


#Article 3: अ (594 words)


अ देवनागरी लिपि कय पहिला वर्ण अव संस्कृत, हिंदी, मराठी, नेपाली आदि भाषन् कय वर्णमाला कय पहिला अक्षर अव ध्वनि होय। इ एक स्वर होय। ई कंठ्य वर्ण होय ।एकर उच्चारण स्थान कंठ होय। एकरे ध्वनि कय भाषाविज्ञान में श्वा कही जात है।

ई संस्कृत अव भारत कय कुल प्रादेशिक भाषन् कय वर्णमाला कय पहिला अक्षर होय। इब्राली भाषा कय 'अलेफ्', यूनानी कय 'अल्फा' औ लातिनी, इतालीय अव अंग्रेजी कय ए (A) एकर समकक्ष होँय। 

अक्षरन् में ई सबसे बडा मानि जात अहै। उपनिषदन् में एकर बडा महिमा लिखा है। तंत्रशास्त्र कय अनुसार ई वर्णमाला कय पहीला अक्षर एकरे नाते है कि ई सृष्टि उत्पन्न करेस  पहीले सृष्टिवर्त कय आकुल अवस्था कय सूचित करत है।

श्रीमद्भग्वद्गीता में कृष्ण अपने आप कय अक्षरन् में अकार कहत हैं- 'अक्षराणामकारोस्मि'।

पाणिनि कय अनुसार एकर उच्चारण कंठ से होत है। उच्चारण कय अनुसार संस्कृत में एकर अट्ठारह भेद हैं:-

हिंदी अव अउर भारतीय भाषन् में अ कय  दुइय उच्चारण है ह्रस्व औ दीर्घ । खालि पर्वतीय प्रदेशन् में, जहाँ दूर से मनईन् कय बोलावे या संबोधन करेक् परत है, प्लुत कय प्रयोग होत है। इ उच्चारणन् कय क्रमश अ, अ२ और अ३ से व्यक्त कई सका जात है। दीर्घ करेक  लिए अ कय आगे एक खड़ा पाति जोड़ देत हैं जवने से ओकर आकार आ होई जात है। संस्कृत अव ओसे संबद्ध कुल भाषन् कय व्यंजन में अ समाहित होत है औ ओकरे सहायता से ही ओन्हन कय पुरा उच्चारण होत है। उदाहरण का लिए, क= क्+ अ; ख= ख्+ अ, आदि। वास्तव में कुल व्यंजन कय व्यक्त करय वाले अक्षरन् कय रचना में अ खडा रहत है। अ कय प्रतीक खड़ा रेखा (।) है जवन व्यंजन कय दक्खीन, मध्य अव ऊप्पर भाग मा  रहत है, जैसय क  में बिचे में है; ख, ग, घ  में दक्खीन भाग में अव ङ , छ , ट  आदि में ऊप्पर भाग में है।

अ स्वर कय रचना कय बारे में वर्णोद्धारतंत्र में उल्लेख है।

चौथा शत ई. पू. कय ब्राह्मी से लईकै नवा शत ई. कय देवनागरी तक एकर बहुत  रूप मिलत हैं।

अ कय प्रयोग अव्यय कय रूप में भी होत है। तत्पुरुष समास में नकार कय लोप होइकै खाली अकार रही जात है; अऋणी कय छोडी कय स्वर कय पहिले अ कय अन् होई जात है। तत्पुरुष में अ कय प्रयोग निचे दिहा छ विभिन्न अर्थ में होत है

(१) सादृश्य- अब्राह्मण। एकर अर्थ होय ब्राह्मण कय छोडी कय ओकरे सदृश दूसर वर्ण, (क्षत्रिय, वैश्य आदि)।

(२) अभाव- अपाप। पाप कय अभाव।

(३) अन्यत्व- अघट। घट छोडी कय दूसर पदार्थ, पट, पीठ आदि।

(४) अल्पता- अनुदरी। छोट पेटवालस्।

(५) अप्राशस्त्य- अकाल। खराब काल, विपत्काल आदि।

(६) विरोध- असुर। सुर कय विरोधी, राक्षस आदि।

इही तरह अ कय प्रयोग संबोधन (अ!), विस्मय (अ:), अधिक्षेप (तिरस्कार) आदि में होत है।

अ (पुंलिंग, संज्ञा) अर्थ में विष्णु कय लिए प्रयुक्त होत है। कहु-कहु अकार से ब्रह्मा कय भी बोध होत है। तंत्रशास्त्र कय अनुसार अ में ब्रह्मा, विष्णु औ शिव औ ओन कय शक्ति वर्तमान हैं। तंत्र में अ कय पर्याय सृष्टि, श्रीकंठ, मेघ, कीर्ति, निवृत्ति, ब्रह्मा, वामाद्यज, सारस्वत, अमृत, हर, नरकाटि, ललाट, एकमात्रिक, कंठ ब्राह्मण, वागीश औ प्रणवादि भी पाए जात हैं। प्रणव कय (अ+ उ+ म) तीन अक्षरन् में अ पहिला है। योग साधना में प्रणव (आे३म्) औ खाश कइकय् ओकर प्रथम अक्षर अ कय विशेष महत्व है। चित्त एकाग्र करेक  लिए पहीले पूरा ओ३म् कय उच्चारण न कइ कय ओकरे बीजाक्षर अ कय जप कइ जात है।अईसन विश्वास कइ जात है कि एकरे जप से देह कय भीत्तर तत्व कफ, वायु, पित्त, रक्त अव शुक्र शुद्ध होई जात हैं औ एहसे समाधि कय पूर्णावस्था कय प्राप्ति होत है।




#Article 4: अंकोरवाट मंदिर (814 words)


अंकोरवाट मंदिर 
अंकोरवाट (खमेर भाषा : អង្គរវត្ត) विश्व कय सबसे बड़ा हिन्दू मन्दिर परिसर अव विश्व कय सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक होय। ई कंबोडिया कय अंकोर में है जवने कै पुराना नाव 'यशोधरपुर' रहा।

अंग्कोरथोम औ अंग्कोरवात प्राचीन कंबुज कय राजधानी औ ओकरे मंदिरन् कय भग्नावशेष कय विस्तार  होय। अंग्कोरथोम औ अंग्कोरवात सुदूर पूरुव कय हिंदचीन में प्राचीन भारतीय संस्कृति कय अवशेष होय। ईसवी सदिन् कय पहिले से  सुदूर पूरुव कय देशन् में प्रवासी भारतीय् कय कयु उपनिवेश  रहा। हिंदचीन, सुवर्ण द्वीप, वनद्वीप, मलाया जइसन  जगहि में भारतीय लोग कालांतर में अनेक राज्यन् कय स्थापना कीहिन। वर्तमान कंबोडिया कय उत्तरी भाग में स्थित ‘कंबुज’ शब्द से व्यक्त होत है, कुछ विद्वान भारत कय पश्चिमोत्तर सीमा पे बसय वाले कंबोजन् कय संबंध इही प्राचीन भारतीय उपनिवेश से बतावत हयँ। अनुश्रुति कय अनुसार इ राज्य कय संस्थापक कौंडिन्य बाभन रहा जेकर नाव वहँ कय एक संस्कृत अभिलेख में मिला है। नवां शताब्दी ईसवी में जयवर्मा तृतीय कंबुज कय राजा भय औ ओनही u लगभग ८६० ईसवी में अंग्कोरथोम (थोम का माने 'राजधानी' होय) नावँ कय आपन राजधानी कय सुरुवात किहीन। राजधानी  ४० वर्ष तक बनत रहा औ ९०० ई. कय लगभग तैयार होइ गवा। ओकरे निर्माण कय संबंध में कंबुज के साहित्य में ढेर किंवदंति प्रचलित है।

पच्छु कय सीमावर्ती थाई लोग पहिले कंबुज कय समेर साम्राज्य कय अधीन रहें लेकिन १४वां सदी कय मध्य मे ओन कंबुज पे आक्रमण करय लागिन औ अंग्कोरथोम कय कयु दाई जीतीन औ लूटिन। तब लाचार होईकै ख्मेरन् कय आपन उ राजधानी छोडेक परा। फिर धीरे-धीरे बाढ़ से उ नगर बर्बाद होई गवा औ ओकर सत्ता अंधकार में विलीन होइ गवा। नगऱवो कुल टूटिकय खंडहर होइ गय। १९वा सदी कय अंत में एक फ्रांसीसी वैज्ञानिक  पाँच दिन कय नाँय कय यात्रा से वँह पहुचा अव उ नगर कय अउर ओकरे खंडहरन् कय पुनरुद्धार किहीस। नगर तोन्ले सांप नाव कय महान सरोवर कय किनारे उत्तर कय ओर ढेर साल से वईसय सुता परा रहा जहाँ नगीचवे , दूसरे तट पे, विशाल मंदिरन् कय भग्नावशेष खड़ा रहा।
आज कय  अंग्कोरथोम एक विशाल नगर कय खंडहर होय। ओकरे चारों ओर ३३० फुट चौड़ा गहिर गड़हा है जवन पानी से भरा रहत रहा। नगर औ गड़हा कय बीचेम एकठु बडहन कय वर्गाकार प्राचीर नगर कय रक्षा करत है।प्राचीरमा ढेर भव्य औ विशाल महाद्वार बना हैं। महाद्वारन् कय ऊँच शिखरन् कय त्रिशीर्ष दिग्गज अपने मस्तक पे उठाएक खड़ा हैं। दुसर-दुसर दरवाजा से पाँच दुसर-दुसर राजपथ नगर कय बिच तक पहुँचत हैं। बहुत किसीम कय आकृतिन् वाला सरोवरन् कय खंडहर आज आपन जीर्णावस्था में भी निर्माणकर्ता कय प्रशस्ति गावत हैं। नगर कय ठीक बीचोबीच शिव कय एक विशाल मंदिर है जवने कय तीन भाग हैं। प्रत्येक भाग में एक ऊँच शिखर है। मध्य शिखर कय ऊँचाई लगभग १५० फुट है। इ ऊँच शिखरन् कय चारों ओर बहुत छोट-छोट शिखर बना हैं जवन संख्या में लगभग ५० हैं। इ शिखरन कय चारों ओर समाधिस्थ शिव कय मूर्ति स्थापित अहै। मंदिर कय विशालता औ निर्माण कला आश्चर्यजनक है। ओकरे देवालीन् कय पशु, चीरई, फ़ुल अव नृत्यांगना जैसन ढेर आकृतिन् से अलंकृत कई गा है। ई मंदिर वास्तुकला कय दृष्टि से विश्व कय एक आश्चर्यजनक वस्तु होय औ भारत कय प्राचीन पौराणिक मंदिरन् कय अवशेषन् में तो एक्कै है। अंग्कोरथोम कय मंदिर औ भवन, ओकरे प्राचीन राजपथ औ सरोवर कुल उ नगर कय समृद्धि कय सूचक हैं।

१२वा शताब्दी कय लगभग सूर्यवर्मा द्वितीय अंग्कोरथोम में विष्णु कय एक विशाल मंदिर बनवाईन। इ मंदिर कय रक्षा भी एक चतुर्दिक गड़हा करत है जवने कय चौड़ाई लगभग ७०० फुट है। लम्मे से  गड़हा बडा ताल जैसन देखाअ है। मंदिर कय पच्छु कय ओर इ गडहा कय पार करेक लिए एक पुल्ह बना है। पुल्ह कय पार मंदिर में हलेक लिए एक विशाल दुआर बना है जवन लगभग १,००० फुट चौड़ा है। मंदिर बहुत बडा है। एकरे देवालीन पे कुल रामायण मूर्तिन् में बनावा है। इ मंदिर कय देखेस से जानी परत है कि विदेशन् में जाईकै भी प्रवासी कलाकार लोग भारतीय कला कय जियाए रहे।

ख्मेर शास्त्रीय शैली से प्रभावित स्थापत्य वाला इ मंदिर कय बनावेक काम सूर्यवर्मन द्वितीय ने सुरु किहिन लेकिन ओन एका पुरा नाई कई पाइन। मंदिर कय काम ओनकय भएने अव उत्तराधिकारी धरणीन्द्रवर्मन कय शासनकाल में पुरा भय। मिश्र अव मेक्सिको कय स्टेप पिरामिडन् कय जैसन ई सीढ़ी पे उठत गा है। एकर मूल शिखर लगभग ६४ मीटर ऊँच है। एकरे अलावा अऊर कुल आठों शिखर ५४ मीटर उँच हैं। मंदिर साढ़े तीन किलोमीटर लम्मा पाथर कय देवाल से घेरान है, ओकरे बहरे ३० मीटर खुला जमिन औ फिर बहरे १९० मीटर चौडा गड्हा है। विद्वानन् कय अनुसार ई चोल वंश कय मन्दिरन् से मिलत जुलत है। दक्खिन पच्छु में स्थित ग्रन्थालय कय साथे इ मंदिर में तीन वीथि हैं जवने मे भितर वाला ढेर ऊंचाई पे हैं। निर्माण कय कुछ ही वर्ष बाद चम्पा राज्य  इ नगर कय लूटिस। ओकरे बादमे राजा जयवर्मन-७  नगर कय कुछ किलोमीटर उत्तर में फिर से बसाईन। १४वा या १५वा शताब्दी में थेरवाद बौद्ध लोग  एका अपने नियन्त्रण में लई लिहिन।




#Article 5: अंटार्कटिका (131 words)


अंटार्कटिका

लाम्बर्ट अजिमुथाल प्रोजेक्शन पे आधारित मानचित्र।दक्खिनी ध्रुव मध्य में है।

अंटार्कटिका (या अन्टार्टिका) पृथ्वी कय दक्खीनी महाद्वीप हुवे, जवने मे दक्खिन ध्रुव  है। ई दक्खिनी गोलार्द्ध कय अंटार्कटिक क्षेत्र औ लगभग पूरा तरह से अंटार्कटिक गोलाइ कय दक्खिन में स्थित अहै। इ चारों ओर से दक्खिनी महासागर से घेरान  अहै।
अंटार्कटिका पृथ्वी कय सबसे ठंढ जगह होय। पृथ्वी पय सबसे ठंढ प्राकृतिक तापमान २१ जुलाई १९८३ मा अंटार्कटिका मा रूसी वोस्तोक स्टेशन मा -८९.२ डिग्री सेल्सियस (-१२८.६ °F) दर्ज कइ गा रहा। अन्टार्कटिका बहुतै बड़ा बर्फीला रेगिस्तान होय। जाडा मा एकरे भीतरी जगहन् कय कम से कम तापमान −८० °C (−११२ °F) औ −९० °C (−१३० °F) कय बीच औ गर्मिन् मा एकरे किनारन् कय अधिकतम तापमान ५ °C (४१ °F) औ १५ °C (५९ °F) कय बीचे रहत है। 




#Article 6: अक्षांश (118 words)


अक्षांश पृथ्वी पे कौनों जगहि कय सटीक लोकेशन निश्चित करै खत्तिर बनावल तरीका,  भूगोलीय निर्देशांक सिस्टम कय हिस्सा होय। अक्षांश अव देशान्तर कय सहायता से कौनों अस्थान कय सही-सही स्थिति बताय मिली।

अक्षांश एक मेर  कय कोण कय नाप होय जवने में कौनों जगहि कय भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्खिन ओर कय कोणीय दूरी नापि जात है । एकर कोण पृथ्वी कय केंद्र पे बनाला।

भूमध्य रेखा कय अक्षांश कय मान शून्य अंश होय ।अव दुनों ध्रुव कय मान ९०° होय। बाकी कुल जगहि कय अक्षांश ०° से ९०° कय बिचे में रहत है ।

अक्षांश अव  देशांतर कय इहै निर्देशांक सिस्टम कय पृथ्वी कय भूगोलीय निर्देशांक सिस्टम कहा जात है जवन एक्ठु गोलीय निर्देशांक सिस्टम होय।




#Article 7: अखिलेश यादव (211 words)


 

अखिलेश यादव (जनम: 1 जुलाई 1973)  उत्तर प्रदेश कय मुख्यमन्त्री रहें। यन उत्तर प्रदेश कय सबसे जवान मुख्यमंत्री रहें । यसे पहिले यन लगातार तीन दांई सांसद रहि चुका हैं। समाजवादी पार्टी कय राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव कय बेटवा अखिलेश 2012 कय उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में आपन पार्टी कय नेतृत्व करिन। ओनकय पार्टी कय राज्य में स्पष्ट बहुमत मिलैक बाद, 15 मार्च 2012 कय वन उत्तर प्रदेश कय मुख्य मन्त्री पद कय शपथ ग्रहण करिन।

अखिलेश यादव कय जनम 1 जुलाई 1973 कय इटावा जिला कय सैफई गाँव में समाजवादी पार्टी कय नेता मुलायम सिंह यादव कय पहिला मेहरारु मालती देवी किंहै भवा। अखिलेश शाकाहारी होंय। यनकय बियाह डिम्पल यादव कय साथे 24 नवंबर 1999 कय भा रहा। अखिलेश तीन लरिकन कय बाप होंय। 

अखिलेश  राजस्थान मिलिट्री स्कूल धौलपुर से पढाई किहें हँय वन इन्जिनियरिङ में स्नातक कय डिग्री मैसूर कय एस॰ जे॰ कालेज ऑफ इंजीनियरिंग से लीहिन, बाद में विदेस चला गँय औ सिडनी विश्वविद्यालय से पर्यावरण इन्जिनियरिङ में स्नातकोत्तर करिन

अखिलेश मई 2009 कय लोकसभा उप-चुनाव में फिरोजाबाद सीट से आपन नगिचेक प्रतिद्वंद्वी बहुजन समाज पार्टी कय प्रत्याशी एस०पी०एस० बघेल कय 67,301 मत से हराइन। यकरे अलावा वन कन्नौज से भी जीतें। बाद में ओन फिरोजाबाद सीट से इस्तिफा दिहिन औ कन्नौज सीट अपने लगे धरिन।




#Article 8: अजरबैजान (116 words)


अजरबैजान एशिया कय एक्ठु देश होय । एकर राजधानी बाकु होय ।इ कॉकेशस कय पुरुब मा हय । इ यूरोप कय पुरुब औ एसिया कय बिचेम बसा हय । भौगोलिक रुप से इ एसियै कय भाग होय । यकर सिमा अर्मेनिया, जॉर्जिया, रूस, ईरान, तुर्की औ यकर तटीय भाग कैस्पियन समुन्दर से सटा है। इ १९९१ तक सोवियत संघ कय भाग रहा।
इ एक्ठु धर्मनिरपेक्ष देस होय । यकर ढेर मनई इस्लाम धरम कय मानत हँय औ इ इस्लामी सम्मेलन संघ कय सदस्य देस होय । इ देश धीरे-धीरे औपचारिक लेकिन सत्तावादी लोकतंत्र कय ओर बढ़त है।

यकर नाँव अट्रोपटन सब्द से निकरा है । यकरे नाँव कय जरि फारसी धरम कय मानि जात हय ।




#Article 9: अजिंक्य रहाणे (123 words)


 
अजिंक्य रहाणे यक भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होयँ।, यन घरेलू प्रतियोगितन मा मुंबई खर्तिन खेलत हँय। यन इंडियन प्रीमियर लीग मा राजस्थान रॉयल्स खर्तिन खेलत रहें।२०२० कय इंडियन प्रीमियर लीग मा दिल्ली कैपिटल्स यन्है लइ लिहिस । यन दायाँ हाथ कय बल्लेबाज होँय, यन 2011 मा इंग्लैंड कय खिलाफ अपने अंतरराष्ट्रीय कैरियर कय सुरुआत किहिन औ 2013 मा ऑस्ट्रेलिया कय खिलाफ अपने टेस्ट कैरियर कय सुरुआत किहिन। 2007-08 कय सत्र मा रहाणे आपन प्रथम श्रेणी कैरियर कय सुरुआत किहिन औ 100 प्रथम श्रेणी पारी कय बाद 62.04 कय औसत बनाय रहें। 31 अगस्त 2011 कय मैनचेस्टर मा ओन T20I सुरुआत किहिन औ उ मैच मा 61 रन बनाइन औ सितंबर 2011 मा अपने कैरियर कय सुरुआत पय एक दिवसीय मैच मा 40 रन बनाइन।




#Article 10: अधीर रंजन चौधरी (382 words)


अधीर रंजन चौधरी (जन्म 2 अप्रैल 1956) भारत की सत्रहवीं लोकसभा के सदस्य हैं तथा इसके पूर्व वे १३वीं, १४वीं, १५वीं एवं सोलहवीं लोकसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। 2014 के चुनावों में इन्होंने पश्चिम बंगाल की बहरामपुर सीट से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से भाग लिया।
वह पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भी हैं। 

चौधरी का जन्म 2 अप्रैल 1956 को निरंजन और सरोजा बाला चौधरी का जन्म पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेरहामपुर में हुआ था। उन्होंने बेरहामपुर में आईसी संस्थान में अध्ययन किया। 

चौधरी राजीव गांधी के प्रीमियर के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। 1991 में, उन्होंने नाबाग्राम निर्वाचन क्षेत्र से पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव लड़ा। मतदान के दौरान, उनका भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के 300 समर्थकों ने पीछा किया और उसके उम्मीदवार को बंधक बना लिया। चौधरी 1,401 वोटों के अंतर से हार गए। 1996 में, वह उसी निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे।  चौधरी को 76,852 मत मिले और लगभग 20,329 मतों के अंतर से जीत हासिल की। 

चौधरी ने बेरहमपुर निर्वाचन क्षेत्र से 1999 का भारतीय आम चुनाव लड़ा। उन्होंने 95,391 वोटों  के अंतर से जीत हासिल की और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी, क्रांतिकारी सोशलिस्ट पार्टी के मौजूदा सांसद प्रमोथेस मुखर्जी को हराया। उनकी सफलता के बाद, उन्हें मुर्शिदाबाद जिले का कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया। १९९९ से २००० के बीच, उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी, रेलवे कन्वेंशन समिति और समिति के सदस्य के रूप में कार्य किया, जो कि रेलवे के उपक्रमों को सामान्य राजस्व को देय लाभांश की दर की समीक्षा करने के लिए समिति के सदस्य थे। 2000 और 2004 के बीच, उन्होंने विदेश मंत्रालय की सलाहकार समिति के सदस्य के रूप में कार्य किया। २००३ में, चौधरी के नेतृत्व में, कांग्रेस पार्टी ने ३३ जिला परिषद सीटों में से २३,२६ पंचायत समितियों में से १३ और मुर्शिदाबाद में २५४ ग्राम सभाओं में से १४४ जीते।  In 2003, under Chowdhury's leadership, the Congress party won 23 out of 33 zilla parishad seats, 13 out of 26 panchayat samitis and 104 out of 254 village councils in Murshidabad. 

जून 2019 में, उन्हें लोकसभा में कांग्रेस के नेता के रूप में चुना गया था। NDTV की एक रिपोर्ट के अनुसार, अधीर रंजन चौधरी को पार्टी द्वारा राहुल गांधी को समझाने में विफल रहने के बाद काम दिया गया था। 




#Article 11: अफगानिस्तान (847 words)


अफगानिस्तान एशिया कय एक्ठु देश होय । एकर राजधानी काबुल होय ।अप्रैल २००७ मा अफगानिस्तान सार्क कय अठवां सदस्य बना। अफगानिस्तान कय पूरुब मा पाकिस्तान, उत्तर पूरुब मा भारत औ चीन, उत्तर मा ताजिकिस्तान, कज़ाकस्तान औ तुर्कमेनिस्तान औ पच्छु मा ईरान है।

अफ़ग़ानिस्तान रेशम राहि औ मनई प्रवास कय एक्ठु पुरान केन्द्र बिन्दु रहा है।हिँँया पुरातत्वविदन कय मध्य पाषाण काल ​​कय मानव बस्ती कय साक्ष्य मिला है। इ क्षेत्र मा नगरीय सभ्यता कय शुरुआत 3000 से 2,000 ई.पू. कय आसपास मानि सका जात है। इ क्षेत्र एक्ठु अइसन भू-रणनीतिक जगहि पै है जवन मध्य एशिया औ पच्छु एसीया कय भारतीय उपमहाद्वीप कय संस्कृति से जोड़त है। इ जमिनी पै कुषाण, हफ्थलिट, समानी, गजनवी, मोहमद गौरी, मुगल, दुर्रानी औ अउर दूसर प्रमुख साम्राज्यन कय उत्थान भवा है।
ब्रिटिश सेनाओं भी कयु दाई अफ़ग़ानिस्तान पे आक्रमण किहे रहा। वर्तमान मा अमेरिका कय तालेबान पे आक्रमण करेक बाद नाटो(NATO) कय सेना हिँया रहत है ।
अफ़ग़ानिस्तान कय प्रमुख नगर होय- राजधानी काबुल, कंधार (गंधार प्रदेश) भारत कय प्राचीन ग्रंथ महाभारत मा एका गंधार प्रदेश कहि गा है।हिँया कयु नसल कय मनई रहत हैं जवने मा पश्तून (पठान या अफ़ग़ान) सबसे ढेर हैं।एकरे अलावा उज्बेक, ताजिक, तुर्कमेन औ हज़ारा शामिल हैं। हिँया कय मुख्य भाषा पश्तो होय। फ़ारसी भाषा कय अफ़गान रूप कय दरी कहत हैं।

अफ़गानिस्तान नाँव मा अफ़गा़न कय मतलब होत है यँह कय पश्तून मनई लोग औ स्तान या स्थान कय मतलब होत है जगह ।

मनई कय बसाहट १०,००० साल से भी ढेर पुरान होइ सकत है। ईसा कय १८०० साल पहिले आर्यन कय आगमन इहि जगहि भवा रहा। ईसा कय ७०० साल पहिले एकरे उत्तरी क्षेत्र मा गांधार महाजनपद रहा जवने कय बारे मा भारतीय स्रोत महाभारत औ अउर ग्रंथन मा बखान मिलत है।
ईसापूर्व ५०० मा फ़ारस कय हखामनी शासकों एका जीत लिहिन। सिकन्दर कय फारस विजय अभियान कय तहत अफ़गानिस्तान भी यूनानी साम्राज्य कय अंग बनि गवा। एकरे बाद इ शक कय शासन मा आए। शक स्कीथि कय भारतीय अंग रहा। ईसापूर्व २३० मा मौर्य शासन कय तरे अफ़ग़ानिस्तान कय पूरा इलाका आय चुका रहा लेकिन मौर्यन कय शासन ढेर दिन तक नाइ रहा। एकरे बाद पार्थियन औ फ़िर सासानी शासक फ़ारस मा केन्द्रित आपन साम्राज्यन कय हिस्सा एका बना लिहिन।
सासनी वंश इस्लाम कय आवै से पहिले कय अंतिम ईरानी वंश रहा। अरब लोग ख़ुरासान पै सन् ७०७ में अधिकार जमा लिहिन। सामानी वंश, जवन फ़ारसी मूल कय लेकिन सुन्नी रहे,९८७ इस्वी मा आपन शासन गजनविन से हारि गयँ खो जवने कय नाते लगभग कुल अफ़ग़ानिस्तान ग़ज़नविन कय हाथेंम आइ गै। ग़ोर कय शासक गज़नी पै ११८३ मा अधिकार जमा लिहिन।

मध्यकाल में कइयु अफ़गान शासक  दिल्ली कय सत्ता पय सासन जमाइन या जमावैक कोसिस किहिन जवने म लोदी वंश कय नाँव पहिला जगहि पय है। अफगानिस्तान पय सिख साम्राज्य कय बडा राजा दिलीप सिंह कय कइयु साल तक सासन रहा l अफगान से मिलिकय बाबर, नादिर शाह औ अहमद शाह अब्दाली दिल्ली पय आक्रमण किहिस । अफ़ग़ानिस्तान कय कुछ जगह दिल्ली सल्तनत कय तरे रहा।

२०१९ कय अफगानी जानकारी कय अनुसार हिँया कय जनसंख्या ३२.९ मिलियन हय लेकिन यू.एन कय अनुसार यँह कय जनसंख्या ३८ मिलियन हय । २३.९% मनई सहर मा रहत हँय औ ७१% मनई गाँव मे । लगभग ४.७% मनई घुमन्ता हँय । जनसंख्या बढैक दर २.७% हय जवन अफ्रिका कय बहरे कय देसे म सबसे ढेर होय । अइसै रहा तौ यँह कय जनसंख्या २०५० मा ८० मिलियन पहुँचि जाई ।

९९.७% मनइ इस्लाम धरम कय मानत हँय वह में से ढेर सुन्नी होँय। हजारैं सिख औ हिन्दु मनईऔं बड़ा सहर मे रहत हँय (काबुल,जलालाबाद,कन्दहार,गज़्नि)। 
दारी औ पश्तो यँह कय कामकाज औ बोलिचाली कय भाषा होय । ढेर मनई दुनौ भाषा बोलत हँय । उज़्बेक,तूर्क,बलोची ,पाशायी औ नुरिस्तानी बोलै वाले मनई ओ यँह रहत हँय । 

अफ़ग़ानिस्तान चारों ओर से ज़मीन से घेरान है औ यकर सबसे बड़ा सीमा पूरुब कय ओर पाकिस्तान से सटा है। यका डूरण्ड रेखा कहा लैं। बिचेक औ उत्तरपूरुब कय कोना में पहाड माला है जवन उत्तरपूरुब में ताजिकिस्तान मे हिन्दूकुश पहाड कय फइलाव होय। 
तापमान जनवरि म −१५°C (५ °F) से लइकै −२६ °C (−१५ °F) तक रहाला । जुलाई मा तापमान ३५ °C (९५ °F) से लइकै ४३ °C (१०९ °F) तक होइ सकत हय । बरखा दिसम्बर से लइकै अप्रैल कय बिचेम होत हय । भारत से नज्दिके होयक बावजुदौ इ मानसून कय क्षेत्र से बहरे परा ला । लेकिन कुछ हिस्सन मे (नूरिस्तान) प्रदेस मा मानसून कय बरखा होला ।  

१९४६ में इ संयुक्त राष्ट्र संघ कय सदस्य बना । नाटो से यकर बढिया सम्बन्ध हय । नाटो अफगानिस्तान कय सेना कय तालिमऔ देवैक काम करत हय ।

२०१८ म  यकर जिडिपी $21.7 billion रहा । अफगानिस्तान यक्ठु कम विकासित देसन मे गिनि जात हय । दा अफगानिस्तान बैंक यँह कय केन्द्रिय बैंक होय ।यँह कय पइसा कय नाँव अफगानी(AFN) होय । ७५ अफगानी बराबर १ अमेरिकी डालर होत हय ।  

अफ़ग़ानिस्तान में कुल ३४ परसासनिक विभाग हँय। यन्हन कय नाँव होय - 

बदख़्शान
बदगीश
बाग़लान
बाल्क़
बमयन
दायकुंडी
फ़राह
फ़रयब
ग़ज़नी
ग़ोर
हेलमंद
हेरात
ज़ोजान
क़ाबुल
कांदहार (कांधार)
क़पिसा
ख़ोस्त
कोनार
कुन्दूज
लगमान
लोगर
नांगरहर
निमरूज़
नूरेस्तान
ओरुज़्ग़ान
पक़्तिया
पक़्तिका
पंजशिर
परवान
समंगान
सरे पोल
तक़ार
वारदाक़
ज़बोल




#Article 12: अफ़्रीका (191 words)


अफ़्रीका (अंग्रेजी:Africa) एशिया कय  बाद विश्व कय  सबसे बड़ा महाद्वीप होय । यह ३७०१४' उत्तरी अक्षांश से ३४०५०' दक्षिणी अक्षांश अव  १७०३३' पश्चिमी देशान्तर से ५१०२३' पूर्वी देशान्तर कय  बीच स्थित अहै।  अफ्रीका कय  उत्तर महिआ भूमध्यसागर अव  यूरोप महाद्वीप, पश्चिम महिया अटलांटिक महासागर, दक्षिण महिआ दक्षिण अटलांटिक महासागर अव  पुरुब  ओर अरब सागर अव  हिन्द महासागर अहै। पुरुबमा स्वेज थल डमरू एका एशिया से जोडे अहै अव  स्वेज नहर एका एशिया से अलगा करे अहै। जिब्राल्टर जलडमरू एकरे  उत्तर महिया, यूरोप महाद्वीप से अलगा करे अहै। 

ई महाद्वीप में बिसाल रेगिस्तान, बहुत घना जंगल, घास कय  मैदान, बड़ा-बड़ा नद्दी अव  झील अउर विचित्र-विचित्र जंगली जानवर मिला लय । मुख्य मध्याह्न रेखा (००)अफ्रीका महाद्वीप कय  घाना देश कय   राजधानी अक्रा शहर से होइ कय  के गुजरा ला । 

कुछ इतिहासकार लोगन कय  मत ई अहै कि मनुष्य कय  उत्पत्ति एही महाद्वीप पे  भए रहा अव  एही से  बाकी महादीपन पे  आदमी गय रहा।इहै  महादीप में विश्व कय  दुईठो  प्राचीन सभ्यता कय  (मिस्र एवं कार्थेज) कय  भी विकास भय । अफ्रीका कय  बहुत देश द्वितीय विश्व युद्ध कय  बाद स्वतंत्र भए अहै  अव् ई कुल देस आपन आर्थिक बिकास में लागा अहै।




#Article 13: अफ़्रीका कय भूगोल (103 words)


अफ़्रीका कय भूगोल अफ़्रीका महाद्वीप कय भौगोलिक तत्वन अव ओन्हन कय एक जगह से दुसर जगह कय बीच विस्तार कय वर्णन होय।

यूरोप से अफ़्रीका कय भूमध्य सागर अलग करा ला अव एशिया से ई लाल सागर कय द्वारा अलग होला। एशिया से ई महादीप स्वेज थलडमरू से जोडाऩ है जवने कय खनि कय स्वेज नहर बनावा गा है, हालांकि कबो-कबो स्वेज कय पुरुब ओर कय सिनाई प्रायदीप भी अफिरके कय हिस्सा मान लिहा जाला।

अफिरका कय सबसे ऊँच पहाड़ किलिमंजारो परबत होय, सबसे लमहर नद्दी नील नदी होय अव सबसे बड़हन झील विक्टोरिया झील होय।

अफ्रीका कय पठारन कय महादीप कहा जाला।




#Article 14: अफ्रिका (189 words)


अफ़्रीका वा कालद्वीप, एशिया कय बाद विश्व कय सबसे बड़ा महाद्वीप होय।
ई ३७०१४' उत्तरी अक्षांश से ३४०५०' दक्खीनी अक्षांश अव १७०३३' पच्छु देशान्तर से ५१०२३' पूरुबी देशान्तर कय बिचे मे  है।अफ्रीका कय उत्तर में भूमध्यसागर अव यूरोप महाद्वीप, पच्छू में अंध महासागर, दक्खीन में दक्खीन महासागर अव पूरुब में अरब सागर अव हिन्द महासागर हैं। पूरुब में स्वेज भूडमरूमध्य एका एशिया से जोड़त है अव स्वेज नहर एका एशिया से अलग करत अहै। जिब्राल्टर जलडमरूमध्य एकरे उत्तर में यूरोप महाद्वीप से अलग करत अहै। ई महाद्वीप में बडा-बडा मरुभुमि, घना वन, बडा घास कय मैदान, बड़ा-बड़ा नदि अव पोखरा अव विचित्र जंगली जानवर हैं। मुख्य मध्याह्न रेखा (००) अफ्रीका महाद्वीप कय घाना देश कय राजधानी अक्रा शहर से होइकै गुजरत अहै। यहँ सेरेनगेती औ क्रुजर राष्‍ट्रीय खरीहान अहै तो जलप्रपात औ वर्षावन  हैं। एक ओर सहारा मरुभुमी है तो दूसर ओर किलिमंजारो पर्वत  है औ सुषुप्‍त ज्वालामुखी  है। युगांडा, तंजानिया औ केन्या कय सीमा पे स्थित विक्‍टोरिया पोखरा अफ्रीका कय सबसे बड़ा अव कुल पृथ्वी पे मीठ पानी कय दूसरा सबसे बड़ा पोखरा होय। ई पोखरा दुनिया कय सबसे लम्मा नदी नील कय पानी कय स्रोत भी हुवे।




#Article 15: अब्दुल कलाम (126 words)


अवुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम  (१५ अक्टूबर १९३१ - २७ जुलाई २०१५), रामेश्वरम, तमिलनाडु, भारत), जेका डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम कय नाव से भी जानि जात है, भारतीय गणतंत्र कय ग्यारहवा निर्वाचित राष्ट्रपति होयँ। वे भारत कय पूर्व राष्ट्रपति, जानामाना वैज्ञानिक अउर अभियंता कय रूप में विख्यात हँय।

डॉक्टर कलाम  साहित्यिक रूप से आपन शोध कय चार उत्कृष्ट पुस्तक में समाहित किहे हैं, जवन ई प्रकार है- 'विंग्स ऑफ़ फायर', 'इण्डिया 2020- ए विज़न फ़ॉर द न्यू मिलेनियम', 'माई जर्नी' अव 'इग्नाटिड माइंड्स- अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया'। ई पुस्तकन् कय कई भारतीय अव विदेशी भाषा में अनुवाद होई चुका है। ई प्रकारसे यन भारत कय एक विशिष्ट वैज्ञानिक होयँ, जेका 30 विश्वविद्यालय अउर संस्थान से डॉक्टरेट कय मानद उपाधि प्राप्त होई चुका अहै।




#Article 16: अमेजन नदी (230 words)


आमेजन या अमेजॉन या आमेजॉन (पुर्तगाली: Rio Amazonas; स्पेनी: Río Amazonas) दक्खिन अमेरिका से होइकै बहै वाला एक नदी होय। आयतन कय हिसाब से ई विश्व कय सबसे बड़ा नदी होय औ लम्माई कय हिसाब से दूसरा। ई ब्राजील, पेरु, बोलविया, कोलोंबिया अव इक्वेडोर से होइकै बहत अहै। ई पेरु कय एंडीज़ पर्वतमाला से निकरी कै पूरुब कय ओर बहत अहै औ अटलांटिक महासागर में मिलत अहै। एकर प्रवाह-घाटी विश्व में सबसे बढिया है अव एहमा पानी कय प्रवाह दर एकरे बाद कय आठ नदिन् कय जोड से भी ढेर  अहै। इ नदी पे पुल्ह कय समस्या है।

यकर कुल क्षेत्रफल सत्तर लाख वर्ग किलोमीटर है, जवन पूरा दक्खिन अमरीकी प्रायद्वीप कय 40 प्रतिशत हिस्सा होय। अमेज़न कै जंगल धरती कै पर्यावरण संतुलन करै मा बहुत जरुरि भूमिका निभावत अहै, इहिक नाते ओका 'धरती कै फेफड़ा' कहा जात है।

अमेज़न जैव विविधता कै केंद्र होय औ हिँया जीव-जंतुन् औ वनस्पतिन् कै बहुत जात मिलत है। अमेज़न कै बर्खा बन से होइकै बहय वाला लम्माई 6,437 से 7000 किलोमीटर है। यकर चोड़ाई 140 है ।

अमेज़न कै किनारे पय नौ देशन् कै लगभग तीन करोड़ मनई बसत हैं। इ देश होय-- ब्राज़ील, बोलिविया, पेरू, इक्वेडोर, कोलंबिया, वेनेज़ुएला, गयाना, फ्रेंच गयाना औ सूरीनाम। यँहमे दुई-तिहाई आबादी ब्राज़ील कै मनईन कय है । 

अमेज़ॅन कै 1100 से ढेर सहायक नदियां हैं, जवने में से 12 नदि कै लंबाई 1,500 किलोमीटर (930 मील) है।




#Article 17: अरविंद केजरीवाल (114 words)


अरविंद केजरीवाल (जनम: १६ अगस्त १९६८) एक समाज सेवक, नेता अउर पूर्व आई आर एस अधिकारी अहेन। एन भारत के दिल्ली राज्य के मुख्यमन्त्री रहि चूका हैन। २८ दिसम्बर २०१३ से १४ फरवरी २०१४ तक केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री पद पै बिराजमान रहेन। राजनीति में आवे से पहिले अरविन्द केजरीवाल एक समाजसेवक रहेन जे सरकार में अधिक पारदर्शिता लावे खातिर संघर्ष केहेन। भ्रष्टाचार अउर कला धन के खिलाफ अन्ना हजारे क्य आन्दोलन से जुडा रहेन बाद में मतभेद होय के वजह से अन्ना हजारे से अलग होय गयेन। एन आम आदमी पार्टी नाम के एक नवा राजनीतिक पार्टी संस्थापक अउर संयोजक अहेन।दिल्ली विधानसभा चुनाव २०१५ मा एन भारी बहुमत से दिल्ली कय मुख्यमंत्री बनें




#Article 18: अर्जुन रामपाल (187 words)


अर्जुन रामपाल , (जन्म 26 नवम्बर 1972) भारत कय एक्ठु अभिनेता होंय । 

अर्जुन रामपाल कय जनम 1972 में जबलपुर, मध्य प्रदेश मा भवा रहा। वन मिस इंडिया औ सुपर मॉडल मेहर जेसिया से बियाह कीहिन औ ओनकय दुई बिटियां हिन, माहिका, 17 जनवरी 2002 कय औ माइरा जून 2005 में पैदा भइन.

ओनकय पहिला फ़िलिम - मोक्ष 2001 में आय, जवने कय अशोक मेहता निर्देसन किहिन । अबहिन,इ फ़िलिम वनकय दूसरा फ़िलिम प्यार, इश्क़ और मोहब्बत कय बाद आ रहा, जवनेम ओन सुनील शेट्टी औ आफ़ताब शिवदासानी कय साथे काम किहिन । जबकि दुनौ फिलिम बॉक्स ऑफ़िस पय बढियस नाइ चला, लेकिन आलोचकन से बहुत बडाई मिला। 2002 में ओन अंतर्राष्ट्रीय भारतीय फ़िलिम अकादमी से फ़ेस ऑफ़ द इयर इनाम जितिन।

आपन पहिला फ़िलिम कय बाद से , ओन लगातार आंखें (2002), दिल है तुम्हारा (2002), यक़ीन (2005) औ एक अजनबी (2005) जइसन फ़िल्मन में काम किहिन। ढेर फ़िलिमिन में वन सहजोगी भूमिका में देखाने औ इ व्यावसायिक तवर पय सफल नाइ रहा।

वन शाहरुख़ ख़ान, रानी मुखर्जी, सैफ़ अली ख़ान, प्रीति ज़िंटा औ प्रियंका चोपड़ा जइसन सितारन कय साथे मिलिकै टेम्पटेशन 2004 में भाग लिहिन।




#Article 19: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (133 words)


अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय () भारत के प्रमुख केन्द्रीय विश्वविद्यालयों मा से एक अहै जौन उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिला मा स्थित है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एक आवासीय शैक्षणिक संस्थान होय। एहकय स्थापना 1920 मा सर सैयद अहमद खान केहे रहें अउर 1921 मा भारतीय संसद के एक अधिनियम के माद्धेम से केन्द्रीय विश्वविद्यालय कय दर्जा दीन गा। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के तर्ज पर ब्रिटिश राज के समय बनावा गा पहिला उच्च शिक्षण संस्थान रहा। मूलतः ई मुस्लिम एंग्लो ओरिएंटल कालेज रहा, जौन महान मुस्लिम समाज सुधारक सर सैयद अहमद खान के हाथे स्थापित भवा रहा। कइव प्रमुख मुस्लिम नेताओं, उर्दू लेखकों अव उपमहाद्वीप कय विद्वान विश्वविद्यालय से स्नातक कय उपाधि प्राप्त केहे अहैं।

हैदराबाद कय सतवें निज़ाम- मीर उस्मान अली खान वर्ष 1951 मा एह विश्‍वविद्यालय के बरे 5 लाख रुपिया कय दान देहें।




#Article 20: अलेक्जेन्डर महान (112 words)


अलेक्जेन्डर महान या सिकंदर (२० जुलाई ३५६ ईसापूर्व से ११ जून ३२३ ईसा पूर्व) मकदूनियाँ, (मेसेडोनिया) कय ग्रीक शासक रहा। उ एलेक्ज़ेंडर तृतीय अव एलेक्ज़ेंडर मेसेडोनियन नावँ से भी जाना जात है। इतिहास में उ सबसे कुशल औ यशस्वी सेनापति माना जात है। ओकर जनम ईसापूर्व ३५६ में पेल्ला में भवा रहा ।
सिकंदर कय दादा कय नाव फिलिप़ अव माई कय नाव ओलंपिया रहा । 
सिकंदर १६ साल कै उमर मे अरस्तु से शिक्षा लिहे रहा। 
सिकंदर बीस बरस कय उमर में मेसिडोनिया कै राजा बना औ दुनिया जीतेक् सपना देखै लाग। अपने दादा कय एशिया माईनर जितेक् इच्छा पूरा करै खत्तिर अपने सैनिक, हथियार औ लश्कर कै साथे निकरा । 




#Article 21: अल्बर्ट आइंस्टीन (150 words)


अल्बर्ट आइंस्टीन (; १४ मार्च १८७९ - १८ अप्रैल १९५५) एकठो सैद्धांतिक भौतिकविद् रहेँ । वे सापेक्षता कय  सिद्धांत अउर द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण E = mc2 कय  लिए जाना जात हँय। वन्है सैद्धांतिक भौतिकी, खास कईकै प्रकाश-विद्युत ऊत्सर्जन कय  खोज कय  लिए १९२१ महियाँ नोबेल पुरस्कार प्रदान कई  गय ।

आइंसटाइन कय  सापेक्षता कय  विशेष अव  सामान्य सिद्धांत सहित कए योगदान दिहिन । वनके अन्य योगदान महिया- सापेक्ष ब्रह्मांड, केशिकीय गति, क्रांतिक उपच्छाया, सांख्यिक मैकेनिक्स कय  समस्या, अणु कय  ब्राउनियन गति, अणु कय  उत्परिवर्त्तन संभाव्यता, एक अणु वाला गैस कय  क्वांटम सिद्धांत, कम विकिरण घनत्व वाला प्रकाश कय  ऊष्मीय गुण, विकिरण कय  सिद्धांत, एकीकृत क्षेत्र सिद्धांत अउर् भौतिकी कय  ज्यामितीकरण शामिल अहै।

आइंस्टीन  पचास से ढेर  शोध-पत्र अऊर  विज्ञान से अलग किताबें लिखे अहै। १९९९ मा टाइम पत्रिका वन्है शताब्दी-पुरूष घोषित किहिस । एक सर्वेक्षण कय  अनुसार वे सार्वकालिक महानतम वैज्ञानिक माना गएँ। आइंस्टीन शब्द बुद्धिमान कय  पर्याय माना जाता हँय।




#Article 22: अवध (225 words)


अवध वर्तमान भारतके उत्तर प्रदेश और नेपालके कपिलवस्तु रुपन्देही, दाङ आदि मिलाके एक भाग का नाम है जो प्राचीन काल में कोशल कहलाता था। इसकी राजधानी अयोध्या थी। अवध शब्द अयोध्या से ही निकला रह। अवध की राजधानी प्रांरभ में फैजाबाद थी किंतु बाद को लखनऊ उठ आई छनि। अवध पर नवाबों का आधिपत्य था जो प्राय: स्वतंत्र थे, क्योंकि अवध के नवाब शिया मुसलमान थे अत: अवध में इसलाम के इस संप्रदाय को विशेष संरक्षण मिला। लखनऊ उर्दू कविता का भी प्रसिद्ध केंद्र रहा। दिल्ली केंद्र के नष्ट होने पर बहुत से दिल्ली के भी प्रसिद्ध उर्दू कवि लखनऊ वापस चले आए थे।

अवध की पारम्परिक राजधानी लखनऊ है।

भौगोलिक रूप से प्राचीन अवध की भूमि भारतके कइ जिले और वर्तमान नेपालके कइ जिले मिलाकर बन जावतनी। 

सन् 1765 ई. में बक्सर के युद्ध में अवध के नवाब हार गए, परंतु लार्ड क्लाइव ने अवध उनको लौटा दिया, केवल इलाहाबाद और कड़ा जिलों को क्लाइव ने मुगल सम्राट् शाहआलम को दे दिया। वारेन हेस्टिंग्ज़ ने पीछे नवाब की सहायता करके रुहेलखंड को भी अवध में सम्मिलित करा दिया और शाहआलम से अप्रसन्न होकर इलाहाबाद और कड़ा को अवध के नवाब के सुपुर्द कर दिया। 1775 ई. में अंग्रेजों ने अवध के नवाब से बनारस का जिला ले लिया और 1801 में रुहेलखंड ले लिया। इस प्रकार अवध कभी बड़ा, कभी छोटा होता रहा।

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#Article 23: अवध के इतिहास (273 words)


अपने भारत देसवा कय सभ्यता पूरे संसार मा पुरान सभ्यतन मा से एक मानी जात है| भारत कय इतिहास मा अवध कय धरती कय प्राचीन काल से बड़ा योगदान रहा है| अवध क्षेत्र कय सभ्यता औ संस्कृति समुल्ले भारत सहित विदेसन मा आपन झंडा गाडिस है| कुल देशवा का एक सूत्र मा जोड़े जैसन महत्वपूर्ण काम अवधी संस्कृति किहिस है| भारतय नहीं पूरे दुनिया मा राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक औ साहित्यिक रूप से समृद्ध अवध कय धरती आपन महत्वपूर्ण स्थान राखत है| अवध क्षेत्र मा बोली जाये वाली अवधी भाषा एक ऐसन आन्दोलन है जौन कौनो औरे भाषा मा नाही देखाए पड़त है|

श्री राम के नाम से विख्यात अवध के प्रतापी राजा श्री राम चन्द्र जी पूरे भारतवर्ष का ऐसन सूत्र मा पिरोयिन की ऊ आजतक वैसन विद्यमान है| एकर अंदाजा ऐसन लगावा जाये सकत है कि अगर भारत के इतिहास से श्री राम चन्द्र के इतिहास निकार दीन जाये तौ बाकी कुछ बचबे न करी| धार्मिक भावना और श्रद्धा से भारत का कन कन मा समाहित श्री राम भारत के जनमानस के ऐसन प्राणतत्त्व है जौन जीवन का नवीन उर्जा प्रदान करत है| श्री राम के इतिहास उत्तर भारत से दक्खिन भारत, अउर बंगाल से पंजाब तलक सबके जीवन के ताईं एक प्रेरणा श्रोत रहा है|

हियाँ नबाबन के राज रहा|

इ साईत अवध गजेटियर के हिसाब से  अपने अवध क्षेत्र कय पूरा क्षेत्रफल २३.९३० वर्गमील है| अउर एकर विस्तार २५° ३४’ से २९° ६’ उत्तरी अक्षांश अउर ७९° ४५’ से ८३° ११’ पूर्वी देशांतर तक है| एकर उत्तरी सीमा नेपाल का छुवत है, दक्खिन मा गंगा, पच्छिम मा फ़रुक्खाबाद, शाहजहांपुर, कानपुर अउर पूरब मा जौनपुर, बस्ती अउर आजमगढ़ से घेरान है|




#Article 24: अवधी (208 words)


अवधी भारत औ नेपाल मा बोलि जाय वाला भाषा होय। |ई भाषा भारत कय  उत्तर प्रदेश  अव नेपाल कय अवध क्षेत्र मा बोलि जात है । अवधी भाषा गुयाना, त्रिनिदाद जैसन कैरीबीआई देसन मा भी बोलि जात है । 'अवध' सब्द अयोध्या सब्द से आ है। तुलसीदास  अपने रामचरितमानस में अयोध्या कय अवधपुरी कहे हयँ। 
भाषा शास्त्री डॉ॰ सर जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन कय भाषक सर्वेक्षण मा अवधी बोलय वालन कय कुल अबादी 1615458 रहा जवन सन् 1971 कय जनगणना मा 28399552 होइ गवा। इ समय मा शोधकर्तन कय अनुमान है कि 6 करोड़ से ढेर मनई अवधी बोलत हैं। भारत केय उत्तर प्रदेस राज्य कय 19 जिला- सुल्तानपुर, अमेठी, बाराबंकी, प्रतापगढ़, प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर, रायबरेली, उन्नाव, लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, अयोध्या अव अंबेडकर नगर में इ बोलि जात है। जबकि 7 जिला- जौनपुर, मिर्जापुर, कानपुर,  शाहजहांपुर, आजमगढ़,सिद्धार्थनगर, बस्ती औ बांदा कय कुछ जगहन में यकर इस्तेमानल होत है। बिहार प्रांत कय 2 जिला कय साथे नेपाल कय कयु जिला - बांके जिला, बर्दिया जिला, दांग जिला, कपिलवस्तु जिला, पच्छु नवलपरासी जिला,  रुपन्देही जिला, कंचनपुर जिलन में इ बोलि जात है। अइसै दुनियक अउर देस- मॉरिशस, त्रिनिदाद औ टुबैगो, फिजी, गयाना, सूरीनाम सहित आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड अव हॉलैंड (नीदरलैंड) में लाखौं मनई अवधी बोलत हैं।




#Article 25: अवधी साहित्य (217 words)


भारत कय अवध क्षेत्र कय भाषा अवधी कहात अहै, जवन राष्ट्रभाषा हिन्दी कय एक उपभाषा होय।  अवधी कय प्राचीन साहित्य बड़ा संपन्न अहै। यहमा भक्ति काव्य अउर प्रेमाख्यान काव्य दुनों कय विकास भय।

भक्तिकाव्य अउर प्रेमाख्यान काव्य, प्राचीन अवधी साहित्य कय दुई शाखा होय। 

भक्तिकाव्य कय शिरोमणि ग्रंथ गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘रामचरितमानस’ होय। भक्तिकाव्य में गोस्वामी तुलसीदास कय रामचरितमानस (संवत 1631) अवधी साहित्य कय प्रमुख कृति होय। एकर भाषा संस्कृत शब्दावली से भरा अहै। रामचरितमानस कय अतिरिक्त तुलसीदास  अउर बहुत ग्रंथ अवधी में लिखा अहैं। इही भक्ति साहित्य कय अंतर्गत लालदास कय अवधबिलास आवत अहै। एकर रचना संवत् 1700 में भय। 

फाइल:Queen Nagamati talks to her parrot, Padmavat, c1750.jpg|thumb|Who is more beautiful, I or Padmavati?, Queen Nagamati asks to her new parrot, and it gives a displeasing reply...; an illustrated manuscript of Padmavat, c. 1750

प्रेमाख्यान काव्य में सर्वप्रसिद्ध ग्रंथ मलिक मुहम्मद जायसी रचित पद्मावत अहै, जेकर रचना रामचरितमानस से 34 वर्ष पहिले भय। दोहा चौपाई कय जवन क्रम पद्मावत में है प्राय: उहै मानस में मिलत है

पढ़ीस, मृगेश, वंशीधर शुक्ल, रमई काका, पं.द्वारिका प्रसाद मिश्र, विश्वनाथ पाठक, त्रिलोचन शास्त्री, डॉ॰ श्यामसुंदर मधुप, बेकल उत्साही, पारस भ्रमर, विकल गोंडवी, जुमई खां आजाद, आद्या प्रसाद उन्मत, निर्झर प्रतापगढ़ी, असविंद द्विवेदी, जगदीश पीयूष, विक्रम मणि त्रिपाठी जैसन अनेक रचनाकार है, जेकर अवधी साहित्य में अमूल्य योगदान रहा अहैं।




#Article 26: असम (288 words)


असम या आसाम उत्तर पुरुबी भारत मा एकठो राज्य होय। असम अउर उत्तर पुरूबी भारतीय राज्यन से घिरा अहय। असम भारत कय एक सीमांत राज्य आय जौन चारिउ ओर से, सुरम्य पर्वतश्रेणि से घिरा बाय। ई भारत कय पुरुबोत्तर सीमा 24° 1' उ॰अ॰-27° 55' उ॰अ॰ अउर 89° 44' पू॰दे॰-96° 2' पू॰दे॰) पय बाय। पूरे राज्य कय क्षेत्रफल 78466 वर्ग कि॰मी॰ अहय। भारत - भूटान अव भारत - बांग्लादेश सीमा कुछ भाग मा असम से जुडी अहय। एह राज्य के उत्तर म अरुणाचल प्रदेश, पुरुब म नागालैंड अउर मणिपुर, दक्खिन म मिजोरम अव मेघालय अउर पच्छूँ मा बंग्लादेश अहय।

 

असम म छह से बारा साल की उमर कय लइका के ताईं माध्यमिक स्तर तक अनिवार्य अउर सेत मा पढ़ाई करय कय ब्यवस्था अहय।
गुवाहाटी, जोरहाट, तेजपुर, सिलचर अउर डिब्रूगढ़ मा विश्वविद्यालय अहँय।
राज्य के 80इव से जादा केद्रंय से लोक कल्याण कय तमाम योजना चलति अहँय।
जौन महिलाओं अव लरिकन के बरे मन बहलावय अउर तमाम रहन सहन कय सुविधा कय ब्यवस्था कराथीं।

  

	    	
इंजीनियरिंग कॉलेज-

मेडिकल कॉलेज-

असमिया अउर बोडो खास क्षेत्रीय अव सरकारी भाषा अहँइ। बंगाली बराक घाटी के तीन जिलन म सरकारी दर्जा पाये अहय अउर राज्य कय दुसरी सबसे जादा बोली जाय वाली भाषा (33.91%) अहय। 

असम से भारत का जादा खनिज तेल मिलत हय। यहाँहियाँ लगभग 1००० किलोमीटर लम्बी पेटी मा खनिज तेल पावा जात हय। ई पेटी एह राज्य कय उत्तरी-पुरुबी सीमा से शुरू होइके खासी अउर जयन्तिया पहाड़ियों से होत होत कछार जिला तक फइली बाय। हियाँ कय खास तेल इलाका तिनसुकिया, डिब्रुगड़ अव शिवसागर जिला मा पाइ जात हय

असम म 33 जिला अहँय -

अबहीं कय असम बाढ़, गरीबी, पिछड़ेपन अउर विदेशी घुसपैठ (खास कइके बांग्लादेशी) से परेशान अहय । एह घुस्पैठ कय सबसे बड़का कारन फासीवादी विचारधारा अउर दंगावादी अहँय।




#Article 27: आगरा ज़िला (286 words)


आगरा उत्तर प्रदेश प्रान्त कय एक ज़िला होय। विश्व कय अजूबा ताजमहल ,आगरा कय किला अउर स्वामी बाग आगरा कय पहचान अहै अउर ई यमुना नदी के किनारे बसा अहै। आगरा २७.१८° उत्तर ७८.०२° पुरुब मा  यमुना नदी के तट पय स्थित अहै। समुद्र-तल से एहकै औसत ऊँचाई क़रीब १७१ मीटर (५६१ फ़ीट) अहै। आगरा उत्तर प्रदेश का तीसरा सबसे बड़ा शहर होय।

आगरा एक ऐतिहासिक नगर होय, एहकै प्रमाण ई अपने चारों ओर समेटे अहै। वइसे तौ आगरा का इतिहास मुख्य रूप से मुगल काल से जाना जात है लेकिन एहकइ सम्बन्ध महर्षि अन्गिरा से अहै जौन १००० बरस ईसा पूर्व भा रहें। इतिहास मा पहिला ज़िक्र आगरा कय महाभारत के समय से माना जात है, जब एहका अग्रबाण या अग्रवन के नाम से संबोधित कीन जात रहा। कहत हैं कि पहिले ई नगर आयॅग्रह के नाम से भी जाना जात रहा। तौलमी पहिला ज्ञात व्यक्ति रहा जौन एहका आगरा नाम से संबोधित किहिस है।

आगरा शहर का सिकंदर लोदी सन् 1506 ई. में बसाये रहा। आगरा मुगल साम्राजय कय चहेती जगह रही। आगरा 1526 से 1658 तक मुग़ल साम्राज्य कय राजधानी रहा। आजौ आगरा मुग़लकालीन इमारतन जइसे - ताज महल, लाल किला, फ़तेहपुर सीकरी आदि के वजह से एक विख्यात पर्यटन-स्थल अहै। यइ तीनों इमारतैं यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल अहैं। बाबर (मुग़ल साम्राज्य का जनक) हियाँ चौकोर (आयताकार एवं वर्गाकार) बाग कय निर्माण कराये रहा

सन् 2011 के जनगणना के अनुसार, आगरा कय जनसंख्या 1587704 अहै। आगरा कय जनसंख्या कै ५३% पुरूष अउर ४७% महिलाएँ अहैं। हियाँ कय औसत साक्षरता दर ६५% अहै, जेहमा ७६% पुरुष और ५३% महिलाएँ साक्षर अहैं। ई राष्ट्रीय औसत ५९.५% से ज्यादा अहै। आगरा कय ११% जनसंख्या ६ वर्ष से नीचे के लरिकन कय अहै।




#Article 28: आचार्य विश्वनाथ पाठक (113 words)


विश्वनाथ पाठक अवधी भाषा के एक कवि अहेन।

आधुनिक अवधी कविता कै महान कवि विश्वनाथ पाठक कै जनम २४-जुलाई १९३१ क फैजाबाद जिला के पठखौली गाँव मा भा। इनकै पिता कै नाव श्री रामप्रताप पाठक है। पाठक जी अवधी, हिन्दी, संस्कृत, पालि, प्राकृत औ अपभ्रंस भासा कै विद्वान हैं। यहि साइत फैजाबाद सहर के मोदहा नाव कै मोहल्ला मा रहत अहैं। ‘सर्वमंगला’ पाठक जी कै लिखी अनोखी रचना है, जेहिपै लखनऊ औ अवध विस्वविद्यालय मा कयिउ सोधौ कीन गा है। यहि रचना कै दुइ सर्ग अवध विस्वविद्यालय के बी.ए.-तिसरे साल के सिलेबस मा रखा गवा हैं। यही ‘सर्वमंगला’ कै पहिला सर्ग हियाँ प्रस्तुत अहै। सर्वमंगला पुस्तक ‘भवदीय प्रकाशन, शृंगारहाट, अयोध्या-फैजाबाद’ से छपी अहाय।




#Article 29: आन्ध्र प्रदेश विधान सभा (103 words)


आंध्र प्रदेश विधान सभा भारत के राज्य आंध्र प्रदेश कय संरचना विधान सभा कय निचला सदन आय। 2019 तक आंध्र प्रदेश के विधान सभा मा 175 विधायक शामिल अहै, जिनकी अवधि 5 साल अहै। विधानसभा कय संरचना द्विसदनीय है अउर 3 सत्रों मतलब बजट, मानसून अव जाड़ाकालीन सत्र आयोजित कीन जात हैं। आंध्र प्रदेश के विधान सभा 2016 के राज्य बजट सत्रन से अमरावती मा अंतरिम विधायी विधानसभा भवन मा चर्चा शुरू किहिज। नइकई इमारत काफी हाईटेकि अहै स्वचालित भाषण अनुवाद कय सुविधा, स्वत: वोट रिकॉर्डिंग सिस्टम अउरव बहुत कुछ । 

ई आन्ध्र प्रदेश के शहर विजयवाडा के नगीच राजधानी अमरावती मा अहै। 




#Article 30: आमिर खान (231 words)


आमिर ख़ान (नस्तालीक़: عامر خان) (जनम आमिर हुसैन ख़ान ; मार्च 14, 1965) एक्ठु भारतीय फ़िलिम अभिनेता, निर्माता, निर्देशक, पटकथा लिखय वाले, कब्बो कब्बो गायक औ आमिर ख़ान प्रोडक्सनस कय संस्थापक औ मालिक होँय।

आपन चाचा नासिर हुसैन कय फिलिम यादों की बारात (1973) में एक्ठु बाल कलाकार कय भूमिका में देखाने औ ग्यारह साल बाद ख़ान कय करियर फिलिम होली (1984) से सुरु भवा वन अपने चचेरा भाई मंसूर ख़ान कय साथे फिलिम क़यामत से क़यामत तक (1988) खर्तिन आपन पहिला व्यवसायिक सफलता पायें औ वन फिलिम में एक्टिंग खर्तिन फिल्मफेयर सबसे नीक मेल डेब्यु इनाम () जीतें। पिछला आठ नावाकंन कय बाद 1980 औ 1990 कय समय मा , ख़ान कय राजा हिन्दुस्तानी (1996), खर्तिन पहिला फिलिमफ़ेयर सबसे नीक अभिनेता इनाम मिला जवन अब तक कय ओनकय एक्ठु बड़ा व्यवसायिक सफलता रहा।

ओन्हय बाद में फिल्मफेयर कार्यक्रम में दूसर सबसे नीक अभिनेता इनाम औ लगान में ओन्कय अभिनय खर्तिन 2001 में कईयु अउर इनाम मिला औ अकादमी पुरस्कार खर्तिन नाँव सामिल कइ गै। अभिनय से चार साल कय सन्यास लेवैक बाद, केतन मेहता कय फ़िलिम  (2005) से ख़ान कय वापसी भवा। २००७ में, वन निर्देशक कय रूप में फ़िलिम तारे ज़मीन पर कय निर्देशन किहिन, जवने खर्तिन ओन्हय फिल्मफेयर सबसे नीक निर्देशक पुरस्कार दइ गै। कईयु कॉमर्शियल सफल फ़िल्मन कय साथे होवैक नाते औ बहुत नीक अभिनय करैक नाते, वन हिन्दी सिनेमा कय एक्ठु प्रमुख अभिनेता बनि गा हैं।




#Article 31: आर्मेनिया (145 words)


आर्मेनिया एशिया कय एक्ठु देश होय । एकर राजधानी येरेवन होय ।
आर्मीनिया (आर्मेनिया) पच्छु एसिया औ यूरोप कय काकेशस जगह कय एक्ठु पहाड़ी देश होय जवन चारों ओर ज़मीन से घेरान है। १९९० कय पहिले हिँया सोवियत संघ कय सासन रहा औ सोवियत कय इ राज्य रहा। आज़ादी कय लडाई कय बाद २३ अगस्त १९९० कय यका सोवियत से स्वतंत्रता मिला, लेकिन देस बनै कय घोषना २१ सितंबर, १९९१ कय भवा औ यका अंतर्राष्ट्रीय मान्यता २५ दिसंबर कय मिला। 

अर्मेनिया कय मनई लोग अपने आप कय हयक खानदान कय मानत हैं जे नूह (इस्लाम ईसाईयत औ यहूदिन मा सम्मनित ) कय पनाति रहा। कुछ ईसाईन कय माना जाय तौ नोआ (इस्लाम मा नूह) औ ओकर परिवार हिँया आइकै बसि गा रहा । आर्मीनिया कय अर्मेनियाई भाषा मा नाँव हयस्तान होय जवने कय माने हायक कय जमीन होय। हायक नोह कय पनाती कय नाँव रहा।




#Article 32: आर्य समाज (1790 words)


आर्य समाज एक हिन्दू सुधार आंदोलन आय जेहकय स्थापना स्वामी दयानन्द सरस्वती 1875 मा बंबई मा मथुरा के स्वामी विरजानंद की प्रेरणा से केहे रहें। ई आंदोलन पाश्चात्य प्रभावों कय प्रतिक्रिया स्वरूप हिंदू धर्म मा सुधार के बरे शुरू कीन गा रहा । आर्य समाज मा शुद्ध वैदिक परम्परा मा विश्वास करत रहें अउर मूर्ति पूजा, अवतारवाद, बलि, झूठ कर्मकाण्ड अव अंधविश्वासऽन् का धिक्कारत रहें । यहि मा छुआछूत अव जातिगत भेदभाव कय विरोध कीन गा मेहरारुन अव शूद्रऽन् का भी यज्ञोपवीत धारण करय अव वेद पढ़ै कै अधिकार दीन गा। स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा रचित सत्यार्थ प्रकाश नामक ग्रन्थ आर्य समाज कय मूल ग्रन्थ होय। आर्य समाज कय आदर्श वाक्य अहै: कृण्वन्तो विश्वमार्यम्, जेहि कय मतलब अहै- विश्व का आर्य बनावत चला।

परसिद्ध आर्य समाजी मनइन मा स्वामी दयानन्द सरस्वती, स्वामी श्रद्धानन्द, महात्मा हंसराज, लाला लाजपत राय, भाई परमानन्द, पंडित गुरुदत्त, स्वामी आनन्दबोध सरस्वती, स्वामी अछूतानन्द, चौधरी चरण सिंह, पंडित वन्देमातरम रामचन्द्र राव, बाबा रामदेव अउर कयिउ जने आवत हैं। 

आर्य शब्द का मतलब अहै श्रेष्ठ अव प्रगतिशील। माने आर्य समाज कय मतलब भवा हुआ श्रेष्ठ अउर प्रगतिशीलऽन् कय समाज, जे वेदों के अनुकूल चलय कय प्रयास करत हैं। दुसरे का वहि पय चलय का प्रेरित करत हैं। आर्यसमाजियऽन् के आदर्श मर्यादा पुरुषोत्तम राम अउर योगिराज कृष्ण अहैं। महर्षि दयानंद वही वेद मत का फिर से स्थापित करय बरे आर्य समाज कय नींव रक्खें। आर्य समाज के सब सिद्धांत अउर नियम वेदों पय आधारित अहैं। आर्य समाज की मान्यतऽन् के अनुसार फलित ज्योतिष, जादू-टोना, जन्मपत्री, श्राद्ध, तर्पण, व्रत, भूत-प्रेत, देवी जागरण, मूरती पूजा अउर तीर्थ यात्रा मनगढ़ंत अहैं, वेद विरुद्ध अहैं। आर्य समाज सच्चे ईश्वर कय पूजा करय का कहत है , ई ईश्वर वायु अउर अकाश की तरह सर्वव्यापी अहै, ऊ अवतार नहीं लेत, ऊ सब मनइन का उनके करम के अनुसार फल देत है, अगला जनम देत है, वहि कय ध्यान घरे मा एकांत मा कउनो कोने होइ सकत हय। 

यहिके अनुसार रोज यज्ञ करब हर आर्य कय कर्त्तव्य आय। परमाणु का न केहू बनाइ सकत है, न वहि कय टुकड़ा होइ सकत है । यानी ऊ अनादि काल से अहैं। वही तरह एक परमात्मा अउर हम जीवात्माएं भी अनादि काल से अहैं। परमात्मा परमाणुओं का गति दइ के सृष्टि रचत है। आत्माओं का करम करने बरे प्रेरित करत है। फिर चार ऋषियों के मन म 20,378 वेदमंत्रों कय अर्थ सहित ज्ञान अउर आपन परिचय देत है। सत्यार्थ प्रकाश आर्य समाज कय मूल ग्रन्थ अहै। अउर माना जाना ग्रंथ अहैं - वेद, उपनिषद, षड् दर्शन, गीता अव वाल्मीकि रामायण अउरऽव् तमाम। महर्षि दयानंद सत्यार्थ प्रकाश मा इन सबकै सार देहे अहैं। 18 घंटा समाधि मा रहय वाले योगिराज दयानंद लगभग आठ हजार किताबऽन् कय मंथन कइके अद्भुत अउर क्रांतिकारी सत्यार्थ प्रकाश कय रचना केहें।

भगवान कय सर्वोत्तम अउर निज नाम ओम् अहै। वहि मा अनंत गुण होये के कारन वहिके ब्रह्मा, महेश, विष्णु, गणेश, देवी, अग्नि, शनि वगैरह अनंत नाम अहैं। इनकय अलग- अलग नाम से मूर्ति पूजा ठीक नही अहै। आर्य समाज वर्णव्यवस्था यानी ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य अव शूद्र का करम से मानत हय, जनम से नाही। आर्य समाज स्वदेशी, स्वभाषा, स्वसंस्कृति अउर स्वधर्म कय पोषाक आय।

आर्य समाज सृष्टी कय  उत्पत्ति कय समय चार अरब 32 करोड़ बरस अउर एतनय समय परलय काल कै मानत हय। योग से प्राप्त मुक्ति कय समय वेदऽन् के अनुसार 31 नील 10 खरब 40 अरब यानी एक परांत काल मानत है। आर्य समाज वसुधैव कुटुंबकम् का मानत है। लिकिन भूमंडलीकरण का देश, समाज अउर संस्कृति के बरे घातक मानत है। आर्य समाज वैदिक समाज रचना के निर्माण अव आर्य चक्रवर्ती राज्य स्थापित करय बरे प्रयासरत अहै। एह समाज मा मांस, अंडा, बीड़ी, सिगरेट, शराब, चाय, मिर्च-मसाले वगैरह वेद विरुद्ध होत हैं।

आर्य समाज भारत मा राष्ट्रवादी विचारधारा का आगे बढ़ावै मा खास योगदान देहे है। एह के अनुयायी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन मा बढ़ि-बढ़ि के हिस्सा लेहें। आर्य समाजय के प्रभाव से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भितरी स्वदेशी आन्दोलन शुरू भवा। स्वामीजी आधुनिक भारत के धार्मिक नेताओं मा पहिला महापुरूष रहे जे 'स्वराज्य' शब्द कय प्रयोग केहें। आर्य समाज हिन्दू धरम मा एक नयी चेतना शुरू किहिस। स्वतंत्रता से पहिले वाले काल मा हिंदू समाज के नवजागरण अउर पुनरुत्थान आंदोलन के रूप मा आर्य समाज सबसे  शक्तिशाली आंदोलन रहा। ई पूरे पच्छूं अउर उत्तर भारत मा सक्रिय रहा अउर  सोवत हिन्दू जाति का जगावै मा लगा रहा। हियाँ तक कि आर्य समाजी प्रचारक फिजी, मारीशस, गयाना, ट्रिनिडाड, दक्खिन अफ्रीकऽव् मा हिंदुऽन् का संगठित करय के उद्देश्य से पहुँचत रहें। आर्य समाजियय सबसे बड़ा काम जाति व्यवस्था का तोड़य अउर सब हिन्दुऽन् मा बराबरी मा  समानता कय भाव जगावै कै केंहे।

भारत का जेह तरह ब्रिटिश सरकार कय आर्थिक उपनिवेश अउर बाद मा राजनीतिक उपनिवेश बनाइ दीन गा रहा, वोहके खिलाफ  भारतीयऽन् की ओरी से तेज प्रतिक्रिया होब स्वाभाविक रहा। चूंकि भारत धीरे-धीरे पश्चिमी विचारऽन् की ओरी बढ़य लाग रहा, तौ प्रतिक्रिया सामाजिक क्षेत्र से आउब स्वाभाविक काम रही। ई प्रतिक्रिया 19 वीं शताब्दी मा उठि खड़ा भए सामाजिक सुधार आन्दोलनऽन् के रूप मा सामने आई। अइसे ही समाज सुधार आंदोलनऽन् मा आर्यसमाज कय नाम आवत है। आर्यसमाज विदेशी जुआ उतार फेंकय के बरे, समाज मा खुदै आंतरिक सुधार कइके आपन काम किहिस।
ई आधुनिक भारत मा शुरू भए पुर्नजागरण का नई दिशा दिहिस। साथ मा भारतीयों मा भारतीयता का अपनावै, पुरान संस्कृति का मौलिक रूप मा स्वीकार करय, पश्चिमी प्रभाव का विशुद्ध भारतीयता यानी 'वेदों की ओरी लउटा' के नारे के साथ खतम करय अउर सब भारतीयऽन् का एकताबद्ध करय के बरे प्रेरित किहिस।

आर्य समाज अपनी स्थापनऽय् से सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आन्दोलन कय शंखनाद किहिस, जइसे- जातिवादी जड़मूलक समाज का तोड़ब, मेहरारुन का बराबर अधिकार, बालविवाह कय खात्मा, विधवा विवाह कय समर्थन, नीची जातियों का सामाजिक अधिकार मिलब अउर तमाम। स्वामी दयानन्द सरस्वती आर्य समाज के स्थापना के पीछे ऊपर लिखे सामाजिक नवजागरण का मुख्य अधार बनायें। उनकय विश्वास रहा कि नवीन प्रबुद्ध भारत मा, नवजागृत हुवत समाज मा, नये भारत कय निर्माण करब अहै तौ समाज का बन्धनमुक्त करब पहिला काम होय का चाही। खुद बाभन होत हुए भी स्वामी जी बभनन कय सत्ता कै खण्डन कै प्रतिपादन केहें अउर धार्मिक अंधविश्वास अव कर्मकाण्डऽन् कै तेज भर्त्सना केहें। थोड़ेऽन् दिन मा वै समाज सुधार के क्षेत्र मा नई ज्ञान-ज्योति के रूप मा उदयीमान भयें। एहमा वै पाएं‌ कि भारतीय युवा पाश्चात्य अनुकरण पय जोर देत अहै । अतः वै पाश्चात्य संस्कृति पय शक्तिशाली प्रहार केहें अउर भारतीय गौरव का हमेशा  ऊंच केहें।

सामान्यतः स्वामीजी भारतीय समाज अउर हिन्दू धरम धर्म मा प्रचालित दोषों का उजागर करय के साथ ही आंचलिक पंथों अउर अन्य धर्मो कय भी आलोचना केहें। पुरोहितवाद पउ करारा प्रहार करत हुए स्वामीजी मानें कि स्वार्थों अउर अज्ञानी पुरोहितों ने पुराणों जइसे ग्रंथऽन् कय सहारा लइके हिन्दू धरम मा भ्रष्ट केहे अहैं। स्वामी जी धर्म सुधारक के रूप मा मूरती पूजा, कर्मकाण्ड, पुराणपंथी, तन्त्रवाद कय घोर विरोधी रहें। एह के लिए वैन वेदऽन् कय सहारा लइके कयिउ दृष्टांत केहें। एहसे वै सुसुप्त भारतीय जनमानस का चेतन्य करय कय अदभुत प्रयास केहें। स्वामी जी हिन्दुअऽन् का हीन, पतित अउर कायर होय के भाव से मुक्त केहें अउर उनमा उत्कट आत्मविश्वास जगाएं। फलस्वरूप समाज पश्चिम मानसिक दासता के खिलाफ दृढ़ आत्मविश्वास अउर संकल्प के साथ विद्रोह कइ सकें। एनही क्रांतीकारी विचारऽन् के कारण वेलेंटाइन शिरोल स्वामीजी का 'इण्डियन अरनेस्ट' कहिस।

देखिये, दयानंद एंग्लो वैदिक विद्यालय, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय

स्वामी दयानन्द कय मूलमन्त्र रहा कि जनता कय विकास अउर प्रगति सुनिश्चित करय अउर उनके अस्तित्व की रक्षा करय कय सर्वोत्तम साधन शिक्षा अहै। एही मन्त्र का  गाँठ मा बाँधि के आर्यसमाज काम किहिस। आर्यसमाज एह तथ्य का आत्मसात कइ लेहे रहा कि शिक्षा की जड़ें राष्ट्रीय भावना अउर परम्परा मा गहरी जमी होंय का चाही। हम एक पुरान अउर श्रेष्ठ परम्परा के उत्तराधिकारी हँय। हमारी शिक्षा मा भारतीय नीतिशास्त्र अउर दर्शन का सर्वोपरि स्थान प्राप्त होये।  शिक्षा के क्षेत्र मा गुरुकुल अव डीएवी कालेज स्थापित कइके शिक्षा जगत मा आर्यसमाज अग्रणी भूमिका निभाइस। स्त्रीशिक्षा मा आर्यसमाज कय उल्लेखनीय योगदान रहा। 1885 के शुरुआत मा आर्यसमाज कय अमृतसर शाखा द्वि  महिला विद्यालयऽन् कय स्थापना कय घोषना केहे रहें अउर तिसरा कटरा डुला मा प्रस्तावित रहा। 1880 के दौरान लाहौर आर्यसमाज महिला शिक्षा के क्षेत्र मा अग्रणी बना रहा। 1889 ई0ाफिरोजपुर आर्यसमाज  एक कन्या विद्यालय स्थापित केहे रहा।

आर्य समाज से जुड़े मनई भारत की स्वतन्त्रता के साथे-साथे भारत कय संस्कृति, भाषा, धर्म, शिक्षा आदि के क्षेत्र मा सक्रिय रूप से जुड़े रहें। स्वामी दयानन्द कय मातृभाषा गुजराती रही अउर उनकय संस्कृत कय ज्ञान बहुत अच्छा रहा, लिकिन केशव चन्द्र सेन के सलाह पय वैं सत्यार्थ प्रकाश कय रचना हिन्दी मा केहें। दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश जइसा क्रांतिकारी ग्रंथ हिंदी मा रचि के हिंदी का एक प्रतिष्ठा देहें। आर्यसमाज हिन्दी का 'अर्यभाषा' कहिस अउर सब आर्यसमाजियऽन् के बरे एह कय ज्ञान जरूरी बताइस। दयानन्द जी वेदों कय व्याख्या संस्कृत के साथे-साथे हिंदिऽव् मा केहें। स्वामी श्रद्धानन्द हानि उठाइके भी अनेक पत्र-पत्रिका कय प्रकाशन देवनागरी लिपि मा लिखी हिन्दी मा केहें जबकि उनकय प्रकाशन पहिले उर्दू मा होत रहा।
आर्यसमाज हिन्दी के सम्वर्द्धन के मैदान मा अग्रगामी बना।

सैकड़ों गुरुकुलों, डीएवी स्कूल अउर कॉलेजों मा हिंदी भाषा का प्राथमिकता दीन गय अउर एह काम के बरे नवा पाठ्यक्रम कय किताबऽन्पु कय रचना हिंदी भाषा के माध्यम से गुरुकुल कांगड़ी अउर लाहौर आदि जगह पय भय जिनके विषय विज्ञान, गणित, समाज शास्त्र, इतिहास आदि रहें। ई एक अलगऽय् किसम कय हिन्दी भाषा मा परीक्षण रहा जेह कय वांछनीय परिणाम निकरें।

विदेशों मा भवानी दयाल सन्यासी, भाई परमानन्द, गंगा प्रसाद उपाध्याय, डॉ. चिरंजीव भारद्वाज, मेहता जैमिनी, आचार्य रामदेव, पंडित चमूपति अउर तमाम जने हिंदी भाषा कय प्रवासी भारतीयऽन् मा प्रचार केहें जेह से वै मातृभूमि से दूर होत हुए भी वहिकै संस्कृति, वहिकै विचारधारा से न केवल जुड़ें रहें बल्कि अपनी विदेश मा जन्मी सन्तानऽव् का वहिसे अवगत करवावत रहें। आर्यसमाज से न केवल पंजाब मा हिंदी भाषा कय प्रचार कीन गा बल्कि सुदूर दक्षिण भारत मा, असम, बर्मा आदि तक हिंदी का पहुँचावा गा। न्यायालय मा दुष्कर भाषा के स्थान पय सरल हिंदी भाषा कय प्रयोग के बरे भी स्वामी श्रद्धानन्द द्वारा प्रयास कीन गा रहे।

आर्य समाज कय हिन्दी पत्रकारिता देश का राष्ट्रीय संस्कृति, धर्मचिन्तन, स्वदेशी कय पाठ पढ़ाइस। आर्यसमाज के माध्यम से ज्ञानमूलक अव रसात्मक द्विनव परकार से साहित्य कय अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी भय। स्वामी दयानन्द पत्रकारिता से धर्म प्रचार व्यापक रूप से करा चाहत रहें। वै खुद कउनो पत्र नही निकारि पायें  लिकिन समाजियऽन् का पत्र-पत्रिका निकारय के बरे प्रोत्साहित केहें। आर्य समाज के तमाम संस्थाओं द्वारा प्रसारित होय वाली पत्र-पत्रिकऽन् मा ‘पवमान’, ‘आत्म शुद्धि पथ’, ‘वैदिक गर्जना’, ‘आर्य संकल्प’, ‘वैदिक रवि’, ‘विश्वज्योति’, ‘सत्यार्थ सौरभ’, ‘दयानन्द सन्देश’, ‘महर्षि दयानन्द स्मृति प्रकाश’, ‘तपोभूमि’, ‘नूतन निष्काम पत्रिका’, ‘आर्य प्रेरणा’ , ‘आर्य संसार’, ‘सुधारक’, ‘टंकारा समाचार’, ‘अग्निदूत’, ‘आर्य सेवक’, ‘भारतोदय’, ‘आर्य मुसाफिर’, ‘आर्य सन्देश’, ‘आर्य मर्यादा’, ‘आर्य जगत’, ‘आर्य मित्र’, ‘आर्य प्रतिनिधि’, ‘आर्य मार्तण्ड’, ‘आर्य जीवन’, ‘परोपकारी’, ‘सम्वर्द्धिनी’ अउर तमाम मासिक, पाक्षिक अव वार्षिक पत्रिका प्रकाशित होति अहैं जेहसे हिन्दी पत्रकारिता का नवका अंजोर मिलत अहै।

आर्यसमाज के प्रचार कय भाषा हिन्दिन रही। आर्य समाज ने हिन्दी पत्रकारिता के उन्नयन मा ऐतिहासिक भूमिका निभाइस।




#Article 33: आलु (148 words)


आलु खाए वाला तरकारी कय नाँव होय । ई जमिन कय निचे फराला औ सोरिहा तरकारी होय लेकिन आलु कै खाए वाला भाग जवन रहा ला ऊ डाँठ होय । यकर वैज्ञानिक नाँव 'सोलेनम ट्युबरोसम'(Solanum tuberosum) होय । यहमा बहुत स्टार्च औ कार्बोहाइड्रेट रहत है । आलु कै उप्पर अगर रौसनी परिजात है तौ वोकर रङ हरेर होइजाल औ उ जहरिला होइजात है । 
अमेरिकी वैज्ञानिकन् कै अनुसंधान मा इ निष्कर्ष निकारा कि पेरू कै किसान आज से लगभग 7000 साल पहले से आलू बोवत औ उगावत हैं। सोरहवां सदी मा स्पेन आपन दक्खिन अमेरिकी उपनिवेशन् से आलू कै यूरोप पहुंचाइस ओकरे बाद ब्रिटेन जैसन देशन् से आलू  दुनिया भर में लोकप्रिय होइ गवा । आजो आयरलैंड औ रूस कै अधिकांश जनता आलू पै निर्भर हैं। भारत औ नेपाल मा इ सब से लोकप्रिय तरकारी होय ।

आलु खेती खर्तिन कुछ चिज पै ध्यान दै जात है :




#Article 34: इटली (308 words)


यूरोप कय एक्ठु देस होय । एकर राजधानी रोम होय्। इटली कय उत्तर मा आल्प्स पर्वतमाला है जवने मा फ्रांस, स्विट्ज़रलैंड, ऑस्ट्रिया औ स्लोवेनिया कय सीमा जुड़त हय। सिसली औ सार्डिनिया, जवन भूमध्य सागर कय दुई सबसे बड़ा द्वीप होँय, इटली कय ही अंग होँय। वेटिकन सिटी औ सैन मरीनो इटली मा मिलल दुई स्वतंत्र देश होँय। पो और टाइबर हिँया कय प्रमुख नदि होँय। रोम टाइबर नदी पय मौजुद है।
इटली, यूनान कय बाद यूरोप कय दूसरा पूरान देस होय। रोम कय सभ्यता औ इटली कय इतिहास देश कय प्राचीन वैभव औ विकास कय प्रतीक होय। आधुनिक इटली 1861 ई. मा राज्य कय रूप मा गठित भवा रहा। देश कय धीमा बिकास, सामाजिक संगठन औ राजनितिक उथल-पुथल इटली कय 2,500 वर्ष कय इतिहास से संबद्ध है। देश मा पहिले राजतंत्र रहा जवने कै अंतिम राजघराना सेवाय रहा। जून, सन् 1946 से देश एक्ठु जनतांत्रिक राज्य मा बदलि गवा।
इटली कय राजधानी रोम पूरान समय कय एकठु शक्ति औ प्रभाव से भरा रोमन साम्राज्य कय राजधानी रहा है। ईसा कय आसपास औ ओकरे बाद रोमन साम्राज्य भूमध्य समुन्दर कय क्षेत्र मा आपन प्रभुता स्थापित करे रहा जवने कै नाते हिँया संस्कृति औ अउर क्षेत्रऽन मा आधुनिक यूरोप कय आधारशिला मानि जात है। औ मध्यपूरुब कय इतिहास मा भी रोमन साम्राज्य  आपन प्रभाव डारिस रहा औ ओसे प्रभावित भवा रहा। आज कय इटली कय संस्कृति पय ग्रीकऽन कय भी प्रभाव परा है।
इटली कय जनसंख्या २००८ मा ५ करोड़ ९० लाख रहा। देश कय क्षेत्रफल ३लाख वर्ग किलोमीटर कय आसपास है। १९९१ मा हिँया कय सरकार कय बड़ा पद कय अधिकारिन् मा बड़ा भ्रष्टाचार कय पर्दाफाश भवा जवने कै बाद हिँया कय राजनैतिक सत्ता और प्रशासन मा कयु बदलाव आए । रोम हिँया कय राजधानी होय औ दुसर बड़ा नगरन् मा वेनिस, मिलान जइसन कय नाँव लइ सका जात है। इटली कय यूरोप का “भारत” भि कहि जात है।




#Article 35: इतिहास मा आज/अप्रैल 29 (132 words)


लाल पाथर से दिल्ली के बीचौं बीच बनी एह इमारत के सामने से गुजरैं तौ एहकै भव्यता अकसर ध्यान खींचत है। एहकै मजबूती, बेहतरीन स्थापत्य कला औ एहकै बेमिसाल कारीगरी कै मुरीद लोगन के लिए ई जानब दिलचस्प होये कि लाल किला कै नेंव 29 अप्रैल का रक्खी गय रही। एह दिन का दुनिया कै इतिहासिक इमारतन म शुमार बकिंघम पैलेस अव के बरे भी खास है। दरअसल 1993 म अजुवय के दिन ब्रिटिश राजशाही के एह आवास का आम जनता की ताईं खोल दीन गवा रहा। एहसे पहिले तक साल के कुछय दिनन म एह का आम जनता के बदे खोला जात रहा, लिकिन अब मनई पूरे साल टिकट खरीदिके एह शाही इमारत के कुछ हिस्सा कै दिदार कइ सकत हंय।
 नीचे एक लइन से देखा जाय इतिहास म 29 अप्रैल: 

                              




#Article 36: इमरान खान (अभिनेता) (102 words)


इमरान खान भारत कय एक्ठु अभिनेता होय ।

खान कय जनम मैडिसन, विस्कजिन, अमेरिकाम भा रहा। ओनकय बप्पा अनिल पाल, एक्ठु हिन्दी-बंगाली रहें,ओन लिंक्डइन में एक्ठु कन्सल्टंट रहें औ माँइ नुज़हत खान, एक्ठु मुसलमान होँय। जब वन डेढ़ साल कय रहें तब ओनकय माँइ-बप्पा कय तलाक होइ गवा औ ओन आपन नाँव कय पाछे कय पाल बदलिकय खान धइ लिहिन। यन अभिनेता आमिर खान अव निर्माता-निर्देशक मंसूर खान कय भतीजा होँय औ नासिर हुसैन, जे एक्ठु निर्देशक अव निर्माता होँय,ओनकय नाती होंय। भारत मे ओन बोम्बे स्कॉटिश स्कुल में पढ़ाई कीहिन लेकिन बाद में ऊटी कय एक्ठु बोर्डिंग स्कुल में पढाई किहिन।




#Article 37: इरफान खान (282 words)


इरफ़ान ख़ान (7 जनवरी 1967 – 29 अप्रैल 2020), जेका खाली इरफ़ान कय नाँव से भी जानि जात हय  हिंदी सिनेमा में काम करै वाले एक्ठु भारतीय एक्टर औ प्रोड्यूसर रहें। बॉलीवुड कय अलावा यन कयु ब्रिटिश फिलिम में औ हॉलीवुड फिलिम में भी काम कइ चुका हँय। साल 2011 में भारत सरकार यन्हय पद्म श्री से सम्मानित किहिस।
इरफान मक़बूल, सात खून माफ, स्लमडाग मिलेनियर, लाइफ इन मेट्रो, द लंच बाक्स, पीकू, तलवार, हिंदी मी़डियम आऊर इंगलिश मीडियम जइसन शानदार फिलिमन में काम कइ चुका हँय। 

न्यूरो इंडोक्राइन ट्यूमर नाँव कय बीमारी से  29 अप्रैल 2020 बंबई कय कोकिलाबेन अस्पताल में यनकय निधन होइ गवा।

इरफ़ान खान कय जनम राजस्थान में, एक्ठु मुस्लिम परिवार में, सईदा बेगम खान औ यासीन अली खान कय घरे भा रहा। वनकय माइ बाप टोंक जिले कय लगे खजुरिया गाँव से रहें औ टायर कय कारोबार चलावत रहें। इरफान औ वनकय दोस सतीश शर्मा क्रिकेट में रहे औ बाद में, को सीके नायडू टूर्नामेंट ताई 23 साल से कम उमर कय खेलाडिन कय पहिला श्रेणी क्रिकेट में खेलै ताई चुनि गय। दुर्भाग्य से, पइसा कय कमी कय नाते ऊ टूर्नामेंट में भाग लेवे नाइ गय।

इरफ़ान खान कय निधन 29 अप्रैल 2020 कय मुम्बईक कोकीलाबेन अस्पताल में भै, जहाँ वन लार्ज़ इन्टेस्टाइन (कोलोन) कय संक्रमण से भर्ती रहें। साल 2018 में वन्है न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर कय पता चला, जवनेक बाद वन एक साल कय खर्तिन ब्रिटेन में इलाज कराइन। एक साल कय फुर्सत कय बाद वन फिर से कोलोन संक्रमण कय शिकायत से मुम्बई में भर्ती भँए। इ बीच में वन आपन फ़िलिम अंग्रेज़ी मीडियम कय शूटिंग किहिन, जवन वनकय अंतिम फिल्म रहा।वन्है न्युरो इन्डोक्राइन कैंसर रहा, जवन हॉर्मोन-बनावै वाले कोशिका कय एक्ठु दुर्लभ मेर कय कैंसर होय।




#Article 38: इलाहाबाद उच्च न्यायालय (159 words)


प्रयागराज उच्च न्यायालय (prayagraj High Court) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य कय उच्च न्यायालय हय। भारत मा स्थापित सबसे पुरान उच्च न्यायालयन मा से एक अहै। ई 1869 से काम करत अहै।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय मूल रूप से ब्रिटिश राज मा भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम 1861 के अन्तर्गत आगरा मा 17 मार्च 1866 का स्थापित कीन गा रहा। उत्तरी-पश्चिमी प्रान्तों के बरे  स्थापित एह न्यायाधिकरण के पहिले मुख्य न्यायाधीश रहे सर वाल्टर मॉर्गन। सन् 1869 मा एहका आगरा से  इलाहाबाद स्थानान्तरित कइ दीन गवा। 11 मार्च 1919 का एह कय नाम बदलि के 'इलाहाबाद उच्च न्यायालय' रख दीन गा।

जब उत्तराखण्ड राज्य कय गठन 2000 भवा, उच्च न्यायालय के कार्यक्षेत्र मा से उत्तराखण्ड कै तेरह जिला निकार के उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय से सम्बद्ध कइ दीन गएँ जेह कय मुख्यालय नैनीताल मा अहै।

दिसम्बर 2018 मा इलाहाबाद उच्च न्यायालय निर्णय लेहे अहै कि साल 2019 के जनवरी महीने से सभी फैसलऽन कै हिन्दी मा अनूदित कॉपी भी उपलब्ध करायी जाए। 




#Article 39: उत्तर प्रदेश (236 words)


उत्तर प्रदेश भारत के सबसे जनसंख्या वाला बड़ा राज्य होय। लखनऊ प्रदेश कय प्रशासनिक अउर विधायिक राजधानी होय अउर इलाहाबाद न्यायिक राजधानी होय। 

उत्तर प्रदेश उत्तर भारत कय एक राज्य हुवै 200 मिलियन से जादा निवासियों के साथ, ई भारत मा सबसे जादा आबादी वाला राज्य अहै अउर साथ मा दुनिया मा सबसे जादा आबादी वाला देश उपखंड होय। ई 1 अप्रैल 1937 का ब्रिटिश शासन के दौरान आगरा अउर अवध के संयुक्त प्रांत के रूप में बनावा गा रहा, अउर 1950 मा उत्तर प्रदेश कय नाम बदल दीन गा रहा। राज्य जा 18 मंडल अउर 75 जिला मा बांटा गा अहै, जेहमे राजधानी लखनऊ अहै। मुख्य जातीय समूह हिंदवी लोग अहैं, जौन जनसांख्यिकीय बहुलता कै निर्माण करत हैं। 9 नवंबर 2000 का, एक नवा राज्य, उत्तराखंड, राज्य के हिमालयी पहाड़ी क्षेत्र से बाहर निकाला गा रहा। राज्य कय दुइ प्रमुख नदी, गंगा अउर यमुना, इलाहाबाद (प्रयागराज) मा मिलति हैं अउर फिर आगे गंगा के रूप में बहति हैं। हिंदी सबसे व्यापक रूप से बोली जाय वाली भाषा है अउर राज्य की आधिकारिक भाषा भी है।

उत्तर प्रदेश भारत कय सबसे बड़ा (जनसंख्या के आधार पर) राज्य अहै। लखनऊ प्रदेश कय प्रशासनिक व विधायिक राजधानी अहै अउर प्रयागराज (इलाहाबाद) न्यायिक राजधानी अहै। नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी अउर मार्केटिंग कय मुख्य राष्ट्रीय केंद्र हुवै। आगरा, अलीगढ, अयोध्या, कानपुर, झाँसी, बरेली, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर, मथुरा, मुरादाबाद, गाजियाबाद, अलीगढ़, सुल्तानपुर, अयोध्या, बरेली, आज़मगढ़, मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर हियां कय मुख्य शहर हुवैं।




#Article 40: उत्तर प्रदेश कय खाना (146 words)


अवध क्षेत्र कय आपन एक अलग खास नवाबी खानपान शैली है। यहमे विभिन्न तरह कय बिरयानीयां, कबाब, कोरमा, नाहरी कुल्चा, शीरमाल, ज़र्दा, रुमाली रोटी अउर वर्की परांठा अउर् रोटि आदि हैं, जवनेमें काकोरी कबाब, गलावटी कबाब, पतीली कबाब, बोटी कबाब, घुटवां कबाब अउर शामी कबाब प्रमुख अहैं। शहर में बहुत जगह ई व्यंजन मिली। ई सब किसिम कय एवं सब बजट कै होंई। जहां एक ओर १८०५ में स्थापित राम आसरे हलवाई कय मक्खन मलाई एवं मलाई-गिलौरी प्रसिद्ध अहै, वहीं अकबरी गेट पे मिलय वाले हाजी मुराद अली कैय् टुण्डा कय कबाब भी कम मशहूर नाई हैं। यकरे अलावा अन्य नवाबी पकवान जैइसै 'दमपुख़्त', लच्छेदार प्याज  अउर हरेर  चटनी के साथ परोसल  सीख-कबाब अउर रूमाली रोटी कय भी जवाब नाई अहै। लखनऊ कय चाट देश कय बेहतरीन चाट में से एक अहै। और खाना कै अंत में विश्व-प्रसिद्ध लखनऊ कय पान जेकर कवनो जबाब नाई अहै।




#Article 41: उत्तर प्रदेश कय मुख्यमन्त्री (125 words)


उत्तर प्रदेश कय मुख्यमंत्री उत्तर भारत कय राज्य उत्तर प्रदेश कय प्रमुख होत है। उत्तर प्रदेश कय मुख्यमंत्रीयों कय सूची हिँया दई गा है।

उत्तर प्रदेश मा अब तक 20 व्यक्ति मुख्यमंत्री रहि चुका हैं। इ 20 मनईइन कय अतरिक्त, तीन मनई अउर राज्य कय कार्यकारी मुख्यमंत्री रहि चुका हैं जेकर कार्यकाल बहुत छोट रहा। वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव होँय जे  15 मार्च 2012 से इ पद पे आसीन हैं।

संयुक्त प्रान्त, जवने कय मुख्यालय इलाहाबाद मा रहा, ब्रिटिश भारत कय एकठु प्रान्त रहा। वर्तमान मा इ हिस्सा उत्तर प्रदेश अव उत्तराखण्ड मा है।

     
भारत कय स्वतंत्रता कय बाद मा संयुक्त प्रान्त उत्तर प्रदेश नाँव से जाना जाय लाग। 26 जनवरी 1950 कय संयुक्त प्रान्त कय प्रधान गोविंद वल्लभ पंत राज्य का पहिला मुख्यमंत्री बने।    




#Article 42: उत्तराखंड कय मंडल (108 words)


उत्तराखण्ड कय मण्डल भारत के उत्तराखण्ड राज्य के द्वि मण्डलन का कहत हैं। उत्तराखण्ड मा द्वि मण्डल अहैं: कुमाऊँ अउर गढ़वाल जौन क्रमशः राज्य के पूरब अउर पच्छूं भाग मा हंय।

इन द्विनौ  मण्डलन मा से गढ़वाल मण्डल, जनसंख्या अउर क्षेत्रफल द्विनौ ही दृष्टि से कुमाऊँ मण्डल से बड़ा हय। गढ़वाल मण्डल कय कुल क्षेत्रफल ३२,४४८.३ (६०.६७%) वर्ग किमी अहै कुमाऊँ मण्डल कय २१,०३४.७ (३९.३३%)। यही तरह राज्य कय अधिकतर जनसंख्या भी गढ़वाल मण्डल मा निवास करत हय। राज्य कय कुल ८४,८९,३४९ जनसंख्या मा से ४९,२५,३८० (५८.०२%) लोग गढ़वाल मण्डल मा अउर ३५,६३,९६९ (४१.९८%) लोग कुमाऊँ मण्डल मा निवास करत हंय।

राज्य के द्विनौ मण्डलन कय तुलनात्मक तालिका:




#Article 43: ओमप्रकाश चौटाला (167 words)


ओमप्रकाश चौटाला भारत के प्रांत हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व उप-प्रधानमन्त्री चौधरी देवीलाल के पुत्र हैं।

चौधरी ओमप्रकाश चौटाला का जन्म 1 जनवरी 1936 को डबवाली, सिरसा, हरियाणा के चौटाला नामक गाँव में हुआ। उनका जन्म सिहाग गोत्र के एक जाट परिवार में हुआ।
चौटाला भारत के पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल के सबसे बड़े बेटे हैं। उन्होंने दो बेटों अजय व अभय और एक बेटी सुनीता है। उनके पुत्र अभय ऐलनाबाद विधायक हैं और उसके पोते दुष्यंत चौटाला हिसार लोकसभा से पूर्व सांसद और हरियाणा के वर्तमान उप-मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक रूप से 4 जुलाई 1989 से 6 अप्रैल 1991 को और अंत में 24 से 22 मार्च 1991 से फिर से मार्च 2004 के 17 जुलाई 1990 को 12 से 2 मई 1990 को 2 से हरियाणा के मुख्यमंत्री दिसंबर 1989 , जुलाई 1990 था, वह हो गया था राष्ट्रीय स्तर पर राजग और संयुक्त राष्ट्रीय प्रगतिशील गठबंधन का हिस्सा है। वर्तमान में इंडियन नेशनल लोकदल की हरियाणा विधानसभा में एक सीट है।




#Article 44: कजरी (330 words)


कजरी (कजली)
यहि शब्द कै व्युत्पत्ति सावन महीना में आकाश में आच्छादित बादर कै करियापन से लिहा गा है । जवन कि गाजर के जइसै होत है । यही गाजर का अवधी में काजर कहा जात है, यही से कजरी बना है ।
अवधी लोक समाज में कजरी गीत सावन औ भदौ महीना में गावा जात है । वर्षा के समय आसमान में करिया बादर कै बर्चस्व, धरती में धानी चुनरी ओढे मेहरारु, वगिया मा झलुवा झूलत कजरी गीत गावत हैं । यहि गीत कै विषयवस्तु मुख्यतः प्रेम प्रधान होत हैं । यहमा विप्रलंभ औ संभोग दूनौ किसिम के श्रृङ्गार रस कै भाव होत हैं । यहमा पति पत्नी का  छोडि कै ढेर दिन से विदेश जाय के नाते विरह, पतिव्रता कै प्रेम औ नन्द भउजी कै हास परिहास आदि मिलत हैं ।
 
ठाड कुवां पर भीजै गोरिया 
सिरपर धरे गगरिया नाय । टेक
ससुरु बडा कडा जल बरसय
कइसै जाबौ नोकरिया नाय
पा“व पनहिया हाथे छतरिया
सिरपर धरे रुमलिया नाय
दुलहिन मजे मजे चला जाबै
जालिम कठिन नोकरिया नाय, ठाड कुवा पे भीजै ...... ।
देवरा बडा कडा जल बरसै
कइसै जाबौ नोकरिया नाय
पा“व पनहिया हाथे छतुरिया
सिरपर धरे रुमलिया नाय
भयहू मजे मजे चला जाबै
जालिम कठिन नोकरिया नाय, ठाड कुवा पे भीजै ..... ।
देवरा बडा कडा जल बरसै
कइसै जाबौ नोकरिया नाय
पा“व पनहिया हाथे छतुरिया
सिरपर धरे रुमलिया नाय
भउजी माजे मजे चला जाबै
जालिम कठिन नोकरिया नाय । ठाड कुवा पे भीजै ........ ।
सइयां बडा कडा जल बरसै
कइसै जाबौ नोकरिया नाय
पा“व पनहिया हाथे छतुरिया
मन मा तोरि सुरतिया नाय
धनिया मजे मजे चला जाबै
जालिम कठिन नोकरिया नाय, ठाड कुवा पे भीजै ।

ज्यौना न जेवैं चरावैं लाली गइया हो । खेलन ............ ।
झाझर गेडुवा गंगाजल पानी,
गेडुवा न घूटैं चरावैं लाली गइया हो । खेलन ............. ।
लवङ इलाइची कै बीरा जोरायौं,
बिरवा न कूचैं चरावैं लाली गइया हो । खेलन .............. ।
पूmला हजारी कै सेजिया बिछायौं,
सेजिया न सूतैं चरावैं लाली गइया हो । खेलन ............




