन्फैंट्री), 30,000 घोड़ासवार, 8,000 रथ आ 9,000 हाथी रहलें जेकरे पाछे चले वाला आ भृत्य लोग भी रहे। बड़ा पैमाना पर गुप्तचर ब्यवस्था भी मौर्य साम्राज्य के बिसेसता हवे।

कुल मिला के मौर्य काल के प्रशासन बढ़निहार प्रक्रिया रहल आ समय के अनुसार जइसन परिस्थिति होखे एह में सुधार भी होखे। आमतौर पर चाणक्य के लिखल ग्रंथ अर्थशास्त्रम् में बर्णित प्रशासन के चंद्रगुप्त मौर्य के शासन काल के अंतिम समय में लागू प्रशासनिक ब्यवस्था के बिबरन के रूप में देखल जाला, एकरे निर्माण में खुद चाणक्य के भी कम जोगदान ना रहे। हालाँकि ई किताब में आदर्श ब्यवस्था बतावल गइल बा आ जरूरी नइखे कि ओह समय के चलन के एकदम सटीक बिबरन होखे।

रोमिला थापर नियर इतिहासकार लोग के मानल बा कि मौर्य साम्राज्य के प्रशासन में एगो मूलभूत कमी रहल कि ऊ बेहवारिक रूप से सुसंगठित होखले के बावजूद जरूरत से ज्यादा नौकरशाही केंद्रित रहल। गुप्त लोग से इनहन लोग के कर ब्यवस्था बढ़ियाँ रहल जबकि तनखाह के मामिला में ऊँच वर्ग आ निचला अधिकारी लोग के बीच बहुत असमानता रहल, सभसे अधिक तनखाह 48 हजार पण आ सभसे कम 60 पण रहे।




#Article 120: पुणे (105 words)


पुणे भारत के 9वा अउर मुंबई के बाद महाराष्ट्र के दूसरा बड़ शहर बा। पुरान जमाना मे मराठा साम्राज्य के शक्ति का केन्द्र रहे वाला ई शहर, मुला अउर मुथा नदी के संगम पर दक्कन पठार पर समुद्र स्तर से 500 मीटर दुरी पे बा। पुणे शहर पुणे जिला के प्रशासनिक बा।

पुणे शहर के 847 ई. के बाद एक शहर के रूप में जानल गईल बा। पुणे शहर के मूल रूप से पुनावाड़ी नाम से जानल जात रह्ला। 1730 में, पुणे पेशवा, सतारा के भोंसले छत्रपति (मराठा साम्राज्य के शासक) के प्रधानमंत्री के गद्दी के रूप में एगो महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र बन गईल रह्ला।




#Article 121: पर्यावरण (2007 words)


पर्यावरण () कौनो जीवधारी के चारों ओर पावल जाये वाली सगरी जैविक आ अजैविक चीजन क एकट्ठा रूप हउवे जेवना से ओ जीवधारी के जीवन परभावित होला।

पर्यावरण में सगरी प्राकृतिक आ मनुष्य क बनवाल चीज भी आ जाला; सगरी जिंदा जीव-जंतु से लेके बेजान चीज ले, सभ कुछ आ जाला। एही से पर्यावरण में दू तरह क चीज गिनावल जाला: जैविक संघटक - सगरी जिंदा जीव-जंतु, पेड़-पौधा, बैक्टीरिया आ कीड़ा-मकोड़ा सभ; आ  अजैविक संघटक - सगरी बेजान भौतिक आ रासायनिक चीज, जइसे पहाड़, मैदान, माटी, हवा, पानी इत्यादि।

प्राकृतिक पर्यावरण क मतलब होला अइसन कुल चीज जेवन प्रकृति में अपने आप मिलेलीं आ मनुष्य द्वारा ना बनावल हईं। एगो अउरी अर्थ में ओइसन सारा जगहन की पर्यावरण के प्राकृतिक पर्यावरण कहल जाला जहाँ मनुष्य क बहुत कम हस्तछेप भइल होखे। प्राकृतिक पर्यावरण की अंग की रूप में कौनो जगह क जमीनी रचना, जलवायु, नदी, झील, प्राकृतिक बनस्पति, जीव-जंतु आ इन्हन से जुडल सभ तरह क क्रिया के अध्ययन होला। प्राकृतिक पर्यावरण की बिपरीत बनावटी पर्यावरण एगो अइसन पर्यावरण होला जेवना क रचना आदमी अपनी हिसाब से करेला। बनावटी पर्यावरण में उहे क्रिया-प्रक्रिया होले जेवन प्राकृतिक पर्यावरण में होले लेकिन ई आदमी द्वारा बहुत ढेर नियन्त्रित आ परभावित होले।

पर्यावरण अवनयन क मतलब होला पर्यावरण की गुणवत्ता में कमी। एही क एगो प्रकार हवे प्रदूषण जेवना में प्राकृतिक पर्यावरण में कौनो अइसन चीज क प्रवेश मनुष्य की काम द्वारा होला जेवना से प्राकृतिक पर्यावरण क ब्यवस्था गड़बड़ा जाला आ एकरी गुणवत्ता में कमी होला। हवा, पानी अउरी माटी में मनुष्य द्वारा फईलावल गंदगी से होखे वाला प्रदूषण अइसने एगो घटना बा।

पर्यावरण क पढ़ाई करे वाला बिज्ञान के पर्यावरण बिज्ञान कहल जाला। एकरी आलावा भूगोल में एकर अध्ययन होला।

इकोलॉजी में जीव सभ आ उनहन के पर्यावरण के बीच क्रिया-प्रतिक्रिया क अध्ययन आ बैज्ञानिक बिस्लेषण कइल जाला। ए बिज्ञान के पर्यावरणीय-जीव बिग्यान भी कहल जाला। मुख्य रूप से इ बिग्यान कौनो आस्थान की पर्यावरण के एगो सिस्टम मान के ओकर अध्ययन करे ला।

सिस्टम चाहे तंत्र क मतलब होला अइसन इकाई जेवना क सगरी हिस्सा एक-दुसरा से जुडल होखे आ आपस में क्रिया-प्रतिक्रिया करत होखे आ एही वजह से ऊ सिस्टम कई टुकड़न से मिल के बनला की बावजूद एगो सिंगल इकाई की रूप में ब्यवहार करत होखे।

ए नजरिया से देखल जाय त हमनी की पृथ्वी क पर्यावरणो एगो बहुत बड़हन सिस्टम के रूप में काम करेला। पर्यावरण क रचना कई चीज से मिल के भइल बा जिनहन के एकर अंग (पार्ट भा एलिमेंट) कहल जा सकेला आ तबो पर ई अलग-अलग अंग कौनों न कौनो क्रिया-प्रक्रिया द्वारा एक दुसरा से जुड़ के पुरा पर्यावरण के एगो सिंगल ज़िंदा इकाई की रूप में काम करे लायक बनावेला। एही से पर्यावरण के एगो पारिस्थितिक तंत्र कहल जाला। एकरे बाद दुसरा स्तर पर दुनिया के अलग-अलग इलाका में अलग-अलग किसिम के पर्यावरण दसा के कारण अलग तरह के बायोम पावल जालें। या फिर अउरी छोट स्तर पर भी पृथ्वी के कौनों हिस्सा के इकोसिस्टम मान के ओकर अध्ययन आ बिस्लेषण कइल जा सके ला।

इकोसिस्टम की रूप में पर्यावरण के मान लिहला पर एकरी अध्ययन में कई तरह क सुबिधा हो जाला। सबसे बड़ बात ई कि तब ई मान लिहल जाला की पर्यावरण की कौनो छोट से छोट अंग में कौनो बदलाव होई त ओकर परभाव पूरा पर्यावरण पर पड़ी। ए तरह से पर्यावरण में होखे वाला बदलाव क अध्ययन करे में बहुत सुबिधा हो जाला।

 

प्राकृतिक पर्यावरण प्रकृति में अपने आप, यानि प्राकृतिक रूप से पावल जाए वाली सगरी जिंदा आ बेजान चीजन के एकट्ठा रूप हवे। अइसन प्राकृतिक दसा जेह में आदमी क हस्तक्षेप बहुत कम भइल होखे। पूरा ब्रह्मांड प्राकृतिक बा, बाकी ई शब्द अकसर पृथ्वी खातिर इस्तमाल कइल जाला, या पृथ्वी के कौनों खास इलाका खातिर। एह तरह के पर्यावरण में पृथ्वी पर पावल जाए वाली सगरी जीव सभ के प्रजाति, चट्टान, जलवायु, मौसम आ अन्य प्राकृतिक संसाधन सभ के शामिल कइल जाला जेकरा से मनुष्य के जीवन संभव बा आ जवना पर मनुष्य के सगरी वर्तमान आर्थिक गतिबिधि सभ मूल रूप से निर्भर बा। प्राकृतिक पर्यावरण के बिपरीत, मनुष्य के बनावल पर्यावरण बा। पृथ्वी के बहुत सारा इलाका में मनुष्य अपना गतिबिधि से मूल प्राकृतिक दसा सभ के एतना बदल दिहले बा, जइसे कि खेती खातिर या शहर बसावे खातिर, कि अब उहाँ के प्राकृतिक पर्यावरण बदल के मनुष्य-निर्मित पर्यावरण बन गइल बाटे। इहाँ तक कि बहुत मामूली बुझाए वाला बदलाव, जइसे कौनों रेगिस्तानी इलाका में माटी के देवाल आ छान छप्पर डाल के घर बना लिहल भी आसपास के पर्यावरण के आर्टिफिशियल पर्यावरण में बदल देला, ऊ प्राकृतिक ना रहि जाला। हालाँकि, बहुत सारा जियाजंतु आपन घर बनावे लें आ बहुत बड़ आकार के रचना भी क देलें, उनहन के कइल बदलाव प्राकृतिक पर्यावरण के हिस्सा मानल जाला।

वास्तव में पूर्ण रूप से प्राकृतिक पर्यावरण पृथ्वी पर साइदे कहीं मिले, आ कौनों भी जगह के प्राकृतिकता 100% प्राकृतिक से 0% प्राकृतिक के बीच कहीं होला। वास्तव में प्राकृतिक पर्यावरण के चीजन के एह तरीका से देखल जा सके ला कि इनहन के प्राकृतिकता मनुष्य के कामकाज के परभाव से केतना सुरक्षित बा। कुछ लोग के कहनाम इहो बा कि जब मनुष्य के काम से पूरा पृथ्वी के जलवायु सिस्टम आ हवा के बनावट में बदलाव हो रहल बा, पृथ्वी के कौनों हिस्सा आज अइसन नइखे बचल जवना के सही अरथ में प्राकृतिक कहल जा सके।

एक ठो दूसर संर्दभ में, प्राकृतिक पर्यावरण शब्द के प्रयोग जीवजंतु के आवास (हैबिटाट) खातिर भी होला। उदाहरण खातिर, जब ई कहल जाय कि जिराफ सभ के प्राकृतिक पर्यावरण सवाना घास के मैदान हवे।

पृथ्वी बिज्ञान आ भौतिक भूगोल जइसन बिसय जे मुख्य रूप से एह तरह के पर्यावरण के अध्ययन करे लें, प्राकृतिक पर्यावरण के चार हिस्सा में बाँटे लें: थलमंडल, वायुमंडल, जलमंडल आ जीमंडल। कुछ बिद्वान लोग हिममंडल (क्रायोस्फीयर, बर्फ वाला हिस्सा) आ मृदामंडल (पेडोस्फीयर, माटी वाला हिस्सा) के अलग से गिने लें आ पृथ्वी के छह गो मंडल में बाँटे लें।

जइसे पृथिवी पर हर जीव-जंतु अपनी पर्यावरण की संघे क्रिया-प्रतिक्रिया (अन्तर्क्रिया) करेला ओइसहीं मनुष्यो अपनी पर्यावरण की संघे अन्तर्क्रिया करेला। मनुष्य आ ओकरी पर्यावरण की बीच की संबंध क अध्ययन दू तरह से कइल जाला इतिहासी रूप से, मने कि 'समय की साथ बदलाव';  आ भूगोलीय रूप से, मने कि अस्थान की संघे बदलाव।

इतिहास देखल जाय त ई पता चलि की मानव क आपनी पर्यावरण की संघे कई तरह का संबंध रहि चुकल बा। पहिले मनुष्य अउरी जीव जंतु की तरे हर तरह से पर्यावरण पर निर्भर रहे आ पर्यावरण की क्रिया से मनुष्य क जीवन नियंत्रित होखे। आज मानव समाज पर्यावरण में बहुत भारी बदलाव क सकत बा आ क इले बा।आज मानव समाज की लगे एतना घातक परमाणु बम आ हाइड्रोजन बम बा कि ऊ पुरा पृथ्वी क (मने सगरी पर्यावरण क) बिनास करे में सक्षम बा। ई पूरा बिकास कइसे भइल एकर अध्ययन बहुत रोचक आ ज्ञान देवे वाला विषय हो सकेला।

भूगोल की हिसाब से देखल जाय त अलग-अलग जगह पर मानव समाज का ओकरी पर्यावरण की संघे अलग तरह क संबंध मिली। मनुष्य आ पर्यावरण की बिचा में होखे वाला क्रिया-प्रतिक्रिया आ ओकर परभाव कइसे एक जगह से दूसरी जगह बदलत जाला एकर अध्ययन भूगोल में कइल जाला।

पर्यावरणी मुद्दा या पर्यावरणी समस्या, पर्यावरण पर मनुष्य के नोकसानदेह परभाव हवे। बहुत लंबा समय से ई चिंता के बिसय रहल बाड़ें, बाकी अभिन ले इनहन के सुलझाव पूरा तरीका से ना हो पवले बा।

एकर पूरक बिचार हवे पर्यावरण संरक्षण, मने कि पर्यावरण के सुरक्षा, में अइसन काम के शामिल कइल जाला जे ब्याक्तिगत, संस्थागत भा सरकारी या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राकृतिक पर्यावरण के दसा के मनुष्य के परभाव से सुरक्षा देवे खाती कइल जा रहल बाने; चाहे पर्यावरण के लाभ खातिर भा मनुष्य के फायदा खाती। पर्यावरणवाद, एक तरह के सामाजिक आ पर्यावरणी आंदोलन हवे जवना के तहत पर्यावरणी मुद्दा सभ के साथ निपटे बदे जागरुकता, शिक्षा आ सामाजिक सक्रियता बढ़ावे खातिर काम कइल जाला।

प्रदूषण जब कौनो तरह के हानिकारक तत्व प्रकृति में पावल जाये वाला हवा, पानी चाहे माटी जैसन उपयोगी चीजन में मिल के ओके गंदा कर देला आ ओके आदमी के उपयोग लायक ना रहे देला त एही के प्रदूषण कहल जाला। एकर सीधा बुरा असर आदमी आ सगरी जीव-जंतु पेड़-पौधा पर पड़ेला। जवन नुक्सानदेह पदार्थ की मिलला से प्रदूषण होला, माने कि जवन पदार्थ प्रदूषण के कारण होला, ओके प्रदूषक कहल जाला।

प्रदूषण के एइसन घटना अपने-आप प्राकृतिक रूप से भी हो सकेला आ एह में आदमी के भी हाथ हो सकेला। आदमी द्वारा होखे वाला प्रदूषण में जबसे आदमी बिज्ञान आ तकनीक में आगे बढल बा तबे से ढेर इजाफा भइल बा। एक परकार से आदमी खुदे अपनी पर्यावरण में नुकसानदेह पदार्थन के पहुँचा के प्रदूषण फइला रहल बा जेवना से पर्यावरण आ प्रकृति में नुकसानदेह परिवर्तन देखेके मिलत बा।

नदी की पानी में शहरी नाला अउरी फैक्टरी के जहरीला पानी मिलले से नदी के पानी पिए लायेक ना रहि जाला। अगर एइसन जहरीला पदार्थन के बहुत अधिक मात्रा पानी में मिल जाला त ऊ पानी नहाये लायक भी ना रहि जाला आ ओ में रहे वाला जीव-जंतु भी मरे लागेलन आ ऊ पानी गाय-गोरू के भी पिए लायक ना बचेला। नदी, ताल, तलही आ झील में ए तरह क प्रदूषण जल प्रदूषण कहल जाला।

एही तरह से हवा प्रदूषण, शोर प्रदूषण, माटी प्रदूषण, ठोस-कचड़ा प्रदूषण, प्रकाश प्रदूषण आदि कई परकार के प्रदूषण आजकाल पूरा विश्व खातिर समस्या बनल बा।

जलवायु बदलाव भा जलवायु परिवर्तन (Climate change), पृथ्वी के जलवायु में लंबा समय के दौरान होखे वाला बदलाव हवे। खासतौर पर वर्तमान समय में मनुष्य के क्रियाकलाप से भूमंडलीय तापन के कारन जलवायु में होखे वाला परिवर्तन एगो प्रमुख चर्चा के बिसय बाटे आ  कुछ लोग के हिसाब से निकट भबिस्य में पृथ्वी आ मानवता खातिर एगो खतरा बाटे।

बैस्विक गरमाव आ एकरे कारण जलवायु में बदलाव पछिला लगभग एक सदी के समय में धरती के जलवायु सिस्टम में औसत तापमान के बढ़ती आ एकरा से जुड़ल परभाव सभ खातिर इस्तेमाल होखे वाला शब्दावली हवे। कई तरह के बैज्ञानिक सबूत ई देखा रहल बाने कि जलवायु सिस्टम गरम हो रहल बाटे।

पर्यावरण दर्शन दर्शनशास्त्र के शाखा हवे जे एह बात पर विचार करे ले की आदमी क अपनी पर्यावरण की बारे में का सोच आ बिचार बा, लोग आपनी पर्यावरण की बारे में कइसे सोचेला। पर्यावरण दर्शन ए बारे में चिंतन करे ला कि पर्यावरण के मनुष्य की संदर्भ में कइसे देखल जात बा आ मनुष्य अपना के पर्यावरण की संदर्भ में कइसे देखत बा।

आसन भाषा में कहल जाय त ई ए बात क अध्ययन करे ला की हमनी क अपनी पर्यावरण की बारे में का सोचत बाड़ीं आ हमहन क अपनी पर्यावरण की बारे में जेवन सोच बा ऊ केतना ठीक बा आ केतना गलत बा। पर्यावरण दर्शन क कुछ मुख्य सवाल नीचे दिहल गइल चीजन से संबधित बा:

पर्यावरण प्रबंधन क अर्थ होला अइसन सारा चीज क मैनेजमेंट जेवना से पर्यावरण पर परभाव पड़त होखे। एकर मतलब पर्यावरण की प्रबंधन से नाहीं बलुक पर्यावरण के प्रभावित करे वाला चीजन की मैनेजमेंट से बा।

पर्यावरण नीति या पालिसी पर्यावरण की सुरक्षा आ एके प्रभावित करे वाला चीजन की बारे में योजना बनावे खातिर आधार देला। पर्यावरण नीति कौनों भी संस्था (जेह में कौनों राष्ट्र के सरकार से ले के कौनों प्राइवेट कंपनी ले सामिल बा) के द्वारा घोषित, ओह संस्था के पर्यावरण के बारे में सोच, बिचार, उद्देश्य इत्यादि के जाहिर करे वाला चीज हवे आ ई एह बात के वक्तव्य भा साफ-साफ कथन होला कि संस्था के पर्यावरणी मुद्दा सभ पर का पोजीशन बा आ पर्यावरण के मामिला में ऊ कवना किसिम के नैतिक भाव रखत बा, साथे-साथ पर्यावरण के सुरक्षा खातिर बनावल कानून आ रेगुलेशन सभ के ऊ संस्था कवना तरीका से पालन करी आ एकरे खातिर केतना तत्पर बाटे।

पर्यावरण कानून में ऊ सगरी अंतर्राष्ट्रीय संधि, समझौता आ कौनों देस में बनावल कानून आ जालें जेवन पर्यावरण की रक्षा खातिर बनावल गइल होखें। एकर मेन मकसद होला आदमी की क्रियाकलाप से प्राकृतिक पर्यावरण के होखे वाला नोकसान के रोकल आ पर्यावरण क टिकाऊपन बचावल।

पर्यावरणवाद एक तरह के दर्शन, बिचारधारा आ सामाजिक आंदोलन ह जे पर्यावरण के सुरक्षा खातिर आ एकर मूल रूप बचावे खातिर बा। ई एक तरह के सामाजिक आ पर्यावरणी आंदोलन हवे जवना के तहत पर्यावरणी मुद्दा सभ के साथ निपटे बदे जागरुकता, शिक्षा आ सामाजिक सक्रियता बढ़ावे खातिर काम कइल जाला।




#Article 122: लोक संगीत (153 words)


लोक संगीत (अंग्रेजी:Folk music) कवनो भी संस्कृति में आम जनता द्वारा पारंपरिक रूप से प्रचलित गीत-संगीत के कहल जाला। सामान्यतः ई गाँव-गिरांव में खुद से प्रचलित आ अनाम रचनाकार लोगन द्वारा बनावल रचना होले। लोकगीतन क धुन भी पारंपरिक होले। सामान्य रूप से ई शास्त्रीय संगीत की विपरीत स्वतः उत्पन्न मानल जाला।

नया समय में मेन संगीत से अलग हटिके कम प्रचलित भाषा बोली में रचना के भी लोग संगीत कहल जात बाटे।

भोजपुरी लोकगीत में होली (फगुआ), कजरी, बिरहा, सोहर, बियाह क गीत इत्यादि अइसने कुल गीत आवेलें। सोरठी, पूरबी, कहारऊ धुन भी लोकगीत से जुडल बा आ ए धुनन पर होखे वाली वर्तमान रचना कुल के भी लोकगीत कहल जाला। मनोज तिवारी, भरत शर्मा, कल्पना पटवारी, शारदा सिन्हा, मालिनी अवस्थी, निरहुआ, खेषारी, कल्लू, पवन सिंह, गोपाल राय, मदन राय भोजपुरी लोकगीत के अलग अलग विधा के गायक बाढन।

पाश्चात्य लोकगीत में ज्यादातर रचना अकेले आ एगो बाजा कि संघे गावल जाला।

 




#Article 123: भोजपुरी लोकगीत (465 words)


भोजपुरी लोकगीत भारत आ नेपाल के भोजपुरी क्षेत्र में, आ कुछ अउरी देसन में जहाँ भोजपुरी भाषा बोले वाला लोग बसल बा, परंपरागत रूप से गावल जाए वाला लोकगीत हवें। भारत में भोजपुरी इलाका के बिस्तार पूरबी उत्तर परदेस, पच्छिमी बिहार, झारखंड आ छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सा में बा आ नेपाल के तराई वाला इलाका के कुछ हिस्सा भोजपुरी भाषी क्षेत्र में आवे लें, जहाँ ई लोकगीत चलनसार बाने। अन्य जगहन में सूरीनाम, फिजी, मॉरिशस इत्यादि देशन में जहाँ भोजपुरी भाषी लोग बाटे एकर प्रचलन बाटे।

आमतौर पर एहू के दू गो बिभेद में बाँटल जा सकेला। एक हिस्सा ओह गीतन के बा जवन परंपरा में पुराना जमाना से चलि आ रहल बाड़ें। इन्हन के रचना के कइल ई किछु अता-पता नइखे। सैकड़न साल में ई गीत बनल बाड़ें। कजरी, सोहर, झूमर इत्यादि परंपरागत गीत एही श्रेणी में आई। दूसरा ओर पछिला कुछ समय में प्रोफेशनल लोग के द्वारा लोकगीत के एगो बिधा के रूप में बिकसित करि के गावे के परंपरा शुरू भइल। भिखारी ठाकुर के बिदेसिया से ले के वर्तमान समय के ढेर सारा गायक लोग के गीत के लोकगीत के बिधा में कहल जाला।

भोजपुरी लोकगीतन के एकट्ठा करे के दिसा में कई लोग काम कइल। परसिद्ध भाषा बिग्यानी आ भारत के भाषाई सर्वे करे वाला जार्ज ग्रियर्सन कुछ भोजपुरी लोकगीत सभ के एकट्ठा क के उनहन के अंगरेजी में अनुवाद 1886 में रॉयल एशियाटिक सोसायटी के जर्नल में छपववलें। देवेंद्र सत्यार्थी कुछ अहिरऊ गीत बिरहा सभ के संकलन करिके छापा में छपववलें। भोजपुरी लोकगीतन के साहित्यिक दृष्टि से अध्ययन कई गो लोग कइले बाटे जेवना में कृष्णदेव उपाध्याय के काम बहुत महत्व वाला बाटे। एकरे अलावा श्रीधर मिश्र आ विद्यानिवास मिश्र के लिखल चीज भी खास महत्व के बा।

भोजपुरी लोकगीत कउनो परिचय के मोहताज ना बा,आज के समय में भोजपुरी लोकगीत में एक से बढ़ी के एक गीत आ रहल बा।
शारदा सिन्हा, मनोज तिवारी, निरहुआ, कल्पना पटवारी, चंदन तिवारी, मदन राय, गोपाल राय, जइसन गायक के सुंदर आवाज में भोजपुरी लोकगीत आज पूरे विश्व में सुनल आउरी गवाल जा रहल बा।

भोजपुरी लोकगीतन के कृष्ण देव उपधिया चार गो प्रकार में बँटले बाने। (1) संस्कार आ रीति-रेवाज से जुडल, (2) बरत-तिहुआर से संबंधित, (3) मौसम आ सीजन के अनुसार गावल जाए वाला, (4) कौनों जाति-समुदाय के गीत, आ (5) दैनिक जीवन के बिबिध कामकाज आ पेशा से जुड़ल गीत।

भोजपुरी लोकगीत, गायकी के बिधा के रूप में भी चलन में बा आ बिबिध किसिम के परंपरागत पुराना लोकगीत सभ के भी एह बिधा में गिनल जाला आ बाद के कई गीतकार आ गायक लोग भोजपुरी भाषा में बिबिध किसिम के रचना सभ के भी एह बिधा के तहत गवले बाने।
भोजपुरी लोकगीत के कुछ प्रमुख गायक लोग में शारदा सिन्हा, भरत शर्मा, मनोज तिवारी, कल्पना पटवारी, चंदन तिवारी, पवन सिंह, दामोदर राव आभास चतुर्वेदी, अमित सिंह नियर लोग बा।




#Article 124: कजरी (655 words)


कजरी एक तरह क भोजपुरी लोकगीत हवे। ई सावन की महीना के गीत ह जेकरा के बिटिया-मेहरारू कुल झुलुआ खेलत समय गावेलीं। कजरी गा-गा के झुलुआ खेलला के कजरी खेलल कहल जाला। ई उत्तर प्रदेश आ बिहार के एगो प्रमुख लोक गीत ह। भोजपुरी के अलावा ई गीत मैथिली आ मगही में भी गावल जाला हालाँकि, कजरी के मुख्य क्षेत्र भोजपुरी इलाका ह आ एहू में बनारस आ मिर्जापुर के एकर मुख्य क्षेत्र मानल जाला।

कुछ बिद्वान लोग कजरी के उत्पत्ति बनारस मिर्जापुर के इलाका में होखे वाली शक्ति पूजा भा गौरी पूजा से जोड़े ला जबकि कुछ वैष्णव लोग एकरा के कृष्ण के पूजा आ लावनी से जोड़े ला; मिर्जापुर के परंपरागत लोक कलाकार लोग एकरा के बिंध्यवासिनी देवी के देन माने ला।

भोजपुरी क्षेत्र में अलग-अलग मौसम में गावल जाये वाला तरह-तरह क गीत पावल जालें जेवना में कजरी क आपन एगो अलगे महत्व हवे । कजरी गावे क मौसम बरसात क होला जब सावन की महीना में ए गीतिन के गावल जाला। कजरी के गीति गावे वाली अधिकतर नयी उमर के लइकी-बिटिया होखेलीं । ए गीतिन के सावन में झुलुआ खेलत घरी लइकी कुल आपस में दू गोल बना के गावेलीं। कजरी गा-गा के झुलुआ खेलला के कजरी खेलल कहल जाला । एहीसे कजरी की गीतिन में सावन की महीना क हरियाली, रिमझिम बरखा के फुहार क खनक, खेल-खेलवाड़ के चंचलता, किशोरावस्था के उछाह अउरी आपस में छेड़छाड़ वाली बातचीत के सरसता झलकेला।

सावन की मौसम आ गावे वालिन के उमिर के हिसाब से कजरी की गीतिन में बिबिध बिसय मिले ला। गीतन में अधिकतर चंचलता आ प्रेम भरल विषय मिलेला। पति-पत्नी के प्रेम संबाद आ बिरह बरणन, ननद-भउजाई क छेड़छाड़, सासु-पतोहि क नोकझोंक, राधा-कृष्ण क प्रेम, श्रीरामचंद्र के जीवन क घटना, अउरी नई बहुरिया क अपने पति की साथै प्रेम भरल बातचीत कजरी क सबसे चलनसार विषय हवें। कजरी गावे वालिन में बहुत लइकी अइसनो होखेलीं जवन बियाह-गौना की बाद पहिला सावन में अपनी नइहर आइल रहेलिन जेकरा वजह से वियोग-रस से भरल कजरी क गीति भी मिलेलीं। एकरी अलावा जीवन के हर बात से जुडल कजरी क गीति छिटपुट पावल जालीं । भारत की आजादी के लड़ाई के समय देशभक्ती वाली कजरी बहुत गावल जाँय जिनहन के सुराजी कजरी कहले जाला।

इहाँ कजरी क एगो उदहारण दिहल जात (साइड में कोटेशन देखीं) बा जवना में ननद-भउजाई क संवाद बा:

पहिले भउजाई ननद से कहत बाड़ी कि ए ननद! इ तऽ बादर घेरि आइल बा, हम एइसना में सावन में कजरी खेले कइसे जाइबि? ननद कहत बाड़ी – ए भउजी तू त अकेलही कजरी खेले जात बाडू आ तोहरी संघे केहू सहेलियो नइखे। डहरी में तोहके गुंडा रोकि लिहें तब! ए पर भउजाई जवाब देत बाड़ी – कि अगर एइसन होई त केतने लोग गोली खाई, केतने फाँसी पर चढ़ी आ केतने लोगन के जेल में चक्की पीसे के पड़ी।

एकरे अलावा खेती-किसानी से ले के बिबिध अन्य बिसय के बरनन कजरी के गीतन में मिले ला। दयानिधि मिसिर के कहनाम बा: 

गीत के बिधा के अलावा कजरी नाँव के तिहुआर भी मनावल जाला। ई तिहुआर भोजपुरी इलाका आ बुंदेलखंड में मामूली हेरफेर के साथ मनावल जाला। सावन के पुर्नवासी के सावनी के साथ-साथ कजरी पूर्णिमा भी कहल जाला। भोजपुरी क्षेत्र में ई तिहुआर जेठ के पहिला अतवार, जेकरा परावन पूजा कहल जाला, से सुरू हो के भादों के अँजोरिया के दुआदसी, बावनी दुआदसी तक ले चले ला। एह दौरान बनारस आ मिर्जापुर में दुगोल्ला कजरी के आयोजन भी होला। कजरी नउमी आ कजरी पूर्णिमा के एह तिहुआर के बुंदेलखंड के लोक-जीवन में खास महत्व हवे; सावन के अँजोरिया के नउमी के कजरी बोअल जाला, जेह में मेहरारू बाहर से माटी ले आ के घर के अन्हार कोना में रख के ओम्मे जौ बोवे लीं, पुर्नवासी के एही जई के ले के कजरी के जलूस निकरे ला।

मिर्जापुर के कबी आ लोक कलाकार बदरीनारायण 'प्रेमधन' के नाँव कजरी के जिकिर में जरूर लिहल जाला। गायक कलाकारन में भोजपुरी-मैथिली इलाका के मशहूर गायिका शारदा सिन्हा के गावल कई गो कजरी परसिद्ध बाड़ी।




#Article 125: भिखारी ठाकुर (814 words)


भिखारी ठाकुर (18 दिसंबर, 1887 - 10 जुलाई, सन 1971) भोजपुरी भाषा के गीतकार, नाटककार आ लोक कलाकार रहलें। इनका के भोजपुरी क शेक्सपीयर भी कहल जाला। भिखारी के जनम बिहार के सारन जिला के एक ठो गाँव कुतुबपुर में नाऊ परिवार में भइल। सुरुआत में कमाए खातिर खड़गपुर गइलेन बाकी कुछ दिन बाद उहाँ से मन ना लगले पर लवटे कलकत्ता आ आगे जगन्नाथ पुरी ले घूम के लवटे के परल।

नाच आ रामलीला के सौकीन भिखारी आपन खुद के मंडली बना के रामलीला सुरू कइलें। बाद में ऊ एह मंडली खातिर खुदे नाटक आ गीत रचे सुरू कइलें। एह मंडली में खुद नचनिया, एक्टर आ सूत्रधार के रूप में पाठ खेलें। धीरे-धीरे उनके मंडली भोजपुरी इलाका में बहुत परसिद्ध हो गइल। बाद में उनके लिखल रचना पटना आ बनारस से किताब के शकल में छपल। उनके सभसे परसिद्ध नाटक बिदेसिया के आधार बना के एक ठो फिलिम भी बनल।

भिखारी ठाकुर के रचना में बिदेसिया आ बेटी-बेचवा बहुत नामी भइलीं। खासतौर से एह नाटकन में इस्तेमाल होखे वाला गीत सभ के धुन बिदेसिया के नाँव से चलन में आइल आ आजो ले एकर अलग पहिचान बाटे।

भिखारी के ओह समय के समाज में ब्याप्त कुरीति सभ के ऊपर अपना ब्यंग करे आ बदलाव के जरूरत महसूस करावे खातिर जानल जालन।

भिखारी ठाकुर के जनम बिहार के सारन जिला के कुतुबपुर दियारा नाँव के गाँव में, 18 दिसंबर, 1887 ई॰ के दलसिंगार ठाकुर आ शिवकली देवी के घरे भइल। भिखारी के परिवार बार बनावे वाला नाऊ के रहल जेकरा एक ठो नीच जाती मानल जाला।

भिखारी के लईकाँई में बियाह भइल आ पहिला मेहरारू के जल्दिये निघन हो गइल। दुसरा बियाह मनतुरनी देवी से भइल।

भिखारी कुछ उमिर होखले पर खड़गपुर कमाये चल गइलें, ओकरा बाद उहाँ मन ना लगला पऽ जगन्नाथ पुरी घूम अइलें। उनके एह कलकत्ता-खड़गपुर- पुरी यात्रा से अनुभव में बिस्तार भइल। लवट के अपना गाँवे आ के ऊ पहिले रामलीला आ बाद में आपन लोकनाटक के मंडली बनवलें। एही मंडली के साथ भोजपुरी इलाका भर घूम-घूम नाटक देखवलें आ कलकत्ता तक ले जा के आपन कला के पर्दर्शन कइलन।

भिखारी, कलकत्ता से लवट के आपन गाँव में पहिले रामलीला खेले के सुरुआत कइलें। बाद में नाच, आ एकरे बाद आपन नाटक मंडली बनवलें। एह में प्रमुख भूमिका उनके एक ठो रिश्तेदार बाबूलाल के रहल जिनके अइसन मंडली के संजोजन के कुछ अनुभव रहे। मंडली के लोग भिखारी ठाकुर के मालिक जी कहे आ उनुके अनुशासन के बाद ले चर्चा कइल करे।

भिखारी के सभसे परसिद्ध रचना उनके लोक नाटक बिदेसिया हवे। ई नाटक अतना मशहूर भइल कि उनके नाटक के शैली के नाँवे बिदेसिया पड़ गइल।
बाद में कय ठो नाटक एह शैली में अउरी लोग भी लिखल। आ ई भारत से बाहर मॉरिशस जइसन भोजपुरी भाषी देस सभ ले पहुँच गइल।

मूल रूप से बिदेसिया एक ठो अइसन आदमी जे कलकत्ता कमाए गइल (आ बिदेसी हो गइल) के मेहरारू धनिया के वियोग आ एक ठो बटोही से अपना पति के लवट आवे के अरज करत सनेसा के कहानी हवे।

लोकनाटक

जवन घड़ी भिखारी रहन ओह घड़ी गँवई समाज ना जाने कय गो सामाजिक कुरिती से जकड़ल रहे।भिखारी ठाकुर पढल-लिखल ना रहन।तब्बो समाज के बुराई सभ के आपन लिखाई मे उठवलन।ओह मे से कुछ उदाहरन निचे लिखल बा।

१)ओह घड़ी पईसा के कमी के चलते एगो अइसन कुरिती समाज मे फईलल रहे जेमे लोग आपन बेटी बेच देत रहे,ओह घड़ी ई जईसे एगो रिवाजे बन गईल रहे। भिखारी ठाकुर अईसने एगो बेचल बेटी के मन के बात आपन नाटक बेटी बेचवा मे लिखलें बाड़ें।ओह मे कुछ पंक्ति हई हऽ:-

रुपिया गिनाई लिहलऽ,पगहा धराई दिहलऽ,
चेरिया से छेरिया बनवलऽ हो बाबू जी।
बुढ़ बर सेना कईलऽ बेटी के ना रखलऽ खेयाल
कइनी हम कवन कसूरवा हो बाबू जी।।

माने:- ए बाबूजी! रऊवा आपन बेटी के गाय,बकरी नियन बेच दिहनी।

सभसे बड़ बात ई रहे की जवन लोग हुनकर नाटक देखे जात रहे,ऊ खाली आपन मनोरंजन करे जात रहे,लेकिन नाटक देखला के बाद उ लोग के मन में बेटीबेचवा प्रथा से नफ़रत हो जात रहे।

२)पहिले विधवा सभ के जीनगी बड़ा कष्ट से बितत रहे,शास्त्र सभ के मोताबिक ई मानल जात रहे कि पिछला जनम में पाप कईला के चलते पति मर जाला आ मेहरारू विधवा हो जाले।

एह समस्या के तरफ लोगन के धेयान उ विधवा विलाप नाटक लिख के खिचलें।ओह घड़ी जादे तर मेहरारू बेमेल बियाह के चलते विधवा हो जात रहे।

३)पहिले के भोजपुरी किसान सभ गरीब रहन लोग आ ऊ लोग के पास जमीन ना होखत रहे,एही चलते उ लोग कलकत्ता,नेपाल नियन जगह पऽ जा के मजुरी करत रहे।जादे तर ई देखल जात रहे की पत्नी के छोर के लोग बहरी काम करे जात रहे आ होन्ने जा के वेश्या सभ के फेरा में पड़ जा जात रहे।एही बात भिखारी ठाकुर बिदेशिया में लिखलें बांड़े।एह में जवन नायिका बिया उ गवना करा के नाया नाया आइल बीया आ कुछे दिन बाद ओकर मरद कमाए चल जाता।

गवना कराई सँईया घरे बईठाई दिहलऽ,
अपने चललऽ परदेश रेे बीदेशिया।।




#Article 126: रक्षाबंधन (265 words)


रक्षाबंधन या राखी हिन्दू लोगन क त्यौहार बा जवन हर साल सावन महीना के पूर्णिमा के दिन मनावल जाला। सावन के महीना में मनावे के वजह से कत्तों कत्तों एके सावनी या सलूनो भी कहल जाला। रक्षाबंधन में राखी या रक्षा के सबसे ढेर महत्व देवल जाला। राखी कच्चा सूत जइसन सस्ती चीज से लगाइत रंगीन कलावा, रेशम क धागा, चाँदी और सोना जइसन महंगी चीज तक बन सकेला।

सबेरहीं नहइले के बाद औरत और लइकी लोग पूजा क थरिया सजावेलीं। थरिया में राखी के अलावा रोरी या हरदी, दीया, अच्छत आऊर कुछ पइसो रख लेवल जाला। आदमी और लइका लोग टीका करावे खातिर पूजा वाली या कऊनो ठीक जगह बईठ जानै। पहिले पूजा कइल जाला, फिर बहिन लोग भाइन क माथा पर रोरी और अच्छत क टीका लगायके अच्छत छिरिक के आरती उतारैनी आऊर उनके कलाई पर राखी बान्हैनी। भाई लोग अपने बहिनिन के राखी बन्हाई के खातिर नेग के तौर पर कुछ पइसा चाहे उपहार देवलन। ज्यादेतर जगहन में मुहूरत से राखी बान्हल जाला आऊर बहिन लोग राखी बान्हे से पहिले भुक्खल रहैलिन।

नेपाल के पहाडी इलाका मे ब्राहमन् और छेत्रियेन लोग के द्वारा  मनावल जाला। लेकिन तराई क्षेत्र के लोग जे नेपाल मे भारत के नज्दिक बा, उ लोग बहुत धुम-धम से मनावे ला।
येह पर्व पर बहिन लोग भाई के लालट पर तिलक लगाके राखी दहिना हात पर बाॅधके अपन हाथ से भाईके फलफूल आ मिठाई खुवाबेला औरो भाई के दिर्घ आयु के प्रार्थना करे ला। साथही भाई आपन बहिन के आपन योग्यता अनुसारके दक्षिणा देवेला । 
इ पर्व भाई बहिन के प्यार जतावे वाला आ मिले वाला पर्व ह ।




#Article 127: मानिक चौक (सीतामढ़ी, बिहार) (348 words)


मानिक चौक एनएच.77 के बगल में सीतामढी जिला के सबसे बड़का गांव हई। प्रेम नगर, गाढ़ा, टीकउली, थुम्मा, जहांगीर पुर, मनोरथी टोला, आजम गढ़ के बीच मे ई गांव बसल हई। ई गांव अपना चौहदी में सबसे बड़का गांव हई। अई गांव के विस्तार के बारे मे अही बात से अंदाजा लगायल जा सकई छई की ईहा तीन गो मुखीया हई। लगभग पचार हजार के आस पास आवदी हई। ऐतवे न रून्नी सैदपुर प्रखंड में सबसे पहीले मानेचौक के ही हाई स्कूल आ पानी टंकी बनल रहई। माने चौक मे एक एक दिन बीच क के दू गो बाजार लगई छई, एगो बरका बाजार, आ दोसर नयका बाजार,। मानिक चौक शिक्षा के मामला में काफी आगे रहे वाला गांव हई। इहां के स्कूल से पढ़ के लड़िका-लइकी सब देश विदेश में बड़का बड़का पोस्ट पर काम कर रहल हईं। इहे उ गांव है जहां के रहे वाला महंत जी रून्नीसौदपुर के विधायक तीन बार बनलखिन। मानिक चौक उतरे दखिने त ऐना फैलल हई जेना जम्मू से लेकर कन्याकुमारी तक भारत। 

मानिक चौक में ब्रहम बाबा के मंदिन, दुर्गा स्थान, कबरीया बारी के मंदिर, मलंग बाबा के स्थान, विश्वकर्मा मंदिर, बरा प्रसिद्ध हई। माने चौक के बरका ईनार के लोग दूर दूर तक जनई छई। ईहां पहीले एगों मेला लगईत रहलई ह, उहो बड़ा विख्यात रहई। इहां कुछ प्राईवेट स्कूल आ कोचिंग सेंटर भी बड़ा फेमस हई। आस पास के लगभग बीस गो गांव के बच्चा ईहां पढे अबई छई। मानिकचौक में चावल गेहू दाल के खेती जादे हाईछई ऐकरा अलावे सब्जी साग भी लोग उपजबई छई। मानिक चौक के मेला रोड़ में लकड़ी के मारे दुकान हई जहां दूर दूर से लोग खरीदारी करे अबई छई। मानिक चौक में युवा के संगठन हई जे मानेचौक के विकास के लेल लगातार प्रयासरत रहई छई। मानिक चौक के ऐना स्थानिय बोल चाल में मानेचौक भी लोग कहई छई। हर साल अई गांव में छठ पूजा, सरसती पूजा, विश्वकर्मा पूजा, किसनामठी, दुर्गापूजा, दीवाली, दाहा, मलंग बाबा के पूजा बरा धूम धाम से मनाएल जाईछई।।
आ एगो बजरंग बली के स्थान हई जेकरा लोग सबजी चौक के नाम से जनइ छई ,




#Article 128: नदिया के पार (1982) (321 words)


नदिया के पार भोजपुरी-अवधी की मिलल जुलल हिंदी भाषा में बनल एगो फिलिम बा। राजश्री बैनर में बनल ए फिलिम में सचिन आ साधना मेन रोल में रहे लोग आ ए फिलिम क डाइरेक्टर गोविंद मुनीस आ प्रोड्यूसर ताराचंद बड़जात्या रहलें। फिलिम क कहानी उत्तर प्रदेश की गाँव में घटित होत देखावल गइल बा। फिलिम क कहानी केशव प्रसाद मिश्र की हिंदी उपन्यास कोहबर की शर्त की ऊपर आधारित रहे।
 
रवीन्द्र जैन की मधुर संगीत से सजल ए फिलिम क कई गो गाना बहुत परसिद्ध भइल रहे जइसे कि - कौन दिसा में ले के चला रे बटोहिया..., अउरी साँची कहीं तोहरे आवन से भउजी... आउर सबसे  प्रचलित गाना होली के ह -जोगी जी ....। फिलिम में ओ समय की गाँव क परिवेश देखावल गइल बा आ फिलिम क काफी हिस्सा क शूटिंग जौनपुर जिला की सिकरारा में भइल रहे। फिलिम कई साल लगातार इलाहाबाद में हॉउसफुल चलल। 1994 में एही फिलिम के फ़िर से बदलाव कइके हम आपके हैं कौन फिलिम बनावल गइल।

फिलिम क कहानी हिंदी उपन्यास कोहबर की शर्त पर आधारित रहे।

एगो गाँव में एक ठो किसान बाभन आ उनकर दू गो भतीजा ओंकार (इन्दर ठाकुर) आ चन्दन (सचिन) रहत बा लोग। ओंकार बेमार पड़ जालें आ दुसरा गाँव क एगो बैद जी उनकर इलाज करे लें। इलाज की बाद बैद जी की बड़की लइकी रूपा (मिताली) से ओंकार क बियाह हो जाला। रूपा क जचगी होखे वाला रहेला त उनकर छोट बहिन गुंजा (साधना सिंह) आवेली गुंजा आ चन्दन में प्रेम हो जाला आ ई जान के रूपा उन्हान लोगन क बियाह करावे में मदद करे के कहेली। ई बात खाली रूपा के मालुम रहेला आ उनकर अचानक मौत हो जाला बैद जी आ ओंकार क चचा लोग ई तय करेला कि ओंकार आ गुंजा क शादी हो जाय। लेकिन बियाह की रसम से ठीक पहिले लोगन के चन्दन आ गुंजा की प्रेम क पता चल जाला आ तब चन्दन आ गुंजा क बियाह हो जाला।




#Article 129: रवि किशन (358 words)


रवि किशन शुक्ल (जनम:17 जुलाई 1969) जिनके रवि किशन नाँव ढेर परसिद्ध बा, एक ठो भारतीय एक्टर बाने जे मुख्य रूप से भोजपुरी, हिंदी आ कुछ तेलुगु भाषा के सिनेमा सभ में अभिनय कइले बाने। सन् 2006 में रवि किशन, बिग बॉस में हिस्सा लिहलें आ 2012 में झलक दिखला जा में भी प्रतियोगी रहलें।

रवि किशन के पहिली फिलिम पीतांबर (1992) रहल जौन एक ठो हिंदी भाषा के फिलिम रहल आ एह में ऊ मिथुन चक्रवर्ती आ शक्ति कपूर के साथ काम कइलेन। इनके पहिली भोजपुरी फिलिम सइयाँ हमार (2003) रहल जेवना से इनके काफी परसिद्धि मिलल। एकरा पहिले भी ऊ कई गो हिंदी फिलिम सभ में काम कइलेन जेह में हमारा फैसला (1997) काल निर्णय, मुकाम नियर फिलिम रहली।

रवि किशन एकरे बाद भोजपुरी आ हिंदी दुन्नों भाषा की फिलिम में पूछ बढ़ल। इनके कुछ प्रसिद्ध फिलिम सभ में, हिंदी में तेरे नाम (2003), वेलकम टू सज्जनपुर (2008) लक (2009); भोजपुरी में सइयाँ हमार (2003), राम बलराम (2009), देवरा बड़ा सतावेला (2010), मोहल्ला अस्सी (2011), पंडित जी बताईं न बियाह कब होई 2 (2015); आ तेलुगु में रेस गुर्रम (2014) गिनावल जा सके लीं।

सन् 2006 में रविकिशन बिग बॉस के पहिला सीजन में प्रतियोगी रहलें आ फाइनल में पहुँचले। एकरे अलावा झलक दिखला जा में हिस्सा लिहलें। हाल में एक से बढ़कर एक (जी टीवी कार्यक्रम) आ बाथरूम सिंगर नियर टीवी शो में काम कइलेन। किशन, एनडी टीवी के कार्यक्रम राज पिछले जनम के में होस्ट रहलें। 

साल 2014 में रवि किशन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर जौनपुर से लोक सभा के चुनाव लड़लें। बाद में ऊ भाजपा में शामिल हो गइलेन। 2019 के आम चुनाव खाती भाजपा इनका के गोरखपुर लोकसभा सीट से मैदान में उतारे जा रहल बा।

रवि किशन के जनम मुंबई में भइल जहाँ इनके बाबूजी, श्याम नारायण शुक्ल डेयरी के बिजनेस में रहलें। इनके माताजी के नांव जड़ावती देवी हऽ। बाद में, जब रवि दस साल के रहलें इनका पिताजी के बंबई छोड़ के अपना मूल घर केराकत, जौनपुर आवे के पड़ल।

रवि के बियाह प्रीती से भइल बा आ इनके तीन गो बेटी आ एक ठो बेटा बाने।

रवि किशन अपना के भोजपुरी माई के बेटा माने लें।




#Article 130: अन्ना हजारे (201 words)


किसन बापट बाबूराव हज़ारे (मराठी: अण्णा हज़ारे; जन्म : 15 जून, 1937) भारत क एक समाजसेवी बाड़न। ज्यादेतर लोग उनके अन्ना हजारे के नाम से ही जानैलन। सन् 1992 में भारत सरकार उनके पद्मभूषण से सम्मानित कइले रहल। सूचना क अधिकार आऊर जनलोकपाल आंदोलन में अन्ना क प्रमुख भूमिका मानल जाला।

अन्ना हजारे क जनम महाराष्ट्र के अहमदनगर के रालेगन सिद्धि गाँव के एगो मराठा किसान परिवार में भयल रहे। उनकर बाबूजी क नांव बाबूराव हजारे आऊर माई क नांव लक्ष्मीबाई हजारे रहल। उनकर लरिकाईं बहुत गरीबी में बीतल रहै। बाबूजी मजूर रहलें आऊर बाबा सेना में रहलें। बाबा क तैनाती भिंगनगर में रहल। वैसे अन्ना के पूर्वंजों का गाँव अहमद नगर जिले में ही स्थित रालेगन सिद्धि में था। दादा की मृत्यु के सात वर्षों बाद अन्ना का परिवार रालेगन आ गया। अन्ना के छह भाई हैं। परिवार में तंगी का आलम देखकर अन्ना की बुआ उन्हें मुम्बई ले गईं। वहाँ उन्होंने सातवीं तक पढ़ाई की। परिवार पर कष्टों का बोझ देखकर वे दादर स्टेशन के बाहर एक फूल बेचनेवाले की दुकान में ४० रुपये के वेतन पर काम करने लगे। इसके बाद उन्होंने फूलों की अपनी दुकान खोल ली और अपने दो भाइयों को भी रालेगन से बुला लिया।




#Article 131: जानकी अम्माल (261 words)


एडावलेठ कक्कट जानकी अम्माल () (1897-1984) भारत क एगो महिला वैज्ञानिक रहलीं। अम्माल एक जानल-मानल वनस्पति आऊर कोशिका वैज्ञानिक रहलीं जिनकर आनुवांशिकी, उद्विकास, वानस्पतिक भूगोल और नृजातीय वानस्पतिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हउवे। पद्म श्री से सम्मानित जानकी अम्माल भारतीय विज्ञान अकादमी की संस्थापक फेलो रहलीं।

जानकी अम्माल क जनम केरल के तेल्लीचेरी में वर्ष 1897 में भइल रहे। एगो सुसंस्कृत मध्यवर्गीय परिवार में जन्मल अम्माल क पिता जी ओह बखत के मद्रास सूबा में उप-न्यायाधीश रहलें। अम्माल क छः भाई और पाँच बहिन रहलीं। तेल्लीचेरी में शुरुआती पढ़ाई लिखाई के बाद आगे के पढ़ाई बदे अम्माल मद्रास चल गइलीं जहवाँ ऊ क्वींस मेरी'ज़ कॉलेज से स्नातक कइलीं आऊर 1921 में प्रेसीडेन्सी कॉलेज से ऑनर्स क उपाधि लेहलीं।

अम्माल वीमेन्स क्रिश्चियन कॉलेज, मद्रास में पढ़उलीं। ऊ मिशिगन विश्वविद्यालय, अमेरिका में एगो बार्बर स्कॉलर के तौर पर कुछ बखत बदे रहलीं जहवाँ से 1925 में आपन स्नातकोत्तर क उपाधि पउलीं। भारत वापसी के बादो अम्माल वी॰क्रि॰कॉ॰ में पढ़ावल जारी रखलीं। ऊ, पहिले ओरिएंटल बार्बर फेलो के तौर पर, फिर से मिशिगन चल गइलीं जहवाँ 1931 में उनके डी॰एससी॰ क उपाधि मिलल। अम्माल वनस्पति विज्ञान क प्रोफेसर बन के लौटलीं आऊर महाराजा कॉलेज ऑफ साईंस, त्रिवेन्द्रम में 1930 से 1934 तक पढ़वलीं।

अम्माल के 1935 में भारतीय विज्ञान अकादमी क आऊर 1957 में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी क फेलो चुनल गयल। मिशिगन विश्वविद्यालय 1956 में उनके एलएल॰डी॰ क मानद उपाधि देहलै। भारत सरकार 1957 में उनके पद्म श्री से सम्मानित कइलै। 2000 में भारत सरकार क पर्यावरण और वन मंत्रालय उनके नाम पर वर्गीकरण विज्ञान के क्षेत्र में राष्ट्रीय पुरस्कार संस्थापित कइलै।

 




#Article 132: सुनेत्रा गुप्ता (232 words)


सुनेत्रा गुप्ता (जन्म : 1965) एगो वैज्ञानिक आऊर ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में मीमांसात्मक रोगशास्त्र क प्रोफ़ेसर बाड़ीं जिनकर रुचि मलेरिया, ऍच आई वी, इन्फ़्लूएन्ज़ा और बॅक्टेरियाई मेनिंग्टिस जइसन छूत के बीमारी क वजह पता लगवलै में हव।  सुनेत्रा उपन्यास भी लिखैलीं।

सुनेत्रा गुप्ता क जन्म कोलकाता, भारत में भयल रहै। सुनेत्रा जीव विज्ञान में प्रिन्स्टन विश्वविद्यालय से डिग्री और युनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन से पीएच॰ डी॰ क उपाधि लेहलीं।

सुनेत्रा गुप्ता ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्राणि-विज्ञान विभाग में मीमांसात्मक रोगशास्त्र क प्रोफ़ेसर बाड़ीं। ऊ यूरोपीय सलाहकार बोर्ड क सदस्या भी बाड़ीं। 

उनके लंदन के जूलॉजिकल सोसायटी के ओर से वैज्ञानिक पदक से सम्मानित कयल गयल बा आऊर रॉयल सोसाइटी लंदन आऊर वैज्ञानिक अनुसंधान बदे उनके रोज़लिण्ड फ्रेंकलिन पुरस्कार दिहल गयल हौ। उनके उपन्यासन के साहित्य अकादमी पुरस्कार आऊर  दक्षिणी कला साहित्य पुरस्कार बदे चुनल गयल हौ। उनके उपन्यासन के वोडाफोन क्रॉसवर्ड बुक अवार्ड बदे नामांकित कयल गयल आऊर ऑरेंज पुरस्कार बदे भी पहिले नामांकन सूची में भी विचार कयल गयल रहै।

गुप्ता क चित्र प्रतिष्ठित रॉयल सोसाइटी के ग्रीष्मकालीन विज्ञान प्रदर्शनी में प्रमुख महिला वैज्ञानिकन जइसे कि मैडम क्यूरी के साथे जुलाई 2013में रखल गयल रहै।  

गुप्ता सबसे पहिले अपने उपन्यासन के बंगाली में लिखलीं। ऊ रवींद्रनाथ टैगोर के कविता क अनुवाद भी कइलीं। सुनेत्रा कई उपन्यास लिखले बाड़ीं जेमा अक्टूबर 2012 में उनकर पचवाँ उपन्यास सो गुड इन ब्लैक दक्षिण एशियाई साहित्य के डीएससी पुरस्कार बदे पहिलका नामांकन सूची में शामिल कयल गयल रहै। 




#Article 133: बानू जहाँगीर कोयाजी (247 words)


बानू जहाँगीर कोयाजी (22 अगस्त 1918 – 15 जुलाई 2004) भारतीय चिकित्सा वैज्ञानिक रहलीं। कोयाजी परिवार नियोजन आऊर जनसंख्या नियंत्रण बदे  महत्वपूर्ण काम कइलीं। ऊ किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल, पुणे क निर्देशिका भी रहलीं। कोयाजी समुदाय के स्वास्थकर्मियन के साथे महाराष्ट्र के देही इलाक़न बदे कई कार्यक्रम शुरु कइले रहलीं। ऊ अपने काम में चटकवाही के वजह से केन्द्र सरकार क स्वास्थ्य सलाकार बन गईलीं आऊर दुनिया भर में अपने काम बदे जानल गइलीं।

कोयाजी के कई पुरस्कार मिलल जेमा 1989 में पद्मभूषण आऊर सार्वजनिक सेवा बदे 1993 में रेमन मैगसेसे पुरस्कार मुख्य रूप से शामिल हौ।

कोयाजी स्वास्थ्य बदे बेहतर बुनियादी सुविधा क हिमायती रहलीं। उनकरे एही सोच के कारण किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल, पुणे क क्षमता 1940 में मात्र चालीस बिस्तर से बढ़िके 1999 में 550 बिस्तर तक पहुँच गयल। ऊ एह अस्पताल से 55 साल तक जुड़ल रहलीं आऊर एकरे साथे कई दूसर महत्वपूर्ण पद सम्हरलें रहलीं जेमा विश्व स्वास्थ्य संगठन क मानव प्रजनन क वैज्ञानिक आऊर तकनीकी समूह क सदस्यता, विश्व स्वास्थ्य संगठन क स्वास्थ्य, मानवशक्ति और विकास समूह क सदस्यता, वगैरा शामिल हौ। ई महाराष्ट्र सरकार, भारत सरकार आऊर फ़ोर्ड फ़ाउन्डेशन के आलावा कई दूसर संगठनन बदे सलाहकार के तौर पे भी काम कइले रहलीं। इनकर महत्वपूर्ण योगदान परिवार नियोजन, बाल स्वास्थ्य आऊर जनसंख्या नियंत्रण वगैरा रहल जेमा ई भारत सरकार के नीतियन के निर्माण आऊर उनके लागू करवावै में जोर देहलीं।

कोयाजी चिकित्सा आऊर स्वास्थ्य के अपने मुख्य काम के साथ-साथ अपने समय के समाचारपत्रन के समूह क निर्देशिका भी रहलीं।




#Article 134: मंगलयान (413 words)


मंगलयान, (हिंदी: मंगल कक्षित्र मिशन, ; मार्स ऑर्बिटर मिशन), मंगल ग्रह के अध्ययन खातिर भारत के पहिला यान भेजे के अभियान बाटे। असल में ई भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन क एगो महत्वाकांक्षी अन्तरिक्ष परियोजना रहल जेह में पहिलिये बेर भारत के सफलता मिल गइल। एह परियोजना के भीतर 5 नवम्बर 2013 के 2 बजके 38 मिनट पर मंगल ग्रह के गोठे (परिकरमा) करे वाला एगो बनावटी उपग्रह आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा की सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसऍलवी) सी-25 के मदद से सफलता के साथे छोड़ल गइल। ई 24 सितम्बर 2014 के अपनी कक्षा में स्थापित हो गइल आ इसरो आ भारत की बिग्यानी लोगन के एगो बहुत बड़ सफलता मिलल। एकरे साथै भारतो अब ओह देशन में शामिल हो गयल बा जवन मंगल पर आपन यान भेजले बाड़ें। वइसे अबहीं तक मंगल जाये बदे शुरू कयल गयल दू-तिहाई अभियान सफल ना हो पायल बा।
असल में ई एगो प्रौद्योगिकी प्रदर्शन परियोजना बा जेकर मकसद ग्रहन के बीच में आपसी अन्तरिक्ष अभियान खातिर जरूरी डिजाइन, योजना, व्यवस्था आऊर ई कुल के लागू करावे के तरीका क विकास करल बा।

मंगलयान की साथ पाँच को डाटा एकट्ठा करे वाला उपकरण भेजल  गइल बाड़ें जिनहन क कुल वजन 15 किलोग्राम बा। -

यह इसकी 20 करोड़ किलोमीटर से ज्यादा लम्बी यात्रा शुरूआत होगी जो नौ महीने से भी ज्यादा का समय लेगी और इसकी सबसे बड़ी चुनौती इसके अन्तिम चरण में यान को बिल्कुल सटीक तौर पर धीमा करने की होगी, ताकि मंगल ग्रह अपने छोटे गुरुत्व बल के जरिये इसे अपने उपग्रह के रूप में स्वीकार करने को तैयार हो जाये।,

मंगलयान के जब मंगल ग्रह के चारो ओर परिकरमा करे खातिर कक्षा (ऑर्बिट) में स्थापित कइल गइल, ई एगो बहुत चापट आकार के कक्षा रहल। परिकरमा के काल 72 घंटा 51 मिनट 51 सेकेंड के रखल गइल आ चक्कर लगावे के समय मंगल से सभसे नजदीकी दूरी 421.7 किमी आ सभसे दूर स्थित होखे पर 76993.6 किमी के दूरी स्थापित कइल गइल। जब ई एह कक्षा में प्रवेश कइलस, एह में कुल 40 किलोग्राम ईंधन बचल, ई मात्रा एकरा छह महीना ले काम करे खातिर जेतना के जरूरत रहे ओ से लगभग 20 किलो ज्यादा रहल।

बीच में 17-दिन खातिर मंगलयान से संपर्क टूट गइल, 6 से 22 जून 2015 ले जब ई अपना कक्षा में परिकरमा करत मंगल के साथ सुरुज के पाछे चल गइल।

मार्च 2016 में, वैज्ञानिक रिसर्च के रूप में जियोफिसिकल रिसर्च लेटर्स में MENCA उपकरण के द्वारा कइल गइल नाप जोख के परिणाम छपल।




#Article 135: वुडरो विल्सन (326 words)


वुडरो विल्सन (अंगरेजी : Woodrow Wilson) (1856-1924) अमेरिका के 28 वें राष्ट्रपति बाड़ें। विल्सन के लोक प्रशासन के काम-धाम क व्याख्या करे वाले अकादमिक विद्वान , प्रशासक, इतिहासकार, कानून क जानकार, आउर राजनीतिज्ञ के रूप में जानल जाला। 

वुडरो विल्सन क जनम 28 दिसंबर, 1856 के अमेरिका के वर्जीनिया प्रांत में भयल रहे। ऊ प्रिन्सटन विश्वविद्यालय से राजनीति, प्रशासन आउर कानून क पढ़ाई करत 1879 में स्नातक क उपाधि प्राप्त कइलें। प्रिन्सटन विश्वविद्यालय से ही 1886 में विल्सन पीएच. डी. क उपाधि भई पवलें। उनकर पहिली रचना कांग्रेसी सरकार (Congressional Government) 1884 में छपल। विल्सन 1886 से लेकर 1902 तक राजनीति विज्ञान क प्रोफेसर रहलें। 1902 से 1910 तक के बखत में ऊ प्रिन्सटन विश्वविद्यालय के अध्यक्ष पद पर रहलें।

विल्सन को 1910 में न्यू जर्सी राज्य का गवर्नर चुना गया। 1912 में विल्सन को अमेरिका का 28 वाँ राष्ट्रपति चुना गया। वे 8 वर्षों तक अमेरिका के राष्ट्रपति के पद रहने के बाद सेवानिवृत्त हो गये। 1919 में विल्सन को शांति का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ। 1924 में मस्तिष्क आघात (cerebral haemorrhage) से उनका निधन हो गया।

वुडरो विल्सन का मानना था कि लोक प्रशासन को राजनीति से पृथक होना चाहिेए। उन्हें सामान्य तौर पर प्रशासन और राजनीति में विभाजन को रेखांकित करने के कारण याद किया जाता है। विल्सन के अनुसार किसी संविधान की रचना तो आसान है किंतु उसको क्रियान्वित करना कठिन है। उन्होंने क्रियान्वयन के क्षेत्र के अध्ययन पर विशेष बल दिया। अपने निबन्ध स्टडी ऑफ ऐडमिनिस्ट्रेशन (Study of Administration) में विल्सन ने राजनीति और प्रशासन के अंतरसंबंधों पर चर्चा करते हुए लिखा था कि, प्रशासन राजनीति के विषय क्षेत्र के बाहर है। प्रशासनिक समस्याएँ राजनीतिक समस्याएँ नहीं होती हैं। यद्यपि राजनीति, प्रशासन के कार्य व स्वरूप निर्धारित कर सकती है फिर भी उसको यह अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए कि वह प्रशासनिक पक्षों के बारे में हेर-फेर कर सके।
प्रशासन को राजनीति से स्वतंत्र करते हुए वुडरो विल्सन ने उसे एक विषय के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।




#Article 136: सुरुज (159 words)


सूर्य (Sun) एगो अंजोरा करे वाला तारा हवे जेवन सौरमंडल के केन्द्र में स्थित बा आ जेकरी चारो ओर हमनी क पृथ्वी आ सौरमंडल क बाकी ग्रह चक्कर लगावेलन।   

भूगर्भहोखे वाला कुछ घटना के छोड़ दिहल जाय तऽ, पृथ्वी पऽ होखे वाला लगभग मय घटना सूर्य के अंजोर के ऊर्जा से संचालित होला। 

सूर्य के अंजोरा से दिन होला आ सूर्य के अंजोरा से मय ग्रह अंजोर होलें। सूर्य के घाम से ऊर्जा के प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा पेड़-पौधा भोजन (रासायनिक ऊर्जा) में बदल देलन जेवना क इस्तेमाल बाकी जीवजन्तु आहार श्रृंखला में एक दूसरा के खा के करेलन। आज हमनी क जेतना जीवाश्म ईंधन जइसे कि कोइला, पेट्रोल, पेट्रोलियम गैस इत्यादि क प्रयोग ऊर्जा प्राप्त करे खातिर करत बानी जा ई कुल सौर ऊर्जा क रूप हवे, एइसन सौर ऊर्जा जवन इतिहास में बहुत पहिले पेड़-पौधन द्वारा प्रकाश संश्लेषण के बिधि से रासायनिक ऊर्जा में बदल दिहल गईल रहे आ अब भंडार के रूप में संरक्षित बा।




#Article 137: जयप्रकाश नारायण (307 words)


जयप्रकाश नारायणजे जे.पी. के नाम से ज्यादा विख्यात रहले एगो भारतीय राजनीतिक नेता, स्वतंत्रता सेनानी, विचारक, समाजसेवी आ आंदोलनकारी रहलें। उनका सेवा भावना, त्याग आ तपस्या से प्रभावित होके लोग उनका के लोकनायक भी कहत रहे। लोकनायक के मतलब होला, जन-जन के नेता।

लोकनायक जयप्रकाश नारायण के जनम 11 अक्टूबर 1902 के बलिया जिला के सिताबदियारा गाँव में भइल रहे। उनका के छव साल के उमर में गाँव के प्राथमिक स्कूल में पढ़े खातिर भेजल गईल। जयप्रकाश नारायण स्वभाविक तेज तरार आ बुद्धिमान रहले। नवे साल के उमर में उ सातवाँ कलास में पहुँच गईले आ सन्‌ 1919 में हायर सेकेंडर इम्तिहान प्रथम श्रेणी से उतीर्ण कइले।

इनकर बियाह 18 साल के उमर में प्रसिद्ध समाज-सेवी श्री ब्रजकिशोर प्रसाद के बेटी सुश्री प्रभावती जी से भइल। प्रभावती जी उनका जीवन के ही ना बल्की उनका समाजिक गतिविधि के भी एगो अंग बन गईली।

देश-सेवा खातिर कौ-कौ बार उनका जेल-यातना भी भोगे के परल। जे.पी. गांधी जी के विचार से बहुत प्रभावित रहलें आ जीवनभर सत्ता से दूर रहके उनका आदर्श पर चलते गइलें। नेहरू जी उनका के बहुत मानत रहलें। उ जयप्रकाश जी के अपना मंत्रिमण्डल में शामिल होखे खातिर नेवता देले रहले। लेकिन सत्ता के राजनीति में रूचि ना होखे के कारण ओकरा के उ ठुकरा दिहले।

बाद में उनका सर्वोदय विचारधारा से संबंध हो गईल। भूदान आन्दोलन में उनकर सक्रिय सहयोग महत्वपूर्ण रहे। सन्‌ 1975 में उ देश के नवयुवकन के नेतृत्व एक बार फेर से सम्हरलें।

जेल में ही जयप्रकाश जी के गुर्दा खराब हो गईल। उनका के दिल्ली के आर्युविज्ञान संस्थान में, फेर बाद में बम्बई के जसलोक अस्पताल में भरती कइल गईल।
डाक्टर लोग के सूझ-बूझ आ मेहनत से उनका प्राण के रक्षा कइल गईल, लेकिन तब से निरन्तर जे.पी. जी रोगशय्या पर पड़ल रहस। आखीर ई स्वतंत्रता सेनानी, विचारक, चिंतक आ क्रांतिकारी व्यक्तित्व 9 अक्टूबर 1979 के  चिरनिद्रा में सुत गइलें।




#Article 138: सारनाथ (1000 words)


सारनाथ भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के पूरबी हिस्सा में मौजूद शहर बनारस से करीब दस किलोमीटर दूर उत्तर पच्छिम दिशा में एगो अस्थान बा जहाँ भगवान बुद्ध आपन पहिला उपदेश दिहलन। भगवान बुद्ध ए अस्थान पर मृगदाव, ऋषिपत्तन में आपन पहिला उपदेश दिहलन जेवना के धर्मचक्र प्रवर्तन कहल जाला। एही कारण महाराजा अशोक एह अस्थान पर एगो स्तंभ (खम्भा) लगववलन जेवना के सारनाथ क अशोक स्तंभ कहल जाला। भारत क राष्ट्रीय चिह्न एही अशोक स्तंभ की मुकुट (ऊपरी हिस्सा) की आकृति क नकल हवे। आजकाल ए स्तंभ की मुकुट के सारनाथ संग्रहालय में सुरक्षित रखल गइल बा। ऋषिपत्तन, जेवना के पाली भाषा में इशिपत्तन भी कहल जाला बौद्ध धर्म की चार सबसे प्रमुख तीरथ में गिनल जाला, बाकी तीनों हवें लुम्बिनी, बोधगया अउरी कुशीनगर। इहँवा सारनाथ में धम्मेक स्तूप, मूलगंध कुटी, सारनाथ संग्रहालय, चौखंडी स्तूप आ अउरी कई मंदिर देखे लायक बा। पुरातात्विक खुदाई में मिलल तरह तरह के मूर्ति आ सामन भी संग्रहालय में रखल बा जवन इतिहास आ संस्कृति की विद्यार्थी खातिर बहुत महत्व क चीज बा।

जैन धर्म के इग्यारहवाँ तीर्थंकर श्रेयांशनाथ के भी जनम एही जगह से थोड़ी दूरी पर भइल रहे जे से सारनाथ क महत्व जैन धर्म के माने वालन में भी बा।

सारनाथ शब्द के उत्पत्ति संस्कृत भाषा की सारंगनाथ से मानल जाला, जेकर अर्थ होला ‘हरिना (हिरन) के राजा’। कहानी ई कहल जाला कि बोधिसत्व जब हिरन की रूप में अवतार लिहलें तब शिकार खेले वाला राजा से एगो गर्भवती हिरनी के जान बचावे की खातिर आपन प्राण निछावर कइ दिहलन। राजा ए बात से प्रभावित हो के हरिना कुल के शिकार कइल छोड़ दिहलें आ एही अस्थान पर हरिना कुल खातिर एगो अभयारण्य बनवा दिहलन जहाँ केहू हरिना के शिकार न करे। आज एकरी प्रतीक की रूप में हिरन पार्क इहाँ बंवावल गइल बा। सारंगनाथ की नाम की साथ आजकाल इहाँ एगो शिव मंदिर भी बा जेवना आधार पर कुछ लोग ई कहेला कि ई जगह प्राचीन काल से शिव की पूजा क आस्थान रहे आ इहाँ पहिले भी सारंगनाथ शिव के पूजा होखे। हालाँकि ई बाति उल्टो हो सकेला कि शिव के पूजा बाद में ए बौद्ध अस्थान पर शुरू भइल होखे।

ऋषिपत्तन के कहानी ई हवे कि इहाँ भगवान बुद्ध कि जनम से पाहिले ओकर सूचना 500 ऋषियन के देवे खातिर देवता लोग उतरल रहलें। दूसरी कहानी की हिसाब से ऋषि लोग अपनी हिमालय यात्रा पर आकाश मार्ग से जात घरी उतर के विश्राम कइले रहे जेसे एकर नाँव ऋषिपत्तन पड़ल।

मृगदाव चाहे मृगदाय ऐसे कहल जाला कि इहाँ राजा के आदेश की अनुसार मृग के शिकार कइल मना रहे आ मिरगा (हिरन) कुल स्वतंत्र हो के बिना कौनो भय के विचरण क सकत रहलें।

भगवान बुद्ध करीब 533 ई. पू. में इहाँ आपन पहिला उपदेश दिहलें जे के धर्मचक्र प्रवर्तन कहल जाला। एकरी बाद लगभग तीन सौ बारिस क इतिहास मालुम नइखे काहें से कि पुरातात्विक खोदाई में ए समय क कौनो चीज ना मिलल बा। मौर्य काल में अशोक(304-232 ई.पू.) की समय से सारनाथ के इतिहास की बारे में जानकारी मिलेला। सम्राट अशोक इहाँ स्तंभ लगववलें आ ओपर ब्राह्मी लिपि में आपन आदेश लिखववलें। कनिष्क की समय में इहवाँ बोधिसत्व के मूर्ति लगावल गईल। तीसरी शताब्दी से सारनाथ के असली उत्थान शुरू भइल अउरी कला, संस्कृति आ धर्म की एगो महत्वपूर्ण केन्द्र की रूप में सारनाथ गुप्त काल में(चौथी सदी से छठवीं सदी की बिचा में) अपनी उत्कर्ष पर पहुँचल। ए समय में मथुरा की बाद सारनाथ क कला आ संस्कृति की क्षेत्र में दूसरा अस्थान रहे। चीनी यात्री ह्वेन सांग सतवी सदी में महाराज हर्ष की राज में इहाँ के यात्रा कइलन।

सारनाथ क महत्व पहिली बार तब पता चलल जब काशीनरेश महाराज चेतसिंह क दीवान जगत सिंह अनजाने में धर्मराजिका स्तूप के खोदवा दिहलन आ एकरी ईंटा से जगतगंज मुहल्ला बनवा दिहलन। तब कर्नल कैकेंजी 1815 ई. में एह अस्थान पर पहिली बेर खोदाई करववलन लेकिन उनके कुछ बहुत सफलता ना मिलल। बाद में जनरल कनिंघम की अगुआई में (1835-36 ई.) एकर नीमन से खोदाई भइल आ धम्मेक स्तूप आ चौखंडी स्तूप आ औरी महत्वपूर्ण चीज मिलल। 1851-52 ई. में मेजर किटोई खोदाई करववलन जेवना के रपट छपल ना लेकिन खोदाई में मिलल चीज कुल कलकत्ता संग्रहालय में रक्खल बा।

एह क्षेत्र के बैग्यानिक ढंग से खोदाई एच.बी. ओरटल की अगुआई में शुरू भइल जेवना के हरग्रीव आगे बढ़ावलन आ आखिरी पांच साल के खोदाई श्री दया राम साहनी जी की अगुआई में भइल। एही दौरान 1904 ई. में संग्रहालय के अस्थापना भइल आ 1910 ई. में एकर बिल्डिंग बन के तैयार भइल जहाँ एह खोदाई के मिलल सामन रक्खल बा।

धम्मेक स्तूप भा धमेख स्तूप दुमंजिला सिलिंडर के आकृति में लगभग 43.6 मीटर ऊँच, आ 28 मीटर डाया वाला, ईंटा के बनल चीज बा। मानल जाला कि एह अस्थान पर बुद्ध से पहिले भी समाधि सभ के निर्माण भइल रहे। एह वर्तमान स्तूप के निर्माण लगभग 500 ईस्वी में भइल बतावल जाला जे मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनवावल एगो स्तूप के जगह पर बनावल गइल हवे।

 

अशोक के परसिद्ध सिंह स्तंभ भी धमेक स्तूप के बगले में लगावल गइल रहे जेकर मुकुट वर्तमान में सारनाथ म्यूजियम में रखल बा आ जेकर आकृति ले के भारत के राजचीन्हा बनावल गइल हवे।

इ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण बिभाग के म्यूजियम ह जहाँ सारनाथ के खोदाई में मिलल बिबिध प्रकार के चीज संरक्षित क के रखल गइल बा। हेइजे परसिद्ध सिंह स्तंभ के मुकुट भी रखल बा जेके नकल से भारत के राजकीय चीन्हा बनल हवे।

 

धर्मराजिक स्तूप, सारनाथ में सम्राट अशोक के बनवावल स्तूप रहल। वर्तमान में एकर चबूतरा भर बचल बा जे सारनाथ के परसिद्ध धम्मेक स्तूप के बगल में पच्छिम ओर मौजूद बा।

गुप्त काल (लगभग चउथी-पाँचवी सदी) में बनल ई स्तूप ओह अस्थान के चीन्हा के रूप में बनावल गइल हवे जहाँ गौतम बुद्ध के भेंट पहिला पाँच गो शिष्य लोग से भइल, जिन्हन लोग के ऊ सारनाथ में आपन पहिला उपदेश दिहलें।

स्तूप, सारनाथ के मुख्य खोदाई स्थल से दक्खिन ओर मौजूद बा आ ई चौकोर चबूतरा सभ के तीन गो मंजिल के रूप में बनल रहे। वर्तमान में एकरे ऊपरी हिस्सा में अठकोनी बुर्जी बा जे बाद के जमाना के निर्माण हवे।




#Article 139: बनारस (2089 words)


बनारस, भारत की उत्तर प्रदेश में गंगा नदी की तीरे बसल एगो विश्वप्रसिद्ध शहर अउरी हिन्दू धर्म क सबसे महत्वपूर्ण तीरथन में गिनल जाये वाला अस्थान हउवे। ई बाबा विश्वनाथ (बाबा बिसेसरनाथ) के नगरी हवे जेवना की बारे में पुराणन में कहल बा कि ई साक्षात् भगवान शंकर की त्रिशूल पर स्थित बा आ पूरा विश्व में प्रलय भइला पर भी ई नगरी अपनी अस्थान पर अडिग रहेले। शिव के अविमुक्तेश्वर रूप में अस्थान लिहला की कारण ए नगरी के अविमुक्तेश्वर क्षेत्र कहल जाला।

बौद्ध धर्म आ जैन धर्म के माने वालन खातिर भी ए शहर के महत्व बा। इहाँ से करीब दस किलोमीटर दूर सारनाथ नाँव के अस्थान परेला जहाँ भगवान बुद्ध आपन पहिला उपदेश दिहले रहलन। 

बनारस शब्द हिंदी आ संस्कृत में प्रचलित वाराणसी से निकलल हवे। वर्तमान समय में ए शहर के अफिशियल नाँव वाराणसी बा। वाराणसी शब्द की उत्पत्ति की बारे में कहल जाला कि वरुणा अउरी असी नाँव की दू गो नदियन की बीचा में बसल शहर के वाराणसी कहल गईल। एकर प्राचीन नाँव काशी हवे जेवन प्रकाशित से उत्पन्न मानल जाला। प्राचीन काल से विद्या की क्षेत्र में ए नगरी के परसिद्धी की वजह से ई नाँव धरईल होई। एकर अउरी कई गो नाँव अलग-अलग पुस्तकन में मिलेला जइसे अविमुक्तक्षेत्र, आनंदवन आ रुद्रावास इत्यादि।

पुराणन में लिखल कथा की मोताबिक वाराणसी नगर के अस्थापना भगवान शिव जी कइलें रहलन। महाभारत की कथा में काशी क जिकिर आइल बा जहाँ पितामह भीष्म काशी नरेश की तीनों पुत्री (अम्बा, अम्बिका, अम्बालिका) लोगन के अपहरण कइले रहलन। महाभारत की युद्ध में काशी नरेश पाण्डव सेना में रही के कौरवन से लड़ाई कइलन। पुरातात्विक खोदाई में मिलल चीजन की अध्ययन से ई पता चलल बा कि वाराणसी में सबसे पुरान बस्ती 1000 ई. पू. की आसपास रहे ए तरह से वाराणसी विश्व की सबसे पुरान बसल नगरन में गिनल जा सकेला। ई पुरातात्विक खोज बतावेले कि ओ समय वाराणसी में वैदिक आर्य लोग निवास करें। हालाँकि ओही समय की आसपास के अथर्ववेद में इहाँ अनार्य लोगन के बस्ती के बात लिखल बा।Pletcher, 2010 pp=159–160 |

एकरी आलावा वाराणसी जैन तीर्थंकर पार्श्वनाथ के भी निवास अस्थान मानल जाला। भगवान बुद्ध (जन्म 567 ई.पू.) की समय में वाराणसी काशी राज्य के राजधानी की रूप में रेशम, मलमल, इत्र, हाथीदांत के सामन अउरी कलात्मक समान की केन्द्र की रूप में विख्यात रहे।Pletcher, 2010, pp=159–160 |बुद्ध बनारस से थोड़ी दूर पर स्थित सारनाथ में आपन पहिला उपदेश दिहलीं आ इहें से धर्मचक्रप्रवर्तन कइलिन। ए बात के प्रमाण ह्वेन सांग नाँव के चीनी यात्री, जेवन 635 इस्वी में इहाँ आइल रहलें, दिहलें कि ओ समय में वाराणसी धर्म आ ब्यापार के एगो महत्वपूर्ण केन्द्र रहे। ए नगर के धार्मिक महत्व अपनी उत्कर्ष पर पहुँच गइल जब आठवीं सदी में आदि शंकराचार्य इहवाँ शैव पीठ के अस्थापना कइलें। प्राचीन काल में तक्षशिला से पाटलिपुत्र जाये वाला मार्ग इहवाँ वाराणसी से हो के गुजरे।

सन 1194 ई. में तुर्क मुस्लिम आक्रमणकारी कुतुबुद्दीन ऐबक इहाँ की बहुत सारा मंदिरन के ढहवा दिहलस। एकरी बाद मुस्लिम शासन की समय में ए नगर के पतन आरम्भ हो गइल। हालाँकि नया मंदिरन के निर्माण आ ढहावल चलत रहे। विद्या की राजधानी की रूप में बनारस मध्य काल में भी ओतने प्रतिष्ठित रहल। फिरोज़ शाह 1376 ई. में अउरी सिकंदर लोदी 1496 ई. में बाकी बचल-खुचल प्राचीन मंदिरन के भी ढहवा दिहलन। एही समय सूफ़ी आंदोलन के सबसे बड़ संतन में गिने जाये वाला कबीरदास जी आ संत रविदास जी के जनम भी एही नगरी में भइल। ई संत लोग हिन्दू-मुस्लिम एकता खातिर आ धर्म की सत्ता की खिलाफ़ आवाज बुलन्द कइल। जात-पात, धार्मिक उन्माद आ आपसी बैर की खिलाफ़ जोरदार प्रचार ए संतन की द्वारा कइल गइल। गुरु नानकदेव 1507 ई. में शिवराति की अवसर पर बनारस के यात्रा कइलीं आ ए आंदोलन में आपन योगदान दिहलीं।

सोलहवीं सदी में बनारस में सांस्कृतिक पुनरुद्धार के आरम्भ भइल जब अकबर इहाँ दू गो मंदिरन क निर्माण करववलन। पूना के राजा इहाँ अन्नपूर्णा मंदिर बनववलन आ एही समय अकबरी पुल के निर्माण भइल। सन् 1665 ई. में फ्रांसीसी यात्री टेवर्नियर इहाँ के यात्रा कइलें आ गंगा तीरे बनल बिंदुमाधव मंदिर की बनावट के बखान कइलें। शेर शाह एही दौरान शाही सड़क के निर्माण करववलें जेवना के बाद में ग्रांड ट्रंक रोड (जीटी रोड) कहल गइल। औरंगजेब की शासन की समय एक बेर फिन से मंदिरन के ढाहल गइल लेकिन ओकरी बाद से जेतना शासक भइलें ऊ हिन्दू धर्म के ओतना विरोधी ना रहलें।

आजकाल की बनारस के रूप एही समय में बनल जब अठारहवीं सदी में राजपूत आ मराठा शासक कई महल आ मंदिरन के बनववलन। मुग़ल शासक मुहम्मद शाह इहाँ मानमंदिर घाट की बगल में एगो नक्षत्र-वेधशाला बनवावे के आदेश दिहलन। एही समय पर्यटन ए नगर में काफ़ी बढल।

गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स की शासन काल में सन 1791 ई. में इहाँ जोनाथन डंकन संस्कृत कालेज के अस्थापना कइलें। 1867 ई. में बनारस नगर निगम के अस्थापना भइल। सन् 1897 ई. में मार्क ट्वेन बनारस की बारे में आपन भावना कुछ ए तरे व्यक्त कइलें - Benares is older than history, older than tradition, older even than legend, and looks twice as old as all of them put  together.(बनारस इतिहासो ले पुरान ह, परम्परो से पुरान ह, कथा-कहनियो ले पुरान ह, आ अगर ए सबके एकट्ठा कइ दिहल जाय त ओहू सबसे दुगुन्ना पुरान मालूम होला)।

सन् 1910 ई. में अंग्रेज शासक बनारस के नया राज की रूप में बनवलें आ रामनगर के इहाँ के राजधानी बनावल गइल लेकिन ए राज के कौनो शासन क्षेत्र ना दिहल गइल। आजु ले काशी नरेश के निवास रामनगर किला में बा। उहाँ के बनारस की संस्कृति में बहुत महत्व के अस्थान प्राप्त बा आ उहाँ के आजुओ बनारस के सांस्कृतिक मुखिया माना जालीं। बनारस राज के भारत में विलय 15 अक्टूबर 1948 ई. में भइल।

भूगोल की दृष्टि से बनारस मध्य गंगा मैदान के हिस्सा हवे। गंगा नदी इहँवा उत्तर दिशा की ओर बहेली जे से इहाँ गंगा जी के उत्तरमुखी गंगा कहल जाला। एही उत्तरमुखी गंगा की कमानी नियर मोड़ की सहारे पच्छिमी किनारा पर बनारस शहर बसल बा। शहर के ऊंचाई नदी से करीब 15 मीटर (50 फीट) से 21 मीटर (70 फीट) बाटे। शहर की उत्तरी सीमा की ओर वरुणा नदी गंगा में मिल जाली। कई गो प्राचीन झील अब लगभग समाप्त होखे की कगार पर बाड़ी जेवन पाहिले काफ़ी विस्तार वाली रहलीं। प्राचीन मत्स्योदरी हृद नाँव के झील जे के आजकाल मछोदरी कहल जाला अइसने एगो उदहारण बा।

नगरीय इलाका लगभग 112.26 वर्ग किलोमीटर में फैलल बा। एकर बिस्तार 82° 56’पू. – 83° 03’पू.  आ  25° 14’उ. – 25° 23’ 30’’ उ. कि बिचा में बा।

बनारस क जलवायु आर्द्र उपोष्ण प्रकार क हवे (कोपेन की वर्गीकरण में: Cwg)। सबसे गरम महीना मई-जून (औसत तापमान 37 डिग्री सेल्सियस) आ सबसे ठंढा महीना जनवरी होला (औसत तापमान 19 डिग्री सेल्सियस) । बारिश मानसून की द्वारा जून की तीसरा हप्ता से शुरू हो के अक्टूबर की पहिला हप्ता ले होले जेवना के बरखा ऋतु कहल जाला। सबसे बेसी बरखा जुलाई-अगस्त (लगभग सावन-भादो) में होखेले। औसत सालाना बरखा लगभग 100 सेंटीमीटर (40.37 इंच) होला। बरखा की ऋतु से ठीक पाहिले अप्रैल मई में ख़ूब लूहि बहेले आ आन्ही अंधड़ आवेला। जाड़ा की ऋतु में तापमान बहुत कम भी हो जाला। शीतलहरी की समय कौनो-कौनो दिन क न्यूनतम (एक दिन-रात में सबसे कम) तापमान 3-4 डिग्री सेल्सियस ले नीचे चलि जाला। जाड़ा में बरखा भूमध्य सागर की ओर से आवे वाला पच्छिमी विक्षोभ से होला जेवन एक तरह के चक्रवाती बरखा होला आ रबी की फसल खातिर फायदेमंद होला। जाड़ा में कुहासो पड़ेला।

साल 2011 की जनगणना की अनुसार वाराणसी नगरीय इलाका के कुल जनसंख्या 14,35,113 रहे जे में 7,61,060 मर्द आ 6,74,053 औरत रहलीं।

नगर निगम की सीमा की भीतर तकरीबन 1,38,000 लोग मलिन बस्ती में निवास करत बा। धर्म की आधार पर देखल जाय त जनसंख्या क 80% हिन्दू, 18% मुसलमान, आ 1.2% जैन लोग बा।

बनारस में भोजपुरी भाषा के पछाहीं रूप बोलल जाला जेवना के काशिका नाँव दिहल गइल बा। बाकी मुख्य भाषा हिंदी हवे। विदेशी पर्यटक लोगन की आवागमन की कारण अंगरेजी क प्रचलन पर्यटन उद्द्योग से जुडल लोगन में मिलेला।

बनारस क संगीत से जुड़ाव पौराणिक आख्यानन में वर्णित बा। पुराणन की अनुसार भगवान शिव ए नगरी के अस्थापना कइलीं आ उंहेंके संगीत के उत्पन्न करे वाला भी मानल जालीं, एहीसे साफ़ बुझात बा कि ए नगरी के संगीत से बहुते पुरान जुड़ाव बा। सोलहवीं सदी में राजा गोविन्द चन्द्र की राज्य की समय इहवाँ ध्रुपद गायन के राज्य से आसरय मिलल जेकरी बाद अउरी दूसर कुल शैली के भी उत्त्थान भइल। मध्यकाल में इहाँ की संगीत के कबीरदास जी आ अउरी कई गो सूफी संत लोगन की उपस्थिति से भी बहुत बढ़ावा मिलल।

शास्त्रीय संगीत में बनारस घराना क एगो आपन अलगे पहिचान हवे। आजकाल बनारस के निर्गुन, ठुमरी आ बनारसी कजरी खातिर विशेष रूप से जानल जाला। इहाँ के विश्वप्रसिद्द संगीतकार लोगन में सितार वादक पं. रविशंकर, शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ साहब, ठुमरी गायिका श्रीमती गिरिजा देवी, तबला वादक पं. किशन जी महाराज, निर्गुन गायक पं. कुमार गन्धर्व जइसन गुनी लोगन के नाँव आवेला।

इतिहास में शिक्षा की मामिला में बनारस के बहुत प्राचीन समय से बहुत ऊँच मोकाम रहल बा। इहाँ ले कि बनारस के एही से विश्वविद्द्या क राजधानी की रूप में परसिद्धी हवे। वेद के अध्ययन, धर्मशास्त्र, व्याकरण, कर्मकांड, आयुर्वेद, ज्योतिष जइसन सभ तरीका की ज्ञान में बनारस की बिद्वानन क लोहा पूरा विश्व मानेला। व्याकरण की क्षेत्र में इहवाँ के ऋषि पतंजलि के टीका काशिका एगो आधारस्तंभ मानल जाला। प्राचीन बैद्य सुश्रुत जे सर्जरी के पहिला अविष्कार करे वाला रहलीं, उहाँ के ग्रन्थ सुश्रुत संहिता आयुर्वेद के नामी ग्रन्थ हवे।
आजकाल की समय में भी बनारस में चार गो विश्विद्यालय बा जेवना में सभसे ढेर महत्व बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के बा। बीएचयू के बिज्ञान आ प्रौद्योगिकी से ले के साहित्य आ समाज बिज्ञान की क्षेत्र में योगदान बा। बीएचयू के आईआईटी भारत की सोलह सभसे महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी संस्थानन में से एगो हवे।

एकरी आलावा सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्विद्यालय, महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ आ केन्द्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान (डीम्ड इन्वर्सिटी) इहवाँ के अउरी तीन गो विश्वविद्यालय बा। उदय प्रताप कालेज, हरिश्चंद्र कालेज, अग्रसेन कन्या कालेज, बसंत कन्या महाविद्यालय जइसन कई गो डिग्री कालेज इहवाँ बाड़ें।

बनारस भारत की बाकी हिस्सन से सड़क, रेल अउरी हवाई मार्ग से बढियाँ से जुडल बा। बहुत प्राचीन काल से आजु ले ए नगरी के लगातार महत्वपूर्ण रहला में एकर परिवहन की साधन से सम्पन्न भइल आ पूरा देश से जुड़ाव के बिसेस योगदान बा।

बनारस में लाल बहादुर शास्त्री अंताराष्ट्रिय हवाई अड्डा मुख्य शहर से करीबन 25 कि.मी. दूर बाबतपुर में बा। इहाँ से शारजाह, काठमांडू, दिल्ली, गया, खजुराहो, लखनऊ, बंगलौर, हैदराबाद, मुंबई, कलकत्ता, गउहाटी इत्यादि जगह खातिर हवाई जहाज जाला आवेला। जबसे इहवाँ नया टर्मिनल के उद्घाटन भइल बा (अक्टूबर 2010 ई. से) ए के अंताराष्ट्रिय हवाई अड्डा के दर्जा मिल गइल बा।

बनरस जंक्शन, जेवना के वाराणसी कैंट रेलवे टीशन कहल जाला, बनारस के सबसे व्यस्त रेलवे इस्टेशन बा। ए कर लोड कम करे खातिर मुग़लसराय में टीशन बा आ उहो भारत की सबसे व्यस्त रहेवाला इस्टेशनन में गिनाला। कैंट टीशन से रोज़ करीबन साढ़ेतीन लाख से ज्यादा लोग आ 240 की लगभग रेलगाड़ी गुजरेला।

बनारस से हो के राष्ट्रिय हाइवे 2 गुजरेला जेवन ए शहर के पूरुब ओर कलकत्ता से आ पच्छिम ओर वाया इलाहाबाद दिल्ली से जोड़ेला। स्वर्णिम चतुर्भुज योजना में एके बढ़िया बिकास भइल बा आ ए हाइवे के चार लेन के बना दिहल गइल बा। राष्ट्रिय हाइवे 29 बनारस के वाया गाजीपुर, मऊ, गोरखपुर से जोड़त बा; राष्ट्रिय हाइवे 7 जेवन भारत के सबसे लंबा हाइवे ह ऊ इहाँ से नागपुर, हैदराबाद होत कन्याकुमारी तक जाला; आ  राष्ट्रिय हाइवे 56 जौनपुर, सुल्तानपुर होत लखनऊ ले जाला।

गंगा में नाव पर जल परिवहन बनारस की खातिर एगो महत्व के चीज बहुत प्राचीन काल से हवे। आजकाल गंगा नदी में हल्दिया (कलकत्ता) से इलाहाबाद ले घोषित राष्ट्रिय जल मार्ग – 1 बनारस से हो के गुजरेला।

बनारस शहर की अन्दर परिवहन खातिर सिटी बस, छोटका टेम्पू, आ रेक्सा साधन बा। घाट की किनारे किनारे नाव से भी आइल-जाइल जा सकेला। बनारस के ज्यादातर बस्ती अंग्रेजन के पहिले के बसल बा जेवन आजकाल की परिवहन की साधन आ मोटर-गाड़ी की की हिसाब से ना बसल रहे। बाद के बस्ती भी सरकारी लापरवाही आ बिना योजना के बस गइल। नतीजा ई बा कि आज बनारस के सड़क कुल जाम खातिर मशहूर हो गइल बाड़ी।

बनारस में वाराणसी जिला क मुख्यालय बा आ वाराणसी कमिश्नरी क कार्यालय बा। शहर के व्यवस्था स्थानीय स्वशासन की तहत नगर निगम देखेला। पानी क सप्लाई जल निगम करेला जेवन नगर निगम क अंग हवे। नया निर्माण आ नगर की नियोजन खातिर वाराणसी विकास प्राधिकरण बा। काशी विश्वनाथ मंदिर खातिर राजा बनारस की अध्यक्षता में एगो ट्रस्ट सन् 1983 ई. में बनल जेवन मंदिर के व्यवस्था देखेला। 
 




#Article 140: कुशीनगर (1016 words)


कुशीनगर भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी पूरबी हिस्सा में एगो शहर, पर्यटन स्थल आ बौद्ध तीरथ बा। अपनहीं नाँव के जिला में मौजूद ई शहर उत्तरी-पूरबी उतर प्रदेश के प्रमुख शहर गोरखपुर से करीबन 50 किलोमीटर पूरुब ओर नेशनल हाइवे 28 पर पड़े ला। एकरा के कुछ बड़हन आकार नजदीकी दूसर शहर पड़रौना बा।

कुशीनगर के प्राचीन नाँव कुशीनारा बतावल जाला। एकर पहिचान ओह जगह के रूप में कइल जाला जहाँ भगवान बुद्ध के परिनिर्वाण भइल। एहीसे ई जगह बौद्ध धर्म माने वाला लोगन क चारि गो सबसे पबित्र तीरथ अस्थानन में गिनल जाला, बाकी तीन गो जगह लुम्बिनी, बोधिगया, आ सारनाथ हवें। भारत से बाहर के लोग खाती ई एगो अंतरराष्ट्रीय पर्यटन आ तीरथ के जगह हवे। खासतौर से एशियाई देसन के लोग, जहाँ बौद्ध धर्म के प्रचलन बहुत बा, अपना जिनगी में कम से कम एक बेर इहाँ के जातरा जरूर कइल चाहे ला।

परिनिर्वाण मंदिर, रामभर स्तूप आ अन्य प्राचीन बिहार के अवशेष इहाँ के देखे लायक चीज बाने। परिनिर्वाण मंदिर में गौतम बुद्ध के लेटल मुद्रा में मूर्ती बा। एकरे अलावे कई गो नया मंदिर आसपास के बड़हन बिस्तार में स्थापित भइल बाने। कई सारा मंदिर सभ के नाँव ओह देस के नाँव पर बा जहाँ के लोग इनहन के बनवावल हवे। सरकार इहाँ मैत्रय परियोजना के तहत एगो बिसाल मूर्ती स्थापित करावे के घोषणा भी कइले बा।

एक ठो मत के मोताबिक एह जगह के पुराना नाँव कुशीनारा भा कुशवती रहल आ ई नाँव कोशल के राजा, प्रसिद्ध हिंदू देवता, श्री रामचंद्र के बेटा कुश द्वारा स्थापित कइल गइल आ उनके राजधानी रहल।

दूसर मत के अनुसार एह इलाका में पावल जाए वाली कुश घास के कारन एकर नाँव कुशवती पड़ल हवे। दुसरे वाली परंपरा, जेकरा के बौद्ध लोग माने ला, के मोताबिक एकर नाँव कुशवती, राम के लइका कुश से काफी समय पहिले से इहे रहल।

वास्तविक भूगोलीय लोकेशन के हिसाब से कुशीनगर, 24.74 डिग्री उत्तर अक्षांस आ 83.88 डिग्री पूरबी देशांतर पर मौजूद बा। अन्य शहर आ कस्बा सभ के सापेक्ष एह कस्बा के लोकेशन बतावल जाय त गोरखपुर महानगर से लगभग 50 किलोमीटर पूरुब ओर नेशनल हाइवे 27 (नया नंबरिंग में) पर पड़े ला। एकरे लगहीं कसया नाँव के बजार आ कस्बा बा जहाँ से उत्तर ओर पड़रौना (लगभग 15 किलोमीटर), आ रामकोला (18 किलोमीटर) पर बाने, दक्खिन में देवरिया शहर आ पूरुब ओर तमकुही राज नाँव के जगह पड़े ला।

भौतिक भूगोल के हिसाब से ई गंगा के बिचला मैदानी हिस्सा के उत्तरी इलाका हवे आ सरजू आ गंडक नदिन के बीचोबीच में पड़े ला। खुद कुशीनगर से कुछे दूरी पर पच्छिम ओर छोटी गंडक नदी बहे ले। खनुआ नदी नाँव क एक ठो पातर धारा कुशीनगर से हो के गुजरे ले जे आगे जा के छोटी गंडक में मिले ले, छोटी गंडक खुद आगे जा के भाटपार रानी, सलेमपुर हो के गोठिनी के लगे सरजू नदी में मिले ले। एह तरीका से कुशीनगर सरजू नदी के बेसिन के हिस्सा हवे, जवन कि खुद गंगा नदी के थाला के उत्तरी भाग हऽ।

पूरा इलाका के जलवायु कोपेन के बर्गीकरण के हिसाब से Cwa प्रकार के हवे, यानी कि नम उष्णकटिबंधी जलवायु हवे। जनवरी सभसे ठंढा महीना होला आ औसत तापमान लगभग 4 से 6 डिग्री सेंटीग्रेड रहे ला, मई-जून में सभसे ढेर गर्मी पड़े ले आ एह दौरान दिन अधिकतम तापमान 40 डिग्री C तक पार क जाला। बरखा मुख्य रूप से बीच जून से ले के सितंबर ले होले जब दक्खिनी-पच्छिमी मानसून के बंगाल के खाड़ी वाली शाखा से अह इलाका में बरखा होले। ई जिला उत्तर प्रदेश के सभसे सुदूर उत्तर पूरुब में हवे आ एही कारण इहाँ सभसे ढेर बरखा होले। कुछ बरखा जनवरी के अंत आ फरवरी में होले जे चक्रवाती बरखा होले। कुल मिला के ई तराई के दक्खिनी इलाका हवे आ माटी में हमेशा भरपूर नमी मौजूद रहे ले।

वर्तमान कुशीनगर के कुशवती (बुद्ध पूर्व काल में) आ कुशीनारा (बुद्ध-बाद के काल में) के रूप में पहिचानल जाला। कुशीनारा मल्ल लोग के राजधानी रहल। मल्ल, छठईं सदी में एगो महाजनपद रहे। बाद में ई मौर्य साम्राज्य, शुंग साम्राज्य, कुषाण, गुप्त आ हर्ष के साम्राज्य के हिस्सा बनल।

मध्यकाल में, कुशीनगर कलचुरी राजपूत लोग के अधीन आइल। मानल जाला कि बारहवीं सदी तक ले कुशीनारा शहर के रूप में मौजूद रहल ओकरे बाद उपेक्षा के शिकार भइल आ धीरे-धीरे इतिहास में गायब हो गइल। एकरे बगल में मौजूद शहर पड़रौना के बारे में अनुमान बा कि पनरहवीं सदी में इहाँ राजपूत मदन सिंह के राज रहे।

आधुनिक जमाना में, कुशीनगर के महत्व बढ़ल 19वीं सदी में, जब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पहिला सर्वेयर जनरल अलेक्जेंडर कनिंघम आ इनके बाद ए॰सी॰एल॰ कार्लाइल के खोज के दौरान मुख्य स्तूप के खोज भइल आ 6.10 मीटर लमहर बुद्ध के लेटल प्रतिमा 1876 में मिलल। खोदाई आ खोज के काम सुरुआती बीसवीं सदी ले जारी रहल। बाद के खोदाई डच पुरातत्वबिद जीन फिलिप वोगल (J. Ph. Vogel) के निर्देश में भइल। इनके अगुआई में 1904-5, 1905-6 आ 1906-7 में पुरातत्वी खोज के अभियान चलल आ भारी मात्रा में बौद्ध संपदा मिलल।

आजादी के बाद कुशीनगर देवरिया जिला के हिस्सा बनल रहल आ 13 मई 1994 के नया जिला पडरौना जिला के नाँव से बनल जेकरा नाँव बाद में कुशीनगर जिला क दिहल गइल।

बुद्ध के परिनिर्वाण स्थल पर अशोक द्वारा स्तूप बनवावल गइल आ एह जगह के तीरथ के रूप में परतिष्ठा भइल। गुप्त बंस (4थी से 7वीं सदी) के हिंदू शासक लोग एह स्तूप के बड़ करावल आ परिनिर्वाण मंदिर में लेटल बुद्ध के मुर्ती अस्थापित करावल। बौद्ध भिक्षु लोग द्वारा ई तीरथ छोड़ दिहल गइल जब 1200 ईस्वी के आसपास मुस्लिम सेना के बचे खाती ई लोग भाग चलल, बाद के इस्लामी शासन काल में ई जगह धीरे-धीरे भुला दिहल गइल।

ब्रिटिश पुरातत्वबिद अलेक्जेंडर कनिंघम एह जगह के 19वीं सदी में दुबारा खोजलें आ इनके सहजोगी ए॰सी॰एल॰ कार्लाइल इहाँ खोदाई करवलें आ लगभग 1500 बरिस पुरान बुद्ध के मुर्ती मिलल। एकरे बाद ई जगह बौद्ध तीर्थ आ पर्यटन केंद्र के रूप में फिर से महत्व पा गइल। तीसरी सदी ईसा पूर्व के पुरातात्विक अवशेष सभ से ई पता चले ला कि ई जगह प्राचीन काल में बौद्ध तीर्थ रहे।

भारत के जनगणना 2011 के अनुसार, कुशीनगर नगर पंचायत के कुल जनसंख्या 22,214 रहल




#Article 141: रसड़ा (349 words)


रसड़ा () भारत देश की उत्तर प्रदेश राज्य में बलियाँ जिला में एगो शहर बा। ई आपने नाँव की तहसील क मुख्यालय ह। इहाँ नाथ बाबा मंदिर देखे लायक धार्मिक अस्थान बा। इहाँ अनाज क मंडी आ अउरी सामन क बाजार ए इलाका की आर्थिक जीवन खातिर महत्वपूर्ण बा।

रसड़ा की आसपास क इलाका बलियाँ जिला की अउरी इलाका की तरे प्राचीन काल में कोसल राज्य क हिस्सा रहे। कोसल राज्य की कमजोर भइला पर ए इलाका में भर जाति की लोगन के छोट-छोट प्रभाव क्षेत्र बनि गइलन स। एकरी बाद सेंगर राजपूत लोग ए इलाका में परभाव अस्थापित कइल। ए शहर के अस्थापना कब भइल ई मालुम नइखे।
सन बयालिस की आंदोलन में रसड़ा संघर्ष क एगो बहुते महत्वपूर्ण केन्द्र रहे। ए आंदोलन में अगस्त 1942 ई. में बलियाँ जिला की अउरी जगहन की नियर रसड़ो में स्वतंत्रता के घोषणा हो गइल आ तहसील मुख्यालय पर तिरंगा लहर दिहल गईल।

रसड़ा क लोकेशन 25° 51' उत्तरी अक्षांश आ 83° 51' पूरबी देशांतर बा आ समुद्र तल से ऊँचाई 54 मीटर बा।
जिला मुख्यालय बलियाँ से इहाँ क दूरी 33 किलोमीटर बा आ बनारस से वाया मऊ इहाँ के दूरी 142 किलोमीटर बा।
प्राकृतिक भूगोल कि दृष्टि से ई शहर मध्य गंगा मैदान क हिस्सा हवे आ इहवाँ जलोढ़ निक्षेप के चट्टान मिलेला। आसपास दोमट आ बलुई दोमत माटी पावल जाला आ कहीं कहीं ऊसर मिलेला। ताल ए इलाका कि चारो ओर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर पावल जाला। बसनही नदी रसड़ा की लगे से हो के बहेले जेवन आगे जा के गंगा जी में मिल जाले।
जलवायु नम प्रकार के बा आ बसंत, गर्मी, बरखाऋतु, आ जाड़ा के चार गो मौसम होला। साल भर में औसत बरखा 100 सेंटीमीटर की आसपास होले।

प्राकृतिक रूप से पावल जाए वाला बन अब समाप्त हो गईल बाड़े। बड़ पेड़न में आम, महुआ, नीबि, बरगद, पीपर, पाकड़, गूलरि, इमिली, आ अर्जुन क पेड़ मिलेलें। नया वृक्षारोपण में ज्यादातर पेड़ सफ़ेदा, बिलायती बबुर, आ शिरिष के लगावल गइल बा।

रसड़ा क जनसंख्या 1971 में 14,042 रहे जवन 1991 में बढ़ के 23,865; आ 2001 में 29,238 आ 2011 में बढ़ के 31,765 हो गइल बा।




#Article 142: देवरिया (193 words)


देवरिया () भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में एक ठो शहर बा। ई शहर एही नाँव के जिला, देवरिया जिला के मुख्यालय हवे।

देवरिया शब्द के उत्पत्ती के बारे में कई मत बा। जिला के वेबसाइट पर उपलब्ध बिबरन के मोताबिक ई देवारण्य चाहे देवपुरिया से निकलल हो सके ला; इहो मानल जाला कि देउरिया के अरथ देवता के अस्थान होला।

शहर मैदानी इलाका में बसल हवे, ई मैदान उत्तरी भारत के मैदान के हिस्सा हवे। शहर के लगे से कुर्ना नदी नाँव के एगो बहुत छोट नदी बहे ले जबकि छोटी गंडक नदी एह शहर के पूरुब ओर से हो के बहे ले। इलाका के मुख्य नदी सरजू नदी (घाघरा नदी) हवे जे एह शहर से कुछ दूरी पर दक्खिन ओर बाटे।

एह इलाका के मुख्य शहर गोरखपुर हवे जे देवरिया से 53 किलोमीटर के दूरी पर उत्तर पच्छिम में बाटे।

साल 2011 के जनगणना अनुसार देवरिया के कुल शहरी जनसंख्या 129479 बाटे आ आसपास के उपशहरी इलाका के मिला लिहल जाय तब कुल जनसंख्या 129479 बा। जनसंख्या के हिसाब से ई भारत के 361वाँ शहर बाटे।
जनगणना आँकड़ा के मोताबिक एह शहर में लिंगानुपात 919 आ साक्षरता के दर 86.8% बाटे।




#Article 143: देवरिया जिला (311 words)


देवरिया ज़िला भारत देश की उत्तर प्रदेश राज्य में, एकदम पुरुब-उत्तर हिस्सा में एगो ज़िला हउए आ देवरिया नाँव के शहर ए ज़िला क मुख्यालय हउए।

एह जिला के भूगोलीय बिस्तार 26° 6′ उत्तर से 27° 8′ उत्तर अक्षांस ले आ 83° 29′ पुरुब से 84 ° 26′ पुरुब देशांतर ले बाटे। जिला के कुल रकबा (एरिया) 2,535 वर्ग किलोमीटर बा। एकरा उत्तर ओर कुशीनगर जिला, पच्छिम ओर गोरखपुर जिला आ दक्खिन ओर मऊ जिला आ बलियाँ जिला बाड़ें जबकि एकरे पुरुब ओर बिहार राज्य बा।

आमतौर पर ई इलाका मैदानी इलाका हवे आ बिचला गंगा मैदान के हिस्सा मानल जाला। सरजू, राप्ती आ छोटी गंडक एह जिला के प्रमुख नदी बाड़ीं। सरजू (घाघरा) नदी एह जिला के दक्खिनी सीमा बनावे ले आ लगभग सारा जलबहाव एही नदी में जाला। बरहज के लगे राप्ती नदी सरजू में मिले ले।

सलेमपुर, बरहज आ भाटपार रानी, देवरिया के अलावा प्रमुख शहर बाड़ें।

जिला एही नाँव के देवरिया लोकसभा चुनाव क्षेत्र में आवे ला। बिधानसभा चुनाव क्षेत्र में इहाँ कुल सात गो बिधान सभा क्षेत्र बाड़ें: रुद्रपुर (क्रम संख्या 336), देवरिया (337), पथरदेवा (338), रामपुर कारखाना (339), भाटपार रानी (340), सलेमपुर (341) अउरी बरहज (342) बाड़ें।

जिला के प्रशासन खातिर एकरा के पाँच गो तहसील में बाँटल गइल बाटे: देवरिया सदर, भाटपार रानी, बरहज, सलेमपुर आ रुद्रपुर। फिर एकरे बाद जिला में कुल 16 गो ब्लॉक (बिकासखंड) बाड़ें: बैतालपुर, बरहज, बनकटा, भागलपुर, भलुअनी, भटनी, भाटपार रानी, देवरिया सदर, देसही देवरिया, गौरी बाज़ार, लार,पथरदेवा, रामपुर कारखाना, रुद्रपुर, सलेमपुर अउरी तरकुलवा।

भारत के जनगणना, 2011 के अनुसार देवरिया जिला के कुल आबादी 3,098,637 रहल। एह तरीका से भारत के कुल 640 जिला सभ में एकर अस्थान 114 रहल। जिला में जनसंख्या के घनत्व  बाटे इहाँ के जनसंख्या के बढ़ती के दर 2001-2011 के दशक में 14.23% रहल। देवरिया जिला में मानव लिंगानुपात 1013 औरत प्रति 1000 मरदाना रहल, आ जिला में साक्षरता के डर 73.53% रहल।




#Article 144: गाजीपुर (521 words)


गाजीपुर (; हिंदी: ग़ाज़ीपुर ) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में एक ठो शहर बा। एह शहर के अस्थापना मसूद ग़ाज़ी कइले रहलें, अइसन बतावल जाला, हालाँकि कुछ इतिहासकार कहेंले कि ऊ पुरनका गाधिपुरी के नाव बदल दिहलें जेवना के आज गाजीपुर शहर के नाव से जानल जाला।       

गाजीपुर जिला के ज़मानिया शहर के मदन बनारस आ गाजीपुर के लहुरी काशी भी कहल जाला। अंग्रेजी राज में 1820 में इहवां एगो बड़हन अफीम के फैक्टरी खोलल गइले रहे, जहवां अजुओ काम चल रहल बा। गाजीपुर मुगल काल में गुलाब के खेती आ इत्र खातिर मशहूर रहे। इहवां भोजपुरी भाषा बोलल जाला।

पौराणिक मान्यता के हिसाब से गाजीपुर पहिले जंगलिय स्थान रहे अउर त्रेता युग में राजा दशरथ के राज्य के हिस्सा रहे। कहल जाला की ईहे अनजाने में दशरथ श्रवण कुमार के बाण मरले जे से ऊ मर गईले। अपना पाप के प्रायश्चित खातिर राजा दशरथ महादेव के पूजा कईले उ स्थान आज भी महाहर महादेव मंदिर के नाम से मरदह ब्लाक में ह। महर्षि जमदग्नि के आश्रम भी ईहे रहे आज उ जगह के जमानिया कहल जाला, अउर विश्वामित्र के तपस्या गाजीपुर के ही आज के मैनपुर गांव में भंग कईली देवतन के राजा इंद्र के अप्सरा मेनका आके और कण्व ऋषि के आश्रम भी एहिजे रहे उ जगह के करण्डा कहल जाला ए समय, भिरगू ऋषि के शिष्य दरदर जी भी गाजीपुर में ही गंगा नदी के तट पर तपस्या कईले अउर उ स्थान अब ददरीघाट बोलल जाला इहा एकदम किनरवे से गंगा जी बहत बलिया निकल जाली जहवा भिरगू बाबा के आश्रम अबहियों बाटे।

इतिहासी बिमर्ष के हिसाब से, ए शहर के तुगलक वंश के शासन काल में सैय्यद मसूद गाजी बसवले रहलन। बाकी कुछ इतिहासकार लोगन के मुताबिक एह शहर के अस्तित्व बहुत पुरान हउवे जेवना के पुरान नाव गाधिपुरी हऽ। कुछ लोग के मानल इहो बा कि मसूद ग़ाज़ी कौनो नया शहर ना बसवलें, ऊ खाली पुरनके शहरिया के नाव 1330 में बदलके गाजीपुर कऽ दिहलें।

ऐतिहासिक दस्तावेजन के मुताबिक गाजीपुर के कठउत में पृथ्वीराज चौहान के वंशज राजा मंधाता के गढ़ी रहे। राजा मंधाता ओ समय भी दिल्ली के सुल्तानन के अधीनता ना स्वीकरले रहलन। ई बात ओइजुगा के खरखाह जागीरदार दिल्ली पहुंचवले जेकरा बाद मुहम्मद बिन तुगलक के सिपहसालार सैयद मसूद अल हुसैनी सेना के एगो टुकड़ी लेके कठउत अइलें आ राजा मंधाता के गढ़ी पर हमला बोल दिहलें। राजा मंधाता एह जुद्ध में हार गइलें। जेवना के बाद सैयद मसूद अल हुसैनी राजा के संपत्ति के नयका मालिक बनि गइलें। एह जुद्ध के बाद दिल्ली के सुल्तान के ओर से सैयद मसूद अल हुसैनी के मलिक-अल-सादात गााजी के उपाधि देहल गइल। सैयद मसूद गाजी एकरा बाद कठउत के बगल में गौसपुर नाव से एगो नया गढ़ बसा लिहलें। बाकी कुछे दिन के बाद ऊ गौसपुर से थोड़की दूर पे गाजीपुर नाव के एगो नया शहर बसा आपन राजाकाज के ठेकाना बदल लिहलें।

साल 2011 के जनगणना अनुसार गाजीपुर के कुल शहरी जनसंख्या 110587 बाटे आ आसपास के उपशहरी इलाका के मिला लिहल जाय तब कुल जनसंख्या 121136 बा। जनसंख्या के हिसाब से ई भारत के 443वाँ शहर बाटे।
जनगणना आँकड़ा के मोताबिक एह शहर में लिंगानुपात 908 आ साक्षरता के दर 84.27% बाटे।




#Article 145: हजारी प्रसाद द्विवेदी (249 words)


आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी (19 अगस्त 190719 मई 1979) हिंदी, संस्कृत आ भारतीय इतिहास अउरी संस्कृति के विद्वान रहलें आ आधुनिक युग क एगो मौलिक निबंधकार, उत्कृष्ट समालोचक आ सांस्कृतिक विचारधारा क बहुते नामी उपन्यासकार रहलें। द्विवेदी क जनम 19 अगस्त 1907 ई में बलिया जिला की दुबे-का-छपरा नाँव की गाँव में भइल रहे। उहाँ के परिवार ज्योतिष विद्या खातिर बहुत परसिद्ध रहे आ उहाँ के पिता पं. अनमोल द्विवेदी जी संस्कृत क प्रकांड पंडित रहलीं।

द्विवेदी जी क प्रारंभिक शिक्षा गांव की  इस्कूल में भइल आ उहंवें से उहाँ क मिडिल क इम्तिहान पास कइलीं। एकरी बाद उहाँ क  इंटर क परीक्षा आ ज्योतिष विषय में आचार्य क परीक्षा पास कइलीं। पढ़ाई लिखाई खतम क के द्विवेदी जी शांतिनिकेतन चलि गइलीं आ कई बरिस ले उहाँ हिंदी क पठन-पाठन कइलीं । शांतिनिकेतन में गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर आ आचार्य क्षितिमोहन सेन की परभाव से साहित्य क गहन अध्ययन और रचना शुरू कइलीं।

द्विवेदी जी का व्यक्तित्व बड़ा प्रभावशाली आ उहाँ क स्वभाव बड़ा सरल आ उदार रहे। पंडित जी हिंदी, अंग्रेज़ी, संस्कृत आ बंगाली भाषा क विद्वान रहलीं। भक्तिकाल की साहित्य का उहाँ के बहुत नीमन आ बिस्तार से ज्ञान ज्ञान रहे। लखनऊ विश्वविद्यालय उहाँ के डी.लिट. की उपाधि दे के विशेष सम्मान कइलस। उहाँ क बी.एच.यू. में हिंदी पढ़ावलीं आ उहाँ के भारत सरकार 1957 में पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित कइलस।

बाणभट्ट की आत्मकथा नाँव क उपन्यास पंडित जी क सबसे परसिद्ध आ महत्व वाली रचना मानल जाले।

द्विवेदी जी क प्रमुख रचना नीचे दिहल जात बा -




#Article 146: जवाहरलाल नेहरू (714 words)


जवाहरलाल नेहरु (नवंबर 14, 1889 - मई 27, 1964) क जनम उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद में भइल रहे। उहाँ के भारत की स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिहलीं आ स्वतंत्र भारत क पहिला प्रधानमन्त्री बनलीं।

जवाहर लाल नेहरू क पैदाइश इलाहाबाद में एगो धनी-मानी वकील मोतीलाल नेहरू की घरे भइल। उहाँ की माता जी क नाँव स्वरूप रानी नेहरू रहे। उहाँ के मोतीलाल नेहरू क एकलौता लरिका रहलीं। जवाहिरलाल की अलावा अलावा मोती लाल नेहरू क तीन गो लइकी रहलीं। नेहरू जी कश्मीरी वंश क सारस्वत ब्राह्मण रहलें। 

जवाहरलाल नेहरू आपन स्कूली शिक्षा हैरो से, आ कॉलेज क शिक्षा ट्रिनिटी कॉलेज, लंदन से पढले रहलीं। एकरी बाद ऊ वकालत क डिग्री कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पूरा कइलें। इंग्लैंड में उहाँ क सात साल रहल रहलीं जेवना से उहाँ की फैबियन समाजवाद आ आयरिश राष्ट्रवाद में रूचि पैदा भइल।

जवाहरलाल नेहरू 1912 में भारत लवट के वकालत शुरू कइलें। 1916 में उनकर बियाह कमला नेहरू की संघे भइल। 1917 में जवाहर लाल नेहरू होम रुल लीग‎ में शामिल हो गइलें। राजनीति में उनकर असली दीक्षा दू साल बाद 1919 में भइल जब ऊ महात्मा गाँधी की संपर्क में अइलें। ओ समय महात्मा गांधी रॉलेट अधिनियम क बिरोध करत रहलें। नेहरू, महात्मा गांधी की सक्रिय लेकिन शांतिपूर्ण, सविनय अवज्ञा आंदोलन की प्रति बहुत रूचि लिहले।

नेहरू अपना परिवारो के महात्मा गांधी की उपदेशों की अनुसार बना लिहलें। जवाहरलाल और मोतीलाल नेहरू पश्चिमी कपड़ा आ महंगी संपत्ति क त्याग क दिहल लोग। ऊ लोग अब  खादी कुर्ता आ गाँधी टोपी पहिने लागल लोग। जवाहर लाल नेहरू 1920-1922 में असहयोग आंदोलन में सक्रिय हिस्सा लिहलें आ एही की दौरान पहिली बेर उनके गिरफ्तार कइल गइल। कुछ महीना की बाद उनके रिहा कर दिहल गइल।

जवाहरलाल नेहरू 1924 में इलाहाबाद नगर निगम के अध्यक्ष चुनल गइलें आ दू बरिस ले ए पड़ पर रहलें। 1926 में ब्रिटिश अधिकारी लोगन से सहयोग की कमी क हवाला देके इस्तीफा दे दिहलें।

दिसम्बर 1929 में, कांग्रेस क वार्षिक अधिवेशन लाहौर में आयोजित कइल गइल आ एही में जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस पार्टी क अध्यक्ष चुनल गइलें। एअही सत्र में प्रस्ताव पारित भइल जेवना में 'पूर्ण स्वराज्य' क मांग कइल गइल। 26 जनवरी, 1930 के लाहौर में जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत का झंडा फहरवलें। गांधियो जी 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन का आह्वान कइलें। आंदोलन बहुत सफल रहल आ ई ब्रिटिश सरकार के प्रमुख राजनीतिक सुधार की आवश्यकता के स्वीकार करे खातिर मजबूर कइ दिहलस।

जब ब्रिटिश सरकार भारत अधिनियम 1935 प्रख्यापित कइलस तब कांग्रेस पार्टी चुनाव लड़ला क फैसला कइलस। नेहरू चुनाव से बाहर रहलें  लेकिन बाहर से जोर-सोर से पार्टी खातिर राष्ट्रव्यापी अभियान चलवलें। कांग्रेस लगभग हर प्रांत में सरकारन  क गठन कइलस आ केन्द्रीय असेंबली में सबसे ढेर सीटन पर जीतल।

नेहरू कांग्रेस की अध्यक्ष पद खातिर 1936 आ  1937 में चुनल गइलें। उनकरा के 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन की दौरान गिरफ्तारो कइल गइल आ 1945 में छोड दिहल गइल। 1947 में भारत आ पाकिस्तान की आजादी की समय नेहरू जी अंगरेजी सरकार की साथे भइल बातचीत में महत्वपूर्ण भागीदारी कइलें।

सन् 1947 में भारत के आजादी मिलला पर जब भावी प्रधानमंत्री खातिर कांग्रेस में मतदान भइल तब सरदार पटेल के सबसे ढेर मत मिलल। उनकी बाद सर्वाधिक मत आचार्य कृपलानी के मिलल रहे। बाकी गांधीजी की कहला पर सरदार पटेल आ आचार्य कृपलानी नाँव वापस ले लिहल लोग आ जवाहर लाल नेहरू के  प्रधानमंत्री बनावल गइल।

जवाहर लाल नेहरू जोसिप बरोज़ टिटो आ अब्दुल गमाल नासिर की संघे मिलके एशिया आ अफ्रीका में उपनिवेशवाद खतम करे खातिर एगो गुट निरपेक्ष आंदोलन बनवलें। वह कोरियाई युद्ध क अंत करे खातिर, स्वेज नहर विवाद सुलझावे खातिर, आ कांगो समझौता जइसन अन्य अंतरराष्ट्रीय समस्या कुल की समाधान में मध्यस्थ रहलें। पश्चिम बर्लिन, ऑस्ट्रिया, आ लाओस नियर कई गो अउरी विस्फोटक मुद्दा कुल की समाधान में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहे। उनके साल 1955 में भारत रत्न से सम्मनित कइल गइल।

बाकी नेहरू पाकिस्तान आ चीन की संघे भारत की संबंधन में सुधार ना कर पवलें। पाकिस्तान की संघे समझौता तक पहुँचले में कश्मीर मुद्दा आ चीन की संघे मित्रता में सीमा विवाद रोड़ा साबित भइल। नेहरू चीन की ओर मित्रता क हाथ भी बढवलें, लेकिन 1962 में चीन धोखा से आक्रमण क के नेहरू के एगो अइसन बड़ झटका दिहलस कि शायद उनकर मौत भी एही कारण से भइल। 27 मई, 1964 के जवाहरलाल नेहरू क दिल क दौरा पडल आ उनकर मौत हो गइल।




#Article 147: गौतम बुद्ध (1515 words)


भगवान बुद्ध, गौतम बुद्ध, सिद्धार्थ गौतम, शाक्यमुनि भा खाली बुद्ध की नाँव से जानल जाला एगो संत-महात्मा रहलें आ जिनके शिक्षा की आधार पर बौद्ध धर्म अस्थापित भइल। बुद्ध के जनम शाक्य कुल में लुम्बिनी(वर्तमान नेपाल में) नामक अस्थान पर भइल रहे जेवन शाक्य गणतंत्र क राजधानी रहे।

बुद्ध शब्द क अर्थ होला अइसन व्यक्ति जे के बोधि (मने ज्ञान) मिल गइल होखे आ बौद्ध धर्म में इहाँ के सबसे बड़ ज्ञान प्राप्त व्यक्ति मानल गइल बा आ सम्मासंबुद्ध अथवा सम्यकसम्बुद्ध कहल जाला। शाक्य कुल में जनम की कारण इहाँ के शाक्यमुनि कहल जाला। गौतम गोत्र में जनम भइल आ जनम की बाद नाँव सिद्धार्थ धराइल जेवना से इहाँ के नाँव सिद्धार्थ गौतम भइल। ज्ञान (बोधि) प्राप्त कइ लिहला पर बुद्ध, गौतम बुद्ध, महात्मा बुद्ध आ भगवान बुद्ध कहल जाए लागल। 
ज्ञान अथवा बोधि के सही स्वरूप के भाषा आ वाणी द्वारा वर्णन ना हो सकेला ओकरी ओर खाली इशारा भर कइल जा सकेला एही से गौतम बुद्ध के तथागत भी कहल जाला जेकर मतलब होला 'जे उहाँ पहुँच गइल होखे' या 'जे ओ (ज्ञान) के प्राप्त कइ लिहले होखे/प्राप्त हो गइल होखे'।

भगवान बुद्ध अपनी शिक्षा से मध्यम मार्ग क उपदेश दिहलीं जेवना क अर्थ होला इन्द्रिय सुख मे लिप्त रहला आ सारा इन्द्रिय सुख की निषेध की बीच के मार्ग। 
सामाजिक सांस्कृतिक रूप से बुद्ध भगवान के शिक्षा ओ समय की ब्राह्मण धर्म की खिलाफ़ एगो विद्रोह की रूप में भी देखल जा सकेला काहें से की ए नया धर्म में जात-पात आ कर्मकांड क विरोध कइल गइल आ ज्ञान प्राप्त करे खातिर आपन रास्ता खुद खोजे खातिर निर्देश दिहल गइल।

भगवान बुद्ध आपन शिक्षा जबानी उपदेश की रूप में पूर्वी भारत में भ्रमण क के पालि भाषा में दिहलीं जेवना क बाद में तिब्बत, चीन, जापान, श्रीलंका आ वतर्मान इंडोनेशिया आ थाईलैंड ले प्रचार-प्रसार भइल।  
आज भगवान बुद्ध क उपदेश माने वाला बौद्ध धर्म क अनुयायी लोग पूरा दुनिया में फइलल बा ।

इतिहासी गौतम बुद्ध के जीवन के समय क निर्धारण कइल बहुत मुश्किल बा। काहें से कि उहाँ की जन्म आ मरला क कौनो निश्चित समय आ तारीख़ नइखे मालूम 
ज्यादातर बिद्वान लोग गौतम बुद्ध के जीवन 563 ई.पू. से 483 ई.पू. की बीच में मानेला। हालाँकि अबहिन कुछ दिन पहिले एगो संभावित बौद्ध अस्थान माया मंदिर के उत्खनन लुम्बिनी में भइल बा जेवना क तारीख 550 ई.पू. से पहिले बतावल जात बा, अगर ई सही निकली तब गौतम बुद्ध क जीवन काल अउरी पीछे सरक जाई।

पारंपरिक रूप से भगवान बुद्ध की जीवन की बारे में बुद्धचरित, ललितविस्तार सूत्र, महावस्तु अउरी निदानकथा नाँव की ग्रन्थ में मिलेला। ए सभ में बुद्धचरितम् सबसे पुरान बा जेवन दूसरी सदी के रचना मानल जाला ई एगो महाकाव्य हवे जेकर रचना अश्वघोष कइले रहलें। महायान परंपरा में ललितविस्तारसूत्रम् के रचना तीसरी सदी में आ महावस्तु के रचना चौथी सदी में भइल मानल जाला। धर्म्गुप्तक परंपरा में अभिनिष्क्रमण सूत्र सबसे बड़ आकार वाली जीवनी हवे आ एकर कई गी चीनी भाषा क अनुवाद मिलेला। निदानकथा श्रीलंका की थेरवाद परंपरा के ग्रन्थ हवे जेवना के रचना पाँचवीं सदी ईसवी में बुद्धघोष कइलें।

जातक कथा की रूप में बुद्ध की पिछला कई जनम के कहानी मिलेला जे में मनुष्य आ पशु पक्षी की रूप में बोधिसत्व के बार-बार जनम लिहला आ उनकी कार्य क वर्णन बा। जातक कथा के ज्यादातर हिस्सा के रचना चौथी सदी ईसवी में भइल मानल जाला।

ज्यादातर बिद्वान लोग गौतम बुद्ध क जनमभुईं कपिलवस्तु के मानेला जेवन दक्षिणी नेपाल में बा।
एकरी अलावा नेपाले में लुम्बिनी (वर्तमान रुम्मिनदेई) की बारे में काफ़ी बिद्वानन के मत बा कि इहाँ भगवान बुद्ध के जनम भइल रहे। 
एकरी आलावा उत्तर प्रदेश में पिपरहवा आ उड़ीसा में कपिलेश्वर के भी बुद्ध भगवान क जनमभुईं साबित करे के कोशिश होला। 
ज्यादातर लोग इहे मानेला कि गौतम गोत्र की शाक्य क्षत्रिय राजा शुद्धोदन जेवन कपिलवस्तु के राजा रहलें आ महारानी महामाया देवी कि पुत्र की रूप में उहाँ के जनम भइल आ सिद्धार्थ नाँव धराइल।
 
कहानी की मुताबिक महारानी महामाया सपना देखली कि एगो सफ़ेद हाथी उनकी गर्भ  में दाहिने ओर से प्रवेश करत बा। एकरी बाद गर्भवती रानी आपनी प्रसव खातिर नइहर जात समय लुम्बिनी नाँव की बन में लरिका के जनम दिहली। कहानी की मुताबिक राजकुमार के जनम पूर्णिमा के भइल जेवना के आज बुद्ध पूर्णिमा की रूप में मनावल जाला। कहानी इहो कहेले कि रानी के प्रसव की बाद मृत्यु हो गइल आ राजकुमार सिद्धार्थ के पालन-पोषन उनकर मौसी महाप्रजापति गौतमी कइली। ज्योतिषी लोग बिचार क के बतावल कि या त ई लरिका एगो चक्रवर्ती राजा होई या फिर भुत बड़ा संत-महात्मा।

राजा शुद्धोदन अपनी ओर से सभ कोशिस कइलें की लरिका सिद्धार्थ के कौनो दुःख संताप की बारे में पता न चले आ ई महान राजा बने। 
राजकुमार सिद्धार्थ के बियाह सोलह बारिस की उमिर में यशोधरा से भइल आ ऊ एगो लरिका के भी जनम दिहली जेकर नाँव राहुल भइल। 
सिद्धार्थ उन्तीस बारिस कि उमिर ले राजकुमार के जीवन बितवलन।

राजकुमार सिद्धार्थ एक दिन आपनी सारथि के ले के भ्रमण पर निकललें आ डहरी में उनके एगो द्ध व्यक्ति, एगो बीमार आदमी, एगो मृतक आ एगो सन्यासी देखाइल जेवना की बाद उनके संसार की दुखी रूप के परिचय मिलल। 
संसार की दुःख आ मरणशीलता के देखि के उनकर मन खिन्न हो गइल आ संसार की दुःख के कारण जाने खातिर आ जीवन क असली उद्देश्य जाने खातिर उहाँ के सन्यास ले लिहलीं। 
कहानी कहेले कि जब अपनी कंथक नाँव की घोड़ा पर चढ़ी के सारथि चन्ना की साथै राजकुमार महल से निकललें त देवता उनकी घोड़ा की टाप के आवाज हर लिहलें लोग जे से चुपचाप बिना पहरेदारन की जानकारी के ऊ बाहर निकल सकें। 
जीवन कि दुःख के परिचय पा के जीवन से बैराग आ सत्य की खोज में निकलला के बौद्ध कथा में महाभिनिष्क्रमण कहल गइल।
 

ज्ञान की खोज में सबसे पाहिले उहाँ के राजगीर गइलीं जहाँ के राजा बिम्बिसार के इ बात पता चल गइल। 
बिम्बिसार सिद्धार्थ के राजधानी आवे के नेवता दिहले लेकिन सिद्धार्थ मना क दिहलें आ कहले कि ज्ञान मिलला की बाद आपकी राज्य में सभसे पाहिले आइब। 
एकरी बाद उहाँ के योगी लोगन की संगत में जा के कठोर योग साधना कइलिन लेकिन ए से उहाँ के संतुष्टि ना मिलल।
अलग अलग मार्ग पर साधना कइला की बाद भी उहाँके वास्तविक ज्ञान ना मिलल। 
फिर खुद से अपनी मार्ग के चिंतन-मनन-साधना आ ध्यान द्वारा शुद्ध करत करत एक दिन पूर्णिमा की दिने उहाँके 'मार-विजय' क के ज्ञान के प्राप्ति भइल। 
जहाँ उहाँ के ज्ञान मिलल ओ जगह के अब बोधगया कहल जाला आ जेवनी पीपर की पेड़ की नीचे उहाँ के ध्यान लगवले रहलीं ओ के बोधिवृक्ष कहल गइल। 
एकरी बाद सिद्धार्थ गौतम से उहाँ क बुद्ध कहाए लगलीं। 
कहानी में इहो वर्णन मिलेला कि कठोर साधना की बाद समाधी से उठला पर उहाँ के एगो गँवईं कन्या सुजाता की हाथ से खीर ग्रहण कइलीं जे से उहाँ के साथी कौण्डिन्य आ अउरी चार लोग ई सोच के कि इनकर साधना भंग हो गइल उहाँ के छोडि के चलि गइल लोग। 
बोधि प्राप्त कइला की समय उहाँ के उमिर 35 बरिस रहे।
  

ज्ञान प्राप्त कइला की बाद महात्मा बुद्ध के दू गो व्यापारी लोग मिलल जेवन सबसे पहिले उहाँ के शिष्य बनल इन्हन लोगन के नाँव रहे तपुस्स आ भल्लिक
मानल जाला कि ई दूनो लोग शिष्य बनत समय आपन केश मुंडवा दिहल आ ऊ अब रंगून की लगे श्वे दगां में मंदिर में रक्खल बा।

एकरी बाद महात्मा बुद्ध यात्रा करत मृगदाव (वर्तमान सारनाथ)में आ के अपनी पाँच शिष्य लोगन के पहिला उपदेश दिहलीं ।
महात्मा बुद्ध की एही पहिला उपदेश के धर्मचक्रप्रवर्तन कहल जाला। 
एही पाँच शिष्यन की साथ उहाँ के संघ के अस्थापना कइलीं आ ई पांचो शिष्य अर्हत् बनल लोग। 
एकरी बाद जे जे बौद्ध धर्म के अनुयायी बनल संघ में शामिल होत गइल आ संघ क बिस्तार होत गइल।

पैतीस बरिस की उमिर से अस्सी बारिस की उमिर ले लगभग 45 साल भगवान बुद्ध घूमि-घूमि के भ्रमण करत आ शिक्षा आ उपदेश देत बितवलीं 
भ्रमण आ भिक्षा द्वारा जीवन यापन के चारिका कहल जाला।
 
महापरिनिर्वाण सूत्र की अनुसार 80 बारिस की उमिर में भगवान बुद्ध ई घोषणा क दिहलें की अब हम परिनिर्वाण के प्राप्त हो जाइबि (भौतिक देह के त्याग देइब)।
एकरी बाद ऊ कुंद नाँव की लोहार की द्वारा भेंट कइल भोजन कइलें जेवन उहाँ के अंतिम भोजन रहल एकरी बाद उहाँ के तबियत खराब हो गइल। 
उहाँ के आनंद के बोला के कुंद के समुझावे के कहलीं कि ऊ ई मत समझे कि एकर दोष ओकरी पर पड़ी ए मे कुंद क कौनो दोष ना बा आ ई भोजन अतुल्य रहल ह।
कहानी ई कहेले कि परिनिर्वाण से पहिले बुद्ध ठीक हो गइल रहलीं आ सामान्य रूप से देह त्याग कइलीं।
कुछ विद्वान लोग इहो कहेला कि उहाँके वृद्धावस्था की सामान्य लक्षण की अनुसार देह त्याग कइलीं आ ए में भोजन के दूषित रहल क कौनो बाति ना रहे।

कुशवती अथवा कुशीनारा (वर्तमान कुशीनगर) की बन में उहाँ के परिनिर्वाण के प्राप्त भइलिन आ अपनी शिष्य लोगन खातिर उहाँ के आखिरी वचन रहे कि 'सारा सांसारिक चीज नाशवान बा, अपनी मुक्ति खातिर बहुत ध्यान पूर्वक प्रयास करे के चाही' (पाली में : व्ययधम्मा संखारा, अप्पमादेन सम्पादेथा)।
परिनिर्वाण की बाद उहाँ के दाह संस्कार क दिहल गइल आ उहाँ के अस्थि अवशेष अलग अलग जगह पर सुरक्षित रखल गइल।
 




#Article 148: सआदत हसन मंटो (155 words)


सआदत हसन मंटो उर्दू क एगो बहुत मशहूर लेखक रहलें।
मुख्य रूप से उनकर प्रसिद्धि कहानी लेखक की तरे बा लेकिन कहानी की आलावा ऊ फिल्म के स्क्रिप्ट, रेडियोनामा आ नाटक भी लिखलें।

मंटो क जनम अंग्रेजन की समय की भारत में 11 मई सन 1912 ई. में समराला, पंजाब में भइल। 
मंटो के शुरूआती पढ़ाई अमृतसर में आ फ़िर इन्वार्सिटी के पढ़ाई अलीगढ़ में भइल।
बंबई (अब मुंबई) में रहि के काफ़ी लेखन कइलें आ सन 1948 ई. में ऊ पाकिस्तान चलि गइलें।

अंगरेजी हुकूमत आ पाकिस्तान सरकार दुनो उनपर तीन तीन बेर अश्लीलता के आरोप में मुकदमा चलावल लेकिन एक्को बेर आरोप साबित ना भइल। 
तमाशा उहाँ के पहिली कहानी रहे आ ए पर अंगरेजी हुकूमत प्रतिबन्ध लगा दिहलस। 
उनकी प्रसिद्द रचना में टोबा टेक सिंह, बू, ठंडा गोश्त, खोल दो, आ धुआँ  जइसन कहानी बाड़ी कुल।

खाली बयालिस बरिस की उमिर में उनकर देहांत लाहौर में 18 जनवरी, 1955 के हो गइल




#Article 149: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (248 words)


बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) बनारस में एगो केन्द्रीय विश्वविद्यालय बा। ए विश्वविद्यालय के स्थापना (बनारस हिंदू विश्वविद्यालय एक्ट, एक्ट क्रमांक 16, सन् 1915) महामाना पंडित मदन मोहन मालवीय जी के हाथे सन् 1916 में बसंत पंचमी के दिने भइल रहे। ए विश्वविद्यालय के मूल में डॉ. एनी बेसेन्ट द्वारा स्थापित आ चलावल जा रहल सेन्ट्रल हिंदू स्कूल रहल। आज क तारीख में ए विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के दर्जा मिल चुकल बा।

ए विश्वविद्यालय क पास दूगो परिसर बा। जेवना में पुरनका आ मूल परिसर (1300 एकड़) बनारस में बा जेवना के जमीन काशी नरेश दान में देले रहलन। एक परिसर में 6 गो संस्थान, 14 गो संकाय आ लामा नियरा 140 गो विभाग बाड़न स। विश्वविद्यालय के दूसरका परिसर मिर्जापुर जिला में बरकछा में (2700 एकड़) में बा। 75 गो छात्रावासन के साथे ई एशिया के सबसे बड़ रिहायशी विश्वविद्यालय ह जेवना में 30,000 से ढेर छात्र पढ़ेंले। एमें 34 देशन से आइल विदेशियो शामिल बाड़ें।

ए विश्वविद्यालय के प्रांगण में विश्वनाथ जी के एगो बड़हन मंदिरो बा, जेवना के बनारस में नवका विश्वनाथ मंदिर कहल जाला। एकरा अलावे ए विश्वविद्यालय में सर सुंदरलाल अस्पताल, गउशाला, प्रेस, स्टेट बैंक के शाखा, एनसीसी प्रशिक्षण केंद्र आ डाकखानो बाटे। सर सुंदरलाल, डॉ. एस. राधाकृष्णन, डॉ. अमरनाथ झा, आचार्य नरेंद्रदेव, हजारी प्रसाद द्विवेदी आ डॉ. रामास्वामी अय्यर नियर कइगो विद्वान इहवां कुलपति रहि चुकल बाड़ें।

वर्ष 2015-2016 ए विश्वविद्यालय के स्थापना के सउंवा बरिस रहे जेवना साल कई गो बड़हन सांस्कृतिक कार्यक्रम आ प्रतियोगितन के आयोजन संपन्न भइल।




#Article 150: कबीर (274 words)


कबीरदास चाहे संत कबीर 15वीं सदी के एगो संत महात्मा, रहस्यवादी आ कवी जिनके रचना आ उपदेश के परभाव, कुछ बिद्वान लोग के अनुसार तत्कालीन भक्ति आंदोलन पर पड़ल। इनकर जनम बनारस की लगे लहरतारा में भइल रहे। धार्मिक पाखण्ड की खिलाफ उपदेश दिहलें आ भगवान की निर्गुण रूप के आराधना करे के उपदेश दिहलें। निर्गुण भक्ति की कवि लोगन में कबीरदास क अस्थान बहुत ऊपर बा। कबीर के रचना सभ के अंश सिख धर्म के पबित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में भी शामिल मिले ला।

कबीर के जनम के बारे में जानकारी कथा-कहानी आ बिस्वास में तोपाइल बा। एगो कथा के मोताबिक इनकर जनम बाभन औरत से भइल रहल जेकर बियाह ना भइल रहे। एही कारन ऊ कबीर के त्याग दिहली आ ओकरे बाद इनका के मुस्लिम जोलहा परिवार पा गइल आ लालन-पालन कइल। इनके सुरुआती जिनगी मुस्लिम परिवार में बीतल एह बारे में साइद कमे संदेह बा, बाकी बाद में ई हिंदू संत आ गुरू रामानंद के परभाव में अइलें आ उनके चेला बन गइलें।

कबीर के हिंदू आ मुस्लिम दुनों धरम के आलोचना करे खाती जानल जाला। उनके अनुसार हिंदू लोग वेद से आ करमकांड से भरमाव में बा आ ऊ एह लोग के धार्मिक रेवाज सभ के भरपूर आलोचना कइलें जेह में जनेव आ खतना दुनों के बिरोध सामिल बा। इनका जिनगी में हिंदू आ मुस्लिम दुनों धरम के लोग इनके बिचार खातिर इनका के धमकावल। निधन के बाद इनके ऊपर दुनों धरम के लोग दावा कइल।(एह बात पर बिबाद भइल कि इनके जरावल जाय कि दफन कइल जाव)।

धर्मदास उनके वाणी क संग्रह  बीजक  नाम के ग्रंथ मे कइन जेकर तीन मुख्य भाग ह: साखी , सबद (पद), रमैनी 




#Article 151: पड़रौना (749 words)


पड़रौना या पडरौना भारत देश की उत्तर प्रदेश राज्य की उत्तरी पूरबी सीमान्त इलाका में एगो शहर बा जेवन जिला कुशीनगर के मुख्यालय हवे। ए शहर के प्राचीन नाँव पावा बतावल जाला जेवन मल्ल क्षत्री लोगन क राजधानी रहे। इहंवे से कुछ दूरी पर भगवान बुद्ध चुन्द नाँव की लोहार की घरे आपन आखिरी भोजन कइला की बाद बीमार पड़ल रहलें। प्राचीन पावा क अवशेष वर्तमान फाजिलनगर से थोड़ी दूर पर मानल जाला। एकरी नाँव की बारे में इहो मान्यता बा कि भगवान राम इहँवा कुछ समय बितावलें आ भगवान राम की पद से रौंदा अस्थान पदरौना आ फिन बाद में पडरौना हो गइल।

वर्तमान समय में ई शहर कुशीनगर जिला के मुख्यालय बा आ आसपास की इलाका की लोगन के बाज़ार से ले के शिक्षा आ रोजगार के मौका उपलब्ध करावत बा। इहाँ एगो चीनी मिल बा जेवन गन्ना उद्योग खातिर महत्वपूर्ण बा। उदित नारायण पोस्ट ग्रेजुएट कालेज ए इलाका में शिक्षा के महत्वपूर्ण केन्द्र बाटे।

पड़रौना या पडरौना क प्राचीन नाँव पावा बतावल जाला। प्राचीन काल में पावा (वर्तमान पड़रौना) मल्ल गणराज्य के राजधानी रहे आ इहँवा एगो संसद जइसन संथागार से ए इलाका क शासन चलावल जाय।

भगवान बुद्ध मल्ल लोगन के आमंत्रण पर इहँवा आ के उपदेश दिहलीं आ इहंवे चुन्द नाँव की लोहार की घरे आपन आखिरी भोजन ग्रहण कइलिन। एकरी बाद उहाँ के कुशीनारा या कुशवती की जंगल तक पहुँच के ककुत्था नदी पार क के तबियत खराब हो गइल। हालाँकि गौतम बुद्ध आनंद से कहलीं कि चुन्द से कहि दें कि ओकरी दिहल भोजन में कौनो खराबी ना रहल ह आ अब हमार परिनिर्वाण के समय आ गइल बा।
एकरी बाद भगवान बुद्ध आपन अन्तिम उपदेश दिहलें आ परिनिर्वाण प्राप्त कइलें। जहाँ भगवान बुद्ध के परिनिर्वाण (देह त्याग) भइल ओ अस्थान के अब कुशीनगर की नाँव से जानल जाला आ इहँवा परिनिर्वाण मंदिर आ रामभर स्तूप आज की समय में बौद्ध धर्म के तीर्थ आ पर्यटन केन्द्र की रूप में बा।

महाजनपद काल में ई इलाका कोसल की अंतर्गत आवे आ महाराजा प्रसेनजित की मरला की बाद ए क्षेत्र में छोट-छोट राज्य अस्थापित हो गइलें। मगध साम्राज्य की विस्तार की बाद ई क्षेत्र मगध की शासन में चलि गइल। मध्यकाल आ एकरी बाद के इतिहास बहुत न मालूम बा।

पड़रौना की नाँव के एगो अउरी उत्पत्ति बतावल जाला। कहल जाला कि भगवान राम ए क्षेत्र में कुछ समय रहलें आ उनकी पद से रौंदल इलाका के पद+रौंदा कहल गइल आ इहे बाद में पड़रौना हो गइल।

पड़रौना शहर क भूगोलीय अवस्थिति 26.9 उ. अक्षांश आ 83.98 पू. देशांतर पर बा। गोरखपुर से लगभग 75 कि.मी. पुरुब ओर आ देवरिया से ## कि.मी. उत्तर ओर स्थित बा।

भूआकृति विज्ञान की हिसाब से ई शहर मध्य गंगा मैदान की उत्तरी हिस्सा में बा आ एकरी कुछे उत्तर में तराई क इलाका शुरू हो जाला। जमीन जलोढ़ चट्टान से बनल बा आ ई जलोढ़ हिमालयी नदियन की द्वारा ले आवल अवसाद की निक्षेप से बनल बा। ज़मीन क सामान्य ढाल दक्खिन-पच्छिम से उत्तर-पूरुब ओर बा। पड़रौना से सटले उत्तर ओर वाणी नदी बहत रहे जेवना के धारा चीनी मिल बनवावे खातिर मोड़ दिहल गईल। वाणी नदी पच्छिम से पूरुब ओर बहे आ फिर उत्तर की ओर मुड़ के बेलवाँ जंगल कि लगे झरही नदी में मिल जाय। पड़रौना से थोड़ी दूर पहिले पच्छिम ओर ए में से एगो नाला खनवा के एकर पानी पहिलहीं झरही की ओर मोड़ दिहल गइल बा। लेकिन तबो अभिन ले एकर पुरान थाला मौजूद बा आ बरखा भइला पर पानी से भर जाला। चीनी मिल क ठंढा करे वाला फौवारा तालाब (cooling pond) आ दरबार क रामधाम पोखरा एही वाणी नदिए क हिस्सा हउवे।

जलवायु नम शीतोष्ण प्रकार के बा। जाड़ा, बसंत, गर्मी, बरसात क ऋतु पावल जालिन। मई के महीना में लूहि बहला पर प्रचंड गर्मी पड़ेले। तराई क इलाका नज़दीक रहला से इहाँ बरखा पहिले शुरू हो जाले आ ढेर होले। मानसून क आगमन लगभग 10 जून के। होला जाड़ा में कुहरा पड़ेला आ शीतलहरी की समय न्यूनतम तापमान 5 °C से नीचे भी चलि जाला। 
लूहि आ शीतलहरी की चरम तापमान की अलावा बरसात के उमस भरल गर्मी भी बहुत कष्टदायक होले। बाकी समय मौसम सुहावन रहेला।

माटी में नमी बहुत समय ले रहेले आ जमीन की नीचे पानी क लेवल (जल-स्तर) अबहिन बहुत नीचे नइखे गिरल। पड़रौना की दक्खिन ओर से बड़की नहर गुजरेले जेवना से जल स्तर सामान्य से ऊपर रहेला।

मुख्य फसल गन्ना आ धान बा। व्यापारिक कृषि की रूप में हरदी, पपीता, केला इत्यादी क खेती भी होला।

पड़रौना नगर पालिका क्षेत्र में कुल 25 ठे वार्ड बा आ कुल जनसंख्या 47,723 बाटे।




#Article 152: कुशीनगर जिला (1233 words)


कुशीनगर जिला भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के सभसे उत्तरी पूरबी हिस्सा में एगो जिला बा। एक जिला मुख्यालय पड़रौना नाँव के कस्बा से थोड़ी दूर दक्खिन ओर मौजूद रबिंद्र नगर धूस में बा। जिला के नाँव प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ आ पर्यटन के जगह कुशीनगर नाँव के अस्थान पर रखल गइल हवे।

आजादी के बाद से ई देवरिया जिला क हिस्सा रहे जेवना के 13 मई 1994 के अलग जिला बनावल गइल। सुरुआत में एह जिला के नाँव पडरौना जिला रहल जेकरा के बाद में प्रसिद्ध अस्थान कुशीनगर के नाँव पर 19 जून 1997 के कुशीनगर जिला क दिहल गइल।

वर्तमान कुशीनगर जिला के अंदर पड़े वाला इलाका के प्राचीन इतिहास के बारे में बतावल जाला कि इहाँ मल्ल लोग के राज रहल। बतावल जाला की कुशीनगर के पुरान नाँव राम के लइका कुश के नाँव पर पड़ल कुशवती बतावे ला आ मल्ल राज के स्थापना के समय 4250 ईसा पूर्व में लक्ष्मण के लड़िका चंद्रकेतु द्वारा भइल भी बतावे ला। पुरातत्व के साखी के आधार पर इतिहास लिखे वाला लोग जरूर माने ला कि तीसरी सदी ईसा पूर्व से पहिले भी कुशीनगर बौद्ध तीर्थ जरूर रहल होखी भले पुरातात्विक प्रमाण ना मिले ला।

मल्ल लोग के ई राज गणराज्य (रिपब्लिक) के रूप में रहल आ सोरह ठो महाजनपद सभ में से एक रहल। एहू के दू हिस्सा आ दू ठो राजधानी रहल। एक ठो राजधानी वर्तमान कसया के लगे कुशीनगर रहल आ दुसरी राजधानी पावा रहल जेकर वर्तमान जगह फाजिलनगर मानल जाला। एह दुनों जगहन के इतिहासी महत्व बा। कुशीनगर में गौतम बुद्ध के निधन भइल आ पावा में महावीर के।

बाद के समय में ई इलाका मगध राज, मौर्य साम्राज्य आ गुप्त साम्राज्य के अधीन रहल। अशोक के काल में इहाँ कुशीनगर में गौतम बुद्ध के निधन वाला अस्थान पर स्तूप बनवावल गइल। बाद के समय में हिंदू राजा लोग परिनिर्वाण मंदिर के निर्माण करावल।

अंत में ई इलाका हर्ष के शासन में रहल आ पूर्व-मध्य काल में कलचुरी क्षत्री लोग के शासन में आइल। मानल जाला कि बारहवीं सदी तक ले कुशीनगर नाँव के ई राजधानी आबाद रहल आ ओके बाद धीरे-धीरे एकर महत्व कम हो गइल। मुस्लिम आक्रमण के बाद बौद्ध लोग एह अस्थान के छोड़ के भाग गइल आ ई बौद्ध तीर्थ बिलुप्त हो गइल।

दुबारा एह जगह के 19वीं सदी में खोज भइल। अलेक्जेंडर कनिंघम के अगुआई में आ बाद में उनके सहजोगी ए॰ सी॰ एल॰ कार्लाइल द्वारा एह इलाका में पुरातात्विक खोदाई के काम भइल आ बुद्ध के लेटल मुर्ती मिलल। 

कुशीनगर जिला के भूगोलीय लोकेशन 26.55 N अक्षांस से 27.31 N अक्षांस आ 83.5 E देशांतर से 84.42 E देशांतर के बीचा में बा। जिला के आकृति लगभग त्रिभुज नियर बा जेकर आधार दक्खिन ओर आ शीर्ष उत्तर ओर बाटे। पूरबी कोना बिहार राज्य में घुसल बा आ एह जिला के उत्तर-पूरुब में बिहार के पच्छिम चंपारण जिला आ दक्खिन-पूरुब में बिहारे के गोपालगंज जिला पड़े लें। गंडक नदी कुशीनगर जिला आ पच्छिम चंपारण जिला के बीच के ज्यादातर सीमा बनावे ले। एह जिला के दक्खिन में देवरिया जिला बा जवना से अलगा हो के कुशीनगर खुद एगो जिला बनल। दक्खिन-पच्छिमी सीमा गोरखपुर जिला के साथे बने ले आ ज्यादातर हिस्सा मझाना नदी से बने ले। उत्तर-पच्छिमी सीमा महाराजगंज जिला के साथे बने ले जवन उत्तरी हिस्सा में कुछ दूर ले छोटी गंडक नदी के सहारे-सहारे बने ले। नेशनल हाइवे नंबर 27 (पुराना नंबरिंग में NH28) एह जिला के लगभग बीच से हो के पूरुब-पच्छिम के दिसा में गुजरे ला आ हाटा, कसया आ तमकुही राज जइसन बजार एही पर पड़े लें। कसया से पडरौना ले नेशनल हाइवे 724 (पुराना नंबरिंग में NH28B) जाला आ उतर-दक्खिन दिसा में बाटे।

भूआकृति बिज्ञान के हिसाब से ई जिला बिचला गंगा मैदान में पड़े ला आ अउरी डिटेल में बतावल जाय त घाघरा-गंडक दुआबा के हिस्सा हवे। कुल मिला के ई जलोढ़ चट्टान वाला क्षेत्र हवे आ प्राचीन काल के टीथीज सागर में जमा भइल भूपदार्थ सभ से बनल हवे। जिला के औसत ढाल उतर दिसा से दक्खिन-दक्खिन पूरुब दिसा में बाटे। गंडक आ छोटी गंडक एह जिला के पानी बहा के ले जाए वाली मुख्य नदी हई, गंडक एकरे उत्तरी पूरबी हिस्सा (सीमा) से बहे ले आ छोटी गंडक एकरे पच्छिमी हिस्सा में उत्तर-दक्खिन दिसा में बहे ले। अउरी प्रमुख नदी सभ में पडरौना शहर के उत्तर में बहे वाली झरही नदी आ अउरी उत्तर में बाँसी नदी, कुशीनगर के पच्छिम से बहे वाली खनुआ नदी, आ छोटी गंडक से पच्छिम ओर बहे वाली एकर सहायक माउनि नदी प्रमुख नदी बाड़ी। एह इलाका में जगह-जगह कई गो ताल भी पावल जालें, इनहन में पिपरा मुफ्ती आ तुर्कहा ताल आ पिपरइचा ताल प्रमुख बाने।

कुशीनगर के पच्छिम ओर गोरखपुर में मौसम बेध वाला इस्टेशन बा जहाँ के आँकड़ा एह जिला का प्रतिनिधित्व करे वाला मानल जा सके ला। एह आँकड़ा सभ के हिसाब से देखल जाय तब जनवरी के महीना सभसे ठंढा होला आ एह महीना के औसत अधिकतम डेली तापमान 23 C आ न्यूनतम औसत डेली तापमान 9.9 C रहे ला। मई के महीना सभसे गरम होला आ एह महीना में इहे अधिकतम औसत डेली ताप बढ़ के 39 C आ न्यूनतम औसत डेली तापमान 25.9 C हो जाला। कुल सालाना औसत बरखा 1203 मिलीमीटर होले आ एकर ज्यादातर हिस्सा जून से सितंबर ले रहे वाला मानसून के सीजन में होला।

साल 2011 के जनगणना के आँकड़ा के अनुसार कुशीनगर जिला के कुल जनसंख्या 3,560,830 रहल, यानी कि लिथुआनिया देस के बराबर या अमेरिकी राज्य कनेक्टिकट के बराबर एह जिला के जनसंख्या रहल। एह हिसाब से भारत के 640 जिला सभ में एह जिला के रैंक 81वाँ रहल। जिला में जनसंख्या घनत्व  रहल। जिला में जनसंख्या बढ़ती के दर 2001-2011 के एक दशक के अवधि में 23.08% रहे। कुशीनगर जिला में लिंगानुपात  955 औरत प्रति 1000 मरद रहल, आ साक्षरता दर 67.66% दर्ज कइल गइल।

कुशीनगर जिला के अर्थब्यवस्था मुख्य रूप से खेती आधारित बा आ इहँवा के 77 प्रतिशत जमीन पर खेती कइल जा रहल बाटे। नेट बोवाई वाला क्षेत्र के रकबा 223,166 हजार हेक्टेयर दर्ज कइल गइल बा आ 5156 हेक्टेयर जमीन परती के रूप में रहल; जिला में फसल इंटेंसिटी 156.1 % दर्ज कइल गइल। कुल खेतिहर लोग के जनसंख्या 2,85,698 रहल जेह में ज्यादातर लोग (2,75,698) छोटहन आ सीमांत किसान रहे। इलाका में उपराजल जाए वाली प्रमुख फसल सभ में धान, ऊख, गोहूँ, मसुरी इत्यादि बाटे। सिंचनी के साधन के रूप में नहर आ ट्यूबवेल के इस्तेमाल प्रमुख बा। खेती के साथे-साथ गाइ, भइस, भेड़-बकरी नियर मवेशी पालल जालें।

साल 2010-11 में पूरा जिला में रजिस्टर्ड उद्योगी इकाई सभ के गिनती 3,736 रहल जेह में आठ गो इकाई मध्यम भा बड़ कटेगरी में रहलीं स। एह में से ज्यादातर इकाई सभ पड़रौना में स्थापित बाड़ी सऽ। एकरे अलावा कसया, सिर्गतिया, नदवार आ सिसवा बुजुर्ग में उद्योगिक इकाई स्थापित बा।

चीनी मिल एह इलाका में सभसे प्रमुख आर्थिक आधार हवे। पड़रौना, सेवरही, रामकोला, लक्ष्मीगंज, खड्डा आ हाटा नियर जगहन पर चीनी मिल बाड़ी स। कुल छह गो भारी चीनी मिल के अलावे एह इलाका में छोट लेवल पर भी क्रशर स्थापित बाने। हाल के समाचारन के मोताबिक एकरा फिर चालू होखे के उमेद बा।

जहाँ तक ले जिला के आर्थिक बिकास के बात बा, साल 2006 में पंचायती राज मंत्रालय द्वारा देस के कुल 640 जिला सभ में से बीछल गइल 250 सबसे बैकवर्ड जिला सभ में कुशीनगर जिला भी शामिल कइल गइल रहे। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के 34 गो जिला सभ में से इहो जिला एक बा जेकरा के पिछड़ा क्षेत्र ग्रांट फंड प्रोग्राम (BRGF) के तहत धन जारी कइल जा रहल बा।




#Article 153: अंगरेजी (1177 words)


अंगरेजी, भा अंगरेजी भाषा (English language) मूल रूप से इंग्लैंड क भाषा हवे जेवन अब हर ओ देश में बोलल जात बा जहाँ जहाँ अंग्रेज लोग राज कइलें। आज अमेरिका, आस्ट्रेलिया आ न्यूज़ीलैंड जइसन देशन में ई मुख्य भाषा बा आ भारतीय क्षेत्र में भी ए भाषा क प्रचलन बहुत बा। भारत के मिजोरम नीयन कुछ राज्यन में ई सरकारी भाषा हवे।

भाषा बिज्ञान के बँटवारा के हिसाब से अंगरेजी एगो पच्छिमी जर्मनिक भाषा हवे जे मध्यकालीन इंग्लैंड में बोलल जाय आ अब बैस्विक रूप से संपर्क भाषा (लिंग्वा फ़्रैंका) बन चुकल बा। प्राचीन काल में जर्मनिक मूल के  एंगल्स नाँव के एगो जनजाति उत्तर-पूरुब दिशा से प्रवास क के इंग्लैंड आइल रहे जिनहन लोग के नाँव में एह भाषा के नाँव के जरि बा। अंतिम रूप से एह भाषा के नाँव बाल्टिक सागर में मौजूद एंग्लिया या एंग्लेन नाँव के प्रायदीप के नाँव पर पड़ल। अपना उच्चारण आ ब्याकरण के हिसाब से ई फ्रायसियन भाषा से सभसे नजदीक हवे, हालाँकि, एकरे शब्दभंडार में कई गो जर्मनिक भाषा सभ के परभाव सुरुआती मध्यकाल में पड़ल आ बाद में एह पर रोमांस भाषा सभ, खासतौर पर फ्रांसीसी आ लैटिन भाषा, के परभाव बहुत ढेर पड़ल। 

अंगरेजी भाषा के सुरुआती रूप के पुरनकी अंगरेजी (ओल्ड इंग्लिश) या एंग्लो-सैक्सन (c. 550–1066 CE) कहल जाला। पुरनकी अंगरेजी के बिकास नार्थ सागर के आसपास के जर्मनिक बोली सभ से भइल जे फ्रायसिया, लोवर सैक्सनी, जटलैंड आ दक्खिनी स्वीडन में बोलल जाँय। एह बोली सभ के बोले वाला लोग के एंगेल्स, सैक्सन आ जट लोग कहल जाला।  पाँचवीं सदी में ईहे ऐंग्लो-सैक्सन लोग उत्तर से आ के ब्रिटेन में बसे सुरू कइल आ ब्रिटेन से रोमन लोग के लखेदे सुरू कइल। सातवीं सदी के अंत ले रोमन लोग ब्रिटेन से बहरिया गइल आ जर्मनिक मूल के ऐंग्लो-सैक्सन भाषा ब्रिटेन के रोमानी भाषा सभ (43–409 CE) क जगह ले लिहलस। एह रोमनी भाषा सभ में: आम ब्रितानी, एगो सेल्टिक आ लैटिन भाषा रहे जे सीजर द्वारा ब्रिटेन पर कब्ज़ा के समय के बाद इहाँ स्थापित भइल रहे। इंग्लैंड आ इंग्लिश (मूल रूप से Ænglaland आ Ænglisc) एही एंगल्स लोग के नाँव पर पड़ल हवे।

आठवीं से बारहवी सदी के बीच, पुरनकी अंगरेजी धीरे-धीरे क्रमिक रूप से कई भाषा सभ के संपर्क के कारण मध्यकालीन अंगरेजी (मिडिल इंग्लिश) के रूप लिहलस। एगो अट्रेंडम तरीका से मिडिल इंग्लिश के सुरुआत के विलियम (दि कॉन्करर) के इंगलैंड बिजय 1066 से भी जोड़ल जाला हालाँकि, एकर बिकास 1200–1450 के बीच ले के समय तक ले होखत रहल।

बारहवीं सदी तक पहुँचत-पहुँचत मिडिल इंग्लिश के पूरा बिकास हो गइल। एह में नॉर्स आ नॉरमन बिसेसता आ लच्छन सभ के समन्वय हो गइल आ इहे भाषा सुरुआती मॉडर्न अंगरेजी (1500) के बिकसित होखे से ठीक पहिले तक ले बोलल लिखल गइल। एह जमाना के साहित्यिक रचना में ज्यॉफ्री चौसर के दि कैंटरबरी टेल्स आ मैलरी के ले मोर्टे डि 'आर्थर के नाँव गिनावल जाला। एह दौर में क्षेत्रीय बोली सभ के साहित्य में प्रयोग में बढ़ती भइल आ ई चौसर नियर लोग द्वारा खास परभाव पैदा करे खातिर इस्तेमाल कइल गइलीं। 

अंगरेजी भाषा के इतिहास में अगिला दौर के सुरुआती मॉडर्न इंग्लिश (1500–1700) के दौर कहल जाला। एह काल में जवन भाषा बिकसित भइल ओह में शामिल होखे वाला नया लच्छन रहलें: ब्यापक स्वर घसकाव (ग्रेट वॉवेल शिफ्ट) (1300-1700), इन्फ्लेक्शन के सहज होखल, आ भाषाबैज्ञानिक मानकीकरण (स्टैंडराइजेशन)।

साल 2016 तक ले दुनिया में कुल 400 मिलियन (40 करोड़) लोग मूलभाषा के रूप में अंगरेजी बोले वाला रहल, मने कि एह लोग के पहिली भाषा अंगरेजी हवे; लगभग 1.1 बिलियन लोग एकरा के दुसरी भाषा के रूप में बोले वाला रहल। अनुमान इहे बा कि अंगरेजी साइद दुनिया के तिसरी सभसे ढेर बोलल जाए वाली भाषा बा जेकरा से आगे दू गो भाषा बाड़ी सऽ, दुनिया के सभसे ढेर लोग द्वारा बोलल जाये वाली मैंडारिन, आ दुसरा नमर पर सभसे ढेर बोलल जाए वाली स्पेनिश भाषा। हालाँकि, मूलभाषा आ गैर-मूलभाषा के रूप में बोले वाला लोग के जोड़ दिहल जाय तब जरूर हो सकेला कि ई दुनिया के सभसे बड़ भाषा होखे, निर्भर एह बात पर बा कि अइसन अनुमान कवना परिभाषा के आधार पर लागावल जा रहल बा। अंगरेजी बोले वाला लोगन के समुदाय हर महादीप, दीप आ समुंद्री इलाका में जरूर मिल जाई। 

जवना देस सभ में अंगरेजी बोलल जाला उनहन के अलगा-अलगा समूह में बाँट के भी देखल जा सकत बा। आमतौर पर ई तीन गो सर्किल के रूप में बाँटल जाला: अंदरूनी सर्किल में अइसन देस आवे लें जहाँ के मूलभाषा अंगरेजी हवे या फिर जहाँ के भाषा अंगरेजी के ऊँच साहित्यिक स्टैंडर्ड आ एकरे चालढाल के तय करे ला। अंगरेजी कौनों एगो देस के भाषा ना बा, न इ खाली अइसने देस सभ के भाषा बा जहाँ अंगरेज लोग जा के बस गइल। कई अइसन देस भी बाने जहाँ कुछे अंगरेज लोग जाके बसल बाकिर ई भासा उहाँ के राष्ट्रभाषा बाटे। एकरे अलावा ई अंतरराष्ट्रीय लेवल पर आपसी संबाद आ संपर्क के भाषा में भी बिकसित हो चुकल बा आ भूगोल के कौनों भी हिस्सा में जहाँ दू लोग एक दुसरा के भाषा न बूझत होखे, एकर इस्तेमाल क सके ला।

ऊपर बतावले गइल बा कि अंगरेजी बोले वाला बिस्व के तीन को सर्किल भा हल्का में बाँटल जाला। तीन हल्का वाला एह मॉडल में अंदरूनी हल्का (इनर सर्किल), में अइसन देस आवे लें जहाँ के बिसाल लोकल समुदाय मूल भाषा भा महतारी भासा के रूप में बोले सीखे ला, बाहरी हल्का (आउटर सर्किल) में मूलभासा के रूप में अंगरेजी जाने बोले वाला लोग के संख्या कम बा बाकी दुसरी भासा के रूप में एकर ब्यापक चलन बा आ पढ़ाई-लिखाई आ मीडिया प्रसारण सभ में अंगरेजी के बहुतायत से इस्तमाल हो रहल बा आ सरकारी कामकाज में भी एकर भरपूर इस्तमाल हो रहल बा, अंत में बिस्तारवान हल्का (एक्सपैंडिंग सर्किल) बा जहाँ के लोग बिदेसी भाषा के रूप में अंगरेजी सीखे-पढ़े ला। अंगरेजी भासा के भूगोलीय बिस्तार के ई मॉडल भारतीय भाषाबिग्यानी ब्रज काचरू के दिहल गइल हवे आ ई अंगरेज लोग आ अंगरेजी के इतिहासी बिस्तार के आधार पर बनावल गइल हवे।

अइसन देस जहाँ अंगरेजी के मूलभासाभासी (नेटिव स्पीकर) लोग बहुतायत में बा, अंदरूनी हल्क़ा के रूप में चिन्हित कइल गइल बा आ एह में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, आस्ट्रेलिया, कनाडा, आयरलैंड आ न्यूजीलैंड के सामिल कइल गइल बा जबकि उल्लेखनीय संख्या में बोले वाला लोग के आबादी होखे के कारन दक्खिन अफिरका के भी एही सर्किल में गिनल जाला। मूलभासा के रूप में अंगरेजी बोले वाला लोग के आबादी के हिसाब से सजावल जाय तब सभसे ऊपर यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका (कमसेकम 231 मिलियन या 23.1 करोड़), आ एकरे बाद घटत क्रम से यूनाइटेड किंगडम (60 मिलियन भा 6 करोड़), कनाडा (19 मिलियन या 1.9 करोड़), आस्ट्रेलिया (कम से कम 17 मिलियन), दक्खिन अफिरका (4.8 मिलियन या 48 लाख), आयरलैंड (42 लाख), आ न्यूजीलैंड (37 लाख) के नाँव गिनावल जा सके ला। एह देस के बच्चा अपना माई-बाबू से अंगरेजी सीखे लें आ लोकल लोग जिनहन लोग के आपन भाषा कवनों दूसर बा या बाहर से आ के बसे वाला लोग (इमिग्रेंट) एह माहौल में आ कामकाज के जगह पर बातचीत करे खातिर अंगरेजी सीखे ला। ई अंदरूनी हल्क़ा एगो अइसन आधार भा बेस देला जहाँ से बाहर के ओर अंगरेजी के बिस्तार होला।




#Article 154: कोलकाता (349 words)


कोलकाता (पुरान नाँव कलकत्ता) भारत देस के पच्छिम बंगाल राज्य क राजधानी हऽ। हुगली नदी के पूरबी तीरे पर बसल ई शहर आर्थिक, ब्यापारिक आ सांस्कृतिक हिसाब से बहुत महत्व वाला शहर ह आ पूरबी भारत के सभसे बड़ शहर भी हवे; कलकत्ता बंदरगाह भारत के सभसे पुरान अभिन ले चालू बंदरगाह हवे आ अपना तरह के अकेल बंदरगाह हऽ जे नदी के सहारे बाटे। शहर के सांस्कृतिक राजधानी मानल जाला आ अंगरेजी में एकर सिटी ऑफ ज्वाय (आनंद के नगर) के रूप में परसिद्धी बा। साल 2011 के जनगणना के आँकड़ा अनुसार, कोलकाता शहर के कुल जनसंख्या 4.5 मिलियन (45 लाख) रहल, जबकि एकरा उपशहरी इलाका सभ के सामिल कइ के कुल जनसंख्या 14.1 मिलियन (141 लाख) रहल, एह हिसाब से ई भारत के तिसरा सभसे ढेर जनसंख्या वाला शहर बा। हाल के अनुमान सभ के मोताबिक कोलकाता मेट्रो एरिया के अर्थब्यवस्था के आकार $60 से $150 बिलियन (परचेजिंग पावर पैरिटी खाती जीडीपी के एडजस्ट कइ के) बाटे जेकरा चलते ई शहर मुंबई आ दिल्ली के बाद भारत के तिसरहा सभसे बड़ आर्थिक केंद्र भी बा। 

सत्रहवीं सदी ईसवी की अंत में कलकत्ता नाँव से अस्थापित ई शहर अंग्रेजन की समय में (सन 1911 ई. से पहिले ले) पूरा भारत क राजधानी रहे। एही से एकर इतिहास आ संस्कृति की हिसाब से बहुत महत्व बा। कलकत्ता बंदरगाह भारत क सबसे पुरान बंदरगाह हवे। आर्थिक आ ब्यापारिक दृष्टि से सबसे बड़ शहर रहला से इहाँ रोजी-रोजगार खातिर पुरा भारत से लोग आवे आ उत्तर प्रदेश आ बिहार की भोजपुरिहा इलाका क लोग ए में प्रमुख रहे। लोकगीत आ किस्सा-कहानी की जरिये  कलकत्ता से भोजपुरिया संस्कृति क जुड़ाव आजु ले महसूस कइल जा सकेला।

सतरहवीं सदी के नक्शा सभ पर कलकत्ता भा कोलिकाता कहीं ना देखाई पड़े ला हालाँकि, गोबिंदपुर आ सुतानुती जरूर एह नक्शा सभ पर लउके लें। कलकत्ता (Calcutta) शब्द के पहिला इस्तेमाल 1688 के लिखल एगो चिट्ठी में मिले ला जे ढाका से ईस्ट इंडिया कंपनी के एजेंट लोग द्वारा लिखल गइल रहे, 1689 में जॉब चार्नूक, जिनके एह शहर के संस्थापक मानल जाला, अपना खत-किताबत में एह नाँव के ऑफिशियल तरीका से इस्तेमाल शुरू क दिहलें।




#Article 155: सरजू नदी (229 words)


सरजू (अउरी नाँव - सरयू नदी, घाघरा नदी, सरजू मइया) हिमालय पर्वत से निकले वाली आ उत्तरी भारत की गंगा मैदान में बहेवाली एगो नदी ह जेवन नेपाल से भारत में प्रवेश करेले आ बलिया आ छपरा की बीच में गंगा नदी में मिल जाले। हिन्दू धर्म में अवतार मानल जाए वाला भगवान राम के जनम एही सरयू नदी की तीरे अजोध्या में भइल रहे। अपनी ऊपरी हिस्सा में ई नदी दू गो धारा में पहिचानल जाले काली आ करनाली (घाघरा) जिनहन की संगम की बाद ए के सरयू या घाघरा कहल जाला। थोड़ी दूर बाद ए में शारदा(नेपाल में नाँव: महाकाली) नदी मिल जाली। भारत में ई नदी पूरा रास्ता भर उत्तर प्रदेश में बहेले आ अंत में थोड़ी दूर ले उत्तर प्रदेश आ बिहार क सीमा बनावेले।

सरजू नदी क प्रमुख सहायक नदी राप्ती हवे जेवना की तीरे गोरखपुर नगर बसल बा आ ई बरहज की लगे सरजू जी में मिल जाले। राप्ती की आलावा अउरी कई गो छोट-बड़ नदी ए में मिलेली।

सरजू जी अपनी विशाल जलराशि खातिर जानल जाली आ निचला हिस्सा में कबो-कबो बाढ़ि आवेले। लखीमपुर-खीरी जिला में ई नदी दुधवा बाघ अभयारण्य से हो के गुजरेली आ हाले में सूँस की संरक्षण खातिर एहू नदी में कोसिस कइल जात बा। 
इय के नजदीका शहर के नाम फैजाबाद,राजेसुल्तानपुर ,टाँन्डा है
राम नवमी के अजोध्या जी में लाखन लोग सरजू जी में अस्नान करे आवेला।




#Article 156: एशिया (402 words)


एशिया () धरती के सभसे बड़हन आ सभसे ढेर जनसंख्या वाला महादीप हऽ, मुख्य रूप से उत्तरी आ पूरबी गोलार्धन में पड़े ला, यूरोप के साथे मिल के दुनो के यूरेशिया कहल जाला आ अफिरका के साथे मिला के बनल क्षेत्र एफ्रो-एशिया के नाँव से जानल जाला। एशिया के कुल क्षेत्र बिस्तार  बा जे पृथ्वी के कुल जमीनी हिस्सा के लगभग 30% हिस्सा बा आ पूरा धरती के सतह के क्षेत्रफल के 8.7% बाटे। ई महादीप, बहुत पुराना समय से मानवीय जनसंख्या के निवास अस्थान रहल बा, आ दुनिया के कई गो सुरुआती सभ्यता सभ के जनमभूँइ हवे। ई महादीप खाली अपना बड़हन बिस्तार आ ढेर खा जनसंख्ये खातिर ना जानल जाला बलुक इहाँ कई गो बहुत घन बसल इलाका भी बाने आ कई गो बिसाल इलाका जहाँ बहुत बिरल जनसंख्या बसाव बाटे। एशिया के कुल जनसंख्या लगभग 4.4 बिलियन बाटे। 

एकरा बिसाल साइज आ बिस्तार के अउरी इहाँ मौजूद बिबिधता के  धियान में राखल जाय तब एशिया के संकल्पना (कांसेप्ट) — मने कि एगो नाँव जे पुराना जमाना से चलन में बा — वास्तव में मानव भूगोल के संकल्पना ढेर बुझाला, न कि भौतिक भूगोल के। एशिया अपना भूगोलीय क्षेत्र सभ के स्तर पर जातीय समूह, संस्कृति, पर्यावरण, अर्थब्यवस्था, इतिहासी संबंध आ शासन के सिस्टम सभ के मामिला में  बहुते बिबिधता वाला महादीप ह। इहाँ के जलवायु में भी बहुते भारी बिबिधता बा, जहाँ एक ओर मध्य पूरब के इलाका बा जे गरमी में खूब गरम प्रदेश हो जाला तहाँ महादीपीय जलवायु के नमूना के रूप में साइबेरिया भी बा जहाँ जाड़ा में तापमान बहुते नीचे गिर जाला।

एशिया पृथ्वी के सभसे बड़हन महादीप हवे। पृथ्वी के सतह के 8.8% भाग (या कुल जमीनी हिस्सा के 30% भाग) पर एकर बिस्तार बा, आ एकर  लगभग  के समुंद्री तटरेखा (कोस्टलाइन) सगरी महादीपन में सभसे लमहर बा। एशिया के परिभाषा दिहल जाला कि ई यूरेशिया के अइसन हिस्सा हवे जे यूराल परबत के पूरब में बा। वास्तव में ई परंपरागत सीमा हवे, एशिया यूरेशिया के कुल इलाका के पाँच हिस्सा में से चार हिस्सा भर के इलाका हऽ आ यूराल परबत आ स्वज नहर के पूरब आ काला सागर, काकेशस परबर आ कैस्पियन सागर के दक्खिन के हिस्सा एशिया महादीप मानल जाला। एकरे पूरुब में प्रशांत महासागर, दक्खिन में हिंद महासागर आ उत्तर में आर्कटिक महासागर बा। एह महादीप में कुल 48 देस बाने, इनहन में से तीन गो (रूस, कजाकिस्तान आ तुर्की) के कुछ जमीनी हिस्सा यूरोप महादीप में भी पड़े ला।




#Article 157: बांग्लादेश (105 words)


बांग्लादेश () एशिया महादीप में एगो देस बा। क्षेत्र की दृष्टि से एकर गिनती भारतीय उपमहादीप आ दक्खिनी एशिया में होले। बांग्लादेश क जनसंख्या लगभग  1,50,03,900 (बिस्व में 8वाँ अस्थान) बा आ क्षेत्रफल 1,47,570 किमी2 (विश्व में 94वाँ अस्थान)बा।

बांग्लादेश क अंतर्राष्ट्रीय सीमा तीन ओर भारत से आ सुदूर दक्खिन-पूरुब माथ पर म्याँमार से मिलेला।

बांग्लादेश अंगरेजी राज में भारते क हिस्सा रहे आ 15 अगस्त 1947 के भारत के बँटवारा के बाद ई इलाका पूरबी पाकिस्तान की रूप में अलगा हो गइल। 1971 ई. में ई पकिस्तान से आजाद हो के एगो अलगे राष्ट्र बन गइल।

बांग्लादेश में बंगाली आ उर्दू मुख्य भाषा बा।




#Article 158: नरेंद्र मोदी (897 words)


नरेन्द्र दामोदरदास मोदी (17 सितम्बर 1950) एगो भारतीय राजनीतिज्ञ आ भारत के 14वाँ आ वर्तमान परधानमंत्री बाड़ें। मोदी 26 मई 2014 के प्रधानमंत्री पद के शपथ लिहलें। भारत के अबतक भइल प्रधानमंत्री लोग में मोदी आजाद भारत में जनमल पहिला प्रधानमंत्री बाड़ें। एकरा पहिले ऊ गुजरात के मुख्यमंत्री रहलें आ वर्तमान में बनारस लोकसभा सीट से सांसद बाङे। नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी के सदस्य, हिंदू राष्ट्रवादी आ दक्खिनपंथी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य हवें।

बडनगर में एगो गुजराती परिवार में पैदा मोदी, बचपन में अपना बाबूजी के चाय के दुकान पर मदद करें, बाद में आपन दुकान लगावे लगलें। स्वयंसेवक संघ से उनके परिचय आ जुड़ाव आठ बरिस के उमिर में भइल। ग्रेजुएशन के पढ़ाई के बाद मोदी घर छोड़ दिहलें, कारण बियाह बतावल जाला जेकरा के मोदी स्वीकार ना कइलें। दू साल खातिर भारत के बिबिध इलाका सभ में घूमे के बाद 1969 या 1970 में अहमदाबाद लवटलें। 1971 में आरएसएस के फुल-टाइम मेंबर बन गइलें आ 1975 के इमरजेंसी के दौर में कुछ दिन इनके लुकाये के परल। 1985 में आरएसएस इनके भाजपा में भेज दिहलस, पार्टी के बिबिध पद पर रह के काम करत साल 2001 में एकर जनरल सेक्रेटरी बनलें।

मोदी 2014 के आम चुनाव में भाजपा के अगुआई कइलेन आ पार्टी लोकसभा में बहुमत से आइल। कौनों पार्टी के 1984 के बाद से पूर्ण बहुमत पहिली बेर मिलल बा। मोदी खुद बनारस लोक सभा सीट से चुनल गइलें। परधानमंत्री बनले के बाद से मोदी प्रशासन के कोसिस रहल बा कि देस में बिदेसी डाइरेक्ट निवेश के बढ़ावा दिहल जाय, मूलभूत संरचना पर खरच ढेर कइल जाय, आ स्वास्थ्य आ सामाजिक कल्याण के ऊपर होखे वाला खर्चा में कटौती कइल जाय। मोदी के सारकार द्वारा ब्यूरोक्रेसी के दक्षता बढ़ावे आ आ सेंट्रलाइज हो चुकल पावर के छितरावे के कोसिस में योजना आयोग के भंग क दिहल गइल बा। इनके द्वारा देस भर में हाई-प्रोफाइल सफाई अभियान चलावल गइल बा आ पर्यावरण आ मजूरी संबंधी कानून के कमजोर भा खतम क दिहल गइल बा। मोदी के देस के राजीनीत के दक्खिनपंथी राजनीति के तरफ ओरमावे खातिर इंजीनियरी करे के क्रेडिट दिहल जाला आ इनके हिंदू राष्ट्रवादी बिसवास आ गुजरात दंगा में भूमिका के ले के देस में आ देस के बाहर बिबादास्पद छवी बा; एह दुनों बात के, सामाजिक भेदभाव वाला एजेंडा रखे वाला ब्यक्ति होखे के सबूत के तौर पर भी प्रस्तुत कइल जाला।

नरेंद्र मोदी के जनम 17 सितंबर 1950 के एगो गुजराती परिवार में, मेहसाणा जिला (ओह समय के बांबे स्टेट, अब गुजरात) के वडनगर में भइल। बाबूजी दामोदरदास मूलचंद मोदी (c.1915 - 1989) आ महतारी हीराबेन मोदी (जनम c.1920) के छह गो में नरेंद्र मोदी तिसरा संतान रहलें। मोदी के परिवार मोध-घाँची-तेली समुदाय के हवे, जेकरा के सरकारी तौर पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में गिनल जाला।

लरिकाईं में मोदी वडनगर रेलवे टीशन पर चाय बेचे में अपने बाबूजी के मदद करें, बाद में अपना भाई के साथे खुद के छाया के दुकान बस अड्डा के लगे चलवलें। मोदी साल 1967 में वडनगर से इंटर के इम्तिहान पास कइलें, जहाँ उनके एगो अध्यापक औसत दर्जा के बिद्यार्थी आ बाद-बिबाद में रूचि रखे वाला आ थियेटर में लगाव रखे वाला बिद्यार्थी के रूप में बतवलें। बाद-बिबाद प्रतियोगिता में मोदी के कुशलता उनके संघे पढ़े वाला बिद्यार्थी आ उनके मास्टर साहब लोग चिन्हित कइल। मोदी नाटकन (थियेटरन) में बहुत बिसाल व्यक्तित्व (लार्जर-देन-लाइफ) वाला किरदार निभावल पसंद करें जे उनके राजनीतिक कैरियर में भी झलके ला।

आठ बरिस के उमिर में मोदी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बारे में मालुम भइल आ ऊ लोकल शाखा में जाए सुरू कइलेन। एकरे बाद मोदी लक्ष्मणराव इनामदार, जिनके वकील साहब के नाँव से जानल जाय, मिलने आ उहे इनका के बालस्वयंसेवक बनवलें आ इनके राजनीतिक अभिभावक बनलें। आरएसएस में अपना शिक्षा के दौरान मोदी वसंत गजेंद्रगाडकर आ नाथालाल जघड़ा से मिललें जे लोग भारतीय जनसंघ के नेता आ 1980 में भारतीय जनता पार्टी के गुजरात इकाई के संस्थापक सदस्य रहल लोग। पढ़ाई के दौरान लरिकाईंये में इनके बियाह जसोदाबेन नरेंद्रभाई मोदी से तय हो गइल जेकरा के मोदी ना स्वीकार कइलें  आ एही कारन उपजल पारिवारिक तनाव के कारन 1967 में घर छोड़ देवे के फैसला कइलें।

एकरे बाद मोदी दू साल उत्तर भारत आ पूर्वोत्तर भारत के जगह-जगह घुमलें, कवना-कवना जगह गइलें आ रहलें एकरे बारे में बहुत बिबरन ना मिले ला। अपना इंटरभ्यू में मोदी, स्वामी विवेकानंद के स्थापित बेलूर मठ (कलकत्ता लगे), एकरे बाद अल्मोड़ा के अद्वैत आश्रम आ रामकृष्ण मिशन, राजकोट जाए के बात कहले बाने। एह में से हर जगह कुछे दिन खातिर रह पवलें काहें कि उनके कॉलेज के शिक्षा अभिन पूरा ना भइल रहल। विवेकानंद के इनके जीवन पर बहुत परभाव बतावल जाला।

अहमदाबाद में मोदी दोबारा इनामदार से दोबारा मिललें जे ओह समय शहर के हेगडेवार भवन (शहर के आरएसएस मुख्यालय) में रहलें। 1971 के भारत-पाक लड़ाई के बाद मोदी अपना चाचा के साथे काम कइल छोड़ के पूरा टाइम खातिर आरएसएस के प्रचारक बन गइलें आ इनामदार के मातहत काम करे लगलें। लड़ाई के कुछे दिन पहिले मोदी भारत सरकार के खिलाफ एगो शांतिपूर्ण धरना-परदर्शन में हिस्सा लिहलें जेकरा खातिर उनके गिरफ्तार कइल गइल रहे; इहे कारन बतावल जाला कि इनामदार इनके सिखावे-पढ़ावे खातिर बीछलें। कई साल बाद 2001 में इनामदार के जीवनी छपल जेह में मोदी सहायक लेखक रहलें। साल 1978 में मोदी राजनीतिशास्त्र में बीए कइलें, दिल्ली विश्वविद्यालय के पत्राचार माध्यम से, आ थर्ड डिवीजन पास भइलें। पाँच बरिस बाद, 1982 में, गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति बिज्ञान में एमए के डिग्री लिहलें।




#Article 159: ईटानगर (171 words)


ईटानगर भारत की अरुणाचल प्रदेश प्रान्त क राजधानी ह।
हिमालय की निचला भाग में स्थित ई सुन्दर शहर प्रशासनिक रूप से पापुम पारे जिला में आवेला।

प्रान्त क राजधानी होखला की वजह से ईटानगर देश की बाकी हिस्सन से बढियाँ से जुडल बा।
गौहाटी से ईटानगर खातिर रेगुलर हेलीकाप्टर आ बस चलेला आ इहाँ से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन नाहरलागुन में बा।

इहँवा देखे लायक जगह में एगो पंद्रहवीं सदी क इतिहासी ईटा-किला बाटे जेवना की आधार पर ए शहर क नाँव पड़ल बा। 
एकरी अलावा गंगा झील आ बुद्ध मंदिर देखे लायक बा।

ईटानगर क भूगोलीय लोकेशन 27.1°उ. 93.62°पू. बाटे आ समुद्र तल से ऊंचाई 750 मीटर बा ।

ईटानगर क जलवायु नम शीतोष्ण प्रकार क बा आ कोपेन की सिस्टम में Cwb प्रकार क बतावल जा सकेला।
जाड़ा में बरखा ना होले आ गर्मी में बरखा क शुरुआत जल्दी हो जाले।

ईटानगर में विविध प्रकार क आदिवासी लोग बसल बा आ बौद्ध धर्म क प्रभाव भी लउकेला। 
गोम्पा बुद्ध मंदिर इहँवा दलाई लामा द्वारा अस्थापित थेरवाद क मंदिर हवे।




#Article 160: सेमराजपुर, मऊ (115 words)


सेमराजपुर  उत्तर प्रदेश की मऊ ज़िला में एगो गाँव बाटे। जिला मुख्यालय मऊ से पूरुब ओर स्थित सेमराजपुर क दूरी वाया रतनपुरा लगभग 38 किमी बा।
सेमराजपुर गाँव में एही नाँव से डाकखाना बा अउर पिनकोड हवे 221706।  
ई गाँव रतनपुरा ब्लाक, मऊ सदर तहसील, अउर घोसी लोकसभा क्षेत्र में आवेला।

ए गाँव में 4 गो प्राइमरी इस्कूल अउर दू गो जूनियर हाई स्कूल बा। सरकारी प्राइमरी इस्कूलन में दुपहरिया की भोजन (मिड डे मील) क सुविधा उपलब्ध बा

पहिले के समय में सेमराजपुर ग्राम पंचायत में तीन गो गाँव आवे - सेमराजपुर, भीमहर अउर समनपूरा। नया सीमांकन में एह गाँव के खुद ग्रामपंचायत बना दिहल गइल बा।
गाँव के वर्तमान प्रधान शिवजी सिंह बाड़न।




#Article 161: पृथ्वी के अंदरूनी बनावट (740 words)


पृथ्वी क आतंरिक संरचना शल्कीय, मने कि परतदार, बाटे जइसे पियाज क छिलका कई परत में होला। ए परतन क मोटाई का सीमांकन रासायनिक विशेषता अथवा यांत्रिक विशेषता की आधार पर कइल जाला।
पृथ्वी क सबसे ऊपरी परत भूपर्पटी एगो ठोस परत हवे, मध्यवर्ती मैंटल बहुत ढेर गाढ़ परत हवे, आ बाहरी क्रोड तरल अउरी आतंरिक क्रोड ठोस अवस्था में हवे।

पृथ्वी की आतंरिक संरचना की बारे में जानकारी क स्रोत को दू तरह क बाड़ें । प्रत्यक्ष स्रोत, जइसे ज्वालामुखी से निकलल  पदार्थन क अध्ययन, समुद्र्तलीय छेदन से मिलल आंकड़ा क अध्ययन इत्यादि, जेवन कम गहराई ले का जानकारी उपलब्ध करा पावे लें। दूसरी ओर अप्रत्यक्ष स्रोत की रूप में भूकम्पीय तरंगन क अध्ययन अउर अधिक गहराई की विशेषता की बारे में जानकारी देला।

पृथ्वी की द्वारा दूसरी ब्रह्माण्डीय पिण्ड, जइसे चंद्रमा, पर लगावल जाये वाला गुरुत्वाकर्षण एकरी द्रव्यमान की गणना का स्रोत ह। पृथ्वी की आयतन आ द्रव्यमान की अन्तर्सम्बन्ध से एकरी औसत घनत्व क गणना कइल जाले। ध्यान देवे वाला बाति बा कि खगोलशास्त्री पृथ्वी की परिक्रमण कक्षा की आकार आ अन्य पिण्डन पर एकरी प्रभाव से एकरी गुरुत्वाकर्षण क गणना कर सके लें।

यांत्रिक लक्षणों की आधार पर पृथ्वी के  स्थलमण्डल, दुर्बलता मण्डल, मध्यवर्ती मैंटल, बाह्य क्रोड और आतंरिक क्रोड में बाँटल जाला। रासायनिक संरचना की आधार पर भूपर्पटी, ऊपरी मैंटल, निचला मैंटल, बाह्य क्रोड और आतंरिक क्रोड में बाँटल जाला।

पृथ्वी की अंतरतम क ई परतदार संरचना भूकंपीय तरंगों की संचलन और उनहन की परावर्तन आ प्रत्यावर्तन पर आधारित ह जिनहन क अध्ययन भूकंपलेखी की आँकड़न से कइल जाला। भूकंप से पैदा भइल प्राथमिक अउरी द्वितीयक तरंगन के पृथ्वी की अंदर स्नेल की नियम के अनुसार प्रत्यावर्तित हो के  वक्राकार पथ पर गति होले। जब दू गो परतन की बीच में घनत्व अथवा रासायनिक संरचना क अचानक परिवर्तन होला तब तरंगन क कुछ ऊर्जा उहाँ से परावर्तित हो जाले। परतन की बीच की अइसन जगहन के असातत्य (Discontinuity) कहल जाला।

भूपर्पटी पृथ्वी क सबसे ऊपरी परत हवे जेवना क औसत गहराई 24 किमी तक ह आ ई गहराई 5 किमी से 70 किमी के बीच अलग-अलग जगह पर अलग-अलग मिलेला। समुद्रन की नीचे ई कम मोट समुद्री बेसाल्टिक भूपर्पटी के रूप में मिलेला त महाद्वीपन की नीचे एकर बिस्तार ढेर गहराई ले पावल । सर्वाधिक गहराई पर्वतों के नीचे पावल जाला।
भूपर्पटी को भी तीन परतों में बाँटा जाता है - अवसादी परत, ग्रेनाइटिक परत और बेसाल्टिक परत। ग्रेनाइटिक और बेसाल्टिक परत के मध्य कोनार्ड असातत्य पावल जाला। ध्यातव्य है कि समुद्री भूपर्पटी केवल बेसाल्ट और गैब्रो जैसी चट्टानों की बनी  होती है जबकि अवसादी और ग्रेनाइटिक परतें महाद्वीपीय भागों में पावल जाला।

भूपर्पटी की रचना में सर्वाधिक मात्रा आक्सीजन की है। एडवर्ड स्वेस ने इसे सियाल नाम दिया था क्योंकि यह सिलिका और एल्युमिनियम की बनल ह। ई सियाल महाद्वीपीय भूपर्पटी के अवसादी और ग्रेनाइटिक परतन खातिर के लिये सही बा। कोनार्ड असातत्य की नीचे सीमा (सिलिका+मैग्नीशियम) क परत शुरू हो जाला।
भूपर्पटी आ मैंटल की बीच क सीमा मोहोरोविकिक असातत्य द्वारा बने ला जे के मोहो भी कहल जाला।
 

मैंटल का विस्तार मोहो से लेकर 2890 किमी की गहराई पर स्थित गुट्टेन्बर्ग असातत्य तक बाटे। मैंटल के इस निचली सीमा पर दाब ~140 GPa पावल जाला। मैंटल में संवहनीय धारा चले लीं जिनकी कारण स्थलमण्डल की प्लेटों में गति होला। मैंटल के दू भाग में बाँटल जाला ऊपरी मैंटल और निचला मैंटल और इनकी बीच की  सीमा 710 किमी पर रेपिटी असातत्य की नाँव से जानल जाला।
मैंटल का गाढ़ापन  1021 से  1024 Pa·s के बीच पाया जाता है जो गहराई पर निर्भर करता है।

तुलना के लिये ध्यातव्य है कि पानी का गाढ़ापन  10−3 Pa·s और कोलतार  () 107 Pa·s होला।   

क्रोड का विस्तार मैंटल की नीचे है आर्थात 2890 किमी से लेकर पृथ्वी की केन्द्र तक। किन्तु यह भी दो परतों में विभक्त है - बाह्य कोर और आतंरिक कोर। बाह्य कोर तरल अवस्था में पाया जाला क्योंकि यह द्वितीयक भूकंपीय तरंगों (एस-तरंगों) को सोख लेता है। आतंरिक क्रोड की खोज 1936 में के. ई. बूलेन ने की थी। यह ठोस अवस्था में माना जाला। इन दोनों की बीच की सीमा को बूलेन-लेहमैन असातत्य कहल जाला।

आतंरिक क्रोड मुख्यतः लोहे का बना है जिसमें निकल की भी कुछ मात्रा है। चूँकि बाह्य क्रोड तरल अवस्था में है और इसमें रेडियोधर्मी पदार्थो और विद्युत आवेशित कणों की कुछ मात्रा पावल जाला, जब इसके पदार्थ धारा के रूप में आतंरिक ठोस क्रोड का चक्कर लगते हैं तो चुंबकीय क्षेत्र बन जाला। पृथ्वी के चुम्बकत्व या भूचुम्बकत्व की यह व्याख्या डाइनेमो सिद्धांत कहल जाला।




#Article 162: हिंद महासागर (245 words)


हिंद महासागर बिस्व क तीसरा सबसे बड़हन महासागर ह जे लगभग  क्षेत्रफल पर बिस्तार लिहले बा आ धरती के पूरा पानी वाली सतह के लगभग 20% हिस्सा कभर करे ला। एकरे पच्छिम ओर अफ्रीका, उत्तर ओर एशिया आ पूरुब ओर ऑस्ट्रेलिया महादीप बाड़ें आ दक्खिन में दक्खिनी महासागर, या फिर अगर ओकरा के अलगा से महासागर महासागर न मानल जाय, तब अंटार्कटिका महादीप बाटे। एकर नाँव भारत के नाँव (हिंद) के नाँव पर रखल गइल हवे आ अइसन एकलौता महासागर बा जेकर नाँव कौनों देस के नाँव प रखल गइल होखे। अरब सागर आ बंगाल क खाड़ी एही हिंद महासागरे क हिस्सा हउवें।

हिंद महासागर दुनिया के बाकी महासागर सभ के तुलना में सभसे नाया हवे। एह महासागर में एक्टिव महासागरी कटक (रिज) बाड़ें जिनहन के सहारे प्लेट सभ के सरकाव होखे ला। रोडरिगीस ट्रिपल प्वाइंट आ बिचला भारतीय रिज, कास्बर्ग रिज इत्यादि एह में प्रमुख बाड़ीं। अफिरकी प्लेट आ इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट एक दुसरे से फरका हटे लीं तहाँ कास्बर्ग रिज हवे; दक्खिन-पच्छिमी इंडियन रिज के सहारे अफिरकी प्लेट आ अंटार्कटिका प्लेट के बिलगाव होला आ बिचली रिज अरब सागर से हो के लाल सागर ले आ आगे भूमध्य सागर तक ले चल जाले।

महादीप सभ के बाहरी किनारा पर कई ठे छोटहन दीप पावल जालें। पूरा तरीका से समुंद्र से घेराइल, दीपीय देस, भी एह महासागर में बाड़ें। लगभग घड़ी के सुई के दिसा में गिनावल जाय तब राज्य (देस) आ राज्यक्षेत्र (टेरिटरी) सभ के बिबरन नीचे बा:

अफिरका

एशिया

ऑस्ट्रेलेशिया

दक्खिनी हिंद महासागर




#Article 163: सिंधु नदी (234 words)


सिंधु नदी एशिया महादीप के कुछ सभसे लमहर नदी सभ में से एक हवे। ई तिब्बत के पठार से मानसरोवर झील के लगे से निकले ले आ उत्तर पच्छिम मुहें भारत के लद्दाख इलाका से हो के बहे ले, ओकरे बाद ई पाकिस्तान के अधिकार वाला गिलगित-बल्तिस्तान इलाका से हो के बहे के बाद मुड़े ले आ पूरा पाकिस्तान पार करे के बाद अरब सागर में कराची के नगीचे जा के मिले ले। ई पाकिस्तान के सभसे लमहर नदी आ राष्ट्रिय नदी हवे।

नदी के थाला लगभग  से बेसी रकबा पर बिस्तार लिहले बाटे। एगो अनुमान (इस्टीमेट) के मोताबिक एकर सालाना बहाव  बाटे, ई नील नदी के लगभग दुगुन्ना बाटे आ दजला-फरात नदिन सभ के तिनगुन्ना बा। सालाना बहाव के मामिला में एह तरीका से ई दुनियाँ के सभसे बड़हन नदी सभ में से एक बा। लद्दाख में एह में जाँस्कर नदी बायें से आ के मिलेले। मैदान में उतरे पर चिनाब, झेलम, रावी, ब्यास आ सतलज के रूप में पंजनद सभ आ के मिले लीं। दहिने ओर से आ के मिले वाली नदी सभ में स्योक, गिलगित, काबुल, गोमल आ कुर्रम नदी प्रमुख बाड़ी सऽ। एगो पहाड़ी सोता से निकले के बाद ई नदी मुख्य रूप से आपन बहाव के पानी ग्लेशियर सभ से हासिल करे ले। हिमालय, कराकोरम आ हिंदुकुश परबत सभ के नदी सभ से एकरा के पानी मिले ला आ कई किसिम के इकोसिस्टम सभ से हो के बहे ले।




#Article 164: नर्मदा नदी (142 words)


नर्मदा चाहे नर्बदा नदी भारत में बहे वाली एगो महत्वपूर्ण नदी ह। ई बिचला भारत के राज्य मध्य प्रदेश में अमरकंटक पहाड़ से निकल के पूरूब से पच्छिम दिसा में बहे ले आ लगभग  के लंबाई वाली ई नदी अंत में खंभात के खाड़ी, अरब सागर में गिरेले।

नदी अपना लगभग पूरा लंबाई में एगो भ्रंश घाटी से हो के बहे ले आ एही कारन एकर बेसिन एरिया पूरूब से पच्छिम ओर पट्टी के रूप में बा आ उत्तरी आ दक्खिनी किनारे पर परबत श्रेणी खड़ा बाड़ी। परंपरागत रूप से बिंध्य परबत आ नर्मदा के उत्तर भारत आ दक्खिन भारत के बीचा के बिभाजक मानल जाला। नर्मदा के पहिला साहित्यिक उल्लेख कालीदास के रघुवंश काब्य में रेवा नाँव से मिले ला। एकरे साथे कई किसिम के कथा भी जुड़ल बा। भारत के हिंदू परंपरा में एह नदी के बहुत पबित्र मानल जाला।




#Article 165: ब्रह्मपुत्र नदी (526 words)


ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत, भारत आ बांग्लादेश में बहे वाली एगो महत्वपूर्ण नदी हऽ। ई तिब्बत में, राकस ताल आ मानसरोवर झील से नगीचे वाला इलाका में आंग्सी ग्लेशियर से निकल के हिमालय के उत्तरे-उत्तर पच्छिम से पुरुब ओर बहे ले आ फिर अरुणाचल प्रदेश में दिहांग के नाँव से भारत में प्रवेश करे ले; आसाम में ए के ब्रह्मपुत्र कहल जाला आ फिर बांग्लादेश में गंगा की संघे मिल के बंगाल की खाड़ी में गिरेले।

मानसरोवर के लग्गे से निकले के बाद से ले के हिमालय के पार कइ के अरुणाचल में प्रवेश करे तक ले एकरा धारा पच्छिम से पूरुब ओर के बहे ले। पूर रास्ता दक्खिनी तिब्बत में पड़े ला जहाँ एकरा के यारलुंग-सांग-पो भा खाली त्सां पो के नाँव से बोलावल जाला। एकरे बाद एह नदी के धारा अचानक अपने दाहिने ओर मुड़े ले आ हिमालय के परबत श्रेणी सभ के एगो बड़हन गॉर्ज (गहिरी घाटी) से हो के पार करे ले जेकरा के यारलुंग त्सां पो गॉर्ज कहल जाला। एह गार्ज के एक ओर नामचा बरवा आ दुसरे ओर ग्याल पेरी चोटी पड़े लीं आ एही के हिमालय के पूरबी सीमा मानल जाला। एकरा आगे बढ़े पर ई भारत के अरुणाचल प्रदेश में घुसे ले आ आगे बढ़ के आसाम घाटी में। आसाम घाटी एगो चाकर आ लमछार मैदान हवे जहाँ ई नदी दक्खिन-पच्छिम मुँह हो के बहे ले आ एकर पानी भरपूर चाकर पाट में बहे ला, कतो-कतो त एकर पाट पचास किलोमीटर ले हो जाला। हेइजा आसाम में एकरा के ब्रह्मपुत्र कहल जाला। आसाम से निकल के ई दक्खिन मुँह के बहे ले आ बांग्लादेस में परवेश करे ले जेकरे कुछे आगे जाए पर एकर सभसे बड़ सहायिका सभ में से एक तीस्ता नदी आ के एह में मिल जाला। औरो आगे बढ़े पर ई नदी दू गो धारा में बँट जाले आ पच्छिमी धारा, जेह में आज्काल्ह ढेर पानी बहे ला आ जेकरा के उहाँ जमुना कहल जाला, गंगा के ओह धारा से मिले ले जेकरा के बांग्लादेस में पद्मा कहल जाला। सझिया धारा के नाँव पद्मा कहाला। पूरबी धारा, जे पहिले ढेर पानी वाली रहल, ब्रह्मपुत्रो के नाँव से आगे बढ़े ले आ मेघना नदी में मिले ले, दुनों के सझिया नाँव मेघना कहाला आ अंत में ई आ पच्छिम वाली पद्मा आ के एक्के में मिल जालीं; अंत में एह सभ के नाँव मेघना कहाला आ एही नाँव से ई बंगाल के खाड़ी में मिले ले।

लगभग  लमहर, ब्रहमपुत्र नदी सिंचनी आ ट्रांसपोर्ट खाती बहुत महत्व के नदी हवे। नदी के औसत गहिराई  आ अधिकतम गहिराई  बा। नदी में बिनासकारी बाढ़ आवे के संभावना रहे ला जब बसंत ऋतू में हिमालय के बरफ पघिले ले। नदी के जलबहाव (डिस्चार्ज) औसतन , होला आ बाढ़ में ई  ले चहुँप सके ला। ई बहुधारा नदी (braided river) के एकदम क्लासिक उदाहरण हवे आ चैनल घसकाव आ अव्ल्शन के खतरा हमेशा रहे ला। ई अपना लगभग सगरी लंबाई में नाव चलावे लायक बा। ई दुनियाँ के कुछ अइसन नदी सभ में से हवे जेह में ज्वार-भाटा के परभाव भी परिलक्षित होखे ला।

राष्ट्रिय जलमार्ग 2 (NW2) एह नदी के एगो 891 किमी लमहर हिस्सा हवे। ई रास्ता सादिया से धुबरी नाँव के जगह के बीचा में आसाम राज्य में बा।




#Article 166: गोदावरी नदी (248 words)


गोदावरी(कैथी:𑂏𑂷𑂠𑂰𑂫𑂩𑂲) नदी दक्खिन भारत में बहे वाली एगो महत्वपूर्ण नदी ह। ई महाराष्ट्र से निकल के बंगाल के खाड़ी में गिरेले। गोदावरी नदी भारत के दूसरी सभसे लमहर नदी हवे, गंगा नदी के बाद। एकरा निकसे के सोता महाराष्ट्र के त्रयंबकेश्वर में बा। इहाँ से निकसे के बाद ई  के दूरी तय करे ले जेकरे दौरान ई महाराष्ट्र (48.6%), तेलंगाना (18.8%), आंध्र प्रदेश (4.5%), छत्तीसगढ़ (10.9%), मध्य प्रदेश (10.0%), ओडिशा (5.7%), कर्नाटक (1.4%) आ पुद्दुचेरी (यनम) से हो के गुजरे ले आ अंत में बंगाल के खाड़ी में अपने सहायिका सभ के बिसाल नेटवर्क से एकट्ठा कइल पानी गिरावे ले। एक थाला (बेसिन) लगभग  एरिया पर बिस्तार लिहले बा आ एह तरीका से ई भारतीय उपमहादीप के सभसे बिसाल नदी थाला सभ में से एक हवे; खाली गंगा आ सिंधु नदी के थाला एकरा ले बड़हन बाने। लंबाई, थाला के साइज आ कुल पानी के बहाव, सभ मामिला में ई प्रायदीपी भारत के सभसे बड़ नदी ठहरे ले; मुला एही कारन एकरा के दक्खिन गंगा के उपाधि दिहल गइल होखी।

हिंदू ग्रंथ सभ एह नदी के बरनन सदियन से मिले ला आ एकरे थाला में बहुत समृद्ध संस्कृति के बिकास भइल बा। पछिला कुछ दशक में, नदी के धारा रोक के कई गो बंधा बनावल गइल बाड़ें जिनहन से एकर बहाव रुकल बा। एह नदी के डेल्टा वाला इलाका में जनघनत्व 729 ब्यक्ति/किमी2 – देस के औसत के लगभग दुन्ना बाटे, आ ई डेल्टाई इलाका ख़तरा में भी बतावल जा रहल बा अगर समुंद्र तल में चढ़ाव होखे।




#Article 167: शिमला (122 words)


शिमला () भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य में एक ठो शहर बा। अपने आप में ए शहर क बहुत इतिहासी महत्व बाटे। अंग्रेझो से पहले नेपाल क शासक ए देश पर राज कईने | १८वीं सदी में शिमला भारत क गरम के दिनो क राजधानी बन गईल रहे। १९६३ मे शिमला हिमाचल प्रदेश क राजधानी बन गईल रहे | यह भारत के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल में एक ठो स्थल बा |

साल 2011 के जनगणना अनुसार शिमला के कुल शहरी जनसंख्या 169578 बाटे आ आसपास के उपशहरी इलाका के मिला लिहल जाय तब कुल जनसंख्या 171817 बा। जनसंख्या के हिसाब से ई भारत के 274वाँ शहर बाटे।
जनगणना आँकड़ा के मोताबिक एह शहर में लिंगानुपात 820 आ साक्षरता के दर 93.63% बाटे।




#Article 168: राप्ती (109 words)


राप्ती नदी (प्राचीन नाँव: अचिरावती; पूरबी राप्ती से बिभेद खाती: पच्छिमी राप्ती) भारतीय उपमहादीप के एगो प्रमुख नदी हवे जे नैपाल से निकले ले आ आगे जा के भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश में बहे ले। हिमालय पहाड़ से नेपाल में निकल के ई नदी गोरखपुर जिला में बरहज से पच्छिम ओर सरजू नदी में मिल जाले।

राप्ती का प्राचीन नाँव अचिरावती बतावल जाला। अचिरावती के शाब्दिक अरथ बतावल जाला - जे बहुत समय (चिर काल) तक न रहे आ ई नाँव एकरे बेरबेर रस्ता बदले के कारन परल।

कई जगह एह नदी के पूरबी राप्ती से बिभेद क के अलग बतावे बदे पच्छिमी राप्ती के नाँव से बोलावल जाला।




#Article 169: सिकंदरपुर (272 words)


सिकंदरपुर भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के बलियाँ जिला में एगो नगर पंचायत आ कस्बा बा। ई अपनहीं नाँव के तहसील के मुख्यालय भी हवे।

सिकंदरपुर के स्थापना लोदी बंस के राजा सिकंदर लोदी कइले रहलें आ उनहीं के नाँव पर एकर नाँव सिकंदर पुर पड़ल। ई गुलाब की खेती खातिर मशहूर हऽ। पुराना समय में ई इतर के ब्यापार के बहुत मशहूर जगह रहल।

साल 2011 के भारतीय जनगणना के आँकड़ा अनुसार सिकंदर पुर नगर पंचायत में कुल 15 वार्ड सभ में 23,986 लोग निवास करत रहल जेह में 12,512 मरद 11,474 आ मेहरारू लोग रहल।

एही आँकड़ा के अनुसार, सिकंदरपुर में लिंगानुपात 917 महिला प्रति 1000 पुरुष रहल, जे उत्तर प्रदेश राज्य के औसत लिंगानुपात 912 से थोरिके सा ऊपर रहल। हालाँकि, छोट लइकी-लड़िकन के लिंगानुपात 894 रहल जे राज्य के औसत 902 से तुलना में कम रहल। सिकंदर पुर में साक्षरता के दर 77.08 %  रहल जे राज्य के औसत 67.68 % से आगे रहल। इहाँ मरदाना साक्षरता 83.70 % आ जानना साक्षरता 69.88 % रहल।

सिकंदरपुर पुराना जमाना से गुलाब के खेती आ गुलाब के अर्क से बने वाला इतर, गुलाब जल आ गुलाब शकरी खातिर मशहूर रहल बा। गुलाब शकरी एक तरह के शरबत बनावे के सामान हवे, चीनी के गोल गोल लड्डू नियर गोला जेह में गुलाब के महक बसल होले आ पानी में डारला पर तुरंते घुल जाला।

हाल के समय में इहाँ के एह उद्योग के स्थिति खराब भइल बा आ सिकंदरपुर के गुलाब उद्योग के खतम होखे के संका बतावल जा रहल बाटे। कुछ मात्रा में अभिन ले इहाँ से बिदेस खातिर गुलाबजल के निर्यात होला जेकरा कारन इहाँ ई रोजगार चल रहल बाटे।




#Article 170: नाथबाबा मंदिर (203 words)


नाथबाबा कऽ मंदिर उत्तर प्रदेश के बलियाँ जिला के रसड़ा में एगो नाथ बाबा के मंदिर बा। मंदिर से सटले एगो बहुत सुघर पोखरा बा जवना के नाथबाबा कऽ पोखरा कहल जाला।

मंदिर के निर्माण सेंगर बिरादरी के राजपूत लोगन के पूर्वज आ एगो संत श्रीनाथ बाबा के आदर में भइल हवे।  बलियाँ जिला के ई इलाका पहिले, मुगल काल में, लखनेसर डीह नाँव के परगना में रहल आ इहाँ सेंगर राजपूत लोगन के बहुतायत रहल। सेंगर बिरादरी के राजपूत लोग खाती आजो ई मंदिर खास हवे। 

रसड़ा के लगहीं नागपुर गाँवों में नाथ जी के भव्य मंदिर अउर पोखरा आ पार्क बा। ओइसे नाथ बाबा के मंदिर पाँच जगह पर बा: रसड़ा, नागपुर, नगपुरा, महाराजपुर आ कंसो पटना।

मंदिर के मुख्य पूजा हर तिसरहा साल होखे ला जब नाथ बाबा के एगो बिसेस किसिम के पकवान रोट चढ़ावल जाला। एह पूजा के मोका पर लाठी के पूजा होला आ लोग लाठी से लड़ाई के दाँव-पेच के पर्दर्शन करे ला। एह तरीका के पूजा साइदे कहीं अउरी होखत होखे। एही पूजा के दौरान, मंदिर से थोरिके दूर पर मौजूद मुसलमान संत बाबा रोशन शाह के दरगाह पर चादरो चढ़ावल जाला। एकरे अलावा इहाँ हर साल भव्य रामलीला होखेले आ दशहरा क मेला लागेला।




#Article 171: माउंट एवरेस्ट (171 words)


माउंट एवरेस्ट बिस्व के सभसे ऊँच परबत चोटी हऽ। ई हिमालय के महालंगुर हिमाल नाँव के परबत श्रेणी में बाटे। एहिजा से नेपाल आ तिब्बत (चीन) के बाडर गुजरे ला। एकरा के सगरमाथा (नेपाली) आ चोमोलुन्गमा (तिब्बती) नाँव से भी जानल जाला।

एह परबत चोटी के ऑफिशियल ऊँचाई  मानल जाला।   ऊँचाई के नापजोख 1955 में भारतीय सर्वेक्षण में भइल जेकरा बाद में चीनी सर्वेक्षण कन्फर्म कइल। कुछ दिन ले नेपाल आ चीन में एकरे ऊपर असहमती रहल कि बर्फ वाली ऊँचाई 8848 मीटर (नेपाली दावा) के मानल जाव कि चट्टानी ऊँचाई 8844 मीटर (चीन के दावा) के मानल जाय। एगो समझौता में चीन नेपाली दावा के मान लिहलस आ नेपालो चट्टानी ऊँचाई के मान के अलग से पहिचान लिहलस।

एकर वर्तमान नाँव, 1865 में लंदन में मौजूद रॉयल ज्याग्रफिकल सोसाइटी द्वारा, ओह समय में भारत के सर्वेयर जनरल एंड्रयू वाघ के सुझाव पर रखल गइल; वाघ अपना से पहिले सर्वेयर जनरल रहल सर जार्ज एवरेस्ट के नाँव पर रखे के सलाह दिहलें हालाँकि, एवरेस्ट खुद एह बात से सहमत ना रहलें।




#Article 172: तिब्बत (320 words)


तिब्बत एशिया महादीप में एगो क्षेत्र बा। वर्तमान में ई चीन देस के खुदमुखतार इलाका (ऑटोनॉमस रीज़न) के रूप में बा। ई चीन के पच्छिमी-दक्खिनी हिस्सा में बा आ भारत, नेपाल आ भूटान देसन के उत्तरी सीमा एही के साथ बने ले। 24 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र बिस्तार वाला ई इलाका चीन के कुल रकबा के लगभग चउथाई हिस्सा हवे। तिब्बत के अधिकतर इलाका पठारी आ पहाड़ी बाटे। तिब्बत के पठार के एकरे ऊँचाई के कारन संसार के छत कहल जाला। एकर औसत ऊंचाई 4900 मीटर बाटे आ संसार के सभसे ऊँच परबत चोटी, हिमालय के माउंट एवरेस्ट, तिब्बत आ नेपाल के बीच बा।

तिब्बती लोगन के ई मूल निवास क्षेत्र हवे आ अउरी कई गो जाति के लोगन के भी मूल अस्थान हवे जइसे कि मोनपा लोग, जियांग लोग आ ल्होबा लोग एही जगह के मूल निवासी हवे। हाल के दसक में चीनी हान लोग आ हुई लोग भी चीन द्वारा बसावल गइल बा। इहाँ के मुख्य धरम तिब्बती बौद्ध धरम हवे, एकरे अलावा तिब्बती मुसलमान आ कुछ ईसाई लोग भी अल्पसंख्यक के रूप में निवास करे ला।

तिब्बत के संस्कृति आ कला, संगीत आ आर्किटेक्चर पर तिब्बती बौद्ध धरम के ब्यापक आ पोढ़ परभाव देखे के मिले ला। एकरे अलावा चीनी आ भारतीय परभाव भी चिन्हित कइल जा सके ला। इहाँ के अर्थब्यवस्था मुख्य रूप से जीवन निर्वाह खातिर खेतीकिसानी आ पशुपालन वाली बा। मुख्य उपज में जौ, याक के माँस आ तिब्बती चाय बाटे। कई तरह के पहाड़ी जड़ी-बूटी आ उन भी इहाँ से बाहर बेचल जाला। परंपरागत रूप से हिमालय परबत के दर्रा सभ से हो के कई गो रस्ता द्वारा भारत आ तिब्बत के बीच ब्यापार होत रहल बा जे अब भारत आ चीन के बीच के तनाव के चलते बहुत खराब स्थिति में पहुँच गइल बा। 

तिब्बत के धार्मिक नेता आ मुखिया, दलाई लामा आजकाल्ह भारत में निर्वासित (इलाका बदर) शरणार्थी के रूप में रहे लें आ तिब्बत के ढेर सारा लोग भी।




#Article 173: फुटबाल (200 words)


एसोसिएशन फुटबॉल चाहे आम भाषा में फुटबॉल आ अंगरेजी में सॉसर एगो गेना क खेल हवे। एकर पूरा नाँव एसोशियेशन फुटबाल ह। जवनी गेना से ई खेल खेलल जाला ओ गेनओ के फुटबाले कहल जाला। 

फ़ुटबाल एगो चौकोर मैदान में खेलल जाला जवन 90 से 120 मीटर लम्बा आ 45 से 90 मीटर चाकर होला। दुनो लंबाई वाला छोर पर गोल पोस्ट होला। ए गो टीम में गोलकी के ले के इगारह गो खेलाड़ी होला। टीम क सारा खिलाड़ी आपस में मिल के चालाकी से ई कोसिस करेलन कि सामने वाला गोल पोस्ट में गेना मार दिहल जाय। एही के गोल कइल कहल जाला। ए गो टीम में इगारह गो खेलाड़ी होला जवना में ए गो गोलकी अइसन होला जे गेना के अपनी पेनाल्टी एरिया की भीतर हाथ से पकड़ सके ला नाहीं त बाकी कौनो खेलाडी के गेना के हाथ से ना छुए के रहेला। ए तरे दुनो टीम की बिचा में कम्पटीशन होला कि कवन टीम ढेर गोल क देले। अगर निश्चित समय में दुनों में से कौनो टीम गोल ना का पावेले चाहे दूनो क गोल बराबर हो जाला त अधिका टाइम दिहल जाला। जब अधिकवो टाइमवा खतम हो जाला तब फिर फैसला पेनाल्टी शूट से होला।




#Article 174: फेड़ (171 words)


 
पेड़ अइसन बनस्पति के कहल जाला जवन सालो भर ज़िंदा रहे वाला होखे मने कि सीजनल न होखे, जेवना क कुल उमिर कम से कम दू बरिस जरूर होखे, जेवना में एगो स्पष्ट तना होखे आ डाढ़ि होखें स। कबो-कबो एही में इहो जोड़ि लिहल जाला की ओकरी तना आ डाढ़ि से लकड़ी मिले के चाही। डाढ़ि आ तना क भइल जरूरी हवे।

पेड़ जब छोट होला तब ओके पौधा चाहे ओधी कहल जाला। बहुत पेड़न क उमिर कई सौ साल भी हो सकेला। अइसना में ओ पेड़ क दस साल पुरान होखला पर भी ओधी कहल जाई।

ए तरे पेड़ क जमीन की नीचे जरि होला (ए के हिंदी में जड़ कहल जाला आ भोजपुरिये में दूसर शब्द सोरि हवे)। जरि आ सोरि क काम होला पेड़ की बढ़े आ जिंदा रहे खातिर जमीन से पानी आ अवरू कई तरह क पोषक तत्व खींच के ऊपर पहुँचावल।

पेड़ पर कौनो इलाका की माटी आ मौसम का बहुत परभाव परे ला। अलग-अलग जलवायु वाला छेत्र में अलग-अलग किसिम क पेड़ मिलेला।




#Article 175: महाभारत (330 words)


महाभारत संस्कृत भाषा के दू गो प्राचीन महाकाब्य सभ में से एक बा, दुसरका रामायण हवे।

महाभारत के कथा, कुरुक्षेत्र में पांडव आ कौरव लोग के बीच भइल जुद्ध के कथा हवे। एकरे अलावा एह में धार्मिक उपदेश, दार्शनिक आ आध्यात्मिक चीज आ भक्ति संबंधी बिचार भी लिखल बा। श्रीमद्भगवद्गीता, नल-दमयंती के कथा आ ऋष्यशृंग के कथा नियर कई चीज जे एही महाकाब्य के हिस्सा हईं, अपना में खुद स्वतंत्र रचना के लेखा भी परतिष्ठा पवले बाड़ी सऽ। महाभारत में पुरुषार्थ चतुष्टय के बरनन भी बा आ एह महाकाब्य में रामायण के संछिप्त रूप भी समाइल बा।

परंपरा अनुसार, महाभारत के रचयिता व्यास मुनि के मानल जाला। हालाँकि, एकरे मूल रूप आ आकार के बारे में बहुत खोजबीन करे के कोसिस बिद्वान आ रिसर्च करे वाला लोग द्वारा कइल गइल बा। एकर सभसे पुरान, अबहिन ले बचल संस्करण सभ 400 ईपू से पुरान ना मानल जालें, हालाँकि मूल रचना के आठवीं-नउवीं सदी ईसापूर्व के मानल जाला। अइसन मानल जाला कि ई ग्रंथ अपना वर्तमान बिसाल रूप में गुप्त काल (चउथी सदी इसवी) में पहुँचल महाभारत शब्द के अरथ बतावल जाला - भारत कुल के लोग के कथा; इहो बतावल जाला कि एकर पुरान संस्करण 24,000 श्लोक वाला रहे जेकरा के खाली भारत कहल जाय।

महाभारत दुनिया के सभसे बड़हन महाकाब्य हवे आ एकरा के अब तक ले लिखल गइल सभसे लमहर कबिता (काब्य) के रूप में बतावल गइल बा।  एकरा सभसे लमहर वर्शन में 1,00,000 लाख श्लोक, मने की 2,00,000 लाइन (श्लोक दू लाइन के छंद हवे) बाटे, आ बिचा-बिचा में लमहर गद्य भी मिलेला। कुल लगभग 18 करोड़ शब्द संख्या वाला ई महाकाब्य, इलियड आ ओडिसी दुन्नों के मिला दिहल जाय तबो एकरे लगभग दस गुना होखी; संस्कृते के दुसरका प्रतिष्ठित महाकाब्य रामायण के तुलना में ई लगभग चारि गुना बड़ बा। डब्लू जे जॉनसन एह महाकाब्य के दुनिया के सगरी सभ्यता सभ के ग्रंथ सभ से तुलना करे में महत्त्व के मामिला में बाइबिल, शेक्सपियर के रचना-संसार, होमर के रचना, यूनानी ड्रामा, भा कुरआन के बराबर मनले बाने।




#Article 176: रोटी (159 words)


रोटी चाहे फुलकी चाहे चपाती भारतीय भोजन क चीज हवे जेवन पिसान (आटा) के पानी में सान के आ ओकर लोई बना के चौकी बेलना से बेल के तावा पर सेंक के बनावल जाला। अधिकतर ए के गोहूँ (गेहूँ) की आटा से बनावल जाला लेकिन कब्बो-कब्बो गोजई आ जनेरा की आटा क बनावल जाला। अउरी अनाजन में जव, चन्ना, बजड़ा, आ बजड़ी क रोटी बनेला। जब ए के तावा पर सेंकल जाला त तावा रोटी कहल जाला आ इहे घर में बनेला। लेकिन बजार में होटल आ ढाबा पर ए के तंदूर में सेंकल जाला तब ए के तंदूरी रोटी कहल जाला।

भारतीय रोटी भारत, पाकिस्तान,नेपाल, श्री लंका, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया में खाइल जाले। एकरी अलावा ई दक्षिण अफ्रीका आ सूरीनाम, त्रिनिदाद टोबैगो में जहाँ-जहाँ भारत से लोग गइल बा उहाँ खाइल जाले।

दुनिया में अलग-अलग देसन में अलग अलग तरीका से रोटी बनावल जाला आ एही से एकर बहुत परकार बाटे। इहँवा एगो संछेप लिस्ट दिहल जात बा:




#Article 177: पीपरि (287 words)


पीपरि चाहे पिप्पली (जैविक नाम:Piper longum), (पीपली, , पीपरी, एवं  अंग्रेज़ी:लॉन्ग पाइपर),  पाइपरेसी परिवार के पुष्पीय पौधे का सदस्य है। इसकी खेती इसके फ़ल के लिये की जाती है। इस फ़ल को सुखाकर मसाले, छौंक एवं औदषधीय गुणों के लिये आयुर्वेद में प्रयोग किया जाता है। इसका स्वाद अपने परिवार के ही एक सदस्य काली मिर्च जैसा ही किन्तु उससे अधिक तीखा होता है। इस परिवार के अन्य सदस्यों में दक्षिणी या सफ़ेद मिर्च, गोल मिर्च एवं ग्रीन पैपर भी हैं। इनके लिये अंग्रेज़ी शब्द पैपर इनके संस्कृत एवं तमिल/मलयाली नाम पिप्पली से ही लिया गया है। 
विभिन्न भाषाओं में इसके नाम इस प्रकार से हैं:
संस्कृत  पिप्पली, हिंदी- पीपर, पीपल, मराठी- पिपल, गुजराती- पीपर, बांग्ला- पिपुल, तेलुगू- पिप्पलु, तिप्पली, फारसी- फिलफिल। अंग्रेज़ी- लांग पीपर, लैटिन- पाइपर लांगम।~~ पिप्पली के फल कई छोटे फलों से मिल कर बना होता है, जिनमें से हरेक एक खसखस के दाने के बराबर होता है। ये सभी मिलकर एक  की तरह दिखने वाले आकार में जुड़े रहते हैं। इस फ़ल में ऍल्कलॉयड पाइपराइन होता है, जो इसे इसका तीखापन देता है। इसकी अन्य प्रजातियाँ जावा एवं इण्डोनेशिया में पायी जाती हैं। इसमें सुगन्धित तेल (0.7%), पाइपराइन (4-5%) तथा पिपलार्टिन नामक क्षाराभ पाए जाते हैं। इनके अतिरिक्त दो नए तरल क्षाराभ सिसेमिन और पिपलास्टिरॉल भी हाल ही में  ज्ञात हुए हैं। पीपर की जड़ जिसे पीपला मूल भी कहा गया है पाइपरिन (0.15-0.18%), पिपलार्टिन (0.13-0.20%), पाइपरलौंगुमिनिन, एक स्टिरॉएड तथा ग्लाइकोसाइड से युक्त होती है।

पीपर यूनान में छठीएवं पाँचवीं शताब्दी के मध्य पहुंची थी। इसका उल्लेख हिपोक्रेटिस ने पहली बार किया, और इसे एक मसाले के बजाय एक औषधि के रूप में किया ता। यूनानियों एवं रोमवासियों में, अमरीकी महाद्वीपों की खोज से पूर्व ही पीपरी एक महत्त्वपूर्ण एवं सर्वज्ञात मसाला था।




#Article 178: रूनी (157 words)


अमरुत एगो फल हवे जवन गरम इलाका सभ में माझिल आकार के फेड़ा पर फरे ला। 

एकर अंगरेजी में आम चलनसार नाँव गुआवा हवे, हालाँकि गुआवा बहुत सामान्य नाँव हवे आ कई तरह के फल सभ के अंगरेजी में एहि नाँव से बोलावल जाला भले ऊ बैज्ञानिक दृष्टि से अलगा प्रजाति के होखें। 

सभसे ढेर प्रचलित अमरुत कॉमन अमरुत (सीडियम गुआय्वा) हवे जवन कि मूल रूप से ई मैक्सिको आ मध्य अमेरिका क पौधा हवे लेकिन अब ई अफ्रीका आ एशिया की उष्ण कटिबंधीय इलाका में ख़ूब पैदा कइल जाला। ई भारत, पाकिस्तान, आ बाकी दक्खिनी एशिया में ई खूब होला। भारत में इलाहाबाद शहर अपनी अमरुत खातिर पुरा दुनिया में मशहूर हवे।

भारत में अमरुत क कई गो प्रजाति (किसिम) होला जइसे की इलाहाबादी सफ़ेदा, इलाहाबादी सुरखा, सरदार (लखनऊ -49), सेबिया अमरुत, बेहट कोकोनट अउरी ललित हवे। इलाहाबादी सफ़ेदा आ सरदार (एही के लखनऊ -49 कहल जाला) अपने स्वाद आ ख़ूब ढेर फराई खातिर परसिद्ध बाटे।




#Article 179: अनार (276 words)


अनार (Punica granatum) एक ठो फलदार फेड़ होला। एकर झांग नियर फेड़ बनस्पति बिज्ञान के बर्गीकरण में Lythraceae परिवार में रखल जाला आ ई फेड़ मौसम अनुसार पतई गिरा देला। एकर औसत ऊँचाई  होले।

फेड़ में, उत्तरी गोलार्ध में सितंबर से फरवरी के बीच में आ दक्खिनी गोलार्ध में मार्च से मई के बीच के सीजन में फल लागे ला। फल के अन्दर छोट-छोट चमकीला दाना होलें जे गुलाबी से ले के गहिरा लाल रंग के हो सके लें। हर दाना के बीच में एक ठो उज्जर बीया होला आ एकरा चारों ओर रस भरल रहे ला। अनार के फल के सीधे भी खाइल जाला आ जूस भी निकार के पियल जाला। एकरे अलावा एकर दाना आ जूस दुन्नों तरह-तरह के भोजन में, भोजन के सजावे में, आ पियल जाए वाला चीज जइसे स्मूदी या काकटेल इत्यादि में भी डालल जालें।

अनार के मूल स्थान वर्तमान समय के ईरान हवे जहाँ से प्राचीन काल में ई अन्य जगह पहुँचल आ ओही ज़माना से एकरा के भूमध्यसागरीय इलाका आ उत्तरी भारत में उपराजल जाला। स्पेन के कब्जा वाला अमेरिका में ई 16वीं सदी में चहुँपल आ कैलीफोर्निया में 1769 में नया बसे वाला लोग द्वारा ले जाइल गइल।

आज के समय में आनार के खेती पूरा मध्य पूरब आ काकेशस क्षेत्र में, उत्तरी अफिरका आ उष्णकटिबंधीय अफिरका में, भारतीय उपमहादीप में, मध्य एशिया में, दक्खिन पुरुब एशिया के सूखल रहे वाला कुछ इलाका में, आ भूमध्यसागरीय बेसिन के कुछ इलाका सभ में उपजावल जा रहल बाटे। उत्तरी अमेरिका के एरिजोना आ कैलीफोर्निया के कुछ हिस्सा में भी एकर खेती कइल जा रहल बा। हाल के समय में यूरोपीय आ पच्छिमी गोलार्ध में एकर व्यापारिक महत्व बढ़ल बाटे।




#Article 180: जामुन (162 words)


जामुन (बैज्ञानिक नाँव : Syzygium cumini) एक तरह क सदाबहार पेड़ हवे जेवना पर ख़ूब गाढ़ बैंगनी रँग क फर फरेला| जामुन क पेड़ भारत आ दक्षिण एशिया की बाकी कुल देशन आ इण्डोनेशिया आदि में पावल जाला।

एकरा  विभिन्न घरेलू नाम जैसे जामुन, राजमन, काला जामुन, जमाली, ब्लैकबेरी भी ह प्रकृति में यी  अम्लीय अउर कसाव  होला अउर स्वाद में मीठ होला। अम्लीय प्रकृति के कारण  लोग एकरा ke raamras के साथ  खाले।

जामुन के  फल 100 में 70  खाए  जोग  होता होला । एकरामे ग्लूकोज आ फ्रक्टोज दो मुख्य स्रोत होले। फल में खनिजो के मतरा ढेर  होला। अन्य फलों के अपेक्षाकृत  में यह कम कैलोरी देवे ला। एगो सामान्य  आकार के जामुन 3-4 कैलोरी ऊर्जा  देबेला। एह फल के बीज में काबरेहाइड्रेट, प्रोटीन आ कैल्शियम के मतरा  ढेर होला  यी  लोह तत्व  का बड़ा स्रोत ह । प्रति 100 ग्राम जामुन  में एक से दो मिग्रा  लोह तत्व  होला। एकरा में  विटामिन बी, कैरोटिन, मैग्नीशियम आ  रेषाद्दार तत्व  होला 

 




#Article 181: उत्तर प्रदेश क नाच (713 words)


लोकनाच में उत्तर प्रदेश के मय अंचल के आपन विशिष्ट चिन्हासी बा। समृद्ध विरासत के विविधता के संईतल ई आंगिक कलारूप लोक संस्कृति के प्रमुख वाहक बङुवे।

ख़्याल नृत्य पुत्र जन्मोत्सव पर बुंदेलखण्ड में किया जाता है। इसमें रंगीन कागजों तथा बाँसों की सहायता से मंदिर बनाकर फिर उसे सिर पर रखकर नृत्य किया जाता है।

रास नृत्य ब्रज में रासलीला के दौरान किया जाता है। रासक दण्ड नृत्य भी इसी क्षेत्र का एक आकर्षक नृत्य है। 

झूला नृत्य भी ब्रज क्षेत्र का नृत्य है, जिसका आयोजन श्रावण मास में किया जाता है। इस नृत्य को इस क्षेत्र के मंदिरों में बड़े उल्लास के साथ किया जाता है।

मयूर नृत्य भी ब्रज क्षेत्र का ही नृत्य है। इसमें नर्तक मोर के पंख से बने विशेष वस्त्र धारण करते हैं।

धोबिया नृत्य पूर्वांचल में प्रचलित है। यह नृत्य धोबी समुदाय द्वारा किया जाता है। इसके माध्यम से धोबी एवं गदहे के मध्य आजीविका संबंधों का भावप्रवण निरूपण किया जाता है।

चरकुला नृत्य ब्रज क्षेत्रवासियों द्वारा किया जाता है। इस घड़ा नृत्य में बैलगाड़ी अथवा रथ के पहिये पर कई घड़े रखे जाते हैं फिर उन्हें सिर पर रखकर नृत्य किया जाता है।

कठघोड़वा नृत्य पूर्वांचल में माँगलिक अवसरों पर किया जाता है। इसमें एक नर्तक अन्य नर्तकों के घेरे के अंदर कृत्रिम घोड़ी पर बैठकर नृत्य करता है।

जोगिनी नृत्य विशेषकर रामनवमी के अवसर पर किया जाता है। इसके अंतर्गत साधु या कोई अन्य पुरुष महिला का रूप धारण करके नृत्य करते हैं।

धींवर नृत्य अनेक शुभ अवसरों पर विशेषकर कहार जाति के लोगों द्वारा आयोजित किया जाता है।

शौरा या सैरा नृत्य बुंदेलखण्ड के कृषक अपनी फसलों को काटते समय हर्ष प्रकट करने के उद्देश्य से करते हैं।

कर्मा व शीला नृत्य सोनभद्र और मिर्जापुर के खखार आदिवासी समूह द्वारा आयोजित किया जाता है।

पासी नृत्य पासी जाति के लोगों द्वारा सात अलग अलग मुद्राओं की एक गति तथा एक ही लय में युद्ध की भाँति किया जाता है।

घोड़ा नृत्य बुंदेलखण्ड में माँगलिक अवसरों पर बाजों की धुन पर घोड़ों द्वारा करवाया जाता है।

धुरिया नृत्य को बुंदेलखण्ड के प्रजापति (कुम्हार) स्त्री वेश धारण करके करते हैं।

छोलिया नृत्य राजपूत जाति के लोगों द्वारा विवाहोत्सव पर किया जाता है। इसे करते समय नर्तकों के एक हाथ में तलवार तथा दूसरे हाथ में ढाल होती है।

छपेली नृत्य एक हाथ में रुमाल तथा दूसरे हाथ में दर्पण लेकर किया जाता है। इस के माध्यम से नर्तक आध्यात्मिक समुन्नति की कामना करते हैं।

नटवरी नृत्य पूर्वांचल क्षेत्र के अहीरों द्वारा किया जाता है। यह नृत्य गीत व नक्कारे के सुरों पर किया जाता है।

देवी नृत्य अधिकांशतः बुंदेलखण्ड में ही प्रचलित है। इस लोक नृत्य में एक नर्तक देवी का स्वरूप धारण कर अन्य नर्तकों के सामने खड़ा रहता है तथा उसके सम्मुख शेष सभी नर्तक नृत्य करते हैं।

राई नृत्य बुंदेलखण्ड की महिलाओं द्वारा किया जाता है। यहाँ की महिलाएँ इस नृत्य को विशेषतः श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर करती हैं। इसको मयूर की भाँति किया जाता है, इसीलिेए यह मयूर नृत्य भी कहलाता है।

बुंदेलखण्ड के अहीरों द्वारा अनेकानेक दीपकों को प्रज्ज्वलित कर किसी घड़े, कलश अथवा थाल में रखकर प्रज्ज्वलित दीपकों को सिर पर रखकर दीप नृत्य किया जाता है।

पाई डण्डा नृत्य गुजरात के डाण्डिया नृत्य के समान है जो कि बुंदेलखण्ड के अहीरों द्वारा किया जाता है।

कार्तिक नृत्य बुंदेलखण्ड क्षेत्र में कार्तिक माह में नर्तकों द्वारा श्रीकृष्ण तथा गोपियों का रूप धरकर किया जाता है।

कलाबाज नृत्य अवध क्षेत्र के नर्तकों द्वारा किया जाता है। इस नृत्य में नर्तक मोरबाजा लेकर कच्ची घोड़ी पर बैठ कर नृत्य करते हैं।

ब्रज की लट्ठमार होली की तरह बुंदेलखण्ड विशेषकर चित्रकूट में दीपावली के दिन ढोल-नगाड़े की तान पर आकर्षक वेशभूषा के साथ मोरपंखधारी लठैत एक दूसरे पर ताबड़तोड़ वार करते हुए मोरपंख व दीवारी नृ्त्य व खेल का प्रदर्शन करते हैं।

सोनभद्र व पड़ोसी जिलों में संतान की कामना पूरी होने पर ठडिया नृ्त्य का आयोजन सरस्वती के चरणों समर्पित होकर किया किया जाता है।

मिर्जापुर और सोनभद्र आदि जिलों में चौलर नृत्य अच्छी वर्षा तथा अच्छी फसल की कामना पूर्ति हेतु किया जाता है।

ढेढिया नृत्य का प्रचलन द्वाबा क्षेत्र में है। राम के लंका विजय के पश्चात वापस आने पर स्वागत में किया जाता है। इसमें सिरपर छिद्रयुक्त मिट्टी के बर्तन में दीपक रखकर किया जाता है।

सोनभद्र की जनजातियों द्वारा ढरकहरी नृत्य का आयोजन किया जाता है।




#Article 182: पुराण (165 words)


पुराण संस्कृत साहित्य आ हिंदू धर्म के ग्रंथ हवें स। कुल अठारह गो पुराणन के जानकारी मिलेला।

पुराण अठारह हैं । विष्णु पुराण के अनुसार उनके नाम ये हैं—विष्णु, पद्य, ब्रह्म, शिव, भागवत, नारद, मार्कंडेय, अग्नि, ब्रह्मवैवर्त, लिंग, वाराह, स्कंद, वामन, कूर्म, मत्स्य, गरुड, ब्रह्मांड और भविष्य ।

पुराणों में एक विचित्रता यह है कि प्रत्येक पुराण में अठारहो पुराणों के नाम और उनकीश्लोकसंख्या है । नाम और श्लोकसंख्या प्रायः सबकी मिलती है, कहीं कहीं भेद है । जैसे कूर्म पुराण में अग्नि के स्थान में वायुपुराण; मार्कंडेय पुराण में लिंगपुराण के स्थान में नृसिंहपुराण; देवीभागवत में शिव पुराण के स्थान में नारद पुराण और मत्स्य में वायुपुराण है । भागवत के नाम से आजकल दो पुराण मिलते हैं—एक श्रीमदभागवत, दूसरा देवीभागवत । कौन वास्तव में पुराण है इसपर झगड़ा रहा है । रामाश्रम स्वामी ने 'दुर्जनमुखचपेटिका' में सिद्ध किया है कि श्रीमदभागवत ही पुराण है । इसपर काशीनाथ भट्ट ने 'दुर्जनमुखमहाचपेटिका' तथा एक और पंडित ने 'दुर्जनमुखपद्यपादुका' देवीभागवत के पक्ष में लिखी थी ।




#Article 183: प्रदूषण (1543 words)


प्रदूषण अइसन क्रिया चाहे घटना हऽ जेवना में प्राकृतिक पर्यावरण में कौनो अइसन चीज क प्रवेश होला जेवना से पर्यावरण के नोकसान पहुँचे। जवनी चीज की प्रवेश से अइसन होला ओ पदार्थन के प्रदूषक पदार्थ कहल जाला। आमतौर पर पर्यावरण में कई प्राकृतिक कारण से अइसन पादर्थ सभ के प्रवेश हो सके ला जे नोकसानदेह होखे, जइसे कि जंगल के आग से निकलल धुँआ चाहे ज्वालामुखी से निकले वाली गैस आ धुँआ, बाकी एह शब्द के इस्तेमाल मनुष्य द्वारा पर्यावरण में पहुँचावल जा रहल खराब परभाव वाली चीजन खातिर होखे ला। ई प्रदूषक सभ ठोस, द्रव चाहे गैस के रूप में पदार्थ हो सके ला चाहे गर्मी इत्यादि के रूप में एनर्जी हो सके ले; बस अगर प्रदूषक तत्व के पर्यावरण में एतना तेजी से प्रवेश हो रहल बा कि ऊ प्राकृतिक रूप से गैर-नोकसानदेह रूप में बदल जाय चाहे छितरा जाय, तब ऊ प्रदूषण कहल जाई।

प्रदूषण क कई गो प्रकार हो सकेला। आमतौर पर पर्यावरण की जवनी अंग में प्रदूषक चीज क प्रवेश होला ओही की नाँव पर ओ प्रकार का भी नाँव रखल जाला। जइसे अगर पानी में कौनो कूड़ा-कचरा फेकला से पानी क गुणवत्ता खराब होखे त ए के जल प्रदूषण कहल जाई।

एही प्रकार से वायु प्रदूषण आ मिट्टी प्रदूषण क नाँव धराइल बा। कई बेर जवनी चीज से प्रदूषण होला ओहू की नाँव पर प्रदूषण की प्रकार क नाँव धरा जाला जइसे कि आवाज से होखे वाला प्रदूषण के आवाज प्रदूषण आ प्रकाश से होखे वाला के प्रकाश प्रदूषण कहल जाला।

प्रदूषण से मनुष्य की स्वास्थ पर बहुत तरह क बुरा प्रभाव पड़ेला। हाले में विश्व स्वास्थ्य संगठन की एगो आकलन की हिसाब से साल 2012 में वायु प्रदूषण की कारण करीब 70 लाख लोगन के आपन जान गंवावे के पड़ल।

प्रदूषण के सुरुआत आदमी के द्वारा एकट्ठा हो के एक जगह रहे के एकदम सुरुआती दौर से शुरू होला, जबसे मनुष्य झुंड में बस्ती बना के रहे शुरू कइल; आखिर आजो बिबिध अध्ययन में अइसन पुराना बस्ती सभ के ओही सभ चीजन से पहिचान कइल जाला जे ओह जमाना के आबादी द्वारा कबाड़ के रूप में छोड़ल गइल। हालाँकि, प्रदूषण तबतक ले कौनों समस्या ना रहल जबतक के हर ब्यक्ति के लगे निवास करे खातिर पर्याप्त जगह रहे। मूल रूप से कोइला के इस्तेमाल आ शहरीकरण से एह समस्या के सुरुआत दर्ज कइल जाला; भले ऊ हजार दू हजार साल पुरान शहर सभ होखें। धातु पघिलावे के काम में भट्ठी के इस्तेमाल से प्रदूषण के उदाहरण बहुत पुराना समय के सभ्यता सभ में मिले ला।

बाद के प्रदूषण मुख्य रूप से उद्योग क्रांति के बाद के समस्या हवे। बिबिध किसिम के उद्योग सभ में कोइला के इस्तेमाल से उपजे वाला धुँआ आ एह उद्योग सभ से निकले वाला कचरा प्रदूषण के सभसे प्रमुख वजह बनल।

प्रदूषण के बर्गीकरण कई आधार पर कइल जा सके ला आ एकरा के कई प्रकार में बाँटल जा सके ला। पर्यावरण भा इकोसिस्टम के कवन अंग में प्रदूषक तत्व प्रवेश का रहल बाड़ें एह आधार पर, प्रदूषक तत्व के आधार पर, भा मनुष्य के ओह कामकाज के आधार पर जवना से प्रदूषण हो रहल बा, ई कुछ अइसन आधार बाड़ें जिन्हन के हिसाब से बाँट के प्रदूषण के प्रकार बतावल जाला। नीचे ई संछेप में दिहल गइल बा:

पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद हवा के गुणवत्ता सगरी जीवधारी सभ आ इकोसिस्टम के सही से संचालन खाती बहुत महत्व के चीज बा। अगर हवा में प्रदूषक तत्व के प्रवेश होखे आ ओह कारण से हवा के गुणवत्ता में कमी आवे, एकर परभाव जीव-जंतु, जेह में मनुष्य भी शामिल बाड़ें, आ इकोसिस्टम के काम करे पर खराब असर डाले तब स्थिति हवा प्रदूषण होला। सभसे आम रूप धुँआ के प्रवेश से हवा के गुणवत्ता में खराबी बा। चाहे ई धुँआ उद्योग सभ के चिमनी से निकले वाला होखे, डीजल-पेट्रोल से चले वाली गाड़ी सभ के होखे, खेत में बेकार डाठ जरावे से होखे। शहरीकरण आ उद्योगीकरण के कारण पूरा दुनिया में धुँआ से होखे वाला हवा प्रदूषण एगो समस्या बाटे। एकरे अलावा धूर के महीन कण इत्यादि के हवा में चहुँपे से भी हवा प्रदूषण होला।

आम गैस सभ जे हवा प्रदूषण खातिर जिम्मेदार बाड़ी उनहन में कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, क्लोरोफ्ल्यूरोकार्बन (CFCs) आ नाइट्रोजन के आक्साइड बाड़ें जे उद्योग सभ आ मोटरगाड़ी आ से पैदा होखे लें। फोटोकेमिकल ओजोन आ स्मॉग के पैदाइश तब होखे ला जब नाइट्रोजन के ऑक्साइड सभ आ हाइड्रोकार्बन सभ सुरुज के रोशनी के साथे रिएक्शन करे लें। पार्टिकुलेट मैटर, या फिर महीन धूर में माइक्रोमीटर साइज PM10 से PM2.5 हवा के प्रदूषण के कारण बने ला।

हावा प्रदूषण केतना नोक्सान्देह हो सकेला एकर अंजाद एही से लगावल जा सके ला कि बिस्व स्वास्थ्य संगठन के एगो आकलन की हिसाब से साल 2012 में हावा प्रदूषण के चलते करीब 70 लाख लोगन के आपन जान गंवावे के पड़ल।

पानी परदूषण भा जल प्रदूषण पानी के भंडार सभ में नोकसानदेह चीजन के प्रवेश से होला। नदी, झील, ताल, समुंद्र आ जमीन के नीचे के जलसोता सभ में सीधे या फिर अप्रत्यक्ष रूप से नोक्सानदेह पदार्थन के पहुँचे से उनहन में मौजूद पानी के क्वालिटी खराब हो जाला आ जिंदा जिया-जंतु आ बनस्पति सभ खातिर इस्तमाल लायक ना रह जाला।

मनुष्य के कई तरह के कामकाज सभ से पानी के क्वालिटी खराब हो सके ले। आमतौर पर शहर आ बस्ती सभ से निकले वाला गंदा पानी आसपास के नदी चाहे झील में पहुँच के ओकरा के गंदा क सके ला। शहर सभ में कई किसिम के उद्योग अइसन होलें जिनहन से गंदगी आ नोकसानदेह पदार्थ बाहर निकले लें आ पानी में छोड़ दिहल जालें। एकरे अलावा खेती में इस्तेमाल होखे वाली केमिकल वाली खाद आ बिबिध किसिम के कीटनाशक सभ अंत में बहि के पानी में पहुँचे लें आ नदी के पानी के गंदा क सके लें।

माटी में मनुष्य द्वारा नोकसान देह पदार्थ छोड़े से भा कौनों अन्य तरीका से माटी के प्राकृतिक सिस्टम के खराब करे से होला। अधिकतर, ई उद्योग से निकले वाला कचड़ा आ गंदा पानी से, खेती में बहुत ढेर खाद आ कीटनाशक के इस्तमाल से आ शहरी कचड़ा के बिना शोधले फेंके से होला।

माटी में परदूषण भा कंटामिनेशन खातिर जिम्मेदार मुख्य पदार्थ सभ में पेट्रोलियम हाइड्रोकार्बन (पेट्रोलियम तेल से निकले वाला कार्बनिक पदार्थ, जइसे प्लास्टिक, पन्नी इत्यादि), कीटनाशक, आ भारी घातु के कण शामिल बाने।

समुंद्री प्रदूषण समुंद्र आ सागर सभ के पानी में अइसन पदार्थ के प्रवेश होला जे नोकसानदेह होखे। ई प्रदूषक तत्व सभ आम कचरा-कबाड़ हो सके ला, रासायनिक पदार्थ (केमिकल) हो सके लें, प्लास्टिक हो सके ला, खेती किसानी के इस्तेमाल के खाद आ कीटनाशक के बह के समुंद्र में पहुँचे वाला हिस्सा हो सके ला आ अउरी किसिम-किसिम के नोकसान पहुँचावे वाला चीज हो सके ला। साथे साथ कौनों जगह के समुंदरी पानी में आक्रमणकारी प्रजाति के पहुँच जाए के भी समुंद्री प्रदूषण में गिनल जा सके ला।

लगभग अस्सी प्रतिशत समुंदरी प्रदूषण जमीनी सतह से चीजन के समुंद्र में पहुँचे से होला।

प्रदूषण के कीमत चुकावे के पड़े ला। अइसन मैन्यूफैक्चरिंग के कामकाज जे हवा प्रदूषण पैदा करे, पूरा समाज खातिर सेहत संबधी नोकसान पैदा करे ला जेकर पूरा समाज के कीमत चुकावे के पड़े ला। एह तरह के हवा के गंदगी के साफ़ करे में कीमत चुकावे के पड़े ला। अइसन मैन्यूफैक्चरिंग कामकाज में पैदा होखे वाला हवा प्रदूषण के निगेटिव एक्सटर्नलिटी पैदा करे ला जेकर परिभाषा ई हवे कि “जब कौनों फर्म अइसन उत्पादन करे जे ओह लोगन के नोकसान पहुँचावे जे लोग के फर्म द्वारा कौनों किसिम के कंपेनशेसन नइखे दिहल जा रहल। एकर एगो अउरी उदाहरण दिहल जा सके ला, जइसे कि कौनों कपड़ा धोवे वाली फर्म एगो इस्टील बनावे वाली फर्म के लगे होखे, इस्टील के फर्म से निकले वाली गंदगी के कारन कपड़ा धोवे वाली फर्म के बेसी खर्चा करे के पड़ी।

एही तरह से प्रदूषण कौनों उत्पादन क रहे वाली फर्म के ऊपर भी कीमत देवे के जरूरत पैदा करे ला। उदाहरण खातिर अगर फर्म पर कानूनी रूप से दबाव होखे कि कम प्रदूषण करे के बाटे, अइसना में प्रदूषण कम करे के उपाय में ओह फर्म के खर्चा लागी, एकरा के अबैटमेंट कॉस्ट कहल जाला; अगर हर एक अगिला इकाई बस्तु के उत्पादन पर लागे वाली अइसन कीमत के गिनती कइल जाय तब ऊ मार्जिनल अबैटमेंट कीमत कहाई।2005 के एगो इस्टीमेट के अनुसार अमेरिका में प्रदूषण से एह तरह के रोक में लागे वाली पूँजी आ फर्म चलावे के खर्चा में एह काम के खर्चा लगभग $27 बिलियन के रहल।

प्रदूषण पर्यावरण में कई रूप में आ ब्यापक तरीका से मौजूद बा। एकर कई किसिम के परभाव पर्यावरण पर पड़े लें:

प्रदूषण नियंत्रण चाहे प्रदूषण कंट्रोल शब्द के इस्तेमाल पर्यावरण के मैनेजमेंट खातिर कइल जाला जेकरा चलते प्रदूषण के कम कइल जा सके। एह में प्रदूषण फइलावे वाला चीज सभ पर रोक लगावल शामिल बा। अगर प्रदूषण कंट्रोल के उपाय न इस्तेमाल कइल जाय तब बिबिध किसिम के कचड़ा जे अतिउपभोग से, ठंढा देसन में गर्मी करे वाला उपाय सभ से, खेती में इस्तेमाल होखे वाला खाद आ कीटनाशक सभ से, खनन से, उद्योग से आ परिवहन से निकल के पर्यावरण में चहुँप जाई। एकरा चलते पर्यावरण के सेहत के नोकसान पहुँची। प्रदूषण रोकथाम आ कचरा घटाव के उपाय सभ के सभसे बेसी महत्व दिहल जाला, हालाँकि, प्रदूषण कंट्रोल के औरी उपाय भी बाने। प्राकृतिक जमीन के कौनों किसिम के बिकास करत समय अइसन तकनीक के इस्तेमाल भी कइल जा सके ला जवना से कि जमीन के बिकास (लैंड डेवलपमेंट) के पर्यावरण पर परभाव के कम कइल जा सके।




#Article 184: दैलेख जिला (1505 words)


दैलेख जिला नैपाल देस की मध्य पश्चिमांचल विकास क्षेत्र आ भेरी अंचल का एगो जिला हवे। ई जिला एगो विकट पहाड़ी जिला कुल की श्रेणी मे गिनल जाला। जिला क भूगोलीय आकृति तिभुज नियर बा। इहाँ क सबसे ऊँच चोटी महाबुलेक हवे आ सबसे कम ऊँचाई वाला जगह तल्लो डुंगेश्वर नाँव क अस्थान ह। ए जिला क सीमा पुरुब ओर भेरी अंचल की जाजरकोट जिला की साथे, पच्छिम ओर सेती अंचल की अछाम जिला की साथे, दक्खिन ओर भेरी अंचल की सुर्खेत जिला आ उत्तर ओर कर्णाली अंचल की कालीकोट जिला की साथै जुड़ल बाटे।

ए जिला की भूगोलीय बनावट के मुख्यरूप से तीन हिस्सा में बाँटल गइल बा - 

ए अस्थान क नाँव दैलेख कइसे पड़ल एकरी बारे में कई गो कहानी प्रचलित बा। एगो कहानी की मोताबिक प्राचीन काल में ई स्थान महर्षि दधीचि क तपोभूमि रहल आ एही  आधार पर एके  दधिलेख कहल गइल आ फिन बाद में इहे दधिलेख बदल के दैलेख बनि गइल। दूसरा कहानी की मोताबिक प्राचीन काल में यह स्थान देवता लोगन का निवास स्थान रहल आ देवलोक कहल जाव जेवन बाद में बिगड़ के दैलेख हो गइल। एगो तीसरका मत इहो बा कि इहँवा तमाम दही दूध मिलेला आ एही कारण ए के दैलेख कहल जाला।

ए जिला क नाँव भी जिला मुख्यालय दैलेख की नाँव पर रक्खल गइल बा। 

दैलेख जिला बाइसे राज्यकाल में खस राज्य क जाड़ा क राजधानी की  रूप में परिचित दुल्लु अउरी बेलासपुर दू गो राज्यन में बंटल रहे। प्राचीन आ मध्यकाल में गू गो राज्यं में बंटल ए जिला के शाहकालीन नेपाल पुर्नएकीकरण अभियान में गोरखाली राजकुमार बहादुर शाह की द्वारा सन 1789 की आसपास नेपाल राज्य में जोड़ला क तथ्य इतिहासी वर्णन में मिलेला। 

जिला की विभिन्न जगह पर अस्थापित मन्दिर, देवल आ शिलालेख आदि ए जिला की इतिहास क आजो परिचय दे रहल बाड़ें। कहल जाला कि की दैलेख जिला मुख्यालय पुरानो बजार में प्रसिद्ध कोतगढी पुराना समय में एगो किला रहे। वि.सं. 2009 साल पहिले अछाम, सुर्खेत आ जाजरकोट जिलन के कुछ क्षेत्र भी एही जिला में जुड़ल रहे।  राजा रजौटा उन्मुलन ठीक 2016 की बाद आधुनिक नेपाल क प्रशासनिक ढाँचा बमोजिम गौडा अउरी  2018 साल बद ई जिला पूर्व मे भैरीलेक अउरी कट्टीभञ्ज्याङ्ग, उत्तर में महाबुलेक, पश्चिम में कर्णाली नदी, आ दक्षिण में तीनचुला की अन्दर आवे वाला इलाका के दैलेख जिला में मिला के सीमांकन क इललोग।  राणा कालिन प्रधान मन्त्री जंग बहादुर राणा क बचपन दैलेख जिला की दुल्लु क्षेत्र  में बीतल हवे। दैलेख जिला क लोग वि.सं. 2007 साल की क्रान्ति में पश्चिम नेपाल में सबसे आगे रहे। तत्कालीन भुमीगत नेपाली काँग्रेस पाटी के दैलैख की कटुवाल क निवासी शेर सिंह खड्का कालिकोट, जुम्ला, अछाम, डोटी आदी पश्चिमी जिलन पर कब्जा कइले रहलें। अइसहीं वि.सं. 2036 की जनमत संग्रह में आ  2046 की  जन आन्दोलन में भी दैलेख क  रंग बहादुर शाही, बिनोद कुमार शाह, मणी राज रेग्मी गणेश बहादुर खड्का, शिव राज जोशी, रंग नाथ जोशी, गोविन्द बन्दी, हेम बहादुर शाही, हर्क बहादुर शाही, पुर्ण ब. शाही, भद्र ब. शाही, तर्क ब. बडुवाल, बजिर सिंह बि.क. चिदानन्द स्वामी नियर बहुत नेता लोग साथ दिहल। वि.सं 2063 की जन आन्दोलन में भी उपर गिनावल लोगन की संघे मिल के कुछ नया नेता लोग जैसे:- थिर ब. कार्की, रत्नेश श्रेष्ठ, कृष्ण बी.सी. राज ब. बुढा, राम प्रसाद इत्यादी लोग हिस्सा लिहल।

दैलेख जिला क बिस्तार अक्षांस: 28.35 से 29.8 उत्तर ले आ पुरुब पच्छिम बिस्तार देशान्तर 81.25 से 81.53 पूर्व ले बाटे। एकर सीमा बनावे वाला अउरी जिला पुरुब ओर जाजरकोट, पश्चिम ओर अछाम, उत्तर में कालिकोट आ दक्खिन में सुर्खेत जिला बाटे।

जिला क कुल क्षेत्रफल: 1502 वर्ग कि.मि. (देश का कुल भू-भाग का 1.02%) बाटे आ इहाँ सब से ऊँच अस्थान: समुद्र सतह से 4168 मीटर (महाबुलेक) आ सबसे नीचाई वाला अस्थान 544 मीटर (तल्लो डुङ्गेश्वर) बाटे।

राजनैतिक हिसाब से दैलेख जिला के 49 गा.वि.स., 2 नगरपालिका, 2 निर्वाचन क्षेत्र आ 11 इलाकन में विभाजित कइल गइल बा।

नदी तट से हिमालय तक फइलल इहँवा की जमीनी भूमि आकार के तीन हिस्सा में विभाजित कइल जाला:

यह भूमि आकार वाला इलाका जिला क क्रम से करीब 10%, 37%, आ 53% रकबा घेरले बाड़ें। मध्य पहाड़ी क्षेत्र में जिला का 85% से भी ज्याद जनसंख्या आ बस्ती केन्द्रित बा। 

दैलेख जिला में पहिले कुल 60 गा.वि.स. (ग्राम पञ्चायत) रहे। 5 गा.वि.स.के मिला के नारायण नगरपालिका बनावल गइल, आ 6 गा.वि.स. के मिला के दुल्लु नगरपालिका बनावल गइल। ए समय ए जिला में 49 गा.वि.स. आ दू गो नगरपालिका बाटे।

दैलेख जिले में बिभिन्न जाती तथा बिभिन्न धर्म का क लोग रहेला। इहँवा हिन्दू धर्म की लोगन क बिसेस अधिकता बा। इहाँ हिन्दू लोगन का कुल तिहुआर मनावल जाला। दशैं, तिहार, माघी, होरी, नयां बर्ष, रक्षावंधन, तीज इत्यादी कुल तिहुआरण के हिन्दू धर्मावलम्बी की अलावा अन्य धर्म क लोग भी मनावत देखल जाला। ई जिला बहु-जाती बहु-भाषी भइला की बावजूद भी इहाँ हिन्दू संस्कृती के ढेर मान्यता दिहल जाला। हिन्दू त्यौहारन की दिन सरकारी छुट्टी होला  और जगह-जगह पर मेला लागे ला।

दैलेख जिला बिकट पहाड़ी जिला जरुर हवे बाकी एही से ई पर्यटन खातिर एगो रमणीय अस्थान बनि गइल बा। इहाँ पुराना जमाना क बनल देवल, किला, दरगाह आदी जिला की हर हिस्सा में देखाई देला। जैसे:-

ए अस्थानन पर कौनो न कौनो दैविक घटना जरुर मिलेला। कहीं पानी में आग क ज्योती बरत मिलेला त कहीं जमीन में से धूर निकलता लउकेला। कहल जाला कि महाभारत की समय में युधिष्ठिर का मुकावला नागरुप क राजा नहुष की साथ एही पञ्चकोशी अस्थान पर भइल रहे। राजा युधिष्ठिर नाग रुपी नहुक के ज्ञान दिहलें तब जाके नाहक के मुक्तीमिलल। नाग रुपी नहुष क शिर श्रीस्थान पर, गोड़ पादुका आस्थान पर, नाभ नाभिस्थान पर, कक्ष कोटिला पर आ एही तरे धुलेश्वर पर धुलगिरल रहे। 

एकरी साथे ए जिला में पर्यटक लोगन का मन मोहित करे वाला कई गो अस्थान बाटे। 
जिला की मध्यपश्चिम भाग से हो के बहत छामगाड आ पूर्व के तर्फ बहत लोहोरे नदिन क संगम चुप्रा दैलेख जिला क बहुत आकर्षक भूगोलीय स्थल मानल जाला। खस राजा नागराज क हिमाली राज्य क जाड़ा क राजधानी दैलेख दुल्लुक्षेत्र में पञ्चकोशी तीर्थस्थल में श्रीस्थान आ नाभिस्थान की भितर नित्य प्रज्वलित ज्वाला जी नेपाल क राष्ट्रिय स्तर क धार्मिक, इतिहासी अउरी पर्यटकीय अस्थान हवे। भुर्ती गांव में एक साथ रहे 22 देवल के विश्व सम्पदा सम्भाव्य सूची में रखल गइल बाटे। रावतकोट गावं में पञ्चदेवल, जिला मुख्यालय पर कोत गढी आ दुल्लु क्षेत्र में रहे कीर्ति खम्बा, सात खम्बा, पटङ्गेनी दरबार, जंगबहादुर राणा के पिता बाल नरसिंह कुवँर का समाधी स्थल, बालेश्वर मन्दिर जेवना क चिनाई पुराना जमाना में उर्दी क बेसन भें के बनावल सीमेंट नियर चीज से कइल गइल बा, देखे लायक बाटे। एकरी आसपास की गो पौराणिक शिलालेख इहाँ क प्रमुख पर्यटन अस्थान हवें।

दैलेख की भूगोलीय दृष्टी से पहाडी जिला होखाले की वजह से इहाँ बहुत पर्यटकिय क्षेत्र बाटे। नेपाल क परमुख मानल जाए वाला पंचकोशी तिर्थस्थल एही जिला में बाटे। एकरी साथै साथ नेपाल क एकलौता प्रमुख शिलालेख दुल्लु स्थित कीर्तिखम्बा आ वैज्ञानिकन की अनुसार मृत जवालामुखी मानल जाए वाली चोटी धुलेश्वर एही जिला में अवस्थित बाटे।

साथे साथ नेपाल क एक मात्र पेट्रोल, गैस आ मिट्टितेल क खानि एही जिला में मिलले क सम्भावना बाटे। प्राचिन मत अनुसार डुन्गेश्वर में दधिचि ऋषि के आश्रम रहल ई विश्वास कइल जाला। एही तरे बैक का लेक के महाभारत की पात्र दोर्णाचार्य क तपोभूमी द्रोणाचल पर्वत कहल जाला। 

इहाँ पर कई धार्मिक सम्पदा रहल बाड़ी। यहां के कुछ धार्मिक सम्पदाओं का नाम प्रकार नीचे दिहल जात बा-

 

नुवाकोट से लेके भारत की गढ़वाल तक की इलाका में विभिन्न जगह में प्राचिन काल में देवल निर्माण कइल गइल बा। बाकिर सब से ढेर  संख्या मे देवल दैलेख जिला मिलेला। स्थानिय जन विश्वास अनुसार महाभारत काल के पात्र पाण्डवों द्वारा निर्माण किए बताए गए ये देवल क्यों और किस प्रयोजन के लिय निर्माण किएगए हें, इस का आज तक कोही ठोस प्रमाण नहीं है। दैलेख जिला कि विभिन्न क्षेत्र में अस्थापित देवल अउरी अन्य सम्पदा निम्नलिखित बाटे:

पर्यटकीय दृष्टिकोण से उपर उल्लिखित सभी सम्पदा स्थित स्थानों में सडक की पहुंच दै। शित काल में सवारी साधन से यात्रा करना सम्भव है। यह सम्पदाएं तक पहुंचने के लिय जिला विकास समिति और गावं विकास समिति के ओर से निरन्तर लगानी होरही है। जितना पहुंच के लिए सडक में लगानी हुइ है, इस तुलना में यह सम्पदाओं का संरक्षण और सम्बर्धन में लगानी हो नही पारहा है। स्थानीय समुदाय को भी इनकी महत्वा के विषय में समझ नहोने के कारण यह अमूल्य सम्पदायें जीर्ण अवस्था में पहुंचे हें।

दैलेख जिला को विभिन्न जात जातीओं का उद्गम स्थल के रूप में भी लिया जाता है क्यों की इस जिले के विभिन्न स्थानों से उद्गम हुए जाती के लोग नेपाल और भारत के विभिन्न जगहों पर बसे हुए हें। जैसे की :- 

इत्यादी जगहों से उपर उल्लेखित जातिन क पैदाइश भइल मानल जाला। उपर उल्लेखित जात के लोग संसार की कवनों भी कोने में बसल होखें बाकी ऊ लोग अपना उद्गम स्थान के रूप में दैलेख जिला के जरूर पहिचाने ला।

दैलेख जिला के 49 गा. वि. स. (गाउं विकाश समिती/ ग्राम पञ्चायत), 2 नगर पालिका, 2 सांसदीय क्षेत्र अउरी 11 ब्लॉकन में विभाजीत कइल गइलबाटे। दैलेख जिला के गा. वि. स./नगरपालिका के नाम सूची नीचे दिहल जात बा:- 




#Article 185: चीनी भाषा (118 words)


चीनी भाषा (अंगरेजी: Chinese ; 汉语/漢語, पिनयिन: Hànyǔ; 华语/華語, Huáyǔ; या 中文 हुआ-यू, Zhōngwén श़ोंग-वॅन) चीन देश के मुख्य भाषा आ राजभाषा ह। इ संसार में सबसे अधिक बोलल जाए वाला भाषा ह। इ चीन एवं पूर्वी एशिया के कुछ देश में बोलल जायेला। चीनी भाषा चीनी-तिब्बती भाषा-परिवार में आवेला आ वास्तव में कई भाषा आ बोलियन के समूह ह। मानकीकृत चीनी असल में एक 'मन्दारिन' नामक भाषा ह। इ में एकाक्षरी शब्द या शब्द भाग ही होखेला आ इ चीनी भावचित्र में लिखल जायेला (परम्परागत चीनी लिपि या सरलीकृत चीनी लिपि में)। चीनी एक सुरभेदी भाषा ह।

चीनी भाषा वास्तव में एगो भाषा ना होके, कई भिन्न बोलियन के वर्ग ह, जे में सात मुख्य समूह बा:




#Article 186: बुनी (237 words)


बुनी एगो मौसम से संबंधित घटना हवे जेवना मे पानी आकाश से भुञ प गिरेला। ई वर्षण क एगो रूप हवे जेवना में पानी द्रव की रूप में नीचे गिरेला। बुन्नी की आकार की हिसाब से बरखा के फँकारी, झींसी, झींसा, बुन्नी कहल जाला। जमीन आ समुन्द्र से भाप बन के उड़े वाला पानी आसमान में ऊपर जा के संघनन की कारण बहुत छोट-छोट बुन्नी आ बरफ में बदल जाला जेवना से बादर बनेला। जब आपस में मिल के ई बुन्नी बड़ होजाली तब पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण से खिंचा के जमीन की ओर गिरे लागेली जेवना के बरखा कहल जाला।

बरखा पृथ्वी की जल-चक्र क एगो बहुत महत्व वाला घटना आ हिस्सा हवे काहें से की जमीन की ऊपर मीठा पानी क सबसे ढेर पुर्ती एही बरखे से होले। खेती खातिर बरखा क महत्व बहुत बा काहें से कि सिंचनी क ई प्राकृतिक साधन हवे जेवन प्रकृति हमनी के फिरी में दिहले बा। भारत जइसन देस में खेतीबारी में पैदावार बहुत ढेर मात्रा में बरखा पर निर्भर होला।

बरखा क विश्व में वितरण सब जगह एक्के नियर ना मिलेला। कहीं बहुत कम बरखा होले त कहीं बहत ढेर। एही तरे विश्व में कुछ जगहन पर साल भर रोज बरखा होला, कुच्छ जगह गर्मी में बरखा होला, कुछ जगह जाड़ा की सीजन में, आ कुछ जगह, जइसे कि भारत में, बरसात क अलग सीजने होला। भारत की मेघालय राज्य में चेरापूँजी में विश्व क सबसे ढेर बरखा होला।




#Article 187: कुंभ मेला (133 words)


कुंभ मेला भारत की चार गो जगह पर हर बारहवां बरिस लागे वाला एगो धार्मिक मेला हवे। सबसे बड़हन कुंभ मेला इलाहाबाद में गंगा, यमुना आ पौराणिक सरस्वती नदिन की संगम पर लागेला। इलाहाबाद की अलावा ई हरिद्वार, उज्जैन आ नाशिक में लागेला।
कुम्भ मेला में पूरा भारत से हिन्दू तीर्थ यात्री लोग अस्नान करे खातिर एकट्ठा होला आ पूरा विश्व से लोग एके देखे खातिर आवेला।

एह चारो जगह लागे वाला कुंभ में से इलाहाबाद के कुंभ मेला के खास महत्व हवे। इलाहाबाद में कुंभ 2001 में आ 2012 में लागल रहल आ इनहन के बीचा में छठवाँ साल पर अर्द्धकुंभ लागल। 2019 में लागे वाला अर्द्ध कुंभ के सरकारी तौर पर नाँव बदल के कुम्भ के नाँव से परचारित कइल गइल जेकरे खिलाफ इलाहाबाद हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर कइल गइल।




#Article 188: मोबाइल फोन (895 words)


मोबाइल फोन या मोबाइल (इ के सेलफोन आ हाथफोन भी कहल जायेला) एक तरह के टेलीफोन हवे जे बेतार के होला आ आसानी से कहीं ले जाइल जा सके ला। टेलीफोन के तरे ईहो आदमी के आवाज के इलेक्ट्रानिक सिग्नल में बदल देला आ एक ठो नेटवर्क द्वारा एक जगह से दूसरा जगह भेजे ला, दूसरा ओर से मिले वाला अइसने इलेक्ट्रानिक सिग्नल के वापस आवाज में बदल के सुनावे ला।

बात करे के अलावा, आज के मोबाइल के अउरी बहुत सारा उपयोग बा, जइसे मैसेज भेजल, चैट कइल, गेम खेलल, फोटो खींचल, इंटरनेट सर्फिंग कइल आ बीडियो देखल। नया ज़माना के मोबाइल फोन के स्मार्टफोन कहल जाला जिनहन में बहुत सारा मोबाइल एप इंस्टाल कइल जा सके ला आ बिबिध रूप में इस्तमाल कइल जा सके ला।

मोस्फेट, क्या लार्ज स्केल इंटीग्रेशन, सुचना थिअरी आ सेल्यूलर नेटवर्क के क्षेत्र मे बिकास होखला के चलते सस्ता मोबाइल संपर्क के बिकास भईल। दुनिया के पहिला मोबाइल फोन, जॉन ऍफ़॰ मिटचेल द्वारा आ मार्टिन कूपर द्वारा मोटोरोला कंपनी के खातिर बनावल गइल, 1973 में प्रदर्शित एह फोन के वजन लगभग 2 किलो रहल। 1979 मे निप्पोन टेलीग्राफ आउर टेलीफोन कंपनी जापान मे पहिलका सेल्यूलर नेटवर्क चालू कइलस। मोटोरोला के DynaTac 8000x हाट मे मिले वाला पहिलका मोबाइल फोन रहे।. 1983 से 2014 ले, दुनिया भ मे मोबाइल फोन के परजोग सात अरब से बेसी हो गइल; एतना मे धरती प हर केहू के एगो मोबाइल फोन मिल सकेला. 2016 के पहिलका तिमाही मे, सभ से बेसी स्मार्टफोन Samsung, Apple and Huawei बनइले रहे; स्मार्टफोन sales represented 78 percent of total mobile phone sales. For feature phones (slang: “dumbphones”) , the largest were Samsung, Nokia and Alcatel.