#Article 45: कपिलदेव (286 words)


कपिल देव राम लाल निखञ कय जनम ६ जनवरी १९५९ कय चंडीगढ़ मा भा रहा। वन कय बियाह रोमी भाटिया से सन १९८० मे भै ।यन भारतिय क्रिकेट कय कप्तान कय पद पे रहि चुका हैं। यन १९८३ क्रिकेट् बिस्व कप मा भारतिय क्रिकेट टीम कय कप्तानी करिन औ भारत कय विश्वकप जिताईन।

यन आपन क्रिकेट करीयर कय सुरुआत १९७५ मा हरयाना कय ओर से पञाब कय बिरुध घरेलू क्रिकेट से करिन। यन यक आल राउन्डर रहें जे दाँया हाथ से बल्लेबाज़ी औ तेज़ गेन्दबाज़ी करत रहें। यनकय अन्तर-राष्ट्रीय करियर पाकिस्तान के बिरुद्ध फैसलाबाद मा १६ अक्टूबर १९७८ कय भवा। इ दौरा वन्कय खर्तिन कवनौ नीक नाइ रहा, लेकिन आवै वाले समय मा यन आपन नीक खेल से भारतिय क्रिकेट टीम में आपन जगह बना लिहिन। श्रीलंका कय बिरुद्ध १९८२-८३ मा यन आपन कप्तानी कय करियर कय सुरुवात किहिन। जब यन्है बिश्व कप कय कप्तानी कय मौक्का मिला तब यन औसत खेलाडी रहें, लेकिन आपन नीक परदर्सन से औ अपने टीम कय सहयोग से भारत कय पहिला बिश्व कप जिताइन औ रातो-रात भारतिय इतिहास मे आपन नाँव लिखाइन। मोहम्मद अज़हरुद्दीन कय कप्तानी मा यन १९९२ कय बिश्व कप मा आपन अंतिम अन्तर-राष्ट्रिय खेल खेलिन। यन आपन क्रिकेट करियर मा एक दिवसीय क्रिकेट मा २२५ औ टेस्ट क्रिकेट मा १३१ मैच खेलिन। एक दिवसीय क्रिकेट मा यन 23.79 कय औसत से ३७८३ रन बनाइन औ टेस्ट क्रिकेट मा यन 31.05 कय औसत से ५२४८ रन बनाइन। गेंदबाजी कइकै यन एक दिवसीय औ टेस्ट क्रिकेट मा २५३ औ ४३४ विकेट लिहिन । १९८३ कय विश्व कप मा ज़िमबाब्वे कय बिरुध यनकय १७५ रन कय पारी यादगार अहै जवने कय बदौलत भारत उ मैच जीता। यन एक दिवसीय क्रिकेट मा १ औ टेस्ट क्रिकेत मा ८ सतक लगाय हैं।




#Article 46: करीमनगर जिला (806 words)


करीमनगर  दक्खिनी भारतीय राज्य तेलंगाना कय इकट्ठी जिला होय। ई तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से 165 किलोमीटर दूर अहय। करीमनगर कय नांव एक्ठु किलादार सयैद करीमुद्दीन के नांव पय परा। ई शहर वेद कय पढ़ाई के बरे जाना माना अहय जौन पुरानय समय से एह नगर कय पहिचान रही अहय। हियाँ कय खास प्राकृतिक संसाधनन म गोदावरी नदी सबसे जरूरी अहै जौन हियाँ कय जिनगी कय एक जरूरी हीसा अहय। कयिउ पुरान मंदिर एह जिला मा आवत हँय जिनमा मुक्‍तेश्‍वर स्‍वामी का संकलपा मंदिर सबसे बढ़िया अहय।  भक्ती अउर पढ़ाई कय ई नगरी कय सैर अपने आप मा एक अलगय अनुभव अहय।

करीमनगर से 38 किलोमीटर दूर वमुलावडा म भगवान राजाराजेश्‍वर स्‍वामी कय परसिद्ध मंदिर बाय जहां दूर-दूर से लोगय दरसन करय बरे आवत हँय। एह मंदिर कय निर्माण चालुक्‍य राजा 750 ईसवी से 975 ईसवी के बीच करवाये रहें। मंदिर परिसर म श्री राम, लक्ष्‍मण, देवी लक्ष्‍मी, गणपति अउर भगवान पद्मनाथ स्‍वामी कय मंदिर बना अहँय। एक अउर अजोग मंदिर अहय जौन भगवान भीमेश्‍वर का संकलपा अहय। हियाँ कयिउ खुला बरामदा अहँय। इन मा से अद्दाला मंटप सबसे सुंदर अहय। मंदिर मा स्थित धर्मकुंडम घूमय वालेन का काफी प्यारा अहय। लोगन का विश्‍वास हय कि एह पानी मा बीमारियन का ठीक करय कय शक्ती अहय। सबसे पहिले भक्‍त एह कुड म नहात हँय वहिके बाद दरसन करय के बरे जात हँय । मंदिर कय एक अउर खिंचाव मंदिर परिसर मा एक्ठु दरगाह बाय जहां सब धरम अव जाति कय मनई विनती करय आवत हँय।

करीमनगर से 70 किलोमीटर दूर गोदावरी नदी के किनारे मंरहेंनी अहय। ई जगह पुरान समय मा वैदिक पढ़ाई कय केन्द्र रहा। अजुवव हियाँ वेद अउर संस्‍कृत कय पढ़ाई करावय वाले तमाम स्कूल अहँय । हियाँ ढेर मंदिर अहँय जिनमा से खास अहँय प्रमुख हैं भगवान शैलेश्‍वर, लक्ष्‍मीनारायण स्‍वामी, ओंकारेश्‍वर स्‍वामी अउर महालक्ष्‍मी मंदिर। मंरहेंनी जैन अउर बौद्धव धरम कय मुख्‍य केन्द्र अहय। 

करीमनगर से 20 किलोमीटर की दूरी पय धुलिकट्टा एक जरूरी स्‍रहेंन बाय। दुनिया भर से तमाम बौद्धभिक्षु हियाँ आवत हँय। सातवाहन काल के कयिउ बौद्ध स्‍तूप हियाँ मिलत हँय। हर साल जनवरी के महीना म हियां सातवाहन उत्‍सव कय आयोजन कीन जात हय।

कोंडागट्टू करीम नगर से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पय बाय । हियाँ अंजनेय स्‍वामी का निराला मंदिर अहय। पहाड़ी, घाटी अउर झरना के बीचे कोंडागट्टू कय कुदरती सुंदरता देखतय बनत हय। स्‍रहेंनी मनइन के हिसाब से एह मंदिर कय निर्माण एक चरवाहा करीब 300 साल पहिले केहे रहा। अबहीं कय मंदिर 160 साल पहिले कृष्‍ण राव देशमुख ने बनवाये रहें। माना जात हय कि अगर कउनो महिला एह मंदिर म 40 दिन पूजा करय तौ ऊ लरकोर होइ जात हय । एह मंदिर के अलावा हियाँ कोंडलार्य अउर बाजापोटना कय गुफाएं देखय लायक आहँय।

करीम नगर से 75 किलोमीटर दूर रैकल म केशवनाथ स्‍वामी कय एक्ठु पुरान मंदिर अहय। 11ईं शताब्‍दी म काकतिय वंश द्वारा बनाये गये एह मंदिर कय मूरती बहुतय सुन्दर अहँय। एहके अलावा हियाँ पंचमुखलिंगेश्‍वर स्‍वामी कय निराला मंदिर भी अहय। मंदिर म भगवान शिव कय पंचानन प्रतिमा देखी जाय सकत हय। माना जात हय कि काशी के बाद हिंययी पय शिवजी कय ई रूप देखा जाय सकत हय। रैकल म भीमन्‍न कय मंदिर बाय जिनके सम्‍मान म हियाँ हर साल जनवरी-फरवरी के महीना म तीन दिनी जात्रा आयोजित कीन जात हय।

करीमनगर से 30 किलोमीटर दूर सुनसान ग्रेनाइट पहाड़ी पय योजना बनइ के एह मंदिर कय निर्माण करावय कय के बरे काकतिय राजाओं नांव लीन जात हय। महलन कय अवशेष आजव  किले कय गौरव कय गवाही देत लागत हँय। 

जंगलन से घेरा ई खूबसूरत जगह करीमनगर से 130 किलोमीटर दूर अहय। हियाँ कय मुक्‍तेश्‍वरा स्‍वामी का संकलपा पुरान मंदिर अपने अजोग पना के कारन भक्‍तन का अपनी ओरी खींचत हय। हिंययी अकेल एक मंदिर अहय जहां एक्क्य ठीहा पय द्वि शिवलिंग मिलत हँय। कयिउ मंदिरन म से एक मंदिर ब्रह्मव जी समर्पित बाय जौन एक अद्भुत बाति अहै।

करीमनगर से 78 किलोमीटर दूर गोदावरी नदी के किनारे बसा अहय 15वीं शताब्‍दी कय मंदिर नगरी धर्मापुरी। सुनी सुनाई बातन के हिसाब से राजा बाली वर्मा हियाँ धर्म देवता यज्ञ केहे रहें। वै चाहत रहें कि उनकय सगरौ मनई धरम का मा अउर वहि के हिसाब से ब्यउहार करंय। एह कारन एह गांव का धर्मपुरी कहा जाय लाग। भाषा पढ़ाई, साहित्‍य, नृत्‍य अउर संगीत के क्षेत्र म ई गांव खास जगह रक्खत हय। नगर के खास मंदिरन म 13वीं शताब्‍दी मा बना श्री लक्ष्‍मी नरसिम्‍हा स्‍वामी मंदिर, श्री वैंकटेश्‍वर स्‍वामी मंदिर, श्री रामलिंगेश्‍वर स्‍वामी मंदिर (जहां शिव अउर विष्‍णु कय प्रतिमा एक दूसरे के साथ अहँय।) शामिल अहँय। गोदावरी एह जगह कय मोह का अउरव बढ़ाय देत हय।

हैदराबाद कय बेगमपेट हवाई अड्डा सबसे नगीच हवाई अड्डा अहय।

करीमनगर रेलवे स्‍टेशन आंध्र प्रदेश के सगरौ बड़वार स्‍टेशन से जुड़ा बाय।

करीमनगर वारंगल से 80 किलोमीटर अउर हैदराबाद से 172 किलोमीटर दूर अहय। हियाँ से करीमनगर के बरे रोज बस चलतहीं। 

मुख्यालय - करीमनगर
क्षेत्रफल - 11,823 वर्ग कि.मी.

आबादी - 34,914,822 (2001 जनगणना)




#Article 47: कर्क रेखा (101 words)


कर्क रेखा एक अइसन कल्पित रेखा है जवन पृथ्वी कय उ सारा जगहन से होइ कय गुजरा ला जवन पृथ्वी कय सबसे उत्तर ओर कय आस्थान होय जहाँ सुरुज कय किरन साल में कम से कम एक दिन जरूर सीधा (90 अंश पर) परला। अइसन वर्तमान समय में 21 जून कय होला जब सूर्य सबसे उत्तर ले पहुँच कय सीधा चमकाला। अइसन पृथ्वी कय एकर काल्पनिक धुरी कय झुकाव कय नाते से होला अव 21 जून कय पृथ्वी कय उत्तरी हिस्सा ठीक सुरुज कय ओर झुका रहाला जवने से सुरुज से आवे वाला किरन पृथ्वी पे उत्तर कय ओर चढ़ जाला।




#Article 48: कर्ण झील (118 words)


कर्ण झील हरियाणा के करनाल शहर के पास स्थित है।
यह राज्य की राजधानी चंडीगढ तथा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली दोनों से लगभग १२५ किमी की दूरी पर है। इस कारण से यह स्थान इन दो महत्वपूर्ण स्थानों के यात्रियों के लिये विश्राम स्थल का कार्य करता है।

महाभारत के प्रमुख पात्र कर्ण को यह दुर्योधन ने इस प्रदेश का राज्य सौंपा था। ऐसी मान्यता है कि इस झील में कर्ण स्नान किया करते थे तथा इसी स्थान पर उन्होंने अपने कवच कुण्डल भगवान ईंद्र को दान किए थे, जिसके परिणामस्वरूप इतिहास में वे दानवीर कर्ण के नाम से प्रसिद्ध हुए।

मान्यता है कि इस स्थान को कर्ण ताल कहा जाता था, जो कालांतर में करनाल कहा जाने लगा।

 




#Article 49: कर्म (106 words)


साधारण बोलचाल कय भाषा में कर्म कय अर्थ होत है 'क्रिया'। व्याकरण में क्रिया से निष्पाद्यमान फल कय आश्रय कय कर्म कहत हैं। राम घर जात है' इ उदाहरण में घर गमन क्रिया कय फल कय आश्रय होवे कय नाते जाय क्रिया' कय कर्म होय।

दर्शन में कर्म एक विशेष अर्थ में प्रयुक्त होत है। जवन कुछ मनई करत है वसे कवनो फल उत्पन्न होत है।ई फल शुभ, अशुभ वा दुनों से भिन्न होत है। फल कय ई रूप क्रिया कय नाते स्थिर होत है। दान शुभ कर्म होय लेकिन हिंसा अशुभ कर्म होय। हियाँ कर्म शब्द क्रिया औ फल दुनों कय लिए प्रयुक्त होत है।




#Article 50: कल्पना चावला (909 words)


कल्पना चावला (1 जुलाई 1961 - 1 फ़रवरी 2003), एक भारतीय अमरीकी अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष शटल मिशन विशेषज्ञ थी और अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला थी। वे कोलंबिया अन्तरिक्ष यान आपदा में मारे गए सात यात्री दल सदस्यों में से एक थीं।

भारत की महान बेटी-कल्पना चावला करनाल, हरियाणा, भारत में जन्मी थी। उनका जन्म 1 जुलाई सन् 1962 में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री बनारसी लाल चावला और माता का नाम संजयोती देवी था। वह अपने परिवार के चार भाई बहनो में सबसे छोटी थी। घर में सब उसे प्यार से मोंटू कहते थे। कल्पना की प्रारंभिक पढाई “टैगोर बाल निकेतन” में हुई। कल्पना जब आठवी कक्षा में पहुचीं तो उन्होंने इंजिनयर बनने की इच्छा प्रकट की। उसकी माँ ने अपनी बेटी की भावनाओं को समझा और आगे बढने में मदद की। पिता उसे चिकित्सक या शिक्षिका बनाना चाहते थे। किंतु कल्पना बचपन से ही अंतरिक्ष में घूमने की कल्पना करती थी। कल्पना का सर्वाधिक महत्वपूर्ण गुण था - उसकी लगन और जुझार प्रवृति। कल्पना न तो काम करने में आलसी थी और न असफलता में घबराने वाली थी।
 उनकी उड़ान में दिलचस्पी  J R D Tata  'जहाँगीर रतनजी दादाभाई टाटा से प्रेरित थी जो एक अग्रणी भारतीय विमान चालक और उद्योगपति थे।

कल्पना चावला ने प्रारंभिक शिक्षा टैगोर पब्लिक स्कूल करनाल से प्राप्त की। आगे की शिक्षा वैमानिक अभियान्त्रिकी में पंजाब इंजिनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़, भारत से करते हुए 1982 में अभियांत्रिकी स्नातक की उपाधि प्राप्त की। वे संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए 1982 में चली गईं और 1984 वैमानिक अभियान्त्रिकी में विज्ञान निष्णात की उपाधि टेक्सास विश्वविद्यालय आर्लिंगटन से प्राप्त की। कल्पना जी ने 1986 में दूसरी विज्ञान निष्णात की उपाधि पाई और 1988 में कोलोराडो विश्वविद्यालय बोल्डर से वैमानिक अभियंत्रिकी में विद्या वाचस्पति की उपाधि पाई। कल्पना जी को हवाईजहाज़ों, ग्लाइडरों व व्यावसायिक विमानचालन के लाइसेंसों के लिए प्रमाणित उड़ान प्रशिक्षक का दर्ज़ा हासिल था। उन्हें एकल व बहु इंजन वायुयानों के लिए व्यावसायिक विमानचालक के लाइसेंस भी प्राप्त थे। अन्तरिक्ष यात्री बनने से पहले वो एक सुप्रसिद्ध नासा कि वैज्ञानिक थी।

१९८८ के अंत में उन्होंने नासा के एम्स अनुसंधान केंद्र के लिए ओवेर्सेट मेथड्स इंक के उपाध्यक्ष के रूप में काम करना शुरू किया, उन्होंने वहाँ वी/एसटीओएल में सीएफ़डी पर अनुसंधान किया।

कल्पना जी मार्च १९९५ में नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर में शामिल हुईं और उन्हें १९९८ में अपनी पहली उड़ान के लिए चुनी गयीं थी।
उनका पहला अंतरिक्ष मिशन १९ नवम्बर १९९७ को छह अंतरिक्ष यात्री दल के हिस्से के रूप में अंतरिक्ष शटल कोलंबिया की उड़ान एसटीएस-८७ से शुरू हुआ। कल्पना जी अंतरिक्ष में उड़ने वाली प्रथम भारत में जन्मी महिला थीं और अंतरिक्ष में उड़ाने वाली भारतीय मूल की दूसरी व्यक्ति थीं। राकेश शर्मा ने १९८४ में सोवियत अंतरिक्ष यान में एक उड़ान भरी थी। कल्पना जी अपने पहले मिशन में १.०४ करोड़ मील का सफ़र तय कर के पृथ्वी की २५२ परिक्रमाएँ कीं और अंतरिक्ष में ३६० से अधिक घंटे बिताए। एसटीएस-८७ के दौरान स्पार्टन उपग्रह को तैनात करने के लिए भी ज़िम्मेदार थीं, इस खराब हुए उपग्रह को पकड़ने के लिए विंस्टन स्कॉट और तकाओ दोई को अंतरिक्ष में चलना पड़ा था। पाँच महीने की तफ़्तीश के बाद नासा ने कल्पना चावला को इस मामले में पूर्णतया दोषमुक्त पाया, त्रुटियाँ तंत्रांश अंतरापृष्ठों व यान कर्मचारियों तथा ज़मीनी नियंत्रकों के लिए परिभाषित विधियों में मिलीं।

एसटीएस-८७ की उड़ानोपरांत गतिविधियों के पूरा होने पर कल्पना जी ने अंतरिक्ष यात्री कार्यालय में, तकनीकी पदों पर काम किया, उनके यहाँ के कार्यकलाप को उनके साथियों ने विशेष पुरस्कार दे के सम्मानित किया।

१९८३ में वे एक उड़ान प्रशिक्षक और विमानन लेखक, जीन पियरे हैरीसन से मिलीं और शादी की और १९९० में एक देशीयकृत संयुक्त राज्य अमेरिका की नागरिक बनीं। till here 

भारत के लिए चावला की आखिरी यात्रा १९९१-१९९२ के नए साल की छुट्टी के दौरान थी जब वे और उनके पति, परिवार के साथ समय बिताने गए थे। २००० में उन्हें एसटीएस-१०७ में अपनी दूसरी उड़ान के कर्मचारी के तौर पर चुना गया। यह अभियान लगातार पीछे सरकता रहा, क्योंकि विभिन्न कार्यों के नियोजित समय में टकराव होता रहा और कुछ तकनीकी समस्याएँ भी आईं, जैसे कि शटल इंजन बहाव अस्तरों में दरारें। १६ जनवरी २००३ को कल्पना जी ने अंततः कोलंबिया पर चढ़ के विनाशरत एसटीएस-१०७ मिशन का आरंभ किया। उनकी ज़िम्मेदारियों में शामिल थे स्पेसहैब/बल्ले-बल्ले/फ़्रीस्टार लघुगुरुत्व प्रयोग जिसके लिए कर्मचारी दल ने ८० प्रयोग किए, जिनके जरिए पृथ्वी व अंतरिक्ष विज्ञान, उन्नत तकनीक विकास व अंतरिक्ष यात्री स्वास्थ्य व सुरक्षा का अध्ययन हुआ। कोलंबिया अंतरिक्ष यान में उनके साथ अन्य यात्री थे-

अंतरिक्ष पर पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला कल्पना चावला की दूसरी अंतरिक्ष यात्रा ही उनकी अंतिम यात्रा साबित हुई। सभी तरह के अनुसंधान तथा विचार - विमर्श के उपरांत वापसी के समय पृथ्वी के वायुमंडल में अंतरिक्ष यान के
प्रवेश के समय जिस तरह की भयंकर घटना घटी वह अब इतिहास की बात हो गई। नासा तथा विश्व के
लिये यह एक दर्दनाक घटना थी। १ फ़रवरी २००३ को कोलंबिया अंतरिक्षयान पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया। देखते ही देखते अंतरिक्ष यान और उसमें सवार सातों यात्रियों के अवशेष टेक्सास नामक शहर पर बरसने लगे और सफ़ल कहलया जाने वाला अभियान भीषण सत्य बन गया।

ये अंतरिक्ष यात्री तो सितारों की दुनिया में विलीन हो गए लेकिन इनके अनुसंधानों का लाभ पूरे विश्व को अवश्य मिलेगा।
इस तरह कल्पना चावला के यह शब्द सत्य हो गए,” मैं अंतरिक्ष के लिए ही बनी हूँ। प्रत्येक पल अंतरिक्ष के लिए ही बिताया है और इसी के लिए ही मरूँगी।“




#Article 51: कविता (729 words)


कविता या काव्य साहित्य के एक विधा होय ।

यथार्थ ( अवधी मे कविता )

मनई छोड मनई धन से नात लगावै
धन कै खातिर स्वार्थ कै जात बनावै

आपन-आन के मुश्किल पहिचानब
परेप साथ दिए वहिक आपन जानब

राजा कब्बो रंक बनै हरिश्चन्द्र कै देखी
दौलत कै धौंस पे कबहु न करी सेखी

प्रेम कै भुखा दुनियाँ इर्ष्या केहु न भावै
मायाममता से दुश्मन कै नजिक बोलावै

जनहित खातिर जियैमरै मसिहा कहावै
मउतो कै बाद इतिहास अमर बनावै

जेतनै तोपौ वतनै लौकै यी बुराई सारा
सच्चाई-सादगी जानी सभ्यता कै पारा

दिल से अच्छा सब से अच्छा बात यी खाटी
महान सोच सोना जानी बाँकी सब माटी

आपन भाषा आपन भेष ( अवधी कविता )

मुडेप पगडी कान्हेप गम्छा लगाइ भइया
आपन भाषा आपन भेष बचाई भइया

धोती कुर्ता मे अपनेक सजाइ भइया
आपन भाषा आपन भेष बचाई भइया

अवधी कै भाव अवध मे बढाई भइया
आपन भाषा आपन भेष बचाई भइया

अवधी कै अध्ययन करी औ कराई भइया
आपन भाषा आपन भेष बचाई भइया

अवध नरेश रामचन्द्र कै गुण गाई भइया
आपन भाषा आपन भेष बचाई भइया

आपन संस्कृति सम्झी औ सम्झाई भइया
आपन भाषा आपन भेष बचाई भइया

बडहन कै पयर पे मुण झुकाइ भइया
आपन भाषा आपन भेष बचाई भइया

छोटहन पे आशिर्वाद बरसाई भइया
आपन भाषा आपन भेष बचाई भइया

पासपडोस से अच्छा सम्बन्ध बनाई भइया
आपन भाषा आपन भेष बचाई भइया

मानी खाली परम्परा मे अच्छाई भइया
आपन भाषा आपन भेष बचाई भइया

अन्धविश्वास छोडी औ छोडाई भइया
आपन भाषा आपन भेष बचाई भइया

छुवाछोभ से यी समाज कै बचाई भइया
आपन भाषा आपन भेष बचाई भइया

दहेज लियबदियब समाज से हटाई भइया
आपन भाषा आपन भेष बचाई भइया

मन वचन कर्म मे अमृत बरसाई भइया
आपन भाषा आपन भेष बचाई भइया

आचार मुरब्बा चटनी न भुलुवाई भइया
आपन भाषा आपन भेष बचाई भइया

हरियर सागसब्जी कै लुफ्त उठाई भइया
आपन भाषा आपन भेष बचाई भइया

सुखमी रक्खै सदा हलाल कै कमाई भइया
आपन भाषा आपन भेष बचाई भइया

क्या है?] (लेखक—आचार्य रामचन्द्र शुक्ल)

ऋतु राजा ( अवधी कविता )

हरियर तन हरियर बाना
मनई चिरई सब जग दिवाना
सजलधजल दुलहिन जइसन
देखो मनोरम प्रकृति कै अइसन
ऋतुअन कै राजा बसन्त देखो
तन मन अउर नजर कै सेको
पाता पल्लो फुन्गी सारा
झुम कै नाचैं खुशी कै मारा
मजोर नाचै पङ्ख फैलाय
देख कै नृत्य यी मन लोभाय
कोइलिया गावै सबका भावै
कविता गीत खोबै फुरावै
अमवा वउरै डडिया पहुँडै
सीताबिलरिया खुशी से दउडै
हवाबयार सुवासित चारौओर
न ठण्ढी जादा न गर्मी कै बटोर

नागरिकता नायी पावत हैं  ( अवधी कविता )

बुद्ध कै सनेश दादा वनकर सुनावत हैं
राणा लोगन कै सारा खिस्सा बतावत हैं
गर्व से आपन पुरान इतिहास बतावत हैं
सुधिराम बेचारु नागरिकता नायी पावत हैं

रातिम नीद मुश्किल से वनकरआवत है
करवट बदल-बदल कै रात बितावत हैं
रातदिन सिरिफ एक्कै बात सतावत है
सुधिराम बेचारु नागरिकता नायी पावत हैं

कब्बो गाविस अध्यक्ष फटकारत हैं
कब्बो अपनै वार्ड अध्यक्ष भगावत हैं
सुधबुध सारा गुम होय जावत है
सुधिराम बेचारु नागरिकता नायी पावत हैं

नेतन कै पीछे-पीछे दिन बितावत हैं
सदरमुकाम कै जिला प्रशासन धावत हैं
निराशा केवल हाथ मे आवत है
सुधिराम बेचारु नागरिकता नायी पावत हैं

माईदादा कै नाम कै लालपुर्जा माङत हैं
यथार्थ भूमिहीन केहू न लालपुर्जा पावत हैं
नागरिकताबिहीन दादा दु:ख सुनावत हैं
सुधिराम बेचारु नागरिकता नायी पावत हैं

कब्बो घुसपात कै बात सुनावत हैं
विदेशी कहिकै कब्बो थरकावत हैं
खून कै आँसु खाली चुआवत हैं
सुधिराम बेचारु नागरिकता नायी पावत हैं

सरजमीन कै नाम पे तरसावत हैं
नियमकानुन कै पाठ पढावत हैं
खाली कमीकमजोरी देखावत हैं
सुधिराम बेचारु नागरिकता नायी पावत हैं

बत्तीस सोता महतारी कै ( अवधी कविता )

मठ मन्दिर मस्जिद गुरुद्वारे धावैं
सन्तान खातिर दरदर दु:ख पावैं
महान रूप यी देबी अवतारी कै
न भुली बत्तीस सोता महतारी कै

कब्बो उलटी कब्बो घुमनी आवै
नौ माह खुशी भी दु:ख पहुँचावै
असीम प्रेम देखी माई दुलारी कै
न भुली बत्तीस सोता महतारी कै

बुकवा तेल बिते हररोज सफाई में
पीछेपीछे बाबु बहिनी चिल्लाई में
अगाध प्रेम माई कै अकवारी मे
न भुली बत्तीस सोता महतारी कै

छिन मे आछी छिन मे पेसाब धोवैं
वही गन्दगी मे माई हररोज सोवैं
वाह सराहनीय करम यी नारी कै
न भुली बत्तीस सोता महतारी कै

पुचकारैं कब्बो छाती से लगावैं
किलकारी सुन सारा दर्द भुलावैं
हर्षित देख अपने फूलवारी कै
न भुली बत्तीस सोता महतारी कै

कब्बो दवाई कब्बो झारफूक करावैं
खुद कम बच्चन कै अच्छा पहिरावैं
दु:खमी खुद खुश बच्चा सुखारी कै
न भुली बत्तीस सोता महतारी कै




#Article 52: काइरो (357 words)


काइरो मिश्र कय राजधानी होय । अरब देश कय इ सब से बडा देश होय ।इ मेट्रोपोलिटन शहर होय । यकर जनसंख्या लगभग २ करोड है जवन कि अफ्रिका कै,अरब देशन कै कवनो भि शहर कै औ दुनिया कै कवनो भि शहर कै छ्ठंवा सबसे बडा देश होय । काइरो प्राचिन इजिप्ट या मिश्र सभ्यता से जुड़ा़ है । इ सहर नाइल नदि कै किनारे बसा है । इ सहर ९६९ ईस्वी संवत मा फातिमिद राजवंस बसाये रहा । काइरो मे ढेर इस्लामिक इमारत है इहिकै नाते काइरो कै 'हजार मिनार कै सहर' भि कहि जाला । काइरो मा दुनिया कै सबसे बड़ा औ सबसे पुरान फिलिम औ संगीत कम्पनी हैं । काइरो मा दुनिया कै दुसरा सबसे पुरान विश्व विद्यालय अल-अज़हर विश्व विद्यालय है । ढ़ेर कुल अन्तराष्ट्रिय मिड़िया,व्यापार औ संघ संस्था कै क्षेत्रिय मुख्यालय काइरो मा है।
काइरो दुनिया कै १५वां सबसे व्यस्त शहर होय । यँह कै अर्थव्यवस्था मध्य पुरुब मा पहिला जगह पै है औ दुनिया मा ४३वां जगह पै है। 

काइरो कै सरकारी नाँव अल-क़ाहिरा होय जवने कै मतलब होत है 'परास्त करै वाला' । इ मानि जात है कि जब इ सहर कै बसाइ जात रहा तब पृथ्वी से मंगल ग्रह उगत देखात रहा । मंगल ग्रह कय अरब देशमा विजेता ग्रह मानि जात है।इजिप्ट कै लोग इ शहर कै मस्र भि कहत हैं । 

इ शहर कै आसपास कै जगह प्राचीन इजिप्ट कै केंन्द्रिय जगह रहा । ९६८ ईस मा फातिमिद लोग इजिप्ट आयें औ काइरो कै राजधानी बनाईन । अल-अज़हर महज़िद औ विश्वविद्यालय ९७२ ईस मा बना रहा । इ दुनिया कै एक्ठु मशहुर मदरस़ा भी होय । १९९२ मा आवा ५.8 रेक्टर भुकम्प से काइरो मा ५४५ मनइन कै मउत भवा औ ६५१२ मनइन घायल भँए । १८४७ से बाद कै सबसे भंजक भुकम्प इ रहा ।

काइरो कै मौसम गरम मरुस्थल ।मार्च से मई तक गरम आन्हि आवा कराला जवने से सहरा मरुभुमि कै धूर शहर मा चलि आवाला ।  जाड़ा मा अधिकत़म तापक्रम १४  से २२°C रहाला । गर्मी मा तापक्रम ४०°C तक चला जाला । बरख़ा बहुतै कम होला उहो खाली जाड़ा कै मौसम मा लेकिन कब्बो कब्बो मुसलाधार बरख़ा से बढ़ियो आ जाला। )




#Article 53: कार्बनिक यौगिक (280 words)


कार्बन कय रासायनिक यौगिकन् कय कार्बनिक यौगिक कहत हैं। प्रकृति में एकर संख्या 10 लाख से भी ढेर है। जीवन पद्धति में कार्बनिक यौगिकन् कय बहुतै जरुरी भूमिका है। एहमा कार्बन कय साथे हाइड्रोजन भी रहत है। ऐतिहासिक अव परंपरा गत कारणन् से कुछ कार्बन कय यौगिकन् कय कार्बनिक यौगिक कय श्रेणी में नाइ रक्खि जात है। एहमे कार्बनडाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड प्रमुख होंय। सब जैव अणु जैसय कार्बोहाइड्रेट, अमीनो अम्ल, प्रोटीन, आरएनए अव डीएनए कार्बनिक यौगिक होयँ। कार्बन औ हाइड्रोजन कय यौगिक कय हाइड्रोकार्बन कहत हैं। मेथेन (CH4) सबसे छोट अणुसूत्र कय हाइड्रोकार्बन होय। ईथेन (C2H6), प्रोपेन (C3H8) आदि एकरे बाद आवत हैं, जवनेमें क्रमश: एक एक कार्बन जोड़ात जात है। हाइड्रोकार्बन तीन श्रेणिन् में विभाजित कई गा  है: ईथेन श्रेणी, एथिलीन श्रेणी औ ऐसीटिलीन श्रेणी। ईथेन श्रेणी कय हाइड्रोकार्बन संतृप्त हैं,  एन्हनमे हाइड्रोजन कय मात्रा अउर नाइ बढ़ाए सका जात है। एथिलीन में दुइ कार्बनन् कय बीच में एक द्विबंध (=) है, ऐसीटिलीन में त्रिगुण बंध (º) वाले यौगिक अस्थायी हैं। ई आसानी से ऑक्सीकृत अव हैलोजनीकृत होइ सकत हैं। हाइड्रोकार्बनन् कय बहुत  व्युत्पन्न तैयार कई  सका जात हय, जवन ढेर कामे आवत  है। अइसन व्युत्पन्न क्लोराइड, ब्रोमाइड, आयोडाइड, ऐल्कोहाल, सोडियम ऐल्कॉक्साइड, ऐमिन, मरकैप्टन, नाइट्रेट, नाइट्राइट, नाइट्राइट, हाइड्रोजन फास्फेट अव हाइड्रोजन सल्फेट हय। असतृप्त हाइड्रोकार्बन ढेर सक्रिय होत है औ ढेर अभिकारकन् से संयुक्त होत हय सरलता से व्युत्पन्न बनावत है। अइसन् ढेर व्युत्पंन औद्योगिक दृष्टि से बड़ा काम आवत अहै। एन्हनसे ढेर बहुमूल्य विलायक, प्लास्टिक, कृमिनाशक दवाई आदि मिलत हय। हाइड्रोकार्बनन कय ऑक्सीकरण से ऐल्कोहॉल ईथर, कीटोन, ऐल्डीहाइड, वसा अम्ल, एस्टर आदि  मिलत है। ऐल्कोहॉल प्राथमिक, द्वितीयक औ तृतीयक होई सकत है। एन्हन कय एस्टर द्रव सुगंधित होत हैं। ढेर कुल सुगंधित द्रव्य एन्हनसे तैयार कई जात है।




#Article 54: कालका (260 words)


कालका हरियाणा प्रान्त के पंचकुला जिला का एक शहर है। यह शहर राष्ट्रीय राजमार्ग २२ पर स्थित है। यह शहर हिमालय के पाँव में, पड़ोसी प्रान्त हिमाचल प्रदेश की और जाने के लिए द्वार है।

इस शहर का नाम प्राचीन कालिका माता मंदिर पर है।

राष्ट्रीय राजमार्ग २२ पर हरियाणा के पिंजौर व हिमाचल प्रदेश के परवाणू के बीच स्थित है। 
हाल ही में राष्ट्रीय राजमार्ग २२ पर बाईपास (हिमालयन एक्सप्रेसवे) बना दिया गया है, जो पिंजौर, परवाणू तथा कालका को बाहर से ही लांघ कर निकल जाता है। अतः अंबाला या चंडीगढ़ की तरफ से कालका जाने के लिए यात्रियों को खास ध्यान रखना चाहिए पिंजौर से ठीक पहले राष्ट्रीय राजमार्ग छोड़कर बाएं मुड़ें। शिमला से आते समय परवाणू से ठीक पहले राष्ट्रीय राजमार्ग छोड़कर दाएं मुड़ें।

निकटतम रेलवे स्टेशन - कालका
रेल मार्ग- दिल्ली कालका मुख्य रेल मार्ग, कालका शिमला नैरो गेज रेल मार्ग। कालका शिमला रेल मार्ग युनेस्कोके हेरिटेज स्थानो कि सूची में समाविष्ट है।
The Kalka Railway station is very ancient and Historical.  It is very surprising experience to visit in Train on Narrow Gauge Line of Kalka to Shimla.
When you sit in it, you will see on so many places that the train round on Hill and crossing the Tunnel।  You can see the Last compartment of Train as it is running and moving as a snake.

निकटतम हवाई अड्डा - चंडीगढ़।

२००१ की जनगणना के अनुसार - कुल जनसंख्या ___ है, पुरुष-___, महिलाएं-___।

कालिका माता मंदिर

स्थानीय बाज़ार में मिट्टी, चीनीमिट्टी (सिरेमिक्स) आदि की कलाकृतियों की दुकानें देखने लायक हैं।

कालका शिमला रेलवे




#Article 55: कालिंजर दुर्ग (139 words)


 कालिंजर दुर्ग, भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के बांदा जिला मा एक्ठु दुर्ग आय। बुन्देलखण्ड क्षेत्र मा विंध्य पर्वत पय ई दुर्ग विश्व धरोहर जगह खजुराहो से 97.7  किमी अहय। एह का  भारत कय सबसे बड़वार अउर अपराजेय दुर्गन म गिना जात हय। एह दुर्ग म कयिउ पुरान प्राचीन मन्दिर अहँय। इनमा कयिउ मंदिर तिसरी से पंचई सदी गुप्तकाल कय हँय। हियाँ के शिव मन्दिर के बारे मा मा बाय कि सागर-मन्थन से निकरे कालकूट विष का पिये के बाद भगवान शिव हिंययी तपस्या कएके वोहकय आगि शांत केहे रहें। कार्तिक पूर्णिमा के मउका पय लागय वाला कतिकी मेला हियाँ कय जाना माना सांस्कृतिक उत्सव आय। भारत कय आजादी के बाद एह कय प पहिचान एक खास इतिहासी धरोहर के रूप म कीन गय अहय। एह समय मा ई दुर्ग भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग के मलिकाना अव देखरेख मा हय।




#Article 56: कुरुक्षेत्र जिला (227 words)


कुरुक्षेत्र जिला भारत के उत्तरी राज्य हरियाणा के 21 जिलन मा से एक होय। कुरुक्षेत्र कस्बा हिन्दुअन कय एक पवित्र जगह, एह जिला कय प्रशासनिक मुख्यालय अहै। एह कय कुल क्षेत्रफल 1682.53 वर्ग किमी अहै। एह जिला कय कुल जनसंख्या 964231 (2011 कय जनगणना) अहै। ई जिला अम्बाला सम्भाग (मण्डल) का एक्ठु भाग होय।

जिले कय नांव कुरुक्षेत्र के पुरान क्षेत्र के नाम से निकरा, जेहकय शाब्दिक अर्थ कुरुओं कय भुईं होत है। ई माना जात है कि पुराणन अव महाभारत मा वर्णित कुरुक्षेत्र कय लड़ाई हियईं भय रही अउर कृष्ण लड़ाई से पहिले लड़ाई के मैदान मा अर्जुन का श्रीमद्भगवद्गीता कय उपदेश देहे रहें ।

कुरुक्षेत्र जिला मा द्वि उप-सम्भाग कय समावेश अहै: थानेसर अउर पिहोवा। थानेसर उप-सम्भाग मा द्वि तहसिलें, थानेसर अउर शाहबाद अउर द्वि उप-तहसिल, लाडवा अव बाबैन हँय। पिहोवा उप-खण्ड मा पिहोवा तहसिल अउर इस्माईलाबाद उप-तहसिल शामील हँय। एह जिला कै खास नगर कुरुक्षेत्र, थानेसर अउर पिहोवा हँय। पंजाब सीमा पय होय के कारन हियाँ बड़ी संख्या मा सिखऽव कय आबादी हय।

जिले कय जनसंख्या घनत्व  है। 2001-2011 के दशक मा एहकय जनसंख्या बढ़य कय दर 16.81% रही। कुरुक्षेत्र मा लिंगानुपात प्रति 1000 मंसेधू पय 889	महिलाएँ, और साक्षरता दर 76.7% अहै।

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कय 1956 मा कुरुक्षेत्र कय एकात्मक आवासीय विश्वविद्यालय के रूप मा स्थापना भय। कुरुक्षेत्र के क्षेत्रीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय जेहक्य बाद मा नाम बदलि के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राखा गवा।




#Article 57: कुर्दिस्तान (150 words)


असल मा कुर्दिस्तान से अभिप्राय वह्य प्रदेश से अहै जहाँ कुर्द लोग रहत हैं। कुर्द कट्टर सुन्नी मुसलमान, योद्धा, कुशल घुड़सवार, बंजारा जाति कय मनई अहें। ई प्रदेश एनातोलिया के दक्षिणपूरब पहाड़न् अउर जागरूस श्रेणी के उत्तरपच्छूं मा स्थित अहै अउर तुर्की, ईरान अव इराक तीन देश मा बँटा अहै। कुर्द मनई गर्मी मा गोरू बछरू के साथे पहाड़ी चरागाह पय चला जाथें। जाड़ा मा घाटी मा रहत हैं। इनकय घर गारा,माटी, ईंटा अउर लकड़ी कय बनत हैं। इनके हिंया मेहमानन् कय आवभगत प्रसिद्ध अहै।

संक्षेप मा कुर्दिस्तान ईरान के एक उस्तान (प्रांत) कय नाम हुवै जौन उत्तर मा अजरबैजान, दक्षिण मा किरमान शाह, पूरब मा ईराक कय सीमा अउरर पच्छूं मा गेरूस अउर हमदान के उस्तानों से घिरा अहै। एहकय खास शहर सिनंदाज (सिन्नेह) अहै। हियाँ कय खास उद्योग गलीचा, ऊन अउर नमदा अहै। हियाँ कुर्द आबादी रहत है अउर ई तुर्की अव इराक के सीमा के करीब अहै।




#Article 58: कैलेण्डर (114 words)


कैलेण्डर चाहे कलेंडर समय कय  गणना कय  व्यवस्थित करेकै  साधन होए जवने में दिन हफ्ता वा साल महिआ बाँटि कय  समय कय  हिसाब रक्खा जात हय । तिथि कौनों एक  दिन कय  पहिचाने कय  साधन होय । दूसरा तरीका से कहा जाय तो तिथि कौनो दिन विशेष कय  नाँव होय ।

भारत महिया सामान्य रूप से अंग्रेजी ग्रेगेरियन कैलेण्डर अउर  हिन्दू पंचांग कय  इस्तेमाल होत हय । आजकाल ग्रेगेरियन कैलेण्डर पुरा दुनिया में सबसे ढेर इस्तेमाल होत हय ।

कैलेण्डर शब्द कय  उत्पत्ति लातीन भाषा कय  calendarium से भा है जवने कय  मतलब होए  किताब मे  लिखा; ई पुरान जमाना कय  हर महीना कय  पहिला दिन (kalendae) कय  लिस्ट बनावेक  खातिर इस्तेमाल होत रहा।




#Article 59: कोक बोरोक भाषा (102 words)


कोक बोरोक या तिप्राकक भाषा या त्रिपुरी भाषा भारत के त्रिपुरा राज्य कय त्रिपुरी समुदाय अउर बंगलादेश के कुछ पड़ोसी क्षेत्रन मा बोली जाय वाली भाषा हय। 'कोक' कय अर्थ 'भाषा' अउर 'बोरोक' कय अर्थ 'लोग' होत है। हियाँ बोरोक शब्द से अर्थ त्रिपुरी लोग अहैं। कोक बोरोक तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार कय सदस्य आय अउर असम मा बोली जाय वाली बोड़ो भाषा अव दिमासा भाषा कय निकट सम्बन्धी अहै। कोक बोरोक का कभो-कभो  त्रिपुरी भाषा भी कह दिन जात है।

कोक बोरोक भाषा मा गिनती' का लेखमुङ (लेखमुंग) कहत हैं। मुख्य संख्याओं के बरे कोक बोरोक मा प्रयुक्त शब्द नीचे दीन गा अहैं।




#Article 60: कोरोना भाइरस (318 words)


कोरोना भाइरस (Coronavirus) ढेर मेर कय भाइरस कय समूह होय जवन स्तनधारिन् औ चिरईन् में रोग पैदा करत है । यन्हरे आरएनए भाइरस होयँ। यन्हरे मनइन में सास नली अव फेफड़ा में संक्रमण पैदा कइ सकत हैं जवने कै नाते साधारण सर्दी बोखार से लइकै सास फुलेक समस्या अव मौत भी होइ सकत है । यका रोकै खत्तिर कौनो भैक्सीन (vaccine) या एंटिभाइरल दवाई नाइ बना है ।
चीन कय वुहान सहर से निकरा २०१९ नोवेल कोरोना भाइरस इही भाइरस कय एक्ठु उदाहरण होय । इ भाइरस कय संक्रमण २०१९-२०२० मे बहुत बडा प्रकोप कय रुप लिहिस । विश्व स्वास्थ संगठन इ भाइरस कय संक्रमण कय नाव कोभिड १९ (COVID 19) धरिस । कवनो भि भाइरस सामान्य माइक्रोस्कोप या खालि आंखि से नाइ देखा लैं । यका देखै खत्तिर इलेक्ट्रोन माइक्रोस्कोप प्रयोग कइ जात है ।
इलेक्ट्रोन माइक्रोस्कोप मे कोरोना भाइरस कय आकार गोल देखान जवने कै उप्पर चारो वोर खूँटी जइसन स्पाइक है । स्पाइक कै नाते एकरे पिछे चक्र जैसन आकार देखात है ,इहिकै नाते एकर नाव कोराना परा है ।

मनइन कै असर करै वाला कोरोना भाइरस कै खोज १९६० मे यूनाइटेड किंगडम में भवा रहा । ओकरे बाद मे सार्स कोरोना भाइरस २००३ में पता लाग,मर्स कोरोना भाइरस २०१२ में अव सार्स कोरोना भाइरस २०१९ में पता लाग ।    
कवनो कवनो कोरोना भाइरस कै संक्रमण से मनइन पे कवनो असर नाइ होत है तो कुछ कोरोना भाइरस जइसै मर्स कोरोना भाइरस (MERS-CoV) से संक्रमण कै मौत दर ३०% है । कोरोना भाइरस कै संक्रमण में सर्दि,खोंखी,बोखार जैसन लच्छ्न देखात है । कोरोना भाइरस निमोनिया औ ब्रोन्काईटिस (Bronchitis) भि कराय सकत है । अबहिन तक ६ मेर कै कोरोना कै प्रजातिन कै पता लाग है जवने मे से एक्ठु कै दुइ उप प्रजाति में बाटे हैं ।
यह मे से ४ जात अइसन है जवन मनइन मे साधारण सर्दि जइसन लच्छन पैदा करत हैं :

३ जात मनइन मे तगड़ा लच्छन पैदा करा लैं :




#Article 61: क्रिकेट (125 words)


क्रिकेट एक्ठु खेल होय जवने कय सुरुवात दक्खिनी इंगलैंड मा भवा रहा । क्रिकेट शब्द कय सुरुवात क्रिक शब्द से भवा हय जवने कय मतलब होत हय लाठी ।क्रिकेट खेलय वाला बैट लाठि जइसन होत हय तव यकर नाँव इँहि से आ होइ । यूरोपिएन भाषा विद्वान हेइनर गिल्मेस्टर कय अनुसार क्रिकेट शब्द डच शब्द मेट डि क्रिकेटसन से आवा हय जवने कय मतल्ब होय लाठि से पिछा करो । 

यकर लम्माई २२ गज़ होत हय । यकरे दुनो ओर विकेट होत हय जवने मा ३ ठु स्टम्प औ २ ठु बेल होत हय । यहमा दुई टोली होत हय यक टोली गेना मारिकै रन बनावैक कोसिस करत हय दुसर टोली रन रोकैक औ दुसरे टोली कय खेलाडी कय आउट करैक कोसिस करत हय ।




#Article 62: क्रिस्टोफर कोलम्बस (103 words)


क्रिस्टोफर कोलम्बस (१४५१ - २० मई १५०६) एक समुद्री-नाविक, उपनिवेशवादी, खोजी यात्री रहे़। वनकय अटलांटिक महासागर में ढेर समुद्री यात्राऩ कय कारण अमेरिकी महाद्वीप कय बारे में यूरोप में जानकारी बढ़ा। यद्यपि अमेरिका पहुँचय वाला वन प्रथम यूरोपीय नाई रहे लेकिन कोलम्बस  यूरोपवासि औ अमेरिका कय मूल निवासिऩ कय बीच विस्तृत सम्पर्क कय बढ़ावा दिहिन। वन अमेरिका कय चार दाइ यात्रा कीहिन जवने कय खर्च स्पेन कय रानी इसाबेला (Isabella) उठाइन। वन हिस्पानिओला (Hispaniola) द्वीप पे बस्ती बसावे कय कोशिश कीहिन औ इही प्रकार अमेरिका में स्पेनी उपनिवेशवाद कय नेई राखीऩ। इही प्रकार ई नवाँ दुनिया में यूरोपीय उपनिवेशवाद कय प्रक्रिया आरम्भ भय।




#Article 63: गंडक नदी (146 words)


गंडक नदी भारत कय उत्तर में पडोसी देश कय हिमालय से निकरी कय उत्तर बिहार से बहत  जाई कय गंगा नदी से मिल जाला। ई एक्ठु बड़ा नदी होय जवने मेँ बरसात कय समय पानी बहुत ढेर बढी जाला जवनेक नाते से उत्तर बिहार मेँ बाढ़ भी आ जाला। गण्डकी नदी, नेपाल औ बिहार में बहै वाली एक्ठु नदी होय जवनेक  बड़की गंडक या खाली गंडक कहि जात है। इ नदी कय नेपाल में सालिग्रामि या सालग्रामी औ मैदानन मे नारायणी औ सप्तगण्डकी कहत हैं। यूनानी कय भूगोल विद यका  कोंडोचेट्स (Kondochates) औ महाकाव्यन में यका सदानीरा कहि गा हय ।

गण्डकी हिमालय से निकरीकय दक्खिन-पच्छु बहिकै भारत में हलत हय। त्रिवेणी पहाड कय पहिले यहमें एक्ठु सहायक नदी त्रिशूलगंगा मिलत  है। इ नदी बहुत दूर तक उत्तर प्रदेश औ बिहार राज्य  कय बीचे सीमा खिँचत है। उत्तर प्रदेश में इ नदी महराजगंज औ कुशीनगर जिला से होइकय बहत है। बिहार में इ चंपारन, सारन औ मुजफ्फरपुर जिला से होइकै बहत हय । १९२ मील कय बाद पटना कय आगे गंगा में मिलि जात है। इ नदी कय कुल लम्बाई लगभग १३१० किलोमीटर हय।




#Article 64: गुजरात कय जिले (190 words)


भारत के गुजरात राज्य में ३३ ज़िले है।  कच्छ सब से बड़ा और सब से छोटा ज़िला डांग है। अहमदाबाद ज़िले में सब से ज्यादा जनसंख्या और सब से कम जनसंख्या डांग ज़िले में है। सुरत ज़िला सब से ज्यादा जनसंख्या घनत्व वाला ज़िला है। 

गुजरात में २४९ तहसील है

१ मई १९६० के दिन बृहद मुंबई राज्य के उत्तरेय स्थान में स्थित १७ ज़िले को जोड़कर गुजरात राज्य की स्थापना की गई थी। दूसरे भागो से महाराष्ट्र राज्य बनाया गया था।

स्थापना काल में अहमदाबाद, अमरेली, बनासकाँठा, भरुच, भावनगर, डांग, जामनगर, जूनागढ़, खेडा, कच्छ, महेसाना, पंचमहाल, राजकोट, साबरकाँठा, રसुरत, सुरेन्द्रनगर और वडोदरा.ज़िले थे।

१९६४ में अहमदाबाद और महेसाना ज़िले में से गांधेनगर ज़िला बनाया गया। जो गुजरात का पाटनगर बना।

१९६६ में सुरत ज़िले में से वलसाड़ ज़िला बनाया गया।

२ अक्तूबर १९९७ के दिन ५ नये ज़िले की रचना कि गई:-

वर्ष २००० में पाटन ज़िले की रचना बनासकाँठा और महेसाना ज़िल से की गई।

२ अक्तूबर २००७ को सुरत ज़िले से अलग तापी ज़िले की रचना की गई।

१५ अगस्त २०१३ के दिन गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नये ७ ज़िले के रचना की गई-:




#Article 65: गुड़गांव जिला (622 words)


गुड़गाँव, भारतीय राज्य हरियाणा कय छठवाँ सबसे बड़ा शहर आय। ई हरियाणा के 4 प्रमण्डल मा से एक अहय। गुडगाँव हरियाणा कय ओद्योगिक अउर वितीय केंद्र आय। गुड़गाँव भारत के राजधानी दिल्ली से 30 किलोमीटर, द्वारका से 10 किलोमीटर, चंडीगढ़ से 268 किलोमीटर दूर अहय। गुड़गाँव दिल्ली के चार खास उपग्रह शहरऽन् मा से एक अहय अउर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र कय एक हिस्सा होय। गुड़गाँव दिल्ली से राष्ट्रीय राजमार्ग अउर दिल्ली मेट्रो के जरिये से सीमा साँझा करत हय।

गुड़गाँव का भारत मा प्रति मनई आमदनी मा चंडीगढ़ अव मुंबई के बाद तीसरे नम्बर पय अहय । गुडगाँव भारत कय पहिला अइसा शहर होय जेहके हर घरे मा बिजुली सपलाई होत है।  बिज़नस टुडे मैगज़ीन गुड़गाँव का भारत मा रहय के बरे 11ईं जगह देहे अहय। पिछले 25 सालऽन् गुडगाँव बहुतय तेजी से  आगे बढ़ा अहय अउर दुनिया के नक़्शे पय जगह बनये अहय। 

गुड़गाँव कय नाम हिन्दू ग्रंथऽन मा मिलत हय। गुड़गाँव गाँव, जौन शहर के बीचौंबीच मा अहय, गुरु द्रोणाचार्य कय गाँव आय। गुरु द्रोणाचार्य हिंययी पांडवऽन अउर कौरवऽन का पढ़ाये रहें। पांडव अउर कोरव्, हिन्दू ग्रन्थ महाभारत कय किरदार अहें। गुडगाँव कय पुरान नाव गुरुग्राम हुवै, माने गुरु (द्रोणाचार्य) कय ग्राम | गुरु द्रोणाचार्य का गुरुग्राम पांड्वो अव कौरव उपहार मा देहे रहें, जौन की ऋषि भरद्वाज के बेटवा रहें। महाभारत मा देखावा गवा इन्दारा , जेहमा पांडवऽन अउर और कौरवऽन कय गेंद चली गय रही, अबहिनव गुरु द्रोणाचार्य कॉलेज के भितरी मौजूद अहय।

इतिहास मा गुडगाँव पय हमेशा से दिल्ली पय राज करय वाले रजवन कय अधिकार रहा जइसे की राजपूत, यदुवंशी, मुग़ल, मराठा अउर तमाम। 
 

प्राचीन हिंदू पौराणिक कथाओं में गुड़गांव का उल्लेख एक महत्वपूर्ण नगर के रूप में मिलता है। यह दिल्ली के चार प्रमुख उपनगरों में से एक है इसलिए इसे भारत के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का एक हिस्सा माना जाता है। गुड़गाँव को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का एक सबसे अभिजात्य क्षेत्र भी एक माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में शहर का अत्यधिक विकास हुआ है तथा देश के भीतर एक आउटसोर्सिंग गंतव्य के रूप में विकसित होने के अतिरिक्ति इस क्षेत्र ने एक अचल संपत्ति में आया एक अभूतपूर्व उछाल देखा है।

गुड़गाँव की स्थापना 15 अगस्त 1979 ई. को की गई थी। महाभारत काल में राजा युधिष्ठिर ने गुड़गाँव को अपने धर्मगुरु द्रोणाचार्य को उपहार स्वरूप दिया था और आज भी उनके नाम पर एक तालाब के भग्नावशेष तथा एक मंदिर प्रतीक के तौर पर विद्यमान हैं। इस कारण इसका नाम गुरुगाँव पड़ा था। बाद में समय के साथ इसका नाम गुड़गाँव हो गया।

गेहूँ, तिलहन, बाजरा, ज्वार और दलहन महत्त्वपूर्ण फ़सलें हैं।

यह औद्योगिक विकास का गलियारा बन चुका है। गुड़गाँव में सूती वस्त्र, यंत्रचालित बुनाई और कृषि उपकरणों से संबंधित उद्योग हैं।सूचना प्रौद्योगिकी और आईटी-सक्षम सेवा उद्योग में जिला गुड़गांव से कुल निर्यात वित्त वर्ष 2018 के अंत में 18,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

यह शहर दिल्ली से 30 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में दिल्ली-जयपुर राजमार्ग पर स्थित है।

हरियाणा राज्य में स्थित गुड़गाँव बहुत ही ख़ूबसूरत स्‍थान है। गुड़गाँव पर्यटन का आकर्षक स्थल है। गुड़गाँव में शीतला माता का मन्दिर बहुत प्रसिद्ध है। देश-विदेश से पर्यटक शीतला माता की पूजा करने के लिए यहां आते हैं। शीतला माता के मन्दिर के अलावा भी पर्यटक यहाँ पर कई पर्यटक स्थलों की सैर कर सकते हैं।

गुड़गाँव का कुछ दिनों में जबरदस्त औद्योगिकरण हुआ है। यहाँ पर कई बहुर्राष्ट्रीय कम्पनियों के कारख़ाने स्थापित किए गए हैं। हज़ारों मजदूर यहाँ काम करके अपनी आजीविका कमाते हैं। इसके अलावा गुड़गाँव को आई.टी. सेक्टर का गढ़ भी कहा जाता है। गुडगांव ने कुछ ही समय में जबरदस्त प्रगति की है और हरियाणा सरकार इसे नई ऊँचाईयों तक ले जाने के लिए यहाँ नई परियोजनाएँ शुरू करने की कोशिश कर रही है। इस शहर को साइबर सिटी के रूप में नई पहचान मिल रही है।




#Article 66: गोस्वामी तुलसीदास (257 words)


गोस्वामी तुलसीदास कय जन्म सावन कय शुक्ल पक्ष सप्तमी मे वर्तमान भारत कै उत्तरप्रदेश कै चित्रकूट मे भए रहा । वन हिन्दु कै प्रसिद्ध ग्रन्थ रामचरितमानस कै रचियता होयँ । उनका जन्म राजापुर गाँव (वर्तमान बाँदा जिला) उत्तर प्रदेश में भवा रहै। अपने जीवनकाल मा ऊ १२ ग्रन्थ लिखिन्। ऊ संस्कृत विद्वान होने के साथ ही हिन्दी भाषा के प्रसिद्ध और सर्वश्रेष्ठ कवियन् मा एक माना जात हैं। श्रीरामचरितमानस वाल्मीकि रामायण का प्रकारान्तर से ऐसन अवधी भाषान्तर अहै जीमा अन्य भी कयु कृतिन् से महत्वपूर्ण सामग्री समाहित कई गय रहा। रामचरितमानस का समस्त उत्तर भारत मा बड़े भक्तिभाव से पढ़ा जात् है। ईके बाद विनय पत्रिका उनका एक अन्य महत्वपूर्ण काव्य माना जात है। त्रेता युग के ऐतिहासिक राम-रावण युद्ध पे आधारित वनके प्रबन्ध काव्य रामचरितमानस कय विश्व के १०० सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय काव्यन् मा ४६वाँ स्थान दिया गवा है।

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले मा कुछु दूरी पर राजापुर नामक एक ग्राम रहै, हुंवाँ आत्माराम दुबे नाम के याक प्रतिष्ठित सरयूपारीण ब्राह्मण रहत रहैं। उनकी धर्मपत्नी का नाम हुलसी रहै। संवत् १५५४ के श्रावण मास के शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि के दिन अभुक्त मूल नक्षत्र मा इन्हीं भाग्यवान दम्पति के हिंयाँ ई महान आत्मा मनुष्य योनि मा जन्म लिहिन। प्रचलित जनश्रुति के अनुसार शिशु पूरे बारह महीने तक माँ के गर्भ मा रहे के कारण अत्यधिक हृष्ट पुष्ट राहै और ऊके मुख मा दाँत दिखायी देत रहैं। जन्म लेने के बाद प्राय: सभी शिशु रोया ही करत हैं पर ई बालक जो पहिल शब्द बोलिस ऊ राम रहै। इहे मारे इनका घर का नाम ही रामबोलान्पड़ गवा।




#Article 67: गौरी लंकेश (1012 words)


 गौरी लंकेश (२९ जनवरी १९६२- ५ सितंबर २०१७) कन्नड़ कय भारतीय क्रांतिकारी पत्रकार रहीं। वे बंगलौर से निकलने वाली कन्नड़ साप्ताहिक पत्रिका लंकेश में संपादिका के रूप में कार्यरत थीं। पिता पी. लंकेश की लंकेश पत्रिका के साथ हीं वे साप्ताहिक गौरी लंकेश पत्रिका भी निकालती थीं। ५ सितंबर २०१७ को बंगलौर के राजराजेश्वरी नगर में उनके घर पर अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। इस तरह वे  
नरेंद्र दाभोलकर (पुणे, २०१३), गोविंद पानसरे (कोल्हापुर, २०१५), एमएम कलबुर्गी (२०१५) जैसे दक्षिणपंथ के आलोचक भारतीय पत्रकारों और लेखकों के वर्ग में शामिल हो गईं जिनकी २०१३ ई। के बाद हत्या कर  दी गई है।

गौरी का जन्म २९ जनवरी १९६२ को कर्नाटक के एक लिंगायत परिवार में हुआ था। उनके पिता पी। लंकेस कन्नड़ के प्रसिद्ध लेखक, कवि एवं पत्रकार थे। इसके साथ ही वे पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता भी थे। १९८० ई. में उन्होंने लंकेश नामक कन्नड़ साप्ताहिक पत्रिका की शुरुआत की थी। उनकी तीन संतानें थी- गौरी, कविता, और इंद्रजीत। कविता ने फिल्म को पेशे के रूप में अपनाया तथा अनेक पुरस्कार अर्जित किया। गौरी ने पत्रकारिता को अपना पेशा बनाने का निश्चय किया। पत्रकार के रूप में उनके पेशेवर जीवन की शुरुआत बेंगलुरू में 'टाइम्स ऑफ इंडिया' से हुई। चिदानंद राजघट्ट से विवाह के बाद  वे कुछ दिन दिल्ली रहीं। इसके बाद पुनः बेंगलूरू लौटकर उन्होंने ९ सालों तक 'संडे' मैग्जीन में संवाददाता के रूप में काम किया। 
उनका अंग्रेजी तथा कन्नड़ दोनों भाषाओं पर पूरा अधिकार था। उन्होंने बेंगलूरू में रहकर मुख्यतः कन्नड़ में पत्रकारिता करने का निर्णय किया। वर्ष २००० ई। में उनके पिता पी। लंकेश की हृदयाघात से मृत्यु हो गई। उस समय गौरी दिल्ली में इनाडु के तेलुगू चैनल में कार्यरत थीं। तबतक वे पत्रकारिता में १६ वर्ष बिता चुकी थीं। पिता की मौत के बाद गौरी ने अपने भाई इंद्रजीत के साथ 'लंकेश पत्रिके' के प्रकाशक मणि से मिलकर उसे बंद करने को कहा। मणि ने इससे इनकार किया और पत्रिका जारी रखने पर उन्हें सहमत किया। गौरी ने लंकेश साप्ताहिक अखबार का संपादन दायित्व सँभाला और इंद्रजीत ने व्यवसायिक दायित्व। किंतु दोनों में २००१ ई। तक आते आते पत्रिका की विचारधारा को लेकर मतभेद पैदा हो गए। २००५ ई। में ये मतभेद खुलकर सबके सामने आ गए जब पत्रिका में गौरी की सहमति से नक्सलवादियों के पुलिस पर हमला करने से संबंधित रपट छपी। १३ फरवरी को पत्रिका के मुद्राधिकार औ्र प्रकाशनाधिकार रखने वाले इंद्रजीत ने नक्सलवादियों का समर्थन करने का आरोप लगाकर यह रपट वापस ले ली। १४ फरवरी को उसने गौरी के खिलाफ पुलिस में प्रकाशन कार्यालय से कंप्यूटर, प्रिंटर और स्कैनर चुराने की शिकायत की। गौरी ने भी इंद्रजीत की बंदूक दिखाकर धमकी देने की शिकायत की। १५ फरवरी को इंद्रजीत ने पत्रकार वार्ता बुलाकर गौरी पर पत्रिका के जरिए नक्सलवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। गौरी ने भी पत्रकार वार्ता कर इसका खंडन किया और कहा कि भाई का विरोध उसके सामाजिक सक्रियतावाद से है। इसके बाद उन्होंने अपनी  कन्न ड़ साप्ताहिक अखबार 'गौरी लंकेश पत्रिके' का प्रकाशन शुरु किया।

५ सितंबर २०१७ को वे जब बंगलौर के राज राजेश्वरी नगर स्थित अपने घर लौटकर दरवाज़ा खोल रही थीं, तब हमलावरों ने उनके सीने पर दो और सिर पर एक गोली मार दी। इससे उनका तत्काल निधन हो गया। बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर सुनील कुमार ने बीबीसी को बताया, मंगलवार शाम गौरी जब अपने घर लौट रही थीं, तब उनके घर के बाहर ये हमला हुआ. ये हमला किस वजह से किया गया, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता. 
गौरी के हत्या कय भारतीय पत्रकारऽन् अउर बुद्धिजीवियऽन् मा बड़ी प्रतिक्रिया मिली। दिल्ली मा पत्रकारय प्रेस क्लब मा जमा होइके एहकय निंदा केहें अव जंतर-मंतर पय प्रतिरोध आयोजित केहें। सामाजिक जुड़ाव साइटों जइसे फेसबुक, ट्वीटर आदि पय भी एह हत्या कय प्रतिक्रिया भय।

गौरी वामपंथी विचारधारा के निकट थीं। वे दक्षिणपंथीयों की कड़ी आलोचक थीं। वे सत्ता विरोधी स्वर का प्रतिनिधित्व करती थीं। वे सरकार से त्रस्त लोगों की पीड़ा को अपनी पत्रिका में स्वर देती थीं। बहुत से लोग गौरी की हत्या का कारण उनके विचारधारात्मक लेखन को मानते हैं। हत्या होने से पहले लिखे गए आखिरी संपादकीय में गौरी ने हिंदुत्ववादी संगठनों एवं संघ की झूठे समाचार बनाने तथा लोगों में फैलाने के लिए आलोचना की थी। उन्होंने लिखा था कि- इस हफ्ते के अंक में मेरे दोस्त डॉ वासु ने गोएबल्स की तरह इंडिया में फेक न्यूज़ बनाने की फैक्ट्री के बारे में लिखा है। झूठ के ऐसे कारखाने ज़्यादातर मोदी भक्त ही चलाते हैं। झूठ के कारखानों से जो नुकसान हो रहा है मैं उसके बारे में अपने संपादकीय में बताने का प्रयास करूंगी. अभी परसों ही गणेश चतुर्थी थी. उस दिन सोशल मीडिया में एक झूठ फैलाया गया। फैलाने वाले संघ के लोग थे.
ये झूठ क्या है? झूठ ये है कि कर्नाटक सरकार जहां बोलेगी वहीं गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करनी है, उसके पहले दस लाख जमा करना होगा, मूर्ति की ऊंचाई कितनी होगी, इसके लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी, दूसरे धर्म के लोग जहां रहते हैं उन रास्तों से विसर्जन के लिए नहीं ले जा सकते हैं. पटाखे वगैरह नहीं छोड़ सकते हैं. संघ के लोगों ने इस झूठ को खूब फैलाया. ये झूठ इतना ज़ोर से फैल गया कि अंत में कर्नाटक के पुलिस प्रमुख आर के दत्ता को प्रेस बुलानी पड़ी और सफाई देनी पड़ी कि सरकार ने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है. ये सब झूठ है.

एह झूठ कय स्रोत जब हम सब पता करय कय कोशिश किहिन तौ ऊ जाइ पहुंचिस POSTCARD.NEWS नाम के वेबसाइट पय. ई वेबसाइट पक्के हिन्दुत्ववादियऽन् कय आय. एहकय काम हर दिन फ़ेक न्यूज़ बनाइके सोशल मीडिया मा फइलाउब अहै 

वह्य समय कय कर्नाटक कय मुखमंत्री सिद्धारमैया कहें, ई काफी दुखद खबरि अहय। गउरी पत्रकार, लेखक अउर विकासशील विचारन कय रहीं। वैं हमेशा कट्टरपंथियऽन् के खिलाफ आवाज़ उठावत रहीं। ई बेहद दुखद अहै कि उनकय हत्या कय दीन गय।

गउरी का अपने क्रांतिकारी पत्रकारिता के कारन कयिउ मुश्किल कय सामना करय का परा। सन 2005 मा पुलिस एकठो नक्सली हमला से जुड़ी रिपोर्ट मा उनकर नाम लिहिस। यहिके बाद उनका लंकेश पत्रिका अउर अपने भाय से अलग होय का परा। वै आपन संघर्ष कन्नहड़ साप्ताहिक अखबार 'गौरी लंकेश पत्रिके' निकारि के जारी रक्खीं।




#Article 68: ग्रामर्षि शिवदास आत्रेय (100 words)


ग्रामर्षि शिवदास आत्रेय अवधी भाषा के साहित्यकार अहै। आत्रेय जी के घर उत्तर प्रदेश क्य सुल्तानपुर जनपद में धनपतगंज बजार के पास अहै। आत्रेय जी एक किसान रहे के बावजूद आपन साहित्य साधना भी करत बाटेन। एनके द्वारा एतना कुल ले साहित्य सृजन किहा बाटइ कि सब एनका ग्रामर्षि कहै लागेन। 

आत्रेय जी के अपने शब्द में ही एहि प्रकार बा-

आप के कुछ रचना के नाम  नीचे दिहा जात बा। एहमन में से शिवशक्ति महाकाव्य आप सब के सेवा में समर्पित बा। हनुमान-चरित के टाइपिंग चलत बा। आवै वाले कुछ महीना में इहौ आप सब के पढ़ै के मिले।




#Article 69: चाणक्य (866 words)


चाणक्य (अनुमानतः ईसापूर्व ३७५ - ईसापूर्व २२५) चन्द्रगुप्त मौर्य कय महामंत्री रहे। वे 'कौटिल्य' नावँ से भी विख्यात हैं। वन नंदवंश कय नाश कईकै चन्द्रगुप्त मौर्य कय राजा बनाईन। वन कय द्वारा रचित अर्थशास्त्र राजनीति, अर्थनीति, कृषि, समाजनीति आदि कय महान ग्रंन्थ है। अर्थशास्त्र मौर्यकालीन भारतीय समाज कय दर्पण मानि जात है।

मुद्राराक्षस के अनुसार इनका असली नाम 'विष्णुगुप्त' रहै। विष्णुपुराण, भागवत आदि पुराण अव कथासरित्सागर आदि संस्कृत ग्रंथन् मा तो चाणक्य कय नाँव आवा ही है, बौद्ध ग्रंथो मा भी एनकय खीसा बराबर मिलत है। बुद्धघोष कय बनावल विनयपिटक कय टीका अव महानाम स्थविर रचित महावंश कय टीका में चाणक्य कय वृत्तांत दिया गवा है। चाणक्य तक्षशिला (याक नगर जवन रावलापिंडी के नगिचे रहै) के निवासी रहैं। इनके जीवन कय घटनन् कय् विशेष संबंध मौर्य चंद्रगुप्त की राज्यप्राप्ति से है। ई उ समय कय एक प्रसिद्ध विद्वान रहैं , ईमा कोउनो संदेह नाहीं है। कहत हैं कि चाणक्य राजसी ठाट-बाट से दूर छोट कय कुटिया में रहत रहैं।

चद्रगुप्त कय साथे चाणक्य कय मैत्री कय खीसा ऐसन है-

पाटलिपुत्र कय राजा नंद या महानंद कय किहाँ कवनो यज्ञ रहा। वहमा ये भी गए औ भोजन कय समय एक्ठु प्रधान आसन पै जाईकै बैठें।चाणक्य कय रङङ करिआ होएक नाते राजा वन्हय ओहँसे उठाई दिहिन । एहपे रीसीआइकय वन इ किरीया खाइन की जब तक नंद खानदान कय नाश नाइ कै देब तब तक आपन चुर्की नाइ बान्हब।अव उही समय राजकुमार चन्द्रगुप्त कय अपने राज्य से निकारा भवा रहा ।  चद्रगुप्त अव चाणक्य मिलीकय म्लेच्छा राजा पर्वतक कय साथे नंद से लडाई किहीन अव नंदन् कय नाश किहिन । नंद कय नाश कय संबंध मा कयु प्रकार कय खीसा है।

वनकय जनम कय बारे में बहुत विद्वानन मा मतभेद है। केहु कय अनुसार वनकय जनम पंजाब कय चणक क्षेत्रमा भवा रहा तव केहु कहा लँय की वनकय जनम दक्खीन भारत मा भवा रहा ।कवनो कवनो विद्वानन् कय इहो विचार है कि वन कांचीपुरम कय रहय वाले द्रविण बाभन रहें अव जीअए-खाए उत्तर भारत मा आए रहें ।कुछ विद्वानन् कय मतानुसार केरल वनकय जनम स्थान बतावा जात है। इही संबंध मा वनकय द्वारा चरणी नदी कय उल्लेख इहै बात कय प्रमाण कय रूप में दै जात है ।
कौटिल्य कय बारे में ई कहि जात है कि वन बड़ा स्वाभिमानी अव क्रोधी स्वभाव कय मनई रहें। एक्ठु किंवदंती कय अनुसार एक दाइ मगध कय राजा महानंद शराध कय अवसर पे कौटिल्य कय अपमानित किहिन रहा। कौटिल्य क्रोध मे वशीभूत होइकय आपन चुर्की खोलिकय इ प्रतिज्ञा लिहिन कि जब तक वन नंदवंश कय नाश नाइ कै दिहैं तब तक वन आपन चूर्की नाइ बन्हिहैं। कौटिल्य कय व्यावहारिक राजनीति में प्रवेश करय कय इहो एक्ठु बड़ा कारण रहा। नंदवंश कय विनाश कय बाद वन चन्द्रगुप्त मौर्य कय राजगद्दी पे बैठय में हर संभव सहायता कीहिन। चन्द्रगुप्त मौर्य गद्दी पे बैठैक  बाद वन्हय पराक्रमी बनावै में औ मौर्य साम्राज्य कय विस्तार करै कै उद्देश्य से वन व्यावहारिक राजनीति में प्रवेश किहिन।

चाणक्य सम्राट् चंद्रगुप्त मौर्य (321-298 ई.) कय महामंत्री रहें। वन चंद्रगुप्त कय प्रशासकीय उपयोग खत्तीर इ ग्रंथ कय रचना कीहीन रहा। इ मुख्यत: सूत्रशैली में लिखा है औ संस्कृत कय सूत्रसाहित्य कय काल औ परंपरा में आवै लायक है। इ शास्त्र बिना कवनो विस्तार कय, समझय औ ग्रहण करै में सरल अव कौटिल्य कय अपनै शब्द में लिखा है।

कौटिल्य राज्य कय तुलना मनई-शरीर से करें हैं। राज्य कय कुल तत्त्व मनई कय शरीर कय अंग जइसन परस्पर सम्बन्धित, अन्तनिर्भर अव मिलि-जुलिकय काम करत हैं ।

जनसंख्या में किसान, मजुरहा अव आर्थिक उत्पादन में योगदान देए वाला प्रजा है। प्रजा कय स्वामिभक्त, परिश्रमी अव राजा कय आज्ञा कय पालन करए वाला होएक चाहि।

कौटिल्य न केवल राज्य के आन्तरिक कार्य, बल्कि वाह्य कार्यों का भी विस्तार से चर्चा किहिन हैं। ई सम्बन्ध मा ऊ विदेश नीति, अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों तथा युद्ध व शान्ति के नियमों का विवेचन किहिन हैं। कूटनीति के सम्बन्धों का विश्लेषण किए खातिर मण्डल सिद्धांत प्रतिपादित किहिन हैं-

मण्डल सिद्धांत
कौटिल्य अपन मण्डल सिद्धांत मा विभिन्न राज्यों द्वारा दूसरे राज्यों के प्रति अपनाई नीति का वर्णन किहिन हैं । प्राचीन काल मा भारत मा अनेक छोटे-छोटे राज्यों का अस्तित्व रहै । शक्तिशाली राजा युद्ध द्वारा अपन साम्राज्य का विस्तार करत रहैं । राज्य कई बार सुरक्षा की खतिर और राज्यों में समझौता भी करत रहैं। कौटिल्य के अनुसार युद्ध व विजय द्वारा अपन साम्राज्य का विस्तार करन वाले राजा को अपने शत्रुओं की तुलना मा मित्रों की संख्या बढ़ावेक चही, ताकि शत्रुअन पर नियंत्रण रखा जा सके। दूसर ओर निर्बल राज्यों का शक्तिशाली पड़ोसी राज्यों से सतर्क रहना चही। उनका समान स्तर वाले राज्यों के साथ मिलकर शक्तिशाली राज्यों की विस्तार-नीति से बचने खतिर याक गुट या ‘मंडल’ बनाना चही। कौटिल्य का मंडल सिद्धांत भौगोलिक आधार पर ऊ दर्शावत् है कि किस प्रकार विजय की इच्छा रक्खै वाले राज्य के पड़ोसी देश (राज्य) ऊकय मित्र या शत्रु हो सकत हैं। ई सिद्धांत के अनुसार मंडल के केन्द्र में याक एक ऐस राजा होत है, जो और राज्यों को  जीतने का इच्छुक होत है, ईका ‘‘विजीगीषु’’ कहा जात है। ‘‘विजीगीषु’’ के मार्ग में आवै वाला सबसे पहिला राज्य ‘‘अरि’’ (शत्रु) तथा शत्रु से लगा हुआ राज्य ‘‘शत्रु का शत्रु’’ होत है, मतलब ऊ विजीगीषु का मित्र होत है। कौटिल्य ‘‘मध्यम’’ व ‘‘उदासीन’’ राज्यों का भी वर्णन किहिन हैं, जो सामर्थ्य होते हुए भी रणनीति में भाग नहीं लेत हैं।




#Article 70: चार्ल्स डार्विन (159 words)


चार्ल्स डार्विन (१२ फरवरी, १८०९ – १९ अप्रैल १८८२)  क्रमविकास कय  सिद्धान्त कय  प्रतिपादन किहिन । वनकय  शोध आंशिक रूप से १८३१ से १८३६ माँ एचएमएस बीगल पे वानकय समुद्र यात्रा कय  संग्रह पे  आधारित रहा। यहँमा से कईउ संग्रह यह  संग्रहालय महिया अभिनो भी उपस्थित अहैं। डार्विन महान वैज्ञानिक रहेन् - आज जवन  हम सजीव चीज देखत अहन, वनकै उत्पत्ति तथा विविधता कय  समझय  कय  लिए वनका विकास कय  सिद्धान्त सर्वश्रेष्ठ माध्यम बनि चुका अहै।
	
संचार डार्विन कय  शोध कय  केन्द्र-बिन्दु रहा। वनकय  सर्वाधिक प्रसिद्ध पुस्तक ऑरिजिन ऑफ स्पीसीज़ (Origin of Species) प्रजाति कय  उत्पत्ति सामान्य पाठक पे केंद्रित रहा। डार्विन चाहत रहे   कि वनकय  सिद्धान्त यथासम्भव व्यापक रूप से प्रसारित होय ।

डार्विन कय  विकास कय  सिद्धान्त से हमन कय  ई समझय  में मदद मिलत अहै कि कवने  प्रकार विभिन्न प्रजाति एक दूसरे कय  साथे जोङा  अहैं। उदाहरणतः वैज्ञानिक यह समझय  कय  प्रयास करत   अहैं कि रूस कय  बैकाल ताल  महिया प्रजाति कय  विविधता कैईसै विकसित भय।




#Article 71: चेक रिपब्लिक (112 words)


चेक गणराज्य (चेक : Česká republika or Česko) यूरोप महाद्वीप कय यक्ठु देश होय। यकर उत्तर पूरुब सीमा पय पोलैन्ड, पच्छु सीमा पय जर्मनी, दक्खिन मे ऑस्ट्रिया औ पूरुब मे स्लोवाकिया हय। यकर राजधानी प्राग होय। यकर मुख्य- औ राजभाषा चेक भाषा होय।

चेक गणराज्य बीच यूरोप मा हय। इ कुल ओर से ज़मीन से घेरान हय (मतलब यकरे कवनौ सीमा पय समुन्दर या महा समुन्दर नाइ हय)। यकर सीमा पोलैंड, जर्मनी, ऑस्ट्रिया औ स्लोवाकिया से सटा हय। यकर मुख्य तीन भाग हँय बोहीमिया, मोराविया औ साइलीसिया। देस कय कुल क्षेत्रफल 30,450 वर्ग मील हय, जवने मे से 20,367 वर्ग मील बोहीमिया मा हय। देस कय राजधानी प्राग बीच बोहीमिया में हय।




#Article 72: जर्मनी (156 words)


जर्मनी यूरोप कय एक्ठु देस होय । एकर राजधानी बर्लिन होय।जर्मनी कय उत्तरी सीमा पय उत्तरी समुन्दर, डेनमार्क औ बाल्टिक समुन्दर, पूरुब मा पोलैंड औ चेक गणराज्य, दखिन मा आस्ट्रिया औ स्विट्ज़रलैंड औ पच्छु मा फ्रांस, लक्सेम्बर्ग, बेल्जियम औ नीदरलैंड है।

जर्मनी मा कुल सोरह राज्य हैं। इनका ४९३ ज़िलऽन मा बाँटि गा है।

जर्मनी मा कयु बड़ा नगर हैं |

जर्मनी बिच यूरोप मा है, एकर कुल क्षेत्रफल ३५७,०२१ कि.मी.२ है|
भौगोलिक नजर से जर्मनी कय निचे दिहा विभाग मा बाँटि गा है :

पूरुब जर्मनी कय मनई ढेर कइकै समजातीय हैं, लेकिन स्वैबियन (Swabians), थुरिंजियन (Thuringians) सैक्सनियन (Saxonians), प्रशियन (Prussians) कुल मा कुछ परस्पर भेद है। पच्छु मा लगभग 99% मूल जर्मन हैं। अल्पसंख्यन् मा खाली डेनी (Danes) हैं। जर्मन भाषा (जर्मन:deutsch डॉइच) राजभाषा होय । अलग अलग भागऽन मा प्रयोग होय वाल बोलि जर्मन मे परत हैं ।
संविधान से धार्मिक स्वतंत्रता मान्य है। ढेर कइकै रोमन कैथोलिक औ प्रोटेस्टैंट लोग बसत हैं। 
 




#Article 73: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (1090 words)


जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, () संक्षेप में जे॰एन॰यू॰, नई दिल्ली के दक्षिणी भाग में स्थित केन्द्रीय विश्‍वविद्यालय है। यह मानविकी, समाज विज्ञान, विज्ञान, अंतरराष्ट्रीय अध्ययन आदि विषयों में उच्च स्तर की शिक्षा और शोध कार्य में संलग्न भारत के अग्रणी संस्थानों में से है। जेएनयू को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NACC) ने जुलाई 2012 में किये गए सर्वे में भारत का सबसे अच्छा विश्वविद्यालय माना है। NACC ने विश्वविद्यालय को 4 में से 3.9 ग्रेड दिया है, जो कि देश में किसी भी शैक्षिक संस्थान को प्रदत उच्चतम ग्रेड है समय-समय पर लोग इसे 'घातक राजनीति का अड्डा', 'देशद्रोही गतिविधियों का केन्द्र', 'दरार का गढ़' आदि कहते रहे हैं। इसके छात्रों और अध्यापकों पर भारत में नक्सवादी हिंसा का समर्थन करने और भारतविरोधी कार्यों में संलिप्त रहने के आरोप भी लगते रहे हैं।

छात्रों के एक समूह ने 9 फरबरी 2016 को 2001 भारतीय संसद हमले के दोषी अफज़ल गुरु की फांसी की तीसरी बरसी के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का नाम कश्मीरी कवि आगा शाहिद अली के काव्य संग्रह बिना डाक-घर वाला देश (जो जम्मू कश्मीर के एक हिंसक समय के बारे में है) पर रखा गया था।

इस कार्यक्रम के छात्र आयोजकों ने सारी परिसर में पोस्टर लगाए थे जिनमें लिखा था कि सभी (हिन्दी अनुवाद) 9 फरबरी, मंगलवार को साबरमती ढाबे में ब्राह्मणवादी विचारधारा के विरुद्ध, अफज़ल गुरु और मकबूल भट्ट की न्यायिक हत्या (उनके अनुसार) के विरुद्ध, कश्मीरी लोगों के आत्मनिर्णय के लोकतांत्रिक अधिकार के लिए संघर्ष के समर्थन में कवियों, कलाकारों, गायकों, लेखकों, विद्यार्थियों, बुद्धिजीवियों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं के साथ सांस्कृतिक संध्या, और कला और फ़ोटो प्रदर्शनी पर आमंत्रित हैं।

जे॰एन॰यू॰ छात्र संघ के संयुक्त सचिव सौरभ कुमार शर्मा (जो एबीवीपी से है) ने इसकी शिकायत करते हुए विश्वविद्यालय के उप-कुलाधिपति जगदीश कुमार को एक पत्र लिखा। इस पत्र में उसने लिखा कि ये गतिविधियाँ परिसर की शांति और सामंजस्य को खत्म कर देगी, और कार्यक्रम के आयोजक छात्रों को निस्सारित करने का अनुरोध किया।

विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने कार्यक्रम के प्रकार की गलतबयानी का हवाला देते हुए इसे अनुमति नहीं दी। विश्वविद्यालय के उप-कुलाधिपति प्रोफेसर जगदीश कुमार ने कहा: हिन्दी अनुवाद: हम ने सुना था कि कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम है पर हमें बाद में पता चला कि ये एक विरोध मार्च है। हमें यह पोस्टरों से पता चला, पर इसके बारे में हम से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। इसलिए विश्वविद्यालय में शांति का माहौल बनाए रखने के लिए हम ने इसे रद्द कर दिया।

इसके बावजूद आयोजकों ने कार्यक्रम जारी रखने का फैसला किया और विरोध मार्च की जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम, और मुद्दे पर कला और फ़ोटो प्रदर्शनी आयोजित करने का फैसला किया।

कथित तौर पर कार्यक्रम के दौरान कुछ छात्रों ने भारत विरोधी नारे (जैसे: भारत की बर्बादी तक, जंग लड़ेंगे, जंग लड़ेगे / 'कितने अफजल मारोगे, हर घर से अफजल निकलेगा' / 'पाकिस्तान जिंदाबाद') लगाए। इस बात से गुस्सा होकर एबीवीपी के सदस्य उप-कुलाधिपति के कार्यालय के बहार इकट्ठा हो गए और राष्ट्र विरोधी गतिविधि करने वाले छात्रों के निष्कासन की मांग में नारे लगाने लगे।

इस राष्ट्र विरोधी नारेबाजी की आम जनता ने बहुत निंदा की क्योंकि जे॰एन॰यू॰ के छात्रों को पढाई में करदाता के पैसे से भरी सब्सिडी मिलती है। इस कार्यक्रम और उसमें लगे नारों पर भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रविरोधी नारे लगाने वालों को किसी भी कीमत पर माफ नहीं किया जाएगा, जबकि मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने भी कहा कि भारत माता का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कुमार विश्वास ने कहा कि देशद्रोहियों पर केन्द्र कड़ी कार्यवाही करे।  हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के एक पूर्व सहायक मंत्री ट्वीट कर वेश्याओं को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्राओं से बेहतर बताया और कहा कि वेश्यायें केवल देह बेचतीं हैं जबकि इन छात्राओं ने तो देश ही बेच दिया।

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्विटर पर लिखा (हिन्दी अनुवाद) अगर कोई भारत में रहते हुए भारत विरोधी नारे लगता है और भारत की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देता है, तो उसे सहन नहीं किया जाएगा।

इस विवाद के कारण राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के ५४वें बैच के अधिकारियों ने अपनी डिग्रियां वापस देने को कहा है। कुछ समाचार पत्रों के अनुसार इन अधिकारियों का कहना है कि इन्हें यह सब सुनने पर काफी खराब लग रहा है इस वज़ह से डिग्रियां वापस देने का एलान किया है।

भाजपा सांसद महेश गिरी की शिकायत पर 12 फरबरी 2016 को छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उस पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 124A के तहत देशद्रोह का आरोप लगाया गया। इस धारा में व्यक्ति को अधिकतम आजीवन कारावास की सजा मिल सकती है।

अपनी गिरफ़्तारी के कुछ घंटे पूर्व बनी वीडियो में कन्हैया कुमार कहता है: हमको देश भक्ति का सर्टिफिकेट आर॰एस॰एस॰ से नहीं चाहिए। वो आगे कहता है: हम हैं इस देश के, और इस मिट्टी से प्यार करते हैं। इस देश के अन्दर जो 80 प्रतिशत गरीब अवाम है, हम उसके लिए लड़ते हैं। हमारे लिए यही देशभक्ति है। हमें पूरा भरोसा है अपने देश के संविधान पर। और हम इस बात को पूरी मजबूती से कहना चाहते हैं कि इस देश के संविधान पे अगर कोई ऊँगली उठाएगा, चाहे वो ऊँगली संघियों का हो, चाहे वो ऊँगली किसी का भी हो, उस ऊँगली को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।

एमनेस्टी इण्टरनेशनल ने छात्रों की गिरफ़्तारी को अनुचित कहकर उसकी आलोचना की। अपनी फेसबुक टाइमलाइन पर एमनेस्टी इण्टरनेशनल ने लिखा हिन्दी अनुवाद: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार अपमान या परेशान करने वाले भाषण पर भी लागु होता है। भारत का विद्रोह कानून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतरराष्ट्रीय मानकों के उलट है, और इसे निरस्त किया जाना चाहिए।

अगले दिन पुलिस ने 7 छात्रों को हिरासत में ले लिया।

इन गिरफ्तारियों की विपक्ष की पार्टियों ने बहुत आलोचना की। इसके कई नेता जे॰एन॰यू॰ पहुंचे और उन्होंने पुलिस कारवाई का विरोध कर रहे छात्रों का समर्थन किया। इसी दौरान केंद्र गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने दोहराया कि हालांकि छात्रों को परेशान नहीं किया जाएगा पर दोषियों को बख्शा भी नहीं जाएगा। गृह राज्‍यमंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि जे॰एन॰यू॰ को देशद्रोही गतिविधियों का केंद्र नहीं बनने दिया जाएगा।

विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने गिरफ्तारियों को अत्यधिक पुलिस कार्रवाई कह कर उनकी आलोचना की। ए॰आई॰एस॰एफ॰ के नेता रामकृष्ण ने कहा जे॰एन॰यू॰ का भगवाकरण करने का निरंतर प्रयास हो रहा है, और कन्हैया वामपंथियों और दूसरों की लड़ाई में प्यादा बन गया है। ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन के नेता प्रह्लाद सिंह ने कहा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को नाथूराम विनायक गोडसे के समर्थकों में कुछ देशद्रोही नहीं दिखाई दिया, पर कन्हैया को कुछ न कहने के बावजूद गिरफ्तार कर लिया गया।




#Article 74: जाम्बिया (125 words)


ज़ाम्बिया गणराज्य दक्खिनी अफ्रीका मा एक्ठु भुइं से बंधा देश आय। एह कय सीमा उत्तर मा कांगो लोकतान्त्रिक गणराज्य, उत्तर-पुरुब मा जिम्बाब्वे अउर बोत्सवाना, दक्खिन म नामीबिया अव पच्छूँ मा अंगोला से मिलत हय। देश कै रजधानी लुसाका देश के दक्खिन-मध्य मा बाय। देश कय आबादी दक्खिन म राजधानी लुसाका अउर उत्तर-पच्छूँ कै कांसे कय खदान के एहर ओहर सिमटी अहै। समाजवादी विचारधारा वाली सरकार कय लंबे समय तक कय राज कै नतीजा आज जाम्बिया का भुगतय का परत अहै। विकास दर म पिछरि गा हय, एहके अलावा एड्सव कय समस्या देश मा जकरेटे अहै। एक आँकडा लगावा गा है कि जवान आबादी कै 10 प्रतिशत एड्स के चपेटे मा हय। देश कै 55 प्रतिशत अबादी 2 डालर रोजाना से कम म जिन्दगी खेवति अहै।




#Article 75: जॉर्ज वॉशिंगटन (171 words)


जार्ज वाशिंगटन (अंग्रेज़ी: George Washington) (जनम: २२ फरवरी, १७३२ मउत: १४ दिसंबर १७९९) संयुक्त राज्य अमेरिका कय पहिला राष्ट्रपति रहें। यन अमेरिकी सेना कय अगुवाई करिन अव ब्रिटेन कय ऊप्पर अमरीकी क्रान्ति (१७७५-१७८३) में जीत पाइन। यन १७८९ मा अमेरिका कय पहिला राष्ट्रपति चुनि गँय। 

आजौ अमेरिका मा यन कय नाँव कय सिक्का चलत अहै।

यन कय अम्मा कय नाँव मैरी बॉल औ पिता कय नाँव औगस्टाइन वॉशिंगटन रहा। यन दुनौ जने यक स्थानीय विश्वविद्यालय में पढावत रहैं। बतौर लरिका, वॉशिंगटन  बहुत लम्मा समय तक कवनो बिद्यालय नाई गँय।
जॉर्ज वाशिंगटन कय बारे में यक्ठु मसहूर लेकिन झूठ खीसा है कि यक दाँई यन जब छोट रहें तब अपने पिता कय चेरी पेड़ कय काट दिहिन। जब यन कय दादा पूछिन तौ यन झूठ नाईं बोलिन औ सही-सही बताईन की पेड़ ओनही काटें हैँ। ई खीसा ई बतावे कय लिए कहि गा है औ कहि जात है की वॉशिंगटन केतना ईमानदार रहें। लेकिन मज़ा कय बात ई है कि ई किहानी सही नाई हैं औ ई खीसा पार्सन वीम्स गढे हँय।




#Article 76: जोन गुटेन्बर्ग (191 words)


योहानेस गुटेनबर्ग (जर्मन: Johannes Gutenberg, 1398-1468) टाइप कय माध्यम से मुद्रण विद्या कय आविष्कारक होयँ। वे जर्मनी कय मेंज कय रहे।वन सन १४३९ मा प्रिंटिंग प्रेस कय रचना कीहिन जवने कय एक बडहन् आविष्कार मान जाता है।

गुटनबर्ग कै टाइप-छपाई कै आविष्कार करै से पहिले छापय कै सारा काम ब्लाक मा अक्षर खोदिकै कइ जात रहा । गूटेनबर्ग कै जनम जर्मनी कै मेंज नाँव कै जगह मा भवा रहा। 1420 ई. म वन्कै परिवार कै राजनीतिक अशांति कै नाते आपन सहर छोड़ेक परा ।वन 1439 ई. कै आसपास स्ट्रासबोर्ग मा आपन छपाई मसीन कै परीक्षण किहिन। काठ कै टुकड़न् पै ओन उल्टा अक्षर खोदिन। फिर ओन शब्द औ वाक्य कै रूप देवै खर्तिन छेद कै माध्यम से एक्कैम जोड़िन औ अइसय तैयार भवा बडा ब्लाक कै करिया मसी मा बोरिकय पार्चमेंट पै दाब दिहिन। अइसय छपाई मा सफलता पाइन। बाद मा ओन्हय इ तरिका मा कुछ सुधार किहिन।
इ तरिका से पहिला छापल किताब ‘कांस्टेंन मिसल’ होय जवन 1450 कै आस पास छापि गवा रहा । ओकर खाली तीन प्रति उपलब्ध है। एक्ठु म्युनिख (जर्मनी) मा, दूसरा ज्यूरिख (स्विटज़रलैंड) मा औ तीसरा न्यूयार्क मा। एकरे अलावा एक्ठु बाइबिल गुटेनबर्ग छापे रहें।




#Article 77: जोसेफ स्टालिन (377 words)


जोज़ेफ विसारिओनोविच स्टालिन (रूसी : Ио́сиф Виссарио́нович Джугашвили) (1878-1953) सोवियत संघ कय १९२२ से १९५३ तक नेता रहें। स्तालिन कय जनम गोरी जॉर्जिया में भवा रहा।

स्टालिन कय जनम जॉर्जिया कय गोरी नाँव कय जगह पय भवा रहा। वनकय दादा माई निर्धन रहें। जोज़फ़ गिर्जाघर कय स्कूल में पढ़य से ढेर आपन सङरिहन कय साथे लड़ेक औ घूमैक काम ढेर किहिन। जब जॉर्जिया में नँवा मेर कय जूता बनै लाग तौ जोज़फ़ कय दादा तिफ्लिस चला गँय। वँह जोज़फ़ कय गीत औ साहित्य में ढेर मन लागै लाग। इ समय तिफ्लिस में बहुत कुल क्रांतिकारी साहित्य चोरी से बाँटि जाय लाग। जोज़फ़ इ किताबिन कय बड़ा चाव से पढ़ै लागे। 19 साल कय अवस्था में वन मार्क्स कय सिद्धांतन पय चला एक्ठु गुप्त संस्था कय सदस्य बने। 1899 ई. में इ दल से प्रेरणा लइकय काकेशिया कय मजदूर हड़ताल करै लागे। सरकार इ मज़दूरन कय दबावै लाग। 1900 ई. में तिफ्लिस कय दल फिर क्रांति कय सुरुवात किहिस। यकरे नाते जोज़फ़ कय तिफ्लिस छोड़िकै बातूम भागैक परा। 1902 ई. में जोज़फ़ कय ज़ेलिम डारि दिहिन। 1903 से 1913 कय बीचेम ओन्है छ दांइ साइबेरिया भेजि गै। मार्च 1917 में कुल क्रांतिकारिन कय छोड दिहिन। स्टालिन जर्मन सेनन कय हराइकै दुई दांइ खार्कोव कय स्वतंत्र किहिन औ ओन्है लेनिनग्रेड से खदेर दिहिन।

स्टालिन साम्यवादी नेता कय साथे वन राष्ट्रीय तानाशाह भी रहें। 1936 में 13 रूसी नेतन पय स्टालिन कय मारैक षड्यंत्र रचैक आरोप लगाइ गै औ ओन्है प्राणदंड दइ गै। अइसय स्टालिन आपन राहि साफ कइ लिहिन। 1937 तक मजूरहा संघ, सोवियत औ सरकार कय कुल विभाग ओनकय तरे आइ गै। कला औ साहित्य कय विकास पय स्टालिन कय पूरा नियंत्रण रहा।

फरवरी, 1945 में याल्टा सम्मेलन में रूस कय सुरक्षा परिषद में निषेधाधिकार (वीटो पॉवर) दइ गै। चेकोस्लोवाकिया से चीन तक रूस कय नेतृत्व में साम्यवादी सरकार बनाइ गै। फ्रांस औ ब्रिटेन कय शक्ति तनि कम होइ गै। 1947 से  रूस औ अमरीका में शीत युद्ध सुरु होइ गवा। साम्यवाद कय फइलैस रोकैक नाते अमरीका यूरोपीय देशन कय आर्थिक सहायता देवैक निर्णय किहिस। उहै साल रूस अंतरराष्ट्रीय साम्यवाद संस्था कय फिर से जिआइस। स्टालिन कय नेतृत्व में सोवियत रूस कुल क्षेत्रन में बहुतै ढेर सफलता पाइस। चिजन कय उत्पादन बहुतै बाढ़ औ कुल नागरिकन कय शिक्षा, घर, मजुरी जइसन जिन्दगि कय कुल जरुरि सुविधा मिलै लाग।




#Article 78: टर्की (721 words)


टर्की या तुर्की (तुर्क भाषा: Türkiye उच्चारण: तुर्किया) यूरेसिया कय यक्ठु देस होय। यकर राजधानी अंकारा होय। यकर मुख्य- औ राजभाषा तुर्की भाषा होय। इ दुनिया कय यकलौता मुस्लिम बहुमत वाला देस होय जवन कि धरमनिरपेच्छ हय। इ यक लोकतान्त्रिक गणराज्य होय। यकर एसियाई हिस्सा कय अनातोलिया औ यूरोपीय हिस्सा कय थ्रेस कहत हँय।
स्थिति : 39 डिग्री उत्तरी अक्षांश औ 36 डिग्री पूरुबी देसान्तर। यकर कुछ जमिन यूरोप मा औ ढेर जमिन एसिया मा परत हय इहिकै नाते यका यूरोप औ एसिया कय बीचेक 'पुल्ह' कहि जात है। इजीयन समुन्दर (Aegean sea) कय पातर कय पानी कय भाग बीच मा आवैक नाते से इ पुल्ह कय दुई भाग होइ जात हँय, जवने कय यूरोपीय टर्की औ एसियाई टर्की कहत हँय। टर्की कय इ दुनौ भाग बॉसपोरस कय जलडमरू, मारमारा समुन्दर औ डारडनेल्ज से यक दूसरे से अलग होत हँय।

टर्की गणतंत्र कय कुल क्षेत्रफल 2,96,185 वर्ग मील हय जवने म यूरोपीय टर्की (पूरुबी थ्रैस) कय क्षेत्रफल 9,068 वर्ग मील औ एसियाई टर्की  (ऐनाटोलिआ) कय क्षेत्रफल 2,87,117 वर्ग मील हय। यकरे तरे 451 दलदली जगह औ 3,256 नोनखार पानी कय ताल हँय। पूरुब मा रूस औ ईरान, दक्खिन कय ओर इराक, सीरिया औ भूमध्य समुन्दर, पच्छु म ग्रीस औ बुल्गारिया औ उत्तर मा करिया समुन्दर यकर राजनीतिक सीमा बनावत करत हिं।

यूरोपीय टर्की - तीनकोनहा प्रायद्वीपी प्रदेस होय जवने कय पुनुई पूरुब मा बॉसपोरस का मोहाने पय हय। यकरे उत्तर औ दक्खिन दुनौ ओर पहाड माला फइली हय। बीच मा निचला मैदान मिलत हय जवने से होइकै मारीत्सा औ इरजिन नदि बहत हिं। यहि भाग से होइकै इस्तैस्म्यूल कय संबंध पच्छुँक देसन से हय।

एशियाई टर्की - यका तीन प्राकृतिक भागन मा बाँटि गा हय: 1. उत्तर मा करिया समुन्दर कय किनारे पय पॉण्टस पहाड, 2. बीच मा ऐनाटोलिया औ आरमीनिया कय निचला भाग, 3. दक्खिन मा टॉरस औ ऐंटिटॉरस पहाड जवन भूमध्य समुन्दर कय किनारे तक फइला हय।

दुनौ समुन्दर कय किनारे पय मैदान कय पातर पट्टि हँय। पच्छुँ मा इजीयन औ मारमारा समुन्दरन कय किनारे पय आस किहा कम ऊँच पहाड़ मिलत हँय, जवने से बीच कय पठार तक आवाजाहि सहज हय। उत्तर से दक्खिन कय ओर आवै पय करिया समुन्दर कय किनारे पय पातर कय मैदान हय जहाँ से एक से लइकै दुई मील तक ऊँच पॉण्टस पहाड एकाएक उठा हँय। इ कुल पहाड कय पार करैक बाद ऐनाटोलिया कय लम्मा पठार हँय। यकरे दक्खिन टॉरस कय ऊँच पहाड माला फइला हय औ दक्खिन जाय पय भूमध्य समुन्दर किनारे कय निचला मैदान हय। एनाटोलिया पठार मा टर्की कय एक तिहाई भाग सामिल हय।

तुर्की मा ढेर मनई तुर्की भाषा बोलत हँंय। इ तुर्की भाषा समूह होय, जवन कयु अउर अइसन अज़रबैजानी औ तातारी कय रूप मा एसिया भर बोलि जाय वाली भाषन मा सामिल हय । तुर्की भाषा बीच एसिया से आ हय, लेकिन अब इ बीच एसिया मा बोलि जाय वाली भाषन से तनि अलग हय।

तुर्की मा अल्पसंख्यक जइसै अरबी, कुर्द, अर्मेनियाई, यूनानी या लादीनो, औ कयु दूसर भाषा बोलि जात हय।

कयु मनई अंग्रेजिवौ, जवन मध्यम औ उच्च विद्यालय मा सिखाय जात हय बोलत हँय।

तुर्की कय साक्षरता दर अबहिन 95% है। तुर्की कय मनईन कय 12 साल के ताईं स्कूल जाब जरुरी हय।

इस्तांबुल विश्वविद्यालय तुर्की कय पहिला विश्वविद्यालय होय। इ 1453. मा बना रहा ।
हुवाँ कै राष्ट्रीय शिक्षा मंत्रालय कय अनुसार 2002 मा तुर्की मा 6065 उच्च विद्यालयों रहें। 2011 कय स्थिति अनुसार तुर्की मा कुल 166 विश्वविद्यालयों हँय 

तुर्की कय राजधानी औ दूसरा सबसे बड़ा सहर इस्तांबुल होय।इ दुई अलग-अलग महाद्वीपन पै हय। तुर्की कय ७ क्षेत्र औ ८१ प्रांत मा बांटि गा हय। हरेक प्रांत कय आपन छोट कय सरकार हय, लेकिन वे खाली छोट-छोट चिजन कय बारे मा निर्णय लइ सकत हँय: अंकारा मा सरकार जरुरी मुद्दन कय फैसला करत हय। हरेक प्रांत कय जिलन मा बांटि गा हय।

एजियन क्षेत्र
अफ्योंकरहिसार
ऐदिन
देनिज़ली
इज़मिर
कुटहया
मनिसा
मुग्ला
उशाक

काला सागर क्षेत्र

अमास्या
अर्तविन
बेबर्त
कोरुम
गिरेसुन
गुमुशाने
ओर्दु
रिज़े
सम्सुन
सिनोप
तोकात
त्राब्जोन
बार्तिन
बोलू
दुज्के
काराबुक
कस्तमोनू
ज़ोंगुलडक

मध्य अनातोलियाई क्षेत्र

अक्साराय
अंकारा
शांकिरि
एस्किसेहर
कारमान
कायसेरी
किरिक्काले
किरसेहर
कोन्या
नवसेहर
निगडे
सिवास
योज़्गत

पूर्वी अनातोलिया

अग्री
अर्दहान
बिंगोल
बितलिस
एलाज़िग
एर्ज़िंकान
एर्ज़ुरम
हक्कारी
इग्दीर
कार्स
मलात्या
मुस
तुन्सेली
वान

मारमरा क्षेत्र

बालिकेसिर
बिलेसिक
बुरसा
चानकले
एदिर्ने
इस्ताम्बुल
किरक्लालेरी
कोकाएली
साकर्या
तेकिरडाग
येलोवा

भूमध्य सागरीय क्षेत्र

अदन
अन्ताल्या
बुरदुर
हताय  (सीरिया के साथ विवदित)
इस्पार्टा
कड़ांमनास
मर्सिन
ओस्मानिये
अदियमान
बतमान
दियारबकिर
गज़ियान्तेप
किलिस
मर्दिन
सनलिउर्फ़
सीइर्त
सिरनाक




#Article 79: डा. राम निवास पाण्डेय (182 words)


डा. राम निवास पाण्डेय अवधीभाषी विद्वान, प्राध्यापक, आन्वेषक एवं इतिहासविद् रहे।
वहाँ जीवन पर्यन्त शिक्षण पेशामे समर्पित रहे। वहा त्रिभुवन विश्वविद्यालयमे इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विषयके अध्ययन, अनुसान्धान ‌और अध्यापनके काममे समर्पित रहे।

त्रिभुवन विश्वविद्यालयके सेवा अवधिमे चार विधा इतिहास, संस्कृति, पुरातत्व, बुद्ध अध्ययन के अध्ययन अध्यापनके लिए अलग अलग विभाग स्थापना किये।
वहाँके जनम कपिलवस्तु जिला पिपरा गाउँविकास समितिके गौरा गावमेँ इस्वी सम्बत १९३९ जनवरी १२ में जन्मे रहे।

नेपाल पुरातात्विक दृष्टिकोणसे बहुत महत्वपूर्ण देश होइ। विश्वकय सबसे पुरान मानव निमर्मित हतियारके खोज किहा गय रहा। यी बर्दिया जिलाके दाव तालसे मिला रहा।
यही किसिमसे दाङ जिलासे मध्य पाषाण अव नव पाषाण कालीन सामग्री प्राप्त किहे रहे। 

पाण्डेयजी नेपालकै प्राचीन इतिहास सम्बन्धि प्रमाणित ग्रन्थ लिखिन।

अपने जीवनकालमे आप नेपाल राजकीय प्रज्ञा प्रतिष्ठान कय आजीवन सदस्य रहे। युनेस्को, गुठी संस्थान, सांस्कृतिक संस्थान कय सञ्चालक लगायत अन्य संस्था ओर अवधि सांस्कृतिक विकास परिषद् स्थापक सदस्य रहे।

अपने जीवन कालमे आप गोरखा दक्षिणबाहु दोस्रो, राष्ट्रिय प्रतिभा पुरस्कार, नूर गंगा प्रतिभा पुरस्कार, महेन्द्र प्रज्ञा पुरस्कार आदि पदक अब विभूषणसे सम्मानित भवा गय रहा।

डा पाण्डेय कय मृत्यु विक्रम सम्बत २०६१ साल मंसीर १४ गते भय।




#Article 80: तिनछठ्ठी (157 words)


 

तिनछ्ठ्ठी पुजा भादौ अन्हियार पाख छ्ठ्ठी तिथि मे किहा जात है। छ्ठ्ठी तिथि मे मनावैके नाते यकर नाव  तिनछठ्ठी भा है।यी तिउहार अवध क्षेत्र कै लडिकोर मेहरारु लोगन कै जादा महत्वपुर्ण तिउहार होय।यहि दिने भिन्नहियै नहाय कय महुवा कै द्तुईन कैकय  व्रत बैठ्त ही।जङगल से लाये परास कै पाता, महुवा कै पाता, कुश औ गायके गोबर से घरमे कोहबर बनावा जात है।वमहा गौरी औ गणेश कै चित्र बनावा जात है।वहि चित्र मा छ ठु मुड होत है।उ तिथि कै प्रतीक होत हैं।गणेश औ गौरी मह्तारी औ बेट्वा कै प्रतीक होत है।भुइ पर बनाये यहि चित्र का हरदी से रंगा दुई कपडा से ओढावा जात है।यहि दिन परास कै पाता मे तिन्नी कै चाउर , चना,दहि,महुवा रखिकै छ कुशमे गाठ बान्ही कै धूप ,दीप ,सिन्दूर से पुजा किहा जात है।ब्रतालु मेहरारु लोग पुजा के बाद तिन्नी कै चाउर कै भात औ  चौराई कै साग कै पारन करत ही।यी व्रत बेट्वा कय लम्मा आयु के  खातिर मनावा जात है।




#Article 81: तुलसीदास (138 words)


तुलसीदास कय   जन्म सावन  कय शुक्ल पक्ष सप्तमी मे  वर्तमान भारत कै उत्तरप्रदेश कै चित्रकूट मे भए रहा । वन हिन्दु कै प्रसिद्ध ग्रन्थ रामचरितमानस कै  रचियता होयँ ।
उनका जन्म राजापुर गाँव (वर्तमान बाँदा जिला) उत्तर प्रदेश में भवा रहै। अपने जीवनकाल मा ऊ १२ ग्रन्थ लिखिन्। ऊ संस्कृत विद्वान होने के साथ ही हिन्दी भाषा के प्रसिद्ध और सर्वश्रेष्ठ कवियन् मा एक माना जात हैं। श्रीरामचरितमानस वाल्मीकि रामायण का प्रकारान्तर से ऐसन अवधी भाषान्तर अहै जीमा अन्य भी कयु कृतिन् से महत्वपूर्ण सामग्री समाहित कई गय रहा। रामचरितमानस का समस्त उत्तर भारत मा बड़े भक्तिभाव से पढ़ा जात् है। ईके बाद विनय पत्रिका उनका एक अन्य महत्वपूर्ण काव्य माना जात है। त्रेता युग के ऐतिहासिक राम-रावण युद्ध पे आधारित वनके प्रबन्ध काव्य रामचरितमानस कय विश्व के १०० सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय काव्यन् मा ४६वाँ स्थान दिया गवा है।




#Article 82: दक्खिन अमेरिका (170 words)


दक्खिन अमेरिका (अंग्रेज़ी:) नँवा दुनिया कय एक्ठु महादीप होय। एकरे पच्छु ओर अटलांटिक महासागर, पच्छु ओर प्रशांत महासागर अव दक्खिन ओर दक्खिनी महासागर है जबकि उत्तर ओर ई पनामा थलडमरू से उत्तर अमेरिका से जोडान अहै। 

अमेजन  क्षेत्र मा साल भर गर्मी होत हय । हिँया ओसहा(हुय्मिड) हवापानी होय  । भूमध्य रेखीय क्षेत्र होयक नाते घनघोर बरखा होत हय औ बाढि आवत हय । ओइसय महादेश कय किनारी जगहन मा भि सामुद्रिक प्रभाव से साल भर बरखा होत हय । इ महादेश कय बीच कय जगह मा  अनिश्चित बरखा होत हय । इ जगहन मा सूखा ढेर परत हय । यकरे पुरुबी जगहन मा बेमौसमी बरखा औ बहुतै गर्मी होत हय । हिँया हरदम आन्हि बयार आवा ला।

हिँया स्पैनिश औ पोर्चुगिज भाषा ढेर बोलि जात हय जवने कय बोलय वालन कय गिन्ती लगभग २० करोड हय । स्पैनिश ढेर देस कय राजभाषा होय । पोर्चुगिज ब्राज़िल कय राजभाषा होय । डच़ सुरिनाम कय राजभाषा होय ।गयाना कय राज़भाषा अङरेज़ी होय ।४

लगभग ९०% मनई क्रिश्चियन हँय (८२% रोमन कैथोलिक)




#Article 83: दक्षिण त्रिपुरा जिला (666 words)


दक्खिन त्रिपुरा जिला  भारतीय राज्य त्रिपुरा कय एक जिला होय। जिला कय मुख्यालय बेलोनिया होय। ऐतिहासिक दृष्टि से भी ई स्थान काफी महत्वपूर्ण अहै। त्रिपुरा सुंदरी मंदिर के बरे प्रसिद्ध एह जगह पय अन्य पर्यटन स्थल जइसे शिव बरी, भुवनेशवरी मंदिर, देवतामुर अउर तीर्थमुख आदि भी विशेष रूप से प्रसिद्ध अहै। एह कारन से ई स्थान धार्मिक दृष्टि से काफी महत्व रक्खत है। काफी संख्या मा पर्यटक हियाँ आउब पसंद करत हैं।

डक्खिन त्रिपुरा कय जिला मुख्यालय उदयपुर मा स्थित अहै। यह जिला दो प्रमुख पर्वतों बारामुरा देवतामुरा अव अथरमुरा-कलारी के बीच मा स्थित अहै। जिला अगरतला से साठ किलोमीटर के दूरी पय स्थित अहै।

त्रिपुरा सुंदरी मंदिर अगरतला-सबरूम मार्ग पय उदयपुर शहर से तीन किलोमीटर की दूरी पय स्थित अहै। एह मंदिर कय निर्माण महाराजा धन्य माणिक्य के शासनकाल मा 1501 ई. के दौरान करवावा गा रहा। ई मंदिर भारत के 51 महापीठों में से एक अहै। पौराणिक कथा के अनुसार, एह स्थान पय माता सती के सीधे पैर के अंगुरियन कय निशान आजौ मौजूद अहैं। ई मंदिर राज्य के प्रमुख पयर्टन स्थलों मा से एक अहै। हजारन के संख्या मा भक्त रोज मंदिर मा माता के दर्शन के बरे आवत हैं। दिवाली के दौरान माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर मा भव्‍य स्तर पय दीवाली मेले कय आयोजन कीन जा है। जेहमा हर साल हजारन मनई एह मेला मा शामिल होत हैं ।राजमाला के अनुसार, मंदिर कय निर्माण करे के बाद मंदिर मा भगवान विष्णु कय मूर्ति स्थापित कीन गय रही। लिकिन एक रात महाराजा धन्य माणिक्य के सपन मा महा माया आईं अउर उनसे कहीं कि वयँ उनकै उनकी मूरती का चित्तौंग से एह स्थान पय रख दियैं। एहके बाद माता त्रिपुरा सुंदरी कय स्थापना एह मंदिर मा कय दीन गय।

भुवनेशवरी मंदिर गुमटी के उत्तरी तट पय स्थित अहै। एह मंदिर कय निर्माण महाराजा गोविन्द माणिक्य के शासनकाल के दौरान 1667 से 1676 ई. के मध्य करवावा गा रहा। ई मंदिर ऐतिहासिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण अहै। माना जा है कि रविन्द्रनाथ टैगोर ने प्रसिद्ध उपन्यास राजर्षि अउर नाटक बिसराजन कय रचना हियंयी केहे रहें।

शिव बरी मंदिर उदयपुर शहर मा स्थित अहै। पीठमाला के अनुसार, ई त्रिपुरेश भैरव कय निवास स्थान आय। एहके अलावा मंदिर के भीतर एक शिवलिंग भी हय। एह मंदिर कय निर्मान महाराजा धन्य माणिक्य करवाए रहें। मंदिर कय प्रवेश द्वार पश्चिम दिशा की ओरी अहै। सन् 1651 ई. मा मंदिर कय महाराजा कल्याण माणिक्य द्वारा पुनर्निर्माण करवावा गा। अउर वर्तमान समय मा महाराजा राधा किशोर माणिक्य द्वारा इनकय मरम्मत करवाई गय।

देवतामुर उदयपुर से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पय अहै। देवतामुर कय अर्थ देवता पर्वत होत है। ई जगह विशेष रूप से हियाँ मौजूद भगवान शिव, देवी दुर्गा अउर अन्य देवी-देवताओं के चित्रों के बरे प्रसिद्ध अहै। ई चित्र काफी खूबसूरत अहै। ई जगह पूरी तरह से जंगलन से घिरा अहै।

तीर्थमुख जिला मुख्यालय से लगभग 62 किलोमीटर दूर अहै। ई जगह विशेष रूप से आपन प्राकृतिक सुंदरता के बरे प्रसिद्ध अहै। प्रसिद्ध डुमबुर हैदल परियोजना हिंययी स्थित अहै। जौन कि दक्षिण त्रिपुरा जिला कय शक्ति कय प्रमुख स्रोत अहै। एहके अलावा तीर्थमुख स्थित डुमबुर कुण्ड भी काफी प्रसिद्ध अहै। हियाँ विश्व कील्य विभिन्न पक्षियों की प्रजातियां देखी जाय सकत हीं। हर साल पूस संक्राति के दिन हियाँ प्रसिद्ध मेला तीर्थमुख कय आयोजन कीन जात है। काफी संख्या मा लोग देश-विदेश से एह मेला मा शामिल होत हैं। एहके बाद गोमती नदी मा नहाइ के रीति-रिवाज के अनुसार अपने पित्रों का पिण्ड-दान करत हैं।

तीन मंदिर जगन्नाथ डिघी के पूरब तट पय स्थित अहै। माना जात है कि एह मंदिर कय निर्माण 17वीं शताब्दी के मध्य मा करवावा गा रहा।

ई अभ्यारण जिला मुख्यालय से करीबन 60 किलोमीटर के दूरी पय स्थित अहै। हियाँ पक्षियों कय अनेक प्रजांतिया देखी जाय सकत हीं।

सबसे नगीच हवाई अड्डा अगरतला है। अगरतला से उत्तर त्रिपुरा 60 किलोमीटर दूर अहै।

सबसे नगीच रेलवे स्टेशन कुमारघाट अहै। ई स्थान जिला मुख्यालय से लगभग 190 किलोमीटर की दूरी पय अहै।

उत्तर त्रिपुरा से अगरतला साठ किलोमीटर की दूरी पय अहै। ई स्थान सड़क मार्ग द्वारा भारत के कइव प्रमुख शहरऽन् से जुड़ा अहै।




#Article 84: दादरा अव नगर हवेली कय जिले (1838 words)


 
दादरा और नगर हवेली (, , ) भारत का एक केंद्रशासित प्रदेश हैं। यह दक्षिणी भारत में महाराष्ट्र और गुजरात के बीच स्तिथ है, हालाँकि दादरा, जो कि इस प्रदेश कि एक तालुका है, कुछ किलोमीटर दूर गुजरात में स्तिथ एक  है। सिलवासा इस प्रदेश की राजधानी है। यह क्षेत्र दमन से १० से ३० किलोमीटर दूर है। 

इस प्रदेश पर १७७९ तक मराठाओं का और फिर १९५४ तक पुर्तगाली साम्राज्य का साशन था। इस संघ को भारत में ११ अगस्त १९६१ में शामिल किया गया। २ अगस्त को मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है।

दादरा और नगर घवेली प्रमुख रूप से ग्रामीण क्षेत्र है जिसमे ६२% से अधिक आदिवासी रहते है। संघ राज्य क्षेत्र ४० प्रतिशत हिस्सा आरक्षित वनों से घिरा है जो नाना प्रकार के वनस्पति और पशु को निवास प्रदान करते है। समुद्री तट से समीपता के कारण, गर्मियों में तापमान ज्यादा ऊपर नहीं जाता। दमनगंगा यहाँ की प्रमुख नदी है जो अरब सागर में जाकर मिलती है।

घने वन तथा अनुकूल जलवायु को देखते हुए यहाँ पर्यटन क्षेत्र को उच्‍च प्राथमिकता दी गई है। यत्रिओ के ठहरने के लिए अनेक होटल्स और रेसोर्ट्स मौजूद है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हर साल तारपा उत्सव, पतंग उत्सव और विश्व पर्यटन दिवस आदि आयोजित किए जाते हैं। पर्यटन स्थल होने के साथ साथ ये एक महत्वपूर्ण ओद्योगिक केंद्र भी है। प्रदेश में कुल तीन ओद्योगिक व्ययस्थापन मौजूद हैं जिनमे कुल २९० प्लाट हैं।

दादरा और नगर हवेली का गहरा इतिहास हमलावर राजपूत राजाओं द्वारा क्षेत्र के कोली सरदारों की हार के साथ शुरू होता है। मराठों ने राजपूतों को हरा कर १८वीं सदी के मध्य में अपना शासन स्थापित किया। मराठों और पुर्तगालियों के बीच लंबे संघर्ष के बाद १७ दिसम्बर १७७९ को मराठा पेशवा माधव राव II ने मित्रता सुनिशचित करने के खातिर इस प्रदेश के ७९ गावों को १२,००० रुपए का राजस्व क्षतिपूर्ति के तौर पर पुर्तगालियों को सौंप दिया। जनता द्वारा २ अगस्त,१९५४ को मुक्त कराने तक पुर्तगालियों ने इस प्रदेश पर शासन किया। १९५४ से १९६१ तक यह प्रदेश लगभग स्वतंत्र रूप से काम करता रहा जिसे ‘स्वतंत्र दादरा एंव नगर हवेली प्रशासन’ ने चलाया। लेकिन ११ अगस्त १९६१ को यह प्रदेश भारतीय संघ में शामिल हो गया और तब से भारत सरकार एक केंद्रशासित प्रदेश के रूप में इसका प्रशासन कर रही है। पुर्तगाल के चंगुल से इस क्षेत्र की मुक्ति के बाद से ‘वरिष्ठ पंचायत’ प्रशासन की परामर्शदात्री संस्था के रूप में कार्य कर रही थी परंतु इसे १९८९ में भंग कर दिया गया और अखिल भारतीय स्तर पर संविधान संशोधन के अनुरूप दादरा और नगर हवेली जिला पंचायत और ११ ग्राम पंचायतों की एक प्रदेश परिषद गठित कर दी गई।

भारत की १९४७ में आजादी के बाद, पुर्तगाली प्रान्तों में सक्रिय स्वतंत्रता सेनानी तथा दुसरे स्थानों के बसे भारतीयों ने गोवा, दमन, दिउ, दादरा एवं नगर हवेली के मुक्ति का विचार पाला। भारत के स्वतंत्र होने से पहले से ही महात्मा गाँधी की भी यही विचारधारा थी और उन्होने ये पुष्टि भी की - गोवा (व अन्य अस्वतंत्र इलाके) को मौजूद मुक्त राज्य (भारत) के कानूनों के विरोध में एक अलग इकाई के रूप में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

जब भारत ने २६ जनवरी १९५० को गणतंत्रता हासिल की तब फ़्रांसिसी सरकार ने भारत के पूर्वी तट पर अपनी क्षेत्रीय संपत्ति खाली करने का निर्णय लिया परन्तु पुर्तगाली सरकार ने तब भी भारत में अपने जड़ गड़ाए रखे। फलस्वरूप गोवा, दादरा, नगर हवेली तथा अन्य क्षेत्रों में स्वतंत्रता आन्दोलन और गहरा हो गया। फिर लिस्बन में एक भारतीय दूतावास खोला गया ताकि गोवा के हस्तांतरण पर चर्चा की जा सके। लेकिन पुर्तगाली सरकार ने ना ही सिर्फ गोवा की मुक्ति के बारे में बात करने से मना कर दिया बल्कि उन्होंने पहले से ही लागु दमनकारी उपायों को परिक्षेत्रों में तेज कर दिया। १९५३ मे पुर्तगाली सरकार से समझौते के लिए एक और प्रयास किया गया - इस बार उन्हें ये भी आश्वासन दिलाया गया कि परिक्षेत्रों की सांस्कृतिक पहचान उनके स्थानांतरण के बाद भी संरक्षित रहेगी और कानूनों व रीति रिवाजों को भी अपरिवर्तित रखा जायेगा। फिर भी वे पहले की तरह अपने हठ पर कायम बने रहे और यहां तक कि भारत द्वारा की गई पहल का जवाब देने से भी इनकार कर गए। फलस्वरूप लिस्बन में स्तिथ भारतीय दूतावास को जून १९५३ में बंद कर दिया गया।

गोवा सरकार के एक बैंक कर्मचारी - अप्पासाहेब कर्मलकर ने नेशनल लिबरेशन मूवमेंट संगठन (NLMO) की बागडोर संभाली ताकि वोह पुर्तगाली-सशैत प्रदेशों को मुक्ति दिला सकें। साथ ही साथ आजाद गोमान्तक दल(विश्वनाथ लावंडे, दत्तात्रेय देशपांडे, प्रभाकर सीनरी और श्री. गोले के नेतृत्व में), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (रजा वाकणकर और नाना कजरेकर के नेतृत्व में) के स्वयंसेवक दादरा और नगर हवेली को मुक्त कराने के लिए सशस्त्र हमले की तय्यारी कर रहे थे। वाकणकर और काजरेकर ने स्थलाकृति अध्ययन और स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं, जो पुर्तगाली क्षेत्र की मुक्ति के लिए आंदोलन कर रहे थे, से परिचय के लिए १९५३ में दादरा और नगर हवेली का कई बार दौरा किया। अप्रैल, १९५४ में तीनो संगठनो ने मिलकर एक संयुक्त मोर्चा (युनाइटेड फ्रंट) निकाला और एिंल्फसटन बगीचे कि एक बैठक में, एक सशस्त्र हमले की योजना बनाई। स्वतंत्र रूप से, एक और संगठन, युनाइटेड फ्रंट ऑफ गोअन्स ने भी इसी तरह की एक योजना बनाइ। भारत के स्वतंत्र होने से पहले से ही महात्मा गाँधी की भी यही विचारधारा थी और उन्होने ये पुष्टि भी की - गोवा (व अन्य अस्वतंत्र इलाके) को मौजूद मुक्त राज्य (भारत) के कानूनों के विरोध में एक अलग इकाई के रूप में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

जब भारत ने २६ जनवरी १९५० को गणतंत्रता हासिल की तब फ़्रांसिसी सरकार ने भारत के पूर्वी तट पर अपनी क्षेत्रीय संपत्ति खाली करने का निर्णय लिया परन्तु पुर्तगाली सरकार ने तब भी भारत में अपने जड़ गड़ाए रखे। फलस्वरूप गोवा, दादरा, नगर हवेली तथा अन्य क्षेत्रों में स्वतंत्रता आन्दोलन और गहरा हो गया। फिर लिस्बन में एक भारतीय दूतावास खोला गया ताकि गोवा के हस्तांतरण पर चर्चा की जा सके। लेकिन पुर्तगाली सरकार ने ना ही सिर्फ गोवा की मुक्ति के बारे में बात करने से मना कर दिया बल्कि उन्होंने पहले से ही लागु दमनकारी उपायों को परिक्षेत्रों में तेज कर दिया। १९५३ मे पुर्तगाली सरकार से समझौते के लिए एक और प्रयास किया गया - इस बार उन्हें ये भी आश्वासन दिलाया गया कि परिक्षेत्रों की सांस्कृतिक पहचान उनके स्थानांतरण के बाद भी संरक्षित रहेगी और कानूनों व रीति रिवाजों को भी अपरिवर्तित रखा जायेगा। फिर भी वे पहले की तरह अपने हठ पर कायम बने रहे और यहां तक कि भारत द्वारा की गई पहल का जवाब देने से भी इनकार कर गए। फलस्वरूप लिस्बन में स्तिथ भारतीय दूतावास को जून १९५३ में बंद कर दिया गया।

गोवा सरकार के एक बैंक कर्मचारी - अप्पासाहेब कर्मलकर ने नेशनल लिबरेशन मूवमेंट संगठन (NLMO) की बागडोर संभाली ताकि वोह पुर्तगाली-सशैत प्रदेशों को मुक्ति दिला सकें। साथ ही साथ आजाद गोमान्तक दल(विश्वनाथ लावंडे, दत्तात्रेय देशपांडे, प्रभाकर सीनरी और श्री. गोले के नेतृत्व में), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (रजा वाकणकर और नाना कजरेकर के नेतृत्व में) के स्वयंसेवक दादरा और नगर हवेली को मुक्त कराने के लिए सशस्त्र हमले की तय्यारी कर रहे थे। वाकणकर और काजरेकर ने स्थलाकृति अध्ययन और स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं, जो पुर्तगाली क्षेत्र की मुक्ति के लिए आंदोलन कर रहे थे, से परिचय के लिए १९५३ में दादरा और नगर हवेली का कई बार दौरा किया। अप्रैल, १९५४ में तीनो संगठनो ने मिलकर एक संयुक्त मोर्चा (युनाइटेड फ्रंट) निकाला और एिंल्फसटन बगीचे कि एक बैठक में, एक सशस्त्र हमले की योजना बनाई। स्वतंत्र रूप से, एक और संगठन, युनाइटेड फ्रंट ऑफ गोअन्स ने भी इसी तरह की एक योजना बनाइ।

फ्रांसिस मैस्करेनहास और विमान देसी के नेतृत्व में युनाइटेड फ्रंट ऑफ गोअन्स के करीब १५ सदस्यों ने २२ जुलाई १९५४ की रात को दादरा पुलिस स्टेशन में हमला बोला। उन्होंने उप-निरीक्षक अनिसेतो रोसारियो की हत्या कर दी। अगले ही दिन पुलिस चौकी पर भारतीय तिरंगा फहराया गया और दादरा को मुक्त प्रान्त घोषित कर दिया गया। जयंतीभाई देसी को दादरा के प्रशाशन हेतु पंचायत का मुखिया बना दिया गया। 

२८ जुलाई १९५४ को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और आज़ाद गोमान्तक दल के स्वयंसेवक ने नारोली के पुलिस चौकी पर हमला बोला और पुर्तगाली अफसरों को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर दिया और नारोली को आजाद किया। अगले दिन, २९ जुलाई को स्वतंत्र नारोली की ग्राम पंचायत की स्थापना हुई।

कप्तान फिदाल्गो के नेतृत्व में अभी भी पुर्तगाली सेना ने नगर हवेली में स्तिथ सिलवासा में अड्डा जमाया हुआ था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और आज़ाद गोमान्तक दल के स्वयंसेवकों ने मौका देखते ही सिलवासा की परिधि में स्थित पिपरिया पर कब्जा जमा लिया। करीब आते देख कप्तान फिदल्गो ने स्वत१५० सेन्य करमचारियों के साथ सिलवासा से १५ किमी दूर खान्वेल भाग गए। २ अगस्त १९५४ को सिलवासा मुक्त घोषित कर दिया गया।

कप्तान फिदाल्गो, जो नगर हवेली के अंदरूनी हिस्से में छुपे थे, को आखिरकार ११ अगस्त १९५४ में आत्मसमर्पण करना पड़ा। एक सार्वजनिक बैठक में कर्मलकर को प्रथम प्रशाशक के रूप में चुना गया।

स्वतंत्र होने के बावजूद, अंतर्राष्ट्रीय न्यायलय द्वारा दादरा-नगर हवेली को पुर्तगाली संपत्ति के रूप में मान्यता प्राप्त थी।

१९५४ से १९६१ तक, दादरा और नगर हवेली वरिष्ठ पंचायत द्वारा संचालित एक मुक्त प्रदेश रहा। १९६१ में जब भारत ने गोवा को मुक्त किया तब श्री बदलानी को एक दिन के लिए राज्य-प्रमुख बनाया गया। उन्होंने तथा भारत के प्रधान मंत्री, जवाहर लाल नेहरु, ने एक समझौते पर हस्ताक्षार किया और दादरा और नगर हवेली औपचारिक रूप से भारत में संयोजित कर दिया।

यह केंद्र-साशित प्रदेश दो भिन्न भौगौलिक क्षेत्रों से बना है - दादरा और नगर हवेली। यह कुल ४९१ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह उत्तर-पशिम और पूर्व में वलसाड जिले से और दक्षिण और दक्षिण-पूर्व में ठाणे और नाशिक जिले से घिरा हुआ है। दादरा और नगर हवेली के ज्यादातर हिस्से पहाड़ी है। इसके पूर्वी दिशा में सहयाद्री पर्वत श्रंखला है। प्रदेश के मध्य क्षेत्र में मैदान है जिसकी मिट्टी अत्यधिक उपजाऊ है। दमनगंगा नदी पश्चिमी तट से ६४ किलोमीटर दूर घाट से निकल कर, दादरा और नगर हवेली को पर करते हुए दमन में अरब सागर से जा मिलती है। इसकी तीन सहायक नदिया - पीरी, वर्ना और सकर्तोंद भी प्रदेश की जल-श्रोत हैं। प्रदेश का लक्भाग ५३% हिस्से में वन है परन्तु केवल ४०% हिस्सा ही आरक्षित वन में गिना जाता है। समृद्ध जैव - विविधता इसे पक्षियों और जानवरों के लिए एक आदर्श निवास स्थान बनाता है। यह इसे पारिस्थितिकी पर्यटन के लिए एक आदर्श स्थान बनाता है। सिलवासा वन्य जीवन के प्रति उत्साही लोगों के लिए एक उचित पर्यावरण-पर्यटन स्थल।

दादरा और नगर हवेली के जलवायु अपने प्रकार में विशिष्ट है। तट के पास स्थित होने के नाते, यहाँ एक समुद्री जलवायु परिस्थितियां है। ग्रीष्म ऋतु गर्म और नम होती है। मई के महिना सबसे गरम होता है और अधिकतम तापमान 35° तक पहुँच जाता है। वर्षा दक्षिण पश्चिम मानसून हवाएं लती हैं वर्षा ऋतु जून से सितंबर तक रहती है। यहाँ साल में २००-२५० सेमी. वर्षा होती है और इसी कारण  इसे पश्चिम भारत का चेरापूंजी कहाँ जाता है। सर्दियाँ काफी सुखद होती है और तापमान १४° से ३०° तक रहता है।




#Article 85: दिनेश कार्तिक (177 words)


दिनेश कार्तिक (Dinesh Karthik) भारतीय क्रिकेट खेलाड़ी होंय। यनकय जनम १ जून १९८५ कय तमिलनाडु मा भा रहा । दिनेश कार्तिक विकेटकीपर होंय, यन नीक बल्लेबाजी खर्तिन जानि जात हैं। यन घरेलू क्रिकेट मा तमिलनाडु खर्तिन खेलत हैं । इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) मा यन्कय टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) होय । यन 2018 से इ टीम कय कप्तान होंय । 

दिनेश कार्तिक भारत खर्तिन पहिला मैच 2004 मा खेलिन । यन 5 सितंबर 2004 कय इंग्लैंड कय खिलाफ वनडे क्रिकेट में डेब्यू किहिन । दुई महीना कय भीत्तर यन टेस्ट क्रिकेटर बनि गए । यन पहिला टेस्ट मैच ऑस्ट्रेलिया कय खिलाफ नवंबर 2004 मा खेलिन । लगभग दुई साल बाद भारत आपन पहिला टी20 मैच खेलिस । दिसंबर 2006 कय खेलि गै इ मैच मा दिनेश कार्तिक सामिल रहें । दिनेस कार्तिक 2007 मा टी20 वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतै वाली भारतीय टीम कय सदस्य रहें ।  

दिनेश कार्तिक २०१९ मा इंग्लैंड एंड वेल्स मे भै आईसीसी विश्व कप में आपन अंतिम मैच खेलिन । भारत इ विश्व कप कय सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड से हारि गै ।




#Article 86: दिल्ली कय जिले अउर उपमंडल (110 words)


राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली(NCT) कुल 11 जिले में बांटा हुआ है। हरेक जिले का एक उपायुक्त नियुक्त है और जिले के तीन उपजिले हैं। प्रत्येक उप जिले का एक उप जिलाधीश नियुक्त है। सभी उपायुक्त मंडलीय अधिकारी के अधीन होते हैं। दिल्ली का जिला प्रशासन सभी प्रकार की राज्य एवं केन्द्रीय नीतियों और का प्रवर्तन विभाग होता है। यही विभिन्न अन्य सरकारी कार्यकर्तृयों पर आधिकारिक नियंत्रण रखता है। निम्न लिखित दिल्ली के जिलों और उपजिलों की सूची है:-

इन जिलों के सिवाय तीन नगरपालिकाएं भी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अस्तित्व में हैं: 

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का विस्तृत क्षेत्र देखती है।

नई दिल्ली जिला का प्रशासन देखती है।

दक्षिण पश्चिम जिला




#Article 87: दुर्गा (154 words)


दुर्गा पार्वती कय दूसर नाव होय। हिन्दुन् कय शाक्त साम्प्रदाय में भगवती दुर्गा कय ही दुनिया कय पराशक्ति अउर सर्वोच्च देवता माना जात अहै (शाक्त साम्प्रदाय ईश्वर कय देवी कय रूप में मानत अहै)। वेदों में  दुर्गा कय कवनो चर्चा नाई अहै, लेकिन् उपनिषद में देवी उमा हैमवती (उमा, हिमालय कय बिटिआ) कय वर्णन अहै। पुराण में दुर्गा कय आदिशक्ति माना गा है। दुर्गा असल में शिव कय मेहरारु पार्वती कय एक रूप होय, जेकर उत्पत्ति राक्षस कय नाश करय कय लिये देवता कय प्रार्थना पे पार्वती लिहिन रहा -- इहिकै नाते दुर्गा युद्ध कय देवी होय। देवी दुर्गा कय स्वयं कयु रूप अहैं। मुख्य रूप वनकय गौरी है, अर्थात शान्तमय, सुन्दर अउर गोरहर रूप। वनकय सबसे भयानक रूप काली है, अर्थात कारिया रूप। विभिन्न रूपों में दुर्गा भारत अउर नेपाल कय कई मन्दिरों अउर तीर्थस्थान में पूजी जात अहिन्। कुछ दुर्गा मन्दिर में पशुबलि भी चढ़त अहै। भगवती दुर्गा कय सवारी शेर होय।





#Article 89: धलाई जिला (417 words)


धलाई  भारतीय राज्य त्रिपुरा कय एक जिला होय। जिले कय मुख्यालय अम्बासा अहै। ई जिला प्राकृतिक सुंदरता के बरे प्रसिद्ध अहै। धलाई कय जादातर क्षेत्रफल पर्वतों और जंगलों से घिरा अहै। मनु, धलाई अउर कोवाई हियाँ कय प्रमुख नदियां अहैं। धलाई स्थित देई प्रमुख ऊंचे पर्वत पुरुब मा लांगथिराई अउर पश्चिम मा अथारमुरा अहै। लांगथिराई मंदिर अउर कमलेश्‍वरी मंदिर हियाँ कय खास आकर्षक केन्द्रऽन् मा से अहैं। काफी संख्या मा प्रकृति-प्रेमी हियाँ आउब पसंद करत हैं।

त्रिपुरा गर्वमेंट संग्रहालय पर्यटकऽन्, विद्यार्थियऽन्, जनता अउर शोधकत्ताओं आदि सब का राज्य के भूतकाल अउर वर्तमान संबंधी इतिहास अव परम्परा कय जानकारी प्रदान करत है। हियाँ प्रदर्शित जादातर मूर्तियां काफी पुरानि अहैं। हियाँ मौजूद प्रतिमाएं उदयपुर, पिलक, जोलईबरी अउर त्रिपुरा के अन्य जगहऽन् से मिली अहैं। एहके अलावा पिलक द्वारा प्राप्त सभी मूर्तियों कै संग्रह काफी सुंदर अहै। ई हिन्दू अउर बौद्धों कै परम्परा कय मिश्रण अहै। ई अपनी शैली अउर विभिन्न विषयवस्तु के बरे अपने आप मा प्रसिद्ध है।

अगरतला मा खास आकर्षण केन्द्र उज्‍जौन्ता पैलेस, राज्य संग्रहालय, जनजातीय संग्रहालय, सुकान्ता एकेडमी, एम.बी.बी. कॉलेज, लक्ष्मीनारायाण मंदिर, उमा महेश्‍वर मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, बेनुबन बिहार, गेडु मीन मस्जिद, मलांच निवास, रविन्द्र कनान, पुरबाशा, हस्तशिप केन्द्र, चौदहवां देवी मंदिर, चर्च आदि अहैं।

अगरतला स्थित उज्जयंता पैलेस एक शाही महल होय। ई महल एक वर्ग किलोमीटर के दायरे मा फइला अहै। एह महल कय निर्माण महाराजा राधा किशोर मानिक सन् 1899-1901 ई. के दौरान करवाये रहें। महल मा खूबसूरत टाइल, लकड़ी कय जादातर काम अउर दरवाजन पय खूबसूरत हस्त कला कीन गय अहै। एह महल का विशाल मुगल गार्डन कय शैली मा तैयार कीन गा अ। उज्जयंता महल कय वास्तुकला काफी आकर्षक अहै। एहके अलावा महल मा तीन ऊंच गुम्बद अहैं। 

लांगथिराई भगवान शिव कय नाम आय। माना जात है कि भगवान शिव अपने कैलाश यात्रा के दौरान लॉगथिराई पर्वत पय थोड़ी देर अराम केहे रहें। ई मंदिर यही पर्वत पय अहै। लॉगथिराई कय मतलब गहरी घाटी भी होत है। ई मंदिर अगरतला से 102 किलोमीटर की दूरी पय राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर स्थित अहै। प्रकृति-प्रेमियों के बरे ई बिल्कुल उचित जगह अहै। ई खूबसूरत जगह पय स्थित लांगथिराई मंदिर पय हजारन की संख्या मा लोग आवत हैं।

कमलेश्‍वरी काली माई का एक दूसर नाम आय। ई मंदिर कमलपुर शहर के बीचौ बीच स्थित अहै। कमलेश्‍वरी मंदिर अंबासा से लगभग 35 किलोमीटर अउर अगरतला से 122 किलोमीटर दूर अहै।

सबसे नगीच हवाई अड्डा सी.ए अगरतला अहै। अगरतला से धलाई 64 किलोमीटर की दूरी पय स्थित अहै।

सबसे नगीच रेलवे स्टेशन कुमारघाट अहै।

धलाई सड़कमार्ग से त्रिपुरा भारत के कइव खास शहरऽन् से जुड़ा अहै।




#Article 90: धान (291 words)


धान (Paddy) एक प्रमुख फसल होय जवनेसे चाउर निकारि जात है। ई भारत अव नेपाल सहित एशिया औ दुनिया कय बहुत देशन कय मुख्य खाना होय। विश्व मा जोन्हरी कय बाद धान सबसे ढेर बोवे वाला अनाज होय। यकर वैज्ञानिक नाँव ओरिजा सेटिभा होय । वनस्पति वैदिक साहित्य औ पुरातात्विक उत्खनन मा मिला है की धान सबसे पुरान पैदावार होय । हजारों साल पहिले से भारत अव चीन मा यकर खेती होत रहा। धान खेती मा विश्व कै लगभग ९० प्रतिशत क्षेत्र एसिया मा परत है अउर विश्व कय लगभग ९० प्रतिशत धान एसिया मा पैदा औ खपत होत है । संसार भर १५० मिलियन से ढेर इलाका मा धान कै खेती होत है । भारत औ चीन दुनो मिलिकै विश्व कै लगभग आधा धान इलाका समेटे हैं औ ६० प्रतिशत से ढेर मनई चाउर से बना चीज खात हैं । चाउर एसिया कै प्रमुख खाद्य पदार्थ होय ।

धान कै पहिला बिया कहाँ मिला यकिन कै साथे केहु नाइ बता पावत है । सम्भव है कि १०,००० वर्ष पहिले एसिया कै गर्मी इलाका मा धान कै खेती कै शुरुआत भवा रहा । भारत मा हस्तिनापुर (उत्तर प्रदेश)-मा उत्खनन (१०००-७५० इसा पहिले)-कै समय मा धान कै सबसे पुरान नमूना ज़रल अवस्था मा मिला रहा । ढेर कुल जंगली धान मिलेक नाते इ कहि सका जात है धान कै खेति सबसे पहिले भारत मा भवा रहा ।इ विस्वास है कि जंगली धान कै पैदावार पहिले बङ्गलादेश, असम, उडिसा औ एकर आसपास कै इलाकन् मा होत रहा । पच्छु औ उत्तर अफ्रिका (इजिप्ट), पूरुब औ मध्य अफ्रिकन् कै ढेर देशन मा धानेक् खेती होत रहा। ओकरे बादमा धान कै खेती दक्खिन् औ मध्य अमेरिकी देश (ल्याटिन अमेरिका), अष्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका औ स्पेन, इटाली औ फ्रान्स जैसन दक्खिन कै युरोपी होए लाग ।




#Article 91: नाग पन्चमी (168 words)


 

सावन अजोर पाख पन्चमी के तिथि कै दिन कै नाग पन्चमी या गुडिंया तिउहार के रूप मे मनावै कै प्रचलन है।यहि पर्व मे एकओर साप कै पुजा किहा जात है तौ दुसरे वोर गुडिंया पिटा जात है ।यहि दिन भिन्नही उठिकै घर लिपपोत कैकय घरके दिवाल मे बहरे से गोबर से गोठा जात है।दिवाल मे साप , बिच्छी इत्यादि कै चित्र बनवा जात है।गाव के नागदेवता के थान्ह पे मेहरारु लोग दूध ,धान कै लावा औ भिजावा चना चढावै कय चलन है।यहि पर्व मे घुंघुरी खायकै चलन है। यहि दिने खीर, पुडीं,गुलगुला, गोझिया खाय कै चलन है।यहि दिने संझा कै बिटियै लोग नवानवा कपडा पहिर कै रंगीबिरंगी कपडा कै गुडिंया बनाय कै औ लडिके लोग बाँस मे रंगीबिरङ्गी कागज कै झालर कै झन्डी बनाय कै गाव के बहरे डहरचन्नी पर जुटि कै बिटियै लोग गुडिया फेकत ही औ लडिके लोग बाँस के झन्डी से पीटत है।औ यकरे बाद लड्की लोग प्रसाद बाट्त ही।इहि तिउहार मे लडिके बिटियय लोग झलुवा झुलत है।यहि मेर गुडिया पर्व मनावा जात है ।




#Article 92: नार्वे (220 words)


नॉर्वे (बूकमॉल नॉर्वेजियन:  () कुङेरिकेत नोर्ये, नी-नॉर्वेजियन:  () कुङेरिकेत नुरेग) यूरोप महाद्वीप कय यक्ठु देस होय। यकर राजधानी ओस्लो  होय। यकर मुख्य- औ राजभाषा  नॉर्वेजियन भाषा होय। नार्वे यक्ठु राजशाही होय। यकरे क्षेत्राधिकार् मा स्कैडीनेवियाई देस हैं। जवने मा पहाड़, ग्लेशियर औ गहिर तटीय जगह सामिल हैं।नार्वे कय राजधानी ओस्लो हरा भरा जगह औ संग्रहालयन कय सहर होय।

नार्वे कय कुल क्षेत्रफल ३ लाख ८५ हजार दुई सौ बावन वर्ग किलोमीटर (१,४८,७४७ वर्ग मील) हय औ जनसंख्या लगभग पचपन लाख। भारतीय मनईन कय सँख्या लगभग पच्चीस हजार हय। इ यूरोप मा सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाले देसन मा दुसरा जगह पय हय । देस कय सीमा पूरुब मा स्वीडन से सटा हय औ उत्तर मा कुछ कुछ जगह  कय सीमा फ़िनलैण्ड औ रूस से सटा हय। नॉर्वे कय राजा हराल्ड पंचवा होँय और वनकय प्रधानमंत्री जेन्स स्तोल्तेंबेर्ग होंय।

नॉर्वे मा 17 मई कय दिन राष्ट्रीय दिन कय रूप मा मनाय जात अहै। इ दिन 1814 ईसवी मा नॉर्वे कय संविधान बना रहा। देस कय संसद कय स्टोरटिंग कहि जात अहै जवने कय सदस्य हर चार साल बाद चुनि जात हँय।

नॉर्वे कय ढेर आबादी नार्वेजियन हँय, ढेर आप्रवासी पोलैंड स्वेडन, इरान (कुर्दिस्तान सहित), पाकिस्तान औ इराक से आ हैं।

नॉर्वे मछरी पकरै, पैदर यात्रा औ स्कीइंग कि ताईं जानि जात अहै, बिसेष रूप से लिलीहामर कय ओलंपिक रिसोर्ट मा ।




#Article 93: निज़ामाबाद जिला (136 words)


निजामाबाद  भारतीय राज्य तेलंगाना कय एक्ठु जिला होय। एह जिला कय मुख्यालय निजामाबाद अहय।

पुरान समय म इन्‍द्रपुरी अव इन्‍दूर के नांव से परसिद्ध आंध्रप्रदेश कय निजामाबाद जिला आपन समृद्ध संस्‍कृति के साथे साथे ऐतिहासिक स्‍मारकन अउर प्राकृतिक सुंदरता के बरे जाना जात हय। एह कय नांव हैदराबाद के निजाम के नांव पय राखा गवा अहै।

एह जिला कय चौहद्दी करीमनगर, मेदक अउर नान्देड़ जिलन से मिलत हय अउर पुरुब मा आदिलाबाद से मिलत हय। ई जिला चालुक्‍य, तुगलक, गोलकुंडा अउर निजाम शासकन कय राज मा रहि चुका अहय। इन सब शासकन कय तमाम निसानी एह शहर मा देखि जाय सकत हय। प्राकृतिक संसाधनन से भरा ई जगह औद्योगिक विकास के राही पय तेजी से आगे बढ़त अहय। निजामाबाद से गोदावरी नदी आंध्रप्रदेश मा घुसि के एह राज्य का रचय म खासि भूमिका अदा करत हय।




#Article 94: नेपाल (4705 words)


नेपाल (आधिकारिक रूप मा, सङ्घीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्र नेपाल ) एक दक्खिन एशियाई स्थलरुद्ध देस होय । नेपाल कै उत्तर मा चीन कै स्वायत्तशासी प्रदेश तिब्बत है अउर दक्खिन, पूरुब अव पच्छु में भारत अवस्थित है। नेपाल कय 85 प्रतिशत नागरिक हिन्दू धर्मावलम्बी हैं। नेपाल विश्व कै प्रतिशत आधार पै सबसे बड़ा हिन्दू धर्मावलम्बी राष्ट्र होय। नेपाल कै राजभाषा नेपाली होय औ नेपाल कै मनइन कय नेपाली कहि जात है।

एक्ठु छोट जगहि खर्तिन नेपाल कै भौगोलिक विविधता बहुतै उल्लेखनीय है। हिँया तराई कै उष्ण फाँट से लइकै ठंढ हिमालय कै श्रृंखला मौजुद है। संसार कै सबसे ऊँच 14 हिम श्रृंखलन् में से आठ नेपाल मा है जवने मा संसार कै सबसे बडा पर्वत सगरमाथा एवरेस्ट (नेपाल औ चीन कै सीमा पै) भी एक होय । नेपाल कै राजधानी औ सबसे बड़ा सहर काठमांडू होय। काठमांडू उपत्यका कै भीत्तर ललीतपुर (पाटन), भक्तपुर, मध्यपुर औ किर्तीपुर नाँव कै नगर भी हैं दुसर प्रमुख नगरन् मा पोखरा, विराटनगर, धरान, भरतपुर, वीरगंज, महेन्द्रनगर, बुटवल, हेटौडा, भैरहवा, जनकपुर, नेपालगंज, वीरेन्द्रनगर, त्रिभुवननगर हैं।

अबहिन कै नेपाली भूभाग अठारहवा सदी मा गोरखा कै शाह वंशीय राजा पृथ्वी नारायण शाह कै द्वारा संगठित नेपाल राज्य कै एक्ठु अंश होय । अंग्रेज़न् कै साथे भवा संधिन् मा नेपाल कै उ समय (१८१४ मा) एक तिहाई नेपाली क्षेत्र ब्रिटिश इंडिया कै देवैक परा रहा, जवन आज भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड औ पच्छु बंगाल मा विलय हो गवा है। बींसवा सदी मा सुरु भवा जनतांत्रिक आन्दोलन मा कयु दाइ भवा जब राजशाही कै जनता औ ओनकै प्रतिनिधिन् कै अधिकाधिक अधिकार देवैक परा। २००८ मा जनतन् से चुनल प्रतिनिधि माओवादी नेता प्रचण्ड कै प्रधानमंत्री बनेक बाद से इ आन्दोलन खतम भवा। लेकिन सेना अध्यक्ष कै निकारेक लइकै राष्ट्रपति से भवा मतभेद औ टीवी पै सेना मा माओवादिन् कै नियुक्ति कै लइकै वीडियो फुटेज कै प्रसारण कै बाद सरकार से सहयोगी दलन् से समर्थन वापिस लेवैकै बाद प्रचण्ड कै इस्तीफा देवैक परा। लेकिन माओवादिन् कै सत्ता मा आवै से पहिले सन् २००६ मा राजा कै अधिकार कै बहुतै सीमित कइ दिहा रहा।

दक्खिन एशिया मा नेपाल कै सेना पँचवा सबसे बडा सेना होय औ विश्व युद्धन् कै समय मा , आपन गोरखा इतिहास खर्तीन मसहुर है औ संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानन् खर्तीन जरूरी योगदान दिहे है।

'नेपाल' शब्द कै व्युत्पत्ति कै संबंध मा विद्वानन् कै ढेर मेरकै धारणा है। नेपाल शब्द कै उत्त्पत्ति कै बारे मा ठोस प्रमाण कवनो नाइ है, लेकिन एक्ठु मसहुर विश्वास कै अनुसार इ शब्द 'ने' ऋषि औ पाल (गुफा) मिलिकै बना है। मानि जात है कि एक्ठु समय नेपाल कै राजधानी काठमांडू 'ने' ऋषि कै तपस्या करैक जगह रहा। 'ने' मुनि कै द्वारा पालित होवैक नाते इ भूखंड कै नाँव नेपाल परा, अइसन कहि जात है।

तिब्बती भाषा मा 'ने' कै मतलब 'बिचला' औ 'पा' का मतलब 'देस' होत है। तिब्बती मनइ 'नेपाल' कै 'नेपा' कहत हैं। 'नेपाल' औ 'नेवार' शब्द कै समानता कै आधार पै डॉ॰ ग्रियर्सन औ यंग कहिन कि एक्कै मूल शब्द से दूनों कै व्युत्पत्ति होवैक अनुमान है। टर्नर नेपाल, नेवार, या नेवार, नेपाल दूनों स्थिति कै स्वीकार किहिन है। 'नेपाल' शब्द कै इस्तेमाल सबसे पहिले कौटिल्य अपने अर्थशास्त्र मा किहे हैं। उ काल मा बिहार मा जवन मागधी भाषा प्रचलित रहा ओहमें 'र' कै उच्चारण नाइ होत रहा। सम्राट् अशोक कै शिलालेखन् मा 'राजा' कै जगहि पै 'लाजा' शब्द व्यवहार भवा है। इहिकै नाते नेपार, नेबार, नेवार अइसै विकसि भवा होइ।

हिमालय क्षेत्र में मनुष्यों का आगमन लगभग ९,००० वर्ष पहले होने के तथ्य की पुष्टि काठमांडू उपत्यका में पाये गये नव पाषाण औजारों से होती है। सम्भवतः तिब्बती-बर्माई मूल के लोग नेपाल में २,५०० वर्ष पहले आ चुके थे। 
५५०० ईसा पुर्व महाभारत काल मे जब कुंती पुञ पाॅच पाडंव स्वर्ग की ओर प्रस्थान कर रहे थे तभी पंडुपुञ भिमजी ने भगवान महादेवजी को दर्शन देने हेतु विनंती की। तभी भगवान शिवजी ने उन्हे दर्शन एक लिंग के रुप मे दिये जो आज पशुपतिनाथ ज्योतिर्लिंग  के नाम से जाना जाता है । १५०० ईसा पूर्व के आसपास हिन्द-आर्यन जातियों ने काठमांडू उपत्यका में प्रवेश किया। करीब १००० ईसा पूर्व में छोटे-छोटे राज्य और राज्य संगठन बनें। नेपाल स्थित जनकपुर में भगवान श्रीरामपत्नी माता सिताजी का जन्म ७५०० ईसा पुर्व हुआ।सिद्धार्थ गौतम (ईसापूर्व ५६३–४८३) शाक्य वंश के राजकुमार थे, उनका जन्म नेपाल के लुम्बिनी में हुआ था, जिन्होंने अपना राज-पाट त्याग कर तपस्वी का जीवन निर्वाह किया और वह बुद्ध बन गए।

२५० ईसा पूर्व तक इस क्षेत्र में उत्तर भारत के मौर्य साम्राज्य का प्रभाव पड़ा और बाद में चौथी शताब्दी में गुप्तवंश के अधीन में कठपुतली राज्य हो गया। इस क्षेत्र में ५वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में आकर वैशाली के लिच्छवियों के राज्य की स्थापना हुई। ८वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में लिच्छवि वंश का अस्त हो गया और सन् ८७९ से नेवार (नेपाल की एक जाति) युग का उदय हुआ, फिर भी इन लोगों का नियन्त्रण देशभर में कितना हुआ था, इसका आकलन कर पाना कठिन है। ११वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में दक्षिण भारत से आए चालुक्य साम्राज्य का प्रभाव नेपाल के दक्षिणी भूभाग में दिखा। चालुक्यों के प्रभाव में आकर उस समय राजाओं ने बौद्ध धर्म को छोड़कर हिन्दू धर्म का समर्थन किया और नेपाल में धार्मिक परिवर्तन होने लगा।

१३वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में संस्कृत शब्द मल्ल का थर वाले वंश का उदय होने लगा। २०० वर्ष में इन राजाओं ने शक्ति एकजुट की। १४वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में देश का बहुत ज्यादा भाग एकीकृत राज्य के अधीन में आ गया। लेकिन यह एकीकरण कम समय तक ही टिक सका: १४८२ में यह राज्य तीन भाग में विभाजित हो गया - कान्तिपुर, ललितपुर और भक्तपुर – जिसके बीच मे शताव्दियौं तक मेल नही हो सका।

१७६५ में, गोरखा राजा पृथ्वी नारायण शाह ने नेपाल के छोटे-छोटे बाइसे व चोबिसे राज्य के उपर चढ़ाई करते हुए एकीकृत किया, बहुत ज्यादा रक्तरंजित लड़ाइयों के पश्चात् उन्होंने ३ वर्ष बाद कान्तीपुर, पाटन व भादगाँउ के राजाओं को हराया और अपने राज्य का नाम गोरखा से नेपाल में परिवर्तित किया। तथापि उन्हे कान्तिपुर विजय में कोई युद्ध नही करना पड़ा। वास्तव में, उस समय इन्द्रजात्रा पर्व में कान्तिपुर की सभी जनता फसल के देवता भगवान इन्द्र की पूजा और महोत्सव (जात्रा) मना रहे थे, जब पृथ्वी नारायण शाह ने अपनी सेना लेकर धावा बोला और सिंहासन पर कब्जा कर लिया। इस घटना को आधुनिक नेपाल का जन्म भी कहते है।

तिब्बत से हिमाली (हिमालयी) मार्ग के नियन्त्रण के लिए हुआ विवाद और उसके पश्चात युद्ध में तिब्बत की सहायता के लिए चीन के आने के बाद नेपाल पीछे हट गया। नेपाल की सीमा के नजदीक का छोटे-छोटे राज्यों को हड़पने के कारण से शुरु हुआ विवाद ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी के साथ दुश्मनी का कारण बना। इसी वजह से १८१४–१६ रक्तरंजित एंग्लो-नेपाल युद्ध हो गया, जिसमें नेपाल को अपनी दो तिहाई भूभाग से हाथ धोना पड़ा लेकिन अपनी सार्वभौमसत्ता और स्वतन्त्रता को कायम रखा। दक्षिण एशियाई मुल्कों में यही एक खण्ड है जो कभी भी किसी बाहरी सामन्त (उपनिवेशों) के अधीन में नही आया। विलायत से लड़ने में पश्चिम में सतलुज से पुर्व में तीस्ता नदी तक फैला हुआ विशाल नेपाल सुगौली सन्धि के बाद पश्चिम में महाकाली और मेची नदियों के बीच सिमट गया लेकिन अपनी स्वाधीनता को बचाए रखने में नेपाल सफल रहा, बाद मे अंग्रेजो ने १८२२ में मेची नदी व राप्ती नदी के बीच की तराई का हिस्सा नेपाल को वापस किया उसी तरह १८६० में राणा प्रधानमंत्री जंगबहादुर से खुश होकर 'भारतीय सैनिक बिद्रोह को कूचलने मे नेपाली सेना का भरपूर सहयोग के बदले अंग्रेजों ने राप्तीनदी से महाकाली नदी के बीच का तराई का थोड़ा और हिस्सा नेपाल को लौटाया। लेकिन सुगौली सन्धी के बाद नेपाल ने जमीन का बहुत बडा हिस्सा गँवा दिया, यह क्षेत्र अभी उत्तराखंड राज्य और हिमाचल प्रदेश और पंजाब पहाड़ी राज्य में सम्मिलित है। पूर्व में दार्जिलिंग और उसके आसपास का नेपाली मूल के लोगों का भूमि (जो अब पश्चिम बंगाल मे है) भी ब्रिटिश इन्डिया के अधीन मे हो गया तथा नेपाल का सिक्किम पर प्रभाव और शक्ति भी नेपाल को त्यागने पड़े।

राज परिवार व भारदारो के बीच गुटबन्दी के कारण युद्ध के बाद स्थायित्व कायम हुआ। सन् १८४६ में शासन कर रही रानी का सेनानायक जंगबहादुर राणा को पदच्युत करने के षड़यंत्र का खुलासा होने से कोतपर्व नाम का नरसंहार हुवा। हथियारधारी सेना व रानी के प्रति वफादार भाइ-भारदारो के बीच मारकाट चलने से देश के सयौँ राजखलाक, भारदारलोग व दूसरे रजवाड़ों की हत्या हुई। जंगबहादुर की जीत के बाद राणा खानदान उन्होंने सुरुकिया व राणा शासन लागु किया। राजा को नाममात्र में सीमित किया व प्रधानमन्त्री पद को शक्तिशाली वंशानुगत किया गया। राणाशासक पूर्णनिष्ठा के साथ ब्रिटिश के पक्ष में रहते थे व ब्रिटिश शासक को १८५७ की सेपोई रेबेल्योन (प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम), व बाद में दोनो विश्व युद्धसहयोग किया था। सन १९२३ में यूनाइटेड किंगडम व नेपाल बीच आधिकारिक रूप में मित्रता के समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें नेपाल की स्वतन्त्रता को यूनाइटेड किंगडम ने स्वीकार किया। दक्षिण एशियाई मुल्कों में पहला, नेपाली राजदूतावास ब्रिटेन की राजधानी लंदन मे खुल गया।

१९४० दशक के उत्तरार्ध में लोकतन्त्र-समर्थित आन्दोलनों का उदय होने लगा व राजनैतिक पार्टियां राणा शासन के विरुद्ध हो गईं। उसी समय चीन ने १९५० में तिब्बत पर कब्जा कर लिया जिसकी वजह से बढ़ती हुई सैनिक गतिविधियों को टालने के लिए भारत नेपाल की स्थायित्व पर चाख बनाने लगा। फलस्वरुप राजा त्रिभुवन को भारत ने समर्थन किया १९५१ में सत्ता लेने में सहयोग किया, नई सरकार का निर्माण हो गया, जिसमें ज्यादा आन्दोलनकारी नेपाली कांग्रेस पार्टी के लोगों की सहभागिता थी। राजा व सरकार के बीच वर्षों की शक्ति खींचातानी के पश्चात्, १९५९ में राजा महेन्द्र ने लोकतान्त्रिक अभ्यास अन्त किया व निर्दलीय पंचायत व्यवस्था लागू करके राज किया। सन् १९८९के जनआन्दोलन ने राजतन्त्र को सांवैधानिक सुधार करने व बहुदलीय संसद बनाने का वातावरण बन गया सन १९९०मा कृष्णप्रसाद भट्टराई अन्तरिम सरकारके प्रधानमन्त्री बन गए, नये संविधान का निर्माण हुआ राजा बीरेन्द्र ने १९९० में नेपाल के इतिहास में दूसरा प्रजातन्त्रिक बहुदलीय संविधान जारी किया व अन्तरिम सरकार ने संसद के लिए प्रजातान्त्रिक चुनाव करवाए। नेपाली कांग्रेस ने राष्ट्र के दूसरे प्रजातन्त्रिक चुनाव में बहुमत प्राप्त किया व गिरिजा प्रसाद कोइराला प्रधानमन्त्री बने।

इक्कीसवीं सदी के आरम्भ से नेपाल में माओवादियों का आन्दोलन तेज होता गया। मधेशियों के मुद्दे पर भी आन्दोलन हुए। अन्त में सन् 2008 में राजा ज्ञानेन्द्र ने प्रजातांत्रिक चुनाव करवाए जिसमें माओवादियों को बहुमत मिला और प्रचण्ड नेपाल के प्रधानमंत्री बने और नेपाली कांग्रेस नेता रामबरन यादव ने राष्ट्रपति का कार्यभार संभाला।

मानचित्र पर नेपाल का आकार एक तिरछे सामानान्तर चतुर्भुज का है। नेपाल की कुल लम्बाई करीब 800 किलोमीटर और चौड़ाई 200 किलोमीटर है। नेपाल का कुल क्षेत्रफल 147181 वर्ग किलोमीटर है। नेपाल भौगोलिक रूप से तीन भागों में विभाजित है– पर्वतीय क्षेत्र, शिवालिक क्षेत्र और तराई क्षेत्र। साथ में 'भित्री मधेस' कहलाने वाले उपत्यकाओं का एक समूह पहाड़ी क्षेत्र के महाभारत पर्वत शृंखला व चुरिया शृंखला के बीच स्थित है। यह क्षेत्र पहाड़ व तराई के बीच में स्थित है। हिमाली पहाड़ी व तराई क्षेत्र पूर्व-पश्चिम दिशा मे देशभर में फैले हुए है और यिनी क्षेत्र को नेपाल की प्रमुख नदियों ने जगह-जगह पर विभाजन किया है।

भारत के साथ जुड़ा हुआ तराई फांट भारतीय-गंगा के मैदान का उत्तरी भाग है। इस भाग की सिंचाई तथा भरण-पोषण मे तीन नदियों का मुख्य योगदान है: कोशी, गण्डकी (भारत मे गण्डक नदी) और कर्णाली नदी। इस भूभाग की जलवायु उष्ण और संतृप्त (आर्द्र) है।

पहाड़ी भूभाग मे १,००० लेकर ४,००० मीटर तक की ऊंचाई के पर्वत पड़ते हैं। इस क्षेत्र में महाभारत लेख व शिवालिक (चुरिया) नाम की दो मुख्य पर्वत शृंखलायें हैं। पहाड़ी क्षेत्र मे ही काठमांडू उपत्यका, पोखरा उपत्यका, सुर्खेत उपत्यका के साथ टार, बेसी, पाटन माडी कहे जाने वाले बहुत से उपत्यका पड़ते है। यह उपत्यका नेपाल की सबसे उर्वर भूमि है तथा काठमांडू उपत्यका नेपाल का सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र है। पहाड़ी क्षेत्र की उपत्यका को छोड़ कर २,५०० मीटर (८,२०० फुट) की ऊंचाई पर जनघनत्व बहुत कम है।

हिमाली क्षेत्र में संसार की सबसे ऊंची हिम शृंखलायें पड़ती हैं। इस क्षेत्र की उत्तर में चीन की सीमा के पास में संसार का सर्वोच्च शिखर, ऐवरेस्ट (सगरमाथा) ८,८४८ मीटर (२९,०३५ फुट) अवस्थित है। संसार की 8000 मीटर से ऊँची 14 चोटियों में से 8 नेपाल की हिमालयी क्षेत्र में पड़ती हैं। संसार का तीसरा सर्वोच्च शिखर कंचनजंघा, भी इसी हिमालयी क्षेत्र मे पड़ता है।

नेपाल मे पाँच मौसमी क्षेत्र है जो ऊंचाई के साथ कुछ मात्रा में मेल खाते हैं। उष्णकटिबन्धीय तथा उपोष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र १,२०० मीटर (३,९४० फि) से नीचे, शीतोष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र १,२०० लेकर २,४०० मीटर (३,९००–७,८७५ फि), ठण्डा क्षेत्र २,४०० से लेकर ३,६०० मीटर (७,८७५–११,८०० फि), उप-आर्कटिक क्षेत्र ३,६०० से लेकर ४,४०० मीटर (११,८००–१४,४०० फि), व आर्कटिक क्षेत्र ४,४०० मीटर (१४,४०० फिट) से ऊपर। नेपाल मे पाँच ऋतुएं होती हैं: उष्म, मनसून, अटम, शिषिर व बसन्त। हिमालय मध्य एशिया से बहने वाली ठन्डी हवा को नेपाल के अन्दर जाने से रोकता है तथा मानसून की वायु का उत्तरी परिधि के रूप में पानी काम करताहै।
नेपाल व बंगलादेश की सीमा नहि जुडता है फिर भी ये दोनों राष्ट्र २१ किलोमीटर (१३ मील) की एक सँकरी चिकेन्स् नेक (मुर्गे की गर्दन) कहे जाने वाले क्षेत्र से अलग है। इस क्षेत्र को स्वतन्त्र-व्यापार क्षेत्र बनाने का प्रयास हो रहा है।

संसार का सर्वोच्च शिखर सगरमाथा (एवरेस्ट) नेपाल व तिब्बती सीमा पर अवस्थित है। इस हिमालकी नेपाल में पडने वाले दक्षिण-पूर्वी रिज (ridge) प्राविधिक रूपमे चढना सहज माना जाता है। जिसकी वजहसे हरेक वर्ष इस स्थान मे बहुत पर्यटक जाते है। अन्य चढे जाने वाले हिमशिखर मे अन्नपूर्णा (१,२,३,४) अन्नपूर्णा श्रखला मे पडता है।

कृषि जनसंख्या के ७६% रोजगार का स्रोत है और कुल ग्राह्यस्थ उत्पादन का ३९% योगदान करता है और सेवा क्षेत्र ३९% साथ में उद्योग २१% आय का स्रोत है है। देश की उत्तरी दो-तिहाई भाग में पहाडी और हिमालयी भूभाग सडकें, पुल तथा अन्य संरचना निर्माण करने में कठिन और मँहगा बनाता है। सन् २००३ तक पिच -सडकों की कुल लम्बाई ८,५०० किमी से कुछ ज्यादा और दक्षिण में रेल्वे-लाइन की कुल लम्बाई ५९ किमी मात्र है। ४८ धावनमार्ग और उनमेसे १७ पिचहोनेसे हवाईमार्गकी स्थिति बहुत अच्छा है। यहाँ जादामे प्रति १२ व्यक्तिके लिए १ टेलिफोन सुविधा उपल्ब्ध है; तारजडित सेवा देशभर में है लेकिन शहरों और जिला मुख्यालयों में ज्यादा केन्द्रित है; सेवामें जनताकी पहुँच बढने और सस्ता होते जानेसे मोबाइल (या तार-रहित) सेवाकी स्थिति देशभर बहुत अच्छा है। सन् २००५ मे १,७५,००० इन्टरनेट जडाने (connections) थे, लेकिन संकटकाल लागू होनेकेपश्चात् कुछ समय सेवा अवरूद्ध होगयी था। कुछ अन्योल बाद नेपालकी दुसरी बृहत जनआन्दोलनने राजाकी निरंकुश अधिकार समाप्त करनेके पश्चात सभी इन्टरनेट सेवाए बिना रोकटोक सुचारू होगएहैं।

नेपालकी भूपरिवेष्ठित स्थिति, प्राविधिक कमजोरी और लम्बे द्वन्द ने अर्थतन्त्र को पूर्ण रूपमे विकासशील होने नहीं दिया है। नेपाल भारत, जापान, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, यूरोपीय संघ, चीन, स्विट्जरलैंड और स्कैंडिनेवियन राष्ट्रों से वैदेशिक सहयोग पाता है। वित्तीय वर्ष २००५/०६में सरकार का बजट करीब १.१५३ अरब अमेरिकी डालर था, लेकिन कुल खर्च १.७८९ अरब हुआ था। १९९० दशक की बढती मुद्रा स्फीति दर घटकर २.९% पहुंची है। कुछ वर्षों से नेपाली मुद्रा रूपैयाँ को भारतीय रूपैया के साथ का सटहीदर १.६ मा स्थिर रखा गया है। १९९० दशकमे खुली बनायीगयी मुद्रा बिनिमय दर निर्धारण नीतिके कारण विदेशी मुद्रा की कालाबाजारी लगभग समाप्त हो चुकी है। एक दीर्घकालीन आर्थिक समझौते ने भारत के साथ अच्छे संबन्ध में मदद दी है।
जनता बीच का सम्पत्ति वितरण अन्य विकसित और विकासोन्मुख देशों के तुलना में ही है: ऊपरवाले १०% गृहस्थी के साथ कुल राष्ट्रिय सम्पत्ति का ३९.१% पर नियन्त्रण है और निम्नतम १०% के साथ केवल २.६%।

नेपाल की १ करोड़ जितने का कार्यबलमे दक्ष कामदारका कमी है। ८१% कार्यबलको कृषि, १६% सेवा और ३% उत्पादन/कला-आधारित उद्योग रोजगार प्रदान करता है।

संविधान की धारा 295 (ख) के अनुसार प्रदेशों का नामाकरण सम्वन्धित प्रदेश के संसद (विधान सभा) में दो तिहाई बहुमत से होने का प्रावधान है।

नेपाल की संस्कृति तिब्बत एवं भारत से मिलती-जुलती है। यहाँ की वेषभूषा, भाषा तथा पकवान इत्यादि एक जैसे ही हैं। नेपाल का सामान्य खाना चने की दाल, भात, तरकारी, अचार है। इस प्रकार का खाना सुबह एवं रात में दिन में दोनो जून खाया जाता है। खाने में चिवड़ा और चाय का भी चलन है। मांस-मछली तथा अंडा भी खाया जाता है। हिमालयी भाग में गेहूँ, मकई, कोदो, आलू आदि का खाना और तराई में गेहूँ की रोटी का प्रचलन है। कोदो के मादक पदार्थ तोंगबा, छ्याङ, रक्सी आदि का सेवन हिमालयी भाग में बहुत होता है। नेवार समुदाय अपने विशेष किस्म के नेवारी परिकारों का सेवन करते हैं।

नेपाली सामाजिक जीवन की मान्यता, विश्वास और संस्कृति हिंदू भावना में आधारित है। धार्मिक सहिष्णुता और जातिगत सहिष्णुता का आपस का अन्योन्याश्रित सम्बन्ध नेपाल की अपनी मौलिक संस्कृति है। यहाँ के पर्वों में वैष्णव, शैव, बौद्ध, शाक्त सब धर्मों का प्रभाव एक-दूसरे पर समान रूप से पड़ा है। किसी भी एक धार्मिक पर्व को धर्मावलम्बी विशेष का कह सकना और अलग कर पाना बहुत कठिन है। सभी धर्मावलंबी आपस में मिलकर उल्लासमय वातावरण में सभी पर्वों में भाग लेते हैं। नेपाल में छुआछूत का भेद न कट्टर रूप में है और न जन्मसंस्कार के आधार पर ही है। शक्तिपीठों में चांडाल और भंगी, चमार, देवपाल और पुजारी के रूप में प्रसिद्ध शक्ति पीठ गुह्येश्वरी देवी, शोभा भागवती के चांडाल तथा भंगी, चमार पुजारियों को प्रस्तुत किया जा सकता है।

उपासना की पद्धति और उपासना के प्रतीकों में भी समन्वय स्थापित किया गया है। नेपाल में बौद्ध धर्म ने भी मूर्तिपूजा और कर्मकांड अपनाया है। बौद्ध पशुपतिनाथ की पूजा आर्यावलोकितेश्वर के रूप में करते हैं और हिंदू मंजुश्री की पूजा सरस्वती के रूप में करते हैं। नेपाल की यह समन्वयात्मक संस्कृति लिच्छवि काल से अद्यावधि चली आ रही है।

नेपाल अनुग्रहपरायण देश है। वह किसी के मैत्रीपूर्ण अनुग्रह को कभी भूल नहीं सकता। नेपाल का पराक्रम विश्वविख्यात है। नेपाल की सांस्कृतिक परम्परा को कायम रखने के लिए वि॰सं॰ 2017 साल में संयुक्त राज्य अमरीका के काँग्रेस के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधन करते हुए श्री 5 महेन्द्र ने स्पष्टरूप में कहा था कि 'सैनिक कार्यों में लगने वाले खर्च संसार की गरीबी हटाने में व्यय हों'।

नेपाल एक छोटा स्वतंत्र राष्ट्र है, किंतु जाति के आधार पर नेपाल राज्य की मित्र राष्ट्र भारत के समान विभिन्न जातियों के रहने का एक अजायबघर जैसा है। उत्तरी भाग की ओर भोटिया, तामां‌, लिंबू, शेरपा, महाभारत शृंखला में मगर, किरात, नेवार, गुरुं‌, सुनुवार और भीतरी तराई क्षेत्र में घिमाल, थारू, मेचै, दनवार आदि जातियों की बहुलता विशेष रूप से उल्लेखनीय है। ठाकुर, खस, जैसी, क्षत्री जातियों तथा ब्राह्मणों की सख्या नेपाल में यत्र-तत्र काफी है। यहाँ पर प्रवासी भारतीयों की संख्या भी पर्याप्त है।

नेपाल मे आधुनिक शिक्षा की शुरूवात राणा प्रधानमन्त्री जंगबहादुर राणा की विदेश यात्रा के बाद सन् 1854 में स्थापित दरबार हाईस्कूल (हाल रानीपोखरी किनारे अवस्थित भानु मा.बि.) से हुई थी, इससे पहले नेपाल मे कुछ धर्मशास्त्रीय दर्शन पर आधारित शिक्षा मात्र दी जाती थी। आधुनिक शिक्षा की शुरूवात 1854 में होते हुए भी यह आम नेपाली जनताके लिए सर्वसुलभ नहीं था। लेकिन देशके विभिन्न भागों में कुछ विद्यालय दरबार हाईस्कूलकी शुरूवात के बाद खुलना शुरू हुए। लेकिन नेपाल में पहला उच्च शिक्षा केन्द्र काठमान्डू में राहहुवा त्रिचन्द्र कैम्पस है। राणा प्रधानमन्त्री चन्द्र सम्सेर ने अपने साथ राजा त्रिभुवनका नाम जोडके इस कैंपसका नाम रखाथा। इस कैंपसकी स्थापना बाद नेपालमे उच्च शिक्षा अर्जन बहुत सहज होनगया लेकिन सन 1959 तक भी देश मे एकभी विश्वविद्यालय स्थापित नहीं हो सकाथा राजनितिक परिवर्तन के पश्चात् राणा शासन मुक्त देशने अन्ततः 1959 मे त्रिभुवन विश्वविद्यालयकी स्थापना की। उसके बाद महेन्द्र संस्कृत के साथ अन्य विश्वविद्यालय खुलते गए। हाल ही में मात्र सरकार ने ४ थप विश्वविद्यालय भी स्थापित करने की घोषणा की है। नेपाल की शिक्षा का सबसे मुख्य योजनाकार शिक्षामन्त्रालय है उसके अलावा शिक्षा विभाग, पाँच क्षेत्रीय शिक्षा निदेशालय, पचहतर जिल्ला शिक्षा कार्यालय, परीक्षा नियन्त्रण कार्यालय सानोठिमी, उच्चमाध्यामिक शिक्षा परिषद्, पाठ्यक्रम विकास केन्द्र, विभिन्न विश्वविद्यालयों के परीक्षा नियन्त्रण कार्यालय नेपालकी शिक्षाका विकास विस्तार तथा नियन्त्रणके क्षेत्र में कार्यरत हैं।

नेपाल मे बहुत पहिले से आयुर्वेद (प्राकृतिक चिकित्सा) पद्धति उपयोग मे था। बैध और परंपरागत चिकित्सक गाँवघर और शहरो मे स्वास्थ्य सेवा पहुचाते थे। उनलोगो की औषधि के श्रोत नेपाल के हिमाल से तराइ तक मिलनेवाले जडीबुटी ही होते थे। आधुनिक चिकित्सा पद्धती की शुरूवात राणा प्रधानमन्त्री जंगवाहादुर राणा की बेलायत यात्रा के बाद दरवार के अन्दर शुरू हुवा लेकिन नेपाल में आधुनिक चिकित्सा संस्था के रूप में राणा प्रधानमन्त्री वीर सम्सेर के काल मे काठामाण्डौ में सन १८८९ मे स्थापित वीर अस्पताल ही है। तत्पश्चात चन्द्र समसेर के काल मे स्थापित त्रिचन्द्र सैनिक अस्पताल है। हाल में नेपाल के हस्पताल सामन्यतया आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा तथा आधुनिक चिकीत्सा करके सरकारी सेवा विद्यमान हे।

नेपाल मे नेपाली सेना, नेपाली सैनिक विमान सेवा, नेपाल ससस्त्र प्रहरी बल, नेपाल प्रहरी, नेपाल ससस्त्र वनरक्षक तथा राष्ट्रीय अनुसन्धान विभाग नेपाल लगायत सस्सत्र, तथा गुप्तचर सुरक्षा निकाय रहेहै।दक्षिण एशिया में नेपाल की सेना पांचवीं सबसे बड़ी है और विशेषकर विश्व युद्धों के दौरान, अपने गोरखा इतिहास के लिए उल्लेखनीय रही है। गोरखा सेना को सबसे अधिक बार विक्टोरिया क्रॉस दिया गया है।

भारत के उत्तर में बसा नेपाल रंगों से भरपूर एक खूबसूरत है। यहां वह सब कुछ है जिसकी तमन्ना एक आम सैलानी को होती है। देवताओं का घर कहे जाने वाले नेपाल विविधाताओं से पूर्ण है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां एक ओर यहां बर्फ से ढ़कीं पहाड़ियां हैं, वहीं दूसरी ओर तीर्थस्थान है। रोमांचक खेलों के शौकीन यहां रिवर राफ्टिंग, रॉक क्लाइमिंग, जंगल सफारी और स्कीइंग का भी मजा ले सकते हैं।

लुंबिनी महात्मा बुद्ध की जन्म स्थली है। यह उत्तर प्रदेश की उत्तरी सीमा के निकट वर्तमान नेपाल में स्थित है। यूनेस्को तथा विश्व के सभी बौद्ध सम्प्रदाय (महायान, बज्रयान, थेरवाद आदि) के अनुसार यह स्थान नेपाल के कपिलवस्तु में है जहाँ पर युनेस्को का आधिकारिक स्मारक लगायत सभी बुद्ध धर्म के सम्प्रयायौं ने अपने संस्कृति अनुसार के मन्दिर, गुम्बा, बिहार आदि निर्माण किया है। इस स्थान पर सम्राट अशोक द्वारा स्थापित अशोक स्तम्भ पर ब्राह्मी लिपि में प्राकृत भाषा में बुद्ध का जन्म स्थान होने का वर्णन किया हुआ शिलापत्र अवस्थित है।

जनकपुर नेपाल का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जहां सीता मां माता का जन्म हुवा था। ये नगर प्राचीन काल में मिथिला की राजधानी माना जाता है। यहाँ पर प्रसिद्ध राजा जनक थे जो सीता माता जी के पिता थे। सीता माता का जन्म मिट्टी के घड़े से हुआ था। यह शहर भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की ससुराल के रूप में विख्यात है।

मुक्तिनाथ वैष्‍णव संप्रदाय के प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह तीर्थस्‍थान शालिग्राम भगवान के लिए प्रसिद्ध है। भारत में बिहार के वाल्मीकि नगर शहर से कुछ दूरी पर  जाने पर  गंडक  नदी  से होते हुए जाने का मार्ग है ा दरअसल एक पवित्र पत्‍थर होता है जिसको हिंदू धर्म में पूजनीय माना जाता है। यह मुख्‍य रूप से नेपाल की ओर प्रवाहित होने वाली काली गण्‍डकी नदी में पाया जाता है। जिस क्षेत्र में मुक्तिनाथ स्थित हैं उसको मुक्तिक्षेत्र' के नाम से जाना जाता हैं। हिंदू धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार यह वह क्षेत्र है, जहां लोगों को मुक्ति या मोक्ष प्राप्‍त होता है। मुक्तिनाथ की यात्रा काफी मुश्किल है। फिर भी हिंदू धर्मावलंबी बड़ी संख्‍या में यहां तीर्थाटन के लिए आते हैं। यात्रा के दौरान हिमालय पर्वत के एक बड़े हिस्‍से को लांघना होता है। यह हिंदू धर्म के दूरस्‍थ तीर्थस्‍थानों में से एक है।

काठमांडु शहर से 29 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में छुट्टियां बिताने की खूबसूरत जगह ककनी स्थित है। यहां से हिमालय का खूबसूरत नजारा देखते ही बनता है। ककनी से गणोश हिमल, गौरीशंकर 7134 मी., चौबा भामर 6109 मी., मनस्लु 8163 मी., हिमालचुली 7893 मी., अन्नपूर्णा 8091 मी. समेत अनेक पर्वत चोटियों को करीब से देखा जा सकता है।

समुद्र तल से 4360 मी. की ऊंचाई पर स्थित गोसाई कुण्ड झील नेपाल के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। काठमांडु से 132 किलोमीटर दूर धुंचे से गोसरई कुंड पहुंचना सबसे सही विकल्प है। उत्तर में पहाड़ और दक्षिण में विशाल झील इसकी सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। यहां और भी नौ प्रसिद्ध झीलें हैं। जैसे सरस्वती भरव, सौर्य और गणोश कुंड आदि।

यह प्राचीन नगर काठमांडु से 30 किलोमीटर पूर्व अर्निको राजमार्ग काठमांडु-कोदारी राजमार्ग के एक ओर बसा है। यहां से पूर्व में कयरेलुंग और पश्चिम में हिमालचुली श्रृंखलाओं के खूबसूरत दृश्यों का आनंद उठाया जा सकता है।

भगवान पशुपतिनाथ का यह खूबसूरत मंदिर काठमांडु से करीब 5 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है। बIगमती नदी के किनारे इस मंदिर के साथ और भी मंदिर बने हुए हैं। विश्मवप्रसिद्ध महाकाव्य महाभारत  जो महर्षि वेदव्यासद्वारा ५५०० ईसा पुर्व भारतवर्ष मे हुआ। उसीमे कुंतीपुञ धर्मराज युधिष्टीर , अर्जुन, भिम, नकुल, सहदेव तथा द्रोपदी जब स्वर्गारोहण कर रहे थे तब वे जिस विशाल पर्वत श्रृखंला से गये उसे  महाभारत पर्वत श्रृखंला  तथा जहा पर कैलासनाथ आदियोगी महादेव जी ने ज्योतिर्लिंग के रुप मे प्रकट हुये वो स्थान  श्री पशुपतिनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर  के नाम से जाना जाता है। पशुपतिनाथ ज्योतिर्लिंग देवस्थान के बारे में माना जाता है कि यह नेपाल में हिंदुओं का सबसे प्रमुख और पवित्र तीर्थस्थल है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर प्रतिवर्ष हजारों देशी-विदेशी श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचता है। गोल्फ कोर्स और हवाई अड्डे के पास बने इस मंदिर को भगवान का निवास स्थान माना जाता है।

पशुपति शिव (केदार )के शिर , उत्तराखण्डका केदारनाथ शिव (केदार)का शरीर ,डोटी बोगटानका बड्डीकेदार, शिव (केदार )का पाउ (खुट्टा)के रुपमे शिवका तीन अंग प्रसिद्द ज्योतिर्लिंग धार्मिक तीर्थ है । डोटीके केदार व कार्तिकेय (मोहन्याल)का  इतिहास अयोध्याका राजवंश से जुड़ा है । उत्तराखण्ड के सनातनी देवता डोटी ,सुर्खेत ,काठमाडौँ के देबिदेवाताका धार्मिक तीर्थ के लिए प्राचीन कालमे महाभारत पर्वत,चुरे पर्वत क्षेत्र से आवत जावत होता था । यिसी लिए यह क्षेत्र पबित्र धार्मिक इतिहास से सम्बन्धित है ।

रॉयल चितवन राष्ट्रीय उद्यान देश की प्राकृतिक संपदा का खजाना है। 932 वर्ग किलोमीटर में फैला यह उद्यान दक्षिण- मध्य नेपाल में स्थित है। 1973 में इसे नेपाल के प्रथम राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा हासिल हुआ। इसकी अद्भुत पारिस्थितिकी को देखते हुए यूनेस्को ने 1984 में इसे विश्‍व धरोहर का दर्जा दिया।

इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह काठमांडु घाटी का सबसे पुराना विष्णु मंदिर है। मूल रूप से इस मंदिर का निर्माण चौथी शताब्दी के आस-पास हुआ था। वर्तमान पैगोडा शैली में बना यह मंदिर 1702 में पुन: बनाया गया जब आग के कारण यह नष्ट हो गया था। यह मंदिर घाटी के पूर्वी ओर पहाड़ की चोटी पर भक्तपुर से चार किलोमीटर उत्तर में खूबसूरत और शांतिपूर्ण स्थान पर स्थित है। यह मंदिर यूनेस्को विश्‍व धरोहर सूची का हिस्सा है। 2072 वैशाख 12 का भुकम्प ने इस मन्दिरका कुछ संरचना विगड गया है।

भक्तपुर के दरबार स्क्वैयर का निर्माण 16वीं और 17वीं शताब्दी में हुआ था। इसके अंदर एक शाही महल दरबार और पारंपरिक नेवाड़, पैगोडा शैली में बने बहुत सारे मंदिर हैं। स्वर्ण द्वार, जो दरबार स्क्वैयर का प्रवेश द्वार है, काफी आकर्षक है। इसे देखकर अंदर की खूबसूरती का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। यह जगह भी युनेस्को की विश्‍व धरोहर का हिस्सा है।

यूनेस्को की आठ सांस्कृतिक विश्‍व धरोहरों में से एक काठमांडु दरबार प्राचीन मंदिरों, महलों और गलियों का समूह है। यह राजधानी की सामाजिक, धार्मिक और शहरी जिंदगी का मुख्य केंद्र है।

खूबसूरती की मिसाल स्वर्ण द्वार नेपाल की शान है। बेशकीमती पत्थरों से सजे इस दरवाजे का धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्व है। शाही अंदाज में बने इस द्वार के ऊपर देवी काली और गरुड़ की प्रतिमाएं लगी हैं। यह माना जाता है कि स्वर्ण द्वार स्वर्ग की दो अप्सराएं हैं। इसका वास्तुशिल्प और सुंदरता पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। तथा मनमोहक सुंदर दृश्य पर्यटकों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण जगह है।

काठमांडु घाटी के मध्य में स्थित बोधनाथ स्तूप तिब्बती संस्कृति का केंद्र है। 1959 में चीन के हमले के बाद यहां बड़ी संख्या में तिब्बतियों ने शरण ली और यह स्थान तिब्बती बौद्धधर्म का प्रमुख केंद्र बन गया। बोधनाथ नेपाल का सबसे बड़ा स्तूप है। इसका निर्माण 14वीं शताब्दी के आस-पास हुआ था, जब मुगलों ने आक्रमण किया।

 संदर्भ  - इस स्तूप को नेपाली में बौद्ध नाम से पुकारा जाता है। इसकी प्रारम्भिक ऐतिहासिक सामग्री इसकी ही नीचे डबा हुवा अनुमानित है। लिच्छवि राजाओं मानदेव द्वारा निर्मित और शिवदेव द्वारा विस्तारित माना जाता है। हालान्की इसकी वर्तमान स्वरूप की निर्माण की तिथि भी अज्ञात ही है। इसकी गर्भ-बेदी की दीवार पर स्थापित छोटे-छोटे प्रस्तर मूर्तियां और ऊपर की छत्रावली संस्कृत बौद्ध-धर्म का प्रतीक माना जाता है। संस्कृत बौद्ध वाङ्मय का तिब्बती भा

नेपाल, (आधिकारिक रूप मा संघीय लोकतान्त्रिक गणराज्य नेपाल)  एकठु दक्खिन एशियाई भूपरिवेष्ठित हिमालयी राष्ट्र होय । नेपाल कय  उत्तर मा चीन कय  स्वायत्तशासी प्रदेश तिब्बत हय अउर  दक्खिन, पूरुव अव पच्छु मैंहा  भारत हय। नेपाल कय ८१ प्रतिशत नागरिक हिन्दू धर्मावलम्बी हँय । नेपाल विश्व कय  प्रतिशत कय  आधार पे सबसे ढेर हिन्दू धर्मावलम्बी राष्ट्र होय। नेपाल कय  राजभाषा नेपाली होए अउर नेपाल कय  मनईन  कय  नेपाली कहा जात है।




#Article 95: पंजाब नेशनल बैंक (157 words)


पंजाब नैशनल बैंक भारत कय यक्ठु बड़ा औ पुरान बैंक होय। इ यक्ठु अनुसूचित बैंक होय। पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) बना रहा १९ मई, १८९४ कय जब भारतीय कंपनी अधिनियम कय तरे अनारकली बाज़ार लाहौर मा यकर कार्यालय कय साथे पंजीकृत कीन गै। पंजाब नैशनल बैंक भारत कय दुसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक होय औ भारत कय ७६४ सहरन मा यकर लगभग ४,५०० साखा हँय। यकर लगभग ३७ लाख ग्राहक हँय। बैंकर अल्मानेक लंदन कय अनुसार यि बैंक दुनिया कय सबसे बडा बैंकन मा २४८वें जगह पय हय। बित्तीय साल २००७ मा, बैंक कय कुल जायदाद ६० अरब अमेरिकी डॉलर रहा। पंजाब नैशनल बैंक कय ब्रिटेन मा यक्ठु बैंकिंग सहायक बैंक हय, साथै हांगकांग औ काबुल मा साखा हय औ अल्माटी, शंघाई औ दुबई मा यकर कार्यालय हय।

इ बैंक लाहौर मा १८९५ मा बना रहा । यका बनावै वाले स्वदेसी आन्दोलन कय नेता लोग रहें । यकरे काम काज मा लाला लाजपत रायऔ जुडा रहें ।




#Article 96: पटना (228 words)


पटना ( ) भारत महिया बिहार प्रान्त कय राजधानी अहै। पटना कय प्राचीन नाँव पाटलिपुत्र रहा।
आधुनिक पटना दुनिया कय कुछ अइसन गिनल-चुनल प्रचीन नगरन में से अहै जवन बहुत प्राचीन काल से आज भी आबाद अहै। अपने आप में ई शहर कय बहुत ऐतिहासिक महत्व अहै।

मेगस्थनीज (350 ई॰पू॰-290 ई॰पू॰) आपन भारत भ्रमण कय बाद लिखल पुस्तक इंडिका मा ई नगर कय उल्लेख पलिबोथ्रा (पाटलिपुत्र) कय रूप में करिन जवन गंगा अउर  अरेन्नोवास (सोनभद्र-हिरण्यवाह) कय संगम पे  बसा रहा। ऊ पुस्तक कय आकलन कय हिसाब से प्राचीन पटना (पलिबोथा) 9 मील (14.5 कि.मी.) लम्मा तथा 1.75 मील (2.8 कि.मी.) चौड़ा रहा होई। 

आधुनिक पटना बिहार राज्य कय राजधानी अहै अव  गंगा नदी कय  दक्षिणी किनारा पे अवस्थित अहै। सोरह  लाख (16,00,000) से अधिक आवादी वाला ई शहर, लगभग 15 कि.मी. लम्मा अव 7 कि.मी. चौड़ा अहै।

प्राचीन बौद्ध अव जैन तीर्थस्थल वैशाली, राजगीर या राजगृह, नालन्दा, बोधगया अउर पावापुरी पटना शहर कय आस-पास अहै। पटना सिक्ख लोगन कै खातिर पवित्र अस्थान अहै। सिक्ख लोगन कय 10वा वा अंतिम गुरु गुरू गोबिंद सिंह कय  जन्म हिया भए  रहा| हर बरिस देश-विदेश से लाखन ठो सिक्ख श्रद्धालु पटना मा हरमंदिर साहब कय  दर्शन करय आवा लय।

एतिहासिक अव  प्रशासनिक महत्व कय अलावा पटना शिक्षा अव चिकित्सा कय भी प्रमुख केंद्र अहै। देवारिन से घिरा नगर कय पुराना क्षेत्र, जवने कय पटना सिटी कहा जाला एक  प्रमुख वाणिज्यिक केन्द्र अहै।




#Article 97: पश्चिम त्रिपुरा जिला (564 words)