रेडियो इंजीनियरी के सुरुआती दौर में लोग ई सोच लिहले रहल कि भाबिस्य में हाथ में ले के रेडियो टेलीफोन से बात कइल जा सकी। साल 1917 में फिनलैंड में एरिक टाइगरस्टेड पेटेंट खाती परचा भरलें, पाकेट-साइज के फोल्ड होखे वाला टेलीफोन खातिर जेह में बहुत पातर कार्बन माइक लागल रहल। सेलुलर फोन सभ के पहिला पूर्बज सभ रेडियो सिग्नल आधारित बात करावे वाला यंत्र रहलें जिनहन के प्रयोग जहाज आ रेल में चालक दल के लोग द्वारा आपस में बात करे खातिर सुरू भइल। दूसरा बिस्व जुद्ध के बाद के दौर में पाकेट में समा जाए वाला टेलीफोन बनावे खाती दौड़ सुरू भइल। मोबाइल फोन के बिकास क्रम के कई जेनरेशन में बाँट के देखल जाला, पहिलका के जीरो जेनरेशन (0G) कहल जाला आ एह जमाना के मोबाइल फोन रेडियो आधारित रहलें, सेलुलर नेटवर्क आधारित ना रहलें आ बहुत महँगा रहलें। एहमें बेल सिस्टम के बनावल मोबाइल टेलीफोन सर्विस आ एकरे बाद के वर्जन इम्प्रूव्ड मोबाइल टेलीफोन सर्विस के नांव गिनावल जा सके ला।

ई सभे अवधारणन क पहिला अवतार ह जौन मोबाइल टेलीफोनी में अगिला बड़ कदम, एनालॉग सेल्युलर टेलीफोन के गठन के आधार बनल। इ पेटेंट में शामिल अवधारणन के (कम से कम 34 अन्य पेटेंटन में उद्धृत) बाद में कई उपग्रह संचार प्रणाली में विस्तारित करल गईल रहल। बाद में सेलुलर प्रणाली से डिजिटल प्रणाली में अद्यतन, इ पेटेंट के क्रेडिट देवेला।

एक मोटोरोला अनुसंधानकर्ता आ शासनात्मक,मार्टिन कूपर, के व्यापक रूप से अनु वाहन सेटिंग में हाथ के उपयोग खातिर पहला व्यावहारिक मोबाइल फोन के आविष्कारक मानल जयेला। 17 अक्टूबर, 1973 में रेडियो टेलीफोन प्रणाली में अमेरिका के पेटेंट कार्यालय के द्वारा कूपर के आविष्कारक घोषित करल गईल आ बाद में अमेरिका पेटेंट 3906166 जारी करल गईल रहल।
एक आधुनिक, कुछ भारी वहनीय चोगा के प्रयोग करके, कूपर 3 अप्रैल, 1973 के बेल लेबोरेटरीज के एक प्रतिद्वंद्वी डा. योएल एस. एंगेल के एक हाथ के मोबाइल फोन पर पहिला बार फोन कईलन।

 1983 में, मोटोरोला ड्य्नाTAC, संयुक्त राज्य अमेरिका में FCC के द्वारा अनुमोदित पहिला मोबाइल फोन रहल। 1984 में, बेल लेबोरेटरीज द्वारा आधुनिक व्यावसायिक सेलुलर प्रौद्योगिकी के विकसित करल गईल (ज़्यादातर गलैड़न के, पैरेलमन पेटेंट पर आधारित), जौन एकाधिक केन्द्र नियंत्रित बेस स्टेशनन (सेल साइटों) के नियोजित करले, प्रत्येक छोट क्षेत्र (एक सेल) के सेवा उपलब्ध करत रहल। सेल साइट इ तरह से स्थापित भइल कि सेल आंशिक रूप से अतिच्छादन करत रहले। एक सेलुलर प्रणाली में, एक बेस स्टेशन (सेल साइट) आ एक टर्मिनल (फोन) के बीच सिग्नल केवल इतना प्रबल होवे के चाही की उ इ दुनों के बीच पहुँच सके, ताकि विभिन्न कोशिकाअन में बातचीत के अलग करे खातिर उहे चैनल एक साथ इस्तेमाल किरल जा सके।

सेलुलर प्रणालि के कई प्रौद्योगिकी उछाल के आवश्यकता रहल, हवाले सहित, जेसे मोबाइल फोन के सेल के बीच कूच करते हुए बातचीत जारी रखे के गुंजायश रहल। इ प्रणाली में बेस स्टेशनन आ टेलीफोन दुनों में चर संचरण शक्ति शामिल बा (बेस स्टेशनन द्वारा नियंत्रित), जौन रेंज आ सेल के आकार में भिन्न संभव बनवलस। जब इ प्रणाली में विस्तार आ क्षमता के निकट पहुंचल, विद्युत पारेषण के कम करे के क्षमता द्वारा नया कोशिका के जुड़ल मुमकिन बनल, जे के परिणाम अधिक, छोट कोशिका आ इ प्रकार अधिक क्षमता। इ वृद्धि क सबूत के अभी भी कई पुरान में, लंबा सेल साइट टावरन पर देखल जा सकत बा जौन टावरन के ऊपरी हिस्से पर कौनो एंटीना ना रहल। इ साइट द्वारा मूलतः बड़ बड़ कोशिका बनल, आ इहे खातिर उके एंटीना ऊंच टावरन के ऊपर स्थापति रहल; टॉवर इ तरह से डिजाइन करल गईल रहल ताकि प्रणाली के विस्तार होखे-सेल के आकार सिकुड़ सकें- एंटीना के कम करल जा सकत बा उनके मूल मस्तूल पर सीमा के कम करे खातिर।
डिजिटल 2G (दूसरी पीढ़ी) सेलुलर प्रौद्योगिकी पर पहिला आधुनिक नेटवर्क प्रौद्योगिकी 1991 में फिनलैंड मे




#Article 189: पूड़ी (243 words)


पूड़ी चाहे पूरी एगो भारतीय खाना हवे जेवना के आटा से तेल, बनस्पति घीव चाहे शुद्ध घीव में छान के बनावल जाला। सादी पूड़ी में आटा क लोई रोटी नियर बेल के ओ के तेल चाहे घीव में छान (तल) दिहल जाला। पूड़ी क एगो दूसर रूप कचौड़ी हवे जेवना में लोई की बिचा में उरदी की दाल की संघे मसाला भर के बनावल जाला।

सामान्य रूप से भारत की हर हिस्सा में ई बनावल आ खाइल जाला। आजकाल अधिकतर लोग ए के सब्जी-भाजी की संघे सबेरे नाश्ता में खाइल पसंद करे ला। हालांकि हमेशा से ई शादी बियाह आ कौनो तीज तिहुआर पर बनावल जाए वाला चीज हवे। तेवहार में ई हलुआ कि संघे बने ले। भोजपुरिया इलाका में पूड़ी की संघे कोहड़ा क सब्जी पण्डित जी लोगन क प्रिय भोजन मानल जाय।

ए शब्द क उत्पत्ति संस्कृत की पूरिका से मानल जाला। कचउड़ी के संस्कृत में शष्कुली भी कहल जाला। बलिया आ छपरा जिला की इलाका में एकर आकार बहुत बड़हन होला आ ई करीब एक फुट से ऊपर चौड़ाई (व्यास) वाली होले।

पूड़ी आटे चाहे मैदा से बनावल जाले। एकरी खातिर कड़ा आटा गूंधल (सानल) जाला आ फिर ए के हल्का सा घीव या तेल लगाके बेल के घीव या वनस्पति तेल में छान लिहल जाला। छाने में ए के खाली एक बेर उलातल जाला आ जब ई पूड़ी फूल जाले आ दुनो ओर इन्हन क रंग ललछहूँ  हो जाला तब कड़ाही से निकाल लिहल जाला। पूड़ी गर्मागर्म परोसल जाला।




#Article 190: इकोलॉजी (287 words)


इकोलॉजी में सगरी जिंदा जिया-जंतु आ उनहन के पर्यावरण के साथ संबंध के अध्ययन होला आ जीवधारी सभ के खुद के क्रियाकलाप आ उनहन के आसपास के पर्यावरणी दसा से बनल आवास के भी अध्ययन होला, आ बिस्व के अलग-अलग जगह पर अलग दसा के कारण इलाकाई अध्ययन भी होला।

इकोलाजी (Ecology) या पारिस्थितिकी में जीवधारी सभ आ उनहन के अपने पर्यावरण की साथे क्रिया-प्रतिक्रिया क अध्ययन आ बैज्ञानिक बिस्लेषण कइल जाला। ए बिज्ञान के पर्यावरणीय जीव बिग्यान भी कहल जाला। मुख्य रूप से इ बिग्यान कौनो आस्थान की पर्यावरण के एगो सिस्टम मान के ओकर अध्ययन करे ला।

सिस्टम चाहे तंत्र क मतलब होला अइसन इकाई जेवना क कुल पार्ट चाहे अंग एक दुसरा से जुडल होखे आ आपस में क्रिया-प्रतिक्रिया करत होखे आ एही वजह से ऊ सिस्टम कई टुकड़न से मिल के बनला की बावजूद एगो सिंगल इकाई की रूप में ब्यवहार करत होखे।

ए नजरिया से देखल जाय त हमनी की पृथ्वी क पर्यावरणो एगो बहुत बड़हन सिस्टम (तंत्र) की रूप में काम करेला। पर्यावरण क रचना कई चीज से मिल के भइल बा जिनहाँ के एकर अंग (पार्ट) कहल जा सकेला आ तबो पर ई अलग-अलग अंग कौनो न कौनो क्रिया-प्रक्रिया द्वारा एक दुसरा से जुड़ के पुरा पर्यावरण के एगो सिंगल जिंदा इकाई की रूप में काम करे लायक बनावेला। एही से पर्यावरण के एगो इकोसिस्टम कहल जाला।

इकोसिस्टम की रूप में पर्यावरण के मान लिहला पर एकरी अध्ययन में कई तरह क सुबिधा हो जाला। सबसे बड़ बात ई कि तब ई मान लिहल जाला की पर्यावरण की कौनो छोट से छोट अंग में कौनो बदलाव होई त ओकर परभाव पूरा पर्यावरण पर पड़ी। ए तरह से पर्यावरण में होखे वाला बदलाव क अध्ययन करे में बहुत सुबिधा हो जाला।




#Article 191: जलवायु (140 words)


जलवायु (; क्लाइमेट) मौसम के दसा सभ के लमहर समय क औसत होला। आमतौर पर अइसन समय तीस बरिस के मानल जाला। जलवायु ई बतावेला की कौनों जगह पर कइसन मौसम रहेला आ साल भर में कइसे-कइसे मौसम में बदलाव होला। मौसम के एह चीज सभ में तापमान, नमी, हवा, हवादाब आ बरखा के सामिल कइल जाला। कौनों जगह के जलवायु पर ओह जगह के अक्षांश, जमीनी उच्चावच, ऊँचाई आ आसपास मौजूद पानी के बड़ भंडार आ धारा सभ के परभाव पड़े ला।

जलवायु के प्रकार बतावे खातिर एकरे वर्गीकरण के कई गो तरीका अपनावल गइल बाड़ें। एह सभ में सभसे परसिद्ध कोपेन के जलवायु वर्गीकरण हवे।

जलवायु बदलाव कौनो जगह की चाहे पुरा पृथ्वी की जलवायु में होखे वाला बदलाव के कहल जाला। पुराजलवायु बिज्ञान (पैलियोक्लाइमेटोलॉजी) अइसन शाखा हवे जे पुराना समय के इतिहासी जलवायु के अध्ययन करे ला।




#Article 192: छपरा (396 words)


छपरा(कैथी: 𑂓𑂣𑂩𑂰) भारत के बिहार राज्य के एकदम पच्छिमी हिस्सा में बसल एगो महत्वपूर्ण सहर हऽ। ई सारण प्रमंडल आ सारन जिला के मुख्यालय भी हऽ। शहर के लोकेशन इलाका के दू गो बिसाल नदी गंगा आ सरजू के संगम के लगे, सरजू के उत्तरी (बायाँ) तीरे पर बाटे। वास्तव में ई शहर उत्तर प्रदेश से कुछ मिनट के दूरी पर मौजूद बा।

गोरखपुर-गुवाहाटी रेलमार्ग पर छपरा रेलवे स्टेशन एगो महत्वपूर्ण जंक्शन ह जहवां से गोपालगंज एवं बलिया खातिर रेललाइन जाला |

अईसन कहल जाला की इहाँ के दाहिआवाँ महल्ला में दधीचि ऋषि के आश्रम रहे । इहाँ से पाँच मील पछिम में  रिविलगंज बा , जहाँ गौतम ऋषि के बसेरा बतावल जाला, ऊहाँ कार्तिक पूर्णिमा के दिने एगो बरिआर मेला लागेला। ईहो कहल जाला की छपरा से 2 कोस प चिरान छपरा बा जहाँ पौराणिक राजा मयूरध्वज के राजधानी अऊरी च्यवन ऋषि  के आश्रम रहे। ऊहाँ भारतीय पुरातत्व बिभाग के ओर से कोड़ाई के काम चल रहल बा जहां से इहाँ के इतिहास के बारे में कुछ बडहन जानकारी मिले के उम्मेद बा|छपरा से लगभग 17 कोस दूर पूरब गंडक नदी के तट प सोनपुर बा जवन हरिहर क्षेत्र के नाम से विख्यात बा। अईसनो कहल जाला की इहें गज अऊरी ग्राह के जुध भइल रहे।

ई सहर प्रमुख रेल व सड़क मार्ग से जुड़ल बा अऊर एगो कृषि व्यापार केंद्र ह।

शोरा और अलसी तेल प्रसंस्करण इहाँ के प्रमुख उद्योग बा।

एह सहर में कईएक गो  पार्क, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, बिहार विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त महाविद्यालय अऊरी कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध एगो  महाविद्यालय बा।

इहाँ  शिव और विष्णु के मंदिर एके साथे बा। कार्तिक पूर्णिमा के दिने सोनपुर के बिख्यात मेला लागेला अऊरी महिनन चलेला। मौर्य कुल के राजा लोगीन इहें से हाथी, घोड़ा, ऊटन के खरीदत रहले, एह से एकर प्राचीनता के पता चलेला। आजु-काल्ह एह मेला में गेरुअन के बिक्री में कमी आइल बा। एकर मुख्या वजह केरल से आवे वाली हाथियन के बेचे प कचहरी के रोक लगवल कहल जात बा। अबहियो महिना भ खातिर ई मेला बरिआर जमघट बन जाला। सोनपुरे में रेलवे अस्टेसन भइला के चलते इहाँ चहूपल आसन बा। ई मेला जगजीवन पूल के नियरे लागेला। जाड़ के दिन में गंडक के पानी हाड़ कपावेलायक पाला हो जाला। मेला में हर तरह के पालतू जानवर बेचल जालें। छपरा में कईकगो अस्कूल-कवलेज बा अऊर पढाई के प्रसार हो रहल बा। जिला में चीनी के कईकगो कारखाना बा।




#Article 193: कोसल (147 words)


कोसल कोशल राज्य प्राचीन काल में भारत की उत्तरी भाग में एगो राज्य रहे जेवना क बिस्तार लगभग-लगभग ओही इलाका पर रहे जहाँ आज उत्तर प्रदेश प्रदेश बाटे। वर्तमान उत्तर प्रदेश से सटल बिहार क कुछ हिस्सा भी एही राज्य में रहे जइसे कि आज जवन इलाका छपरा आ सिवान की आस पास बा। तराई वाला इलाका में नेपाल का भी कुछ हिस्सा एही राज्य में रहे। एकर उद्भव बाद की वैदिक काल में एगो छोट राज्य की रूप में भइल रहे। गौतम बुद्ध की समय में कोसल क राजा प्रसेनजित रहलें। बौद्ध ग्रन्थ अंगुत्तर निकाय की हिसाब से ओ समय ई भारत की सोलह महाजनपद में से एगो रहे। काशी आ मगध दूनो से ए राज्य क संबंध अच्छा रहे। बाद में प्रसेनजित की मरला कि बाद ई राज्य धीरे धीरे कमजोर होत गइल आ मगध राज्य मजबूत हो के एकरी इलाका पर अधिकार कइ लिहलस।




#Article 194: इलाहाबाद हाइकोर्ट (191 words)


इलाहाबाद हाईकोर्ट (हिंदी:इलाहाबाद उच्च न्यायलय, अंग्रेजी:High Court of Judicature at Allahabad) सन 1869 से इलाहाबाद में स्थित एगो हाइकोर्ट बाटे जेवना क न्याय क्षेत्र उत्तर प्रदेश हवे। ई भारत की सबसे शुरूआती हाइकोर्टन में से एगो हवे। एकर एगो खण्डपीठ लखनऊ में भी बाटे। इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज लोगन का अधिकतम संख्या 160 बाटे जेवन भारत की कुल हाईकोर्टन में सबसे ढेर बा 

इलाहाबाद हाइकोर्ट क अस्थापना 1834 में भारत की उत्तरी-पश्चिमी प्रान्तन खातिर भइल जब इहँवा गवर्नर क आसन अस्थापित भइल लेकिन एके कुछे दिन बाद आगरा भेज दिहल गइल। आगरा में 1866 में एकर वर्तमान रूप में 1861 की उच्च न्यायलय अधिनियम की तहत गठन भइल आ 1869 में एके फ़िर से इलाहाबाद ले आवल गइल 
तबसे ई इलाहाबाद में स्थित बाटे। सर वाल्टर मोर्गन एकर पहिला मुख्य न्यायाधीश रहलें।
 
एकर वर्तमान भवन बनला से पहिले ई इलाहाबाद इन्वर्सिटी की दरभंगा हाल में रहे जहाँ आजकाल इन्वर्सिटी की रजिस्टार क कार्यालय बाटे।
 
एकर वर्तमान नाँव (High Court of Judicature at Allahabad) 11 मार्च सन् 1919 में भइल। सन् 2000 में उत्तरांचल (अब उत्तराखण्ड) बनला पर एकरी अन्दर आवे वाला क्षेत्र इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्य्यायाधिकार में आवल बंद हो गइल।




#Article 195: राजेसुल्तानपुर (102 words)


राजेसुल्तानपुर उत्तर प्रदेश की अंबेडकर नगर जिला में एगो प्रमुख कस्बा अऊर नगर पचायत बाटे। ई क़स्बा सरयू नदी के मैदान मे बसल बा। राजेसुल्तानपुर के लगभग तीन तरफ आजमगढ़ जिला लागेला अऊर आधा तरफ गोरखपुर जिला।

इहाँ कय जनसंख्या करीब इक्कीस हजार बा

राजेसुल्तानपुर क लगभग 75% आबादी खेती-बाड़ी करे ले अऊर 25% लोग दुकान दौरी।

अवध मे गोँडा के बाद
सबसे अधिक तम्बाकू
का उत्पादन अंबेडकर
नगर जिले के
राजेसुल्तानपुर मे
होता है।
राजेसुल्तानपुर
की तम्बाकू विश्व
प्रसिद्द है
यही कारण है
कि गुटको,पान
मसालो मे
राजेसुल्तानपुरी
तम्बाकू
लिखा जाता है।
राजेसुल्तानपुर के
तम्बाकू उत्पादन
क्षेत्र
राजेसुल्तानपुर क्षेत्र
की लगभग




#Article 196: भारत के इतिहास (461 words)


ई लेख भारत आ आसपास की क्षेत्र की इतिहास खातिर बाटे। आजादी की बाद भारत गणतन्त्र की इतिहास खातिर देखल जाय: भारत गणतन्त्र क इतिहास।

भारत क इतिहास भारत देस आ आसपास के इलाका, जेकरा के भारतीय उपमहादीप भा दक्खिन एशिया के नाँव से जानल जाला, के पुराइतिहासी काल से ले के आजकाल के जमाना ले के इतिहास ह। भारत के इतिहास सुरू होला पुराइतिहासी जुग के लोगन आबादी के एह इलाका में बसाव से; इहे आबादी आ समाज आगे चल के सिंधु घाटी सभ्यता के रूप लेला; इंडो-आर्य संस्कृति आ वैदिक सभ्यता के रूप में आगे बढ़े ला आ हिंदू, जैन आ बौद्ध धर्म के एह इलाका में परतिष्ठा होले; कई गो बिसाल साम्राज्य एक के बाद के स्थापित होलें; मध्य काल में मुसलमानी शासक लोग के प्रभुत्व स्थापित होला; यूरोपीय लोग व्यापार के मकसद से आ के एह क्षेत्र के आपन उपनिवेश बना लेला; आजादी के लड़ाई के बाद भारत के बिभाजन आ वर्तमान भारत गणराज्य के उदय होला; आ अंत में आजाद भारत अपना बिबिध तरह के समस्या सभ से जूझत आज के समय में दुनिया के तीसरी सभसे ताकतवर अर्थब्यवस्था के रूप में स्थापित होला।  

भारत के पुराइतिहास कम से कम 75,000 बरिस पहिले से शुरू होला जबसे इहँवा होमो सैपियंस मानव कि रहल क परमान मिले शुरू होला जबकि एहू से पहिले लगभग 5,00,000 साल पहिले से जब से होमो इरेक्टस मानव का प्रमाण मिले लागे ला।

सिंधु घाटी सभ्यता क समय ई॰ पू॰ 3300 से 1300 ई॰ पू॰ ले मानल जाला जेवन आज की पाकिस्तान आ भारत की हिस्सा में सिंधु नदी आ एकरे साहायक नदिन के घाटी सभ की सहारे बिकसित भइल रहे। एकरी बाद क्रम से वैदिक सभ्यता आ महाजनपद काल आवेला। भगवान बुद्ध क जनम महाजनपद काल में छठवी सदी ई॰ पू॰ में भइल जब मगध साम्राज्य आ कोसल राज्य रहे।

चौथी सदी से तिसरी सदी ई॰ पू॰ की समय में भारत की अधिकतर इलाका पर मौर्य साम्राज्य क अधिकार रहल। मौर्य साम्राज्य की पतन की बाद कई गो छोट-छोट राजा अलग अलग हिस्सा पर राज्य कइलें आ फिर भारत की बड़हन हिस्सा पर गुप्त साम्राज्य अस्थापित भइला ले इहे स्थिति रहे। गुप्त काल के भारत क स्वर्ण युग भा क्लासिकल जुग कहल जाला। एही समय में इहाँ हिंदू धर्म के वर्तमान रूप के प्रतिष्ठा भइल। सातवीं से इगारहवीं सदी ईस्वी में पाल, राष्ट्रकूट आ गुर्जर प्रतिहार शासकन की बीच में शक्ति-संघर्ष भइल।

मुसलमानी शासन के सुरुआत 1206 ई॰ में शुरू भइल जब दिल्ली सल्तनत क अस्थापना भइल। एकरे बाद से लेके यूरोपीय लोग के आगमन ले के दौर के मध्यकाल कहल जाला। सन् 1857 ई॰ में भारत की पहिला स्वतंत्रता संघर्ष की बाद भारत क शासन ब्रिटिश ताज के अधीन हो गइल। 15 अगस्त 1947 के भारत आजाद भइल आ 26 जनवरी 1950 के भारत गणराज्य के रूप में स्थापित भइल।




#Article 197: भारत के भूगोल (3945 words)


भारत में बिबिध प्राकृतिक आ मानवीय चीजन के जगह भा क्षेत्र अनुसार बितरण, यानी कि भारत के भूगोल, हर तरह से बहुत विविधता वाला बाटे। एशिया महादीप के दक्खिनी हिस्सा में मौजूद भारत देस, क्षेत्रफल के हिसाब से बिस्व में सातवाँ आ जनसंख्या की हिसाब से दूसरा सभसे बड़हन देस हवे।

भारत के उत्तर में हिमालय के बहुते ऊँच पहाड़ बाटे आ दक्खिन में प्रायद्वीप वाला हिस्सा में ऊबड़-खाबड़ पठार मिलेला। इन्हन की बिचा में उत्तरी भारत के मैदान बा जेवन एगो समतल जमीन हवे। दूनो समुद्र की किनारे पर किनारे के मैदान बाड़ें, जिनहन के समुद्र तटीय मैदान कहल जाला। एह देस में जलवायु में भी बहुत बिबिधता बा; एक ओर राजस्थान में बहुत गर्मी आ जाड़ा दूनो पड़ेला आ बरखा एकदम्मे कम होला त ओही जा दूसरी ओर चेरापूंजी के गिनती विश्व के सबसे ढेर बरखा वाला जगह सभ में होले। पुरा भारत में जुलाई से अक्टूबर ले मानसून के बरखा होले जबकि पच्छिमी हिमालय आ तमिलनाडु की समुंद्र की किनारे वाला हिस्सा में जाड़ा में बरखा होले।

जनसंख्या के हिसाब से भी एक इलाका से दुसरे इलाका के बिचा में बहुत अंतर पावल जाला। मैदानी हिस्सा में जनसंख्या के धनत्व ढेर बा जबकि पहाड़ी आ पठारी इलाकन में बहुत कम जनसंख्या पावल जाले। अलग-अलग प्रदेश में विकास के स्थिति भी बहुत विभिन्नता लिहले मिलेला।

भारत देस के भूगोली लोकेशन भूमध्य रेखा के उत्तर में 8°4' से 37°6' उत्तरी अक्षांस आ 68°7' से 97°25' पूरबी देशांतर के बिचा में बाट। क्षेत्रफल के हिसाब से ई दुनिया के सातवाँ सभसे बड़हन देस हवे आ एकर कुल रकबा   बाटे। उत्तर से दक्खिन ले भारत के लंबाई  बा आ पुरुब से पच्छिम एकर बिस्तार  के लंबाई में बा। भारत के जमीनी सीमा के लंबाई  आ समुंद्र तट के लंबाई  बाटे।

दक्खिन ओर, भारतीय जमीनी हिस्सा त्रिभुज के आकार में हिंद महासागर में घुसल बाटे, सटीक रूप से बतावल जाय त एह प्रायदीपीय भाग के पच्छिमी ओर अरब सागर आ दक्खिनी-पच्छिमी ओर लक्षदीप सागर बाने आ पूरुब आ आ दक्खिन-पूरुब ओर बंगाल के खाड़ी बा। पाक जलजोड़ आ मन्नार के खाड़ी द्वारा ई श्रीलंका से बिलग होला आ एकरे कुछ दूर प लगभग  दक्खिन-पच्छिम में मालदीव बाटे। भारत के दीपीय हिस्सा अंडमान निकोबार दीप समूह, एकरे मुख्य जमीनी हिस्सा से करीबन  दक्खिन पूरुब में बाने आ एही के चलते भारत के समुंदरी सीमा म्यांमार, थाइलैंड आ इंडोनेशिया के साथे जुड़े ला। कन्याकुमारी 8°4′41″N आ  77°32′28″E पर मौजूद बा आ मुख्य जमीनी हिस्सा के सभसे दक्खिनी बिंदु  हऽ जबकि भारत के सभसे दक्खिनी बिंदु इंदिरा प्वाइंट, बड़का निकोबार दीप पर मौजूद बा। सभसे उत्तरी बिंदु, जवन भारत के शासन में बा, सियाचिन ग्लेशियर में इंदिरा कॉल हवे। भारत के राज्यक्षेत्रीय जलसीमा एकरे जमीनी बेसलाइन से   के दूरी तक ले बा।

भारत के उत्तरी सीमांत सभ बहुधा हिमालय परबत के श्रेणी सभ से बने ला आ चीन, भूटान, नेपाल के साथे जुड़े ला। भारत के सभसे उत्तरी राज्य जम्मू काश्मीर के कुछ हिस्सा चीन आ पाकिस्तान के साथ बिबादित बाटे। भारत-पाकिस्तान सीमा भारतीय राज्य पंजाब, राजस्थान आ गुजरात के पाकिस्तान से सटल सीमा हवे आ पंजाब के मैदान आ थार के रेगिस्तान से गुजरे ले। सुदूर पूर्वोत्तर में भारत के सीमा चिन आ कचिन पहाड़ी सभ के सहारे, बर्मा से सटे ले।

teenu भारत में 28 गो राज्य आ 8 गो संघ राज्यक्षेत्र बाने। राज्यन के नाँव नीचे दिहल जात बाटे-  (कोष्टक में राजधानी का नाम):

भारत के छह गो मुख्य भौतिकआकृतिक प्रदेश भा क्षेत्र सभ में बाँटल जाला:

भारत के उत्तरी भाग में परबत सभ के बिसाल आर्क मौजूद बा जे पच्छिम में हिंदुकुश परबत से सुरू होखे ले आ हिमालय के श्रेणी सभ, जेह में नेपाल के सगरी इलाका आवेला, पूरुब-पच्छिम दिसा में भारतीय राज्य अरुणाचल ले जाले, आगे जा के ई पटकई बुम नियर  छोटहन पहाड़ी सभ के रूप ले लेला। एह पहाड़ी इलाका के निर्माण भारतीय प्लेट आ एशियाई प्लेट के टकराव वाला किनारा पर भइल हवे। अल्पाइन क्रम के परबत निर्माण के दौरान बनल ई श्रेणी सभ में दुनिया के कुछ सभसे ऊँच परबत चोटी मौजूद बाड़ी जेह में ई एक तरह से प्राकृतिक सीमा के काम करे ला आ ध्रुवीय इलाका के ठंढा हवा सभ के भारतीय उपमहादीप के भीतर प्रवेश करे से रोके ला। एही कारन भारत के उत्तरी हिस्सा कर्क रेखा के उत्तर में मौजूद होखे के बावजूद उष्णकटिबंधी जलवायु वाला हवे। ईहे परबत के बिस्तार मानसून के हवा सभ के रोक के बरखा करावे ला आ भारत के जलवायु प एकर दोहरा परभाव पड़े ला। एही परबत सभ से निकले वाली नदी, उपजाऊँ मैदानी हिस्सा में बहे लीं जे एकरे दक्खिन ओर पड़े ला। जीवभूगोल के बिद्वान लोग एह परबत श्रेणी सभ के पृथ्वी के दू गो बड़हन जीवभूगोली इकोज़ोन सभ के बिभाजक सीमा माने ला - समशीतोष्ण (टेम्परेट) पैलीआर्कटिक इकोज़ोन पूरा यूरेशियाई भाग में हिमालय के उत्तर ओर बा आ दक्खिन में उपोष्णकटिबंधी इंडोमलय इकोज़ोन जे हिमालय के दक्खिन में पड़े ला आ जेह में भारतीय उपमहादीप, दक्खिनपूरब एशिया आ इंडोनेशिया नियर इलाका सामिल कइल जालें।

हिमालय दुनिया के सभसे ऊँच परबत हवे, दुनिया के सभसे ऊँच परबत चोटी माउंट एवरेस्ट () एही के हिस्सा हवे आ नेपाल-चीन के सीमा प मौजूद बा। हिमालय द्वारा भारत के उत्तर-पूरबी बाडर भी बने ला, एह जगह ई भारत के उत्तर-पूरबी एशिया से बिलग करे ला। ई परबत दुनिया के सभसे नया मोड़दार परबत सभ में से भी एक हवे आ बिना कौनों ब्यवधान के की लगभग  लंबाई में बिस्तार लिहले बा आ कुल  क्षेत्रफल पर फइलल बाटे। हिमालय के बिस्तार जम्मू-काश्मीर से ले के अरुणाचल प्रदेश ले बा आ एह परबती हिस्सा में भारत के अउरी राज्य सभ हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड आ सिक्किम राज्य बाने जिन्हन के ज्यादातर हिस्सा हिमालय के परबती भाग में पड़े ला। हिमालय के कई गो चोटी सभ  से ऊँच बाड़ी स आ एह इलाका में बरफ रेखा (जेकरे ऊपर बर्फ जमल रहे ला) करीबन  सिक्किम के आसपास से ले के  के आसपास तक से, काश्मीर में पावल जाले। भारत के प्रशासित इलाका में कंचनजंघा सभसे ऊँच परबत चोटी हवे जे भारत-नेपाल बाडर प बा। हिमालय के ज्यादातर चोटी सभ सालो भर बरफ से तोपाइल रहे लीं।

Kutch Kathiawar plateau is located in Gujarat state.

The Indo-Gangetic plains, also known as the Great Plains are large alluvial plains dominated by three main rivers, the Indus, Ganges, and Brahmaputra. They run parallel to the Himalayas, from जम्मू-काश्मीर in the west to आसाम in the east, and drain most of northern and eastern India. The plains encompass an area of . The major rivers in this region are the Ganges, Indus, and Brahmaputra along with their main tributaries–Yamuna, Chambal, Gomti, Ghaghara, Kosi, Sutlej, Ravi, Beas, Chenab, and Tista—as well as the rivers of the Ganges Delta, such as the Meghna.

The great plains are sometimes classified into four divisions:

The Indo-Gangetic belt is the world's most extensive expanse of uninterrupted alluvium formed by the deposition of silt by the numerous rivers. The plains are flat making it conducive for irrigation through canals. The area is also rich in ground water sources.The plains are one of the world's most intensely farmed areas. The main crops grown are rice and wheat, which are grown in rotation. Other important crops grown in the region include maize, sugarcane and cotton. The Indo-Gangetic plains rank among the world's most densely populated areas.

The Thar Desert (also known as the deserts) is by some calculations the world's seventh largest desert, by some others the tenth. It forms a significant portion of western India and covers an area of . The desert continues into Pakistan as the Cholistan Desert. Most of the Thar Desert is situated in राजस्थान, covering 61% of its geographic area.

About 10 percent of this region comprises sand dunes, and the remaining 90 percent consist of craggy rock forms, compacted salt-lake bottoms, and interdunal and fixed dune areas. Annual temperatures can range from  in the winter to over  during the summer. Most of the rainfall received in this region is associated with the short July–September southwest monsoon that brings  of precipitation. Water is scarce and occurs at great depths, ranging from  below the ground level. Rainfall is precarious and erratic, ranging from below  in the extreme west to  eastward.The only river in this region is Luni. The soils of the arid region are generally sandy to sandy-loam in texture. The consistency and depth vary as per the topographical features. The low-lying loams are heavier may have a hard pan of clay, calcium carbonate or gypsum.

In western India, the Kutch region in Gujarat and Koyna in Maharashtra are classified as a Zone IV region (high risk) for earthquakes. The Kutch city of Bhuj was the epicentre of the 2001 Gujarat earthquake, which claimed the lives of more than 1,337 people and injured 166,836 while destroying or damaging near a million homes. The 1993 Latur earthquake in Maharashtra killed 7,928 people and injured 30,000. Other areas have a moderate to low risk of an earthquake occurring.

(The Eastern Coastal Plain is a wide stretch of land lying between the Eastern Ghats and the oceanic boundary of India. It stretches from तमिलनाडु in the south to पच्छिम बंगाल in the east. The Mahanadi, Godavari, Kaveri, and Krishna rivers drain these plains. The temperature in the coastal regions often exceeds , and is coupled with high levels of humidity. The region receives both the northeast monsoon and southwest monsoon rains.) The southwest monsoon splits into two branches, the Bay of Bengal branch and the Arabian Sea branch. (The Bay of Bengal branch moves northwards crossing northeast India in early June. The Arabian Sea branch moves northwards and discharges much of its rain on the windward side of Western Ghats. Annual rainfall in this region averages between . The width of the plains varies between . The plains are divided into six regions—the Mahanadi delta, the southern Andhra Pradesh plain, the Krishna-Godavari deltas, the Kanyakumari coast, the Coromandel Coast, and sandy coastal).

The Western Coastal Plain is a narrow strip of land sandwiched between the Western Ghats and the Arabian Sea, ranging from  in width. It extends from Gujarat in the north and extends through Maharashtra, Goa, Karnataka, and Kerala. Numerous rivers and backwaters inundate the region. Mostly originating in the Western Ghats, the rivers are fast-flowing, usually perennial, and empty into estuaries. Major rivers flowing into the sea are the Tapi, Narmada, Mandovi and Zuari. Vegetation is mostly deciduous, but the Malabar Coast moist forests constitute a unique ecoregion. The Western Coastal Plain can be divided into two parts, the Konkan and the Malabar Coast.

(The Lakshadweep and the Andaman and Nicobar Islands are India's two major island formations and are classified as union territories.

The Lakshadweep Islands lie  off the coast of Kerala in the Arabian sea with an area of . They consist of twelve atolls, three reefs, and five submerged banks, with a total of about 35 islands and islets.)

(The Andaman and Nicobar Islands are located between 6° and 14° north latitude and 92° and 94° east longitude. They consist of 572 islands, lying in the Bay of Bengal near the Myanma coast running in a North-South axis for approximately 910 km. They are located  from Kolkata (Calcutta) and  from Cape Negrais in Burma. The territory consists of two island groups, the Andaman Islands and the Nicobar Islands. The Andaman and Nicobar Islands consist of 572 islands which run in a North-South axis for around 910 km. The Andaman group has 325 islands which cover an area of 6,170 km2 (2,382 sq mi) while the Nicobar group has only 247 islands with an area of 1,765 km2 (681 sq mi). India's only active volcano, Barren Island is situated here. It last erupted in 2017. The Narcondum is a dormant volcano and there is a mud volcano at Baratang. Indira Point, India's southernmost land point, is situated in the Nicobar islands at 6°45’10″N and 93°49’36″E, and lies just  from the Indonesian island of Sumatra, to the southeast. The highest point is Mount Thullier at .

Other significant islands in India include Diu, a former Portuguese colony; Majuli, a river island of the Brahmaputra; Elephanta in Bombay Harbour; and Sriharikota, a barrier island in Andhra Pradesh. Salsette Island is India's most populous island on which the city of Mumbai (Bombay) is located. Forty-two islands in the Gulf of Kutch constitute the Marine National Park.

India has around 14,500 km of inland navigable waterways. There are twelve rivers which are classified as major rivers, with the total catchment area exceeding . All major rivers of India originate from one of the three main watersheds:

The Himalayan river networks are snow-fed and have a perennial supply throughout the year. The other two river systems are dependent on the monsoons and shrink into rivulets during the dry season. The Himalayan rivers that flow westward into Punjab are the Indus, Jhelum, Chenab, Ravi, Beas, and Sutlej.

(The Ganges-Brahmaputra-Meghana system has the largest catchment area of about . The Ganges Basin alone has a catchment of about . The Ganges originates from the Gangotri Glacier in Uttarakhand. It flows southeast, draining into the Bay of Bengal). (The Yamuna and Gomti rivers also arise in the western Himalayas and join the Ganges in the plains. The Brahmaputra originates in Tibet, China, where it is known as the Yarlung Tsangpo River) (or Tsangpo). It enters India in the far-eastern state of अरुणाचल प्रदेश, then flows west through आसाम. The Brahmaputra merges with the Ganges in Bangladesh, where it is known as the Jamuna River.

The Chambal, another tributary of the Ganges, via the Yamuna, originates from the Vindhya-Satpura watershed. The river flows eastward. Westward-flowing rivers from this watershed are the Narmada and Tapti, which drain into the Arabian Sea in Gujarat. The river network that flows from east to west constitutes 10% of the total outflow.

(The Western Ghats are the source of all Deccan rivers, which include the through Godavari River, Krishna River and Kaveri River, all draining into the Bay of Bengal. These rivers constitute 20% of India's total outflow).

The heavy southwest monsoon rains cause the Brahmaputra and other rivers to distend their banks, often flooding surrounding areas. Though they provide rice paddy farmers with a largely dependable source of natural irrigation and fertilisation, such floods have killed thousands of people and tend to cause displacements of people in such areas.

Major gulfs include the Gulf of Cambay, Gulf of Kutch, and the Gulf of Mannar. Straits include the Palk Strait, which separates India from Sri Lanka; the Ten Degree Channel, which separates the Andamans from the Nicobar Islands; 'and the Eight Degree Channel, which separates the Laccadive and Amindivi Islands from the Minicoy Island to the south. Important capes include the Kanyakumari (formerly called Cape Comorin), the southern tip of mainland India; Indira Point, the southernmost point in India (on Great Nicobar Island); Rama's Bridge, and Point Calimere. The Arabian Sea lies to the west of India, the Bay of Bengal and the Indian Ocean lie to the east and south, respectively. Smaller seas include the Laccadive Sea and the Andaman Sea. There are four coral reefs in India, located in the Andaman and Nicobar Islands, the Gulf of Mannar, Lakshadweep, and the Gulf of Kutch. Important lakes include Sambhar Lake, the country's largest saltwater lake in Rajasthan, Vembanad Lake in Kerala, Kolleru Lake in Andhra Pradesh, Loktak Lake in मणिपुर, Dal Lake in Kashmir, Chilka Lake(lagoon lake) in Orrisa, and Sasthamkotta Lake in Kerala.

India's wetland ecosystem is widely distributed from the cold and arid located in the Ladakh region of Jammu and Kashmir, and those with the wet and humid climate of peninsular India. Most of the wetlands are directly or indirectly linked to river networks. The Indian government has identified a total of 71 wetlands for conservation and are part of sanctuaries and national parks. Mangrove forests are present all along the Indian coastline in sheltered estuaries, creeks, backwaters, salt marshes and mudflats. The mangrove area covers a total of , which comprises 7% of the world's total mangrove cover. Prominent mangrove covers are located in the Andaman and Nicobar Islands, the Sundarbans delta, the Gulf of Kutch and the deltas of the Mahanadi, Godavari and Krishna rivers. Parts of Maharashtra, Karnataka and Kerala also have large mangrove covers.

The Sundarbans delta is home to the largest mangrove forest in the world. It lies at the mouth of the Ganges and spreads across areas of Bangladesh and West Bengal. The Sundarbans is a UNESCO World Heritage Site, but is identified separately as the Sundarbans (Bangladesh) and the Sundarbans National Park (India). The Sundarbans are intersected by a complex network of tidal waterways, mudflats and small islands of salt-tolerant mangrove forests. The area is known for its diverse fauna, being home to a large variety of species of birds, spotted deer, crocodiles and snakes. Its most famous inhabitant is the Bengal tiger. It is estimated that there are now 400 Bengal tigers and about 30,000 spotted deer in the area.

The Rann of Kutch is a marshy region located in northwestern Gujarat and the bordering Sindh province of Pakistan. It occupies a total area of . The region was originally a part of the Arabian Sea. Geologic forces such as earthquakes resulted in the damming up of the region, turning it into a large saltwater lagoon. This area gradually filled with silt thus turning it into a seasonal salt marsh. During the monsoons, the area turn into a shallow marsh, often flooding to knee-depth. After the monsoons, the region turns dry and becomes parched.

 map is based on native vegetation, temperature, precipitation and their seasonality.

Based on the Köppen system, India hosts six major climatic subtypes, ranging from arid desert in the west, alpine tundra and glaciers in the north, and humid tropical regions supporting rainforests in the southwest and the island territories. The nation has four seasons: winter (January–February), summer (March–May), a monsoon (rainy) season (June–September) and a post-monsoon period (October–December)'.

The Himalayas act as a barrier to the frigid katabatic winds flowing down from Central Asia.' Thus, North India is kept warm or only mildly cooled during winter; in summer, the same phenomenon makes India relatively hot. Although the Tropic of Cancer—the boundary between the tropics and subtropics—passes through the middle of India, the whole country is considered to be tropical.

Summer lasts between March and June in most parts of India. Temperatures can exceed  during the day. The coastal regions exceed  coupled with high levels of humidity. In the Thar desert area temperatures can exceed . The rain-bearing monsoon clouds are attracted to the low-pressure system created by the Thar Desert. The southwest monsoon splits into two arms, the Bay of Bengal arm and the Arabian Sea arm. The Bay of Bengal arm moves northwards crossing northeast India in early June. The Arabian Sea arm moves northwards and deposits much of its rain on the windward side of Western Ghats. Winters in peninsula India see mild to warm days and cool nights. Further north the temperature is cooler. Temperatures in some parts of the Indian plains sometimes fall below freezing. Most of northern India is plagued by fog during this season. The highest temperature recorded in India was  in Phalodi, Rajasthan. The lowest was  in Kashmir.

India's geological features are classified based on their era of formation. The Precambrian formations of Cudappah and Vindhyan systems are spread out over the eastern and southern states. A small part of this period is spread over western and central India. The Paleozoic formations from the Cambrian, Ordovician, Silurian and Devonian system are found in the Western Himalaya region in Kashmir and Himachal Pradesh. The Mesozoic Deccan Traps formation is seen over most of the northern Deccan; they are believed to be the result of sub-aerial volcanic activity. The Trap soil is black in colour and conducive to agriculture. The Carboniferous system, Permian System and Triassic systems are seen in the western Himalayas. The Jurassic system is seen in the western Himalayas and Rajasthan.

Tertiary imprints are seen in parts of Manipur, Nagaland, Arunachal Pradesh and along the Himalayan belt. The Cretaceous system is seen in central India in the Vindhyas and part of the Indo-Gangetic plains. The Gondowana system is seen in the Narmada River area in the Vindhyas and Satpuras. The Eocene system is seen in the western Himalayas and Assam. Oligocene formations are seen in Kutch and Assam. The Pleistocene system is found over central India. The Andaman and Nicobar Island are thought to have been formed in this era by volcanoes. The Himalayas were formed by the convergence and deformation of the Indo-Australian and Eurasian Plates. Their continued convergence raises the height of the Himalayas by 1 cm each year.

Soils in India can be classified into 8 categories: alluvial, black, red, laterite, forest, arid  desert, saline  alkaline and peaty  organic soils. Alluvial soil constitute the largest soil group in India, constituting 80% of the total land surface. It is derived from the deposition of silt carried by rivers and are found in the Great Northern plains from Punjab to the Assam valley. Alluvial soil are generally fertile but they lack nitrogen and tend to be phosphoric. National Disaster Management Authority says that 60% of Indian landmass is prone to earthquake and 8% susceptible to cyclone risks.

Black soil are well developed in the Deccan lava region of Maharashtra, Gujarat, and Madhya Pradesh. These contain high percentage of clay and are moisture retentive. Red soil are found in Tamil Nadu, Karnataka plateau, Andhra plateau, Chota Nagpur plateau and the Aravallis. These are deficient in nitrogen, phosphorus and humus. Laterite soils are formed in tropical regions with heavy rainfall. Heavy rainfall results in leaching out all soluble material of top layer of soil. These are generally found in Western ghats, Eastern ghats and hilly areas of northeastern states that receive heavy rainfall. Forest soils occur on the slopes of mountains and hills in Himalayas, Western Ghats and Eastern Ghats. These generally consist of large amounts of dead leaves and other organic matter called humus.

India's total renewable water resources are estimated at 1,907.8 km3/year. Its annual supply of usable and replenshable groundwater amounts to 350 billion cubic metres. Only 35% of groundwater resources are being utilised. About 44 million tonnes of cargo is moved annually through the country's major rivers and waterways. Groundwater supplies 40% of water in India's irrigation canals. 56% of the land is arable and used for agriculture. Black soils are moisture-retentive and are preferred for dry farming and growing cotton, linseed, etc. Forest soils are used for tea and coffee plantations. Red soil have a wide diffusion of iron content.

Most of India's estimated  in oil reserves are located in the Mumbai High, upper Assam, Cambay, the Krishna-Godavari and Cauvery basins. India possesses about seventeen trillion cubic feet of natural gas in Andhra Pradesh, Gujarat and Odisha. Uranium is mined in Andhra Pradesh. India has 400 medium-to-high enthalpy thermal springs for producing geothermal energy in seven provinces — the Himalayas, Sohana, Cambay, the Narmada-Tapti delta, the Godavari delta and the Andaman and Nicobar Islands (specifically the volcanic Barren Island.)

India is the world's biggest producer of mica blocks and mica splittings. India ranks second amongst the world's largest producers of barites and chromites. The Pleistocene system is rich in minerals. India is the third-largest coal producer in the world and ranks fourth in the production of iron ore. It is the fifth-largest producer of bauxite and crude steel, the seventh-largest of manganese ore and the eighth-largest of aluminium. India has significant sources of titanium ore, diamonds and limestone. India possesses 24% of the world's known and economically viable thorium, which is mined along shores of Kerala. Gold had been mined in the now-defunct Kolar Gold Fields in Karnataka.




#Article 198: कर्क रेखा (452 words)


कर्क रेखा एगो कल्पित रेखा ह जेवन पृथ्वी के अइसन जगह सभ से गुजरे ले जे सभसे उत्तरी जगह बाने जहाँ सुरुज के किरण सीधा पड़ सके ला। अइसन वर्तमान समय में 21 जून के होला जब सूर्य सबसे उत्तर ले पहुँच के सीधा चमकेला, एह दिन के उत्तरी संक्रांति कहल जाला। अइसन पृथ्वी की एकरी काल्पनिक धुरी की झुकाव की वजह से होला आ 21 जून के पृथ्वी क उत्तरी हिस्सा ठीक सुरुज की ओर झुकल रहेला जेवना से सुरुज से आवे वाला किरन पृथ्वी पर सभसे उत्तर की ओर ले चढ़ जाले।

वर्तमान समय में कर्क रेखा क इस्थिति आमतौर पर 23.5 डिग्री उत्तरी अक्षांश बतावल जाला हालाँकि ई हमेशा एकही ना रहेला। इतिहास में ए में थोड़ा बहुत परिवर्तन भी भइल बा जेवन चक्रीय होला, मने कबो घट जाला आ फिर ठीक ओतने समय में बढ़ जाला। ई बदलाव पृथिवी के झुकाव के मात्रा में बदलाव की वजह से होला।

कर्क रेखा, आ एकर उल्टा मकर रेखा जेवन दक्खिनी गोलार्ध में इस्थित बा, दुनो की बिच्चा में क हिस्सा उष्ण कटिबंध कहल जाला।

कर्क रेखा भारत की बीचोबीच से हो के जाले आ भारत की आठ गो राज्यन से हो के गुजरेले। ई राज्य हवें गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल त्रिपुरा अउरी मिजोरम। उज्जैन आ राँची शहर लगभग कर्क रेखा पर इस्थित बाड़ें।

एह रेखा के नाँव अबसे लगभग 2,000 पहिले धराइल, ओह समय में सुरुज कर्क नाँव के राशि (कर्क माने खेखड़ा) में रहत रहे जब जून संक्रांति होखे। मने की अइसन समय जब साल में एक बेर सुरुज के किरन सभसे उत्तरी बिंदु सभ पर पड़े, ओह समय सुरुज आकास में कर्क नाँव के तारा मंडल के सोझा रहल करे। हालाँकि, अब अइसन स्थिति ना बाटे, पृथ्वी के धुरी के झुकाव के दिसा भी बहुत धीरे-धीरे बदलत रहे ला जेकरा के अयन चलन भा अयन गति कहल जाला, एकरे परभाव के कारण, अब वर्तमान में जब जून संक्रांति (उत्तरी संक्रांति) होखे ले तब सुरुज वास्तव में वृष राशि में होखे ला। भारतीय ज्योतिष में, निरयन सिस्टम में गणना करे पर, जेह में अयन गति के परभाव के हटा के राशिमान लिखल जाला, कर्क संक्रांति 15 जुलाई के आसपास होले, जबकि सायन सिस्टम में ई 21 जून के होखे ले।

कर्क रेखा आ मकर रेखा के बीच के इलाका के अंगरेजी में ट्रोपिकल कहल जाला आ एह रेखा सभ के ट्रॉपिक्स कहल जाला। इहो यूनानी (ग्रीक) भाषा के ट्रोपो शब्द से निकसल हवे जेकर अरथ बदलाव से हऽ मने की एकरे बाद सुरुज के दिसा (किरण के चढ़ाव-उतराव) बदल जाले।

पूरा दुनिया में कई जगह पर नाप-जोख कइ के कर्क रेखा क जमीन पर इस्थिति के देखावे खातिर तरह तरह क निसान लगावल गइल बा। एही में से कुछ क फोटो नीचे दिहल जात बा:




#Article 199: मकर रेखा (167 words)


मकर रेखा एगो अइसन कल्पित रेखा ह जेवन पृथ्वी की ओ सारा जगहन से हो के गुजरे ले जवन पृथ्वी क सबसे दक्खिन ओर क आस्थान हवें जहाँ सुरुज क किरन साल में कम से कम एक दिन जरूर सीधा (90 अंश पर) पड़ेले। अइसन वर्तमान समय में 22 दिसंबर के होला जब सूर्य सबसे दक्खिन ले पहुँच के सीधा चमकेला। अइसन पृथ्वी की एकरी काल्पनिक धुरी की झुकाव की वजह से होला आ 22 दिसंबर के पृथ्वी क दक्खिनी हिस्सा ठीक सुरुज की ओर झुकल रहेला जेवना से सुरुज से आवे वाला किरन पृथ्वी पर दक्खिन की ओर चढ़ जाले।

वर्तमान समय में मकर रेखा क इस्थिति 23.5 डिग्री दक्खिनी अक्षांश की सहारे बाटे। इतिहास में ए में थोड़ा बहुत परिवर्तन भी भइल बा जेवन चक्रीय होला, मने कबो घट जाला आ फिर ठीक ओतने समय में बढ़ जाला। ई परिवर्तन पृथिवी की झुकाव की मात्रा में बदलाव की वजह से होला।

कर्क रेखा, आ मकर रेखा की बिच्चा में क हिस्सा उष्ण कटिबंध कहल जाला।




#Article 200: मकर संक्रांति (133 words)


खिचड़ी या मकर संक्रांति हिंदू लोगन क प्रमुख पर्व ह। मकर संक्रान्ति पूरा भारत आ नेपाल में कौनों न कौनों रूप में मनावल जाला। माघ मास में जब सूरज मकर राशि में आवेला तबे इ  पर्व  मनावल जाला। इ त्योहार जनवरी महिना की चौदहवां या पन्द्रहवां दिनें पड़ेला काहें कि एही दिन के सूर्य धनु राशि के छोड़के मकर राशि में प्रवेश करेला। मकर संक्रान्ति की दिन से ही सूर्य क उत्तरायण गति भी शुरू हो जाला। एहीसे ए पर्व के कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहल जाला। तमिलनाडु में एके पोंगल नामक उत्सव की रूप में मनावल जाला जबकि कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में एके खाली संक्रांति कहल जाला।

इ भारतवर्ष तथा नेपाल की सब प्रान्तन में अलग-अलग नांव व भाँति-भाँति की रीति-रिवाज द्वारा भक्ति एवं उत्साह की साथ धूमधाम से मनावल जाला।

सम्पूर्ण भारत में मकर संक्रान्ति अलग-अलग रूप में मनावल जाला। विभिन्न प्रान्त में ए त्योहार के मनवले क जेतना अधिक रूप प्रचलित बा ओतना कौनों अन्य पर्व में नइखे।




#Article 201: खिचड़ी (254 words)


खिचड़ी एगो भोजन क चीज हवे जेवन दाल आ चावल (चाउर) से बनावल जाला| खिचड़ी शब्द क उत्पत्ति संस्कृत की खिच्चा शब्द से भईल बा, जेकर मतलब होला, चावल और फली क एगो पकवान।

सेलेकस क ग्रीक राजदूत उल्लेख कई न की दाल की साथ चावल दक्षिण एशिया में भारत की लोगन की बीच बहुत लोकप्रिय बा। मोरक्को क यात्री, इब्न बट्टुता 1350 की आसपास सिरका में रहले की दौरान, चावल और मूंग से बनल एगो बानगी के किशरी की रूप में उल्लेख कईले बा। अफानासीय निकितिन, एगो रूसी साहसिक जवन 15 वीं सदी में दक्षिण एशिया क यात्रा कईले रहे, ओकरी लेखन में खिचड़ी क वर्णन मिलेला। खिचड़ी मुग़ल साम्राज्य में बहुत लोकप्रिय रहे, खासकर जहांगीर की समय में। मुगल सम्राट अकबर की वज़ीर, अबू-फजल इब्न मुबारक द्वारा लिखित 16 वीं शताब्दी की दस्तावेज़ आईन-ए-अकबरी में, खिचड़ी की नुस्खा क उल्लेख बा, जवन की सात प्रकार क बा। अकबर, बीरबल और खिचड़ी क एगो अनोखा कहानीयो क जिक्र मिलेला।

पाकिस्तान, नेपाल और भारत में खिचड़ी एगो बहुत लोकप्रिय पकवान ह। इ पकवान भारत, गुजरात, बंगाल, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसन कईगो राज्यन में व्यापक रूप से तैयार कईल जाला। फूलगोभी, आलू और हरा मटर जैसे सब्जियां सामान्य तौर पर एमें मिला दिहल जाला। तटीय महाराष्ट्र में एकर एगो लोकप्रिय प्रकार झींगा से बनेला। एकही बर्तन में बहुत आसानी से बनवले की सुविधा की चलते खिचड़ी  एगो पसंदीदा कैम्प फायर बानगी ह।

अन्य कई क्षेत्र में, खिचड़ी के आमतौर प कढ़ी की साथ परोसल जाला, और अक्सर साथ पापड़ भी रहेला।




#Article 202: बिसुवत रेखा (102 words)


बिसुवत रेखा चाहे भूमध्य रेखा पृथ्वी के दू बराबर गोलार्ध (उत्तरी आ दक्खिनी) में बाँटे वाली रेखा हवे। एकर अक्षांश जीरो डिग्री होला मने कि बाकी जगहन कि अक्षांश क नाप-जोख एही की संदर्भ में होला।

एकरे आसपास के इलाका के भूमध्य-रेखीय प्रदेश भा बिस्वतरेखीय प्रदेश कहल जाला। जलवायु के बर्गीकरण में भी एह रेखा के आसपास के इलाका के बिसुवतरेखीय जलवायु मानल जाला। एह तरीका से कौनों भी भूगोली तत्व के साथे अगर भूमध्यरेखीय भा बिसुवत रेखीय (इक्विटोरियल) शब्द जुड़ल होखे तब ओकर मतलब ई होला कि ऊ चीज एही रेखा के आसपास के इलाका में पावल जाले भा संबधित बा।




#Article 203: बैताल पचीसी (112 words)


बैताल पचीसी (संस्कृत:वेतालपञ्चविंशतिका) पचीस गो कहानिन क संग्रह हवे जेवना में राजा बिक्रम आ बैताल की बीच में बातचीत की रूप में कहानी कहल गइल बाटे।

कहानी की अनुसार एगो बैताल शमसान में पेड़ पर लटकल रहेला जेवना के राजा बिक्रम अपनी कान्हीं पर उठा के ले जालें। डहरी में ऊ बैतलवा राजा के कहानी सुनावेला आ अंत में कहानी पर आधारित प्रश्न पूछेला। प्रश्न क जवाब देते बिक्रम क व्रत भंग होजाला आ बैतलवा फिन से जाके पेड़ पर लटक जाला। इहे घटना पचीस बेर होले आ पचीस गो कहानी बैतलवा सुनावेला।

मूल रूप से ई कहानी संस्कृत में लिखल गइल रहे आ एकर कइयन गो भाषा में अनुवाद भइल बाटे।




#Article 204: कालिदास (766 words)


कालीदास (संस्कृत: कालिदास) प्राचीन भारतीय कवी रहलें, इनके संस्कृत भाषा के एगो महान कवि आ नाटककार मानल जाला। कालीदास कई गो नाटक आ काव्यरचना सभ के संस्कृत साहित्य में सभसे ऊँच जगह दिहल जाला, इनहन में से कुछ यूरोपीय भाषा सभ में अनुबाद होखे वाली संस्कृत के सभसे पहिला रचना हईं।

कालिदास के जनम स्थान आ समय के बारे में कई मत चलन में बा, हालाँकि ज्यादातर लोग उनके चउथी-पांचवी सदी ईसवी में भइल माने ला।

कालिदास इतिहास के कवना काल में रहलें एह बारे में बिद्वान लोग आपस में एकमत नइखे। सभसे पहिले अगर ई देखल जाय कि सभसे पुरान समय आ सभसे नया समय, मने कि समय के अवधि के सीमा का बा। इनके लिखल नाटक मालविकाग्निमित्रम् से सभसे पुराना सीमा तय होखे में मदद मिले ला। एह नाटक में मुख्य किरदार शुंग बंस के राजा अग्निमित्र बाड़ें, बतावल जाला कि अग्निमित्र, मौर्यबंस के बिनास क के शुंग बंस के अस्थापना करे वाला राजा पुष्यमित्र शुंग के बेटा रहलें आ पुष्यमित्र के शासनकाल 158 ई॰पू॰ में शुरू भइल रहल जबकि अग्निमित्र के काल 150 ई॰पू॰ मानल जाला। एह तरीका से कालिदास जब अगर एह राजा के बरनन अपना नायक के रूप में करे लें तब कालिदास इनसे पहिले के ना हो सके लें, मने कि कालिदास 150 ई॰पू॰ से पहिले ना भइल होखिहें। एकरा बाद, सभसे बाद के सीमा के बारे में खोज क के ई बतावल गइल बा कि कालीदास बाणभट्ट के पहिले भइल होखिहें काहें से कि बाणभट्ट इनके अपना काब्य हर्षचरितम् में बड़ा आदर से इयाद कइले बाने आ इनके सूक्ति के तारीफ कइले बाने। बाण खुद सम्राट हर्ष के सभा में कवी रहलें आ हर्ष के काल 606 ई से शुरू मानल जाला, मने कि कालिदास एकरे पहिलहीं भइल होखिहें। दूसर परमान कर्नाटक राज्य के एहोल-शिलालेख से मिले ला जेकरा में जैन कबी रविकीर्ति अपना के कालिदास आ भारवि के समान यशस्वी कहले बाड़ें। एहू से परमान के बल मिले ला काहें कि एहोल-शिलालेख 634 ई बतावल जाला। एह समय के एगो अन्य परमान के आधार पर अउरी पाछे खसकावल जा सके ला, काहें कि मंदसौर अभिलेख पर कालिदास के लेखन शैली के परभाव निर्बिबाद रूप से स्वीकार कइल जाला आ ई अभिलेख 473 ई॰ के हवे।

कालिदास मूल रूप से कहाँ के रहलें एकरे बारे में तीन गो प्रमुख मत बा, हिमालय के क्षेत्र के रहलें, उज्जैन के रहलें या कलिंग के रहलें। एह तीनों मत के कारण के रूप में कुमारसंभवम् में हिमालय के बेहतरीन बर्णन, मेघदूतम् में उज्जैन के खातिर उनके खास लगाव, आ रघुवंशम् काव्य में कलिंग के राजा के बारे में बहुत तारीफ़ भरल बिबरन के गिनावल जाला।

कालीदास की जीवन की बारे में बहुत कुछ मालुम नइखे। जेतना पता बा कथा-कहानी आ उनके रचना सभ में से अनुमान पर आधारित बाटे।

एक ठो किंबदंती कालिदास आ बिद्योतमा के ले के मिले ला। एह कहानी में बतावल जाला कि सुरुआत में कालिदास एकदम्मे मुरुख रहलें। ओह समय के एगो बहुते बिदुसी औरत बिद्योतमा रहली जे शर्त रखले रहली कि जे उनुका शास्त्रार्थ में हरा दी ओही से बियाह करिहें। उनका से जब केहू ना जीत पावल तब पंडित लोग खिसिया के षडयंत्र कइल कि एकर बियाह कौनों मुरुख से करावल जाई। खोजत-खोजत कालिदास भेंटा गइलें जे जवना डाढ़ पर बइठल रहलें ओही के काटत रहलें। पंडित लोग के ई एकदम सही आदमी लगलें आ इनके धरि के ले गइल लोग आ बिद्योतमा के शास्त्रार्थ खाती चुनौती दिहल। कहल गइल कि ई महान पंडित हवें बाकी मौन बरत लिहले बाने आ इशारा में जबाब दिहें। शास्त्रार्थ इशारा में भइल आ छल से पंडित लोग एह इशारेबाजी के अइसन ब्याख्या कइल कि बिद्योतमा हार मान लिहली। बाद में जब भेद खुल गइल बिद्योत्तमा कालिदास के बहुत धिक्कार कइली आ कालिदास देवी के भक्त बन के बिद्या हासिल कइलें। 

कालीदास के बिस्व के महान कबी आ नाटककार लोग में गिनल जाला। कालिदास अपना रचना में भारतीय पुराण आ भारतीय दर्शन के आधार बना के कथा, बिबरन आ अलंकार बिधान कइले बाने। भारतीय चेतना के इनका रचना सभ में एतना सुघर निरूपण होखे के कारण कुछ बिद्वान लोग इनका के राष्ट्र कवि के दर्जा देवे लें।

कालिदास वैदर्भी रीति के कवी हवें। एह रीति के कविता के बिसेसता छोट समास वाली, सहज सुघर आ अलंकार योजना वाली भाषा प्रमुख चीज हवे। कालिदास के  प्रकृति वर्णन खास हवें आ बिसेस रूप से इनका के उपमा अलंकार के प्रयोग खातिर जानल जाला। साहित्य में औदार्य गुण के बदे कालिदास  के बिसेस परेम हवे आ ऊ अपना शृंगार रस प्रधान साहित्य में भी आदर्शवादी परंपरा आ नैतिक मूल्य के यथा उचित धियान रखले हवें।

कालिदास के बाद के परसिद्ध कवी बाणभट्ट ने उनके सूक्ति सभ के बिसेस रूप से तारीफी कइले बाने।




#Article 205: विवेकी राय (174 words)


विवेकी राय (19 नवंबर 1924 - 22 नवंबर 2016) हिंदी आ भोजपुरी का साहित्यकार आ आलोचक रहलें। ऊ मूल रूप से ग़ाजीपुर की सोनवानी गाँव क रहेवाला रहलें। राय 50 गो से अधिका पुस्तकन  क रचना कइ चुकल रहलन आ ऊ ललित निबंध, कथा साहित्य आ कविता बिधा के लेखक रहलें। उनकरी रचना में गंवई मन आ मिज़ाज़ क झलक मिलेला। गाँव की माटी क सोन्हाइल महक उनकी रचना क ख़ास पहिचान बा।

ललित निबंध विधा में इहाँ क गिनती हजारीप्रसाद द्विवेदी, विद्यानिवास मिश्र, आ कुबेरनाथ राय की परम्परा में होला।
मनबोध मास्टर की डायरी  आ फिर बैतलवा डाल पर   सबसे चर्चित निबंध संकलन बाड़ें आ सोनामाटी उपन्यास उहाँ के सबसे लोकप्रिय उपन्यास बाटे। उहाँ के उत्तर प्रदेश सरकार कई गो सम्मान दिहले बा। हिंदी साहित्य में योगदान खातिर 2001 में महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार आ 2006 में यश भारती पुरस्कार दिहल गइल। उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा महात्मा गांधी सम्मान से भी पुरस्कृत किया गया। उन्होंने कुछ अच्छे निबंधों की भी रचना की है।
तारीख 22 नवंबर 2016 के उनके निधन हो गइल।




#Article 206: परबत माला (142 words)


परबत माला चाहे परबत शृंखला (Mountain Chain) या परबत श्रेणी (Mountain Range) पहाड़न की एगो अइसन कड़ी के कहल जाला जवन बहुत ढेर लंबाई में विस्तार वाली होखे। कब्बो कबो एकही परबत माला कई गो छोट-छोट परबत श्रेणिन में भी टूटल हो सकेले अइसना में छोटका हिस्सन के श्रेणी आ पूरा लंबाई के पर्वतमाला कहल जाला। कई गो परबत श्रेणी या पर्वत माला एकही जगह पर एकट्ठा मिलें आ उनहन में आपस में भूबिज्ञान की हिसाब से कौनों संबंध भी होखे त अइसना में पुरा संरचना के परबत तंत्र (Mountain System) कहल जाला चाहे कब्बो कबो कार्डिलेरा (Cordillera) कहल जाला।

हिमालय पहाड़ एगो परबत तंत्र हवे जेवन तीन गो परबत माला कुल से मिल के बनल हवे - हिमाद्रि, मझिला हिमालय आ शिवालिक। एही तरे मझिला हिमालय परबत माला कई गो परबत श्रेणी में बाँटल बा जइसे धौलाधार श्रेणी, महाभारत श्रेणी इत्यादि।




#Article 207: संगीत (138 words)


संगीत एक तरह का कला हवे जेवन सुने में नीक लागे वाली आवाज की उतार-चढ़ाव आ विराम की माध्यम से सुनेवाला की मन में आनंद पैदा करे ला। मनुष्य अपनी कंठ से संगीतमय आवाज निकाल सकेला, तरह तरह की बाजा के बजा के संगीत पैदा क सकेला आ एही सुर ताल की लहरी पर आपन अंग हिलाडुला के नाच भी सकेला। एही से गावल, बजावल, आ नाचल तीनों चीजु के संगीत कहल जाला।

एकर दू गो बिभाजन कइल जाला शास्त्रीय संगीत आ सुगम संगीत। लोक संगीत, जेवन आम गँवई जनता क संगीत हवे ओके कुछ लोग सुगम संगीत क हिस्सा मानेला आ कुच्छ लोग अलगे एगो परकार की रूप में मानेला।

अलग-अलग जगह की लोकगीत आ लोकसंगीत में ओ जगह की संस्कृति क बिसेसता झलकेला।

भारत में संगीत क उत्पत्ति साक्षात् भगवान शंकर जी से भइल मानल जाला।




#Article 208: एप्सिस (151 words)


अपसौर (अंगरेजी: Aphelion) ओ स्थिति के कहल जाला जब कौनो ग्रह अपनी कक्षा में सूर्य क चक्कर लगावत समय सूर्य से सबसे दूर वाला बिंदु पर रहेला। ए समय ओकर वेग सबसे कम रहेला। अइसन ए वजह से होला कि सारा ग्रह सूर्य क चक्कर दीर्घवृत्ताकार कक्षा में लगावेलें।

उपसौर (अंगरेजी: Perihelion) ओ स्थिति के कहल जाला जब कौनो ग्रह अपनी कक्षा में सूर्य क चक्कर लगावत समय सूर्य से सबसे नजदीक वाला बिंदु पर रहेला। ए समय ओकर वेग सबसे ढेर रहेला। अइसन ए वजह से होला कि सारा ग्रह सूर्य क चक्कर दीर्घवृत्ताकार कक्षा में लगावेलें।

ई केपलर की नियम की अनुसार होला।

पृथ्वी अपनी उपसौर की स्थिति में सूर्य से 147,098,074 कि॰मी॰ (0.9832898912 AU) की दूरी पर रहेले आ इ लगभग 3-4 जनवरी के होला।
पृथ्वी अपनी अपसौर की स्थिति में सूर्य से 152,097,701 कि॰मी॰ (1.0167103335 AU) की दूरी पर रहेले आ इ लगभग 3-4 जून के होला।




#Article 209: सौर मंडल (693 words)


सौर मंडल सूर्य आ एकरी चारों ओर चक्कर लगावेवाला ग्रह आ उन्हन की उपग्रह कुल से मिल के बनल परिवार के कहल जाला। वर्तमान समय में सूर्य क आठ गो ग्रह बाड़ें काहें से कि नौवां ग्रह प्लूटो के 2006 में अनियमित आकार की कक्षा की कारण ग्रहन की लिस्ट से बाहर क दिहल गइल। अब प्लूटो के बौना ग्रह कहल जाला।

सूर्य की ओर से क्रम से बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस (अरुण) अउरी नेपच्यून (वरुण) इहे आठ गो ग्रह बा। सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति हवे आ सबसे छोट बुध। मंगल आ बृहस्पति के बीच में छोट छोट पिंड सभ के पेटी पावल जाले आ एह पिंड सभ के एस्टेरॉइड्स कहल जाला।

सुरुज सौर मंडल के तारा हवे आ बाकी सभ सौरमंडली पिंड सभ के तुलना में सभसे ढेर वजनदार, बाकी सभ से बहुते ढेर वजन वाला पिंड हवे। एकर बिसाल द्रब्यमान (332,900 पृथिवी के बरोबर) एकरे कोर में अतना ढेर तापमान आ दाब बना देला कि हाइड्रोजन के हीलियम में बदलाव के काम परमाणु फ्यूजन द्वारा होखे ला आ एही कारण ई मेन सीक्वेंस तारा हवे। एह कारण भारी मात्रा में ऊर्जा रिलीज होले जेकर ज्यादातर हिस्सा बाहरी अंतरिक्ष में रेडियेशन के रूप में फइले ला आ एह रेडियेशन के सभसे ढेर मात्रा प्रकाश (विजिबल लाइट) के रूप में होले।

सुरुज जी-प्रकार के मेन-सीक्वेंस तारा हवे। अउरी ढेर गरम मेन-सीक्वेंस तारा सभ ज्यादा चमकदार होलें। सुरुज के तापमान सभसे गरम तारा सभ आ सभसे ठंढा तारा सभ के बीच में हवे। सुरुज से ढेर ताप आ दमक वाला तारा बहुत कंचित-कला पावल जालें, जबकी एकरे ले बहुत कम चमक आ ताप वाला तारा, जिनहन के रेड ड्वार्फ कहल जाला, आकाशगंगा के कुल तारा सभ के 85% हिस्सा हवें।

सुरुज पापुलेशन I तारा हवे; एकरे ले पुरानका पापुलेशन II तारा सभ के तुलना में एह में हाइड्रोजन आ हीलियम से भारी तत्व (खगोलीय पैरालांस में धातु) के मात्रा ढेर पावल जाले। हाइड्रोजन आ हीलियम से भारी तत्व सभ के निर्माण प्राचीन आ बिस्फोटित हो रहल तारा सभ के कोर में भइल, एही से ब्रहमांड में एह पदार्थ सभ के बहुतायत (एनरिचमेंट) खाती एह तारा सभ के मुर्दा होखे के परल होखी। सभसे पुराण तारा सभ में सबसे कम धातु मिले ला, जबकि बाद के तारा सब में ज्यादा। धातु यानी मेटल के मौजूदगी सुरुज के चारों ओर ग्रह मंडली के निर्माण में बहुत महत्वपूर्ण रहल होखी अइसन अनुमान लगावल जाला काहें से कि ग्रह सभ के उत्पत्ती मेटल सभ के एकट्ठा होखे से होला।

अंदरूनी सौरमंडल में सौरमंडल के अइसन हिस्सा आवे ला जे में टेरेस्ट्रियल ग्रह आ एस्टेरॉइड पेटी के शामिल कइल जाला। एह अंदरूनी भा भीतरी सौरमंडल के पिंड सभ सिलिका वाला पदार्थ आ धातु सभ से बनल हवें आ तुलना में ई सुरुज के नजदीक बाने; एह पूरा क्षेत्र के त्रिज्या (रेडियस) बृहस्पति आ शनी के कक्षा के अंतर (बीच के दूरी) से भी कम बा। ई इलाका बर्फ रेखा (फ्रॉस्ट लाइन) के भितरे पड़े ला जे सुरुज से करीब 5 एयू के दूरी से कुछ कम (लगभग 700 मिलियन किलोमीटर या 70 करोड़ किलोमीटर) दूरी तक ले मानल जाले।

चार गो भीतरी ग्रह (इनर प्लैनेट) सभ के रचना चट्टानी पदार्थ से भइल हवे; प्राकृतिक उपग्रह नामौजूद बाने या फिर बहुत कम बाने, कौनों छल्ला इनहन के चारो ओर ना मिले लें। इनहन के रचना में रिफ्रेक्शन वाला मटेरियल के बहुलता बा जइसे की सिलिकेट पदार्थ सभ जिनहन से एह ग्रहन के ऊपरी परत - क्रस्ट, आ बिचली परत - मैंटल, के निर्माण भइल हवे, आ धातु वाला पदार्थ जइसे कि लोहा आ निकेल से इनहन के सभसे अंदरूनी भाग - कोर के निर्माण भइल हवे। चार गो भीतरी ग्रह सभ में से तीन गो (शुक्र, मंगल आ पृथ्वी) के चारो ओर वायुमंडल पावल जाला जे मौसमी घटना पैदा करे खाती पर्याप्त बा; सगरी चारों पर इम्पैक्ट क्रेटर पावल जालें आ सतह पर टेक्टॉनिक थलरूप मिले लें जइसे कि ज्वालामुखी आ रिफ्ट घाटी। भीतरी ग्रह (inner planet) शब्द के हीन ग्रह (inferior planet) से अलग बूझे के चाहीं, हीन ग्रह में खाली दू गो ग्रह आवे लें (बुध आ शुक्र) जे पृथ्वी के तुलना में सुरुज के नजदीक बाने, यानी पृथ्वी के ओर से देखे पर भीतर की ओर मौजूद कक्षा में सुरुज के चक्कर लगावे लें।




#Article 210: बुध ग्रह (219 words)


बुध () सौर मंडल के एगो ग्रह हवे जेवन सौर मंडल के केन्द्र पर मौजूद सूर्य की ओर से सबसे पहिला ग्रह हवे, मने कि ई सूर्य से सभसे नजदीकी ग्रह हवे। ई सौर मण्डल क सभसे छोट ग्रह भी हवे। ई सूर्य के चक्कर लगावे में 88 दिन (पृथ्वी के दिन) के समय लेला आ पृथ्वी से देखला पर अपनी धुरी पर 116 दिन में एक चक्कर घूमे ला। पृथ्वी से दूरबीन से देखला पर इहो चंद्रमा नियर घटत-बढ़त लउकेला।

बुध ग्रह के आपन कौनों खास वायुमंडल नइखे जवना कारण अहिजा दिन आ रात के तापमान में बहुत ढेर अंतर पावल जाला। एकरे विसुवत रेखा वाला इलाका में रात में तापमान  ले गिर जाला आ दिन में  पहुच जाला, ध्रुवीय इलाका हमेशा  से नीचे के तापमान वाला रहे लें। बुध के धुरी के झुकाव बाकी ग्रह सभ के तुलना में सभसे कम बाटे आ एकरे परिकरमा मार्ग के चपटापन सभसे ढेर बा।

चूँकि, बुध पृथ्वी से छोट मार्ग में चक्कर लगावे ला (शुक्र भी) ई हमेशा पृथ्वी से सबेरे भा साँझ के बेरा देखाई पड़े ला, ऊहो तब जब सुरुज के बहुत नजदीक कोन पर न रहे तब। सुरुज के रौशनी के कारण अक्सर ई धरती से बिना दूरबीन के ना लउके ला।

अबले दू गो अंतरिक्ष यान बुध ग्रह के यात्रा कर चुकल बाने मैरिनर आ मैसेंजर।




#Article 211: शुक्र ग्रह (102 words)


शुक्र (अंग्रेज़ी:Venus) एगो ग्रह (Planet) जेवन सूर्य की ओर से बुध की बाद दुसरा नंबर पर बाटे। एह तरे ई बुध आ पृथ्वी की बीच में स्थित बा। ई सूर्य का चक्कर 224.7 पार्थिव दिन में लगावेला।

एकर आकार आ द्रव्यमान पृथ्वी से बहुत मिलत-जुलत बा जेवना कारन से एके पृथ्वी क बहिन भी कहल जाला। 
आसमान में ई चंद्रमा की बाद सभसे ढेर चमकीला प्राकृतिक चीज हउवे। ई अक्सर सबेर चाहे साँझ क लउकेला काहें से कि ई भीतरी ग्रह (Inner Planet) हवे आ सूर्य से बहुत दूर ना लउकेला। पृथ्वी से दूरबीन से देखला पर इहो चंद्रमा नियर घटत-बढ़त लउकेला। 




#Article 212: मंगल ग्रह (183 words)


मंगल सौर मण्डल में सूर्य की ओर से चउथा ग्रह हवे जेवन सूर्य से 2280 लाख किमी (1420 लाख मील) या 1.52 AU की दूरी पर बाटे। ई पार्थिव ग्रह कहल जाला काहें से कि पृथ्वी कि तरे एहू क रचना चट्टान वाला पदार्थन से भइल बा। एके लाल ग्रह कहल जाला काहें से कि एकरी सतह पर लोहा क आक्सीकरण होला आ एही से एकर सतह लाल लउकेले।

पृथ्वी की दिन की आधार पर देखल जाय त मंगल क एक दिन पृथ्वी से थोड़िके सा बड़ होला लेकिन मंगल क एक साल करीब 687 पार्थिव दिन क होला। मने एके सूर्य क एक चक्कर लगावे में 687 पृथ्वी क दिन लागेला। एकर वातावरण बिरल होला, मंगल पृथ्वी के ब्यस के लगभग आधा होला.एकर दिन के मन अवरी अक्ष के झुकाव [पृथ्वी] के सामान होला इ आपन धुरी पर 24 घंटा में एक बार पूरा चक्कर  लगावे ला मंगल के कक्षातली [25] डिग्री के कोण पर झुकल बवे जवाना कारन इ पृथ्वी के सामान ऋतु परिवर्तन होला

मंगल क दू गो प्राकृतिक उपग्रह बाड़ें जिनहन क नाँव फोबोस आ डिमोस रक्खल गइल बा।




#Article 213: ग्रह (103 words)


ग्रह अइसन आकाशीय पिण्ड के कहल जाला जवन कौनो तारा क चक्कर लगावे। हमनी के सौर मण्डल क तारा सूर्य हवे जेवना का चक्कर लगावेवाला आठ गो ग्रह बाटें - बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस (अरुण) अउरी नेपच्यून (वरुण)।

ग्रह कहाए खातिर कौनो पिण्ड में नीचे लिखल बिसेसता होखे के चाहीं:
 

पहिले प्लूटो के भी ग्रह मानल जा लेकिन सन् 2006 में एके ग्रहन की कटेगरी से बाहर क दिहल गइल आ बौना ग्रह कि कटेगरी में शामिल क लिहल गइल।

बुध, शुक्र, पृथ्वी आ मंगल के भीतरी ग्रह कहल जाला आ बाकी के बाहरी आ बृहस्पति नियर ग्रह कहल जाला।




#Article 214: एस्टेरॉइड्स (302 words)


एस्टेरॉइड हमनी के सौरमंडल के अंदरूनी हिस्सा में मौजूद बहुत छोटहन आकार के ग्रह हवें सऽ आ ई मंगल ग्रह आ बृहस्पति ग्रह की बिचा में पावल जाए वाला चट्टानी पिंड हवें स जेवन एक ठो पेटी की रूप में बाड़न स। हिंदी में इन्हन के क्षुद्रग्रह कहल जाला जबकि अंगरेजी में एस्टेरॉइड्स के अलावे इनहन के प्लेनेटॉइड्स भी कहल जाला। मंगल आ बृहस्पति के बीचा के ई इलाका एस्टेरॉइड बेल्ट चाहे एस्टेरॉइड पेटी कहाला। परंपरागत रूप से पुराना जमाना से एस्टेरॉइड्स चाहे प्लेनेटॉइड्स सभ अइसन पिंड सभ के नाँव दिहल गइल जे सुरुज के चक्कर लगावे लें बाकी ग्रह के नियर स्पष्ट गोलाई के आकृति ना होला आ इनहन के पुच्छल तारा नियर स्पष्ट बिसेस्ता भी ना होला, जइसे कि पोंछ। कुछ एस्टेरॉइड सभ के परिकरमा के रास्ता बहुत ढेर चापट भी होला। 

एस्टेरॉइड के खोज सन 1801 में इटली के रहे वाला ज्यूसिप्पी पियाज्जी (Giuseppe Piazzi) कइलेन जे पादरी आ खगोलशास्त्री रहलें।  पियाज्जी द्वारा खोजल गइल एस्टेरॉइड के बौना ग्रह के श्रेणी में रखल जाला आ एकरा के आजकाल सिरिस के नाँव से जानल जाला जे सभसे बड़हन साइज के एस्टेरॉइड भी हवे। हालाँकि, जवना समय एकर खोज भइल एकरा के एगो छोट ग्रह बूझल गइल। बाद में जब अइसन छोट-छोट बहुत सारा पिंड सभ के खोज भ गइल तब विलियम हर्शेल एह सभ के एस्टेरॉइड नाँव दिहलें।

अपना खास सतह, जे चमकदार हवे, के कारण फोर वेस्टा (4Vesta) एकलौता अइसन एस्टेरॉइड बा जेकरा के हमनी के धरती पर से बिना दूरबीनो के देख सकीं लें, हालाँकि एकरा खाती एकदम साफ़ आकास चाहे ला आ ई खास सतह धरती के ओर मुँह कइले होखे इहो जरूरी होला। एकरे अलावे एगो अउरी एस्टेरॉइड उल्लेखजोग बा जेकर नाँव इरोस (Eros) हवे, काहें से कि ई एकलौता अइसन एस्टेरॉइड बा जेह पर मनुष्य के बनावल अंतरिक्ष यान (नियर शूमेकर (NEAR-shoemaker)) उतर चुकल बा।




#Article 215: वायुमंडल (481 words)


पृथ्वी के वायुमंडल, (Atmosphere, एटमॉस्फियर) पृथ्वी के चारों ओर लपटाइल गैसन के घेरा हवे। गैस सभ के एह मैकेनिकल मिक्चर के हवा कहल जाला। पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के ताकत एह हवा के पृथ्वी के चारों ओर पकड़ले रहे ले।

वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन गैस पृथ्वी पर जीवन खातिर बहुत जरूरी बा। एकरे अलावा ई वायुमंडल सुरुज के अल्ट्रावायलेट किरण के सोख के उनहन से सगरी जीवधारिन के रक्षा करे ला, गर्मी सोख के ओकर बँटवारा का देला जवना से दिन आ रात के ताप में बहुत अंतर ना होखे पावे ला, सुरुज से आवे वाला रोशनी के डिफ्यूज क के फइला देला जवना से उहो चीज सभ के देखल जा सके ला जिनहन पर सीधा सुरुज के रोशनी (घाम) न पड़ रहल होखे। एकरे अलावा, वायुमंडल के महत्व एह कारण बा भी कि एह में बिबिध प्रकार के मौसम संबधी घटना घटित होखे लीं, जइसे कि हवा के बहल, बादर आ बरखा इत्यादि मनुष्य के जीवन आ आर्थिक कामकाज (खेती इत्यादि) के बहुत सीमा तक परभावित करे लें।

वायुमंडल के अध्ययन करे वाला बिसय के वायुमंडल बिज्ञान; वायुमंडली दशा, मने कि मौसम, के अध्ययन करे वाला बिज्ञान के मौसम बिज्ञान; आ लंबा समय के मौसमी पैटर्न के अध्ययन करे वाला बिज्ञान के जलवायु बिज्ञान कहल जाला।

वायुमंडल में के हवा कई गैसन का मेरवन होला। ऊँचाई के साथ इनहना के अनुपात में धटती-बढ़ती होला बाकी जमीन से 100 किलोमीटर ले हवा में गैसन के अनुपात लगभग एक्के नियर होला। वायुमंडल के एह हिस्सा के सममंडल (होमोस्फियर) कहल जाला। एही निचला, होमोस्फियर में कवन गैस केतना मात्र में मिलेले एकर बिबरन वायुमंडल के कंपोजीशन कहाला।

वायुमंडल में पानी (भाप के रूप में) के मात्रा एक जगह से दूसर जगह, आ एक दिन से दुसरे दिन के बीच भा एक सीजन से दुसरे सीजन के बीच हमेशा बदलत रहे ला। वायुमंडली पानी के बदलत रहे के कारण वायुमंडल के कंपोजीशन बतावत घरी एह में भाप के मात्रा के ना शामिल कइल जाला, खाली सूखल हवा के कंपोजीशन बतावल जाले जे नीचे दिहल जा रहल बाटे:

The relative concentration of gasses remains constant until about .

पृथ्वी के वायुमंडल के कई गो परत (लेयर) में बाँटल जा सके ला। ई एगो सामान्य बात मानल जाला की वायुमंडल में ऊपर की ओर गइले पर ताप में कमी आवेले, बाकी ई बात पुरा वायुमंडल खातिर सही नइखे। एही से तापमान की बदलाव आ दूसरी कई गो बिसेसता की आधार पर वायुमंडल के कई गो परत में बाँटल गइल बा। जब एकरा के ताप की आधार पर बाँटल जाला त एके तापीय संरचना या थर्मल स्ट्रक्चर कहल जाला।

बादर, अकास में पानी की बहुत छोट बुन्नी आ बरफ की कन से बनल चीज बा जेवन हवा में उधियात रहेला आ धीरे-धीरे एक जगह से दुसरे जगह जाला। एही बादर सभ में जब पानी के बड़ बुन्नी बन जालीं तब ऊ हवा में ना रुक पावे लीं आ नीचे गिरे सुरू हो जालीं जेकरा के बरखा कहल जाला।




#Article 216: दूरबीन (176 words)


दूरबीन (अंगरेजी: टेलिस्कोप) एगो अइसन यंत्र होला जेवना से दूर क चीज देखल जा सकेला। मुख्य रूप से ई प्रकाश आधारित यंत्र होला जे देखलाई पड़े वाला इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन (प्रकाश) के किरण के कुछ मोड़ के भा इकट्टा एक जगह केंद्रित क के बहुत लम्मा के चीज के भी साफ देखाई पड़े लायक स्थिति बना देला। प्रकाश आधारित दूरबीन सभ के ऑप्टिकल दूरबीन कहल जाला। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन के स्पेक्ट्रम के अन्य हिस्सा में भी काम करे वाला दूरबीन बाड़ें, जइसे कि रेडियो दूरबीन, एक्स-रे दूरबीन, गामा रे दूरबीन आ इन्फ्रारेड दूरबीन।

आमतौर पर दूरबीन के इस्तेमाल आकासी पिंड सभ के बेध करे आ उनहन के अध्ययन करे खातिर होला आ ई बेधशाला सभ के मुख्य औजार होला। एकरे अलावा छोट दूरबीन सभ के जमीनी उपयोग भी होला। स्नाइपर राइफल से ले के चिरई निहारे वाला दूरबीन ले भा जहाजी परिवहन में दूरबीन के इस्तेमाल अइसने कुछ उपयोग बाड़ें।

पहिला दूरबीन, सत्रहवीं सदी में, नीदरलैंड में शीसा के लेंस सभ के इस्तेमाल से बनावल गइल रहल। एकरे कुछ समय बाद रिफ्रेक्टिंग टेलिस्कोप के आबिस्कार भी भ गइल।




#Article 217: अंगरेजी साहित्य (462 words)


अंगरेजी साहित्य चाहे अंगरेजी-भाषा के साहित्य, अंगरेजी भाषा में रचल साहित्य हवे जेह में इंग्लैंड के अलावे अउरियो आसपास के देसन के लोगन द्वारा साहित्य के सामिल कइल जाला आ बाद के समय में अंगरेज-शासित रहल देसन आ उपनिवेशन के लोग द्वारा एह भाषा में लिखल साहित्य के भी गिनल जाला। इंग्लैंड, जहाँ के लोग के अंगरेज (इंग्लिश) कहल जाला आ जेह लोगन के ई अंगरेजी (इंग्लिश) भाषा हवे, के अलावे आसपास के अउरीयो इलाका के लोग एह भाषा में लिखल, स्कॉटलैंड, वेल्श, पूरा आयरलैंड में एह भाषा में साहित्य लिखल गइल। बाद में ब्रिटिश साम्राज्य के समय में ओह देसन में भी अंगरेजी में साहित्य लिखल गइल जे एह साम्राज्य के उपनिवेश रहलें आ अमेरिकी अंगरेजी साहित्य, भारतीय अंगरेजी साहित्य आ प्रवासी लोगन के लिखल अंगरेजी साहित्य नियर उपबिभाजन पैदा भइल जे अंगरेजी साहित्य के हिस्सा हवे।

अंगरेजी भाषा के पैदाइश लगभग पाँचवीं सदी के दौरान सुरू भइल जब एंग्लो-सैक्सन प्रवासी लोग ग्रेट ब्रिटेन में आ के बसल आ एह लोगन के एंग्लो-फ्रायसियन बोली से एह नया भाषा के बिकास भइल। एह सुरुआती अंग्रेजी के पुरानी अंगरेजी (ओल्ड इंग्लिश) के नाँव से जानल जाला। बेइअवुल्फ़ (Beowulf) एह पुरानी अंगरेजी के सभसे परसिद्ध रचना हवे जेकरे रचयिता के जानकारी ना बाटे; ई स्कैंडिनेविया के परिवेश में स्थापित कहानी होखे के बावजूद अंगरेज लोगन में आ इंग्लैंड में एक तरह के राष्ट्रीय महाकाव्य के रूप मानल-जानल जाला। 1066 में नार्मन लोग इंग्लैंड पर कब्जा कइल जेकरे बाद पुरानी अंगरेजी में साहित्य के लिखल रूप गायब भ गइल आ एह दौर में राजकाज से ले के कोर्ट कचहरी आ लिखित बेहवार के भाषा फ्रेंच बन गइल रहे। नार्मन दौर के बोलचाल वाली अंगरेजी के मिडिल इंग्लिश कहल जाला। अंगरेजी भाषा के ईहे रूप 1470 के दशक ले रहल जबले कि बाद के मिडिल इंग्लिश ना बिकसित भइल जे लंदन आ आसपास के भाषा के बिस्तारित इलाका में फइले से बनल; एकरा के चांसरी स्टैंडर्ड (Chancery Standard) कहल जाला। ज्यॉफ्री चॉसर एह भाषा के सभसे परसिद्ध रचनाकार हवें आ उनके दि केंटरबरी टेल्स सभसे परसिद्ध रचना हवे। चौसर के अंगरेजी साहित्य के जनक आ अंगरेजी कबिता के जनक के रूप में एही कारन जानल जाला कि ऊ अइसन समय में आपन रचना के भाषा देसी अंगरेजी के बनवलें जबकि इंग्लैंड में अबहिनो राजकाज आ लिखा-पढ़ी के भाषा फ्रेंच आ लातीनी रहल। 1439 में प्रिंटिंग प्रेस के आबिस्कार भइल आ ई अंगरेजी के प्रसार आ मानक रूप धरे में मदद कइलस, किंग जेम्स के बाइबिल एही आबिस्कार के नतीजा रहल। एकरे बाद अंगरेजी में उच्चारण के भारी बदलाव शुरू भइल आ बहुत लंबा उच्चारण वाला स्वर भाषा से गायब हो गइलें आ कई शब्दन में व्यंजन सभ साइलेंट हो गइलें; एह घटना के ग्रेट वॉवेल शिफ्ट के नाँव से जानल जाला आ अंगरेजी के इस्पेलिंग आ उच्चारण में अंतर होखे में एकर भारी परभाव मानल जाला।




#Article 218: व्लादीमिर नाबोकव (198 words)


व्लादीमिर व्लादीमिरविच नाबोकव (रूसी: Владимир Владимирович Набоков) (10 अप्रैल 1899जूलि, 22 अप्रैल 1899ग्रेग - 2 जुलाई 1977) रूसी अउरी अंगरेजी भाषा क लेखक रहलें। उनके उपनाँव व्लादिमीर सिरिन की नाँव से भी जानल जाला।

शुरुआत में ऊ खाली रूसी भाषा में लिखें बाकी बाद में अंग्रेजियो में लिक्खे शुरू कइ दिहलें। उनकर पहिला नौ गो उपन्यास रूसी भाषा में रहे बाद में अंगरेजी में भी लिखे लगलें लेखक की आलावा उनके तितली निरेखेवाला आ शतरंज क समस्या बनावेवाला की रूप में भी जानल जाला।

नाबोकव के सबसे ढेर जानल जाला उनकी अंगरेजी उपन्यास लोलिता खातिर जेवन अंगरेजी में उनकर बारहवाँ उपन्यास रहे आ सभसे नीमन रचना मानल जाले। ई एगो बहुत सुन्दर आ  विवादास्पद रचना हवे। लोलिता (1955) के  में चौथा अस्थान दिहल गइल आ पीयर आग (1962) एही लिस्ट में 53 वाँ अस्थान पवलस।

लोलिता आ पीयर आगि (Pale fire) की आलावा फिन (Phin) आ अदा या ऑर्डर (Ada or Ardor) उनकर प्रसिद्द रचना हईं। उनके सात बेर खातिर नामांकित कइल गइल लेकिन ई पुरस्कार एको बेर मिलल ना।

नाबोकव क जनम (10 अप्रैल 1899जूलि, 22 अप्रैल 1899ग्रेग) के सेंट पीटर्सबर्ग शहर में भइल।

उनकर 2 जुलाई 1977 के स्विट्ज़रलैंड की मोंट्रियू शहर में देहांत हो गइल।




#Article 219: लोलिता (188 words)


लोलिता  व्लादीमिर नाबोकव क अंगरेजी में लिखल एगो विश्वपरसिद्ध उपन्यास हवे।

उपन्यास क शुरुआत एगो काल्पनिक प्रस्तावना से होला जेवना में ई स्थापित कइल जाला कि हम्बर हम्बर्ट, जे ए उपन्यास क मुख्य चरित्र हवे, ई उपन्यास क रचना पूरा क के मर गइलें। 
उपन्यास क हिरोइन श्रीमती रिचार्ड शिलर (लोलिता) बच्चा पैदा होखे में 17 साल की उमिर में मर गइली।

हम्बर हम्बर्ट एगो साहित्यिक आदमी रहेलें। 
उनके बचपन में अनाबेल नाँव की लइकी से प्रेम आ कुछ शारीरिक निकटता क अनुभव मिलेला अनाबेल क मौत हो जाले आ ए अधूरा प्रेम जेवना की वजह से ऊ हमेशा खातिर कमउमिर की लड़िकिन की खातिर एगो मनोवैज्ञानिक आकर्षण क शिकार हो जालें हमेशा खातिर अनाबेल क यादगार बा जाला। 
अइसन कम उमिर की लड़िकिन के उपन्यास में ऊ एगो अलगे नाँव निम्फेट देलें। 
ई भावना उनकी साथ हमेशा रहेले जबले उनके लोलिता ना मिल जाले ।

आपन लेखन कार्य करे खातिर मिस्टर हम्बर्ट एगो छोट शहर में जा के रहे शुरू करे ले जहाँ मिसेज चोर्लेट आ उनकर 12 बरिस क लइकी डोलोरेस (उपनाम लो लोला डॉली) से उनकर मुलाकात होला।
ऊ डोलोरेस क नाँव लोलिता रख देलें।




#Article 220: कैलेंडर (469 words)


कैलेण्डर चाहे कलेंडर समय की गणना के व्यवस्थित कइला क साधन हवे जेवना में दिन हफ्ता आ साल में बाँट के समय क हिसाब रक्खल जाला।
आजकल अधिकतर देश ग्रेगोरियन कैलेंडर को अपना चुके हैं। किन्तु अब भी कई देश ऐसे हैं जो प्राचीन कैलेंडरों का उपयोग करते हैं। इतिहास में कई देशों नें कैलेंडर बदले। आइए उनके विषय में एक नजर देखें:

 

समय	घटना

तिथि कौनों एगो दिन क पहिचान कइले क साधन हवे। दूसरा तरीका से कहल जाय त तिथि कौनो दिन विशेष क नाँव हवे।

भारत में सामान्य रूप से अंगरेजी ग्रेगेरियन कैलेण्डर आ हिन्दू पंचांग क इस्तेमाल होला। आजकाल ग्रेगेरियन कैलेण्डर पुरा दुनिया में सबसे ढेर इस्तेमाल होला।

कैलेण्डर शब्द क उत्पत्ति लातीन भाषा की calendarium से भइल हवे जेवना का मतलब किताब में लिखल होला; ई पुराना जमाना में हर महीना की पहिला दिन (kalendae) के लिस्ट बनवला खातिर इस्तेमाल होखे।

अंतर्राष्ट्रीय रूप से स्टैण्डर्ड मानल जाए वाला आ पुरा दुनिया में इस्तेमाल होखे वाला कलेंडर हवे। एकर आधार वर्ष ईसा की जन्म के मानल जाला आ ए से पहिले की समय के BC (Before Christ) या ईसा पूर्व (ई॰पू॰) आ बाद की सालन के AD (Anno Domini) या ईसवी (ई॰)  कहल जाला। कुछ लोग ई॰ के  CE (Common Era) आ ई॰ पू॰ के  BCE (Before Common Era) भी कहेला।

पत्रा चाहे पंचांग से तिथि, वार, नक्षत्र, योग आ करण क हिसाब रक्खल जाला। पाँच चीज क गणना कइले की कारन एके पञ्चांग कहल जाला। हिन्दू पंचांग में शक संवत आ विक्रमी संवत क प्रयोग साल की गिनती खातिर होला।

हिन्दू पंचांग सूर्य आ चंद्रमा दूनो पर आधारित गणना करेला। हिन्दू महीना चंद्रमा की कला पर आधारित होला आ एक पुर्नवासी (पूरणमासी या पूर्णिमा) से आगिला पुर्नवासी ले होला। महीना के दू गो पाख में बाँटल जाला। जवना हिस्सा में चन्द्रमा बढ़त रहे ला (अमवसा से पुर्नवासी ले) ओके अँजोरिया चाहे शुक्लपक्ष कहल जाला। जेवना हिस्सा में चंद्रमा घटे लागे ला (पुर्नवासी कि बाद से अमावसा ले) ओके अन्हरिया या कृष्णपक्ष कहल जाला। एगो पाख 13-15 दिन क होला।

पाख में एक्कम, दुइज, तीज, चउथ, पंचिमी, छठ, सत्तिमी, अष्टिमी, नवमी, दसमी, एकादशी, दुआदसी (द्वादशी), तेरस, चतुर्दशी, आ पुर्नवासी/अमौसा (अमावस्या) तिथि होले। एगो तिथि क समय ओतना होला जेतना देर में चंद्रमा की गति की कारन, चंद्रमा आ सूर्य की बिचा में बारह अंश बीत जाय। चंद्रमा पृथ्वी क चक्कर दीर्घवृत्तीय रास्ता पर लगावेला एही से कबो ई 12 अंश क दूरी जल्दी तय हो जाले आ कबो ढेर समय लागेला आ तिथि छोट-बड़ होत रहेलिन। अमावसा कि अंत आ अँजोरिया की एक्कम क शुरुआत होले जब सूर्य आ चंद्रमा की बिचा में शून्य अंश क कोण बनेला। पुर्नवासी के ई कोण 180 अंश हो जाला मने पृथ्वी सूर्य आ चंद्रमा की बिचा में होले।

हिंदू महीना क नाँव क्रम से चइत, बइसाख, जेठ, असाढ़, सावन, भादो, कुआर, कातिक, अगहन, पूस, माघ, आ फागुन होला।




#Article 221: हिंदू पतरा (1091 words)


हिन्दू पतरा, हिंदू कैलेंडर या हिन्दू पंचांग अइसन सभ कैलेंडर सभ के कहल जाला जे हिंदू लोग द्वारा दिन, तिथि, आ महीना के गणना करे खातिर आ आपन पर्ब-तिहुआर के गणना करे खातिर करे ला। पत्रा चाहे पंचांग से तिथि, वार, नक्षत्र, योग आ करण क हिसाब रक्खल जाला; पाँच चीज क गणना कइले की कारन एह कैलेंडर सभ के पञ्चांग कहल जाला। क्षेत्र के अनुसार एह कैलेंडर सभ में पर्याप्त बिबिधता देखे के मिलेला। ई सगरी कैलेंडर या पतरा सभ चंद्रमा आ साइडेरियल गणना के अलग-अलग तरीका से इस्तेमाल करे में भी बिबिधता वाला बाड़ें आ महीना आ साल के सुरुआत के मामिला में भी इनहन में बिबिधता मिलेला।

क्षेत्र अनुसार कई तरह के पञ्चांग मिले लें - नेपाली पंचांग, बिक्रम संवत, बंगाली पंचांग, शालिवाहन शक पञ्चांग इत्यादि एह में प्रमुख बाड़ें। उत्तर भारत में बिक्रम संवत के प्रमुखता देखे के मिले ला, हालाँकि ई नेपाली बिक्रम पञ्चांग से कुछ अलग होला।

ज्यादातर हिंदू तिहवार चंद्रमा के कला के आधार पर बनल चंद्र पंचांग से निर्धारित होलें, जबकि कुछ तिहुआर (खिचड़ी, सतुआन, बहुरा इत्यादि) सुरुज के आधार पर। महीना के नाँव एह सगरी कैलेंडर सभ में लगभग समान मिले ला, भले इनहन के सुरुआत एक साथ न होखे। महीना सभ के नाँव संस्कृत पर आधारित होखे के कारण लगभग एक रूप बाटे। ज्यादातर सौर हिंदू कैलेंडर सभ में सूर्य के एक राशि से दुसरा राशि में संक्राति के दिन महीना बदले ला आ 12 गो महीना आ साल में 365 या 366 दिन होलें।

बौद्ध कैलेंडर आ परंपरागत चंद्र-सौर पञ्चांग जे कम्बोडिया, लाओस, म्यांमार, श्रीलंका आ थाईलैंड में प्रयोग होलें, उहो सभ पुरान हिंदू कैलेंडर पर आधारित हवें।

अधिकतर हिंदू पंचांग सभ, पाँचवीं-छठवीं सदी में आर्यभट्ट आ वाराहमिहिर के दिहल सिद्धांत, जे खुद प्राचीन वेदांग ज्योतिष पर आधारित आ बिकसित रहल, पर आधारित हवें। सूर्यसिद्धांत आ पञ्चसिद्धंतिका ग्रंथन पर आधारित एह ब्यवस्था में बाद में भी पर्याप्त सुधार भइल, खास तौर पर बारहवीं सदी में भास्कर II द्वारा; आ क्षेत्रीय बिबिधता भी आइल।

भारतीय राष्ट्रीय पञ्चांग या शक कैलेंडर, जे एक ठो पुरान पञ्चांग पर आधारित हवे, 1957 में लागू भइल।

हिंदू कैलेंडर सभ में दिन के सुरुआत सुरुज उगे के समय से मानल जाला आ एक सूर्योदय से अगिला सूर्योदय ले के समय के एक दिन कहल जाला। तकनीकी ज्योतिषीय शब्दावली में एकरा के अहोरात्र कहल जाला। अहः माने दिन, रात्रि माने रात, यानि एक दिन-रात के समय। एकरे अलावा अन्य कई प्रकार के संकल्पना समय के माप के बा जे लगभग एक दिन या दिन के बराबर होला। इनहन के पाँच गो मुख्य अंग कहल जाला जिनहन के आधार पर हिंदू कैलेंडर सभ के पञ्चांग कहल गइल बा। ई क्रम से नीचे दिहल जात बाड़ें:

पञ्चांग के एह पाँचों अंग सभ के बिबरण आगे दिहल जात बा।

तिथि, एक ठो सूर्य-सापेक्ष चंद्रमास (सिनोडिक महीना) के 1/30वाँ हिस्सा होला आ ई सुरुज आ चंद्रमा के बीच हर 12° देशंतारीय कोण के पूरा होखला पर बदले ले। अमौसा के सुरुज आ चंद्र एक सीध में होलें, एकरे बाद चंद्रमा अपने परिक्रमा में आगे बढे ला आ सूर्य आ चंद्रमा के बीचे के कोणीय अंतर बढ़त जाला। हर 12° पर एक तिथि पूरा हो जाले आ पूरा 360° पूरा होखले पर फिर अमौसा के स्थिति, यानि सुरुज चंद्र एक सीध में हो जालें। 

हालाँकि चंद्रमा के 12° आगे बढ़े में हमेशा बराबर समय ना लागे ला आ एही से तिथि छोट-बड़ होत रहे लीं। एक तिथि के समय लगभग 19 घंटा से ले के 26 घंटा ले के हो सकेला।

सूर्योदय के समय जवन तिथि होल ओही के ओह दिन के तिथि मान लिहल जाला। एकरा के उदया तिथि कहल जाला। अगर एक सूर्योदय के समय कौनों तिथि रहल जे अगिला सूर्योदय के भी रहि गइल तब अगिला दिन के भी उहे तिथि होखी। मतलब कि एकही तिथि दू दिन कुल के तिथि कहाई, एकरा के बढ़ती कहल जाला। एकरे उल्टा, अगर कौनों तिथि सूर्योदय के बाद सुरू भइल आ अगिला सूर्योदय के पहिलहीं खतम हो गइल तब उ कौनों दिन के तिथि ना कहा पाई काहें कि कौनों दिन ओह तिथि में सूर्योदय ना भइल। एकरा के तिथि हानि (क्षय) या घटती कहल जाई।

वार या वासर हप्ता के सात दिन सभ के नाँव के कहल जाला। नीचे कुछ प्रमुख भारतीय भाषा सभ में दिन सभ के क्षेत्रीय नाँव लिखल गइल बा:

वार या वासर के अर्थ संस्कृत में दिन होला आ दिन के स्वामी के नाँव के अलग अलग पर्यायवाची सभ में भी वार या वासर जोड़ के दिन सभ के कई प्रकार से नाँव में बिबिधता देखे के मिले ला।

सूर्य की आधार पर गणना कइल जाला। पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगावेले एही से सूर्य आकाश में कौनो-न-कौनो राशि में उगत मालूम होला। बारह गो राशि आ 27 गो नक्षत्र में जवना में सूर्य जब होला ओही हिसाब से सौर मास क नाँव हो जाला। बारह गो सौर मास होला। एक महीना से दुसरा महीन में बदलाव क भी दू गो आधार बा। सायन मास अंगरेजी कैलेण्डर की हिसाब से 21-22-23 तारीख के बदलेला आ निरयन सौर मास 13-14 तारीख़ के।

साल के दू गो अयन में बाँटल जाला। उत्तरायण आ दक्षिणायन। जब सूर्य मकर रेखा से उत्तर की ओर गति शुरू करेल (खिचड़ी की बाद) त उत्तरायण शुरू होला। सतुआन की बाद जब सूर्य कर्क रेखा से दक्षिण की ओर जाला तब दक्षिणायन शुरू होला।

सायन आ निरयन की हिसाब से दू गो कर्क संक्रांति आ दू गो मकर संक्राति हो जाले।

हिन्दू महीना चंद्रमा की कला पर आधारित होला आ एक पुर्नवासी (पूरणमासी या पूर्णिमा) से आगिला पुर्नवासी ले होला। महीना के दू गो पाख में बाँटल जाला। जवना हिस्सा में चन्द्रमा बढ़त रहे ला (अमवसा से पुर्नवासी ले) ओके अँजोरिया चाहे शुक्लपक्ष कहल जाला। जेवना हिस्सा में चंद्रमा घटे लागे ला (पुर्नवासी कि बाद से अमावसा ले) ओके अन्हरिया या कृष्णपक्ष कहल जाला। एगो पाख 13-15 दिन क होला।

पाख में एक्कम, दुइज, तीज, चउथ, पंचिमी, छठ, सत्तिमी, अष्टिमि, नवमी, दसमी, एकादशी, दुआदसी (द्वादशी), तेरस, चतुर्दशी, आ पुर्नवासी/अमौसा (अमावस्या) तिथि होले। एगो तिथि क समय ओतना होला जेतना देर में चंद्रमा की गति की कारन, चंद्रमा आ सूर्य की बिचा में बारह अंश बीत जाय। चंद्रमा पृथ्वी क चक्कर दीर्घवृत्तीय रास्ता पर लगावेला एही से कबो ई 12 अंश क दूरी जल्दी तय हो जाले आ कबो ढेर समय लागेला आ तिथि छोट-बड़ होत रहेलिन। अमावसा कि अंत आ अँजोरिया की एक्कम क शुरुआत होले जब सूर्य आ चंद्रमा की बिचा में शून्य अंश क कोण बनेला। पुर्नवासी के ई कोण 180 अंश हो जाला मने पृथ्वी सूर्य आ चंद्रमा की बिचा में होले।

हिन्दू महीना कुल के नाँव क्रम से चइत, बइसाख, जेठ, असाढ़, सावन, भादो, कुआर, कातिक, अगहन, पूस, माघ, आ फागुन होला।




#Article 222: यूरोप (742 words)


यूरोप या योरप (अंग्रेजी:Europe) परंपरागत रूप से सात गो मानल जाए वाला महाद्वीप कुल में से एगो महाद्वीप हवे। ई यूरेशिया भूभाग की पच्छिमी ओर स्थित बा आ एशिया आ एकरी बीच पारंपरिक सीमा यूराल पर्वत के मानल जाला। यूरेशिया भूभाग की प्रायद्वीप की रूप में होखला की कारण एके प्रायद्वीपीय महाद्वीप भी कहल जाला। एकरी उत्तर में आर्कटिक महासागर, पच्छिम ओर अटलांटिक महासागर आ दक्खिन ओर भूमध्यसागर बाटे।

यूरोप क्षेत्रफल की हिसाब से बाकी महाद्वीपन में खाली आस्ट्रेलिया महाद्वीप से बड़ हवे। एकर क्षेत्रफल करीब 10,180,000 वर्ग किमी (3,930,000 वर्ग मील) बा जेवन पूरा पृथ्वी की सतह का 2% आ पृथ्वी कि जमीन वाला हिस्सा क 6.8% हवे। यूरप में करीब 50 गो देस बाड़ें जेवना में रूस सबसे बड़ बा। यूरोप की अउरी मुख्य देशन में यूनाइटेड किंगडम, फ़्रांस, जर्मनी, इटली इत्यादि बाटें। रूस क विस्तार यूरोप आ एशिया दुन्नों महाद्वीप में बाटे लेकिन सांस्कृतिक रूप से एके यूरोप क हिस्सा मानल जाला।

पश्चिमी संस्कृति का पैदाइश यूरोपे में भइल जेवन यूनान आ रोम कि प्राचीन सभ्यता, यूरोप में पुनर्जागरण आ औद्योगिक क्रांति क परिणाम हउवे। एही क्रम में यूरोप के कई गो देश दूसरी अफ्रीकी आ एशियाई देशन पर उपनिवेश स्थापित कइलें आ ए तरे यूरोप क संस्कृति पुरा दुनिया में फइल गइल।

यूरोप का ज्यादातर देश विकसित देस कि श्रेणी में आवेलें। यूरोपियन यूनियन इहँवा कई देसन क आर्थिक संघ हवे। यूरोपियन युनियन की सदस्य देसन क मुद्रा यूरो हवे।

यूरोप एशिया कि पच्छिम ओर बाटे आ उत्तरी अटलांटिक महासागर में एगो प्रायद्वीप की नियर बाटे।

यूरोप में मानव ईसापूर्व 35,000 के आसपास आइल। ग्रीक (यूनानी) आ लातिनी (रोम) राज्यन क अस्थापना पहिली सहस्त्राब्दी की सुरुआत में भइल। ई दोनों संस्कृति  आधुनिक य़ूरोप की संस्कृति के बहुते बहुत प्रभावित कइले हवे। ईसापूर्व 480 के आसपास य़ूनान पर ईरानी आक्रमण भइल आ एह में यूनानी लोगन के पीछे हटे के पड़ल। 330 ईसापूर्व में सिकन्दर ने ईरानी साम्राज्य के जीत लिहलें। 146 ई.पू. में यूनानी प्रायद्वीप (द्वीप छोड़ के) रोमन प्रोटेक्टोरेट क हिस्सा बन गइल। यूनान क अन्तिम पतन 88 ई.पू में भइल जब पोन्टस क मिथ्रिडेट्स छठवाँ (VI) नामक राजा रोम की खिलाफ़ विद्रोह कर दिहलस, जब ऊ रोमन जनरल लुसियस कॉर्नेलियस सुला की द्वारा यूनान से बाहर खदेड़ दिहल गइल तब तब यूनान पर फिन से रोम क अधिकार हो गइल आ यूनानी नगर फिर कब्बो ए से उबर न पवलें कुल।

सन् 27 ईसापूर्व में रोमन गणतंत्र समाप्त हो गइल आ रोमन साम्राज्य क अस्थापना भइल। सन् 313 में कांस्टेंटाइन ईसाई धर्म स्वीकार क लिहलें आ इहे धर्म रोमन साम्राज्य क राजधर्म बन गइल। पाँचवीं सदी आवत-आवत रोमन साम्राज्य कमजोर हो चुकल रहे लेकिन पूर्वी रोमन साम्राज्य पंद्रहवीं सदी ले इस्तांबुल में बनल रहल। इस समय की दौरान पूर्वी रोमन साम्राज्य के कई बेर अरब आक्रमण क सामना करे के पड़ल जेम्मे उन्हान के कई गो प्रदेश अरब लोगन के देवे के पड़ल।

रोमन साम्राज्य की पतन की साथ-साथ यूरप एगो अइसन लम्बा समय खातिर अनजान इतिहास की दौर में चलि गइल जेवना के इतिहासकार लोग प्रवास क युग कहेला। कई तरह क आक्रमण यूरोप पर भइल जेवना में ऑस्ट्रोगोथ, विसिगोथ, गोथ, वेंडाल, हूण, फ्रैंक, एंजेल्स, सैक्सन, स्लेव, अवार, आ बाद में वाइकिंग, कुमान आ मैगीर इत्यादि जाति-जनजाति कबीला इत्यादि क आक्रमणकारी रहलें।  एही काल के पैत्रार्क नियर पुनर्जागरण क इतिहासकार लोग यूरोप क अन्ध युग कहेला। ए समय में यूरोप से ज्ञान-विज्ञान आ संस्कृति क महत्वपूर्ण तत्व अपनी सबसे खराब अवस्था में पहुच गइल।

आधुनिक इतिहास का सुरुआत कुस्तुनतुनिया (कांस्टेंटिनोपल) की पतन से मानल जाला। एकरी बाद पूरा योरोप में ज्ञान-विज्ञान आ साहित्य की क्षेत्र में अचानक परिवर्तन भइल जेवना के पुनर्जागरण कहल जाला।

The culture of Europe can be described as a series of overlapping cultures; cultural mixes exist across the continent. There are cultural innovations and movements, sometimes at odds with each other. Thus the question of common culture or common values is complex. In his article, Andreas Kaplan describes Europe as embracing maximum cultural diversity at minimal geographical distances.

The culture of Europe can be described as a series of overlapping cultures; cultural mixes exist across the continent. There are cultural innovations and movements, sometimes at odds with each other. Thus the question of common culture or common values is complex. In his article, Andreas Kaplan describes Europe as embracing maximum cultural diversity at minimal geographical distances.

According to historian Hilaire Belloc, for several centuries the peoples of Europe based their self-identification on the remaining traces of the Roman culture and on the concept of Christendom, because many European-wide military alliances were of religious nature: the Crusades (1095–1291), the Reconquista (711-1492), the Battle of Lepanto (1571).




#Article 223: यूरेशिया (117 words)


यूरेशिया एगो विशाल भूभाग हवे जेवन वास्तव में एगो महाद्वीप हवे लेकिन परंपरागत रूप से एके यूरोप आ एशिया दू गो महाद्वीप मानल जाला।
योरोप महाद्वीप वास्तव में यूरेशिया क एगो प्रायद्वीप नियर हिस्सा हवे।

यूरेशिया की उत्तर ओर आर्कटिक महासागर, पच्छिम ओर अटलांटिक महासागर, दक्खिन ओर भूमध्य सागर आ हिन्द महासागर आ पूरुब ओर प्रशांत महासागर बाटे।

यूरेशिया में विशाल आकार की वजह से बहुत भूगोलीय विविधता मिलेला।

यूरेशिया का क्षेत्रफल लगभग 52,990,000 वर्ग किलोमीटर बा जेवन पूरा पृथ्वी क जमीनी हिस्सा क 36.2% हवे। यूरेशिया में पुरा दुनिया क लगभग 65% लोग रहेला (जनसंख्या 4.6 बिलियन)। मनुष्य ए भूभाग पर अबसे  करीब 60,000 से 125,000 हजार साल पहिले अफ्रीका से आ के रहे शुरू कइलस।




#Article 224: यूरोप के भूगोल (179 words)


यूरोप के परंपरागत रूप से सात गो महादीपन में से एगो मानल जाला। ई यूरेशिया भूखण्ड क पच्छिमी हिस्सा हवे जवन कई गो प्रायद्वीप से मिल के बनल बा आ एही से एके प्रायदीपन क प्रायदीप कहल जाला। ई बिस्व क सभसे छोट महादीप हवे। यूरोप के अफिरका महादीप से भूमध्य सागर अलगा करे ला, एकरी पच्छिम ओर अटलांटिक महासागर बाटे आ उत्तर ओर आर्कटिक सागर।

यूरोप क पूरबी सीमा आमतौर पर यूराल परबत के मानल जाला आ दक्खिनी पूरबी इलाका में यूराल नदी के, हालाँकि रूस देस क बिस्तार यूरोप आ एशिया दुनूं महादीपन में बाटे।

यूरोप की भूगोल मुख्य महत्व एकरी खुद कि इतिहास आ पूरा दुनिया की इतिहास आ भूगोल पर परभाव की कारण बाटे। ई दुनिया क दूसरा सभसे छोट महाद्वीप हवे बाकी इहाँ क लोग ओउर दुनियां में जा के आपन उपनिवेश बना के शासन कइलें। आज पाश्चात्य संस्कृति जेवन यूरोप क पैदावार हवे पूरा दुनिया में अस्थापित हो गइल बा या फिर बाकी संस्कृतिन की तत्वन के परभावित करत बाटे।

इहाँ यूरोप की सभसे लमहर नदी कुल का एगो लिस्ट दिहल जात बा:




#Article 225: अफिरका (186 words)


अफ़्रीका (अंग्रेजी:Africa) एशिया कि बाद विश्व क सबसे बड़ महाद्वीप हवे। यह 37014' उत्तरी अक्षांश से 34050' दक्षिणी अक्षांश आ 17033' पश्चिमी देशान्तर से 51023' पूर्वी देशान्तर की बीच स्थित बाटे।  अफ्रीका की उत्तर में भूमध्यसागर आ यूरोप महाद्वीप, पश्चिम में अटलांटिक महासागर, दक्षिण में दक्षिण अटलांटिक महासागर आ प्रुब ओर अरब सागर आ हिन्द महासागर बातें। पूर्व में स्वेज थल डमरू एके एशिया से जोड़ले बा आ स्वेज नहर एके एशिया से अलगा करे ले। जिब्राल्टर जलडमरू एके उत्तर में यूरोप महाद्वीप से अलगा करेला।

ए महाद्वीप में बिसाल रेगिस्तान, बहुत घन जंगल, घास क मैदान, बड़ी-बड़ी नद्दी आ झील अउरी विचित्र-विचित्र जंगली जानवर पावल जाला। मुख्य मध्याह्न रेखा (00)अफ्रीका महाद्वीप की घाना देश की राजधानी अक्रा शहर से हो के गुजरे ले।

कुछ इतिहासकार लोगन क मत ई बाटे कि मनुष्य क उत्पत्ति एही महाद्वीप पर भइल आ एही जा से बाकी महादीपन पर आदमी गइल। एही महादीप में विश्व की दूगो  प्राचीन सभ्यता क (मिस्र एवं कार्थेज) क भी विकास भइल। अफ्रीका क बहुत देश द्वितीय विश्व युद्ध की बाद स्वतंत्र भइल हवें आ ई कुल देस अपनी आर्थिक बिकास में लागल बाड़े।




#Article 226: अफ़्रीका क भूगोल (149 words)


अफ़्रीका क भूगोल अफ़्रीका महाद्वीप की भूगोलीय तत्वन आ उन्हन की एक जगह से दुसरा जगह कि बीच विस्तार क वर्णन हवे।

अफ़्रीका, अफरीका, या अफिरका (भोजपुरी उच्चारण) एगो महादीप हवे जेवना में 62 गो राजनीतिक खंड (देस) बाने कुल। एकर बिस्तार भूमध्य रेखा की उत्तर आ दक्खिन दुनों और बा आ ई एशिया की बाद दूसरा सभ्से बड़हन महादीप हवे। अफ़्रीका क क्षेत्रफल 30368609 वर्ग किलोमीटर बाटे।

यूरोप से अफ़्रीका के भूमध्य सागर अलगा करे ला आ एशिया से ई लाल सागर की द्वारा अलग होला। एशिया से ई महादीप स्वेज थलडमरू से जुड़ल बा जेवना के खनि के स्वेज नहर बनावल गइल बा, हालांकि कबो-कबो स्वेज की पुरुब ओर क सिनाई प्रायदीप भी अफिरके क हिस्सा मान लिहल जाला।

अफिरका क सबसे ऊँच पहाड़ किलिमंजारो परबत हवे, सबसे लमहर नद्दी नील नदी ह आ सबसे बड़हन झील विक्टोरिया झील हउवे।

अफ्रीका के पठारन क महादीप कहल जाला।




#Article 227: पर्यावरण भूगोल (305 words)


पर्यावरण भूगोल (अंगरेजी: Environmental geography) पर्यावरण की दशा कुल, पर्यावरण क कार्यशीलता आ तकनीकी ज्ञान वाला आर्थिक मनुष्य अउरी पर्यावरण की बिचा में जारी संबंधन क अध्ययन जगह आ समय (spatio-temporal) की संदर्भ में करे वाला विज्ञान हवे।

ई भूगोल क एगो शाखा हवे जेवन एक तरह का संश्लेषणात्मक विज्ञान हवे आ एके इंटीग्रेटेड भूगोल (समन्वयात्मक भूगोल) की रूप में भी जानल जाला।

भूगोल क ई शाखा एक तरह से भौतिक भूगोल आ मानव भूगोल की अध्ययन क्षेत्र में दूरी कम कइला क काम करे ला| भूगोल हमेशा से मानव आ ओकरी पर्यावरण की अध्ययन के अस्थान आ समय की संदर्भ में करत रहल बाटे बाकी 1950-1970 की दौर में भौतिक भूगोल आ मानव भूगोल कि बिचा में दूरो बढ़ल आ एही से भूगोल क पर्यावरण की पढ़ाई से कुछ दूरी बन गइल जेवना कारन ए दौर में पर्यावरण क झण्डाबरदार जीव विज्ञानी लोग रहि गइल रहे। बाद में तंत्र विश्लेषण आ इकोलोजिकल  उपागम की महत्व के भूगोल में तेजी से बहुत तेजी से मान बढ़ल आ पर्यावरण भूगोल, भौतिक अउरी मानव भूगोल की बिचा में एगो बहुआयामी संश्लेषण की रूप में आगे आइल।

पर्यावरण भूगोल की पढ़ाई क छेत्र -  (1) पर्यावरण क एगो इकोसिस्टम की रूप में गढ़न आ काम कइला क अद्ययन, (2) मनुष्य आ इकोसिस्टम की आपसी  संबंध के विश्लेषण आ पर्यावरण का नुकसान, (3)पर्यावरणीय दशा आ मानव-पर्यावरण संबंध क स्थानिक संदर्भ में अध्ययन, (4) पर्यावरण संरक्षण अउरी प्रबंधन से जुड़ल स्थानिक पहलू, अउरी (5) भूगोलीय सूचना प्रणाली (जी॰ आइ॰ एस॰) आ सुदूर संवेदन तकनीक क पर्यावरणीय अध्ययन में प्रयोग की दिशा के बतावल बाटे।

एही से प्राकृतिक या भौतिक भूगोल आ मानव भूगोल की बिचा में समन्वय स्थापित करे आ इनहन में एगो बहु आयामी संश्लेषण करे वाला बिज्ञान होखला की कारण पर्यावरण भूगोल के भोगोल क एगो तीसरकी नई शाखा की रूप में भी कुछ विद्वानों लोग मानत बाटे।




#Article 228: निकोबारी जंगली मुर्ग (120 words)


निकोबार मॅगापोड या निकोबारी जंगली मुर्ग ( या ) (Megapodius nicobariensis) भारत की अंडमान निकोबार द्वीप समूह की निकोबार की दीपन मे पावल जाला। एकर 2 गो उपजाति निकोबार की 14 गो दीपन में पावल जालीं जेवन एह प्रकार से बाटे-

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह दक्षिण पूर्वी एशिया की ढेर नजदीक होखले की कारण पहिले ई म्यांमार की कुछ तटवर्ती इलाकन में भी पावल जात रहे, बाकी अब उहाँ से विलुप्त हो गइल बाटे।

दिसम्बर 2004 की सुनामी की बाद इन्हन कई संख्या में भारी गिरावट देखल गइल रहे लेकिन बाद की सालन में इन्हन कई संख्या में सुधार भइल बाटे, हालांकि अब्बो मनुष्य द्वारा इन्हन की इलाका क अतिक्रमण कइले की वजह से इन्हन के भारी ख़तरा बाटे।




#Article 229: सुनामी (320 words)


सुनामी (, बंदरगाही लहर;,
, अंगरेजी उच्चारण: ) आमतौर पर समुंद्र भा बड़हन झील या फिर कौनो भी बड़हन जलभंडार में पानी के बिसाल मात्रा के अपना जगह से अचानक घसक जाए के कारन उठे वाली बिसाल लहर सभ हईं। भूडोल, ज्वालामुखी बिस्फोट, भा अन्य कवनो तरीका के बिस्फोट (जेह में पानी के नीचे परमाणु परीक्षण भी शामिल बा), भूस्खलन, ग्लेशियर टूटे, या उल्का गिरे के कारण जब पानी के बहुत बड़हन मात्रा अचानक अपना जगह से घसके भा हिलेडुले ले, सुनामी लहरन के उत्पत्ती के कारन बन सके ला। पानी के बिसाल भंडार सभ में सामान्य रूप से उठे वाली लहर हवा के कारण होलीं या फिर ज्वार-भाटा के कारण जबकि सुनामी लहर सभ पानी के अचानक हिलडुल के कारण उठे लीं।

सुनामी लहर सभ आम समुंदरी धारा भा लहर नियन ना होलीं। इनहन के वेवलेंथ बहुत ढेर होला। एही कारण टूटत लहर के रूप में देखाई पड़े के बजाय सुनामी के लहर तेजी से बढ़त ज्वार नियर भी मालुम पड़ सके ले जबकि इनहन के ज्वार-भाटा से कवनो जुड़ाव ना होला। सुनामी कवनो एक ठो लहर भी ना होला बलुक एह में एक के बाद एक कई लहर आवे लीं आ इनहन के किनारा से टकरा के जमीनी हिस्सा ले चढ़े के कार्यक्रम कुछ मिनट से ले के कुछ घंटा तक ले भी चल सके ला। अगर सुनामी के मूल कारण वाली घटना बड़हन होखे तब 10 मीटर से ढेर ऊँच लहरन के लड़ी पैदा हो सके ला। जद्यपि कि सुनामी के घटना के परभाव आमतौर पर समुंद्र भा झील के किनारा के इलाका के ऊपर पड़े ला, इनहन के बिनासकारी रूप बहुत बिसाल आ भयंकर भी हो सके ला पूरा समुंद्री बेसिन इनहन से परभावित हो सके ला। साल 2004 में हिंद महासागर में आइल सुनामी मानव इतिहास के सभसे बड़ आफत-बिपत में से एक रहल जेह के कारन हिंद महासागर के किनारे मौजूद 14 गो देसन के कम से कम 2,30,000 लोग मुअल भा निपाता भइल।




#Article 230: अन्हबकुला (175 words)


अन्हबकुला चाहे अन्हरा बकुला (हिंदी में अन्ध बक), (अंग्रेजी: or paddybird) (Ardeola grayii) चिरइन की हेरन (heron) परिवार क सदस्य हवे। ई अक्सर धान की खेत में या गाँव-नगर की नागीचे पानी की स्रोत की आस पास लउकेला।

मटमइला रंग क होखला की वजह से बहुत नागीचे गइले पर आदमी एके देख पावेला काहें से कि ई वातावरण में छुपल रह जाला। प्राकृतिक विकास की क्रम में एही से ई बहुत नजदीक गाइला पर भी उड़े ला ना काहें कि एके अपनी छुपल रहला क भरोसा होला। शायद एही वजह से एके अन्हरा बकुला, अन्ध बक, अन्ह बकुला नियर नाँव लोग ए गलतफहमी में दिहल कि एके लउकेला कम।

बिना हिलले खड़ा रहे वाला आ काहिरी समय में उड़ के भाड़े वाला ई चिरई के लोग ग़लतफ़हमी में आन्हर बुझे आ एही से एकर नाँव अइसन धारा गइल श्री लंका में भी ए के काना कोका कहल जाला।

बकुला की ध्यान लगा के बइठला से बगुला भगत कहावत चल पड़ल, जेवना का मतलब होला दुष्ट आदमी जेवन देखावटी रूप से संत नियर व्यवहार करत होखे। 




#Article 231: खैरा बकुला (379 words)


खैरा अंजन भा खैरा बकुला भा खाली खैरा() (Ardea cinerea) चिरइन के बकुला परिवार के सदस्य हवे। हिंदी में एकरा के नारी आ सैन भी कहल जाला। आम बोलचाल के भासा में बकुला कहि के भी काम चल जाला हालाँकि, बकुला कई ठे प्रजाति के चिरई सभ के कहल जाला आ ई असल में कौनों प्रजाति के नाँव ना हवे बलुक चिरइन के परिवार हवे जवना में कुल साठ गो से ढेर प्रजाति बाड़ी।

खैरा एगो लमहर टाँग वाली आ लमछर आकार वाली पनिहा शिकारी चिरई हवे। ई बकुला परिवार, आर्डेडाई, के सदस्य चिरई के प्रजाति लगभग पूरा शीतोष्ण कटिबंधी यूरोप आ एशिया में आ अफिरका के कुछ हिस्सा में पावल जाले। आमतौर पर ई चिरई अपने पूरा इलाका में साल भर निवास करे वाली हवे बाकी ढेर उत्तर के ओर वाला इलाका में से ई जाड़ा के दिन में दक्खिन ओर प्रवास करे चलि आवेलीं। नमभूमि के निवासी ई चिरई अक्सर झील, ताल, तालाब, पोखरा गड़ही आ नद्दी-नाला आ दलदली भूमि के आसपास देखाई पड़े ले। एकर भोजन मुख्य रूप से पनिहा जीव जंतु होलें जिनके शिकार ई पानी में एक जगह स्थिर खड़ा हो के लगे अइला पर चोंच मार के भी करे ले आ किनारे पर खड़ा होके लगे के छिछला पानी में लपक के भी पकड़े ले।

खड़ा होखला पर लगभग एक मीटर के ऊँचाई वाली ई चिरई सभ के सयान सदस्य के वजन लगभग  होला। इनहन के मूँड़ी आ गर्दन सफेद रंग के होला आ गर्दन पर एगो करिया पट्टी नियर आँख के ऊपर से मूँड़ के पाछे से गर्दन की ओर होला। गर्दन के निचला हिस्सा में एगो पातर पट्टी होले। शरीर आ पाँख के रंग मटियाहूँ (gray) रंग के होला आ शरीर के निचला, पेट के ओर के हिस्सा हल्का मटियाहूँ लिहले उज्जर रंग के होला। पाँख के ऊपर करिया पट्टी भी होला। तेज नोक वाली चोंच गुलाबी आभा लिहले पियर रंग के होला।

ई चिरई अपना कॉलोनी बना के एक साथे बच्चा देली कुल। बच्चा पैदा करे के समय बसन्त के होला जब ई ऊँच फेड़ सभ पर बकुलाहट में घोंसला बना के अंडा देवे लीं। एक बेर में तीन से पांच गो अंडा देलिन। अंडा के नर आ मादा दुनो मिल के करीब 25 दिन ले सेवे लीं, बच्चा निकलला पर चारा चुगावे के काम भी दुनो परानी करे लीं।




#Article 232: लम्पुरा बकुला (381 words)


लम्पुरा बकुला (अंगरेजी:) (Ardeola bacchus) चिरइन की हेरन (heron) परिवार क सदस्य हवे। एकरी रंग में जाड़ा आ प्रजनन काल कि विचा में बहुत अंतर आ जाला।

ई ऊ छह गो प्रजातिन में से एगो हवे जिनहन के अंगरेजी में पौण्ड हेरन (pond herons - genus ) कहल जाला। ई भारतीय पौण्ड हेरन या अन्हबकुला (A. grayii) आ पूरुब ओर जावा के पौण्ड हेरन ( A. speciosa) के लगभग () प्रजाति हवे आ ई सगरी एक संघे मिल के एगो सुपरप्रजाति  () बनावेलें। एगो ग्रुप की रूप में ई ( A. ralloides) या मालागासी पौण्ड हेरन ( (A. idae) के साथ जुड़ल बाटें। साल 2011 ले अभी ए अन्हबकुला सभ के आपसी संबंध खातिर मॉलिक्यूलर एनालिसिस नइखे प्रकाशित भइल। आ ऑस्टियोलॉजिकल () आँकड़ा के भी सगरी प्रजातिन खातिर ( खातिर) नीक से अध्ययन नइखे भइल।

अंगरेजी में एकरा के  कहल जाला आ चूँकि ई भारत की हिंदी या भोजपुरी बेल्ट में ला मिलेला, साइत एही से  हिंदी या भोजपुरी में कौनों नाँव भी नइखे। भारत में ई पूर्वोत्तर की राज्यन में पावल जाला आ एकर नाँव मणिपुर में लम्पुरा हवे।

भारत में ई पूर्वोत्तर भारत की हिस्सा में पावल जाला।

The Chinese pond heron is typically  long with white wings, a yellow bill with a black tip, yellow eyes and legs. Its overall colour is red, blue and white during breeding season, and greyish-brown and flecked with white at other times.