पश्चिम त्रिपुरा भारतीय राज्य त्रिपुरा कय एक जिला आय। जिला कय मुख्यालय अगरतला आय जौन राज्य कय राजधानिव अहै। पश्चिम त्रिपुरा जहां एक ओरी मंदिरन के बरे जाना जात है, हुवंयी दुसरी ओर ई जगह ऊंच पर्वत, महल अव झील आदि के बरे भी प्रसिद्ध अहै। ऐतिहासिक दृष्टि से भी ई काफी महत्वपूर्ण अहै। 

पश्चिम त्रिपुरा बांग्लादेश के उत्तर, उत्तर त्रिपुरा के पुरुब अउर दक्षिण त्रिपुरा के दक्खिन से घिरी अहै। ई स्थान कइव प्रमुख राजाओं के हाथों से होइके गुजरा हय। बीर बिक्रम किशोर माणिक्य हियाँ कय अंतिम राजा रहे। इनके खतम भये के बाद उनकय मेहरारू महाराजी कंचनपुरा देवी एह जगह कय कार्यभार पूरी तरह से संभालीं। हियाँ कय प्रमुख नदियों मा गोमती अव होवाड़ अहै।
एहकय क्षेत्रफल अहै 2997 km² अव जनसंख्या अहै 1,530,531 (2001)।

पच्छूं त्रिपुरा जिला कय चार उपमंडल अहैं।

अगरतला मा प्रमुख आकर्षण केन्द्र उज्जयंता पैलेस, राज्य संग्रहालय, जनजातीय संग्रहालय, सुकान्ता एकेडमी, एम.बी.बी. कॉलेज, लक्ष्मीनारायाण मंदिर, उमा महेश्‍वर मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, बेनुबन बिहार, गेडु मीन मस्जिद, मलांच निवास, रविन्द्र कनान, पुरबाशा, हस्तशिप केन्द्र, चौदहवां देवी मंदिर, चर्च आदि अहैं।

 
अगरतला स्थित उज्जयंता पैलेस एक शाही महल आय। ई महल एक वर्ग किलोमीटर के दायरा मा फइला बा। एह महल कय निर्माण महाराजा राधा किशोर मानिक सन् 1899-1901 ई. मा करवाए रहें। महल मा खूबसूरत टाइल, लकड़ी कय जादातर काम अव दरवाजन पय खूबसूरत हस्तकला कीन गय अहै। एह महल क का विशाल मुगल गार्डन के शैली मा तैयार कीन गा अहै। उज्जयंता महल कय वास्तुकला काफी आकर्षक अहै। एहके अतिरिक्त महल मा तीन ऊंच गुम्बद अहैं।

ई मंदिर अगरतला हवाई अड्डा से 125 किलोमीटर की दूरी पय स्थित अहै। माना जात है कि एहमा स्थित मूर्ति का अराकन से लावा गा रहा। हर साल अप्रैल माह के दौरान एक सप्ताह के मेला कय आयोजन कीन जात है। काफी संख्या मा लोग देश-विदेश से एह मेला मा शामिल होत हैं।

चतुर्दश देवता मंदिर ओल्ड अगरतला मा स्थित अहै। ई मंदिर अगरतला से लगभग आठ किलोमीटर दूर अहै। एह मंदिर कय निर्माण महाराजा कृष्ण किशोर माणिक्य अठाहरवीं शताब्दी मा करवाए रहें। हर साल जून मा खरची पूजा कीन जात है। एह पूजा मा काफी संख्या मा हर धरम कय मनई शामिल होत हैं।

एह विशाल झील कय निर्माण महाराजा धन्य माणिक्य 15वीं शताब्दी मा करवाए रहें। ई झील कमलसागर के तट पय स्थित अहै। झील के नगीचय मा देवी काली कय एक प्रसिद्ध मंदिर अहै। ई मंदिर लगभग सोलहवीं शताब्दी का आय। काफी संख्या मा पर्यटक मंदिर मा दर्शन अउर झील कउ आनन्द लियै बरे आवत हैं। यहिके अलावा, कवि रविन्द्रनाथ टैगोर 1926 मा हियाँ कुछ समय खातिर ठहरा रहें।

ऊंचे पर्वत पय स्थित कुंजबन एक खूबसूरत दर्शनीय स्थल अहै। एह महल कय निर्माण महाराजा बिरेन्द्र किशोर माणिक्य 1917 ई. मा करवाए रहें। एह खूबसूरत जगह कय चयन महाराजा ने सुबुरबन महल कय इमारत बनवावइ के बरे केहे रहें। 

एह खूबसूरत झील महल कय निर्माण महाराजा वीरबिक्रम किशोर माणिक्य 1930 ई. मा करवाए रहें। ई महल एक प्राकृतिक झील के बीचे स्थित अहै जेहका रूद्रसागर के नाम से जाना जात है। एहकय क्षेत्रफल 5.35 वर्ग किलोमीटर मा फैला बा। संझा के समय एह महल कय नजारा अत्यंत अद्भुत होत है।

सबसे नगीच हवाई अड्डा अगरतला अहै। कलकत्ता द्वारा अगरतला के बरे नियमित रूप से उड़ान भरी जात है।

सबसे नगीच रेलवे स्टेशन धर्मनगर अहै। ई स्थान अगरतला स्थित जिला मुख्यालय से 200 किलोमीटर दूर अहै।

पच्छूं त्रिपुरा कलकत्ता, धर्मनगर, गोवाहटी, सिलचर आदि से सड़क मार्ग द्वारा पहुंचा जाय सकत है।




#Article 98: पाइथागोरस प्रमेय (142 words)


पाइथागोरस प्रमेय या बौधायन कय प्रमेय: समकोण त्रिभुज कय दो भुजाओं कय लम्बाइयों के वर्गों कय जोड़ कर्ण कय लम्बाई के वर्ग के बराबर होत है। 

पाइथागोरस प्रमेय (या, बौधायन प्रमेय) यूक्लिडीय ज्यामिति मा कउनो समकोण त्रिभुज के तीनों भुजाओं के बीचे एक सम्बन्ध बतावै वाला प्रमेय होय। एह प्रमेय का आमतौर पय एक समीकरण के रूप मा निम्नलिखित तरीका से अभिव्यक्त कीन जात है-

जहाँ c समकोण त्रिभुज के कर्ण कय लंबाई अहै तथा a अउर b अन्य दो भुजाओं कय लम्बाई होय। पाइथागोरस यूनान कै गणितज्ञ रहें।  उनही का प्रमेय कय खोज कय श्रेय दीन जात है,् हालांकि ई माना जाय लाग अहै कि एह प्रमेय कय जानकारी उनसे पहिले कय अहै। भारत कय प्राचीन ग्रंथ बौधायन शुल्बसूत्र मा ई प्रमेय दीनि अहै। काफी प्रमाण अहै कि बेबीलोन कय गणितज्ञौ एह सिद्धांत का जानत रहें। एहका 'बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय' भी कहथें।




#Article 99: पाकिस्तान (826 words)


पाकिस्तान एसिया कय एक्ठु देश होय । एकर राजधानी इस्लामाबाद होय । 

पाकिस्तान कय जनम सन् 1947 मा भारत कय विभाजन पे भवा रहा । सबसे पहिले सन् 1930 मा कवि (शायर) मुहम्मद इक़बाल  दुइ देस कय सिद्धान्त कय जीकिर किहे रहें । ओन भारत कय उत्तर-पच्छु  मा सिंध, बलूचिस्तान, पंजाब औ अफ़गान (सूबा-ए-सरहद) कय मिलाइकै एक्ठु नँवा देस बनावेकै कीहे रहें । सन् 1933 मा कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय कय छात्र चौधरी रहमत अली  पंजाब, सिन्ध, कश्मीर औ बलोचिस्तान कय मनइन खर्तीन पाक्स्तान (जवन बाद मा पाकिस्तान बना) शब्द कय बनाये रहें। सन् 1947 से 1970 तक पाकिस्तान दुई भागन मा बंटा रहा - पूरुब पाकिस्तान औ पच्छु पाकिस्तान। दिसम्बर, सन् 1971 मा भारत कय साथे भवा लड़ाई कय बाद पूरुब पाकिस्तान बांग्लादेश बना औ पच्छु पाकिस्तान पाकिस्तान रहि गै ।

पाकिस्तान शब्द कय जनम सन् 1933 मा कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय कय छात्र चौधरी रहमत अली  पाक्स्तान कय रूप मा करें रहें ।

आज कय पाकिस्तान कय जमिन कय मानवीय इतिहास कम से कम 5000 साल पुरान है,लेकिन पाकिस्तान शब्द कय जनम सन् 1933 मा कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय कय छात्र चौधरी रहमत अली से भवा रहा। आज कय पाकिस्तानी जमिन कयु संस्कृतिन कय गवाह है।
ईसापहिले 3300-1800 कय बीच हिँया सिन्धुघाटी सभ्यता कय विकास भवा। हिँया विश्व कय चार पुरान ताम्र-कांस्यकालीन सभ्यतन में से एक रहा।यकर जमिन  सिन्धु नदी कय किनारे बसा रहा लेकिन गुजरात (भारत) औ राजस्थान मा भी इ सभ्यता  कय अवशेष मिला । मोहेन्जो-दारो, हड़प्पा जइसन जगह पाकिस्तान मा इ सभ्यता कय प्रमुख अवशेष-जगह होँय। इ सभ्यता कय मनइलोग के रहें एकरे बारे मा विद्वानन मा मतभेद है। केहु एका आर्यन कय पूरान शाखा कहत हैं तो केहु द्रविड़। केहु एका बलोची भी ठहरवत हैं। इ मतभेद कय एक कारण सिन्धु-घाटी सभ्यता कय लिपि ना पढि पाइब होय।

अइसन मानि जात है कि 1500 ईसापहिले कय आसपास आर्यन कय आगमन पाकिस्तान कय उत्तरी जगहन कय राहि से भारत मा भवा । आर्यन कय निवास जगह स्पियन सागर कय पूरूब औ उत्तरी हिस्सन कय मानि जात है जहाँ से वे इ समय कय करीब ईरान, यूरोप औ भारत कय ओर चलि गा रहें। सन् 543 ईसापूरूब मा पाकिस्तान कय ढेर इलाका ईरान (फारस) कय हख़ामनी साम्राज्य कय तरे आइ गवा। लेकिन उ समय इस्लाम कय उदय नाइ भवा रहा; ईरान कय मनइ ज़रदोश्त कय चेला रहें औ देवतन कय पूजा करत रहें। सन् 330 ईसापूरूब मा मकदूनिया (यूनान) कय विजेता सिकन्दर  दारा तीसरा कय तीन दाई हराइकै  हखामनी वंश कय खत़म कइ दिहिस। इहिकै नाते मिस्र से पाकिस्तान तक फइला हखामनी साम्राज्य कय पतन होइ गवा औ सिकन्दर पंजाब तक आइ गै। ग्रीक स्रोतन कय मुताबिक ऊ सिन्धु नदी कय किनारे पै भारतीय राजा पुरु (ग्रीक - पोरस) कय हरा दिहिस। लेकिन ओकर सेना आगे बढ़ेस  इनकार कइ दिहिस औ ऊ भारत मा हले बिना वापिस लौटि गवा।ओकरे बाद उत्तरी पाकिस्तान औ अफगानिस्तान मा यूनानी-बैक्ट्रियन सभ्यता कय विकास भवा। सिकन्दर कय साम्राज्य कय ओकर सेनापति आपस मा बाँट लिहिन। सेल्युकस नेक्टर सिकन्दर कय सबसे शक्तिशाली उत्तराधिकारिन में से एक रहा।

मौर्य 300 ईसापूर्व कय आसपास पाकिस्तान कय अपने साम्राज्य कय तरे कई लिहीन ।एकरे बाद फिरसे ई ग्रीको-बैक्ट्रियन शासन मा चलि गवा । इ शासकन मा सबसे प्रमुख मिनांदर बौद्ध धर्म कय बढाइस । पार्थियन कय पतन कय बाद ई फारसी प्रभाव से मुक्त होइ गवा । सिन्ध कय राय राजवंश (सन् 489-632) हिँया शासन किहिन।एकरे बाद इ उत्तर भारत कय गुप्त औ फारस कय सासानी साम्राज्य कय  बीचे बँटा रहि गै।

सन् 712 मा फारस कय सेनापति मुहम्मद बिन क़ासिम सिन्ध कय  राजा कय हरा दिहिस। इ फारसी जीत ना होइकै इस्लाम कय जीत रहा। बिन कासिम एक्ठु अरब रहा औ पूरुबी ईरान मा अरबन कय आबादी औ नियंत्रण बढ़त जात रहा । लेकिन इ समय केन्द्रीय ईरान मा अरबन कय प्रति घृणा औ इर्षा बढ़त जात रहा लेकिन इ क्षेत्र मा अरबन कय सत्ता जमा गा रहा । एकरे बाद पाकिस्तान कय क्षेत्र इस्लाम से प्रभावित होत चला गै। पाकिस्तानी सरकार कय अनुसार इ समय 'पाकिस्तान कय नेइ' डारि गा रहा । 1192 मा दिल्ली कय सुल्तान पृथ्वीराज चौहान कय हरावैक बाद मा दिल्ली कय सत्ता पे फारस से आवल तुर्क, अरब और फारसिन कय नियंत्रण होइ गवा । पाकिस्तान दिल्ली सल्तनत कय अंग बनि गवा।

सोरहवा सदी मा मध्य-एशिया से भागि कय आवल बाबर  दिल्ली कय सत्ता पे अधिकार जमाइस औ पाकिस्तान मुगल साम्राज्य कय अंग बनि गवा। मुगल काबुल तक कय जमीन कय आपने साम्राज्य मा मिला लिहिन। अठारहवा सदी कय अन्तिम तक विदेशि (खास कइकय अंग्रेजन) कय प्रभुत्व भारतीय उपमहाद्वीप पे बढ़त गै। सन् 1857 कय गदर कय बाद पूरा भारत अंग्रेजन कय शासन मा आइ गवा।

अंग्रेज़न कय  शासन काल मा , ख़ास कई कै पंजाब मा  कयू विरोधी आंदोलन भवा। इ दौरान पंजाब औ सिंध मा अच्छा ख़ासा हिंदू आबादी रहा। लेकिन जनतंत्र कय मांग कय लइकै औ मुसलमानन कय अल्पमत मा होएक नाते अलग मुस्लिम राष्ट्र कय मांग होए लाग। पहिले सन् 1930 मा शायर मुहम्मद इक़बाल भारत कय उत्तर-पच्छु चार प्रान्त -सिन्ध, बलूचिस्तान, पंजाब औ अफ़गान (सूबा-ए-सरहद)- कय मिलाइकै एक्ठु अलग राष्ट्र कय मांग कीहे रहें । 1947 अगस्त मा भारत कय विभाजन कय बाद पाकिस्तान कय जनम भवा। उ समय पाकिस्तान मा अबहिन कय पाकिस्तान औ बांग्लादेश दूनो देस एक्कै मा रहें । सन् 1971 मा भारत कय साथ भवा लडाई मा पाकिस्तान कय पूरबी हिस्सा (जवने कय  उ समय तक पूरुबी पाकिस्तान कहि जात रहा) बांग्लादेश कय रूप मा स्वतंत्र होइ गवा।




#Article 100: पानीपत (512 words)


पानीपत (Panipat) भारत के हरियाणा राज्य के पानीपत ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है।

पानीपत एक प्राचीन और ऐतिहासिक शहर है। यह दिल्ली-चंडीगढ राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-१ पर स्थित है। यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली के अन्तर्गत आता है और दिल्ली से ९० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भारत के इतिहास को एक नया मोड़ देने वाली तीन प्रमुख लड़ाईयां यहां लड़ी गयी थी।

प्राचीन काल में पांडवों एवं कौरवों के बीच महाभारत का युद्ध इसी के पास कुरुक्षेत्र में हुआ था, अत: इसका धार्मिक महत्व भी बढ़ गया है। महाभारत युद्ध के समय में युधिष्ठिर ने दुर्योधन से जो पाँच स्थान माँगे थे उनमें से यह भी एक था। आधुनिक युग में यहाँ पर तीन इतिहासप्रसिद्ध युद्ध भी हुए हैं। प्रथम युद्ध में, सन्‌ 1526 में बाबर ने भारत की तत्कालीन शाही सेना को हराया था। द्वितीय युद्ध में, सन्‌ 1556 में अकबर ने उसी स्थल पर अफगान आदिलशाह के जनरल हेमू को परास्त किया था। तीसरे युद्ध में, सन्‌ 1761 में, अहमदशाह दुर्रानी ने मराठों को हराया था। यहाँ अलाउद्दीन द्वारा बनवाया एक मकबरा भी है।

नगर में पीतल के बरतन, छुरी, काँटे, चाकू बनाने तथा कपास ओटने का काम होता है। यहाँ शिक्षा एवं अस्पताल का भी उत्तम प्रबंध है।

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देवी मंदिर पानीपत शहर, हरियाणा में स्थित है। देवी मंदिर देवी दुर्गो को समर्पित है। यहां मंदिर पानीपत शहर का मुख्य मंदिर है तथा पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां मंदिर एक तालाब के किनारे स्थित है जोकि अब सुख गया है और इस सुखे हुए तालाब में एक पार्क का निर्माण किया गया है जहां बच्चे व बुर्जग सुबह शाम टहलने आते है। इस पार्क में नवरात्रों के दौरान रामलीला का आयोजन भी किया जाता है जोकि लगभग 100 वर्षो से किया जाता रहा है।

देवी के मंदिर में सभी देवी-देवताओं कि मूर्ति है तथा मंदिर में एक यज्ञशाला भी है। मंदिर का पुनः निर्माण किया गया है जो कि बहुत ही सुन्दर तरीके से जोकि भारतीयें वास्तुकला की एक सुन्दर छवि को दर्शाता है। इस मंदिर में भक्त दर्शनों के लिए लगभग पुरे भारत से आते है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का इतिहास लगभग 250 वर्ष पुराना है इस मंदिर का निर्माण 18वीं शाताब्दी में किया गया था।

ऐसा माना जाता है कि सदाशिवराव को लिए देवी की मूर्ति तालाब के किनारे मिली थी, तब सदाशिवराय ने यहां मंदिर बनाने का फैसला किया।

ऐसा माना जाता है कि जब मंदिर को निर्माण किया जा रहा था तो देवी की मूर्ति को रात को एक स्थान से दूसरे स्थान पर रखा गया था परन्तु सुबह मूर्ति उसी स्थान मिली थी जहां से उसे पाया गया था तब यहां निर्णय लिया गया कि मंदिर उसी स्थान पर बनाया जाये जहां देवी की मूर्ति मिली है।

देवी मंदिर में सभी त्यौहार मनाये जाते है विशेष कर दुर्गा पूजा व नवरात्र के त्यौहार पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। इस दिन मंदिर को फूलो व लाईट से सजाया जाता है। मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं के दिल और दिमाग को शांति प्रदान करता है।

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#Article 101: पुराण (847 words)


पुराण, हिंदु कय धर्मसंबंधी आख्यानग्रंथ होय जवनेमें सृष्टि, लय, प्राचीन ऋषि, मुनि अउर राजा कय वृत्तात आदि अहैं। ई वैदिक काल कय काफ़ी बाद कय ग्रन्थ हैं, जवन स्मृति विभाग में आवत अहैं। भारतीय जीवन-धारा में जवन ग्रन्थ कय महत्वपूर्ण स्थान अहै वनमें पुराण भक्ति-ग्रंथ कय रूप में बहुत महत्वपूर्ण माना जाते अहैं। अठारह पुराणों में अलग-अलग देवी-देवता कय केन्द्र मानकय पाप औ पुण्य, धर्म औ अधर्म, कर्म औ अकर्म कय गाथा कही गा अहैं। कुछ पुराणों में सृष्टि कय आरम्भ से अन्त तक कय विवरण किहा गा अहै। यहमा हिन्दू देवी-देवता कय अउर पौराणिक मिथक कय बहुत अच्छा वर्णन अहै। 

कर्मकांड (वेद) से ज्ञान (उपनिषद्) कय ओर आईकै भारतीय मानस में पुराणों कय माध्यम से भक्ति कय अविरल धारा प्रवाहित करे है। विकास कय इही प्रक्रिया में बहुदेववाद औ निर्गुण ब्रह्म कय स्वरूपात्मक व्याख्या से धीरे-धीरे मानस अवतारवाद या सगुण भक्ति कय ओर प्रेरित भए।

पुराणों में वैदिक काल से चलत सृष्टि आदि संबंधी विचार, प्राचीन राजा अउर ऋषिय कै परंपरागत वृत्तांत तथा कहानि आदि कय संग्रह कय साथ साथ कल्पित कथा कय विचित्रता अउर रोचक वर्णन द्वारा सांप्रदायिक या साधारण उपदेश भी मिलत अहैं। पुराण उहै प्रकार कय प्रमाण ग्रंथ नाहीं होय जवन प्रकार श्रुति, स्मृति आदि होय। 

पुराणों में विष्णु, वायु, मत्स्य अउर भागवत में ऐतिहासिक वृत्त— राजा कय वंशावली आदि कय रूप में बहुत कुछ मिलत अहैं। ई वंशावलि यद्यपि बहुत संक्षिप्त अहैं अउर यहमा परस्पर कहु  विरोध भी अहैं लेकिन् हैं बडे़ काम कय। पुराण कय ओर ऐतिहासिकविद् यहर विशेष रूप से ध्यान दिहे अहै अउर वे ई वंशावलि कय छानबीन में लाग हैं। 

पुराण भुतकाल, वर्तमान अउर् भविष्यकाल कय देखल  युग होय जवने कै बहुत ही सुन्दर ढंग से लिखा गा है जवनेकै धर्म में आस्था राखय वाले लोग धर्म ग्रन्थ मानत अहैं अउर जवन लोग बुध्द्धिजीवी होत अहैं वे एका विज्ञान कय रूप में देखते अहैं जवनेकय उदारहरण द्वारा आप समझा जाई सकत अहैं 
पुराण में 14 मन्वन्तर कय बारे में बतावा गा है साथ ही पृथ्वी कय आयु बतावा गा है, कौने  युग में केतना ग्रह कय आकाश मंडल रहा उहो बताव बतावा है वह् समय  कौन-२  देवता रहे उहो बतावा  है, पृथ्वी कय कौन  शत्रु रहे वन्का विनाश कैसे भए हिया सब  बतावा है लेकिन यतने सुंन्दर ढग से लिखा गा है की सब चीज धर्म अउर पुरान कथा जैसन् लागत अहै जवनेकै आज तक नासा जइसन वैज्ञानिक सङग्ठन् तक नाहीं समझ पाए, नासा जवनेकै आधार हिन्दुत्व वेद होय जवनेपे वे आरभ से ही लागा रहे लेकिन् आज तक सही से नाहीं जान पाए की हिन्दुत्व सस्क्रिती काव् होय हिन्दू कय सब कुछ विज्ञान पे आधारित अहै  इहै पुराण होय:- 
पुराण में बतावा  है कि पृथवी ६ दाई नष्ट होई चुका है ई सातवी उतपती होय अउर आय वाला ७ युग कय व्याखा है, पुराण सब प्रमाणों कय साथ आपकय बतावत है की हम जवन भी यहमा लिखित अहन वह सब सत्य अउर प्रमाण वाला होय आप जवन इ समय पृथवी पर हव ऊ पूराण कय अनुसार वैवस्त मन्वन्तर (युग) होय,

प्राचीनकाल से पुराण देवता, ऋषि, मनुष्य - सब का मार्गदर्शन करत  अहैं। पुराण मनईनकय धर्म एवं नीति कय अनुसार जीवन व्यतीत करय कय शिक्षा देत अहैं। पुराण मनुष्य कय कर्म कय विश्लेषण कईकै वन्हें दुष्कर्म करय से रोकत अहैं। पुराण वस्तुतः वेद कय विस्तार होय। वेद बहुतै जटिल तथा शुष्क भाषा-शैली में लिखा गा अहैं। वेदव्यास जी  पुराण कय रचना अउर पुनर्रचना कीहिन्। कहा जात अहै, ‘‘पूर्णात पुराण ’’ जवने कै अर्थ होय वेद कय पूरक , अर्थात् पुराण (जवन वेद कय टीका होय)। वेद कय जटिल भाषा में कहल बात कय पुराण में सरल भाषा में समझावा गा हैं। पुराण-साहित्य में अवतारवाद कय प्रतिष्ठित कै गा है। निर्गुण निराकार कय सत्ता कय मानिकै सगुण साकार कय उपासना करेकै ई ग्रंथ कय विषय होय। पुराण में अलग-अलग देवी-देवता कय केन्द्र में रखिकै पाप-पुण्य, धर्म-अधर्म और कर्म-अकर्म कय कहानि हैं। प्रेम, भक्ति, त्याग, सेवा, सहनशीलता अईसन  मानवीय गुण होय, जवनकय अभाव में उन्नत समाज कय कल्पना नाहीं कइ जा सकत अहै। पुराणों में देवी-देवताओं कय अनेक स्वरूप कय लईकै एक विस्तृत विवरण मिलत अहै। पुराण में सत्य कय प्रतिष्ठित करै में दुष्कर्म कय विस्तृत चित्रण पुराणकारलोग किहिन् अहै। पुराणकार  देवता कय दुष्प्रवृत्ति कय व्यापक विवरण किहिन् अहै लेकिन मूल उद्देश्य सद्भावना कय विकास अउर सत्य कय प्रतिष्ठा  होय।

पुराण अठारह अहैं। 

म-2, भ-2, ब्र-3, व-4 ।​अ-1,ना-1, प-1, लिं-1, ग-1, कू-1, स्क-1 ॥
विष्णु पुराण कय अनुसार वनकय नाव  हैं—विष्णु, पद्य, ब्रह्म, वायु(शिव), भागवत, नारद, मार्कंडेय, अग्नि, ब्रह्मवैवर्त, लिंग, वाराह, स्कंद, वामन, कूर्म, मत्स्य, गरुड, ब्रह्मांड अउर भविष्य।

पुराण में एक विचित्रता ई अहै कि प्रत्येक पुराण में अठारह पुराण कय नाव अउर वनकयश्लोकसंख्या अहै। नाव अउर् श्लोकसंख्या प्रायः सबकय एक्कै है, कहु कहु भेद अहै। जैसय कूर्म पुराण में अग्नि कय स्थान में वायुपुराण; मार्कंडेय पुराण में लिंगपुराण कय स्थान में नृसिंहपुराण; देवीभागवत में शिव पुराण कय स्थान में नारद पुराण अउर मत्स्य में वायुपुराण अहै। भागवत कय नाव से आजकल दुई पुराण मिलत अहैं—एक श्रीमदभागवत, दूसर देवीभागवत। कौन वास्तव में पुराण अहै यहपे झगड़ा रहा अहै। रामाश्रम स्वामी  'दुर्जनमुखचपेटिका' में सिद्ध किहिन् अहै कि श्रीमदभागवत ही पुराण होय। यह पे काशीनाथ भट्ट  'दुर्जनमुखमहाचपेटिका' तथा एक अउर पंडित  'दुर्जनमुखपद्यपादुका' देवीभागवत कय पक्ष में लिखे रहे।

सुखसागर कय अनुसारः




#Article 102: पृथ्वी नारायण शाह (341 words)


पृथ्वी नारायण शाह नेपाल कय  एक  छोट पहाडी राज्य गोरखा कय  राजा नरभुपाल शाह तथा रानी कौसल्यावती कय  लरिका रहे  । बि.सं. १७७९ माँ एनकय  जनम भए रहा । बि.सं. १७९९ माँ  बीस बरस कय उमर माँ पृथ्वीनारयण शाह गोरखा कय  राजा बनि गए। ई आधुनिक नेपाल कय  जनमदाता होए |  छोट छोट राज्यन माँ विभाजीत नेपाल कय  एकिकृत करे कय  शुरुवात किहिन , नेपाल प्राचिन काल से एकिकृत होइकै  विभाजित होइ जात रहा। वईसे तो पृथ्वी नरायण शाहो से पहिलहुँ उपत्यका कय राजा यक्ष मल्ल, पाल्पा कय राजा मणीमकुन्द सेन अव  जुम्ला कय  राजा जितारी मल्ल कय समय  भी एकीकरण भए रहा ,बाकी एकीकृत नेपाल कय  ऊपर उल्लेखित राजा लोग ढेर दिन तक बचाई कय नाई राखिपाइन|  लेकिन पृथ्वी नारायण शाह जब एकीकरण शुरू किहिन  तो नेपाल कय  फिर विभाजन नाई होइ पाए | 

पृथ्वी नारायण शाह आधुनीक नेपाल के नीँव गाड़  गए अव  छोट छोट क्षेत्र जैसे (भिरकोट,कास्की,लम्जुंग गोरखा) मा राज करत शाहवंश कय पुरा नेपाल कय  राजवंश मा बदल दिहिन्। बि.सं. १८३१ माँ  पृथ्वी नारायण शाह ५२ वर्ष कय  उमर माँ  देहान्त कई गए तब्बो नेपाल एकिकरण अभियान वनकय  पतोह रानी राजेन्द्र लक्ष्मी, बेटवा राजकुमार बाहदुर शाह सब मिलकए  आगे बढाईन । नेपाल एकिकरण अभियान कए पुर्णविराम वनकए परनाती राजा गिर्वाण युद्ध विक्रम शाह कय  समय मा भए, नेपाल अंग्रेज युद्ध जवने कय  एंगलो-नेपाल युद्ध (१८१४–१६) के बाद भय । 

उक्त युद्ध माँ  नेपाल आपन सार्वर्भौमिकता तो बचा लिहिस लेकिन  बाकी बिशाल नेपाल कय  क्षेत्र जवने महिया पश्चिम क्षेत्र मा हाल कय  भारत कय  उतराखंड राज्य , हिमाचल राज्य तथा पंजाब कय  छोट छोट पहाड़ी क्षेत्र अऊर  सतलज नदी पार कय  पहाडी राज्य तक रहा तो पूरुब  मा दार्जिलिङ, से लईकै टिष्टा नदी तक तराई अऊर  पहाडी भू भाग ब्रिटिस इस्ट इण्डिया कम्पनि सरकार कय  सुगौली सन्धि कय  अन्तर्गत देवे कय  पडा। सिक्किम कय  उपर नेपाल कय  अधिकारो खतम होइ गवा। बाकी अंग्रेज लोग नेपाल कय  १८२२ माँ मेची से राप्ती तक तराई तथा प्रथम राणा प्रधानमन्त्री जंगबहादुर कय  काम से खुश होइकै राप्ती से महाकाली कय  बिच कय  तराई भू भाग १८६० मेँ वापस लौटा दिहिस ।




#Article 103: पेहवा (387 words)


पिहोवा (पेहवा, पेहोवा) हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिला कय एक नगर आय। एहकय पुरान नाम 'पृथूदक' हय। ई एक प्रसिद्ध तीरथ अहै।

महाभारत मा कहा गा हय कि

कुरुक्षेत्र पवित्र माना गा हय अउर सरस्वती कुरुक्षेत्रऽव से जादा पवित्र अहै। सरस्वती तीर्थ काफी जादा पवित्र अहै, लिकिन पृथूदक इनमा सबसे जादा पावन अव पवित्र अहै।

महाभारत, वामन पुराण, स्कन्द पुराण, मार्कण्डेय पुराण अउरव तमाम पुराण अव धर्मग्रन्थ के हिसाब से एह तीरथ कय महत्व एह बरे जादा होइ जात है कि पौराणिक व्याख्यान के हिसाब से एह तीर्थ कय रचना प्रजापति ब्रह्मा पृथ्वी, पानी, हवा अव अकाश के साथ सृष्टि कय शुरुआत केहे रहें। 'पृथुदक' शब्द कय उत्पत्ति कय सम्बन्ध महाराजा पृथु से रहा हय। एह जगह पृथु  अपने बाबू के खतम भये के बाद उनकय किरिया करम अव श्राद्ध केहें। यानी जहां पृथु अपने बाबू का उदक यानि पानी देहें । पृथु अव उदक के जोड़ से ई तीरथ पृथूदक कहलाइस।

वामन पुराण के हिसाब गंगा के तट पय रहय वाले रुषंगु नामक ऋषि आपन आखिरी समय जानिके मुक्ति की इच्छा से गंगा का छोड़िके पृथुदक मा जाय के बरे अपने बेटवन से गुजारिश केहे रहें। क्योंकि उसका कल्याण गंगा द्वार पर संभव नहीं था। पद्मपुराण के लेखा जौन मनई सरस्वती के उत्तरी तट पय पृथुदक मा जप करत करत अपने शरीर कय छ्वाड़त हय, वहि का नि:संदेह अमरता मिलि जात हय।

पेहवा मा गु्र्जर प्रतिहार वंश कय महान शासक मिहिर भोज कय घोड़ा केंद्र रहा,हियाँ घोड़न कय बयपार होत रहा।
उनका भोज देव कहा गा अहै
पेहवा से गुर्जर प्रतिहार शासक मिहिर भोज कय एक अभिलेखऽव मिला अहै ।

पिहोवा राष्ट्रीय राजमार्ग 65 पय स्थित अहै।
एहकय भौगोलिक स्थिति अहै- 29.98°N 76.58°E. समुद्र के तल से औसत उँचाई 224 मीटर हय।

वायु मार्ग
पिहोवा के सबसे नगीच चण्डीगढ़ अउर दिल्ली हवाई अड्डा अहै। चण्डीगढ़, दिल्ली से घूमय वाले कार, बस अउर टैक्सी से राष्ट्रीय राजमार्ग 65 अव राष्ट्रीय राजमार्ग 1 से असानी से पिहोवा तक पहुँचि सकत हइँ।

रेल रस्ता
रेलरस्ता से पिहोवा पहुंचय बरे घूमय वालेन का पहिले कुरूक्षेत्र या अंबाला आवय का  परत हय । 
 
रोड रस्ता
दिल्ली से घूमय वाले कार, बस अउर टैक्सी से राष्ट्रीय राजमार्ग 1 से कुरुक्षेत्र तक, वहिके बाद पिहोवा तक पहुँचि सकत हँय। चण्डीगढ़ से राष्ट्रीय राजमार्ग 65 से सीधा पिहोवा तक पहुँचि सकत हँय। पंजाब से पटियाला से भी रोड रस्ता से पिहोवा तक आइ सकत हइँ।




#Article 104: प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय (101 words)


नालंदा विश्विद्यालय पुरान समय में एक  बहुत बड़हन अऊर  विश्वप्रसिद्ध विश्वविद्यालय रहा जवने कय खण्डहर अऊर अवशेष वर्तमान नालंदा नाँव कय अस्थान पर अहै। ई एक बहुत बड़ा बौद्ध विहार रहा  बौद्ध दर्शन कय पढ़ाई कय पूरा बिस्व में एक  महत्वपूर्ण केन्द्र रहा। ई पाँचवी सदी इसवी से लै कय ११९७ ले शिक्षा कय एक अगुवा संस्थान रहा अऊर एकर धाक बहुत दूर-दूर ले रहा।

भारत सरकार कय दूसर देसन कय सरकारण कय साथे मिल कय ई उजरल -पजरल  विश्विद्यालय कय सम्मान में नालंदा विश्वविद्यालय कय नाँव से एक नया विश्विद्यालय खोलिस अहै जवने में २०१४ से पढ़ाई शुरू भए रहा।




#Article 105: फ़िनलैण्ड (187 words)


फ़िनलैंड, (फ़िनिश: Suomen tasavalta सुओमेन तासावाल्ता या Suomi सुओमी) आधिकारिक तवर पै फ़िनलैंड गणराज्य उत्तरी यूरोप कय फेनोस्केनेडियन क्षेत्र कय यक्ठु नॉर्डिक देस होय। यकर सीमा पच्छुम स्वीडन, पूरुब मा रूस औ उत्तर मा नॉर्वे से सटा हय, जबकि फिनलैंड खाड़ी कय पार दक्खिन मा एस्टोनिया हय। देस कय राजधानी हेलसिंकी होय।

लगभग 53 लाख कय आबादी वाला इ देस कय ढेर मनई दक्खिन वर रहत हँय। क्षेत्रफल कय हिसाब से इ यूरोप कय अठवां सबसे बड़ा औ जनघनत्व कय आधार पय यूरोपीय संघ में सबसे कम आबादी वाला देस होय। देस मा रहै वाले ढेर मनईन कय मातरिभाषा फ़िनिष होय, औ देस कय ५.५ प्रतिसत आबादी कय मातरिभाषा स्वीडिस होय।

फिनलैंड ऐतिहासिक रूप से स्वीडन कय यक्ठु हिस्सा रहा औ १८०९ से रूसी साम्राज्य कय तरे यक्ठु स्वायत्त ग्रैंड डची रहा। रूस से गृहयुद्ध कय बाद १९१७ मा फ़िनलैंड स्वतंत्रता कय घोषणा कीहिस। फिनलैंड १९५५ मा संयुक्त राष्ट्र संघ मा, १९६९ मा ओईसीडी औ १९९५ मा यूरोपीय संघ औ यूरोजोन मा सामिल भवा। यक्ठु सर्वेक्षण मा सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक औ सैन्य संकेतन कय आधार पय फिनलैंड कय दुनिया कय दूसरा सबसे ढेर स्थिर देस मानि गै।




#Article 106: फासीवाद (276 words)


फासीवाद एक मेर कय सरकार होय । यहमा देश कय जनता से बड़ा मानि जात है । ऐसन सरकार मे एक्ठु सब्से बडा नेता रहत है जवने कय तानाशाह कहि जात है ।
यकर सुरुवात १९१४ कै पहिले कै समाजवादी आंदोलन (सिंडिकैलिज़्म) मा होइ चुका रहा । इ फ्रांसीसी विचारक जाज़ेंज सारेल कै दर्शन से प्रभावित रहा ।सिंडिकैलिस्ट पार्टी उ समय पूँजीवाद औ संसदीय राज्य कै विरोध करत रहा।१९१९ म पहिला विश्वयुद्ध कय बाद पार्टी कय एक्ठु सदस्य मुसोलिनि आपन कुछ क्रांतिकारी सङरिहा कै साथ़े एक्ठु नँवा क्रांति कै भूमिका बनाइन । अंतर्राष्ट्रीय स्तर पै इटली कै सम्मानित जगह, गृहनीति मा मजूरहन् औ सेना कै सम्मान अव कुल लोकतांत्रिक औ संसदीय दल अव तरिकन् कय दमन कुल उ घोषणापत्र कय जरुरी चीज रहा।पहिला विश्वयुद्ध मा इटली अपने सङरिहा देशन कय साथे मिलिकै लडिस औ ओहमा ओका बहुत नोक्शान उठावेक परा । मुसोलिनी आपन शक्ति बढ़ावै खर्तिन रोसोनी कै नेशनल सिंडिकैलिस्ट पार्टी कै भी अपने साथे मिला लिहिन । क्रांति औ पुनरुत्थान कै धरिहा नारा निर्धन जनता कै बहुत प्रभावित किहिस औ बहुसंख्यक किसान औ मजूरहन में फ़ासिस्टवाद कै जऱ, बहुत गहराई तक फैलि गै ।

पहिला विश्वयुद्ध कय बाद आपन सुरुवाती दिन मा फ़ासिस्टवादी आंदोलन कय उद्देश्य राष्ट्र कै एकता औ शक्ति बढाइब रहा। १९१९ औ १९२२ कै बीच मा इटली कै कानून औ व्यवस्था कै चुनौती सिंडिकैलिस्ट, कम्युनिस्ट अव दुसर वामपंथी पार्टिन् से मिलै लाग। उ समय फ़ासिस्टवाद कै एक्ठु प्रतिक्रियावादी औ प्रतिक्रांतिवादी आंदोलन कै रुप मा बुझत रहे। स्पेन, जर्मनी जैसन देसन मा भि अइसन आन्दोलन भवा औ फ़ासिस्टवाद कै साम्यवाद कै प्रतिपक्ष (एंटीथीसिस) कै रुप मा लेवै लागें। १९३५ कै बाद हिटलर-मुसोलिनी-संधि कै नाते एका अतिक्रमण औ साम्राज्यवाद से जोडिकै देखै लागें ।




#Article 107: फुटबल खेल (348 words)


एसोसिएशन फुटबॉल जेका फूटबल , फुटबॉल (अंग्रेजी: फुट: गोड, बॉल: गेंना) या सॉकर कहि जात है।ई दुनिया कय सबसे मशहुर खेल मे से एक होय। ई एकठु सामूहिक खेल होय औ एका ग्यारह खेलाड़ि कय दुई दल कय बीचे खेली जात हैं ।यका खेलय वाले खेलाडिन कय गिन्ती दुनिया भर मा २५० मिलियन हय औ लगभग २०० देस सामिल हँय । इ चौकोण मैदान मा खेलि जात हय जवने कय पिच कहत हँय । पिच कय दुनो छोर मा गोल रहत हय ।इ खेल मा एक टिम मा ११ खेलाडी रहत हय जवने में से एक्ठु गोलकिपर रहत हय । इ खेल मा दूनो टिम कय मक्सद रहत हय गेना कय विपक्षी टिम कय गोल लाइन कय ओहपार पँहुचाय कय गोल करब । जवन टिम सबसे ढेर गोल करत हय उ जित जात हय ।  
इ खेलै कय नियम नियम होत हय जवने कय खेल कय कानुन कहत हँय । गेना कय परिधि या घुमाव ६८ से ७० सेमी होएक चाँहि जवने कय फूटबाल कहत हँय । अगर दूनो टिम कय बराबर गोल करे हँय तव खेल ड्रा होइ जात हय या तव अउर समय दइ जात हय खेल खेलय कय नाइ तव पेनाल्टि शुट आउट भि करवाय सका जात हय। गोलकिपर कय छोडिकै अउर कवनो  खेलाडि कय गेना कय हाथे से छुवैक अनुमति नाइ रहत हय ।

ओ खेल पहिले कय ग्रिक लोग खेलत रहें । उ समय मा एका हार्पास्टोन कहत रहें । वइसय रोमन लोग भि इ खेल कय खेलत रहे तव वका हार्पास्टुम कहत रहें । मध्य जुग मा इट्ली मा फ़ुटबाल खेल खेलय लागे औ यकर
विकास भवा वइसय पोलिनेसिया कय बंसिदा बाँस कय बना गेना से ढेर मेर कय खेल खेलत रहे ।एस्किमो लोग पहाडी घास पात से गोल गेना बनाइ कय फूटबाल खेलत रहे । बहुत मेर कय फूटबाल इंगलैण्ड मा खेल कय रुप मा विकास भवा औ ओकर संयोजन भवा ।    

फेडरेशन इंटरनेशनल द फुटबॉल असोसिएशन () (फीफा), फुटबॉल कय मिला अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण संस्था होय (औ सहायक खेल जइसय फुटसल () औ समुन्द्र तटीय फुटबॉल ())। फीफा मुख्यालय जुरिच मा मौजुद है।

फीफा कय साथे छः क्षेत्रीय संगठन जुड़ा हँय; 




#Article 108: बड़खल झील (102 words)


फरीदाबाद में स्थित बड़खल झील बहुत ही खूबसूरत है। यह मानव निर्मित झील है। इसके पास अरावली पर्वत श्रृंखला है। झील में पर्यटक जलक्रीडा़ओं (वाटर स्पोर्टस) का आनंद ले सकते हैं। यहां से थोड़ी दूरी पर बड़खल गांव है। इस गांव का नाम पर्शियन भाषा से लिया गया है। बड़खल का हिन्दी में अर्थ होता है बिना किसी रूकावट। झील में पानी की आपूर्ति बारिश के पानी और एक छोटी-सी जलधारा से होती है। पर्यटकों के ठहरने के लिए झील के पास रेस्ट हाऊस भी बने हुए हैं। इन विश्राम गृहों (रेस्ट हाऊसों) में बिना किसी परेशानी के आराम से ठहरा जा 




#Article 109: बरखा (241 words)


बरखा एक्ठु मौसम से संबंधित घटना होय जवने में पानी बुन्नी कय रूप में आसमान से जमीन पे गिराला। ई वर्षण कय एक्ठु रूप होय जवने में पानी द्रव कय रूप में नीचे गिराला। बुनी कय आकार कय हिसाब से बरखा के फँकारी, झींसी, झींसा, बुनी कहा जाला। जमीन अव समुन्द्र से बाफ बनी कय उड़य वाला पानी आसमान में ऊपर जाई कय संघनन कय कारण बहुत छोट-छोट बुनी अव बरफ में बदल जाला जवने से बादर बनाला। जब आपस में मिल कय ई बुनी बड़ा होई जाला तब पृथ्वी कय गुरुत्वाकर्षण से खिंचाई कय जमीन कय ओर गिरै लागाला जवने कै बरखा कहा जाला। 

बरखा पृथ्वी कय जल-चक्र कय एक्ठु बहुत महत्व वाला घटना अव हिस्सा होय काहें से की जमीन कय ऊपर मीठ पानी कय सबसे ढेर पुर्ती इही बरखा से होला। खेती खातिर बरखा कय महत्व बहुत है काहें से कि सिंचनी कय ई प्राकृतिक साधन होय जवन प्रकृति हम्मन कय सेती में दिहे है। भारत जइसन देस में खेतीबारी में पैदावार बहुत ढेर मात्रा में बरखा पे निर्भर होला।

बरखा कय विश्व में वितरण सब जगह एक्कै  नाई रहाला। कहुं बहुत कम बरखा होला तो कहुं बहुत ढेर। इही तरे विश्व में कुछ जगहन पे साल भर रोज बरखा होला, कुछ जगह गर्मी में बरखा होला, कुछ जगह जाड़ा कय सीजन में, अव कुछ जगह, जइसे कि भारत में, बरसात कय अलगै सीजन होला। भारत कय मेघालय राज्य में चेरापूँजी में विश्व कय सबसे ढेर बरखा होला।




#Article 110: बलभद्र प्रसाद दीक्षित ‘पढ़ीस’ (106 words)


बलभद्र प्रसाद दीक्षित ‘पढ़ीस’ एक अवधी भाषा के कवि रहेन। आधुनिक अवधी कवियन मा सबले जेठ कहा जइहैं। पढ़ीस जी कै जनम १८९८ ई. मा भा रहा। गाँव – अम्बरपुर। जिला – सीतापुर/अवध। खड़ी बोली हिन्दी , अंग्रेजी अउर उर्दू कै ग्यान हुवै के बादौ पढ़ीस जी कविताई अपनी मादरी जुबान मा यानी अवधी मा किहिन। १९३३ ई. मा पढ़ीस जी कै काव्य संग्रह ‘चकल्लस’ प्रकासित भा, जेहिकै भूमिका निराला जी लिखिन औ’ साफ तौर पै कहिन कि यू संग्रह हिन्दी के तमाम सफल काव्यन से बढ़िके है। पढ़ीस जी कै ग्रंथावली उ.प्र. हिन्दी संस्थान से आय चुकी है। पढ़ीस जी सन्‌ १९४२ मा दिवंगत भये।




#Article 111: बस्ती (180 words)


बस्ती, भारत देश के उत्तर प्रदेश प्रान्त मा एक्ठु मंडल अव जिला होय। हियाँ शहरी निकाय कय नगर पालिका परिषद वाला रूप भी मौजूद अहय। 

बस्ती जिला कै पुरान नाम वशिष्ठी रहा। जौन कि भगवान राम के गुरु ऋषि वशिष्ठ के नाम पय पड़ा रहा।

इहां के प्रसिद्ध राजा   राजा जालिम सिंह रहिन, जवन अल्मोड़ा के राजा रहिन हय। ईहा छावनी में शहीद स्मारकवो बना बा, जहां पे भारत के स्वतंत्रता के खातिर जवानन के एक रैली जवन बिहार के भागलपुर से फैज़ाबाद आवत रहिन १४० जवानन के फांसी पे लटकाए दीन गय रहा।

बस्ती जिला पच्छु गोंडा और अयोध्या जनपद, उत्तर में गोंडा और सिद्धार्थनगर जनपद, पुरुब म संतकबीरनगर औे दक्खिन म अम्बेकरनगर औ अयोध्या जनपद के भू - भाग से जुड़ा बाटे।

संतकबीरनगर औ सिद्धार्थनगर पहिले बस्ती के हिस्सा रहा लेकिन बाद में अलग होई गय रहा।

बस्ती में हिया बहुत नदी बहत् थीं।  कुछ प्रमुख नदी ह्य सरयू (घाघरा) , कुवानो , मनोरमा औ राप्ती। 

बड़ मनई

१- रामचंद्र शुक्ल 

२- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

३- जगद्मबिका पाल

४- हरीश द्विवेदी

५- राम प्रसाद चौधरी

६- अरविंद चौधरी




#Article 112: बांग्लादेश (451 words)


बांग्लादेश गणतन्त्र (बांग्ला: গণপ্রজাতন্ত্রী বাংলাদেশ गॉनोप्रोजातोन्त्री बाङ्लादेश्) दक्खिन जंबूद्वीप कय एक एक्ठु देश होय। देश कय उत्तर, पूरुब अव पच्छु सीमा भारत अउर दक्खिनपूरुब सीमा म्यान्मार देश से मिलत अहै; दक्खिन में बंगाल कय खाड़ी हय। बांग्लादेश अउर भारतीय राज्य पच्छु बंगाल एक्ठु बांग्लाभाषी अंचल, बंगाल होय, जेकर ऐतिहासिक नाँव “বঙ্গ” बॉङ्गो या “বাংলা” बांग्ला होय। एकर् सीमारेखा ऊ समय निर्धारित भा रहा जब 1947 में भारत कय विभाजन कय समय एका पूरुबी पाकिस्तान कय नाँव से पाकिस्तान कय पूरुबी भाग घोषित कइ गै।एकर राजधानी ढाका होय ।
पूरुब औ पच्छु पाकिस्तान कय बिचे मा लगभग 1600 किलोमीटर (1000 मील) कय भौगोलिक दूरी रहा। पाकिस्तान कय दुनों भागन कय जनतन् कय धर्म (इस्लाम) एक्कै रहा, लेकिन जाति औ भाषागत दूरि बहुत ढेर रहा। पच्छु पाकिस्तान कय तत्कालीन सरकार कय अन्याय कय विरुद्ध 1971 मा भारत कय सहयोग से एक्ठु खूनि लड़ाइ कय बाद स्वाधीन राष्ट्र बांग्लादेश कय जनम भवा ।  स्वाधीनता कय बाद बांग्लादेश कय कुछ सुरुवाति साल राजनैतिक अस्थिरता से भरा रहा, देश मा 13 राष्ट्रशासक बदलि गए औ 4 सैन्य बगावत भवा। विश्व कय सबसे ढेर जनसङ्ख्या वाला देशन् मा बांग्लादेश आठवां  जगहि पय है। लेकिन क्षेत्रफल मा बांग्लादेश विश्व मा 93वाँ पय है। फलस्वरूप बांग्लादेश विश्व कय सबसे घना आबादी वाला देशन् में से एक है। मुसलमान- बाहुल्य जनसंख्या वालन् देसन् मा बांग्लादेश ४था है, जबकि बांग्लादेश कय मुसलमानन् कय संख्या भारत कय अल्पसंख्यक मुसलमानन् कय संख्या से कम है। गंगा-ब्रह्मपुत्र कय मुहाना पय स्थित इ देश, हरसाल मौसमी उत्पात कय शिकार होत है औ चक्रवात बहुत सामान्य है। बांग्लादेश दक्खिन एशियाई आंचलिक सहयोग संस्था,सार्क(SARK)औ बिम्सटेक कय सदस्य होय ।इ ओआइसी औ डी-8 कय भी सदस्य होय।

बांग्लादेश कय छः उपक्षेत्रन् मा बांटि गा है जवनेन कय नाँव उ राज्यन् कय राजधानि कय उप्पर धरि गा है 

एक्ठु अनुमान कय मुताबिक 2007 से 2010 कय बीच बांग्लादेश कय जनसंख्या 150 से 170 लाख कय बीच होए लायक रहा लेकिन इ अनुमान से कम है । इ दुनिया कय 8 वां सबसे ढेर आबादी वाला देश होय। 1951 मा, इ देश कय जनसंख्या 44 लाख रहा। इ दुनिया कय सबसे घना आबादी वाला देश होय औ जनसंख्या घनत्व कय मामले मा इ दुनिया मा 11 वा जगह पय है।
बांग्लादेश 2018 से सरकारी नोकरिन् से आरक्षण कय प्रावधान खतम कइ दिहिस्।

रवीन्द्रनाथ ठाकुर विश्व कय एकलौता मनई होँय, जे दुई देस कय राष्ट्रगान लिखें हैं भारत कय औ बांग्लादेश कय । ओनकय कविता 'आमार सोनार बाँग्ला' बांग्लादेश कय राष्ट्रगान होय।

बांग्लादेश मा 98% से ढेर मनई बंगाली भाषा बोलत हैं, जवन हिँया कय आधिकारिक भाषा होय। अंग्रेजी भी मध्य औ उच्च वर्ग कय बीच मा एक्ठु दूसरा भाषा कय रूप मा प्रयोग कइ जात है औ व्यापक रूप से उँच शिक्षा औ कानूनी प्रणाली मा एकर इस्तेमाल होत है।




#Article 113: बिरहा। (129 words)


बिरहा कै नामाकरण बिरह से भवा है।अवध समाज मे बिरहा यादव/ अहिर जाती कै लोग गावत है।बिरहा कै एक गायन शैली होत है।यकर बिषय वस्तु कारुणिक होत है बकिर आजकल  बिरहा के बिषयवस्तु मे विविधता आइगा है।बिरहा दुई मेर होत है चार कडि वाला औ रामायण , महाभारत या आउर कौनो कथात्मक ।बिरहा अकसर कोमल भाव मे व्यक्त होत है तौ कौनो वीर रस युक्त भी होत है।बिरहा घाँस काट्त कै गाय भैस चरावत कै औ अन्य सामाजिक धार्मिक अनुस्थान के जमघत मे गावा जात है।
बिरहा कै एक कडी:

पन्चो सुनौ लगाकर कान,

कही नारी अम्विदा कै बयान,

नारी अम्विदा रहली बारी औ कुवांर,

पुजनवा शंकर भोला कै करैं,

नारी रही अम्बिदा अनुसुइयक बहिनिया ,

रोजरोज बारिउ नारी मन्दिर मा दियनवा,

दियना बेगर जलाये न किहेउ भोजनवा ......




#Article 114: बिराटनगर (136 words)


विराटनगर पूरुबी नेपालकय  शहर होय। 2011 कय जनगणना कय हिसाब से ई शहर नेपाल कय पांचवा सबसे ढेर जनसंख्या वाला शहर होय। जनसंख्या घनत्व में ई काठमांडू कय बाद दुसरा नंबर पय है। बिराटनगर नेपाल कय औद्योगिक राजधानी होय जेकर क्षेत्रफल 40.108 मील² (103.88 किमी²) हय। एकर भौगोलिक अवस्थिति 26°28'60उत्तर 87°16'60पूरुब देशांतर पय हय। ई शहर प्रदेश संख्या 1 कय दक्खिनी क्षेत्र (तराई) में मोरंग जिला में हय। ई नेपाल कय राष्ट्रीय राजधानी से 399 किमी पय पूरुब कय तराई में पराला औ भारतीय अंतराष्ट्रीय सिमा से 6 किमी उत्तर में हय। 22 मई 2017 कय ई शहर कय महानगर कय दर्जा मिला हय। ई शहर कय महानगर कय श्रेणीम लावै ताई यह में टंकीसिनुवारी औ जहदा-3 कय जोड़ि गा हय, जवने से एकर जनसंख्या बढ़ि कै 240,000 होइ गा हय । यसे पहिले शहर कय जनसंख्या 214,000 रहा।




#Article 115: ब्राजिल (126 words)


ब्राजिल दक्खिन अमेरिका कय एक्ठु देश होय । एकर राजधानी ब्रासीलिया होय । इ दक्खिन अमेरिका कय सबसे बडा देस औ सबसे ढेर जनसंख्या वाला देश होय । क्षेत्रफल कय हिसाब से इ दुनिया कय ५वां सबसे बडा देश होय ।  दुनिया मा सबसे ढेर पुर्तगाली भाषा इहि देश मा बोलि जात हय । इ देश कय पूरुब मा आन्ध्र महासागर (ब्राजिल कय तटीय क्षेत्र ७९४१ किमि लम्मा हय)  उत्तर मा भेनेजुएला, सुरिनाम, गायना औ फ्रेञ्च गायना हँय; उत्तर पच्छु मा कोलम्बिया; पच्छु मा बोलिभिया र पेरु; दक्खिन पच्छु मा अर्जेन्टिना औ पाराग्वे औ दक्खिन मा उरुग्वे हय। आन्ध्र महासागर मा ढेर आर्किपेगालो कुल ब्राजिल कय जमिन मा परत हय जइसय फर्‍न्याण्डो दे नोरोन्हा, रोकास अटोल, सेण्ट पिटर एण्ड पल रक्स औ ट्रिन्डेड औ मार्टिम भाज।




#Article 116: भारत (6128 words)


भारत (आधिकारिक नाँव: भारत गणराज्य, ) दक्खिन एशिया कय भारतीय उपमहाद्वीप कय सबसे बड़ा देश होय।इ पूरा रूप से उत्तरी गोलार्ध मा है, भारत भौगोलिक नज़र से विश्व कय सतवाँ सबसे बड़ा देेेश होय(1.रूस, 2.कनाडा, 3.चीन, 4.अमरीका, 5.ब्राजील, 6.ऑस्ट्रेलिया, 7.भारत),जबकि जनसंख्या कय नज़र से दूसरा सबसे बड़ा देश होय। भारत कय पच्छु मा पाकिस्तान, उत्तर-पूरुब मा चीन, नेपाल औ भूटान, पूरुब मा बांग्लादेश औ म्यान्मार है। हिन्द महासागर मा एकर दक्खिन पच्छु मा मालदीव, दक्खिन मा श्रीलंका औ दखिन-पूरुब मा इंडोनेशिया से भारत कय सामुद्रिक सीमा है। एकरे उत्तर कय भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से औ दक्खिन मा हिन्द महासागर से जुड़ा है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागर हैं।

प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता,  कुमारी कंदम महाद्‌वीप व्‍यापार मार्गों और बड़े-बड़े  का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है। चार प्रमुख संप्रदायों: हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का यहां उदय हुआ, पारसी, यहूदी, ईसाई, और मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दी में यहां पहुचे और यहां की विविध संस्कृति को नया रूप दिया। क्रमिक विजयों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ने १८वीं और १९वीं सदी में भारत के ज़्यादतर हिस्सों को अपने राज्य में मिला लिया। १८५७ के विफल विद्रोह के बाद भारत के प्रशासन का भार ब्रिटिश सरकार ने अपने ऊपर ले लिया। ब्रिटिश भारत के रूप में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रमुख अंग भारत ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक लम्बे और मुख्य रूप से अहिंसक स्वतन्त्रता संग्राम के बाद १५ अगस्त १९४७ को आज़ादी पाई। १९५० में लागू हुए नये संविधान में इसे सार्वजनिक वयस्क मताधिकार के आधार पर स्थापित संवैधानिक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया और युनाईटेड किंगडम की तर्ज़ पर वेस्टमिंस्टर शैली की संसदीय सरकार स्थापित की गयी। एक संघीय राष्ट्र, भारत को २९ राज्यों और ७ संघ शासित प्रदेशों में गठित किया गया है। लम्बे समय तक समाजवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने के बाद 1991 के पश्चात् भारत ने उदारीकरण और वैश्वीकरण की नयी नीतियों के आधार पर सार्थक आर्थिक और सामाजिक प्रगति की है।

भारत के दो आधिकारिक नाम हैं- हिन्दी में भारत और अंग्रेज़ी में इण्डिया (India)। इण्डिया नाम की उत्पत्ति सिन्धु नदी के अंग्रेजी नाम इण्डस से हुई है। भारत नाम, एक प्राचीन सम्राट भरत जो कि मनु के वंशज ऋषभदेव के सबसे बड़े बेटे थे और जिनकी कथा श्रीमद्भागवत महापुराण में है, के नाम से लिया गया है। महाभारत के आदि पर्व में भी सम्भव पर्व के 74 वें अध्याय के 131 वें श्लोक के अनुसार राजा दुष्यन्त और शकुंतला के पुत्र भरत के नाम पर इस भूखण्ड का नाम भारत पड़ा। एक व्युत्पत्ति के अनुसार भारत (भा + रत) शब्द का मतलब है आन्तरिक प्रकाश या विदेक-रूपी प्रकाश में लीन। एक तीसरा नाम हिन्दुस्तान भी है जिसका अर्थ हिन्द (हिन्दू) की भूमि, यह नाम विशेषकर अरब/ईरान में प्रचलित हुआ। इसका समकालीन उपयोग कम और प्रायः उत्तरी भारत के लिए होता है। इसके अतिरिक्त भारतवर्ष को वैदिक काल से आर्यावर्त जम्बूद्वीप और अजनाभदेश के नाम से भी जाना जाता रहा है। बहुत पहले भारत का एक मुंहबोला नाम 'सोने की चिड़िया' भी प्रचलित था।

भारत का राष्ट्रीय चिह्न सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ की अनुकृति है जो सारनाथ के संग्रहालय में सुरक्षित है। भारत सरकार ने यह चिह्न २६ जनवरी १९५० को अपनाया। उसमें केवल तीन सिंह दिखाई पड़ते हैं, चौथा सिंह दृष्टिगोचर नहीं है। राष्ट्रीय चिह्न के नीचे देवनागरी लिपि में 'सत्यमेव जयते' अंकित है।

भारत के राष्ट्रीय झंडे में तीन समांतर आयताकार पट्टियाँ हैं। ऊपर की पट्टी केसरिया रंग की, मध्य की पट्टी सफेद रंग की तथा नीचे की पट्टी गहरे हरे रंग की है। झंडे की लंबाई चौड़ाई का अनुपात 3:2 का है। सफेद पट्टी पर चर्खे की जगह सारनाथ के सिंह स्तंभ वाले धर्मचक्र अनुकृति अशोक चक्र है जिसका रंग गहरा नीला है। चक्र का व्यास लगभग सफेद पट्टी के चौड़ाई जितना है और उसमें २४ अरे हैं।
राष्ट्रभाषा: हिंदी
कवि रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा लिखित 'जन-गण-मन' के प्रथम अंश को भारत के राष्ट्रीय गान के रूप में २४ जनवरी १९५० ई. को अपनाया गया। साथ-साथ यह भी निर्णय किया गया कि बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा लिखित 'वंदे मातरम्' को भी 'जन-गण-मन' के समान ही दर्जा दिया जाएगा, क्योंकि स्वतंत्रता संग्राम में 'वंदे मातरम्' गान जनता का प्रेरणास्रोत था।

भारत सरकार ने देश भर के लिए राष्ट्रीय पंचांग के रूप में शक संवत् को अपनाया है। इसका प्रथम मास 'चैत' है और वर्ष सामान्यत: ३६५ दिन का है। इस पंचांग के दिन स्थायी रूप से अंग्रेजी पंचांग के मास दिनों के अनुरूप बैठते हैं। सरकारी कार्यो के लिए ग्रेगरी कैलेंडर (अंग्रेजी कैलेंडर) के साथ-साथ राष्ट्रीय पंचांग का भी प्रयोग किया जाता है।

प्राचीन हिन्दू मान्यताओं के अनुसार भारत को एक सनातन राष्ट्र माना जाता है क्योंकि यह मानव-सभ्यता का पहला राष्ट्र था। श्रीमद्भागवत के पंचम स्कन्ध में भारत राष्ट्र की स्थापना का वर्णन आता है। भारतीय दर्शन के अनुसार सृष्टि उत्पत्ति के पश्चात ब्रह्मा के मानस पुत्र स्वयंभू मनु ने व्यवस्था सम्भाली। इनके दो पुत्र, प्रियव्रत और उत्तानपाद थे। उत्तानपाद भक्त ध्रुव के पिता थे। इन्हीं प्रियव्रत के दस पुत्र थे। तीन पुत्र बाल्यकाल से ही विरक्त थे। इस कारण प्रियव्रत ने पृथ्वी को सात भागों में विभक्त कर एक-एक भाग प्रत्येक पुत्र को सौंप दिया। इन्हीं में से एक थे आग्नीध्र जिन्हें जम्बूद्वीप का शासन कार्य सौंपा गया। वृद्धावस्था में आग्नीध्र ने अपने नौ पुत्रों को जम्बूद्वीप के विभिन्न नौ स्थानों का शासन दायित्व सौंपा। इन नौ पुत्रों में सबसे बड़े थे नाभि जिन्हें हिमवर्ष का भू-भाग मिला। इन्होंने हिमवर्ष को स्वयं के नाम अजनाभ से जोड़ कर अजनाभवर्ष प्रचारित किया। यह हिमवर्ष या अजनाभवर्ष ही प्राचीन भारत देश था। राजा नाभि के पुत्र थे ऋषभ। ऋषभदेव के सौ पुत्रों में भरत ज्येष्ठ एवं सबसे गुणवान थे। ऋषभदेव ने वानप्रस्थ लेने पर उन्हें राजपाट सौंप दिया। पहले भारतवर्ष का नाम ॠषभदेव के पिता नाभिराज के नाम पर अजनाभवर्ष प्रसिद्ध था। भरत के नाम से ही लोग अजनाभखण्ड को भारतवर्ष कहने लगे।

पाषाण युग भीमबेटका मध्य प्रदेश की गुफाएँ भारत में मानव जीवन का प्राचीनतम प्रमाण हैं। प्रथम स्थाई बस्तियों ने ९००० वर्ष पूर्व स्वरुप लिया। यही आगे चल कर सिन्धु घाटी सभ्यता में विकसित हुई, जो २६०० ईसा पूर्व और १९०० ईसा पूर्व के मध्य अपने चरम पर थी।
लगभग १६०० ईसा पूर्व आर्य भारत आए और उन्होंने उत्तर भारतीय क्षेत्रों में वैदिक सभ्यता का सूत्रपात किया। इस सभ्यता के स्रोत वेद और पुराण हैं। किन्तु आर्य-आक्रमण-सिद्धांत अभी तक विवादस्पद है। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक सहित कुछ विद्वानों की मान्यता यह है कि आर्य भारतवर्ष के ही स्थायी निवासी रहे हैं तथा वैदिक इतिहास करीब ७५,००० वर्ष प्राचीन है। इसी समय दक्षिण भारत में द्रविड़ सभ्यता का विकास होता रहा। दोनों जातियों ने एक दूसरे की खूबियों को अपनाते हुए भारत में एक मिश्रित-संस्कृति का निर्माण किया।

५०० ईसवी पूर्व कॆ बाद कई स्वतंत्र राज्य बन गए। भारत के प्रारम्भिक राजवंशों में उत्तर भारत का मौर्य राजवंश उल्लेखनीय है जिसके प्रतापी सम्राट अशोक का विश्व इतिहास में विशेष स्थान है। १८० ईसवी के आरम्भ से मध्य एशिया से कई आक्रमण हुए, जिनके परिणामस्वरूप उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में यूनानी, शक, पार्थी और अंततः कुषाण राजवंश स्थापित हुए। तीसरी शताब्दी के आगे का समय जब भारत पर गुप्त वंश का शासन था, भारत का स्वर्णिम काल कहलाया। दक्षिण भारत में भिन्न-भिन्न काल-खण्डों में कई राजवंश चालुक्य, चेर, चोल, पल्लव तथा पांड्य रहे। ईसा के आस-पास संगम-साहित्य अपने चरम पर था, जिसमें तमिळ भाषा का परिवर्धन हुआ। सातवाहनों और चालुक्यों ने मध्य भारत में अपना वर्चस्व स्थापित किया। विज्ञान, कला, साहित्य, गणित, खगोलशास्त्र, प्राचीन प्रौद्योगिकी, धर्म, तथा दर्शन इन्हीं राजाओं के शासनकाल में फले-फूले।

१२वीं शताब्दी के प्रारंभ में, भारत पर इस्लामी आक्रमणों के पश्चात, उत्तरी व केन्द्रीय भारत का अधिकांश भाग दिल्ली सल्तनत के शासनाधीन हो गया; और बाद में, अधिकांश उपमहाद्वीप मुगल वंश के अधीन। दक्षिण भारत में विजयनगर साम्राज्य शक्तिशाली निकला। हालाँकि, विशेषतः तुलनात्मक रूप से, संरक्षित दक्षिण में अनेक राज्य शेष रहे, अथवा अस्तित्व में आये। मुगलों के संक्षिप्त अधिकार के बाद सत्रहवीं सदी में दक्षिण और मध्य भारत में मराठों का उत्कर्ष हुआ। उत्तर पश्चिम में सिक्खों की शक्ति में वृद्धि हुई।

१७वीं शताब्दी के मध्यकाल में पुर्तगाल, डच, फ्रांस, ब्रिटेन सहित अनेक यूरोपीय देशों, जो भारत से व्यापार करने के इच्छुक थे, उन्होंने देश की आतंरिक शासकीय अराजकता का फायदा उठाया अंग्रेज दूसरे देशों से व्यापार के इच्छुक लोगों को रोकने में सफल रहे और १८४० तक लगभग संपूर्ण देश पर शासन करने में सफल हुए। १८५७ में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी के विरुद्ध असफल विद्रोह, जो भारतीय स्वतन्त्रता के प्रथम संग्राम से भी जाना जाता है, के बाद भारत का अधिकांश भाग सीधे अंग्रेजी शासन के प्रशासनिक नियंत्रण में आ गया।

बीसवी सदी के प्रारम्भ में आधुनिक शिक्षा के प्रसार और विश्वपटल पर बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के चलते भारत में एक बौद्धिक आन्दोलन का सूत्रपात हुआ जिसने सामाजिक और राजनीतिक स्तरों पर अनेक परिवर्तनों एवम आन्दोलनों की नीव रखी। १८८५ में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना ने स्वतन्त्रता आन्दोलन को एक गतिमान स्वरूप दिया। बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में लम्बे समय तक स्वतंत्रता प्राप्ति के लिये विशाल अहिंसावादी संघर्ष चला, जिसका नेतृत्‍व महात्मा गांधी, जो आधिकारिक रूप से आधुनिक भारत के 'राष्ट्रपिता' के रूप में संबोधित किये जाते हैं, इसी सदी में भारत के सामाजिक आन्दोलन, जो सामाजिक स्वतंत्र्यता प्राप्ति के लिए भी विशाल अहिंसावादी एवं क्रांतिवादी संघर्ष चला, जिसका नेतृत्व डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर ने किया, जो ‘आधुनिक भारत के निर्माता’, ‘संविधान निर्माता' एवं ‘दलितों के मसिहा’ के रूप में संबोधित किये जाते है। इसके साथ-साथ चंद्रशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, वीर सावरकर आदि के नेतृत्‍व मे चले क्रांतिकारी संघर्ष के फलस्वरुप १५ अगस्त, १९४७ भारत ने अंग्रेजी शासन से पूर्णतः स्वतंत्रता प्राप्त की। तदुपरान्त २६ जनवरी, १९५० को भारत एक गणराज्य बना।

एक बहुजातीय तथा बहुधार्मिक राष्ट्र होने के कारण भारत को समय-समय पर साम्प्रदायिक तथा जातीय विद्वेष का शिकार होना पड़ा है। क्षेत्रीय असंतोष तथा विद्रोह भी हालाँकि देश के अलग-अलग हिस्सों में होते रहे हैं, पर इसकी धर्मनिरपेक्षता तथा जनतांत्रिकता, केवल १९७५-७७ को छोड़, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर दी थी, अक्षुण्ण रही है।

भारत के पड़ोसी राष्ट्रों के साथ अनसुलझे सीमा विवाद हैं। इसके कारण इसे छोटे पैमानों पर युद्ध का भी सामना करना पड़ा है। १९६२ में चीन के साथ, तथा १९४७, १९६५, १९७१ एवं १९९९ में पाकिस्तान के साथ लड़ाइयाँ हो चुकी हैं।

भारत गुटनिरपेक्ष आन्दोलन तथा संयुक्त राष्ट्र संघ के संस्थापक सदस्य देशों में से एक है।

१९७४ में भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया था जिसके बाद १९९८ में ५ और परीक्षण किये गये। १९९० के दशक में किये गये आर्थिक सुधारीकरण की बदौलत आज देश सबसे तेज़ी से विकासशील राष्ट्रों की सूची में आ गया है।

भारत का संविधान भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतान्त्रिक गणराज्य घोषित करता है। भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है, जिसकी द्विसदनात्मक संसद वेस्टमिन्स्टर शैली की संसदीय प्रणाली द्वारा संचालित है। भारत का प्रशासन संघीय ढांचे के अन्तर्गत चलाया जाता है, जिसके अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र सरकार और राज्य स्तर पर राज्य सरकारें हैं। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का बंटवारा संविधान में दी गई रूपरेखा के आधार पर होता है। वर्तमान में भारत में २९ राज्य और ७ केंद्र-शासित प्रदेश हैं। केंद्र शासित प्रदेशों में, स्थानीय प्रशासन को राज्यों की तुलना में कम शक्तियां प्राप्त होती हैं। भारत का सरकारी ढाँचा, जिसमें केंद्र राज्यों की तुलना में ज़्यादा सशक्त है, उसे आमतौर पर अर्ध-संघीय (सेमि-फ़ेडेरल) कहा जाता रहा है, पर १९९० के दशक के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक बदलावों के कारण इसकी रूपरेखा धीरे-धीरे और अधिक संघीय (फ़ेडेरल) होती जा रही है।

इसके शासन में तीन मुख्य अंग हैं: न्यायपालिका, कार्यपालिका और व्यवस्थापिका।

व्यवस्थापिका संसद को कहते हैं, जिसके दो सदन हैं – उच्चसदन राज्यसभा, अथवा राज्यपरिषद् और निम्नसदन लोकसभा. राज्यसभा में २४५ सदस्य होते हैं जबकि लोकसभा में ५४५। राज्यसभा एक स्थाई सदन है और इसके सदस्यों का चुनाव, अप्रत्यक्ष विधि से ६ वर्षों के लिये होता है। राज्यसभा के ज़्यादातर सदस्यों का चयन राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा किया जाता है, और हर दूसरे साल राज्य सभा के एक तिहाई सदस्य पदमुक्त हो जाते हैं। लोकसभा के ५४३ सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष विधि से, ५ वर्षों की अवधि के लिये आम चुनावों के माध्यम से किया जाता है जिनमें १८ वर्ष से अधिक उम्र के सभी भारतीय नागरिक मतदान कर सकते हैं। इसके इलावा २ सदस्यों को राष्ट्रपति एंग्लो-इण्डियन समुदाय में से नामित कर सकती है, अगर यह समुदाय संसद में पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व ना पा सका हो।

कार्यपालिका के तीन अंग हैं – राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और मंत्रिमंडल। राष्ट्रपति, जो राष्ट्र का प्रमुख है, की भूमिका अधिकतर आनुष्ठानिक ही है। उसके दायित्वों में संविधान का अभिव्यक्तिकरण, प्रस्तावित कानूनों (विधेयक) पर अपनी सहमति देना और अध्यादेश जारी करना प्रमुख हैं। वह भारतीय सेनाओं का मुख्य सेनापति भी है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को एक अप्रत्यक्ष मतदान विधि द्वारा ५ वर्षों के लिये चुना जाता है। प्रधानमन्त्री सरकार का प्रमुख है और कार्यपालिका की सारी शक्तियाँ उसी के पास होती हैं। इसका चुनाव राजनैतिक पार्टियों या गठबन्धन के द्वारा प्रत्यक्ष विधि से संसद में बहुमत प्राप्त करने पर होता है। बहुमत बने रहने की स्थिति में इसका कार्यकाल ५ वर्षों का होता है। संविधान में किसी उप-प्रधानमंत्री का प्रावधान नहीं है पर समय-समय पर इसमें फेरबदल होता रहा है। मंत्रिमंडल का प्रमुख प्रधानमंत्री होता है। मंत्रिमंडल के प्रत्येक मंत्री को संसद का सदस्य होना अनिवार्य है। कार्यपालिका संसद को उत्तरदायी होती है, और प्रधानमंत्री और उनका मंत्रिमण्डल लोक सभा में बहुमत के समर्थन के आधार पर ही अपने कार्यालय में बने रह सकते हैं।

भारत की स्वतंत्र न्यायपालिका का ढाँचा त्रिस्तरीय है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय, जिसके प्रधान प्रधान न्यायाधीश है; २४ उच्च न्यायालय और बहुत सारी निचली अदालतें हैं। सर्वोच्च न्यायालय को अपने मूल न्यायाधिकार (ओरिजिनल ज्युरिडिक्शन), और उच्च न्यायालयों के ऊपर अपीलीय न्यायाधिकार के मामलों, दोनो को देखने का अधिकार है। सर्वोच्च न्यायालय के मूल न्ययाधिकार में मौलिक अधिकारों के हनन के इलावा राज्यों और केंद्र, और दो या दो से अधिक राज्यों के बीच के विवाद आते हैं। सर्वोच्च न्यायालय को राज्य और केंद्रीय कानूनों को असंवैधानिक ठहराने के अधिकार है। भारत में २४ उच्च न्यायालयों के अधिकार और उत्तरदायित्व सर्वोच्च न्यायालय की अपेक्षा सीमित हैं। संविधान ने न्यायपालिका को विस्तृत अधिकार दिये हैं, जिनमें संविधान की अंतिम व्याख्या करने का अधिकार भी सम्मिलित है।

भारत विश्व का सबसे बडा लोकतंत्र है। बहुदलीय प्रणाली वाले इस संसदीय गणराज्य में छ: मान्यता-प्राप्त राष्ट्रीय पार्टियां, और ४० से भी ज़्यादा क्षेत्रीय पार्टियां हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), जिसकी नीतियों को केंद्रीय-दक्षिणपंथी या रूढिवादी माना जाता है, के नेतृत्व में केंद्र में सरकार है जिसके प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी हैं। अन्य पार्टियों में सबसे बडी भारतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेस (कॉंग्रेस) है, जिसे भारतीय राजनीति में केंद्र-वामपंथी और उदार माना जाता है। २००४ से २०१४ तक केंद्र में मनमोहन सिंह की गठबन्धन सरकार का सबसे बडा हिस्सा कॉंग्रेस पार्टी का था। १९५० मे गणराज्य के घोषित होने से १९८० के दशक के अन्त तक कॉंग्रेस का संसद में निरंतर बहुमत रहा। पर तब से राजनैतिक पटल पर भाजपा और कॉंग्रेस को अन्य पार्टियों के साथ सत्ता बांटनी पडी है। १९८९ के बाद से क्षेत्रीय पार्टियों के उदय ने केंद्र में गठबंधन सरकारों के नये दौर की शुरुआत की है।

गणराज्य के पहले तीन चुनावों (१९५१–५२, १९५७, १९६२) में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में कॉंग्रेस ने आसान जीत पाई। १९६४ में नेहरू की मृत्यु के बाद लाल बहादुर शास्त्री कुछ समय के लिये प्रधानमंत्री बने, और १९६६ में उनकी खुद की मौत के बाद इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं। १९६७ और १९७१ के चुनावों में जीतने के बाद १९७७ के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पडा। १९७५ में प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने राष्ट्रीय आपात्काल की घोषणा कर दी थी। इस घोषणा और इससे उपजी आम नाराज़गी के कारण १९७७ के चुनावों में नवगठित जनता पार्टी ने कॉंग्रेस को हरा दिया और पूर्व में कॉंग्रेस के सदस्य और नेहरु के केबिनेट में मंत्री रहे मोरारजी देसाई के नेतृत्व में नई सरकार बनी। यह सरकार सिर्फ़ तीन साल चली, और १९८० में हुए चुनावों में जीतकर इंदिरा गांधी फिर से प्रधानमंत्री बनीं। १९८४ में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनके बेटे राजीव गांधी कॉंग्रेस के नेता और प्रधानमंत्री बने। १९८४ के चुनावों में ज़बरदस्त जीत के बाद १९८९ में नवगठित जनता दल के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय मोर्चा ने वाम मोर्चा के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई, जो केवल दो साल चली। १९९१ के चुनावों में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला, परंतु कॉंग्रेस सबसे बडी पार्टी बनी, और पी वी नरसिंहा राव के नेतृत्व में अल्पमत सरकार बनी जो अपना कार्यकाल पूरा करने में सफल रही।

१९९६ के चुनावों के बाद दो साल तक राजनैतिक उथल पुथल का वक्त रहा, जिसमें कई गठबंधन सरकारें आई और गई। १९९६ में भाजपा ने केवल १३ दिन के लिये सरकार बनाई, जो समर्थन ना मिलने के कारण गिर गई। उसके बाद दो संयुक्त मोर्चे की सरकारें आई जो कुछ लंबे वक्त तक चली। ये सरकारें कॉंग्रेस के बाहरी समर्थन से बनी थीं। १९९८ के चुनावों के बाद भाजपा एक सफल गठबंधन बनाने में सफल रही। भाजपा के अटल बिहारी वजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग, या एनडीए) नाम के इस गठबंधन की सरकार पहली ऐसी सरकार बनी जिसने अपना पाँच साल का कार्यकाल पूरा किय। २००४ के चुनावों में भी किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला, पर कॉँंग्रेस सबसे बडी पार्टी बनके उभरी, और इसने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग, या यूपीए) के नाम से नया गठबंधन बनाया। इस गठबंधन ने वामपंथी और गैर-भाजपा सांसदों के सहयोग से मनमोहन सिँह के नेतृत्व में पाँच साल तक शासन चलाया। २००९ के चुनावों में यूपीए और अधिक सीटें जीता जिसके कारण यह साम्यवादी (कॉम्युनिस्ट) दलों के बाहरी सहयोग के बिना ही सरकार बनाने में कामयाब रहा। इसी साल मनमोहन सिँह जवाहरलाल नेहरू के बाद् ऐसे पहले प्रधानमंत्री बने जिन्हे दो लगातार कार्यकाल के लिये प्रधानमंत्री बनने का अवसर प्राप्त हुआ। २०१४ के चुनावों में १९८४ के बाद पहली बार किसी राजनैतिक पार्टी को बहुमत प्राप्त हुआ, और भाजपा ने गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाई।

लगभग 13 लाख सक्रिय सैनिकों के साथ, भारतीय सेना दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी है। भारत की सशस्त्र सेना में एक थलसेना, नौसेना, वायु सेना और अर्द्धसैनिक बल, तटरक्षक, जैसे सामरिक और सहायक बल विद्यमान हैं। भारत के राष्ट्रपति भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर है।

आज रूस के साथ सामरिक संबंधों को जारी रखने के अलावा, भारत विस्तृत इजरायल और फ्रांस के साथ रक्षा संबंध रखा है। हाल के वर्षों में, भारत में क्षेत्रीय सहयोग और विश्व व्यापार संगठन के लिए एक दक्षिण एशियाई एसोसिएशन में प्रभावशाली भूमिका निभाई है। १०,००० राष्ट्र सैन्य और पुलिस कर्मियों को चार महाद्वीपों भर में पैंतीस संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सेवा प्रदान की है। भारत भी विभिन्न बहुपक्षीय मंचों, खासकर पूर्वी एशिया शिखर बैठक और जी-८५ बैठक में एक सक्रिय भागीदार रहा है। आर्थिक क्षेत्र में भारत दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और एशिया के विकासशील देशों के साथ घनिष्ठ संबंध रखते है। अब भारत एक पूर्व की ओर देखो नीति में भी संयोग किया है। यह आसियान देशों के साथ अपनी भागीदारी को मजबूत बनाने के मुद्दों की एक विस्तृत श्रृंखला है जिसमे जापान और दक्षिण कोरिया ने भी मदद किया है। यह विशेष रूप से आर्थिक निवेश और क्षेत्रीय सुरक्षा का प्रयास है।

हाल ही में, भारत का संयुक्त राष्ट्रे अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ आर्थिक, सामरिक और सैन्य सहयोग बढ़ गया है। 2008 में, भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच असैनिक परमाणु समझौते हस्ताक्षर किए गए थे। हालाँकि उस समय भारत के पास परमाणु हथियार था और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के पक्ष में नहीं था यह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) से छूट प्राप्त है, भारत की परमाणु प्रौद्योगिकी और वाणिज्य पर पहले प्रतिबंध समाप्त. भारत विश्व का छठा वास्तविक परमाणु हथियार राष्ट्रत बन गया है। एनएसजी छूट के बाद भारत भी रूस, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा सहित देशों के साथ असैनिक परमाणु ऊर्जा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करने में सक्षम है।

वित्त वर्ष 2014-15 के केन्द्रीय अंतरिम बजट में रक्षा आवंटन में 10 प्रतिशत बढ़ोत्‍तरी करते हुए 224,000 करोड़ रूपए आवंटित किए गए। 2013-14 के बजट में यह राशि 203,672 करोड़ रूपए थी। 2012–13 में रक्षा सेवाओं के लिए 1,93,407 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था, जबकि 2011–2012 में यह राशि 1,64,415 करोइ़ थी। साल 2011 में भारतीय रक्षा बजट 36.03 अरब अमरिकी डॉलर रहा (या सकल घरेलू उत्पाद का 1,83%)। 2008 के एक SIRPI रिपोर्ट के अनुसार, भारत क्रय शक्ति के मामले में भारतीय सेना के सैन्य खर्च 72.7 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। साल 2011 में भारतीय रक्षा मंत्रालय के वार्षिक रक्षा बजट में 11.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, हालाँकि यह पैसा सरकार की अन्य शाखाओं के माध्यम से सैन्य की ओर जाते हुए पैसों में शमिल नहीं होता है। भारत दुनिया का सबसे बड़े हथियार आयातक है।

२०१४ में नरेन्द्र मोदी नीत भाजपा सरकार ने मेक इन इण्डिया के नाम से भारत में निर्माण अभियान की शुरुआत की और भारत को हथियार आयातक से निर्यातक बनाने के लक्ष्य की घोषणा की। रक्षा निर्माण के द्वार निजी कंपनियों के लिए भी खोल दिए गए और भारत के कई उद्योग घरानों ने बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में पूंजी निवेश की योजनाएँ घोषित की। फ्राँस की डसॉल्ट एविएशन ने अंबानी समूह के साथ साझेदारी में रफेल लड़ाकू विमान, तथा अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन ने टाटा समूह के साथ साझेदारी लड़ाकू विमान एफ-१६  का निर्माण भारत में प्रारंभ करने की घोषणाएँ की हैं। अन्य प्रतिष्ठित समूह जैसे एल एंड टी, महिंद्रा, कल्याणी आदि भी कई परियोजनाओं के निर्माण की पहल कर चुके हैं जिनमें तोपें, असला, जलपोत व पनडुब्बियों का निर्मान शामिल है। रूस के साथ कमोव हेलीकॉप्टर का निर्माण भी भारत में करने के लिए समझौता हुआ है।

शीर्ष फॉरेन पॉलिसी मैगजीन ने अपने सर्वे में कहा कि भारत २०१७ में विश्व में ६ वीं महाशक्ति है।

वर्तमान में भारत 28 राज्यों तथा 

अन्टार्कटिका और दक्षिण गंगोत्री और मैत्री पर भी भारत के वैज्ञानिक-स्थल हैं, यद्यपि अभी तक कोई वास्तविक आधिपत्य स्थापित नहीं किया गया है।

भाषाओं के मामले में भारतवर्ष विश्व के समृद्धतम देशों में से है। संविधान के अनुसार हिन्दी भारत की राजभाषा है, और अंग्रेजी को सहायक राजाभाषा का स्थान दिया गया है। १९४७-१९५० के संविधान के निर्माण के समय देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी भाषा और हिन्दी-अरबी अंकों के अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप को संघ (केंद्र) सरकार की कामकाज की भाषा बनाया गया था, और गैर-हिन्दी भाषी राज्यों में हिन्दी के प्रचलन को बढ़ाकर उन्हें हिन्दी-भाषी राज्यों के समान स्तर तक आने तक के लिये १५ वर्षों तक अंग्रेजी के इस्तेमाल की इजाज़त देते हुए इसे सहायक राजभाषा का दर्ज़ा दिया गया था। संविधान के अनुसार यह व्यवस्था १९५० मे समाप्त हो जाने वाली थी, लेकिन् तमिलनाडु राज्य के हिन्दी भाषा विरोधी आन्दोलन और हिन्दी भाषी राज्यों राजनैतिक विरोध के परिणामस्वरूप, संसद ने इस व्यवस्था की समाप्ति को अनिश्चित काल तक स्थगित कर दिया है। इस वजह से वर्तमान समय में केंद्रीय सरकार में काम हिन्दी और अंग्रेज़ी भाषाओं में होता है और राज्यों में हिन्दी अथवा अपने-अपने क्षेत्रीय भाषाओं में काम होता है। केन्द्र और राज्यों और अन्तर-राज्यीय पत्र-व्यवहार के लिए, यदि कोई राज्य ऐसी मांग करे, तो हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं का होना आवश्यक है। भारतीय संविधान एक राष्ट्रभाषा का वर्णन नहीं करता।

हिन्दी और अंग्रेज़ी के इलावा संविधान की आठवीं अनुसूची में २० अन्य भाषाओं का वर्णन है जिन्हें भारत में आधिकारिक कामकाज में इस्तेमाल किया जा सकता है। संविधान के अनुसार सरकार इन भाषाओं के विकास के लिये प्रयास करेगी, और अधिकृत राजभाषा (हिन्दी) को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए इन भाषाओं का उपयोग करेगी। आठवीं अनुसूची में दर्ज़ २२ भाषांए ये हैं:

राज्यवार भाषाओं की आधिकारिक स्थिति इस प्रकार है:

भारत पूरी तौर पर भारतीय प्लेट के ऊपर स्थित है जो भारतीय आस्ट्रेलियाई प्लेट (Indo-Australian Plate) का उपखण्ड है। प्राचीन काल में यह प्लेट गोंडवानालैण्ड का हिस्सा थी और अफ्रीका और अंटार्कटिका के साथ जुड़ी हुई थी। तकरीबन ९ करोड़ वर्ष पहले क्रीटेशियस काल में भारतीय प्लेट १५ सेमी. वर्ष की गति से उत्तर की ओर बढ़ने लगी और इओसीन पीरियड में यूरेशियन प्लेट से टकराई। भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के मध्य स्थित टेथीज भूसन्नति के अवसादों के वालन द्वारा ऊपर उठने से तिब्बत पठार और हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ। सामने की द्रोणी में बाद में अवसाद जमा हो जाने से सिन्धु-गंगा मैदान बना। भारतीय प्लेट अभी भी लगभग ५ सेमी./वर्ष की गति से उत्तर की ओर गतिशील है और हिमालय की ऊंचाई में अभी भी २ मिमी./वर्ष कि गति से उत्थान हो रहा है।

भारत के उत्तर में हिमालय की पर्वतमाला नए और मोड़दार पहाड़ों से बनी है। यह पर्वतश्रेणी कश्मीर से अरुणाचल तक लगभग १,५०० मील तक फैली हुई है। इसकी चौड़ाई १५० से २०० मील तक है। यह संसार की सबसे ऊँची पर्वतमाला है और इसमें अनेक चोटियाँ २४,००० फुट से अधिक ऊँची हैं। हिमालय की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट है जिसकी ऊँचाई २९,०२८ फुट है जो नेपाल में स्थित है।

हिमालय के दक्षिण सिन्धु-गंगा मैदान है जो सिंधु, गंगा तथा ब्रह्मपुत्र और उनकी सहायक नदियों द्वारा बना है। हिमालय (शिवालिक) की तलहटी में जहाँ नदियाँ पर्वतीय क्षेत्र को छोड़कर मैदान में प्रवेश करती हैं, एक संकीर्ण पेटी में कंकड पत्थर मिश्रित निक्षेप पाया जाता है जिसमें नदियाँ अंतर्धान हो जाती हैं। इस ढलुवाँ क्षेत्र को भाबर कहते हैं। भाबर के दक्षिण में तराई प्रदेश है, जहाँ विलुप्त नदियाँ पुन: प्रकट हो जाती हैं। यह क्षेत्र दलदलों और जंगलों से भरा है। तराई के दक्षिण में जलोढ़ मैदान पाया जाता है। मैदान में जलोढ़ दो किस्म के हैं, पुराना जलोढ़ और नवीन जलोढ़। पुराने जलोढ़ को बाँगर कहते हैं। यह अपेक्षाकृत ऊँची भूमि में पाया जाता है, जहाँ नदियों की बाढ़ का जल नहीं पहुँच पाता। इसमें कहीं कहीं चूने के कंकड मिलते हैं। नवीन जलोढ़ को खादर कहते हैं। यह नदियों की बाढ़ के मैदान तथा डेल्टा प्रदेश में पाया जाता है जहाँ नदियाँ प्रति वर्ष नई तलछट जमा करती हैं।

उत्तरी भारत के मैदान के दक्षिण का पूरा भाग एक विस्तृत पठार है जो दुनिया के सबसे पुराने स्थल खंड का अवशेष है और मुख्यत: कड़ी तथा दानेदार कायांतरित चट्टानों से बना है। पठार तीन ओर पहाड़ी श्रेणियों से घिरा है। उत्तर में विंध्याचल तथा सतपुड़ा की पहाड़ियाँ हैं, जिनके बीच नर्मदा नदी पश्चिम की ओर बहती है। नर्मदा घाटी के उत्तर विंध्याचल प्रपाती ढाल बनाता है। सतपुड़ा की पर्वतश्रेणी उत्तर भारत को दक्षिण भारत से अलग करती है और पूर्व की ओर महादेव पहाड़ी तथा मैकाल पहाड़ी के नाम से जानी जाती है। सतपुड़ा के दक्षिण अजंता की पहाड़ियाँ हैं। प्रायद्वीप के पश्चिमी किनारे पर पश्चिमी घाट और पूर्वी किनारे पर पूर्वी घाट नामक पहाडियाँ हैं।

कई महत्वपूर्ण और बड़ी नदियाँ जैसे गंगा, ब्रह्मपुत्र, यमुना, गोदावरी और कृष्णा भारत से होकर बहती हैं।

कोपेन के वर्गीकरण में भारत में छह प्रकार की जलवायु का निरूपण है किन्तु यहाँ यह भी ध्यातव्य है कि भू-आकृति के प्रभाव में छोटे और स्थानीय स्तर पर भी जलवायु में बहुत विविधता और विशिष्टता मिलती है। भारत की जलवायु दक्षिण में उष्णकटिबंधीय है और हिमालयी क्षेत्रों में अधिक ऊँचाई के कारण अल्पाइन (ध्रुवीय जैसी), एक ओर यह पुर्वोत्तर भारत में उष्ण कटिबंधीय नम प्रकार की है तो पश्चिमी भागों में शुष्क प्रकार की।
 
कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार भारत में निम्नलिखित छह प्रकार के जलवायु प्रदेश पाए जाते हैं:

परंपरागत रूप से भारत में छह ऋतुएँ मानी जाती रहीं हैं परन्तु भारतीय मौसम विज्ञान विभाग चार ऋतुओं का वर्णन करता है जिन्हें हम उनके परंपरागत नामों से तुलनात्मक रूप में निम्नवत लिख सकते हैं:

शीत ऋतु (Winters) – दिसंबर से मार्च तक, जिसमें दिसंबर और जनवरी सबसे ठंढे महीने होते हैं; उत्तरी भारत में औसत तापमान १० से १५ डिग्री सेल्सियस होता है।

ग्रीष्म ऋतु (Summers or Pre-monsoon) – अप्रैल से जून तक जिसमें मई सबसे गर्म महीना होता है, औसत तापमान ३२ से ४० डिग्री सेल्सियस होता है।

वर्षा ऋतु (Monsoon or Rainy) – जुलाई से सितम्बर तक, जिसमें सार्वाधिक वर्षा अगस्त महीने में होती है, वस्तुतः मानसून का आगमन और प्रत्यावर्तन (लौटना) दोनों क्रमिक रूप से होते हैं और अलग अलग स्थानों पर इनका समय अलग अलग होता है। सामान्यतः १ जून को केरल तट पर मानसून के आगमन तारीख होती है इसके ठीक बाद यह पूर्वोत्तर भारत में पहुँचता है और क्रमशः पूर्व से पश्चिम तथा उत्तर से दक्षिण की ओर गतिशील होता है इलाहाबाद में मानसून के पहुँचने की तिथि १८ जून मानी जाती है और दिल्ली में २९ जून।

शरद ऋतु (Post-monsoon ot Autumn) - उत्तरी भारत में अक्टूबर और नवंबर माह में मौसम साफ़ और शांत रहता है और अक्टूबर में मानसून लौटना शुरू हो जाता है जिससे तमिलनाडु के तट पर लौटते मानसून से वर्षा होती है।

भारत के मुख्य शहर हैं – दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई, बंगलोर (बेंगलुरु)|

ये भी देंखे – भारत के शहर

मुद्रा स्थानांतरण की दर से भारत की अर्थव्यवस्था विश्व में दसवें और क्रयशक्ति के अनुसार तीसरे स्थान पर है। वर्ष २००३ में भारत में लगभग ८% की दर से आर्थिक वृद्धि हुई है जो कि विश्व की सबसे तीव्र बढती हुई अर्थव्यवस्थओं में से एक है। परंतु भारत की अत्यधिक जनसंख्या के कारण प्रतिव्यक्ति आय क्रयशक्ति की दर से मात्र ३,२६२ अमेरिकन डॉलर है जो कि विश्व बैंक के अनुसार १२५वें स्थान पर है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार २६५ (मार्च २००९) अरब अमेरिकी डॉलर है। मुम्बई भारत की आर्थिक राजधानी है और भारतीय रिजर्व बैंक और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का मुख्यालय भी। यद्यपि एक चौथाई भारतीय अभी भी निर्धनता रेखा से नीचे हैं, तीव्रता से बढ़ती हुई सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के कारण मध्यमवर्ग में वृद्धि हुई है। १९९१ के बाद भारत में आर्थिक सुधार की नीति ने भारत के सर्वंगीण विकास मे बड़ी भूमिका निभाई है।

१९९१ के बाद भारत में हुए आर्थिक सुधारोँ ने भारत के सर्वांगीण विकास मे बड़ी भूमिका निभाई। भारतीय अर्थव्यवस्था ने कृषि पर अपनी ऐतिहासिक निर्भरता कम की है और कृषि अब भारतीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का केवल २५% है। दूसरे प्रमुख उद्योग हैं उत्खनन, पेट्रोलियम, बहुमूल्य रत्न, चलचित्र, वस्त्र, सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं, तथा सजावटी वस्तुऐं। भारत के अधिकतर औद्योगिक क्षेत्र उसके प्रमुख महानगरों के आसपास स्थित हैं। हाल ही के वर्षों में $१७२० करोड़ अमरीकी डालर वार्षिक आय २००४-२००५ के साथ भारत सॉफ़्टवेयर और बीपीओ सेवाओं का सबसे बडा केन्द्र बन कर उभरा है। इसके साथ ही कई लघु स्तर के उद्योग भी हैं जोकि छोटे भारतीय गाँव और भारतीय नगरों के कई नागरिकों को जीविका प्रदान करते हैं। पिछले वर्षों में भारत में वित्तीय संस्थानों ने विकास में बड़ी भूमिका निभाई है।

केवल तीस लाख विदेशी पर्यटकों के प्रतिवर्ष आने के बाद भी भारतीय पर्यटन राष्ट्रीय आय का एक अति आवश्यक, परन्तु कम विकसित स्रोत है। पर्यटन उद्योग भारत के जीडीपी का कुल ५,३% है। पर्यटन १०% भारतीय कामगारों को आजीविका देता है। वास्तविक संख्या ४.२ करोड है। आर्थिक रूप से देखा जाए तो पर्यटन भारतीय अर्थव्यवस्था को लगभग $४०० करोड डालर प्रदान करता है। भारत के प्रमुख व्यापार सहयोगी हैं अमरीका, जापान, चीन और संयुक्त अरब अमीरात।

भारत के निर्यातों में कृषि उत्पाद, चाय, कपड़ा, बहुमूल्य रत्न व आभूषण, साफ़्टवेयर सेवायें, इंजीनियरिंग सामान, रसायन तथा चमड़ा उत्पाद प्रमुख हैं जबकि उसके आयातों में कच्चा तेल, मशीनरी, बहुमूल्य रत्न, उर्वरक (फ़र्टिलाइज़र) तथा रसायन प्रमुख हैं। वर्ष २००४ के लिये भारत के कुल निर्यात $६९१८ करोड़ डालर के थे जबकि उसके आयात $८९३३ करोड़ डालर के थे।

दिसम्‍बर 2013 के अंत में भारत का कुल विदेशी कर्ज 426.0 अरब अमरीकी डॉलर था, जिसमें कि दीर्घकालिक कर्ज 333.3 अरब (78,2%) तथा अल्‍पकालिक कर्ज 92,7% अरब अमरीकी डॉलर (21,8%) था। कुल विदेशी कर्ज में सरकार का विदेशी कर्ज 76.4 अरब अमरीकी डॉलर (कुल विदेशी कर्ज का 17.9 प्रतिशत) था, बाकी में व्‍यावसायिक उधार, एनआरआई जमा और बहुउद्देश्‍यीय कर्ज आदि हैं।

 भारत चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। भारत की विभिन्नताओं से भरी जनता में भाषा, जाति और धर्म, सामाजिक और राजनीतिक सौहार्द्र और समरसता के मुख्य शत्रु हैं। 
भारत की जनगणना २०११ के अनुसार भारत में ७४.०४ प्रतिशत साक्षरता है जिस में से +८०% पुरुष और ६हैं।% स्त्रियाँ साक्षर हैं। लिंग अनुपात की दृष्टि से भारत में प्रत्येक १००० पुरुषों के पीछे मात्र ९४० महिलायें हैं। कार्य भागीदारी दर (कुल जनसंख्या मे कार्य करने वालों का भाग) ३९.१% है। पुरुषों के लिये यह दर ५१,७% और स्त्रियों के लिये २५,६% है। भारत की १००० जनसंख्या में २२.३२ जन्मों के साथ बढ़ती जनसंख्या के आधे लोग २२.६६ वर्ष से कम आयु के हैं।

यद्यपि भारत की ७९.८० प्रतिशत या ९६.६२ करोड़ जनसंख्या हिन्दू है, १४.२३ प्रतिशत या १७.२२ करोड़ जनसंख्या के साथ भारत विश्व में मुसलमानों की संख्या में भी इंडोनेशिया और पाकिस्तान के बाद तीसरे स्थान पर है। अन्य धर्मावलम्बियों में ईसाई (२.३० % या २.७८ करोड़), सिख (१,७२ % या २.०८ करोड़), बौद्ध (०,७० % या ८४.४३ लाख), जैन (०,३७ % या ४४.५२ लाख), अन्य धर्म  (०,६६ % या ७९.३८ लाख) इनमें यहूदी, पारसी, अहमदी और बहाई आदि धर्मीय हैं। नास्तिकता  ०,२४% या ३८.३७ लाख है।

भारत दो मुख्य भाषा-सूत्रों: आर्य और द्रविड़ भाषाओँ का स्रोत भी है। भारत का संविधान कुल २३ भाषाओं को मान्यता देता है। हिन्दी और अंग्रेजी केन्द्रीय सरकार द्वारा सरकारी कामकाज के लिये उपयोग की जाती हैं। संस्कृत और तमिल जैसी अति प्राचीन भाषाएं भारत में ही जन्मी हैं। संस्कृत, संसार की सर्वाधिक प्राचीन भाषाओँ में से एक है, जिसका विकास पथ्यास्वस्ति नाम की अति प्राचीन भाषा/ बोली से हुआ था। तमिल के अलावा सारी भारतीय भाषाएँ संस्कृत से ही विकसित हुई हैं, हालाँकि संस्कृत और तमिल में कई शब्द समान हैं ! कुल मिला कर भारत में १६५२ से भी अधिक भाषाएं एवं बोलियाँ बोली जातीं हैं।

भारत की सांस्कृतिक धरोहर बहुत संपन्न है। यहाँ की संस्कृति अनोखी है और वर्षों से इसके कई अवयव अब तक अक्षुण्य हैं। आक्रमणकारियों तथा प्रवासियों से विभिन्न चीजों को समेट कर यह एक मिश्रित संस्कृति बन गई है। आधुनिक भारत का समाज, भाषाएं, रीति-रिवाज इत्यादि इसका प्रमाण हैं। ताजमहल और अन्य उदाहरण, इस्लाम प्रभावित स्थापत्य कला के उत्कृष्ट नमूने हैं। 
 
भारतीय समाज बहुधर्मिक, बहुभाषी तथा मिश्र-सांस्कृतिक है। पारंपरिक भारतीय पारिवारिक मूल्यों को काफी आदर की दृष्टि से देखा जाता है।

विभिन्न धर्मों के इस भूभाग पर कई मनभावन पर्व त्यौहार मनाए जाते हैं - दिवाली, होली, दशहरा. पोंगल तथा ओणम . ईद उल-फ़ित्र, ईद-उल-जुहा, मुहर्रम, क्रिसमस, ईस्टर आदि भी काफ़ी लोकप्रिय हैं।

भारत में संगीत तथा नृत्य की अपनी शैलियां भी विकसित हुईं, जो बहुत ही लोकप्रिय हैं। भरतनाट्यम, ओडिसी, कथक प्रसिद्ध भारतीय नृत्य शैली है। हिन्दुस्तानी संगीत तथा कर्नाटक संगीत भारतीय परंपरागत संगीत की दो मुख्य धाराएं हैं। लोक नृत्यों () में शामिल हैं पंजाब का भांगड़ा, असम का बिहू, झारखंड का झुमइर और डमकच, झारखंड और उड़ीसा का छाऊ, राजस्थान का घूमर, गुजरात का डांडिया  और गरबा, कर्नाटक जा यक्षगान, महाराष्ट्र का लावनी और गोवा का देख्ननी ।

हालाँकि हॉकी देश का राष्ट्रीय खेल है, क्रिकेट सबसे अधिक लोकप्रिय है। वर्तमान में फुटबॉल, हॉकी तथा टेनिस में भी बहुत भारतीयों की अभिरुचि है। देश की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम 1983 और 2011 में दो बार विश्व कप और 2007 का 20–20 विश्व-कप जीत चुकी है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2003 में वह विश्व कप के फाइनल तक पहुँची थी। 1930 तथा 40 के दशक में हॉकी भारत में अपने चरम पर थी। मेजर ध्यानचंद ने हॉकी में भारत को बहुत प्रसिद्धि दिलाई और एक समय भारत ने अमरीका को 24–0 से हराया था जो अब तक विश्व कीर्तिमान है। शतरंज के जनक देश भारत के खिलाड़ी विश्वनाथ आनंद ने अच्छा प्रदर्शन किया है।

वैश्वीकरण के इस युग में शेष विश्व की तरह भारतीय समाज पर भी अंग्रेजी तथा यूरोपीय प्रभाव पड़ रहा है। बाहरी लोगों की खूबियों को अपनाने की भारतीय परंपरा का नया दौर कई भारतीयों की दृष्टि में उचित नहीं है। एक खुले समाज के जीवन का यत्न कर रहे लोगों को मध्यमवर्गीय तथा वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है। कुछ लोग इसे भारतीय पारंपरिक मूल्यों का हनन भी मानते हैं। विज्ञान तथा साहित्य में अधिक प्रगति न कर पाने की वजह से भारतीय समाज यूरोपीय लोगों पर निर्भर होता जा रहा है। ऐसे समय में लोग विदेशी अविष्कारों का भारत में प्रयोग अनुचित भी समझते हैं।

भारतीय फिल्म उद्योग, दुनिया की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली सिनेमा का उत्पादन करता है। इसके अलावा यहाँ असमिया, बंगाली, भोजपुरी, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, पंजाबी, गुजराती, मराठी, ओडिया, तमिल और तेलुगू भाषाओं के क्षेत्रीय सिनेमाई परंपराएं भी मौजूद हैं। दक्षिण भारतीय सिनेमा का राष्ट्रीय फिल्म राजस्व में 75% से अधिक का हिस्सा है। भारत में सितंबर 2016 तक 2200 मल्टीप्लेक्स स्क्रीन सिनेमाघर थे तथा इसके 2019 तक 3000 तक बढ़ने की अपेक्षा की गई हैं।

भारतीय खानपान बहुत ही समृद्ध है। शाकाहारी तथा मांसाहारी दोनों ही तरह का खाना पसन्द किया जाता है। भारतीय व्यंजन विदेशों में भी बहुत पसन्द किए जाते हैं।

भारत में कई सारे पर्व मनाए जाते हैं, जिसमें 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस, 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस, 2 अक्टूबर को गांधी जयंती, दिवाली, होली और ईद पूरे देश में मनाई जाती है। इसके अलावा अन्य पर्व राज्यों के अनुसार होते हैं।

भारत दक्खिन एशिया कय एकठु देश होय.भारत का आधिकारिक नाम भारत गणराज्य है। पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध मा स्थित भारत का भौगोलिक विस्तार ८° ४' से ३७° ६' उत्तरी अक्षांश तक तथा ६८° ७' से ९७° २५'पूर्वी देशान्तर तक है और ईका भौगोलिक विस्तार उत्तर से दक्षिण तक ३,२१४ कि. मी. और पूर्व से पश्चिम तक २,९३३ कि. मी. है।




#Article 117: भारत कय ज़िले (153 words)


ज़िला भारतीय राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश का प्रशासनिक हिस्सा होता है। जिले फिर उप-भागों में या सीधे तालुकों में बंटे होते हैं।

जिले के अधिकारियों की गिनती में निम्न आते हैं:

इनमें से प्रत्येक अधिकारी के अधीन राज्य सरकार की उपयुक्त शाखाओं के अधिकारी होते हैं।

अधिकतर जिलों का एक ज़िला मुख्यालय होता है, जिसका नाम प्रायः जिले के नाम पर ही हिता है। कुछ जिलों में ऐसा नहीं होता, जैसे छत्तीसगढ़ राज्य के जिले सरगुजा का मुख्यालय है अम्बिकापुर।

अधिकांश जिलों के नाम उनके मुख्यालयों के नामों पर रखे हैं। कुछ के दो नाम भी हैं, एक पारंपरिक नाम और दूसरा मुख्यालय का नाम। क्योंकि अधिकांश जिलों के नाम उसके मुख्यालय शहर के नाम पर हैं, तो उस जिले के नाम के आगे ज़िला शब्द लगाया जाता है, जिससे कि वह उस नाम के शहर से पृथक हो सके।

नोट, चंडीगढ़ दो राज्यों और एक केन्द्र शासित प्रदेश की राजधानी है




#Article 118: भारत कय राज्य (592 words)


भारत राज्यों का एक संघ है। इसमें 28 राज्य और 9  केन्द्र शासित प्रदेश हैं। ये राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश पुनः जिलों और अन्य क्षेत्रों में बांटे गए हैं।.

Jammu and Kashmir has 42,241 km2 of area administered by India and 78,114 km2 of area controlled by Pakistan under Azad Kashmir and Gilgit-Baltistan, which is claimed by India as part of Jammu and Kashmir. Additionally, it has 5,180 km2 of area controlled by the People's Republic of China under Trans-Karakoram Tract, which is also claimed by India as part of Jammu and Kashmir.

Ladakh has 59,146 km2 of area administered by India and 37,555 km2 of area controlled by the People's Republic of China under Aksai Chin, which is claimed by India as part of Ladakh.

भारत के इतिहास में भारतीय उपमहाद्वीप पर विभिन्न जातीय समूहों ने शासन किया और इसे अलग-अलग प्रशासन-संबन्धी भागों में विभाजित किया। आधुनिक भारत के वर्तमान प्रशासनिक प्रभाग नए घटनाक्रम हैं, जो ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान विकसित हुए। ब्रिटिश भारत में, वर्तमान भारत, पाकिस्तान और बंगलादेश, साथ ही अफ़्गानिस्तान प्रांत और उससे जुड़े संरक्षित प्रांत, बाद में उपनिवेश बना, बर्मा (म्यांमार) आदि, सभी राज्य समाहित थे। इस अवधि के दौरान, भारत के क्षेत्रों में या तो ब्रिटिशों का शासन था या उन पर स्थानीय राजाओं का नियंत्रण था। १९४७ में स्वतन्त्रता के बाद इन विभागों को संरक्षित किया गया और पंजाब तथा बंगाल के प्रांतों को भारत और पाकिस्तान के बीच विभाजित किया गया। नए राष्ट्र के लिए पहली चुनौती थी राजसी राज्यों का संघों में विलय।

स्वतन्त्रता के बाद, हालांकि, भारत में अस्थिरता आ गई। कई प्रांत औपनिवेशिकरण के उद्देश्य से ब्रिटिशों द्वारा बनाए गए, पर इन पर भारतीय नागरिकों की या राजसी राज्यों की कोई इच्छा दिखाई नहीं दी। १९५६ में जातीय तनाव ने संसद का दरवाजा खटखटाया और राज्य पुनर्गठन अधिनियम के आधार पर देश को जातीय और भाषाई आधार पर पुनर्निर्माण करने के लिए अधिनियम लाया गया।

भारत में जिस प्रकार पूर्व में फ़्रांसीसी और पुर्तगाली उपनिवेशों को गणराज्य में समाहित किया गया था, वैसे ही १९६२ में पांडिचेरी, दादरा, नगर हवेली, गोआ, दमन और दियू को संघ राज्य बनाया गया।

१९५६ के बाद कई नए राज्यों और संघ राज्यों को बनाया गया। बम्बई पुनर्गठन अधिनियम के द्वारा १ मई, १९६० को भाषाई आधार पर बंबई राज्य को गुजरात और महाराष्ट्र के रूप में अलग किया गया। १९६६ के पंजाब पुनर्गठन अधिनियम ने भाषाई और धार्मिक पैमाने पर पंजाब (भारत) को हरियाणा के नए हिन्दू बहुल और हिन्दी भाषी राज्यों में बाँटा और पंजाब के उत्तरी जिलों को हिमाचल प्रदेश में स्थानांतरित कर दिया गया और एक जिले को चण्डीगढ़ का नाम दिया जो पंजाब और हरियाणा की साझा राजधानी है। नागालैण्ड १९६२ में, मेघालय और हिमाचल प्रदेश १९७१ में, त्रिपुरा और मणिपुर १९७२ में राज्य बनाए गए। १९७२ में अरुणाचल प्रदेश को एक केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। सिक्किम राज्य १९७५ में एक राज्य के रूप में भारतीय संघ में सम्मिलित हो गया। १९८६ में मिज़ोरम और १९८७ में गोआ और अरुणाचल प्रदेश राज्य बने जबकि गोआ के उत्तरी भाग दमन और दीयु एक अलग संघ राज्य बन गए। २००० में तीन नए राज्य बनाए गए। पूर्वी मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ (१ नवंबर, २०००) में और उत्तरांचल (९ नवंबर, २०००) बनाए गए जो अब उत्तराखण्ड है। उत्तर प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों के कारण झारखण्ड (१५ नवंबर २०००) को बिहार के दक्षिणी जिलों में से पृथक कर बनाया गया। दो केन्द्र शासित प्रदेशों दिल्ली और पाण्डिचेरी (जो बाद में पुदुचेरी कहा गया) को विधानसभा सदस्यों का अधिकार दिया गया और अब वे छोटे राज्यों के रूप में गिने जाते हैं।




#Article 119: भारत कय राष्ट्रपति कय सूची (236 words)


भारत कय राष्ट्रपति देश कय मुखिया अउर भारत कय प्रथम नागरिक होय। राष्ट्रपति कय पास भारतीय सशस्त्र सेना कय भी सर्वोच्च कमान अहै। भारत कय  राष्ट्रपति लोक सभा, राज्यसभा अउर विधानसभा कय निर्वाचित सदस्य द्वारा चुना जात अहै। भारत कय राष्ट्रपति कय कार्यकाल ५ वर्ष कय होता अहै। 

भारत कय स्वतंत्रता से अबतक १३ राष्ट्रपति होई चुका अहै। भारत कय राष्ट्रपति पद कय स्थापना भारतीय संविधान कय द्वारा कई गा अहै। ई १३ राष्ट्रपति कय अलावा ३ कार्यवाहक राष्ट्रपति भी भ्ए अहै जे पदस्थ राष्ट्रपति कय मृत्यु कय बाद बनावा गए अहै। भारत कय प्रथम राष्ट्रपति डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद रहे।

७ राष्ट्रपति निर्वाचित होवे से पाहिले राजनीतिक पार्टी कय सदस्य रही चुका अहै। यहमे से ६ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अउर १ जनता पार्टी कय सदस्य शामिल अहै, जे बाद मे राष्ट्रपति बने. दुई राष्ट्रपति, ज़ाकिर हुसैन अउर फ़ख़रुद्दीन अली अहमद, जे पदस्थ रहतय  मृत्यु होई गवा. भारत कय वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी होय जे २५ जुलाई २०१२ कय भारत कय १३वा राष्ट्रपति कय तौर पे निर्वाचित भ्ए राष्ट्रपति रहय से पहिले वे भारत सरकार में वित्त मंत्री, विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री अउर योजना आयोग कय उपाध्यक्ष रह चुका अहै। वे मूल रूप से पश्चिम बंगाल कय निवासी होय ईहिसे वे इ राज्य से पहले राष्ट्रपति अहैं। यसे पहिले राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल भारत कय पहीला महिला राष्ट्रपति रहिन्।

भारत कय राष्ट्रपतियों कय सूचि ई प्रकार अहै -

 ई पृष्ठभूमि कै अंतर्गत लिखल  नाव कार्यवाहक राष्ट्रपति कै होय। 




#Article 120: भारत कय संघ राज्यक्षेत्र (592 words)


भारत राज्यों का एक संघ है। इसमें 28 राज्य और 9  केन्द्र शासित प्रदेश हैं। ये राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश पुनः जिलों और अन्य क्षेत्रों में बांटे गए हैं।.

Jammu and Kashmir has 42,241 km2 of area administered by India and 78,114 km2 of area controlled by Pakistan under Azad Kashmir and Gilgit-Baltistan, which is claimed by India as part of Jammu and Kashmir. Additionally, it has 5,180 km2 of area controlled by the People's Republic of China under Trans-Karakoram Tract, which is also claimed by India as part of Jammu and Kashmir.

Ladakh has 59,146 km2 of area administered by India and 37,555 km2 of area controlled by the People's Republic of China under Aksai Chin, which is claimed by India as part of Ladakh.

भारत के इतिहास में भारतीय उपमहाद्वीप पर विभिन्न जातीय समूहों ने शासन किया और इसे अलग-अलग प्रशासन-संबन्धी भागों में विभाजित किया। आधुनिक भारत के वर्तमान प्रशासनिक प्रभाग नए घटनाक्रम हैं, जो ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान विकसित हुए। ब्रिटिश भारत में, वर्तमान भारत, पाकिस्तान और बंगलादेश, साथ ही अफ़्गानिस्तान प्रांत और उससे जुड़े संरक्षित प्रांत, बाद में उपनिवेश बना, बर्मा (म्यांमार) आदि, सभी राज्य समाहित थे। इस अवधि के दौरान, भारत के क्षेत्रों में या तो ब्रिटिशों का शासन था या उन पर स्थानीय राजाओं का नियंत्रण था। १९४७ में स्वतन्त्रता के बाद इन विभागों को संरक्षित किया गया और पंजाब तथा बंगाल के प्रांतों को भारत और पाकिस्तान के बीच विभाजित किया गया। नए राष्ट्र के लिए पहली चुनौती थी राजसी राज्यों का संघों में विलय।

स्वतन्त्रता के बाद, हालांकि, भारत में अस्थिरता आ गई। कई प्रांत औपनिवेशिकरण के उद्देश्य से ब्रिटिशों द्वारा बनाए गए, पर इन पर भारतीय नागरिकों की या राजसी राज्यों की कोई इच्छा दिखाई नहीं दी। १९५६ में जातीय तनाव ने संसद का दरवाजा खटखटाया और राज्य पुनर्गठन अधिनियम के आधार पर देश को जातीय और भाषाई आधार पर पुनर्निर्माण करने के लिए अधिनियम लाया गया।

भारत में जिस प्रकार पूर्व में फ़्रांसीसी और पुर्तगाली उपनिवेशों को गणराज्य में समाहित किया गया था, वैसे ही १९६२ में पांडिचेरी, दादरा, नगर हवेली, गोआ, दमन और दियू को संघ राज्य बनाया गया।

१९५६ के बाद कई नए राज्यों और संघ राज्यों को बनाया गया। बम्बई पुनर्गठन अधिनियम के द्वारा १ मई, १९६० को भाषाई आधार पर बंबई राज्य को गुजरात और महाराष्ट्र के रूप में अलग किया गया। १९६६ के पंजाब पुनर्गठन अधिनियम ने भाषाई और धार्मिक पैमाने पर पंजाब (भारत) को हरियाणा के नए हिन्दू बहुल और हिन्दी भाषी राज्यों में बाँटा और पंजाब के उत्तरी जिलों को हिमाचल प्रदेश में स्थानांतरित कर दिया गया और एक जिले को चण्डीगढ़ का नाम दिया जो पंजाब और हरियाणा की साझा राजधानी है। नागालैण्ड १९६२ में, मेघालय और हिमाचल प्रदेश १९७१ में, त्रिपुरा और मणिपुर १९७२ में राज्य बनाए गए। १९७२ में अरुणाचल प्रदेश को एक केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। सिक्किम राज्य १९७५ में एक राज्य के रूप में भारतीय संघ में सम्मिलित हो गया। १९८६ में मिज़ोरम और १९८७ में गोआ और अरुणाचल प्रदेश राज्य बने जबकि गोआ के उत्तरी भाग दमन और दीयु एक अलग संघ राज्य बन गए। २००० में तीन नए राज्य बनाए गए। पूर्वी मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ (१ नवंबर, २०००) में और उत्तरांचल (९ नवंबर, २०००) बनाए गए जो अब उत्तराखण्ड है। उत्तर प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों के कारण झारखण्ड (१५ नवंबर २०००) को बिहार के दक्षिणी जिलों में से पृथक कर बनाया गया। दो केन्द्र शासित प्रदेशों दिल्ली और पाण्डिचेरी (जो बाद में पुदुचेरी कहा गया) को विधानसभा सदस्यों का अधिकार दिया गया और अब वे छोटे राज्यों के रूप में गिने जाते हैं।




#Article 121: भारत मा शहरी निकाय (162 words)


भारत मा नगर प्रशासन वर्ष 1687 के बादय से अस्तित्व मा हय | मद्रास नगर निगम के 1687
 गठन के साथे अउर फिर 1726 मा कलकत्ता अउर बॉम्बे नगर निगम| उन्नीसवीं सदी के शुरुआती भाग मा भारत मा लगभग हर शहर मा नगर निगम प्रशासन कय मौजूदगी होइ गय रही| तब भारत कै वाइसराय, लार्ड रिप्प नगरपालिका शासन कय नींव रक्खे रहे|

नगर निगम अव नगर पालिका पूरी तरह से प्रतिनिधि निकाय हँय, जबकि अधिसूचित क्षेत्र समितियां अउर शहर क्षेत्र समितियां या तौ पूरी तरह या आधा तीहा निकाय ह अहँय। भारत के संविधान के हिसाब से, 1992के 74 एँ संशोधन अधिनियम, वै स्थापित कीन गा रहे| जब तक राज्य नगरपालिका कानून मा संशोधन नहीं कीन गा रहा (ज्यादातर 1994 मा कीन गा रहे), नगर  निगम का अल्ट्रा वायर्स (प्राधिकरण से हटिके) आधार पय आयोजित कीन गा रहा| राज्य सरकारें व प्रावधानों मा संशोधन के बिना कार्यकारी निर्णयों के माध्यम से कार्य क्षेत्र कै विस्तार या नियंत्रित करय बरे स्वतंत्र रहें।
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#Article 122: भिवानी जिला (527 words)


भिवानी ज़िला भारत के हरियाणा राज्य का एक जिला है जिसका मुख्यालय भिवानी है।

क्षेत्रफल की दृष्टि से यह हरियाणा का सबसे बड़ा जिला हुआ करता था, परंतु चरखी दादरी भिवानी से अलग होकर एक नया जिला बन गया जिसके कारण अब सिरसा जिला सबसे बड़ा जिला बन गया। इसकी स्थापना 22 दिसम्बर, 1972 को हुई थी जब इसे हिसार से अलग कर दिया गया था। इसके जिला मुख्यालय का नाम भी भिवानी ही है। इसका क्षेत्रफल 5140 वर्ग किमी है। 442 गावों को समेटे इस जिले की जनसँख्या 1,425, 022 है जो जनसंख्या की दृष्टि से भिवानी को हरियाणा में तीसरा बड़ा जिला बना देता है (पहले और दुसरे पर क्रमशः फरीदाबाद और हिसार हैं)। जिला मुख्यालय भिवानी भारत की राजधानी दिल्ली से 124 किलोमीटर दूर है।

भिवानी के उत्तर में हिसार, पूर्व में रोहतक, दक्षिण में महेंद्रगढ़, दक्षिण पूर्व में रेवाड़ी तथा पश्चिम और दक्षिण पश्चिम में राजस्थान है। ये हरियाणा के सबसे नीचे जल स्तर के जिलों में आता है।

भिवानी जिले का नाम इसके मुख्यालय के नाम से लिया गया है।

भिवानी के सबसे पुराने गांव में एक नाम काैंट गांव का भी आता है जो भिवानी से ३ किलोमीटर दूर स्थित है। जहां के लोग बहुत ही सभ्य और संस्कारी हैं। भिवानी जिले की नीव इसी गांव से निकले एक व्यक्ति द्वारा की गई थी। जो आज भिवानी के नाम से जाना जाता है।
भिवानी के एक गाँव, मीताथल में की गयी खुदाई से प्राप्त प्रमाण बताते हैं कि यह स्थान हडप्पा संस्कृति के समय से ही आबाद था। भिवानी के समीप नौरंगाबाद गाँव में की गयी खुदाई के दौरान प्राप्त वस्तुएं लगभग ढाई हज़ार साल पुरानी हैं। आइन-ए-अकबरी में भिवानी शहर का ज़िक्र मिलता है।सिंधु घाटी सभ्यता की खान, तोशाम और मकानों को तोशाम हिल रेंज की खानक पहाड़ियों पर पाया गया है। [उद्धरण वांछित] खुदाई (1968–73 और 1980-86) भिवानी के मिताथल गाँव में, पूर्व-हड़प्पा और पूर्व के साक्ष्य का पता लगाया गया है।  क्षेत्र में हड़प्पा (सिंधु घाटी सभ्यता) संस्कृति।  भिवानी शहर से लगभग 10 किलोमीटर (6.2 मील) पूर्व में, नौरंगाबाद गाँव के पास, 2001 में प्रारंभिक खुदाई में सिक्कों, औज़ारों, खिलौनों, मूर्तियों और बर्तनों समेत 2,500 साल पुरानी कलाकृतियों का पता चला था।  पुरातत्वविदों के अनुसार, सिक्कों, सिक्कों के टुकड़ों, मूर्तियों और घरों के डिजाइन की उपस्थिति से पता चलता है कि 300 ई.पू. तक कुषाण, गुप्त और यौधेय काल में कभी-कभी यहाँ एक शहर मौजूद था।

 भिवानी शहर का उल्लेख ऐन-ए-अकबरी में किया गया है और यह मुगलों के समय से वाणिज्य का एक प्रमुख केंद्र रहा है।

भिवानी में पाँच तहसील हैं - भिवानी, बवानी खेड़ा, तोशाम, लोहारू और सिवानी।

अधिकाँश लोगों का व्यवसाय कृषि है। यहाँ की फ़सल बाजरा मुख्या है। इसके अलावा ज्वार, गेहूँ, गन्ना, सरसों, धान और चना है। भिवानी के दक्षिणी इलाके थार रेगिस्तान के संपर्क में आते हैं। अतः वहाँ पर बालू मिटटी अधिक है। अतः वहाँ पर पानी की पूर्ती भूमिगत जल को निकाल कर की जाती है जहाँ सूखे कूएँ दो सौ फीट की गहराई तक जाते हैं जिनमें पानी की मोटर स्थायी रूप से रख दी जाती है। बाकी स्थानों पर हरियाणा सरकार द्वारा प्रदान की गयी नहर की सेवा ज़मीन को उपजाऊ बनाये रखने में मदद करती है।




#Article 123: भुवनेश्वर कुमार (127 words)


भुवनेश्वर कुमार (Bhuvneshwar Kumar Singh/, जनम : 5 फ़रवरी 1990) भारत कय टेस्ट क्रिकेट, एक दिवसीय क्रिकेट औ ट्वेंटी ट्वेंटी क्रिकेट तीनों फार्मैट कय खेलाडी होँय। भुवनेश्वर कुमार प्रथम श्रेणी क्रिकेट मा उत्तर प्रदेश खर्तिन खेलत हैं। इंडियन प्रीमियर लीग मा रॉयल चैलेंजर्स बैंगलुरू खर्तिन खेलि चुका हँय । कुमार इ प्रतियोगिता कय छठवा संस्करण मा पुणे वारियर्स इंडिया कय टीम कय अगुआई किहिन। भुवनेश्वर कुमार दाँया हाथ कय मध्यम तेज स्विंग गेंदबाज़ी औ बीचक्रम मा दाँया हाथ से बल्लेबाजी करत हँय । इहिकै नाते ओन्है ऑल-राउन्डर क्रिकेट खेलाडी मानि जात हँय। भुवनेश्वर कुमार गेंना कय विकेट कय दुनौं ओर स्विंग करैम माहिर हय, जवनेक नाते वन्है भारतीय क्रिकेट टीम कय यक्ठु परमुख गेंदबाज़ मानि जात हय।
यन उत्तर प्रदेश कय मेरठ जिला मा जनमा हँय ।




#Article 124: भूटान (276 words)


भूटान राजतंत्र  हिमालय पे बसा दक्षिण एशिया कय एकठु छोट अव महत्वपूर्ण देश होय । ई देश चीन (तिब्बत) अव  भारत कय बीच में हय। ई देश कय  स्थानीय नाँव द्रुक यू होय, जवने कय  अर्थ होला 'ड्रैगन कय  देश । ई देश  पहाड़ी हय  खाली दक्खिन भाग में तनीक भर सपाट जमीन अहै। सांस्कृतिक अऊर् धार्मिक तौर से ई तिब्बत से जुड़ा अहै, लेकिन भौगोलिक अऊर् राजनीतिक परिस्थितियन कय् कारण वर्तमान में ई देश भारत कय नगिचे हय।

कुछ मनइन कय अनुसार भुटान कय नाँव 'भोट-अन्त' से परा हय जवने कय माने जँहा तिब्बत खतम होत हय होय । यँह कय मनई यका ड्रुग-युल माने ड्रैगन कय देस भि कहत हैं ।

सत्रहवां सदी कय अंत मा भूटान बौद्ध धर्म कय अपनाइस । 1865 मा ब्रिटेन औ भूटान कय बीचे सिनचुलु संधि पय हस्ताक्षर भवा, जवने से भूटान कय सीमा कय कुछ भूभाग कय बदला मा ब्रिटेन कुछ वार्षिक अनुदान देवै लाग। ब्रिटिश प्रभाव कय नाते 1907 मा हिँया राजशाही कय स्थापना भवा। तीन साल कय बाद एक्ठु अउर समझौता भवा, जवने मा ब्रिटिश इ बात पय राजी भवा कि उ भूटान कय आंतरिक मामलन् मा हस्त्क्षेप नाइ करि लेकिन भूटान कय विदेश नीति इंग्लैंड तय करि। बाद मा 1947 कय बाद मा इहै भुमिका भारत कय मिला। दुइ साल बाद 1949 मा भारत भूटान समझौता मा भारत भूटान कय उ कुल जमीन ओका लउटा दीहिस जवन अंग्रेज लिहे रहें । इ समझौते कय नाते से भारत कय भूटान कय विदेश नीति अव रक्षा नीति मा बहुत महत्वपूर्ण भूमिका मिला।

भूटान बीस जिलन् (ज़ोंगखाग) मा विभाजित है। 

भूटान मा आधिकारिक धर्म बौद्ध धर्म कय वज्रयान शाखा होय, जवने कय देस कय ७५% जनता मानत हैं। 




#Article 125: भोजपुरी भाषा (169 words)


भोजपुरी (अंग्रेजी: Bhojpuri नस्तलिक:بھوجپوري  listen (मदद·जानकारी))भाषाई परिवार कय स्तर पे एक  इंडो-आर्य भाषा होए जवन मूल रूप से भारत कय मध्य गंगा कय मैदान कय कुछ हिस्सन मा अव  नेपाल कय तराई वाला कुछ हिस्सन मा बोला जात अहै.भारत मा ई भाषा मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश कय  पूर्वांचल मा, बिहार कय पश्चिमी हिस्सा, अव  झारखंड कय  उत्तरी पश्चिमी हिस्सा मा बोला जात अहै.
भोजपुरी जानय-समझय  वाला लोग कय  विस्तार विश्व कय  सगरी महाद्वीपन पर अहै  जेकरे कारण अंग्रेजी राज कय  दौरान उत्तर परदेश अव  बिहार से अंग्रेजन कय  द्वारा लई गवा मजदूर होय |  जवन  लोगन कय  वंशज अब ओहीं जाइ बस गय हँय, उहय  लोगन कय  पूर्वज वहँ   गय  रहे। अइसन देशन मा  सूरिनाम, गुयाना, त्रिनिदाद आ टोबैगो, फिजी जईसन  देश प्रमुख अहै जहाँ भोजपुरी प्रमुख भाषा कय रूप में बोला अव  समझा जात अहै। भारत कय   जनगणना आंकड़ा २००१ कय  अनुसार भारत मा लगभग ३.३ करोड़ भोजपुरी बोलय  वाला लोग अहै  ।  पूरा विश्व मा  भोजपुरी जानय  वाला लोगन कय  संख्या लगभग ३.५  करोड़ अहै । 




#Article 126: मङ्गोलिया (656 words)


मङ्गोलिया एशिया कय एक्ठु देश होय । मंगोलिया (मंगोलियन: Монгол улс,) पूरुब औ मध्य एशिया मा एक्ठु जमिन से घेरान (लेंडलॉक) देश होय। यकर सीमा उत्तर मा रूस, दक्खिन, पूरुब और पच्छु मा चीन से सटा है। जबकि मंगोलिया कय सीमा कज़ाख़िस्तान से नाइ सटा हय, लेकिन यकर सबसे पच्छु कय छोर कज़ाख़िस्तान कय पूरुब ओर से खालि 24 मील (38 किमी) दूर है। देश कय राजधानी औ सबसे बड़ा सहर उलान बाटोर होय, जहां देश कय लगभग 38% जनसंख्या रहत है। मंगोलिया मा संसदीय गणतंत्र है।

आज जवने कय मंगोलिया कहि जात हय कउनो जमाना मे शिओंगु, शियानबेइ ,रोउरुन जइसन तमाम घुमन्ता साम्राज्य यहपै शासन किहिन ।
सन् 1206 म चंगेज खान  मंगोल साम्राज्य कय खडा़ कीहिस । लेकिन युआन राजवंश कय पतन कय बाद मंगोल अपने पुरान रहन-सहन पय  लौटि आए। 16 वीं और 17 वीं शताब्दी मा मंगोलिया तिब्बती बौद्ध धर्म कय प्रभाव तरे आवा। 17 वीं सदी कय  अंत मा मंगोलिया कय ढेर क्षेत्र मा क्विंग राजवंश कय शासन लगि गा रहा । १९११ म किंग राजवंश कय पतन कय समय मा मंगोलिया आपन स्वतंत्रता कय घोषणा कीहिस , लेकिन १९२१ तक स्वतंत्रता कय बनावै मा औ १९४५ तक अंतरराष्ट्रीय मान्यता पावै खातिर संघर्ष करैक परा रहा। यकरे नाते में देश मजबूत रूस और सोवियत प्रभाव में आवा, १९२४ मा मंगोलियाई जनवादी गणराज्य कय घोषणा कइ गै औ राजनीतिक रूप से मंगोलिया उ समय कय सोवियत राजनीति कय मानै लाग। १९८९ मा पूरुबी  यूरोप मा कम्युनिस्ट शासन कय टूटैक बाद, मंगोलिया म  १९९० मा लोकतांत्रिक क्रांति देखैक मिला , जवनेकै नाते से बहु-दलीय व्यवस्था बना , १९९२ मा नँवा संविधान बना औ देस बजार अर्थव्यवस्था कय ओर आगे बढा।
छिगिस खान  (जेका चंगेज खान कय नाँव से जानि जात है) मंगोल जातिन कय यकठ्ठा करैक औ एक्ठु बहुतै बडा साम्राज्य कय नेयइ डारिन। इ साम्राज्य चीन, रूस, पूरुबी यूरोप औ मध्य एशिया तक फइला रहा।मंगोल इतिहास मा लिखा है कि छठवा शताब्दी मा भारत से दुई आर्चाय ‘‘नरेन्द्र यशसँ’’ औ ‘‘शाक्य वंश’’ मंगोलिया आये। वे अपने साथे बौद्ध सूत्र ग्रन्थ औ मूर्ति लाये। छठवा शताब्दी मा बौद्धमत कय परचार सुरु होइ गवा औ चालु रहा। भारत से धरम गुरु हुँवा जात रहे औ मंगोल  तीरथ यात्रा करै वाले, संस्कृत कय पढाई करै वाले औ धरम कय ज्ञान पावै खर्तिन भारत आवत रहेँ। 17वां शती तक इ चलतै रहा। मंगोलवासी अपने कय भगवान बुद्ध कय प्रिय शिष्य मौद्गल्यायन कय संतान मानत हैं। मूलरूप में जवन मंगोल देश रहा अब उ 3 भागन मा बंटा रहा। मंगोलिया कय एक भाग चीन कय अधीन है।जवने कय आन्तरिक मंगोलिया कहत हैं। मुख्य भाग जवन अब स्वतन्त्र है, बाहरी मंगोलिया कहा ला। कुछ भाग रूस कय अधीन है जवने कय साईबीरिया प्रदेश कय भाग बना दिहा है। यका बुयार्त गणराज्य कहत हैं। मंगोलिया कय राजधानी उलान बातर होय जवने कय माने होय 'लाल बहादुर'। मंगोलिया कय राष्ट्र पताका कय स्वयंभू (सोयंबू उच्चारण करत हैं) कहि जात हय । 'स्वयं भू' संस्कृत कय शब्द होय। बहुत मंगोल मनई संस्कृत नाँव धरा लैं। वहं भारतीय पतत्रा औ आयुर्वेद काय चलन है। महिनन कय नाँव औ हप्तन कय दिन कय नाँवो भारतै से है । जइसैे अत्तवार कय आदिया (आदित्यवार), सोम कय सोमिया, मंङ्ङर कय संस्कृत मा अंगारक शब्द है। बुद्ध=बुद्ध, बिहफै=व्रिहस्पत, शुक्क=सूकर, सनिच्चर कय सांचिर बोलत हैं।

मंगोलीया कय एक्ठु राष्ट्रपति कय नाँव शुंभू रहा। मंगोल देस कय जवन वैज्ञानिक सबसे पहिले अन्तरिक्ष में गँय, ओनकय नाँव गोरक्षथा रहा। केहु केहु कय नाँव कीर्ति, कुषली, कुमुद, कुबेर सुमेर,जय जिमित्र, वज्रमपाणि होय । मेहरारुन कय नाँव इन्द्री, रत्ना, अमृता जइसनौ रहत हय। चीन मे मंगोलवंश कय पहिला सम्राट कुब्लेखान होय। उ तिब्बत से महायान बौद्धमत कय प्रधान आर्चाय फाग्सपा (आर्य) कय पीकिग मे बोलाइकै ओनसे दीक्षा लीहिस। आर्चाय फाग्सपा कय राजगुरु कय पदवी दइ गै। ओन चीन में विहार बनवाइन। चीन कय बू-वाई शान नाँव कय पहाड पै मंजू श्रीदेवी कय बडका मंदिर बनवाइन।

यँह कय राज काज कय भाषा औ सबसे ढेर बोलि जाय वाला भाषा मंगोलियन होय । ९५% जनता इहै भाषा बोलत हँय ।

मंगोलिया म रहै वाले १५ साल से उप्पर कय मनईन मे ५३% बौद्ध धरम मानै वाले औ ३९% कवनौ धरम ना मानै वाले मनई रहें ।  




#Article 127: मलिक मोहम्मद जायसी (910 words)


भक्ति काल के निर्गुण प्रेमाश्रयी शाखा के कवि मलिक मुहम्मद जायसी केर जनम सन 1397 ई॰ और 1494 ई॰ के बीच अउर मृत्यु- 1542 ई. के बीच उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिला के जायस नगर के कंचना खुर्द मोहल्ला मा माना जात थे। जायसी अवधि क्य कालजयी रचना पद्मावत के रचयिता रहेन।

जायस नगर मोर अस्थानू।
नगरक नाँव आदि उदयानू।
तहाँ देवस दस पहुने आएऊँ।
भा वैराग बहुत सुख पाएऊँ॥

ई कविता से ई स्पष्ट है की रायबरेली कै पुरान नाम उद्यान नगर रहा

भा अवतार मोर नौ सदी।
तीस बरिख ऊपर कवि बदी।।

जायसी केर २१ रचनन केर के उल्लेख मिलत हैं जीमा पद्मावत, अखरावट, आख़िरी कलाम, कहरनामा, चित्ररेखा आदि प्रमुख हैं। अपने अवधि में जायसी जी केर ग्रन्थ पद्मावत कै विशेष स्थान है। येहमा रानी पद्मावती केर प्रेम-कथा कै बसा रोचक वर्णन भवा है। रत्नसेन कै पहली मेहरारू नागमती के वियोग कै बड़ा अच्छा वर्णन है। जायसी के रचना-शैली पी आदिकाल के जैन कवियन की दोहा चौपाई पद्धति केर प्रभाव परा है। जायसी सैय्यद अशरफ़ का प्यारा पीर मानत रहे और खुद का उनके द्वार केर मुरीद बतावत है। उनहिन के शब्दन मा:-

सो मोरा गुरु तिन्ह हों चला। धोवा पाप पानिसिर मेला।।
पेम पियालाया पंथ लखावा। अरपु चाखि मोहिं बूँद चखावा।।

जो मधु चढ़ा न उतरइ कावा। परेउ माति पसउं फेरि अरवा।।

एक जगह पै जायसी अपने बारे मा बड़े बिनम्र हवे कै कहत है:-

मुहम्मद मलिक पेम मधुभोरा। नाउँ बड़ेरा दरपन थोरा।।
जेव- जेंव बुढ़ा तेवं- तेवं नवा। खुदी कई ख्याल न कवा।।
हाथ पियाला साथ सुरांई। पेम पीतिलई आरे निबाही।।
बुधि खोई और लाज गँवाई। अजहूँ अइस धरी लरिकाई।।
पता न राखा दुहवई आंता। माता कलालिन के रस मांता।।
दूध पियसववइ तेस उधारा। बालक होई परातिन्ह बारा।।
खउं लाटउं चाहउं खेला। भएउ अजान चार सिर मेला।।
पेम कटोरी नाइके मता पियावइ दूध। बालक पीया चाहइ, क्या मगर क्या बूध।।

ई पंक्तियन से लागत है कि जायसी प्रेम- मधु के भ्रमर रहे। जायसी संसार को अस्थिर मानत रहे, उनके हिसाब ते प्रेम और सद्भाव ही स्थिर है अउर रही, जबकि समुल्ला संसार अस्थिर है। संसार केर अस्थिरता का वर्णन उन्हीं के शब्दन मा देखा जाये –

यह संसार झूठ थिर नाहिं। तरुवर पंखि तार परछाहीं।।
मोर मोर कइ रहा न कोई। जाऐ उवा जग अथवा सोई।।
पानी जस बुलबुला होई। फूट बिस्मादि मिलहं जल सोई।।
मलिक मुहम्मद पंथी घर ही माहिं उदास। कबहूँ संवरहि मन कै, कवहूँ टपक उबास।।

एक जगह पै चित्ररेखा मा उई अपने बारे मा लिखिन है:-

मुहमद सायर दीन दुनि, मुख अंब्रित बेनान। बदन जइस जग चंद सपूरन, एक जइस नेनान।

पद्मावत
पदमावति सब सखी बोलाई । चीर पटोर हार पहिराई ॥
सीस सबन्ह के सेंदुर पूरा और राते सब अंग सेंदुरा ॥
चंदन अगर चित्र सब भरीं ।नए चार जानहु अवतारीं ॥
जनहु कँवल सँग फूली कूईं । जनहुँ चाँद सँग तरई ऊईं ॥
धनि पदमावति, धनि तोर नाहू । जेहि अभरन पहिरा सब काहू ॥
बारह अभरन, सोरह सिंगारा । तोहि सौंह नहिं ससि उजियारा ॥
ससि सकलंक रहै नहिं पूजा । तू निकलंक, न सरि कोई दूजा ॥

काहू बीन गहा कर,काहू नाद मृदंग ।
सबन्ह अनंद मनावा रहसि कूदि एक संग ॥1॥

का सिंगार ओहि बरनौं, राजा । ओहिक सिंगार ओहि पै छाजा ॥
प्रथम सीस कस्तूरी केसा । बलि बासुकि, का और नरेसा ॥
भौंर केस, वह मालति रानी । बिसहर लुरे लेहिं अरघानी ॥
बेनी छोरि झार जौं बारा । सरग पतार होइ अँधियारा ॥
कोंपर कुटिल केस नग कारे । लहरन्हि भरे भुअंग बैसारे ॥
बेधे जनों मलयगिरि बासा । सीस चढे लोटहिं चहँ पासा ॥
घुँघरवार अलकै विषभरी । सँकरैं पेम चहैं गिउ परी ॥
bbyaख्या

अस फदवार केस वै परा सीस गिउ फाँद ।
अस्टौ कुरी नाग सब अरुझ केस के बाँद ॥1॥

बरनौं माँग सीस उपराहीं । सेंदुर अबहिं चढा जेहि नाहीं ॥
बिनु सेंदुर अस जानहु दीआ । उजियर पंथ रैनि महँ कीआ ॥
कंचन रेख कसौटी कसी । जनु घन महँ दामिनि परगसी ॥
सरु-किरिन जनु गगन बिसेखी । जमुना माँह सुरसती देखी ॥
खाँडै धार रुहिर नु भरा । करवत लेइ बेनी पर धरा ॥
तेहि पर पूरि धरे जो मोती । जमुना माँझ गंग कै सोती ॥
करवत तपा लेहिं होइ चूरू । मकु सो रुहिर लेइ देइ सेंदूरू ॥

कनक दुवासन बानि होइ चह सोहाग वह माँग ।
सेवा करहिं नखत सब उवै गगन जस गाँग ॥2॥

कहौं लिलार दुइज कै जोती । दुइजन जोति कहाँ जग ओती ॥
सहस किरिन जो सुरुज दिपाई । देखि लिलार सोउ छपि जाई ॥
का सरवर तेहि देउँ मयंकू । चाँद कलंकी, वह निकलंकू ॥
औ चाँदहि पुनि राहु गरासा । वह बिनु राहु सदा परगासा ॥
तेहि लिलार पर तलक बईठा । दुइज-पाट जानहु ध्रुव दीठा ॥
कनक-पाट जनु बैठा राजा । सबै सिंगार अत्र लेइ साजा ॥
ओहि आगे थिर रहा न कोऊ । दहुँ का कहँ अस जुरै सँजोगू ॥

खरग, धनुक, चक बान दुइ, जग-मारन तिन्ह नावँ ।
सुनि कै परा मुरुछि कै (राजा) मोकहँ हए कुठावँ ॥3॥

भौहैं स्याम धनुक जनु ताना । जा सहुँ हेर मार विष-बाना ॥
हनै धुनै उन्ह भौंहनि चढे । केइ हतियार काल अस गढे ?॥
उहै धनुक किरसुन पर अहा । उहै धनुक राघौ कर गहा ॥
ओहि धनुक रावन संघारा । ओहि धनुक कंसासुर मारा ॥
ओहि धनुक बैधा हुत राहू । मारा ओहि सहस्राबाहू ॥
उहै धनुक मैं थापहँ चीन्हा । धानुक आप बेझ जग कीन्हा ॥
उन्ह भौंहनि सरि केउ न जीता । अछरी छपीं, छपीं गोपीता ॥

भौंह धनुक, धनि धानुक, दूसर सरि न कराइ ।
गगन धनुक जो ऊगै लाजहि सो छपि जाइ ॥4॥




#Article 128: मल्लिका शेरावत (148 words)


मल्लिका शेरावत भारतीय सिनेमा की प्रसिद्ध हीरोईन और एक मॉडल है। रोहतक में प्रारंभिक पढ़ाई करने के बाद उसने मिरांडा हाउस, दिल्ली विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में डिग्री प्राप्त की। वह भारत की पहली अभिनेत्री है जिसने जैकी चैन के साथ काम किया है।

उसने फिल्मों में अपना नाम रीमा की जगह मल्लिका रखा, ऐसा उसने रीमा नाम की अन्य अभिनेत्रियों से नाम की समानता के कारण होने वाले कनफ्यूजन को दूर करने के लिए किया। मल्लिका का अर्थ रानी होता है और वह चाहती भी है कि लोग उसे इसी नाम से पुकारें। शेरावत उनकी माँ का सरनेम है।

इन्होने अपनी अच्छी शुरुआत जीना सिर्फ़ मेरे लिये से की। मगर फिल्म मर्डर से इन्हे अलग पहचान मिली। जुन 2007 में हॉगकाँग की एक प्रसिद्ध मैगजीन ने उसे एशिया के सबसे खूबसूरत 100 लोगों की सूची में स्थान दिया।

इन्हें अभी तक कोई भी नामी पुरस्कार नही मिला है,




#Article 129: मस्को (494 words)


मस्को रुस कय राजधानी होय । इ रूस कै अव यूरोप कै सबसे बड़ा सहर होय । इ मोस्कवा नदी कै किनारे बसा है ।यँह दुनिया कै ढेर अरपपति रहत हैं इहिकै नाते मस्को कै अरबपतिन कै सहर भि कहि जात है । २००७ मा मास्को कै लगातार दूसरा दाइ दुनिया कै सबसे महंङा शहर भी घोषित कइ गै रहा। इ सोवियत संघ औ पूरान रुसि साम्राज्य कै पुरान राजधानि रहा ।

एकर नाँव मोस्कवा नदि पै रखि गा है । २३७-३८ कै आक्रमण कै बाद, मंगोल लोग सारा सहर जरा दिहिन औ मनइन कै मार दिहिन। मास्को फिरसे आपन विकास किहिस और १३२७ मा व्लादिमीर - सुज्दाल रियासत कै राजधानी बनावा गै । वोल्गा नदी कै सुरूवात पै होवैक नाते एका फायदा रहा औ फिर धीरे धीरे सहर बड़ा होय लाग। मास्को एक्ठु शांत औ संपन्न रियासत बनि गवा औ कुल रूस से मनइ आयक हिँया बसै लागे।
१६५४-५६ कै प्लेग मा मास्को कै आधा आबादी खतम होइ गवा। १७०३ मा बाल्टिक तट पै पीटर महान सैंट पीटर्सबर्ग बनावैक बाद, १७१२ से मास्को रूस कै राजधानी नाइ रहि गै । १७७१ कै प्लेग माझिल रूस कै अन्तिम बड़ा प्लेग रहा, जवने मा खालि मास्को कै  १००००० मनइन कै जान गवा। १९०५ मा, अलेक्जेंडर अद्रिनोव मास्को कै पहिला महापौर बने। १९१७ कै रुसी क्रांति कै बाद, मास्को कै सोवियत संघ कै राजधानी बनाइ गै। मई ८,१९६५ कै, नाजी जर्मनी पै जितेक २०वा वर्षगांठ कै मउक्का पै मास्को कै हीरो सिटी कै उपाधि दइ गै।

मास्को यूरोप कै सबसे बड़ा सहरी अर्थव्यवस्थाओं में से एक होय। इ रूस कै सकल घरेलू उत्पाद कै लगभग २४% योगदान करत है। २००८ मा मास्को कै अर्थव्यवस्था ८.४४ ट्रिलियन रूबल रहा | मास्को मा औसत मासिक वेतन ४१६०० रूबल है। २०१० मा, मास्को मा बेरोजगारी दर खालि १% रहा, जवन रूस कै कुल प्रशासनिक क्षेत्रन् मा सबसे कम है।
मास्को रूस कै निर्विवादित रूप से प्रधान आर्थिक केंद्र होय। हिँया रूस कै सबसे बडा बैंक औ कंपनि कुल हैं जवनेमे रूस कै सबसे बड़ा कंपनी गेज्प्रोम सामिल है। मास्को मा रूस कै खुदरा बिक्री मा १७% औ कुल निर्माण कामन् मा १३% हिस्सेदारी है। चेर्किजोव्सकी बजार, ३ करोड़ डॉलर कै रोजाना बिक्री औ दस हजार विक्रेतन् कै साथे यूरोप कै सबसे बड़ा बजार होय।हिंया बाजार प्रशासनिक रूप से १२ भागन् मा बटा है औ सहर कै एक्ठु बड़हन भूभाग पै मौजुद है।२००८ मा, मास्को मा ७४ अरबपति रहें औ हिँया न्यूयोर्क, ७१ अरबपति, से ऊँचला पायदान पै है ।

मास्को मा १६९६ बडहन विद्यालय औ ९१ महाविद्यालय हैं। एकरे अलावा, २२२ अउर संस्थानऽओ उँच शिक्षा देत हैं, जवने मे से ६० प्रदेश विश्वविद्यालय अव १७५५ मा बना लोमोनोसोव मास्को स्टेट विश्वविद्यालय भी सामिल ह। विश्वविद्यालय मा २९ संकाय औ ४५० विभाग हैं जवन मे ३०००० पूर्वस्नातक औ ७००० स्नातकोत्तर छात्र पढत हैं। साथै विश्वविद्यालय मा, उँच विद्यालय कै लगभग १०००० विद्यार्थी पढत हैं औ लगभग २००० शोधार्थी काम करत हैं। मास्को स्टेट विश्वविद्यालय पुस्तकालय, रूस कै सबसे बडा पुस्तकालयों में से एक होय, हिँया लगभग ९० लाख किताब है।




#Article 130: महाकवि घाघ (763 words)


महाकवि घाघ अवधी भाषा केर साहित्यन इन कै बड़ी ऊंची जगहा है उनके अंदर खेती केर और मनई मनई के जीवन से सम्बंधित तमाम चीजन केर बड़ी अद्भुत जानकारी रही| मनई के रहन सहन उनके खेती पाती और तबियत के बारे मा घाघ जी जौन कहिन ऊ सब वैज्ञानिक रूप मा सही पावा गवा|

घाघ जी के जनम स्थान और उनके समय के बारे में विद्वानन मा बड़ा मतभेद है. कुछ जने उनका गोंडा कय बतावत है, कुछ जने बिहार कय| मुला बहुत विद्वानै घाघ केर जनम सं. 1753 वि. मानत है|   घाघ कय असली नाम के बारे मा कुछ खास नाही पता लागी पावा है|  श्री रामनरेश त्रिपाठी जी अपनी खोजन के आधार पै घाघ का  ब्राह्मण (देवकली दुबे) मानत  है। उनके अनुसार घाघ कन्नौज के चौधरी सराय के रहै वाले रहे| कहा जात है कि घाघ हुमायूँ के दरबार मा गये रहे। हुमायूँ के बाद उनका सम्बन्ध अकबर से भी रहा। अकबर कला संगीत अउर गुण केर बड़ा पारखी रहा| विद्वानन की सम्मान करत रहा। घाघ केर गुन से अकबर भी प्रभावित भवा  और उपहार मा  घाघ का तमाम धन और कन्नौज के लगे जमीन दिहिस, जिपर घाघ  गाँव बसाइन| ओकर नाम ‘अकबराबाद सराय घाघ’ रखा गवा। सरकारी कागजन मा अबहिऊ ऊ गाँव केर नाम ‘सराय घाघ’ है। ई  कन्नौज स्टेशन से लगभग एक मील पच्छूं मा  है। अकबर घाघ का  ‘चौधरी’ केर उपाधि दिहिन रहै। यही लिए घाघ के घर परिवार वाले अबहिऊ उनका चौधरी कहत हैं। ‘सराय घाघ’ का दूसर नाम ‘चौधरी सराय’  है। घाघ के मेहरारू कय  नाम तौ नहीं मालूम है मुला उनके दुई लरिका रहे -मार्कण्डेय दुबे और धीरधर दुबे। ई दूनौ लरिकन के खानदान मा दुबे लोगन के बीस पच्चीस घर अबहिउ वही बस्ती मा  हैं। मार्कण्डेय के खानदान में बच्चूलाल दुबे, विष्णु स्वरूप दुबे तथा धीरधर दुबे के खानदान में रामचरण दुबे और कृष्ण दुबे वर्तमान मा  हैं।  ई  लोग घाघ की सातवीं-आठवीं पीढ़ी में अपने का बतावत  हैं। ई लोग कबहू दान नाही लेत है| यनकर कहब है कि घाघ अपने घरम करम  के बड़े कट्टर रहे| जिहिके कारन उनका अंत मा मुग़ल दरबार से हाटाय दीन गवा रहै और उनके जमींदारी केर अधिकतर भाग जब्त कै लीन गवा  रहे। 

सावन मास बहे पुरवइया।
बछवा बेच लेहु धेनु गइया।।

अर्थात् यदि सावन महीने में पुरवैया हवा बह रही हो तो अकाल पड़ने की संभावना है। किसानों को चाहिए कि वे अपने बैल बेच कर गाय खरीद लें, कुछ दही-मट्ठा तो मिलेगा।

शुक्रवार की बादरी, रही सनीचर छाय।
तो यों भाखै भड्डरी, बिन बरसे ना जाए।।

अर्थात् यदि शुक्रवार के बादल शनिवार को छाए रह जाएं, तो भड्डरी कहते हैं कि वह बादल बिना पानी बरसे नहीं जाएगा।

रोहिनी बरसै मृग तपै, कुछ कुछ अद्रा जाय।
कहै घाघ सुन घाघिनी, स्वान भात नहीं खाय।।

अर्थात् यदि रोहिणी पूरा बरस जाए, मृगशिरा में तपन रहे और आर्द्रा में साधारण वर्षा हो जाए तो धान की पैदावार इतनी अच्छी होगी कि कुत्ते भी भात खाने से ऊब जाएंगे और नहीं खाएंगे।

उत्रा उत्तर दै गयी, हस्त गयो मुख मोरि।
भली विचारी चित्तरा, परजा लेइ बहोरि।।

अर्थात् उत्तरा और हथिया नक्षत्र में यदि पानी न भी बरसे और चित्रा में पानी बरस जाए तो उपज ठीक ठाक ही होती है।

पुरुवा रोपे पूर किसान।
आधा खखड़ी आधा धान।।

अर्थात् पूर्वा नक्षत्र में धान रोपने पर आधा धान और आधा खखड़ी (कटकर-पइया) पैदा होता है।

आद्रा में जौ बोवै साठी।
दु:खै मारि निकारै लाठी।।

अर्थात् जो किसान आद्रा नक्षत्र में धान बोता है वह दु:ख को लाठी मारकर भगा देता है।

ऐसा कहा जात है कि घाघ कै और उनके बहुरिया कै पटरी नाही खात रही| कुछ विद्वान कय कहब है कि यही मारे घाघ आपन मूल निवास छपरा छोड़कै  कन्नौज चले गये रहै। घाघ जौन  कहावत कहत रहे उनकर बहुरिया ओकर उल्टा कहावत बनाय के कहत रही| पं. राम नरेश त्रिपाठी, घाघ और उनके बहुरिया केर नोंकझोंक वाली कुछ कहावते लिखिन है| तनि देखा जाये…………………

घाघ- 

मुये चाम से चाम कटावै, भुइँ सँकरी माँ सोवै।
घाघ कहैं ये तीनों भकुवा उढ़रि जाइँ पै रोवै।।

बहुरिया-

दाम देइ के चाम कटावै, नींद लागि जब सोवै।
काम के मारे उढ़रि गई जब समुझि आइ तब रोवै।।

घाघ -

तरून तिया होइ अँगने सोवै रन में चढ़ि के छत्री रोवै।
साँझे सतुवा करै बियारी घाघ मरै उनकर महतारी।।

बहुरिया -

पतिव्रता होइ अँगने सोवै बिना अन्न के छत्री रोवै।
भूख लागि जब करै बियारी मरै घाघ ही कै महतारी।। 

घाघ –

बिन गौने ससुरारी जाय बिना माघ घिउ खींचरि खाय।
बिन वर्षा के पहनै पउवा घाघ कहैं ये तीनों कउवा।।

बहुरिया –

काम परे ससुरारी जाय मन चाहे घिउ खींचरि खाय।
करै जोग तो पहिरै पउवा कहै पतोहू घाघै कउवा।। 

 




#Article 131: महाराष्ट्र विधानसभा (124 words)


महाराष्ट्र विधान सभा भारतीय राज्य महाराष्ट्र के द्विसदनीय विधायिका का निचला सदन हैं। यह राजधानी मुम्बई में दक्षिण मुम्बई के नरीमन पॉइंट इलाके में स्थित हैं। वर्तमान में, विधान सभा के २८८ सदस्य एक सीट वाले निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित कियें जाते हैं और एक सदस्य नामांकित किया जाता हैं। ऊपरी सदन महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य इलेक्टोरल कॉलेज द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित कियें जाते हैं। महाराष्ट्र विधान सभा की 288 सीटों में से 29 अनुसूचित जाति और 25 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। 

नई विधानसभा म शिवसेना, राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी, काँग्रेस आय के (महाराष्ट्र विकास आघाडी) का सरकार अस्तित्व मे हे ' जेहके नेतृत्व शिवसेना प्रमुख बाळासाहेब ठाकरे कय बेटवा उध्दव ठाकरे मुख्यमंत्री के रूप मा करत अहैं..




#Article 132: मार्को पोलो (100 words)


मार्को पोलो (वेनिस १५ सितंबर, १२५४ - वेनिस, २९ जनवरी, १३२४) एकठु इतालवी व्यापारी, खोजकर्ता औ राजदूत रहे। वनकय जन्म वेनिस गणराज्य में मध्य युग कय अंत में भय। अपने दादा, निकोलस पोलो (Niccolò) औ अपने चाचा, मातेयो (Matteo), कय साथे वन रेशम मार्ग कय यात्रा करय वाले पहिला यूरोपियन में से एक रहे। वन आपन यात्रा १२७२ में लाइआसुस बंदरगाह (आर्मेनिया) से सुरु कीहिन रहा। वनकय चीन से लैकय, पूरुब कय यात्रा कय बडहन प्रतिवेदन  लंमा समय तक पछ्छु में एशिया कय बारे में जानकारी देए वाला स्रोत रहा ।

वन आर्मेनिया से होइकै टर्की कय उत्तर में गए।




#Article 133: मालदिभ्स (188 words)


मालदिभ्स एसिया कय एक्ठु देश होय । एकर राजधानी माले होय । इ देस मा ११९२ टापू हैं जवने मे से २०० पय बस्ती है ।कय राजधानी औ सबसे बडा़ सहर माले होय । माले कय जनसंख्या १०३६९३ है ।मालदीव जनसंख्या औ क्षेत्र दुनो हिसाब से एसीया कय सबसे छोट देस होय ।समुद्री सतह से एकरे जमीन कय औसत उचाई १.५ मीटर है जवन की पृथ्वी पय सबसे कम होय ।

मालदीव मा लगभग ११९२ मुँगा द्वीप हैं जवन उत्तर दक्खिन ओर कय हैं ।

इ देस कय हवापानी मा हिंद महासागर कय ढेर प्रभाव है । हिँया कय तापमान पूरा साल २४℃ औ ३३℃ कय बीच मा रहत है ।

मालदीव मा 7 प्रांत हैं, हर एक मा नीचे दिहा प्रशासकीय विभाग हैं (राजधानी माले आपन प्रशासकीय विभाग होय):

इ प्रांत उथुरु बोदुथीलाधुन्माथि कय ऐतिहासिक विभाजन कय अनुरूप है। धेकुनु बोदुथीलाधुन्माथि, उथुरु मेधु-राज्जे, मेधु-राज्जे, धेकुनु मेधु-राज्जे, हुवाधू (या उथुरु सुवादीन्माथि) औ अडडूलाकथोल्हू (या धेकुनु सुवादीन्माथि).

सरकारी औ आम भाषा धिवेही होय जवन एक्ठु भारत-यूरोपीय भाषा होय जवने मा प्राचीन सिंहली भाषा, इलू कय साथे कुछ समानता है।यहँ कय ढेर मनई सुन्नी ईस्लाम धर्म कय मानत हँय ।




#Article 134: मेघालय (8614 words)


मेघालय (, )  पूर्वोत्तर भारत का एक राज्य है जिसका शाब्दिक अर्थ है बादलों का घर। २०१६ के अनुसार यहां की जनसंख्या ३२,११,४७४ है एवं विस्तार २२,० वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में है, जिसका लम्बाई से चौडाई अनुपात लगभग ३:१ का है। राज्य का दक्षिणी छोर मयमनसिंह एवं सिलहट बांग्लादेशी विभागों से लगता है, पश्चिमी ओर रंगपुर बांग्लादेशी भाग तथा उत्तर एवं पूर्वी ओर भारतीय राज्य असम से घिरा हुआ है। राज्य की राजधानी शिलांग है। भारत में ब्रिटिश राज के समय तत्कालीन ब्रिटिश शाही अधिकारियों द्वारा इसे पूर्व का स्काटलैण्ड संज्ञा दी गयी थी। मेघालय पहले असम राज्य का ही भाग था, २१ जनवरी १९७२ को असम के खासी, गारो एवं जैन्तिया पर्वतीय जिलों को काटकर नया राज्य मेघालय अस्तित्व में लाया गया। यहां की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है। इसके अलावा अन्य मुख्यतः बोली जाने वाली भाषाओं में खासी, गारो, प्नार, बियाट, हजोंग एवं बांग्ला आती हैं। इनके अलावा यहां हिन्दी भी कुछ कुछ बोली समझी जाती है जिसके बोलने वाले मुख्यतः शिलांग में मिलते हैं। भारत के अन्य राज्यों से अलग यहां मातृवंशीय प्रणाली चलती है, जिसमें वंशावली मां (महिला) के नाम से चलती है और सबसे छोटी बेटी अपने माता पिता की देखभाल करती है तथा उसे ही उनकी सारी सम्पत्ति मिलती है।

यह राज्य भारत का आर्द्रतम क्षेत्र है, जहां वार्षित औसत वर्षा  दर्ज हुई है। राज्य का ७०% से अधिक क्षेत्र वनाच्छादित है। राज्य में मेघालय उपोष्णकटिबंधीय वन पर्यावरण क्षेत्रों का विस्तार है, यहां के पर्वतीय वन उत्तर से दक्षिण के अन्य निचले क्षेत्रों के उष्णकटिबन्धीय वनों से पृथक हैं। ये वन स्तनधारी पशुओ, पक्षियों तथा वृक्षों की जैवविविधता के मामलों में विशेष उल्लेखनीय हैं।

मेघालय में मुख्य रूप से कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था(अग्रेरियन) है जिसमें वाणिज्यिक वन उद्योग का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान है। यहां की मुख्य फ़सल में आलू, चावल, मक्का, अनान्नास, केला, पपीता एवं दालचीनी, हल्दी आदि बहुत से मसाले, आदि हैं। सेवा क्षेत्र में मुख्यतः अचल सम्पत्ति एवं बीमा कम्पनियां हैं। वर्ष २०१२ के लिये मेघालय का सकल राज्य घरेलू उत्पाद  अनुमानित था। राज्य भूगर्भ सम्पदाओं की दृष्टि से खनिजों से सम्पन्न है किन्तु अभी तक इससे सम्बन्धित कोई उल्लेखनीय उद्योग चालू नहीं हुए हैं।  राज्य में लगभग  लम्बे राष्ट्रीय राजमार्ग बने हैं। यह बांग्लादेश के साथ व्यापार के लिए एक प्रमुख लाजिस्टिक केंद्र भी है।

मेघालय शब्द का शब्दिक अर्थ है: मेघों का आलय या घर। यह संस्कृत मूल से निकला है।  इस शब्द की व्युत्पत्ति कलकत्ता विश्वविद्यालय में भूगोल विभाग के प्राध्यापक एमेरिटस डॉ॰एस पी॰चटर्जी द्वारा की गई थी। इस नाम पर आरम्भ में इसके नाम पर काफ़ी विरोध हुआ, क्योंकि अन्य पूर्वोत्तर राज्यों की भांति, जिनके नाम उनके निवासियों से संबंधित थे, जैसे मिज़ोरम: मिज़ो जनजाति, नागालैण्ड: नागा लोग, असम: असोम या अहोम लोग के नाम पर है; किन्तु मेघालय शब्द से स्थानीय गारो, खासी या जयंतिया जनजातियों का नाम कहीं सम्बन्धित नहीं होता है। किन्तु कालान्तर में इसे अपना लिया गया। 

अपने अन्य पड़ोसी पूर्वोत्तर-भारतीय राज्यों के साथ ही, मेघालय भी पुरातात्त्विक रुचि का केन्द्र रहा है। यहां लोग नवपाषाण युग से निवास करते आ रहे हैं।  अब तक खोजे गए नवपाषाण स्थल प्रायः ऊंचे स्थानों पर मिले हैं, जैसे यहां के खासी और गारो पर्वत एवं पड़ोसी राज्यों में भी। यहां नवपाषाण शैली की झूम कृषि शैली अभी तक अभ्यास में है। यहां के हाईलैण्ड पठार खनिज सम्पन्न मृदा के साथ साथ प्रचुर वर्षा होने पर भी बाढ़ से रोकथाम करने में सहायक होते हैं। मानव इतिहास में मेघालय का महत्त्व धान की फ़सल के घरेलु व्यावसायीकरण से जुड़ा हुआ है। चावल के उद्गम से जुड़े प्रतिस्पर्धी सिद्धांतों में आयन ग्लोवर के सिद्धांत के अनुसार, भारत २०,००० से अधिक पहचान वाली प्रजातियों के साथ घरेलु चावल की सबसे बड़ी विविधता का केंद्र है और पूर्वोत्तर भारत घरेलु चावल की उत्पत्ति का इकलौता क्षेत्र है जो सबसे अनुकूल है।  मेघालय की पहाड़ियों में की गयी सीमित पुरातात्विक शोध सुझाती है कि यहां मानव का निवास प्राचीन काल से रहा है। भारत २०,००० से अधिक पहचान वाली प्रजातियों के साथ घरेलु चावल की सबसे बड़ी विविधता का केंद्र है और उसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र घरेलु चावल की उत्पत्ति का अकेला सबसे अनुकूल क्षेत्र है।

मेघालय का गठन असम राज्य के दो बड़े जिलों  संयुक्त खासी हिल्स एवं जयन्तिया हिल्स को असम से अलग कर २१ जनवरी, १९७२ को किया गया था। इसे पूर्ण राज्य का दर्जा देने से पूर्व १९७० में अर्ध-स्वायत्त दर्जा दिया गया था।

१९वीं शताब्दी में ब्रिटिश राज के अधीन आने से पूर्व गारो, खासी एवं जयन्तिया जनजातियों के अपने राज्य हुआ करते थे। कालान्तर में ब्रिटिश ने १९३५ में तत्कालीन मेघालय को असम के अधीन कर दिया था। तब इस क्षेत्र को ब्रिटिश राज के साथ एक सन्धि के तहत अर्ध-स्वतंत्र दर्जा मिला हुआ था। १६ अक्तूबर १९०५ में लॉर्ड कर्ज़न द्वारा बंगाल के विभाजन होने पर मेघालय नवगठित प्रान्त पूर्वी बंगाल एवं असम का भाग बना। हालांकि इस विभाजन के १९१२ में वापस पलट दिये जाने पर मेघालय असम का भाग बना।  ३ जनवरी १९२१ को भारत सरकार के १९१९ के अधिनियम की धारा ५२ए के अनुसरण में, गवर्नर-जनरल-इन-काउन्सिल ने मेघालय के खासी राज्य के अलावा अन्य सभी क्षेत्रों को पिछड़े क्षेत्र घोषित कर दिया था। इसके बाद, ब्रिटिश प्रशासन ने भारत सरकार के अधिनियम १९३५ के तहत इसे अधिनियमित किया। इस अधिनियम के अन्तर्गत पिछाड़े क्षेत्रों को दो श्रेणियों,- अपवर्जित एवं आंशिक अपवर्जित में पुनर्समूहीकृत किया।

१९४७ में स्वतंत्रता के समय, वर्तमान मेघालय में असम के दो जिले थे और यह क्षेत्र असम राज्य के अधीन होते हुए भी सीमित स्वायत्त क्षेत्र था। 

१९६० में एक पृथक पर्वतीय राज्य की मांग उठने लगी। १९६९ के असम पुनर्संगठन (मेघालय) अधिनियम के अन्तर्गत मेघालय को स्वायत्त राज्य बनाया गया। यह अधिनियम २ अप्रैल १९७० को प्रभाव में आया और इस तरह असम से मेघालय नाम के एक स्वायत्त राज्य का जन्म हुआ। भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के अनुसार इस स्वायत्त राज्य के पास एक ३७ सदस्यीय विधान सभा बनी। 

१९७१ में संसद ने  पूर्वोत्तर पुनर्गठन अधिनियम पास किया जिसके अन्तर्गत्त मेघालय को २१ जनवरी १९७२ को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ और अपनी स्वयं की मेघालय विधान सभा बनी।

मेघालय पूर्वोत्तर भारत की सात बहनों वाले राज्य में से एक है। यह एक पर्वतीय राज्य है जिसमें घाटियों और पठारों तथा ऊंची-नीची भूमि वाले क्षेत्र हैं। यहाँ पर भूगर्भीय सम्पदा भी प्रचुर उपलब्ध है। यहां मुख्यतः आर्कियन पाषाण संरचनाएं हैं। इन पाषाण शृंखलाओं में कोयला, चूना पत्थर, यूरेनियम और सिलिमैनाइट जैसे बहुमूल्य खनिजों के भण्डार हैं। 

मेघालय में बहुत सी नदियां भी हैं जिनमें से अधिकांश वर्षा आश्रित और मौसमी हैं। 

दक्षिणी खासी पर्वतीय क्षेत्र में इन नदियों द्वारा गहरी गॉर्ज रूपी घाटियां एवं ढेरों नैसर्गिक जल प्रपात निर्मित हुए हैं।

पठार क्षेत्र की ऊंचाई  से  के बीच है। पठार के मध्य भाग में खासी पर्वतमाला के भाग हैं जिनकी ऊंचाई अधिकतम है। इसके बाद दूसरे स्थान पर जयन्तिया पर्वतमाला वाला पूर्वी भाग आता है। मेघालय का उच्चतम स्थान शिलाँग पीक है, जहां बड़ा वायु सेना स्टेशन है। यह खासी पर्वत का भाग है और यहां से शिलांग शहर का मनोहारी एवं विहंगम दृश्य दिखाई देता है। शिलांग पीक की ऊंचाई  है। पठार के पश्चिमी भाग गारो पर्वत में है और अधिकतर समतल है। गारो पर्वतमाला का उच्चतम शिखर नोकरेक पीक है जिसकी ऊंचाई  है।

कुछ क्षेत्रों में वार्षिक औसत वर्षा  के साथ मेघालय पृथ्वी पर आर्द्रतम स्थान अंकित है। पठार का पश्चिमी भाग, जिसमें गारो पर्वतों के निचले भाग आते हैं वर्ष पर्यन्त उच्च तापमान में रहता है। ऊंचाईयों वाले शिलांग एवं निकटवर्ती क्षेत्रों में प्रायः कम तापमान रहता है। इस क्षेत्र का अधिकतम तापमान यदा कदा ही  से ऊपर जाता होगा, जबकि शीतकालीन उप-शून्य तापमान यहां सामान्य हैं।
राजधानी शिलांग के दक्षिण में खासी पर्वत स्थित सोहरा (चेरापूंजी) कस्बा एक कैलेण्डर माह में सर्वाधिक वर्षा का कीर्तिमान धारक है, जबकि निकटवर्ती मौसिनराम ग्राम वर्ष भर में विश्व की सर्वाधिक वर्षा का कीर्तिमान धारक है।

राज्य का लगभग ७०% से अधिक भाग वनाच्छादित है, जिसमें से  सघन प्राथमिक उपोष्णकटिबंधीय वन हैं। मेघालयी वन एशिया के प्रचुरतम वनस्पति निवासों में से एक हैं। इन वनों को भरपूर वर्षा उपलब्ध रहती है और यहां प्रचुर मात्रा में वनस्पति एवं वन्य जीव अपनी विविधता के संग मिलते हैं। मेघालय के वनों का एक लघु भाग भारत के पवित्र वृक्षों (सैक्रेड ग्रोव्स) के नाम से जाना जाता है। प्राचीन वनों के कुछ छोटे भाग हैं जिन्हें समुदायों द्वारा सैंकड़ों वर्षों से धार्मिक एवं सांस्कृत विश्वास के कारण संरक्षित किया जाता रहा है। ये वन भाग धार्मिक कृत्यों हेतु रक्षित रहते हैं और किसी भी प्रकार के शोषण से सुरक्षित रखे जाते हैं। इन पवित्र ग्रोव्स में बहुत से दुर्लभ पादप एवं पशु आते हैं। पश्चिम गारो हिल्स में नोकरेक बायोस्फ़ेयर रिज़र्व एवं दक्षिण गारो हिल्स में बालफकरम राष्ट्रीय उद्यान को मेघालय के सर्वाधिक जैवविविधता बहुल स्थलों में गिना जाता हैं। मेघालय में तीन वन्य जीवन अभयारण्य हैं: नोंगखाईलेम, सिजू अभयारण्य एवं बाघमारा अभयारण्य, जहां कीटभोजी  घटपर्णी (पिचर प्लांट) नेपेन्थिस खासियाना का पौधा मिलता है जिसे स्थानीय भाषा में मे'मांग कोकसी कहते हैं। 

यहां के मौसम और स्थलीय स्थितियों में विविधता के कारण मेघालय के वनों में पुष्पों की प्रजातियों का बाहुल्य है। इनमें परजीवी, अधिपादप, रसभरे पौधों और झाड़ियों की बड़ी विविध प्रजातियां मिलती हैं। यहां की सबसे महत्वपूर्ण वृक्ष किस्मों में से दो हैं साल का पेड (शोरिया रोबस्टा) और टीक (टेक्टोना ग्रैंडिस) हैं। मेघालय फल, सब्जियों, मसालों और औषधीय पौधों की ढेरों किस्म का घर है। मेघालय अपने विभिन्न प्रकार के ३२५ से अधिक किस्मों के ऑर्किड्स के लिए भी प्रसिद्ध है। इनमें से सर्वाधिक पाई जाने वाली किस्में खासी पर्वतों के मासस्माई, माल्मलुह और सोहरारीम जंगलों में पाई जाती है। 

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मेघालय में स्तनधारियों, पक्षियों, सरीसृपों एवं कीट, कृमियों की भी अनेक किस्में पायी जाती हैं। स्तनधारियों की महत्त्वपूर्ण प्रजातियों में हाथी, भालू, लाल पाण्डा, सिवेट, नेवले, रासू, कृंतक, गौर, जंगली भैंस, हिरण, जंगली सूअर और कई नरवानर गण और साथ ही चमगादड़ की प्रचुर प्रजातियां भी मिलती हैं। मेघालय की चूनापत्थर गुफाएँ जैसे सीजू की गुफाओं में देश की कई लुप्तप्राय एवं दुर्लभ चमगादड़ प्रजातियां मिलती हैं। यहां के लगभग सभी जिलों में हूलॉक जिब्बन भी दिखाई देता है।

यहाँ के सामान्यतया पाये जाने वाले सरीसृपों में छिपकलियां, मगरमच्छ और कछुए आते हैं। मेघालय में बड़ी संख्या में सर्पों की प्रजातियां मिलती हैं, जिनमें अजगर, कॉपरहैड, ग्रीन ट्री रेसर, नाग,  कोरल स्नेक तथा वाइपर्स भी आते हैं।

मेघालय के वनों में पक्षियों की ६६० प्रजातियां मिलती हैं जिनमें से अधिकांश हिमालय की तलहटी क्षेत्रों, तिब्बत एवं दक्षिण-पूर्वी एशिया की स्थानिक हैं। यहां पायी जाने वाली पक्षी प्रजातियों में से ३४ विश्वव्यापी लुप्तप्राय (एनडेन्जर्ड) प्र्जाति सूची एवं ९ लुप्तप्राय प्रजाति सूची में आती हैं। मेघालय में प्रायः दिखाई देने वाली पक्षी प्रजातियों में फैसियनिडी, एनाटिडी, पोडिसिपेडिडी, सिकोनाईडी, थ्रेस्कियोर्निथिडी, आर्डेडी, पेलिकनिडी, फैलाक्रोकोरैसिडी, एन्हिन्जिडी, फ़ैल्कोनिडी, एसिपिट्रिडी, ओटिडिडी, आदि बहुत सी किस्में हैं। इन प्रत्येक किस्म में बहुत सी प्रजातियां हैं। ग्रेट इण्डियन हॉर्नबिल मेघालय का सबसे बड़ा पक्षी है। अन्य क्षेत्रीय पक्षियों में सलेटी मयूर-तीतर, बड़े भारतीय तोते (इण्डियन पैराकीट), हरे कबूतर एवं ब्लू जे पक्षी आते हैं।  मेघालय २५० से अधिक तितलियों का भी गृह स्थान है जो भारत में पायी जाने वाली कुल प्रजातियों का लगभग एक-चौथाई है।

मेघालय की जनसंख्या का अधिकांश भाग जनजातीय लोग हैं। इनमें खासी सबसे बड़े समूह हैं, इसके बाद गारो और फ़िर जयन्तिया लोग आते हैं। ये उन लोगों में से थे जिन्हें अंग्रेज लोग पहाड़ी जनजाति कहा करते थे। इनके अलावा अन्य समूहों में बियाट, कोच, संबंधित राजबोंगशी, बोरो, हाजोंग, दीमासा, कुकी, लखार, तीवा (लालुंग), करबी, राभा और नेपाली शामिल हैं।   

जनगणना२०११ की प्रावधानिक रिपोर्ट के अनुसार, सभी सात उत्तर-पूर्वी राज्यों में से मेघालय में २७.८२% की उच्चतम, दशक की जनसंख्या वृद्धि दर्ज की गई। २०११ तक मेघालय की जनसंख्या २९,६४,००७ हो जाने का अनुमान है; जिसमें से १४,९२,६६८ महिलाएं एवं १४,७१,३३९ पुरुष होने का अनुमान है। भारत की २०११ की जनगणना के अनुसार, राज्य में लिंग अनुपात प्रति १००० पुरुषों पर ९८६ महिलाएं रहा जो राष्ट्रीय औसत ९४० से कहीं अधिक है। यहां का शहरी महिला लिंगानुपात ९८५ ग्रामीण लिंगानुपात ९७२ से अधिक है।

मेघालय की कुल जनसंख्या में से १,१८५,६१९ लोग कार्यसाधक गतिविधियों में संलग्न हैं। ७७.७% कार्यकर्त्ता अपने इन कार्यों को मुख्य कार्य बताते हैं (६ माह या अधिक से संलग्न) जबकि २२.३% लोग आंशिक रूप से (६ माह से कम) हैं। इन ११,८५,६१९ कार्यकर्त्ताओं में से ४,११,२७० कृषक रूप में (स्वामी या सह-स्वामी) संलग्न हैं, जबकि १,१४,६४२ कार्यकर्त्ता कृषक मजदूर रूप में संलग्न हैं।

मेघालय भारत के उन तीन राज्यों में से एक है जहां ईसाई बाहुल्य है। यहाँ की लगभग ७५% जनसंख्या ईसाई धर्म का अनुसरण करती है जिनमें प्रेस्बिटेरियन, बैपटिस्ट और कैथोलिक आम संप्रदायों में आते हैं। मेघालय में लोगों का धर्म उनकी जाति से निकटता से संबंधित है। गारो जनजाति के ९०% और खासी जनजाति के लगभग ८०% लोग ईसाई है, जबकि हजोंग जनजाति के ९७% से अधिक, कोच के ९८.५३% और राभा जनजातियों के ९४.६०% लोग हिंदू हैं।

२००१ की जनगणना के अनुसार मेघालय में रहने वाली ६,८९,६३९ गारो जनसंख्या में से अधिकांश ईसाई हैं, और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले कुछ लोग ही सोंगसेरेक धर्म का पालन करते हैं। ११,२३,४९० खासी लोगों में से अधिकांश ईसाई थे, २,०२,९७८ स्वदेशी नियाम खासी / शॉनोंग / नियाम्त्रे, १७,६४१ हिंदू थे और २,९७७ मुस्लिम थे। मेघालय में कई कम जनसंख्या वाली जनजातियां भी हैं, जिनमें हाजोंग (३१,३८१ - ९७.२३% हिंदू), कोच (३१,३८१ -९८.५३% हिंदू), राभा (२८,१५३ - ९४.६०% हिंदू), मिकिर (११,३९९ - ५२% ईसाई और ३०% हिंदू) शामिल हैं, तीवा (लालंग) (८,८ - ९६.१५% ईसाई) और बियाट (१०,०८५ - ९७.३०% ईसाई)। 

स्वदेशी से ईसाईयत को धर्मान्तरण ब्रिटिश काल में १९वीं शताब्दी से आरम्भ हुआ। १८३० में अमेरिकन बापटिस्ट फ़ारेन मिशनरी सोसायटी पूर्वोत्तर में सक्रिय हुई और स्वदेशी से इनका धर्मान्तरण ईसाईयत को किये जाने की प्रक्रिया आरम्भ हुई।  कालान्तर में उन्हें चेरापुञ्जी, मेघालय तक अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार करने का प्रस्ताव भी मिला किन्तु पर्याप्त संसाधनों की कमी के कारण उन्होंने मना कर दिया। वैल्श प्रेसबाईटेरियन ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया और चेरापुञ्जी मिशन क्षेत्र में कार्य आरम्भ कर दिया। १९०० के आरम्भ तक प्रोटेस्टैण्ट ईसाई मिशन भी मेघालय में सक्रिय होने लगे थे। विश्व युद्ध के आरम्भ होने के कारण यहां के प्रचारकों को इस कार्य को छोड़ कर यूरोप एवं अमेरिका में अपने घरों को लौटने पर बाध्य होना पड़ा। यही वह काल था जब कैथोलिकन मत ने मेघालय व पडोसी क्षेत्रों में अपनी जड़ें फ़ैलानी आरम्भ की थीं।  २०वीं श्ताब्दी में यूनियन क्रिश्चियन कालेज ने बड़ापानी, शिलांग में अपना संचालन शुरू किया। वर्तमान में प्रेसबाईटेरियन और कैथोलिक ही यहां के सर्वाधिक प्रचलित ईसाई मत हैं।

राज्य की आधिकारिक एवं सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा अंग्रेजी है। इसके अलावा यहां की अन्य प्रधान भाषाएं हैं खासी और गारो।

खासी (जिसे खसी, खसिया या क्यी भी कहते हैं) ऑस्ट्रो-एशियाई भाषाओं के मोन-ख्मेर परिवार की एक शाखा है। २००१ की भारतीय जनगणना के अनुसार खासी भाषा को बोलने वाले ११,२८,५७५ लोग मेघालय में रहते हैं। खासी भाषा के बहुत से शब्द की इण्डो-आर्य भाषाएं जैसे नेपाली, बांग्ला एवं असमिया से लिये गए हैं। इसके अलावा खासी भाषा की अपनी कोई लिपि नहीं है और यह भारत में अभी तक चल रही मोन-ख्मेर भाषाओं में से एक है।

गारो भाषा का  तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की सदस्य कोच एवं बोडो भाषाओं से निकट सामीप्य है। गारो भाषा अधिकांश जनसंख्या द्वारा बोली जाती है और इसकी कई बोलियां प्रचलित हैं, जैसे अबेंग या अम्बेंग, अटोंग, अकावे (या अवे), मात्ची दुआल, चोबोक, चिसक मेगम या लिंगंगम, रुगा, गारा-गञ्चिंग एवं माटाबेंग।

इनके अलावा मेघालय में बहुत सी अन्य भाषाएं भी बोली जाती हैं, जैसे  प्नार भाषा पश्चिम एवं पूर्वी जयन्तिया पर्वत पर पर बहुत से लोगों द्वारा बोली ज्ती हैं। यह भाषा खासी भाषा से संबंधित है। अन्य भाषाओं के अलावा वार जयन्तिया (पश्चिम जयन्तिया पर्वत), मराम एवं लिंगंगम (पश्चिम खासी पर्वत), वार पिनर्सिया (पूर्वी खासी पर्वत), के लोगों द्वारा बहुत सी बोलियां भी बोली जाती हैं। री-भोई जिले के तीवा लोगों द्वारा तीवा भाषा बोली जाती है। मेघालय के असम से लगते दक्षिण-पूर्वी भागों में बसने वाले बड़ी संख्या में लोगों द्वारा बियाट भाषा बोली जाती है। नेपाली भाषा राज्य के लगभग सभी भागों में बोली जाती है।

विभिन्न जातीय और जनसांख्यिकीय समूहों में अंग्रेजी एक समान भाषा के रूप में बोली जाती है। शहरी क्षेत्रों में अधिकतर लोग अंग्रेजी बोल सकते हैं; ग्रामीण निवासियों की क्षमता में भिन्नता मिलती है।

मेघालय में वर्तमान में ११ जिले हैं।

जयन्तिया हिल्स मंडल:

गारो हिल्स मंडल:

जयन्तिया हिल जिला २२ फ़रवरी १९७२ को सृजित किया गया था। इसका कुल भौगोलिक क्षेत्रफ़ल  है और  यहां की जनसंख्या २,९५,६९२ है। यहां का जिला मुख्यालय जोवाई में स्थित है। जयन्तिया हिल्स जिला राज्य में कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक जिला है। जिले भर में कोयले की खानें दिखाई देती हैं। इसके अलावा यहां चूनेपत्थर का खनन भी वृद्धि पर है क्योंकि सीमेण्ट उद्योग यहां जोरों पर है और उसमें चूनेपत्थर की ऊंची मांग है। हाल के कुछ वर्षों में ही इस बड़े जिले को दो छोटे जिलों: पश्चिम जयतिया एवं पूर्वी जयन्तिया हिल्स में बांट दिया गया था। 

पूर्वी खासी हिल्स जिले को खासी हिल्स में से २८ अक्तूबर १९७६ को निकाल कर नया जिला बनाया गया था। जिले का विस्तार  में है और  यहां की जनसंख्या ६,६०,९२३ है। ईस्ट खासी हिल्स जिले का मुख्यालय राज्य की राजधानी शिलांग में है।

री-भोइ जिले की स्थापना ईस्ट खासी जिले को विभाजित कर ४ जून १९९२ को हुई थी। री-भोई जिले का कुल क्षेत्रफ़ल  है और  यहां की कुल जनसंख्या १,९२,७९५ है। जिले का मुख्यालय नोंगपोह में है। यहां की भूमि पर्वतीय है और वनाच्छादित है। री-भोई जिला अपने अनानासों के लिये प्रसिद्ध है और राज्य में अनानास का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र है।पश्चिम खासी हिल्स जिला राज्य का सबसे बड़ा जिला है औ इसका क्षेत्रफ़ल  है और  जिले की जनसंख्या २,९४,११५ है। यह जिला खासी हिल्स जिले से काटकर २८ अक्तूबर १९७६ को बनाया गया था। जिले का मुख्यालय नोंगस्टोइन में है।ईस्ट गारो हिल्स जिले की स्थापना १९७६ में की गयी थी और इसकी जनसंख्या २००१ की जनगणना अनुसार २,४७,५५५ है। इस जिले का विस्तार  में है। जिले का मुख्यालय विलियमनगर में है जिसे पहले सिमसानगिरि बोला जाता था। नोंगलबीबरा जिले का एक कस्बा है जहां बड़ी संख्या में कोयले की खानें हैं। यहां से राष्ट्रीय राजमार्ग ६२ द्वारा कोयला ग्वालपाड़ा और जोगीघोपा को भेजा जाता है।पश्चिम गारो हिल्स जिला राज्य के पश्चिमी भाग में स्थित है और इसका भौगोलिक विस्तार  में है। २००१ की जनगणनानुसार जिले की जनसंख्या ५,१५,८१३ है और जिले का मुख्यालय तुरा में है।द्क्षिण गारो हिल्स जिला १८ जून १९९२ को तत्कालीन पश्चिम गारो हिल्स जिले को विभाजित कर बनाया गया था। जिले का कुल भौगोलिक क्षेत्र  है और वर्ष २००१ की जनगणनानुसार यहां की जनसंख्या ९९,१०० है। जिले का मुख्यालय बाघमारा में है।वर्ष २०१२ के स्थितिनुसार राज्य में ११ जिले, १६ नगर व कस्बे और अनुमानित ६,०२६ ग्राम थे।

मेघालय में विद्यालय राज्य सरकार, निजी संगठनों एवं धार्मिक संस्थानों द्वारा संचालित होते हैं। शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी ही है। अन्य भारतीय भाषाएं जैसे असमिया, बंगाली, हिन्दी, गारो, खासी, मीज़ो, नेपाली और उर्दु वैकल्पिक विषयों की श्रेणी में पढ़ाई जाती हैं। माध्यमिक शिक्षा की शिक्षा बोर्ड्स से सम्बद्ध है जैसे काउंसिल ऑफ इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्ज़ामिनेशंस (आईसीएसई), केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई), राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (ओपन स्कूल) और मेघालय शिक्षा बोर्ड। 

१०+२+३ शिक्षा पद्धति के अन्तर्गत्त, माध्यमिक शिक्षा पूर्ण होने के उपरान्त विद्यार्थी प्रायः २ वर्ष कनिष्ठ महाविद्यालय (जूनियर स्कूल) में शिक्षण लेते हैं जिसे प्री-युनिवर्सिटी कहते हैं, या फ़िर उच्चतर माध्यमिक शिक्षा सुविधा वाले किसी मेघालय शिक्षा बोर्ड या केन्द्रीय शिक्षा बोर्ड से सम्बद्ध विद्यालय में प्रवेश लेते हैं। विद्यार्थी तीन में से किसी एक विधा को चुनते हैं: कला, वाणिज्य या विज्ञान। दो वर्ष का कार्यक्रम सफ़लतापूर्वक पूर्ण करने के उपरान्त विद्यार्थी किसी सामान्य या व्यावसायिक स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं।

इनके अलावा बहुत से अन्य संस्थान जैसे: 

मेघालय के वर्तमान राज्यपाल गंगा प्रसाद राज्य के प्रमुख हैं।

मेघालय विधान सभा में वर्तमान में  ६० सदस्य होते हैं। मेघालय राज्य के दो प्रतिनिधि लोक सभा हेतु निर्वाचित होते हैं, प्रत्येक एक शिलांग और एक तुरा निर्वाचन क्षेत्र से। यहां का एक प्रतिनिधि राज्य सभा में भी जाता है।

राज्य के सृजन से ही यहां गौहाटी उच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र रहा है। १९७४ से ही गौहाटी उच्च न्यायालय की एक सर्किट बेञ्च यहां स्थापित है। मार्च २०१३ में मेघालय उच्च न्यायालय को गौहाटी उच्च न्यायालय से विलग कर दिया गया और अब राज्य का अपना उच्च न्यायालय है।

राष्ट्र की ग्रामीण जनता को स्थानीय स्व-सरकार उपलब्ध कराने हेतु भारतीय संविधान में प्रायोजन किये गये हैं। इनके अनुसार पंचायती राज संस्थान की स्थापना की गयी है।  पूर्वोत्तर राज्यों के भिन्न रीति रिवाजों एवं मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए, क्षेत्र के लिये एक अलग राजनीतिक एवं प्रशासनिक ढांचे का निर्माण किया गया है क्षेत्र की कुछ जनजातियों की अपनी पारम्परिक राजनीतिक प्रणालियां हैं। इनके चलते यह महसूस किया गया कि पंचायती राज प्रणाली यहां लागू की जाने से विवाद उत्पन्न करेगी। गोपीनाथ बोरदोलोई की अध्यक्षता में बनी एक उपसमिति की सिफ़ारिशों को संविधान में संलग्न किया गया। इसके तहत मेघालय सहित पूर्वोत्तर के कई ग्रामीण क्षेत्रों में स्वायत्त जिला परिषदों का गठन कर उनका अपना संविधान लागू किया गया। मेघालय में ऐसी एडीसी परिषदें निम्न हैं:खासी हिल ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउन्सिलगारो हिल ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउन्सिल
जयन्तिया हिल ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउन्सिल

मेघालय में मुख्य रूप से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था है। कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों में ही लगभग मेघालय की दो-तिहाई जनशक्ति कार्यरत है। हालांकि इस क्षेत्र का राज्य की एनएसडीपी में योगदान मात्र एक-तिहाई ही है। राज्य में कृषि की कम उत्पादकता का प्रमुख कारण गैर-टिकाऊ कृषि परम्पराएं हैं। इन्हीं कारणों से कृषि में जनसंख्या के बड़े भाग के संलग्न होने के बावजूद भी राज्य को अन्य भारतीय राज्यों से भोजन आयात करना पड़ता है। बुनियादी ढांचे की बाधाओं ने राज्य की अर्थव्यवस्था को भारत के बाकी भागों के मुकाबले उस तेजी से उच्च आय की नौकरियां सृजित करने से रोक रखा है।

मेघालय का वर्ष २०१२ का सकल राज्य घरेलू उत्पाद वर्तमान मूल्यों पर  अनुमानित था। २०१२ में भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, राज्य की लगभग १२% जनसंख्या गरीबी की रेखा से नीचे थी जिसमें से ग्रामीण क्षेत्रों में १२.५% एवं शहरी क्षेत्रों में ९.३% जनसंख्या गरीबी की रेखा से नीचे थी।

मेघालय मूलतः एक कृषि प्रधान राज्य है जिसकी ८०% जनसंख्या अपनी आजीविका हेतु पूर्ण रूपेण कृषि पर ही निर्भर है। मेघालय के कुल भौगोलिक क्षेत्रफ़ल का लगभग १०% कृषि में प्रयोग किया जाता है। राज्य में कृषि प्रायः आधुनिक तकनीकों के अभाव या अति-सीमित प्रयोग के साथ होती है जिसके परिणामस्वरूप कम उत्पादन और कम उत्पादकता ही हाथ आती है। अतः इन कारणों से कृषि में लगी अधिकांश जनसंख्या के बावजूद भी राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि उत्पादन का योगदान कम है, और कृषि में लगी अधिकांश जनसंख्या गरीब ही  रहती है। खेती वाले क्षेत्र का एक भाग यहां की परंपरागत स्थानांतरण कृषि, जिसे स्थानीय भाषा में लोग झूम कृषि कहते हैं, के तहत है।

मेघालय में वर्ष २००१ में २,३०,००० टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ था। धान यहां की मुख्य खाद्यान्न फ़सल है जो राज्य के कुल खाद्यान्न उत्पादन का ८०% उत्तरदायी है। इसके अलावा अन्य महत्त्वपूर्ण खाद्यान्नों में मक्का, गेहूं और कुछ अन्य अनाज एवं दालें भी उगायी जाती हैं। इनके अलावा यहां आलू, अदरख, हल्दी, काली मिर्च, सुपारी, तेजपत्ता, पान, शार्ट स्टेपल सूत, सन, मेस्ता, सरसों और कैनोला का भी उत्पादन किया जाता है। धान और मक्का जैसे प्रधान खाद्य फ़सलों के अलाव मेघालय बागों की फ़सलों जैसे सन्तरों, नींबू, अनानास, अमरूद, लीची, केले, कटहल और कई फ़ल जैसे आड़ू, आलूबुखारे एवं नाशपाती के उत्पादन में भी योगदान देता है।अनाज और मुख्य खाद्यान्न उत्पादन यहां की कुल कृषि भूमि का ६०% घेर लेता है। १९७० के दशक के मध्य में उच्चोत्पादन देने वाली फ़सल की किस्मों के प्रयोग आरम्भ किये जाने से खाद्यान उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार आया था। धान की उच्चोत्पादन वाली किस्मों जैसे मसूरी, पंकज, आईआर-८, आरसीपीएल एवं अन्य बेहतर किस्मों की शृंखला-विशेषकर आईआर-३६ जो रबी के मौसम के अनुकूल है, के प्रयोग से एक बड़ी सफ़लता प्राप्त की गयी, जिसके उप्रान्त वर्ष में तीन फ़सलें बोई जाने लगी थीं।  

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा धान की शीत सहिष्णु किस्मों जैसे मेघा-१ एवं मेघा-२ के विकास कर यहां प्रयोग किये जाने से पुनः बड़ी सफ़लता मिली थी। परिषद के शिलांग के निकट उमरोई स्थित पूर्वोत्तर क्षेत्र केन्द्र द्वारा इन किस्मों को १९९१-९२ में उच्च ऊंचाई क्षेत्रों के लिए विकसित की गयी थी, जहां तब तक कोई उच्चोत्पादन किस्म नहीं होती थीं। आज राज्य यह दावा कर सकता है कि धान उत्पादन के कुल क्षेत्र का लगभग ४२% क्षेत्र उच्चोत्पादन किस्मों द्वारा रोपा जाता है और इनकी औसत उत्पादकता  है। ऐसा ही हाल मक्का और धान उत्पादन के लिये भी रहा है जहां एचवाईवी के प्रयोग किये जाने से उत्पादन १९७१-७२ में  से  मक्का और गेहूं  से  हो गया।

कैनोला, सरसों, अलसी, सोयाबीन,अरण्डी और तिल जैसे तिलहन यहां लगभग  पर उगाए जाते हैं। कैनोला और सरसों यहां के सबसे महत्वपूर्ण तिलहन हैं, जो यहां के लगभग ६.५ हजार टन के कुल तिलहन उत्पादन के दो-तिहाई से अधिक भाग देते हैं। कपास, सन और मेस्टा जैसी फ़सलें ही यहां की मुख्य नकदी फसलों में आती हैं और गारो पर्वत में उगाए जाते हैं। हाल के वर्षों में इनके उत्पादन में गिरावट आयी है जो इनको बोई जाने वाली कृषि भूमि में होती कमी से भी दिखाई देता है।

मेघालय की जलवायु यहां फ़ल, सब्जियों, पुष्पों, मसालों, मशरूम जैसी फ़लदार फ़सलों के अलावा चिकित्सकीय पौधों की विभिन्न किस्मों की उपज में बहुत सहायक है। ये उच्च मूल्य फ़सल आंकी जाती हैं, किन्तु घरेलु उपयोगी फ़सलों की अत्यावश्यकता यहां के किसानों को इनकी खेती अपनाने से रोकती है। कुछ मुख्य फ़लदार फ़सलों में यहां रसीले फ़ल, अनानास, पपीते और केले आते हैं। इनके साथ साथ ही बड़ी मात्रा में यहां सब्जियां जैसे फ़ूलगोभी, बंदगोभी और मूली, आदि भी उगायी जाती हैं।

पूरे राज्य भर में सुपारी के बाग खूब दिखायी देते हैं, विशेषकर गुवाहाटी से शिलांग राजमार्ग के किनारे के क्षेत्र में। इनके अलावा अन्य उद्यान फ़सलें जैसे चाय, कॉफ़ी और काजू यहां काफ़ी समय बाद पहुंचे किन्तु अब इनका प्रचलन भी बढ रहा है। मसालों, पुष्पों और मशरूमों की बड़ी किस्मों का उत्पादन राज्य भर में किया जाता है। 

मेघालय में प्राकृतिक सम्पदा का बाहुल्य है। इनमें कोयला, चूनापत्थर, सिलिमैनाइट, चीनी मिट्टी और ग्रेनाइट आते हैं। मेघालय भर में वृहत स्तर के वनाच्छादन, समृद्ध जैव विविधता और प्रचुर जल सोत हैं। यहां निम्नस्तरीय औद्योगिकीकरण एवं अपेक्षाकृत खराब बुनियादी ढांचा राज्य की अर्थव्यवस्था के हित में इन प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के लिए बाधा के रूप में कार्य करता है। हाल के वर्षों में ९०० एमटीडी(मीट्रिक टन प्रतिदिन) से अधिक उत्पादन क्षमता वाले दो बड़े सीमेंट निर्माण संयंत्र जयन्तिया हिल्स जिले में लुम्श्नौंग और नौङ्ग्स्निङ्ग में लगे हैं एवं इस जिले में उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाले चूना पत्थर के समृद्ध भण्डार का उपयोग करने के लिए कई और निर्माण प्रक्रिया में हैं। 

मेघालय के ऊंचे पर्वतों, गहरी घाटियों और प्रचुर वर्षा के कारण यहां बड़ी मात्रा में अप्रयुक्त जलविद्युत क्षमता संचित है। यहां की मूल्यांकित उत्पादन क्षमता ३००० मेगावाट से अधिक है। राज्य में वर्तमान स्थापित क्षमता १८५ मेगावाट है, किन्तु राज्य स्वयं ६१० मेगावॉट का उपभोग करता है, अर्थात दूसरे शब्दों में, यह बिजली आयात करता है। राज्य की आर्थिक वृद्धि के साथ साथ ही बिजली की बढ़ती मांग भी जुडी है। राज्य में जलविद्युत से उत्पन्न बिजली निर्यात करने एवं उससे मिलने वाली आय से अपनी आंतरिक विकास योजनाओं के लिए आय अर्जित करने की पर्याप्त क्षमता है। राज्य में भी कोयले के भी बड़े भण्डार हैं, जो कि यहां ताप विद्युत संयंत्र की संभावना को भी बल देते हैं।

बहुत सी परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। नंगलबीबरा में प्रस्तावित ताप-विद्युत परियोजना के प्रचालन में आने पर ७५१ मेगावाट विद्युत अतिरिक्त उत्पादन की संभावना है। पश्चिम खासी हिल्स में एक २५० वॉट की परियोजना लगाने का भी प्रस्ताव है। राज्य सरकार अपना विद्युत उत्पादन २०००-२५०० मेगावॉट तक वर्धन करने का लक्ष्य रखता है जिसमें से ७००-९८० मेगावॉट ताप-विद्युत होगी तथा १४००-१५२० मेगावॉट जल-विद्युत होंगीं। राज्य सरकार ने अपने क्षेत्र में निजी क्षेत्र के निवेश में तेजी लाने हेतु एक साझा लागत वाले सार्वजनिक-निजी साझेदारी मॉडल की रूपरेखा तैयार की है। विद्युत उत्पादन, परिवर्तन और वितरण मेघालय एनर्जी कॉरपोरेशन लिमिटेड को सौंपा गया है, जिसे बिजली आपूर्ति अधिनियम १९४८ के तहत गठित किया गया था। वर्तमान में पांच जल विद्युत स्टेशन और एक मिनी जल विद्युत संयंत्र हैं जिसमें उमियम हाइडल परियोजना, उमट्रू हाइडल परियोजना, माइंट्डू-लेशका-१ हाइडल परियोजना और सनपानी माइक्रो हाइडल (एसईएसयू) परियोजना सम्मिलित हैं।   

भारत की १२वीं पंचवर्षीय योजना में, राज्य में अधिक जल विद्युत परियोजनाएं स्थापित करने का एक प्रस्ताव है जो इस प्रकार से हैं:

इनमें से जेपी समूह ने खासी पर्वत में किन्शी और उमंगोट परियोजनाओं के निर्माण के लिए बीड़ा उठाया है।.