It is found in shallow fresh and salt water wetlands and ponds in China and adjacent temperate and subtropical East Asia. Essentially a lowland bird, its range is delimited by the subarctic regions in the north, and by the mountain ranges in the west and south.

The species is prone to some vagrancy. One individual in breeding plumage was seen by the river at Bonzon near Gangaw – just inside the Chin State of Burma – west of the species' usual range, on अप्रैल 8, 1995. A stray bird stopping over on Saint Paul Island, Alaska on August 4–9, 1997 was the first recorded occurrence of this species in the United States.

Its food consists of insects, fish, and crustaceans. The Chinese pond heron often nests in mixed-species heronries. It lays a clutch of 3–6 blue-green eggs.

It is fairly common and not considered a threatened species by the IUCN.




#Article 233: चकोर (110 words)


चकोर (अंग्रेजी:Chukar partridge; बैज्ञा.:Alectoris chukar) चिरइन की तीतर-बटेर परिवार क सदस्य पक्षी हवे।
एकर शिकार कइल जाला आ ई पाकिस्तान क राष्ट्रीय पक्षी हवे।

एकर नाँव संस्कृत मूल से निकलल हवे आ मानल जाला कि एकर उल्लेख ऋग्वेद की समय से संस्कृत में मिलेला।

चकोर पाकिस्तान क राष्ट्रीय पक्षी हवे। साहित्य में एकर उल्लेख ऋग्वेद की समय (1700 ईपू) से होत आइल बाटे  
भारतीय क्षेत्रन में आ साहित्य में एके बहुत प्रेमी पक्षी मानल जाला आ ई मान्यता प्रचलित बाटे कि ई रात भर चंद्रमा के निहारत रहेला। 
प्रजनन की समय बहुत उग्र सुभाव क होखला की वजह से एके लड़ाकू चिरई की रूप में लडावे खातिर भी पोसल जाला।




#Article 234: चिरई (131 words)


चिरई (अंगरेजी:Bird, हिंदी: चिड़िया) दू गो टांग आ पाँख वाली, आ अंडा देवे वाली जंतु हवे जेकरे कुछ प्रजाति के छोड़ के बाकी सभ आसमान में उड़ सके लीं। ई रीढ़ वाली आ गरम खून वाली जंतु हईं स जिनहन के शरीर के तापमान पाँख से तोपाइल रहे के कारन बाहर के वातावरण से बहुत परभावित ना होला।

पुरा दुनिया में चिरइन के लगभग 10,000 प्रजाति पावल जालीं। भारत में इनहन के लगभग 1,314 गो प्रजाति रिकार्ड कइल गइल बाटे। इन्हन में से 42 गो देसी, 1 गो बाहर से आदमिन द्वारा ले आइल, आ करीब 25 गो यदा-कदा आ बहुत कम पावाल जाये वाली बाडीं। दू गो प्रजाति अबले भारत से बिलुप्त हो चुकल बाड़ीं आ 82 गो प्रजाति अइसन बाड़ीं जिनहन पर पुरा बिस्व भर में खतरा मँडरात बाटे। 




#Article 235: टुइयाँ सुग्गा (109 words)


टुइयाँ सुग्गा या टुंइया सुग्गा (अंग्रेज़ी:) एगो सुग्गा की प्रजाति क चिरई हउवे। ई लगभग एगो मैना की आकार क आ लमहर नोकदार पोंछ वाली चिरई हवे। बाकी सुग्गन से सबसे बड़ अंतर एकरी मूंडी क रंग होल। एकर मूंडी क पूरा उपरका हिस्सा नीलापन लिहले लाल रंग क होला।

एकर नांव टुंइया एकरी बोली की आधार पर पड़ल हवे। एकर बोली चटक आवाज में टुंई नियर होले।

हिमालय की पहाड़ी हिस्सा में 2000 मीटर की ऊंचाई ले आ बाकि पूरा भारत में पावल जाला। ई देसी सुग्गा नियर ना हवे जेवन खुलता जंगली हिस्सा में भी रहे बलुक ई हमेशा घन जंगली इलाका में रहल पसंद करे ला।




#Article 236: पहाड़ी टुइयाँ (101 words)


पहाड़ी टुइयाँ या पहाड़ी टुंइया (अंग्रेज़ी:) एगो सुग्गा की परिवार क चिरई हउवे। ई एगो घानी रंग क चिरई हवे जेवना क आकर मैना से थोड़ी सा बड़ होला आ एकर मूंडी क ऊपरी हिस्सा नीलापन लिहले स्लेटी (माटियाहूँ) रंग क होले।

ई हिमालय की तराई वाला इलाका में 600 से 2500 मीटर की ऊँचाई वाला हिस्सा में पाकिस्तान से ले के अरुणाचल प्रदेश ले पावल जाला।

नर की गर्दन प्4 एगो हरियर रंग क कालर आ पँखुरा पर लाल रंग क चकत्ता होला।

ई ए पहाड़ी इलाकन में फल की बगइचन में फल की पैदावार के बहुत नोकसान पहुँचावे ला।




#Article 237: नीलपंखी सुग्गा (109 words)


नीलपंखी सुग्गा या हिंदी में मदनगोर तोता (अंग्रेज़ी:) एगो सुग्गा परिवार क चिरई हवे।

शरीर क आकार लगभग मैना की बराबर होल या कुछ बड़हन होला आ नोकदार पोंछ होले। एकर शरीर क रंग बाकी सुग्गन नियर धानी या पियराहूँ हरियर न होके मतियाहूँ या स्लेटी हरियर होला। एकर पाँख आ डैना नीला रंग क होला, जेवन एकरी नांव का कारन हवे।

ई दक्खिनी भारत में 500 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर मिले वाला जंगल कुल में रहे वाला सुग्गा हवे। भारत की अलावा ई श्री लंका में भी पावल जाला।

एकर मुख्य भोजन पीपर की गोदा आ अइसने दूसर गोदा वाला फल आ अनाज क दाना हवे।




#Article 238: मैना (202 words)


मैना कई प्रजाति के चिरइन के कहल जाला। ई सगरी चिरई सभ जे मैना कहि के बोलावल जालीं, दक्खिन एशिया आ मुख्य रूप से भारत के मूल निवासी हई स आ इहाँ से बाकी देसन में इनहन के फइलाव भइल हवे। कुछ जगह त इनहन के आक्रमणकारी प्रजाति के रूप में भी चिन्हित कइल गइल बा।

जीव बिज्ञान भा चिरई बिज्ञान के अनुसार, मैना अपने आप में कवनो जाति या प्रजाति ना हवे। इ तऽ एगो आम चलनसार नाँव हवे। आम आदमी कई प्रजाति के चिरइन सभ के सड़मेड़े मैना कहि के बोलावे ला। बैज्ञानिक बर्गीकरण के हिसाब से एह में कई प्रजाति के चिरई सामिल बाड़ी सऽ। मुख्य रूप से स्टर्लिंग परिवार की चिरइन के मैना नाँव से बोलावल जाला।

भोजपुरी के मैना शब्द संस्कृत भाषा से आइल मानल जाला। एकर उत्पत्ति संस्कृत की मदना से मानल जाला। मैना भारत आ एकरी आसपास की देसन में पावल जालीं आ इहाँ से दूसरी देसन में भी ले जाइल गइल बाड़ीं।

कुल:पासरीफारमेस परिवार: स्टर्निडाई

नीचे मैना सभ के प्रजातिन के नाँव दिहल जा रहल बा:

अंग्रेजी में इनहन के True मैना कहल जाला। इनहन के नाँव नीचे बा:

नीचे दिहल प्रजाति सभ के भी अक्सरहा Acridotheres mynas सभ में सामिल क लिहल जाला:




#Article 239: गौरइया (344 words)


गौरइया (अंगरेजी: House sparrow, बैज्ञानिक नाँव: Passer domesticus) चिरइन के पासरिडाइ के सभसे प्रमुख चिरई हवे आ दुनिया के ज्यादातर हिस्सा में पावल जाले। छोटी मुकी ई चिरई आमतौर पर  लमहर आ  वजन वाली होले। मादा गौरइया आ बच्चा सभ के रंग पियाराहूँ भूअर आ सलेटी रंग के होला, जबकि नर गौरइया के देह पर ढेर चटकार करिया, सफेद आ भूअर चीन्हा होला आ कंठ में करिया चकत्ता होला। चिरई सभ के जाति पासर में कुल 25 प्रजाति आवे लीं जिनहन में से इहो हवे आ ई यूरोप के ज्यादातर हिस्सा, भूमध्यसागरीय इलाका आ एशिया के अधिकांश इलाका सभ के मूल निवासी हवे। जान के भा अनजाने में, ई कई अउरी इलाका सभ में चहुँपावल गइल बा जिनहन में ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सा, अफिरका आ दुनो अमेरिका सामिल बाने; एह तरीका से ई दुनिया में सभसे ढेर क्षेत्र-बिस्तार वाली चिरई हवे।

मनुष्य के निवास स्थान से गौरइया के गहिरा जुड़ाव बा आ शहरी आ देहाती दुनो इलाका में ई पावल जाले। भले ई बहुत बिबिधता वाला अलग-अलग क्षेत्र सभ में पावल जात होखे, आमतौर पर अइसन घन जंगल, घास के मैदान आ रेगिस्तान सभ से दूरे रहे ले जहाँ कि मानव बस्ती न होखे। एकर मुख्य भोजन अनाज आ खर-कतवार सभ के बीया हवे हालाँकि, मोका मिले पर ई छोट किरौना आ अउरी कई तरह के चीज भी खा लेले। एकर शिकार करे वाला जीव सभ में बिलारि, बाज (हॉक), उरुआ आन कुछ मैमल सभ बाने।

गौरइया ढेर संख्या, हर जगह मिले के कारण आ मनुष्य के आबादी के साथे जुड़ाव के कारण एह चिरई के सांस्कृतिक महत्व बाटे। कहीं ई खेत खाए वाली चिरई के रूप में देखल जाले, कहीं पालतू के रूप में भी रखल जाले; कहीं एकरा के मार के खाइल जाला आ सेक्सुअल पावर आ कामुकता के साथे एकर संबंध बतावल जाला; कहीं ई बहुत आम चीज के चीन्हा मानल जाले आ कहीं अश्लील चीज (वलगर) के रूप में देखल जाले। भले ई बहुतायत में पावल जाले, कुछ इलाका सभ में एकर संख्या घटल बा। आइयूसीएन के लाल सूची में एकरा के एकदम कम चिंताजनक श्रेणी में रखल गइल बा।




#Article 240: भौतिक भूगोल (174 words)


भौतिक भूगोल (अंगरेजी: Physical geography) भूगोल के दू गो प्रमुख शाखा सभ में से एक हवे आ एह शाखा में धरती पर मौजूद प्राकृतिक चीज सभ के भूगोलीय अध्ययन कइल जाला। भौतिक भूगोल में, पृथ्वी के ठोस चट्टानी हिस्सा थलमंडल, चारों ओर मौजूद हवा से बनल वायुमंडल, समुंद्र आ सागर के रूप में मौजूद जलमंडल, आ बिबिध जिया-जंतु आ बनस्पति से बनल जीवमंडल के अध्ययन होला। एकरे बिपरीत, भूगोल के दुसरकी शाखा मानव भूगोल हवे जेह में मनुष्य के काम से प्रभावित भा मनुष्य के बनावल पर्यावरण से संबंधित चीजन के पढ़ाई होला।

भूगोल के शाखा होखे के नाते, एह बिसय में ऊपर बतावल चीज सभ के अध्ययन जगह आ क्षेत्र के संदर्भ में कइल जाला आ स्पेशियल पैटर्न के खोज आ ब्याख्या कइल जाला। एकरे अलावा मनुष्य आ पर्यावरण के आपसी संबंध आ मनुष्य के पर्यावरण पर परभाव के अध्ययन भी अलग-अलग जगह आ क्षेत्र के संदर्भ में कइल जाले।

एह चार गो के अलावा भौतिक भूगोल के उपशाखा सभ में समुंद्रतटीय भूगोल, माटी बिज्ञान, क्वार्टरनरी बिज्ञान, जलबिज्ञान आ पर्यावरण भूगोल शामिल बाने।




#Article 241: सामाजिक भूगोल (172 words)


सामाजिक भूगोल (अंगरेजी: Social geography) मानव भूगोल के एगो शाखा हउवे। ई शाखा सामाजिक सिद्धांत आ समाजशास्त्रीय संकल्पना (कांसेप्ट) सभ से संबंधित बा आ समाज के बिबिध तत्व आ प्रक्रिया सभ के स्थानिक (स्पेशियल) अध्ययन करे ला। हालाँकि, भूगोल में समाज के अध्ययन काफी सुरुआते से भ रहल बा, सामाजिक भूगोल के अध्ययन अलगा से एगो शाखा के रूप में भी ढेर दिना से हो रहल बा, एकरे बिसयबस्तु मने कि स्कोप के बारे में बिद्वान लोग अभिन ले एकमत नइखे। बिसयबस्तु के मामिला में सामाजिक भूगोल आ भूगोल के अउरी कई गो शाखा में आपस में ओभरलैप देखे के मिले ला आ साथे-साथ सामाजिक भूगोल आ समाजशास्त्र आ समाज कार्य (सोशल वर्क) नियर बिसय सभ से भी ओभरलैप देखे में आवे ला।

ब्रिटैनिका एन्साइक्लोपीडिया के अनुसार, सामाजिक भूगोल आपन धियान समाज में मौजूद बिभाजन सभ, सुरुआती तौर प बर्ग-बिभाजन, नृजातीयता (एथनिसिटी) आ कुछ हद तक धर्म (आधारित बिभाजन) पर केंद्रित करे ला; हालाँकि, हाल में एह में अउरी कई चीज जुड़ल बा, जइसे कि लिंग (जेंडर) आ कामुक झुकाव, उमिर इत्यादि।




#Article 242: प्रादेशिक भूगोल (102 words)


प्रादेशिक भूगोल (अंग्रेज़ी:) भूगोल के एगो  शाखा हउवे। प्रादेशिक भूगोल में प्रिथ्वी के कौनों हिस्सा (प्रदेश) के चुन के उहाँ पावल जाए वाले हर भूगोलीय तत्व के अध्ययन होला।

प्रादेशिक भूगोल के बिपरीत सिस्टमेटिक या क्रमबद्ध एप्रोच भूगोल के अध्ययन के अइसन तरीका बाटे जवना में कौनों भूगोलीय तत्व के पुरा दुनिया में वितरण आ वितरण के पैटर्न के अध्ययन होला। उदाहरण खातिर कृषि के एगो भूगोलीय तत्व के रूप में ले के पुरा दुनिया में कृषि के भूगोलीय अध्ययन।

भूगोल के क्लासिकल पीरियड में अलेक्जेंडर फॉन हम्बोल्ट सिस्टमेटिक भूगोल के अस्थापना कइलें आ कार्ल रिटर प्रादेशिक भूगोल के ढेर महत्व दिहलें।




#Article 243: कृषि भूगोल (204 words)


खेती के भूगोल भा कृषि भूगोल (अंगरेजी: Agricultural geography, एग्रिकल्चरल ज्याॅग्रफी) मानव भूगोल के अंतर्गत आवे वाली शाखा आर्थिक भूगोल के एगो उपशाखा हउवे। खेती के बैस्विक आ क्षेत्रीय पैटर्न के अध्ययन एकर मुख्य बिसय हवे - बिस्व के बिबिध कृषि प्रकार, कृषि अवस्थिति (लोकेशन), आ कृषि प्रदेश नियर चीज एह शाखा के अंतर्गत पढ़ल जालें। हालाँकि, खेती से जुड़ल उत्पादन के अध्ययन परंपरागत रूप से प्रमुख बा जबकि उपभोग से जुड़ल चीज के अध्ययन पर जोर कम बा।

परंपरागत रूप से खेती के भूगोल मानव भूगोल के शाखा आर्थिक भूगोल के उपशाखा के रूप में देखल जाला। आर्थिक भूगोल में मनुष्य के बिबिध प्राथमिक, द्वीतीयक, तृतीयक इत्यादि आर्थिक क्रिया सभ के भूगोली पैटर्न के अध्ययन कइल जाला। खेती के, जे आजीविका (जीवन चलावे के आगम) आ खुद के उपभोग खाती कइल जाय, प्राथमिक क्रिया मानल जाला।

स्वतंत्र रूप से, भूगोल के शाखा के रूप में कृषि भूगोल के अध्ययन के प्रमुख बिसय नीचे दिहल बाड़ें:

कवना किसिम क खेती कहाँ, आ काहें हो रहल बा एकर बिस्लेषण खेती के लोकेशन संबंधी सिद्धांत द्वारा कइल जाला। वॉन थ्यूनेन मॉडल अइसने एगो सैद्धांतिक मॉडल हवे जे ई बतावे ला कि बाजार के सेंटर से दूरी बढ़े प खेती के पैटर्न में कइसे बदलाव होखे ला।




#Article 244: संसाधन भूगोल (379 words)


संसाधन भूगोल (अंगरेजी: Resource geography) आम ब्यापक बिभाजन अनुसार मानव भूगोल के, आ बिसेस रूप से सटीक आ सकेत बिभाजन अनुसार आर्थिक भूगोल के, एगो शाखा हउवे। भूगोल के ई शाखा मुख्य रूप से संसाधन सभ के पृथ्वी पर अलग-अलग जगह बितरण पर धियान केन्द्रित करे ला। संसाधन के कमी, संसाधन के पर्याप्तता (भरपूर मौजूदगी), गुणवत्ता (इस्तेमाल खाती आ उत्पादन में महत्व अनुसार) आ मनुष्य के सस्टेनेबल बिकास एकर मुख्य फोकस बाटे। एकरे अलावा ई, संसाधन सभ के उपलब्धता वाला इलाका आ डिमांड वाला इलाका के बीच बिसमता के भी अध्ययन करे ला।

संसाधन भूगोल के मुख्य सवाल ई बा की पृथ्वी पर सीमित मात्रा में पावल जाए वाला संसाधन सभ कइसे मनुष्य के असीमित मांग के पूरा क सके लें। एह शाखा के बिचारधारा में उपयोगिता वादी, प्राग्मैटिक आ प्रबंधनकारी, तीनों तरह के बिचार रहल बा।

भूगोल अपना सुरुआती काल से धरती प बिबिध चीज सभ के बितरण के अध्ययन करे वाला बिसय बा; साथे-साथे साथ ई मनुष्य के बिबिध क्रियाकलाप आ मनुष्य के पर्यावरण के बीचा में संबंध के भी स्थान (जगह) के बिसेस महत्व के धियान में रख के अध्ययन करे वाला बिसय हवे। मनुष्य के क्रियाकलाप सभ के स्थानिक (स्पेशियल) अध्ययन भूगोल के बिसाल शाखा मानव भूगोल के अंतर्गत कइल जाला। मानव भूगोल के उपशाखा बा आर्थिक भूगोल जे मनुष्य के बिबिध आर्थिक कामकाज सभ के भूगोलीय अध्ययन आ बिस्लेषण करे ला।

मूल रूप से प्राकृतिक संसाधन सभ के भूगोल के अध्ययन में - संसाधन सभ के धरातल प बितरन, इनहन के ख़ास तरीका से (असमान) बितरण के कारण आ पैटर्न के अध्ययन, बितरण में जगह अनुसार बिबिधता आ असमानता के कारण पड़े वाला आर्थिक परभाव इत्यादि के अध्ययन कइल जाला।

समय के साथ एह शाखा के फोकस भी बदलत रहल बा। एगो बिद्वान के कहनाम बा कि अगर बीसवीं सदी के शुरूआती दौर में ई प्राकृतिक संसाधन के अर्थशास्त्र के भूगोल के जिकिर भइल रहित तब एकर अरथ बूझल जाइत कि कौनों देस के खेती, जंगल, खनिज, जल आ अउरी प्राकृतिक संसाधन सभ के लोकेशन के मतलब, जनसंख्या के केंद्र आ आर्थिक कामकाज के केंद्र सभ संबंधित हालाँकि उनके अनुसार ई नया समय में बदल रहल बा आ अब बेहवारिक भूगोल आ बेहवारिक अर्थशास्त्र, जे दुनों एक दुसरे के करीब आ रहल बाड़ें, के बीच अंतर्संबंध सभ के रूप में बिकसित हो रहल बा।




#Article 245: रिमोट सेंसिंग (269 words)


रिमोट सेंसिंग (हिंदी:सुदूर संवेदन) एगो तकनीक आ प्रक्रिया हवे जेह में आकाश में उड़ रहल गुब्बारा, हवाई जहाज भा उपग्रह पर लागल कैमरा या सेंसर से धरती के कौनों हिस्सा क चित्र खींचल जाला आ चित्र से बिबिध किसिम के जानकारी इकठ्ठा कइल जाला। दुसरे शब्द में, रिमोट सेंसिंग, भूगोलीय आँकड़ा बटोरे के तरीका हवे जेह में कैमरा भा सेंसर धरती के सतह से ऊपर कौनों प्लेटफार्म (जहाज भा उपग्रह इत्यादि) पर मौजूद रहे ला।

रिमोट सेंसिंग के प्रक्रिया के, प्लेटफार्म के आधार पर बाँटल जा सके ला - हवाई जहाज पर मौजूद कैमरा से फोटो खींचे के काम हवाई फोटोग्राफी कहाला, जबकि उपग्रह पर लागल सेंसर से चित्र (इमेज) लिहल सैटेलाईट रिमोट सेंसिंग। एही तरह सेंसर के प्रकार के आधार पर भी एकर दू प्रकार में बाँटल जाला: एक्टिव रिमोट सेंसिंग आ पैसिव रिमोट सेंसिंग; जब सेंसर अइसन संकेत रिसीव करे जे ओही प्लेटफार्मे से भेजल गइल होखे आ जमीन से टकरा के वापस आइल होखे तब एकरा के एक्टिव रिमोट सेंसिंग कहल जाला, जइसे कि राडार द्वारा चित्र लिहल। एकरे बिपरीत सुरुज के प्रकाश के धरती से रिफ्लेक्ट हो के लवटे वाला हिस्सा के ग्रहण करे वाला सेंसर सभ द्वारा कइल रिमोट सेंसिंग पैसिव रिमोट सेंसिंग कहाला।

ज्ञान-बिज्ञान के शाखा के रूप में रिमोट सेंसिंग के मतलब ऊपर बतावल प्रक्रिया आ तकनीकी के अध्ययन करे वाला बिसय होला। एकरे साथे जुड़ल अन्य कई बिसय बाड़ें जे संबंधित चीज सभ के अध्ययन करे लें, जइसे कि डिजिटल इमेज प्रॉसेसिंग, फोटोग्रामेटरी, जीआइसाइंस इत्यादि। रिमोट सेंसिंग के उत्पाद के रूप में हवाई फोटो आ उपग्रह आँकड़ा (उपग्रह से लिहल इमेज) आजकाल जीवन के बिबिध क्षेत्र में इस्तमाल हो रहल बाटे। 




#Article 246: जीआइएस (272 words)


भूगोलीय सूचना सिस्टम (ज्याग्रफिकल इनफार्मेशन सिस्टम (Geographical Information System) भा संछेप में जीआइएस) कंप्यूटर आधारित सिस्टम हवे जेवना में भूगोलीय आँकड़ा सहेज के रक्खल जा सकेला, एह आँकड़ा सभ के मैनिपुलेशन, बर्गीकरण, एनालिसिस, क्वैरी आ प्रेजेंटेशन कइल जा सकेला। ई एगो खास तरह के इनफार्मेशन सिस्टम हवे जे भूगोलीय आँकड़ा खातिर डिजाइन कइल गइल हवे। इनफार्मेशन सिस्टम के मतलब होला, कंप्यूटर आधारित सिस्टम जेह में सूचना आ जानकारी के इनपुट के रूप में दिहल जाय, बिबिध तरीका से प्रासेस कइल जा सके आ सार्थक आउटपुट हासिल कइल जा सके।

कुछ लोग, जीआइएस के परिभाषा, कंप्यूटर आधारित औजार सभ के समूह के रूप में भी करे ला। मतलब की अइसन औजार आ उपकरण सभ के सेट जिनहन के इस्तेमाल भूगोलीय आँकड़ा के अध्ययन भा बिस्लेषण करे में मददगार होखे। अन्य लोग जीआइएस के आँकड़ा भंडार, यानी डेटाबेस के रूप में भी देखे ला; अइसन डेटाबेस जेह में भूगोलीय आँकड़ा रखल होखे, एह आँकड़ा के बिस्लेषण करे, एह में से क्वैरी करे आ एकर प्रेजेंटेशन करे के सुबिधा मौजूद होखे।

कौनों भी कंप्यूटर सिस्टम मतिन, जीआइएस के भी तीन गो कंपोनेंट होला — हार्डवेयर, साफ्टवेयर आ ह्यूमनवेयर। जीआइएस के कई गो साफ्टवेयर फ्री डोमेन में भी उपलब्ध बाने जबकि कई सारा साफ्टवेयर कामर्शियल इस्तेमाल वाला बाने। 
वेब जीआईएस आ वेब मैपिंग लगभग समान अरथ में इस्तेमाल होखे वाला टर्मावली हवे। वेब मैपिंग के मतलब बा जीआइएस के उत्पाद के वेब ब्राउजर के जरिये हासिल कइल। अइसन नक्सा बनावे के बिधा के वेब कार्टोग्राफी कहल जाला।

जीआईएस के अध्ययन करे वाला बिज्ञान के ज्याग्राफिक इनफार्मेशन साइंस (जीआइसाइंस) कहल जाला आ ई खुद ज्ञान के एक ठो एगो बड़हन शाखा भूसूचना बिज्ञान (जियोइन्फार्मेटिक्स) के अंदर आवे ला।




#Article 247: भारतीय गिद्ध (397 words)


भारतीय गिद्ध (Gyps indicus) पुरान दुनिया क गिद्ध बा । जवन आजू के नई दुनिया के गिद्धन से आपन सूंघले क शक्ति खातिर भिन्न बा। यह मध्य और पश्चिमी से लेकर दक्षिणी भारत तक पाया जाता है। प्रायः यह जाति खड़ी चट्टानों के श्रंग में अपना घोंसला बनाती है, परन्तु राजस्थान में यह अपना घोंसला पेड़ों पर बनाते हुये भी पाये गये हैं। अन्य गिद्धों की भांति यह भी अपमार्जक या मुर्दाख़ोर होता है, और यह ऊँची उड़ान भरकर इंसानी आबादी के नज़दीक या जंगलों में मुर्दा पशु को ढूंढ लेते हैं और उनका आहार करते हैं। इनके चक्षु बहुत तीक्ष्ण होते हैं और काफ़ी ऊँचाई से यह अपना आहार ढूंढ लेते हैं। यह प्रायः समूह में रहते हैं। 
भारतीय गिद्ध का सर गंजा होता है, उसके पंख बहुत चौड़े होते हैं तथा पूँछ के पर छोटे होते हैं। इसका वज़न 5.5 से 6.3 कि. होता है। इसकी लंबाई 80-103 से. मी. तथा पंख खोलने में 1.96 से 2.38 मी. की चौड़ाई होती है।

यह जाति आज से कुछ साल पहले अपने पूरे क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में पायी जाती थी। 1990 के दशक में इस जाति का 97% से 99% पतन हो गया है। इसका मूलतः कारण पशु दवाई डाइक्लोफिनॅक (diclofenac) है जो कि पशुओं के जोड़ों के दर्द को मिटाने में मदद करती है। जब यह दवाई खाया हुआ पशु मर जाता है, और उसको मरने से थोड़ा पहले यह दवाई दी गई होती है और उसको भारतीय गिद्ध खाता है तो उसके गुर्दे बंद हो जाते हैं और वह मर जाता है। अब नई दवाई मॅलॉक्सिकॅम  आ गई है और यह हमारे गिद्धों के लिये हानिकारक भी नहीं हैं। जब इस दवाई का उत्पादन बढ़ जायेगा तो सारे पशु-पालक इसका इस्तेमाल करेंगे और शायद हमारे गिद्ध बच जायें।

आज भारतीय गिद्धों का प्रजनन बंदी हालत में किया जा रहा है। इसका कारण यह है कि खुले में यह विलुप्ति की कग़ार में पहुँच गये हैं। शायद इनकी संख्या बढ़ जाये। गिद्ध दीर्घायु होते हैं लेकिन प्रजनन में बहुत समय लगाते हैं। गिद्ध प्रजनन में 5 वर्ष की अवस्था में आते हैं। एक बार में एक से दो अण्डे पैदा करते हैं लेकिन अगर समय ख़राब हो तो एक ही चूज़े को खिलाते हैं। यदि परभक्षी इनके अण्डे खा जाते हैं तो यह अगले साल तक प्रजनन नहीं करते हैं। यही कारण है कि भारतीय गिद्ध अभी भी अपनी आबादी बढ़ा नहीं पा रहा है।




#Article 248: प्राकृतिक पर्यावरण (431 words)


प्राकृतिक पर्यावरण (अंगरेजी:Natural environment) प्राकृतिक रूप से पावल जाए वाली सगरी जिंदा आ बेजान चीजन के एकट्ठा रूप हवे। मने कि अइसन प्राकृतिक दसा जेह में आदमी क हस्तक्षेप बहुत कम भइल होखे। पूरा ब्रह्मांड प्राकृतिक बा, बाकी ई शब्द अकसर पृथ्वी खातिर इस्तमाल कइल जाला, या पृथ्वी के कौनों खास इलाका खातिर। एह तरह के पर्यावरण में पृथ्वी पर पावल जाए वाली सगरी जीव सभ के प्रजाति, चट्टान, जलवायु, मौसम आ अन्य प्राकृतिक संसाधन सभ (आ इनहन के आपसी क्रिया-प्रतिक्रिया) के शामिल कइल जाला जेकरा से मनुष्य के जीवन संभव बा आ जवना पर मनुष्य के सगरी वर्तमान आर्थिक गतिबिधि सभ मूल रूप से निर्भर बा।

प्राकृतिक पर्यावरण के दू गो पहलू बा:

प्राकृतिक पर्यावरण के बिपरीत, मनुष्य के बनावल पर्यावरण बा। पृथ्वी के बहुत सारा इलाका में मनुष्य अपना गतिबिधि से मूल प्राकृतिक दसा सभ के एतना बदल दिहले बा, जइसे कि खेती खातिर या शहर बसावे खातिर, कि अब उहाँ के प्राकृतिक पर्यावरण बदल के मनुष्य-निर्मित पर्यावरण बन गइल बाटे। इहाँ तक कि बहुत मामूली बुझाए वाला बदलाव, जइसे कौनों रेगिस्तानी इलाका में माटी के देवाल आ छान छप्पर डाल के घर बना लिहल भी आसपास के पर्यावरण के आर्टिफिशियल पर्यावरण में बदल देला, ऊ प्राकृतिक ना रहि जाला। हालाँकि, बहुत सारा जियाजंतु आपन घर बनावे लें आ बहुत बड़ आकार के रचना भी क देलें, उनहन के कइल बदलाव प्राकृतिक पर्यावरण के हिस्सा मानल जाला।

वास्तव में पूर्ण रूप से प्राकृतिक पर्यावरण पृथ्वी पर साइदे कहीं मिले, आ कौनों भी जगह के प्राकृतिकता 100% प्राकृतिक से 0% प्राकृतिक के बीच कहीं होला। सटीक तरीका से कहल जाय तब प्राकृतिक पर्यावरण के चीजन के एह तरीका से देखल जा सके ला कि इनहन के प्राकृतिकता मनुष्य के कामकाज के परभाव से केतना सुरक्षित बा। एह तरीका से देखे पर कुछ लोग के कहनाम इहो बा कि जब मनुष्य के काम से पूरा पृथ्वी के जलवायु सिस्टम आ हवा के बनावट में बदलाव हो रहल बा, पृथ्वी के कौनों हिस्सा आज अइसन नइखे बचल जवना के सही अरथ में प्राकृतिक कहल जा सके।

एक ठो दूसर संर्दभ में, प्राकृतिक पर्यावरण शब्द के प्रयोग जीवजंतु के आवास (हैबिटाट) खातिर भी होला। उदाहरण खातिर, जब ई कहल जाय कि जिराफ सभ के प्राकृतिक पर्यावरण सवाना घास के मैदान हवे।

पृथ्वी बिज्ञान आ भौतिक भूगोल जइसन बिसय जे मुख्य रूप से एह तरह के पर्यावरण के अध्ययन करे लें, प्राकृतिक पर्यावरण (यानि पृथ्वी) के चार हिस्सा में बाँटे लें: थलमंडल, वायुमंडल, जलमंडल आ जीमंडल। कुछ बिद्वान लोग हिममंडल (क्रायोस्फीयर, बर्फ वाला हिस्सा) आ मृदामंडल (पेडोस्फीयर, माटी वाला हिस्सा) के अलग से गिने लें आ पृथ्वी के छह गो मंडल में बाँटे लें।




#Article 249: खनिज (136 words)


खनिज ऊ सारा पदार्थान के कहल जाला जिनहन के खान में से खनि के निकालल जाला। हालाँकि ई एगो बहुत साधारण परिभाषा हवे।

वैज्ञानिक रूप से खनिज कहाए खातिर नीचे लिखल गुण होखे के चाहीं:

खनिज आ चट्टान में अंतर होला, काहें से की एकही चट्टान कई गो खनिजन से मिल के बनल हो सकेले। अधिकतर खान से खनि के जवन पदार्थ निकालल जालें उन्हान में एकहि संगे कई गो खनिज मिलल रहे लें। बाद में इन्हन के अलगियवल जाला।

भूगोल आ भूगर्भशास्त्र में खनिजन क बहुत महत्त्व होल आ इन्हां की मात्रा की आधार पर चत्तानन के अलग-अलग प्रकार में बाँटल जाला।

खनिजन क कई गो रूप मिलेला। मुख्य बिभाजन धातुई खनिज आ बेधातुई खनिज में होला।

सेन्हा नून क ढोंका भी एक तरह क खनिज हवे जेवना क खोदाई क के निकालल जाला
।




#Article 250: ऊखि (238 words)


ऊखि, ऊख, चाहे गन्ना एगो साल भर में होखे वाली फसल हवे जेवना की रस से चीनी, गूर (गुड़) भेली, शीरा, राब इत्यादि बनावल जाला। ई मूल रूप से भारतीय क्षेत्र के पौधा हवे आ एही जा से बाकि दुनियाँ में ले जाइल गइल हवे, जबकि कुछ किसिम सभ दक्खिन पूर्ब एशिया, न्यू गिनी आ दक्खिन अमेरिका के मूल हईं।

बैज्ञानिक रूप से एह में कई प्रजाति सभ आवे लीं जे घास (Poaceae) हईं आ सैक्कारम (Saccharum) जीनस के एंड्रोपोगोनियाइ (Andropogoneae) ट्राइब के सदस्य हईं। एह पौधा (घास) के तना पोरदार होला जेह में चीनी वाला सुक्रोज पावल जाला। ई 2 से 6 मीटर (छह फीट से बीस फीट) लमहर हो सके ला। सगरी परजाति के ऊख आपस में क्रास कर सके लीं आ वर्तमान में ब्यापारिक उत्पादन में इस्तेमाल होखे वाली किसिम सभ एही बहुत जटिल क्रास से उपजल संकर प्रजाति हईं। ऊखि जवना घास परिवार पोआसिया (Poaceae) के सदस्य हवे एह में बहुत सारा आर्थिक महत्व के पौधा आवे लें जइसे कि मक्का, गोहूँ, धान इत्यादि।

गन्ना से निकले वाला सुक्रोज के इस्पेशल मिल आ फैक्टरी सभ में बिबिध इस्तेमाल खातिर निकालल आ ई चीनी के रूप में खाना में, खानपान के बिबिध उद्योग में कच्चा माल बिलियन टन गन्ना पैदा भइल, जेह में अकेले ब्राजील देस 41% के साथ पहिला नंबर पर रहल। 2012 में फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन के अनुमान रहल कि एकर खेती लगभग  रकबा पर कुल 90 से बेसी देसन में होखे।




#Article 251: पनामा नहर (1370 words)


पनामा नहर उत्तर आ दक्खिन अमेरिका के जोड़े वाला थलजोड़, पनामा, जे एही नाँव के देस पनामा में बाटे, एगो पानी की जहाज वाली नहर हवे आ ई प्रशांत महासागर आ अटलांटिक महासागर के जोड़ेले। एकर कुल लंबाई 77.1 किमी हवे आ एम्मे तीन गो थाला बनल बाड़ें जिनहन में पानी भर के जहाजन के ऊपर उठावल जाला तब जाके ऊ ए नहर के पार कइ पावेलन। ई नहर गाटुम झील से होके गुजरेले। अमेरिका की पूर्वी आ  पश्चिमी तट की बीच क दूरी ए  नहर की बन गइला से लगभग 8000 मील (12,875 कि॰मी॰) घट गइल नाहीं त एकरी ना रहला पर जहाजन के दक्षिण अमेरिका के हॉर्न अंतरीप से होकर चक्कर लगा के जाए के पड़त रहे।

एकर निर्माण क काम 14 अगस्त 1914 के पूरा भइल रहे आ 15 अगस्त 1914 के ई जहाज आवे-जाए खातिर खोलल गइल ए तरे ई 15 अगस्त, 2014 के आपन 100वाँ जन्मदिन मनवलस।

जब ई नहर बनल रहे तब एसे लगभग 1000 जहाज हर  बरिस गुजरें स बाकी अब सौ बरिस बाद इनहन क संख्या लगभग 42 जहाज रोज़ हो चुकल बाटे। ई नहर अपने आप में इंजीनियरी क एगो गजबे नमूना हवे। ई ताजा पानी की गाटुन झील से हो के गुजरे ले आ काहें से की ए झील क जलस्तर समुद्रतल से 26 मीटर ऊपर हवे, एम्में जहाजन के घुसे आ निकाले खातिर तीन गो थाला (लॉक्स) बनावल बा जिनहन में जहाज के घुसा के फिर पानी भरल जाला आ जहाज ऊपर उठी जाला। तब जा के ई जहाज गाटुन झील से हो के गुजार पावे लें।

एह थाला (लॉक्स) क वर्तमान चौड़ाई 35 मीटर बा जेवन आजकाल की बड़का जहाजन खातिर पर्याप्त नइखे। एही से एकरी विस्तार क प्रोजेक्ट चलत बाटे जेवना के 2015 ले पूरा होखले क उम्मीद बाटे।

पनामा नहर के अमेरिकन सोसायटी ऑफ सिविल इंजीनियर्स (American Society of Civil Engineers) क लोग पुरा दुनिया की आधुनिक इंजीनियरी की सात गो आश्चर्य में अस्थान दिहले बा लोग।

पनामा नहर बनावे क सबसे पहिली योजना स्पेन के राजा आ  पवित्र रोमन साम्राज्य के सम्राट चार्ल्स पंचम सन् 1534 में पास कइलें आ एकरी खातिर सर्वेक्षण करे क निर्देश दिहलन ताकि स्पेनी व्यापारिन आ सेना के पुर्तगालिन से बेहतर जलमार्ग मिल सके आ एअकर लाभ लिहल जा सके। 
रणनीतिक आ व्यापारिक महत्व आ दुनों नया खोजल गइल महाद्वीपन की बिच्चा में पनामा थलडमरू की कम चौड़ाई की बावजूद इहाँ व्यापारिक मार्ग बनावे क पहिला कोसिस 1658 में स्काटलैण्ड राज्य द्वारा कइल गइल जेवन एगो जमीनी रास्ता रहे बाकी खराब पर्यावरणीय दशा आ उच्चावच की विषमता के कारण एके 1700 में लगभग छोड़ दिहल गइल।

फ़्रांस द्वारा इहाँ नहर बनावे क काम 1 जनवरी 1881 के फर्डिनेंड डी लेसप (Ferdinand de Lesseps) की अगुआई में शुरू भइल जे स्वेज नहर का निर्माणकर्ता रहलें।

भूगर्भिक आ जलवैज्ञानिक अध्ययनों की बिना आरम्भ भइल एह काम में अउरी कई किसिम क बाधा आइल जेवना में इहाँ क असह जलवायवीय दशा आ मच्छरन क परकोप की कारण बीमारी आ अउरी दूसर दुर्घटना में तकरीबन 22,000 मजदूरा आ कर्मचारिन क जान गइल।

अंततः 1889 में ई निर्माता कंपनी दिवालिया हो गइल आ फर्डिनेंड डी लेसप क बेटा चार्ल्स डी लेसप के वित्तीय अनियमितता की आरोप में (जिसे पनामा स्कैंडल कहा गया) पाँच साल क सजाय हो गइल। कंपनी के निरस्त कर दिहल गइल आ काम रुक गइल। 1894 में एगो दूसरी कंपनी Compagnie Nouvelle du Canal de Panama क अस्थापना भइल बाकी इहो प्रयास सफल ना भइल।

बाद में अमेरिकी सरकार कोलंबिया सरकार की संघे संधि-समझौता कइलस आ एह क्षेत्र क अधिग्रहण (तब यह कोलंबिया देश के अंतर्गत रहे) कइलस 1904 में अमेरिकी इंजीनियरों काम शुरू कइलन आ ई नहर के तीन गो ताला बना के पूरा करे क योजना बनल आ शुरूआत भइल।

अमेरिकी लोग बहुत आध्ययन आ निवेश कईला की बाद 1914 में एके पूरा कइल लोग। एक तरह से देखल जाय त वास्को डी बिल्बोया (Vasco Núñez de Balboa) द्वारा पनामा डमरूमध्य के पार कइला की लगभग 400 बरिस की बाद जाके ए नहर क निर्माण हो पावल। ए प्रोजेक्ट में अमरीकी सरकार लगभग $375,000,000 (वर्तमान सम्तुल्य्क $8,600,000,000) खर्च कइलस 

तमाम परिवर्तन, विवाद आ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में एकर निष्पक्ष स्थिति बनवले रखे खातिर लगभग 80 किलोमीटर लमहर एह नहर क प्रशासन 31 दिसंबर, 1999 के पनामा के सौंप दिहल गइल।

संचालन की मामिला में भी यह नहर अजबे बाटे काहें कि ई दुनिया क अकेल अइसन जलमार्ग हवे जहां कौनों जहाज क कप्तान अपनी जहाज का कंट्रोल छोड़ के पूरा तरह ओके पनामा कि लोकल विशेषज्ञ कप्तान के सौंप देला। प्रशांत आ अटलांटिक महासागर की बीच बनल एह नहर से गुजरे खातिर हजारन टन भारी जहाज के लॉक में पानी भरके 85 फीट ऊपर उठावल जाला।

पूरे लॉक तन्त्र के पार करने खातिर पहिले जहाज के सबसे निचला लॉक में ले जाइल जाला, फिर लॉक बंद कइ के ओमें शक्तिशाली पम्प द्वारा पानी भरल जाला। ए तरे  पानी से जहाज ऊपर उठे लागे ला। तत्पश्चात भारी आ बहुत ताकतवर लोकोमोटिव इंजन जहाज के साइड से लड़ला से बचावत खींच के दूसरे लॉक में ले जाला। फिर दूसरे लॉक में इहे काम दोहरावल जाला, पानी भरल, जहाज के खींचल आ आगे बढ़ल। तीन लॉकों मे हो के ऊपर उठले की बाद जहाज ताजा पानी की कृत्रिम झील, गाटून झील,  में पहुँच जाला आ उहाँ बनावल रास्ता में से हो के गुजरेला। दुसरा ओर पहुँचले की बाद फिर से एही तरे तीन बेर में  85 फीट नीचे ले जाकर महासागर में उतार दिहल जाला।

वर्तमान समय में दुनिया भर में व्यापार खातिर चले वाला जहाजन क 5 प्रतिशत पानी के जहाज पनामा से होके गुजरेला।

फिलहाल पनामा नहर से ख़ाली उहे जहाज गुजर पावेलन जेवन 1050 फीट लंबाई, 110 फीट चौड़ाई आ 41.2 फीट गहराई के अन्दर बाडेन। हालाँकि आधुनिक जहाज आकार में काफी बड़ हो चुकल बाड़ें आ एही कारन अब इहाँ एगो नया लॉक बनावल जात बाटे। नहर में तैयार कइल जात नवका लॉक 12000 कंटेनरन वाला बड़का जहाजिन की साइज की अनुसार बनावल जात बाटे जेवना क चेम्बर 1400 फीट लंबा, 180 फीट चाकर आ 60 फीट गहिर बनावल जाई आ साथै-साथ ही ए नवका लॉक में जहाजिन के खींचे खातिर लोकोमोटिव की जगह टगबोट लगावल जाई।

पनामा नहर के चाकर करे की काम के तीसरे सेट क लॉक का प्रोजेक्ट भी कहल जात बाटे। एके 2015 तक पूरा हो गइले पर पनामा नहर से पहिले की मोकाबिला ज्यादा बड़ आकार क जहाज गुजर सकिहें आ जेवना से ए रास्ता क इस्तेमाल में बढ़ोत्तरी होई। नहर के चाकर करे आ बड़ जहाजिन खातिर नया लॉक बनावे क ई प्रोजेक्ट स्पेन आ इटली की कंपनिन की नियंत्रण वाली 'ग्रूपो यूनिडोस पोर एल कनाल कंसोर्टियम' (जीयूपीसी) की लगे बाटे। उम्मीद बा कि नए तीसरे सेट के लॉक तैयार हो गइले पर मार्ग क क्षमता दुगुन्ना हो जाई।

अभी हाले में पनामा नहर चलावे वाली कंपनी एसीपी आ नहर क विस्तार करत कंपनी जीयूपीसी में वित्तीय आवश्यकता के लेके विवाद हो गइल रहल हवे। 
जीयूपीसी क कहनाम रहल कि संचालक कंपनी क सर्वे गलत रहल हवे आ पास बजट में ई काम पूरा ना कइल जा सकत बाटे। 

स्पेनी कंपनी साकिर की प्रवक्ता की अनुसार जीयूपीसी औपचारिक रूप से एसीपी तक संदेश पहुंचा दिहलस कि अगर निर्धारित अवधि में मंजूरी ना मिली तब काम रोकि दिहल जाई। इसके लियेसकिर ने 1.2 अरब यूरो अतिरिक्त देने की माँग की और ऐसा न होने पर काम रोक देने कि धमकी दे डी थी। बाद में मध्यस्थता के सिलसिले में आना पास्टोर कंपनियों के प्रतिनिधियों के अलावा पनामा के राष्ट्रपति रिकार्डो मार्टिनेली को भी उतरना पड़ा था और तब जाकर यह विवाद शांत हुआ।

एही की साथे एगो अउरी समस्या ई बाटे की बेर-बेर पानी भरला आ छोड़ला की वजह से गाटुन झील क साफ़ पानी में समुद्री नमकीन पानी मिल जाला जेवना से एअकरी पर्यावरण आ एम्मे रहे वाला जिया-जंतु खातिर खतरा हो गइल बाटे। अइसना में बड़ थाला क बनावल ए समस्या के अउरी बढ़इबे करी

पनामा सरकार पर इहो आरोप भी लागेला की ए नहर से होखे वाली आय से इहँवा की लोकल लोगन के कौनो फ़ायदा न होला आ ई बिस्तार का काम खाली कंपनिन की सुविधा खातिर होखत बाटे

हाले में चीन की सहायता से निकारागुआ नाँव की देस में भी नहर बनवले क योजना बाटे। हालाँकि एकरी बनवले क पर्यावरणविद लोग काफ़ी विरोध करत बाटे आ इहो मानल जात बाटे कि खर्चा ढेर होई आ ए से फ़ायदा कम होई।




#Article 252: डायचे विले (127 words)


डॉयचे वेले (छो: डीडब्ल्यू या डी॰डब्ल्यू॰) जर्मन अन्तराष्ट्रीय प्रसारणकर्ता हवे।

एकर रेडियो आ टीवी दूनो सेवा बाटे। डीडब्ल्यू रेडियो लघु तरंग, इंटरनेट और उपग्रह रेडियो पर 30 भाषवन में प्रसारण करत बाटे। जर्मन भाषा की नाँव डॉयचे वेले क अर्थ जर्मन तरंग होला आ एहू क सर्विस ठीक ओइसने बाटे जइसन अउरी अन्तराष्ट्रीय प्रसारणकर्ता कुल बीबीसी वर्ल्ड सर्विस, फ़्रांस 24, वॉयस ऑफ़ अमेरिका, रेडियो कैनेडा इंटरनेशनल, रेडियो फ्री यूरोप आ रेडियो फ़्रांस इंटरनेशनल आदि क बाटे।

डॉयचे वेले क वेबसाइट बर्लिन आ बॉन दूनों शहरन से चलावल जाला। 6 फरवरी 2012 के ई सेवा अपनी कई गो ब्रांड में कई ठे महत्वपूर्ण बदलाव कइलस ।

भारतीय चैनल दूरदर्शन की संघे एकर समझौता से एगो प्रोग्राम मंथन देखावल जात बा जवन दूरदर्शन आ डायचे विले दूनों पर आवेला।




#Article 253: यूनाइटेड किंगडम (1462 words)


यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड नॉदर्न आयरलैंड उत्तरी आयरलैंड एक मात्र अइसन हिस्सा बाटे जवन कौनों दूसर राष्ट्र (आयरलैंड रिपब्लिक) के साथे जमीनी सीमा वाला बा। एह जमीनी सीमा के छोड़ दिहल जाव तब यूके चारों ओर से अटलांटिक महासागर से घेराइल बाटे, जहाँ एकरे पूरुब ओर नॉर्थ सागर, दक्खिन में इंग्लिश चैनल आ दक्खिन-दक्खिन पच्छिम में सेल्टिक सागर बाड़ें। ग्रेट ब्रिटेन आ आयरलैंड के बीच के समुंद्र के आयरिश सागर कहल जाला। क्षेत्रफल में  बिस्तार वाला यूनाइटेड किंगडम  आ  अस्थान पर बाटे। जनसंख्या के हिसाब से ई देस  के सभसे ढेर जनसंख्या वाला देस बाटे आ एकर जनसंख्या लगभग 65.1 मिलियन बाटे। एही से ई यूरोपियन युनियन के चउथा सभसे घना आबादी वाला देस बाटे।

युनाइटेड किंगडम एगो  (संबैधानिक राजतंत्र) हवे जहाँ संसदीय ब्यवस्था वाला शासन बाटे। एकर राजधानी लंदन, एगो महत्वपूर्ण बैस्विक शहर आ फाइनेंस के केन्द्र बाटे जहाँ के शहरी आबादी 10,310,000 बा आ ई यूरोप के चउथा सभसे बड़ा शहर बाटे। वर्तमान में एकर इहाँ के राजशाही के प्रमुख 6 फरवरी 1952 से महारानी एलिजाबेथ II बाड़ी। यूनाइटेड किंगडम में चार गो देस (country) आवे लें: इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स, आ उत्तरी आयरलैंड। बाद के तीनों के प्रशासनिक  दिहल गइल बाटे, हालांकि, ई तीनों खातिर अलग-अलग किसिम के बाटे आ इनहन के राजधानी, क्रम से एडिनबर्ग, कार्डिफ, आ बेलफास्ट बा। नगिचे के आइल्स ऑफ मैन, बालिविक ऑफ गुएर्नसी आ बालिविक ऑफ जर्सी युनाइटेड किंगडम के हिस्सा ना हवे बलुक,  हवें ब्रिटिश सरकार इनहन के सुरक्षा आ अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व करे ला।

The total area of the United Kingdom is approximately . The country occupies the major part of the British Isles archipelago and includes the island of Great Britain, the north-eastern one-sixth of the island of Ireland and some smaller surrounding islands. It lies between the North Atlantic Ocean and the North Sea with the south-east coast coming within  of the coast of northern France, from which it is separated by the English Channel. In 1993 10 % of the UK was forested, 46 % used for pastures and 25 % cultivated for agriculture. The Royal Greenwich Observatory in London is the defining point of the Prime Meridian.

The United Kingdom lies between latitudes 49° to 61° N, and longitudes 9° W to 2° E. Northern Ireland shares a  land boundary with the Republic of Ireland. The coastline of Great Britain is  long. It is connected to continental Europe by the Channel Tunnel, which at  ( underwater) is the longest underwater tunnel in the world.

England accounts for just over half of the total area of the UK, covering . Most of the country consists of lowland terrain, with mountainous terrain north-west of the Tees-Exe line; including the Cumbrian Mountains of the Lake District, the Pennines, Exmoor and Dartmoor. The main rivers and estuaries are the Thames, Severn and the Humber. England's highest mountain is Scafell Pike () in the Lake District. Its principal rivers are the Severn, Thames, Humber, Tees, Tyne, Tweed, Avon, Exe and Mersey.

Scotland accounts for just under a third of the total area of the UK, covering  and including nearly eight hundred islands, predominantly west and north of the mainland; notably the Hebrides, Orkney Islands and Shetland Islands. Scotland is the most mountainous country in the UK and its topography is distinguished by the Highland Boundary Fault—a geological rock fracture—which traverses Scotland from Arran in the west to Stonehaven in the east. The fault separates two distinctively different regions; namely the Highlands to the north and west and the lowlands to the south and east. The more rugged Highland region contains the majority of Scotland's mountainous land, including Ben Nevis which at  is the highest point in the British Isles. Lowland areas—especially the narrow waist of land between the Firth of Clyde and the Firth of Forth known as the Central Belt—are flatter and home to most of the population including Glasgow, Scotland's largest city, and Edinburgh, its capital and political centre, although upland and mountainous terrain lies within the Southern Uplands.

Wales accounts for less than a tenth of the total area of the UK, covering . Wales is mostly mountainous, though South Wales is less mountainous than North and mid Wales. The main population and industrial areas are in South Wales, consisting of the coastal cities of Cardiff, Swansea and Newport, and the South Wales Valleys to their north. The highest mountains in Wales are in Snowdonia and include Snowdon () which, at , is the highest peak in Wales. The 14, or possibly 15, Welsh mountains over  high are known collectively as the Welsh 3000s. Wales has over  of coastline. Several islands lie off the Welsh mainland, the largest of which is Anglesey (Ynys Môn) in the north-west.

Northern Ireland, separated from Great Britain by the Irish Sea and North Channel, has an area of  and is mostly hilly. It includes Lough Neagh which, at , is the largest lake in the British Isles by area. The highest peak in Northern Ireland is Slieve Donard in the Mourne Mountains at .

The United Kingdom has a temperate climate, with plentiful rainfall all year round. The temperature varies with the seasons seldom dropping below  or rising above . The prevailing wind is from the south-west and bears frequent spells of mild and wet weather from the Atlantic Ocean, although the eastern parts are mostly sheltered from this wind since the majority of the rain falls over the western regions the eastern parts are therefore the driest. Atlantic currents, warmed by the Gulf Stream, bring mild winters; especially in the west where winters are wet and even more so over high ground. Summers are warmest in the south-east of England, being closest to the European mainland, and coolest in the north. Heavy snowfall can occur in winter and early spring on high ground, and occasionally settles to great depth away from the hills.

There is no consistent system of administrative or geographic demarcation across the United Kingdom. Each country of the United Kingdom has its own arrangements, whose origins often pre-date the UK's formation. Until the 19th century there was little change to those arrangements, but there has since been a constant evolution of role and function, most significantly the devolution of powers to Scotland, Wales and Northern Ireland.

The organisation of local government in England is complex, with the distribution of functions varying according to local arrangements. Legislation concerning local government in England is the responsibility of the UK's parliament and the government, as England has no devolved legislature. The upper-tier subdivisions of England are the nine regions, now used primarily for statistical purposes. One region, Greater London, has had a directly elected assembly and mayor since 2000 following popular support for the proposal in a referendum. It was intended that other regions would also be given their own elected regional assemblies, but a proposed assembly in the North East region was rejected by a referendum in 2004. Below the regional tier, some parts of England have county councils and district councils and others have unitary authorities; while London consists of 32 London boroughs and the City of London. Councillors are elected by the first-past-the-post system in single-member wards or by the multi-member plurality system in multi-member wards.

For local government purposes, Scotland is divided into 32 council areas, with wide variation in both size and population. The cities of Glasgow, Edinburgh, Aberdeen and Dundee are separate council areas, as is the Highland Council which includes a third of Scotland's area but only just over 200,000 people. Local councils are made up of elected councillors, of whom there are 1,223; they are paid a part-time salary. Elections are conducted by single transferable vote in multi-member wards that elect either three or four councillors. Each council elects a Provost, or Convenor, to chair meetings of the council and to act as a figurehead for the area. Councillors are subject to a code of conduct enforced by the Standards Commission for Scotland. The representative association of Scotland's local authorities is the Convention of Scottish Local Authorities (COSLA).

Local government in Wales consists of 22 unitary authorities. These include the cities of Cardiff, Swansea and Newport which are unitary authorities in their own right. Elections are held every four years under the first-past-the-post system. The most recent elections were held in May 2012, except for the Isle of Anglesey. The Welsh Local Government Association represents the interests of local authorities in Wales.

Local government in Northern Ireland has since 1973 been organised into 26 district councils, each elected by single transferable vote. Their powers are limited to services such as collecting waste, controlling dogs and maintaining parks and cemeteries. On 13 मार्च 2008 the executive agreed on proposals to create 11 new councils and replace the present system. The next local elections were postponed until 2016 to facilitate this.




#Article 254: जर्मनी (146 words)


जर्मनी (), ऑफिशियल तौर पर जर्मन फेडरल रिपब्लिक (, ), मध्य-पूरबी यूरोप में एगो देस बा। ई देस एगो फेडरल संसदीय रिपब्लिक हवे। देस में कुल 16 गो राज्य बाने आ एकर बिस्तार लगभग 3,57,021 बर्ग किलोमीटर इलाका पर बा। इहाँ के जलवायु शीतोष्ण कटिबंधीय बा आ एक सीजन से दूसरा सीजन के बीच में पर्याप्त मौसमी अंतर पावल जाला। इहाँ के जनसंख्या करीब 8.2 करोड़ बा आ ई यूरोपियन यूनियन के सभसे ढेर जनसंख्या वाला देस हवे। अमेरिका के बाद ई दुनिया में दूसरा सभसे पापुलर देस हवे जहाँ बाहरी लोग आ के बसल चाहे ला। जर्मनी के राजधानी आ सभसे बड़ शहर बर्लिन बा जबकि ए देस के सभसे ढेर शहरी केंद्र सभ रूर इलाका में मौजूद बाने (मुख्य केंद्र: डार्टमंड आ एस्सेन) जबकि देस के अन्य प्रमुख शहर सभ में हैम्बर्ग, म्यूनिख, कोलोन, फ्रांकफुर्त, श्टुटगर्ट, डुस्सेलडोर्फ़, लाइपजिग, ब्रेमेन, ड्रेस्डेन, हानोवर आ नूरेम्बर्ग बाने।




#Article 255: फ्रांस (1103 words)


फ़्रांस यूरोप महादीप के पच्छिमी हिस्सा में एगो देस हवे। फ्रांस के राजधानी पैरिस हवे आ ई दुनिया के परभावशाली देसन में से एक हवे। फ्रांस देस के राज्यक्षेत्र एकरा मुख्य भूमि के अलावा बाकी कई समुंदरपार राज्यक्षेत्र आ इलाका सभ के रूप में भी बा। यूरोप में मौजूद फ्रांस के मुख्य भूमि के मेट्रोपोलिटन फ्रांस कहल जाला। ई मुख्य भूमि, भूमध्यसागर से ले के इंग्लिश चैनल आ नार्थ सागर ले, आ राइन नदी से ले के अटलांटिक महासागर तक ले बिस्तार लिहले बा। समुंदरपार इलाका में दक्खिन अमेरिका महादीप पर फ्रेंच गयाना के रूप में आ अउरी कई गो दीप सभ के रूप में बा जे अटलांटिक, प्रशांत आ हिंद महासागर में स्थित बाने। फ्रांस के कुल रकबा 6,43,801 बर्ग किलोमीटर बा आ इहाँ के कुल जनसंख्या जनवरी 2017 के अनुमान अनुसार 6.7 करोड़ रहल। राजनीतिक हिसाब से ई एकात्मक आ आधा-राष्ट्रपतीय रिपब्लिक हवे। सभसे बड़ शहर आ राजधानी पैरिस बा के सांस्कृतिक, आर्थिक आ बाणिज्य के राजधानी भी बा। अन्य प्रमुख शहर सभ में मार्सेली, लियोन, लिले, नाइस, तुलू आ बोर्दों के नाँव गिनावल जा सके ला।

कला, संस्कृति, बिज्ञान आ दर्शन के क्षेत्र में लंबा समय से फ्रांस के पूरा दुनिया में आगे गिनल जा सके लायक जगह रहल बा। ई यूरोप के चउथा सभसे ढेर यूनेस्को बिस्व धरोहर वाला देस हवे। फ्रांस में हर साल 8.3 करोड़ के आसपास पर्यटक लोग आवे ला, एह मामिला में ई दुनिया में नंबर एक पर बा। ई एगो बिकसित राष्ट्र हवे आ नामिनल जीडीपी के हिसाब से दुनिया के पाँचवाँ आ पीपीपी के हिसाब से दुनिया के नउवाँ सभसे बड़ देस हवे। समेकित हाउसहोल्ड धन के हिसाब से ई दुनिया में चउथा नंबर पर बा। शिक्षा, सेहत रखरखाव, जीवन प्रत्याशा आ मानव बिकास के मामिला में भी एकर स्थान दुनिया में ऊपर के देस सभ में बा। अबो भी फ्रांस दुनिया के एगो प्रमुख ताकत बा आ ई यूनाइटेड नेशंस के सुरक्षा काउंसिल के पाँच गो स्थाई मेंबर सभ में हऽ जेकरा लगे वीटो पावर बा आ घोषित रूप से परमाणु हथियार संपन्न देस बाटे। यूरोपियन यूनियन आ यूरोजोन के अगुआ देसन में से एक बा। G7, NATO, OECD, WTO आ La Francophonie जइसन पावरफुल अंतरराष्ट्रीय मंडली सभ के सदस्य देस बा।

मूल रूप से पूरा फ्रैकिश साम्राज्य के खाती इस्तेमाल होखे वाला शब्द फ्रांस लैटिन भाषा के फ्रांसिया से जनमल हवे। एकर अरथ होखे फ्रैंक लोग के देस। आधुनिक जुग के वर्तमान फ्रांस के अब्बो इटैलियन आ स्पेनी भाषा सभ में फ्रांसिया कहल जाला, जर्मन भाषा में फ्रांकरीष आ डच भाषा में फ्रांकरिज्क कहल जाला। इनहन के इतिहासी अरथ उहे हवे, मने कि फ्रैंक लोग के देस।

फ्रांस के राज्यक्षेत्र (टेरिटरी) के ज्यादातर हिस्सा पच्छिमी यूरोप में पड़े ला आ एकरा के मेट्रोपोलिटन फ्रांस कहल जाला जवना से कि समुंद्र पार के फ्रांसीसी इलाका सभ से एकरा के अलग बूझल जा सके। एह में फ्रांस के मुख्य इलाका आ आसपास के कुछ दीप सभ सामिल बाने आ एकरे उत्तर में नार्थ सागर, उत्तर पच्छिम में इंग्लिश चैनल, पच्छिम में अटलांटिक महासागर आ दक्खिनपूरुब में भूमध्य सागर मौजूद बा। जमीनी सीमा सभ, उत्तर पूरुब में बेल्जियम आ लक्जमबर्ग, पूरुब में जर्मनी आ स्विट्जरलैंड, दक्खिन पूरुब में इटली आ मोनाको, आ दक्खिन आ दक्खिन पच्छिम में अंडोरा आ स्पेन के साथे बने ला। उत्तर पूरुब के हिस्सा छोड़ दिहल जाय त बाकी फ्रांस के जमीनी सीमा प्राकृतिक सीमा हई स जइसे कि दक्खिन में पिरेनीज पहाड़ से, दक्खिन पूरुब में आल्प्स आ जूरा परबत से आ पूरुब में राइन नदी से। एकरे आकृति के कारण फ्रांस के हेक्सगन () यानी षटकोण कहल जाला।

मेट्रो फ्रांस में कई गो दीप भी सामिल बाने जिनहन में सभसे बड़ बा कोर्सिका; एकरे अलावा इंग्लिश चैनल आ भूमध्य सागर में अउरी कई गो छोट छोट दीप बाने।

मेट्रो फ्रांस के लोकेशन 41° आ 51° N अक्षांस अउरी 6° पच्छिमी आ 10° पूरबी देशांतर के बीच बा आ ई उत्तरी उपोष्ण कटिबंधी इलाका में पड़े ला। एकर महादीपी हिस्सा उत्तर से दक्खिन आ पूरुब से पछिम ले लगभग 1000 किमी लंबाई आ एतने चौड़ाई वाला बाटे।

मुख्य भूमि के अलावा फ्रांस के अधीन कई गो समुंद्र पार इलाका भी बाने:

एही कारण, फ्रांस के सीमा वाया फ्रेंच गयाना ब्राजील आ सूरीनाम से मिले ला आ सेंट मार्टिन के कुछ हिस्सा द्वारा नीदरलैंड से भी एकर सीमा बने ला।

मेट्रोपौलिटन फ्रांस में थलरूप के मामिला में भरपूर बिबिधता मौजूद बा आ कई किसिम के प्राकृतिक लैंडस्केप पावल जालें। वर्तमान फ्रांस के बड़हन इलाका सभ के उठान कई टेक्टॉनिक हलचल सभ के बाद भइल हवे; उदाहरण खाती पैलियोजोइक जुग में भइल हर्सीनियन उत्थान, जेकरे दौरान आर्मोरिकन पठार आ बिचला पठार (मैसिफ सेंट्रल), मोरवान मैसिफ, वोस्जेज आ आर्डन्नीज परबत माला आ कोर्सिका दीप के निर्माण भइल हवे। एह मैसिफ सभ, मने के ऊँच मजबूत आ कड़ेर चट्टान वाले भूखंड सभ के इर्द-गिर्द कई गो अवसादी बेसिन (सेडीमेंटरी बेसिन) सभ के निर्माण भइल बा जेह में दक्खिनपच्छिम के एक्वाटाइन बेसिन सभ, उत्तर में पैरिस बेसिन इत्यादि बाड़ें, पैरिस बेसिन में कुछ सभसे उपजाऊ भूभाग भी बाड़ें जइसे कि ब्यू'ओस आ ब्राइ के सिल्ट बेड सभ। कई गो प्राकृतिक गलियारा नियर भूभाग भी बाड़ें जेह में रो'न घाटी प्रमुख बा आ आवागमन के सुबिधाजनक बनावे ला। समुंद्र तल से लगभग  के ऊँचाई पर माउंट ब्लांक नाँव के परबत बा जे फ्रांस आ इटली के बाडर वाला हिस्सा में मौजूद आल्प्स परबत के पहाड़ हवे, ई पूरा यूरोप के सभसे ऊँच बिंदु हवे। हालाँकि, फ्रांस के लगभग 60 % म्युनिसिपैलिटी सभ के वर्गीकरण भूडोल के रिस्क वाला इलाका के रूप में कइल गइल बाटे, ई रिस्क मध्यम कटेगरी के बा। फ्रांस के समुंद्री किनारा भी कई तरह के थलरूप वाला बा जे में एक दुसरे से बिल्कुले अलग किसिम के चीज पावल जाला: फ्रेंच रीवीरा के तट परबती इलाका हवे, तटीय क्लिफ पावल जालें जइसे कि कोट-डी-एल्बार्ट्रे, आ भरपूर चाकर बलुआ मैदानी समुंदरी किनारा लैंगुएडॉक के हिस्सा में मिले ला। कोर्सिका एगो दीप हवे जे भूमध्यसागरी किनारे से कुछ दूर प समुंद्र में मौजूद बा। फ्रांस के नदी तंत्र भरपूर बिकसित बा जेह में चार गो प्रमुख नदी बाड़ी: सीन, लोइर, गरोन, आ रोन। एह चारो नदी आ इनाहन के सहायिका सभ के बेसिन के बिस्तार फ्रांस के लगभग 62 % हिस्सा कभर क लेला। रोन नदी के पछिम में सेंट्रल मैसिफ के ऊँच भूभाग हवे आ पूरुब में आल्प्स परबत के उंच हिस्सा हऽ आ ई नदी भूमध्य सागर में गिरे ले। कुछ नदी सभ म्यूज आ राइन नदी के ओर, मने कि उत्तर-पूरुब मुँह के बहे ला। पच्छिमी हिस्सा के नदी सभ पच्छिम मुँह के बहे लीं आ अटलांटिक महासागर में गिरे लीं। फ्रांस के समुंद्री क्षेत्र लगभग  इलाका प बिस्तार लिहले बा, धियान देवे वाली बात ई कि एकर लगभग 97 % हिस्सा मुख्यभूमि से जुड़ल ना बलुक समुंद्र-पार हिस्सा सभ के साथे जुड़ल बाटे।




#Article 256: इटली (226 words)


इटली (अंगरेजी: Italy) यूरोप में एगो देस बाटे। एकर राजधानी रोम हवे। भूमध्य सागर के बीचोबीच मौजूद ई देस, मुख्य रूप से प्रायदीप हवे आ एकर जमीनी बाडर फ्रांस, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया, स्लोवेनिया, सैन मरीनो, आ वेटिकन सिटी के साथे बाद। इटली के बिस्तार लगभग  एरिया पर बाटे आ ई मुख्य रूप से समशीतोष्ण जलवायु वाला आ भूमध्य सागरीय जलवायु इलाका हवे। इहाँ के जनसंख्या लगभग 61 बा आ एह हिसाब से ई यूरोपियन यूनियन में चउथा आ दक्खिनी यूरोप में सभसे ढेर जनसंख्या वाला देस बाटे।

इटली के लोकेशन दक्खिनी यूरोप में बा, 35° से 47° N अक्षांस आ 6° से 19° E देशांतर के बिचा में ई देस बिस्तार लिहले बा। इटली के उत्तर में एकर सीमा फ्रांस, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया आ स्लोवेनिया से मिले ला आ ई सीमा मोटामोटी रूप से आल्प्स परबत के जलबिभाजक के सहारे बाटे, पहाड़ी इलाका के घेरा में इहाँ के पो घाटी आ वेनेसियाई मैदान बाटे। एकरा दक्खिन में ई पूरा प्रायदीपी भाग हवे जेकरा के इटैलियन प्रायदीप कहले जाला आ भूमध्य सागर में दू गो बड़हन दीप बाड़ें सिसिली आ सार्डीनिया।  इनहन के अलावे अउरी कई गो छोटहन दीप भी बाड़ें। संप्रभु राज्य सैन मरीनो आ वेटिकन सिटी दुनों इटली देस के एन्क्लेव हवें, मने कि एह देसन के चारो ओर इटली के सीमा बा। कैंपियोने दि'इटालिया नाँव के एन्क्लेव, जे इटली के हिस्सा हवे, स्विट्जरलैंड के भीतर बा।




#Article 257: रोम (352 words)


रोम () यूरोप महादीप के एगो प्रमुख शहर आ इटली देस के राजधानी हवे। रोम राजधानी क्षेत्र के अलग कम्यून (नाँव कम्यूने दि रोमा कैपिताले) के रूप में प्रशासन बेवस्था बा आ ई इटली के लाजियो क्षेत्र के राजधानी के रूप में भी हऽ। अपना 2,874,558  निवासी लोग के साथ  इलाका वाला, ई कम्यून इटली के सभसे घन आ सभसे ढेर आबादी वाला कम्यून भी हवे। ई यूरोपियन यूनियन के देस सभ में चउथा सभसे बड़ शहर हवे। ई शहर मेट्रोपॉलिटन रोम के बीचोबीच वाला हिस्सा हवे आ अगर पूरा मेट्रो रोम के हिसाब में लिहल जाव तब एकर जनसंख्या करीबन 4.3 मिलियन (43 लाख) बाटे। रोम के लोकेशन इटली प्रायदीप के बिचला-पच्छिमी प्रांत के हिस्सा बा आ लाजियो के भीतर, टाइबर नदी के किनारे बसल बा। अउरी खास बात ईहो बा कि एह शहर के भितरें ईसाई धरम के केंद्र वेटिकन सिटी भी मौजूद बा जे अलगा राज्य के दर्जा वाला देस मानल जाला। एही कारण कबो-कबो रोम के दू गो देस सभ के राजधानी भी कहल जाला।

रोम बिचली इटली के लाजियो इलाका में पड़े ला आ टाइबर नदी के तीरे बसल बाटे। मूल आबादी ओह पहाड़ी सभ पर बसे सुरू भइल रहल जिनहन के ढाल टाइबर दीप के ओर रहल, नदी पर एगो लचका (फोर्ड) के ओर मुँह कइले, ई एह नदी पर एह इलाका में एकलौता प्राकृतिक उपटान के हिस्सा रहल जहाँ से नदी आसानी से पार कइल जा सकत रहल होखे। राजा लोग के रोम, सात गो पहाड़ी सभ पर बसल: अवेंताइन पहाड़ी, काईलियन पहाड़ी, कैपिटलाइन पहाड़ी, एस्क्वीलाइन पहाड़ी, पैलेटाइन पहाड़ी क्विरिनल पहाड़ी आ विमिनल पहाड़ी पर। आज के समय के रोम से एनीन नाँव के एगो अउरी नदी गुजरे ले। ई इतिहासी रोम के बीच में, टाइबर नदी में आ के मिल जाले।

हालाँकि, शहर के सेंटर टाइरेनियन सागर से करीबन  भीतर के ओर बा, शहर के सीमा समुंद्र के तीरे ले बाटे। एहर के ओर पच्छिमी-दक्खिनी डिस्ट्रिक्ट ओस्तिया पड़े ला। रोम के बिचला हिस्सा के ऊँचाई समुंद्र तल से   (पैन्थिया के बेस के लगे) से  (मारियो परबत) तक ले बाटे। रोम कम्यून के कुल एरिया लगभग  बाटे जेह में कई गो हरा-भरा इलाका भी बाड़ें।




#Article 258: जापान (186 words)


जापान एशिया महादीप की पूरबी छोर पर एगो देश बाटे। एके ऊगत सुरुज क देस भी कहल जाला।

जापान एगो दीपी देस हउवे जेवना में लगभग 3900 दीप बाड़ें। हालाँकि इनहन में चार गो सबसे बड़का दीप होन्शू, होकैडो, क्यूशू आ शिकोकू हवें। ई चारि गो दीप मिलके जापान क लगभग 98% क्षेत्रफल बनावे लें। होन्शू इनहन में सभसे बड़हन दीप हवे। जापान क राजधानी टोकियो हवे जेवन विश्व क सबसे ढेर जनसँख्या वाला शहर (शहरी संकुल) हवे। जापान जनसंख्या की हिसाब से विश्व क दसवाँ नंबर क देश हवे।

जापान प्रशांत महासागर में स्थित बा। एकर उत्तर-दक्खिन बिस्तार ओखोटस्क सागर से ले के दक्खिनी चीन सागर आ ताइवान ले बाटे।

होंशू सबसे बड़हन दीप हवे जेवना पर जापान क लगभग 80% जनसंख्या  रहेले। एही दीप पर जापान क सबसे बड़ मैदान क्वान्टो मैदान बाटे। फ्यूजीयामा ज्वालामुखी आ टोकियो शहर भी एही दीप पर बा। जापान की जलवायु पर उत्तर-दक्खिन बिस्तार आ समुद्री स्थिति क परभाव लउकेला। क्यूरोशिवो आ क्यूराइल धारा क प्रभाव इहाँ की जलवायु आ मछली उद्योग पर पड़ेला। जापान क लगभग 66% क्षेत्र पर जंगल बा आ खाली 16% भाग खेती लायक बाटे।




#Article 259: टोकियो (192 words)


टोकियो (जापानी: 東京(पूरबी राजधानी, उच्चारण: तोउक्योउ)), सरकारी नाँव — टोकियो मेट्रोपोलिस(अंग्रेज़ी: Tokyo (उच्चारण: टोकियो)), जापान क एगो प्रीफेक्चर आ राजधानी हवे। टोकियो क जनसंख्या 13,185,502 आ पूरा मेट्रो क जनसंख्या 35,682,460 हवे आ एह तरे ई विश्व क सबसे ढेर जनसंख्या वाला नगर हवे। एकर कुल क्षेत्रफल 2,187.66 km2 आ मेट्रो सहित क्षेत्रफल 13,572 km2 बाटे आ एहीसे ई क्षेत्रफलो की हिसाब से दुनिया क सबसे बड़हन नगर हवे।

टोकियो जापान क राजधानी, शाही महल क अस्थान आ जापान कि राजा क निवास अस्थान हवे। ई जापान की सभसे बड़हन दीप होन्शू पर एकरी क्वान्तो प्रदेश में स्थित बाटे आ इजू दीप आ ओगासावारा दीप ए शहर क हिस्सा हवें।

टोकियो के सामान्य लोग एगु नगर की रूप में मानेला बाकी ई एगो प्रीफेक्चर (जापानी जिला) कि तरे मानल जाला आ एगो जिला की तरे एकर प्रशासन चलावल जाला।

टोकियो के अल्फा+ विश्वनगरी क दर्जा हासिल बाटे।

टोकियो क पुरान नाँव ईदो रहे जेवना क मतलब होला नदी मुहाना (एश्चुअरी)। बाद में एअकर नाँव तोउ (पूरबी) + क्योउ (राजधानी) रखा गइल। पुरान अंगरेजी कि नक्शा आ किताबिं में एकर नाँव टोकेई भी मिलेला बाकी ई अब ब्यवहार में नइखे आ अब एके टोकियो कहल जाला।




#Article 260: कैस्पियन सागर (146 words)


कैस्पियन सागर एशिया महादीप में, बिचला एशिया के पच्छिमी माथ पर मौजूद एगो चारो ओर से जमीन से घेराइल झील हवे जेकरा बिसाल आकार के चलते परंपरागत रूप से सागर कहल जाला। ई काकेशस परबत के पूरुब में आ बिसाल स्टेपी के मैदान के पच्छिम में बाटे आ पानी के सतह के रकबा के हिसाब से दुनिया के सभसे बड़ खारा पानी के झील हवे। एकरे उत्तर-पूरुब में कजाकिस्तान, उत्तर-पच्छिम में रूस, पच्छिम में अजरबैजान, दक्खिन में ईरान, आ दक्खिन-पूरुब में तुर्कमेनिस्तान देस बाड़ें।

कैस्पियन सागर समुंद्र तल से करीबन  नीचे कैस्पियन निचाई में मौजूद बा। एकरा दक्खिनी हिस्सा में एह समुंद्र के तली समुंद्र तल से   नीचे ले पहुँच जाले, एकरा चलते ई बैकाल झील के बाद दूसरा सभसे गहिरा जगह भी बा (बैकाल के गहिराई  हवे)। एकरे किनारे रहे वाला लोग एकरा में समुंद्र बूझे, अइसन साइद एकरे बिसाल आकार (साइज) के कारन रहल।




#Article 261: अरल सागर (322 words)


अरल सागर  (,  Aral Teñizi; ; ; , ) मध्यएशिया में कजाकिस्तान आ उज्बेकिस्तान देसवन में बिस्तार वाला एगो एंडोरेइक बेसिन आ सूखत जा रहल झील बाटे। अरल सागर के नाँव के अर्थ होला टापू वाला समुंद्र जवन एह झील में देखाई पड़े वाला ढेर सारा टापू सभ के कारण रखाइल रहे।  अरल सागर के थाला उज्बेजिस्तान , ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, किर्गीजिस्तान, कजाकिस्तान आ अफ़गानिस्तान के हिस्सा सभ में बिस्तार वाला बाटे।

पुरान समय में दुनिया के चउथा सभसे बड़की झील रहि चुकल ई सागर के सतह के क्षेत्रफल 68,000 बर्ग किमी रहल बाकी ई 1960 के दशक से लगातार सिकुडत जात बाटे।
ई सिकुड़ाव के कारण सोवियत रूस के सिंचाई परियोजना के कारण शुरू भइल जेवना में एह सागर में गिरे वाली नद्दी सब के पानी मोड़ दिहल गइल। साल 2007 ले आवत-आवत ई अपने पुरान क्षेत्रफल के 10%भर बचल आ चार हिस्सा में बँट गइल - उत्तर अरल सागर, दक्खिन अरल सागर के दू हिस्सा पच्छिमी आ पूरबी, आ बीच में एगो छोट झील के रूप में। 2009 में पहुँच के दक्खिन अरल सागर के पूरबी हिस्सा सूख गइल आ पच्छिमी हिस्सा एगो पातर पट्टी के रूप में बचल।
नासा के 2014 में लिहल तस्वीर से ई पता चलल की नया समय के इतिहास में पहिली बेर ई सागर पूरा सूख गइल। एकर पूरबी बेसिन के अब अरलकुम रेगिस्तान कहल जाला।

कजाकिस्तान सरकार 2005 में उत्तर अरल सागर के बचावे खातिर एगो डैम प्रोजेक्ट चलवलस जेकरा कारण 2003 की लेवल की तुलना में 2008 में 12 मीटर के बढ़ती नापल गइल 2008 के आँकड़ा के अनुसार उत्तर अरल सागर में सभसे गहिरा जगह पर गहिराई 42 मीटर (138 फीट) रहल।

अरल सागर के सिकुड़ाव के दुनिया के सभसे खराब पर्यावरणीय संकट के दर्जा दिहल गइल। एह सागर में मछरी पकड़े के धंधा के लगभग बंद हो गइले के कारण ब्यापक बेरोजगारी फइलल। एकरे अलावा एह सागर के बचल हिस्सा में प्रदूषण के कारण भी कई तरह के समस्या पैदा भइल बाटे।




#Article 262: भूगोलीय निर्देशांक सिस्टम (110 words)


भूगोलीय निर्देशांक सिस्टम (ज्याॅग्रफिकल कोऑर्डिनेट सिस्टम) भूगोल में इस्तेमाल होला जे पृथ्वी पर कौनों स्थान क लोकेशन सही-सही बतावे खातिर एगो तरीका हवे। एह सिस्टम में कुछ अंक आ अच्छर के इस्तेमाल से कौनों जगह के सटीक लोकेशन बतावल जाल सके ला, एह संख्या मान सभ के चुनाव एह तरीका से कइल जाला कि इनहन में से एक ठो वर्टिकल (खड़ा-खड़ी) तल पर आ बाकी दू गो भा तीन गो संख्या (जेकरे आगे अच्छर भी हो सके ला) हौरिजेंटल (बेंड़ी-बेंड़ा भा पट) तल पर लोकेशन बतावे लें।

भूगोलीय निर्देशांक सभ में सभसे आम इस्तमाल वाला तरीका अक्षांश, देशान्तर आ ऊँचाई की मान की सहायता से जगह क लोकेशन बतावल हवे।




#Article 263: तुर्काना झील (239 words)


तुर्काना झील (अंग्रेज़ी: Lake Turkana), जेवना के पहिले रुडोल्फ़ झील (अंग्रेज़ी: Lake Rudolf) कहल जाव, महान अफ़्रीकी झील में से हवे। ई नमकीन पानी क झील हवे जेवन घनफल (वोल्यूम) की हिसाब से कैस्पियन सागर, इसिक-कुल आ वान झील के बाद दुनिया क चौथा नंबर क सबसे बड़हन नमकीन झील हवे। अरल सागर कब्बो एहू ले बड़ रहे बाकी अधिकतर सूख गइला की कारण अब ए से छोट हो गइल बाटे। तुर्काना एगो रेगिस्तान नियर क्षेत्र में स्थित बा आ दुनिया क सबसे बड़ स्थाई रेगिस्तानी झील भी हवे। एकर अधिकतर हिस्सा कीनिया में बा बाकिर एकदम उत्तरी छोर इथियोपिया में पड़े ला। ई कीनिया क सभसे उत्तरी झील भी हवे।

तुर्काना झील की बीचोबीच की दीप पर एक जिन्दा ज्वालामुखी बाटे जेवना से गैस आ धुंआ हमेशा निकलत रहेला। झील क दक्खिनी आ पूरबी किनारा पथरीला  जबकी उत्तरी आ पच्छिमी किनारन पर बलुआ मैदान आ बालू क ढूह पावल जालें। घाम में आसपास क धरती जल्दिये गरमा जाले जबकि पानी धीरे-धीरे गरम होखेला। ज़मीन आ पानी में तापमान की अंतर से इहाँ तेज़ हवा चलेला आ कबो-कबो त आन्ही आ जाला।

मैदानी किनारन पर मगरमच्छ आ पत्थरील किनारन पर साँप आ बिच्छी मिले लें। पर्यटक लोगन इहाँ कब्बो बिना लोकल गाइड के अकेले ना गइले क सलाह दिहल जाले।

तुर्काना की आसपास के इलाक़ा में प्राचीन मानव क कई ठे जीवाश्म (फ़ॉसिल) मिलल बाड़ें आ कई गो विद्वान लोगन की अनुसार मानव जाति क पैदाइश इहवें भइल रहे।




#Article 264: जीव बिज्ञान (138 words)


जीव बिज्ञान बिज्ञान का शाखा हवे जेवन जीवन बिज्ञान की श्रेणी में आवेला आ धरती पर पावल जाए वाला जीव-जंतु, बनस्पति, बैक्टीरिया इत्यादि सगरी जिंदा जीवधारिन क पढ़ाई करे ला।

जीव बिज्ञान के दू गो बड़हन शाखा में बाँटल जाला: जंतु बिज्ञान आ बनस्पति बिज्ञान। एकरी अलावा कई गो अउरो शाखा बाड़ी: जीव रसायनशास्त्र, कोशिकी जीव बिज्ञान, इकोलॉजी इत्यादि।

जीव या जीवधारी मने जेवना में जीवन होखे, जे जिन्दा होखे। जीव कुल्हिन के भी दू हिस्सा में बाँटल जाला। जंतु, जेवना में सारा जानवर, कीड़ा मकोड़ा, चिरई वगैरह आवेला; आ बनस्पति जेवना में सगरी छोट बड़ पेड़ पौधा आ घास आ जाला।

एकरी अलावा कुछ बहुत नक्खी नक्खी जिन्दा जीव होलें जिनहन के आँख से ना देखल जा सकेला बलुक देखे खातिर खुर्दबीन क जरूरत पड़ेला। इनहन के सूक्ष्मजीव कहल जाला। बैक्टीरिया आ वाइरस इत्यादि अइसने सूक्ष्मजीव हवें।




#Article 265: कंप्यूटर (170 words)


कंप्यूटर (अंगरेजी: Computer) एगो सामान्य इस्तेमाल में आवे वाला इलेक्ट्रानिक मशीन हवे जेवन प्रोग्राम की आधार पर तेजी से गणना कर सकत बा। ई गणित सम्बन्धी गणना आ तर्क सम्बन्धी गणना,दुनो करे में सक्षम होला। शुरुआती दौर में कम्प्युटर खाली इलेक्ट्रानिक न होखे बलुक एनालोग कंप्यूटर भी रहलन बाकी अब इलेक्ट्रानिके कंप्यूटर इस्तेमाल होत बाटे।

पहिले की कंप्यूटरन क साइजो खूबे बड़ होखे लेकिन अब टेक्नालजी में अतना सुधार भइल बा की एगो छोटहन घड़ी में ले कम्यूटर समा सकत बाटे।

आम जनता खाली डेस्कटॉप आ लैपटॉप के कंप्यूटर बुझेले बाकि अइसन ना बा। कंप्यूटर आजकाल बहुत चीजन में निहित रूप से लागल रहत बा। एमपी3 प्लेयर, कैमरा, टीवी नियन कइयो अइसन रोज इसतेमाल होखे वाला चीजन में कम्यूटर क इस्तेमाल निहित रूप से भइल रहत बा। मोबाइल फोन त एगो छोटमोट पर्सनल कंप्यूटरे होखल जात बा। एही तरे मौसम बिज्ञान नियर चीजन में इस्तेमाल होक वाला कंप्यूटर अब्बो कमरा भर क होखे लें।

इनहना के टिपिकल बर्गीकरण इनहन के इस्तेमाल के आधार पर आ साइज के आधार पर होला:




#Article 266: कैमरा (114 words)


कैमरा एगो अइसन यंत्र हवे जेवना से फोटो खींचल जाला। ई फोटोग्राफी क मुख्य औजार हवे। कैमरा मूल रूप से दू परकार क होला फिलिम वाला या रील वाला अउरी डिजिटल।

उपयोग की आधार पर भी एके दू परकार में बाँटल जाला स्टिल कैमरा आ वीडियो कैमरा। हालाँकि अब ज्यादातर कैमरा अइसन बनत बाड़ें की फोटो कैमरा से वीडियो भी रिकार्ड कइल जा सकत बा आ वीडियो कैमरा से स्थिर फोटो भी खींचल जा सकत बा।

एकरी आलावा कैमरा अब स्वतंत्र रूपसे अलगा एगो यंत्र होखो इहो जरूरी नइखे बलुक बहुत सारा औजारन आ मशीनरी में कैमरो लागल रहत बा। मोबाइल कंप्यूटर आ अइसन बहुत सार यंत्रन में अब कैमरा संगही लागल रहत बा।




#Article 267: रोमानिया (136 words)


रोमानिया यूरोप क एगो देस हवे। रोमानिया एगो संप्रभु राज्य हवे आ बिचला यूरोप, पूरबी यूरोप आ दक्खिन-पूरबी यूरोप के मिलान वाला जगह पर स्थित बाटे। एक ओर दक्खिन-पूरुब में जहाँ एकर बाडर ब्लैक सागर से भी मिले ला; दक्खिन में बुल्गारिया, उत्तर में युक्रेन आ पच्छिम में हंगरी से, दक्खिन-पच्छिम में सर्बिया आ पूरुब में माल्डोवा से एकर सीमा बनल बा। एह देस में मुख्य रूप से समशीतोष्ण-महादीपी जलवायु पावल जाले आ एह देस के कुल रकबा 238,397 वर्ग किलोमीटर (92,046 वर्ग मी) बाटे आ एह हिसाब से ई यूरोप में बारहवाँ सभसे बड़हन देस बा जबकि आबादी के हिसाब से एक अस्थान यूरोपियन युनियन में सातवाँ हवे, कुल 20 मिलियन जनसंख्या के साथ। एकर राजधानी आ सभसे बड़ शहरबुखारेस्ट हवे। एकरे अलावा अउरी महत्त्व के शहर सभ में Iași, Timișoara, Cluj-Napoca आ Constanța बाने।




#Article 268: पुर्तगाल (346 words)


पुर्तगाल (Portugal) दक्खिनी-पच्छिमी यूरोप में, आइबेरियन प्रायदीप पर एगो संप्रभु राज्य, मने कि आजाद देस बाटे। ई यूरोप के मुख्य जमीन के सभसे पच्छिमी देस हवे जेकरे पच्छिम में अटलांटिक महासागर बा आ उत्तर आ पूरुब में ई स्पेन के साथे सीमा बनावे ला। एकरे राज्यक्षेत्र में एह मुख्य इलाका के अलावे अटलांटिक में मौजूद दीपसमूह अजोर्स आ मदीरिया बाड़ें जे खुदशासित (ऑटोनॉमस) इलाका हवें आ इनहन के आपन क्षेत्रीय शासन बेवस्था बा।

पुर्तगाल आइबेरिया प्रायदीप के सभसे पुरान राज्य हवे आ यूरोप के सभसे पुरान राज्य सभ में से एक हवे, प्रागइतिहासी समय से अबतक एकर राज्यक्षेत्र लगातार बसत रहल बा, एह पर हमला होत रहल बाने आ जुद्ध होत रहल बाने। प्री-सेल्ट, सेल्ट, कार्थेजिनियन आ रोमन लोग के हमला के बाद एह इलाका पर विसिगोथ आ सुएबी जर्मन लोग के हमला भइल। एगो देस के रूप में पुर्तगाल के अस्थापना मूर जाति के लोगन पर ईसाई पुनर्विजय (रिकंक्वीस्ता) के बाद भइल, मूर लोग एह प्रायदीप पर 711 ईस्वी में हमला कइले रहल। 868 में एगो देस के रूप में अस्थापित होखे के बादो आजादी के कोसिस जारी रहल आ, 1128 में साओ मामेद के जुद्ध में, जेह में पुर्तगाली नेता अलफोंस हेनरीकस अपना महतारी के अगुआई वाली सेना के हरा दिहलें, पुर्तगाल के संप्रभुता स्थापित भइल आ अलफोंस हेनरीकस प्रिंस ऑफ पुर्तगाल के टाइटिल हासिल कइलेन, बाद में 1139 में भइल ऑरीक के जुद्ध में पुर्तगाल के राजा के उपाधि धारण कइलेन आ 1143 में जा के आसपास के राज सभ से भइल संधि में पुर्तगाल के संप्रभुता के पूरा तरीका से पहिचान मिलल।

वर्तमान पुर्तगाल एगो बिकसित राष्ट्र बाटे आ हाई-इनकम आ हाई-जीवन-स्तर वाला देस हवे, सामाजिक प्रगति के मामिला में 20वाँ अस्थान पर बा आ 25वाँ सभसे समृद्ध देस बाटे। ई दुनिया के चउथा सभसे शांति वाला देस हवे पनरहवाँ सभसे सस्टेनेबल देस बाटे, शासन बेवस्था एकात्मक (यूनिटरी), अध-राष्ट्रपतीय आ रिपब्लिक बेवस्था बा। एकरे अलावे भी कई मामिला में ई दुनिया में हाई रैंक वाला देस बा, जइसे कि प्रेस के आजादी (14वाँ), एलजीबीटी अधिकार (यूरोप में 7वाँ), नैतिक आजादी में (3सरा) आ सड़क नेटवर्क के मामिला में तीसरा अस्थान पर बाटे।




#Article 269: स्पेन (135 words)


स्पेन (अंगरेजी: Spain, स्पेनी भाषा:España) या ऑफिशियल रूप से स्पेन राज दक्खिनी यूरोप के आइबेरिया प्रायदीप पर स्थित एक ठो संप्रभु देस बाटे। मुख्य भूमि के अलावा दू गो दीपचाप, भूमध्य सागर में बैलेरिक दीप, आ उत्तरी अफिरकी अटलांटिक किनारा पर कनारी दीप भी एकर हिस्सा बाने; उत्तरी अफिरका में दू गो शहर Ceuta आ Melilla आ मोरक्को तट पर आल्बोर्न सागर में कई ठो छोट दीप भी एही के हिस्सा हवें।

मुख्य स्पेनी भूमि, दक्खिन आ पूरुब में भूमध्य सागर के साथ किनारा वाला बा आ उत्तर में फ्रांस देस के साथ सीमा बने ले जबकि पच्छिम में पुर्तगाल आ अटलांटिक महासागर बा। ई एक मात्र अइसन यूरोपीय देश बाटे जेकर सीमा अफ्रीकी देस मोरक्को के साथ सटल बाटे आ एह देस के अफ्रीकी महादीप पर मौजूद हिस्सा में खाली 5% जनता रहे ले।




#Article 270: सोन नदी (343 words)


सोन नदी भारत में एगो नदी बा जेवन गंगा नदी क सहायिका नदी हवे। बिचला भारत के पठारी हिस्सा में मध्यप्रदेश के अमरकंटक पहाड़ से निकल के दक्खिन-पच्छिम से उत्तर-पूरुब ओर के बहत ई नदी कुल लगभग  दूरी तय करे के बाद बिहार में आरा के पूरुब आ पटना से कुछ पहिलहीं गंगा में बाएँ से मिले ले। गंगा के सहायिका सभ में बाएँ से मिले वाली नदी सभ में जमुना नदी के बाद ई दुसरी सभसे बड़ नदी हवे।

भूबिज्ञान के हिसाब से सोन नदी के घाटी, जे लमहर आकृति के घाटी हवे, नर्मदा नदी के भ्रंश-घाटी के आगे बिस्तार मानल जाला आ पूरा भ्रंश (फाल्ट-सिस्टम) के नर्मदा-सोन रिफ्ट घाटी कहल जाला। सोन नदी के खुद सहायिका सभ में ज्यादे एह में बाएँ से आ के मिले लीं जिनहन में रिहंद नदी आ उत्तर कोइल नदी प्रमुख बाड़ी सऽ। नदी के ऊपर डेहरी नाँव के जगह पर बंधा बनावल गइल बा आ इहाँ से सोन नहर निकालल गइल बा। एकरे सहायिका नदी सभ पर भी कई गो बंधा बनावल गइल बाड़ें। नदी पर कई गो पुल भी बाड़ें, एह नदी के निचला हिस्सा जे मैदानी हवे भरपूर आबादी वाला हवे।

सोन चाकर पाट वाली नदी हवे हालाँकि, साल भर एह में ओतना पानी के बहाव ना रहे ला, मानसून के सीजन में एह में भरपूर बाढ़ आवे ले आ ई एह पाट में आपन रस्ता बदलत रहे ले। सोन नदी के बालू खास पीयर भा नारंगी रंग के होला आ मोट दाना के होला। एकरा के पूरबी उत्तर प्रदेश आ पच्छिमी बिहार में ललकी बालू के नाँव से जानल जाला आ ई एह इलाका में दूर-दूर ले बिल्डिंग के ढलाई खाती ले जाइल जाला। नदी के महत्व एकरे ऊपरी थाला में बनल बंधा आ बिजली उत्पादन खाती बा, एकरे दक्खिनी हिस्सा में गोंडवाना सीरीज के चट्टान सभ में कोइला के खान भी पावल जालीं।

सोन के ऊपरी थाला बहुत प्राचीन जमाना से मनुष्य के आबादी वाला रहल हवे आ एह इलाका में पुरा-इतिहास काल के चीज खोदाई में मिलल बाड़ी स जिनहन से भारत के इतिहास के समझे में मदद मिले ला।




#Article 271: गोमती नदी (481 words)


गोमती नदी भारत में गंगा क एगो सहायक नदी बा। ई औड़िहार की लगे गंगाजी में मिलेले आ लखनऊ आ जौनपुर नियर शहर एकरी तीरे बसल बाटें। उत्तर प्रदेश के अधिकतर प्रमुख नदी सभ हिमालय से निकले लीं बाकी गोमती नदी पहाड़ी नदी ना हवे। ई उत्तर प्रदेश के तराई के इलाका में, पीलीभीत जिला में मौजूद गोमतताल नाँव के झील से निकसे ले। सई नदी एकर प्रमुख सहायिका नदी बा। नदी क कुल लंबाई लगभग 900 किलोमीटर बा आ गंगा में मिले के समय ई भरपूर चाकर पाट वाली नदी हो जाले।

हिंदू धर्म में एह नदी के महत्व बा आ पुराण में बर्णित कथा सभ के मोताबिक ई वशिष्ठ मुनि के बेटी हई। मानल जाला कि एकादशी के गोमती नदी में नहान करे से पाप के नाश हो जाला। एह नदी में एगो खास किसिम के घुँघुँची मिले ले जेकरा के गोमती चक्र कहल जाला। एकरे दुर्लभ होखे के कारण एकर तांत्रिक पूजा आ टोटका सभ में इस्तेमाल होला।

गोमती नदी पहाड़ के ग्लेशियर से ना निकसे ले। ई बरखा के पानी आ जमीनभीतरी पानी से निकसे ले आ गोमत नाँव के एगो ताल से एकर उद्गम होला जेकरा के पहिले फुलहार झील कहल जाय। ई ताल पीलीभीत जिला में माधो ताल के बगले में बाटे। इहाँ से निकल के गोमती नदी अपना पूरा लंबाई  भर उत्तर प्रदेश में बहे ले आ गाजीपुर जिला में सैदपुर आ औडिहार के लगे कैथी में गंगा में मिले ले।

गोमती अपना उदगम के  आगे बढ़े पर गैहाई नदी से मिले ले। गोमती एगो पातर धारा के रूप में बहे ले जबतक कि ई लखीमपुर खीरी जिला में मोहमदी खीरी ले ना चहुँप जाले (अपना उद्गम से करीबन 100 किलोमीटर), एहिजा के बाद एह में सुखेता, चोहा आ अन्हरा चोहा नियर सहायिका नदी आ के मिले लीं। एकरे बाद ई नदी पूरा तरीका से नदी के रूप धारण क लेले। मैलानी में कठिना आ सीतापुर जिला में सारयाँ नदी आ के एह में मिले लीं। सई नदी एकर सभसे लमहर सहायिका नदी हवे जे जौनपुर के लगे एह में आ के मिले ले।

अपना उद्गम से  ई नदी लखनऊ पहुँचे ले जे उत्तर प्रदेश के राजधानी हवे। एह शहर के किनारे ई नदी लगभग बारह किलोमीटर के दूरी तय करे ले आ करीब 25 नाला बिना सफाई के सीवर के पानी एह नदी में छोड़े लें। एह्करे बाद नदी पर एगो बैराज बना दिहल गइल बा जेकरे कारण ई एगो झील नियर हो गइल बा। 

लखनऊ के अलावा एह नदी के तीरे बसल शहर सभ में लखीम पुर खीरी, सुल्तानपुर, केराकत आ जौनपुर बाड़ें। सुल्तानपुर आ जौनपुर जिला के ई नदी बीच से बाँटत गुजरे ले। जौनपुर एगो इतिहासी शहर हवे आ इहाँ गोमती नदी पर बनल शाही पुल इतिहासी धरोहर के रूप में बा।

आगे जा के कैथी में जहाँ ई नदी गंगा में मिले ले एह संगम पर मार्कंडेय महादेव के मंदिर बा। ई हिंदू लोग खाती पवित्र तीरथ मानल जाला।




#Article 272: भारत की नदिन के लिस्ट (257 words)


नद्दी चाहे नदी, एगो प्राकृतिक धारा होले जेवना में मीठ पानी ढाल की अनुसार बहेला आ समुंद्र ले पहुँचले क कोशिश करेला जहाँ समुंद्र ले न पहुँच पावेला तहां कौनों झील में मिल जाला या फिन रेगिस्तान में धीरे-धीरे बिलुप्त हो जाला।

कौनों नदी में अगर दूसर नदी आ के मिलेले त ओह छोटकी नद्दी के सहायक नदी कहल जाला आ जेवना बड़की में ऊ मिलेले ओके मुख्य नदी एही तरीके से कौनों इलाका में नदिन क पुरा जाल फइलल रहेला।

ए पन्ना पर भारत की नदिन क एगो लिस्ट बनावल गइल बाटे जेवन सहायक नादिन की मिलला की तरीका की अनुसार बाटे। लिस्ट में मुहाना से उत्पत्ति स्थान या उद्गम की ओर की क्रम से नाँव लिखल जात बा। मने कि एह लिस्ट में कौनों मुख्य नदी की हेडिंग में जेतने नीचे नाँव होई ऊ नदी ओतने ऊपर की ओर मुख्य नदी में मिलत होई।

भारत का नद्दी कुल या त बंगाल क खाड़ी में गिरे लीं या पच्छिम की ओर अरब सागर में। एही से भूगोलीय रू से भी ई लिस्ट बंगाल की खाड़ी में गिरे वाली नदीन में उत्तर से दक्खिन ओर आ अरब सागर में गिरे वाली नादिन में दक्खिन से उत्तर ओर कि क्रम से बनावल जात बा। मने एगो माला नियर चलल जात बा- बंगाल से उड़ीसा, आंध्र, तमिलनाडु होत कन्याकुमारी ले आ फिर पच्छिमी तट की सहारे उत्तर मुहें केरल, गोवा महाराष्ट्र होत गुजरात ले।
 
भारत क बड़हन नद्दी हईं:

बाकी बचल नदिन में:

सुरमा-मेघना-बराक नदी पारिवार बांग्लादेश आ भारत में बाटे

Prasad Society, Tilak Road, Pune 411 030, INDIA




#Article 273: भारत क मुख्य नदी सभ (694 words)


Rivers of India play an important role in the lives of the Indians. They provide potable water, cheap transportation, electricity, and the livelihood for a large number of people all over the country. This easily explains why nearly all the major cities of भारत are located by the banks of rivers. The rivers also have an important role in Hindu Dharma and are considered holy by all Hindus in the country.

Seven major rivers along with their numerous tributaries make up the river system of India. The largest basin system of the rivers pour their waters into the Bay of Bengal; however, some of the rivers whose courses take them through the western part of the country and towards the east of the state of Himachal Pradesh empty into the Arabian Sea. Parts of Ladakh, northern parts of the Aravalli range and the arid parts of the Thar Desert have inland drainage.

All major rivers of India originate from one of the three main watersheds:

Known as Ganga-Satluj Ka Maidaan (गँगा सतलज का मैदान), this area is drained by 16 major rivers. The major Himalayan Rivers are the Indus, Ganges, and Brahmaputra. These rivers are long,and are joined by many large and important tributaries. Himalayan rivers have long courses from their source to sea.(in India Arabian sea and Bay of Bengal)

The major rivers in this system are (in order of merging, from west to east)

Before entering Bangladesh, Ganga leaves a distributary Hugli, which provides water for irrigation in West Bengal

The Indus River originates in  the northern slopes of the Kailash range near Lake Mansarovar in Tibet. Although most of the river's course runs through neighbouring Pakistan, as per as regulation of Indus water treaty of 1960, India can only use only 20 percent of the water in this river. A portion of it does run through Indian territory, as do parts of the courses of its five major tributaries, listed below. These tributaries are the source of the name of the Punjab of South Asia; the name is derived from the punch (five) and aab (water), hence the combination of the words (Punjab) means land with the water of five rivers. The Indus is 3200 km long.

The major rivers in Indus river system are (in order of their length):

India experiences an average precipitation of 1,170 mm per year, or about 4,000 km3 of rains annually. Some 80% of its area experiences rains of 750 mm or more a year. However, this rain is not uniform in time or geography. Most of the rains occur during its monsoon seasons (June to September), with the northeast and north receiving far more rains than India's west and south. Other than rains, the melting of snow year round over the Himalayas feeds the northern rivers to varying degrees. The southern rivers, however experience more flow variability over the year. For the Himalayan basin, this leads to flooding in some months and water scarcity in others. Despite extensive river system, safe clean drinking water as well as irrigation water supplies for sustainable agriculture are in shortage across India, in part because it has, as yet, harnessed a small fraction of its available and recoverable surface water resource. India harnessed 761 km3 (20%) of its water resources in 2010, part of which came from unsustainable use of groundwater. Of the water it withdrew from its rivers and groundwater wells, India dedicated about 688 km3 to irrigation, 56 km3 to municipal and drinking water applications and 17 km3 to industry.

According to 2011 report of the Food and Agriculture Organization of the United Nations, India's basin wise distribution of catchment area and utilizable surface water resources is presented in the following table:

The main water divide in peninsular rivers is formed by the Western Ghats, which run from north to south close to the western coast. Most of the major rivers of the peninsula such as the Mahanadi, the Godavari, the Krishna and the Kaveri flow eastwards and drain into the Bay of Bengal. These rivers make delta at their mouth. The Narmada and Tapti are the only long rivers, which flow west and make estuaries.




#Article 274: नदी थाला (237 words)


नदी थाला, जलनिकास थाला चाहे नदी बेसिन ओ सारा एरिया के कहल जाला जेवना क पानी बहि के कौनों एगो नदी द्वारा निकले ला। एह में मुख्य नदी, ओकर सगरी सहायिका नदी आ सगरी एरिया शामिल होला जहाँ तक ले के पानी बह के मुख्य नदी द्वारा समुंद्र या झील में गिरत होखे। मुख्य नदी के बड़हन सहायिका सभ के बेसिन के उपबेसिन (सबबेसिन) कहल जाला आ शाखा-प्रशाखा सभ के एह किसिम के उपबेसिन सभ के क्रम तय (ऑर्डरिंग) कइल जा सके ला।

अंगरेजी में एकरा के ड्रेनेज बेसिन कहल जाला। कौनों ड्रेनेज बेसिन के सीमा तय करे वाला रेखा, जे अक्सर ऊँच हिस्सा सभ के सहारे आ पहाड़ी चोटी सभ के सहारे गुजरे ले, ओकरा के वाटर-डिवाइड कहल जाला। एकरे अलावा नदी थाला के वाटरशेड आ कैचमेंट एरिया भी कहल जाला। एही से मिलत-जुलत शब्द नहर खाती इस्तेमाल होला, नहर के पानी जेतना एरिया के सिंचनी करत होखे ऊ सगरी एरिया नहर के कमांड एरिया कहाला।

नदी थाला के भूआकृति, सहायिका सभ के जाल इत्यादि सभ मिल के ड्रेनेज सिस्टम के नाँव से जानल जालें। नदिन के आपस में जुड़ाव से बने वाली आकृति सभ भी हर इलाका में एक समान ना होखे लीं, अलग-अलग एह पैटर्न सभ के ड्रेनेज पैटर्न के रूप में पहिचानल जाला।

नदी थाला के पर्यावरण बिज्ञान, इकोलाजी के अध्ययन आ मैनेजमेंट इत्यादि में अक्सर एगो प्राकृतिक इकाई (नैचुरल यूनिट) के रूप में बीछ के अध्ययन, प्लानिंग आ मैनेजमेंट इत्यादि कइल जाला।




#Article 275: सुरेन्द्र मोहन पाठक (160 words)


सुरेन्द्र मोहन पाठक (जनम 19 फरवरी 1940) हिंदी-भाषा के लेखक आ उपन्यासकार बाड़ें। साठ के दशक से लगातार लेखन में सक्रिय पाठक अभिन तक लेखन के काम क रहल बाड़ें आ अबतक ले लगभग तीन सौ उपन्यास लिख चुकल बाड़ें। इनके पहिली रचना सत्तावन साल पुराना आदमी (1958) मनोहर कहानियाँ में छपल रहे, एकरे बाद से लगातार इनके उपन्यास बिबिध पाकेट बुक्स प्रकाशकन द्वारा छपत रहलें, अब इनके हिंदी उपन्यास हार्पर नियर इंटरनेशनल प्रकाशन से भी छप चुकल बा आ इनका के हिंदी पल्प फिक्शन (लुगदी साहित्य) के नमर एक के लेखक मानल जाला। इनके रचित पात्र: सुनील, विमल आ सुधीर कोहली इत्यादि के सीरीज वाला उपन्यास सभ के काफी माँग रहे ला। साल 2014 में छपल इनके उपन्यास कोलाबा कॉन्सपिरेसी के अमेजन.कॉम पर हिंदी के सभसे पापुलर किताब के दर्जा मिलल रहल। साल 2017 में इनके आपन आत्मकथा लिखे के ख़बर आइलआ 2018 के सुरुआत में ई न बैरी न कोई बेगाना नाँव से वेस्टलैंड बुक्स प्रकाशन से छपल।




#Article 276: नालंदा (156 words)


नालंदा बिहार में राजगीर की लगे एगो अस्थान बा जवन इतिहास में एगो बहुत बड़हन विश्वविद्यालय आ बौद्ध विहार रहे। आजकाल की समय में ईहाँ पुरान अवषेशन क खनाई भइल बा आ ई एगो पर्यटन क अस्थान बन चुकल बा।

एकरी इतिहास के बतावे वाला संग्रहालय आ अइसने कुल चीज इहाँ बन चुकल बा।

नालंदा विश्विद्यालय पुराना समय में एगो बहुत बड़हन आ विश्वप्रसिद्ध विश्वविद्यालय रहे जेवना क खण्डहर आ अवशेष वर्तमान नालंदा नाँव की अस्थान पर बाटे। ई एगो बहुत बड़ा बौद्ध विहार रहे आ बौद्ध दर्शन की पढ़ाई क पूरा बिस्व में एगो महत्वपूर्ण केन्द्र रहे। ई पाँचवी सदी इसवी से ले के 1197 ले शिक्षा क एगो अगुवा संस्थान रहल आ एकर धाक बहुत दूर-दूर ले रहे।

भारत सरकार कई दूसरी देसन की सरकारण की संघे मिल के ए उजर-पजर गइल विश्विद्यालय की सम्मान में नालंदा विश्वविद्यालय कि नाँव से एगो नया विश्विद्यालय खोललस हवे जेवना में 2014 से पढ़ाई शुरू भइल हवे।




#Article 277: यूरोप के देस सभ के लिस्ट (113 words)


नीचे यूरोप की सगरी देशन क एगो सूची बनावल जात बा:

The following six entities in Europe have partial diplomatic recognition by one or more UN member states (and therefore are defined as states by the constitutive theory of statehood) or have no diplomatic recognition by any UN member state but are defined as states by the declarative theory of statehood and are recognised by one or more Non-UN member states. None are members of the UN, Council of Europe or EU.

The following six European entities are dependent territories.

The following places are considered integral parts of their controlling state, but have a political arrangement which was decided through an international agreement.




#Article 278: प्रायदीप (100 words)


प्रायदीप या प्रायद्वीप जमीन क अइसन बड़हन हिस्सा होला जेवन तीन ओर से समुन्द्र से घेराइल होला। ई अंतरीप से अलग होला जेवन छोट आ पातर जमीनी हिस्सा होला आ समुन्द्र में दूर ले घुसल होला। हालांकि कुछ परिभाषा में एम्मे अंतरीप, स्पिट आ जमीन से जुडल दीप वगैरह के भी प्रायदीप मान लिहल जाला।

उदाहरण खातिर भारत क दक्खिनी पठार वाला हिस्सा एगो प्रायदीप हवे जेवना की पच्छिम ओर अरब सागर, पुरुब ओर बंगाल क खाड़ी आ दक्खिन ओर हिन्द महासागर बाटे। एही तरे यूरोप महादीप के भी एगो बड़ा प्रायदीप मानल जाला आ प्रायदीपन क प्रायदीप कहल जाला।




#Article 279: दक्खिन अमेरिका के भूगोल (346 words)


दक्खिन अमेरिका भूगोलीय हिसाब से नई दुनिया (दुनों अमेरिका महादीप) कऽ एगो महादीप हवे आ एकरे भूगोल में बिबिध प्रकार के क्षेत्र आ जलवायु वाला इलाका सामिल बाने। हालाँकि, दुनों अमेरिका महादीप पनामा थलजोड़ से जुड़ल हवें आ पनामा नहर से अलग होखे लें, ई दक्खिनी महादीप परंपरागत रूप से अलगा से एगो महादीप मानल जाला आ कभी-काल्ह के इनहन के एक्के सुपरमहादीप के रूप में भी देखल जाला आ अंगरेजी में अमेरिकाज़ कहि के बोलावल जाला। राजनीतिक सीमा के आधार पर पनामा–कोलंबिया के बाडर के एह दुनों महादीप सभ के बीचा के बिभाजक मानल जाला।

दक्खिन अमेरिका के उत्तर अमेरिका से जुड़ाव करीबन 30 लाख बरिस पहिले, पनामा के थलजोड़ (इस्थमस ऑफ पनामा) के बने से भइल। एकरे बाद भइल भूबिग्यानी इतिहास के घटना के ग्रेट अमेरिकन इंटरचेंज के नाँव से जानल जाला। एंडीज, जे एगो नया आ अभिन ले हलचल से गुजरे वाला परबत श्रेणी बा, एह महादीप के पच्छिमी किनारे के रूप में स्थित बा; उत्तरी एंडीज के पुरुब ओर बिसाल इलाका बा जे भूमध्य रेखीय बरखा बन वाला इलाका हवे आ अमेजन बेसिन के नाँव से जानल जाला। एह महादीप पर पेटागोनिया के पठार आ अटाकामा के रेगिस्तान नियर सूखा इलाका भी बाने अउरी लानोज, कैंपोज आ पंपाज के घास के मैदान बाड़ें।

एह महादीप के अंतर्गत कई ठे दीपसभ भी आवे लें जे अलग-अलग देस सभ के द्वारा शासित बाड़ें सऽ। एकरे उत्तर में कैरिबीयन दीप सभ के आमतौर पर उत्तर अमेरिका के साथे शामिल कइल जाला। हालाँकि, एह सागर के किनारे मौजूद जवन देस सभ दक्खिन अमेरिका में बाड़ें उनहन में कोलंबिया, वेनेजुएला, गयाना, सूरीनाम, आ फ्रेंच गयाना सभ के कैरेबियन दक्खिन अमेरिका के उपनाँव से भी जानल जाला।

रकबा आ जनसंख्या दुनों के हिसाब से ब्राजील देस एह महादीप के सभसे बड़हन देस बा। ओहिजे अर्जेंटीना इहाँ के सभसे ढेर शहरीकरण वाला देस बा। एह महादीप के उपबिभाग सभ में एंडीज परबत के सहारे एंडीयन स्टेट्स, कैरीबियन सागर के सहारे कैरीबियन स्टेट्स, आ दक्खिनी नोकदार हिस्सा में सदर्न कोन स्टेट्स के नाँव से भी जानल जाला। महादीप के देस आ राज्यक्षेत्र सभ के लिस्ट नीचे दिहल जा रहल बा:




#Article 280: सूरीनाम (286 words)


सूरीनाम (अंगरेजी: Suriname;  भा ) जेकर ऑफिशियल नाँव सूरीनाम रिपब्लिक बा, दक्खिन अमेरिका महादीप में, अटलांटिक किनारे पर एगो आजाद आ संप्रभु देस बा। सूरीनाम के उत्तरी सीमा अटलांटिक महासागर से, पूरुब ओर फ्रांस (फ्रेंच गयाना से) के साथे, दक्खिन में ब्राजील के साथे आ पच्छिम में गयाना के साथे बने ला। एकर कुल रकबा लगभग , बा आ ई दक्खिन अमेरिका महादीप के सबसे छोट देस हवे। सूरीनाम के जनसंख्या , जेह में से ज्यादातर आबादी उत्तरी किनारा पर आ सभसे बड़ शहर आ राजधानी पारामारिबो में रहे ले।

सूरीनाम में बिबिध मूलनिवासी लोग रहत रहे जबकि सोलहवीं सदी में यूरोपीयन लोग इहाँ पहुँचल आ अंत में ई 17वीं-सदी में डच लोग के कब्जा में आइल। डच उपनिवेश के दौर में, इहाँ मुख्य रूप से प्लांटेशन के अर्थब्यवस्था रहे आ अफिरका आ भारत के दास लोग पर आधारित रहल। साल 1954 में, ई किंगडम ऑफ नीदरलैंड के हिस्सा के रूप में अस्थापित भइल। 25 नवंबर 1975 ई राजनीतिक रूप से आजाद भ गइल, हलाँकि, बहुत नजदीकी आर्थिक, डिप्लोमैटिक आ सासंकृतिक जुड़ाव अबहिन भी एकर नीदरलैंड के साथे बा।

सांस्कृतिक रूप से सूरीनाम के कैरेबियन देस मानल जाला आ ई कैरेबियन कम्युनिटी (CARICOM) के हिस्सा भी बा। इहाँ के ऑफिशियल भाषा डच हवे जबकि सरनाम नाँव के अंगरेजी आधारित क्रियोल भाषा ब्यापक रूप से बोलचाल आ संपर्क खाती इस्तेमाल  होखे ले। सरकारी, पढाई आ बिजनेस अउरी मीडिया इत्यादि में ऑफिशियल भाषा डच के इस्तेमाल होला सूरीनाम एकलौता अइसन देस बा जहां यूरोप से बहरें डच भाषा ब्यापक रूप से चलन में बा। उपनिवेशी शासन आ इतिहास के चलते सूरीनाम के जनसंख्या में नृजातीय बिबिधता बहुत बा आ इहाँ कई धार्मिक आ भाषाई समूह मिले लें। भोजपुरी आधारित बोली इहाँ सरनामी हिंदुस्तानी के नाँव से बोलल जाले।




#Article 281: रामदरश मिश्र (112 words)


रामदरश मिश्र (जनम: 15 अगस्त 1924, ग्राम डुमरी, जिला गोरखपुर) हिंदी आउर भोजपुरी साहित्य में नवगीत, कविता, ललित निबंध आउर आलोचना लिखे खातिन जानल जाने। गद्य आउर पद्य के समस्त विधा में इनकर हस्तक्षेप बाटे। इनकर शिक्षा पहिले गांव म भइल फिर प्रयाग म। इनका के हिंदी आलोचना के स्तंभ के रूप में जानल जाला। आंचलिक जीवन पर 'जल टूटता हुआ' जइसन सफल उपन्यास इनकर साहित्यिक जीवन के अमूल्य धरोहर मानल जाला। 'बैरंग-बेनाम चिट्ठियाँ', 'पक गयी है धूप', 'कंधे पर सूरज', 'दिन एक नदी बन गया', 'जुलूस कहां जा रहा है', 'आग कुछ नहीं बोलती', 'बारिश में भीगते बच्चे', 'हंसी ओठ पर आँखें नम हैं' आदि इनकर अन्य प्रमुख साहित्यिक कृति बाटे।




#Article 282: अक्षांश (283 words)


भूगोल में, अक्षांश (Latitude-लैटिट्यूड) पृथ्वी के सतह पर मौजूद कौनों बिंदु (जगह) के भूमध्य रेखा से उत्तर भा दक्खिन ओर लोकेशन बतावे वाला कोणीय माप हवे, ई पृथ्वी पर जगह सभ के सटीक लोकेशन निश्चित करे खातिर बनावल तरीका भूगोलीय निर्देशांक सिस्टम क हिस्सा हवे। भूमध्य रेखा के तल, से ऊपर-नीचे, वर्टिकल प्लेन पर, अक्षांश के कोण नापल जाला, एह तरह से, भूमध्यरेखा के अक्षांसी मान सुन्य अंश आ दुनों ध्रुव के मान 90° होला। बाकी सभ जगहन के अक्षांश 0° से 90° की बिच में होला आ एकर उत्तरी भा दक्खिनी गोलार्ध में स्थिति बतावे बदे उत्तर या दक्खिन लिखल जाला, या शार्ट फ़ार्म में N भा S लिखल जाला।

एकही अक्षांसी मान वाला जगह सभ के मिलावे वाली लाइन के कल्पना कइल जाव त ई सगरी ग्लोब पर वृत्त (सर्किल) के रूप में खींचल जा सके लीं जवन की भूमध्य रेखा के समानांतर होखे लीं, इनहन के समानांतर रेखा कहल जाला। भूमध्य रेखा खुद एगो बड़ा वृत्त होला जबकि बाकी अक्षांसन के समानंतर रेखा सभ छोटहन वृत्त होलीं आ दुनों ध्रुव बिंदु के रूप में होलें। एह तरीका से ग्लोब पर, 0° के इंटरवल पर कुल 179 समानांतर रेखा खींचल जालीं।

अक्षांश के साथ देशांतर के मान बता के कौनों अस्थान क सटीक लोकेशन बतावल जा सकेला। अक्षांस-देशांतर के एक जोड़ा, निर्देशांक भा भूगोलीय निर्देशांक होला। अक्षांस सभ के समानांतर रेखा आ देशांतर सभ के मेरिडियन सभ के जाल के ग्रैटीक्यूल कहल जाला।

जबले स्पष्ट रूप से पूरा नाँव न बतावल जाय, अक्षांस शब्द से मतलब जियोडेटिक अक्षांस से होला। एकरे अलावा, छह प्रकार के सहजोगी अक्षांस (ऑक्जिलरी लैटिट्यूड) भी होखे लें - ऑथेलिक अक्षांस, समरूपी (कॉनफॉर्मल) अक्षांश, भूकेंद्रित अक्षांस, आइसोमीट्रिक अक्षांस, पैरामीट्रिक अक्षांस (भा रिड्यूस्ड अक्षांस), आ रेक्टिफाइंग अक्षांस आ।




#Article 283: कृष्णदेव उपाध्याय (186 words)


डॉ॰ कृष्णदेव उपाध्याय (जनम: 1910, सोनबरसा, बलियाँ - ) हिंदी के आचार्य आ भोजपुरी भाषा आ भोजपुरी लोक साहित्य कऽ बिद्वान रहलें। उनके भोजपुरी लोकगीत आ लोक साहित्य के क्षेत्र में रिसर्च आ लेखन खातिर जानल जाला।

उपधिया के जनम 1910 में, भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के बलियाँ जिला के सोनबरसा नाँव के गाँव में भइल। इनके सुरुआती पढ़ाई गाँव में भइल, माध्यमिक शिक्षा बलियाँ में आ उच्च शिक्षा काशी विश्वविद्यालय, बनारस से।

उपधिया जी, हिंदी आ संस्कृत में एम॰ए॰ रहलें आ भोजपुरी लोकगीतन पर आपन थीसिस लिख के पीएचडी के डिग्री लिहलें।

काफी समय ले ई ज्ञानपुर में हिंदी के अध्यापक रहलें आ बाद में काशी विश्वविद्यालय में यूजीसी के प्रोफेसर रहलें। बाद में इलाहाबाद जा के रहे लगलें। तीन बेर यूरोप के जात्रा कइलेन।

इनकर बड़ भाई बलदेव उपधिया भी संस्कृत के नामी बिद्वान रहल बाने।

कृष्णदेव उपधिया के पीएचडी के थीसीस साहित्य सम्मेलन, प्रयाग से छपल। लोक साहित्य आ भोजपुरी के क्षेत्र में आजीव काम क के उपधिया कई ठे पुस्तक छपववलें।

एकरे अलावा ऊ लोक संस्कृति से जुड़ल अध्ययन आ रिसर्च खातिर बनारस में भारतीय लोक-संस्कृति-शोध-संस्थान के स्थापना आ संचालन भी कइलेन। 




#Article 284: बलदेव उपाध्याय (117 words)


बलदेव उपाध्याय (10 अक्टूबर 1899 - 10 अगस्त 1999) संस्कृत आ दर्शन के बिद्वान आ लेखक रहलें। इनके जनम बलिया जिला के सोनबरसा गाँव में भइल आ पढ़ाई बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से। इनके लिखल कइयन ठे किताब बाड़ी आ खासतौर प इनके संस्कृत साहित्य, संस्कृत साहित्य के इतिहास, भारतीय दर्शन इत्यादि बिसय प हिंदी भाषा में किताब लिखे खाती जानल जाला, जबकि इनका से पहिले अइसन किताब या त अंगरेजी भा जर्मन भाषा में लिखल गइल रहली स या फिर सीधे संस्कृते में रहली सऽ। इनकर छोट भाई कृष्णदेव उपाध्याय भोजपुरी भाषा के साहित्य आ लोक साहित्य प काम करे खाती जानल जालें।

बलदेव उपधिया के साल 1984 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण सम्मान दिहल गइल।




#Article 285: दसखत (115 words)


दसखत भा दस्खत केहू क व्यक्तिगत पहिचान के साबित करेवाला, ओह व्यक्ति की खुद की हाथ से लिखल एगो बिसेस निशान होला ( जेवन ओ व्यक्ति क नांव हो सकेला या नांव की कुछ अक्षरन से बनल हो सकेला) आ एसे ई साबित होला की ऊ बेकति खुद एह दस्खत की निशान से ऊपर लिखल बात के परमान देता।
 
दसखत भा दस्खत उर्दू की दस्तख़त शब्द क भोजपुरी रूप हवे। हिंदी में दस्खत के हस्ताक्षर आ अंगरेजी में सिग्नेचर (Signature) या साइन (Sign) कहल जाला।

दस्खत केहू क एगो अलग पहिचान होला आ एकर नक़ल ना उतारल जा सकेला। कौनों कागज पर केहू दूसरा क दसखत कइल धोखाधड़ी हवे आ ई अपराध भी मानल जाला।




#Article 286: लइका (186 words)


लइका भा लरिका या लड़िका, कम उमिर की नर मनुष्य के कहल जाला। ई शब्द छोट बालक खाती भी इस्तेमाल हो सके ला आ जवान होखे से ठीक पहिले के नौछेड़ उमिर के पुरुष खाती भी इस्तेमाल होला। शारीरिक रूप से लइका आ लइकी के बीचा में अंतर सेक्स संबंधी अंग के अंतर होखे ला; हालाँकि, जादेतर संस्कृति में बचपन से पहिनावा आ बार के इस्टाइल इत्यादि के चलते ऊपरी पहिचान भी लइका आ लइकी में अंतर करे खाती इस्तेमाल हो सके ला।

नर आ मादा के बीच के लिंग वाला लोग, हिजड़ा लोग, में आमतौर पर कम उमिर में ई भेद अस्थापित कइल मुश्किल होला आ आमतौर पर मादा गुण वाला हिजड़ा (हिजड़ी) लोग के एह उमिर में गलती से लइका बूझल जा सके ला।

एह तरीका से ई शब्द कम उमिर वाला मनुष्य खाती जीवीय रूप से नर-मादा के भेद करे के साथे साथ सांस्कृतिक रूप से एह लोग में भेद करे खाती इस्तेमाल होखे ला। एकरे अलावा एकर अउरी कई किसिम के इस्तेमाल भी हो सके ला – जइसे कि कम अनुभाव के बतावे खाती, सरल बुद्धी वाला होखे के बतावे खाती इत्यादि।




#Article 287: डब्नियम (180 words)


डब्नियम (; अमेरिकी उच्चारण डूब्नियम) एगो सिंथेटिक रासायनिक तत्व हवे। एकर मतलब ई कि एकरा के प्रकृति में अपने आप ना पावल जाला, प्रयोगशाला (लैब) में बनावल जा सके ला। एकर रासायनिक चीन्हा Db हवे।

डब्नियम बहुते रेडियोएक्टिव तत्व हवे आ एकरे सभसे स्थाई आइसोटोप, डब्नियम-268 (268Db) के हाफ-लाइफ बस 28 घंटा के होखे ला। एही कारण एकर गुण आ लच्छन सभ के अध्ययन मुश्किल काम बाटे।

एह तत्व के पहिली बेर खोज के दावा रूसी बैज्ञानिक लोग द्वारा कइल गइल, ज्वाइंट इंस्टीटयूट फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (JINR) 1968 में एकरे खोजे के दावा प्रस्तुत कइलस, एकरे बाद लारेंस बर्कले लैबोरेट्री में अमेरिकन टीम एकरे खोजल जाए के दावा 1970 में कइलस। दूनों टीम एकरे खोज पर आपन-आपन दावा करें आ बिना कौनों औपचारिक मान्यता के आपन आपन दिहल नाँव के इस्तेमाल करें। अंत में 1993 में एगो ऑफिशियल इन्वेस्टिगेशन में IUPAC/IUPAP ज्वाइंट वर्किंग पार्टी एह खोज के श्रेय दुनों टीम के देवे के स्वीकार कइलस। एह तत्व के वर्तमान नाँव डब्नियम (dubnium) साल 1997 में डब्ना (Dubna) क़स्बा के नाँव पर रखल गइल जे रूसी लैब JINR के अस्थान रहल।




#Article 288: गौरीगंज, नेपाल (129 words)


गौरीगंज गाँवपालिका नेपाल के प्रदेश संख्या 1 के झापा जिला में एगो गाँवपालिका बा। नेपाल में नाया 744 स्थानीय प्रशासनिक इकाई लागू भइला के बाद से पुरनका समय के गौरीगंज, महाभारा, कोरोबारी आ खजुरगाछी गाँव बिकास समीति (गाविस) सभ के मिला दिहल गइल आ एह गाँवपालिका के स्थापना भइल। एह गाँवपालिका के अब कुल 6 वार्ड में बाँटल गइल बा। गाँवपालिका के कुल जनसंख्या 33,038 बा आ कुल रकबा 101.35 वर्ग किलोमीटर बाटे।

साल 2017 में नेपाली इलेक्शन के समय भइल जनगणना के अनुमान अनुसार एह गाँवपालिका के कुल जनसंख्या 33,038 रहल आ कुल रकबा 101.35 वर्ग किलोमीटर रहल।

गौरीगंज गाँवपालिका के निर्माण से पहिले ई इलाका कई गो गाविस सभ में बिभाजित रहल जिनहन के आपस में बिलय क के ई गाँवपालिका बनावल गइल। ई गाविस सभ बा:




#Article 289: जंतु बिज्ञान (135 words)


जंतु बिज्ञान या प्राणी बिज्ञान जीव बिज्ञान क एगो शाखा हवे जेवन जंतु जगत के सगरी जीवधारी सभ, मने कि जानवरन के जीवन के अध्ययन करे ला। एह अध्ययन में जानवर सभ के शरीर के संरचना (स्ट्रक्चर), भ्रूणबिज्ञान (एंब्रियोलॉजी), क्रमबिकास, बर्गीकरण, आदत, आ बिस्व में बितरण इत्यादि सामिल बाड़ें आ अइसन खाली जिंदा जानवरन खाती ना बलुक ओह जानवरन के बारे में भी अध्ययन होला जे बिलुप्त हो चुकल बाड़ें। एह में इहो अध्ययन कइल जाला कि जानवर सभ अपना इकोसिस्टम से कवना तरीका से क्रिया-अंतरक्रिया करे लें।

एकरे बिपरीत पौधा जगत के अध्ययन बनस्पति बिज्ञान नाँव के शाखा में होला आ ई दुनों जीव बिज्ञान के सभसे प्रमुख दू गो बिभाजन के रूप में अस्थापित शाखा बाड़ी सऽ।

जंतु बिज्ञान भा प्राणी बिज्ञान के एह बिसय के कई गो शाखा आ उपशाखा बाड़ी स:




#Article 290: सीजन (236 words)


सीजन (हिंदी/संस्कृत: ऋतु) मौसम में होखे वाला बदलाव की आधार पर साल क बिभाजन होला। कौनों जगह की मौसम होखे वाला बदलाव जवन हर साल, साल की अलग-अलग हिस्सा में, एगो निश्चित क्रम में होला ओही की आधार पर एक बरिस के अलग-अलग सीजन में बाँट दिहल जाला। भारत में अधिकतर हिस्सा में तीन गो मुख्य सीजन होला गर्मी, जाड़ा आ बरसात।

पुरान भारतीय हिसाब से इहाँ साल के छह गो ऋतु में बाँटल जाला - बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत आ शिषिर (या शीत)। बाकी ई जगह की भूगोलीय स्थिति पर निर्भर बाटे, बहुत जगह ख़ाली दू गो सीजन होला जाड़ा आ बसंत। जबकि कुछ जगहन पर साल भर एक्के नियर मौसम रहेला आ कौनों सीजन ना पावल जाला।

मौसम में सीजन की अनुसार बदलाव क मुख्य कारण पृथ्वी क अपनी धुरी पर झुकाव आ साल भर में सुरुज क चक्कर लगावत घरी ए झुकाव की दिशा क सुरुज से संबंध बाटे। साल की जेवना हिस्सा में उत्तरी गोलार्ध सुरुज की ओर झुकल रहेला, इहाँ गर्मी या बसंत क सीजन होला। जब उत्तरी गोलार्ध क झुकाव सुरुज की सम्मुख ना होके, एकरी बिपरीत होला, तब इहाँ जाड़ा क सीजन हो जाला।