मेघालय की साक्षरता  दर ६२.५६ है जिसके साथ यह भारत का २७वां साक्षर राज्य है। यह दर २०११ में ७५.५ तक पहुंच गयी। वर्ष २००६ के आंकड़ों के अनुसार यहाँ ५८५१ प्राथमिक विद्यालय, १७५९ माध्यमिक विद्यालय एवं ६५५ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हैं।  

२००८ में, ५,१८,००० विद्यार्थी प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ रहे थे और २,३२,००० उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ रहे थे। राज्य अपने विद्यालयों में गुणवत्ता, पहुंच, बुनियादी ढांचे और शिक्षकों के प्रशिक्षण का ध्यान रखता है और उत्तरदायी है।

शिलांग स्थित उच्च शिक्षा संस्थान  भी हैं जैसे भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) एवं प्रौद्योगिकी एवं प्रबन्धन विश्वविद्यालय (यूएसटीएम) जो प्रथम भारतीय विश्वविद्यालय है जिसने क्लाउड कम्प्यूटिंग अभियान्त्रिकी को अध्ययन के क्षेत्र में स्थान दिया है। आईआईएम शिलांग राष्ट्र के सर्वोच्च श्रेणी के प्रबन्धन संस्थानों में से एक है।

राज्य में १३ सरकारी औषधालय, २२ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, ९३ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं ४०८ उप-केन्द्र हैं। यहाँ ३७८ चिकित्सक, ८१ भेषजज्ञ, ३३७ स्टाफ़ नर्सें एवं ७७ लैब तकनीशियन हैं। राज्य सरकार द्वारा तपेदिक, कुष्ठ रोग, कैंसर और मानसिक रोग के उपचार हेतु एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है। हालांकि मृत्यु दर में लगातार गिरावट आयी है किन्तु राज्य के स्वास्थ्य विभाग के स्थिति पत्र (स्टेटस पेपर) के अनुसार जीवन प्रत्याशा में सुधार और स्वास्थ्य सम्बन्धी बुनियादी ढांचे में पर्याप्त वृद्धि के अभाव में राज्य की जनसंख्या का लगभग ४२.३% भाग स्वास्थ्य देखरेख से अभी भी अछूता है। यहां बहुत से अस्पताल निर्माणाधीन हैं, जो सरकारी व निजी दोनों ही प्रकार के हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार से हैं: सिविल अस्पताल, गणेश दास अस्पताल, के जे पी सायनोड अस्पताल, पूर्वोत्तर इंदिरा गांधी क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं चिकित्सा संस्थान (एन.ई.आई.जी.आर.आई.एच.एम.एस),  नार्थ ईस्ट इन्स्टीट्यूट ऑफ़ आयुर्वेद (एनईआईएएच), आर.पी चेस्ट अस्पताल, वुडलैण्ड अस्पताल, नज़ारेथ अस्पताल एवं क्रिश्चियन अस्पताल, आदि। 

नगर महापालिका:  1 शिलांग (शिलांग छावनी,/उमरोई, मवलाई , मदनर्टिंग, नोंगथिम्माई, नोंगमइनसोंग, पिन्थोरुमख्रा सहित)नगरपालिकाएं: 3 तुरा, जोवाई, विलियमनगर।नगर बोर्ड: 9  रेसुबेलपाडा, बाघमारा, नोइंगस्टोइन, नोंगपोह, मैडानार्टिंग, नोंगथाइमाय, नोंगमिनसोंग, पिन्थोरुमख्रा, आदिकस्बा समितियां: 1 पिनुर्स्ला

मेघालय की मुख्य जनजातियां हैं खासी, गारो और जयन्तिया। प्रत्येक जनजाति की अपनी संस्कृति, अपनी परम्पराएं, पहनावा और अपनी भाषाएं हैं।

मेघालय के अधिकांश लोग और प्रधान जनजातियां मातृवंशीय प्रणाली का अनुसरण करते हैं, जहां विरासत और वंश महिलाओं के साथ चलता है। कनिष्ठतम पुत्री को ही सारी संपत्ति मिलती है और वही बुजुर्ग माता-पिता और किसी भी अविवाहित भाई बहन की देखभाल भी किया करती है। कुछ मामलों में, जहां परिवार में कोई बेटी नहीं है या अन्य कारणों से, माता-पिता किसी और बेटी को नामांकित कर सकते हैं जैसे कि अपनी पुत्रवधू को, और घर के उत्तराधिकार और अन्य सभी संपत्तियों का अधिकार उसे ही मिलता है।

खासी और जयन्तिया जनजाति के लोग पारम्परिक मातृवंशीय प्रणाली का पालन करते जिसमें खुन खटदुह (अर्थात कनिष्ठतम पुत्री) घर की सारी सम्पत्ति की अधिकारी एवं वृद्ध माता-पिता की देखभाल की उत्तरदायी होती है। हालांकि पुरुष वर्ग, विशेषकर मामा इस सम्पत्ति पर परोक्ष रूप से पकड बनाए रहते हैं, क्योंकि वे इस सम्पत्ति के फ़ेरबदल, क्रय-विक्रय आदि के सम्बन्ध में लिये जाने वाले महत्त्वपूर्ण निर्णयों में सम्मिलित होते हैं। परिवार में कोई पुत्री न होने की स्थिति में खासी और जयन्तिया (जिन्हें सिण्टेंग भी कहा जाता है) में आइया रैप आइङ्ग का रिवाज होता है, जिसमें परिवार किसी अन्य परिवार की कन्या को दत्तक बना कर अपना लेता है, और इस तरह वह का ट्राई आइङ्ग (परिवार की मुखिया) बन जाती है। इस अवसर पर पूरे समुदाय में धार्मिक अनुष्ठान होते हैं व उत्सव मनाया जाता है।

गारो वंश प्रणाली में, सबसे छोटी पुत्री को स्वतः रूप से परिवार की संपत्ति विरासत में मिलती है, यदि एक और पुत्री का नाम माता-पिता द्वारा नहीं निर्धारित किया जाता है। उसके बाद उसे  नोकना, अर्थात  घर के लिए नामित किया जाता है। यदि किसी परिवार में कोई बेटियां नहीं हैं, तो चुनी हुई पुत्रवधू (बोहारी) या एक दत्तक पुत्री (डरागता) को घर में रखते हैं और उसे ही गृह सम्पत्ति मिल जाती है।

मेघालय में विश्व की सबसे बड़ी जीवित मातृवंशीय संस्कृति प्रचलन में है।

तीनों प्रधान जनजातियाँ, खासी, गारो एवं जयन्तिया समुदायों के अपने अपने पारम्परिक राजनीतिक संस्थान हैं जो सैंकड़ों वर्षों से चलते चले आ रहे हैं। ये राजनीतिक संस्थान गांव स्तर, कबीले स्तर और राज्य स्तर जैसे विभिन्न स्तरों पर काफी विकसित और कार्यरत  हैं।.

खासियों की पारम्परिक राजनीतिक प्रणाली में प्रत्येक कुल या वंश की अपनी स्वयं की परिषद होती है जिसे दोरबार कुर कहते हैं और यह वंश के मुखिया की अध्यक्षता में संचालित होती है। यह परिषद या दोरबार वंश के आंतरिक मामलों की देखरेख करती है। इसी प्रकार प्रत्येक ग्राम की एक स्थानीय सभा होती है जिसे दोरबार श्वोंग कहते हैं, अर्थात ग्राम परिषद। इसका संचालन भी ग्राम मुखिया कीअध्यक्षता में होता है। अन्तर-ग्राम मुद्दों पर निकटवर्ती ग्राम के लोगों से गठित एक राजनीतिक इकाई निर्णय लेती है। स्थानीय राजनीतिक इकाइयाँ रेड्स कहलाती हैं और ये सर्वोच्च राजनीतिक संस्थान साइमशिप के अधीन कार्य करती हैं। ये साइमशिप बहुत सी रे्ड्स का संघ होती है और इनका साईम या सीईएम (राजा) के नाम से जाना जाने वाला एक निर्वाचित प्रमुख होता है। साइम ने एक निर्वाचित राज्य विधानसभा के माध्यम से खासी राज्य पर शासन करते हैं जिसे दरबार हिमा के नाम से जाना जाता है। सीईएम के पास उनके मंत्रियों से गठित एक मंत्रिमण्डल होता है जिनकी राय व सलाह से वह अपनी कार्यपालक का उत्तरदायित्त्व पूर्ण करता है। । इनके राज्य में कर एवं चुंगियां भी वसूली जाती हैं और करों को पिनसुक तथा टोल को क्रोंग कहा जाता था। क्रोंग राज्य का प्रधान आय स्रोत हुआ करती है। २०वीं शताब्दी के आरम्भ में राजा दखोर सिंह यहां का साइम हुआ करता था।

जयन्तिया लोगों में भी त्रिस्तरीय राजनीतिक प्रणाली होती है जो खासी लोगों के लगभग समान ही होती है और इसमें भी रेड्स और साइम हुआ करते हैं। रेड्स की अध्यक्षता डोलोइस करते हैं जो रेड्स स्तर पर कार्यपालक एवं रीति रिवाजों के साथ देख रेख किया करते हैं। प्रत्येक निर्वाचित स्तर की अपनी परिषद या दरबार हुआ करते हैं। 

गारो समूह  परम्परागत राजनीतिक प्रणाली में, गारो ग्रामों के एक समूह का एक राजा हुआ करता है जिसे ए-किंग कहते हैं। ए-किंग निक्माज़ के अधीन कार्य करता है। यह निक्मा गारों लोगों की एकमात्र राजनीतिक एवं प्रशासनिक प्राधिकारी होता है और यही सब न्यायिक और विधायी कार्य भी किया करता है। ये विभिन्न निक्माज़ विभिन्न ए-किंग्स के मुद्दों को सुलझाने हेतु मुल कर कार्य किया करते हैं। गारो लोगों के बीच कोई सुव्यवस्थित परिषद या दरबार नहीं हुआ करते हैं।

नृत्य खासी जीवन की संस्कृति का मुख्य रिवाज है, और राइट्स आफ़ पैसेज का एक भाग भी है। नृत्यों का आयोजन श्नोंग (ग्राम), रेड्स(ग्राम समूह) और हिमा(रेड्स का समूह) में किया जाता है। इनके उत्सवों में से कुछ हैं: का शाद सुक माइनसिएम, का पोम-ब्लांग नोंगक्रेम, का शाद शाङ्गवियांग, का-शाद काइनजो खास्केन, का बाम खाना श्नोंग,  उमसान नोंग खराई और शाद बेह सियर।

जयन्तिया हिल्स के लोगों के उत्सव अन्य जनजातियों की ही भांति उनके जीवन व संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। ये प्रकृति और अपने लोगों के बीच सन्तुलन एवं एकजुटता को मनाते हैं। जयन्तिया लोगों के उत्सवों में से कुछ हैं: बेहदियेनख्लाम, लाहो नृत्य एवं बुआई का त्योहार।

गारों लोगों के लिये उत्सव उनके सांस्कृतिक विरासत का भाग हैं। ये अपने धार्मिक अवसरों, प्रकृति और मौसम और साथ ही सामुदायिक घटनाएं जैसे झूम कृषि अवसरों को मनाते हैं। गारों समुदाय के प्रमुख त्योहारों में डेन बिल्सिया, वङ्गाला, रोंगचू गाला, माइ अमुआ, मङ्गोना, ग्रेण्डिक बा, जमाङ्ग सिआ, जा मेगापा, सा सट रा चाका, अजेयोर अहोएया, डोरे राटा नृत्य, चेम्बिल मेसारा, डो'क्रुसुआ, सराम चा'आ और ए से मेनिया या टाटा हैं जिन्हें ये बडी चाहत से मनाया करते हैं।

हैजोंग लोग अपने पारम्परिक त्योहारों के साथ साथ हिन्दू त्योहार भी मनाते हैं। गारो पर्वत की पूरी समतल भूमि में हैजोंग लोगों का निवास है, ये कृषक जनजाति हैं। इनके प्रमुख पारम्परिक उत्सवों में पुस्ने, बिस्वे, काटी गासा, बास्तु पुजे और चोर मगा आते हैं।

बियाट लोगों के कई प्रकार के त्योहार एवं उत्सव होते हैं; नल्डिंग कूट, पम्चार कूट, लेबाङ्ग कूट, फ़वाङ्ग कूट, आदि। हालांकि अपने भूतकाल की भांति अब ये नल्डिंग कूट के अलावा इनमें से कोई त्योहार अब नहीं मनाते हैं। नल्डिंग कूट (जीवन का नवीकरण) हर वर्ष जनवरी के माह में आता है और तब ये लोग गायन, नृत्य और पारम्परिक खेल आदि खेलते हैं। इनका पुजारी - थियांपु चुङ्ग पाठियान  नामक देवता की अर्चना कर के उससे इनकी खुशहाली एवं समृद्धि को इनके जीवन के हल पहलु में भर देने की प्रार्थना करता है।

दक्षिण मेघालय में मावसिनराम के निकट मावजिम्बुइन गुफाएं हैं। यहां गुफा की छत से टपकते हुए जल में मिले चूने के जमाव से प्राकृतिक बना हुआ एक शिवलिंग है। १३वीं शताब्दी से चली आ रही मान्यता अनुसार यह हाटकेश्वर नामक शिवलिंग जयन्तिया पर्वत की गुफा में रानी सिंगा के समय से चला आ रहा है। जयन्तिया जनजाति के दसियों हजारों सदस्य प्रत्येक वर्ष यहां हिन्दू त्योहार शिवरात्रि में भाग लेते हैं एवं जोर शोर से मनाते हैं।

मेघालय में जीवित जड पुलों का निर्माण भी मिलता है। यहां फ़ाइकस इलास्टिका (भारतीय रबर वृक्ष) की हवाई जडों को धीरे धीरे जोड कर सेतु तैयार किये जाते हैं। ऐसे सेतु मावसिनराम की घाटी के पूर्व में पूर्वी खासी हिल्स के क्षेत्र में एवं पूर्वी जयन्तिया हिल्स जिले में भी मिल जाते हैं। इनका निर्माण खासी एवं जयन्तिया जनजातियों द्वारा किया जाता रहा है ऐसे सेतु शिलांग पठार के दक्षिणी सीमा के साथ लगी पहाडी भूमि पर भी मिल जाते हैं। हालांकि ऐसी संस्कृतिक धरोहरों में से बहुत से सेतु अब ध्वंस हो चुके हैं, जो भूस्खलन या बाढ की भेंट चढ गये या उनका स्थान अधिक मजबूत आधुनिक स्टील सेतुओं ने ले लिया।

१९४७ में भारत के विभाजन से पूर्वोत्तर की मूल अवसंरचना को काफ़ी धक्का पहुंचा जिसका एक कारण यह भी था कि इस क्षेत्र का मात्र २% भाग ही देश के शेष हिस्से से लगता था। भूमि का एक बहुत ही संकरा सा भाग पूर्वोत्तर को मुख्यभूमि में सिलिगुड़ी गलियारे के द्वारा पश्चिम बंगाल से जुड़ा हुआ है। मेघालय भूमि से घिरा राज्य है जहां दूर दूर तक छोटी बडी बस्तियां व आबादी बसी हुई है। अतः यहां परिवहन का एकमात्र साधन सडक ही है। हालांकि राजधानी शिलांग सडकों द्वारा भली भांति जुडी हुई है, अधिकांश अन्य भाग इस मामले में पीछे ही हैं। राज्य की सडकों का एक बड़ा भाग अभी भी कच्चा ही है। मेघालय में अधिकांश आवाजाही निकटवर्ती राज्य असम की राजधानी गुवाहाटी से ही होती है जो शिलांग से १०३ किमी पर स्थित है। गुवाहाटी समूचे देश से नियमित रेल और वायु सेवा द्वारा भली प्रकार से जुडा हुआ है।जब मेघालय को १९७२ में असम से काट कर एक स्वायत्त राज्य के रूप में अलग किया गया था, तब इसे १७४ किमी के राष्ट्रीय राजमार्ग सहित २७८६.६८ किमी की कुल सडकें विरासत में मिली थीं। तब राज्य का सडक घनत्व १२.४२ वर्ग किमी प्रति १०० वर्ग किमी राज्य क्षेत्रफ़ल था। २००४ तक के आंकड़ों के अनुसार कुल सडक लम्बाई ९३५० किमी तक पहुंच गयी थी, जिसमें ५,८५७ किमी पक्की व पेव्ड भी थी। मार्च २०११ तक के आंकडों के अनुसार सडक घनत्व ४१.६९ वर्ग किमी पहुंच चुका था, हालांकि इस मामले में मेघालय राष्ट्रीय औसत ७४ किमी प्रति १०० वर्ग किमी से नीचे ही रहा। राज्य के लोगों को बेहतर सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मेघालय लोक सेवा आयोग (मेघालय पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेण्ट) वर्तमान सडकों एवं सेतुओं के सुधार और उन्नयन हेतु निरन्तर प्रयासरत है एवं अनेक कदम उठा रहा है।

मेघालय में सडक जाल की कुल लम्बाई  किमी है, जिसमें से  किमी तारकोल की सडक है एवं शेष  किमी सडक रोड़ी की है। मेघालय राज्य असम में सिल्चर, मिजोरम में आईजोल और त्रिपुरा में अगरतला से राष्ट्रीय राजमार्गों से भली-भांति जुड़ा हुआ है। बहुत सी निजी बसें एवं टैसी संचालक गुवाहाटी से शिलांग यात्रियों को लाते ले जाते हैं। यह मार्ग लगभग ढाई घंटे का है। शिलांग से मेघालय के सभी प्रधान नगरों, पूर्वोत्तर की अन्य राजधानियों एवं असम के नगरों के लिये दिवस एवं रात्रि बस सेवाएं उपलब्ध हैं।

मेघालय में रेलमार्ग का एकमात्र मार्ग  तक है जहां से गुवाहाटी तक नियमित रेल सेवा चलती है। यह सेवा ३० नवंबर २०१४ को आरम्भ हुई थी। राज्य में एक औपचारिक पर्वतीय रेल चेरा कम्पनीगंज स्टेट रेलवे पहले चला करती थी। शिलांग से  पर  निकटतम रेलवे स्टेशन है जो पूर्वोत्तर क्षेत्र को ब्रॉडगेज लाइन द्वारा देश के शेष भाग से जोड़ा करता है। गुवाहाटी से रेलवे लाइन को बायर्नीहाट () तक जोड़ने का प्रस्ताव विचाराधीन है जो आगे शिलांग तक विस्तृत की जायेगी।

राज्य की राजधानी शिलांग का विमानक्षेत्र उमरोई में स्थित है। यह शिलांग मुख्य शहर से  पर गुवाहाटी-शिलांग राजमार्ग पर स्थित है। इसका नया टर्मिनल भवन  की लागत से बना है जिसका उद्घाटन जून २०११ में हुआ था। एअर इंडिया क्षेत्रीय अपनी उड़ान शिलांग विमानक्श्झेत्र से कोलकता तक प्रतिदिन भरता है। एक  हैलीकॉप्टर सेवा भी शिलांग से गुवाहाटी और तुरा के लिये चलती है। तुरा के निकट बाल्जेक विमानक्षेत्र २००८ में प्रचालन में आया था। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण इसकी देख रेख कर रहा है। प्राधिकरण विमानक्षेत्र को एटीआर ४२ एवं एटीआर ७२ सीटर के लिये विकसित कर रहा है। असम में अन्य निकटवर्ती विमानक्षेत्रों में बोरझार, गुवाहाटी विमानक्षेत्र(IATA: GAU) शिलांग से लगभग  पर स्थित है।

बहुत पहले विदेशी पर्यटकों को उन क्षेत्रों में प्रवेश पूर्व अनुमति लेनी होती थी, जिनसे मिल कर अब मेघालय बना है। हालांकि प्रतिबन्ध १९५५ में हटा लिए गए थे। राज्य के पर्वतों, पठारी ऊंची-नीची भूमि, कोहरे व धूंध से भरे इलाकों और नैसर्गिक दृश्यों आदि को देखते हुए मेघालय की तुलना स्कॉटलैण्ड से की जाती रही है और इसे पूर्व का स्कॉटलैण्ड (स्कॉटलैण्ड ऑफ़ द ईस्ट) भी कहा गया है। राज्य में देश के सबसे घने प्राथमिक वन उपस्थित हैं और इस कारण से यह भारत के सबसे महत्त्वपूर्भ पारिस्थित्तिक क्षेत्रों में से एक गिना जाता रहा है। मेघालयी उपोष्णकटिबंधीय वनों में पादप एवं जीव जगत की वृहत किस्में पायी जाती है। राज्य में २ राष्ट्रीय उद्यान एवं ३ वन्य जीवन अभयारण्य हैं।मेघालय बहुत से साहसिक पर्यटन जैसे पर्वतारोहण, रॉक क्लाइम्बिंग, ट्रेकिंग, हाइकिंग, गुफा भ्रमण एवं जल-क्रीड़ा के अवसर भी प्रदान करता है। राज्य में कई ट्रेकिंग मार्ग भी उपलब्ध हैं जिनमें से कुछ में तो दुर्लभ जानवरों से भी सामना संभव होता है। उमियम झील में जल क्रीड़ा (वॉटर स्पोर्ट्स) परिसर हैं, जहां रो-बोट्स, पैडलबोट्स, सेलिंग नौकाएं, क्रूज-बोट, वॉटर स्कूटर और स्पीडबोट जैसी सुविधाएं हैं भी मिलती हैं। चेरापुंजी पूर्वोत्तर भारत के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल में से एक है। यह राजधानी शिलांग से दक्षिण दिशा में स्थित है तथा एक मनोहारी प्राकृतिक अवलोकन वाले सड़क मार्ग द्वारा यह राजधानी शिलांग से जुड़ा हुआ है। चेरापुंजी के निकटस्थ ही जीवित जड़ सेतु पर्यटकों के लिये आकर्षण हैं। प्रसिद्ध दोहरा जड़ीय सेतु अन्य बहुत से इस प्रकार के सेतुओं सहित पर्यटकों को स्तंभित कर देने वाला आकर्षण है। इस प्रकार के बहुत से सेतु नोंगथिम्मई, माइन्टेंग एवं टाइनरोंग में मिल जाते हैं। जड़ सेतु मिलने वाले अन्य स्थानों में मावैलनोंग के पर्यटन ग्राम के निकट रिवाई ग्राम, पायनर्सिया और विशेषकर पश्चिम जयन्तिया हिल्स जिले के  रांगथाइल्लाइंग एवं मावकिरनॉट गाँव हैं, जहाँ निकटवर्ती गांवों में बहुत से जड़ सेतु देखने को मिल जाते हैं।जलप्रपात एवं नदियाँराज्य के प्रमुख एवं  में एलिफ़ैण्ट फ़ॉल्स, शाडथम प्रपात, वेइनिया प्रपात, बिशप प्रपात, नोहकालिकाई प्रपात, लांगशियांग प्रपात एवं स्वीट प्रपात, क्रिनोलाइन जलप्रपात, काइनरेम जलप्रपात, नोहस्गिथियांग जलप्रपात, बीदों जलप्रपात, मार्गरेट जलप्रपात और स्प्रैड इगल जलप्रपात कुछ हैं। इनके अलावा यहाँ विशेषकर मॉनसून के काल में ढेरों झरने मिलते हैं। मावसिनराम के निकट स्थित जकरेम के गर्म जल के झरने में औषधीय एवं चिकित्सकीय गुण पाये जाने की मान्यता है।पश्चिम खासी हिल्स जिले में स्थित नोंगखनम द्वीप मेघालय का सबसे बड़ा एवं एशिया का दूसरा सबसे बड़ा नदी द्वीप है। यह नोंगस्टोइन से १४ किमी॰ दूर स्थित है। यह द्वीप किन्शी नदी के फान्लियान्ग और नाम्लियान्ग नदियों में विभाजित हो जाने से बना है। रेतीली तटरेखा वाली फान्लियान्ग नदी बहुत ही सुन्दर झील बनाती है। इसके आगे आगे जाते हुए फान्लियान्ग नदी एक गहरी घाटी में गिरने से पूर्व एक ६० मी॰ ऊँचे  जलप्रपात से गिरती है। यह प्रपात शादथम फ़ॉल्स नाम से प्रसिद्ध है।

मेघालय अपने पवित्र वृक्षों के लिये भी प्रसिद्ध है। ये वन, उद्यान या प्राकृतिक सम्पदा का छोटा या बड़ा भाग होते हैं, जिन्हें स्थानीय लोग कई पीढियों से किसी स्थानीय देवता को समर्पित कर उसके प्रतीक के रूप में पूजते रहे हैं। ये प्राचीन काल से मान्यता रही है और इनके अनुसार इन वृक्षों में पवित्र आत्मा का निवास होता है। ऐसे स्थान भारत पर्यन्त मिल जाएंगे और इनका अनुरक्षण एवं देखभाल स्थानीय लोग करते हैं, तथा इनकी पत्तियों व अन्य भागों को या इनमें निवास करने वाले जीव जन्तुओं को किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचाना या तोड़ना निषेध होता है। मावफ्लांग सैकरेड फ़ॉरेस्ट (मावफलांग पवित्र वन) जिसे लॉ लिंगडोह भी कहा जाता है, मेघालय के सैकरेड फ़ॉरेस्ट्स में से एक है। यह शिलाँग से लगभग २५ कि॰मी॰ पर मावफलांग में स्थित है। यह एक नैसर्गिक दश्य वाला पवित्र स्थान है जहां पवित्र रुद्राक्ष भी मिल जाते हैं।

मेघालय का ग्रामीण जीवन एवं ग्राम पूर्वोत्तर की पर्वतीय जीवनशैली का दर्शन कराते हैं। ऐसा एक गांव भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित है, जिसे मावलिन्नॉंग कहते हैं। इसके बारे में पत्रिका डिस्कवर इण्डिया में विस्तृत लेख निकला था। यह गांव पर्यटन के लिये जाना जाता है और यहां एक जीवित जड़ सेतु, हाइकिंग ट्रेल और चट्टान संरचनाएं हैं।

मेघालय में बहुत से प्राकृतिक एवं कृत्रिम झीलें व सरोवर हैं। गुवाहाटी-शिलाँग राजमार्ग पर स्थित उमियम झील (जिसे बड़ापानी झील भी कहते हैं: उम=बड़ा+यम =पानी) यहां आने वाले पर्यटकों के लिये एक बड़ा आकर्षण है। मेघालय में बहुत से उद्यान भी हैं, थांगखरान्ग पार्क, ईको पार्क, बॉटैनिकल गार्डन एवं लेडी हैदरी पार्क इनमें से कुछ हैं। शिलांग से ९६ कि॰मी॰ दूर स्थित डॉकी बांग्लादेश का द्वार है। यहां से मेघालय और बांग्लादेश सीमा के कुछ सर्वोच्च पर्वतों के नैसर्गिक दृश्य दिखाई देते हैं।     

बलफकरम राष्ट्रीय उद्यान अपने प्राचीन आवास और दृश्यों के साथ यहां का एक प्रमुख आकर्षण है। गारो पर्वत पर स्थित नोकरेक राष्ट्रीय उद्यान में भरपूर वन्य जीवन मिलता है जिसकाअपना ही आनन्द है।

मेघालय में अनुमानित ५०० प्राकृतिक चूनापत्थर एवं बलुआपत्थर की गुफाएं हैं, जो राज्य भर में फ़ैली हुई हैं। इनमें से उपमहाद्वीप की अधिकांश सबसे लम्बी और सबसे गहरी गुफाएं हैं। इनमें क्रेम लियाट प्रा सबसे लम्बी और सायन्रियांग पामियंग सबसे गहरी गुफा है। ये दोनों ही जयन्तिया पर्वत में स्थित है। बहुत से देशों जैसे यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, आयरलैंड एवं संयुक्त राज्य से ढेरों गुफा प्रेमी यहां दशकों से आते रहते हैं और इन गुफाओं में अन्वेषण करते रहते हैं। 

मेघालय अपने जीवित जड़ सेतुओं के लिये भी प्रसिद्ध है। ये एक प्रकार के निलंबन सेतु होते हैं जिनका निर्माण रबड़ के पेड़ की जड़ों एवं मूलों को आपस में गूंथ कर आमने सामने के नदी तटों के आरपार किया जाता है। ऐसे सेतु चेरापुंजी, नोंगतलांग, कुडेंग रिम एवं कुडेंग थिम्माई गांवों में देखने को मिल जाते हैं। इस प्रकार का एक दोहरा सेतु नोंग्रियाट ग्राम में मिलता है।मेघालय में अन्य पर्यटक आकर्षण इस प्रकार से हैं:

राज्य के प्रमुख मुद्दों में बांग्लादेश से अवैध प्रवासियों का प्रवेश, हिंसा की घटनाएं, राजनीतिक अस्थिरता, खेतों के लिये काट कर जलाने की प्रथा के चलते वनों की अवैध कटाई आते हैं। स्थानीय निवासी खासियों और बांग्लादेशी मुसलमानों के बीच झड़पों एवं हिंसा की अनेक वारदातें होती रहती हैं।

बांग्लादेश की सीमा से लगते हुए राज्यों में अवैध अप्रवासन एक प्रमुख मुद्दा बन गया है - पश्चिम में पश्चिम बंगाल, उत्तर में मेघालय और असम, पूर्व में त्रिपुरा, मणिपुर एवं मिज़ोरम। भारतीय अर्थ-व्यवस्था के उन्नत होने के कारण लाखों बांग्लादेशी यहां घुसपैठ करते रहे हैं।इन बांग्लादेशी प्रवासियों का यहां घुसपैठ करने का मुख्य उद्देश्य वहां की हिंसा, गरीबी, बेरोजगारी और साथ ही इस्लामिक बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे धार्मिक अत्याचार से बचाव ही होता है। मेघालय में दर्जनों राजनीतिक एवं नागरिक स्मूहों व दलों की लम्बे समय से यह मांग रही है कि इस घुसपैठ पर रोक लगायी जाए या कम से कम इसे नियन्त्रित स्तर तक ही अनुमत किया जाए अन्यथा इससे इन राज्यों की अर्थ एवं कानून व्यवस्था पर बुरा प्रभाव व अवांछित भार पड़ता है। बांग्लादेश और मेघालय की सीमा लगभग ४४० किलोमीटर लम्बी है जिसमें से ३५० कि॰मी॰ पर बाड़ लगी हुई है, किन्तु सीमा की लगातार अन्वरत गश्त संभव नहीं है अतः इसमें घुसपैठ की संभावनाएं हैं। इसे पूर्णतया बाड़ लगाने एवं प्रवेश को अनुमति या अनुज्ञा पत्र द्वारा नियन्त्रित करने के प्रयास जारी हैं।

तत्कालीन मुख्य मंत्री मुकुल संगमा ने अगस्त २०१२ में केन्द्र सरकार को पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में हो रही अवैध घुसपैठ को नियन्त्रण से बाहर होने से पूर्व पर्याप्त प्रयास करने की मांग की थी।

वर्ष २००६ से २०१३ के अन्तराल में शून्य से २८ नागरिक प्रतिवर्ष मेघालय( या शून्य से १ व्यक्ति प्रति १ लाख व्यक्ति) में मारे गये थे, जिन्हें राज्य के प्राधिकारियों द्वारा आतंक-संबंधी साभिप्राय हिंसा ्में वर्गीकृत किया गया है। विश्व की साभिप्राय हिंसा के कारण होने वाली मत्यु की औसत वार्षिक दर हाल के वर्षों में ७.९ प्रति १ लाख व्यक्ति रही है। आतंक-संबन्धी हत्याएं प्रायः जनजातीय समूहों में और बांग्लादेशी प्रवासियों का विरोध करते हुए होती रही हैं। राजनीतिक संकल्प और वार्ता के साथ-साथ, विभिन्न ईसाई संगठनों ने भी हिंसा को रोकने और समूहों के बीच चर्चा की प्रक्रिया में सहायक होने के लिए पहल की है।

राज्य की स्थापना के बाद से यहां २३ सरकारें बन चुकी हैं, जिनका औसत कार्यकाल १८ माह से कम ही है। मात्र ३ सरकारें ३ वर्ष से अधिक चली हैं। इस राजनीतिक अस्थिरता का दुष्प्रभाव राज्य की अर्थ-व्यवस्था पर पड़ता रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में राजनीतिक स्थिरता में वृद्धि दिखाई दे रही है और आशा है कि ये राज्य के लिये लाभदायक होगी। २००८ में चुनी गयी सरकार के ५ वर्ष पूरे होने पर अन्तिम विधान सभा २०१३ में चुनी गयी थी जिसका कार्यकाल प्रगति पर है।

मेघालय में झूम कृषि अर्थात वृक्ष काटो एवं जलाओ और कृषि भूमि पाओ -- का अभ्यास पुरातन समय से चलता आ रहा है। यह यहां की लोककथाओं के द्वारा सांस्कृतिक रूप से स्थानीय लोगों की कृषि शैली में बस चुका है। इस लोककथा के अनुसार वायु के देवता ने ओलावृष्टि एवं तूफ़ान के देवता के साथ मिलकर आकाशीय वृक्ष (देवताओं के वृक्ष) को झकझोड़कर हिला दिया जिससे उसके बहुत से बीज पृथ्वी पर आ गिरे और एक दो’ अमिक नामक पक्षी ने उन्हें खेतों में बो दिया। ये असल में धान के बीज थे। ईश्वर ने इस तरह से मानव को धान के बीज देकर इन्हें झूम कृषि के निर्देश दिये, साथ ही ये भी कहा कि प्रत्येक फसल पर अपनी उपज का एक भाग मुझे समर्पित किया करोगे। मेघालय के गारो पर्वतों की एक अनु लोककथा के अनुसार बोने-निरेपा-जाने-नितेपा  नामक व्यक्ति ने मिसि-कोकडोक नामक एक शिला के निकट की भूमि को साफ़ करके वहां धान और बाजरे की खेती की और अच्छी उपज पायी। तब उसने यह तकनीक अन्य लोगों को भि बतायी, और वर्ष के प्रत्येक माह का नाम इस कृषि के एक चरण के नाम पर रख दिया, इससे स्थानीय लोगों को इसके नाम का अभ्यास सरल रूप से सुलभ हो जाये।आधुनिक काल में यह स्थानांतरण वाली कृषि परम्परा मेघालय की जैवविविधता के लिये बड़ा खतरा बन गयी है। २००१ के एक उपग्रह चित्र के चित्र से ज्ञात होता है कि ये स्थानांतरण कृषि जारी है और सघन वनों के क्षेत्र, संरक्षित जीवमंडलों से भी इसके कारण छंटते जा रहे हैं।  झूम कृषि न केवल प्राकृतिक जैवविविधता के लिये खतरा है, बल्कि ये कृषि का न्यून-उपज वाला हानिकारक तरीका है। मेघालय में अधिकांश जनसंख्या के कृषि पर आधारित होने के आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए ये माना जा रहा है कि ये यहां के लिये एक महत्त्वपूर्ण मुद्दा है। स्थानांतरण कृषि केवल भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में ही नहीं की जाती, वरन दक्षिण-पूर्व एशिया में भर में इसका चलन है।

राज्य में कुछ प्रमुख मीडिया पत्र इस प्रकार से हैं:

पिछले कई वर्षों में राज्य में बहुत से सामयिक, साप्ताहिक और दैनिक पत्र आरम्भ हुए हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार से हैं:

राज्य में प्रकाशित साप्ताहिक रोजगार समाचार पत्र:




#Article 135: मेघालय कय जिले (198 words)


मेघालय राज्य के तीन मंडलों में कुल ११ जिले हैं।

२१ जनवरी १९७२ को मेघालय राज्य का गठन असम राज्य के २ जिलों, जयंतिया हिल्स और संगठित गारो तथा खासी हिल्स से हुआ। नया राज्य बनने पर गारो हिल्स तथा खासी हिल्स को अलग जिलों का दर्जा दिया गया। इस प्रकार राज्य में तीन जिले थे; जयंतिया, गारो तथा खासी।

२२ अक्टूबर १९७६ को गारो हिल्स जिले का विभाजन कर पूर्वी गारो हिल्स जिला और पश्चिमी खासी हिल्स जिले का, और इसके ६ दिन बाद २८ अक्टूबर १९७६ को खासी हिल्स जिले का विभाजन कर पूर्वी खासी हिल्स जिला और पश्चिमी खासी हिल्स जिले का गठन किया गया।

४ जून १९९२ को का पुन: विभाजन कर पश्चिम गारो हिल्स जिले से दक्षिण गारो हिल्स जिले का, और खासी हिल्स जिले में से री-भोई जिले का निर्माण किया गया। २०१२ में पूर्व गारो हिल्स जिले से उत्तर गारो हिल्स जिले का, पश्चिम खासी हिल्स से दक्षिण पश्चिम खासी हिल्स जिले का, और पश्चिम गारो हिल्स जिले से दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स जिले का गठन हुआ, और साथ ही जयंतिया हिल्स के विभाजन के बाद २ नए जिले अस्तित्व में आये, पश्चिम जयंतिया हिल्स जिला और पूर्व जयंतिया हिल्स जिला।




#Article 136: यमुनानगर जिला (187 words)


यमुनानगर ज़िला भारत के हरियाणा राज्य का एक ज़िला है। ज़िले का मुख्यालय यमुनानगर है। यह हरियाणा राज्य का प्रमुख नगर है। यहाँ सरस्वती शुगर मिल ( एशिया की सबसे बड़ी) पेपर मिल, लक्कड मार्केट, पावर प्लांट आदि है। यहाँ पर कलेसर राष्ट्रीय उद्यान भी है। इसके अलावा कलेसर वन्यजीव अभ्यारण और चौधरी देवीलाल हर्बल नेचर पार्क भी है। शिवालिक की पर्वतमालाएँ इस क्षेत्र के उत्तरी भाग मे विस्तृत है। इन पहाडियों मे वेदिक कालीन मंदिरों के अवशेष एवं बौद्ध धर्म के मंदिरों के अवशेष भी मिले हैं। जिले मे कपालमोचन का मेला मुख्य आकर्षण का केंद्र है इसके अलावा शिवालिक पर्वत की गोद मे स्थित आदिबद्री, आदिकेदार, सरस्वती उद्गम स्थल और लगभग २००० फीट की पहाडी की चोटी पर विराजमान मंत्रा देवी का मंदिर पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। हथनिकुंड बैराज भी इसी जिले मे है। इस जिले मे पंचतीर्थी मेला हरनौल,लाला वाले पीर खिजरी, चिट्टा मंदिर, लक्कडहारा मंदिर, गौ-बच्चा मंदिर,पंचमुखी हनुमान, सरस्वती धाम मुस्तफाबाद, शीतला माता जागधौली आदि धार्मिक स्थान भी है। यहाँ की प्रमुख नदी यमुना है। इसके अलावा सोम नदी, सरस्वती नदी,राक्षी,पथराला नदी और बोली नदी आदि बरसाती नदियाँ भी बहती है।




#Article 137: यूनान (697 words)


यूनान () यूरोप कय एक्ठु  देस होय । एकर राजधानी एथेंस होय्। अंग्रेजी अव दुसर पच्छु कै भाषा मा एका ग्रीक कहि जात है। हिँया पे रहै वाले मनइ अपने देस कय “एल्लास” कहत हैं।इ भूमध्य समुन्दर कय उत्तर पूरुब मा एक्ठु द्वीपन् कय समूह होय। प्राचीन यूनानी मनइ इ द्वीप से अउर कयु जगहि गँय वे लोग आजो अल्पसंख्यक कय रूप मा मौज़ूद है, जइसय - तुर्की, मिस्र, पच्छु यूरोप अउर कुल।

स्थिति: 35° से 41° 30' उ.अ. तथा 19° 30' से 27° पू.दे.; क्षेत्रफल- 51,182 वर्ग मील, जनसंख्या 85,55,000 (1958, अनुमानित) बालकन प्रायद्वीप कय दक्खिनी भाग मा बालकन राज्य कय एक्ठु देश होय जवने कय उत्तर मा अल्बानिया, यूगोस्लाविया औ बलगेरिया, पूरुब मा तुर्की, दक्खिन-पच्छु, दक्खिन औ दक्खिन-पूरुब मा आयोनियन समुन्दर, भूमध्यसमुन्दर औ ईजियन सगर हैं। यूनान कय हेलाज़ (Hellas) कय राज्य कहत हैं।

ग्रीस कय सबसे नीक भौगोलिक विशेषता ओकर पहाड़ से सजा भाग,बहुत गहिर कटा फटा तटरेखा औ ढेर कुल द्वीप होय। पहाड़श्रेणि एकरे 3/4 क्षेत्र मा फैला है। पच्छु भाग मा पिंडस पहाड़ समुद्र औ तटरेखा कय साथे साथे लगातार फैला है। एकरे उल्टा, पूरुब मा पहाड़श्रेणिन् औ समुन्द्र एक्कय साथे कोण बनाइकै चलत हँय। इ मेर कय छिन्न भिन्न तटरेखा यूरोप मा एक बहुत सुन्नर झालरदार (Fringed) द्वीप बनावत हय। सबसे बड़ा बंदरगाह इही झालरदार द्वीप पय मौजूद है औ ईजियन समुन्दर लगभग 2,000 द्वीपन् से भरा है। इ एशिया औ यूरोप कय बीच मा सीढ़ी कय पाथर कय काम करत है। देश कय कवनो भी भाग समुन्दर 80 मील से ढेर दूर नाइ है। इ देश मा ्थ्रोस, मैसेडोनिया औ थेसाली नाँव कै तीन बड़ा मैदान हैं।

ग्रीस कय हवापानी एकरे फइलाव कय मेर से बहुत असाधारण रूप से अलग है। एकर प्रधान कारण ऊँचाई मा अलगपन, देश कय लम्मा बनावट औ बालकन औ भूमध्यसमुन्दरीय हवा कय मौजुदगी है। समुन्द्रतटीय भागन् मा भूमध्यसमुन्दरी हवापानी मिलत है जवने कय खासियत लम्मा, उमस औ सूखा गर्मि औ बरखा से भर ठंढ जाड़ा कय मउसम होय, थेसाली, मैसेडोनिया औ थ्रोस कय मैदानन् कय हवापानी बरख़ा, जाडा कय मउसम ठंढ औ गर्मि मा बहुतै उमस होत है। अल्पाइन पहाड़े पय तीसरा मेर कय हवापानी मिलत है ।

यन्हन मा खास कइकै आयोनियन, ईजियन, यूबोआ, साईक्लेड्स औ क्रीट द्वीप मुख्य होँय। क्रीट सबसे बड़ा द्वीप होय, जेकर लंबाई 160 मील औ चौड़ाई 35 मील हय। सन्‌ 1951 मा यकर जनसंख्या 4,61,300 रहा औ यहमे दुई परमुख नगर, कैंडिया औ कैनिया, बसा हैं।

आयोनियन द्वीप बहुतै घना बसा हय। कुल द्वीपन में कुछ शराब, जैतून कय तेल, अंगूर, चकोतरा औ तरकारि पैदा होत हैं। हिँया कय ढेर निवासी मछुवारा, नाय चलावै वाले या स्पंज गोताखोर कय रूप मा जीवन चलावत हँय।

कोयला, बिजली, तथा पूँजी की कमी के कारण ग्रीस के उद्योगों का विकास बहुत ही मंद रहा। निर्माण उद्योगों में, जो कृषि पदार्थों पर ही आधारित है, केवल 8% जनसंख्या लगी हुई है। इन उद्योगों में वस्त्र, रसायनक और भोज्य पदार्थ मुख्य हैं। अन्य निर्मित माल में जैतून के तेल, शराब, कालीन, आटा, सिगरेट, उर्वरक और भवननिर्माण सामग्री हैं। औद्योगिक विकास एथेन्स तथा सोलोनिका के आसपास है। ईधेसा सूती वस्त्र निर्माण का प्रमुख केंद्र है।

हिँया से निर्यात कइ जाये वाली परमुख कृषि चिज सुर्ती, मुनक्का, जैतून, जैतून कय तेल, अंगूर औ सराब होय। मुनक्का कय निर्यात 1937 ई. कय 15% से बढ़िकै 1951 ई. में 32% होइ गवा। ग्रीस कय परमुख ग्राहक पच्छु जर्मनी, संयुक्त राज्य अमरीका, ब्रिटेन, आस्ट्रिया, इटली, फ्रांस औ मिस्त्र होंय। आयात कय चिजन मा तइयार माल, खाय वाले चिज औ कच्चे माल हैं, जवने कय इस्तमाल संयुक्त राज्य अमरीका, ब्रिटेन, पच्छु जर्मनी, इटली, बेल्जियम औ लक्सेमबर्ग करत है।

यातायात कय साधन पानी जहाज, रेल औ सड़क हँय। हिँया 1956 में (100 टन औ ऊप्पर कय) 347 व्यापारिक जहाज रहें जेकर क्षमता 13,07,336 टन रहा। 1955 ई. में रेल राहिन कय लंबाई 1678 मील औ 1953 ई. में कुल सड़कन कय लंबाई 14,221 मील रहा। दुसरा विश्वयुद्ध समय मा ग्रीस कय यातायात व्यवस्था कय बहुतै हानि उठावैक परा लेकिन संयुक्त राज्य कय सहायता से सन्‌ 1950 तक यका पुरा नीक बनाइ गै।

हिँया सात साल से लइकै 14 साल तक सुरुवाती पढाई करहिक़ है। सन्‌ 1954 में सुरुवाती पाठसाला 9,368, उँच माध्यमिक विद्यालय 425, औ दुई विश्वविद्यालय-एथेन्स औ सालोनिका में रहा। यकरे बादे एथेन्स मा कयु प्राविधिक औ विदेसी विद्यालय रहें।




#Article 138: यूरोप (258 words)


यूरोप या योरप (अंग्रेजी:Europe) परंपरागत रूप से सातठु  माना जाए वाला महाद्वीप में से एकठु महाद्वीप होय । ई यूरेशिया भूभाग कय  पच्छु ओर हय । एशिया अव  एकरे बीचे मे पारंपरिक सीमा यूराल पर्वत कय  मानि जाला। यूरेशिया भूभाग कय  प्रायद्वीप कय रूप मे होएक कारण एका प्रायद्वीपीय महाद्वीप भी कहा जाला। एकरे उत्तर में आर्कटिक महासागर, पच्छु ओर अटलांटिक महासागर अव  दक्खिन ओर भूमध्यसागर अहै।

यूरोप क्षेत्रफल कय हिसाब से बाकी महाद्वीपन में खाली आस्ट्रेलिया महाद्वीप से बड़ा है। एकर क्षेत्रफल करीब 10,180,000 वर्ग किमी (3,930,000 वर्ग मील) है जवन पूरा पृथ्वी कय सतह कय  2% अव पृथ्वी कय जमीन वाला हिस्सा कय 6.8% होय। यूरप में करीब 50 ठु देस हँय जवने में रूस सबसे बड़ा है। यूरोप कय  अउर मुख्य देशन में यूनाइटेड किंगडम, फ़्रांस, जर्मनी, इटली इत्यादि है। रूस कय विस्तार यूरोप अव एशिया दुनो महाद्वीप में है लेकिन सांस्कृतिक रूप से एका यूरोप कय हिस्सा मानि जाला।

पश्चिमी संस्कृति कय पैदाइश यूरोपे में भए जवन  यूनान अव  रोम कय प्राचीन सभ्यता, यूरोप में पुनर्जागरण अव औद्योगिक क्रांति कय परिणाम होय। एही क्रम में यूरोप कय कई ठउर देश दूसर अफ्रीकी अव  एशियाई देशन पे उपनिवेश स्थापित करिन् अव  एकरे तरे यूरोप कय संस्कृति पुरा दुनिया में फइलि गय।

यूरोप कय ज्यादातर देश विकसित देस कय श्रेणी में आवालँय । यूरोपियन यूनियन हियाँ कई देसन कय आर्थिक संघ होय। यूरोपियन युनियन कय सदस्य देसन कय मुद्रा यूरो होय।

यूरोप एशिया कय पच्छु ओर हय अव  उत्तरी अटलांटिक महासागर में एक प्रायद्वीप कय नियरे अहै।
पांच सबसे बड़ा यूरोपीय संघ कय देसन कय राजधानि:




#Article 139: योगी आदित्यनाथ (326 words)


योगी आदित्यनाथ (जनम 5 जून 1972) गोरखपुर क्य परसिद्ध गोरखनाथ मंदिर के महन्त अहेन। वर्मान में गोरखपुर से सांसद बाटेन अव अबहिन कय उत्तर प्रदेश कय मुख्यमन्त्री होँय। यन 19 मार्च 2017 कय प्रदेश कय विधान सभा चुनावन में भारतीय जनता पार्टी कय बड़ा जीत कय बाद यँह कय 21वां मुख्यमन्त्री पद कय शपथ लीहिन। वन 1998 से 2017 तक भारतीय जनता पार्टी कय टिकट पय गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र कय अगुवाई किहिन औ 2014 लोकसभा चुनाव में यन सांसद चुनि गा रहें । आदित्यनाथ गोरखनाथ मन्दिर कय पहिले कय महन्त अवैद्यनाथ कय उत्तराधिकारी होंय। यन हिन्दू जवानन कय सामाजिक, सांस्कृतिक औ राष्ट्रवादी समूहन हिन्दू युवा वाहिनी कय बनायें रहें, औ यनकय छवि एक्ठु प्रखर राष्ट्ररवादी नेता कय हय।

यन 1977 में टिहरी कय गजा कय स्कूल में पढ़ाई शुरू कीहिन अव 1987 में यहँ से दस कय परीच्छा पास कीहिन। सन् 1989 में ऋषिकेश कय श्री भरत मन्दिर इण्टर कॉलेज से यन इंटरमीडिएट कय परीच्छा पास कीहिन। 1990 में ग्रेजुएशन कय पढ़ाई करत कै अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मे सामिल भँय। 1992 में श्रीनगर कय हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से यन गणित में बीएससी कय परीच्छा पास कीहिन। कोटद्वार में रहत कय यनकय कमरा से समान चोरी होइ गा रहा जवने में यनकय सनत प्रमाण पत्र रहा। इहिकै नाते से गोरखपुर से विज्ञान स्नातकोत्तर करैक यनकय प्रयास असफल रहि गै । यकरे बाद यन ऋषिकेश में फिरसे विज्ञान स्नातकोत्तर में भर्ना लिहिन लेकिन राम मंदिर आंदोलन कय प्रभाव औ भर्ना होएक परेसानी से वनकय ध्यान दुसरे ओर चला गै। 1993 में गणित में एमएससी कय पढ़ाई कय समय मे गुरु गोरखनाथ परय शोध करेक यन गोरखपुर आँए औ गोरखपुर मे रहत कै यन महंत अवैद्यनाथ से मिला रहें जे यनकय किनरवै कय गांव मे रहत रहें औ परिवार कय पुरान जानपहिचान रहें। अंत मे यन महंत कय शरण में चला गए औ दीक्षा लइ लीहिन। 1994 में यन पूरा संन्यासी बनि गए, जवने कय बाद यनकय नाँव अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ होइ गै।




#Article 140: रफ़ीक सादानी (203 words)


अवधी कय बात होय अउर एक नाम न आवे ऐसन नहीं ह्वे सकत है| ऊ नाम है अवध क्षेत्र कय गंगा जमुनी तहजीब के मसीहा रफ़ीक सादानी| बिना कौनो स्कूली पढ़ाई किहे रफ़ीक अवधी व्यग्य के ऊ पायदान तक पहुचे जहाँ तक पहुचे खातिर बड़े बड़े पढ़े लिखे सपना देखत है|
रफ़ीक कय जनम  सन १९३३ मा बर्मा ( आज के म्यांमार ) मा भवा रहै| इनके वालिद हुवां पय इत्र कय कारोबार करत रहे| दोसरे विश्व युद्द मा उनके कुल कारोबार तहसनहस ह्वे गवा अउर इनके वालिद का हुवा से पलायन करइ का  परिगा| बर्मा छोड़ कय उनके वालिद अपने पूरे कुनबा के साथ उत्तर परदेस के फ़ैजाबाद मा आय के बस गे| हियाहीं से रफ़ीक के मन मा अवधी कय बिरवा निन्गरै का सुरु किहिस| ई बड़े अचरज कय बात रही कि दुनिया का व्यंग अयुर  हंसी लुटावे वाले रफ़ीक खुद बड़ी मुफलिसी अयुर  झंझटन मा जिंदगी गुजारीन| येकर अंदाजा यही से लगावा जाय सकत है कि यनकर यक लरिका  अयुर  यक भाय मुफलिसी के चलते दुनिया छोड़ दिहिन| मुल रफ़ीक अपनी मुफलिसी अयुर  मजबूरी का आपन ताकत बनाईन|
दुनिया का हंसावे वाली ई आवाज़  ९ फ़रवरी सन २०१० का एक सड़क दुर्घटना मा हमेशा हमेशा के लिए शांत ह्वे गय|




#Article 141: रफीक सादानी (243 words)


रफीक सादानी अवधी भाषा के एक कवि रहेन। 

सादानी जी बर्मा देस मा पैदा भा रहे अउर हुवाँ से परिवार समेत फैजाबाद-अवध आइ गा रहे। अति थोर आमदनी आदि के बावजूद अवधी मा कविता लिखै की चुनौती का स्वीकार किहिन, पुरहरे निभाइन।

बिना कौनो स्कूली पढ़ाई किहे रफ़ीक अवधी व्यग्य के ऊ पायदान तक पहुचे जहाँ तक पहुचे खातिर बड़े बड़े पढ़े लिखे सपना देखत है|
रफ़ीक कय जनम  सन १९३३ मा बर्मा ( आज के म्यांमार ) मा भवा रहै| इनके वालिद हुवां पय इत्र कय कारोबार करत रहे| दोसरे विश्व युद्द मा उनके कुल कारोबार तहसनहस ह्वे गवा अउर इनके वालिद का हुवा से पलायन करइ का  परिगा| बर्मा छोड़ कय उनके वालिद अपने पूरे कुनबा के साथ उत्तर परदेस के फ़ैजाबाद मा आय के बस गे| हियाहीं से रफ़ीक के मन मा अवधी कय बिरवा निन्गरै का सुरु किहिस| ई बड़े अचरज कय बात रही कि दुनिया का व्यंग अयुर  हंसी लुटावे वाले रफ़ीक खुद बड़ी मुफलिसी अयुर  झंझटन मा जिंदगी गुजारीन| येकर अंदाजा यही से लगावा जाय सकत है कि यनकर यक लरिका  अयुर  यक भाय मुफलिसी के चलते दुनिया छोड़ दिहिन| मुल रफ़ीक अपनी मुफलिसी अयुर  मजबूरी का आपन ताकत बनाईन|
दुनिया का हंसावे वाली ई आवाज़  ९ फ़रवरी सन २०१० का एक सड़क दुर्घटना मा हमेशा हमेशा के लिए शांत ह्वे गय| दुरभाग से सादानी जी जैसे बेहद पापुलर अउर काबिल सायर की सायरी कै कौनौ संग्रहौ नाय आय सका है। इनके अब देहांत होय गा बा। 




#Article 142: रमई काका (156 words)


रमई काका एक अवधी भाषा के कवि रहेन। अवधी के आधुनिक कबियन मा सबसे पापुलर कवि रमई काका कै जनम रावतपुर, उन्नाव जिला (अवध) मा दुइ फरौरी सन्‌ १९२५ क भा रहा। काका जी कै पूरा नाव है चंद्रभूसन तिरबेदी। काका केरी कबिताई मा व्यंग्य कै छटा जनता के जबान पै चढ़ि के बोलति रही। आजौ कविता कै उहै असर बरकरार अहै। १९४० से काका जी आकासबानी मा काम करै लागे अउर तब से काका जी कै ख्याति बढ़तै गै। आकासबानी लखनऊ से काका जी कै प्रोग्राम ‘बहिरे बाबा’ बहुतै सराहा गवा। काका जी के कार्यक्रम कै प्रस्तुति बी.बी.सी. लंदन से ह्वै चुकी है। इनकै कबिता चौपाल मा, किसानन के खेतन मा, मेलन मा, चौराहन पै सहजै मिलि जात है। ‘भिनसार’, ‘बौछार’, ‘फुहार’, ‘गुलछर्रा’, ‘नेताजी’ जैसे कयिउ काब्य-संग्रह हजारन की संख्या मा छपे अउर बिके। दूर-दूर तक अपनी लोक-भासा कै जस फैलाय के माटी कै ई सपूत अठारह अपरैल सन्‌ १९८२ क ई दुनिया छोड़ दिहिस।




#Article 143: राजाराजेश्‍वर मंदिर (143 words)


करीमनगर से 38 किलोमीटर दूर वमुलावडा म भगवान राजाराजेश्‍वर स्‍वामी कय परसिद्ध मंदिर बाय जहां दूर-दूर से लोगय दरसन करय बरे आवत हँय। एह मंदिर कय निर्माण चालुक्‍य राजा 750 ईसवी से 975 ईसवी के बीच करवाये रहें। मंदिर परिसर म श्री राम, लक्ष्‍मण, देवी लक्ष्‍मी, गणपति अउर भगवान पद्मनाथ स्‍वामी कय मंदिर बना अहँय। एक अउर अजोग मंदिर अहय जौन भगवान भीमेश्‍वर का संकलपा अहय। हियाँ कयिउ खुला बरामदा अहँय। इन मा से अद्दाला मंटप सबसे सुंदर अहय। मंदिर मा स्थित धर्मकुंडम घूमय वालेन का काफी प्यारा अहय। लोगन का विश्‍वास हय कि एह पानी मा बीमारियन का ठीक करय कय शक्ती अहय। सबसे पहिले भक्‍त एह कुड म नहात हँय वहिके बाद दरसन करय के बरे जात हँय । मंदिर कय एक अउर खिंचाव मंदिर परिसर मा एक्ठु दरगाह बाय जहां सब धरम अव जाति कय मनई विनती करय आवत हँय।




#Article 144: राजेन्द्र प्रसाद (102 words)


डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद (; 3 दिसंबर, 1884 - 28 फरवरी, 1963) भारत कय  प्रथम राष्ट्रपति रहे| राजेन्द्र प्रसाद भारतीय स्वाधीनता आंदोलन कय  प्रमुख नेतन् में से एक  रहे अउर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कय  अध्यक्ष कय  रूप में एक प्रमुख भूमिका निभाइन्| भारतीय संविधान कय  निर्माणॉ मा वन आपना प्रमुख योगदान दिहिन  जेकरे कारण २६ जनवरी १९५० के भारत के एक  गणतंत्र कय  रुप मा स्थापना भए । राष्ट्रपति  कय  अलावा वन स्वाधीन भारत मा केन्द्रीय मंत्री के रुप में भी थोर समय खातिर काम किहिन । पूरा देश महिया खूब लोकप्रियता  के कारण वन  कय राजेन्द्र बाबू अव  देशरत्न कहिके पुकारा जाला|




#Article 145: रामचरितमानस (120 words)


श्री रामचरितमानस अवधी भाषा मा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा १६वीं सदी मा रचा गवा कालजई महाकाव्य होय। एह ग्रन्थ का अवधी साहित्य कय यक महान कृति माना जात है। यहिका सामान्यतः 'तुलसी रामायण' या 'तुलसीकृत रामायण' भी कहा जात है। रामचरितमानस भारतीय संस्कृति मा एक विशेष स्थान रक्खत है। उत्तर भारत मा 'रामायण' के रूप मा बहुत जने रोज पढ़त हैं। ठंडी वाली नवरातम् मा एहकै सुन्दर काण्ड कय पाठ पूरे नौ दिन करा जात है। रामायण मण्डलऽन् द्वारा मंगलवार अउर शनिवार का एहके सुन्दरकाण्ड कय पाठ कीन जात है।

रामचरिमानस कै कुछ दोहा औ चौपाई :

हरि अनन्त हरि कथा अनंता , पढ़ई लिखहि बहु बिधि सब संता।।

होई हैं वहीं जो राम रचि राखा, को कहि तर्क बढावहि शाखा।।




#Article 146: रामस्वामी वेंकटरमण (109 words)


रामस्वामी वेंकटरमण,  (रामास्वामी वेंकटरमन, रामास्वामी वेंकटरामण या रामास्वामी वेंकटरमण)(४ दिसंबर १९१०-२७ जनवरी २००९) भारत कय ८वा राष्ट्रपति रहे। वन १९८७ से १९९२ तक ई पद पर रहे। राष्ट्रपति बनय कय पहिले वे ४ वर्षों तक भारत कय उपराष्ट्रपति रहे।
वेंकटरमन कय जनम ४ दिसंबर, १९१० कय तमिलनाडुम तंजौर कय नगिचे पट्टुकोट्टय में भा रहा। वनकय ढेर शिक्षा-दीक्षा राजधानी चेन्नई (तबकय मद्रास) में भा रहा।वन अर्थशास्त्र से स्नातकोत्तर मद्रास विश्वविद्यालय से करें रहें। यकरे बाद वन मद्रास कय लॉ कॉलेज से कानून कय पढ़ाई कीहिन। पढाई पूरा करैक बाद वन मद्रास उच्च न्यायालय में सन १९३५ से वकालत सुरू कीहिन औ १९५१ से वन उच्चतम न्यायालय में वकालत सुरू कीहिन। 




#Article 147: रुद्राष्टकम् (162 words)


 रुद्राष्टकम् भगवान शिव कय स्तुति होय ।
 
इ रामचरितमानस कय उत्तरकाण्ड मे है ।
 ॥ अथ रुद्राष्टकम् ॥
नमामीशमीशान निर्वाणरूपम् ।
विभुम् व्यापकम् ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।
निजम् निर्गुणम् निर्विकल्पम् निरीहम् ।
चिदाकाशमाकाशवासम् भजेऽहम् ॥१॥
निराकारमोङ्कारमूलम् तुरीयम् ।
गिराज्ञानगोतीतमीशम् गिरीशम् ।
करालम् महाकालकालम् कृपालम् ।
गुणागारसंसारपारम् नतोऽहम् ॥२॥
तुषाराद्रिसङ्काशगौरम् गभीरम् ।
मनोभूतकोटि प्रभाश्रीशरीरम् ।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारुगङ्गा ।
लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥३॥
चलत्कुण्डलम् भ्रूसुनेत्रम् विशालम् ।
प्रसन्नाननम् नीलकण्ठम् दयालम् ।
मृगाधीश चर्माम्बरम् मुण्डमालम् ।
प्रियम् शङ्करम् सर्वनाथम् भजामि ॥४॥
 प्रचण्डम् प्रकृष्टम् प्रगल्भम् परेशम् ।
अखण्डम् अजम् भानुकोटिप्रकाशम् ।
त्रयः शूलनिर्मूलनम् शूलपाणिम् ।
भजेऽहम् भवानीपतिम् भावगम्यम् ॥५॥
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी ।
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारि ।
चिदानन्द सन्दोह मोहापहारि ।
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारि ॥६॥
न यावद् उमानाथपादारविन्दम् ।
भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावत्सुखम् शान्ति सन्तापनाशम् ।
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ॥७॥
न जानामि योगम् जपम् नैव पूजाम् ।
नतोऽहम् सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम् ।
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानम् ।
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ॥८॥
रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः
प्रसीदति॥




#Article 148: लक्षद्वीप (137 words)


लक्षद्वीप (संस्कृत: लक्ष: लाख, + द्वीप) भारत के दक्खिन-पच्छूं मा अरब सागर मा स्थित एक भारतीय द्वीप-समूह आय। एहकय राजधानी कवरत्ती अहै।

सगरौ केन्द्र शासित प्रदेशऽन् मा लक्षद्वीप सबसे छोट अहै। लक्षद्वीप द्वीप-समूह कय उत्तपत्ति पुरान समय मा भए ज्वालामुखी विस्फोट से निकरे लावा से भय अहै। ई भारत के मुख्यभूमि से लगभग 300 कि॰मी॰ दूर पच्छूँ मा अरब सागर मा अवस्थित अहै।

लक्षद्वीप द्वीप-समूह मा कुल 36 द्वीप अहैं लिकिन केवल 10 द्वीपऽन् पय जनजीवन अहै। देशी पयर्टकऽन् का 6 द्वीपऽन् पय जाय कै अनुमति अहै जबकि विदेशी पयर्टकऽन् का खाली 2 द्वीप (अगाती अव बंगाराम) पय जाय कय अनुमति अहै।

अन्दरोत पय पयर्टकऽन् का जाय कै अनुमति नाइ हय।

। ई प्रवाल भित्तियऽन् से बना द्वीप आय।
। एंड्रोट द्वीप लक्षद्वीप कय सबसे बड़ा द्वीप हुवै,जबकि अमिवी द्वीप लक्षद्वीप कै सबसे बड़ा द्वीप समूह अहै।




#Article 149: लक्षद्वीप कय जिले (143 words)


लक्षद्वीप (संस्कृत: लक्ष: लाख, + द्वीप) भारत के दक्षिण-पश्चिम में अरब सागर में स्थित एक भारतीय द्वीप-समूह है। इसकी राजधानी कवरत्ती है।

समस्त केन्द्र शासित प्रदेशों में लक्षद्वीप सब से छोटा है। लक्षद्वीप द्वीप-समूह की उत्तपत्ति प्राचीनकाल में हुए ज्वालामुखीय विस्फोट से निकले लावा से हुई है। यह भारत की मुख्यभूमि से लगभग 300 कि॰मी॰ दूर पश्चिम दिशा में अरब सागर में अवस्थित है।
यहाँ मुस्लिम बहुसंख्यक है।

लक्षद्वीप द्वीप-समूह में कुल 36 द्वीप है परन्तु केवल 10 द्वीपों पर जनजीवन है। देशी पयर्टकों को 6 द्वीपों पर जाने की अनुमति है जबकि विदेशी पयर्टकों को केवल 2 द्वीपों (अगाती व बंगाराम) पर जाने की अनुमति है।

अन्दरोत पर पयर्टकों को जाने की अनुमति नहीं है।

। यह प्रवाल भित्तियों से निर्मित द्वीप है।
। एंड्रोट द्वीप लक्षद्वीप का सबसे बड़ा द्वीप है,जबकि अमिवी द्वीप लक्षद्वीप का सबसे बड़ा द्वीप समूह है।

।




#Article 150: लद्दाख (174 words)


लद्दाख़ (तिब्बती लिपि: ལ་དྭགས་  ;उर्दू: ; ऊंचे दर्रऽन् कय भुइं) उत्तरी भारत कय जम्मू और कश्मीर से सटा यक केंद्र शासित राज्य होय, जौन उत्तर मा काराकोरम पर्वत अउर दक्षिण मा हिमालय पर्वत के बीचे मा अहै। ई भारत के सबसे विरंड क्षेत्रऽन् मा पहिले नंबर पय अहै।

 सीमावर्ती स्थिति के कारण सामरिक दृष्टि से एहकय बड़ा महत्व अहै। लद्दाख, उत्तर-पश्चिमी हिमालय के पर्वतीय क्रम मा आवत है, जहाँ कय जादातर भूईं खेती करय लायेक नाहीं हय। गॉडविन आस्टिन (K2, 8,611 मीटर) अउर गाशरब्रूम I (8,068 मीटर) सर्वाधिक ऊँची चोटी अहँइ। हियाँ कय जलवायु बहुत जादा शुष्क अउर कठोर अहै। वार्षिक वृष्टि 3.2 इंच तथा वार्षिक औसत ताप 5 डिग्री सें. अहय। नदियाँ दिन मा कुछै समय बहति हैं, शेष समय मा बरफ जमि जाथै। सिंधु मुख्य नदी अहय। राज्य कय राजधानी एवं प्रमुख नगर लेह बाटै। अधिकांश जनसंख्या घुमक्कड़ बा, जिनकय प्रकृति, संस्कार एवं रहन-सहन तिब्बत एवं नेपाल से प्रभावित बाटै। पूर्वी भाग मा जादातर मनई  बौद्ध अहैं तथा पश्चिमी भाग 
जादातर मुसुलमान बाटें। हेमिस गोंपा बौंद्धऽन् कय सबसे बड़ा धार्मिक संस्थान अहइ।




#Article 151: लाला लाजपत राय (444 words)


लाला लजपत राय जन्म: 28 जनवरी 1865 - मृत्यु: 17 नवम्बर 1928) भारत के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे। इन्हें पंजाब केसरी भी कहा जाता है। इन्होंने पंजाब नैशनल बैंक और लक्ष्मी बीमा कम्पनी की स्थापना भी की थी। ये भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में गरम दल के तीन प्रमुख नेताओं लाल-बाल-पाल में से एक थे। सन् 1928 में इन्होंने साइमन कमीशन के विरुद्ध एक प्रदर्शन में हिस्सा लिया, जिसके दौरान हुए लाठी-चार्ज में ये बुरी तरह से घायल हो गये और अन्ततः १७ नवम्बर सन् १९२८ को इनकी महान आत्मा ने पार्थिव देह त्याग दी।

लाला लाजपत राय का जन्म पंजाब के मोगा जिले में 28 जनवरी 1865 को एक जैन परिवार में हुआ था। इन्होंने कुछ समय हरियाणा के रोहतक और हिसार शहरों में वकालत की। ये भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गरम दल के प्रमुख नेता थे। बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल के साथ इस त्रिमूर्ति को लाल-बाल-पाल के नाम से जाना जाता था। इन्हीं तीनों नेताओं ने सबसे पहले भारत में पूर्ण स्वतन्त्रता की माँग की थी बाद में समूचा देश इनके साथ हो गया। इन्होंने स्वामी दयानन्द सरस्वती के साथ मिलकर आर्य समाज को पंजाब में लोकप्रिय बनाया। लाला हंसराज एवं कल्याण चन्द्र दीक्षित के साथ दयानन्द एंग्लो वैदिक विद्यालयों का प्रसार किया, लोग जिन्हें आजकल डीएवी स्कूल्स व कालेज के नाम से जानते है। लालाजी ने अनेक स्थानों पर अकाल में शिविर लगाकर लोगों की सेवा भी की थी। 30 अक्टूबर 1928 को इन्होंने लाहौर में साइमन कमीशन के विरुद्ध आयोजित एक विशाल प्रदर्शन में हिस्सा लिया, जिसके दौरान हुए लाठी-चार्ज में ये बुरी तरह से घायल हो गये। उस समय इन्होंने कहा था: मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत में एक-एक कील का काम करेगी। और वही हुआ भी; लालाजी के बलिदान के 20 साल के भीतर ही ब्रिटिश साम्राज्य का सूर्य अस्त हो गया। 17 नवंबर 1928 को इन्हीं चोटों की वजह से इनका देहान्त हो गया।

लाला जी की मृत्यु से सारा देश उत्तेजित हो उठा और चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव व अन्य क्रांतिकारियों ने लालाजी पर जानलेवा लाठीचार्ज का बदला लेने का निर्णय किया। इन देशभक्तों ने अपने प्रिय नेता की हत्या के ठीक एक महीने बाद अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर ली और 17 दिसम्बर 1928 को ब्रिटिश पुलिस के अफ़सर सांडर्स को गोली से उड़ा दिया। लालाजी की मौत के बदले सांडर्स की हत्या के मामले में ही राजगुरु, सुखदेव और भगतसिंह को फाँसी की सजा सुनाई गई।

लालाजी ने हिन्दी में शिवाजी, श्रीकृष्ण और कई महापुरुषों की जीवनियाँ लिखीं। उन्होने देश में और विशेषतः पंजाब में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में बहुत सहयोग दिया। देश में हिन्दी लागू करने के लिये उन्होने हस्ताक्षर अभियान भी चलाया था।




#Article 152: लेख (466 words)


'बटोही' कै छोटहन झलक ( समीक्षा )

वर्ष एक अङ्क एक कै रूप मे प्रकाशित अवधी भाषा कै द्वैमासिक साहित्यिक पत्रिका ' बटोही ' साहित्यकार औ पत्रिका कै स्थानीय व्यवस्थापक शिवनन्दन जायसवाल कै मार्फत हाथ मे पडेक बाद साहित्य कै एक विद्यार्थी होय कै नाते खुशी कै कौनो जवाफ नायी रहा । सब से पहिले यी साहित्यिक पत्रिका छापेम अहम् भुमिका खेलेवाले सब लोगन कै हम खुले दिल से धन्यवाद दिएक चाहित हन औ यी साहित्यिक पत्रिका कै छापेक निरन्तरता कै खातिर शुभकामना व्यक्त करेक चाहित हन ।
विक्रममणि त्रिपाठी कै प्रकाशन औ सम्पादकत्व मे प्रकाशित यी पत्रिका मे रामचन्द्र पाण्डेय के लैके सात लोग सल्लाहकार औ विक्रममणि त्रिपाठी कै लैके सात लोग सम्पादक रूप मे काम करत हैं । राघवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव कै लैके छ लोग स्थानीय व्यवस्थापक कै रूप मे जिम्मा लिहा यी पत्रिका जि.प्र.का. काठमाडौं मे ४०/२०७१/७२ न. के रूप मे दर्ता है ।
उपर कभर कै पृष्ठ मे अवधी साहित्यकार स्व. विश्वनाथ पाठक कै तस्बिर छपा येंह साहित्यिक पत्रिका मे कुल मिलायजुलाय कै सोरा ठौरा लेख-रचना समेटा गवा है । ' अवधी भाषा कै आदिकवि कुक्करीपा ' शिर्षक पे जीवनीपरक समालोचनात्मक आलेख समेटा गवा है । वैसे सच्चिदानन्द चौबे के द्वारा लिखा समालोचनात्मक आलेख ' नेपालमा अवधी कै प्राचीन परम्परा ' हंसावती कुर्मी कै द्वारा लिखा आलेख ' अवधी लोक जीवन औ पर्यावरण ' तेजबहादुर निषाद कै द्वारा लिखा आलेख ' निषाद बंश कै संस्कृति ' औ सम्पादक कै द्वारा लिखा आलेख ' अवधी संस्कृति कै उन्नायक पाठक जी कै निधन ' औ  ' पाण्डेय जी कै निधन से अपूर्णीय क्षति '  येंहमा समेटा गवा है । वैसे ही नयनराज पाण्डे , विजय वर्मा , मोदिनी कुमार केवल , लोकनाथ वर्मा औ पूजा हमाल कै द्वारा लिखा क्रमशः ' शासन ' , ' टुटत भ्रम ' ,  'सपना ' ' शास्त्रार्थ ' औ ' भूत कै चुरकी ' शिर्षक पे कथा समेटा गवा है । वैसे ही गजेन्द्रनाथ शुक्ल औ सच्चिदानन्द चौबे कै द्वारा लिखा क्रमशः ' जइसे बेटवा वइसे बिटिया ' औ ' अपने मातृभाषा ' शिर्षक पे कविता समेटा गवा है । वैसे दु:ख हरण यादव कै द्वारा लिखा गजल , सविता चौधरी कै द्वारा लिखा ' झलुवा कै गीत ' औ अकिञ्चन शाक्य कै द्वारा लिखा गीतिलय कै रचना ' रजाईबिन ' येंहमा समेटा गवा है । कुछ लेख रचना कै नेपाली उल्था भी किया गवा है ।
पत्रिका कै अन्तिम पृष्ठ मे कुछ अवधी मे लिखा पुस्तक कै छोटहन मे परिचय सहित प्रचारप्रसार किया गवा है । लेमिनेटेड रङ्गीन कडा कभर मे प्रकाशित येंह पत्रिका मे कुछ विज्ञापनवा समेटा गवा है ।
कौनो भी भाषा मे पत्रिका प्रकाशन कै शुरुआत करब आसान होत है लेकिन निरन्तरता दियब कठिन होत है । येंह पत्रिका कै निरन्तरता कै खातिर फिर एक बेर शुभकामना व्यक्त करत आवेवाला दिन मे आउर उत्कृष्ट लेख रचना प्रकाशित होयी कै के उम्मीद करित हन ।




#Article 153: वर्णमाला (100 words)


कवनो एक भाषा या अनेक भाषान् कय् लिखए कय लिए प्रयुक्त मानक प्रतीकन् कय क्रमबद्ध समूह कय् वर्णमाला (=वर्णों कय् माला या समूह) कहत हैं। उदाहरण कय लिए देवनागरी कय वर्णमाला में अ आ इ ई उ ऊ ऋ ऋ लृ लृ् ए ऐ ओ औ अं अः  क  ख  ग  घ  ङ। च  छ  ज  झ  ञ। ट  ठ  ड  ढ  ण। त  थ  द  ध  न। प  फ  ब  भ  म। य  र  ल  व। श  ष  स  ह कय 'देवनागरी वर्णमाला' कहत हैं औ a b c d ... z कय रोमन वर्णमाला (रोमन अल्फाबेट) कहत हैं। 




#Article 154: विकीपीडिया:कयिउ मतलब वाले शब्द (343 words)


कई ऐसे शब्द होते हैं जिनके एक से अधिक अर्थ होते हैं। ऐसे शब्द बहुविकल्पी शब्द कहलाते हैं। ऐसे शब्दों से सम्बंधित विषयों पर अलग-अलग लेख बनाए जाते हैं। जब मिलते-जुलते नाम के एक से अधिक लेख होते हैं, तो ऐसा होने की संभावना होती है कि पाठक एक के बजाए दूसरे लेख पर पहुँच जाए। ऐसे में पाठकों को शब्द से सम्बंधित विषयों के विकल्प बताने की आवश्यकता होती है ताकि पाठक मनचाहा लेख आसानी से ढूँढ सकें। ये विकल्प बताने के निम्न तरीके होते हैं:

यदि शब्द या वाक्यांश से सम्बंधित कुछ ही लेख हों, और उनमें से एक बाकियों से काफ़ी अधिक प्रचलित हो, तो फिर मुख्य नाम पर प्रचलित विषय का लेख डाला जाता है और तीनों लेखों की शुरुआत में दूसरे दो लेखों की कड़ियाँ प्रदान की जाती हैं ताकि पाठक दूसरे विषय का लेख आसानी से ढूँढ सकें। उदाहरण: रुपया लेख में ऊपर-ऊपर भारतीय रुपया लेख की कड़ी दी गई है।

बहुविकल्पी पृष्ठ ऐसे पृष्ठ होते हैं जो किसी शब्द या वाक्यांश से सम्बंधित सभी विषयों के लेखों की सूची प्रदान करते हैं। इनपर सूची के अतिरिक्त कोई सामग्री नहीं रखी जाती और इनके अंत में  साँचे का प्रयोग किया जाता है।

यदि शब्द या वाक्यांश से सम्बंधित विषयों की संख्या अधिक हो, और उनमें से एक बाकियों से काफ़ी अधिक प्रचलित हो, तो फिर मुख्य नाम पर प्रचलित विषय का लेख डाला जाता है और एक बहुविकल्पी पृष्ठ बनाया जाता है जिसका नाम मुख्य लेख का नाम (बहुविकल्पी) रखा जाता है। यहाँ ( और नाम के अंत में एक स्पेस रखा जाता है। उदाहरण: नील कपड़ों पर लगाए जाने वाले पदार्थ के बारे में है, और अन्य विषयों के लिये नील (बहुविकल्पी) है।

यदि शब्द या वाक्यांश से सम्बंधित कई विषय हों और उनमें से कोई भी अन्य विषयों से बहुत अधिक प्रचलित ना हो, तो ऐसे में मुख्य लेख को एक बहुविकल्पी पृष्ठ बनाया जाता है, और सभी लेखों के नाम के आगे एक स्पेस देकर ब्रैकेट में कोई उपयुक्त प्रत्यय जोड़ा जाता है या फिर विषय के पूरे नाम का प्रयोग किया जाता है।




#Article 155: वीरेन्द्र सहवाग (615 words)


वीरेन्द्र सहवाग (अंग्रेजी: Virender Sehwag, जन्म: 20 अक्टूबर 1978, हरियाणा) एक भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी हैं। प्यार से उन्हें सभी वीरू ही कहते हैं। वैसे उन्हें नज़फ़गढ़ के नवाब व आधुनिक क्रिकेट के ज़ेन मास्टर के रूप में भी जाना जाता है। वे दायें हाथ के आक्रामक सलामी बल्लेबाज तो हैं ही किन्तु आवश्यकता के समय दायें हाथ से ऑफ स्पिन गेंदबाज़ी भी कर लेते हैं। उन्होंने भारत की ओर से पहला एकदिवसीय मैच 1999 में व पहला टेस्ट मैच 2001 में खेला था। अप्रैल 2009 में सहवाग एकमात्र ऐसे भारतीय बने जिन्हें विजडन लीडिंग क्रिकेटर ऑफ द ईयर के खिताब से नवाज़ा गया। उन्होंने अगले वर्ष भी इस ख़िताब को फिर जीता।

सहवाग का जन्म 20 अक्टूबर 1978 को हरियाणा के एक जाट परिवार में हुआ। सहवाग अपने माता-पिता के चार बच्चों में तीसरे संतान हैं। सहवाग से बड़ी दो बहनें मंजू और अंजू हैं जबकि उनसे छोटा एक भाई है विनोद। सहवाग के पिता किशन सहवाग बताते हैं कि वीरू में क्रिकेट के लिये प्यार सात माह की उम्र से ही जाग गया था जब उन्होंने पहली बार उसे खिलौना बैट लाकर दिया। यही वीरू बारह साल की उम्र में क्रिकेट के दौरान जब अपना दाँत तुड़वाकर घर पहुँचा तो पिता ने उसके क्रिकेट खेलने पर प्रतिबन्ध लगा दिया। बाद में वीरू की माँ कृष्णा सहवाग के हस्तक्षेप के बाद ही यह प्रतिबन्ध हटा। उसके बाद तो क्रिकेट उनकी जिन्दगी का जैसे पहला प्यार ही बनकर रह गया। वैसे यह अलग बात है कि 2004 में उन्होंने आरती नाम की एक कन्या से शादी रचा ली और उससे उनके दो पुत्र भी हैं। वे अपने परिवार के साथ दिल्ली के नजफगढ इलाके में रहते हैं।

टेस्ट क्रिकेट में भारत की ओर से तिहरा शतक जड़ने के रिकार्डधारी सहवाग ने अब तक 228 एकदिवसीय मैच में 13 शतक और 36 अर्धशतकों की मदद से 7380 रन बनाए हैं। उनका एकदिवसीय बैटिंग औसत 34.65 का है। एकदिवसीय मैचों में उनका सर्वाधिक स्कोर 219 रन है। दिलचस्प तथ्य यह है कि सहवाग की आक्रामक खेल शैली वनडे क्रिकेट के अनुकूल है लेकिन वह टेस्ट मैचों में अधिक सफल रहे हैं जिसमें उन्होंने 72 टेस्ट मैचों में 52.50 के औसत से 17 शतक और 19 अर्धशतकों समेत 6248 रन बनाये हैं।

मार्च 2010 में उन्होंने हैमिल्टन में न्यूजीलैंड के खिलाफ सिर्फ 60 गेंदों पर शतक बनाया था। टेस्ट क्रिकेट में पहले विकेट के लिये सबसे बड़ी साझेदारी का रिकार्ड भी सहवाग के ही नाम है। राहुल द्रविड़ के साथ 410 रन की साझेदारी बना करके वीरू ने कीर्तिमान बनाया था। एकदिवसीय क्रिकेट मैच में उनका सर्वाधिक स्कोर 219 रन है। जो एक विश्व रिकॉर्ड था। जिसे बाद में रोहित शर्मा ने 264 रन बना कर तोड़ा।
सहवाग पहले भारतीय खिलाड़ी हैं जिन्होंने टेस्ट मैच में तिहरा शतक जड़ा है। सर डोनाल्ड ब्रेडमैन और ब्रायन लारा के बाद सहवाग दुनिया के तीसरे ऐसे बल्लेबाज हैं जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में दो बार तिहरा शतक बनाने का कीर्तिमान स्थापित किया है।
अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट में किसी बल्लेबाज द्वारा यह सबसे तेज गति से बनाया तिहरा शतक (319 रन) भी है। तीन सौ उन्निस रन बनाने के लिये उन्होंने सिर्फ़ 278 गेंद ही खेलीं। तीस से ज्यादा औसत के साथ सहवाग का स्ट्राइक रेट दुनिया में सबसे ज्यादा है। इसके अलावा वह दुनिया के एकमात्र ऐसे क्रिकेट खिलाड़ी हैं जिन्होंने टेस्ट मैचों में दो तिहरे शतक बनाने के साथ एक पारी में पाँच विकेट भी हासिल किये।

इन्हें भारत सरकार ने 2002 में अर्जुन पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त उन्हें 2008 में अपने शानदार प्रदर्शन के लिये विजडन लीडिंग क्रिकेटर इन द वर्ल्ड के सम्मान से नवाजा गया। सहवाग ने इस पुरस्कार को 2009 में दुबारा अपने नाम किया। 2011 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर के नाते ईएसपीएन क्रिकीन्फो अवार्ड भी दिया गया।




#Article 156: वैदिक काल (139 words)


वैदिक काल प्राचीन भारतीय संस्कृति कय एक काल खंड होय, जब वेद कय रचना भए रहा। हड़प्पा संस्कृति कय पतन कय बाद भारत में एक नया सभ्यता कय आविर्भाव भय। ई सभ्यता कय जानकारी कय स्रोत वेद कय आधार पे एका वैदिक सभ्यता कय नाम दै गय। वैदिक काल कय दुई भाग, ऋग्वैदिक काल (1500- 1000 ई. पू.) तथा उत्तर वैदिक काल (1000 - 600 ई. पू.) में बांटा  है।

ऋग्वैदिक काल में आर्य सप्त सिन्धु क्षेत्र में रहत रहे। यह क्षेत्र वर्तमान में पंजाब एवं हरियाणा कय कुछ भाग में पड़त अहै।

ऋग्वेद में 40 नदि, हिमालय (हिमवंत) त्रिकोता पर्वत, मूंजवत (हिंदु-कुश पर्वत) कय उल्लेख अहै। गंगा नदी कय चर्चा एक बेर, यमुना कय तीन बेर उल्लेख अहै। विंध्यपर्वतमाला कय चर्चा नाहीं  भा अहै। रावी नदी कय तट पे 'दाशराज्ञ युद्ध' (सुदास एवं दिवोदास) कय बीच भय रहा।




#Article 157: शिव ताण्डव स्तोत्र (960 words)


शिव ताण्डव स्तोत्र (संस्कृत:शिवताण्डवस्तोत्रम्) महान विद्वान अव परम शिवभक्त लंकाधिपति रावण रचे हँय ।ई भगवान शिव कय स्तोत्र होय।
 

मान्यता ई है कि रावण जब कैलाश पर्वत  उठाई लिहिन रहा  औ जब पूरा पर्वत  कय लंका लई कय चलय लाँगे तव भोले बाबा  अपने अंगूठा से तनिक् भर जैसे दबाईन तो कैलाश फिर जहां रहा उहीं अवस्थित होई गवा। शिव कय अनन्य भक्त रावण कय हाथ दबि गवा औ ओन आर्तनाद कई उठिन - शंकर शंकर - अर्थात क्षमा करो, क्षमा करो औ स्तुति करय लागीन; जौन कालांतर मा शिव तांडव स्त्रोत्र बनि गय।

शिवताण्डव स्तोत्र स्तोत्रकाव्य में बहुतै लोकप्रिय है। ई पञ्चचामर छन्द में आबद्ध अहै। एकर अनुप्रास औ समास बहुल भाषा संगीतमय ध्वनि औ प्रवाह कय कारण शिवभक्तन् मा प्रचलित अहै। सुन्दर भाषा औ काव्य-शैली कय कारण ई स्तोत्रन् कय जानकार खास कै कय शिवस्तोत्रन् मा विशिष्ट स्थान राखत अहै।

 

॥ इति रावणकृतं शिव ताण्डव स्तोत्रं संपूर्णम्‌ ॥

जटाटवी-गलज्जल-प्रवाह-पावित-स्थले
गलेऽव-लम्ब्य-लम्बितां-भुजङ्ग-तुङ्ग-मालिकाम् 
डमड्डमड्डमड्डम-न्निनादव-ड्डमर्वयं
चकार-चण्ड्ताण्डवं-तनोतु-नः शिवः शिवम् .. १..

जौन् शिव जी कय सघन, वनरूपी जटा से प्रवाहित होई कय गंगा जी कय धारा ओन कय कंठ कय प्रक्षालित होत अहै, जेकरे गटई मा बडा अव लम्मा साँप कय माला लटकत्  अहै, अव जवन शिव जी डम-डम डमरू बजाई कय प्रचण्ड ताण्डव करत हँय, वे शिवजी हम्म्न कय कल्यान करँय

जटा-कटा-हसं-भ्रमभ्रमन्नि-लिम्प-निर्झरी-

धगद्धगद्धग-ज्ज्वल-ल्ललाट-पट्ट-पावके
किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम .. २..

जवने शिव जी कय जटा में अतिवेग से विलास कै कय भ्रमण करत् देवी गंगा कय लहर ओन कय शिश पे लहरात अहिन्, जेकरे मस्तक पे आगी कय प्रचण्ड ज्वाला धधक-धधक कय प्रज्वलित होत  अहै, उ बाल चंद्रमा से विभूषित शिवजी में हमार अंनुराग प्रतिक्षण बढत रहय।

धरा-धरेन्द्र-नंदिनीविलास-बन्धु-बन्धुर
स्फुर-द्दिगन्त-सन्ततिप्रमोद-मान-मानसे .
कृपा-कटाक्ष-धोरणी-निरुद्ध-दुर्धरापदि
क्वचि-द्दिगम्बरे-मनो विनोदमेतु वस्तुनि .. ३..

जे पर्वतराजसुता(पार्वती जी) कय विलासमय रमणिय कटाक्षन् मा परम आनन्दित चित्त रहत हैं, जेकरे मस्तक मा सम्पूर्ण सृष्टि अव प्राणीगण वास करत हैं, अव जेकरे कृपादृष्टि  से  भक्तन् कय कुल विपत्ति दूर होई जाती अहैं, अईसन दिगम्बर (आसमान कय कपडा जैसए धारण करय वाले) शिवजी कय आराधना से हमार चित्त हर्दम आन्दित रहय।

जटा-भुजङ्ग-पिङ्गल-स्फुरत्फणा-मणिप्रभा
कदम्ब-कुङ्कुम-द्रवप्रलिप्त-दिग्व-धूमुखे 
मदान्ध-सिन्धुर-स्फुरत्त्व-गुत्तरी-यमे-दुरे
मनो विनोदमद्भुतं-बिभर्तु-भूतभर्तरि .. ४..

हम उ शिवजी कय भक्ति मे आन्दित रहि जे कूल प्राणिन् कय आधार अव रक्षक होँय, जेकरे जटा में लपटान् साँप कय फण कय मणिन् कय प्रकाश, पीएर वर्ण प्रभा-समुहरूपकेसर कय कातिं से दिशा कय प्रकाशित करत अहै औ जे गजचर्म से विभुषित हँय।
सहस्रलोचनप्रभृत्य-शेष-लेख-शेखर
प्रसून-धूलि-धोरणी-विधू-सराङ्घ्रि-पीठभूः 
भुजङ्गराज-मालया-निबद्ध-जाटजूटक:
श्रियै-चिराय-जायतां चकोर-बन्धु-शेखरः .. ५..

जवन शिव जी कय चरण इन्द्र-विष्णु आदि देवतान् कय मस्तक कय फूल कय धूर से रंजित अहै (जेका देवतागण आपन मुड कय फूल अर्पन करत हैं), जेकरे जटा पे लाल साँप विराजमान अहै, वे चन्द्रशेखर हम्मै चिरकाल कय लिए सम्पदा देंए।

ललाट-चत्वर-ज्वलद्धनञ्जय-स्फुलिङ्गभा-
निपीत-पञ्च-सायकं-नमन्नि-लिम्प-नायकम् 
सुधा-मयूख-लेखया-विराजमान-शेखरं
महाकपालि-सम्पदे-शिरो-जटाल-मस्तुनः.. ६..

जवनन शिव जी  इन्द्रादि देवतन् कय गर्व दहन कैईकै, कामदेव कय अपने विशाल मस्तक कय अग्नि ज्वाला से भस्म कई दिहिन, अव जे कुल देवन् द्वारा पुज्य हैं, औ चन्द्रमा औ गंगा द्वारा सुशोभित हैं, वे ह्म्मै सिद्दी प्रदान करैँ।

कराल-भाल-पट्टिका-धगद्धगद्धग-ज्ज्वल
द्धनञ्ज-याहुतीकृत-प्रचण्डपञ्च-सायके 
धरा-धरेन्द्र-नन्दिनी-कुचाग्रचित्र-पत्रक

जेकरे मस्तक से धक-धक करत प्रचण्ड ज्वाला  कामदेव कय भस्म कई दिहिस अव जे शिव पार्वती जी कय स्तन कय अग्र भाग पे चित्रकारी करेम्  अति चतुर हँय ( यँह पार्वती प्रकृति होँय, अव चित्रकारी सृजन होँय), ओन शिव जी में हमार प्रीति अटल रहै।

नवीन-मेघ-मण्डली-निरुद्ध-दुर्धर-स्फुरत्
कुहू-निशी-थिनी-तमः प्रबन्ध-बद्ध-कन्धरः 
निलिम्प-निर्झरी-धरस्त-नोतु कृत्ति-सिन्धुरः
कला-निधान-बन्धुरः श्रियं जगद्धुरंधरः .. ८..

जेकरे कण्ठ नँवा मेंघ कय घटा से परिपूर्ण अमवसा कय राती कय जैसन करीया है, जौन कि गज-चर्म, गंगा अव बाल-चन्द्र से शोभायमान हँय अव जे कि जगत कय बोझा धारण करय वाले हँय, वे शिव जी हम्मै कुल प्रकार कय सम्पनता देँय।

प्रफुल्ल-नीलपङ्कज-प्रपञ्च-कालिमप्रभा-

स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकछिदं तमंतक-च्छिदं भजे .. ९..

जेकर कण्ठ औ कान्ह पूरा फुलान  नीलकमल कय जैसन फैला अहै सुन्दर श्याम प्रभा से विभुषित अहै, जे कामदेव औ त्रिपुरासुर कय्य विनाशक, संसार कय दु:ख कय काटय वाले, दक्षयज्ञ विनाशक, गजासुर एवं अन्धकासुर कय संहारक हँय अव जे मृत्यू कय वश में करय वाले हँय, हम ओन शिव जी कय भजीत अहन।

अखर्वसर्व-मङ्ग-लाकला-कदंबमञ्जरी
रस-प्रवाह-माधुरी विजृंभणा-मधुव्रतम् .
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं
गजान्त-कान्ध-कान्तकं तमन्तकान्तकं भजे .. १०..

जे कल्यानमय, अविनाशि, समस्त कला कय रस कय अस्वादन करय वाले हँय, जे कामदेव कय भस्म करय वाले हैं, त्रिपुरासुर, गजासुर, अन्धकासुर के सहांरक, दक्षयज्ञविध्वसंक औ स्वयं यमराज कय लिए भी यमस्वरूप हँय, हम ओन शिव जी कय भजीत अहन।

जयत्व-दभ्र-विभ्र-म-भ्रमद्भुजङ्ग-मश्वस-
द्विनिर्गमत्क्रम-स्फुरत्कराल-भाल-हव्यवाट्
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्ग-तुङ्ग-मङ्गल
ध्वनि-क्रम-प्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः .. ११..

अतयंत वेग से भ्रमण करय वाले साँप कय फूफकार से क्रमश: ललाट में बढल्  प्रचंण आगी कय मध्य मृदंग कय मंगलकारी उच्च धिम-धिम कय ध्वनि कय साथे ताण्डव नृत्य में लीन शिव जी कुल प्रकार सुशोभित होत हँय।

दृष-द्विचित्र-तल्पयोर्भुजङ्ग-मौक्ति-कस्रजोर्

तृष्णार-विन्द-चक्षुषोः प्रजा-मही-महेन्द्रयोः
समप्रवृतिकः कदा सदाशिवं भजे .. १२..

कठोर पत्थर अव कोमल शय्या, साँप अव मोतिन् कय माला, बहुमूल्य रत्न अव माटीन् कय टूकडा, शत्रू अव मित्रन्, राजा अव प्रजा, तिनका अव कमल पे एक्कै दृष्टि राखय वाले शिव कय हम भजीत अहन।

कदा निलिम्प-निर्झरीनिकुञ्ज-कोटरे वसन्
विमुक्त-दुर्मतिः सदा शिरःस्थ-मञ्जलिं वहन् .
विमुक्त-लोल-लोचनो ललाम-भाललग्नकः
शिवेति मंत्र-मुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् .. १३..

कब हम गंगा जी कय कछारगुञ में निवास कईकै, निष्कपट होइकै, मुँडि पे अंजली धारण कैईकै चंचल नेत्रन् अव ललाट वाला शिव जी कय मंत्रोच्चार कईकै  अक्षय सुख कय प्राप्त करब।

निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-
निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं
परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥१४ ॥
प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी
महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः
शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥१५॥

इदम् हि नित्य-मेव-मुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं
पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धि-मेति-संततम् .
हरे गुरौ सुभक्तिमा शुयातिना न्यथा गतिं
विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिंतनम् .. १६..