एकरी ठीक बिपरीत, जब उत्तरी गोलार्ध में गर्मीं होला तब दक्खिनी गोलार्ध में जाड़ा क सीजन होला।

दक्खिनी एशिया, यानी भारत के आसपास के इलाका में, साल के छह गो ऋतु में बाँटे के परंपरा हवे। एकर एगो आसान बिबरन नीचे दिहल जात बा:




#Article 291: बूँट (390 words)


बूँट चाहे चाना (अंग्रेज़ी: ) एगो सब्जी हवे।
भोजपुरी  में बूंट के अन्न के राजा मानल गईल बा | एह अन्न के खेती कार्तिक महीना में बो के चैत्र तक काट लिहल जाला।  एकर पौधा 2 से 2.5 फुट के उचाई तक होला एकर पत्ता एकदम छोट ,खाए में नुन्छाह लागेला| एक पौधा में 1 से 5 किलो बूंट फरेला एकर फूल छोट छोट  बैगनी रंग के होला बूंट के खेत देखे में बहुत सुन्दर लागेला | एकरा के हिंदी में चना अंगरेजी में gram अथवा chickpea  कहल जाला | भौगोलिकता जलवायु आ माटी के असर के कारन एकर रंग आकर स्वाद अलग अलग बदल जाला |

प्रयोग

बूंट के बहरूपिया बह्गुनिया अन्न के उपाधि प्राप्त बा कबिबर तेज नारायण पाण्डेय जी बूंट के बारे में लिखत बानी :-

जैसे चाहे वैसे भावे बूंट सुरतिया मनके |

थकल किशान के राहत देवे सवाद चटकार राजन के ||

कांचे फांक भूंजी चबाव चाहे खा तू तलके | 

चीखना के अनमोल खज़ाना स्वस्थ रखेला तन के ||    

बूंट के जमते 4 हफ्ता के बाद से एकर प्रयोग शुरू  हो जाला एकरा छोट छोट फुनगी के खोंट के रामरस (नून) जंवाईंन  के संगे  कांचे खाइल  जाला एकरा के आगि प पका के भी खाइल जाला ई बहुत सुलभ आ स्वास्थ्य बर्धक होला एकरा के सागी  कहल जाला बूंट के थान फुलाए तक सागी के रूप में प्रयोग कइल जाला।  लगभग 25 दिन बाद से एकरा में ढेंढी लाग जाला एह  समय में कमजोर ढेंढी वाला पौधा के खेत से छांट के अलग कर लिहल जाला आ सुखल पतई बटोर के लहरा के बूंट के थान लहर प सेंकी के खाइल जाला एकरा के होरहा कहल जाला होरहा के प्रयोग पहिला हाली  लगभग फाल्गुन महीना के अंत में होला ओकरा बाद ढेंढी पाके शुरू हो जाला 20-25 दिन में ढेंढी पक्ला के बाद फसल काट लिहल जाला कटला बाद बैल से अथवा आधुनिक मशीन से दँवरी करके अन्न आ भूसा के अलग कर लिहल जाला

चना अऊर चना के दाल न खाली स्वास्थ्य और सौंदर्य में लाभकारी होत हय बल्कि बहुत कुल  रोग के ठीक करय में मदद करत हय।
एहमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नमी, चिकनाई, रेशे, केल्शियम, आयरन व विटामिन्स पाय जात हय।
कब्ज, डायबिटिज अऊर पीलिया जइसन रोग में बड़ा फायदा करत हय।
चना हमन लोग के शरीर में प्रोटीन के आपूर्ति करत हय एहि खातिर एके प्रोटीन के राजा कहा जात हय।




#Article 292: झील (633 words)


झील चाहे ताल चारो ओर से जमीन से घेराइल पानी के भंडार होला, जमीन के निचाई वाला एरिया जहाँ पानी के ठहराव होखे, जे एह में आ के जुड़े वाली भा एकर पानी बहा के ले जाए वाली जलधारा (नद्दी) के अलावा पानी के ठहरल भंडार होखे। झील जमीन के थलरूप हवे, मने कि, ई जमीनी सतह के हिस्सा होला आ समुंद्र से अलग होला आ लैगून से अलगा बूझल जाला; ई तालाब आ पोखरा से अलगा, बड़ आ गहिरा होला। नदी भा जलधारा से झील अलग होले काहें कि उनहन में पानी के बहाव होला जबकि झील के पानी थिराइल रहे ला; ज्यादातर झील सभ में पानी नद्दी द्वारा आ सके ला आ बाहरो निकल सकत हो सके ला। झील मीठ पानी क भंडार भी हो सकेला आ नमकीन पानी क भी; ई प्राकृतिक भी हो सकेला या मनुष्य के बनावल भी।

प्राकृतिक झील सभ बेसी कइ के पहाड़ी इलाका, रिफ्ट घाटी वाला इलाका आ ग्लेशियर वाला इलाका सभ में पावल जालीं। अन्य झील सभ अइसन इलाका में पावल जालीं जहाँ जमीन के ढाल अइसन होखे कि अंदरूनी बहाव सिस्टम बन गइल होखे, पानी समुंद्र ने ना पहुँचे बलुक कौनों निचाई के इलाका में एकट्ठा होखे आ झील के रूप में रुक जाय। पुरान आ प्रौढ़ हो चुकल नदी सभ के बहाव के रास्ता में भी झील के निर्माण देखे के मिले ला। भूबैज्ञानिक टाइम पैमाना पर देखल जाव तब सगरी झील टेम्परेरी घटना होखे लीं जे कबो न कबो भरा जइहें।

बहुत सारा झील सभ आदमी के बनावल बंधा द्वारा बनल हो सके लीं जे उद्योग में भा पनबिजली बनावे इत्यादि खातिर बनावल गइल हो सके लीं। सिंचाई, सुंदरता, पर्यटन इत्यादि खातिर भी मनुष्य आर्टीफिशियल झील बना सके ला।

झील आ पोखरा-गड़ही में अंतर करे के कौनों इंटरनेशनल स्वीकार कइल पैमाना नइखे आ अकसर ई भरम के स्थिति बनल रहे ला। उदाहरण खातिर, लिम्नोलॉजी में सहज परिभाषा ई दिहल जाले की झील तलाब-पोखरा के बड़हन वर्जन होला जे अतना बड़ होखे कि ओह में लहर उठे आ किनारे पर अइसन लहर से कटाव हो सके। हालाँकि, एह परिभाषा से पोखरा-तलाब के पूरा तरीका से बाहर ना कइल जा सके ला काहें कि ई घटना पोखरा-तलाब में भी होला आ एकरा के नापजोख कइल बहुत मुश्किल काम बाटे। एही कारन कई बेर साइज के आधार पर झील के परिभाषा देवे के कोसिस कइल जाला। साइज के आधार पर  से ले के  तक के साइज के कम-से-कम साइज मानल जाला जेकरा से बड़ साइज वाला जलभंडार के झील कहल जा सके। इकोलाजी के संस्थापक बैज्ञानिक चार्ल्स एल्टन  या एकरा से बड़ साइज के जलभंडार के झील मानें।

झील शब्द के इस्तेमाल अइसन निचाई वाला इलाका के भी कहल जा सके ला जे साल के ज्यादातर हिस्सा में सूखल रहे बाकी कुछ समय खातिर कौनों सीजन में एह में पानी भरा जात होखे। जैसे कि आयर झील। एही तरह से नाँव में भी काफी भरम के स्थिति रहे ला। अंग्रेजी में बहुत सारा झील सभ के परंपरागत नाँव में pond जुड़ल हो सके ला जबकि बहुत सारा तलाब सभ के नाँव में lake जुड़ल हो सके ला। एगो किताब में इहो देखावल गइल बा कि ई नाँव जगह अनुसार भी हो सके लें। भोजपुरी इलाका में ताल शब्द कई बेर तलाब खातिर इस्तेमाल होला कई जगह झील खातिर। एही तरे उत्तराखंड में नैनीताल, सात ताल, भीम ताल नियर सगरी जलभंडार सभ वास्तव में झील हवें बाकी इनहन के नाँव में ताल शब्द जुड़े ला।

एगो हाइड्रोलॉजी के किताब में नीचे दिहल पाँच गो पैमाना बतावल गइल बाड़ें जिनहन के आधार पर कौनों जलभंडार के झील मानल जा सके ला:

समुंदरी पानी के आगम के पैमाना के अलावा, बाकी सब पैमाना के अन्य प्रकाशित जगह पर भी मान्यता दिहल गइल बाटे या फिर उनहन के बिस्तार से बतावल गइल बा।

महादीप सभ में, झील के सतह के रकबा के हिसाब से सभसे बड़ झील सभ:




#Article 293: गरमी (सीजन) (205 words)


गर्मी साल में एक बेर आवे वाला सीजन हवे जेवना में तापमान बढ़ जाला आ मौसम गरम हो जाला। पृथ्वी पर उत्तरी गोलार्ध में ई ऋतु अप्रैल से जून ले रहेले जबकि दक्खिनी गोलार्ध में सितंबर से फरवरी ले।

ई सीजन सभसे गरम होला। शीतोष्णकटिबंधी इलाका आ ठंढा प्रदेस सभ में तापमान बढ़े से राहत मिलेला, बहुत सारा इलाका में बरफ पघिल जाला आ हरियाली हो जाला। ठंढा प्रदेश के निवासी लोग गर्मी के उत्सुकता से इंतजार करे ला।

एकरे बिपरीत उष्णकटिबंधीय इलाका में गर्मी के सीजन के दौरान मौसम असह रूप से गरम हो जाला। गरम हवा चले ले आ तापमान बहुत ऊपर पहुँच जाला। गर्मी से परेशान हो के लोग जल्दी बरखा के सीजन आवे के इंतजार करे ला। भारत में उत्तरी मैदानी इलाका में गर्मी के प्रकोप सभसे ढेर होला आ एह सीजन में थार के रेगिस्तान के ओर से दुपहरिया के बाद से सांझ ले चले वाली हवा के लूहि कहल जाला जे जानलेवा भी साबित हो सके ले। रात के समय पुरुआ हवा बहे पर कुछ ठंडक आ आराम मिले ला। परंपरागत रूप से जेठ आ बइसाख के दू महीना के ग्रीष्म ऋतु कहल गइल बा। गर्मी के बाद, मानसून के आगमन होला आ बरखा के ऋतु (सीजन) आ जाला।




#Article 294: भोजपुरी साहित्य (897 words)


भोजपुरी साहित्य में अइसन सगरी साहित्य के रखल जाला जवन भोजपुरी भाषा में रचल गइल बाटे। गोरखनाथ, कबीरदास आ दरिया साहेब नियर संत लोगन के बानी से सुरुआत हो के भिखारी ठाकुर आ राहुल बाबा के रचना से होत भोजपुरी साहित्य के बिकास आज कबिता, कहानी, उपन्यास आ ब्लॉग लेखन ले पहुँच गइल बाटे। आधुनिक काल के सुरुआत में पाण्डेय कपिल, रामजी राय, भोलानाथ गहमरी नियर लोगन के रचना से वर्तमान साहित्य के रीढ़ मजबूत भइल बा। 

भोजपुरी भाषा आ साहित्य के इतिहास लिखे वाला लोगन में ग्रियर्सन, राहुल बाबा से ले के उदय नारायण तिवारी, कृष्णदेव उपाध्याय, हवलदार तिवारी आ तैयब हुसैन 'पीड़ित' नियर बिद्वान लोगन के योगदान बा। अर्जुन तिवारी के लिखल एकरा साहित्य के इतिहास भोजपुरी भाषा में मौजूद बा।

भोजपुरी सहित्य के सुरुआत सातवीं सदी से मानल जाला। उद्धरण दिहल जाला की हर्षवर्धन (सन् 606 - 648 ई) के समय के संस्कृत कवि बाणभट्ट अपने समय के दू गो कवि लोगन के नाँव गिनवले बाड़ें जे लोग संस्कृत आ प्राकृत दुनों के छोड़ के अपनी देहाती बोली में रचना करे। ई कवि लोग बाटे ईसानचंद्र आ बेनीभारत। ईसानचंद्र बिहार में सोन नदी के पच्छिमी किनारा के पिअरो गाँव (प्रीतिकूट) के रहे वाला रहलें। 

बाद के साहित्य के सिद्ध साहित्य या संत साहित्य कहल जाला। पूरन भगत (नवीं सदी) के गीत में भोजपुरी के झलक लउके ला। नाथ सम्प्रदाय के गुरु गोरखनाथ के रचना में भोजपुरी क्रिया सबदन के इस्तेमाल बहुतायत से बाटे। 

एह काल के गीत में कथा के गावे जोग गीत में बर्णन कइल गइल बा। एग गीतकथा सब में सोरठी ब्रिजभार, शोभा बनजारा, सती बिहुला, आल्हा, लोरिकी आ राजा भरथरी के कथा सभ मुख्य बाड़ीं सऽ।

बिचला समय के रचना में भक्ति के उदय आ संत लोगन के बानी के समेटल जाला। हिंदी साहित्य में एकरा के भक्ति काल कहल जाला। एह काल के कवि लोगन में बिद्यापति, सूरदास, कबीरदास, जायसी आदि के नाँव गिनावल जाला। इनहन लोगन में केहू भी खास भोजपुरिये के कवि होखे अइसन ना बा बाकी इन्हन लोगन के रचना में भोजपुरी के परभाव वाली रचना भी मिले लीं। ग्रियर्सन के हवाले से बिद्यापती के कई ठो रचना भोजपुरी में भइल बतावल जाला; आ रामनरेश त्रिपाठी के हवाले से एगो उदाहरण  बिद्यापति के बारहमासा से दिहल गइल बा जे साफ भोजपुरी में बाटे। सूरदास मुख्य रूप से ब्रजभाषा के कवि रहलें बाकी उनहूँ के एगो रचना देखे जोग बाटे। कबीर के परसिद्ध निर्गुन कवन ठगवा नगरिया लूटल हो खाँटी भोजपुरी के रचना बाटे। कबीर के चेला धरमदास के रचना

एकरी आलावा बाबा कीनाराम आ भीखमराम के रचना में भोजपुरी के झलक देखल जा सके ला। घाघ आ भड्डरी के कहाउत सब भी एही काल के रचना हईं सऽ।

आधुनिक भोजपुरी साहित्य के एकदम सुरुआती समय के नवजागरन काल कहल गइल बा। एह समय के कवि लोग में तेग अली 'तेग', हीरा डोम, बुलाकी दास, दूधनाथ उपाध्याय, रघुवीरनारायण, महेन्दर मिसिर आ भिखारी ठाकुर के नाँव आवेला। तेग अली के रचना बदमास दर्पण खास बनारसी भोजपुरी के एगो गजबे उदाहरण देखावे वाली रचना बाटे। महेन्दर मिसिर, मिश्रावलिया गांव, छपरा के रहलें आ उनकर लिखल पुरबी एगो जमाना में पुरा इलाका में चलनसार रहे आ आजु ले कहीं कहीं सुने के मिल जाला। भिखारी ठाकुर के रचना गीत आ गीतनाटक के रूप में रहे। उनुकर सभसे परसिद्ध रचना बिदेसिया बा आ राहुल बाबा उनुका के भोजपुरी के शेक्सपियर के उपाधि दिहलें।

एकरा बाद के पीढ़ी के लोगन में कवि मोती बी ए, मनोरजंन दादा, भोला नाथ गहमरी, विवेकी राय नियर लोग बा।

भोजपुरी उपन्यास क मतलब इहाँ अइसन उपन्यासन से बा जिनहन के रचना भोजपुरी भाषा में भइल बा। विश्व की सगरी भाषा कुल में साहित्य क एगो अइसन विधा पावल जाले जेवना में गद्य रूप में लंबा वर्णन आ जीवन की हर पहलू क वर्णन मिलेला आ एही के नाँव उपन्यास हवे। अइसन उपन्यासन क रचना भोजपुरी भाषा में बाद में भले शुरू भइल लेकिन भोजपुरी भाषा की साहित्य में उपन्यासन क एकदम्मे अभाव नइखे। भोजपुरी के पहिला उपन्यास बिंदिया श्री रामनाथ पाण्डेय जी के रचना बा जेवना क प्रकाशन सन् 1956 में भोजपुरी संसद, जगतगंज, वाराणसी, से भइल। एकरी बाद से लगातार भोजपुरी में उपन्यासन क रचना जारी बा।

भोजपुरी उपन्यासन के काल खंड में बाँटला क कौनो प्रामाणिक वर्णन नइखे बाकिर श्री रामनाथ पाण्डेय जी भोजपुरी कथा साहित्य के चारि गो काल खंड में विभाजित कइले बाड़ीं। इहाँ की हिसाब से भोजपुरी कथा-साहित्य के नीचे लिखल तरीका से बाँटल जा सकेला:

लोकगाथा काल (आज़ादी से पाहिले): 
ए काल में कौनो भोजपुरी उपन्यास के रचना नइखे भइल।

प्रारंभिक काल (1947 से 1961 ले):
भोजपुरी क पहिला उपन्यास बिंदिया 1956 में छपल लेकिन भोजपुरी कहानी क शुरुआत अवध बिहारी सुमन क रचना 'जेहलि क सनदि' से मानल जाला जेवन 1948 में छपल रहे।

मध्य काल (1961 से 1974 ले):
एह काल में भोजपुरी में लगभग दस गो उपन्यास छपल। एह समय की प्रमुख उपन्यासन में बा : थरुहट के बबुआ और बहुरिया(1965), जीवन साह (1964), सेमर के फूल (1966), रहनिदार बेटी (1966), एगो सुबह, एगो साँझ (1967), सुन्नर काका (1979)। ए उपन्यासन में अधिकतर सामजिक उपन्यास हवें। 'थरुहट के बबुआ और बहुरिया के भोजपुरी में आंचलिक उपन्यास कहल जाला।

आधुनिक काल (1975 की बाद):
एह काल में लगभग बीस गो से अधिका उपन्यासन के रचना आ प्रकाशन भइल। फुलसुंघी (1977), भोर मुसुकाइल (1978), घर टोला गाँव (1979), जिनिगी के राह (1982), दरद के डहर (1983), अछूत (1986), महेन्दर मिसिर(1994), इमरितिया काकी (1997), अमंगलहारी (1998), आव लवटि चलीं जा (2000), आधे-आध (2000) इत्यादि उपन्यास एह काल के प्रमुख उपन्यास बा।




#Article 295: अनुबाद (190 words)


कौनों एगो स्रोत-भाषा में लिखल बात के अरथ के दूसरी आ बराबरी के टारगेट-भाषा में लिखल रूप में ब्यक्त कइल अनुबाद (अंगरेजी: ट्रांसलेशन; Translation) हवे। कुछ लोग के अनुसार ई प्रक्रिया हवे, कुछ के अनुसार ई प्रक्रिया आ ओकर परिणाम हवे, आ कुछ लोग के अनुसार सैद्धांतिक रूप से ई दू भाषा के बीच के संबंध हवे बशर्ते कि दुनों भाषा में कहल लिखल गइल बात के मतलब एकही होखे। आमतौर पर एकर तीन गो प्रकार बतावल जालें: समभाषी, अन्य भाषी आ संकेतबदल के रूप में अनुबाद।

अनुबाद शब्द खुद संस्कृत के अनु+वाद से बनल हवे जेकर अरथ लगावल जाला, कौनों बात के पाछे-पाछे दोहरावल, दोबारा कहल, जवन बात कहल गइल ओहीके दुसरे भाषा में कहल। आज के समय में ई शब्द अनुबाद अंगरेजी के ट्रांसलेशन के समकक्ष अरथ में इस्तेमाल कइल जाला; अंगरेजी के एक भाषा से दुसरे भाषा में बदलाव के लिखल रूप के ट्रांसलेशन कहल जाला जबकि अगर केहू बक्ता बोल रहल होखे आ ओकरे कहल बात के केहू दुसरे भाषा के कह के ब्यक्त करे तब ओकरा के इंटरप्रेटेशन कहल जाला। हिंदी में कुछ जगह अइसन मौखिक अनुबाद खाती भाषांतर भा रूपांतर के इस्तमाल कइल जाला।




#Article 296: राष्‍ट्रपति (104 words)


राष्‍ट्रपति () कौनों देस, राष्ट्र के मुखिया क पद बाटे। भारत में राष्ट्रपति सभसे बड़ा संबैधानिक पद हवे। 

ई कौनों राष्ट्र या देस के मुखिया होला, आमतौर पर कौनों लोकतंत्र आ रिपब्लिक के मुखिया, बाकी तानाशाही के मुखिया भी ई टाइटिल रख सकत बाटे। राष्ट्रपति शब्द अंगरेजी के प्रेसिडेंट (President) के अनुबाद हवे जवना के मूल अर्थ होला (निगरानी करे खातिर) बइठे वाला, मतलब कि अध्यक्क्षता करे वाला। अंगरेजी शब्द के प्रयोग अध्यक्ष खातिर भी होला बाकी हिंदी-भोजपुरी में एकरा के बिलग कइ लिहल बाटे आ राष्ट्र या देस के प्रेसिडेंट के राष्ट्रपति, आ सभा सम्मेलन या पार्टी के मुखिया के अध्यक्ष कहल जाला।




#Article 297: 2015 क्रिकेट विश्व कप (259 words)


आईसीसी (ICC) क्रिकेट विश्व कप 2015, 11वां आईसीसी क्रिकेट विश्व कप रहे, आ ऑस्ट्रेलिया अउरी न्यूजीलैंड संगे एकर मेजबानी कइले रहे। ई टूर्नामेंट 2015 फ़रवरी 14 - मार्च 29 ले चलल, 49 ठे मैच 14 जगहन पर खेलल गइल, 26 मैच ऑस्ट्रेलिया मे आयोजित भईल, एडिलेड, ब्रिस्बेन, कैनबरा, होबार्ट, मेलबोर्न, पर्थ आ सिडनी में अउरी न्यूजीलैंड 23 मैच क मेजबानी कइलस, ऑकलैंड, क्राइस्टचर्च, डुनेडिन, हैमिल्टन, नेपियर, नेल्सन आ वेलिंग्टन मे। टूर्नामेंट कऽ फाइनल मैच मेलबोर्न क्रिकेट ग्रांउड आस्ट्रेलिया मे खेलल गईल आ हेकरा ऑस्ट्रेलिया जितलस।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ईएसपीएन स्टार स्पोर्ट्स के अमेरिका खातिर 2 अरब डॉलर में 2015 क्रिकेट विश्व कप के प्रसारण क अधिकार बेचले बाटे। स्थानीय आयोजन समिति टूर्नामेंट में अपनी ओर से क्रिकेट की प्रशंसक लोगन की जरूरत की मोताबिक सबसे ढेर अनुकूल टूर्नामेंट बनावे खातिर आ ऑस्ट्रेलिया अउरी न्यूजीलैंड भर में क्रिकेट की बढ़ावा खातिर एगो विस्तृत श्रृंखला बनावे खातिर एह कप क मेजबानी चाहत बाटे।

तारीखों और स्थानों तय हैं, पर कौन सा मैच वे मेजबान करेगे परिवर्तन के अधीन है, मेजबान देशों को समायोजित करने के लिए। ऑस्ट्रेलिया क्वार्टर फाइनल के लिए अर्हता होता हैं तो वे एडिलेड में 20 मार्च को मैच में खेलेंगे, न्यूजीलैंड क्वार्टर फाइनल के लिए अर्हता होता हैं तो वे वेलिंगटन में 21 मार्च को खेलेंगे। ऑस्ट्रेलिया सेमीफाइनल के लिए अर्हता होता हैं तो वे सिडनी में 26 मार्च को मैच खेलेंगे, न्यूजीलैंड उत्तीर्ण हैं तो उनके सेमीफाइनल ऑकलैंड में 24 मार्च को खेला जाएगा। सेमीफाइनल में अगर न्यूजीलैंड बनाम ऑस्ट्रेलिया की स्थिति में, पूल ए में उच्च समाप्त कि टीम मैच के लिए गृह लाभ होगा।




#Article 298: प्लेट टेक्टॉनिक्स (105 words)


प्लेट टेक्टॉनिक्स भूगोल आ भूगर्भ बिग्यान से जुड़ल एगो संकल्पना बाटे जेवना में पृथ्वी पर होखे वाला टेक्टॉनिक क्रिया, मने कि हलचल से संबंधित अध्ययन कइल जाला। पृथिवी के अंदरूनी बनावट के अध्ययन से ई पता चले ला कि एकरे मैंटल में उपरी हिस्सा में एगो अइसन परत पावल जाले जे आधा-पघिलल परत के नियर बा आ ई एस्थेनोस्फीयर कहाला। एही एस्थेनोस्फीयर के ऊपर के परत, जेह में पृथ्वी के क्रस्ट आ मैंटल के कुछ हिस्सा शामिल बा, लिथास्फीयर (थलमंडल) कहाला जे कई बिसाल टुकड़ा में बँटल बाटे। एह बिसाल टुकड़ा सभ के प्लेट कहल जाला आ इनहने के गति के अध्ययन प्लेट टेक्टॉनिक्स हवे।




#Article 299: विवेकानंद (253 words)


स्वामी विवेकानंद (; 12 जनवरी 1863 — 4 जुलाई 1902) भारत के एगो आध्यात्मिक नेता आ रामकृष्ण परमहंस के शिष्य रहलें। ऊ वेदांत के बिख्यात आ परभावशाली बिद्वान रहलें। जनम के नाँव नरेंद्र नाथ दत्त रहल। ऊ दर्शन आ धर्म के बिद्वान भर ना रहलें बलुक एगो तेज तर्रार समाज सुधारक भी रहलें आ हिंदू धर्म में सुधार के काम भी कइलन। विवेकानंद, रामकृष्ण मठ आ रामकृष्ण मिशन के अस्थापना कइलें।

उनुका के अमेरिका स्थित शिकागो में सन् 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म पर दिहल भाषण खातिर जानल जाला जवना के सुरुआत अमरीकी भाई बहिनी लोग…. के वाक्य से भइल। उनुकर ई संबोधन सभके दिल जीत लिहलस।

कलकत्ता के एक ठो उच्च-वर्गीय बंगाली परिवार में जनमल विवेकानंद, अध्यात्म के ओर मुड़ गइलेन। ऊ अपना गुरु रामकृष्ण देव से शिक्षा से परभावित भइलें आ उनसे ई सीखलें कि सगरी जीव में पबित्र शक्ति के बास बा आ एही कारन मानव मात्र के सेवा से ईश्वर के सेवा भी होखी। रामकृष्ण के गुजर जाए के बाद विवेकानंद पूरा भारतीय उपमहादीप के ब्यापक भ्रमण कइलेन आ ओह जमाना के ब्रिटिश भारत के परिस्थिति सभ के सीधा ज्ञान हासिल कइलें। एकरे बाद ऊ अमेरिका के जतरा कइलेन आ 1893 में शिकागो में भइल बिस्व धर्म संसद में भारत के प्रतिनिधित्व कइलेन। विवेकानंद हिंदू दर्शन के ऊपर अमेरिका, इंग्लैंड, यूरोप आ भारत में सैकड़न लेक्चर आ क्लास चलवलें। विवेकानंद के देसप्रेमी संत के रूप में मानल जाला आ भारत में उनके जनम दिन राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनावल जाला।




#Article 300: जनसंख्या (118 words)


जनसंख्या जीव जंतु के कौनों भी प्रजाति के सगरी सदस्यन के गिनती के कहल जाला। आम बोलचाल की भाषा में एकर मतलब होला कवनों इलाका में निवास करे वाला सगरी मनुष्य।

जनसंख्या के गिनती कइले के जनगणना कहल जाला।  अलग-अलग देस में ई अलग-अलग समय बिता के होला।  भारत में ई हर दस साल पर होला, पाछिली बेर 2011 में जनगणना भइल रहे। एह समय भारत क कुल जनसंख्या 1,210,569,573 बाटे (2011 की जनगणना की हिसाब से)।

जनगणना मने होला कौनों भी क्षेत्र में एगो प्रजाति वाला सभ परानिन के गिनती कइल। आमतौर पर एकर उपयोग आदमिन की गिनती खातिर कइल जाला बाकी ई एगो ब्यापक शब्द बाटे आ अउरी दूसरी परानिन की गिनती खातिर भी इस्तेमाल होला।




#Article 301: मनोज तिवारी (265 words)


मनोज तिवारी (जन्म 1 फ़रवरी 1971) भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार, राजनेता आ संगीत निर्देशक बानीं। तिवारी जी 16वी लोकसभा  चुनाव में सांसद चुनल गइल बानीं। 

फिल्मन में काम कइले से पहिले मनोज तिवारी तकरीबन दस साल भोजपुरी गायक की रूप में काम कई न। फेर सन 2003 में उ फिल्म 'ससुरा बड़ा पैसा वाला'में अभिनय कई न जवन मनोरंजन और आर्थिक दृष्टि से बहुत सफल फिल्म साबित भइल और मानल जाए लागल की भोजपुरी फिल्मन क नया दौर शुरू हो गइल बा। एकरी बाद उ दुगो और फिल्म 'दारोगा बाबू आई लव यू' और 'बंधन टूटे ना' नांव क फिल्मन में भी अभिनय कई न। मनोज तिवारी एगो टेलीविज़न कार्यक्रम 'चक दे बच्चे' में बतौर मेज़बान कार्य कई न। सन 2010 में मनोज तिवारी प्रतिभागी की तौर पर रियलिटी शो 'बीग बॉस' में हिस्सा लिह न। मनोज तिवारी और श्वेता तिवारी 'कब अइबू अंगनवा हमार' और 'ए भौजी के सिस्टर' नामक फिल्मन में साथ-साथ काम क चुकल बालो। सन 2011 की मध्य में मनोज और उनकी पत्नी रानी में अलगाव हो गइल। मनोज तिवारी नया धुन,गाना और अल्बम बनावल जारी रख न। उ अनुराग कश्यप द्वारा निर्देशित फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' खातिर एगो लोकप्रिय गीत 'जिय हो बिहार के लाला' भी गव न। मनोज तिवारी सन 2011में बाबा रामदेव द्वारा रामलीला मैदान पर शुरू कइल गइल भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन और अन्ना आंदोलन में भी सक्रिय रह न। 2009 में मनोज तिवारी समाजवादी पार्टी की ओर से राजनीति में आपन भविष्य अज़मव न लेकिन असफल रह न। फिलहाल तिवारी बीजेपी की तरफ से राजनीति में सक्रिय बा न और उतर-पूर्वी दिल्ली से संसद सदस्य हंव।




#Article 302: भोजपुरी सिनेमा (194 words)


भोजपुरी सिनेमा में, भारत के पूरबी उत्तर प्रदेश आ पच्छिमी बिहार के भाषा भोजपुरी में बने वाली फिलिम सभ के गिनल जाला। पहिली भोजपुरी फिलिम विश्वनाथ शाहाबादी के गंगा मइया तोहें पियरी चढ़इबों रहे जेवन 1963 में रिलीज भइल रहे। अस्सी के दशक में कई ठे उल्लेख जोग भोजपुरी फिलिम रिलीज भइली जिनहन में बिटिया भइल सयान, चंदवा के ताके चकोर, हमार भौजी, गंगा किनारे मोरा गाँव, आ सम्पूर्ण तीर्थ यात्रा के नाँव प्रमुख रूप से गिनावल जाला। 

पुराना समय में भोजपुरी में फिलिम बनावे के काम भी बंबई में होखे आ ई हिंदी सिनेमा के एक ठो हिस्सा के रूप में बनावल जायँ। अब एह फिलिम सभ के निर्माण भोजपुरी इलाका में भी हो रहल बा आ गोरखपुर, बनारस आ पटना नियर छोट शहर भी एह इंडस्ट्री के हिस्सा बन चुकल बाने। 

भोजपुरी फिलिम के मुख्य दर्शक लोग पूरबी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड आ नेपाल के मधेस इलाका में बा लो जहाँ के ई भाषा हवे। एकरे अलावा अन्य शहर सभ में रहे वाला भोजपुरी भाषी लोग बा। एही कारन भोजपुरी सिनेमा के दर्शक यूरोप आ अमेरिकी देस सभ में भी बा आ सूरीनाम नियर देस सभ में भी जहाँ भोजपुरी बोलल जाले।




#Article 303: रानी चटर्जी (237 words)


रानी चटर्जी एक ठो भारतीय ऐक्ट्रेस बाड़ी जे मुख्य रूप से भोजपुरी सिनेमा में काम करे खातिर जानल जाली। उनके भोजपुरी फिलिम ससुरा बड़ा पइसा वाला से परसिद्धि मिलल, जेह में ऊ मनोज तिवारी के साथ काम कइली। एकरे अलावा उनके कुछ परसिद्ध फिलिम सभ में सीता, देवरा बड़ा सतावेला आ रानी नं॰ 786 बाड़ी सऽ।

रानी चर्टजी के जनम मुंबई में भइल आ एहीजे पलल-बढ़ल हई। चटर्जी आपन भोजपुरी फिलिम कैरियर के सुरुआत ससुरा बड़ा पइसा वाला से कइली। फिलिम हिट रहल आ एकरा के कई गो अवार्ड भी मिललें।

अपना फिलिमी कैरियर के सुरुआत के तेरह साल बाद भी, चटर्जी भोजपुरी फिलिम इंडस्ट्री में अभिन ले नमर एक पर बाड़ी आ खुद अपना दम प फिलिम हिट करावे के क्षमता राखत बाड़ी जे अभी अउरी कौनों भोजपुरी हिरोइन में नइखे। चटर्जी के कहनाम बा कि नमर एक के पोजीशन खाती उनका के खुद से खतरा बुझाला कि जहिया मेहनत कइल बंद क देब तहिया हमरा खतरा हो जाई।

हाल में रानी चटर्जी एक्टिंग के साथे-साथ गायकी के ओर भी बढ़ चलल बाड़ी आ एगो फिलिम खातिर अपना आवाज में दू गो गाना रिकार्ड करवले बाड़ी।

बिहार के पटना में आयोजित छठवाँ भोजपुरी फिलिम अवार्ड (2013) में रानी चटर्जी के साल के बेस्ट ऐक्ट्रेस के अवार्ड मिलल, ई फिलिम नागिन में उनके रोल खातिर दिहल गइल।
साल 2015 में मारीशस में आयोजित एगो फिलिम समारोह में रानी चटर्जी के सभसे पापुलर ऐक्ट्रेस के अवार्ड दिहल गइल।




#Article 304: शुभी शर्मा (178 words)


शुभी शर्मा एक तो भारतीय एक्ट्रेस बाड़ी जे मुख्य रूप से भोजपुरी सिनेमा में सक्रिय बाड़ी। शुभी के उनके 2008 के फिलिम चलनी के चालल दूल्हा खातिर जानल जाला जेह में ऊ दिनेश लाल यादव निरहुआ के सोझा काम कइली आ एह फिलिम में अपने रोल खातिर इनके 5वाँ भोजपुरी फिलिम अवार्ड्स में बेस्ट डेब्यू के इनाम मिलल।

शर्मा आपन एक्टिंग कैरियर के सुरुआत 2008 के फिलिम चलनी के चालल दुलहा से कइली जेह में ऊ निरहुआ के बिपरीत हिरोइन रहली। इनके अन्य उल्लेख जोग फिलिम सभ में आज के करन अर्जुन दिनेश लाल यादव के साथ, भइया के साली ओढ़निया वाली पवन सिंह के साथ, संतान रवि किशन के साथ, आ छपरा एक्सप्रेस खेसारी लाल यादव के साथ रहल बा।

सन 2015 में जॉन अब्राहम के फिलिम वेलकम बैक में एक ठो मशहूर गाना मैं बबली हुई तू बंटी हुआ... में शर्मा जॉन के साथ डांस करत लउकली आ उनके डांस के तारीफ भी भइल।

मशहूर हिंदी फिलिम राम लखन के भोजपुरी में बन रहल एही नाँव के रीमेक में शर्मा के काम करे के खबर बा।




#Article 305: गणतंत्र दिवस (भारत) (225 words)


भारत क गणतंत्र दिवस 26 जनवरी के मनावल जाये वाला एगो राष्ट्रीय तिहुआर हवे। आजाद भारत क संविधान एही दिन सन् 1950 से लागू भइल। एह दिन भारत क परधानमंत्री दिल्ली में लाल किला पर झंडा फहरावे लें आ परेड के सलामी लेलन।

भारत 15 अगस्त सन् 1947 के आजाद भइल आ एकर संविधान 26 जनवरी 1950 से लागू भइल जेवन भारत सरकार अधिनियम (1935) के अस्थान लिहलस आ एही की संघे भारत क एगो आजाद गणतंत्र की रूप में अस्थापना पूरा भइल। 26 जनवरी के तारिख चुनले कि पीछे ई वजह रहे कि एही दिन सन 1930 मे काँग्रेस पूर्ण सुराज के आपन लक्ष्य क घोषणा कइले रहल।

ई दिन राष्ट्रीय छुट्टी क दिन होला आ हर सरकारी दफ्तर आ इस्कूल कॉलेज में झंडा फहरा के आ मिठाई बाँट के खुसी मनावल जाला। भारत में एकरी अलावा अउरी दूगो राष्ट्रीय छुट्टी के दिन स्वतंत्रता दिवस आ गाँधी जयंती होला।

भारत एगो बहुत लमहर आंदोलन की बाद 15 अगस्त सन् 1947 के आजाद भइल। भारत अपना के एगो स्वतंत्र आ जनता की राज वाला राज्य घोषित कइलस बाकी ई तौले ना लागू भइल जबले कि भारत के संविधान ना लागू हो गइल।

भारत हर बरिस कौनों देस कि एगो नेता के अपनी गणतंत्र दिवस की समारोह में मुख्य अतिथि कि रूप में बोलावेला। नीचे अबले के सगरी अतिथि लोगन के एगो लिस्ट दिहल जात बाटे:




#Article 306: व्हाइट हाउस (188 words)


वाइट हाउस () अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक निवास आ मुख्य कार्यस्थल बाटे। ई वाशिंगटन, डीसी शहर में उत्तर पच्छिमी वाशिंगटन, डीसी में बाटे आ इहाँ के पता 1600 पेन्सिलवेनिया एवेन्यू हवे। 1800 में जब जॉन एडम्स इहाँ रहे शुरू कइलेन ओकरे बाद से सभ अमेरिकी राष्ट्रपति लोगन के निवास एहिजे रहल बा।

एकर डिजाइन बनावे वाला आर्किटेक्ट आयरलैंड में जनमल जेम्स होबन रहलें। होबन एकर डिजाइन डब्लिन में मौजूद लेइनस्टर हाउस के आधार पर बनवलें जहाँ आजकाल आयरलैंड के संसद बाटे। निर्माण के काम 1792 से 1800 ले चलल आ ई एक्विया क्रीक बलुआ पाथर से बनावल गइल हवे जेकरा के सफेद पेंट कइल गइल हा। 1801 में थॉमस जेफ़रसन जब इहाँ रहे अइलें, बेंजामिन हेनरी लात्रोव नाँव के आर्किटेक्ट के मदद से एह में कुछ बदलाव करववलें जेकरा से नेंव आ स्टोर वाला हिस्सा तोपा गइल। 1814 में ई भवन ब्रिटिश सेना द्वारा जरा दिहल गइल रहे हालाँकि, तुरंते मरम्मत के काम शुरू भइल आ जेम्स मुनरो 1817 में इहाँ रहे शुरू कइलें जब अभिन एकर मरम्मत पूरा ना भइल रहे। 1824 में एकर दक्खिनी गोलाकार पोर्टिको बनल आ 1829 में उत्तर ओर के पोर्टिको बनल।




#Article 307: कपिल मिश्रा (121 words)


कपिल मिश्रा भारत की दिल्ली राज्य की करावल नगर सीट से आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक आ दिल्ली राज्य सरकार में जल मंत्री बाने। 2015 की चुनावन में ई अपना बिपक्षी उमेदवार के 44,431 वोटन की अंतर से हरा के चुनल गइल रहलें।

मई 2017 में कपिल मिश्र, आम आदमी पार्टी के नेता आ मुखिया अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगवलें कि पार्टी के नेता लोग चंदा के रकम के हेराफेरी कइले बा। जनता से आ चुनाव आयोग से जानकारी छिपावल गइल बा आ छोटहन कंपनी सब के साथ मिल के मनी लाउन्ड्रिंग कइल गइल बा। एकरा से पहिले ऊ केजरीवाल पर दू करोड़ रूपया लेवे के आरोप लगवले रहलें आ दावा कइलेन की ई लेनदेन उनके आँखी के सोझा भइल।




#Article 308: किताब (153 words)


किताब वा पुस्तक कागज या अन्य अइसने कौनों चीज के पन्ना सभ के एक किनारा ओर एक दूसरा से जुड़ल रूप ह। किताब के पन्ना सभ  भा चित्र छपल होला। अगर कुछ न छपल होखे आ सादा पन्ना अइसन रूप में जुड़ल होखें तब ऊ चीज कापी, डायरी भा नोटबुक कहाला, जइसन भी इस्तेमाल होखे ओही के अनुसार।

किताब के एगो पन्ना के अंगरेजी में लीफ़ कहल जाला जेकरे दुन्नो साइड के पेज कहल जाला। भोजपुरी में दुन्नो खातिर पन्ना शब्द के इस्तेमाल होला आ जइसन प्रसंग होखे ओकरे अनुसार अरथ लगा लिहल जाला।

लाइब्रेरी साइंस में किताब के मोनोग्राफ भी कहल जाला। अइसन नाँव के कारण ई बा कि कई ठो पत्रिका या जर्नल सभ भी रूपरंग में किताब नियर हो सके लें, एही से अलगा अर्थ में साफ-साफ बूझे खातिर किताबिन के मोनोग्राफ कहल जाला।

कंप्यूटर आ मोबाइल पर पढ़ल जाए खातिर इलेक्ट्रानिक रूप से छपल किताब के ई-बुक कहल जाला।




#Article 309: ब्रिजमेनाइट (141 words)


ब्रिजमेनाइट चाहे सिलिकेट पेरोव्सकाइट (अंग्रेजी) धरती पर पावल जाए वाला सबसे ढेर मात्रा में खनिज हवे। ई खनिज बहुत ढेर घनत्व वाला मैग्नीशियम-आ-लोहा के सिलिकेट होला जेवन धरती की अंदर 670 से 2700 किलोमीटर की गहिराई में पावल जाला। एकर नाँव 2014 में ब्रिजमेनाइट धराइल जब पहिली बेर एकर नमूना सन् 1879 में आस्ट्रेलिया में गिरल एगो उल्कापिंड से पावल गइल। काहें से की धरती पर अभिन ले एकर कौनों नमूना ना मिलल रहल आ जबले प्राकृतिक रूप से कौनों खनिज के नमूना न मिल जाय ओकर नाँव न धराला।

एकर नमूना क खोज अमेरिका की नेवादा इन्वरसिटी के खनिज बिग्यानी ओलिवर शाउनर के टीम कइलस आ ई सांइस में नवंबर 2014 में छपल

ब्रिजमेनाईट नाँव अमेरिका की भौतिकबिग्यानी पर्सी ब्रिजमैन की की सम्मान में रखल गइल जे 1946 में उच्च दाब वाली भौतिकी की छेत्र में नोबेल पुरस्कार पवले रहलें।




#Article 310: ग्रीनहाउस प्रभाव (105 words)


ग्रीन हाउस प्रभाव पृथ्वी की वायुमंडल में कुछ खास गैस कि मात्रा के बढ़ले से होखे वाला परभाव हवे जेवना की कारण पृथ्वी से अंतरिक्ष में जाए वाला विकिरण क कुछ हिस्सा वायुमंडल में ए गैसन द्वारा सोख के फिन पृथ्वी की ओर रेडिएट कइ दिहल जाले आ साल डर साल एह से पृथ्वी क तापमान में बढ़ती होत जात बा। एही कारन ई ग्लोबल वार्मिंग मने भूमंडलीय तापन के सभसे मुख्य कारन मानल जाला।

जेवनी गैसन से ई परभाव पड़े ला उन्हन के ग्रीन हाउस गैस कहल जाला। कार्बनडाइऑक्साइड, क्लोरोफ्लोरोकार्बन, टेट्रामीथेन नीयन कई गो गैस बाड़ी सन जिनहन से एह परभाव में बढ़ती होला।




#Article 311: बिहार के इतिहास (467 words)


बिहार क इतिहास प्रागैतिहासिक काल से मिले शुरू हो जाला जेवना में लिखित इतिहास से पहिले की ज़माना के माटी के बर्तन आ पत्थर के औज़ार मिलेला। बिहार में आर्य लोगन की आगमन के इतिहास 800 ईसा पूर्व की आसपास मानल जाला। उत्तर वैदिक समय में बिहार में कई गो राज्य जैसे कि विदेह, वैशाली, अंग नियर राज्यन के बिकास भइल। एकरी बाद बिहार में मगध राज्य के बिस्तार भइल जेवन सभसे ढेर बिस्तार वाला राज्य रहे। मौर्य साम्राज्य की समय इहाँ बौद्ध आ जैन धर्म के ब्यापक बिस्तार बढ़ल आ 320 ई में चंद्रगुप्त प्रथम पाटलिपुत्र (पटना) में महाराजाधिराज के पदवी धारण कैलें। गुप्त राज की क्षय की बाद पूरबी भारत में पाल बंस के अधिकार भइल आ एही समय मिथिला में कर्नाट राजा लोगन के शासन चलल।

बारहवीं सदी की अंत में बख्तियार खिलजी बिहार पर धीरे-धीरे शासन बढ़ावे शुरू कइलन आ तेरहवीं सदी की शुरुआत से बिहार में तुर्क लोगन के राज अस्थापित भइल। पाल बंस की पतन की बाद  कुछ समय खातिर शाहाबाद, सारण, चम्पारण आ मुजफ्फरपुर की इलाका में चेर लोगन के शासन भइल। उज्जैनवंशी राजपूत लोग तेरहवीं सदी में भोजपुर से आपन राज चलावल लोग आ पंद्रहवी सदी ले बिहार में कई गो छोट-छोट राज अस्थापित रहलें। अफगान बंस के शेरशाह पंद्रहवीं सदी में आपन अधिकार बहुत बड़ा इलाका पर कइलन आ सहसराम (सासाराम) से शासन कइलें। 1580 में अकबर बिहार के मुगल राज के सूबा(प्रान्त) घोषित कइलें आ कमोबेस पूरा बिहार के सगरी छोट-बड़ राजा आ नवाब लोग मुगल शासन के अपनी ऊपर मानल। बंगाल से सटल इलाका में बाद में बंगाल की नवाब लोगन के अधिकार भइल आ ई स्थिति अंग्रेजन की अइला ले बनल रहल।

बिहार में बिदेसी लोगन में सभसे पहिले पुर्तगाली लोग आइल जे बंगाल की हुगली में आपन अड्डा बना के पटना ले नाइ से ब्यापारी की रूप में आवे। बिहार एह समय शोरा की ब्यापार खातिर मसहूर रहे। अंग्रेज लोग 1620 ई में पटना की आलमगंज में आपन पहिला फैक्टरी अस्थापित कइल आ इहाँ आपन ब्यापार बढ़ावे शुरू कइल। पलासी की लड़ाई आ बक्सर की लड़ाई की बाद ए इलाका पर अंग्रेज लोगन के शासन शुरू भइल आ भारत की आजादी ले चलल।

आजादी की लड़ाई में बिहार में कई ठे महत्ववाली घटना भइल। जगदीशपुर में कुँवरसिंह आपन स्वतंत्र राज चलवलें। उन्नईस्वीं सदी की पछीला हिस्सा में वहाबी आंदोलन बिहारो में जोर पकरलस। 1908 में मुजफ्फरपुर बम कांड भइल आ एकरी बाद बिहार में क्रांतिकारी भावना के अस्थापना भइल। पटना में अनुशीलन समिति की एगो शाखा के अस्थापना 1913 में भइल। भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस क बिहार में पहिला अधिवेशन पटना की बाँकीपुर में 1912 में भइल। गाँधीजी आपनी सत्याग्रह के शुरुआत 1917 में चम्पारन से कइलें। 1922 में भागलपुर झंडा कांड भइल। असहयोग आंदोलन से ले के भारत छोड़ो आंदोलन ले बिहार के जनता भारत की आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़ के हिस्सा लिहलस।




#Article 312: सिंधु घाटी सभ्यता (153 words)


सिंधु घाटी सभ्यता प्राचीन भारत में एगो सभ्यता रहे जेवन वर्तमान पाकिस्तान, अफगानिस्तान के कुछ हिस्सा ओउर भारत की कुछ इलाकन में ओ समय फइलल रहे। एकर अनुमानित समय इसा पूर्व 10,000 से 2,500 बा। पाहिले एकर समय 3,500 ईसा पूर्व से 2,500 ईसा पूर्व मानल गइल लेकिन राखिगढ़ी के खुदाई के बाद अब एकर समय 10000 ईसा पूर्व तक अनुमान लगावल जाता। ई हिसाब से सिन्धु घाटी सभ्यता संसार के पहिलका सभ्यता मानल जा सकता। ई सभ्यता लुप्त सरस्वती, सिन्धु, सतलज, घघर हकरा, नर्मदा नदी के किनारे विकसित भेल।

सिंधु घाटी सभ्यता प्राचीन मिश्र,मेसोपोटामिया के साथे दुनिया के तीन गो सभ से पुरान सभ्यता में से एक बा।एह सभ्यता के जनसंख्या ५० लाख से जादे रहे। एह सभ्यता के एक शहरी नियोजन, पाकल ईँटा के मकान, विस्तृत जल निकासी खाती जानल जाला। नगर सभ में लईकन के खेलौना आऊर लड़ाई के हथियार मिलल बा, जे शांति आ समृद्धि के सुझाव देवे ला।




#Article 313: नारायण देसाई (285 words)


नारायण देसाई (24 दिसम्बर 1924 - 15 मार्च 2015) एगो परसिद्ध गाँधीवादी रहलें। देसाई जी गाँधीजी के निजी सचिव आ उनकर जीवनीकार महादेव देसाई के लड़िका रहलें। नारायण देसाई भूदान आंदोलन आ सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन से जुड़ल रहलें आ उनके गाँधी कथा खातिर जानल जाला जेवन ऊ 2004 में सुनावे शुरू कइलें।

महात्मा गाँधी के निजी सचिव अउरी जीवनीकार महादेव देसाई की पुत्र के रूप में इनकर जनम 24 दिसम्बर 1924 के गुजरात की वलसाड में भइल।
 साबरमती आश्रम में बचपन बीतल अउरी आरंभिक शिक्षा कि बाद इहाँके पढ़ाई छोड़ दिहलिन आ अपने बाबूजी के निर्देशन में बाद के शिक्षा ग्रहण कइलीं।

नारायण देसाई क विवाह प्रसिद्द स्वतंत्रता सेनानी नबकृष्ण चौधुरी अउरीमालतीदेवी चौधरी की पुत्री उत्तरा चौधरी से भइल। एकरी बाद दूनो जन सूरत की लगे वेड़छी नामक एगो छोट गाँव में चले गये जहाँ पति-पतनी दूनो लोग पढ़ावे के काम शुरू कइलीं। आचार्य विनोबा भावे के भूदान आंदोलन से जुड़के देसाई जी गुजरात में काफ़ी भूदान यात्राएं कइलीं। देसाई जी भूदान आंदोलन के मुखपत्र भूमिपुत्र क शुरूआत कइलीं अउरी 1959 ले एकर संपादक रहलीं।

नारायण देसाई गाँधीजी की आदर्श पर अटूट श्रद्धा अउरी विश्वास रखत रहलीं। इहाँके आपन पूरा जिनगी महात्मा जी की बतायवल डहर पर चलिके बितवलीं आ एही आदर्शन के परचार प्रसार करे में लागल रहलीं।

उहाँके 'तरुण शांति सेना' के नेतृत्व कइलीं, वेडची में अणु शक्ति रहित विश्व खातिर एगो विद्यालय के अस्थापना कइलीं आ गांधी शान्ति प्रतिष्ठान, गांधी विचार परिषद अउरी गांधी स्मृति संस्थान से जुड़ल रहलीं।

देसाई जी गुजरात विद्यापीठ के 23 जुलाई 2007 से पिछले साल नवंबर ले कुलाधिपति रहलीं।

नारायण देसाई जी 2004 में एगो नई पहल कइलीं जे में उहाँके गाँधी जी के जीवन क कहानी सुनावे शुरू कइलीं। एके गाँधी कथा क नाँव दिहल गइल।




#Article 314: बिहारी भाषा (245 words)


बिहारी भाषा भारतीय राज्य बिहार आ एकरे आसपास के राज्यन में आ सटल नेपाल में बोलल जाए वाली पुरबी इंडिक भाषावन सभ के समूह हऽ। एह भाषा सभ में भोजपुरी, मगही, मैथिली आ अंगिका मुख्य भाषा बाड़ी स। प्रमुख रूप से भारत के ई भाषा सभ के बोले वालन के संख्या नेपालो में 21% से भी ढेर बा।

हालाँकि, एह भाषा सभ के बोले वालन के संख्या बहुते ढेर बा, तबो प मैथिली के अलावा भारत में इनहन के संबैधानिक रुप से भाषा के दर्जा नइखे आ इनहन के हिंदी के बोली के रूप में मानल जाला। मैथिली के 2003 में संविधान के 92वें संशोधन में संबैधानिक दर्जा मिलल। अहिजा तक कि बिहारे में, पढ़ाई-लिखाई आ कार्यालयी क्षेत्र में हिंदी भाषा इस्तमाल होखे ला। इ भाषावन के 1961 में कानूनी रुप से हिंदी के ब्यापक छत्रछाया में बोली मान लिहल गइल। इ तरिक से राज्य आ राष्ट्रिय राजनीति अइसन भाषावन के लोप होवे के अवस्था बना रहल बा लोग।

नालंदा खुला विश्वविद्यालय बिहारी भाषावन (मगही, भोजपुरी, मैथिली) में कई तरह के कोर्स उपलब्ध करवले बा। आजादी के बाद हिंदी भाषा के बिहार के एकमात्र अधिकारिक भाषा के तौर पर बिहार अधिकारिक भाषा एक्ट, 1950 में जगह दिहल गइल। 1981 में हिंदी एकमात्र अधिकारिक भाषा के दर्जा से हट गइल आ एकरे साथे-साथ उर्दू के दूसर अधिकारिक भाषा के दर्जा दिहल गइल। हिंदी आ उर्दू के एह लड़ाई में बहुत अधिक संख्या में बोले जाये वाल भाषावन मगही, भोजपुरी आ मैथिली के अनदेखा कर दिहल गइल।




#Article 315: बिहार के भूगोल (318 words)


बिहार राज्य उत्तरी पूर्वी भारत क एगो राज्य हवे जेवन भारत की गंगा मैदान में स्थित बाटे आ एकर भूगोलीय बिस्तार 21° 58' 10 N ~ 27° 31' 15 N अक्षांश आ 82° 19' 50 E ~ 88° 17' 40 E देशांतर की बिचा में बाटे। बिहार के कुल रकबा 94,163 वर्ग किलोमीटर बाटे। बिहार के सीमा उत्तर में नेपाल, पुरुब ओर पश्चिम बंगाल, दक्खिन ओर झारखंड आ पच्छिम ओर उत्तर प्रदेश से सटल बा।

बिहार के जमीन की रचना की हिसाब से दू भाग में बाँटल जाला - शिवालिक के पहाड़ी भाग आ उत्तरी तराई प्रदेश अउरी बिहार मैदान।

तराई वाला हिस्सा मे तीन गो उपबिभाग कइल जाला:

बिहार में गंगा के बिचला मैदान पड़ेला आ एहू के दू हिस्सा में बाँटल जाला उत्तरी बिहार क मैदान आ दक्खिनी बिहार क मैदान।

 

बिहार के सभसे दक्खिनी हिस्सा में कई गो पहाड़ी बा जेवना में कुछ प्रमुख पहाड़ी बाड़ीं:

बिहार में 38 गो जिला बा जेवन 9 गो प्रमंडल में ग्रुप कइल बाटे:

बिहार के जलवायु नम उपोष्ण कटिबंधी जलवायु (Cwa) हवे। इहाँ जाड़ा में ख़ूब ठंढा मौसम रहेला आ तापमान 0 से 10 डिग्री ले नीचे गीर जाला। जाड़ा में बरखा पच्छिमी विक्षोभ से पैदा चक्रवात से होला। फरवरी कि अंत से ले के अप्रैल ले मौसम बसंत के होला आ सुहावन होला। अप्रैल की बाद गर्मी पड़े शुरू होला आ मई की अंत ले ख़ूब गर्मी पड़ेला जेवना में तापमान 45 डिग्री ले ऊपर पहुँच जाला। मई में लोकल झंझावात से बरखा भी होला। एकरी बाद मानसून के सीजन आ जाला आ बरखा के शुरुआत होला जेवन सितंबर की शुरुआत ले चलेला। बिहार में 150 से 200 सेंटीमीटर ले बरखा होला। अक्टूबर-नवंबर के मौसम सुहावन होला आ फिर नवंबर से जाड़ा शुरू हो जाला।

बिहार की 5,558 वर्ग किलोमीटर हिस्सा में बन क्षेत्र बा जेवना में 76 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र पर बहुत घन बन बा। बिहार की कुल रकबा के 5.9% क्षेत्र पर बन बाटे।




#Article 316: भारत के जिला सभ के लिस्ट (153 words)


जिला राज्य या केन्द्र शासित प्रदेशवन के एगो प्रशासनिक हिस्सा होखेला। जिलाकुल फिर उप-भागवन में या सीधे तालुकवन में बँटल होखेला।

जिलावन के अधिकारियन के गिनती में निम्न लोग आवेला:

निम्न में से प्रत्येक अधिकारी के अधीन राज्य सरकार के उपयुक्त शाखावन के अधिकारी होखेला।

अधिकतर जिलावन के एगो जिला मुख्यालय होखेला, जेकर नाम प्रायः जिला के नाम पर ही होखेला। कुछ जिलावन में अईसन ना होखेला, जैसे बिहार राज्य के जिला सारण के मुख्यालय बा छपरा में।

अधिकांश जिलावन के नाम उके मुख्यालयन के नामवन पर रखल होखेला। कुछ जिलावन के दुई नाम भी बाडें, एक पारंपरिक नाम आ दूसर मुख्यालय के नाम। काहेकि अधिकांश जिलावन के नाम उके मुख्यालय शहर के नाम पर पर रहेला, तो उ जिला के नाम के आगे जिला शब्द लगा दिहल जाला, जेसे कि उ जिला उ नाम के शहर से अलग हो सके।

नोट, चंडीगढ़ दुई राज्यवन आ एक केन्द्र शासित प्रदेश के राजधानी ह




#Article 317: नस्तालीक (102 words)


नस्तालीक़ (), इस्लामी कैलिग्राफी के एक प्रमुख पद्धति ह। इका जन्म इरान में चौदहवीं-पन्द्रहवीं शताब्दी में भइल रहल। ई इरान, दक्षिणी एशिया एवं तुर्की के क्षेत्रवन में बहुतायत में प्रयोग होत रहल। कभी कभी इके प्रयोग अरबी लिखे खातिर भी कइल जाला। शीर्षक आदि लिखे खातिर इके प्रयोग खूब होखेला। 

नस्तालीक के एगो रूप उर्दू एवं फारसी लिखे में प्रयुक्त होखेला। उर्दू अधिकांशतः नस्तालीक़ लिपि में लिखल जाला, जवन फ़ारसी-अरबी लिपि के एगो रूप ह। उर्दू दाहिना से बाँवे तरफ लिखल जायेला। भारत में उर्दू देवनागरी में भी लिखल जायेला। 

नीचे के सारिणी में नस्त'अलिक लिपि आ उका उच्चारण दिहल गईल बा। 




#Article 318: भाषा परिवार (145 words)


आपस में सम्बन्धित भाषावन के भाषा-परिवार कहल जायेला। कउन भाषाकुल कउन परिवार में आवेला, एकर वैज्ञानिक आधार बा।

इस समय संसार के भाषावन के तीन अवस्थाकुल बाडें। विभिन्न देशवन के प्राचीन भाषावन जेकर अध्ययन आ वर्गीकरण पर्याप्त सामग्री के अभाव में नईखे हो सकल, पहलीका अवस्था में बा। इकुल के अस्तित्व इमें उपलब्ध प्राचीन शिलालेखवन, सिक्कवन आ हस्तलिखित पुस्तकवन में अभी सुरक्षित बा। मेसोपोटेमिया के पुरान भाषा ‘सुमेरीय’ तथा इटली क प्राचीन भाषा ‘एत्रस्कन’ एही तरह की भाषाकुल हवें। दूसर अवस्था में अईसन आधुनिक भाषाकुल हवें, जेके सम्यक् शोध के अभाव में अध्ययन आ विभाजन प्रचुर सामग्री के होते हुए भी नईखे हो सकल। बास्क, बुशमन, जापानी, कोरियाई, अंडमानी आदि भाषाकुल एही अवस्था में बाड़ें। तीसरका अवस्था के भाषावन में पर्याप्त सामग्री बा आ उका अध्ययन एवं वर्गीकरण हो चुकल बा। ग्रीक, अरबी, फारसी, संस्कृत, अंगरेजी आदि अनेक विकसित एवं समृद्ध भाषाकुल इके अन्तर्गत आवेलें।




#Article 319: पूर्वांचल विकास क्षेत्र, नेपाल (301 words)


पूर्वांचल विकाश क्षेत्र नेपाल के पाँचों विकास क्षेत्र में से एगो विकास क्षेत्र ह। ई नेपाल के सबसे पूर्व में स्थित बा। ई का पूर्व में भारत के सिक्किम आ पश्चिम बंगाल के दार्जीलिंग तथा पश्चिम में नेपाल के मध्यांचल आ उत्तर में चीन के तिब्बत आ दक्षिण में भारत के बिहार स्थित बा। पूर्वांचल के मुख्यालय धनकुटा में स्थित बा। पूर्वांचल में 3 गो अंचल आ 16 गो जिला  बा।

ई क्षेत्र नेपालके तीसरा सबसे बड़ा विकास विकास क्षेत्र ह लेकिन जनसंख्या के हिसाब से नेपाल के दुसरका सबसे बड़ा जनसंख्या वाला विकास क्षेत्र ह। ई क्षेत्र के क्षेत्रफल  बा आ जनसंख्या औसत 5811555 ब्यक्ति बाड़ें। ई क्षेत्र के जनसंख्या घनत्व 204.2 व्यक्ति/किमा2 बा।

पारिस्थितीक रुप से ई क्षेत्र तीन भाग में बाँटल जा सकत बा: पर्वत, पहाड़ आ तराई।
ई क्षेत्र के तथा पुरा विश्व के सबसे ऊँचा पर्वत एवरेष्ट जे के नेपाली में सगरमाथा कहल जायेला, एहि क्षेत्र में स्थित बा। ई सगरमाथा अञ्चल के  सोलुखुम्बु जिला मे पड़ेला।

पूर्वाञ्चल क्षेत्र में सब से प्रमुख नदीयन में कोशी नदी पड़ेला जवन कि गंगा के सहायक नदी ह आ मेची नदी बा जवन महानन्दा नदी के सहायक नदी ह। नेपाल के बड़की नदी प्रणाली ह कोशी नदी आ एकर सबसे ऊँचा झरना प्रपात ह्यात्रुंग झरना नेपाल के तेह्रथुम जिला मे स्थित बा। ह्यात्रुंग झरना प्रपात ()  ऊँचा बा।

ई क्षेत्रजैव विविधता में धनी मानल जायेला, उदाहरणस्वरुप नेपाल में 31 प्रकार के गुराँस पावल जायेला जे में से 28 प्रकार के गुराँस तीनजुरे-मिल्के-जल्जले (पूर्वांचल) क्षेत्रवे में खाली पावल जायेला।

ई क्षेत्र के प्रमुख शहर कुल बाड़ें बिराटनगर, धरान, धनकुटा, इटहरी, राजबिराज, बिर्तामोड आ दमक. अन्य शहर कुल बाड़ें नाम्चे बजार (एवरेष्ट पर्वत के नियरे बेस कैम्प के लगे), गाईघाट, लहान, ईलाम, इत्यादी।

पूर्वांचल में मेची अंचल, कोशी अंचल आ सगरमाथा अंचल 3 गो अंचल पड़ेला आ 16 गो जिला बाड़ें।




#Article 320: नेपाल के इतिहास (757 words)


एशिया के बड़ देश सब चीन आ भारत के बीच में हिमालय के कोख में बसल देश नेपाल के इतिहास ई क्षेत्र में रहल अन्य देशवन कुल से अलग बा। नेपाल से दक्षिण के देश कुल जब विदेशीयन कुल के अधिन में रहल तवनो घड़ी नेपाल स्वतन्त्र राष्ट्र के रूप में स्थापित रहल।

नेपाल शब्द सब से पहिले अथर्ववेद में उल्लेखित पावल जायेला। अथर्ववेद के अनुसार नेपाल हिमालय के कोख में रहला के कारण नेपाल नाम के उत्पत्ति संस्कृत शब्द निपालय से भइल बा, जेकर अर्थ पहाड के आधार (पैर)  अथवा पैर पर निवास ह। 
ई के साथ साथ निचे बतावल गइल कथनो कुल सुने में आवेला:

काठमांडु घाटी में पावल गइल नि‍योलि‍थि‍क उपकरणन से ई पता चलेला कि अहिजा मानव जाति के बसाई 9 हजार वर्ष पहि‍ले से बा| इ से पता चलल बा कि मानव जे शायद किराँत जाति के रहल लोग लगभग 2500 वर्ष अगाडी अहिजा रहत रहल लोग। किराँती जंगली आ पहाडी कुल के एगो जनजाति हवे लोग, जवन मध्य एशिया, भारत आ हिमालय से आ कर के अहिजा बसे लागल लोग। किराँत काल से पहिले भी इ देश में गोपाल, महिषपाल जईसन अन्य जाति के लोगन के राज्य रहल ई बात के अपुष्ट इतिहास कुल भी पावल जायेला लेकिन स्पष्ट प्रमाण के अभाव होखला से किराँत काल शुरू होखला के समय से पहिले के इतिहास के मानल ना जायेला। एहि कारण से नेपाल के प्रामाणिक प्राचीन इतिहास के शुरुआत किराँत काल से हि भइल बा ई बात के इतिहासी मान्यता मिल चुकल बा। ई काल के राजा यलम्बर के हि प्रथम किराँती राजा के रूप में मानल गइल बा।

सन 400 से 750 तक नेपाल के हाल के राजधानी काठमांडु में लिच्छवीयन के शासन रहल। कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार तथा चिनी यात्री हुएन साङ्ग के यात्रा वृत्तान्त के अनुसार वैशाली से भाग के आइल कुछ वीर पुरुष लोग किराँती कुल के खेद के लिच्छवी वंश के स्थापना कइले रहल लोग । पावल गइल शिलालेख, मुद्रा आ चंगुनारायण मन्दिर के अभिलेख कुल से पता चलेला मानदेव लिच्छवी वंश के प्रथम इतिहासी राजा रहले । अंशुवर्मा के भारत के राजा हर्षवर्धन से निकटतम वैवाहिक संबंध रहल । ई बात से ई पुष्टि होला कि गण्डक नदी से कोशी नदी तक पहाडी भूभाग में लिच्छवी कुल किराँती कुल के खेद के एक साथ शासन कइले जा। एहि क्षेत्र से दक्षिण के नेपाल के तराई प्रदेश जईसे कि मिथिला राज्य बा ई के अंशुवर्मा अपना अधिन में लेके वैशाली आ पाटलीपुत्र राज्य में समावेश कर दिहले। अंशुवर्मा के बाद नरेन्द्रदेव भारतीय राजा कुल के समर्थन सहयोग से राज्य कइले । नरेन्द्र के बाद गुप्त वंश के शासन अईला से सम्पूर्ण राज्य छोट छोट राज्य में विभाजित हो गइल । ई सम्पूर्ण घटना ईसा पूर्व के ह। ओने बंगाल में चालुक्यसेन के राज्य रहल । नान्यदेव चालुक्य राजा के सेनापति रहले। जे तिरहुत डोय राज्य के स्थापना कर के सिमरनगढ के आपन राजधानी बनवले । मुसलमान आक्रमणकारी सुद्धिन तुगलक के भय से नान्यदेव के पलाती हरि सिंहदेव सर्लाही जिल्ला होते हुए भक्तपुर भाग गइलन उनकर रानी राजल देवी जयस्थिति मल्ल के आपन दामाद बनाके मल्लवंश के शासन स्थापित कइली।

विक्रम संवत 1799 में गोरखा के राजा नरभुपाल शाह के निधन के पश्चात राज्य सम्हाल के रखले रहन उनकर जेठ लैका पृथ्वी नारायण शाह। पृथ्वीनारायण शाह राज्य के विस्तार करे के सोचलन आ नेपाल के एकिकरण के शुरुआत कर दिहलन। उ पहिला हाली नुवाकोट पर विसं 1800 में आक्रमण कइलन लेकिन ओह बेरा उनके हार के सामना करे के पड़ल। फिर विसं 1801 में दुसरा हाली आक्रमण कइले आ नुवाकोट के उपर विजय प्राप्त कर लिहलें। ओ के बाद उ विसं 1814 आ विसं 1821 में किर्तिपुर के लड़ाई में दू-दू बार बहुत बुरा तरह से पराजित भइले। ई लड़ाई में किर्तिपुर के लोग सेनापति कालु पाण्डेय के मार दिहले जा आ पृथ्वी नारायण शाह के भाई सुरप्रताप के आँख कुल फोड़ दिहले जा। विसं 1822 चैत्र 3 गते पुन: किर्तिपुर के ऊपर आक्रमण करल गइल आ विजय हासिल भइल। पृथ्वी नारायण विसं 1825 भाद्र शुक्ल चर्दुशी के दिन काठमांडु में इन्द्रयात्रा पर्व मनावतखान आक्रमण कर दिहले आ जीत गइले। एकरा बाद उ क्रमश: विसं 1825 आश्विन 22 में ललितपुर, विसं 1826 कार्तिक में भक्तपुर के ऊपर विजय प्राप्त कइले।

पृथ्वी नारायण शाह काठमांडु के ऊपर विजय हासिल कइला के बाद विसं 2026 में आपन देश के राजधानी गोरखा से काठमांडु ले अईले आ उ आपन राज्य गोरखा के नाम बदल के सम्पूर्ण राज्य के नाम नेपाल रख दिहले। पृथ्वी नारायण के मृत्यु के बाद भी राज्य विस्तार के काम ना रुकल आ लगातार अड़ोस-पड़ोस के राज्य जितते हुए उनकर लैका-नाती कुल नेपाल के अउर बढवले जा।




#Article 321: किराँत राज्य (116 words)


संस्कृत साहित्य आ हिन्दू के पुरान ग्रन्थन से पता चलेला कि इतिहास में किराँती लोगन के एगो राज्य रहल जेके किराँत राज्य कह के सम्बोधन कइल जायेला, उ लोगन के राज्य हिमालय के पास रहल जेके हिमालयन निवासी भी कहल जायेला (अधिकतर पुर्वी हिमालय कि ओर)। उ लोग पर्वत निवासी लोग के साथ-साथ कुरूक्षेत्र के लड़ाई में हिस्सा लेले रहल लोग। उ लोग नेपाल आ भूटान के हिमालयी क्षेत्र में पूरा फैल गईल रहल लोग। उ लोगन के फैलाव भारत के राज्य हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, दार्जिलिंग, आसाम आ त्रिपुरा तक रहे। उ लोग पाकिस्तान के पश्चिमी हिमालय क्षेत्र तक भी फैल गईल रहल लोग। किराँत वंश के संस्थापक राजा यलम्बर रहलन।




#Article 322: बिहार के जलवायु (123 words)


बिहार के जलवायु नम उपोष्ण कटिबंधी जलवायु (Cwa) हवे। इहाँ जाड़ा में ख़ूब ठंढा मौसम रहेला आ तापमान 0 से 10 डिग्री ले नीचे गीर जाला। जाड़ा में बरखा पच्छिमी विक्षोभ से पैदा चक्रवात से होला। फरवरी कि अंत से ले के अप्रैल ले मौसम बसंत के होला आ सुहावन होला। अप्रैल की बाद गर्मी पड़े शुरू होला आ मई की अंत ले ख़ूब गर्मी पड़ेला जेवना में तापमान 45 डिग्री ले ऊपर पहुँच जाला। मई में लोकल झंझावात से बरखा भी होला। एकरी बाद मानसून के सीजन आ जाला आ बरखा के शुरुआत होला जेवन सितंबर की शुरुआत ले चलेला। बिहार में 150 से 200 सेंटीमीटर ले बरखा होला। अक्टूबर-नवंबर के मौसम सुहावन होला आ फिर नवंबर से जाड़ा शुरू हो जाला।




#Article 323: अर्थशास्त्र (217 words)


अर्थशास्त्र (Economics; इकोनॉमिक्स) सामाजिक विज्ञान के शाखा ह जेकरा अन्तर्गत वस्तुवन आ सेवा कुल के उत्पादन, वितरण, विनिमय आ उपभोग के अध्ययन करल जायेला। 'अर्थशास्त्र' शब्द संस्कृत शब्दन अर्थ (धन) आ शास्त्र के संधि से बनल बा, जेकर शाब्दिक अर्थ ह - 'धन के अध्ययन'। कउनो विषय के संबंध में मुनष्यन के कार्यन के क्रमबद्ध ज्ञान के उ विषय के शास्त्र कहल जायला, इहे खातिर अर्थशास्त्र में मुनष्यन के अर्थसंबंधी कायन के क्रमबद्ध ज्ञान होखल आवश्यक बा।

अर्थशास्त्र के फोकस एह बात पर होला कि बिभिन्न आर्थिक एजेंट सभ के बेहवार आ आपसी क्रिया-अंतर्क्रिया कवना तरीका के बा आ अर्थब्यवस्था सभ कइसे काम करे लीं। माइक्रोइकोनॉमिक्स में अर्थब्यवस्था के बेसिक तत्व सभ के बिस्लेषण कइल जाला जेह में एकहक ठो एजेंट आ बजार (मार्केट), इनहन के अंतर्क्रिया, आ एह अंतर्क्रिया (इंटरैक्शन) सभ के परिणाम के अध्ययन शामिल होला। एह एकहक ठो एजेंट सभ में परिवार, फर्म, बिक्रेता, खरीदार इत्यादि लोग सामिल होला। 

एकरे बिपरीत मैक्रोइकोनॉमिक्स में पूरा अर्थब्यवस्था के बिस्लेषण कइल जाला (मने कि पूरा संपूर्ण उत्पादन, उपभोग, बचत, आ निवेश) आ पूरा अर्थब्यवस्था के परभावित करे वाला मुद्दा, बेरोजगारी, बिबिध किसिम के आर्थिक नीति इत्यादि के अध्ययन आ बिस्लेषण कइल जाला।

अर्थशास्त्रीय विवेचना के प्रयोग समाज से संबंधित विभिन्न क्षेत्रन में कइल जायेला, जैसे:- अपराध, शिक्षा, परिवार, स्वास्थ्य, कानून, राजनीति, धर्म, सामाजिक संस्थान और युद्ध इत्यदि।




#Article 324: भारतीय उपमहादीप (210 words)


भारतीय उपमहाद्वीप या उपमहाद्वीप () एशिया के दक्खिनी हिस्सा में स्थित बा। एह क्षेत्र के ज्यादातर हिस्सा भूबिज्ञान के हिसाब से भारतीय प्लेट पर स्थित आ एकरे दक्खिन तरफ हिंद महासागर बाटे। 

भारतीय उपमहाद्वीप के परिभाषा भिन्न-भिन्न प्रकार से दिहल जायेला लेकिन इ में कुछ मुख्य देशकुल बाड़े जवन हमेशा शामिल कइल जायेलें भारत, पाकिस्तान आ बांग्लादेश। कुछ परिभाषा में श्रीलंका, नेपाल आ भूटानो के शामिल कइल जायेला। कुछ परिभाषा में कुछ अउर भी देश के नाम जोड़ल जायेला जइसे कि अफगानिस्तान आ म्यानमार। अलग-अलग परिभाषा के साथ अलग-अलग नाम भी हो सकत बा।

भारतीय उपमहादीप के कांसेप्ट पुरान हवे आ बतावल जाला कि मेगस्थनीज जेकरा के इंडिया कहलें, भा बाद में जेकरा के हिंदुस्तान कहल जाय ओह में ई पूरा इलाका सामिल रहल आ एकरा के एगो सांस्कृतिक क्षेत्र के रूप में पहिचान रहल; वर्तमान भारत गणराज्य, पाकिस्तान, श्रीलंका, भूटान, नेपाल नियर देस सभ आधुनिक काल के संकल्पना हवे आ मूल सांस्कृतिक इकाई के रूप में पहिचान एकरे बहुत पहिले के हवे।

भारतीय उपमहादीप यानी अंगरेजी में इंडियन सबकंटीनेंट के जगह कुछ लोग खाली सबकंटीनेंट, दक्खिन एशियाई उपमहादीप (साउथ एशियन सबकंटीनेंट), या फिर खाली दक्खिन एशिया कहल पसंद करे ला। एह में पाकिस्तानी लोग आ चीनी लोग सामिल बा जे लोग एह में भारतीय शब्द पर आपत्ति करे ला।




#Article 325: भारतीय प्लेट (110 words)


भारतीय भूमी-खण्ड या इन्डियन प्लेट एगो विवर्तनिक प्लेट (भूमी-खण्ड) ह जवन मूल रूप से गोंडवाना के प्राचीन महाद्वीप के एगो हिस्सा रहल जे में से इ बँट के अलग हो गईल आ एगो मुख्य हिस्सा बन गईल। लगभग पाँच से साढ़े पाँच करोड़ वर्ष पहिले इ भूमी-खण्ड अष्ट्रेलियाई भूमी-खण्ड से जुड़ल रहल। इ भाग आज मुख्य इंडो-अष्ट्रेलियाई भूमी-खण्ड के एगो हिस्सा ह जेमे दक्षिण-एशिया के बहुत सारा हिस्सा आवेला जइसे कि भारतीय उपमहाद्वीप, हिंद महासागर के तहत बेसिन के हिस्सा, दक्षिण चीन अउर पूर्वी इंडोनेशिया के कुछ हिस्सवन सहित। इ लद्दाख, कोहीस्तान आ बलूचिस्तान के छोर तक फैलल बा लेकिन लद्दाख, कोहिस्तान आ बलूचिस्तान के इ में ना गनल जायेला।




#Article 326: भूपरिवेष्ठित राष्ट्र (212 words)


भू-परिवेष्ठित राष्ट्र या स्थल रुद्ध राष्ट्र उ राष्ट्र के कहल जाला जवना देश के सिमा चारो ओर से कउनो न कउनो देश से घेराइल होखे अर्थात कहे के माने ह की उ देश के सिमा कहीं से भी कउनो खुला समुन्दर के तट से न लागल होखे। कुछ राष्ट्र बाड़ें जवन दुई गो देश से घेराइल बाड़ें त कउनो देश अधिक देशन से घेराइल बाड़ें। कुछ देशन के सिमा समुन्दर से लागल बा फिर भी भू-परिवेष्ठित बा काहे की उ देश जवना समुन्दर से घेराइल बा उ समुन्दर खुला समुन्दर नइखे।

निचे कुछ भू परेवेष्ठित देशन के देखीं

भू-परिवेष्ठित राष्ट्र हो सकत बा एकही देश से चारो ओर से घेराईल होखे (अगर समुन्दर बा त उहो घेराईल होखे) या दुई गो देश से घेराईल होखे या अधिक देशन से घेराईल होखे। जवन भू-परिवेष्ठित देश चारो ओर से कउनो दूसर भू-परिवेष्ठित देश (एक या अधिक) से घेराईल होखे त ओईसन देश के दोहरा भू-परिवेष्ठित देश कहल जाला।

तीनगो देश कुल बाड़ें जवन एकही देश से चारो ओर से घेराईल बाड़ें।

सातगो देश कुल बाड़ें जवन मात्र दूईये गो देश से चारो ओर से घेराईल बाड़ें:

इ सूची में दूई गो अउर देश के जोड़ल जा सकत बा जेवना के अंतराष्ट्रिय तौर पर देश के मान्यता नईखे अथवा थोड़ा मात्रा में मान्यता प्राप्त बा।:




#Article 327: मध्यमांचल विकास क्षेत्र, नेपाल (236 words)


मध्यमांचल विकास क्षेत्र नेपाल के पाँच विकास क्षेत्रन में से एगो विकास क्षेत्र ह। इ नेपाल के मध्य में स्थित बा। एकर पूर्व में पूर्वांचल विकास क्षेत्र, पश्चिम में पश्चिमांचल विकास क्षेत्र तथा उत्तर में चीन के तिब्बत तथा दक्षिण में भारत के बिहार स्थित बा। मध्यमाञ्चल के मुख्यालय काठमांडु में स्थित बा। मध्यमाञ्चल में 3 गो अंचल तथा 19 गो जिला कुल बाड़ें।

मध्यमांचल विकास क्षेत्र नेपाल के चौथा सबसे बड़हन विकास क्षेत्र ह जेकर क्षेत्रफल बा  लेकिन जनसंख्या के हिसाब से इ विकास क्षेत्र सबसे बड़ ह। अहिजा के जनसंख्या बा 9,656,985 ब्यक्ति; एकर जनसंख्या घनत्व दूसर क्षेत्रन से उच्च बा 352.3 ब्यक्ति/किमी2 बा।

काठमांडु घाटी एहि विकास क्षेत्र में पड़ेला जेकर क्षेत्रफल बा ; एकर लंबाई पुरब से पश्चिम कि ओर  बा आ चौड़ाई उत्तर से दक्खिन ओर  बाटे।

मध्यांचल विकास क्षेत्र के महत्वपूर्ण नदियन में बाड़ी बागमती, जवन कोशी के सहायक नदी हई। इ काठमान्डु से होते हुए बहेली आ गंगा नदी में जा के मिल जायेली। हिन्दू अउर बुद्ध धर्म के लोगन द्वारा बागमती नदी के पवित्र नदी मानल जाला।

इ क्षेत्र के दूसर कुल नदी बाड़ी जा कमला, लखनदेई अउर विष्णुमती; इ तीन छोट नदी बागमती के सहायक नदी हई जा।

इ क्षेत्र के महत्वपूर्ण शहर कुल बाड़े जा काठमांडु, पाटन, भरतपुर, भक्तपुर, भैरहवा, ललितपुर, नगरकोट आ जनकपुर। अन्य उल्लेखनीय जगह कुल बाटे खोकना, हेटौडा, हरिसिद्धी, गोदावरी, इत्यादी।

इ क्षेत्र में 3 गो अंचल आ 19 गो जिला कुल बाटे:




#Article 328: दक्खिन एशियाई क्षेत्रीय सहजोग संगठन (128 words)


दक्खिन एशियाई क्षेत्रीय सहजोग संगठन (हिंदी: (दक्षेस), अंग्रेज़ी:(SAARC)) दक्खिन एशिया के आठ गो देस सभ के आर्थिक आ राजनीतिक संगठन हवे। एह संगठन की सदस्य देसवन की जनसंख्या (लगभग 1.5 अरब) के देखल जाय त ई कौनों भी क्षेत्रीय संगठन की तुलना में ढेर प्रभावशाली बा।

एकर अस्थापना 8 दिसम्बर 1985 के भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव आ भूटान के मिला के भइल रहे। बाद में अप्रैल 2007 में एकरी 14वाँ शिखर सम्मेलन में अफ़ग़ानिस्तान एकर आठवाँ सदस्य बन गइल।

संगठन के संचालन सदस्य देस सभ के मंत्रिपरिषद द्वारा नियुक्त महासचिव करे लें लोग, जिनहन लोगन के नियुक्ति तीन साल बदे देसवन के वर्णमाला क्रम की अनुसार कइल जाले।

आज की समय में एह संगठन में नीचे दिहल गइल देस सदस्य बाने (अंगरेजी के अक्षर क्रम में):




#Article 329: लोकेशन (246 words)


लोकेशन, अस्थान या फिर जगह, भूगोल में पृथ्वी की कौनों क्षेत्र, सहर गांव या कौनों भी बिंदु के कहल जाला जेवन अपनी स्थिति खातिर बिसेस रूप से पहिचनाल जा सके। आम बोलचाल में जगह आ लोकेशन दुनों के एकही अरथ लगावल जाला। हालाँकि, भूगोल में इनहन में एगो भेद कइल जाला। लोकेशन के भूगोल में दू तरीका से बतावल जाला। स्वतंत्र निर्देशांक द्वारा, मने की अक्षांश-देशांतर की द्वारा; या सापेक्षिक निर्देशांक द्वारा - जेवना में दूसरी मालूम जगहन से दूरी आ दिशा बतावल जाला। जबकी, जगह के परिभाषा बतावे में सटीक लोकेशन पर ओतना जोर ना होला जेतना कि ओह लोकेशन पर पावे जाए वाला चीज सभ के बिसेसता बतावे पर होला। के अपने आप में बिशिष्ट भइले की कारन ई भूगोल के आधार हवे, काहें से की भूगोल में प्राथमिक रूप से एही बात के पढ़ाई होला की कौनो चीज कौनी-कौनी जगह पर पावल जाला, या फिर कौनों जगह बिसेस पर कवन-कवन चीज मिलेला।

भूगोल आ जीआइएस में आमतौर पर जगह शब्द के तीन गो अरथ में प्रयोग हो सकेला:

एह में लोकेशन आ प्लेस में ई अंतर होला की लोकेशन पृथ्वी क कौनो भी बिंदु हो सकेला जइसे की 27° 59' N आ 86° 56' E एगो लोकेशन बा। बाकी जबले एकर पहिचान नइखे तबले ई अस्थान (प्लेस) ना कहाई। हँ, जब ई बता दिहल जाय की ई माउन्ट एवरेस्ट के लोकेशन हवे, तब ई एगो बिसेस जगह बन जाई जेवना के पहिचान भी साफ हो गइल। अब ई जगह के प्लेस कहल जाई।




#Article 330: सरस्वती नदी (168 words)


सरस्वती नदी दुनिया के सभसे प्राचीन संस्कृत साहित्य ऋग्वेद में बर्णित एक ठो नदी हवे। बाद के बैदिक आ बैदिक-बाद काल में भी एकर बरनन मिले ला।  हिंदू धरम में एकर बहुत महत्व एह कारण से भी बा कि लगभग दूसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व के जमाना में वैदिक लोग द्वारा ऋग्वेद के रचना एही नदी के तीरे रहत समय भइल रहे। हिंदू लोग द्वारा पूजल जाए वाली देवी सरस्वती एही नदी के देवी रूप में कल्पना रहली, बाकि बाद में समय के साथ अलग रूप बिकसित हो गइल। ऋग्वेद के नदीसूक्त (10.75) में सरस्वती के यमुना आ सतलज के बिचा में बहे वाली बतावल  गइल बाटे। बाद के ब्राह्मण ग्रंथ, तांड्य आ जैमिनीय ब्राह्मण में, आ महाभारत में सरस्वती के रेगिस्तान में सूख जाए के बिबरन मिले ला।

हिंदू मान्यता के अनुसार सरस्वती नदी अदृश्य रूप से आज भी बहे ले आ गंगा आ यमुना के साथ इलाहाबाद में त्रिवेणी संगम बनावे ले। हमनी के गैलेक्सी आकाशगंगा में एक ठो हिस्सा के भी सरस्वती नाँव दिहल गइल बाटे।




#Article 331: संयुक्त प्रांत (104 words)


संयुक्त प्रांत या 'युनाइटेड प्रोविंसेस्' (United Provinces) ब्रिटिशकालीन भारत में तथा भारत के स्वतंत्र होखला के बाद तक एक प्रमुख प्रान्त रहल। इ 1 अप्रैल 1937 के अस्तित्व में आइल जब तत्कालीन अंग्रेज कुल 'युनाइटेड प्रोविंसेस' के छोट कइले जा। एकरा अन्तर्गत लगभग उहे भूभाग आवत रहल जवन वर्तमान में उत्तर प्रदेश आ उत्तराखण्ड के मिलाके बनत बा।

स्वतंत्रत होखला के बाद सन् 1947 में बनारस, रामपुर आ टेहरी-गढ़वाल के रियासतो कुल 'युनाइटेड प्रोविंसेस' में मिला लीहल गइल। 25 जनवरी 1950 के एकर नाम बदलके 'उत्तर प्रदेश' कर दिहल गइल। सन् 2000 में एही में से उत्तरांचल (अब 'उत्तराखण्ड') नामक प्रदेश के निर्माण भइल।




#Article 332: खुसरू बाग (653 words)


खुसरू बाग उत्तर प्रदेश के, इलाहाबाद नगर मे एक ठो बिसाल बाग बा जेह मे चार ठो मकबरा मौजूद बाड़ें। जहाँगीर के सभसे बड़का लइका खुसरू मिर्जा (निधन 1622 ई॰) के मकबरा एह मे प्रमुख बाटे जेकरा नाँव प एह बाग के भी नाँव धराइल बाटे। एकरे अलावा, खुसरू के महतारी शाह बेगम (निधन 1604), खुसरू के बहिन सुलतान निसार बेगम (या सुल्तानुन्निसा बेगम) (निधन 1624) आ एक ठो नामालूम ब्यक्ति तमोलिन बेगम के मकबरा एक बाग में मौजूद बाड़ें।

वर्तमान समय में एह बाग आ मकबरा के भारत के राष्ट्रीय महत्व के स्मारक सभ में दर्जा दिहल गइल बाटे आ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण बिभाग एकर रखरखाव करे ला। एकरे अलावा सरकार एह में एक ठो इको पार्क के भी स्थापना कइले बाटे। बाग वाला हिस्सा में नर्सरी भी बाटे। एही बाग के पूरबी भाग में इलाहबाद के जल निगम के मुख्य कार्यालय आ अउरी अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर भी बा।

ई बाग इलाहाबाद के पच्छिमी हिस्सा में मोहल्ला खुल्दाबाद में बाटे। इलाहाबाद जंक्शन के सामने थोडा सा दाहिनी ओर हट के एकर पछिला गेट मौजूद बा। ई अकबर के किला से लगभग 2 मील के दूरी पर पच्छिम ओर पड़े ला।

चौकोर आकर के ई बाग चारों ओर से ऊँच देवाल वाला बाटे। एह में तीन गो गेट बाड़ें। मुख्य दरवाजा, दक्खिन दिसा में पुरनका जी॰टी॰ रोड पर खुले ला। उत्तर दिसा वाला दरवाजा, रेलवे स्टेशन के सामने वाली रोड, लीडर रोड पर खुले ला। पूरुब दिसा वाला दरवाजा रेलवे स्टेशन से खुल्दाबाद जाए वाली मेन रोड में जुड़े वाली एक ठो गलीनुमा सड़क पर खुले ला।

खुसरू बाग में मौजूद भवन आ एकर दरवाजा मुगल शैली के उदाहरण के रूप में गिनल जालें।
खुसरू बाग के दक्खिनी दरवाजा, जेवन सबसे भब्य बाटे, पुराना समय में खुल्दाबाद नाँव के सराय में खुले। एकरे दरवाजा के सजावट किला के दरवाजा से मिलत बतावल गइल बाटे। एह दरवाजा आ एकरे ठीक सीध में बनल शाह बेगम के मकबरा आ आसपास के वातावरण के डिजाइन के श्रेय जहाँगीर के दरबारी कलाकार अक़ा रिज़ा के दिहल जाला।

बाग के अंदर थोड़ी-थोड़ी दूर पर पूरब से पच्छिम, एक लाइन मे चार गो भवन बाड़ें। इनहन के बीच में दू गो फव्वारा बाड़े। फव्वारा के पानी के सोता के रूप में थोड़ी दूर उत्तर ओर एक ठो इनार पुरान इनार बाटे जे अब जाली से तोप दिहल गइल बा।

चारों इमारत में सभसे पूरब ओर खुसरू के मकबरा बाटे जे एक तल्ला वाला सादा भवन बाटे। एकरे देवाल पर आ गुम्बद के भीतरी हिस्सा में फ़ारसी में शेर लिखल बतावल गइल बा।

पूरब के ओर से दूसरा मकबरा खुसरू के बहिन के बतावल जाला। ब्रिटिश लाइब्रेरी के बिबरन के मोताबिक ई खुसरू के बहिन रहली जिनके नाँव सुलतान निसार बेगम बतावल बा, हालाँकि इलाहाबाद के इतिहास लेखक इनके नाँव सुल्तान्नुन्निसा बेगम लिखले बाड़ें। ई मकबरा एक ठो सुन्दर आ सजावट वाला भवन बाटे जेह में कब्र नइखे। एकर निर्माण सुल्तानुन्निसा अपने जीवन काल में अपना मकबरा खातिर करवले रहली बाकी बाद में उनुके राय बदल गइल आ उनुके सिकंदरा में अकबर के कब्र के बगल में दफन कइल गइल।

आर्किटेक्चर के हिसाब से ई मकबरा सभसे खूबसूरत बाटे। एक ठो ऊँच चबूतरा पर बनल ई भवन एक ठो सुन्दर रचना बा। एकरे गुंबद के अंदरूनी हिस्सा में सुंदर सजावट के काम बा।

तीसरा मकबरा, खुसरू के महतारी शाह बेगम के बा। शाह बेगम, मूल रूप से मनभावती बाई या मान बाई, आमेर के राजा भगवान दास के लइकी रहली। जहाँगीर आ खुसरू के बीच झगडा से परेशान हो के ई अफीम खा के आत्महत्या कर लिहली। इनके मकबरा एह बाग के मुख्य भवन बाटे ई तीन तल्ला के इमारत, इहाँ मौजूद इमारत सभ में सभसे बड़ बाटे। एकर डिजाइन जहाँगीर के दरबारी कलाकार अक़ा रिज़ा बनवले रहलें आ एह पर सजावट के काम मीर अब्दुल्ला मुश्कीन कलाम कइलेन। कब्र सभसे नीचे वाले खंड में बा जबकि ओकरे ऊपर वाले खंड में संगमरमर के नकल बाटे। भवन के सभसे ऊपरी तल्ला एक ठो सुन्दर मुगलिया गुम्बदाकार छतरी के रूप में बा।




#Article 333: मिंटो पार्क (142 words)


मिंटो पार्क () भा सरकारी नाँव मदन मोहन मालवीय पार्क इलाहाबाद में एक ठो पब्लिक पार्क बाटे। शहर के दक्खिनी हिस्सा में यमुना नदी के किनारे मौजूद ई पार्क अपना इतिहासी महत्व खातिर प्रसिद्द बाटे। 1 नवंबर 1858 के लार्ड कैनिंग अहिजे से रानी विक्टोरिया के मशहूर घोषणापत्र पढले रहलन। एही घोषणापत्र द्वारा आधिकारिक रूप से भारत पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन के अंत भइल आ भारत ब्रिटिश क्राउन के अधीन भइल। ओह समय इहाँ एक ठो बड़हन मैदान रहल जहाँ एह घोषणा खातिर दरबार लगावल गइल। बाद में इहाँ पार्क बनावे के फैसला भइल आ 1910 में लार्ड मिंटो अहिजा एक ठो चीन्हा के रूप में सफ़ेद संगमरमर के खंभा लगववलें आ पार्क खोल दिहल गइल। बाद में एह  ऊपरी हिस्सा के बदल दिहल गइल आ अब एह पर चार शेर के निशान वाला भारत के वर्तमान राजचिह्न बा।




#Article 334: अवग्रह (126 words)


अवग्रह (ऽ) एगो देवनागरी चिन्ह ह जवन अंगरेजी के एस (S) जइसन दिखेला। एकर प्रयोग संधि-विशेष के कारण लुप्त हो गइल। 'अ' के प्रदर्शित करे खातिर एकर प्रयोग कइल जाला। जइसे प्रसिद्ध महावाक्य 'सोऽहम्' में। पाणिनीय व्याकरण (अष्टाध्यायी) में ए संबंध में नियम बा।
एकर प्रयोग संस्कृत में ए प्रकार होखेला-
बालकः+अयम्= बालको+अयम्=बालकोऽयम्।

इ के पूर्वरूप स्वर सन्धि कहल जाला। इ अयादि सन्धि के अपवाद ह। आधुनिक भारतीय भषवन में इ चिह्न के प्रयोग अतिदीर्घ स्वर (जैसे पुकारे में) खातिर भी कइल जाला, जैसे -'माइऽऽऽ'।
मैथिली भाषा में एकर प्रयोग अभी भी होला। जइसे अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन करू, कारण, स्‍वर्गक राज्‍य लग आबि गेल अछि”। एकर प्रयोग कहीं कहीं भोजपुरी में भी पावल गईल बा। जइसे- बनारस कऽ घाट पर बइठल रहलीं।




#Article 335: यज्ञ (102 words)


यज्ञ, जग्य भा जग्गि, हिंदू धर्म में एगो धार्मिक अनुष्ठान हवे। यज्ञ के शाब्दिक अरथ 'अर्पण कइल, पूजन कइल आ समादर कइल' होला। आम तौर पर यज्ञ में देवता लोग के बिबिध प्रकार से पूजा कइल जाला, ओहके बाद अग्नि में बिबिध प्रकार के चीज मंत्र पढ़-पढ़ के हवन कइल जाला। मानल जाला कि ई अर्पित सामग्री, अग्नि देव द्वारा ओह सारा देव लोग ले पहुँचावल जाई।

यज्ञ, ब्याक्तिगत रूप से अकेले भी अग्नि के सोझा बइठ के कइल जा सके ला आ भारी ढंढकमंडल के साथ बिसाल आयोजन के रूप में भी हो सके ला जेह में हजारन लोग सामिल होखे। 




#Article 336: झूँसी (152 words)


झूँसी या झूंसी, इलाहाबाद क एगो उपनगर हवे। ई इलाहाबाद शहर के पूरुब में, गंगा नदी के पार बसल बस्ती हवे। इलाहाबाद के मोहल्ला दारागंज आ झूँसी के बीच में सड़क लालबहादुर शास्त्री पुल बाटे आ रेलवे पुल (आइजेट ब्रिज) बा। झूँसी में रेलवे टीशनो बा।

झूँसी से कुछ दूर पर एगो प्राचीन इनार बा जेकरा के समुद्रकूप के नाँव से जानल जाला आ ई समुद्रगुप्त के बनवावल मानल जाला। इलाहाबाद जिला गजेटियर में दिहल बर्णन के मोताबिक झूसी के प्राचीन नाँव प्रतिष्ठानपुर रहल आ ई प्रयाग से पुरान नगर हवे काहें से कि पहिले प्रयाग में खाली ऋषि-मुनि लोग के आश्रम भर रहे। एह प्रतिष्ठान पुर के चंद्रबंसी राजा पुरुरवा (ऐल) के राजधानी बतावल जाला। इहो बतावल जाला कि पुरुरवा अपना महतारी इला खाती एगो आवास गंगा पार बनववले रहलें जे इलाआवास कहाय आ बाद में बिगड़ के इलाहाबास भ गइल रहे, अकबर एही के कुछ बदल के इलाहाबाद क दिहलें।




#Article 337: वैदिक काल (361 words)


वैदिक काल (1500 ईसा पूर्ब – 500 ईसा पूर्ब) भारत आ भारतीय उपमहादीप की इतिहास के ऊ काल हवे जेवना समय वेद के रचना भइल मानल जाला। एकरे पहिले के काल सिंधु घाटी सभ्यता के हवे आ एकरे बाद गंगा मैदान में दुसरा शहरी बिस्तार के काल हवे। एह काल के नाँव वेद ग्रंथ सभ के नाँव पर रखल गइल हवे जे एह दौर के बारे में उपलब्ध परमान बाने। वेद सभ के रचना एह काल में भइल आ ई जबानी इयाद कऽ के पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे पास भइलें। एही से इनहन के श्रुति ग्रंथ कहल जाला।

वैदिक सभ्यता के संबंध आर्य लोग से बतावल जाला। हालाँकि, आर्य शब्द कौनों प्रजाति (रेस) के खाती ना इस्तेमाल भइल हवे बलुक ई भाषा के वर्गीकरण हवे। अलग-अलग बिद्वान लोग आर्यभाषा बोले वाला, मने कि आर्य लोग, के मूल अस्थान भारत से बहरें माने ला हालाँकि, ई बहरहूँ कहाँ रहल एह बारे में कौनों एकमत ना बा। मानल जाला कि भारत (भारतीय उपमहादीप) में आर्य लोग के आगमन भा आक्रमण करीबन 1500 ईसा पूर्ब के समय में भइल रहे। एही जा से वैदिक काल के सुरुआत मानल जाला। एकरे बाद एह काल के दू हिस्सा में बाँटल जाला।

कुछ लोग सुरुआती आ बाद के वैदिक काल में ई बिभाजन करे ला आ इनहन के बीचा के सीमा 1200 ईसापूर्ब बतावे ला। कुछ लोग ई बात कहे ला कि ऋग्वेद, जे चारों वेद सभ में सभसे पुरान ग्रंथ हवे, एह में लोहा के कवनो जिकिर ना मिले ला। एह आधार पर लोहा वाल जुग से पहिले के कालखंड के ऋग्वेदिक काल के नाँव दिहल जाला आ एकर समय 1500 से 1000 ईसा पूर्ब माने ला काहें से कि भारत में लोहा के इस्तेमाल के पहिला सबूत, वर्तमान में एटा जिला के अतरंजीखेड़ा नाँव के जगह से, 1000 ईपू के आसपास के समय के मिले ला। 600 से 500 ईसा पूर्ब के समय में भारत में दूसरी नगरीय क्रांति भइल आ एही समय ले वैदिक काल के सभसे बाद वाली सीमा निर्धारित कइल जाला, जबकि वैदिक काल के गाँव वाली सभ्यता बतावल जाला। शहर (महाजनपद काल) के उदय आ श्रमण आंदोलन में तेजी जे वेद के महत्त्व के चुनौती दिहल एह काल के अंतिम अवस्था मानल जाला।




#Article 338: ययाति (201 words)


ययाति भारतीय पुराणन में बर्णित कथा सभ में इक्ष्वाकु बंस के एगो राजा हवें। इनके कथा प्रसिद्ध महाकाब्य महाभारतो में मिले ला। ययाति राजा नहुष आ अशोकसुंदरी के छह गो बेटा लोग में से दुसरा नमर पर रहलें आ बड़ भाई याति के राजकाज में रूचि न होखे के कारन इनके राज मिलल। इनकर बियाह असुर लोग के गुरु शुक्राचार्य के बेटी देवयानी से भइल। देवयानी के सखी शर्मिष्ठा के साथे संबंध हो जाए के कारन नराज हो के शुक्राचार्य इनके बृद्ध हो जाए के सराप दे दिहलें, हालाँकि बाद में ई कहलें कि अगर तोहार लरिका आपन जवानी दे के बूढ़ होखे खाती तइयार होखे तब तोहके बदले में तोहार जवानी वापिस मिली। एह तरीका से ययाति काफी समय ले भोगबिलास कइलें बाकी उनके इच्छा तिरपित ना भइल, अंत में ऊ बैराग धारण क लिहलें।

यदु, तुवर्षु, अनु, द्रुह्य आ पुरु इनके लइका बतावल गइल बा आ अंतिम बेटा पुरु आपन यौवन के त्याग कइले रहलें। इहे पुरु महाभारत के पांडव लोगन के पुरखा रहलें। ई कथा महाभारत में आ भागवत पुराण में मिले ला। एही कथा आ राजा ययाति के नाँव पर, बुढ़ापा में बहुत जोर के कामना के ययाति ग्रंथि (ग्रंथि माने मन के जटिलता, अस्वाभाविकता) कहल जाला।




#Article 339: इलाहाबाद के इतिहास (1555 words)


इलाहाबाद, जवना के एकरे पुरान नाँव प्रयाग से भी बोलावल जाला, भारत के उत्तरी हिस्सा के राज्य उत्तर प्रदेश में एगो बड़ा आ प्रमुख शहर बाटे। मानल जाला की प्रयाग के नाँव इलाहाबाद बादशाह अकबर द्वारा 1575 ईसवी में राखल गइल जे अंगरेजी राज में, अंगरेजी में Allahabad हो गइल आ अंगरेजी में एकर इहे इस्पेलिंग लिखल जाए के कारन कुछ लोग ए के अलाहाबाद भी कहे ला। शहर एगो तिकोना आकार के जमीनी हिस्सा पर बसल बाटे जे तीन ओर से गंगा आ यमुना नदिन से घेराइल बाटे आ खाली पच्छिम ओर के जमीनी हिस्सा दुआब से जुड़ल बाटे। शहर के मुख्य महत्व हिंदू धर्म में पवित्र स्थान, तीर्थ, के रूप में बाटे। हिंदू मत के अनुसार गंगा आ यमुना, दुनों नदी के पबित्र मानल गइल बा आ इनहन के मिले के अस्थान, संगम, त्रिवेणी संगम के नाँव से बोलावल जाला। मान्यता के अनुसार, वैदिक काल के सरस्वती नदी (जे अब सूख चुकल बा) प्राचीन काल में अहिजे गंगा आ यमुना के साथ मिले आ तीन गो नदिन के मिले के ई जगह त्रिवेणी संगम कहाय। ई जगह, भारत के चारि गो अइसन जगह में बा जहाँ कुंभ मेला लागे ला आ हिंदू लोग के तीर्थ हवे। साहित्य में आ हिंदू ग्रंथन में कुछ जगहन पर एकरा के तीरथराज के उपाधि भी दिहल गइल बा।

एकर प्राचीन नाँव प्रयाग (संस्कृत शब्द जेकर अर्थ बा यज्ञ के भूमि), ई मानल जाला कि ब्रह्मा के द्वारा एही जे यग्य करे  करे के कारन पड़ल।

प्रयाग क अस्तित्व वैदिक काल से बा आ वैदिक साहित्य में एकर वर्णन ब्रह्मा जी की यग्य की भूमि की रूप में भइल बा आ एही क समर्थन मत्स्यपुराण आ लिंगपुराण में भी मिलेला। इहवाँ पुरातात्विक खोदाई में पालिशदार उत्तरी काला मृदभाण्ड मिलल बा जेवन 600 ई॰पू॰ से 700 ई॰पू॰ के बतावल जाला। पुराणन में वर्णन मिलेला कि राजा ययाति जेवन प्रयाग से जा के सप्तसैन्धव प्रदेश पर विजय प्राप्त कइलें उनहीं के पाँच पुत्रन (यदु, द्रुह्य, पुरु, अनु, आ तुवर्शु) की नाँव पर ऋग्वेद की मुख्य जन क नाँव पड़ल। जब आर्य लोग मध्यदेश में आपना प्रभुत्व अस्थापित कइलें तब कौशाम्बी-प्रयाग क क्षेत्र उनहन लोगन की अधिकार में महत्वपूर्ण क्षेत्र रहल। कुरु लोग हस्तिनापुर की बाढ़ में बह गइला की बाद कौशाम्बी नगरी क अस्थापना कइलें जेवन ऋषि कोसंब की नाँव पर बसल। महर्षि वाल्मीकि रचित रामायण में श्री राम के इहवाँ आगमन के वर्णन बा जब ऊ बनवास कि समय दक्षिण की ओर जात घरी इहँवा भारद्वाज ऋषि की आश्रम में रुकल रहलें। इहाँ से श्री राम भरद्वाज ऋषि की सुझाव के मानि के चित्रकूट की ओर गइलें आ उहाँ कुटी बना के रहे लगलें।

महाजनपद काल में प्रयाग के ई इलाका वत्स राज्य की अन्दर आवे जेकर राजधानी कौशाम्बी रहे। एकरी बाद भगवान बुद्ध के इहवाँ आगमन के वर्णन मिलल बा जब 450 ई॰पू॰ मगध में अजातशत्रु के शासन रहे । 319 ई॰पू॰में चंद्रगुप्त मौर्य कौशाम्बी पर अधिकार क लिह्लें आ प्रयाग भी उनकी अधिकार में आ गइल। 273 ई॰ में सम्राट अशोक की शासन काल में इहँवा एगो कीर्ति स्तंभ लगवावल गइल जेवन आज भी अशोक स्तंभ की नाँव से इलाहाबाद में अकबर की किला में सुरक्षित बा। ए पर उत्कीर्ण लेख के प्रयाग प्रशस्ति की नाँव से जानल जाला। प्रयाग प्रशस्ति में समुद्रगुप्त द्वारा 326 ई. में अश्वमेध यग्य कइला क वर्णन लिखल बा आ ए शिला लेख के रचयिता हरिषेण के मानल जाला। समुद्रगुप्त के खोदवावल कुआँ इलाहाबाद की बगल में झूँसी की लगे बा जेवना के समुद्रकूप कहल जाला।

एकरी बाद 525 ई॰ में प्रयाग आ एकरी आसपास की इलाका पर कन्नौज की राजा यशोवर्मन क अधिकार हो गइल। सम्राट हर्षवर्द्धन की बारे में कहल जाला कि उहाँके हर कुंभ मेला में आपन सबकुछ दान क दीं। चीनी यात्री ह्वेन सांग के आगमन हर्षवर्धन की समय में भइल रहे आ ऊ प्रयाग के यात्रा कइलें आ अपनी बर्णन में लिखलें कि गंगा आ यमुना नदी जहाँ मिलेलीं उहाँ एगो बड़ा मंदिर आ विशाल पेड़ बा। उ इहो लिखलें कि ए पेड़ (अक्षयवट) से बहुत लोग कूदि के जान दे देला काहें की ई मान्यता बा कि ए परम पबित्र जगह पर मरला से स्वर्ग मिल जाई। हर्षवर्द्धन की बाद क लगभग 200 बारिस क इतिहास नामालूम बा। लगभग 810 ई. की बाद कन्नौज क शासन प्रतिहार राजपूत लोगन की द्वारा भइल आ 1090 ई॰ की आसपास कड़ा के इलाका चंद्रदेव गहड़वाल की कब्ज़ा में आ गइल। ए समय प्रयाग के शासन कड़ा से चले आ लगभग सारा जानकारी कड़ा की पुरालेख से प्राप्त होला।

मुहम्मद गोरी 1194 ई॰ में एक कि बाद एक दिल्ली आ कन्नौज पर अधिकार करत बनारस ले हमला कइलस आ प्रयाग की इलाका पर भी ओकर प्रभुत्व हो गइल। ओह समय से लेके अकबर की समय तक प्रयाग क प्रशासनिक महाव बहुत काम हो गइल रहे आ ई कड़ा से शासित इलाका में आवे। 1567 ई॰ में कड़ा के गवर्नर अली कुली खान की बागी हो गइला पर अकबर इहवाँ आ के ओ के हरा दिहलें आ पहिली बार प्रयाग के यात्रा कइलें अउरी ए अस्थान की सैनिक महत्व के महसूस कइलें। 1574 ई॰ अपनी दूसरी यात्रा की दौरान अकबर इहँवा इलाहाबाद शहर के अस्थापना कइलें आ किला के नीव रखलें।

औरंगजेब की शासन काल में फ्रांसीसी यात्री टेवर्नियर बनारस जात समय एक दिन खातिर (6 दिसंबर, 1665 ई॰) इलाहाबाद में रुकल रहलें आ ए शहर क वर्णन एगो बड़ा आ ख़ूबसूरत शहर की रूप में कइलें। सन 1739 ई॰ में मराठा सरदार राघोजी भोंसले इलाहाबाद पर आक्रमण करि के शहर में लूटपाट कइलस। सन 1759 ई॰ में इलाहाबाद शुजाउद्दौला की कब्ज़ा में आ गइल आ अंततः सन 1764 ई॰ की बक्सर की लड़ाई कि बाद इलाहाबाद के दीवानी अधिकार अंग्रेजन के मिल गइल आ सन 1801 ई॰ की बाद ई अंग्रेजन की राज्य में शामिल हो गइल।

अंग्रेज इलाहाबाद पर अपनी अधिकार की बाद इहाँ एगो गैरीसन के अस्थापना कइले आ इलाहाबाद के प्रमुख सैनिक केन्द्र की रूप में महत्व दिहलें। अकबर की समय में इलाहाबाद सूबा में 12 गो सरकार आ 177 परगना क इलाका आवे जेवन ब्रिटिश काल में कम हो के 5 आ 23 बचल। सन 1825 में फतेहपुर ज़िला इलाहाबद से अलग कइल गइल आ सन 1842 ई॰ से 1862 ई॰ की बीच में कई बार मिर्जापुर आ इलाहाबाद की बीछ में जिला क सीमा में बदलाव भइल।

सन 1829 ई॰ में इलाहाबाद में कमिश्नरी के अस्थापना भइल आ मिस्टर राबर्ट बार्लो इलाहाबाद के पहिला कमिश्नर नियुक्त भइलें, इलाहाबाद के पहिला कलेक्टर मिस्टर ए. अहमुट्टी रहलें जिनकी नाँव पर मोहल्ला मुट्ठीगंज बसल। 1834 ई॰ में इहँवा गवर्नर के आसन आइल आ 1858 ई में ई संयुक्त प्रान्त क राजधानी बन गईल। इहंवे लार्ड कैनिंग महारानी क घोषणापत्र पढ़ी के सुनावलें आ भारत के शासन ईस्ट इण्डिया कंपनी कि हाथ से महारानी की हाथ में चलि गइल। थोड़ा समय खातिर इलाहाबाद एह समय पूरा ब्रिटिश भारत क राजधानी रहल।

एक तरह से देखल जाय त शहर क वर्तमान स्वरूप अंग्रेजन की समय में बनल। मुट्ठीगंज कीडगंज कोतवाली लूकरगंज, जार्जटाउन, एलनगंज, म्योराबाद जइसन मोहल्ला एही समय बसल। वर्तमान चौक मोहल्ला अंग्रेजन की समय से पाहिले तक एगो गड़ही की रूप में रहे जेवना की आसपास कुछ सागसब्जी आ अनाज के दूकान लगे। लार्ड कैनिंग की नाँव पर सिविल स्टेशन क विकास भइल आ ओ समय ए के कैनिंग टाउन कहल जाय जेवना के वर्तमान नाँव सिविल लाइन्स बा। वर्तमान महात्मा गाँधी मार्ग के ओ समय नाँव कैनिंग रोड रहे।

सन 1866 ई. में इलाहाबाद में हाइकोर्ट के अस्थापना भइल आ ठीक बाद में एक साल खातिर आगरा भेज दिहल गइल लेकिन फिर 1868 ई. में वापस इलाहाबाद आ गइल आ तब से इहंवे बा। सन 1887 ई. में म्योर सेन्ट्रल कालेज के इलाहाबाद विश्विद्यालय की रूप में मान्यता दिहल गइल आ ई भारत क चौथा सभसे पुरान विश्विद्यालय बनल।

प्रथम स्वतंत्रता संघर्ष में इलाहाबाद के महत्वपूर्ण योगदान रहे। इहँवा ग़दर के नेतृत्व मौलवी लियाक़त अली कइलें। इहाँ 6 जून 1957 के बगावत शुरू भइल आ जल्दिये बागी सिपाही आ जनता रेलवे आ टेलीग्राफ पर कब्ज़ा क लिहलें। दारागंज में नाव की पुल पर बागी लोगन क कब्ज़ा हो गइल। मौलवी साहब, जेवन स्कूल के अध्यापक रहलें खुसरू बाग़ से आपन कमान सम्भाले शुरू कइलें। लगभग एक हफ्ता बाद 12 जून के  कर्नल नील के पलटन बनारस से इहँवा पहुँचल आ दारागंज क पुल पर आपन कब्जा वापस लिहलस। एकरी बाद शहर में लड़ाई भइल आ तब मौलवी साहब अपनी लोगन की साथ शहर छोड़ के बाहर से लड़ाई करे लगलन। अंग्रेज सेना शहर पर वापस कब्ज़ा कइला की बाद लोगन पर बहुत अत्याचार कइलस। समदाबाद आ रसूलपुर नाँव क दू गो गाँव त पूरा क पूरा जरा दिहल गइलन। एही गाँवन की ज़मीन पर अल्फ्रेड पार्क के निर्माण भइल जेवना के आजकाल आज़ाद पार्क कहल जाला।

भारत की स्वतंत्रता संग्राम में इलाहाबाद क योगदान हमेशा महत्वपूर्ण मानल जाला। इहाँ काँग्रेस क चौथा अधिवेशन लार्ड वेडरबर्न की अध्यक्षता में सन 1888 ई॰ में भइल। एकरी आलावा आठवाँ आ पचीसवाँ अधिवेशन क्रम से 1892 ई॰ आ 1910 ई॰ में भइल। सन 1920 ई॰ में आल-इण्डिया-खिलाफत कांफ्रेंस इलाहाबाद में आयोजित भइल।

आज़ादी की लड़ाई में इलाहाबाद के नेता लोगन क लिस्ट भी बहुत लंबा बा। ए में से प्रमुख लोग रहे पं॰ अयोध्या नाथ, सुरेन्द्र नाथ सेन, पं॰ मदन मोहल मालवीय, मोतीलाल नेहरू, पुरुषोत्तम दास टंडन, सी॰ वाई॰ चिंतामणि, हृदय नाथ कुंजरू, तेजबहादुर सप्रू, जवाहरलाल नेहरू इत्यादि। सुन्दरलाल आ मनाज़िर अली सोख्ता क्रांतिकारी दल क सदस्य रहे लोग। महान क्रन्तिकारी चंद्रशेखर आजाद इहँवे अल्फ्रेड पार्क में शहीद भइलें आ उनकी नाँव पर अब ए पार्क के चंद्रशेखर आजाद पार्क कहल जाला।




#Article 340: अशोक स्तंभ (174 words)


अशोक स्तंभ (अशोक के खम्हा) पूरा दक्खिनी एशिया (भारतीय उपमहादीप) में जगह-जगह गड़ल खंभा बाड़ें जिनहन के मौर्य वंश के सम्राट अशोक ( से 232 ईसापूर्व) द्वारा लगवावल गइल रहे, या कम से कम जिनहन पर अशोक द्वारा आदेशलेख लिखवावल गइल। इनहन में सभसे प्रसिद्द सारनाथ के खम्भा बा जेवना की मुकुट से आजाद भारत के राजचिह्न लिहल गइल हवे। एह खम्हा सभ के कुल संख्या 33 बतावल जाला जेह में से 20 गो अभिन ले मौजूद बाने। इनहन में से कुछे अइसन बाने जिनहन के ऊपरी मुकुट, जेह में कवनो जानवर के आकृति बनल रहल, सुरक्षित बचल बा। 

सुलतान फिरोजशाह तुगलक द्वारा अइसन दू गो खंभा दिल्ली ले आइल गइलें कौशांबी के स्तंभ के अकबर इलाहाबाद के किला में ले आ के लगवा दिहलें, कुछ अन्य खम्हा सभ भी मुग़ल काल में एक जगह से दुसरा जगह ले जाइल गइलेन। औसतन 12 से 15 मीटर ऊँच आ लगभग 50 टन वजन वाला ई खम्हा एकही सिंगल पाथर के काट के बनावल गइल हवें आ सैकड़न मील दूर ले जा के लगवावल गइल हवें।




#Article 341: चंद्रगुप्त मौर्य (172 words)


चंद्रगुप्त मौर्य जे यूनान मे सेंट्रोकोटस नांव से प्रचलित रहन मगध के राजा आ मौर्य साम्राज्य के संस्थापक रहन। चन्द्रगुप्त के सम्राट बने से पहिले सिकंदर उत्तर पक्खिम भारत प चढ़ाई कइले रहे। ई जैन धरम के मानत रहन। यूनानी आ लैटिन मे हिनकर नांव संद्रोकोटोस आ अंद्रोकोटोस लिखल बाटे।

चंद्रगुप्त भारत के इतिहास के एगो महत्वपूर्ण बेकत बाड़न। हिनकर सम्राट बने से पहीले सिकंदर उत्तर पक्खिम भारत प आक्रमन कइले रहे। चंद्रगुप्त आपन राज स्थापित कइलन आ आपन राज मे दोसर राज सभ मे मिलइलन। यूनानी राजा सभ हिनकरा ले जुध करे से भागत रहन, सेल्योक्स १ निकेटर हिनकरा ले आपन धीया के बियाह कऽ देले रहन।

चंद्रगुप्त के जिनगी के जानकारी जैन, बुद्ध, हिन्दू आ यूनानी लेखन मे मिलेला, बाकिर सभन के कथा तनी अलगा बाटे। हीनकरा दिया क्रमबद्ध जानकारी देवे अला ग्रंथ निम्नलिखित बाड़ऽसन:

जस्टीन के छोड़ के कोनो यूनानी चाहे रोमन लेखक सीधा चंद्रगुप्त के नांव नइखे लेले। ऊ लोग नन्द सभ दिया बात कइले बा। जस्टीन लिखले बाड़न जे चंद्रगुप्त चाणक्य संगे नंद सभ के हरइले रहन।




#Article 342: ह्वेन सांग (195 words)


ह्वेन सांग एगो चीनी तीर्थ यात्री रहलें जे बौद्ध धर्म से प्रभावित होके एकर अध्ययन करे खातिर भारत आइल रहलें। ऊ हर्षवर्धन की समय में इहाँ आइल रहलें।

ह्वेन त्सांग लियांग चाउ, जहां वह था एक अतिथि व्याख्याता के लिए कूच। राज्यपाल उसे जाने से इनकार कर दिया है, लेकिन इसने राज्यपाल को नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने कहा कि दो भिक्षुओं की सहायता के साथ शहर से बाहर फिसल गया। कुछ गार्ड एक चक्कर वह उस गोबी रेगिस्तान के लिए उसे ले लिया बारे में उसे बताया। इसने शहर हमी और एक कारवां के लिए इसे बनाया है। Turfan के राजा ह्वेन त्सांग ने अपनी अदालत में होना चाहता था। जब उसने मना कर दिया, राजा सब कुछ ह्वेन त्सांग के साथ अपने तरीके से संभवतः की जरूरत सकता है पर उसे भेजा। ह्वेन त्सांग टीएन शान पर्वत को पार कर गया है और अब क्या किरगिजस्तान गणराज्य में इसिक कुल झील के लिए उतरा। उन्होंने बैक्ट्रिया के लिए लोहे के गेट (आधुनिक अफगानिस्तान) के माध्यम से ताशकन्द की राजधानी और समरकंद के शहर और उसके बाद की यात्रा की। उन्होंने बल्ख, जहां बुद्ध की कई मशहूर अवशेष वहाँ थे के शहर का दौरा कि




#Article 343: बगसर के जुद्ध (110 words)


बक्सर के जुद्ध, आधुनिक भारत के शुरूआती दौर में सभसे महत्वपूर्ण जुद्ध सभ में से एक, 22 अक्टूबर 1764 के ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी आ मुगल साम्राज्य, अवध के नबाब अउरी मीर कासिम आ सहजोगी लोग के संजुक्त सेना के बीचा में लड़ल गइल। लड़ाई वर्तमान बगसर के लगे एगो छोट किला के आसपास भइल, ई जगह बिहार के राजधानी पटना से लगभग 130 किलोमीटर पच्छिम में बा। लड़ाई में कंपनी के सेना के अगुआ हेक्टर मुनरो रहलें आ एह लड़ाई में कंपनी के बिजय भइल।

एही जीत से कंपनी के मुग़ल बादशाह के साथे इलाहाबाद के संधि करे के मोका मिलल आ भारत में कंपनी के स्थिति पोख्ता भइल।




#Article 344: कोपेन के जलवायु वर्गीकरण (203 words)


File:World Köppen Classification (with authors).svg|thumb|upright=2.5|An updated Köppen–Geiger climate map

कोपेन के जलवायु बर्गीकरण, जलवायु के अलग-अलग प्रकार में बाँटे के एगो तरीका हवे जेवना में पूरा बिस्व के अलग-अलग तरह के जलवायु के उन्हन के बिसेसता के अधार प बाँटल गइल बाटे। ई जलवायु बर्गीकरण दुनिया के सभसे चलनसार बर्गीकरण बा, आ रूसी मूल के जर्मन बिद्वान व्लादीमिर कोपेन (Wladimir Köppen) द्वारा पहिली बेर साल 1884 में दिहल गइल, बाद में 1918 आ 1936 में कोपेन एह में खुदे कई गो संसोधन कइलें। अउरी बाद में चल के (1954, 1961 में) जर्मन मौसमबिग्यानी रुडॉल्फ गीगर, कोपेन के साथ मिल के एह में अउरी संसोधन कइलें आ वर्तमान बर्गीकरण के एही से कोपेन-गीगर जलवायु बर्गीकरण भी कहल जाला।

एह बर्गीकरण में बिस्व के पाँच गो बृहद जलवायु समूह में, आ आगे जा के इनहन के उपबिभाग कइ के, कुल 30 जलवायु प्रकार में बाँटल गइल बा।

सभसे पहिले एह जलवायु वर्गीकरण में पूरा बिस्व के जलवायु सभ के पाँच गो समूह (ग्रुप) में बाँटल गइल बा: A (उष्णकटिबंधी), B (सूखा वाला प्रदेश), C (समशीतोष्ण), D (महादीपी), आ E (ध्रुवीय)। दुसरा अच्छर से सीजन के साथ बरखा होखे भा न होखे के बतावल गइल बा आ तिसरा अच्छर से गर्मी के मात्रा बतावल गइल हवे।




#Article 345: मानसून (207 words)


मानसून के परंपरागत परिभाषा, हवा के दिसा में होखे वाला बदलाव के रूप में दिहल जाले, जेह में हवा बहे के दिसा एक सीजन से दूसरा सीजन के बीच एकदम उलटा हो जाले आ इलाका में होखे वाला बरखा के मात्रा एकरा से प्रभावित होला। हालाँकि, अब मानसून के अरथ धरती के वायुमंडल में बड़ा पैमाना पर होखे वाला  से लिहल जाला जेकर कारण जमीनी आ समुंदरी हिस्सा के अलग-अलग तेजी से गरम होखल बा।  आमतौर पर बोलचाल की भाषा में मानसून शब्द के प्रयोग बरखा के सीजन खातिर होला, हालाँकि मानसून के दौरान बीच-बीच में सूखा मौसम के दौर भी आवे ला।

दुनिया के सभसे बड़हन मानसून सिस्टम सभ में पच्छिमी अफिरकी आ एशिया-आस्ट्रेलियाई मानसून आवे लें; भारतीय मानसून भी एह में दुसरका के हिस्सा हवे। उत्तर आ दक्खिन अमेरिका में भी अइसन सिस्टम पावल जाला बाकी उहाँ हवा के बहाव के दिसा एकदम से ना उलटे ले आ एही कारन एह सिस्टमन के मानसून माने पर बिबाद बा।

मानसून शब्द अंगरेजी के हवे, ब्रिटिश राज में भारत, बांग्लादेश, बर्मा, पाकिस्तान आ आसपास के इलाका में गरमी के सीजन के बाद बंगाल के खाड़ी आ अरब सागर से उठे वाली हवा के जमीनी हिस्सा पर पहुँच के भारी बरखा करे के घटना खातिर इस्तमाल शुरू भइल।




#Article 346: परगना (153 words)


परगना , , भारत आ भारतीय उपमहादीप में सल्तनत काल, मुगल काल आ ब्रिटिश राज के दौरान प्रशासन के एगो इकाई रहल, मुख्य रूप से ई मुस्लिम शासक लोग द्वारा इस्तेमाल में आइल हालाँकि, खाली इहे लोग एकर इस्तेमाल कइले होखे अइसन ना बा।

परगना के रूप में इलाका सभ के बिभाजन के सुरुआत  सल्तनत काल में भइल। एह शब्द के उतपत्ती फ़ारसी भाषा से बतावल जाले। एक ठो परगना के कई ठो मौजा में बाँटल गइल रहे, एक मौजा में एक ठो भा कई गो गाँव होखें आ उनहन के आसपास के जमीन होखे। मौजा के शाब्दिक अरथ एरिया भा इलाका होला आ ई शब्द अभिन ले चलन में बा।

बाद में शेर शाह सूरी के जमाना में, परगना के प्रशासन के अउरी मजबूती मिलल आ शिकदर (पुलिसिंग के मुखिया) आ अमीन भा मुंसिफ (फैसला करे वाला, भा लगान वसूली करे वाला) आ कारकून (रिकार्ड रखे वाला) लोग के नियुक्त कइल गइल। 




#Article 347: रबी (334 words)


रबी भारत आ आसपास के इलाका में एगो फसली सीजन हवे। ई सीजन के फसल अक्टूबर से मार्च की बिचा में जाड़ा में होखे लीं आ बसंत में इनहन के कटिया होखे ला। मुख्य फसल गोहूँ हवे। सीजन के अलावे एह फसल सभ के भी रबी के नाँव से भा रबी के फसल के नाँव से जानल जाला।

शब्द के उत्पत्ती अरबी मूल से हवे जहाँ एकर मतलब बसंत होला। काहें से कि एह सीजन के फसल सभ पाक के बसंत में कटिया खाती तइयार होखे लीं, इनहन के नाँव रबी के फसल आ एह फसली सीजन के नाँव रबी पड़ गइल।

रबी के फसल सभ के बोआई के समय अक्टूबर के बाद से नवंबर ले होला। ई मौसम के हिसाब से मानसून के बाद के समय होला। मानसून के समय, मने कि बरखा के रितु बीत जाए के बाद खेत झुरा के जोते लायक हो जालें तब एह फसल के बोआई सुरू होला। उत्तर प्रदेश आ बिहार नियर राज्य सभ में नद्दी के तीरे के काफी मैदानी जमीन अइसनो होखे ले जहाँ बाढ़ के पानी लागल रहे ला, ओकरे उतरे के बाद जोते लायक हो जाए पर ओह इलाका में खाली एही सीजन आ जायद में (सब्जी वाला फसल) सभ के खेती हो पावे ला। कभी-कभार जवना साल मानसून के बरखा कम होखे ले, ऊँचास खेत सभ में नहर से पानी रेंगावे के पड़े ला आ ओकरे बाद जोते लायक होखे पर फसल बोअल जाले जवना से कि बीया के जामे खातिर भरपूर नमी मिल सके।

दिसंबर-जनवरी के जाड़ा भर धीरे-धीरे फसल बढ़े ले आ फरवरी के अंत में घाम तेज होखे सुरू होख्ले पर रेंडे आ फूटे सुरू होले। कटिया आ दंवरी के काम अप्रैल ले चले ला। एह इलाका सभ में गोहूँ नियर फसल के कबो कबो नोकसान भी हो जाला काहें कि जाड़ा के बाद बसंत में अचानक गर्मी बढ़े से अनाज भरपूर दाना वाला होखे से पहिलहीं पाके सुरू हो जाला। अप्रैल में आवे वाला झाकोरदार आ पाथर के साथ होखे वाली बरखा से भी फसल के नोकसान होला।




#Article 348: खजुराहो (शहर) (145 words)


खजुराहो भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त में स्थित एक प्रमुख शहर ह जवन आपन प्राचीन आ मध्यकालीन मंदिरन खातिर विश्वविख्यात बा। इ मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला में स्थित बा। खजुराहो के प्राचीन काल में खजूरपुरा और खजूर वाहिका के नाम से भी जानल जात रहल। अहिजा बहुत बड़ संख्या में प्राचीन हिन्दू अउर जैन मंदिर बड़ुए। मंदिरन के शहर खजुराहो पूरे विश्व में मुड़ल पत्थरन से निर्मित मंदिरन खातिर प्रसिद्ध बा। खजुराहो के इ अलंकृत मंदिरन की वजह से जानल जाला जवन कि देश के सर्वोत्कृष्ठ मध्यकालीन स्मारक ह। भारत के अलावा दुनिया भर के आगन्तुक अउर पर्यटक प्रेम के इ अप्रतिम सौंदर्य के प्रतीक देखे खातिर निरंतर आवत रहेला लोग। हिन्दू कला आ संस्कृति के शिल्पियन द्वारा इ शहर के पत्थरन पर मध्यकाल में उत्कीर्ण करल गइल रहल। संभोग के विभिन्न कला सभ के इ मंदिरन पर खुबे खूबसूरती से उभारल गइल बा।




#Article 349: स्रेब्रेनिका नरसंहार (126 words)


स्रेब्रेनिका नरसंहार 1995 में भइल एगो नरसंहार ह जवना में 8000 से भी अधिक बोस्नियाकी लोग मारल गइल रहल, जेमें मुख्य रुप से पुरुष आ लइकन के हत्या भइल रहल। इ नरसंहार बोस्नियाइ युद्ध के दौरान स्रेब्रेनिका शहर आ ओकर आस-पास में भइल रहल। जनरल रात्को म्लाडिक के आदेश पर स्रप्सका गणराज्य आर्मी द्वारा इ नरसंहार में लोगन के मारे खातिर बढावा मिलल रहे। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव द्वारा उल्लेखित बा कि इ नरसंहार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से यूरोपीय धरती पर सबसे खराब अपराध के रूप में सामूहिक हत्या ह। सर्बिया के एगो अर्धसैनिक इकाई के बिच्छु कहल जात रहल। र्बियाई आंतरिक मंत्रालय के आधिकारिक हिस्सा 1991, इ नरसंहार में हिस्सा लेले रहल, जे में सैकड़ों युक्रेनी आ रुसी स्वयंसेवकसभो भाग लेले रहले जा।




#Article 350: क्रिकेट (153 words)


क्रिकेट एगो बैट-गेना के खेल ह जेवना में दू गो टीम एक दुसरा की खिलाफ एगो गोल मैदान में खेलेलीं। मैदान की बिचा में 22 गज के लंबाई वाली पिच होखेले आ हर टीम में 11 गो खेलाड़ी होलें।
आजु की समय में क्रिकेट पुरा दुनिया में लगभग 120 मिलियन खेलाड़ी लोग खेलेला जेवना से ई पुरा दुनिया के दुसरा नंबर के सभसे प्रचलित खेल बा।

खेलत घरी दुनों टीम पारी-पारा बैटिंग आ बालिंग करे लीं जेवना के पारी (इनिंग) कहल जाला।

क्रिकेट के सबसे पहिले खेलल गइले के परमान इंग्लैंड में मिलेला जहाँ से ई बाकी जगह फइलल

वर्तमान समय में टेस्ट मैच दू पारी के आ अधिक-से-अधिक पाँच दिन के होला। ई हमेशा दिन के मैच होला।

एक दिनी या एकदिवसीय क्रिकेट मैच एक्के दिन क होला आ 50 ओवर ले खेलल जाला। समय की अनुसार ई दिन के मैच आ दिन-रात के मैच हो सकेला।

बीस ओवर के मैच होला।




#Article 351: संस्कृति (271 words)


कौनों  भी  पुरान भा वर्तमान लोगन के  समूह के आचार- बेहवार के सगरी अमूर्त तत्वन के एकट्ठा रूप होला संस्कृति ।  जब कवनो संस्कार के आकर के रूप में देखल जाला वोह आकर के नाम ह  संस्कृति । संस्कृति सभ्यता के क्रियारूप होला जवन आदमी के  ब्यक्तिगत भा सामाजिक लुरी,रहन,शहुरि,पहिरावा,उठ -बइठ,बोली ,बिचार भा सामाजिक क्रियाकलाप के रूप में लउकेला। जतना भी देवनागरी लिपि से जुडल भाषा बडिस उ सब भाषा में एकरा के संस्कृति ही कहल जाला अंगरेजी में एकरा के culture  कहल जाला।

संस्कृति शब्द के उत्पत्ति

संस्कृति शब्द के उत्पत्ति संस्कृत शब्द के साथ साथ मानल जाला। संस्कृत भाषा के उत्पत्ति   प्राकृत,यवाणी,भजपुरी(भोजपुरी ) ,अवधी ,मैथली ,सैथली कुवांड,लुवांड,ज्वाठी,हलथि,मियांजा ,संस्थाली, बिरोछा ,कुमान्ड आदि चौदह भाषा के  संस्कार देला  से  भइल बा । एह प्रकार से भाषा आ संस्कृति के संबंध नोह् आ मांस नियन एक दूसरा के पूरक बन गईल।हर भाषा के आपन संस्कृति होला,एकर कारण मानव सभ्यता  के बिकाश के समय में मानव के अलग अलग समूह में रहेके प्रविर्ती के मानल जाला। भोजपुरी भाषा संस्कृत से भी पुरान भाषा ह। आज सांस्कृतिक कर्मकांड में बहुत क्रिया के भोजपुरी संस्कृति के अनुसार कइल जाला जैसे भोजपुरी संस्कृति के मट्कोड ,भूमिपूजन बनल।

संस्कृति के अंग -

संस्कृति के महत्व :-  मानवता के श्रृंगार ,पालन ,आ रक्षा करे में संस्कृति के  महत्वपूर्ण भूमिका बा ,संस्कृति बिहिन मानव समाज जीव मात्र बन के रह जाला। संस्कृति खाली मानवता खाती मात्र ना होके एह धरती प के जीव खाती भी बहुत आवस्यक बिआ। पशु-पालन ,कृषि संस्कृति के आधार प ही बिकाश करेले। सामाजिक बिकाश के आधार में संस्कृति रीढ़ के हड्डी नियन भूमिका निर्वाह करेली। संस्कृति से परिवार ,समाज ,देश के संबंध सूत्र मिलेला।




#Article 352: इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान-दिल्ली (आईआईआईटी-डी) (279 words)


 
इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान -दिल्ली (IIIT-D) दिल्ली, भारत मा स्थित उच्च शिक्षा हेतु एगो स्वायत्त विश्वविद्यालय बा। एह महाविद्यालय एआईसीटीइ द्वारा राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित कइल रहलन।  ई विश्वविद्यालय स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के शोध पर केन्द्रित शोध-उन्मुख विश्वविद्यालय बा। एह महाविद्यालय, भारत सरकार के राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद ने इका ‘अ’ श्रेणी संस्थान मा करील रहलन। 

एह महाविद्यालय  की स्थापना दिल्ली सरकार के एक अधिनियम (आईआईआईटी दिल्ली अधिनियम 2007) के तहत राजकीय विश्वविद्यालय कइल रहलन  5 मई 2015 को मनीष शिशोदिया  माननीय उपमुख्यमंत्री,दिल्ली दूसरी बार निर्माण बा नींव का पत्थर रखिल।

सन 2014 में किए गए अगलासेम  के एक सर्वेनुसार भारत  के अभियांत्रिकी संस्थानों में इका नम्बर नौवें स्थान पर बा।  
सन 2015में किए गए डाटाक्यूस्त्ट पत्रिका के एक सर्वेनुसार भारत  के सरकारी अभियांत्रिकी संस्थानों में इका नम्बर सातवें स्थान पर बा।

सन 2014 में किए गए एक सिलिकोन इंडिया इंजीनियरिंग के सर्वे ने इस संस्थान को भारतीय अभियांत्रिकी संस्थानों में इका नंबर 35वें स्थान पर बा.।
एह महाविद्यालय भारत सरकार के एआईसीटीइ ने इका राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित कइल रहलन.

छात्रावास की सुविधा,

पुस्तकालय,

प्रयोगशालाएं,

इंटरनेट की सुविधा,

संगणक केंद्र,

चिकित्सा सुविधा,

खेल की सुविधा,

कैंटीन.

आईआईआईटी-डी  में एक पुस्तकालय और 8 प्रयोगशालायें छात्रों के लिए एक अध्ययन हेतु बा.

संस्थान के दुई मंजिलों के भवन में भोजन और मनोरंजन केंद्र बा, जिसमें एक संगीत कमरे और एक व्यायामशाला एवं अतिरिक्त सह पाठयक्रम गतिविधियों के लिए करील रहलन.वर्तमान में आईआईआईटी-डी में कार्यरत छात्र क्लब, सामुदायिक कार्य क्लब, नृत्य क्लब, रचना क्लब, एथिकल हैकिंग क्लब, चलचित्र बनाने का क्लब, संगीत क्लब, रोबोटिक्स क्लब, भ्रमण और दिल्ली हेरिटेज (सदा) क्लब, खेल क्लब, प्रश्नोत्तरी क्लब, ई-सेल और वेब डिजाइन और विकास क्लब, साहित्यिक क्लब में शामिल बा.




#Article 353: उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक खंड (169 words)


उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक बिभाजन सभ में सभसे ऊपरी स्तर पर मंडल बाने, एकरा बाद क्रम से जिला, तहसील आवे लें। तहसील के भी उपबिभाजन ब्लाक (बिकासखंड) में होला, बाकी ई इकाई मुख्य रूप से बिकास सम्बन्धी कामकाज खातिर बाने।

वर्तमान में, उत्तर प्रदेश में कुल 18 गो मंडल, 75 गो जिला, आ 822 ब्लाक बा।

मंडल या कमिश्नरी के प्रशासनिक मुखिया कमिश्नर (मंडलायुक्त) होलें आ पूरा मंडल में कानून ब्यवस्था आ जमीन के लगान (रेवेन्यू) वसूली के जिम्मेदारी इनहीं के होला। कमिश्नर लोग भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) के सीनियर अधिकारी होला लोग आ परमोशन के बाद एह पद पर पहुँचे ला।

जिला के जिलाधीश (डीएम या कलेक्टर) होलें। वास्तव में सरकारी कामकाज के बँटवारा के कारण एकही ब्यक्ति के ई तीनों पद के अनुसार तीन गो नांव से बोलावल जाला। रेवेन्यू संबंधी काम करे पर इनहीं लोग के कलेक्टर कहल जाला, आ न्याय संबंधी काम के समय डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (डीएम)।

तहसील स्तर पर डिप्टी कलेक्टर (जेकरा के एसडीएम भी कह दिहल जाला) आ तहसीलदार लोग मुख्य अधिकारी होला।




#Article 354: बलियाँ जिला (422 words)


बलियाँ जिला भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ मंडल में एगो जिला बाटे जौना के मुख्यालय बलियाँ सहर बा। ई जिला उत्तर प्रदेश के सभसे पूरबी जिला हवे आ उत्तर में सरजू नदी आ दक्खिन में गंगा नदी एकर सीमा बनावे लीं, जिला दुन्नो नदिन के बीचे में त्रिभुज के आकर में बा आ नदिन के बीच के दुआबा क्षेत्र नोकदार आकार में बिहार राज्य के ओर प्रवेश कइले बा।

बलियाँ जिला के उत्तरी सीमा सरजू नदी द्वारा बनावल जाले आ पच्छिम में उत्तर प्रदेश के देवरिया आ पूरुब ओर बढ़ले पर सिवान जिला के साथ बनल बा आ उत्तरी पूरबी आ पूरबी सीमा सारन जिला के साथ सटल बा; दक्खिनी-पच्छिमी सीमा गाजीपुर जिला से आ एकरे बाद पूरुब बढ़ले पर में बिहार राज्य के बक्सर आ भोजपुर जिला के साथ बा; पच्छिम में एकर सीमा मऊ जिला के साथ बाटे। प्रशासन के हिसाब से बलियाँ जिला के छह गो तहसील में बाँटल गइल बाटे: बलिया सदर, बांसडीह, रसड़ा, बैरिया, सिकंदरपुर, आ बेलथरा। 

जिला के लोगन के मुख्य ब्यवसाय खेती बाटे। खेती के साथ साथ कुछ छोट उद्योग धंधा भी जिला में स्थापित बाने। रसड़ा में सरकारी चीनी मिल आ सूती कपड़ा के मिल मौजूद बा। एकरे अलावा जिला के काफी लोग भारत के अन्य सहर सभ में आ अरब देसवन ले रोजगार खातिर गइल बा। 

सन 1942 के समय के आजादी के आंदोलन में बलियाँ में कुछ दिन खातिर अंगरेजी राज खतम क के आजादी के घोषणा भइल रहे। एह लड़ाई के नेता चित्तू पांडे के जिला के महत्वपूर्ण लोग में गिनल जाला। भारत के पूर्व परधानमंत्री चंद्रशेखर इहाँ से रहल बाने।
 
सांस्कृतिक रूप से इहाँ के भिर्गू आश्रम, जे मुख्य शहर बलियाँ से कुछ दूर पर बा, महत्व के अस्थान बाटे। हर साल इहाँ लागे वाला ददरी मेला भी धार्मिक-सांस्कृतिक आकर्षण के चीज बाटे। एकरे अलावा हजारी प्रसाद द्विवेदी, बलदेव उपाध्याय आ अमरकांत नियर कई ठो बिद्वान आ साहित्यकार लोग एह जिला से रहल बा।

जिला के मुख्यालय बलियाँ के अलावा अउरी प्रमुख शहर में रसड़ा आ सिकंदरपुर बाने।

साल 2011 के जनगणना के आँकड़ा के मोताबिक बलियाँ जिला के कुल जनसंख्या 32,23,642 रहल, जे मॉरिटानिया देस के जनसंख्या के लगभग बराबर रहल आ अमेरिकी राज्य आयोवा के बराबर रहल। एह तरीका से जनसंख्या के मामिला में भारत के कुछ 640 जिला सभ में बलियाँ के अस्थान 108वाँ रहलआ जिला में जनसंख्या के घनत्व 1,081 ब्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर रहल। 2001-2011 के दशक में इहाँ के जनसंख्या में बढ़ती के दर 16.73% दर्ज कइल गइल।	जिला में लिंगानुपात 933 औरत प्रति 1,000 मरदाना पर रहल, आ साक्षरता दर 73.82% रहल।




#Article 355: अंटार्कटिका (291 words)


अंटार्कटिका या अंटार्टिका (Antarctica  या ) 
पृथ्वी के सभसे दक्खिनी महादीप बा, जेवना पर दक्खिनी ध्रुव स्थित बाटे। ई लगभग पूरा का पूरा अंटार्कटिक वृत्त की दक्खिन ओर स्थित बाटे आ चारों ओर से दक्खिनी महासागर से घेराइल बाटे। ई दुनियाँ के पाँचवा सभसे बड़हन महादीप हवे आ क्रम से एशिया, अफिरका, उत्तरी अमेरिका आ दक्खिनी अमेरिका की बाद आवेला। एकर कुल एरिया 140 लाख बर्ग किलोमीटर बाटे। एकर 98% हिस्सा बरफ से तोपाइल रहेला जौना के औसत मोटाई 1.9 किलोमीटर बा।

अंटार्कटिका दुनिया के सभसे ठंढा, सूखा आ सभसे तेज हवा वाला महादीप ह आ एकर औसत ऊँचाई बाकी कुल महादीपन ले ढेर बाटे। अंटार्कटिका में वर्षण बहुत कम होला आ खाली किनारा वाला इलाका में होला एही से एके रेगिस्तान मानल जाला। इहाँ के तापमान −89 °C (−129 °F) ले रेकार्ड कइल जा चुकल बाटे। इहाँ खराब मौसम दशा की कारण केहू आदमी हमेशा खातिर नइखे बसल आ खाली बैज्ञानिक रिसर्च करे खातिर इहाँ लोग रहेला। इहाँ की जीव बिबिधता में गिनावल जाय त कुछ एल्गी, बैक्टीरिया, फंगस, पौधा आ कुछ बहुत छोट जानवर जइसे कि दीमक, नेमाटोड आ पेंग्विन पावल जालें। जहाँ कहीं बनस्पति मिलेला ऊ टुंड्रा प्रकार के होला।

ए महादीप के खोज सभसे पहिले एगो रूसी अभियान में  फैबियन बेलिंग्सहॉउसेन (Fabian Gottlieb von Bellingshausen) आ मिखाइल लाजरेव (Mikhail Lazarev) नाँव के अभियानी लोग सन् 1820 में कइल।

अंटार्कटिका अंतर्राष्ट्रीय क़ानून की अन्दर कौनों एगो देस के संपत्ति ना हवे आ एकर खाली रिसर्च आ ज्ञान बिग्यान खातिर देस सभ उपयोग करे ला। अंटार्कटिका समझौता () सन् 1959 में साइन भइल रहे आ ई कौनों तरह के मलेटरी गतिविधि आ परमाणु बिस्फोट या परमाणु कचरा के फेंकले के पुरा प्रतिबन्ध लगावेला। समझौता पर अबले कुल 50 गो देस दस्खत कइ चुकल बाड़ें जौना में भारत भी बाटे।




#Article 356: रूम सागर (101 words)


रूम सागर या भूमध्य सागर ( - ) एगो समुन्द्र  हवे जेवन पछ्चिमी ओर अटलांटिक महासागर से जुड़ल बाटे आ एकरी उत्तर में यूरोप, दक्खिन में अफिरका आ पूरुब ओर एशिया महादीप बा। एही से एकरा के भू-मध्य सागर कहल जाला आ एकरी अंगरेजी नाँव, जेवन लातीनी भाषा से उपजल हवे, के भी मतलब इहे होला। एकरी आसपास की इलाका के रूम सागरीय क्षेत्र कहल जाला।

कब्बो कबो टेक्नीकल भाषा में एकरा के यूराफ्रिकन भूमध्य सागर (Eurafrican Mediterranean Sea) या यूरोपियन भूमध्य सागर (European Mediterranean Sea) कहल जाला जेवना से एकरा के अउरी अइसन समुद्रन से बिलगा के चीन्हल जा सके।




#Article 357: ग्रेट लेक्स (113 words)


बड़की झील या महान झील सभ पाँच गो झीलवन के झुण्ड हवे जेवन अमेरिका आ कनाडा की बिचा में बाड़ी आ इन्हन के पानी सेंट लारेंस नदी से हो के अटलांटिक महासागर में गिरेला। क्रमसे पच्छिम से पुर्रुब की ओर, सुपीरियर झील, मिशिगन झील, ह्यूरन झील, इरी झील, आ ओंटारियो झील पाँचों मिल के दुनिया के सभसे बड़का मीठा पानी के भंडार बनावे लीं।
इनहन के कुल सतही क्षेत्रफल  आ कुल आयतन  बाटे।
The total surface is , and the total volume (measured at the low water datum) is . सुपीरियर झील दुनिया क दुसरकी सभसे बड़की झील हवे आ मिशिगन झील कौनों एगो देस की सीमा में स्थित सभसे बड़हन झील हवे।




#Article 358: नदी (173 words)


नदी या नद्दी, जमीन के ढाल के अनुसार, प्राकृतिक रूप से, एगो निश्चित धारा की रूप में बहत पानी के कहल जाला जे आमतौर प कौनों दुसरा नदी में, झील में या समुंद्र में मिल जाले। कुछ जगह जहाँ बारिश बहुत कम होला आ जमीनभीतरी पानी के लेवल बहुत नीचे होला उहाँ नदी रेगिस्तान में धीरे-धीरे सूख के भी बिलीन हो जाली कुल। नदी के छोट रूप, जब नदी अपनी सुरुआती अवस्था में होले, नाला भा सरिता या जलधारा  होला, हालाँकि एकर कौनों बहुत साफ पैमाना नइखे कि कब नदी कहल जाई आ कब नाला, आमतौर प ई लोकल पुकार नाँव के आधार बना के तय कइल जाला कि ओकरा के ओह इलाका के लोग का कहत बा।

बिस्व के सभसे लमहर नदी नील नदी हवे, सभसे ढेर पानी समुंद्र में पहुँचावे वाली नदी अमेजन नदी हवे आ सभसे ढेर बेसिन एरिया वाली नदी मिसिसिपी-मिसौरी नदी हवे। भारत के सभसे महत्वपूर्ण नदी गंगा नदी हवे आ एकरी आलावा सिंधु, ब्रह्मपुत्र, नर्मदा, गोदावरी आ कृष्णा नदी भारत के औरो दूसर प्रमुख नदी बाड़ी स।




#Article 359: मिसीसिपी नदी (111 words)


मिसीसिपी नदी (अंगरेजी: Mississippi River) उत्तर अमेरिका महादीप के सभसे बड़हन थाला वाली नदी हवे आ ई पूरा-पूरा ख़ाली यूनाइटेड स्टेट्स में बहे ले, हालाँकि एकर पानी ग्रहण करे के इलाका कनाडा में भी बिस्तृत बाटे। मिनेसोटा की उत्तरी हिस्सा से निकल के ई  के दूरी तय कइ के आपन डेल्टा मैक्सिको के खाड़ी में बनावेले। मिसीसिपी नदी दुनिया के चौथी सभसे लमहर नदी हवे आ पानी के बहाव की मामिला में ई दसवाँ नंबर पर बाटे।

एकर सभसे प्रमुख सहायिका नदी ओहायो नदी हवे जे एकरा में कैरो, इलिनोई में संगम करे ले आ एहिजा ओहायो नदी में मिसीसिपियो ले ढेर पानी रहे ला। दूसर प्रमुख सहायिका मिसौरी नदी हवे।




#Article 360: जमीन (242 words)


जमीन या स्थल (हिंदी) (अंगरेजी: Land, sometimes referred to as dry land) पृथ्वी के ऊ हिस्सा हवे जेवन समुन्द्र से ऊपर बाटे आ कौनों पानी की भण्डार से तोपाइल नइखे। पृथ्वी की एही हिस्सा पर ज्यादातर मानवीय कामकाज होला आ प्राकृतिक संसाधन आ खेती इत्यादि के मौजूदगी बाटे। जमीन पर वर्तमान समय में पावल जाये वाली ज्यादातर बनस्पति आ जिया-जंतु सभ के पूर्वजन के उत्पत्ति समुंदरी या पानी में पैदा भइल बनस्पति आ जीव सभ से भइल हवे।

जमीन के सीमा एकरे लगे पावल जाये वाला पानी के भंडार से बने ला। जहाँ समुंद्र आ जमीन मिले ले ओकरा के किनारा भा समुंद्री किनारा (अंगरेजी में कोस्ट) कहल जाला। किनारा के परिभाषा प्राकृतिक भी हो सके ला आ लोकल प्रशासनिक परिभाषा अलग-अलग जगह पर कुछ बदलाव लिहले भी हो सके ला। सूखल आ कड़ेर चट्टान वाला जमीन के किनारा के परिभाषा आ सीमांकन आसान होला जबकि दलदली इलाका सभ में ई बतावल मुस्किल हो जाला कि कहाँ जमीन खतम होत बा आ कहाँ से समुंद्र सुरू हो रहल बा। ज्वार-भाटा आ मौसमी दसा में बदलाव के कारन ई समस्या अउरी जटिल हो जाला।

भौतिक भूगोल में पृथ्वी के जमीनी हिस्सा के अध्ययन थलमंडल के रूप में होला आ समुन्द्र आ अन्य बड़हन पानी के भंडार सभ के अध्ययन जलमंडल के रूप में होला। किनारा के अध्ययन खातिर एगो खास अलगा से उपशाखा बाटे जेकरा के समुंद्रतटीय भूगोल कहल जाला, जे भूआकृति बिज्ञान आ समुंद्रबिज्ञान दुनो के चीज मिला के बनल उपशाखा हवे।




#Article 361: बन (150 words)


बन अइसन बिसाल इलाका के कहल जाला जहाँ पेड़ पौधन के बहुलता होखे। एकरे अलावा अउरी कई तरह के परिभाषा दिहल जाला जेह में फेड़ के घनापन, फेड़न के लंबाई, कानूनी स्थिति या दर्जा, इकोलॉजिकल सेवा इत्यादि के आधार बनावल गइल बाटे। बहुत प्रचलित खाद्य आ खेती ऑर्गेनाइजेशन के परिभाषा के हिसाब से, दुनिया के चार बिलियन हेक्टेयर (150 लाख बर्गमील) या लगभग 30 % जमीनी हिस्सा पर 2006 में बन के बिस्तार रहल

बन के मनुष्य खातिर कई रूप में महत्व बाटे - आमतौर पर ई पर्यावरण आ इकोलॉजी के हिसाब से कुछ सेवा प्रदान करे ला, जइसे कि ऑक्सीजन इत्यादि। आर्थिक रूप से इनहन के बहुत महत्व बा आ कई ठे उद्योग खातिर कच्चा माल बन से मिले ला, बहुत सारा इस्तमाल खातिर लकड़ी आ अन्य बन से उपजे वाला चीज मिले ला। आर्थिक रूप से बन से हासिल होखे वाला चीजन के बन संसाधन भी कहल जाला।




#Article 362: ग्लेशियर (655 words)


ग्लेशियर या हिमानी या हिमनद (अंग्रेजी: Glacier) एक तरह के बरफ के नदी होला जेवना में बरफ के ढेर अपनहीं भार की वजह से घन होके फुहा नियर बरफ ना रहि जाला आ एकर घनत्व ढेर हो जाला आ ढाल की अनुसार सरक के बहे शुरू हो जाला। ढाल की अनुसार ई पहाड़न की बिचा में बरफ की नदी नियर रूप ले लेला आ धीरे धीरे बहाव करे ला। धियान देवे वाली बात ई बा की बरफ में दबाव पड़ला पर द्रव (fluid) के गुण आ जाला जेवना कारण ई बहे लागे ला।

आमतौर पर ग्लेशियर के निर्माण अइसन इलाका में होला जहाँ सालभर में बरफ गिरले के मात्रा बरफ पघिलले की मात्रा से ढेर होखे। बाकी बहि के ई अइसन इलाका में बि आ जाला जहाँ एकर पघिलाव ढेर होला आ बरफ कम गिरेले, अइसन इलाका में ई धीरे धीरे खतम होखे लागे ला। पहाड़न पर ई घाटी में एगो निश्चित धारा के रूप ले के बहे लें बाकी ध्रुवीय इलाका में जहाँ ख़ूब ढेर बरफ एकट्ठा हो जाले उहाँ ई बरफ की मोट चद्दर की रूप में भी बहेला। पहाड़ की दुनो ढाल से बर्फ़ आ आ के घाटी में इकठ्ठा हो के अपने वजन की परभाव से नीचे की ओर धारा की रूप में बहे लागेले। धारा की रूप में ई हिमानी कई किलोमीटर लम्बा होला आ नीचे आ के जब गरम इलाका में आवेला त पघिल के पानी देला जेवना से अकसर नदी निकले ली। हिमालय पहाड़ से निकले वाली अधिकतर नद्दी कुल एही प्रकार से निकलेली। उदाहरण खातिर गंगा नदी गंगोत्री नाँव की हिमानी से निकलेली।

संसार में हिमनद ऊँच पहाड़न पर आ दुनों ध्रुव पर पावल जालें। ग्लेशियर से जुड़ल बहुत सारा जमीनी आकृति बाड़ी जिनहन के हिमनदी स्थलरूप कहल जाला। इन्हन के पढ़ाई हिमनदीय भू-आकृति बिज्ञान में होला।

ग्लेशियर के निर्माण बरफ के इकट्ठा होखे से होला। आमतौर पर ऊँच पहाड़ी हिस्सा में ऊपरी इलाका में बरफबारी होला आ एह बरफ के कुछ हिस्सा वापस हवा में उड़ जाला बाकी जवन हिस्सा बच जाला ऊ पहिले से बचल बरफ के ऊपर गला होखत जाला। एह प्रक्रिया में नीचे वाली बरफ चँतात जाले आ पघिल के दोबारा जमत जाले जेकरे कारन ई ठोस होखत जाले। अइसन बरफ के जे एकदम मजबूत ठोस अवस्था आ फुहा नियर भा रुई नियर बरफ के बीच-बीच के हालत में होखे ले, ग्लेशियर बिज्ञान में नेवे (névé उच्चारण:नेऽवेऽ) कहाले।

अइसने बरफ के एकट्ठा होखे से ग्लेशियर के निर्माण होला आ आमतौर पर ई एगो ख़ास किसिम के थलरूप सर्क चाहे कोरी में बने ला। ई सर्क, आरामकुर्सी नियर आकृति के हिस्सा होला (मने के आधा कटोरा नियर) जेह में किनारे के बरफ भी सरक के गहिरा बिचला हिस्सा में एकट्ठा होखत जाले। दब के एही सर्क सभ में ई ग्लेशियल बरफ (glacier ice) बन जाले आ ढेर मात्रा में  हो जाए पर ओभरफ्लो के रूप में बह के बहरें निकले लागे ले। पहाड़ी ढाल पर ई सरक के आ बह के घाटी में एकट्ठा होखे ले आ घाटी में बरफ के बहत नदी नियर बन जाले।

समशीतोष्ण इलाका सभ में ग्लेशियर के बरफ बेर-बेर पघिलत आ जमत रहे ले आ एकरे कारन बरफ फर्न के रूप ले लेले। ग्लेशियर के बरफ ओह बरफ से कुछ कम घनत्व वाली होखे ले जवन कि पानी के जमावे से बने ले। कारन ई होला कि ग्लेशियर वाली बरफ में हवा के बहुत नखी-नखी बुलबुला भी रहे लें। ग्लेशियर के बरफ हलका निलाहूँ भा आसमानी कलर के टोन में होखे ले। अइसन रंग पानी के कण सभ द्वारा इंफ्रारेड आ लाल विकिरण के कुछ हिस्सा सोख लेवे के कारन होला। एही कारन पानीयो के रंग नीला लउके ला। ई चीज रेले स्कैटरिंग के कारण ना होखे ले जइसन कि कुछ जगह लिखल मिले ला।

ग्लेशियर वाला इलाका में, आ ग्लेशियर रुपी परिवर्तनकारी एजेंट के कार्य से कई किस्म के थलरूप सभ के निर्माण होला। एह सभ के अध्ययन करे वाली शाखा के ग्लेशियल भूआकृतिबिज्ञान कहल जाला। एह में से कुछ के संछेप में परिचय नीचे दिहल गइल बा:




#Article 363: रॉकी परबत (133 words)


रॉकी परबत उत्तर अमेरिका महादीप के पच्छिमी भाग में स्थित एगो बिसाल परबत श्रेणी बाटे। ई अल्पाइन क्रम के परबत हवे आ एकर निर्माण लारामाइन परबत निर्माण की घटना में भइल रहे। उत्तर अमेरिकी प्लेट की नीचे पच्छिम ओर से कई गो प्लेट सभ के धँसाव से बनल ई परबत के पूरुब-पच्छिम चौड़ाई भी बहुत बाटे काहें से कि ए धँसाव के कोन बहुत कम रहे। ई परबत के लंबाई में बिस्तार उत्तर दक्खिन के बाटे आ एकर कुल लंबाई लगभग 3000 मील (4830 किलोमीटर) बा।

बर्तमान में ई नेशनल पार्क आ बन क्षेत्र से घिरल बाटे आ कई तरह के खनिज पदार्थन के भण्डार भी हवे। ई अमेरिका में पर्यटन के बहुत सारा जगहन के अपनी ऊपर आश्रय दिहले बाटे जहाँ पर्वतारोहण, हाइकिंग आ प्रकृति दर्शन नियर चीज खातिर लोग घुमे जाला।




#Article 364: लंदन (148 words)


लंदन दुनिया के एक ठो प्रमुख शहर, इंग्लैंड आ यूनाइटेड किंगडम के राजधानी आ इहाँ के सभसे ढेर जनसंख्या वाला शहर हवे। ग्रेट ब्रिटेन के दक्खिन-पूरबी हिस्सा में टेम्स नदी के तीरे बसल ई शहर लगभग दू हजार साल से प्रमुख बस्ती के रूप में मौजूद बा। रोमन साम्राज्य के लोग द्वारा ई शहर लंडनियम के नाँव से बसावल गइल रहल। लंदन के पुराना मूल क्षेत्र, जेकरा सिटी ऑफ लंदन कहल जाला, लगभग  बिस्तार के आपन मध्य जुग के इलाका बरकरार रखले बा जे एकरे चारदेवारी में आवे। कम से कम 19वीं सदी के बाद से एह मूल लंदन शहर के इर्द-गिर्द बड़ा साइज के मेट्रो शहर के बिस्तार के लंदन नाँव से जानल जाए लागल; एह में मिडिलसेक्स, एस्सेक्स, सर्रे, केंट आ हर्थफोर्डशायर के शामिल कइल जाला, जेवना सभ से आज के ग्रेटर लंदन बनल बा, लंदन के मेयर आ लंदन असेम्बली द्वारा जेकर शासन चले ला।




#Article 365: मिशन इंद्रधनुष (174 words)


मिशन इन्द्रधनुष भारत सरकार के महिला अउरी बाल विकास विभाग के संचालित एगो योजना बाटे जेवना के पहिला चरण के सुरुआत बिस्व स्वास्थ्य दिवस की अवसार पर 7 अप्रैल 2015 के भइल। ई योजना (मिशन) 25 दिसंबर 2014 के लांच कइल गइल रहे। एकर मुख्य उद्देश्य बाटे हाई रिस्क एरिया, गंदी बस्ती, भट्ठा नियर अइसन इलाका में जहाँ बेमारी के खतरा बहुत होखे 0 से 2 बरिस की लड़िका-बच्चन के सात गो बेमारिन से बचाव खातिर टीका लगावल। ई सात गो बेमारी बा - डिप्थीरिया, कुकुर खाँसी, टेटनस, पोलियो, टीबी, मीसल्स आ हेपेटाइटिस बी।

इन्द्रधनुष में सात गो रंग होला जेवना के चीन्हा की रूप में चुनल गइल बा कि केहू की जिनगी में बेमारिन के करिया रंग न आवे आ सभकर जिनगी इन्द्रधनुष नियर बनल रहे। ए मिशन के भारत की 201 जिला सभ में शुरू कइल गइल बाटे आ 2020 ले एकर लक्ष्य पूरा कइल जाई।

ए मिशन की लागू करे खातिर भारत सरकार 201 गो अइसन जिला सभ के चुनाव कइले बाटे जहाँ टीकाकरण के रफ़्तार कम चिन्हित कइल गइल बाटे।




#Article 366: डिजिटल इंडिया (101 words)


डिजिटल इंडिया (Digital India) भारत सरकार के एगो पहल बाटे जेवन भारत की सरकारी बिभागन आ आम जनता के जोड़े के नीयत से चालू कइल गइल बाटे। एकरा पहिले राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस मिशन के योजना रहे जेवना के अ़ब मोदी सरकार संशोधित रूप में लागू करे वाली बाटे। 20 अगस्त 2014 के प्रधानमंत्री मोदी कि अध्यक्षता में केन्द्रीय सरकार की बैठक में एकरा के स्वीकृति दिहल गइल रहे आ एके 1 जुलाई 2015 से शुरू कइल गइल आ जुलाई महीना की पहिला हफ्ता के डिजिटल हफ्ता मानावे के घोषणा कइल गइल।

ए योजना में नौ गो आधार आ लक्ष्य बनावल गइल बाटे:'




#Article 367: सागर माला प्रोजेक्ट (146 words)


सागर माला परियोजना भारत सरकार के एक ठो योजना बाटे जेवन भारत की बंदरगाह सभ के बिकास की नीयत से मोदी सरकार द्वारा सुरू कइल जात बा। एकरा के 25 मार्च 2015 के केन्द्रीय कैबिनेट के मंजूरी मिल गइल। एकर मुख्य उदेश्य बन्दारगाह की ऊपर आधारित विकास के बढ़ावा दिहल आ बंदरगाहन के रोड आ रेल की जरिये अंदरूनी इलाका से जोड़ल बाटे।

एके नीला क्रान्ति की रूप में भी देखल जात बाटे।

एकर योजना अटल बिहारी वाजपेयी कि सरकार में (2004 में) बनल रहे बाकी यूपीए सरकार एके ऊपर बहुत धियान ना दिहलस।

जहाजरानी मंत्रालय एकर कांसेप्ट नोट में एकरा खातिर तीन ठो मुख्य कार्य बतवले बाटे:

भारत की क्षेत्र में कुल लगभग 1208 ठो दीप बाटें। ई सागर माला योजना इनहन में से 700 दीप सभ के बिकास कइले के प्लान बनावत बाटे जिनहन के प्रयोग पर्यटन आ बालीवुड खातिर भी कइल जा सकी।




#Article 368: दक्खिन कोरिया (109 words)


दक्खिन कोरिया एशिया महादीप में एगो देस बाटे जेकर राजधानी सियोल बाटे। ई पुरा देस कोरियाई प्रायदीप पर स्थित बाटे आ एकर उत्तरी सीमा उत्तर कोरिया से मिलेला जवन 'कोरियाई गैर-सैन्य क्षेत्र' कहाले।

एतिहासिक रूप से कोरिया के जापान 1910 में जीत लिहले रहे आ दुसरा बिस्व जुद्ध के खतम भइला पर जापान के समर्पण के बाद कोरिया के दू हिस्सा में बाँट दिहल गइल। उत्तरी हिस्सा सोवियत युनियन के प्रभाव में रहल आ दक्खिनी कोरिया अमेरिका के। फिर से दुनों के एकीकरण के बार्ता बिफल भइला के बाद 1948 में दू गो अलग-अलग सरकार बनल: उत्तर में डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया आ दक्खिन में रिपब्लिक ऑफ कोरिया।




#Article 369: पुच्छल तारा (558 words)


पुच्छल तारा बर्फीला छोटहन सौरमंडली पिंड होला जे सुरुज के नगीचे से गुजरे ला तब गरम हो के गैस निकाले ला। एह आउटगैसिंग के प्रक्रिया में देखलाई पड़े वाला वायुमंडल के निर्माण होला जेकरा के कॉमा कहल जाला आ कभी कभी ई पोंछ भा कूँचा के आकार के चीज के निर्माण हो जाला जेकरा के पोंछ कहल जाला। अइसन घटना पुच्छल तारा के बिचला पिंड, जेकरा केंद्रक कहल जाला, के ऊपर सुरुज के रेडिएशन आ सौर हवा के परभाव के कारण होला। पुच्छल तारा के केंद्रक कुछ सौ किलोमीटर से ले के दसन हजार किलोमीटर तक ले के होखे लें आ ई बरफ, धूर आ छोटहन चट्टानी टुकड़ा सभ के ढेर होखे लें। ई केन्द्रक एक ठो ठोस पिंड के रूप में ना बलुक ढीला-ढाला ढेरी नियर होला। कॉमा के बिस्तार पृथ्वी के ब्यास के पंद्रह गुना तक ले हो सके ला आ इनहन के पोंछ के बिस्तार एक खगोलीय इकाई (एयू) तक ले हो सके ले। ई भरपूर चमक वाला होला आ पृथ्वी से देखे खाती कौनो यंत्र के जरूरत ना पड़े ले, धरती से देखले पर ई आकास में 30° के आर्क (60 चंद्रमा) के बिसतार वाला देखाई पड़ सके ला। प्राचीन काल से इनहन के कई संस्कृति के लोग देखले आ इनहन के बिबरन रिकार्ड कइले बा।

 कुल 5,253 पुच्छल तारा सभ के पता लगावल जा चुकल बा, जइसे-जइसे अउरी जानकारी होखत जात बा ई संख्या बढ़ते जाता। इहो धियान देवे लायक बात बा कि ई गिनती ओह संख्या के एगो नखी मुकी हिस्सा बा जवन कि एह पुच्छल तारा सभ के कुल संख्या होखे के संभावना बा, कारण ई कि बाहरी सौरमंडल (ऊर्ट बदरी) वाला हिस्सा में जहाँ अइसन पुच्छल तारा नियर चीज सभ के भंडार बा, इनहन के संख्या एक ट्रिलियन होखे के अनुमान लगावल गइल बा। लगभग एक पुच्छल तारा हर बरिस बिना कौनों दूरबीन इत्यादि के, सीधे आँख से देखाई पड़े ला, हालाँकि इनहन में से ज्यादातर बहुत मद्धिम होलें आ बहुत शानदार ना होलें। खास चमकदार उदाहरण सभ में बिसाल पुच्छल तारा आवे लें। पुच्छल तारा सभ के लगे ले कई गो मानव-रहित आकासबिमान प्रोब चहुँपल बाने जिनहन में यूरोपीय स्पेस एजेंसी के प्रोब रोसेटा अइसन पहिला प्रोब रहे जे एगो रोबोट नियर आकासबिमान के पुच्छल तारा के सतह पर उतरलस, आ नासा के डीप इम्पैक्ट नाँव के आकासबिमान एगो अइसन मिशन पूरा कइलस जेह में टेम्पल  1 पुच्छल तारा के ऊपर टक्कर से क्रेटर बनावल गइल जवना से कि एकरे अंदरूनी हिस्सा के बारे में जानल जा सके।

संस्कृत में एकरा के धूमकेतु कहल गइल बा। धूम माने धुआँ आ केतु माने झंडा भा पताका, यानी कि धुआँ के पताका भा झंडा नियर रूप। सहज रूप में, पूँछ नियर चीज एकरे मुख्य पहिचान होखे के कारण पुच्छल तारा भा पोंछियल तारा एकर नाँव पड़ल हवे यानी पोंछ वाला तारा।

भोजपुरी में एकर एक ठो अउरी नाँव चलनसार हवे - बढ़नी। भोजपुरी में झाड़ू या कूँचा के बढ़नी कहल जाला आ एही से मिलत जुलत आकृति के चीज होखे के कारण लोग पुच्छल तारा सभ के भी बढ़नी कहे ला।

अंगरेजी में एकरा के कॉमेट कहल जाला। पुरनकी अंगरेजी में ई लैटिन मूल से आइल ह आ लैटिन में खुद ई यूनानी मूल के शब्द κομήτης से आइल हवे जेकर मतलब होला लमहर केश बढ़ावल। हालाँकि ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में इहो नोट कइल गइल बा कि यूनानी शब्द (ἀστὴρ) κομήτης के यूनानी भाषा में इस्तमाल पहिलहीं पुच्छल तारा सभ खाती होखे।




#Article 370: गैलेक्सी (131 words)


गैलेक्सी एगो बिशाल सिस्टम होला जेवना में गुरुत्वाकर्षण की बल द्वारा बहुत सारा तारा, ,  आ , अउरी  सब एक दुसरा से बन्हाइल रहेला।  गैलेक्सी सभ के उदाहरण, बौना गैलेक्सी जिनहन में कुछ हजार (103) तारा होखे से ले के कई सौ  (1014) तारा वाली गैलेक्सी ले हो सके ला जेवना में ई सगरी तारा अपनी गैलेक्सी के द्रव्यमान सेंटर के चारों ओर चक्कर लगावे लें। 

गैलेक्सी के बिभाजन इन्हन की आकृति की आधार पर हो सकत बा जौना में , सर्पाकार (स्पाइरल), आ  आकार वाली गैलेक्सी हो सके लीं। बहुत सारा गैलेक्सी सभ की केन्द्र में बलैकहोल होख्ले के गुंजाइश बतावल जाला। हमनी की आकाशगंगा नामक गैलेक्सी में सेंटर में  नाँव के ब्लैकहोल बाटे जौना के द्रब्यमान हमनी कि सुरुज की तुलना में 40 लाख गुना से भी अधिक बाटे। 




#Article 371: पाब्लो पिकासो (668 words)


पाब्लो पिकासो (25 अक्टूबर 1881 – 8 अप्रैल 1973) स्पेनी पैदाइश वाला एगो पेंटर रहलें जिनकर ढेर जिनगी फ्रांस में बीतल आ ऊ पेंटिंग की दुनिया में बहुत प्रसिद्धी हासिल कइलें। बीसवीं सदी क एगो महत्वपूर्ण कलाकार के रूप में पेंटिंग में ऊ 'घनवाद' आ 'कोलाज' के जन्मदाता कहल जालन। ले देमोइज़ेल द'एविनो, गुएर्निका (1937) आ 'द वीपिंद वुमन' (1937) उनकर प्रसिद्ध पेंटिंग के रूप में जानल जालीं। गुएर्निका नाम के पेंटिंग में ऊ दूसरका विश्व युद्ध के भयावहता के चित्रण कइले रहलन। 

बीसवीं सदी के पहिला दसक में ऊ आपन पुरान पारंपरिक शैली के छोड़ि के तमाम दूसर विचार आ सिद्धांतन के लेके प्रयोग शुरु कइलें। एह रचनाकाल में पेंटर हैनरी मैटिस उनकरा के पेंटिग में रेडिकल तकनीक इस्तेमाल करे खातिर प्रेरित कइलें। ए दौर में इ दूनों कलाकारन के बीच प्रतिस्पर्धा के वजह से कला जगत के बहुत नायाब चीज हासिल भइली स। एही से आधुनिक कला में ए दूनों कलाकारन के अगुवा मानल जाला।

पिकासों के जनम स्पेन के शहर में भइल रहे। उनकर पिता डोन खोसे रुइज़ ब्लास्को एगो मशहूर चित्रकार रहलन आ उनक उनकी माता मारिया पिकासो लोपेज़ जेनोआ इलाके क एगो इतालवी मूल के परिवार से रहली। पिकासो के धार्मिक दीक्षा कैथोलिक रीति से भइल रहे बाकी ऊ बाद में नास्तिक हो गइल रहलें। पिकासो के पिता खुद एगो पेंटर रहला के साथे साथ चित्रकला क प्रोफेसर भी रहलन । चित्रकला क ओर पिकासों के झुकाव लरिकइए में लउक गइल रहे। उनकरा महतारी के मुताबिक पिकासो के मुंह से पहिलका शब्द 'पिज़' 'पिज़' निकलल रहे। 'पिज़' के स्पेनिस में पेन्सिल कहल जाला। पिकासो जब सात साल के रहलन त उनकर पिता उनकरा के चित्रकला में बकायदा प्रशिक्षण देबे शुरू कइ देहलें।

साल 1900 में पिकासो पेरिस आ गइलें। पेरिस को ओ समय यूरोप में कला के केंद्र मानल जात रहे। अपना जीवन काल के एह समय में ऊ भांड़न, मसखरन आ गिटारवादकन के चित्र बनवलें। साल 1906 में आपन मशहूर पेंटिग 'एविगनन की महिलाएं' पर काम शुरू कइलें आ एक बरिस के मेहनत के बाद एकरा के बना के पूरा कइलें। साल 1909 में पिकासो पेंटिंग में घनवाद सिद्धांत के जनम दिहलें आ ओकर सैद्धांतिक ढांचा खड़ा कइलें। उनकर ई शैली अगिला 60-70 बरिस तक बहस आ चर्चा क विषय बनल रहे जवन दुनिया भर के कलाकारन के प्रभावित कइलस। ए शैली में पिकासो हर किसिम के रंग आ रेखांकन के प्रयोग कइलन। पिकासो एह कालखंड में मशहूर कलाकार एंग्रेस के पेंटिंग में खास दिलचस्पी लिहलें आ एही प्रभाव में औरतन पर कइगो पेंटिंग कइलन।

पिकासो अपना जिनिगी तकरीबन 50,000 कलाकृतियन के निर्माण कइलन। पिकासो ओइसे त कला के कइगो क्षेत्र में महारत हासिल कइलें बाकी उनकरा के असली सफलता पेंटिंग में मिलल रहे। अपना पेंटिग में उ रंग से जेयादा रेखांकन पर जोर देत रहलन। कई बेर ऊ आपन पेंटिग में टेक्सचर बनावे खातिर बालू के प्रयोग भी करत रहलें। उ अपना पेंटिंग बनावे में कौनो माॉडल आ दृश्य से प्रेरणा लेबे के बजाय अपना यादाश्त आ स्मृति के इस्तेमाल करत रहलें।

पिकासो राजनीतिक विचारधारा क मामला में मूल रूप से मानवतावादी रहलें। ऊ जीवन भर अत्याचार आ अन्याय के विरोध कइलें। साल 1944 में पिकासो फ्रांस के कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य बन गइलें। स्टालिन के विचारधारा के समर्थन के वजह से उनका के खई बेर विरोध के सामना करे के पड़ल। उनकर आलोचक उनकरा पर ई कहिक भी वैचारिक हमला कइलें कि पिकासो मार्क्स आ एंगेल्स के कवनो किताब पढ़लहीं बिना कम्युनिस्ट कइसे बनि गइलें। उनकरा के कम्युनिस्ट विचारधारा के ककहरो ना मालूम रहे। बाकी पिकासो जिनिगी भर इ कहत रहि गइलें कि ऊ कम्युनिस्ट ङउवन आ उनकर पेंटिग कम्युनिस्ट विचारधारा के पेंटिग हई सs।

पिकासो अपना विचारधारा खातिर स्वेच्छा से देस निकाला स्वीकार क लिहलें आ कसम खइलें कि जबतक स्पेन में रिपब्लिकन शासन ना स्थापित हो जाई तब तक ऊ देस ना लवटिहें। पिकासो अपना पेंटिग से जिनिगी में बेहिसाब दौलत कमइलें। आज तक इतिहास में कवनो कलाकार भा रचनाकार के इ सौभाग्या प्राप्त ना भइल। ऊ निजी पेंटिग आ संग्रह खातिर मुहमांगा फीस वसूलत रहलें बाकी सार्वजनिक संग्रहालय के ऊ आपन पेंटिंग मुफ्त में दे देत रहलन।




#Article 372: अंग्रेजी खातिर आइपीए (307 words)


Throughout Wikipedia, the pronunciation of words is indicated by means of the International Phonetic Alphabet (IPA). The following tables list the IPA symbols used for English words and pronunciations. Please note that several of these symbols are used in ways that are specific to Wikipedia and differ from those used by dictionaries.

If the IPA symbols are not displayed properly by your browser, see the links below.

If the words illustrating two symbols sound the same to you (say, if you pronounce cot and caught the same, or do and dew, or marry and merry), you can ignore the difference between those symbols. Footnotes explain some of these mergers. (See also Dialect variation below.)

For a table listing all spellings of these sounds, see . For help converting spelling to pronunciation, see .

This key represents diaphonemes, abstractions of speech sounds that accommodate General American (GenAm), Received Pronunciation (RP), Canadian English, South African, Australian, and New Zealand pronunciations. Therefore, not all of the distinctions shown here are relevant to a particular dialect:

On the other hand, there are some distinctions which you might make but which this key does not encode, as they are seldom reflected in the dictionaries used as sources for Wikipedia articles:

Other words may have different vowels depending on the speaker.

The pronunciation of the  vowel in Scotland, Wales and northern England has always been closer to , even amongst educated speakers. BBC English is moving away from the older RP  towards the more open vowel , and the Oxford English Dictionary transcribes the lad, bad, cat, trap vowel as  in its updated entries.

For more extensive information on dialect variations, you may wish to see the IPA chart for English dialects.

If you feel it is necessary to add a pronunciation respelling using another convention, then please use the conventions of .




#Article 373: शेक्सपियर (119 words)


विलियम शेक्सपियर (26 अप्रैल 1564 (बपतिस्मा) – 23 अप्रैल 1616) अंगरेज कबी, नाटककार, आ एक्टर रहलें। शेक्सपियर के अंगरेजी भाषा के सभसे महान लेखक मानल जाला आ इनके गिनती पूरा दुनिया के महान नाटककार लोग में होले। इनका के इंग्लैंड के राष्ट्रीय कवि अउरी बर्ड ऑफ एवन के रूप में भी जानल जाला। इनके साहित्यिक रचना सभ में, बिबिध छिटपुट रचना सभ के अलावा, 39 गो नाटक आ 154 गो सॉनेट, दू गो लमहर कबिता आ अउरी कई किसिम के रचना गिनावल जालीं। इनके नाटक सभ के अनुबाद दुनिया के लगभग हर प्रमुख भाषा में भइल बा आ इनके नाटक सभ के अउरी नाटककार लोग के नाटकन के तुलना में बहुत ढेर बेर मंच प खेलल जा चुकल बा।




#Article 374: एडगर एलन पो (205 words)


एलन एडगर पो () 19 जनवरी 1809 - 7 अक्टूबर 1849 एगो अमेरिकी लेखक, कवि, संपादक आ साहित्य के आलोचक रहलें जिनका के अमेरिका में रोमांटिक आंदोलन के हिस्सा मानल जाला।
पो के उनकरा लिखल रहस्य वाली कहानी खातिर आ उनुकी कविता खातिर जानल जाला।
पो के जासूसी आ रहस्य आधारित कहानी लिखे वाला लोगन में पहिला अस्थान बाटे आ उनहीं के बिज्ञान आधारित गल्प के शुरुआत करे वाला भी मानल जाला।
ऊ एगो पहिला अइसन लेखक रहलें जे खाली लेखक की रूप में आपन जीवन बितावे के कोसिस कइल आ एही से आपन कमाई-धमाई करे के कारन हमेसा बहुत अभाव के जिनगी जियल।

एलन के जनम बोस्टन में भइल रहे आ उनुकर माई-बाबू दुनों जन एक्टर रहलें।
उनुका पिताजी परिवार के छोड़ दिहलें जब जब एलन खाली साले भर के रहलें आ अगिला बरिस उनुकर महतारियो मरि गइली।
अनाथ लरिका के एगो दूसर परिवार गोद लिहल बाकी कबो उनके कबो ठीक से अपना न पावल।

पो एकरी बाद गद्य में लिखे सुरू कइलें।

पो के लेखन से पुरा अमेरिके न बलुक दुनिया के लेखक लोग प्रभावित भइल आ उनुकर चलावल रहस्य वाली बिधा पुरा दुनिया में जोर पकड़लस।
आजु भी उनकरा नाँव से एडगर पुरस्कार दिहल जाला जौना के रहस्य-कथा लिखे खातिर दिहल जाला।




#Article 375: फिदूर दोस्तोवस्की (208 words)


फिदूर दोतोव्सकी (अंग्रेजी:) (11 नवंबर 1821 - 9 फरवरी 1881) एगो रूसी लेखक आ उपन्यासकार, कहानी लेखक, पत्रकार आ दार्शनिक रहलें।
उनुकर लिखल कहानी सभ में मानव मनोबिज्ञान के बहुत सफल चित्रण भइल बाटे आ ओ समय के राजनीतिक आ सामाजिक माहौल के भी बढ़ियाँ से देखावल गइल बाटे।

ऊ बीस बरिस की उमिर में लिखे सुरू कइ दिहलें आ उनुकर पहिला उपन्यास पुअर फोक 1846 में छपल जब उनुकर उमिर खाली पचीसे बरिस रहे।
उनुकर परसिद्ध रचना में क्राइम एंड पनिशमेंट (1866), द इडियट (1869), डीमन्स (1872) आ द ब्रदर्स कारामजोव (1880) बाटे।

दोस्तोवस्की के जनम 1821 में मास्को में भइल रहे।
जब उनुकर उमिर पनरह बरिस रहे तबे उनुकर महतारी मरि गइली।
लगभग ओकरा बादे ऊ इस्कूली पढ़ाई छोड़ दिहलें आ निकोलायेव मलेटरी इंजीनियरी इंस्टीट्यूट में पढ़े लगलें आ उहाँ से ग्रेजुएशन कइलें।

उनुका के मौत के सजा भी मिलल बाकी आखिरी समय में जार निकोलस I की आदेस से माफी मिल गइल।

दोस्तोवस्की के बाद में जुआ खेले के आदत लागि गइल रहे आ उनकर माली हालत एतना खराब हो गइल रहे कि उनके कुछ समय बदे भिखमंगई ले करे के परल।

उनुकर काम से बहुत लेखक-साहित्यकार लोग परभावित भइल आ उनकी रचना सभ के दुनिया की लगभग हर बड़हन भाषा में अनुवाद भइल बा।




#Article 376: फ्रांज़ काफ़्का (265 words)


फ्रांज़ काफ़्का जर्मन भाषा में लिखे वाला एगो जर्मन उपन्यासकार आ लेखक रहलें। उनकरा लेखन में आधुनिक समाज में सामाजिक अलगाव के चित्रण पावल जाला। समकालीन आलोचक काफ्का के 20वीं सदी के सर्वश्रेष्ठ लेखकन में से एगो लेखल मानेलें। उनकरा लेखन के वजह से अंगरेजी में एगो तकनीकी शब्द के जनम हो गइल जेकरा के Kafkaesque कहल जाला। एह शब्द के मतलब होला बहकावे वाला।   

काफ़्का के जनम प्राहा, बोहेमिया के एगो मध्यमवर्गीय जर्मन भाषी यहूदी परिवार में भइल रहे। काफ़्का क पिता हरमन काफ़्का क प्राहा में आपन कारोबार रहे। ऊ आपन फैंसी कपड़ा के दुकान के जरिए परिवार चलावस। काफ़्का के महतारी जूली उनकरा पिता जी से ढेर पढल लिखल रहली बाकी ऊ अपना पति के कारोबार में मदद करस। काफ़्का के जीवनी में उनकरा पिता जी के स्वार्थी आ दबंग व्यापारी क रूप में देखावल गइल बा लेकिन काफ्का उनकरा बारे में दोसरा नज़रिया से देखक लिखले रहलन। उनकरा मोताबिक उनकर पिताजी में आत्म-संतोष, धीरज, सांसारिक सफलता आ परीश्रम के जरिए सफलता हासिल करे के गुण रहे।

कारोबार में सफलता आ तरक्की खातिर उनकरा मां-बाप के घर से बाहर रहि के 12 घंटा तक काम करेके पड़े। एह वजह से काफ़्का के बचपन अकेलापन में बीतल रहे। एइसना हालत में काफ़्का के परवरिश उनकरा परिवार के नोकर-चाकरन के हाथ से भइल। एही वजह से पिता-पुत्र के बीच तनावपूर्ण रिश्ता रहे जेवना के बारे में काफ़्का के लेखन में साफ-साफ देखल जा सकेला।

काफ्का के पिता दबंग किस्म के स्वभाव के रहलन बाकिर उनकर महतारी स्वभाव से शांत आ लजाधुर रहली। काफ़्का के पिता क व्यक्तित्व क असर उनकरा लेखन पर भी पड़ल।




#Article 377: वर्चुअल इंटरनेशनल ऑथारिटी फाइल (142 words)


वर्चुअल इंटरनेशनल ऑथारिटी फाइल (वी॰आइ॰एफ॰ए॰ (VIAF)) एगो इंटरनेशनल ऑथारिटी फाइल ह। ई कई गो राष्ट्रीय लाइब्रेरी कुल के सहजोग से बनल प्रोजेक्ट हवे जेवना के नियंत्रण आ संचालन  (OCLC) करे ला। ए प्रोजेक्ट के शुरुआत  आ अमेरिका के  की सहजोग से भइल।

The aim is to link the national authority files (such as the German Name Authority File) to a single virtual authority file. In this file, identical records from the different data sets are linked together. A VIAF record receives a standard data number, contains the primary see and see also records from the original records, and refers to the original authority records. The data are made available online and are available for research and data exchange and sharing. Reciprocal updating uses the Open Archives Initiative protocol.

ई फाइल नंबर सभ विकिपीडिया की जीवनी वाला लेख सब में शामिल कइल जालें।




#Article 378: लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस कंट्रोल नंबर (347 words)


लाइब्रेरी ऑफ काँग्रेस कंट्रोल नंबर (एल॰सी॰सी॰एन॰ (LCCN)) अमेरिका की लाइब्रेरी ऑफ काँग्रेस में इस्तेमाल होखे वाला एगो सीरियल आधारित नंबर दिहले आ कैटलॉग बानवे के तरीका हवे। एकर किताब की बिसय से कौनों भी मतलब ना होला आ लाइब्रेरी ऑफ काँग्रेस वर्गीकरण से कन्फ्यूज न होखल जाय।

The LCCN numbering system has been in use since 1898, at which time the acronym LCCN originally stood for Library of Congress Card Number. It has also been called the Library of Congress Catalog Card Number, among other names. The Library of Congress prepared cards of bibliographic information for their library catalog and would sell duplicate sets of the cards to other libraries for use in their catalogs. This is known as centralized cataloging. Each set of cards was given a serial number to help identify it.

Although most of the bibliographic information is now electronically created, stored and shared with other libraries, there is still a need to identify each unique record, and the LCCN continues to perform that function.

Librarians all over the world use this unique identifier in the process of cataloging most books which have been published in the United States.  It helps them reach the correct cataloging data (known as a cataloging record), which the Library of Congress and third parties make available on the Web and through other media.

In फरवरी 2008, the Library of Congress created the LCCN Permalink service, providing a stable URL for all Library of Congress Control Numbers.

In its most elementary form the number includes a year and a serial number.  The year has two digits for 1898 to 2000, and four digits beginning in 2001.  The three ambiguous years are distinguished by the size of the serial number.  There are also some peculiarities in numbers beginning with a 7 because of an unsuccessful experiment applied between 1969 and 1972.

Serial numbers are six digits long and should include leading zeros.  The hyphen that is often seen separating the year and serial number is optional. More recently, the Library of Congress has instructed publishers not to include a hyphen.

 
 




#Article 379: स्वीडन राष्ट्रीय लाइब्रेरी (181 words)


LIBRIS (Library Information System) is a Swedish national union catalogue maintained by the National Library of Sweden in Stockholm. It is possible to freely search about 6.5 million titles nationwide.

In addition to bibliographic records, one for each book or publication, LIBRIS also contains an authority file of people. For each person there is a record connecting name, birth and occupation with a unique identifier.

The MARC Code for the Swedish Union Catalog is SE-LIBR, normalized: selibr.

The development of LIBRIS can be traced to the mid-1960s. While rationalization of libraries had been an issue for two decades after World War II, it was in 1965 that a government committee published a report on the use of computers in research libraries. The government budget of 1965 created a research library council (Forskningsbiblioteksrådet, FBR). A preliminary design document, Biblioteksadministrativt Information System (BAIS) was published in मई 1970, and the name LIBRIS, short for Library Information System, was used for a technical subcommittee that started on 1 July 1970. The newsletter LIBRIS-meddelanden () has been published since 1972 and is online since 1997.




#Article 380: यूनियन लिस्ट ऑफ आर्टिस्ट नेम्स (222 words)


The Union List of Artist Names (ULAN) is an online database using a controlled vocabulary currently containing around 293,000 names and other information about artists. Names in ULAN may include given names, pseudonyms, variant spellings, names in multiple languages, and names that have changed over time (e.g., married names). Among these names, one is flagged as the preferred name.

Although it is displayed as a list, ULAN is structured as a thesaurus, compliant with ISO and NISO standards for thesaurus construction; it contains hierarchical, equivalence, and associative relationships.

The focus of each ULAN record is an artist. Currently there are around 120,000 artists in the ULAN. In the database, each artist record (also called a subject in this manual) is identified by a unique numeric ID. Linked to each artist record are names, related artists, sources for the data, and notes. The temporal coverage of the ULAN ranges from Antiquity to the present and the scope is global.

The ULAN includes proper names and associated information about artists. Artists may be either individuals (persons) or groups of individuals working together (corporate bodies). Artists in the ULAN generally represent creators involved in the conception or production of visual arts and architecture. Some performance artists are included (but typically not actors, dancers, or other performing artists). Repositories and some donors are included as well.




#Article 381: चेक गणराज्य के राष्ट्रीय लाइब्रेरी (159 words)


चेक गणराज्य के राष्ट्रीय लाइब्रेरी () चेक रिपब्लिक के सेंट्रल लाइब्रेरी बाटे। ई उहाँ के संस्कृति मंत्रालय के अधीन बाटेल  लाइब्रेरी के मेन बिल्डिंग प्राग के क्लेमेंटियम में बा जहाँ एह पुस्तकालय के आधा कितब सभ रखल बाड़ी। बाकी आधा हिस्सा होस्तिव्र डिस्ट्रिक्ट में रखल बाटे। ई चेक रिपब्लिक के सभसे बड़हन लाइब्रेरी बाटे फंड के मामिला में आ इहाँ लगभग 60 लाख आइटम रखल बाटे। एह लाइब्रेरी के लगभग 60,000 रजिस्टर्ड पाठक लोग बा। चेक भाषा के सामग्री के आलावा इहाँ तुर्की ईरान आ भारत से ले आइल सामग्री भी रखल बाटे। ई प्राग के चार्ल्स विश्वविद्यालय खातिर किताब भण्डार के काम भी करे ले।

एह लाइब्रेरी के अंतर्राष्ट्रीय पहिचान 2005 में मिलल जब ई यूनेस्को के मेमोरी ऑफ दि वल्ड प्रोग्राम के तहत जिकिजी पुरस्कार पवलस। ई पुरस्कार पुरान सामग्री के डिजिटाइज करे खातिर मिलल। ई प्रोजेक्ट, जवन 1992 में शुरू भइल अपने शुरुआत के 13 बरिस में लगभग 1700 आइटम के डिजिटाइज करे में सफलता पावल।




#Article 382: रूस के राजकीय लाइब्रेरी (125 words)


रूस के राजकीय लाइब्रेरी () रूस के राष्ट्रीय पुस्तकालय हटे।, located in Moscow. It is the largest in the country and the fourth largest in the world for its collection of books (17.5 million). including over 17 million books and serial volumes, 13 million journals, 350 thousand music scores and sound records, 150,000 maps and others. There are items in 247 languages of the world, the foreign part representing about 29 percent of the entire collection.

Between 1922 and 1991 at least one copy of every book published in the USSR was deposited with the library, a practice which continues in a similar method today, with the library designated by law as a place to hold a mandatory copy of every publication issued in Russia.




#Article 383: लेखक उद्धरण (बनस्पति बिज्ञान) (159 words)


In botanical nomenclature, author citation refers to citing the person or group of people who validly published a botanical name, i.e. who first published the name while fulfilling the formal requirements as specified by the International Code of Nomenclature for algae, fungi, and plants (ICN). In cases where a species is no longer in its original generic placement (i.e. a new combination of genus and specific epithet), both the author(s) of the original genus placement and those of the new combination are given (the former in parentheses).

In botany, it is customary (though not obligatory) to abbreviate author names according to a recognised list of standard abbreviations.

There are diffences between the botanical Code and the normal practice in zoology. In zoology, the publication year is given following the author name(s) and the authorship of a new combination is normally omitted. A small number of more specialized practices also vary between the recommendations of the botanical and zoological codes.




#Article 384: नीदरलैंड्स इंस्टीट्यूट फॉर आर्ट हिस्ट्री (210 words)


The Netherlands Institute for Art History (Dutch: Rijksbureau voor Kunsthistorische Documentatie or RKD) is located in The Hague and is home to the largest art history center in the world. The center specializes in documentation, archives, and books on Western art from the late Middle Ages until modern times. All of this is open to the public, and much of it has been digitized and is available on their website. The main goal of the bureau is to collect, categorize, and make art research available, most notably in the field of Dutch Masters.

Via the available databases, the visitor can gain insight into archival evidence on the lives of many artists of past centuries. The library owns approximately 450,000 titles, of which ca. 150,000 are auction catalogs. There are ca. 3,000 magazines, of which 600 are currently running subscriptions. Though most of the text is in Dutch, the standard record format includes a link to library entries and images of known works, which include English as well as Dutch titles.

The RKD also manages the Dutch version of the Art and Architecture Thesaurus, a thesaurus of terms for management of information on art and architecture. The original version is an initiative of the Getty Research Institute in Los Angeles, California.




#Article 385: साइनी (202 words)


CiNii ( ) is a bibliographic database service for material in Japanese academic libraries, especially focusing on Japanese works and English works published in Japan. The database was founded in अप्रैल 2005 and is maintained by the National Institute of Informatics. The service searches from within the databases maintained by the NII itself [NII Electronic Library Service (NII-ELS) and Citation Database for Japanese Publications (CJP)], as well as the databases provided by the National Diet Library of Japan, institutional repositories, and other organizations.

The database contains more than 15 million articles from more than 3600 publications. A typical month (in 2012) saw more than 30 million accesses from 2.2 million unique visitors, and is the largest and most comprehensive database of its kind in Japan. Although the database is multidisciplinary, the largest portion of the queries it receives is in the humanities and social sciences field, perhaps because CiNii is the only database that covers Japanese scholarly works in this field (as opposed to the natural, formal, and medical sciences which benefit from other databases).

The database assigns a unique identifier, NII Article ID (NAID), to each of its journal article entries. A different identifier, NCID, is used for books.

NCID Examples




#Article 386: पहिनावा (166 words)


पहिनावा केहू आदमी भा औरत द्वारा पहिनल जाए वाला सगरी चीज के कहल जाला जेवन आम तौर पर सूत से बनल कपड़ा की रूप में होला। एकर मुख्य उद्देश्य शरीर के ढांकल आ मौसम से बचाव होला। पहिनावा में कपड़ा के परकार, मात्रा आ इस्टाइल कई बात पर निर्भर बाटे जइसे कि मौसम, फैशन आ देस-अस्थान।

पहिनावा, कपड़ा पहिने की तरीका के आ कपड़ा सभ से रूप रंग आ परकार के भी कहल जाला। आम तौर पर पहिनावा से मतलब होला कि केहू कइसन कपड़ा पहिरले बाटे। ब्यापक अरथ में ई कौनों अस्थान, क्षेत्र या देस के के लोगन के कपड़ा आ कपड़ा पहिरे की तरीका के बतावेला। समय कई अनुसार पहिनावा में भी बदलाव होला। ई बदलाव एकही आदमी कई उमिर में बदलाव से भी हो सकेला आ बहुत लम्बा समय में कौनों बिसेस जगह कई लोगन के पुरा पहिनावा में भी बदलाव हो सके ला। पुरान समय में पहिनावा कुछ अउरी रहे आज ओही अस्थान के लोग दूसर किसिम के पहिनावा पहिन सके ला। 




#Article 387: कपड़ा (112 words)


कपड़ा सूत के बीनल चीज होला जेवना के इस्तेमाल पहिनावा कई रूप में आ अउरी कई तरह कई काम जइसे परदा बनावे में, ओढ़े बिछावे की चादर कई रूप में आ अउरी अइसने ढेर सारा कामन में होला।

चिरकुट कवनो कपडा (नया चाहे पुरान) के टुकड़ा के कहल जाला। ई शब्द दुगो शब्द  के मिलला से बनल बा  चिर (कपडा) + कूट (टुकड़ा)। चिरकुट शब्द भोजपुरी भाषा के देशज शब्द के श्रेणी में आवेला |

भोजपुरी संस्कृति में छोट से छोट बस्तु के महत्व देवे के कोशिस  कइल गईल बा | चिरकुट के  हस्त कला कृति में सजावे खाती ;बाद्ययंत्र  झाली के मुठिया नगाड़ा के झालर   आदि बनावे में उपयोग कइल जाला




#Article 388: रंग (605 words)


रंग () एगो गुणधर्म हवे जौना के आदमी लाल, पीयर, हरियर नियर कई सारा आलग-अलग प्रकार की रूप में पहिचाने ला। रंग के सीधा संबंध प्रकाश या रोशनी से होखे ला, काहें से कि प्रकाश के अलग-अलग वेवलेंथ वाला हिस्सा आदमी के अलग-अलग पहिचान में आवेला। आदमी की आँख में रेटिना पर प्रकाश के पहिचान करे वाला नखी-नखी संवेदनशील कोन होखेलें जिनहन के अलग-अलग वेवलेंथ के प्रकाश अलग-अलग मात्रा में एक्टिव करे ला आ एही संवेदना से आदमी के रंग के पहिचान होला।

हालाँकि रंग के भौतिक गुण आ एकर आदिमी की द्वारा पहिचान में बहुत जटिल संबंध बाटे।

रंग के अलग अलग तरीका से गणितीय रूप में भी चिन्हित करे के तरीका बनावल गइल बाटे जौना में सबसे प्रमुख RGB सिस्टम आ CMYK सिस्टम बाटे। एकरी अलावा HSV या HSB कलर स्पेस भी परिभाषित कइल बाटे। इहो धियान में रखे वाली बाति बाटे की एगो सिस्टम में रंग के पहिचानक के दुसरा सिस्टम की पहिचानक में बदले के कौनों बहुत सीधा गणितीय तरीका न होखे ला।

रंग के अध्ययन करे वाला बिज्ञान के कलरीमीट्री कहल जाला या कबो-कबो सीधे रंग बिज्ञान () भी कहल जाला।

रंग के भौतिक रूप से पहिचान करे खातिर कई गो तरीका बनावल गइल बाटें जेवना कई आधार पर अलग-अलग रंग के गणितीय पहिचान दिहल जा सकेले। ई पहिचान एक तरह के निर्देशांक होला आ इन्हन के पुरा समूह के कलर स्पेस कहल जाला। नीचे इन्हन के मुख्य परकार दिहल गइल बाटे:

सबसे आसान आ प्रमुख कलर स्पेस बाटे। ई प्रकाश के तीन गो मुख्य रंग - लाल, हरा आ नीला की जोड़ से बाकी रंग बनावे की कला पर आधारित बाटे आ एह सिस्टम में कौनों रंग के चीन्हा ई बतावेला की केतना लाल, केतना हरियर आ केतना नीला रंग के प्रकाश के मिला के ऊ रंग बतावल जा सकत बाटे। 8-बिट (8-bit) सिस्टम में 0 से 255 की बीच में तीनों रंग के वैल्यू बतावल जाले।

एकर इस्तेमाल मुख्य रूप से ओ सगरी सिस्टम में होखेला जेवन सीधे प्रकाश पैदा कइ के अलग अलग रंग के चीज देखावेला। सबसे नीक उदाहरण टीवी या कम्यूटर के स्क्रीन बाटे। एह स्क्रीन कुल पर लउके वाली हर चीज के रंग अलग-अलग वेवलेंथ के प्रकाश के मिक्स कइ के बनल रहेला।

चूँकि, ई सिस्टम सीधे प्रकाश के जोड़ से रंग बनावेला, एही से एकरा के जोड़क रंग ब्यवस्था (Additive color system) कहल जाला।

आरजीबी की ठीक उल्टा ई ब्यवस्था सफेद प्रकाश के परावर्तित करे वाला सतह पर क्रम से सियान, मैजेंटा आ पीला (+काला) रंग के सियाही लगा के उन्हन की द्वारा अलग अलग रंग बनावे के तरीका पर आधारित बाटे। कौनों सफेद कागज सगरी रंग के प्रकाश परावर्तित करे ला एही से ऊ सफेद लउके ला। अगर ओपर लाल सियाही लगा दिहल जाय त ऊ लाल लउके लागी जौना के मतलब ई भइल की लाल सियाही नीला आ हरा रंग के प्रकाश के सोख ले लेले आ उन्हन के ना परावर्तित होखे देले। एही तरे नीला सियाही लाल आ आ हरा रंग के प्रकाश के सोख लेले।

एकर मुख्य इस्तेमाल छपाई में होखेला जहाँ चार गो रंग के सियाही सियान, मैजेंटा, पीला आ काला (CMYK) की सहायता से सगरी रंगीन चीज छापल जाला। चूँकि, अलग अलग सियाही अलग अलग रंग की प्रकाश के घटा (सोख के) बाकी बचल प्रकाश से रंग बनावे ले एही से एकरा के घटावक (Subtractive color system) भी कहल जाला

ई एगो दूसर ब्यवस्था बाटे जौना में रंग के प्रकार के ह्यू (hue), ओकरी गहिराई या हल्कापन के सैचुरेशन (saturation) आ ओकरी शुद्धता या चटक होखला के वैल्यू (value) की रूप में परिभाषित कइल जाला।

एही से मिलत-जुलत एगो अउरी ब्यवस्था ह्यू-सैचुरेशन-ब्राइटनेस (HSB) के भी होखे ले। आ इन्हन की अलावा अउरी कई गो रंग ब्यवस्था बाटे।




#Article 389: भोजपुरी संस्कृति (798 words)


भोजपुरी संस्कृति के ही भोजपुरिया  संस्कृति भी कहल जाला| भोजपुरी के अन्य भाषा से संबंध के बारे में कहल जाला -

मैथिल के बहिन लागे अवधी के भाई |

अंगरेजी के बाप लगे संस्कृत के माई|| 

प्रकृति के जन्मल बेटी पिए गंगा के पानी |

सहज सुशील बिनम्र दुअर्थी एह भाषा के पहिचानि|| 

भोजपुरी संस्कृति के इतिहास

भोजपुरी संस्कृति के इतिहास अशोक महान से भी पुरान ह अशोक महान के  पूरा नाम देवानांप्रिय अशोक मौर्य रहे  उनकर राजकाल ईसापूर्व 273 से 232 तक रहे  प्राचीन भारत में मौर्य राजवंश  के चक्रवर्ती राजा रहले  उनका  समय  में मौर्य राज्य उत्तर में हिन्दुकुश के  श्रेणि से ले के  दक्षिण में गोदावरी नदी के दक्षिण आ  मैसूर  पूर्व में बंगाल से पश्चिम में अफ़गानिस्तान तक पहुँच गईल रहे । एह समय के उ बहुत प्रतापी राजा रहन।  बिहार के  प्राचीन नाम ’विहार’ रहे , जिसका मतलब मठ होला । यी  भारत के पूर्वी भाग में स्थित बा क्षेत्रफल के हिसाब से बिहार भारत का बारहवां सबसे बड़ा और आबादी के मान से तीसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य ह।  बंगाल के  क्षेत्र में पहुंचने से पहले गंगा नदी एहि  राज्य से बहेली  जेकरा कारन यी  राज्य वनस्पति आ  जीव-जन्तु से समृद्ध बा। बिहार के  वन क्षेत्र भी विशाल बा  जवन कि 6,764 वर्ग किमी के बा  यी  राज्य भाषाई तौर पर प्रभावकारी बा एहिजा कई  भाषा बाडिस जवना में भोजपुरी प्रधान भाषा मानल जाला, बिहार की राजधानी पटना ह, जेकर  नाम पहले पाटलीपुत्र रहे । भारत के कुछ महान राजा जैसे समुद्रगुप्त, चन्द्रगुप्त मौर्य, विेक्रमादित्य और अशोक के शासन में बिहार शक्ति, संस्कृति और शिक्षा क केन्द्र बन गईल रहे  यह  समय दुगो  महान शिक्षा केन्द्र रहन , विक्रमशिला और नालंदा विश्वविद्यालय। बिहार में आज भी   3,500  साल पुरान इतिहास के  गवाही देत कई प्राचीन स्मारक मौजूद बाड़िस

 अन्य संस्कृति से भिन्नता 

भोजपुरी संस्कृति के अन्य संस्कृति से भिन्न पवित्र आ मानवता के नजदीक होखे के कुछ प्राकृतिक अउर दैविक कारन भी बा संस्कृत भाषा के एक  रचना जवना के  उत्तरी संस्करण में सिंहासनद्वात्रिंशति तथा विक्रमचरित के नाम से दक्षिणी संस्करण में उपलब्ध बा  एकर  संस्कर्ता एक मुनि जी रहन  जिनकर  नाम क्षेभेन्द्र रहे  बंगाल में वररुचि  जी के द्वारा प्रस्तुत संस्करण भी एहि  के समरुप मानल  जाला एकर  दक्षिणी रुप ज्यादा लोकप्रिय भइल  लोक भाषा में एकर  अनुवाद होते रहे अउर पौराणिक कथा नियन  भारतीय समाज में मौखिक परम्परा के रुप में रच-बस गइलस यी  कथा  के  रचना वेतालपञ्चविंशति या बेताल पच्चीसी के बाद भइल  लेकिन  निश्चित रुप से  रचनाकाल के बारे में कुछ नईखे कहल  जा सकत। एतना  लगभग तय बा  कि एकर  रचना धारा के राजा भोज के समय में ना भइल होई  काहेकि  प्रत्येक कथा में  राजा भोज के  उल्लेख मिलेला यह से एकर  रचना काल 11वीं शताब्दी के बाद भइल होई । एकरा के  द्वात्रींशत्पुत्तलिका के नाम से भी जानल जाला ।

लोक कथा 

एह  कथा के   भूमिका में भी  कथा बा  जवन राजा भोज की कथा कहेलिस 32 कथा 32 पुतलि  के मुह  से कहल बा जवन एक सिंहासन में लागल बाडीस। यी  सिंहासन राजा भोज के  विचित्र परिस्थिति में मिलल। एक दिन राजा भोज  के मालूम भइल  कि एक साधारण चरवाहा अपना  न्यायप्रियता खाती मसहूर बा , जबकि उ बिल्कुल अनपढ़ बा  तथा पुश्तैनी रुप से उनके  राज्य के कुम्हार के गायी, भैंस  बकरि चरावेला । जब राजा भोज  तहक़ीक़ात करवले त पता चला कि उ  चरवाहा सब फैसला  एगो छोट पहाड़  पर चढ़ के  करेला राजा भोज के जिज्ञासा बढ़ गईल तब उ भेष बदल के वोह चरवाहा के पास गईले ओकरा के कठिन समस्या के समाधान करत देख राजा दंग रह गईले वो चरवाहा के नाम चन्द्रभान रहे।  राजा के पुछला पर चन्द्रभान एक दिब्य शक्ति के बारे में राजा के बतवलस की उ शक्ति एहि टीला पर हमरा आवेली आ हमरा के उचित न्याय करे में मदत करेली। जब राजा वोह जगह के  खोदवावले तब उनका एक सिंघासन मिलल। राजा पंडित लोग के बोला के सिंघासन पर बैठे के मुहूर्त निकलवले आ जब मुहूर्त के दिन सिंघासन पर बैठे चलले तब सिंघासन में लागल सोना के बत्तीस पुतरी ठठा के हंस देली स। जब राजा पुतरी से हँसे के कारन पुछले तब पुतरी कहे लगलि स ये राजन यी सिंघासन त राजा बिक्रमादित्य के ह  एकरा प तू तबे बईठीह जब तू राजा बिक्रमादित्य नियन होइह तब राजा पुछले की राजा बिक्रमादित्य में का खासियत रहे एह सवाल के जबाब में बिक्रमादित्य के बत्तीस गो पुतली 32 गो काथा सुनवलिस एहि 32 कथा के आधार पर राजा भोज के एगो सभ्य संस्कृति के ज्ञान भइल जेकरा के उ भोजपुरी संस्कृति के नाम से परम प्रतापी राजा बिकमादित्य के दिब्य अंश के रूप में लोक कल्याण खाती छोड़ गईल बाड़े राजा बिक्रमादित्य के समय से ही काल गड़ना चलल जेकरा के विक्रम  सम्बत कहल जाला हिन्दू आर्य के संस्कृति भी ईहे ह जवन आज भी भोजपुरी संस्कृति के नाम से जानल जाले




#Article 390: दि ब्लू मार्बल (956 words)


दि ब्लू मार्बल (, भोजपुरी अर्थ:निलकी गोली या नीला रंग के गोली) एगो बहुते परसिद्ध फोटो हवे। ई हमनी की पृथ्वी के फोटो हवे जेवन 7 दिसंबर 1972 के अपोलो 17 आकाशबिमान से खींचल गइल रहे, लगभग 45,000 किलोमीटर (28,000 मील) की दूरी से।
ई मनुष्य जाति की इतिहास में एगो सभसे चिन्हारू आ बहुतेरा लोगन के देखल फोटो बाटे।

नासा की अभिलेख में एह फोटो के नाँव AS17-148-22727 बाटे।
ई फोटो अपोलो आकासबिमान की यात्रिन द्वारा चंद्रमा की ओर जात समय उन्हान लोगन के पृथ्वी कइसन लउकल एकर बहुते निक उदाहरण देखावेले।
एह फोटो में सबसे ऊपर की ओर भूमध्य सागर के हिस्सा लउकत बाटे आ दक्खिन में नीचे अंटार्कटिका के बरफटोपी, मोजाम्बिक चैनल एकरी ठीक बीच में लउकत बाटे।

इहे नाँव से नासा 2012 में एगो फोटो सभ के सीरीज भी जारी कइलस जौना में बहुत मेहनत से पृथ्वी के अइसन फोटो सभ के जोड़ के अधगोला के अइसन चित्र बनावे के कोसिस कइल गइल बाटे कि कम से कम हिस्सा बादर से तोपाइल होखे आ फोटो बढियाँ रिसोल्यूशन के होखे।

ई फोटो - जवन अंतरिक्षयात्री लोगन द्वारा 7 दिसंबर, 1972 के, 10:39 यूटीसी पर खींचल गइल - एगो सभसे ढेर परचारित फोटो में से गिनल जाले। ई अइसन कुछ गिनल-चुनल फोटो में से बा जौना में पुरा पृथ्वी के अधगोला लउकत बाटे, कारण ई कि जब अंतरिक्षयात्री लोग ई फोटो लिहल तब सुरुज के रोशनी उन्हन लोगन की ठीक पीछे की ओर से आवत रहे आ सामने पृथ्वी रहे जेवना से पृथ्वी के जेतना हिस्सा उन्हन लोगन की सामने रहे ओहपर पुरा पर रोशनी पड़त रहे। ई फोटो शीशा के गोली - जेवन लरिका खेले लें - नियर लउके ले एही से एकर नाँव नीली गोली रखा गइल।

ई फोटो अपोलो 17 की लांच की 5 घंटा 6 मिनट बाद लिहल गइल आ लगभग 1 घंटा 54 मिनट पहिले ई आकासबिमान पृथ्वी के कक्षा के छोड़ के चंद्रमा की ओर जाए वाला रास्ता में रहे। दिसंबर के महीना होखला की कारन सुरुज दक्खिनी गोलार्ध में चमकत रहे जेवना से एम्में अंटार्कटिका प्रकाश में बाटे।

फोटो में सबसे ऊपर दहिने ओर एगो चक्रवात देखल ज सकत बाटे जवन हिन्द महासागर में बनल बाटे। ई चक्रवात एह लांच की दू दिन पहिले भारत की तमिलनाडु राज्य में भारी बरखा क चुकल रहे (5 दिसंबर के)।

नासा एकरा के ऑफिसियल रूप से AS17-148-22727 नाँव दिहलस; एकरी ठीक पहिले खींचल AS17-148-22726 भी लगभग अइसने फोटो हवे जेवना में पुरा अधगोला रोशनी में बाटे। फोटो अपना मूल रूप में दक्खिनी ध्रुव के ऊपर देखावत खींचल गइल रहे आ मेडागास्कर एकरी लगभग बीचोबीच बाटे। दि ब्लू मार्बल की रूप में एकरा के उलट के देखावल गइल रहल।

फोटो खींचे वाला फोटोग्राफर एगो 70-मिलीमीटर हैसलब्लेड कैमरा आ 80-मिलीमीटर जीस लेंस के इस्तेमाल कइ के ई फोटो खिंचलें।

अपोलो 17 आखिरी चंद्रमा मिशन रहे जेवना में आदमी भी सवार रहे आ एकरा बाद केहू भी बेकती पृथिवी से एतना दूरी ले ना पहुँचल की पुरा पृथ्वी के फोटो खींच सके, बाकी एकरा बाद भी बिना यात्री वाला बिमान सब से कई ठो अइसन फोटो खींचल गइल बा।

दि ब्लू मार्बल अइसन पहिला फोटो न रहे जेवना में पुरा अधगोला साफ़ आ प्रकाश में लउकत होखे काहें कि अइसन फोटो पहिले एटीएस-3 उपग्रह से पहिलहीं 1967 में लिहल ज चुकल रहे। इ त पर्यावरण कार्यकर्ता अउरी उलटसंस्कृति (counterculture) के कार्यकर्ता लोग एकरा के पुरा बैस्विक बोध के बिसय बना के एगो पहिचान कई निशान की रूप में महत्व दिहल। एही से 70 की दशक में पर्यावरण आंदोलन की जमाना में ई फोटो पर्यावरण की प्रति जागरुकता, पृथ्वी के अकेलापन, कमजोरी आ नाजुक होखला के पहिचान बन गइल। नासा के पुरालेखबिसेसग्य माइक जेन्ट्री की अनुसार साइत ई फोटो पुरा मनुष्य इतिहास में सबसे ढेर पहुँच वाली फोटो हवे जेवन सबसे ढेर मात्रा में लोगन ले पहुँचल होखे।

बाद में भी अइसने कई गो पृथ्वी के फोटो (जौना में कम्पोजिट फोटो भी शामिल बाड़ी जेवन कई गो फोटो के जोड़ के ढेर रिसोल्यूशन आ बढ़ियां क्वालिटी के तैयार कइल गइल बाड़ी) के जिन्हन के ब्लू मार्बल नाँव दिहल गइल बाटे।
अब त ई ब्लू मार्बल नाँव पर्यावर की खातिर जागरुकता बढ़ावे वाला बहुत सारा फोटो में पृथ्वी के देखवले के कहल जाए लागल बाटे।

एही क्रम में 2005 में दि ब्लू मार्बल नेक्स्ट जेनेरेशन (नया पीढ़ी के नीली गोली) रिलीज भइल। एह में पुरा ग्लोब के बादर की बिना फोटो में देखावल गइल आ आलग अलग मौसम में बरफ के चादर के बिस्तार भी घटत-बढ़त देखावल गइल। ई फोटो नासा के अर्थ ओब्सेर्वेटरी के एगो प्रोडक्ट रहे। ई पछिला फोटो से बढ़ियां रिसोल्यूसन पर रहे (अबकी बेर 500मी/पिक्सल)।

ई फोटो के बहुत लोग देखल, फ्लिकर पर पहिले हप्ता में एके देखे वालन के संख्या 31 लाख पहुँच गइल। एकरी बाद, 2 फरवरी के नासा एगो अउरी फोटो रिलीज कइलस जौना में पूरबी गोलार्ध देखावल रहे आ एकर डेटा 23 जनवरी 2012 के हासिल कइल गइल रहे।

ई फोटो विजिबल/इन्फ्रारेड इमेज रेडियोमीटर सूट (वीआइआइआरएस) से लिहल गइल फोटो सब के जोड़ के बनाव गइल कम्पोजिट इमेज रहल। ई औजार सुओमी एनपीपी उपग्रह पर लागल रहे आ ई उपग्रह डेटा लेवे में आठ घंटा की समय में छह गो चक्कर पूरा कइलस।

दिसंबर 2012 में 5 तारीख के नासा एगो अउरी फोटो रिलीज कइलस जौना के ब्लैक मार्बल (काली गोली) कहल गइल। ई फोटो रात में लिहल गइल डेटा से बनावल गइल रहे जेवना में ऊ सगरी मनुष्य के बनावल चीज देखात बाटे जौना के रोशनी आकाश में से पकड़ में आ सकत बाटे।
इहो फोटो खातिर डेटा सुओमी उपग्रह से लिहल गइल रहे। एकरा खातिर सुओमी 312 चक्कर में 2.5 टेराबाईट डेटा इकठ्ठा कइलस।
नासा कि अनुसार एह फोटो के बनावत घरी सगरी डिम लाइट आ, जंगल के आग, गैस लपट, अरोरा, आ परावर्तित चाँदनी के फिल्टर की इस्तेमाल से हटा के एकरा के खाली शहर की रोशनी पर जोर देवे वाली फोटो बनावल गइल।




#Article 391: सती (प्रथा) (251 words)


सती प्रथा भारत में एगो रिवाज रहे जेवना में मरद की मू गइले पर मेहरारुओ ओहि की चिता में जरि के आपन जिनगी खतम क ले। ई प्रथा अंग्रेजन द्वारा सन् 1829 में गैर-कानूनी घोषित करे से पहिले चलन में रहे। हालांकि आजादी की बाद ले अइसन घटना होखले के कुछ उदाहरण मिलेला।

सती स्त्री लिंग शब्द ह एह शब्द के पुलिंग शब्द ह सत, जवन की हिंदी के सत्य शब्द के अपभ्रंश रूप ह भोजपुरी में सत्य के साँच कहल जाला।
जइसे साँच के आंच ना होला।

जब भोजपुरी में सती शब्द के प्रयोग कइल जाला तब वोकर मतलब होला सत के आचरन करे वाली मेहरारू  मेहरारू के हक़ में वोकर सत ह वोकर मर्दाना कान्हे  की जब कवनो कन्या के कन्या दान कइल जाला तब उ महतारी बाप खाती परया हो के दान प्राप्त मरद के अर्धांग्नी बन जाले।  जब वोकर आधा अंग कवनो भी कारन ने नस्ट हो गईल तब ओकरा सत के रक्षा खाती समाज ओकरा मर्दाना के लहास के संगे ओकरो के सद्गति प्रदान कर देत रहन एह प्रकार से उ सत खाती अपना देंही के तिआग के सती हो जात रहली हा। 

बंगाल के प्रसिद्द समाज सुधारक राजा राममोहन राय क योगदान सबसे ढेर गिनल जाला। अंग्रेज सरकार 1829 में एह प्रथा पर प्रतिबन्ध लगा दिहलस। हालांकि आजाद भारत में भी सती होखले के कुछ घटना प्रकाश में आइल बा बाकि अब ई पूरा तरीका से एगो गैर कानूनी काम मानल जाला।

एकरा बावजूद अभी हाल में ले अइसन घटना के छिटपुट खबर मिलल बाटे।




#Article 392: चंडि कालासन (724 words)


कालासन (, ), या चंडि कलिबेनिंग, जावा, इंडोनेशिया में एगो 8वीं-सदी के बौद्ध मंदिर ह। ई योग्यकर्ता से 13 किमी दूर प्रमबनम मंदिर की रास्ता में पड़ेला, आ ई मेन रास्ता 'जालन सोलो' की दाहिने ओर  योग्यकर्ता आ सुरकर्ता की बीच में बाटे। प्रशासनिक दृष्टि से ई स्लीमन रीजेंसी की कालासन जिला में पड़ेला।

संस्कृत भाषा में आ प्रनागरी लिपि में लिखल, 778 ईसवी की, कालासन शिलालेख की अनुसार ई मंदिर शैलेन्द्र वंश के शिरोमणि (Guru Sang Raja Sailendravamçatilaka - the Jewel of Sailendra family) की इच्छानुसार बनावल गइल जे  (शिलालेख की दुसरा हिस्सा में इनका के काड़ियान पनंगकरण भी कहल गइल बा) के  देवी तारा (बोधिसत्विनी) के पवित्र भवन ताराभवनम् बनवावे खातिर तइयार कइलन।

एकरी अलावा, एगो विहार बनवावल गइल जेवन शैलेन्द्र परिवार की क्षेत्र की बौद्ध भिक्षु लोगन खातिर रहल। पनंगकरण संघ के कलस नाँव के गाँव दिहलें। अगर शिलालेख के तारीख की हिसाब से देखल जाय त कालासन मंदिर प्रमबनन मैदान की इलाका में बनल सभसे प्राचीन बौद्ध मंदिर बाटे।

डच लोगन की उपनिवेशिकी समय की दौरान थोर-बहुत मरम्मत के काम भइले की बावजूद आज ई मंदिर बहुत खराब इस्थिति में बाटे। अगले-बगल की कुछ मंदिरन -  प्रमबनन, सेवु आ संबिसरइ - सभ की तुलना में ई मंदिर के देखभाल कि मामिला में उपेक्षिते कहल जाई।

मंदिर एगो 14.2 वर्ग मीटर की निचला आधार (भुईंधरा) की ऊपर स्थित बाटे। मंदिर के निर्माण योजना धन की आकार के बाटे आ अइसन डिजाइन कइल गइल बा की एगो बारह कोन के आकृति बनावेला। सगरी चारों छोर पर सीढ़ी आ द्वार बाटें जेवन कल-मकर की आकृति से सजल बाटें आ 3.5 वर्गमीटर के कमरा वाला बाटें। छोटका कमरा जवन उत्तर दक्खिन पुरुब पच्छिम चारों ओर बाटें, इनहन में कौनों मूर्ती नइखे बाकी कमल के पंखुरी वाला बेदी ई सबूत देवेलिन की कब्बो इहाँ मूर्ती (बोधिसत्व के) जरूर रहल होखी।

मंदिर बौद्ध आक्रितिन - जेवना में बोधिसत्व आ गण  मुख्य बाटें - से बहुत नीक से सजल बाटे। काल (संस्कृत मूल काल = समय या मृत्यु के देवता) के मुखाकृति जवन दक्खिनी दरवाजा पर बाटे ऊ बहुत बेर फोटो में उतारल गइल बाटे आ बिद्वान लोग एकर अपनी पुस्तक में मध्य-जावा की पत्थर-कला की नमूना की रूप में इस्तेमाल कइले बाटे। मंदिर में अन्दर आ बाहर बड़े-बड़े ताखा बनल बाटें जिनहन में कब्बो मूर्ती रहल होखी। बाहरी देवालि पर बनल ताखा की सजावट में बहुत महीनी से काल, देवता आ अउरी दैवीय चीज के उकेरल गइल बाटे जेवना में स्वर्गलोक के देवता, अप्सरा आ गंधर्ब लोग के देखावल गइल बा।

मंदिर के छत तीन खण्ड में डिजाइन कइल बाटे। सबसे निचला छत मंदिर की ढाँचा की हिसाब से बहुभुज की आकृति के बा जेवना में छोट-छोट ताख में बोधिसत्व के मूर्ती बनल बाटे। हर ताख के ऊपर स्तूप बनल बा। बिचला, मने कि दुसरा छत, आठ कोन के बाटे जेवना पर अइसन ताखा बाने जिनहन में ध्यानी बुद्ध की दुनों ओर बोधिसत्व लोग खड़ा देखावल गइल बाटे। सबसे ऊपरी छत लगभग गोल बाटे आ एम्में एकही स्तूप की नीचे आठ गो मूर्ती बाड़ी। अठकोन वाली आकृति के कुछ लोग इहो अनुमान लगावेला की ई गैर-बौद्ध परभाव पुराना जमाना से चलल आ रहल शुरूआती बोरोबुदुर संरचना से आइल हवे।

मंदिर के मुख्य द्वार पुरुब ओर के बा आ इहे मुख्य बिचला कमरा में पहुँचे के रास्ता भी बा। एगो बड़का कमरा में कमल बेदी (पद्मवेदिका) आ सिंहासन बाटे जेवना पर मकर, सिंह आ हाथी के आकृति बनल बाटे। कालासन लेख कि अनुसार, एह मंदिर में एगो बड़हन आकार के (कम से कम चार मीटर ऊँच) मूर्ती बोधिसत्वदेवी (तारा) के रहल। सिंहासन की डिजाइन से इहो अनुमान लगावल जाला कि ई मूर्ती काँसा के बनल रहे आ देवी बइठल आसन में बनावल गइल रहली। अब ई मूर्ति नइखे, साइत एहू का उहे हाल भइल जेवन सेवु की मंदिर की काँसा के मुरती के भइल, धातु की लालच में एकरा के लूट ले भागल गइल।

बाहरी देवालि पर वज्रलेप (मने हीरा के प्लास्टर, या बहुत मजबूत प्लास्टर) के अवशेष मिल बाटे। इहे पदार्थ लगहीं की चंडि सरी मंदिर में भी मिलल बाटे। ई पियाराहूँ सफेद पलस्तर मंदिर के देवालि के सुरक्षा खातिर रहे जेवन अब उचड़ि गइल बा।

ई मंदिर पुरातत्व की दृष्टि से बहुत धनी प्रमबनन मैदान के हिस्सा हवे। एकरा से कुछे सौ मीटर उत्तर-पुरुब ओर सरि मंदिर बाटे। ई चंडि सरि साइत कालासन लेख में बतावल विहार भी हो सकत बाटे। अउरी पुरुब ओर प्रमबनन के मंदिर बा आ सेवु मंदिर आ चंडि प्लओसन बाटे।




#Article 393: गोइँठा (101 words)


गोइँठाचाहे गोंइठा जानवरन के गोबर (गाय या भइँस के मल) में भूसा, भूसी, चाहे सूखल पुआरस वगैरह के मिला के बनावल एगो लवना (ईंधन या जलावन) होला। एकरा के हिंदी में उपला आ अवधी में कंडा के नाम से जानल जाला। पुरा उत्तरी भारत की देहाती इलाका में बनावल जाला।

एही के चापट गोलाई के आकार में बनल रूप के चिपरी चाहे थेपली कहल जाला जेवन हाली से सूखि के जरावे खातिर तइयार हो जाले।

गोबर के प्राकृतिक परित्यक्त पदार्थ जैसे सुखल पतई भूसा आदि के मिला के मनपसनद आकार में पाथी के सुखावल जाला आ जरावे खाती उपयोग कइल जाला।




#Article 394: लिट्टी (796 words)


लिट्टी, बाटी या भउरी भोजपुरी क्षेत्र के एक ठो पकवान हवे जे गोहूँ के आटा के बनल गोल-गोल लोई के रूप में होला आ एकरे बीच चना के सतुआ के चटक मसाला भरल होला आ ई आगि के भउर में सेंक के बनावल जाला। आम तौर पर ई गोइंठा के आगि में सेंकल जाला हालाँकि, कोइला के आंच में या आधुनिक ओवन में भी संकल जा सकेला। नया जमाना में एकरा तेल में छान के भी बनावल जा रहल बाटे। लिट्टी के गाढ़ दाल, चोखा या मीट के साथ खाइल जाला। लिट्टी-चोखा प्रसिद्ध आ पूरा भोजन हवे। बिहार आ झारखंड में टीशन के आसपास या बजार में चोखा के साथ लिट्टी बेचे वाला ठेला एक ठो आम दृश्य हवे। लिट्टी-चोखा के भोजपुरी संस्कृति आ बिहार के पहिचान के रूप में देखल जाए लागल बा आ अब ई भोजन देस-बिदेस में ले पहुँच बना चुकल बाटे।

आमतौर पर लिट्टी, भउरी, भौरी, भरुती, आ फुटेहरी एकही चीज हवे आ वर्तमान में सभसे परसिद्ध नाँव लिट्टिये बा। हालाँकि, अभी भी देहाती इलाका सभ में एकरा के भउरी कहल जाला।

चलन में आजकाल्ह जेवना के लिट्टी कहल जात बा ओके परंपरागत रूप से भउरी या भरुती कहल जाय। लिट्टी त हाथ से थाप के बनावल मोट मोट रोटी के कहल जाय। हालाँकि परंपरागत रूप से जवना मोट रोटी के लिट्टी कहल जाय ऊ भी सादा आटा के या कुछ मसाला भर के भरुई बने आ एह अनुसार मकुनी आ बेर्हईं इत्यादि नाँव से जानल जाले।

लिट्टी के आमतौर पर बाटी भी कह दिहल जाला, जबकि बाटी एक ठो एकदम अलग सवाद वाली आ अलग क्षेत्र के चीज हवे। बाटी मध्य प्रदेश आ राजस्थान में प्रचलित खाना हवे आ दाल-बाटी-चूरमा पूरा भोजन के नाँव हवे।

लिट्टी देखे में गोल-गोल, देसी घीव में चमकत, सोन्ह सुगंध वाला ब्यंजन हऽ। कही-कही एकरा के चापुटो बनावे के चलन बा आ एकरा के जब बिना सतुआ भरले बनावल जाला तब सादी भउरी कहल जाला। सादी भउरी के एक ठो रूप भीतर से खोंखर भी हवे। सादी भउरी के चिकन या मीट के साथ काफी पसंद कइल जाला। गाढ़ दाल, जेकरा के भोजपुरी क्षेत्र में नकदावा कहल जाल, के साथ भी सादी भउरी खाइल जाला।

भरुई लिट्टी बनावे खातिर  में नून, मरिचा, कुछ मसाला आ महीन कटल लहसुन डाल के मीसल जाला। कुछ जगह एकरा के चटकार बनावे खातिर मरिचा के अँचार भी डालल जाला। जब ई मसाला त इयार हो जाला तब एकरा के सानल आटा के कटोरी नियर बना के ओह में भरल जाला आ गोल लोई नियर रूप दे दिहल जाला। अब ई सेंके खातिर तइयार हो जाला। गोईंठा के भउर या कोइला के आँच पर एकरा के सेंक दिहल जाला। परोसे के समय ले गरम रहे एकरा खातिर ओही राखी में तोप के भी रखल जाला। परोसे से पहिले कपड़ा से राखी झार के भउरी पर गरम देसी घीव चोभ दिहल जाला या फिर सीधे घीव में बोर के निकाल लिहल जाला।

एकर एक ठो दूसर तरीका भाप से पकावल भी हवे। कवनो भदेली आदि बर्तन में रख के पानी डाल के उबाल लिहल जाला फेन कड़ाही में तेल डाल के छान दिहल जाला एह बिधि के बनल लिट्टी चिकनाहट के कारन ओतना लोक प्रिय नइखे।

एक ठो अन्य तरीका हवे गोल लोई के बना लिहले की बाद तेल में छान के पकावल। ई रूप में बनल भउरी अकसर जतरा के समय साथ ले जाए आ डहरी में खाए खातिर बनावल जाले। बजार में भी बहुत सारी दुकान पर एह रूप में बनल लिट्टी नाश्ता के तौर पर मिल जाले।

लिट्टी-चोखा आज के समय में भोजपुरी क्षेत्र के संस्कृति के पहिचान के रूप में देखल जाये लागल बा। बिहार, झारखंड आ पूरबी उत्तर प्रदेश में जहाँ ई कबो काम चलाऊँ भोजन के रूप में इस्तेमाल होखे या बनावे में आसानी के कारण बनभोज इत्यादि में बनावल जाय, अब ई एह क्षेत्र के लोग के पहिचान के रूप में देखल जाला।

आमतौर पर टीशन आ बजार में लागे वाला लिट्टी चोखा के ठेला से उप उठ के ई ब्यंजन अब बड़े-बड़े मेला इत्यादि के फ़ूडस्टाल सभ के बीच जगह बना चुकल बाटे। बिबाह भोज में भी ई आजकल दिखाई दे रहल बिया। देश-बिदेश में एकर प्रचलन बढ़त जात बा।
परंपरागत बनारसी पिकनिक में लिट्टी एक ठो प्रमुख पकवान के रूप में रहल हऽ। बिहार के राजधानी पटना में भारत के बाहर से आवे वाला लोग लिट्टी के बहुत पसंद करे ला आ इनहन लोग में काफी लोग के त इहाँ आवे के बाद पहिली बेर एह व्यंजन के पता लागे ला। इहे ना ई खाना बिहार के छोट छोट शहर सभ से ले के दिल्ली बंबई आ लगभग हर बड़ भारतीय शहर ले पहुँच बना चुकल बाटे। हाल में एक ठो खबर के मोताबिक झारखंड के एक ठो इंजीनियर जे अमेरिका में नौकरी करे लें उनके बनावल समूह उहाँ प्रयोग के रूप में एकर स्टाल लगावल जे कुछे घंटा में खाली हो गइल।




#Article 395: सतुआन (560 words)


सतुआन भोजपुरी संस्कृति के काल बोधक पर्व ह। हिन्दू पतरा में सौर मास के हिसाब से सुरूज जहिआ भूमध्य रेखा (बिसुवत रेखा) से उत्तर के ओर जाले तहिये ई पर्व मनावल जाला। एहि दिन से खरमास के भी समाप्ति मान लिहल जाला।

सतुआन के बहुत तरह से मनावल जाला, सामान्य रूप से आज के दिन जौ के सत्तू गरीब असहाय के दान करे के प्रचलन बा। आज के दिन लोग स्नान पावन नदी गंगा में करे ला, पूजा आदि के बाद जौ के सत्तू, गुर, कच्चा आम के टिकोरा आदि गरीब असहाय के दान कइल जाला आ ईस्ट देवता, ब्रह्मबाबा आदि के चढ़ा के प्रसाद के रूप में ग्रहण कइल जाला ई काल बोधक पर्व संस्कृति के सचेतना, मानव जीवन के उल्लास आ सामाजिक प्रेम प्रदान करेला।

दो मिनट में मैगी खाने वाली पीढ़ी को यह जानकर आश्चर्य होगा, कि सतुआ गूँथने में मिनटों नहीं लगता है। और ना ही आग पर पकाने की जरूरत और ना ही बर्तन की आवश्यकता है। सात भुने अनाज के आटे से बने सतुआ को घोल कर पी भी सकते है, और इसे गुंथ कर खा भी सकते है, इसे गमछा बिछा कर पानी डाल कर और थोड़ा सा नमक मिला कर तैयार किया जा सकता है।

सतुआन से माह भर से रुके मंगल कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। हिंदू धर्मावलंबियों के लिए संक्रांति का काफी महत्व है। इस दिन को खरमास समाप्ति और मंगल कार्य की शुरुआत का दिन तो मानते ही हैं, पवित्र नदियों में स्नान एवं दान-पुण्य का भी इसे बड़ा पर्व माना जाता है। सतुआ के सेवन की परंपरा भी यहां सदियों से कायम है। सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ संक्रांति का पर्व शुरू हो जाता है। पूरे दिन नदियों में स्नान एवं दान-पुण्य किया जाता है। बताते चलें कि प्रति वर्ष चैत्र में खरमास लगता है। और इसकी समाप्ति के दिन यानी सूर्य के मेष संक्रांति में प्रवेश के दिन सतुआ संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं को मानने वाले लोग आम के फल (टिकोरा) सेवन की भी शुरुआत इसी दिन करते हैं। प्रतिवर्ष सूर्य जब मीन राशि छोड़कर मेष राशि में प्रवेश करते हैं। तब इसके उपलक्ष्य में यह त्योहार मनाया जाता है। ये भी मान्यता है की जब सूर्य मीन राशि को त्याग कर मेष राशि में प्रवेश करते है। तो उसके पुण्यकाल में सूर्य और चंद्र की रश्मियों से अमृतधारा की वर्षा होती है, जो आरोग्य वर्धक होता है। इसलिए इस दिन लोग बासी खाना भी खाते हैं। सतुआनी में दाल से बनी सत्तू खाने की परंपरा है। यह पर्व कई मायने में महत्वपूर्ण है। इस दिन लोग गंगा स्नान कर मिट्टी या पीतल के घड़े में आम का पल्लो स्थापित करते हैं। सत्तू, गुड़ और चीनी आदि से पूजा की जाती है। इस दौरान सोना और चाँदी आदि दान देने की भी परंपरा है। पूजा के उपरांत लोग सत्तू व आम को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते है। 

इसके एक दिन बाद जूड़ शीतल का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन पेड़ में बासी जल डालने की भी परंपरा है। जुड़ शीतल का त्योहार बिहार में हर्षोलास के साथ मनाया जाता है। पर्व के एक दिन पूर्व मिट्टी के घड़े या शंख जल को ढंककर रखा जाता है, फिर जुड़ शीतल के दिन सुबह उठकर पूरे घर में जल का छींटा देते हैं। मान्यता है की बासी जल के छींटे से पूरा घर और आंगन शुद्ध हो जाता है।




#Article 396: धरती के इतिहास (632 words)


चिंह-जान 

भोजपुरी के धरती शब्द संस्कृत के धारित्री शब्द के अपभ्रंस रूप ह। एकर मतलब होला धारण करे में सक्षम  अथवा जे धारण कइले बा  सब मानव जाती संस्कृति जलवायु ,खनिज ,रशायन आदि के धारण करे वाला सौर मंडल के जीवधारी  ग्रह के धरती कहल जाला |

धरती के उत्पत्ति 

धरती के उत्पत्ति आ एकरा प  जीवन के उत्पत्ति के  बारे में अभी तक प्रमाणित साक्ष्य के उपलब्धि नईखे।  बिभिन्न प्रकार के बिज्ञान आ धर्मशास्त्र  में धरती के उत्पत्ति आ एकरा प  जीवन के उत्पत्ति के  बारे में बिभिन्न प्रकार के तर्क आ सिद्धांत बा लेकिन एकरा में से कवनो के प्रमाणित नईखे मानल जा सकत। भोजपुरी संस्कृति में धरती के महतारी के दर्जा दिहल गईल बा संस्कृत में लिखल बा जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी  एह वाक्य में जन्म भूमि के जवन चर्चा बा वोकर मतलब धरती के कवनो बिशेष क्षेत्र  ना ह बल्कि संतरा के आकर के सौर मंडल में शुक्र आ मंगल के बीच में स्थित पूरा धरती ग्रह के बारे में कहल गईल बा। 

सौर निहारिका वाला सिद्धांत 
एह सिद्धांत के अनुसार धरती के उत्पति आज से लगभग 4 अरब 54 करोड़  बरिस पहिले सूर्य के टुटला से भइल  रहे वोह समय में ई ग्रह आगि के जरत गोला नियन रहे एह सिद्धांत के अनुसार धरती के उत्पत्ति के दू गो काल चरण में बिभाजन कइल गईल बा एकरा के हेडियन समय आ आर्कियन समय के नाम से जानल जाला। धरती के उत्पत्ति के शुरू के समय के हेडियन समय आ धरती के उत्पत्ति के शुरू के समय से लगभग 73 करोड़ साल  बाद आर्कियन समय के शुरुआत मानल गईल बा ई भी मानल जाला की आर्कियन समय में ही धरती पर जीवन के शुरुआत भइल होई ई जीवन काई के रूप में भइल होई। ई सिद्धांत के आधार धरती प मिलल कुछ पुरान चट्टान में स्थित कुछ पुरान  डेट्राइटल ज़र्कान के कन के उमिर के मानल जाला अभीतक डेट्राइटल ज़र्कान के कन के उमिर 4 अरब  41 करोड़  बरिस पुरान तक  मिलल बा। 

थेइया वाला सिद्धांत  

कुछ ज्ञानी लोग धरती के उत्पत्ति के बारे में कहे ले की धरती के उत्पत्ति  दुगो बड़  ग्रह के टकरइला से भइल रहे एह सिद्धांत के अनुसार कवनो  मंगल ग्रह से छोट अनजान ग्रह के ठोकर से धरती आ चन्द्रमा के उत्पत्ति मानल जाला यह सिद्धांत के आधार अपोलो कार्यक्रम के समय में चन्द्रमा प से धरती प ले आईलगयिल चन्द्रमा के चट्टान के कुछ अंश के अध्यन के मानल जाला। एह सिद्धांत में ठोकर देबे वाला ग्रह के थेइया कहल गईल बा एह सिद्धांत में कहल बा की थेइया के   निर्माण सुरुज  आ  धरती से 15000000 किलोमीटर दूर, ओहनी के  चौथा चाहे  पांचवा  लैग्रेन्जियन बिंदु  पर पदार्थ के संचयन से भइल होई।  शायद शुरू  में थेयिका के गति  कक्षा स्थिर होई  लेकिन पदार्थ के बटोरयिला  के कारन  जब थेइया के  भार जब बढे लागल तब उ डगमगा गईल होई  लैग्रेन्जियन बिंदु के चारों ओर थेइया के घूमे के गति  बढ़त  गईल होई आ   लगभग 4533000000 बरिस पाहिले उ टकरा गईल होई एह सिद्धांत अनुसार धरती के सुरुज से पाहिले के उत्पत्ति मानल गईल बा। 

धर्म ग्रन्थ अनुसार धरती के  उत्पत्ति 

धर्म ग्रन्थ के श्रेणी में बेद के सबसे पुरान मानल जाला ई श्रिस्टी के रचयिता ब्रह्मा जी के मुह से निकलल शब्द मानल जाला ऋग बेद के नासदीय सूक्त  एकरा में कुल 7 गो  मन्त्र बा एह मन्त्र के के अनुसार श्रष्टी के उत्पत्ति से पाहिले अनादि पदार्थ (जेकरा के प्रकृति) कहल गईल बा के अलावा कुछ ना रहे धर्म शास्त्र में शिव के अनादि कहल गईल बा। घोर अन्धकार में शक्ति रूपी प्रकश में उत्पन्न रचयिता शक्ति के कामना रूपी बीज से सूरज चन्द्रमा आदि के साथ धरती के निर्माण भइल। कुर्रान ,बाइबिल आदि में भी धरती के उत्पत्ति के बारे में चर्चा बा लेकिन ई सब में भी सिद्धांत के भेद न होके सिर्फ संज्ञा के भेद मात्र बा।




#Article 397: अंकगणित (338 words)


अंकगणित गणित के तीन बड़ शाखा में एक ह। अंक चाहे संख्या के  गणना से जुडल  गणित के शाखा के   अंकगणित कहल जाला । एकरा  के  (ग्रीक मेंΑριθμητική, जर्मन में Arithmetik, अंगरेजी में भी Arithmetic) कहल जाला। ई  गणित के जरी ह। गणित के तीन को प्रकार बतावल गईल बा अंकगणित ,बीजगणित आ रेखा गणित एकरा में से अंकगणित से  ही गणित शिक्षा के सुरुआत कइल जाला संसार में अईसन शायदे केहु होई जे अंकगणित के उपयोग न करत होई। अंकगणित के अंतर्गत जोड़, घटाव, गुना, भाग, भिन्न,दसमलव आदि के गड़ना कइल जाला |

अंकगणित के उत्पत्ति  

आदमी  जब उत्पन्न भइल तब ओकरा खेती-पाती के ज्ञान न रहे उ जंगल में फल आदि बटोर के खात रहे। फल बटोरे ओकरा दुरी जंगल में जायेके परत रहे। बरसात आदि में फल आदि के भण्डारण के समय फल आदि के गिनती के जरूरत भइल होई तब गणित तथा अंक  के आवश्य्कता भइल | तब उ अपना अंगूरी के अंक बनवले | अंगूरी से अंगूरी के जब गिनब तब 9 गो अंगूरी मिली। एह प्रकार से 9 गो प्राकृतिक संख्या के आविष्कार भइल | जहां कवनो अंक ना रहे ओहिजा गोली पार दिआत रहे। वही गोली के बाद में शून्य नाम दिहल गईल वही गोली प चढ़ा के जब दोसर गोली लिखल गईल तब वोकर नाम अनंत दिहल गईल आर्यावर्त  में अंकगणित के ज्ञान बहुत पुराना ह। बेद में भी गड़ना के उल्लेख मिलेला। आज भी शून्य ,अनंत आदि आर्यावर्त के ही देन मानल जाला।   

अंक :- 1 से 9 तक के आकर के अंक कहल जाला अंक अवधी भाषा के देशज शब्द ह एकर मतलब गोद होला एह शब्द के हिंदी भाषा में भी प्रयोग भइल बा।  रामचरित मानस में तुलशीदास जी भी एह शब्द के प्रयोग कइले बानी। 

संख्या  एक से अधिक अंक के जब एक संगे लिखल जाला तब ओकरा के संख्या कहल जाला। भोजपुरी में एहि से मिळत - जुलत एक अउर शब्द बा संखा जवना के मतलब संतान होला |

अंक गणित में गड़ना के प्रकार  

अंक गणित में चार प्रक़र के गड़ना कइल जाला |




#Article 398: अपराध (284 words)


आदमी एगो सामाजिक प्राणी ह। ई समाज में रहल चाहेला। समाज के निर्माण एक दूसरा के सहयोग ,बिकाश ,सुख-दुःख में साथ देवे आ बिभिन्न प्रकार के आफत बिपत के समय ,काल परिस्थिति के अनुरूप आपसी छलफल से निपटे खाती मानवता के परम पवित्र सूत्र से बाँधी के होला। जब केहु आदमी एह सूत्र के कवनो बिधि से क्षिति पहुँचावेला या पहुँचावे के दुष्प्रयाष करेला अथवा मानव संस्कृति, भूगोलीय क्षेत्र, भाषा या रहन-सहन के आधार प निर्मित देश ,काल ,नियम ,कानून के रूप गुण,मौलिक सिद्धांत चाहे खुद अपना के भी क्षति पहुँचावे के प्रयास करेला या पहुँचावेला अपराध कहाला|अपराध के हिंदी में दंडाभियोग उर्दू में جرمअंग्रेजी में crimeनेपाली में कसूर आदि नाम से जानल जाला। 

अपराध के प्रकार 

अपराध के मुख्य रूप से तीन गो श्रेणी में बाँटल जा सकेला |सिक्किम

जब केहु आदमी सामाजिक परंम्परा के तुर के अपना सुबिधा,सौख या साख प्राप्ति खाती कवनो सामाजिक क्रिया करेला सामाजिक अपराध कहल जाला उदाहरण खाती जैसे केहु ब्यक्ति बिना उचित समय के अचानक देवाली या होली मनावे लागल चाहे समाज के प्रयोग होखे वाला राह  के अपना बाहन आदि से रोक दे, सामजिक अपराध कहल जाला हर संस्कृति, क्षेत्र,देश में अलग अलग प्रकार के नियम ,कानून के ब्यवस्था होला आ वही प्रकार के सजाय भी होला 

जब केहु बयक्ति कवनो देश के कानून के बिपरीत कवनो कार्य करेला कानूनी अपराध कहल जाला।हर देस के कानून अलग-अलग होला l

आदमी के सामाजिक बिकाश तथा सामाजिक क्रिया-कलाप के आधार प संध आदि के निर्माण होला। बहुत से देश में संघ के कानून भी होला आ बिशेष परिस्थिति में संध के कानून देश के कानून से भिन्न होखे के संभावना भी होला एह परिस्थिति में संध आदि के नियम के हेला करे वाला सदस्य के अपराधी मानल जाला




#Article 399: भावना (319 words)


भावना मन क एगो हिस्सा हवे। आम भासा में मनुष्य कौनों समय जइसन महसूस करत रहेला आ ओकर मन के जवन स्थिति होले ओही के ओह समय के मनोभाव कहल जाला। एही मनोभाव सब के समूह के अलग-अलग परकार की भावना की रूप में समझल जा सकेला, जइसे खीस (क्रोध), आनंद, दुःख नियर चीज हमनी की मन के भावना होले।

सजीव मेँ दू प्रकार के इंद्री बतावल गईल  बा पहिलका ज्ञान इंद्री आ दूसरा कर्म इंद्री। जीव के आँख ,नाक कान आ त्वचा के ज्ञान इंद्री कहल जाला। ज्ञान इंद्री के माध्यम से ही जीव के मस्तिष्क तक कवनो भी प्रकार के सन्देश पहुँचेला |स्नेसा पहुँचते ही दिमाग अपना पाहिले के अनुभव के आधार प कवनो प्रतिक्रिया खाती कर्म इन्द्रिय के संदेश भेजेला । एह शारीरिक परिवर्तन के ही भावना कहल जाला भावना मनोभाव, स्वभाव आदि से जुडल शब्द ह।

दर्शन शास्त्र ,तर्कशास्त्र,मनोबिज्ञान ,जीवबिज्ञान आदि के अधयन आ अनुसन्धान के आधार प भावना  के वर्गीकरण के आधार निचे उल्लेख कइल बा

एह प्रकार देखल जाय त भावना के दू गो ही वर्गीकरण भइल बा। जीव बिज्ञान में मस्तिष्क के भावना उत्पन्न भइला के स्थान के आधार प वर्गीकरण कइल बा  एमिग्डाला दिमाग   के  विशेष हिस्सा से उत्पन्न भावना के सुभाविक भावना कहल जाला आ  प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स दिमाग  के अगिला हिस्सा  उत्पन्न भावना सनाम या संज्ञानात्मक भावना कहल जाला।भावना आ  भावना के परिणाम  के बीच संबंधित अंतर मुख्य व्यवहार आ  भावनात्मक अभिव्यक्ति ह अपना  भावनात्मक स्थिति के परिणाम के रूप में लोग क तरह के  अभिव्यक्ति करेले , जैसे रोयेले हँसेले लडेले  या नफरत करेले।  यदि केहु  बिना कवनो  संबंधित अभिव्यक्ति के भावना प्रकट करे त मानल जा सकेला  की भावना खाती अभिव्यक्ति की आवश्यकता न होला ।मनोबिज्ञान के आधार प भावना क्षणिक आ दीर्घ कालीन भावना मानल गईल बा जैसे अन्धेरा में रस्सी के सांप मानल ब्यक्तिगत भ्रम के साथ साथ क्षणिक भावना के भी उदहारण ह वोही तरह से केहु से शत्रुता के दीर्घ कालीन भावना मानल जाला।




#Article 400: फिलिम (590 words)


फिलिम ()  हिंदी में चलचित्र या सिनेमा, अंगरेजी में मूवी (Moovies) एगो अइसन चीज बा जेवन एक की बाद एक खींचल कय गो फोटो के हाली-हाली देखावे के चलते मूल दृश्य के दोबारा चलत-फिरत रूप में देखावे के काम करे ले। फ़िल्म (Film) वास्तव में उ रील के कहल जाला जवना पर कवनो चित्र चाहे चलचित्र अंकित होला, ई कैमरा में प्रयोग करे खाती प्रकाश के प्रति संबेदनशील पायस आदि पोतल कार्बन प्लास्टिक आदि के समिश्रण से बनल पातर लचकदार पट्टी नियन होला जवना प चित्र चाहे चलचित्र कैमरा से अंकित कइल जाला। एकरा पर तेज प्रकाश के किरण परला प चित्र आगे परदा प दिखाई देला। यदि एक निमेष (आदमी के एक बार आंखि झपके के समय) में 50 गो से ज्यादा चित्र एक साथ देखावल जाय त चित्र में चित्रित चरित्र गतिमान लउके लागि लोग मनोरंजन खाती एकरा के देखे जात रहन आ सामान्य बोल चाल के भाषा में फिलिम कहे लागले।

आदम काल में मानव आपन छाया जल में देखि के समय बितावत रहे. कबो अपना चेहरा पर फेंड के पतई मिस के हरियर रग पोतत रहे त कबो जरल पतई के करिखा पोत के अपना के जल में निहारत रहे आ मनोरंजन करत रहे। आपन चेहरा देखे के चाहत आदमी के सीसा के खोज करे खाती प्रेरित कइलस।बतावल जाला की सीसा के खोज 2500 बरीस ई. पु. मेसोपोटामिया  में बनल रहे लेकिन ई सब सीसा छोट आकर के रहे जवना के सीसा बनावे के प्रयास मात्र कहल जा सकत रहे। बाद में लगभग 1500 बरीस ई. पु. मिश्र में सीसा बने लागल रहे। फ़ोटो छवि बनावे में सक्षम पहिला हाली कैमरा से पहले ई 1827 में  एगो करिआ कपडा ओढ़ाके एगो लकड़ी के डिब्बा  के तल में एक फोटोग्राफिक प्लेट डाल के प्रयोग कइले रहन जवन Nicephore Niepce द्वारा आविष्कार कइल गईल रहे। एह प्रकार स्थिर चित्र खिचे के  सुरुआत भइल रहे। बाद में एहि प्रक़र के कैमरा में डोरा बंधी के दौड़त घोडा के चित्र खिचे के प्रयाश कइल गईल ई प्रयास सफल भइल बाद में 1867 ई में अमेरिका में चलचित्र खिचे वाली मशीन जवना के नाम जूपराक्सीस्कोप रहे से गतिमान चित्र खिचल गईल रहे ओकरा बाद बहुत तेजी से यह क्षेत्र में बिकाश भइल जापान जर्मनी चाइना भारत चारु ओर बिभिन्न प्रकार के चलचित्र कैमरा और चलचित्र बनावे वाली कंपनी बाजार में आगईलस |1862 ई में सीसा के टुकड़ा प फोटो सटा के लेंस के सामने से चले वाला छोट मशीन बन गईल रहे। लोग हर पार्टी आदि में एकरा के देखत आ मनोरंजन करत रहे एकरा के जादू के लालटेन कहल जात रहे |  John Ayrton एगो Thaumatrope नाम के यंत्र बनवले रहन जेकरा में घोडा आ धुड़सवार के चलत चित्र लउकत रहे। सन् 1885 में दू आदमी George-Eastman आ William H. Walker फिलिम के पहिला रील के बिकास कइले ई जिलेटिन पायस पायस के बनल रहे। बाद में स. 1902 में एहि रील के प्रयोग कईके चन्द्र यात्रा  के फिलिम बनल रहे। फेन 1903  ई में निर्देशक तथा कैमरामैन Edwin S. Porter एगो ट्रेन डकैती के सच्चा घटना प आधारित 10 मिनट के चलचित्र बनवले रहन जवना के नाम रहे ग्रेट  ट्रैन  रॉबरी। 1905 में पहिला ब्यवसायिक फिलिम बनल जवना के नाम रहे 5 सेंट मूवीज़ थियेटर। एकरा बाद 1907 से बहुत अंगरेजी फिलिम बनली स। भारत में सं 1896 में पहिला Lumiere Brothers से  बम्बई नाम के कला चित्रण भइल रहे। भारतीय सिनेमा में दादा साहेब (देवराम सखाराम भटवडेकर ) के प्रयास के अग्रगण्य मानल जाला। आज भी सिनेमा जगत में दादा एगो सम्मान के शब्द मानल जाला। सं 1897 में हीरालाल सेन द्वारा निर्देशित फिलिम फारस के फूल  बहुत सफल मानल गईल।

फिलिम के महत्व

फिलिम के दुष्प्रभाव




#Article 401: तीज (540 words)


तीज हिन्दू नारी के  मनावे वाला बहुत महत्व के पर्व ह। ई पर्व अपना मरद के लम्बा उमिर आ स्वास्थ्य के कामना खाती मनावल जाइल जाला। ई त्यौहार भाद्र शुदी द्वीतिया से पञ्चमी तक 4 दिन मनवाल  जाला। तीज में  भगवान शिव के पूजा अर्चना कइला के साथ नाचगान मनोरञ्जन समेत करे के चलन बा। हिन्दू मेहरारू द्वारा स्वतन्त्र आ आनन्दमय रूप से मनवाल जाये वाला ई त्यौहार अन्य धर्म आ जातजाति के मेहरारू भी हर्षोल्लास के साथ मनावे लागल बडिस।

ई त्यौहार मुख्य रूपले उत्तरप्रदेश,बिहार,नेपाल आदि में मनावल जाला। कहल जाला की  आदि -शक्ति  भगवान शिव केअर्धाङ्गीनी हिमालय पुत्री पार्वती जी भगवान शिव के स्वास्थ्य तथा शरीर में  कवनो वाधा उत्पन्न न हो एह कामना से पहिले भूखल रही उ दिन शास्त्र में  हरितालिका तिज के दिन कहल गइल बा तब से आज तक हर हिन्दू नारी ई त्यौहार मनावत अवतारी ।

तीज भूखे वाला दिन से एक दिन पहिले यानि भाद्र शुदी दुतिया के हर कोई अपना बेटी बहिन के घरे बोलावेला या ससुरार से नईहर आवे में कवनो समस्या के स्थिति में नईहर से मर-मिढ़ाई ल, लुगा-झूला, लइकन के खेलवाना आदि भेजवा दिहल जाला एकरा के तीज भेजल या आयिल कहल जाला। जेकरा के देख सेकरे घरे ससुरारी आ ममहर के लोग लउकेला। पूरा गांव में खुसी के माहौल बन जाला। एह त्यौहार में मुख्य रूप से पौरकिया ठेकुआ टिकरी बेलगरामी जईसन मिठाई जेकरा घरे पहुंच ओहिजे मिलेला। रात में देरी तक मेहरारू खालिस 4 बजे भोर तक दही आदि के सरबत पिअल जाला एकरा के सरगही खाए वाला दिन कहल जाला।

तीज के दिन छोड़ के गणेशचतुर्थी आ  ऋषिपञ्चमी के भी एक साथ मनावे के चलन बा। आज के दिन मेहरारू लोग भोरे उठ के नहा-धोवा के नया कपडा पहिर के भगवान भोले नाथ के पूजा करेला लोग दिन भर निराजल भूख के साझी खानी टोल गांव के बेटी-पतोह संगे जुट के गीत मंगल आदि गावे ला लोग। भोले नाथ के मंदिर में दिआ जरावे के साथ साथ सुंदर -सुन्दर भजन से पूरा गांव गूँज जाला आज के माहौल आ  सदभावना देखि के मन करेला की ई दिन सालो भर रहित। तीज के दिन मेहरारू लोग के मुरझाईल चेहरा देख के नारी के महानता के बोध होला की कैसे अपना शरीर के कष्ट देके ई लोग अपना परिवार के खुसी के कामना करेला लोग। शायद एहि से शास्त्र में नारी के महानता बतावल गइल बा। 

हिन्दू के धर्म ग्रन्थ शिव पुरान के कथा अनुसार जब देवी पार्बती के पिता महाराज हिमालय अपना पुत्री पार्वती के बिबाह भगवान बिष्णु से जब करे के तैयार भइले तब यी बात पार्वती के न जँचल | उ शिव के अपना पति के रूप में  प्राप्त करे खाती जंगल में जा के तपस्या करे लगली। जब पार्वती के तपस्या 100 बरस पूरा हो गइल तब भी भोले नाथ दर्शन ना दिहनि तब पार्वती शिव लिंग के स्थापना कर के निराहार ब्रत- उपास से शिव के आराधना कइली तब शिव, पार्वती के कठोर तप देख के मनचाहा बरदान देवे के राजी हो गइले। तब पार्वती शिव के अपना पति के रूप में मंगलि आ कहली की हे नाथ आज हरितालिका के दिन जे भी मेहरारू राउर जवना भी कामना से पूजा करसु उनको पूरा करब। एह प्रकार से शिव पार्वती के बिआह भइल। आ हिन्दू धर्म में तीज के त्यौहार शुरू भइल।




#Article 402: आयतन (106 words)


जब कवनो सामान के कहीं धईल जाल त उ तीन गो आयाम (लंबाई ,चौड़ाई और उचाई ) में अधिकार क लेला। दोसरा शब्द में कवनो भी धईल सामान के तीन गो आयाम में नापल जा सकेला। यह तीनो आयाम के माप के योगफल के आयतन कहल जाला।एक आयाम  जैसे रेखा  अथवा दू आयाम के आकृति जैसे त्रिभुज ,चतुर्भुज आदि  के आयतन हमेशा शुन्य होला। एकर इकाई हमेशा घन में लिखल जाला  जैसे घनलीटर ,घनमीटर,घनसेंटीमीटर आदि।  

आयतन आ घनत्व  

कवनो  पदार्थ के इकाई आयतन में मौजूद रहेवाला  द्रब्यमान के  वोह पदार्थ के  घनत्व  कहल  जाला ।  जैसे लोहा के  घनत्व लकड़ी के घनत्व से ढेर  होला ।




#Article 403: त्रिभुज (102 words)


त्रिभुज ज्यामितीय आकृति ह जवन एगो अइसन बहुभुज होला जवना के तीन गो भुजा हो आ तीनो भुजा बिना कवनो अन्य आधार के आपस में जुड़ के तीन गो कोण के निर्माण करेली त्रिभुज कहावेली। त्रिभुज के तीनो कोणन के माप के जोड़ हमेशा 180 अंस होला। त्रिभुज के भुजा के नाप, आ कोण के नाप के आधार पर अलग-अलग प्रकार बा।

एगो त्रिभुज जेवना के अ ब स नांव के तीन गो कोना होखे,  निसान से चिन्हित कइल जाला।

भुजा के नाप के आधार प त्रिभुज दू प्रकार के होला।

कोण के नाप के आधार प त्रिभुज तीन  प्रकार के होला।




#Article 404: वेबसाइट (217 words)


वेबसाइट आपस में संबंधित नेटवर्क वेब संसाधन सभ, जइसे कि वेब पन्ना, मल्टीमीडिया इत्यादि, के संग्रह हवे जेकरा के एगो डोमेन नाँव से पहिचानल जा सके आ कम से कम एक ठो वेब सर्वर पर प्रकाशित होखे। वेबसाइट के कुछ प्रमुख उदाहरण बाड़ें विकिपीडिया.कॉम, गूगल.कॉम इत्यादि।

वेबसाइट तक कौनों पब्लिक नेटवर्क जइसे कि इंटरनेट द्वारा या फिर प्राइवेट लोकल एरिया नेटवर्क द्वारा पहुँच अस्थापित कइल जा सके ला आ एकरा खाती एगो यूनिफार्म रिसोर्स लोकेटर (यूआरएल) के जरूरत होले जे वेबसाइट के चिन्हित करे।

वल्ड वाइड वेब (WWW) के रचना 1990 में सर्न (CERN) में काम करे वाला ब्रिटिश बैज्ञानिक टिम बर्नर्स-ली द्वारा कइल गइल। 30 अप्रैल 1993 के सर्न द्वारा एह बात के घोषणा कइल गइल कि वल्ड वाइड वेब सभके इस्तेमाल खाती फिरी उपलब्ध होखी। सर्वर से एकहक गो फाइल के हासिल (रिट्राइव) करे खातिर एचटीएमएल (HTML) आ एचटीटीपी (HTTP) के पहिले के जमाना में अउरी दूसर प्रोटोकाल सभ जइसे कि फाइल ट्रांसफर प्रोटोकाल (एफटीपी) आ गोफर प्रोटोकाल (gopher protocol) सभ के इस्तेमाल होखे। ई प्रोटोकाल सभ सिंपल डाइरेक्टरी स्ट्रक्चर उपलब्ध करावे लीं जेह में प्रयोगकर्ता लोग नेविगेट (भ्रमण) क सके ला आ फाइल डाउनलोड करे खाती बीछ सके ला। ओह समय में डाकुमेंट सभ के बिना फारमेट कइल टेक्स्ट के रूप में उपलब्ध करावल जाय या फिर वर्ड प्रासेसर के फारमेट में उपलब्ध होखे।




#Article 405: कोशिका (जीव बिज्ञान) (595 words)


कोशिका जीव शरीर के आधारभूत इकाई ह। कवनो प्रानी मे इहे कोशिका से जीव के अंग बिकाश होला आ वोही अंग समूह के शरीर  कहल जाला। कोशिका बहुत प्रकार के उपकोशिका से निर्मित होला, जवना में माइटोकांड्रिया, नुक्लेउस, गोलगिबॉडीएस, आदि मुख्य तत्व होला।

जीव जगत में जीवन, पशु आ पौधा दू रूप में बाँटल गइल बा आ एही से कोशिका भी जीवकोशिका आ पौधकोशिका दू प्रकार के होला।

कोशिका के आधार प दू प्रकार के जीव होले। एककोशीय जीव जैसे अमीबा आ बहुकोशिकीय जीव, जैसे आदमी, काहें की आदमी के शरीर ढेर सारा कोशिका से बनल बा।

आर्यावर्त में कोशिका के जीवबीज के रूप में ऋषि चरक  इ.स. 100 से 200 वर्ष पूर्व बर्णन कइले बाड़े। ऋषि चरक आ सुश्रुताचार्य इ.स. पूर्व 5000 में लिखल गईल अर्थववेद से ज्ञान प्राप्त करके तीन खंडमें आयुर्वेद प प्रबंध लिखले रहन। आज भी सूक्ष्म योग इहे अर्थववेद के कुछ सिद्धांत मन्त्र के शिवजी के द्वारा कुछ कीलित मन्त्र के साथ जोड़ के तंत्रबिद्या में आदमी के बाल आ नोह्  से  मोहन, मारन आ बशीकरण जइसन  कठिन प्रयोग करे में आज भी सफल बा।इहे कारन से आज भी साधक, साधु, ऋषि आदि आपन दाढ़ी, बार, नोह साधना काल में ना काटत रहन।

जीवधारि में दू प्रकार के कोशकीय संगठन पावल जाला। एक प्रकार ह प्राककेन्द्रकी (प्रोकैरिओट) जवना के कोशिका केंद्रक झिल्लीबद्ध ना होला, जबकि सुकेन्द्रकी (यूकैरिओट) में एक स्पष्ट केंद्रक दुगो झिल्लि से घेरल रहेला। कोशिका के मुख्य अवयव ह -

सभ जीवाणु आ हरियर-नीला काई के कोशिका एगो दृढ़ कोशिका भित्ति से बद्ध होला, जवन पौधकोशिका नियन लेकिन जीवकोशिका से अलग होला, जेकरा कारण से ओहनी के पौधकोशिका वर्ग में शामिल कइल जाला। 

सब जीवकोशिका में एगो अईसन झिल्ली होला जवना के आरपार कवनो रस द्रब्य त जा सकेला लेकिन ई देखे में ई एगो विभेदक नियन लउकेला जेकरा के जीवद्रव्यकला कहल जाला। ई कोशिका के बाहर आ भीतर के पदार्थ के  गति के नियंत्रण करेला। 

सभ यूकैरियोट जीव में एक स्पष्ट केंद्रक (nucleus) होला। ई केंद्रक सभ कोशिकीय क्रिया के नियंत्रण केंद्र होखेला। 

ई प्रकाश संश्लेषण क्रिया के केंद्र ह, यह से खाली  प्रकाश संश्लेषित पौधकोशिका में ही पावल जाला। 

ई एगो दुहरा झिल्ली से तोपायिल कोशिका के अंग ह। ई ऊर्जा उत्पादन से सम्बंधित होला। एहसे एकरा के कोशिका के शक्ति केंद्र कहल जाला। 

राइबोजोम प्रोटीन संश्लेषण के केंद्र ह आ प्रोकैरिओट व यूकैरिओट दोनों कोशिकामें पावल जाला। 

लाइसोसोम अपघटन एंजाइम के थैलि होलिस जवन बहुत सारा पदार्थ के अपघटित करेलिस।

तारक केंद्र सभ जीवकोशिका में आ कुछ पौधकोशिका में भी पावल जाला। ई मुख्य रूप से धुरी तंत्र कोशिका विभाजन के समय नया उत्पन्न कोशिका आ जन्म देबे वाली कोशिका के बीच गुणसूत्र के अलग करे से संम्बन्धित या पक्ष्याभ (Celia) आदि के संगठन से सम्बंधित होला।

हर जीव जवना में जनन लैंगिक क्रिया से होला ,जीव के  जन्म ज़यगोट से होला, जेकरा बार-बार विभाजित भईला से शरीर के अनेक कोशिका बनेलिस। बे एह विभाजन के अतना प्रकार के ऊतक (tissues) आ अंग (organ) ना बन पायित। यी विभाजन दू चरण में पूरा होला । केंद्रक विभाजन जवना के सूत्रीविभाजन (mitosis) कहलजाला आ दोसरा चरण के कोशिका विभाजन (Cytokinesis) कहलजाला। 

सूत्रीविभाजन जीव के  कायिक कोशिका (Somatic cells) में होला। यह से एकरा के कायिक कोशिका विभाजन भी कहल जाला। गुणसूत्र संख्या सूत्रीविभाजन के समय बराबर रहेला यानी नया उत्पन्न  कोशिका (Daughter cells) के गुणसूत्र संख्या पैदा करे वाली कोशिका जतना रहेला, एहसे एकरा के समसूत्री विभाजन (equational division) भी कहल जा सकेला।

सूत्रीविभाजन के उल्टा एकरा में गुणसूत्र संख्या कम हो के आधा रह जाला, काहेकि एकरामे कुल गुणसूत्र समजात गुणसूत्र (homologus chromosomes) अलग हो जाला न कि वोहनीके अद्र्धगुणसूत्र। नया उत्पन्न कोशिका में गुणसूत्र संख्या जन्म देबे वाली कोशिका से आधा होखला  के कारण इस विभाजन को न्यूनीकरण विभाजन (reductional division) भी कहल जाला।




#Article 406: बिआह (358 words)


बियाह एगो संस्कार हवे जेवना में लड़िका आ लड़की के सामजिक रूप से एक संघे पति-पत्नी की तरे रहे आ जीवन बितावे खातिर एक-दूसरा द्वारा चुनल आ सर्ब समाज द्वारा एके मान्यता दिहल जाला।

जब लईका आ लईकी एक दूसरा के, समाज क़ानून या रीती रिवाज के साक्षी राखी, के एक दोसरा के आपन जीवन साथी बनावेले बिआह कहल जाला।  बिआह हिंदी भाषा के  बिबाह  शब्द के अपभ्रंस रूप ह। भोजपुरी भाषा के ई देशज शब्द के श्रेणी में आवेला। उर्दू के निकाह शब्द के मतलब बिआह ना होला। इस्लाम सभ्यता में बिआह ना होला।  एह संस्कृति में बंस बढ़ावे खाती चाहे मानव के मूल जरूरत मैथुन के पूर्ति खाती मेहर (धन) देके कनिया कीनल जाला। एगो पुरुष क्ईओगो कनिया किन सकता एकर इस्लाम सभ्यता में आजादी बा।

'बिआह'  शब्द के  प्रयोग मुख्य रूप से दूगो अर्थ में होला। एकर पहिला  अर्थ उ  क्रिया, संस्कार, विधि या पद्धति ह; जेकरा से मरद-मेहरारू  के स्थायी-संबंध बनेला  तथा एह सबंध के परिणाम के रूप में जामल संतान के माता पिता के सम्पत्ति के अधिकार मिलेला  । पुराना जमाना के आ  मध्यकाल के धर्मशास्त्री के साथ   वर्तमान युग के समाजशास्त्री भी , समाज से मान्यता मिलल , परिवार की स्थापना करेवाला  कवनो  पद्धति के बिआह  मान लेत रहन लेकिन मनुस्मृति के टीकाकार मेधातिथि (3। 20) के शब्द के अनुसार बिआह के एगो सुनिश्चित  पद्धति आ  अनेक विधि से संपन्न होखे  वाला आ  कन्या के अर्धांगिनी  बनाने वाला संस्कार मानेले |भोजपुरी संस्कृति में मनु समृति के आधार प रचना भइल हिन्दू बिबाह पद्धति के प्रचलन ज्यादा बा।