इ उत्त्मोत्त्म शिव ताण्डव स्त्रोत कय रोज पढे से या श्रवण करेस् खालि  प्राणि पवित्र होई जात हँय, परंगुरू शिव में स्थापित होई जाता हँय अव कुल प्रकार कय भ्रम से मुक्त होई जात अहै।

पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं
यः शंभुपूजनपरं पठति प्रदोषे .
तस्य स्थिरां रथ गजेन्द्र तुरङ्ग युक्तां
लक्ष्मीं सदैवसुमुखिं प्रददाति शंभुः .. १७..

प्रात: शिवपुजन कय अंत मा ई रावणकृत शिवताण्डवस्तोत्र कय गान से लक्ष्मी स्थिर रहत अहिन अव भक्त रथ, गज, घोडा आदि सम्पदा से सर्वदा युक्त रहत है




#Article 158: श्रीलंका (404 words)


श्रीलंका (आधिकारिक नाव श्रीलंका समाजवादी जनतांत्रिक गणराज्य) दक्खिन एशिया में हिन्द महासागर कय उत्तरी भाग में एकठु द्वीपीय देश होय।कोलम्बो एकर राजधानी होय।१९७२ तक एकर नाँव सिलोन रहा । १९७१ बाद एकर नाँव श्रीलंका धइ गै ।

श्रीलंका कय पिछला ५००० साल कय लिखित इतिहास मिलत है। १२५,००० साल पहिले हिँया मनई बस्ति होएक प्रमाण मिलत है। श्रीलंका कय संस्कृति बहुतै धनी है ।महान धार्मिक किताब रामायण मा लंका का जिकिर है । रामायण मा कुबेर औ बाद मा रावण कय लंका कय राजा बताइ गा है । रावण कय सोना कय महल अव अशोक बाटिका कय भी रामायण मा जिकिर है । श्रीराम कय बनावल राम सेतु कय अवशेष आजो मौजुद है । श्री राम रावण कय मारेक बाद लंका कय राज्य विभीषण कय सँउपिन ।हिँया २९ ईसापूर्व मा चतुर्थ बौद्ध संगीति कय समय लिखा बौद्ध ग्रन्थ भि मिला है।

प्राचीन काल से ही श्रीलंका पै शाही सिंहल वंश कय शासन रहा है। समय-समय मा दक्खिन भारतीय राजवंशन् कय भी आक्रमण हिँया होत रहा है। तीसरा सदी ईसा पहिले मा मौर्य सम्राट अशोक कय बेटवा महेन्द्र कय हिँया पय आवै से बौद्ध धर्म कय आगमन भवा।

सोरहवां सदी मा यूरोपीय शक्ति श्रीलंका मा आपन व्यापार स्थापित किहिस।इ देस चाय, रबड़, चीनी, कॉफ़ी, दालचीनी सहित अउर मसालऽन कय निर्यातक बनि गवा । पहिले पुर्तगाल कोलम्बो कय लगे आपन दुर्ग बनाइस। धीरे-धीरे पुर्तगालिय  आपन प्रभुत्व आसपास कय इलाकन् मा बना लिहिन। श्रीलंका कय निवासिन् में ओए लोगन खर्तिन घृणा पैदा होइ गवा। फिर वय लोग डच लोगन् से मदद कय अपील कीहिन। १६३० ईस्वी मा डच लोग पुर्तगालिन् पय हमला बोलिन औ ओन्है मार गिराइन, लेकिन डच लोग फिरसे श्रीलंका कय उप्पर आपन धाक जमावै लागे। १६६० तक अंग्रेजन् कय ध्यान यह पर गै। नीदरलैंड पे फ्रांस कय अधिकार होवैक बाद अंग्रेजन् कय इ डर भवा कि श्रीलंका डच इलाकऽन पय फ्रांसिसी अधिकार होइ जाइ । ओकरे बाद ओन्हरे डच इलाकन् पर अधिकार करेक सुरु किहिन । १८०० ईस्वी  आवत-आवत तटीय इलाकन् पय अंग्रेजन् कय अधिकार होइ गवा। १८१८ तक अंतिम राज्य कैंडी कय राजा भी आत्मसमर्पण कै दिहिन औ अइसय पूरा श्रीलंका पे अंग्रेजन् कय अधिकार होइ गवा। दुसरका विश्वयुद्ध कय बाद ४ फरवरी १९४८ कय देश कय यूनाइटेड किंगडम से पूरा स्वतंत्रता मिला।

प्रशासकीय रूप से श्रीलंका ९ प्रान्तन् मा बँटा है। इ ९ प्रान्तन् मा कुल २५ जिला हैं। 

इ देस एक्ठु बहुजातीय औ बहुधार्मिक होय। हिँया कय निवासिऽन मा ७४% सिंहली, १८% तमिल, ७% ईसाई औ १% अउर जाति कय हैं। 






#Article 160: सउदी अरब (188 words)


सउदी अरब मध्यपूर्व मा स्थित एकठु मुस्लिम देश होय। एकर रजधानी रियाद होय ।ई एक इस्लामी राजतंत्र होय जेकर स्थापना १७५० कय आसपास सउद द्वारा कै गा रहा। यह कय धरती बलुहा अहै तथा जलवायु उष्णकटिबंधीय मरुस्थल। ई विश्व कय अग्रणी तेल निर्यातक देश में गिना जात अहै। सउदी अरब कय पश्चिम कय ओर लाल सागर अहै अउर वकरे पार मिस्र। दक्षिण कय ओर ओमान अउर यमन अहैं अउर वकरे दक्षिण में हिन्द महासागर। उत्तर मा इराक अउर ज़ॉर्डन कय सीमा लागत अहै जबकि पूरुब मा फारस कय खाड़ी अउर कुवैत तथा संयुक्त अरब अमीरात। इसरायल-फ़िलिस्तीन कय क्षेत्र एकरे उत्तर कय दिशा में हय अउर अरब लोग  एकरे इतिहास कय बहुत प्रभावित किहिन् हँय।

हिँया इस्लाम कय प्रवर्तक मुहम्मद साहब कय जन्म भा रहा अउर हिँया इस्लाम कय दुई सबसे पवित्र स्थल मक्का औ मदीना है। इस्लाम मा हज कय स्थान मक्का बतावा गा है अउर दुनिया कय सारा मुसलमान मक्का कय ओर नमाज अदा करा लै। यहँ कय मुसलमान मुख्यतः सुन्नी हैं अउर इस्लाम कय  राजनैतिक राजधानी कै ई देश से बहरे रहय कय बावजूद इ देश कय मनई  इस्लाम धर्म पे आपन अमिट छाप छोडे हँय।




#Article 161: सगरमाथा (110 words)


सगरमाथा संसार कय  सबसे  लम्मा पहाड  होए  । एकर  उचाइ समुद्र सतहसे ८,८४८.८६ मीटर (२९,०३१.६९ फीट)  अहै  । ई नेपालकय  सोलुखुम्बु जिल्ला कय  खुम्जुङ गा.वि.स.महिया परत अहै । तिब्बती भाषा महियाँ एकर  नाव  चोमोलुङ्गमा होए ।
सगरमाथा कय  सन १८६५ महियाँ सर एवरेष्ट कय  नावसे  Mt. Everest नामाकरण भए रहा। बाद मे सन १९६० मा इतिहास शिरोमणि बाबुराम आचार्यले एकर  नावँ  सगरमाथा राखिन  । एका कवनो जगह  देवढुङ्गा कहत अहै ।
सगरमाथा कय  शिखर माँ सर्वप्रथम, सन १९५३ मई २९ तारिख दिन कय  ११:१५ बजे, नेपाल कय  तेन्जिङ नोर्गे शेर्पा अव  न्युजिल्याण्ड कय  सर एडमन्ड हिलारी आपन गोड  राखिन्।

सगरमाथा नेपाल कय  १४ अञ्चल मेँ से एक अञ्चल होए । 




#Article 162: सहारा मरुभूमी (131 words)


सहारा (अरबी: الصحراء الكبرى, सबसे बड़ा मरुभुमी') विश्व कय बडा गरम मरुभुमि हुवे। सहारा नाँव रेगिस्तान कय लिए अरबी शब्द सहरा (صحراء) से लई ग अहै जवने कै अर्थ होय मरुभुमि। ई अफ़्रीका कय उत्तरी भाग में अटलांटिक महासागर से लाल सागर तक ५,६०० किलोमीटर कय लम्बाई तक सूडान कय उत्तर अव एटलस पर्वत कय दक्खिन १,३०० किलोमीटर कय चौड़ाई में फैला है। एहमा भूमध्य सागर कय कुछ तटीय इलाका भी शामिल अहै। क्षेत्रफल में ई यूरोप कय लगभग बराबर अव भारत कय क्षेत्रफल कय दूना से ढेर अहै। माली, मोरक्को, मुरितानिया, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, लीबिया, नाइजर, चाड, सूडान अव मिस्र देश में इ मरुभुमि कय विस्तार अहै। दक्खिन मे एकर सीमा सहल से मिलत हैं जवन एक अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय सवाना क्षेत्र होय। ई सहारा कय बाकी अफ्रीका से अलग करत अहै।




#Article 163: सिंगापुर (105 words)


सिंगापुर (अंग्रेज़ी: Singapore सिंगपोर, चीनी: 新加坡 शीन्जियापो, मलय: Singapura सिंगापुरा, Tamil: சிங்கப்பூர் चिंकाप्पूर) विश्व कय प्रमुख बंदरगाह अउर व्यापारिक केंद्र में से एक होय। ई दक्खिन एशिया में मलेशिया अव इंडोनेशिया कय बीचे में है।

सिंगापुर यानी सिंहन् कय पुर। यानी एका सिंह का शहर कहा जात अहै। हिँया कयु धर्म में विश्वास राखय वाले, दुसर देशन् कय संस्कृति, इतिहास अव भाषा कय मनई एकजुट होइकै रहत अहैं। मुख्य रूप से हिँया चीनी अव अँग्रेजी दुनों भाषा बोलत हैं। आकार में बम्बई से तनी छोट ई देश में बसय वाले करीब 35 लाख कय आबादी में चीनी, मलय अउर् 8 प्रतिशत भारतीय लोग रहत अहैं।




#Article 164: सिद्धार्थनगर (120 words)


सिद्धार्थनगर या भैरहवा, दक्खिन-पच्छु नेपाल में भारतीय सीमा कय नज्दिक  एक्ठु सहर , नगरपालिका अव रूपन्देही जिला का मुख्यालय होय। ई भारत कय साथे कारोवार कय  नाका होय। यहँसे पोखरा  लगभग २०० किमी परत है। भैरहवा, लुम्विनी अञ्चल कय रूपन्देही जिल्ला मे बुटवल नगर से २० कि मि कय दूरी पे है। यकर नँवा  सिद्धार्थनगर होय। सन् १९९१ कय नेपाली जनगणना कय अनुसार यँह कै जनसंख्या 39,473 रहा।

भैरहवा कय स्थानीय निवासी अवधी अउर भोजपुरी बोलत हैं जबकि नेपाली यहँ कय राष्ट्रीय भाषा होय। ई गौतम बुद्ध कय जन्मस्थली लुम्बिनी कय प्रवेशद्वार होय। भारतीय सीमा कय लगे रहैक कारण ई आयात-निर्यात व्यापार में ढेर भूमिका देत है। इहि नाते भैरहवा कय  तराई क्षेत्र कय वाणिज्य केन्द्र भी कहा जात है।




#Article 165: सिरसा जिला (562 words)


सिरसा ज़िला भारत के हरियाणा राज्य का एक ज़िला है। ज़िले का मुख्यालय सिरसा है।

सितंबर 1975 को हरियाणा के प्रथम जिले के रूप में अस्तित्व में आया सिरसा नगर बठिंडा-रेवाड़ी पर रेलमार्ग पर तथा दिल्ली-फाजिल्का राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 10 पर स्थित है। हरियाणा के पश्चिम छोर पर बसा, पंजाब और राजस्थान की सीमाओं से सटा यह शहर मुक्तसर व बठिंडा (पंजाब) तथा गंगानगर और हनुमानगढ़ (राजस्थान) तथा हरियाणा के फतेहाबाद और हिसार जिलों के साथ लगता है। भौगोलिक दृष्टि से इसकी स्थिती अक्षांश में 29.53 तथा दक्षांश में 75.02 है तथा यह जिला 4276 वर्ग किलोमीटर में फैला है। हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ से 252 किलोमीटर दूर है। सिरसा, भारत के हरियाणा राज्‍य में स्थित ए‍क शहर है, जो राष्‍ट्रीय राजमार्ग 10 पर स्थित है।

विधानसभा क्षेत्र एवं वर्तमान विधायक

सि‍रसा जिले का नाम, इसके मुख्‍यायल सिरसा के नाम से उत्‍पन्‍न हुआ है। ऐसा माना जाता है कि सिरसा जिला, उत्‍तर भारत के सबसे पुराने जिलों में से एक है। सिरसा का जिक्र, महाभारत में भी हुआ है, हालांकि उस काल में इसे साईरिषाका के नाम से जाना जाता था। इस स्‍थल का उल्‍लेख, पाणिनी के अष्‍टाधायी और दिव्‍यावदन में भी मिलता है। महाभारत में, यह भी उल्‍लेख किया गया है कि साईरिषाका को पश्चिमी तिमाही के विजय अभियान में नकुल द्वारा लिया गया था। पाणिनी ने उल्‍लेख किया है कि सिरसा 5 वीं सदी का एक समृद्ध शहर था।

सिरसा जिले में पर्यटकों की सैर के काफी स्‍थल है। सिरसा, डेरा सच्‍चा सौदा का मुख्‍यालय है, यह एक प्रकार का धार्मिक समूह है जिसकी स्‍थापना शाह मस्‍ताना ने की थी, जिनका वास्‍तविक नाम खेमामल था। यह सेक्‍टर, अपनी सामाजिक सेवा गतिविधियों के कारण जाना जाता है और यहां सभी को मुफ्त में लंगर भी छकाया जाता है, साथ ही जनता से किसी भी प्रकार का दान भी नहीं स्‍वीकार किया जाता है। यहां का अन्‍य लोकप्रिय धार्मिक संप्रदाय, राधा स्‍वामी संप्रदाय है जो यहीं स्थित है।
सिरसा शहर से 5 किलोमीटर दूर पूवर् की ओर राधा स्‍वामी सत्‍संग घर स्थित है। सेक्‍ट, पंजाब में स्थित अमृतसर के ब्‍यास में स्थित राधा स्‍वामी मुख्‍यालय की एक शाखा है।

पर्यटक जब भी सिरसा जाएं तो वहां कगदाना में स्थित राम देव मंदिर में भी अवश्‍य जाएं। जैसा कि नाम से ही स्‍पष्‍ट है कि यह मंदिर बाबा राम देवजी को समर्पित है जिन्‍हे भारत के कई राज्‍यों, विशेषकर राजस्‍थान में और पाकिस्‍तान के सिंध में देवता के रूप में पूजा जाता है।
बाबारामदेव, गरीबों और पिछड़े वर्ग की मदद करने के लिए जाने जाते थे और उनके बारे में व उनकी चमत्‍कारी शक्तियों के बारे में कई कहानियां भी प्रचलित है। इसके अलावा, यहां आकर रामनगरिया में हनुमान मंदिर और चोरमार खेरा में गुरूद्वारा गुरू गोविंद सिंह की यात्रा भी अवश्‍य करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि सिक्‍ख गुरू अपनी रात यहीं बिताते है। यहां डेरा बाबा सारसाई नाथ मंदिर है, जिसे 13 वीं सदी में यहां बनवाया गया था, इस मंदिर को सिरसा में हिसार द्वार के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण सारसाई नाथ ने करवाया था, जो एक प्रमुख गुरू या ऋषि थे, जिन्‍होने अपने अनुयायियों के साथ मिलकर यहां प्रार्थना, ध्‍यान और कई धार्मिक अनुष्‍ठान भी किए।

सिरसा और उसके आसपास के क्षेत्रों में घग्‍गर घाटी की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्‍कृतिक की अमूल्‍य विरासत यहां एक स्‍वर्ग समान है। यहां आकर पर्यटक, भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण के उत्‍खनन स्‍थलों की यात्रा भी कर सकते है।




#Article 166: सीरिया (138 words)


सीरिया आधिकारिक रूप से सीरियाई अरब गणराज्य दख्खिन-पछ्छु एशिया कय एक राष्ट्र होय। एकरे पछ्छु में लेबनॉन अव भूमध्यसागर, दख्खिन-पछ्छु में इसरायल, दख्खिन में ज़ॉर्डन, पूरुब में इराक़ अव उत्तर में टर्की अहै। इजराएल अव ईराक कय बीचे मे होए कय नाते ई बिच-पूरुब कय एक जरुरी देश होय। एकर राजधानी दमिश्क होय जवन उमय्यद ख़िलाफ़त अव मामलुक साम्राज्य कय राजधानी रही चुका अहै। 

अप्रैल 1946 में फ्रांस से स्वाधीनता मिलय कय बाद हिँया कय शासन में बाथ पार्टी कय प्रभुत्व रहा अहै। 1963 से हिँया आपातकाल लागू हय जवने कय कारण 1970 कय बाद से हिँया कय शासक असद परिवार कय मनई रहत हँय।

सीरिया कय कार्यपालिका कय अंग होय - राष्ट्रपति, दुई उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री मंत्रीपरिषद। हिया कय विधायिका में एकमात्र सदन अहै।

न्यायपालिका कय अंग होय - सांवैधानिक उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय तथा दुई अन्य न्यायालय। 




#Article 167: सूरजकुण्ड (150 words)


सूरजकुंड हरियाणा में फरीदाबाद जिला स्थित है। यह अपने हस्तशिल्प-मेला के लिये प्रसिद्ध है।

हरियाणा की पर्यटन विभाग ने 1987 में शुरू किया था। तब से हर साल इन्ही दिनों ये मेला लगता है। इस मेले का मुख्य आकर्षण है कि भारत के सभी राज्यों में से सबसे अच्छा शिल्प उत्पादों को एक ही स्थान पर जहाँ आप न देख सकते बल्कि उन्हें महसूस कर सकते हैं और उन्हें खरीद भी सकते है। इस शिल्प मेले में आप सबसे अच्छे हथकरघा और देश के सभी हस्तशिल्प पा सकते हैं। साथ ही मेला मैदान के ग्रामीण परिवेश की अद्भुत रेंज आगंतुकों को आकर्षित कर रही है। ये मेला 16 फ़रवरी तक चलेगा। सूरजकुंड मेले में इस गांव के माहौल को न केवल शहर की सुविधा-निवासी गांव जीवन की एक स्वाद पाने के लिए, लेकिन यह भी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खरीददारों के लिए पहुँच प्राप्त करने के शिल्पकारों में मदद करता है। 




#Article 168: सेनापति जिला (412 words)


सेनापति भारत के मणिपुर राज्य का एक ज़िला है। सेनापति ज़िले का मुख्यालय है।

सेनापति जिला मणिपुर के उत्त्तरी भाग में स्थित है जो नागालैण्ड की सीमा पर पड़ता है। यह जिला पूरी तरह से पहाड पर बसा है। इसके बीचों-बीच राष्ट्रीय राजमार्ग ३९ से गुजरता है। पहाड होने के कारण यहां चा‍रों तरफ हरियाली है। इसके बीचों-बीच इम्फाल नदी भी बहती है।

कौब्रु पहाड यह यहां के प्रमुख पहाडों में से एक है। इसकी ऊंचाई लगभग २००० मी है। इसे यहां के लोग पवित्र स्थान मानते हैं और गर्मियों पर यहां चढते है। सर्दियों में यहां बहुत ठण्ड रहती है। इस पर्वत पर चढना लोग शुभ मानते हैं। गर्मियों में लोग झुण्ड बनाकर इसपर चढते हैं। लोगों का कहना है कि यहां पाण्डवों का आना हुआ था। यहां पर एक सुरंग भी है जिसमें लोगों को घुसना शुभ माना जाता है। इस पहाड पर चढने का मुख्य रास्ता मोट्बुंग नामक गांव से है।

कौब्रु लैखा यह एक शिव मन्दिर है। यह सेनापति से इम्फाल जाते वक्त्त NH-39 पर बीच में पड़ता है। यह मन्दिर इम्फाल नदी के किनारे पड़ता है। यहां की शिवरात्रि मणिपुर भर में विशेष माना जाता है। इस दिन यहां के सब बिहार निवासी एकत्रित होते हैं और शिव की पुजा करते हैं। कहते हैं कौब्रु पहाड में शिवलिंग पर चढाया गया दुध यहां के शिवलिंग पर गिरता है। लोग यहां के क्षेत्रिय कांवड में भी यहां आते हैं।

कांपोक्पी यह यहां की प्रमुख नगरों में से एक है। यह भी NH-39 के किनारे पड़ता है। इम्फाल नदी यहां से निकलती है। यहां से सेनापति और इम्फाल विपरित दिशाओं में २५ किमी दूर पडते हैं।

माओ गेट यह मणिपुर और नागालैण्ड के बोर्डर में पड़ता है। यहां से मणिपुर की सीमा प्रारम्भ होती है। यहां के निवासी नागा हैं। यह पहाड पर स्थित होने के कारण यहां पर बहुत ठण्ड पडती है। यहां से पहाडों के नजारें देखने लायक हैं।

मोट्बुंग यह दक्षिणी सेनापति में पड़ता है। यह घाटियों मं स्थित है। यह एक पहाडी बाजार है जो मंगलवार और शुक्रवार को खुलता है। यहां कुकी, मितै, नेपाली लोग रहते हैं। यहां के कुछ मुख्य स्कूलों में Baptist High School,Apex Christian High School हैं। यहां से इम्फाल तक के लिए बस चलती हैं।

चारहजारे यह मोट्बुंग से एक किमी की दूरी पर स्थित है। यह नेपालियों का गांव है। इसके किनारे कुकी जनजाति का भी गांव है। यहां दो स्कूल हैं - सनातन संस्क्रित विद्यालय और Ideal English High School। यह मेरा भी गांव है।

सपरमैना

मारम

तोक्फान




#Article 169: हरियाणा (3719 words)


हरियाणा उत्तर भारत का एक राज्य है जिसकी राजधानी चण्डीगढ़ है। इसकी सीमायें उत्तर में पंजाब और हिमाचल प्रदेश, दक्षिण एवं पश्चिम में राजस्थान से जुड़ी हुई हैं। यमुना नदी इसके उत्तर प्रदेश राज्य के साथ पूर्वी सीमा को परिभाषित करती है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली हरियाणा से तीन ओर से घिरी हुई है और फलस्वरूप हरियाणा का दक्षिणी क्षेत्र नियोजित विकास के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल है।

यह राज्य वैदिक सभ्यता और सिंधु घाटी सभ्यता का मुख्य निवास स्थान है। इस क्षेत्र में विभिन्न निर्णायक लड़ाइयाँ भी हुई हैं जिसमें भारत का अधिकत्तर इतिहास समाहित है। इसमें महाभारत का महाकाव्य युद्ध भी शामिल है। हिन्दू मतों के अनुसार महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में हुआ (इसमें भगवान कृष्ण ने भागवत गीता का वादन किया)। इसके अलावा यहाँ तीन पानीपत की लड़ाइयाँ हुई। ब्रितानी भारत में हरियाणा पंजाब राज्य का अंग था जिसे १९६६ में भारत के १७वें राज्य के रूप में पहचान मिली। वर्तमान में खाद्यान और दुग्ध उत्पादन में हरियाणा देश में प्रमुख राज्य है। इस राज्य के निवासियों का प्रमुख व्यवसाय कृषि है। समतल कृषि भूमि निमज्जक कुओं (समर्सिबल पंप) और नहर से सिंचित की जाती है। १९६० के दशक की हरित क्रान्ति में हरियाणा का भारी योगदान रहा जिससे देश खाद्यान सम्पन्न हुआ।

हरियाणा, भारत के अमीर राज्यों में से एक है और प्रति व्यक्ति आय के आधार पर यह देश का दूसरा सबसे धनी राज्य है। वर्ष २०१२-१३ में देश में इसकी प्रति-व्यक्ति  १,१९,१५८ (अर्थव्यवस्था के आकार के आधार पर भारत के राज्य देखें) और वर्ष २०१३-१४ में  १,३२,०८९ रही। हरियाणा आर्थिक रूप से दक्षिण एशिया का सबसे विकसित क्षेत्र है और यहाँ कृषि एवं विनिर्माण उद्योग ने १९७० के दशक से निरंतर वृद्धि का प्राप्त की है। भारत में हरियाणा यात्रि कारों, द्विचक्र वाहनों और ट्रैक्टरों के निर्माण में सर्वोपरी राज्य है। भारत में प्रति व्यक्ति निवेश के आधार पर वर्ष २००० से राज्य सर्वोपरी स्थान पर रहा है।

हरियाणा राज्य जाट और यादव जाति के भाईचारे का राज्य माना जाता है
और हरियाणा गुर्जरों की बलियानियत से भी जाना जाता है

हरियाणा उत्तर भारत में स्थित एक स्थलरुद्ध राज्य है। इसका विस्तार २७°३९' उत्तर से ३०°५५' उत्तर तक के अक्षांशों तक, और ७४°२८' पूर्व से ७७°३६' पूर्व तक के देशान्तरों तक है। राज्य की सीमायें उत्तर में पंजाब और हिमाचल प्रदेश, तथा दक्षिण एवं पश्चिम में राजस्थान से जुड़ी हुई हैं। उत्तर प्रदेश राज्य के साथ इसकी पूर्वी सीमा को यमुना नदी परिभाषित करती है। हरियाणा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली को भी तीन ओर से घेरता है। राज्य का क्षेत्रफल ४४,२१२ वर्ग किलोमीटर है, जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का १.४ प्रतिशत है, और इस प्रकार क्षेत्रफल के आधार पर यह भारत का इक्कीसवाँ सबसे बड़ा राज्य है। समुद्र तल से हरियाणा की ऊंचाई ७०० से ३६०० फीट (२०० मीटर से १२०० मीटर) तक है।

भौगोलिक तौर पर हरियाणा को चार भागों में बांटा जा सकता है: राज्य के उत्तरी हिस्से में स्थित यमुना-घग्गर के मैदान, सुदूर उत्तर में शिवालिक पहाड़ियों की एक पट्टी, दक्षिण-पश्चिम में बांगर क्षेत्र तथा दक्षिणी हिस्से में अरावली पर्वतमालाओं के अंतिमांश, जिनका क्षैतिज विस्तार राजस्थान से दिल्ली तक है। राज्य की मिट्टी आमतौर पर गहरी और उपजाऊ है। हालांकि, पूर्वोत्तर के पहाड़ी और दक्षिण-पश्चिम के रेतीले इलाके इसके अपवाद हैं। राज्य की अधिकांश भूमि कृषि योग्य है, लेकिन यहाँ अत्यधिक सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है।

यमुना राज्य की एकमात्र चिरस्थायी नदी है, जो इसकी पूर्वी सीमा पर बहती है। उत्तरी हरियाणा में उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर बहने वाली कई बरसाती नदियां हैं, जो हिमालय की शिवालिक पहाड़ियों से निकलती हैं। इनमें घग्गर-हकरा, चौटांग, टागंरी, कौशल्या, मारकंडा, सरस्वती और सोम इत्यादि प्रमुख हैं। इसी तरह दक्षिणी हरियाणा में भी अरावली पहाड़ियों से निकलने वाली कई नदियां दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर बहती हैं। इन नदियों में साहिबी, दोहान, कृष्णावती और इंदौरी शामिल हैं। माना जाता है कि ये सभी किसी समय सरस्वती नदी की सहायक नदियां थीं। इन नदियों पर राज्य भर में कई बाँध बने हैं, जिनमें यमुना नदी पर बने हथिनीकुंड तथा ताजेवाला बैराज, पंचकुला ज़िले में स्थित कौशल्या बाँध, यमुनानगर ज़िले में स्थित पथराला बैराज तथा सिरसा ज़िले में स्थित ओटू बैराज मुख्य हैं।

हरियाणा की प्रमुख झीलों में गुरुग्राम का बसई वेटलैंड, फरीदाबाद की बड़खल झील और प्राचीन सूरजकुण्ड, कुरुक्षेत्र के सन्निहित और ब्रह्म सरोवर, हिसार की ब्लू बर्ड झील, सोहना की दमदामा झील, यमुनानगर जिले का हथनी कुंड, करनाल की कर्ण झील, और रोहतक की तिल्यार झील इत्यादि प्रमुख हैं। सिंचाई के लिए जल की व्यवस्था हेतु राज्य भर में नहरों का जाल बिछा है, जिनमें पश्चिमी यमुना नहर, इंदिरा गांधी नहर और प्रस्तावित सतलज यमुना लिंक नहर मुख्य हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आने वाले लगभग १४,००० जोहड़ों और ६० झीलों का प्रबंधन हरियाणा राज्य वाटरबॉडी प्रबंधन बोर्ड हरियाणा के जिम्मे है। राज्य का एकमात्र गरम चश्मा सोहना में स्थित है।

२०१३ में राज्य में वन कवर ३.५९% (१,५८६ वर्ग किमी) था, और राज्य में वृक्षारोपण २.९०% (१,२८२ वर्ग किमी) था, जिसमें कुल वन और वृक्ष ६.४९% का कवर था। २०१६-१७ में, १४.१ मिलियन पौधे लगाकर १८,४१२ हेक्टेयर क्षेत्र को वन क्षेत्र के अंतर्गत लाया गया था। पूरे राज्य में कांटेदार, शुष्क, पर्णपाती वन और कांटेदार झाड़ियों को पाया जा सकता है। मानसून के दौरान, घास का एक कालीन पहाड़ियों को ढक लेता है। शहतूत, नीलगिरी, पाइन, किकर, शिशम और बाबुल यहां पाए जाने वाले कुछ पेड़ हैं। हरियाणा राज्य में पाए जाने वाले जीवों की प्रजातियों में काला हिरण, नीलगाय, पैंथर, लोमड़ी, नेवला, सियार और जंगली कुत्ता शामिल हैं। यहां पक्षियों की ४५० से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं।

हरियाणा की जलवायु साल भर में गांगेय मैदानों के समान रहती है, यहाँ का मौसम गर्मियों में बहुत गर्म, जबकि सर्दियों में मध्यम ठंडा रहता है। सबसे गर्म महीने मई और जून होते हैं, जब तापमान ४५ डिग्री सेल्सियस (११३ डिग्री फारेनहाइट) तक चला जाता है,नारनौल व हिसार गर्मी में सबसे गर्म तथा सर्दी में सबसे ठंडे शहर  और सबसे ठंडे महीने दिसंबर और जनवरी रहते है। कोप्पेन वर्गीकरण के अनुसार राज्य में तीन मौसम क्षेत्र पाए जाते हैं: राज्य के पश्चिमी तथा मध्य हिस्सों की जलवायु अर्द्ध शुष्क है, उत्तरी तथा पूर्वी क्षेत्रों की गर्म भूमध्यसागरीय, जबकि दक्षिणी क्षेत्रों की जलवायु मरुस्थलीय है।

करनाल, कुरुक्षेत्र और अंबाला जिलों के कुछ हिस्सों को छोड़कर पूरे राज्य में वर्षा कम और अनियमित है। वर्ष भर में अधिकतम वर्षा २१६ सेमी, जबकि न्यूनतम वर्षा २५ से ३८ सेमी तक रिकॉर्ड की जाती है। जुलाई से सितंबर के महीनों के दौरान लगभग ८० प्रतिशत बारिश होती है, और शेष वर्षा दिसंबर से फरवरी की अवधि के दौरान प्राप्त होती है। हरियाणा में तीन जिले ऐसे हैं जो अपने से ज्यादा ताकतवर हैं 1.रोहतक 2.सोनीपत 3.झज्जर

जाट हरियाणा में प्रमुख जाति हैं, जोकि वीर एवं साहसी जाति है, और राज्य के मतदाताओं का लगभग १७% हिस्सा बनाते हैं। बाकी मतदाताओं में ओबीसी की वीर जाति (२४%, अहीर / यादव सहित) ऊपरी जाति (ब्राह्मणों, बनियास और पंजाबियों सहित ३०%); और दलित (२१%) शामिल हैं।                  

८७.४६% आबादी के साथ हिंदू राज्य में बहुसंख्यक हैं। प्रमुख अल्पसंख्यकों में मुसलमान (७.०३%) (मुख्य रूप से मियो) और सिख (४.९१%) हैं। मुस्लिम मुख्य रूप से नूंह जिले में पाए जाते हैं। हरियाणा में पंजाब के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी सिख आबादी है, और वे ज्यादातर पंजाब के आस-पास के जिलों, जैसे हिसार, सिरसा, जींद, फतेहाबाद, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, नारनौल और पंचकुला में रहते हैं।

हिंदी २०१० तक हरियाणा की एकमात्र आधिकारिक भाषा थी और राज्य की अधिकांश आबादी (८७.३१%) द्वारा बोली जाती है। हरियाणा में ७०% ग्रामीण आबादी है जो मुख्य रूप से हिंदी की हरियाणवी बोली बोलती है। हरियाणा में ब्रजभाषा भी लोकप्रिय है, जो पलवल ज़िला और गुरूग्राम ज़िला में प्रमुखता से बोली जाती है। साथ ही साथ अन्य संबंधित बोलियां भी, जैसे बागरी और मेवाती भी बोली जाती हैं।

इसकी स्थापना १ नवम्बर १९६६ को हुई। इसे भाषायी आधार पर पूर्वी पंजाब से नये राज्य के रूप में बनाया गया। शब्द हरियाणा सर्वप्रथम १२वीं सदी में अपभ्रंश लेखक विबुध श्रीधर (विसं ११८९–१२३०) ने उल्लिखीत किया था। 

हरियाणा संस्कृत शब्द हरी और आयन से मिलकर बना है , जिसमे हरी शब्द भगवान विष्णु का सूचक है और आयन का अर्थ होता है घर , इस प्रकार से हरियाणा भगवान के घर से लिया गया है यहीं पर महाभारत का महान युद्ध लड़ा गया था , जिसमे विष्णु अवतार भगवान श्री कृष्ण ने गीता का उपदेश कुरुक्षेत्र की भूमि पर दिया था | हालाँकि कुछ विद्वान जैसे मुनि लाल ,मुरली चंद शर्मा ,HA फडके ,सुखदेव सिंह आदि का मानना है कि हरी शब्द यहाँ कि हरियाली का प्रतीक है और आयन का अर्थ होता है जंगल जो कि हरियाणा के नाम को सार्थक करता है | एवं इनके अलावा हरियाणा की उत्पत्ति अहिर+आना मतलब अहीर जाति से है क्यूँकि भगवान श्री हरी अहीर जाति से थे ओर वो हरियाणा आए थे

सिंधु घाटी जितनी पुरानी कई सभ्यताओं के अवशेष सरस्वती नदी के किनारे पाए गए हैं। जिनमे नौरंगाबाद और मिट्टाथल भिवानी में, कुणाल, फतेहाबाद मे, अग्रोहा और राखीगढी़ हिसार में, रूखी रोहतक में और बनवाली Fatehabad जिले में प्रमुख है। प्राचीन वैदिक सभ्यता भी सरस्वती नदी के तट के आस पास फली फूली। ऋग्वेद के मंत्रों की रचना भी यहीं हुई है।

कुछ प्राचीन हिंदू ग्रंथों के अनुसार, कुरुक्षेत्र की सीमायें, मोटे तौर पर हरियाणा राज्य की सीमायें हैं। तैत्रीय अरण्यक ५.१.१ के अनुसार, कुरुक्षेत्र क्षेत्र, तुर्घना (श्रुघना / सुघ सरहिन्द, पंजाब में) के दक्षिण में, खांडव (दिल्ली और मेवात क्षेत्र) के उत्तर में, मारू (रेगिस्तान) के पूर्व में और पारिन के पश्चिम में है। भारत के महाकाव्य महाभारतमे हरियाणा का उल्लेख बहुधान्यकऔर बहुधनके रूप में किया गया है। महाभारत में वर्णित हरियाणा के कुछ स्थान आज के आधुनिक शहरों जैसे, प्रिथुदक (पेहोवा), तिलप्रस्थ (तिल्पुट), पानप्रस्थ (पानीपत) और सोनप्रस्थ (सोनीपत) में विकसित हो गये हैं। गुड़गाँव का अर्थ गुरु के ग्राम यानि गुरु द्रोणाचार्य के गाँव से है। कौरवों और पांडवों के बीच हुआ महाभारत का प्रसिद्ध युद्ध कुरुक्षेत्र नगर के निकट हुआ था। कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश यहीं पर दिया था। इसके बाद अठारह दिन तक हस्तिनापुर के सिंहासन का अधिकारी तय करने के लिये कुरुक्षेत्र के मैदानी इलाकों में पूरे भारत से आयी सेनाओं के मध्य भीषण संघर्ष हुआ। जनश्रुति के अनुसार महाराजा अग्रसेन् ने अग्रोहा जो आज के हिसार के निकट स्थित है, में एक व्यापारियों के समृद्ध नगर की स्थापना की थी। किवंदती है कि जो भी व्यक्ति यहाँ बसना चाहता था उसे एक ईंट और रुपया शहर के सभी एक लाख नागरिकों द्वारा दिया जाता था, इससे उस व्यक्ति के पास घर बनाने के लिये पर्याप्त ईंटें और व्यापार शुरू करने के लिए पर्याप्त धन होता था।

हूण के शासन के पश्चात हर्षवर्धन द्वारा 7वीं शताब्दी में स्थापित राज्य की राजधानी कुरुक्षेत्र के पास थानेसर में बसायी। उसकी मौत के बाद गुर्जर प्रतिहार ने वहां शासन करना आरंभ कर दिया और अपनी राजधानी कन्नौज बना ली। यह स्थान दिल्ली के शासक के लिये महत्वपूर्ण था। पृथ्वीराज चौहान ने १२वीं शताब्दी में अपना किला हाँसी और तरावड़ी (पुराना नाम तराईन) में स्थापित कर लिया।मुहम्मद गौरी ने दुसरी तराईन युध में इस पर कब्जा कर लिया। उसके पश्चात दिल्ली सल्तनत ने कई सदी तक यहाँ शासन किया।

विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा दिल्ली पर अधिकार के लिए अधिकतर युद्ध हरियाणा की धरती पर ही लड़े गए। तरावड़ी के युद्ध के अतिरिक्त पानीपत के मैदान में भी तीन युद्ध एसे लड़े गए जिन्होंने भारत के इतिहास की दिशा ही बदल दी। ब्रिटिश राज से मुक्ति पाने के आन्दोलनों में हरियाणा वासियों ने भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। रेवाड़ी के राजा राव तुला राम का नाम १८५७ के संग्राम में योगदान दिया।

एक राज्य के रूप में हरियाणा १ नवंबर १९६६ को पंजाब पुनर्गठन अधिनियम (१९६६) के माध्यम से अस्तित्व में आया था। भारत सरकार ने २३ अप्रैल १९६६ को पंजाब के तत्कालीन राज्य को निवासियों द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं के आधार पर विभाजित करने के विचार के बाद हरियाणा के नए राज्य की सीमा निर्धारित करने के लिए न्यायमूर्ति जेसी शाह की अध्यक्षता में शाह आयोग की स्थापना की। आयोग ने ३१ मई १९६६ को अपनी रिपोर्ट दे दी, जिससे हिसार, महेंद्रगढ़, गुड़गांव, रोहतक और करनाल के तत्कालीन जिलों हरियाणा के नए राज्य का हिस्सा बन गए। इसके अलावा, संगरूर जिले की जिंद और नरवाना तहसील, और साथ साथ ही नारायणगढ़, अंबाला और जगधरी को भी इसमें शामिल किया जाना था।

आयोग ने यह भी सिफारिश की थी कि खारद तहसील, जिसमें पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ शामिल थी, को हरियाणा का हिस्सा होना चाहिए। हालांकि, हरियाणा को खड़द का केवल एक छोटा सा हिस्सा दिया गया था। चंडीगढ़ शहर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था, जो कालांतर में पंजाब और हरियाणा दोनों की राजधानी बना।

प्रशासनिक आधार पर हरियाणा को २२ जिलों में विभाजित किया गया है, जो ६ मण्डलों में समूहबद्ध हैं। इन २२ जिलों में ७२ सब-डिवीजन, ९३ तहसील, ५० उप-तहसील, १४० सामुदायिक विकास खंड, १५४ नगर तथा कस्बे, ६,२१२ ग्राम पंचायत और ६,८४१ गांव हैं।

१ नवंबर १९६६ को जब तत्कालीन पूर्वी पंजाब के विभाजन द्वारा हरियाणा राज्य की स्थापना हुई थी, तब राज्य में ७ जिले थे; रोहतक, जींद, हिसार, महेंद्रगढ़, गुडगाँव, करनाल तथा अम्बाला। २०१७ तक इन जिलों के पुनर्गठन के माध्यम से १४ नए जिले जोड़े जा चुके हैं। 

हरियाणा में कुल १५४ नगर तथा कस्बे हैं। २०११ की जनगणना के अनुसार राज्य में १ लाख से अधिक जनसंख्या वाले १८ नगर हैं: फरीदाबाद, गुरुग्राम, पानीपत, अम्बाला, यमुनानगर, रोहतक, हिसार, करनाल, सोनीपत, पंचकुला, भिवानी, सिरसा, बहादुरगढ़, जींद, थानेसर, कैथल, रेवाड़ी और पलवल।

चण्डीगढ़, जो भारत का एक केन्द्र शासित प्रदेश है, हरियाणा की राजधानी है। १ नवंबर, १९६६ को जब पंजाब के हिन्दी-भाषी पूर्वी भाग को काटकर हरियाणा राज्य का गठन किया गया, तो चंडीगढ़ शहर के दोनों के बीच सीमा पर स्थित होने के कारण इसी दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी के रूप में घोषित किया गया और साथ ही संघ शासित क्षेत्र भी घोषित किया गया था। अगस्त १९८५ में तत्कालीन प्रधान मंत्री राजीव गांधी और अकाली दल के संत हरचंद सिंह लोंगोवाल के बीच हुए समझौते के अनुसार, चंडीगढ़ को १९८६ में पंजाब में स्थानांतरित होना तय हुआ था। इसके साथ ही हरियाणा के लिए एक नयी राजधानी का सृजन भी होना था, किन्तु कुछ प्रशासनिक कारणों के चलते इस स्थानांतरण में विलंब हुआ। इस विलंब के मुख्य कारणों में दक्षिणी पंजाब के कुछ हिन्दी-भाषी गाँवों को हरियाणा और पश्चिम हरियाणा के पंजाबी-भाषी गाँवों को पंजाब को देने का विवाद था।

२०१२-१७ में १२.९६% की कंपाउंड वार्षिक वृद्धि दर और २०१७-१८ में यूएस $९५ बिलियन डॉलर की अनुमानित जीएसडीपी के साथ हरियाणा की जीडीपी भारत में १४वीं सबसे बड़ी है। हरियाणा की जीडीपी ५२% सर्विस सेक्टर, ३०% इंडस्ट्रीज सेक्टर, और १८% कृषि सेक्टर में विभाजित है।

सर्विस सेक्टर ४५% रीयल एस्टेट और वित्तीय और पेशेवर सेवाओं, २६% व्यापार और आतिथ्य, १५% राज्य और केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों, और १४% परिवहन और रसद और गोदाम में विभाजित है। आईटी सेवाओं में, गुरुग्राम विकास दर और मौजूदा प्रौद्योगिकी आधारभूत संरचना में पूरे भारत में नंबर १ स्थान पर, और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र, नवाचार और उत्तरदायित्व (नवंबर २०१६) में नंबर २ पर है।

इंडस्ट्रीज सेक्टर ६९% विनिर्माण, २८% निर्माण, २% उपयोगिताओं और १% खनन में विभाजित है। हरियाणा पूरे भारत की ६७% यात्री कार, ६०% मोटरसाइकिल, ५०% ट्रैक्टर और ५०% रेफ्रिजरेटरों का उत्पादन करता है।

सेवाओं और औद्योगिक क्षेत्रों को ७ परिचालित एसईजेड और अतिरिक्त २३ औपचारिक रूप से अनुमोदित एसईजेड (२० पहले ही अधिसूचित और ३ इन-प्रिंसिपल स्वीकृति) द्वारा बढ़ाया जाता है जो ज्यादातर दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर, अमृतसर दिल्ली कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर और दिल्ली पश्चिमी परिधीय एक्सप्रेसवे के साथ फैले हुए हैं।

कृषि क्षेत्र ९३% फसलों और पशुधन, ४% वाणिज्यिक वानिकी और लॉगिंग, और २% मत्स्यपालन में विभाजित है। हरियाणा का कृषि क्षेत्र, भारत के १.४% से कम क्षेत्र के साथ, केंद्रीय खाद्य सुरक्षा सार्वजनिक वितरण प्रणाली, और कुल राष्ट्रीय कृषि निर्यात का ७% का योगदान देता है जिसमें कुल राष्ट्रीय बासमती चावल निर्यात का ६०% शामिल है।

हरियाणा परंपरागत रूप से एक कृषि समाज रहा है। १९६० के दशक में हरियाणा में हरित क्रांति के आगमन, और फिर १९६३ में भाखड़ा बांध और १९७० के दशक में पश्चिमी यमुना कमांड नेटवर्क नहर प्रणाली के पूरा होने के परिणामस्वरूप हरियाणा में खाद्य अनाज उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। २०१५-२०१६ में, हरियाणा में १,३३,५२,००० टन गेहूं, ४१,४५,००० टन चावल, ७१,६९,००० टन गन्ना, ९,९३,००० टन कपास और ८,५५,००० टन तिलहन (सरसों का बीज, सूरजमुखी, आदि) का उत्पादन हुआ। हरियाणा दुग्ध के लिए भी जाना जाता है। राज्य में मवेशियों की कई नस्लें पाई जाती हैं, जिनमें मुर्रा भैंस, हरियाणवी, मेवाती, साहिवाल और नीलि-रवि इत्यादि प्रमुख हैं।

कृषि आधारित हरियाणा की अर्थव्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए, केंद्रीय सरकार (केंद्रीय अनुसंधान संस्थान, बफेलो, केंद्रीय भेड़ प्रजनन फार्म, इक्विनेस पर राष्ट्रीय शोध केंद्र, मत्स्य पालन संस्थान, राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, भारतीय संस्थान गेहूं और जौ अनुसंधान और राष्ट्रीय ब्यूरो ऑफ एनिमल आनुवांशिक संसाधन) और राज्य सरकार (सीसीएस एचएयू, लुवास, सरकारी पशुधन फार्म, क्षेत्रीय चारा स्टेशन और उत्तरी क्षेत्र कृषि मशीनरी प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थान) ने कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और शिक्षा के लिए कई संस्थान राज्य में खोले हैं।

हरियाणा पुलिस बल हरियाणा की कानून प्रवर्तन एजेंसी है। हरियाणा पुलिस की पांच रेंज अंबाला, हिसार, करनाल, रेवाड़ी और रोहतक हैं। इसके अतिरिक्त फरीदाबाद, गुड़गांव और पंचकुला में तीन पुलिस आयुक्त हैं। साइबर क्राइम की जांच हेतु गुड़गांव के सेक्टर ५१ में साइबर सेल स्थित है।

राज्य में सर्वोच्च न्यायिक प्राधिकरण पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय है। हरियाणा ई-फाइलिंग सुविधा का उपयोग करता है।

नागरिकों को सैकड़ों ई-सेवाओं की पेशकश करने के लिए सभी जिलों में सर्व सेवा केंद्रों (सीएससी) को अपग्रेड किया गया है, जिसमें नए जल कनेक्शन, सीवर कनेक्शन, बिजली बिल संग्रह, राशन कार्ड सदस्य पंजीकरण, एचबीएसई का परिणाम, बोर्ड परीक्षाओं के लिए प्रवेश पत्र, सरकारी कॉलेजों के लिए ऑनलाइन प्रवेश फॉर्म, बसों की लंबी मार्ग बुकिंग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और एचयूडीए प्लॉट्स स्टेटस पूछताछ के लिए फॉर्म उपलब्ध हैं। हरियाणा सभी जिलों में आधार-सक्षम जन्म पंजीकरण को लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है। डिजिटल इंडिया पहल के अंतर्गत एकीकृत यूएमएएनजी ऐप और पोर्टल के माध्यम से हजारों पारंपरिक ऑफ़लाइन राज्य और केंद्र सरकार सेवाएं भी २४/७ उपलब्ध हैं।

दिसंबर २०१७ तक हरियाणा राज्य में सड़कों की कुल लंबाई २६,०६२ किलोमीटर (१६,१९४ मील) है, जिसमें २,४८२ किलोमीटर (१,५४२ मील) राष्ट्रीय राजमार्ग, १,८०१ किलोमीटर (१,११९ मील) राज्य राजमार्ग, १,३९५ किलोमीटर (८६७ मील) प्रमुख जिला सड़क (एमडीआर) और २०,३४४ किलोमीटर (१२,६४१ मील) अन्य जिला सड़क (ओडीआर) हैं। राज्य में कुल १५ राष्ट्रीय राजमार्ग हैं, जिनमें से अधिकतर राज्य के विभिन्न हिस्सों को दिल्ली से जोड़ते हैं। हरियाणा रोडवेज का ३,८६४ बसों का बेड़ा राज्य भर में प्रति दिन १.१५ मिलियन किमी की दूरी को कवर करता है। हरियाणा देश में लक्जरी वीडियो कोच पेश करने वाला पहला राज्य था।

हरियाणा में रेल नेटवर्क ३ रेलवे जोनों के तहत ५ रेल डिवीजनों द्वारा कवर किया गया है। डायमंड चतुर्भुज हाई स्पीड रेल नेटवर्क, पूर्वी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर (72 किमी) और पश्चिमी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर (177 किमी) हरियाणा से गुजरते हैं।

उत्तर पश्चिमी रेलवे जोन के बीकानेर रेलवे डिवीजन पश्चिमी और दक्षिणी हरियाणा में भटिंडा-दबवाली-हनुमानगढ़ लाइन, रेवाड़ी-भिवानी-हिसार-बठिंडा लाइन, हिसार-सदुलपुर लाइन और रेवाड़ी-लोहारु-सदुलपुर लाइन को कवर करते हुए रेल नेटवर्क का संचालन करता है। इसी जोन के जयपुर रेलवे डिवीजन के अंतर्गत दक्षिण-पश्चिम हरियाणा का रेल नेटवर्क आता है, जिसमें रेवाड़ी-रेन्गस-जयपुर लाइन, दिल्ली-अलवर-जयपुर लाइन और लोहारु-सीकर लाइन शामिल है। उत्तरी, पूर्व और मध्य हरियाणा के क्षेत्र उत्तरी रेलवे जोन के दिल्ली रेलवे डिवीजन के अंतर्गत आते हैं, जिसके अंदर दिल्ली-अंबाला लाइन, दिल्ली-रोहतक-तोहाना लाइन, रेवारी-रोहतक लाइन, जींद-सोनीपत लाइन और दिल्ली-रेवाड़ी लाइन आती हैं। इसी जाने के अंबाला रेलवे डिवीजन के अंतर्गत उत्तर-पूर्व हरियाणा में अंबाला-यमुनानगर लाइन, अंबाला-कुरुक्षेत्र लाइन और यूनेस्को विश्व विरासत कालका-शिमला रेलवे लाइन आती हैं। दक्षिण-पूर्व हरियाणा की पलवल-मथुरा लाइन उत्तर मध्य रेलवे जोन के आगरा रेलवे डिवीजन के अंतर्गत आने वाली एकमात्र रेलवे लाइन है।

हरियाणा में साक्षरता दर में ऊपर की प्रवृत्ति देखी गई है और २०११ की जनगणना के मुताबिक यह ७६.६४ प्रतिशत है। पुरुषों में साक्षरता डॉ ८५.३८ प्रतिशत है, जबकि महिलाओं में यह ६६.६७ प्रतिशत है। २००१ में हरियाणा की साक्षरता दर ६७.९१ प्रतिशत थी; तब ७८.४९ प्रतिशत पुरुष और ५५.७३ प्रतिशत महिलाएं साक्षर थीं। २०१३ तक, हरियाणा के उच्चतम साक्षरता दर वाले नगर गुरुग्राम (८६.३० प्रतिशत), पंचकुला (८१.९० प्रतिशत) और अम्बाला (८१.७० प्रतिशत) हैं। जिलों के संदर्भ में, 2012 तक ७४ प्रतिशत के साथ रेवाड़ी में हरियाणा की उच्चतम साक्षरता दर थी, जो राष्ट्रीय औसत ५९.५ प्रतिशत से अधिक थी: पुरुष साक्षरता ७९ प्रतिशत थी, और महिला ६७ प्रतिशत थी।

हरियाणा बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन सालाना दो बार माध्यमिक, मैट्रिक, और वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर सार्वजनिक परीक्षाऐं आयोजित करता है। बोर्ड की स्थापना सितंबर १९६९ में चण्डीगढ़ में हुई थी, और १९८१ में यह भिवानी में स्थानांतरित हो गया। फरवरी और मार्च में सात लाख से अधिक उम्मीदवार वार्षिक परीक्षा में भाग लेते हैं; जबकि लगभग डेढ़ लाख प्रत्येक नवंबर में पूरक परीक्षाओं में भाग लेते हैं। बोर्ड सालाना दो बार वरिष्ठ और वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर हरियाणा ओपन स्कूल के लिए भी परीक्षा आयोजित करता है। हरियाणा सरकार बैचलर डिग्री स्तर तक महिलाओं को मुफ्त शिक्षा प्रदान करती है। हिंदी और अंग्रेजी स्कूलों में अनिवार्य भाषाएं हैं जबकि पंजाबी, संस्कृत और उर्दू वैकल्पिक भाषाओं के रूप में चुने जाते हैं।

२०१५-२०१६ में, राज्य भर में लगभग २०,००० स्कूल थे, जिनमें से १०,१०० सरकारी स्कूल (३६ आरोही स्कूल, ११ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, २१ मॉडल संस्कार स्कूल, ८७४४ सरकारी प्राथमिक विद्यालय, ३३८६ सरकारी माध्यमिक विद्यालय, १२८४ सरकारी हाई स्कूल और १९६७ सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय), ७,६३५ निजी स्कूल (२०० सहायता प्राप्त, ६,६१२ अनियोजित मान्यता प्राप्त, और ८२१ अज्ञात अवैतनिक निजी स्कूल) और कई सौ अन्य केंद्र सरकार और निजी विद्यालय थे, जैसे केन्द्रीय विद्यालय, भारतीय आर्मी पब्लिक स्कूल, जवाहर नवोदय विद्यालय और डीएवी स्कूल।

हरियाणा में २९ विश्वविद्यालय और २९९ कॉलेज हैं, जिनमें ११५ सरकारी कॉलेज, ८८ सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेज और ९६ स्वयं वित्त कॉलेज शामिल हैं। केवल हिसार में ही तीन विश्वविद्यालय हैं: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय - एशिया का सबसे बड़ा कृषि विश्वविद्यालय, गुरु जांभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय); कई राष्ट्रीय संस्थान हैं, जैसे कृषि और पशु चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (इक्विंस पर राष्ट्रीय शोध केंद्र), केंद्रीय भेड़ प्रजनन फार्म, पिग प्रजनन और अनुसंधान पर राष्ट्रीय संस्थान, उत्तरी क्षेत्र कृषि मशीनरी प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थान और मध्य इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन बफेलो (सीआईआरबी); और महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज, एग्रोहा सहित २० से अधिक कॉलेज भी हैं।

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने २७ फरवरी २०१६ को घोषणा की कि युवाओं को कंप्यूटर प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) स्थापित किया जाएगा और भारत के सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क (एसटीपीआई) की स्थापना पंचकुला के सेक्टर २३ में मौजूदा एचएसआईआईडीसी आईटी पार्क में की जाएगी।




#Article 170: हरियाणा कय पर्यटन (284 words)


हरियाणा में बहुत से पर्यटन स्थल है, जो कि निम्नलिखित हैं -

करनाल - कर्ण झील , 9 हाल गोलफ़ कोर्स , मामा बनजा सराय, मुगल पूल, कलंदर शाह का मकबरा, कनिष्क का स्तूप, मीरा साहब का मकबरा, तरवाड़ी सराय , खरोस्टि अभिलेख, राष्ट्रीय दूध डेयरी, पशु और भैंस अनुवांशिक, गेंहू अनुवांशिक संस्थान, मिट्टी लवणता (1969)।

अम्बाला - किंग फिशर , सेंटपॉल चर्च, पुराना डाक बंगला।

चरखी दादरी - कपूर की पहाड़ियां,सूरज मल सीमेंट।

रोहतक - दिनी मस्जिद, लाल मस्जिद,मैना, तिलयार झील, एशिया का सबसे बड़ा कपड़ा बाजार, हिरण पार्क, नीली कोठी ।

भिवानी - पृथ्वी राज की कचहरी, रेड रोबिन ।

पानीपत - शाह कलन्दर की मजार,काला अम्ब,काबुली बाग, ब्लू जे, पानीपत संग्राहलय, बहाल तेल शोदक, पानीपत तापीय ऊर्जा (1367MW), इब्राहिम लोदी का मकबरा ( युद्ध मे मार गया था यही)

स्काई लार्क।

सोनीपत - मामा भांजा की दरगाह,

जींद - हंस हेडर, वीरवारा , जयंती संग्राहलय,

झज्जर - पुरातत्व संग्राहलय, अरवली सुपर तापीय (1500MW),
महाात्मा गांधी तापीय , मोहनबाड़ी, भिंड़ावास (सुन्दर झीलों के लिए),

खपडवास वन्यजीव अभ्यारण, केंसर अस्पताल

रेवाड़ी - AIMS 2 , सेेंड पाईपर, लेंड पाइपर, नाहड़ वन्य जीव अभ्यारण।
फतेेेहाबाद - नाभकीय ऊर्जा , बाबा फरीद, कुुुनाल।

हिसार - जहाज कोठी,ब्लू बर्ड, ब्लेक बर्ड, गुजरी महल, लाट की मस्जिद, अग्रोहा , राखीगढ़ी, महावीर स्टटडियूम, भेस अनुसनधान, धान अनुसन्धान ,

कैथल - प्राचीन इटो का मंदिर , 11 रुद्री शिव मंदिर, रजिया बेगम का मकबरा (1240), अम्बकेस्वर मंदिर, सरस्वती वन्य जीव अभ्यारण्य।

कुरुक्षेत्र - यहां महाभारत की लड़ाई हुई थी, श्री कर्षण संग्रालय, बर्ह्म सरोवर ( चारो तरफ से पका), ज्योति सर ( जहाँ महाभारत लिखी गयी वेदवास ), कल्पना चावला मेमोरियल प्लेटोनियम, हर्ष का टीला, छिलछिला वन्य जीव अभयारण्य ।

सिरसा - लीलाधर सरस्वती संग्रालय, अबूशहर वन्य जीव अभ्यारण,

 




#Article 171: हरियाणा विधानसभा (146 words)


हरियाणा विधानसभा कय मुख्यालय चंडीगढ़ मा अहै। हरियाणा प्रदेश १ नवम्बर १९६६ का अस्तित्व मा आवा। वह्य समय एहमा 58 सीट रही जेहमा 10 अनुसूचित जातियों के बरे आरक्षित रही। मार्च 1967 मा सीट बढ़ाइ के 81 कीन गा अउर 1977 मा एहका 90 कय दीन गा जिन मा 17 सीट अनुसूचित जातियों के बरे आरक्षिति अहैं।

हरियाणा विधानसभा कय मुख्यालय चंडीगढ़ स्थित कैपिटल कॉम्पलेक्स मा अहै। ई कॉम्पलेक्स ली कारबूज़िए द्वारा डिज़ाईन कीन गय इमारतों कय समूह आय। 

कुल सीट 90, जिन मा से 17 (आरक्षित) अहँय। विस्तृत सूची के बरे हरियाणा कय विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र पन्ना देखैं।

वर्तमान मा 14ईं विधानसभा आय। शासक दल भाजपा अउर जजपा आय, मुख्यमंत्री हयेन मनोहर लाल खट्टर अउर उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला अहैं।
ज्ञान चंद गुप्ता  विधानसभा अध्यक्ष होंय अउर
डॉ रघुवीर सिंह कादियान का विधानसभा कय प्रोटेम स्पीकर बनवा गा अहै।

हरियाणा कय नवा राज्यपाल(governor):- सत्यदेव नारायण आर्य




#Article 172: हिन्दू धर्म (299 words)


हिन्दू धर्म (संस्कृत: सनातन धर्म) विश्व कय सब धर्म में सबसे पुरान धर्म होय। ई वेदन् पय आधारित धर्म होय, जवन अपने अन्दर कईयु अलग अलग उपासना पद्धति, मत, सम्प्रदाय अउर दर्शन समेटे अहै। अनुयायि कय गिन्तीन् कय आधार पय ई विश्व कय तीसरा सबसे बड़ा धर्म होय, गिन्ती कय आधार पे एकर अधिकतर उपासक भारत में अहैं अउर प्रतिशत कय आधार पे नेपाल में हँय। हालाँकि यहमें कईयु देवी-देवता कय पूजा कै जात अहै, लेकिन वास्तव में ई एकेश्वरवादी धर्म होय।श्रीमद्भगवद्गीता गीता हिन्दू धर्म कय पवित्रतम ग्रन्थन् में से एक होय। भगवान श्रीकृष्ण  गीता कय सन्देश पाण्डव राजकुमार अर्जुन कय सुनाए रहे। ई एकठु स्मृति ग्रन्थ होय। यहमा एकेश्वरवाद कय बहुत सुन्दर ढंग से चर्चा भा अहै। श्रीमद्भगवद्गीता  सातवाँ अध्याय यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रद्धयार्चितुमिच्छति। तस्य तस्याचलां श्रद्धां तामेव विदधाम्यहम्॥७- २१॥

हिन्दी मा ई धर्म कय सनातन धर्म या वैदिक धर्म भी कहा जात अहैं। इण्डोनेशिया में ई धर्म कय औपचारिक नाव हिन्दु आगम होय। हिन्दू केवल एकठु धर्म या सम्प्रदाय ही नाइ होय अपितु जीवन जीए कए एक पद्धति होय  हिंसायाम दूयते या सा हिन्दु   अर्थात् जे अपने मन, वचन, कर्म से हिंसा से दूर रहय ऊ हिन्दू होय अउर् जे कर्म अपने हित कय लिए दूसरे कय कष्ट देए ऊ हिंसा होय।

नेपाल विश्व कय एक्कय आधुनिक हिन्दू राष्ट्र रहा (नेपाल कय लोकतान्त्रिक आंदोलन कय बाद कय अंतरिम संविधान मा कवनो भी धर्म कय राष्ट्र धर्म नाई घोषित कै गय । नेपाल कय हिन्दू राष्ट्र होवे या ना होवे कय अंतिम फैसला संविधान सभा कय चुनाव से निर्वाचित विधायक करिहै)।

हिन्दू धर्म कय १९६०८५३११० साल कय इतिहास अहै। 
भारत (अउर् आधुनिक पाकिस्तानी क्षेत्र) कय सिन्धु घाटी सभ्यता मा हिन्दू धर्म कय कैउ चिह्न मिलत अहैं।
हिंदू धर्म मान्यता में पांच प्रमुख देवता पूजनीय अहै। ई एक ईश्वर कय ही अलग-अलग रूप अउर शक्ति होय। 




#Article 173: २०१५ नेपाल भूइँडोल (583 words)


२०१५ नेपाल भुइँडोल नेपाल में  ७.८ रेक्टर तीव्रता  कय २५ अप्रैल २०१५ भीन्नही ११:५६ स्थानीय समय में गय। भुइँडोल कय अधिकेन्द्र गोरखा, नेपाल से ३४ कि.मी. दूरे रहा। भुइँडोल कय केन्द्र कय गहिराई लगभग ९ कि.मी. नीचे रहा। भूकंप में कयु महत्वपूर्ण प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर अव  घर नष्ट होइ गय। १९३४ कय बाद पहिला दाइ नेपाल में एतना ढेर तीव्रता वाला भुइँडोल आ है जवनेसे ७००० से ढेर मौत होइ गा है अउर बहुत ढेर मनई घायल होइ गा हैं। भूकंप कय झटका चीन, भारत, बांग्लादेश अउर पाकिस्तान में भी महसूस कई गय। नेपाल कय साथ-साथ चीन, भारत अउर बांग्लादेश में भी ढेर मनईन कय मौत कय पुष्टि होइ चुका है। 
भुइँडोल कय नाते से सगरमाथा पर्वत पे एवलान्च आइ गय जवनेसे १७ पर्वतारोहि मरि गँय। काठमांडू में यूनेस्को विश्व धरोहर लैकय कयू प्राचीन एतिहासिक जगहिन् कय नोकसान पहुचाँ है। १८हवा सदी में बनल धरहरा कुलीयँ नष्ट होइ गवा है, अकेलय एहँसे २०० से ढेर लहास निकारि गा है।भुइँडोल कय बाद कय झटका अबहिनो भारत अव नेपाल में महसूस कई जात है।

नेपाल कय भूभाग धरती कय निचे हिन्द-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट कय यूरेशियाई प्लेट से लडय कय जगहि (जवने से हिमालय पर्वत कय निर्माण भवा रहा) दक्खीनी सीमा पे है। यहँ धरती कय निचे टेक्टोनिक प्लेट कय विस्थापन कय गति लगभग १.८ इंच प्रति वर्ष है। भूकंप कय परिमाप, स्थिति अउर परिस्थितिन् से इ पता चलत है कि भूकंप कय कारण मुख्य प्लेट कय घुस्कब होय। भूकंप कय तीव्रता यह नाते बढा कि एकर सुरुवात काठमाण्डौं  लगे रहा अव काठमांडू बेसिन में है । वहँ ढेर कुल बलुहा माटि (सेडिमेन्ट्री रक) है।

इ भुइँडोल कय सुरुवात्त गोरखा नेपाल से लगभग ३४ कि.मी. दक्खिन-पुरुब में धरती कय निचे लगभग ९ कि.मीं कय गहिराई में रहा। चीनी भुइँडोल नेटवर्क केंद्र द्वारा एकर शुरुवाती तीव्रता ८.१ तक नापि गय। संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण द्वारा एकर तीव्रता ७.५ फिर ७.९ तक नापि गय। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग कय अनुसार नेपाल कय काठमांडू से ८० कि.मी. दूर दुई प्रचंड तीव्रता वाला भुइँडोल कय झटका महसूस कै गय, पहिला ७.९एमw अउर दूसरका ६.६एमw कय परिमाप कय रहा। भुइँडोल कय अधिकेंद्र से सबसे नज़दीकी शहर ३५ किलोमीटर दूर भरतपुर, नेपाल रहा। २ तीव्र झट्कन कय बाद  ढेर दाइ कम तीव्रता (4.5mw) वाला झटका (आफ्टर शॉक) आय ।
जब भुइँडोल आय तब एवरेस्ट पर्वत पे सैकणों पर्वतारोही चढाई करत रहें। भुइँडोल कय तीव्र कम्पन कय नाते से बर्फ कय बहुत बडा परत खसकय लाग औ भूसख्लन शुरू होइ गय जवनेमें १७ से ढेर पर्वतारोहिन् कय मरेक खबर है।नेपाली अधिकारिन् कय अनुसार बरफ कय विशाल चट्टान नीचे कय ओर जोरे से गिरय लागें जवने कय नाते से एवेऱेस्ट कय बेस कैंप तबाह होइ गय औ ३७ से ढेर मनई घायल होइ गयँ।

संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण कय जालपन्ना (वेबसाइट) कय का आप महसूस करा गय (डिड यू फील इट) खंड पे मिला प्रतिक्रियन् कय अनुसार काठमांडू में भुइँडोल कय तीव्रता ९ (प्रचंड) तक रहा। भुइँडोल कय झट्का पडोसी देश भारत कय ढेर राज्य जैसय की बिहार, उत्तर प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, उत्तराखंड, उडीसा, आँध्र प्रदेश, कर्नाटक अव  गुजरात तक महसूस कै गय।एकर असर भारत कय राजधानी दिल्ली अव राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी महसूस कै गय। देवालीन् मे छोट मोट दरार उडीसाअव केरल कय कोचीन तक पाइ गय। पटना में तीव्रता ५ (मध्यम) रहा। का आप महसूस करा गय पे मिला जवाबन् कय अनुसार ढाका, बांग्लादेश में तीव्रता ४ (हल्का) रहा। भुइँडोल कय झटका अधिकेंद्र से १९०० कि.मीं दूर तिब्बत औ चेंगडू चीन में भी महसूस कै गय। पाकिस्तान औ भूटान से भी कम तीव्रता वाला झट्कन् कय महसूस करेक खबर मिला।




#Article 174: गोहूँ (255 words)


गोहूँ दुनिया कै एक्ठु प्रमुख अन्न फस़ल होय । यकर खेती लगभग दुनिया कै कुल देश मा होला । दुनिया मा फस़ल कै क्षेत्रमा गोहूँ (ट्रिट्रिकम एसपीपी.)- पहिल जगह पै है। दुनिया मा गोहूँ पैदा औ खपत करै वाले देश मा भारत एक्ठु प्रमुख देश होय। भारतीय कृषि मा धान कै बाद दुसरा जगह पै गोहूँ है। गोहूँ से पिसान बनाला । खास कइ कै पूरुब भारत औ नेपाल मा गोहूँक् पिसाने कै रोटी बनाएक खालैं। गोहूँकै पैरा गाय भैंस कै खिआवेम प्रयोग होत है । १९६०कै दशककै अन्तिम ओर हरित क्रान्ति से गोहूँकै उत्पादन मा बढिया असर परा है ।  देशमा यकर उत्पादन बढावैक  कृषि मन्त्रालयले ढेर जोड देत है। वर्तमान मा उत्तर प्रदेश, पञ्जाब र हरियाणा प्रमुख तीन गोहूँ उत्पादक राज्य होयँ। यीहै तीनो राज्य देश मा उत्पादन होय वाला गोहूँ कै करिब ७० प्रतिशत जगह समेटे हैं। ढेर उत्पादन मा उत्तर प्रदेश पहिला है लेकिन उत्पादकता (उत्पादन करेक क्षमता) मा इ पञ्जाब औ हरियाणासे पाछे है। बढिया सिँचाइ व्यवस्था कै नाते यी राज्यन मा ढेर गोहूँ पैदावार करेक क्षमता है। हरियाणा मा गोहूँ फस़ल होवै वाले ९८ प्रतिशत क्षेत्र सिँचित है अव पञ्जाब मा यकर अनुपात ९६ प्रतिशत है। लेकिन उत्तर प्रदेश मा खालि ८८ प्रतिशत गोहूँ फस़ल क्षेत्र सिँचित हैं। सिक्किम लगायत गैर-पारम्परिक राज्यन मा भि गोहूँ कै उत्पादन लोकप्रिय होत है। सिँचाइ सुविधा औ इ क्षेत्रन् खर्तिन अनुकूल होवै वाला बीया कै विकास कइ कै यी क्षेत्रन मा गोहूँ कै लोकप्रियता बढाइ जात है।

अक्टूबर-नवम्बर महिना मा इ बोइ जात है औ एकर कटिया मार्च-अप्रेल महिना मा होत है ।




#Article 175: निकोलस कोपरनिकस (214 words)


निकोलस कोपरनिकस (Nicolaus Copernicus, पोलिश: Mikołaj Kopernik; 19 फ़रवरी 1473 – 24 मई 1543) पोलिश खगोलशास्त्री अव गणितज्ञ रहें। ओन इ क्रांतिकारी सूत्र दिहे रहे कि पृथ्वी अंतरिक्ष कै केन्द्र मा नाइ है।

निकोलस पहिला युरोपिय खगोलशास्त्री रहें जे पृथ्वी कै ब्रह्माण्ड कै केन्द्र से बहरे मानिन, वन हीलियोसेंट्रिज्म मॉडल कै लागू किहिन। एकरे पहिले पूरा युरोप अरस्तू कै अवधारणा पै विश्वास करत रहा, जवने मा पृथ्वी ब्रह्माण्ड कै केन्द्र रहा औ सूर्ज, तरई अव दूसर पिंड ओकरे चारो ओर चक्कर लगावत हैं।

खगोलशास्त्री होएक साथे ओन गणितज्ञ, चिकित्सक, अनुवादक, कलाकार, न्यायाधीश, गवर्नर, सैनिक नेता औ अर्थशास्त्रो रहें। ओन मुद्रा पै शोध कइ कै ग्रेशम कै मसहूर नियम कै बनाइन, जवने कै अनुसार खराब मुद्रा बढिया मुद्रा कै चलन से बहरे कइ देत है। ओन मुद्रा कै संख्यात्मक सिद्धांत कै फार्मूला दिहिन । कोपरनिकस कै सुझाव कै नाते पोलैंड कै सरकार कै मुद्रा कै स्थायित्व मा सहायता मिला।

कोपरनिकस कै अन्तरिक्ष कै बारे मा सात नियम दिहिन, जवन ओनकै किताब मा दर्ज है : 

विशेष बात इ है कि कोपरनिकस इ निष्कर्ष बिना कवनो मसीन कै प्रयोग किहे निकारिन। ओन घंटन तक नंगा आँखि से अन्तरिक्ष कै निहारैं और गणितीय गणना से इ निष्कर्ष पावैक कोसीस करत रहें। बाद में गैलिलियो जब दूरदर्शी कै आविष्कार किहिन तौ कोपरनिकस कै बातिन कै पुष्टि भवा ।




#Article 176: ट्रकोमा (204 words)


ट्रकोमा बचावा जाय सकै वाला आन्हरपन कय एक्ठु कारण होय । इ एक्ठु आँखि कै रोग होय जवन क्लामैडिया ट्रकोम्याटिस नाँव कै बैक्टेरिया से होत है । इ सरुवा रोग होय । दुनिया मा  लगभग ८ करोड मनइन कै इ रोग है जवने में से २२ लाख कै आँखि मा समस्या है औ लगभग १२ लाख मनइ आन्हर हैं । इ रोग खास कइकै अफ्रिका ,एसिया औ दक्खिन अमेरिका मा ढेर होत है ।
इ रोग लागेक संभवाना अइसन अवस्था मा ढेर होत है:

इ रोग एक मनइ से दुसरे मनइ मा ट्रकोमा रोगी कै कंजङ्टाइभा (आँखि कै एक्ठु परत़) से निकरै वाला पानी से फैलत है जवन हवा से,पानी से ,माछी से ,हाथे से या अङोछा तौलिया से फैलि सकत है ।

बैक्टेरिया कै संक्रमण करैक बाद मनइन मा इ रोग कै लक्षन ५ से २१ दिन मा देखात है ।

इ रोग कै रोकै खर्तिन साफ वातावरण रक्खब जरुरि है जवने मा साफ पानी कै प्रयोग बहुतै जरुरि चिज होय । आपन आसपास कै वातावरण कै साफ सुथरा राखब जरुरी रहत है । माछी कै जनसङ्ख्या कम करेक उपाय अपनावैक चाँहि । इ रोग लागेक बाद मा दवाइन कै विकल्प मा मुँह से खाय वाला ओरल एंटिबायटिक औ टापिकल एंटिबायटिक है ।




#Article 177: दमा (349 words)


 अस्थमा (दमा) (ग्रीक शब्द ἅσθμα, ásthma, panting से) साँस नली कै एक्ठु जीर्ण सूजन वाला रोग होय ।एकरे नाते फेफड़ा मा हवा जाब कठिन होइ जात है।जब एलर्जन्स (एलर्जी करै वाले चीज) औ इरिटेंट्स सास नली कै सम्पर्क मा आवत हैं तब साँस लेएम सम्स्या होब या साँस फूलब दमा होए ।  आम लक्क्ष्न मा घरघराहट, खोंखी, सीना मा जकड़न औ साँस लेएम सम्स्या शामिल है।
इ समस्या दिन मे कुछ दाइ होय से लइकै हप्ता या महिना मे कुछ दिन होइ सकत है । अस्थमा कय कारण जेनेटीक औ पर्यावरणीय कारक तत्वन कै संयोजन मानि जात है ।अस्थमा कै लक्षन राति कै या कसरथ करेक बाद मा बढि सकत है । अस्थमा करावै कै पर्यावरणीय तत्व मा हवा कै प्रदूषण औ एलर्जी करावै वाले तत्व परत है जइसय फूल कै पराग ।अस्थमा कै पूरा इलाज नाई है लेकिन लक्क्षन कै रोकेक उपाय है जवने से रोगी कै कठिनाई नाइ होइ ।२०१५ मा दुनिया मा ३५.८ करोड़ मनईन कै अस्थमा रहा औ १९९० मा १८.३ करोड़ मनईन कै अस्थमा रहा । २०१५ मा ३९७,१०० मनईन कै मउत अस्थमा से भवा । अस्थमा साँस कै नली कै असर करत है । एहमे साँस कै नली कै मांसपेसी सिकूड़ जात है औ साँस कै नली से कफ़ निकरि कै उँही भठैक़ नाते साँस लेवैमे दिक्कत होवै लागत है ।

अस्थमा कै स्थायी निदान नाइ है ।अस्थमा कै उपचार कै एक्कै लक्ष्य होय कि यि कुल लक्षन कै ना होवै देब , अस्वस्थता घटाइब , तिब्र दौरा (एक्युट अटैक) आवै ना देब औ स्वस्थ जिन्दगी देब । यकरे निदान मा इन्हेल्ड कर्टिकोस्टेरोइड ,बर्कोंडाइलेटर ,ल्यूकोट्राईन एन्टागोनिस्ट औ मास्ट सेल स्टेबलाइजर जइसन दवाईकै इस्तेमाल होत है ।
दमा कै रोगिन कै ‘इन्हेलर’ तरिका (जवने मा दवाई कै इन्हेलर कै मदत से सिधै फेफड़ा तक पहुचाइ जात है) से उपचार कइ जात है। इन्हेलर से लेवैक बाद मा दवाई बहुत हाली काम करत है औ ढेर प्रभावकारी होत है। दवाई बहुतै कम मात्रा मा खून मे पहुचत है इहिकै नाते एकर ‘साइड इफ्फेक्ट’ बहुत कम होत है । दमा कै रोगिन कै इस्तेमाल करै वाला ब्रोङ्कोडाइलेटर औ स्टेरोइड दवाई इन्हेलरऽय से दइ जात है ।






#Article 179: अमरीकी डॉलर (372 words)


अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका कै राष्ट्रीय मुद्रा होय। एक डॉलर मा सौ सेंट होत हैं। पचास सेंट के सिक्का का आधा डॉलर कहा जात है। पचीस सेंट के सिक्का का क्वार्टर कहत हैं। दस सेंट कै सिक्का डाइम कहा जात है औ पाँच सेंट के सिक्का का निकॅल कहा जात है। एक सेंट का पैनी के नांव से बोलावा जात हय । डॉलर कै नोट १,५,१०,२०,५० औ १०० डॉलर मा मिलत है।

१८ वीं शताब्दी के समय स्पेन के उपनिवेशन म स्पेनी डॉलर नांव कै मुद्रा क चलन मा रही और वह्य दौरान ई मुद्रा अमेरिकव म वित्त औ वाणिज्य कै रीढ़ रही। स्पेनी डॉलर के कारन ही बाद म अमेरिका कै राष्ट्रीय मुद्रा कै नांव डॉलर परा। सन १७७५ कै अमेरिकी क्रान्ति के समय तौ स्पेनी मुद्रा कै सिक्कन कै महत्त्व अउर बढ़ि गवा अव क्रांतिकारियन कै मांग रही की हर उपनिवेश कै आपन  मुद्रा होय जेहसे कॉनटिनेंटल कांग्रेस कै भी समर्थन मिलै। डॉलर संबद्ध वइसे तौ अमेरिकी क्रान्ति के २०० साल पहिले से अंग्रेजी भाषा म मुहजबानी चलन म रहा जेहका शेक्सपियर के कइव नाटक में उल्लेख रहा। तेरह उपनिवेशों म स्पेनी डॉलर चलन म रहा, जौन बाद म संयुक्त राज्य अमेरिका बना। वर्जिनिया म भी स्पेनी डॉलर का कानूनी निविदा के रूप मा मानता मिली रही।

संयुक्त राज्य अमेरिका कै सुरुआती दिनन म, डॉलर ऊ सिक्का समझा जात रहा जेहका स्पेन  ढाले रहत रहा औ एहका स्पेनी मिल्ड डॉलर बोलावा जात रहा। यै सिक्कय वह्य समय देश म मानक मुद्रा के रूप म उपयोग म रहे। २ अप्रैल १७९२ का, अलेक्जेंडर हैमिल्टन, जौन वह्य समय राजकोष सचिव रहें, वंय चांदी कै स्पेनी मिल्ड डॉलर के सिक्कन म (जौन वह्य समय चलन म रहे) वैज्ञानिक ढंग से राशि तय कइके राष्ट्रीय कांग्रेस के सामने एक प्रतिवेदन प्रस्तुत किहिस। एह प्रतिवेदन के परिणाम भवा कि, डॉलर परिभाषित कीन गा जेहका नाप कै इकाई माना गवा जेहकै दाम सुद्ध चांदी कै ३७१ अन्नाग्राम कै ४/१६ वां भाग या मानक चांदी ४१६ अन्नाग्राम के बराबर रहा।

डॉलर चिन्हान ($) के पाछे कै इतिहास ई हय कि अमेरिकी डॉलर का देखावै की ताईं अंग्रेज़ी कै US यानी यूनाइटेड स्टेट्स (United States) का जोरि दीन गवा जेहसे अमेरिकी मुद्रा का चीन्हा जाय सकै ।

लेनदेन दर/प्रति $ - ६४.०८६८ रुपिया (सम्प्रति १५ जून, २०१५)।




#Article 180: एलन मस्क (209 words)


एलन रीव मस्क (; जनम २८ जून १९७१) एक्ठु दक्खिन अफ्रीकी-कनाडाई-अमेरिकी दिग्गज व्यापारी, निवेशक, इंजीनियर, औ आविष्कारक रहें। एलन स्पेसएक्स कै संस्थापक, सीईओ औ प्रधान डिजाइनर; टेस्ला कंपनी कै सह-संस्थापक, सीईओ औ उत्पाद कै वास्तुकार; ओपनएआई कै सह-अध्यक्ष; न्यूरालिंक कै संस्थापक औ सीईओ औ द बोरिंग कंपनी कै संस्थापक होँय। एकरे अलावा वन सोलरसिटी कै सह-संस्थापक औ पूर्व अध्यक्ष, ज़िप2 कै सह-संस्थापक औ एक्स.कॉम कै संस्थापक होँय, जवन बाद मा कॉन्फ़िनिटी कै साथे विलय होइ गवा औ ओका नँवा नाँव पेपैल मिला।
दिसंबर २०१६ मा, एलन कै फ़ोर्ब्स पत्रिका कै दुनिया कै सबसे शक्तिशाली मनइन कै सूची में २१वाँ जगह मिला। जनवरी २०१८ तक, एलन कै कुल जायदाद २०.९ अरब अमेरिकी डॉलर है, औ फोर्ब्स कै दुनिया कै ५३वा सबसे धनी मनइ कै रूप मा दर्ज कइ गवा है।
एलन कहें है कि सोलरसिटी, टेस्ला औ स्पेसएक्स कै लक्ष्य, विश्व औ मानवता कै बदलै खर्तिन ओनकै दृष्टिकोण कै चारों ओर घूमत है। ओनकै लक्ष्यन् मा सस्टेनेबल इनर्जी निकारब औ ओकर उपयोग कै माध्यम से ग्लोबल वार्मिंग कै कम करब औ मंगल ग्रह पै मनइ बस्ती कै बसाइकै मनइ कै विलुप्त होएक खतरा कै कम करब सामिल है।
अपने एकरे अलावा , एक्ठु ढेर गति परिवहन प्रणाली कै कल्पना कीहिन जवने कै हाईपरलुप कै रूप मा जाना जात है ।




#Article 181: क्रोएशिया (295 words)


क्रोएशिया दक्खिन पूरुब यूरोप यानि बाल्कन मा पानोनियन प्लेन, औ भूमध्य सागर कै बीच बसा एक्ठु देश होय। देश कय दक्खिन औ पच्छु किनारा एड्रियाटिक सागर से मिलत हय। देश कै राजधानी औ सबसे बड़ा सहर जगरेब होय, जवन तट से भीत्तर है। एड्रियाटिक सागर कै किनारे लगभग हज़ार द्वीप हैं, इ समुन्दर कै किनारे पर्यटन खर्तिन बढिया परिस्थिति है।

पूरुब यूगोस्लाविविया कै देश एकर पड़ोसी होयं जइसय - उत्तर मा स्लोवेनिया औ हंगरी, उत्तर पूरुब मा सर्बिया, पूरुब मा बॉस्निया औ हर्ज़ेगोविना औ दक्खिन पूरुब मा मोंटेंग्रो से एकर सीमाना मिलत है। एड्रियाटिक समुन्दर कै पार इटली है (350 km) जवनेकै दुसरा विश्वयुद्ध कै समय हिँया मौजुदगी रहा। हिँया कै प्रधान निवासी क्रोएट होँय जवन अपने आप कै ह्राओत कहत हैं। हिँया कय भाषा पूर्वी स्लाविक वर्ग मा आवत है।

आज जवने कै क्रोएशिया कै नाँव से जानि जात है, हुँवा सतवाँ शताब्दी मा क्रोट्स आपन कदम धरे रहें। ओन राज्य कय संगठित किहिन। तामिस्लाव पहिला कय 925 ई. मा राज्याभिषेक कइ गय औ क्रोएशिया राज्य बना। राज्य कै रूप मा क्रोएशिया आपन स्वायत्तता लगभग दुई शताब्दिन् तक बरकरार रक्खीस औ राजा पीटर क्रेशमिर चउथा औ जोनीमिर कै शासन कै दाँई आपन ऊंचाई पय पहुंचा। बरस 1102 मा पेक्टा समझौता से क्रोएशिया कय राजा हंगरी कय राजा कय साथे विवादास्पद समझौता किहिन। बरस 1526 मा क्रोएशियन संसद फ्रेडिनेंड कय हाउस ऑफ हाब्सबर्ग से सिहांसन पय बइठाइस। 1918 मा क्रोएशिया आस्ट्रिया-हंगरी से अलग होवैक घोषणा करीस यूगोस्लाविया राज्य मा सहस्थापक कै रूप मा जुडि गव। दुसरा विश्व युद्ध कय समय नाजि क्रोएशिया कय जगह पय कब्जा जमा लिहिन औ स्वतंत्र राज्य क्रोएशिया कय स्थापना कीहिन। लड़ाई खत्म होवैक बाद मा क्रोएशिया दूसरा यूगोस्लाविया कय संस्थापक सदस्य कय रूप मा शामिल होइ गवा। 25 जून 1991 मा क्रोएशिया स्वतंत्रता कय घोषणा कइकै संप्रभु राज्य बनि गवा। 




#Article 182: २०१९-२० कोरोना भाइरस महामारी (808 words)


वुहान कोरोना भाइरस महामारी (2019–20) कय सुरुआत एक्ठु नँवा मेर कय कोरोना भाइरस (2019-nCoV) कय संक्रमण कय रूप मा मध्य चीन कय वुहान शहर मा 2019 कय मध्य दिसंबर मा भवा। बहुत मनइन कय बिना कवनो कारण निमोनिया होवै लाग औ इ मिला कि ओह में से ढेर मनइ वुहान सी फूड मार्केट मा मछरि बेचत रहें अव जानवरन कै व्यापर करत रहें। चीनी वैज्ञानिक लोग बाद मा  कोरोनावायरस कय एक्ठु नँवा नसल कय पहिचान किहिन २०१९-nCoV सुरुवाती नाँव दइ गै। इ नँवा भायरस मा कम से कम 70 प्रतिशत उहै जीनोम अनुक्रम मिला जवन सार्स-कोरोनावायरस मा मिलत है। संक्रमण कय पता लगावैक एक्ठु पीसीआर परीक्षण कय बनाइन औ कयु मामलन् कय पुष्टि उ मनइन मा भवा जे सीधै बाजार से जुड़ा रहे और जे बजार से नाई जुडा रहें। पहिले इ स्पष्ट नाइ रहा कि इ भायरस सार्स जेतना तगड़ा औ घातक है कि नाइ है । 

२१ जनवरी २०२० कय चीनी प्रीमियर ली केकियांग  नोबेल कोरोना वायरस कय नाते फइलय वाला निमोनिया महामारी कय रोकय औ नियंत्रित करय खर्तिन निर्णायक औ प्रभावी प्रयास करेक चिरौरी किहिन। 14 मार्च 2020 तक दुनिया मा यसे 5,800 मउत होइ चुका है। इ वायरस कय पूरा चीन मा, औ मनई से मनई मा फइलय कय प्रमाण हैं। ९ फरवरी तक व्यापक परीक्षण मा 88,000 से ढेर मामलन कय खुलासा भवा रहा  जवने मे से कुछ स्वास्थ्यकर्मी रहें।    २० मार्च २०२० तक थाईलैंड, दक्खिन कोरिया, जापान, ताइवान, मकाऊ, हांगकांग, संयुक्त राज्य अमेरिका,  सिंगापुर, वियतनाम, भारत, ईरान, इराक, इटली, कतर, दुबई, कुवैत औ अउर 160 देशन् मा एकर मामला मिला है।  

२३ जनवरी २०२० कय, विश्व स्वास्थ्य संगठन इ महामारी कय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करे कय खिलाफ फैसला किहिस।  डब्ल्यूएचओ पहिले चेतावनी दीहे रहा कि एक्ठु बड़ा महामरी संभव है, औ चीनी नँवा साल कय आसपास फइले कै चिंता रहा ।  ढेर कुल नँवा साल कय कार्यक्रम  रद्द होइ गवा  रोग कय मामला बढैक नाते चीन मा बन जानवरन कय व्यापार, वायरस कय प्रसार औ नोकसान पहुचावैं  कय क्षमता कय बारे मा सब लोग प्रश्न उठावै लागे  

पहिला संदिग्ध मामला कय 31 दिसंबर 2019 कय WHO कय सूचित कइ गा रहा। 1 जनवरी 2020 कय बजार बंद कइ गै औ जेतना  मनइन मा कोरोनावायरस संक्रमण कय संकेत औ लक्षन रहा ओन्है अलगे कइ गै । कोरोना वायरस संक्रमण से पहिला मउत 9 जनवरी 2020 कय भवा । 

चीनी नँवा साल कय समय मा इ भाइरस सुरु भवा औ फइला औ मध्य जनवरी तक इ चीन कय दुसर राज्यन मा फइला। दुसर देसन मा : थाईलैंड (13 जनवरी); जापान (15 जनवरी); दक्खिन कोरिया (20 जनवरी); ताइवान औ संयुक्त राज्य अमेरिका (21 जनवरी); हांगकांग औ मकाऊ (22 जनवरी); सिंगापुर (23 जनवरी); फ्रांस, नेपाल औ वियतनाम (24 जनवरी); ऑस्ट्रेलिया औ मलेशिया (25 जनवरी); कनाडा (26 जनवरी); कंबोडिया (27 जनवरी); जर्मनी (28 जनवरी); फिनलैंड, श्रीलंका औ संयुक्त अरब अमीरात (29 जनवरी); भारत, इटली औ फिलीपींस (30 जनवरी); यूनाइटेड किंगडम, रूस, स्वीडन औ स्पेन (31 जनवरी)। 1 फरवरी तक, दुनिया भर मा 14,000 से ढेर मामलन् कय पुष्टि भवा। 1 फरवरी कय फिलीपींस मा चीन से बहरे कय देस मा पहिला मउत भवा । वियतनाम, जापान, जर्मनी औ संयुक्त राज्य अमेरिका (विशेष रूप से शिकागो) मा स्थानिय मनइन से मनइन मा फइलेक पुष्टि भवा ।  29 जनवरी कय विश्व स्वास्थ्य संगठन नोवेल कोरोनवायरस कय प्रकोप कय आपातकाल घोषित किहिस ।

पिडित मनइ कय कवनो भि लक्षन नाइ होइ सकत है लेकिन जेका लक्षन होत है ओन लोगन कय बोखार आइब,खोंखि आइब ,गटई खसखसाब,साँस फूलब ,पेट झरब जइसन समस्या होइ सकत हय । समस्या मामूली से लइकै गंभिर तक होइ सकत है । गंभिर समस्या मा निमोनिया औ एक्यूट रेस्परेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम होइ सकत है ।
प्रोफेसर विल्सन कय अनुसार, कोविड-19 से संक्रमित मनई कय चार श्रेणिन् मा बांटि सका जात है। पहिला श्रेणी मा उ मनइ आवत है जवने मा कवनो लक्षन नाइ देखात है । ओकरे बाद उ मनइ आवत है जेकरे मा उप्पर कय साँस नलि मा संक्रमण होत है यहँ मा संक्रमित मनइ कय बोखार, कफ, मुड़ पिराब या कंजक्टीवाइटिस (आंखि कय बीमारी) कय लक्षन होत है। इ लक्षन वाले मनइ संक्रमण फइलाय सकत हैं । तीसरा श्रेणी मा कोविड-19 पॉजिटिव मनइ होत हैं,जवने मा निमोनिया जइसन लक्षन होत है औ उ लोग अस्पताल मा रहत हैं। चौथा श्रेणीन् कय मनईन मा निमोनिया जइसन बीमारी कय गंभीर रूप होत है ।

कोरोना वायरस मुख्य रूप से हवा कय छिँटा कय माध्यम से फइलत है जब एक्ठु संक्रमित मनई खोंखि या लगभग 3 फीट (0.91 मीटर) से 6 फीट (1.8 मीटर) कय दायरा मा छींकत है। इ दुसर कोरोना वायरस कय जइसन हैंडिल औ रेलिंग से भि फइल सकत है।

इ महामरी से बचेक एक्कै उपाय है कि संक्रमित मनइ कय साँस कय छिँटा से अपने आप कय दूर रक्खब । ओकरे खर्तिन साबुन पानी से हाथ धोइब ,मास्क पहिरब जरुरी हय ।

सीडीसी, एनएचएस, औ डब्ल्यूएचओ मनइन कय इहो कहत है कि बिना धोय हाथ आंखि,नकूना औ मुंह कय छूवै से बचैं।

कोरोना भाइरस




#Article 183: जेम्स म्याडिसन (175 words)


जेम्ज़ मैडिसन (James Madison) एक्ठु अमेरिकी राजनेता औ राजनैतिक दार्शनिक रहें जे १८०९-१८१७ काल मा अमेरिका कय चउथा राष्ट्रपति रहें। ओन अमेरिका कय संविधान बनावै मा जरूरि भूमिका निभाइन इहि कय नाते एन्हय 'अमेरिकी संविधान कय जनक' भी कहि जात है। अमेरिका कय मसहुर अधिकार विधेयक ओन्हि लिखे रहे औ पारित करावै रहे।

१७७६ मा अमेरिका कय स्वतन्त्र होएक बाद मा मैडिसन अउर अमेरिकी राजनैतिक विचारन् कय साथे मिलिकय संविधान कय रचना किहिन। एकरे बाद इ दस्तावेज़ कय स्वीकृत करवाइ कय नँवा राष्ट्र मा लागू करेकै ज़रुरत रहा। कयु राजनेता एकरे विरोध मा रहे औ चाहत रहे कि अमेरिका कय तेरह उपनिवेशन कय एक्ठु सूत्र मा बान्हयक जगहि अलग-अलग देस जइसन होँय। मैडिसन ऐलॅक्सैण्डर हैमिलटन औ जॉन जे कय साथे मिलिकय १७८८ मा 'फ़ेडेरेलिस्ट पेपर्ज़​' (अर्थ: संघ-समर्थक काग़ज़ात​') नाँव से संविधान खर्तिन समर्थन बनावै खर्तिन एक्ठु लेख कय शृंखला प्रकाशित कीहिन। १७८९ में यह संविधान मंज़ूर होने के बाद लागू हो गया।

मैडिसन कय आधुनिक काल मा इ बात पय निंदा होत है कि ओन अमेरिका मा उ समय कय गुलाम-प्रथा मा पूरा भागीदार बनें। 




#Article 184: डेंगू (254 words)


डेंगू बोख़ार एक्ठु संक्रमण होय जवन डेंगू वायरस कय नाते होत है।संक्रमण कय बाद डेंगू कय लक्षन देखाय मा ३ से ७ दिन लागि सक़त़ है औ इ निक होय मा २ से ७ दिन लागि सक़त़ हय ।   एडिज़ मच्छर से डेंगू कय वायरस फइलत है। डेंगू बोख़ार कय हड्डीतोड़ बोख़ार कय नाँव से भी जानि जात है, काहे से डेंगू कय बिमारी मा अइसन पीरा होत है कि लागि हड्डी टूटि गवा है। डेंगू बोख़ार कय कुछ लक्षनन् मा बोखार; मूड़ पिराब; चमड़ा पय चेचक जइसन लाल दाग औ मांसपेशिन् औ गाठिन् कय दर्द सामिल है। कुछ लोगन् में, डेंगू बोख़ार एक या दुई अइसन रूप मा होइ सकत है जवन जिन्दगी खर्तिन खतरा होइ सकत हैं। पहिला, डेंगू रक्तस्रावी बोख़ार होय, जवने कय नाते देहि से खून बहब (ब्लिडिङ) औ प्लेटलेट्स  कय स्तर कम होइ सकत है। दूसर डेंगू शॉक सिंड्रोम होय, जवने से खतरनाक रूप से कम ब्लड प्रेसर होइ सकत है।
डेंगू वायरस ५ मेर कय होत है। यदि कवनो मनई कय ई में से कवनो एक मेर कय वायरस कय संक्रमण होइ जाइ तव आमतौर पय ओकर पूरे जीवन मा उ मेर कय डेंगू वायरस से बचाव मिलि। लेकिन बाकी कय चार मेर से उ कुछ समय तक सुरक्षित रहि। औ अगर फिर बाकि कवनो से अगर ओका संक्रमण होइ तव ओका गंभीर समस्या होएक संभावना ढेर रहत़ है।
यकरे ईलाज खर्तिन कवनो दवाई या भैक्सिन नाइ है औ एकरे बेऱमिहऩ कय लक्षन कय अनुसार दवाई होत है । यसे बचेक एक्कै उपाय है मच्छडऩ से बचब़ ।




#Article 185: टीबी (129 words)


क्षयरोग या टिबी (ट्युबरक्युलोसिस) विश्व भर फैलल संक्रामक रोग होय। माइकोब्याक्टेरिया नाँव कय बैक्टेरिया कय स्ट्रेन कय नाते इ रोग होत हय लेकिन खास कइकय माइकोब्याक्टेरियम ट्युबरक्युलोसिस नाँव कय ब्याक्टेरिया कय नाते टीबी लागत है। खास कइकय इ फेफड़न मा असर करत़ है लेकिन देहि कय अउर भागन मा भि इ असर कइ सकत हय जइसय आँत औ हड्डी। इ रोग लागल मनइन मा अगर सक्रिय किटाणु हैं तव ओकरे साँस से, छिँकत़ या  खोखत़ निकरय वाला छिँटा से इ रोग फइल सकत है। ढेर संक्रमणन मा लक्षन नाइ देख़ा ला ओका ल्याटेन्ट ट्युबरक्युलोसिस कहत़ हैं । करीब दस मा एक्ठु ल्याटेन्ट ट्युबरक्युलोसिस धिरे धिरे सक्रिय रोग बनि सकत़ है। यदि समय मा इलाज ना भवा तव संक्रमित मे से ५०% बेऱमिहन कय टिबी से मौत होइ सकत है। 




#Article 186: सोरियासिस (162 words)


सोरियासिस (psoriasis) चमड़ा कय यक्ठु रोग होय । इ रोग मा चमड़ा मा लल्छँहा छिलका या परत़ जइसन(स्केल) देख़ा ला। इ अटोइम्युन रोग होय ।अटोइम्युन रोग माने अइसन रोग जवन देहि कय इम्युन सिस्टम कय खराब प्रतिक्रिया से होत है। इ देहि कय कवनो भाग मा छोट छोट चकती जैसन होत हय या तव पुरा देहि मा होइ जात हय ।इ वंसानुगत रोग होय जवन प्रयावरण कय कुछ चिजन कय नाते सक्रिय होइ जात है । अगर जुड़वन मे से कवनो एक कय सोरियासिस हय तव दुसरके कय सोरियासिस होएक संभावना ३ गूना ढेर रहत है ।यकर लक्षन जाड़ा कय मौसम मा अउर ख़राब होइ जात है । कवनो इन्फेक्सन या चिन्ता से भि यकर लक्षन खराब होइ सकत है । इ छुवाछुत कय रोग नाइ होय । इ रोग कय पहिचान यकरे लक्षन से होत है ।

यकर कवनो निदान नाइ है लेकिन यकर इलाज स्टेराइड़,विटामिन डी ,यूवी लाइट औ इम्युन सिस्टम कय दबावै वाला दवाई जइसय मेथोट्रिक्जेट से होत हय।




#Article 187: कुष्ठरोग (605 words)