बिआह के दोसर मतलब समाज के चलन आ समाज में मानल  विधि से अपनावल मरद-मेहरारू के   संबंध आ  पारिवारिक जीवन भी होला। एह  संबंध से मरद-मेहरारू के  अनेक प्रकार के अधिकार आ  कर्तव्य मिलेला एकरा से  एक ओर जहाँ  समाज मरद-मेहरारू  के मैथुन  के  अधिकार देला  ओहिजे दोसरा  ओर  मरद  के मेहरारू आ  संतान के पालन एवं भरणपोषण खाती मजबूर करेला । ई बिआह के दोसरका मतलब बिधवा आदि के समाज में सम्मान आ अधिकार देबे खाती ह।   बिआह समाज में जामल लईकन के  स्थिति के  निर्धारण करेला आ  संपत्ति के  उत्तराधिकार  देला भोजपुरी संस्कृति में  बिआह  से जामल संतान  के ही  उत्तराधिकार  दिहल जाला।




#Article 407: हिंदू (113 words)


हिंदू शब्द पुराना जमाना से दक्खिन एशिया, यानी आजु की भारत, पकिस्तान, नेपाल, आ बांग्लादेस की लोगन के पहिचान की रूप में इस्तेमाल होखे; जबकि आजु की समय में ई केहू भी बेकति खातिर इस्तेमाल हो सकत बा जे अपना के धार्मिक या सांस्कृतिक रूप से हिंदू मानत होखे।

अपनी छोट अरथ में ई हिंदू धर्म के माने वाला लोगन खातिर प्रयोग होला आ बड़हन अरथ में ई हिंदू संस्कृति के हिस्सा सगरी लोगन खातिर।

हिंदू शब्द के उत्पत्ति की बारे में सभसे प्रचलित मत ई हवे की फारस के लोग सिंधु नदी की पुरुब ओर बसल लोगन के हिंदू कहे। काहें की ऊ लोग 'स' के उच्चारण 'ह' की रूप में करे।




#Article 408: काली (332 words)


काली चाहे महाकाली हिंदू लोग के एगो देवी के कहल जाला। इनकर मूर्ति करिया रंग के स्त्री के रूप में चार बाँहि वाली, गोड के नीचे शिव भगवान के दबवले, मुड़ी के माला आ बाँही के करधनी लगवले बड़ा डेराभूत  होला।

काली कालि शब्द के अपभृंश रूप ह जवना के मतलब होला काल के अंतिम बिंदु या आरम्भ बिंदु काल के शाब्दिक अर्थ समय होला। हिन्दू शास्त्र में काल अथवा समय के स्वस्तिक के रूप में बनावल भा देखावल जाला। श्रृष्टि, काल भा समय चक्र के परिणाम ह एह से कालि के माता मानल जाला। हिन्दू धर्म सबसे पुरान धर्म ह एह से यह धर्म में ई शब्द आज भी काली के रूप में मौजूद बा। हिन्दू धर्म, मूर्ति  भा आकार के  पूजा से संबंधित भइला के कारण आ काली शब्द इकारांत भइला के कारण काली के मूर्ति स्त्री रूप में बनावल गईल बा |समय भा काल पुरूष लिंग शब्द ह लेकिन एकर जन्म भा उत्पत्ति जवना बिंदु से भइल उ माता के रूप होखला के कारण भी काल शब्द में ई के मात्रा जोड़ के काल के माता भा काल के पूर्ण में उदरस्त करे के शक्ति काली कहईली। देखल जाय त ई काली के संबंध खाली हिन्दू धर्म मात्र से न होके कुल ब्रह्माण्ड में मौजूद धर्म आ संस्कृति से हो जात बा। काल भा समय के सबसे बलवान भा शक्तिशाली तत्व मानल जाला आ काली, जेकरा से काल के उत्पत्ति भा अंत होला उनकर शक्ति के त ब्याख्या कवनो शब्द से नइखे  कइल जा सकत। काली के उपासना ,पूजा हर धर्म में वोह धर्म के रीती के अनुसार होला आ हर धर्म में इनका के अलग अलग नाम से आ अलग अलग रूप से सम्मान कइल जाला। स्वस्तिक भी इनके रूप ह। समय भा काल के हर धर्म हर संस्कृति में सबसे ज्यादा महत्व दिहल जाला। इस्लाम धर्म के अजान कहीं भा इशाई धर्म के प्रार्थना सब समय के सम्मान के रूप ह। जहां काल के सम्मान होला वो जगह पर काली के सम्मान खुद ब खुद हो जाला।




#Article 409: जिउतिया (682 words)


जिउतिया या जितिया एक ठो हिंदू तेहवार बाटे जे भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार में आ नेपाल देस में मनावल जाला। एह तेहवार में औरत लोग बिना अन्न पानी के भुक्खे लीं।

अवधि आ भोजपुरी संस्कृति ब्रत,तिउहार  के धनि संस्कृति मानल जालिस। एहि संस्कृति में पुत्र के लम्बा आयु खाती कुआर  अँधरिया के अष्टमी तिथि भा कुआर शुदी अष्टमी तिथि के मेहरारू लोग के द्वारा कइल जाएवला बहुत कठिन तिउहार ह जिउतिया । एह तिउहार में खर तक मुंह में ना लगावल जाये के कारन एकरा के खर -जिउतिया भी कहल जाला। भोजपुरी में जब केहु के कवनो बड़ दुर्धटना से जब जान बाँची जाला तब ई कहल जाला की फलाना के माई खर-जिउतिया कइले होइन्हे एहि से उनकर जान बाँचल। भोजपुरी संस्कृति में ई तिउहार कुआर  अँधरिया के अष्टमी तिथि  के दिन आ अवधी संस्कृति में यी तिउहार कुआर शुदी अष्टमी तिथि के दिन मनावल जाला| ई तिउहार हिंदी भाषा में जीवित्पुत्रिका के नाम से जानल जाला। 
 

महाभारत में द्रोणाचार्य के बेटा अश्वस्थामा जब पाण्डवं के लईकन के मारी देले त पांडव बहुत दुखी भइल रहन। तब शोक से ब्याकुल द्रोपती ऋषि धौम्य के लगे जा के लईकन के लम्बा उमिर के उपाय पुछला प ऋषि धौम्य सतयुग के राजा जीमूतवाहन  के कथा सुनवाले आ एह ब्रत के उपाय बतवले रहन।  तब से ई ब्रत भोजपुरी आ अवधी संस्कृति में जुट गयील।  

सतयुग में जम्बूद्वीप नाव के जगह प एगो बहुत प्रतापी राजा रहन उनकर नाम रहे जीमूतवाहन। एक हाली  उ अपना मेहरारू सुभगा के संगे ससुरारी जा के रहे लगले। अचानक राति के उनका कवनो मेहरारू के रोये के आवाज सुनाई देलस। वोह आवाज के पीछा करत उ मेहरारू लगे जा के रोये के कारन पुछला प मेहरारू एगो दुष्ट गरुण के बारे में बतवलस जवन गांव के लईकन के खा जात रहे उहे गरूण आज एह मेहरारूके  बेटा  के उठा ले गईल रहे। राजा मेहरारू से ओकरा लईका के बचावे के बचन देके वोह जगह पहुँचले जहाँ गरूण रोज मॉस खाए आवत रहे। राजा के देख के गरूण उनका प झपटलस आ उनकर बयां बाहीं नोच लेलस तब राजा आपन दाहिना अंग ओकरा आगे क देले ई देख के गरूण उनका से पुछलस की तू त आदमी नईख  बुझात, का तू कवनो देवता हव तब राजा कहले की हम सूर्यवंस में उत्पन्न शालिबाहन के पुत्र हईं। राजा के उदारता देख के गरूण राजा से बरदान मांगे के कहला प राजा आजतक के खाइल सब लईकन के जीवित होखे के आ आज बाद कवनो लईका के अकाल मृत्यु से बचावे के बरदान मंगले। तब गरुण नागलोक से अमृत ले- आके सब मरल लईकन के जिआ देले आ जिउतिया के ब्रत के बारे में बतवले आ ई ब्रत करे वाला के पुत्र के अकाल मृत्यु से बचावे के बरदान दिहले।
  

कुआर अंधारिया के सत्तमी तिथि के सांझी खा सतपुतिआ के तरकारी बूंट डाल के बनावल आ खाइल जाला एह दिन  नदी किनारे भा पोखरी प जा के खरी और तेल नेनुआ के पत्ता पर रख के चिल्हो-सियारो के दिहल जाला। आम के दतुवन से मुँह धोवल जाला सांझीखा ओठँघन पकावे आ खाए के चलन बा। । अष्टमी तिथि के भोर में सरगही खाए के चलन बा लेकिन सुरुज उगला के बाद से कुछ भी मुँह में ना डालल जाला। आदतन दांत आदि खोदे खाती खरिका आदि भी मुँह में डाले के पावंदी मानल जाला। पूरा निराजल  ब्रत रहिके के सांझी खा जिउतिया के नेनुआ के पत्ता प धके पूजा करेके आ जीमूतवाहन के कथा सुने के चलन बा। कथा के बाद लईकन के जिउतिया ठेका के मेहरारू लोग पहिन लेला आ सालभर पहिरले रहेला लोग। मेहरारू के ज गो लईका लईकी रही त गो जिउतिया सोना के भा चानी के बानवे के चलन बा।जिउतिया ब्रत के पारण नवमी तिथि में कइल जाला। 

ई ब्रत जहां मेहरारू के त्याग के मूर्ती प्रमाणित करेला ओहिजे महतारी के बेटा के प्रति महान प्रेम भी देखावेला। हर  बेटा आज के दिन अपना खाती मतारी के भूखल देख के  मन में मतारी के प्रति पवित्र  भावना के बिकास करे ला जवन परिवार के बांधेवाला प्रेम बंधन के अउर मजबूत करेला। श्रद्धा सबुर आ बिस्वास के सत्यता प्रमाणित करेवाला ई तिउहार अब अन्य संस्कृति में भी लउके लागल बा।




#Article 410: दुर्गा पूजा (600 words)


दूर्गा पूजा, जौना के दुर्गोत्सव के नाँव से भी जानल जाला, चाहे शरदोत्सव, पुरा दक्खिनी एशिया में मनावल जाए वाला एगो सालाना हिंदू तिहुआर ह जे में हिन्दू देवी दुर्गा के पूजा कइल जाले। ए में छः दिन के महालय, षष्ठी, महा सप्तमी, महा अष्टमी, महा नवमी आ विजयदशमी के रूप में मनावल जाला। दुर्गा पूजा मनावे के तिथि सब पारम्परिक हिन्दू पतरा की हिसाब से आवे लीं आ ए तिहुआर से जुड़ल कुआर महीना की अँजोर पाख के देवी पक्ष, देवी पखवाड़ा के नाँव से भी जानल जाला।

दुर्गा पूजा के ई पर्व हिन्दू देवी दुर्गा के बुराई के चीन्हा राक्षस महिषासुर पर विजय के रूप में मनावल जाला। एही से दुर्गा पूजा के ई पर्व बुराई पर भलाई के बिजय के रूप में भी मानल जाला।

दुर्गा पूजा भारतीय राज्य असम, बिहार, झारखण्ड, मणिपुर, ओडिशा, त्रिपुरा आ सभसे ढेर पश्चिम बंगाल में व्यापक रूप से मनावल जाला है जहाँ ए समय पांच-दिन के सालाना छुट्टी रहे ले।  बंगाली हिंदू आ आसामी हिन्दुअन के बहुलता वाला क्षेत्र जइसे की पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा में ई साल के सभसे बड़हन उत्सव मानल जाला। ई ख़ाली हिंदू लोगन के तिउहार ना हवे बलुक ई बंगाली हिन्दू समाज में सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से सबसे महत्व वाला तिहुआर भी हवे। पश्चिमी भारत के अलावा दुर्गा पूजा के उत्सव दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, कश्मीर, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक आ केरल में भी मनावल जाला। दुर्गा पूजा के तिहवार 91% हिन्दू आबादी वाले नेपाल आ 8% हिन्दू आबादी वाले बांग्लादेश में भी एगो बड़ परब के रूप में मनावल जाला। वर्तमान में विभिन्न प्रवासी आसामी आ बंगाली सांस्कृतिक संगठन, संयुक्त राज्य अमेरीका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैण्ड, सिंगापुर आ कुवैत सहित अलग-अलग देसवन में भी धूमधाम से ई तिहवार मनावे ला लोग। साल 2006 में ब्रिटिश संग्रहालय में एगो बिसाल दुर्गापूजा के उत्सव के आयोजन भइल रहे।

दुर्गा पूजा के परचार आ एकर परसिद्धि ब्रिटिश राज में बंगाल आ भूतपूर्व असाम में धीरे-धीरे बढ़ल। हिन्दू सुधारक लोग दुर्गा के भारत में एगो नया पहिचान दिहल आ एकरा के भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के चीन्हा भी बनावल।

बंगाल, आसम, ओडिशा में दुर्गा पूजा के अकालबोधन (दुर्गा के असामयिक जागरण), शरदियो पुजो (शरत्कालीन पूजा), शरोदोत्सब ( (पतझड़ का उत्सव),  महा पूजो (महा पूजा), मायेर पुजो (माँ की पूजा) या खाली पूजा यापुजो भी कहल जाला। पूर्वी बंगाल (बांग्लादेश) में, दुर्गा पूजा के भगवती पूजा के रूप में भी मनावल जाला। एकरा के पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा, दिल्ली आ मध्य प्रदेश में दुर्गा पूजा भी कहल जाला।

पूजा के गुजरात, उत्तर प्रदेश, पंजाब, केरल अउरी महाराष्ट्र में  नवरात्रि के रूप में कुल्लू घाटी, हिमाचल प्रदेश में कुल्लू दशहरा, मैसूर, कर्नाटक में मैसूर दशहरा, तमिलनाडु में बोमाई गोलू आ आन्ध्र प्रदेश में बोमाला कोलुवू के रूप में भी मनावल जाला।

पतझड़ (जाड़ा के सुरुआत) के समय दुर्गा के पूजा बंगाल में सबसे बड़हन हिन्दू पर्व ह। दुर्गा पूजा नेपाल आ भूटान में भी स्थानीय परम्परा अउरी बिबिध रूप की साथे मनावल जाला। पूजा के अरथ हवे आराधना अउरी दुर्गा पूजा बंगाली पंचांग के छठवाँ महीना कुआर (अश्विन) में बढ़त चान की छठवीं तिथि से दसिमी ले मनावल जाला। हालाँकि, कबो-कब, सौर माह में आ चन्द्रमाह में अंतर होखला पर ई बाद वाले महीना कातिक में भी मनावल जाला। ग्रेगोरी कैलेण्डर की हिसाब से ई तिहवार के तिथि कुल सितंबर आ अक्टूबर महीना में पड़े लीं।

कृत्तिबास रामायण में राम, रावण से युद्ध के दौरान देवी दुर्गा के आवाहन करे लें। जबकि परम्परा में दुर्गा के पूजा बसंत में होखे। लड़ाई में अचानक ई जरूरत पड़ले की कारन, राम की द्वारा देवी दुर्गा के बेसमय आवाहन कइल गइल आ एही से एकरा के अकाल बोधन भी कहल जाला।




#Article 411: आगी उगिलल (376 words)


आगी उगिलल () एक तरह के तमाशा हवे जेवना में कलाकार अपनी मुँह से ज्वलनशील द्रव पदार्थ फूँक के आगी के लपट पैदा करे ला आ अइसन बुझाला की ऊ लपट ओकरा मुँह से निकलत बाटे। एह  तमाशा के उत्पत्ती भारत में भइल मानल जाले। मेला या सर्कस में अइसन कलाकार ई तमाशा देखावे लें। आधुनिक समय में ई रॉक बैंड में भी देखे के मिलेला। ई एगो खतरनाक खेल हवे जेवना के अगर बिना ट्रेनिंग के केहू करे त ओकर जान भी जा सके ले।

आम तौर पर ई तमाशा बहुत सधल आ काफ़ी ट्रेनिंग लिहल कलाकार लोग देखावेला। तमाशा में कलाकार मुँह में कौनों बहुत तेजी से आगि पकड़े वाला पदार्थ भर के ओकरा के एगो मशाल पर फूँके ला। तेल के ई फुहारा भभक के बरे ला आ बुझाला की कलाकार की मुँह से आगि के लपट निकलत बाटे।

कई तरह के तेल या ईंधन के इस्तेमाल होला जेवना में कुछ खतरनाक भी होलें। सही ईंधन के चुनाव खतरा ताले खातिर बहुत जरूरी मानल जाला।

आगी उगिले के तमाशा के कई ठो बैंड अपनी शो के एगो आकर्सन की रूप में इस्तेमाल कइलें Fire breathing has been utilized in many bands of varying genres as an eye-catching spectacle. , जे कैलिफोर्निया के एगो रॉक बैंड  के लीड सिंगर रहलें, अपनी हर शो से पहिले आगी उगले के तमाशा देखावे खातिर जानल जाँय, जब 1900सब के आखिरी साल आ 2000सब के सुरुआती समय रहे। माइक ऑड, जे /हॉरर मेटल बैंड  के गायक रहलें, एकर प्रयोग करें।

अगस्त 2007 में  नाँव की एगो उत्सव में , ; एकही बेर शुरू कइल लपट के बुताये से पहिले 21 लोग के पास कइल गइल।

बिस्व के सभसे ऊँच आगि के लपट उगिले के रेकार्ड 8.05 मीटर (26 फीट 5 इंच) के बा जेवन Antonio Restivo नाँव की कलाकार, लास वेगास में  11 जनवरी 2011 के देखवलें।

बिना दुबारा तेल भरले एक बेर में 182 बेर लपट फूँके के रेकार्ड Tobias Buschick (जर्मनी) के बाटे जब ऊ Neuenbürg, Germany, में 3 अगस्त 2013 के ई तमाशा देखवलें।

एक मिनट में 189 (बीच में मुँह में दुबारा ईंधन लिहले के बाद) के रेकार्ट Zhu Jiangao (चीन) कीनांव बाटे जब ऊ CCTV की सेट पर ई देखवले रहलें- (Guinness World Records Special in Jiangyin, Jiangsu, China on 9 जनवरी 2015)।




#Article 412: ड्रैगन (110 words)


ड्रैगन या हिंदी अउरी उर्दू में अज़दहा (اژدها) एगो काल्पनिक जीव हवे जेवना के बिसाल आकार के सर्प नियर मानल जाला जेवना के पाँखि होला आ ऊ उड़ सकेला आ मुँह से आगि उगिलेला। ई कथा-जीव कई संस्कृतिन में कहानी, चित्रकारी आ आधुनिक ज़माना में फिलिम इत्यादि में बतावल या देखावल गइल बाटे। मूल रूप से सभसे प्रचलित रूप दू तरह के बा जे यूरोपीय कल्पना आ पूरबी एशिया की लोगन के कल्पना पर आधारित होखे ला।

भारतीय संस्कृति में एकर समांतर वैदिक जीव वृत्र के मानल जाला जे इंद्र के शत्रु रहले। हालाँकि भारत की कुछ हिस्सा के छोड़ के बाकी भाग में एह प्रानी के बहुत महत्व नइखे।




#Article 413: नवरातर (264 words)


नवरातर, नौरातर या नवरात (संस्कृत:नवरात्र, नौगो राति के समूह) एगो हिंदू तिउहार ह। ई माता दुर्गा या शक्ति के पूजा के पर्व हवे जेवन नौ राति के होला। साल में दू बेर ई तिहुआर मनावल जाला, चइत के अँजोर में आ कुआर की अँजोर में सुरुआति के नौगो तिथी के समय नवरातर के समय होला। ई दुगो की अलावा तीनठो नवरातर अउरी होला जेवन खाली शाक्त शाखा के लोग आ तांत्रिक पूजा करे वाला लोग मनावे ला आ ई बहुत प्रचलित ना हवें।

चइत की नवरात्र के संस्कृत में चैत्र नवरात्र या वसन्त नवरात्र कहल जाला आ एकर समापन रामनउमी की दिने होला। सभसे ढेर महत्व आ प्रचलन कुआर की नवरातर के होला जे के संस्कृत में शारदीय नवरात्र कहल जाला। एही नवरातर में छठ से लेके एकरी समापन के बाद दसिमी ले दुर्गा पूजा आ दसिमी के बिजयदसिमी या दशहरा की रूप में भारत, नेपाल, भूटान आ बंगलादेस में धूमधाम से मनावल जाला।

संस्कृत शब्द नवरात्र के अरथ होला नौगो रात्रि (राति) के समूह। ई पुल्लिंग शब्द हवे जेकरा के वर्तमान में कुछ लोग नवरात्रि भी बोले ला जे संस्कृत व्याकरण के हिसाब से गलत बा।

भोजपुरी में एकर नौरातर या नवरातर उच्चारण होला। अन्य क्षेत्रन में भी कुछ मामूली अंतर के साथ अइसने उच्चारण भेद देखे के मिले ला। उदाहरण खातिर दिल्ली के क्षेत्र में कुछ जगह पर एकरा नुराते भी उच्चारण कइल जाला।

नौरातर साल में चार बेर आवेला जेह में दुगो खूब धूमधाम से मनावल जाला, कुआर आ चइत के महिना में। एहू में कुआर के नवरातर के ढेर महत्त्व हवे। कुआर के अँजोरिया पाख के देवी-पक्ष भी कहल जाला।




#Article 414: अथर्ववेद (148 words)


अथर्ववेद, सभसे पुरान ग्रंथन के रूप परसिद्ध आ हिंदू धर्म में पवित्र मानल जाए वाला चारि गो वेद में से एगो वेद ह। एकरा के सभसे नया (चउथा) बेद मानल जाला,  वेदत्रयी (ऋक यजु साम) में एकरा के ना शामिल कइल जाला आ ई ज्यादातर, ई लौकिक चीज सभ के बारे में ज्ञान के भंडार के रूप में बा; आचार बेहवार के तरीका के संकलन हवे जबकि पहिला तीन गो वेद के बिसय मुख्य रूप से देव स्तुती आ यग्य हवें। वैदिक साहित्य में अथर्ववेद के शामिल बाद में कइल गइल आ कई बिद्वान लोग एकरा के अनार्य परभाव भी स्वीकार करे ला। एह संदर्भ में आर्य कौनों जाति भा प्रजाति (रेस) के अरथ में ना बलुक आर्यभाषा बोले वाला लोग के अरथ में इस्तेमाल होला। 
कुछ बिद्वान लोग एकरा के क्षत्रिय राजा लोग के अनुरोध चाहे प्रेरणा पर लौकिक कामकाज खाती लिखल गइल ग्रंथ भी माने ला।




#Article 415: कुचिपुड़ी (260 words)


कुचिपुड़ी एगो शास्त्रीय नाच या नृत्य के शैली हवे। ई नाच भारत की आंध्रप्रदेश राज्य में सभसे प्रचलित हवे आ एहिजे एकर जनम भइल रहे। आंध्रप्रदेश की अलावा ई पुरा दक्खिनी भारत में बहुत परचलित नाच हवे। कहल जाला की एकर जनम कुचिपुड़ी गाँव में भइल रहे आ एकर शुरुआत सिद्धेन्द्र योगी नाँव के कृष्ण-भक्त संत कइले रहलें।

कुचिपुड़ी नाच के परदर्शन आम तौर पर कुछ परंपरागत तरीका से शुरू होला। जेवना में स्टेज पर एगो शुरूआती पूजन नियर होखेला जेकरा बाद कलाकार अपनी पात्र के रूप में प्रवेश करे लें। प्रवेश की बाद कलाकार आपन परिचय देला आ पात्र के अस्थापित करे के काम करे ला। एकरा बाद मुख्य नाटक आरम्भ होला। ई नाच-नाटक हमेशा कर्नाटक संगीत में सजल गीत की साथे होखे ला। गीत के एक ठो गायक गावे ला आ मिरदंग वायलिन बाँसुरी आ तम्बूरा पर गायक के सहजोग कइल जाला। नाचे वाला कलाकार के ज्यादातर गहना आ आभूषण एगो खास हलुक लकड़ी के बने लें जौना के बूरुगु कहल जाला आ ई परम्पारा सतरहवीं सदी में शुरू भइल रहे।

भरत मुनि की नाट्यशास्त्र के जानकार सिद्धेन्द्र योगी एकर शुरूआत कइलें आ ऊ पारिजातहरण नाँव के एगो नाटक के रचना कइलें आ एही से एह नाच के शुरूआत मानल जाला।

कुचिपुड़ी नाच के कलाकार चपल आ तेज गतिविधि वाला होखे लें आ नाच में गोलाई आ पद संचालन में लय आ उड़ान के बहुत महत्व होला। नाचे वाला कलाकार एगो खास गरिमा की संघे ई नाच परस्तुत करे लें। कर्नाटक संगीत की साथे होखे वाला ई नाच भरतनाट्यम की संघे कई माने में समानता लिहले होखे ला।




#Article 416: कस्तुरी (120 words)


कस्तुरी (; बैज्ञानिक नाँव: Turdus merula या दूसर आम अंगरेजी नाँव: Eurasian blackbird) एगो  परिवार के चिरई के प्रजाति हवे। एकर प्रजनन क्षेत्र यूरोप, एशिया, आ उत्तरी आफिरका हवे आ ई कनाडा, यूएस, मैक्सिको, पेरू, ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे, फाकलैंड नियर देश कुल में मनुष्य द्वारा  चिरई हऽ। एकर कई गो उप-प्रजाति बाड़ी आ एह में से कई गो एशियाई उप प्रजातिन के त स्वतंत्र रूप से प्रजाति भी मानल जाला।

भूगोलीय अस्थान की अक्षांश की हिसाब से ई चिरई प्रवासी भी हो सके ले आ मूल निवासी भी। भारत में ई मुख्य रूप से पूरा भारत की पहाड़ आ पहाड़ी इलाका में 1500 मीटर से ढेर ऊँच जंगल में पावल जाय, बाकी अब एकर बिस्तार बहुत ठीक से मालुम नइखे।




#Article 417: टैक्सोनॉमिक रैंक (115 words)


जीव बिज्ञान के वर्गीकरण में, रैंक जीव सभ के समूहन के आपसी तर-ऊपर क्रम की हिसाब से बँटवारा क लेवल या स्तर बाटे।

जीव बिज्ञान में प्राणी सभ के बर्गीकरण खातिर केतना प्रकार के टैक्सोनौमिक रैंक सभ प्रचलन में बा ई संख्या कौनों निश्चित संख्या नइखे। काहें से कि, अगर जरूरत पड़े, टैक्सोनॉमिस्ट लोग नया रैंक के भी गढ़ लेला, हालाँकि, नया रैंक के नाँव रखे खातिर जरूर कुछ सीमा तय कइल गइल बा जेवन कि  नामकरण कोड () के अनुसार  होखे के चाहीं।

एही कारण नीचे दिहल रैंक सभ एक ठो सभके समाहित करत बिधि से बनावल गइल बाटे जे रैंक सभ के आपसी तरऊपरिया स्थिति बतावे भर खातिर दिहल जात बाटे (नोट देखीं):




#Article 418: एल्ब (118 words)


एल्ब या एल्बा मध्य यूरोप के एक ठो बड़हन नदी हवे। ई नदी चेक रिपब्लिक की उत्तरी हिस्सा में मौजूद क्रकोनोस पहाड़ से निकल के उत्तरी सागर में गिरे ले। एकर कुल लंबाई  बाटे।

एल्ब नदी के मुख्य-मुख्य सहायक नदी में , , , , , अउरी  के नाँव गिनावल जा सकेला।

केकरी सहायक नदिन की साथे मिला के एकर कुल थाला  बाटे जेवन यूरोप में चउथा सभसे बड़हन नदी थाला बाटे। ई थाला चारि गो देस कुल में बिस्तार लिहले बा जौना में सभसे ढेर जर्मनी में (65.5%) आ दुसरा नंबर पर चेक रिपब्लिक में (33.7%) बाटे। अउरी छोट हिस्सा ऑस्ट्रिया (0.6%) आ पोलैंड (0.2%) में बाटे। एकरा थाला में लगभग 24.5 मिलियन लोग निवास करे ला।




#Article 419: लंदन टावर (140 words)


लंदन टावर () या महारानी के शाही महल आ किला (Her Majesty's Royal Palace and Fortress) एक ठो इतिहासी किला () हवे जेवन बीच-लंदन में टेम्स नदी की उत्तरी किनारा पर मौजूद बाटे। एकर अस्थापना इंग्लैण्ड पर नार्मन बिजय के चीन्हा की रूप में सन् 1066 इसवी में भइल रहे। उजरका टावर (मीनार) जेवना की आधार पर ए पुरा भवन के नाँव राखल गइल बा, विलियम 'विजेता' के बनवावल ह। ई किला 1100  () से 1952 (), ले एक ठो कैदखाना की रूप में इस्तेमाल भइल हालाँकि ई एकरा बनवावे के मूल मकसद ना रहे। ई शानदार महल मूल रूप से त शाही परिवार के आवास की खातिर बनल रहे। 

एकरी इतिहासी महत्व के कारण आजु ई किला यूनेस्को के बिस्व धरोहर स्थल में शामिल बाटे। वर्तमान में इहाँ शाही खजाना के कुछ हिस्सा आ गहना गुरिया भी राखल बाटे।




#Article 420: बिस्व धरोहर स्थल (232 words)


बिस्व धरोहर स्थल () कौनो अस्थान (जइसे की कौनों बिल्डिंग/भवन, शहर, कॉम्प्लेक्स, रेगिस्तान, जंगल, दीप, झील, स्मारक, भा पहाड़) होखे ला जेवन की यूनेस्को (UNESCO) की द्वारा सांस्कृतिक, प्राकृतिक या अइसने कौनों महत्व की कारन बिस्व धरोहर की लिस्ट में शामिल कइल जाला। ई लिस्ट अंतरराष्ट्रीय बिस्व धरोहर प्रोग्राम की तहत, जौना के यूनेस्को के बिस्व धरोहर कमेटी चलावे ले आ जवन जनरल असेम्बली में चुनल 21 गो मेंबर देस सभ द्वारा बनावल जाले।

जुलाई 2015 ले, एह लिस्ट में 1031 स्थल: 802 सांस्कृतिक, 197 प्राकृतिक, आ 32 गो मेरवन स्थल बाड़ें जेवन 163 देस में छिटाइल बाड़ें। अगर देस अनुसार लिस्ट देखल जाय त, इटली में 51 स्थल बाड़ें आ ई पहिला नंबर पर बाटे। एकरा बाद, चीन (48), स्पेन (44), फ्रांस (41), जर्मनी (40), मैक्सिको (33), आ सातवाँ नंबर पर भारत (32) की साथ अगिला क्रम पर बाड़ें। यूनेस्को इनहन के एगो पहिचानक नंबर देला, आ अब नया सिस्टम में जेवन स्थल ई लिस्ट से बाहर हो गइल बाड़ें उन्हन के नंबर भी सुरक्षित राखल जाला जेवना से ई पहिचान नंबर कुल के संख्या 1200 से अधिका हो चुकल बाटे हालाँकि वर्तमान (लिस्ट) में अइसन स्थल सब के संख्या कम बाटे।

हर एक बिस्व धरोहर स्थल कानूनी रूप से ओही राज्य या राष्ट्र के हिस्सा मानल जाला जौना में ऊ मौजूद बाटे, बाकी यूनेस्को इनहन के सुरक्षा आ संरक्षण की दृष्टी से अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामूहिक इंट्रेस्ट के बिसय मानेला।




#Article 421: टेम्स नदी (193 words)


टेम्स नदी (,  ) इंग्लैंड के एगो प्रमुख नदी हवे आ इंग्लैंड आ यूनाइटेड किंगडम के राजधानी आ दुनिया के एगो सभसे महत्व वाला शहर लंदन एही टेम्स नदी की किनारे बसल बाटे। वर्तमान समय में लंदन शहर के एतना बिस्तार हो चुकल बाटे की अब ई शहर एह नदी की किनारे ना बा बलुक ई नदी अब एह शहर की दक्खिनी हिस्सा से हो के बहे ले। 

लंदन की अलावा ऑक्सफोर्ड, रीडिंग, हेनलये आ विंडसर नियर अउरी कई गो प्रसिद्द शहर एह नदी की तीरे बसल बाड़ें।

ई नदी इंग्लैण्ड के सभसे लमहर आ सेवर्न नदी की बाद यूनाइटेड किंगडम के दुसरकी सभसे लमहर नदी ह। एकर कुल लंबाई  बाटे। ई तुलनात्मक रूप से देखल जाय त इंग्लैण्ड की 
सूखा वाला इलाका से गुजरे ले एही से एकर जल निकास के मात्रा अउरी बाकी नदिन की तुलना में कम बाटे।

नदी में 80 से ढेर दीप बाड़ें आ एकरी निचला हिस्सा में एकर पानी समुन्दर से मिल के खारा पानी बन जाल जेवना कारन ई बहुत प्रकार के जीव-जंतु आ बनस्पति के आश्रय दिहले बाटे आ एक ठो प्रमुख बैज्ञानिक रूचि के जगह एकरा लगे बाड़ें जइसे की  जेवन  पर फइलल बाटे।




#Article 422: नहान (137 words)


नहान या अस्नान हिंदू धर्म में एक ठो पबित्र रीति रिवाज ह। कौनों नदी, समुन्द्र या कौनों भी जल के भण्डार में बुड़की मार के या कौनों पात्र में जल ले के अपना ऊपर डाल के अपनी शुद्धी के इच्छा कइल नहान कहाला। ई खाली शारीरिक शुद्धी ना बलुक मन में ब्याप्त दोष के हटा के मानसिक आ आत्मिक शुद्धी के माध्यम भी मानल जाला।

नहान के एगो अउरी अरथ प्रसूति-स्नान भी होला। बच्चा होखला के बाद महतारी आ बच्चा के सउरि से बाहर निकले से पाहिले नहान करावल जाला।

हिंदू धर्म में सभसे पबित्र मानल जाए वाली नदी गंगा में नहान के गंगा अस्नान कहल जाला आ ई सभ पाप के काटे वाला नहान मानल जाला।

कुछ ख़ास तिथी आ परब के भी नहान के नाँव से जानल जाला। जइसे खिचड़ी के नहान भा कातिक अस्नान।




#Article 423: नमामि गंगे (121 words)


नमामि गंगे (शाब्दिक अरथ: गंगा के (हम) परनाम करत बानी) भारत सरकार के एगो प्रोग्राम बा जे जून 2014 में सुरू कइल गइल। ई इंटीग्रेटेड संरक्षण मिशन के तहत चलावल जा रहल बा। एकर मुख्य उद्देश्य गंगा नदी में प्रदूषण के कम कइल बा। एह प्रोग्राम के तहत एक्के साथे लगभग तीन सौ प्रोजेक्ट सभ के सुरुआत साल 2016 में भइल।

ई भारत के परधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में सुरू कइल गइल। हालाँकि, कैग के एगो रपट के बाद एह परियोजना पर बिबादो भइल। एह रपट में बतावल गइल रहे कि एह प्रोजेक्ट के धनराशि में से भारी मात्रा में हिस्सा खर्चा ना भइल रहे।

एकरा खातिर जर्मनी के एगो संस्था के साथे समजौता भी भइल रहल।




#Article 424: कोसी नदी (414 words)


कोसी नदी तिब्बत, नेपाल आ भारत के बिहार राज्य में बहे वाली एक ठी नदी बा। ई गंगा के सहायक नदी हऽ आ कटिहार जिला में गंगाजी में मिल जाले।

कोसी के सप्तकोसी भी कहल जाला जेवन एकरी ऊपरी सात गो धारा के कारन रखाइल नाँव बा। पानी के बहाव के हिसाब से कोसी, घाघरा आ यमुना के बाद गंगा के तीसरी सभसे बड़ सहायक नदी हवे। तराई में पहाड़ से उतरे के बाद ई नदी दुनिया के सभसे बड़ जलोढ़ पंखा बनावे ले। एह में आवे वाली भारी बाढ़ एकरा बेर-बेर रस्ता बदले के कारन एकरा के बिहार के शोक के रूप में जानल जाला।

सप्तकोसी नदीके सात ठो सहायक नदी बाडे। महालुंगुर हिमालके
दुधपोखर से उदगम होखेबाला दूधकोसी ओखलढुंगा जिलाके
जयरामघाटमे सुनकोसी नदीमे समाहित होला। सप्तकोसी नदीके
सहायक नदी सभ मे  सबसे बडहन आ सबसे लम्बा मानेबाला 
तिब्बतसे बहते आबेबाला अरुण नदी संखुवासभा जिलाके किमांथांकासे नेपाल प्रबेश
करेला। सप्तकोसी नदी प्रणालीके सबसे बडहन नदी
तिब्बत आ नेपाल के सिमाना से तकरीबन 100 कि मि भितर से उदगम होके कुभ्मभकर्ण हिमाल के
जल संचित करेवाला अरुण नदी भोजपुर जिलाके पग्नाम कहेवाला जगह मे सुनकोसी
नदीमे मिलेला। सप्तकोसी के सहायक नदी तमोर के उदगमस्थल
कुम्भकर्ण हिमाल ह । त्रिबेणी घाटमे अरुणनदीमे  मिललाके बाद 
सप्तकोसी नदी बनेला। सप्तकोसी के बार्षिक बहाव क्षमता तकरीबन 

कोसी नदी के कुल लंबाई  बा आ एकरे थाला के कुल  एरिया तिब्बत में, नेपाल में, आ भारतीय राज्य बिहार में पड़े ला।

कोसी नदी के थाला (बेसिन भा कैचमेंट एरिया) लगभग छह किसिम के भूबैग्यानिक आ जलवायु वाला बेल्ट सभ में बिस्तार लिहले बा; ऊँचाई  से  के बीचा में बाटे आ तिब्बत पठार, हिमालय, हिमालय के मझिली पहाड़ी, महाभारत श्रेणी, शिवालिक से होखत तराई वाला इलाका ले एकर फइलाव बाटे। दूध-कोसी बेसिन में अकेल्ले कुल 36 ग्लेशियर आ 296 ग्लेशियरी झील बाड़ी सऽ।

नदी के बेसिन उत्तरी माथ पर त्सांग पो (ब्रह्मपुत्र) के बेसिन के साथे सीमा बनावे ला, पुरुब में महानंदा के बेसिन के साथे आ दक्खिन में गंगा आ पच्छिमी ओर गंडकी नदी के बेसिन के साथे एकरे बेसिन के बाडर बा; खुद ई गंगा नदी में मिले ले। छतरा गार्ज के ऊपरी हिस्सा में एकर कुल आठ गो सहायिका धारा बाड़ी सऽ:

ऊपर बतावल तीनों प्रमुख धारा जहाँ मिले लीं ओकरा के त्रिबेनी कहल जाला आ इ नदी नेपाल के सबसे बडहन नदी बाटे। सातगो अलग अलग नदी मिलला से इ नदी के नाँव सप्त कोशी कहाला। चतरा गार्ज के बाद ई कोसी बराज ले बहे ले आ ओकरे बाद गंगा नदी के मैदान में परवेश करे ले। 




#Article 425: महानंदा (393 words)


महानंदा (, ) भारत आ बांग्लादेस में बहे वाली एगो ट्रांसबाउंड्री नदी बा। ई गंगा नदी सिस्टम के एगो महत्वपूर्ण नदी हऽ आ एकर प्रमुख सहायिका मेची नदी हवे जे नेपाल से निकसे ले आ नैपाल अउरी भारतीय राज्य पच्छिम बंगाल के बीच बाडर बनावे ले। महानंदा नदी खुद भारत के पच्छिम बंगाल, आ बिहार राज्य से होके बांग्लादेस में जा के गंगा में मिले ले।

नदी के कुल लंबाई  बा आ ई पहाड़ी इलाका से उतरे के बाद बहुत कम ढाल वाली जमीन में बहे ले एही कारण मानसून के सीजन में एह नदी में अक्सर बाढ़ आवे ले। 

महानंदा के उदगम हिमालय परबत से होला: दार्जिलिंग जिला में कुरसियांग के पूरुब में चिम्ली के लगे महालदिरम पहाड़ पर पगलाझोरा झरना से ई नदी निकसे ले, एह अस्थान के ऊँचाई समुंद्र तल से करीबन  हऽ। ई महानंदा बनजीव अभयारण्य से हो के बहे ले आ सिलीगुड़ी के लगे मैदान में परवेश करे ले आ जलपाईगुड़ी जिला के छू के गुजरे ले।

नदी बांग्लादेस में पाँचगढ़ जिला के तेतुलिया के लगे परवेश करे ले आ  बहे के बाद फिर भारत के सीमा में आ जाले। एकरा बाद ई पच्छिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिला में आ बिहार के किशनगंज आ कटिहार जिला में बहे ले आ फिर पच्छिम बंगाल के मालदा जिला में परवेश करे ले। महानंदा एह जिला के दू हिस्सा में बाँटे ले mdash; पूरबी इलाका, जे मुख्य रूप से पुराना अल्यूवियम के जमाव से बनल हवे आ तुलना में कम उपजाऊँ हवे जेकरा के बारिंद कहल जाला, आ पच्छिमी इलाका जे फिर से कालिंद्री नदी द्वारा दू हिस्सा में बाँटल जाला, उत्तरी हिस्सा के ताल कहल जाला जे निचाई के जमीन वाला बाढ़ परभावित इलाका हवे आ दक्खिनी हिस्सा के दियारा कहल जाला जे उपजाऊँ आ घन आबादी वाला इलाका हवे।

ई नदी बांग्लादेश के नवाबगंज जिला में गोदागिरी के लगे गंगा नदी में मिले ले।

महानंदा नदी में लगभग हर साल बाढ़ आवे ला आ जवना साल मानसून मजबूत रहे ला एकरे बाढ़ से काफी इलाका परभावित होला।

बिहार के किशनगंज आ कटिहार जिला एह बाढ़ से सभसे ढेर परभावित होलें। बाढ़ से बचाव खातिर नदी के तीरे बाँध बनावल गइल बाकी लोकल लोगन के मानल बा कि बाँध बनावे से इस्थिति अउरी खाराब भइल बा। कुछ जगह बाँध के टूट जाए के बाद केंद्र सरकार जब दुबारा एकरा बनवावे के पहल कइल लोकल लोग एकर भरपूर बिरोध कइल।




#Article 426: हुगली नदी (220 words)


हुगली नदी या भागीरथी-हुगली नदी, गंगा नदी के एगो शाखा (डिस्ट्रिब्यूटरी) हवे जे भारत में बहे ले। गंगा नदी के बांग्लादेस में प्रवेश से पहिले मुर्शिदाबाद जिला में गिरिया के लगे दू गो धारा हो जालीं सऽ आ दुसरकी धारा पदमा के नाँव से पूरुब मुँह के बहे ले आ बांग्लादेस में प्रवेश करे ले जबकि ई धारा दक्खिन मुँह के बहे ले जे शुरुआत में भागीरथी नदी के नाँव से आ आगे बढ़ के जलंगी नदी के आके एह में मिल जाये पर हुगली के नाँव से आगे बढ़े ले। 

एह नदी के कुल लंबाई करीबन 260 किलोमीटर (160 मील) बा आ परंपरागत रूप से ईहे गंगा कहाले। ई नदी पच्छिम बंगाल (आ कुछ हिस्सा झारखंड में) के राढ़ प्रदेश से हो के बहे ले। हुगली के सभसे प्रमुख सहायक नदी दामोदर हवे जौन एह में बायें से आ के मिले ले। भारत के प्रसिद्द शहर कलकत्ता आ हावड़ा हुगली के किनारे बसल बाड़ें। कलकत्ता से नीचे (नदी के रास्ता में आगे) जहाँ एह में हल्दी नदी आ के. मिले ले उहाँ वर्तमान हल्दिया बंदरगाह बाटे जौन कलकत्ता बंदरगाह के भार कम करे खातिर बनल एगो आधुनिक बंदरगाह बा। अंत में हुगली नदी गंगा सागर में बंगाल के खाड़ी में गिर के समुन्द्र में मिल जाले। भूआकृतिबिज्ञान के हिसाब से एह नदी के तीन गो हिस्सा में बाँटल जाला।




#Article 427: दामोदर नदी (417 words)


दामोदर नदी भारतीय राज्य झारखंड से निकल के पच्छिम बंगाल में बहे वाली, हुगली नदी के सहायिका, नदी बा। नदी के कुल लंबाई  बा। ई नदी झारखंड के छोटा नागपुर पठार से निकले ले जहाँ प्राचीन काल के चट्टान सभ खनिज संपदा से भरपूर बाड़ी। पठारी हिस्सा पार करे के बाद ई बंगाल के मैदान में परवेश करे ले आ ढाल एकदम से कम हो जाला। एही कारण बरसात के सीजन में, जब एकरे ऊपरी हिस्सा में भरपूर पानी बरसे ला आ नीचे उतरे पर ढाल अचानक कम हो जाला, एह में भयानक बाढ़ आवे ले। इतिहासी रूप से एही कारन एह नदी के बंगाल के शोक कहल जाय। हालाँकि, अब एह नदी आ एकरे सहायिका नदी सभ पर कई गो बंधा बनावल गइल बाड़ें जवना से बाढ़ में कमी आइल बा आ बिजली के उत्पादन होला। ई मैनेजमेंट अमेरिका के टेनेसी वैली कार्पोरेशन के तर्ज पर दामोदर वैली कार्पोरेशन (डीवीसी) बना के कइल गइल बा।

दामोदर के प्रमुख सहायिका नदी सभ में बरकार, कोनार आ जमुनिया नियर नदी बाड़ी सऽ। नदी के थाला खूब खनिज पदार्थ वाला हवे आ यही कारन एह इलाका में उद्योग सभ के बिकास भी भइल बा। बोकारो, आसनसोल, दुर्गापुर आ बर्धमान नियर शहर एह नदी के तीरे बसल बाड़ें जे कलकत्ता बंदरगाह के पछवारे के परदेस में पड़े लें। एह इलाका में उद्योग के अस्थापन के कारन ई नदी भारत के कुछ सभसे ढेर प्रदूषित नदी सभ में से एक हवे।

दामोदर घाटी के नाँव से जानल जाए वाला भूगोलीय इलाका के बिस्तार झारखंड राज्य के हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा, गिरडीह, धनबाद, बोकारो आ चतरा ज़िला सभ में आ पच्छिम बंगाल राज्य के बर्धमान आ हुगली जिला सभ में बाटे। एह में कुछ इलाका पलामू, राँची, लोहरदग्गा, आ दुमका जिला के भी आवे ला आ पच्छिम बंगाल के हावड़ा, बाँकुरा आ पुरुलिया जिला के भी हिस्सा आवे ला। नदी के कुल कैचमेंट एरिया भा थाला के बिस्तार  पर बाटे।

दामोदर घाटी में कोइला पावल जाला। ई भारत के सभसे प्रमुख कोकिंग कोइला के सेंटर मानल जाला।इहाँ कोइला के भारी जमाव बिचला हिस्सा में मिलेला जे लगभग  एरिया में बाटे। इहँवा के सभसे प्रमुख खदान सभ में झरिया, रानीगंज, पच्छिम बोकारो, पूर्ब बोकारो, रामगढ़, दक्खिन कर्णपुर, आ उत्तर कर्णपुर बाड़ी स। 

एह तरीका से देखल जाय तब ई दामोदर घाटी भारत के कुछ सभसे प्रमुख उद्योगिक क्षेत्र सभ में से एक हवे। बोकारो इस्टील कारखाना, इस्को इस्टील कारखाना, बर्नपुर; आ दुर्गापुर इस्टील कारखाना इहाँ इस्टील अथारिटी ऑफ़ इंडिया (सेल) के प्रमुख कारखाना बाड़ें। इनहन के अलावा अउरी कई गो कारखाना इहाँ अस्थापित बाड़ें।




#Article 428: मछरेंगा (108 words)


मछरेंगा या कॉमन किंगफिशर (अंगरेजी: Common Kingfisher; बैज्ञानिक नाँव:Alcedo atthis) एगो भारी ठोड़ वाली चिरई बाटे। ई रंग बिरंगी आ सुन्दर चिरई होखे ले।

मछरेंगा के कई ठो उपप्रजाति भी पावल जालिन। ई एशिया, यूरोप आ उत्तरी अफिरका के हिस्सन में पावल जाले। ई पक्षी साफ़ पानी के एगो बहुत नीक पहिचान हवे आ कौनों  इलाका में एकर पावल जाइल ई बतावे ला की ओह इलाका के पानी के भण्डार (ताल, झील, तालाब, नदी इत्यादि) बहुत प्रदूषित नइखे भइल। कृत्रिम तरीके से बांध  बनावल या पानी के बहाव के मैनेज कइल एकरा संख्या पर खराब असर डाले ला।

क्षेत्र की अनुसार एकरा कई गो उप प्रजाति पावल जाली।




#Article 429: पुराभूगोल (197 words)


पुराभूगोल (अंग्रेजी:Palaeogeography या paleogeography) इतिहासी भूगोल के शाखा बा। ई शब्दावली आमतौर पर भौतिक जमीनरूप खातिर इस्तेमाल होखे ला बाकी मनुष्य के सांस्कृतिक पर्यावरण खातिर भी इस्तेमाल कइल जा सकत बाटे। जब एकर फोकस ख़ाली थलरूप पर होला तब एही के पुराभूआकृतिबिज्ञान भी कहल जाला।

पुराभूगोल अइसन बहुत महत्व के जानकारी उपलब्ध करावे ला जवना के उपयोग कई प्रकार के बैज्ञानिक अध्ययन सब में होखे ला। उदाहरण खातिर अवसादी थाला सब के पुराभूगोलीय अध्ययन पेट्रोलियम भूबिज्ञान के अद्ययन में बहुत महत्व के जानकारी देला काहें से कि पृथ्वी के पुराना जमाना के भूआकृतिबिज्ञान के चट्टानी रिकार्ड स्तरबिग्यानी रूप में सुरक्षित रहे ला। पुरा भूगोल में फॉसिल सभ के अध्ययन भी शामिल होला आ ई क्रम-बिकास के अध्ययन मे महत्व वाली जानकारी देला। एह जानकारी में पुरान जीव प्रजातिन के रूप आ शरीर के रचना के साथै साथ उन्हन के बिलोपन के बारे में भी जानकारी मिले ले। पुराभूगोल के अध्ययन से महादीप बिस्थापन आ प्लेट टेक्टॉनिक के अध्ययन आ प्रमाण जुटावे में भी मदद मिले ला।  पुरा भूगोल के अध्ययन से पुरान सुपर महादीप पैंजिया आ एकर भाग सभ के जानकारी मिलल जेवना से आज महादीप आ परबत सभ के उत्पत्ति आ इन्हन में बदलाव के ब्याख्या करे वाला सिद्धांत बन सकल।




#Article 430: दामोदर राव (343 words)


दामोदर राव (जन्म 21 अगस्त 1977) एगो भारतीय गायक, संगीतकार आ अभिनेता हउवे. इनकर संगीत मधुर अउरी कर्णप्रिय होला। दामोदर राव आज तकले लगभग सत्तर गो से भी ज्यादा हिंदी आ भोजपुरी फिल्मन में आपन मधुर संगीत देले बाड़न। आ लगभग 750 गो से भी ज्यादा एल्बम बनवले बाड़न, दामोदर राव एगो सुरीला गायक भी हउवन, इनकर गावल कई गो एल्बम भी बाजार में उपलब्ध बा, इनकर गावल भोजपुरी में किताब भी मार्केट में मिलेला, आ इनकर गावल हिंदी में साईं भजन के पुस्तक  साईं आराधना नाम से बाजार में बिकेला । आज भोजपुरी फ़िल्मी समाज में इनकर बहुत बड़ा योगदान बा, साथे साथे हिंदी फिल्म जगत में भी आप मजबूत पैठ बनावे के फेरा में बाड़ें । दामोदर राव बेस्ट संगीतकार के कई गो अवार्ड भी प्राप्त कइले बाड़न |
दामोदर राव के जन्म भारत के बिहार राज्य के पश्चिम चंपारण जिला बेतिया के नरकटियागंज शहर में भइल रहे, राव अभी मुंबई में अपना पूरा परिवार के साथे रहलें, राव संगीत परिवार से संबंध राखेलें, इनकर पिता रामधनी राव एगो क्षेत्रिय लोक गायक रहलें। दामोदर राव अबले लगभग 70 गो से ज्यादा फिल्म में आपन संगीत देलें बाड़न, जेमे कई गो भाषा शामिल बा जइसे हिंदी, भोजपुरी, मैथिली, हरियाणवी, पंजाबी आदि । दामोदर राव बहुत सारा एल्बम रेकार्ड कइले बाड़न, काफी एल्बम में इ खुद गवलें भी बाड़ें आ साथे साथ अभिनय भी कइले हउवन । इनकर एगो गाना «भारत को बचाना ही होगा मोदी को लाना ही होगा» काफी प्रसिद्ध भइल रहे जेकर गायक सुमित बाबा रहलें ।
आ एगो अउरी गाना डी जे वाला भाई करा भोल्युम हाई जवना के गायिका रहली गायिका देवी, इहो गाना सुपर हिट भइल रहे। इनका संगीत में अब तकले भोजपुरी फिल्म जगत के सारा कलाकार लो काम कइले बा, आ हिंदी जगत के भी लगभग सारा बड़का गायक लो गीत गवले बा । जइसे कुमार सानु, उदित नारायण झा, सपना अवस्थी, साधना सरगम, विनोद राठोर, अनूप जलोटा, रूप कुमार राठोर, पवन सिंह, इन्दू सोनाली, कल्पना पटवारी, मोहन राठोर, अलका याग्निक, मनोज तिवारी, शाहिद माल्या, शबाब साबरी, संचिति सकट, अलोक कुमार, पामेला जैन आदि ।




#Article 431: भाबर (249 words)


भाबर हिमालय के दक्खिन ओर शिवालिक श्रेणी के ठीक नीचे वाला इलाका के कहल जाला जहाँ हिमालय से उतरे वाली नदी कुल माटी, बालू, कंकड़ रूप में अवसाद जमा क के एगो अइसन पट्टी बनवले बाड़ी जेवन उत्तराखंड, नेपाल आ पच्छिमी बंगाल के उत्तरी हिस्सा में फइलल बाटे। ई बेल्ट अइसन बड़े बड़े कंकड़ आ बालू से बनल बाटे कि नदी के पानी कहीं कहीं एह में गायब भी हो जाला आ जमीन के अन्दर बहत दूर आ के फिर निकले ला। एकरा ठीक नीचे वाला इलाका के तराई कहल जाला।

भाबर के नाँव से जानल जाए वाली ई पट्टी निचला हिमालय भा शिवालिक परबत माला के ठीक दक्खिन में पावल जाला। ई लगभग 8 से 15 किलोमीटर चाकर बेल्ट जम्मू से ले के आसाम तक बिस्तार लिहले बा आ एकर चौड़ाई पच्छिम में ढेर बा जबकि पूरुब ओर कम बाटे। आमतौर पर ई पूरा पट्टी कंकड़-पाथर के बनल हवे आ एहिजे के मौजूद पदार्थ सभ के अध्ययन ई सूचित करे ला की ई मटेरियल सभ शिवालिक के धो के बहावल सामाग्री हवे जे नद्दिन द्वारा ले आ के गला क दिहल हवे। एह इलाका के ऊपरी चट्टानी परत बहुत छेददार यानी सरंध्र (पोरस) हवे, एही कारन अगर नदी में बहुत बहाव न होखे, मने की छोट-मोट नदी होखे तब ऊ एह इलाका में जमीन के भीतर से बहे लागे ले ऊपर से बहाव के पता ना लागे ला। एह इलाका में प्राकृतिक रूप से जंगल पावल जाँय आ अब्बो इ बेल्ट खेती खाती बहुत नीक ना मानल जाला।




#Article 432: बाढ़ि (227 words)


बाढ़ि या बाढ़ एगो अइसन घटना होखे ले जवना में पानी अपना बहाव के आम बिस्तार से ऊपर उठ के अइसन जमीन के ऊपर चढ़ि आवेला जहाँ आमतौर पर जमीन सूखल रहे ले। जब एकरा से मनुष्य के नोकसान होखे ला तब ई आफत में गिनल जाला। ई प्राकृतिक कारण आ मनुष्य के कौनों काम या फिर दुनों के मिलल जुलल कारण के परिणाम हो सके ला।

आमतौर पर नदी या झील के किनारे के जमीन जवन सूखल रहे ले ओकरा पानी के बढ़ले के कारन बूड़ि गइले के बाढ़ि कहल जाला। पानी के ई चढ़ाव ढेर बरखा भइला या अउरी कौनों दूसर कारन से हो सके ला, जइसे की बाँध सभसे अचानक पानी छोड़ल या बाँध के टूट गइले से। 

कुछ इलाका में लगभग हर साल बाढ़ि आवेले जेवन सीजनल होखे ले। बरसात के मौसम में नदी नाला ताल सब में पानी चढ़ जाला आ आसपास के सूखल रहे वाली जमीन के डुबा देला।
कुछ जगह अचानक ढेर बरखा हो गइले पर भी पानी ओतने तेजी से बह के निकल ना पावे के कारन जमा हो जाला, एकरा के जलजमाव कहल जाला आ इहो बाढ़ के एगो रूप मानल जाला।

केनियो केनीयो बुनी होखला से बाढ़ि आ जाला। अईसन तब होला जब बुनि चाहे बरफ गले से आवे वाला पानी जेतना हाली हाली जामा होला ओतने हाली निकल ना पावेला।

लगभग हर नदी मे बाढ़ि आवेला।




#Article 433: चार (दीप) (108 words)


चार बंगाल में गंगा डेल्टा में नदी द्वारा ले आइल माटी आ अवसाद के जमा कइला से बनल दीप के कहल जाला। बाढ़ उतरले की बाद अक्सर नया चार भी बन जाला आ पुरान कट के बह भी जाला। इहाँ रहे वाला लोग नया दीप पर बस जाला आ पुरान के छोड़ देला। 

चार के उलटा एह डेल्टा वाला हिस्सा में बील नाँव के थलरूप भी मिलेला जवन आम आम मैदान से तनी गहिरा झील नियर हिस्सा होला जहाँ पानी एकट्ठा हो जाला।
चार पर रहे वाला लोग बाढ़ के नीक माने ला काहें से की एकरा से नया माटी आ के जमीन के अउरी उपजाऊँ बना देला।




#Article 434: निकास (हाइड्रोलॉजी) (152 words)


बहाव मात्रा या निकास बहाव (, डिस्चार्ज) या कबो कबो ख़ाली बहाव कहि दिहल जाला, जल बिज्ञान में पानी के बहाव के आयतन के दर के कहल जाला। आसान भासा में कहल जाय त प्रति एकाई समय में केतना मात्रा पानी के बह गइल ओके बहाव मात्रा कहल जाला।

इकाई, जिनहन के इस्तेमाल बहाव मात्रा के बतावे खातिर होखे ला ऊ कई ठो बाड़ी, जइसे की घन मी./से. (m³/s) (cubic meters per second), घन फीट/से. (ft³/s) (cubic feet per second or cfs) आ एकड़-फीट प्रति दिन (acre-feet per day)। उदाहरण खातिर गंगा डेल्टा में गंगा के मुख्य धारा जेवना में ब्रह्मपुत्र आ मेघना भी मिल जालिन, के कुल बहाव मात्रा  बतावल जाले।

आम तौर पर एके नापे के तरीका बहुत आसान होला, जेह में बहाव के मात्रा (Q) धारा के क्रास-सेक्शन के क्षेत्रफल (A) आ औसत बहाव वेग के गुणनफल के बराबर होला (), आ एकरा के लिखे के तरीका होला:

जहाँ




#Article 435: कंचनजंघा (117 words)


कंचनजंघा (सिक्किमी आ ) बिस्व के तीसरी सबसे ऊँच परबत चोटी बा। ई चोटी कुछ हिस्सा नेपाल में आ कुछ हिस्सा भारत के सिक्किम में पड़ेला। एकर ऊँचाई  बा आ हिमालय के जौना हिस्सा में ई बाटे ओकरा के कंचनजंघा हिमाल कहल जाला। कंचनजंघा हिमाल के क्षेत्र पच्छिम में तामुर नदी, लोनक नदी से उत्तर ओर आ पूरुब ओर तीस्ता नदी से घेराइल बाटे। पहिले एकरा के बिस्व के सबसे ऊँच चोटी मानल जाय बाकिर 1852 में जब माउंट एवरेस्ट के ऊँचाई खातिर (तब एकरा के पीक-XV कहल जाय) गणना भइल तब पता चलल की ई सभसे ऊँच बा आ अंत में 1856 में ऑफिशियली ई घोषणा भइल की कंचनजंघा दुनिया के तिसरकी सभसे ऊँच चोटी बा।




#Article 436: क्लारा चर्च (154 words)


संत क्लेयर के चर्च (दि चर्च ऑफ सेंट क्लेयर) या क्लारा चर्च  (स्वीडिश: Klara kyrka) सेन्ट्रल स्टॉकहोम में एक ठे चर्च बाटे।

संत क्लेयर के ई चर्च निचला नॉर्मल्म में क्लारा एरिया में स्थित बाटे। क्लारा एरिया स्टॉकहोम के पुराना शहर के एगो क्षेत्र रहे जवन आज एह पुरनका शहर के लगभग पर्यावाची हो चुकल बा भले आज ऊ पुरान शहर बदल चुकल बाटे।#x5B;#x5D;

सेंट क्लेयर के कान्वेंट आ चर्च के अस्थापना एह जगह पर 1280 के दसक में भइल रहे। सन् 1527 में गुस्ताव वासा, स्पेन के राजा, चर्च पर कब्ज़ा क लिहलें आ कान्वेंट के तहस-नहस क दिहलें। वर्तमान चर्च के बिल्डिंग के निर्माण 1572 में जोहान III के समय में शुरू भइल।

इहाँ के कब्रिस्तान, जौन आजु माडर्न बिल्डिंग के भीड़ से घेरा चुकल बाटे, के शुरुआत 17वीं सदी में भइल रहे।

चर्च के टावर एकरा जीर्णोद्धार के काम के दौरान 1880 के दसक में बनावल गइल आ ई  ऊँचाई वाला बाटे।




#Article 437: ग्रांट पार्क (209 words)


ग्रांट पार्क () शिकागो शहर में मिशिगन झील के पच्छिमी किनारे पर एक ठो पार्क बाटे। ई शिकागो के लूप कम्यूनिटी एरिया में मौजूद बा आ 
(319 एकड़ 1.29 कि॰मी॰²) के क्षेत्रफल में फइलल बाटे। शिकागो के सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट (सीबीडी) में मौजूद एह पार्क के मुख्य आकर्षण के चीज गिनावल जाय त इहाँ मिलेनियम पार्क, बकिंघम फुहारा,  शिकागो कला इंस्टीट्यूट, म्यूजियम कैम्पस नियर चीज बाड़ी। मूल रूप से एकरा के झील पार्क (Lake Park) कहल जाय आ ई एह शहर के बसले के समय से इहाँ बा, एकर नाँव 1901 में उलिसस एस ग्रांट के सम्मान में उनुकी नाँव पर रखाइल। पार्क के एरिया कई बेर बढ़ावल गइल आ ई बिस्तार झील से जमीन हासिल क के भइल। मुक्त अस्थान के इस्तेमाल के ले के एह पार्क के बिस्तार पर कई बेर बिबाद भी भइल।

एकरा उत्तर ओर रैन्डाल्फ सड़क, दक्खिन ओर रूज़वेल्ट रोड आ मैकफेट्रिज ड्राइव बा, पच्छिम ओर मिशिगन एवेन्यू आ पूरुब ओर मिशिगन झील बाटे। पार्क में पब्लिक के इस्तेमाल खातिर जगह, बगइचा, कला के प्रदर्शनी, आयोजन स्थल आ खेल के जगह मौजूद बाटे। इहँवा कुछ सालाना जलसा के अस्थान भी बाटे।

पार्क के अक्सरहा शिकागो के दुआर भी कहल जाला। एह पार्क के प्रशासन आ मैनेजमेंट के जिम्मेदारी शिकागो पार्क डिस्ट्रिक्ट के हवाले बाटे।




#Article 438: धौलागिरि (137 words)


धौलागिरी नेपाल में एगो मैसिफ़ बा आ ई काली गंडकी से लगभग  के दूरी पर एकरे आ भेरी नदी के बीच में मौजूद बाटे। एकरा उत्तर ओर भेरी नदी के सहायिका आ दक्खिन-पूरुब ओर Myagdi Khola नदी बाटे। धौलागिरी I बिस्व के सातवीं सभसे ऊँच चोटी बा आ ई समुद्र तल से  के ऊँचाई वाली बाटे।

एकर नाँव धौलागिरी संस्कृत के धवल (सफ़ेद) आ गिरि (पर्वत) से बनल बाटे। गंडकी नदी बेसिन के ई सभसे ऊँच चोटी भी बा।

अन्नपूर्णा I (8,091m/26,545 ft) एकरा से मात्र 34 km. पूरुब ओर बाटे।  गंडकी (नारायणी) नदी अन्नपूर्णा आ धौलागिरी के बीच में गार्ज बनावेले आ ई गार्ज दुनिया के सभसे गहिरा मानल जाला। अन्नपूर्णा के दक्खिन में पोखरा नाँव के अस्थान एगो प्रमुख पर्यटन अस्थान बाटे आ इहाँ परबत पर चढ़े वाला क्लाइम्बर लोग रुक के आगे बढ़े ला।




#Article 439: दक्खिनी एशिया के मानसून (137 words)


दक्खिनी एशिया के मानसून एगो मौसम सिस्टम बा जेवन पूरा बैस्विक मानसून के अस्थानीय रूप हवे। सबसे पहिले एही मौसम सिस्टम के पहिचान मानसून के रूप में भइल रहे। ई मौसम सिस्टम भारतीय उपमहादीप के प्रभावित करे ला। भारत आ आसपास के देसवन खातिर एकर महत्व बहुत बा काहें से की पूरा खेती आ अउरी आर्थिक क्रिया एह सीजनल बदलाव के साथ प्राचीन समय से सेट हो चुकल बा।

अरब सागर में समुंदरी यात्रा करे वाला जहाजी लोग सभसे पहिले एकर पहिचान कइल जब ऊ लोग अफिरका, भारत आ दक्खिनी पच्छिमी एशिया के बिचा में यात्रा करे।

उपमहादीप पर एकरे बिस्तार के हिसाब से एकरा के दू प्रकार में बाँटल जाला:

एगो दुसरा आधार पर एकरा के दू हिस्सा में भी बाँटल जाला, बरखा ले आवे वाली हवा के बहे के दिसा में बदलाव के आधार पर:




#Article 440: रासायनिक तत्व (155 words)


रासायनिक तत्व ()  अइसन रासायनिक पदार्थ होला जवना के सगरी परमाणु सभ में एक बराबर प्रोटॉन के संख्या पावल जाले (मने की ओकरा हर एक परमाणु के परमाणु नंबर, Z, बराबर होखे)। रसायनशास्त्र के प्रसंग में लिखत-पढ़त घरी एकरा के खाली तत्व कह दिहले से भी इहे अरथ बुझाला की रासायनिक तत्व के बात कइल जात बाटे।

वर्तमान समय में 118 गो तत्वन के पहिचान कइल गइल बाटे जवना में से 94 गो प्राकृतिक रूप से पृथ्वी पर पावल जालें आ बाकी 24 गो सिंथेटिक तत्व हवें।

कुल 80 गो तत्व अइसन बाड़ें जिनहन के कम से कम एक ठो स्थाई (स्टेबल) आइसोटोप बाटे आ 38 गो तत्व खासतौर पर रेडियोएक्टिव आइसोटोप वाला बाड़ें जिनहन में समय बितला के साथ क्षय हो के दुसरा तत्व में बदलाव होत रहे ला। लोहा द्रब्यमान के लिहाज से सभसे ढेर पावल जाए वाला तत्व बाटे आ ऑक्सीजन पृथ्वी के क्रस्ट में सभसे बहुतायत से मिले वाला तत्व बा।




#Article 441: धारा बदलाव (186 words)


नदी के धारा बदलाव या एवल्शन () एगो भूआकृतिक आ भूबैज्ञानिक घटना हवे जेवना में नदी तेजी से आपन पुरान बहाव के धारा छोड़ के नई धारा के रूप में बहे लागे ले। ई अक्सर तब होला जब पुरान चैनल के ढाल एतना कम होखे की नदी में मौजूद अवसाद के एकट्ठा भइला से भर जाय आ नदी के दूसर ढाल वाला रास्ता पर बहे के पड़े।

नदी धारा के बदलाव के घटना बहुतायत में देखल जाले जब नदी अपने डेल्टा के हिस्सा में बहेले। डेल्टा वाला हिस्सा में नदी के ढाल बहुत कम हो जाला आ जब अवसाद जमा होला तब अक्सर नदी पुरान बहाव के मार्ग छोड़ के नया रास्ता से बहे लागे ले। एकर के डेल्टा बदलाव या डेल्टा स्विचिंग भी कहल जाला।

नदी डेल्टा के एगो प्रकार पंजाकर डेल्टा एही तरे बने ला जब नदी एगो रास्ता पर बहत आ अवसाद जमा करत समुन्द्र में दूर ले पहुँच जाले आ बीच में ई रास्ता छोड़ के दूसर रास्ता पर इहे काम शुरू हो जाला तब अइसन कई बेर में हो के नदी के डेल्टा के आकार चिरई के पंजा नियर हो जाला। 




#Article 442: ग्रेट डिवाइडिंग रेंज (136 words)


ग्रेट डिवाइडिंग रेंज (अंग्रेज़ी: Great Dividing Range, मतलब:महान बिभाजन करे वाली परबत श्रेणी) भा ईस्टर्न हाइलैंड्स (Eastern Highlands, पूरबी ऊँच भूमी ) ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़ परबत श्रेणी बाटे आ दुनिया के तीसरी सबसे लम्बी जमीनी परबत श्रेणी (गैर-समुंदरी) भी बा। ई पूर्वोत्तर क्वीन्ज़लैंड राज्य के तट से पार स्थित डाउअन द्वीप से ले के दक्खिन दिसा में में 3,500 किमी तक न्यू साउथ वेल्स आ विक्टोरिया राज्यन ले फइलल बाटे। ग्रेट डिवाइडिंग रेंज के चौड़ाई बिभिन्न जगह पर 150 किमी से 300 किमी के बीच बा। ऑस्ट्रेलिया के कई ठे नदी सभ एही परबत से निकले लीं, जिनहन में डारलिंग नदी भी शामिल बा। एकर कई ठे उपश्रेणी भी बाड़ी, जइसे की स्नोई पर्वत (Snowy Mountains)। ऑस्ट्रेलिया के सभसे ऊँच पहाड़, 2,228 मीटर ऊँचाई वाला कोसीओस्को पर्वत (Mount Kosciuszko), एही स्नोई रेंज में स्थित बाटे।




#Article 443: सीनाई परबत (154 words)


सीनाई परबत ( ; मिस्र देसी अरबी: جَبَل مُوسَى, ) मिस्र देस के एशियाई भाग में सीनाई प्रायदीप पर एगो परबत बाटे। ई  ऊँचाई वाला परबत, माउंट कैथरीन ( ऊँच) के बाद मिस्र के दुसरा सभसे ऊँच पहाड़ बाटे।

एह पहाड़ के सांस्कृतिक आ धार्मिक महत्व बहुत बा आ मानल जाला के मूसा के एही पहाड़ पर ज्ञान प्राप्त भइल रहे।

सीनाई पठार एशिया आ अफिरका के बीच में स्थित बाटे। ई राजनीतिक रूप से मिस्र देस के अंतर्गत आवेला। एकरा पच्छिम में स्वेज के खाड़ी बा आ पूरुब ओर अकाबा के खाड़ी। दूनों खाड़ी के बीच में त्रिभुज के आकार के ई प्रायदीपीय पठार पर नोक वाला हिस्सा में सीनाई परबत स्थित बाटे।

सीनाई परबत के उत्तर-दक्क्षिण लंबाई  आ पूरुब-पच्छिम के चौड़ाई  बाटे।

माउंट सिनाई के चट्टान सभ अरबी-नूबियन शील्ड के निर्माण के आखिरी काल में बनल रहलीं आ ई परबत एगो मुनरी के आकार के रूप में ज्वालामुखी क्रिया के परिणाम हवे।




#Article 444: चोटी (थलरूप) (103 words)


चोटी या परबत चोटी आमतौर पर जमीन के अइसन हिस्सा होला जवना के ऊँचाई अपने ठीक आसपास के जमीन से सबसे अधिक होखे। चोटी के इस्तेमाल अक्सर परबत के साथे होला आ ई कौनों पहाड़ या पहाड़ी के सभसे ऊँच बिंदु के खातिर कइल जाला। एकही परबत श्रेणी में कई गो परबत चोटी हो सकेली। 

आम धारणा के मोताबिक चोटी के बहुत नुकीला गुम्बद या मीनार के नियर मानल जाला, हालाँकि ई दूर से भले नोकदार लउके बाकी असल में उहाँ पहुँचला पर समतल हिस्सा भी हो सके ला। बस ई आसपास के जमीन से ऊँच समतल हिस्सा होला जेकरा किनारा ढालू होला।




#Article 445: बड़का कॉकेशस (122 words)


बड़का कॉकेशस (, ग्रेटर कॉकेशस; ; ; ) एगो प्रमुख परबत श्रेणी बाटे जवन कॉकेशस परबत सिस्टम के हिस्सा हऽ।

ई परबत श्रेणी पच्छिम-उत्तरपच्छिम से पूरुब-उत्तरपूरुब के दिसा में लगभग  के लंबाई में, काला सागर के  से कैस्पियन सागर के  तक बिस्तार लिहले बाटे। ई बिस्तार पच्छिमी कॉकेशस में सोची, जवन काला सागर के उत्तरी-पच्छिमी तट पर बाटे, से कैस्पियन के तीरे बसल बाकू ले बा।

भूगोल में एह परबत के तीन हिस्सा में बाँटे के परंपरा बाटे:

पच्छिमी कॉकेशस के इलाका नम हवे आ एही से इहवाँ खूब जंगल पावल जालें (पतझड़ बन,  के ऊँचाई ले, कोणीय बन  ले आ अल्पाइन बनस्पति पेड़ रेखा के ऊपर)। एकरे बिपरीत पूरबी हिस्सा तुलना में सूखल रहे ला आ लगभग फेड़-रूख से बिहीन बाटे।




#Article 446: सबसे ऊँच परबतन के लिस्ट (618 words)


कम से कम 109 गो चोटी अइसन बाड़ी जिनके ऊँचाई समुंद्र तल से  से ढेर बाटे। इन्हन में से सभ चोटी दक्खिनी आ मध्य एशिया में मौजूद बाड़ी। इन्हना में खाली उनहन के बीछल गइल बा जिनहना के उप-चोटी न मान के अलगा से परबत चोटी के दर्जा दिहल जाला।

ई बात हर केस में बहुत क्लियर ना होला की कौनों कवना रेखा के सहारे कौनों परबत चोटी के बगल वाली चोटी से अलग कइल जाव।
एगो प्रचलित तरीका ई हवे की उपचोटी आ मुख्य परबत चोटी के बिभाजन थलरुपी उच्चता (टोपोग्राफिक प्रॉमिनेंस) के नाप से कइल जाय। टोपोग्राफिक प्रौमिनेंस, एगो तरीका हवे जेवना में कौनों चोटी के ऊँचाई, ओकरा आ ओकरे के बगल वाली चोटी के बीच के गहिरा हिस्सा (दर्रा या कॉल) से नापल जाला। ऊँचकी चोटी के पैरेंट पीक (parent peak) कहल जाला। परबत के एगो कामन परिभाषा ई बा की ओकर प्रॉमिनेंट ऊँचाई  होखे के चाहीं। बिकल्प के रूप में सापेक्षिक प्रौमिनेंस (प्रौमिनेंस/ऊँचाई) के इस्तेमाल (आमतौर पर 7–8%) भी होखे ला। नीचे के लिस्ट में सभसे ऊँच 100 गो चोटी, कम से कम  मीटर प्रौमिनेंस वाली दिहल गइल बाड़ी, जवन लगभग 7% प्रौमिनेंस के साथ वाली बाड़ी। प्रौमिनेंस के आधार पर लिस्ट बनावे में एगो कमी ई होखेला की कबो-कबो कौनो अइसन परबत छूट जाला जवन बहुत परसिद्ध होखे बाकी अपने बगल के परबत चोटी से जवना के बिलगाव करे वाली घाटी या कॉल अतना गहिरा न होखे कि प्रौमिनेंस के नाप बहुत ढेर आवे। उदाहरण कि रूप में  आ । अइसन कुछ चोटी जवन प्रौमिनेंस में नजदीक ले पहुँचल बाड़ी की उनहन के गिनल जाय, नीचे दिहल बाड़ी बाकी उन्हना के गणना रैंक नइखे दिहल गइल, खाली नाँव दिहल बा।

इहाँ दिहल ऊंचाई भी, कोसिस कइल गइल बाटे की सटीक होखे, बाकी कई दसा में ई नाप के सटीकता बहुत मुश्किल होला। खास तौर पर जब परबत समुंद्र से बहुत दूर होखे तब समुंद्र तल से ऊँचाई के निर्धारण कठिन हो जाला। अलग-अलग स्रोत भी कई चोटी के ऊँचाई अलग-अलग बतावत मिल जालें। एही ज्ञानकोश में अलग-अलग स्रोत के हवाला दे के एकही चोटी के अलग ऊँचाई भी दिहल हो सकत बाटे। एगो सभसे मजबूत उदाहरण बा अलघ मुजतग  जवन उत्तरी तिब्बत में बाटे, जवना के ऊँचाई  से  भी लिखल मिले ला, बाकी ई  से  ले बाटे। कौनों कौनों परबत के ऊँचाई अलग-अलग स्रोत में   से ढेर के अंतर के साथ भी मिले ला। माउंट एवरेस्ट के ऊंचाई भी  से  के बीच में लिखल मिलेले। ई सभ अनियमितता इहे बतावे लीं कि ऊँचाई के गणना में अक्सर सटीकता के बिबाद हो सके ला।

एही वजह से इहाँ लिस्ट के  से ढेर ऊंचाई वाली चोटी सभ के कभर करे वाली बनावल गइल बाटे (खाली 7000 नइखे रखल गइल)।

एह में से ज्यादातर परबत सभ हिमालय आ कराकोरम श्रेणी के हिस्सा बाड़ें जवन तिब्बत के पठार के दक्खिन आ पच्छिम में स्थित बाड़ें। वास्तव में, सगरी  से ऊँच चोटी सभ  एशिया (पूर्ब एशिया, मध्य एशिया आ दक्खिन एशिया) के एगो चौकोर बक्सा नियर क्षेत्र में मौजूद बा जवना के पच्छिमी सीमा  () में  अफगानिस्तान-पाकिस्तान बाडर पर बा, उत्तर में , (Tuōmù'ěr Fēng) () में किर्गीस्तान – जिनजियांग बाडर पर बा, पूरुब में  (Minya Konka) () के रूप में सिचुआन मे बा आ दक्खिन ओर  () के रूप में सिक्किम (भारत) – नेपाल बाडर पर बाटे।

एशिया से बाहर सभसे ऊँच चोटी अकांकागुआ () बा, जवना के एगो लिस्ट के मुताबिक 189वाँ अस्थान बाटे, थलरुपी उच्चता (टोपोग्राफिक प्रॉमिनेंस)  के हिसाब से।

उच्च एशिया के परबत सभ के नीचे कम्पोजिट उपग्रह इमेज में देखावल गइल बाटे। संख्या, लिस्ट में रैंकिंग बतावत बा। साफ-साफ देखावे खातिर कम ऊंचाई वाली चोटी जिनहन के लेबल ढेर ऊंचाई वालिन के संघे ओभरलैप करत बा, छोड़ दिहल गइल बा। बक्सा में देखावल क्षेत्र के बड़ा रूप में अलगा से देखावल गइल बाटे।




#Article 447: प्रियंका चोपड़ा (293 words)


प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra; जनम 18 जुलाई 1982) भारतीय फिलिम अभिनेत्री, गायिका आ मॉडल बाड़ी। प्रियंका सन 2000 के मिस वर्ल्ड भी चुनल गइल रहली। इनकी सफल फ़िल्मी कैरियर की माध्यम से, चोपड़ा बॉलीवुड क सबसे अधिक वेतन पावे वाली अभिनेत्रियन में से एगो हई और भारत में सबसे लोकप्रिय हस्तिन में से एगो बन गईल बाड़ी। उ सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री क एगो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और चार श्रेणी में फिल्मफेयर पुरस्कार सहित कई पुरस्कार और नामांकन प्राप्त कईले बाड़ी।

प्रियंका क जन्म जमशेदपुर में भइल रहे। लेकिन उ बरेली के आपन असली घर मानेली। उन क माता-पिता भारतीय सेना में चिकित्सक रहे लो। 13 साल की उम्र में उ एगो किशोरी के रूप में अमेरिका में अपनी चाची के साथ कुछ साल रहली। ए दौरान अमरीका की कई स्कूल में उन क पढ़ाई भइल, मेसाचुसेट्स में रहले की दौरान, उ कईगो थिएटर शो में भाग लिहली और वेस्टर्न क्लासिकल संगीत, कोरल सिंगिंग और कत्थक नृत्य सिखली। उ सन 2000 की फेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता क दूसरा विजेता रहली और ओकरी बाद उ मिस इंडिया वर्ल्ड की खिताब खातिर भाग लिहली जहाँ उनके मिस वर्ल्ड क ताज पहनावल गईल। ए सम्मान के प्राप्त करे वाली उ पाँचवां भारतीय हई। आपन स्कूल क पढ़ाई पूरा होखले की बाद उ कॉलेज में नांव लिखवले रहली लेकिन मिस वर्ल्ड बनले की बाद कॉलेज क पढ़ाई छोड़ दिहली।

प्रियंका आपन छोट भाई सिद्धार्थ सहित अपनी परिवार की साथ मजबूत रिश्ता रखले बाड़ी, उ अपनी परिवार की साथ एकही अपार्टमेन्ट की समान मंजिल प रहेली। उ अपनी पिताजी की काफी करीब रहली जिन क देहांत जून 2013 में हो गईल।

प्रियंका चोपड़ा के मिलल प्रमुख पुरस्कार आ सम्मान में - फैशन (2008) खातिर राष्ट्रीय फिलिम पुरस्कार आ चार गो फिल्मफेयर पुरस्कार:  अंदाज (2003),  ऐतराज (2004),  फैशन आ  7 खून माफ (2011) खातिर मिल चुकल बाटे।




#Article 448: तस्मान झील (278 words)


तस्मान झील () एगो प्रोग्लेशियल झील बाटे जवन तस्मान ग्लेशियर के लौटानी के कारण न्यूजीलैंड के साउथ आइलैंड पर बनल बाटे। वर्तमान में एह ग्लेशियर के लौटान के गति तेज भइल बाटे आ झील के भी अभी बिस्तार हो रहल बाटे।

सन् 70 के सुरुआत में एह इलाका में कई ठो छोट-छोट तालाब रहलें जवन ग्लेशियर के पघिलाव से बनल रहलें। 1990 ले ई सगरी आपस में मिल के तस्मान झील के रूप ले लिहलें।

तस्मान झील, तस्मान ग्लेशियर के लौटान के तेज कइले बाटे। सुरुआत में ई क्लिफ के हिस्सा के नीचे की ओर से खदरा के अइसन भइल आ क्लिफ के हिस्सा खदर के नीचे झील में गिरत गइल। हालाँकि, 2006 से, 50-60 मी के ग्लेशियर के उभार क्लिफ से बाहर झाँकत बाटे, जवन पहिले डूबल रहे आ समय समय पर एकरा से आइसबर्ग टूट के झील में गिर के पँवरत रहे लें। ग्लेशियर के काफ़ी हिस्सा के पानी के संपर्क में रहले की कारन एकरे लौटानी के गति तेज हो चुकल बाटे। 2008 में झील के बिस्तार 7 किलोमीटर लंबाई, 2 किलोमीटर चौड़ाई आ 245 मीटर के गहिराई वाला रहे जवन 2000 के बाद से लगभग डबल हो गइल रहे। संभावना ई बतावल जात बाटे की ई झील के बिस्तार बढ़ि के अगिला एक दू दशक में 16 किलोमीटर लंबाई वाला हो जाई।

तस्मान झील आ ग्लेशियर आ एकरे आसपास के पहाड़ सभ के इलाका सब माउंट कुक नेशनल पार्क के हिस्सा हवे। नाव ले के एह झील में सैर सपाटा कइल बर्तमान समय में एगो प्रमुख मनोरंजन बन चुकल बाटे।

न्यूजीलैंड आ ऑस्ट्रेलिया के ढेर सारा भूगोलीय जगह आ थलरूप की नियर इहो झील के नाँव एगो  खोजकर्ता  के नाँव पर रखल गइल बाटे।




#Article 449: प्रोग्लेशियल झील (308 words)


प्रोग्लेशियल झील () एक प्रकार के थलरूप हवे जवन हिमानी के लौटानी के समय मोरेन के पाछे पानी एकट्ठा भ गइला से बने ले। कुछ दशा में अइसन झील के निर्माण आइसोस्टेटिक खाल में बरफ के हट गइला के बाद पघिलल पानी के एकट्ठा भइला से भी हो जाला। उत्तरी गोलार्ध में अइसन झील के निर्माण बहुतायत से भइल रहे जब 10,000 बरिस पहिले आइस एज के समापन भइल।

कुछ दशा में, अइसन झील सह समय के साथ सूख गइल आ क्वार्टरनरी गर्मी के चलते इन्हन के पानी भाप बनके उड़ि गइल। बाकी कुछ जगह पर जइसे की  आ  में, अचानक इन्हन के बाँध टूटल आ आसपास के इलाका में बाढ़ भी आ गइल। वाशिंगटन के आसपास के इलाका अइसने प्राचीन बाढ़ में खदर के बहले के सबूत देखावत बाटे

ग्रेट ब्रिटेन में, लैपवर्थ झील, हैरिसन झील आ पिकरिंग झील सभ प्रोग्लेशियल झील के उदाहरण रहलीं। श्रोपशायर में  आ  में  अइसने प्रोग्लेशियल झील के पानी के बाँध से ऊपर आ के अचानक बहे शुरू हो के कटाव करि के बनावल गलियारा के उदाहरण बा।

The receding glaciers of the tropical Andes have formed a number of proglacial lakes, especially in the  of Peru, where 70% of all tropical glaciers are. Several such lakes have formed rapidly during the 20th century. These lakes may burst, creating a hazard for zones below. Many natural dams (usually moraines) containing the lake water have been reinforced with safety dams. Some 34 such dams have been built in the  to contain proglacial lakes.

प्रोग्लेशियल झील कौनों ऐतिहासिके घटना ना हवे बलुक हाल के समय में भी अइसन झील बनल बाड़ी। एकर एक ठो उदाहरण न्यूजीलैंड के तस्मान झील बाटे जवन हाल में बनल बा आ अभिन ले एकर बिस्तार हो रहल बाटे। ई झील 1990 के दशक के आसपास बनल आ सन् 2000 से 2010 के बीच एकर बिस्तार लगभग दुगुन्ना हो गइल।




#Article 450: औराकी/माउंट कुक नेशनल पार्क (271 words)


औराकी/माउंट कुक नेशनल पार्क () न्यूजीलैंड के साउथ आइलैंड (दक्खिनी दीप) में मौजूद कस्बा ट्वीजे के लगे स्थित बाटे। औराकी/माउंट कुक, जवन की न्यूजीलैंड के सबसे ऊँच परबत हवे आ माउंट कुक विलेज एही पार्क के अंदर मौजूद बाड़ें। एह इलाका के सरकारी तौर पर अक्टूबर 1953 में राष्ट्रीय पार्क के रूप में अधिसूचित कइल गइल रहे आ एह में कुछ अइसन संरक्षण क्षेत्र (रिजर्व) बाड़ें जिनहन में से कुछ के स्थापना त 1887 में हो गइल रहे ताकि इलाका के महत्व वाली बनस्पति आ लैंडस्केप के बचावल जा सके।

पार्क के रकबा 700 km2 से कुछ अधिके बाटे। एकरे 40% एरिया पर ग्लेशियर बाड़ें, जिनहन में औराकी/माउंट कुक के ढाल पर मौजूद तस्मान ग्लेशियर सभसे प्रमुख बा।

न्यूजीलैंड में 3,000 मीटर से ढेर ऊँचाई वाली 20 गो चोटी बाड़ी जिनहन में खाली माउंट एस्पायरिंग के छोड़ दिहल जाय त बाकी सगरी एही पार्क के अंदर स्थित बाड़ी। इन्हन में सबसे महत्वपूर्ण माउंट कुक 3753 मीटर ऊँच बाटे। अउरी बाकी सभ में माउंट तस्मान, माउंट हिक्स, माउंट सेफ्टन आ माउंट एली डि बौमन इत्यादि बा।  दक्खिनी आल्प्स के परबत सभ अपेक्षानुसार नया बाड़ें, इन्हन के उमिर दस मिलियन बरिस से कम बा आ अभिन ले निर्माण हो रहल बाटे। चोटी के ऊचाई बढ़े के गति लगभग 5–10 mm सालाना बाटे। ई अनुमान लगावल गइल बाटे की अबले लगभग 25 किमी के उठान हो चुकल बाटे, हालाँकि, कटाव से ई घटत रहे ला। 

पार्क के सीमा  से मेन बिभाजक (एगो प्राकृतिक सीमा) द्वारा बने ले आ एक साथ मिल के दुनों पार्क  South Westland बिस्व धरोहर स्थल के निर्माण करे लें, जवना के एकरे गजब के प्राकृतिक महत्व की खातिर जानल जाला।




#Article 451: तस्मान ग्लेशियर (220 words)


तस्मान ग्लेशियर () न्यूजीलैंड के कई ठो ग्लेशियर सभ में से सबसे बड़हन ग्लेशियर हवे जवन दक्खिनी आल्प्स से निकल के दक्खिन-पूरुब के दिसा में मैकेंजी बेसिन के ओर बहे ला। ई न्यूजीलैंड के साउथ आइलैंड पर स्थित बाटे आ न्यूजीलैंड के सबसे लंबा ग्लेशियर भी हवे।

 के लंबाई वाला ई हिमानी न्यूजीलैंड के सबसे लंबा हिमानी बाटे। ई अधिकतम It is as much as  चौड़ा आ  मोटाई लिहले, पूरा तौर पर माउंट कुक नेशनल पार्क के अंदर स्थित बाटे। ई हिमानी लगभग  पर बिस्तार लिहले बाटे आ ई समुंद्र तल से  ऊँचाई से शुरू होले। जाड़ा में  मोट बरफ पड़े ला आ गर्मी में पघिलाव के बाद  बरफ बच जाला जवना से ई ग्लेशियर रिचार्ज होला।

एकरे पूरबी किनारे पर माउंट तस्मान आ माउंट कुक परबत बाड़ें।

सन् 1990 के बाद से ई ग्लेशियर में  सालाना के दर से लौटान भइल बाटे आ हाल में एह में तेजी भी दर्ज कइल गइल बाटे। जवन अब  सालाना नापल गइल बा। इहो गणना कइल गइल बा की अबसे 10 से 19 बरिस के बाद ई ग्लेशियर पूरा खतम हो जाई आ एकरे अंतिम छोर पर मौजूद प्रोग्लेशियल झील, तस्मान झील अपने अधिकतम बिस्तार वाली हो जाई। 1973 ले ई ग्लेशियर के कौनों टर्मिनल झील ना रहे आ 2008 ले आवत आवत तस्मान झील  लंबी,  चौड़ाई वाली, आ  गहिरा झील हो गइल।




#Article 452: हुडेड पिट्टा (406 words)


हुड वाला पिट्टा (, ; Pitta sordida) पिट्टा परिवार के एक ठो  चिरई बाटे जवन पूरबी आ दक्खिनी पूरबी एशिया में आ समुंद्र तटीय दक्खिनी पूरबी एशिया में पावल जाले। ई एह इलाका के जंगल से ले के बाग बगीचा आ खेती वाला इलाका सभ में मिले ले। लेप्चा भाषा में एकरा के फित्तम् फ़ो कहल जाला।

ए चिरई के लंबाई 16 से 19 सेंटीमीटर ले हो सके ले आ वजन लगभग 42 से 70 ग्राम ले होला। ई चिरई कई प्रकार के किरौना आ लार्वा खाले आ रसदार फल भी खाले। इन्हन के मिलन समय फरवरी से अगस्त ले होला (भारत में जून से अप्रैल)जवना दौरान ई जमीन पर आपन खतोना बनावे ले आ नर आ मादा दुनों मिल के बच्चा सब के देखभाल करे लें। ई अपने निवास क्षेत्र के बहुत महत्व देले आ इन्हन के आवाज मधुर (क्वीक-क्वीक) होले, जवन कबो कबो रात भर चले ले।

ई चिरई चमकीला रंग से ले के हल्का मटमइल निलछाहूँ-हरा रंग के हो सके ले। एकरे मूंडी के रंग करिया होला आ टोपीदार लउके ला एही से एकरा के हुड वाला पिट्टा भी कहल जाला। मूंडी के ऊपर भूरा रंग के निशान भी कबो कबो होला। बाकी शरीर नीलाहूँ हरियर होला। पूँछ के रंग करिया होला जवना के छोर पर नीला रंग भी हो सकेला। पिट्टा जाति के बाकी चिरई सभ नियर एकर पोंछ बहुत बाहर निकलल ना होले बलुक बहुत छोट होला।

पूरबी आ दक्खिनी पूरबी एशिया में आ समुंद्र तटीय दक्खिनी पूरबी एशिया में पावल जाले। ई एह इलाका के जंगल से ले के बाग बगीचा आ खेती वाला इलाका सभ में मिले ले।

भारत में ई चिरई हिमालय के तराई वाला इलाका आ उत्तर प्रदेश से ले के नीचला बंगाल ले, आ बंगलादेश आ बर्मा में पावल जाले।

आमतौर पर ई चिरई जमीन पर छोट किरौना आ लार्वा के शिकार करे ले। पतझड़ वाला बन में ई पतई के ढेर में टकटोर के किरौना खोजे ले। भारत में इन्हन के प्रजनन काल (बच्चा देवे के समय) अप्रैल से जून होला आ ई आमतौर पर बांस के पतई के गोला निअर इकट्टा क के जमीन पर खतोना बनावे ले। एक बेर में चार से पाँच अंडा देले। नर आ मादा दुनों मिल के बच्चा के पोसे लें।

पकड़ के रखले पर आम तौर पर ई बाकी साथी चिरइन के साथ घुलमिल जाले बाकी प्रजनन समय में दूसरी पिट्टा सभ पर लड़ाकू हो सकेले।
लंदन चिड़ियाघर में ई चिरई लंबा गलियारा नियर हिस्सा में रखल जाले।




#Article 453: आइएसबीएन (350 words)


आइ॰एस॰बी॰एन॰ या पूरा नाँव इंटरनेशनल स्टैंडर्ड बुक नंबर () एगो यूनीक  नंबर होला जवन किताब के पहिचानक होला।

हर किताब के अलग-अलग संस्करण (रिप्रिंट के ना) के एक ठो अकेल आ एकलौता आइ॰एस॰बी॰एन॰ दिहल जाला। उदाहरण खातिर कौनों किताब अगर पेपरबैक, हार्डकवर आ ई-बुक के रूप में छपे तब तीनों के अलग-अलग आइ॰एस॰बी॰एन॰ होखी। ई तेरह अंक के लंबाई वाला संख्या होला अगर 1 जनवरी 2007 के बाद दिहल गइल होखे आ 10 अंक के होला अगर एह से पहिले दिहल गइल होखे। एह निसानी देवे के तरीका में अलग-अलग देस में भी कुछ अंतर मिले ला आ प्रकाशन संस्था अपना क्षेत्र में केतना नामी बाते एहू के भी धियान में रखल जाला। 

आइ॰एस॰बी॰एन॰ के फ़ायदा ई बाटे कि एकरा द्वारा दुनियाँ में कहीं छपल किताब के एक ठो बिसेस पहिचान हासिल हो जाले जेकरा मदद से एकरा के खोजल आ एकर जानकारी साझा करे में सुबिधा हो जाला। 

एकर सुरुआती रूप 1967 में लागू 9-अंक के स्टैंडर्ड बुक नंबर (एसबीएन) रहल। 10 अंक के लंबाई वाला कोड के सुरुआत अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संस्था (ISO) द्वारा बनावल गइल आ पहिली बेर ISO 2108 के रूप में छपल।

एही के नियर एक ठो पहिचानक जर्नल आ पत्रिका सभ खातिर भी बा जेकरा के आई॰एस॰एस॰एन॰ (ISSN) कहल जाला, आ संगीत से संबंधित चीज के पहिचानक आई॰एस॰एम॰एन॰ (ISMN) होला।

स्टैंडर्ड बुक नंबरिंग (SBN) कोड एक ठो नौ अंक के कामर्शियल किताब पहिचानक हवे जेकरा के ट्रिनिटी कॉलेज, डब्लिन के एमेरिटस प्रोफ़ेसर, गौर्डन फोस्टर ईजाद कइलेन, 1965 में आ ई किताब बेचे वाला आ स्टेशनरी बेचे वाला लोग खातिर बनावल गइल रहल। 1967 में यूनाइटेड किंगडम में डेविड वाइटकर आइएसबीएन कंफिगरेशन पहिचान बनवलें (जिनके आइएसबीएन के पिता कहल जाला) आ 1968 में अमेरिका में एमरी कोल्टे  द्वारा बनावल गइल जे बाद में अमेरिकी आइएसबीएन एजेंसी के डाइरेक्टर भी बनलें।

एसबीएन कोड के पाहिले 0 जोड़ के एकरा के आइएसबीएन बनावल जा सके ला, उदाहरण खातिर, किताब Mr. J. G. Reeder Returns के दुसरा संस्करण होडर प्रकाशन द्वारा 1965 में छपल आ एकर  – 340 प्रकाशक के पहिचान, 01381 सीरियल नंबर, आ 8 जाँच संख्या हवे। एकरा के बदल के ISBN 0-340-01381-8 बनावल जा सके ला।




#Article 454: साउथ आइलैंड (167 words)


साउथ आइलैंड चाहे ते वाइपोनामू is the larger of the two major islands of New Zealand, the other being the smaller but more populous North Island. It is bordered to the north by Cook Strait, to the west by the Tasman Sea, and to the south and east by the Pacific Ocean. The South Island covers  and is influenced by a temperate climate.

As it has a 32% larger landmass than the North Island, it is sometimes referred to as the mainland of New Zealand, especially by South Island residents; however, only % of New Zealand's  million inhabitants live in the South Island. In the early stages of European (Pākehā) settlement of the country, the South Island had the majority of the European population and wealth due to the 1860s gold rushes. The North Island population overtook the South in the early 20th century, with 56% of the population living in the North in 1911, and the drift north of people and businesses continued throughout the century.




#Article 455: पिट्टा (208 words)


पिट्टा उष्णकटिबंधीय एशिया आ ऑस्ट्रेलिया के पैसराइन चिरई सभ  के परिवार हवे जवना के पिट्टीडाई (Pittidae) के नाँव से जानल जाला। इनहन के कुछ प्रजाति अफिरका में भी पावल जालिन। पिट्टा सभ, आमतौर पर एकही नियर आकार-प्रकार आ रंगरूप अउरी आदत वाला होलें। सन् 2009 में इन्हन के तीन गो जाति (genus) में बाँटल गइल।  जीनस,  आ  पिट्टा नाँव, भारत के आंध्रप्रदेश में बोलल जाये वाली भाषा तेलुगु में हवे जवन सभ जगह प्रचलित हो गइल। पिट्टा के आकार आमतौर पर  लंबाई वाला, बड़हन गोलाई वाला (stocky), आ लंबा टांग वाला होलें। इनहन के पोंछ बहुत छोट होले। सगरी त ना, बाकी अधिकतर पिट्टा सभ चमकीला रंग के होलें।

आमतौर पर इ चिरई जंगल के निचला हिस्सा, जमीन के नजदीक, में रहे ली। इन्हन के कई ठे प्रजाति माइग्रेटरी (सीजन के हिसाब से एक जगह से दूसर जगह प्रवास करे वाली) भी होलीं।

पिट्टा के कई ठो प्रजाति बिलुप्त होखे के कगार पर भी बाड़ी। इन्हन में , के आइयूसीएन के लाल सूची में खतरा में की श्रेणी में रखल गइल बाटे। अउरी आठ गो प्रजाति खतरा के संभावना वाली (vulnerable) भी बतावल गइल बाड़ी। जंगल के तेजी से भइल बिनास इन्हन के आवास में कमी कइले बाटे, जवन इन्हन के ऊपर खतरा के मूल कारण बनल बा।




#Article 456: पासराइन (101 words)


पैसराइन अइसन चिरई सभ के कहल जाला जवन पैसरीफॉर्म्स नानाव के  कुल खानदान के होखे लीं। एह पैसराइन के अंदर चिरई सभ के लगभग आधा प्रजाति सभ आ जालिन। इन्हन के एगो प्रमुख पहिचान इन के पंजा होला जवना में तीन गो हिस्सा आगे की ओर आ एगो पाछे के ओर होला। अबके एह समूह के 5,000 ले प्रजातिन जे पहिचान हो चुकल बाटे।

अंगरेजी नाँव passerine आ Passeriformes बैज्ञानिक नाँव Passer domesticus से लिहल गइल बाटे जवन गौरइया के बैज्ञानिक नाँव हवे आ खुद लातीनी भाषा के passer से लिहल हवे जवना के अर्थ गौरइया या एकरे नियर चिरई होला।




#Article 457: तारा (202 words)


तारा चाहे जोन्ही (, ) प्लाज्मा के बनल चमकदार आकाशी पिंड हवें जे अपने खुद के गुरुत्व के कारण छितराये से बचल रहे लें जबकि इनहन के केंद्र में थर्मोन्यूक्लियर फ्यूजन के कारण भारी मात्रा में ऊर्जा रिलीज होखे ले आ बाहर की ओर बल लगावे ले। पृथिवी के सभसे नजदीकी तारा सुरुज बाटे जवन हमनी के सौर मंडल के सेंटर में बाटे, पृथ्वी आ बाकी ग्रह सुरुज के चक्कर लगावे लें। हमनी के सौर मंडल के बाहर सभसे नगीचे मौजूद तारा प्रॉक्सिमा सेंचुरी बा। पुराना समय से बिद्वान आ बैज्ञानिक लोग एह तरई सभ के निरखत आ रहल बा आ इनहन के छोट-बड़ झुंड में कल्पित क के नक्षत्र (नछत्तर) सभ के रूप में नाँव भी दिहले बा। कुछ बेसी चमकदार तारा सभ के आपन खुद के नाँव भी बा। हालाँकि, अइसन तारा सभ भी आकाश में बाड़ें जिनहन के चमक एतना कम बाटे कि ई खाली आँख से ना देखलाई पड़े लें। हमनी के अपने आकाश गंगा नाँव के गैलेक्सी के कुछ तारा सभ के देख पावे लीं जे एह गैलेक्सी में हमनी के नगीचे बाड़े। एगो अनुमान के मोताबिक ब्रह्मांड में कुल लगभग 300 सेक्सटिलियन () तारा बाड़ें जिनहन में से ज्यादतर दूरी के कारण देखलाई ना पड़े लें।




#Article 458: सुपरनोवा (193 words)


सुपरनोवा एक ठो ब्रह्मांडीय घटना बा जवन कौनों बिसाल तारा के जीवन के अंत में ओकरे बिस्फोट के रूप में घटित होले। एह घटना में एतना अँजोर आ ऊर्जा निकलेला कि कुछ समय खातिर पूरा गैलेक्सी के प्रकाश से ढेर प्रकाश ई अकेले पैदा क देला।

सुपरनोवा, नोवा से ढेर एनर्जेटिक होला। सुपरनोवा शब्द लातीन भाषा के नोवा से बनल बाटे जेकर मतलब नया होला। 1572 ई॰ में टाइको ब्राहे एगो सुपरनोवा के बिस्फोट देखलें आ एह नया किसिम के तारा ले अपने किताब ला स्तेल्ला नोवा में बर्णन कइने। एही के बाद एकर नाँव नोवा पड़ि गइल।

पिछला एक हजार बरिस में खाली तीन गो सुपनोवा देखल गइल बा जवना में आखिरी 1604 के केपलर तारा (एसएन 1604) रहे, बाकी दू गो पुरनका के छाड़न खोजल गइल बाटे; हालाँकि दूरबीन बिधि से अउरी दूसरी गैलेक्सी सभ में इ घटना देखल गइल बाटे। 

एकरे अन्दर बिस्फोट के बाद ई लगभग 30,000 किलोमीटर प्रति सेकेंड (प्रकाश के वेग के 10%) के दर से आकाशीय सामग्री के अपना से दूर फेंके ला। एह से एगो शॉक-वेव के निर्माण हो जाला आ आसपास काफ़ी दूर तक पदार्थ छितरा जाला। अइसना पदार्थ के सुपरनोवा छाड़न कहल जाला।




#Article 459: स्पेस (153 words)


स्पेस () तीन-आयामी (3-D) बिस्तार हऽ जेकर कवनो सीमा नइखे आ एही में सगरी चीज आ घटना सभ मौजूद बा; आपस में कौनो-न-कौनो सापेक्षिक दूरी पर आ एक दूसरा से कौनों-न-कौनों सापेक्षिक दिसा में ई सगरी चीज आ घटना के स्थिति बा।

अक्सरहा, भौतिक स्पेस के तीन गो रेखीय डाइमेंशन में बिस्तार लिहले मानल जाला। हालाँकि भौतिकी के जानकार लोग एही में समय यानी टाइम के भी जोड़ लेला आ अनंत-असीम स्पेसटाइम के संकल्पना (कांसेप्ट) के रूप में एकर बर्णन करे ला। स्पेस के कांसेप्ट के मूलभूत कांसेप्ट मानल जाला आ ई भौतिक ब्रह्मांड के समझे खातिर मूल चीज मानल जाला। हालाँकि, दार्शनिक लोग में एह बात पर अभिनो ले बिबाद बा कि ई स्पेस अपना में खुद कौनो इकाई (एंटाइटी) हवे, अलग-अलग इकाई सभ के बीचा में आपसी संबंध मात्र हवे, भा एगो कांसेप्चुअल फ्रेमवर्क के हिस्सा भर हऽ।

संस्कृत में स्पेस के दिक् कहल जाला आ स्पेसटाइम के दिक्काल कहल जाला।




#Article 460: ब्लैक होल (600 words)


 
ब्लैक होल () एगो ज्यामितीय रूप से परिभाषित, स्पेस-टाइम के अइसन क्षेत्र बा, जवना के अंदर एतना ढेर गुरुत्वाकर्षण होला के ओह में से कण या इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक रेडियेशन (प्रकाश) भी बाहर न निकल सके। रिलेटिविटी के जनरल थियरी ई बतावे ले की अगर द्रब्यमान भरपूर मात्रा में कांपैक्ट हो जाय तब ऊ स्पेस-टाइम के रूप बदल के ब्लैक होल के निर्माण करे में सक्षम हो सके ला। अइसन सीमा जहाँ से कौनों चीज फिर बहरें न निकल सके इवेंट होराइजन कहल जाला। भले एह इवेंट होराइजन के भारी परभाव एकरा के क्रास करे वाला चीज के दशा-दिशा पर पड़त होखे, कौनों लोकल फीचर इहाँ से हमनी के डिटेक्ट ना हो पावे ला। कई परकार से, ब्लैक होल सभ आदर्श ब्लैकबॉडी के रूप में बेहवार करे ला, मने की कौनों प्रकाश के रिफ्लेक्ट ना करे ला। हालाँकि, वक्राकार स्पेसटाइम के क्वांटम फ़ील्ड थियरी ई प्रेडिक्ट करे ले की इवेंट होराइजन से हॉकिंग रेडियेशन निकले ला जवन की ओही स्पेक्ट्रम में होला जवन की कौनों ब्लैकबॉडी अपना द्रब्यमान के उल्टा अनुपात वाला तापमान में करी। अब चूँकि ब्लैकहोल सभ में द्रब्यमान एतना बेसी होला की अइसन तापमान एक केल्विन के खरबवाँ हिस्सा भर होखे ला आ अइसन रेडियेशन के डिटेक्ट कइल लगभग असंभव बाटे।

Objects whose gravitational fields are too strong for light to escape were first considered in the 18th century by John Michell and Pierre-Simon Laplace. The first modern solution of general relativity that would characterize a black hole was found by Karl Schwarzschild in 1916, although its interpretation as a region of space from which nothing can escape was first published by David Finkelstein in 1958. Black holes were long considered a mathematical curiosity; it was during the 1960s that theoretical work showed they were a generic prediction of general relativity. The discovery of neutron stars by Jocelyn Bell Burnell in 1967 sparked interest in gravitationally collapsed compact objects as a possible astrophysical reality.

Black holes of stellar mass are expected to form when very massive stars collapse at the end of their life cycle. After a black hole has formed, it can continue to grow by absorbing mass from its surroundings. By absorbing other stars and merging with other black holes, supermassive black holes of millions of solar masses () may form. There is consensus that supermassive black holes exist in the centers of most galaxies.

The presence of a black hole can be inferred through its interaction with other matter and with electromagnetic radiation such as visible light. Matter that falls onto a black hole can form an external accretion disk heated by friction, forming some of the brightest objects in the universe. If there are other stars orbiting a black hole, their orbits can be used to determine the black hole's mass and location. Such observations can be used to exclude possible alternatives such as neutron stars. In this way, astronomers have identified numerous stellar black hole candidates in binary systems, and established that the radio source known as Sagittarius A*, at the core of the Milky Way galaxy, contains a supermassive black hole of about 4.3 million solar masses.

On 11 February 2016, the LIGO collaboration announced the first direct detection of gravitational waves, which also represented the first observation of a black hole merger. , eleven gravitational wave events have been observed that originated from ten merging black holes (along with one binary neutron star merger). On 10 April 2019, the first ever direct image of a black hole and its vicinity was published, following observations made by the Event Horizon Telescope in 2017 of the supermassive black hole in Messier 87's galactic centre.




#Article 461: भौतिक ब्रह्मांड बिज्ञान (274 words)


भौतिक ब्रह्मांड बिज्ञान या फिजिकल कॉस्मोलॉजी (), ब्रह्मांड में मौजूद बड़ा पैमाना के पिण्ड, संरचना आ गतिक चीज सभ के अध्ययन करे वाला बिसय बा आ ई ब्रह्मांड के बारे में आधारभूत सवाल सभ के उत्तर खोजे के कोसिस करे ला जइसे की ब्रह्मांड के उत्पत्ती, संरचना, क्रम-बिकास आ अंतिम भबिस्य का होखी।
मनुष्यता के इतिहास के ज्यादातर समय में ई बिज्ञान दर्शन के शाखा मेटाफिजिक्स, आ धरम के हिस्सा रहल हउवे। कॉस्मोलॉजी के बिज्ञान के रूप में अध्ययन कोपरनिकस के सिद्धांत के बाद शुरू भइल जेकरा बाद ई माने जाये लागल कि ब्रह्मांड के सगरी पिंड एकही किसिम के नियम के अनुपालन करे लें। एकरे बिकास में न्यूटन के सिद्धांत के योगदान भी रहल, जवन ई नियम सब के समझ बढ़ावे शुरू कइलस।

एकर बर्तमान स्वरूप, 1915 में आइंस्टीन के जनरल थियोरी ऑफ रिलेटिविटी के साथ सुरू होला। बिसय के बिकास के रूप में बड़हन घटना हबल के द्वारा एह खोज से भइल की हमनी के गैलेक्सी, आकाशगंगा के बाहर भी बहुत सारी बड़े बड़े गैलेक्सी बहुतायत में बा। एकरे बाद वेस्तो स्लिफर नियर लोग ई बतावल की ब्रह्मांड में बिस्तार हो रहल बाटे।

एह सभ खोज के बाद जॉर्ज लैमेतियर के द्वारा बिग बैंग के थियरी अस्थापित भइल। बिग बैंग आज सभसे ढेर प्रचलित मॉडल बाटे हालाँकि कुछ अन्य रिसर्चर लोग दूसर बैकल्पिक मॉडल साबित करे में जुटल बा लोग; बाकी ज्यादातर बैग्यानिक लोग ई स्वीकार करे ला की बिग बैंग के थियरी ब्रह्मांड के नीक ब्याख्या करे में सक्षम बाटे।

कॉस्मोलौजी के सहायता में अन्य कई बिसय आ शाखा के योगदान बाटे - जिनहन में पार्टिकल फिजिक्स, एस्ट्रोफिजिक्स, जनरल रिलेटिविटी, क्वांटम मैकेनिक्स आ प्लाज्मा फिजिक्स के नाँव गिनाव्ल जा सकत बाटे।




#Article 462: समाज (296 words)


एगो समाज अइसन व्यक्ति लोग के समूह होला जे लोग आपस में सामाजिक अंतर्क्रिया में शामिल होला। दुसरा रूप में समाज कौनों भूगोलीय क्षेत्र बिसेस में रहे वाला लोग के अइसन समूह हवे जे एक नियर भाव-बिचार, रहन-सहन आ संस्कृति के अन्दर रहि के आपस में संबंधित होला, हालाँकि कौनों बड़हन समाज में एकरे अन्दर छोट-छोट समूह भी पावल जा सके ला।

समाज के बिसेसता सभ में एकर रीति-रिवाज आपसी बेहवार के तरीका निश्चित करे ला; समाज के कार्य-प्रणाली एकरा के संस्था के रूप देला आ ब्यवस्था बनावे के काम करे ला; अधिकार आ जिम्मेवारी के बँटवारा एकरे काम करे के ढंग आ व्यवस्थित रूप से बनल रहे में मदद करे ला; आपसी सहजोग एकरे पैदाइश आ बनल रहे के मूल आधार होला आ समूह के लोग पर कुछ नियंत्रण रखे ला आ कुछ तरह के स्वतंत्रता भी देला।

एह तरीका से, समाज, लोगन के समूह द्वारा आपसी सहजोग के आ आपस में बेहवार के निश्चित तरीका आ रूप देवे वाली एगो संस्था हवे जवन सामाजिक संबंध के जाल पर खड़ा बाटे।

संरचनावादी बिचारधारा में समाज के निरूपण अइसन सांस्कृतिक अवसंरचना भा आर्थिक, सामाजिक, औद्योगिक अवसंरचना के रूप कइल जा सकत बाते जवन लोगन के एकट्ठा भइले से बनल बा, फिर भी एकरा से अलग कुछ बा। एह बिचार के अनुसार समाज खाली दूसरे लोग के साथ आचार बेहवार पर आधारित न होला बलुक लोगन के अपने भौतिक पर्यावरण आ अपने से अन्य लोग के साथ संबंध से बनल संरचना होला।

समाज के अध्ययन करे वाला बिसय समाज शास्त्र हवे। समाज मनोबिज्ञान भा सामाजिक मनोबिज्ञान नाँव के बिसय समाज में लोग के आपसी आदान-प्रदान के आ संबंध के मनोबिज्ञान के ब्याख्या करे ला। एकरे आलावा समाज कई ठो अउरी संस्था सभ के मूल इकाई भी होला आ राजनीति आ अंतर्राष्ट्रीय संबंध में महत्व के बिसय होला।




#Article 463: बिहिरी (841 words)


बिहिरी, बहिरी या बहरी(, पेरेग्रीन फाल्कन; बैज्ञानिक नाँव:Falco peregrinus) चिरइन के बाज परिवार के चिरई बा।
ई एक ठो शिकारी चिरई हवे।
बड़हन कउआ के आकार के ई बाज, निलछाहूँ-स्लेटी रंग के पीठ आ सफेद धारीदार पेट वाला, काला मूंडी वाला आ मोंछदार होला। खास चिरइन के शिकार करे वाली अउरी अपने नियर शिकारी पक्षिन के तरे इहो चिरई लैंगिक बिसम रुपी होले आ मादा के आकर नर के आकार से पर्याप्त बड़हन होला।
बिहिरी के एकरे तेजी खातिर जानल जाला, काहें की अपने शिकार के झपट के पकड़े खातिर गोता लगावत घरी एकर स्पीड  से ढेर होला, इहे बिसेसता एकरा के धरती के सभसे तेज जानवर बना देले। नेशनल ज्योग्राफिक के टीवी प्रोग्राम के अनुसार अबले बिहिरी के सभसे तेज गति  नापल जा चुकल बाटे।

बिहिरी के प्रजनन क्षेत्र आर्कटिक टुंड्रा से ले के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र तक बिस्तार लिहले बाटे। खाली ध्रुवीय प्रदेश आ बहुत ऊँच पहाड़ी इलाका के आ उष्णकटिबंधीय वर्षावन के छोड़ के, ई धरती पर लगभग हर जगह पावल जाले। बर्फ़ से तोपाइल न रहे वाला जमीनी हिस्सा में खाली न्यूजीलैंड अइसन जगह बा जहाँ ई ना पावल जाले। ई बिसेसता के कारण ई दुनिया के सभसे ढेर बिस्तार क्षेत्र वाली शिकारी चिरई भी बाटे आ दुनिया के सभसे ढेर पावल जाए वाली चिरई सभ में से गिनल जाले। एक्सपर्ट लो एह चिरई के 19 से 19 गो ले उपप्रजातिन के पहिचान करे ला जवन क्षेत्र आ रंग रूप के अंतर के आधार पर अलगावल जालीं; इहो बिबाद के बिसय बा की Barbary falcon के दू गो उपप्रजाति Falco peregrinus के नाँव से आ F. pelegrinoides. कहल जाला अलग बाड़ी की नाहीं। ई निर्धारित कइल गइल बा की इनहन में जेनेटिक बिसमता मात्र 0.6–0.8 % होले।

एकरे भोजन में आमतौर पर माझिल आकार के चिरई होलीं बाकी ई कबो-कबो छोट मैमल, छोट रेंगे वाला जंतु आ किरौना भी खा लेला। साल भर की उमिर में ई बच्चा पैदा करे लायक वयस्कता पा जाला आ ओकरे बाद जीवन भर प्रजनन करे ला। ई सामान्य रूप से  में रहे ला, जवन ऊँच क्लिफ़ के किनारा पर होला या फिर नया ज़माना में मनुष्य के बनावल ऊँच बिल्डिंग में भी हो सकेला। कुछ इलाका सभ में ई चिरई खतरा में आ गइल रहे जहाँ कीटनाशक के बहुत इस्तेमाल होखे, खासतौर पर डीडटी के। सत्तर के दश में डीडीटी पर प्रतिबंध लगले के बाद से एकरे संख्या में बढ़ती देखल गइल बाटे आ ई प्रजाति ओह इलाका सभ में भी खतरा से बाहर आ रहल बाटे; एकरे अलावा इन्हन के घोंसला बनावे के जगह के भी बड़ा पैमाना पर संरक्षित करे के कोसिस भइल बाटे।

बिहिरी के शिकार करे खातिर बाज पोसे वाला लोग बहुत महत्व देला काहें की ई बहुत तेज आ मजबूत होले आ शिकार करे में निपुण होले। हाल में ई के पकड़ के कैद कर के भी बच्चा पैदा करावे में सफलता मिले से एह चिरई के ई इस्तेमाल बढ़ल बाटे। ई आमतौर पर छोट-बड़, लगभग हर तरह के शिकार (चिरई) के पकड़े में प्रभावी होखे ले।

बिहिरी, बहिरी या बहरी के रूप में एकर कई ठो उच्चारण प्रचलित बाटे जवना में हिंदी में बहरी सबसे प्रचलित बाटे। आमतौर पर ई अरबी के बहर शब्द से उत्पन्न मानल जाला। दूसरे अनुमान के मुताबिक़ ई संस्कृत के वि-हर्तु, वि-हारि या वि-हन्त्री (जे चिरई के मारे) से उत्पन्न हो सकेला या फिर वि-हरि (वीनां वीषु वा हरिः - पक्षी में सिंह की नियर)।

हिंदी में बहरी शब्द एह चिरई खातिर आ एकरे एक ठो नजदीकी भाई-बंधु शाहीन बाज खातिर भी प्रयोग होला। तुरमुती, लगर आ खेरमुतिया तीन गो प्रकार के बहरी बतावल गइल बाटे।

संस्कृत में एकर अउरी दूसर नाँव शालिव आ सारिम बतावल गइल बाटे, वैदिक शब्द तक्ववी आ क्षिप्रश्येन भी एही के होखला के अनुमान लगावल गइल बाटे। हालाँकि तक्ववी नाँव एकरे नजदीकी प्रजाति, शाहीन के भी हो सकेला। एकरे अलावा एकर अउरी संभावित नाँव नीलच्छद श्येन (कल्पद्रुमकोष में) आ धूमिका (चरकसंहिता में) भी बाटे।

एकर अंगरेजी आ बिग्यानिक नाँव पेरेग्रीन (peregrine) के मतलब बाहरी (comes from abroad) होला। ई नाँव एकरे पुरा उत्तरी गोलार्ध में प्रवास करे के समय पकड़ल जाए के कारण पड़ल हवे, एकरा के घोंसला से ना पकड़ल जाला।

बिहिरी के शरीर के लंबाई  आ पाँख के फइलाव  होला। नर आ मादा, दुनों के रंग-रूप plumage एक्के नियर होला, लेकिन बाकी शिकारी चिरइन नियर बिहिरी भी साइज में लैंगिक बिसमरुपी होले आ मादा के आकार नर के तुलना में 30% बड़हन होला। नर के वजन  होला आ मादा के वजन  होला। ज्यादातर उपप्रजातिन में, नर के वजन  से कम होला आ मादा के वजन  से ढेर होला, नर से डेढ़ गुना वजन वाली मादा के साथ भी मिलन होखत देखल जाला। बिहिरी के स्टैण्डर्ड नाप में: पाँख (wing chord) , पोंछ  आ tarsus  के होला।

बिहिरी Falco peregrinus के कई ठे उपप्रजाति पहिचल गइल बाड़ी, इन्हन में 1994 ले 19 गो के स्वीकृति मिल चुकल रहे आ, में  जवन कनारी दीप पर आ उत्तरी अफिरका के तटीय भाग में पावल जाले, के पेरेग्रीन फाल्कन Falco peregrinus, के उपप्रजाति मानल गइल बा न की अलग F. pelegrinoides के रूप में। 19 गो उपप्रजाति सभ के बिस्व के नक्शा पर बितरण नीचे दिहल जात बाटे:




#Article 464: जानवर (134 words)


जानवर, जनावर या प्राणी () बहुकोशिकीय, यूकैरियोटिक जीवधारी बा जवन एनिमेलिया किंगडम (प्राणी जगत) के अंतर्गत आवेलें। सगरी जानवर गमनशील होलें, माने की चल फिर सके लें। वयस्क भइला पर जानवर के शरीर एगो स्थाई रूप ले लेला, हालांकि, कुछ जानवर सभ में बाद में भी बदलाव होत रहे ला।
सगरी जानवर हेट्रोट्रॉफ होलें, माने की, जिंदा रहे खातिर दूसरे जीवधारी खा के पचावे के परेला या कौनों दूसरे जीवधारी के उत्पाद के खा के पचावे लें।

जानवर के उत्पत्ति पृथ्वी पर अब से लगभग 542 मिलियन (5420 लाख) बरिस पहिले, कैम्ब्रियाई बिस्फोट के समय भइल रहे। इनहन के कई बिभाग में बाँटल जाला जवना में प्रमुख बाटें: वर्टीब्रेट (चिरई, मैमल, एम्फिबियन, रेप्टाइल, मछरी); मोलस्कस (क्लैम्स, ऑइस्टर्स, ऑक्टोपस, स्क्विड, घोंघा); आर्थोपोड्स (मिलिपेड, सेंटीपीड, किरौना, मकड़ी, बिच्छी, खेखड़ा, लोबस्टर, झींगा); अनेलिड्स (केंचुआ); स्पंज आ जेलीफिश।




#Article 465: अंकोर वाट (492 words)


अंकोरवाट (; ) कंबोडिया में मौजूद एगो मंदिर बाटे आ ई दुनिया के सबसे बड़हन धार्मिक स्थल हवे जवन 162.6 हेक्टेयर (1,626,000 वर्गमीटर) क्षेत्रफल में बिस्तार लिहले बा। ई मूल रूप से हिंदू मंदिर के रूप में बनल रहे जवन धीरे-धीरे बौद्ध मंदिर में बदलत चलि गइल। ई ख्मेर राजा सूर्यवर्मन दूसरा के द्वारा 12वीं सदी के शुरुआत में, तत्कालीन राजधानी यशोधरपुर, जवना के अब अंकोरथोम कहल जाला, में बनवावल गइल रहे। अपने पहिले के शैव राजा लोग के परमपरा से अलग हटि सूर्यवर्मन के बनवावल के ई मंदिर विष्णु के समर्पित बाटे।
ई ख्मेर शैली के सभसे नीक उदाहरण हवे आ कंबोडिया के चीन्हा के रूप में पहिचानल जाला आ उहाँ के झंडा पर भी देखावल गइल बाटे। ई कंबोडिया के सभसे प्रमुख पर्यटन आकर्षण भी बा।

अंकोर वाट, ख्मेर शैली के दू गो परंपरा - मंदिर-परबत आ गैलरीदार मंदिर के मिलन के उदाहरण भी हवे। ई मेरु परबत के नकल की रूप में बनावल गइल बाटे जवन हिन्दू धर्म में प्रचलित कथा में देवता लोग के निवास अस्थान मानल जाला।
ई तीन चौकोर चबूतरा नियर खण्ड में बा जवना में एक खण्ड से ऊपर वाला पर जाये खातिर सीढ़ी बनल बाटे आ हर खण्ड गैलरी के रूप में कलात्मक ढंग से सजल बाटे।

एकर आधुनिक नाँव अंकोर वाट के अर्थ मंदिर के नगर या मंदिर के राजधानी बा। खमेर भाषा में अंकोर के मतलब शहर बा जवन इहाँ के देसी भाषा के नोकोर से निकलल मानल जाला, जवन खुद संस्कृत के नगर के बिगाड़ से बनल हऽ। वाट माने मंदिर होला जवन खुद संस्कृत के वाट शब्द के मतलब होला।

अंकोर वाट आधुनिक सीम रीप नाँव के कस्बा से 5.5 किलोमीटर के दूरी पर उत्तर ओर बाटे आ पुरनकी राजधानी, जवन बाफुनो के लगे रहे, के थोड़िके दूर दक्खिन ओर पुरुबाहुत हटि के बाटे।
अंकोर के मंदिरन में ई सभसे दक्खिन में बाटे।

कथा के मोताबिक एह मंदिर के निर्माण के आदेस इंद्र दिहले रहलें। तेरहवीं सदी के एगो चीनी यात्री इहो वर्णन कइलें बा की ई मंदिर, मानल जाला की, कौनों दिब्य आर्किटेक्ट एकही राति में बना दिहलें।

इतिहास के हिसाब से देखल जाय त ई मंदिर के सुरुआती डिजाइन बारहवीं सदी के सुरु के हिस्सा में, सूर्यवर्मन दूसरा (शासन 1113 – ल 1150 ई) बनावल गइल रहे। ई बिष्णु के समर्पित मंदिर रहे आ ई राजा के मंदिर आ एकरे आसपास के इलाका राजधानी बनावे के बिचार से डिजाइन कइल गइल रहे।
एकर मूल नाँव मालुम नइखे की का रखल गइल रहे। राजा के मरला के बाद एह मंदिर के कुछ काम अधूरा रहि गइल। सूर्यवर्मन के मौत के लगभग 27 बरिस बाद इहाँ चाम लोग, जे ख्मेर लोग के परंपरागत दुश्मन रहे, के आक्रमण भइल आ अंकोर के लूट लिहल गइल।
बाद में एकरा के जयवर्मन सातवाँ, जे इहाँ से थोड़ी दूर उत्तर में (अंकोर थोम आ बाद में बायन में) आपन राजधानी बनवलें, एह मंदिर के उद्धार कइलें। बारहवी सदी के अंत आवत-आवत ई मंदिर बौद्ध परभाव में आवत चलि गइल जवन अभिन ले जारी बाटे।




#Article 466: एशिया के भूगोल (174 words)


एशिया के भूगोल, एशिया महादीप के भूगोलीय बर्णन बा एकरे भूगोलीय क्षेत्र में बिभाजन के बर्णन बाटे। ई दुनियाँ के सभसे बड़ महादीप हवे आ पृथ्वी के कुल जमीनी हिस्सा के लगभग तीस प्रतिशत हिस्सा कभर करे ला; सभसे ढेर जनसंख्या वाला महादीप भी हवे आ लगभग 60 प्रतिशत जनसंख्या यही महादीप पर निवास करे लें। एशिया में लगभग 50 से ढेर देश बा। परंपरागत रूप से एशिया के बिभाजन उत्तर एशिया (रूस वाला हिस्सा), मध्य एशिया, पुरबी एशिया, दक्खिन पूरबी एशिया, दक्खिन एशिया आ दक्खिन पच्छिम एशिया में कइल जाला।

एशिया महादीप यूरेशिया नाँव से सुपरमहादीप के हिस्सा हवे आ एकरे पूरबी हिस्सा पर बिस्तार लिहले बा। वास्तव में यूरोप आ एशिया के बीचा के बिभाजन परंपरागत हवे आ एह सीमा के निश्चित करे पर काफी बिबाद भी बा। हालाँकि, सभसे ब्यापक सहमती देखल जाय तब एगो काल्पनिक लाइन जे यूराल परबत, काकेशस परबत आ काला सागर से हो के गुजरे ओही के यूरोप आ एशिया के बीच के बाडर मान लिहल जाला। रूस देस के हिस्सा दुनों महादीप में बिस्तार लिहले बाटे।




#Article 467: उत्तर कोरिया (129 words)


उत्तर कोरिया पूरब एशिया में एगो देश बाटे। एकर राजधानी आ सभसे बड़हन शहर प्योंगयांग हऽ। एह देस के जमीनी सीमा यालू आ त्युमेन नदिन के सहारे चीन के साथे बने ला आ सीमा के कुछ हिस्सा रूस के साथे सटल बा। 'कोरियाई गैर-सैन्य क्षेत्र' एकरा के दक्खिन कोरिया से अलग करे ला।

एतिहासिक रूप से कोरिया के जापान 1910 में जीत लिहले रहे आ दुसरा बिस्व जुद्ध के खतम भइला पर जापान के समर्पण के बाद कोरिया के दू हिस्सा में बाँट दिहल गइल। उत्तरी हिस्सा सोवियत युनियन के प्रभाव में रहल आ दक्खिनी कोरिया अमेरिका के। फिर से दुनों के एकीकरण के बार्ता बिफल भइला के बाद 1948 में दू गो अलग-अलग सरकार बनल: उत्तर में डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया आ दक्खिन में रिपब्लिक ऑफ कोरिया।




#Article 468: थॉमस पेन (224 words)


थॉमस पेन ( 8 जून 1809) एगो अंग्रेज-अमेरिकन राजनीतिक एक्टिविस्ट, दार्शनिक, राजनीतिक सिद्धांतकार आ क्रांतिकारी रहलें। अमेरिका के संस्थापक लोग में से एक, थॉमस पेन अमेरिकी क्रान्ति के सुरुआत में दू गो बहुत परभावशाली पम्फलेट निकललें जिनहन के बहुत परसिद्धी मिलल। 
पेन, 1776 में रिबेलियन लोग के ब्रिटेन के शासन से स्वतंत्रता घोषित करे के प्रेरणा दिहलें।

इंग्लैंड के नॉरफ्लॉक काउंटी के एगो अस्थान थेटफोर्ड में पैदा पेन सन् 1774 ई॰ में बेंजामिन फ्रैंकलिन के मदद से अमेरिका गइलें, अमेरिकी क्रांति के सुरु होखे से ठीक पहिले। उनुके लिखल पम्फलेट कॉमन सेंस (1776) के ओह समय लगभग हर क्रांतिकारी पढ़ले या एकरे पाठ के सुनले होखी।
अनुपात के हिसाब से देखल जाय त उनुकर ई रचना दुनिया के सर्बदा के बेस्ट सेलर कहाई। उनुकर दुसरी पम्फलेट के सीरीज, द अमेरिकन क्राइसिस (1776-83) भी एगो क्रांति समर्थक प्रकाशन रहे। कॉमन सेंस अतना परभावशाली रहे की जॉन एडम्स कहलें की, कॉमन सेंस के लेखक के कलम के बिना वाशिंगटन के तलवार ब्यर्थ में उठल साबित भइल रहित।

दिसंबर 1793 में उनुके पेरिस में गिरफ्तार कइल गइल आ 1794 में रिहा कइ दिहल गइल। ऊ अपने पम्फलेट द एज ऑफ रीजन (1793-94) के कारण बहुत कुख्यात भइलें।

सन् 1802 ई में पेन अमेरिका लवट अइलें आ 8 जून 1809 के उनुकर निधन भइल। ईसाइयत के उनुके बिरोध के चलते उनुके दफनावे में खाली छह लोग शामिल भइल।




#Article 469: कॉमन सेंस (पम्फलेट) (160 words)


कॉमन सेंस () थॉमस पेन के 1775-76 में लिखल एगो पम्फलेट रहे। ई पम्फलेट तेरह उपनिवेश सभ में रहे वाला लोग के ब्रिटेन के शासन से आजादी खातिर लड़े के आ अपने स्वतंत्रता के घोषणा करे खातिर प्रेरणा दिहलस। तुरंत जरूरी आजादी खाती तर्क आ आजादी के लाभ के बहुत आसान भासा में बतावे वाली ई पम्फलेट पहिली बे अनाम रूप से 10 जनवरी 1776 के छपल। छपते-छपत ई एगो परसिद्ध चीज बन गइल आ बहुत बिकाइल आ आम एकट्ठा होखे के जगहन पर लोग एकरा के पढ़ के सुनल-सुनावल।

वाशिंगटन अपने सेना के सगरी लोग के ई पम्फलेट पढ़ववलें, जेवन सेना ओह समय बोस्टन में ब्रिटिश सेना के घेरे में लागल रहे। अगर ओह समय के उपनिवेशवन के जनसंख्या (25 लाख) के हिसाब से देखल जाय त ई पम्फलेट अमेरिका के इतिहास में सभसे ढेर बिकाए आ सर्कुलेट होखे वालो किताब कहल जाई। साल 2006 ले भी ई पम्फ्लेट अमेरिका में आल टाइम बेस्ट सेलर में गिनल जात रहल।




#Article 470: तेरह उपनिवेश (106 words)


तेरह उपनिवेश () ब्रिटिश उपनिवेश रहलें जवन पूरबी उत्तर अमेरिका के अटलांटिक महासागर के तट पर सन् 1607 से 1733 के बीच अस्थापित कइल गइल रहलें। इहे उपनिवेश सभ मिल के सन् 1776 में ब्रिटेन से स्वतंत्रता के ऐलान आ खाली भर उपनिवेश न रहि के अब यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के राज्य बन गइलें। इहे कारण बाटे की आधुनिक अमेरिकी झंडा में 13 लाल आ सफ़ेद धारी बाटे आ मूल अमेरिकी झंडा में 13 गो सितारा रहलें।

ई तेरह उपनिवेश रहलें - डेलावेर, पैनसिल्वेनिया, न्यू जर्सी, जोर्जिया, कन्नॅटिकट, मैसाच्यूसॅट्स बे, मैरीलैंड, दक्षिण कैरोलाइना, न्यू हैम्शर, वर्जिन्या, न्यू यॉर्क, उत्तर कैरोलाइना आ रोड आयलॅन्ड व प्रॉविडॅन्स। 




#Article 471: वल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (104 words)


वल्ड वाइड फंड फॉर नेचर  () भा डब्लूडब्लूएफ (WWF), एगो गैर सरकारी संस्था (एनजीओ) बाटे जवन प्रकृति के संरक्षण ला काम करेला। एकर अस्थापना 29 अप्रैल 1961 के भइल रहे। ई वर्तमान में 100 से ढेर देस सभ में सक्रिय बाटे। एकरे आमदनी के मेन सोर्स व्यक्तिगत रूप से दिहल जाये वाला चंदा आ दान के रकम बाटे।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की एगो हालिया रिपोर्ट के तहत हिमालय के हिमनद अन में हर साल 10 से 15 मीटर के दर से संकुचन हो रहल बा संकुचन के सबसे अधिक दर गंगोत्री हिमनद के बा जवन 23 मीटर प्रति वर्ष के दर से संकुचित हो रहल बा




#Article 472: 1965 के भारत-पाक युद्ध (119 words)


भारत एकर जबाब पुरा खुला लड़ाई के रूप में दिहलस आ पच्छिमी पाकिस्तान पर हमला क दिहलस। सतरह दिन चलल एह लड़ाई में दुनों ओर से हजारन लोग मारल गइल आ ई दुसरा बिस्व जुद्ध के बाद ई टैंक के सभसे बड़हन लड़ाई भी बनल। अंतर्राष्ट्रीय हस्तक्षेप के बाद दुनों देश के बीच में सीज फायर के घोषणा भइल आ अंत में ताशकंद समझौता भइल।

लड़ाई के परिणाम के बारे में दुनों देश अपना के जीतल बतावे लें हालाँकि, समीक्षक लोग के बिचार में एह में भारत के ढेर फ़ायदा भइल आ ऊ दक्खिन एशिया के एगो मजबूत ताकत के रूप में सामने आइल। एह लड़ाई के समय भारत के प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के भारत में काफ़ी तारीफ़ मिलल।




#Article 473: बर्की के लड़ाई (333 words)


बर्की के लड़ाई भारत आ पाकिस्तान के सेना के बीच लड़ल गइल 1965 के युद्धके हिस्सा रहल। बर्की () पाकिस्तान में लाहौर के  दक्खिन-पूरुब में भारत-पाकिस्तान बार्डर के नजदीक जगह बाटे आ ई लाहौर से इच्छोगिल नहर के पुल द्वारा जुड़ल बाटे। लड़ाई के समय दुनों देस के सेना के संख्या लगभग बराबर रहे। पाकिस्तानी सैनिक नहर के किनारे खाई खन के ओह में से लड़त रहलें आ टैंक आ फाइटर जेट के सपोर्ट भी रहे। भारतीय सेना 11 सितंबर 1965 के एह जगह के जीत लिहलस।

Pakistan launched Operation Grand Slam on 17 August 1965 in an effort to relieve infiltrators who had been surrounded after the failure of Operation Gibraltar on 15 August and to attempt to cut off the Indian supply lines. With supply lines under severe stress due to Operation Grand Slam, India launched an offensive towards Lahore to open up a second front in the war and distract Pakistani attention from Kashmir. After opening the Lahore front, Indian troops advanced towards Lahore along three axes—Amritsar-Lahore, Khalra-Burki- Lahore and Khem Karan-Kasur roads—overwhelming the small Pakistani force.