कुष्ठरोग या कोढ़ (Leprosy) या हैन्सेन कय रोग (Hansen’s Disease) (एचडी) (HD),चिकित्सक गेरहार्ड आर्मोर हैन्सेन (Gerhard Armauer Hansen) कय नाँव पय, माइकोबैक्टेरियम लेप्री (Mycobacterium leprae) औ माइकोबैक्टेरियम लेप्रोमेटॉसिस (Mycobacterium lepromatosis) जीवाणुन् कय नाते से होय वाला दीर्घकालिक बेमारी होय । .यकरे संक्रमण से नसा , साँस कय नली ,चमड़ा औ आखिँ कय हानि करत हय । नसा कय हानि से मनइ कय पीरा महसुस करेक क्षमता घटि जात है जवने कय नाते गोड़े या हाथे मा चोट या कवनो संक्रमण से ऊ अंग भंग होयक संभावना बहुतै ढेर रहत है ।
इ रोग छुयै से लागै वाला रोग होय , कुष्ठरोग बेमार कय खोखिं कय छिँटा से या नकूना कय पानी से इ रोग दुसरे स्वस्थ मनइ कय लागि सकत हय ,लेकिन बहुत ढेर सम्पर्क होब जरुरि रहत हय औ लगभग सम्पर्क मा आवल ९५% मनइन कय इ रोग नाइ लागत हय । मनई कय इम्यून तंत्र यहमा बड़ा भूमिका खेलत हय । गर्भवति मेहरारू से ओकरे लरिका मा इ रोगि नाइ नाइ फैलत हय ना तव यौन संपर्क से इ रोग फइलत हय । गरीबी मा रहय वाले लोगन मा इ रोग ढेर पाय जात हय काहे से अइसन ढेर अवस्था मा रहय कय खर्तिन कम जगह होत हय औ किटाणु से छुवाय कय संभावना ढेर रहत हय । 
इ रोग दुई मेर कय होत हय : पौसी बैसिलरी औ मल्टी बैसिलरी । पौसी बैसिलरी रोग मा चमड़ा मा ५ या ओसे थोरय कम संवेदनसील चकती या धब्बा होत हय । मल्टी बैसिलरी मा  चमड़ा ५ से ढेर धब्बा होत हय जवने मा पीरा मह्सुस करय वाला क्षमता कम होत हय ।

माइकोबैक्टेरियम लेप्री (Mycobacterium leprae) औ माइकोबैक्टेरियम लेप्रोमेटॉसिस (Mycobacterium lepromatosis) जीवाणुन् कय नाते से इ रोग होत हय । माइकोबैक्टेरियम लेप्रोमेटॉसिस (Mycobacterium lepromatosis) नँवा
मेर कय माइकोबैक्टेरियम होय । इ एसिड़ फास्ट बैक्टेरिया होय । 

इ रोग लागैक सबसे बडा जोखिम होय इ रोग लागल मनई कय सम्पर्क मा आइब।जे कुष्ठरोग कय रोगी कय सम्पर्क मा हय ओका इ रोग लागैक संभावाना अउर मनइन से ७ से ८ गूना ढेर रहत हय ।कम बिछौना, दूषित पानी औ कम खाना, जइसन खराब स्थिति या इम्यून तन्त्र कय घटावय वाला अउर रोग जइसय एचाआइभी मा इ रोग लागैक जोखिम ढेर रहत हय । कोढ़ लागा कूल मनइन मा लक्षन नाइ देखाय सकत हय । 

कुष्ठरोग इ रोग कय रोगिन से बहुत लम्मा सम्पर्क औ नकुना कय पानी से होत हय । पुरान खोज कय अनुसार इ रोगा चमड़ा कय सम्पर्क से फइलत हय लेकिन नँवा खोज मा इ पता लाग हय कि साँस कय नली से एकर किटाणु देहि मा हलत़ हँय । यौन संपर्क से औ माई से गर्भ मा लरिका कय इ रोग नाइ लागत हय ।

एकर लक्षन बहुत मेर कय होइ सकत हय जइसय -नकूना से पानि बहब ,मूड़ कय चमडा झूर होब,चमडा मा लाल ,चमकिल औ झुर चकती आइब औ उ जगह पय मह्सुस करैक क्षमता कम होब , कुछ जगह पय चेहरा कय चमडा,कान,हाथे कय चमडा मोट होइ जाब,अंगुठा पय कम महसुस होब ,नकुना कय कार्टिलेज़ नष्ट होएक नाते नकूना चिप्टा होइजाब । एकर पहिला लक्षन चमडा पय लल्छँहु या फिक्का रङ कय धब्बा या चकती देखाब होय जवने पे गरम ठंढ या पीरा कम मह्सुस होत हय । अगभग ३०% मनईन मा नसा नष्ट होइ जात हय जवने कय नाते मांसपेसी कमजोड औ नसा कय काम करय वाला जगह सुन्न होइ जात हय । 

इ रोग दवाई से नीक होइ जात हय । पौसी बैसिलरी खर्तिन ६ महिन्ना तक डैप्सोन (dapsone) औ रिफाम्पिसिन (rifampicin) दवाई खायक परत हय । मल्टिबेसिलरी कुष्ठ रोग कय उपचार खर्तिन १२ महिन्ना तक रिफाम्पिसिन (rifampicin), डैप्सोन (dapsone) औ क्लोफेजिमिन (clofazimine) खाएक परत हय। इ दवाई विश्व स्वास्थ्य सङ्गठन सेती मे देत हय ।




#Article 188: मलेरिया (147 words)


मलेरिया रोग मासा कय काटय से फइलय वाला रोग होय ।इ रोग मनई अव दुसरे जानवरन कय भि लागि सकत हय । मलेरिया प्लाज्मोडियम नाँव कय प्रोटोज़ोवा से होत हय जवने कय मासा फइलावै कय काम करत हय । मलेरिया मा तेज़ बोखार ,थकान ,जुडि औ कपकपी होत हय । यकरे अउर लक्षन मा उल्टि आइब औ गम्भिर अवस्था मा सिज़र ,पीलिया,कोमा औ मउत भि होइ सकत हय । मासा कय काटय से अगर प्लाज़्मोडियम परजिवि देहि मा चलि गय तव १० से १५ दिन मा लक्षन देखायक सुरु होत हय । एक दाँइ मलेरिया लागैक बाद मा यदि दुसरा दाई मलेरिया लागि तव लक्षन बहुत ह्ल्का देखाइ । इ देहि मा पहिला संक्रमण से बनय वाला एन्टिबडी या रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता कय नाते से होत हय लेकिन अगर एक साल मलेरिया कय किटाणु से सम्पर्क ना होय तव इ रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता खतम होइ जाइ ।




#Article 189: उरुग्वे (165 words)


उरुग्वे दक्खिन अमेरिका कय दक्खिन पुरुब हिस्सा कय एक्ठु देश होय । देश मा रहय वाला लगभग 35 लाख कय आबादी में से 11 लाख मनइ राजधानी मोंटेवीडियो औ ओकरे महानगरीय जगहन् मा रहत हँय। देश कय 88–94% आबादी यूरोपीय औ मिलाजुला वर्ण कय मनई हैं।

उरुग्वे कय जमीनी सीमा खाली ब्राजील से, उत्तर मा रियो ग्रांड दो सूल से मिलत है। यकरे पच्छु मा उरुग्वे नदी, दक्खिन पच्छु मा रियो दी ला प्लाता कय मोहाना औ दक्खिन पुरुब मा दक्खिन अंध महासागर है। उरुग्वे दक्खिन अमेरिका मा सूरीनाम कय बाद दूसरा सबसे छोट देश होय। 

उरुग्वे मा सबसे पुरान यूरोपीय कालोनी कोलोनिया डेल स्कारमेंटो कय स्थापना पुर्तगाल 1680 मा किहे रहें । मोटेवीडियो कय स्थापना स्पेनियो 18वीं सदी कय शुरुआती दउर मा सैन्य गढ़ कय रूप मा भवा रहा । उरुग्वे  1825-1928 कय बीच स्पेन, अर्जेन्टीना औ ब्राजील कय बीच मा तीन तरफा लड़ाई कय बाद स्वतंत्रता हासिल कीहिस। हिँया संवैधानिक लोकतंत्र है, जहां राष्ट्रपति राज्य कय साथे-साथे सरकार कय भी मुखिया होत है।




#Article 190: न्यूमोनिया (407 words)


न्यूमोनिया या निमोनिया फेफडा कय सूजन कय कहत  हँय जवन छोट हवा कय थइलि अल्भ्योलाई(Alveoli) कय असर करत हय ।यकरे लक्षन मा कफ या खेखार आईब , खोंखि आइब , सीना पिराब,बोखार आइब औ साँस फूलब होय । यकर गंभिरता ढेर मेर कय होइ सकत हय ।

न्यूमोनिया लागल मनईन मा कफ सहित कय खोंखी ,बोखार कय साथ मा जूडि औ कपकपी ,साँस फूलब , सीना मा चोंखलार पीरा,अव हाली हाली साँस लेब होय । बूढ लोगन मा घडबडाहट औ भ्रम भि होइ सकत हय ।बोखार निमोनिया कय पहिचान करय वाला लक्षन नाइ होय बोखा अउर रोगन मा भि होइ सकत हय औ बूढ मनइ ,कुपोषण औ रोग से बचैक क्षमता कम रहय वाले लोगन मा बोखार मौजुद नाइ रहि सकत हय । ५ साल से छोट लरिकन मा खोंखि ,बोखार औ हाली हाली साँस लेवैक लक्षन रहत हय । २ महिना से छोट लरिकन मा खोंखि नाइ रहत हय । छोट लरिकन कय गम्भिर लक्षन मा चमडा कय रङ्ङ निलहा होइ जाब , मिर्गी जइसन दौरा आइब ,खाब पिएब बन्द कइ देब ,बिहोस होइ जाब ,उल्टी करब औ  बहुत तेज़ बोखार आइब होय ।स्ट्रेप्टोकोकस नाँव कय किटाणु से होय वाला निमोनिया मा मूर्चा रङ कय खेंखार आवत हय औ क्लिब्जेला नाँव कय किटाणु से होय वाला निमोनिया मा लाल रङ्ङ कय खेंखार आवत हय ।

न्यूमोनिया एक्ठु संक्रमण होय जवन ढेर कइकय भाइरस या बैक्टेरिया से होत हय । इ दुसर किटाणुन से भि होइ सकत हय जइसय फफुंद से या कवनो दवाई से भि इ लागि सकत हय । इ रोग कय जोखिम मा सिस्टिक फाइब्रोसिस , सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज),दमा,डायबटिज़ ,हार्ट फेलिएर कय मरिज़,सिगरेट बिंडि पिय वाले लोग ,बँढिया से खोंखि ना पावै वाले लोग जइसय स्ट्रोक कय मरिज रहत हँय ।

इ रोग कय पता एकरे लक्षन औ देहि कँय जाँच से लागत हय । खून कय जाँच,सीना कय एक्सरे,खेँखार कय जाँच डायगनोसिस कय पूख्ता करत हय । 
न्यूमोनिया दुइ मेर कय होत हय एक्ठू समाज मा लागल औ दुसर अस्पताल मा लागल न्यूमोनिया ।

कुछ मेर कय न्यूमोनिया से बचैक भैक्सिन हय ।इन्फ्लुएन्ज़ा भैक्सिन इन्फ्लुएन्ज़ा से होवै वाला निमोनिया से बचावत हय । यसे बचैक दुसर उपाय हाथ धोइब औ सिगरेट बिडि ना पिएब होय । यकर निदान न्यूमोनिया कवनो कारण से भवा हय ओहपे निर्भर रहत हय ।बैक्टेरिया से होय वाले निमोनिया मा एंटिबायटिक दइ जात हय । अगर न्यूमोनिया ढेर गंभिर हय तव बेरमिहा कय अस्पताले भर्ना करब जरूरी हय औ ओन्है आक्सिजन कय जरुरत परि सकत हय । 




#Article 191: इनफ़्लुएंज़ा (122 words)


इनफ़्लुएंज़ा जवने कय फ्लू भि कहत हँय एक्ठु संक्रमण होय जवन इनफ़्लुएंज़ा भाइरस से होत हय  । यकर लक्षन कम से एकदम गम्भिर होइ सकत हय । सबसे आम लक्षन मा बोखार , नकूना बहब , गटइ खसखसाब औ कुछ खाय पिए मा परेसानी होब , गाँठि औ मांसपेसिन मा पीरा , मूड पिराब ,खोंखि औ आलस लागब होय । मनइन कय देहि मा भाइरस हलेक बाद २ से ७ दिन मा यकर लक्षन देखायक सुरु होत हय । खोंखि एक हप्ता से ढेर रहि सकत हय ॥ छोट लरिकन मा पेट झरब , उल्टि आय सकत हय लेकिन बडवारन मा इ लक्षन नाइ रहत हय  । यकरे नाते निमोनिया ,दुसर बैक्टेरिया कय संक्रमणा औ साइनस मा संक्रमण होइ सकत हय ।  




#Article 192: खसरा (114 words)


खसरा छूतहा रोग होय । इ मिज़ल्स भाइरस से होत हय । यकर लक्षन किटाणु से या रोगी से सम्पर्क मा आवै का बाद मा १०से १२ दिन बाद मा देखात हय औ इ ७ से १० दिन तक रहत हय । यकरे लक्षन मा बोखार,खोंखि,नकूना बहब,आंखि लाल होइ जात हय । लक्षन देखायक २ से ३ दिन बाद रोगी कय मुँह कय भित्तर छोट कय उज्जर कय दोदरा देखात हय जवने कय कोप्लिक कय दोदरा कहत हँय ।३से ५ दिन मा चेहरा कय चमडा मा लाल कय चिपटा दोदरा  निकरि आवत हय जवन पूरा देहि मा फैलि जात हय । इ संक्रमण मा न्यूमोनिया,मिर्गी जइसन दौरा, इन्सेफलाइटिस,बहिरापन जइसन जटिलता आय सकत हय ।




#Article 193: कोलम्बिया (168 words)


कोलम्बिया दक्खिनी अमरीका महाद्वीप कय उत्तर-पच्छु मा स्थित एक्ठु देश होय। देश कय राजधानी बोगोटा होय। कोलम्बिया कय पुरुब मा वेनेजुएला  अउर ब्राजील, दक्खिन मा इक्वेडोर  अउर पेरू, उत्तर मा केरेबियन सागर, उत्तर पच्छु मा पनामा  अउर पच्छु मा प्रशांत महासागर हय। क्षेत्रफल कय हिसाब से कोलंबिया दुनिया कय 26वां  अउर दक्खिन अमेरिकी महाद्वीप कय चउथा बड़ा देश होय। आबादी कय लिहाज से कोलंबिया दुनिया कय 29वां अउर दक्खिन अमेरिकी महाद्वीप मा ब्राजील कय बाद दूसरा सबसे बड़ा देश होय। कोलम्बिया मा मेक्सिको  अउर ब्राजील कय बाद स्पेनिश बोलय वाला सबसे ढेर मनइ रहत हैं।

कोलंबिया एक्ठु बहुसांस्कृतिक देश होय। हिँया कय मूल निवासिन् कय अलावा पंद्रहवा शताब्दी मा आये स्पेनिश  अउर उन्नीसवी सदी मा दास प्रथा कय लिए लाय गए अफ़्रीकी मनइन कय नाते इ बहुत मेर कय सांस्कृतिक परम्परन् वाला देश होय। बीसवी सदी मा यूरोप  अउर मध्य एशिया कय भी लोग हिँया आयक बसय से हिँया उनकय संस्कृति कय भी झलक मिलत है।

कोलम्बिया ३२ विभाग (प्रांत) औ एक राजधानी जिला क्षेत्र मा बटा है।




#Article 194: ईक्वाडोर (122 words)


ईक्वाडोर, आधिकारिक तौर पय इक्वाडोर गणराज्य (शाब्दिक रूप से, भूमध्य रेखा कय गणराज्य), दक्खिन अमेरिका कय एक्ठु प्रतिनिधि लोकतांत्रिक गणराज्य होय। देश कय उत्तर मा कोलंबिया, पूरुब औ दक्खिन मा पेरू औ पच्छु कय ओर प्रशांत महासागर है। इ एक दक्खिन अमेरिका मा उ दुई देसन (दुसरका चिली) में से है, जवने कय सीमा ब्राजील कय साथे नाइ मिलत है।देश कय हिस्सा में मुख्य भूमि कय पच्छु मा प्रशांत महासागर मा स्थित गालापोगोस द्वीप भी आवत है। भूमध्य रेखा, जवने कय आधार पय देश कय नाँव राखि गा है, इक्वाडोर कय दुई भागन मा बाँटत है। यकर राजधानी क्विटो औ सबसे बड़ा सहर गुआयाकिल होय।

इक्वाडोर 24 प्रांत (स्पेनिश: provincias) मा बांटि गा है, हर एक प्रांत आपन प्रशासनिक राजधानी कय साथे:-




#Article 195: भौगोलिक निर्देशांक प्रणाली (251 words)


भूगोलीय निर्देशांक प्रणाली (अंग्रेज़ी:) एक मेर कय निर्देशांक प्रणाली होय , जवने से पृथ्वी पय कवनो भी जगह कय स्थिति तीन (३) निर्देशांकन् कय माध्यम से निश्चित कइ सका जात हय । यि गोलाकार निर्देशांक प्रणाली से दइ जात है।

अक्षांश (अंग्रेज़ी:लैटिट्यूड, Lat., φ, या फ़ाई) पृथ्वी कय सतह पय एक्ठु बिन्दु से भूमध्य रेखा तक बना कोण होत है, जवने कय ग्लोब कय केन्द्र पय नापि जात है। एक्कय अक्षांश बिन्दुन कय जोड़य वाली रेखन कय अक्षांश रेखा कहत हैं। अक्षांश कय रेखा कुल इ देखाव मा क्षैतिज औ सीधा लागत हैं, लेकिन वे अलग अलग अर्धव्यासन् वाला और गोल होत हैं। एक अक्षांश पय मौजुद कुल जगह एक्कय लागे जुडिकय अक्षांश कय गोला बनावत हैं। यि कुल गोला भूमध्य रेखा कय समानांतर होत हैं। यन्हन मा भौगोलिक उत्तरी ध्रुव ९०° उत्तर कोण पय रहत है; अव भौगोलिक दक्खिनी ध्रुव ९०° दक्खिन कोण पय। शून्य अंश (0°) अक्षांश रेखा कय भूमध्य रेखा कहत हैं। इ ग्लोब कय उत्तरी अव दक्खिनी, दुई गोलार्धन् मा बांटत है। 

देशांतर (अंग्रेज़ी:लॉन्गीट्यूड, Long., λ, या लैम्ब्डा) दुनों भूगोलीय ध्रुवन् कय बीच खींचा काल्पनिक मध्याह्न रेखन् कय सन्दर्भ देशांतर रेखा से पूरुब या पच्छु में बना कोण होत है औ जवन मध्याह्न रेखा जवने बिंदु या जगह से जात है ओकर कोणीय मान उ जगह कय देशांतर होत है। कुल देशांतर रेखा अर्ध-गोलाकार होत हैं। इ समांनांतर नाइ होती हैं अव उत्तरी अव दक्खिनी ध्रुवन पय जुडत हैं।

कोण कय लिखे कय कयु तरिका होत हैं, कुल एक्कय अक्षांश, देशांतर कय क्रम मा लिखि जात हय।




#Article 196: पैराग्वे (105 words)


पैराग्वे (/pærəɡwaɪ/; स्पेनिश उच्चारण: [paɾaɣwaj]; गुआरानी: पैरागुआई, [paɾaɰwaj]), आधिकारिक तौर पय पैराग्वे गणराज्य, मध्य दक्खिन अमेरिका में एक स्थल-रुद्ध देश होय, इ अर्जेंटीना से दक्खिन औ दक्खिनपच्छु, ब्राजील से पुरुब औ पुरुबोत्तर, औ बोलीविया से उत्तर-पच्छु मा घेरान है। इ पैराग्वे नदी कय दुनों किनारा पय बसा है, जवन देश कय केंद्र से होइकय  उत्तर से दक्खिन तक बहत है। दक्खिन अमेरिका मा यकर केंद्रीय जगह कय नाते से  यका कब्बो कब्बो कोराज़ोन डी सुदामेरिक (दक्खिन अमेरिका कय दिल) भी कहि जात है। पैराग्वे अफ्रीका-यूरेशिया कय बहरे दुइ स्थलरुद्ध देश (दूसर बोलिविया होय) में से एक होय, औ अमेरिका में सबसे छोटा स्थल-रुद्ध देश होय।




#Article 197: सूरिनाम (146 words)


सूरीनाम, आधिकारिक तौर पय सूरीनाम गणराज्य, दक्खिन अमरीका महाद्वीप कय उत्तर मा मौजुद एक देश होय। सूरीनाम पूरुब मा फ्रेंच गुयाना औ पच्छु गयाना मौजुद है। देश कय दक्खिनी सीमा ब्राजील औ उत्तरी सीमा अंध महासागर से मिलत है। देश कय मरोविजने औ कोरंतिज नदी पय फ्रेंच गुयाना औ गयाना से धुर दक्खिन मा मिलय वाला सीमा विवादास्पद है। सूरीनाम दक्खिन अमरीका कय क्षेत्रफल औ आबादी कय हिसाब से सबसे छोट संप्रभु देश होय। यकर राजधानी पारामारिबो होय। इ पच्छु गोलार्ध पय एकलौता डच भाषी जगह है, जवन नीदरलैंड राजशाही कय हिस्सा नाइ है। सूरीनाम कय समाज बहुसांस्कृतिक है, जवने मा अलग-अलग जाति, भाषा औ धर्म वाले लोग निवास करत हैं। देश कय एक चौथाई जनता प्रति दिन 2 डा़लर से कम पय जीवन निबाह करत हैं।

सूरीनाम कय बासठ रिसोर्ट मा भी विभाजित कइ गा है। 

सूरीनाम बहुत प्रसिद्ध फुटबॉल खिलाड़िन् कय जनम-भूमि रहा है।




#Article 198: त्रिनिदाद औ टोबैगो (102 words)


त्रिनिदाद औ टोबैगो आधिकारिक रूप से त्रिनिदाद औ टोबैगो गणराज्य कैरिबियाई सागर मा मौजुद, पूरा तरह से द्विपन पय मौजुद देश होय। इ दक्खिन कैरिबिया मा, वेनेज़ुएला कय उत्तर-पूरुब मा है। यकर जलसीमा बारबाडोस से उत्तर-पूरुब मा, गयाना से दक्खिन-पूरुब मा औ वेनेज़ुएला से दक्खिन औ पच्छु मा जलसीमा साझा करत है।

इ देश कय क्षेत्रफल ५,१३० वर्ग किलोमीटर है। इ द्वीप समूह में से दुइ मुख्य द्वीप है- त्रिनिदाद औ टोबैगो। इ मुख्य द्वीपन कय अलावा कयु छोट-छोट द्वीप हैं। त्रिनिदाद, देश कय ९४% क्षेत्र औ ९६% आबादी कय साथे, देश कय सबसे बड़ा औ सबसे ढेर जनसँख्या वाला द्वीप होय।




#Article 199: वेनेज़ुएला (189 words)


वेनेज़ुएला दक्खिन अमेरिका कय एक्ठु देस होय ।

दक्खिन अमेरिका मा, वेनेज़ुएलाई मनइन कय ओनकय मजेदार औ सहज़ चरित्र खर्तिन जानि जात हय । ओनमें ढेर संयुक्त अफ्रीकी, यूरोपीय औ भारतीय जरि से आवत हैं। रोमन कैथोलिक देश कय प्रमुख धर्म होय औ आधिकारिक भाषा स्पेनिश होय। वेनेज़ुएला मा व्यंजन आमतौर पय एक जगह से दूसरे जगह मा अलग होत हय। पैबेलॉन क्रियोलोल देश कय राष्ट्रीय पकवान मानि जात है। आमतौर पय अउर खाय वाल चिजिन मा , ब्रेड, स्नैक्स, डेसर्ट, पेय चिज, केक, चीज औ अउर शामिल होत हैं।

कला में देश कय मुख्य योगदान आकर्षक धार्मिक रूपांकन होय। 19वीं शताब्दी मा, कला बहुतय बदलि गवा । मार्टिन तोवर वाई तोवर  देश कय कला कय बदले कय  जरुरी भूमिका निभाईन। विश्व मसहुर कलाकारन में से कुछ यीशु-आर्मान्डो रेवरॉन, क्रिस्टोबल रोजास, राफेल सोटो, मैनुअल कैबर औ कार्लोस क्रूज़-डायज़ होंय। वेनेजुएला कय जाना-माना कविन में एंड्रेस एलोय ब्लैंको औ फर्मिन टोरो शामिल हैं, जे देश मा साहित्य कय बढावै में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाईन। कुछ मसहुर लेखक औ उपन्यासकार मा रोमुलो गैलेगोस, एड्रियानो गोंजालेस लियोन, टेरेसा डे ला पैरारा, मारियानो पिकॉन सलास, मिगुएल ओटेरो सिल्वा औ आर्टूरो उस्लर पिट्री हँय।




#Article 200: कबड्डी (432 words)


कबड्डी एक्ठु खेल होय, जवन खास रूप से भारतीय उपमहाद्वीप मा खेलि जात अहै।इ खेल भारत, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका औ पाकिस्तान मा लोकप्रिय अहै। कबड्डी नाँव कय इस्तेमाल उत्तर भारत मा होत है, इ खेल कय दक्खिन मा चेडुगुडु औ पूरुब मा हु तू तू कय नाँव से भी जानि जात हय।  तमिल, कन्नड़ औ मलयालम मा इ मूल शब्द, (கை-பிடி) कै (हाथ), पिडि (पकडब) कय रुपबदल होय, जवने कय अनुवाद होय 'हाथ पकडे रहब'।कबड्डी, बांग्लादेश कय राष्ट्रीय खेल होय। 

आसान शब्दन मा यका ढेर अंक हासिल करय खर्तिन दुइ टीमन कय बीच कय एक्ठु मुकाबला कहि सका जात हय। अंक पावैक खर्तिन एक टीम कय रेडर (कबड्डी-कबड्डी बोलय वाला) विपक्षी पाले (कोर्ट) मा जाइकय हुँवा मौजूद खेलाडिन कय छूवैक प्रयास करत हैं। यहमा विपक्षी टीम कय स्टापर (रेडर कय पकरय वाले) आपन पाला मा आवा रेडर कय पकरिकय वापिस जाय से रोकत हैं औ अगर उ इ प्रयास मा सफल होत हैं तो ओनकय टीम कय यकारे बदला एक अंक मिलत है। औ अगर रेडर कवनो स्टापर कय छूइकय अपन पाला मा चलि जात है तव ओकरे टीम कय एक अंक मिलि जात औ जवने स्टापर कय उ छुये है ओका कोर्ट से बाहरे जाएक परत है।
कबड्डी मा 12 खिलाड़ी होत हैं जवने में से 7 गोइदां कोर्ट मा होत हैं औ 5 रिज़र्व होत हैं ।कबड्डी कोर्ट डॉज बॉल गेम जेतना बड़ा होत है।कोर्ट कय बीचोबीच एक्ठु लाइन खिंचान रहत है जवन एका दुई हिस्सन मा बांटत है। कबड्डी महासंघ कय हिसाब से कोर्ट कय नाप 13 मीटर × 10 मीटर होत है।

इ खेल 20-20 मिनट कय दुई हिस्सन मा खेलि जात है। हर हिस्सन मा टीमन कय पाला बदलत हय औ यकरे खर्तिन ओन्है पांच मिनट कय ब्रेक मिलत है। जबकि आयोजक यकरे एक हिस्सा कय समय 10 या 15 मिनट कय भी कराय सकत हैं। हर टीम मा 5-6 स्टापर अव 4-5 रेडर होत हैं। एक दांई में खालि चार स्टापर कय कोर्ट पय उतरय कय इजाजत होत है। जब कवनो स्टापर कवनो रेडर कय अपने पाला से बहरे जाय से रोकत हय ओन्हय एक अंक मिलत है लेकिन अगर रेडर ओन्हय छूइकय भागय मा सफल रहत है तव ओनकय टीम कय अंक मिलि जात अहै।
मैचों उमर औ वजन कय आधार पय कइ जात है, लेकिन आजकल मेहरारुन कय भी ढेर भागेदारी रहत है।
पूरा मैच कय निगरानी आठ लोग करत हैं: एक रेफ़री, दुई अंपायर, दुई लाइंसमैन, एक्ठु टाइम कीपर , एक्ठु स्कोर कीपर औ एक्ठु टीवी अंपायर।

कबड्डी कय विश्वकप सबसे पहिले २००४ मा खेलि गा रहा। ओकरे बाद २००७, २०१०, २०१२ औ २०१६ मा भवा। अबहिन तक भारत कुल में जीता हय।



#Article 201: जूडो (330 words)


जूडो () एक्ठु मार्शल आर्ट औ लडाकु जापानी खेल होय । यका डॉ कानो जिगोरो जापान मा बनाए रहें । 
यकर खासियत यकर प्रतिसपरधा होय जवने कय उद्देश्य अपने प्रतिद्वंद्वी कय या तव जमीन पय पटकैक रहत हय या तव ओका अपने बस मा करैक रहत हय । हाथ औ गोड कय मार औ वाए कय साथे-साथे हथियारन से बचेकय तरिका होय जुडो । जुडो कय खेलय वाले ,सिखय वाले कय जुडोका कहत हँय औ यहमा पहिरै वाला कपडा कय जुडोगी कहत हँय। इ खेल कय जोगरो कानो १८८२ मा बनाये रहें ।
वन सन् १८६० मा जापान कय समुन्द्री तट से सटा जगह कोबे कय एक्ठु साधारण मध्यम आर्थिक अवस्था वाले परिवार मा जनम लिहे । कानो सन् १८८२ मा खालि २२ बरिस उमर कय रहें जब इ खेल कय बनाये रहें  ।

जुडो शब्द कय जरि उ चित्रलिपि से निकरा है जहां से जुजुत्सु शब्द निकरा है: jū (柔?), जवने कय मतलब यकरे सन्दर्भ के आधार पय नरमता, कोमलता और आसान भी होइ सकत है।

जुडो कय सिखै वालैन कय जुडोका  कय नाँव से जानि जात है, लेकिन पारंपरिक रूप से खाली चउथा डैन या ओसे उप्पर कय दर्जा पावै वालै कय जुडोका कहि जात रहा। जब कवनो अंग्रेज़ी शब्द कय साथे -ka (-का) प्रत्यय जोडाय जात है तौ ओकर मतलब एक्ठु अइसन मनइ होत है जवन उ विषय कय विशेषज्ञ होत है या ओकरे लगे उ विषय कय विशेष ज्ञान होत है। चउथा डैन से नीचे कय दर्जा पावै वाले अउर लोगन कय केंक्यु-सेई या प्रशिक्षु कहि जात रहा। आधुनिक समय में जुडोका का मतलब किसी भी स्तर की विशेषज्ञता वाले जुडो अभ्यासकर्ता से है।

जुडो सिखावै वाले कय सेंसेई कहि जात है। सेंसेई शब्द सेन या साकी (पहिला) औ सेई (जीन्दगी) से हुवत है जवने कय मतलब उ मनइ से है जे आपसे पहिले आ है। पच्छुहा डोजो मा, डैन दर्जा कय कवनो भी प्रशिक्षक कय सेंसेई कहब आम बाति होय। परंपरागत रूप से, उ ख़िताब चउथा डैन या ओसे ऊंच दर्जा कय प्रशिक्षन खर्तिन होय। 




#Article 202: बास्केटबॉल (862 words)


बास्केटबाल एक्ठु टीम खेल होय जवने मा ५ ठु सक्रिय खेलाडी रहत हँय । यहमे २ टीम होत हिन । यकर मैदान चौखन्ना रहत हय । यहमे दुनो टीम कय मकसद गेना कय विपक्षी टीम कय बास्केट मा डारेक रहत हय अव अपने बास्केट मा दुसरे टीम कय गेना डारै से रोकेक रहत हय । बास्केट १० फीट उप्पर यक्ठु बोर्ड पै लटकावा रहत हय ,यहमा जाली लाग रहत हय ।यहमा खेलि जाय वाले गेना कय बास्केट बाल कहा लैं । बास्केटबाल कय गोलाई या परिधि २४ से.मी होत हय । 
यकरे मैदान मा थ्री पोइंट लाइन रहत हय जवने कय पीछे से बास्केट करै पे तीन अंक मिली औ ओकरे आगे से बास्केट करै पे  २ अंक मिली । सबसे ढेर अंक पावै वाल टीम जिति जाई ।

दिसंबर 1891 कय सुरुवात मा डॉ॰ जेम्स नाइस्मिथ जे कनाडा मा जनमा रहें शारीरिक शिक्षा कय प्रोफ़ेसर औ इंटरनेशनल यंग मेन्स क्रिश्चियन एसोसिएशन ट्रेनिंग स्कूल (YMCA)(अब स्प्रिंगफ़ील्ड कॉलेज) मा पढावत रहें, संयुक्त राज्य अमेरिका कय स्प्रिंगफ़ील्ड, मैसाचुसेट्समें, न्यू इंग्लैंड कय लम्मा सर्दि कय समय मा आपन छात्रन कय व्यस्त औ फ़िटनेस कय उचित स्तर पय राखैक खर्तिन एक्ठु तगड़ा इनडोर खेल कय खोज़ कीहिन ।  ओनही बुनियादी नियमन कय लिखिन औ एक्ठु 10 फुट (3.05 मीटर) ऊंच ट्रैक पय एक्ठु पीच बास्केट ठोंक दीहिन । आधुनिक बास्केटबॉल जाली कय उलट, इ पीच बास्केट मा पेनी रहा औ गेना कय हाथे से कुल बास्केट या अंक पावैक बाद निकारि जात रहा; लेकिन, इ बेअसर निकरा, तौ टोकरी कय पेनी मा एक्ठु छेद कइ गै,  जवने कय कुल दांइ गेना कय एक्ठु लम्मा लकडी या लोहा से कोंचि कय बहरे निकारि जात रहा । इ टोकरी कय इस्तमाल 1906 तक कइ गै, जब ओका बैकबोर्ड औ खुंटि मा लटकाई गै तब ओहमा एक्ठु अउर बदलाव कइ गै, जवने से गेना आर-पार होइ जाय । इ खेला आजौ अइसनै खेलि जात हय । गोल कय शूट करय खर्तिन एक्ठु सॉकर गेना कय इस्तमाल होय लाग । कब्बो कवनो मनई टोकरी मा गेना डारि,तौ ओकरे टीम कय एक अंक मिलि । जवने टीम कय सबसे ढेर अंक मिलि, उ खेल कय जिति जाई ।2006 कय सुरुवात मा नाइस्मिथ कय नातिन कय खोजल ओनकय डायरि मा इसारा है कि वे आपन बनावल नँवा खेल से घबड़ान रहें, जवने मा डक ऑन अ रॉक नाँव कय लरिकन कय खेल कय नियम मा मिलावा रहा औ ढेर जने यहमा असफल रहें। नाइस्मिथ इ नँवा खेल कय बास्केट बॉल कहिन ।

खेला कय चार भाग मा बांटि गा हय जवने मा एक भाग १२ मिनट कय होत हय । खेला बाद अगर अउर समय देवैक होत हय तव ५-५ मिनट कय दइ जात हय । दुसरा भाग कय बाद दूनो टिम बास्केट कय जगह कय अदला बदलि कइ लेत हँय। इ समय खालि खेल कय समय होय जब खेला कवनो नाते रुकि जाइ तौ घडि कय बन्द कइ जात हय इहिक नाते इ खेला लम्मा होइ जाला लगभग २ घंटा कय । एक टिम से ५ खेलाडि मैदान मा आइ सकत हँय ।आपन खेलाडि बदलय मा कवनो रोकटोक नाइ हय लेकिन तब्बय जब खेल रुका रहि । टिम मा कोच होत हँय जे खेल कय रणनिति बनावा लैं औ खेलाडिन कय खेल पय नज़र राखा लैं यकरे बाद टिम मा सहायक कोच , मैनेज़र ,गिन्ती करय वाले ,डाक्टर औ ट्रेनर रहत हँय । खेला मा टाइम आउट होत हय जवने मा कोच कय चिरौरी पय घडि कय रोकि कय खेलाडिन से खेल कय उप्पर बातचित भि होत हय ।
खेला कय निगरानी रेफ्री या अंपायर करत हँय । स्कोर कय गिन्ती ,समय ,बेजाँह,खेलाडिन कय बदलि कय निगरानी टेबल कर्मचारी रक्खत हँय।
इ खेला खेलय खर्तिन चौखनहा मैदान या कोर्ट औ बास्केट बाल चाहत हय । यकरे बादे घडि ,सिटि ,स्कोरबोर्ड  कय भि जरुरत रहत हय अगर खेल प्रतिस्पर्धा वाला हय ।

गेना कय बास्केट ओर लइजात कय या तव उछाडि कय,दुई जने कय बिच लोक्कारि कय ,फेंकि कय लइ जाय सकत हँय । गेना कय मैदान कय रेखा कय भित्तर रहिकय खेलैक परि। गेना कय पटकि पटकि कय लइजात कय रुकेक नाइ हय अगर दुनौ हाथ कय इस्त्माल किहिन तौ उ रुकल मानि जाई । गेना कय निचे हाथ धइ कय नाइ फेकैंक मिलि । गेना कय हाथे से फेकैंक नाइ मिलि औ मुठा से मारैक नाइ मिलि । अगर इ कुल नियम नाइ मनिहैं तव बेजाह मानि जाइ औ खेलाडि कय गेना दुसरे टिम कय देवैक परि । बास्केट कय लगे गोल करत कय बिपक्षि खेलाडी कय गेना नाई छुवैक मिलि औ बस्केट रिम कय उप्पर अगर गेना कय छुई दिहैं तव उहौ बेजाह मानि जाइ औ बिपक्षी टिम यानि गोल करै वाली टिम कय अंक मिलि जाई ।
खेला मा खेलाडिन कय कवनो मेर कय छेडछाड ,मारपिट या गारी देब बेजाह होय । इ जिम्मा रेफ्री कय होय की के बेजाह करे हय ।

वइसय कवनो नियम नाइ हय कि कवन खेलाडि कवन जगह होवैक चांहि तब्बो जइसय जइसय खेल बढय लाग खेलाडि औ कोच लोग खेलाडिन कय निश्चित जगह बनाइकय रणनिति बनावै लागें लेकिन कवनो क्वनो कोच इहो कहत हँय कि इ खेला मा खेलाडिन कय जगह निश्चित कइकय नाइ खेलैक चांहि । कुछ मसहुर जगह इहै कुल होय :

ढेर टिम २ गार्ड २ फारवार्ड औ १ सेन्टर रक्खत हँय ।

अउर बास्केटबॉल कय खेल हैं : 




#Article 203: टेबल टेनिस (579 words)


टेबल टेनिस(table tennis) कय पिंग पोंग ओ(ping pong)  कहि जात है। टेबल टेनिस कय कोठरी कय भीत्तर खेलय खर्तिन  बनाइ गा रहा ।सबसे पहिले टेबल टेनिस कय सुरुआत इंग्लैंड मा भवा । सन् 1922 मा इंग्लैंड मा टेबल टेनिस ऐसोसिएशन बना औ पहिला विश्वप्रतियोगिता लंदन मा भवा । अब इ खेल बहुतै मसहुर होइ चुका है औ दुनिया भर कय 71 देसन मा खेलि जात है।टेबल टेनिस आज बहुतय मसहुर है । टेबल टेनिस लाखौं मनइ खेलत हैं औ टेनिस 2.5 इंच कय होत हय ।

टेबल टेनिस एक दांइ में दुई जने (एकल) या चार जने (युगल) खेलाड़िन  कय बीचे खेलि जात है। हरेक खेलाड़ी एक्ठु बल्ला (बैट) लेत हैं औ एक्ठु गेंना होब जरुरी हय । खेल कय जगह एक्ठु लकड़ी कय पटरा कय टेबल होत है। गोडे मा रबर कय  जूता औ  रंगीन कपड़ा (कवनौ गाढा रंङ कय) पहिरब जरूरी रहत हय ।
टेबल कय  लम्माई 9 फुट, चौड़ाई 5 फुट, पटरा कय मोटाई 1 इंच (या 3/4 इंच ) औ जमिन से ऊँचाई 2.5 फुट होत है। लकड़ी कय बादे स्लेट, सीसा या प्लास्टिक कय सतह कय टेबल भी बनाय जात है । 
टेबल कय सतह पय 12 फुट ऊप्पर से सीधा गिरावल गेना टिप्पा लइकय 8 से 9 फुट कय बीचे तक उछलैक चाहिं। टेबल कय ऊप्पर बिजुली कय रोसनी कय बढिया बेवस्था  रहत है जवने से रतिवोकै खेल होइ सकै ।
टेबल कय चारों ओर 3/4 इंच मोट उज्जर लाइन (रेखा) औ लम्माई में बीच से 1/8 इंच चौड़ा रेखा (खाली ४ जने कय जुगल खेला खर्तिन ) बना रहत है। टेबल कय बीच चौड़ाई मा आर पार, 6 इंच ऊँच जाल तना रहत है, जवन टेबल कय चौड़ाई कय बहरे दुनों ओर छह इंच तक बहरे निकरा रहत है।

सैल्यूलाइड कय गोल उज्जर गेंना , जवने कय गोलाइ या परिधि 41/2 से 4 3/4 इंच कय बीचे औ जवने कय वजन 2.40 से 2.53 ग्राम कय बीचे रहत हय उहै खेला मा इस्तेमाल होत हय ।

कुछ याद रक्खै वाले जानकारी :

मेज़ कय आकार : चौखनहा

लम्माई :274 सैंटीमीटर

चौड़ाई :152.5 सैंटीमीटर

जमिन से ऊँचाई :76  

जाल कय लम्माई :1835688 M

खेलय वाले सतह से जाल कय ऊँचाई :15.25

गेंना कय परिधि: 37.2 मिलीमीटर से 38.2 मिलीमीटर

गेंना कय वज़न :2.40 ग्राम से 2.53 ग्राम तक

गेंना जवने चीज़ से बना रहै: सैल्यूलाइड या उज्जर प्लास्टिक कय

जाल कय लम्माई 183 सैंटीमीटर होत है। यकर ऊपरी हिस्सा खेलय वाले सतहसे 15.25 सैंटीमीटर ऊँच होत है। इ रसरी से 15.25 सैंटीमीटर से बहरे कय ओर होत है।

गेना गोला होत है। इ सैल्यूलाइड औ प्लास्टिक कय उज्जर या पियर रङ कय होत हय। यकर व्यास 37.2 मिलीमिटर से कम औ 38.2 मिलीमीटर से ढेर नाइ होत हय। यकर वजन 2.40 ग्राम से कम औ 2.53 ग्राम से ढेर नाइ होत हय।

गेना कय मारय वाला काठे कय बल्ला कय रैकेट कहत हँय लेकिन ब्रिटेन मा यका बैट औ यू.एस औ कनाडा मा यका पैडल कहत हँय । लेकिन आधिकारिक नाँव यकर रैकेट होय । 
रैकेट कवनो भी आकार या वजन कय होइ सकत है। यकर निचला भाग गाढा रंङ कय होएक चाहि।

दुइ जने कय खेल मा सर्विस करय वाला (सर्वर) लगातार पाँच दाँइ सर्विसें करत है। चाहे ओकर अंक बनै या ना बनै। ओकरे बाद सर्विस दूसरे खेलाड़ी कय मिलत है। अइसय ओहुकै पाँच सर्विस करय कय बाद सर्विस मा बदलाव होत है।
चार जने कय खेल मा सर्वर सर्विस करत है औ रिसीवरी बढिया वापसी करि। सर्वर कय सङरिहा फिर बढ़िया वापसी करि औ फिर कुल खेलाड़ी ओइसय बढ़िया वापिसी करिंहै।




#Article 204: कुचकुचवा (107 words)


कुचकुचवा एक मेर कय चिरई होय । इ दिन से ढेर राति कय देखा ला । दुनिया भर में यकर २०० जात हँय । यन्हरे छोटवार किरा औ जानवरन कय खालैं ।यकर कवनो कवनो जात तौ मछरिऔ कय खा लँय ।अन्टार्टिका कय बादे यन्हरे दुनिया कय हर कोनम मिला लैं । यकरे गोड मा चार-चार अङुरी होत हय । यन्हन कय आँखि यन्हन कय मूँडि पय यक्कै दरि पय सटा रहा ला औ बहुतै तेज रहा ला । बिना कवनो आवाज़ कइकै उडै में यन्हरे बहुत काबिल रहत हँय । यकर पखना नरम ,मुलायम औ महिन होत हय । 

यका लक्ष्मी कय बाहन मानि जात हय ।




#Article 205: अनुभव सिन्हा (136 words)


अनुभव सिन्हा (जन्म:२२ जून १९६५) एक्ठु भारतीय फिलिम निर्देशक होँय। जे तुम बिन,शाहरुख खान कय अभिनय करल रा.वन , मुल्क औ आर्टिकल 15 जइसन फिलिमिन कय निर्देशन किहे हँय।

सिन्हा कय जनम इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में एक्ठु कायस्थ परिवारे म भवा रहा। ओनकय बप्पा कै नाँव प्रेम गोविंद सिन्हा औ माई क नाँव सुशीला सिन्हा होय। ओनकय शुरुआती पढाई लिखाई कालागढ़, गढ़वाल से भवा रहा। सिन्हा आपन हाईस्कूल कय पढ़ाई राजकीय इंटर कॉलेज, इलाहाबाद से औ इंटरमीडिएट बनारस कय क्वीन्स कॉलेज से किहे रहें। ओन मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक कय डिग्री अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से लिहिन।

अनुभव सिन्हा क निर्देशन किहा फिलिम

सिन्हा ४ दिसम्बर १९९० मा  (जब मुम्बई कय नाँव बॉम्बे रहा) म आवैस पहिले दुई साल तक नई दिल्ली म इंजीनियर कय रूप में काम किहिन।ओन पंकज पारासर कय असिस्टेन्ट बनिकै भि काम किहिन। 




#Article 206: तिग्मांशु धूलिया (187 words)


तिग्मांशु धूलिया (जनम: ३ जुलाई १९६७) भारतीय हिन्दी फिलिम उद्योग बॉलीवुड कय एक्ठु मसहुर निर्माता, निर्देशक औ अभिनेता होंय। ओन आपन कैरियर शेखर कपूर कय  निर्देशन करल फिलिम बैंडिट क्वीन से बतौर पहूना निर्देशक शुरू किहिन।

तिग्मांशु कय जनम उत्तर प्रदेस कय इलाहाबाद में ३ जुलाई १९६७ कय भा रहा । ओनकय परिवार मूल रूप से उत्तराखंड कय पौङी जिला कय मदनपुर गाँव कय होँय । ओनकय दादा स्व. केशव चन्द्र धूलिया हाईकोर्ट कय जज रहें औ माता श्रीमती सुमित्रा धूलिया संस्कृत कय प्रोफ़ेसर रहिन । तिग्मांशु आपन सुरुवाती पढाई सेंट जोसेफ स्कूल औ एंग्लो बंगाली इण्टरमिडियेट कालेज से कीहिन। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ओन अंग्रेजी, अर्थशास्त्र औ आधुनिक इतिहास में स्नातक कय पढाई पूरा कीहिन। यकरे बाद ओन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से रंगमंच में परास्नातक किहिन।

तिग्मांशु १९९० मा बैंडिट क्वीन में बतौर कास्टिंग निर्देशक आपन फिलमी जीवन कय शुरुआत कीहिन। ओन इ फिल्म में संवादौ लिखिन। यन मणिरत्नम कय निर्देशन किहा फिलिम दिल से कय पटकहानी लिखीन। साल २००० में आवा आसिफ कपाङिया कय निर्देशन किहा फिलिम द वारियर में ओन कास्टिंग कय काम किहिन। ओन स्टिफ अपर लिप्स औ बाम्बे ब्ल्यूज में भी कास्टिंग कीहिन।




#Article 207: जमशेदपुर (241 words)


जमशेदपुर कय दूसर नाँव टाटानगर होय ।इ भारत कय झारखंड राज्य कय एक्ठु सहर होय। इ झारखंड कय दक्खिनी हिस्सम पूरुबी सिंहभूम जिला कय हिस्सा होय। जमशेदपुर कय इस्थापना पारसी व्यवसायी जमशेदजी नौशरवान जी टाटा कराय रहें। १९०७ में टाटा आयरन ऐंड स्टील कंपनी (टिस्को) कय इस्थापना से इ सहर कय बुनियाद परा। यसे पहिले इ साकची नाँव कय एक्ठु आदिवासी गाँव रहा। हिँया कय माटी करिया होयक नाते हिँया पहिले रेलवे-स्टेशन कालीमाटी कय नाँव से बना जवने कय बाद में बदलिकय टाटानगर कइ गै। खनिज चिजन कय ढेर मौजुदगी औ खड़कई औ सुवर्णरेखा नदी कय आसानी से मिलय वाले पानी, औ कोलकाता से नजदीकी कय नाते इ आज यक्ठु आधुनिक सहर बनि गा हय ।

इ सहर आज भारत कय सबसे आगे कय औद्योगिक नगरन में से एक होय। टाटा घराना कय कयु कंपनिन कय उत्पादन इकाई जइसै टिस्को, टाटा मोटर्स, टिस्कॉन, टिन्पलेट, टिमकन, ट्यूब डिवीजन इहैं हय।

१९१९ मा लार्ड केल्म्सफार्ड जम्सेत्जी टाटा कय सम्मान मा इ सहर कय नाँव जमशेदपुर धरिन जवने कय नाँव साक्ची रहा पहिले ।

जमशेदपुर यक्ठु औद्योगिक नगर होय।
यँह कय कुछ परधान कारखाना होंय:

आधुनिक स्टील एन्ड पावर लिमिटेड्, कोहिनुर स्टील एन्ड पावर लिमिटेड्, जेमिपोल्, एन एम एल । साकची हिँया कय यक्ठु परधान व्यापारिक केन्द्र होय।

जमशेदपुर कय परधान शिक्षा औ शोध संस्थान: 

यकरे बादे दोरवाजी टाटा पार्क, भाटिया पार्क, जेआरडी टाटा कॉम्‍पलेक्‍स, पटमदा कय लावजोड़ा हथीखेदा मंदिर,  गोलपहाड़ी मंदिर, भुवनेश्‍वरी मंदिर, सूर्य मंदिर जइसन जगह भि घुमि सका जात हय ।




#Article 208: अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेट परिषद (138 words)


अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेट परिषद या आइ सी सी दुनिया भर कय क्रिकेट कय चलावै वाला औ देखै वाला यक्ठु संगठन होय ।

 श्रीलंका में 1981 में यक्ठु पूरा सदस्य कय रूप में भर्ती कराइ गै, औ टेस्ट खेलै वाले देस ७ होइ गँय। 1989 में, नँवा नियम कय अपनाइ गै औ अब कय नाँव, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद बना। दक्खिन अफ्रीका 1991 में आईसीसी, रंगभेद कय खतम करैक बाद यक्ठु पूरा सदस्य कय रूप में फिर से चुनि गै;  1992 में नौवां टेस्ट खेलै वाला देस कय रूप में  जिम्बाब्वे कय चुनि गै। फिर, साल 2000 में बांग्लादेश कय टेस्ट दर्जा मिला।

मुख्य लेख:अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट समिती सदस्य देस

सदस्य देस तीन विभागन मे हँय:

यन्हन कय काम इ क्षेत्रन मे क्रिकेट कय आगे बढाइब होय

पहिले कय दुई क्षेत्रीय निकाय कय अफ्रीकी क्रिकेट संघ बनै कै बाद बन्द कइ गै:




#Article 209: बुल्गारिया (216 words)


बुल्गारिया दक्खिन-पूरुब यूरोप कय यक्ठु देस होय, जेकर राजधानी सोफ़िया होय।
देश कय सीमा उत्तर मा रोमानिया से, पच्छु मा सर्बिया औ मेसेडोनिया से, दक्खिन मा ग्रीस औ तुर्की से मिलत है। पूरुब मा देस कय सीमा करिया समुन्दर निस्चित करत हय। कला औ तकनीक कय बादे राजनैतिक नजरि से बुल्गारिया कय बजूद पँचवा सदी से देखाय लाग। पहिले बुल्गारियन साम्राज्य (632/681 - 1018) बाल्कन क्षेत्र औ पूरा पूरुबी यूरोप कय बहुत मेर से परभाबित किहिस। बुल्गारियन साम्राज्य कय पतन कय बाद यका ओटोमन सासन कय तरे लाइ गै। 1877-78 मा भवा रुस-तुर्की युद्ध बुल्गारिया राज्य कय फिरसे बसावैम मदद कीहिस। दुसरा विश्व युद्ध कय बाद बुल्गारिया साम्यवादी राज्य औ पुरुबी ब्लाक कय हिस्सा बनि गै। 1989 मा क्रांति कय बाद 1990 में साम्यबादिन कय सत्ता से एकाधिकार खतम होइ गै औ देस संसदीय गणराज्य कय रूप मा आगे बढ़ै लाग। इ देस 2004 से नाटो कय औ 2007 से यूरोपियन यूनियन कय सदस्य होय।

बुल्गारिया जवन यूनान औ इस्तांबुल कय उत्तर मा बसा है मनइक बसैक नजर से बहुत पुरान हय। मोंटाना कय आसपास 6800 साल पुरान एक्ठु पट्टिकालेख मिला है जवनेम चार पंक्ति मा 24 चिह्न बना है - यका पढ़ि पाइब अबहिन तक संभव नाइ होइ पा हय लेकिन यसे इ अनुमान लगाइ सका जात हय कि उ समय हिँया मनई रहें ।




#Article 210: रोमानिया (115 words)


रोमानिया (;प्राचीन: Rumania (रूमानिया), Roumania (रौमानिया) करिया समुन्दर कय सीमा पय, कर्पेथियन चाप कय बहरे औ यकर भीत्तर, निचला डेन्यूब पय, बाल्कन प्रायद्वीप कय उत्तर मा, दक्खिन पुरुब औ मध्य यूरोप कय यक्ठु देस होय. लगभग पूरा डेन्यूब डेल्टा इ क्षेत्र कय भीत्तर है। यकर सीमा पच्छुम हंगरी औ सर्बिया से, उत्तर पूरुब मा यूक्रेन औ माल्दोवा कय गणराज्य से औ दक्खिन मा बुल्गेरिया से जुडा हय।

रोमानिया क स्थिति : 43°6' से 48°5' उ.अ. औ 20°4' से 31°0' पू.दे. हय। इ यूरोप महाद्वीप कय यक्ठु स्वतंत्र देस होय। यकर क्षेत्रफल 91,671 वर्ग मील हय । हिँया कय लगभग 85 प्रतिसत निवासी रोमानिया कय भाषा बोलत हँय। रोमानिया कय 'अन्न कय देस' कहि जात हय।




#Article 211: लक्सेम्बर्ग (104 words)


लक्सेम्बर्ग (लक्सेम्बर्गी : Groussherzogtum Lëtzebuerg, फ़्राँसिसी : Grand-Duché de Luxembourg, जर्मन : Großherzogtum Luxemburg) यूरोप महाद्वीप कय यक्ठु देस होय। यकर राजधानी लक्सेम्बर्ग सहर होय। यकर मुख्य राजभाषा- जर्मन भाषा, फ़्राँसिसी भाषा औ लक्सेम्बर्गी भाषा होय। यकर सासक यक्ठु राजा-जइसन ग्रैंड ड्यूक होंय। लक्जमबर्ग पच्छु यूरोप कय यक्ठु छोट देस होय। इ बेल्जियम, फ्रांस औ जर्मनी से घेरान हय। लक्जमबर्ग कय क्षेत्रफल 2586 वर्ग किलोमीटर हय, जबकि जनसंख्या पाँच लाख कय लगभग हय। 
लक्जमबर्ग मा संसदीय लोकतांत्रिक बेवस्था हय, जबकि संवैधानिक रूप से राजा सबसे बडा होत हय। लक्जमबर्ग यक्ठु विकसित देस होय, जहाँ प्रति मनई सकल घरेलू पइदावार या जी॰डी॰पी॰ सबसे ढेर हय। 




#Article 212: योगेश चन्द्र चटर्जी (345 words)


योगेश चन्द्र चटर्जी (1895 - 1969)  बंगाल कै एक्ठु खास क्रान्तिकारी रहें। वय बंगाल कै अनुशीलन समिति अव संयुक्त प्रान्त (अब उत्तर प्रदेश) कै हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन कय सक्रिय सदस्य रहें। कुल मिलाइके वय आजादी के लड़ाई कै सच्चा सेनानी रहें। बंगाल कै अनुशीलन समिति म काम करत उनका पुलिस कयिउ परकार कै अमानुषिक यातनायें दीन गयीं लिकिन वंय टस से मस नही भयें। उनका काकोरी कांड मा उमरकइद कै सजा मिली रही। आजाद भारत म वंय  राज्य सभा मा सांसदव रहें। योगेश दा कुछ किताबव लिखे रहें जिनमा अंगरेजी किताब इन सर्च ऑफ फ्रीडम उल्लेखनीय है।

योगेश चन्द्र चटर्जी कै जनम ढाका जिला के गावदिया गाँव म 1895 मा भा रहा। 1916 म वय पहली बार गिरफ्तार भा रहें। वह्य समय वय अनुशीलन समिति कय सक्रिय सदस्य रहें। पुलिस द्वारा भयंकर यातनायें दी गयीं किन्तु वे एक ही उत्तर देते रहे - मुझे कुछ नहीं मालूम। मारपीट का कोई असर नही हुआ। अन्त म उनकय हाथ गोड़ कसके बाँध दीन गा औ दुइ सिपाही ने उनका गुप्तांग पकडकर हस्तमैथुन द्वारा अप्राकृतिक ढँग से एतनी वार वीर्य निकाले कि खून आवय लाग। वोहके बाद गुह मूत से भरी बल्टी उनके उप्पर उड़ेर देहें। शरीर धोवय की ताईं पानी तक न दीन गा। मुँहे मा गुह चला गा लिकिन योगेश फुरै योगेश होइ गये। ई निमुछिये नौजवान मूछ वालेन तक का पस्त कै दिहिस।
 

आजाद भारत मा उनकै झुकाव कांग्रेस की ओरी होइगा अउर वै उत्तर प्रदेश से राज्य सभा कै सांसद चुना गयें। 1956 से 1969 तक अपनी मौत तक वय लगातार 14 साल राज्य सभा कय सदस्स रहें।

योगेश दा काकोरी कांड से पहिलेनय हावड़ा रेलवे स्टेशन पय गिरफ्तार कय लीन गा रहें। नजरबन्दिव की हालत म उनका काकोरी कांड के मुकदमा म घसीट लीन गा रहा। वैं जेल से छूटे के बाद बिआह नही केहें, जिंदगी भय बिनबिआहा रहें। वइ कुछ किताबव लिखे रहें जिनमा उनकै अंगरेजी मा लिखी किताब इन सर्च ऑफ फ्रीडम कै काफी चर्चा भय । योगेश दा कै एक अउर किताब इण्डियन रिव्यूलूशनरीज़ इन कॉन्फ्रेंस अंग्रेजिन म प्रकाशित भय। उनकय लिखी गय द्विनव किताबन कै का बिबरन एस अहै:




#Article 213: पहिला बिस्व जुद्ध (822 words)


पहिला बिस्व जुद्ध 1914 से 1918 तक खास कइकै यूरोप मा चला महाजुद्ध कय कहि जात हय। इ महाजुद्ध यूरोप, एसिया अव अफ्रीका तीन महाद्वीपन मा औ समुन्द्र, धरती औ आसमान मा लड़ि गै।
यहि लडाई म ७ करोड सैनिक रहें जउने मे से ६ करोड खाली यूरोप कै सैनिक रहें । इहिक नाते यका दुनियक लडाईन मे से सबसे बडवार लडाई मानि जात हय । इ दुनियक सबसे खूनी लडाईन मेकिर कय यक होय । यहिमा ९० लाख लडाकू औ १.३ करोड जनता मारि गँय । अव वहि समय कै इंफ्लूयंजा महामारी से १७ लाख से १० करोड़ मनई मारि गँय । इ जुद्ध लगभग ५२ महीना तक चला । जुद्ध खतम होत-होत घरि चार बड़ा साम्राज्य रूस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी (हैप्सबर्ग) औ अटोमन साम्राज्य (उस्मानिया) ढहि गए। यूरोप कय सीमा कुल फिर से खिचान औ अमेरिका यक्ठु 'महाशक्ति' बनि कय उतिरान।

जुद्ध मा जर्मनी कय हार कय बाद १८ जून १९१९ मा पेरिस शांति सम्मेलन भवा जवने म २७ देस सामिल भँय। अमेरिका, इंग्लैंड औ फ्रांस यकर अगुआई किहिन । जर्मनी पय वर्साय कय संधि लादि गै ।

२८ जून १९१४ मा अष्ट्रो-हंगेरियाई राजकुमार कय हत्या होइ गै । इ हत्या किहे रहा बोस्नियाई सर्ब यूगोस्लाव राष्ट्रवादी गैव्रिलो प्रिन्सिप ।  यकरे जवाब मा अष्ट्रिया-हंगरी वहि साल कय २३ जुलाई मा सर्बिया कय अल्टीमेटम दिहिस ।इ अल्टीमेटम मा १० अइसन.नियम रहा जवनेकै सर्बिया कै मानैक रहा । कुछ इतिहासकार इहौ मानत अहैं कि अष्ट्रिया पहिलवैंस सर्बिया से लडाई चाहत रहा ।सर्बिया कय जवाब अष्ट्रिया कय नाई संतोख दई पाय ,सर्बिया ढेर नियम मानैं कै ताईं तइयार होइ गै लेकिन कुल नांई मानिस ।अष्ट्रिया तब सर्बिया कै उप्पर लडाई पै उतारु होई गै ।

सर्बिया कय उप्पर लडाई कै घोषणा कय बाद सर्बिया कै सँङरिहा देस रुस अष्ट्रिया-हंगरी कै उप्पर लडाई कै घोषणा कई दिहिस  । यहि घटना से दुनिया कय कुछ देस दुई हिस्सन मा बँटि गँय । दुई हिस्सन मा यक हिस्सम रहें रुस,फ्रांस औ ब्रिटेन जवने कय एलाईड पावर कहि गै औ दुसरके म रहें जर्मनी , अष्ट्रिय-हंगरी औ अटोमन साम्राज्य जवने कै सेंट्रल पावर कहि गै । इ दुनौ पच्छ मा अउर सहयोगी देसौ रहें । 
सर्बिया म साल्विक मनईन से रुस यक दुसरेक उप्पर होय वाले लडाईन मा सहयोग देवैक सहमति किहे रहा ।इहिक नाते रुस सर्बिया कै वर से लडैक तइयार होइ गै ।इ घोषणा रुस ३० जुलाई कय संझा कै किहिस । अगले दिन आष्ट्रिया-हंगरी औ जर्मनीओ लडाई कै घोषणा किहिन लेकिन जर्मनी १२ घंटा कय भीत्तर  रुस कै लडाई रोकैक अल्टीमेटम दिहिस । जर्मनी ताकतवर होय कै ताईं जवन काम किहे रहा उ रुस कै नाई पसंद रहा इहिक नाते जर्मनी कै डेर रहा कि रुस जर्मनीओ कै उप्पर आक्रमण  ना कइ देय । जब रुस नाई मान तौ अगस्त २ कै जर्मनीऔ रुस कै उप्पर लडाई कै घोषणा कई दिहिस । 
यकरे बाद फ्रांस रुस कै सहयोग मा आय औ लडाई कै  तइयारी करै लाग । 

जर्मनी बीच यूरोप मा आय । यका डेर रहा की पुरुब मा रुस से लडै जाब तौ पच्छुँ से फ्रांस ना आक्रमण कई देय ।
जर्मनी रणनीति बनाईस की छ हप्ता कै भीत्तर फ्रांस कै हरायक बाद पुरुब मे जबतक रुस तइयारी कइकै पहुँची वहँ पहुँचैक। इ रणनीति कै बाद मा स्लिफेन प्लान कहि गै । 
२ अगस्त कय जर्मनी फ्रांस पै आक्रमण करै कै ताईं बेल्जियम से राहि मांङिस। फ्रांस कै उप्पर हालि से जितै कै ताईं इ जरुरी रहा । जब बेल्जियम राहि नाई दिहिस तौ जर्मनी बेल्जियम कै.उप्पर ३अगस्त कय आक्रमण कहिस.औ उहै.दिन फ्रांस कै उप्पर लडाई करैक घोषणा किहिस । बेल्जियन सरकार १८३९ कय लन्दन समझौता कय सहमति कय अनुसार ब्रिटेन से मदद खर्तिन गोहराइस ।ब्रिटेन ४ अगस्त कै जर्मनी से लडाई कै घोषणा किहिस । १२ अगस्त कै ब्रिटेन औ फ्रांस अष्ट्रिया-हंगरी पै लडाई कै घोषणा किहिन। २३ अगस्त कै ब्रिटेन फ्रांस कै ओर आवा अउर चीन औ प्रसांत मा जर्मनी कै जमीन हथिया लिहिस । नवंबर १९१४ मा अटोमन जुद्ध मा कूदा औ सेन्ट्रल पावर कै पच्छ लिहिस जवने मा जर्मनी औ अष्ट्रिया-हंगरी रहें ।
लडाई यहि कुल देसन कय उपनिवेस वाले देसन मा भि लडि गै । इहिकै नाते लडाई अफ्रिका तक भै ।
सुरुआत मा जर्मनी कय जीत भवा। 1917 मा जर्मनी कयिउ व्यापारी जहाज़न कय बुडा दिहिस। यक दाईं जर्मनी इंगलैण्ड कय लुसिटिनिया जहाज़ कय अपने पनडुब्बी से बुडा दीहिस। जवने मा कुछ अमेरिकी नागरिक रहें । यहे अमेरिका ब्रिटेन कय ओर से लडाई म कूदि परा लेकिन रूसी क्रांति कय नाते रूस महायुद्ध से अलग होइ गै। १९१८ ई. मा ब्रिटेन , फ़्रांस औ अमेरिका मिलिकै जर्मनी औ वोकर सङरिहा देसन कय हराइन। जर्मनी औ आस्ट्रिया कय चिरौरी पय ११ नवम्बर १९१८ कय लडाई खतम होइ गै ।

यहि महाजुद्ध मा बहुत लड़ाइ कुल भवा। यहिमा टेनेनबर्ग कय लडाई (26 से 31 अगस्त 1914), मार्नं (5 से 10 सितंबर 1914), सरी बइर (Sari Bair) औ सूवला खाड़ी (6 से 10 अगस्त 1915), वर्दूं (21 फ़रवरी 1916 से 20 अगस्त 1917), आमिऐं (8 से 11 अगस्त 1918), औ वित्तोरिओ बेनेतो (23 से 29 अक्टूबर 1918) जइसन बडावार लडाई भयें।




#Article 214: पूरुबी यूरोप (108 words)


पूरुबी यूरोप यूरोप कय महाद्वीप कय पूरुब कय ओर हय। यकरे सीमा पय सबकै सहमति ना होवैक नाते यहमा सामिल देस अव जगहिन कय कउनो निस्चित बटवाँरा नाइ हय। ढेर यहिमा यूरोप कय उ देस हँय जवन या तौ पहिलेक सोवियत संघ कय तरे रहें या वकरे बस में रहे। यहमा रूस, यूक्रेन, बेलारूस, पोलैण्ड, बुल्गारिया, चेक गणतंत्र, स्लोवाकिया, एस्टोनिया, लातविया, लिथुएनिया, हंगरी औ मोल्दोवा सामिल हँय। कुछ स्रोतन मा अल्बानिया औ पहिलेक यूगोस्लाविया कय टुटैक बाद बनल देस - सर्बिया, मासेदोनिया, स्लोवीनिया, क्रोएशिया, बोस्निया - सामिल हँय। लगभग कुल परिभाषन मा यूराल पहाडमाला, यूराल नदी औ कॉकस जगहि पूरुबी यूरोप कय पहिले कै सीमा मानि जात हय।




#Article 215: दक्खिनी यूरोप (118 words)


फाइल:Europe_subregion_map_UN_geoscheme.svg|दाएँ|अंगूठाकार|250x250पिक्सेल| संयुक्त राष्ट्र कै दिहा यूरोपीय जगहिन कय बर्गीकरण (दक्खिनी यूरोप हरेर हय)  

दक्खिनी यूरोप ( स्पेनी: Europa del Sur, पुर्तगाली: Europa meridional, इतालवी: Europa meridionale, अंग्रेज़ी: Southern Europe) यूरोपीय महाद्वीप कय दक्खिनी भाग कय कहि जात हय। यका दक्खिन यूरोपऽऔ कहि जात हय। इ भूमध्य समुन्दर कय उत्तरी किनारा पय हय। हिँया कय मनई रोमान्स भाषा कुल बोलत हँय, जवन खास कइकै लैटिन से उपजा हय। पच्छुँ कय कयु भाषा इही भाषा परिवार से जुडा हय। 

इबेरियन प्रायद्वीप जगहिन मा स्पेन, पुर्तगाल औ अंडोरा कय दक्खिन-पच्छुँ यूरोप कय रूप मा बाँटि सका जात हय। 

यहमा मोनाको, साइप्रस और पच्छुँ बाल्कन सामिल होइ सकत हँय । 

इ जगहिन मा फ्रांस कय निचे दिहा जगह सामिल होइ सकत हँय: 




#Article 216: राहुल द्रविड़ (444 words)


राहुल शरद द्रविड़ (कन्नड़: ರಾಹುಲ್ ಶರದ್ ದ್ರಾವಿಡ, )  (जनम - 11 जनवरी 1973) भारतीय क्रिकेट टीम कय सबसे अनुभवी खेलाड़िन में से यक होंय, 1996 से वे यकर हर बखत कय सदस्य रहि चुका अहैं। अक्टूबर 2005 में वन भारतीय क्रिकेट टीम कय कप्तान कय रूप मा चुनि गा रहें औ सितम्बर 2007 में वन अपने इ पद से इस्तीफा दइ दिहिन। १६ साल तक भारत कय प्रतिनिधित्व करैक बाद मा वन साल २०१२ कय मार्च मा अंतर्राष्ट्रीय औ राष्ट्रीय क्रिकेट कय कुल फॉर्मैट से सन्यास लइ लिहिन। 

द्रविड़ कय साल 2000 मा पांच विसडेन क्रिकेटर में से एक कय रूप मा सम्मानित कीन गै । द्रविड़ कय 2004 कय उद्घाटन इनाम कय समारोह मा  आईसीसी प्लेयर ऑफ़ द ईयर औ साल कय टेस्ट प्लेयर कय पुरस्कार से सम्मानित कीन गै।

लम्मा समय तक बल्लेबाजी करैक वनकय छ्मता कय नाते वन्है देवाल कय रूप मा जानि जात हय, द्रविड़ क्रिकेट कय दुनिया मा बहुत कुल रिकॉर्ड बनाये हँय। द्रविड़ बहुत सांत मेर कय मनई होँय। देवाल कय रूप मा मसहुर द्रविड़ पिच पय लम्मा समय तक टिकै रहैक ताईं जानि जात हँय।

सुनील गावस्कर औ सचिन तेंदुलकर कय बाद वन तीसरा अइसन बल्लेबाज होय जे टेस्ट क्रिकेट मा दस हज़ार से ढेर रन बनाये हँय। 14 फ़रवरी 2007 कय, वन दुनिया कय क्रिकेट इतिहास मा छठवा औ भारत मा सचिन तेंडुलकर औ सौरव गांगुली कय बाद तिसरा खेलाड़ी बनि गय जब वन एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मा दस हज़ार रन कय स्कोर बनाये हँय। वन पहिला औ यक्कै बल्लेबाज होंय जे कुल 10 टेस्ट खेलै वाले देस कय बिरुद्ध शतक बनाये हँय। 182 से ढेर कैच कय साथे टेस्ट क्रिकेट मा सबसे ढेर कैच कय रिकॉर्ड द्रविड़ कय नाँवै हँय। 
 
 द्रविड़ 18 अलग-अलग भागीदारन कय साथे 75 दाईं शतकीय साझेदारी किहें हैं, इ यक्ठु विश्व रिकॉर्ड होय।

द्रविड़ कय जनम इंदौर, मध्य प्रदेश मा, कर्नाटक मा रहै वाले यक्ठु मराठा परिवार मा भवा रहा। वनकय पैतृक पूर्बज थंजावुर, तमिल नाडू कय अय्यर रहें।

वन बेंगलोर कर्नाटक मा बड़ा भय. वन मराठी औ कन्नड़ बोलत हँय।  विजय वनकय छोट भाई होंय , दुनौं भाई यक्ठु साधारण मध्यम बर्ग कय माहौल मा बड़ा भँय| द्रविड़ कय पिता GE Electric के ताईं काम करत रहें, इ यक्ठु कम्पनी होय जवन जेम औ दुसर संरक्षित खाद्य बनावै कि ताईं जानि जात है, इहिकै नाते सेंट जोसेफ हाई स्कूल बेंगलोर मा वन्कै टीम कय सदस्य वन्है जेमी नाँव दिहिन ।

वन्कै अम्मा पुष्पा, बंगलौर विश्वविद्यालय मा वास्तुकला कय प्रोफेसर रहिन।
राहुल द्रविड़ 4 मई 2003 कय कर्नाटक कय सेंट जोसेफ कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स बेंगलोर से डिग्री लिहिन। राहुल नागपुर कय यक्ठु सर्जन डॉक्टर विजेता पेंधारकर से बियाह किहिन औ 11 अक्टूबर 2005 कय वन्कै बेटवा समित, कय जनम भवा।




#Article 217: वी वी एस लक्ष्मण (257 words)


वी वी एस लक्ष्मण यक भारतीय क्रिकेट खेलाड़ी होंय। वेंकट साई लक्ष्मण (जनम १ नवम्बर १९७४), कब्बौ प्रेम से वेंकटसाईं लक्ष्मण या वीवीएस कय रूप मा आम तवर पय जानि जात हँय। भारतीय क्रिकेटर लक्ष्मण हैदराबाद क्रिकेट टीम कय अगुआई करत हैं। वैं हैदराबाद घरेलू क्रिकेट औ लंकाशायर काउंटी क्रिकेट क्लब मा खेलत रहें। लक्ष्मण पहिले कय भारत कय राष्ट्रपति, महान डॉ॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन कय भतीजे होंय। वन डेक्कन चार्जर्स टीम (इंडियन प्रीमियर लीग) कय कप्तान रहि चुका हैं। लक्ष्मण कय पद्मश्री पुरुस्कार औ भारत कय चउथा सबसे बडा नागरिक सम्मान से सम्मानित कीन गा हय।

लक्ष्मण दाँया हाथ कय बल्लेबाज होंय औ कब्बो कब्बो ऑफ़ स्पिन गेंदबाजी करत हैं। वन्कै सानदार तरिका औ स्पिन कय खिलाफ गेना हिट करैक क्षमता मोहम्मद अजहरुद्दीन कय याद देत हय। लक्ष्मण आपन नरम नल्ला कय इस्तेमाल से ढेर जगहिन पय गेंना पहुचावैक क्षमता रक्ख्त हैं।

लक्ष्मण ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम कय खिलाफ आपन बल्लेबाजी खर्तिन सबसे मसहुर हैं। फ़रवरी २०१० तक, वन १६ सैकड़ा लगाय चुका हैं, जवनेम 6 सैकड़ा ऑस्ट्रेलिया कय खिलाफ बनाय हैं। ऑस्ट्रेलिया कय खिलाफ ईडन गार्डन कोलकाता में आपन २८१ कय निजी सबसे ढेर २०००-०१ औ २०० *फिरोज शाह कोटला २००८-०९ में बनाय हँय ।

लक्ष्मण यक हैदराबाद, आंध्रप्रदेश मा नियोगी बाभन परिवार मा पैदा भय रहें। लक्ष्मण कय माता - पिता, शांताराम औ सत्यभामा डॉक्टर होंय। | लक्ष्मण लिटिल फ्लावर हाई स्कूल, हैदराबाद ,भारत मा पढाई किहिन। वन यक्ठु मेडिकल छात्र कय रूप मा दाखिला लिहिन, लेकिन चिकित्सा मा रहैक बजाय क्रिकेट कय चुनिन। वन १६ फ़रवरी २००४ कय यक कंप्यूटर इंजीनियर से बियाह किहिन ।




#Article 218: डी एन ए कय नकल (268 words)


डी एन ए कय नकल या डी एन ए रेप्लिकेसन यक मेर कय जैबिक परकिरिया होय जेहिमा यक्ठु मूल (पैरेन्ट डीएनए) डिनए से दुई ठु उहै मेर कय डी एन ए बनत हँय । यि परकिरिया जियै वालै कुल प्राणिन मा होत हय । जिबन म होय वाले कोष या सेल कय यक्ठु लक्षण होत उ होय बिभाजन । बिभाजन होत कय डिनए का भि बटैँक परा ,इहिकै नाते डिएनए रेप्लिकेसन बहुतै जरुरी चीज होय ।
डिनए कय दुई किनारा या स्ट्रैंड होत हय । रेप्लिकेसन कय समय मा यन्हरे उधरि जात हँय या छुटि जात हँय । अब इ दुनौ स्ट्रैंड साँचा कय काम करिहैं । डिएनए रेप्लिकेसन डिएनए कय चुनिन्दा जगहि से सुरु होत हय । यका रेप्लिकेसन कय सुरुआती जगह या ओरिजिन अफ रेप्लिकेसन (ori) कहत हँय । पहिले हेलिकेज नाँव कय इन्ज़ाइम डिएनए कय दुनौ किनारा कय अलग करि जइसै कपडा मे लाग चैन या ज़िप खुलत हय उहि मेर कय । 
दुनौं साँचा कय किनारे अब एक-एक ठु उहै मेर कय नँवा डिनए स्ट्रैंड बनि । अब जवन नँवा स्ट्रैंड बनि उ औ जवन साँचा हँय उ दुनौ मिलिकै एक्ठु नँवा डिनए बनइहैं । यहमा देखा जाय तौ अब जवन नँवा डिनए बना ओहिमा एक स्ट्रैंड नँवा हय औ एक साँचा वाला हय या मूल डिनए वाला एक स्ट्रैंड हय । इहिकै नाते डिनए रेप्लिकेसन कय सेमिकन्ज़र्वेटिभ तरिका मानि जात हय काहे से नँवा वाले डिनए कय दुई स्ट्रैंड मा यक्ठु मूल डिनए से हय औ एक्ठुयै नँवा हय । 

१. सुरुवाती जगह कय चुनाव

२. मूल डिनए कय दुनौ स्ट्रैंड कय उधेरब

३. रेप्लिकेसन फोर्क बनब

४. डिनए स्ट्र्रैंड बनब 

५. अंत




#Article 219: अमित मिश्रा (110 words)


अमित मिश्रा (जनम 24 नवम्बर 1982) यक्ठु भारतीय क्रिकेट खेलाड़ी होंय । यन दहिने हाथ से लेगब्रेक गेंदबाजी करा लैं औ निचला क्रम कय दहिने हाथ कय बल्लेबाज होंय। अमित मिश्रा घरेलू मैच रणजी ट्रॉफी मा हरियाणा कय वर से खेलत हैं औ 2017 इंडियन प्रीमियर लीग मा दिल्ली डेयरडेविल्स कय ओर से खेलत हैं । 

मिश्रा आपन टेस्ट क्रिकेट कैरियर कय सुरुआत १७ अक्टूबर २००८ कय ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम कय खिलाफ किहिन रहा। औ पहिला एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट कैरियर कय सुरुआत १३ अप्रैल २००३ कय दक्खिन अफ़्रीका क्रिकेट टीम कय खिलाफ खेले रहें। यन पहिला ट्वेन्टी-ट्वेन्टी मुकाबला १३ जून २०१० कय ज़िम्बाब्वे क्रिकेट टीम कय खिलाफ खेले रहें।




#Article 220: आशीष नेहरा (154 words)


आशीष दीवनसिंह नेहरा (जनम: २९ अप्रैल १९७९) यक भारतीय क्रिकेट खेलाड़ी होँय । यन साल २०१७ तक भारत कय वर से अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलिन। बांया हाथ कय तेज गेंदबाज कय रूपन मा ये आपन बिबिधता कय खर्तिन जानि जात हैं। यन आपन गति, सटीकता, रेखा औ लंबाई मा चतुरता औ गेंना कय दुनौ वर स्विंग करैक क्षमता की ताईं जानि जात हैं। आशीष नेहरा नँवा गेंना कय साथे आपन गेंदबाजी औ अंतिम ओवरन पय बिसेष रूप से परभाबी रहे हैं। फिटनेस कय मुद्दन की ताईं वन कयु दाईं नाई खेलि पा हँय। आईपीएल मा भी आशीष बिसेष रूप से परभाबी रहे हैं, जवने मा वन पांच अलग-अलग टीमन से खेलि चुका हँय। आशीष नेहरा कय रवि शास्त्री सबसे बड़ा गेंदबाजन में से एक कहे हँय जेका आज तक भारतीय टीम कब्बौ नाईं देखे है। महेंद्र सिंह धोनी नेहरा कय नाँव भारत कय आगे कय गेंदबाजी कोच कय रूप मा रक्खैक राय दिहे हँय ।




#Article 221: शार्दुल ठाकुर (103 words)


शार्दुल ठाकुर () (जनम ;१६ अक्टूबर १९९१, पालघर, महाराष्ट्र, भारत) यक भारतीय क्रिकेट टीम कय खेलाड़ी होंय यन घरेलू क्रिकेट मुम्बई की ताईं खेलत हैं। यन प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलिकै भारतीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट टीम कय २१८वां खिलाड़ी होंय। यन इंडियन प्रीमियर लीग मा किंग्स इलेवन पंजाब औ मुम्बई इंडियन्स से खेलि चुका हैं औ अबहिन यन चेन्नई सुपर किंग्स कय वर से खेलत हँय ।

शार्दुल ठाकुर आपन स्कूली क्रिकेट जीवन मा एक दाईं ६ गेंना पय लगातार ६ छक्का लगाय रहें। यन आपन प्रथम श्रेणी क्रिकेट कय सुरुआत नवम्बर २०१२ मा जयपुर कय सवाई मानसिंह स्टेडियम मा राजस्थान कय खिलाफ खेलिन रहा।




#Article 222: रविचंद्रन अश्विन (213 words)


रविचंद्रन अश्विन यक भारतीय क्रिकेट खेलाड़ी होँय । यन गेंदबाजी औ बल्लेबाजी दुनौ खर्तिन जानि जात हैं। अनिल कुंबले कय जइसन रविचंद्रन अश्विनऔ इंजिनियरई कय पढ़ाई छोड़िकय क्रिकेट मा कैरियर बनाइन। ऑफ ब्रेक स्पिन गेंदबाजी करै वाले  आश्विन २००६-०७ मा तमिलनाडु कय ओर से २० से कम औसत से ३१ विकेट लिहिन। लेकिन इ सीजन मा नल्ला कय चोट कय नाते अश्विन खेल चालु रक्खैम नाकाम रहें। २००८ मा आश्विन आईपीएल मा सानदार वापसी किहिन। चेन्नई सुपर किंग्स कय ओर से यन नीक खेलिन औ तमिलनाडु कय ओर से आश्विन बल्ला और गेंना दुनौं से सानदार खेला देखाईन। २०१० कय सुरुआत मा आश्विन कय टीम  इंडिया कय ओर से खेलैक मौक्का मिला। आश्विन कय इ वन्कै पहिला विश्व कप रहा। अश्विन आपन २००वां विकेट न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम कय खिलाफ ग्रीन पार्क स्टेडियम ,कानपुर मा २६ सितम्बर कय लिहिन औ यन भारत कय दुसरा सबसे तेज २०० विकेट लेवै वाले बनि गँय। यन २०२० कय आइपिएल दिल्ली कैपिटल्स कय ओर से खेलिन ।

अश्विन कय जनम 17 सितंबर 1986 कय यक्ठु तमिल परिवार मा भा रहा। यन चेन्नई कय पच्छु मामबलम मा रहत रहें। यन आपन स्कूली पढाई पद्म शेषाद्री बाला भवन औ सेंट बेडे से किहिन। यन एसएसएन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग मा हिस्सा लिहिन औ सूचना प्रौद्योगिकी मा बीटेक कय साथे स्नातक किहिन।




#Article 223: मुरली विजय (128 words)


मुरली विजय (जनम १ अप्रैल १९८४) यक भारतीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलाड़ी होंय, यन दाँया हाथ कय सलामी बल्लेबाज होंय। यन भारतीय टेस्ट टीम कय यक नियमित खेलाड़ी होंय। यकरे अलावा प्रथम श्रेणी क्रिकेट मा तमिलनाडु औ इंडियन प्रीमियर लीग मा चेन्नई सुपर किंग्स कय भी अगुआई करत हैं।

१७ साल कय उमर मा क्रिकेट खेलैक सुरू करैक बाद, विजय तमिलनाडु अंडर - २२ टीम मा चुनि जाय से पहिले चेन्नई मा क्लब क्रिकेट खेलत रहें। यन हालिय आगे बढ़ें औ २००६ मा तमिलनाडु सीनियर टीम खर्तिन प्रथम श्रेणी मा चुनि गय। यन २००६-०७ कय रणजी ट्रॉफी मा सबसे ढेर रन बनावै वाले बल्लेबाजन में से यक रहें, इ यनकै पहिला प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट रहा। अक्टूबर २००८ तक, यन दक्खिन क्षेत्र, इंडिया रेड औ इंडिया ए कय अगुआई किहिन।




#Article 224: संजय मांजरेकर (110 words)


संजय मांजरेकर (Sanjay Manjrekar)  यक्ठु पहिले कय भारतीय क्रिकेट खेलाड़ी होंय। मांजरेकर अपने समय में भारतीय टीम से टेस्ट औ एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेलत रहें । यन 1987 से 1996 कय बीच 37 टेस्ट मैच औ 74 वनडे मैच खेलिन. संजय मांजरेकर इ समय मा 1992 में ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड मा भवा आईसीसी विश्व कप औ 1996 मा भारत-पाकिस्तान-श्रीलंका मा खेलि गै आईसीसी विश्व कप मा हिस्सा लिहिन। यन क्रिकेट से रिटायरमेंट कय बाद कॉमेंट्री करत हँय । 

संजय विजय मांजरेकर कय जनम 16 जुलाई 1965 कय मंगलोर मा भा रहा। संजय मांजरेकर 1952 से 1965 कय बीच भारत खर्तिन 55 टेस्ट मैच खेलै वाले विजय मांजरेकर कय बेटवा होयं।




#Article 225: मानसिक स्वास्थ्य (129 words)


डब्लुएचओ कय दिहा स्वास्थय कय परिभासा होय देहि कय , मन कय औ समाजिक रुप से तंदुरुस्ती ना कि खाली कवनो रोग कय गैर मउजुदगी । यहिमा मन कय स्वास्थय कय जिकिर कइ गा हय ।मानसिक स्वास्थ्य कय कउनो यक आधिकारिक परिभाषा नाइ है। मन कय स्वास्थय कय मतलब महज कवनो मानसिक रोग कय गैरमउजुदगी नाइ होय बल्कि मनई कय बेवहार अव भाव उचित अव संतोख से रहब होय । जीवन मा होय वाले कामकाज कुल औ जीवन कय आनंद कय बीच पटरी बइठाइ कय रक्खब या दुनौ कय साथे साथे लइजायक खर्तिन मानसिक स्वास्थय सही रहब बहुत जरुरि रहत हय । इ अइसन अवस्था होय जहाँ मनई कय आपन क्षमता कय बारेम मालुम रहला औ अपने जीन्दगी कय कुल समस्यन कय चिंता कय सोखैक सच्छम रहत हय ।




#Article 226: शेन वाटसन (202 words)


शेन वाटसन रॉबर्ट (जनम 17 जून 1981 कय इप्सविच, क्वींसलैंड मा) यक ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट खेलाड़ी होंय। यन दाँया हाथ कय बल्लेबाज औ दाँया हाथ कय मद्धिम तेज गेंदबाज होंय। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मा यन खास कइकै सलामी बल्लेबाज कय रूप मा बल्लेबाजी करा लैं, औ घरेलू मैचन में यन सलामी बल्लेबाजी कमै करा लैं।

यन आस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम मा आपन क्रिकेट करियर कय सुरुआत 2002 मा आपन पहिला एकदिवदसीय मैच दक्खिन अफ्रीका कय खिलाफ खेलिकै किहिन । एकदिवसीय टीम कय स्थायी सदस्य होवैक बावजूद, यन ऑस्ट्रेलिया कय ओर से बहुत कम टेस्ट मैच खेले हैं, टेस्ट क्रिकेट मा यनकै सुरुवात जनवरी 2005 कय सिडनी क्रिकेट ग्राउंड मा पाकिस्तान कय बिरुद्ध भै। ऑस्ट्रेलिया कय नामी टेस्ट आलराउंडर खेलाड़ी कय रूप मय मानि जायक बावजूद, ढेर चोटिल रहैक नाते यन टेस्ट टीम मा आपन जगह पक्का नाइ कइ पाइन। जबकी 2009 कय दूसरा छमाही से, वॉटसन टेस्ट क्रिकेट मा औस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज कय रूप मा साइमन कैटिच कय साथे बल्लेबाजी करैक सुरु किहिन। वॉटसन कय 2010 मा एलन बार्डर मेडल से सम्मानित कीन गै।

वॉटसन कय पत्नी ली फॉक्स स्पोर्ट्स कय ऑस्ट्रेलियाई प्रस्तुतकर्ता होंय। यन कयु मॉडलिंग सूट किहे हिन, जइसै 2009 औ 2010 कय मैन ऑफ क्रिकेट कैलेंडर औ अल्फा मैगजीन कय सूट ।




#Article 227: नाथन लायन (130 words)


नाथन माइकल लायन () (जनम: २० नवम्बर १९८७, योंग, न्यू साउथ वेल्स, ऑस्ट्रेलिया) ऑस्ट्रेलिया कय क्रिकेट खेलाड़ी होंय। यन ऑस्ट्रेलियाई टीम कय ओर से ऑफ़-स्पिनर होइकै सबसे ढेर विकेट लेय वाले खेलाड़ी होंय। यनसे पहिले सबसे ढेर विकेट लेवै कय रिकॉर्ड हग ट्रम्बल कय है जे २०१५ तक १४१ विकेट लिहे रहें। 

नाथन लायन आपन टेस्ट क्रिकेट कैरियर कय सुरुआत ३१ अगस्त २०११ कय श्रीलंका कय खिलाफ किहे रहें। लायन कय अब तक टेस्ट क्रिकेट मैचन  में सबसे नीक प्रदर्सन ५० रन दइकै ८ विकेट लेब रहा । जबकि यन वनडे क्रिकेट कैरियर कय सुरुआत ८ मार्च २०१२ कय श्रीलंका कय खिलाफ किहें रहें लेकिन यन अब तक ५ साल मा खाली १३ वनडे मैच खेले रहें। वनडे मा यनकय सबसे नीक प्रदर्सन ४४ रन दइकै ४ विकेट लेब रहा। 




#Article 228: अत्रि (150 words)


अत्री यक बैदिक ऋषि होंय, यन ब्रम्हा जी कय मानस बेटवन में से यक रहें। चंद्रमा, दत्तात्रेय औ दुर्वासा यी तीन बेटवैं रहें। अग्नि, इंद्र औ हिंदू धर्म कय अउर बैदिक देवतन कय बड़ा गिन्ती में भजन लिखैक जस दइ जात हय। अत्री हिंदू परंपरा मा सप्तर्षि (सात महान बैदिक ऋषिन) में से यक होंय, औ सबसे ढेर ऋग्वेद में यनकय नांव आवत है।
अयोध्या कय राजा श्रीराम अपने बनबास काल मे सीता औ भाई लक्ष्मण कय साथे अत्री ऋषी कय आश्रम चित्रकुटमे गये रहें। अत्री ऋषी सती अनुसया कय पती रहें । सती अनुसया सोरा सतिन मे से एक रहीं जे अपने तप बलसे ब्रम्हा,विष्णु,महेश कय छोट लरिका बना दिहे रहिन।पुराणन में कहि गा है तीनों देब लोग माता अनुसूया कय बरदान दिहे रहें, कि हमरे आप कय बेटवा रूप में आप कय गर्भ से जनम लेवा जाई उहै तीनों चंद्रमा(ब्रम्हा) दत्तात्रेय (विष्णू) औ दुर्वासा (शिव) कय अवतार होयं।




#Article 229: अगस्त्य (362 words)


अगस्त्य  (तमिल:அகத்தியர், अगतियार) यक बैदिक ॠषि रहें। यन वशिष्ठ मुनि कय बड़ा भाई रहें। यनकय जनम सावन शुक्ल पंचमी (तदनुसार ३००० ई.पू.) कय काशी मा भा रहा। अब इ जगह अगस्त्यकुंड कय नाँव से मसहुर है। यनकय पत्नी लोपामुद्रा विदर्भ देस कय राजकुमारी रहिन। यन्है सप्तर्षिन में से यक मानि जात है। देवतन कय चिरौरि पय यन कासी छोडीकय दक्खिन कय ओर गँय औ बाद में उहीं बसि गँय ।
महर्षि अगस्त्य राजा दसरथ कय राजगुरु रहें। यनकय गिन्ती सप्तर्षिन में कीन जात है। महर्षि अगस्त्य कय मं‍त्रदृष्टा ऋषि कहि जात है, काहे से यन अपने तपस्या कय समय में मंत्रन कय सक्ति कय देखे रहें। ऋग्वेद कय बहुत मंत्र यन लिखे हँय । महर्षि अगस्त्य ऋग्वेद कय पहिला मंडल कय 165 सूक्त से 191 तक कय सूक्त कय बताये रहें। यनकय बेटवा दृढ़च्युत औ दृढ़च्युत कय बेटवा इध्मवाह नवम मंडल कय 25वा औ 26वा सूक्त कय लिखे रहें।

महर्षि अगस्त्य कय पुलस्त्य ऋषि कय बेटवा मानि जात है। वनकय भाई कय नाँव विश्रवा रहा जे रावण कय पिता रहें। पुलस्त्य ऋषि ब्रह्मा कय बेटवा रहें। महर्षि अगस्त्य विदर्भ कय राजा कय बिटिया लोपामुद्रा से बियाह किहिन, जे बिद्वान औ बेद कय जानकार रहिन। दक्खिन भारत में यन्हय मलयध्वज नाँव कय पांड्य राजा कय बिटिया बताइ जात है। वहं यनकय नांव कृष्णेक्षणा है। यनकय इध्मवाहन नाँव कय बेटवा रहा।

अगस्त्य के बारे में कहि जात है कि यक दाई यन अपने मंत्र सक्ति से समुन्द्र कय कुल पानी पि लिहे रहें, विंध्याचल पहाड़ कय झुका दिहे रहें औ मणिमती नगरी कय इल्वल औ वातापी नांव कय दुष्ट दैत्यन कय सक्ति कय खतम कइ दिहें रहें। अगस्त्य ऋषि कय समय में राजा श्रुतर्वा, बृहदस्थ औ त्रसदस्यु रहें।
अगस्त्य तमिल भाषा ब्याकरण लिखे रहें।  

महर्षि अगस्त्य कय भारतबर्ष में बहुत आश्रम हैं। यनमें से कुछ मुख्य आश्रम उत्तराखण्ड, महाराष्ट्र औ तमिलनाडु में हैं। यक उत्तराखण्ड कय रुद्रप्रयाग जिला कय अगस्त्यमुनि नांव कय सहर में है। यहँ महर्षि तप किहें रहें औ आतापी-वातापी नांव कय दुई असुरन कय बध किहे रहें। मुनि कय आश्रम कय जगह पय अब यक मन्दिर है। आसपास कय ढेर गाँव में मुनि कय इष्टदेव कय रूप में मान्यता है। मन्दिर में मठाधीश नगिचवै बेंजी नाँव कय गाँव से होत हैं।




#Article 230: अष्टावक्र (348 words)


अष्टावक्र अद्वैत बेदान्त कय महत्वपूर्ण किताब अष्टावक्र गीता कय ऋषि होंय। अष्टावक्र गीता अद्वैत बेदान्त कय महत्वपूर्ण किताब होय। 'अष्टावक्र' कय मतलब 'आठ जगह से टेढ' होत है। कहा लैं कि अष्टावक्र कय देहि आठ जगह पे टेढ़ रहा।

उद्दालक ऋषि कय बेटवा कय नाँव श्‍वेतकेतु रहा। उद्दालक ऋषि कय यक चेला कय नाँव कहोड़ रहा। कहोड़ कय कुल बेदन कय ज्ञान देवैक बाद उद्दालक ऋषि वनकय साथे आपन रूपवती औ गुणवती बिटिया सुजाता कय बियाह कइ दिहिन। कुछ दिन कय बाद सुजाता गर्भवती होइ गइन। यक दिन कहोड़ वेदपाठ करत रहें तो गर्भ के भीत्तर से लरिका कहिस कि पिताजी! आप बेद कय गलत पाठ कीन जात हय। इ सुनतै कहोड़ रिसिआएक बोलिन कि तू गर्भवै से हमार अपमान करत हे इहिकै नाते तैं आठ जगहि पे वक्र (टेढ़ा) होइ जाबे।

हठात् यक दिन कहोड़ राजा जनक कय दरबार में पहुँचे। वहँ बंदी से शास्त्रार्थ में वनकै हार होइ गै। हार होइ जायक नाते वन्है पानी में बुड़ा दिहिन। इ घटना कय बाद अष्टावक्र कय जनम भै। पिता कय न होयक नाते से वन अपने नाना उद्दालक कय आपन पिता औ अपने मामा श्‍वेतकेतु कय आपन भाई समझत रहें। यक दिन जब वन उद्दालक कय कनिया में बैठा रहे तो श्‍वेतकेतु अपने पिता कय कनिया से खींचिकै कहिन कि हट जा तैं हिँया से, इ तोरे पिता कय कनिया नाइ होय। अष्टावक्र कय इ बात नीक नाई लाग औ वन तुरन्तै आपन अम्मा कय लगे आइकै अपने पिता कय बिषय में पूछताछ किहिन। अम्मा अष्टावक्र कय कुल बात सहि सहि बता दींहिन।

अपान अम्मा कय बात सुनैक बाद अष्टावक्र अपने मामा श्‍वेतकेतु कय साथे बंदी से शास्त्रार्थ करै की ताईं राजा जनक कय यज्ञशाला मा पहुँचे। वँह द्वारपाल वन्है रोकिकै कहिन कि यज्ञशाला में लरिकन कय जायक आज्ञा नाई है। यहपे अष्टावक्र कहिन कि अरे द्वारपाल! खाली बार उज्जर होइ जाय पै या उमिर ढेर होइ जाय से केहु बड़ा मनैइ नाई बनि जात। जेका बेदन कय ज्ञान होय औ जे बुद्धि में तेज हय उहै वास्तव में बड़ा होत है। यतना कहिकै वन राजा जनक कय सभा में पहुँचे औ बंदी कय शास्त्रार्थ की ताईं ललकारिन।




#Article 231: कश्यप (151 words)


कश्यप ऋषि यक बैदिक ऋषि रहें। यनकय गिन्ती सप्तर्षि में कीन जात हय। हिन्दू मान्यता अनुसार यनकय बंसज से ही दुनिया आगे बढा हय।

यनकय पिता ब्रह्मा कय बेटवा मरीचि ऋषि रहें । 

कश्यप ऋषि प्राचीन बैदिक ॠषिन में प्रमुख ॠषि होँय जेकर जिकिर यक दांई ॠग्वेद मा भा है। अउर संहितन में भी यनकय नाँव मिलत है। यन्है हरदम धार्मिक औ रहस्य से भरा चरित्र वाला बताइ जात है औ बहुत प्राचीन कहि गा है। ऐतरेय ब्राह्मण कय अनुसार यन 'विश्वकर्मभौवन' नाँव कय राजा कय अभिषेक कराय रहें। 

महाभारत औ पुराणन में असुरन कय सुरुवात औ वंशावली कय बर्णन में कहि गा है की ब्रह्मा कय सात मानस बेटवन में से एक 'मरीचि' रहें जे अपने इच्छा से कश्यप नांव कय प्रजापति बेटवा कय पैदा किहिन । कश्यप दक्ष प्रजापति कय 17 बिटियन से बियाह किहिन। दक्ष कय इ बिटियन से जे सन्तान पैदा भँय ओनकै नाँव निचे हय :




#Article 232: इंक्युबेसन अवधि (113 words)


इंक्युबेसन अवधि कवनो भि जिवाणु,रसायन या रेडियसन मनइ कय देहिम हलै कय बादे मे अव पहिला लक्षण देखायक बीच कय समय होय । संक्रमण पयदा करै वाले जिवाणु जब देहिम हलि तौ वका देहिम लक्षन पयदा करैक ताईं आपन गिन्ती बढाई औ इ उहै समय होय। लैटेन्सी कय मतलब होत हय जब जिवाणु देहिम हलि तौ उ आपन गिन्ती ना बढाइकै वइसै बइठा रहि जइसै एचआइभि भाइरस ढेर समय तक करत हय । हर रोग कय अलग अलग इंक्युबेसन अवधि होत हय । रोग कय इंक्युबेसन अवधि बहुत चिज मे निर्भर करत हय जइसय मनई कय रोग प्रतिरोधात्मक छमता , जिवाणु देहिक कवने राहि देहिम हला हय औ कवने गिन्तिम हला हय  ।




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