Indian infantry, supported by the only Indian armored division, quickly pushed back unprepared Pakistani defenders with the aim of encircling and possibly besieging Lahore. Due to the element of surprise, India was able to capture a large amount of Pakistani territory from the town of Khalra, an Indian border town which lies on a straight road to Lahore through Burki. In the meantime, the Pakistani Army mobilized the troops in the region and mounted a three-pronged counterattack to recapture lost ground. The Battle of Burki was subsequently fought on Khalra-Burki- Lahore road.

Pakistan's main goal was to force the Indian infantry into retreat before their armored support and supply lines could catch up. The Pakistani Army's aim also was to capture much of the territory it had lost earlier in the fighting. The Indian infantry's aim was to capture and hold the town of Burki until reinforcements, including armor and supplies, could arrive.




#Article 474: लीमा (134 words)


लीमा दक्खिन अमेरिका के देस पेरू के राजधानी आ सभसे बड़ शहर बाटे। शिलन, रिमाक आ लुरिन नदिन के घाटी में बसल ई शहर, पेरू के प्रशांत महासागर के तट के बिचला हिस्सा में बाटे।

लीमा के जनसंख्या लगभग 10 मिलियन बाटे आ ई पेरू के सभसे बड़ा शहर होखे के साथे-साथ दुन्नो अमेरिका में तीसरा नंबर के सभसे बड़ा शहर भी बा, साओ पालो आ मैक्सिको सिटी के बाद।

लीमा के आस्थापना 1536 ई में स्पेनी लोग के द्वारा भइल। इहाँ नई दुनिया (अमेरिका दुनों) के सभसे पुरान इनवर्सिटी सैन मार्कोस राष्ट्रीय विश्वविद्यालय बाटे जवना के आस्थापना पबित्र रोमन साम्राज्य के सम्राट चार्ल्स पाँचवाँ के शाही आदेश से भइल रहे।

लीमा में 1982 के मिस वल्ड प्रतियोगिता के आयोजन भइल। हाल में सन् 2014 में यूनाइटेड नेशंस जलवायु परिवर्तन कॉन्फ्रेंस इहाँ आयोजित भइल।




#Article 475: अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस (117 words)


अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस (, इंटरनेशनल नर्सेस डे) या आइ॰एन॰डी॰ (IND) पुरा दुनिया में मनावल जाये वाला दिवस हवे जवन हर साल 12 मई के मनावल जाला। ई दिवस समाज के खातिर नर्स लोगन के योगदान के तारीफ में मनवल जाला।

इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्सेस (नर्स लोगन के अंतर्राष्ट्रीय समीति) एह दिवस के 1965 से हर साल मनावेले।

जनवरी 1974, से एकरा के मनावे के दिन 12 मई के चुनल गइल जवन की फ्लोरेंस नाइटेंगल के जन्म दिवस हवे। फ्लोरेंस नाइटेंगल के आधुनिक नर्सिंग के संस्थापक मानल जाला। हर साल एह दिवस पर आइ॰सी॰एन॰ इंटरनेशनल नर्सिंग डे किट तइयार करे ले आ बांटेले जवना में नर्सिंग में उपयोगी शिक्षा आ आम जानकारी होला।

आइ॰सी॰एन॰ के घोषित सालाना थीम:




#Article 476: सैन मार्कोस राष्ट्रीय विश्वविद्यालय (115 words)


सैन मार्कोस राष्ट्रीय विश्वविद्यालय (, UNMSM) पेरू के राजधानी लीमा में मौजूद एगो विश्वविद्यालय बाटे। ई पेरू के एगो सम्मानित शैक्षणिक संस्था हवे आ हमेशा ऊपर के दू गो संस्था में एकर रैंक रहे ला। एकर आस्थापना 12 मई 1551 के पबित्र रोमन साम्राज्य के सम्राट चार्ल्स पाँचवा के शाही आदेश से भइल रहे आ एह तरे ई अमेरिका (दुनों) में सभसे पुरान आधिकारिक रूप से आस्थापित विश्वविद्याय बाटे आ दुनिया के सभसे पुरान विश्वविद्यालय सभ में से एक बा।

इहाँ 20 गो फैकल्टी में बँटल 60 गो एकेडमिक-स्कूल बाड़ें। लगभग 30,000 अंडरग्रेजुएट आ 4,000 ग्रेजुएट बिद्यार्थी इहाँ पढ़ेलें आ एह में बिदेसी बिद्यार्थी भी बाड़ें। एह तरे ई विश्वविद्यालय पेरू के शान मानल जाला।




#Article 477: लाल किला (733 words)


लाल किला भारत के राजधानी दिल्ली नगरे एगो इतिहासीक किला बाटे। ई किला मुगल शासक लोग के मुख्य निवासस्थान रहल, लमसम 200 बरिस ले जब ले कि 1857 मे अंतिम मुगल बादशाह के अंगरेज लोग देस निकाला ना दे दिहल। ई दिल्ली के बीचोबीच के इलाका मे बा आ इहाँ कए गो म्यूजियम स्थापित कइल गइल बाने। मुगल शासन काल मे ई खाली मुगल बादशाह लोग के बास करे के जगह भर ना रहल बलुक राजकाज से अउरी मुगल राजा लोग के पारिवारिक कारपरोज से जुड़ल आयोजन आ राजनीतिक घटना सभ के केन्दरो रहल, नगीचे के इलाका प एह जगह के बहुत परभाव भी रहल।

पाँचवाँ मुग़ल बादशाह शाह जहाँ द्वारा ई किला 1639 में बनवावल गइल जब किलेबंदी (देवाल आ गेट) के भीतर ऊ आपन राजधानी शाहजहानाबाद बसवलें। लाल रंग के बलुआ पाथर से बनल होखे के कारन एकर नाँव लाल किला रखाइल। ई किला 1546 में इस्लाम शाह सूरी के बनवावल सलीमगढ़ किला के ठीक बगल में बाटे। शाही आवास के भवन  सभ एक कतार में बनल बाने आ ई एगो नहर के किनारे बनावल गइल बाने। एह नहर के नहर-ए-बहिश्त यानी स्वर्ग के नहर नाँव दिहल गइल रहे। किला के बनावट आ आर्किटेक्चर के परभाव एकरे बाद बने वाला कई गो किला आ भवन सभ पर पड़ल।

वर्तमान में, हर साल भारत के आजादी के राष्ट्रीय परब स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर भारत के परधानमंत्री किला के मुख्य दरवाजा पर तिरंगा फहरावे लें आ किला के प्राचीर से राष्ट्र के संबोधित करे लें।

किला के वर्तमान चलनसार नाँव, हिंदुस्तानी भाषा में लाल क़िला हवे। अंगरेजी में एकरा के रेड फ़ोर्ट कहल जाला ले लाल किला के अनुवाद हवे। मूल रूप से, मुगल बादशाह लोग के आवास रहल एह किला के क़िला-ए-मुबारक़ नाँव रहल। एकरे अलावा, आगरा के किला के भी लाल किला कहल जाला।

किला के सभसे प्रमुख चीज जे ठीक से बचल बा ओह में किला के देवाल आ प्राचीर, मेन गेट, कुछ हाल आ नदी के पूरबी किनारा पर बनल आवासी भवन बाने। किला के अंग के रूप में, आ किला के भीतर मौजूद भवन आ बिल्डिंग सभ में से कुछ प्रमुख के बिबरन नीचे दिहल जा रहल बाटे:

लाहौरी गेट, लाल किला के मुख्य दरवाजा हवे, नाँव एह कारन रखल गइल बा कि ई लाहौर के ओर मुँह कइले बाटे।
औरंगजेब के समय में एह दरवाजा के सामने वाला हिस्सा में सुरक्षा खातिर एगो अउरी देवाल बना दिहल गइल। एह नया निर्माण खातिर शाहजहाँ के कहनाम रहल कि सुघर दुलहिन के मुँह पर पर्दा डाल दिहल गइल। भारत के आजादी (1947) के बाद से एही गेट पर 15 अगस्त के तिरंगा झंडा फहरावल जाला आ भारत के परधानमंत्री इहाँ से देस के संबोधित करे लें।

दिल्ली दरवाजा, किला के दुसरा प्रमुख दरवाजा हवे। ई दक्खिन मुँह के बा आ अपना बनावट में बहुत कुछ लाहौरी गेट के नियन बाटे। एह दरवाजा के दूनो ओर एकहक ठो बड़हन आकार के हाथी बनल बाने। 1903 में लार्ड कर्जन इनहन के मरम्मत करववले रहलें जबकि इनहन के औरंगजेब के समय में गिरवा दिहल गइल रहल।

छत्ता चौक मूल रूप से बजार के रूप में बनावल गइल रहेल ई लाहौरी गेट के बगल में बा आ एकरा सोझा खुला मैदान नियर बाटे। मुगल दौर में इहाँ शाही भवन में निवास करे वाला लोग के खातिर रेशम, गहना-गुरिया आ अउरी कई तरह के सामान सभ के बजार लागे। बजार के आगे मैदान आ ओकरे बाद उत्तर-दक्खिन के एगो सड़क बा। ई सड़क किला के दू हिस्सा में बाँटे ले, पच्छिमी हिस्सा मलेटरी सरंजाम खातिर इस्तेमाल होखे आ पूरबी हिस्सा आवास के रूप में रहल। एही सड़क के दक्खिनी छोर पर दिल्ली गेट बाटे।

छत्ता चौक के किलेबंदी वाली देवाल भीतर के हिस्सा में जहाँ खतम होला ओकरे आगे ई भवन बा। नौबतखाना भा नक्कारखाना के नाँव से जानल जाला। 1857 के बिद्रोह के बाद एकरे बगल वाली बाँह आ साम्हने के तालाब के ढाह दिहल गइल रहे।

नक्कार खाना से हो के एह अंदरूनी हिस्सा में जाइल जाला जहाँ आम जनता के सुनवाई खातिर दरबार रहल। ई  चाकर आ  गहिराई वाला हिस्सा बाटे, चारों ओर गैलरी बा जेह में पहरेदारी होखे। एकरे सभसे अंदरूनी हिस्सा में पब्लिक के सुनवाई होखे।
हाल के खम्हा आ हाल के सफेद चुनाम से सजावट कइल गइल रहे। एकरे पछिला हिस्सा में झरोखा बा जहाँ से बादशाह जनता के दर्शन दें।

दीवाने-आम के इस्तेमाल राजकाज के काम खातिर भी होखे। एकरे आगे के अँगनाई के बाद मरदाना हिस्सा बाटे आ एकरे बाद आवास वाला हिस्सा शुरू होला।




#Article 478: बेन कार्लिन (267 words)


फ्रेडरिक बेंजामिन बेन कार्लिन (जनम 27 जुलाई 1912  – 7 मार्च 1981) एगो आस्ट्रेलियाई एडवेंचरर रहलें जे एगो एम्फीबियस गाड़ी (पानी आ जमीन दुनों पर चले वाली) पर सवार हो के पुरा दुनिया के चक्कर लगावे वाला पहिला आ अब ले के एकलौता व्यक्ति रहलें।

पच्छिमी ऑस्ट्रेलिया के नॉर्थम में पैदा भइल कार्लिन, पर्थ के गिलफोर्ड ग्रामर स्कूल में सुरुआती शिक्षा लिहलें आ बाद में कालगुर्ली स्कूल ऑफ माइंस में पढ़लें। एगो इंजीनियर बनले के बाद ऊ कुछ दिन खदान इंजीनियर के रूप में काम कइलें। सैनिक के रूप में कार्लिन, दुसरा बिस्व युद्ध के दौरान भारत, इटली आ मध्य पूर्ब में तैनात भइलें। 1946 में सेना से रिटायरमेंट ले के ऊ अमेरिका में बस गइलें।

अपने सैनिक जीवन के दौरान उनुके एगो आइडिया आइल रहे आ एही कारण ऊ हनीमून के रूप में अटलांटिक महासागर के पार करे के योजना बनवलें। एगो फोर्ड जी॰पी॰ए॰ (जवन फोर्ड जी॰पी॰डब्लू॰ के सुधार रहे) के हाफ़ सेफ़ (आधा सुरक्षित) नाँव रखलें आ एही में सवार हो के ऊ अटलांटिक पार करे के योजना बनवलन। कई बेर के प्रयास के बिफल होखे के बाद ऊ अंत में 1951 में अटलांटिक पार करे में सफल भइलें।

एह सफलता से खुस हो के बाद में ऊ पुरा दुनिया के चक्कर एही गाड़ी कम नाव से लगा दिहलें। 13 मई 1958 के ऊ वापस अमेरिका पहुँच के आपन ई यात्रा पूरा कइलें।अइसन करे वाला ऊ पहिला आ आखिरी व्यक्ति रहलें। एह यात्रा में कार्लिन आ उनुके गाड़ी हाफ़ सेफ़  के यात्रा समुंद्र में आ  यात्रा जमीन पर, दस साल में पूरा कइल आ 38 गो देसवन से गुजरल जवना के कुल खर्चा $35,000 आइल।




#Article 479: गुरुद्वारा शीशगंज साहिब (107 words)


गुरुद्वारा शीश गंज साहिब भारत के राजधानी दिल्ली में चाँदनी चौक इलाका में एगो परसिद्ध गुरुद्वारा बाटे। ई इतिहासी गुरुद्वारा ओह अस्थान के निशानी बाटे जहाँ 11 नवंबर 1675 के बादशाह औरंगजेब, नउवाँ सिख गुरू तेग बहादुर के इस्लाम ना स्वीकार करे खातिर मरवा दिहले रहलें। एकर अस्थापना 1783 में बघेल सिंह द्वारा कइल गइल। बघेल सिंह शाह आलम दूसरा के समय में दिल्ली पर सेना ले के चढ़ाई कइलें आ लाल किला के दीवाने आम पर कब्ज़ा कर लिहलें। एकरे बाद भइल समझौता के बाद ऊ दिल्ली में गुरु तेग बहादुर के निशानी के रूप में ई गुरुद्वारा बनववलें।

एकर वर्तमान बिल्डिंग सन् 1930 में बनल।




#Article 480: बुद्ध जयंती पार्क (194 words)


बुद्ध जयंती स्मारक पार्क या बुद्धा गार्डन भारत के राजधानी दिल्ली में एक ठो पार्क बाटे। ई पार्क दिल्ली रिज के दक्खिनी हिस्सा में, धौला कुआँ के नजदीक के इलाका में मौजूद बाटे। गौतम बुद्ध के बुद्धत्व प्राप्त कइला के 2500 वाँ बरसी के मनावे खातिर एह पार्क के निर्माण भइल। ई पार्क सभका खातिर खुला बा आ इहाँ घूमे के कौनों चार्ज नइखे। एह पार्क में एगो आर्टिफिशियल तालाब में बनल दीप पर गौतम बुद्ध के एगो सोना मढ़ल मूर्ती बाटे जवन आठ फीट ऊँच बाटे।

गौतम बुद्ध के 2500 वाँ परिनिर्वाण के मनावे खातिर एह पार्क के नाँव 1965 में बुद्ध जयंती पार्क रखल गइल रहे आ तत्काल में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री एह समारोह में हिस्सा लिहलें। शास्त्री इहाँ श्री लंका से ले आइल गइल बोधि वृक्ष के कलम रोपलें।

इहाँ मूर्ती अस्थापित करे के बिचार दलाई लामा द्वारा 1983 में रखल गइल आ तत्काल में प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के सहमति मिले के बाद तिब्बत हाउस में एह प्रोजेक्ट पर काम शुरू भइल।

बुद्ध के मूर्ति आठ फीट ऊँच बाटे। ई तामा के बनल मूर्ति सोना से मढ़ल बा। बुद्ध के ई मूर्ती भूमिस्पर्श मुद्रा में गौतम बुद्ध के देखावे ले।




#Article 481: बैजंती (207 words)


बैजंती या बैजयंती फूल वाला पौधा सभ के एगो जाति बा जवना में 19 गो प्रजाति शामिल बाड़ी। ई जाति के पौधन के नजदीकी संबंध जिंजीबेरल्स कुल के पौधा सभ से बाटे जवना में आदी (अदरक), हल्दी, केला इत्यादि के पौधा आवेलें।

जीव बिग्यान में एह जाति के काना (Cana) कहल जाला आ ई कानाकाई (Cannaceae) परिवार के अकेल जाति समूह हवे। एह जाति के पौधा सभ के पत्ता आ फूल सुंदरता खातिर जानल जालें आ एही खातिर लोग इनहन के सजावटी पौधा के रूप में लगावे ला। एकर फूल नारंगी या लाल रंग के टोन में होखे लें आ चमकदार रंगत वाला होलें। गाँव देहात में ई पौधा अक्सर पानी एकट्ठा होखे वाली जगह पर अपने आप पनप के झांग नियर हो जाला। शहरन में एकर सजावटी पौधा के रूप में घर से ले के पार्क आ गार्डेन सभ में ब्यापक इस्तेमाल होला। 

सुंदरता के आलावा ई पौधा के खेती होला। कारण की ई स्टार्च (मंड) के बहुत धनी स्रोत बाटे।

भूगोलीय रूप से ई उष्णकटिबंधीय पौधा हवे आ गरम आ नमी वाला इलाका में मिले ला। हालँकि, ई समशीतोष्ण इलाका में भी उगावल जाला जहाँ गर्मी में 6-8 घंटा ले घाम मिल जाय।
जाड़ा मे इन्हन के गर्म जगह पर ले जाए के परे ला।




#Article 482: वैलेंटाइन्स डे (187 words)


वैलेंटाइन्स डे भा संत वैलेंटाइन्स डे एगो प्रमुख सांस्कृतिक आ कारोबारी तिहुआर बाटे जवन हर साल ग्रेगरी कलेंडर के हिसाब से 14 फरवरी के मनावल जाला भले एह दिन कौनो देस में सरकारी छुट्टी ना होखे ले। ई पच्छिमी संस्कृति के तिहुआर, जवन अब पुरा दुनिया के बहुत सारा देसवन में फइल चुकल बाटे, एगो प्राचीन संत वैलेंटाइन के यादगार में आ प्रेम जाहिर करे वाला दिन के रूप में मनावल जाला।

एकरा साथे कई तरह के कथा बाद में जुड़त चल गइल आ एगो कथा के मोताबिक संत वैलेंटाइन अइसन सिपाही लोग के बियाह करवावे खातिर जेल में भेजल गइल रहलें जिनहन लोग के बियाह करे पर रोमन साम्राज्य में प्रतिबन्ध रहे। जेल में ऊ जेलर के बेटी के बेमारी ठीक कइलें आ जेल से बिदा होत घरी तोहार वैलेंटाइन लिख के बिदा भइलें।

रूमानी प्यार के साथ एह कहनी के जुड़ाव चउदहवीं सदी में इंग्लैंड में ज्योफ्री चौसर के समय भइल। बाद में ई अठारहवीं सदी आवत-आवत एगो अइसन दिन के रूप में मनावल जाये लागल जहिया प्रेमी-प्रेमिका लोग एक दुसरा के फूल, चाकलेट आ ग्रीटींग कार्ड डे के आपन प्यार के इजहार करे लागल।




#Article 483: बहादुरगंज, गाजीपुर (127 words)


बहादुरगंज भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के गाजीपुर जिला में एगो नगर पंचायत बा। ई कस्बा तमसा नदी (टौंस) के दक्खिनी तीरे प बा। मऊ से 12 किमी आ गाजीपुर से लगभग 42 किमी दूरी प बाटे।

बहादुरगंज में सबसे बड़ धार्मिक समारोह सभ में राम नउमी, ईद-मिलाद-उल-नबी, भारत मिलाप, मुहर्रम आ दुर्गा पूजा बाड़ें। वार्षिक समारोह के साथ-साथ दशहारा, ईद-उल-ज़ुहा, ईद-उल-फ़ितर, होली, रमजान-उल-मु8862862947बारक, दिवाली, रक्षाबंधन, शब-ई-बरात, क्रिसमस, ईस्टर आ अन्य अवसर; आ भारत के राष्ट्रीय तिहुआर स्वतंत्रता दिवस आ गणतंत्र दिवस पूरा उत्साह के साथ मनावल जालें।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, जिला सहकारी बैंक और उप डाकघर में बैंकिंग सेवा आ एटीएम सुविधा उपलब्ध बा। उपडाकघर अब सीबीएस सुविधा प्रदान कर रहल बा।

बहादुरगंज में कई स्कूल, कॉलेज आ इस्लामी मदरसा बाड़ें:




#Article 484: भेली (165 words)


भेली, गूर, या गुड़ () मुख्य रूप से ऊख के रस से, आ अन्य रूप में तरकुल के रस या खजूर से बनावल जाए वाला एक ठो ठोस, मीठ पदार्थ हवे। आमतौर पर ई ठोस गोली या पिंडी के रूप में बनावल जाला, एही के ठोस के बजाय कुछ गाढ़ तरल रूप के भोजपुरी क्षेत्र में गूर या राब कहल जाला।

भेली के पिंडी के आकार भी अलग अलग क्षेत्र में अलग अलग होला आ एक ठो भेली 20 ग्राम से ले के पाव भर (250 ग्राम) ले के हो सकेला। पच्छिमी उत्तर प्रदेश में, जहाँ एकरा के गुड़ कहल जाला, अउरी बड़ा आकर के ढोंक भी बनावल जाला। रंग में ई सुनहरी-भूरा रंग से ले के लगभग करिया रंग ले के हो सकेला।

मुख्य रूप से ई एशियाई महादीप आ अफिरका में बनावल जाला। सभसे ढेर प्रचलन उत्तर प्रदेश आ बिहार के इलाका में बाटे आ ई उत्तर प्रदेश में एक ठो बहुत ब्यापक उद्योग हवे जेकरा से लोकल स्तर पर लोग जुड़ल बाटे।




#Article 485: पेय (142 words)


पेय अइसन पदार्थ के कहल जाला जवना के पियल जा सके। अंग्रेजी में इनहना के ड्रिंक (drink) चाहे बीवरेज (beverage) कहल जाला आ एह में हर द्रव (लिक्विड) पदार्थ आ जाला जे मनुष्य के उपभोग खाती होखे।

आदमी के पियास मेटावे के अलावा एह पेय सभ के सांस्कृतिक महत्व भी बा। सभसे आम पेय सभ में पिए वाला पानी, दूध, गाय के दूध, कॉफी, चाय, हॉट चाकलेट आ कोल्ड ड्रिंक बा। एकरे अलावा एल्कोहल वाला पेय सभ बा जेह में वाइन, बियर, आ शराब शामिल बा जे मनुष्यता के इतिहास में लगभग आठ हजार साल से शामिल बा।

Non-alcoholic drinks often signify drinks that would normally contain alcohol, such as beer and wine, but are made with less than .5 percent alcohol by volume. The category includes drinks that have undergone an alcohol removal process such as non-alcoholic beers and de-alcoholized wines.




#Article 486: हिंदू दर्शन (106 words)


हिंदू दर्शन प्राचीन भारत में पैदा भइल कई ठे दर्शनसभ के एकट्ठा नाँव हवे। मूल रूप से एह में छः गो भारतीय दर्शन आवेलें - सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा आ वेदांत। इनहन के षड् दर्शन कहल जाला आ ई आस्तिक दर्शन भी कहल जालें जे बेद के प्रमाण स्वीकार करे लें आ। एकरे अलावा, भारतीय दर्शन में कुछ नास्तिक दर्शन भी बाड़ें जइसे की बौद्ध, जैन, चार्वाक आ आजीविक। चार्वाक आ आजीविक नियर कई ठे दर्शन के हिंदू दर्शन में गिनल जाला जबकि जैन आ बौद्ध अलग धर्म के रूप में मानल जाए के कारन इनहन के दर्शन के हिंदू दर्शन से बाहर रखल जाला।




#Article 487: फ्रांसीसी क्रांति (110 words)


फ्रांसीसी क्रांति () सन् 1789 से 1799 के दौर रहल जवना समय में फ़्रांस में बहुत बड़ा पैमाना पर सामाजिक आ राजनीतिक बदलाव आ उठापटक भइल। एकरे बाद फ़्रांस में राजशाही के अंत हो गइल आ रिपब्लिक सरकार बनल आ अंत में एह दौर के समापन नेपोलियन द्वारा डिक्टेटरशिप में भइल। एकरा के फ़्रांस, यूरोप आ पुरा दुनिया के इतिहास के एगो बहुत महत्वपूर्ण घटना के रूप में देखल जाला।

फ्रांस के क्रांति के कारन जटिल बाड़ऽसन आ इतिहासकार लोग आजो हेकरा प बहस करेलन। सात बरिस के जुद्ध आ अमेरीकी क्रांति जुद्ध के ओरईला प फ्राँस सरकार करज मे बुड़ल रहे। परिस्तिथी नीमन करे बदे सरकार कर बढ़ाई दिहलस।

 




#Article 488: माया (195 words)


माया के शाब्दिक अरथ होला धोखा या भरम या जादुई शक्ति। संस्कृत के ई शब्द भारतीय परंपरा में कई अलग-अलग जगह पर अलग-अलग अरथ में इस्तेमाल होला। वैदिक काल में माया के प्रयोग शक्ति के अर्थ में भइल बा। उपनिषद में एकर समकक्षी अविद्या के मानल जा सकत बाटे, श्वेताश्वेतर उपनिषद में ईश्वर के मायी कहल बा जे अपने माया रुपी शक्ति से सृष्टि के रचना करे ला। बाद के साहित्य में माया के अरथ अइसन धोखा के रूप में लिहल गइल बा जहाँ चीज वास्तव में जवन बा ओइसन प्रतीत नइखे होखत। भारतीय दर्शन में माया अइसन चीज खातिर प्रयोग होला जवन हमेशा बदलत रहे आ एही से ऊ वास्तविक सत्य न होखे।
अद्वैत वेदांत के अनुसार ब्रह्म सत्य हवे आ जगत् मिथ्या हवे ब्रह्म माया भा अविद्या के कारण जगत्-प्रपंच के रूप में प्रतीत होला।

बौद्ध परंपरा में माया गौतम बुद्ध में माता के नाँव हवे। महायान में जवना चीज के नाँव भर होखे वास्तव में अस्तित्व न होखे ओकरा के भी माया कहल गइल बाटे।

एकरे अलावा भी, हिंदू परंपरा में देवी के उपनांव के रूप में माया के प्रयोग होला। धन के देवी लक्ष्मी खातिर भी माया के प्रयोग देखल जाला।




#Article 489: पुरुषार्थ (126 words)


पुरुषार्थ मनुष्य के कइसन कर्म करे के चाहीं एह बात के भारतीय परंपरा में निर्धारण हवे। एक तरह से ई जीवन जिये के लक्ष्य बतावे ला। परंपरागत रूप से चारि गो पुरुषार्थ गिनावल गइल बाड़ें - धर्म (नैतिक लक्ष्य), अर्थ (धन-संपत्ति के अर्जन), काम (सुख, प्रेम आ भावनात्मक संतुष्टी) आ मोक्ष (आध्यत्मिक ज्ञान आ मुक्ति)। सुरुआती तीनों के आचरण में प्राप्ति सभके लक्ष्य बतावल बाटे जबकि मोक्ष मनुष्य के अन्तिम लक्ष्य हवे, जहाँ संसार के आवागमन चक्र से मुक्ति के पावे खातिर, आध्यात्मिक ज्ञान के प्राप्ति के तरीका मानल जाला।

पुरुषार्थ के हिंदू परम्परा में केन्द्रीय स्थान मानल जाला आ हिंदू धर्म के माने वाला लोग एकरा के आश्रम व्यवस्था आ वर्ण व्यवस्था के साथ हिंदू परंपरा के मुख्य आधार के रूप में भी देखे लें।




#Article 490: भूगोल के रूपरेखा (249 words)


आगे दिहल रूपरेखा भूगोल आ एकरे संबंधित बिसय सभ के परिचय खातिर बनावल गइल बाटे:

भूगोल पृथ्वी आ एकरे निवासी लोग के अध्ययन हवे।

अंगरेजी के geography शब्द: ग्रीक  - geographia, lit. पृथ्वी के वर्णन-लेखन

प्रादेशिक भूगोल ndash; दुनिया के प्रदेश (इलाका या क्षेत्र) सभ के अध्ययन करे वाली शाखा। कौनों प्रदेश के यूनीक लच्छन सभ जइसे कि उहाँ के प्राकृतिक तत्व, मानवीय तत्व आ प्रादेशीकरण - जेह में धरातल के सतह के क्षेत्र या प्रदेश में बाँटे खातिर इस्तेमाल होखे वाली टेकनीक सभ के बारे में भी बिचार होल, पर धियान केंद्रित कइल जाला। प्रादेशिक भूगोल आगे जा के अलग-अलग प्रदेश सभ के अध्ययन में बँट जाला।

प्रदेश ndash; एगो क्षेत्र या इलाका होला जे अपना भौतिक बिसेसता, मानवीय बिसेसता, भा कौनों फंक्शनल बिसेसता के द्वारा परिभाषित होला। भूगोल के अलग-अलग शाखा सभ में भी एह शब्द के अलग-अलग अरथ में इस्तमाल होला। 

भूगोल के शाखा सभ में कॉमन बिसय के रूप में कुछ टॉपिक बाड़ें:

 () आ भूगोल के दर्शन

केहू भूगोलवेत्ता अइसन बैज्ञानिक होला जे पृथ्वी  के भौतिक पर्यावरण आ मानवीय आवास क्षेत्र के अध्ययन करे ला। पुराना समय से भूगोलवेत्ता लोग के नक्षा बनावे खातिर जानल जाला। नक्शा बनावे के बिद्या - कार्टोग्राफी भूगोले के एक ठो शाखा हवे। एकरे अलावा भूगोलवेत्ता लोग, पृथ्वी के बिबिध भौतिक, पर्यावरणी आ सांस्कृतिक तत्व सभ के आपसी स्थानिक-संबंध के अध्ययन  पर आपन अध्ययन के धियान फोकस करे ला।

भूगोल के पढ़ाई के कोर्स जेवना के इस्कूल आ कॉलेज में पढ़ावल जाला, नीचे दिहल मूल बनावट पर आधारित बाटे:




#Article 491: मई दिवस (100 words)


मई दिवस, पहिली मई के मनावल जाये वाला एगो पुरान तिहवार हवे जवन यूरोप में बसंत के उत्सव में से एक हवे आ बहुत जगह एह दिन छुट्टी भी होला। नाच गाना के साथ एह तिहवार के मनावल जाला।

उनईसवीं सदी के अंत के काल में मई दिवस के दिने अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनावे के घोषणा सोशलिस्ट आ कम्युनिस्ट लोग सेकेंड इंटरनेशनल में कइल। एह दिन के चुनाव शिकागो में भइल हेमार्केट घटना के कारण कइल गइल, जौना में पुलिस द्वारा आंदोलन आ हड़ताल करे वाला मजदूर लोग पर गोलीबारी में कई लोग के जान गइल रहे।




#Article 492: क्रेटर लेक (174 words)


क्रेटर झील या क्रेटर लेक (, लोकल नाँव: giiwas) अमेरिका के पच्छिमी हिस्सा में, कैस्केड परबत श्रेणी में मौजूद एगो काल्डेरा झील बाटे। ई यूनाइटेड स्टेट्स के ओरेगन राज्य में बा।
ई झील क्रेटर नेशनल पार्क के मुख्य आकर्षण बाटे आ अपने साफ़ नीला रंग के पानी के खातिर जानल जाले।

ई झील माउंट मजामा नाँव के  ज्वालामुखी परबत के क्रेटर के धंसकाव से बनल काल्डेरा, जवन करीब -गहिरा बाटे आ करीबन 7,700 (± 150) पहिले बनल रहे,
में पानी भर गइले से बनल बाटे। हालाँकि, एह झील में न कौनों नदी गिरे ले न एकरा से बाहर निकसे ले, तबो एकर पानी भाप बनके उड़े से आ बरखा आ बरफ से आगम होखे से, लगभग 250 बरिस में बदल जाला। झील के गहिराई , बाटे आ एह प्रकार से ई यूनाइटेड स्टेट्स के सभसे गहिरा झीलसब में से एक बा। दुनिया के सभसे गहिरा झीलसब में एकर दसवाँ अस्थान बाटे।

झील के अंदर सिंडर कोन के पानी के सतह से ऊपर ले आ गइले के वजह से बनल दू गो टापू भी बाड़ें।




#Article 493: काली मरिच (164 words)


काली मरिच (Piper nigrum) एक ठो लता होला जवना में फूल आ फर लागे ला। मुख्य रूप से एकरा के फर खातिर उपजावल जाला जवन मसाला में इस्तेमाल होला। एकर फर लंबा झोंपा में फरे ला। फर सभ बहुत छोट-छोट कोइली वाला गोला होलें जे एक ठे लर में झोंप नियर लटकल होलें। झोंपा के तूर के थोड़ी देर ले गरम पानी में उसिन दिहल जाला जौना से बाहरी छिलका उतर जाला आ एकरा के सुखावत घरी एकर रंग करिया करे वाला एंजाइम सब के काम करे के मोका मिल जाला। कुछ दिन ले सुखावत समय एकरा ऊपरी परत पर सिकुड़न पैदा हो जाले। सुखा दिहला के बाद ई मसाला के रूप में इस्तेमाल खातिर तइयार हो जाला।

काली मरिच मूल रूप से भारत के पौधा हवे। दक्खिन भारत में एकर बड़ा पैमाना पर खेती होला। हालाँकि, अब ई उष्णकटिबंधीय जलवायु वाला कई देसवन में उपजावल जात बाटे। बरिस 2013 के आँकड़ा देखल जाय तब वियतनाम एकर सभसे ढेर उत्पादन करे वाला देस बाटे।




#Article 494: हीलियम (360 words)


हीलियम चाहे हिलियम (; ग्रीक शब्द हेलियोस से जेके मतलब सुरुज होला) एगो रसायनिक तत्व बाटे। एकर रासायनिक चीन्हा He हवे आ परमाणु नंबर 2 हवे। ई एगो बिनारंग, बेसवाद आ बिनागंध वाली; अक्रियाशील गैस हवे। ई मोनोएटामिक रूप में मिले ले आ बिसैला ना होखे ले। एह गैस के उबाल ताप सगरी रसायनिक तत्व सभ में सबसे कम हवे। हीलियम, हाइड्रोजन के बाद दुसरही सभसे हल्लुक गैस हवे आ ब्रह्मांड के जेतना हिस्सा के बारे में जानकारी बाटे ओह में ई हाड्रोजन के बाद दुसरा सभसे बेसी पावल जाए वाला तत्व भी बा। लगभग 24% तत्व द्रब्यमान एह गैस के रूप में बाटे। सगरी हैबी धातु सभ के मिला दिहल जाय तबो ई बारह गुना मात्रा में बा।

हीलियम के वर्तमान मात्रा में से ज्यादतर हिस्सा हीलियम-4 के बाटे जेकर अधिकतर हिस्सा बिग बैंग के समय के बनल हवे। एकरे अलावा तारा सभ में लगातार हीलियम के पैदाइश हो रहल बा काहें कि तारा सभ में परमाणु फ्यूजन होखत रहे ला।

पृथ्वी पर ई तत्व बहुत कम पावल जाय वाले तत्वन में से एक हवे—वायुमंडल में आयतन अनुसार बस 5.2 पीपीएम मात्रा मौजूद बा। वर्तमान में पृथ्वी पर जेतना भी हीलियम मौजूद बा ऊ लगभग सगरी हैभी रेडियोएक्टिव तत्व सभ (जइसे कि थोरियम आ यूरेनियम, हालाँकि अउरियो बाने) के प्राकृतिक रूप से रेडियोएक्टिव क्षय से निकलल हवे, काहें कि क्षय में निकले वाला अल्फा पार्टिकल सभ में हीलियम-4 के न्यूक्लिआइ होला। ई रेडियोजेनिक हीलियम बाकी प्राकृतिक गैस सभ के साथे मिलल बाटे आ एकर कंसंट्रेशन अधिकतम  7% (आयतन अनुसार) तक ले मिले ला, एही से एकरा के लो टेम्प्रेचर मेथड के कामर्शियल इस्तमाल खाती निकालल जाला, एह तरीका के फ्रैक्शनल डिस्टिलेशन कहल जाला। एकरे पहिले एकरा के नान-रिन्यूएबल संसाधन के रूप में देखल जाय काहें कि एक बेर एकरे वायुमंडल में प्रवेश के बाद एकरा के दोबारा इस्तेमाल खाती हासिल कइल संभव ना रहल-एकरा के बहुत कम सप्लाई वाली चीज मानल जाय। हालाँकि, हाल के अध्ययन सभ में ई बात सोझा आइल बा कि पृथ्वी के अंदरूनी हिस्सा में रेडियोसक्रियता द्वारा पैदा होखे वाली गैस प्राकृतिक रिजर्वायर (वायुमंडल) में पहिले से बेसी मात्रा में भी कंसंट्रेट पावल जा सके ला, कुछ दशा में ज्वालामुखी क्रिया द्वारा निकले के कारण।




#Article 495: स्तूप (313 words)


स्तूप ढूह या टीला नियर आकृति के एगो रचना होला जवना में (आमतौर पर बौद्ध) भिक्षु या भिक्षुणी लोग के शरीर के कौनों अवशेष गाड़ल गइल रहेला। एक तरह से ई भिक्षु लोग के समाधी भा यादगार होला। ई जगह धार्मिक रूप से पबित्र मानल जाले आ आसपास के जगह ध्यान लगावे खातिर इस्तेमाल होले।

सभसे पुरान स्तूप मध्य प्रदेश में साँची स्तूप हवे। भारत के अलावा ई अउरी अइसन देस सभ में भी बनावल गइल बाने जहाँ बौद्ध धरम के परभाव बा।

स्तूप के निर्माण के सुरुआत बुद्ध के समय से पहिले से हो चुकल रहे। श्रमण लोग के बइठल अवस्था में गाड़े खातिर चैत्य के निर्माण होखे। बुद्ध के निर्वाण के बाद उनुके जरा दिहल गइल आ राख के बाँट के आठ गो ढूह में समाधी बनावल गइल आ दू गो अउरी ढूह में अस्थि-अवशेष के समाधी दिहल गइल।

सभसे पुरान स्तूप सभ के पुरातत्व वाली जानकारी 4थी सदी ईपू के मिलेला। बौद्ध ग्रंथ सब के मोताबिक स्तूप के निर्माण बुद्ध के मरले के एक सदी बाद शुरू भइल। इहो मानल जाला कि पहिले ई चीज लकड़ी के बनावल जाय या फिर खाली भर माटी के ढेर एकट्ठा करि के गोल टीला के आकार दे दिहल जाय। बाद में ई पक्का ईंटा के बनावल जाए लागल।

अउरी बाद में, बौद्ध धर्म के बिस्तार के बाद, ई परंपरा भारत के बाहर के देसवन में पहुँचल। उदाहरण खातिर पूर्ब एशिया के देस सभ में बने वाला पैगोडा के एही स्तूप के निरखल रूप मानल जाला।

 
भारत के प्रमुख स्तूप में सारनाथ में धमेक स्तूप, साँची स्तूप, भरहुत स्तूप आ अमरावती स्तूप के गिनल जाला। सभसे ऊँच स्तूप थाईलैंड में फ्रा पथोमाचेदी स्तूप बाटे जवन 127 मीटर ऊँच बाटे। एकरे अलावा पाकिस्तान के स्वात घाटी में, श्रीलंका में आ अउरी बहुत सारा देसवन में पुरान स्तूप बाड़ें। सभसे बिस्तार से बनल स्तूप बोरोबुदुर में मौजूद बाटे जवन यूनेस्को द्वारा बिस्व विरासत स्थल घोषित बाटे।




#Article 496: बौद्ध धर्म (179 words)


बौद्ध धर्म एगो प्रमुख धर्म बाटे जवन गौतम बुद्ध के शिक्षा पर आधारित दर्शन आ जीवन शैली के अनुपालन करे ला। ई उत्तर भारत आ नेपाल के इलाका में पैदा भइल धर्म हवे जहाँ इतिहास के अनुसार गौतम बुद्ध छठवीं से चउथी सदी ईसा पूर्व के बीच में कौनों समय मगध राज में रहलें।

वर्तमान समय में ई धर्म भारतीय उपमहादीप, पूर्ब एशिया आ दक्खिन पूर्ब एशिया में प्रमुख रूप से बिस्तार लिहले बाटे। एकरे माने वाला लोग के संख्या के हिसाब से ई दुनिया के चउथा सभसे बड़ा धर्म बाटे।

वर्तमान भारत आ नेपाल के सीमावर्ती इलाका में शाक्य कुल में पैदा राजकुमार सिद्धार्थ, जिनके बाद में शाक्य मुनि आ गौतम बुद्ध कहल गइल बौद्ध धर्म के अस्थापना करे वाला रहलें। बुद्ध शब्द के अर्थ होला जेकरा के बोधि अर्थात सत्य के ज्ञान मिल चुकल होखे, जे जाग चुकल होखे। हालाँकि, बुद्ध के समय के बारे में कई ठो बिबाद बाड़ें, ज्यादातर लोग इनके जीवन 563 ई.पू. से 483 ई.पू. की बीच में मानेला।

बौद्ध धर्म चार गो आर्य सत्य आ अष्टांगिक मार्ग के अनुसरण के शिक्षा देला।




#Article 497: बौद्ध धर्म के इतिहास (820 words)


बौद्ध धर्म के इतिहास के आ सुरुआत गौतम बुद्ध के छठवीं सदी ईसा पूर्व में लुंबिनी, नेपाल में जनम के समय से ले के वर्त्तमान समय ले बिस्तार लिहले बाटे। एही से ई धरम संसार के कुछ सभसे पुरान धर्म में गिनल जा सकत बाटे। उत्तरी भारत आ नेपाल के सीमा वाला इलाका एह धर्म के जन्मभूमि बाटे जहाँ से ई धर्म समय के साथ एशिया महादीप के एगो बड़हन क्षेत्र पर बिस्तार लिहलस। एह बिस्तार के दौरान बौद्ध धर्म में कई बदलाव आ बिभाजन जैसे कि थेरवाद, हीनयान आ महायान शाखा के निर्माण इत्यादि भी भइल।

बुद्ध शब्द के अर्थ होला जेकरा के बोधि, अर्थात सत्य के ज्ञान मिल चुकल होखे, जे जाग चुकल होखे। वर्तमान भारत आ नेपाल के तराई वाला इलाका में शाक्य कुल में लुम्बिनी, जेवन शाक्य गणतंत्र क राजधानी रहे (वर्तमान में नेपाल में), नामक अस्थान पर राजा शुद्धोदन के बेटा के रूप में राजकुमार सिद्धार्थ के जन्म भइल। जज्ञान प्राप्त कइले के बाद उनके गौतम बुद्ध के नाँव से जानल गइल (गौतम गोत्र के नाँव रहल)। उहाँ की जन्म आ मरला क कौनो निश्चित समय आ तारीख़ नइखे मालूम ज्यादातर बिद्वान लोग गौतम बुद्ध के जीवनकाल 563 ई॰पू॰ से 483 ई॰पू॰ की बीच में मानेला। 

सुरुआती बौद्ध धर्म के समय गौतम बुद्ध के समय से ले के दूसरी बौद्ध संगीति ले के मानल जाला।

पाँचवीं सदी ईसा पूर्व में, महात्मा बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद पहिली बौद्ध संगीति, राजगृह में अजातशत्रु के समय में, बुद्ध के प्रमुख शिष्य महकस्सप के अध्यक्षता में भइल। एह संगीति (सम्मलेन या परिषद) में बुद्ध के उपदेश सभ के संकलन कइल गइल जवना के तिपिटक कहल जाला आ जवन शुरुआती बौद्ध धर्म बारे में जानकारी देला।

चउथी सदी ईसा पूर्व में, संघ में शामिल लोग के कुछ अनुशासन में ढिलाई के कारण उपजल बिबाद के सलटावे खातिर दूसरी बौद्ध संगीति बोलावल गइल। ई वैशाली में भइल रहे।

सम्राट अशोक (273 ई॰पू॰ - 232 ई॰पू॰) कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म अपना लिहलें। उनुके समय में राज संरक्षण में बौद्ध धर्म के तेजी से आ ब्यापक परचार-प्रसार भइल। अशोक, साँची स्तूप बनववलें आ जगह-जगह अशोक स्तंभ लगवा के नैतिक शिक्षा के प्रसार कइलें। अशोके के समय में, लगभग 250 ई॰पू॰ में तीसरी बौद्ध संगीति पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना के पास) में भइल। एह सम्मलेन के बाद बौद्ध धर्म के ब्यापक परचार करे खातिर भिक्षु लोग के दूर दूर ले भेजल गइल। अशोक के लड़िका महिंद आ लइकी संघमित्रा खुद श्रीलंका में बौद्ध धर्म के प्रचार करे गइल लोग। संघमित्रा, उहाँ अपने साथ बोधि बृक्ष के कलम ले गइली जवना के अनुराधापुर में रोपल गइल।

शुंग वंश (185-73 ई॰पू॰) के समय में बौद्ध धर्म पर संकट आ गइल आ बौद्ध ग्रंथन में मिले वाला बिबरण के आधार पर कहल जाला कि एह समय में सैकडन बौद्ध बिहार सभ के मटियामेट कइ दिहल गइल आ हजारन हजार बौद्ध भिक्षु लोग के हत्या करि दिहल गइल। बौद्ध ग्रंथन में इहो दावा कइल जाला की एह काल में बहुत सारा बौद्ध बिहार सभ के ऊपर हिंदू मंदिर बनवा दिहल गइल। हालाँकि, आदुनिक इतिहासकार लोग सबूत के आभाव में पुष्यमित्र शुंग के अइसन आरोप से बरी कर देला।

एही काल में बौद्ध लोग उत्तर आ दक्खिन दुनों ओर बिस्थापित भइल आ बौद्ध धर्म के कला केन्द्र मगध से हट के मथुरा आ गांधार हो गइल आ दक्किन में अमरावती आ भरहुत बौद्ध कला के केंद्र बनलें।

कुछ बिद्वान लोग के अनुसार महायान के आरंभिक पुस्तक प्रज्ञापारमिता सूत्र के रचना आंध्र देश में कृष्णा नदी के आसपास के महासांघिक लोग कइल। ई पहिली सदी ईसापूर्व के समय के दौरान भइल।

कनिष्क के समय में (100 ई॰) काश्मीर में थेरवाद शाखा के लोग बौद्ध संगीति बोलावल। ई श्रीलंका में भइल बौद्ध संगीति से करीब 200 साल पहिले भइल रहे। श्रीलंका वाली बौद्ध संगीति में सभसे पहिली बेर तीनों पिटक के लिखित रूप में संकालित कइल गइल रहे। एही से पाली धर्मग्रंथ के पहिला रूप अस्तित्व में आइल।

एह प्रकार से दू गो चउथी बौद्ध संगीति भइल, एगो काश्मीर में - थेरवाद के आ दूसरी श्रीलंका में सर्वास्तिवाद के माने वाला लोग के।

पहिली सदी से ले के 10वीं सदी के बीच बौद्ध धर्म के महायान शाखा के फइलाव भइल आ ई मध्य एशिया, चीन आ पूर्ब एशिया ले चहुँपल आ दक्खिन पूर्ब एशिया के अधिकतर देससभ में चहुँप गइल।

पांचवी सदी के दौरान बौद्ध धर्म में शैव मत के मिलावट होखे से आ वाममार्गी तन्त्र के आचरण के प्रवेश के बाद बौद्ध धर्म के एगो नयी शाखा के उत्पत्ती भइल जवना के वज्रयान नाँव हवे।

मानल जाला की भारत में राजनीतिक उथल-पुथल से जमीनी रास्ता के कम चालू रह गइला के कारण समुन्द्री मार्ग से यातायात बढ़ल आ एही से लंका के पाली धर्मग्रंथ, जवन थेरवाद के आधार हवें, अधिक प्रचलन बढ़ल।

वर्तमान समय में बौद्ध धर्म अपने जन्म-भूमि में एगो कम प्रचलित धर्म बाटे। हालाँकि, पूर्ब आ दक्खिन पूर्ब एशिया के देसवना में ई प्रमुख धर्म बा। तिब्बत पर चीन के शासन के अस्थापना के बाद तिब्बत के काफ़ी बौद्ध लोग पुरा दुनिया में फैल गइल बाटे। 




#Article 498: थेरवाद (132 words)


थेरवाद बौद्ध धर्म के एक ठो शाखा बाटे। ई पालि तिपिटक के मूल ग्रंथ माने ला आ एकर नाँव बुजुर्ग स्थविर (थेर) लोग के उपस्थिति में त्रिपिटक के संकलन भइले के कारण पड़ल। 

श्री लंका थेरवाद के प्रमुख केन्द्र हवे काहें से की इहें पहिली बेर तिपिटक के लिखित रूप में संकलन भइल रहे। श्री लंका से ई पूरब के देस, दक्खिन पूर्ब एशिया में फइलल काहें कि एह समय समुंदरी मार्ग से ब्यापार होखे आ लंका एह ब्यापार मार्ग के बीच में पड़े।

Theravāda Buddhism is followed by countries and people around the globe, and is:

Today, Theravāda Buddhists, otherwise known as Theravadins, number over 150 million worldwide, and during the past few decades Theravāda Buddhism has begun to take root in the West and in the Buddhist revival in India.




#Article 499: बौद्ध संगीति (215 words)


बौद्ध संगीति बौद्ध धर्म के अनुयायी बिद्वान लोग के एक प्रकार के सम्मेल्लन के कहल जाला। प्राचीन काल में अइसन कुल चारि गो संगीति भइल जिनहन के मकसद भगवान बुद्ध के शिक्षा के सही आ स्पष्ट रूप से पालन करे खातिर एह शिक्षा सभ के पाठ, संकलन आ ओह पर चर्चा कइल रहे।

पहिली बौद्ध संगीति बुद्ध के मरले के कुछ दिन बाद भइल रहे जवना में बुद्ध के शिक्षा सभ के स्पष्ट रूप से समझे आ अनुसरण करे खातिर उनके शिक्षा सभ के पाठ आ संकलन भइल जवन विनयपिटक आ सुत्तपिटक के प्राचीनतम अंश बा। दुसरी बौद्ध संगीति पहिली के करीब सौ बरिस बाद वैशाली में भइल आ एहमें विनय आ सुत्त पिटक के बिस्तार आ अभिधम्मपिटक के कुछ अंश के संकलन भइल। एह संगीति में अनुयायी लोग दू भाग में बँट गइल जवन बाद में हीनयान आ महायान कहाइल। तिसरी संगीति अशोक के काल में पाटलिपुत्र में भइल जवना में थेरवादी लोग के द्वारा विनयपिटक, सुत्तपिटक आ अभिधम्मपिटक के रूप में पाली तिपिटक के संकलन भइल।

सुरुआती चार गो संगीति के बाद ई परंपर टूट गइल आ बहुत बाद में जा के आधुनिक काल में पाँचवी संगीति हो पावल। बौद्ध संगीति के कुल संख्या के बारे में बहुत एकमत नइखे आ इहाँ पच्छिमी लेखन के हिसाब से इन्हन के बर्णन कइल गइल बाटे।




#Article 500: दुसरी बौद्ध संगीति (105 words)


दुसरी बौद्ध संगीति प्राचीन काल में बौद्ध धर्म के लोग के दुसरी सम्मलेन रहे पहिली संगीति के लगभग सौ बरिस बाद भइल। ई संगीति वैशाली (वर्तमान बिहार) में संपन्न भइल।

एह संगीति में विनयपिटक आ सुत्तपिटक के बिस्तार भइल आ अभिधम्मपिटक के संकलन भइल। एही संगीति में स्थविर लोग आ महासांघिक लोग संघ से दू हिस्सा में अलग हो गइल। इहे आगे चलि के हीनयान आ महायान के रूप लिहलस।

दुसरी बौद्ध संगीति में बीछल सात सौ लोग हिस्सा लिहल एही से एकरा के सप्तशातिका भी कहल जाला। दुसरी संगीति के बोलावल जाए के मुख्य कारण संघ के अनुशासन में ढिलाई के उपचार कइल रहे।




#Article 501: चउथी बौद्ध संगीति (119 words)


चउथी बौद्ध संगीति के नाँव से बौद्ध धर्म के दू ठो संगीति (सम्मलेन) सभ के जानल जाला। एह दु गो में से पहिली श्रीलंका में पहिली सदी ईसा पूर्व में भइल आ एही संगीति में थेरवाद के त्रिपिटक के ताड़ के पत्ता पर लिख के सुरक्षित कइल गइल। 

दुसरकी संगीति काश्मीर में पहिली सदी ईसवी में भइल आ ई सर्वास्तिवाद के लोग के संगीति रहे। एकर मुख्य उद्देश्य महायान के कुछ चीज के स्वीकार कइल रहे आ एही संगीति में बुद्ध के पूजा, मूर्ति आ बोधिसत्व के संकल्पना के स्वीकार कइल गइल। एह संगीति में सर्वास्तिवाद के त्रिपिटक के संकलन भइल जवन मूल रूप में संस्कृत में रहे बाकी अब किछु अंश मात्र बचल बाटे, चीनी अनुवाद पूरा मिलेला।




#Article 502: खंध (156 words)


बौद्ध दर्शन में पाँच गो स्कंध या खंध (संस्कृत:स्कन्ध) मानल गइल बाड़ें जिनसे अनुभव करे वाली सत्ता या ब्यवहार में जवना के जीवात्मा कहि दिहल जाला, के रचना मानल गइल बाटे। ई पाँच गो स्कंध - रूप, वेदना, संज्ञा, संस्कार आ विज्ञान हवें। इनहने के क्षणिक संघात (एकट्ठा भइले) के  पुद्गल या आत्मा कहल जाला।

पाँच स्कंध, हीनयान के प्रमुख सिद्धांत क्षणभंगवाद के दू गो रूप संतानवाद आ संघातवाद में से संघातवाद के अंतर्गत आवेलें। संघात के मतलब होला एकट्ठा भइल (aggregate)। क्षणभंगवाद ई कहे ला कि चेतना से युक्त ना त आत्मा बा न भौतिक पदार्थ। ना त कौनों आत्मा या पुद्गल नाम के चेतन द्रव्य बाटे न कौनों भौतिक पदार्थ। सत् खाली क्षणिक धर्म हवे, क्षणिक विज्ञान आ क्षणिक परमाणु के प्रवाह हो रहेला। संघातवादके अनुसार ई आपस में मिल के एकट्ठा हो के पाँच परकार के खंध बनावे लें आ ई पांचो खंध एकट्ठा होके महसूस करे वाला सत्ता (आत्मा या पुद्गल) हवे।




#Article 503: मिर्जापुर (173 words)


मिर्जापुर () भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में, दक्खिनी-पूरबी हिस्सा में एक ठो शहर बा। शहर गंगा नदी के दाहिने तीरे पर बसल बा आ एकरे आसपास पहाड़ी इलाका बाटे। एह पहाड़ी सभ पर कई गो मंदिर आ गुफा बाड़ीं जे हिंदू लोग पबित्र माने ला आ इहाँ पूजा-पाठ आ दर्शन करे आवे ला। इन्हना में सभसे परसिद्ध विंध्यवासिनी देवी के मंदिर बा के मिर्जापुर सहर से कुछे दूरी पर विंध्याचल में बाटे। कबो-कबो एह दुनों जगह के मिला के मिर्जापुर-बिंध्याचल के सड़मेंड़ एकही नाँव से भी जानल जाला।

मिर्जापुर शहर दिल्ली आ कलकत्ता दुनों से लगभग 650 किलोमीटर के दूरी पर बा; इलाहाबाद से ई लगभग 87 किलोमीटर पुरुब ओर आ बनारस से करीबन 67 किलोमीटर पच्छिम (तनिका दखिनाहुत) पड़े ला।

साल 2011 के जनगणना अनुसार मिर्जापुर के कुल शहरी जनसंख्या 2,34,871 बाटे आ आसपास के उपशहरी इलाका के मिला लिहल जाय तब कुल जनसंख्या 2,45,817 बा। जनसंख्या के हिसाब से ई भारत के 188वाँ शहर बाटे। जनगणना आँकड़ा के मोताबिक एह शहर में लिंगानुपात 870 आ साक्षरता के दर 76.47% बाटे।




#Article 504: अशोक (1341 words)


अशोक (धम्म लिपि: 𑀅𑀲𑁄𑀓, असोक; 304—232 ई॰पू॰), चाहे असोक महान मौर्य वंश के एगो भारतीय सम्राट रहलें जे  से 232 ई॰पू॰ ले लगभग मय भारत पऽ राज कइलें। भारत के महान सम्राट लोग में से एक, अशोक के राज उत्तर-पच्छिम में हिंदुकुश से ले के पूरुब में वर्तमान बांग्लादेश ले, आ दक्खिन के ओर आजकाल के तमिलनाडु आ केरल के कुछ हिस्सा छोड़ के बाकी मय भारत के छेंकले रहे। एह राज के राजधानी मगध में पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) रहल आ उज्जैन आ तक्षशिला में क्षेत्रीय राजधानी रहलीं सऽ।

अशोक के जीवन के सभसे बड़ घटना कलिंग के लड़ाई रहल जेकरे बाद ऊ लड़ाई आ हत्या से बैराग ले के बौद्ध धरम अपना लिहलें आ शांति के परचार में लाग गइलें। अशोक के समय में तीसरका बौद्ध संगीति पाटलिपुत्र में भइल आ ऊ भारत से बाहर के देस सभ में बुद्ध के उपदेश फइलावे खातिर धर्मप्रचारक भेजलें।

अशोक कय जगह प खम्भा गड़ववलें जिनहन प नैतिक उपदेश खोदवावल रहल। इन्हन के आज अशोक स्तंभ कहल जाला। भारत के राष्ट्रीय चीन्हा सारनाथ के अशोक स्तंभ से लिहल गइल बाटे।

आदेशलेख सभ में अशोक नाँव दू बेर आइल बा, पहिला मास्की के लेख में जेने सुरूआते  देवनांपियस अशोकस से भइल बा, आ दुसरा बेर गुर्जरा के अभिलेख में अशोक नाँव आइल बा। अबले के अनुमान से इहे साबित भइल बा की बाकी आदेशलेखन में जेकरा के पियदसि आ देवानांपिय कहल गइल बा ऊ उहे राजा हवें जिनके बौद्ध ग्रंथन में अशोक बतावल गइल बा आ पुराणन में अशोकवर्द्धन कहल गइल बा। हालाँकि, नीलकंठ शास्त्री के कहनाम बा कि पियदसि इनकर असली नाँव रहल आ अशोक , या फिर अशोक असली नाँव रहल आ पियदसि विरुद रहल, ई बात तयजिवन जिइल कठिन बा

अशोक के शुरुआती जीवन

चक्रवर्ती अशोक सम्राट बिंदुसार आउर रानी धम्मा के बेटा रहन। भारतीय ग्रंथ भविष्य पुराण में भी एह बात के लिखल गइल बा कि चंद्रगुप्त के बियाह सैल्युकस के बेटी से भइल रहे। 

पुरान बुद्ध, जैन आ हिन्दु लेखन‌ से अशोक के बारे में अलग-अलग बात पता चलेला। अवदान साहित्य मे लिखल बा कि अशोक रानी सुभद्रंगी के बेटा रहन। अशोकवदन में लिखल बा कि अशोक के माई चम्पा नगर के एगो  ब्राह्मण के बेटी रही। अशोक के नाँव उनके धइल रहे। दिव्यदानो मे  अइसने कहानी लिखल बा लेकिन माई के नाँव जनकपदकल्यानी लिखल बा।   

सत्ता के बिस्तार

२७२इशा पूर्व में राजा बिन्दुसार के मरला के बाद राजगद्दी खातिर लड़ाई चालू हो गइल।दिव्यदान में लिखल बा कि, बिन्दुसार आपन बड़ बेटा सूसिम के आपन उत्तराधिकारी  बनावल चाहत रहन, बाकिर अशोक के आपन पिता के मंत्री लोगन के सहजोग मिलल रहे। मंत्री लोग सूसिम के अहंकारी मानत रहन, आउर ई लोग के लागत रहे की सूसिम उ लोग के इज्जत ना करी। पता लागेला कि एगो रधागुप्त नांव के मंत्री  अशोक के राजगद्दी ले पहुचावे में महत्वपूर्ण भूमिका निभवले रहे। अशोकवदन मे एह बात के लीखल गइल बा कि राजा बनला के बाद अशोक रधागुप्त के प्रधानमंत्री बनवले रहन। दिपवंश आ महावंश मे लिखल बा कि अशोक आपन ९९ भाईयन के मार के राजा बनल रहन, बाकिर एह बात के सबूत ना मिले। 

राजा बनला के बाद अशोक आपन राज्य के बहुत तेजी से बिस्तार कीइलें। हुनकर  राज उत्तर-पच्छिम में हिंदुकुश से ले के पूरुब में वर्तमान बांग्लादेश ले, आ दक्खिन के ओरे आजकाल के तमिलनाडु आ केरल के कुछ हिस्सा छोड़ के बाकी मय भारत प बिस्तार वाला रहल, उनकर राज बलुचिस्तान आ अफगानिस्तानो पे  रहल।

बियाह

अलग-अलग स्त्रोतन से पता लागेला कि अशोक के पाँच गो बियाह भइल रहे। उ लोग के नाँव देवी, करुवाकी, तिष्यारक्षा पद्मावती आउर असन्धिमित्रा रहे। अइसहीँ  ईहो पता लागेला कि अशोक चार बेटा आ दुगो बेटी के बाप रहन। बेटन के नाम महेन्द्र(देवी के बेटा), तिवारा (करुवाकी के बेटा), कुनाल ( पद्मावती के बेटा), आउर जकुला रहे। बेटी लोग के नाम संघमित्रा(देवी के बेटी) आ चारूमती रहे।

कलिंगा  पऽ बिजय आ बुद्ध धर्म में परिवर्तन

भले अशोक के जीवन के जीवन खून खराबा से भरल रहे बाकिर कलिंगा पऽ बिजय हासिल कइला के बाद उ बुद्ध धर्म के अपना लिहलें।कलिंग राज्य ओह समय में एगो गणतांत्रिक राज्य रहे जवन की ओह घड़ी के भारत में एगो अपवाद नियन रहे, काहे  की ओह घड़ी राजतंत्र रहे। अशोक के गद्दी पऽ बइठला के आठ साल बाद कलिंग युद्ध भईल। शिलालेखन से पता लागेला की युद्ध बड़ी भयानक रहे जेमे लगभग एक लाख सैनिक मारल गइलें।

कहल जाला की कलिंग पऽ बिजय हासिल कइला के बाद , एक दिन अशोक नगर घूमे गइलें जेने उनका खाली तबाही लउकल। युद्ध से भईल ओह तबाही उनका के बदल दिहलस, आ ओकर बाद उ बुद्ध धर्म के अपना लिहलन।

देहांत आउर बिरासत

अशोक ३६ साल लें राज कइलन, हुनकर २३२ ई•पु में देहांत हो गइल। कहल जाला की हुनकर अंतिम संस्कार बजी उनकर लाश सात दिन आउर सात रातन ले जलत रहल।उनका मरला के बाद मौर्य साम्राज्य ५० साल में ही खतम हो गइल। 

१८५ ई•पु मे अंतिम मौर्य सम्राट बृहदरथ के हत्या हुनकर सेनापति द्वारा कर दिहल गइल। जेकरा बाद पुष्पमित्र सूंघ राजा बनलें आ सुंघ वंश के स्थापना कीइलें। 

अशोक के बारे जादे तर बात शीलालेखन से पता लागेला जवन की प्राकृत भाषा में लिखल बा।

अंग्रेजन के समय के इतिहासकार लगभग अशोक के भुला गइल रहन, बाकिर जेम्स प्रिंसपी ऐतिहासिक स्त्रोतन के फेनू से जोहे के काम कइलन। जॉन ह्यूबर्ट मार्शल एगो आउर महत्वपूर्ण इतिहासकार रहन।

अशोक के जीवन आ शासन के जानकारी जादे तर बुद्ध स्त्रोतन से मिलेला। अशोकवदन से अशोक के बारे में ढेर जानकारी मिल जाला,आउर जानकारी दीपवंश,महावंश आ अशोक के शिलालेख सभ से मीलेला। अशोक के घड़ी के चीज कुम्हार,पटना मे मिलेला।

अशोक के अध्यादेश:- अशोक के अध्यादेश ३३ गो शिलालेखन के समूह बा। ई शिलालेख सभ भारत आ पाकिस्तान में फैलल बा। ई शिलालेख सभ भारत के इतिहास के एगो सभसे बरियार राजा द्वारा बुद्ध धरम के परचार के कहानी बतवेला।

महावंश:- ई श्रीलंका के राजा लोग के लिखल एगो कविता हऽ जेकरा पाली भाषा में लिखल गइल बा।

अशोक के जीवन के जानकारी फेनु से प्राप्त करे में सभ से जादे बुद्ध स्त्रोत के इस्तेमाल कईल गईल बा। पारंपरिक लेखन के आधार पऽ शुरुआती विद्वान अशोक के एगो बौद्ध सम्राट मनले बाड़न, जेकरा धर्म बदले के पड़ल रहे,आ जे बुद्ध धर्म के परचार कईले  रहे। रोमिला थापर अशोक के बारे में लिखले बाड़ी की  हमनी के अशोक के दू तरह से देखे के चाहीं, पाहिला एगो राजनेता जवन एक समय में आपन साम्राज्य स्थापित कइलन, आ दूसरा एगो अइसन आदमी जे समाज के बदले खातिर आपन आचार विचार के समाज में फैलीईलें। अशोक अपना घड़ी के हर धर्म के इज्जत करत रहन।

हालाकि शिलालेख से ई बात साफ पता लागेला की अशोक बुद्ध धर्म के मानत रहन। एगो शिलालेख में अशोक जानवर सभ के बली देवे वाला वैदिक अनुष्ठान के प्रतिबंधित कईले बाड़न, एकरा से ई बात साबित होखेला की ऊ वैदिक परंपरा के ना मानत रहन। ऊ बुद्ध धर्म के पवित्र जगहन पऽ आपन स्तंभ खड़ा करवईलें बाकिर बाकी सभ धर्म के पवित्र जगह पऽ स्तंभ ना बनववलन। अशोक कर्तव्यन के देखावे ला धम्म शब्द  के इस्तेमाल कइलन,जवन एगो बौद्ध शब्द हऽ। साथे सारे ऊ बुद्ध धर्म के तीन गो उपदेशनो के  परचार कइलन।

अशोक के सभ शिलालेखन में अशोक के एगो निमन आ दयालु राजा देखावल गईल बा। कलिंग के शिलालेखन में अशोक अपना के आपन प्रजा के पिता कहले बाड़न आउर आपन प्रजा के आपन संतान बोलले बाड़ें। अशोक से पहिले घर आ मकान अस्थाई समान से बनत रहे जईसे लकड़ी, बांस आ खपड़ा। पाटलिपुत्र में अशोक आपन लकड़ी के महल के पत्थर के बंववलें।ओह महल के बनवावे में उ बिदेसी कारीगर के इस्तेमाल  कईले रहन।

 अशोक स्तंभ 

अशोक जगह जगह स्तंभ बनववले रहन। अईसे तऽ अशोक के ढ़ेरे स्तंभ होखे के चाहीँ लेकिन अभी खाली दसे गो बा। स्तंभ सभ के औसत ऊंचाई ४०-५० फीट आ वजन ५०,००० किलोग्राम बा। सँवसे स्तंभ सभ के बनारस में तरासल गईल रहे आ फिर जगह जगह ले जा के खड़ा कईल गईल रहे।स्तंभ सभ के खोज सोरहवाँ शताब्दी में थॉमस कॉर्यात  कईलें रहन।

 सिंह चतुर्भुज स्तंभ शीर्ष 

सिंह चतुर्भुज स्तंभ शीर्ष अशोक के सारनाथ के स्तंभ पऽ धईल रहे, बाकिर अब उ सारनाथ संग्रहालय में धईल बा।एकरा भारत के राष्ट्रीय चिन्ह के रूप में भी अपनावल गईल बा।




#Article 505: दिघोंच (162 words)


दिघोंच (, बै॰:Anas acuta) चिरइन के एगो प्रजाति बाटे। ई पनिहा चिरई हवे आ अपना आकृती में बत्तख आ हंस के बीच के होखे ले आ साइज में ई माझिल आकार के होखे ले। नर आ मादा के बीचा में रंग-रूप में भरपूर लैंगिक बिसमरूपता पावल जाले, मने कि दुनों के रंगरूप अलग-अलग होखे ला।

ई एगो प्रवासी चिरई हवे आ गरमी के दिना में उत्तरी ठंडा प्रदेश में रहे ले आ एही इलाका में इनहन के प्रजनन भी होखे ला। जाड़ा के दिन में ई दक्खिन उतर आवे लीं आ गर्म-इलाका में आ जालीं जे में पूरा मानसूनी इलाका सामिल बा आ कुछ समशीतोष्ण इलाका भी। ई आस्ट्रेलिया महादीप के छोड़ के बाकी सगरी महादीप में मिले ले। हालाँकि, अफिरका, दक्खिनी अमेरिका (एकदम उत्तरी हिस्सा) आ दक्खिन एशिया में ई बस जाड़ा भर प्रबास पर रहे लीं।

प्रजाति के बिलुप्त होखे के आधार पर इनहन के खतरा मुक्त श्रेणी में रखल गइल बा काहें की ई भरपूर संख्या में पावल जालीं।




#Article 506: ऑपन हैंड (179 words)


ऑपन हैंड या ऑपन हैंड मॉन्यूमेंट (, ) एक ठो मॉन्यूमेंट बाटे जे भारतीय शहर चंडीगढ़ में बा। ई स्मारक चंडीगढ़ के प्लानिंग करे वाला आर्किटेक्ट लि कोर्बूजिए के डिजाइन कइल हवे। एकर प्रतीकात्मक अरथ हवे एगो खुलल हाथ, देवे खातिर आ लेवे खातिर; शांति समृद्धि आ मानवता के एकता। लि कोर्बूजिए के कई ठो ऑपन हैंड स्मारक सभ में ई सभसे बड़हन बाटे आ  ऊँचाई वाला बा। एकर धातु से बनल हिस्सा  ऊँच बाटे आ ई हवा में घुमरी काटे खातिर डिजाइन कइल गइल रहल।

ई चीन्हा कोर्बूजिए के डिजाइन के थीम के प्रमुख हिस्सा रहल जवन उनुका खातिर शान्ति आ पुनर्स्थापन के प्रतीक रहल। कोर्बूजिए के इहो कहनाम रहल कि ई 'दूसरी मशीन क्रांति' के भी प्रतीक रहल।

ऑपन हैंड मॉन्यूमेंट चंडीगढ़ के राजधानी कॉम्प्लेक्स, जवन सेक्टर 1 में बा, में मौजूद बा आ एकरे पाछे हिमालय के शिवालिक श्रेणी के सीन दिखाई पड़ेला। चंडीगढ़ शहर खुद नेशनल हाइवे 21 आ नॅशनल हाइवे 22 के कटान पर एगो प्रमुख उत्तर भारतीय शहर बाटे जे आवागम के साधन द्वारा कई मुख्य शहर सभ से बढियाँ जुड़ाव वाला बाटे।




#Article 507: पनकउआ (360 words)


पनकउआ (, बैज्ञानिक नाँव:Phalacrocorax carbo) चिरइन के एगो प्रजाति बाटे। ई समुंदरी चिरई सभ के कोर्मोरैंट परिवार के सदस्य हवे। एकरा बंस के नाँव लैटिनाइज रूप हवे आ एकर उत्पत्ति प्राचीन यूनानी भाषा के  φαλακρός (फालाक्रोस, चंडूल) आ κόραξ (कोराक्स, कागा) से बाटे आ कार्बो मने लैटिन में चारकोल होला।

एकरे अंडा देवे के भूगोलीय इलाका पुरानी दुनिया आ उत्तरी अमेरिका के अटलांटिक तट बाटे।

ई एक ठो बड़हन आकार के करिया रंग के चिरई हवे आ एकरा आकर में इलाका के हिसाब से बहुत बिबिधता देखे के मिले ला। एकर वजन  से  ले बतावल जाला। नर पनकउआ के साइज मादा के तुलना में बड़ा होला आ ई भारी भी होखे लें, एकर सभसे प्रमुख उपप्रजाति (P. c. carbo) यूरोप में पावल जाए वाली (P. c. sinensis) से 10% बड़ा होले। सभसे हल्लुक जर्मनी में पावल जाए वाली (P. c. sinensis) होले, जहाँ 36 गो नर सभ के औसत वजन  नापल गइल रहल आ 17 गो मादा सभ के वजन  जोखला पर  आइल। सभसे भारी वजन प्रिंस एडवर्ड दीप, कनाडा में (P. c. carbo) के रहल जहाँ 11 गो नर सभके औसत वजन  आ 11 गो मादा सभके वजन  जोखल गइल। लंबाई  आ पाँख बिस्तार  बतावल गइल बाटे।

ई बहुत कॉमन चिरई हवे आ समुन्दर आ एश्चुअरी वाला इलाका में पावल जालीं। ढेर उत्तर में पावल जाए वाली चिरई सभ जाड़ा के दिन में समुन्दर के किनारा के सहारे दक्खिन की ओर प्रवास करि जालीं जहाँ पर्याप्त मछरी मिलें।

The great cormorant breeds mainly on coasts, nesting on cliffs or in trees (which are eventually killed by the droppings), but also increasingly inland. Three or four eggs are laid in a nest of seaweed or twigs.

The great cormorant can dive to considerable depths, but often feeds in shallow water. It frequently brings prey to the surface. A wide variety of fish are taken: cormorants are often noticed eating eels, but this may reflect the considerable time taken to subdue an eel and position it for swallowing, rather than any dominance of eels in the diet. In British waters, dive times of 20–30 seconds are common, with a recovery time on the surface around a third of the dive time.




#Article 508: सफेद गिद्ध (536 words)


सफेद गिद्ध भा मिस्रदेसी गिद्ध (, इजिप्शियन वल्चर; बैज्ञानिक नाँव: Neophron percnopterus) चिरइन के गिद्ध समूह के एगो प्रजाति बाटे। ई पुरानी दुनिया के गिद्ध हवे आ जीनस नियोफ्रौन (Neophron) के एकलौता सदस्य बा। एकर निवास के इलाका बहुत ब्यापक बाटे आ पच्छिमी यूरोप आ उत्तरी अफ्रीका से भारत ले फइलल बाटे।

सफेद गिद्ध मुख्य रूप से लाश के माँस खाला बाकी मौका मिलले पर ई छोट-छोट स्तनधारी, छोट चिरई, रेप्टाइल इत्यादि के शिकार भी करे ला। दूसर चिरई सब के अंडा भी खा लेला, बड़ा होखला पर ओकरा के पत्थर पर पटक-पटक तूर देला। चिरई सभ के द्वारा औजार के अइसन उपयोग एगो दुर्लभ चीज बाटे। आपन खतोना बनावे के समय ऊन नियर चीज के लपेट के एकट्ठा करे खातिर ई लकड़ी के छोट डंडी सभ के औजार के रूप में इस्तेमाल करे ला।

समशीतोष्ण इलाका में रहे वाला सदस्य जाड़ा के मौसम में दक्खिन के ओर प्रवास करे लें जबकि उष्णकटिबंधीय आबादी अपने जगह पर स्थाई रहेले। एह प्रजाति के आबादी में 20 वीं सदी में काफी गिरावट आइल बाटे आ एकर मुख्य कारण शिकार, आकस्मिक विषाक्तता, आ बिजली लाइन के साथ टकराव बाटे जौना सभ से एह गिद्धन के खतरा होला।

एह प्रजाति के वयस्क सदस्यन के पाँख के रंग सफेद होला आ करिया रंग के उड़ान पंख होलें। जंगली सदस्य सभ में आमतौर पर सफेद पाँख के रंग मुर्चाइल लोहा के रंग के या भूअर रंग के छाया लिहले, कीचड़-कनई के रंग के होला जवना के कारण लौह युक्त मिट्टी से लागल गंदगी के बतावल जाल। चित्र में देखावल सदस्य चिड़ियाघर से बा एही से ई एकदम सफेद बा। ठोर पतला आ लंबा बाटे आ ऊपरी जबड़ा के नोक मोड़दार बा। नथुना, एगो पट दरार के रूप में बाटे। गर्दन के पंख भी लमहर होलें। उड़ान पाँख नोकदार होलें आ इनहन में तीसरा ग्रुप सबसे लमहर होला; पोंछ पाचर के आकार के होले। वयस्क के पैर गुलाबी आ लरिकाईं में पैर माटी के रंग के होला। पंजा लमहर आ सीधा होलें, तीसरी आ चउथी अँगुरी अपने आधार के लग्गे कुछ झिल्लीदार होले।

चोंच के रंग अधिकतर प्रजाति में करिया होला जबकि भारतीय उप-प्रजाति (ginginianus) के वयस्क सदस्यन में पीयर रंग के होला। रासमुसेन आ एंडर्टन (2005) सुझाव देदेल बाटें की उप-प्रजाति के बर्गीकरण खातिर एह लच्छन के अउरी अध्ययन के जरूरत बाटे। आमतौर पर नर आ मादा में अंतर कइल मुश्किल होला, हालाँकि, नर अपने मिलन काल में कुछ गहिरा नारंगी चेहरा वाला होलें। मादा के आकार औसतन कुछ बड़ा होला आ ई नर के तुलना में 10-15% भारी होली। लरिकाईं में ई करिया आ चॉकलेट रंग के होलें आ सफेद धब्बा वाला होलें, जबकि वयस्क के रंग कम से कम पाँच बरिस के उमिर के बाद हासिल होला।

वयस्क सफेद गिद्ध के पोंछ के पाँख के नोक से ठोर के नोक तक के लंबाई 47-65 सेंटीमीटर (19-26 इंच) नापल गइल बाटे। तुलना में कुछ छोट आकार के N. P. ginginianus उप-प्रजाति के नर के आकार 47-52 सेंटीमीटर (19-20 इंच) आ मादा के आकार 52-55.5  सेंटीमीटर (20.5-21.9 इंच) के होला।पाँख के फइलाव शरीर के कुल लंबाई के  लगभग 2.7 गुना ले होला। स्पेन में एह चिरई के वजन 1.9  किलोग्राम(4.2 पौंड) आ कैनरी द्वीप में पावल जाए वाली उप प्रजाति (majorensis gigantism) 2.4 किलोग्राम (5.3 पौंड) के भार वाली बतावल गइल बाटे।




#Article 509: रैलस एक्वाटिकस (203 words)


रैलस एक्वाटिकस (अंगरेजी: Water rail; वाटर रेल; बैज्ञा॰ नाँव:Rallus aquaticus) चिरइन के एगो प्रजाति बाटे। ई चिरई यूरोप, एशिया आ उत्तरी अफिरका के अइसन हिस्सा सभ में पावल जाले जहाँ पर्याप्त बनस्पति होखे आ पानी के किनारे मूँज नियर लमहर घास होखे। एही मूँजहन सभ में ई अंडा देले आ बच्चा पोसे ले। ज्यादातर यूरोप आ पच्छिमी एशियाई इलाका में ई सालभर निवास करे ले हालाँकि कुछ उत्तरी इलाका में ई गरमी के दिन में जाले आ अफिरका आ भारतीय उपमहादीप में ई जाड़ा के दिन में आवे ले।

एकर पुरहर उमिर के सदस्य के औसत लंबाई  23–28 सेंटीमीटर (9–11 इंच) के आसपास होला आ शरीर कुछ चापट अकार के होला। ई पानी के किनारे लमहर घास वाला इलाका में पानी के सतह से कुछ ऊँचाई पर आपन खतोना बनावे ले। हलका माटियाहूँपन लिहले सफ़ेद रंग के अंडा के सेवे के काम मादा करे ले आ 19-22 दिन के बाद एह में से बच्चा निकले लें। मादा अपने अंडा या बच्चा सभ के बाहरी जीव जन्तु से बचावे ले आ अगर एकर खतोना कौनों जानवर देख ले तब अंडा बच्चा दुसरे जगह पहुँचा देले।

ई चिरई सर्वभक्षी होले आ आमतौर पर पानी आ नम जमीन के किनारे से छोट किरौना पकड़ के खाले।




#Article 510: बाल दिवस (259 words)


बाल दिवस () अलग-अलग देसवन में साल के अलग-अलग तारीख के मनावल जाला बाल दिवस मनावे के सुरुआत के इतिहास 1925 से सुरू होला जब बाल कल्याण खातिर बिस्व सम्मलेन (World Conference for the Well-being of Children) में बाल दिवस मनावे के प्रस्ताव रखल गइल। एकरा बाद ई 1954 से स्थापित हो गइल आ एगो कौनों उचित बीछल दिन के मनावल जाए लागल।
बाल सुरक्षा खातिर अंतर्राष्ट्रीय दिवस बहुत सारा देसवन में 1 जून के मनावल जाला। ई 1950 से मनावल जाए शुरू भइल आ वीमंस इंटरनेशनल डेमोक्रेटिक फेडरेशन के मास्को काँग्रेस (22 नवंबर 1949) के द्वारा स्थापित हवे। संजुक्त राष्ट्र के निर्धारित दिन 20 नवंबर हवे जहिया यूनिवर्सल चिल्ड्रेंस डे मनावल जाला।

भारत में बाल दिवस चाचा नेहरू के जनम दिन 14 नवंबर के मनावल जाला।

यूनिवर्सल चिल्ड्रेंस डे यानि सर्बदेशीय बाल दिवस, संयुक्त राष्ट्र के निर्धारित तिथि 20 नवंबर के मनावल जाला। एकरे पीछे कारण ई हवे की एही तारीख के 1959 में बाल अधिकार के घोषणापत्र (Declaration of the Rights of the Child) के अंगीकार कइल गइल आ 1989 में एही तारीख़ के  बाल अधिकार के समझौता (Convention on the Rights of the Child) भइल। 

भारत में बाल दिवस 14 नवंबर के मनावल जाला। एही दिन भारत के पहिला प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जनमदिन हवे। नेहरू के बच्चन से बहुत लगाव रहे आ ऊ लड़िकन के चाचा नेहरू के रूप में जानल जानें।

अलग-अलग देसवन सभ में बाल दिवस अलग-अलग तारीख के मनावल जाला। सभके आपन आपन कारण बाटे। नीचे कुछ प्रमुख देस सभ के बाल दिवस के लिस्ट तारीख के क्रम में दिहल गइल बाटे:




#Article 511: अराक्नोथेरा मैग्ना (207 words)


अराक्नोथेरा मैग्ना (, बैज्ञानिक नाँव:Arachnothera magna) चिरइन के नेक्टरनिडाई (फूल के रस चूसे वाली चिरई) परिवार के एगो प्रजाति बाटे।

ई एक ठो छोट साइज के चिरई होली सन, लगभग गौरइया के आकार के। एकर रंग जैतूनी पीयर होला आ ओह पर गाढ़ा रंग के धारी (streaks) होखे लीं। एकर ठोर लमहर, पातर आ हल्का सा गोलाई लिहले आर्च नियर होला। ठोर खास, फूलन के रस चूसे के हिसाब से होला। ठोर के रंग करिया आ टांग के रंग पीयर होला।
पेट आ सीना के हिस्सा पीयर रंग के आ करिया धारी वाला होला।

एह चिरई ए प्राकृतिक आवास उपउष्णकटिबंधीय आ उष्णकटिबंधीय इलाका के नम निचली जमीन वाला जंगली हिस्सा आ नम पहाड़ी जंगल वाला इलाका हवें। भूगोलीय बिस्तार के हिसाब से देखल जाय तब, ई चिरई दक्खिनी एशिया आ दक्खिन पूरब एशिया के हिस्सन में पावल जाले। भारत के पूरबी राज्यन में, भूटान, बांग्लादेश, बर्मा, कम्बोडिया, चीन, लाओस, मलेशिया, थाईलैंड आ वियतनाम में पावल जाले।

एह प्रजाति के चिरईन के अकेल या जोड़ा में घूमत पावल जाला। एकरा अंडा देवे के समय मार्च से जुलाई के बीच होला। खतोना, मुख्य रूप से छोट पतई सभ के बनल होला आ अक्सर कौनों बड़हन पतई के पछिला हिस्सा में सटल होला।

ई चिरई फूलन के रस चूसे ले।




#Article 512: गोटहार्ड बेस सुरंग (240 words)


गोटहार्ड बेस सुरंग ()  स्विट्ज़रलैंड में आल्प्स पर्वत के नीचे से उत्तरी आ दक्खिनी यूरोप के तेज गति वाली रेल सेवा से जोड़े वाली एगो सुरंग बा जवन 1 जून 2016 से चालू भइल आ दिसंबर 2016 ले पुरा तरीका से काम करे लागी। 57 किलोमीटर लमहर ई सुरंग दुनिया के सभसे लमहर आ सभसे गहिरी परिवहन सुरंग बा आ ई रेल लिंक नीदरलैंड्स के रोटरडैम आ इटली के गेनोआ के जोड़ी। 

स्विट्जरलैंड के कहनाम बाटे की ई सुरंग यूरोप में माल-परिवहन में एगो क्रांतिकारी क़दम होखी काहें से की अभिन ले एह रास्ता पर सामान के ढोआई लाखन गो ट्रकन से होखत रहल बा बाकिर अब ई सामान एह सुरंग के बन गइले के बाद रेल से ढोआ सकत बाटे। एकरे बनले के बाद से ज़्यूरिख़ आ मिलान के यात्रा में लागे वाला टाइम में एक से दू घंटा चालीस मिनट के कमी आई।

ई बेस सुरंग के लंबाई के साथ दुनिया में सबसे लंबा यातायात सुरंग बाटे आ एकरे दुनों मुहाना के बीच के भूगणितीय दूरी बाटे। उहो तब जब ई समुद्र के लेवल से   के अधिकतम ऊंचाई की संघे आल्प्स भा कौनों भी अन्य प्रमुख पर्वत श्रृंखला के निचे से हो के गुजरे वाला पहिला समतल (फ्लैट) मार्ग बाटे। ई दुनिया की सबसे गहिरी यातायात सुरंग भी बन गइल बा काहें की एकर अधिकतम गहराई लगभग बा जवन पृथ्वी पर गहिरा खदान सभ के बाराबर बाटे। वेंटिलेशन के बिना, पहाड़ के अंदर के तापमान  ले पहुँच जाला।




#Article 513: बिस्व समुंदर दिवस (219 words)


बिस्व समुंदर दिवस हर साल आठ जून के मनावल जाए वाला दिवस बाटे जवन समुंद्र के महत्व आ एकरे उपयोगी चीज सभ के महत्व के ब्यापक स्तर पर पहिचान करावे खातिर मनावल जाला। ईदिवस के मनावे के पहिली बेर प्रस्ताव कनाडा के ओर से सन् 1992 में रियो सम्मेलन में कइल गइल आ ई बिना ऑफिशियल मान्यता के मनावल जाए लागल। बाद में, यूनाइटेड नेशन्स एकरा के 2008 में मान्यता दिहलस। सन् 2003 से एकरा के मनावे के कार्यक्रम सभ के संयोजन दि ओशन प्रोजेक्ट करत बाटे।

बिस्व समुंदर दिवस मनावे के मेन मकसद बा समुंद्र आ समुंद्र से मिले वाला बहुत तरह के चीज के महत्व के सम्मान दिहल। लाभ के अलावा समुंद्र के आपन महत्व अपने आप में भी बा जवना के पहचान करावल भी एह दिवस के मकसद बाटे।

एह दिन दुनिया भर में कई तरह के शिक्षा देवे वाला कार्यक्रम आ टूर के आयोजन होला।

यूनाइटेड नेशंस के वेबसाइट पर एकरे मकसद के बारे में लिखल बा की:

साल 2016 में बिस्व समुंद्र दिवस के थीम रखल गइल बाटे - स्वस्थ समुंद्र, सेहतमंद ग्रह (Healthy oceans, healthy planet)आ समुंदर में प्लास्टिक के कचरा से होखे वाला नोकसान के बारे में जागरुकता ले आइल भी एह साल के कार्यक्रम में मकसद बाटे।

संयुक्त राष्ट्र एह मौका पर एक ठो फोटोग्राफी के कंपटीशन भी करवा रहल बा।




#Article 514: मारिया शारापोवा (176 words)


मारिया शारापोवा (; जनम 19 अप्रैल 1987) रूस के टेनिस खिलाड़ी आ परसिद्ध व्यक्तित्व बाड़ी। 1994 से परमानेंट अमेरिकी निवासी, शारापोवा 2001 से डब्लूटीए में खेल रहल बाड़ी। पाँच बेर नंबर एक के रैंक हासिल कर चुकल बाड़ी, कुल मिला के 21 हप्ता के समय खातिर। ऊ कैरियर ग्रैंड स्लैम जीते वाली दस गो महिला खेलाड़ी में में शामिल बाड़ी आ अइसन एकलौती रूसी कहलादी बाड़ी। ओलंपिक में भी ऊ दस गो सिल्वर मेडल जीत चुकल बाड़ी

हालिया खबर में देखल जाय तब, अंतरराष्ट्रीय टेनिस फेडरेशन 8 जून 2016 के शारापोवा पर दुई साल बदे पाबंदी लगा दिहले बा।ड्रग टेस्ट में फेल होखले के उन पर ई प्रतिबंध लगावल गइल बाटे, 
एकरे पहिले मार्च में भी उन पर प्रतिबंध लगावल गइल रहल। जनवरी में ऑस्ट्रेलियन ओपन में उनुका के प्रतिबंधित दवाई मेल्डोनियम लेवे के दोषी पावल गइल रहल।
शारापोवा के कहनाम बाटे की ऊ मेडिकल ज़रूरत के कारन मेल्डोनियम लिहले रहली आ ऊ 29 जनवरी से लागू होखे वाले एह बैन के ख़िलाफ़ अपील करिहें। शारापोवा रियो ओलंपिक में रूस के टेनिस टीम के हिस्सा बाड़ी।




#Article 515: सत्यमेव जयते (176 words)


एकरा के राजचीन्हा के ठीक नीचे लिखल जाला। भारत के राजचिह्न आ ई वाक्य दुनों भारतीय करेंसी (रुपिया) के पछिला ओर छपल होला। एकरे अलावा केंद्र सरकार के दस्तावेज आ महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजन पर राष्ट्रीय चीन्हा के साथ छापल जाला। भारत के राजचीह्न सम्राट अशोक के बनवावल सारनाथ के अशोक स्तंभ के ऊपरी मुकुट के कॉपी हवे।

एह वाक्य के उत्त्पत्ति परसिद्ध उपनिषद मुंडक उपनिषद के मंत्र संख्या 3.1.6. से लिहल गइल बाटे। पूरा मंत्र नीचे दिहल बाटे:

सत्यमेव जयते नानृतं
सत्येन पन्था विततो देवयानः ।
येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा
यत्र तत् सत्यस्य परमं निधानम् ॥6॥

satyameva jayate nānṛtaṁ
satyena panthā vitato devayānaḥ
yenākramantyṛṣayo hyāptakāmā
yatra tat satyasya paramaṁ nidhānam

 alone triumphs; not .
Through truth the divine path is spread out
by which the sages whose desires have been completely fulfilled, reach
where that supreme treasure of Truth resides.

पापुलर शब्दावली:

एह नारा के प्रचार प्रसार मुख्य रूप से पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा कइल गइल आ उहे एकरा के राष्ट्रीय स्तर पर परसिद्ध कइलें जब ऊ 1918 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दुसरा बे अध्यक्ष रहलें।




#Article 516: बंदे मातरम् (351 words)


राष्ट्रीय गीत के रूप में अंगीकार कइल दू गो बंद नीचे दिहल गइल बाड़ें:

Here are the rest of the original lyrics from which the National Song of India came (continuing from the last section):

Here is the translation in prose of the above two stanzas rendered by Aurobindo Ghose. This has also been adopted by the Government of India's national portal. The original Vande Mataram consists of six stanzas and the translation in prose for the complete poem by Shri Aurobindo appeared in Karmayogin, 20 November 1909.

Mother, I salute thee!
Rich with thy hurrying streams,
bright with orchard gleams,
Cool with thy winds of delight,
Dark fields waving Mother of might,
Mother free.

Glory of moonlight dreams,
Over thy branches and lordly streams,
Clad in thy blossoming trees,
Mother, giver of ease
Laughing low and sweet!
Mother I kiss thy feet,
Speaker sweet and low!
Mother, to thee I salute.

Who hath said thou art weak in thy lands
When the swords flash out in seventy million hands
And seventy million voices roar
Thy dreadful name from shore to shore?
With many strengths who art mighty and stored,
To thee I call Mother and Lord!
Thou who savest, arise and save!
To her I cry who ever her foeman drove
Back from plain and Sea
And shook herself free.

Thou art wisdom, thou art law,
Thou art heart, our soul, our breath
Thou art love divine, the awe
In our hearts that conquers death.
Thine the strength that nerves the arm,
Thine the beauty, thine the charm.
Every image made divine
In our temples is but thine.

Thou art Durga, Lady and Queen,
With her hands that strike and her
swords of sheen,
Thou art Lakshmi lotus-throned,
And the Muse a hundred-toned,
Pure and perfect without peer,
Mother lend thine ear,
Rich with thy hurrying streams,
Bright with thy orchard gleems,
Dark of hue O candid-fair

In thy soul, with bejeweled hair
And thy glorious smile divine,
Loveliest of all earthly lands,
Showering wealth from well-stored hands!
Mother, mother mine!
Mother sweet, I salute thee,
Mother great and free!




#Article 517: रिपब्लिक (131 words)


लोकतंत्र, गणतंत्र या रिपब्लिक (Republic) एगो संप्रभु राज्य या देश होला जवना के सरकार के या शासन के रूप अइसन होला जेह में शक्ति के प्रयोग के अधिकार जनता के द्वारा चुनल प्रतिनिधि लोग से बनल संस्था के हाथ में होला आ एह संस्था या सरकार के प्रमुख शक्ति के प्रयोग क़ानून के शासन के अंदर रहि के करे ला।

आधुनिक समय में कौनों लोकतंत्र के परिभाषा आमतौर पर एगो सरकार होला आ राजा के एकरा से बाहर रखल जाला। वर्तमान में, दुनिया के 206 संप्रभु राज्यन में से 147 के आधिकारिक नाँव में रिपब्लिक शब्द के उपयोग होत बाटे; बाकी ई सगरी एक्के नियर अरथ में लोकतंत्र नइखें, ना सगरी अइसन देसन में चुनल गइल सरकार बाटे, न सगरी चुनल सरकार एक्के नियर अरथ में लोकतंत्र के इस्तेमाल करे लीं।




#Article 518: सकल घरेलू उत्पाद (335 words)


सकल घरेलू उत्पाद (अंग्रेजी:Gross Domestic Product) या जीडीपी कौनों देस भा क्षेत्र में कौनो निश्चित समय अवधि में होखे वाला कुल उत्पादन के माप हवे। ई सगरी माल आ सेवा सभ के उत्पादन के बाजार मूल्य के मौद्रिक नाप हवे, यानी मुद्रा (रुपिया, डालर इत्यादि में) ब्यक्त कइल जाला, आ आमतौर पर तिमाही (साल में चार बेर) या साल भर खाती मापल जाला।

नामिक (नॉमिनल) जीडीपी के अनुमान सामान्यतः पूरे देस या क्षेत्र के आर्थिक प्रदर्शन के निर्धारित करे खातिर इस्तेमाल होला, आ अंतर्राष्ट्रीय स्तर प आपस में तुलना करे खाती होला। हालाँकि, मुद्रास्फीति के दर अलग-अलग देसवन में अलग-अलग होख्ले के कारण, तुलना करे खातिर नॉमिनल जीडीपी के बहुत नीक तरीका ना मानला जाला। मुद्रास्फीति के परभाव के हटा के तुलना करे खाती जीवनयापन में होखे वाला खर्चा के दर के धियान में रख के परचेजिंग पावर पैरिटी (पीपीपी) के आधार पर होखे वाली गणना के इस्तेमाल कइल जाला।

ओईसीडी () द्वारा सकल घरेलू उत्पाद के परिभाषा दिहल गइल बा कि ई सगरी निवासी आ संस्थागत इकाई सभ द्वारा उत्पादन के प्रक्रिया में कुल जोड़ल गइल वैल्यू (वैल्यू एडेड; जेह में उत्पाद के सभ के मूल्य में कौनों अन्य टैक्स भी होखे तब ओकरा के जोड़ल गइल होखे, सब्सिडी घटा दिहल गइल होखे) के एक ठो समेकित माप हवे।”  अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमऍफ़) के अनुसार जीडीपी, अंतिम उत्पाद आ सेवा सभ के मौद्रिक मूल्य हवे - मने कि, अइसन जे अंतिम प्रयोगकर्ता द्वारा खरीदल जालीं - जिनहन के उत्पादन कौनों देस में एगो निश्चित समय अवधि (साल भा तिमाही में) होखे ला।

कुल जीडीपी के कई हिस्सा में तूर के भी बतावल जा सके ला, मने कि अर्थब्यवस्था के अलग-अलग इंडस्ट्री भा सेक्टर अनुसार, जइसे कि खेती के सेक्टर के जीडीपी केतना रहल। जीडीपी आ कुल जनसँख्या के अनुपात के प्रति ब्यक्ति जीडीपी (या जीडीपी पर प्रति ब्यक्ति आय) कहल जाला आ ई कौनों इलाका में जिनगी के स्तर के सूचक के रूप में इस्तमाल होला। जीडीपी के बिस्व अर्थब्यवस्था के बढ़ती आ बिकास के सभसे प्रमुख सूचक के रूप में भी मानल जाला।.




#Article 519: हाइड्रोग्राफी (113 words)


हाइड्रोग्राफी () एक प्रकार के बेहवारिक बिज्ञान (एप्लाइड साइंस) बा जवन पृथ्वी पर पानी आ जलभंडार सभ के नापजोख आ बिबरन देवे के काम करे ला। ई बिज्ञान प्रिथ्वी पर मौजूद नदी, झील, तालाब आ समुंद्र के आकार, गहिराई, पानी के मात्रा आ पानी के लेवल नियर कई सारा चीजन के नाप आ बिबरण करे ला जवना के प्रमुख उदेश्य नेविगेशन (जहाज आ नाव के संचालन) में सुबिधा खातिर डेटा उपलब्ध करावल, पानी के लेवल के भबिस्यबाणी कइल आ अन्य कई सारा आर्थिक, सुरक्षा आ पर्यावरणीय मुद्दा सभ के अध्ययन में सुबिधा उपलब्ध करावल बाटे।

समुद्री हाइड्रोग्राफी पर फोकस रखे वाली एसोसिएशन 

नदी, जलधारा आ झील के हाइड्रोग्राफी पर फोकस रखे वाली एसोसिएशन 




#Article 520: गंगा (4585 words)


गंगा एशिया के एक ठो प्रमुख नदी बा जवन भारत आ बांग्लादेस में बहे ले। भारत की उत्तराखंड राज्य में, हिमालय पहाड़ पर स्थित गंगोत्री से निकल के बिसाल मैदानी इलाका में बहे के बाद बंगाल की खाड़ी में समुंद्र में मिल जाले। समुंद्र में नदिन द्वारा कुल छोड़ल जाये वाला पानी के हिसाब से ई दुनिया के तीसरी सभसे बड़ नदी हवे।

गंगा अपना रस्ता में हिमालय से ले आइल बालू-माटी के बिछा के एगो बिसाल मैदान बनावे ले जेकरा के एही की नाँव पर गंगा के मैदान कहल जाला। ई मैदान बहुत उपजाऊ हवे आ एही कारण इहाँ प्राचीन काल से जनसंख्या के बसाव भइल। आजु ई दुनिया के सबसे घन बस्ती वाला क्षेत्र हवे। गंगा की तीर पर भारत आ बांग्लादेस के कई ठो प्रमुख शहर बसल बाड़ें। ऋषिकेश, हरिद्वार, कन्नौज, कानपुर, इलाहाबाद, बनारस, बलियाँ, पटना, कलकत्ता आ ढाका नियर शहर एही नदी के तीरे बसल बाने।

हिंदू धर्म में गंगा के देवी आ माई की रूप में पूजल जाला। अइसन मानल जाला कि गंगा में अस्नान कइला से पुन्य मिलेला आ सगरी पाप कट जाला। गंगा की किनारे कई पबित्र तिथिन के मेला आ नहान लागे ला। दुनिया के सभसे बड़ मेला प्रयाग के कुंभ गंगा आ यमुना आ कथा में बर्णित नदी सरस्वती के संगम पर लागेला।

गंगा के मैदान आ एकर थाला पर्यावरण आ जीव जंतु खातिर भी महत्व वाला हवे। गंगा में कई प्रकार के मछरी आ अउरी बिबिध जलजीव पावल जालें। एह नदी में सूँस के दू गो प्रजाति गंगा डाल्फिन आ इरावदी डाल्फिन पावल जालीं जे एह समय बिलुप्त होखे के खतरा में बाड़ीं। गंगा के डेल्टा सुंदरबन पर्यावरण आ पारिस्थितिकी की मामिला में पूरा दुनिया खातिर महत्व वाला गिनल जाला।

साल 2007 में आइल एगो रपट की मोताबिक ओह समय गंगा दुनिया के पाँचवी सभसे प्रदूषित नदी रहे। भारत सरकार एकरा प्रदूषण के कम करे खातिर गंगा कार्ययोजना चलवलस बाकी ई बहुत सफल ना भइल। वर्तमान में नरेन्द्र मोदी के सरकार एकरा खातिर नमामि गंगे नाँव से एगो परियोजना चला रहल बाटे।

गंगा नदी दू गो धारा भागीरथी आ अलकनंदा की मिलले की बाद बनेली। ई संगम देवप्रयाग में होला। हिंदू संस्कृति में ई मान्यता ह की मुख्य धारा भागीरथी ह हालाँकि अलकनंदा अधिका लमहर धारा हवे। अलकनंदा के पानी के स्रोत नंदा देवी, त्रिशूल आ कामेत की चोटी पर जमल बरफ के पघिलाव से हवे। भागीरथी नदी समुन्द्र तल से  की ऊँचाई पर गंगोत्री हिमानी के निचला हिस्सा से निकलेली जे के गोमुख कहल जाला।

अलकनंदा के धारा कई गो महत्वपूर्ण धारा सभ से मिल के बनेले। सभसे पाहिले विष्णुप्रयाग में अलकनंदा में धौली गंगा के संगम होला, एकरी बाद नंदप्रयाग में नंदाकिनी, कर्णप्रयाग में पिंडर आ रुद्रप्रयाग में मंदाकिनी से संगम के बाद अंत में देवप्रयाग में अलकनंदा आ भागीरथी के संगम होला। ई छह नदियन के पाँच गो संगम पंचप्रयाग की नाँव से पबित्र अस्थान मानल जालें।

लगभग 250 किलोमीटर के दूरी पहाड़ी घाटी में पूरा कइ के गंगा ऋषिकेश में हिमालय से नीचे उतरे ले आ हरिद्वार नाम के परसिद्ध धार्मिक अस्थान से ई मैदानी भाग में प्रवेश करे ले। हरिद्वार में एकर कुछ पानी बाँध बना के गंगा नहर में मोड़ दिहल गइल बाटे जेवना से दुआबा के इलाकन में सिंचनी होला।

एकरा बाद गंगा कन्नौज, फर्रूखाबाद आ कानपुर नगर से हो के गुजरे ले आ एही बीच में एकर सहायिका रामगंगा आके मिले ले। रामगंगा औसतन  पानी गंगा में ले आवे ले।

इलाहाबाद में गंगा में यमुना आ के मिले ले आ ई हिन्दुन के परसिद्ध तीर्थ त्रिवेणी संगम कहाला। इहाँ यमुना नदी में गंगा से ढेर पानी  होला आ ई दुनों की कुल बहाव के 58.5% होला। एकरा कुछे दूर बाद टौंस नदी आ के गंगा में मिलेले जेवन कैमूर श्रेणी से निकल के  पानी गंगा में ले आवे ले। एकरा बाद गंगा बिंध्याचल परबत की किनारे से हो के उत्तर की ओर मुड़े शुरू हो जाले। मिर्जापुर जिला में पबित्र बिंध्यवासिनी देवी के लगे से होत ई बनारस पहुँचेले जहाँ एकर बहाव उत्तर मुँह के हवे। बनारस की आगे औड़िहार नाँव की जगह की लगे गंगा में गोमती आ के मिलेले आ ई  पानी गंगा में डाले ले। गाजीपुर आ बलियाँ नियर शहर से हो के बलियाँ आ छपरा की बीच में सरजू (घाघरा या करनाली) नदी गंगा में मिले ले। सरजू गंगा के सभसे बड़ सहायिका नदी हवे जेवन  पानी ले आवे ले।

घाघरा से संगम की बाद नदी पुरुब मुँह के बहे शुरू हो जाले आ थोड़ी दूर बाद दक्खिन ओर से आके सोन आ एकरी कुछ दूर बाद उत्तर ओर से आके नारायणी मिल जालीं आ क्रम से  आ  पानी गंगा में पहुँचावे लीं। पूरबी बिहार में कोसी नदी आ के मिल जाले जेवन  पानी ले आवेले आ ई सरजू आ यमुना की बाद तिसरकी सभसे बड़ सहायिका नदी ह।

भागलपुर के बाद गंगा में बहाव दखिन मुँह के होखे शुरू हो जाला आ पाकुड़ की लगे से ई दू गो धारा में बँटे लागेले जौना में दाहिने ओर के धारा भागीरथी-हुगली हवे। दुसरकी धारा बांग्लादेश की ओर बढे ले आ एकरा कुछ दूर बाद बांग्लादेश में घुसे से ठीक पहिले फरक्का में बैराज बना के एकर पानी एगो फीडर नहर द्वारा हुगली की ओर भेजल जाला। भागीरथी की रूप में अलग भइल धारा में जब बायें से एगो छोटी मुकी नदी जलंगी आ के मिले ले तब एकर नाँव हुगली हो जाला। ई संगम नब द्वीप के लगे होला। एकरी बाद हुगली में एकर सभसे बड़ सहायिका नदी दामोदर (लंबाई: आ बहाव:.) आ के दाहिने से मिले ले। आगे 
एक ठी अउरी छोट नदी चूर्णी कलकत्ता से पहिले हुगली में मिल जाले। हुगली आगे कलकत्ता-हावड़ा की बीच से हो के बहे ले आ आगे हल्दी नदी ए में दायें से मिले ले जहाँ हल्दिया बंदरगाह के निर्माण भइल बा। एकरा बाद ई सागर दीप के लगे बंगाल की खाड़ी में समुन्द्र में मिले ले। एह अस्थान के गंगासागर कहल जाला।

ओहर मेन गंगा के जेवन धारा बांग्लादेश में परवेश करे ले ऊ आगे पद्मा की नाँव से बहे ले। ई कुछ दूर बाद जा के ब्रह्मपुत्र के सभसे बड़ शाखा जमुना से आ ओकरी बाद दुसरी सभसे बड़ शाखा मेघना से मिले ले आ एकरी बाद ई मेघना नाँव से बह के बंगाल की खाड़ी में डेल्टा बनावे ले।

गंगा डेल्टा, जेवन ब्रह्मपुत्र आ गंगा नदी के ले आइल निक्षेप से बनल बाटे, बिस्व के सभसे बड़ डेल्टा हवे जौना के क्षेत्रफल  बाटे आ ई बंगाल के खाड़ी के उत्तर सिरहाने पर  चैड़ाई में बिस्तार लिहले बाटे।

बिस्व में खाली दू गो नदी अमेजन आ कांगो बाड़ी जिनहन के औसत बहाव के मात्रा गंगा, ब्रह्मपुत्र आ सुरमा-मेघना के एकठ्ठा मात्रा से ढेर होखे। भरपूर बाढ़ वाला समय में खाली अमेजन एकरा से ढेर बहाव वाली रहि जाले।

भूबिज्ञान की नजरिया से गंगा नदी के थाला के अधिकतर हिस्सा नया रचना हवे सिवाय ओ हिस्सा के जेवन दक्खिन भारत के प्रायदीपी पठार से बहि के आवे वाली सहायक नदिन के थाला की अंतर्गत आवेला। भारत के भूबिज्ञान के सभसे नया अध्याय हवे गंगा के मैदान के निर्माण जेवन भारतीय प्लेट आ यूरेशियाई प्लेट के टकराव आ ओकरी परिणाम स्वरुप हिमालय परबत के उठान की बाद के घटना हवे।

वर्तमान समय से करीब 75 मिलियन बरिस पहिले दक्खिनी सुपरमहादीप गोंडवाना लैंड के उत्तर की ओर खिसकाव सुरू भइल। एही सुपरमहादीप के टुकड़ा आजु के दक्खिनी भारत के पठार हवे जे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट क हिस्सा हवे। ई सरक के जब यूरेशियाई प्लेट से लड़ल तब इनहन की बीच में टीथीस सागर में जमा अवसाद से हिमालय परबत के निर्माण भइल। हिमालय परबत के ठीक दक्खिन में ओह पुरान समुंद्री तली के लचक के धँस गइला से आ बाकी बचल खुचल टीथीस सागर के हिस्सा में सिंधु आ गंगा के सहायक नदिन द्वारा अवसाद जमा कईला से उत्तर भारत के मैदान बनल। एही मैदान के हिस्सा गंगा के मैदान भी हवे जेवन गंगा आ एकरी सहायक नदी सभ के द्वारा ले आइल पदार्थ से बनल बाटे।

भूबिज्ञान की दृष्टि से गंगा के मैदान एगो फोरडीप (foredeep) या फोरलैंड बेसिन मानल जाला।

भूआकृति बिज्ञान के नजरिया से गंगा के परबतीय हिस्सा एकरा मैदानी हिस्सा से बिसेसता में एकदम अलग बाटे। ए पूरा सिस्टम के एगो नया भूबैज्ञानिक इकाई होखला के कारण अभी भी एह में बदलाव के प्रक्रिया चालू बाटे। भूआकृति बिज्ञान की हिसाब से हिमालयी क्षेत्र में गंगा अभी अपरदन चक्र के युवा अवस्था में बाटे जबकि मैदानी भाग में ई प्रौढ़ आ अंतीम हिस्सा की ओर जीर्ण अवस्था में बा। जहाँ हिमालयी हिस्सा में गंगा के धारा पतील बाकी खूब तेज बहाव वाली बा उहें मैदान में उतरले की बाद एकर बहाव के चाल कम आ चौड़ाई आ गहिराई बढ़ जाला।

गंगा सिस्टम में सभसे महत्व वाली भूआकृतिक घटना हिमालय से उतर के मैदान में अइला पर एह नदिन की रास्ता के ढाल में अचानक परिवर्तन बाटे। एकरा वजह से भाबर आ तराई नियर क्षेत्र के निर्माण भइल बा। जलोढ़ पंख के रचना करे में ई नदी एही से सक्षम होलीं। उत्तरी बिहार में नेपाल की ओर से उतरे वाली नदी सभ के बनावल जलोढ़ पंखा बिस्व में सभसे बड़ अइसन रचना मानल जाला। अक्सर एह इलाका में आवे वाली बाढ़ के कारण भी अचानक ढाल परिवर्तन के ई भूआकृतिक घटना के मानल जाला।

नदी की किनारे मैदान में बाँगर आ खादर संरचना आ डेल्टाई भाग में चार आ बील के थलरूप प्रमुख भूआकृतिक बिसेसता बाटें।

गंगा के थाला आ एकर मार्ग जलबैज्ञानिक अध्ययन के नजरिया से कई तरह से कइल जाला। मुख्य समस्या एकर परिभाषा के कारन होला। आम बिचार आ नाँव के हिसाब से गंगा नाँव अलकनंदा आ भागीरथी के संगम  देवप्रयाग से ले हुगली आ पद्मा की दू गो धारा में अलग होखला ले के मार्ग के मानल जाला। परंपरागत रूप से एके गौमुख से ले के गंगासागर ले मानल जाला। एकरी डेल्टा वाला हिस्सा में भी कई धारा में कौना के मुख्य मानल जाय ई समस्या पैदा हो जाले।
एही सभ से एकर लंबाई आ थाला के रकबा अउरी कुल जल निकास के मात्रा के गिनती में कई तरह के मत हो जाला।

आमतौर पर गंगा के लंबाई  से कुछ अधिका, लगभग  से  ले बतावल जाले या लगभग । ए सगरी नाप में गंगा के सोता भागीरथी के गंगोत्री हिमानी से गोमुख से निकले वाली धारा के मानल जाला आ एकर मुहाना मेघना नदी के मुहाना के मानल जाला। कुछ लोग हरिद्वार के भी गंगा के स्रोत माने ला जहाँ से ई मैदान में प्रवेश करे ले।

कुछ जगह एकर लंबाई हुगली शाखा के मुख्य मान के दिहल जाले जेवन की मेघना शाखा से ढेर हवे। तब एकर लंबाई भागीरथी के उद्गम से ले के हुगली के मुहाना ले लगभग , या हरिद्वार से हुगली के मुहाना लव  बतावल जाले। कुछ अन्य लोग भागीरथी से बांग्लादेस बाडर ले, पदमा नाम भइला ले, एकर लंबाई ।

टोंस-यमुना-गंगा के लगातार एक नदी मान लिहल जाय टी ई गंगा बेसिन के सभसे लमहर नदी होई (2,758 km.) हालाँकि परम्परा में टोंस के अलग नदी मान लिहल जाला आ गंगा आ यमुना के लंबाई गंगोत्री आ यमुनोत्री से नापल जाला।

लंबाई के अलावा गंगा नदी के थाला (बेसिन) के बिस्तार पर भी अलग-अलग मत देखे के मिलेला। गंगा के थाला चार गो देसवन में बिस्तार लिहले बाटे, भारत, नेपाल, चीन, आ बांग्लादेस; भारत के इगारह गो राज्य में ई थाला के बिस्तार बा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब,  हरियाणा, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, आ पच्छिम बंगाल आ दिल्ली। गंगा के थाला, डेल्टा के शामिल क के बाकी ब्रह्मपुत्र आ मेघना के बेसिन के अलग रख के  बाटे जेवना के  हिस्सा (लगभग 80%) भारत में बा,  हिस्सा (13%) नेपाल में,  हिस्सा (4%) बांग्लादेस में, आ  हिस्सा (3%) चीन में बाटे। जब कभी गंगा-ब्रह्मपुत्र- मेघना के थाला एकट्ठा एकही मान लिहल जाला तब एकर बिस्तार  पर बाटे। or . ई गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना थाला (GBM या GMB) के बिस्तार भारत, नेपाल, भूटान, चीन आ बांग्लादेश मे बा।

गंगा थाला उत्तर ओर हिमालय आ पारहिमालय से ले के दक्खिन में बिंध्य परबत आ पच्छिम में अरावली के पूरबी ढाल से पूरुब में छोटा नागपुर के पठार होखत सुंदरबन डेल्टा ले फइलल बाटे। गंगा के बहाव के बहुत बड़ा हिस्सा हिमालयी क्षेत्र से हासिल होला। हिमालयी क्षेत्र में ई थाला के बिस्तार यमुना सतलज बिभाजक से  ले के नेपाल सिक्किम सीमा ले, जहाँ ब्रह्मपुत्र के थाला एकरा से अलग होला, पच्छिम से पूरुब 1,200 km के चौड़ाई में बा। ई खंड में बिस्व के 14सभसे ऊँच परबत चोटी में से 9 गो चोटी बाड़ी जेवना में माउंट एवरेस्ट भी बा जेवन गंगा बेसिन आ बिस्व के सभसे ऊँच बिंदु हवे। अउरी चोटी सभ में कंचनजंघा, ल्होत्से, मकालू, चो ऑयू, धौलागिरि, मंसालू, अन्नपूर्णा and शिशापांगमा. बाटें।हिमालयी हिस्सा में हिमाचल प्रदेश के दक्खिनी पूरबी भाग, पूरा उत्तराखंड, पूरा नेपाल, आ पच्छिम बंगाल के सभसे उत्तरी हिस्सा आवेला।

गंगा नदी के निकास बहाव (डिस्चार्ज) भी कई प्रकार से बतावल जाला। जब मेघना नदी के मुहाना से होखे वाला निकास के नापल जाला तब यह में गंगा ब्रह्मपुत्र आ मेघना तीनो के पानी होखे ला आ ई कुल , या  बतावल जाला। दुसरा ओर, जब गंगा, ब्रह्मपुत्र आ मेघना जे अलगा-अलगा बहाव बतावल जाला तब गंगा के लगभग , ब्रह्मपुत्र के लगभग , मेघना के  बहाव निकास बतावल जाला।

हार्डिंग ब्रिज, बांग्लादेश, पर   अपनी सभसे ढेर बहाव की स्थिति में गंगा के बहाव निकास  नापल गइल बा, आ 1997 में, सभसे कम बहाव की सीजन में, एही जा ई मात्र  नापल गइल।

गंगा नदी के जलचक्र दक्खिनी पच्छिमी मानसून से निर्धारित होला। लगभग 84% बरखा जून से सितंबर की बीच में होला। परिणाम ई होखे ला की गंगा के बहाव में सीजनल उतार चढ़ाव बहुत होला। बिना बरखा के सीजन आ बरसात के सीजन की बहाव के बीच के अनुपात हार्डिंग पुल पर 1:6 के नापल गइल बाटे। अइसन सीजनल उतार-चढ़ाव के कारण इलाका में जलसंसाधन आ जमीन के उचित उपयोग होखे में दिक्कत होखे ला आ समुचित बिकास ना हो पवले बा। एही सीजनल बदलाव के कारण सूखा आ बाढ़ दुनों के परकोप होजाला। बांग्लादेश में बहुत इलाका अइसन बाड़ें जहाँ अक्सरहां कम बरखा वाला सीजन में सूखा पड़ जाला आ बरसात के सीजन में हर साले बाढ़ि आवे ले।

गंगा डेल्टा में कई गो नदी आ के मिले ली भी आ शाखा की रूप में अलग भी होखे ली। एही कारन इहाँ एगो जाल नियर बन जाला। गंगा आ ब्रह्मपुत्र दुनों कई गो शाखा में बँटा के बहेली आ इन्हन के सभसे बड़की शाखा आपस में मिल जाली जबकि दुनों के कुछ छोटी छोटी शाखा बाद में मेन धारा से वापस मिलेली या सीधे समुन्दर में जा गिरेली। गंगा डेल्टा में धारा कुल के ई जाल हमेशा से अइसने ना रहल बाटे जइसन आज मौजूद बा बलुक ई बहुत सारा बदलाव से गुजरल बाटे जब नदिन के धारा बदलाव भइल बा।

बारहवीं सदी से पहिले भागीरथी-हुगली शाखा गंगा के मुख्य धारा रहे आ पदमा एगो छोट शाखा रहे। हालांकि,मेन बहाव के समुद्र में पहुंचे के रास्ता आज की समय के हुगली नदी वाला ना रहे बलुक ई आदि गंगा वाला मार्ग से बहे।

बारहवीं सदी से सोलहवीं सदी ले भागीरथी-हुगली आ पदमा, दूनो शाखा लगभग बरोबर बहाव वाली रहलीं। सोरहवीं सदी के बाद पदमा धीरे धीरे मेन चैनल में बदल गइल। ई मानल जाला की भागीरथी-हुगली शाखा लगातार गाद से भरत गइल आ गंगा के मुख्य बहाव दक्खिन पूरुब ओर पद्मा में घुसुकत गइल। अठारहवीं सदी के अंत ले जात-जात पदमा गंगा के मुख्य शाखा हो गइल। पद्मा में एह खिसकाव के परिणाम ई भइल की ई समुन्दर में गिरे से पहिलहीं  ब्रह्मपुत्र आ मेघना से मिल के साथे साथ बंगाल के खाड़ी में गिरे लागल जबकि पहिले अलग गिरे। मेघना आ गंगा के वर्तमान संगम अब से लगभग 150 बरिस पहिले के घटना हवे।

अठारहवीं सदी के अंत की सालन में ब्रह्मपुत्र के निचला मार्ग में बहुत नाटकीय बदलाव देखल गइल जेवन गंगा से एकर संबंध के बहुत बदल दिहलस। 1787 में आइल बाढ़ में तीस्ता नदी, जेवन पहिले पद्मा के सहायक नदी रहे, की मार्ग में बदलाव हो गइल आ अब ई ब्रह्मपुत्र से जा के मिल गइल। एकरा बाद ब्रह्मपुत्र के रास्ता में भी बदलाव भइल आ ई दक्खिन ओर घुसुक के नया चैनल काट के बना दिहलस। ब्रह्मपुत्र के इहे नवका शाखा मुख्य हो गइल आ आज जमुना कहल जाले। प्राचीन समय से ब्रह्मपुत्र के मुख्य धारा अउरी पुरुबाहुत रहे आ मैमनसिंघ के लगे से हो के बहे आ मेघना में मिले। आज ई शाखा एगो मामूली धारा बाटे जेवना के अबो ब्रह्मपुत्र या पुरनकी ब्रह्मपुत्र कहल जाला। लांगलबाँध के लगे, जहाँ पुरनकी ब्रह्मपुत्र मेघना से मिले, ऊ जगह आजु भी हिंदू लोग पबित्र माने ला। एही संगम के नगीचे एगो इतिहासी खँडहर वारि बटेश्वर के बा।

देर हड़प्पा काल, लगभग हड़प्पाई बस्ती सभ के पूरुब ओर फइलाव शुरू भइल। ई बिस्तार सिंधु नदी के थाला से गंगा-जमुना दुआबा की ओर भइल हालाँकि ई मानल जाला की ई फइलाव गंगा पार कइ के एकरे पूरबी किनारे ले ना भइल। ईसा पूर्व दूसरे सहस्राबदी में जब हड़प्पा के पतन होखे शुरू भइल तब भारत में सभ्यता के केंद्र सिंधु घाटी से घुसुक के गंगा घाटी की ओर आवे शुरू हो गइल। इहो अनुमान बतावल जाला की बाद के हड़प्पा बस्ती सभ आ गंगा थाला के इंडो आर्य संस्कृति आ वैदिक संस्कृति में कड़ी जुड़ल होखे।

ई नदी भारत के सभसे लमहर नदी बा। शुरुआत के ऋग्वेद के जमाना के वैदिक संस्कृति के समय सिंधु नदी आ सरस्वती नदी प्रमुख पवित्र नदी रहलीं न की गंगा। बाकी बाद के बेद कुल में गंगा के ढेर महत्व मिलल बा। बाद में गंगा के मैदान कई बहुत प्रभावशाली साम्राज्यन के क्षेत्र बनल जइसे की मौर्य साम्राज्य से ले के मुगल राज।

मेगस्थनीज पहिला अइसन यूरोप के यात्री रहे जे गंगा के बर्णन कर के पच्छिमी लोगन के एकर जानकारी दिहलें।

बंगाल में 1809 के बरसात के सीजन में , भागीरथी के निचला चैनल बंद हो गइल रहे बाकी अगिला साल ई पूरा खुल गइल आ फिर पहिलहीं नियर हो गइल।

गंगा नदी के हिंदू घर्म में बहुत पबित्र मानल गइल बाटे। ई नदी आपने बहाव के पूरा लंबाई के हर हिस्सा में पबित्र मानल जाले। एकरा धारा में हर जगह हिंदू लोग अस्नान करे ला जवना के गंगा नहान कहल जाला, आ गंगाजल हाथ में ले के अपने पुरखा-पुरनिया आ देवता लोग के जल चढ़ावे ला। जल चढ़ावे में अँजुरी में गंगा के पानी भर के हाथ ऊपर क के जल के फिर नीचे गिरा दिहल जाला। एकरे अलावा फूल, अच्छत इत्यादि भी चढ़ावल जाला आ दिया बार के नदी के धारा में प्रवाहित कइल जाला। नहान के बाद लोग गंगा जल ले के अपना घरे लवटे ला। केहू के मरला पर ओकर फूल (हड्डी के बिना जरले बच गइल हिस्सा) बहावे खातिर गंगा में ले आवेला लोग आ ई मरल बेकति के मुक्ति खातिर कइल जाला।

हिंदू कथा में बर्णन के हिसाब से गंगा सगरी पबित्र जल सभ के प्रतिनिधि स्वरूप हई।  स्थानीय नदी सभ के गंगा जइसन कहि के बोलावल जाला आ कबो-कबो स्थानीय गंगा के नाँव से भी बोलावल जाला।  कावेरी नदी जवन कर्नाटक आ तमिलनाडु में बहे ले, दक्खिन भारत के गंगा कहाले। गोदावरी के महर्षि गौतम द्वारा ले जाइल गइल गंगा मानल जाला जवन मध्य भारत में बहे ले। हमेशा जहाँ कहीं धार्मिक कार्य में जल के प्रयोग होला, गंगा के आवाहन कइल जाला काहें की ई मानल जाला की सगरी जल सभ में गंगा मौजूद बाड़ी। एकरा बावजूद भी गंगा में नहाये खातिर हिंदू लोग के मन में एगो खास अस्थान बाटे। गंगा में पबित्र धार्मिक अस्थानन पर, जइसे की हरिद्वार, त्रिवेणी संगम, काशी नियर तीर्थ में गंगा नाहन के बिसेस महत्व दिहल जाला। गंगा के हिंदू धर्म में अइसन अस्थान बाटे की हिंदू धर्म में कम आस्था रखे वाला लोग भी गंगा के महत्व के स्वीकार करे ला। भारत के पहिला प्रधानमंत्री, जवाहिरलाल नेहरू भी, बहुत आस्तिक ना होखला के बावजूद ई ईच्छा जाहिर कइलें की उनके राख के कुछ हिस्सा गंगा में दहा दिहल जाय। The Ganga, he wrote in his will, is the river of India, beloved of her people, round which are intertwined her racial memories, her hopes and fears, her songs of triumph, her victories and her defeats. She has been a symbol of India's age-long culture and civilization, ever-changing, ever-flowing, and yet ever the same Ganga.

जेठ के महीना के अँजोर पाख में दसिमी तिथि के गंगा के अवतरण के परब मनावल जाला जवन अंगरेजी कलेंडर के हिसाब से मई भा जून के महीना में पड़े ला। एह दिन लोग गंगा के धरती पर उतरले के तिथि के रूप में मनावेला। एह दिन के गंगा नहान दस गो पाप के हरे वाला (दसहरा) मानल जाला, या दुसरा मान्यता के अनुसार दस जनम के पाप के धोवे वाला मानल जाला। जे गंगा से दूर रहे वाला बा आ गंगा ले ना पहुँच पावेला ऊ लोग कौनों भी स्थानीय नदी में नाहन कर लेला, काहें की हिंदू धर्म में धरती के सगरी जल के गंगा के रूप मानल जाला।

गंगा के अवतरण के भी कई ठे कहानी कथा प्रचालन में बाटे। वैदिक कथा के अनुसार स्वर्ग के राजा इंद्र देव आकासी सर्प रूप वाला वृत्रासुर के बध करिके सोम नामक रस के पृथ्वी पर उतरे के रास्ता बनवलें जवना के ऊ रास्ता रोकले रहे।

वैष्णव सम्प्रदाय के बहुप्रचलित मत के अनुसार एह कथा में इंद्र के जगह बिष्णु के रखल जाला। अइसना में एह स्वर्गीय जल के विष्णुपदी कहला जाला आ गंगा के विष्णु के चरण से उत्पन्न मानल जाला। ई कथा के मुताबिक, अपने वामन अवतार में पूरा ब्रह्माण्ड के तीन पग में नाप दिहले के बाद अपने पैर से बिष्णु भगवान स्वर्ग (आकाश) के खोद दिहलें जवना से पबित्र धार बहि निकलल आ बर्हमांड में व्याप्त हो गइल। आकाशीय स्वर्ग से निकले के बाद गंगा इंद्र के स्वर्ग में पहुँचल जहाँ ध्रुव ओकरा के प्राप्त कइलें, जे बिष्णु के भक्त रहलें, आ अब आकाश में ध्रुव तारा के रूप में स्थित बाड़ें। एकरा बाद ई आकाशगंगा के रूप में बहि के चंद्रमा ले पहुँचल। एकरे बाद गंगा ब्रह्मलोक में पहुचल आ मेरु परबत पर, जवन पृथ्वी में खिलल कमल के रूप में मानल गइल बा, उतर गइल। इहाँ से एगो पंखुड़ी से एगो धारा भारत वर्ष में अलकनंदा के रूप में बहि निकलल।

हिंदू कथा में अवतरण के कथा में सभसे महत्वपूर्ण स्थान शिव के मिलल बा। रामायण, महाभारत आ कई ठे पुराणन में बर्णित ई कथा के अंतर्गत कहानी कपिल मुनि के साथ शुरू होले जिनके तपस्या के सगर के साठ हजार लड़िका लोग भंग कई दिहल। क्रोधित होके कपिल मुनि ओह लोग के भसम कई दिहलें आ उन्हन लोग के आत्मा पाताल में भटके खातिर छूट गइल। उनहन लोग बंस में भागीरथ नाँव के राजा भइलें जे अपनी पुरखा लोग के आत्मा के मुक्ती दिवावे खातिर गंगा के स्वर्ग से उतारे खातिर प्रण लिहलें। हालाँकि उनके एकरा खातिर ब्रह्मा आ शिव के तपस्या करे के पड़ल। कहानी के मोताबिक ऊ पहिले बरम्हा के तपस्या कइलें की ऊ गंगा के अपने कमंडल से मुक्त करें जहाँ ऊ बिष्णु के चरण से निकल के स्थापित रहली। ब्रह्मा कहलें की गंगा के तेज बहाव के जमीन पर रोके खातिर पहिले शिव के तइयार करें। ओकरे बाद ऊ शिव के तपस्या कइलें जे अपने जटा में गंगा के रोक लिहलें। एकरा बाद आपन एक ठो लट (अलक) खोल के गंगा के धारा के जमीन पर उतरे दिहलें। आगे-आगे भागीरथ आ पाछे गंगा ओह अस्थान पर पहुँचल लोग जहाँ कपिल मुनि भागीरथ के पुरखा लोग के भसम कइले रहलें। उहाँ, गंगासागर, में गंगा पाताल में प्रवेश कइली आ ऊ लोग के आत्मा मुक्त भइल। भागीरथ के द्वारा धरती पर अवतरण के कारन गंगा के नाँव भागीरथी पड़ल।

गंगा के स्वर्ग से अवतरण भइल हवे एही से ऊं स्वर्ग के प्राप्त करे के यान भी हई। गंगा के त्रिपथगा भी कहल जाला, जेकर माने होला तीनों लोक में गमन करे वाली आ एही से ऊ एह लोक से दुसरा लोक में पहुँचावे के मार्ग भी हई। इहे कारण बाटे की श्राद्ध करम के समय गंगा के अवतरण के कथा सुनावल जाला आ अइसन कारज में गंगाजल के इस्तेमाल होला।

हिंदू लोग गंगा के तीरे अपने पुरखा लोग के नाँव ले के पिंडदान भी करे ला, जवना में चाउर के आटा आ तिल के बनल पिंडा के गंगा में दहवावल जाला। हर तिल के संख्या के हजारगुना साल ले पुरखा लोग के स्वर्ग मिले के मान्यता प्रचलन में हवे। गंगा के मृत आत्मा खातिर महत्व के अंजाद एही से लगावल जा सकेला की महाभारत में बर्णन बा की अगर एकहू अस्थि, मरल ब्यक्ति के, गंगा के छू ले त ओके स्वर्ग में अस्थान मिलेला।

तिब्बत के पठार बिस्व के तिसरका सभसे बड़हन बरफ के भंडार बाटे। चीन के मौसम बिज्ञान एडमिनिस्ट्रेशन के चीफ, क्विन दाहे, बतवलें कि हाल के समय में तेजी से एह बर्फ़ के पघिलाव आ एकरे परिणाम के रूप में तापमान में बढ़ती एह इलाका में खेती आ पर्यटन खातिर शार्ट टर्म में भले बहुत नीक होखे बाकी ई एगो चेतावनी के संकेत बाटे। ऊ एगो गंभीर चेतावनी दिहलें की:

बरिस 2007 में आइपीसीसी अपने चौथी रपट में कहलस कि हिमालय के ग्लेशियर, जवन नद्दी सभ के पानी, देलें ऊ सन् 2035 ले पघिल के खतम हो जइहें। बाद में ई घोषणा वापस ले लिहल गइल काहें से की ई एगो अंजाद वाली रिसर्च पर आधारित रहे। हालाँकि, आइपीसीसी अपने एह आम खोज पर टिकल बाटे की हिमालय के ग्लेशियर सभ पर बैस्विक तापन के चलते खतरा बाटे (परिणाम के रूप में गंगा नदी थाला के हिमालई नद्दिन पर भी)।

गंगा बहुत ढेर प्रदूषण से ग्रस्त बाटे आ एह प्रदूषण से लगभग 4000 लाख लोग प्रभावित होला जे एकरे किनारे बसल बाटे। चूँकि ई नदी बहुत घऽन बसल इलाका से हो के बहे ले, नगर के सीवर के पानी, उद्योग के गंदगी आ प्लास्टिक-पॉलिथीन इत्यादि के बहुत भारी मात्र एह में पड़ेले आ नदी के प्रदूषित करे ले। ई समस्या एह कारण अउरी गंभीर हो जाले काहें की बहुत सारा गरीब लोग गंगा के पानी पर नहाये धोए खातिर निर्भर बाड़ें। विश्व बैंक के एगो अनुमान के अनुसार भारत में प्रदूषण के कारण स्वास्थ पर होखे वाला खर्चा एह देस के कुल जीडीपी के तीन प्रतिशत के आसपास बाटे। इहो अनुमानित कइल गइल बाटे की बेमारी के अस्सी प्रतिशत हिस्सा आ बेमारी से मौत के एक तिहाई घटना, पानी के गंदगी आ एह से होखे वाली बेमारी से होले।

बनारस, जहाँ लोग पबित्र नाहन खातिर जाला, ई शहर रोज 2000 लाख लीटर सीवर के पानी गंगा में छोड़े ला, जवना से कोलिफौर्म बैक्टीरिया के मात्र पानी में खतरनाक लेवल ले बढ़ि जाला। सरकारी पैमाना के हिसाब से एह बैक्टेरिया के प्रति 100 मिलीलीटर पानी में 500 से ज्यादा ना होखे के चाहीं, बाकी बनारस में प्रवेश से पहिलहीं गंगा में करीब 120 गुना (60000 प्रति 100 मिलीलीटर) बैक्टीरिया रहे लें।

गंगा में लाश दहवावे से भी काफ़ी प्रदूषण फइलेला। काहें की बहुत लोग जरावे के बजाय लाश के परवाहि कर देलें।

गंगा के बनारस से बाहर निकलत समय एह में लगभग 150 लाख कोलिफौर्म बैक्टीरिया प्रति 100 मिलीलीटर हो जालें। with observed peak values of 100 million per 100 ml. अइसन पानी पिए लायक त नाहींये होला, नहाये पर भी इन्फेक्शन के खतरा रहे ला।

लगातर बढ़ि रहल प्रदूषण के साथे-साथ पानी के कम होखले का समस्या भी बिकराल होत जात बाटे। नदी के धारा कई जगह पर सूखे के करीब हो चुकल बाटे। बनारस में कब्बो एकर गहिराई  के आसपास औसत रूप से रहल करे, बाकिर अब ई कई जगह पर  ले रहि जाले।

गंगा नदी के तली से पत्थर आ बालू के खनले के काम हरिद्वार जिला के बहुत लंबा समय से समस्या रहल बाटे। हरिद्वार में गंगा मैदान में प्रवेश करे ले आ इहाँ कुंभ मेला एरिया में लगभग  140 किमी2 के इलाका में खनाई पर रोक बाटे। स्वामी निगमानंद, एगो 34 बरिस के साधू रहलें, जे 2011 के 19 फरवरी से अवैध खनन के आ स्टोन क्रशिंग के बिरोध में उपास करत रहलें, उनुकर 14 जून 2011 के देहरादून के जौलीग्रांट में हिमालय हास्पिटल में मौत हो गइल। उनुके मौत से एह मुद्दा के तवज्जो मिलल आ केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय एह मामिला में हस्तक्षेप कइलस।




#Total Article count: 519
#Total Word count: 198315